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अधूरी हसरतें

तू सच कह रही है मेरी जान मैं सच में अपनी मां को चोदा हुं और उसी नें तो मुझे चोदना सिखाया,,,, नहीं तो मैं भला कहां जान पाता कि बुर किसे कहते हैं कैसी होती है चूची किसे कहते हैं कैसी दिखती है चुदाई क्या होती है। लेकिन आज जितना भी मैं सीखा हूं आज सब कुछ मैं तुझे दिखाऊंगा रंडी,,,,, देखना आज मैं तेरी बुर में पूरा घुस जाऊंगा तो तुझे इतना मजा दूंगा कि तू दिन रात मेरे लंड के लिए तड़पेगी।

तो देर किस बात की है भड़वे अाजा चढ़ जा मुझ पर मैं भी तो देखु सच में तुझे बातें करना ही आता है या चोदने भी आता है।

( इतना कहने के साथ ही एक बार फिर से निर्मला ने अपनी टांगे फैलाकर अपने मुख्य द्वार को शुभम की आंखों के आगे कर दी जिसे देख कर सुभम एक दम से चुदवासा हो गया,,, शुभम भी जल्दी से अपनी पोजीशन बनाते हुए टांगों के बीच पहुंच गया और दोनों हाथों से अपनी मां की मखमली टांगो को पकड़ कर अपनी जांघों पर चढ़ाता हुआ अपने मोटे तगड़े लंड के सुपाड़े को बुर के बीचो-बीच टीकाकर एक जबरदस्त करारा झटका मारा और समूचा लंड एक ही झटके में पूरा का पूरा बुर में समा गया। एक साथ हुआ जबरदस्त हमला निर्मला झेल नही पाई और उसके मुंह से चीख निकल गई।

ओहहहहहहह,,,,, मां ,,,,,,, मर गई रे हरामजादे,,,,,,, ससससससस,,,,,, सच मे,,,,, आदमी का लंड है या गधे का,,,, हरामजादे,,,,, भोसडी़ के,,,,, आहहहहहहहह,,,,,

चुप सालीे रंडी अभी तुझे दिखाता हूं अपने लंड का असली ताकत अभी तो सिर्फ घुसा है,,, अब तो तुझे जम कर चोदूंगा,,, तब तो तू और ज्यादा चिल्लाएगी (इतना कहने के साथ ही वह लंड को बाहर की तरफ निकालकर फीर से जोरदार धक्का मारा और एक बार फिर से उसकी चीख गुंजने लगी। इसके साथ ही शुभम अपनी मां को चोदना शुरू कर दिया बड़ी तेज रफ्तार के साथ उसका लंड बुर के के अंदर बाहर हो रहा था।।

साथ ही निर्मला की गर्म सिसकारियां पूरे कमरे में गूंज रही थी। दोनों तरफ से गंदी गंदी गालियों की बौछार हो रही थी जिससे उन दोनों का मजा दुगना बढ़ता जा रहा था। कुछ देर तक यूं ही चोदने के बाद शुभम बोला,,,

चल अब कुत्तिया बन जा साली,,, तुझे मे पीछे से चोदूंगा

मैं भी देखना चाहता हूं कि पीछे से तेरी बड़ी-बड़ी गांड चोदने में कितना मजा आता है।

( इतना सुनते ही निर्मला सिहर उठी क्योंकि शुभम गांड चोदने की बात कर रहा था इसलिए वह बोली।)

ननननन ना,,, ऐसा मत करना वहां बहुत दुखेगा,,,,

बस इतने से डर गई मेरी जान तू चिंता मत कर मैं वहां नहीं डालूंगा क्योंकि मैं देख रहा हूं कि तेरा छेंद बहुत छोटा है मेरा लंड घुस ही नहीं पाएगा।( इतना सुनने के बाद निर्मला को इत्मीनान हुआ और वह तुरंत घोड़ी बन गई अपनी मां की बड़ी-बड़ी और गोरी गांड को देखकर शुभम का मान एकदम से ललच उठा और वह तुरंत एकदम पीछे जाकर के अपने दोनों हाथ से अपनी मां की गोरी गोरी गांड पकड़कर लंड का सुपाड़ा बुर से सटाकर अंदर डाल दिया,,, एक बार फिर से

दोनों के चेहरे पर संतुष्टि जनक एहसास साफ झलक रहा था। ना तो निर्मला ने और ना ही शुभम ने कभी जिंदगी में इस तरह की कभी कल्पना किया था की उनके साथ ऐसा कुछ होगा। बेहद अद्भुत और अकल्पनीय रात्रि संगम बेहद आनंददायक एहसास दोनों के तन-बदन में गुदगुदी कर रहा था। दोनों के बीच बहुत ही गहरा रिश्ता बन चुका था जो कि एक पति पत्नी के बीच ही होता है दोनों एक दूसरे में समाने के लिए हमेशा तत्पर ही रहते थे जहां मौका मिला नहीं की दोनों एक दूसरे की आगोश में खो जाते थे। निर्मला के चेहरे पर मुस्कुराहट तेर रही थी क्योंकि रात में जिस तरह का वह चरित्र निभाई थी उस तरह कि उसने कभी भी सपने में नहीं सोची थी। निर्मला ने वाकई में बिल्कुल कॉल गर्ल की तरह ही, अपना चरित्र निभाई थी जिसमे की अश्लील वार्तालाप के साथ साथ गंदी औरतों का रंडी पन भी साफ झलक रहा था। कुछ ही देर में दोनों शहर से दूर आ चुके थे अब गांव की हद शुरू होने वाला था।

सुबह की ठंडक धीरे धीरे कम हो रही थी और दोपहर की चिलचिलाती धूप अपना असर दिखा रहीे थी। गर्मी की कड़कती धुप मे भी निर्मला के बुर की नमी बरकरार थी। वाकई में निर्मला बहुत ही प्यासी औरत थी जिसने वर्षों तक अपने प्यास को ऐसी सुराही में दबा कर रखी थी,, जिसका पानी एकदम रसीला और मीठा हो चुका था और वह अपनी जवानी की सुराही के मीठे रस से अपने ही बेटे को भिगो रही थी। और उसकी प्यास बुझा भी रही थी और अपने प्यास को और भी ज्यादा बढ़ा रही थी । निर्मला और शुभम ईस सफर का पूरी तरह से आनंद लेते हुए आगे बढ़ रहे थे। आज सुबह से भी यह दोनों कई घंटों का सफर तय कर चुके थे। शुभम की हालत खराब हो रही थी क्योंकि गर्मी काफी थी। शुभम परेशान होता हुआ बोला।

क्या मम्मी अभी कितना दूर होगा मेरी तो हालत खराब हो गई है और गर्मी भी कितनी ज्यादा है।

बस बेटा थोड़ी देर और अपना गांव शुरू होने वाला है। (निर्मला स्टीयरिंग संभालते हुए बोली) मैं जानती हूं यहां गर्मी बहुत है लेकिन सच बताऊं तो गांव में मजा भी बहुत आता है। और मजा लेने के लिए थोड़ी बहुत परेशानी तो उठानी पड़ती है।

तुम सच कह रही हो मम्मी अब देखो ना,,, कहां पता था कि हम दोनों को इस तरह से होटल में रुकना पड़ेगा और वह भी मुझे एक ग्राहक के तौर पर और तुम्हें कॉल गर्ल के तौर पर लेकिन सच कहूं तो मजा बहुत आया मैं तो कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि, होटल में इस तरह से चुदाई का कार्यक्रम होगा।

सच रे बहुत मजा आया एक अजीब सा एहसास होने लगा है,,, मेरे तन-बदन में तो अभी भी ना जाने कैसे झुनझुनी सी मची हुई है। धंधा करने वाली औरतें किस तरह से अपने ग्राहकों को खुश करतीे हैं और किस तरह से उनसे मजे लेती हैं इस बात का एहसास मुझे कल रात को होटल में ही हुआ,,( दोनों हाथ से स्टेरिंग संभालते हुए शुभम की तरफ देखते हुए बोली)

सच में मम्मी कल तुम बहुत सेक्सी लग रही थी एक नया रूप निखर कर आया था मैं तो कभी सोच भी नहीं सकता था कि आप इस तरह से गंदी गंदी गालियों के साथ बातें करेंगी।

अरे पागल मैंने भी कहां सोची थी लेकिन कल यह सब करके मुझे बहुत ही सुकून महसूस हो रहा है सच गाली देकर चुदवाने में और भी ज्यादा मजा आता है।

अगर मम्मी किसी शख्स ने सच में तुम्हें धंधे वाली समझकर तुम्हारी कीमत पूछ लिया होता तो,,,,

तो क्या बता देती,,,, मेरी कीमत,,,, वैसे अगर सच में ऐसा होता तो क्या कीमत होती मेरी एक रात की( कुछ सोचते हुए निर्मला शुभम से बोली)

सच बताऊं क्या तुम्हारी कोई कीमत नहीं है।

हं,,,,,,( निर्मला आश्चर्य के साथ शुभम की तरफ देखते हुए)

अरे मेरा मतलब है कि तुम बिल्कुल अनमोल हो तुम्हारा कोई मोल नहीं है तुम्हें तो बस किस्मत से पाया जा सकता है।

( अपने बेटे की इस तरह की बातें सुनकर निर्मला मन-ही-मन मुस्कुराने लगी।)

 
बात ही बात में गांव आ गया था लेकिन अभी भी निर्मला का गांव दस 15 किलोमीटर दूर था।,,, निर्मला हाइवे के किनारे गाड़ी को धीमे करते हुए।

देखिए सड़क अपने गांव की तरफ जाती है लेकिन अपनी भी तो आप ही सफर तय करना बाकी है अब मुझे गाड़ी को कच्ची सड़क पर उतारनी होगी,,,

( इतना कहने के साथ ही निर्मला खाली सड़क देखकर गाड़ी को दूसरी तरफ घुमा दी और कच्ची सड़क पर धीरे-धीरे उतारने लगी क्योंकि सड़क काफी उबड़ खाबड़ थी सड़क क्या थी एक चोड़ी सी पगडंडी ही थी।

शुभम चारों तरफ अपनी नजरें दोड़ा रहा था चारों तरफ हरियाली फैली हुई थी उसे बहुत ही सुकून भरा नजारा लग रहा था।,, तभी एक झटका सा लगा और शुभम का सिर कार की छत से टकरा गया,,,,।

ओहहहहहह,,,, मां ,,,,,, क्या मम्मी क्या कर रही हो ठीक से चलाओ ना।

अरे ठीक ही तो चला रही हूं देख नहीं रहा इतना बड़ा खड्डा है अच्छा हुआ कि गाड़ी दूसरी तरफ नहीं गई संभल गई,,,,,,( स्टेरिंग घुमाकर गाड़ी को कंट्रोल में करते हुए) तुझे तो बस हल्का सा धक्का लगा है मेरी को गांड का बाजा बज गया है।,,,, घंटों से ड्राइविंग करते करते ऐसा लग रहा है कि मेरी गांड सूज गई है।,,,( निर्मला गाड़ी को धीरे-धीरे आगे बढ़ाते हुए मुस्कुराते हुए बोल रही थी।)

क्या बात है मम्मी बिना गांड मरवाए ही तुम्हारी गांड सुझ गई है।

तो क्या तुझे क्या लगता है गांड मराने के बाद ही गांड सोचती है अरे इतने घंटों से पेट पर बैठे-बैठे जो गांड मरा रही हूं वह क्या कम है।,,,

मुझे क्या पता,, यह तो तुम्हीअच्छी तरह से जानती होगी की गांड किस वजह से सुज जाती है,, मुझे इसमें किसी भी प्रकार का अनुभव नहीं है तुम्हें ज्यादा अनुभव होगा,,,,( शुभम शरारती अंदाज में बोला)

तुझे क्या लगता है कि मैंने कभी गांड मरवाई हूं।

मुझे क्या पता मरवा भी सकती हो मैंने तो आज तक नहीं मारी,,,, तुम्हारी गांड,,,,

तेरी मारने की इच्छा है क्या?( बात ही बात में वहां शुभम के मन की बात जानना चाहती थी,, कि शुभम क्या बोलता है और वैसे भी रात में जिस तरह से गांड के छोटे से छेद पर शुभम ने अपने लंड का सुपाड़ा भिडाया था,,, तभी निर्मला के बदन में अजीब सी झुनझुनाहट मच गई थी। उसके भी दिल के कोने में गांड मारने वाली बात को लेकर चहल पहल मची हुई थी। रात वाले वाक्ये के बाद से निर्मला के मन में भी गांड चुदाई करवाने की इच्छा प्रज्वलित हो रही थी लेकिन उसके मन में घबराहट भी थी इसीलिए वह शुभम के मन की बात जानना चाहती थी।

मेरा क्या है मैं तो कहीं भी डाल दूंगा,,,, मुझे तो तुम्हारी खूबसूरत चीज में से हर जगह से आनंद ही आनंद मिलता है, लेकिन एक बात कहूं तो मेरा मन भी तुम्हारा गांड मारने को करता है। लेकिन तुम जब देखो तब नानुकुर करती रहती हो कभी मौका ही नहीं दी, अगर तुम राजी होती तो कल रात होटल में इसका उद्घाटन कर दिया होता,,,,

( अपने बेटे की इस तरह की बातें और उसका इरादा जानकर उत्तेजना के मारे निर्मला का गला सूखने लगा और वह आश्चर्य के साथ अपने बेटे को देख रही थी और बोली।)

तू पागल हो गया है भला ऐसा कैसे हो सकता है।

क्या नहीं हो सकता?

अरे तू ही सोच उसका छेद कितना छोटा होता है और तेरा लंड कितना मोटा है मैं तो मर ही जाऊंगी,,, ( निर्मला को इस तरह की बातें करने में गुदगुदी हो रही थी उसे अच्छा लग रहा था लेकिन मन ही मन वह अपनी घबराहट को क्लियर कर लेना चाहती थी क्योंकि वह भी अच्छी तरह से जानती थी कि उसके छोटे से छेद में उसके बेटे का मोटा लंड किसी भी हाल में घुस नहीं पाएगा।)

तुम सच में पागल हो मम्मी,,, अरे धीरे-धीरे सब कुछ हो जाएगा ऐसा तो है नहीं कि मैं सीधा लंड टिकाया और उस में डाल दिया,,, मैं भी जानता हूं की तरह से तो मैं तो मजा ले पाओगे और नाम नहीं है ऐसे में सिर्फ दर्द ही होगा और मेरे सारे अरमान धरे के धरे रह जाएंगे।

( अपने बेटे की बात सुनकर वह पूरी तरह से वाकिफ हो गई थी उसका बेटा गांड मारने के लिए पूरी तरह से उत्सुक है। अपने बेटे की उत्सुकता को देखकर उसके बदन में भी हलचल सी मच ने लगी इसलिए वह कैसे कर पाएगा यह जानने के लिए बोली,,।)

तो कैसे करेगा तू इतनी सी छोटे से छेंद में तेरा मोटा लंड जाएगा केसे?

तुम्हारी चुदाई कर कर के इतना तुम्हें समझ गया हूं कि मुझे कब क्या और कैसे करना है। अरे पहले मैं तुम्हारे खूबसूरत बदन से प्यार करूंगा तुम्हारी बुर चाट लूंगा ताकि तुम पूरी तरह से उत्तेजित हो सको,,, फिर अपनी जीभ से तुम्हारी गोरी गोरी गांड का भुरे रंग का छेंद चाटुंगा ताकि तुम एकदम कामोत्तेजित हो जाओ एकदम चुदवासी हो जाओ और खुद ही मेरे लंड को अपनी गांड में डलवाने के लिए बोलो,,,

( निर्मला अपनी नजरों को एक छोटी सी पगडंडी पर दिखाते हुए स्टेरिंग को संभाले हुए अपने बेटे की गर्म बातों को बड़े ही चटखारे लेकर सुन रही थी और उत्तेजित भी हो रही थी,,, और फिर बोली,,,।)

तो क्या ऐसा करने पर तेरा मोटा लंड चला जाएगा?

बुर का छेंद भी को छोटा होता है जब उसमें चला जाता है तो क्या उसमें नहीं जाएगा,,,,

लेकिन बुर तो अपने आप फेलता जाता है उधर का छेद थोड़ी- फेलेगा।।

सब फेलेगा थूक लगा लगा कर गीला कर दूंगा,, अगर उससे भी काम नहीं बनना तो नारियल का तेल लगाकर एकदम लसीला कर दूंगा अब तो आराम से जाएगा बस तुम एक बार हां कह दो,,,

( अपने बेटे की बातें और उत्सुकता देखकर निर्मला भी उत्सुक हो गई इसलिए बोली।)

चल तू बोलता है तो मैं हां कर देती हूं लेकिन कोई भी परेशानी नहीं होनी चाहिए जो भी करना सोच समझ कर करना।

तुम चिंता मत करो मम्मी मै बहुत आराम से करूंगा,,,

( शुभम खुश होता हुआ बोला और अपने बेटे की खुशी देखकर निर्मला भी मन ही मन प्रसन्न होने लगी लेकिन ऐसा बातें सुनकर उसकी बुर में नमी बढ़ने लगी उसे पेशाब सी महसूस होने लगी,,,। आधे से ज्यादा सफर तय कर चुके थे बस तीन 4 किलोमीटर ही घर रह गया था वह मन ही मन सोच रही थी कि घर जाकर ही पेशाब करेगी,,,, इसलिए वहां रुकी नहीं। दोनों गांव के अद्भुत खूबसूरत नजारे का दर्शन करते हुए मन ही मन प्रसन्नता के भाव लिए आगे बढ़ते चले जा रहे थे।

ऊंची नीची पगडंडियों से होते हुए गाड़ी झटका खाते हुए आगे बढ़ती चली जा रही थी और जिस तरह से गाड़ी चल रही थी निर्मला को काफी झटका महसूस हो रहा था जिसकी वजह से ऊसके पेशाब का प्रेशर बार-बार बढ़ता चला जा रहा था।,,, निर्मला से यह प्रेशर बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं हो रहा था। उसे ऐसा लग रहा था कि कभी भी उसकी पेशाब निकल जाएगी वह चारों तरफ नजरें दौड़ाते हुए चली जा रही थी अब तक रास्ते में उसे कोई भी राहगीर नहीं मिला था कोई भी गांव वाला नजर नहीं आ रहा था धूप ही इतनी कड़क थी कि सब लोग अपने-अपने घर में बैठे हुए थे। बार-बार वह अपनी सीट से ऊपर की तरफ अपनी गांड उठा ले रही थी ताकि वह अपनी पेशाब को रोक सके लेकिन सड़क ही ऐसी उबड़-खाबड़ थी कि झटका लगने पर ऐसा लग रहा था कि पेशाब की धार फूट पड़ेगी। आखिरकार तंग आकर उसने एकाएक ब्रेक लगाई। पेड़ के नीचे घनी छांव में गाड़ी रुकने की वजह से शुभम अपनी मां से बोला।

मम्मी यहां तो कोई घर दिखाई नहीं दे रहा है फिर भी यहां गाड़ी क्यों रोक दी,,,,

अरे गाड़ी रोकना मेरी मजबूरी थी क्योंकि वह नहीं रुक रही थी, ( इतना कहने के साथ ही वह कार का दरवाजा खोलकर बाहर आ गई)

क्या रुक नहीं रही थी?

अरे मुझे बड़े जोरों से पेशाब लगी है, अगर गाड़ी नहीं रोकती तो मेरी पेंटी गीली हो जाती।,,,

( अपनी मां की बात सुनकर उसे आश्चर्य से देखते हुए बोला।)

लेकिन मम्मी यहां करोगी कहां?

और यही सड़क के किनारे और कहां (सड़क के थोड़ा किनारे खड़े होते हुए बोली)

मम्मी यहां कोई देख लेगा तो!

अरे कौन देखेगा यहां देख पूरा गांव सन्नाटे मैं है,, कोई नजर आ रहा है ? सब के सब इतनी कड़कती धुप अपने-अपने घर में घुसे बैठे हैं यहां कौन देखेगा?

( इतना कहने के साथ ही निर्मला झट से अपनी साड़ी को कमर तक उठा दी यह देखकर शुभम एक दम से गनगना गया। वह देखता ही रह गया कुछ समझ पाता इससे पहले ही उसकी मां ने अपनी पैंटी को भी जांघ तक सरका कर नीचे बैठ कर मूतना शुरू कर दी। अपनी मां की बड़ी-बड़ी और गोरी गांड को देख कर एक बार फिर से शुभम के तन-बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ गई आज बिल्कुल करीब से वह अपनी मां को पेशाब करते हुए देख रहा था करीब 2 कदम की दूरी पर ही सुभम खड़ा था और दो कदम की दूरी पर है उसकी मां नीचे बैठ कर अपनी नंगी गांड दिखाते हुए मुत रही थी,,

शुभम का लंड पेंट में फिर से खड़ा हो गया। जी तो कर रहा था कि वह भी पीछे से उसी की तरह बैठकर अपने लंड को सीधे उसकी बुर मे उतार कर बैठे बैठे ही चोदना शुरू कर दे। और वह ऐसा कर भी देता अगर ऐसी खुली सड़क पर यह नजारा होने की वजाय कहीं और किसी बंद कमरे में होता तो। अब तक तो वह पूरा का पूरा लंड बुर में डाल दिया होता। शुभम बार-बार इधर उधर नजर दौड़ाकर यह देख रहा था कि कहीं किसी की नजर यहां तो नहीं पहुंच रही है लेकिन उसे पूरी तरह से तसल्ली हो गई थी कि दूर-दूर तक कोई भी नहीं था इसलिए वह भी इत्मीनान से अपनी मां को पेशाब करते देख रहा था। शुभम से भी वहां नहीं जा और वाली वहीं पर खड़ा हो कर के अपना लंड बाहर निकालकर मुतना शुरू कर दिया। दोनों एक दूसरे को देख कर मुस्कुराने लगे।

कुछ ही मिनटों बाद दोनों अपने गांव के घर पहुंच गए घर के लोग बड़े प्यार से दोनों का सत्कार किए।

आज बहुत सालों बाद शुभम अपने गांव आया था साथ ही निर्मला भी काफी सालों बाद ही अपने घर लौट रही थी इसलिए सबसे बहुत खुश होकर मिल रही थी। उसकी दोनों भाभियां भी बड़े गर्मजोशी के साथ निर्मला को अपने गले लगाकर मिल रही थी पास में ही खड़ा शुभम यह सब देख रहा था। तभी शुभम की बड़ी वाली मामी की नजर शुभम पर गई तो वह,,,, निर्मला से बोली,,,

अरे वाह अपना लालू तो कितना बड़ा हो गया है,, गोद में था जब तुम यहां से इसको लेकर गई थी बड़ा प्यारा लगता था और तों और अब तो पहले से भी ज्यादा खूबसूरत हो गया है।,,,,( शुभम खड़ा होकर उन सबको देख कर मुस्कुरा रहा था तभी निर्मला बोली)

यह तुम्हारी बड़ी मामी है बेटा ईनके पैर छुओ,,,,

( इतना सुनते ही शुभम आज्ञाकारी पुत्र की भांती आगे बढ़ा,, और जैसे ही अपनी मामी के पैरों में झुकने को हुआ कि तभी उसकी मामी उसकी बांह पकड़ कर उसे रोकते हुए खड़ा कर दि और तुरंत,,, उसे अपने गले लगाते हुए बोली,,,

मेरा प्यारा बेटा देखो तो मेरे से भी लंबा हो गया है। मेरी आंखे तरस गई थी अपने भांजे को देखने के लिए और यह निर्मला है कि कभी भी यहां आने का नाम ही नहीं लेती मैं तो छोटे देवर की शादी ना होती तो मैं कभी भी अपने शुभम को देख नहीं पाती,,,

( इतना कहते हुए वह शुभम को कसके अपने गले लगाई हुई थी,,, सब कुछ ठीक नहीं चल रहा था कि शुभम के बदन में घंटियां बजने लगी उसकी जांघों के बीच के हथियार में जैसे जान सी आ गई हो तो धीरे-धीरे उठने लगा,,,, और ऊठता भी कैसे नहीं,,,,,, उसकी मामी की दोनों जवानियां उसके सीने पर दस्तक जो दे रही थी,,, शुभम को साथ में सो सो रहा था कि उसकी मामी की बड़ी-बड़ी दोनों गोल चूचियां उसके सीने से दब रही है और वह भी एकदम नरम नरम,,,,, शुभम अब तक वैसे ही खड़ा था उसकी मम्मी ने ही उसे गले लगाई हुई थी लेकिन जैसे ही शुभम को उनकी बड़ी बड़ी चूची यों का एहसास अपने सीने पर हुआ वह उन्हें बाहों में भरे बिना नहीं रह सका,, और वह भी अपने दोनों हाथ को उसकी मामी के पीछे पीठ पर रखकर सहलाने लगा,,, उसकी मम्मी और बाकी सभी को यही लग रहा था कि मामी और भांजे का प्यार दिखाई दे रहा है लेकिन शुभम के मन में कुछ और चल रहा था वह तो अपनी मामी की बड़ी-बड़ी चूचियों को मुंह में भर कर पीना चाहता था। आते ही उसने देख लिया था कि उसकी बड़ी वाली मामी की गांड काफी बड़ी और चौड़ी थी और यही तो शुभम की सबसे बड़ी कमजोरी भी थी। तभी शुभम को अपने से अलग करते हुए,,, उसकी बड़ी मम्मी अपनी बड़ी बेटी तनु से सामान अंदर ले जाने के लिए बोली तो जैसे ही तनु सामान उठाकर कमरे में जाने लगी वैसे ही शुभम की नजर तनुं पर पड़ी,,, तनु की लंबाई करीब करीब 5:30 फीट की थी,,,, गोरा रंग पतला बदन,,, गांड पर का घेराव अभी ज्यादा नहीं उभरा,,, था,,, फिर भी बदन पर मादकता छाई हुई थी कुल मिलाकर बेहद खूबसूरत लग रही थी। पीछे से ही जब यह हाल था तो आगे से तो पूरी तरह से धमाका नजर आती होगी,,, तनु को पीछे से देखते हुए शुभम यही सोच रहा था तब तक वह कमरे के अंदर चली गई,,, तभी निर्मला ने शुभम को उसकी छोटी मामी के पैर छूने के लिए बोली और शुभम छोटी मामी की तरफ बढ़ा छोटी मां की और भी ज्यादा खूबसूरत लग रही थी गोरी चिट्टी भरे बदन की मादक शरीर वाली मामी को देख कर शुभम का दिल जोरों से ऊछलने लगा,,, शुभम को लगा की यह मामी भी उसे अपने सीने से लगाएगी तो इनकी भी दोनों जवानी को अपने अंदर महसूस कर पाएगा,,, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ वह बिना गले लगा ही आशीर्वाद दे दी। शुभम घर के बाकी लोगों से भी बड़े प्यार से मिला घर के लोग सभी खुश थे शादी का माहौल था इसलिए घर पर धीरे-धीरे मेहमान इकट्ठा होना शुरू हो गए थे।

निर्मला बेहद खुश नजर आ रही थी, और खुश होती भी क्यो नहीं बरसों बाद तो अपने मायके आई।थी,,,

सुदामा और निर्मला नहा धोकर खाना खाकर आराम करने चले गए घर काफी बड़ा था और अलग-अलग कमरे भी बने हुए थे इसलिए निर्मला और शुभम को एक कमरा दे दिया गया यह वही कमरा था जिसमे निर्मला अपने स्कूल के दिनों में पढ़ाई करती थी और रहती भी थी बरसों बाद उसी कमरे में आकर निर्मला को बेहद सुकून महसूस हो रहा था। निर्मला और शुभम काफी थक चुके थे इसलिए नहाने के बाद थोड़ा बदन हल्का हुआ और खाना खाते ही दोनों ऐसा सोए कि सुबह में ही उनकी नींद खुली,,,,।

निर्मला तो पहले से ही बिस्तर से उठकर बाहर जा चुकी थी।,,, हंस हंस के आ रही बातों की आवाज सुनकर शुभम की भी नींद खुली तो वह बिस्तर से उठ कर बैठ गया और कान लगाकर सुनने लगा कि कुछ औरतों की आवाज कहां से आ रही ं उठकर,,,, सुबह के 8:00 बज रहे थे वह घड़ी की तरफ देखकर बिस्तर पर से खड़ा हो गया और बाहर जाने को हुआ ही था कि बिस्तर के पास की बंद खिड़की के करीब से आवाज आ रही थी वह वापस मुड़कर खिड़की के पास आया और हल्के से खिड़की को खोलकर देखा तो बाहर का नजारा देखकर दंग रह गया। घर के पीछे कुछ औरतें नहा रही थी वह हमें कैसे खिड़की को खोला था जिसमें से उसे साफ नजर आ रही थी कि उसकी बड़ी बड़ी मामी और छोटी मामी के साथ-साथ तनु और जो कि हैंड पंप चला रही थी और उसकी मां भी वहीं बैठ कर नहा रही थी। लेकिन हैरान कर देने वाली बात यह थी कि,,,, तीनो के तीनो अर्धनग्न अवस्था में नहा रही थी तनु का बदन भीग चुका था, जिसकी वजह से उसका ड्रेस उसके बदन से चिपक गया था और वह जल्दी-जल्दी हेडपंप चला रही थी,,,,, शुभम साफ तौर पर देख रहा था कि उसकी मां केवल पेटीकोट को अपने बदन से लपेटी हुई थी जो कि ठीक से लिपटी हुई भी नहीं थी भीगने की वजह से उसके मखमली बदन से नीचे की तरफ सरक रही थी। निर्मला की नंगी चिकनी पीठ शुभम की आंखों के सामने सुनहरी धूप में चमक रही थी। उसकी दोनों मामीयों का भी यही हाल था। लेकिन दोनों मामलों की नंगी चूचियां जोकि पके हुए आम की तरह बड़ी-बड़ी थी वह साफ तौर पर नजर आ रही थी क्योंकि दोनों ने पेटीकोट को ऊपर की तरफ नहीं खींची थी,,, जिससे दोनों मामी की गोल-गोल जवानियां आंख ऊठाए खिड़की की तरफ ही देख रही थी। छोटी मामी का रंग एकदम गोरा था और बड़ी मामी का रंग थोड़ा दबा हुआ था लेकिन फिर भी मैंने इतनी जबरदस्त लग रहे थे कि छोटी मा्मी से भी कई गुना ज्यादा सेक्सी बड़ी मामी लग रही थी। दोनों बाल्टी में से बारी बारी से मग भर भर कर पानी को अपने बदन पर डाल रहीे थी। गीले कपड़ों में तनु की जवानी साफ नजर आ रही थी सीने पर के दोनों चूचियां अभी नींबू के ही आकार की थी यह शुभम अच्छी तरह से समझ गया था बाहर का नजारा देखकर शुभम का लंड पूरी तरह से पेंट में खड़ा हो गया था। एक साथ चार चार खूबसूरत जवानी से भरपूर औरतों के दर्शन और वह भी अर्धनग्न अवस्था में करके शुभम अपने आप को धन्य समझ रहा था। गांव आने से उसका जरूर कुछ ना कुछ फायदा होने वाला है ऐसा उसे लगने लगा था अगर किस्मत ने चाहा तो अपनी मां के साथ साथ 3 दिन जवानी का स्वाद जरूर चख पाएगा ऐसा सोचकर उसके लंड कि अकड़ और ज्यादा बढ़ने लगी थी।। अपनी बड़ी वाली मामी की हरकत देखकर उसके बदन में उत्तेजना की चीटियां चिकोटी काटने लगी थी,,, क्योंकि बार-बार वह बाल्टी से मग में पानी भरकर उसे अपने पेटीकोट के अंदर डालते थे लेकिन साथ ही एक हाथ अंदर की तरफ डालकर अपनी बुर को रगड़ भी रही थी, ऐसा लग रहा था कि जैसे वह उसे साफ कर रही थी,,, ओर यह देखकर निर्मला और उसकी छोटी मामी के साथ साथ तनु भी हंस रही थी वह लोग आपस में कुछ बातें कर रहे थे जो कि ठीक से सुनाई नहीं दे रहा था। वह लोग क्या बातें कर रहे हैं यही सुनने के लिए वह अपने लंड के साथ साथ अपना कान भी खड़ा कर लिया था।

हल्की सी खुल़ी खिड़की में से शुभम अपनी नजरों को और कान को चौकन्ना कर के बाहर के नजारे का आनंद लूट रहा था।,, वैसे भी इस तरह से अर्धनग्न अवस्था में औरतों को नहाते हुए देख पाना भी बेहद आनंद दायक और किस्मत की बात होती है यह सबके हिस्से में नहीं आती।,,, शुभम की किस्मत जोरों पर थी एक तो वैसे भी पहले से ही उसे बेहद खूबसूरत औरत का साथ मिल चुका था जिसके साथ हुआ हर पल संभोगरत होकर धीरे-धीरे उसके मादक रस को अपने अंदर उतार रहा था। और आपकी आंखों के सामने 3 खूबसूरत नारियां अर्धनग्न अवस्था में नहाते हुए अपनी जवानी का जलवा बिखेर रही थी। जिसमें उसकी मां भी शामिल थी यह जवानी का जलवा शुभम के लिए बेहद लजीज हलवा था। जिसको खाने के लिए शुभम तड़प रहा था लेकिन अभी यह तय नहीं था कि यह हलवा कब उसकी थाली में आने वाला है।,,, शुभम ने आंखों से ही इन तीनों हलवो की मिठास को महसूस कर लिया था,,।

आम का सीजन भी शुरू हो गया था लेकिन पेड़ पर मिलने वाले आम की मिठास से शुभम को कोई मतलब नहीं था। क्योंकि आम से भी ज्यादा स्वादिष्ट और मजेदार तो उसे चुचियों में आ रहा था। आम से ज्यादा तो वह अब तक चुचियों को चूस कर उनका रस पी चुका था। वैसे भी या उम्र ही चूचियों को दबा दबा कर पीने की होती है ना की आम को,,, क्योंकि जितना अधिक संतुष्टि चूचियों की नरमाहट और ऊसकी गोलाई में मिलती है उतना मजा ना तो आमको दबाने में आता है और ना ही उसके रस में।

शुभम एकटक खिड़की से बाहर देख रहा था जहां पर उसकी मां और उसकी दोनों मामियां और उसकी चचेरी बहन नहाने का आनंद ले रही थी।,, तभी शुभम के कानों में उसकी मां की आवाज सुनाई दी जो कि उसकी बड़ी मामी से बोल रही थी,,,

भाभी बहुत रगड़ रगड़ कर साफ कर रही हो लगता है कल रात को भैया ने कुछ ज्यादा ही माल निकाल दिया,,,,

अरे नहीं ऐसी कोई बात नहीं है बहुत दिन हो गए थे, साफ करें तो आज सबके साथ नहाते हुए साफ कर रही हूं।,,,

( शुभम तो दोनों की बातें सुनकर एकदम सन्न रह गया क्योंकि पास में ही तनु मुस्कुराते हुए हेंडपंप चला रही थी लेकिन दोनों को इस बात की बिल्कुल भी परवाह नहीं थी की उनकी बड़ी लड़की उनके साथ है फिर भी वह लोग इस तरह की बातें कर रही थी,,, शुभम का लंड पेंट में जोर मारने लगा था उसे क्या था उसे इस बात की बिल्कुल भी परवाह नहीं थी कि वह लोग तनु की मौजुदगी में इस तरह की बातें करते हैं उसे तो बस मजा लेने से मतलब था। और आंखों को सेंकते हुए वह मजा भी ले रहा था।,,, तभी ऊसकी छोटी मामी अपने पैर को ब्रश से रगड़ते हुए बोली।

दीदी युं छिपा छिपाकर क्यों रगड़ रही हो हमें भी तो दिखाओ कौन सा ऐसा खजाना है जिस पर जंग लग गया है और इस तरह से रगड़ रगड़ कर साफ करना पड़ रहा है।

अरे मेरा क्या अलग है मेरे पास भी वही है जो तुम लोगों के पास है देखना हो तो अपना अपना खोलकर देख लो,, ( इतना कहकर वह हंसने लगी,, तनु भी हंस रही थी उसे इस बात की बिल्कुल भी परवाह नहीं थी किसकी मम्मी इस तरह की अश्लील मजाक कर रही हैं। सभी निर्मला की आवाज शुभम के कानों में पड़ी जो कि तनु को ब्रश पकड़ाते हुए,,, पीठ मलने का इशारा करते हुए बोली,,,।

हां भाभी छोटी भाभी ठीक कह रही है मैं भी देखना चाहती हूं कि मेरी भाभी की वो कैसी दिखती है।

 
क्या निर्मला तुम भी,, सबके पास एक जेसी ही तो है मेरी पास क्या कोई खास है।,,,

भाभी तुम बहुत खास हो इसीलिए तो मैं कह रही हूं,,,

( निर्मला तनु को थोड़ा पीठ के और नीचे ब्रश रगड़ने के लिए इशारा करते हुए बोली जिसकी वजह से तनु पीठ के नीचे रगड़ने लगी लेकिन पेटीकोट एकदम कमर के नीचे तक सरक गई जिसकी वजह से निर्मला की लाल रंग की पेंटिं साफ नजर आने लगी अपनी मां की लाल रंग की पेंटिं को देखकर शुभम का लंड ठोकर मारने लगा,,,, शुभम देखते ही देखते उत्तेजना की ओर अग्रसर होता जा रहा था वैसे भी जिंदगी में पहली बार वह इस तरह का नजारा देख रहा था एक साथ चार चार खूबसूरत जवानी का रस हेडपंप के नीचे बिखर रहा था जिसे लूटने वाला केवल वही था।,,,)

रहने दो निर्मला मेरी बच्ची खड़ी है वरना मैं सच में तुम्हें दिखा देती,,,

तो दिखा दो ना तनु को इससे कोई एतराज नहीं है,,, क्यों तन्हा तुम्हें कोई एतराज तो नहीं है ना वैसे भी हम औरतों को औरतों के साथ थोड़ी बहुत मस्ती करने की झूठ तो होनी ही चाहिए,,,,( तनु को इसमें कोई आपत्ति नहीं थी वह हां में सिर हिला कर अपना मंतव्य बता चुकी थी,,,, सबकी सहमति हो जाने पर शुभम का दिल जोरों से धड़क रहा था उसे लगने लगा था कि आज वह उसकी बड़ी मामी की रसीली बुर के दर्शन कर लेगा,,,,, वह खिड़की के पल्लू के ओट से अपनी नजरें टिकाएं बाहर के नजारे का मजा लूट रहा था ।अपने आप पर सब्र ना होने की वजह से उसने अपने पजामे को नीचे सरका कर अपने लंड को हाथ में लेकर हीलाना शुरू कर दिया,, क्या करें ऐसा गर्म नजारा देखकर तो किसी का भी लंड पिघल जाए,, वह तो शुभम था जो कि मर्दाना जोश से भरा हुआ था इसलिए अभी तक उसका लंड पीघला नहीं था। शुभम को उत्सुकता से बाहर की तरफ देख रहा था उसे अब उस पल का इंतजार था जब उसकी बड़ी मामी,,, अपना पेटीकोट हटाकर अपनी जांघों के बीच का वह मुख्य द्वार का दर्शन कराएंगी जिसमें से गुजरने के लिए ऊसका लंड खड़ा हो गया था

तभी उसकी बड़ी मामी ने जो कहा उसे सुनकर शुभम के तन-बदन में उत्तेजना कि चीटियां चुटकी काटने लगी।,,,

चलो ठीक है मैं दिखा दूंगी,,, लेकिन पहले मेरी एक शर्त है अगर तुम लोग मानो तो,,,, निर्मला और तुम तनु नहीं,,

कैसी शर्त (शुभम की छोटी मामी बोली)

यही कि तुम दोनों को भी अपनी अपनी दिखानी होगी,,,

चलो मंजूर है (झट से शुभम की मां बोल पड़ी,, अपनी मां कि इस तरह के उतावलापन देखकर शुभम को जरा भी अचरज नही हुआ,,, क्योंकि वह अच्छी तरह से जानता था कि उसकी मां कितनी ज्यादा बेशर्म हो चुकी है लेकिन फिर भी इसमें भी सुभम का ही फायदा था एक साथ तीन तीन रसीली बुर के दर्शन करने का मौका बड़े भाग्य से मिलता है। इसलिए तो शुभम अपने आप को बड़ा भाग्यशाली समझ रहा था अब तो उसका दिल और जोरो से धड़कने लगा था। वह धीरे-धीरे अपने लंड को मुट्ठी में भरकर हिला रहा था और कल्पना कर रहा था कि,,, उसका मोटा लंड ऊसकि बड़ी मामी की बुर के अंदर बाहर हो रहा है इसलिए उसके बदन में उत्तेजना कुछ ज्यादा ही अनुभव रही थी।,,,तभी वह देखा कि उसकी बड़ी मामी एकदम से खड़ी हो गई,, उसके बदन पर कुछ भी नहीं था ऊपर की बड़ी बड़ी चूचियां एकदम साफ नजर आने लगी सूचियों का साइज उसकी मां की चुचियों की तरह ही था,,,, लेकिन निर्मला की चुचियों का आकार एकदम खरबूजे की तरह गोल था,,, और उसकी बड़ी मामी की चूचियों का आकार बड़े बड़े पपीते की तरह था। जिसे मुंह में भरकर पीने के लिए सुभम बेताब हो गया। वह ध्यान से अपनी मामी के खूबसूरत बदन को देख रहा था हल्का सा सांवला रंग था लेकिन बड़े ही मादक बदन की मालकिन थी। थोड़ी सी मोटी सी लेकिन बहुत खूबसूरत लग रही थी,,, पानी से पूरा बदन भीगा हुआ था कमर के ऊपर का हिस्सा पूरी तरह से नग्न था। ऊसके खूबसूरत बदन पर मात्र केवल पेटीकोट ही था जो कि पानी में भीग कर कमर से भी नीचे सरक गया था। जहां से उसकी कमर के नीचे का और जांघों के बीच के द्वार के ऊपरी हिस्से का कट़ाव साफ नजर आ रहा था। इतना देखते ही शुभम की हालत खराब होने लगी उसकी सांसो की गति तेज होने लगी और लंड पर ऊसका हाथ बड़ी तेजी से चलने लगा। बड़ी मामी पर शुभम की छोटी मामी और उसकी मां के साथ-साथ खुद उसकी बेटी की भी नजर बराबर बनी हुई थी वह निर्मला की पीठ को ब्रश से रगड़ते हुए अपनी मां के खूबसूरत बदन को देख कर मुस्कुरा रही थी। सुबह की बड़ी मामी मुस्कुरा रही थी बारी-बारी से तीनों की तरफ देख रही थी और अपने दोनों हाथ से अपनी सरकती हुई पेटीकोट को पकड़कर धीरे-धीरे नीचे की तरफ सरकाने लगी,,, जैसे-जैसे निर्मला की पेटीकोट नीचे की तरफ सरक रही थी।

जैसे जैसे शुभम को उसकी बड़ी मामी की टांगो के बीच का त्रिकोण आकार वाला स्थल नजर आ रहा था जिसे देख कर उसके तन-बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ रही थी,,, देखते ही देखते उसकी बड़ी मामी ने झटके से अपनी पेटीकोट को एकदम नीचे सरका कर पूरी तरह से नंगी हो गई,,,,। यह देखकर शुभम के होश उड़ गए उसके लंड का कड़क पन बढ़ने लगा। यह नजारा पूरी तरह से उत्तेजना से भरा हुआ था क्योंकि परिवार की औरतें खुद उनकी बड़ी लड़की अपनी मां को पूरी तरह से नंगी होते हुए देख रही थी और मुस्कुरा रही थी शायद उसे यह सब अच्छा लग रहा था तभी तो वह भी कोई एतराज नहीं जता रही थी। वैसे भी गांव में इस तरह के मजाक का स्तर परिवार में औरतों के बीच होता ही रहता है इसलिए उन लोगों के लिए कोई बड़ी बात नहीं थी लेकिन शुभम के लिए यह बेहद अद्भुत और आश्चर्यजनक वाली बात थी लेकिन मादकता से भरा हुआ एहसास भी था। जिसके एहसास में वह पूरी तरह से अपने आप को घोल दे रहा था।,,,

लो देख लो बहुत देखने के लिए तड़प रही थी ना तुम दोनो,,, ( मुस्कुराते हुए शुभम की बड़ी मामी बोली तब जाकर शुभम फिर से गौर से देखने लगा,,, उसे इस बात का एहसास हो गया कि उसकी मां ने अंदर पेंटी नहीं पहनी थी अंदर से बिल्कुल नंगी ही थी। मोटी मोटी जांघे एकदम चिकनी जिसपर पानी की बूंदे मोतियों की तरह फिसल कर नीचे गिर रही थी। शुभम की नजर जांघो से होती हुई,,, उसकी टांगों के बीच के उस पतली दरार पर टिक गई जोकि,,, झाटों के झुरमुट में छिपी हुई थी,,, बुर के पर ढेर सारे घुंघराले बाल उगे हुए थे,,, जिसमें से दो की गुलाबी पत्तियां ऐसा लग रहा था कि अपने दोनों हाथ से झांटो के झुरमुट को हटाकर उसमें से झांक रही हो,,,, बेहद उन्माद से भरा हुआ दृश्य था। आज पहली बार सुबह औरत की बुर पर इतने सारे बाल देख रहा था जिसे देखते ही वह समझ गया कि मामी शायद सफाई का ध्यान नहीं रखती लेकिन फिर भी उसे बोल के ऊपर इतने ज्यादा काले घुंघराले बाल शोभनीय लग रहे थे।

उसके हाथ की गति धीरे-धीरे बढ़ती जा रही थी,,, उसकी छोटी मामी के साथ साथ उसकी मां भी हंसते हुए बड़ी मामी की बुर का मजा ले रही थी शादी उसकी बड़ी लड़की भी बड़े ध्यान से देख कर मुस्कुराते हुए इधर-उधर शर्मा कर अपनी नजर फेर ले रही थी तनु की इस हरकत को देखकर शुभम की छोटी मामी बोली,,,।

देख लो तनु अपनी मां की खूबसूरत बुर को, इस उम्र में भी वह तुम्हारी बुर को भी टक्कर मार रही हैं,,

तुम ही देखो चाहती मैं तो जा रही हूं कपड़े सुखाने( इतना कहकर तनु वहां से कपड़ों का ढेर लेकर चली गई क्योंकि वह जानती थी कि यह तीनों मिलकर अश्लील मजाक करने वाले हैं और उसे थोड़ी शर्म महसूस हो रही थी तनु के जाते ही निर्मला ने तुरंत अपने हाथ आगे बढ़ा कर,,, झट से अपने बीच वाली उंगली से शुभम की मामी की बुर की गुलाबी पत्ती को कुरेदते हुए बोली,,,,

वाह भाभी अभी तक तुम्हारी बुर टाईट है,,, भैया तो तो मजा आ जाता होगा तुम्हें पेलने मैं,,,

( इतना कह कर निर्मला के साथ साथ उसकी छोटी नानी भी हंसने लगी लेकिन शुभम अपनी मां की यह बात सुनकर एकदम से उत्तेजित हो गया वह अपनी मां का छिनार पन देखकर और भी ज्यादा मदहोश होता जा रहा था।)

अरे तुम्हारे भैया को खेती से फुर्सत मिले तब ना मेरे ऊपर ध्यान दें,, अगर मेरे ऊपर ध्यान देते तो इस तरह से यह खेती की (अपनी बुर की तरफ उंगली से इशारा करते हुए) कटाई हो गई होती हो ओर यह जमीन भी एक दम चिकनी नजर आती है।)

ओह तभी इतनी टाइट है लगता है महीनों से इसमें कुछ नया नहीं है ।

हां यार क्या करूं कामकाज से फुर्सत मिले तब ना इतना कहने के साथ ही वह फिर से पेटीकोट को ऊपर की तरफ खींच कर नहाना शुरू कर दी और नहाते हुए बोली,,,

चल अब तू दिखा (अपनी देवरानी की तरफ इशारा करते हुए बोली)

नहीं मैं नहीं दिखाऊंगी,,,

चल अब नाटक मत करो मैंने जिस तरह से दीखा दी उसी तरह से तुमको भी दिखाना पड़ेगा वरना,,,

नहीं दीदी मैं नहीं दिखाऊंगी मुझको शर्म आती है,,,

( अपने बदन को सीकोड़ते हुए बोली।)

क्या भाभी क्यों नाटक कर रही हो देखो बड़ी भाभी ने कितने आराम से दिखा दी तुम्हें दिखाने में क्या हो रहा है।( शुभम अपनी मां की बात सुनकर मस्त हुआ जा रहा था क्योंकि जिस तरह से वह उत्साहित थी उसकी ओर देखने के लिए उससे कहीं ज्यादा गुना उत्साहित वह खुद था अपनी मामी की बुर देखने के लिए,,)

चलो दिखाओ नहीं तो हम लोगों को जबरदस्ती करना पड़ेगा,,,

नहीं मैं नहीं दिखाऊंगी,,,

भाभी यह ऐसे नहीं मानेंगेी लगता है जबरदस्ती करना ही पड़ेगा,,,

( इतना कहने के साथ ही निर्मला ने अपनी छोटी भाभी की पेटीकोट को पकड़कर खींचना शुरु कर दी साथ ही उसकी बड़ी भाभी भी उसका साथ देते हुए दूसरी तरफ से उसकी पेटीकोट पकड़ कर पीछे की तरफ खींचना शुरु कर दी वह बैठकर अपनी पेटीकोट को बचाने की कोशिश कर रही थी लेकिन दो औरतों की ताकत के आगे वाला उसकी क्या चलने वाली थी,,,। वह अपने आपको बचा नहीं पाई और दोनों ने मिलकर उसकी पेटीकोट को खींचकर उसे भी पूरी तरह से नंगी कर दी शुभम की आंखें फटी की फटी रह गई क्या गजब का नजारा उसकी आंखों के सामने पेश हो रहा था,,, 2 औरतें मिलकर एक औरत को नंगी कर रहीं थी,,, उसकी छोटी मामी नीचे बेठी की बेठी रह गई,,, शुभम अपनी छोटी मामी को पूरी तरह से नंगी देख रहा था एकदम गोरा बदन था खरबूजे जैसी मगर छोटी चूचियां बेहद खूबसूरत लग रही थी। लेकिन जिस चीज को देखने के लिए उसका मन तड़प रहा था वह तो वह अपनी जांघो को सिकोड कर छुपाई हुई थी,,, शुभम इस इंतजार में था कि कब ऊसकी छोटी मामी,,, खड़ी होकर अपनी रसीली बुर के दर्शन करवाएेगी लेकिन जिस तरह से वह जिद कर रही थी ऐसा लग नहीं रहा था कि उसके बुर के दर्शन हो पाएंगे,,, लेकिन ऐसा लग रहा था कि किस्मत शुभम का हि साथ दे रही थीै तभी तो जैसे उसकी मन की बात को जानते हुए उसकी मां और उसकी बड़ी मामी उसकी एक एक टांग को खींच कर अलग करने लगी,, और अगले ही पल दोनों मैं मिलकर छोटी मामी की टागों को अलग कर दी जिससे कि,, जैसा नजारा सुभम देखना चाहता था ठीक वैसा ही नजारा उसकी आंखों के सामने नजर आने लगा,,,

शुभम साफ साफ देखता रहा था कि उसकी छोटी मामी की बुर ऊसकी आंखों के सामने सुनहरी धूप में चमक रही थी,,, और वह यह देखकर हैरान था कि जहां बड़ी मामी की बुर बालों से भरी हुई थी वही छोटी मामी की बुर तो एकदम चिकनी थी ऐसा लग रहा था कि कल रात को ही क्रीम लगाकर अपनी बाल को साफ की हो,,, क्या देख कर उसकी मां भी हैरान थी तभी तो वह बोली,,,

वाह भाभी तुम तो छुपे रुस्तम निकली,,, बड़ी भाभी की बुर पर बाल हीलाते बाल है और तुमने तो अपनी बुर को चीकनीं करके रखी हो,,,,, लगता है कि छोटे भैया तुम्हारी रोज लेते हैं तभी तो देखो कितनी हरी-भरी लग रही है तुम्हारी बुर (अपने दोनों हाथों से जांघो को खोलते हुए,,,, कुछ भी कहने की बजाए छोटी मामी शर्मा रही थी और उसकी शर्म को देख कर कुछ भी कहने की जरूरत नहीं थी,,,।)

चलो अब तो इसने भी दिखा दी अब तुम्हारी बारी है निर्मला रानी,,,,

हां,,,,हां,,,,, जरुर दिखाऊंगी मैंने कब ईनंकार र्की हूं,,,( इतना कहने के साथ ही निर्मला खड़ी हो गई,,, शुभम अच्छी तरह से जानता था कि पिछले कुछ महीनों में उसकी मां के अंदर बहुत कुछ बदल चुका है तभी तो वह इस तरह से अपनी बुर दिखाने के लिए तैयार हो गई

निर्मला जिस तरह से खरीदें शुभम को सिर्फ उसकी पीठ ही नजर आ रही थी उसके कमर के नीचे तक पेटीकोट सरक गया था जिससे उसकी लाल पेंटिं ना जाने कब से नजर आ रही थी,,, उसकी दोनों मां मियां निर्मला की खूबसूरत गोरे बदन को देखकर अपनी आंखें गरम कर रहेी थी, क्योंकि वह लोग भी अच्छी तरह से जानती थी कि निर्मला बेहद खूबसूरत औरत है उसका पूरा बदन और के शरीर की बनावट बेहद कामुक है। देखते ही देखते निर्मला अपने पेटिकोट को नीचे सरका दी,, शुभम अच्छी तरह से देख पा रहा था कि उसके मां के गोरे बदन पर सिर्फ लाल रंग की पेंट ही रह गई थी जिसे देख कर, दोनों की आंखों में चमक आ गई थी तुम दोनों के चेहरे की उत्साह को देखकर शुभम को लग रहा था कि उसके गोरे बदन को देखकर दोनों आश्चर्यचकित हो गई है लेकिन तभी अपनी बड़ी मामी की बात सुनकर वह भी दंग रह गया,,।

अरे निर्मला तुमको साड़ी के नीचे भी कच्छी पहनती हो,,, क्या हमेशा ही पहनती हो या सिर्फ आज ही पहनी हो,,,

भाभी यह कच्छी और ब्रा तो हमेशा पहनती हूं,,,( इतना कहने के साथ ही निर्मला पेंटी के दोनों छोर को अपने हाथ से पकड़ ली,,, शुभम को समझ नहीं आ रहा था कि कच्ची किसे कहते हैं लेकिन जब उसकी मां ने ब्रा और कच्छी एक साथ बोली तो वहं समझ गया कि पेंटी को भी कच्छी कहा जाता है,,,। कच्छी शब्द सुनकर शुभम को बड़ा अजीब लग रहा था,,, लेकिन इस शब्द से उसके तन-बदन में कामुकता की लहर दौड़ में लगी थी और वह जोर जोर से मुठ मारने लगा था।,,,

निर्मला तुमको यह सब पहनना अच्छा लगता है।( उसकी बड़ी मामी आश्चर्य के साथ बोली और यह बात तो सुभम को भी बेहद आश्चर्यजनक लग रही थी।)

अरे तो क्या भाभी औरतों को तो यह सब पहनना चाहिए,,,

( इतना कहने के साथ ही वह धीरे-धीरे नीचे की तरफ अपनी पेमटी को सरकाने लगी। )

पर यहां गांव में तो बहुत सी औरतें नहीं पहनती हम खुद नहीं पहनती हैं,,,।

( अपनी मामी की बात को सुनकर शुभम को यह समझने में बिल्कुल भी देर नहीं लगेगी तभी यह दोनों पेटीकोट के नीचे एकदम नंगी थी क्योंकि यह दोनों पेंटी पहनती ही नहीं थी,,,।)

चलो अच्छी बात है तुम कहती हो तो हम दोनों भी पहनेंगे लेकिन हमें भी तुम्हारी तरह ही अच्छी सी ब्रा और पैंटी दे कर ही जाना।,,,

( शुभम की मम्मी उत्सुकता से बोली)

ले लेना भाभी मैं तुम दोनों को देकर जाऊंगी,,,, लेकिन सबसे पहले मैं जो दिखा रही हूं वह तो देख लो,,,,

अरे तू तो एकदम बेशर्म हो गई है ऐसी तो बिल्कुल भी नहीं थी लेकिन अब देखो कैसी अपनी बुर देीखाने के लिए लालायित हुए जा रहीे हैं।

निर्मला अपनी भाभी की बात सुनकर थोड़ा झेंप सी गई,,,, जल्दी ही उसने इस बात पर गौर कर ली कि वास्तव में वह एकदम बेशर्मो वाली हरकत कर रही थी,,,

फिर भी वह बात को संभालते हुए बोली,,,।

। ऐसी बात नहीं है माफी अब तुम दोनों जने दिखा दी मगर मैं नहीं दिखाऊंगी तो तुम दोनों जन मेरे बारे में क्या सोचोगी और वैसे भी तो मैं कहां किसी आदमी के सामने दिखा रही हो अपनी भाभियों को ही तो दिखा रही हूं और एक औरत को दिखाने में कैसी शर्म,,,,, चलो अच्छा जाने दो नहीं दिखाती,, इतना कहने के साथ ही जानबूझकर वह नीचे झुक कर अपनी पेटीकोट को ऊपर उठाने को हुई ही थी की शुभम की छोटी मामी बोली,,,,

नहीं है तो चीटिंग है मुझसे को जबरदस्ती दीखवावाली और खुद की बारी आई तो बहाना कर रही हो,,,

हां निर्मला ऐसा बिल्कुल भी नहीं चलेगा चलो जल्दी से दिखाओ,,,,

दिखा तो रही थी तुम ही सब कह रही हो कि बेशर्म हो गई है,,,

अच्छा नहीं कहेंगे बस अब तो दिखा दो,,,,

ठीक है कहती हो तो दिखा देती हूं । (इतना कहने के साथ ही वह पेटीकोट को वापस छोड़ दी,, शुभम का हांथ जोरों से चल रहा था अच्छी तरह से जानता था कि उसकी मां की बुर बेहद हसीन और खूबसूरत है और उस पर बालों का तो नामोनिशान नहीं था क्योंकि हमेशा वह क्रीम से साफ ही रखती थी,,,, तीनों की बातों ने शुभम के बदन में कामोत्तेजना की जबरदस्त लहर को भड़काने का काम कर रही थी। वह जोर जोर से मुट्ठ मार रहा था। तभी उसकी आंखों के सामने उसकी मां अपनी पेंटी को पकड़कर नीचे की तरफ सरकाने लगी,,, वैसे तो शुभम को सिर्फ उसकी मां की पीठ की तरफ का ही हिस्सा दिख रहा था और वैसे भी उसे इस समय उसकी मां की बुर भले ही ना दिखाई देती हो उसके दिलो-दिमाग पर तो बस उसकी बुर।ही छाई हुई थी इसलिए देखने की जरूरत नहीं थी। देखते ही देखते निर्मला ने अपनी पैंटी को पूरी तरह से उतारकर एकदम नंगी हो गई। निर्मला को संपूर्ण नग्नावस्था में देखकर शुभम की दोनों मामियो का मुंह खुला का खुला रह गया,,,

बाप रे निर्मला तुम्हारी बुर तो एकदम खूबसूरत और कितनी चिकनी है एकदम मक्खन की तरह मेरा दिल तो कर रहा है कि जीभ से चाट लुं।

तो चाट लो ना रोका किसने है।

सच में तुम्हारे जितनी खूबसूरत बुर हमारी होती तो हमारे पति दिन-रात हमसे चिपके हुए होते।

( इतना सुनकर निर्मला अपनी खूबसूरती की तारीफ अपनी ही भाभियों के मुंह से सुनकर मन ही मन प्रसन्न होने लगी,, और शुभम अपनी मामी की मस्त बातों को सुनकर जोरदार प्रेसर के साथ लंड की पिचकारी दीवार पर दे मारा,,,, शुभम झड़ चुका था।,,, और तीनो भी नहा कर जा चुकी थी।

 
इधर शुभम और निर्मला गांव पहुंच चुके थे और दूसरी तरफ शहर में अशोक को जिसका इंतजार था वह भी पहुंच चुकी थी उसकी छोटी बहन मधु,,,। अशोक को तो खुला दौर मिल गया था क्योंकि कुछ दिन तक घर पर उसके और उसकी छोटी बहन मधु के सिवा और कोई भी नहीं था इसलिए अशोक पूरी तरह से अपनी छोटी बहन के साथ गुलछर्रे उड़ा लेना चाहता था बिना किसी रोक-टोक के,,, और घर पर आते ही अशोक अपनी छोटी बहन मधु को पीते अपने बेडरूम में लेकर गया और जाते ही अपने साथ-साथ उसके भी कपड़े उतारकर उसे पूरी तरह से नंगी कर दिया,,,, मधु को यह सब अच्छा नहीं लग रहा था लेकिन क्या करें वह मजबूर हो चुकी थी क्योंकि उसके बड़े भाई अशोक के सिवा उसका कोई सहारा नहीं था और वह भी अच्छी तरह से जानती थी कि उसका बड़ा भाई उसकी मदद बस उसके बदन के एवज में ही कर सकता है,,,, इसलिए उसके पास उसके बड़े भाई का साथ देने के सिवा दूसरा कोई रास्ता नहीं था। वह भी बिस्तर पर उसका साथ देने लगी बहुत दिनों से अशोक भी प्यासा था क्योंकि उसने अपनी सेक्रेटरी को छोड़ दिया था। इसलिए ऊसके लंड में भी बहुत खुजली हो रही थी। मधु जैसी खूबसूरत जवानी को पाकर उससे रहा नहीं गया और वह अपने लंड को उसके मुंह में डाल दिया,,, मधु भी जवान थी वह जानती थी कि उसके बड़े भाई के लंड में इतना दम नहीं है उसे तो मोटा अोर बड़ा लंड चाहिए था लेकिन फिर भी कर भी क्या सकती थी उसकी बुर मे भी बहुत दिनों से कुछ गया नही था।,,, इसलिए थोड़ी बहुत प्यास तो उसके मन में भी थी। इसलिए वह भी अपने भाई का साथ देते हुए उसके लंड को चूसना शुरू कर दि।

थोड़ी देर तक अशोक अपने लंड को अपनी छोटी बहन के मुंह में डालकर उससे चुसवाता रहा,,,, इसके बाद सीधे ही वह अपनी बहन को उठा कर बिस्तर पर ले गया,, और फिर अपने हाथों से उसकी टांगो को फैला कर उसकी नमकीन बुर का स्वाद अपनी जीभ से चाट कर लेने लगा,,, अपने बड़े भाई की इस हरकत पर मधु भी एकदम प्यासी हो गई उसकी बुर से पानी निकलने लगा,, और अगले ही पल जीभ की जगह अशोक अपना लंड बुर में डालकर चोदना शुरू कर दिया।

दूसरी तरफ शुभम खिड़की से बाहर का नजारा देखकर संतुष्ट हो चुका था और इस बात का पता लगभग ऊसे चल चुका था कि उसकी बड़ी मामी लगभग लंड की प्यासी है,, वह मन ही मन यह सोचने लगा कि अगर जरा सी कोशिश की जाए तो उसे बड़ी मामी के साथ साथ उसकी छोटी मामी और बड़ी मामी की लड़की तनु तीनों की बुर चोदने को मिल जाएगी,,,, वह मन ही मन में यह ख्याल बोलने लगा कि अगर ऐसा हुआ तो उसकी दसों की 10 उंगलियां घी में होंगी।। एक नया तरीके का अनुभव उसे महसूस करने को मिलेगा क्योंकि उसने अभी तक अपनी मां को ही चोदते आ रहा था। किसी गैर औरत को अभी तक चोदा नहीं था,,, हां इतना जरूर है कि अगर अब तक वह शहर में होता तो वह अपनी शीतल मैम की चुदाई जरूर कर चुका होता। लेकिन वह सारा ध्यान इस समय गांव की तीनो जवानीयो पर केंद्रीत किए हुए था वह तीनों की बुर का मजा लेना चाहता था और देखना चाहता था कि इन तीनों की बुर का स्वाद किस तरह का होता है।,,,

धीरे-धीरे उसे भी गांव में मज़ा आने लगा था गांव का खुलापन खुली हवा और ज्यादातर गांव की औरतो का आपस में गंदा मजाक करना बेहद पसंद था। शुभम की नजर दिन-रात अब तीनों के फिराक में रहने लगी,, हालांकि वह अपनी मां से भी काफी इंप्रेस था क्योंकि यहां आने के बाद उसके रुप यौवनं में कुछ ज्यादा ही निखार आ गया था। लेकिन 2 दिन बीत चुके थे,, अभी तक वह अपनी मां की चुदाई नहीं कर पाया था क्योंकि देर रात तक कोई ना कोई औरत निर्मला को अपने पास बिठाकर गप्पे लड़ाती रहती और इतने वर्षों मे आने के बाद निर्मला उन्हें इनकार भी नहीं कर पाती थी और ऐसे में शुभम सो जाता था और निर्मला भी बिस्तर पर जाते ही ढेर हो जाते थी। हालांकि उसकी बुर में भी चीटियां रेंग रही थी क्योंकि उसकी आदत अब रोजाना लंड लेने को करने लगी थी।,,,

ऐसे ही शुभम एक दिन नहाकर अपने कमरे में टॉवेल लपेट कर अपनी अंडरवियर को धो रहा था। इधर-उधर ढूंढने के बाद भी उसे अंडरवियर नहीं मिल रही थी वह काफी परेशान हो रहा था और इस हाल में बाहर जा भी नहीं सकता था।,,, बहुत गुस्से में इधर उधर बिस्तर उधेड़बुन रहा था लेकिन कहीं भी उसे उसकी अंडर बीयर नहीं मिल पा रही थी।,,, इसी अफरा-तफरी में उसकी कमर के टावर टूट कर नीचे गिर गई और वह पूरी तरह से नंगा हो गया उसका मजबूत तगड़ा लंड खड़ा नहीं था लेकिन फिर भी,,, इस तरह से जानू के बीच झूल रहा था कि इस अवस्था में कोई भी औरत देख ले तो उसकी बुर से पानी अपने आप फेंक दें,,, उसे इस बात की चिंता बिल्कुल भी नहीं थी कि वह इस समय कमरे में पूरी तरह से नंगा होकर इधर-उधर घूम रहा है वह तो बस परेशान था अपनी अंडरवियर के लिए,,, वह कमरे के चारों तरफ इधर-उधर नंगा ही घूम कर अपनी चड्डी ढुंढ रहा था। लेकिन इस बात का अनुभव उसे भी हो रहा था कि,,, उसकी टांगों के बीच का लंबा लंड झूल रहा है लेकिन इस बात से वह बिल्कुल भी बेफिक्र हो चुका था,,,। तभी वह अपनी चड्डी को इधर-उधर ढूंढता हुआ बिस्तर के नीचे नजर डाला तो वहां पर उसे उसकी मां की पैंटी नजर आई और वह उसे हाथों में लेकर देखने लगा,,, यू एकाएक उसके हाथों में उसकी मां की पैंटी आ जाने की वजह से उसके तनबदन में उत्तेजना की लहर दौड़ गई।। वह एक तक अपनी मां की पैंटी को हाथों में लेकर उसे खींच-खींच कर देखने लगा और सोचने लगा कि उसकी मां की भारी-भरकम गांड इतनी छोटी सी पेंटी में कैसे समा जाती है। तभी उसे वह पल याद आने लगा जब उसकी मामी लोग उसकी मां की पैंटी को देख कर उसे कच्छी कह रही थी। कच्छी शब्द उसके जेहन में आते ही उत्तेजना के मारे का लंड खड़ा होने लगा,,,। उसे कच्छी शब्द पेंटी शब्द से ज्यादा मादक लग रहा था। इस शब्द में उसे कुछ ज्यादा ही उत्तेजना का अनुभव हो रहा था तभी तो वह अपनी मां की कच्छी को लेकर कुछ ज्यादा ही उत्तेजना का अनुभव करते हुए अपने लंड को खड़ा कर लिया था। उससे रहा नहीं गया और वह अपनी मां की चड्डी को अपनी नाक से लगाकर सुँघने लगा,, धुली हुई पेंटिं से भी अजीब सी मादक खुशबू उसके नाक में प्रवेश करके उसके तन-बदन में उत्तेजना की चिंगारी भड़का रही थी।,,, कुछ देर तक ऐसे ही सुंघकर मस्त होता हुआ वह वापस उसे बिस्तर के नीचे रख दिया और फिर से एक बार अपनी चड्डी को ढूंढने लगा,,,

वह बेखबर होकर अपनी चड्डी को ढूंढ ही रहा था कि तभी दरवाजा भाड़ाक की आवाज के साथ खुला,,, और वह तुरंत दरवाजे की तरफ मुड़ कर खड़ा होकर देखने लगा कि आखिर हुआ क्या,,, उसे इस बात का एहसास बिल्कुल भी नहीं था कि, वह कमरे में पूरी तरह से नंगा हो चुका है,,, दरवाजा खुलने से वह एक दम से चौंक उठा था,,, लेकिन उससे भी ज्यादा शौक होती थी उसकी बड़ी मामी जो कि दरवाजा खोली थी वह तो शुभम को इस तरह से नंगा देखकर एकदम हैरान रह गई और ज्यादा हैरानी उसे शुभम के लंबे लंड को देखकर हो रही थी। उसकी नजरें सुभम के लंड पर ही टिकी हुई थी उसका मुंह खुला का खुला रह गया था आंखें फटी की फटी रह गई थी जिंदगी में उसने आज तक इस तरह का मजबुत तगड़ा लंड नहीं देखी थी। उसका तो पूरा वजूद ही हिल गया था शुभम भी एकाएक दरवाजे पर अपनी बड़ी मामी को खड़ी देखकर हैरान हो गया लेकिन,,, उसे इस बात से और ज्यादा झटका लगा कि इस समय वह कमरे में पूरी तरह से नंबर खड़ा था और तो और उसका लंड भी पूरी तरह से टाइट होकर सीधा खड़ा था,,, जिसको उसकी मांमी आंखें फाड़े देख रही थी,,,, शुभम बड़ी अजीब सी स्थिति में फंस चुका था,,। उसके पास इतना भी समय नहीं था कि वह पास में पड़ी टावल को उठाकर अपनी कमर से लपेट सके,,,, हैरान कर देने वाली बात यह थी कि उसकी मामी दरवाजे पर खड़ी होकर के बस उसके लंड को ही देखे जा रही थी।,,,

शुभम पूरी तरह से शर्मिंदा हो चुका था वह ज्यादा देर तक एैसे खड़ा नहीं रह सका। वग झट से आगे बढ़कर बिस्तर पर पड़ी टावल उठा कर अपनी कमर से लपेट लिया तब जाकर के उसकी मामी का ध्यान भंग हुआ,,,।

और उसे भी इस बात से शर्मिंदगी हुई थी वह भी बेशर्मों की तरह शुभम के लौड़े को देखे जा रही थी। वग शर्मा के झट से वहां से चली गई,,,, शुभम जल्दी जल्दी कपड़े पहनने लगा,।

दूसरी तरफ उसकी मामी सीधे अपने कमरे में आ कर बिस्तर पर बैठ कर हांफने लगी उसे तो अब भी अपनी आंखों पर विश्वास नहीं हो रहा था कि जो नजारा वह अभी-अभी शुभम के कमरे में देख कर आई है वह सच है। वह मन ही मन सोचने लगी कि, क्या हुआ जो देखी थी वह सच है क्या शुभम का लंड वाकई में इतना बड़ा और मोटा है। वह तोें किसी गधे का लंड दिख रहा था।

। वह बिस्तर पर बैठे-बैठे उत्तेजना के मारे,, शुभम के

लंड की तुलना अपने पति से करने लगी तो उसे इस बात का एहसास हो गया कि शुभम की लंबे मोटे लंड के आगे उसके पति का लंड तो काफी छोटा था।

लंड की तुलनात्मक असर को देखकर उसकी बुर गीली होने लगी,, एक अजीब सा एहसास उसके तन बदन को झकझोर कर रख दे रहा था।

 
उसने कभी ऐसा सपने में भी नहीं सोची थी कि उसकी आंखों के सामने ऐसा नजारा देखने को मिलेगा,,, वह तो निर्मला को किसी काम की वजह से उसके कमरे में ढूंढते हुए पहुंच गई थी,,,। लेकिन उसे क्या मालूम था कि कमरे में कुछ और ही नजारा आंखों को देखने को मिलेगा। शुभम के नंगे बदन और खास करके उसके मोटी तगड़े लंबे-लंड की मोटाई और उसका कड़कपन देख कर उसे अब तक हैरानी हो रही थी बिस्तर पर बैठे-बैठे यही सब सोचते हुए उसकी बुर पानी छोड़ रही थी। और वैसे भी जो काफी समय से प्यासी हो जो कि पानी की एक बूंद के लिए भी तरस गई हो उसकी आंखों के सामने हरा भरा सावन नजर आए तो ऐसे में उसकी प्यास बढ़े नहीं तो और क्या हो,,, उसका तो पूरा वजूद डगमगा गया था इस तरह का एहसास उसके मन में कभी भी नहीं हुआ था जिस तरह का एहसास आज उसके तन बदन को झकझोर कर रख दे रहा था। बार-बार ना चाहते हुए भी उस की आंखों के सामने कभी उसके पती का छोटा और पतला ककड़ी नुमा लंड तो कभी उसके भांजे का मजबुत और तगड़ा केला नुमा लंड आ जा रहा था जिसके बीज वह मन ही मन में तुलना करने लगी थी। क्योंकि उसकी बुर मे भी अभी तक सिर्फ उसके पति का ही लंड गया था।,,, यह सारे विचार उसके मन में अजीब सा तूफान ला रहे थे। अब तक सूखी जमीन पर जैसे बारिश की फुहार बरस रही हो इस तरह से उसकी बुर की अंदरूनी और बाहरी सतह मदन रस की फुहार से गीली होने लगी थी। ना चाहते हुए भी अपने आप उसके हाथ साड़ी के ऊपर से ही बुर के ऊपर पहुंच गए,,,, और अपने मन पर काबू ना कर सकने की स्थिति में अपने आप ही उसने अपने हाथ से बुर को साड़ी के ऊपर से ही दबोच ली और ऐसा करने पर उसके मुख से हल्की सी सिसकारी निकल गई वह आगे बढ़ती इससे पहले ही उसे कोई बुलाने लगा और वह झट से कमरे से बाहर आ गई।,,,

दूसरी तरफ शुभम हैरान था उसे समझ में नहीं आ रहा था कि कैसे बाहर जाएं,,, कैसे बह अपनी मामी से आंख मिलाएं,,, क्योंकि जो कुछ भी हुआ था वह अनजाने में हुआ था लेकिन फिर भी उसे दरवाजे में कड़ी लगाकर रखना चाहिए था। और वैसे भी उसके शरीर कोई सामान्य हालत में नहीं था वह पूरी तरह से नंगा था और उस पर भी उसकी पूरी तरह से खड़ा था जैसे लग रहा था कि किसी को चोदने जा रहा हो,,, वह मन ही मन सोचने लगा कि अगर कांड सामान्य स्थिति में होता ना की पूरी तरह से उत्तेजनात्मक तब वह अपने बारे में कुछ सफाई पेश कर सकता था लेकिन जिस हाल में उसकी मम्मी ने उसे देखा था और उसके लंड के दर्शन किए थे ऐसे में तो ऐसा ही लग रहा था कि उसके मन में कुछ और चल रहा था तभी तो तोें ऊसका लंड इतना खड़ा था।वह यही सब सोच कर हैरान हुएं जा रहा था।

उसके मन में शंका था कि कहीं की मामी ने घर में सभी को बता दिया तो की शुभम कमरे में एकदम नंगा था और उसका लंड खड़ा था उसके बारे में ना जाने लोग कैसीे-कैसी बातें करेंगे। लेकिन उसे इस बात की संतुष्टि थी कि उसकी मम्मी ने उसे तब नहीं देखी जब वह उसकी मम्मी की पैंटी को लेकर हाथों से छू कर देख रहा था और नाक से लगाकर उसके मदन रस की खुशबू को शुंघ कर अपने छातियों में उतार रहा था। अगर कहीं उस समय उसकी मामी ने देख लिया होता तो उसकी इज्जत की धज्जियां उड़ गई होती और उसके और उसकी मां के बीच के संबंध में शायद ऊन्हे शक हो जाता,, अच्छा हुआ कि ऐसा कुछ भी नहीं हुआ वरना आज ना जाने क्या हो जाता ऐसा मन में सोचते हुए वह अपने कपड़े जल्दी-जल्दी पहनने लगा,,, वह पेंट पहन कर देख रही अपनी जीप बंद कर रहा था,,, एकाएक उसकी आंखों के सामने उसकी बड़ी मामी की जांघो के बीच का वह नजारा याद आने लगा,, उस बेचारे को याद करते ही उसके बदन में उत्तेजना के लहर दोड़ने लगी,,,

तुरंत ही उसके तन बदन में मादकता का असर होने लगा बार-बार उसकी आंखों के सामने उसकी मामी की जांघो के बीच झांटों का झुरमुट नाचने लगा,,, पहली बार वह औरत की बुर के ऊपर इतने ढेर सारे घुंघराले बाल देख रहा था। हालांकि वह अपनी मां की बुर पर कई बार देख चुका था लेकिन वहं बाल एकदम हल्के हल्के थे जो कि ना के बराबर थे। इसलिए तो मामी के झाटों के बाल को लेकर उसके मन में अजीब सी उत्सुकता भरी हुई थी। एक बार फिर से उसके मन में उसकी मामी की बालों वाली बुर में लंड डालने की इच्छा प्रबल होने लगी और इस बात को लेकर वह मन ही मन में सोचने लगा कि अच्छा ही हुआ कि उसकी मांमी ने उसके मोटे तगड़े लंड को खड़ा हुए हालत में देख ली।,, अगर जिस तरह का सपना वह मन ही मन में बुन रहा है। और अगर वास्तव में उसकी मामी की बुर में बहुत दिनों से लंड नें प्रवेश नहीं लिया है तो यह नजारा उसके मन में चुदासपन को जगाने में मदद करेगी,,,, और अगर सच में ऐसा हो गया तो जैसा वह सोच रहा है बाल वाली बुर में लंड डालने का मौका उसे जल्दी ही मिल जाएगा,,,,,,

यह सोचकर उसके तन-बदन में हलचल सी मचने लगी और उसके होठों पर मुस्कुराहट तेरने लगी।,,,

दूसरी तरफ उसकी मामी के दिलो-दिमाग पर शुभम का लंड पूरी तरह से हावी हो चुका था उसका किसी भी काम में मन नहीं लग रहा था। जब भी वह कोई काम करने लगती तो बार-बार उसकी आंखों के सामने शुभम का खड़ा लंड आ जाता था और वह काम नहीं कर पाती थी बल्कि उस लंड के ख्याल में खोई रहती थी।

शादी को कुछ ही दिन रह गए थे इसलिए घर के सभी लोग आज खरीदी करने जा रहे थे बाजार यहां से करीबन 20 किलोमीटर दूरी पर था और घर पर ही कार होने की वजह से सब लोग उसी में जाने वाले थे।

शुभम बार-बार अपनी मम्मी के सामने आकर यह देखना चाह रहा था कि उसे देखते ही उसके चेहरे पर किस तरह के बदलाव और भाव आते हैं और सच में जब भी सुबह उसकी आंखों के सामने आता था तो शर्म के मारे उसकी नजरें नीचे हो जा रही थी। जबकि ऐसे हालात में शुभम को शर्म आनी चाहिए थी लेकिन ना जाने कैसी कशमकश में उसकी बड़ी मामी फंसी हुई थी कि वह सुबह से नजरें नहीं मिला पा रही थी जब भी शुभम को देखती तो उसकी नजर अपने आप ही उसकी टांगों के बीच चली जाती थी। और इस बात पर सुभम का ध्यान लगा हुआ था। वह अपनी बड़ी मामी की नजरों को अच्छी तरह से भाप ले रहा था कि ज्यादातर उसकी नजर किस अंग पर जा रही थी,,,,, और इस बात को लेकर उसके मन में प्रसन्नता के भाव पनप रहे थे।

उसकी बड़ी मामी का मन किसी काम में नहीं लग रहा था इसलिए जब उससे बाजार जाने के लिए पूछा गया तो वह तबीयत का बहाना करके इंकार कर दी,,, शुभम इस बात को अच्छी तरह से जानता था कि घर के सभी लोग बाजार जाने वाले हैं लेकिन इस तरह से उसकी मामी का इंकार कर देना,, उसे अपने लिए रास्ता खुलता नजर आने लगा इसलिए वह भी ना जाने का मन बना लिया था और इसलिए अपने कमरे में चला गया ताकि कोई उसे जाने के लिए पूछे नहीं,,,, निर्मला सभी यह बोलकर अपने कमरे में चली गई कि वह कुछ ही देर में तैयार होकर आती है। जैसे ही कमरे में पहुंची तो शुभम बिस्तर बैठ कर कुछ सोच रहा था शायद वह मामी को पाने के बारे में सोच रहा था।

कमरे में आते ही निर्मला शुभम से बोली,,,

बेटा जल्दी से तैयार हो जाओ हमें बाजार जाना है वहां बहुत सारी खरीदी करना है।

( शुभम तो पहले से ही मन बना लिया था कि वह भी बाजार नहीं जाएगा इसलिए मुंह बनाते हुए बोला,,।)

नहीं मम्मी मैं क्या करूंगा वहां जाकर वैसे भी मैं थक चुका हूं मुझे आराम करना है जो भी खरीदी करना मेरे लिए भी कुछ खरीद लेना,,,

( शुभम की बात सुनते ही निर्मला उसके माथे पर अपनी हथेली रखते हुएे बोली,,।)

क्या बात है बेटा तेरी तबीयत तो ठीक है

हां मामी मेरी तबीयत बिल्कुल ठीक है बस मेरा मन नहीं कर रहा जाने को मैं कुछ देर आराम कर लूंगा तो सही हो जाएगा,,,

बेटा बाजार में सुबह से शाम हो जाएगी काफी समय लगेगा तब तक तू अकेले रह लेगा क्या,,,,

तभी तो मैं जा नहीं रहा हूं ना मैं ईतना समय लगेगा तो मैं बोर हो जाऊंगा,,

( शुभम तो बस बहाना बना रहा था घर पर रुकने का क्योंकि वह जान चुका था कि उसकी मांमी भी रुकने वाली है और घर में उसकी मां भी और उसके सिवा कोई भी नहीं था अगर ऐसे में उसके मन में जो चल रहा है वह हो गया तो उसके तो भाग्य खुल जाएंगे यही सब सोचकर उसके मन में अजीब सी हलचल मची हुई थी।)

चल कोई बात नहीं जैसा तुझे ठीक लगे तो यही कमरे में रहकर आराम करना (इतना कहने के साथ ही निर्मला दरवाजे की कुंडी लगाकर अपनी साड़ी को उतारने लगी ताकि दूसरी शाड़ी पहन सके,,, कुछ ही सेकंड में निर्मला अपने बदन से साड़ी को उतार कर बिस्तर पर फेंक दी उसके बदन पर ब्लाउज और पेटीकोट ही था जो कि पेटीकोट काफी चुस्त होने की वजह से,,, उसकी भरावदार बड़ी-बड़ी गोल गांड उभरकर सामने नजर आ रही थी। एक तो पहले से ही उसकी मामी की गदराई

जवानी उसके तन बदन में चिंगारियां पैदा कर रही थी और आंखों के सामने उसकी मां की,,बड़ी बड़ी गांड शोले भड़काने लगी थी। काफीै दिन हो चुके थे शुभम को चुदाई कीए वैसे तो 2 दिन ही गुजरे थे लेकिन एक एक दिन उसे महीनों जैसा लगता था ।जब तक वह अपनी मां की बुर में लंड डालकर चोद न दे, तब तक ऊसका मन नहीं भरता था। इसलिए आज मौका देखकर वह बिस्तर पर पर से उठा और पीछे से जाकर अपनी मां को अपनी बांहों में दबोच लिया,,, लंड पहले से ही पूरी तरह से खड़ा हो चुका था,,, इसलिए जैसे ही वह अपनी मां को पीछे से बाहों में भरा, पजामे में तना हुआ लंड,, सीधे पेटीकोट को चीरता हुआ गांड की दोनों फांखों के बीच धंसने लगा,,, जो हाल सुभम का हो रहा था वही हाल निर्मलाका भी था,,,, इसलिए एकाएक लंड की चुभन महसूस होती है वह उत्तेजना से सिहर उठी।

शुभम अपनी मां को बाहों में भरते ही उसके गर्दन पर चुंबनों की बारिश कर दिया,,, उसकी इस हरकत पर निर्मला इतराते हुए बोली,,,

अब जाकर तुझे अपनी मां की याद आ रही है अब तक तो तू दूर ही दूर रह रहा था,,, सोचती थी गांव में जाकर खूब मजे करूंगी लेकिन दो दिन तक तूने ऐसे ही गुजार दिया,,,

मम्मी मैं तो हमेशा तैयार ही रहता था लेकिन तुम ही रात भर ना जाने कहां गायब रहती थी।

शुभम ब्लाउज के ऊपर से हीलाते अपनी मां की चुचियों को दबाता हुआ बोला,,,

ससससहहहहह,,,, आहहहहहहहह,,,, क्या करूं बेटा इतने बरसों बाद आई हूं तो कोई ना कोई बुला ही लेता है बातें करने के लिए (निर्मला सिसकारी लेते हुए बोली)

वह सब जाने दो अभी तो मौका मिला है तो क्यों ना इस मौके का फायदा उठा लिया जाए (और इतना कहने के साथ ही शुभम अपनी मां को अपनी तरफ घुमा लिया और उसे गुलाबी होठों पर अपने होंठ रख कर चूसना शुरु कर दिया,,, उसकी मां भी उत्तेजित अवस्था में उसे अपनी बांहों में भर्ती हुई बोली।)

मौका तो है लेकिन ज्यादा समय नहीं है कोई भी मुझे बुलाने आ जाएगा,,( इतना कहने के साथ ही निर्मला अपने बेटे के पजामे में अपना हाथ डालकर उसके टनटनाए हुए लंड को अपनी मुट्ठी में भरकर हीलाने लगी।

कोई बात नहीं मम्मी इतना समय तो बहुत है। उस तरफ घूम कर झुक जाओ बाकीे सब मैं संभाल लुंगा,,,,

देखना बेटा तू संभाल लेना अगर कोई आ गया बुलाने तो क्या होगा (और इतना कहते हुए वह दीवार की तरफ मुंह करके झुक गई)

तू चिंता मत कर मम्मी तब तक में हम दोनों का पानी निकल दुंगा ( इतना कहने के साथ ही शुभम अपनी मां की पीठ पर हाथ रखकर थोड़ा सा दबा कर उसे और झुकने का इशारा किया ताकि उनकी बड़ी बड़ी गांड थोड़ी और ऊपर की तरफ उठ जाएं,,,, निर्मला भी कुछ ज्यादा ही चुदवासी हो चुकी थी इसलिए अपनी बेटे की बात मानते हुए थोड़ा सा और नीचे की तरफ झुक कर अपनी बड़ी बड़ी गांड को उपर की तरफ उठा दी,,,,

सुभम अपनी मां की बड़ी बड़ी गांड जौकी पेटीकोट में ढंकी होने के बावजूद भी अपना कहर पूरी तरह से ढाने में कारगर थी,,, वह एक पल की भी देरी किए बिना झटसे दोनों हाथों से अपनी मां की पेटीकोट को पकड़कर उपर की तरफ सरकाने लगा और देखते ही देखते वह कमर तक पेटीकोट को उठा दिया,,,, गोरी गोरी गाल पर मरून कलर की पेंटिं अपना कहर ढा रही थी जिसे देखते ही शुभम के मुंह से सिसकारी निकल गई,,,

ऊफ्फफफ,,,,,, मम्मी यह तेरी कच्छी मन करता है कि बिना उतारे ही ईसमे अपना लंड डाल दुं।

( इतना कहने के साथ ही शुभम अपनी मां की पेंटिं ऊतारे बिना ही उसपर दोनों हथेलियां रखकर नरम नरम गांड को दबाना शुरु कर दिया,,,, अपने बेटे की ऐसी कामुक हरकत की वजह से उसके बदन में उत्तेजना की लहर सर से पांव तक बड़ी तीव्र गति से दौड़ने लगी,,,।

बेटा ऐसी बातों में ही वक्त जाया मत कर जरूर कोई आ जाएगा बुलाने तब हम दोनों प्यासे हीं रह जाएंगे,,,

( उसकी मां सच कह रही थी यह बात शुभम भी अच्छी तरह से जानता था क्योंकि वह लोगों को बाजार जाना था,,,, इसलिए वक्त की नजाकत को समझते हुए शुभम अपनी मां की बात सुनकर तुरंत पेंटिं को दोनों छोर से पकड़कर नीचे जांघाे तक सरका दिया।,,, शुभम अपनी मां की बुर हाथ लगा कर बुर की स्थिति का जायजा लिया तो इस बात का उसे एहसास हो गया कि उसकी मां कुछ ज्यादा ही पानी छोड़ रही थी,,, इसलिए ज्यादा देर ना लगाते हुए पजामे को नीचे किया और अपने खड़ा लंड को अपनी मां की बुर से सटाकर जोर से धक्का लगाया तो लंड सबकुछ चीरता हुआ,,, बुर की गहराई में उतर गया,,, इस धक्के से निर्मला की चीख निकलते निकलते रह गई । निर्मला कामोत्तेजित हुए बोली,,,,

सससहहहहहह,,,,,, बस बेटा अब रुकना नहीं जोर जोर से चोद मुझे मेरा पानी निकाल दे,,,,

इतना सुनना था कि शुभम भी जोश में आ गया और बिना रुके धक्के लगा कर अपनी मां के बुर चोदना शुरू कर दिया। गांव में दोनाे पहली बार चुदाई का आनंद ले रहे थे,,,, निर्मला भी जिंदगी में पहली बार गांव में चुदाई का आनंद ले रही थी,, इसलिए कुछ ज्यादा ही उत्तेजित नजर आ रही थी। वह भी जोर जोर से अपनी गांड को पीछे की तरफ ठेल ठेल कर अपने बेटे के लंड को अपनी बुर मे जल्दी से जल्दी ऊतारती चली जा रही थी।

अपनी मां का छिनार पन शुभम की उत्तेजना और ज्यादा बढ़ा दे रहा था,,,, इस समय बैलेंस वह अपनी मां की चुदाई कर रहा था लेकिन उसके जेहन में उसकी बड़ी मामी का गदराया बदन बसा हुआ था,,,। वह अच्छी तरह से जानता था कि उसकी मामी,,, उसकी मम्मी जितनी खूबसूरत नहीं है लेकिन फिर भी किसी और औरत को चोदने की लालसा बढ़ती जा रही थी। इसलिए बार-बार उसे ऐसा ही लग रहा था कि वह अपनी बड़ी मामी की बालों वाली बुर में लंड डाल. रहा है। वैसे भी मर्दों की प्यास एक औरत तक कहां सीमीत रहती है,, भले ही उसके बिस्तर पर दुनिया की सबसे खूबसूरत औरत क्यों ना हो उसकी नजर इधर उधर चली जाती है,,,। यही शुभम के साथ भी हो रहा था वैसे भी शुभम भी तो एक मर्द ही था ।ऊसका लंड बड़ी तीव्र गति से उसकी मां की बुर के अंदर बाहर हो रहा था।

निर्मला अपने बेटे से चुदवाते हुए हल्की-हल्की सिसकारी ले रही थी ताकि उसकी आवाज कमरे से बाहर ना जा सके। शुभम की उत्तेजना पल पल बढ़ती जा रही थी जिसका, असर यह हो रहा था कि वह बार-बार अपनी मां की गोरी गोरी गांड पर चपत लगा दे रहा था। और इस तरह से चपत लगाने की वजह से निर्मला भी बेहद कामोत्तेजित हो करके जोर-जोर से अपनेी गांड को पीछे दे रही थी,,, दोनों को इस समय गांव के घर के इस कमरे में बेहद आनंद आ रहा था। निर्मला की हल्की हल्की गरम सिसकारियां पूरे कमरे में गूंज रही थी शुभम की हालत भी पल-पल खराब होते जा रही थी।

लंड का कड़कपन निर्मला की बुर की गहराई में और ज्यादा बढ़ता जा रहा था। कुछ ही देर में निर्मला पसीने से तरबतर हो गई,, दोनों चरम सुख के बिल्कुल करीब पहुंच चुके थे,,, शुभम का धक्का तेज होता जा रहा था और साथ ही निर्मला भी अपनी कमर को पीछे की तरफ बड़ी तेजी से उछालने लगी थी,,, शुभम की उत्तेजना उसके बस में बिल्कुल भी नहीं थी और आगे दोनों हाथ को बढ़ाकर अपनी मां की दोनो चुचियों को पकड़कर दबाते हुए धक्के लगाने लगा,, दो चार धक्कों के बाद ही दोनों एक साथ झड़ गए,,,।

निर्मला जल्दी से अपने कपड़े पहन कर जा चुकी थी और कुछ ही देर में घर के सभी लोग गाड़ी में बैठकर बाजार की तरफ निकल गए।

निर्मला अपने कमरे में बिस्तर पर लेटी हुई थी उसकी आंखों के सामने से शुभम का तगड़ा लंड हटने का नाम नहीं ले रहा था।,, जब से उसने शुभम का संपूर्ण नग्नावस्था में दीदार की थी तब से उसकी हालत पतली हो गई थी उसकी आंखों की नींद और चैन सब कुछ उड़ गया था। बार-बार उसकी बुर गीली हो जा रही थी जिसे वह साड़ी से ही साफ कर दे रही थी।,,, आज बरसों के बाद उसके मन में भी एक अजीब सी हलचल मची हुई थी उसका मन शुभम के प्रति मचलने लगा था। ना जाने उसके मन में कैसे-कैसे ख्याल आता रहे थे। जिंदगी में उसने भी कभी दूसरे पुरुष का संसर्ग नहीं की थी। लेकिन आज उसका मन विचलित हो रहा था। वह जानती थी कि शुभम भी घर पर मौजूद है वह साथ में बाजार नहीं गया है।,, बहुत कुछ सोचने के बाद वह शुभम के कमरे की तरफ चल दी।

 
यह जानते हुए भी कि घर में इस वक्त कोई नहीं है फिर भी इधर-उधर नजर घुमाते हुए वह शुभम के कमरे की ओर बढ़ने लगी थी,,, मन में अजीब सी हलचल मची हुई थी, उसके बदन का हर हिस्सा आज मादक गुदगुदी पन का एहसास कर रहा था। जब से उसने शुभम के लंड का दीदार की थी तब से ऊसकी बुर का गीलापन कम होने का नाम ही नहीं ले रहा था। शुभम से मिलने की उत्सुकता के साथ-साथ उसके मन में दुविधा भी थी की शुभम से मिलकर वह क्या बात करेगी,,,, फिर भी वह औरत की और औरत के खूबसूरत मादक जिस्म की ताकत को अच्छी तरह से पहचानती थी। वह जानती थी कि जिस्म की खूबसूरती हमेशा से मर्दों की कमजोरी रही है। अच्छे अच्छे जो की औरत के बदन की बनावट और उसके उतार चढ़ाव के आगे घुटने टेक दिए तो यह छोटा सा शुभम क्या चीज है उसके मन में ढेर सारी भावनाएं और कल्पनाएं जन्म ले रही थी । वह घर में बैठे-बैठे ही इस बात पर गौर कर लीेखी कि,,, शुभम के मन में भी कुछ उत्तेजनात्मक भावनाएं जन्म ले रही थी तभी तो उसका लंड इस हद तक खड़ा था। जरूर उसके मन में भी कुछ गलत ही चल रहा था जिसका असर उसके लंड पर हुआ था।,,,,, इसका मतलब यही था कि अगर वह थोड़ा सा भी प्रयास करेगी तो अपने बदन का जलवा दिखा कर वह शुभम के साथ,,,,

( इतना विचार मन में आते ही वह शरमा गई और उसके आगे मन में ही कुछ नहीं बोल पाई,,, शुभम को उस अवस्था में अगर वह नहीं देखी होती तो उसके मन में इस तरह के अश्लील विचार नहीं आते लेकिन जब से उसने शुभम को नग्नावस्था में देखी थी, तबसे शुभम को लेकर उसके मन में बेहद ही रोमांचक करो ऊतेजक ख्यालात आ रहे थे।,,,, उसे ना जाने क्यों अपने ऊपर पूरा विश्वास था कि वह शुभम के साथ,, कामोत्तेजना से भरपूर संभोगसुख से युक्त आनंददायक सीढ़ियो कि कुछ पायदान जरूर चढ़ जाएगी। मन में ढेर सारे ख्यालात और भावनाएं लिएे वह शुभम के कमरे के सामने पहुंच गई। कमरे का दरवाजा बंद था और वह शुभम के लिए टांगो के बीच का दरवाजा खोलने आई थी जिसके लिए शुभम भी तड़प रहा था। लेकिन कैसे शुरुआत होगी यह दोनों में से कोई नहीं जानता था शुभम की मम्मी के दिल की धड़कन जोरों से धड़क रही थी। मन में उत्तेजना की लहर पांव को जमीन पर उतरने नहीं दे रहे थे। मादक भावनाएं पर पसारे हवा में गुलाटीयां खा रही थी। उत्तेजना के मारे गला सूखने लगा था वह समझ नहीं पा रही थी कि दरवाजे पर दस्तक दे कि नहीं दे, अगर जैसा वह सोच रही है ऐसा बिल्कुल भी नहीं हुआ तो,, तो आज सम्मान की दीवार ऐसे ढहेगी कि फिर उठने का नाम नहीं लेंगी,,, यह ख्याल मन में आते ही वह वापस लौट जाना चाहती थी लेकिन फिर उसके मन में ख्याल आया कि डर के आगे ही तो जीत है अगर आज अपने घर को मारकर व कमरे में दाखिल हो जाएगी तो हो सकता है की शायद वर्षों से प्यासी,,, बुर को एक बार फिर से हरा भरा सावन देखने को मिल जाए। वैसे भी उसने ढेर सारे सावनन देखीे थी लेकिन कुछ साल सें ऐसा लग रहा था कि सावन उससे रुठ गया है और उसकी जमीन सुखी होने के साथ-साथ अब तपने भी लगी थी और इसकी तपन इस समय उसे बर्दाश्त नहीं होता रही थी।। इसलिए उस पर पानी का छिंटकाव करना बेहद जरूरी हो चुका था। वरना यह जमीन दूसरों को सुख देने की परिपक्वता खो देगी।

दृढ़ निश्चय करके उसने दरवाजे को खटखटाने के लिए

हाथ आगे बढ़ा कर दरवाजे पर लगाई ही थी की दरवाजा खुद-ब-खुद खुल गया,,,। दरवाजा खुलते ही सामने बिस्तर पर शुभम बैठा मिला जो कि कुछ कर रहा था इस तरह का एक दरवाजा खुलने पर शुभम की भी नजर दरवाजे पर गई,,, और दरवाजे पर अपनी बड़ी मामी को खड़ा देखकर वह हक्का-बक्का रह गया मुझे तो समझ में नहीं आया क्या बोलें उसे सुबह वाला दृश्य याद आ गया जो कि ईसी तरह से एकाएक दरवाजा खुला था। और उसकी बड़ी मामी ने वह देख ली थी जिसकी शायद उसे भी उम्मीद नहीं थी,,,,। बड़ी मामी को दरवाजे पर फिर से खड़ी देखकर,,, शुभम हड़ बड़ाते हुए बोला,,,,

अ्अअअ,, आप,,,,, मम्मी यहां,,, अब बाजार नहीं गई क्या?

नहीं मैं बाजार नहीं गई (कमरे में प्रवेश करते हुए )लेकिन तुम क्या दरवाजे की कुंडी नहीं लगाते सुबह में भी दरवाजा खुला था अभी भी दरवाजा खुला है। यह चल क्या रहा है इतना कहने के साथ ही वह कमरे में प्रवेश कर गई और हल्के से दरवाजे को बंद कर दी।

( शुभम अपनी बड़ी मामी की बात का मतलब समझते हुए एकदम शर्मिंदा हो गया और शर्मिंदगी के भाव चेहरे पर लाते हुए बोला।)

मामी ने एकदम से शर्मिंदा हूं मुझे नहीं मालूम था कि दरवाजे पर कुंडी नहीं लगी हुई है मैं एकदम से भूल गया था,,।

चलो मैंने मान ली कि तुम भूल गए थे लेकिन जिस तरह के हालात में तुम कमरे में थे इसके बारे में कुछ कहोगे,,,

( वह बिस्तर पर बेठते हुए बोली शुभम की तो हालत खराब हुए जा रही थी।)

मामी मैं सच में नहीं जानता,,,,,, वह क्या है कि,,, मैं पहले से ही बिल्कुल नंगा नहीं था। मैं जब नहा कर आया तो,, मैं टावल लपेट रखा था,,,,,

लेकिन जब मैं कमरे का दरवाजा खोली तब तो तुम बिल्कुल नंगे थे,,,( तपाक से उसकी मामी बोली ।)

हां लेकिन मैं टॉवल पहनकर अपनी चड्डी ढूंढ रहा था,,,और मे काफी समय से परेशान था क्योंकि वह मुझे मिल नहीं रही थी,,, उसे ढूंढने में कब मेरी टॉवल निकल गई मुझे पता ही नहीं चला,,,,।,,

( शुभम अपनी नजरों को नीचे झुका कर शर्मिंदा होते हुए बोले जा रहा था।,, और ऊसकी बड़ी मामी तिरछी नजरों से उसके हाव-भाव पर गौर कर रही थी। सुभम की बात पर उसे विश्वास नहीं हो रहा था। इसलिए वह बोली।)

चल मैं मान लेती हूं कि तेरी चड्डी ढुंढ़ने में तेरी टॉवल नीचे उतर गई,,, लेकिन मुझे यह समझ नहीं आता कि

सुबह सुबह नहाने के बाद भी तेरा लंड खड़ा क्यो था।

( अपनी बड़ी मामी के मुंह से इस तरह की खुली बात सुनकर शुभम पूरी तरह से झेंप गया उसे समझ में नहीं आ रहा था कि मामी को क्या जवाब दें,,,, वह कुछ देर तक ऐसे ही खामोश रहा है तो उसकी मामी फिर से बोली)

क्यों क्या हुआ खामोश क्यों हो गया तेरे मन में कहीं कुछ चल तो नहीं रहा है।

( वह बिल्कुल साफ साफ बोल देना चाह रही थी,,, क्योंकि वह चाहती थी कि जो भी होना है वह हो जाए,,

शुभम अपनी मामी की बातों का जवाब देने में सक्षम नहीं था फिर भी इधर-उधर बात घुमाते हुए बोला।)

नहीं मामीं ऐसा कुछ भी नहीं है,,,, ।

( शुभम अपनी मामी को सफाई देते हुए बोला,,, और वह अपने भांजे की बात सुनकर मन ही मन मुस्कुरा रही थी,,वह जानती थी कि शुभम चाहे जितना भी झूठ बोल ले उसके लंड को खड़े होने के पीछे औरत ही जवाबदार थी वह चाहे वास्तव में हो या ख्यालों में वह थी तो एक औरत ही। तो फिर से मुस्कुराते हुए बोली,,।)

कोई बात नहीं इतनी उम्र मेरी ऐसे ही नहीं हुई है इतना तो मै जानती हूं कि लड़कों के मन में क्या चलता रहता है। तू बोले या ना बोले मैं अच्छी तरह से समझती हूं कि इस उम्र में तेरे जैसा जवान लड़का क्या सोच कर अपना खड़ा कर लेता है।( शुभम अपनी मम्मी की बातों को सुनकर एकदम हैरान था वह सोचा नहीं था कि वह इतनी खुली बातें करती होंगी।,,, अब तो उनके सामने भी कोई रास्ता नहीं था इसलिए वह खामोश ही रहा यह चुप्पी उसकी मामी की बातों का समर्थन करने के लिए काफी थी और वैसे भी शुभम क्या बहाना बनाता उसकी तो हक्की-बक्की ही बंद हो गई थी। वह अपनी बड़ी मामी को क्या जवाब देता इस बारे में उसे कुछ पता नहीं था,,,। शर्मिंदगी का एहसास उसे पल पल नजरें झुकाने के लिए मजबूर करते जा रहे थे। दूसरी तरफ ऊसकी बड़ी मामी यह सब बातोें के दौरान अपनी बुर को और ज्यादा गीली होती महसूस कर रही थी। बार-बार उसकी नजरो शुभम की टांगों के बीच चली जा रही थी। और यह बात शुभम से छिपी नहीं रही,,,, वह समझ गयां की मामी के दिमाग में कुछ और चल रहा है। वह उसके मोटे तगड़े लंड को लेकर शायद कुछ ज्यादा ही आकर्षित हो चुकी हैं और होती भी क्यों नहीं जब निर्मला जैसी खूबसूरत औरत बहक सकती है तो यह क्यों नहीं,,,, उसके मन में घंटियां बजने लगी,,, अपनी मामी की खुली बातें सुनकर उसे इस बात का एहसास तो हो ही गया था कि मामी के मन मे ऊसके लंड को लेकर हलचल सी मची हुई है वरना इस तरह की बातें वह कभी नहीं करती,,, अपनी मामी की बातों का जवाब देने की बजाय खुद ही उससे प्रश्न करते हुए बोला,,,।

लेकिन मामी इतनी सुबह सुबह आप मेरे कमरे में क्या करने आई थी आपको कुछ काम था क्या,,,?

अपनी भांजे की बात सुनकर इस बार वह हक्की बक्की रह गई उसे कुछ समझ में नहीं आया कि वह क्या बोले लेकिन वह भी बहुत चलाक थी। झट से बहाना बनाते हुए बोली,,,,

मुझे तो भाभी से काम था,,,

मम्मी से,,,,,,, मम्मी से क्या काम था?

अब उनसे ही काम था तुझे क्या बताऊं,,,,

( वह जानबूझकर इस तरह से बोल रही थी ताकि शुभम के मन में उसकी बातों को जानने की उत्सुकता बढ़ती जाए)

अरे ऐसा कौन सा काम था मुझे भी तो बताओ हो सकता है मैं तुम्हारी मदद कर सकूं (दूसरी तरफ शुभम अपनी जुगाड़ में लगा हुआ था)

तू क्या मदद करेगा,,,बेटा,, तेरे लायक काम होता तो मैं जरूर बता देती,,,,।

मामी मुझे भी तो बताओ आखिर मैं इधर आ कर कुछ तो काम करूं क, हो सकता है तुम्हारी मदद कर सकूं,,,

( शुभम जानता था कि औरत को पाने का सबसे सरल रास्ता यही होता है कि उन्हें बातों में उलझाकर उनके मन की बात जान ली जाए,,,,।)

जाने दे बेटा इधर शादी में घूमने फिरने आया है तू आराम कर तेरी मम्मी आएगी तो मैं उन्हें बता दूंगी और वैसे भी उन्हीं का काम है,,,,

अरे मामी,,,, आराम करने का क्या है, लयहां मैं भी बैठे बैठे बोर हो रहा हूं तुम कोई काम बताओगी तो मेरा भी टाइम पास हो जाएगा (इतना कहने के साथ ही वह अपनी जगह पर बैठ कर अपनी मामी के एकदम करीब बैठ गया इतना करीब कि उनकी जांघ से उसकी खुद की जांघ स्पर्श होने लगी,,,, शुभम की मांमी को तनबदन में तो उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी,,,, शुभम की हरकत ने उसके बदन में कामोत्तेजना की प्यास और ज्यादा बढ़ा दी,,,, लेकिन वह भी समझ गई कि अगर आगे बढ़ना है तो यही सही मौका है

और उसकी मामी मौके की नजाकत को समझते हुए,,

बोली,,,,

तू क्या सच में मेरी मदद करना चाहता है,,।

( वह शुभम की तरफ प्यार की आंखों से देखते हुए बोली ।)

हा मामी,,, मे तुम्हारे कोई काम आ सकुं,,, ईससे भला मेरे लिए खुशकिस्मती वाली कौन सी बात होगी,,,

( शुभम की बात सुनकर उसके तन-बदन में मदहोशी का आलम छाने लगा,,, वह समझ गई थी आज शुभम के ही हांथो उसका उद्धार होना लिखा है,,, अब पीछे हटना मुमकिन नहीं था,,। पीछे हटने का मतलब था एकबार फीर से प्यासी रहकर जीवन बीताना,,, और इस बार वह प्यासी नही रहना चाहती थी। वह अपनी प्यास बुझाने का रास्ता मन ही मन में खोज निकाली थी वह जानती थी कि शुभम को किस तरह से रीझाना है। इसलिए वह मुस्कुराते हुए बोली।)

मैं तुम्हारी मम्मी को इसलिए ढूंढ रही थी ताकि मैं उनसे

अपने बदन की मालीश करवा सकुं,,,,

( अपनी मामी की बस इतनी सी बात सुनते ही,,, उसके लंड नजर आने लगा वो समझ गया कि आज उसकी मामी की बुर उसे चोदने को जरूर मिलेगी,,, इसलिए वह भी वक्त गवाए बिना बोला।)

तो इसमें कौन सी बड़ी बात है मालिश करने में तो मे माहिर हूं,,,

तू किसकी मालीश करता है तुझे आता है क्या मालीश करना,,,

अरे मामी इसमें कौन सी बड़ी बात है,। कितने कैसा सीखना होता है मम्मी ने मुझे सब कुछ सिखा दि है। उनका बगन जब भी दर्द से टूटता था तो वह मुझे मालूम करने को कहती थी और धीरे-धीरे मैं इतनी अच्छी मालिश करने लगा कि मम्मी को दवा की जरूरत नहीं पड़ती,,,,

( शुभम की बातें सुनकर वह मन ही मन प्रसन्न होने लगी उसका रास्ता साफ होते नजर आ रहा था।)

तो क्या तू मेरी भी मालिश करके मेरा दर्द मिटा देगा,,,

हां मामी यह तो मेरे बाएं हाथ का खेल है,,।

चल ठीक है तू कहता है तो मैं आज देख लूं कि सच में तु मालीश कर पाता है या ऐसे ही बातें बना रहा है,,।

जो भी कह रहा हूं सच कह रहा हूं आजमा कर देख. लो,,,,

लेकिन मुझसे एक वादा करना होगा,,,

कैसा वादा?

यही कि तू मेरे और तेरे बीच कि यह मालिश वाली बात किसी से भी नहीं कहेगा,,, तभी मैं तुझ से मालिश करवाऊंगी,,,

( शुभम को क्या था उसे तो दोनों हाथों में लड्डू लेने से मतलब था और वह अपने दोनों हाथों में लड्डू के साथ-साथ मुंह में भी लड्डू लेने के लिए तड़प रहा था इसलिए वह बोला।)

आप बेफिक्र रहिए मामी मैं किसी से कुछ भी नहीं कहूंगा,,,

( शुभम की बात सुनकर मन ही मन प्रसन्न होने लगी उसके होठों पर मादक मुस्कान आ गई और वह मुस्कुराते हुए बोली,,,।)

तो चल मेरे साथ मेरे कमरे में वही तुझ से मालिश करवाऊंगी,,,

 
शुभम एकदम से प्रसन्न हो गया था,, क्योंकि वह जानता था कि मामी का इस तरह से अपने कमरे में बुलाकर मालिश करने का आमंत्रण साफ तौर पर उन्हें चोदने का अमुल्य अवसर था। और इस अवसर को शुभम किसी भी हाल में अपने हाथ से जाने नहीं देना चाहता था जिंदगी में पहली बार किसी गैर औरत को चोदने का शुभ अवसर जो उसे मिल रहा था। दूसरी औरतों को चोदने का अनुभव भी वह महसूस कर लेना चाहता था। उसकी बड़ी मामी इतना कहकर अपने कमरे की तरफ चल दी,,,, शुभम जल्दी से अपने बिस्तर से उठा और टी-शर्ट पहन कर एक बार कमरे से बाहर जाते जाते पजामे के ऊपर से ही अपने तने हुए लंड को पकड़ कर बोला,,,।

बहुत ही जल्द तेरे भाग्य खुलने वाले हैं,,, अगर सबकुछ ठीक हुआ तो आज तुझे बालों वाली बुर चोदने को मिलेगा,,,,

( और इतना कहकर वह कमरे से बाहर आ गया आज घर पर कोई भी नहीं था सिवा उसकी बड़ी मामी और उसके,,, इसलिए उसके मन में किसी भी प्रकार का भय नहीं था। और वैसे भी उसकी मां ने पहले से ही उसे इतना बता दी थी कि शाम ढलने से पहले वो लोग वापस नहीं आ पाएंगे,,, दोनों के पास पर्याप्त मात्रा में समय था शुभम इधर उधर देखते हुए अपने मामी के कमरे की तरफ आगे बढ़ने लगा,,,। अगले ही पल में अपनी मामी की कमरे के बाहर खड़ा था,, दरवाजा बंद था, दरवाजा बंद होने की वजह से वह थोड़ा असहज महसूस करने लगा,,, उसे समझ में नहीं आ रहा था कि कुछ सेकंड पहले ही अपने कमरे में आने का आमंत्रण देकर उसकी मा्मी ने इस तरह से दरवाजा क्यों बंद कर ली,,, फिर भी वह दरवाजे पर दस्तक दिए बिना ही बोला,,,।

मामी ओ,,,,, मामी कहां हो तुम,,,,?

दरवाजा खुला है अंदर आ जा,,,,।

( इतना सुनते ही उत्तेजना के मारे शुभम का दिल जोर से ऊछलने लगा,,, और यही हाल उसकी मा्मी का भी हो रहा था क्योंकि पहली बार ही वह कमरे में किसी गैर मर्द को आने का आमंत्रण दे रही थी।,,, शुभम तो इजाजत पाते ही दरवाजे को हल्के से धक्का दिया तो दरवाजा खुल गया। शुभम की नजर कैसे हैं कमरे के अंदर गई तो अंदर का नजारा देखकर हक्का-बक्का रह गया। ऊसकी बड़ी मामी, बिस्तर पर बैठी हुई थी और कंधे पर से साड़ी का पल्लू नीचे लुढ़का हुआ था। और तों और ब्लाउज के ऊपर के दोनों बटन खुले हुए थे जिसकी वजह से उसकी चूचियों का ज्यादातर हिस्सा बाहर नजर आ रहा था शुभम की नजर तो अपनी मामी की दोनों गोलाइयो पर ही टिकी की टिकी रह गई। शुभम को एक बात और हैरान करने वाली थी कि जब वह उसके कमरे में आई थी तब उसके ब्लाऊज के सारे बटन बंद थे,,, लेकिन अभी ब्लाउज के दोनों बटन खुले थे या जानबूझकर उसकी मामी ने खुद ही खोल दि थी,,,, औरतों मस्ती करने के अनुभव के हिसाब से,,

अब तक इतना तो समझ ही गया था कि जानबूझकर उसकी मम्मी ने अपने ब्लाउज के दोनों बटन उसे रिझाने के लिए खोल रखी थी। ऐसे में चाहे कुछ भी हो फायदा तो सिर्फ शुभम का ही था। बिस्तर पर बैठीे अपनी मामी की कामुकता को देखकर शुभम सब कुछ भूल कर एक टक बस उसे देखते ही रह गया। उसकी मामी मन ही मन प्रसन्न होने लगी क्योंकि जिस वजह से ऊसने अपने आप से दोनों बटन को खोली थी,,, वह वजह सफल होती नजर आ रही थी।,, शुभम को अपनी तरफ इस तरह से देखते हुए पाकर वह बोली।

अब देखते ही रहोगे यै इधर भी आओगे (इतना सुनते ही जैसे उसे नींद से जगाया हो इस तरह से चौकते हुए अपने कदम को अपने मामी की तरफ आगे बढ़ा दिया,, जैसे ही वह अपने कदम को आगे बढ़ाया ही था कि वह बोल पड़ी,,,,)

अरे अरे पहले दरवाजा तो बंद कर ले,,,

ओह सॉरी मैं भूल गया (इतना कहने के साथ ही वह दरवाजे को बंद करने के लिए दरवाजे की तरफ बढ़ा,,, दरवाजे पर कुंडी लगाए बिना ही वह दरवाजे को बंद करके वापस लौट हीलाते रहा था कि तभी उसकी मामी फिर बोल पड़ी,,,

अरे कुंडी तो लगा दे।,,,,

( अपनी मामी की बात सुनते ही वह जल्दी से दरवाजे की कुंडी लगाकर दरवाजे को बंद कर दिया,,, हड़बड़ाहट में वह सबकुछ भूल ही जा रहा था। अपनी मामी के मुंह से कुंडी लगा दे ऐसा सुनकर उसके बदन में कामोत्तेजना की लहर दौड़ नेे लगी क्योंकि कुंडी लगाने का संकेत वह साफ-साफ समझ रहा था,,, बंद कमरे में एक खूबसूरत जवान औरत और नई उम्र का लड़का जब आपस में मिलते हैं तो वह लोग सिर्फ एक ही खेल खेलते हैं,,,चुदाई,,,,,,,, चुदाई,,,,, और बस चुदाई,,,,,,,

कुंडी लगाने का मतलब यही था कि अब यह खेल शुरू होने वाला है। दरवाजे पर कुंडी रखते ही वह अपना समय बर्बाद नहीं करना चाहती थी इसलिए बिस्तर से खड़ी होती हुई बोली,,,

देख सुभम ऊस आलमारी में सरसों के तेल की शीशी होगी उसे लेते आना तो,,,,( हाथ के इशारे से उसे अलमारी दिखाते हुए बोली,,शुभम भी बिल्कुल देर नहीं करना चाहता था इसलिए वह, तुरंत अलमारी खोल कर इधर उधर देखा तो जल्दी उसे सरसों से भरी तेल की शीशी नजर आ गई, और वह झट से उसे लेकर अलमारी बंद करके जैसे ही अपनी मामी की तरफ मुड़ा तो अपनी मामी को देखते ही उसके तन-बदन में उत्तेजना की चिंगारियां फूटने लगी,,,, वह तों वहीं पर जड़वंत हो कर बस उस नजारे को अपनी आंखों के द्वारा देखते हुए उसका रसपान करने लगा।,,, करता भी क्या नजारा ही कुछ ऐसा था उसकी मामी बिना उसकी तरफ देखे अपनी साड़ी खोल रही थी। थोड़ी ही देर में उसके बदन से साड़ी अलग हो गई और वह अपनी साड़ी को बिस्तर पर फेंक दी,,, उसकी पीठ शुभम की तरफ थी जिसे वह जानबूझकर की हुई थी,,,ताकी चुस्त पेटीकोट में,, शुभम उसकी भरावदार और बड़ी-बड़ी गांड के आकार का मुआईना कर सके,,, और जैसा वह सोची थी बिल्कुल वैसा ही हो रहा था,,,। हाथ में तोल की बोतल लिए सुभम बार-बार अपनी मामी को ऊपर से नीचे की तरफ देख रहा था,,,, उसे समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करें क्योंकि इस उम्र में भी ऊसकी मामी का बदन खेतों में काम कर करके एकदम कसा हुआ था। बदन पर कहीं भी अधिक चर्बी का नामोनिशान नहीं था बस हल्का सा पेट निकला हुआ था। ब्लाउज पीछे से साधारण यह डिजाइन का था लेकिन डोरी से बना होने के कारण बेहद खूबसूरत और बदन की मादकता को और ज्यादा बढ़ा दे रहा था। हल्का सा सांवलाराम होने के बावजूद भी बदन में अजीज से निखार के साथ साथ गजब का चमक दिखाई दे रहा था। पतली कमर से हल्का सा ज्यादा घेराव होने की वजह से कमर के नीचे नितंबो का घेराव कुछ ज्यादा ही था जिसकी वजह से उसकी मामी का बदन कामोतेजना से भरपुर लग रहा था। चुस्त पेटीकोट,, का वह हिस्सा जो कि नितंबों से नीचे होता है, और नितंबों के बीच की फांक की गहराई और जांघों के बीच के फासले मैं इस तरह से उलझा हुआ था कि पेटीकोट में होने के बावजूद भी कमर के नीचे का पूरा बदन साफ तौर पर उसके आकार का कटाव और घेराव पेटीकोट के ऊपर से भी बड़े आराम से नजर आ रहा था। जिसे देखते ही शुभम के बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी।,,, कुछ देर तक शुभम की मामी जानबूझकर इसी तरह से,, खड़ी होकर अपने खूबसूरत बदन का रसपान अपने भांजे को कराती रही,, शुभम भी अपनी मां के खूबसूरत बदन की शारीरिक संरचना,, से पुरी तरह से वाकिफ था,, और तो और बाकी का कसर उसकी शीतल मैडम पूरा कर दे रही थी,, जिसकी वजह से औरत के बदन का कौन सा हिस्सा,, मर्दों के कामोत्तेजना और ज्यादा बढ़ाता है इस बारे में शुभम को भलीभांति मालूम था इसलिए तो उसकी नजर,,, उसकी मामी की बड़ी-बड़ी गांड पर ही टिकी हुई थी और यही तो शुभम की सबसे बड़ी कमजोरी भी थी,, जहां पर भी बड़ी-बड़ी और गोल गांड को दर्शन हो जाते थे,,, उसे छूने के लिए उसे पाने के लिए शुभम का मन बेचैन हो जाता था। कुछ मिनटों तक शुभम ऐसे ही खड़े खड़े ही अपनी मामी की खूबसूरत बदन को ऊपर से नीचे की तरफ देखकर अपनी आंखों को ठंडक देता रहा,,,, लेकिन इस तरह से खूबसूरत बदन को देखने की वजह से आंखों की ठंडक टांगों के बीच में गर्माहट दे रही थी। देखते ही देखते शुभम के पजामे मे पुरा तंबू बन चुका था। लेकिन इस बात का एहसास ऊसे बिल्कुल भी नहीथा वह तो एक दम मस्त हो कर अपनी मामी की खूबसूरत बदन का रसपान कर रहा था,, जो हाल शुभम का था उससे कहीं ज्यादा बेहाल उसकी मामी हुए जा रही थी,,, क्योंकि आए दिन शुभम को तो इस तरह के नजारे देखने की आदत सी हो गई थी कभी उसकी मां ईस तरह के नजारे दिखातीे तो कभी शीतल मैडम,,,,, लेकिन उसकी मामी का तो यह पहला अनुभव था क्योंकि पहली बार ही वह किसी गैर मर्द भले ही वह अभी जवान हो रहा हो लेकिन था तो एक पूरा मर्द ही,,, उसके सामने अपनी साड़ी उतार कर केवल ब्लाउज और पेटीकोट में खड़ी थी। जिस तरह का अनुभव शुभम अपने पजामे में कर रहा था उसी तरह का अनूभव उसकी मांमीे अपनी टांगों के बीच कर रही थी,,, जिस तरह की कामोत्तेजना का असर उसके बदन में हो रहा था वह बता नहीं सकती थी। उसकी बुर से लगातार नंमकीन रस झर रहा था। ऊसकी बुर पूरी तरह से गीली हो चुकी थी। उत्तेजना के मारे उसकी टांगों में कंपन सा हो रहा था उसके में इतनी हिम्मत नहीं थी कि पलटकर शुभम की तरफ देख सके। इस हालत में वह शुभम से शायद नजरें मिलाने से कतरा रही थी,, करीब-करीब पांच छ मिनट जैसा गुजर चुका था।। इतना तो वह समझ ही गई थी ईतनी देर से उसकी पीठ की तरफ खड़ा होकर शुभम क्या देख रहा होगा,,,। इस बात का एहसास होते ही की उस का भांजा चुस्त पेटीकोट में छिपी हुई उसके नितंबों के आकार को ही देख रहा होगा उसके तन-बदन में चीटियां रेंगने लगी।

वह हिम्मत करके शुभम की तरफ घूमते ही बोली,,,,

अरे तुझे कितनी देर्ररर,,,,,,( इतना कहने के साथ ही उसके मुंह में शब्द अटके के अटके ही रह गए,, क्योंकि उसकी नजर सीधे हीलाते शुभम के पजामे में बने तंबू पर पड़ गई,,, जो की पजामे मैं पूरी तरह से तना हुआ था। इतने ऊंचे और मजबूत तंबु को देखकर उसकी आंखें फटी की फटी रह गई वह आगे कुछ बोल नहीं पाई,,, अपनी मामी की हालत को देखकर उससे यह समझते देर नहीं लगी कि उसकी मा्मी ने पजामे में बने उसके तंबु को देख ली है। और इस बात का एहसास उसे तभी हुआ कि ऊसका लंड पूरी तरह से खड़ा है।,,,

 
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