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एक आदमी तुरंत सामने आया. और इलेक्ट्रीक चेअर ऑपरेट करनेके पॅनलके पास गया. पुलिसके जो लोग ऍंथोनीको इलेक्ट्रीक चेअरके पास ले गए थे उन्होने उसे अब उस चेअरपर इलेक्ट्रीक बिठाया. काले कपडेसे उसका चेहरा ढंका गया. फिर वे पुलिस इलेक्ट्रीक चेअर चेंबरसे बाहर आ गए और उन्होने चेंबर बंद कर दिया.
मुख्य अधिकारीने पॅनलके पास खडे ऑपरेटरकी तरफ देखा. ऑपरेटर पॅनलके पास एकदम तैयार खडा था. फिरसे वह अधिकारी अपनी घडीकी तरफ देखने लगा. शायद उसकी उलटी गीणती शुरु हो गई थी.
भलेही उन लोगोंको वह हमेशाका था फिरभी वातावरणमें थोडा तनाव स्पष्ट दिखने लगा. अचानक उस अधिकारीने ऑपरेटरको इशारा किया.
ऑपरेटरने एक पलकीभी देरी ना करते हूए इलेक्ट्रीक चेअर पॅनलपर एक लाल बटन दबाया.
थोडी देरमें ऑपरेटर काम तमाम होगया इस अंदाजमें उस अधिकारीके तरफ देखने लगा.
डॉक्टर उस अधिकारीने डॉक्टरको पुकारा.
डॉक्टर झटसे इलेक्ट्रीक चेअर चेंबरके पास गया, चेंबर खोला और अंदर चला गया.
सर ही इज डेड अंदरसे डॉक्टरका आवाज आगया.
वह अधिकारी एकदमसे मुड गया और वह जगह छोडकर वहांसे चला गया. वह ऑपरेटर वहीं बगलमें एक कमरेमें चला गया. वहा बाजुमेंही खडा एक स्टाफ मेंबर उस चेंबरमें, शायद चेंबर साफ करनेके लिए घुस गया. सबकुछ कैसे किसी मशिनकी तरह चल रहा था. उन सबको भलेही वह हमेशाका हो फिरभी जॉनके लिए वह हमेशा होनेवाली बाते नही थी. वह अबभी वही खडा एक एक चिज और एक एक हो रही बातें ध्यानसे निहार रहा था.
अब डॉक्टरभी वहांसे चला गया.
वहां सिर्फ सॅम अकेलाही बचा. वह अबभी वहां चूपचाप खडा था, उसके दिमागमें शायद कुछ अलगही चल रहा हो.
अचानक कोई जल्दी जल्दी उसके पिछेसे वहां आगया.
अच्छा. हो गया है शायद पिछेस आवाज आया.
सॅमने मुडकर पिछे देखा और उसका मुहं आश्चर्यसे खुला का खुला ही रह गया. उसके सामने ऑपरेटर खडा था.
ये तो अभी अभी पॅनल ऑपरेट कर उस बगलके कमरेमे गया था.
फिर अभीके अभी ये इधर किधरसे आगया.
मुझे चिंता थी की मेरी अनुपस्थीमें पॅनल कौन ऑपरेट करेगा. वह ऑपरेटर बोला.
बाय द वे किसने ऑपरेट किया पॅनल उस ऑपरेटरने सॅमको पुछा.
सॅमको एक के बाद एक आश्चर्यके धक्के लग रहे थे. .
सॅमने बगलके कमरेकी तरफ देखा.
किसने ऑपरेट किया मतलब . तुमनेही तो ऑपरेट किया सॅमने अविश्वासके साथ कहा.
क्या बात करते हो . मै तो अभी अभी यहां आ रहा हूं . उस ऑपरेटरने कहा.
सॅमने फिरसे चौंककर उसकी तरफ देखा और फिर उस बगलके कमरेकी तरफ देखा जिसमें वह थोडी देर पहले गया था.
आवो मेरे साथ .आवो सॅम उसे उस बगलके कमरेकी तरफ ले गया.
सॅमने उस कमरेका दरवाजा धकेला. दरवाजा अंदरसे बंद था. उसने दरवाजेपर नॉक किया. अंदरसे कोई प्रतिक्रिया नही थी. सॅम अब वह दरवाजा जोर जोरसे ठोकने लगा. फिरभी अंदरसे कोई प्रतिक्रिया नही थी. सॅम अपनी पुरी ताकदके साथ उस दरवाजेको धकेलने लगा. वह संभ्रममे पडा ऑपरेटरभी अब उसे धकेलनेमें मदद करने लगा.
जोर जोरसे धकेलकर और धक्के देकर आखिर सॅमने और उस ऑपरेटरने वह दरवाजा तोडा.
दरवाजा टूटतेही सॅम और वह ऑपरेटर जल्दी जल्दी कमरेमें घुस गए. उन्होने कमरेमें चारो तरफ अपनी नजरे दौडाई. कमरेमे कोई नही था. उन्होने एक दुसरेकी तरफ देखा. उस ऑपरेटरके चेहरेपर संभ्रमके भाव थे तो सॅमके चेहरेपर अगम्य ऐसे डरके भाव दिख रहे थे.
अचानक उपरसे कुछ निचे गिर गया. दोनोंने चौंककर देखा. वह एक काली बिल्ली थी, जिसने उपरसे छलांग लगाई थी. वह बिल्ली अब सॅमके एकदम सामने खडी होगई और एकटक सॅमकी तरफ देखने लगी. वे आश्चर्यसे मुंह खोलकर उस बिल्लीकी तरफ देखने लगे. धीरे धीरे उस काली बिल्लीका रुपांतर नॅन्सीके सडे हूए मृतदेहमें होने लगा. उस ऑपरेटरके तो हाथपैर कांपने लगे थे. सॅमभी बर्फ जम जाए ऐसा एकदम स्थिर और स्तब्ध होकर उसके सामने जो घट रहा था वह देख रहा था. धीरे धीरे उस सडे हूए मृतदेह का रुपांतर एक सुंदर, जवान तरुणीमें हो गया. हां, वह नॅन्सीही थी. अब उसके चेहरेपर एक सुकून झलक रहा था. देखते देखते उसके आंखोसे दो बडे बडे आंसू निकलकर गालोंपर बहने लगे और धीरे धीरे वह वहांसे अदृष्य होकर गायब होगई.
ई मेल विषय–फैमिली अफेयर
प्रिय प्रभु, शीनी तलाक लेने पर उतारू . तुम्हारी भाभी ने खाना पीना छोडा . घर में मातमी माहौल . प्रपन्नाचार्य एस्ट्रोलाजर को शीनी की जन्मपत्री दिखा कर उपचार पूछो . अलगरजी मत करना . तुम्हारा हरदयाल .
हरदयाल ने कम्प्यूटर आफ किया और कोने में पडे दीवान पर ढेर हो गया . शीनी ने हमेशा उसे तनाव में रखा था . शादी की जिद ठानी थी, तब भी वह महीनों परेशान रहा था, पूरे परिवार का अमन चैन खत्म हो गया था और अब शादी के पचीस साल बाद यह नया शगूफा . दो जवान बेटियाँ हैं, वे क्या सोच रही होंगी . छह छह फीट के दो लड़के हैं, वे इस स्थिति का कैसे सामना करेंगे शीनी के विवाह के अवसर पर उसने भारतीय संस्कृति और जीवन शैली को महिमा मंडित करते हुए दावा किया था कि हम भारतीय लोग विवाह को एक पवित्र बंधन मानते हैं .
हम इस सम्बंध को जन्म जन्मांतर तक निभाने का संकल्प लेते हैं . निक को हमने एक अत्यंत विनम्र, आज्ञाकारी और कर्तव्यनिष्ठ नवयुवक के रूप में जाना है . हमारा विश्वास है कि पूर्वजन्म में वह भी एक भारतीय आत्मा रहा होगा . हम उससे अपेक्षा रखते हैं कि वह हमारी फूल सी बिटिया को हमेशा फूलों की सेज पर रखेगा और उसके प्रति अपने प्रेम में लेशमात्र की कमी न आने देगा . हम दोनों के सुखद और सुदीर्घ दाम्पत्य की कामना करते हैं .
यह सोच कर हरदयाल का सिर शर्म से फोम के तकिये में झुकता चला गया कि निक ने तो शपथ का निर्वाह किया, उसकी बिटिया ने ही इस बंधन को तार तार करने की ठान ली . यह एक ऐसी शर्मनाक खबर थी, जो अभी तक परिवार तक सीमित थी, मगर जल्द ही जंगल की आग की तरह इसकी लपटें हर सिम्त उठने लगेंगी . हरदयाल दीवान की पट्टी पर अपना सिर पटकने लगा . सिर पटकने से उसे बहुत राहत मिलती . यह तरीका उसने अपनी पत्नी से सीखा था . एक जमाना था, वह जरा जरा सी बात पर सिर पटकने लगती . सामने दीवार पड़ती तो दीवार पर, खम्भा पड़ता तो खम्भे पर . बच्चे बड़े हुए तो वे भी बात बात पर सिर पटकने लगे . हरदयाल की पत्नी शैल को बच्चों की खातिर अपना यह शौक छोड़ना पड़ा . अब उसे मनस्ताप होता तो मंत्रेच्चार करने लगती . दसियों मंत्र और चालीसे उसने कंठस्थ कर लिये थे .
आधी रात को जब हरदयाल की नींद खुली तो उसने पाया उसकी पत्नी पलंग पर नहीं थी, वह घर के एक कोने में मंदिर के सामने बैठ कर तन्मयता से पूजा कर रही थी . बीच बीच में वह पीतल की छोटी सी घंटी उठा लेती और भगवान के कानों के पास ध्वनि करती . वह शंख ध्वनि करना भी सीख गयी थी . लग रहा था, पूजा करने में उसने शरीर की पूरी ऊर्जा लगा ली थी . उसने जैसे तय कर लिया था कि वह ईश्वर को इस बात के लिए राजी करके ही दम लेगी कि शीनी तलाक की जिद छोड़ दे . पूजा करते करते सहसा वह निढाल हो गयी और वहीं आसन पर लुढ़क गयी .
शील ने छोटी बिटिया नेहा को भी सेण्ट पाल से बुलवा लिया था . वह बच्चों को राबर्ट के पास छोड़ आयी थी कि शाम तक तो उसे लौट ही आना है, मगर यहाँ अपने माता पिता की स्थिति देख उसने एकाध दिन उनके पास रुक जाना ही बेहतर समझा . शीनी उसकी बड़ी बहन नहीं सखी भी रही है, उसे विश्वास था कि शीनी उसकी बात पर तो जरूर ही गौर करेगी, मगर ज्योंही नेहा ने उसे अपने फैसले पर पुनर्विचार करने का सुझाव दिया, शीनी ने उसे अपनी सीमा में ही रहने का मशवरा दिया और फोन पटक दिया . नेहा इस व्यवहार के लिए तैयार न थी . उसे गहरा आघात लगा . इस घर में आज पहली बार ऐसा हुआ था कि किसी ने उससे सुबह चाय तक के लिए नहीं पूछा था . एक खास तरह का बेगानापन चारों तरफ पसरा हुआ था . नीचे माँ और ऊपर पिता ने मनहूसियत फैला रखी थी . जब जब ऐसा हुआ, शीनी के कारण ही हुआ . उसे झटके देने की आदत है . पहला झटका उसने तब दिया था जब वह विधिवत घोषित रूप से डेट पर गयी थी . नेहा उन दिनों स्कूल में पढती थी . स्कूल से लौट कर उसने पाया, घर का माहौल कभी इतना मनहूस और गमगीन न था . लग रहा था, दीवारें रो रही हैं, फरनीचर सिसक रहा है . फर्श पर बिछा कालीन मुर्दे की तरह निस्पंद पडा था . हस्बेमामूल उसने अत्यंत उत्साह से आवाज दी थी, मॉम कहाँ हो . मैं आ गयी .
नेहा को याद है, उसकी आवाज कमरे का चक्कर लगा कर उसी की गोद में आ गिरी थी . उसने दुबारा आवाज दी मॉम मॉम . कोई उत्तर न पाकर वह बेडरूम में घुस गयी थी . उसने देखा उसकी माँ आज ही की तरह औंधी लेटी थी और सिसकियाँ भर रही थी .
क्या हुआ माँ उसने माँ को हिलाते हुए पूछा .
मर गयी तेरी माँ . माँ ने सिसकियों के बीच जवाब दिया .
मुख्य अधिकारीने पॅनलके पास खडे ऑपरेटरकी तरफ देखा. ऑपरेटर पॅनलके पास एकदम तैयार खडा था. फिरसे वह अधिकारी अपनी घडीकी तरफ देखने लगा. शायद उसकी उलटी गीणती शुरु हो गई थी.
भलेही उन लोगोंको वह हमेशाका था फिरभी वातावरणमें थोडा तनाव स्पष्ट दिखने लगा. अचानक उस अधिकारीने ऑपरेटरको इशारा किया.
ऑपरेटरने एक पलकीभी देरी ना करते हूए इलेक्ट्रीक चेअर पॅनलपर एक लाल बटन दबाया.
थोडी देरमें ऑपरेटर काम तमाम होगया इस अंदाजमें उस अधिकारीके तरफ देखने लगा.
डॉक्टर उस अधिकारीने डॉक्टरको पुकारा.
डॉक्टर झटसे इलेक्ट्रीक चेअर चेंबरके पास गया, चेंबर खोला और अंदर चला गया.
सर ही इज डेड अंदरसे डॉक्टरका आवाज आगया.
वह अधिकारी एकदमसे मुड गया और वह जगह छोडकर वहांसे चला गया. वह ऑपरेटर वहीं बगलमें एक कमरेमें चला गया. वहा बाजुमेंही खडा एक स्टाफ मेंबर उस चेंबरमें, शायद चेंबर साफ करनेके लिए घुस गया. सबकुछ कैसे किसी मशिनकी तरह चल रहा था. उन सबको भलेही वह हमेशाका हो फिरभी जॉनके लिए वह हमेशा होनेवाली बाते नही थी. वह अबभी वही खडा एक एक चिज और एक एक हो रही बातें ध्यानसे निहार रहा था.
अब डॉक्टरभी वहांसे चला गया.
वहां सिर्फ सॅम अकेलाही बचा. वह अबभी वहां चूपचाप खडा था, उसके दिमागमें शायद कुछ अलगही चल रहा हो.
अचानक कोई जल्दी जल्दी उसके पिछेसे वहां आगया.
अच्छा. हो गया है शायद पिछेस आवाज आया.
सॅमने मुडकर पिछे देखा और उसका मुहं आश्चर्यसे खुला का खुला ही रह गया. उसके सामने ऑपरेटर खडा था.
ये तो अभी अभी पॅनल ऑपरेट कर उस बगलके कमरेमे गया था.
फिर अभीके अभी ये इधर किधरसे आगया.
मुझे चिंता थी की मेरी अनुपस्थीमें पॅनल कौन ऑपरेट करेगा. वह ऑपरेटर बोला.
बाय द वे किसने ऑपरेट किया पॅनल उस ऑपरेटरने सॅमको पुछा.
सॅमको एक के बाद एक आश्चर्यके धक्के लग रहे थे. .
सॅमने बगलके कमरेकी तरफ देखा.
किसने ऑपरेट किया मतलब . तुमनेही तो ऑपरेट किया सॅमने अविश्वासके साथ कहा.
क्या बात करते हो . मै तो अभी अभी यहां आ रहा हूं . उस ऑपरेटरने कहा.
सॅमने फिरसे चौंककर उसकी तरफ देखा और फिर उस बगलके कमरेकी तरफ देखा जिसमें वह थोडी देर पहले गया था.
आवो मेरे साथ .आवो सॅम उसे उस बगलके कमरेकी तरफ ले गया.
सॅमने उस कमरेका दरवाजा धकेला. दरवाजा अंदरसे बंद था. उसने दरवाजेपर नॉक किया. अंदरसे कोई प्रतिक्रिया नही थी. सॅम अब वह दरवाजा जोर जोरसे ठोकने लगा. फिरभी अंदरसे कोई प्रतिक्रिया नही थी. सॅम अपनी पुरी ताकदके साथ उस दरवाजेको धकेलने लगा. वह संभ्रममे पडा ऑपरेटरभी अब उसे धकेलनेमें मदद करने लगा.
जोर जोरसे धकेलकर और धक्के देकर आखिर सॅमने और उस ऑपरेटरने वह दरवाजा तोडा.
दरवाजा टूटतेही सॅम और वह ऑपरेटर जल्दी जल्दी कमरेमें घुस गए. उन्होने कमरेमें चारो तरफ अपनी नजरे दौडाई. कमरेमे कोई नही था. उन्होने एक दुसरेकी तरफ देखा. उस ऑपरेटरके चेहरेपर संभ्रमके भाव थे तो सॅमके चेहरेपर अगम्य ऐसे डरके भाव दिख रहे थे.
अचानक उपरसे कुछ निचे गिर गया. दोनोंने चौंककर देखा. वह एक काली बिल्ली थी, जिसने उपरसे छलांग लगाई थी. वह बिल्ली अब सॅमके एकदम सामने खडी होगई और एकटक सॅमकी तरफ देखने लगी. वे आश्चर्यसे मुंह खोलकर उस बिल्लीकी तरफ देखने लगे. धीरे धीरे उस काली बिल्लीका रुपांतर नॅन्सीके सडे हूए मृतदेहमें होने लगा. उस ऑपरेटरके तो हाथपैर कांपने लगे थे. सॅमभी बर्फ जम जाए ऐसा एकदम स्थिर और स्तब्ध होकर उसके सामने जो घट रहा था वह देख रहा था. धीरे धीरे उस सडे हूए मृतदेह का रुपांतर एक सुंदर, जवान तरुणीमें हो गया. हां, वह नॅन्सीही थी. अब उसके चेहरेपर एक सुकून झलक रहा था. देखते देखते उसके आंखोसे दो बडे बडे आंसू निकलकर गालोंपर बहने लगे और धीरे धीरे वह वहांसे अदृष्य होकर गायब होगई.
ई मेल विषय–फैमिली अफेयर
प्रिय प्रभु, शीनी तलाक लेने पर उतारू . तुम्हारी भाभी ने खाना पीना छोडा . घर में मातमी माहौल . प्रपन्नाचार्य एस्ट्रोलाजर को शीनी की जन्मपत्री दिखा कर उपचार पूछो . अलगरजी मत करना . तुम्हारा हरदयाल .
हरदयाल ने कम्प्यूटर आफ किया और कोने में पडे दीवान पर ढेर हो गया . शीनी ने हमेशा उसे तनाव में रखा था . शादी की जिद ठानी थी, तब भी वह महीनों परेशान रहा था, पूरे परिवार का अमन चैन खत्म हो गया था और अब शादी के पचीस साल बाद यह नया शगूफा . दो जवान बेटियाँ हैं, वे क्या सोच रही होंगी . छह छह फीट के दो लड़के हैं, वे इस स्थिति का कैसे सामना करेंगे शीनी के विवाह के अवसर पर उसने भारतीय संस्कृति और जीवन शैली को महिमा मंडित करते हुए दावा किया था कि हम भारतीय लोग विवाह को एक पवित्र बंधन मानते हैं .
हम इस सम्बंध को जन्म जन्मांतर तक निभाने का संकल्प लेते हैं . निक को हमने एक अत्यंत विनम्र, आज्ञाकारी और कर्तव्यनिष्ठ नवयुवक के रूप में जाना है . हमारा विश्वास है कि पूर्वजन्म में वह भी एक भारतीय आत्मा रहा होगा . हम उससे अपेक्षा रखते हैं कि वह हमारी फूल सी बिटिया को हमेशा फूलों की सेज पर रखेगा और उसके प्रति अपने प्रेम में लेशमात्र की कमी न आने देगा . हम दोनों के सुखद और सुदीर्घ दाम्पत्य की कामना करते हैं .
यह सोच कर हरदयाल का सिर शर्म से फोम के तकिये में झुकता चला गया कि निक ने तो शपथ का निर्वाह किया, उसकी बिटिया ने ही इस बंधन को तार तार करने की ठान ली . यह एक ऐसी शर्मनाक खबर थी, जो अभी तक परिवार तक सीमित थी, मगर जल्द ही जंगल की आग की तरह इसकी लपटें हर सिम्त उठने लगेंगी . हरदयाल दीवान की पट्टी पर अपना सिर पटकने लगा . सिर पटकने से उसे बहुत राहत मिलती . यह तरीका उसने अपनी पत्नी से सीखा था . एक जमाना था, वह जरा जरा सी बात पर सिर पटकने लगती . सामने दीवार पड़ती तो दीवार पर, खम्भा पड़ता तो खम्भे पर . बच्चे बड़े हुए तो वे भी बात बात पर सिर पटकने लगे . हरदयाल की पत्नी शैल को बच्चों की खातिर अपना यह शौक छोड़ना पड़ा . अब उसे मनस्ताप होता तो मंत्रेच्चार करने लगती . दसियों मंत्र और चालीसे उसने कंठस्थ कर लिये थे .
आधी रात को जब हरदयाल की नींद खुली तो उसने पाया उसकी पत्नी पलंग पर नहीं थी, वह घर के एक कोने में मंदिर के सामने बैठ कर तन्मयता से पूजा कर रही थी . बीच बीच में वह पीतल की छोटी सी घंटी उठा लेती और भगवान के कानों के पास ध्वनि करती . वह शंख ध्वनि करना भी सीख गयी थी . लग रहा था, पूजा करने में उसने शरीर की पूरी ऊर्जा लगा ली थी . उसने जैसे तय कर लिया था कि वह ईश्वर को इस बात के लिए राजी करके ही दम लेगी कि शीनी तलाक की जिद छोड़ दे . पूजा करते करते सहसा वह निढाल हो गयी और वहीं आसन पर लुढ़क गयी .
शील ने छोटी बिटिया नेहा को भी सेण्ट पाल से बुलवा लिया था . वह बच्चों को राबर्ट के पास छोड़ आयी थी कि शाम तक तो उसे लौट ही आना है, मगर यहाँ अपने माता पिता की स्थिति देख उसने एकाध दिन उनके पास रुक जाना ही बेहतर समझा . शीनी उसकी बड़ी बहन नहीं सखी भी रही है, उसे विश्वास था कि शीनी उसकी बात पर तो जरूर ही गौर करेगी, मगर ज्योंही नेहा ने उसे अपने फैसले पर पुनर्विचार करने का सुझाव दिया, शीनी ने उसे अपनी सीमा में ही रहने का मशवरा दिया और फोन पटक दिया . नेहा इस व्यवहार के लिए तैयार न थी . उसे गहरा आघात लगा . इस घर में आज पहली बार ऐसा हुआ था कि किसी ने उससे सुबह चाय तक के लिए नहीं पूछा था . एक खास तरह का बेगानापन चारों तरफ पसरा हुआ था . नीचे माँ और ऊपर पिता ने मनहूसियत फैला रखी थी . जब जब ऐसा हुआ, शीनी के कारण ही हुआ . उसे झटके देने की आदत है . पहला झटका उसने तब दिया था जब वह विधिवत घोषित रूप से डेट पर गयी थी . नेहा उन दिनों स्कूल में पढती थी . स्कूल से लौट कर उसने पाया, घर का माहौल कभी इतना मनहूस और गमगीन न था . लग रहा था, दीवारें रो रही हैं, फरनीचर सिसक रहा है . फर्श पर बिछा कालीन मुर्दे की तरह निस्पंद पडा था . हस्बेमामूल उसने अत्यंत उत्साह से आवाज दी थी, मॉम कहाँ हो . मैं आ गयी .
नेहा को याद है, उसकी आवाज कमरे का चक्कर लगा कर उसी की गोद में आ गिरी थी . उसने दुबारा आवाज दी मॉम मॉम . कोई उत्तर न पाकर वह बेडरूम में घुस गयी थी . उसने देखा उसकी माँ आज ही की तरह औंधी लेटी थी और सिसकियाँ भर रही थी .
क्या हुआ माँ उसने माँ को हिलाते हुए पूछा .
मर गयी तेरी माँ . माँ ने सिसकियों के बीच जवाब दिया .