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अंदाज़

गंजी लड़की की चीखें, सुनकर डॉली और दूसरी लड़कियां भी जाग उठी।

डॉली ने झट बत्ती जलाई और जैसे ही उसकी निगाहें गंनी लड़की पर पड़ी, वह दोनों कानों पर हाथ रखकर बुरी तरह चिल्लाई

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'भूत...भूत...!

जो भी लड़की गंजी लड़की को देखती, वही चिल्ला पड़ती।

गंजी लड़की ने डॉली को झकझोरकर हांफतें हुए कहा 'अरे...वह भूत नहीं...चोर था चोर..!'

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डॉली और दूसरी लड़कियों को अचानक होश आया क्योंकि उन्होंने ही मिलकर उस लड़की को । गंजा किया था डॉली ने तेज-तेज सांसों के बीच कहा 'कहां था चोर ? किधर से आया था?'

'छत पर से आया था । मुझे देखकर चीख मारकर भाग गया।'

'भाग गया...तूने उसे रोका नहीं?'

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गंजी ने रोआंसी आवाज में कहा 'तुम लोगों ने मुझे इस योग्य छोड़ा है कि कोई हैंडसम भूत, मेरा मतलव मेरा हैंडसम फेवर...उफ्फोह...हैंडसम लड़का मुझे दिखकर टिक सके?'

डॉली ने दुखी स्वर में कहा 'मुझे क्या मालूम था कि वह आज ही आ जाएगा, वरना मैं तुझे कल सुबह गंजा करती ।'

'कहे कू...?'

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'अरे वह चोर ही तो आंटी का बेटा है।'

'ऊई, मां! मैं तो भूल ही गई थी।'

दूसरी लड़की ने कहा

'लो बोलो...हाथ आते-आते निकल गया ।'

'अब तो -वह रुपये लेने भी लौटकर नहीं आएगा । कैसी रही?'

डॉली ने उसे चपत मारकर कहा 'ऐसी रही । अबे गधी, अगर इस समय वह रुक जाता तो फिर हमें सारे शहर में उसे ढुंढ़ने की

जरूरत न पेश आती।'

गंजी ने कहा 'तुम्हारा मतलब है, वह अब लौटकर नहीं आएगा।'

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'डरकर भागा है । अब क्या आएगा ?'

गंजी ने चापलूसी से कहा 'तो फिर वह रुपयों का बैग मुझे दे दो ना । जरा सोचो तो मैंने कितनी बड़ी भेंट दी है उनके लिए | गंजी भी हो गई ।'
 
'अब तू रुपयों का क्या करेगी लो...बोलो?'

'शादी बनाऊंगी...एक बंगला और कार खरीदूंगी, एक फैक्टरी लगाऊंगी।'

डॉली ने उसे घूरकर कहा 'एक ताजमहल भी बनवाना, जिसका नाम गंजीमहल रखना...।'

'मैं इतनी मूर्ख थोड़े ही हूं। पहले मैं अपने बालों के लिए सिर की व्हिग खरीदूंगी-खूबसूरत, लम्बे रेशमी बाल!'

अचानक दरवाजे के पास से यशोदा की आवाज आई

__ 'क्यों जाग रही हो तुम छोकरियो? और यह बाहर कैसा शोर हो रहा है?'

वे सब चौंककर मुड़ी।

जैसे ही यशोदा की निगाहें गंजी लड़की पर पड़ी । उसके हाथों से छड़ी छूटकर गिर गई और वह कानों पर हाथ रखकर चिल्लाई

'ओ...भूत...भूत...!'

फिर वह लड़खड़ाकर बेहोश होकर गिरने लगी तो झपटकर डॉली और दूसरी लड़कियों ने मिलकर उसे संभाला और उठाकर उसके कमरे में लाकर उसके बैड पर लिटा दिया । एक लड़की यशोदा की छड़ी और चश्मा भी उठाकर ले आई थी।

डॉली ने चिन्तित स्वर में कहा 'अब क्या होगा?'

गंजी ने दुखी स्वर में कहा 'होगा क्या । जब भी मुझे देखेंगी, इसी तरह से चीख मारकर चीख हो जाया करेंगी।'

दूसरी ने डपटकर कहा 'चीख मारकर बेहोश हो जाया करेंगी।'

'गंजी ने आंखें निकालकर कहा 'चुप...नहीं तो डरा दूंगी।'

वह लड़की सचमुच डर गई।

गंजी ने कहा 'अब तो एक ही तरीका है।'

डॉली ने उसे घूरकर पूछा 'बोल...?'

'जब तक मेरे सिर पर बाला न निकल आएं, आंटी को ऐनक मत लगाने दो।'

'सिर पर बाल...?'

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डॉली ने चुटकी बजाकर कहा 'गुड आइडिया ।'

'फिर कोई आइडिया?'

'कल से फिर तेरे सिर पर बाल होंगे।'

'सच...?' गंजी ने खुशी से उछलकर कहा-'और उनमें जुएं भी होंगी।'

'उफ! कल तेरे सिर पर व्हिग होगी।'

'व्हिग...' एक और लड़की उछल पड़ी

'कल से क्यों? वह तो आज ही से आ सकती है?'

'कैसे...?'

'हमारे पीछे जो बंगला है, उसकी मालकिन व्हिग लगाती है।'
 
दूसरी ने उछलकर कहा 'और वे सब एक कमरे में बंद होकर भूत-भूत चिल्ला रहे हैं।'

फिर...?'

'मैं अभी दौड़कर व्हिग लाती हूं । मुझे मालूम है, वह कहां रखती है।'

फिर वह दौड़कर बाहर चली गई।

लगभग आधे घंटे बाद जब यशोदा ने आंखें खोली तो उसके सामने गंजी लड़की खड़ी थी और उसके सिर पर सुनहरे सुन्दर बालों की व्हिग थी।

पड़ोस के बंगले से कोई औरत चिल्ला रही थी

'मेरे बाल...मेरे बाल...!'

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डॉली ने एक चादर में रुपयों के बैग को रखकर उसके आसपास कुछ अखबारों के कागजों की रद्दी रखी और एक गठरी-सी बना ली। बाकी सब लड़किया खड़ी देख रही थी। उनके चेहरे परेशान थे और आंखें चिन्ता में डूबी ।

एक लड़की ने रोआसी आवाज में कहा \ 'अगर तू पकड़ी गई तो क्या होगा ?'

दूसरी ने मुंह बिसूरकर कहा 'हमें नई लीडर चुननी पड़ेगी।'

तीसरी ने उसकी पीठ पर 'धप्प' मारकर कहा 'तेरे मुंह में खाक...'

चौथी ने उसे मारकर कहा 'ऐसे अशुभ शब्द बोलती है?'

पांचवीं ने झट एक ताबीज उतारकर डॉली के गले में डाल दिया और कहा 'दुर्गा मां तेरी रक्षा करें ।'

छठी ने फटाफट अपनी आंख के काजल का काला टीका डॉली के माथे पर दाएं तरफ लगाकर कहा 'ईश्वर तुझे बुरी नजर से बचाए ।'

डॉली ने खीझकर कहा 'अरे, मैं पुलिस-टेशन जा रही हूं । हिमालय की चोटी विजय करने नहीं ।'

अचानक दरवाजे के पास यशोदा की आवाज आई 'हे, तुम पुलिस स्टेशन क्यों जा रही हो ?'

वे सब बौखला गई।

डॉली ने झट कहा 'ओह, आंटी ! पुलिस-स्टेशन के सामने एक रद्दी खरीदने वाले की दुकान खुली है । मै यह रद्दी उसकी दुकान पर बेचने जा रही हुँ ।'
 
यशोदा ने अंदर आकर कहा लेकिन रही खरीदने वाला तो यही आकर रद्दी ले जाता है।'

'वह बेईमान है । तोल में बेईमानी करता है। लेकिन दुकान वाला इसलिए बेईमानी नहीं कर सकता कि उसकी दुकान पुलिस-स्टेशन के सामने है।'

__ 'लेकिन पुलिस स्टेशन के सामने तो पहले मिठाई वाले की दुकान थी।'

'हां, आंटी । जिनके अपराधी हवालात से छुट जाते थे, वे लोग वही से मिठाई खरीदकर खुशी में बांटते थे । मगर बाद में पुलिस वाले उधार ले-लेकर इतना खा गए कि वह दुकान छोड़कर भाग गया ।'

'और एक रद्दतीवाले ने दुकान खोल ली?'

'हां, आंटी । अब कोई पुलिस वाला तो रद्दी खा ही नहीं सकता था । वैसे भी कोई दूसरा पुलिस-स्टेशन के सामने दुकान लेने को तैयार नहीं था | इसलिए रद्दीवाले को कम भाव में ही दुकान मिल गई।'

'अच्छा..अच्छा ठीक है । लेकिन जल्दी आने का।'

'बस, आंटी । मैं आई और गई...मेरा मतलब हैं गई और आई ।'

यशोदा वापस चली गई।

..

डॉली ने माथे का पसीना पोंछा। फिर बोली 'अरे, कोई यह गठरी पकड़वाकर नीचे तक पहुंचा दो ।'

गंजी लड़की ने डॉली की मदद की।

सीढ़ियां उतरकर वे नीचे आई । फुटपाथ पर रुककर डॉली हांफने लगी तो व्हिग पहने गंजी ने हमदर्दी से पूछ लिया

तू इसे पुलिस-स्टेशन तक कैसे ले जाएगी?'

अचानक पीछे में एक ठिगने आदमी ने लपककर गंजी व्हिग वाली के कंधे पर हाथ रखा और बड़े प्यार से बोला

'डार्लिंग अभी तो तुम बाथरूम में थी।'

व्हिगवाली ने पलटकर 'तड़ाक' से नाटे आदमी को चांटा मारा | मगर उसका हाथ नाटे कद के सिर के ऊपर से निकलकर एक राहगीर के गाल पर पड़ा और व्हिग वाली ने बौखलाकर कहा 'क्षर...क्ष...क्षमा कीजिएगा । मैं उन्हें मार रही थी।'

उसने नाटे की तरफ इशारा किया तो राहगीर ने गाल सहलाकर बड़ी विनम्रतापूर्वक कहा 'कोई बात नही । आपने इन्हें अपना पति समझा होगा । एक बार मेरी पत्नी को भी भ्रम हो गया था । मगर अब मै उसके मुड़ते ही उसके तेवर देखकर झट अपना गाल पेश कर देता हूं ।'

फिर वह नाटे कदवाले आदमी से बोला 'मिस्टर! आप सीढ़ी लेकर नहीं चल सकते तो ऊंची ऐड़ी के जूते ही पहन लिया कीजिए । अब तो मर्दो में भी हाई हील की महामारी फैल गई है।'

फिर वह चला गया।

नाटे आदमी ने बडुबड़ाकर कहा 'मूर्ख समझता है । इस कद के कारण तो कई बार पिटने से बच चुका हूं।'

फिर वह व्हिगवाली से बोला

'क्षमा कीजिएगा, बहनजी । मैं आपको अपनी घरवाली समझा था । उसके बात बिल्कुल ऐसे ही हैं । पचपन वर्ष की हो गई । लेकिन अभी तक न तो बालों का रंग बदला, न ही रंगत । काश! उसके दाढ़ी-मूंछे भी होती । पता नहीं, उल्लू की पट्टी क्या खाती है?'

गंजी ने गुर्राकर कहा भेजा।'

नाटा आदमी खुश होकर बोला

'वह तो था ही नहीं । यह मेरी पांचवीं शादी है | पहली चारों को क्या भूखी रखता...?' फिर उसे गुर्राकर उसकी पत्नी ने पुकारा और वह हड़बड़ाकर अंदर लौट गया ।

गंजी मुंह ही मुंह में कुछ बड़बड़ा रही थी। फिर अचानक डॉली की चीख सुनकर उछल पड़ी।
 
'लिफ्ट...लिफ्ट, प्लीज...!'

गंजी ने बौखलाकर कहा 'अरे बाप रे! यह तो पलिस की जीप है।'

डॉली ने कहा 'मुझे भी तो पुलिस स्टेशन ही जाना है।' जीप कुछ दूर जाकर रुकी।

फिर रिवर्स होकर उसके पास आकर रुक गई । उसमें सिर्फ एक दारोगा बैठा हुआ था ।

डॉली ने गठरी जीप में रखते हुए कहा 'आपका बहुत-बहुत शुक्रिया! लोग अकारण भारतीय पुलिस को अशिष्ट कहते हैं।'

दारोगा ने हड़बड़ाकर कहा 'अरे...अरे...यह क्या हो रहा है?'

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डॉली ने निस्संकोच भाव से बैठते हुए गंजी से कहा

'अच्छा, खुदा हाफिज!'

गंजी ने आंखों में आंसू भरकर कहा 'जाओ...ईश्वर और दुर्गा मां तुम्हारी रक्षा करें

दारोगा ने खीझकर कहा 'मैं पूछता हूं, यह क्या हरकत है?'

डॉली ने कहा 'आपको पुलिस स्टेशन ही जाना है ना?'

'हां...!'

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'मुझे भी वही जाना है। आप खाली जीप ही तो लेकर जा रहे है।'

'मरार इस गठरी में क्या है ?'

'रद्दी...!'

'खूब! क्या पुलिस की गाड़ियां अब रद्दीवालों को लिफ्ट देने के लिए रह गई है?'

'आप चलिए तो सही ।'

'हर्गिज नही, नीचे उतरो।'

'अच्छा । जरा, इधर आइए।'

दरोगा करीब आया और डॉली ने चुपकेसे कहा-'इस गठरी में रद्दी के साथ एक रुपयों से भरा बैग भी है।'

दरोगा उछल पड़ा

'क्या? रुपयों से भरा बैग?'

'जी, हां । यह बैग चोरी का है । मैं इसे पुलिस स्टेशन पहुंचाने जा रही हूं।'

दरोगा ने उसे ध्यान से देखा । फिर खुश होकर झटपट स्टेयरिंग पर जा बैठा ।

कुछ ही देर बाद जीप लहराती हुई फर्राटे- भर रही थी । व्हिगवाली लड़की जल्दी से फुटपाथ से उतरती हुई हाथ हिलाकर चिल्लाई

'संभलकर...संभलकर...दाएं-बाएं देखकर ।'

इतने में उसके करीब एक मोटरसाइकिल आकर रुकी और उस पर सवार काली पतलून, काली-जैकेट, काले चश्मे और काली नाइट कैपवाले ने व्हिगवाली को संबोधित किया-'एक्सक्यूज मी।'

व्हिग वाली ने पलटकर देखे बिना कहा 'माफ कर दिया ।'

'मैडम! मेरी बात तो सनिये ।'

व्हिग वाली ने पलटकर झटके से कहा 'हां, बोलो।'

'वह....जरा करीब आइए...।'

'हर्गिज नहीं । मैं जानती हूं, इस व्हिग में मैं पहले से ज्यादा सुन्दर नजर आने लगी हूं । कुछ देर पहले ही एक राहगीर चांटा खाकर गया है।'

सवार ने जेब में हाथ डालकर एक छोटा-सा रिवाल्वर दिखाते हुए कहा 'यह क्या है?'

'रिवाल्वर है । क्या तुम मुझे इतना बुद्ध समझते हो?'

'श्रीमती बुद्धिमानी! इसमें से गोली भी निकलती है और माथे में छेद कर देती है, जिसके माथे में छेद हो जाता है वह इस

दुनिया से चला जाता है?'

'परलोक...और कहां?'

अगले ही पल सवार ने गुर्राकर कहा 'तुम परलोक जाना चाहोगी?'

'हर्गिज नहीं।'

फिर वह हड़बड़ाकर भयभीत स्वर में बोली 'क...क...कहां...परलोक?'
 
सवार ने गुर्राकर कहा 'हां! कल रात इस छत पर नोटों से भरा एक बैग फेंका गया था ।'

'वो...मुझे ही मि...मिला था । म...म...मेरे...सि...स...सिर में जुएं बहुत थी...ना...त...त तो मम...मैं मालदार हो गई थी । म...म...मगर...उन सबने...मेरे ब...ब...बात काट डाले...और म...म...मैं फिर से गुर्राकर गाल हो गई।'

वह फिर से गुर्राकर बोला 'वह बैग कहां है?'

'पु...प...पुलिस स्टेशन गया ।'

'क्या...?'

'अभी-अभी ड...डॉली...रद्दी के साथ गठरी में बांधकर ले गई।'

'कैसे...?'

__ 'पु...प...पुलिस की जीप में...बहुत भारी था ना । दरोगाजी से लि...ल...लिफ्ट लेकर चली गई।'

दूसरे ही पल सवार ने मोटरसाइकिल स्टार्ट की और मोटर साइकिल फर्राटे भरती चली गई।

गंजी लड़की अभी तक थरथर कांप रहीं थी। अचानक उसने सिर पर हाथ फेरा और बड़बड़ाने के अंदाज में बोली

'हे...यह तो कल रात वाला चोर मालूम होता है।' 'वह...वह तो आंटी का बेटा था ।' 'तो क्या यह आंटी की बेटा है?'

तभी नाटे आदमी की आवाज सुनाई दी

'वह रही वह लड़की, जिसे मैं अपनी डार्लिंग समझा था ।'

व्हिगवाली ने पलटकर देखा।

एक मोटी, कुरूप काली भैंस जैसी औरत अपने गंजे सिर पर तौलिया बांधे खड़ी थी।

उसने लड़की को देखकर अपने हसबैंड से गुर्राकर कहा-'तुमने इसके कंधे पर हाथ रखा था?'

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'त...त...तुम्हारे धोखे में!'

'मैं उसकू बाद में देखेगी । अंदर चलो । पहले तुम्हारा हाथ तोड़ेगी।'

फिर वह नाटे कद के आदमी का हाथ मरोड़कर अंदर ले गई और गंजी व्हिगवाली, टोपी की तरह अपनी व्हिग संभालती हुई अनाथ-आश्रम के दरवाजे में भागी।

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सेठ गोपालदास ने पुलिस इंस्पेक्टर से कहा "एक खूबसूरत भोली-सी लड़की थी । उसने अपने-आपको मेरी बेटी रीता की सहेली बताया था।'

'अच्छा ...'

'पूरे बारह सूट, बारह जोड़ी जूते, कास्मैटिक्स का सामान, लगभग पचास हजार का फ्रॉड किया उसने मेरे साथ और एक हजार कैश भी ले गई।'

फिर सेठ ने शॉपिंग सेंटर के मालिक कि तरफ इशारा करके कहा

'वह तो इन्होंने मेरा चैक चेक कर लिया । मैंने एक प्रेजेंट खरीदा था सिर्फ दस हजार का । उसकी कीमत बिल पर अलग लिखी थी । पचास हजार का विभिन्न सामान

'अच्छा ...!'

'मैंने ब्लैक चैक दिया था। बिल चेक करके रकम यह खुद भरते हैं । इन्होंने मुझे फोन करके बताया ।'

फिर उसने तीन सेल्जं-गर्ल और एक सेल्समैन की तरफ इशारा करके कहा 'उसने इनसे सामान लिया था । ये लड़कियां उसे शिनाख्त कर सकती हैं।'

'ठीक है । मैं रिपोर्ट दर्ज करता हूं और अभी से इंक्वायरी शुरू |'

'अच्छा, अब हमें आज्ञा दीजिए।'

सेठ और शॉपिंग सेंटर के मालिक के साथ पुलिस इंस्पेक्टर भी उठकर दरवाजे तक आया । उनके पीछे सेल्लगर्ल और सेल्लमैन

थे।

ठीक उसी समय एक जीप आकर रुकी।

उसमें से जैसे ही डॉली उतरी, सेठ ने उसकी तरफ हाथ उठाकर जोर से कहा 'यही है वह लड़की!'

साथ ही सेल्लगर्ल और सेल्जमैन भी चिल्लाए 'हां...हां, यही है वह लड़की ।'

डॉली के हाथ-पांव फूल गए थे। दरोगा ने जीप से उतरकर कहा

'क्या मामला है?'

इंस्पेक्टर ने डॉली की तरफ इशारा करके कहा 'यह लड़की चोर है।'

'हे, आपको कैसे मालूम ? मैं तो खुद इसे कल रात पच्चीस लाख रुपये जो चोरी हुई थे, उनके साथ पकड़कर ला रहा हूं।'

'क्या ? वे पच्चीस लाख भी इसके पास से बरामद हुए हैं?'

_ 'जी, हां । यह रद्दी के साथ एक बैग गठरी में बांधकर ले जा रही थी । मुझे संदेह हुआ । मैंने गठरी

की तलाशी ली और इसे पकड़ लिया ।'

इंस्पेक्टर ने चिल्लाकर कहा 'गिरफ्तार कर लो इस लड़की को ।'

अचानक डॉली को बस एक ही रास्ता सूझा । वह पलटकर बुरी तरह बाहर भागी । साथ ही उसके पीछे दरोगा और कई कांस्टेबिल चिल्लाते हुए दौड़े।

'ठहरों...खबरदार...गोली मगर दूंगा।'

'पकड़ो...पकड़ो...!,

'चोर...चोर...!'

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तभी एक मोटरसाइकिल का हार्न सुनकर ने लोग इधर-उधर हो गए।

मोटर साइकिल उनके बीच से निकलकर डॉली के पास रुकी और सवार ने तेज स्वर में कहा

'जल्दी बैठो, वरना पकड़ी जाओगी।'

डॉली बौखलाकर मोटरसाइकिल के कैरियर पर बैठ गई । मोटरसाइकिल हवा से बातें करने लगी।

पीछे से चीखें सुनाई दी

'अरे, पकड़ो।'

'वह भाग रही है ।'

'जल्दी से जीप निकालकर लाओ।'

लेकिन जब तक वे लोग जीप निकालते । मोटरसाइकिल कहां से कहां जा पहुंची थी।

डॉली थर-थर कंप रही थी। फिर अचानक उसे कुछ विचार आया और वह चिल्लाई

'रोको...रोको...जल्दी रोको...।'
 
सवार ने जोर से कहा 'पागल हुई हो । पीछे पलिस आ रही है।'

डॉली ने हांफते हुए कहा 'मुझे पुलिस स्टेशन ही वापस पहुंचा दो।'

'क्यों?'

'मैं...मैंने वह रुपयों का बैग चोरी नही किया

'फिर दरोगा ने क्यों पकड़ा ?'

'वह झूठा है । मैं तो वह बैग वापस करने जा रही थी।'

'किस कू...?'

'प...पु...पुलिस स्टेशन पहुंचाने ।'

'कहां से आए वे रुपये तुम्हारे पास?'

'कोई छत पर फेंक गया था रात को ।'

'फिर तुम पुलिस-टेशन से भागी ही क्यों थी

'वह...वह तो...मैंने एक सेठ को देख लिया था।'

'सेठ से क्यों डर गई? क्या वह तुम्हारे पीछे पड़ा है?'

'तौबा...तौबा...वह तो बहुत अच्छे हैं । मुझे बेटी कह रहे थे ।'

'फिर भी तुम उससे डर रही थी ?'

'वह तो कल मेरा बर्थ-डे था ।'

'अच्छा, तुम्हारा बर्थ-डे भी होता है।'

'आजकल तो मजदूर और रिक्शा-पुलर भी अपने बच्चों का बर्थ-डे मनाते है ।'

'लेकिन तुम्हारे बर्थ-डे का सेठ गोपालदास से क्या संबंध?'

डॉली उछल पड़ी 'तुम उनका नाम जानते हो?'

'अच्छी तरह से, उन्हें भी जानता हूं

'तब तो मुझे उनके पास ले चलो।'

'क्यों...?'

'मैं उनके पैरों पर गिरकर माफी मांग लूंगी।'

'किस बात की?'

डॉली ने जोर-जोर से बताया कि उसने सेठ गोपालदास को किस तरह धोखा दिया था।

बराबर से गुजरते एक मोटरसाइकिल सवार ने जोर से पूछा

'आपने मुझसे कुछ कहा, मैडम?'

डॉली ने चिल्लाकर कहा 'शटअप!'

'ओ...सॉरी! आप दोनों पति-पत्नी में झगड़ा हो रहा है । मेरी पत्नी भी जब मोटरसाइकिल पर मेरे साथ बैठती है तो लोग यही समझते है कि वह उन्हें संबोधित कर रही है।'

फिर वह मोटरसाइकिल तेजी से निकालकर ले गया । डॉली ने अपने साथी से जोर से कहा

'वापस चलो, वरना मैं कूद पडूंगी।'

'लंगड़ी हो जाओगी । सारी सूबसूरती खाक में मिल जाएगी।'

'तो फिर धीमे कर लो । मुझे उतरने दो ।'

'पुलिस स्टेशन जाने के लिए?'

'हां...!'

'लेकिन अब क्या वे लोग तुम्हारी सफाई मान लेंगे? अगर तुम पहले ही रुक गई होती तो भी तुम्हारा बचना मुश्किल था।'

'क्यों?'

'क्योंकि पुलिस दरोगा की बात मानती कि उसने तुम्हें रुपयों के बैग के साथ पकड़ा है।'

'मगर मैंने तो दरोगा को सच्चाई बताकर जीप में लिफ्ट ली थी।

'सच्चाई से पुलिस वालों की खानदानी दुश्मनी होती है ।'

'अब क्या होगा?'

'अगर पकड़ी गई तो पूरे दस वर्ष की जेल ।'

'नहीं...!'

डॉली बुरी तरह कांप गई।

नौजवान ने कहा 'जानती हो, वह पच्चीस लाख रुपये कहां से चोरी हुए थे ?'

'क...क...कहां से...?'

'सेठ मुरली मनोहर की तिजोरी से ।'

'हे भगवान!'

'अब पुलिस तुम्हें किसी कीमत पर निर्दोष नहीं समझेगी क्योंकि तुमने पहले एक बड़े सेठ गोपालदास के साथ फ्रॉड किया । फिर दूसरे सेठ मुरली मनोहर के यहां पच्चीस लाख की चोरी की।'

डॉली ने रोआंसी आवाज में कहा 'भगवान के लिए जरा मोटर साइकिल रोक लो।'

'क्यों?'

'मैं रोना चाहती हूं।'

'सड़क पर रोओगी तो लोग समझेंगे तुम मेरी पत्नी हो और मैंने तुम्हारे साथ कोई ज्यादती की है। इसलिए रो रही हो ।'

'फिर कहां सताओगे?'

'किसी सुरक्षित जगह । जहां पुलिस का कोई आदमी भी तुम्हें न पहचान सके क्योंकि अब तक वायरलेस के द्वारा सारे शहर में पुलिस ने तुम्हारा और मेरा हुलिया अनाउंस कर दिया होगा। हर तरफ की पुलिस हमें ढूंढ रही होगी।'

'हे भगवान, अब क्या होगा ?'

'घबराओ मत । जब तक मैं तुम्हारे साथ हूं, कुछ नहीं होगा।'
 
अचानक एक टैक्सी का हार्न सुनकर सवार ने बैक-व्यू मिरर में देखा और मोटरसाइकिल एक तरफ रोक दी। टैक्सी बराबर आकर रुकी। उसमें से टैक्स-ड्राइवर की वर्दी में एक और नौजवान उतरा और बोला 'इतनी देर से टैक्सी दौड़ा रहा हूं । लेकिन एक लड़की ने तुम्हें बहरा कर दिया । अगर शादी कर लोगे तो शायद अंधे-गूंगें भी हो जाओगे।'

'अबे, तू किधर से लेग गया?'

'देखो, यह पहली अबे है ।'

'हां...हां...समझ गया । चाबी टैक्सी में है?'

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.

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'और क्या?'

'ठीक है, तू मोटरसाइकिल संभाल!'

'वाह बेटा । सारे शहर मे पुलिस की गाड़ियां चिल्लाती फिर रही हैं-एक मोटरसाइकिल सवार, जिसके पीछे एक खूबसूरत लड़की बैठी है।'

नौजवान ने कहा 'और सवार काले कपड़े पहने है, लड़की गुलाबी लबादा।'

'बिल्कुल...बिकुल...।'

'अबे, तू तो टैक्सी-ड्राइवर की वर्दी में मोटरसाइकिल चलाएगा और तेरे पीछे कोई लड़की भी नहीं होगी।'

'देखो, यह दूसरी 'अबे' है।'

सवार ने कहा 'और मैं एक लड़की के सामने तेरा घूँसा नहीं खाऊंगा।'

'बाद में खा लोगे ना? वरना मुझे अपच हो जाएगी।'

'खा लूंगा | चल संभाल मोटर साइकिल ।'

टैक्स-ड्राइवर ने मोटरसाइकित संभाली। नौजवान ने डॉली को टैक्सी में बिठाया ।

जब टैक्सी चल पड़ी तो नौजवान ने कहा 'अब तुम चाहो तो रो सकती हो ।'

अगले ही पल डॉली सचमुच चेहरा दोनों हाथों में छुपाकर फुट-फुटकर रोने लगी । नौजवान ठंडी सांस लेकर रह गया।

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एक रेस्टोरेंट के ऊपरी मंजिल के केबिन में पहुंचकर नौजवान ने परदा खींच दिया।

जब दोनों आमने-सामने बैठे तो डॉली बरबस उछल पड़ी । उसका दिल भी जोर-जोर से धड़क-उठा और उसके दिमाग मे एक बात गूंजने लगी।

'यह तो यशोदा आंटी का बेटा है।' 'शत-प्रतिशत यह यशोदा आंटी का बेटा है ।' 'और यही उस बैग का चोर भी है।' 'यह संयोगवश मिल गया।' 'वरना अब तो मैं इसे ढुंढ भी नहीं सकती थी।' तो पुलिस मेरे पीछे लगी है।' 'नहीं, अब मैं इसका साथ नहीं छोडूंगी।'

'हर्गिज नहीं...।'

'यशोदा आंटी, मैंने तुम्हारे बेटे को पा लिया ।'

'तुम देखना, एक दिन मैं इसे सुधारकर तुम्हारे सामने लाऊंगी।'

'चाहे इसकी चोरी का आरोप मुझे अपने ही सिर क्यों न लेना पड़े।'

'लेकिन मैं पहले इसे सुधारूंगी।' 'बाद में खुद को पुलिस को सौंप दूंगी।'

'कह दूंगी कि मुरली मनोहर सेठ के यहां चोरी मैंने की थी।'

सहसा नौजवान ने मेज पर हाथ मारकर कहा 'ऐ, क्या बहरी हो गई हो?'

डॉली उछल पड़ी और जल्दी से संभलकर बैठती हुई बोली 'नहीं..!'

'तो फिर क्या सोच रही थीं?'

'सेठ मुरली मनोहर के यहां चोरी मैंने की थी

नौजवान उछाल पड़ा। वह आंखें फाड़कर बोला

'क्या...क्या...फिर से कहना ।'

डॉली ने झट संभलकर बैठते हुए कहा

'व...व...वह कुछ नहीं...ब...ब...बस...यूं ही...'

नौजवान ने उसे घूरकर कहा

'तुमने अभी कहा था-सेठ मुरली मनोहर के यहां चोरी तुमने की थी।'

'हां, यूं ही जुबान से निकल गया था ।'

नौजवान उसे घूरता रहा। फिर बोला तुम्हारा नाम क्या है?'

' यशोदा...!"

डॉली गड़बड़ा गई और जल्दी से बोली 'नहीं, मेरा नाम डॉली है।'

'अभी तो तुम यशोदा कह रही थी।'

'वह मेरी आंटी का नाम है।'

'तुम उसी अनाथ-आश्रम में रहती हो ना?'

'हां...!'

'वहां और कौन-कौन रहता है?'

'मेरे अलावा ग्यारह दूसरी लड़कियां और यशोदा आंटी!'

'क्या तुम सब चोर हो?'

'हे। हम लोग अनाथ हैं, चोर नहीं है।'

तभी डॉली को ख्याल आया कि उसे यशोदा आंटी के बेटे को सुधारना है।

उसी समय वेटर ने आकर उनसे आर्डर मांगा

नौजवान ने डॉली से पूछा 'चाय, कॉफी या कोल्ड?'

डॉली ने उसे बड़ी मीठी नजरों से देखकर कहा 'जो तुम पिलाओगे।'

नौजवान ने उसे घूरा। फिर वेटर से बोला 'दो डबल आमलेट । दो कप चाय का पॉट ।'

उसके जाने के बाद नौजवान ने कहा 'तुम्हारे आश्रम में कोई भूत रहता है?'

'नहीं तो...।'

'कल रात एक चुडैल...।'

'अरे वह...उसे हम लोगों ने गंजा कर दिया था ।'

'ओह, क्या वह विधवा हो गई है?'

'उसकी शादी ही नहीं हुई तो विधवा केंसे होगी?'

'फिर क्यों गंजा किया ?'
 
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