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अमन रेहाना की गाण्ड को थाम लेता है, जिससे रेहाना की चुचियाँ उसके मुँह के सामने लटकने लगती हैं, और वो भी सटासट अपना लण्ड रेहाना की गीली चूत में पेलने लगता है-“अह्म्मह… जान् अह्म्मह… तेरी माँ की… अह्म्मह…” फिर रेहाना की एक चूची मुँह में लेकर गलप्प्प-गलप्प्प काटने लगता है।
रेहाना-“आह्म्मह… सुनिए ना… उंह्म्मह… इतने जोर से जानू खा जाओ इन्हें अह्म्मह…” वो इतने जोर से अपनी कमर पटक रही थी के पच-पच की आवाज़ आ रही थी। 10 मिनट में रेहाना की कमर थकने लगती है। इस दौरान वो एक बार झड़ चुकी थी, मगर जोश में वो सब कुछ भूल गई। वो तो आज जी भर के अपनी चूत को पानी पिलाना चाहती थी। रेहाना हाँफते हुए-“उंह्म्मह… जानू आप मेरे ऊपर आओ उंह्म्मह…”
अमन बिना रेहाना की चूत से लण्ड निकाले उसे नीचे कर लेता है, और चोदने लगता है। अमन के मजबूत हाथ रेहाना की नरम मखमली चुचियाँ पूरी तरह निचोड़ने लगते हैं-“अह्म्मह… रेहाना, साली कल नहीं चुदी क्या मलिक से…”
रेहाना-“नहीं जानू, मेरे चूत आपकी अमानत है उंह्म्मह… मैं उसमें खयानत नहीं होने दूंगी… आगज्गग आग उंह्म्मह… अम्मी…”
अमन ये सुनकर और जोर-जोर से उसे चोदने लगता है-“अह्म्मह… हाँ… तू मेरी है रेहाना, सिर्फ़ मेरी…”
रेहाना-“हाँ हाँ जानू, जानू आपकी, सिर्फ़ आपकी…”
25 मिनट की इस जबरदस्त चुदाई से दोनों हाँफने लगे थे और अब एक दूसरे की बाँहों में अपने प्यार का रस निकालने लगे थे। अमन दूसरी बार झड़ने लगा था, वहीं रेहाना चौथी बार। दोनों अपनी सांसें थामते हुए एक दूसरे के होंठों को चूमे जा रहे थे।
रेहाना-“अब आप जाएं, मलिक आता होगा…”
अमन-“तेरा शौहर है, और तू नाम लेती है?”
रेहाना अमन के लण्ड से खेलते हुए-“बीवी अपने शौहर का नाम नहीं लेती, जैसे मैं आपका नाम नहीं लेती…”
अमन उसे कसते हुए-“मेरी रेहाना, आई लव यू स्जीट हार्ट…”
रेहाना-“अह्म्मह… आई लव यू टू जानू…”
अमन अपने कपड़े पहनकर वपचकले दरवाजे से बाहर चला जाता है। रेहाना मुख्य दरवाजा खोलकरके दुबारा नहाने चली जाती है। आज कई दिनों बाद उसका बदन ढीला था, उसे अंदर से हल्कापन महसूस हो रहा था। वो नहाकर बाहर आई तो फ़िज़ा और मलिक घर आ चुके थे।
मलिक हाल में किकेट देख रहा था, जबकी फ़िज़ा रेहाना के रूम में बेड पे बैठी थी। और दरवाजे अंदर से बंद कर दी थी।
रेहाना जब बाहर आई तो तौलिया में थी, पूछा-“अरे आ गई बेटा? तेरे अब्बू कहाँ हैं?”
फ़िज़ा बेड से उठते हुए उसके पास जाती है। वो रेहाना के चेहरे को देखती है, फिर बेड को, फिर रेहाना को, फिर बेड को।
रेहाना के माथे पे पसीना आ जाता है।
फ़िज़ा-यहाँ अमन आया था?
रेहाना-“ना ना नहीं तो, वो यहाँ क्यों आयेगा?” उसकी आवाज़ में हकलाहट थी।
फ़िज़ा रेहाना के करीब उससे सटकर-“तो फिर ये बेडशीट पे क्या गिरा है?”
रेहाना बेडशीट बदलना भूल गई थी। क्योंकी उसपे अमन और रेहाना का प्रेम-रस पड़ा हुआ था, वो साफ-साफ पहचाना जा सकता था। रेहाना ने कहा-“मुझे एम॰सी॰ शुरू है…”
फ़िज़ा-“अच्छा…” और फ़िज़ा रेहाना की तौलिया निकालकर बेड पे फेंक देती है। अब रेहाना नंगी अपनी बेटी के सामने खड़ी थी।
रेहाना-क्या कर रही है बेटा?
फ़िज़ा अपनी दो उंगलियाँ रेहाना की चूत में डाल देती है।
रेहाना-“अह्म्मह… ओह्म्मह…”
फ़िज़ा अपनी उंगलियाँ बाहर निकालकर सूंघते हुए-“फिर इसमें से अमन की खुशबू क्यों आ रही है?” और फ़िज़ा वो गीली उंगलियाँ अपने होंठों पे, फिर रेहाना के होंठों पे फेरती है।
रेहाना ये सब देखकर गरम हो चुकी थी-“हाँ, वो आए थे मुझे जी भर के चोदकर गये हैं…”
फ़िज़ा अपने होंठ रेहाना के होंठों पे रखकर उन्हें चूसने लगती है-“गलप्प्प-गलप्प्प…” दोनों माँ-बेटी एक दूसरे की चूत को सहलाने लगती हैं।
रेहाना-“उंह्म्मह… बेटा छोड़ दे मुझे, नहीं तो फिर से नहाना पड़ेगा…”
पर फ़िज़ा तो बहक चुकेी थी। उसे अमन का लण्ड नज़र आने लगा था।
मलिक बाहर से-“अरे भाई, कपड़े चेंज करना हो गया हो तो दरवाजा खोलो, मुझे फाइल लेनी है…”
दोनों एक दूसरे को छोड़ देती हैं। दोनों की आँखों में हवस साफ नज़र आ रही थी। फ़िज़ा रेहाना के कान में-“अम्मी मैं रात में दरवाजा खुला रखूंगी…” और फ़िज़ा बाहर चली जाती है।
रेहाना बाथरूम में घुसते हुए बेड-शीट भी साथ ले जाती है। और चेंज करने लगती है।
रात 8 बजे-
ख़ान साहब-“अरे भाई, सब तैयारियाँ हो गई ना? वो लोग आते होंगे…”
रजिया-“जी हो गई हैं। कितने गेस्ट हैं?”
ख़ान साहब-पता नहीं ये अमन कहाँ रह गया?
अमन अपने रूम में तैयार हो रहा था।
डोरबेल बजती है, और अनुम दरवाजा खोलती है। सलाम के बाद वो मेहमान अंदर आते हैं। सिर्फ़ दो लोग थे पाशा और उसके बीवी महक। पाशा एक अधेड़ उमर का काला सा मर्द था। पर उसके बीवी महक किसी मॉडल से कम ना थी, ज्यादा से ज्यादा 25 साल की होगी।
ख़ान साहब दोनों मेहमानों को हाल में बैठाते हैं, और बातें करने लगते हैं।
पाशा अपनी बीवी से सबका परिचय करिाता है।
महक को देखकर पता नहीं क्यों दोनों रजिया और अनुम जल भुन गये थे। शायद वजह ये थी कि कुछ दिन अमन उनके साथ रहने वाला था फैक्टरी में।
15 मिनट बाद अमन हाल में दाखिल होता है।
महक-ये कौन है?
ख़ान साहब-ये अमन है, हमारा बेटा। यही आपकी फैक्टरी का नया मालिक होगा।
अमन दोनों से शेक हैंड करता है। आज अमन कयामत लग रहा था। डार्क ब्लू जीन्स उसपे क्रीम सफेद शर्ट और कोट में मानो कोई फिल्म हीरो हो। महक और अमन नज़रें मिलाते है। और मानो जैसे आँखों हैी आँखों में दोनों एक दूसरे को पसंद कर बैठे थे।
महक-अमन यहाँ बैठो।
अमन उन लोगों के साथ बैठ जाता है, और बिजनेस की बातें होने लगती हैं।
रेहाना-“आह्म्मह… सुनिए ना… उंह्म्मह… इतने जोर से जानू खा जाओ इन्हें अह्म्मह…” वो इतने जोर से अपनी कमर पटक रही थी के पच-पच की आवाज़ आ रही थी। 10 मिनट में रेहाना की कमर थकने लगती है। इस दौरान वो एक बार झड़ चुकी थी, मगर जोश में वो सब कुछ भूल गई। वो तो आज जी भर के अपनी चूत को पानी पिलाना चाहती थी। रेहाना हाँफते हुए-“उंह्म्मह… जानू आप मेरे ऊपर आओ उंह्म्मह…”
अमन बिना रेहाना की चूत से लण्ड निकाले उसे नीचे कर लेता है, और चोदने लगता है। अमन के मजबूत हाथ रेहाना की नरम मखमली चुचियाँ पूरी तरह निचोड़ने लगते हैं-“अह्म्मह… रेहाना, साली कल नहीं चुदी क्या मलिक से…”
रेहाना-“नहीं जानू, मेरे चूत आपकी अमानत है उंह्म्मह… मैं उसमें खयानत नहीं होने दूंगी… आगज्गग आग उंह्म्मह… अम्मी…”
अमन ये सुनकर और जोर-जोर से उसे चोदने लगता है-“अह्म्मह… हाँ… तू मेरी है रेहाना, सिर्फ़ मेरी…”
रेहाना-“हाँ हाँ जानू, जानू आपकी, सिर्फ़ आपकी…”
25 मिनट की इस जबरदस्त चुदाई से दोनों हाँफने लगे थे और अब एक दूसरे की बाँहों में अपने प्यार का रस निकालने लगे थे। अमन दूसरी बार झड़ने लगा था, वहीं रेहाना चौथी बार। दोनों अपनी सांसें थामते हुए एक दूसरे के होंठों को चूमे जा रहे थे।
रेहाना-“अब आप जाएं, मलिक आता होगा…”
अमन-“तेरा शौहर है, और तू नाम लेती है?”
रेहाना अमन के लण्ड से खेलते हुए-“बीवी अपने शौहर का नाम नहीं लेती, जैसे मैं आपका नाम नहीं लेती…”
अमन उसे कसते हुए-“मेरी रेहाना, आई लव यू स्जीट हार्ट…”
रेहाना-“अह्म्मह… आई लव यू टू जानू…”
अमन अपने कपड़े पहनकर वपचकले दरवाजे से बाहर चला जाता है। रेहाना मुख्य दरवाजा खोलकरके दुबारा नहाने चली जाती है। आज कई दिनों बाद उसका बदन ढीला था, उसे अंदर से हल्कापन महसूस हो रहा था। वो नहाकर बाहर आई तो फ़िज़ा और मलिक घर आ चुके थे।
मलिक हाल में किकेट देख रहा था, जबकी फ़िज़ा रेहाना के रूम में बेड पे बैठी थी। और दरवाजे अंदर से बंद कर दी थी।
रेहाना जब बाहर आई तो तौलिया में थी, पूछा-“अरे आ गई बेटा? तेरे अब्बू कहाँ हैं?”
फ़िज़ा बेड से उठते हुए उसके पास जाती है। वो रेहाना के चेहरे को देखती है, फिर बेड को, फिर रेहाना को, फिर बेड को।
रेहाना के माथे पे पसीना आ जाता है।
फ़िज़ा-यहाँ अमन आया था?
रेहाना-“ना ना नहीं तो, वो यहाँ क्यों आयेगा?” उसकी आवाज़ में हकलाहट थी।
फ़िज़ा रेहाना के करीब उससे सटकर-“तो फिर ये बेडशीट पे क्या गिरा है?”
रेहाना बेडशीट बदलना भूल गई थी। क्योंकी उसपे अमन और रेहाना का प्रेम-रस पड़ा हुआ था, वो साफ-साफ पहचाना जा सकता था। रेहाना ने कहा-“मुझे एम॰सी॰ शुरू है…”
फ़िज़ा-“अच्छा…” और फ़िज़ा रेहाना की तौलिया निकालकर बेड पे फेंक देती है। अब रेहाना नंगी अपनी बेटी के सामने खड़ी थी।
रेहाना-क्या कर रही है बेटा?
फ़िज़ा अपनी दो उंगलियाँ रेहाना की चूत में डाल देती है।
रेहाना-“अह्म्मह… ओह्म्मह…”
फ़िज़ा अपनी उंगलियाँ बाहर निकालकर सूंघते हुए-“फिर इसमें से अमन की खुशबू क्यों आ रही है?” और फ़िज़ा वो गीली उंगलियाँ अपने होंठों पे, फिर रेहाना के होंठों पे फेरती है।
रेहाना ये सब देखकर गरम हो चुकी थी-“हाँ, वो आए थे मुझे जी भर के चोदकर गये हैं…”
फ़िज़ा अपने होंठ रेहाना के होंठों पे रखकर उन्हें चूसने लगती है-“गलप्प्प-गलप्प्प…” दोनों माँ-बेटी एक दूसरे की चूत को सहलाने लगती हैं।
रेहाना-“उंह्म्मह… बेटा छोड़ दे मुझे, नहीं तो फिर से नहाना पड़ेगा…”
पर फ़िज़ा तो बहक चुकेी थी। उसे अमन का लण्ड नज़र आने लगा था।
मलिक बाहर से-“अरे भाई, कपड़े चेंज करना हो गया हो तो दरवाजा खोलो, मुझे फाइल लेनी है…”
दोनों एक दूसरे को छोड़ देती हैं। दोनों की आँखों में हवस साफ नज़र आ रही थी। फ़िज़ा रेहाना के कान में-“अम्मी मैं रात में दरवाजा खुला रखूंगी…” और फ़िज़ा बाहर चली जाती है।
रेहाना बाथरूम में घुसते हुए बेड-शीट भी साथ ले जाती है। और चेंज करने लगती है।
रात 8 बजे-
ख़ान साहब-“अरे भाई, सब तैयारियाँ हो गई ना? वो लोग आते होंगे…”
रजिया-“जी हो गई हैं। कितने गेस्ट हैं?”
ख़ान साहब-पता नहीं ये अमन कहाँ रह गया?
अमन अपने रूम में तैयार हो रहा था।
डोरबेल बजती है, और अनुम दरवाजा खोलती है। सलाम के बाद वो मेहमान अंदर आते हैं। सिर्फ़ दो लोग थे पाशा और उसके बीवी महक। पाशा एक अधेड़ उमर का काला सा मर्द था। पर उसके बीवी महक किसी मॉडल से कम ना थी, ज्यादा से ज्यादा 25 साल की होगी।
ख़ान साहब दोनों मेहमानों को हाल में बैठाते हैं, और बातें करने लगते हैं।
पाशा अपनी बीवी से सबका परिचय करिाता है।
महक को देखकर पता नहीं क्यों दोनों रजिया और अनुम जल भुन गये थे। शायद वजह ये थी कि कुछ दिन अमन उनके साथ रहने वाला था फैक्टरी में।
15 मिनट बाद अमन हाल में दाखिल होता है।
महक-ये कौन है?
ख़ान साहब-ये अमन है, हमारा बेटा। यही आपकी फैक्टरी का नया मालिक होगा।
अमन दोनों से शेक हैंड करता है। आज अमन कयामत लग रहा था। डार्क ब्लू जीन्स उसपे क्रीम सफेद शर्ट और कोट में मानो कोई फिल्म हीरो हो। महक और अमन नज़रें मिलाते है। और मानो जैसे आँखों हैी आँखों में दोनों एक दूसरे को पसंद कर बैठे थे।
महक-अमन यहाँ बैठो।
अमन उन लोगों के साथ बैठ जाता है, और बिजनेस की बातें होने लगती हैं।