लोकल बस में मिली आंटी दोस्त के रूम पर चुदी

Discussion in 'Hindi Sex Stories' started by sexstories, Apr 1, 2018.

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    sexstories Administrator Staff Member

    अब मैंने उनके मम्मे को ज़ोर – ज़ोर से दबाना शुरू कर दिया. क्योंकि बस में हमें देखने वाला कोई नहीं था. ड्राइवर, कंडक्टर के अलावा सवारी भी बहुत कम थी. अब आंटी ने धीरे से अपना हाथ मेरे लन्ड पर रख दिया. गजब की फीलिंग थी यार! मुझे नहीं पता था कि बस में मेरा ये सफर इतना सेक्सी बन जाएगा…

    हेलो दोस्तों, कैसे हो आप सब? मैं आपका दोस्त रोमियो चंडीगड़ का रहने वाला एक पंजाबी लड़का हूं. मैं काफ़ी समय से अन्तर्वासना साइट का पाठक हूँ और इसकी हर कहानी को पढ़ता रहता हूँ. दोस्तों, मैं बचपन से ही चूत का दीवाना रहा हूँ और कामदेव ने भी मेरे ऊपर अपनी कृपा बनाए रखी है. आज मैं यहां पहली बार लिख रहा हूँ इसमे अगर मुझसे कोई ग़लती हो जाए तो माफ़ करना.

    दोस्तों, मेरी यह कहानी 3 साल पहले की है जब मैं कॉलेज में पढ़ता था. उस समय मैं लोकल बस से कॉलेज आता – जाता था. एक बार की बात है मैं बस स्टैंड पर खड़ा होकर बस का इंतजार कर रहा था. बहुत गर्मी हो रही थी और बारिश का मौसम बन रहा था. आसमान पर काले – काले बादल हो रहे थे.

    उसी समय वहां मेरे सामने पंजाब रोडवेज की एक बस आकर रुकी. दोस्तों, आमतौर पर पंजाब में लोकल बस में बहुत कम लोग चढ़ते है. इसलिए भीड़ कम होती है. मैं उस बस में चढ़ गया. तभी मेरी नज़र बस की लास्ट वाली सीट पर पड़ी. उस पर एक बहुत ही सेक्सी और खूबसूरत आंटी बैठी थी. उनका चेहरा बहुत आकर्षक था. बाकी मुझे उनके फिगर का तो पता नहीं चल सका.

    मैं उन्हें देख ही रहा था कि तभी उसकी नज़र मेरी नज़र से टकराई. उसकी आखों में मुझे कुछ अजीब सा लग रहा था. फिर मैंने अपना फेस दूसरी तरफ़ कर लिया और चुपके से उसकी तरफ देखा तो पाया कि वो मेरी तरफ़ ही देख रही थी और मुझे देखते देख कर उसने हल्के से मुस्करा दिया.

    उसे मुस्कुराते देख मैंने भी उसकी तरफ देख कर स्माइल कर दी. अब वो और मैं लगातार एक – दूसरे को ही देख रहे थे. तभी हल्की – हल्की बारिश शुरू हो गयी. वो लास्ट सीट पर अकेली बैठी थी और मैं उसके साथ वाली सीट पर बैठा था. अब वो मुझे देख कर मुस्काराई तो मैंने उसे आंख मार दी.

    तभी बस कंडक्टर आ गया तो उससे मैंने अगले स्टेशन तक का टिकट ले लिया. फिर कंडक्टर आगे जाकर बस ड्राइवर के पास बैठ गया. ये देख कर आंटी और मैं बड़े खुश हुए. बाहर बारिश बहुत तेज शुरू हो गयी थी और बस धीरे – धीरे चल रही थी. फिर मैंने धीरे से अपना बायां हाथ आगे किया और आंटी के बूब्स को टच कर दिया.

    अब आंटी ने बड़ी कातिल अदा से मेरी तरफ देखा. उसे ऐसे देखते देख कर मैं समझ गया कि अब मामला सेट है. फिर मैंने धीरे से उनके मम्मे को अपनी बांह से दबा दिया तो आंटी ने बड़ी सेक्सी आह भरी और अपनी आंखें बंद कर ली.

    अब मुझे कन्फर्म हो गया था कि अब मामला पूरी तरह से सेट है. फिर मैंने धीरे से अपने हाथ से आंटी का मम्मे को पकड़ लिया और ज़ोर से दबा दिया. अब आंटी ने मेरी तरफ़ देखा और ये सब करने से मना किया लेकिन उसके मना करने में दम नहीं था वो सिर्फ़ ऐसे ही कह रही थी. इसलिए मैंने उनकी बात नहीं मानी.

    अब मैंने उनके मम्मे को ज़ोर – ज़ोर से दबाना शुरू कर दिया. क्योंकि बस में हमें देखने वाला कोई नहीं था. ड्राइवर, कंडक्टर के अलावा सवारी भी बहुत कम थी. अब आंटी ने धीरे से अपना हाथ मेरे लन्ड पर रख दिया. गजब की फीलिंग थी यार! मुझे नहीं पता था कि मेरा बस में मेरा ये सफर इतना सेक्सी बन जाएगा.

    मैंने अब बिना किसी डर से उनके मम्मे दबाना शुरू कर दिया. फिर मैंने आंटी का नाम पूछा तो उन्होंने अपना नाम सोनिया (बदला हुआ नाम) बताया और फिर मैंने उनका साइज़ पूछा तो उन्होंने अपना साइज़ 36D-29-38 बताया.

    अब आंटी का पूरा मूड बन गया था. अब आंटी मेरे लंड को ज़ोर – ज़ोर से दबा रही थी और मैं उनके बूब्स को जोर – जोर से दबा रहा था. तभी मेरा स्टॉप आ गया और आंटी को भी वहीं उतरना था. बारिश भी अब थोड़ी रुक गयी थी. अब मैंने आंटी से पूछा क्या इरादा है? तो आंटी ने कहा – तेरे साथ ही हूँ पर मेरे पास टाइम सिर्फ़ दो घंटे ही है.

    अब मैंने पीजी में रहने वाले अपने एक फ्रेंड को कॉल किया और उसे सारी कहानी बता दी तो वो बोला, “भाई चाभी ले जा तू.” मैं आपको बताना भूल गया कि मेरा वह दोस्त मोहाली में जॉब करता है. अब मैंने आंटी को बोला कि मोहाली जाना पड़ेगा तो आंटी चल पड़ी. फिर मैंने एक स्पेशल ऑटो किया और सबसे पहले फ्रेंड के पास से चाभी लाया.

    फिर मैं जल्दी से अंदर जाकर रूम लॉक किया और आंटी पर टूट पड़ा. अब मैंने जल्दी से उनका कुर्ता उतार दिया. नीचे उन्होंने स्किन कलर की ब्रा पहन रखी थी. अब मैं ब्रा के ऊपर से ही उनके बाएं बूब्स को मुंह में डाल लिया और चूसने लगा. अब आंटी ‘ओह आह आह श्ह्ह्ह’ कर रही थी.

    क्या बूब्स थे यार उसके! उसको छूने के बाद मरा हुआ बंदा भी खड़ा हो जाए. उनके बूब्स चूसने बाद मैंने अब उनकी सलवार भी उतार दी. नीचे उन्होंने रेड कलर की पैंटी पहन रखी थी और वह आगे से पूरी भीगी हुई थी. अब मैंने उनकी ब्रा उतार दी और आंटी ने मेरी शर्ट और जीन्स को उतार दिया.

    मेरा लंड देख कर उनके मुंह में पानी आ गया. मेरे लंड का साइज़ मैं नहीं बताऊंगा, जिसको इंटरेस्ट होगा वो खुद ही देख लेगी. फिर आंटी ने मेरी अंडर वियर भी उतार दिया और मैंने आंटी की पैंटी खींच कर उतार दिया और उनके बूब्स को चूसने लगा. उनके सफेद बूब्स पर ब्राउन निप्पल था, जिन्हें चूसने में बहुत मज़ा आ रहा था.

    फिर आंटी जल्दी से नीचे बैठ गयी और मेरा लंड अपने मुंह में डाल कर जोर – जोर से चूसने लगीं. अब मैंने कहा, “आंटी, ऐसा न करो नहीं तो मेरा निकल जाएगा.” इस पर आंटी बोली मुंह में मत निकालना मुझे अछा नहीं लगता तो मैंने उनके मुंह से लंड निकाल लिया क्योंकि मैं किसी पर ज़बरदस्ती नहीं करता

    फिर मैंने आंटी को बेड पर लिटाया और फिर मैं उनके ऊपर लेट गया. फिर मैंने आंटी की टाँगे अपने कंधों पर रख ली और लंड को उनकी शेव की हुई गोरी चूत पर रखा तो आंटी ने खुद ही नीचे से धक्के दे दिया और लंड का टोपा उनकी चूत में फंस गया.

    अब आंटी ने बड़ी ज़ोर से सांस ली और बोली, “लड़कों के लंड बहुत मस्त होते हैं, तभी तो तेरे पर मेरा दिल आ गया था.” और इतना बोल कर आंटी रुक गईं तो मैंने बड़े प्यार से उनके लिप्स पर किस किया और अपना पूरा लंड उनकी चूत में उतार दिया. अब आंटी ज़ोर से चीखना चाहती थी पर उनके लिप्स मैंने अपने लिप्स से लॉक कर रखे थे.

    जब मैंने उनके लिप्स से अपने लिप्स हटाए तो आंटी बोली, “हाय रे, मज़ा आ गया. बड़ा लंड लेकर लूट ले मुझे.” अब मैं ज़ोर – ज़ोर से लंड अंदर – बाहर कर रहा था. तभी आंटी ने मुझे ज़ोर से पकड़ लिया और मेरे लिप्स पर काट लिया और मजे से झड़ने लगी. लेकिन मेरा नहीं हुआ था और मैं ज़ोर – ज़ोर से लंड अंदर – बाहर कर रहा था. जिससे आंटी फिर से गरम हो गयी.

    अब मैंने अपना लंड बाहर निकाल लिया और आंटी को डॉगी स्टाइल में लाकर लंड पीछे से उनकी चूत में डाल दिया. अब आंटी मज़े से चुदवाने लगी. फिर मैंने पीछे से उनके बड़े – बड़े बूब्स को पकड़ लिया और आंटी को मस्ती से चोदने लगा. हम दोनों को बहुत मज़ा आ रहा था.

    तभी करीब 20 मिनट की चुदाई के बाद मैं झरने वाला था तो आंटी से पूछा कि कहां निकालूँ तो आंटी ने कहा, “अंदर ही डाल दो.” फिर मैं बड़े मज़े से अंदर ही झड़ गया. मज़ा आ गया था यार!

    फिर आंटी बोली – वाउ, मज़ा आ गया.

    थोड़ी देर बाद हमारा फिर से मूड बन गया और बाद में मैंने आंटी को 3 बार चोदा. फिर आंटी ने कहा, ” अब तो मुझे जाना होगा, लेकिन अगली बार जल्द ही फिर से मिलूंगी.” और फिर उन्होंने मेरे को 1000 रुपए दिए और मैं उनको बस स्टैंड पर छोड़ आया.
     
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