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Guest
पहाड़ी इलाकों के चलते नेटवर्क ठीक से काम नहीं कर रहा था ।
सारी बात सुनकर डॉली को भी यही लगा । कि जिसने तुम्हारे बेटे के लिए इतना बड़ा बलिदान दिया है ।
इतना बड़ा काम किया है।
हम उनके लिये इतना तो कर ही सकते है राज अगर एक मरते इंसान को हम खुशी दे पाते है।
तो इससे बड़ा पुण्य का काम हमारे लिए कुछ और हो ही नही सकता।
डॉली के कहने पर राज ने कुछ दिन यहाँ रुकने का निश्चय कर लिया था ।
स्थिति को देखते हुए और डॉली के कहने पर राज कुछ दिनों के लिए काम्या के घर पर रुक गया था ।
अपनी बेटी के परिवार को देखकर काम्या के बाबा बहुत खुश थे ।अपनी जिंदगी के आखिरी दिनों में ही सही ,पर कुछ वक्त के लिए उन्हें काफी खुशियां मिल गई थी।
धीरे धीरे काम्या के बाबा को यह भी पता चल गया था, कि वह दूसरी बार भी मां बनने वाली है ।और यह जानकर उनकी खुशी भी दुगनी हो गई थी ।
लेकिन अभी तक असल में काम्या के साथ क्या हुआ है, इस सच्चाई से वह वाकिफ नहीं थे ।
और अब उन्हें कुछ भी बताना कहीं से भी सही नहीं था ।
क्योंकि काम्या ने भी अपने आने के बाद डॉक्टर को बुला कर बाबा को दिखा दिया था,।
और उन्होंने कहा था ,यह भगवान के हाथ में है, कि वह इनकी सांसे कितनी देर ,या कितने दिनों तक और चलने देता है ।
यहां तक कि उन्हें सारी दवाइयां देना भी बंद कर दिया गया था ।
क्योंकि दवाइयों से उनकी हालत और ज्यादा बिगड़ सकती थी।
काम्या तो दुहरी जिंदगी जी रही थी। एक तरफ राजीव का इतना बड़ा दुख।
जिसे वह भुला ही नहीं पा रही थी।
और दूसरी तरफ चेहरे पर झूठी खुशी जो अपने बाबा को दिखा रही थी ।
इसके साथ ही दो बच्चों के साथ अपने आने वाले फ्यूचर की चिंता ।
काम्या की एजुकेशन भी कुछ खास नहीं थी । बस स्कूल पास किया था ।
उसके बाद आगे पढ़ ही नहीं पाई।
अब उसका सहारा उसके बाबा का एक छोटा सा घर ,और एक छोटा सा बागान ही था।
इसी में उसे अपनी और अपने बच्चों की पूरी जिंदगी काटनी थी ।
काम्या चारों तरफ चिंताओं से घिरी थी जबभी बाबा के सामने आती, तो उसके चेहरे पर एक झूठी मुस्कान होती ।
क्योंकि पिछले 6 सालों से बह उन्हें सिर्फ दुखी ही तो देती आई थी ।
और इस चीज का उसको बहुत पछतावा था । जिंदगी ने उसके साथ जो किया, वह बता कर वह अपने बाबा को और दुखी नहीं करना चाहती थी।
अभी तक राज के बारे में भी खान चाचू के अलावा ,किसी औऱ को कुछ भी पता नहीं था ।
काम्य ने सोच लिया था, कि जब तक उसके बाबा जिंदा है।
वह इस बात को राज रखेगी, लेकिन उसके बाद सारी सच्चाई बता कर राज को यहां से वापस भेज देगी ।
फिर
फिर ,,,चाहे उसके लिए ,उसे किसी से भी क्यों ना लड़ना पड़े ।
आखिर उसकी अपनी जिंदगी थी ,उसके अपने फैसले थे ,और इन सब के बीच में बोलने का हक किसी को भी नहीं है ।
यही सोचते हुए दिन निकलते जा रहे थे। सौम्या इन 10,,,15 दिनों में राज से काफी घुलमिल गई थी ।
उसको इतने दिनों से अपने डैड का इंतजार जो था, और एक मासूम सी बच्ची का निश्चल प्रेम देखकर, राज भी उसके काफी करीब आ गया था ।
धीरे-धीरे काम्या के बाबा भी राज को बहुत पसंद करने लगे थे ।
उसकी ईमानदारी और सज्जनता को देखकर वह राज से बहुत प्रभावित हुए थे ।
आज सुबह से ही मौसम काफी अच्छा था ,काम्या के
बाबा भी रोज से कुछ ज्यादा ही एक्टिव और खुश लग रहे थे। अपने आप बिस्तर पर बैठते हुए उन्होंने काम्या को आवाज लगाई ,,,,
बेटा आज बहुत अच्छा दिन है ,,,,
बाबा क्यों क्या है आज
काम्या ने सवाल किया - बेटा यह तो पता नहीं क्या है ,लेकिन हां आज मैं बहुत खुश हूं ।
मेरा मन बहुत अच्छा है - तुझे तेरे परिवार के साथ खुश देख लिया है ।
अब मैं आराम से अपनी आंखें बंद कर पाऊंगा ।
तभी राज भी अंदर आया, और उन्होंने राज को बुलाकर अपने पास बिठाते हुए उसकी आंखों में देख कर कहा - बेटा मुझे फक्र है अपनी बेटी की पसंद पर अगर मुझे पहले पता होता ,कि तुम्हारे जैसा दामाद मेरी बेटी ने ढूंढा है ।
तो शायद मैं कभी इतने दिनों तुमसे दूर नहीं रह पाता ,,,,,
बेटा आज मुझे तुमसे बहुत कुछ कहना है पता नहीं क्यों ,मुझे ऐसा लग रहा है
जैसे मेरे पास वक्त बहुत कम है।
मेरे बाद काम्या का कोई भी नहीं है
ना कोई रिश्तेदार ,न हीं उसका कोई भाई बहन ,,उसकी मां तो बचपन में ही उसे छोड़कर चली गई थी ।
और शायद बहुत जल्द मैं भी उसके पास पहुंच जाऊंगा ।
एक तुम ही हो मेरी काम्या का ध्यान रखने के लिए ।
मैं जानता हूं, कि इतने सालों तुमने मेरी काम्या को बहुत खुश रखा है ।
और मुझसे बादा करो, कि इसी तरह आगे भी उसका ध्यान रखोगे ।
अचानक बाबा के मुंह से इस तरह की बातें सुनकर राज देखता ही रह गया। तब तक काम्या ने बात को बदलते हुए कहा- - बाबा आप इस तरह क्यों बोल रहे हैं
कुछ नहीं होगा आपको!
आप बिल्कुल ठीक हो जाएंगे -अब खाना खाकर दवाइयां खाइए ।
यह सब फालतू की बाते मत कीजिए
नहीं काम्या मुझे अपने दामाद से बातें कर लेने दो ।
पता नहीं किस वक्त मेरी सांसे रुक जाए और मेरे मन की बात मन में ही रह जाए। बेटा में नही जानता तुम्हारे घर वाले कौन है ,कहां है ,कैसे हैं,
लेकिन मैं चाहूंगा ,एक बार तुम दोनों जाकर उन्हें मना लो ,बड़े कुछ दिनों अपने बच्चो से नाराज तो रह सकते हैं लेकिन हमेशा के लिए उनसे दूर नहीं हो सकते।
जब खून की बात आती है तो अच्छे-अच्छे पत्थरों के दिल भी पिघल जाते हैं ।
अपना खून सबको प्यारा होता है ,और मुझे पूरा विश्वास है ,कि आपके माता-पिता भी आपको और मेरी काम्या को अपनी बहू के रूप में अपना लेंगे।
एक बार अगर काम्या को अपने घर ले जाओगे ।
तो वह बहुत जल्दी सबका मन जीत लेगी कोशिश
करने के बाद भी, वह अपनी बात कहते ही जा रहे थे ।
लेकिन बात करते हुए ही उनकी सांस भरने लगी,,,, शब्द लड़खड़ाने लगे ,और ऐसे लग रहा था ,जैसे बहुत कोशिश करने के बाद वह कुछ बोल पा रहे हो। उनकी सांसे तेज तेज चलने लगी थी उन्होंने राज का हाथ अपने हाथ में लिया ,और आंखों में देखकर कहने लगे ।
मुझे वचन दो ,मेरी काम्या का हमेशा ध्यान रखोगे ।
मुझसे वादा करो ,,,,,,
अभी तक आसपास के लोग घर के अंदर आ गए थे ।
ऐसे लग रहा था, जैसे कि राज के उत्तर का इंतजार कर रहे हैं ।
उनकी उल्टी सांसे शुरू हो गई थी ,लेकिन राज काम्या को देखता ,और कभी बाबा को ।
उसे खुद समझ नहीं आ रहा था ,वह क्या कहें ।
आसपास खड़े लोग,, राज के कंधे पर हाथ रख कर ,उसे समझाने लगे ।
बेटा लगता है इनकी सांसें तुम्हारे बोलने का इंतजार कर रही है ।
और कष्ट मत दो ,,तुम उन्हें दिलासा दे दो काम्या की तरफ से निश्चिंत हो जाएंगे।
तो आसानी से उनके प्राण निकल पाएंगे वह काम्या के हाथ को और कसके पकड़ते जा रहे थे ।
बेटे मेरी काम्या का ध्यान रखोगे ना
अगर तुम्हारे बाबा तुम्हें ना भी अपनाये तो तुम दोनों यहीं रह कर अपनी दुनिया बसा लेना ।
राज के सामने स्थिति ऐसी थी,, कुछ ना कुछ तो उसे बाबा से कहना ही था ।
उसने बहुत हिम्मत करते हुए कहा --बाबा मैं आपसे वादा करता हूं ,,,,
की काम्या की जिम्मेदारी मैं लेता हूं !
मैं काम्या और बच्चों की सुरक्षा का हमेशा ख्याल रखूंगा!
मैं ख्याल रखूंगा ,कि उन तीनों का भविष्य सुरक्षित कर पाऊं !
राज के मुंह से ऐसी बात सुनी तो कुछ ही पलों में उनकी आंखें बंद हो गई थी। काम्या एक बार फिर से फबक पड़ी थी
अब उसके ऊपर कोई भी नहीं था ।
सारी बात सुनकर डॉली को भी यही लगा । कि जिसने तुम्हारे बेटे के लिए इतना बड़ा बलिदान दिया है ।
इतना बड़ा काम किया है।
हम उनके लिये इतना तो कर ही सकते है राज अगर एक मरते इंसान को हम खुशी दे पाते है।
तो इससे बड़ा पुण्य का काम हमारे लिए कुछ और हो ही नही सकता।
डॉली के कहने पर राज ने कुछ दिन यहाँ रुकने का निश्चय कर लिया था ।
स्थिति को देखते हुए और डॉली के कहने पर राज कुछ दिनों के लिए काम्या के घर पर रुक गया था ।
अपनी बेटी के परिवार को देखकर काम्या के बाबा बहुत खुश थे ।अपनी जिंदगी के आखिरी दिनों में ही सही ,पर कुछ वक्त के लिए उन्हें काफी खुशियां मिल गई थी।
धीरे धीरे काम्या के बाबा को यह भी पता चल गया था, कि वह दूसरी बार भी मां बनने वाली है ।और यह जानकर उनकी खुशी भी दुगनी हो गई थी ।
लेकिन अभी तक असल में काम्या के साथ क्या हुआ है, इस सच्चाई से वह वाकिफ नहीं थे ।
और अब उन्हें कुछ भी बताना कहीं से भी सही नहीं था ।
क्योंकि काम्या ने भी अपने आने के बाद डॉक्टर को बुला कर बाबा को दिखा दिया था,।
और उन्होंने कहा था ,यह भगवान के हाथ में है, कि वह इनकी सांसे कितनी देर ,या कितने दिनों तक और चलने देता है ।
यहां तक कि उन्हें सारी दवाइयां देना भी बंद कर दिया गया था ।
क्योंकि दवाइयों से उनकी हालत और ज्यादा बिगड़ सकती थी।
काम्या तो दुहरी जिंदगी जी रही थी। एक तरफ राजीव का इतना बड़ा दुख।
जिसे वह भुला ही नहीं पा रही थी।
और दूसरी तरफ चेहरे पर झूठी खुशी जो अपने बाबा को दिखा रही थी ।
इसके साथ ही दो बच्चों के साथ अपने आने वाले फ्यूचर की चिंता ।
काम्या की एजुकेशन भी कुछ खास नहीं थी । बस स्कूल पास किया था ।
उसके बाद आगे पढ़ ही नहीं पाई।
अब उसका सहारा उसके बाबा का एक छोटा सा घर ,और एक छोटा सा बागान ही था।
इसी में उसे अपनी और अपने बच्चों की पूरी जिंदगी काटनी थी ।
काम्या चारों तरफ चिंताओं से घिरी थी जबभी बाबा के सामने आती, तो उसके चेहरे पर एक झूठी मुस्कान होती ।
क्योंकि पिछले 6 सालों से बह उन्हें सिर्फ दुखी ही तो देती आई थी ।
और इस चीज का उसको बहुत पछतावा था । जिंदगी ने उसके साथ जो किया, वह बता कर वह अपने बाबा को और दुखी नहीं करना चाहती थी।
अभी तक राज के बारे में भी खान चाचू के अलावा ,किसी औऱ को कुछ भी पता नहीं था ।
काम्य ने सोच लिया था, कि जब तक उसके बाबा जिंदा है।
वह इस बात को राज रखेगी, लेकिन उसके बाद सारी सच्चाई बता कर राज को यहां से वापस भेज देगी ।
फिर
फिर ,,,चाहे उसके लिए ,उसे किसी से भी क्यों ना लड़ना पड़े ।
आखिर उसकी अपनी जिंदगी थी ,उसके अपने फैसले थे ,और इन सब के बीच में बोलने का हक किसी को भी नहीं है ।
यही सोचते हुए दिन निकलते जा रहे थे। सौम्या इन 10,,,15 दिनों में राज से काफी घुलमिल गई थी ।
उसको इतने दिनों से अपने डैड का इंतजार जो था, और एक मासूम सी बच्ची का निश्चल प्रेम देखकर, राज भी उसके काफी करीब आ गया था ।
धीरे-धीरे काम्या के बाबा भी राज को बहुत पसंद करने लगे थे ।
उसकी ईमानदारी और सज्जनता को देखकर वह राज से बहुत प्रभावित हुए थे ।
आज सुबह से ही मौसम काफी अच्छा था ,काम्या के
बाबा भी रोज से कुछ ज्यादा ही एक्टिव और खुश लग रहे थे। अपने आप बिस्तर पर बैठते हुए उन्होंने काम्या को आवाज लगाई ,,,,
बेटा आज बहुत अच्छा दिन है ,,,,
बाबा क्यों क्या है आज
काम्या ने सवाल किया - बेटा यह तो पता नहीं क्या है ,लेकिन हां आज मैं बहुत खुश हूं ।
मेरा मन बहुत अच्छा है - तुझे तेरे परिवार के साथ खुश देख लिया है ।
अब मैं आराम से अपनी आंखें बंद कर पाऊंगा ।
तभी राज भी अंदर आया, और उन्होंने राज को बुलाकर अपने पास बिठाते हुए उसकी आंखों में देख कर कहा - बेटा मुझे फक्र है अपनी बेटी की पसंद पर अगर मुझे पहले पता होता ,कि तुम्हारे जैसा दामाद मेरी बेटी ने ढूंढा है ।
तो शायद मैं कभी इतने दिनों तुमसे दूर नहीं रह पाता ,,,,,
बेटा आज मुझे तुमसे बहुत कुछ कहना है पता नहीं क्यों ,मुझे ऐसा लग रहा है
जैसे मेरे पास वक्त बहुत कम है।
मेरे बाद काम्या का कोई भी नहीं है
ना कोई रिश्तेदार ,न हीं उसका कोई भाई बहन ,,उसकी मां तो बचपन में ही उसे छोड़कर चली गई थी ।
और शायद बहुत जल्द मैं भी उसके पास पहुंच जाऊंगा ।
एक तुम ही हो मेरी काम्या का ध्यान रखने के लिए ।
मैं जानता हूं, कि इतने सालों तुमने मेरी काम्या को बहुत खुश रखा है ।
और मुझसे बादा करो, कि इसी तरह आगे भी उसका ध्यान रखोगे ।
अचानक बाबा के मुंह से इस तरह की बातें सुनकर राज देखता ही रह गया। तब तक काम्या ने बात को बदलते हुए कहा- - बाबा आप इस तरह क्यों बोल रहे हैं
कुछ नहीं होगा आपको!
आप बिल्कुल ठीक हो जाएंगे -अब खाना खाकर दवाइयां खाइए ।
यह सब फालतू की बाते मत कीजिए
नहीं काम्या मुझे अपने दामाद से बातें कर लेने दो ।
पता नहीं किस वक्त मेरी सांसे रुक जाए और मेरे मन की बात मन में ही रह जाए। बेटा में नही जानता तुम्हारे घर वाले कौन है ,कहां है ,कैसे हैं,
लेकिन मैं चाहूंगा ,एक बार तुम दोनों जाकर उन्हें मना लो ,बड़े कुछ दिनों अपने बच्चो से नाराज तो रह सकते हैं लेकिन हमेशा के लिए उनसे दूर नहीं हो सकते।
जब खून की बात आती है तो अच्छे-अच्छे पत्थरों के दिल भी पिघल जाते हैं ।
अपना खून सबको प्यारा होता है ,और मुझे पूरा विश्वास है ,कि आपके माता-पिता भी आपको और मेरी काम्या को अपनी बहू के रूप में अपना लेंगे।
एक बार अगर काम्या को अपने घर ले जाओगे ।
तो वह बहुत जल्दी सबका मन जीत लेगी कोशिश
करने के बाद भी, वह अपनी बात कहते ही जा रहे थे ।
लेकिन बात करते हुए ही उनकी सांस भरने लगी,,,, शब्द लड़खड़ाने लगे ,और ऐसे लग रहा था ,जैसे बहुत कोशिश करने के बाद वह कुछ बोल पा रहे हो। उनकी सांसे तेज तेज चलने लगी थी उन्होंने राज का हाथ अपने हाथ में लिया ,और आंखों में देखकर कहने लगे ।
मुझे वचन दो ,मेरी काम्या का हमेशा ध्यान रखोगे ।
मुझसे वादा करो ,,,,,,
अभी तक आसपास के लोग घर के अंदर आ गए थे ।
ऐसे लग रहा था, जैसे कि राज के उत्तर का इंतजार कर रहे हैं ।
उनकी उल्टी सांसे शुरू हो गई थी ,लेकिन राज काम्या को देखता ,और कभी बाबा को ।
उसे खुद समझ नहीं आ रहा था ,वह क्या कहें ।
आसपास खड़े लोग,, राज के कंधे पर हाथ रख कर ,उसे समझाने लगे ।
बेटा लगता है इनकी सांसें तुम्हारे बोलने का इंतजार कर रही है ।
और कष्ट मत दो ,,तुम उन्हें दिलासा दे दो काम्या की तरफ से निश्चिंत हो जाएंगे।
तो आसानी से उनके प्राण निकल पाएंगे वह काम्या के हाथ को और कसके पकड़ते जा रहे थे ।
बेटे मेरी काम्या का ध्यान रखोगे ना
अगर तुम्हारे बाबा तुम्हें ना भी अपनाये तो तुम दोनों यहीं रह कर अपनी दुनिया बसा लेना ।
राज के सामने स्थिति ऐसी थी,, कुछ ना कुछ तो उसे बाबा से कहना ही था ।
उसने बहुत हिम्मत करते हुए कहा --बाबा मैं आपसे वादा करता हूं ,,,,
की काम्या की जिम्मेदारी मैं लेता हूं !
मैं काम्या और बच्चों की सुरक्षा का हमेशा ख्याल रखूंगा!
मैं ख्याल रखूंगा ,कि उन तीनों का भविष्य सुरक्षित कर पाऊं !
राज के मुंह से ऐसी बात सुनी तो कुछ ही पलों में उनकी आंखें बंद हो गई थी। काम्या एक बार फिर से फबक पड़ी थी
अब उसके ऊपर कोई भी नहीं था ।