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Guest
रोज की तरह आज भी थाने के बड़े अफसर अपने घर खाना खाने गए थे,, मैंने राज को खाने का डब्बा दिया और उस भले आदमी को सारी बात बताते हुए उनसे एक फोन करने की मदद मांगी,, उन्होंने बिना किसी बहस के अपनी जेब से फोन निकाला और जल्दी से नंबर लगाकर मुझे फोन दे दिया कि मैं बाहर जाकर उन्हें सारी बात अच्छे से समझा दूं, और मैंने ऐसा ही किया सारी बात करने के बाद बड़े साहब के आने से पहले ही उनका फोन वापस करके घर आ गई,, मैंने जैसे ही मालिक को फोन किया और राज का नाम बताया तो उन्हें 1 मिनट भी नहीं लगा हमें पहचानने में वह हमारे बारे में पूछने लगे कि हम कैसे हैं ,,,,बताने से पहले मैं उनके सामने जी भर के रो ली थी पिछले 15,,,,20 दिनों में पहली बार कोई ऐसा मिला था जिसने हमारी खैरियत पूछी हो ,,,वर्ना तो सब मेरी परछाई से भी दूर हो रहे थे , उन्होंने मुझे शांत करा कर सारी बात पूछी और मुझसे कल ही मिलने का वादा करके फोन रख दिया ,,,,
दूसरे दिन जब मैं खाना लेकर थाने पहुंची तो मुझे यकीन ही नहीं हो रहा था कि उन दोनों लड़कों के पिता और उनके साथ उनका एक वकील थाने में बैठे हुए थे ,,,मेरे लिए उनका आना किसी अचंभे से कम ना था ,मैंने सोचा भी नहीं था कि आज भी कुछ लोग ऐसे होंगे जो किसी के दुख दर्द को इस तरह से समझ पाएंगे,, उनको देखते ही मैं बुरी तरह से फूट पड़ी थी,,
मेरे आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे,,,, वह बहुत बड़े लोग थे और शहर से बहुत बड़ा वकील उनके साथ आया था ,,ढाबा मालिक तो उनके पैर की धूल भी ना था ,,जब उन्होंने थाने में सारी सच्चाई बताई और राज की जिम्मेदारी अपने ऊपर लेते हुए इस घटना की दोबारा जांच करने के लिए कहा ,,,और ऐसा ना करने पर बड़े अफसर से शिकायत करने की धमकी भी दी तो थाने के बड़े अफसर भी बुरी तरह से डर गए ,और जब उनने अपनी पूरी टीम को ढाबा मालिक के यहाँ भेजा और सख्ती से पूछताछ की ,,,,राज के आने जाने का टाइम देखा , आसपास राज के बारे में पूछताछ की बात की थी ,तो उसकी सारी सच्चाई ,सामने आते देर न लगी , और जब हकीकत सामने आ गई तो फिर उसकी औरत को भी अपनी सच्चाई कबूल करनी पड़ी आखिरकार 20 ,,,25 दिन के बाद राज को छोड़ दिया गया,,,
उसके बाद राज घर आ गया जब एक मुसीबत खत्म हुई तो यहां दूसरी मुसीबत ने जन्म ले लिया था ,,सारी बस्ती में से कोई भी हम से सीधे मुंह बात करने को तैयार ना था राज पर ठरकी होने का ठप्पा लग चुका था सब यही कह रहे थे कि बिन मां बाप की औलाद अनाथ ,आवारा ,यही तो करेगा शराब और दारू पीकर ही तो बड़ा हुआ होगा,,, जिस मालिक ने इसे सहारा दिया उसी के घर में इसने ऐसा काम किया,,,
और उसके बाद उस बस्ती में सब राज को ठरकी के नाम से ही बुलाने लगे थे ,,ऐसी बातें सुनकर मेरा
कलेजा मुंह को आता था जिस बच्चे ने पूरी जिंदगी में शराब को कभी छुआ भी नहीं, उसे ठरकी कहकर बुलाया जाने लगा था ,,,राज ने अपने बारे में बहुत सफाई दी सबको बहुत समझाया,, पर किसी ने उसकी एक न सुनी ,,
तब से ही मेरा राज ऐसा हो गया लोगों के लिए उसके मन में एक गुस्सा भर चुका था लोगों के मुंह से अपने लिए ऐसी बातें सुनता तो उसकी आंखों में खून उतर आता ,,और तब से उसके मन में लोगों की प्यार की जगह जिद और नफरत ने ले ली ,,अब हमें वहां पर कोई काम भी नहीं देता था,,राज के पास जो थोड़े पैसे थे जो उसने बैंक में इखट्टे किए थे ,,,उसी से हम अपना खर्चा चला रहे थे,, पर आखिर ऐसा कब तक चलता, एक डेढ़ महीने बाद एक दिन अचानक ही हमारी खैरियत पूछने के लिए उन्हीं लड़कों के पिता ने हमें फोन किया उस वक्त राज घर पर नहीं था,, तो फोन मेंने ही उठाया उस दिन मैं बहुत ज्यादा परेशान थी ,और फिर जब उन्होंने अपनापन से पूछा तो मैंने उन्हें सारी बात बता दी ,,अपनी सारी परेशानियां एक-एक करके उनके सामने रख दी,
मेरी इस बात पर वह हमसे काफी नाराज थे कि उनके इतना कहने के बाद भी हमने अपनी परेशानी उन्हें नहीं बताई उसके बाद दूसरे ही दिन ,, फिर हमारे पास हमारे घर पहुंच गए ,,,और इस बार उन्होंने राज को अपने पास बिठाकर बिल्कुल अपने बेटे की तरह प्यार से समझाया ,उसके सिर पर हाथ फेरते हुए कहा बेटा
अगर आज तुम्हारे पिता जिंदा होते तो क्या तुम उन का दिया हुआ कुछ भी नहीं लेते,,,क्या मुझे अपना पिता नहीं मानोगे ,,,ऐसा कैसे हो सकता है कि किसी का बेटा मुसीबत में हो और उसका पिता उसके लिए कुछ भी ना करें,,,,
जो लिफाफा में तुझे दे रहा था वह आज भी मेरे पास बिल्कुल वैसा ही रखा हुआ है,,,, क्योंकि मैं तुम्हें दे चुका था ,,,और दी हुई चीज कभी वापस नहीं ली जाती ,,,अब अगर तुम नहीं लोगे तो मैं समझूंगा कि तुम मुझे अपना पिता नहीं मानते ,,,और अगर इसे लेकर अपना नया जीवन शुरू करोगे तो मुझे बहुत खुशी होगी ,,,,,
देखो राज बर्बादी, बदनामी ,और जिद हमेशा किसी इंसान को बुरे रास्ते पर ले जाती है ,,,लेकिन इन पैसों से अगर तुम अपनी अच्छी जिंदगी शुरू करोगे तो तुम्हारे और काकी के लिए अच्छा होगा ,,,
और मुझे भी अच्छा लगेगा जब उन्होंने इतना समझाया और फिर मैंने भी उनके सामने ही राज को अच्छे से डांट लगाई कि बड़ों का अनादर क्यों कर रहा है इस तरह से ,,,
आखिर वह तुमसे बड़े हैं उनके पैर छूकर पिता का आशीर्वाद समझकर यह लिफाफा रख ले,,,,,, और शायद तब यह बात राज की समझ में आ गई थी ,,,और उसने सब की बात मान ली ,,उसने सोच लिया था कि वह इस बस्ती को छोड़कर कहीं दूर जाकर नए तरीके से अपनी जिंदगी शुरु करेगा ,,,,,,,
राज ने सब के समझाने पर उन लोगों से ₹5 लाख और जमीन के टुकड़े के कागजात रख लिए थे , तब राज को सच में उनमें अपने पिता ही नजर आ रहे थे, जिन्होंने पूरे अधिकार के साथ राज को वह लिफाफा दिया था ,और जब राज इस बात के लिए राजी हो गया, तो उन्होंने उसी वक्त हमसे सामान बांधने के लिए कहा,
क्योंकि वह सुबह से शाम तक यहीं थे और इतने टाइम में देख रहे थे कि कोई भी हमारे यहां ना आ रहा है ,ना हमसे बात कर रहा है मदद करना तो बहुत दूर की बात है, जब यहां आकर उन्होंने बस्ती में राज का घर पूछा था ,तब भी लोगों ने हंसते हुए राज का मजाक उड़ाया ,और कहा आप राज का घर पूछ रहे हैं ,या ठरकी का जिसने अपने मालिक का नमक खाया और उन्हीं के साथ ऐसा काम किया ,वह तो ठरकी है और ठरकी को पीने के बाद होश ही कहां रहता है ,कि वह क्या कर रहा है,,,
सब की राज के बारे में यही राय थी ,सब उसे राज की जगह ठरकी ही बुलाने लगे थे लेकिन उन्होंने कुछ ना कहते हुए हमारे घर का पता लगाया और घर तक आ
गए ,,
वह स्थिति से अच्छी तरह वाकिफ थे, कि राज का अब यहाँ रहना ठीक नहीं है,, अगर वह यहां रहा तो यही सब बातें सुन सुनकर और ज्यादा परेशान हो जाएगा उन्होंने जबरदस्ती हमारा सामान बधवाया सामान था ही क्या ,सिर्फ थोड़े से कपड़े और कुछ रसोई का सामान, टूटी हुई निमाड़ के दो पलंग जो उन्होंने, यहीं पर छोड़ने के लिए कहे थे ,,जरा सा सामान उनकी बड़ी सी गाड़ी के ऊपर और पीछे डिग्गी में ही आ गया था ,,अब चारों वही चल पड़े थे जहां पर उन्होंने राज को वह जमीन का टुकड़ा दिया था ,वह जगह पास ही थी बस कुछ ही देर में सब लोग वहां पर पहुंच गए थे,,
जेसे ही वहां पहुंचकर गाड़ी से उतरे तो आसपास के कुछ लोग उनसे मिलने आ गए थे ,वहां के लोग उन्हें जानते थे क्योंकि यहां पर बहुत सारी जमीन उनकी थी, और कभी-कभी जमीन के सिलसिले में उनका आना जाना यहां हो जाता था ,सब लोग उनके पास आए तो उन्होंने राज से सब का परिचय करवाया ,और राज को अपना खास बताकर सबसे यहां पर राज का का साथ देने की बात कही, उन्होंने यह भी बताया कि राज बहुत मेहनती लड़का है ,और जो भी करेगा इसमें आप सब इसका साथ दे तो आपका भी फायदा होगा ,,जब उन्होंने राज की इतनी तरफदारी की, और उसके बारे में इतनी सारी अच्छी बातें बताई तो वहां के लोगों ने इस बात को मान कर राज का अपनी बस्ती में स्वागत किया,,,,
दूसरे दिन जब मैं खाना लेकर थाने पहुंची तो मुझे यकीन ही नहीं हो रहा था कि उन दोनों लड़कों के पिता और उनके साथ उनका एक वकील थाने में बैठे हुए थे ,,,मेरे लिए उनका आना किसी अचंभे से कम ना था ,मैंने सोचा भी नहीं था कि आज भी कुछ लोग ऐसे होंगे जो किसी के दुख दर्द को इस तरह से समझ पाएंगे,, उनको देखते ही मैं बुरी तरह से फूट पड़ी थी,,
मेरे आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे,,,, वह बहुत बड़े लोग थे और शहर से बहुत बड़ा वकील उनके साथ आया था ,,ढाबा मालिक तो उनके पैर की धूल भी ना था ,,जब उन्होंने थाने में सारी सच्चाई बताई और राज की जिम्मेदारी अपने ऊपर लेते हुए इस घटना की दोबारा जांच करने के लिए कहा ,,,और ऐसा ना करने पर बड़े अफसर से शिकायत करने की धमकी भी दी तो थाने के बड़े अफसर भी बुरी तरह से डर गए ,और जब उनने अपनी पूरी टीम को ढाबा मालिक के यहाँ भेजा और सख्ती से पूछताछ की ,,,,राज के आने जाने का टाइम देखा , आसपास राज के बारे में पूछताछ की बात की थी ,तो उसकी सारी सच्चाई ,सामने आते देर न लगी , और जब हकीकत सामने आ गई तो फिर उसकी औरत को भी अपनी सच्चाई कबूल करनी पड़ी आखिरकार 20 ,,,25 दिन के बाद राज को छोड़ दिया गया,,,
उसके बाद राज घर आ गया जब एक मुसीबत खत्म हुई तो यहां दूसरी मुसीबत ने जन्म ले लिया था ,,सारी बस्ती में से कोई भी हम से सीधे मुंह बात करने को तैयार ना था राज पर ठरकी होने का ठप्पा लग चुका था सब यही कह रहे थे कि बिन मां बाप की औलाद अनाथ ,आवारा ,यही तो करेगा शराब और दारू पीकर ही तो बड़ा हुआ होगा,,, जिस मालिक ने इसे सहारा दिया उसी के घर में इसने ऐसा काम किया,,,
और उसके बाद उस बस्ती में सब राज को ठरकी के नाम से ही बुलाने लगे थे ,,ऐसी बातें सुनकर मेरा
कलेजा मुंह को आता था जिस बच्चे ने पूरी जिंदगी में शराब को कभी छुआ भी नहीं, उसे ठरकी कहकर बुलाया जाने लगा था ,,,राज ने अपने बारे में बहुत सफाई दी सबको बहुत समझाया,, पर किसी ने उसकी एक न सुनी ,,
तब से ही मेरा राज ऐसा हो गया लोगों के लिए उसके मन में एक गुस्सा भर चुका था लोगों के मुंह से अपने लिए ऐसी बातें सुनता तो उसकी आंखों में खून उतर आता ,,और तब से उसके मन में लोगों की प्यार की जगह जिद और नफरत ने ले ली ,,अब हमें वहां पर कोई काम भी नहीं देता था,,राज के पास जो थोड़े पैसे थे जो उसने बैंक में इखट्टे किए थे ,,,उसी से हम अपना खर्चा चला रहे थे,, पर आखिर ऐसा कब तक चलता, एक डेढ़ महीने बाद एक दिन अचानक ही हमारी खैरियत पूछने के लिए उन्हीं लड़कों के पिता ने हमें फोन किया उस वक्त राज घर पर नहीं था,, तो फोन मेंने ही उठाया उस दिन मैं बहुत ज्यादा परेशान थी ,और फिर जब उन्होंने अपनापन से पूछा तो मैंने उन्हें सारी बात बता दी ,,अपनी सारी परेशानियां एक-एक करके उनके सामने रख दी,
मेरी इस बात पर वह हमसे काफी नाराज थे कि उनके इतना कहने के बाद भी हमने अपनी परेशानी उन्हें नहीं बताई उसके बाद दूसरे ही दिन ,, फिर हमारे पास हमारे घर पहुंच गए ,,,और इस बार उन्होंने राज को अपने पास बिठाकर बिल्कुल अपने बेटे की तरह प्यार से समझाया ,उसके सिर पर हाथ फेरते हुए कहा बेटा
अगर आज तुम्हारे पिता जिंदा होते तो क्या तुम उन का दिया हुआ कुछ भी नहीं लेते,,,क्या मुझे अपना पिता नहीं मानोगे ,,,ऐसा कैसे हो सकता है कि किसी का बेटा मुसीबत में हो और उसका पिता उसके लिए कुछ भी ना करें,,,,
जो लिफाफा में तुझे दे रहा था वह आज भी मेरे पास बिल्कुल वैसा ही रखा हुआ है,,,, क्योंकि मैं तुम्हें दे चुका था ,,,और दी हुई चीज कभी वापस नहीं ली जाती ,,,अब अगर तुम नहीं लोगे तो मैं समझूंगा कि तुम मुझे अपना पिता नहीं मानते ,,,और अगर इसे लेकर अपना नया जीवन शुरू करोगे तो मुझे बहुत खुशी होगी ,,,,,
देखो राज बर्बादी, बदनामी ,और जिद हमेशा किसी इंसान को बुरे रास्ते पर ले जाती है ,,,लेकिन इन पैसों से अगर तुम अपनी अच्छी जिंदगी शुरू करोगे तो तुम्हारे और काकी के लिए अच्छा होगा ,,,
और मुझे भी अच्छा लगेगा जब उन्होंने इतना समझाया और फिर मैंने भी उनके सामने ही राज को अच्छे से डांट लगाई कि बड़ों का अनादर क्यों कर रहा है इस तरह से ,,,
आखिर वह तुमसे बड़े हैं उनके पैर छूकर पिता का आशीर्वाद समझकर यह लिफाफा रख ले,,,,,, और शायद तब यह बात राज की समझ में आ गई थी ,,,और उसने सब की बात मान ली ,,उसने सोच लिया था कि वह इस बस्ती को छोड़कर कहीं दूर जाकर नए तरीके से अपनी जिंदगी शुरु करेगा ,,,,,,,
राज ने सब के समझाने पर उन लोगों से ₹5 लाख और जमीन के टुकड़े के कागजात रख लिए थे , तब राज को सच में उनमें अपने पिता ही नजर आ रहे थे, जिन्होंने पूरे अधिकार के साथ राज को वह लिफाफा दिया था ,और जब राज इस बात के लिए राजी हो गया, तो उन्होंने उसी वक्त हमसे सामान बांधने के लिए कहा,
क्योंकि वह सुबह से शाम तक यहीं थे और इतने टाइम में देख रहे थे कि कोई भी हमारे यहां ना आ रहा है ,ना हमसे बात कर रहा है मदद करना तो बहुत दूर की बात है, जब यहां आकर उन्होंने बस्ती में राज का घर पूछा था ,तब भी लोगों ने हंसते हुए राज का मजाक उड़ाया ,और कहा आप राज का घर पूछ रहे हैं ,या ठरकी का जिसने अपने मालिक का नमक खाया और उन्हीं के साथ ऐसा काम किया ,वह तो ठरकी है और ठरकी को पीने के बाद होश ही कहां रहता है ,कि वह क्या कर रहा है,,,
सब की राज के बारे में यही राय थी ,सब उसे राज की जगह ठरकी ही बुलाने लगे थे लेकिन उन्होंने कुछ ना कहते हुए हमारे घर का पता लगाया और घर तक आ
गए ,,
वह स्थिति से अच्छी तरह वाकिफ थे, कि राज का अब यहाँ रहना ठीक नहीं है,, अगर वह यहां रहा तो यही सब बातें सुन सुनकर और ज्यादा परेशान हो जाएगा उन्होंने जबरदस्ती हमारा सामान बधवाया सामान था ही क्या ,सिर्फ थोड़े से कपड़े और कुछ रसोई का सामान, टूटी हुई निमाड़ के दो पलंग जो उन्होंने, यहीं पर छोड़ने के लिए कहे थे ,,जरा सा सामान उनकी बड़ी सी गाड़ी के ऊपर और पीछे डिग्गी में ही आ गया था ,,अब चारों वही चल पड़े थे जहां पर उन्होंने राज को वह जमीन का टुकड़ा दिया था ,वह जगह पास ही थी बस कुछ ही देर में सब लोग वहां पर पहुंच गए थे,,
जेसे ही वहां पहुंचकर गाड़ी से उतरे तो आसपास के कुछ लोग उनसे मिलने आ गए थे ,वहां के लोग उन्हें जानते थे क्योंकि यहां पर बहुत सारी जमीन उनकी थी, और कभी-कभी जमीन के सिलसिले में उनका आना जाना यहां हो जाता था ,सब लोग उनके पास आए तो उन्होंने राज से सब का परिचय करवाया ,और राज को अपना खास बताकर सबसे यहां पर राज का का साथ देने की बात कही, उन्होंने यह भी बताया कि राज बहुत मेहनती लड़का है ,और जो भी करेगा इसमें आप सब इसका साथ दे तो आपका भी फायदा होगा ,,जब उन्होंने राज की इतनी तरफदारी की, और उसके बारे में इतनी सारी अच्छी बातें बताई तो वहां के लोगों ने इस बात को मान कर राज का अपनी बस्ती में स्वागत किया,,,,