S
StoryPublisher
Guest
चित्रा ने करन से पूछा,
तुम किस किसको न्योता देना चाहोगे
करन ने कुछ सीनियर फैकल्टी मेम्बरज के नाम गिना दिए जिन्हें वह एकाध बार मिल चुका था और जो शायद उसका नाम उसके चेहरे से जोड़ सकते थे . स्नातकों की फहरिस्त चित्रा और डेविड पर छोड़ दी .
रसल स्क्वेयर का अहाता लंदन के बीचो बीच पड़ता है . इंस्टीट्यूट ऑफ कामनवेल्थ स्टडीज और स्कूल आफ ओरियंटल ऐंड अफ़ीकन स्टडीज जैसी दो नामवर संस्थाएँ इसी अहाते में एक दूसरे से कुछ ही कदमों की दूरी पर हैं . वहां के सीनियर फैकल्टी मेम्बर्स इंग्लैंड में ही नहीं, दूसरे मुल्कों में भी आला तालीम, व्यापारी और सियासती मामलों में सलाह करते हैं, देते हैं . न जाने कौन, कब, किसकी नजर में पड़ जाये कहाँ से कहाँ पहुँच जाये वैसे भी करन यही मान कर चलता था कि अंग्रेज़ों ने ऐसा एम्पायर तो जरूर बनाया था जहाँ सूरज कभी डूबता नहीं, लेकिन जब वो टूट कर बिखरा तो काफ़ी मेस हो गई . उसे संभालने के लिए कुछ तो इमदाद चाहिए थी . वह तैयार था, बस बात उस पर किसी की नजर पड़ने की थी .
नीली छतरीवाला अगर अंग्रेज है तो उपर से नीचे देखने वक्त मैं उसे एक बार बस दिखाई दे जाऊँ, बाकी मैं खुद सँभाल लूँगा . उसने चित्रा से कहा, फिर तुम्हारी पार्टी में तो ताहिरा भी मेरे साथ होगी . उसे देख कर नजर फेर लेना मुमकिन ही नहीं .
सीनियर फैकल्टी मेम्बर्स जब तक पार्टी में रुके, बाकी मेहमान उन्हीं को घेरे रहे, उनके जाते ही पूरी पार्टी का नक्शा बदल गया . छोटी छोटी टोलियाँ बनीं और यहाँ वहाँ बिखर गई . कैंट, मार्लबरो और रॉथमैन सिगरेटों से उठते धुएँ की अलग–अलग महक कई–कई आवाज़ों से उठता बे–अल्फ़ाज शोर . खाली गिलासों को भरने के लिए कोने में रखी ड्रिंक्स की ट्रे की तरफ बढ़ते और वहाँ से लौटते कदमों की चहल पहल . करीनेवार बेतरतीबी का जीता जागता मेला . मेले में करन ताहिरा से कब जुदा हुआ, उसे पता नहीं चला .
दीवार से सटी बुक शेल्फ के पास खड़ी ताहिरा का जी चाहा कि वह एक नहीं, छः सात हो जाये . हर टोली में एक साथ शामिल हो, हर उठते हुए ठहाके पर खिलखिला के हँसे, और फिर किसी जादुई पिटारी में ताजा धुएँ की महक, उठती आवाजों का शोर, चलते फिरते कदमों की आहट को कैद कर ले . पिटारी इतनी छोटी हो कि आज तो उसके पर्स में आसानी से पूरी आ जाए . लेकिन हैडन सैंट्रल पहुँचनेपर फैल कर वो सारा कमरा भर दे जहाँ वह करन के जाने और लौटने के बीच बिल्कुल अकेली होती है . उस कमरे में न टी वी था, न रेडिओ न टेपरिकार्डर . उस कमरे की घड़ी भी टिक टिक नहीं करती थी . सड़क की तरफ खुलती एक खिड़की थी, गुसलखाने की तरफ जाते हुए गलियारे में एक दरवाजा . पचासी साल की स्पिंस्टर बहिन के मरने पर अस्सी साल के बिली को हैंडन सेन्ट्रल का मकान इकलौते वारिस की हैसियत से मुफ़्त मिला था . पिछले दस सालों में दो बीवियों को दफ़्न कर चुका था . अब एक बयासी साल की बेवा के चक्कर लगा रहता था . दो कमरों वाले मकान का एक कमरा किराये पर चढ़ा दिया था करन को . पूरे लंदन में करन को वहीं क्यों रहना पसंद आया, यह उसने ताहिरा को नहीं बताया . बस इतना ही कह दिया बिना ताहिरा के पूछे,
थोड़ी सी परेशानी बर्दाश्त कर लो भाई . हाथ खुलते ही निकल जायेंगे यहाँ से .
ताहिरा के कंधे पर एक मुलायम हाथ आ कर टिक गया .
क्यों ताहिरा यह फैसला नहीं कर पा रही हो कि किस खुशनसीब टोली में जाकर शामिल होना है आज चित्रा पूछ रही थी . डेविड उसके पास खड़ा था .
खुलते हुए गेहुए रंग और जहीन चेहरे वाली कली सी नाजुक चित्रा . मँझले कद का दुबला पतला लंबे भूरे बालों वाल डेविड . चित्रा अपने पाँव के नीचे आता एक कुशन उठाने को झुकी तो डेविड ने उसके माथे पर गिरते बालों की लट पीछे सरका दी . चित्रा ने हाथ बढ़ा कर ड्रिंक ट्रे से एक गिलास उठाया तो डेविड ने बोतल पकड़ कर उँड़ेलना शुरू कर दिया . गिलास उसके हाथों से लेकर पहले उसी के ओठों तक ले गया और उसके घूँट भरते ही खुद भी उसी गिलास से सिप करने लगा . अब चित्रा डेविड की बाँह के घेरे में थी और वह अपने ओठ उसके माथे पर रख कर लंबी साँस ले रहा था .
हम यहीं अपनी एक छोटी सी टोली क्यों ना बना ले कम से कम थोड़ी देर के लिये, सिर्फ हम तीनों डेविड ने कहा .
उसके खुले बालों में अँगुलियाँ घुमाती चित्रा हँस दी .
मुझे लगता है कि डेविड को अपने बालों की पोनी टेल बाँधनी चाहिये . मुझसे कहीं घने बाल हैं इसके . तुम्हारा क्या ख्याल है ताहिरा
ताहिरा का मन अचानक करन से बिल्कुल सट कर बैठने को हुआ . उसने चारों तरफ नजर दौड़ाई .
करन को देख रही हो न वहाँ सोफ़े पर है .
ताहिरा को अपनी तरफ आते देखकर करन के साथ सोफ़े पर बैठे दोनों अजनबी उठ खड़े हुए . करन ने दोनों को वापस बिठा दिया फिर अपनी जगह पर ताहिरा को बिठा, खुद उसके पास सोफ़े के बाजू पर बैठ गया .
यह असलमबेग है, कराची से, और यह अयूमा ओवुली है नैरोबी से . उसने परिचय कराया . दोनों मेरी तरह इंस्टीट्यूट में फेलोज हैं .
असलम नें ताहिरा को अपनी बातचीत में शामिल करते हुए कहा,
हम लोग पीने वालों की जमातें बना रहे थे . एक वो जो बोतल देखकर कहते हैं आज तू नहीं या मैं नहीं, दूसरे वो जो पीते कम और झूमते ज्यादा हैं . वह रुका, भरपूर नजरों से पहले ताहिरा और फिर सामने से आती हुई चित्रा को देखा . फिर आह भर कर बोला,
तीसरे वो जिन्हें अच्छी सूरत देखकर बिना पिये ही नशा हो जाता है .
डेविड भी अब तक आ गया था और चित्रा के कंधे तक कटे बालों से छेड़खानी कर रहा था . चित्रा ने असलम की कही बात का तर्जुमा किया तो हँस कर बोला,
अगर तुम चित्रा को निहारने से एक आध मिनट की फ़ुरसत ले सको असलम, तो मैं पूछना चाहता हूँ कि तुम्हारे लिये क्या ला सकता हूँ मेरा मतलब है कि तुम्हारे पीने के लिये .
असलम न मुस्कुराया, न कुछ बोला . जब डेविड ड्रिंक्स ट्रे की तरफ जाने को मुड़ा तो असलम ने उसे रोक लिया .
एक बात बताओगे डेविड ऐसा क्या है तुम गोरे आदमियों के पास कि हमारे यहाँ की आला उमदा लड़कियों को तुम फाँस लेते हो और हमारे हिस्से आती हैं तुम्हारी बेचारी तलछट . दफ्तरों में टाइप करने वालियाँ, डाकघरों के खतों को मोहरें लगाने वालियाँ, बसों और गाड़ियों के टिकट बेचने वालियाँ
ताहिरा ने असलम की तरफ देखा . वो न तो पी रहा था न ही उसकी आँखों में कोई हँसी मजाक की हल्की सी छाँव थी .
करन ने बात का रुख मोड़ा .
यह सारा कुसूर मेरा है . न मैं ताहिरा को चित्रा समझता, न चित्रा डेविड से मिलती . मैं तो अपनी खूबसूरत बीवी को आज भी सेल्सगर्ल होते होते बचा लाया हूँ . क्या पता कौन खरीददार कभी दुकान की रसीद के साथ बेचनेवाली को भी बतौर तोहफ़ा पैक करवा लेनेकी ज़िद पकड़ ले .
इस से पहले कि चित्रा करन की बात का तर्जुमा करे, असलम करन की तरफ देखकर बोला .
तुम हिंदुओं की हीपोक्रसी का तो जवाब ही नहीं . यहाँ आते ही स्कर्ट पहनी हुई हर चीज के साथ लिपट जाने और जहाँ तहाँ जायका बदलने में तुम्हें कोई परहेज नहीं रहता . फिर वहाँ जा कर कुँवारी दुल्हनें ले आते हो जो तुम्हारे अलावा किसी को देख भी ले तो उनकी शामत . न उसकी आवाज में कोई चुहल थी, न चेहरे पर कोई मुस्कराहट .
अब बस भी करो असलम . अभी तक खामोश बैठे अयुमा आवुलो ने ट्रूस की माँग करता हुआ हाथ उठा दिया . तुम भी कैसा हरामीपना दिखाने पर उतर आये हो .
अब असलम उठ कर खड़ा हो गया . अयूमा ओवुली के कंधों पर उसने दोनों हाथ रख दिये और मुस्करा कर कहा,
तुम्हारी बात तो मैंने सुन ली, मेरे साँवले सलोने दोस्त, लेकिन अगर किसी गोरे हरामी ने मुझे माँ की गाली दी होती तो यकीनन उसी की माँ को ही खराब कर के उसकी बात रख लेता .
ताहिरा ने डेविड को देखा . उसके चेहरे पर न गुस्सा था, न परेशानी . पास खड़ी चित्रा को देख उसका हाथ अपने हाथ में लेकर बड़े इत्मीनान से डेविड ने पूछा, चल के देखें कि पॉट रोस्ट तैयार हो गया या नहीं पक जाने की खुशबू तो आ रही है .
जैसे किसी ने कुछ कहा ही नहीं, जैसे किसी ने कुछ सुना ही नहीं .
अपोलो ११ की चाँद के धरातल पर पहुँचती तस्वीर ज्योंही टी वी पर उभरी, डेविड ने एक एक करके कमरे के सारे लैंप बुझा दिये . उस घुप्प अँधेरे में पूरा कमरा भी आसमान हो गया . फिर जो बत्ती जलाई तो कमरे की छत पर छोटे छोटे टिमटिम करते नीले बल्बों का चंदोवा था, हल्के स्लेटी रंग की दीवारों पर टंगे छोटे बड़े कई पोस्टर धुँधले बादलों की टुकड़ियाँ थीं, वॉल टू वॉल फरशी दरी एक तिलस्मी कालीन थी, और उस पर जहाँ तहाँ बिखरी मेहमानों की टोलियाँ अपनी अँगुलियाँ क्रास किये टी वी पर नजरें एकटक गडाए थीं जैसे पलक झपकने पर तिलस्म टूटने का अंदेशा हो . स्पेस सूट पहने नील आर्मस्ट्रांग का पहला कदम जब चाँद के अछूते धरातल पर उतरने में सिर्फ जरा सा ठिठका तो ताहिरा ने पास बैठे करन का हाथ कस कर थाम लिया . दुनिया के हर इन्सान के लाखों मील दूर, अपोलो ११ में अपने दूसरे साथियों की पहुँच से बाहर, यह अकेला इंसान इस वक्त कितनी नजरों के दायरे में है किसी एक अकेली जान को क्या कभी इतनी नजरों ने पहले भी एक साथ देखा है देखेंगी
तालियों की गड़गड़ाहट के साथ देखने वालों ने एक दूसरे को गले लगाया, शैम्पैन के ग्लास खनके . असलम अपना गिलास ताहिरा के गिलास से खनका कर करन से बोला,
आज के बाद खूबसूरत चेहरों की तशबीह चाँद के देने वालों का क्या होगा यार, मगर आज के दिन मुझे जाम उठाने की इजाजत दे ही दो . एक ऐसी खूबसूरत औरत के नाम जिसकी मिसाल चाँद से हो ही नहीं सकती क्योंकि उसके सामने चाँद भी फीका लगता है. मैं अपना यह जाम तुम्हारी दुल्हन के नाम उठाता हूँ, करन .
ताहिरा ने जाहिदा खाला को एक और खत लिखा,
खाला जान,
कल चित्रा ने हमारे लिए एक शानदार दावत दी . बहुत शहाना इलाके में रिहाइश है उसकी, लेकिन जमीन से ऊपर नहीं, जमीन के नीचे . यहाँ उसे बेसमेंट कहते हैं . दावत का सारा माहौल ही बिल्कुल तिलस्मी कर के रखा था उसने . मेहमान कह रहे थे कि मेरा काशनी मुकैश वाला दुपट्टा और चित्रा की बेसमेंट की नीची छत से टिमटिमाते छोटे छोटे नीले बल्बों की रोशनी में मुकाबला चल रहा है . किसके पास ज्यादा सितारे हैं
चित्रा की तो मैं फूफी हूँ न खाला जान . उम्र में भी मुझसे कोई साल भर छोटी है वो लेकिन मेरा ऐसा दुलार करती है वो जैसे मेरी आपा हो . बड़ी ही प्यारी है और सँभली हुई भी .
मैंने उसे एक बार भी माथे पर तेवर डाले नहीं देखा है तो बड़ी कम–गो . पर हर बात इशारतन सँभाल लेती है . मुझे तो लगता है कि वो जो भी चाहे कर सकती है . चाँद पर भी उतरती तो वहाँ ऐसे घूमने निकल जाती जैसे कम्पनी बाग में सैर करने गई हो .
लाहौर से लंदन इतना दूर तो नहीं है न खाला जान जितना जमीन से चाँद आप यहाँ आतीं तो कितना अच्छा होता .
आपकी अपनी गुड़िया
ताहिरा
हाँ एक बात और . मुझे मेरा खत मिलते ही लंबा सा खत लिखियेगा . इतना लंबा कि उसे एक बार पढ़ने में ही मेरा पूरा दिन निकल जाये . रुक रुक पढ़ूँगी और पढ़ती पढ़ती आपसे बातें करूँगी . कितनी बातें बतानी है आपको .
ताहिरा
पूरा करने के बाद ताहिरा ने काफ़ी बार सोचा कि डेविड के बारे में कुछ लिखे . चित्रा उसी के साथ रहती है . दोनों कितने प्यारे लगते हैं . लेकिन लिखा कुछ नहीं .
तुम किस किसको न्योता देना चाहोगे
करन ने कुछ सीनियर फैकल्टी मेम्बरज के नाम गिना दिए जिन्हें वह एकाध बार मिल चुका था और जो शायद उसका नाम उसके चेहरे से जोड़ सकते थे . स्नातकों की फहरिस्त चित्रा और डेविड पर छोड़ दी .
रसल स्क्वेयर का अहाता लंदन के बीचो बीच पड़ता है . इंस्टीट्यूट ऑफ कामनवेल्थ स्टडीज और स्कूल आफ ओरियंटल ऐंड अफ़ीकन स्टडीज जैसी दो नामवर संस्थाएँ इसी अहाते में एक दूसरे से कुछ ही कदमों की दूरी पर हैं . वहां के सीनियर फैकल्टी मेम्बर्स इंग्लैंड में ही नहीं, दूसरे मुल्कों में भी आला तालीम, व्यापारी और सियासती मामलों में सलाह करते हैं, देते हैं . न जाने कौन, कब, किसकी नजर में पड़ जाये कहाँ से कहाँ पहुँच जाये वैसे भी करन यही मान कर चलता था कि अंग्रेज़ों ने ऐसा एम्पायर तो जरूर बनाया था जहाँ सूरज कभी डूबता नहीं, लेकिन जब वो टूट कर बिखरा तो काफ़ी मेस हो गई . उसे संभालने के लिए कुछ तो इमदाद चाहिए थी . वह तैयार था, बस बात उस पर किसी की नजर पड़ने की थी .
नीली छतरीवाला अगर अंग्रेज है तो उपर से नीचे देखने वक्त मैं उसे एक बार बस दिखाई दे जाऊँ, बाकी मैं खुद सँभाल लूँगा . उसने चित्रा से कहा, फिर तुम्हारी पार्टी में तो ताहिरा भी मेरे साथ होगी . उसे देख कर नजर फेर लेना मुमकिन ही नहीं .
सीनियर फैकल्टी मेम्बर्स जब तक पार्टी में रुके, बाकी मेहमान उन्हीं को घेरे रहे, उनके जाते ही पूरी पार्टी का नक्शा बदल गया . छोटी छोटी टोलियाँ बनीं और यहाँ वहाँ बिखर गई . कैंट, मार्लबरो और रॉथमैन सिगरेटों से उठते धुएँ की अलग–अलग महक कई–कई आवाज़ों से उठता बे–अल्फ़ाज शोर . खाली गिलासों को भरने के लिए कोने में रखी ड्रिंक्स की ट्रे की तरफ बढ़ते और वहाँ से लौटते कदमों की चहल पहल . करीनेवार बेतरतीबी का जीता जागता मेला . मेले में करन ताहिरा से कब जुदा हुआ, उसे पता नहीं चला .
दीवार से सटी बुक शेल्फ के पास खड़ी ताहिरा का जी चाहा कि वह एक नहीं, छः सात हो जाये . हर टोली में एक साथ शामिल हो, हर उठते हुए ठहाके पर खिलखिला के हँसे, और फिर किसी जादुई पिटारी में ताजा धुएँ की महक, उठती आवाजों का शोर, चलते फिरते कदमों की आहट को कैद कर ले . पिटारी इतनी छोटी हो कि आज तो उसके पर्स में आसानी से पूरी आ जाए . लेकिन हैडन सैंट्रल पहुँचनेपर फैल कर वो सारा कमरा भर दे जहाँ वह करन के जाने और लौटने के बीच बिल्कुल अकेली होती है . उस कमरे में न टी वी था, न रेडिओ न टेपरिकार्डर . उस कमरे की घड़ी भी टिक टिक नहीं करती थी . सड़क की तरफ खुलती एक खिड़की थी, गुसलखाने की तरफ जाते हुए गलियारे में एक दरवाजा . पचासी साल की स्पिंस्टर बहिन के मरने पर अस्सी साल के बिली को हैंडन सेन्ट्रल का मकान इकलौते वारिस की हैसियत से मुफ़्त मिला था . पिछले दस सालों में दो बीवियों को दफ़्न कर चुका था . अब एक बयासी साल की बेवा के चक्कर लगा रहता था . दो कमरों वाले मकान का एक कमरा किराये पर चढ़ा दिया था करन को . पूरे लंदन में करन को वहीं क्यों रहना पसंद आया, यह उसने ताहिरा को नहीं बताया . बस इतना ही कह दिया बिना ताहिरा के पूछे,
थोड़ी सी परेशानी बर्दाश्त कर लो भाई . हाथ खुलते ही निकल जायेंगे यहाँ से .
ताहिरा के कंधे पर एक मुलायम हाथ आ कर टिक गया .
क्यों ताहिरा यह फैसला नहीं कर पा रही हो कि किस खुशनसीब टोली में जाकर शामिल होना है आज चित्रा पूछ रही थी . डेविड उसके पास खड़ा था .
खुलते हुए गेहुए रंग और जहीन चेहरे वाली कली सी नाजुक चित्रा . मँझले कद का दुबला पतला लंबे भूरे बालों वाल डेविड . चित्रा अपने पाँव के नीचे आता एक कुशन उठाने को झुकी तो डेविड ने उसके माथे पर गिरते बालों की लट पीछे सरका दी . चित्रा ने हाथ बढ़ा कर ड्रिंक ट्रे से एक गिलास उठाया तो डेविड ने बोतल पकड़ कर उँड़ेलना शुरू कर दिया . गिलास उसके हाथों से लेकर पहले उसी के ओठों तक ले गया और उसके घूँट भरते ही खुद भी उसी गिलास से सिप करने लगा . अब चित्रा डेविड की बाँह के घेरे में थी और वह अपने ओठ उसके माथे पर रख कर लंबी साँस ले रहा था .
हम यहीं अपनी एक छोटी सी टोली क्यों ना बना ले कम से कम थोड़ी देर के लिये, सिर्फ हम तीनों डेविड ने कहा .
उसके खुले बालों में अँगुलियाँ घुमाती चित्रा हँस दी .
मुझे लगता है कि डेविड को अपने बालों की पोनी टेल बाँधनी चाहिये . मुझसे कहीं घने बाल हैं इसके . तुम्हारा क्या ख्याल है ताहिरा
ताहिरा का मन अचानक करन से बिल्कुल सट कर बैठने को हुआ . उसने चारों तरफ नजर दौड़ाई .
करन को देख रही हो न वहाँ सोफ़े पर है .
ताहिरा को अपनी तरफ आते देखकर करन के साथ सोफ़े पर बैठे दोनों अजनबी उठ खड़े हुए . करन ने दोनों को वापस बिठा दिया फिर अपनी जगह पर ताहिरा को बिठा, खुद उसके पास सोफ़े के बाजू पर बैठ गया .
यह असलमबेग है, कराची से, और यह अयूमा ओवुली है नैरोबी से . उसने परिचय कराया . दोनों मेरी तरह इंस्टीट्यूट में फेलोज हैं .
असलम नें ताहिरा को अपनी बातचीत में शामिल करते हुए कहा,
हम लोग पीने वालों की जमातें बना रहे थे . एक वो जो बोतल देखकर कहते हैं आज तू नहीं या मैं नहीं, दूसरे वो जो पीते कम और झूमते ज्यादा हैं . वह रुका, भरपूर नजरों से पहले ताहिरा और फिर सामने से आती हुई चित्रा को देखा . फिर आह भर कर बोला,
तीसरे वो जिन्हें अच्छी सूरत देखकर बिना पिये ही नशा हो जाता है .
डेविड भी अब तक आ गया था और चित्रा के कंधे तक कटे बालों से छेड़खानी कर रहा था . चित्रा ने असलम की कही बात का तर्जुमा किया तो हँस कर बोला,
अगर तुम चित्रा को निहारने से एक आध मिनट की फ़ुरसत ले सको असलम, तो मैं पूछना चाहता हूँ कि तुम्हारे लिये क्या ला सकता हूँ मेरा मतलब है कि तुम्हारे पीने के लिये .
असलम न मुस्कुराया, न कुछ बोला . जब डेविड ड्रिंक्स ट्रे की तरफ जाने को मुड़ा तो असलम ने उसे रोक लिया .
एक बात बताओगे डेविड ऐसा क्या है तुम गोरे आदमियों के पास कि हमारे यहाँ की आला उमदा लड़कियों को तुम फाँस लेते हो और हमारे हिस्से आती हैं तुम्हारी बेचारी तलछट . दफ्तरों में टाइप करने वालियाँ, डाकघरों के खतों को मोहरें लगाने वालियाँ, बसों और गाड़ियों के टिकट बेचने वालियाँ
ताहिरा ने असलम की तरफ देखा . वो न तो पी रहा था न ही उसकी आँखों में कोई हँसी मजाक की हल्की सी छाँव थी .
करन ने बात का रुख मोड़ा .
यह सारा कुसूर मेरा है . न मैं ताहिरा को चित्रा समझता, न चित्रा डेविड से मिलती . मैं तो अपनी खूबसूरत बीवी को आज भी सेल्सगर्ल होते होते बचा लाया हूँ . क्या पता कौन खरीददार कभी दुकान की रसीद के साथ बेचनेवाली को भी बतौर तोहफ़ा पैक करवा लेनेकी ज़िद पकड़ ले .
इस से पहले कि चित्रा करन की बात का तर्जुमा करे, असलम करन की तरफ देखकर बोला .
तुम हिंदुओं की हीपोक्रसी का तो जवाब ही नहीं . यहाँ आते ही स्कर्ट पहनी हुई हर चीज के साथ लिपट जाने और जहाँ तहाँ जायका बदलने में तुम्हें कोई परहेज नहीं रहता . फिर वहाँ जा कर कुँवारी दुल्हनें ले आते हो जो तुम्हारे अलावा किसी को देख भी ले तो उनकी शामत . न उसकी आवाज में कोई चुहल थी, न चेहरे पर कोई मुस्कराहट .
अब बस भी करो असलम . अभी तक खामोश बैठे अयुमा आवुलो ने ट्रूस की माँग करता हुआ हाथ उठा दिया . तुम भी कैसा हरामीपना दिखाने पर उतर आये हो .
अब असलम उठ कर खड़ा हो गया . अयूमा ओवुली के कंधों पर उसने दोनों हाथ रख दिये और मुस्करा कर कहा,
तुम्हारी बात तो मैंने सुन ली, मेरे साँवले सलोने दोस्त, लेकिन अगर किसी गोरे हरामी ने मुझे माँ की गाली दी होती तो यकीनन उसी की माँ को ही खराब कर के उसकी बात रख लेता .
ताहिरा ने डेविड को देखा . उसके चेहरे पर न गुस्सा था, न परेशानी . पास खड़ी चित्रा को देख उसका हाथ अपने हाथ में लेकर बड़े इत्मीनान से डेविड ने पूछा, चल के देखें कि पॉट रोस्ट तैयार हो गया या नहीं पक जाने की खुशबू तो आ रही है .
जैसे किसी ने कुछ कहा ही नहीं, जैसे किसी ने कुछ सुना ही नहीं .
अपोलो ११ की चाँद के धरातल पर पहुँचती तस्वीर ज्योंही टी वी पर उभरी, डेविड ने एक एक करके कमरे के सारे लैंप बुझा दिये . उस घुप्प अँधेरे में पूरा कमरा भी आसमान हो गया . फिर जो बत्ती जलाई तो कमरे की छत पर छोटे छोटे टिमटिम करते नीले बल्बों का चंदोवा था, हल्के स्लेटी रंग की दीवारों पर टंगे छोटे बड़े कई पोस्टर धुँधले बादलों की टुकड़ियाँ थीं, वॉल टू वॉल फरशी दरी एक तिलस्मी कालीन थी, और उस पर जहाँ तहाँ बिखरी मेहमानों की टोलियाँ अपनी अँगुलियाँ क्रास किये टी वी पर नजरें एकटक गडाए थीं जैसे पलक झपकने पर तिलस्म टूटने का अंदेशा हो . स्पेस सूट पहने नील आर्मस्ट्रांग का पहला कदम जब चाँद के अछूते धरातल पर उतरने में सिर्फ जरा सा ठिठका तो ताहिरा ने पास बैठे करन का हाथ कस कर थाम लिया . दुनिया के हर इन्सान के लाखों मील दूर, अपोलो ११ में अपने दूसरे साथियों की पहुँच से बाहर, यह अकेला इंसान इस वक्त कितनी नजरों के दायरे में है किसी एक अकेली जान को क्या कभी इतनी नजरों ने पहले भी एक साथ देखा है देखेंगी
तालियों की गड़गड़ाहट के साथ देखने वालों ने एक दूसरे को गले लगाया, शैम्पैन के ग्लास खनके . असलम अपना गिलास ताहिरा के गिलास से खनका कर करन से बोला,
आज के बाद खूबसूरत चेहरों की तशबीह चाँद के देने वालों का क्या होगा यार, मगर आज के दिन मुझे जाम उठाने की इजाजत दे ही दो . एक ऐसी खूबसूरत औरत के नाम जिसकी मिसाल चाँद से हो ही नहीं सकती क्योंकि उसके सामने चाँद भी फीका लगता है. मैं अपना यह जाम तुम्हारी दुल्हन के नाम उठाता हूँ, करन .
ताहिरा ने जाहिदा खाला को एक और खत लिखा,
खाला जान,
कल चित्रा ने हमारे लिए एक शानदार दावत दी . बहुत शहाना इलाके में रिहाइश है उसकी, लेकिन जमीन से ऊपर नहीं, जमीन के नीचे . यहाँ उसे बेसमेंट कहते हैं . दावत का सारा माहौल ही बिल्कुल तिलस्मी कर के रखा था उसने . मेहमान कह रहे थे कि मेरा काशनी मुकैश वाला दुपट्टा और चित्रा की बेसमेंट की नीची छत से टिमटिमाते छोटे छोटे नीले बल्बों की रोशनी में मुकाबला चल रहा है . किसके पास ज्यादा सितारे हैं
चित्रा की तो मैं फूफी हूँ न खाला जान . उम्र में भी मुझसे कोई साल भर छोटी है वो लेकिन मेरा ऐसा दुलार करती है वो जैसे मेरी आपा हो . बड़ी ही प्यारी है और सँभली हुई भी .
मैंने उसे एक बार भी माथे पर तेवर डाले नहीं देखा है तो बड़ी कम–गो . पर हर बात इशारतन सँभाल लेती है . मुझे तो लगता है कि वो जो भी चाहे कर सकती है . चाँद पर भी उतरती तो वहाँ ऐसे घूमने निकल जाती जैसे कम्पनी बाग में सैर करने गई हो .
लाहौर से लंदन इतना दूर तो नहीं है न खाला जान जितना जमीन से चाँद आप यहाँ आतीं तो कितना अच्छा होता .
आपकी अपनी गुड़िया
ताहिरा
हाँ एक बात और . मुझे मेरा खत मिलते ही लंबा सा खत लिखियेगा . इतना लंबा कि उसे एक बार पढ़ने में ही मेरा पूरा दिन निकल जाये . रुक रुक पढ़ूँगी और पढ़ती पढ़ती आपसे बातें करूँगी . कितनी बातें बतानी है आपको .
ताहिरा
पूरा करने के बाद ताहिरा ने काफ़ी बार सोचा कि डेविड के बारे में कुछ लिखे . चित्रा उसी के साथ रहती है . दोनों कितने प्यारे लगते हैं . लेकिन लिखा कुछ नहीं .