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Romance प्रेम कहानी डॉली और राज की

तीनों बैठकर बातें कर ही रही थी ।

कि तभी शैलेश गरम कैसरॉल में डिनर भर के टेबल पर रखने लगा ।

उसने बाकायदा सभी के सामने प्लेटे भी रखी ,,,,यहां तक कि पानी का जग भी। और बड़ी ही अदब के साथ कहा ,,,आप सभी डिनर स्टार्ट कर सकते हैं ।

अच्छा जी -देखते हैं आखिर डॉक्टर शैलेश ने क्या क्या बनाया है ।

राजनी सभी डोंगे खोलने लगी पहले में गरमा गरम पास्ता,,,

दूसरे में बिरयानी ,,,

और,तीसरे डोंगे में शानदार वेजिटेबल सैंडविच ,,,खाने से काफी अच्छी खुशबू आ रही थी।

राजनी से तो सब्र ही नहीं हो रहा था।

वह जल्दी से सब की प्लेटों में सारी चीजें रखने लगी ।

और कोई शुरू करता ,उससे पहले राजनी ने सैंडविच पर सॉस लगाते हुए उससे खाना शुरू भी कर दिया।

एक बाइट खाते साथ ही उसके मुंह से निकला,,,WOW,,, डॉक्टर शैलेश मानना पड़ेगा,,, एक अच्छे डॉक्टर के साथ आप एक अच्छे कुक भी है ।

कुछ भी हो,, पूनम आंटी ,,मॉम ,,,अब डॉक्टर शैलेश मेरे सारे टेस्ट में पास हो चुके हैं ।

अब आप जब कहे मै इनसे शादी करने के लिए तैयार हूं ।

क्या

जैसे ही राजनी के मुंह से ये बात सुनी की सभी एक साथ हंस पड़े ।

डॉली ने झूठा गुस्सा दिखाते हुए कहा राजनी तू यह कैसी बातें कर रही है।

शैलेश से खाना बनवाएगी

जी अगर शैलेश अच्छा खाना बनाता है तो खाना वही बनाएगा,,,, इस तरह हंसी मजाक करते हुए सभी डिनर करने लगे।

इस बीच शैलेश और राजनी की शादी की बातों को लेकर भी डॉली और पूनम काफी कुछ सोचती रही थी ।

हंसी खुशी 8 दिन कब बीत गए, पता ही नहीं चला ।

डॉली पूनम शैलेश सोनितपुर से वापस अपने-अपने घर आ गए थे।

2 महीने बाद दिवाली थी ,तो दिवाली पर नीलेश और राजनी डॉली के पास आने वाले थे ।

और डॉली ने तय कर लिया था, कि वह दीवाली पर ही शैलेश और राजनी की शादी की डेट फिक्स कर देगी।

और नीलेश से भी रमैया के बारे में सारी बातें क्लियर

करके उन दोनों की शादी के लिए भी उनके घर वालों से पूछ लेंगे ।

इन सभी बातों की प्लानिंग पूनम और डॉली के बीच में चलने लगी थी। आखिरकार 2 महीने पूरे हो गए ,,,आज का दिन था, जब नीलेश और राजनी गांव आने वाले थे ।

डॉली दिवाली की सारी तैयारियां कर चुकी थी, बस 4 दिन बाद दिवाली थी। जैसे ही दोनों बच्चे घर आए, कि घर में रौनक लग गई थी ।

राजनी तो पूरे 1 साल बाद घर आ रही थी ,और नीलेश वह भी लगभग इतने ही दिनों बाद आ रहा था ।

इस बार दोनों 10 से 12 दिन का समय निकालकर आए थे ।

क्योंकि सबके बीच काफी कुछ जरूरी बातें भी होने थीं।

काकी को तो जैसे नजरें बिछाकर दोनों बच्चों का इंतजार था ।

घर में एक बार फिर से खुशी आ गई थी। दोनों बच्चों के आने से घर,,,घर लगने लगा था।

डॉली ने पूनम से कह दिया था, कि दिवाली की पूजा के बाद, हम एक साथ बैठकर शादी के बारे में सारी बातें डिस्कस कर लेंगे ।

और पूनम को सबके साथ आने का इनविटेशन भी दे दिया था ।

दिवाली मनाई जा चुकी थी ।

उसके ठीक दूसरे दिन, पूनम विकास गौरी ,और शैलेश ,चारों डॉली के घर पर आ चुके थे ।

क्योंकि यहां काकी थी ,और काकी के सामने ही डॉली सारी बातें फाइनल करना चाहती थी ।

पर राजनी को अभी इतना पता नहीं था कि दिवाली के दूसरे दिन ही पूनम आंटी आकर शादी की डेट भी निकलवाने वाली है ।

जब सबके बीच बातें होने लगी, और बात डेट तक आ पहुंची,,, तो राजनी ने डॉली की तरफ देखते हुए कहा -- मॉम मैं शादी के लिए तैयार हूं ,और मैंने कहा भी था। कि ठीक है ,पर इतनी जल्दी

मैंने ऐसा तो नहीं सोचा था ।

डॉली और पूनम चौकते हुए राजनी की तरफ देखते लगी,,,,

राजनी बेटा सोनितपुर में तुमने ही तो कहा था ,कि तुम तैयार हो, और हम जब चाहे ,तुम्हारी शादी कर दे ,इसीलिए तो हम सबने ये प्लान बनाया था।

हां मम्मा ,,,मैंने कहा था ,पर यह तो नहीं कहा था ,कि 2 महीने बाद ही आप मेरी शादी की डेट फिक्स कर दो ।

मैं इतनी जल्दी तैयार नहीं हूं ।

डॉली ने कुछ डांटते हुए कहा --राजनी तुम कैसी बातें कर रही हो

सब कुछ तुमसे पूछ कर ही किया जा रहा है ,तुम्हारे कहने के बाद ही मैंने विकास और पूनम को यहां बुलाया है।

मामा सॉरी !

पर अभी इतनी भी जल्दी नहीं है ,कि हम शादी की डेट ही निकलवा ले ।

ये सुनकर डॉली और काकी राजनी पर दबाव बनाने लगी।

तो उसने आंखों में आंसू लाते हुए कहा मम्मा क्या हम डैड के लिए थोड़ा और वेट नहीं कर सकते

एक बार डैड को आ जाने दो मैं उनके आशीर्वाद के साथ ही शैलेश के साथ अपनी नई जिंदगी शुरू करना चाहती हूं। राजनी तुझे सब कुछ पता है, फिर क्यों बच्चों जैसी जिद कर रही है ,आखिर हम कब तक इंतजार करें

जब तक डैड नहीं आएंगे तब तक। राजनी कुछ गुस्से में बोली,,,,

डॉली भी राजनी पर भड़क गई,,, राजनी तुझे हर बात अच्छी तरह से पता है ,कि हम में से कोई भी नहीं बता सकता ,कि तेरे डैड कब आएंगे, फिर क्यों बच्चों की तरह जिद कर रही है

आखिर शैलेश को और कितना इंतजार करवाएंगे ,,,,मम्मा जितना इंतजार आपने मुझे डैड का करवाया है ।

इस बात पर एक साथ सभी राजनी की तरफ देखने लगे,,, शैलेश ने खड़े होते हुए कहा-- राजनी तुम क्या कुछ भी बोले जा रही हो

इन सब में डॉली आंटी कहां बीच में आ गई

हां शैलेश इन सबके बीच में मॉम ही तो है मॉम ने ही डैड को जाने के लिए कहा था डॉली ,,,राजनी को देखे जा रही थी,,,, राजनी मैंने राज को जाने के लिए कहा

हां मॉम मुझे अच्छी तरह से याद है ,डैड ने आपसे ही पूछा था ना ,,,कि क्या वह वहाँ रह सकते हैं,,, उन्होंने यह फैसला आपके ऊपर ही छोड़ा था ना।

कि अगर आप कहोगी तो ही वो वहाँ रुकेंगे,,,, और आपने हम सब से बिना पूछे डैड को वहाँ रुकने के लिए कह दिया था ।

मम्मा क्या डैड पर मेरा ,निलेश का और काकी का कोई हक नहीं है

क्या डैड सिर्फ आप ही के थे

जब आपने डैड से प्रॉमिस ले लिया उसके बाद आप ने हम सब को बताया था ।

और तब हम कर भी क्या सकते थे, तब डैड डिसीजन ले चुके थे ।

सॉरी मम्मा बट डैड को हम सब से दूर करने में ,कहीं ना कहीं आप भी जिम्मेदार है ।

आज हम सब डैड के बिना कितने अधूरे हैं ,,,आप सोच भी कैसे सकती हैं, की डैड के बिना मैं शैलेश से शादी कर लूंगी इतना कहते हुए राजनी रोती हुई ऊपर अपने कमरे में चली गई थी,,,,

उसके पीछे पीछे शैलेश भी भागता हुआ उसे मनाने के लिए ऊपर चला गया।

इन 6 सालों में डॉली ने खुद को इतना कमजोर महसूस

कभी नहीं किया था जितना वह आज कर रही थी।

उसके पैर बुरी तरह से कांप रहे थे ,अगर नीलेश ने उसे थामा न होता ,तो शायद जमीन पर ही गिर जाती ।

नीलेश ने उसे पकड़ कर बिठाया ,और पानी पिलाते उसे समझाने लगा,,,

प्लीज मॉम आप उसकी बातों का बुरा मत मानो ,,,मैं जानता हूं ,वो डैड से कितना प्यार करती है।

मॉम डैड के जाने के बाद राजनी को रोते हुए मैंने देखा है,,, इन 6 सालों में उसने डैड को कितना मिस किया है।

भले ही ऊपर से वह कितनी भी स्ट्रांग बनी हुई हो ,,अंदर से वह हर पल डैड कॉम मिस करती है।

डॉली के आंसू उसे गीला करते जा रहे थे पूनम विकास और काकी सभी डॉली को समझा रहे थे ।

कि राजनी बच्ची है ,उसकी बातों को दिल पर मत लो ।

लेकिन डॉली अंदर तक जड़ हो गई थी।

डॉली को समझाते हुए विकास और पूनम देर रात अपने घर चले गए थे ।

रात को डॉली ने नीलेश और काकी को उनके कमरे में भेज दिया ,,,और कहा कि वह ठीक है ।

सभी अपनी अपनी जगह आराम करो पर डॉली के मन पर तो जैसे राजनी की बातों का एक भारी-भरकम बोझ था ।

वह अकेली करवटें बदलते हुए सच में कहीं ना कहीं खुद को ही गुनहगार मान रही थी ।

अगर उस वक्त बस राज को ना कह देती तो राज नहीं जाते ।

अगर राजनी इसी तरह से ना करती रही तो ,,शैलेश पूनम कब तक रुकेंगे ।

उसकी भी उम्र हो रही है ,और आगे नीलेश के लिए भी तो सारी बातें सोचनी होंगी।

पूरी रात डॉली के दिमाग में इसी बात का मंथन चलता रहा था ।

उसने पूरी रात कितना सोचा था ,कितना समझा था ,सारी बातों को ।

हर तरीके से सोच चुकी थी ,सुबह होते होते वह राजनी काकी और नीलेश को देखते हुए एक बहुत बड़ा फैसला ले चुकी थी ।

चाहे कुछ भी हो वह राजनी की जिंदगी को बर्बाद नहीं होने देगी ।

हर काम समय पर ही अच्छा लगता है। आखिर और कितना इंतजार करेगी वह अपनी जिंदगी को आगे बढ़ाने के लिए अब चाहे कुछ भी हो ,,,राजनी की शादी तो इस साल वह करवा कर ही रहेगी। उसके लिए डॉली को चाहे कितना ही बड़ा बलिदान क्यों ना देना पड़े।

डॉली ने आंसू पोछे ,,,उठ कर नहा धोकर पूजा की, और अपने कान्हा जी के सामने अपने फैसले पर खुद की मुहर लगा ली,,,,,,,

डॉली ये क्या किया

डॉली को पता था ,कि उसकी तरह राजनी भी पूरी रात सोई नहीं होगी। राजनी ने भले ही गुस्से में या दुख में डॉली से वह सब कहा था ।

लेकिन यह सब कह कर वह भी खुश नहीं होंगी।

डॉली ने अच्छे से दो कप कॉफी बनाई और खुद को नार्मल करते हुए ऊपर राजनी के पास आने लगी,,,,,
 
उधर राजनी भी कहां सोई थी रात भर

उसने भी हाथ मुंह धोया ,और फ्रेश होकर नीचे आने लगी ।

क्योंकि वह समझ गई थी ,कि मॉम अभी तक उठकर पूजा कर चुकी होगी ,उसने रात को जो भी कहा, उसके लिए उसे मॉम से सॉरी बोलना चाहिए ।

उसने मॉम को कितना हर्ट किया है।

इधर से डॉली ऊपर जा रही थी।

और राजनी नीचे आ रही थी ,डॉली ने पहली सीढ़ी पर रखने के लिए जैसे ही कदम उठाया ,,,तब तक राजनी

नीचे आ चुकी थी।

उसने डॉली को देखते हुए कहा ,,मॉम सॉरी मुझे आपसे इस तरह बात नहीं करनी चाहिए थी ।

और डॉली के हाथ से ट्रे लेकर हॉल में टेबल पर रख दी।

डॉली का हाथ पकड़ कर अपने पास बिठाया ,,और उसकी गोद में सर रखकर उसके सामने अपने दोनों कान पकड़ कर डॉली से माफी मांगने लगी।

मामा सो सॉरी ,,,,मैं जानती हूं डैड की

गैरमौजूदगी में आपने ही सब कुछ संभाला है ।

लेकिन मॉम ,,,

आई मिस यू टू मच माय डैड ,,,,

राजनी कुछ और कहती ,,डॉली ने राजनी के मुंह पर हाथ रखते हुए कहा राजनी तुझे कुछ भी कहने की जरूरत नहीं है ,,,,बेटा मैं अच्छी तरह से समझती हूं,,, कि सच में ,इन सब में कहीं ना कहीं गलती मेरी ही थी ।

जो तुझ से बिना पूछे मैंने इतना बड़ा डिसीजन ले लिया था ।

एक बात और,, 2 महीने बाद जो तेरी शादी की डेट निकली है ,शादी उसी डेट में होगी ।

पर मम्मा

राजनी मेरी पूरी बात तो सुनो,,, तेरी मौत तुझसे प्रॉमिस करती है, कि तेरी शादी मैं तेरे डैड जरूर आएंगे ।

मैं खुद लेकर आऊंगी उन्हें,,,,अब बस पूरे मन से अपनी शादी की तैयारियां कर ।

हम पूनम को और नहीं रोक सकते

सालों से उन्हें रुकने के लिए कहते आ रहे हैं।

पर अब और नहीं,,,, पर मॉम हमें तो कुछ भी पता नहीं है ,की डैड है कहां राजनी मैंने कहा ना ,,तू सब कुछ मेरे ऊपर छोड़ दे ।

कम से कम शादी के 15 दिन पहले मैं तेरे डैड को यहां लेकर आऊंगी।

और हमेशा हमेशा के लिए वह हमारे साथ ही रहेंगे।

मॉम आप सच कह रही हो

आई लव यू सो मच,,,,, केहते हुए राजनी डॉली के गले लग गई ।

मॉम क्या आप जानते हैं ,,कि डैड कहां है वरना आप इतने कॉन्फिडेंस से कैसे कुछ कह सकती है

डॉली कि इस बात पर काकी ,नीलेश सभी हैरान थे ।

जब उन्हें राज के बारे में कुछ भी पता नहीं है ,तो डॉली ऐसा कैसे कह सकती है डॉली ने फोन करके पूनम और विकास को भी बता दिया था , कि राजनी मान गई है ,,,, 2 महीने बाद की जो डेट निकली है ,उसी डेट में शैलेश और राजनी की शादी होगी।

वह तैयारियां शुरू कर दें ,और मैं भी आज से ही राजनी की शादी की तैयारियों में लग जाती हूं ।

एक तरफ राजनी की शादी की तैयारियों की खुशी थी ,दूसरी तरफ सबको ये चिंता थी ।

कि डॉली ये कैसे कर पाएंगी।

लेकिन काकी को डॉली पर भरोसा भी था ।

उसने जिंदगी में जो करना चाहा ,,वह करने में डॉली हमेशा सफल रही है ।

उसने हर फैसला बहुत हिम्मत के साथ लिया है ।

जब बात स्पष्ट हो गई ,तो विकास पूनम और डॉली शादी की तैयारियां शुरू करने लगे थे ।

अभी राजनी यहां चार-पांच दिन और थी उसके रहते हुए डॉली ने राजनी की तैयारियां करना पहले ठीक समझा उसकी ज्वेलरी ,उसके कपड़े ,उसका मेकअप सारी चीजें पसंद करके बुक करवाने लगी थी ।

शहर में शैलेश और पूनम का तो साथ था ही ,,,,क्योंकि एन टाइम पर राजनी को कितने दिनों की छुट्टी मिलने वाली थी ।

यह भी पता नहीं था ,,लेकिन कम से कम 15 दिन के लिए तो वह छुट्टी लेने वाली ही थी ।

दो-चार दिन शादी के पहले से कुछ दिन बाद तक के लिए उसने एप्लीकेशन भी रेडी कर ली थी ।

और उधर शैलेश ने भी ।

2 महीने का समय तो पता भी नहीं चलता ,,,तैयारियां करते हुए पंख लगाकर फ़ुर्र हो जाएगा ।

यही सोच कर शादी के ठीक 3 दिन बाद शैलेश और राजनी का हनीमून के लिए रिजर्वेशन भी हो गया था ।

जो इंडिया के ही बहुत ही खूबसूरत सी प्लेस चंबा की पहाड़ियों में होने वाला था। शैलेश राजनी से रिलेटेड जो भी तैयारियां थी, पूनम और डॉली उन्हें मिलकर इन 5 दिनों में पूरा करना चाहते थे ।

क्योंकि फिर बच्चे अपनी अपनी नौकरी में बिजी हो

जाते,,,,और उन्हें इतना समय कहां रहता ,कि वह खुद के लिए समय दे पाए ।

अभी नीलेश भी यही था ,नीलेश राजनी और डॉली तीनों रोज शहर जाते ,और शादी की शॉपिंग भी शुरू हो गई थी। क्योंकि नीलेश और राजनी के जाने के बाद डॉली को एक बहुत बड़ा काम करना था ।

इसलिए अभी वह ज्यादा से ज्यादा शादी की तैयारी कर लेना चाहती थी।

शादी के लिए शहर में ही एक अच्छा सा मैरिज हॉल भी बुक कर दिया गया था। जिसमें ही कोई 5,,7,,सौ लोगों के डिनर का एक शानदार इंतजाम था ।

शादी के लिए शहर में ही एक अच्छा सा मैरिज हॉल भी बुक कर दिया गया था। जिसमे डॉली पूनम के कुछ खास रिश्तेदार ,,,और खास दोस्त थे।

शादी की तैयारियां जोर शोर से चलने लगी थी ।

पांच साथ दिन में शैलेश और राजनी के काफी काम पूरे हो गए थे। बस कल राजनी जाने वाली थी ,और उसके 2 दिन बाद नीलेश ।

आज रात को डॉली थोड़ी फ्री हुई थी

तो उसने काकी,, और राजनी के साथ बैठकर नीलेश से भी उसके और रमैया के बारे में बात कर लेना ठीक समझा ।

निलेश बेटा मेरे ख्याल से अब तो तुम्हे और रमैया को भी अपने बारे में सोच लेना चाहिए ।

बेटा सभी काम उम्र पर ही ठीक लगते हैं हमें तो रमइया बहुत अच्छी लड़की लगी है ,,,,और मुझे कोई एतराज

नहीं है रमैया को अपनी बहू बनाने के लिए। लेकिन सही बात तो यह है ,कि अभी तक मैं भी नहीं जानती ,कि तुम और रमैया एक दूसरे के बारे में क्या सोचते हो इस बात पर नीलेश मुस्कुरा गया,,,,

मॉम आप जैसा सोच रही है, वह बिल्कुल सही है ,,,हमारा रिश्ता दोस्ती से काफी आगे बढ़ गया है ,,,हम दोनों एक दूसरे को पसंद करते हैं ,और एक दूसरे को लाइफ पार्टनर की तरह देखना चाहते हैं।

सच बात तो है ,कि मैं भी यही चाहता था ,,,,कि पहले राजनी की शादी हो उसके बाद में अपनी शादी के बारे में सो

सोचूंगा ।

अब जब राजनी की शादी हो रही है तो मुझे और रमैया को भी कोई एतराज नहीं है ।

इन फैक्ट रमैया तो अपनी फैमिली वालों से बात कर भी चुकी है ।

और उसके डैड ने भी इच्छा जताई थी कि वह आपसे बात करना चाहते हैं ।

पर मैंने ही उन्हें मना कर दिया था ।

डॉली ने नीलेश को देखते हुए कहा निलेश बेटा अगर बात करना चाहते हैं

तो मैं तैयार हूं ,,,तू फोन पर उनसे मेरी बात करवा दे।

मैं खुद रमैया का हाथ तेरे लिए मांग लूंगी,,,,

म,,म,,मॉम,, कुछ कहते हुए निलेश हकला रहा था ।

नीलेश बेटा क्या कहना चाहते हो साफ-साफ बताओ

ना,,,,,

मॉम में बस यही कहना चाहता हूं ,कि अगर उन्होंने डैड के बारे में पूछा तो

तो हम क्या कहेंगे

नीलेश हम वही कहेंगे ,जो सच है ,अगर वह हमारे रिश्तेदार बनने वाले हैं।

तो उनसे कोई भी बात छुपाना सही नहीं होगा।

मैं उन्हें सारी सच्चाई बता दूंगी ,और फिर मुझ पर भरोसा रखो ।

अगर मैंने प्रॉमिस किया है, कि राजनी की शादी से पहले डैड को वापस लाकर रहूँगी, तो ऐसा ही होगा ।

फिर तो किसी से कुछ भी झूठ बोलने की या छिपाने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। और अगर उन्होंने पहले बात करनी चाही और कुछ पूछा तो

शैलेश मैं चाहती हूं ,कि तू पहले से ही उन्हें सब कुछ बता दे ।

मैं उनसे बात कर लूंगी ,लेकिन उससे पहले रमैया को और उनकी फैमिली वालों को तू सारी बातें सच सच बता दे ।

मैं नहीं चाहती ,कि कोई हमारे वारे में किसी भी तरह की गलत राय बनाए।

बेटा तू उनके घर भी जा चुका है।

एक बार तू अपने तरीके से बात कर ले उन्हें अच्छे से सारी बातें समझा दे ।

उसके बाद मैं भी उन रमैया के पेरेंट्स से बात कर लूंगी ।

ठीक है ,,मॉम मौका देखकर मैं उन्हें सब कुछ बता दूंगा ।
 
डॉली यह सारी बातें सब के बीच बैठकर कर चुकी थी ।

दूसरे दिन सुबह ही राजनी सोनितपुर के लिए नकल गई।

निलेश उसे छोड़ने शहर गया ,जहां पर शैलेश पूनम और गौरी भी राजनी से मिल चुके थे।

पूनम ने गले लगाते हुए कहा ,राजनी खुशी-खुशी जाओ ,और जल्दी से दो महीने बाद मेरे शैलेश की बहू बनकर मेरे घर आओ ।

इस बार जाते हुए राजनी ने विकास और पूनम के पैर छुए थे।

पूनम ने एक बार फिर राजनी को अपने गले लगा लिया।

राजनी सोनितपुर के लिए निकल गई थी । और ठीक 2 दिन बाद शैलेश भी मुंबई के लिए निकल गया।

आप काफी हद तक डॉली को ऐसे लग रहा था, कि उसके दिल का बोझ कुछ कम हुआ है ।

उसने नीलेश से भी कह दिया था, कि वह सारी बातें रमैया के फैमिली वालों को बता दे।

और इधर फैसला चाहे बड़ा ही था, लेकिन वो ले चुकी थी । एक बार फिर से राज को वापस लाने के लिए।

तैयारियां करते हुए एक महीने से ऊपर हो गया था ।

अब डॉली मौका देख रही थी ,कि वह कब राज को लेने जाए ।

उसने कैलेंडर उठाते हुए तारीख देखी ,कि संडे और सैटरडे के अलावा अगर आगे पीछे कोई छुट्टी हो ,तो उसमें वह एप्लीकेशन देकर तेजपुर के लिए निकल जाएगी ।

और आज से सिर्फ 8 दिन बाद ही उसे संडे सैटरडे के साथ एक मंडे की छुट्टी भी दिख गई थी ,और ट्यूसडे की छुट्टी की एप्लीकेशन साथ में लगाते हुए ,राजनी को पूरे 4 दिन की छुट्टी मिल गई थी।

2 दिन बाद जब छुट्टी सैंक्शन हो गई

तो उसने ऑनलाइन गुवाहाटी के लिए ट्रेन से रिजर्वेशन भी करवा लिया ।

लेकिन अभी तक इस बारे में उसने किसी को भी कुछ नहीं बताया था।

इन फैक्ट वह जाते समय भी काकी को कुछ नहीं बताना चाहती थी ।

पर इस तरह से अचानक गायब हो जाना काकी परेशान हो जाएगी ।

इसलिए डॉली ने एक साफ सुंदर राइटिंग में चिट्ठी लिखी ,,,जो जाने से पहले वह काकी तक पहुंचाना चाहती थी।

मेरी प्यारी काकी

मुझे पता है ,मेरी जिंदगी में शायद मुझसे ज्यादा मुझे अगर किसी ने जाना है ,तो वह आप हो । बचपन से आज तक मेरे हर फैसले में आपने मेरा साथ दिया है।

एक माँ से भी बढ़कर मुझे समझा है, मेरी मदद की है।

काफी आज मैंने जो फैसला लिया है मुझे पूरा भरोसा है ,कि आप आज भी मेरा साथ देंगी।

ताकि मुझे आपके साथ और आशीर्वाद की बहुत जरूरत है । क्योंकि जो फैसला मुझे लेना पड़ रहा है ,,,,,

राज के साथ-साथ हम सबके लिए भी वह सही होगा ।

अब जो बात मैं आपसे कहने जा रही हूं शायद वह सुनकर आप परेशान होगी।

पर प्लीज आप अपने आप को संभालना ,,,और मेरे फैसले में मेरा साथ देना ।

काकी मैं राज को लेने जा रही हूं ।

लेकिन मुझे पता है ,कि वह अपनी जिम्मेदारी से मुंह नहीं मोड़ सकते ।

अगर आज तक मैंने राज के हर फैसले में उनका साथ दिया है ।

तो अब जो मेरा फैसला है ,मैं उम्मीद करूंगी ,कि वो भी उस फैसले में मेरा साथ दें ।

काकी मेरा फैसला यह है ।

कि मैं काम्या और उसकी दोनों बच्चियों को इस घर में लेकर आऊंगी।

मुझे पता है ,,,काम्या ऐसे कभी नहीं आएगी ।

इसलिए मजबूरन मैं काम्या को अपनी छोटी बहन और राज की पत्नी बनाकर इस घर में लाऊंगी ।

और अब चाहे कुछ भी हो जाए ,4 दिन बाद राज मेरे साथ इस घर में वापस जरूर आएंगे ,,,

आपकी डॉली

2 दिन बाद डॉली को तेजपुर के लिए निकलना था ।

डॉली ने सारी तैयारियां कर ली ,और चिट्ठी को भी अच्छी तरह से एक लिफाफे में चिपकाते हुए बंद किया ,और अपने पास रख लिया ।

ताकि जाने से पहले वह चिट्ठी पिंकी को दे कर कहे ,,,कि उसके कहने के अनुसार यह चिट्ठी वो काकी को पढ़ कर बता दे। सारी तैयारियां हो गई थी, दूसरे दिन डॉली को तेजपुर के लिए निकलना था। और सुबह ऑफिस जाते वक्त ही उसने अपना छोटा सा बैग भी साथ में ले लिया था ।

अभी तक काकी को या पिंकी को इस बारे में कुछ भी नहीं बताया था उसने। लिफाफा बंद कर कान्हा जी के पास मंदिर में रखा ,और माथा टेकते हुए निकल गई ।

आज फ्राइडे था ,डॉली ने दिनभर ऑफिस किया और शाम को 700 बजे उसकी ट्रेन थी गुवाहाटी जाने के

लिए ।

रास्ते में डॉली ने सोचा अब फोन करके पिंकी को बता देती है ,कि चिट्ठी उसने कान्हा जी के पास रखी है।

शाम को 6 ,,7 बजे जब उसके ऑफिस से आने का टाइम होता है ।

उस वक्त तक वह चिट्ठी पढ़कर काकी को बता देना ,कि उसमें क्या लिखा है ।

लेकिन डॉली ने जैसे ही फोन निकालने के लिए बैग में हाथ डाला ,पता चला कि जल्दबाजी में फोन तो घर पर ही भूल गई है ।

यह एक बहुत बड़ी प्रॉब्लम थी ,पर अब वापस लौटना भी मुमकिन नहीं था। क्योंकि बस 10 मिनट बाद वह शहर पहुंचने ही वाली थी ।

अब जो होगा देखा जाएगा ,,यह सोचते हुए डॉली ने दिनभर ऑफिस किया ।

और निकलने से पहले ऑफिस के फोन से ही फोन लगाकर पिंकी को सब कुछ बता दिया ।

डॉली गुवाहाटी के लिए निकल गई थी। गुवाहाटी पहुंचकर वहां से टैक्सी लेकर वह राज के पास जाने वाली थी।
 
इधर डॉली तेजपुर जाने के लिए निकल चुकी थी ।

और डॉली के बताए अनुसार पिंकी ने कान्हा जी के बगल में रखा हुआ लिफाफा उठाया,,, और उसमें से चिट्ठी निकालकर पड़ने लगी ।

पहले तो ये चिट्ठी पढ़कर पिंकी ही बहुत परेशान हो रही थी ।

कि आंटी ये क्या करने जा रही है

फिर उसने रोते हुए काकी को भी यह चिट्ठी पढ़कर सुनाई।

काकी हाथ में माला लेकर जाप कर रही थी । काकी ने माला पूरी की ,और हाथ जोड़ते हुए कहने लगी,,,,,

हे भगवान पता नहीं मेरे सिवा और डॉली की जिंदगी में यह कौन सा मोड़ आ रहा है

क्या करने जा रही है यह लड़की ,मैं तो यह भी नहीं कह सकती,,, कि वह अपने इरादे में सफल ना हो ।

मैंने तो हमेशा ही उसका साथ दिया है और उसको भरोसा दिलाया है ,कि उसके हर फैसले में उसका साथ हमेशा दूंगी। काकी कान्हा जी के सामने आई और आंखों में आंसू लेकर कहने लगी,,,,,,

हे कान्हा जी ,तुझे तो मेरी डॉली ने अपना भाई माना है, एक भाई बन कर ही आप उनकी रक्षा करना ।

मुझे आप पर पूरा भरोसा है ,जो भी हो सब अच्छा हो ।

काकी खामोश हो गई थी ,क्योंकि वह ऐसी ऐसी बातें देख चुकी थी ,कि उन्हें हर बात छोटी लगने लगी थी ।

लेकिन फिर भी काकी ने राजनी और नीलेश को बताना ठीक समझा ।

क्योंकि दोनों बच्चे समझदार थे ,काकी ने पिंकी से फोन लगवा कर पहले नीलेश से बात करना ठीक समझा ,,,,,

उसने डॉली का पूरा पत्र पढ़कर नीलेश को सुना दिया ,,,,,नीलेश बहुत परेशान हो गया था ।

की काकी मॉम घर से तो निकल गई पर क्या आपको यह पता है ,कि वह कहां गई

नहीं बेटा मुझे कैसे पता होगा ।

काकी 1 मिनट ,,,,,में मॉम का फोन ट्राई करता हूं ,अगर वह बात ना भी करे तो शायद लोकेशन से कुछ पता लगाता हूं। नीलेश बेटा !

डॉली का फोन घर में ही है ,पता नहीं छूट गया है ,या फिर वह जानबूझकर छोड़ कर गई है ।

क्या

मॉम फोन घर पर छोड़ कर गई है

काकी 1 मिनट ,,,आप मेरी बात पिंकी से करवाईये ,,,

काकी ने पिंकी को फोन दिया ,तो निलेश उसे समझाने लगा ,,,,

पिंकी जल्दी से मॉम का फोन ऑन कर उसमें देखो ,,,कि मम्मा की लास्ट कॉलिंग कहां की है !

जी निलेश भैया ,,अभी देख कर बताती हूं ।

पिंकी फोन देखने लगी,,, लेकिन उसमें लास्ट कॉलिंग तो नीलेश के लिए ही थी।

निलेश को याद आया ,,,कि हां शाम को मॉम ने उससे बात की थी।

शादी के बारे में कुछ पूछने के लिए, मुझे कॉल किया था ।

पिंकी तू एक काम कर,,, मॉम के मेल चेक कर ,,,,

हां निलेश भैया ,,,पिंकी ने ध्यान से फोन में मेल खोलते हुए देखा ,,,और नीलेश से कहा ,,,निलेश भैया आंटी के मोबाइल में तो लगातार ऑफिस के ही कुछ मेल पड़े हुए हैं ।

जो उनकी मीटिंग और कुछ दूसरी बातों को लेकर है ।

अच्छा कल मम्मा ऑफिस कैसे गई थी निलेश भैया वही रोज की तरह ऑफिस की गाड़ी से ।

ठीक है ,,,मैं थोड़ी देर बाद तुझे फोन करता हूं ,अभी फोन रख ।

इतना कहते हुए नीलेश डॉली के ड्राइवर को फोन लगाने लगा,,,,,,

ड्राइवर का फोन नंबर नीलेश के पास रहता था ,,ड्राइवर ने फोन उठाया और नीलेश ने उससे पूछा ,तो उसने बताया कि कल शाम को मैडम जी को उसने स्टेशन पर छोड़ा था ।

क्या ,,स्टेशन पर

क्या आपको कोई आईडिया है ,कि मॉम गई कहां है

भैया जी यह तो पता नहीं, क्योंकि मैंने मैडम को स्टेशन पर उतारा ,और उनसे कहा भी, कि मैं आपका बैग ट्रेन पर रख आऊ,,,,, पर उन्होंने मना कर दिया था।

छोटा सा बैग था ,,,उन्होंने कहा वह खुद ही चली जाएंगी,, और मैं बाहर से ही वापस आ गया था ।

अच्छा ठीक है ,अगर कुछ पता चलता है तो तुम मुझे बताना ,,,,

जी ,,,,

नीलेश सोच रहा था ,,,कि अगर मॉम ट्रेन से गई है ,तो जरूर उन्होंने टिकट कन्हैया अंकल से मंगवाए होंगे ,या फिर ऑनलाइन बुक किए होंगे ,,,,

मैं कन्हैया अंकल को फोन लगाकर पूछता हूं ,,,,

निलेश ने कन्हैया को भी फोन लगाया लेकिन कन्हैया ने

बताया,, कि डॉली ने उससे तो कोई टिकट नहीं मंगवाए ।

अब निलेश के पास एक ही ऑप्शन था कि जरूर मॉम ने ऑनलाइन टिकट बुक किया होगा ,,,,इसका पता हमें मॉम के फोन से चल जाएगा ।

उसके बाद उसने दोबारा पिंकी को फोन किया ,,,,,पिंकी तू मॉम के फोन में चेक कर,,,,कि क्या उन्होंने कहीं के लिए टिकट बुक करवाए हैं ।

जी निलेश भैया,,,,पिंकी एक बार फिर फोन चेक करने लगी।

आखिर इस बार नीलेश को सफलता मिल ही गई थी ,,,,डॉली ने फ्राइडे को यहां से टिकट बुक किया ,,,और सैटरडे को सुबह वह गोवाहाटी पहुंचने वाली थी। यानी कि यहां से गुवाहाटी के लिए ट्रेन टिकट बुक किया गया था ।

इतना तो नीलेश को समझ में आ गया था कि मॉम गुवाहाटी गई है ।

क्या मोम राजनी के पास गई है

शायद ऐसा हो सकता है ,,,,

मुझे राजनी को फोन करना चाहिए

पर अगर वह वहाँ नहीं हुई ,तो,,, तो,,, राजनी बहुत परेशान हो जाएगी ।

उससे कुछ घुमा फिरा कर पूछना होगा।

हां हां यही सही रहेगा,,, सोचते हुए नीलेश ने राजनी को फोन किया ,कुछ फॉर्मल बातें करने के बाद निलेश को पता चल गया ,कि मॉम यहां नहीं है ।

ठीक है ऐसे ही फोन लगाया था ।

अब नीलेश की समझ में नहीं आ रहा था आखिर वह करे क्या,,,, इतना तो पक्का था ,कि सुबह की ट्रेन से डॉली गोवाहाटी पहुंचने वाली है ।

लेकिन ये किसी भी तरह पॉसिबल नहीं था ,,,कि नीलेश गुवाहाटी जाकर डॉली को पिक कर ले ,,,उसकी ट्रेन के टाइम पर गुवाहाटी पहुंच पाए,,ये पॉसिबल नही था।

कुछ देर सोचने के बाद अचानक नीलेश के दिमाग में रमैया की फैमिली का ख्याल आया ,,,,हां मैं कैसे भूल सकता हूं रमैया के मॉम डैड तो गुवाहाटी में ही है।

मुझे उन्हीं को कहना चाहिए,, लेकिन उससे पहले मुझे उन्हें सबकुछ बताना होगा ।

अब सही समय आ गया है ,कि हम उनसे कोई बात ना छुपाये।

वैसे भी मैं उन्हें सब कुछ बताने वाला था ।

सब कुछ सुनने के बाद रमैया के मॉम डैड का जो भी डिसीजन हो ,लेकिन अब उन्हें सब कुछ बता देना ही ठीक होगा। नीलेश ने देर ना करते हुए झट से रमैया के डैड को फोन लगा दिया ।

उन्होंने जैसे ही फोन पिक किया,,, नीलेश ने टाइम वेस्ट ना करते हुए उन्हें बताना शुरू किया ,,,,डैड मुझे आज आपसे एक बहुत जरुरी बात करनी है ।

आप मुसझे मेरे डैड के बारे में पूछते थे ना ।

और शायद मैंने आपको ठीक से कुछ नहीं बताया ,हमेशा बात को गोलमोल कर दिया ।

लेकिन आज मैं आपको सब कुछ बताने जा रहा हूं ,उसके बाद आपका चाहे जो भी डिसीजन रहे ,पर आज मैं आपको अपनी बात कह कर ही रहूंगा।

डैड असल में मेंरे डैड हमारे साथ नहीं रहते ,,,वो 6 साल पहले हम सब से दूर हो गए हैं ।निलेश धीरे-धीरे उस दिन से जब नीलेश का एक्सीडेंट हुआ था ,सारी बातें रमैया के डैड को बताता जा रहा था कि कैसे वह शहर से आ रहे थे ,उनका एक्सीडेंट हुआ ,एक अजनबी उसमें घायल हुआ ,नीलेश की आंखों का एक्सीडेंट हुआ ,और जाने से पहले उसने निलेश को अपनी आंखें डोनेट की,, और उनका इतना बड़ा एहसान चुकाने के लिए डैड ने उस इंसान के बच्चों की जिम्मेदारी लेना सही समझा ,और इस फैसले में मॉम भी डैड के साथ थी ।

अपनी जिम्मेदारी को निभाने के लिए दोनो ने डिसीजन लिया, कि जब तक वह उनका भविष्य सुरक्षित नहीं कर देते ।

तब तक वह उन्हें छोड़कर कहीं नहीं जाएंगी।

और उसके बाद, इस बात को 6 साल हो गए ,लेकिन अभी तक हमें नहीं पता की डैड कहाँ है ।

और आज मॉम घर से निकली हैं।

वह डैड को लेने जा रही है ,,मुझे पता चला की मॉम गुवाहाटी स्टेशन पहुंचने वाली है।

डैड आपसे मेरी रिक्वेस्ट है ,कि आप स्टेशन पर जाकर मॉम को पिक करके अपने घर ले जाएं,,,,क्योंकि किसी भी तरह हमें मॉम को यह करने से रोकना ही होगा ।

हम मॉम को इतनी बड़ी कुर्बानी नहीं देने देगें,,,,,चाहे मुझे या राजनी को इसकी कोई भी कीमत क्यों न झुकाना पड़े ।

डैड मॉम का फोन भी उनके साथ नहीं है वरना शायद मैं कुछ कोशिश कर पाता। डैड मैं भी अभी फ्लाइड से निकल रहा हूं पर प्लीज कल सुबह 1000 बजे आप ट्रेन देख ले ,,,,उस ट्रेन का नाम और बोगी नंबर मैं आपको सेंड कर रहा हूं ।

वैसे तो मॉम की फोटो आपने देखी ही है लेकिन एक फोटो और भेज रहा हूं ।

रमैया के डैड नीलेश की एक एक बात ध्यान से सुनते जा रहे थे ।

और नीलेश जो भी बातें बता रहा था ,उन्हें ऐसा लग रहा था ,,कि कितने सारे राज उनके सामने खुलते जा रहे हैं ।

जिस बात की तलाश में वह बरसों से थे शायद वह सारी बातें आज उनके सामने आ रही हैं ।

ऐसे लग रहा था ,कि फोन उनके हाथ से छूट कर जमीन पर गिर जाएगा ।

उन्होंने फोन संभाला ,और अपने शब्दों पर जोर देते हुए कहा,,,,,

निलेश बेटा जिस शख्स ने तुम्हें अपने रेटीना डोनेट किए हैं ,,उसका नाम क्या था

क्या तुम्हें याद है

जी डैड बहुत अच्छी तरह से ,भला उनको मैं कैसे भूल सकता हूं ।

उनका नाम राजीव था ।

क्या

रमैया के डैड के हाथ कांपने लगे थे।
 
उनके माथे पर पसीने की बूंदें छलक आई थी ,,,,

उन्होंने दुबारा सवाल किए,,,,,

क्या उसकी उम्र यही 30 के आसपास थी हां डैड,,, पर पर आपको कैसे पता

क्या उसकी वाइफ का नाम काम्या था और उसकी 5 साल की बेटी थी

जी सब कुछ यही था ,,,,पर पर मुझे समझ नहीं आ रहा ,कि आपको यह सारी बातें कैसे पता

मैंने तो आज से पहले आपको कुछ कभी बताया ही नहीं ।

और बेटा क्या काम्या उस वक्त प्रेग्नेंट भी थी

जी डैड मॉम ने बताया था ,,कि वह दोबारा प्रेग्नेंट थी ,,,,

डैड पर पर आप सारी बातें कैसे जानते हैं बेटा मैं सब कुछ जानता हूं ।

और जिस बात की तलाश मुझे पिछले 6 सालों से थी,,, जिसके लिए मैं कहां-कहां नहीं भटक रहा था ।

कितनी जगह काम्या और उसके बच्चों के बारे में पूछ चुका था ।

वह तलाश आज आकर खत्म हुई है ।

नीलेश क्या तुम बता सकते हो ,,,कि इस वक्त वो कहा है

डैड मुझे कुछ नहीं पता ,,,,,

बस इतना पता है, कि मॉम काम्या की शादी डैड से कराने गई है।

डैड ये बिल्कुल गलत है ,,,मैं कभी ये होने नहीं दूंगा।

निलेश बेटा तुम बिल्कुल भी टेंशन मत लो ,,,अब तुम्हारी मॉम को रोकने की सारी जिम्मेदारी मेरी ।

पर डैड मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा आप ,,,,,

अब तक फोन कट चुका था ।

रमैया के डैड ने जोर से चीख चीख कर रमैया की मॉम को भी आवाज़ लगाई ।

जैसे ही वह आई,,,, और उन्होंने पूछा कि आखिर हुआ क्या है

लेकिन रमैंया के डैड बिल्कुल भी इस हालत में नहीं थे ,,,कि उन्हें कुछ बता पाए ।

उन्होंने फोन की रिकॉर्डिंग ऑन की और रमैया की मॉम ने सब कुछ सुन लिया।

जिस बात की तलाश वह सालों से कर रही थी ,,,वह नहीं जानती थी कि वह नीलेश पर आकर खत्म होगी।

नीलेश के द्वारा उन्हें सब कुछ पता चलेगा इस बारे में जल्दी से दोनों ने रमैया के दादा दादी को भी बताया,,,, और देर ना करते हुए चारों गाड़ी में बैठ कर रेलवे स्टेशन के लिए निकल गए ।

जिससे वहां जाकर डॉली को पिक कर सकें ।

क्योंकि वह नहीं चाहते थे ,,कि उन्हें वहां जाने में जरा भी देर हो,,,और डॉली कुछ ऐसा करवा दे जो नही होना चाहिए,,,

इधर डॉली की ट्रेन गुवाहाटी पहुंचने वाली थी ,,,और उधर रमैया की फैमिली डॉली को पिक करने स्टेशन के लिए भी निकल चुकी थी ।

लेकिन किसी ने सच ही कहा है ,देर में अंधेर होता है, वह घर से कुछ ही दूरी पर पहुँचे, कि रास्ते में एक छोटा सा एक्सीडेंट हो गया था, जिसकी वजह से रोड पर काफी भीड़ भाड़ इकठ्ठी हो गई थी,,पुलिस कार्रवाई चल रही थी ,और लग नहीं रहा था, कि 1 घंटे से पहले इस भीड़ को हटाया जा सकेगा ।

आखिरकार उन्हें पीछे के रास्ते से यानी कि एक लंबे रास्ते से स्टेशन जाने के लिए निकलना पड़ा,,,, लेकिन ट्रेन अपने सही समय पर स्टेशन आ चुकी थी।

रमैया के घर से स्टेशन की दूरी यही कोई 1 घंटे की दूरी पर थी।

लेकिन ट्रेन ठीक वक्त में ही स्टेशन पर आ चुकी ,,,डॉली ट्रेन से उतरी ,उसने आसपास के लोगों से कुछ पूछताछ

की और कुछ ही देर में एक टैक्सी बुक करके तेजपुर के लिए निकल गई।

1 घंटे बाद जब रमैया के मॉम डैड और दादा-दादी स्टेशन आए ,तो पता चला ट्रेन तो 45 मिनट पहले ही स्टेशन छोड़ चुकी है ।

यह सुनकर सब ने अपना माथा पीट लिया था । अब क्या करें

नीलेश से भी लगातार फोन पर बात हो रही थी ,,,और अब कुछ समझ नहीं आ रहा था ,कि कैसे डॉली तक पहुंचा जाए रमैया के डैड डॉली की फोटो दिखाकर आसपास कुछ लोगों से पूछताछ कर रहे थे ,,,,,कि यह मैडम उतरकर किस तरफ गई है ,या कैसे गई है, क्या कोई इस बारे में कुछ बता सकता है

तभी दो टैक्सी वाले पास आए ,और उन्होंने ध्यान से फोटो देखते हुए कहा- जी साब ये मैडम अभी उतरी थी ।

और उन्होंने टैक्सी के बारे में कुछ पूछताछ भी की थी, मैं उस वक्त दूसरी सवारी को लेकर कहीं जा रहा था, लेकिन हां मैडम की बात मैंने अपने ही एक दोस्त गिरधारी से करवा दी थी।

वह भी टैक्सी चलाता है ,और मैडम उसकी टैक्सी से गई है ।

अच्छा !

पर क्या बता सकते हैं, कि वह गई किधर है ,,,,जी साहब मैडम ने तेजपुर के लिए टैक्सी की थी ।

जी साब तेजपुर में चाय के बागान तक छोड़ने के लिए मैडम ने कहा था ,और मैंने ही अपने दोस्त से उनकी बात करवाई थी ।

अच्छा ठीक है, क्या तुम अपने दोस्त का नंबर दे सकते हो

मेरा मतलब कि उस टैक्सी वाले का!

जी बिल्कुल हम सब टैक्सी वाले आपस में दोस्त ही है ,और एक दूसरे का नंबर और पता सब कुछ हमारे पास होता है। लीजिए,,,,,, टैक्सी वाले ने उसका नंबर दिया ,,,और उन्होंने देर ना करते हुए अपनी गाड़ी को तेजपुर की तरफ ले लिया ।

डॉली की गाड़ी तेजपुर पहुंच चुकी थी दोपहर के 100 बजे थे ,और इस वक्त राज चाय के बागान में ही होता है।

डॉली जहां दो बार पहले राज से मिल चुकी थी, वह ठीक उसी जगह पहुंच गई थी ,कुछ देर बाद उसे राज भी दिख गया डॉली ने टैक्सी वाले को वापस जाने के लिए कहा ,,,और वह राज के पास आ गई,,,, एक बार फिर डॉली राज के ठीक सामने थी।

राज ने अचानक इस तरह से डॉली को देखा ,तो वह कुछ परेशान हो गया,,,, महारानी तू यहां अचानक , सब ठीक तो है ना ,,,डॉली राज के गले लग कर रोने लगी,,,, राज कुछ भी ठीक नहीं है ,डॉली ने सारी बातें राज को बताई, कि राजनी की शादी होने वाली है और किस तरह से उसने शादी को मना किया,,,,

राज रजनी आपके आशीर्वाद के बिना कभी भी शादी नहीं कर सकती।

अब उसकी उम्र हो गई है, और फिर शैलेश और पूनम भी कब से इंतजार कर रहे हैं, कि रजनी उनके घर बहू बनकर आए ,मैं जानती हूं कि आपका फैसला अपनी जगह सही था, और आपके फैसले में मेरा साथ देना अपनी जगह सही था ।

लेकिन इन सब में हम अपने बच्चों को भूल गए ,उनके लिए ये सब सही नहीं था उन्हें हमारी जरूरत है ,उन्हें अपने डैड की जरूरत है, उन्हें आपकी जरूरत है। राज मैं इस बात को भी अच्छी तरह से जानती हूं,,,, कि अपनी कसम तोड़ना भी ठीक नहीं है ।

और सच बताऊ, मैं भी नहीं चाहती कि आप अपनी कसम तोड़े ,और आपके मन पर कोई बोझ रह जाए ।

जिसने हमारे निलेश को एक नई जिंदगी दी हैं ,,,जिसकी आंखों से हमारा नीलेश अपनी दुनिया देख पा रहा है, उसके दोनों बच्चों को हम बेसहारा कैसे छोड़ सकते हैं ।

हमारी जिम्मेदारी बनती है,,कि हम पूरे मन के साथ उनकी जिम्मेदारी उठाएं डॉली राज के गले लग कर यह सारी बातें कर रही थी ।

और राज डॉली को सहलाते हुए अपने गले लगा कर उसकी सारी बातें सुन रहा था ।

दोनों अपनी बातों में इतने मसरूफ थे कि उन्हें आसपास की खबर ही नहीं थी।

कि कौन आ रहा है ,और कौन जा रहा है ।

आज राज जल्दी में था ,इसलिए खाने का डब्बा लेकर नहीं आया था ।

दोपहर के 100 बज चुके थे ,एन उसी वक्त काम्या राज के लिए खाने का डब्बा लेकर आई, उसे पता होता था ,कि इस वक्त राज बागान के बीच में चटाई बिछा कर आराम से लेटा रहता है।

क्योंकि इस वक्त तक सभी मजदूर भी खाना खाने के लिए चले जाते हैं।

और राज भी थोड़ा आराम करता है।

काम्या उसके खाने का डब्बा ला रही थी इसलिए वह धीरे-धीरे राज को देखती हुई बागान के अंदर आ रही थी ।

राज तो उसे नहीं दिखा, लेकिन कुछ बातों की आवाज उसके कानों में पड़ी। जब धीरे-धीरे चारों तरफ देखते हुए नजर दौड़ाई ,तो बागान के बीच में किसी की बातें करने की आवाज़ आई।

वह खामोशी से अंदर झांक कर देखने लगी।

जब उसने राज के साथ किसी को इस तरह गले लगे देखा ,तो उसके कदम वहीं अटक गए ,,,उसे विश्वास ही नहीं हो रहा था , कि राज इस तरह से किसी के साथ

नहीं,,,,

नहीं,,,,,

राज ऐसे नहीं है ,और जो आंखें देख रहीं थी ,,,,वह

वह भी तो सच है,,,,,

आखिर छुपते छुपाते वह राज के और भी नजदीक आने लगी ।

अब वह राज को बहुत करीब से देख पा रही थी।

डॉली का चेहरा जब राज ने ऊपर उठाते हुये,,,,अपने हाथों में लिया ,और उसे देख कर कुछ कहने को हुआ,,,,तभी काम्या भी डॉली को देख पाई,,,, और डॉली को देखकर जैसे काम्या की सांसे रुक गई थी कि राज ने तो सब से सारी बातें छुपा कर रखी थी ,फिर अचानक डॉली यहां कैसे

उन दोनों के बीच की बातें सुनी ,तो उसके भी आंसू निकल आए।

पति-पत्नी होते हुए भी राज डॉली से कितनी दूर हो गए हैं ।

और इन सब की वजह मैं हूं !

सिर्फ में !

वह खाने का डिब्बा लेकर वापस अपने घर की तरफ बढ़ने लगी,,,,,

उसके मन मे,,,कितने ही तरह के सवाल चल रहे थे ।

कि आखिर इतने दिनों तक उसने राज से जाने के लिये क्यों नहीं कहा

पर वह करती भी क्या,,, उसने तो राज से जाने के लिए कहा था ।

इस बात के लिए वो तैयार भी हो गए थे

फिर वह घटना हुई ,और एक बार फिर से राज का मन परिवर्तित हो गया ।

क्योंकि सौम्या तो कहीं ना कहीं राज को ही अपना डैड मान चुकी थी।

यह तो राज ने ही कहा था, कि जब तक वह मुझे

सुरक्षित नहीं कर देते ।

तब तक यही रहेंगे ।

पर इन सब में कहीं ना कहीं दोष मेरा ही है ।

हे भगवान !

मुझे माफ करना ,पर मैं भी अपने बच्चों को लेकर स्वार्थी हो गई थी ।

कि राज का हाथ उनके सिर पर है ,तो मेरे बच्चों की परवरिश हो जाएगी।

मैं सच में अकेले कुछ भी नहीं कर सकती थी ,,,राजीव और बाबा के जाने के बाद कितनी अकेली हो गई थी मैं।

लेकिन अब मैं कैसे भी अपनी जिंदगी काट लूंगी ,,,माना कि मेरे बच्चो को इस वक्त सहारे की बहुत जरूरत है ।

पर यह गलत है ,कि मैं राज को उनकी फैमिली से और दूर करूं।

6 साल कम नहीं होते अपने परिवार से दूर रहने के लिए।

राज ने 6 साल तक बिना किसी स्वार्थ के मेरी मदद की है ,अब ये मेरा फर्ज बनता है, कि मैं राज को उनकी फैमिली तक पहुंचाऊ,,,,, अब चाहे कुछ भी हो। आज मुझे वह फैसला लेना ही होगा जो मुझे 6 साल पहले ले लेना चाहिए था।

उस वक्त में कमजोर थी , टूटी हुई थी बीमार थी ,और शायद इस वजह से मैं कुछ नहीं कह पाई ,या फिर मैंने कुछ कहना नहीं चाहा ।

लेकिन अब मैं खुद को संभाल लूंगी। मेहनत करूंगी ,और अपने बच्चों को खुद ही पालूंगी ,क्योंकि वह मेरे और राजीव के बच्चे हैं ,तो मेरी जिम्मेदारी बनती है।

हां और इसके लिए मुझे सबको सच बताना ही होगा ,,,कि राज मेरे पति नहीं है ,मेरे पति राजीव है ।

और मैं उनकी विधवा हूं ,,,राज तो इंसानियत के नाते मेरे साथ इतने दिनों तक रहे हैं ।

लेकिन भगवान ही जानता है,,,कोई माने या ना माने,,,,,छूना तो दूर राज ने तो गलत इरादे से मुझे कभी देखा भी नहीं है।

राज की सोच तो बिल्कुल श्रीराम के जैसी है, उनके लिए डॉली ही उनकी सीता है ।

आज मैं सब को ये सच बता कर ही रहूंगी ।

उसके बाद भले ही लोग मुझ पर और राज पर उंगलियां उठाएं,,, कुछ भी सोचे आज मैं सब कुछ सहन करने के लिए तैयार हूं ।

लेकिन आज मैं डॉली के साथ राज को जरूर भेजूंगी ।

यह सोचते हुए काम्या घर आ गई थी। कुछ ही देर में उसने ,अपनी सारी सुहाग की निशानियां को अलग कर दिया था।

वह राजीव की विधवा बनकर राजीव की फोटो लेकर घर से बाहर आ गई थी। जब उसे इस तरह से देखा, तो बागान के कुछ लोग उसके आसपास इकट्ठे हो गए काम्या तुझे हुआ क्या है

,तू इस तरह से क्यों खड़ी है

पागल हो गई है क्या

क्या एक सुहागिन स्त्री इस तरह से रहती है ,,,,,,,

नहीं पागल तो मैं पहले थी ,अब मेरी आंखें खुल चुकी है ,आज मैं आप सबको एक सच बताना चाहती हूं।

राज मेरे पति नहीं है, मेरे पति राजीव थे यह रही उनकी फोटो ,,,,मेरे हाथ में । और यह दोनों बच्चे राजीव के ही हैं ।

कुछ ही देर में काम्या ने एक्सीडेंट से आज तक की सारी बातें सब लोगों को बता दीं थी।

आसपास खड़े लोग काम्या की बात ध्यान से सुन रहे थे ।

सारी बात बताते हुए काम्या बुरी तरह से फबक कर रो पड़ी।

तभी काम्या के बाबा के खास दोस्त खान चाचु भी वहां आ गए थे।

और उन्होंने काम्या की बात की गवाही दी ,,,उनने उस दिन से यह सारी बातें बतादी,,,, और कहा कि उनने ही मना किया था ,,,,कि जाते वक्त अपने बाबा को इतना बड़ा सदमा ना दे ।

वरना वो चैन की मौत मर भी नहीं पाएंगे। और मेरे कहने पर ही काम्या ने वह बात छुपाई थी ।

और फिर धीरे-धीरे परिस्थितियां कुछ ऐसी बनी ,,कि राज ने भी यहां रुकने का मन बना लिया था ।

बेटा राज और काम्या का रिश्ता बिल्कुल पवित्र है ,इनके बीच सिर्फ और सिर्फ इंसानियत का रिश्ता है।

यह सारी बातें सुनकर काम्या वही जमीन पर बैठगई ,,आसपास की कुछ महिलाएं आकर काम्या को संभालने लगी काम्या रोते हुए कहती जा रही थी ।

हां यही सच है ,मैंने सिर्फ बाबा की वजह से झूठ बोला था ।

लेकिन वह छूट कुछ ज्यादा ही लंबा खिंच गया ,पर अब और नहीं ,इस झूठ की आप जो भी सजा देना चाहे ,मुझे मंजूर है । और मैं अपनी गलतियों के लिए सब से माफी मांगती हूं ।

प्लीज मुझे और राज को माफ कर दो आज मै राज को अपनी सारी कसमो से सारे बंधनों से मुक्त करती हूं ।

आज मैं उन्हे उनकी फैमिली के पास भेज रही हूं ।

और आप लोगों से मेरी एक ही विनती है कि इस फैसले में आप मेरा साथ दे।

काम्य ने साफ मन से सारी बात सबके सामने रख दी थी । अब उसमें कोई झूठ नहीं था ।

और फिर जो हुआ वह काम्या की खुद की जिंदगी थी ।
 
आखिर उसने किसी के साथ तो कुछ बुरा नहीं किया था ,फिर उसकी जो स्थिति थी दो छोटे बच्चे थे ,उसके बाबा उसका साथ छोड़ गए थे ।

यह सब देखते हुए गांव वालों की आंखों में भी आंसू आ गए ।

सब लोग काम्या के पास आ गए ,और उसे सहारा देते हुए कहा ,,,काम्या तुमने जो सोचा ,बिल्कुल सही है ।

देर से ही सही ,पर तुमने बिलकुल सही फैसला लिया है ,और इस फैसले में हम सब तुम्हारे साथ हैं ।

तुम चिंता मत करो, हम तुम्हारा साथ देंगे तुम्हारे बच्चों को पालने में ,और तुम्हारे घर चलाने में हमारी जिस भी मदद की जरूरत होगी,,,,हम करने को तैयार है। और राज ने तुम्हारे लिए जो कहा है ।

जो किया है ,उसका एहसान तो हम नहीं चुका सकते ,लेकिन आज हम सब खुशी से राज को उसकी फैमिली के पास भेजेंगे ।

सभी गांव वाले आकर काम्या को सांत्वना देने लगे थे ।

इधर डॉली और राज के बीच बातें चलती ही जा रही थी ,लेकिन अब वक्त आ गया था ,कि डॉली राज से वह सब कहे जो कहने के लिए वह यहां तक आई है ।

क्योंकि अभी तक इस बारे में उसने राज से कोई बात नहीं की थी ।

उसने मजबूती से राज का हाथ पकड़ते हुए राज की आंखों में देख कर कहा,,, राज आज मैं भी आपसे कुछ मांगना चाहती हूं ,भरोसा है कि आप मना नहीं करेंगे

महारानी तू बोल ना तेरे को अब अपुन से क्या चाहिए

राज पहले आप मुझसे प्रॉमिस कीजिए कि मैं जो मांगूंगी ,आप वह मुझे देंगे। पहले तू बता तो सही ,,राज पहले आप प्रॉमिस कीजिए ,मैं तभी आपको बताऊंगी ।

तभी गांव से ही 15 सोलह साल के दो बच्चे दौड़ते हुए आए,,,, और राज से जल्दी से घर चलने के लिऐ कहने लगे,,,,,क्या हुआ बेटा

वह आपके घर के बाहर बहुत भीड़ लगी है ,,,,और काम्या दीदी बहुत रो रही है और सब लोगों उन्हें समझा रहे हैं।

पर हुआ क्या है

पता नहीं क्या हुआ, बहुत सारे लोग वहां पर है ।

आप जल्दी चलो,,,, इतना सुनकर ही डॉली और राज घर की तरफ दौड़ पड़े।

अभी डॉली की बात अधूरी ही रह गई थी इस वक्त काम्या के पास पहुंचना जरूरी था ।

5 मिनट बाद जब घर के बाहर आए तो देखा,,, सच में काम्या बीच में बैठी सिसकियां ले रही है ।

और उसके चारों तरफ लोगों का हुजूम जुड़ा है ।

राज सब को अलग करते हुए काम्या के पास जा पहुंचा ,,,राज के पीछे डॉली भी वहां आ गई ।

राज ने घबराते हुए पूछा,,,,

काम्या क्या हुआ ,तुम इस तरह से रो क्यों रही हो

आसपास बैठे लोग राज को ध्यान से देखने लगे ,,,,

राज सबसे पूछने लगा ,आखिर तुम लोग मुझे ऐसे देख क्यों रहे हो

हुआ क्या है ,कोई बताता क्यों नहीं!

काम्या तुम ठीक तो हो

तभी राज की नजर काम्या के हाथ पर गई ,जिसमें उसने राजीव की फोटो पकड़ रखी थी ,राज ने काम्या के हाथ से वो फोटो ली ,और उसे छुपाने की कोशिश करने लगा।

काम्या ने ध्यान से राज को देखा और कहा ,,,,,राज अब छुपाने से कोई फायदा नहीं है, मैंने सबको सच्चाई

बता दी है ।

क्या

हां राज सारी सच्चाई जो पिछले 6 सालों में झूठ बनके सबके सामने थी।

बस अब और नहीं,,,अब मैं पूरी तरह से तैयार हूं ,कि मैं अपने बच्चों को संभाल लूंगी ,,आप अपने मन पर कोई बोझ मत रखिए ।

प्लीज आप डॉली के साथ वापस जाना चाहिए आपके परिवार को आपकी जरूरत है। और इन 6 सालों में मेरी वजह से आप अपने परिवार से दूर रहे ,उसके लिए मुझे माफ कर दीजिए ।

काम्या ने डॉली के दोनों हाथ अपने हाथ में लिए ,,,और रोते हुए कहने लगी,,,,

डॉली तुम्हारी सबसे बड़ी गुनहगार में हूं ।

मैं जानती हूं तुमने राज को कितना मिस किया होगा।

और कैसे 6 साल में काटे होंगे ।

सच बताऊं मैं भी कहीं ना कहीं स्वार्थी हो गई थी अपने बच्चों के लिए ,मुझमें इतनी हिम्मत नहीं थी ,कि मैं अकेले ही अपने दोनों बच्चों को पाल सकूँ।

लेकिन इन 6 सालों में मैंने बहुत कुछ सीख लिया है ,राज मेरा इतना साथ देने के लिए बहुत-बहुत शुक्रिया ।

डॉली जो सोच रही थी ,सब कुछ उससे उलट हो गया था ।

और इस तरह से काम्या को देखकर डॉली को बहुत दुख हो रहा था ।

कि सच में एक अकेली लड़की के लिए कुछ भी करना कितना मुश्किल होता है।

क्योंकि डॉली के लिए कुछ भी नया नहीं था ,वह सारी परिस्थितियों से लड़ चुकी थी ।

जब वह राज से पहली बार मिली थी,,तो कितनी असहाय थी ,लेकिन उसे काकी और राज का साथ मिला ,और उसके बाद ही वह खुद को मजबूत बना पाई। फिर काम्या के साथ तो उसके दो छोटे बच्चे थे ,,,डॉली को काम्या की हर बात सही लग रही थी ।

और अभी काम्या ने चाहे जो भी किया हो ,भले ही उसने सच्चाई सबके सामने रख दी थी।

लेकिन सच्चाई रखने से काम्या की मुश्किलें तो कम नहीं होती,,,

दो बच्चों का साथ, उनकी देखरेख,,,उनका खर्चा सब कुछ इतना आसान नहीं था।

डॉली अभी तक राज से अपनी बात नहीं कह पाई थी ।

लेकिन उसने सोच लिया था।

कि वह सबके सामने अपनी बात को रखेगी,,,, जो बात वह राज से अकेले मैं कहना चाहती थी ,,उस बात को सबके सामने कहेगी ।

अगर काम्या के कहने पर राज मेरे साथ आ भी गये ,तो वो दिल से कभी खुश नहीं रह पाएंगे।

उन्हें काम्या के बच्चों की चिंता सताती ही रहेगी,,,,,

डॉली अचानक सबके बीच खड़ी हुई, और सबका ध्यान अपनी तरफ आकर्षित करते हुए कहा ,,,,मैं डॉली राज की पत्नी ,,,और राज के यहां रहने में मेरी मर्जी भी शामिल थी ।

मैंने हर कदम पर राज का साथ दिया है सब कुछ सुन कर सारी परिस्थितियों को देखकर ,और सब कुछ समझ कर ,मैंने एक फैसला लिया है ।

कि मैं काम्या की शादी से राज से करवाऊंगी ।

मुझे इस शादी से कोई आपत्ति नहीं है और उसके बाद वह हमारे साथ रहेंगी।

मैं और राज मिलकर काम्या और उसके बच्चों का ध्यान अच्छी तरह से रखेंगे।

और मैं आशा करती हूं, कि मेरे इस फैसले में सबका सहयोग मुझे मिलेगा,,,,,,

जब डॉली ने ये बात कही, तो आसपास खड़े लोग ध्यान से डॉली को देखे जा रहे थे ।

और काम्या उसके सामने तो जैसे कोई अनहोनी सी बात हो गई थी ।

राज के कानों में जब यह बात पड़ी तो डॉली के कंधे पकड़ कर,,हिलाते हुए बुरी तरह से बरस पड़ा,,,,, तू पागल हो गई है क्या

कुछ भी बोले जा रही है ,शहज़ादी तूने सोच भी कैसे लिया ,की अपुन यह सब करेगा ।

राज मैं जानती हूं, आप ऐसा कुछ नहीं कर सकते,,,,, पर काम्या को देखते हुये यह मेरा फैसला है ।

आज तक मैंने हर फैसले में आपका साथ दिया है ,आज आपको मेरा साथ देना पड़ेगा । राज आपके साथ साथ मुझे भी काम्या के बच्चों की चिंता है ।

मैं जानती हूं ,कि दोनों बच्चे अभी बहुत छोटे है । उन्हें

अपने सिर पर किसी के हाथ की जरूरत है ।

जो उनकी परवरिश कर सके ,उन्हें सहारा दे सके ,,,,, काम्या ने क्या कहा है , कि वह इस बात के लिए तैयार है ,कि वह अपने बच्चों की परवरिश कर लेगी।

पर कहने और करने में बहुत अंतर होता है ,,,,,राज आपने सोचा है,,,, दो बच्चों का साथ है ,वह बच्चों को संभालेगी, घर को संभालेगी ,या फिर बाहर काम देखेगी उसके पास ना तो कोई ढंग की नौकरी है और ना ही कोई ऐसा जरिया, जिससे वह अपने परिवार को चला सके।

राज जाते जाते राजीव ने जो हमारे नीलेश के लिए किया है ,अपनी जिंदगी में ,मैं उस बात को कभी नहीं भूल सकती और मैं जानती हूं ,कि काम्या ऐसे कभी भी हमारे साथ नहीं चलेगी ।

इसलिए मैं उसे आपकी पत्नी बनाकर पूरे सम्मान के साथ अपने घर ले जाऊंगी।

मैंने काकी से वादा किया है ,कि मैं आपको घर में वापस लेकर आऊंगी। तभी काम्या अचानक से खड़ी हो गई,,,

डॉली मैं जानती हूं ,कि आपने ऐसा क्यों सोचा, किस लिए सोचा ,कहीं ना कहीं आप मेरे पति का एहसान चुकाना चाहती हैं ।

मेरे बच्चों को सुरक्षित भविष्य देना चाहते हैं । पर जहां आप मुझे राज की पत्नी बनाने के लिए कह रहीं है ,वही राज इस बात से इंकार कर रहे हैं ।

लेकिन ,,,लेकिन,,,, इन सबके बीच में, मैं कहां हूं

मेरे बारे में किसी ने सोचा है!

कि मैं क्या चाहती हूं

आप दोनों ने अपने अपने फैसले सुना दीए ,,,,लेकिन मेरा फैसला सुनने की कोशिश भी की है किसी ने ।

डॉली क्या यह सिर्फ आपका फैसला है कि मैं राज की पत्नी बनूं,,,, और राज क्या यह सिर्फ आपका फैसला है कि आप मुझे अपनी पत्नी नहीं बनाएंगे ।

आप ये मत भूलिए कि इस में मेरा फैसला होना भी जरूरी है ।

और डॉली तुम ने ये सोच भी कैसे लिया कि मैं राज की दूसरी पत्नी बन कर उनके घर जाऊंगी ।

जिस इंसान ने भगवान बन कर मेरा साथ दिया है, क्या मैं उसी की फैमिली को बर्बाद करूंगी,,,,,

ऐसा कभी नहीं होगा !

राज से शादी करना तो दूर, इस बारे में मैं सोच भी नहीं सकती,,,, मेरी दोनों बच्चियों के पिता राजीव थे, और मैं राजीव को बहुत प्यार करती थी।

और अब भी करती हूं।

यह बच्चे मेरे और राजीव के हैं ।

तो मेरी जिम्मेदारी बनती है ,चाहे कैसे भी मैं इन्हें बड़ा करूं,,,,,,

इस बात पर डॉली को थोड़ी शर्मिंदगी लगी थी ,लेकिन उसने बहुत मजबूती से काम्या के दोनों हाथ अपने हाथों में लिए और उसकी तरफ देखकर कहने लगी ,,

काम्या तुम राज की दूसरी पत्नी नहीं मेरी छोटी बहन बनके मेरे घर आओगी मैंने सौम्या और सुभि को देख

कर ये फैसला लिया है ।

उन्हें भी तो जरूरत है ,उनके सिर पर किसी का हाथ हो ।

अगर राज तुम सब को इस हालत में यहां से छोड़कर जाएंगे ,तो वह कभी भी खुश नहीं रह पाएंगे ।

मैं जानती हूं ,कि तुम राज को यहां से जाने के लिए कहोगी ।

पर मैं राज के मन की दुविधा को भी अच्छी तरह से समझती हूं ।

तुम्हें मेरे साथ चलना ही होगा ,,,,,
 
तभी पीछे से आवाज सुनाई दी,,,

डॉली बेटा!

सही मायनों में काम्या हमारी जिम्मेदारी है । अब वह हम सबके साथ रहेंगी।

अपने परिवार के साथ ,,शुभी और सौम्या अपने दादा दादी और अपने ताऊ ताई के साथ रहेंगे ।

यह सुनकर जब डॉली ने पलट कर पीछे देखा ,,,,तो देखते ही रह गई ,,,

काम्या ,राज सबके बीच एक सन्नाटा खिंच गया था ।

राज ध्यान से सामने खड़े चारों व्यक्तियों को गौर से देखने लगा ,,,काम्या भी उनके नजदीक जाकर ,उनकी तरफ देखने लगी राज और काम्या पहचान गए थे, कि यह तो राजीव के माता-पिता है।

राज जल्दी से आगे आया ,,और उन को देखते हुए पूछा ,,लेकिन आप यहां कैसे

अपन जब 8 साल पहले काम्या को आपके पास लेकरगया था ।

तब आपने क्या कहा था ,,,

अपन को अच्छी तरह से याद है, हमने कितना समझाने की कोशिश की थी

कि काम्या आपके बेटे राजीव की पत्नी है लेकिन आपने हमारी एक नहीं सुनी। धक्का देकर हमें निकाल दिया ,और यहां तक कि पुलिस में कंप्लेंट करने की भी धमकी दी थी ।

तभी वह बुजुर्ग काम्या और राज के सामने हाथ जोड़ कर बैठ गए थे ।

हां बेटा ,हमें सब कुछ याद है ,बहुत अच्छी तरह से याद है ।

कि तुम काम्या और उसके बच्चों को लेकर हमारे पास आए थे, लेकिन उस वक्त हम अपने बेटे के दुख में, और गुस्से में इतने अंधे हो गए थे ,कि हमने तुम्हारी बात ठीक से सुनी भी नहीं ।

और तुम वहां से चले आए ।

लेकिन उसके 15 दिनों बाद मेरे फोन पर राजीव का मेल आया ,,,,,,जो उसने अस्पताल से लिखा था ।

उसमें उसने साफ-साफ लिखा था ,कि वह काम्या से 6 साल पहले शादी कर चुका है, उसकी 5 साल की बेटी है।

और काम्या दोबारा प्रेग्नेंट है ,यह राजीव ने तब लिखा था ,,जब एक्सीडेंट को सिर्फ एक ही दिन हुआ था ।

और उसकी हालत इतनी खराब नहीं थी पर फिर भी बेटा कहते हैं ना कि मरने वाले को कुछ ना कुछ

आभास तो हो ही जाता है ,और शायद यही आभास मेरे राजीव को हो गया था ।

एक्सीडेंट मैं उसका फोन खराब हो गया था ,उसने अस्पताल के ही किसी कर्मचारी के फोन से हमें मेल किया था। उस मेल में काम्या और अपनी शादी की कुछ तस्वीरें भी भेजी थी ।

सौम्या की तस्वीर भी उनके साथ थी। राजीव ने सारी बात साफ-साफ बता दीं थी,,,, और सबसे आखरी में उसने यही लिखा था, कि वह कुछ दिनों में ठीक हो जाएगा, और काम्या को लेकर घर वापस आ रहा है ।

लेकिन बेटा उसे पता नहीं था ,,कि यह उसका आखरी मेल था।

अब वो कभी वापस घर नही आ पायेगा कभी ठीक नहीं होगा।

पर इत्तिफ़ाक़ देखो कर्मचारी के फोन में भी उसी वक्त डाटा खत्म होना था।

और शायद उसने 15 दिन बाद ,नेट पैक लिया,,,,और तब वहां से राजीव का मेल सेंड हुआ ,,,,,जब हमें यह मेल मिला।

तब तुम और काम्या हम से बहुत दूर जा चुके थे ।

उसके बाद हमें कितना पछतावा हुआ हमने तुम दोनों को कितना ढूंढा ।

भले ही हमारा राजीव इस दुनिया में नहीं रहा ,,,,पर उसका खून ,,,उसकी दोनों बेटियां अब भी यहां है।

तब से हम अपने पश्चाताप की आग में जल रहे हैं ।

बेटा हमें पता नहीं था ,कि सिर्फ कुछ ही किलोमीटर की

दूरी पर तुम दोनों यहां रह रहे हो ।

वरना मैं कब का काम्या को अपने साथ ले जाता ।

बेटा तुम्हारे एहसानों का बदला मैं कभी नहीं चुका सकता ,अगर तुम काम्या का साथ नहीं देते ,,,तो पता नहीं उसके होने वाले बच्चे पर ,और मेरी सौम्या क्या गुजरती।

सारी बातें सुनते हुए राज उनको उठाते हुए अपने गले से लगा लिया।

अंकल जी आप बड़े हैं ,,अपन से ।इस तरह से अपन से माफी मत मांगो अगर अपन आपकी जगह होता, तो शायद अपन भी यही करता ।

पर अपन ने तो अपना फर्ज निभाया है। तभी रमईया के मॉम डैड भी राज के करीब आए ,,,,और राज को गले लगा लिया ।

राज आपने मेरे भाई के दोनों बच्चों को सहारा दिया है, अपना परिवार छोड़कर उनका साथ दिया ,आज के जमाने में भला ऐसे लोग धरती पर कहां मिलते हैं। आप जरूर आसमान से आए हुए कोई फरिश्ते हो ,भला कौन किसके लिए इतना करता है ,,,,,

भाई

हां राज ! राजीव मेरा छोटा भाई था ,वह शुरू से ही बहुत खुले विचारों का था ।

उसने हम सब को भनक तक नहीं लगने दी ,,कि उसने शादी कर ली है, क्योंकि वह धीरे-धीरे यह बात बताना चाहता था राज लेकिन हम चाहते हैं ,कि अब तुम अपने परिवार के साथ खुशी-खुशी लौट जाओ,,,,, अबकाम्या अपने घर जाएंगी काम्या के बच्चे अपने दादा दादा और अपने ताऊजी ताई जी और रमैया दीदी के साथ रहेंगे ।

जब उन्होंने देखा कि सौम्या और सुभी कहीं दूर खड़ी चुपचाप ये सब देख रही है तो रमैया के दादु ने दोनों को अपने पास बुलाया ।

और अपने गले से लगा लिया ,सौम्या सुभी बेटा ,,,,अब आप अपने घर चलोगे मैं तुम्हारा दादू हूं ,और यह तुम्हारी दादी तुम हम सबके साथ रहोगी ,,,,

छोटी बच्चियां भला इन बातों को क्या समझती,,,,वह दौड़कर काम्या से लिपट गई ,,,,मम्मी हम आपको छोड़कर कहीं नहीं जाएंगे !

बेटा आपकी मम्मी भी हमारे साथ ही चलेगी,,,,

और डैड्डू

हम डैडी को छोड़कर भी कहीं नहीं जाएंगे,,,,,डैड आप हमारे साथ ही चलेंगे ना

इस बात पर राज शांत हो गया ,,,,

ये पल सच में भावुक कर देने वाला था छोटी छोटी बच्चियां भला रिश्तो को क्या समझती,,,, उन्हें तो बस प्यार ही समझ आता है ।

लेकिन जब उन्हें अपना परिवार मिलता उनका प्यार मिलता, तो वह उसमें भी घुलमिल जाती,,,, जब कोई किसी को दिल से प्यार करता है ,तो बच्चे तो उसी के हो जाते हैं।

काम्या ने इस बात को सहर्ष स्वीकार कर लिया था ,क्योंकि वह अच्छी तरह से जानती थी, कि राजीव

भी यही चाहते थे कि वह जाकर उसके परिवार के साथ रहे।

और फिर वह राजीव का परिवार था उनके माता पिता थे ,और भला दादा दादी से ज्यादा प्यार अपने बच्चों को कौन दे सकता है ।

रमैया की मॉम ने,,,काम्या को अपने गले लगा लिया ,,,काम्या तुम मेरी देवरानी नहीं ,छोटी बहन की तरह मेरे घर में रहोगी,,,, हम सब मिलकर सौम्या और सुभी का ध्यान रखेंगे ।

हम कब से तुम्हें ढूंढ रहे थे ,अब जल्दी से तैयारी करो ,हमें अपने घर चलना है।

चलो अंदर चलते हैं ,मैं भी साथ चल कर तुम्हारे चलने की तैयारी करवा लेती हूं।

दोनो जैसे ही अंदर जाने को हुई ,कि तभी एक गाड़ी और आकर रुकी, उसमें नीलेश और राजनी थे ।

पिंकी ने राजनी को फोन करके सब कुछ बता दिया था।

नीलेश गुवाहाटी पहुंचा ,,,,गुवाहाटी पहुंच कर राजनी को लेते हुए ,यहाँ पहुंच गया निलेश,,,,, भागता हुआ डॉली के गले लग गया ,,,,मॉम आप ये क्या करने जा रही थी

क्योंकि नीलेश की डैड से पहले ही बात हो गई थी, कि वह लोग वहां पहुंच गए हैं लेकिन उसके बाद कुछ ही देर बाद नीलेश भी यहां आ गया था ।

जब नीलेश डॉली से अलग हुआ, तो देखा कि पीछे ही राज खड़ा है ।

राज को देखते ही नीलेश राजनी की आंखों से आंसुओं की धार लग गई थी। राज ने आगे बढ़ते हुए अपने दोनों बच्चों को अपनी बाहों में भर लिया ,और नीलेश राजनी राज के गले लग गये।

यह वक्त ऐसा था, कि कोई भी अपने आंसुओं को रोक नहीं पा रहा था ।

कहीं थोड़ा सा बिछड़ने का गम था ,और कहीं बहुत ज्यादा मिलने की खुशी थी। सौम्या और सुभि सहमी हुई एक तरफ खड़ी थी ।

वह देख रही थी ,कि राजनी और नीलेश डैड,,,डैड,,,कहते हुए राज के गले लग गए हैं ।

तो कुछ समझ ही नहीं पा रही थी।

कि यह सब क्या हो रहा है ,,,,वो उदास आंखों से राज को देखे जा रही थी।
 
राज,,,, नीलेश और राजनी के साथ सौम्या के पास पहुंचा ,और घुटनों के बल बैठते हुए मुस्कुराकर कहा ,,,,होय सौम्या सुभी इधर आओ ,,,,अपन के पास आओ ,यह देख यह नीलेश भैया और ये राजनी दीदी ,,,,

सुभी ने एक बार बड़ी बड़ी आंखों ने देखा और दौड़ कर राज के गले लग गई।

डैड सब लोग कहां जाने की बात कर रहे हैं

हम आपको छोड़कर कहीं नहीं जाएंगे !

राज ने गले लगाते हुए कहा ,,,,

मेरा बच्चा तुम ,दोनों अपुन से दूर कभी नहीं जाओगे,,, तुम जब भी कहोगे अपुन तुमसे मिलने आएगा ।

अब से तुम दोनों के दो दो घर है ,और तुम कभी भी अपने दूसरे घर में आ सकते हो ,,,अपुन खुद तुमको लेने आएगा ,जब भी तुम्हारा मन हो ,अपनी डॉली मॉम के पास आ जाना ,,,और काम्या मॉम तो तुम्हारे साथ है ही।

अब तुम्हारी दो दो मां है ,,,,कुछ ही देर में रमैया के दादू नीलेश की तरफ बढ़े ,,,

और उसके चेहरे को उसकी आंखों को छूते हुए उन्हें चूम लिया,,,,

निलेश बेटा मुझे इस बात की बहुत खुशी है ,कि भले ही भगवान ने मेरे राजीव को छीन लिया ,लेकिन उसकी आंखें अब भी यह दुनिया देख रही है ।

वो हमें देख पा रही है ,हम सबको देख पा रही हैं ।

जाते हुए उसने इतना बड़ा काम किया है मैं काम्या के इस फैसले से बहुत खुश हूं कि उस मुश्किल की घड़ी में भी उसने इतना बड़ा फैसला ले लिया था ।

कम से कम आज मेरे बेटे की आंखें तो इस दुनिया में है ,भगवान का करिश्मा भी देखो, कि कहीं ना कहीं उसकी आंखें एक बार फिर मेरे परिवार से जुड़ने जा रही है ,,,,,

डॉली और राज ध्यान से उन्हें देखने लगे थे ,,,,वो आगे बढ़े और मुस्कुराते हुए कहा ,,,,,हां क्योंकि राजनी की शादी में हम सब नीलेश और रमैया की शादी के बारे में भी बात करने वाले थे ।

हम अपनी रमैया का रिश्ता नीलेश के लिए लाने वाले थे ।

इस तरह निलेश हमारा भी बेटा हो गया! क्या

पूरे 8 साल बाद राज और डॉली के चेहरे पर एक सुकून भरी मुस्कुराहट थी।

दोनों ने मुस्कुराते हुए रमैया के दादू के सामने हाथ जोड़ लिए,,, अंकल जी हमें यह रिश्ता दिल से मंजूर है ।

तब राज ने कहा,,,, जी! हम पूरी तरह से तैयार है कि राजनी की शादी के बाद जल्दी हम नीलेश और रमैया की शादी भी करवा दें।

अपुन भले ही 8 साल तक अपने परिवार से दूर था ,लेकिन उनके बारे में हर बात पता थी ,और इस बात का श्रेय जाता है अपुन के सबसे अच्छे दोस्त कन्हैया को।

हां ! कन्हैया से बात करके अपुन अपने परिवार की सारी खबर रखता था लेकिन अपुन ने कन्हैया से प्रॉमिस लिया था ,कि वह इस बारे में किसी को भी ना बताए,,,,,क्योंकि अपुन खुद को कमजोर करना नहीं चाहता था ।

कन्हैया ने अपुन को बताया था, कि हमारा नीलेश रमैया को पसंद करता है।

और फिर अभी अपुन की बात इस बारे में शहज़ादी से हो ही गई थी।

भाई साहब अगर आप नीलेश का रिश्ता लेकर नहीं आते, तो हम खुद रमैया का हाथ मांगने आपके घर आ रहे थे।

राज! क्यों नहीं एक काम करें

राजनी की शादी में हम ,इन दोनों का छोटा सा इंगेजमेंट का फंक्शन रख देते हैं आपके और हमारे रिलेटेड से भी रहेंगे, और फिर नीलेश रमैया भी शादी में आ ही रहे हैं।

बच्चों को इतना समय भी नहीं है ,कि बार-बार आए,,,, एक फंक्शन हो जाएगा और जब भी दोनों फ्री होंगे ,तो फिर हम शादी करवा देंगे ,,,,,

राज खिलखिला कर हंसने लगा था,,, अरे अपुन तो हर तरह से तैयार है ,जैसा तुम बोलेगा, वैसा होगा ।

राज नीलेश के करीब आते हुए उसके गले में हाथ डाल कर बोला,,,, अपना बच्चा पार्टी इतना बड़ा हो गया, कि दोनों का शादी भी होने वाला है।

राजनी हंसते हुए बोली जी डैड-- और अब आप शैलेश और रमैया के ससुर जी बनने वाले हैं।

राज ने हंसते हुए कहा बिल्कुल अपुन को यह बात एक्सेप्ट है ।

एक बार फिर डॉली और राज की जिंदगी मैं खुशियां आ गई थी।

तभी रमैया के दादू ने जोर से आवाज लगाते हुए कहा,,,,, काम्या बेटा कुछ ही देर में शाम होने वाली है ,अब हमें और देर नहीं करना चाहिए ,,,,तुम जल्दी से अपना सामान पैक कर लो ।

हमें अभी निकलना होगा ।

लेकिन अभी तो सब बाहर ही खड़े थे और फिर सुबह से ना किसी ने कुछ खाया था ,ना पिया था ।

सभी भाग दौड़ में ही लगे थे, अगर सामान बांधकरगुवाहाटी के लिए निकलते,,,, तो भी कम से कम ग्वाहाटी पहुंचते-पहुंचते 4 घंटे तो लग ही जाते। काम्या सोच ही नहीं पा रही थी ,कि वह इतनी जल्दी बैग पैक कैसे करे।

आखिर सालों का सामान है,, कितनी सारी जरूरत की चीजें हैं, जिन्हें चुन चुन कर रखना होगा ।

और फिर एकदम से 2 घंटे के अंदर अपने बाबा के घर से कैसे चली जाती। उसने डॉली, राज की तरफ देखा और कहां --डॉली अगर आप सब कहे ,तो क्या हम कल यहां से निकले

वैसे भी आप सब सुबह से ही यहां से वहां घूम रहे हैं, मुझे तो लग रहा है कि सबको बहुत तेज भूख भी लगी होगी।

भले ही मेरे बाबा अब नही है,,,, अगर आज बाबा जिंदा होते, मेरी ससुराल वालों को ऐसे बाहर से कभी नहीं जाने देते ,,,,अगर ऐसे भूखे पेट आप सब यहां से जाएंगे, तो उन्हें बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगेगा।

मैं चाहती हूं ,आज रात के लिए आप सभी यहां रुक जाए ।

हां यह बात सच है, कि आपके घर के जैसी सुख सुविधा मैं आप लोगों को नहीं दे सकती,,,, लेकिन फिर भी मैं चाहती हूं कि कम से कम एक रात तो आप यहां रुक ही जाए ।

जिससे मैं अपनी अच्छे से तैयारी भी कर लूँ,,,, और फिर अगर आप हमारे यहां रात का खाना खा लेगे,,, तो मेरे बाबा को भी अच्छा लगेगा ।

अब काम्या चुपचाप इनके जवाब का इंतजार करने लगी थी।
 
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