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डॉली लगातार उस घंटी की आवाज की तरफ बढ़ती जा रही थी।
कभी इधर देखती, तो कभी उधर, आखिर 2 मिनट बाद वह उस फोन तक पहुंच गई थी ,जो कई घंटी जाने के बाद बंद हो चुका था । और एक बार फिर से उस पर कॉल आने लगा था ।
डॉली ने आसपास नजर दौड़ाई ,तो कोई भी नहीं दिख रहा था ।
बस एक चटाई थी ,उसके ऊपर एक खाने का डब्बा ,उस पर एक फोन, अगर इस तरह से फोन उठाती,तो शायद कोई उसे गलत समझ लेता ।
इसलिए फोन को हाथ ना लगाते हुए वह आसपास देखने की कोशिश कर रही थी। कि जिसका ये फोन है ,तो यही कहि आस पास ही होगा ,,,,
तभी डॉली को अपनी बांई तरफ से जो लगभग 20 ,,,25 फीट की दूरी पर था। कुछ आवाज़ आई,,,,
हां !
यह पानी के कलकल की आबाज़ थी।
वो समझ रही थी। कि शायद इस फोन का मालिक पेड़ों में पानी दे रहा है।
लेकिन फिर भी वह फोन लेने नही आया शायद वो अपने काम मे व्यस्त होंगे
एक बार तो डॉली मन हुआ ,,,कि बजने दो,,,,जाने दो,,, मुझे क्या करना
जिसका फोन होगा ,वह अपने आप आकर देख लेगा ।
पर फिर भी जब तीसरी बार फोन आने लगा ,,तो डॉली को लगा शायद उसके फैमिली मेंबर ,,या फिर कोई जरूरी फोन होगा ।
इंसानियत के नाते ही सही ,,, मुझे उसे बता देना चाहिए ।
डॉली ने आवाज लगाई,,,,,
सुनिए!!!
हेलो !!!
आपका फोन बज रहा है ,,,
फिर भी उसने नहीं सुना ,तो डॉली धीरे-धीरे उसकी तरफ बढ़ने लगी ,,,,
जब पास जाकर देखा तो वह कदमों के बल बैठकर ,,अभी भी पाइप से पानी देने में व्यस्त था ।
डॉली ठीक उसके पीछे खड़ी थी ,,,
उसने एक बार फिर आवाज दी,,,,
हेलो,,, मिस्टर आपका फोन कब से बजे जा रहा है , अगर आपका अपने फोन पर ध्यान ही नहीं है ,तो फोन
अपने पास रखते ही क्यों है
इस बार डॉली की आवाज शायद उसके कानो तक पहुंच गई थी ।
और जब उसने मुड़कर डॉली को देखा
तो ऐसे लगा ,,,शायद यह कोई अचंभित कर देने वाला सपना हो !
यह बात इतनी बड़ी थी ,,जो किसी सपने से भी परे थी । एक ऐसा सपना जो पूरे 8 साल बाद हकीकत बन के सामने आया था ।
महारानी और राज का सपना,,,
जो 8 साल पहले तक हकीकत था, एक खूबसूरत सी प्यार भरी दुनिया ,,,जहां किसी की नजर लगी और दोनों एक दूसरे से इतनी दूर हो गये, कि 8 साल से एक दूसरे को देखना तो दूर ,,,,एक दूसरे की खबर तक नहीं ली।
5 मिनट तक डॉली और राज आमने सामने आ जाने से शतब्ध थे।
डॉली को विश्वास ही नहीं हो रहा था
की राज उसे यहां मिलेगा ।
राजनी का यहां आना ,,,,,
इन दोनों को एक दूसरे के इतने करीब ले आएगा ।
डॉली ने धीरे से अपना हाथ राज के गाल पर रखा ।जब उसे विश्वास हुआ ,,,कि यह सपना नहीं हकीकत है ।
उसका राज उसके सामने है।
तो तड़प कर एक बार फिर अपने राज के गले लग
गई,,,,,,
राज ने भी पूरी शिद्दत से 8 साल की दूरियों को मिटाते हुए अपनी महारानी को अपनी बाहों में भर लिया था ।
एक बार फिर से राज और डॉली के बीच 30 साल पहले वाला प्रेम पनप गया था। जब अपने प्रेम का इजहार करने के लिए डॉली राज के गले लगी थी ।
और डॉली के आंसुओं ने राज को भिगोया था ।
और आज भी उसकी आंखों के आंसू राज को भिगो रहे थे ।
8 साल की दूरियों की भरपाई तो नहीं हो सकती थी ,,,,पर हां 8 मिनट तक दोनों खामोश थे ।
बस उनकी धड़कनें ही एक-दूसरे को सुन पा रही थी ।
जब जी भर के डॉली ने अपने आंसुओं का सैलाब उड़ेल दिया ।
तब राज ने डॉली का चेहरा अपने हाथों में लेते हुए कहा ,,,,,
महारानी तू यहां कैसे
राज मैं क्या क्या बताऊं ,,,आपको!
इन 8 सालों में क्या हुआ है, और मैं यहां कैसे ,,,डॉली की हिचकियां उसे बोलने नहीं दे रही थी ।
सहजादी पहले तो चुप हो जा ,,,यह पानी पी से ।
पानी बोतल का ढक्कन खोलते हुए डॉली को पानी पिलाया ,,,,,
कुछ देर बाद जब डॉली शांत हुई तो कितनी सारी ऐसी बातें थी ,जो दोनों एक दूसरे से करना चाहते थे ।
दोनों वहीं बिछी हुई चटाई पर बैठ गये और एक दूसरे से
अपने दिल का हाल कहने लगे ।
लेकिन इसी बीच डॉली की नज़र वहाँ रखे खाने के डब्बे पर गई, तो डॉली ने उस तरफ देखते हुये कहा,,,,
राज यह आपके खाने का डब्बा है ना
राज--हां पर तुझे कैसे पता
डॉली--क्योंकि डब्बा भरा हुआ है ,खाने का समय कब का निकल गया ,और आपने खाना खाया भी नहीं होगा ,,,
डॉली डब्बा खोलकर राज के सामने रखने लगी,,,
वह एक एक चीज को ध्यान से देख रही थी ,डब्बे को काफी अच्छे से भरा गया था । जिसमें दो सब्जियां ,रोटियां,,सलाद और कुछ मीठा भी था ।
महारानी,,, तू यह सब छोड़ मैं तुमसे बहुत सारी बातें करना चाहता हूं ।
डॉली--नहीं पहले आप खाना खाएंगे,,, डॉली ने कौर तोड़ते हुए राज के मुंह में रख दिया।
राज भी अपने हाथों से डॉली को खिलाने लगा,,,,,
8 साल बाद यह मौका आया था, जब डॉली राज को अपने हाथों से कुछ खिला रही थी ।
और इन 8 सालों में आज पहली बार था जब राज का पूरा डब्बा खत्म हुआ था। वरना रोज उसके डिब्बे में खाना बच ही जाता था।
और इस बात को लेकर काम्या भी बहुत परेशान रहती थी।
खाना खत्म होने के बाद ,हाथ धोते हुए डॉली एक बार फिर से राज की बाहों में जा समाई,,,,,
सालों की छूटी हुई बातें दोनों के बीच होने लगी थी ।
राज--सहजादी हमारी बच्चा पार्टी कैसी है
डॉली-- राज कहने को तो सब ठीक है दुनिया की नजरों में सब कुछ अच्छा है पर राजनी औऱ नीलेश आपकी कमी को कभी नहीं भूल पाएंगे ,जब भी कुछ अच्छा होता है, दोनों आपको बहुत याद करते हैं ,,,,
राज--और काकी वह तो ठीक है ना डॉली--बस कुछ उम्मीदों ने उन्हें जिंदा रखा है ,,,उसमें सबसे पहली उम्मीद तो आपके लौटने की ही है
राज --और अपनी राजनी डॉक्टर तो बन गई ना
डॉली -हां आपकी राजनी डॉक्टर बन गई है,,,और वह यही है ,सोनितपुर में है।
राज --क्या अपुन की राजनी सोनितपुर में है
डॉली--हां और निलेश मुंबई में ,,,
राज--अपुन इस बात को जानता है ,अरे अपुन का नीलेश इतना बड़ा मॉडल बन गया है ,तो क्या उसे जानने का नहीं उसका प्रोग्राम टीवी पर देखा था ।
लेकिन राजनी यहां कब आई,,,,
डॉली --10 महीने होने को आ रहे हैं
उसे तबसे यहां है।
राज-- और फिर काकी ,,और तेरी नौकरी
डॉली --राज सब कुछ अपनी जगह पर है ,मैं 8 दिन के लिए राजनी के पास आई हूं ,,वह यहां पर अकेली ही रहती है और हां ,मेरे साथ शैलेश और पूनम भी आए हैं ,,,,
राज घबराते हुए चौक जाता है,,
तो ,,,तो,,, क्या वह दोनों यहां पर है
यही आस पास होंगे ,,,बागान देखते हुए मैं अंदर आ गई थी ।
राज---महारानी मैं नहीं चाहता कि वह मुझे देख पाएं,,,
डॉली-- राज मैं उनको अभी फोन कर देती हूं ,,,वो यहाँ नही आएंगे।
राज आपको एक बात और बतानी है हमारी राजनी और शैलेश की शादी पक्की हो गई है,,, शैलेश एक ऑर्थोपेडिक्स डॉक्टर बन गया है ।
और राजनी गायकनोलॉजिस्ट बन गई है सोनितपुर का पूरा हॉस्पिटल सभालती है राज जोर से हंसने लगा,,,,
कभी इधर देखती, तो कभी उधर, आखिर 2 मिनट बाद वह उस फोन तक पहुंच गई थी ,जो कई घंटी जाने के बाद बंद हो चुका था । और एक बार फिर से उस पर कॉल आने लगा था ।
डॉली ने आसपास नजर दौड़ाई ,तो कोई भी नहीं दिख रहा था ।
बस एक चटाई थी ,उसके ऊपर एक खाने का डब्बा ,उस पर एक फोन, अगर इस तरह से फोन उठाती,तो शायद कोई उसे गलत समझ लेता ।
इसलिए फोन को हाथ ना लगाते हुए वह आसपास देखने की कोशिश कर रही थी। कि जिसका ये फोन है ,तो यही कहि आस पास ही होगा ,,,,
तभी डॉली को अपनी बांई तरफ से जो लगभग 20 ,,,25 फीट की दूरी पर था। कुछ आवाज़ आई,,,,
हां !
यह पानी के कलकल की आबाज़ थी।
वो समझ रही थी। कि शायद इस फोन का मालिक पेड़ों में पानी दे रहा है।
लेकिन फिर भी वह फोन लेने नही आया शायद वो अपने काम मे व्यस्त होंगे
एक बार तो डॉली मन हुआ ,,,कि बजने दो,,,,जाने दो,,, मुझे क्या करना
जिसका फोन होगा ,वह अपने आप आकर देख लेगा ।
पर फिर भी जब तीसरी बार फोन आने लगा ,,तो डॉली को लगा शायद उसके फैमिली मेंबर ,,या फिर कोई जरूरी फोन होगा ।
इंसानियत के नाते ही सही ,,, मुझे उसे बता देना चाहिए ।
डॉली ने आवाज लगाई,,,,,
सुनिए!!!
हेलो !!!
आपका फोन बज रहा है ,,,
फिर भी उसने नहीं सुना ,तो डॉली धीरे-धीरे उसकी तरफ बढ़ने लगी ,,,,
जब पास जाकर देखा तो वह कदमों के बल बैठकर ,,अभी भी पाइप से पानी देने में व्यस्त था ।
डॉली ठीक उसके पीछे खड़ी थी ,,,
उसने एक बार फिर आवाज दी,,,,
हेलो,,, मिस्टर आपका फोन कब से बजे जा रहा है , अगर आपका अपने फोन पर ध्यान ही नहीं है ,तो फोन
अपने पास रखते ही क्यों है
इस बार डॉली की आवाज शायद उसके कानो तक पहुंच गई थी ।
और जब उसने मुड़कर डॉली को देखा
तो ऐसे लगा ,,,शायद यह कोई अचंभित कर देने वाला सपना हो !
यह बात इतनी बड़ी थी ,,जो किसी सपने से भी परे थी । एक ऐसा सपना जो पूरे 8 साल बाद हकीकत बन के सामने आया था ।
महारानी और राज का सपना,,,
जो 8 साल पहले तक हकीकत था, एक खूबसूरत सी प्यार भरी दुनिया ,,,जहां किसी की नजर लगी और दोनों एक दूसरे से इतनी दूर हो गये, कि 8 साल से एक दूसरे को देखना तो दूर ,,,,एक दूसरे की खबर तक नहीं ली।
5 मिनट तक डॉली और राज आमने सामने आ जाने से शतब्ध थे।
डॉली को विश्वास ही नहीं हो रहा था
की राज उसे यहां मिलेगा ।
राजनी का यहां आना ,,,,,
इन दोनों को एक दूसरे के इतने करीब ले आएगा ।
डॉली ने धीरे से अपना हाथ राज के गाल पर रखा ।जब उसे विश्वास हुआ ,,,कि यह सपना नहीं हकीकत है ।
उसका राज उसके सामने है।
तो तड़प कर एक बार फिर अपने राज के गले लग
गई,,,,,,
राज ने भी पूरी शिद्दत से 8 साल की दूरियों को मिटाते हुए अपनी महारानी को अपनी बाहों में भर लिया था ।
एक बार फिर से राज और डॉली के बीच 30 साल पहले वाला प्रेम पनप गया था। जब अपने प्रेम का इजहार करने के लिए डॉली राज के गले लगी थी ।
और डॉली के आंसुओं ने राज को भिगोया था ।
और आज भी उसकी आंखों के आंसू राज को भिगो रहे थे ।
8 साल की दूरियों की भरपाई तो नहीं हो सकती थी ,,,,पर हां 8 मिनट तक दोनों खामोश थे ।
बस उनकी धड़कनें ही एक-दूसरे को सुन पा रही थी ।
जब जी भर के डॉली ने अपने आंसुओं का सैलाब उड़ेल दिया ।
तब राज ने डॉली का चेहरा अपने हाथों में लेते हुए कहा ,,,,,
महारानी तू यहां कैसे
राज मैं क्या क्या बताऊं ,,,आपको!
इन 8 सालों में क्या हुआ है, और मैं यहां कैसे ,,,डॉली की हिचकियां उसे बोलने नहीं दे रही थी ।
सहजादी पहले तो चुप हो जा ,,,यह पानी पी से ।
पानी बोतल का ढक्कन खोलते हुए डॉली को पानी पिलाया ,,,,,
कुछ देर बाद जब डॉली शांत हुई तो कितनी सारी ऐसी बातें थी ,जो दोनों एक दूसरे से करना चाहते थे ।
दोनों वहीं बिछी हुई चटाई पर बैठ गये और एक दूसरे से
अपने दिल का हाल कहने लगे ।
लेकिन इसी बीच डॉली की नज़र वहाँ रखे खाने के डब्बे पर गई, तो डॉली ने उस तरफ देखते हुये कहा,,,,
राज यह आपके खाने का डब्बा है ना
राज--हां पर तुझे कैसे पता
डॉली--क्योंकि डब्बा भरा हुआ है ,खाने का समय कब का निकल गया ,और आपने खाना खाया भी नहीं होगा ,,,
डॉली डब्बा खोलकर राज के सामने रखने लगी,,,
वह एक एक चीज को ध्यान से देख रही थी ,डब्बे को काफी अच्छे से भरा गया था । जिसमें दो सब्जियां ,रोटियां,,सलाद और कुछ मीठा भी था ।
महारानी,,, तू यह सब छोड़ मैं तुमसे बहुत सारी बातें करना चाहता हूं ।
डॉली--नहीं पहले आप खाना खाएंगे,,, डॉली ने कौर तोड़ते हुए राज के मुंह में रख दिया।
राज भी अपने हाथों से डॉली को खिलाने लगा,,,,,
8 साल बाद यह मौका आया था, जब डॉली राज को अपने हाथों से कुछ खिला रही थी ।
और इन 8 सालों में आज पहली बार था जब राज का पूरा डब्बा खत्म हुआ था। वरना रोज उसके डिब्बे में खाना बच ही जाता था।
और इस बात को लेकर काम्या भी बहुत परेशान रहती थी।
खाना खत्म होने के बाद ,हाथ धोते हुए डॉली एक बार फिर से राज की बाहों में जा समाई,,,,,
सालों की छूटी हुई बातें दोनों के बीच होने लगी थी ।
राज--सहजादी हमारी बच्चा पार्टी कैसी है
डॉली-- राज कहने को तो सब ठीक है दुनिया की नजरों में सब कुछ अच्छा है पर राजनी औऱ नीलेश आपकी कमी को कभी नहीं भूल पाएंगे ,जब भी कुछ अच्छा होता है, दोनों आपको बहुत याद करते हैं ,,,,
राज--और काकी वह तो ठीक है ना डॉली--बस कुछ उम्मीदों ने उन्हें जिंदा रखा है ,,,उसमें सबसे पहली उम्मीद तो आपके लौटने की ही है
राज --और अपनी राजनी डॉक्टर तो बन गई ना
डॉली -हां आपकी राजनी डॉक्टर बन गई है,,,और वह यही है ,सोनितपुर में है।
राज --क्या अपुन की राजनी सोनितपुर में है
डॉली--हां और निलेश मुंबई में ,,,
राज--अपुन इस बात को जानता है ,अरे अपुन का नीलेश इतना बड़ा मॉडल बन गया है ,तो क्या उसे जानने का नहीं उसका प्रोग्राम टीवी पर देखा था ।
लेकिन राजनी यहां कब आई,,,,
डॉली --10 महीने होने को आ रहे हैं
उसे तबसे यहां है।
राज-- और फिर काकी ,,और तेरी नौकरी
डॉली --राज सब कुछ अपनी जगह पर है ,मैं 8 दिन के लिए राजनी के पास आई हूं ,,वह यहां पर अकेली ही रहती है और हां ,मेरे साथ शैलेश और पूनम भी आए हैं ,,,,
राज घबराते हुए चौक जाता है,,
तो ,,,तो,,, क्या वह दोनों यहां पर है
यही आस पास होंगे ,,,बागान देखते हुए मैं अंदर आ गई थी ।
राज---महारानी मैं नहीं चाहता कि वह मुझे देख पाएं,,,
डॉली-- राज मैं उनको अभी फोन कर देती हूं ,,,वो यहाँ नही आएंगे।
राज आपको एक बात और बतानी है हमारी राजनी और शैलेश की शादी पक्की हो गई है,,, शैलेश एक ऑर्थोपेडिक्स डॉक्टर बन गया है ।
और राजनी गायकनोलॉजिस्ट बन गई है सोनितपुर का पूरा हॉस्पिटल सभालती है राज जोर से हंसने लगा,,,,