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Romance प्रेम कहानी डॉली और राज की

पूनम ने राजनी के करीब आते हुए कहा राजनी बेटा शैलेश ने मुझे सब कुछ बता दिया है । तुम्हारी कोई भी बात हमसे छुपी नहीं है ।

और हम चाहते हैं , कि तुम्हारे बर्थडे के साथ ही तुम्हारी इंगेजमेंट का अनाउंसमेंट भी कर देना चाहिए ।

इस बार राजनी ने कोई ना नुकुर नही की थी ।

वह शर्मा के मुस्कुरा उठी ।

जी आँटी,,, और मॉम आप दोनों को जैसा ठीक लगे , मुझे कोई एतराज नहीं है ।

मॉम आप दोनो फ्रेश हो जाइए, मैं आपके लिए चाय बनाती हूं ।

वह भी अदरक वाली ।

अच्छा फिर चलो मैं भी चाय बनाने मैं तुम्हारी हेल्प करता हूं ।

नहीं मुझे आपकी हेल्प की जरूरत नहीं है ।

ठीक है ,पर कम से कम अपना किचिन तो दिखा सकती हो

पूनम समझ रही थी ,कि पूरे 10 महीने बाद शैलेश

राजनी से मिल रहा है ।

उन्होंने स्पेस देते हुए कहा,,,,

राजनी बेटा शैलेश की हेल्प ले लो ।

उसे भी काम करने की आदत डलनी चाहिए ना ।

तब तक हम लोग जाकर फ्रेश हो जाते हैं ।

डॉली और पूनम आंगन की तरफ चली गई । और शैलेश राजनी के साथ किचन में ।

जैसे ही वह किचन में आये,,,,

शैलेश ने राजनी को अपने गले लगा लिया । और उसकी आंखों में देखते हुए कहा !

राजनी तुम जानती हो ,मेरे ये 10 महीने कैसे कटे हैं ।

मैंने तुम्हें बहुत मिस किया है ,लेकिन अब तुमसे और दूर नहीं रह सकता। इसलिए पूरे 8 दिन की छुट्टी लेकर तुम्हारे पास आ गया ।

क्या ,,,,8 दिन ,,शैलेश रैयली आई एम सो हैप्पी ,,,,,कि 8 दिन तक मुझे तुम्हारा मॉम का और आंटी का साथ मिलेगा ।

पूरे 10 महीने से मैं कितना तरस गई हूं तुम सब के लिए ।

और राजनी ने डॉली और पूनम की तरह शैलेश को भी हग कर लिया था।

चाय पीते हुये ,,,सभी दूसरे दिन की तैयारियों में लग गए थे ।

डॉली ने राजनी से बात करके कल की कुछ प्लानिंग कर ली थी ।

राजनी ने बताया ,और डॉली भी पहले से जानती

थी ,कि राजनी के यहां पर सभी से काफी अच्छे रिलेशन है ।

और सभी फैमिली की तरह ही रहते हैं।

तो उन्हीं 15,,,20 फैमिली को बर्थडे के लिए इनवाइट भी कर दिया गया था।

राजनी के कहने पर उन्हीं लोगों ने बाहर गार्डन में सबके खाने पीने का इंतजाम भी करवा दिया था ।

जिसमें एक छोटा सा टेंट था, उसी के अंदर एक हलवाई से बात करते हुये क्रोकरी सहित खाने का इंतजाम अच्छी तरह से हो गया था।

वहाँ सबके सामने ही शैलेश और राजनी की इंगेजमेंट का अनाउंसमेंट करने वाले थे ।

यानी कि इनके रिश्ते को दुनिया के सामने बताना चाहते थे ।

दूसरे दिन सुबह राजनी हॉस्पिटल चली गई ,क्योंकि उसे कुछ जरूरी पेशेंट देखने थे।

लेकर शाम को वह जल्दी ही आ गई थी जब आकर देखा ,तो कैंपस का नजारा ही अलग था।

बहुत ही खूबसूरत सा छोटा सा टेंट उसको पिंक और वाइट बैलून से सजाया गया था ।

उसके अंदर अच्छे अच्छे खाने की खुशबू दौड़ रही थी । यही कोई 8,10 लोग थे जो खाने बनाने का ,उसको टेबल पर लगाने का ,और वहां के साज सजावट का काम देख रहे थे ।

डॉली पूनम भी तैयार हो चुकी थी ।

और शैलेश भी।

बस राजनी का इंतजार था, कि वह आकर तैयार हो ,तो सभी बाहर आ जाये पहाड़ी इलाकों में रात जल्दी ही हो जाती थी ।

तो डिनर का टाइम भी 800 बजे का रखा गया था ।

900 बजे तक सारा प्रोग्राम खत्म हो जाता । अभी 500 बजे थे ,और 600 बजे तक सबको बाहर आना था ।

राजनी ने जल्दी से हाथ मुँह धोये, और अपना कवर्ड खोल कर देखने लगी।

मॉम मैं क्या पहनू

मेरे पास तो कोई ढंग की ड्रेस भी नहीं है और ना ही मुझे पहले से पता था ।

ऐसा कुछ होने वाला है,,,

राजनी तुझे वह सब देखने की जरूरत नहीं है । तेरी ड्रेस ये रही ,,,,

जब पीछे मुड़कर देखा ,तो डॉली के हाथ में बहुत ही खूबसूरत सा वाइट गाउन था राजनी ने झट से उसे अपने हाथ में लेते हुए कहा,,,,,WOW

मॉम सो ब्यूटीफुल ,,,

कितना सुंदर है ,,मुझे बहुत पसंद आया हां राजनी ,,,ये सचमुच बहुत ही खूबसूरत है,,,पर ये मेरी पसंद नहीं ,इसके लिए तुम शैलेश को थैंक यू बोलो शैलेश ही इसे लेकर आया है तुम्हारे लिए।

अच्छा तो मिस्टर चिपकू की पसंद भी इतनी अच्छी हो सकती है ।

आई कांट बिलीव ,,,,,

लेकिन मैडम जी अब विलिव करना सीख लीजिए ।

क्योंकि यह मेरी ही पसंद है ,और मैं खुद अकेले जाकर इसको लेकर आया हूं। बहुत सुंदर है,,,

मैं इसे अभी पहन कर आती हूं ।

जब राजनी कमरे से बाहर आई तो परियों की महारानी से कम नहीं लग रही थी ।

वाइट गाउन कंधे तक करली हेयर, और हल्का सा मेकअप ।

शैलेश तो उस पर से नजर ही नहीं हटा पा रहा था ।

उसे देखा तो बस देखता ही रह गया।

एक तरफ वो पढ़ाकू लड़की ,जिसकी आंखों पर हमेशा चश्मा चढ़ा रहता था। और उसके आसपास आगे पीछे किताबें ही किताबें रहती थी ।

लेकिन आज

आज वह अपने सुपर मॉडल भाई की बहन लग रही थी ।

उतनी ही खूबसूरत ,,,,,

मॉम ,,,आँटी,,, कैसी लग रही हूं

यह भी कोई पूछने वाली बात है।

तब तक पूनम ने आते हुए राजनी की

बलाएँ ले लीं।

बहुत खूबसूरत लग रही है ,,,

डॉली इसे काला टीका लगा दो ।

तैयार होकर सभी बाहर आ चुके थे।

जब कैम्प्स में सभी ने देखा कि राजनी बाहर आ चुकी है ।

तो कुछ ही देर में सभी लोग टेंट के नीचे आ गए थे ।

राजनी ने केक काटा, सबको केक खिलाया,,,, और उसके बाद पूनम ने डॉली को इशारा किया ,,,

कि वह शैलेश राजनी के बारे में सब को बता दे।

लेकिन डॉली ने पूनम से ही यह सब बताने के लिए कहा ।

पूनम ने ऊंची आवाज से बोलते हुए कहा सुनो,, सुनो,,, सुनो ,,,आपकी डॉ राजनी अब मेरे बेटे डॉ शैलेश की धर्म पत्नी बनने वाली है ।

मेरा मतलब कि कुछ समय बाद,,, हालांकि अभी डेट फिक्स नहीं है ।

पर जैसे ही दोनों को अपनी जॉब से टाइम मिलता है ,हम इन दोनों की सगाई और उसके बाद शादी कर देंगे ।

शैलेश का हाथ पकड़ते हुए राजनी के बगल में खड़ा कर दिया था ।

यह सुनकर जोरों से तालियां बजने लगी सभी बहुत खुश थे ,अपनी डॉ राजनी के लिए ।

यानी कि इनका रिश्ता सबके सामने आ चुका था।

उसके बाद सब ने तेज म्यूजिक पर डांस किया ,केक खाया, राजनी को बधाइयां दी ,फिर सबने एक साथ डिनर किया। पार्टी 1000 की जगह 11,,,12 बजे तक चली ।

कोई अंदर जाने को तैयार ही नहीं था। अपनी राजनी के लिए सब इतने खुश जो थे।
 
पार्टी खत्म हुई,,,और जैसे तैसे सभी लोग अंदर

गए ,,,,तो कल की प्लानिंग करने लगे ।

राजनी को तो हॉस्पिटल जाना ही था। तो उसने कह दिया था।

कि मॉम आप तीनों कल आस-पास ही कहीं हो आईये ।

क्योंकि मैं जा चुकी हूं ।

2 दिनों बाद मुझे छुट्टी मिल जाएगी। उसके बाद मैं भी आपके साथ चलूंगी। शैलेश ने अपनी राय दी ,यह भी ठीक रहेगा ,,,राजनी कल अपनी ड्यूटी कर लेगी ,और आसपास की कुछ जगह, मैं आपको और आंटी को दिखा दूंगा ।

और तय हो गया ,,कि राजनी के ऑफिस निकलने के साथ ही,हम भी यहाँ से निकल लेंगे,,, आसपास की जगह भी घूम आएंगे ।

रात को ही टैक्सी भी बुक कर दी गई थी काफी देर हो गई थी ,इसलिए कमरे में जाकर ही सभी लोग जल्दी सो गए,,,,,

दूसरे दिन सुबह 1000 बजे तक राजनी हॉस्पिटल निकल गई थी ।

और शैलेश,,,,, डॉली और पूनम को लेकर आसपास चाय के बागान देखने के लिए ।

सोनितपुर के आसपास तो सबसे प्रसिद्ध तेजपुर के चाय बागान ही थे।

जहां पर हर तरह की चाय उगाई जाती है ।

और बस तो ढाई घंटे की दूरी थी ,तो निलेश ने ड्राइवर

को वही चलने के लिए कहा ।

2 घंटे बाद ही, टैक्सी तेजपुर बागान मैं पहुंच गई थी।

सभी टैक्सी से नीचे आ चुके थे ,और शैलेश ने टैक्सी वाले को अपना नंबर देते हुए कहा ,,,,की वो जैसे ही बागान देखकर फ्री होते हैं ,कि उसे कॉल कर देगे।

क्योंकि वो जहां आए थे ,यहां पर टैक्सी खड़ी नहीं कर सकते थे ।

यह बहुत ही सकरी रोड थी।

तो उसको वापस जाकर टैक्सी स्टैंड में ही टैक्सी खड़ी करनी थी ।

और तीनों चाय बागानों के बीच पहुंच चुके थे ।

अभी दोपहर के 1200 बज चुके थे। लेकिन यहां का मौसम इतना खूबसूरत था ,पता हीं नहीं चलता ,दोपहर है या शाम

अभी भी टेंपरेचर यही कोई 15 या 16 डिग्री के आसपास था।

हल्की हल्की धूप ,और ठंडी बहती हवा 1 स्वेटर या शॉल की जरूरत तो यहां पर हमेशा रहती है ।

इधर राज पूरी तरह से बागान के काम में व्यस्त था ।

आज पौधों में पानी दिया जा रहा था। जिसमें बहुत ध्यान रखना पड़ता है।

बैठ बैठ कर नीचे से चैक करना पड़ता है कि सभी पौधों में पानी बराबर जा रहा है कि नहीं ।

बच्चों के एग्जाम शुरु हो गए थे ,तो काम्या ने दोपहर के खाने का डब्बा राज को सुबह ही दे दिया था ।

क्योंकि वह बच्चों की पढ़ाई में व्यस्त थी शैलेश ,,राजनी,,, और पूनम को घूमते हुए पूरा एक घंटा हो गया था।

लेकिन ऐसे लग रहा था ,जैसे कि अभी अभी यहां आए हो ।

हर चीज कितनी खूबसूरत है यहां पर! डॉली तो जैसे बागानों के अंदर खिची चली जा रही थी ।

छोटी जगह थी ,,सीधे साधे लोग थे।

तो शैलेश ने आराम से पूनम और डॉली को चाय बागान देखने के लिए कह दिया था ।

कि जब आप लोग अच्छी तरह से देख लो ,,,तो यह जो ऊंचा पेड़ दिख रहा है। जिस पर बड़ी सी घंटी लगी है ।

बस इसी के पास आ जाना ,,,

2,,, 3 घंटे बाद हम यही मिल जाएंगे।

यह भी ठीक था ,,,तो सब इत्मीनान से अपनी-अपनी तरह से चाय बागान देखने लगे थे ।

करीब 100 बजे राज के फोन पर काम्या का फोन आया ।

राज मुझे आपसे बस इतना कहना है

कि आप खाना खा लीजिए।

जहाँ तक मुझे पता है ,जब तक मैं याद नहीं दिलाऊँगी,,, आप डब्बे को हाथ भी नहीं लगाएंगे ।

काम्या ! बस बागान का एक कोना ही बचा है ,पानी देने के लिए ।

अपन जैसे ही उसको कंप्लीट करता है। सबसे पहले खाना खाएगा।

तुम चिंता मत करो ।

बच्चों की पढ़ाई पर ध्यान दो ।

अपन पक्का खा लेगा ,,,ठीक है इतना कहते हुए काम्या ने फोन रख दिया।

डॉली बागानों को देखते हुये काफी अंदर आ गई थी।

उसे खुद इस बात का एहसास नहीं हुआ कि कब वह चलते-चलते बागानों के बीच आ पहुंची है।

हालांकि फोन उसके पास ही था ।

कि अगर कोई एक दूसरे को नहीं देख पा रहा,,, तो फोन करके पास आ जाएंगे।

राज पौधों में पानी देने में मस्त था । बागन के बीच में रखा हुआ उसका सामान ,,जिसमें खाने का डब्बा ,एक चटाई ,,और वही पड़ा उसका फोन,,, राज का फोन दोबारा आने लगा था। काम्या का ही फोन था ,लेकिन ,राज

वहाँ से थोड़ी दूरी पर था ।

तो फोन की आवाज उसके कानों तक नहीं पहुंच रही थी ।

फोन लगातार बज रहा था ।

लेकिन हां थोड़ी ही दूर पर डॉली के कानों तक राज के फोन की आवाज़ पहुंच चुकी थी ।

फोन जमीन पर था ,,डॉली को आस पास कोई दिख तो नहीं रहा था।

पर फोन की लगातार जा रही घण्टी को वह अच्छे से

सुन पा रही थी।

वो धीरे धीरे उस घण्टी की आवाज़ की तरफ बढ़ने लगी,,,,,,,,,,,
 
डॉली लगातार उस घंटी की आवाज की तरफ बढ़ती जा रही थी।

कभी इधर देखती, तो कभी उधर, आखिर 2 मिनट बाद वह उस फोन तक पहुंच गई थी ,जो कई घंटी जाने के बाद बंद हो चुका था । और एक बार फिर से उस पर कॉल आने लगा था ।

डॉली ने आसपास नजर दौड़ाई ,तो कोई भी नहीं दिख रहा था ।

बस एक चटाई थी ,उसके ऊपर एक खाने का डब्बा ,उस पर एक फोन, अगर इस तरह से फोन उठाती,तो शायद कोई उसे गलत समझ लेता ।

इसलिए फोन को हाथ ना लगाते हुए वह आसपास देखने की कोशिश कर रही थी। कि जिसका ये फोन है ,तो यही कहि आस पास ही होगा ,,,,

तभी डॉली को अपनी बांई तरफ से जो लगभग 20 ,,,25 फीट की दूरी पर था। कुछ आवाज़ आई,,,,

हां !

यह पानी के कलकल की आबाज़ थी।

वो समझ रही थी। कि शायद इस फोन का मालिक पेड़ों में पानी दे रहा है।

लेकिन फिर भी वह फोन लेने नही आया शायद वो अपने काम मे व्यस्त होंगे

एक बार तो डॉली मन हुआ ,,,कि बजने दो,,,,जाने दो,,, मुझे क्या करना

जिसका फोन होगा ,वह अपने आप आकर देख लेगा ।

पर फिर भी जब तीसरी बार फोन आने लगा ,,तो डॉली को लगा शायद उसके फैमिली मेंबर ,,या फिर कोई जरूरी फोन होगा ।

इंसानियत के नाते ही सही ,,, मुझे उसे बता देना चाहिए ।

डॉली ने आवाज लगाई,,,,,

सुनिए!!!

हेलो !!!

आपका फोन बज रहा है ,,,

फिर भी उसने नहीं सुना ,तो डॉली धीरे-धीरे उसकी तरफ बढ़ने लगी ,,,,

जब पास जाकर देखा तो वह कदमों के बल बैठकर ,,अभी भी पाइप से पानी देने में व्यस्त था ।

डॉली ठीक उसके पीछे खड़ी थी ,,,

उसने एक बार फिर आवाज दी,,,,

हेलो,,, मिस्टर आपका फोन कब से बजे जा रहा है , अगर आपका अपने फोन पर ध्यान ही नहीं है ,तो फोन

अपने पास रखते ही क्यों है

इस बार डॉली की आवाज शायद उसके कानो तक पहुंच गई थी ।

और जब उसने मुड़कर डॉली को देखा

तो ऐसे लगा ,,,शायद यह कोई अचंभित कर देने वाला सपना हो !

यह बात इतनी बड़ी थी ,,जो किसी सपने से भी परे थी । एक ऐसा सपना जो पूरे 8 साल बाद हकीकत बन के सामने आया था ।

महारानी और राज का सपना,,,

जो 8 साल पहले तक हकीकत था, एक खूबसूरत सी प्यार भरी दुनिया ,,,जहां किसी की नजर लगी और दोनों एक दूसरे से इतनी दूर हो गये, कि 8 साल से एक दूसरे को देखना तो दूर ,,,,एक दूसरे की खबर तक नहीं ली।

5 मिनट तक डॉली और राज आमने सामने आ जाने से शतब्ध थे।

डॉली को विश्वास ही नहीं हो रहा था

की राज उसे यहां मिलेगा ।

राजनी का यहां आना ,,,,,

इन दोनों को एक दूसरे के इतने करीब ले आएगा ।

डॉली ने धीरे से अपना हाथ राज के गाल पर रखा ।जब उसे विश्वास हुआ ,,,कि यह सपना नहीं हकीकत है ।

उसका राज उसके सामने है।

तो तड़प कर एक बार फिर अपने राज के गले लग

गई,,,,,,

राज ने भी पूरी शिद्दत से 8 साल की दूरियों को मिटाते हुए अपनी महारानी को अपनी बाहों में भर लिया था ।

एक बार फिर से राज और डॉली के बीच 30 साल पहले वाला प्रेम पनप गया था। जब अपने प्रेम का इजहार करने के लिए डॉली राज के गले लगी थी ।

और डॉली के आंसुओं ने राज को भिगोया था ।

और आज भी उसकी आंखों के आंसू राज को भिगो रहे थे ।

8 साल की दूरियों की भरपाई तो नहीं हो सकती थी ,,,,पर हां 8 मिनट तक दोनों खामोश थे ।

बस उनकी धड़कनें ही एक-दूसरे को सुन पा रही थी ।

जब जी भर के डॉली ने अपने आंसुओं का सैलाब उड़ेल दिया ।

तब राज ने डॉली का चेहरा अपने हाथों में लेते हुए कहा ,,,,,

महारानी तू यहां कैसे

राज मैं क्या क्या बताऊं ,,,आपको!

इन 8 सालों में क्या हुआ है, और मैं यहां कैसे ,,,डॉली की हिचकियां उसे बोलने नहीं दे रही थी ।

सहजादी पहले तो चुप हो जा ,,,यह पानी पी से ।

पानी बोतल का ढक्कन खोलते हुए डॉली को पानी पिलाया ,,,,,

कुछ देर बाद जब डॉली शांत हुई तो कितनी सारी ऐसी बातें थी ,जो दोनों एक दूसरे से करना चाहते थे ।

दोनों वहीं बिछी हुई चटाई पर बैठ गये और एक दूसरे से

अपने दिल का हाल कहने लगे ।

लेकिन इसी बीच डॉली की नज़र वहाँ रखे खाने के डब्बे पर गई, तो डॉली ने उस तरफ देखते हुये कहा,,,,

राज यह आपके खाने का डब्बा है ना

राज--हां पर तुझे कैसे पता

डॉली--क्योंकि डब्बा भरा हुआ है ,खाने का समय कब का निकल गया ,और आपने खाना खाया भी नहीं होगा ,,,

डॉली डब्बा खोलकर राज के सामने रखने लगी,,,

वह एक एक चीज को ध्यान से देख रही थी ,डब्बे को काफी अच्छे से भरा गया था । जिसमें दो सब्जियां ,रोटियां,,सलाद और कुछ मीठा भी था ।

महारानी,,, तू यह सब छोड़ मैं तुमसे बहुत सारी बातें करना चाहता हूं ।

डॉली--नहीं पहले आप खाना खाएंगे,,, डॉली ने कौर तोड़ते हुए राज के मुंह में रख दिया।

राज भी अपने हाथों से डॉली को खिलाने लगा,,,,,

8 साल बाद यह मौका आया था, जब डॉली राज को अपने हाथों से कुछ खिला रही थी ।

और इन 8 सालों में आज पहली बार था जब राज का पूरा डब्बा खत्म हुआ था। वरना रोज उसके डिब्बे में खाना बच ही जाता था।

और इस बात को लेकर काम्या भी बहुत परेशान रहती थी।

खाना खत्म होने के बाद ,हाथ धोते हुए डॉली एक बार फिर से राज की बाहों में जा समाई,,,,,

सालों की छूटी हुई बातें दोनों के बीच होने लगी थी ।

राज--सहजादी हमारी बच्चा पार्टी कैसी है

डॉली-- राज कहने को तो सब ठीक है दुनिया की नजरों में सब कुछ अच्छा है पर राजनी औऱ नीलेश आपकी कमी को कभी नहीं भूल पाएंगे ,जब भी कुछ अच्छा होता है, दोनों आपको बहुत याद करते हैं ,,,,

राज--और काकी वह तो ठीक है ना डॉली--बस कुछ उम्मीदों ने उन्हें जिंदा रखा है ,,,उसमें सबसे पहली उम्मीद तो आपके लौटने की ही है

राज --और अपनी राजनी डॉक्टर तो बन गई ना

डॉली -हां आपकी राजनी डॉक्टर बन गई है,,,और वह यही है ,सोनितपुर में है।

राज --क्या अपुन की राजनी सोनितपुर में है

डॉली--हां और निलेश मुंबई में ,,,

राज--अपुन इस बात को जानता है ,अरे अपुन का नीलेश इतना बड़ा मॉडल बन गया है ,तो क्या उसे जानने का नहीं उसका प्रोग्राम टीवी पर देखा था ।

लेकिन राजनी यहां कब आई,,,,

डॉली --10 महीने होने को आ रहे हैं

उसे तबसे यहां है।

राज-- और फिर काकी ,,और तेरी नौकरी

डॉली --राज सब कुछ अपनी जगह पर है ,मैं 8 दिन के लिए राजनी के पास आई हूं ,,वह यहां पर अकेली ही रहती है और हां ,मेरे साथ शैलेश और पूनम भी आए हैं ,,,,

राज घबराते हुए चौक जाता है,,

तो ,,,तो,,, क्या वह दोनों यहां पर है

यही आस पास होंगे ,,,बागान देखते हुए मैं अंदर आ गई थी ।

राज---महारानी मैं नहीं चाहता कि वह मुझे देख पाएं,,,

डॉली-- राज मैं उनको अभी फोन कर देती हूं ,,,वो यहाँ नही आएंगे।

राज आपको एक बात और बतानी है हमारी राजनी और शैलेश की शादी पक्की हो गई है,,, शैलेश एक ऑर्थोपेडिक्स डॉक्टर बन गया है ।

और राजनी गायकनोलॉजिस्ट बन गई है सोनितपुर का पूरा हॉस्पिटल सभालती है राज जोर से हंसने लगा,,,,
 
राज--हमारी राजनी इतनी बड़ी हो गई की उसकी शादी भी होने वाली है ,और वह भी शैलेश से उसको तो वह चिपकू कहती थी ना

डॉली--राज पर हमें कुछ दिन पहले ही पता चला ,,कि वो दोनों एक दूसरे से शादी करना चाहते हैं ,और कल राजनी के बर्थडे पर हम ने सबको बता दिया । राज--महारानी मुझे पता था, तू सब कुछ संभाल लेंगी, और देख ना तूने अपनी परवरिश में कोई भी कमी नहीं छोड़ी ,,,मैं भी जितना नहीं कर पाता उतना तूने किया है । सब कुछ कितने अच्छे से हो गया,,,

डॉली ---और राज आपकी कमी

उसे कौन पूरी करेगा

राज--सहजादी तूने मुझसे प्रॉमिस किया था ना ,कि तू कभी हार नहीं मानेंगी,,,

डॉली --राज कहने को तो सब कुछ हो रहा है ,पर आपके बिना मैं हमेशा अधूरी ही रहूँगी,, मेरी कोई खुशी पूरी नहीं होगी शायद 6 महीने ,या 1 साल बाद राजनी की शादी होगी ,उसमें तो आप आयेंगे क्या आपके आशीर्वाद के बिना वह खुश रह पाएंगी

राज --पता नहीं मैं कब वापस लौट पाऊंगा ,,कब तेरे और बच्चों के साथ रह पाऊंगा ,,,देखते ही देखते 8 साल बीत गए ,लेकिन मैं कुछ भी तो नहीं कर पाया बस वक्त के हाथों की कठपुतली बन के रह गया हूं,,वह जो मुझसे करवा रहा है

मैं वही कर रहा हूं,,,,,

डॉली ने एक ठंडी सांस भरते हुए कहा! जानती हूं राज ,,,वक्त ही तो है ,जिससे जो चाहे ,वह करवा सकता है।

जिसके साथ जो चाहे वह कर सकता है। मैं कुछ भी तो नहीं भूली हूं ,ना हमारा अच्छा वक्त ,और ना ही बुरा ,,,,

मुझे अच्छी तरह से याद है ,जब उस दिन मेरा रिजल्ट आया था।

और मैं महिला बाल विकास अधिकारी के लिए चुन ली गई थी ।और ठीक उस के दूसरे दिन राजनी का भी एमबीबीएस के लिए सिलेक्शन हो गया था ।

दिवाली के लिए नीलेश भी बेंगलुरु से घर आ रहा था ,हम सब ने दिवाली की शॉपिंग की ,,,,आपने मेरी और राजनी की खुशी में ढेर सारी मिठाईयां ली थी ढाबे पर गांव में सब को बांटने के लिए। बस कुछ दिनों बाद ही दीपावली थी अपने घर को सजाने के लिए कितनी सारी शॉपिंग की थी ।

उसके उसके बाद हम पूनम और विकास के यहां भी गए थे मिलने ,उन दोनों ने कितना रोका था हमें ,की रात हो गई है सुबह निकल जाना ,पर हमें तो यही लगा कि

बस 2 घंटे की दूरी है ,अभी पहुंच जाएंगे ।

और काकी भी हमारा इंतजार कर रही थी ।

खासकर नीलेश का ,कितने महीने बाद वो लौट रहा था ।

काश अगर उस रात हम पूनम के कहने पर उसके घर रुक जाते ,तो शायद ये सब नहीं होता ।

पर वक्त को कौन अपनी मुट्ठी में कब बंद कर पाया है ।

वक्त तो रेत की तरह फिसलता ही जाता है ।

और जब मुट्ठी खाली होती है, तब पता चलता है ,कि सब कुछ निकल चुका है। और शायद उस रात भी वक्त ने हमारी खुशियां हमसे छीन ली थी ।

इतना कहते हुए डॉली और राज एक बार फिर से 8 साल पुरानी उस घटना को सोचने लगे थे ।

उस दिन राज शहर से डॉली राजनी और नीलेश को लेकर आ रहा था।

अपनी इनोवा लेकर गया था ।

नीलेश महीनों बाद बेंगलुरु से वापस आया था ।और डॉली और राजनी दीपावली की शॉपिंग करनी शहर गई थी रात तक सारा काम निपट गया था ।

नीलेश ने गाड़ी में कुछ लाउड इंग्लिश सॉन्ग बजा रखे थे ।

नीलेश राज आगे थे ।

डॉली राजनी के साथ पीछे।

हल्की हल्की सर्दियां भी लग गई थी । इसलिए अंधेरा जल्दी और कुछ घना होने लगा था ।

वैसे तो अभी रात के 1000 ही बजे थे और इस वक्त

तो राज अक्ज़र ही शहर आता जाता रहता था ।

क्योंकि उसके लिए रास्ता नया नहीं था राज आज बहुत खुश था ।

क्योंकि उसे वह सब कुछ मिल चुका था जो उसने चाहा था।

डॉली अधिकारी बन गई थी, राजनी का एमबीबीएस के लिए चयन हो गया था। और नीलेश वह भी बेंगलुरु जाकर अपना काम सीखने लगा था ।

नीलेश का घर भी रेनुवेट हो चुका था कुल मिलाकर अब राज और डॉली की जिंदगी में कोई भी कमी नहीं थी ।

लाउड म्यूजिक बजते हुए गाड़ी अपनी पूरी रफ्तार पर थी ।

शायद 120 या 125 ,,,वैसे तो राज के लिए यह रफ्तार कोई मायने नहीं रखती थी ।

इस रफ्तार से तो वो हमेशा गाड़ी चलाता था ।

लेकिन कहते हैं ना ,की होनी को कोई नहीं टाल सकता ।

जो भाग में लिखा है ,वह तो होकर ही रहता है।

यह रास्ता राज का तो जाना पहचाना ही था ।

और रोज का आना जाना ,तो वह बड़े ही आराम से कार चला रहा था ।

राज अपने हिसाब से सही रास्ते पर था और कार उसके पूरे कंट्रोल में थी ।

लेकिन तभी,,,,राज के पलक झपकते ही ,अचानक सामने से आती हुई एक तेज रफ्तार कार से बचने के

लिए राज ने अचानक अपनी कार को दाएं तरफ मोड़ दिया ।

रोड के दाएं तरफ एक छोटी सी खाई थी उससे बचने के लिए ,जोर से ब्रेक भी लगा लिए ।

पर उसे इस बात का अंदाजा बिल्कुल नहीं था ।

कि सामने से एक सरियों से भरा लोडिंग भी आ रहा है।

राज की कार अचानक रुकी और सरियों से भरा लोडिंग एक तेज आवाज के साथ कार से टकरा गया।

जिससे सरिए सरकते हुए राज की कार में धंस गए ।

आगे की सीट पर राज के साथ नीलेश था।

अब जो होने वाला था, वह बहुत ही भयानक था ,उसमें से सरिए नीलेश की आंखों के अंदर घुस गए ,गाड़ी में अंधेरा था।

किसी की समझ ही नहीं आया कि हुआ क्या है। बस नीलेश की एक भयानक चीख सुनाई दी।

उसके बाद शायद वह बेहोश हो गया था उधर सामने से आती हुई कार भी खुद को संभाल नहीं पाई ,और दूसरी तरफ की 20,, 30 फीट गहरी खाई में पलट गई ।

ना तो राज की कार में ,और ना ही दूसरी कार में, किसी को कोई होश था। की आखिर सब हुआ क्या है

जो भी था ,बहुत ही भयानक , और डरावना था ।

रोड तो चालू थी ,कुछ गाड़ियां निकली और धीरे-धीरे लोगों का हजूम में इखट्टा हो गया ।

सबने राज की गाड़ी से सबको बाहर निकाला ।

लेकिन नीलेश को देखकर ,राजनी और डॉली बेहोश हो चुकी थी।

अब पास खड़े लोग दूसरी गाड़ी में से भी लोगों को निकाल रहे थे ।

उसमें भी एक दो लोग थे ,जो शायद हस्बैंड वाइफ थे ।

जल्दी से जल्दी सब को दोबारा शहर ले जाकर सबसे अच्छे हॉस्पिटल में एडमिट करवाया गया ।

विकास ,पूनम ,कन्हैया काकी जितने भी जानने वाले थे ।

बस कुछ ही घंटों में सभी हॉस्पिटल आ चुके थे।

अब डॉक्टरों की जांच ,पड़ताल ,टेस्ट ऑपरेशन, सब कुछ शुरू हो गया था। डॉली और राजनी अभी भी बेहोश थी। उन्हें बस कुछ छोटी मोटी चोटें आई थी। उन दोनों को ड्रिप लगी हुई थी, राज को भी हल्की सी चोट थी।

लेकिन राज पूरी तरह से होश में था ।

और एक वही था ,जो सबकी देखरेख में लगा हुआ था ।
 
नीलेश के बारे में तो किसी की डॉक्टर से पूछने की भी हिम्मत नही हो रही थी ।

ना डॉक्टरों ने अभी तक कुछ बताया ही था। की नीलेश की हालत इस वक्त सबसे क्रिटिकल थी ।

उसे ऑपरेशन थिएटर में ले जाया चुका था । और अभी डॉक्टर कुछ भी कहने के लिए राजी नहीं थे ।

और जो दूसरी कार के दो लोगों थे।

उन्हें कुछ ज्यादा चोटें नहीं दिख रही थी लेकिन उनका

भी चेकअप किया जा रहा था ।

कि कहीं कोई अंदरूनी चोट तो नहीं है । ,,,,

लेकिन कुछ ही घंटों बाद 3,,,4 डॉक्टर कुछ जल्दबाजी में एक दूसरे से डिस्कशन कर रहे थे ।

उस महिला के पति के बारे में ,इस वक्त एक राज ही था ।

जो सबकी खोज खबर रख रहा था ।

विकास भी राज के साथ ही था।

जेसे ही डॉक्टर राज के पास आये तो उसने पूछा ,,,,,

डॉक्टर साहब क्या मैं जान सकता हूं

कि कौन कैसा है ,अपुन को कुछ भी पता नहीं चला ।

डॉक्टर ने राज के कंधे पर हाथ रखते हुए आराम से समझाया ,,,,

देखिए आपके बेटे का ऑपरेशन चल रहा है ,,,लोहे की रॉड ने उसकी दोनों आंखों के रेटीना को डैमेज किया है ।

यह सुनकर जैसे राज के शरीर से जान ही निकल गई थी ।

वह निढाल होकर जमीन पर बैठ गया था डॉक्टर ने उसे समझाया ,,,,

इस तरह हिम्मत हारने से कुछ नहीं होगा हम कोशिश कर रहे हैं ।

एक ऑपरेशन हो भी चुका है ।

रात में हमें एक ऑपरेशन और करना पड़ेगा ।

उसके बाद भी हम कह नहीं सकते ऑपरेशन सक्सेसफुल हुआ है कि नहीं। हम अपनी पूरी कोशिश

कर रहे हैं ।

विकास पूनम ने राज को संभालते हुए कुर्सी पर बैठाया ।

और जो दूसरी कार के लोग तो उनके बारे में भी पूछा ।

क्योंकि उनके कोई भी रिलेटेड या जानने वाले यहां नहीं थे । अभी तक यह भी पता नहीं था । कि वहां कौन है,और कहां से आए हैं।

तो इन्ही का फर्ज बनता था, कि उनकी भी खोज खबर लेते रहे ।

जब विकास ने उसके बारे में पूछा तो डॉक्टर ने बताया ,,,,

एक्चुअली हम उन्हीं के बारे में डिस्कस कर रहे थे । देखिए जहां तक उनकी बाइफ़ का सवाल है ,वह ठीक है।

और हां उनका बच्चा भी ठीक है ।

बच्चा मतलब

मतलब कि वह लेडीज़ प्रेग्नेंट है ।

लेकिन जहां तक उनके हस्बैंड की बात है तो उनको लंग्स में इंटरनल डैमेज हुआ है जिसकी वजह से ऑक्सीजन का लेवल भी बहुत कम हो गया है ।

शायद 70 हम उनका ट्रीटमेंट कर रहे हैं ट्रीटमेंट चालू है ,लेकिन 72 घंटे के लिए उन्हें ऑब्जर्वेशन में रखा गया है ।

और इस टाइम में हम कुछ भी नहीं कह पाएंगे ।

अगर इस टाइम में इंप्रूवमेंट होता है ।

तो शायद हम कुछ कर पाए ,और अगर उनकी हालत

बिगड़ती है ।

तो कुछ भी हमारे हाथ में नहीं रह जाएगा इस समय स्थिति इतनी बुरी थी ।

कि एक एक पल साल की तरह काट रहा था ।

डॉली और राजनी के भी सारे एक्स रे और कुछ जनरल टेस्ट हो चुके थे ।

लेकिन भगवान का शुक्र था ,कि दोनों बिल्कुल ठीक थी ।

बस कुछ चोटें थी।

जो समय के साथ ठीक हो जाती,,,,लेकिन जो वक्त की चोटें थी वो पता नही कब तक ठीक होने वाली थी।

इस एक्सीडेंट को पूरे 24 घंटे हो चुके थे नीलेश की आंखों के भी दो ऑपरेशन हो गए थे ।

एक ऑपरेशन एक्सीडेंट के तुरंत बाद हुआ था ,और दूसरा बस कुछ घंटे पहले डॉक्टर ने ऑपरेशन का रिजल्ट सुबह बताने के लिए कहा था ।

कि हम सुबह ही कुछ बता पाएंगे ऑपरेशन कितना सक्सेसफुल रहा ।

कुछ देर में डॉली और राजनी भी होश में आ चुकी थी ।लेकिन कुछ खून बह जाने की वजह से उन्हें ड्रिप चढ़ाई जा रही थी और इसलिए वह अपने रूम में बेड पर ही थी । दोनों बार-बार एक ही रट लगाई जा रही थी । कि उन्हें इसी वक्त नीलेश को देखना है ।लेकिन अभी तक नीलेश के बारे में उन्हें साफ-साफ कुछ भी नहीं बताया गया था । बस यही कहा था, कि कुछ हल्की सी चोट है ,ऑपरेशन हो गया है और अब वह बिल्कुल

ठीक है ।

लेकिन फिर भी एक मां का दिल अपने बच्चे की खुशी और गम को हजारों मील दूर से पहचान लेती है,उसे अनुभूति हो जाती है ,,,, उसका बच्चा खुश है या दुखी ,तो भला जब नीलेश इतने कष्ट में था ,तो डॉली का मन शांत कैसे हो सकता था ।

लेकिन पूनम काकी और विकास ने उन दोनों को संभाल रखा था ।

यहां तक कि राज को भी डॉली के सामने नहीं जाने दिया था ।

वरना शायद राज को देखकर वह कुछ समझ ही जाती ।

गाड़ी में जिस दूसरे युवक का एक्सीडेंट हुआ था ,उसकी हालत भी लगातार गिरती ही जा रही थी ।

ऑक्सीजन लेवल कम हो रहा था ,और लंग्स इन्फेक्शन बढ़ता ही जा रहा था ।

1 दिन बाद उसको वेंटिलेटर पर रख दिया गया था ।

डॉली और राजनी को तो नींद की दवाइयां भी दी गई थी ,लेकिन राज

उसने तो पलक भी नहीं झपकी थी।

कहीं ना कहीं ,वह इन सब के लिए खुद को जिम्मेदार मान रहा था ।

एक अपराधी होने का भाव भी उसके मन में था ।

इस बीच हॉस्पिटल में पुलिस की दखलअंदाजी भी हुई ,क्योंकि चाहे कुछ भी हो ,आखिर पुलिस को तो अपना काम करना ही होता है ।

एक्सीडेंट कैसे हुआ

क्यों हुआ

उस जगह पर जाकर शिनाख्त भी की गई सारी शिनाख्त के बाद यही पता चला कि राज इन सब के लिए कहीं से भी दोषी नहीं था ।

बल्कि सामने वाली कार रॉन्ग साइड से आ रही थी । और इसी वजह से एक्सीडेंट हुआ है ।

कार को तो वह खुद ही ड्राइव कर रहा था ,जो इस वक्त जिंदगी और मौत के बीच में झूल रहा था ।

दूसरी तरफ उसकी प्रेग्नेंट बीवी को भी ऑब्जर्वेशन में रखा था ।

वह भी सिर्फ इसीलिए कि उसे बाहर की बातों के बारे में कुछ भी पता ना चले। क्योंकि एक प्रेगनेंट लेडी को किसी भी तरह का सदमा देना सही नहीं होता।
 
यह 3 दिन 3 साल की तरह कटे थे। आखिर राजनी और डॉली को कितना रोकते ।

2 दिन बाद वह अपनी ज़िद पर बेड से उठ कर बाहर आ गई थी । और बात को भी कितना छुपाते

उन्हें सारी सच्चाई पता चल गई थी। राजनी और डॉली पूरी तरह से अपनी सुध बुध खो बैठी थी ।

ना उनकी आंखों में आंसू थे ,और ना ही होठों पर कोई बात ।

एक स्टेचू बनकर रह गई थी ।

अब तक डॉ ,,,,नीलेश के लिए जो भी कर सकते थे ,सब कुछ कर चुके थे ।

और रिजल्ट सबके सामने था ।

जो बहुत ही डरावना था ,नीलेश की आंखों के रेटिना पूरी तरह से डैमेज हो चुके हैं ,और अब वो कभी नहीं देख पाएगा ।

इतना सुनते ही हॉस्पिटल में ही डॉली और राजनी की चीख-पुकार शुरू हो गई थी । डॉली एक ही बात की रट लगाई जा रही थी ,डॉक्टर साहब भले ही मेरी आंखें निकाल लो ,लेकिन मेरे बेटे को उसकी रोशनी दे दो ।

अभी तो उसकी जिंदगी शुरु भी नहीं हुई वह कैसे जी पाएगा ,,,,पर सब इतना आसान नहीं था ।

सिर्फ हमारे कहने से कुछ नहीं होता है विकास ने आगे बढ़कर डॉक्टर से बात की ,,,डॉक्टर साहब कुछ तो ऐसा होगा कोई तो ऐसा उपाय होगा।

इस पर विज्ञान की दुनिया में तो सब कुछ संभव हो गया है।

फिर आप हमें इतना निराश कैसे कर सकते हैं

कोई ना कोई तरकीब तो होगी

जिससे नीलेश फिर से देख सके ।

बहुत गहराई से कुछ सोचते हुये डॉक्टर ने विकास की तरफ देखते हुए कहा।

एक तरकीब है, पर कुछ इंपॉसिबल ही समझ लीजिये।

डॉक्टर प्लीज आप बताइए तो सही! देखिए बात जरा कड़वी है, लेकिन इसका एक ही उपाय है ,,,,,,

भगवान ना करे ,अगर नीलेश के आसपास की उम्र का कोई भी परसन एक्सीडेंट में ,या फिर किसी बीमारी से उसकी डेट होती है ,और 1 घंटे के अंदर अगर उसके रेटीना को हम नीलेश की आंखों में ट्रांसफर कर पाए ।

तो इस कंडीशन में नीलेश देख पाएगा। इसके अलावा हमारे पास कोई दूसरा चारा नहीं है ।

पर मिस्टर विकास यह एक इत्तेफाक है एक इंसीडेंट है । और लाखों में कोई एक ही इतना खुशकिस्मत होता है ,कि उसे किसी की आंखों के रेटिना मिल पाए।

यह सुन कर तो सबका दिमाग सुन्न हो गया था । यह तो कोई सोच भी नहीं सकता था ,कि हम अपने स्वार्थ के लिए किसी और के बारे में बुरा भी सोचे। डॉक्टर सब कुछ अपने तरीके से कर रहे थे ।

तभी नर्स अंदर से भागती हुई बाहर आई और उसने बताया ,डॉक्टर अंदर पेशेंट की हालत बहुत क्रिटिकल हो रही है ।

ऑक्सीजन मास्क के बावजूद भी उनकी बॉडी में ऑक्सीजन नहीं जा रही है ।

डॉक्टर भागते हुए अंदर पहुंचे,,,, इस कंडीशन में उनकी वाइफ को बुलाना बहुत जरूरी था ।

क्योंकि शायद उनके पास कुछ घंटे ही थे या फिर कुछ मिनट

अब चाहे कुछ भी हो ,आखिर उनके साथ वही थी ,तो उनको सब कुछ बता देना ही सही था ।

क्योंकि अभी नहीं ,तो 1 घंटे बाद तो उन्हें सब कुछ पता चलने ही वाला था ।

दो नर्सो को भेज कर उस लेडी को यहां लाया गया ,,,,,यही कोई 28 ,,,30 वर्षीय एक खूबसूरत सी पहाड़ी युवती थी और शायद 2 या 3 महीने प्रेग्नेंट भी, या इससे ज्यादा भी हो सकते है।

अभी तक उसे यही पता था,कि उनका एक छोटा सा ऑपरेशन हुआ है ।

और इसी लिए उनसे मिलने की मनाई है लेकिन अब बाहर लाकर डॉक्टर और नर्स ने उन्हें सब कुछ समझा दिया था ।

यह सुनकर ही वह बहुत बुरी तरह घबरा गई थी ,उसके आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे ।

तब डॉली और पूनम ने उसे संभाला समझाया ,,,,,डॉक्टर अभी-अभी अंदर गए थे ,और अपनी कोशिशों में लगे थे। कि शायद कुछ हो पाए।

तब तक डॉली ने उसे समझाते हुए अपना परिचय दिया ,,,और उस दिन की दुर्घटना की सारी कहानी उसके सामने रख दी।

कि किस तरह से डॉली का 20 वर्षीय बेटा हमेशा हमेशा के लिए अपनी आंखों की रोशनी खो चुका है।

यह सुनकर वह भी परेशान हो उठी थी, सब कुछ बताते हुए डॉली भी बुरी तरह रोने लगी थी।

सच में एक मां का दुख ,एक माँ ही समझ सकती थी ।

और उसने भी डॉली का दुख समझा इससे बड़ा दुख क्या हो सकता है,कि एक मां के सामने ,उसके बेटे की आंखों की रोशनी चली जाए ,और वह कुछ भी ना कर पा रही हो ।

वह भी एक 5 वर्षीय बच्ची की मां थी और बच्चों के दुख का अंदाजा उसे था ।

उसने डॉली को भरोसा दिलाया ,,,,

कि आप चिंता ना करें ,भगवान हमारी मदद के लिए

किसी ना किसी को तो जरूर भेजता है ।

और 1 दिन ऐसा आता है ,कि सब कुछ ठीक हो ही जाता है।

दोनों अपनी बातें बताते हुये अपना मन हल्का कर रहीं थीं।

तभी डॉली ने उससे कहा ,,,प्लीज आप अपने पेरेंट्स ,का या किसी घर वाले का नंबर दें, तो हम उन्हें भी बुला लेते हैं।

हमारे साथ कोई नहीं है ,मैं तो खुद ही अपने पति के साथ पहली बार अपनी ससुराल वालों से मिलने वाली थी ।

मैं अपने किराएदार के यहां अपनी 5 साल की बेटी को छोड़ कर आई हूं ।

मुझे नहीं पता ,मेरे ससुराल वाले यहां आएंगे या नहीं

या मैं उनसे क्या कहूं

क्योंकि मैं आज से पहले उनसे मिली ही नहीं हूं ।

मेरे पति आज ही मुझे उनसे मिलवाने के लिए ले जा रहे थे । और मेरे पास उनका एड्रेस भी नहीं है ।

मैडम आपके पास फोन नंबर तो होगा जी हां ,,,पर पर इस वक्त पता नहीं फोन नंबर मिल भी पाएगा कि नहीं ,क्योंकि फोन मेरे हस्बैंड की पॉकेट में ही था ।

और मुझे नहीं लगता ,कि वह सही सलामत होगा ।

डॉली और पूनम ने उसे पकड़कर पास ही कुर्सी पर बिठाया ,और पानी पिलाते हुए उसे शांत रहने के लिए कहा।

लेकिन बह एक ही रट लगा रही थी। अपने पति को

देखने की ,,,,,

नर्स ने भरोसा दिलाया था ,कि वह उन्हें अंदर ले जाएगी ,लेकिन अभी डॉक्टर चेकअप कर रहे हैं । तो प्लीज आप थोड़ी वेट कर लीजिए।

जैसे ही डॉक्टर बाहर आए ,,,कि वह बिना पूछे ही अंदर की तरफ भागी, जहां उसके पति बहुत बुरी कंडीशन में थे।

ऐसे लग रहा था ,कि किसी भी वक्त उनकी सांसे थम सकती हैं ।

उन्होंने एक बार बोलती निगाहों से अपनी पत्नी को देखा ,,,,जैसे कि उनसे बहुत कुछ कहना चाहते हो।

लेकिन उनकी आवाज बाहर नहीं निकल पाई ।

धीरे-धीरे उनकी सांसे थमती जा रही थी। और कुछ ही सेकंड में उनकी सांसे हमेशा हमेशा के लिए थम गई थी।

तेज रुदन के साथ वह अपने पति के गले लग गई।

अब तक बाहर खड़े सारे लोग अंदर आ चुके थे ।

और उसे संभालने में लगे थे ,इस बात का तो अंदाजा वहां पर सब को पहले से ही था ,कि उनका बचना मुश्किल है ।

जिस बात का डर था ,वह हो चुका था उस युवक की सांसे थम चुकी थी ।

डॉक्टर ने उस युवति को समझाते हुए कहा !

देखिए जो होना था ,वह हो गया ,,,अब प्लीज ,आगे की फॉर्मेलिटी तो हमें करनी होगी ।

क्या हम आपके घर भेजने के लिए एंबुलेंस का इंतजाम

करें

या फिर आपके घर वाले खुद डेड बॉडी लेने आएंगे

कहते हैं ,कि भगवान जैसी परिस्थिति पैदा करता है ,वैसे ही हमें हिम्मत भी दे देता है ।

और इतना सब कुछ देखने के बाद शायद कुछ उस युवती में भी कुछ हिम्मत आ गई थी ।

उसने साफ स्पष्ट शब्दों में कहा !

डॉक्टर मुझे नहीं पता ,कि इनके घर वाले कहां है ,कौन है ,पर अभी मेरे साथ कोई भी नहीं है ।

मेरा दिमाग काम नहीं कर रहा ,मैं क्या करूं

वह एक बार फिर फूट-फूट कर रोने लगी तब डॉली और पूनम ने दोबारा उसे संभाला ,,,,,,बहन ऐसा मत करो ,ऐसा मत कहो,,,, हम हैं ,,आपके पति का अंतिम संस्कार हम सभी मिलकर करवाएंगे ।

आपको जिस भी सहायता की जरूरत होगी ,वह हम आपको देंगे ।

तब तक राज भी अंदर आ गया था ।

और उसकी हालत देखते हुये डॉली और राज ने आगे बढ़ना ठीक समझा।

और डॉक्टर से बात की, कि वह डिस्चार्ज के पेपर बनाएं ।
 
डेड बॉडी हम लेंगे ,और उनके अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी भी हम ही उठाएंगे।

इसके लिए पेपर फॉर्मेलिटी भी शुरू कर दी गई ,,,,,लेकिन ठीक उसी वक्त नर्स ने डॉक्टर के कान में कुछ फुसफुसाया डॉक्टर ने हां में सिर हिलाते हुए ,उस

पहाड़ी युवती से अकेले में बात करनी चाही,,,,,

सब कमरे से बाहर जा चुके थे ।

डॉक्टर ने रिक्वेस्ट करते हुए कहा ,,,

आई एम सॉरी !

कि मैं इस वक्त आपसे ऐसी बात कह रहा हूं ,पर देखिए,, मैं एक डॉक्टर हूं ।

मैं प्रैक्टिकल चीजों पर बिलीव करता हूं आपको तो पता ही होगा ,की इस एक्सीडेंट में एक 20 साल का लड़का अपनी दोनों आंखें खो चुका है ।

अगेन आई एम सॉरी ,,,पर अगर हम आपके हस्बैंड के रेटिना उनको ट्रांसफर करते हैं ,तो वह फिर से देख पाएंगा

देखिये अंगदान करना तो एक बहुत ही बड़ा और महान कार्य होता है।

एक बार सोच कर देखिए ,आपके हस्बैंड की आंखों से कोई एक बार फिर से यह दुनिया देख पाएगा ।

मुझे नहीं लगता ,इसमें कुछ भी गलत है। लेकिन इसके लिए हमें आपकी परमिशन की जरूरत होगी ,,,पेपर रेडी है ।

अगर आप हां करते हैं ,तो हम उनको आपके हस्बैंड के रेटिना ट्रांसफर कर पाएंगे ।

लेकिन प्लीज यह डिसीजन आपको सिर्फ 10 मिनट में लेना होगा ।

क्योंक आल रेडी 30 मिनट हो चुके हैं। और 1 घंटे के अंदर हमें ऑपरेशन करना ही होगा ।

जैसे ही डॉक्टर बाहर जाने लगे ,,,

तब तक एक बार फिर सब अंदर आ चुके थे ।

लेकिन तभी अचानक जाते हुए डॉक्टर को उस युवती ने रोका ,,,,

डॉक्टर !

मैंने पेपर पर साइन कर दिए हैं ।

प्लीज आप अपना काम कीजिए ।

डॉली और राज तो कुछ समझ ही नहीं पाए थे ।

उन्होंने पास आते हुए पूछा ,,,,

डॉक्टर आप क्या बात कर रहे हैं

डॉक्टर ने नर्स को जल्दी ही सारी तैयारी करने के लिए कहा ,,,,

और राज को बताया ,,की इसी वक्त हमें इनका रेटिना नीलेश में ट्रांसफर करना होगा ।

यह सुनकर राज डॉली कि समझ में ही नहीं आ रहा था ।

कि कोई इतना इतने बड़े दिल का कैसे हो सकता है ।

उसके हस्बैंड की अभी-अभी मौत हुई हो और उसने सिर्फ 10 मिनट के अंदर ही इतना बड़ा डिसीजन भी ले लिया।

वह उस को देखते ही रह गए ।

समझ ही नहीं आ रहा था ,कि वह उनके पैरों में गिरे ,,,,या उसका कैसे धन्यवाद करें ।

लेकिन इतना कहकर वह एक खामोश गुड़िया की तरह बैठ गई थी ।

उसके चेहरे पर कोई भाव नहीं थे ।

डॉक्टर अपना काम शुरू कर चुके थे ।

और 2 घंटे बाद डॉक्टर ने आकर बताया ऑपरेशन सक्सेसफुल रहा । तीन-चार दिनों बाद नीलेश की आंखों की पट्टी खुल जाएगी ।

जब तक ऑपरेशन हुआ ,इस बीच दाह संस्कार की सारी तैयारियां हो चुकी थी उस युवती की इच्छा पर ,,उसको भी दाह संस्कार में साथ ले लिया गया।

शाम तक दाह संस्कार भी हो गया ,लेकिन अब यहां से हॉस्पिटल जाने का कोई मतलब नहीं था ।

क्योंकि नीलेश का ऑपरेशन हो चुका था और डॉक्टर ने भीड़ लगाने के लिए मना किया था।

अब तक गांव से भी काफी लोग आ गए थे ,और भी लोग हॉस्पिटल में नीलेश के पास रुक गये थे।

और उन्होंने राज को कुछ देर के लिए घर जाने को कहा ।

दाह संस्कार करके राज सबके साथ घर आ गया था ।

उस पहाड़ी युवती को भी डॉली अपने साथ ही ले आई थी ।

मरणोपरांत जो भी संस्कार होने चाहिए डॉली ने विधिपूर्वक पंडित को बुलाकर सभी काम अच्छे से करवाए थे ।

और हर पल उसका ध्यान रखा था।

आज निलेश के ऑपरेशन को और उस युवक के दाह संस्कार को पूरे 5 दिन बीत चुके थे ।

और वह युवती जिसका नाम काम्या था वह डॉली के घर पर उसके साथ ही रह रही थी ।

क्योंकि उसके पति के नाम का दिया डॉली के घर में ही जल रहा था ।

आज नीलेश की आंखों की पट्टी खुलने वाली थी ।

काम्या को राजनी और काकी के पास छोड़कर राज डॉली निलेश के पास हॉस्पिटल चले गए थे।

विकास पूनम भी आ चुके थे । सभी लोग सांस रोकते हुए भगवान से एक ही प्रार्थना कर रहे थे ।

कि भगवान नीलेश की आंखों की रोशनी लौटा देना ।

डॉक्टर ने आकर पट्टी खोलना शुरू कर दिया था । पट्टी की परतें खुलती जा रही थी ।

डॉली का दिल और भी तेज धड़कने लगा था । क्योंकि

बस कुछ ही पलों में रिजल्ट उनके सामने आने वाला था ।

पट्टी खोलने के कुछ ही सेकंड बाद पता चल जाता ,कि नीलेश की आंखों की क्या स्थिति है ।

जैसे ही पट्टी का रोल बना ,और आंखों से पट्टी खोल दी गई।

नीलेश ने धीरे-धीरे आंखें खोलना शुरू किया ।

आंखों पर तेज रोशनी ना पड़े ,इसलिए कमरे के सभी पर्दे लगाए गए थे ।

एक मध्यम सी रोशनी कमरे में थी। डॉली राज, विकास ,पूनम सभी निलेश के आस पास ही खड़े थे ।

धीरे-धीरे नीलेश ने आंखें खोली ।

लगभग 2 मिनट बाद डॉली की तरफ देख कर बोला ,,,,

मॉम राजनी कहां है

क्या वह आपके साथ नहीं आई

इतना सुनना था ,,कि खुशी के आंसू डॉली की आंखों से बहने लगे।

डॉक्टर ने कांग्रेचुलेशन बोलते हुए राज को बधाई दी ।

ऑपरेशन सक्सेसफुल रहा रेटिना सही तरह से अपना काम कर रहे है ।

बस कुछ टाइम के लिए आपको कुछ जरूरी प्रोटेक्शन लेने होंगे ।

उसके बाद निलेश बिल्कुल पहले की तरह अपनी लाइफ जी सकता है ।

और हां तीन-चार दिनों बाद इन्हें हॉस्पिटल से डिस्चार्ज कर दिया जाएगा। बस घर जाकर कुछ समय के लिए

थोड़ी सावधानी रखने के बाद यह दोबारा अपने काम पर लौट सकते हैं ।
 
राज तो डॉक्टर के पैरों में गिर गया था डॉक्टर साहब अपुन की जिंदगी आप ने बचाई है । अपुन आपको कभी नहीं भूल सकता । अगर आप जैसे डॉक्टर इस दुनिया में हो ,तो मंदिर जाने की जरूरत नहीं है ,हम अस्पताल को ही मंदिर मानकर उसकी पूजा कर सकते हैं। उस पहाड़ी युवती के साथ हुई दुर्घटना का सब को बहुत दुख था ।

लेकिन दूसरी तरफ नीलेश की आंखें बापस आ जाने से एक संतुष्टि भी थी।

कि उस युवक ने जाते-जाते भी एक जिंदगी आबाद कर दी है ,उसकी आंखों से किसी को दोबारा दुनिया देखने का मौका मिल रहा है।

राज डॉक्टर से और वहां के स्टाफ से इतना प्रभावित हुआ, कि वह भी सपना देखते लगा,,,,, काश उसकी राजनी भी बड़ी होकर एक ऐसी ही डॉक्टर बने ।

जो हमेशा लोगों की सेवा के लिए तत्पर रहे।

पूरे जी जान से उनकी सेवा करे,निस्वार्थ भाव से सबकी सहायता करे।

अब इन सब का घर पहुंचना भी जरूरी था ।क्योंकि पंडित के बताए अनुसार तो चार-पांच दिनों बाद तेरहवीं भी करनी थी अब नीलेश बिल्कुल ठीक था । लेकिन अभी चार-पांच दिन और हॉस्पिटल में रहना था ।

पर उसे कोई प्रॉब्लम नहीं थी ,और फिर डॉक्टर ने उसके आसपास किसी को भी आने के लिए मना किया

था ।

क्योंकि पट्टी अभी अभी खुली थी ,तो इस कंडीशन में इंफेक्शन का काफी खतरा रहता है।

इसलिए एक तरह से निलेश के पास आने पर पाबंदी लगाई थी ।

और डॉक्टर ने कहां था ,कि इन पांच दिनों तक निलेश के पास कोई ना ही आये तो बेहतर होगा।

अब जब डॉली और राज अपनी आंखों से देख चुके थे ।

कि नीलेश सही है ,तो उनकी चिंता भी दूर हो गई थी ।

और फिर कुछ जरूरत होती तो विकास पूनम शहर में ही थे ।

तुरंत निलेश के पास आ जाते ,वैसे भी उन्होंने डॉली और राज से कह दिया था कि गांव में काम्या का ध्यान रखें ।

वह दोनो जाकर हॉस्पिटल में नीलेश की खबर लेते रहेंगे ।

इक तरह से देखा जाए, तो अब नीलेश की तरफ से निश्चिंत हो चुके थे ।

और फिर काम्या का ध्यान देना बहुत जरूरी था ,इसलिए राज डॉली गांव वापस आ गए ।

यहाँ, काम्या ,राजनी, और काकी ने ये बात सुनी ,तो सच में सब की खुशी की सीमा ही नहीं थी

यह काम भगवान के अलावा कोई कर सकता है ,तो वह डॉक्टर ही था ।

जो किसी दूसरे व्यक्ति की आंखें किसी और में लगाकर

उसे दुनिया दिखा सकता है ।कोई साधारण मनुष्य ये सब नहीं कर पाते ।

डॉक्टर के लिए राज के मन में अपार श्रद्धा भर गई थी।

राज भले ही नास्तिक नहीं था ,पर भगवान पर भी उसे जितना भरोसा नहीं था ,उससे कहीं ज्यादा भरोसा उसी डॉक्टर पर हो गया था ।

सबसे पहले आकर राज ने राजनी का माथा चूमते हुए उसे अपने गले से लगा लिया ।

क्योंकि आज उसे अपनी राजनी में भी आने वाले समय का भगवान दिख रहा था ।

उसने राजनी का चेहरा अपने हाथों में लिया ,,,,

और कहा !!!

राजनी अपुन को प्राउड है तेरे ऊपर, कि तू भी आगे चलकर एक डॉक्टर बनेगी अपन तुझे भी ऐसा ही डॉक्टर बनता हुआ देखना चाहता है । जो सबका भला करते हैं ,सबके लिए अच्छा सोचते हैं।

तू अपन से प्रॉमिस कर ,कि तू सबसे पहले इंसानियत देखेगी ।

पैसा नहीं, राज सोचते हुए बहुत आगे पहुंच गया था ।

राजनी जब तू अपनी डॉक्टरी पास कर लेगी ना ,उसके बाद विकास ने बताया था कि बड़ा डॉक्टर बनने के लिए 2 साल और पढ़ा जाता है।

तू अपन से प्रॉमिस कर ,तू वह भी पड़ेगी और अपुन का एक ही सपना है ।

कि जब तू अपनी डॉक्टरी की सारी पढ़ाई कर लेगी ।

तो अपने गांव में आकर एक बड़ा सा अस्पताल खोलेगी।

ठीक उसी जगह ,जहां पर एक्सीडेंट हुआ था ।

डॉक्टर ने बताया था ,कि अगर हम आधे घंटे के अंदर दोनों को हॉस्पिटल ले आते तो नीलेश की आंखों को भी बचाया जा सकता था।

और शायद काम्या के पति को भी राजनी अपुन का एक ही सपना है ,कि अपने गांव में भी एक बड़ा सा अस्पताल हो। अगर तू मेहनत करेगी ,और भगवान का आशीर्वाद होगा ।

तो शायद मुमकिन हो पाए ।

राजनी बहुत गौर से राज की तरफ देख रही थी ।

डैड मैं आपसे प्रॉमिस तो नहीं कर सकती लेकिन हां ,कोशिश करने में कभी पीछे नहीं रहूंगी । मैं आपके सपने को जरूर पूरा करूंगी।

मैं अपने गांव में अस्पताल जरूर खोलूंगी । और पूरे जी जान से उसमें लोगों की सेवा करूंगी।

तभी डॉली भी आ गई ,डॉली ने दोनों की तरफ देखते हुए कहा ।

क्या बातें चल रही है

राजनी और आपके बीच

महारानी यह अपुन का राजनी के साथ सीक्रेट है ।यह तुझे नहीं बताएंगे ।

जब सीक्रेट सबके सामने आएगा । तुझे तभी पता चलेगा ।

राजनी ने भी डॉली की तरफ देखते हुए कहा ,,,,,जी

मॉम यह मेरे और डैड के बीच का सीक्रेट है ।

और आप ही कहते हो ना, किसी से बताया नहीं जाता ,,,नहीं तो वो पूरे नहीं होते।

ठीक है मत बताओ ,,,,भगवान करे तुम्हारा सीक्रेट जल्द पूरा हो औऱ हमे पता चले।

डॉली ने इतना कहा,,,, और राज को अंदर बुलाया ,,,,

राज मुझे आपसे कुछ बात करनी है

हां बोल ना क्या बात है !

आप थोड़ी देर के लिए अंदर आ जाइए काम्या भी अंदर ही है ,उसके साथ ही कोई बात करनी है ।

ठीक है राजनी को छोड़कर राज डॉली और काम्या अंदर कुछ जरूरी बातें करने लगे ।

काकी भी इनके साथ ही बैठी थी।

काम्या तो जैसे अपनी सुध बुध खो बैठी थी ।

उसे खुद से कोई होश नहीं था। लेकिन इन्हीं का फर्ज था ,कि वह इस बात का ध्यान रखें । कि इस वक्त काम्या के लिए क्या सही है ।

जो होना था ,वह हो चुका ,लेकिन आगे की बातों का ध्यान तो रखना ही था। डॉली ने काम्या की तरफ देखते हुए कहा काम्या,,,, अभी तक वक्त ऐसा था ।

कि हमें जो भी करना पड़ा, हम उसमें किसी का इंतजार नहीं कर सकते थे। हॉस्पिटल में नीलेश की वजह से ,मैं बहुत परेशान थी ।

लेकिन अब भगवान की कृपा से निलेश ठीक है । अब हमें हॉस्पिटल जाने की जरूरत नहीं है ।

और 5 दिनों बाद तुम्हारे पति की तेरहवीं का पूजन भी

हमें करना है ।

तो इस कंडीशन में सही होगा, कि हम तुम्हारे घर वालों को खबर कर दें।

अगर हम उन्हें कुछ भी नहीं बताते , तो यह बहुत गलत होगा ।

क्या तुम्हे उनके बारे में कुछ भी पता है। क्या तुम हमें बताओगी की पूरी बात क्या है

तुम कौन हो ,कहां से आई हो

और ऐसी कौन सी परिस्थिति थी

कि तुम्हारे ससुराल वाले तुमसे दूर है।

तुम्हे उन्होंने कभी देखा ही नहीं ,क्या हम यह सब जान सकते हैं ।

क्योंकि हमें यही सही लग रहा है ,कि कम से कम तुम्हारे पति के मां-बाप को तो हमें यह बताना ही चाहिए ।

अपने बेटे के बारे में ऐसा सुनकर उन पर क्या बीतेगी

डॉली आप सही कह रही है ,पर सच में हम आपको क्या-क्या बताएं ,कि मैं किसी स्थिति से गुजर रही हूं ।

जहां मुझे खुद ही इस बारे में कुछ पता नहीं है ,,,,

काम्या मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा

कि तुम अपनी ससुराल वालों के बारे में ही कुछ नहीं जानती,,,,

पर क्यों

तुमने कहा कि एक 5 साल की बेटी भी है तुम्हारी ।

और अभी तक तुमने अपने ससुराल वालों के बारे में कुछ जाना ही नही।

डॉली क्योंकि बात ही कुछ ऐसी है ।

आज से ठीक 8 साल पहले जब में अपने पति यानि कि( राजीव) से मिली थी।

अब काम्या अपनी कहानी डॉली को सुनाने लगती है,,,,,,,

मैं अपने एक रिश्तेदार की शादी में शरीक होने के लिए आई थी ,और राजीव यहां पर एक प्राइवेट कंपनी में जॉब करते थे। शादी के दौरान हम दोनों की मुलाकात हुई ,शादी के बाद भी करीब 15 से 20 दिन तक मै यहाँ रुकी थी ।

और इस बीच हम दोनों पांच छह बार मिल चुके थे ,धीरे-धीरे राजीव मेरे एक अच्छे दोस्त बने ,और कुछ ही दिनों में दोस्त से कुछ ज्यादा ,अब हमें एहसास हुआ ,कि हम एक दूसरे को प्यार करने लगे हैं ।

और उसके बाद राजीव जब भी शहर से अपने घर आते ,,तो मुझसे मिलने मेरे गांव भी आ जाते थे ।

हम दोनों चुप चुप के मिलने लगे थे। हमारी मुलाकातें दिन पर दिन बढ़ती ही जा रही थी । अब हम समझ

चुके थे ,कि हम एक दूसरे के बिना नहीं जी सकते। एक दूसरे में हमें अपना जीवनसाथी नजर आने लगा था ।

राजीव ने अपनी फैमिली के बारे में बताया था ,कि वह बहुत अमीर है ,और मैं अपने बाबा की इकलौती बेटी थी ।

मेरी मां बचपन में ही मुझे छोड़ कर जा चुकी थी।

मैं और मेरे बाबा हम दोनों ही थे ।

मेरी और राजीव की कास्ट भी अलग थी उसको देखते हुए हमारा रिश्ता कुछ नामुमकिन सा ही लग रहा था ।

और इससे काफी समय तक हम दोनों अपने परिवार से यह बात छुपाते रहे। लेकिन इन सब से हमारे प्यार में कोई फर्क नहीं पड़ा था ।

हमारे बीच वो सब हो चुका था, जो शादी से पहले सही नहीं था ।

और कुछ महीने बाद मुझे पता चला कि मैं प्रेग्नेंट हूं,,,,,,

डॉक्टर को भी दिखाया ,,,,पर डॉक्टर ने साफ-साफ कह दिया था ,कि अब अबॉर्शन नहीं हो सकता ।

और फिर राजीब भी मुझे लेकर बहुत प्रोटेक्ट थे ।

वो भी मुझे लेकर कोई रिस्क नहीं लेना चाहते थे। हमने फैसला किया ,कि किसी को बिना कुछ बताए सबसे पहले हम शादी करेंगे ।

उसके बाद धीरे-धीरे अपने घरवालों को मनाने की कोशिश ।

क्योंकि हमारे पास बिल्कुल भी वक्त नहीं था । कि हम उसे बर्बाद करें ।

घर वालों को मनाये,,,, फिर हमारी शादी हो ।

इतने में बहुत कुछ हो सकता था ,और हमें भी पता था ,कि इतनी आसानी से कोई मानने वाला नहीं है ।

हालांकि एक बार तभी मैंने अपने बाबा से बात की ,,,उन्हें बताया था ,कि मैं किसी से प्यार करती हूं ,और उसके साथ शादी करना चाहती हूं ।

लेकिन बाबा ने इस बात को सिरे से नकार दिया था ।

और उसी दिन से मुझ पर कड़ी पाबंदी भी लगा दी गई थी ।

लेकिन हमने पहले से सब कुछ सोच कर रखा था । उसके ठीक दूसरी ही दिन किसी तरह में घर से निकली,,,,

घर से कुछ दूरी पर राजीव मेरा इंतजार कर रहे थे ।

और हम दोनों इसी शहर में आ गए । क्योंकि राजीव की नौकरी यहीं पर थी। हमने मंदिर में से शादी भी कर ली ,और मैं राजीव के साथ एक पत्नी की तरह रहने लगी।

इस बीच मैंने अपने बाबा को बहुत सारे पत्र लिखें ,,,उन्हें मनाने की कोशिश भी की ।

पर सब बेकार था ,वह कैसे भी मुझे स्वीकार करना नहीं चाहते थे ।
 
इन्हीं सब में 7 महीने बाद मेरी बेटी सौम्या हो गई।

सौम्या अभी 2 साल की ही हुई थी लेकिन तभी राजीव का ट्रांसफर उन्हीं के शहर में कर दिया गया ।

जहां पर उनकी फैमिली रहती थी।

राजीव की नौकरी काफी अच्छी थी ,वह मुझे छोड़ कर

तो नहीं जाना चाहते थे। लेकिन इतनी जल्दी नौकरी मिलती कैसे और अब हमारे साथ हमारा एक बच्चा भी था ।

उसका खर्चा भी बढ़ गया था , यहां पर हमारी सारी गृहस्ती बन गई थी ।

हाल फिलहाल के लिए राजीव अपने शहर चले गए ,और वही नौकरी करने लगे ।

मैं यहां अकेली ही रहती थी ,लेकिन राजीव मेरा पूरा ख्याल रखते थे।

हर महीने मेरे अकाउंट में पर्याप्त पैसे भी ट्रांसफर करते थे ।

समय-समय पर मुझसे मिलने भी आ जाते थे ।

लेकिन अचानक एक दिन पता चला ,कि जिस बिल्डिंग में मैं रहती हूं ,उसमें राजीव के एक बहुत खास रिश्तेदार रहने आ गए हैं ।

राजीव ने अभी तक अपनी फैमिली वालों से हमारी शादी की बात छुपा कर रखी थी ।

और अगर राजीव अपने रिश्तेदार के सामने मुझसे मिलने आते।

तो उनके घर पर भी सब कुछ पता चल जाता । इसलिए राजीव जब भी शहर आते , हम घर से बाहर ही मिलते थे।

अब उनका घर पर आना जाना बंद हो गया था ।

सौम्या धीरे-धीरे बड़ी हो रही थी ।

हमने मकान बदलने की कोशिश भी की पर ये मकान काफी अच्छा था।

और फिर सौम्या का स्कूल भी ठीक घर के सामने ही था ।

इसलिए इसे बदलना सही नहीं लगा ।

राजीव सोच रहे थे ,कि कैसे भी करके अपनी फैमिली वालों को बता देंगे ।

और फिर मुझे अपने साथ अपने घर ले जाएंगे ।

उन्होंने एक दो बार घर पर बताने की कोशिश भी की ,पर इस बात को सुनकर ही उनके घर वालों का कुछ अलग ही रवैया देखने को मिला ।

और ये देख कर राजीव की कुछ भी बताने की हिम्मत नहीं पड़ी ।

सौम्या जब भी अपने डैड के बारे में पूछती ,,,हम बस यही कहते ,,,कि आज आएंगे ,,कल आएंगे ,,

इस तरह से अब सौम्या पूरे 5 साल की हो गई है ।

अब तो उसे ठीक से याद भी नहीं कि उसके डैड कौन है ।

कुछ दिनों पहले ,,,जब मुझे पता चला कि मैं दोबारा मां बनने वाली हूं ।

तो राजीव ने फैसला कर लिया था।

कि वह मुझे ले जाकर अपनी फैमिली से मिलवा देंगे।

उनका चाहे जो भी फैसला हो ,अब हम दोनों साथ ही रहेंगे ।

वह मुझे स्वीकार करते, या अस्वीकार पर अब हमने हमारे रिश्ते को सबके सामने लाने का फैसला कर लिया था ।

पर हमने पहली बार सौम्या को वहाँ ले जाना ठीक नहीं

समझा,,, क्योंकि वह बहुत छोटी है,,,,सबके बीच जो भी बातें होने वाली थी,सौम्या के ऊपर सारी बातें सुनकर ,,देख कर ,,कुछ गलत असर पड़ सकता था ।

इसलिए मैं उसको अपने मकानमालिक के पास छोड़ कर आई थी ,, वह उनसे काफी घुली मिली है ।

और अच्छे से उनके पास रह लेती है।

राजीव मुझे अपनी फैमिली से मिलवाने ही ले जा रहे थे।

उसके बाद सब कुछ आप लोगों के सामने है ,,,,,

यह कहते हुए काम्या बुरी तरह से बिफर कर रो पड़ी।

सच में काम्या ने जो कुछ बताया ,,,इससे सभी चिंता में पड़ गए थे ।

कि इस वक्त तो काम्या के साथ कोई भी नहीं है ।

सिवाय उसकी 5 साल की बच्ची और एक ऐसा बच्चा जिसका अभी जन्म भी नहीं हुआ ।

आखिर क्या करेगी

कहां जाएगी

काम्या ! अब तुम ही बताओ ,,, क्या करना है ,,क्या तुम्हारे पास ऐसा कुछ भी नहीं है

कि तुम्हारी ससुराल वालों का पता लगाया जा सके ।

मेरे पास उनका एड्रेस और फोन नंबर है लेकिन वह शहर में मेरे घर पर ही मिलेगा।

और इस वक्त मुझे कुछ भी याद नहीं है मैंने उनकी तस्वीर भी देखी है।

लेकिन मैं नहीं कह सकती कि वह मुझे अपनाएंगे भी ,या नहीं

मुझे कुछ नहीं पता ,,,,,

और इस वक्त इससे ज्यादा मैं कुछ सोच भी नहीं पा रही हूं ।

डॉली ने काम्या के हाथ पकड़ कर उसको दिलासा देते हुए कहा,,,

प्लीज़ तुम इस तरह से टेंशन मत लो देखो तुम फिर से मां बनने वाली हो ।

तो तुम्हे अपना ध्यान तो रखना ही होगा। और तुम जैसा कहोगी हम वैसा ही करेंगे।

हमारी हर तरह से तुम्हारी मदद करने को तैयार है ।

लेकिन अगर इतनी प्रॉब्लम है तो फिर

राजीव की तेरहवीं भी हो जाने दो ।

उसके बाद हमें कुछ सोचना होगा।

क्योंकि अगर तुम चली गई तो तुम्हारे बिना ,,कोई भी पूजा सफल नहीं होंगी। सब कुछ अधर में लटक जाएगा ।

ठीक है डॉली जो तुम्हे सही लगे ,,,,,

अब सब कुछ डॉली और राज को ही तय करना था ।

और उन दोनों ने ही तय किया ,कि जैसे ही राजीव की तेरहवीं का पूजन हो जाता है । और नीलेश घर आ जाता है।

उसके बाद वह खुद काम्या को लेकर उसके ससुराल जाएंगे ।

उसके बाद क्या होता है ,,,वह तो जाकर ही पता चलेगा ।

आखिरकार 8 दिन और बीत गये।

अब राजीव की तेरहवीं का पूजन भी हो चुका था । नीलेश भी घर आ गया था। नीलेश अब ठीक था।

बस थोड़ी रेस्ट करना था ,,,तो काकी और राजनी भी थी ।

डॉली राज और काम्या तीनों शहर के लिए निकलने वाले थे ।

शहर से काम्या का सामान लेकर ,और उसकी बेटी को लेकर उसको छोड़ने उसके ससुराल जाने वाले थे ।

लेकिन उसी दिन राजनी के कॉलेज का कुछ जरूरी काम आ गया।

अब वैसे भी 15 दिनों से वह यही थी। अब काम को और नही रोक सकती थी। उसे हर हालत में दूसरे शहर जाना था। राजनी दूसरे दिन सुबह शहर के लिए निकल गई ।
 
नीलेश का कमरा ऊपर था ,और फिर काकी से भी इतना कुछ कहा बन पाता था ।

नीलेश ठीक था ,,पर अभी भी उसको देखरेख की बहुत जरूरत थी ।

और फिर ये भी पता नहीं था ,,,,कि काम्या को छोड़ने में कितने दिन लग जाएंगे ।

क्योंकि शहर जाकर जब काम्या का एड्रेस देखते ,,फोन नंबर देखते तभी पता चलता ,,,कि उसकी ससुराल है कहां।

पर अब ऐसे हालात में ,निलेश के पास डॉली का रुकना बहुत जरूरी था ।

तब राज ने कहा ,,,,शहज़ादी तू यहीं रुक जा।

मैं काम्या को अच्छी तरह से छोड़कर आऊंगा ।

और सही बात ये थी कि,,, डॉली का भी मन नहीं था ,,कि वह नीलेश को इस तरह से छोड़कर जाए ।

आखिर डॉली का जाना कैंसिल हो गया और राज काम्या को लेकर शहर के लिए निकलने लगा ।

जैसे ही राज जाने को हुआ कि अचानक टेबल पर रखा हुआ कांच का ग्लास नीचे गिरा ,,,,और टुकड़े टुकड़े हो गया ।

यह देखकर डॉली का मन कुछ खराब हो गया था ।

राज कांच का टूटना अच्छा नहीं माना जाता ।

मुझे कुछ अजीब लग रहा है ।

अरे महारानी तू काहे को टेंशन लेती है!

अपुन तुझे छोड़ कर तो नहीं जा रहा है।

और डॉली को समझा दिया।

चाहे जो भी हो ,,डॉली ने काम्या को अपने घर में एक छोटी बहन की तरह रखा था।

जब जाने लगी तो डॉली दही शक्कर की कटोरी भर के लाई ,,,,

काम्या को खिलाने के लिए ,,,,,

कहते हैं,,,, दही शक्कर खिलाने से लोग जल्दी घर आते हैं ।

उसने एक चम्मच काम्या को खिलाया और जैसे ही दूसरी चम्मच उठाई ,,,

राज को खिलाने के लिए ,कि डॉली के हाथ से अचानक कटोरी गिरी और पूरा दही जमीन पर फैल गया ।

एक बार फिर डॉली का मन बिचलित हो गया था ।

डॉली ने जल्दी से दही समेटा ,,,

और बर्तन रखने जैसे ही किचन में गई। कि राज भी उसके पीछे पहुंच गया।

शहज़ादी तू टेंशन मत ले ,,,,अरे दही ही तो फैला है ।

फ्रिज में और दही होगा ।

अगर तेरा मन है,,, तो दोबारा मुझे खिला दे ।

डॉली ने राज का हाथ पकड़ते हुए कहा राज एक साथ बहुत सारे अपशगुन हो रहे है,,, राज मुझे बहुत डर लग रहा है। ऐसे लग रहा है ,,जैसे कुछ गलत होने वाला हो ।

वह घबराते हुए राज के गले से लग गई। राज मुझे बहुत डर लग रहा है ,,,,

महारानी तू भी ना बिल्कुल काकी की तरह हो गई है ।

छोटी-छोटी बातों पर घबरा जाती है।

अरे अपुन को कुछ नहीं होगा।

राज मुझे बहुत बुरा लग रहा है ,,आपके जाने से ,,,ऐसे लग रहा है, जैसे आप मुझसे बहुत दूर जाने वाले हों।

मैं आपको नहीं जाने दूंगी,,, हम काम्या को कुछ दिन और यही रोक लेंगे।

जब नीलेश ठीक हो जाएगा ,,,

तो मैं भी आपके साथ ही चलूंगी।

आप मत जाइए राज !//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f622.svg

शहज़ादी !!!!काम्या को हम कैसे ,और कब तक यहां रोक सकते हैं ।

आखिर उसके बाबा है ,,,उसके पति का घर है ,,,उसे

भी तो अपने घर जाने की लग रही होगी ।

और हम किस हक से उसे रोकेंगे।

देख ऐसा कुछ नहीं है ,,यह सिर्फ तेरी सोच है ,सब कुछ अच्छा होगा ।

तू जैसा सोचेगी ना ,,तुझे वैसी ही फीलिंग आएगी ।

इधर देख मेरी तरफ !

अब जल्दी से अपने आंसू पोछ और मुझे एक मीठी वाली वह दे दे ,,जिससे मैं खुशी-खुशी जा पाऊं ।

जल्दी कर देख अगर काकी आ गई ,तो बस ,,,,,,

डॉली ने राज को देखते हुए,,,अपने होंठ राज के होठों पर रख दिये।

और एक बार फिर उसके गले लग गई राज के लाख समझाने के बाद भी ,उसे कुछ अच्छा नहीं लग रहा था ।

लेकिन सिर्फ फीलिंग होने पर ही राज कैसे रुक सकता था ।

आखिर काम्या को छोड़ने तो जाना ही था

राज ने डॉली की गाल को थपथपाया और बाहर निकल गया,,,,,,,,,

राज काम्या को लेकर शहर के लिए निकल गया।

शहर पहुंचकर काम्या के घर पर भी पहुंच गए थे । काम्या ने शहर जाने से पहले अपनी बेटी सौम्या से बात कर ली थी ,कि वह आज उसके पास आ रही है उसे सौम्या से दूर हुए पूरे 15 दिन हो चुके थे।

और सौम्या पहली बार काम्या से अलग हुई थी ।

इसलिए उसे बेसब्री से अपनी मम्मी का इंतजार था ।

अंदर बाहर होते हुए कितने बार घर पर पूछ चुकी थी ,,,,आँटी मम्मी कब आएंगी मम्मी कब आएंगी

जैसे ही उसने देखा ,कि नीचे काम्या राज के साथ उतरती जा रही है।

तो खुश होते हुए अंदर भागी,,,

आंटी !

आंटी!

मम्मी आ गई और डैड भी साथ में आए हैं ।

काम्या के मकान मालिक को यही पता था ,,,,कि काम्या अपने पति के साथ ही आ रही है ।

क्योंकि काम्या उन्हें बता कर गई थी। किस राजीव उन्हें ससुराल ले जाकर सबसे मिलाने वाले हैं।

घंटी बजने पर जब उसने दरवाजा खोला तो काम्या के साथ राज को खड़ा पाया। उन्होंने कुछ आश्चर्य से काम्या की तरफ देखते हुए कहा,,,,,

काम्या राजीव कहां है

यह काम्या के मकान मालिक की पत्नी थी ,जो लगभग काम्या के हम उम्र ही होगी,,,,,,और इसलिए काम्या की इनसे बहुत अच्छी बनती थी।

और 1 साल जब वो राजीव के साथ इस मकान में रही थी ।

राजीव को अच्छी तरह से जानती थी। और फिर काम्या ने उनसे अपनी कोई भी बात कभी भी नहीं छुपाई।

उन्हें सब कुछ बताया,,,,, उन्हें लगा शायद कोई और होगा ,,काम्या कुछ कहती ,इससे पहले ही 5 साल की नन्ही सी सौम्या भागती हुई आई ।

और झट से राज की गोद में चढ़ गई।

डैड,,,डैड,,,, अब हम अपने घर चलेंगे ना

आप मुझे डॉल भी दिलाएंगे

मैं रोज मम्मा से आपके बारे में पूछती थी डैड कब आएंगे

मेरे लिए क्या लाएंगे

और मम्मा रोज कोई ना कोई बहाना बनाती थी ।

लेकिन मैंने भी मम्मा से कह दिया था अगर डैड इस

बार नहीं आए ,तो मैं खाना नहीं खाऊंगी,,,, और स्कूल भी नहीं जाऊंगी ।

डैड आई लव यू,,,,,,,,

आप आ गए

अब आप मेरे स्कूल भी चलना, और पीटीएम में भी,,,,मैं आपको सब से मिलवाऊँगी,,,,, डैड मेरी नई वाली डॉल टूट गई है ,आप दूसरी दिलाओगे ना

5 वर्षीय मासूम सौम्या की ऐसी बातें सुनकर काम्या बस उसको देखती ही जा रही थी ।

उसके मुंह से एक शब्द भी नहीं निकला। सब लोग आकर अंदर बैठ गए ।

उसके बाद भी सौम्या राज की गोद में ही थी ।

और ढेर सारी बातें उससे करती जा रही थी ।

सौम्या की बातें सुनकर काम्या का कलेजा मुंह को आ रहा था।
 
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