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अंदाज़

किचनवाली लड़की ने फिर प्याली भरी और जोर से आवाज निकाली

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'म्याऊं...!'

फिर प्याली मुंह से लगाकर दूध पीने लगी।

यशोदा आंटी ने छड़ी लेकर भीतर प्रवेश कियी तो ठिठककर रुक गई।

उसने नथुने फुलाकर आंखें घुमाई और धीरे-से बड़बड़ाई

'तो यह है दूध की चोर बिल्ली ।'

लड़की ने प्याली खाली करके मुंह से आवाज निकाली

'म्याऊं...!'

फिर एक प्याली भरने लगी।

यशोदा धीरे-धीरे समीप पहुंची । चीनी भरा हुआ डिब्बा खोलकर उसमें एक चमचा डाला और उसने काउंटर पर रख दिया लड़की प्याली भरने के बाद चीनी का डिब्बा और चमचा देकर तो मानो अपने-आपसे बोली

'अरे!, इसका क्या होगा?'

यशोदा ने पीछे से कहा

'फीका दूध बादी करता है । बादी दूध पीने से डाइजेशन भी खराब होता है और जिगर भी बिगड़ता

लड़की ने कहा

'ओ थैक्स! मैं तो भूल ही गई थी।'

उसने डिब्बे में से चमचा भरकर चीनी निकाली । फिर अगले ही पल उसे पीछे से आने वाली आवाज का ख्याल आया तो उसके दोनों हाथ जहां के तहां रह गए। पूरा शरीर जैसे जादू के जोर से पथराकर रह गया था । यशोदा ने पीछे से कहा

. _ 'डालो....डालो....चीनी डालो....फीका दुध नहीं पीने का ।'

लड़की ने बिलबिलाकर कहा

'अरे बाप रे...!'

दूसरी छड़ी पड़ी तो लड़की छटपटाती हुई जल्दी-जल्दी टांगें सहलाने लगी और बोली

'ओ, आटी । अपुन कू क्षमा करने का आंटी

यशोदा ने गर्दन हिलाकर कहा

'क्षमा करने का । अपुन किधर-किधर से पैसा जोड़कर दूध वाले का बिल देती और तू सब लड़की लोग का दूध पी जाती।'

'लड़की लोग का नहीं आंटी । यह दूध भैंस का होता है।'

'सड़ाक...सड़ाक...!'

यशोदा ने छड़िया मारते हुए कहा

'बातें बनाती...आज मैं तेरी टांगें नीली कर देगी।'

वह लड़की मार खाती हुई बाहर आ गई तो लड़कियों में भगदड़ मच गई।

एक लड़की ने जल्दी से ऑफिस का दरवाजा बंद करके ताला कुदे में डाला और चाबी भी घुमा दी। लेकिन जल्दी में वह चाबी नहीं निकाल सकी क्योंकि आंटी उस लड़की को मारती हुई समीप पहुंच चुकी थी।

सब लड़कियों को वहां देखकर यशोदा ने चौंकते हुए पूछा 'हे..तुम लोग अभी तक जागती?'

एक लड़की हकलाई

'ज...ज...जी...जी...आंटी...!'

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यशोदा ने आंखें निकालकर पूछा

'काहे को जागती?'

उस लड़की ने दूसरी से पूछा

'काहे कू जागती?'

दूसरी ने तीसरी से पूछा

'काहे को जागी?'

तीसरी ने चौथी से पूछा

'अरे, बोल ना...काहे को जागती?'

चौथी ने हडबडाकर दूध पीने वाली लड़की की तरफ इशारा करके कहा

'इसक ढूंढने कू...!'

सब लड़कियों ने जल्दी से कहा

'हां, यशोदा आंटी । इसकु ने ढुंढने कू ।'

यशोदा ने उस लड़की को फिर से छड़ी मारी और गुस्से से बोली



'इस दो पांव का बिल्ली को...यह ईडियट...चोर....सप्ताह में दो-तीन बार दूध चोरी करके पी जाती।'

एक लड़की ने जल्दी से कहा

'ओ...नो...आंटी...यह बेचारी चोरी नहीं करती।'

यशोदा गर्दन हिलाकर बोली 'नहीं...यह तो उधर जा के पूजा करती ।'

लड़की ने दुखी स्वर में कहा

'आंटी! यह बेचारी मजबूर है।'

'अच्छा!' मजबूर होकर दूध का चोरी करने का है।'

__ 'नहीं, आंटी । इसकू नींद में एक ड्रीम आता है।'

'व्हाट....!'

'हां, आंटी । इसकू सपना आता है । एक औरत हाथ फैलाए खड़ी रो रही है और कह रही है, मेरी बच्ची! मैं तुझे अपनी छाती से दूध नहीं पिला सकी । मैंने तुझे पैदा होते ही अनाथ-आश्रम के पालने में डाल दिया। 'तू जवान हो गई। लेकिन आज भी मेरी छाती इस दुःख से फटती है कि मैं अपनी बेटी को दूध नहीं पिला सकी...'

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लड़की ने आंसू पोंछे और बोली

'और आंटी वह औरत कहती है, देख बेटी! मेरी छातियों में आज भी तेरे अधिकार का दूध भरा है

।'

फिर उस औरत की छाती से दुध की-----------

एक देगची में गिरती है----------

लाड़ली । तु...तु भूखी होगी । तू यह दूध नहीं पीएगी तो मेरी छातियां फट जाएंगी । मेरी आत्मा को कभी शांति नहीं मिलेगी...कभी शांति नहीं मिलेगी।'

कहते-कहते वह लड़की रोने लगी।

साथ में दूसरी लड़कियां भी रोने लगीं । जो लड़की दूध पीकर आई थी, उसके होंठों पर दूध लगा था और और आंखों में आंसू थे।

यशोदा की हाथ की छड़ी रुक गई थी । उसका चेहरा लाल हो गया था। उसके होंठ फड़फड़ा रहे थे । आंखें छलक रही थीं? वह रोआंसी आवाज में बोली _ 'मैं...में...तेरे कू मारी...दूध का वास्ते तेरे कू मारी । तेरी मदर की आत्मा कितना दुखी हुआ होएंगा

'आंटी...!'

'ओ गॉड! होली क्राइस्ट मेरे कू माफी देना और...और इसका मदर की आत्मा को शांति देना । यह...यह मेरा बेटी है...अब मैं इसकी मां हैं...मैं...मैं इसकू अपना दूध पिलाएगी...मैं इसकू अपना दूध पिलाएगी आज से...!'

'आंटी....आंटी...!' दूसरे ही पल उस लड़की को यशोदा ने अपनी छाती से लिपटा लिया और वह लड़की 'भों...भों... ' की आवाजें निकालती हुई रोने लगी।

सब लड़कियां भी उतनी ही जोर-जोर से रोने लगी तो दफ्तर का दरवाजा जोर-जोर से थपथपाकर अंदर से डॉली ने चिल्लाते हुए पूछा

'क्या हुआ ? अरे, तुम लोग क्यों रो रही हो

लड़कियां चौंक पड़ी।

ए--एंएं.नै? और भी व्याय् जोर-बोर से रोना शुरू कर इँए परईके. जोर में पियटर लिया था ।

वह रोने के साथ हाथ से इशारा भी करती जा रही थी । सब लड़कियों ने यशोदा को घेरे में ले लिया ।

एक लड़की ने चुपके-चुपके दफ्तर का ताला खोला, कुंदा खोला, दरवाजा खोला और जैसे ही डॉली बाहर निकली, उसका मुंह बंद कर दिया ।

डॉली ने सबको रोते देखा तो यह खुद भी जोर-जोर से रोने लगी।

दूसरी लड़की ने जल्दी-जल्दी दरवाजा बंद करके ताला डाला और झटपट चाबी यशोदा के सिरहाने रखकर वापस चली आई।

फिर यशोदा ने उस लड़की को थपककर कहा

'गॉड ब्लैस यू । जाओ बेटी । अब तुमकी ऐसा ड्रीम आता तो तुम हम कू बोलने का । हम तुम्हारा मदर का माफक है । हम तुम कू अपना दूध पिलाएगी...जाओ...जाओ...सो जाओ...।'







फिर यशोदा आंसू पोंछती हुई अंदर चली गई।
 
दूध पीने वाली आंखें फाड़कर बड़बड़ाई 'आंटी मेरी कू अपना दूध पिलाएंगी?'

फिर वह आंखें त्यौराकर गिरी और बेहोश हो गई ।

दूसरी लड़कियों ने उसे भुजाओं पर संभाला। फिर वे सब उसे उठाकर फटाफट उस हॉल कमरे में ले आई,

जहां वे लोग सब दरियों के ऊपर सोया करती थी।

लड़की को दरी पर लिटा दिया गया और डॉली ने बेचैनी से पूछा 'अरे, क्या हुआ? कोई मुझे भी तो बताओ?'

लड़कियों ने डॉली को घटना बताई।

डॉली ने बेहोश लड़की की जांघ पर एक जोरदार धप्प मारी । वह चिल्लाकर उछलकर बैठ गई और अपनी जांघ को सहलाने लगी।

डॉली ने दांत पीसकर कहा-'ईडियट! तेरे कू बिल्ली की आवाज निकालने कू बोला था या बिल्ली बनने कू बोला था ?'

लड़की ने जांघ दबाकर मुंह बिसूरते हुए कहा 'अब मेरे कू बचपन में मां का दूध नहीं मिला था ना?'

'तो जवानी में यशोदा आंटी तेरे कू दूध पिलाएंगी?'

लड़की ने फिर से बेहोश होने का इरादा किया तो एक 'धप्प' पुन: उसकी जांघ पर पड़ी । वह जल्दी-जल्दी अपनी जांघ सहलाने लगी।

डॉली ने दांत पीसकर कहा 'और तुम लोगों ने मुझे अंदर क्यों बंद कर दिया था ?'

एक लड़की ने कहा

'अरी, यशोदा आंटी इसे मारती हुई आ गई थीं । अगर वह दरवाजा खुला देख लेती तो तू अंदर पकड़ ली जाती ना ?'

दूसरी लड़की ने पूछा 'अरे, हां । तुम अंदर गई थी । क्या हुआ ?'

'लड़का हुआ ।' वे सब खिलखिलाकर हंस पड़ी।

एक ने कहा

'जरूर कुछ पता चल गया है।'

'सिर्फ सूत्र यानि क्लू मिला है।'

'क्या...?'

'आंटी की खास दराज से एक नौजवान लड़के का फोटो पैदा हुआ है ।'

'पैदा हुआ है...?'

'धत् तेरी...मेरा मतलब है निकला है।'

'किधर है? फोटो दिखाने का ना ।'

डॉली ने गिरेहबान से फोटो निकालकर दिखाया तो एक लड़की ने फोटो उसके हाथ से झपट लिया । उसे देखा और ललचाए स्वर में बोली 'हाय...कितना हैंडसम है !'

दूसरी ने उसके हाथ से फोटो झपटकर देखा और बोली 'ऐ यई यो, बिल्कुल अनिल कपूर लगेला है।'

तीसरी ने छीनकर फोटो देखा और बोली 'गलत...एकदम संजय दत्त लगेला है।'

चौथी ने झपटकर कहा

'अरे वाह, यह तो सलमान खान है ।'

पांचवीं ने फोटो देखा तो बोली

'बिल्कुल गलत । यह तो दूसरा ऋषि कपूर है

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इस बार डॉली ने खुद उसके हाथ से फोटो झपट लिया और गुर्राकर बोली

_ 'यह अभिताभ बच्चन है, दिलीप कुमार है, देव आनंद है, राजकपूर है, शम्मी कपूर है, शशि कपूर है, मिठुन चक्रवर्ती हे।'

'हे...हे...एक साथ इतना कैसे हो सकता है

'अरे, तुम लोग कू इसमें कौन-कौन नजर आता? कोई अनिल कपूर कोई कू संजय दत्त, कोई कू सलमान खान-ये तुम लोग का दोष नहीं, तुम लोगों की जवानी का दोष है।'
 
एक लड़की मुंह पर हाथ रखकर हंसी तो ही ने आंखें निकालकर कहा

'कहे को हंसती ?'

'हम लोग जवान हैं ना और तू बुड्डी हैं-ललिता पवार, दुर्गा खोटें !'

'चुप...।'

वे सब खामोश हो गई।

डॉली ने गुस्से से कहा

'क्या मैंने यह फोटो इसलिए ढंढा है कि तुम लोग इसकू अपनी-अपनी पसंद का हीरो बना दो।'

'ओं, आई एम सारी।' एक लड़की ने कहा

'बस, यही फोटो निकला है ?'

'ही, बस!'

'तो यह इस बात का सबूत है कि यह यशोदा आंटी के बेटे का ही फोटो है ?'

डॉली ने गुस्से से कहा

'तुम लोग कू इससे क्या मतलब ? तुम कू तो इसकी सूरत में हीरो ढूंढने का था ।'

'अरे, बोला ना बाबा । आई एम सॉरी!'

डॉली ने मुंह चिढ़ाकर कहा 'आई एम सॉरी!' फिर वह फोटो पलटकर बोली

'यह देखो, क्या लिखा है!' एक लड़की ने झपटकर देखा और जोर से पढ़ा

'आई लविंग सन'

वह उछल पड़ी।

फिर सबने फटाफट फोटो लेकर उस पर लिखी लिखाई पड़ी । आखिर में फोटो फिर से डॉली

के पास आ गया और डॉली ने कहा 'यह लिखाई शत-प्रतिशत यशोदा आंटी की है

'वह तो मालूम है । लेकिन आंटी को यह फोटो मिला कहां से होगा?'

उनके जेठ ने शायद दिया हो ।'

'लेकिन इस फोटो से हम इस हीरो को कहां से ढूंढेगे ?'

एक लड़की ने चुटकी बजाकर वहा 'लो...बोलो...अरे, आइडिया मुझसे लो ।'

'बोल...?'

'फोटो अखबार में छपवा दो कि तलाश है इस नौजवान की।

डॉली ने उसके सिर पर चपत मारी और बोली तू अपना आइडिया अपने पास ही रख...लो बोली।

वह लड़की चपत खाकर सिर खुजाने लगी तो दूसरी ने चौककर कहा

'अरे, इतना हंगामा हो गया और उसे पता ही नहीं?'

'किस कू?'

'वह सिर खुजाने वाली...कैसी रही...?'

डॉली ने बुरा-सा मुंह बनाया और कहा

'वह छत पर जुएं झाड़कर आकाश से नोट टपकने की राह देख रही होगी।'

वे सब हंस दी।

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वह लड़की बराबर बाल कढ़े जा रही थी और चिकने सीमेंट के फर्श पर जुओं का ढेर लग गया था ।

आकाश पर चांद भी था और तारे भी। ___ बराबर में ही म्युनिसपैलिटी के लैम्पपोस्ट का तेज प्रकाश भी।

वह कुछ जुएं गिराती फिर आकाश की तरफ देखती । फिर जुएं गिराती और ऊपर देखती। फिर रुककर उसने ऊपर देखा और बोली

_ 'ऐ ऊपर वाले! क्या पुरखे पुरखे झूठ भी बोलते थे कि जिसके सिर में जुएं होती हैं, वह जल्दी से मालदार हो जाता है।'

तभी छत पर एक बैग गिरा और गिरते ही खुल गया । उसमें से नोटों की गाडियां निकलकर बिखर गई।

लड़की खुशी के मारे बुरी तरह उछल गई। 'हे भगवान! मैं कहीं सपना तो नहीं देख रही

--

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उसने जल्दी-जल्दी आंखें मली । फिर नोटों को टटोलकर देखा। सचमुच वे नोटों की कई गाड्डियां थी । उसका दिल खुशी से धड़क उठा

'मैं मालदार हो गई ।' 'इतने ढेर सारे रुपये। 'लाखों रुपये ।' 'अरें, मैं तो सचमुच मालदार हो गई।'

वह खड़ी होकर खुशी के मारे जोर से नाची और उसका संतुलन बिगड़ गया । एक टांग छत से नीचे लटकी । उसकी चीख निकल गई

'ऊई मांsss..!'

उसने झपटकर मजबूती से छोटी-सी दीवार पकड़ ली ।

नीचे से किसी ने चिल्लाकर कहा

'ऐ, मैडम! क्या आत्महत्या करने का इरादा है

उसने खुद को संभालकर नीचे देखा तो काली पतलून और काली टी-शर्ट पहने एक सुन्दर, स्वस्थ नौजवान खड़ा था।

वह फिर से चिल्लाकर बोला

'छत से गिरकर मरने से ज्यादा तकलीफ होती है । बच जाओ तो लूले-लंगड़े बनकर जीओ। साथ में छ: महीने का कारावास भी । मरना है तो एक गिलास गरम-गरम दूध पीकर मर जाओ।'

लड़की ने चिल्लाकर कहा 'मैं मर नहीं रही थी।

लड़के ने जोर से पूछा 'तो क्या सर्कस में काम करती हो?'

लड़की ने जोर से कहा

'मेरे सिर में बहुत सारी जुएं पैदा हो गई थी।'

'तो लाइसिल डालो, सब मर जाएंगी । तुम क्यों मरती हो?'

'नहीं ये जुएं भाग्यवान हैं।'

'अच्छा ...?'

'हां, मैं अचानक मालदार हो गई।'

'क्या तुम पागल हो?'

लड़की ने रवानी में कहा

'हां...'

लड़का जोर से बोला

'यह घरवाले बांधकर नहीं रखते?'

'यह मेरा घर नहीं है।'

'मालूम है-छत है।'

'यह अनाथ-आश्रम की छत है।'

'तो तुम अनाथ हो ?'

'अब नहीं हूं । अनाथ मालदार नहीं होते और मालदार अनाथ नहीं होते ।'

'यह कौन-से मैथ्स की किताब में लिखा है?'

'मुझे नहीं मालूम ।'

'नीचे जाओ । अगर फिर से दौरा पड़ा तो नीचे गिरकर मर जाओगी।'

तभी एक और आदमी उस नौजवान के पास आया । दोनों में कुछ बातें हुई । फिर दोनों तेज-तेज एक तरफ चले गए।

लड़की झट से दीवार के पास से हटी।

पहले उसने फटाफट नोटों की बैग में भरीं । फिर उठकर नीचे को सीढ़ियों की तरफ झपटी।

फिर कुछ सोचकरपलटी और फर्श पर बैठकर जल्दी-जल्दी जुएं उठा-उठाकर वापस अपने सिर में डालने लगी।
 
'अरे! क्या वह सचमुच जुएं ही निकाल रही है?'

'पता नहीं...'

'जाके देखो ना । कहीं नीचे न गिर गई हो ।'

'लगता है, आज वह मालदार होकर ही नीचे आएगी।' अचानक धम्म-धम्म की आवाजें आई और एक लड़की उछल पड़ी

'वह आ गई।'

सबने दरवाजे की तरफ देखा ।

जुओं वाली लड़की बैग उठाए हांफती-कांपती हॉल में आई । वह तेज-तेज सांसों के साथ उन लोगों से बोली-'तुम...तुम लोग जानती ही नहीं थी कि जिसके सिर में जुएं हो जाती हैं, वह जल्दी मालदार हो जाता है ।'

डॉली ने बैग देखा।

फिर उसे घूरकर बोली 'क्या तू मालदार हो गई?'

'हां यह देखो।'

उसने बैग उलट दिया।

नोटों की ढेर सारी गड्डियां निकलकर फर्श पर बिखर गई और वे सब हड़बड़ा-हड़बड़ाकर जल्दी-जल्दी खड़ी हो गई।

डॉली ने छाती पर हाथ रखकर कहा

'हे...इतने बहुत सारे नोट!'

'लाखों होंगे...लाखों ।'

'कहां से आए हैं तेरे पास?'

'इन जुओं के प्रताप से।'

'ओ जुओं की बच्ची! ये नोट तेरे पास कहां से आए?'

'भगवान ने भेजे हैं।'

'क्या बोला?'

'मेरे सिर से थोड़ी जुएं गिरी तो तुमने सौ रुपये का नोट दिया । मैंने छत पर ढेर सारी जुएं गिराई

तो भगवान ने इतने नोट दिए ।'

-

'इस बैग में भरकर ?'

'हां, इस बैग में भरकर ।'

'क्या भगवान के यहां भी शॉपिंग-सेंटर खुल गया है ? और लीवर की फैक्टरी भी, जिसमें यह बैग बना होगा।

वह जल्दी-जल्दी खुजाती हुई बोली

'पता नहीं । मैंने तो जुएं निकाली थी । वह भी वापस अपने सिर में भर ली । इतने ही रुपये और मिलेंगे । कैसी रही?'

डॉली ने उसकी पीठ पर एक 'धमोकड़ा' मारा तो वह बिलबिलाकर बोली

'मारती क्यों है ? थोड़ी-सी जुएं मेरे सिर से निकालकर तू भी डाल ले ।'
 
डॉली ने उसकी बांह झकझोरकर कहा 'मैं पूछती हूं, यह बैग कहां से आया तेरे पास

'मैं सच कहती हूं, भगवान ने फेंका था।'

'छत पर?'

'हां । मैं तो सिर झुकाए जुएं निकाल रही थी

'अबे, गधी! यह बैग जरूर किसी ने सड़क पर से फेंका होगा।'

जुओंवाली उछलकर बोली 'सड़क पर से ?'

'हां । वह या तो कोई डाकू होगा या स्मगलर

'नहीं...।'

'पुलिस उसका पीछा कर रही होगी । उसने पुलिस छुपाने के लिए यह बैग छत पर फेंक दिया होगा-कोई और जगह न पाकर ।'

'अरे, बाप रे!'

'अगर वह कोई डाकू, बदमाश है तो यह बैग जरूर वापस लेने आएगा।'

जुओंवाली ने छाती पर हाथ रखकर भयभीत स्वर में कहा-'हे भगवान! फिर तो वह मुझे मार डालेगा।'

डॉली ने पूछा 'तुझे क्यों मार डालेगा?'

'क्योंकि उसने मुझे और मैंने उसे देख लिया है। फिल्मों में देखा है ना । चोर, डाकू स्मगलर-उन लोगों को जिन्दा नहीं छोड़ते, जो उन्हें पहचान लेते हैं

डॉली ने खीझकर कहा 'अरे, तो उसने क्या यह तुझे ऊपर आकर दिया था?'

'नहीं, फेंका तो नीचे से ही था ।'

'फिर तुम दोनों ने एक-दूसरे को कैसे देख लिया ?'

__'वह मैं दीवार पर लटक गई थी-गिरने वाली थी ना।'

कई लड़कियों ने एक साथ छाती पर हाथ रखकर कहा 'हाय राम !'

डॉली ने उसे फिर से घूरकर देखा 'तू कंघी से जुएं निकाल रही थी या योगासन कर रही थी।'

'कंघी...?'

वह सिर खुजाते-खुजाते-उछल पड़ी

'अरे बाप रे! कंघी तो छत पर ही रह गई ।'

वह पलटकर कंघी लेने भागी तो डॉली ने झट से उसकी भुजा पकड़कर कहा

'कहा जा रही है ?'

'कंघी...आंटी को सुबह कंघी नहीं मिली तो आंटी मझे गंजा करा देगी, ताकि फिर कभी सिर में कंघी कर ही न सकुँ ।'

उस दौरान डॉली के गिरेहबान से यशोदा के बेटे का फोटो निकलकर गिर गया था, जिसे किसी नहीं देखा । डॉली ने जुओं

वाली की भुजा पकड़कर कहा

'पहले तू यह बता, तू दीवार से लटक क्यों रही थी ?'

उसने 'हबड़-हबड़' सिर खुजाते हुए कहा 'वह मैं खुशी के मारे नाचने लगी थी।'
 
'रुपये पाकर ?'

'अगर तुम्हें अचानक इतने रुपये मिल जाते तो क्या तुम खुश नहीं होती ?'

__ 'अरी, नीचे आकर भी तो खुश हो सकी थी? ऊपर से गिरकर मर गई होती तो हम सब तेरे मरने पर बहुत खुश होते । आटी तो शायद रो-रोकर मर ही जाती।'

'सचमुच...!' जुओं वाली लड़की ने कंपकंपाती आवाज में कहा।

'और नहीं तो क्या झूठ ?'

__ 'तुम लोग और आंटी मुझ से इतना प्यार करती हो?' उसकी आवाज में कंपन था और आंखों में आंसू थे। 'इसका मतलब है, मैं अनाथ नहीं हूं । तुम सब मेरी बहनें हो और आंटी मेरी मां है।'

डॉली गुस्से से बोली 'नहीं, आंटी सिर्फ इस दूध पीने वाली की मां हैं।'

'सिर्फ इसी की क्यों?'

'क्योंकि आंटी अब इसे दूध पिलाया करेंगी।'

दूध पीने वाली उछल पड़ी 'अरे बाप रे! मैं तो कभी नहीं पियूंगी।'

.

.

.

'काहे कू...?'

उसने दोनों हाथों से मुंह ढंककर लजाते हुए कहा-'मुझे शर्म आएगी।'

अचानक जुओंवाली लड़की की निगाहें नीचे पड़े फोटो पर पड़ी और उसने तुरन्त डॉली से संबोधित होकर कहा

'यह फोटो किसके ब्वाय-फ्रेंड का गिर गया

डॉली ने चौंककर अपना गिरेहबान टटोला । फिर तुरन्त झुककर फोटो उठाती हुई उसे साफ करते-करते बोली-'ओहो, यह कैसे गिर गया ? यह आंटी के बेटे की फोटो है।'

जुओंवाली ने चौंककर कहा 'आंटी के बेटे की फोटो | यह कहां से मिली थी?'

'जब तू ऊपर बैठी मालदार बनने की कोशिश कर रही थी, तब मैंने आंटी के दफ्तर में से ढूंढकर निकाली थी।

'काहे कू...?'

'अबे! हम लोग ने फैसला किया है ना कि आंटी के बेटे को ढुंढेगी।'

'अच्छा, तो फोटो के पीछे पता लिखा है ?'

'पता नहीं । बस, ढूंढना है।'

'कैसे मिलेगा फिर ?'

'हम सब लोग फोटो देख लेते है, जिसे भी पहले नजर आ जाए, वह मुझे खबर कर दे।'

'सिर्फ तुझे ही क्यों?'

'इसलिए कि मैं उससे बात करुगी । तुम सब तो गधी हो ।'

एक ने जलकर कहा

'यह क्यों नहीं कहती कि वह इतना सुन्दर है | तू चाहती है कि तू ही उससे बात करे ।'

दूसरी ने कहा

'और क्या ? तू इसीलिए तो हम लोगों की लीडर बनकर रहती है कि जो लड़का मिले, पहले तू उसे ले उड़े।'

जुओंवाली ने जल्दी-जल्दी सिर खुजाकर

'क्या वह सचमुच बहुत सुन्दर है ?'

'बहुत ज्यादा ।' 'बिल्कुल अनिल कपूर!'

'नहीं...त्रुषि कपूर!'

'नहीं...संजय दत्त ।'

'नहीं सलमान खान ।'
 
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