• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

अमन विला-एक सेक्सी दुनियाँ complete

जीशान इससे पहले कुछ बोलता सोफिया की आवाज़ से दोनों चौंक जाते हैं।

सोफिया-“जीशान , अम्मी मुझे फ्लेट पर जाना है कुछ सामान वहाँ है, वो लेकर आना है। आप दोनों प्लीज़… मेरे साथ चलिये ना…”

जीशान-बाद में ले आएगे सोफी।

सोफिया-“नहीं प्लीज़्ज़… अभी चलिये…” उसकी आवाज़ में अजीजी भी थी और खौफ भी।

अनुम और जीशान एक दूसरे को देखने लगते हैं, और अनुम हाँ में सिर हिला देती है। रज़िया और लुबना को बताकर तीनों उस फ्लेट में चले जाते हैं, जो फ्लेट जीशान ने सोफिया को गिफ्ट किया था शादी के वक्त। खालिद और उसका परिवार जा चुके थे। सारा सामान जैसा का तैसा था। उन लोगों ने एक भी जीशान की दी हुई चीज को हाथ नहीं लगाया था। सारा फर्नीचर बेड सब कुछ जैसा का तैसा था।

जीशान-“सोफिया जल्दी से सामान ले ले, जो भी लेना है। मुझे फॅक्टरी भी जाना है…”

सोफिया अपने बेडरूम में जाकर बेड पर बैठ जाती है और फूट -फूट कर रोने लगती है। उसकी आवाज़ सुनकर हाल में बैठे अनुम और जीशान बेडरूम की तरफ भागते है।

अनुम-“क्या बात है सोफिया बेटा, क्यों रो रही हो? चुप हो जाओ…”

जीशान-ऐसे नहीं रोते सोफिया, क्या हुआ?

सोफिया-मुझे समझ में नहीं आ रहा, मैं कैसे कहूँ ?

अनुम-आखिर बात क्या है सोफिया बता तो?

सोफिया सिसकती हुई जीशान की आँखों में देखती हुई कहती है-“मैं प्रेगनेंट हूँ …”

अनुम और जीशान दोनों के मुँह से एक साथ बस यही निकलता है-क्या?

अनुम-“ तू क्या कह रही है सोफिया? जानती भी है तूने तो कही थी कि खालिद ने तुझे छुआ तक नहीं फिर?”

सोफिया कुछ नहीं कहती, बस एकटक जीशान को देखती रहती है।

जीशान आगे बढ़कर सोफिया को बेड से उठाकर खड़ा कर देता है-“ तू सच में प्रेगनेंट है सोफी?”

सोफिया-हाँ। मैं कई दिन से बताना चाहती थी, दो महीने हो गये हैं।

जीशान- तू सच कह रही है सोफी?

सोफिया-हाँ जीशान आपकी कसम।

जीशान सोफिया को अपनी छाती से लगाकर कस के बाहों में भर लेता है-“मेरी जान, आज मुझे तुम दोनों ने वो खुशी दी कि मैं मर ही ना जाऊूँ… आज तुम दोनों मेरे बच्चे की माँ बनने वाली हो…”

अनुम समझ जाती है कि सोफिया जीशान के बच्चे की माँ बनने वाली है।

जीशान-पागल , तूने मुझे बताया क्यों नहीं ?

सोफिया जीशान की बाहों में सिमट गई थी। वो यही चाहती थी की जीशान अपनी औलाद को अपना नाम दे। कहा-“मैं बताना चाहती थी, मगर हिम्मत नहीं जुटा पाई। आज सुबह जब अम्मी के मुँह से ये बात सुनी की वो भी आपके बच्चे की माँ बनने वाली हैं तो मुझसे रहा नहीं गया जीशान । हाँ हाँ मैं आपके बच्चे की माँ बनने वाली हूँ , आपकी मोहब्बत को जनम देने वाली हूँ जीशान …”

जीशान अनुम को भी अपनी बाहों में बुलाकर उसे भी अपनी छाती से लगा लेता है।

अनुम-“सुनिए, ये बात बाहर वालों तक जाएगी तो बहुत बदनामी हो जाएगी…”

जीशान-“अब किसी को भी कुछ नहीं पता चलेगा। मैं तुझसे कह रहा था ना मेरे ख्वाब के बारे में। हम अगले हफ्ते यू ॰के॰ जाने वाले हैं, हमेशा-हमेशा के लिए। यहाँ की फॅक्टरी मैंने नग़मा के नाम कर दिया है और वहाँ सारे इतेजामात कर दिए हैं।

हम वहाँ अपना नया बिजनेस शुरू करेंगे। नग़मा से मैंने सारी बात कर लिया है। वो बहुत खुश है। वो हमारी ख़ानदानी बातें उसके ससुराल वालों तक भी नहीं जाने देगी। बस अनुम तू अब कोई फिकर ना कर। मैं तुम सबको एक बेहतर नई जिंदगी दूँगा वहाँ। तुम मेरी इज़्ज़त हो, तुम्हें जीशान ख़ान अपनी सारी मोहब्बतें देगा, वादा है मेरा तुमसे…”

अनुम-“जान …” और वो जीशान की बातें सुनकर उसके होंठों को चूम लेती है

जीशान भी अनुम की कमर को सहलाते हुये पहली बार सोफिया के सामने अनुम के मुँह में जीभ डालकर उसके होंठों से रस पीने लगता है।

 


ये देख सोफिया की चूत भी सुरसुराने करने लगती है।

जीशान-“ये बेड सुहागरात के लिए तड़प रहा है। है ना सोफी?”

सोफिया-हाँ।

जीशान-“आज तुम दोनों ने मुझे इतनी बड़ी खुशी दी है कि मैं तुम दोनों का मुँह ऐसे मीठा करूँगा की तुम भी याद रखोगी…” कहकर जीशान अपनी शर्ट-पैंट उतारकर अंडरवेअर फेंक कर नंगा बेड पर लेट जाता है-तुम दोनों में से जो सबसे पहले नंगी होकर मेरे पास आएगी, मैं समझूंगा वो मुझसे सबसे ज्यादा प्यार करती है…”

अनुम सोफिया की तरफ देखती है और फिर जीशान के खड़े लण्ड को। उसकी शर्म तो जीशान कई दिन पहले ही मिटा चुका था। अब उसे किसी के सामने अपने शौहर से चुदने में कोई परेशानी नहीं महसूस होती थी।

अनुम और सोफिया, दोनों बिजली की तेजी से अपने कपड़े निकालकर जीशान के पास एक साथ आ जाते हैं। जीशान अनुम को अपने ऊपर खींच लेता है-“अनुम, मुझे तेरी चूत बता, जहाँ से मेरा बच्चा निकलेगा?”

अनुम अपनी कमर जीशान के मुँह की तरफ घुमा देती है और अपना मुँह जीशान के लण्ड की तरफ-“ये देखिये…”

जीशान अपने होंठ अनुम की चूत पर रख कर उसे चाटने लगता है गलपप्प।

अनुम-“आह्ह… सुनिये तो… अज़ज्जई अजी सुनिए नाअ आअह्ह…”

जीशान-“तू क्या देख रही है? मुँह में ले…” वो सोफिया को देखते हुये कहता है, जो सामने बैठी सब देखकर मुश्कुरा रही थी।

सोफिया और अनुम दोनों जीशान के लण्ड पर झुक जाते हैं, और दोनों माँ-बेटी शरमाती हुई जीशान के लण्ड को बार -बार चाटने और चूमने लगती हैं। इस तरह चूमने से दोनों के होंठ एक दूसरे से टकराने लगते हैं, और उसकी वजह से दोनों की चूत से चिंगारियाँ फूट ने लगती हैं।

कुछ ही पलों में वो शर्म-ओ-हया का पतला सा पर्दा भी फट जाता है, और दोनों अपनी जीभ बाहर निकालकर जीशान के लण्ड को, तो कभी एक दूसरे के होंठों को चूमने लग जाती हैं गलपप्प।

इधर जीशान भी अनुम की चूत के दाने को चाट-चाटकर सुजाने लग जाता है गलपप्प।

अनुम अपनी चूत जीशान के मुँह से हटाकर उसके ऊपर सवार हो जाती है और अपने हाथ से लण्ड पकड़कर उसे अपने चूत पर लगा देती है-“बहुत दिल कर रहा है जी अपनी बेटी के सामने चुदने के लिए… आह्ह… अब चोदिए भी जान …”

अपनी अनुम के बड़े-बड़े चूत ड़ों को दोनों हाथों में थामे जीशान भी लण्ड को अनुम की चूत में डाल देता है और सोफिया को अपने होंठों पर झुकाकर सटासट अनुम को चोदने लगता है।

अनुम-“आह्ह… जान …” अनुम भी सोफिया के साथ जीशान के होंठों को, तो कभी सोफिया के होंठों को चूमती हुई अपनी कमर आगे पीछे हिलाने लगती है।

एक तरफ माँ, तो दूसरी तरफ बेटी , दोनों के पेट में जीशान का बच्चा। बस यही एक बात जीशान के खून में ऐसी तपिश पैदा कर देती है कि वो जानवरों के तरह सटासट झपा-झप अनुम की चूत में पिस्टन की तरह अपने लण्ड को आगे पीछे करते हुये उसे चोदता चला जाता है।

और अनुम गधी की तरह अपना मुँह खोलकर चीखती चली जाती है-“आजज्ज्ज्ज्जई मार डालोगे क्या? अम्म्मी जी मैं गई…” वो धक्के इतने जानलेवा थे कि 10 मिनट में ही अनुम फारिघ् हो जाती है।

मगर जीशान का जोश अभी थमा नहीं था। वो सोफिया को अपने नीचे लेटा देता है और उसकी सोई हुई चूत पर थूक कर उस पर हथेली से रगड़ देता है।

सोफिया तड़प जाती है। पिछले कई दिन से चुदी नहीं थी सोफिया।

जीशान उसे और तड़पाने के लिए उसकी क्लोटॉरिस पर अपना लण्ड रगड़ने लगता है। उसकी चूत से लेकर गाण्ड के सुराख तक जीशान अपना लण्ड आगे पीछे करने लगता है।

सोफिया-“अम्मी इनसे बोलिये ना ऐसा ना करें… आह्ह…”

जीशान-तो क्या करूँ जान मेरी हाँ बोल?

सोफिया-“चोदिये ना आह्ह…”

उसका बोलना था कि जीशान अपने लण्ड को सोफिया की चूत में दो महीने बाद फिर से घुसा देता है।

सोफिया का जिस्म अकड़ सा जाता है। एक जोरदार चीख उसके मुँह से निकल जाती है। वो और चीखना चाहती है, मगर अनुम अपने चूत को उसके मुँह पर रख देती है और सोफिया को अपनी जीभ अनुम की चूत में डालनी पड़ती है। एक तरफ से जीशान के लण्ड का वार तो दूसरी तरफ से अनुम की चूत से बहते पानी की धार, सोफिया दोनों तरफ से पानी में सरबोर होने लगती है।

दोनों माँ-बेटी सबसे ज्यादा खुश थीं कि उनका शौहर उन दोनों को इतनी मोहब्बत और इतनी शिद्दत से प्यार भी करता है।

जीशान, अनुम और सोफिया के साथ अमन विला लौट आता है।

लुबना हाल में ही बैठी थी। उसके चेहरे से लगा रहा था कि वो थोड़ी अपसेट सी है।

अनुम और सोफिया चुदाई से थक से गई थीं, वो दोनों अपने-अपने रूम में थोड़ी देर आराम करने चली जाती हैं और जीशान आकर लुबना के बगल में बैठ जाता है।

जीशान-“की हाल है सोणियो?”

लुबना-बड़ी जल्दी आ गये? बड़े थके-थके से लग रहे हैं?

जीशान-नहीं तो। मैं बिल्कुल ठीक हूँ , तुम मुझे परेशान लग रही हो।

लुबना कुछ नहीं कहती। मगर उसकी खामोशी में छुपी हुई बातें जीशान को परेशान करने लगती है। वो लुबना से बात करना चाहता था, मगर उससे पहले उसका सेल फोन बजता है।

काल जीशान के यू ॰के॰ वाले दोस्त का था। जीशान थोड़ी देर उससे बात करता है और फिर से लुबना के पास आकर बैठ जाता है। जीशान सेल पर बात करने के बाद खुश नजर आ रहा था।

लुबना-क्या बात है, बहुत खुश लग रहे हैं? किसका काल था?

जीशान-दोस्त का। तुम क्यों मुँह उतारकर बैठी हो? किसी ने कुछ कहा क्या तुमसे?

लुबना-“कोई मुझसे बात करना पसंद नहीं करता, और जिसे मैं चाहती हूँ कि बात करूँ, वो मेरी तरफ देखता भी नहीं …” वो वहाँ से ये कहकर अपने रूम में चली जाती है।

जीशान भी उसके पीछे-पीछे रूम में चला जाता है, और रूम बंद करके उसका हाथ पकड़कर अपनी तरफ घुमा लेता है-“बात क्या है लुब ? तू मुझसे नाराज है?”

लुबना-“हाँ हूँ मैं आपसे नाराज, और क्यों ना हूँ ? जब देखो आप अम्मी के साथ बिजी रहते हैं। मेरे लिए तो आपके पास वक्त ह नहीं । कभी-कभी तो लगता है आप मुझसे झूठ कहते हैं कि आप भी मुझसे मोहब्बत करते हैं। देखिये जीशान , मुझसे नहीं देखा जाता कि आप मुझे अनदेखा करें। मैं ये नहीं चाहती कि आप अम्मी, और दादी का ख्याल ना रखें । मगर क्या मेरे लिए आपके पास वक्त नहीं ?”

जीशान एक हाथ लुबना की कमर में डालकर उसे अपने से चिपका लेता है-“हुम्म… नाराज है मेरी जान मुझसे तो कैसे मनाया जाए? हुम्म… एक काम करते हैं कि अपनी लुब की किस्सी ले लेते हैं…” और ये कहते हुये जीशान अपने होंठ लुबना के होंठों पर रख देता है।

यही वो तपिश थी जिसके लिए लुबना बेकरार थी, यही वो चाह थी जो लुबना जीशान से चाहती थी। अपने होंठों पर अपने महबूब के होंठों के लगते ही लुबना का सारा गुस्सा हवा हो जाता है, और वो भी जीशान के गले में बाहें डाल देती है।

जीशान-“आइ लव यू मेरा बच्चा…”

लुबना-“ लव यू टू जान …”

जीशान-मेरे साथ चलेगी घूमने?

लुबना-कहाँ?

जीशान-इग्लेंड।

लुबना-क्या? सच्ची जीशान ?

जीशान-“हाँ मुझे यू ॰के॰ जाना पड़ेगा, वहाँ एक गारमेंट्स की फॅक्टरी मैंने खरीद ली है और हमारा नया घर खरीद ने की भी कुछ कार्यवाही की है…”

लुबना खुशी से झूम उठती है-“मैं ज़रूर चलूंगी , और कौन साथ चलेगा?”

जीशान-“अम्मी, तू और मैं…”

लुबना-कब जाना है?

जीशान-“कल सुबह 11:00 बजे की फ्लाइट है। तू पेकिंग कर ले, मैं अम्मी को भी बता दूँगा। और एक बात?”

लुबना-क्या?

जीशान लुबना को अपनी गोद में उठ लेता है और खुद बेड पर बैठ जाता है। लुबना दोनों टाँगे जीशान के इर्द-गिर्द लपेटकर उसके लण्ड पर बैठ जाती है।

जीशान-“वहाँ मैं तुझसे निकाह करने वाला हूँ , अम्मी की मौजूदगी में…”

ये सुनते ही लुबना की पलकें शर्म से झुकती चली जाती हैं। जीशान दोनों हाथों में लुबना के चूत ड़ों को हल्के से दबाता है।

लुबना-“इशह… क्या कर रहे हैं?”

जीशान-“करेगी ना मुझसे शादी लुबु?”

लुबना अपने मुँह में जीशान का कान लेकर चूमती हुई धीरे से कहती है-“हाँ…”

जीशान-“मुझे तुझसे कितनी मोहब्बत है लुब , ये मैं तुझसे उस दिन के बाद बताऊँगा?”

 
जीशान लुबना को अपनी गोद में उठ लेता है और खुद बेड पर बैठ जाता है। लुबना दोनों टाँगे जीशान के इर्द-गिर्द लपेटकर उसके लण्ड पर बैठ जाती है।

जीशान-“वहाँ मैं तुझसे निकाह करने वाला हूँ , अम्मी की मौजूदगी में…”

ये सुनते ही लुबना की पलकें शर्म से झुकती चली जाती हैं। जीशान दोनों हाथों में लुबना के चूत ड़ों को हल्के से दबाता है।

लुबना-“इशह… क्या कर रहे हैं?”

जीशान-“करेगी ना मुझसे शादी लुबु?”

लुबना अपने मुँह में जीशान का कान लेकर चूमती हुई धीरे से कहती है-“हाँ…”

जीशान-“मुझे तुझसे कितनी मोहब्बत है लुब , ये मैं तुझसे उस दिन के बाद बताऊँगा?”

लुबना-मुझे बेसब्री से इंतजार रहेगा।

जीशान-मुझे कुछ चाहिए अभी।

लुबना-क्या?

जीशान-“ईई…” और वो अपना एक हाथ लुबना की शलवार के ऊपर रख देता है, उस हिस्से पर जहाँ लुबना की चूत छुपी हुई थी।

लुबना की आँखें बंद हो जाती हैं-“सब कुछ आपका है जीशान … मगर मैं चाहती हूँ कि शादी के बाद आह्ह…”

जीशान-तुझे मुझ पर यकीन है?”

लुबना-खुद से भी ज्यादा।

जीशान-“तो उतार इसे सब कुछ। एक भी चीज तेरे जिस्म पर नहीं रहनी चाहिए…”

लुबना खड़ी हो जाती है और अपने भाई की आँखों में देखती हुई अपने सारे कपड़े उतारने लगती है। जीशान के कहने के मुताबिक वो अपने जिस्म पर एक भी चीज नहीं रखती। सिर से लेकर पाँव तक हुश्न की मलिका अपना सितम ढाने को तैयार थी, अपनी जान के लिए जान भी दे देने वाली लुबना के दिल में रत्ती बराबर भी डर नहीं था।

जीशान उसे लेटा देता है और उसके ऊपर चढ़कर उसके होंठों को चूमते हुये गर्दन पर जीभ फेरते हुये नीचे चूत तक चला आता है। लुबना साँसें रोक कर एक-एक लम्हा जीने लगती है। जैसे ही जीशान का मुँह लुबना की चूत पर पड़ता है लुबना तड़प जाती है।

लुबना-“भाई जान्न…”

जीशान-“गलपप्प-गलपप्प… लुब तेरे जैसी हसीन मैंने नहीं देखा। ये हुश्न जानलेवा है मेरी जान… गलपप्प-गलपप्प…”

लुबना-“हुश्न भी आपका, जिस्म भी आपका आह्ह… लुबना भी आपकी जीशान …” लुबना नहीं जानती थी कि जीशान अपनी पैंट उतार चुका है, वो तो अपनी आँखें बंद करके जीशान की जीभ को अपनी चूत के ऊपर घूमता हुआ महसूस करके मदहोश सी हो गई थी।

जब जीशान घूमकर लुबना के चेहरे की तरफ आता है तब लुबना आँखें खोलकर देखती है। उसकी आँखों के सामने जीशान का लण्ड झूल रहा था, गुलाबी सुपाड़े पर चमकती हुई शबनम की बूँदें लिए जीशान का हसीन लण्ड देखकर लुबना खुद को रोक नहीं पाती और बिना कुछ सोचे, बिना कुछ बोले उस प्यार की होने वाली निशानी को अपने मुँह में लेकर चूसने लगती है।

जीशान भी अपनी लुबना की टाँगों में सिर दबाए लुबना की गाण्ड के सुराख को और चूत के दाने को चाटने और काटने लगता है गलपप्प-गलपप्प।

लुबना की चूत पर जीशान की गरम जीभ इस कदर आगे पीछे घूम रही थी कि लुबना को ऐसा लग रहा था जैसे जीशान उसे चाट नहीं रहा, बल्की चोद रहा है। लुबना बर्दाश्त नहीं कर पाती और जीशान के सिर को अपने हाथों से कस के पकड़कर कमर को जोर-जोर से आगे पीछे करती हुई जीशान के मुँह पर झड़ने लगती है।

लुबना-“अह्ह्ह्ह… अम्मी जी आह्ह…”

जीशान भी अपनी बहन को शायद अपना पानी पिलाना चाहता था। हालाँकि वो कुछ देर पहले अनुम और सोफिया की चूत में ढेर सारा पानी छोड़कर आया था, मगर लुबना के मुँह का ह कमाल था कि जीशान फिर से उसके मुँह में झड़ने लगता है, और लुबना एक-एक कतरा पीती चली जाती है।

थोड़े देर बाद जीशान लुबना को पेकिंग करने का कहकर वहाँ से अपने रूम में चला जाता है।

 
रात के खाने के वक्त जीशान घर की सभी औरतों के सामने बताता है कि उसे 7 दिन के लिए यू ॰के॰ जाना है और अनुम और लुबना को भी साथ ले जाना है। अनुम और लुबना के नाम से ही प्रॉपर्टी खरीदा था जीशान ने। इसलिए उन दोनों का वहाँ रहना ज़रूरी था।

सभी ये सुनकर बेहद खुश होते हैं, और रात में अनुम और लुबना पेकिंग करके सुबह होने का बेसब्री से इंतजार करने लगते हैं। अनुम के लिए तो ये हनीमून जैसा एहसास था, और लुबना अपनी शादी के ख्याल से ही खुश हो उठी थी।

सुबह 9:00 बजे जीशान, अनुम और लुबना रज़िया और सोफिया से मिलकर इग्लेंड के लिए रवाना हो जाते हैं सफर थका देने वाला था। कई घंटों के सफर के बाद तीनों यू॰के॰ पहुँच जाते हैं। वहाँ जीशान का एक दोस्त उन्हें रिसीव करने आता है, और तीनों उसके साथ एक होटेल में चले जाते हैं।

जीशान कल अपने नये घर और फॅक्टरी देखने जाने वाला था। वो सभी बहुत थक चुके थे। रात का खाना खाने के बाद तीनों एक बेडरूम में सो जाते हैं। किसी में भी इतने ताकत नहीं बची थी कि कपड़े भी चेंज करे।

सुबह जब लुबना की आँख खुलती है तो उसे बेड पर जीशान और अनुम नजर नहीं आते। वो मुँह में ब्रश करती हुई बाथरूम में चली जाती है और दरवाजा खोलते ही उसकी आँखें चकाचौंध हो जाती हैं।

सामने अनुम झुकी हुई थी और जीशान नीचे से नंगा उसकी चूत चाट रहा था।

लुबना ये देखकर वहीं रुक जाती है।

अनुम-“आजी बस भी करिये, चूत में आग लगी हुई है हाँ…”

जीशान-“चुप कर साली … मीठी चूत से दिल नहीं भरता मेरा गलपप्प…”

अनुम-“आपको मेरी कसम चोदिये ना आह्ह… आपने कल से नहीं मुझे किए आह्ह… अम्मी जी…”

जीशान-“ए… यहाँ कहाँ तेरी अम्मी आएगी। यहाँ बस मैं तू और मेरे होने वाली बीवी लुबना है। तुम दोनों का हनीमून ट्रिप है ये। तुम दोनों को तो पूरे 7 दिन नंगा रखने वाला हूँ मैं गलपप्प-गलपप्प…”

अनुम-“कुछ भी करिये, कैसे भी रखिए मगर आह्ह…”

वो रुक जाते हैं क्योंकी जीशान पीछे से अपना लण्ड उसकी एक टाँग उठाकर चूत के अंदर घुसा देता है।

अनुम-“मर गई जी…”

जीशान-“चीख साली … बहुत चुदक्कड़ औरत है तू अनुम आह्ह…”

अनुम-“मैं कहाँ थी? सब आपने ले लेकर मेरी , मुझे ऐसा कर दिया…”

जीशान-“क्या ले लेकर जान्न? हाँ आह्ह…”

अनुम-“मेरी चूत और गाण्ड लेकर आह्ह… आराम से नाअ…”

जीशान-“देख तेरी बेटी तुझे कैसे देख रही है?”

 
सामने खड़ी लुबना अपने होश में आ जाती है, और अनुम उसे देखते हुई रुकती नहीं बल्की और जोर से अपनी कमर आगे पीछे करने लगती है।

अनुम-“मेरे पेट में भी आपका बच्चा है, वो भी आपको देख रहा है जान । वो चाहता है पापा उसकी ममा को और जोर से करें आह्ह…”

जीशान दोनों हाथों में अनुम की कमर को पकड़कर दनादन लण्ड अंदर-बाहर करने लगता है और 15 मिनट की जोरदार चुदाई के बाद अपना पानी अनुम की चूत में निकाल देता है।

अनुम चूत से लण्ड निकालने के बाद कमर हिलाती हुई टायलेट में घुस जाती है।

लुबना अब भी वहीं खड़ी थी। जीशान उसका हाथ पकड़कर उसे अपने पास खींच लेता है और शावर ओन कर देता है। दोनों पानी में भीगने लगते हैं। जीशान अपने हाथ से लुबना की भीगी चूत सहलाने लगता है, और कहता है-“देखी लुब , कैसी चुदक्कड़ है तेरी अम्मी?”

लुबना-“हाँ… मगर आपने मुझे नहीं देखा अब तक?”

जीशान लुबना की बात पर मुश्कुरा देता है।

नाश्ता करने के बाद जीशान, लुबना और अनुम को लण्डन दिखाने ले जाता है। वो इससे पहले भी कई बार अपने अब्बू अमन ख़ान के साथ इग्लेंड आ चुका था।

अनुम और लुबना बहुत खुश नजर आ रही थी। मोहब्बत साथ थी, जज़्बा एक था और जीने का मकसद भी तीनों का एक ही था। जीशान अनुम और लुबना को उनकी पसंद की शॉपिंग करवाता है, और बिना दोनों से कहे लुबना और अनुम के लिए खुद भी कुछ खरीद लेता है। जब वो शॉपिंग माल से बाहर निकल रहे होते हैं तो जीशान को उसका दोस्त वहीं उनकी कार के पास खड़ा मिलता है।

जीशान अनुम और लुबना से उसकी मुलाकात करवाता है। अनुम और लुबना बिल्कुल नहीं जानती थी कि जीशान के दिल और दिमाग़ में क्या चल रहा है?

जीशान का दोस्त उन तीनों को अपनी कार में ले जाता है। कुछ मिनट के बाद कार जब एक हाल के सामने रुकती है तो अनुम को थोड़ा-थोड़ा शक सा होता है, मगर वो जीशान से कुछ नहीं कहती। तीनों जीशान के दोस्त के साथ उस हाल में दाखिल होते हैं, और अंदर का नजारा देखकर अनुम के साथ-साथ लुबना की आँखों में भी खुशी के आँसू छलक जाते हैं।

जीशान और उसके दोस्त ने वहाँ एक छोटा मगर बेहद खूबसूरत निकाह का इंतज़ाम किया हुआ था। जीशान लुबना का हाथ अपने हाथ में लेकर उससे कहता है-“कैसा लगा मेरा सरप्राइज लुबु?”

लुबना-“बेहद हसीन, मेरी उम्मीदों से भी ज्यादा खूबसूरत …”

जीशान-“अनुम लुबना को तैयार करके यहाँ ले आओ और खुद भी…”

अनुम लुबना को लेकर एक रूम में चली जाती है। उनकी मदद करने के लिए वहाँ स्थानीय कुछ औरतें भी थीं, जिन्हें जीशान के दोस्त ने वहाँ इन्वाइट किया था।

शादी के ड्रेस में लुबना बहुत हसीन लग रही थी। जब वो साज सँवर के जीशान के पास हाल में आती है तो सभी की नजर उसपर आकर रुक जाती है। वहाँ कोई नहीं जानता था कि जीशान और लुबना भाई-बहन हैं। काजी को भी यही बताया गया था कि वो कजिन हैं।

काजी साहब अपनी कार्यवाही शुरू करते हैं। पहले लुबना से क़ुबूल करवाया जाता है, और उसके बाद जीशान से। एक सींपल मगर बेहद खूबसूरत अंदाज में जीशान और लुबना की शादी करवा दी जाती है।

सभी मेहमानों के खाना खाने के बाद जीशान अनुम और लुबना अपने नये घर जिसका नाम जीशान ने ‘अनुम विला’ रखा था, वहाँ पहुँचते हैं, जो निहायत ही खूबसूरत और वेल डेकोरेटेड था। अनुम विला सारी फेसिलिटीज से लेश।

अनुम और लुबना घर देखते ही रह जाते हैं।

 
सभी मेहमानों के खाना खाने के बाद जीशान अनुम और लुबना अपने नये घर जिसका नाम जीशान ने ‘अनुम विला’ रखा था, वहाँ पहुँचते हैं, जो निहायत ही खूबसूरत और वेल डेकोरेटेड था। अनुम विला सारी फेसिलिटीज से लेश।

अनुम और लुबना घर देखते ही रह जाते हैं।

जीशान सारी फोर्मिलिटीज पूरी करने के बाद जब अनुम और लुबना के पास आकर घर की चाबियाँ अनुम के हाथों में देता है तो अनुम और लुबना दोनों माँ-बेटी जीशान के गले से लिपट कर रो पड़ती हैं।

जीशान-“अरे बस बस अनुम लुब … अब इन खूबसूरत आँखों में मुझे आँसू नहीं , बल्की खुशी की कलियाँ खिलती हुई दिखाई देनी चाहिए…”

अनुम-“हम सोच भी नहीं सकते थे कि हमारा जीशान इतना सब कुछ इतनी आसानी से अरेज भी कर लेगा। मुझे तुम पर फख्र है और खुशी भी कि मैंने अपने बेटे में एक सही मर्द का इंतिखाब किया।

लुबना-“आपका बहुत-बहुत शुक्रिया। आपने आज मुझे वो खुशी दी है, जिसकी तमन्ना मैं हमेशा से करती आई हूँ । दुनियाँ की नजर में ये एक नाजायज रिश्ता होगा, एक गुनाह होगा, मगर मेरी नजर में मोहब्बत से बड़ा रिश्ता कोई नहीं , और इस मोहब्बत की खातिर आज एक माँ और एक बहन अपनी जान से सिर्फ़ एक चीज माँगती हैं, क्या आप हमें वो देगे?”

जीशान-जान भी माँगो दे दूँगा।

लुबना अपने हाथों में अनुम और जीशान दोनों का हाथ लेकर धीरे से कहती है-“अपनी मोहब्बत कभी कम मत होने देना हम दोनों के लिए। आपसे हमें और कुछ नहीं चाहिए। अगर आप हमें एक छोटे से घर में भी रखेंगे तो हम खुशी-खुशी रह लेंगे, मगर आपके बिना जेशु सच कहती हूँ मर जाएँगे हम…”

जीशान-“कसम खाता हूँ तेरी और अनुम के सिर की लुबना, जिस दिन भी दिल से तुम दोनों के लिए थोड़ी से भी मोहब्बत कम हुई, वो दिन मेरी जिंदगी का आख़िरी दिन हो गा…”

अनुम अपने महबूब के होंठों पर उंगली रख कर उसके सीने से लिपट जाती है।

रात का खाना खाने का किसी का भी मूड नहीं था, ख़ासकर लुबना का। उसके जज़्बात की कोई इंतिहा नहीं थी। हर एक गुजरता हुआ लम्हा उसके तन बदन में आग भड़का रहा था।

जीशान अनुम और लुबना के हाथ में एक-एक पैकेट देता है।

अनुम-क्या है इसमें?

जीशान-“इसमें मेरी खूबसूरत बीवियों के लिए वो ड्रेस हैं, जिन्हें तुम दोनों बेडरूम में पहनोगी आज के बाद हर रात…” ये कहकर जीशान बाथरूम में नहाने चल जाता है।

अनुम पैकेट खोलती है। उसमें कुछ भी नहीं था, बस एक चिट्ठि थी, जिस पर लिखा था-“तुम मुझे ऐसे ही अच्छी लगती हो अनुम बिना कपड़ों के…”

अनुम बुरी तरह शरमा जाती है और जीशान को ढूँढती हुई बाथरूम की तरफ चली जाती है।

अनुम के जाने के बाद जब लुबना पैकेट खोलकर देखती है तो हया की चादर उसे घेर लेती है। वो दिल में सोचती है कि आज मुझे ये पहनकर जीशान के पास जाना होगा।

जीशान बाथरूम में नंगा नहा रहा था कि पीछे से दरवाजा खुलता है और जब जीशान पलटकर देखता है तो अनुम उसे पलटने नहीं देती है और उसकी पीठ से चिपक जाती है।

अनुम-“आप ना दिन-बा-दिन और बेशर्म होते जा रहे हैं…”

जीशान जोर से हँसता है-“मैंने तो तुझे बेडरूम में ऐसे रहने के लिए कहा था अनुम…”

अनुम-“ मेरी जान को जब ऐसी ही मैं अच्छी लगती हूँ तो मुझे कोई ऐतराज नहीं । हमेशा आपके साथ ऐसे रहने का…”

जीशान पलटकर अनुम की आँखों में देखते हुये उसके लबों को चूम लेता है और अनुम अपने नाजुक हाथों में जीशान का कड़क लण्ड पकड़ लेती है। धीरे-धीरे जीशान अपनी कमर को अनुम की चूत की तरफ बढ़ाने लगता है। मगर अनुम उसे रोक लेती है।

अनुम-“रुकिये सरकार… आज इस पर सबसे पहला हक लुब का है, और मैं अपनी बेटी के साथ ना- इंसाफी नहीं होने दूँगी …”

जीशान-“अच्छा तो चलो बाहर। मुझे भी देखना है कि मेरी लुबना मेरे दिए हुये तोहफे में दिखती कैसी है?”

जीशान और अनुम वैसे ही नंगे बाहर चले आते हैं, और लुबना के रूम से बाहर आने का इंतजार करने लगते हैं तकरीबन 5 मिनट बाद लुबना जब बाहर आती है तो जीशान के चेहरे पर मुस्कान और अनुम के चेहरे पर खुशी झलक जाती है।

लुबना वहीं खड़ी उन दोनों को देख रही थी।

जीशान-इधर आओ जान… शरमाओ मत इधर आओ,

लुबना अपने नंगे भाई और नंगी अम्मी की तरफ धीरे-धीरे चलते हुई आ जाती है।

जीशान-“देखो अनुम कितनी खूबसूरत लग रही है मेरी लुब , अपनी सुहागरात वाले ड्रेस में?”

लुबना का चेहरा शर्म से झुकता चला जाता है।

मगर जीशान उसे झुकने नहीं देता है, वो उसे अपने हाथ से ऊपर उठाता है और लुबना की आँखों में झाँकते हुये कहता है-“मेरी लुब मेरी जान, आज से मेरी हो जा। मैं तुझे वो सारी खुशियाँ देना चाहता हूँ , जो तू चाहती थी। शायद तू नहीं जानती, मगर मैंने एक बार तेरे कंप्यूटर में मेरे लिए लिखा हुआ वो पेज पढ़ा था, जिसमें तूने

अपनी होने वाली सुहागरात के बारे में कुछ ख्यालात लिखी थी कि तू कैसे अपनी सुहागरात मनाना चाहती है। देख जैसे तूने सोची थी वैसे ही अरेज किया है ना मैंने?”

लुबना हैरत से जीशान की तरफ देखने लगती है।

जीशान लुबना और अनुम को अपने नये घर के बेडरूम में ले आता है। बेड पर लेटाकर जीशान लुबना की पैंटी उतार देता है और उसके होंठों को चूमने लगता है।

अनुम अपनी लुबना की चूत पर अपने होंठों को लगाकर उसकी कुँवारी चूत का पहला पानी पीने लगती है।

देखते ही देखते लुबना का जिस्म भट्ठी की तरह गरम हो जाता है और वो जोर-जोर से आहें भरने लगती है-“आह्ह… अम्मी जी वहाँ नहीं ना उन्ह… बस भी करिए ना जी अम्मी…”

शायद अनुम अपनी जीभ से अंदर जाने की कोशिश कर रही थी जिसकी वजह से लुबना खुद को चीखने से रोक नहीं पा रही थी।
 


इधर जीशान का लण्ड भी अपनी प्यारी बहना की चूत को खोलने के लिए बेकरार था।

अनुम लुबना की प्यारी चूत से मुँह हटाकर जीशान के लण्ड को चूसने लगती है। उसकी देखा देखी लुबना भी जीशान के लण्ड की तरफ झुकती चली जाती है, और दोनों माँ-बेटी एक साथ बिना किसी शर्म के जीशान के लण्ड को चाटने और चूसने लगती हैं।

ऐसा बिल्कुल भी नहीं लग रहा था कि वो तीनों एक खून से जुड़े हुए हैं, उनकी रगों में एक ही खून था। मगर उस वक्त वो खून बस यही चाहता था कि इस खून से एक और नया खून वजूद ले, जो अनुम और लुबना की चूत से निकले, जिसका बाप जीशान हो।

अपने लण्ड को जीशान और तड़पाना नहीं चाहता था। वो लुबना को लेटा देता है और अनुम अपनी चूत लुबना के मुँह पर लगा देती है।

जीशान-थोड़ा दर्द होगा लुबु।

लुबना-आप फिकर ना करें।

जीशान मुश्कुरा देता है और अनुम की आँखों में उससे भी इजाजत लेकर अपने लण्ड को लुबना की चूत के मुहाने पर लगा देता है। जैसे ही लण्ड लुबना की चूत से टकराता है, लुबना आँखें बंद कर लेती है, और कुछ ही पल बाद उसकी आँखें खुलीं की खुलीं रह जाती हैं, जब जीशान का बेरहम लण्ड अपने ख़ानदान की आख़िरी चूत के अंदर घुसते हुये उसकी पतली सी चूत की झिल्ली को छेदता हुआ अंदर तक चला जाता है।

लुबना-“अम्म्मी आह्ह… नहीं ना प्लीज़्ज़… अम्मी…” वो पहला दर्द हर किसी को बर्दाश्त करना ही पड़ता है।

जीशान अपने धक्के रोकता नहीं , बल्की शुरू रखते हुये और बढ़ा देता है। हर धक्का पहले लुबना को जानलेवा लग रहा था, मगर धीरे-धीरे वो एहसास एक ऐसे खुश गवार जज़्बात में तब्दील होता चला गया कि लुबना भी अपनी कमर को ऊपर जीशान के लण्ड की तरफ उठाने लगती है।

लुबना-“रकिये मत आह्ह… बस करते रहिए नाअ… गलपप्प-गलपप्प…”

आज पहली बार लुबना के साथ बहुत कुछ हो रहा था। पहली बार उसकी चूत में कोई लण्ड गया था, और पहली बार ही वो अपनी अम्मी की चूत भी चाट रही थी। यही वो एहसास था जो लुबना महसूस करना चाहती थी। अपनी पहली चुदाई लुबना ज्यादा देर झेल नहीं पाती और जीशान के लण्ड पर झड़ने लगती है।

मगर जीशान उसे अपने नीचे से नहीं हटने देता है। वो दोनों टाँगे पकड़कर सटासट लुबना की चूत में लण्ड घुसाता जाता है। लुबना की हर चीख अनुम को उसकी चुदाई याद दिला रही थी, जब अमन ने पहली बार उसे इस तरह चोदा था। अनुम जीशान के होंठों को चूमती हुई अपनी चूत को लुबना के मुँह पर जोर-जोर से घिसने लगती है।

अपने दोनों सुराखों को बंद पाकर लुबना का जिस्म थरथराने लगता है। वो चीखना चाहती थी, मगर उसके दोनों सुराख इस कदर बंद थे कि वो कुछ नहीं कर सकती थी।

अनुम-“अब बस भी करिये, बच्ची है…”

जीशान-“अच्छा तुझे बड़ी फिकर हो रही है साली , लगता है तुझे जम कर चाहिए…”

अनुम-“हाँ और नहीं तो क्या? कब से देख रही हूँ और आप हैं कि एक नजर देखते भी नहीं …”

जीशान अनुम का हाथ पकड़कर लुबना की चूत पर उल्टा लेटा देता है, और पीछे से अपना लण्ड अनुम की चूत पर लगा देता है-“बोल क्या चाहिए तुझे? अनुम बोल?”

अनुम-“मुझे अपने शौहर का लौड़ा चाहिए, हर रात इसी तरह अपनी अम्मी को अपनी बेटियों के ऊपर लेटाकर मुझे चोदेगे ना आप? बोलिए चोदेंगे ना?”

जीशान अपने लण्ड को चूत में सट करके घुसा देता है, और उसे अनुम के चूत की गहराईयों में पहुँचा देता है। और अनुम अपने होंठों को लुबना के होंठों से मिला देती है। दोनों माँ-बेटी एक दूसरे को अपनी बाहों में कस के भर लेती हैं।

जीशान बेहद खुश था। उसे असल मायने में अमन विला मिल गया था। जीशान लगातार अनुम को 15 मिनट चोदता रहता है। इस दौरान अनुम कई बार झड़कर निढाल हो जाती है, और जब जीशान अपने लण्ड का पानी उसकी चूत में निकालकर उन दोनों के बीच में लेटता है तो दोनों अनुम और लुबना अपना सिर जीशान की छाती पर रख देती हैं।

जीशान ख़ान-“आज मैं बहुत खुश हूँ अनुम, लुब । मैंने जो चाहा, वो मुझे मिल गया। बस हमारे इस घर को किसी की नजर ना लगे।

शायद ऊपर वाले ने भी जीशान के दिल की बात सुन ली थी। 15 दिन बाद जीशान रज़िया और सोफिया को भी अपने पास इग्लेंड ले आया।

चारों औरतें खुश थीं।

जीशान अपने अब्बू अमन ख़ान की तरह किसी के साथ भी ना इंसाफी नहीं होने देता। जहाँ वो एक तरफ अनुम और लुबना को भी उतनी ही मोहब्बत देता, वहीं रज़िया और सोफिया के साथ भी कभी कमी नहीं होने देता। चारों औरतें अपने शौहर जीशान ख़ान के साथ एक बेडरूम में रहती थीं।

देखते ही देखते अमन विला के इस शहजादे जीशान ख़ान के घर अनुम विला में बच्चों की किल्कारियाँ गूँजने वाली थीं।

9 महीने बाद अनुम को एक लड़का हुआ, जिसका नाम अमन ख़ान रखा गया।

सोफिया को एक बेटी हुई जिसका नाम जीशान ने शीबा रखा।

और अपनी सबसे खूबसूरत बीवी से जीशान इतनी मोहब्बत करता था कि लुबना ने जीशान को एक नहीं दो बेटियाँ दी । एक का नाम नीलोफर और दूसरी का नाम जन्नत रखा गया।

अनुम विला में अक्सर ये नजारा देखने को मिलता था। जीशान के लण्ड से चिपकी

रज़िया

अनुम

सोफिया और

लुबना

दोस्तो ये कहानी भी अपने अंजाम पर पहुँच ही गई अब फिर मिलेंगे नई के साथ

समाप्त

 
Back
Top