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Romance प्रेम कहानी डॉली और राज की

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डॉली ने जब सुबह अपने और नीलेश के बीच हुई सारी बातें काकी को बताई तो काकी को बहुत अच्छा लगा ।

कि उनके नीलेश का सपना पूरा हुआ है और वह अपनी जिंदगी में आगे बढ़ रहा है । और डॉली ने वहाँ जाने वाली बात भी बताई ।

पर डॉली जहां सोच रही थी ,कि काकी उदास हो जाएंगी, और अकेली कैसे रहेंगी, वहीं दूसरी तरफ काकी ने बहुत खुश होकर ,डॉली को जाने के लिए कहा।

डॉली तू वैसे भी कहीं नहीं जाती राजनी की परीक्षा हो जाए ,तो तू भी कुछ दिनों की छुट्टी लेकर घूम आ।

काम से और घर से मन बंटेगा तो मन अच्छा हो जाएगा ,जबसे अप्सर बनी है कही भी नही गई,तेरी तो सालों की छुट्टियां पड़ी है,कबसे तूने ली ही नही। कभी-कभी खुश रहने के इंसान को जगह बदल लेनी चाहिए ,रही मेरी बात, तो मुझे यहां कोई परेशानी नहीं होगी।

मेरे पास पिंकी है ना !

24 घंटे वैसे भी बहुत बोलती है।

उसको अपने पास ही रख लूंगी ,और फिर छोटू तो ढाबे पर सोता ही है ।

जरूरत पड़ी तो पिंकी की मां को भी बुला लूंगी । तू यहां की बिल्कुल भी चिंता मत करना ।

बेटा नीलेश तो पिछले 5 सालों से अकेला ही रह रहा है । 15 दिन के लिए उसे भी मां का प्यार नसीब हो जाएगा ।

अब यहां तो उसका आना ठीक ही है अभी इतना व्यस्त है ,आगे चलकर और व्यस्त होगा।

फिर उसे कहां फुर्सत है की 15 ,15 दिनों के लिए यहां रुक पाए ।

अब तू किसी भी तरह वहां जाने के लिए मना नहीं करेगी । और चुपचाप आज ही छुट्टी के लिए दरख्वास्त दे दे।

सरकारी काम है ,तेरी अफसर की ड्यूटी है । छुट्टी मिलने में भी समय लगेगा।

जब काकी ने इतने अच्छे से डॉली को समझाया । और वह खुशी लग रही थी तो डॉली ने हां कह दी ।

और राजनी भी यह सुनकर बहुत खुश हो गई ,कि वह पूरे 15 दिनों के लिए मुंबई जाने वाली है ।

राजनी भी अपनी पढ़ाई की वजह से कहीं नहीं आती जाती थी ।

राज के जाने के बाद ,यह यह पहला मौका था ,जब दोनों कहीं बाहर जा रही थी ।

जब तक राज उनके साथ यहां था ।

हर साल बच्चों की छुट्टियां लगते साथ ही डॉली और बच्चों को लेकर बाहर घूमाने के लिए ले जाता था ।

डॉली ने, नीलेश को फोन करके बता दिया था ।

और यह सुनकर नीलेश बहुत खुश था। अगले 3 महीनों में उसे ऐसा बहुत कुछ करना था ।

जो डॉली और राजनी के लिए सरप्राइजिंग हो ।

3 महीने उसके लिए काफी थे ।और उसने बहुत कुछ सोच रखा था ।

जो वह डॉली के आने से पहले करना चाहता था ।

इधर राजनी पूरे जी जान से अपनी पढ़ाई की तैयारियों में लग गई थी ।

और देखते ही देखते 3 महीने बीत गए। इन 3 महीनों में डॉली ने अपने ऑफिस का सारा पेंडिंग वर्क पूरा कर लिया था। और 15 दिनों के लिए डॉली की छुट्टी भी

मंजूर हो गई थी।

राजनी के एग्जाम शुरु हो गए ,और पूरे 20 दिन चलने के बाद खत्म भी हो चुके थे ।

अब बस तीन-चार दिन बाद ही शहर से सीधा फ्लाइट लेकर वह दोनों मुंबई पहुंचने वाले थे।

विकास ने सारा इंतजाम करवा दिया था और वहां नीलेश राजनी और डॉली को लेने आ रहा था ।

डॉली और राजनी अपनी तैयारियों में लगी हुई थी, साथ ही डॉली यहां का भी सारा काम सबको अच्छे से समझा रही थी ।

कि उसके जाने के बाद ढाबे पर ,घर पर और काकी को कोई परेशानी ना हो ।

सारा काम अच्छे से चलता रहे ,और विकास ने भी डॉली को आश्वासन दिया था ,किन 15 दिनों में जब भी उसकी छुट्टियां पड़ेगी, वह गांव आकर काकी को और घर को देख जाएगा ।

उन्होंने तो यहां तक कहा था ,कि वह काकी को उनके पास शहर में छोड़ दे, तो कुछ दिनों के लिए उन्हें भी काकी का साथ मिल जाएगा ।

लेकिन काकी अपना घर छोड़कर जाना नहीं चाहती थी ,इसलिए डॉली ने पिंकी छोटू और उसकी पत्नी को काकी की देखरेख करने के लिए घर पर छोड़ दिया था।

काकी से विदा लेते हुए ,डॉली और राजनी शहर के लिए निकल गई थी।

और आज शाम को ही वहां से उनकी सीधी मुंबई के लिए फ्लाइड थी।

अभी भी जब शहर जाना हो, तो कन्हैया ही डॉली को छोड़ने जाता था ।

लेकिन अभी डॉली ने कन्हैया को विकास के घर छोड़ने के लिए कहा था ।

क्योंकि विकास और पूनम ने पहले ही कह दिया था, कि डॉली सीधी यहां आ जाए ।

रात को वह दोनों नीनी को एयरपोर्ट छोड़ देंगे ।

क्योंकि कन्हैया को लौटने में बहुत देर हो जाती । और कन्हैया विकास के यहां छोड़ कर वापस गांव चला गया था।

पूरा दिन सब ने साथ में बिताया ,और राजनी ने शैलेश

पूनम से पीजी की बात भी कर ली थी ।

पूनम ने अपने घर के पास ही राजनी के लिए PG देख लिया था ।

जिस में रहकर 1 साल तक एमएस के लिए कोचिंग करने वाली थी ।

और उसने कह दिया था, कि जैसे ही वह मुंबई से आती है, बिना देर किए ,अपनी पढ़ाई फिर से स्टार्ट कर देगी ।

सुबह के 400 बजे डॉली और राजनी मुंबई पहुंच चुकी थी ।

जब एयरपोर्ट से बाहर निकली तो नीलेश सामने मुस्कुराता हुआ खड़ा था।

नीलेश ने जैसे ही डॉली को देखा ,कि भागता हुआ आकर गले लग गया ।

डॉली ने भी उसको अपने कलेजे से लगा लिया था ।

डॉली के आंसू उसके गालों पर धड़कने लगे थे ।

पूरे 7 महीने बाद बेटे को आंखों के सामने देखा था ।

जब जी भर के अपने कलेजे के टुकड़े को गले लगा चुकी तो ।

फिर राजनी भी जाकर नीलेश के गले लग गई । निलेश ने ऊपर से नीचे तक राजनी को देखा ,तो डॉली की तरफ देखते हुए बोला ,,,,,

मां लगता है मोटू को मेरी बहुत याद आती थी ,,,,

राजनी ने आंखें फाड़कर निलेश को देखा ,,,,,मां देखो ना इतने दिनों बाद मिला है फिर भी चिढ़ा रहा है।

अरे मेरी पूरी बात तो सुन!

मैं तो तेरी तारीफ ही करने वाला हूं

मेरे कहने का मतलब है ,कि शायद तुझे मेरी बहुत याद आती थी ,तूने मुझे बहुत मिस किया ,इसलिए देख ना कितनी पतली हो गई है ।

क्या

यह सुनकर सच में राजनी खुश हो गई थैंक गॉड !

अगर तूने मुझे पतला कहा है ।

तो मतलब मैं पतली हो गई हूं।

सच में पतली हो गई है ,मजाक नहीं कर रहा हूं ,,,,,,

डॉली ने हमेशा की तरह दोनो को समझाया ,,,,,निलेश घर चलकर लड़ लेना ।

अभी हम चलें ,,,,

ठीक है मॉम चलिये।

नीलेश ने सारा लगेज खुद ही उठा लिया और बैग को अपने कंधे पर टाँगते हुये आगे आगे चलने लगा ।

निलेश बेटा में ले रही हूं ना !

मॉम आप बस आ जाइए ,,,जब पार्किंग में आये,,,,तो नीलेश ने एक न्यू ब्राण्ड कार का दरवाजा खोलते हुए, डॉली और राजनी को बैठने का इशारा किया ।

डॉली ने इशारे से पूछा ,यह किसकी गाड़ी है ।

मॉम हमारी,,,,//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f60a.svg

राजनी गाड़ी को देखने लगी,,,,,

भाई सच में गाड़ी तू ने ले ली

और नहीं तो क्या

तुझे लाइसेंस दिखाऊ,,,

भाई बहुत अच्छी गाड़ी है ,न्यू ब्रांड!//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f60a.svg

अरे तूने कब ली ,और हम लोगों को बताया भी नहीं ,अब बता रहा हूं ना

अगर पहले से बता देता ,तो सरप्राइस कैसे होता

राजनी झट से गाड़ी में आगे की सीट पर बैठ गई ,,,,

भाई मैं आगे बैठूगी,,,

डॉली ने राजनी को देखते हुए कहा ठीक है तू ही आगे बैठ जा ।

निलेश ने सारा सामान दिग्गी में और कुछ पीछे डॉली के पास रखा ,और गाड़ी पार्किंग से निकालते हुए कुछ ही देर में मुंबई की सड़कों पर दौड़ने लगी थी।
 
सुबह 400 का नजारा था ,,,,,

बड़ी बड़ी चौड़ी चौड़ी सड़कें ,चारों तरफ जगमगाती हुई लाइटे, कुछ ही देर में गाड़ी एक ब्रिज के ऊपर से गुजरी ,जहां से दूर दिखती समुंदर की लहरें हिलोरे ले रही थी ।

बहुमंजिला इमारतों के बीच से गुजरती हुई निलेश की गाड़ी अपनी पूरी रफ्तार पर थी।

राजनी कभी सामने से ,और कभी बगल में से मुंबई की सड़कों को बड़े गौर से देख रही थी ।

डॉली भी पहली बार ही मुंबई आई थी। अभी तक तो उसने सिर्फ मुंबई के बारे में सुना था ,लेकिन जो देखा था ।

वो उससे कहीं ज्यादा था ,सच में अद्भुत थी मुंबई नगरी ।

यहां की विलासिता ,और सुंदरता को देखकर कहा जा

सकता था ।

कि मुंबई पैसे वालों की है !//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f60a.svg

अब डॉली की समझ में आया था ,कि क्यों लोग मुंबई से आकर्षित होते हैं।

क्यों उसकी तरफ खिंचे चले जाते हैं। और एक बार जो वहां जाता है ,शायद उसका लौटना मुमकिन नहीं हो पाता। क्योंकि हर कोई वहां की चकाचौंध भरी दुनिया में खुद को व्यस्त कर लेता है ।

कुछ भी हो ,राजनी को ये सब देख कर बहुत अच्छा लग रहा था ।

वह पूरे रास्ते नीलेश से सैकड़ों तरह की बातें पूछ रही थी ।

यह कौन सी जगह है

अब गाड़ी कहां टर्न होगी

फिल्म सिटी किस तरफ़ है

जुहू बीच कहां है

अमिताभ बच्चन का बंगला !

शाहरुख खान का बंगला !

इस सब के बारे में राजनी कुछ ना कुछ पूछती ही जा रही थी ।

वैसे तो राजनी को अपनी पढ़ाई से ज्यादा किसी चीज से मतलब नहीं था।

फिर भी यहां आकर वह बहुत एक्साइटिड थी ।

लगभग दो ढाई घंटे के सफर के बाद यह सब नीलेश की बिल्डिंग के कैंपस में आ चुके थे ।

कैंपस काफी अच्छा था , बड़ा सा गार्डन स्विमिंग

पूल ,जिम, डिपार्टमेंटल स्टोर कैंपस के अंदर सारी चीजें दिख रही थी। नीलेश ने गाड़ी पार्क की ,और सामान लेते हुए लिफ्ट के पास जा पहुंचे ।

अब तक सुबह के 630 ,,,,7 के बीच का समय हो चुका था ।

सब ने लिफ्ट ली ,और 14 फ्लोर पर निलेश के फ्लैट में जा पहुंचे ।

फ्लैट के अंदर आते ही डॉली ने पूछा! नीलेश तेरा फ्लैट कुछ अलग लग रहा है। जब वीडियो कॉलिंग करती थी ,तो शायद ही वॉल ग्रीन कलर की थी

लेकिन अभी ब्लू कैसे

मॉम यह भी आपके लिए एक सरप्राइज था ।

1 महीने पहले ही मैंने अपना फ्लैट चेंज किया है ।और गाड़ी भी तभी ली थी । मॉम जिन कंपनियों के साथ मेरे कांटेक्ट थे ,उसमें से बहुत सारे ऐड में कर चुका हूं जिनका पेमेंट मुझे मिल चुका है।

और कुछ काम का पैसा एडवांस भी मिल चुका है ।

तभी मैंने फ्लैट चेंज किया ,और ये गाड़ी ली है ।

राजनी तो सामान रखते हुए सोफे पर पसर गई थी।

लेकिन डॉली यहां वहां घूमते हुये नीलेश के किचन को ,उसके बेडरूम को ,उसकी बालकनी को अच्छे से देख रही थी।

लगभग 2025 मिनट बाद सारी तहकीकात करने के बाद ,डॉली संतुष्ट हो गई ।

कि उसके बेटे के पास किसी चीज की कोई कमी नहीं है । सब कुछ परफेक्ट था बिल्कुल डॉली के घर की

तरह ।

किचन में सारा सामान था ,बेडरूम भी साफ सुथरा था ।

और शैलेश के सारे कवर्ड भी करीने से जमे हुए थे ।

टू बैडरूम का फ्लैट था ,लेकिन फिर भी नीलेश के लिए जगह पर्याप्त थी एक बड़ा सा हॉल, 2 बैडरूम ,दोनों बेडरूम के बाहर बालकनी ,एक किचन, दोनों बेडरूम में अटैच लेट बाथ और एक छोटा सा स्टोर ।

और अकेले नीलेश के लिए यह जगह काफी थी ।

नीलेश ने मुस्कुराते हुए पूछा!

मॉम बताइए क्या पिएंगी!

चाय या कॉफी

डॉली मुस्कुराने लगी, अच्छा तो मेरे बेटे को मेहमानबाजी करना आ गया है जाकर तू चुपचाप बैठ ,मैं बनाती हूं सबके लिए कॉफी ।

तब तक राजनी बीच में बोल पड़ी।

मॉम बनाने दो ना इसे कॉपी, शायद जिंदगी में पहली बार इसके हाथ की कॉफी मिलने वाली है ।

प्लीज इसी को बनाने दो ना ।

नीलेश भी बोला ,,,ठीक है बना रहा हूं कहते हुए नीलेश चेंज करके भी आ गया था ।

उसने कॉफी मशीन में कॉफी दूध शक्कर डालकर मशीन ऑन की ,और 5 मिनट में ही फटाफट 3 कप कॉफी लेकर आ गया।

वाह भाई तूने इतनी जल्दी कॉफी बना ली,,,,

डॉली हंसने लगी,,,,

राजनी नीलेश ने हाथ से नही ,कॉपी मेकर से इतनी जल्दी कॉफी बना दी है। और नहीं तो क्या मॉम ,आपकी तरह थोड़ी ना मैं इतनी मेहनत करूंगा,, कि पहले मलाई ,शक्कर ,और कॉफी को चम्मच से फेटू,,,,,,जब उसमें झाग आ जाये फिर उसमें दूध डालकर कॉफी बनाऊ।

मॉम आपके जितनी अच्छी कॉपी तो मेरी कभी नहीं बन सकती ।

पर हां मुझे इसी से काम चलाना पड़ता है सबने एक ,एक कप कॉफी का उठाया और नीलेश को देखते हुए कहा !

निलेश तूने सच में बहुत अच्छी कॉपी बनाई है ।

तू ये कब और कैसे सीख गया ।

वहाँ आकर तो तू कभी कुछ भी नहीं करता

मॉम बस सीख गया हूं ,,,

अच्छा बताइए आप ब्रेकफास्ट में क्या खाएंगे

आज ब्रेकफास्ट भी मैं आपको बनाकर खिलाऊंगा !

कोई जरूरत नहीं है ,,,तू अपना काम देख ,,, मैं बस नहा धोकर ,,कान्हा जी को याद करके उनका प्रसाद लगा दूं।

फिर तेरे लिए आलू के गरम गरम पराठे बनाती हूं।

Wow ,,,,मॉम कितने दिनों बाद में आपके हाथ के आलू के परांठे खाऊंगा।
 
राजनी का फैसला

थोड़ी देर बाद नाश्ता बन चुका था । और नीलेश के साथ राजनी डॉली भी नाश्ता करने टेबल पर बैठ गई।

नीलेश देख कर खुश हो गया , कि कितने दिनों बाद मॉम के हाथों के पराठे और हरी चटनी खाने को मिली है।

तभी नीलेश के फोन पर अचानक किसी का कॉल आया ।

और नीलेश बात करने लगा,,,,

ओ सॉरी,,,, मैं तो भूल ही गया था

मुझे लगा कि हमें कल जाना है

थैंक यू सो मच ,,,याद दिलाने के लिए अभी 900 बजे है ।

मैं 1100 तक रेडी हो जाऊंगा। डेफिनेटली ओके,,,, ओके,,,

तुम मुझे पिक करने आ जाना

ठीक है ,मैं फोन रखता हूं ,बाय ।

डॉली ध्यान से राज को देख रही थी

जब उससे फोन रखा, तो नहीं डॉली ने पूछा ,,,क्या हुआ निलेश

किसका फोन था

मेरी को मॉडल का फोन था मॉम

मैं तो भूल ही गया था, कि हमारा सूट कल नहीं ,आज है।

मॉम मुझे अभी 1100 बजे निकलना होगा , अच्छा हुआ कि रमैया ने मुझे याद दिला दिया ,राजनी नाम सुनके चौक पड़ी,,,, भाई यह वही रमैया है ना ,जो कंपटीशन में फर्स्ट रैंक पर थी

हां यह वही रमैया है ,और हम दोनों का फोटो शूट है आज , एक मैगजीन के कवर पेज के लिए ।

हमें फोटोशूट कराना है ,,,,,मुझे जल्दी ही तैयार होना होगा ।

ठीक है नीलेश तू तैयार हो जा ,,,,

और बता तेरे लिए खाने में क्या बना दूं अरे मॉम कुछ नही, अब मैं और नहीं खा पाउंगा ।

बेटा पैक कर दूंगी ।

नहीं मॉम रहने दो, वैसे भी मुझे जल्दी निकलना है ।

शाम तक घर आ जाऊंगा ,ज्यादा देर नहीं लगेगी ,,,,,

राजनी चहकते हुई बोली,,,,

भाई आपने बोला कि पिक कर लेना! इसका मतलब कि रमैया यहां आ रही है हां राजनी वह मुझे पिक करने आ रही है भाई मुझे उससे मिलना है !

उसे देखना है मुझे ,कि एक सुपरमॉडल सामने से कैसी दिखती है ।

तो मुझे देख ले ना मैं भी तो सुपर मॉडल हूं ।

तू मजाक करना बंद कर ,,,मुझे रमैया से मिलना है बस प्लीज!

मैं उसके साथ सेल्फी लेना चाहती हूं। राजनी अभी जल्दी में हूं, लेकिन शाम को लौटते वक्त मैं उसे ऊपर ले आऊंगा। हां यह भी ठीक रहेगा।

ठीक 1100 बजे रमैया बिल्डिंग के नीचे नीलेश का वेट कर रही थी।

निलेश ने ,,,, डॉली को शाम को आने की कह कर अपना बैग उठाया ,और फ्लैट से बाहर निकल गया ।

राजनी बालकनी से देखने की कोशिश कर रही थी ।

पर बिल्डिंग इतनी ऊंची थी ,कि कुछ भी समझ नहीं आ रहा था ।

खैर उसे शाम तक का वेट तो करना ही था,,,,,,

निलेश के जाने के बाद ,कुछ काम तो वैसे भी नहीं था ।

डॉली और राजनी निलेश के घर को उसकी चीजों को अच्छी तरह देख रही थी ।

कि उसने अपना सामान कैसे सेट किया है ।लेकिन उन्हें सब कुछ पर्फेक्ट लगा उन्हें आश्चर्य हो रहा था ,कि वह इतनी अच्छी तरह से मेंटेन कैसे करता है । जिसने घर पर कभी एक गिलास पानी भरकर भी नहीं पिया।

पर डॉली को यह सब देख कर अच्छा लग रहा था । कि उनका बेटा समझदार हो गया है ।

दोनों बालकनी में आकर मुंबई नगरी को निहारने में लगी थी ।

ये वक्त राजनी का मुश्किल से कट रहा था ।

पर कैसे भी ,शाम के 600 गए ,और ठीक 600 बजे ही डोर वेल बजी, जब देखा ,तो नीलेश अपने वादे के मुताबिक रमैया को साथ लेकर खड़ा था ।

राजनी तो एक्साइटिड थी ही ,उसने जल्दी से दरवाजा खोलते हुए उन्हें अंदर आने के लिए कहा ।

राजनी की नजरें तो सबसे पहले रमैया पर ही गई ,और वह कुछ देर के लिए तो उसे देखती ही रह गई ।

शानदार फिगर और हाइट थी रमैया की। वैसे तो उसे कैजुअल सी टीशर्ट और जींस पहन रखा था ।

पर इसमें भी बेहद खूबसूरत और आकर्षक लग रही थी ।

जैसे ही अंदर आई राजनी ने मुस्कुराते हुए कहा ,,,,

हाय रमैया !//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f60a.svg

हाय!,,,

रमैया ने भी मुस्कुराते हुए बोला।

तभी नीलेश ने आगे बढ़ते हुए राजनी का इंट्रोडक्शन रमैया से करवाया ,,,

रमैया! सीज माय लिल सिस,,,

वह आकर सोफे पर बैठ गई ,वह बहुत सालीन और सौम्य लग रही थी ।

एक सुपर मॉडल वाला एटीट्यूड उसमें दूर-दूर तक नहीं दिख रहा था।

रमैया के करीब बैठते हुए राजनी ने एक बार फिर उससे बात शुरू की

I have a lot to tell you can I ask you

Of course,,,,रमैया एक बार फिर मुस्कुराई,,,

तब तक डॉली भी वहां आ गई थी।

रमैया को अंदाज़ा तो था ही, कि नीलेश कि मॉम यहां पर है ।

वह मुस्कुराते हुए खड़ी हुई ,और दोनों हाथ जोड़कर बोली ,,,

नमस्ते मॉम जी !//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f60a.svg

डॉली ने भी नमस्ते किया ,,,और पास बैठने के लिए कहा ।

रमैया डॉली को देखते हुए बोली मॉम निलेश आपको बहुत मिस करता है ।

और राजनी वह तुम्हें भी बहुत मिस करता है ।

जब हम शूटिंग से फ्री होते हैं ,तो यह आप दोनों की ही बातें करने लग जाता है राजनी ने रमैया को देखते हुए कहा।

रमैया क्या तुम हिंदी बोल सकती हो

बहुत अच्छी तो नहीं, पर बोल लेती हो

जब मैंने कंपटीशन के दौरान आपको देखा, तो मुझे यही लगा कि आप को हिंदी ठीक से नहीं आती ,,,,

या,,,, राजनी मुझे हिंदी ठीक से नहीं

आती ,क्योंकि ,में बचपन से ही असमिया बोलती आ रही हूं।

व्हाट!असमिया

जी ! क्योंकि में असम से ही बिलोग करती हूँ। और मेरी 12th तक स्कूलिंग

भी असम में ही हुई है।

इसलिए मुझे असमियां बहुत अच्छे से आती है ।

लेकिन 12th के बाद ही मैं मुंबई शिफ्ट गई ।

और तब से मैंने हिंदी बोलना भी सीख लिया था ।

अब मैं हिंदी भी बोल पाती हूं।

वेरी नाइस,,,,, राजनी मुस्कुराते हुए बोली ।

इसका मतलब कि यह खूबसूरती पहाड़ों से मुंबई आई है

रमैया हंस पड़ी//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f60a.svg जी हां मैं पहाड़ी हूं

चारों के बीच काफी देर तक बातें चलती रहीं ।

इस बीच डॉली ने नोटिस किया ,कि रमैया एक सुपरमॉडल भले ही है ।

भले ही स्टेज पर उसका एटीट्यूट अलग हो जाता हो।

लेकिन उसके अंदर एक बहुत ही सोने से दिल वाली लड़की छुपी हुई है ।

उसने राजनी से और डॉली से कितने अच्छे से बात की थी ।

अगले 15 दिनों तक नीलेश जहां भी डॉली और राजनी को घुमाने के लिए ले गया ।

रमैया भी उनके साथ ही थी।

क्योंकि रमैया के पेरेंट्स अभी भी असम में ही रहते थे ।

डॉली का प्यार देखकर रमैया को कहीं ना कहीं उसमें अपनी मॉम दिख रही थी। इसलिए वह रोज इन लोगों के साथ आ जाती, और अपना पूरा टाइम स्पेंड करती 15 दिन कब निकल गए ,पता ही नहीं चला ।

सबने खूब मस्ती की, घूमे फिरे ,,,

गाँव जाते समय निलेश के साथ-साथ रमैंया भी इनको छोड़ने एयरपोर्ट पर आई थी ।

जाते-जाते डॉली ने दोनों की तरफ देख कर कहा ,,,,रमैया जब नीलेश गांव आएगा ,,,तो मैं चाहूंगी कि इसके साथ तुम भी हमारे घर पर आओ ।

तब राजनी भी बोली हां ,,,रमैया प्लीज तुम जरूर आना ,हमें बहुत अच्छा लगेगा

ठीक है! राजनी मैं जरूर आऊंगी।

और सब वापस गांव आ चुके थे ।

आकर ही राजनी अपनी पढ़ाई में लग गई ।
 
देखते ही देखते पूरा साल बीत गया था। शैलेश का एक साल का pg भी पूरा हो चुका था ।

और अपनी मेहनत और लगन से राजनी को भी pg करने के लिए कॉलेज मिल गया था ।

एक साल बाद जहां राजनी के पीजी का एक सेमेस्टर कंप्लीट हुआ ।

वही शैलेश का पीजी पूरा हो गया था। जहां शैलेश ऑर्थोपेडिक्स स्पेशलिस्ट बन गया था ।

वही राजनी 1 साल बाद महिला एवं शिशु रोग

विशेषज्ञ बनने वाली थी।

समय तो अपनी गति से चलता ही रहता है ।और चल भी रहा था ।

1 साल और बीता ,और अब तक राजनी का पीजी कंप्लीट हो चुका था। राजनी का सपना तो एक अलग ही मोड़ लेने वाला था ।

लेकिन यह जरूरी होता है, किसी भी काम को प्रैक्टिकली करने के लिए मेहनत और लगन की जरूरत होती है ।

और राजनी भी अपनी मेहनत लगन में पीछे हटना नहीं चाहती थी ।

इसलिए उसने गवर्नमेंट जॉब करके गांव के लिए ,गांव के लोगों की सेवा करना सही समझा ।

और गवर्नमेंट जॉब के लिए अप्लाई कर दिया ।

कुछ महीनों बाद राजनी को कॉल लेटर आ चुका था ।

लेकिन ये क्या, उसने तो जगह का चुनाव करते हुए ,अपने गांव के सबसे पास वाले कस्बे का नाम फिल किया था ।

पर कारण जो भी रहे हो ,राजनी को वह जगह नहीं मिली , बल्कि उसकी पोस्टिंग असम के एक कस्बे में हुई थी ।

और रूल्स के अकॉर्डिंग कम से कम 3 साल तक उसे वहां रहना होता ।

उसके बाद ही वह अपना ट्रांसफर करा पाएगी ।

राजनी इस बात से परेशान हो उठी थी कि वह भी

डॉली से इतनी दूर चली जाएगी ।

अब उसके मन में एक ही उधेड़बुन चल रही थी ,कि वह यह जॉब करे कि नहीं क्योंकि वह तो अपने गांव के पास ही यहां के लोगों की सेवा करना चाहती थी। लेकिन जो आर्डर आ गया ,उसे अब बदला नहीं जा सकता था ।

जब शैलेश पूनम और विकास को पता चला ,तो सबके फोन आने लगे।

शैलेश का तो यही कहना था ।

कि राजनी अगर गवर्नमेंट ने तुम्हें वहां भेजा है ,तो जरूर कुछ सोच कर ही भेजा होगा ।

शायद वहाँ तुम्हारी जरूरत होगी ।

जहां तक मेरा मानना है ,डॉक्टर का तो फ़र्ज़ ही लोगों की सेवा करने का है ।

चाहे हालत कुछ भी हो ,हमें अपनी ड्यूटी से पीछे कभी नहीं हटना चाहिए ।

3 साल बाद ही सही, तुम अपने गांव आकर यहां के लोगों की सेवा भी कर सकती हो ।

देखो ना मैं भी तो जहां चाहता था ।

वह जगह मुझे नहीं मिली ,मैं भी गांव में रह रहा हूं।

मेरे ख्याल से देर न करते हुए तुम्हें डिसीजन लेना ले लेना चाहिए।

कि तुम असम जा रही हो ।

रही डॉली आंटी की बात, तो मॉम डैड है ना उन्हें देखने के लिए ।

काकी है उनके पास ,कितने सारे लोग हैं तुम चिंता मत

करो ,और फिर आजकल हमारे पास फोन है ,जिसे हम अपने पेरेंट्स से जुड़े रहते हैं ।

शैलेश की बातें डॉली की समझ में काफी हद तक आ चुकी थी ।

और उसने डिसीजन ले लिया था कि वह असम जायगी।

जब राजनी को कॉल लेटर मिला तो देखा असम के,, शोड़ितपुर,,, जिले में राजनी को पोस्टेड किया गया है ।

जो एक बहुत थी खूबसूरत और शांत जगह है,,, राजनी ने डिसीजन तो ले ही लिया था, कि उसे असम जाना है ।

तो अब परेशान होने से क्या फायदा, डॉली और काकी ने भी उसे समझाया कि बेटा जो काम हमें करना है ,उसमें बुराइयां नहीं अच्छाईया ढूंढो ,तभी वह काम खुशी से कर पाओगी।

और कोई भी काम खुशी से ही करना चाहिए, मजबूरी से नहीं ।

वहां की अच्छी चीजें सोचो ,कितना अच्छा मौसम ,चारों तरफ हरियाली ब्रह्मापुत्र नदी का किनारा ,तुम्हें बहुत अच्छा लगेगा वहां ।

और फिर इन सब के साथ-साथ तुम जनता की सेवा करने वहां जा रही हो

तो तुम्हें निराश नहीं होना चाहिए।

मॉम आप ठीक कह रही है।

पर मुझे बुरा नहीं लग रहा ,, में कुछ परेशान हूं ,क्योंकि एक तो मैं आपको छोड़ कर जा रही हूं ,ऊपर से इतनी दूर नया माहौल ,वहां कैसे लोग हैं , वह कैसी जगह है ,मैं कुछ भी तो नहीं जानती उसके बारे में, और इतनी दूर

हमारा तो कोई है भी नहीं ,बस इसलिए मुझे थोड़ी टेंशन हो रही है ।

हां बेटा दूर तो बहुत है ,अगर ऐसा कोई वहाँ होता ,जिससे हमारी जान पहचान होती ,तो मेरी चिंता भी कम हो जाती। मॉम अब आप चिंता करना शुरू मत कीजिए ,अगर आपने चिंता की तो सबकी चिंता एक तरफ हो जाएगी।

और फिर जब गवर्नमेंट मुझे वहाँ भेज रही है ,तो रहने के लिए क्वार्टर और मेड सब कुछ देगी ।

और फिर ऐसी जगह पर हॉस्पिटल के आसपास सी डॉक्टर्स के क्वार्टर भी बने रहते हैं ।

तो मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं होगी ,,,,

पर बातें करते हुये अचानक डॉली के चेहरे पर मुस्कान आ गई ,,,,,

मॉम क्या हुआ

आप खुश हो रही है मेरे जाने से !

राजनी हम रमैया को कैसे भूल सकते हैं वह भी तो असम से बिलॉन्ग करती है राजनी ने भी दिमाग पर जोर डालते हुए कहा,,,,, हां सच में यह तो मैं भूल ही गई थी।

जल्दी से फोन लगा ,,,,

रमैया को फोन करती हूं ,,,,

राजनी ने बिना देर किए रमैया को फोन लगा दिया ।

रमैया ने देखा कि डॉली का फोन आ रहा है ,तो खुश होते हुए फोन उठाया ,,,

जी मॉम कहिए ,,इतनी रात गए मेरी याद कैसे आ गई//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f60a.svg

बेटा याद तो मुझे तेरी हमेशा आती है लेकिन सच बात तो यह है कि आज तुझसे कुछ जरूरी काम था ।

मॉम मुझसे और जरूरी काम

बताइए ना प्लीज !

बेटा तू असम में किस जगह से है

मेरा मतलब किस शहर से।

मॉम मेरे मॉम डैड गुवाहाटी में रहते हैं तुम्हारे मॉम डैड गुवाहाटी में रहते हैं

मेरा मतलब मेरे मॉम डैड और मेरे दादी जी और दादा जी ,,,,मेरी फैमिली में चार लोग हैं ,,,,जी वो सभी गुवाहाटी में रहते हैं ।

पर क्या हुआ अचानक आप ये सब क्यों पूछ रही है

क्योंकि राजनी की पोस्टिंग असम में हुई है ,और वहां के सोनितपुर डिस्ट्रिक्ट के गवर्नमेंट हॉस्पिटल में राजनी को ज्वाइन करना है।

मेरी पहचान का तो कोई वहां पर है नहीं मुझे अचानक तेरी याद आई ,तो सोचा कि तुझसे ही वहां के बारे में कुछ पूछ लूं बेटा क्या तुझे पता है कि सोनितपुर जिला कैसा है

और कहां है

जी मॉम क्यों नहीं ,,आखिर वहाँ मेरा घर है।

सोनितपुर गोआहाटी से यही कोई 160,,,,170 किलोमीटर की दूरी पर है और बहुत खूबसूरत जगह है।

उसके पास इंडिया के फेमस चाय बागान भी है , जो छोटे से कस्बे तेजपुर में पड़ते है।

मॉम आप बिल्कुल भी टेंशन मत लीजिए वहां पर राजनी को कोई प्रॉब्लम नहीं आएगी ।

फिर भी अगर आपको ऐसा लग रहा हो तो मैं खुद राजनी को वहां छोड़ने चली जाऊंगी ।

वैसे भी मैं बहुत दिनों से अपने घर नहीं गई हूं । इस बहाने मॉम डैड से और दादू दादी से भी मिल लूँगी,,,,,

जब से मैंने कॉम्पिटिशन जीता है।

तब से मेरी फैमिली भी चाहती है, कि वह मेरे साथ कुछ टाइम स्पेंड करे।

रमैया यह बात तो ठीक कह रही है

फिर भी बेटा एक बार सोच लेना ,तेरे काम में तो कोई प्रॉब्लम नहीं आएगी

ओ,,,नो,,,मॉम मैं अपना सारा काम पहले ही फिनिश कर दूंगी ,और बस चार-पांच दिन के लिए ही तो जाना है ।

आकर देख लूँगी ।

बस आप एक पर मुझे डेट बता दीजिए कि राजनी को वहां कब ज्वाइन करना है मेरे कुछ रिलेटिव भी आस-पास रहते हैं हो सकता सोनितपुर में भी मेरा कोई रिलेटिव हो।

पर ये तो मुझे मॉम डैड से पूछकर पता चलेगा।

अगर ऐसा हुआ, तो मैं राजनी को उनसे भी इंटीड्यूज़ करवा दूंगी।

ठीक है बेटा तुमने इतना कह दिया

मेरे लिए ये काफी है ,,,अब मैं देखती हूं जैसे ही जरूरत होगी, तो मैं दुबारा फोन करूंगी,,,,

जी माँ बिल्कुल,,,, बाय

बाय ramaiyya,,,,,,

डॉली ने फोन रखा और चैन की ठंडी सांस ली ।

क्योंकि रमैया का इतना कहना डॉली के लिए काफी था।

वैसे तो रमैया से मिले हुए पूरे 3 साल हो चुके थे ।

राजनी के मेडिकल के फाइनल एग्जाम के बाद ही ,जब डॉली और राजनी मुंबई गई थी ,तब रमैया से मिली थी ,उसके बाद राजनी की 1 साल की कोचिंग, और 2 साल का पीजी ।
 
3 साल पूरे हो गए थे ,और इस बीच रमैया से फोन पर बात करना, वीडियो कॉलिंग करना, उसके बारे में पूछना ,,,

या कहें ,कि रमैया डॉली के एक फैमिली मेंबर की तरह हो गई थी । नीलेश और रमैया का रिश्ता काफी गहरा हो गया था यह बात अलग है ,कि अब तक नीलेश ने रमैया को लेकर ऐसी कोई बात नहीं की थी ।

जिससे कि उनके फ्यूचर का कोई अंदाजा लगाया जा सके ,लेकिन वह दोनों बहुत अच्छे दोस्त थे ,और बहुत सारे प्रोजेक्ट जैसे,,,वेब सीरीज,,,शार्ट मूवीज़ ,ऐड,,,,थे

जिनमें रमैया निलेश के साथ काम कर रही थी ।

कुल मिलाकर रमैया से डॉली अपने और अपनी फैमिली के बारे में सारी बातें कर सकती थी ।

हां पर अब तक राज के बारे में रमैया को कुछ भी पता नहीं था ।

उसने एकाध बार पूछने की भी कोशिश की ।

पर जब डॉली ने कोई जवाब नहीं दिया तो वह समझ गई ,,,कि जरूर ऐसी कोई बात है ,जो उसे बताना नहीं चाहती।

और उसके बाद रमैया ने कभी पूछने की कोशिश भी नहीं की।

अब तो राजनी ने मूड बना लिया था

कि वह खुशी-खुशी सोनितपुर जाएगी डॉली और काकी राजनी के साथ उसकी तैयारियों में लग गई ।

पहली बार जो उनसे इतनी दूर जा रही थी । काकी तो पता नहीं कितने ज्यादा सामान की लिस्ट बनवाती जा रही थी। जब राजनी ऊपर से आई, और उसने लिस्ट देखी, तो काकी को समझाते हुए कहा ।

काकी मुझे वहां इतने सामान की जरूरत नहीं है ।

वैसे भी मैं फ्लाइड से जाने वाली हूं ,तो यह सब अलाउड नहीं होगा ।

मैं बस अपने कपड़े और कुछ जरूरत का सामान नहीं ले जाऊंगी।

घर का और किचन का सामान वही ले लूंगी। वह ज्यादा ठीक रहेगा।

ठीक है बेटा ,,,जैसा ठीक लगे,,,

मुझे तो यह पता था, कि घर गृहस्ती में सारी चीजें लगती है ,इसलिए मैंने डॉली से कहकर सब कुछ पर्चे में लिखवा दिया था ।

काकी दादी आप चिंता मत कीजिए

और फिर रमैया और भाई तो मुझे छोड़ने जा ही रहे हैं।

तो हम अपना सारा सामान वहीं खरीद लेंगे ,,,,,,,

राजनी की सारी पैकिंग हो चुकी थी ,और तय हुआ था ,की रमैया और नीलेश उसे दिल्ली एयरपोर्ट पर मिलेंगे ।

राजनी शहर से फ्लाइड लेकर दिल्ली पहुंचने वाली थी।

रमैया नीलेश ,मुंबई से दिल्ली आ जाते और दिल्ली से तीनों की आसाम गुवाहाटी एयरपोर्ट के लिए फ्लाइड थी ।

बस 2 दिन बाद ही राजनी को दिल्ली के लिए निकलना था ।

एक दिन पहले ही डॉली औऱ राजनी शहर चली गई थी ।

क्योंकि वहां से विकास पूनम और शैलेश इन दोनों को एयरपोर्ट तक छोड़ने वाले थे रात को खाना खाने के बाद ,डॉली विकास पूनम जहाँ बातों में व्यस्त हो गये वही राजनी शैलेश के साथ टेरेस पर टहलने चले गए ।

टहलते हुए,,,,,ही ,,, जाने की सोच कर राजनी काफी इमोशनल हो रही थी।

उसे सबसे ज्यादा चिंता तो डॉली की थी और उसने भले ही शैलेश अपने प्यार का इजहार नहीं किया था, पर अब जब उससे इतना दूर जा रही थी।

तो कहीं ना कहीं, उसे शैलेश के लिए बहुत बुरा लग रहा था ।

कि वह उससे दूर जा रही है।

शैलेश राजनी के मन की बातों को समझ चुका था ,उसने राजनी के करीब आते हुए ,उसका चेहरा अपने हाथों में लिया ,और आंखों में देख कर बोला,,, राजनी मैं मॉम का ध्यान रखूंगा, तुम निश्चिंत होकर अपनी ड्यूटी पर ध्यान देना राजनी हम डॉक्टर है, हमारा काम ही सबसे पहले लोगों की सेवा ,उसके बाद हमारी फैमिली आती है ।

मैं हर कदम पर तुम्हारे साथ हूं ,तुम्हें जब भी मेरी जरूरत लगे, मुझे एक आवाज देना ,मैं आ जाऊंगा तुम्हारे पास ।

एक बात और,,,,, जितना इंतजार मुझे तुम्हारा कल था ,उतना ही आज है ,और हमेशा रहेगा ।

तुम्हारे अलावा मैं किसी और के बारे में सोच भी नहीं सकता ,,,पर मैं तुमसे कभी नहीं पूछूंगा,,, कि तुम हमारे रिश्ते के लिए कितना और वक्त चाहती हो ,पर हां सिर्फ तुम्हारी हां का इंतजार है ।

जब तुम कहोगी तभी हम अपने परिवार वालों को यह खुशखबरी सुना देंगे।

तुम समझ रही हो ना

राजनी चुपचाप खड़ी थी ,उसने अब तक कोई जवाब

नहीं दिया था ।

शैलेश ने कहा ठीक है राजनी, अगर तुम अब भी कुछ नहीं कहना चाहती तो मैं तुम पर कोई दबाव नहीं बनाऊंगा ।

पर हां तुम अपना इंतजार करने से मुझे नहीं रोक सकती।

और जैसे ही शैलेश जाने के लिए मुड़ा कि राजनी ने पीछे से उसे अपनी बाहों में भर लिया ,,,,,

शैलेश आई लव यू,,,,,

आई लव यू सो मच,,,,

शैलेश ने तो कभी उम्मीद भी नहीं की थी कि राजनी उससे अपने प्यार का इजहार करेगी । अब तक तो वह इस रिश्ते से दूर ही भाग रही थी ।

मतलब उसने ना नही किया था।

पर हां भी तो नही कहा था। लेकिन आज जब राजनी के मुँह से ऐसा सुना।

तो जैसे शैलेश की तो वर्षो की ख्वाहिश पूरी हो गई थी ।

उसने पलटते हुये राजनी को अपनी बाहों में भर लिया ,,,,

आई लव यू टू राजनी ,,,,,

हां शैलेश जब तुमसे दूर जाने को हुई

तब मुझे एहसास हुआ, कि तुम्हारे मेरी जिंदगी में क्या मायने है।

मैं सच में तुम्हारे बिना नहीं रह पाऊंगी आई प्रॉमिस यू ,,,,कि हम बहुत जल्द अपनी शादी की खुशखबरी

अपने पेरेंट्स को बता पाएंगे ।

बस मुझे थोड़ा सा समय और दे दो,,,, राजनी तुम्हारा इतना कहना ही मेरे लिए काफी है।

मैं खुद चाहता हूं ,कि हम दोनों अपने काम पर भी पूरा ध्यान दें ।

जो हमारे लिए सबसे जरूरी है ,।

राजनी की आंखें भीगी हुई थी ,,,

तब नीलेश ने मुस्कुराते हुए कहा ,,,

अच्छा तो मोटू दूर जा रही है ,तब कहीं जाकर पता चला ,कि वह मुझसे प्यार भी करती है ।

राजनी ने आंसू पोछते हुए कहा,,,

हां क्योंकि अब मुझे तुम्हारी बहुत याद आएगी ,,,

मतलब कि जाते जाते मुझे तड़पा के जा रही हो ।

जिससे मैं तड़पता रहूं ,,,और तुम मुझसे दूर चली जाओ ,,,

पता नहीं ,,,पर मुझे सच में बहुत बुरा लग रहा है ,,,,

कुछ ही देर में शैलेश ने अपनी पॉकेट में हाथ डाला ,और एक चमचमाती हुई डायमंड रिंग निकालकर राजनी की उंगली में पहना दी।

राजनी शैलेश को देखती रह गई ,,,

शैलेश यह रिंग तुम्हारे पास कहां से आई

मैडम जी पिछले 5 साल से इस रिंग को अपनी पॉकेट में डालकर घूम रहा हूं

कि जिस दिन तुम्हारी हां हुई ,उस दिन ये तुम्हारी उंगली

में होगी , और देखो ना आज वो दिन आ ही गया ।

राजनी ने रिंग देखते हुए कहा,,,

वाओ सो ब्यूटीफुल ,,,यह मेरी च्वाइस है बहुत प्यारी है ,,,,

अच्छा जी अपनी गिफ्ट ले ली,,, तारीफ भी कर दी,,,और मेरी गिफ्ट का क्या

मुझे भी तो कुछ मिलना चाहिए,,,

पर शैलेश मेरे पास तो कुछ भी नहीं है!

आई एम सॉरी ,,,,पर मैंने ऐसी कोई गिफ्ट तुम्हारे लिए नहीं रखी थी।

राजनी अगर देना चाहो तो तुम बहुत कुछ दे सकती हो ।

रियली,,,, शैलेश मेरे पास कुछ भी नहीं है

राजनी तुम्हारे पास कुछ ऐसा है जो मेरे लिए सबसे कीमती होगा !//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f60a.svg

अच्छा ओके ,,,बताओ वो क्या

हां बोलो ना ,,,,,

शैलेश ने एक मीठी सी पुच्ची राजनी के गाल पर कर दी।

यह ,,,,और यह वाला गिफ्ट तुम मुझे वापस कर सकती हो ,जो मेरे लिए सबसे कीमती होगा,,,,

राजनी शर्माती हुई जैसे ही नीचे भागने को हुई ,,,,

कि शैलेश से उसे अपनी बाहों में जकड़ लिया ,,,,,

और शरारत से देखते हुए बोला ,,,,

अब जब गिफ्ट का नाम ले ही लिया है तो ऐसे तो मैं आपको नहीं जाने दूंगा।

अब आप मुझे मेरा गिफ्ट दे कर ही जाएंगी,,,,

हां ठीक है अगर आप जाना नहीं चाहती तो यह आपकी मर्जी ,,,,

अब राजनी के पास कोई चारा नहीं था नीचे से डॉली और पूनम भी लगातार आवाज लगाती जा रही थी,,,

राजनी ,,,शैलेश,,, कहां हो तुम दोनों बेटा नीचे आओ,,, बहुत रात हो गई है। राजनी कभी शैलेश को देखती, तो कभी सीढ़ियों की तरफ़ की कोई ऊपर तो नहीं आ रहा ।

अब उसके पास कोई चारा नहीं था । क्योंकि शैलेश उसे छोड़ने वाला नहीं था आखिरकार राजनी ने भी शैलेश को उसका गिफ्ट वापस कर ही दिया।

और उसकी बाहों से खुद को छुड़ाती

हुई नीचे भाग गई,,,,,,
 
जैसे ही राजनी नीचे आई ,तो वह बहुत खुश थी।

पर कहीं उसे इस तरह से खुश देख कर आंटी कोई सवाल न पूछ लें

इसलिए नीचे आने से पहले उसने खुद को नार्मल कर लिया, और आकर चुपचाप पूनम के बगल में बैठ गई ।

उसके पीछे पीछे शैलेश भी नीचे आ गया था । पूनम और डॉली जहां बातों में बिजी थी ।

वही शैलेश अभी भी राजनी को देख कर मुस्कुरा रहा था ।और आंखों ही आंखों में बहुत कुछ कहने की कोशिश भी कर रहा था।

राजनी कभी शैलेश को देखती और कभी डॉली और पूनम से बातें करने लग जाती ।

रह रह के राजनी के होठों पर हंसी आ रही थी । वह कभी इधर चेहरा घुमाती तो कभी उधर ,आखिर बातें

करते करते पूनम की नजर राजनी के ऊपर पड़ ही गई ,और पूनम ने मुस्कुराते हुए कहा लगता है हमारी राजनी बेटी अपनी ड्यूटी के लिए बहुत खुश है ।

और खुश होना भी चाहिए ,अगर मन से अपना काम करोगे, तो बहुत जल्दी ऊंचाइयों को छू पाओगी ।

और मन से की गई मेहनत का फल भी जल्दी मिलेगा।

शैलेश भी बोल पड़ा ,,,मम्मा यह बात आप बिल्कुल सही कह रही है, अगर हम किसी काम को मन से करेंगे ,तो उसका फल भी जल्दी मिलेगा ,क्यों राजनी ठीक कहा ना मम्मा ने

बेशर्ते काम पूरा होना चाहिए ।

आधा अधूरा नहीं ,जब काम को दिल लगा कर कंप्लीट किया जाता है ,रिजल्ट तो उसका तभी आता है ।

राजनी ने आंखें दिखाते हुए कहा शैलेश क्या कुछ भी बोलते रहते हो, आंटी मेरी जॉब के लिए कह रही है।

हां तो मैं भी जॉब के लिए ही कह रहा हूं तुम शायद कुछ और समझ रही हो।

तब तक डॉली भी बोल पड़ी ,,,राजनी तू क्यों शैलेश की हर बात काटती रहती है । वह सच ही तो कह रहा है, कि जब किसी काम को पूरे दिल से किया जाता है । उसका रिजल्ट हमें तभी मिलता है । राजनी अपनी ही बात पर शर्मिंदा हो गई हां मॉम मेरे कहने का मतलब यही था। तभी शैलेश एक बार फिर बीच में बोल पड़ा ,,,,,मॉम मुझे रिजल्ट से याद आया वह मेरा दोस्त है ना संजय

उसको आज ही बेटा हुआ है, आई मीन बेबी बॉय ,,,,

यह तो बहुत बड़ी खुशखबरी है ,अभी 1 साल पहले ही तो उसकी शादी हुई थी।

हां मम्मा वही तो मैं कह रहा हूं , एक तरह से देखा जाए ,तो बच्चे भी एक रिजल्ट की तरह ही होते हैं ।

पूनम शरमाते हुए बोली ,,क्या शैलेश तू कुछ भी बोलता रहता है, बात को कहां से कहां ले जाता है ।

मम्मा मेरे कहने का मतलब यह है, कि उसके लिए भी तो हमें काफी मेहनत करनी होती है ,पहले एक अच्छी सी लड़की देखो ,फिर उसको शादी के लिए पटाओ ,उससे शादी करो ,एक अच्छा सा फ्लैट खरीदो अपने लिए ,तब कहीं जाकर हम बच्चे के बारे में सोच सकते हैं तो फिर आपकी बात सही हुई न ,कि हमें मेहनत के बाद ही एक अच्छा रिजल्ट मिलता है ।

हंसते हुए डॉली बोली,,,, पूनम शैलेश बात तो बिल्कुल सही कह रहा है।

इन सभी बातों पर राजनी धीरे-धीरे मुस्कुरा रही थी ।

मॉम क्या आप भी ,इसकी बातों में लगी हो ,क्या सही कह रहा है

अरे काम काम होता है

शादी शादी होती है

और रिजल्ट !बच्चे !

यह तो दोनों बिल्कुल अलग है ।

शैलेश की सारी की सारी बातें गलत है।

नहीं कुछ गलत नहीं है ,डॉली ने एक बार फिर कहा,,,, इस बात में ,मैं शैलेश के साथ हूं ।

तब तक पूनम ने घड़ी देखते हुए कहा चलो अब इस बात को यहीं खत्म करो जरा एक बार टाइम देखो ।

1200 बज चुके हैं ,और रात को 300 बजे राजनी की फ्लाइड है कम से कम 2 घंटे पहले हमें एयरपोर्ट पहुंचना होगा। और एक घंटा पहले घर से एयरपोर्ट जाने में लग जाएगा ।

इसलिए अब हमें निकलना चाहिए ,शैलेश तुम राजनी का सामान गाड़ी में रखो,,,,,

सभी एयरपोर्ट आ चुके थे ।

राजनी अपना सामान लेकर एयरपोर्ट के अंदर भी चली गई ।

और 3 बजे राजनी की फ्लाइड दिल्ली के लिए उड़ान भी भर चुकी थी।

कुछ घंटों में वह दिल्ली पहुंच गई ,,,

नीलेश रमैया राजनी के पहुंचने से पहले ही दिल्ली एयरपोर्ट पर आ चुके थे।

और कुछ घंटे बाद यहां से भी उनकी फ्लाइड उड़ान भरने वाली थी ।

इस बीच शैलेश डॉली और पूनम सबके फोन आ चुके थे ।

और वह निश्चिंत हो गए थे, कि राजनी ठीक से दिल्ली पहुंच चुकी है ।

और उसे रमैया नीलेश भी मिल गए ।

अब उन्हें किसी बात की टेंशन नहीं थी। मिलते साथ ही रमैया सोनितपुर के बारे में बहुत कुछ बताने लगी।

हालांकि वह काफी पहले सोनितपुर गई थी ।

कितने समय से तो मैं मुंबई में ही रह रही थी ,,,,गुवाहाटी जाती तो 2 या 3 दिन से ज्यादा रुकने का समय उसके पास नहीं होता था ।

इस बार भी मैं तीन-चार दिन का समय लेकर ही आ पाई थी।

तीनों फ्लाइड में बैठ चुके थे ,और कुछ घंटों बाद असम की हरी-भरी वादियों में थे ।

यानी कि गुवाहाटी ,,,,,

रमैया ने पहले से अपने मम्मी पापा को इन्फॉर्म कर दिया था ,जिससे उन्होंने इन सबके लिए गाड़ी भी भेज दी थी ।

और घर पर सबका इंतजार कर रहे थे।

जैसे गाड़ी दरवाजे पर पहुंची,,,

कि रमैया के मॉम डैड झट से बेटी को देखने बाहर आ गए।

नीलेश और राजनी तो पहली बार ही रमैया के मॉम डैड को देख रहे थे ।

लेकिन उन्हें देखकर यह बिल्कुल भी अंदाजा नहीं लगा ,कि यह रमैया के मॉम डैड हो सकते हैं ।

उसकी मॉम भी बिल्कुल अपनी बेटी की तरह खूबसूरत

थी।

उनकी उम्र से पता ही नहीं चल रहा था कि उनकी एक 22 साल की बेटी भी हो सकती है ।

उनको देखकर कोई भी उनकी उम्र 30 ,,35 से ज्यादा कि नहीं कह सकता था। और डैड भी काफी स्मार्ट थे।

रमैया ने देखा और दौड़ते हुए उनके गले जा लगी ।

आई मिस यू डैड

आई मिस यू मॉम,,,,

निलेश राजनी एक दूसरे को देखते ही रह गए ,,,आख़िर राजनी ने हंसते हुए कह ही दिया ,,,,

आंटी मुझे लगा आप रमैया की बहन या फिर भाभी है।

रियली आई एम शॉक्ड!//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f60a.svg

यह सुनकर सभी हंसने लगे ,,,,

चलिए बेटा अंदर चलते हैं ,

नीलेश ,,,राजनी,,,बेटा मोस्ट वेलकम इन माय हाउस ,,,,

सभी गाड़ियों से सामान निकालते हुए एक छोटे से गार्डन में आ गए थे ।

उसके अंदर एक बड़ा सा पोर्च था

और उसके बाद रमैया का स्वीट होम जिसमें उसके मॉम डैड और उसके दादी दादू रहते थे ।

जब अंदर गए ,तो देखा एक कि सामने ही सोफे पर एक 70 वर्षीय बुजुर्ग सामने बैठे हुए हैं । और उनके बगल में उनकी पत्नी ,,,यह दोनों भी काफी सभ्य और सुशिक्षित लग रहे थे ।

शायद यह रमैया के दादी और दादा ही होंगे ।

तभी रमैया जैसे ही गई ,और अपनी दादी और दादु के गले लग गई।

आ गया मेरा बच्चा ,,,पूरे 9 महीने से ऊपर हो चुके हैं तुमसे मिले हुये।

कितना इंतजार करवाती है हर बार।

दादू,,, रियली मैं बहुत बिजी रहती हूं। खैर,,,,,दादू आप इन से मिलिए !//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f60a.svg

यह नीलेश और यह उसकी बहन राजनी दादू राजनी का,,एमबीबीएस डॉक्टर है चाइल्ड एंड गायनोलॉजिस्ट स्पेसिलिस्ट,,,,और उसकी पोस्टिंग सोनितपुर में हुई है ।

और मैं नीलेश के साथ स्पेशल इसी को छोड़ने के लिए आई हूं।

रमु,,,,,,नीलेश को तो हम अच्छी तरह से जानते हैं ,,,हां पर उसे देखने का मौका हमे आज ही मिला।

तू हमेशा नीलेश की ही तो बात करती है तो आज देख भी लिया ,,,,

नीलेश बेटा मेरे पास आओ!

राजनी के दादू ने निलेश को अपने पास बुलाया ,,,,उसे ध्यान से देखते हुए उसके सिर पर हाथ रखा ,,,

गॉड ब्लेस यू ,,,,

नीलेश भी उनके पैरों में झुक गया ।

उन्होंने दोनों हाथों से उठाते हुए नीलेश को अपने गले से लगा लिया ।

जब पास आकर देखा,,, तो बड़े गौर से नीलेश को देख रहे थे ।

अचानक रमैया बोली !

दादू क्या हुआ

आप नीलेश को ऐसे क्यों देख रहे हैं

जैसे कि आप उसे बहुत पहले से जानते हो

उन्होंने बड़ी गंभीरता से सोचते हुए कहा बेटा मैं जानता तो नहीं हूं,,,,

पर शायद कुछ जानने की कोशिश कर रहा हूं ,नीलेश को देखकर मुझे ऐसे लग क्यों लग रहा है ,,जैसे ,,,जैसे कि मैं इससे पहले मिल चुका हूं ,आज से पहले शायद मैंने कभी देखा है ।

कम ओन दादू,,,,,नीलेश आज से पहले कभी यहाँ आया ही नहीं ,और ना ही आप मुंबई गये, तो फिर आप इसे कैसे देख सकते हैं

जरूर आपने किसी और को देखा होगा हां बेटा !

यही होगा,,, खैर,,, चलो बैठो बेटा चाय नाश्ता करो ,,,और आराम करो ,,,

ठीक है दादू ,आज तो हम आराम ही करेंगे,,,,

राजनी की जॉइनिंग परसों है,तो हम लोग कल सोनितपुर के लिए निकल जाएंगे ।

ठीक है बेटा,,, मैंने वह इंतजाम भी करवा दिया है । कल सुबह ही टैक्सी तुम्हें लेने आ जाएगी,,,,,

दादू ने इतना कहा ,,और शॉल ओड़ते हुए अपने कमरे में चले गए,,,

शायद वो किसी बात को गहराई से सोच रहे थे !

पर क्या

आखिर वह कौन सी बात थी

दूसरे दिन सुबह ही , राजनी नीलेश रमैया जल्दी ही उठ गए थे

क्योंकि दूरी भले ही 170,180 किलोमीटर थी ।

लेकिन पहाड़ी इलाकों में यह दूरी काफी लंबी मानी जाती है।

20,, 25 से ज्यादा स्पीड पर हम गाड़ी नहीं चला सकते।

कई बार तो बहुत ही ऊंचे नीचे और घुमावदार रास्ते होते हैं । जिसकी वजह से ड्राइवर को बहुत आराम से और गाड़ी पर फोकस करते हुए गाड़ी चलानी पड़ती है ।

सुबह 800 बजे तक ,तीनों सोनितपुर के लिए निकल गए ।

नीलेश आगे ड्राइवर के साथ बैठा था। पीछे राजनी और रमैया थे, सच में इतनी खूबसूरत जगह !//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f490.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f490.svg

राजनी तो लगातार विंडो से बाहर ही देखती जा रही

थी।

ऊंची ऊंची पहाड़ियां ,और चाय के बागान भी यहीं से शुरू हो गए थे ।

ऐसे लग रहा था ,एक मखमली हरी चादर बिछी हो ,और उसके ऊपर से धीरे-धीरे गाड़ी चली जा रही हो।

बहुत ही खूबसूरत जगह थी।

हां पर बीच-बीच में उसे डॉली की याद भी आने लगती ,क्योंकि इतनी दूर यहाँ से जाना बहुत जल्दी-जल्दी तो संभव नहीं था ।

पहले टैक्सी का फिर फ्लाइड का, कितने सारे और कितने लंबे लंबे सफर तय करने होते ।

तब कहीं जाकर वह डॉली के पास पहुंच पाती, पर बीच-बीच में अपने मन को समझा लेती ,कि लोगों की सेवा करने के लिए ही तो उसने ये पेशा चुना है।

अगर वह इस तरह से निराश होगी

तो दूसरे लोगों को कैसे खुश रख पाएंगी।

राजनी कितनी सारी फोटोस और वीडियो बनाती हुई जा रही थी ।

कि वह सब डॉली को भेजेगी। यहां कितना अच्छा लग रहा है ।

शाम होने से पहले तीनों सोनितपुर पहुंच चुके थे।

राजनी ने हॉस्पिटल के हेड को फोन किया ,तो उन्होंने लोकेशन बताते हुए राजनी के क्वार्टर का एड्रेस दिया ,और उसे बताया, कि वहां पर ऑफिस का ही एक कर्मचारी आपका वेट कर रहा है। आप अपने

क्वार्टर पहुंच जाइए ।

वह आपको सब समझा देगा । क्वार्टर की चाबी भी उसी के पास है।

लगभग 1 घंटे बाद सभी गवर्नमेंट क्वार्टर के सामने पहुंच गए थे ।

यह जगह भी किसी स्वर्ग से कम नहीं लग रही थी । एक छोटे से कैंपस के अंदर, यही कोई 15,,20 सरकारी क्वार्टर बनाए गए थे । जिसमें कुछ डॉक्टर्स के थे कुछ नर्सेज के ,और कुछ पियून और चौकीदार के । क्वाटर के चारों तरफ ऊंची ऊंची बाउंड्री वॉल बनाई गई थी। और मेन गेट पर 24 घंटे एक चौकीदार का पहरा भी रहता था ।

यह देखकर नीलेश को संतुष्टि मिल गई थी, कि राजनी यहां पर सेफ रहेगी

अगर उसे अकेला रहना है ,तो डर वाली कोई बात नहीं थी ।

सारे क्वार्टर आपस में लगे हुए ही थे । जैसे ही कैंपस के अंदर कार पहुंची की आस पास से 8,,10 लोग तुरंत ही कार के पास आ गए ।

उसमें से एक उम्र दराज व्यक्ति ने आगे बढ़ते हुए कहा,,,,

आप डॉक्टर राजनी ! क्या मैं सही हूं राजनी ने मुस्कुराते हुए कहा ,,,

जी आप बिल्कुल सही है !

लेकिन सॉरी मैं आपमें से किसी को भी नहीं पहचानती। डॉक्टर राजनी अपनी पहचान करवाने ही

तो हम यहां पर आए हैं। हम सब को सुबह ही खबर लग गई थी ,कि आप यहां आने वाली हो ।

और हम तभी से आपका इंतजार कर रहे हैं । और वह सज्जन एक-एक करके सब का इंट्रोडक्शन करवाने लगे।

राजनी जी यह तीनों हमारी स्टाफ नर्स है ,यह डॉक्टर किरण है यह दोनों बच्चे ही डॉक्टर किरण के ही है।

और मैं हूं हॉस्पिटल का एचओडी , और हम सब मिलकर आपका स्वागत करते हैं ।

मोस्ट वेलकम !//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f60a.svg

उन्होंने इतने प्यार ,और अपनापन से अपना इंट्रोडक्शन दिया,, कि राजनी का मन खुश हो गया ।

नीलेश रमैया भी मुस्कुरा पड़े । राजनी ने नीलेश रमैया का भी इंट्रोडक्शन कराया और सब को थैंक्स बोला ।
 
अब हल्का हल्का अंधेरा होने लगा था। थोड़ी ही देर में कैंपस लाइटों से जगमगा उठा । जब सारा सामान लेकर अंदर आए तो देखा, कि क्वार्टर में जरूरत की सारी चीजें थी ।

2 बेडरूम ,1 हॉल ,बालकनी और किचन का एक छोटा सा क्वार्टर था ।

इसके ऊपर भी एक कमरा और स्टोर रूम बनाया गया था।

राजनी के लिए इतना काफी था ।

राजनी को जो प्यून ऑफिस से मिला था वह अभी राजनी के घर पर ही था ।

उसने सारा सामान अंदर रखा ,राजनी से पूछ पूछ कर

कुछ सामान सेट भी किया और खाने पीने के लिए पूछने लगा। लेकिन तब तक कॉलोनी की है दो महिलाएं ,एक बड़ी सी ट्रेन में 3,,4 डॉगे और कुछ डिस्पोजल लेकर राजनी के घर आ चुके थे ।

उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा ,,,,

दीपू भैया अभी आपको मैडम के लिए कुछ भी बनाने की जरूरत नहीं है।

यह हमारे मेहमान है ,और मेहमानों का स्वागत करना हमें अच्छी तरह से आता है हां आप कल से इनका सारा काम कर सकते हैं ।

राजनी पहचान तो चुकी थी ,उसने फॉर्मेलिटी की ,,,प्लीज यह सब करने की क्या जरूरत थी ,मैं एडजस्ट कर लूंगी। अरे ऐसे कैसे एडजस्ट करेंगे ।

हमने आपके लिए गरम गरम छोले पूरी और पुलाव बनाया है ।

और हां साथ ही मीठा भी है।

अभी आप खाना खाकर आराम कीजिए आप थक गई होंगी । सुबह दीपू भैया आपको सब कुछ समझा देंगे ।

कि कहां मंडी है ,कहां सामान मिलता है और सब कुछ ला भी देंगे ।

राजनी ने उनसे वो खाना ले लिया ,और उन्हें धन्यवाद दिया।

उनके जाने के बाद तीनों ने खाना खाया और घर का मुआयना करने लगे।

खासकर निलेश घर को बहुत अच्छी तरह से देख रहा था ,कि राजनी के लिए यहां पर सब कुछ सेफ है कि

नहीं ।

घर पुराना था ,लेकिन काफी मजबूती से बनाया गया था ।

और फिर कैंपस के बाहर बाउंड्री वॉल और चौकीदार भी 24 घंटे रहता था।

तो डर की कोई बात नहीं थी ,दूसरे दिन सुबह राजनी ने अपनी ड्यूटी जॉइन कर ली।

तब तक नीलेश और रमैया कॉलोनी में हो आसपास घूमते रहे ।

सब से मिलते जुलते रहे ,ताकि वहां के लोगों का जाएजा ले सके।

रमैया और नीलेश पूरे 2 दिन तक राजनी के पास ही रुके थे । और इन 2 दिनों में उन्होंने यहां के बारे में काफी कुछ जान लिया था ।

उन्हें सब कुछ सही लगा था ।जब जाने को हुये तो राजनी काफी भावुक हो गई थी । क्योंकि पहली बार वह इतनी दूर अकेले रहने वाली थी ।

लेकिन रमैया निलेश ने उसे समझाते हुए कहा ,,,,राजनी हम दोनों भी तो पहली बार ही घर से इतनी दूर गए थे ।

और अब देखो हम मुंबई में कितना घुल मिल गए हैं ।

सबसे इसी तरह तुम भी घुल मिल जाओगी ,और जब भी तुम्हें जरूरत हो तुम मेरे मॉम डैड से कांटेक्ट कर सकती हो ।

यहां पर हमारे कुछ रिलेटिव भी है दो-चार दिनों में,,, मैं तुम्हें उनका फोन नंबर एड्रेस ,,भी सेंड कर दूंगी ।

तुम चिंता मत करना ,,,,

आंखों में आंसू लिए हुये राजनी नीलेश के गले लग गई।

कुछ ही देर बाद ,वो लोग जिस टैक्सी से आए थे , उसी टैक्सी से वापस चले गए। क्योंकि उन्हें गुवाहाटी से सीधे मुंबई निकलना था ।

और पहुंचते साथ ही रात की फ्लाइड से दोनों मुंबई भी निकल चुके थे।

यहां के लोगों का मीठा बोल चाल ,मधुर व्यवहार ,और सकारात्मक रवैया ,राजनी को काफी अच्छा लगा था।

उसे लग ही नहीं रहा था ,कि इन सबसे कुछ ही दिनों पहले मिली है।

हम उम्र राजनी को अपने भाई बहन की तरह देखते थे, कुछ बड़े बुजुर्ग उसको अपनी बेटी कहते थे । छोटे बच्चे राजनी दीदी राजनी दीदी ,कहते उसके आगे पीछे घूमते थे ।

और वहां का चौकीदार और पियून हमेशा राजनी की सेवा में हाजिर रहते थे ।

जैसे गांव में ढाबे पर लोगों के साथ वह खुद को सुरक्षित महसूस करती थी। बिल्कुल वही माहौल उसे यहां भी लगा और कुछ ही दिनों में राजनी सब में अच्छी तरह से घुल मिल गई।

रोज कम से कम 2 घंटे तक डॉली से फोन पर बात करती, वीडियो कॉलिंग करती ,उसे हर चीज के बारे में बताती उसने क्या खाया

क्या पहना

कितने पेशेंट को देखा !

राजनी को यहां आए हुए 9 महीने होने को आए थे ।

लेकिन वह चाह कर भी डॉली से मिलने नहीं जा पाई,,,,

अब राजनी अपने काम में परफेक्ट हो चुकी थी । रोज एक ना एक डिलेवरी तो वह करवाती ही थी ,कभी सिजेरियन तो कभी नॉर्मल ।

यहां के छोटे-छोटे बच्चों को उसकी जरूरत थी ,क्योंकि सरकारी अस्पताल में सिर्फ एक ही लेडी डॉक्टर थी, जो महिला और बाल रोग स्पेसिलिस्ट थी, जिस पर दोनों की जिम्मेदारी थी ।

राजनी अपने काम को पूरी मन और लगन के साथ कर रही थी ।

वह अपने काम के लिए कभी भी वक्त नहीं देखती ,रात हो या दिन जब भी किसी को जरूरत होती ,,,वह तुरंत हॉस्पिटल पहुंचती।

क्योंकि ऐसे कामों में वक्त नहीं देखा जाता।

लेकिन हां !

यहां के लोग भी राजनी का पूरा ध्यान रखते थे।

इतने महीनों में अब तो शैलेश भी उससे मिलने के लिए बेकरार हो उठा था ।

और राजनी भी उसे बहुत बहुत मिस कर रही थी।

जिस दिन राजनी ने अपने प्यार का इजहार किया ,उसी दिन शैलेश को छोड़कर इतनी दूर आ गई थी ।

आज से ठीक 1 महीने बाद राजनी का बर्थडे था ।

डॉली बहुत कह रही थी, कि बेटा बर्थडे पर यहां आ जाओ ।

अब मैं तुम्हें देखना चाहती हूं ,लेकिन यहां के लोगों की जरूरतों को देखते हुए राजनी 1 दिन की भी छुट्टी नहीं ले सकती थी।

वैसे यहां पर एक और ,,,,,

महिला एवं बाल रोग विशेषज्ञ की स्पेशलिस्ट डॉक्टर आने वालीं थी।

लेकिन जब तक वह नहीं आ जाती तब तक राजनी हॉस्पिटल को कैसे भी छोड़ नहीं सकती थी।

लेकिन अब तो राजनी को सच मे बहुत याद आने लगी थी ।

और साथ-साथ शैलेश के लिये भी बहुत उदास और परेशान थी।

इधर शहर में शैलेश भी राजनी को बहुत मिस कर रहा था।

इस बात से बेखबर के पीछे पूनम खड़ी है । राजनी की तस्वीर देखने में लगा था उसकी आंखें भी गीली हो रही थी ।

पूनम समझ गई ,और उसने धीरे से शैलेश के सिर पर हाथ फेरा ,,,,

शैलेश ,अचानक चौकते हुए उठ कर बैठ गया । तब पूनम ने समझाया ,,,

बेटा जब तक राजनी इस रिश्ते के लिए हां नहीं कह देती । हम कुछ भी नहीं कर सकते ।

मैं अच्छी तरह से जानती हूं, कि तू राजनी को बहुत मिस करता है।

तब शैलेश ने मुस्कुराते हुए ,उस दिन की सारी बात पूनम को बता दी।

यह सुनकर तो खुशी के मारे पूनम अपनी मुस्कुराहट रोक ही नहीं पा रही थी ।

उसने शैलेश को उसके प्यार के लिए मुबारकबाद दी ।

और डांटते हुए कहा,,,, शैलेश पूरे 10 महीने बाद तू अब मुझे ये बात बता रहा है ।

हां मम्मा क्योंकि हमने सोचा था ,कि अबकी बार राजनी जब यहां आएगी

तब हम सब कुछ बता देंगे ।

पर देखो ना वो तबसे आ ही नहीं पाई। इतना सुनना था ,,,कि पूनम ने डॉली को भी फोन करके सारी बात बता दी ।

अब तक राजनी ने भी डॉली से इस बारे में कोई बात नहीं की थी ।

सुनकर डॉली की खुशी का भी ठिकाना नहीं था ।

पूनम और डॉली एक साथ ढेर सारी बातें करने लगे ,,,,वह दोनों बच्चों के लिए बहुत खुश थी ।

वह तो कब से यही चाह रही थी, यह खुशखबरी उन्हें सुनने को मिले।

आखिर शैलेश, डॉली ,और पूनम ने मिलकर डिसाइड किया ,कि वह राजनी के बर्थडे पर सोनितपुर जाकर उसे सरप्राइस देंगे ।

जो उसके बर्थडे का सबसे अच्छा गिफ्ट होगा।

यह डिसाइड हो गया था, कि शैलेश

पूनम और डॉली को लेकर, राजनी के बर्थडे पर आसाम जाएगा ।

पर इस बारे में राजनी को कुछ नहीं बताया था ।

तीनों ने फ्लाइट के टिकट भी बुक करवा लिए थे । और तैयारी भी लगानी शुरू कर दी थी ।

शैलेश भी अपनी जॉब के बाद पहली बार ही छुट्टियां ले रहा था ।

तो उसे 8 दिन की छुट्टी आराम से मिल गई थी ।
 
और पूरे 8 दिनों तक शैलेश पूनम और डॉली तीनों राजनी के पास सोनितपुर जाने वाले थे,,,,,,,,,,,

डॉली ने एक बार फिर छोटू की फैमिली को काकी के पास छोड़ कर अच्छे से उनका ध्यान रखने के लिए कहा।

और जब काकी को राजनी और शैलेश के बारे में बताया ,काकी तो फूली ही नहीं समा रही थी ।

उनका मन कर रहा था , कि दोनों बच्चों को गले से लगा कर आशीर्वाद दें ।

पर जो अभी संभव नहीं था । और डॉली ने बता दिया था , कि वह राजनी के पास जाकर उसे सरप्राइस देने वाली है , जिससे वह अपने बर्थडे पर अच्छा महसूस करे।

और फिर शैलेश पूनम हमारे साथ होंगे हम दोनों बच्चों से पूछ कर इनकी सगाई के बारे में भी बात कर लेंगे ।

जब बच्चों को छुट्टियां होंगी , तो हम एक छोटा सा प्रोग्राम रखते हैं ।

कम से कम इनकी सगाई तो कर ही देंगे काकी को यह

लव यू डैड(पॉर्ट-22)

बात बहुत पसंद आई थी उन्हें तो कब से इंतजार था , कि उनकी राजनी पूनम के घर की बहु बने।

सब कुछ इतना अच्छा जो था , काकी ने डॉली से कहा,,, वह निश्चित होगा राजनी के पास जाए , पिछली बार की तरह इस बार भी वह अपना ध्यान अच्छे से रखेंगी। एक महीना बीत गया ,,,,,

और वह दिन आ गया ,जब शैलेश पूनम और डॉली , गुवाहाटी के लिए निकल चुके थे ।

गुवाहाटी पहुंचकर वहां से टैक्सी ली और सोनितपुर की तरफ बढ़ने लगे,,, राजनी अभी कहां पर है ,क्या कर रही है ,यह जानने के लिए शैलेश ने रास्ते से ही फोन लगाया , और पूछा ,,,,

हेलो राजनी ,अभी तुम कहां पर हो मतलब

अभी मैं घर पर हूं , पर तुम क्यों पूछ रहे हो

बस ऐसे ही ,मुझे लगा शायद कहीं घूमने गई हो ,,,,

शैलेश आज छुट्टी है , और छुट्टी को मैं आराम करती हूं ,भला ऐसे अकेले कहीं घूमने जा सकते !

मतलब मैडम जी अभी बिस्तर पर ही है जी हां पर आपको कैसे पता

आप भूल रही है कि मेरे पास दो मन की आंखें भी है , जिससे मैं आपको देख लेता हूं ,,,,

अच्छा जी मन की आंखें तो बड़ी स्ट्रांग है आपकी , अच्छा और बताइए मैं क्या कर रही हूं

आप चाय का वेट कर रही है, कि आपका मेड आकर आपको अदरक वाली चाय पिलाये,,,,

यह भी सही है ,इससे आगे ,,,

इससे आगे , कि चाय पीने के बाद भी आप और सोना चाहेंगी,,,,

इस तरह बातें करते हुए करीब एक घंटा गुजर गया था , डॉली और पूनम अपना मुंह दबा कर हंस रही थी ।

क्योंकि बस कुछ ही मिनट बाद वह राजनी के कैंपस में पहुंचने वाले थे ।

और इसलिए शैलेश ने जानबूझ कर उसे बातों में लगाया हुआ था ।

जिस से बातें करते हुए उसके घर के बाहर तक आ जाए ।

जब कैंपस के बाहर पहुंचे , चौकीदार ने इंट्रोडक्शन देने के लिए कहा ,,,,

तो डॉली ने धीरे से राजनी का नाम लेते हुए अपना परिचय दिया ,,,

राजनी का नाम सुनकर चौकीदार खुश हो गया ,,,,

अच्छा तो आप राजनी मैडम की मां है आपका स्वागत है हमारे सोनितपुर में और मुस्कुराते हुए दरवाजा खोल दिया। शैलेश अभी भी अपनी बातों में व्यस्त था जब वह दरवाजे पर आ गया , और वहां पर

लगी हुई नेम प्लेट पर राजनी का नाम देखा ,,,

डॉ राजनी ,,,उसने आसपास नजर डालते हुए कहा,,,,,

अच्छा यह बताओ राजनी!

तुम्हारे घर के बाहर एक बड़ा सा गुलमोहर का पेड़ है , जिस पर लाल रंग के फूल आते हैं

हां वो तो है ,पर,, पर,,, तुम्हें कैसे पता

अरे मैडम जी मैंने कहा ना मेरे पास दो मन की आंखें है ।

अच्छा तुम्हारी नेम प्लेट ब्लैक है

और उस पर गोल्डन लेटर्स से लिखा हुआ है ,,,

मिस राजनी ,,,,

हां वह भी है

और तुम्हारे घर की बाहरी दीवारे क्रीम है घर के बाहर छोटा सा गार्डन ,,,

और उसमें दो कैनवास की कुर्सियां पढ़ी हुई है । जिस पर बैठकर शायद तुम सुबह की चाय पीती हो

शैलेश ने धीरे से विन्डचैप को हिलाया,,,

तो उसकी मधुर ध्वनी राजनी के कानों तक गई ,,,,

अब तो राजनी विलिव ही नहीं कर पा रही थी ।

कि शैलेश उसे ये सब बता कैसे रहा है। उसने रजाई हटाते हुए स्लीपर को पैरों में डाला ,,,और जल्दी से उठ कर दरवाजा खोल कर बाहर आई,,,,

वह यकीन ही नहीं कर पा रही थी, कि सपना देख रही है, या फिर सच में शैलेश के साथ पूनम आंटी और

मॉम उसके सामने खड़ी है ।

उसने कान से मोबाइल लगाया हुआ था और एक एकटक शैलेश को देखे जा रही थी।,,,,तब तक डॉली भी आगे आकर मुस्कुरा उठी , राजनी तड़पकर डॉली के गले लग गई ।

ओ,,,,,,मॉम,,, इतना बड़ा सरप्राइज़ आप तीनों यहां

वो भी मुझे बिना बताए

पूनम आंटी आप भी,,,,

वह पूनम के गले भी लग गई ।

तभी शैलेश ने मुस्कुराते हुए अपनी बाहें भी फैला दीं।

अब तक राजनी की आंखें भीग चुकी थी ,डॉली और पूनम राजनी के करीब ही खड़ी थी ।

और उसके गालों पर सहलाते हुए उसे समझा रही थी।

राजनी बेटा,,, हम तुम्हारे पास आ गए तब भी तुम रो रही हो ।

मैं विलिव ही नहीं कर पा रही हूं ।

लेकिन अब विलिव कर लो ,क्योंकि हम सब यहां धूमधाम से तुम्हारा बर्थडे सेलिब्रेट करने आए हैं ।

और उसकी तैयारी हमें आज से ही करनी है । कल हम सब अच्छे से तुम्हारा बर्थडे इंजॉय करेंगे ।

मॉम मैं तो सोच रही थी, कि इस बार मुझे अकेले अपना बर्थडे मनाना पड़ेगा।

तब तक शैलेश ने एक बार मुस्कुराते हुए फिर कहा,,,,, राजनी तुम चीटिंग कर रही हो । मैं इतनी दूर से आया हूं ।

तुमने मॉम और आंटी को कितने प्यार से हग दिया ,,,,

और मेरा क्या

शैलेश तुम चुप रहो!

आंटी अंदर चलिए,,,,,

राजनी मुस्कुराते हुए सब को अंदर ले आई ।

लेकिन शैलेश को तो सब भी अपने हग का इंतजार था ।

शैलेश राजनी को मुस्कुराते हुए देख रहा था ।
 
पूनम ने राजनी के करीब आते हुए कहा राजनी बेटा शैलेश ने मुझे सब कुछ बता दिया है । तुम्हारी कोई भी बात हमसे छुपी नहीं है ।

और हम चाहते हैं , कि तुम्हारे बर्थडे के साथ ही तुम्हारी इंगेजमेंट का अनाउंसमेंट भी कर देना चाहिए ।

इस बार राजनी ने कोई ना नुकुर नही की थी ।

वह शर्मा के मुस्कुरा उठी ।

जी आँटी,,, और मॉम आप दोनों को जैसा ठीक लगे , मुझे कोई एतराज नहीं है ।

मॉम आप दोनो फ्रेश हो जाइए, मैं आपके लिए चाय बनाती हूं ।

वह भी अदरक वाली ।

अच्छा फिर चलो मैं भी चाय बनाने मैं तुम्हारी हेल्प करता हूं ।

नहीं मुझे आपकी हेल्प की जरूरत नहीं है ।

ठीक है ,पर कम से कम अपना किचिन तो दिखा सकती हो

पूनम समझ रही थी ,कि पूरे 10 महीने बाद शैलेश

राजनी से मिल रहा है ।

उन्होंने स्पेस देते हुए कहा,,,,

राजनी बेटा शैलेश की हेल्प ले लो ।

उसे भी काम करने की आदत डलनी चाहिए ना ।

तब तक हम लोग जाकर फ्रेश हो जाते हैं ।

डॉली और पूनम आंगन की तरफ चली गई । और शैलेश राजनी के साथ किचन में ।

जैसे ही वह किचन में आये,,,,

शैलेश ने राजनी को अपने गले लगा लिया । और उसकी आंखों में देखते हुए कहा !

राजनी तुम जानती हो ,मेरे ये 10 महीने कैसे कटे हैं ।

मैंने तुम्हें बहुत मिस किया है ,लेकिन अब तुमसे और दूर नहीं रह सकता। इसलिए पूरे 8 दिन की छुट्टी लेकर तुम्हारे पास आ गया ।

क्या ,,,,8 दिन ,,शैलेश रैयली आई एम सो हैप्पी ,,,,,कि 8 दिन तक मुझे तुम्हारा मॉम का और आंटी का साथ मिलेगा ।

पूरे 10 महीने से मैं कितना तरस गई हूं तुम सब के लिए ।

और राजनी ने डॉली और पूनम की तरह शैलेश को भी हग कर लिया था।

चाय पीते हुये ,,,सभी दूसरे दिन की तैयारियों में लग गए थे ।

डॉली ने राजनी से बात करके कल की कुछ प्लानिंग कर ली थी ।

राजनी ने बताया ,और डॉली भी पहले से जानती

थी ,कि राजनी के यहां पर सभी से काफी अच्छे रिलेशन है ।

और सभी फैमिली की तरह ही रहते हैं।

तो उन्हीं 15,,,20 फैमिली को बर्थडे के लिए इनवाइट भी कर दिया गया था।

राजनी के कहने पर उन्हीं लोगों ने बाहर गार्डन में सबके खाने पीने का इंतजाम भी करवा दिया था ।

जिसमें एक छोटा सा टेंट था, उसी के अंदर एक हलवाई से बात करते हुये क्रोकरी सहित खाने का इंतजाम अच्छी तरह से हो गया था।

वहाँ सबके सामने ही शैलेश और राजनी की इंगेजमेंट का अनाउंसमेंट करने वाले थे ।

यानी कि इनके रिश्ते को दुनिया के सामने बताना चाहते थे ।

दूसरे दिन सुबह राजनी हॉस्पिटल चली गई ,क्योंकि उसे कुछ जरूरी पेशेंट देखने थे।

लेकर शाम को वह जल्दी ही आ गई थी जब आकर देखा ,तो कैंपस का नजारा ही अलग था।

बहुत ही खूबसूरत सा छोटा सा टेंट उसको पिंक और वाइट बैलून से सजाया गया था ।

उसके अंदर अच्छे अच्छे खाने की खुशबू दौड़ रही थी । यही कोई 8,10 लोग थे जो खाने बनाने का ,उसको टेबल पर लगाने का ,और वहां के साज सजावट का काम देख रहे थे ।

डॉली पूनम भी तैयार हो चुकी थी ।

और शैलेश भी।

बस राजनी का इंतजार था, कि वह आकर तैयार हो ,तो सभी बाहर आ जाये पहाड़ी इलाकों में रात जल्दी ही हो जाती थी ।

तो डिनर का टाइम भी 800 बजे का रखा गया था ।

900 बजे तक सारा प्रोग्राम खत्म हो जाता । अभी 500 बजे थे ,और 600 बजे तक सबको बाहर आना था ।

राजनी ने जल्दी से हाथ मुँह धोये, और अपना कवर्ड खोल कर देखने लगी।

मॉम मैं क्या पहनू

मेरे पास तो कोई ढंग की ड्रेस भी नहीं है और ना ही मुझे पहले से पता था ।

ऐसा कुछ होने वाला है,,,

राजनी तुझे वह सब देखने की जरूरत नहीं है । तेरी ड्रेस ये रही ,,,,

जब पीछे मुड़कर देखा ,तो डॉली के हाथ में बहुत ही खूबसूरत सा वाइट गाउन था राजनी ने झट से उसे अपने हाथ में लेते हुए कहा,,,,,WOW

मॉम सो ब्यूटीफुल ,,,

कितना सुंदर है ,,मुझे बहुत पसंद आया हां राजनी ,,,ये सचमुच बहुत ही खूबसूरत है,,,पर ये मेरी पसंद नहीं ,इसके लिए तुम शैलेश को थैंक यू बोलो शैलेश ही इसे लेकर आया है तुम्हारे लिए।

अच्छा तो मिस्टर चिपकू की पसंद भी इतनी अच्छी हो सकती है ।

आई कांट बिलीव ,,,,,

लेकिन मैडम जी अब विलिव करना सीख लीजिए ।

क्योंकि यह मेरी ही पसंद है ,और मैं खुद अकेले जाकर इसको लेकर आया हूं। बहुत सुंदर है,,,

मैं इसे अभी पहन कर आती हूं ।

जब राजनी कमरे से बाहर आई तो परियों की महारानी से कम नहीं लग रही थी ।

वाइट गाउन कंधे तक करली हेयर, और हल्का सा मेकअप ।

शैलेश तो उस पर से नजर ही नहीं हटा पा रहा था ।

उसे देखा तो बस देखता ही रह गया।

एक तरफ वो पढ़ाकू लड़की ,जिसकी आंखों पर हमेशा चश्मा चढ़ा रहता था। और उसके आसपास आगे पीछे किताबें ही किताबें रहती थी ।

लेकिन आज

आज वह अपने सुपर मॉडल भाई की बहन लग रही थी ।

उतनी ही खूबसूरत ,,,,,

मॉम ,,,आँटी,,, कैसी लग रही हूं

यह भी कोई पूछने वाली बात है।

तब तक पूनम ने आते हुए राजनी की

बलाएँ ले लीं।

बहुत खूबसूरत लग रही है ,,,

डॉली इसे काला टीका लगा दो ।

तैयार होकर सभी बाहर आ चुके थे।

जब कैम्प्स में सभी ने देखा कि राजनी बाहर आ चुकी है ।

तो कुछ ही देर में सभी लोग टेंट के नीचे आ गए थे ।

राजनी ने केक काटा, सबको केक खिलाया,,,, और उसके बाद पूनम ने डॉली को इशारा किया ,,,

कि वह शैलेश राजनी के बारे में सब को बता दे।

लेकिन डॉली ने पूनम से ही यह सब बताने के लिए कहा ।

पूनम ने ऊंची आवाज से बोलते हुए कहा सुनो,, सुनो,,, सुनो ,,,आपकी डॉ राजनी अब मेरे बेटे डॉ शैलेश की धर्म पत्नी बनने वाली है ।

मेरा मतलब कि कुछ समय बाद,,, हालांकि अभी डेट फिक्स नहीं है ।

पर जैसे ही दोनों को अपनी जॉब से टाइम मिलता है ,हम इन दोनों की सगाई और उसके बाद शादी कर देंगे ।

शैलेश का हाथ पकड़ते हुए राजनी के बगल में खड़ा कर दिया था ।

यह सुनकर जोरों से तालियां बजने लगी सभी बहुत खुश थे ,अपनी डॉ राजनी के लिए ।

यानी कि इनका रिश्ता सबके सामने आ चुका था।

उसके बाद सब ने तेज म्यूजिक पर डांस किया ,केक खाया, राजनी को बधाइयां दी ,फिर सबने एक साथ डिनर किया। पार्टी 1000 की जगह 11,,,12 बजे तक चली ।

कोई अंदर जाने को तैयार ही नहीं था। अपनी राजनी के लिए सब इतने खुश जो थे।
 
पार्टी खत्म हुई,,,और जैसे तैसे सभी लोग अंदर

गए ,,,,तो कल की प्लानिंग करने लगे ।

राजनी को तो हॉस्पिटल जाना ही था। तो उसने कह दिया था।

कि मॉम आप तीनों कल आस-पास ही कहीं हो आईये ।

क्योंकि मैं जा चुकी हूं ।

2 दिनों बाद मुझे छुट्टी मिल जाएगी। उसके बाद मैं भी आपके साथ चलूंगी। शैलेश ने अपनी राय दी ,यह भी ठीक रहेगा ,,,राजनी कल अपनी ड्यूटी कर लेगी ,और आसपास की कुछ जगह, मैं आपको और आंटी को दिखा दूंगा ।

और तय हो गया ,,कि राजनी के ऑफिस निकलने के साथ ही,हम भी यहाँ से निकल लेंगे,,, आसपास की जगह भी घूम आएंगे ।

रात को ही टैक्सी भी बुक कर दी गई थी काफी देर हो गई थी ,इसलिए कमरे में जाकर ही सभी लोग जल्दी सो गए,,,,,

दूसरे दिन सुबह 1000 बजे तक राजनी हॉस्पिटल निकल गई थी ।

और शैलेश,,,,, डॉली और पूनम को लेकर आसपास चाय के बागान देखने के लिए ।

सोनितपुर के आसपास तो सबसे प्रसिद्ध तेजपुर के चाय बागान ही थे।

जहां पर हर तरह की चाय उगाई जाती है ।

और बस तो ढाई घंटे की दूरी थी ,तो निलेश ने ड्राइवर

को वही चलने के लिए कहा ।

2 घंटे बाद ही, टैक्सी तेजपुर बागान मैं पहुंच गई थी।

सभी टैक्सी से नीचे आ चुके थे ,और शैलेश ने टैक्सी वाले को अपना नंबर देते हुए कहा ,,,,की वो जैसे ही बागान देखकर फ्री होते हैं ,कि उसे कॉल कर देगे।

क्योंकि वो जहां आए थे ,यहां पर टैक्सी खड़ी नहीं कर सकते थे ।

यह बहुत ही सकरी रोड थी।

तो उसको वापस जाकर टैक्सी स्टैंड में ही टैक्सी खड़ी करनी थी ।

और तीनों चाय बागानों के बीच पहुंच चुके थे ।

अभी दोपहर के 1200 बज चुके थे। लेकिन यहां का मौसम इतना खूबसूरत था ,पता हीं नहीं चलता ,दोपहर है या शाम

अभी भी टेंपरेचर यही कोई 15 या 16 डिग्री के आसपास था।

हल्की हल्की धूप ,और ठंडी बहती हवा 1 स्वेटर या शॉल की जरूरत तो यहां पर हमेशा रहती है ।

इधर राज पूरी तरह से बागान के काम में व्यस्त था ।

आज पौधों में पानी दिया जा रहा था। जिसमें बहुत ध्यान रखना पड़ता है।

बैठ बैठ कर नीचे से चैक करना पड़ता है कि सभी पौधों में पानी बराबर जा रहा है कि नहीं ।

बच्चों के एग्जाम शुरु हो गए थे ,तो काम्या ने दोपहर के खाने का डब्बा राज को सुबह ही दे दिया था ।

क्योंकि वह बच्चों की पढ़ाई में व्यस्त थी शैलेश ,,राजनी,,, और पूनम को घूमते हुए पूरा एक घंटा हो गया था।

लेकिन ऐसे लग रहा था ,जैसे कि अभी अभी यहां आए हो ।

हर चीज कितनी खूबसूरत है यहां पर! डॉली तो जैसे बागानों के अंदर खिची चली जा रही थी ।

छोटी जगह थी ,,सीधे साधे लोग थे।

तो शैलेश ने आराम से पूनम और डॉली को चाय बागान देखने के लिए कह दिया था ।

कि जब आप लोग अच्छी तरह से देख लो ,,,तो यह जो ऊंचा पेड़ दिख रहा है। जिस पर बड़ी सी घंटी लगी है ।

बस इसी के पास आ जाना ,,,

2,,, 3 घंटे बाद हम यही मिल जाएंगे।

यह भी ठीक था ,,,तो सब इत्मीनान से अपनी-अपनी तरह से चाय बागान देखने लगे थे ।

करीब 100 बजे राज के फोन पर काम्या का फोन आया ।

राज मुझे आपसे बस इतना कहना है

कि आप खाना खा लीजिए।

जहाँ तक मुझे पता है ,जब तक मैं याद नहीं दिलाऊँगी,,, आप डब्बे को हाथ भी नहीं लगाएंगे ।

काम्या ! बस बागान का एक कोना ही बचा है ,पानी देने के लिए ।

अपन जैसे ही उसको कंप्लीट करता है। सबसे पहले खाना खाएगा।

तुम चिंता मत करो ।

बच्चों की पढ़ाई पर ध्यान दो ।

अपन पक्का खा लेगा ,,,ठीक है इतना कहते हुए काम्या ने फोन रख दिया।

डॉली बागानों को देखते हुये काफी अंदर आ गई थी।

उसे खुद इस बात का एहसास नहीं हुआ कि कब वह चलते-चलते बागानों के बीच आ पहुंची है।

हालांकि फोन उसके पास ही था ।

कि अगर कोई एक दूसरे को नहीं देख पा रहा,,, तो फोन करके पास आ जाएंगे।

राज पौधों में पानी देने में मस्त था । बागन के बीच में रखा हुआ उसका सामान ,,जिसमें खाने का डब्बा ,एक चटाई ,,और वही पड़ा उसका फोन,,, राज का फोन दोबारा आने लगा था। काम्या का ही फोन था ,लेकिन ,राज

वहाँ से थोड़ी दूरी पर था ।

तो फोन की आवाज उसके कानों तक नहीं पहुंच रही थी ।

फोन लगातार बज रहा था ।

लेकिन हां थोड़ी ही दूर पर डॉली के कानों तक राज के फोन की आवाज़ पहुंच चुकी थी ।

फोन जमीन पर था ,,डॉली को आस पास कोई दिख तो नहीं रहा था।

पर फोन की लगातार जा रही घण्टी को वह अच्छे से

सुन पा रही थी।

वो धीरे धीरे उस घण्टी की आवाज़ की तरफ बढ़ने लगी,,,,,,,,,,,
 

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