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राजेश मुस्कराया-"बड़ी मां-मुझे टैक्सी का किराया नहीं चाहिए—मैं स्कूल तक इतनी तेज दौड़ लगाऊंगा कि एक दिन दौड़ के मुकाबलों में भी हिस्सा ले सकूगा।"
"बेटा ! मेरा आशीर्वाद तुम्हारे साथ है।" पारो ने प्यार से उसके सिर पर हाथ फेरा।
"बड़ी मां-आपका आशीग्रद ही हवाई जहाज के बराबर है।" और वह दौड़ता हुआ बाहर निकल आया।
कुछ देर बाद वह स्कूल का बैग संभाले बिजली की तेजी से सड़क पर दौड़ रहा था।
राजेश दौड़ता हुआ स्कूल जा रहा था। एक बस पास से गुजरी तो उसे किसी लड़की ने चिल्लाकर कहा-"अरे देखो...बस के साथ दौड़ रहा है।"
दूसरी ने हंसकर कहा-"पैसे बचा रहा होगा।"
एक और लड़की ने कहा-“पागल है टैक्सी के साथ दौड़ता तो ज्यादा पैसे बचते।"
बस में एक जोरदार ठहाका गूंजा।"
राजेश ने एक लटके हुए बैग पर झपट्टा मारा
और बैग उसके हाथ में आ गया और लड़की चिल्लाई-"मेरी किताबें ।'
"अब टैक्सी के साथ दौड़कर पहुंचा दूंगा।"
अचानक बस एक क्रासिंग पर रूक गई-वह लड़की सुनीता घबराई हुई जल्दी से नीचे उतर आई और बोली-"तुमने मेरी किताबों का बैग क्यों छीन लिया ?"
इतने में 'बस' चली गई और राजेश ने कहा
"लो...संभालो अपनी किताबें..अब तुम भी मेरे साथ दौड़ो...हम दोनों मिलकर टैक्सी का किराया बचा लेंगे।"
सुनीता ने कहा-"मैंने तुम्हारे बारे में यह थोड़े ही कहा था।"
"फिर किसने कहा था ?"
"वह लड़कियां तो चली गईं।"
"आई एम सॉरी।"
“मगर तुम क्यों इतनी तेज दौड़ रहे थे ?"
"स्कूल जाने के लिए।
"बस से नहीं गए ?"
"मेरे पास बस का किराया नहीं होता।"
-
-
"तो क्या रोज पैदल जाते हो ?"
।
"हां...वह भी दौड़कर।"
.
"ओ गॉड !"
"क्या है...मसल्स बनते हैं...तुम देख लेना..एक दिन मेरी बड़ी-बड़ी तस्वीरें छपेंगी...टेलीविजन में आएगा कि मैंने 100 मीटर रेस में मिलखा सिंह का रिकार्ड तोड़ दिया है।"
सुनीता हंसकर बोली-"तुम तो कमाल के आदमी हो।"
"इतना ही कमाल का कि आज दो पीरियड मिस न करने पड़े-अगर मैंने आपका बैग न छीना होता अब तक दोनों स्कूल में होते।"
"खैर, आपने कोई गलती नहीं की-जैसे को तैसा होना ही चाहिए।"
इतने में एक आवाज सुनाई दी-“ऐ सुनीता।"
सुनीता चौंक पड़ी-राजेश ने देखा दूर खड़ी एक फीएट में से कोई हाथ बाहर निकालकर चिल्ला रहा था।
राजेश ने कहा-"आपका नाम सुनीता है ?"
"जी हां।"
"बड़ा सुन्दर नाम है।
फिर आवाज आई-"ऐ सुनीता !"
।।
राजेश ने कहा-"यह कौन बदतमीज है ?"
सुनीता ने बुरा-सा मुंह बनाकर कहा-"यूं ही मेरे पीछे पड़ गया है।"
"तो इसे सजा मिलनी चाहिए।"
"मगर क्या सजा दूं ?"
"इसकी गाड़ी में स्कूल जाइए।"
"फिर तो वो मेरे मुंह लग जाएगा।"
"बाद में पीछा छुड़ा लीजिएगा...मैं भी लिफ्ट ले लूंगा।"
इतने में शक्ति पास आ गया और बोला-"सुनीता जी, क्या हुआ है ?"
राजेश ने कहा-"सुनीता जी...आपके भाई साहब क्या कह रहे हैं ?"
"अरे...खबरदार ! भाई होगा तू।"
सुनीता ने कहा-"भैया ! हमें स्कूल छोड़ दोगे।"
"हाय...तुम भी भइया कह रही हो।"
"तो क्या हुआ ?" राजेश ने कहा।
शक्ति ने पूछा-"आप कौन हैं ?"
"मेरे ब्वॉय फ्रेंड हैं। उत्तर सुनीता ने दिया ।
"हाट !" शक्ति उछल पड़ा-"मगर तुम तो मेरी मंगेतर हो।"
"मंगेतर होना अलग बात है और फ्रेंड होना अलग...अभी तो मैं फ्रेंड भी नहीं हुई-शादी की बात तो बरसों बार सोचूंगी।"
राजेश ने कहा-"अरे-फिर सोच लेना..बहुत वक्त है। इसी तू-तू मैं-मैं में स्कूल तो गया।"
"अरे ! यह तो मैं भूल ही गई थी। सुनीता ने कहा-“चलो ! दौड़ लगाते हैं। शायद समय पर पहुंच ही जाएं।"
शक्ति ने जल्दी से कहा-"नहीं नहीं...तुम लोग मेरी गाड़ी में लिफ्ट ले सकते हो।"
कुछ देर बाद वे लोग गाड़ी में थे और गाड़ी सड़क पर दौड़ रही थी । सुनीता और राजेश पिछली सीट पर और शक्ति ड्राइविंग सीट पर था लगभग पांच मिनट बाद एक जगह पर राजेश ने जल्दी से कहा-"बस, बस मेरा स्कूल आ गया।"
शक्ति ने जल्दी से बीच सड़क पर ही कार रोक दी-पीछे से एक कार ने टक्कर मारी और शक्ति की कार आगे सरक गई-शक्ति उतरकर पिछली कार वाले ड्राइवर से लड़ने लगा।
राजेश ने उतरकर कहा-"आपका स्कूल तो गया सुनीता जी.मैं तो पीरियड अटैंड कर लूं।" फिर राजेश अपने स्कूल की ओर दौड़ गया और सुनीता उतरकर एक बस स्टॉप पर जाकर लाइन में खड़ी हो गई।
राजेश स्कूल से निकला और पैदल ही चल पड़ा। अचानक पीछे से एक कार आकर रूकी जिसमें अगली सीट पर जगमोहन स्टेयरिंग संभाले बैठा था...उसके साथ दो लड़के और कुछ लड़कियां थीं-पिछली सीट भरी हुई थी। जगमोहन ने खुश होकर कहा
.
"अरे राजेश, तुम पैदल चल रहे हो।"
"नहीं यार ! हवाई जहाज से आ रहा था उसका पैट्रोल खत्म हो गया और हवाई जहाज कहीं रह गया-मुझे कूदकर नीचे आना पड़ा।"
"कहां है हवाई जहाज ?"
"वो..वो...रहा राजेश।
जगमोहन खिड़की से सिर निकालकर ऊपर देखने लगा तो सभी लड़के-लड़कियां हंसने लगे-राजेश भी हसने लगा। जगमोहन ने राजेश से पूछा-"ये लोग क्यों हंस रहे हैं ?"
"तेरा हवाई जहाज उड़ा रहे हैं।"
"मेरा हवाई जहाज।"
"तेरा मजाक-मजाक ही उड़ाया जाता है न।"
राजेश ने पूछा-"तेरे "फियेट छकड़े में यह सब कौन हैं ?"
"बेटा ! मेरा आशीर्वाद तुम्हारे साथ है।" पारो ने प्यार से उसके सिर पर हाथ फेरा।
"बड़ी मां-आपका आशीग्रद ही हवाई जहाज के बराबर है।" और वह दौड़ता हुआ बाहर निकल आया।
कुछ देर बाद वह स्कूल का बैग संभाले बिजली की तेजी से सड़क पर दौड़ रहा था।
राजेश दौड़ता हुआ स्कूल जा रहा था। एक बस पास से गुजरी तो उसे किसी लड़की ने चिल्लाकर कहा-"अरे देखो...बस के साथ दौड़ रहा है।"
दूसरी ने हंसकर कहा-"पैसे बचा रहा होगा।"
एक और लड़की ने कहा-“पागल है टैक्सी के साथ दौड़ता तो ज्यादा पैसे बचते।"
बस में एक जोरदार ठहाका गूंजा।"
राजेश ने एक लटके हुए बैग पर झपट्टा मारा
और बैग उसके हाथ में आ गया और लड़की चिल्लाई-"मेरी किताबें ।'
"अब टैक्सी के साथ दौड़कर पहुंचा दूंगा।"
अचानक बस एक क्रासिंग पर रूक गई-वह लड़की सुनीता घबराई हुई जल्दी से नीचे उतर आई और बोली-"तुमने मेरी किताबों का बैग क्यों छीन लिया ?"
इतने में 'बस' चली गई और राजेश ने कहा
"लो...संभालो अपनी किताबें..अब तुम भी मेरे साथ दौड़ो...हम दोनों मिलकर टैक्सी का किराया बचा लेंगे।"
सुनीता ने कहा-"मैंने तुम्हारे बारे में यह थोड़े ही कहा था।"
"फिर किसने कहा था ?"
"वह लड़कियां तो चली गईं।"
"आई एम सॉरी।"
“मगर तुम क्यों इतनी तेज दौड़ रहे थे ?"
"स्कूल जाने के लिए।
"बस से नहीं गए ?"
"मेरे पास बस का किराया नहीं होता।"
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"तो क्या रोज पैदल जाते हो ?"
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"हां...वह भी दौड़कर।"
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"ओ गॉड !"
"क्या है...मसल्स बनते हैं...तुम देख लेना..एक दिन मेरी बड़ी-बड़ी तस्वीरें छपेंगी...टेलीविजन में आएगा कि मैंने 100 मीटर रेस में मिलखा सिंह का रिकार्ड तोड़ दिया है।"
सुनीता हंसकर बोली-"तुम तो कमाल के आदमी हो।"
"इतना ही कमाल का कि आज दो पीरियड मिस न करने पड़े-अगर मैंने आपका बैग न छीना होता अब तक दोनों स्कूल में होते।"
"खैर, आपने कोई गलती नहीं की-जैसे को तैसा होना ही चाहिए।"
इतने में एक आवाज सुनाई दी-“ऐ सुनीता।"
सुनीता चौंक पड़ी-राजेश ने देखा दूर खड़ी एक फीएट में से कोई हाथ बाहर निकालकर चिल्ला रहा था।
राजेश ने कहा-"आपका नाम सुनीता है ?"
"जी हां।"
"बड़ा सुन्दर नाम है।
फिर आवाज आई-"ऐ सुनीता !"
।।
राजेश ने कहा-"यह कौन बदतमीज है ?"
सुनीता ने बुरा-सा मुंह बनाकर कहा-"यूं ही मेरे पीछे पड़ गया है।"
"तो इसे सजा मिलनी चाहिए।"
"मगर क्या सजा दूं ?"
"इसकी गाड़ी में स्कूल जाइए।"
"फिर तो वो मेरे मुंह लग जाएगा।"
"बाद में पीछा छुड़ा लीजिएगा...मैं भी लिफ्ट ले लूंगा।"
इतने में शक्ति पास आ गया और बोला-"सुनीता जी, क्या हुआ है ?"
राजेश ने कहा-"सुनीता जी...आपके भाई साहब क्या कह रहे हैं ?"
"अरे...खबरदार ! भाई होगा तू।"
सुनीता ने कहा-"भैया ! हमें स्कूल छोड़ दोगे।"
"हाय...तुम भी भइया कह रही हो।"
"तो क्या हुआ ?" राजेश ने कहा।
शक्ति ने पूछा-"आप कौन हैं ?"
"मेरे ब्वॉय फ्रेंड हैं। उत्तर सुनीता ने दिया ।
"हाट !" शक्ति उछल पड़ा-"मगर तुम तो मेरी मंगेतर हो।"
"मंगेतर होना अलग बात है और फ्रेंड होना अलग...अभी तो मैं फ्रेंड भी नहीं हुई-शादी की बात तो बरसों बार सोचूंगी।"
राजेश ने कहा-"अरे-फिर सोच लेना..बहुत वक्त है। इसी तू-तू मैं-मैं में स्कूल तो गया।"
"अरे ! यह तो मैं भूल ही गई थी। सुनीता ने कहा-“चलो ! दौड़ लगाते हैं। शायद समय पर पहुंच ही जाएं।"
शक्ति ने जल्दी से कहा-"नहीं नहीं...तुम लोग मेरी गाड़ी में लिफ्ट ले सकते हो।"
कुछ देर बाद वे लोग गाड़ी में थे और गाड़ी सड़क पर दौड़ रही थी । सुनीता और राजेश पिछली सीट पर और शक्ति ड्राइविंग सीट पर था लगभग पांच मिनट बाद एक जगह पर राजेश ने जल्दी से कहा-"बस, बस मेरा स्कूल आ गया।"
शक्ति ने जल्दी से बीच सड़क पर ही कार रोक दी-पीछे से एक कार ने टक्कर मारी और शक्ति की कार आगे सरक गई-शक्ति उतरकर पिछली कार वाले ड्राइवर से लड़ने लगा।
राजेश ने उतरकर कहा-"आपका स्कूल तो गया सुनीता जी.मैं तो पीरियड अटैंड कर लूं।" फिर राजेश अपने स्कूल की ओर दौड़ गया और सुनीता उतरकर एक बस स्टॉप पर जाकर लाइन में खड़ी हो गई।
राजेश स्कूल से निकला और पैदल ही चल पड़ा। अचानक पीछे से एक कार आकर रूकी जिसमें अगली सीट पर जगमोहन स्टेयरिंग संभाले बैठा था...उसके साथ दो लड़के और कुछ लड़कियां थीं-पिछली सीट भरी हुई थी। जगमोहन ने खुश होकर कहा
.
"अरे राजेश, तुम पैदल चल रहे हो।"
"नहीं यार ! हवाई जहाज से आ रहा था उसका पैट्रोल खत्म हो गया और हवाई जहाज कहीं रह गया-मुझे कूदकर नीचे आना पड़ा।"
"कहां है हवाई जहाज ?"
"वो..वो...रहा राजेश।
जगमोहन खिड़की से सिर निकालकर ऊपर देखने लगा तो सभी लड़के-लड़कियां हंसने लगे-राजेश भी हसने लगा। जगमोहन ने राजेश से पूछा-"ये लोग क्यों हंस रहे हैं ?"
"तेरा हवाई जहाज उड़ा रहे हैं।"
"मेरा हवाई जहाज।"
"तेरा मजाक-मजाक ही उड़ाया जाता है न।"
राजेश ने पूछा-"तेरे "फियेट छकड़े में यह सब कौन हैं ?"