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अधूरी हसरतें

अशोक अपनी ऑफिस में निश्चिंत होकर बैठा था वह बेफिकर इसलिए था क्योंकि शुभम ने जिस हालत में उसे उसकी ही ऑफिस में किसी गैर औरत के साथ रंगरेलियां मनाते हुए उसे पकड़ा था उस वाक्या को करीब करीब 10 दिन जैसा हो गया था,,, और घर में किसी भी प्रकार का कोहराम नहीं मचा था,,, इसका मतलब साफ था कि शुभम ने इस राज को राज ही रखा था,,,,।,,, वह मन में ही सोच रहा था कि अगर शुभम ने उसके राज को निर्मला से बता दिया होता तो क्या होता घर में कोहराम मच गया होता,, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ था इस बात की संतुष्टि उसके चेहरे पर साफ झलक रही थी,,, अशोक अपनी ऑफिस की चेयर पर बैठकर इस बारे में सोच ही रहा था कि,,,, उसके मोबाइल की रिंग बजने लगी वह पहले पेंट की बाई जेब में मोबाइल को तलाशने के लिए टटोला,,,, लेकिन ऊस जोब में मोबाइल नहीं था तो वहां अपनी दाएं जेब में टटोला तू मोबाइल उसी जेब में रखा हुआ था,, वह मोबाइल को जेब से निकाल कर उसकी स्क्रीन पर देखा तो नंबर अनजाना सा लग रहा था,, वह कॉल को रिसीव करके कान पर लगाते हुए बोला,,,

हेलो कौन,,,,, ?

मैं बोल रही हूं,,,,,

( सामने किसी लड़की की आवाज सुनकर,,, अशोक सचेत हो गया वैसे भी उसने कहीं औरतों के साथ अफेयर करके खत्म कर दिया था इसलिए मैं सोचा था कहीं किसी उनमें से किसी का फोन तो नहीं आ गया,,,, इसलिए वह अनजान बनते हुए बोला,,,,, ।)

मैं कौन मेरे ख्याल से मैं तुम्हें नहीं जानता,,,,,

इतने जल्दी आवाज़ भी भूल गए,,,,,,

( सामने से फोन पर इस बात को सुनकर अशोक फिर हैरान हो गया उसे यकीन होने लगा कि यह उन औरतों में से किसी एक का फोन है इसलिए उसे अंदर ही अंदर डर लगने लगा कि कहीं कोई पैसे की मांगनी ना करने लगे,,,,, )

देखो तुम कौन हो मैं नहीं जानता और तुम्हारी आवाज़ भी मैं नहीं पहचानता साफ-साफ बताओ कौन हो,,,,,

क्या सच में तुम मेरी आवाज नहीं पहचानते मुझे तो हैरानी होती है,,,,,

( अब तो अशोक का दिमाग खराब होने लगा,,, उसे समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर यह लड़की है कौन और इस तरह से पहेलियां क्यों बुझा रही है,,,, इसलिए गुस्से में बोला)

देखो तुम कोई भी हो मुझे इससे कोई फर्क नहीं पड़ता और अगर तुम अपनी पहचान नहीं बताओगी तो मैं फोन कट कर दूंगा,,,

नहीं नहीं ऐसा मत करना मैं मधु बोल रही हूं तुम्हारी छोटी बहन,,,,,,,, ( सामने से जल्दबाजी और घबराहट भरी आवाज आई,,,,, मधु नाम सुनते ही अशोक के चेहरे पर मुस्कुराहट तैर गई मुझे यकीन नहीं हो रहा था कि मधु ने उसे फोन की है,,,,, इसलिए चहकते हुए अशोक बोला,,,, )

मधु तु मुझे तो बिल्कुल भी यकीन नहीं हो रहा है कि तू फोन की है,,, तुझे पता है 5 साल गुजर गए इन 5 सालों में आज पहली बार तूने मुझे फोन कि है,,,,,

हां जानतीे हुं भैया इन 5 सालों में बहुत कुछ बदल गया,,,, मेरी गलती की सजा तो मुझे मिलनी ही थी,,,,

गलती की सजा मैं कुछ समझा नहीं कि तू क्या कह रही है,,,

( अशोक चिंतित स्वर में बोला,,,।)

भैया तुम तो अच्छी तरह से जानते हो कि मैं पूरे परिवार के खिलाफ जाकर अपने बॉयफ्रेंड के साथ भाग कर शादी की इस वजह से पूरे परिवार ने मुझ से हर तरह से रिश्ते को तोड़ दिया,,,,, मुझे लगा था कि मैंने सही फैसला भी हूं लेकिन कुछ ही महीनों में मुझे पता चल गया कि मेरा फैसला बिल्कुल गलत था जिसके साथ मैं सब कुछ छोड़ कर अपना जिंदगी बसर करने चली थी,,,, वह बिल्कुल निकम्मा निकला,,, 6 महीने बाद ही वहं मुझे मारने पीटने लगा मेरी जिंदगी नर्क से भी बदतर कर दिया उसने,,,,

क्या कह रही है मधु तू इतना कुछ सहती रही और हमें बताई भी नहीं,,,,, तुम मुझसे उसकी बात करा मैं अभी उसे बताता हूं

इसकी कोई जरूरत नहीं है भैया मैं उसका घर छोड़ चुकी हूं और अब मुझे दोबारा उस नर्क में नहीं जाना है,,,,

मतलब तू अभी रहती कहां है,,,,?

यही एक जगह भाड़े के मकान में रहती हूं और एक ऑफिस में काम करके अपना गुजारा चला रहीे हु।,,, लेकीन भैया,,, मुझे इस शहर में बिल्कुल भी नहीं रहना है क्योंकि आते-जाते कहीं भी वह मुझे परेशान करने लगता है,,,,।

तो तू,, गांव चली गई होती,,,,

कोशिश की थी लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ वह लोग मुझे अपनाने के लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं है वह लोग तो ईतना तक कहते हैं कि तू मेरे लिए मर गई,,,, अब तुम ही बताओ भैया मैं कहां जाऊं किसके पास जाऊं तुम तो अच्छी तरह से जानते हो की अकेली औरत खुली किताब की तरह होती है जिसके पढ़ने को हर कोई उलटना पलटना चाहता है,,,,।

मेरी आखिरी उम्मीद बस तुम ही हो तुम ही मुझे सहारा दे सकते हो,,,,,

( मधु की आवाज सुनकर अशोक की आंखों में चमक आ गई और वह,,, बोला,,,।)

हां,,, हां,,,, क्यों नहीं मधु अच्छा हुआ तु मेरे पास फोन की,,,,

तू बेझिझक मेरे पास आ सकते हैं मेरे घर का दरवाजा तेरे लिए हमेशा खुला है आखिर तू मेरी छोटी बहन है,,,,।

ओह थैंक्यू भैया मैं तुमसे यही उम्मीद रख रही थी,,,,

तो एक काम कर जल्दी से अपना बोरिया बिस्तर बांध कर इधर आ जा,,,, बाकी तुझे क्या करना है मैं सब तेरे आने के बाद बताऊंगा,,,,

ठीक है भैया मैं 1 हफ्ते के भीतर ही वहां आ जाऊंगी तब तक मेरी सैलरी भी मिल जाएगी,,,,,,

ठीक है मधु जल्दी आना अब तो मैं तुझसे मिलने के लिए बेचैन हो रहा हूं,,,, आई लव यू,,,,, (अशोक कुटिल मुस्कान मुस्कुराते हुए बोला,,, मधु अपने भाई के मुंह से आई लव यु सुन कर मुस्कुराने लगी और वह भी प्रसन्न होते हुए बोली )

लव यू टू भैया,,,,,,( इतना कहने के साथ ही मधु ने फोन काट दी,,,,।)

अशोक की पुरानी यादें ताजा हो गई,,,,, उसे वह दिन याद आने लगा जब वह गांव में ही रहता था और वहां पर रहकर अपनी पढ़ाई पूरा कर रहा था तब मधु अपनी जवानी की दहलीज पर कदम रख रही थी उसकी जवानी भी उसे चिकोटी काट रही थी,,, उसकी सहेलियों में कुछ ऐसी पहेलियां थी जो कि लड़कों के चक्कर में ज्यादा रहती थी और उन्हीं की संगत में मधु भी उन्हीं की तरह होती जा रही थी,,, अपनी सहेलियों के मुंह से उनकी चुदाई की कहानी सुनकर मधु कि अपने पैर के साथ-साथ अपने पर भी फैलाने के चक्कर में थी यहां तक कि वह अपनी उस स्कूल में कुछ बॉयफ्रेंड बना रखी थी और उनके साथ शारीरिक संबंध भी बना चुकी थी जवानी पूरे उफान पर थी बदन की प्यास बुझाई नहीं बुझ रही थी,,, एक तरह से मधु एकदम प्यासी लड़की थी

अशोक तो पहले से ही मन चला था उसने भी कई लड़कियों को अपनी गर्लफ्रेंड बनाया था और वह भी उनके साथ शारीरिक संबंध बना चुका था इसलिए वह अच्छी तरह से जानता था कि,,, चुदाई का शोक अगर एक बार मिल जाए तो बार-बार उसे पाने की इच्छा होती है,,,

ऐसे ही एक दिन अशोक को चोदने की इच्छा हो रही थी,,,, लेकिन इस समय उसके पास किसी भी तरह से अपनी प्यास बुझाने के लिए उसकी कोई भी गर्लफ्रेंड उसके करीब नहीं थी ऐसे में उसे अपने ही हाथ का सहारा लेना पड़ रहा था इसलिए वह बाथरूम की तरफ जाने लगा था कि वह आराम से एकदम नंगा होकर के नहाते नहाते अपने हाथ से अपने लंड को हिलाकर पानी निकाल सके,,,, बाथरूम में पहुंचने से पहले ही जब वह अपनी छोटी बहन मधु के कमरे के करीब पहुंचा तो कमरे में से हल्की हल्की सिसकारी की आवाज़ आ रही थी,,,, अशोक इस तरह की सिसकारी की आवाज को अच्छी तरह से पहचानता था क्योंकि जब वह लड़कियों को चोदता था तो इसी तरह की आवाजें आती थी,,, इसलिए उसके कान खड़े हो गए, वह दबे कदमों से,,, दरवाजे के करीब जाने लगा उसकी किस्मत अच्छी थी,,, दरवाजा अंदर से बंद नहीं था वह हल्के से दरवाजे को खोल के अंदर की तरफ देखा तो,,, उसका लंड एकदम से खड़ा हो गया,,, क्योंकि अंदर कमरे में उसकी छोटी बहन मधु जो की जवानी से एकदम भरपूर हो चुकी थी वह अपने बिस्तर पर एकदम नंगी लेटी हुई थी और अपनी ही हथेली से, अपनीे बुर को जोर-जोर से मसलते हुए गर्म सिसकारी छोड़ रही थी,,, चुदास पन से भरा हुआ अशोक जो कि बुर की तलाश में इधर उधर भटक रहा था,,, अंदर का नजारा और अपनी बहन को इस हालत में देख कर उसे लगने लगा कि उस का जुगाड़ अब घर में ही होने वाला है,,,, वह कुछ देर तक वहीं खड़े होकर अपने लंड को सहलाते हुए अंदर का नजारा देखने लगा । बिस्तर पर मधु पुरी तरह से कामातुर होकर छटपटा रहीे थी,, उससे अपनी जवानी की तड़प बर्दाश्त नहीं हो रही थी,,,, तभी बिस्तर पर पड़े मोटे बैगन को देखकर अशोक का लंड ठुनकी मारने लगा,,, उसे यह समझते देर नहीं लगी कि बिस्तर पर रखा वह मोटा बैगन मधु अपनी बुर में डालने वाली है,,, यह सोचकर ही अशोक का लंड बेकाबू होने लगा,,, वह मन ही मन अपनी बहन को चोदने की इच्छा बना लिया,,,,,, वह ऐन मौके पर अपनी बहन के सामने आना चाहता था ताकि उसके लिए छुपाने जैसा कुछ भी ना हो,,, इसलिए अशोक सही मौके का इंतजार करने लगा और अंदर मधु की हालत पल-पल बेकाबू होती जा रही थी उसकीे बुर में ऐसा लग रहा था कि जैसे चिटिया रेंग रही हो,,, वह जोर-जोर से अपनी हथेली से अपनी बुर की गुलाबी पत्ती जो कि अभी पूरी तरह से खीली भी नहीं थी उसे रगड़ रही थी,,,, मधु की गरम सिसकारी की आवाज अशोक के लंड के सब्र के बांध को तोड़ रही थी,,, कीें तभी मधु बिस्तर पर पड़े बैंगन को उठाकर

अपनी बुर पर रगड़ति हुई उसे बूर के अंदर उतारने लगी,,,,,

अशोक के लिए यही सही मौका था,,,,, अशोक जल्दी से दरवाजा खोलकर कमरे में प्रवेश करने लगा यह देखकर मधु एकदम से घबरा गई और पास में बड़ी चादर को अपने बदन पर ढंकने लगी,,, और अशोक एक हाथ से दरवाजे पर कड़ी लगाते हुए मधु की तरफ देखते हुए बोला,,,

अब इसकी कोई जरूरत नहीं है मेरी बहना मैं सब कुछ देख चुका हूं,,

तततत,, तुम कहना क्या चाहते हो भैया,,,,,( मधु घबराते हुए बोली और अशोक उसके करीब धीरे धीरे कदम बढ़ाते हुए बोला,,।)

अब मेरे कहने और तुम्हारे समझने के लिए कुछ भी नहीं बचा है,,।( इतना कहने के साथ ही अशोक अपनी बहन के बदन के ऊपर से चादर खींच कर नीचे फर्श पर फेंक दिया एक बार फिर से मधु पूरी तरह से नंगी हो गई,,,,

मधु अपनी हालत की वजह से अपने भाई के सामने इस हालत में एकदम शर्मिंदगी महसूस कर रही थी उसे शर्म आ रही थी इसलिए वह अपने हाथों को पर्दा बनाकर अपने अंगों को छुपाने की भरपूर कोशिश करने लगी,,, वह पूरी तरह से घबरा गई थी इसलिए वह अशोक से बोली,,

यह क्या कर रहे हो भैया,,,,,

मैं वही कर रहा हूं मधु जो तुम चाहती हो,,,,

मैं कुछ समझ नहीं रही हूं तुम क्या कहना चाहते हो,,, और तुम मेरे साथ इस तरह का व्यवहार क्यों कर रहे हो,,,,

मधु मेरी बहन तुम बिल्कुल नादान बनने की कोशिश मत करो,,, मैं सब कुछ देख चुका हूं और यह भी जानता हूं कि तुम्हारी बुर मे आग लगी हुई है और उस आग को बुझाने के लिए तुम्हें एक लंड की जरूरत है।

यह क्या कह रहे हो भैया,,,,( मधु अपने भाई के मुंह से इस तरह की गंदी बातें सुनकर आश्चर्य के साथ बोली,,,।)

देखो मधु अब बनने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं है,,,, अगर मैं चाहूं तो जो तुम बंद कमरे के अंदर अभी-अभी कर रही थी वह सब कुछ मम्मी पापा को बता दूंगा तो सोचो तब तुम्हारी क्या हालत होगी,,,,,( इतना कहते हुए अशोक अपने हाथ को मधु की मखमली जांघो पर फिराने लगा,,,, जिसकी वजह से मधु शर्म के मारे संकोचाने लगी,,, फिर भी हिम्मत करते हो बोली,,,।)

ककककककक,,,,, क्या कर रही थी मैं,,,,,,

मुझसे छुपाने की कोई जरूरत नहीं है मैं सब कुछ देख कर ही कमरे में आया हूं और तुम वही कर रही थी जो मैं अपने हाथ से बाथरूम मे करने जा रहा था,,,, और इसको (पास में पड़े बेगन को हाथ में लेकर) अपनी बुर में डाल रही थी।

( इतना सुनते ही मधु के पास कुछ भी छुपाने जैसा नहीं था इसलिए वह ्रुआांसी होते हुए बोली,,,, ।)

भैया प्लीज मुझे माफ कर दो और मम्मी पापा से कुछ मत बताना,,,,

तुझे प्लीज बोलने की कोई जरूरत नहीं मालूम तू तो अपनी जरुरत पूरी कर रही थी जैसे कि मैं अपनी जरुरत पूरी करने के लिए बाथरूम जा रहा था,,,,

मैं कुछ समझी नहीं भैया,,,,

देख तू बैगन को अपनी बुर में डालकर अपनी प्यास बुझाने की कोशिश कर रही थी,, और मैं (अपने पैंट की बटन खोलते हुए अगले ही पल अपने टंनटनाए हुए लंड को बाहर निकाल कर हाथ से हीलाते हुए) अपने ईस लंडं को हाथ से हीला कर उसका पानी निकालने जा रहा था,,,,

( मधु एक तो पहले से चुदवाती थी अपने भाई का खड़ा लंड देखकर उसकी बुर में खुजली मचने लगी वह समझ चुकीे थेी कि उसका भाई उसे चोदना चाहता है। लेकिन फिर भी अनजान बनते हुए बोली,,,।)

भैया तुम क्या कह रहे हो मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा है,,,

मधु अब भोली बनने की कोई जरूरत नहीं है,,, मैं जानता हूं कि इस समय तु लंड के लिए तड़प रही है और मैं बुर के लिए

क्यों ना हम एक दूसरे से अपनी ज़रूरत पूरी कर ले,,,( मधु बार-बार अशोक के लंड की तरफ देखे जा रही थी जिसको वह अपने हाथों से हिला रहा था,,, उसकी जवानी से भरी बुर पानी पानी हुए जा रही थी अब तो वह भी यही चाह रही थी कि उसका भाई अपने लंड को उसके बुर में डालकर चोद डाले,,,, लेकिन वह इस बात को अपने मुंह से नहीं बोल सकती थी फिर भी वह अपने भाई को रोकते हुए बोली,,,

नहीं भैया ऐसा नहीं हो सकता हम दोनों भाई बहन हैं और भाई बहन में इस तरह का रिश्ता पाप कहलाता है,,

देखने चलें हम दोनों भाई बहन नहीं है इस समय में एक प्यासा मर्द हुं और तु प्यासी औरत है,,, मेरे पास लंड है और तेरे पास बूर है जो की एक दूसरे में समाने के लिए तड़प रहे हैं।,,,,

लेकी,,,,,,,, ( मधु कुछ बोल पाती से पहले ही वह उसे रोकते हुए उसे बिस्तर पर लिटाने लगा,,, और उसकी दोनों चुचीयों को हाथ में भरते हुए बोला,,,)

बस अब कुछ बोलने की जरूरत नहीं है,,,,,

( इतना कहने के साथ ही वह अपनी बहन मधु पर टूट पड़ा उसकी चूचियों को कभी हांथो से दबाता तो कभी मुंह में भर कर पीने लगता है,,, मधु को भी बहुत मजा आ रहा था पूरा कमरा उसकी सिसकारियों से गूंज रहा था। अगले ही पल अशोक ने अपने लंड को अपनी बहन की बुर में पूरी तरह से उतार दिया,,, मधु को ऐसा महसूस हो रहा था कि उसका पूरा बदन हवा में उड़ रहा है अशोक अपनी बहन को चोदना शुरू कर दिया था भाई-बहन का पवित्र रिश्ता दोनों मिलकर तार-तार कर चुके थे,,,, यह सिलसिला जो एक बार शुरू हुआ तो वह तब तक चलता रहा जब तक मधु अपने बॉयफ्रेंड के साथ भाग कर शादी नहीं कर ली,,,

उस दिन के बाद आज 5 वर्षों के अंतराल पर अब जाकर मधु का फोन आया था,,,, इसलिए अशोक मन ही मन खुश हो रहा था,,, क्योंकि वह अब अपनी सेक्रेटरी रीता से तंग आ चुका था,,,, ऐसे मे वह पहले से ही किसी नए जुगाड़ में था,,,और एन मौके पर उसकी छोटी बहन मधु का फोन आने से उसके नए जुगाड़ की तलाश का अंत आ चुका था,,,, वह मन ही मन खुश हो रहा था कि तभी ऑफिस का दरवाजा खुला और रीता ऑफिस में दाखिल हुई जिसके चेहरे से साफ पता चल रहा था कि वह काफी गुस्से में थी,,,,

 
रीता को इस तरह से ऑफिस में आता देखकर अशोक को अच्छा तो नहीं लगा,, लेकिन वह कर भी क्या सकता था,, रीता को पहले से ही वह हर तरह की छूट दे रखा था,,,, पुरानी यादो के झरोखों से अशोक बाहर आ चुका था,,, रीता के चेहरे की तरफ देखकर वह भी समझ गया कि रीता आज गुस्से में इसलिए वह कुछ बोलती ऊससे पहले ही वह बोल पड़ा,,,

क्या हुआ रिता तुम्हारा चेहरा क्यों बुझा-बुझा सा है,,,,

चलो यह तो अच्छा हुआ कि तुम्हें इस बात का पता तो चल गया कि मेरा चेहरा बुझा बुझा सा है,,,, और इसके पीछे का कारण भी तुम अच्छी तरह से जानते हो,,,,,,

मैं समझा नहीं कि तुम क्या कहना चाहती हो,,

बनो मत अशोक तुम अच्छी तरह से जानते हो कि मैं क्या कहना चाहती हूं,, मुझे पैसों की सख्त जरूरत है और तुम मुझे वादा करके पैसे देने से इंकार कर रहे हो,,,

मैं कब इनकार किया,,,,

इंकार नहीं किए लेकिन तुम्हारा मतलब साफ़ दिखाई दे रहा है,,,,( रीता चेयर को अपनी तरफ खींच कर उस पर बैठते हुए बोली,,,।)

देखो रीता मैं सच कहूं तो इस समय मेरे पास पैसे नहीं है इसलिए मैं तुम्हें समय नहीं दे सकता,,,,( अशोक साफ-साफ जता देना चाहता था कि उसकी अब उसे जरूरत नहीं है क्योंकि कुछ देर पहले ही फोन पर उसका दूसरा जुगाड़ जो कि उसकी खुद की बहन थी वह बन चुका था,,, इसलिए अब वह रीता से पीछा छुड़ाने के उद्देश्य से बोला,,,।)

पैसे नहीं है,, मुझसे तो झूठ बोलने की कोशिश तुम बिल्कुल मत करना क्योंकि मैं अच्छी तरह से जानती हूं कि यह तुम्हारा बहाना है,,,,। मुझे पैसे चाहिए और आज ही चाहिए,,,,,

( रीता गुस्से में बोल रही थी और अशोक उसपर ध्यान दिए बिना ही फाइल चेक करने लगा वैसा जताना चाह रहा था कि उसकी बातों का उस पर कोई भी फर्क नहीं पड़ रहा है।)

अशोक,,,,( गुस्से में उसके हाथों से फाइल छीनते हुए,,) मैं तुमसे कुछ कह रही हूं और तुम हो कि मेरी बात पर ध्यान दिए बिना ही अपना काम कर रहे हो मैं तुम्हें पागल दिखती हूं क्या,,,, पैसे देते हो या नहीं इतना मुझे साफ-साफ बता दो,,

( रीता कि यह बात अशोक को धमकी भरी लगी इसलिए उसे गुस्सा आ गया और वह गुस्से में बोला,,,।)

रीता मैं तुम्हें एक फूटी कौड़ी नहीं दूंगा तुम अच्छी तरह से जानती हूं कि मैंने तुम्हारे ऊपर पैसों की बारिश कर दिया हूं तुम्हें क्या नहीं दिलाया फ्लैट गाड़ी ऐसो राम की सारी चीजें,,, लेकिन तुम्हारी लालच बढ़ती जा रही है इसलिए मैं अब तुम्हें एक रुपया नहीं देने वाला,,,,

तो तुम मुझे मुफ्त का नहीं देते आ रहे हो,,, उसके बदले में तुमने मेरा इस्तेमाल किए हो तुम्हारा बिस्तर गर्म करती आ रही हूं तब तुम जाकर मुझे बिस्तर गर्म करने के एवज में पैसे दीए हो,,,, यह बात तुम भी अच्छी तरह से जानते हो और मैं भी कि तुम्हारी बीवी बिल्कुल ठंडी है जिसके साथ तुम्हें सोने में मजा नहीं आता इसके लिए तुम मेरे पहलू में आकर गर्माहट लेते आ रहे हो,,,,, मैं हूं तो तुम्हारी इज्जत बची हुई है वरना ना जाने किसी कॉल गर्ल के साथ मुंह मारते फिरते,,,

तो तुम भी एक कॉल गर्ल की ही तरह हो,,, जिसका काम है पैसे लेकर बिस्तर गर्म करना और अब तक तुम भी यही करती आई हो,, और इसके बदले में मैंने तुम्हारी सोच से भी ज्यादा धन दौलत तुम पर लुटा चुका हूं,,, लेकिन अब तुम्हारा काम खत्म हुआ और तुम जा सकतीे हो,,,,।

( अशोक का यह बे रूखापन देखकर और अपने लिए उसके मुंह से कॉल गर्ल की थी उपमा को सुनकर रीता अंदर ही अंदर झुलस गई उसके गुस्से का पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया,,, वह चिल्लाते हुए बोली,,,,।)

अशोक इतना जरूर याद रखना कि जब एक औरत किसी मर्द के लिए अपनी टांगों को खोल सकती हैं तो वक्त आने पर उसकी टांगों के बीच लात भी मार सकती है तुमने जो मेरा आज अपमान किए हो इसका बदला तो मैं तुम से लेकर रहुंगी,,, और अपने पैसे भी तुम से लेकर रहूंगी तुम मुझे अभी ठीक से समझ नहीं पाई मैं तुम्हारी विवाहित जिंदगी में आग लगा दूंगी,,,,

तुझे जो करना है कर लेना मैं तेरी धमकियों से डरने वाला नहीं हूं गेट आउट,,,,,

तेरे जैसा दोगला इंसान मैंने आज तक नहीं देखी,,,, अपनी भोल़ी भाली बीबी को इतना बड़ा धोखा दे रहा है,,, मैं तुझे सिर्फ 2 दिन का समय देती हूं इन 2 दिनों में तो मुझे 1000000 रूपया देकर मुझे हमेशा के लिए भूल जाओ और मैं भी तुझे हमेशा के लिए भूल जाओगी लेकिन तूने अगर इन 2 दिनों में मुझे 1000000 रुपए नहीं दिए,,,, तो मै तेरी जिंदगी उजाड़ कर रख दूंगी,,, तूने जो मेरे साथ अब तक रंगरेलिया मनाया है वह सारी कहानियां मैं तेरी बीवी कोे सुना दूंगी,,,, और तेरे और मेरे बीच में जिस्मानी तालुकात को बताते हुए तेरी बीबी से मुझे बिल्कुल भी शर्म नहीं आएगी क्योंकि तू ही मुझे कॉल गर्ल बोल रहा है तो अब तू देखना यह कॉल गर्ल क्या करती है,,,,,,।

( इतना कहने के साथ ही वह चेयर पर से उठी और पैर पटकते हुए ऑफिस का दरवाजा जोर से खोल कर बाहर जाते हुए उसे बड़ी तेजी से बंद कर दी,,, अशोक उसे जाते हुए देखता रह गया उसकी आखिर में दी हुई धमकी सेवा थोड़ा घबरा गया लेकिन यह सोचकर वह शांत हो गया कि भला एक औरत अपने नाजायज रिश्ते को किसी औरत को कैसे बता सकती है ईसलिए वाह शांत हो गया और अपने ऑफिस का काम करने लगा,,,,

निर्मला के साथ साथ उसकी सहअध्यापिका शीतल भी पूरी तरह से शुभम की दीवानी हो चुकी थी,,,, शीतल शुभम के मर्दाना ताकत को अपने जिस्म में महसूस करना चाहती थी वह उसकी मर्दानगी को अपनी आंखों से साक्षात दर्शन करना चाहती थी,,,, क्योंकि वह पैंट के ऊपर से तो उसके मुसल जैसे लंड को पकड़कर,, उसके मोटे पन और उसकी मजबूती का जायजा ले चुकी थी इसलिए वह उसका साक्षात दर्शन करने के लिए तड़प रही थी,,,, इतनी बोल्ड औरत होने के बावजूद भी उसने अभी तक अपने पति के लंड के सिवा किसी और के लंड के दर्शन नहीं किए थे,,,, हालांकि इच्छा तो उसकी बहुत होती थी पर वह अपने कदम को उस दिशा की तरफ आगे बढ़ाने में हिचकिचाती थी क्योंकि इसमें बदनामी का भी डर का लेकिन जब से उसकी मुलाकात शुभम से हुई थी तब से उसके अंदर का डर कुछ हद तक खत्म हो चुकी थी और वह शुभम के लंड को देखने के लिए उसे हाथों में लेकर उसी गर्माहट को महसूस करने के लिए उसे हीलाने के लिए,,, और उस मजबूत लंड को अपने बुर की गहराई में उतार कर अपने पतिव्रता सिद्धांत को दूर करने के लिए तड़प रही थी,,,,,

स्कूल में रिशेष हो चुकी थी,, निर्मला को रिपोर्ट तैयार करने के लिए इसलिए वह क्लास में ही बैठकर अपना रिपोर्ट तैयार कर रही थी लेकिन शीतल की हालत पल पल खराब हो जा रही थी वह तो बस मौका ढूंढती थी बस शुभम से मिलने के लिए,,,, क्लास में बैठ कर दरवाजे से बाहर जागती हुई शुभम के देख जाने का इंतजार कर रही थी लेकिन जहां तक उसको उम्मीद थी कि शुभम उसे नजर नहीं आने वाला है क्योंकि वह इस समय अपनी मां के साथ उसकी क्लास में लंच कर रहा होता है,,,, लेकिन शीतल की किस्मत बहुत तेज थी उसे शुभम उसकी क्लास से बाहर जाता हुआ नजर आ ही गया,,,, उसे देखते ही वह तुरंत उसे आवाज़ लगाई,,,

शुभम,,,,, शुभम,,,,,,,,,( वहां दो बार उसका नाम पुकारी ही थी कि शुभम आगे कदम बढ़ा गया,,, चेहरे पर आई प्रसन्नता के भाव क्षण भर में ही उदासी में बदल गए लेकिन तभी शुभम दो कदम पीछे चलकर कनखियों से शीतल की तरफ देखने लगा और देखते हुए बोला,,,,।

आपने मुझे आवाज दी मैडम,,,,

( दोबारा शुभम को आवास के बाहर आया हुआ देखकर शीतल के चेहरे पर प्रसन्नता के भाव फिर लौट आएं और वह चहकती हुई बोली,,,,।)

हां हां,,,,,,, शुभम,,,, आओ मैं तुम्हारा इंतजार कर रही थी,,,,

मेरा इंतजार लेकिन क्यों मैडम,,,, (इतना कहते हुए वह क्लास में प्रवेश किया)

शुभम मैं तुमसे पहले भी कह चुकी हूं कि सबके सामने मुझे भले ही मैडम कहां करो लेकिन अकेले में तुम मुझे सिर्फ शीतल बुलाया करो,,,,

( इतना सुनकर शुभम के चेहरे पर मुस्कुराहट आ गई और वह मुस्कुराते हुए बोला,,,।)

ठीक है मैडम,,,, मेरा मतलब है की शीतल,,,,

( शुभम के मुंह से यह बात सुनकर शीतल मुस्कुरा दी,,।)

लेकिन शीतल तुम मुझे,,,,,, मतलब है कि मेरा इंतजार कर रही थी लेकिन क्यों,,,,?

अरे बताती हु थोड़ा रुको तो तुम तो एक साथ सब कुछ पूछ डाल रहे हो,,,, ( इतना कहते हुए कि शीतल दरवाजे की तरफ बढ़ी,,, और दरवाजे के दोनों पल्लो को हल्कें से बंद करते हुए बोली,,,,।) देखो शुभम मुझे यह तो नहीं समझ में आ रहा है कि यह बात तुमसे कहना चाहिए कि नहीं लेकिन जब तक तुमसे कह नहीं लूंगी तब तक शायद मेरे दिल को तसल्ली नहीं मिल पाएगी,,,,,

( जिस समय शीतल दरवाजे के दोनों पल्लो को बंद करने के लिए हल्के हल्के कदम बढ़ा रही थी उसी समय शुभम की नजरें शीतल के संपूर्ण बदन पर ऊपर से नीचे तक चक्कर काट रही थी,,, खास करके शुभम की नजरों का निशाना शीतल की मटकती हुई गांड पर टिकी हुई थी जो कि चलने की वजह से उसके नितंबों के दोनों फांतों के बीच अजीब सी थिऱकन हो रही थी,,, शीतल की गांड भी बेहद बड़ी और गोल गोल की जिसको नजर भर कर देखने मात्र से ही लंड से पानी निकलने की गुंजाइश बनी रहती है। यही हाल शुभम का भी हो रहा था वह एक टक शीतल की बड़ी बड़ी गांड को देख रहा था,,,, और जैसे ही शीतल दरवाजे को थोड़ा सा बंद करके गुमी हुई थी कि उसकी नजर शुभम की नजरों को पकड़ ली थी और वह अच्छी तरह से समझ गई थी कि शुभम उसकी बड़ी बड़ी गांड को भी देख रहा था और यह समझते ही उसके चेहरे पर मुस्कान फैल़ गई,,, शीतल को अपनी तरफ देखता हुआ पाकर शुभम हड़ बढ़ाते हुए बोला,,,।)

शशशश,,, शीतल मेम,, आप जो भी,, कहना चाहती हो बोल दो,,,

मैं बोल तो दूं लेकिन मुझे डर है,,,

डर,,, किस बात का डर,,,,

यही कि तूम मेरी बात मान कर मेरे दिल को तसल्ली दे पाओगे कि नहीं,,,,

मैडम आपके मन में जो भी है वह बोल दो मैं जरूर जैसा आप चाहती हो वैसा ही करूंगा,,,,,

( शुभम के मन में गुदगुदी हो रही थी क्योंकि वह जानता था कि शीतल कुछ इस तरह का ही बात करने वाली है,,,,, इसलिए उसके पैंट के आगे वाला भाग उठने लगा था,,, जिस पर शीतल की नजर पड़ते ही उसकी बुर में गुदगुदी होने लगी,, शुभम की बातें सुनकर उसे थोड़ी हिम्मत मिल रही थी,,, शीतल बात को आगे बढ़ाते हुए बोली,,, ।)

शुभम या तो तुम अच्छी तरह से जानते हो कि उस दिन स्कूटी पर अनजाने में ही मैंने तुम्हारा वो पकड़ ली थी,,,,

क्या मैडम मेरा मतलब है कि शीतल,,, ( शुभम सब कुछ जानते हुए भी तपाक से बोला,,,,)

तुम अच्छी तरह से जानते हो शुभम में किस बारे में बात कर रही हुं,,, इसलिए मैं तुमसे कोई भी बात घुमा फिराकर नहीं कहना चाहती जो बात है मैं तुमसे साफ-साफ कह देना चाहती हूं क्योंकि वैसे भी तुम को मैं पसंद करती हूं,,,,

( सीतल की यह बात सुनकर सुबह मन ही मन बहुत प्रसन्न हो रहा था,,,,।)

देखो शुभम उस दिन स्कूटी पर अनजाने में ही मैं पीछे की तरफ हाथ ले जाकर के,,, पैंट के ऊपर से ही तुम्हारे लंड को पकड़ लीे थी,,,

यह क्या कह रही हो मैडम मुझे उस बात के लिए बेहद शर्मिंदगी महसूस हो रही है,,,,। ( शुभम जानबूझ कर शर्मिंदा होने का नाटक करते हुए बोला।)

नहीं नहीं सुबह तुम्हें उस बात के लिए शर्मिंदा होने की कोई जरूरत नहीं है,,,,, बल्कि वह तो मेरा सौभाग्य था कि मेरे हाथों में तुम्हारा लंड आ गया,,,, ( शीतल इतना कहते हुए टेबल पर इस तरह से झुक गई कि,,,, उसकी बड़ी बड़ी गांड साड़ी में कैद होने के बावजूद भी बड़ी बारीकी से और बड़ी ही सफाई से शुभम को उसके आकार का पूरी तरह से पता चलते हुए दिखाई दे रहा था वह जिसको देखकर सुभम बेहद उत्तेजना का अनुभव कर रहा था,,, क्योंकि शीतल में जानबूझकर अपनी मदमस्त गांड को शुभम की तरफ की हुई थी,,,।)

सौभाग्य,,,,, कैसा सौभाग्य मैडम,,,,,
 


शुभम तू औरतों के मन की बात को समझने के लिए अभी छोटा है लेकिन यह भी अच्छी तरह से जानती हूं कि,, भले ही तू औरतों को समझने के लिए अभी छोटा है लेकिन औरतों के लिए तेरा हथियार बहुत बड़ा है,,, तू शायद नहीं जानता की औरत को जिंदगी में उसकी प्यास बुझाने के लिए बड़े लंड की कामना होती है लेकिन ऐसा लंड सब के नसीब में नहीं होता उस दिन जब अनजाने में तेरा लंड मेरे हाथ में आया तभी मैं उसकी मजबूती और उसके आकार को लेकर के उत्तेजित हूं और बेहद उत्साहित भी हूं,,,,( शीतल अपनी इस बात का शुभम पर क्या प्रभाव पड़ता है यह देखने के लिए वह अपनी नजरों को शुभम की तरफ घुमाई तो शुभम अभी भी उसकी मदमस्त गा को ही देख रहा था,,,, यह देखकर पीतल के चेहरे पर फिर से मुस्कान फैल गई,,,,

और वहां शुभम के चेहरे के हाव भाव को पढ़ते हुए बोली,,,,।

मैं जानती हूं शुभम कि मेरे मुंह से इस तरह की अश्लील बातों को सुनकर तुम्हे बड़ा अजीब लग रहा होगा लेकिन टीचर होने से पहले मैं एक औरत हूं,,,, और हम औरतों की किस्मत में,,,, शायद ही तेरे जैसा लंबा लंड हो ज्यादातर तो ऐसा नहीं होता और मेरी किस्मत में भी शायद नहीं है इसलिए तो जब मैं पेंट के ऊपर से ही,,,, मेरे लंड को पकड़कर उसे महसूस की तब से मैं तेरे लंड के दीदार को तरस रही हूं,,,,,,, लेकिन यह बात तुझसे कहने की मेरी हिम्मत नहीं हो रही थी लेकिन जब तक तुझसे कहती भी नहीं तब तक मुझसे रहा भी नहीं जाता और आज मौका देखकर तुझसे मैं यह बात कर रही हुं।

( शीतल की ऐसी मस्ती भरी बातें सुनकर शुभम पूरी तरह से उत्तेजित हो चुका था उसके चेहरे का रंग लाल होने लगा था और उत्तेजना की वजह से उसके पैंट में पूरी तरह से तंबू बन चुका था जिसे देखकर शीतल की बुर में कुलबुलाहट हो रही थी,,,,,। शुभम प्यासी नजरों से शीतल की तरफ देखते हुए बोला,,,।

लेकिन मैडम जो कुछ भी हुआ वह अनजाने नहीं हुआ उसमें मेरी कोई गलती नहीं है और मैं इसमें कर भी क्या सकता हूं,,,

तुम सब कुछ कर सकते हो इसलिए तो मैं तुम्हें यहां बुलाई हूं।।।।

लेकिन मैडम में,,,,,,,,

( शुभम कुछ और बोल पाता इससे पहले ही वह उसकी बात को बीच में काटते हुए बोली,,,।)

शुभम तुम सब कुछ कर सकते हो,,( इतना कहने के साथ ही वहां शुभम की तरफ घूम गई क्योंकि वह अच्छी तरह से जान गई थी कि शुभम के लिए उसके नितंब दर्शन काफी हो चुका था अब उसके स्तन दर्शन की बारी थी,,,, और शीतल ने शुभम को अपने स्तन दर्शन कराने के लिए बात बाद में ही अपने नितंबों के दर्शन कराते हुए ब्लाउज के ऊपर के दो बटन खोल चुकी थी,,,, और जैसे ही वह शुभम की तरफ घूमी थी शुभम की प्यासी नजरों की दो उसके छातियों की दोनों गोलाई पर जाकर अटक गई थी,,,, और शुभम की आंखें आश्चर्य के फटी की फटी रह गई थी क्योंकि जो उसने देखा था उसकी उसे बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी ऊपर के ब्लाउज के दोनों बटन खुले हुए थे जिसमें से उसकी आधी से भी ज्यादा चुचीया बाहर को छलक रही थी,,,,, वह आंख फाड़े बस चूचियों को ही देखे जा रहा था,,,, शीतल का चलाया तीर ठीक निशाने पर लगने की वजह से वह बहुत प्रसन्न हो रही थी,,,, वह और ज्यादा अपने सीने को थोड़ा सा उठा कर बोली,,,

शुभम तुम मेरे लिए मेरे मन की इच्छा पूरी करोगे ना,,,

लेकिन मैडम मैं क्या कर सकता हूं,,,,( वह शीतल की चुचीयो की तरफ प्यासी नजरों से देखता हुआ बोला,,,,।)

तुम सब कुछ कर,,,,( इतना कहने के बाद भी शीतल जानबूझकर नीचे पेन गिरा दी,।) ओहहहहह,,, ( इतना कहने के साथ ही वह पेन उठाने के लिए नीचे झूकी,, और जैसे ही वह नीचे झुकी उसकी बड़ी बड़ी भारी भरकम चूचियों का वजन बाकी बचे बटन नहीं झेल पाए,,, और दोनों चूचियां छलक कर ब्लाउज से बाहर आ गए,,,,, शुभम की चौकन्नी आंखें यह नजारा बड़ी बारीकी से अपने जेहन में कैद करती चली जा रही थी,,,, शीतल मुझे अच्छी तरह से जानती थी कि उसकी दोनों सोच लिया उसके ब्लाउज से बाहर आ गई लेकिन फिर भी वहां शुभम की नजरों से बचा कर अपनी चुचियों को ब्लाउज में वापस डालने की बजाय,,, सीधी खड़ी हो गई और जानबूझकर इस बात का एहसास कराते हुए कि उसे इस बात का बिल्कुल भी पता नहीं था कि उसकी चूचियां ब्लाऊज के बाहर आ गईे हैं और वह बोली,,,,।

आऊच्च,,,,,, यह क्या हुआ ( इतना कहने के साथ ही वह चार-पांच सेकेंड तक यूं ही खड़ी रही ताकि शुभम नजर भर कर की नंगी जवानी जो की चुचियों से साफ नजर आ रही थी उसे देख सकें,,,, और उसके सोचने के मुताबिक ही हो रहा था,,, शुभम मदहोश होकर उसकी चूचियों कोई देखे जा रहा था जो कि ब्लाऊज से बाहर किसी पके हुए आम के बड़े-बड़े फल की तरह नजर आ रही थी,,, उसके जी मैं तो आ रहा था कि वह दोनों आम को पकड़कर मुंह में भरकर चूस डाले लेकिन वह अपने आप पर संयम रखे हुए था,।

यह चुचिया भी ना देख नहीं रहा है कितनी बड़ी बड़ी हो गई है,,,( एक हाथ से चूची को पकड़कर लगभग शुभम की तरफ दिखाते हुए,,,) अच्छा हुआ कि इनके भार से मेरे ब्लाउज के बटन नहीं टूटे वरना आज कैसे घर जा पाती,,,,

आपको अच्छे से बटन लगाना चाहिए था,,,( शुभम उत्तेजना की वजह से लगभग कांपते स्वर में बोला,,,)

अरे ठीक से ही लगाई थी इस उम्र में यह चूचियां भी बेलगाम हो जाती है चाहे जितना भी कस कर पकड़ने की कोशिश करो इधर-उधर छटक ही जाती है,,,,,,( इतना कहने के साथ ही शीतल अपनी दोनो चुचियों को बारी-बारी से पकड़कर ब्लाउज में डालते हुए ब्लाउज के बटन लगाते हुए बोली,,,,)

शुभम मैं एक गलती की वजह से माफी चाहुंगी,,,, पता नहीं तुम मेरे बारे में क्या सोच रहे होंओगे,,,,( शीतल इस गलती से अनजान बनते हुए बोली लेकिन वह अच्छी तरह से जानती थी कि नितंब दर्शन के बाद बहुत ही अच्छी तरह से उसने अपने स्तन दर्शन भी शुभम को करा चुकी थी,,,, उसे शुभम के पेंट में बना तंबू देखकर इस बात का एहसास होने लगा कि कहीं उसी जवानी के थर्मामीटर का पारा पिघलना जाए इसलिए ऐन मौके पर वह अपनी चुचियों को ब्लाउज में कैद कर चुकी थी,,,, लेकिन वह यह बात को भी अच्छी तरह से जानती थी की उसके दोनों अंगों के दर्शन की वजह से उसने अपनी जवानी का जादु पूरी तरह से शुभम के ऊपर चला चुकी थी,,, शुभम पूरी तरह से,,,, उसकी जवानी के आगोश में सम्मोहित हो चुका था,,, शुभम मदहोश होते हुए बोला,,।

नहीं मैडम मैं तुम्हारे बारे में कुछ भी गलत नहीं सोच रहा हूं यह तो अनजाने मे हीं हो गया,,, अच्छा तो मैं अब जाऊं,,,,

लेकिन तुमने मेरी इच्छा ही कहां पूरी कीए हो जो जा रहे हो,,,,

कैसी इच्छा,,,,,

मैं तुम्हारे लंड को देखना चाहती हूं उसके साछात दर्शन करना चाहती हो मैं देखना चाहती हूं कि तुम्हारे लंड की मोटाई और लंबाई किस कदर तक औरत की बुर में हलचल मचा सकती है,,,,( शीतल जानती थी कि रिषेश पूरी होने वाली है इसलिए साफ-साफ बोल दी,,,,।)

लेकिन मैडम इधर,,,,

( शुभम के मुंह से इधर शब्द सुनकर शीतल समझ गई कि शुभम भी पूरी तरह से तैयार हो चुका है अपने लंड के दर्शन कराने के लिए बस थोड़ा सा झिझक रहा है,,, इसलिए वह उसकी झिझक दूर करते हुए बोली,,,।)

कोई बात नहीं सुभम ईधर तुम्हें किसी बात की डर नहीं है जब तक रिशेश की घंटी नहीं लग जाती तब तक कोई भी कमरे में नहीं आ सकता यह मेरी सख्त हिदायत है सभी विद्यार्थियों के लिए,,,

लेकिन मैडम मुझे,,,,,

तुम बिल्कुल भी मत घबराओ देखो मुझे भी पता है कि तुम्हें यह सब अच्छा लग रहा है वरना पेंट में तुम्हारा लंड पूरी तरह से खड़ा नहीं होता,,,,

( शुभम भी अब बिल्कुल भी देर नहीं करना चाहता था वह भी चाहता था कि जल्द से जल्द शीतल उसके हथियार को देखकर उसकी मर्दाना ताकत का जायजा ले ले ताकि जितना देखने के लिए बेताब है उसे अपनी बुर मे लेने के लिए तड़प उठे,,, इसलिए वह जानबूझकर करने का नाटक करते हुए धीरे-धीरे कांपते हाथों से अपने पेंट की बटन खोलने लगा और यह देख कर शीतल की सांसे ऊपर नीचे होने लगी वह दो कदम और आगे बढ़कर शुभम के बिल्कुल करीब खड़ी हो गई,,,, पल पल उत्तेजना का माहौल बढ़ते जा रहा था दोनों के बदन में ऊन्माद अपनी चरम सीमा पर थी,,, शीत शुभम की पेंट पर ही टिकी हुई थी जैसे-जैसे वह पेंट के बटन को खोलते जा रहा था वैसे शीतल की सांसे और तेज गति से चलती जा रही थी

शीतल से रहा नहीं जा रहा था वह जल्द से जल्द शुभम के लंड के दर्शन करना चाहती थी,,,,वह तंबु को देखकर इस बात का अंदाजा लगा चुकी थी कि शुभम का लंड आम लंड से कहीं ज्यादा गुना ताकतवर है,,,,। अगले ही पल शुभम पेंट के बटन को खोल कर पेंट को नीचे की तरफ सरका दिया अंडरवियर में उसका आकार साफ साफ नजर आ रहा था लेकिन अब शीतल पर सब्र करना बिल्कुल भी कठिन हो चुका था इसलिए वह आगे बढ़कर अपने ही हाथों से शुभम के अंडरवियर को एक झटके में नीचे जांगो तक सरकादी,,,

अंडरवियर के नीचे आते ही क्यों नजारा शीतल की आंखों के सामने आया उसे देखकर शीतल के होश उड़ गए उसकी सांसे अटक गई और उसका गला सूखने लगा,,,,, क्योंकि आज तक उसने ऐसा नजारा कभी नहीं देखा था,,,, यह नजारा पीतल की कल्पना के परे था और उसकी आंखें जो कुछ देख रही थी उसका दिमाग यह मानने को बिल्कुल भी तैयार नहीं था कि एक जवान होते लड़के का लंड इतना मजबूत और इतना लंबा मोटा हो सकता है,,,,। उत्तेजना की कोई सीमा नहीं होती ना तो उस पर किसी का बस नहीं चलता है ना ही वह किसी के पाबंद की गुलाम है,,, इस बात को साबित करते हुए शीतल की बुर से मदन रस की दो चार बूंदे टपक पड़ी,,, जो कि इस बात का सबूत था कि शुभम के लंड को देखकर शीतल उत्तेजना की चरम सीमा पर पहुंच चुकी थी,,, अंडरवियर को एक झटके से नीचे की तरफ खींचने की वजह से लंड में लहरपन आ गया था जिसकी वजह से शुभम का लंड दो तीन बार झटके खाते हुए ऊपर से नीचे की तरफ नजर आने लगा लेकिन उसका लंड इतना ज्यादा कड़क और टाइट था की इससे ज्यादा लहरा ही नहीं सका,, बस एकदम मुंह उठाए छत की तरफ देख रहा था,,,,

शीतल ने लंड ईतना ज्यादा कड़कपन कभी नहीं देखी थी,,

शीतल पूरी तरह से शुभम के लंड को देखकर एकदम सम्मोहित हो चुकी थी,,,,, तभी शुभम ने शीतल की उत्तेजना को और ज्यादा बढ़ाते हुए लंड को अपने हाथ में लेकर उसे जोर-जोर से ऊपर से नीचे की तरफ हीलाने लगा,,,, शुभम की इस हरकत की वजह से और हवा में लहराते हुए लंड को देख कर शीतल की हालत पूरी तरह से खराब हो गई,,,, वह शुभम के मोटे लंड को अपने हाथ में लेकर उसकी गर्माहट को महसूस करना चाहती थी उसकी मोटाई को अपनी हथेली में महसूस करके यह अंदाजा लगाना चाहती थी कि यह लैंड उसकी बूर की दीवारों को कितना चौड़ा कर सकता हैं,,,,। इसलिए वहां शुभम के लंड को पकड़ना चाहती थी उत्तेजना के मारे उसकी बुर पूरी तरह से गीली हो चुकी थी साथ ही उसकी पेंटी भी पानी पानी हो चुकी थी,,, शीतल अपनी अभिलाषा को पूरी करने के लिए उसे पकड़ने के लिए अपना हाथ आगे की तरफ बढ़ा रही थी शुभम को भी इसी पल का इंतजार था वह भी चाहता था कि शीतल अपने नरम नरम हाथों में उसके लंड को पकड़े,,, नाजुक नाजुक उंगलियों से उसे सहलाए,,,, और यही करने के लिए अपना हाथ लंड की तरफ बढ़ा ही रही थी कि,,,, तभी रीशेष पूरी होने की घंटी बज गई,,, घंटी की आवाज सुनकर शुभम को बहुत गुस्सा आया,,,, शीतल भी रिशेष पूरी होने की घंटी की आवाज सुनकर मायूस हो गई,,,,, शुभम के लिए अब वहां इस हालत में ज्यादा देर तक खड़े रहना उचित नहीं था क्योंकि किसी भी समय कोई भी क्लास में आ सकता था बहुत जल्दी से पेंट को ऊपर चढ़ाया और बटन बंद करके,,, शीतल से बिना कुछ बोले क्लास के बाहर चला गया।

 
सुभम फिर से अपनी क्लास में चला गया था लेकिन जाते-जाते शीतल की तड़प को और ज्यादा बढ़ा गया था। शीतल कभी सपने में भी नहीं सोची थी कि किसी का लंड इतना दमदार और तगड़ा हो सकता है उस दिन स्कूटी के पीछे बैठे शुभम के सिलेंडर को पेंट के ऊपर चाहिए अनजाने में पकड़ लेने से ही शीतल को इस बात का आभास हो गया था कि पैंट में छुपा हुआ शुभम का हथियार सामान्य तौर पर होता है वैसा नहीं है। इसलिए उसे देखने की इच्छा उसके मन में प्रबल हो चुकी थी अपनी ईच्छा को वह आखरी ओप देने के लिए अपनी क्लास में बुलाकर उसे अपना लंड दिखाने को बोला बस यही इच्छा शुभम अपनी पेंट उतार कर पूरी कर सका, जबकि शीतल की इच्छा बहुत कुछ करने की थी लेकिन क्लास में और वह भी रितेश के समय वह अपना मन भर कर अपनी इच्छा को पूरी नहीं कर सकती थी लेकिन इस दौरान जो नजारा उसकी आंखों के सामने पेश आया था उस नज़ारे ने पीतल के तन-बदन में काम की ज्वाला को पूरी तरह से भड़का दिया था। शीतल का गला उत्तेजना की वजह से पूरी तरह से सूख गया था मुझे यकीन नहीं हो रहा था कि उसने जो देखी है वास्तव में हकीकत है लेकिन यह झूठ लाया भी नहीं जा सकता था क्योंकि,,, जो उसने देखी थी वह अपनी खुली आंखों से देखी थी। सही मायने में औरत की संतुष्टि के लिए इसी तरह के लंड की जरूरत होती है, लेकिन यह आमतौर पर संभव नहीं हो पाता कुछ लोगों के ही नसीब में इस तरह का दमदार लंड लिखा होता है,,, जिससे वह अपनी बुर को पिघला कर आत्म संतुष्टि प्राप्त करतीे हैं। शीतल की आंखों के सामने अभी भी शुभम का लंबा मोटा लंड हिलता हुआ नजर आ रहा था जिसकी वजह से उसकी पेंटी पूरी तरह से गीली हो चुकी थी और वह अपनी गीली पेंटी के कारण अपने आप को असहज महसूस कर रही थी। क्लास में बच्चों को पढ़ाने में उसका मन अब बिल्कुल भी नहीं लग रहा था। शुभम के लंड को देखने के बाद उसे इस बात का पूरी तरह से एहसास हो गया कि उसकी रातें अब तक बेस्वाद ही गुजर रही है। उसकी आंखें इस समय कुछ और देखने को तैयार ही नहीं थी पूरी क्लास विद्यार्थियों से भरी पड़ी थी लेकिन उसे ऐसा लग रहा था कि बेंच पर बैठा हुआ हर विद्यार्थी शुभम ही है। बार बार टन टनाए हुए लंड पर ऊपसी हुई नसें उसकी बुर्के अंदरूनी नसों को संकुचित कर दे रही थी जिसकी वजह से उसे अपने बदन में उत्तेजना का भर पूर अनुभव हो रहा था। वह उसके लंड को अपने हाथ से पकड़ नहीं पाई उसकी उपसी हुई नसों को अपनी उंगलियों से स्पर्श नहीं कर पाई, और ना ही उसके कठोरपन को अपनी मुट्ठी में भरकर उस की गर्माहट को महसूस कर पाई। शुभम कैलेंडर की आंखों के सामने होने के बावजूद भी वह अपनी ईन इच्छाओं को पूरी ना कर सकने की वजह से अपने आप को कोस रही थी वह अपना मन मसोसकर रह गई,,,। लेकिन उसे इस बात की बेहद खुशी थी कि क्लास के अंदर जो कुछ भी हो रहा था वह उसके कहने पर ही हो रहा था। शुभम का लंड यूं ही अपने आप नहीं खड़ा हो गया था। मर्दों की उत्तेजना के पीछे नारी की देह रचना उसकी बनावट और नारी की मस्ती भरी बातों का बहुत बड़ा कारण होता है और इन सब बातों पर गौर करते ही मर्द पल भर में उत्तेजना का अनुभव करने लगता है और तुरंत उसका लंड ऊत्थान की स्थिति में आ जाता है। और मर्दों में आए इन सब बदलाव को देख कर अंदाजा लगाना एकदम सरल हो जाता है कि मर्द इस समय एकदम से चुदवासा हो चुका है। और उसके मन में नारी देह को भोगने की लालसा प्रबल हो चुकी है और यहीं से बदलाव क्लास के अंदर शुभम के बदन में भी पूरी तरह से देखने को मिल रहा था। और इसी बात को लेकर शीतल बेहद खुश और उत्साहित थी क्योंकि वह जानती थी कि उसके खूबसूरत मरोड़ दार अंग, उसकी भारी भरकम गोल गोल नितंब और उसकी नग्न चूचियों को देखकर ही शुभम क्लास में पूरी तरह से उत्तेजित हो गया था और इसी वजह से उसका लंड भीें पूरी तरह से खड़ा हो गया था। इस बात से शीतल पूरी तरह से संतुष्ट हो चुकी थी की शुभम भी उसके देह लालित्य का दीवाना हो चुका था, तभी तो वह जैसा बोल रही थी वैसा वह करते जा रहा था। इस खेल में ही शीतल इतनी ज्यादा उत्तेजना का अनुभव कर रही थी और जिसकी वजह से उसकी पैंटी पूरी तरह से उसके मदन रस में भिगोकर पानी पानी हो चुकी थी, और तो और इस तरह का अनुभव और अपने बदन में उत्तेजना की लहर को पहली बार महसूस कर रही थी इस वजह से वह बेहद हैरान और आश्चर्य में थे लेकिन एक बात तो तय था,,, जब इस ऊपर में खेल में ही उसे इतनी ज्यादा आनंद और उत्तेजना काम तो हो रहा था तो जब वह शुभम के साथ संभोगरत होते हुए उसकी मजबूत तगड़े लंड को अपनी बुर की गहराई में उतारेगी,,, तब उसका क्या हाल होगा यही सोचकर उसके तन-बदन में सुरसुराहट मच जा रही थी।,,,

दूसरी तरफ आज क्लास में जो हुआ उसकी वजह से शुभम बेहद उत्तेजित था। क्लास में उसका भी मन नहीं लग रहा था जिस तरह से शीतल बेंच पर झुककर साड़ी के ऊपर से ही अपनी भरावदा़र भारी भरकम धार के दर्शन करा रही थी उसे देखकर शुभम पूरी तरह से उत्तेजित हो चुका था। जो कुछ ी क्लास में हो रहा था इतना तो वह समझ गया था कि वह अनजाने में तो बिल्कुल भी नहीं हो रहा था। शीतल का यूं जानबूझकर बैंच. पर झुक कर अपने नितंबों का दर्शन कराना,,, जानबूझकर अपने ब्लाउज के बटन खोलना और तो और यह जानते हुए भी कि झुकने की वजह से उसकी चूचियां बाहर आ जाएंगी,, फिर भी झुककर स्तन दर्शन कराना,,, और जानबूझकर ही अपनी चुचियों को दिखाते हुए ब्लाउज में कैद करना,,, यह सब अनजाने में नहीं हुआ था यह सब सोची समझी साजिश थी। और शुभम इस साजिश की वजह से बेहद खुश था क्योंकि जिस तरह से वह शुभम के लंड को देखने के लिए उत्साहित थी सुगम को लगने लगा था कि उसकी जिंदगी में चोदने के लिए एक बेहद कमसिन बुर और मिलने वाली हैं। लेकिन कब मिलेगी कैसे मिलेगी कहां मिलेगी इस बारे में उसे कुछ भी नहीं पता था। सुबह इस बात से बेहद उत्साहित था कि आने वाला समय बेहद हसीन होने वाला है।

निर्मला अपने गांव जाने की तैयारी में जुटी हुई थी उसने अपने लिए और शुभम के लिए नए कपड़े की खरीदारी की थी । दो दिन उसे गांव जाने में रह गए थे। इस दौरान वहां रेलवे की टिकट के रिजर्वेशन के लिए बार-बार पूछताछ की लेकिन शादी का समय चल रहा था इसलिए रिजर्वेशन मिलना बेहद मुश्किल था आखिरकार प्रिजर्वेशन ना मिलने की उम्मीद में वह अपनी कार से ही गांव जाने का फैसला कर ली। 2 दिन बाद उसे गांव के लिए निकलना था लेकिन उसे गांव जाना है उसके भाई की शादी है इस बारे में उसने अभी तक अशोक को कुछ भी नहीं बताई थी। क्योंकि वह अच्छी तरह से जानती थी कि अशोक उसके साथ गांव जाने वाला नहीं है वह अपने काम में ही हमेशा मस्त रहता है। लेकिन फिर भी उसे एक बार छोटे भाई की शादी की ईत्तला कर देना बेहद जरूरी था।

एक दिन वह ऑफिस के लिए निकल ही रहा था की अचानक उसकी मोबाइल की घंटी बजने लगी और उस समय निर्मला किचन में नाश्ता तैयार कर रही थी अशोक जब मोबाइल की स्क्रीन पर अपनी छोटी बहन मधु का नंबर देखा तो उत्साहित हो गया। और मोबाइल पर मधु से बातें करने लगा। मधु से यह पूछने के लिए फोन की थी कि उसे किस दिन आना है और अशोक ने उसे 2 दिन बाद आने के लिए बोल दिया। अशोक मधु का फोन कट करके मोबाइल जेब में रख ही रहा था कि किचन से निर्मला बाहर आते हुए बोली,,

सुनते हो मेरे छोटे भाई की शादी तय हो चुकी है और 2 दिन बाद हमें उसकी शादी में गांव जाना है अगर आप चलते तो बहुत अच्छा होता।( निर्मला उससे बेमन से पूछ रही थी क्योंकि वह भी यही चाहती थी कि वहं उसके साथ गांव ना जाए ताकि गांव में शुभम और निर्मला मौज मस्ती कर सकें,, और जेसा वह चाहती थी वैसा ही जवाब अशोक के मुंह से सुनकर निर्मला मन-ही-मन बेहद खुश होने लगी पहले तो वह निर्मला के मुंह से गांव जाने वाली बात सुनकर हैरान हो गया लेकिन तभी उसे एक बात का ख्याल आया कि 2 दिन बाद ही तो उसकी छोटी बहन मधु इधर आ रही है और ऐसे में अगर निर्मला और उसका बेटा शुभम गांव के लिए निकल जाएंगे तो उसके लिए कुछ दिन तक मधु के साथ खुलकर ऐश करने को मिल जाएगा और वैसे भी बहुत महीने गुजर गए थे वह किसी और के साथ शारीरिक संबंध बना कर मजा नहीं ले पाया था अपनी सेक्रेटरी रीता की चुदाई कर करके अब वह थक चुका था ऊससे उसका मन भर चुका था,,, उसी नई जवानी के फूल की तलाश रही थी कि तभी उसी झोली में उसकी ही छोटी बहन मधुआ गिरी जिसकी जवानी के रस को वह एक बार फिर से मुंह लगाकर पीना चाहता था और यही मौका उसके लिए सबसे सही भी था इसलिए वह निर्मला से बोला,,,।)

नहीं निर्मला मैं नहीं जा पाऊंगा मुझे ऑफिस में बहुत काम है और कुछ दिनों तक तो मुझे बिल्कुल भी आराम नहीं मिल पाएगा तुम और शुभम चली जाओ। और तुम्हें किसी भी चीज की जरूरत हो ले लेना,,,,। ( इतना कहकर अशोक मुस्कुराते हुए घर से बाहर चला गया और उसे जाते हुए देखकर निर्मला भी मन-ही-मन खुश होते हुए बोली कि मैं भी तो यही चाहती थी कि तुम हमारे साथ ना जाओ,,, अब आएगा गांव में शादी का असली मजा जब सिर्फ मैं और शुभम होंगे,, इस बात को सोचकर ही निर्मला के चेहरे पर प्रसन्नता के भाव साफ नजर आने लगे,,,,,,,

निर्मला ने जब शीतल को यह बात बताई कि वह कुछ दिनों के लिए गांव जा रही है उसके छोटे भाई की शादी है तो यह खबर सुनकर शीतल पूरी तरह से परेशान हो गई,,,, उसकी परेशानी का सबसे बड़ा कारण था शुभम वह नहीं चाहती थी कि शुभम उसकी आंखों से दूर जाए। क्योंकि अब हालिया हो चुका था कि निर्मला का भी मन शुभम के बिना कहीं नहीं लगता था जब तक वह सुबह का दीदार ना कर ले तब तक उसके मन को चैन नहीं मिलता था। यह खबर बताते समय शुभम भी पास में ही खड़ा था जो कि कल की ओर से शीतल की तरफ देख ले रहा था और शीतल भी शुभम को नजर भर कर देख ले रही थी। निर्मला यह खबर शीतल को बता कर अपनी क्लास की तरफ जाने को हुई थी कि तभी शीतल मौका देख कर शुभम को रिसेस में मिलने के लिए बोली ।

शुभम खुद शीतल से मिलने के लिए मचल रहा था क्योंकि पिछले दिन जिस तरह का जलवा दिखाकर उसने उसके बदन में कामाग्नि की चिंगारी भड़काई थी ऐसे में भला कौन होगा जो दुबारा ऐसी मस्त और कामातुर औरत से मिलने की ख्वाहिश ना रखता हो।

निर्मला ने जब यह खबर अपने क्लास के विद्यार्थियों को सुनाई तो क्लास में उपस्थित लड़कों की हालत खराब हो गई वह लोग निर्मला को हमेशा गर्म आंखों से ही देखते थे। अपनी कामाग्नि के घोड़े को कल्पना की दुनिया में ले जा कर अपने ही हाथ से लंड हिला कर संतुष्ट होने का संपूर्ण साधन उनके लिए निर्मला ही थी। अधिकतर लड़के सुबह स्कूल में आने से पहले बाथरूम में निर्मला के नाम की मुठ मारकर अपनी कामाग्नि को शांत करते थे और फिर जाकर स्कूल आते थे। यही क्रिया वह रात में भी किया करते थे। लेकिन जब उन्हें इस बात का पता चला कि कुछ दिनों तक उनकी नजरें निर्मला के मदमस्त बदन का दीदार नहीं कर पाएंगी तो उनका मन उदास हो गया,,, और जो लड़के इस राज से वाकिफ थे और , बाथरूम के बीच बने छेद में से निर्मला की गांड के दर्शन करते आ रहे थे, वह लोग आज एक बार फिर से अपनी टीचर को जाते-जाते रिसेस में बाथरूम में बने उसी छेंद से अपनी सबसे प्यारी टीचर की भरावदार मदमस्त गांड को देखते हुए अपना अपना लंड हिला कर अपना पानी निकालने का मन बना लिए। सबको रीशेष होने का इंतजार था,, शीतल को बड़ी बेसब्री से इंतजार तारीख में सोने का उपयोग विशेष में वह शुभम से मिलने के लिए तड़प रहे थे और जाते-जाते वह अपने दिल का हाल उससे बयां करना चाहती थी,, शुभम बेरी से सोने का इंतजार कर रहा था क्योंकि उसे उम्मीद थी की रीशेष में क्लास के अंदर आज फिर से शीतल के मदमस्त बदन का रसपान नजरों से करने को मिल जाएगा और अगर अच्छा मौका मिला तो उसके खूबसूरत मांसल बदन को हाथों से छूने और दबाने का भी मौका मिल जाएगा,,, और ऐसा ही मौका क्लास के विद्यार्थी भी कर रहे थे क्योंकि रीशेष में ही बाथरूम में बने छेद में से निर्मला की मदमस्त नंगी बड़ी-बड़ी गांड को देखने का उन्हें सौभाग्य मिल जाता था और जब निर्मला कुछ दिनों के लिए अपने गांव जा रहे थे तो ऐसे में उन लोगों की आंखें प्यासी ही रह जाने वाली थी और इसलिए वह लोग निर्मला को जाते-जाते आज एक बार फिर से उसी छेद में से उसकी बड़ी बड़ी गांड के दर्शन करते हुए अपना पानी निकालने का मन बना लिए थे।,,, उन सभी की इच्छा पूर्ति करने कि जैसे स्कूल में टंगी वह घंटी ही जिम्मा उठा ली थी,,,, इसलिए वह अपने नियत समय पर बज उठी और घंटी के बज़ते ही,, शुभम शीतल और क्लास के विद्यार्थियों की सांसें भी तीव्र गति से चलने लगी।

 
स्कूल में रिशेश की घंटी बज चुकी थी, और किसका इंतजार कर रहे हो लोगों में हलचल सी मची हुई थी। शुभम शीतल और विद्यार्थियों के मन की हालत कुछ असहज थी।

लेकिन इन सब में निर्मला ही बिल्कुल सहज थी क्योंकि उसे कुछ भी नहीं मालूम था कि उसकी पीठ पीछे उसकी क्लास के ही विद्यार्थी उसके बारे में बाथरूम में गंदी बातें सोच कर उसे बाथरूम में शौच करते हुए देखकर हस्तमैथुन करते हैं।

उसे यह सब बिल्कुल भी नहीं पता था इसलिए कुछ देर; अपनी क्लास में बैठी रही लेकिन बाहर दीवार के पीछे से खड़े होकर क्लास के आवारा लड़के क्लास में से निर्मला के बाहर आने का इंतजार कर रहे थे ।उन्ही में से एक लड़का बोला,,,

यार मैडम चली जाएंगी तो हम लोगों का क्या होगा।

तू सच कह रहा है यार मैडम जा रही है लेकिन मुझे तो ऐसा लग रहा है कि मेरे जिस्म से मेरी जान चली जा रही है।( दूसरा लड़का उसका साथ देते हुए बोला।)

यार सच कहूं तो मैं मुस्कुराता ही इसलिए हूं कि रिषेेश में मैडम की मदमस्त गोरी गोरी गांड के दर्शन कर सकूं। वरना स्कूल आने का कोई बहाना मेरे पास नहीं है क्योंकि पढ़ाई लिखाई तो अपने पल्ले पड़ती ही नहीं। ( वह दीवार की ओट से निर्मला की क्लास की तरफ देखते हुए बोला।)

तुझे क्या लगता है कि एक तू ही है जो यह सोचकर स्कुल आते है, हम सभी यही सोच कर स्कूल आते हैं वरना हमारे पास भी ऐसा कोई बहाना नहीं है कि रोज स्कूल आए,,, क्यों दोस्तों सही कहा ना मैंने,,,

हां यार तू बिल्कुल सच कह रहा है (आठ 10 लड़कों का झुंड जोकि निर्मला के इंतजार में वहां खड़ा था वह एक साथ बोल पड़ा)

सच कहूं तो सुबह सुबह मैडम की नंगी गोरी और बड़ी बड़ी गांड देख लेता हूं तो ऐसा लगता है कि पूरी दुनिया मैंने बाथरूम के छेद से देख लिया हूं। मेरा तो सारा दिन बड़े अच्छे से गुजरता है। दिन भर बस मेरी आंखो के सामने अपनी प्यारी मैडम की मदमस्त गांड ही घूमती रहती है।,,( वह पैंट के ऊपर से ही अपने खड़े लंड को मसलते हुए बोला।)

यार कसम से मेरी आंख सुबह सुबह जब बिस्तर में खुलती है तो मैं तो यही प्रार्थना करता हूं कि आज मैडम की गांड देखने को मिल जाए। और तो और मैं जब भी मैडम की बड़ी बड़ी गांड के बारे में कल्पना करते हुए मुठ मारता हूं तो उस दिन मेरे माल की पिचकारी बहुत दूर तक जाती है। जबकि ऐसा किसी दूसरे की कल्पना करते हुए करता हूं तो ऐसा बिल्कुल भी नहीं होता।( दूसरा लड़का आगे वाले लड़के की पीठ थपथपाते हुए बोला,, और आगे वाला लड़का बोला।)

यार हम लोग तो सिर्फ दूर से देख कर ही संतुष्ट हो जाते हैं लेकिन सोचो शुभम तो मैडम का ही लड़का है सारा दिन घर पर ही मैडम जी के साथ ही रहता हैं,,,,,

( तभी दूसरा लड़का उसकी बात को बीच में काटते हुए बोला)

तू कहना क्या चाहता है,,,,

सर मेरा कहना बिल्कुल साफ है देख इतना तो सभी जानते हैं कि घर पर हम मे से सभी ने घर की औरतों को कभी ना कभी तो पूरी तरह से नंगी देखा ही है।( तभी वह अपने साथ वाले लड़के की तरफ इशारा करते हुए बोला।) और इसमें तो अपनी मां को पूरी तरह से नंगी हो कर चुदवाते देखा है।

( उसकी बात सुनते ही जिसके बारे में बोल रहा था वह लड़का बोला।)

देख यह गलत है इसीलिए मैं तुझे कोई भी बात नहीं बताता,,

इसमें गलत क्या है तेरी मां तेरे पापा से तो चुदवा रही थी तो इसमें गलत क्या है ऐसा तो था नहीं कि तेरी मां तुझसे चुदवा रही थी।,,,, मैं तो सिर्फ यह बता रहा था कि हम में से सभी में घर की औरतों में से किसी न किसी को संपूर्ण रुप से नंगी दिखाई है या तो कपड़े बदलते हुए या नहाते हुए या तो फिर किस्मत अच्छी हो तो ऊन्हें चुदवाते हुए,,, क्यों भाई लोग मैंने सच कहा ना,,,।( वह अपने दोस्तों से अपनी बात मनवाते हुए बोला। उसके दोस्त भी सभी हां में सुर मिलाते हुए बोले।)

हां देखे हैं तो फिर,,,

तो फिर क्या तुम ही सोचो जब हम जैसे सभी ने अपने घर की औरतों में से किसी न किसी औरत को पूरी तरह से नंगी देखें हीे हैं तो क्या शुभम,,, अपनी मां को पूरी तरह से नंगी नहीं देखा होगा,,,,।

( उसकी बात सुनते ही उसके दोस्तों के दिमाग में जैसी घंटी बजी हो वह लोंग एक साथ बोलें,,,।)

हां यार कहं तो तू ठीक ही रहा है,,,

यही तो मैं कह रहा हूं,,, जब हम लोगों ने अपने घर की औरतों को नंगी देखा होता तो वह भी अपनी मां को नंगी देखा होगा तो सोचो और कितना खुश किस्मत वाला है किसी के बारे में हम दिन रात सोते रहते हैं जिसकी एक झलक पाने के लिए घंटों इंतजार करते हैं और तो और बाथरूम में जाकर दीवार की छेंद से किसकी मदमस्त नंगी गांड को देखने के लिए जिसके भराव दार नितंबों के साथ-साथ उसकी मानसून चिकनी जांघों के दर्शन के लिए मात्र इसी कारण से स्कूल आते हैं तो सोचो शुभम तो उसके साथ ही रहता है वह अपनी मां का क्या क्या देखा होगा वह भी अपनी मां को पूरी तरह से नंगी देखा होगा हम लोग तो अभी तक सिर्फ उसकी चिकनी मोटी मोटी जाएंगे और उसकी बड़ी-बड़ी गोरी गांड को देखकर हम इतने दिनों से मुठ मारते आ रहे हैं,,, वह तो अपनी मां का सब कुछ देख चुका होगा उसकी नंगी मस्त गांड उसकी चिकनी मोटी जांघे,, जिस्म की मिट्टी पर छातियों के नाजुक डाल़ी पर उगे हुए दोनों बड़े-बड़े खरबूजे,,, जिसको आज तक हम में से किसी ने भी संपूर्ण रूप से अपने संभावित आकार में नग्न अवस्था में नहीं देख पाए हैं। वह उसके दोनों पके हुए खरबूजों को पूरी तरह से नंगी देख कर मस्त हो गया होगा,,, और तो और उसने तो हो सकता है अपनी मां की नंगी बुर को भी देख लिया होगा जिसके बारे में सोचकर हम तो बस उसकी गहराई में उतरने की कल्पना करके पानी निकाल देते हैं।,,, मुझे तो पक्का यकीन है कि उसने अपनी मां को चुदवाते हुए भी देखा होगा सोचो क्या नजारा उसकी आंखों के सामने होगा जब उसके पापा अपने लंड को खूबसूरती की मल्लिका निर्मला की चिकनी बुर में लंड डालकर उसको चोदता होगा शुभम का तो खड़े-खड़े ही पानी निकल जाता होगा,,,,

अबे बस कर यार इससे ज्यादा मत बोल वरना हम लोग का यही खड़े खड़े खाली सोचकर ही पानी निकल जाएगा,,,

( उनमें से उनका एक साथ ही बीच में ही बोल पड़ा उसके सभी दोस्त उसकी बात से पूरी तरह से सहमत थे और शुभम की किस्मत से जल भी रहै थै।,,, वह लोग आगे कुछ और बोल पाते कि तभी उन लोगों की नजर क्लास में से निकलती हुई उनकी सपनों की रानी,,, हुस्न की मल्लिका निर्मला बाहर आती हुई नजर आई उसको देखते ही उन लोगों की सांसे अटक गई साथ ही उन लोगों की पेंट में उनका लंड जोर मारने लगा,,,, उन लोगों की सांसे अटक गई और उनमें से ही एक ने बोला,,।

चचचचच,,, चुप,, हो जाओ कोई कुछ मत बोलना पहले मैडम को बाथरूम में जाने दो,,, उनके बाथरूम में घुसते ही हम लोग घुस जाएंगे,,,

( इतना सुनते ही उन लोगों में खामोशी छा गई और उन लोगों की नजरें जो कि बेहद प्यासी थी, वह निर्मला की नितंब नुमा कुएं पर टीक गई,, । वास्तव में निर्मला के नितंब मधुर जल से भरी हुई एक गगरी ही थी क्योंकि जब निर्मला चलती थी तो उसके नितंबों के दोनों फांक आपस में सटे हुए ही, चलने की वजह से इस तरह से ऊपर नीचे होते हुए हिलते हुए नजर आते थे कि,,मानो नितंब नुमा गगरी में से मधुर जल छलक रहा हो,, और यही निर्मला की छलकती हुई जवानी को देखकर यह लड़के मन ही मन प्रार्थना कर रहे थे कीे निर्मला की छलकती हुई जवानी के कुछ छींटे उनके ऊपर भी पड़ जाए जिससे कि वह पूरी तरह से तृप्त हो सके।,, निर्मला इन लड़कों से और उनकी प्यासी नज़रों से अनजान अपनी प्राकृतिक रूप से अपने कदम आगे बढ़ा रही थी जिसकी वजह से उसके नितंबों के दोनों गोले, आपस में टकरा रहे थे और उन दोनों गोलो के टकराने की वजह से,, आकर्षण रूपी गुरुत्वाकर्षण ऊर्जा उन्हें लड़कों को अपनी तरफ खींच रही थी। निर्मला अपनी साड़ी को भी नितंबों के इर्द-गिर्द इतनी कसी हुई बांध देती थी की नितंबों का संपूर्ण आकार बड़ी आसानी से साड़ी के ऊपर ऊपस आता था। निर्मला बड़े आराम से बाथरूम की ओर चली जा रही थी,,, जैसे की निर्मला बाथरूम के दरवाजे के करीब पहुंची वैसे ही उसे देख रहे सारे विद्यार्थी चौकन्ने हो गए,,, और उसके बाथरूम में घुसते ही वह लोग बाथरूम में जाने के लिए चल पड़े,,,

दूसरी तरफ शुभम शीतल की क्लास के अगल-बगल चक्कर लगा रहा था। वह बार-बार आते जाते क्लास के अंदर झांक ले रहा था क्योंकि क्लास के अंदर शीतल मैडम के साथ कोई औरत बैठी हुई थी,,,, शीतल भी बार-बार क्लास के बाहर चक्कर काट रहे हैं शुभम को देख ले रही थी। क्लास में उससे बातें कर रही उस औरत के बारे में सोच-सोच कर शीतल का मन कसमसा जा रहा था वह उसे भगा देना चाह रही थी,,,

लेकिन वह एक टीचर थी इसलिए ऐसा करना उसे शोभा नहीं दे रहा था फिर भी वह किसी तरह से उसे समझा-बुझाकर बाद में आने के लिए बोल दी और वह औरत चली गई, जैसे ही क्लास के बाहर वह औरत निकली का रास्ता देख रहा सुभम झट से क्लास के अंदर दाखिल हो गया,,,, क्लास में आया देखकर शीतल बहुत खुश हो गई लेकिन अगले ही पल उसे याद आ गया कि वह कुछ दिनों के लिए गांव जा रहा है इसलिए उसके चेहरे पर फिर से उदासी के बादल छाने लगे,,,

जब से शुभम के लिए उसके मन में आकर्षण पैदा हुआ था तब से शीतल और भी ज्यादा बन ठनकर स्कुल आने लगी थी। लेडीज परफ्यूम की खुशबू से पूरी क्लास महक रही थी,,

और शीतल के बदन से आ रही भीनी भीनी मादक खुशबू की वजह से शुभम के तन बदन में,,, उन्मादकता का एहसास भर जा रहा था। इस बार शुभम ने ही हल्के से दरवाजे को थोड़ा सा बंद कर दिया था और शीतल शुभम की इस हरकत को देखकर अंदर तक उत्तेजना का अनुभव करने लगे,,,, एक अजीब सी उत्तेजना का एहसास उसके तन बदन अपनी आगोश में भर लिया था उसे ऐसा महसूस होने लगा कि जैसे उसके बेटे की उम्र का लड़का उसके कमरे में आकर के दरवाजे की कुंडी लगा रहा है और वह भी सिर्फ इसलिए ताकि वह उसे आराम से चोद सकें और शीतल भी अपने बेटे संमान उस लड़के को अपना तनबदन संपूर्ण रूप से उसे सौंपने के

सब कुछ जानते हुए भी शुभम अनजान बनते हुए बोला,,,

मैडम आपने मुझे बुलाई थी,,

फिर मैडम शुभम मैंने तुम्हें कितनी बार कहीं होगी तुम मुझे अकेले में शीतल ही बुलाया करो लेकिन ऐसा लगता है कि तुम मुझे अपना नहीं समझते,,,,

नहीं मैम,,,

देखो फिर मैम अब तो ऐसा ही लगने लगा है कि तुम मेरी बातों को और मुझे कुछ नहीं समझते,,,,

सॉरी सॉरी,,,,,,,शीतल,,,,,,

हां,,,,, ऐसी बुलाया करो मुझे,,,, नाम लेकर, जब तुम मुझे नाम लेकर बुलाते हो तो ऐसा लगता है कि कोई अपना मुझे बुला रहा है,,,। नाम लेने से अपनापन महसूस होता है लेकिन तुम तो मुझे शायद अपना समझते ही नहीं हो,,,,,। ( इतना कहते हुए शीतल दूसरी तरफ मुंह करके खड़ी हो गई वह यह जताना चाहती थी कि वह शुभम से नाराज है,,,। जैसे ही क्लास में शुभम प्रवेश किया था वैसे ही उसकी नजर सीधे सीकर के खूबसूरत भरावदार बदन पर ही घूम रही थी, इस समय पीतल की पीतल की तरफ होने की वजह से शुभम की नजरें उसकी मखमली चिकनी पीठ से होते हुए उसके कमर के नीचे भरावंदार ऊठे हुए नितंबों पर टिकी हुई थी,,, और शुभम उसके नितंबों को प्यासी नज़रों से घूर रहा था शुभम उसकी बातों का जवाब देते हुए बोला,,।)

नहीं शीतल ऐसी कोई भी बात नहीं है मैं आपकी इज्जत करता हूं तभी तो आपके कहने से मैं चला आता हूं।

चले तो आते हो लेकिन मुझे हमेशा प्यासी छोड़ कर चले जाते हो,,,

मैं कुछ समझा नहीं,,,,

इसमें समझने वाली कौन सी बात है उस दिन तुम्हें तुम्हें साफ-साफ बता चुकी हूं,। की जिस दिन से अनजाने में मैंने तुम्हारे लंड को पेंट के ऊपर से इस पर की थी तब से मेरे तन बदन में ना जाने कैसी हलचल सी मची हुई है।
 


लेकिन वह तो अनजाने में हुआ था उस बात को लेकर के आप अभी तक परेशान क्यों है,,,।

अरे बुद्धू यही तो बात है तुम औरतों के मन को अभी कहां पहचानता है। औरत के लिए तो उसकी सारी खुशियां बस और बस मर्दों के पेंट मैं छिपे हुए हथियार में ही होती है। और तू यह नहीं जानता कि औरत की खुशियों का विस्तार भी मर्दों के लंड के विस्तार से ही होती है जितना लंबा लंड होगा औरत की खुशियों का विस्तार भी उतना ही ज्यादा होगा,,,, औरत क्या चाहती है मर्द की बस यही खुशी तो चाहती है कि मर्द उसे संपूर्ण रूप से संतुष्टि का एहसास करा सके,,,, उसे अपनी बाहों में भर कर इतनी गरम जोशी से पेश आएं कि उसकी हड्डीया तक चटक जाए,,,, जब वह अपने लंड को औरत की जांघों के बीच के नाजुक अंग में प्रवेश कराएं तो औरत पसीने से तरबतर होकर मर्द को अपनी बाहों में भींच लें।,,,, ( शीतल इस तरह की कामुकता भरी बातें करते हुए शुभम की तरफ मुंह करके खड़ी हो गई थी,, शुभम शीतल की ऐसी गर्म बातें सुनकर एकदम मदहोश हुआ जा रहा था।

उसकी मदहोशी को 4 गुना और ज्यादा बढ़ा रहे थे शीतल के बड़े-बड़े खरबूजे सामान उसकी नुकीली चूचियां,,, जो कि शीतल जानबूझकर गहरी सांसे लेते हुए इस तरह से अपनी चुचियों को ऊपर नीचे कर रहे थे कि शुभम की नजरें बस उसी पर टिकी रहे। और ऐसा हो भी रहा था शुभम पूरी तरह से शीतल की चूचियों से निकल रही आकर्षण रूपी ऊर्जा मैं खिंचा चला जा रहा था। शुभम शीतल की चूचियों को देखता हुआ बोला,,।)

मैडम आप कैसी बातें कर रही है मुझे ना जाने क्या हो रहा है।

मुझे मालूम है तुम्हें क्या हो रहा है तुम उत्तेजित हो रहे हो और यह तो स्वाभाविक है शुभम,,, यह स्वाभाविक पन तो जन्मो जन्म से चलता चला आ रहा है। खूबसूरत स्त्री की उपस्थिति में मर्दों को अक्सर उत्तेजना का अनुभव होने लगता है और वह पूरी तरह से उत्तेजित हो जाता है भले ही वह स्त्री किसी भी रुप में हो,,, चाहे वह उसकी भाभी हो उसकी बहन हो उसकी शादी हो या फिर उसकी मां ही क्यों ना हो,,, उसके खूबसूरत बदन उसके भरावदार नितंब और उसकी बड़ी बड़ी चूची को देखकर अक्सर मर्द उत्तेजना का अनुभव करते हैं। और इस समय बिल्कुल वही तुम्हारे साथ भी हो रहा है,,, । ऊस दीन तो तुम मेरी इच्छा पूरी नहीं किए और वैसे ही चले गए,,,,

कहां मैडम तुम्हारे कहने पर मैंने तुम्हें दिखाया तो था,,,,

लेकिन उसे छुने कहा दीए थे उसे पकड़ने कहां दिए थे उसे सहलाने कहां दिए थे,,,,( शीतल एकदम कामुकता भरे स्वर में बोल रही थी, जिसकी वजह से शुभम की हालत पल-पल खराब हुए जा रही थी।)

घघघघ,,,, घंटी बज गई थी । (शुभम घबराते हुए बोला)

किसकी तुम्हारी या स्कूल की ( शीतल लगभग हंसते हुए बोली)

स्कूल की,,,,

इसका मतलब तुम्हारी घंटी नहीं बजी थी,,,, तो तुम बहुत बहादुर हो,,, मर्दाना ताकत से भरे हुए मर्द हो,,,, तुम मुझे फिर से अपनी मर्दाना ताकत के दर्शन करा दो, मैं उसके दर्शन के लिए कब से तड़प रही हूं,,,,,

( शीतल की मादक गरम बातें सुनकर शुभम कुछ भी बोलने लायक नहीं था उसे इस तरह से खामोश देखकर शीतल बोली,,,।)

लगता है तुम मेरी प्यास नहीं बुझा ना चाहते लेकिन तुमसे तो अच्छा तुम्हारा यह लंड है देखो वह मेरी प्यास बुझाने के लिए कैसे देख रहा है। देखो कैसे पूरी तरह से खड़ा हो गया है।( शीतल शुभम के पेंट में बने तंबू को हाथ से सहलाते हुए बॉली,,,)

मममममम,, मैडम,,, ( शीतल के द्वारा लंड को पैंट के ऊपर से सहलाने की वजह से शुभम उत्तेजना भरे स्वर में बोला।)

क्या हुआ शुभम ( वह उसी तरह से पेंट के ऊपर से ही लंड को सहलाते हुए बोली,,,)

पता नहीं मैडम मुझे क्या हो रहा है,,,,

मुझे मालूम है तुम्हें क्या हो रहा है जिस तरह से मैं तुम्हारे बिना मिले को अपने हाथों में पकड़ने के लिए तड़प रही हो उसी तरह से तुम्हारा लंड दिया संतुष्ट होने के लिए मचल रहा है। ( इतना कहने के साथ ही वह शुभम की पेंट की बटन पर हाथ रखकर उसे खोलने को हुई कि तभी शुभम बोला,,,।)

ककककक, कोई आ जाएगा मैडम,,,,

कोई नहीं आएगा सुबह मैं तुमसे पहले भी बता चुकी हूं कि रिशेश पूरी होने तक इस क्लास में परिंदा भी पर नहीं मार सकता,,,, तुम कुछ दिनों के लिए गांव जा रहे हो अगर आज तुमने अपने लंड को संतुष्ट नहीं किए तो तुम तड़पते रहोगे और मुझे भी प्यासी छोड़ जाओगे तो जो मैं कर रही हूं उसे करने दो इससे तुम्हें भी आराम मिल जाएगा और मुझे भी सुकून मिल जाएगा,,,,( इतना कहते हुए शीतल शुभम की पेंट की बटन पूरी तरह से खोल दी शुभम की हालत पल-पल खराब हुए जा रहे थे उसके तन-बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ रही थी उसकी सांसें तीव्र गति से चल रही थी,, बेहद कामातुर हो चुका था इच्छा तो ऊसकी ऐसी हो रही थी की क्लाश में हम ही शीतल मैडम को पटक कर ऊसकी बुर मे लंड डालकर संतुष्ट हो जाए,,,, लेकिन ऐसा करना आदि उचित नहीं था क्योंकि यह क्लास थी अगर कमरा होता तो वह जरूर ऐसा कर देता क्योंकि वह जानता है कि शीतल मैडम उससे क्या चाहती हैं,,,। शुभम ब्लैक बोर्ड से सटकर खड़ा था और शीतल नीचे घुटनों के बल बैठीे हुए थी,, जहां से शुभम को उसकी बड़ी बड़ी चूचियां और उसके बीच की गहरी लकीर साफ साफ नजर आ रही थी और जिसकी वजह से उसकी उत्तेजना में पल-पल बढ़ोतरी ही होती जा रही थी। कुछ ही सेकंड में शीतल ने शुभम की पेंट को अंडरवियर सहित उनके घुटनों तक सरकादी,,, हवा में सुभम का लहराता हुआ मोटा तगड़ा और लंबा लंड देखकर,,, शीतल की आंखों में चमक आ गई और इस बार वह कोई भी मौका गंवाना नहीं चाहती थी इसलिए तुरंत अपना हाथ आगे बढ़ा कर,,, शुभम के लंड को अपनी मुट्ठी में भरते हुए सिसकते हुए बोली,,,,

सससससस,,,, शुभम,,, तुम्हारा लंड एकदम घोड़े के लंड की तरह हो,, मैंने इतना मजबूत और तगड़े लंड की कभी कल्पना भी नहीं की थी। सच में तुम एकदम संपूर्ण रूप से असली मर्द हो हर औरत तुम्हारे लंड से चुदना चाहेगी,,,।

ओहहहहह शुभम,,, ( शीतल तो एक दम मस्त हो गई थी ऐसा लग रहा था कि उसका सपना पूरा हो रहा है वास्तव में उसने इस तरह के लंड की कभी कल्पना भी नहीं की थी,,, वह तों मदहोशी के आलम में शुभम के लंड को आगे पीछे करते हुए मुठिया रही थी,,,, शुभम एकदम कामातुर हो चुका था उसके बदन में हलचल सी मची हुई थी उत्तेजना के मारे वह कसमसा रहा था। वह कुछ भी बोल पाने की स्थिति में नहीं था। उसकी आंखों के सामने उसके खजाने को एक मदमस्त औरत अपने हाथों से लूट रही थी,,, पर वह कुछ कर पाने की स्थिति में भी नहीं था लेकिन वह खुद चाह रहा था कि ऊसके खजाने को यह औरत पूरी तरह से लूट ले।

औह शुभम,,, तुम तो मुझे अपनी पूरी तरह से दीवानी बना रहे हो,,,, ऐसा लंड अगर किसी औरत को मिल जाए तो वह तो पूरी दुनिया को पा ले,,,,,( शीतल शुभम के लंड को जोर-जोर से हिलाते हुए बोले क्या रही थी धीरे-धीरे उसके मन की लालच बढ़ती जा रही है।वह अब शुभम के लंड की पिचकारी देखना चाहती थी,,, वह यह देखना चाहती थी कि शुभम क्या कर रहे उसका गरम माल कितना निकलता है और उसकी पिचकारी कितनी तेज निकलती है,,,। क्योंकि उसने अब तक पिचकारी के नाम पर सिर्फ चंद बूंदे ही टपकते हुए देखीे थी,,,, इसलिए उसकी यह जिज्ञासा बढ़ती जा रही थी। वह जोर जोर से शुभम के लंड को हिलाते हुए शुभम की तरफ देख रहेी थी, और शुभम भी एकदम मस्त होता हुआ प्यासी नजरों से शीतल को ही देखे जा रहा था।

शुभम भी यही चाह रहा था कि,,, उसकी लंड से पिचकारी निकल जाए वैसे को इस बात की उसे कोई भी दिक्कत नहीं थी क्योंकि वह घर जाकर भी अपनी मां की बुर में अपना लंड डालकर अपना पानी निकाल सकता था लेकिन वह शीतल के हाथों से आज अपना पानी निकलते हुए देखना चाहता था। उत्तेजना के मारे शीतल का चेहरा लाल टमाटर की तरह हो गया था वह बहुत ही जोर जोर से शुभम के लंड को हिला रही थी,,, लेकिन वह अच्छी तरह से जानती थी की,,,, रिसेस पूरी होने में बहुत कम समय रह गया है अब जिस तरह से जोर जोर से हिलाने सें भी शुभम का पानी नहीं निकल रहा है ऐसे मे तो रीशेश पूरी हो जाएगी और उसका पानी नहीं निकल पाएगा और एक बार फिर से उसकी इच्छा अधूरी रह जाएगी,,, इसलिए वह तुरंत अपना विचार बदल दी वह शुभम की तरफ देखीे तो वहां आंखें बंद किए हुएथाशुभम केलंड को मोटा सुपाड़ा देखकर शीतल की जीभ लपलपारही

शुभम के रसीले और ताजे लंड को देखकर पीतल के मुंह में पानी आ रहा था और वह अपना इरादा बदलते हुए अपनी लालच को रोक नहीं पाई और अगले ही पल शुभम के लंड के सुपाड़े को अपने मुंह में भरकर चूसना शुरू कर दी,,,, शुभम के तो तन बदन में चिंगारी भड़कने लगी, शीतल की तरफ से इस तरह की हरकत के बारे में शुभम सोचा ही नहीं था। उसकी आंखें झट़ से खुल गई,,, वह शीतल की तरफ देखा तो वह उसके लंड को लॉलीपॉप की तरह,, लॉलीपॉप की तरह नहीं क्योंकि लॉलीपॉप पर छोटी होती है आइसक्रीम कौन की तरह मुंह में लेकर चूस रही थी। अगले ही पल शुभम की कमर अपने आप ही आगे पीछे हिलने लगी,,, एक तरह से शुभम शीतल के मुंह को चोद रहा था और शुभम की यह हरकत देखकर शीतल पूरी तरह से आनंदित हो गई और वह दुगना गति से शुभम के लंड को मुंह की गहराई तक उतार कर चूसना शुरू कर दि,,, उत्तेजना से दोनों परिपूर्ण हो चुके थे शीतल की बुर पानी पानी होकर कुलबुला रही थी। शीतल के मुंह की गति के साथ-साथ शुभम की कमर की गति भी बढ़ती जा रही थी और नतीजन शुभम ने एक जोरदार तीव्र गति से अपने लंड की पिचकारी शीतल के मुंह में मारना शुरू कर दिया,,,, एक पल के लिए तो शीतल इस तरह से मुंह में पड़ रही तेज पिचकारी की वजह से घबरा गई,,, क्योंकि उसने लंड से इतनी तेज पिचकारी की उम्मीद ही नहीं की थी लेकिन जो हो रहा था वह हकीकत था उसे स्वीकार करते हुए पीपल शुभम के लंड से गर्म पानी के पिचकारी को गटकने शुरू कर दी,,,, वह तब तक गटकती रही जब तक कि शुभम के लंड से एक-एक बूंद उसके मुंह में ना उतर आया हो,,,,, इस उत्तेजना भरी पिचकारी के साथ-साथ शीतल की बुर में भी पानी छोड़ दिया था उसे भी चरम सुख का एहसास होने लगा था दोनों एक साथ झड़ चुके थे, लेकिन शीतल इस बात से बेहद हैरान थी कि गुरु को बिना हाथ लगाए ही ऊसकी बुर पानी छोड़ दी थी,,,, जैसे ही दोनों संतुष्टि प्रदान किए वैसे ही विशेष पूरी होने की घंटी बज गई शुभम जल्दी-जल्दी अपना पैंट पहनकर क्लास से बाहर चला गया और घंटी बजने से पहले यही हाल बाथरूम में उन लड़कों का हो रहा था जो कि बाथरूम के छेद से निर्मला की जवानी को अपनी नजरों से पी रहे थे।

निर्मला के बाथरूम में घुसते ही वह लड़के भी बगल वाले बाथरूम में बेधड़क घुस गए और अंदर जाते ही सभी ने अपना अपना लंड बाहर निकालकर अपने हाथ में लेकर हिलाना शुरू कर दिया,,,, लेकिन तब तक निर्मला कोई भी हरकत में नहीं आई थी वह कुछ देर तक आईने में अपनी शक्ल को देखती रही आईना भी उसकी खूबसूरती जैसे जल भुन जा रहा हो,, इस तरह से वह अपने धुंधलापन की वजह से उसके चेहरे को संपूर्ण रुप से नहीं दिखा रहा था,,, लेकिन निर्मला भी अपना रुमाल निकालकर आईने को साफ करके अपनी खूबसूरती को आईने में देखकर मुस्कुराती हुई दो कदम आगे बढ़ गई उसकी लचकती हुई नितंबों को देखकर बगल वाले बाथरूम में लड़कों की हालत ख़राब हुए जा रही थी। उन लोग का लंड पूरी तरह से खराब हो चुका था और वह लोग अपनी मुट्ठी में भरकर उसे हिला रहे थे तभी निर्मला अपनी साडी को धीरे-धीरे ऊपर की तरफ उठाने लगी, यह नजारा यह क्रिया औरतों के लिए पूरी तरह से औपचारिक था लेकिन यही किया मर्दों के लिए बेहद कामुकता से भरा हुआ था। क्योंकि उन्हें मालूम था कि सारी उठते ही उनके सामने बेहद आकर्षक और कामातुर कर देने वाला नजारा पेश आने वाला है। धीरे-धीरे निर्मला अपनी साड़ी को ऊपर की तरफ उठा रही थी और उसे देखते हुए उन लड़कों की हालत कटे मुर्गे की तरह होती जा रही थी। वह लड़के ऊस छेंद में बारी-बारी से अपनी आंख सटाकर निर्मला की नंगी जवानी का रसपान कर रहे थे। जैसे-जैसे निर्मला की नंगी टागे दूधिया उजाले में और भी ज्यादा चमकती जा रही थी वैसे वैसे उन लड़कों की आंखों में चमक और उनके लंड में कड़ापन बढ़ता जा रहा था। अगले ही पल निर्मला ने अपनी साड़ी को पूरी तरह से कमर तक उठा दि,,, यह नजारा देखकर लड़कों के मुंह से गर्म सिसकारी निकल गई और निकलती भी कैसे नहीं लाल रंग की पैंटी में निर्मला की बड़ी-बड़ी और गौरी गांड पूरी तरह से कसी हुई थी। ऐसा कामातुर कर देने वाला नजारा था कि अगर निर्मला के समीप कोई लड़का होता तो उसकी पैंटी उतारे बिना ही अपने मोटे लंड को उसकी बुर में उतार देता,,, उसके पीछे लगी प्यासी नजरों से अनजान निर्मला धीरे धीरे अपनी पैंटी के दोनों छोर को ऊंगलियो में फसा दी,,,, औरतों का इस तरह से पेंटी उतारने का यह बेहद नायाब तरीका है,,, इस तरह की नाजुक तरीके से ही पता चलता है कि औरत कितने उच्च स्तर की है।,,,

सभी लड़की आंख मारे इस नजारे को धड़कते दिल से और फुंफकारते लंड को हाथ में पकड़ कर देख रहे थे। उन लड़कों के तन बदन पर निर्मला की इस हरकत का क्या असर हो रहा था इसका वर्णन करना बेहद मुश्किल था। बस इतना ही बयां हो सकता था कि उन लोगों की हालत कटे मुर्गे की तरह थी कि जिसकी जान गले में अटकी हुई थी और गला कट चुका था।,,, निर्मला बेहद होले होले अपनी पैंटी को नीचे की तरफ सरका रही थी मानो कि वह जानबूझकर किसी को अपनी हरकत द्वारा अपने नितंबों का प्रदर्शन कर रही हो,,, बेहद उत्तेजक ओर उन्मादक नजारा बनता जा रहा था,,, इस बेहद कामोत्तेजना से भरपूर नजारे का गवाह सिर्फ बाथरूम की दीवारें थी जिसकी चमकती टाइल्स में निर्मला का अक्स नजर आता था,,, एक दूसरे का बात है बाथरूम मैं बने छेद से झांक रहे वह लड़के,,,, लड़कों का हाथ बड़ी तेजी से चल रहा था निर्मला धीरे-धीरे अपनी पैंटी को सरकाते हुए नितंबों के बीचो-बीच ले आई,,, जहां से निर्मला के नितंबों के बीच की वह गहरी लकीर नजर आने लगी जिसकी वजह से नितंबों के दोनों गोले अलग हो जाते थे।,,,, अभी घोड़ों की रेस शुरू हुई हुई थी कि कुछ घोड़े पहले चरण में ही लड़खड़ा कर गिर गए,, उनमे से कुछ लड़कों के लिए यह बेहद शर्मिंदगी भरा एहसास था,,, क्योंकि अभी तो सिर्फ निर्मला की मदमस्त गांड की मात्र वह गहरी खाई ही नजर आई थी,, जिसमें कि दुनिया का हर मर्द डूबने के लिए तैयार भी रहता है और तड़पता भी रहता है,। और इनमें से कुछ लड़कों ने तो बस इस गरम गहरी खाई को देखते हीैं पानी छोड़ दिया,,, यह उनके साथियों के लिए हास्यपद भी था। लेकिन कुछ लड़के निर्मला की जवानी के तूफान में भी टिके हुए थे। निर्मला आहिस्ता आहिस्ता अपनी पैंटी को नीचे जांगो तक सरकादी,, संपूर्ण रूप से नग्न नितंबों के दर्शन मात्र से ही उन लड़कों की सिसकारी छूट गई,,,, गजब का गोल आाकार लिए हुए निर्मला का नितंब था। तभी धीरे से निर्मला मूतने के लिए नीचे बैठने लगी,,, इसी पल का उन लड़कों को बड़ी बेसब्री से इंतजार था। यह नजारा देखने के लिए उन लोगों की सांसें तक थम गई थी। निर्मला नीचे बैठ चुकी थी,,,, उसकी बुर की पेशाब की तेज धार बड़ी तेजी से फूट पड़ी थी,,, और उसमें से बज रही सीटी की आवाज उन लड़कों को बेहद गर्माहट प्रदान कर रही थी,,,,। उन लड़को के हाथ उनके लंड पर बड़ी तेजी से चल रहे थे।,,, निर्मला भी बड़ी तेजी से पेशाब की धार छोड़ते हुए अपने आप को हल्का करने में लगी हुई थी। वह पेशाब पूरी तरह से कर पाती ईससे पहले ही उन लड़कों ने एक साथ पानी छोड़ दिया,,, निर्मला के गांव जाने से पहले का यह ं उन लड़कों के लिए बेहद उत्तेजनात्मक चरम सुख था।

पानी निकल जाने के बावजूद भी उन लड़को ने अभी भी उसे छेंद से बाथरूम के अंदर का गर्म नजारा देखना बंद नहीं किया था क्योंकि वह लोग आखरी पल तक निर्मला की खूबसूरती के रस को अपनी नजरों से पी लेना चाहते थे कुछ ही देर में निर्मला भी पूरी तरह से पेशाब कर चुकी थी,,, वह उठने से पहले एक बार अपने नितंबों को जोर से झटके देकर बुर की गुलाबी पत्तियों के बीच फसे पेशाब की बुंदो को निकाल दी,,, उसका इस तरह से नितंबों को झटका दे ना भी बेहद परेशान कर देने वाला था,,, क्योंकि जब वह अपने नितंबों को झटका दे रही थी तो उसकी मांसल गांड किसी पानी में लहर की तरह लहरा रही थी,,,,। जो कि उन लड़कों के होश उड़ा रही थी,,,, निर्मला जल्दी से खड़ी हुई और अपनी पेंटिं को ऊपर की तरफ चढ़ााकर,, वापस नितंबों को उस पैंटी में कस ली,,,, और अपनी साड़ी को नीचे की तरफ छोड़ दी इसके साथ ही एक बेहद हसीन और कामोत्तेजना से भरपूर नजारे पर पर्दा पड़ गया।

 
शीतल शुभम के मजबूत और तगड़े लंड को अपने मुंह में लेकर उसका पानी निकाल देने की वजह से कुछ हद तक संतुष्ट हो चुकी थी। उसके गाढ़े नमकीन पानी को अपने गले के नीचे उतार कर उसे ऐसा लग रहा था कि आज पहली बार उसने किसी मर्द के लंड को अपने मुंह में लेकर चूसी है। लेकिन इस प्रकार की संतुष्टि उसे अधूरी लग रही थी बल्कि इस तरह से तो उसकी प्यास और ज्यादा भढक़ चुकी थी। वह शुभम के मोटे तगड़े लंड को अपनी बूर के अंदर लेकर उसकी मोटे पन और उसकी गर्माहट को महसूस करना चाहती थी,,,,वह यह देखना और महसूस करना चाहती थी कि चल एक मोटा लंड बुर के अंदर धीरे-धीरे बुर की दीवारों को रगड़ता हुआ उसकी गहराई तक जाता है तो औरत को कैसा महसूस होता है।,,, उसके तन-बदन में किस तरह की चिंगारियां सुलगती है। बुर की गुलाबी पत्तियों को मोटा लंड किस तरह से रोेंदता हुआ,, बुर के कसेपन को फैलाता हुआ,, किस तरह से उसके आकार को बढ़ा देता है और जब बुर अपने आकार से विस्तृत होकर फेलता है तो औरत को किस तरह का दर्द होता है और उसे दर्द के पीछे छिपा हुआ आनंद की अनुभूति औरत को किस प्रकार से होती है यह देखने के लिए उसका मन मचल रहा था।,,, शीतल मन ही मन में अपने आप को कोस रही थी क्योंकि उसे इतना सुनहरा मौका मिला था लेकिन उसका पूरी तरह से फायदा नहीं उठा पाई थी,, यह ख्याल उसके मन में आते ही वह पैर. पटकने लगी थी। वह मन ही मन में यह सोच रही थी कि जितनी देर में उसने शुभम के मोटे लंड को अपने मुंह में लेकर चूसकर ऊसका पानी निकाल दी, इतनी देर में तो वह उसकी बुर में लंड डालकर मस्ती से ऊसकी चुदाई कर सकता था।,,, आज ही वह ं शुभम के मोटे लंड का मज़ा ले लेती।,, लेकिन इस तरह का सुनहरा मौका हाथ से निकल जाने की वजह से उसके पास हाथ मलने के सिवा और कुछ नहीं था,,, फिर भी वह अपने मन को इस बात से संतुष्टि दिला कर खुश थी कि शुभम पूरी तरह से उसके कब्जे में हो चुका था,,,। स्कूल में वह उसके कहने पर में अपने लंड को निकालकर उसके मुंह में चुसा सकता है तो उसके कहने पर वह कहीं भी आकर उसकी चुदाई भी कर सकता है।,, उसे यकीन था कि बहुत ही जल्द उसकी बुर एक मर्द के लंड से चुदने वाली है। उसे उस पल का बेसब्री से इंतजार था जब उसके बेटे की उम्र का लड़का उसको अपने हाथों से नंगी करता हुआ उसके खूबसूरत बदन को अपनी आगोश में भरेगा,,, उसके खूबसूरत गोरे बदन को चूम लेगा और उसके बड़े-बड़े चुचियों को अपने मुंह में भरकर किसी बच्चे की भांति पिएगा,,, और तब वह पल कितना सुहावना होगा जब वह उसकी जांघों के बीच बैठकर,, अपनी जीभ लगाकर उसकी बुर की गुलाब की पत्तियों के बीच किसी भंवरे के भांती,, उसके मदन रस को चूस कर अपनी प्यास बुझाएगा और उसे एक बेहद अतुल्य ऊन्मादक आनंद की अनुभूति कराएगा।,, उस पल के बारे में सोच कर ही उसका तन बदन गंनगाना जा रहा था।,,,,,

दूसरी तरफ लड़कों ने भी आज निर्मला की मदमस्त गांड का नजारा देखते हुए अपने चरम सुख को प्राप्त कर लिया था,,, उन लोगों की आंखें ऐसे नजारे को देखकर खुमारी से भर जाती थी जिस नजारे को देखने के लिए दुनिया को हर मर्द तड़पता रहता था,,,,। सुबह लोग अपनी आंखों को और खुद को बहुत खुशकिस्मत समझते थे,,,, जो उन्हें बेहद खूबसूरत औरत क्या खूबसूरत बदन उसकी भराावदार गांड और उस औरत को पेशाब करते हुए देख पाते थे। निर्मला की गोरी गोरी गांड को देखकर लड़कों ने ना जाने कितनी बार अपने लंड को हिलाकर उसका पानी निकाल दिया था जिसके बारे में निर्मला को भनक तक नहीं लगी थी।,,, निर्मला उन लड़कों की हरकत से अनजान थी हालांकि शुरु-शुरु में एक बार ऐसा लगा था कि दूसरी ओर से कोई उसे देख रहा है लेकिन इस बात को वह भूल चुकी थी और एक दम बिंदास होकर औपचारिक तरीके से वह बाथरूम में जाकर एकदम प्राकृतिक रूप से अपनी शाडी उठाती थी और पेशाब करने बैठ जातेी थी,,,, उसे क्या पता था कि दर्जनों जोड़े आंखें उसकी बड़ी-बड़ी गांड को देख कर मस्त हो रहे हैं,,। गांव जाने से पहले उन लड़कों के साथ-साथ शीतल अपने मन को कुछ हद तक मनाने में कामयाब हो चुकी थी,,,,, सुभम भी बेहद खुश था,,, और वैसे भी मर्द तो हमेशा खुश ही रहते हैं जब तक ऊन्हें औरत का प्यार और उसके खूबसूरत बदन को भोगने को मिलता रहता है तब तक होंगे दुनिया की किसी दूसरी चीज की आवश्यकता नहीं पड़ती। भले ही शुभम का लंड ऊसने अपने मुंह में लेकर उसका पानी निकाली थी,, लेकिन वह जिस तरह से अपनी कमर को हिला रहा था शीतल के गुलाबी होठों उसे बुर की गुलाबी पत्तियों के बीच की फांक के बराबर ही लग रही थी। जो सुख उसे बूर चोदने में मिलता था,, वही सुख उसे आज क्लास के अंदर शीतल के गुलाबी होंठ के बीच लंड पेल कर मिला था। उसे अब पक्का यकीन हो चुका था कि बहुत ही जल्द उसे दूसरी औरत की रशीली बुर चोदने को मिलने वाली है,,, क्योंकि वह इतना तो समझ ही गया था की शीतल बेहद प्यासी औरत है,, और जिसे मुंह में लेने के लिए हॉठ खोलने में समय नहीं लगा तो उसके लंड को बुर में लेने के लिए अपनी टांगों को खोलने में बिल्कुल भी समय नहीं लगेगा,,,। वह भी बहुत खुश था और आने वाले पल के लिए बेसब्री से इंतजार करने लगा था।

घर पर गांव जाने के लिए,,, निर्मला कहीं खरीदी करने गई हुई थी,,, घर पर अशोक अकेला ही था पर वह भी जल्द से जल्द मधु के आने का इंतजार कर रहा था इसलिए तो वह निर्मला के साथ गांव जाने से इनकार कर दिया था क्योंकि वह गांव पहुंचती और मधु इधर उसके पास पहुंचती,,,, बहुत दिन हो गए थे उसे भी मधु के रसीली बुर का स्वाद चखें,,,,, वह घर में बड़े आराम से बैठकर मधु के साथ वह क्या-क्या करेगा इस बारे में सोच रहा था,,, लेकिन वहां अपनी जिंदगी में आने वाले तूफान से बिल्कुल अनजान था वह तो बड़ी बेसब्री से शुभम और निर्मला के जाने का इंतजार कर रहा था क्योंकि मधु के आने का समय निश्चित हो गया था कुछ दिन तक वह घर में ही रहकर अपनी बहन के साथ चुदाई का भरपूर आनंद ले लेना चाहता था। उसे इस बात का पक्का यकीन था कि मधु को इससे कोई भी एतराज नहीं होगा क्योंकि वह अच्छी तरह से जानती थी कि जब वह अपने भाई से मदद की उम्मीद कर रही है तो उसका भाई बदले में उससे कौन सी इच्छा रखता है इसलिए मधु अपने आप को पूरी तरह से तैयार करके रखी थी,,, शादी से पहले वैसे भी वह अपने बड़े भाई के साथ चुदाई का भरपूर आनंद ले चुकी थी। तब तो उसकी कोई मजबूरी नहीं थी वह पूरी तरह से खुले विचार से परिपूर्ण थी लेकिन अब तो उसके पास मजबूरी है अगर वह चाहे भी तो अपनी खूबसूरत बदन को अपने बड़े भाई के हाथों में सौंपने से अपने आप को रोक नहीं सकती थी क्योंकि उसके लिए वैसे भी सारे दरवाजे बंद हो चुके थे उसके परिवार वाले उसे अपनाने से इंकार कर चुके थे और वह अपने पति का घर छोड़ कर आई थी,,,। और वह जिस तरह से अकेले रहकर नौकरी करके अपना खर्चा उठा रही थी दुनिया की प्यासी नजरों का अनुभव उसे अच्छी तरह से हो गया था,,,। इसलिए उसे फिर से अपने बड़े भाई से चुदने में कोई भी एतराज नहीं था बदले में उसे किसी बात की दिक्कत तो नहीं होती,,, ना तो खाने की दिक्कत और ना ही रहने की दिक्कत और ना ही जेब खर्च की दिक्कत वरना जहां वहां अकेले रहकर अपनी जिंदगी जी रही थी वहां तो दूध वाला,,, राशन वाला मकान मालिक सभी लोग उसके खूबसूरत बदन को अपनी प्यासी नजरों से चाटते रहते थे कभी कभार समय पर पैसा ना चुका पाने की स्थिति में,,, उसे अपने बिस्तर में आने का लुभावना प्रस्ताव भी रखते थे,,,,। लेकिन उन लोगों के आधीन होने के लिए मधु का मन नहीं मानता था। वह अपनी जिंदगी को कोसने लगी थी कि कैसा दिन उसका आ गया है कि उसके शरीर को भोगने के लिए एक दूधवाला राशन वाला और मकान मालिक ललचाई नजरों से उसे देखते रहते हैं। कुछ एक बार तो उसे अपने आप से समझौता करके मकान मालिक के अधीन होना पड़ा था। लेकिन एक बार मकान मालिक का बिस्तर गर्म करने की वजह से मकान मालिक कहां खुल चुका था और वह बार-बार उसे धमकाते हुए उसे चुदवाने के लिए मजबूर करता रहता है यह सब से तंग आकर वह अपने भाई का सहारा लेकर उसके पास आने के लिए तैयार हो चुकी थी हालांकि इधर भी उसे अपने भाई के साथ वही सब करना पड़ता जो वह मकान मालिक के साथ कर रही थी,,,,। लेकिन वहां उसे बदनाम होने का पूरा डर था। बल्कि वहा तो वह. मोहल्ले में धीरे-धीरे बदनाम होने लगी थी। लेकिन उसे यकीन था कि वह अशोक के पास निश्चित तौर पर सुरक्षित रहेगी।,,,

अशोक मन ही मन बहुत प्रसन्न हो रहा था। उसके घर के गेट के बाहर तभी एक कार बड़ी तेजी से आकर रुकी 15 20 कदम के फासले पर और हां शुभम उस कार को अपने घर के दरवाजे के सामने खड़ा होता देखकर सोच में पड़ गया कि आखिर यह है कौन तभी कार में से रीता बाहर निकली और शुभम की नजर उस पर पड़ते ही वह,,, समझ गया कि यह तो ऑफिस वाली औरत है,,,,। ऊसका इस तरह से घर पर आना शुभम को बड़ा अजीब लग रहा था और जिस तरह से उसका चेहरा गुस्से में लाल लाल दिख रहा था इससे ऊसे समझते देर नहीं लगी कि आज कुछ तो गड़बड़ होने वाली है,,,,, शुभम को यह लग रहा था कि उसकी मम्मी घर पर ही होगी और आज यह औरत जरूर कुछ ना कुछ बखेड़ा खड़ा करेगी,,,, लेकिन फिर उसके मन में आया कि कहीं ऐसा तो नहीं मम्मी घर पर जाओ और पापा ने उस औरत को घर पर बुलाकर उसके साथ रंगरेलियां मनाने का मन बना लिया,, हो। वैसे भी मर्द जात का कोई भरोसा नहीं होता और वह अक्सर औरतों के प्रति उनका मन चंचल ही होता है,,। लेकिन रीता के चेहरे को देखकर शुभम को कुछ विरोधाभास होने का अंदेशा लग रहा था। वह भी यह देखने के लिए उत्सुक था कि क्या होने वाला है। इसलिए वह वही रुका रहा और उसके घर में जाने का इंतजार करने लगा जैसे ही वह गेट खोल कर अंदर गई शुभम धीरे-धीरे अपने घर की तरफ जाने लगा।

 
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