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Vasna Story मिस्टर & मिसेस पटेल (माँ-बेटा:-एक सच्ची घटना)

नानाजी का दिया हुआ नया सूट पहनके में तैयार हो रहा था रूम में बस में अकेला था मिरर के सामने खड़े होकर खुदको देखते देखते शायद मेरे मन में एक डर महसुस होने लगा. मैं ज़िन्दगी का सब से बड़ा स्टेप लेने जा रहा हु. शादी करके एक नई ज़िन्दगी में प्रवेश करने जा रहा हु. हमें मालूम नहीं हमारे नसीब में आगे क्या लिखा है. मैं माँ से बहुत प्यार करता हु. वह भी मुझसे बहुत बहुत प्यार करती है यह मुझे मालूम है. अब हम पति पत्नी बनके ज़िन्दगी गुजर ने की कसम खाने जा रहे है. हम एक दूसरे को चाहते है. एक दूसारे के साथ जीना चाहते है. एक दूसरे को ज़िन्दगी की हर ख़ुशी देना चाहते है. नाना नानी भी ऐसे ही रिश्ते दिल से चाह के हम सब को खुश देखना चाहते है. मैं आँख बंध करके प्रे करने लगा. हमारी ज़िन्दगी में कोई रुकावट या कोई बाधा या कोई कस्ट न आये. हम एक साथ पूरी ज़िन्दगी ख़ुशी और शान्ति से जी पाये.
मै कॉटेज से निकल गया. नानाजी और दो चार लोग बाहर खड़े थे, उनके साथ में चलने लगा. मुझे मालूम था की माँ और नानी पहले से ही वहां चले गये. क्यूँ की रिंग और मेहँदी के लिए यह लोग दुल्हन को थोडा बहुत सजाने का प्लान सेट करके रखा है. मेरे अंदर माँ को उस्सी तरह सजी हुई देखने की चाहत पूरे बदन में दौड ने लगी. में किसीको उसकी भनक तक लगने नहीं दे रहा हु.
एक हॉल में यह सेरेमनी का आयोजन किया हुआ है. वहाँ पण्डितजी और कुछ लेडीज थी, इनमे से में हल्दी के टाइम भी कुछ कुछ फेस देखा था मैं जाकर वहां सोफे पे बैठा. एक फोटोग्राफर आकर मेरी फोटो क्लिक करने लगा. मैं थोड़ी बेचैनी फील करने लगा. नानाजीने मेरे हाथ के ऊपर अपना हाथ रखा तो मेंने उनको देखा. उनकी आँखों में एक आश्वासन का इशारा और सब कुछ ईजिली लेने का इशारा देख के में खुद को उस वातावरण के साथ मिलाने लगा. औरतें आपस में बात कर रही है. हस रही है. मैनेजर बीच बीच में नाना से बात कर रहा है. मैं बस सब कुछ देख रहा हु. और दुल्हन का यानि की माँ के आने का इंतज़ार करने लगा.
लेकिन यह इंतज़ार लम्बा होने से पहले ही कुछ औरतों के साथ माँ और नानीने हॉल में एंट्री लि. मैं माँ को देख के चौंक गया. क्या यह वहि लड़की है, जिस को में बचपन से देखते आरहा हु, जो मेरी माँ है, जिसको में जी जान से ज़ादा प्यार करते आरहा हु बचपन से!! थोडे मेकअप के साथ लेहेंगे और चोलीमें और कुछ हलकी ज्वेलरी में वह एकदम परी जैसे लगने लगी थी उनके बॉडी का हर कर्व परफेक्ट है. आज वह और भी सेक्सी लग रही है. लहेंगा पहन ने से उनका सेक्सी फ्लैट पेट् और नभि दिख रहा है. पहली बार उनका नाभि देखके मेरे अंदर सिरसिरानी सुरु हो गया. मेरी नज़र थोड़ी ऊपर होते ही उनका बूब्स पर अटक गयी. आज उनका वह दोनों सुडौल आकर क्लियर व्यू के साथ उनकी सुंदरता और बढा दिया. उनका चेहरा देखा तो वह नज़र झुका के , शर्म और लाज में लाल होकर मेरी तरफ बढ़ते आरही है. यहाँ किसीको मालूम न हो, लेकिन नाना नानी और मेरे सामने वह ज़ादा शर्मा गयी. क्यूँ की हमें ही केवल मालूम है हमारा रिश्ता , हमारी परिचय. हम एक रिश्ते से आज दूसरे एक नए रिश्ते में जुड़ने जा रहे है. मेरे अंदर एक एक्ससाइटटेमेंट तो था ही अंदर ही अंदर, और अब माँ को देख के मेरे मन में एक हलचल मचने लगी. मैं खुद को कण्ट्रोल करते ही जारहा हु केवल यह सोचके की बस और कुछ घंटों के बाद वह परी जैसी लडकि, मेरी बीवी बन के मेरी बन जाएगी.
मा आकर मेरे बगल में सोफे में बैठ गयी, नानी उनके पास बैठी गयी है. माँ अपनी नज़र एक दम झुकाके केवल खुद की गोद में रखे हुये हाथ के ऊपर टिकाके रखि, चारों तरफ एक बार भी नहीं देख रही है. मैं इतना सामने हु, तभी भी नहीं देख रही है, उनके होंठो पे जो मुस्कान है उससे पता चल रहा है वह इस रिश्ते को ख़ुशी ख़ुशी अपनाना चाहती है. बस यह मेहसुस करके मेरा मन उनके ऊपर प्यार से पिघल ने लगा. पंडित जी के पास पहलेही दो रिंग देकर रखे है नानीजी. वह बस एक रिंग उठाके मुझे और दूसरी माँ को दे दि. सारी औरतें ख़ुशी की आवाज़ से हमें इस मुहूर्त का इम्पोर्टेन्स मेहसुस करवाने लगी. मैं बस नानी को देखा तो वह मुझे इशारा कि अंगूठी पहनाने के लिये. मैं एकबार माँ को उनकी झुकि हुई नज़र के साथ उनके चेहरे को देख के मेरा हाथ थोडे आगे करते ही नानीने माँ को धीरे धीरे से कहा
?? मंजू,,??
ओर माँने अपना लेफ्ट हैंड को उठके आगे बढानेलगी. हम दोनों के हाथ बीच में आगये. मैं रिंग को पहनाने के लिए मेरी तीन उँगलियाँ में पकड़ के रखा है. और वह उनके ऊँगली में रिंग पेहनने के लिए बाकि उँगलियाँ को थोडा स्प्रेड करके रखी है. मैंने दोनों के हाथ के ऊपर नज़र डालके देखा. शायद हम दोनों के ही हाथ काँप रहे है. एक तो में पहली बार यह सब कर रहा हु. दूसरी बात हम हमारा रिश्ता बदल ने जा रहे है, और तीसरा हम इस रिश्ते को दिल से चाहके एक एक्ससाइटटेमेंट में डुबे हुए है. इस लिए हम दोनों ही थोडे थोडे काँप रहे है. यह शायद वहां की कुछ लेडीजने देख लिया और वह लोग कुछ आपस में बोलके हस पड़ी और हमे शर्म आइ, माँ अपना सर और नीचे झुका ली. मै धीरे धीरे उनके ऊँगली के पास रिंग ले जाके उनको अंगूठी पहना दिया. सब लोग क्लैप से और ख़ुशी का आवाज़ से हमें अभिनन्दन देणे लगे.
 
मैनेजर मेरे पीछे ही था. वह बोलने लगा की यहाँ हमने सब प्रॉपर तरीके से पण्डितजी के साथ परामर्श करके सारा बंदोबस्त किया है. यह सब मैरिड लेडीज है. यह लोग हमारे यहाँ शादी के सारे प्रोग्राम में अपना अपना डूटीस करते है. हम आगे बढ्ने लगे. मैं नानाजी के साथ मेरे रूम में घुसते ही सब लेडीज की तरफ देखा. सबने स्माइल और ख़ुशी की आवाज़ के साथ मेरा स्वागत किया. एक दो ओल्ड लेडीज आगे आकर मेरा हाथ पकड़ के आगे ले जानेलगी. उनके चेहरे पे माँ या बड़ी बहन के जैसा प्यार और खुशियां नज़र आई. मुझे एक छोटी चौकी पे बैठने के लिए कहा. मैं बैठा. नानाजी और मैनेजर साहब वहि साइड में रखे सोफे पे बैठे. मैं इतनी सारी औरतों के बीच पहले थोडा नर्वसनेस फील करने लगा. पर वह लोग अपनी स्माइल और प्यार भरी नज़र देकर मुझे सहज करनेलगी. तभी पण्डितजी अंदर आये. मेरे सामने वाले आसन में बैठे. वह अपना कुछ सामान वहि रखके एक पुस्तक निकाल के पड़ना शुरु किया. मेरा नाम पूछे नानाजी से. फिर कुछ मंत्र बोलके वह पुस्तक बंध किया. फिर एक लाल और पीला रंग का धागा लेकर मेरे हाथ में बाँधने लगे. एक दो लेडीज मंगलमय ध्वनी देकर और शंख बजाके इस मुहूर्त को और धार्मिक करने लगी. पण्डितजी मंत्र के साथ साथ वह धागा बाँधना ख़तम किया. और अपनी एक ऊँगली सामने रखी हल्दि, चंदन और गुलाब पाणी से बना हुआ पेस्ट को छुँकर तीन बार बिरबीर करके कुछ मंत्र पढ़ा फिर एक सीनियर लेडी को आगे का कार्यक्रम सुरु करने को कहा. एक एक करके सात लड़की आगे आयी. सब मैरिड दीखती है. सब उस हल्दी पेस्ट लेकर एक एक करके मेरे पैर में, घुटनो में, बाजु में, हाथ में और चेहरे पे लगाने लगी. सब थोड़ी थोड़ी लगाके रब करते जा रहा है. मुझे एक सुखानुभूति का अनुभव हुआ. बचपन से दुसरों को शादी करते हुए देखके खुदकी भी शादी का मन करता था और आज वह पल है. मेरी शादी की रसम सुरु हो गयी. लाइफ में एक परफेक्ट पार्टनर पाना बहुत जरुरी होता है. जो आपके लाइफ के रास्ते में चलना और स्मूथ करदे. सारे सुख एंड दुख में आपका साथ देके जीना सहज कर दे. नाना नानी मेरे लिए वैसे ही एक लड़की ढूंढे है. जिस्को में दुनिया में सबसे ज़ादा प्यार करता हु. अपनी ज़िन्दगी में पाकर एकसाथ चलना चाहता हु. सारी खुशियां उनको देना चाहता हु, वह लड़की यानि की मेरी प्यारी माँ, आज मेरी बीवी बनने जा रही है . और वह अपने बेटे को अपने पति के रूप में पाने जा रहि है. मैं ऐसी कुछ चिंता में खो गया था थोड़ी देर बाद मैं मेहसुस किया की मेरे पूरे बदन पे वह लोग हल्दी लगा रही है. मेरा कपडा पूरी तरह पीला पीला हो गया. कुरते का स्लीव फोल्ड करके, पाजामे को ऊपर की तरफ उठाके फोल्ड करके , छाती का बटन खोलके, पीछे गर्दन के पास से अंदर की तरफ..सारी जगह हल्दी लग गयी. मुझे शर्म आने लगी. इतनी सारी औरते. और वह लोग आपस में हस रहे है, बाते कर रहे है. कोई कोई मेरे से बात करने की कोशिश कर रही है. पर में सब को केवल एक स्माइल देकर मेरे जवाब दे रहा हु. फिर वह लोग मेरे सरके ऊपर पाणी ड़ालनेलगी. मैं गिला हो गया. वह लोग मेरी हालत देखके खील खीला कर के हस पडी. मैं भी क्या करे.. लोगों के साथ बस मुस्कुराते रहा. रब करके मेरी हल्दी उतारने लगे वह लोग. थोडा टाइम ऐसे चलने के बाद सब लोग मुझे छोड़के साइड में चले गये. पण्डितजी बोले " बेटे अब जाकर खुद नहालो". मैं वहां से उठके सब को नमस्ते बोलके अपने कॉटेज के लिए चल पडा नानाजी भी मैनेजर के साथ उस रूम से बाहर गये. मैं बाहर आतेहि दुल्हनके रूम की तरफ देखा. वहाँ से हसि मजाक और ख़ुशी की आवाज़ें आ रही है. मैं समझ गया वहां का हल्दी का कार्यक्रम अभी तक पूरा नहीं हुआ. नानाजी मेरे पास आतेहि हम वहां से निकल पडे.

पुरा बदन रगड रगड के नहाने के बाद भी बहुत जगह अभी भी पीला पीला होकर रह गया. चेहरे पे भी एक पीलेपन का अभास जैसा लगा हुआ है. मैं दूसरे एक नये कपड़े जो में एमपी से लेके आया, हु पहन के रूम में आया और तभी नानाजी बाहर से अंदर आकर बोले
?? बेटा ..वह मैनेजर पुछ रहा था की हम लंच कहाँ करना चाहते है. मैं तुम्हारी नानी??.मतलब मम्मी को पूछा तोह वह लोग बोले की यहाँ रूम में ही आज लंच करेंगे. तोह में वैसे ही बोल दिया??
नानाजी भी बात करते टाइम खुद को सुधार रहे थे. वह लोग भी अपने आपको चारों तरफ से नए रिश्ते के साथ जोड ने की कोशिश कर रहे है. मुझे अब बस क्या कहना है. मैं बोला
?? ठीक है पापा??.
हल्दी के बाद से शाम तक न में माँ को देखा न नानीजी को. हालांकी मुझे माँ का चेहरा देखने के लिए मन उतावला हो रहा था लेकिन मुझे और कोई कारन न होने की वजह से उनके रूम में जाने में शर्म आने लगा. हम लोगोने अपने अपने रूम में ही लंच कर लिया था नानाजी केवल दो एक बार बाहर जाकर शायद उनलोगों को मिलके आये. नानाजी को देखके वैसे ही लग रहा है जैसे बेटी के शादी में बाप बहुत बिजी रह्ता है. वह रिसोर्ट वाले से, नानीजी और माँ से, मेरे से सब से कोआर्डिनेट कर रहे थे. कहाँ किसको क्या चीज़ की जरुरत, सब कुछ ध्यान दे रहे थे. अब वह अपने बेड पे रेस्ट करने के लिए सोये हुये थे क्यूँ की बस थोड़ी देर बाद रिंग सेरेमनी और मेहँदी है. यहाँ रिसोर्ट वाले ने हमारे शार्ट टाइम को पकङकर, सारे रसम और प्रोग्राम को सेट किया है. साथ में पण्डितजी का दिया हुआ टाइम को भी ध्यान रखना पड़ा . सो हमें सब कुछ थोडा जल्दी जल्दी लगने लगा. पर क्या करे. ऐसेही सब फिक्स किया हुआ है. और शादी में जितना प्लान करो, जितना टाइम लो, आखिर में सब ऐसेही लगता है.
 
मै अब क्या कहुँ समझ नहीं रहा है. आँख उठाके नानी को देखने को भी शर्म आ रहा है. मेरे मन में एक बिचित्र अनुभुति दौड़ रहा है. आज से में उनका दामाद हु, कोई प्यारा छोटा बच्चा नहि, जो उनका प्यारा पोता है. मुझे अब एक परिपूर्ण आदमी बनके उनको भी विस्वास देना है. ज़िन्दगी का हर रिलेशन पे अगर विस्वास, प्रतिबद्धता, ईमानदारी, निष्ठा न रहे और एक दूसरे के प्रति देखभाल, प्रेम , सुरक्षा न रहे , तो वह रिलेशन कैसा स्ट्रांग बनेगा. मुझे भी मेरे अंदर का संकोच और दुविधा छोड़के इस रिलेशन को ऐसे ही देखभाल करना पड़ेगा. मैं धीरे से सर उठाके उनके आँखों में आँख मिलाके कहा
?? आप को यह बात मालूम है की दुनिया में सबसे ज़ादा प्यार में आप की बेटी को ही करता हु. उनको खुश नहीं रखूँगा तो में कैसे खुश रहूँगा !!??
फिर में उनके हाथ पे मेरा हाथ रख के धीरे धीरे कहा
?? आप लोगो ने अपने पोते को दामाद बनाने का जो फैसला किया, उसको में अपनी जान देकर रक्षा करूँगा??.
नानी उनके हाथ से प्यार से माँ की ममता लेकर मेरे गाल सहलानेलगी. उनकी आँखों में ख़ुशी मेहसुस करने की एक अनुभुति प्रकट करके पुछि
?? मेरी बेटी उसके पति के साथ खुश रहेगी यह जानकर मुझे अब मरने का भी दुःख नहीं होगा.??
बोलकर नानी की आंख गिलि होने लगी और वह मुझे गले लगाना चाही. मैं आगे बढ़के उनके गले लग गया. वह प्यार से मेरे पीठ पे अपनी ममता के साथ हाथ फ़िराने लगी. उनके मन के इमोशन को थोडा क़ाबू करके फिर हसपड़ी और मेरे कान के पास धीरे धीरे कहि
?? चलो सब तो ठीक हो जायेगा. लेकिन मेरे मन में इन खुशिओं के साथ एक दुःख है??
मैन वैसे उनके गले लगे हुए पोजीशन पे रहके पुछा
?? वह क्या है मम्मी???
मै नानीजी को मम्मी कह्के बुलाया. वह इस चीज़ को मेहसुस किया और फिर थोड़ी टाइम बाद हस्ते हस्ते एकदम नीची आवाज़ से बोलि
?? मुझे दामाद मिला लेकिन पोता खो दिया. आब मुझे नानी बुलाने के लिए कोई नहीं है. मुझे नानी कह्के बुलाने के लिए कोई चाहिए??
बोलकर नानी हॅसने लगी और में उनके गले लगते हुए पोजीशन पे रहके शर्मा के बोला
?? आप भी न????.??.
मै एक नई हल्का येलो कलर का कुरता और वाइट पाजामा पेहेनके कॉटेज से बाहर निकलते ही देखा नाना वहा मैनेजर के साथ बात कर रहे है. मुझे देखते ही नानाजी और वह दोनों स्माइल दिया और नानाजी बोले
" आजाओ बेटा. हम चलते है. वह लोग बस आनेवाले है."
मुझे मालूम है हमारी हल्दी एक समय पर रखी हुई है , लेकिन होगी अलग अलग . हमारा और कोई रिलेटिव्स , फ्रेंड्स और फॅमिली न होने के कारन यह लोह यहाँ से कुछ लोगो का बंदोबस्त किया है. जो मुझे और माँ को अलग अलग हल्दी लगाएँगे. मैं कुछ न बोलके उनके पास जाने लगा. और तभी दूसरे कॉटेज का डोर खुल गया और हम सब उस तरफ मुड़के देखने लगे. नानीजी पहले निकलकर डोर के सामने खड़ी होकर अंदर की तरफ देखने लगी. और फिर माँ बाहर आयी. माँ डोर के पास आतेहि नानी उनका एक हाथ माँ के पीठ के ऊपर से लेजाकर उनको पकड़के धीरे धीरे आगे बढ्नेलगी. मैं बस माँ की तरफ देखते रह गया. वह एक येलो कलर की नयी साड़ी पहनी हुई है. साड़ी की बॉर्डर रेड और येलो से डिज़ाइन किया हुआ है. मैचिंग शार्ट स्लीव ब्लाउज पहन के रखी है. उससे उनके गोल गोल और लम्बे लम्बे गोरी बाजु और हाथ, और भी सुन्दर लगने लगे. उनके गले में एक गोल्ड चेन और दोनों हाथ में एक एक गोल्ड बँगल है. माथे पे एक छोटी लाल बिन्दी. और पैर में एक क्रीम कलर की फ्लैट स्लिपर पहनी हुई है. बाल जुड़ा करके थोड़ी ऊपर की तरफ बंधा हुआ है, जिसमे उनकी गर्दन और गले की लम्बाई पूरी तरह से नज़र आ रहा है. आज पहली बार लाल बिंदी और इस टाइप का ड्रेस में उनको देख रहा हु. इतने सिंपल ड्रेस में भी मुझे वह बहुत ज़ादा सेक्सी लगने लगी. वह उनके पापा मम्मी और मेरे सामने नज़र उठाने में शायद शर्मा गई. इसलिए नज़र नीचे करके नानी के साथ धीरे धीरे हमारे तरफ आनेलगी. वह इतनी सुन्दर लग रहा है की मेरे मन में बस एक ख़ुशी की लहर बहने लगी. उनको देखके लगता नहीं की वह ३६ साल की है और मेरी माँ है. बस एक नवजवान कुंवारी लड़की के जैसी शर्मा के आगे बढ़ रहा है. यहाँ का मैनेजर यह चित्र देख के कल्पना भी नहीं कर पायेगा की में उनका बेटे हु और यहाँ शास्त्र सम्मत तरीके से उनको शादी करके अपनी पत्नी बनाने के लिए आया हुं.

हम सब एक साथ सामने वाली इमारत की तरफ जाने लगे.

वहा एक रूम दुल्हन के लिए यानि की माँ के लिये, और दूसरे रूम दूल्हे के लिए यानि की मेरे लिए सजाके रखा है रिसोर्ट वाले. दो रूम में से बहुत आवाज़ आरहा है. बहुत सारी लेडीज भरी हुई है. कुछ लोग बाहर थे, हमें आते हुए देख के वह लोग अंदर चले गए और आगे की तैयारी सुरु करदि. मैनेजर के कहने पर नानीजी माँ को लेकर दुल्हन के रूम में जानेलगी. मैं माँ को जाते हुए देखा. उनका ब्लाउज पीछे से ज़ादा कट किया हुआ है. पूरी सुडौल गर्दन और कमर के ऊपरवाला हिस्सा साफ साफ नज़र आ रहा है. मेरे मन में एक हिल्लोल यानि की एक हलचल मचने लगा. जब में नीचे देखा तब उनके फ्लैट स्लिपर में पैर की मुलायम गुलाबी एडी नजर आई. मुझे क्या पता क्यूं, उनकी वह गोल गोल मुलायम गुलाबी एडी देखके मेरे पजामके अंदर लिंग में एक शिर शिरनी होने लगा. मुझे लगा की में अभी झुक के उनके सामने बैठके उनके वह गुलाबी पैर में मेरे चुम्बन दे दुं. मैं जानता हु की उनका सब कुछ बस मेरा ही होने वाला है. तब में प्यार से उनके पैर के हर कोना चुम्बन से भर दूँगा
 
मेरी इस बात पे माँ झट से मेरे चेहरे के तरफ देखि और कुछ न समझ के एक सरप्राइज्ड लुक लेकर मुझे देखते रहि. मेरे होठ पे एक हलका स्माइल आया. और तब नानी हमें पीछे मुड़के देख के कहि
" मंजू..बेटा तू थोडा प्रेशर लगा दे" बोलके फिर काम पे बिजी हो गई. माँ मेरी तरफ देखि और समझ गयी मेरी बदमाशी. वह और शर्म में लाल हो गई. कुछ पल वह वैसे ही बैठि रहि. और मैं उन पे नज़र टिकाके देख रहा हु. थोडे टाइम बाद माँ उनके गोल गोल हाथ बढाके सूटकेस के उप्पर रखी और घुटनोँ के बल बैठके अपनी बॉडी को थोडा उठाके सूटकेस के पास लायी. इसमें मेरे और उनके बीच और कोई दूरि नहीं रही. मैं प्रेशर लगाने की एक्टिंग करते रहा और वह बस वैसे करके धीरे धीरे प्रेशर देणेलगी. मैं उनके तरफ देखा वह बिलकुल नज़र नहीं उठा रही है. मैं मेरे हाथ क्लैप छोड़के धीरे धीरे ऊपर लाया और उनके लम्बी लम्बी नरम उँगलियाँ पे मेरे उँगलियाँ टच करने लगा. उनकी उँगलियों में हल्कि गुलाबी नैलपोलिश लगी हुई है. मैं मेरी कुछ उँगलियो से उनकी उंगलिया पकड़ने की कोशिश कर रहा हु पर वह अपनी उंगलिया मोड़ के हाथ धीरे धीरे खिसका के दूर कर रही है. मेरा सर उनके सर को टच कर रहा है. मैं इंटेंशनली मेरे सर को उनके माथे पे लगाके उनके ऊपर हल्का सा प्रेस करने लगा. और मेरा राईट शोल्डर उनके लेफ्ट शोल्डर को छुने को जा रहा है. कुछ पल बाद माँ उनके हाथ को मेरे हाथ के टच से और दूर नहीं लेगई. वह उनका हाथ छुने में रोकी नही मेरा कन्धा अब उनके कंधे से रगड़ने लगा. उनके ब्लाउज के स्लीव के ऊपर से थोड़ी थोड़ी हल्की गर्मी मेरे शरीर में आने लगी. एक हप्ते बाद हम एकदूसरे का टच महसुस कर रहे है. अब हम दोनों ही समझ गए की हम दोनों का मन और तन एक दूसरे का प्यार पाने के लिये, उसको महसुस करने के लिए तरस रहा है. बस थोड़ी देर बाद हल्दी होगी . हम कानूनी पति पत्नी बनने की तरफ कदम रखना शुरू करेंगे. उस बात पे दोनों के मन और तन में एक अजीब अनुभुति छाई हुइ थी इस लिए दोनों ही नानी के प्रजेंट पे चोरी चोरी एक दूसरे को ऐसे मेहसुस करनेलगे. मैं मेरी नाक उनके काण के ऊपर बालों में हल्का टच करके उनके बालों की खुशबि लेने की कोशिश कर रहा हु. अचानक डोर पे नॉक हुआ. ब्रेकफास्ट लेके मैनेजर और एक लेडी खडी है. और उनको देखते ही माँ झट से सूटकेस के ऊपर से अलग हो गई. नानी उन लोगों को अंदर आकर ब्रेकफास्ट रखने को कहा. तभी में क्लैप खुल गया ऐसे एक्टिंग करके खड़ा हो गया. और नानी को बोला
" सूटकेस के साइड में कपडा फसके टाइट बंध हो गया था"
नानी मेरी तरफ देखके थोड़ी स्माइल किया और शायद कुछ बोलने गई , तो मैनेजर मुझे देखके एक स्माइल देके बोले
" सर्, मिस्टर. पटेल इस नोट इन हिज रूम.वुई वांट टू मीट हिम वन्स??.
मै समझ गया वह अब पेमेंट की बात करने के लिए आया है. मैं उनसे कहा
?? नो नो. ही इस देअर. ही हॅस जस्ट गोन टू बी फ्रेशन उप??
बोलके में वहां से जाने लगा. जाते वक़्त एकबार माँ को छुप के देखा.वह वहि बैठके सूटकेस खोल रही है. और मुझे ऊपर से उनके शोल्डर और बूब्स का ऊपरवाला हिस्सा ब्लाउज के उप्पर पोरशन से दिखाइ दिया. मेरे अंदर उनको अपना बनाके पाने की चाहत बहुत तेज बढ्ने लगा.
मैन मेरे रूम में आतेहि देखा नानाजी बाथरूम से बाहर है. नए कुरता पाजामे में नानाजी को अच्चा लग रहा है. मैनेजर उनसे पेमेंट की बात किया. नानाजी ब्रेकफास्ट के बाद ऑफिस में जाकर देकर आएंगे बोले. मैनेजर बोला की वह वहि रहेंगा.
नास्ता करके नानाजी के जाते टाइम में बोला
?? पापा??मैं भी आता हूँ??
वो मेरे तरफ देख के हँसे और वहि शांत आवाज में बोले
?? अरे तुम रेस्ट करो. अभी फिर हल्दी के लिए तैयार होना है. मैं बस यह सब चुक्का के आजाता हु??
फिर और एकबार स्माइल देके चले गये. मैं रूम में अकेला बेड पे आँख बंध करके सो गया. और थोड़ी देर पहले माँ के स्पर्श की अनुभुति मेहसुस करने लगा. मुझे आज स्पष्ट यह पता चल गया की वह भी मेरा स्पर्श पाने के लिये, मेरा प्यार पाने के लिए खुद को पूरी तरफ समर्पण करने के लिए तैयार है. मेरे प्यार को उनके हर रोम रोम में मेहसुस करने के लिए खुद को सजा के रखी है. मुझे उनके जैसी खूबसूरत प्यारी बीवी पाकर ,मै सच मुच अपने आप में खोने लगता हु.
शायद मेरी आँख लग गया था अचानक नानी की आवाज़ से नीद तूट गया. नानीने झुक के चेहरे पे एक स्माइल लेके मुझे जगाते हुए कहा
?? उठ जाओ बेटा. मैं तुम्हारा नया कपड़ा वहां रख दिया. जल्दी से तैयार हो जाओ. ??
बोलके हस्ते हस्ते मेरे बेड पे बैठ गई. मुझे दोनों चीज़ों से शर्म आई. एक तो पिछली रात ट्रैन में न सोने के कारण अब में सो गया था दूसरी बात यह है की नानी मुझे इस तरह स्माइल करके हल्दी की रसम के लिए बुलाने आई इस लिये. मैं उठ के बैठा. और एक्सक्यूस देणे के जैसे बोला
?? सॉरी नानी..वह..??
नानि अब उनका राईट हैंड से मेरे गाल छुंए और आँखों में एक माँ की ममता मिलाकर प्यार से वैसा ही स्माइल करते हुए एकदम धीरे से बोली
?? अब तू मेरा दामाद बनने जा रहा है. और दामाद अपनी साँस को क्या कहते है? उम् .??
मै शर्म के मारे पाणी पाणी हो गया. मैं सर झुका लिया. और नानी एक चिंतित माँ की तरह उनके आवाज़ में एक इमोशन मिलाके फिर बोलि
??मैं मेरी एक लौती बेटी को तुझे दे रही हु. अब तुझे उसका ख्याल रखना है. ज़िन्दगी भर उसको खुश रखना है. रखेगा न मेरी बेटी को???
 
मैन इन सब थॉट्स में खो गया था, नानाजी बाथरूम जाते टाइम बोले की
" मैं तुम्हारी नानी को बताके आया. वह सूटकेस उनके रूम पे है. वह वहां से तुम्हारे नये कपडे लेकर दे जाएंगे."
बोलके जाने लगे तो में सोच के बोला
" नानाजी...यह लोग...."
मेरे बात ख़तम होने से पहले नानाजी मेरी तरफ देखके मेरी बात काट दिया और थोड़ी स्माइल के साथ एक दम साफ लहजे में कहा
" बेटा......पापा.."
मै उनकी यह बात सुनके उनके सामने शर्मा गया. और फिर हल्का हास्के उनसे नज़र हटाके धीरे से कहा
" ठीक है......... पापा..."
नानाजी मुझे उस हालत से निकाल ने के लिए मेरे साथ देणे के लिए वैसे ही शांत इमोशन के साथ कहा
" कहो क्या कह रहे थे"
मेरे अंदर एक तूफ़ान सा चल रहा है. आज पहली बार नाना को पापा बोल दिया. और हमारा यह रिश्ता ज़िन्दगी भर के लिए शास्त्र सम्मत तरीके से कुछ समय बाद से पक्का हो जाएगा. मैंने उनकी तरफ देख के कहा
" वह लोग बताया था की यहाँ आकर पहले पूरा पेमेंट कर देना है. यह मैनेजर तोह उस बारे में कुछ बताया नहि"
नानाजी भी याद किये और फिर बोले
" हा...बताया तो था बुकिंग के टाइम २५% तो ले भी लिया. अब देखते है..ब्रेकफस्ट के बाद शायद बतायेगा. कोई बातनही जब बोलेगा तब दे देंगे"
बोलके नानाजी अपने कपडे लेके बाथरूम में चले गये. मैं अकेला होते ही मेरे अंदर जो शर्म आया था वह धीरे धीरे जाने लगा. और में फिर से वह प्रिंटेड शेड्यूल देखने लगा. आज दो रसम के बाद कल सुबह पहले रजिस्टर्ड साहब आएंगे और माँ और में कागज में साइन करके पहले हम रजिस्ट्री मैरिज करेंगे. यह करना आवश्यक हो गया है आज काल. नहीं तो बहुत सारी जगह पे इनसब पेपर्स के न होने के कारन फ्यूचर में बहुत प्रॉब्लम फेस करना पडता है. इस लिए यहाँ भी यह लोग कानून के मुताबिक सरकारी आदमी लाकर मैरिज पार्टी को यह फैसिलिटी उपलब्ध करवाते। है. चार्ज ज़ादा लेते है, पर सेफ है. मुझे भी मेरे पासपोर्ट में या बैंक अकाउंट में माँ का नाम मेरे वाइफ के जगह लिखना पडेगा. तब यह सब पेपर्स जरुरी है. उसके बाद दूल्हा और दुल्हन को यहाँ का मेकअप एक्सपर्ट आकर सजाएँग़े. दूल्हा पहले पूजा में बैठेगा. यहाँ पूजा ख़तम होने तक, वहां दुल्हन को सजाना ख़तम हो जायेगा , और वह आकर दूल्हे के पास बैठेंगी और शादी का असली कार्यक्रम चालू होगा. मैं यह सब पड़ते पड़ते माँ का चेहरा याद कर रही था दुलहन के भेष में वह और प्यारी और खूबसूरत लगेगी. तभी अचानक नानीजी आई और बताया की उनके रूम में जो नया सूट केस है, वह खुल नहीं रही है. नानाजी बाथरूम में थे सो में ही गया. मेरे रूम का नेक्स्ट रूम ही उनका था मेरे रूम जैसा दो बेड है और बाकि सब सुखसुविधा है. माँ फ्रेश होकर एक दूसरी साड़ी पहनके वहां सूटकेस खोलने की कोशिश कर रही थी. वह आज भी अपना आँचल टाइट करके कमर में घुमाके सामने पेट के पास घुसाके के रखी है. उनके शरीर का सब कर्व में वह साड़ी लिपट के उनके बॉडी में लगा हुआ है. उनको देखतेही मेरे अंदर एक इच्छा प्रबल होने लगी. उनको मेरी बाहो में लेकर उनके हर कर्व्स में चुम्बन करने का मन कर रहा था जैसे दिल और दिमाग में यह इच्छा आयी, तभी वह अनुभुति खून के साथ मिलकर दौडके जाकर मेरे लिंग में जान दे दिया. और वह में महसुस किया अपनी अंडरवेअर के अंदर. पर में खुद को कण्ट्रोल किया. मैं अंदर आतेही माँ मुझे देखने के लिए ऊपर की तरफ नज़र उठाई. और जैसे ही मेरे से नज़र मिलि, वह झट से आँख घुमा ली और उनका चेहरा एक ख़ुशी और शर्म के वजह से लाल होगया नानी मुझे वह सूटकेस दिखाके बोली " मेंने और मंजुने बहुत कोशिश कि. फिर भी खुल नहीं रही है".

मैने देखा वह वहि सूटकेस है, जिसमे शादी का सब कपडा वैगेरा है.
मैने सूटकेस के पास अपने घुटनोँ में बैठि माँ को उसको खोलने की कोशिश करती हुई देखके बोला
" मैं देखता हुं"
फिर में आगे जाके माँ के सामने घुटना फोल्ड करके फ्लोर पे एक घुटना टिकाके सूटकेस को पकड़ के बैठ गया. माँ तुरंत अपना हाथ सूटकेस के ऊपर से हटा लिया और वहि अपनी दोनों घुटना फ्लोर पे टिकाके बैठि राहि. उनकी नजर झुकी हुई है. नानी मेरे पीछे है और वह अहमदाबाद से ख़रीदे हुये उस नए सूटकेस की कंपनी के ख़राब चीज़ के बारे में बक बक कर रही है. मैं चुराके माँ को देखते हुए सूटकेस को खोलने की कोशिश किया. माँ समझ गयी की में उनको नानी को छुपके देख रही हु. हमारे बीच केवल एक सूटकेस का फासला है.
सूटकेस का साइड क्लैप टाइट होकर बैठ गया. माँ और नानी प्रेस करके भी खोल नहीं पायी. मैं घुटना टिका के बैठके मेरे दोनों एल्बो से सूटकेस के उप्पर प्रेशर दे रहा हु. और माँ के साइड पे जो क्लैप है उसको खोलेने के लिए कोशिश कर रहा हु. मैं थोडा झुका हुआ हूँ सूटकेस के उप्पर. इस लिए मैं थोडासा थोडे आगे जाकर माँ के और नज़्दीक चला गया. मैं लगातार उनको देख देखके काम कर रहा हु और वह बस केवल घुटना टिकाके दोनों हाथ गोद में रखके नज़र नीचे करके चुप चाप बैठि हुई है. मुझे देख नहीं रही है पर होंठो पे एक हलकी मुस्कान है. मुझे मालूम है वह मेरे लिए ??नानी के सामने मेरी प्रेजेंट के लिए वह शर्मा गयी और नानी के सामने सहज होने के लिए ऐसे शांत होकर चुप बैठि है. नानी पीछे दूसरा सूटकेस जहाँ उनका ख़ुदका और नानाजी का अपना है, वह खोल के नानाजी और उनके लिए कपडे निकाल रही है. मैं पीछे एकबार देखा की नानी अभी बिलकुल हमें देख नहीं रही है. हमारे तरफ उनका पीठ है. सूटकेस का सामान पे उनका ध्यान है. अचानक ऐसा प्रेशर देणे में वह क्लैप खुल गया. एक हल्का आवाज़ निकला. उसमे माँ नज़र घुमा के मेरे हाथ के तरफ देखि और समझ गयी की वह खुल गया. पर म्रेरे अंदर एक बदमाशी चढ रही है. मैं नानी को फिर से देखा वह ऐसे ही बक बक करते रही और कपडे निकालती रहि. संमझ में आया की क्लैप खोलने की आवाज़ उनतक पंहुचा नही मैं मेरे हाथसे वह क्लैप को एकसाथ पकड़के रखा है और उसी पोजीशन में बैठके माँ की तरफ नज़र उठाके सीधा उनकी तरफ देखा. वह भी एकबार नज़र उठाके मेरे तरफ देखि और फिर नज़र झुका ली. मेरी बॉडी एकदम उनके पास ही है. बीच का फासला ज़ादा नहीं है क्यूँकि में मेरी उप्पर बॉडी सूटकेस के ऊपर लाकर प्रेस करके रखा. तभी में जोर से बोला
" नानीजी यह तो टाइट होकर बैठ गया. और प्रेशर लगाना पडेगा."
 
यहाँ हमारे लिए दो आदमी वेट कर रहे थे. हमारे आने का पूरा प्लान उनलोगो ने चेक आउट किया हुआ था जैसे ही टैक्सी पहुंची, वह लोग आगे आकर हमसे परिचय किया और में दूल्हा और माँ को दुल्हन जानके हम दोनों को विश किया. फिर हमें सब बता बता के हमारे रहने की जगह पे ले जाने लगे. टोटल ४ सूटकेस था एक मेरा,दूसरा नाना नानी का, तीसरा शादी का सामान भरा हुआ और चौथा माँ का. माँ यहाँ से सीधा मेरे साथ एमपी जानेवाली है. तोह उनका कुछ सामान, जो वह शादी के बाद भी उसे रखना चाहती है, वह सब सामान, कुछ कपडा वगेरा भरके लायी है. वह लोग रिसोर्ट का दो बॉय को बुलाके हमारा सामान हमारे रूम पे ले जाने के लिए कहा. रिसोर्ट बाहर से देखने में छोटा है. पर अंदर जाते ही बहुत बड़ा एरिया का पता चलता है. लेफ्ट साइड में रेस्टॉरंट, डिस्को और पुलसाइड पब है. सीधा जाके एक बिल्डिंग है. दो मंजिला. और राईट में पूरा एरिया खाली है. घास को मेन्टेन करके रखा है. यहाँ उनलोगों का ओपन मैरिज या और कोई पार्टी होता है. और गेट के बाहर एक पार्किंग एरिया देख के आया हु. हम जैसे थोडे आगे जाकर राईट मुडे, वहां उस बिल्ड़िंग के पीछे विशाल एरिया लेकर बहुत सारे छोटा छोटा टेंट जैसा कॉटेज बना हुआ है. बीच में एक लम्बा नैरो वाटर पूल है. उसमे से फुआरा उठ रही है. और उसके चारों तरफ वह कॉटेज है. वह लोग हमें वहि ले जाकर बताया की वह लोग सारे मैरिज में आने वाले गेस्ट्स और फॅमिली मेंबर्स को यही रुकवाते है. और वह दो मंजिला बिल्डडीग केवल इनसाइड बुफे और शादी के लिए हॉल बना हुआ है. जहाँ पार्टी भी हो सकती है. बाकि एडमिनिस्ट्रेटिव सेक्शन और पीछे किचन और कैटर्रिंग का इंतेजाम. अब फिलहाल दो शादी का अरेंजमेंट चल रहा है. वेडनेस्डे को एक बड़ा शादी का बुकिंग है. उसके कुछ मेहमानआचुके है. और कल की शादीके लिए बस हम लोग. हमारा छोटा प्रोग्राम है. इस लिए वह सब कुछ सामने वाले बिल्डिंग के अंदर ही अरेंज किया हुआ है.

हमारे लिए केवल दो कॉटेज बूक है. दोनों फॅमिली कॉटेज है. एक में माँ और नानी चली गयी और दूसरे में में और नानाजी. उन दो आदमी में से एक आदमी हमारी बुकिंग का हेड है. उनके देख भाल से यह शादी का प्रोग्राम होगा. हम जैसे ही कॉटेज के अंदर घूसे तो चौंक गये. बाहर से पता नहीं लगता की अंदर इतना सुन्दर और सुब्यबस्था है. स्पेसियस एरिया में दो डबल बेड रूम के दोनों साइड पे लगा हुआ है. दो कपबोर्ड है. बैठने का अरेंजमेंट में सोफा और सेंटर टेबल रखा हुआ है. दिवार पे बड़ा एलसीडी टीवी लगा हुआ है. एक फ्रिज है. और अपोजिट वाल पे एक बड़ा विन्डौ. जिसके बाहर पेड़ की सारी लाइन है. और उसके पार खाड़ी है, जहाँ प्राइवेट ज्याट बनाके वह लोग प्राइवेट स्टीमर सुहागरात के लिए देते है. मैं बाथरूम चेक करने गया. और बड़ा बाथरूम में सब मॉडर्न फैसिलिटीज का इन्तेज़ाम है. बाथरूम से बाहर आतेहि वह मैनेजर साहब नानाजी को बताने लगा की क्या क्या और कैसे प्रोग्राम सेट किया हुआ है. एक प्रिंटेड पेपर दिया उन्होंने. उसमे सब डिटेल्ड लिखा हुआ है टाइम के साथ. कब हल्दी का रसम, कब रिंग सेरोमनी, कब रजिस्ट्री सिग्निंग, कब शादी वैगेरा वैगेरा सब कुछ लिखा हुआ है. हमारे गेस्ट नहीं है इस लिए रिसेप्शन और फ़ूड के जगह पे क्रॉस किया हुआ है. मैं उनसे वह लेकर देख रहा था आज दो रसम सेट किआ हुआ है. दोपहर को हल्दी है और शाम को रिंग सरमोनी. वह आदमी बता रहे थे की यहाँ के पण्डितजी के मुताबित , उनका दिया हुआ टाइम मेन्टेन करके हम यह चार्ट बनाते है. सब पूरा रसम और तरीका प्रॉपरली मेन्टेन करके , शास्त्र सम्मत से यहाँ शादी का इन्तेज़ाम होता है. उन्होंने उनका मोबाइल नम्बर भी दिया. कोई भी प्रॉब्लम होगा तो उनको सीधा कॉल कर सकते है. दोपहर में हल्दी रसम ठीक टाइम पे सब रेडी हो जायेगा और हमें लेने के लिए वह आएंगे. वह मैनेजर अब हमें फ्रेश होने को कहा और बताया की रूम पे ही ब्रेकफास्ट भेज देंगे. बोलके वह फिर से और एकबार स्वागत और विश करके निकल गये. नानाजी मुझे फ्रेश होने के लिए कह्के वह एक कॉपी प्रिंटेड चार्ट लेके निकल गए नानी के रूम पे. नानी को भी पूरा चीज़ बतानी है. माँ भी जान जायेंगे कब और कैसे क्या क्या होगा. मैं फ्रेश होने के लिए बाथरूम में चला गया.

जब फ्रेश होकर बाथरूम से निकला तब नानाजी रूम पे वापस आगये. उनके हाथ में कुछ कपडे है. वह नानीजी के रूम में रखी हुई उनके सूटकेस से यह लेके आये है. मुझे बाहर निकलते हुए देखके वह बोले की अब तो सोने को ज़ादा टाइम नहीं मिलगा. ११.३० को हल्दी का रसम है. सो में तुम्हारा नानी को भी बता दिया. वह लोग भी फ्रेश होकर ब्रेकफास्ट करके बस थोड़ी रेस्ट कर लेगी और फिर तैयार हो जायेगी हल्दी के लिये. मैं यह सुन के थोड़ी शर्म और ख़ुशी मेहसुस किया. नाना नानी खुद मेरे और माँ का यह रिश्ता चाहते है. वह लोग अपने हाथों से हमारे इस नये रिश्ते को जोड रहे है और हमें हमारे नए रिश्ते में कदम रखने के रास्ते में हर मोड़ पे हमारा साथ देते हुए आरहे है. वह लोग भी चाहते है की उनकी एक लौती बेटी ज़िन्दगी भर जो दुःख और अकेलेपन के सहारे जी है, अब वह ख़ुशी के पलों में बदल जाये और उनकी ज़िन्दगी हर लड़की की तरह अपने पति के साथ गुजार ने में जो सुख और शान्ति मिलती है, वह पा ले. और फिर में उनका इकलौता पोता भी हु. बचपन से उनका सारा प्यार और ममता मेरे ऊपर ही बरसाया उन्होंने. सो आज वह लोग भी चाहते है की अपना ही पोता अपने ही घर पे दमाद बनके रहेगा और सब मिलके एक ख़ुशी के महल में जिन्दगी गुजरेंगे. इस लिए वह इस शादी को शास्त्र अनुसार सब रसम प्रक्रिया पूरा करके करना चाहते है.
 
हम सुबह ५.३० बजे बांद्रा टर्मिनस पे उतर गये. गर्मी का मौसम था सुबह की नरम शीतल हवा से बहुत अच्चा लग रहा है. नाना नानी मुंबई आकर थोडे उदासीन भी हो गये. नाना की शादी के बाद वह लोग कुछ दिन मुंबई में थे. यहाँ नानाजी बिज़नेस सुरु किया था बाद में शिफ़्ट होकर अहमदाबाद चले गये. वहाँ माँ का जनम हुआ. और आज तक वह लोग वहि अपना घर बना लिया . आज यहाँ फिर पूरा फॅमिली के साथ आकर वह लोग थोडे भावूक बन गये. नाना उनके जवानी की बहुत सारी पुराणी बाते बताने लगे. हम स्टेशन से टैक्सी लेकर उसमे सारे लगेज लोड करके रिसोर्ट के लिए चल पडे क़रीब देड घंटे का रास्ता है. माँ सुबह से चुप चाप है. केवल नानी के साथ कुछ बात चित कर रही है. मैं नज़र चुराके दो चार बार उनको देख लिया. मेरा मन अब ख़ुशी से हस रहा है. माँ के अंदर भी एक खुशी की उत्तेजना फैली हुई है, और वह उनका चेहरा देखके, आँखों की हलचल देख के और शारीरिक हलचल देख के पता चलता है. वह नानी के ही आस पास घूम रही है. नानी के साथ ही चल रही है. वह मेरे तरफ देख ही नहीं रही है. मैं सोचता हु की माँ के मन में क्या मेरे लिए , मेरे प्यार के लिए कोई तूफ़ान हो नहीं रहा है!! केवल मेरे अंदर ही है !!! आज बहुत दिन बाद हम पूरी फॅमिली घर से एकसाथ बाहर आकर सब को अच्चा लग रहा है. मैं भी माँ के साथ बहुत दिन ऐसा दुर कहीं आया नहीं था इस लिए आज इस मुंबई शहर में हम एकसाथ आकर हमारे बीच का बॉन्डिंग सब को मेहसुस होने लगा. हम एक फॅमिली है. सब एक दूसरे के लिए ही है. और अब तो और भी नज़्दीक रिलेशन पे जुड़ने जा रहे है. कोई अन्जान लड़की नहि, इस घर की बेटी ही इस घर की बहु बन के आरही है. इसी घर का बेटा इसी घर का दामाद बन के ज़िन्दगी भर एक दूसारे से जुड़े रहने का संपर्क बांध ने जा रहै है. टैक्सी में में ड्राइवर के पास बैठा हु. पीछे नाना, नानी और नानी के पास माँ बैठि हुई है. नानी बीच बीच में माँ को पकड़के रख रही है. माँ के पीछे से हाथ घुमाके उनके दूसरे बाजु पकड़ के अपने पास, अपने दिल के और पास संभाल के रख रही है. एक लौती बेटी. सारा सुख-दुःख उनको घिरके ही है. और आज ऐसा लग रहा है की जैसे उनकी बेटी शादी करके दुर चले जायेगी उनका घर खाली करके, और इस लिए जितना टाइम मिले माँ बेटी एक साथ रहके अपना मन का प्यास मिटा पाई. नानाजी जाते जाते एक एक जगह दिखा रहे है और वह यहाँ क्या क्या किया है वह सब बता रहे है. नानी जी भी बीच बीच में उनका साथ देकर बातों का लिंक जोड़नेलगी. मैं आगे बैठके पीछे नाना का बात सुनने के लिए बीच बीच में पीछे मुड़के देख रहा हु. और तभी एक झलक माँ को देख ले रहा हु. माँ बस बाहर की तरफ नज़र टीका के रखी है . पर मालूम पड़ रही है की उनका मन हमारे बीच में ही है. वह हम सब के बीच होकर भी अकेली हो रही है. उनके होंठो पे हलकी सी स्माइल और आँखों के लाज और शरम की जो छांया दिख रही है, उसमे पता चलता है की वह मन में एक ख़ुशी की अनुभुति मेहसुस कर रही है. पर एक बार भी मुझसे नज़र नहीं मिला रही है. बाहर से हवा आकर माँ के माथे के ऊपर का कुछ बाल उडाके उनके चेहरे पे फेंक रही है. माँ बार बार हाथ से उन बालो को हटाके अपने कान के पीछे ले जाके समेट नेकी कोशिश कर रही है. उनके इस तरह हलकी हलकी मुस्कुराती हुई चेहरे से बाल हटाने का स्टाइल देख के मेरे मन में उनके लिए प्यार और सेक्स दोनों ही जग रही है. एक ओर्गिनेस्स मुझे घिरके रखा है. और उसका पता चलता है मेरे जीन्स के अंदर मेरे लिंग का छटफटानेसे . मैं लिंग को दबाके पैर के उपर दूसरे पैर चढाके , पीछे घुमने के लिए राईट हैंड को हेड रेस्ट के ऊपर रखके तेढा बैठा हुआ हु. नानाजी की बात सुनने से ज़ादा मुझे माँ को चुरा के देखने का ज़ादा ईरादा है. पर में इस तरह पीछे मुड़के बैठा हु, और वह माँ का विज़न एरिया में उनको पता चल रहा है. मेरे तरफ ना देख के भी, वह उनके आय साइड के अंदर हल्का हल्का मेहसुस कर रही है की में उनको भी देख रहा हु बीच बीच मे. और इसलिये वह और भी नज़र बाहर से अंदर के तरफ नहीं कर रही है. लास्ट वीकेंड में घर आकर उनको छु के मेहसुस करने का एक मौका मिला था पर इस बार तो वह मेरे नज़्दीक ही नहीं आई है. मुझे एकबार उनको मेरे बाँहों में भरके मेरे छाति के ऊपर मेहसुस करने का मन कर रही है. और उनके वह उड़ने वाले बालो के अंदर मेरी नाक डूबो के उनके बालो की खुशबू लेने का मन कर रहा है. पर शायद वह हमारे शादी से पहले मुझे मेरी खवाइश पूरी नहीं होगी. और फिर सुहागरात में उनको प्यार और सिर्फ प्यार से उनका पूरा तन मन भर देना चाहता हु. हम सुबह का खाली रोड पकड़ के जल्दी जल्दी रिसोर्ट पहुच गये.
 
नेक्स्ट डे यानि की संडे सुबह सुबह उठना पडा घर पे एक पूजा था मैं एक बार बिमार पड़ा था हॉस्पिटल में भी था तब नानी मेरे नाम का एक मन्नत रखी हुई थी. सब लोग यह कहते है की शादी जैसे एक पवित्र बंधन में बाधा पड़ने से पहले सारा उधार चुका देना चहिये. इस लिए आज वह पूजा हुआ. पण्डितजी हमारे ही फॅमिली के पण्डितजी थे उनको मेरे शादी के बारे में कुछ मालूम नही वह केवल मेरे नाम का उधार रखा हुआ पूजा करने के लिए आये थे. ड्राइंग रूम में पूजा हो रही थी मैं पण्डितजी के सामने बैठा था नाना मेरे पीछे राईट साइड में, नानी उनके बगल में और माँ नानी के पास यानि की मेरे पीछे बैठि हुई थी. पंडित जी पूजा ख़तम होने के बाद मुझे नाना नानी और माँ को प्रणाम करने को कहा. मैं मेरे आसन से उठके नानाके पास गया और उनके पैर छुयै. नानी के पास जाके झुक के उनके भी पैर छुए . मेरे मन में ऐसा कुछ नहीं था की माँ को अब प्रणाम करना चाहिए या नही क्यूँ की वह मेरी माँ है. हालां की दो दिन में वह मेरी पत्नी बन जाएगी. लेकिन फिर भी में उनका ज़िन्दगी भर पैर छु सकता हु. पर नानी को लगा की शायद में दुविधा में हु की माँ का पैर अब छु यानही इस लिए जैसे ही में उनका पैर छूकर खड़ा होने गया, वह मेरे सर पर हाथ रखके अशीर्वाद करने लगी और में झुक के उनके सामने रह गया. तब नानी मुझे बोला " अब जाओ माँ का पैर छु लो". शायद उन्होंने मुझे और माँ को.. दोनों को यह कहना चाहती है की शादी न होने तक अब हम माँ बेटे ही है. मैं माँ के पास गया और झुक के उनके पैर छुये. माँ सर झुका के बैठि थी. मुझे हमेशा उनके उन गुलाबी पैरों को चूमने का मन करता है. पर अब इस परिस्थिति में में मेरे मन से , एक बेटा उसकी माँ का पैर जैसे छुता है, वैसे में उनके पैर छुयै.
पूजा थोड़ी लेट ही ख़तम हुआ था हम सब लंच करके थोड़ी रेस्ट करने लगे . क्यों की शाम को निकल के ट्रैन पकडना है. और रात भर जर्नी करना है. मैं बस अब कुछ सोचने का मौका नहीं पा रहा हु. सब ऐसा इतना जल्दी हो रहा है. मैं भी तैयार होकर हमारी सब का लगेज वगेरा लेकर टैक्सी करके स्टेशन पहुच गया. और टाइम होते ही हम ट्रैन में चढ़ गये. माँ आज एक पिंक कलर की साड़ी पहनी हुई है. उस साड़ी से और उनके चेहरे से जो ग्लो दे रही है , वह सब मिलकर बहुत ही खूबसूरत लग रही है. और मेरे मन में एक ख़ुशी का हवा का झोका जैसे आगया. मैं सोच रहा था की यह प्यारी, सुन्दर, खूबसूरत सेक्सी लड़की बस और कुछ टाइम के बाद मेरी बीवी बन जाएगी. .. और वह मेरी..केवल मेरी ही होजाएगी. मैं उनको देखते रहा और वह बस सब का सोने का इन्तेज़ाम करनेलगी. नाना नानी नीचे के बर्थ में सो गये . और में और माँ ऊपर के बर्थ मे. मैं मेरे बर्थ में सोके उनके तरफ घूमके केवल उनके ऊपर नज़र टिकाके रखी है. वह कुछ टाइम यह महसुस किया और फिर मेरी तरफ देख के ,एक स्माइल देकर शर्मा के घूम गयी और मेरी तरफ पीठ करके सो गई. मैं उनके पीठ के तरफ देखते देखते बहुत उत्तेजित होने लगा. मेरा लिंग फिर से कठिन होने लगा. उनकी पतली कमर और हिप्स के ऊपर नज़र गया. फिर ऊपर जाकर उनके सुडौल गर्दन पे नज़र पड़तेहि में उत्तेजना के चरम सीमा पे पहुच गया. और अनजाने में मेरा हाथ मेरे पाजामे के अंदर जाके मेरे लिंग को छु लिया. मैं बस एकबार मुठ्ठी पकड़ के मेरे लिंग को पकड़ा और फिर थोड़ी टाइम बाद छोड़ दिया. मैं खुद को कण्ट्रोल करते करते सोचने लगा की बस और दो दिन. उसके बाद मेरा लिंग जहाँ दुनियाका सबसे ज़ादा आनंद मेहसुस करेगा, वहां होगा.
 
सो मैं मेरे रूम में पहुचकर माँ को तुरंत एसएमएस किया .
" फिर से भूल गई!!!!"
उनका भी तुरंत रिप्लाई आया
" क्या?"
मैने थोड़ी शरारत करके लिखा
" अरे .. तुम को मालूम हैना रात में जब तक गरम दूध नहीं पिता हु और मेरे सर के बालों में तुम्हारा हाथ का छूना जब तक न मिले, तब तक मुझे ठीक से नीद नहीं आती है !!"
मेसेज सेंड करने के बाद सोचा की आज माँ आयेगी क्या? शाम को जिस तरीके से नज़र घुमा घुमा के चल रही थि, वह सोच के मैं पकड़ नहीं पाया उनके मन में क्या विचार है. अगर आयी तो आज मुझे रोकना मुस्किल हो जाएग. शादी का मुहूर्त जितना नज़्दीक आ रहा है, उतना ही बेताब हो रहा हु, उनको पाने के लिये. मेरे ख़ुद का बनाके पाने के लिये. मेरे प्यार भी जैसे दिन ब दिन बढे जा रहा है, वैसे उनके लिए मेरे अंदर आग भी बढ़ रही है. टाइम निकल रहा है पर माँ का रिप्लाई नहीं आया. मैं भी समझ नहीं पाया माँ आज क्या रिप्लाई देगी. क्या उनके अंदर भी मेरे जैसी चाहत बढ़ नहीं रही है क्या? क्या मेरे बारे में सोचके वह आसक्त होती है या नहीं ? अचानक यह सब के बीच बीप बीप करके एसएमएस आया. उन्होंने लिखा है
" वह में जानती हु...लकिन मुझे आप का ईरादा मालूम है"
पढके मेरे होठ पे एक स्माइल खील गया. माँ मुझे सही तरीके से हमेशा जान जाती थि, और आज भी वह मेरे मन का ईरादा पकड़ लि. फिर भी में भोला बनके लिखा
"क्या?"
उनका अब तुरंत रिप्लाई आया
" आप बहुत बदमाश बन गए हो".
अच्छा ..इस लिए पूरी शाम मेरे से दूर दूर रह रही थी. मैं लिखा
" ओहः.. इस लिए यहाँ आ नहीं रही हो!! तुम्हे मेरी बदमाशी पसंद नहीं है?"
उनहोने जल्दी लिख के भेजा
"उन्ह ह...एक दम नहि"
मुझे अब बस उनके मन की बात जानने का भूत सवार हो गया. मैं लिखा
"ईस लिए मेरे से दुर रह रही हो?"
बस फ़टाक से बीप बीप करके रिप्लाई आगया.
" हमं..इसी लिए तो."
मेरे सर पे शरारत चढ़ गया. और में धीरे धीरे टाइप किया
" दो दिन बाद से क्या करोगी? तभी भी मेरे से दुर रहोगी?"
सेंड करके सोच रहा हु अब वह क्या रिप्लाई देगी. हालां की वह अब पहले से सहज हो गई. स्पेशली हम जब अकेले होते है. मैं उनको नाम लेकर बुलाता हु. वह एक प्यारी पत्नी जैसा मेरे से बात करती है. तो में अब उनका रिप्लाई का इंतज़ार कर रहा हु. अचानक मेरे चिंता का लिंक तूट गया बीप बीप आवाज़ से. उन्होंने लिख के भेजा
"वह सोचना पडेगा".
मै समझ गया माँ मेरी परीक्षा ले रही है. और इसमें उनको आनंद भी मिल रही होगी. मैं भी उसी तरह उनको रिप्लाई दिया
" है राम...अभी भी सोचोगी?"
फटाफ़ट रिप्लाई किया
"ह्म्म.."
मैन फिर थोड़ी सोच के लिखना चालू किया.
" लेकिन मुझे मेरी बीवी .. मेरी मंजु हमेशा..ज़िन्दगी भर मेरे पास , मेरी बाँहों में चहिये".
इस बार तुरंत रिप्लाई नहीं आया, पर इंतज़ार भी ज़ादा करना नहीं पडा उन्होंने लिखा
" ओके. वह में उसको बता दूंगी"
इस जवाब से में थोड़ी रुक गया, माँ क्या लिख के भेजीं है. वह तो और किसीसे एसएमएस ही नहीं करति. ऐसा लगा और किसीके लिए टाइप किया , लेकिन मेरे फोन पर सेंड हो गया. मैं समझ नहीं पाया. क्या वह टाइपिंग गलत कर दि!! मैं एक दुवीधा के साथ लिखके भेजा
"किस्को?"
उनका तुरंत रिप्लाई आया.
" क्यूं...आप की बीवी को".
यह पढ़ के मेरे चेहरे पे फिर से स्माइल आगया. मेरे मन में एक ख़ुशी का तूफ़ान दौडने लगा. में फ़टाफ़ट टाइप किया
" ओहः..तो उनको यह भी बताना की उनका होनेवाला पति उनको बहुत?? बहुत?? प्यार करता है. उनके बिना ज़िन्दगी एक पल भी नहीं जी पाएगा."
" ठीक है. मैं उसको बता दूंगी.ओके"
" और हा...उनको यह भी बताना की उनके पतिके दिल में हमेशा एक ही खूबसूरत लड़की थी, अब है और रहेगी. दुनिया की सबसे खूबसूरत प्यारी लड़की को बीवी के रूप में पाके उनका पति खुद को भाग्यवान मानता है"
" मैं बता दूंगी . और वह यह बात याद रखेगी".
यह पढ़के मुझे मालूम हो गया की माँ बहुत इमोशनल हो गयी और अपनी दिल की बात लिख दिया. उस को पकड़ के में उन्हें परेशान करने के लिए लिखा
" तुमको कैसे मालूम की वह याद रखेगी या नहि"
काई रिप्लाई आया नही माँ शायद समझ गयी की पिछले एसएमएस में वह एक ग़लती कर दि, शायद वह वहि फिर से पड़ रही होगी और सोच रही होगी की कैसे फिर से बात को घुमाया जाए. थोड़ी देर में इंतज़ार करने के बार उनका रिप्लाई मिला
"क्यूं की में उससे पूछ लुंगि".
मैन तुरंत लिख के सेंड किया
"तो अब पुछो ना".
मा बस अब थोड़ी अपनी ही बातों से फस गई. वह समझ नहीं पा रही है की क्या रिप्लाई करे. लेकिन फिर भी लिख के भेजी
" अब वह बिजी है".
मैन हास के टाइप करने लगा
" ठीक है उनको फ्री होने के लिए बोलो और उनको बता दो".
मै यह सेंड कर दिया और कुछ न लिखके मोबाइल पकड़ के बैठा हु. बहुत टाइम कोई रिप्लाई आया नही वह क्या कर रही है अब!! मैं जो बोला उसका जवाब क्या देगीजब कुछ टाइम बाद भी कोई रिप्लाई नहीं आया तो में फिर से एसएमएस टाइप किया
" उनसे बात हुआ".
अब रिप्लाई आया.
"ह्म्मम्".
"तुमने पुछा वह यह सब याद रखेगी या नहि"
"हा...पूछ लिया".
"क्य बोली उन्होंने".
??वह यह सब बातें उसके दिल में सजाकर ज़िन्दगी भर याद रखेगी".
मेरे मन में माँ के लिए प्यार भर गया. अब वह इतनी प्रतिबद्ध और समर्पित हो रही है, मुझे उनके इस भावनाओं की कदर करना है ज़िन्दगी भर. मैं उनके दिल की बात और जानना चाह रहा था मैं लिखा
"और कुछ नहीं बोलि"
उनहोने थोडा टाइम लिया और लिखके भेजि
"वोह भी उसके होनेवाले पति को बहुत. बहुत ..प्यार करती है. पूरी जिंदगी उनके साथ, उनको प्यार करके गुज़ारना चाहती है".
मै भी इमोशनल हो गया. मुझे माँ के लिए जो आसक्ति हुई थी , अब इन सब प्यारी बातों में वह धीरे धीरे कम होने लगी. मेरे मन में उनको पाने के लिये, शारीरिक रूप से उनके पास आने के लिए मन छटफट कर रहा था पर अब भावूक होने लगा. मुझे मालूम पड़ रहा है की मेरे ऊपर एक रेस्पॉन्सिबिलिटी धीरे धीरे बढ़ रही है. माँ को खुश रख के उनका हर इच्छा पूरी करके , उनको सारे सुख , आनंद देकर उनकी ज़िन्दगी को रंगीन बना के रखना चाहता हु. वह ज़िन्दगी भर पति के प्यार के लिए तरसी होगी, अपनी फॅमिली पाने के लिए चाहत दिल में छुपाके रखी होगी, एक प्यारी पत्नी बनके ज़िन्दगी गुजारने का सपना दिल में दफ़न करदी होगी. पर आज उनको सब कुछ देना चाहता हु. इन सब भावनाओं के बीच मेरे फोन पर फिर से एसएमएस आया और उनको मजाक करते हुए लिखा
??और कुछ नहीं बोला उन्होंने??.
मा समझ नहीं पाई में और क्या पूछना चाहता हु, वह रिप्लाई में वहि लिखके भेजि
??और क्या!!??.
मैने लिखा
??दो दिन बाद से भी क्या वह मेरे से दुर रहेगी???
थोड़े टाइम चुप्पी रही फिर उनका रिप्लाई आया
??वह इसका जवाब अब नहीं बतायेगी. और टाइम आने दीजिये. आप को इसका जवाब मिल जाएगा??.
मुझे मालूम है माँ अब मुह से न कुछ बतायेगि, ना आज मेरे पास आयेगी. मैं बस उस दो दिन गुज़रने का इंतज़ार करने लगा.
 
अहमदाबाद पहुंच कर घर पहुँचने तक मेरे छाती में एक अजीब तरीके से एक अनुभुति खेल रही थी ख़ुशी भी हो रही थी थोड़ी शरम, थोड़ी अन्जान चिन्ता..सब सब मिलके शरीर में एक हल्का हल्का कम्पन फील करने लगा. डोर बेल बजाते टाइम शायद मेरे हाथ थोडा काँप गया. अन्दर जो लोग है सबके साथ बस दो दिन बाद से रिलेशन चेंज हो जाएगा. नाना नानी मेरे साँस ससुर बन जाएंगे, में उनका एक लौता दामाद, माँ मेरी पत्नी और में उनका पति बन जाऊंगा. नानी इस बार एकदम खुश होकर और चौड़ी स्माइल के साथ मुझे अंदर स्वागत किया. नानाजी भी एक कुरता और पाजामे पहनके मुह पे चौड़ी हसि लेके मेरी तरफ हाथ फैलाके आये और गले लगाया. मैं उनलोगों के पैर पड़कर ड्राइंग रूम में जाके बैठा. एक तो गर्मी , साथ में एक अनजान अजीब टेंशन . पसिनेसे एकदम गिला हो गया था पंखा खोल के नानाजी भी सोफ़े पर बैठ गया. माँ तभी पानी लेके आई. मैं माँ को एक झलक देखा . इस बार अचानक माँ को चेंज लगा. हालां की उनके अंदर वहि पुराणी शर्म , लाज थी फिर भी आज थोड़ी अलग लगी. जैसे की एक ग्लो उनके चारो तरफ से निकल रही है. पहले से थोड़ी सहज तो हो गयी नाना नानी के सामने, तभी भी उनका चेहरा भी ज़ादा ख़ुशी से भरा लगा. जैसे कोई कुंवारी नवजवान लड़की अपनि शादी से पहले हो जाती है, और होनेवाले पति के सामने एक शरम, संकोच और दबी हुई चाहत से पेश होती है, वैसे माँ आज लग रही है. पिछले वीकेंड में लास्ट देखा था. पर अब वह और सुन्दर , खूबसूरत और सेक्सी लगने लगी. मेरा मन अचानक एक दम ख़ुशी से पिघलने लगा . और माँ के लिए एक अलग फीलिंग्स से मेरे अंदर में तोड़ फोड़ होने लगी. आज यह बिस्वास मेरे मन में गाँठ कर गया की दुनिया में और भी खूबसूरत लड़कियां हो सकती है, पर मेरे नज़र में माँ से ज़ादा कोई खूबसूरत हो नहीं सकती. और में बचपन से ऐसे ही एक लड़की को मेरी बीवी बनके पाना चाहता था और दो दिन में यह खूबसूरत और सेक्सी लड़की मेरी पत्नी बनके मेरी बाँहों में होगी.

आज शाम को एक अलग माहोल मिला घर पर. हमेशा वही टीवी देख के , काम कि बात करके , डिनर करके बस सैटरडे नाईट ख़तम होती था पर आज सब अलग मूड में थे. नाना नानी बहुत सारी हसि की बात बता रहे थे. हम सब हस रहे थे. माँ भी कभी कभी कुछ काम के लिए ड्राइंग रूम में आति थी तो उनके होठ पे भी चौड़ी स्माइल दिखाइ देता था हालां की माँ अभी तक एक बार भी डायरेक्टली नहीं देख रही है मेरी तरफ. फिर भी दो चार बार हमारी नज़र मीली. और वह तुरंत शर्माके नज़र घुमा लि. कल हम शाम को मुंबई के लिए निकल जाएंगे. रात की ट्रैन ले रहे है और एकदम सुबह सुबह बांद्रा टर्मिनस पे पहुच जाएंगे. फिर वहां से टैक्सी लेके रेसोर्ट. वहाँ जाके फ्रेश होकर , ब्रेकफास्ट वगेरा कर लेंगे और उसके बाद हम रेस्ट करेंगे. फिर शाम को एक रसम होगी. पण्डितजी भी रहेंगे. और रात को डिनर करके सब जल्दी सो जाएंगे. क्यूँ की नेक्स्ट डे यानि की मंगलवार सुबह शादी का मुहूर्त है. यहाँ यह लोग अपना अपना पैकिंग वगेरा कर लिया है. एक अलग सूटकेस में मेरी शेरवानि, माँ का शादी का जोडा, और भी शादी का बहुत सारा सामान अलग से पैक करलिया. बात करते वक़्त में नानी को ??नानीजी?? ही बुला रहा था अचानक एक जगह पे बात करते करते नानी मेरे तरफ देख के चुप हो गई. कुछ पल मेरे तरफ नज़र टिकाके रखि. और फिर हास पडी. मैं समझ नहीं पाया. नानीजी नानाजी को देखा तो नानाजी भी हास रहे थे. फिर नानाजी बोले ?? हो जायेगा सुजाता धीरे धीरे सब ठीक हो जायेगा??.
मैन संमझा नहीं वह लोग किस बारे में बात कर रहे है. मेरे आँखों में वह सवाल पढलिया नानीजी. और फिर मुझे देख के हस्ते हस्ते बोलि
?? मुंबई जाकर फिर ऐसा मत करना बेटा. वहाँ और भी लोग होंगे??.
मै चुप होकर सुन रहा था मेरे दिमाग में माँ ऐसी छाई हुई है की में हमेशा उनको लेकर बहुत सारे सपने देखने लगा. इस लिए यहाँ बात के बीच में में लिंक खो बैठा. मेरी हालत देख के नानीजी फिर बोली
?? अब तो मुझे नानीजी मत बुलाओ. मम्मी बोलना सुरु कर दो. नहीं तो रिसोर्ट में नानी बोल दिया तो सब गड़बड़ हो जायेगा??.
बोलके नानीजी जोर जोर से हॅसने लगी. नानाजी हास रहे थे पर नानी जैसा जोर जोर से नही में इन सिचुएशन में थोडा अजीब फील करने लगा. साथ ही साथ शर्म भी . क्यों की बचपन से इन लोगों को नाना नानी बुलाता आया हु. आब मुझे मम्मी पापा बुलाना पडेगा. पर करना तो पडेगा. नहीं तो हमारे लाइफ में बहुत सारे अनवांटेड प्रॉब्लम आ सकते है चारों तरफ से. मैं भी तय कर लिया में मम्मी पापा ही कहुंगा. पर सुरु कैसे करें यहि प्रॉब्लम था पर अभी नानीजी सीधा बोल दि और जो बोली वह सच मुच ठीक भी है. शादी में नानाजी माँ को सम्प्रदान करेंगे और नानीजी मेरे तरफ से जितनी सारी रसम है वह सब सम्पन्न करेंगेमैं बस हास के गरदन झुका के इस परिस्थिति को सहज करने लगा. फिर और बहुत सारी इधर उधर की बात होने के बाद हम सब ने डिनर कर लिया. आज माँ थोड़ी सहज तो है पर सामने थोड़ी कम आरही है. और चुराके देख भी नहीं रही है. मेरी नज़र चारों तरफ घूम रही थी शायद माँ कहीं दिख जाये मेरी तरफ नज़र देते हुये. पर वह आज पूरी शाम बस खाना पकाने में जूटी रही और किचन से बाहर कम निकली. मुझे उनको देखणे, उनको पास में पाने की चाहत एकदम चरम सीमा पे था पर में भी मन को दबाके सब के सामने सहज होकर बैठा था खाना खाकर हम सब अपने अपने रूम में चले गये. मैं थोडा एक्ससायटेड हो रहा था अगर आज रात माँ एक बार एकांत में मेरे पास आने के लिए चाहे तो में सब बाधा सब संकोच तोड़के उनको प्यार करना चाहता हु. जब मन में हम एक दूसरे को पति पत्नी मान लिया है और एक दूसरे के पास हम सरेंडर कर दिए पूर्ण निष्ठा के साथ , जब मानसिक तरीके से एक दूसरे को ग्रहण कर चुके है तो शारीरिक तरीके से क्यों न मिल पाये. मैं इस के लिए तैयार हु, मेरे मन में कोई दुविधा नहीं रही.
 
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