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जीशान इससे पहले कुछ बोलता सोफिया की आवाज़ से दोनों चौंक जाते हैं।
सोफिया-“जीशान , अम्मी मुझे फ्लेट पर जाना है कुछ सामान वहाँ है, वो लेकर आना है। आप दोनों प्लीज़… मेरे साथ चलिये ना…”
जीशान-बाद में ले आएगे सोफी।
सोफिया-“नहीं प्लीज़्ज़… अभी चलिये…” उसकी आवाज़ में अजीजी भी थी और खौफ भी।
अनुम और जीशान एक दूसरे को देखने लगते हैं, और अनुम हाँ में सिर हिला देती है। रज़िया और लुबना को बताकर तीनों उस फ्लेट में चले जाते हैं, जो फ्लेट जीशान ने सोफिया को गिफ्ट किया था शादी के वक्त। खालिद और उसका परिवार जा चुके थे। सारा सामान जैसा का तैसा था। उन लोगों ने एक भी जीशान की दी हुई चीज को हाथ नहीं लगाया था। सारा फर्नीचर बेड सब कुछ जैसा का तैसा था।
जीशान-“सोफिया जल्दी से सामान ले ले, जो भी लेना है। मुझे फॅक्टरी भी जाना है…”
सोफिया अपने बेडरूम में जाकर बेड पर बैठ जाती है और फूट -फूट कर रोने लगती है। उसकी आवाज़ सुनकर हाल में बैठे अनुम और जीशान बेडरूम की तरफ भागते है।
अनुम-“क्या बात है सोफिया बेटा, क्यों रो रही हो? चुप हो जाओ…”
जीशान-ऐसे नहीं रोते सोफिया, क्या हुआ?
सोफिया-मुझे समझ में नहीं आ रहा, मैं कैसे कहूँ ?
अनुम-आखिर बात क्या है सोफिया बता तो?
सोफिया सिसकती हुई जीशान की आँखों में देखती हुई कहती है-“मैं प्रेगनेंट हूँ …”
अनुम और जीशान दोनों के मुँह से एक साथ बस यही निकलता है-क्या?
अनुम-“ तू क्या कह रही है सोफिया? जानती भी है तूने तो कही थी कि खालिद ने तुझे छुआ तक नहीं फिर?”
सोफिया कुछ नहीं कहती, बस एकटक जीशान को देखती रहती है।
जीशान आगे बढ़कर सोफिया को बेड से उठाकर खड़ा कर देता है-“ तू सच में प्रेगनेंट है सोफी?”
सोफिया-हाँ। मैं कई दिन से बताना चाहती थी, दो महीने हो गये हैं।
जीशान- तू सच कह रही है सोफी?
सोफिया-हाँ जीशान आपकी कसम।
जीशान सोफिया को अपनी छाती से लगाकर कस के बाहों में भर लेता है-“मेरी जान, आज मुझे तुम दोनों ने वो खुशी दी कि मैं मर ही ना जाऊूँ… आज तुम दोनों मेरे बच्चे की माँ बनने वाली हो…”
अनुम समझ जाती है कि सोफिया जीशान के बच्चे की माँ बनने वाली है।
जीशान-पागल , तूने मुझे बताया क्यों नहीं ?
सोफिया जीशान की बाहों में सिमट गई थी। वो यही चाहती थी की जीशान अपनी औलाद को अपना नाम दे। कहा-“मैं बताना चाहती थी, मगर हिम्मत नहीं जुटा पाई। आज सुबह जब अम्मी के मुँह से ये बात सुनी की वो भी आपके बच्चे की माँ बनने वाली हैं तो मुझसे रहा नहीं गया जीशान । हाँ हाँ मैं आपके बच्चे की माँ बनने वाली हूँ , आपकी मोहब्बत को जनम देने वाली हूँ जीशान …”
जीशान अनुम को भी अपनी बाहों में बुलाकर उसे भी अपनी छाती से लगा लेता है।
अनुम-“सुनिए, ये बात बाहर वालों तक जाएगी तो बहुत बदनामी हो जाएगी…”
जीशान-“अब किसी को भी कुछ नहीं पता चलेगा। मैं तुझसे कह रहा था ना मेरे ख्वाब के बारे में। हम अगले हफ्ते यू ॰के॰ जाने वाले हैं, हमेशा-हमेशा के लिए। यहाँ की फॅक्टरी मैंने नग़मा के नाम कर दिया है और वहाँ सारे इतेजामात कर दिए हैं।
हम वहाँ अपना नया बिजनेस शुरू करेंगे। नग़मा से मैंने सारी बात कर लिया है। वो बहुत खुश है। वो हमारी ख़ानदानी बातें उसके ससुराल वालों तक भी नहीं जाने देगी। बस अनुम तू अब कोई फिकर ना कर। मैं तुम सबको एक बेहतर नई जिंदगी दूँगा वहाँ। तुम मेरी इज़्ज़त हो, तुम्हें जीशान ख़ान अपनी सारी मोहब्बतें देगा, वादा है मेरा तुमसे…”
अनुम-“जान …” और वो जीशान की बातें सुनकर उसके होंठों को चूम लेती है
जीशान भी अनुम की कमर को सहलाते हुये पहली बार सोफिया के सामने अनुम के मुँह में जीभ डालकर उसके होंठों से रस पीने लगता है।
सोफिया-“जीशान , अम्मी मुझे फ्लेट पर जाना है कुछ सामान वहाँ है, वो लेकर आना है। आप दोनों प्लीज़… मेरे साथ चलिये ना…”
जीशान-बाद में ले आएगे सोफी।
सोफिया-“नहीं प्लीज़्ज़… अभी चलिये…” उसकी आवाज़ में अजीजी भी थी और खौफ भी।
अनुम और जीशान एक दूसरे को देखने लगते हैं, और अनुम हाँ में सिर हिला देती है। रज़िया और लुबना को बताकर तीनों उस फ्लेट में चले जाते हैं, जो फ्लेट जीशान ने सोफिया को गिफ्ट किया था शादी के वक्त। खालिद और उसका परिवार जा चुके थे। सारा सामान जैसा का तैसा था। उन लोगों ने एक भी जीशान की दी हुई चीज को हाथ नहीं लगाया था। सारा फर्नीचर बेड सब कुछ जैसा का तैसा था।
जीशान-“सोफिया जल्दी से सामान ले ले, जो भी लेना है। मुझे फॅक्टरी भी जाना है…”
सोफिया अपने बेडरूम में जाकर बेड पर बैठ जाती है और फूट -फूट कर रोने लगती है। उसकी आवाज़ सुनकर हाल में बैठे अनुम और जीशान बेडरूम की तरफ भागते है।
अनुम-“क्या बात है सोफिया बेटा, क्यों रो रही हो? चुप हो जाओ…”
जीशान-ऐसे नहीं रोते सोफिया, क्या हुआ?
सोफिया-मुझे समझ में नहीं आ रहा, मैं कैसे कहूँ ?
अनुम-आखिर बात क्या है सोफिया बता तो?
सोफिया सिसकती हुई जीशान की आँखों में देखती हुई कहती है-“मैं प्रेगनेंट हूँ …”
अनुम और जीशान दोनों के मुँह से एक साथ बस यही निकलता है-क्या?
अनुम-“ तू क्या कह रही है सोफिया? जानती भी है तूने तो कही थी कि खालिद ने तुझे छुआ तक नहीं फिर?”
सोफिया कुछ नहीं कहती, बस एकटक जीशान को देखती रहती है।
जीशान आगे बढ़कर सोफिया को बेड से उठाकर खड़ा कर देता है-“ तू सच में प्रेगनेंट है सोफी?”
सोफिया-हाँ। मैं कई दिन से बताना चाहती थी, दो महीने हो गये हैं।
जीशान- तू सच कह रही है सोफी?
सोफिया-हाँ जीशान आपकी कसम।
जीशान सोफिया को अपनी छाती से लगाकर कस के बाहों में भर लेता है-“मेरी जान, आज मुझे तुम दोनों ने वो खुशी दी कि मैं मर ही ना जाऊूँ… आज तुम दोनों मेरे बच्चे की माँ बनने वाली हो…”
अनुम समझ जाती है कि सोफिया जीशान के बच्चे की माँ बनने वाली है।
जीशान-पागल , तूने मुझे बताया क्यों नहीं ?
सोफिया जीशान की बाहों में सिमट गई थी। वो यही चाहती थी की जीशान अपनी औलाद को अपना नाम दे। कहा-“मैं बताना चाहती थी, मगर हिम्मत नहीं जुटा पाई। आज सुबह जब अम्मी के मुँह से ये बात सुनी की वो भी आपके बच्चे की माँ बनने वाली हैं तो मुझसे रहा नहीं गया जीशान । हाँ हाँ मैं आपके बच्चे की माँ बनने वाली हूँ , आपकी मोहब्बत को जनम देने वाली हूँ जीशान …”
जीशान अनुम को भी अपनी बाहों में बुलाकर उसे भी अपनी छाती से लगा लेता है।
अनुम-“सुनिए, ये बात बाहर वालों तक जाएगी तो बहुत बदनामी हो जाएगी…”
जीशान-“अब किसी को भी कुछ नहीं पता चलेगा। मैं तुझसे कह रहा था ना मेरे ख्वाब के बारे में। हम अगले हफ्ते यू ॰के॰ जाने वाले हैं, हमेशा-हमेशा के लिए। यहाँ की फॅक्टरी मैंने नग़मा के नाम कर दिया है और वहाँ सारे इतेजामात कर दिए हैं।
हम वहाँ अपना नया बिजनेस शुरू करेंगे। नग़मा से मैंने सारी बात कर लिया है। वो बहुत खुश है। वो हमारी ख़ानदानी बातें उसके ससुराल वालों तक भी नहीं जाने देगी। बस अनुम तू अब कोई फिकर ना कर। मैं तुम सबको एक बेहतर नई जिंदगी दूँगा वहाँ। तुम मेरी इज़्ज़त हो, तुम्हें जीशान ख़ान अपनी सारी मोहब्बतें देगा, वादा है मेरा तुमसे…”
अनुम-“जान …” और वो जीशान की बातें सुनकर उसके होंठों को चूम लेती है
जीशान भी अनुम की कमर को सहलाते हुये पहली बार सोफिया के सामने अनुम के मुँह में जीभ डालकर उसके होंठों से रस पीने लगता है।