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( शुभम तो शीतल की यह बात सुनकर एकदम से जीत गया और उसकी नजर अपने पैंट पर गई तो सच में वहां बहुत बड़ा तंबू बना हुआ था जिसे वह अपनी हथेली से छुपाने की नाकाम कोशिश करने लगा और उसकी यह हालत देखकर शीतल को वहां ज्यादा देर ठहर ना ठीक नहीं लगा और वह हंसते हुए चली गई,,,, शुभम भी किसी तरह से अपनी क्लास में आकर बेठ गया।,,,,,
क्लास से इसे रिपोर्ट कार्ड मिली थी जिस पर उसे उसके पापा के दस्तखत कराने पर रिपोर्ट कार्ड लेकर घर आ गया लेकिन घर पर आकर केवल उसे उसकी मां ही नजर आती थी उसकी खूबसूरती का रसपान करते हुए चार-पांच दिन बीत गए लेकिन उसने रिपोर्ट कार्ड पर अपने पापा के दस्तखत नहीं कराए,, रिपोर्ट कार्ड पर दस्तखत कराने की अंतिम तारीख थी क्योंकि उसे क्लास में देकर जमा करना था लेकिन वह भूल गया था और उसके पापा घर से ऑफिस चले गए थे,,,,, वह उस रिपोर्ट कार्ड पर अपने पापा के दस्तखत कराने के लिए अपने पापा के ऑफिस की तरफ निकल गया।
दूसरी तरफ चार-पांच दिन गुजर जाने की वजह से रीता भी परेशान हो चुकी थी क्योंकि उसे अभी तक रकम नहीं मिली थी। क्योंकि अशोक उसे पैसे नहीं देना चाहता था जब रीता करीब नहीं होती थी तो वह इस बारे में जरूर सोचना था और उसे लगने भी लगा था कि वह काफी पैसे उसके ऊपर लुटा चुका है और उसकी लालच और ज्यादा बढ़ती जा रही है।,,
लेकिन जब पीड़िता उसके करीब होती थी तो वह सब कुछ भूल जाता था,,, ऑफिस में अपना काम करते हुए अशोक मन में ठान लिया था कि इस बार वह रीता को पैसे नहीं देगा चाहे जो भी हो जाए अगर ऐसा हुआ तो वह साफ-साफ उसे कहकर ऑफिस से निकाल देगा और दूसरी तरफ रीता अपने केबिन में बैठ कर उस पैसे के बारे में ही सोच रही थी,,, वह उठकर अशोक की केबिन में जाने लगी,,, क्योंकि वह जानती थी कि अशोक से किस तरह से पैसे लेने हैं,,, रीता केवीन का दरवाजा खोलकर ऑफिस में प्रवेश कि,, अशोक अलमारी म से े कोई फाइल ढूंढ रहा था,,,, रीता बिना कुछ सोचे समझे पीछे से जाकर अशोक के बदन से लिपट गई,,, और उससे लिपटते हुए बोली,,, अशोक मेरी जान कुछ दिनों से तो मेरे ऊपर बिल्कुल भी ध्यान नहीं दे रहे हो क्या कोई और मिल गई है तुम्हें (इतना कहते हुए वह अपना हाथ नीचे ले जाकर पेंट के ऊपर से अशोक के लंड को सहलाने लगी,,, अशोक समझ रहा था कि वह क्या करने आई है लेकिन वह उसकी उंगलियों के जादू से बच नहीं सका क्योंकि कुछ ही सेकंड में उसके लंड में हरकत होना शुरू हो गई,,,,, और रीता धीरे से उसकी पेंट की बटन खोलकर एक झटके से ही अंडरवीयर सहित उसके पैंट को घुटनों तक सरका दी,,, और अशोक को अपनी तरफ घुमा दी,,,, एक हाथ से उसका लंड पकड़ कर ही लाते हुए उसके होठों को चूमने लगी अशोक की हालत उसकी इस हरकत से और ज्यादा खराब होने लगी,,, अशोक उत्तेजित होकर अपने दोनों हाथ आगे बढ़ा कर रीटा की चूचियों को ब्लाउज के ऊपर से दबाने लगा रीता समझ गई कि अब यह एकदम चुदवासा हुए जा रहा है,,, तभी उसकी तड़प को और ज्यादा बढ़ाते हुए रीता अशोक से दो कदम पीछे हटी और उसके सामने ही अपनी साड़ी को ऊपर की तरफ उठाने लगी अशोक अपना लंड पकड़ कर यह नजारा देखकर और ज्यादा मस्त हुए जा रहा था। कभी रीता ने अपनी साड़ी को कमर तक उठा दि और अपनी पैंटी को नीचे की तरफ सरकाते हुए जांघों में फंसा दी,,, अशोक की नजर रीता की चिकनी बुर पर पड़ते ही वह एकदम से चुदवासा हो गया रीता ने जानबूझकर अपनी बुर को आज ही वीट क्रीम लगाकर साफ की थी,,,, अशोक रीता की तरफ आगे बढ़ता इससे पहले ही रीता उसकी तरफ पीठ करके खड़ी हो गई,,, अशोक को समझ पाता इससे पहले ही वह अपनी नजरें पीछे घुमा कर अशोक की तरफ मादक मुस्कान बिखेरते हुए देखती हुई टेबल के ऊपर झुक गई और अपनी भारी-भरकम गांड को अशोक के सामने परोस दी,,, रीता की यही कामुक अदाएं अशोक की जान ले लेती थी अशोक से रहा नहीं गया और वह रीता की तरफ अपना लंड पकड़े आगे बढ़ा,,, रीता समझ गई थी कि वह अब एकदम से चुदवासा हो गया है। अशोक आगे बढ़कर रीता की गांड को दोनों हाथों से थाम लिया,,, रीता समझ गई कि अब वह लंड डालने के लिए पूरी तरह से तैयार हो चुका है, वह अपना लंड ऊसकी बूर से सटाता इससे पहले ही,, रीता अपनी गांड को आगे की तरफ सिकोड़ ली,, और वह अपनीे गांड को सिकोड़ते हुए बोली,,,
तुम अब बदल गए हो अशोक तुम मुझ पर बिल्कुल भी ध्यान नहीं देते,,,,
ऐसा क्यों कह रही हो जान मैं तुम पर बराबर ध्यान देता हूं,,,
नहीं ऐसा बिल्कुल भी नहीं है तो मुझ पर बिल्कुल भी ध्यान नहीं देते कुछ दिनों से तो तुम मुझसे बात तक नहीं कीए हो,,
ऐसा कुछ भी नहीं है रीता,,,, तुम्हें गलतफहमी हो रही है । (इतना कहते हुए वह अपना हाथ आगे बढ़ा कर रीता कि बड़ी-बड़ी गांड को पकड़ना चाह रहा था कि तभी वह उसका हाथ झटकते हुए बोली,,,)
गलतफहमी मुझे नहीं,,,, बल्कि तुम सच में बदल गए हो,,, वैलेंटाइन के दिन मैं अपना परिवार अपने पति को छोड़ कर तुम्हारे साथ शहर के बाहर गई सिर्फ तुम्हें खुश करने के,,, लिए,,, तुम्हारी खुशी की खातिर में अपने परिवार को बार-बार छोड़ कर तुम्हारे साथ कहीं भी चल देती हूं,,,,
यह तुम क्या कह रही हो रीता मुझे बिल्कुल समझ में नहीं आ रहा है । (इतना कहते हुए एक बार फिर से रीता की भराव दार गांड को थामने के लिए हाथ बढ़ाया ही था कि फिर से वह उसका हाथ झटकते हुए बोली,,,,)
वैलेंटाइन के दिन हर प्रेमी अपनी प्रेमिका को कुछ ना कुछ गिफ्ट देता है लेकिन तुमने मुझे कुछ भी नहीं दिया सिवाय झूठे वादे के,,,,,
नहीं जान ऐसा कुछ भी नहीं है मैं तुम्हें झूठा वादा नहीं दिया हूं (इतना कहते हुए अशोक फिर से उसकी मतवाली गांड पर अपना हाथ रखने चला लेकीन इस बार रीता ने उसके हाथ को झटकी नहीं,,,, वह अपनी नंगी गांड पर उसके हाथ को रखने दी,,, रीता की मस्त नंगी गांड पर अपने दोनों हाथ रखते ही उसका जोश बढ़ने लगा और वह कसकर रिता की गांड को अपनी हथेली में भरकर दबाने लगा,,, ऐसा करते ही अशोक को लगने लगा कि रीता नरम पड़ रही है और एक कदम आगे बढ़कर धीरे से अपने लंड को रीता की बुर के मुहाने सटा दिया,,,, लेकिन इस बार भी रीता ने उसे कुछ नहीं बोली बस अपनी नजरें पीछे की तरफ घुमा कर अशोक की हरकत पर नजर रखते हुए बोली,,,,
शुभम तुम मुझे धोखा दिए हो,,
नहीं जान ऐसा बिल्कुल भी नहीं है मैं भला तुम्हें क्यों धोखा दूंगा,,,,
तो तुमने उस रात को मुझे ₹500000 देने का वादा किया था लेकिन अब तक पैसे के बारे में मुझसे कोई जिक्र तक नहीं किए हो,,,,
रीता तुम मुझे गलत समझ रही हो कुछ दिनों से मैं बहुत बिजी हूं इसलिए तुम्हें पैसे नहीं दे पाया तुम तो जानती हो ऑफिस में कितना काम रहता है,,,( इस बार अशोक ने अपने लंड के सुपाड़े को रीता की पनियाई बुर के अंदर उतार दिया,,, उसे लगने लगा कि रीता चोदने के लिए बिल्कुल तैयार हो चुकी है इसलिए उसका विरोध नहीं कर रही है लेकिन उसके सोचने के बिल्कुल विपरीत रीता एक हाथ पीछे ले जाकर अशोक के लंड को पकड़कर अपने हाथ से ही अपनी बुर से बाहर निकाल दि,,,, और लंड को अपनी बुर से बाहर निकालते हुए बोली,,,,
नहीं मैं वैसे झूठे इंसान के साथ कोई भी संबंध रखना नहीं चाहती (इतना कहते हुए रीता खड़ी हो गई और अपनी साड़ी को नीचे कर दी,,, अशोक रीता की हरकत से एकदम से तड़प उठा क्योंकि अभी भी उसके लंड पर से रीता के मदन रस की बूंदे टपक रही थी, वह एकदम से चुदवासा हो गया था ओर रीताा की बुर में लंड डालने के लिए तड़प रहा था,,,, वह एक हाथ में लंड थामे रीता को बोला,,,
ऐसा मत करो जान तुम मेरे लिए सब कुछ हो,,,, तुम अच्छी तरह से जानती हो कि अब तक मैंने तुम्हारी सारी जरूरतों को पूरी करते आया हुं,,,, तुम्हारी यह जरूरत भी मैं पूरी कर दूंगा तुम इतनी जल्दी नाराज हो जाती हो यह मुझे अच्छा नहीं लगता,,,,
अच्छा तो मुझे भी नहीं लगता अशोक लेकिन क्या करें तो मुझे एकदम मजबूर कर देते हो मैंने तुम्हें सब कुछ दे चुकी हूं अपनी इज्जत तक तुम्हें दे चुकी हूं लेकिन तुम्हें मेरी जरा भी फिक्र नहीं है,,,,,
मुझे तुम्हारी बहुत फिक्र है रीता (इतना कहते हुए वह अपने दोनों हाथ से रीता की साड़ी ऊपर सरका ने लगा तो रीता ने फिर से उसका हाथ दूर झटक दी,,, )
रहने दो अशोक तुम्हें अगर मेरी जरा भी इज्जत होती मेरी बात मानते तो मुझे कब से ₹500000 दे दिए होते हीरो का हार बनवाने के लिए,,,,
तुम्हें मना कब कर रहा हूं तुम्हें देने के लिए तो तैयार हूं,,, तुम मुझे बस अभी चोदने दो मैं तुम्हें 500000 का,, चेक लिख दूंगा,,,
नहीं तुम फिर झूठ बोल रहे हो चोदने के बाद फिर भूल जाओगे,,
नहीं भूलूंगा प्रॉमिस मुझे तड़पाओ मत देखो मेरा लंड कितना तड़प रहा है तुम्हारी बुर में जाने के लिए,,,,
( यही तो रहता चाहती थी वह जानबूझकर सब कुछ कर रही थी वह अशोक को अपना खूबसूरत बदन और अपनी बुर पर उसके लंड का स्पर्श करा कर जानबूझकर उसके लंड को बाहर खींच दी थी,,,, रीता अशोक को उसकी बुर पाने के लिए एकदम विवस देखना चाहती थी जो कि वह हो चुका था,,, इसी पल का वह इंतजार कर रही थी वह जानती थी कि ऐसे मोड़ पर पहुंच कर वहं जरूर उसे पैसे देने के लिए तैयार हो जाएगा,,,, उसका चलाया तीर निशाने पर लगा था। वह फिर से अपने बातों के जादू में उसे उलझाते हुए बोली,,,।
देखो अशोक तुम तुम झूठ तो नहीं बोल रहे हो क्योंकि इस बार तुम अगर मुझसे झूठ बोले तो मेरा और तुम्हारा रिश्ता नहीं खत्म हो जाएगा तुमको हमारे प्यार का वास्ता है अगर इस बार तुम झूठ बोले,,,
नहीं मेरी जान मैं कभी झूठ नहीं बोलता ना आप बोल रहा हूं मैं बिलकुल सच बोल रहा हूं बस मुझे चोदने दो,,,,
तुम कहते हो तो इस बार तुम पर भरोसा करके तुम्हारी बात मान जाती हूं,,,,
प्रोमि्स मेरी जान,,, बस अपनी सारी को ऊपर करो और झुक जाओ,,,,
( रीता एक बार फिर से अपने हुस्न के जादू से अशोक से अपनी बात मनवा ली थी और जल्दी से अपनी साड़ी को ऊपर कमर तक उठा कर फिर से टेबल पर झुक गई,,,, रीता की मस्त गांड देखकर अशोक से रहा नहीं गया और वह अपने लंड को रीता की बुर में डालकर चोदना शुरू कर दिया एक बार फिर से रीता झूठ-मूठ का अशोक की चुदाई से सिसकने लगी,,,, वह जोर-जोर से अपनी गांड को पीछे की तरफ ठेलकर अशोक का मजा दुगना कर रही थी,,,
ओ मेरी जान रीता तुम बहुत मस्त हो मैं तुम्हारी तरह ही बीवी चाहता था तुम बहुत अच्छी औरत हो जब से तुम मेरी जिंदगी में आई हो तब से मेरी जिंदगी में बहार आ गई है,,,,,आााहहहहहह आहहहहहह,,,, रीता बहुत मजा आ रहा है।
हां जान मुझे भी बहुत मजा आ रहा है चुदाई का असली मजा मुझे तुम्हारे लंड से ही आता है,,,,आहहहहहहह,,, आहहहहहहहहह,,,, अशोक और जोर से और जोर से चोदो मुझे,,,,,
( अपनी ऑफिस में अशोक अपनी सेक्रेटरी रीता को चोदकर मस्त हुए जा रहा था रीता भी उसका पूरा सहयोग करते हुए उसके लंड का मजा ले रही थी,,, ऑफिस के बाकी कर्मचारी और पूरी दुनिया से बेखबर होकर दोनों एक दूसरे में समाने की पूरी कोशिश कर रहे थे,,,,, कि तभी अचानक ऑफिस का दरवाजा खुला,,, रीता और अशोक की नजरें एक साथ दरवाजे की तरफ घूमी और शुभम अंदर का नजारा देखकर एकदम हैरान रह गया किसी भी बेटे के लिए यह नजारा बेहद आश्चर्यजनक रूप से हैरान कर देने वाला ही था क्योंकि उसका बाप ऑफिस में अपनी ही सेक्रेटरी की चुदाई कर रहा था। शुभम आंखें फाड़े ऑफिस में अपने बाप की करतूत को देख रहा था,,, उसका बाप अपनी सेक्रेटरी को चोद रहा था जो कि वह खुद टेबल पर झुकी हुई थी और उसकी सारी पूरी कमर तक उठी हुई थी, और उसकी लाल रंग की पेंटी उसकी जांघों में फंसी हुई थी,,, शुभम साफ-साफ देख पा रहा था कि उसके बाप का लंड उस औरत की बुर में जल्दी-जल्दी अंदर बाहर हो रहा था,,, और वह भी समझ गया कि जिस तरह से दोनों हांप रहे थे दोनों का पानी निकलने ही वाला था,,,, अशोक के साथ-साथ विजेता भी इस तरह से ऑफिस का दरवाजा खुलने पर एकदम हड़बड़ा से गए थे,,,,, तीनों की नजरें एक दूसरे को देख रही थी यह नजारा देखकर शुभम पल भर के लिए एकदम शर्मिंदा हो गया क्योंकि उसे अपने बाप से ऐसी उम्मीद नहीं थी,,, वहां खड़ा रहना और ऐसे हालात में अपने बाप से रिपोर्ट कार्ड पर सिग्नेचर लेना उसे ठीक नहीं लगा और वह वहां एक पल भी रुकना गवारा नहीं समझा और वापस लौट गया,,, अशोक की हालत ऐसी हो गई थी कि बिना धक्के मारे ही उसका पानी निकल गया,,,,
रीता अपनी पैंटी को ऊपर चढ़ाते हुए आश्चर्य के साथ अशोक से बोली,,,,
यह लड़का कौन था अशोक,,,,,
( इस बार अशोक रीता पर गुस्सा होते हुए बोला)
वह मेरा बेटा था लेकिन रीता तुमने जो आज गलती की हो यह गलती मेरी जिंदगी में ना जाने कैसा तूफान लाएगी,,, तुलसी दरवाजा ठीक से बंद नहीं होता,,,,
मुझ पर चिल्लाओ मत अशोक जितनी गलती मेरी है उतनी गलती तुम्हारी भी है,,,,,, आप अपने वादे के मुताबिक मुझे 500000 का चेक लिख कर दो,,,
अभी तुम जाओ रीता मैं बाद में तुम्हें दे दूंगा अभी मेरा मूड खराब है,,,,
( रीता ऐसे हालात में पैसे मांगने पर जोर देना ठीक नहीं समझी क्योंकि वह जानते थे कि गलती उसकी है इसलिए शांति से उसकी ऑफिस से बाहर निकल गई,,,,)