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अहसान complete

अपडेट-10

अब मुझे कोई उम्मीद नज़र नही आ रही थी कि जो मुझे क़ासिम के बारे मे बता सके मैं वहाँ से बाहर निकल आया. किसी को भी क़ासिम के बारे मे नही पता था. मैं पूरी रात उसको ढूँढ-ढूँढ कर थक चुका था ऑर मेरे पैर भी चल-चल कर जवाब दे चुके थे. अब ना तो मुझ मे चलने की हिम्मत थी ना ही क़ासिम का कुछ पता चला था मैने घर वापिस जाने का फ़ैसला किया ओर बो-झिल दिल के साथ वापिस घर आ गया जब घर आया तो घर के बाहर पोलीस की गाड़ी खड़ी थी जिसको देखकर ना-जाने क्यो एक पल के लिए मैं चोंक गया. बाबा ऑर फ़िज़ा थानेदार से कुछ बात कर रहे थे मुझे उनको देख कर कुछ समझ नही आया इसलिए वहाँ जाके सारा मामला पता करना बेहतर समझा. जब मैं वहाँ पहुँचा तो जाने क्यो थानेदार मुझे गौर से देखने लगा जैसे कुछ याद करने की कोशिश कर रहा हो. लेकिन फ़िज़ा ने मुझे आँखों से ही चुप रहने का इशारा किया ऑर मैं बस पास जाके खड़ा हो गया ऑर थानेदार को सलाम किया.

थानेदार : व.सलाम, ये कौन है.

बाबा : जनाब ये मेरा छोटा बेटा है.

थानेदार : (कुछ याद करते हुए) तुमको मैने पहले भी कही देखा है.

मैं : जी नही साब मैं तो आपको पहली बार मिल रहा हूँ.

थानेदार : क्या नाम है तेरा ?

बाबा : जनाब इसका नाम नीर है बहुत सीध-साधा लड़का है कोई बुरी आदत नही इसको.

थानेदार : ओह्ह अच्छा-अच्छा बेटा है तुम्हारा.... फिर ये कोई ऑर है इसको देख कर किसी की याद आ गई जो एक-दम इसके जैसा था.

इतने मे फ़िज़ा ने नाज़ी को इशारा किया ऑर वो मुझे लेके अंदर चली गई. ये सब क्या हो रहा था मुझे कुछ भी समझ नही आ रहा था...ये थानेदार यहाँ क्यों आया है इतनी रात को, किसी ने भी मुझसे क़ासिम के बारे में क्यो नही पूछा ऐसे ही मेरे अंदर कई सवाल एक साथ खड़े हो गये थे. अचानक मेरी नज़र जीप मे बैठे क़ासिम पर पड़ी तो मैं उसकी ओर जाने लगा लेकिन नाज़ी ने मुझे बाजू से पकड़ लिया ऑर अंदर आने का इशारा किया. मैं बिना कोई सवाल किया चुप-चाप उसके साथ अंदर आ गया.

मैं : ये सब क्या हो रहा है ऑर ये क़ासिम को कहाँ लेके जा रहे हैं, थानेदार मुझे ऐसे क्यो देख रहा था?

नाज़ी : एक तो तुम सवाल बहुत करते हो....अभी कुछ मत बोलो बस अंदर चलो बाबा बात कर रहे हैं ना...

मैं : अच्छा ठीक है (हां मे सिर हिलाते हुए)

कुछ देर बाद थानेदार भी चला गया ऑर उनके साथ क़ासिम भी लेकिन मैं बस खामोश होके अपने सवालो का जवाब जानने के लिए बे-क़रार होके बाबा ऑर फ़िज़ा का इंतज़ार करने लगा. कुछ देर मे बाबा ऑर फ़िज़ा भी घर के अंदर आ गये.

मैं : बाबा ये सब क्या हो रहा है ऑर ये क़ासिम को कहाँ लेके जा रहे हैं?

बाबा : बस बेटा जाने कौन्से गुनाहो की सज़ा मिल रही है मुझ बूढ़े को जो बुढ़ापे मे ये दिन देखने को मिल रहे हैं (अपने सिर पर हाथ रखकर बैठ ते हुए)

मैं : क्या हुआ है बाबा कोई मुझे कुछ बताता क्यो नही.

नाज़ी : वो भाई जान ने हमरी फसल सरपंच को बेच दी थी ऑर उससे पैसे लेके जुए ऑर शराब मे उड़ा दिए थे अब सरपंच अपने पैसे वापिस माँग रहा है लेकिन क़ासिम भाई ने वो सब पैसे खर्च कर दिए इसलिए उस सरपंच ने अपने पैसे निकलवाने के लिए पोलीस को बुला लिया ऑर वो उनको पकड़ के ले गई है.

मैं : तो हम उनके पैसे वापिस कर देते हैं ना उसमे क्या है आख़िर वो इस घर का बेटा है वैसे भी हमारे पास फसल के काफ़ी पैसे बचे हुए हैं

बाबा : नही बेटा क़ासिम के लिए हम बहुत बार पैसे दे चुके हैं अब ज़रूरत नही है शायद जैल मे रहकर ही उससे अक़ल आ जाए.

मैं : बाबा मैं सरपंच से बात करके आता हूँ क़ासिम भाई के लिए शायद वो मान जाए?

बाबा : नही बेटा वो बहुत बे-रहम इंसान है वो नही मानेगा तुम भी इन सब चक्करो मे ना पडो तो बेहतर होगा.(ऑर मायूस क़दमो के साथ अपने कमरे मे चले गये)

मैं : मानेगा बाबा ज़रूर मानेगा नाज़ी मैं अभी आया.

नाज़ी : नही नीर वो बहुत घटिया किस्म का इंसान है जाने दो

मैं : मुझ पर भरोसा है या नही?

नाज़ी : (हाँ मे सिर हिलाते हुए) सबसे ज़्यादा तुम पर ही तो भरोसा है.

मैं : बस फिर चुप रहो मैं अभी आता हूँ

मैं सरपंच की हवेली की तरफ चला गया. जब मैं हवेली के गेट पर पहुँचा तो एक दरबान ने मुझे रोक दिया.

दरबान : क्या काम है अंदर कहाँ घुसा चले आ रहा है?

मैं : मुझे सरपंच से मिलना है बुलाओ उसको.

दरबान : उनकी इजाज़त के बिना उनसे कोई नही मिल सकता ऑर तू है कौन जो इतना रौब झाड़ रहा है चल दफ़ा होज़ा यहाँ से.

मैं : (दरबान की गर्दन पकड़ते हुए) मैं बोला मुझे अभी सरपंच से मिलना है गेट खोल नही तो तेरी गर्दन तोड़ दूँगा समझा....

दरबान : खोलता हूँ भाई मेरी गर्दन तो छोड़ो.... जाओ अंदर.

जब मैं हवेली के अंदर गया तो उसकी शान-ओ-शौकत से ही अंदाज़ा लगाया जा सकता था कि जाने कितने ही ग़रीबो का खून चूस कर इस इंसान ने इतना पैसा जमा किया है हवेली की हर चीज़ से पैसा झलक रहा था. अंदर से हवेली बहुत ही आलीशान ऑर शानदार थी जहाँ में खड़ा था वहाँ से चारों तरफ रास्ते दिखाई दे रहे थे मुझे कुछ समझ नही आ रहा था कि अब मैं किस तरफ जाऊं मैं वहीं खड़ा हो कर इंतिज़ार करने लगा कि कोई नज़र आए तो में सरपंच का पूच्छू अभी मैं इसी शशो पुंज मे था कि मुझे हवैली के लेफ्ट साइड से किसी की खनकती हँसी की आवाज़ सुनाई दी उस हँसी के बाद फॉरेन ही काफ़ी सारी लड़कियों के खिलखिला कर हँसने की आवाज़ आई मेरा रुख़ खुद-ब-खुद उस तरफ हो गया जहन से आवाज़ें आ रहीं थीं. मुझे वहाँ कुछ लड़कियाँ आपस मे अठखेलिया करती नज़र आई. मैने अपने कदम उनकी तरफ बढ़ा दिए इससे पहले कि मैं उनसे कुछ पूछ पाता कुछ लोगो ने आके मुझे पिछे से पकड़ लिया. इससे पहले कि मैं अपना हाथ उठाता उन लड़कियो मे से एक लड़की ने आगे बढ़कर उन लोगो को हुकुम दिया कि मुझे छोड़ दिया जाए ऑर सब लोगो ने सिर झुका कर उस लड़की का हुकुम मान लिया ऑर मुझे छोड़ दिया....

लड़की : हंजी कौन हो आप ऑर अंदर कैसे आए......

मैं : जी मुझे सरपंच जी से मिलना है

लड़की : अब्बू तो घर पर नही है बताओ क्या काम है मैं उनकी बेटी हूँ

मैं : (कुछ सोचते हुए) जी कुछ नही फिर मैं चलता हूँ माफ़ कीजिए आपको मेरी वजह से परेशानी हुई

लड़की : तुमको पहली बार देख रही हो तुम कौन हो ऑर यहाँ नये आए हो क्या (साथ ही उन लोगो को उंगली से जाने का इशारा करते हुए)

मैं : जी मेरा नाम नीर है मैं हैदर अली का छोटा बेटा ऑर क़ासिम अली का छोटा भाई हूँ

लड़की : हमम्म तुमने अभी तक बताया नही कि तुमको अब्बू से काम क्या था ऑर इतनी रात गये इस तरह क्यों आए.?

मैने लड़की को सारी समस्या बता दी ऑर उनकी रकम धीरे-धीरे करके लौटाने की बात भी कह दी ऑर उसको मेरी मदद करने को कहा....

लड़की : ठीक है मैं देखती हूँ क्या कर सकती हूँ आपके लिए.

मैं : आपका बहुत-बहुत शुक्रिया

लड़की : अब बहुत रात हो गई तुम अपने घर जाओ सुबह अब्बू आएँगे तो मैं उनसे बात करके देखूँगी कि क्या हो सकता है

मैं : ठीक है जी आपका मुझ पर अहसान होगा अगर आप मेरी मदद कर देंगी तो.

मैं खुशी-खुशी घर की तरफ जा रहा था लेकिन बार-बार मुझे उस लड़की का चेहरा आँखो के सामने नज़र आ रहा था. कुछ तो था उस लड़की मे जो मुझे अपनी ओर खींच रहा था....लड़की इंतेहा खूबसूरत थी...... गोल सा चेहरा, चेहरे पर बालो की पतली सी लट जो बहुत क़ातिलाना लगती थी... बड़ी-बड़ी हिरनी जैसी आँखें... गुलाब की पंखुड़ी जैसे पतले से रस-भरे होंठ जब हँसती थी तो गालों मे गड्ढे से पड़ते थे जो उसकी खूबसूरती मे चार-चाँद लगाते थे शायद ये पहली लड़की थी गाँव मे जो मैने इतनी सजी-सवरी हुई देखी थी ऑर उसके बात करने का सलीका भी बहुत अच्छा था. मैं उस लड़की के बारे मे ही सोचता हुआ पता नही कब घर के सामने आ गया मेरा ध्यान तब टूटा जब नाज़ी ने मुझे हिला कर कहा....

नाज़ी : अब अंदर भी आना है या आज रात यही दरवाज़े पर ही गुज़ारनी है?

मैं : (चोन्क्ते हुए) हाँ आता हूँ

नाज़ी : क्या बात है आज बड़ा मुस्कुरा रहे हो हवेली पर ही गये थे ना या फिर तुमने भी क़ासिम भाई की तरह कहीं ऑर जाना शुरू कर दिया है (मुझे छेड़ते हुए)

मैं : कहीं ऑर से क्या मतलब है तुम्हारा तुमको मैं ऐसा लगता हूँ क्या....हाँ हवेली पर ही गया था ऑर एक खुश खबरी लेके आया हूँ

नाज़ी : (हैरानी से) क्या खुशख़बरी?

मैं : वो मैं जब हवेली पर गया था तो मुझे सरपंच की बेटी मिली थी वो कह रही थी कि वो अपने अब्बू से बात करेगी ऑर हमारी मदद भी करेगी बहुत अच्छी है वो

नाज़ी : नीर तुम कितने भोले हो...तुम आज के बाद कभी हवेली नही जाओगे समझे

मैं : क्यो क्या हुआ मैने कुछ ग़लत किया क्या?

नाज़ी : नही तुमने कुछ ग़लत नही किया बस आज के बाद उस लड़की से मत मिलना

मैं : वो जब हमारी मदद कर रही है तो ग़लत क्या है मिलने मे ये तो बताओ

नाज़ी : मैने जो तुमको कहा वो तुम्हे समझ नही आया ना ठीक है जो तुम्हारे दिल मे आए करो लेकिन मुझसे बात मत करना आज के बाद समझे

मैं : (परेशानी से) यार लेकिन हुआ क्या बताओ तो सही

नाज़ी : कुछ नही हुआ बस तुम आज के बाद वहाँ नही जाओगे नही तो मैं तुमसे बात नही करूँगी. वो लोग अच्छे लोग नही है नीर.

मैं : ठीक है जो हुकुम सरकार का

नाज़ी : (हँसती हुई) तुम जब मेरी बात मान जाते हो ना तो मुझे बहुत अच्छे लगते हो दिल करता है कि.....

मैं : कि...? क्या दिल करता है?

नाज़ी : कुछ नही बुद्धू चलो अब अंदर चलो खाना खा लो तुम्हारी वजह से मैने ऑर भाभी ने भी खाना नही खाया लेकिन तुमको क्या तुम तो जाओ अपनी उस सरपंच की बेटी के पास.....

मैं : अर्रे तुम दोनो ने खाना क्यों नही खाया?

नाज़ी : हमने सोचा आज हम सब साथ मे ही खाना खा लें (नज़रे झुका के मुस्कुराते हुए)

मैं : बाबा ने खाना खा लिया?

नाज़ी : हाँ वो तो खाना खा के सो भी गये बस हम ही दो पागल बैठी है जो अपने बुढ़ू का इंतज़ार कर रही है लेकिन तुमको तो हवेली वाली से ही फ़ुर्सत नही है हमारी याद कहाँ से आएगी..

मैं : (मुस्कुराते हुए) ज़्यादा मत सोचा करो.... चलो मुझे भी बहुत बहुत भूख लगी है.

Update-10

Ab mujhe koi ummeed nazar nahi aa rahi thi ki jo mujhe Qasim ke bare me bata sake main wahan se bahar nikal aaya. kisi ko bhi qasim ke bare me nahi pata tha. Main poori raat usko dhundh-dhundh kar thak chuka tha or mere pair bhi chal-chal kar jawab de chuke the. ab na to mujh me chalne ki himmat thi na hi qasim ka kuch pata chala tha maine ghar wapis jane ka faisla kiya or bo-jhal dil ke sath wapis ghar aa gaya jab ghar aya to ghar ke bahar police ki gaadi khadi thi jisko dekhkar na-jane kyo ek pal ke liye main chonk gaya. Baba or fiza thaanedar se kuch baat kar rahe the mujhe unko dekh kar kuch samajh nahi aaya isliye wahan jake sara mamla pata karna behtar samjha. Jab main wahan pohoncha to jane kyo thaanedar mujhe gaur se dekhne laga jaise kuch yaad karne ki koshish kar raha ho. lekin fiza ne mujhe aankhon se hi chup rehne ka ishara kiya or main bas pass jake khada ho gaya or thanedaar ko salaam kiya.

Thanedaar : W.Salaam, ye kaun hai.

Baba : janab ye mera chhota beta hai.

Thanedaar : (kuch yaad karte hue) tumko maine pehle bhi kahi dekha hai.

Main : jee nahi saab main to aapko pehli baar mil raha hun.

Thanedaar : kya naam hai tera ?

BaBa : janab iska naam Neer hai bahut seedh-sadha ladka hai koi buri aadat nahi isko.

Thanedaar : ohh achha-achha beta hai tumhara.... fir ye koi or hai isko dekh kar kisi ki yaad aa gai jo ek-dam iske jaisa tha.

itne me fiza ne nazi ko ishara kiya or wo mujhe leke andar chali gai. ye sab kya ho raha tha mujhe kuch bhi samajh nahi aa raha tha...ye thanedaar yahan kyo aaya hai itni raat ko, kisi ne bhi mujhse qasim ke bare me kyo nahi puchaa aise hi mere andar kai sawaal ek sath khade ho gaye the. Achanak meri nazar jeep me baithe qasim par padi to main uski or jane laga lekin nazi ne mujhe baaju se pakad liya or andar aane ka ishara kiya. main bina koi swaal kiya chup-chap uske sath andar aa gaya.

Main : ye sab kya ho raha hai or ye Qasim ko kaha leke jaa rahe hain, thanedaar mujhe aise kyo dekh raha tha?

Nazi : Ek to tum sawaal bahut karte ho....abhi kuch mat bolo bas andar chalo baba baat kar rahe hain naa...

Main : achha thik hai (haa me sir hilate hue)

Kuch der baad thanedaar bhi chala gaya or unke sath qasim bhi lekin main bas khamosh hoke apne sawalo ka jawab janne ke liye be-qarar hoke baba or fiza ka intzaar karne laga. kuch der me baba or fiza bhi ghar ke andar aa gaye.

Main : Baba ye sab kya ho raha hai or ye qasim ko kaha leke jaa rahe hain?

Baba : Bas beta jane kounse gunaho ki saza mil rahi hai mujh budhe ko jo budhape me ye din dekhne ko mil rahe hain (apne sir par hath rakhkar baith te hue)

Main : kya hua hai baba koi mujhe kuch batata kyo nahi.

Nazi : wo bhai jaan ne hamaari fasal sarpanch ko bech di thi or usse paise leke juwe or sharab me udaa diye the ab sarpanch apne paise wapis maang raha hai lekin qasim bhai ne wo sab paise kharch kar diye isliye uss sarpanch ne apne paise nikalwane ke liye police ko bula liya or wo unko pakad ke lai gai hai.

Main : to hum unke paise wapis kar dete hain naa usme kya hai aakhir wo iss ghar ka beta hai waise bhi hmare pass fasal ke kaafi paise bache hue hain

BaBa : nahi beta qasim ke liye hum bahut baar paise de chuke hain ab jarurat nahi hai shayad jail me rehkar hi usse aqal aa jaye.

Main : baba main sarpanch se bat karke aata hun qasim bhai ke liye shayad wo maan jaye?

Baba : nahi beta wo bahut be-reham insaan hai wo nahi manega tum bhi inn sab chakkaro me naa pado to behtar hoga.(or mayus qadmo ke sath apne kamre me chale gaye)

Main : Manega baba jarur manega Nazi main abhi aaya.

Nazi : nahi neer wo bahut ghatiya kism ka insaan hai jane do

Main : mujh par bharosa hai ya nahi?

Nazi : (haa me sir hilate hue) sabse jyaadaa tum par hi to bharosa hai.

Main : bas fir chup raho main abhi aata hun

Main sarpanch ki haweli ki taraf chala gaya. Jab main haweli ke gate par pohoncha to ek darbaan ne mujhe rok diya.

Darbaan : kya kaam hai andar kaha ghusa chale aa raha hai?

Main : mujhe sarpanch se milna hai bulao usko.

Darbaan : unki ijajat ke bina unse koi nahi mil sakta or tu hai kaun jo itna roub jhaad raha hai chal daffa hoja yahan se.

Main : (darbaan ki gardan pakadte hue) main bola mujhe abhi sarpanch se milna hai gate khol nahi to teri gardan tod dunga samjhaaa....

Darbaan : kholta hun bhai meri garden to chodo.... jao andar.

Jab main haweli ke andar gaya to uski shaan-o-shaukat se hi andaaza lagaya jaa sakta tha ki jane kitne hi gareebo ka khun chus kar iss insaan ne itna paisa jama kiya hai haweli ki har chij se paisa jhalak raha tha. andar se haveili bahut hi aalishaan or shandar thi jahann mein khara tha wahann se charon taraf raste dikhaee de rahe the mujhe kuch samjha nahi aa rahi thi ke abb mein kiss taraf jaoon main waheen khara ho ker intizar kerne laga ki koi nazer aye tu mein sarpanch ka poochon abhi mein isi shasho punj me tha ke mujhe havaili ke left side se kisi ki khankhti hansi ki awaz sunaee di uss hansi ke baad foren hi kafi sari ladkiyun ke khilkhila ker hansne ki awaz aayi mera rukh khud-b-khud uss taraf ho gaya jahann se awazen aa raheen theen. mujhe wahan kuch ladakiyaan apas me athkheliyan kerti nazar ayi. maine apne kadam unki taraf badha diye isse pehle ki main unse kuch puch pata kuch logo ne aake mujhe pichhe se pakad liya. isse pehle ki main apna hath uthata unn ladkiyo me se ek ladki ne aagey badhkar unn logo ko hukum diya ki mujhe chod diya jaye or sab logo ne sir jhuka kar uss ladki ka hukum maan liya or mujhe chod diya....

Ladki : hanji kaun ho aap or andar kaise aaye......

Main : ji mujhe sarpanch ji se milna hai

Ladki : abbu to ghar par nahi hai bataao kya kaam hai main unki beti hun

Main : (kuch sochte hue) ji kuch nahi fir main chalta hun maaf kijiye aapko meri wajah se pareshani hui

Ladki : tumko pehli baar dekh rahi ho tum kaun ho or yahan naye aaye ho kya (sath hi unn logo ko ungali se jane ka ishara karte hue)

Main : ji mera naam Neer hai main haider ali ka chhota beta or qasim ali ka chhota bhai hun

Ladki : hhhmmm tumne abhi tak bataayaa nahi ki tumko abbu se kaam kya tha or itni raat gaye iss tarah kyo aaye.?

Maine ladki ko saari samasya bata di or unki rakam dheere-dheere karke lautaane ki baat bhi keh di or usko meri madad karne ko kaha....

Ladki : thik hai main dekhti hun kya kar sakti hun aapke liye.

Main : aapka bahut-bahut shukariya

Ladki : ab bahut raat ho gai tum apne ghar jao subah abbu aayenge to main unse baat karke dekhungi ki kya ho sakta hai

Main : thik hai ji aapka mujh par Ahsaan hoga agar aap meri madad kar dengi to.

Main khushi-khushi ghar ki taraf jaa raha tha lekin bar-bar mujhe uss ladki ka chehra aankho ke samne nazar aa raha tha. Kuch to tha uss ladki me jo mujhe apni or khinch raha tha....ladki intehaa khubsurat thi...... gol sa chehra, chehre par baalo ki patli si latt jo bahut qatilana lagti thi... badi-badi hirani jaisi aankhen... gulaab ki pankhudi jaise patle se rass-bhare honth jab hansatee thi to gaalo me gaddhe se padte the jo uski khubsurati me chaar-chaand lagate the shayad ye pehli ladki thi gaav me jo maine itni saji-sawari hui dekhi thi or uske baat karne ka saleeka bhi bahut achha tha. main uss ladki ke bare me hi sochta hua pata nahi kab ghar ke samne aa gaya mera dhyaan tab toota jab nazi ne mujhe hila kar kaha....

Nazi : ab andar bhi aana hai ya aaj raat yhi darwaze par hi guzarni hai?

Main : (chonkte hue) haa aata hun

Nazi : kya baat hai aaj bada muskura rahe ho haweli par hi gaye the naa ya fir tumne bhi qasim bhai ki tarah kahi or jana shuru kar diya hai (mujhe chedate hue)

Main : kahi or se kya matlab hai tumhara tumko main aisa lagta hun kya....haa haweli par hi gaya tha or ek khush khabari leke aaya hun

Nazi : (hairani se) kya khushkhabari?

Main : wo main jab haweli par gaya tha to mujhe sarpanch ki beti mili thi wo keh rahi thi ki wo apne abbu se baat karegi or hamaari madad bhi karegi bahut achhi hai wo

Nazi : Neer tum kitne bhole ho...tum aaj ke baad kabhi haweli nahi jaoge samjhe

Main : kyo kya hua maine kuch galat kiya kya?

Nazi : nahi tumne kuch galat nahi kiya bas aaj ke baad us ladki se mat milna

Main : wo jab hamaari madad kar rahi hai to galat kya hai milne me ye to bataao

Nazi : maine jo tumko kaha wo tumhe samajh nahi aaya naa thik hai jo tumhare dil me aaye karo lekin mujhse baat mat karna aaj ke baad samjhe

Main : (pareshani se) yaar lekin hua kya bataao to sahi

Nazi : kuch nahi hua bas tum aaj ke bad wahan nahi jaoge nahi to main tumse baat nahi karungi. wo log achhe log nahi hai Neer.

Main : thik hai jo hukum sarkaar ka

Nazi : (hansatee hui) tum jab meri baat maan jate ho naa to mujhe bahut achhe lagte ho dil karta hai ki.....

Main : ki...? kya dil karta hai?

Nazi : kuch nahi buddhu chalo ab andar chalo khana kha lo tumhari wajah se maine or bhabhi ne bhi khana nahi khaya lekin tumko kya tum to jao apni uss sarpanch ki beti ke pass.....

Main : arre tum dono ne khana kyo nahi khaya?

Nazi : hamane socha aaj hum sab sath me hi khana khaa le (nazre jhuka ke muskurate hue)

Main : baba ne khana khaa liya?

Nazi : haa wo to khana kha ke so bhi gaye Bas hum hi do pagal baithi hai jo apne budhu ka intzaar kar rahi hai lekin tumko to haveli wali se hi fursat nahi hai hamaari yaad kaha se aayegi..

Main : (muskurate hue) jyaadaa mat socha karo.... chalo mujhe bhi bahut bahut bhukh lagi hai.

 


अपडेट-11

खाने के वक़्त मैने एक नयी चीज़ नाज़ी ऑर फ़िज़ा मे देखी दोनो मुझे अज़ीब सी नज़रों से देख रही थी ऑर मुझे देखकर बार-बार मुस्कुरा रही थी मैने भी 1-2 बार पूछा कि क्या हुआ लेकिन दोनो ने बस ना मे सिर हिला दिया. रात को खाने के बाद दोनो रसोई मे काम कर रही थी ऑर मैं कमरे मे बैठा था कि फ़िज़ा ने इशारे से मुझे बाहर आने का कहा.

मैं : क्या हुआ

फ़िज़ा : नींद तो नही आ रही?

मैं : ये पूछने के लिए बाहर बुलाया था

फ़िज़ा : (मुस्कुराते हुए) नही कुछ ऑर बात थी

मैं : हाँ बोलो क्या काम है

फ़िज़ा : (झुनझूलाते हुए) हर वक़्त काम हो तभी बुलाऊ ये ज़रूरी है क्या

मैं : नही मैने ऐसा कब कहा बोलो क्या हुआ फिर

फ़िज़ा : कुछ नही बस तुमसे कुछ बात करनी है

मैं : हाँ बोलो

फ़िज़ा : अभी नही रात को जब सब सो जाएँगे तब अकेले मे मेरे कमरे मे आ जाना तब बात करेंगे

मैं : अभी बता दो ना क्या बात है

फ़िज़ा : हर बात का एक वक़्त होता है....रात को मतलब रात को.... ठीक है

मैं : (हाँ मे सिर हिलाते हुए) ठीक है ऑर कोई हुकुम?

फ़िज़ा : नही जी बस इतना ही बस अब सो मत जाना रात को मैं इंतज़ार करूँगी तुम्हारा ठीक है

मैं : ठीक है

मुझे रात को सबके सो जाने के बाद अपने कमरे मे आने का कह कर फ़िज़ा चली गई ऑर मैं वापिस अपने कमरे मे आ गया ऑर अपनी चारपाई पर लेट गया. साथ मे नाज़ी के सो जाने का इंतज़ार करने लगा ताकि मैं फ़िज़ा के कमरे मे जा सकूँ. वैसे तो क़ासिम के जैल से जाने से फ़िज़ा को ऑर बाकी घरवालो को दुखी होना चाहिए था लेकिन 1 ही दिन मे ना-जाने क्यो सब ऐसे बर्ताव कर रहे थे जैसे कुछ हुआ ही ना हो शायद सबने क़ासिम को भुला दिया था. आज फ़िज़ा भी मुझसे बात करते हुए बहुत खुश नज़र आ रही थी. जैसे कुछ हुआ ही ना हो...अभी मैं यही बात सोच ही रहा था कि अचानक मुझे याद आया कि फ़िज़ा ने उस दिन रात को कहा था कि वो माँ बनने वाली है ज़रूर इसी मसले पर बात करने के लिए मुझे बुलाया होगा. लेकिन फिर मैने सोचा कि यार मैं तो खुद हर बात फ़िज़ा ऑर नाज़ी से पूछ कर करता हूँ मैं भला उसकी क्या मदद कर सकता हूँ.

यही सब सोचते हुए काफ़ी वक़्त गुज़र गया ऑर मैं बस अपने बिस्तर पर पड़ा इन सब बातों के बारे मे सोच रहा था कि अचानक मुझे बाहर से किसी के छ्ह्हीई....छ्ह्हीई....की आवाज़ सुनाई दी. मैने आँखें खोलकर बाहर देखा तो फ़िज़ा दरवाज़े पर खड़ी मुस्कुरा रही थी ऑर हाथ हिलाकर मुझे बाहर बुला रही थी. मैने इशारे से उसको नाज़ी के बारे मे पूछा कि क्या वो सो गई तो उसने भी सिर हिला कर हाँ मे जवाब दिया ऑर साथ ही मुझे उंगली से पास आने का इशारा किया जैसे ही मैं अपनी चारपाई से खड़ा हुआ तो फ़िज़ा पलटकर चलने लगी मैं जानता था वो कहाँ जा रही है इसलिए मैं भी उसके पिछे ही चल दिया. वो बिना पिछे देखे सीधा अपने कमरे मे चली गई ऑर अपने कमरे की लाइट बंद कर दी ऑर नाइट बल्ब ऑन कर दिया. मुझे कुछ समझ नही आया कि इसने अगर बात करनी है तो कमरे मे अंधेरा क्यो कर रही है. अभी मैने कमरे मे पहला कदम ही रखा था कि फ़िज़ा ने मेरे दाएँ हाथ को पकड़ कर जल्दी से अंदर खींचा ऑर बाहर की तरफ मुँह करके दाए-बाएँ देखा ऑर कमरा अंदर से बंद कर दिया मुझे बस कुण्डी लगाने की आवाज़ सुनाई दी फिर फ़िज़ा मेरी तरफ पलटी ऑर एक मुस्कुराहट के साथ मुझे देखने लगी मैने भी मुस्कुरा कर उसे देखा.

फ़िज़ा : क्या हुआ ऐसे क्या देख रहे हो.

मैं : वो तुमने कुछ ज़रूरी बात करनी थी ना.

फ़िज़ा : बताती हूँ पहले वहाँ चलो (बेड की तरफ इशारा करते हुए)

मैं : अच्छा... लो आ गया जी अब जल्दी बताओ.

फ़िज़ा : तुमको कोई गाड़ी पकड़नी है क्या?

मैं : नही तो क्यो

फ़िज़ा : तो फिर हर वक़्त इतना जल्दी मे क्यो रहते हो 2 पल मेरे साथ नही गुज़ार सकते?

मैं : ऐसी बात नही है. मैं बस जल्दी के लिए इसलिए कह रहा था कि कोई आ ना जाए कोई हम को ऐसे देखेगा तो अच्छा नही सोचेगा ना इसलिए बस ओर कोई बात नही.(मुस्कुराते हुए)

फ़िज़ा : अच्छा ये बताओ मैं तुमको कैसी लगती हूँ

मैं : बहुत अच्छी लगती हो... तुम, नाज़ी ऑर बाबा तो बहुत अच्छे हो मेरा बहुत ख्याल भी रखते हो.

फ़िज़ा : ऑह्ह्यूनॉवो...(सिर पर हाथ रखते हुए) क्या करूँ मैं तुम्हारा

मैं : क्या हुआ अब मैने क्या किया

फ़िज़ा : मैने सिर्फ़ अपने बारे मे पूछा है सबके बारे मे नही सिर्फ़ मेरे बारे मे बताओ

मैं : म्म्म्मेम तुम बहुत बहुत बहुत अच्छी हो....खुश (मुस्कुराते हुए)

फ़िज़ा : ऐसे नही बाबा... मेरा मतलब देखने मे कैसी लगती हूँ.

मैं : देखने मे भी तुम सुंदर हो....तुम बताओ तुमको मैं कैसा लगता हूँ?

फ़िज़ा : हाए....ऐसे स्वाल मत पूछा करो दिल बाहर निकलने को हो जाता है. तुम तो मुझे मेरी जान से भी ज़्यादा प्यारे हो तुम नही जानते तुम मेरे लिए क्या हो...जानते हो जब तुम नही थे तो मैं हमेशा रात को रोती रहती थी नींद भी नही आती थी खुद को बहुत अकेला महसूस करती थी

मैं : ऑर अब?

फ़िज़ा : अब तो मुझे बहुत सुकून है तुम्हारे आने से जैसे मुझे सारे जहांन की खुशियाँ मिल गई है........जानती हो हर लड़की तुम जैसा पति चाहती है जो उसको बहुत सारा प्यार करे उसकी हर बात माने उसका खूब ख्याल रखे हर तक़लीफ़ मे उसके साथ खड़ा हो तुम मे वो सब खूबियाँ है.

मैं : अर्रे....मुझमे ऐसा क्या देख लिया तुमने.... खुद ही तो कहती हो मैं बुद्धू हूँ.

फ़िज़ा : नही पागल वो तो मैं मज़ाक मे कहती हूँ तुम बहुत अच्छे हो (मेरे गाल खींच कर)

मैं : ऐसे मत किया करो यार (अपने गालो को सहलाते हुए) मैं कोई बच्चा थोड़ी हूँ जो मेरे गाल खींच रही हो.

फ़िज़ा : मैने कब कहाँ बच्चे हो...तुम बच्चे नही मेरी जान तुम तो मेरे होने वाले बच्चे के बाप हो.(मेरे होंठों को चूमते हुए)

मैं : हाँ बच्चे से याद आया इसका अब हम क्या करेंगे?

फ़िज़ा : करना क्या है मेरा बच्चा है मैं पैदा करूँगी ऑर क्या

मैं : लेकिन अगर किसी को पता चल गया कि ये क़ासिम का बच्चा नही तो...?

फ़िज़ा : कुछ भी पता नही चलेगा वो तो वैसे भी जैल मे है जब तक वो बाहर निकलेगा हमारा बच्चा चलने फिरने लगेगा वैसे भी वो आया था ना कुछ दिन के लिए यहाँ तो मैं बोल दूँगी कि उसका है. तुम फिकर मत करो मैने सब कुछ सोच लिया है ऑर किसी को पता भी नही चलेगा.

मैं : लेकिन उस दिन तो तुम कह रही थी कि वो जो तुमने उस दिन कोठरी मे मेरे साथ किया था जैल से आने के बाद क़ासिम ने तुम्हारे साथ एक बार भी नही किया तो फिर उसको पता नही चल जाएगा?

फ़िज़ा : कुछ पता नही चलेगा उस शराबी को अपनी होश नही होती वो मेरी परवाह कहाँ से करेगा कुछ होगा तो कह दूँगी कि क़ासिम ने नशे मे मेरे साथ किया था वैसे भी नशे मे उसको कौनसा होश होता है....अब अगर तुमको तुम्हारे सारे सवालो का जवाब मिल गया हो तो मेहरबानी करके बेड पर लेट जाओ कब से जिन्न की तरह मेरे सिर पर बैठे हुए हो. (हँसती हुई)

मैं : वो तो ठीक है लेकिन तुम जानती हो जब मुझे सब कुछ याद आ जाएगा तो हो सकता है मेरे घरवाले मुझे यहाँ से ले जाए तब तुम क्या करोगी?

फ़िज़ा : कोई बात नही मैने तुम्हे ये तो नही कहा कि मुझसे शादी भी करो. तुम जितना वक़्त भी मेरे साथ हो मैं बस उस हर पल को जी भरके जीना चाहती हूँ तुम्हारे साथ ऑर फिर तुम चले जाओगे तो क्या हुआ तुम्हारी निशानी तो हमेशा मेरे पास रहेगी ना जिसमे मैं हमेशा तुम्हारा अक्स देखूँगी.

मैं : जैसी तुम्हारी मर्ज़ी.

फ़िज़ा : चलो अब बाते बंद करो ऑर लेट जाओ मेरे साथ.

मैं : यहाँ क्यो मैं तो बाहर बाबा के पास सोता हूँ ना.

फ़िज़ा : आज एक दिन मेरे पास सो जाओगे तो तूफान नही आ जाएगा चलो चुप करके लेट जाओ नही तो मैं तुमसे बात नही करूँगी.

मैं : अच्छा ठीक है लेट रहा हूँ.

फ़िज़ा : इसलिए तुम मुझे बहुत प्यारे लगते हो जब मेरी हर बात इतनी आसानी से मान जाते हो (मुस्कुराते हुए).

मेरे बेड पर लेट ते ही फ़िज़ा ने मेरा बायां हाथ अपने हाथो मे लिया ऑर अपने गाल सहलाने लगी ऑर मैं करवट लेके उसकी तरफ मुँह करके लेट गया. ये देखकर उसने भी मेरी तरफ करवट कर ली. अब हम दोनो के चेहरे एक दूसरे के पास थे यहाँ तक कि हम एक दूसरे की साँस की गर्माहट अपने चेहरे पर महसूस कर रहे थे.

फ़िज़ा : मैं तुम्हारे उपर आके लेट जाउ.

मैं : (हाँ मे सिर हिलाते हुए) हमम्म...

फ़िज़ा : ऐसे नही तुम खुद मुझे अपने उपर लो.

मैं : ठीक है (मैने फ़िज़ा को कमर से पकड़कर अपने उपर लिटा लिया)

फ़िज़ा : चलो अब अपनी आँखें बंद करो

मैं : कर ली अब..

फ़िज़ा : अब कुछ नही बस मुँह बंद करो नही तो मुझे करना पड़ेगा.

मैं : वो कैसे (मुस्कुराते हुए)

फ़िज़ा : बोल कर बताऊ या करके बताऊ?

मैं : जो तुमको अच्छा लगे

फ़िज़ा : पहले अपनी आँखें बंद करो मुझे शरम आती है.

मैं : तुमको शरम भी आती है (हँसते हुए)

फ़िज़ा : म्म्म्मीमम.... आँखें बंद करो ना नीर

मैं : अच्छा ये लो अब......

फ़िज़ा : हम्म तो अब पुछो क्या पूछ रहे थे

मैं : मैं पुछ रहा था कीईईई..... (अचानक फ़िज़ा ने अपने होंठ मेरे होंठों पर रख दिए)

Update-11

Khane ke waqt maine ek nayi chij Nazi or Fiza me dekhi dono mujhe azeeb si nazaro se dekh rahi thi or mujhe dekhkar bar-bar muskura rahi thi maine bhi 1-2 baar pucha ki kya hua lekin dono ne bas na me sir hila diya. Raat ko khane ke baad dono rasoyi me kaam kar rahi thi or main kamre me baitha tha ki fiza ne ishare se mujhe bahar aane ka kaha.

Main : kya hua

Fiza : neend to nahi aa rahi?

Main : ye puchne ke liye bahar bulaya tha

Fiza : (muskurate hue) nahi kuch or baat thi

Main : haa bolo kya kaam hai

Fiza : (jhunjhulate hue) har waqt kaam ho tabhi bulau ye jaruri hai kya

Main : nahi maine aisa kab kaha bolo kya hua fir

Fiza : kuch nahi bas tumse kuch baat karni hai

Main : ha bolo

Fiza : abhi nahi raat ko jab sab so jayenge tab akele me mere kamre me aa jana tab baat karenge

Main : abhi bata do naa kya baat hai

Fiza : har baat ka ek waqt hota hai....raat ko matlab raat ko.... thik hai

Main : (haa me sir hilate hue) thik hai or koi hukum?

Fiza : nahi ji bas itna hi bas ab so mat jana raat ko main intzaar karungi tumhara thik hai

Main : thik hai

Mujhe raat ko sabke so jane ke baad apne kamre me aane ka keh kar fiza chali gai or main wapis apne kamre me aa gaya or apni charpayi par let gaya. Sath me Nazi ke so jane ka intzaar karne laga taki main fiza ke kamre me jaa saku. Waise to Qasim ke jail se jane se fiza ko or baki gharwalo ko dukhi hona chahiye tha lekin 1 hi din me na-jane kyo sab aise bartaav kar rahe the jaise kuch hua hi naa ho shayad sabne qasim ko bhula diya tha. Aaj fiza bhi mujhse baat karte hue bahut khush nazar aa rahi thi. Jaise kuch hua hi naa ho...abhi main yhi baat soch hi raha tha ki achanak mujhe yaad aaya ki fiza ne uss din raat ko kaha tha ki wo maa banne wali hai jarur isi masle par baat karne ke liye mujhe bulaya hoga. Lekin fir maine socha ki yaar main to khud har baat fiza or naazi se puch kar karta hun main bhala uski kya madad kar sakta hun.

Yhi sab sochte hue kaafi waqt guzar gaya or main bas apne bistar par pada inn sab baato ke bare me soch raha tha ki achanak mujhe bahar se kisi ke Chhhiiii....Chhhiiii....ki awaaz sunayi di. Maine aankhen kholkar bahar dekha to fiza darwaze par khadi muskura rahi thi or hath hilakar mujhe bahar bula rahi thi. Maine ishare se usko Nazi ke bare me pucha ki kya wo so gai to usne bhi sir hila kar haa me jawab diya or sath hi mujhe ungali se pass aane ka ishara kiya jaise hi main apni charpayi se khada hua to fiza palatkar chalne lagi main janta tha wo kaha ja rahi hai isliye main bhi uske pichhe hi chal diya. Wo bina pichhe dekhe sidha apne kamre me chali gai or apne kamre ki light band kar di or night bulb on kar diya. mujhe kuch samajh nahi aaya ki isne agar baat karni hai to kamre me andhera kyo kar rahi hai. abhi maine kamre me pehla kadam hi rakha tha ki Fiza ne mere daayen hath ko pakad kar jaldi se andar khincha or bahar ki taraf munh karke daaye-baayen dekha or kamra andar se band kar diya mujhe bas kundi lagane ki awaaz sunayi di fir fiza meri taraf palti or ek muskurahat ke sath mujhe dekhne lagi maine bhi muskurakar usse dekha.

Fiza : kya hua aise kya dekh raha ho.

Main : wo tumne kuch jaruri baat karni thi na.

Fiza : batati hun pehle wahan chalo (bed ki taraf ishara karte hue)

Main : achha... loh aa gaya ji ab jaldi bataao.

Fiza : tumko koi gaadi pakadni hai kya?

Main : nahi to kyo

Fiza : to fir har waqt itna jaldi me kyo rehte ho 2 pal mere sath nahi guzaar sakte?

Main : aisi baat nahi hai. main bas jaldi ke liye isliye keh raha tha ki koi aa naa jaye koi ham ko aise dekhega to achha nahi sochega naa isliye bas or koi baat nahi.(muskurate hue)

Fiza : achha ye bataao main tumko kaisi lagti hun

Main : bahut achhi lagti ho... tum, nazi or baba to bahut achhe ho mera bahut khyaal bhi rakhte ho.

Fiza : ohhunoo...(sir par hath rakhte hue) kya karu main tumhara

Main : kya hua ab maine kya kiya

Fiza : maine sirf apne bare me puchaa hai sabke bare me nahi sirf mere bare me bataao

Main : mmmmm tum bahut bahut bahut achhi ho....khush (muskurate hue)

Fiza : aise nahi baba... mera matlab dekhne me kaise lagti hun.

Main : dekhne me bhi tum sunder ho....tum bataao tumko main kaisa lgta hun?

Fiza : haaye....aise swaal mat puchaa karo dil bahar nikalne ko ho jata hai. Tum to mujhe meri jaan se bhi jyaadaa pyaare ho tum nahi jante tum mere liye kya ho...jante ho jab tum nahi the to main hamesha raat ko roti rehti thi neend bhi nahi aati thi khud ko bahut akela mehsoos karti thi

Main : or ab?

Fiza : ab to mujhe bahut sukoon hai tumhare aane se jaise mujhe saare jahann ki khushiyaan mil gai hai........janti ho har ladki tum jaisa pati chahti hai jo usko bahut sara pyaar kare uski har baat maane uska khunb khyaal rakhe har taqleef me uske sath khada ho tum me wo sab khubiyaan hai.

Main : arre....mujhme aisa kya dekh liya tumne.... khud hi to kehti ho main budhhu hun.

Fiza : nahi pagal wo to main mazak me kehti hun tum bahut achhe ho (mere gaal khinch kar)

Main : aise mat kiya karo yaar (apne gaalo ko sehlate hue) main koi bacha thodi hun jo mere gaal khinch rahi ho.

Fize : maine kab kaha bache ho...tum bache nahi meri jaan tum to mere hone wale bache ke baap ho.(mere honthon ko chumte hue)

Main : haa bache se yaad aaya iska ab hum kya karenge?

Fiza : karna kya hai mera bacha hai main paida karungi or kya

Main : lekin agar kisi ko pata chal gaya ki ye qasim ka bacha nahi to...?

Fiza : kuch bhi pata nahi chalega wo to waise bhi jail me hai jab tak wo bahar nikalega hmara bacha chalne firne lagega waise bhi wo aaya tha naa kuch din ke liye yahan to main bol dungi ki uska hai. tum fikar mat karo maine sab kuch soch liya hai or kisi ko pata bhi nahi chalega.

Main : lekin uss din to tum keh rahi thi ki wo jo tumne uss din kothari me mere sath kiya tha jail se aane ke baad qasim ne tumhare sath ek baar bhi nahi kiya to fir usko pata nahi chal jayega?

Fiza : kuch pata nahi chalega uss sharabi ko apni hosh nahi hoti wo meri parvaah kaha se karega kuch hoga to keh dungi ki qasim ne nashe me mere sath kiya tha waise bhi nashe me usko kounsa hosh hoti hai....ab agar tumko tumhare sare sawaalo ka jawab mil gaya ho to meharbani karke bed par let jao kab se jinn ki tarah mere sir par baithe hue ho. (hansatee hui)

Main : wo to thik hai lekin tum janti ho jab mujhe sab kuch yaad aa jayega to ho sakta hai mere gharwale mujhe yahan se le jaye tab tum kya karogi?

Fiza : koi baat nahi main tumhe ye to nahi kaha ki mujhse shaadi bhi karo. tum jitna waqt bhi mere sath ho main bas uss har pal ko jee bharke jeena chahti hun tumhare sath or fir tum chale jaoge to kya hua tumhari nishani to hamesha mere pass rahegi naa jisme main hamesha tumhara aks dekhungi.

Main : jaisi tumhari marzi.

Fiza : chalo ab baate band karo or let jao mere sath.

Main : yahan kyo main to bahar baba ke pass sota hun naa.

Fiza : aaj ek din mere pass so jaoge to toofan nahi aa jayega chalo chup karke let jao nahi to main tumse baat nahi karungi.

Main : achha thik hai let raha hun.

Fiza : isliye tum mujhe bahut pyaare lagte ho jab meri har baat itni asaani se maan jate ho (muskurate hue).

Mere bed par let te hi Fiza ne mera baayan hath apne hatho me liya or apni gaal sehlane lagi or main karwat leke uski taraf munh karke let gaya. Ye dekhkar usne bhi meri taraf karwat kar lee. ab hum dono ke chehre ek dusre ke pass the yahan tak ki hum ek dusre ki saans ki garmahat apne chehre par mehsoos kar rahe the.

Fiza : Main tumhare upar aake let jau.

Main : (haa me sir hilate hue) hhhmmm...

Fiza : Aise nahi tum khud mujhe apne upar lo.

Main : thik hai (maine fiza ko kamar se pakadkar apne upar lita liya)

Fiza : chalo ab apni aankhen band karo

Main : kar lee ab..

Fiza : ab kuch nahi bas munh band karo nahi to mujhe karna padega.

Main : wo kaise (muskurate hue)

Fiza : bol kar batau ya karke batau?

Main : jo tumko achha lage

Fiza : pehle apni aankhen band karo mujhe sharam aati hai.

Main : tumko sharam bhi aati hai (hansate hue)

Fiza : mmmmmm.... aankhen band karo na Neer

Main : achha ye lo ab......

Fiza : hhhmm to ab puchho kya puch rahe the

Main : main puchh rahaaa tha kiiiii..... (achanak fiza ne apne honth mere honthon par rakh diya)

 


अपडेट-12

फ़िज़ा अपने रसभरे ऑर नाज़ुक होंठ कुछ देर ऐसे ही मेरे होंठ के साथ जोड़ कर मेरे उपर पड़ी रही. फिर कुछ देर बाद उसने मेरे चेहरे को अपने हाथो से पकड़ लिया ऑर मेरी आँखो पर, माथे पर, नाक पर, गालो पर हल्के-हल्के चूमने लगी. कुछ देर वो मेरे चेहरे को ऐसे ही धीरे-धीरे चूमती रही फिर वो रुक गई ऑर मेरी आँखो पर हाथ रख लिया. मैं कुछ देर ऐसे ही उसके अगले कदम का इंतज़ार करता रहा तभी मुझे मेरे होंठों पर कुछ गीलापन महसूस हुआ जैसे मेरे होंठों पर कुछ रेंग रहा हो. फिर फ़िज़ा ने अपना हाथ भी मेरी आँखो से उठा दिया ये फ़िज़ा की ज़ुबान थी जो वो मेरे होंठों पर फेर रही थी ऑर मेरे होंठों को अपनी रसभरी ज़ुबान से गीला कर रही थी. अब मज़े से मेरी खुद ही आँखें बंद हो गई ऑर धीरे-धीरे मेरा मुँह खुलने लगा. मेरे मुँह ने फ़िज़ा की ज़ुबान को खुद ही अंदर आने का रास्ता दे दिया ऑर अब मैं धीरे-धीरे फ़िज़ा की ज़ुबान को चूस रहा था ऑर अपने दोनो हाथ फ़िज़ा की कमर पर उपर नीचे फेर रहा था. ये मज़ा मेरे लिए एक दम अनोखा था इससे मेरी साँसे भी तेज़ होने लगी ओर मेरे पाजामे मे भी हरकत शुरू हो गई. मेरा सोया हुआ लंड अब जागने लगा था. मैने अपने दोनो हाथो फ़िज़ा को ज़ोर से अपने गले से लगा लिया ओर नीचे अपनी दोनो टांगे फैला कर फ़िज़ा की टाँगो को अपनी टाँगो मे जाकड़ लिया.

अब हम दोनो ही मज़े की वादियो मे खो चुके थे हम दोनो बारी-बारी एक दूसरे के होंठ चूस रहे थे ओर काट रहे थे. पूरे कमरे मे हमारे चूमने से पुच...पुच... जैसी आवाज़े आ रही थी. इधर फ़िज़ा का बदन भी गरम होने लगा था उसने सलवार के उपर से अपनी चूत को मेरे लंड पर रगड़ना शुरू कर दिया था जिससे मेरा लंड अब पूरी तरह से जाग चुका था ऑर अपने असल रूप मे आ चुका था. फ़िज़ा बार-बार मेरे लंड को अपनी टाँगो के बीच मे दबा रही थी. वैसे तो ये अहसास मुझे पहले भी महसूस हो चुका था लेकिन जाने आज क्या खास था कि मुझे उस दिन से भी ज़्यादा मज़ा आ रहा था. अचानक फ़िज़ा ने मेरे चेहरा पकड़ा ऑर मेरे उपर उठकर मेरे लंड पर बैठ गई साथ ही मुझे भी बिठा लिया. अब हम दोनो बैठ कर एक दूसरे के होंठ चूस रहे थे फ़िज़ा ने अपना मुँह मेरे होंठों से हटाया ऑर मेरे मुँह को पकड़कर अपने गले पर लगा दिया मैने उसके इशारे को समझकर उसके गले पर चूसना ऑर काटना शुरू कर दिया इधर वो मेरी कमीज़ के बटन जल्दी-जल्दी खोल रही थी.

फ़िज़ा : अपने हाथ उपर करो मैं तुम्हे बिना कपड़ो के गले से लगाना चाहती हूँ.

मैने भी उसकी मदद के लिए अपनी दोनो बाहे उपर हवा मे उठा दी ताकि उसको आसानी हो जाए ऑर उसने मेरी कमीज़ उतार दी अब मेरा उपर का बदन एक दम नंगा हो चुका था. कमीज़ के उतरते ही वो किसी जंगली बिल्ली की तरह मेरे सीने पर टूट पड़ी ओर मेरी छाती पर कभी चूम रही थी कभी काट रही थी ऑर कभी काटी हुई जगह को चूस रही थी साथ मे नीचे से वो बार-बार मेरे लंड पर अपनी चूत कभी दबा रही थी तो कभी रगड़ रही थी जिससे उसकी सलवार एक दम गीली हो गई थी उसका गीलापन मुझे भी मेरे लंड पर महसूस हो रहा था.

अब उसने मेरे सीने पर हाथ रखकर पिच्चे को दबाया ओर अब मैं फिर से बेड पर लेट चुका था ओर वो मेरे उपर आके फिर से लेट गई लेकिन इस बार वो मेरी पूरी छाती को जगह-जगह चूस रही थी ऑर चूम रही थी. मुझे उसकी इस हरकत से बहुत मज़ा मिल रहा था. अब मुझसे बर्दाश्त करना बहुत मुश्किल हो रहा था. मैने उससे गर्दन से पकड़कर गला दबाने जैसे अंदाज़ मे उपर की तरफ लाया ऑर उसके होंठ जबरदस्त तरीके से चूस लिए जैसे उसके मुँह से अलग करना चाहता हूँ. अब मैने उसको बालो से पकड़ा ऑर बेड पर पटक दिया ऑर खुद उसके उपर आ गया. मैं उसकी आँखो मे देख रहा था कि क्या उसको मेरी ये हरकत बुरी लगी लेकिन उसने खुद ही एक प्यारी सी मुस्कुराहट के साथ मेरे स्वाल का जवाब दे दिया. मैं भी अब उसकी गर्दन को चूस ऑर काट रहा था ऑर साथ मे उसके बड़े-बड़े मम्मे दोनो हाथो से दबा रहा था.....वो बस मज़े से सस्सिईइ......ससिईईईईई....... कर रही थी ऑर मेरे बालो मे हाथ फेर रही थी अचानक मैने उसकी कमीज़ को दाएँ कंधे की तरफ से ज़ोर से खींच दिया जिससे उसका बयाँ कंधा एक दम नंगा होके मेरी आँखो के सामने आ गया मैने उसके गले से होता हुआ कंधे पर पहले चूमना फिर काटना शुरू कर दिया. वो बस मज़े से बार-बार सीईईई....सीईइ...ऑर आअहह करके ऑर करूऊ......ऑर करूऊ ही कहे जा रही थी.

फ़िज़ा : जाआअँ कमीज़्ज़्ज़्ज़्ज़ उतार दूओ नाआअ मेरिइई भीईीईईई........

उसकी ये शब्द ऐसे थे जैसे वो बहुत ताक़त लगाके इतना कह पाई हो... मैने उसको फिर से बिठाया ऑर उसने अपनी दोनो टांगे मेरी टाँगो की दोनो तरफ करके बैठ गई ऐसे ही मैने उसकी कमीज़ भी उतार दी अब वो सिर्फ़ ब्रा ओर सलवार मे थी. उसकी कमीज़ के उतरते ही उसने मुझे गले से लगा लिया ऑर एक आअहह की आवाज़ उसके मुँह से निकली. उसने जैसे ही मुझे गले लगाया मेरे भी हाथ उसकी पीठ पर चले गये मैं अब उसको अपने गले से लगाए उसकी पीठ पर हाथ फेर रहा था ऑर मेरे हाथ बार-बार उसकी ब्रा के स्टॅप से टकरा रहे थे इसलिए मैने उसकी ब्रा के स्टॅप खोल दिए अब उसकी ब्रा सिर्फ़ कंधे के सहारे ही उसके शरीर से जुड़ी हुई थी ऑर मैं उसकी नंगी पीठ पर हाथ फेर था था नीचे से वो बार-बार मेरे लंड पर अपनी चूत रगड़ रही थी. अचानक उसने धीरे से मेरे कान मे कहा....

फ़िज़ा : सारे कपड़े उतार दे मुझसे बर्दाश्त नही हो रहा अब.

मैं : हमम्म्म

हम दोनो एक दूसरे से अलग हुए ऑर जल्दी जल्दी अपने सारे कपड़े उतारकर बेड से नीचे ज़मीन पर फेंक दिया. उसने मुझसे पहले कपड़े उतार दिए थे इसलिए वो बस मुझे नंगा होता देख रही थी ऑर मुस्कुरा रही थी. जैसे ही मैने अपना आखरी कपड़ा यानी अंडरवेर उतारा वो मेरे उपर टूट पड़ी ऑर मुझे बेड पर गिरा लिया अब वो फिर से मेरे उपर थी ऑर मेरे पूरे बदन पर हाथ फेर रही थी ऑर मेरे होंठों को चूम रही थी ऑर चूस रही थी. साथ ही बार-बार अपने बड़े-बड़े मम्मे मेरे मुँह पर दबा रही थी. कुछ देर बाद उसने मुझे अपने मम्मे चूसने को कहा ऑर मैं किसी छोटे बच्चे की तरह उसके निपल को चूसे ऑर काटने लगा वो मेरे उपर पड़ी बारी-बारी अपने दोनो मम्मे चुस्वा रही थी ऑर मेरे सिर पर हाथ फेर रही थी. साथ मे सीईइ....सीईइ...कर रही थी मेरा काटना शायद उसको चूसने से भी ज़्यादा पसंद था इसलिए जब भी मैं उसके निपल पर काट ता तो वो ऑर ज़ोर से....ऑर ज़ोर से...कहती....ऐसे ही काफ़ी देर तक मैं उसके निपल्स को चूस्ता रहा उसके निपल्स को मैने चूस-चूस कर लाल कर दिया था ऑर उसके मम्मों के जगह-जगह पर मेरे काटने से गोल चक्रियो के निशान से पड़ गये थे जिसको वो देखकर बार-बार खुश हो रही थी ऑर अपनी उंगली के इशारे से मुझे दिखाकर मुस्कुरा रही थी....ऐसे ही काफ़ी देर हम लोग लगे रहे फिर अचानक वो मुझे बोली....

फ़िज़ा : एक नया मज़ा डून?

मैं : क्या मज़ा

फ़िज़ा : दिखाती हूँ अभी

मैं उसकी बात पर सिर हिला कर उसके अगले कदम का इंतज़ार करने लगा कि वो क्या नया करती है. वो फिर से मेरे सीने पर चूमने लगी लेकिन इस बार वो उपर से लगातार नीचे की तरफ जा रही थी. अचानक उसका हाथ मेरे लंड पर पड़ा तो उसने मेरे लंड को झट से पकड़ लिया ऑर हैरत से मेरी ओर देखकर बोली......

फ़िज़ा : ये इतना बड़ा कैसे हो गया उस दिन भी इतना ही था क्या जब पहली बार किया था तो....?

मैं : पता नही शायद इतना ही होगा

फ़िज़ा : हमम्म्म..... अब पता चला उस दिन इतना दर्द क्यो हुआ था मुझे

मैं : किस दिन दर्द हुआ था?

फ़िज़ा : उस दिन कोठरी मे जब हमने किया तब.....जानते हो अगला पूरा दिन मैं ठीक से चल नही पाई थी. नाज़ी ने मुझसे पूछा भी था कि भाभी आज लंगड़ा के क्यो चल रही हो तो मैने उससे झूठ बोल दिया कि पैर मे मोच आ गई है.

मैं : (हँसते हुए) तो मैने कहा था रात को मेरे पास आने को?

फ़िज़ा : नही आना चाहिए था (मुस्कुराते हुए)

मैं भी उसकी इस बात पर मुस्कुरा दिया ऑर वो वापिस मेरे पेट पर चूमने लगी ओर मेरे लंड को पकड़ कर उपर-नीचे करने लगी मुझे उसका ऐसा करने से एक अलग ही किस्म का मज़ा मिल रहा था तभी मेरे लंड पर मुझे कुछ गीलापन महसूस हुआ ऑर मेरे मुँह से एक जोरदार आआहह..... निकल गई. ये सुनकर फ़िज़ा एक दम से रुक गई ऑर मेरा लंड अपने मुँह से निकालकर ऑर अपने मुँह पर उंगली रखकर ज़ोर से मुझे सस्शह..... किया ऑर बोला कि आवाज़ मत करो कोई जाग जाएगा ऑर फिर से वो मेरे लंड के उपर के हिस्से को ज़ुबान से चाटने लगी. धीरे-धीरे उसने पूरा लंड अपने मुँह मे ले लिया ओर चूसना शुरू कर दिया ये मज़ा मेरे लिए एक दम नया था मैं मज़े की वादियो मे गोते लगा रहा था कुछ देर मेरा लंड चूसने के बाद वो फिर से मेरे उपर आ गई ऑर मेरे होंठ चूसने लगी. लेकिन अब उसने मुझे अपने उपर आने को कहा.

मैं : फ़िज़ा मैं भी ऐसे ही करूँ जैसे तुमने मेरे साथ किया?

फ़िज़ा : आज नही कल कर लेना अभी बस डाल दो अब मुझसे ऑर बर्दाश्त नही हो रहा है.

मैं : ठीक है

इसके साथ ही उसने आपनी टांगे चौड़ी कर ली ऑर मुझे बीच मे आने का इशारा किया. मैने जैसे ही अपना लंड उसकी चूत पर रखा उसने एक दम से मुझे रुकने को कहा.

मैं : क्या हुआ

फ़िज़ा : आराम से डालना उस दिन जैसे मत करना नही तो मेरी चीख निकल जाएगी.

मैं : तुम खुद ही डाल लो ना फिर अपने हिसाब से.

फ़िज़ा : ठीक है फिर मैं उपर आती हूँ ऑर खबरदार जो नीचे से झटका मारा तो(मुस्कुराते हुए).

मैं : अच्छा...(हाँ मे सिर हिलाकर मुस्कुराते हुए)

Update-12

Fiza apne rassbhare or nazuk honth kuch der aise hi mere honth ke sath jod kar mere upar padi rahi. fir kuch der baad usne mere chehre ko apne hatho se pakad liya or meri aankho par, maathe par, naak par, gaalo par halke-halke chamane lagi. kuch der wo mere chehre ko aise hi dheere-dheere chumti rahi fir wo ruk gai or meri aankho par hath rakh liya. Main kuch der aise hi uske agle kadam ka intzaar karta raha tabhi mujhe mere honthon par kuch geelapan mehsoos hua jaise mere honthon par kuch reng raha ho. Fir fiza ne apna hath bhi meri aankho se utha diya ye fiza ki zubaan thi jo wo mere honthon par fer rahi thi or mere honthon ko apni rasbhari jubaan se gila kar rahi thi. Ab maze se meri khud hi aankhen band ho gai or dheere-dheere mera munh khulne laga. Mere munh ne fiza ki zubaan ko khud hi andar aane ka rasta de diya or ab main dheere-dheere fiza ki zubaan ko chus raha tha or apne dono hath fiza ki kamar par upar niche fer raha tha. ye maza mere liye ek dam anokha tha isse meri saanse bhi tez hone lagi or mere pajame me bhi harkat shuru ho gai. Mera soya hua lund ab jaagne laga tha. maine apne dono hatho fiza ko jor se apne gale se laga liya or niche apni dono taangey faila kar fiza ki taango ko apni taango me jakad liya.

Ab hum dono hi maze ki wadiyo me kho chuke the hum dono bari-bari ek dusre ke honth chus rahe the or kaat rahe the. poore kamre me hmare chamane se puch...puch... jaisi awaze aa rahi thi. Idhar fiza ka badan bhi garam hone laga tha usne salwaar ke upar se apni chut ko mere lund par ragadna shuru kar diya tha jisse mera lund ab poori tarah se jaag chuka tha or apne asal roop me aa chuka tha. Fiza bar-bar mere lund ko apni taango ke bich me daba rahi thi. waise to ye ahsaas mujhe pehle bhi mehsoos ho chuka tha lekin jane aaj kya khas tha ki mujhe uss din se bhi jyaadaa maza aa raha tha. Achanak fiza ne mere chehra pakda or mere upar uthkar mere lund par baith gai sath hi mujhe bhi bitha liya. Ab hum dono baith kar ek dusre ke honth chus rahe the fiza ne apna munh mere honthon se hataya or mere munh ko pakadkar apne gale par laga diya maine uske ishare ko samjhkar uske gale par chusna or katna shuru kar diya idhar wo meri kameez ke button jaldi-jaldi khol rahi thi.

Fiza : apne haath upar karo main tumhe bina kapdo ke gale se lagana chahti hun.

Maine bhi uski madad ke liye apni dono baahe upar hawa me utha di taki usko asani ho jaye or usne meri kameez utaar di ab mera upar ka badan ek dam nanga ho chuka tha. kameez ke utarte hi wo kisi jungali billi ki tarah mere seene par toot padi or meri chaatee par kabhi chum rahi thi kabhi kaat rahi thi or kabhi kaati hui jagah ko chus rahi thi sath me niche se wo bar-bar mere lund par apni chut kabhi daba rahi thi to kabhi ragad rahi thi jisse uski salwar ek dam gili ho gai thi uska geelapan mujhe bhi mere lund par mehsoos ho raha tha. Ab usne mere seene par hath rakhkar pichhe ko dabaya or ab main fir se bed par let chuka tha or wo mere upar aake fir se let gai lekin iss baar wo meri poori chaatee ko jagah-jagah chus rahi thi or chum rahi thi. Mujhe uski iss harkat se bahut maza mil raha tha. Ab mujhse bardasht karna bahut mushkil ho raha tha. maine usse gardan se pakadkar gala dabane jaise andaaz me upar ki taraf laya or uske honth jabardast tareeke se chus liye jaise uske munh se alag karna chahta hun. Ab maine usko baalo se pakada or bed par patak diya or khud uske upar aa gaya. Main uski aankho me dekh raha tha ki kya usko meri ye harkat buri lagi lekin usne khud hi ek pyaari si muskurahat ke sath mere swaal ka jawab de diya. Main bhi ab uski gardan ko chus or kaat raha tha or sath me uske bade-bade mamme dono hatho se daba raha tha.....wo bas maze se sssiiii......ssiiiiiii....... kar rahi thi or mere baalo me hath fer rahi thi achanak maine uski kameez ko dayen kandhe ki taraf se jor se khinch diya jisse uska bayaan kandha ek dam nanga hoke meri aankho ke samne aa gaya maine uske gale se hota hua kandhe par pehle chumna fir katna shuru kar diya. wo bas maze se bar-bar siiiii....siiii...or aaahhh karke or karoooo......or karoooo hi kahe jaa rahi thi.

Fiza : jaaaaan kameezzzzz utaar dooo naaaaa meriiiii bhiiiiiii........

Uski ye shabd aise the jaise wo bahut taqat lagake itna keh payi ho... maine usko fir se bithaya or usne apni dono taangey meri tango ki dono karke baith gai aise hi maine uski kameez bhi utaar di ab wo sirf Bra or salwaar me thi. uski kameez ke utarte hi usne mujhe gale se laga liyaa or ek aaahhh ki awaaz uske munh se nikali. usne jaise hi mujhe gale lagaya mere bhi hath uski pith par chale gaye main ab usko apne gale se lagaye uski pith par hath fer raha tha or mere hath bar-bar uski bra ke stap se takra rahe the isliye maine uski Bra ke stap khol diye ab uski bra sirf kandhe ke sahare hi uske shareer se judi hui thi or main uski nangi peeth par hath fer tha tha niche se wo bar-bar mere lund par apni chut ragad rahi thi. Achanak usne dheere se mere kaan me kaha....

Fiza : saare kapde utaar de mujhse bardaasht nahi ho raha ab.

Main : hhhmmmm

Hum dono ek dusre se alag hue or jaldi jaldi apne sare kapde utaarkar bed se niche zameen par fenk diya. Usne mujhse pehle kapde utaar diye the isliye wo bas mujhe nanga hota dekh rahi thi or muskura rahi thi. jaise hi maine apna aakhri kapda yaani underwear utaara wo mere upar toot padi or mujhe bed par gira liya ab wo fir se mere upar thi or mere poore badan par hath fer rahi thi or mere honthon ko chum rahi thi or chus rahi thi. Sath hi bar-bar apne bade-bade mamme mere munh par dabaa rahi thi. kuch der baad usne mujhe apne mamme chusne ko kaha or main kisi chhote bache ki tarah uske nipple ko chuse or kaatne laga wo mere upar padi bari-bari apne dono mamme chuswa rahi thi or mere sir par hath fer rahi thi. sath me siiii....siiii...kar rahi thi mera katna shayad usko chusne se bhi jyaadaa pasand tha isliye jab bhi main uske nipple par kat ta to wo or zor se....or zor se...kehti....aise hi kaafi der tak main uske nipples ko chusta raha uske nipple ko maine chus-chus kar laal kar diya tha or uske mummo ke jagah-jagah par mere katne se gol chakriyo ke nishaan se pad gaye the jisko wo dekhkar bar-bar khush ho rahi thi or apni ungali ke ishare se mujhe dikhakar muskura rahi thi....aise hi kaafi der hum log lage rahe fir achanak wo mujhe boli....

Fiza : ek naya mazaa doo?

Main : kya mazaa

Fiza : dikhati hun abhi

Main uski baat par sir hila kar uske agley kadam ka intzaar karne laga ki wo kya naya karti hai. Wo fir se mere seene par chamane lagi lekin iss baar wo upar se lagataar niche ki taraf jaa rahi thi. Achanak uska hath mere lund par pada to usne mere lund ko jhat se pakad liya or hairat se meri or dekhkar boli......

Fiza : ye itna bada kaise ho gaya uss din bhi itna hi tha kya jab pehli baar kiya tha to....?

Main : pata nahi shayad itna hi hoga

Fiza : Hhhmmmm..... ab pata chala uss din itna dard kyo hua tha mujhe

Main : kis din dard hua tha?

Fiza : uss din kothri me jab hamane kiya tab.....jante ho agla poora din main thik se chal nahi payi thi. Nazi ne mujhse pucha bhi tha ki bhabhi aaj langda ke kyo chal rahi ho to maine usse jhooth bol diya ki pair me moch aa gai hai.

Main : (hansate hue) to maine kaha tha raat ko mere pass aane ko?

Fiza : nahi aana chahiye tha (muskurate hue)

Main bhi uski iss baat par muskura diya or wo wapis mere pet par chamane lagi or mere lund ko pakad kar upar-niche karne lagi mujhe uska aisa karne se ek alag hi kism ka maza mil raha tha tabhi mere lund par mujhe kuch gilapan mehsoos hua or mere munh se ek jordaar aaaahhhh..... nikal gai. ye sunkar fiza ek dam se ruk gai or mera lund apne munh se nikaalkar or apne munh par ungali rakhkar jor se mujhe ssshhhh..... kiya or bola ki awaaz mat karo koi jaag jayega or fir se wo mere lund ke upar ke hisse ko jubaan se chatne lagi. Dheere-dheere usne poora lund apne munh me le liya or chusna shuru kar diya ye mazaa mere liye ek dam naya tha main maze ki wadiyo me gote laga raha tha kuch der mera lund chusne ke baad wo fir se mere upar aa gai or mere honth chusne lagi. lekin ab usne mujhe apne upar aane ko kaha.

Main : fiza main bhi aise hi karu jaise tumne mere sath kiya?

Fiza : aaj nahi kal kar lena abhi bas daal do ab mujhse or bardasht nahi ho raha hai.

Main : thik hai

Iske saath hi usne aapni taangey choudi kar lee or mujhe bich me aane ka ishara kiya. maine jaise hi apna lund uski chut par rakha usne ek dam se mujhe rukne ko kaha.

Main : kya hua

Fiza : araam se dalna uss din jaise mat karna nahi to meri cheekh nikal jayegi.

Main : tum khud hi daal lo naa fir apne hisaab se.

Fiza : thik hai fir main upar aati hun or khabardaar jo niche se jhatka maara to(muskurate hue).

Main : achha...(haa me sir hilakar muskurate hue)

 
अपडेट-13

अब मैं नीचे लेट गया था ऑर फ़िज़ा फिर से मेरे उपर आ गई थी उसने एक बार फिर से मेरे लंड को थोड़ा सा चूस कर गीला किया ऑर अब मेरे लंड के टोपी पर काफ़ी सारा थूक जमा हो गया कुछ थूक उसने खुद ही अपनी चूत मे लगाया ऑर लंड को अपने हाथो से पकड़ कर अपनी चूत पर सेट किया ऑर साँस अंदर खींच कर धीरे-धीरे लंड पर बैठने लगी अभी आधा लंड ही अंदर गया था कि उसके चेहरे से पता चल रहा था कि उसको लंड पूरा अंदर लेने मे अभी भी परेशानी हो रही है इसलिए जितना लंड उसके अंदर गया था उतने से ही वो उपर-नीचे होने लगी अब हर झटके के साथ वो थोड़ा ज़्यादा लंड अंदर ले रही थी. कुछ ही देर मे उसने पूरा लंड अपने अंदर उतार लिया ऑर उपर नीचे होने लगी साथ ही उसने मेरे हाथ पकड़कर अपने मम्मों पर रख दिए ऑर मैं उसकी निपल्स को अपनी उंगली ऑर अंगूठे से मरोड़ने लगा. अब उसको भी मज़ा आने लगा था इसलिए वो अपनी गान्ड को धीरे-धीरे उपर-नीचे करती हुई वापिस मेरे सीने पर लेट गई ऑर मेरे सीने पर चूमने लगी.

मैं : अब मैं उपर आउ?

फ़िज़ा : हमम्म आ जाओ लेकिन इसको बाहर मत निकलना बहुत मज़ा आ रहा है.

मैं : ठीक है

मैने ऐसे ही बिना लंड बाहर निकाले उसको कमर से पकड़ कर घुमा दिया अब वो नीचे थी ऑर मैं उसके उपर था उसने अपनी दोनो टांगे हवा मे उठाके मेरी कमर पर लपेट दी थी ऑर मैने धीरे-धीरे झटके लगाने शुरू कर दिए उससे शायद अभी भी दर्द हो रहा था इसलिए उसने मुझे गले से लगाए मेरे होंठ चूसने लगी मैं नीचे से झटके लगा रहा था. अब मैने धीरे-धीरे रफ़्तार बढ़ानी शुरू करदी जिससे उसकी चूत भी पानी छोड़ने लगी ऑर लंड अंदर जाने मे ऑर आसानी हो गई धीरे-धीरे अब उसको भी मज़ा आने लगा था इसलिए उसने आँखें बंद किए ही मुझे कहा कि तोड़ा तेज़ करो. मैने अब अपनी रफ़्तार थोड़ी बढ़ा दी थी जिससे पूरे कमरे मे उसकी आहह....आअहह.... ऑर फ़च....फ़च....की आवाज़े आ रही थी जो शायद कमरे के बाहर तक जा रही होंगी. आज फ़िज़ा ऑर मुझे पहली बार से भी ज़्यादा मज़ा आ रहा था शायद इसलिए हम दोनो ही अपने होश मे नही थे ना ही बाहर आवाज़ जाने की परवाह थी हम दोनो ही बस अपने मज़े मे डूबे लगे हुए थे. कुछ ही देर मे वो फारिग होने करीब आ गई ऑर उसने मुझे ज़ोर से गले से लगा लिया ऑर अपनी गान्ड को उपर उठाना शुरू कर दिया...

फ़िज़ा : अब रुकना मत ज़ोर से करो तेज़्ज़्ज़.....ऑर तेज़्ज़्ज़्ज़....मैं अब करीब ही हूँ.....

कुछ ही जोरदार झटको के साथ वो अपनी मंज़िल पर आ गई उसका पूरा बदन अकड़ गया ऑर उसने अपनी गान्ड हवा मे उठा ली साथ ही उसने मुझे भी उपर को कर दिया कुछ सेकेंड्स वो ऐसे ही आकड़ी रही ऑर फिर एक दम से बेड पर गिर गई ऑर लंबे-लंबे साँस लेने लगी....

फ़िज़ा : आपका हुआ नही अभी तक?

मैं :(ना मे सिर हिलाते हुए)

फ़िज़ा : थोड़ी देर धीरे झटके लगाओ फिर तेज़ कर देना

इसके साथ ही मैं फिर से झटके लगाने लगा ऑर उसकी चूत जो कुछ मिंट पहले ठंडी हो गई थी वो फिर से गरम होने लगी अब उसने भी मेरा फिर से साथ देना शुरू कर दिया. अब मैने उसकी दोनो टाँग हवा मे उठाई ऑर अपने कंधे पर रख ली ऑर ऐसे ही तेज़-तेज़ झटके मारने लगा चन्द जोरदार झटको के बाद मैं भी मंज़िल पर पहुँच ही गया मेरे लंड मे एक अजीब सा उबाल आने लगा ऑर इसी के साथ मेरे लंड ने फ़िज़ा की चूत के अंदर एक झटका खाया जिसको फ़िज़ा की चूत महसूस करते ही फिर से एक बार ऑर फारिग हो गई जिससे फ़िज़ा की चूत अजीब सी सिकुड़न सी आने लगी जैसे वो मेरे लंड को अंदर चूस रही हो वो अहसास ने मुझे इंतेहा मज़ा दिया ऑर फिर मेरे लंड ने लगतार 5-6 झटके खाए ऑर अपनी सारी मानी फ़िज़ा की चूत मे उडेल दी.

हम दोनो की साँस ही फूली हुई थी ऑर हमारा बदन पसीने से नाहया हुआ था लेकिन दोनो को इस वक़्त बहुत सुकून था ऑर शरीर एक दम हल्का महसूस हो रहा था मैं फ़िज़ा के मम्मो के बीच अपना सिर रखे लेटा हुआ था ऑर अपनी सांसो को ठीक करने की कोशिश कर रहा था. फ़िज़ा का हाल भी मेरे जैसा ही था वो भी मुझे गले से लगाए मेरे बालो मे अपनी उंगलियो की कंघी बनाए हाथ फेर रही थी उसके चेहरे पर सुकून था ऑर वो बार-बार मेरे सिर को चूम रही थी साथ मे मेरी पीठ पर हाथ फेर रही थी ऑर मुझे देखकर मुस्कुरा रही थी. मैने भी उसके चेहरे की तरफ देखा ऑर उसके होंठों को हल्के से चूम लिया ऐसे ही हम दोनो कुछ देर एक दूसरे की आँखो मे देखते रहे ऑर फिर मैं उसके उपर से उठ गया ऑर कपड़े पहन ने लगा. अभी मैं कपड़े ही पहन रहा था कि अचानक किसी के दरवाज़ा खट-खटाने की आवाज़ आई हम दोनो ही घबरा गये थे कि इस वक़्त कौन आया होगा. मैने ऑर फ़िज़ा ने जल्दी से अपने-अपने कपड़े पहने ऑर फ़िज़ा ने मुझे बेड के नीचे घुसने को कहा. मैं बिजली की फुर्ती के साथ बेड के नीचे घुस गया. मेरे नीचे घुसते ही फ़िज़ा ने दरवाज़ा खोला.........

मुझे नीचे से कोई लड़की के पैर ही नज़र आए शायद ये नाज़ी थी जो जल्दी उठ गई थी. मैं नीचे से ही उनकी बाते सुनने लगा.

फ़िज़ा : क्या बात है नाज़ी ख़ैरियत है इतनी रात को

नाज़ी : भाभी रात कहाँ बाहर देखो दिन निकलने वाला है

फ़िज़ा : अच्छा मैं तो सो रही थी आज नींद ही नही खुली

नाज़ी : कोई बात नही मैं बस आपको उठाने ही आई थी

फ़िज़ा : तुम चलो मैं आती हूँ

नाज़ी : ठीक है तब तक मैं नीर को भी उठा देती हूँ आज पता नही वो भी नही उठा अभी तक

फ़िज़ा : (घबरा कर) नीर को....... तुम रहने दो उसको मैं उठा दूँगी तुम जाके नहा लो फिर तुम्हारे बाद मैं भी नहा लूँगी

नाज़ी : अच्छा भाभी....(अंदर कमरे मे झाँकते हुए) अर्रे भाभी रात को चद्दर के साथ कुश्ती कर रही थी क्या (मुस्कुराते हुए)

फ़िज़ा : नही तो क्या हुआ

नाज़ी : आपकी चद्दर कैसे बिखरी पड़ी है

फ़िज़ा : (ज़मीन पर देखते हुए) वो मैं सो रही थी हो गई होगी.

नाज़ी : हाँ भाई अकेले बेड पर आप ही शहंशाहों की तरह सोती हो कैसे भी सो जाओ आपका अपना बेड है (मुस्कुराते हुए)

फ़िज़ा : अच्छा....अच्छा अब ज़्यादा बाते ना बना ऑर जाके नहा ले

नाज़ी : ठीक है मेरी प्यारी भाभी (फ़िज़ा के गाल पकड़ते हुए)

इसके साथ ही नाज़ी नहाने चली गई ऑर फ़िज़ा कमरा बंद करके जल्दी से मेरे पास आई....

फ़िज़ा : नीर जल्दी बाहर निकलो

मैं : क्या हुआ नाज़ी थी ना

फ़िज़ा : हम को पता ही नही चला हम रात भर लगे रहे (मुस्कुराते हुए)

मैं : हाँ

फ़िज़ा : चलो अब तुम भी अपने कमरे मे जाओ नही तो किसी को शक़ हो जाएगा ऑर सुनो जाके कुछ देर बेड पर लेट जाना ताकि थोड़ी देर बाद आके मैं तुमको उठा सकूँ.

मैं : अच्छा जाता हूँ

फ़िज़ा : सुनो नीर रात को कैसा लगा मेरे साथ (मुस्कुराते हुए)

मैं :(पलट ते हुए) म्म्म्मरममम.... बोल कर बताऊ या करके (हँसते हुए)

फ़िज़ा : अच्छा बदमाश मेरे अल्फ़ाज़ मुझे ही सुना रहे हो...चलो करके ही दिखा दो (फ़िज़ा ने अपना मुँह आगे कर लिया ऑर आँखें बंद)

मैं : चलो फिर तैयार हो जाओ ऑर चीखना मत

फ़िज़ा : हमम्म्म (आँखें बंद किए हुए ही)

मैं : (मैने उसके दाएँ मम्मे पर काट लिया)

फ़िज़ा : आईईईईई.....बदमाश काटा क्यो....मुझे लगा था मेरे होंठों को चूमोगे तुम (अपने मम्मे को मसल्ति हुई)

मैं : मेरी मर्ज़ी जैसे चाहूं वैसे बताऊ (मुस्कुराते हुए)

फ़िज़ा : रात को आना बच्चू तब बताउन्गी

मैं : मैं रात को आउन्गा ही नही (हँसते हुए)

फ़िज़ा : हाए सच मे नही आओगे (रोने जैसी शक़ल बनाके)

मैं : अच्छा अब रोने मत लग जाना आ जाउन्गा बस..... मैं तो ऐसे ही कह रहा था

फ़िज़ा : नही आए तो देख लेना फिर......(अपने दोनो हाथ कमर पर रखकर)

मैं : अच्छा-अच्छा अब जाने दोगि तो रात को आउन्गा ना

फ़िज़ा : लो जी मैं तो भूल ही गई चलो जल्दी जाओ

मैं धीरे से फ़िज़ा के कमरे से निकल कर जल्दी से अपने बिस्तर पर आके लेट गया ऑर रात भर जागने की वजह से मुझे थकावट सी हो रही थी इसलिए मुझे पता ही नही चला कब मेरी आँख लग गई ऑर मैं सो गया.

मैं अभी सोया ही था कि कुछ ही देर मे मुझे कोई कंधे पर हाथ रखकर ज़ोर-ज़ोर से हिलाने लगा जिससे मेरी आँख खुल गई. मैं हड़बड़ा कर उठा मेरी आँखो मे अभी तक रात की नींद थी जिससे मेरी आँखें लाल हो गई ऑर मेरी आँखें ठीक से खुल भी नही रही थी. मुझे नज़र नही आ रहा था कि मुझे कौन उठा रहा है इसलिए मैने अपने दोनो हाथो से अपनी आँखो को मसला तो मुझे कुछ सॉफ नज़र आने लगा ये फ़िज़ा थी जो मुझे उठा रही थी. जिसको देखते ही मुस्कान अपने आप मेरे चेहरे पर आ गई.

फ़िज़ा : नीर क्या हुआ सो गये थे क्या?

मैं : हाँ ज़रा आँख लग गई थी.

फ़िज़ा : अगर रात की थकान है तो तुम आराम कर लो आज मैं ओर नाज़ी ही खेत चली जाएँगी.

मैं : अकेले जाओगी?

फ़िज़ा : तुम्हारे आने से पहले भी तो अकेली ही जाती थी ना कोई बात नही हम चली जाएँगी तुम आराम से सो जाओ वैसे भी मेरे शेर ने रात को बहुत मेहनत की है (आँख मारकर मुस्कुराते हुए)

मैं : नही मैं ठीक हूँ मैं भी चलूँगा तुम दोनो के साथ

फ़िज़ा : रहने दो ना जान नींद पूरी नही होगी तो बीमार पड़ जाओगे.

मैं : तुम्हारी भी नींद पूरी नही हुई बीमार तो तुम भी पड़ सकती हो ना....चलो कोई बात नही दोनो साथ मे बीमार पड़ेंगे फिर तो ऑर भी अच्छा होगा ऑर ये जान क्या नया नाम रख दिया है मेरा

फ़िज़ा : आज से मैं तुमको अकेले में हमेशा जान ही बुलाउन्गी क्योंकि तुम मेरी जान हो इसलिए (मुस्कुराते हुए) अच्छा बाबा कहाँ है?

मैं : पता नही जब मैं कमरे मे आया था तो बाबा यहाँ नही थे.

फ़िज़ा : अच्छा ज़रूर बाहर घूमने गये होंगे इनको कितनी बार मना किया है कि अकेले बाहर ना जाया करो लेकिन सुनते ही नही है किसीकि. (सिर को झाड़ते हुए)

मैं : कोई बात नही जब आएँगे तब मैं समझा दूँगा फिर तो ठीक है (मुस्कुराते हुए)

फ़िज़ा : हाँ ये ठीक है तुम्हारी बात तो मान ही जाते हैं हमारी सुनते भी नही.....अच्छा एक मिंट रूको मैं अभी आती हूँ.

मैं : अब तुम कहाँ जा रही हो मुझे नहाना भी तो है.

फ़िज़ा : बस 1 मिंट अभी आ रही हूँ जाना मत ठीक है

मैं : (हाँ मे सिर हिलाते हुए) जो हुकुम सरकार का....

Update-13

Ab main niche let gaya the or fiza fir se mere upar aa gai thi usne ek baar fir se mere lund ko thoda sa chus kar gila kiya or ab mere lund ke topi par kaafi sara thook jama ho gaya kuch thook usne khud hi apni chut me lagaya or lund ko apne hatho se pakad kar apni chut par set kiya or saans andar khinch kar dheere-dheere lund par baithne lagi abhi adha lund hi andar gaya tha ki uske chehre se pata chal raha tha ki usko lund poora andar lene me abhi bhi pareshaani ho rahi hai isliye jitna lund uske andar gaya tha utne se hi wo upar-niche hone lagi ab har jhatke ke sath wo thoda jyaadaa lund andar le rahi thi. Kuch hi der me usne poora lund apne andar utaar liya or upar niche hone lagi sath hi usne mere hath pakadkar apne mummo par rakh diye or main uski nipples ko apni ungali or angoothe se marodne laga. Ab usko bhi maza aane laga tha isliye wo apni gaanD ko dheere-dheere upar-niche karti hui wapis mere seene par let gai or mere seene par chamane lagi.

Main : ab main upar aau?

Fiza : hhhhmmm aa jao lekin isko bahar mat nikalana bahut mazza aa raha hai.

Main : thik hai

maine aise hi bina lund bahar nikale usko kamar se pakad kar ghuma diya ab wo niche thi or main uske upar tha usne apni dono taangey hawa me uthake meri kamar par lapet di thi or maine dheere-dheere jhatke lagane shuru kar diye usse shayad abhi bhi dard ho raha tha isliye usne mujhe gale se lagaye mere honth chusne lagi main niche se jhatke laga raha tha. Ab maine dheere-dheere raftaar badhani shuru kardi jisse uski chut bhi paani chodne lagi or lund andar jane me or asani ho gai dheere-dheere ab usko bhi maza aane laga tha isliye usne aankhen band kiye hi mujhe kaha ki thoda tez karo. maine ab apni raftaar thodi badha di thi jisse poore karme me uski aahhh....aaahhh.... or phachhh....phachhh....ki awaaze aa rahi thi jo shayad kamre ke bahar tak jaa rahi hongi. Aaj fiza or mujhe pehli baar se bhi jyaadaa mazaa aa raha tha shayad isliye hum dono hi apne hosh me nahi the naa hi bahar awaaz jane ki parvaah thi hum dono hi bas apne maze me doobe lage hue the. Kuch hi der me wo farig hone kareeb aa gai or usne mujhe jor se gale se laga liya or apni gaanD ko upar uthana shuru kar diya...

Fiza : ab rukna mat jor se karo tezzz.....or tezzzz....main ab kareeb hi hun.....

kuch hi jordaar jhatko ke sath wo apni manjil par aa gai uska poora badan akad gaya or usne apni gaanD hawa me utha lee sath hi usne mujhe bhi upar ko kar diya kuch seconds wo aise hi akadi rahi or fir ek dam se bed par gir gai or lambe-lambe saans lene lagi....

Fiza : aapka hua nahi abhi tak?

Main :(naa me sir hilate hue)

Fiza : thodi der dheere jhatke lagao fir tez kar dena

Iske sath hi maine fir se jhatke lagane laga or uski chut jo kuch mint pehle thandi ho gai thi wo fir se garam hone lagi ab usne bhi mera fir se saath dena shuru kar diya. Ab maine uski dono taang hawa me uthayi or apne kandhe par rakh lee or aise hi tez-tez jhatke marne laga chand jordaar jhatko ke baad main bhi manjil par pohonch hi gaya mere lund me ek ajeeb sa ubaal aane laga or issi ke sath mere lund ne fiza ki chut ke andar ek jhatka khaya jisko fiza ki chut mehsoos karte hi fir se ek baar or farig ho gai jisse fiza ki chut ajeeb si sikudan si aane lagi jaise wo mere lund ko andar chus rahi ho wo ahsaas ne mujhe intehaa maza diya or fir mere lund ne lagtar 5-6 jhatke khaye or apni saari mani fiza ki chut me udhel di.

Hum dono ki saans hi phuli hui thi or hmara badan paseene se nahaya hua tha lekin dono ko iss waqt bahut sukoon tha or shareer ek dam halka mehsoos ho raha tha main fiza ke mammo ke bich apna sir rakhe leta hua tha or apni saanso ko thik karne ki koshish kar raha tha. fiza ka haal bhi mere jaisa hi tha wo bhi mujhe gale se lagaye mere baalo me apni ungaliyo ki kanghi banaye hath fer rahi thi uske chehre par sukoon tha or wo bar-bar mere sir ko chum rahi thi sath me meri pith par hath fer rahi thi or mujhe dekhkar muskura rahi thi. Maine bhi uske chehre ki taraf dekha or uske honthon ko halke se chum liya aise hi hum dono kuch der ek dusre ki aankho me dekhte rahe or fir main uske upar se uth gaya or kapde pehan ne laga. Abhi main kapde hi pehan raha tha ki achanak kisi ke darwaza khat-khatane ki awaaz aayi hum dono hi gabhra gaye the ki iss waqt kaun aya hoga. Maine or fiza na jaldi se apne-apne kapde pehne or fiza ne mujhe bed ke niche ghusne ko kaha. main bijli ki furti ke sath bed ke niche ghus gaya. Mere niche ghuste hi fiza ne darwaza khola.........

Mujhe niche se koi ladki ke pair hi nazar aaye shayad ye naazi thi jo jaldi uth gai thi. main niche se hi unki baate sunne laga.

Fiza : kya baat hai naazi khariyat hai itni raat ko

Nazi : bhabhi raat kaha bahar dekho din nikalne wala hai

Fiza : achha main to so rahi thi aaj jaag hi nahi khuli

Nazi : koi baat nahi main bas aapko uthane hi aayi thi

Fiza : tum chalo main aati hun

Nazi : thik hai tab tak main neer ko bhi utha deti hun aaj pata nahi wo bhi nahi utha abhi tak

Fiza : (gabhrakar) neer ko....... tum rehne do usko main utha dungi tum jake naha lo fir tumhare baad main bhi naha lungi

Nazi : achha bhabhi....(andar kamre me jhankte hue) arre bhabhi raat ko chaddar ke sath kushti kar rahi thi kya (muskurate hue)

Fiza : nahi to kya hua

Nazi : aapki chaddar kaise bikhari padi hai

Fiza : (zameen par dekhte hue) wo main so rahi thi ho gai hogi.

Nazi : haa bhai akele bed par aap hi shenshaho ki tarah soti ho kaise bhi so jao aapka apna bed hai (muskurate hue)

Fiza : achha....achha ab jyaadaa bate na bana or jake naha le

Nazi : thik hai meri pyaari bhabhi (fiza ke gaal pakadte hue)

Iske sath hi nazi nahane chali gai or fiza kamre band karke jaldi se mere pass aayi....

Fiza : neer jaldi bahar nikalo

Main : kya hua nazi thi naa

Fiza : ham ko pata hi nahi chala hum raat bhar lage rahe (muskurate hue)

Main : haa

Fiza : chalo ab tum bhi apne kamre me jao nahi to kisi ko shaq ho jayega or suno jake kuch der bed par let jana taaki thodi der baad aake main tumko utha saku.

Main : achha jata hun

Fiza : suno neer raat ko kaisa laga mere sath (muskurate hue)

Main :(palat te hue) mmmmmmm.... bol kar batau ya karke (hansate hue)

Fiza : achha badmash mere alfaaz mujhe hi suna rahe ho...chalo karke hi dikha do (fiza ne apna munh aagey kar liya or aankhen band)

Main : chalo fir teyaar ho jao or cheekhna mat

Fiza : hhhmmmm (ankhen band kiye hue hi)

Main : (maine uske daayen mamme par kaat liya)

Fiza : aayiiiiiii.....badmash kaata kyo....mujhe laga tha mere honthon ko chumoge tum (apne mamme ko masalti hui)

Main : meri marzi jaise chahu waise batau (muskurate hue)

Fiza : raat ko aana bachu tab bataungi

Main : main raat ko aaunga hi nahi (hansate hue)

Fiza : haaye sach me nahi aaoge (rone jaisi shaqal banake)

Main : achha ab rone mat lag jana aa jaunga bas..... main to aise hi keh raha tha

Fiza : nahi aaye to dekh lena fir......(apne dono hath kamar par rakhkar)

Main : achha-achha ab jane dogi to raat ko aaunga naa

Fiza : loh ji main to bhul hi gai chalo jaldi jao

Main dheere se fiza ke kamre se nikal kar jaldi se apne bistar par aake let gaya or raat bhar jagne ki wajah se mujhe thakawat si ho rahi thi isliye mujhe pata hi nahi chala kab meri aankh lag gai or main so gaya.

Main abhi soya hi tha ki kuch hi der me mujhe koi kandhe par hath rakhkar jor-jor se hilane laga jisse meri jaag khul gai. main hadbada kar utha meri aankho me abhi tak raat ki neend thi jisse meri aankhen laal ho gai or meri aankhen thik se khul bhi nahi rahi thi. Mujhe nazar nahi aa raha tha ki mujhe kaun utha raha hai isliye maine apne dono hatho se apni aankho ko samasya to mujhe kuch saaf nazar aane laga ye fiza thi jo mujhe utha rahi thi. jisko dekhte hi muskaan apne aap mere chehre par aa gai.

Fiza : Neer kya hua so gaye the kya?

Main : haa zra aankh lag gai thi.

Fiza : agar raat ki thakaan hai to tum araam kar lo aaj main or nazi hi khet chali jayengi.

Main : akele jaogi?

Fiza : tumhare aane se pehle bhi to akeli hi jati thi naa koi baat nahi hum chali jayengi tum araam se so jao waise bhi mere sher ne raat ko bahut mehnat ki hai (aankh maarkar muskurate hue)

Main : nahi main thik hun main bhi chalunga tum dono ke sath

Fiza : rehne do naa jaan neend poori nahi hogi to bimaar pad jaoge.

Main : tumhari bhi neend poori nahi hui bimar to tum bhi pad sakti ho naa....chalo koi baat nahi dono sath me bimar padenge fir to or bhi achha hoga or ye jaan kya naya naam rakh diya hai mera

Fiza : aaj se main tumko akele main hamesha jaan hi bulaungi kyonki tum meri jaan ho isliye (muskurate hue) achha baba kaha hai?

Main : pata nahi jab main kamre me aaya tha to baba yahan nahi the.

Fiza : achha jarur bahar ghamane gaye honge inko kitni baar mana kiya hai ki akele bahar naa jaya karo lekin sunte hi nahi hai kisiki. (sir ko jhadte hue)

Main : koi baat nahi jab aayenge tab main samjha dunga fir to thik hai (muskurate hue)

Fiza : haa ye thik hai tumhari baat to maan hi jaate hain hamari sunte bhi nahi.....achha ek mint ruko main abhi aati hun.

Main : ab tum kaha jaa rahi ho mujhe nahana bhi to hai.

Fiza : bas 1 mint abhi aa rahi hun jana mat thik hai

Main : (haa me sir hilate hue) jo hukum sakraar kaa....

 
अपडेट-14

फ़िज़ा बाहर चली गई ऑर मैं बैठा उसको बाहर जाते देखता रहा ऑर अपनी दोनो बाहें उपर हवा मे उठाए अंगड़ाई लेने लगा. अभी 1 मिंट भी नही हुआ था कि फ़िज़ा वापिस आ गई ऑर कमरे मे घुसते हुए उसके चेहरे पर उसकी प्यारी सी सदा-बाहर मुस्कान थी....

फ़िज़ा : उठो ऑर इधर आओ...

मैं : आता हूँ रूको (मैं उठकर चलता हुआ उसके सामने जाके खड़ा हो गया)

फ़िज़ा : (पिछे मुड़कर एक बार फिर देखते हुए) यहाँ नही दरवाज़े के पिछे

मैं : ये लो जी ऑर कोई हुकुम सरकार

फ़िज़ा : अच्छा सुनो आज मैं नाज़ी ऑर बाबा को अपने माँ बनने के बारे मे बताना चाहती हूँ तो तुम उनके सामने ऐसे ही बर्ताव करना जैसे तुम्हे भी उनके सामने ही पता लगा हो ज़्यादा खुश मत होने लग जाना कही उनको शक़ ही ना हो जाए.

मैं : ठीक है फिर मैं भी उनके साथ ही मुबारकबाद दूँगा (आँख मारते हुए)

फ़िज़ा : हमम्म ये ठीक है.

मैं : ऑर कोई हुकुम सरकार

फ़िज़ा : कुछ खास नही.... अब बस मुझे थोड़ा सा प्यार करो सुबह जो रह गया था

मैं : सारी रात तो किया था दिल नही भरा क्या

फ़िज़ा : उउउहहुउऊ वो वाला नही बुधु... रूको हर काम मुझे ही बताना पड़ता है (मुँह चिड़ाकर)

मैं : (कुछ ना समझने जैसा मुँह बनाके फ़िज़ा को देखते हुए)

फ़िज़ा : दरवाज़े के पिछे आओ बाहर कोई आ गया तो देख सकता है हम को इसलिए

मैं : हमम्म्म आ गया अब.....

फ़िज़ा : थोड़ा नीचे तो झुको लंबू....(हँसते हुए)

मैं : (अपने आपको थोड़ा नीचे झुकाते हुए) अब ठीक है

फ़िज़ा : हमम्म्म अब एक दम ठीक है.

फ़िज़ा ने अपनी दोनो बाहें मेरे गले मे हार की तरफ डाल ली ऑर अपनी एडियाँ थोड़ी सी उपर को उठा ली जिससे उसका ऑर मेरा मुँह एक दम आमने सामने आ जाए. अब उसका बदन मेरी छाती से चिपक सा गया था ऑर उसके बड़े-बड़े मम्मे मेरी छाती के साथ लगे हुए थे ओर दब से गये थे फिर उसने अपनी आँखें बंद की ऑर मेरे होंठों पर अपने रसीले होंठ रख दिए मैने भी अपनी दोनो बाहें उसकी कमर मे डाल ली ऑर उसको अपने साथ चिपका लिया जैसे हम 2 जिस्म नही बल्कि 1 ही जिस्म हो कुछ देर हम ऐसे ही होंठों से होंठ जोड़े खड़े रहे फिर मुझसे उसके होंठों की जलन सहन करना बर्दाश्त के बाहर हो गया इसलिए मैने ही धीरे-धीरे उसके रसभरे होंठों को चूसना शुरू कर दिया फ़िज़ा ने भी मेरा पूरा साथ दिया हम दोनो फिर से रात की तरह मज़े की वादियो मे पहुँच रहे थे ऑर हम दोनो पर खुमारी छाने लगी थी.

अभी हम को कुछ ही पल हुए थे कि बाहर नाज़ी की आवाज़ आई जो कि फ़िज़ा को पुकार रही थी. इसलिए हम को ना चाहते हुए भी एक दूसरे से अलग होना पड़ा. मैं जल्दी से फ़िज़ा से दूर होके कुर्सी के पास जाके बैठ हो गया ऑर फ़िज़ा मेरे बिस्तर की चद्दर तह करने लगी.

नाज़ी : भाभी आप यहाँ हो मैं आपको सारे घर मे ढूँढ रही हूँ.

फ़िज़ा : क्या हुआ मैं यहाँ नीर को उठाने आई थी.

नाज़ी : हुआ तो कुछ नही पर मैने बस यही पुछ्ना था कि आप दोनो अभी तक यही हो आज खेत मे नही जाना क्या.

फ़िज़ा : हाँ हाँ जाना है ना... मैं तो बस नीर को उठाने के लिए ही आई थी बस जा रही हूँ.

नाज़ी : लाओ ये सब मैं कर लूँगी आप बस जाके तेयार हो जाओ फिर नीर को भी तो नहाना होगा ना.

मैं : कोई बात नही पहले फ़िज़ा जी तेयार हो जाए मैं बाद मे तेयार हो जाउन्गा.

फ़िज़ा मुझे एक मुस्कान के साथ देखती हुई एक आँख मारकर बाहर को चली गई ऑर मैं उसको देखता रहा. तभी मुझे ख़याल आया कि बाबा कहाँ है इसलिए मैने नाज़ी से ही पुछ्ना ठीक समझा...

मैं : नाज़ी बाबा कहाँ है सुबह से दिखाई नही दिए.

नाज़ी : पता नही रात के बाद तो मैने भी बाबा को नही देखा.

मैं :(चिंता से) वो आगे भी ऐसे घूमने चले जाते है या आज ही गये हैं.

नाज़ी : वैसे तो वो पहले रोज़ सैर करने जाया करते थे सुबह लेकिन कुछ वक़्त से उनकी तबीयत ठीक नही रहती थी तो हमने उनको मना कर दिया था बाहर घूमने जाने से.

मैं : अच्छा

इतना कहकर नाज़ी भी अपने बाकी काम निबटाने मे लग गई ऑर मैं बाहर बैठक मे बैठा बाबा का इंतज़ार करने लगा. कुछ ही देर मे मुझे डोर से बाबा आते हुए दिखाई दिए तो मेरा चेहरा भी खुशी से खिल उठा. बाबा हाथ मे एक छड़ी लिए हुए मुस्कुराते हुए मेरे सामने आके खड़े हो गये.

मैं : बाबा आज सुबह-सुबह किसकी पिटाई करने गये थे (मुस्कुराते हुए)

बाबा : (अपनी छड़ी की तरफ देखते हुए ऑर ज़ोर से हँसते हुए) अर्रे पिटाई नही बेटा मैं तो बस अपनी नीम की दान्तुन ढूँढने गया था. इस उम्र मे किसकी पिटाई करूँगा.

मैं : बाबा मुझे कह देते आपको जाने की क्या ज़रूरत थी

बाबा : बेटा अब इतना भी नकारा ना बनाओ मुझे कि कोई भी काम ना करने दो.... कुछ काम तो मेरे लिए भी छोड़ दिया करो इससे मेरा भी दिल लगा रहता है नही तो घर मे अकेला बैठा तो दिल ही नही लगता.

मैं : जैसा आप बेहतर समझे बाबा. (मुस्कुराते हुए)

बाबा : अच्छा बेटा तुम सुबह-सुबह कहाँ गये थे. जब मैं उठा तो तुम बिस्तर पर नही थे.

मैं : (सोचते हुए) कही नही बाबा रात को ज़रा खुली हवा मे घूमने का दिल था तो कोठारी मे खड़ा था.(मैं जानता था बाबा सीढ़िया नही चढ़ सकते इसलिए उन्होने कोठरी मे नही देखा होगा इसलिए ये झूठ बोला)

बाबा : अच्छा तभी मैं सोच रहा था कि नीर कहाँ चला गया इतनी रात को.

मैं : (मुस्कुराते हुए) ठीक है बाबा हम शाम को बातें करेंगे अभी खेत जाने के लिए देर हो रही है.

बाबा : अच्छा बेटा.

कुछ ही देर मे फ़िज़ा भी तेयार होके आ गई ऑर मेरे तेयार होने के बाद हम खेत चले गये. दुपेहर तक हम तीनो अपने-अपने कामो मे बिज़ी रहे तभी एक आदमी हमारे खेतो मे आता हुआ नज़र आया. जिससे फ़िज़ा ने सबसे पहले बात की ऑर फिर वो दोनो मेरी तरफ आने लगे.

आदमी : सलाम जनाब आपको छोटी मालकिन ने याद किया है.

मैं : वेलेकम.सलाम आप कौन हो ऑर कौनसी छोटी मालकिन.

आदमी : जी मेरा नाम खुदा बक्ष है मुझे सरपंच जी की बेटी ने भेजा है वो आपसे मिलना चाहती है

.

मैं : अच्छा उनको बोलो थोड़ी देर मे आता हूँ

Update-14

Fiza bahar chali gai or main baitha usko bahar jate dekhta raha or apni dono baahe upar hawa me uthaye angdayi lene laga. abhi 1 mint bhi nahi hua tha ki fiza wapis aa gai or kamre me ghuste hue uske chehre par uski pyaari si sada-bahar muskaan thi....

Fiza : utho or idhar aao...

Main : aata hun ruko (main uthkar chalta hua uske samne jaake khada ho gaya)

Fiza : (pichhe mudkar ek bar fir dekhte hue) yahan nahi darwaaze ke pichhe

Main : ye lo ji or koi hukum sarkaar

Fiza : achha suno aaj main nazi or baba ko apne maa banne ke bare me batana chahti hun to tum unke samne aise hi bartaav karna jaise tumhe bhi unke samne hi pata laga ho jyaadaa khush mat hone lag jana kahi unko shaq hi na ho jaye.

Main : thik hai fir main bhi unke sath hi mubaarakbaad dunga (aankh marte hue)

Fiza : hhhmmm ye thik hai.

Main : or koi hukum sarkaar

Fiza : kuch khas nahi.... ab bas mujhe thoda sa pyaar karo subah jo reh gaya tha

Main : saari raat to kiya tha dil nahi bhara kya

Fiza : uuuhhhuuu wo wala nahi budhu... ruko har kaam mujhe hi batana padta hai (munh chidakar)

Main : (kuch naa samajhne jaisa munh banake fiza ko dekhte hue)

Fiza : darwaaze ke pichhe aao bahar koi aa gaya to dekh sakta hai ham ko isliye

Main : hhhmmmm aa gaya ab.....

Fiza : thoda niche to jhuko lambu....(hansate hue)

Main : (apne aapko thoda niche jhukate hue) ab thik hai

Fiza : hhhmmmm ab ek dam thik hai.

Fiza ne apni dono baahen mere gale me haar ki taraf daal li or apni edhiyaan thodi si upar ko utha lee jisse uska or mera munh ek dam aamne saamne aa jaye. Ab uska badan meri chaatee se chipak sa gaya tha or uske bade-bade mamme meri chaatee ke sath lage hue the or dab se gaye the fir usne apni aankhen band ki or mere honthon par apne raseele honth rakh diye maine bhi apni dono baahen uski kamar me daal li or usko apne sath chipkaa liya jaise hum 2 jism nahi balki 1 hi jism ho kuch der hum aise hi honthon se honth jode khade rahe fir mujhse uske honthon ka lams sehan karna bardaasht ke bahar ho gaya isliye maine hi dheere-dheere uske rasbhare honthon ko chusna shuru kar diya fiza ne bhi mera poora sath diya hum dono fir se raat ki tarah maze ki wadiyo me pohonch rahe the or hum dono par khumari chhane lagi thi.

abhi ham ko kuch hi pal hue the ki bahar nazi ki awaaz aayi jo ki fiza ko pukaar rahi thi. isliye ham ko naa chahte hue bhi ek dusre se alag hona pada. Main jaldi se fiza se door hoke kursi ke pass jake khada ho gaya or fiza mere bistar ki chaddar teh karne lagi.

Nazi : bhabhi aap yahan ho main aapko saare ghar me dhundh rahi hun.

Fiza : kya hua main yahan neer ko uthane aayi thi.

Nazi : hua to kuch nahi par maine bas yhi puchhna tha ki aap dono abhi tak yhi ho aaj khete nahi jana kya.

Fiza : haa haa jana hai naa... main to bas Neer ko uthane ke liye hi aayi thi bas jaa rahi hun.

Nazi : lao ye sab main kar lungi aap bas jake teiyaar ho jao fir Neer ko bhi to nahana hoga na.

Main : koi baat nahi pehle fiza ji teiyaar ho jaye main baad me teiyaar ho jaunga.

Fiza mujhe ek muskaan ke sath dekhti hui ek aankh maarkar bahar ko chali gai or main usko dekhta raha. Tabhi mujhe khayaal aaya ki baba kaha hai isliye maine naazi se hi puchhna thik samjha...

Main : nazi baba kaha hai subah se dikhayi nahi diye.

Nazi : pata nahi raat ke baad to maine bhi baba ko nahi dekha.

Main :(chinta se) wo aagey bhi aise ghamane chale jate hai ya aaj hi gaye hain.

Nazi : waise to wo pehle roz sair karne jaya karte the subah lekin kuch waqt se unki tabiyat thik nahi rehti thi to hamane unko mana kar diya tha bahar ghamane jane se.

Main : achha

itna kehkar nazi bhi apne baaki kaam nibatane me lag gai or main bahar baithak me baitha baba ka intzaar karne laga. kuch hi der me mujhe door se baba aate hue dikhayi diye to mera chehra bhi khushi se khil utha. baba hath me ek chhadi liye hue muskurate hue mere samne aake khade ho gaye.

Main : baba aaj subah-subah kiski pitayi karne gaye the (muskurate hue)

Baba : (apni chhadi ki taraf dekhte hue or jor se hansate hue) arre pitayi nahi beta main to bas apni neem ki daantun dhundhne gaya tha. iss umer me kiski pitayi karunga.

Main : baba mujhe keh dete aapko jane ki kya jarurat thi

Baba : beta ab itna bhi nakaara na banao mujhe ki koi bhi kaam na karne do.... kuch kaam to mere liye bhi chod diya karo isse mera bhi dil laga rehta hai nahi to ghar me akaila baitha to dil hi nahi lagta.

Main : jaisa ap behtar samjhe baba. (muskurate hue)

Baba : achha beta tum subah-subah kaha gaye the. jab main utha to tum bistar par nahi the.

Main : (sochte hue) kahi nahi baba raat ko zra khuli hawa me ghamane ka dil tha to kothari me khada tha.(main janta tha baba sidhiya nahi chadh sakte isliye unhone kothari me nahi dekha hoga isliye ye jhooth bola)

Baba : achha tabhi main soch raha tha ki Neer kaha chala gaya itni raat ko.

Main : (muskurate hue) thik hai baba hum shaam ko baaten karenge abhi khet jane ke liye der ho rahi hai.

Baba : achha beta.

kuch hi der me fiza bhi teiyaar hoke aa gai or mere teiyaar hone ke baad hum khet chale gaye. dupehar tak hum teeno apne-apne kaamo me busy rahe tabhi ek aadmi hmare kheto me aata hua nazar aaya. jisse fiza ne sabse pehle baat ki or fir wo dono meri taraf aane lage.

Aadmi : salaam janab aapko chhoti malkin ne yaad kiya hai.

Main : W.Salaam aap kaun ho or kounsi chhoti malkin.

Admi : ji mera naam khuda baksh hai mujhe sarpanch ji ki beti ne bheja hai wo aapse milna chahti hai.

Main : achha unko bolo thodi der me aata hun

 
अपडेट-15

वो आदमी इतना सुनकर वापिस चला गया ऑर फ़िज़ा मुझे गुस्से से खा जाने वाली नज़रों से देखने लगी. मुझे समझ नही आ रहा था कि फ़िज़ा मुझे ऐसे गुस्से से क्यो देख रही है तभी वो वापिस पलट गई ऑर वापिस अपने काम वाली जगह जाने लगी.

मैं : फ़िज़ा क्या हुआ ऐसे बिना कुछ बोले कहाँ जा रही हो बात तो सुनो.

फ़िज़ा : (गुस्से मे) क्या है. जाओ अपनी छोटी मालकिन के पास वो तुम्हारा इंतज़ार कर रही है मेरे पिछे क्यो आ रहे हो.

मैं : अर्रे हुआ क्या है बताओ तो सही गुस्सा किस बात पर हो मैं तुम्हारे लिए उसके पास जा रहा हूँ तुम तो हर वक़्त गुस्सा ही करती रहती हो.

फ़िज़ा : अच्छा जी मैं गुस्सा करती हूँ तुम हवेली गये ऑर मुझे बताया भी नही वहाँ जाके क़ासिम की बात भी कर ली फिर भी मुझे बताना ज़रूरी नही समझा ऑर मैं बिना बात के गुस्सा कर रही हूँ क्यो हैं ना.

मैं : फ़िज़ा वो लड़की क़ासिम को जैल से निकलवाने मे हमारी मदद करेगी इसलिए मैं उसके पास गया था ऑर मैं तुमको बताना भूल गया था नाज़ी को सब पता है जाके पूछ लो.

फ़िज़ा : मैं क्यो पुछू नाज़ी से मुझे तुमको बताना चाहिए था ना ऑर क़ासिम को निकलवाने की कोई ज़रूरत नही है.

मैं : (चोन्क्ते हुए) क्यो तुम नही चाहती की वो बाहर आए ऑर तुम्हारे साथ रहे.

फ़िज़ा : नही मैं बस ये नही चाहती कि तुम मुझसे दूर हो जाओ.

मैं : क्या मतलब

फ़िज़ा : ज़ाहिर सी बात है कि क़ासिम अगर बाहर आएगा तो हम दोनो जैसे अब मिलते हैं वैसे नही मिल पाएँगे ऑर वैसे भी क़ासिम से मुझे सिर्फ़ आँसू ऑर तक़लीफ़ ही मिली है जो खुशी मुझे तुमसे मिली वो मैं खोना नही चाहती बस.

मैं : ठीक है जैसे तुम बोलोगि वैसा ही होगा.

फ़िज़ा : अब तुम छोटी मालकिन के पास भी मत जाना ठीक है.

मैं : (हाँ मे सिर हिलाते हुए) हमम्म अब तो खुश हो.

फ़िज़ा : हमम्म (मुस्कुराते हुए)

अभी हम बात की कर रहे थे कि नाज़ी भी हमारे पास आ गई.....

नाज़ी : क्या हुआ नीर वो आदमी कौन था

मैं : वो हवेली से आया था

फ़िज़ा : (मुझे चुप रहने का इशारा करके नही मे सिर हिलाते हुए) कुछ नही वो बस सरपंच ने ऐसे ही आदमी भेजा था कि हम क़ासिम के लिए हुए पैसे देंगे या नही तो मैने मना कर दिया कि हमारे पास पैसे नही है. जब होंगे तो दे देंगे.

नाज़ी : ओह्ह अच्छा

फिर हम तीनो अपने-अपने कामों मे लग गये ओर शाम को खेत से घर आ गये. रात को मैं बाबा के पास बैठा बातें कर रहा था ऑर उनके पैर दबा रहा था ऑर नाज़ी ऑर फ़िज़ा रसोई मे खाने बनाने मे लगी थी कि अचानक बिजली चली गई.

बाबा : ये बिजली वालो को रात मे भी सुकून नही है.

मैं : बाबा रुकिये मैं रोशनी के लिए मोमबत्ती लेके आता हूँ.

मैं मोमबत्ती लेने रसोई मे गया तो मुझे 2 नही बल्कि एक साया नज़र आया जो झुका हुआ था ऑर कोई समान निकाल रहा था डब्बे मे से मुझे लगा कि फ़िज़ा है इसलिए मुझे शरारत सूझी ऑर मैने पिछे से जाके उसको पकड़ लिया इससे पहले कि वो चोंक कर चीखती मैने उसके मुँह पर हाथ रख दिया.

मैं : चिल्लाना मत मैं हूँ नीर (बहुत धीमी आवाज़ मे)

वो साए वाली लड़की : (वो खामोश होके खड़ी हो गई) हमम्म

मैं : एक पप्पी दो ना (धीमी आवाज़ मे)

वो साए वाली लड़की : (ना मे सिर हिलाते हुए)

तभी लाइट आ गई ऑर मैं हैरान-परेशान वही खड़ा का खड़ा ही रह गया मेरी समझ मे नही आ रहा था कि मुझसे ऐसी ग़लती कैसे हो गई क्योंकि वो लड़की फ़िज़ा नही नाज़ी थी जिसको मैं गले लगाए खड़ा था. लाइट आने के बाद जैसे ही मैने उसको देखा जल्दी से उससे अलग हो गया ऑर रसोई से बाहर निकल गया तेज़ कदमो के साथ.

फ़िज़ा : अर्रे तुम यहाँ क्या कर रहे हो मैं तो तुमको मोमबत्ती देने गई थी.

मैं : कुछ नही वो मैं भी मोमबत्ती लेने आया था

मैं तेज़ कदमो के साथ वापिस कमरे मे आ गया. रात को खाने पर नाज़ी मुझे अजीब सी नॅज़ारो से देख रही थी लेकिन मुझमे उससे नज़ारे मिलाने की हिम्मत नही थी ना ही ये बात मैं किसी को बता सकता था. मैं बस जल्दी-जल्दी खाना ख़तम करके वहाँ से उठना चाहता था तभी नाज़ी बोली...

नाज़ी: भाभी आजकल बिजली जाने के भी फ़ायदे हो गये हैं ना (मेरी तरफ देखती हुई)

मैं : (डर से ना मे सिर हिलाते हुए ऑर मिन्नत वाले अंदाज़ मे नाज़ी को देखते हुए)

फ़िज़ा : (कुछ ना समझने वाले अंदाज़ मे) क्या मतलब.

नाज़ी : कुछ नही वो आजकल हम जैसे गाँव वाले भी शहर वालो की तरह मोमबत्ती जला के खाना खा सकते हैं जैसे फ़िल्मो मे दिखाते हैं.

फ़िज़ा : चल पागल (हँसती हुई)

नाज़ी : (मुझे देख कर हँसती हुई ऑर आँख मारते हुए) हमम्म्म.

फ़िज़ा : अच्छा नाज़ी तुम सबको एक बात बतानी थी (सिर झुका कर मुस्कुराते हुए)

नाज़ी : क्या भाभी.

फ़िज़ा : अब तू थोड़ी समझदार हो जा तुझे एक नये मेहमान की ज़िम्मेदारी उठानी है मेरे साथ.

नाज़ी : क्या मतलब

फ़िज़ा : मतलब ये कि तुम बुआ बनने वाली हो (शर्मा कर मुस्कुराती हुई)

नाज़ी : सचिईीई.....(अपनी जगह से खड़ी होके फ़िज़ा को गले लगाते हुए) हाए कोई मुझे सम्भालो कहीं मैं खुशी से बेहोश ही ना हो जाउ.

मैं : बहुत-बहुत मुबारक हो फ़िज़ा जी.

फ़िज़ा : शुक्रिया...

नाज़ी : चलो क़ासिम भाई ने एक काम तो अच्छा किया

फ़िज़ा : चल बदमाश कही की (कंधे पर मुक्का मारते हुए)

नाज़ी : अच्छा भाभी सुबह बाबा को भी बता दूं वो भी ये सुनकर बहुत खुश होंगे.

फ़िज़ा : (शर्म से मुँह नीचे करते हुए) जो तुमको ठीक लगे.

इसी तरह बातें करते हुआ हमने खाना खाया ऑर रात को सब जल्दी सो गये. फ़िज़ा भी कल रात की चुदाई से बहुत खुश थी इसलिए वो भी मुझे बुलाने नही आई ऑर कुछ हम दोनो पर नींद का भी खुमार था इसलिए आज मैं ऑर फ़िज़ा भी सो गये थे अपने-अपने कमरो मे. सुबह बाबा को नाज़ी ने बता दिया तो वो भी फ़िज़ा के बारे मे सुनकर बहुत खुश हुए ऑर उसको बहुत सी दुआएँ दी. अगले दिन मैने शहर जाना था फसल के लिए नये बीज लेने के लिए इसलिए जल्दी ही तेयार हो गया. आज मैं पहली बार अकेला शहर जा रहा था क्योंकि 2 बार हम जब भी शहर गये थे तो फ़िज़ा ऑर नाज़ी भी मेरे साथ जाती थी. फ़िज़ा मुझे जाने से पहले तमाम हिदायते दे रही थी जैसे मैं शहर नही किसी जंग पर जा रहा हूँ. जब मैं घर से निकला तो नाज़ी ऑर फ़िज़ा दोनो दरवाज़े पर खड़ी मुझे जाता हुआ देखती रही.

फिर मैं बस स्टॅंड आ गया जहाँ शहर जाने के लिए बस आती थी ऑर वहाँ खड़े तमाम लोगो के साथ बस का इंतज़ार करने लगा तभी एक काले रंग की कार मेरे सामने आके रुकी जिसका काँच नीचे हुआ तो अंदर सरपंच की बेटी बैठी थी.

मैं : सलाम छोटी मालकिन.

छोटी मालकिन : वालेकुम.सलाम शहर जा रहे हो?

मैं : हंजी

छोटी मालकिन : चलो अंदर गाड़ी मे आ जाओ मैं भी शहर ही जा रही हूँ

मैं : जी नही शुक्रिया मैं बस मे चला जाउन्गा बेकार मे आपको तक़लीफ़ होगी.

छोटी मालकिन : इसमे तक़लीफ़ की क्या बात है वैसे भी मैं अकेली ही तो हूँ आ जाओ अंदर चलो शाबाश. (कार का दरवाज़ा खोलते हुए)

मैं : जी आपका बहुत-बहुत शुक्रिया. (कार मे बैठ ते हुए)

छोटी मालकिन : कल मैने तुमको बुलाया था तुम आए नही.

मैं : माफ़ करना काम मे मसरूफ़ था फिर भूल गया.

छोटी मालकिन : कोई बात नही ऑर ये तुम मुझे क्या छोटी मालकिन-छोटी मालकिन बुलाते हो मैं तुम्हारी थोड़ी ना मालकिन हूँ.

मैं : सारा गाँव आपको यही कहता है तो मैने भी यही बुला दिया

छोटी मालकिन : गाव वालो मे ऑर तुम मे फ़र्क है.

मैं : क्या फ़र्क है जी मैं भी तो उन जैसा ही हूँ.

छोटी मालकिन : (हँसती हुई) गाँव मे किसी की हिम्मत नही कि मेरे घर मे इस तरह घुस कर मेरे ही लोगो की पिटाई कर दे.

मैं : जी माफी चाहता हूँ वो मैं.....

छोटी मालकिन : अर्रे मैं नाराज़ नही हूँ उल्टा खुश हूँ कि कोई तो है जिसमे इतनी हिम्मत है बस कल थोड़ा सा बुरा लगा.

मैं : जी.... क्या हुआ मुझसे कोई ग़लती हो गई क्या.

छोटी मालकिन : आप मिलने जो नही आए बस यही खता हुई पहले मैने सोचा कि मैं चलती हूँ फिर अब्बा जान घर थे तो आपकी समस्या याद आ गयी फिर मैने बात की थी अब्बू से.

मैं : अच्छा फिर क्या कहा उन्होने छोटी मालकिन.

छोटी मालकिन : वो कह रहे थे कि अब कुछ नही हो सकता क़ासिम को सज़ा एलान हो चुकी है अब तो सज़ा पूरी ही काटनी पड़ेगी...(नज़रें झुका कर) माफ़ करना मैं आपकी मदद नही कर सकी.

मैं : कोई बात नही छोटी मालकिन आपने कोशिश की यही मेरे लिए बहुत है. (मुस्कुराते हुए)

छोटी मालकिन : ये तुम क्या मुझे छोटी मालकिन बुला रहे हो हीना नाम है मेरा.

मैं : लेकिन मैं आपको आपके नाम से कैसे बुला सकता हूँ

हीना : क्यो नही बुला सकते मैं भी तो तुमको नीर ही कहती हूँ ना

मैं : ठीक है जैसा आप बेहतर समझे हीना जी.

हीना : हीना जी नही सिर्फ़ हीना.

मैं : अच्छा हीना

हीना : अच्छा मैं तो शहर नये कपड़े खरीदने जा रही हूँ तुम शहर क्यो जा रहे हो.

मैं : वो मैने फसल के लिए नये बीज लेने थे इसलिए जा रहा हूँ.

हीना : अच्छा.... तुमको मैने पहले इस गाँव मे कभी देखा नही तुम कही बाहर रहते थे क्या पहले...?

मैं : जी... (मुझे याद आ गया कि फ़िज़ा ने अपने बारे मे किसी को भी बताने से मुझे मना किया हुआ है)

हीना : अच्छा तुमने ऐसा लड़ना कहाँ सीखा?

मैं : पता नही जब ज़रूरत होती है खुद ही सब कुछ आ जाता है.

हीना : हथियार भी चला सकते हो?

ये बात सुनकर मुझे जाने क्या हो गया ऑर मुझे अजीब सी तस्वीरें नज़र आने लगी जिसमे मैं लोगो पर गोलियाँ चला रहा हूँ मैने शहर के लोगो जैसे कपड़े पहने है मेरे आस-पास बहुत सारे लोग है तभी मेरे सिर मे दर्द होने लगा ऑर मुझे चक्कर से आने लगे ओर मेरा पूरा बदन पसीने से भीग गया...

Update-15

Wo aadmi itna sunkar wapis chala gaya or fiza mujhe gusse se khaa jane wali nazaro se dekhne lagi. mujhe samajh nahi aa raha tha ki fiza mujhe aise gusse se kyo dekh rahi hai tabhi wo wapis palat gai or wapis apne kaam wali jagah jane lagi.

Main : fiza kya hua aise bina kuch bole kaha jaa rahi ho baat to suno.

Fiza : (gusse me) kya hai. jao apni chhoti malkin ke pass wo tumhara intzaar kar rahi hai mere pichhe kyo aa rahe ho.

Main : arre hua kya hai bataao to sahi gussa kis bat par ho main tumhare liye uske pass jaa raha hun tum to har waqt gussa hi karti rehti ho.

Fiza : achha ji main gussa karti hun tum haveli gaye or mujhe bataayaa bhi nahi wahan jake qasim ki baat bhi kar li fir bhi mujhe batana jaruri nahi samjha or main bina baat ke gussa kar rahi hun kyo hain naa.

Main : fiza wo ladki qasim ko jail se nikalwane me hamaari madad karegi isliye main uske pass gaya tha or main tumko batana bhul gaya tha nazi ko sab pata hai jake puch lo.

Fiza : main kyo puchu nazi se mujhe tumko batana chahiye tha na or qasim ko nikalwane ki koi jarurat nahi hai.

Main : (chonkte hue) kyo tum nahi chahti ki wo baahar aaye or tumhare sath rahe.

Fiza : nahi main bas ye nahi chahti ke tum mujhse door ho jao.

Main : kya matlab

Fiza : zahir si baat hai ki qasim agar bahar aayega to hum dono jaise ab milte hain waise nahi mil payenge or waise bhi qasim se mujhe sirf ansoo or taqleef hi mili hai jo khushi mujhe tumse mili wo main khona nahi chahti bas.

Main : thik hai jaise tum bologi waisa hi hoga.

Fiza : ab tum chhoti malkin ke pass bhi mat jana thik hai.

Main : (haa me sir hilate hue) hhhmmm ab to khush ho.

Fiza : hhmmm (muskurate hue)

abhi hum baat ki kar rahe the ki nazi bhi hmare pass aa gai.....

Nazi : kya hua Neer wo aadmi kaun tha

Main : wo haveli se aaya tha

fiza : (mujhe chup rehne ka ishara karke nahi me sir hilate hue) kuch nahi wo bas sarpanch ne aise hi aadmi bheja tha ki hum qasim ke liye hue paise denge ya nahi to maine mana kar diya ki hmare pass paise nahi hai. jab honge to de denge.

Nazi : ohh achha

Fir hum teeno apne-apne kaamo me lag gaye or shaam ko khet se ghar aa gaye. Raat ko main baba ke pass baitha baaten kar raha tha or unke pair dabaa raha tha or nazi or fiza rasoyi me khane banane me lagi thi ki achanak bijli chali gai.

Baba : ye bijli walo ko raat me bhi sukoon nahi hai.

Main : baba rukiye main roshni ke liye mombatti leke aata hun.

Main mombatti lene rasoyi me gaya to mujhe 2 nahi balki ek saaya nazar aaya jo jhuka hua tha or koi samaan nikaal raha tha dabbe me se mujhe laga ki fiza hai isliye mujhe shararat sujhi or main pichhe se jake usko pakad liya isse pehle ki wo chonk kar cheekhti maine uske munh par hath rakh diya.

Main : chillana mat main hun Neer (bahut dheemi awaaz me)

wo saye wali ladki : (Wo khamosh hoke khadi ho gai) Hhhmmm

Main : ek pappi do naa (dheemi awaaz me)

Wo saye wali ladki : (Naa me sir hilate hue)

Tabhi light aa gai or main hairaan-pareshaan wahi khada ka khada hi reh gaya meri samajh me nahi aa raha tha ki mujhse aisi galati kaise ho gai kyonki wo ladki fiza nahi nazi thi jisko main gale lagaye khada tha. Light aane ke baad jaise hi maine usko dekha jaldi se usse alag ho gaya or rasoyi se bahar nikal gaya tez kadmo ke sath.

Fiza : arre tum yahan kya kar rahe ho main to tumko mombatti dene gai thi.

Main : kuch nahi wo main bhi mombatti lene aaya tha

Main tez kadmo ke sath wapis kamre me aa gaya. Raat ko khane par nazi mujhe ajeeb si nazaro se dekh rahi thi lekin mujhme usse nazare milane ki himmat nahi thi na hi ye baat main kisko bata sakta tha. Main bas jaldi-jaldi khana khatam karke wahan se uthna chahta tha tabhi nazi boli...

Nazi: bhabhi aajkal bijli jane ke bhi fayede ho gaye hain naa (meri taraf dekhti hui)

Main : (Darr se naa me sir hilate hue or minnat wale andaaz me nazi ko dekhte hue)

Fiza : (kuch na samjhne wale andaaz me) kya matlab.

Nazi : kuch nahi wo aajkal hum jaise gaav wale bhi shehar walo ki tarah mombatti jaga ke khana khaa sakte hain jaise filmo me dikhate hain.

Fiza : chal pagal (hansatee hui)

Nazi : (mujhe dekh kar hansatee hui or aankh maarte hue) hhhhmmmm.

Fiza : achha nazi tum sabko ek baat batani thi (sir jhuka kar muskurate hue)

Nazi : kya bhabhi.

Fiza : ab tu thodi samajhdaar ho ja tujhe ek naye mehmaan ki jimmedari uthani hai mere sath.

Nazi : kya matlab

Fiza : matlab ye ki tum buaa banne wali ho (sharmaa kar muskurati hui)

Nazi : sachhhiiiii.....(apni jagah se khadi hoke fiza ko gale lagate hue) haaye koi mujhe sambhalo kahi main khushi se behosh hi na ho jau.

Main : bahut-bahut mubaarak ho fiza ji.

Fiza : shukriya...

Nazi : chalo qasim bhai ne ek kaam to achha kiya

Fiza : chal badmash kahi ki (kandhe par mukka marte hue)

Nazi : achha bhabhi subah baba ko bhi bata doo wo bhi ye sunkar bahut khush honge.

Fiza : (sharm se munh niche karte hue) jo tumko thik lage.

Issi tarah baaten karte hua hamane khana khaya or raat ko sab jaldi so gaye. Fiza bhi kal raat ki chudayi se bahut khush thi isliye wo bhi mujhe bulane nahi aayi or kuch hum dono par neend ka bhi khumaar tha isliye aaj main or fiza bhi so gaye the apne-apne kamro me. Subah baba ko nazi ne bata diya to wo bhi fiza ke bare me sunkar bahut khush hue or usko bahut si duayen di. Agle din maine shehar jana tha fasal ke liye naye beej lene ke liye isliye jaldi hi teiyaar ho gaya. Aaj main pehli baar akaila shehar jaa raha tha kyonki 2 bar hum jab bhi shehar gaye the to fiza or nazi bhi mere sath jati thi. Fiza mujhe jane se pehle tamaam hidayete de rahi thi jaise main shehar nahi kisi jung par jaa raha hun. Jab main ghar se nikala to nazi or fiza dono darwaze par khadi mujhe jata hua dekhti rahi.

Fir main Bus Stand aa gaya jahan shehar jane ke liye Bus aati thi or wahan khade tamaam logo ke sath bus ka intzaar karne laga tabhi ek kaale rang ki Car mere samne aake ruki jiska kaanch niche hua to andar Sarpanch ki beti baithi thi.

Main : salaam chhoti malkin.

Chhoti malkin : W.Salaam shehar jaa rahe ho?

Main : hanji

Chhoti malkin : chalo andar gaadi me aa jao main bhi shehar hi jaa rahi hun

Main : ji nahi shukriya main Bus me chala jaunga bekaar me aapko taqleef hogi.

Chhoti malkin : isme taqleef ki kya baat hai waise bhi main akeli hi to hun aa jao andar chalo shabaash. (car ka darwaaza kholte hue)

Main : ji aapka bahut-bahut shukriya. (car me baith te hue)

Chhoti malkin : kal maine tumko bulaya tha tum aaye nahi.

Main : maaf karna kaam me masroof tha fir bhul gaya.

Chhoti malkin : koi baat nahi or ye tum mujhe kya chhoti malkin-chhoti malkin bulate ho main tumhari thodi na malkin hun.

Main : sara gaav aapko yhi kehta hai to maine bhi yhi bula diya

Chhoti malkin : gaav walo me or tum me fark hai.

Main : kya fark hai ji main bhi to unn jaisa hi hun.

Chhoti malkin : (hansatee hui) gaav me kisi ki himmat nahi ki mere ghar me iss tarah ghus kar mere hi logo ki pitayi kar de.

Main : ji maafi chahta hun wo main.....

Chhoti malkin : arre main naraz nahi hun ulta khush hun ki koi to hai jisme itni himmat hai bas kal thoda sa bura laga.

Main : ji.... kya hua mujhse koi galati ho gai kya.

Chhoti malkin : aap milne jo nahi aaye bas yhi khata hui pehle maine socha ki main chalti hun fir abba jaan ghar the to aapka samasya yaad aa gaya fir maine baat ki thi abbu se.

Main : achha fir kya kaha unhone Chhoti malkin.

Chhoti malkin : wo keh rahe the ki ab kuch nahi ho sakta qasim ko saja elaan ho chuki hai ab to saja poori hi katni padegi...(nazare jhuka kar) maaf karna main aapki madad nahi kar saki.

Main : koi baat nahi chhoti malkin aapne koshish ki yhi mere liye bahut hai. (muskurate hue)

Chhoti malkin : ye tum kya mujhe chhoti malkin bula rahe ho Heena naam hai mera.

Main : lekin main aapko apke naam se kaise bula sakta hun

Heena : kyo nahi bula sakte main bhi to tumko Neer hi kehti hun naa

Main : thik hai jaisa aap behtar samjhe heena ji.

Heena : heena ji nahi sirf heena.

Main : achha heena

Heena : Achha main to shehar naye kapde khareedne jaa rahi hun tum shehar kyo jaa rahe ho.

Main : wo maine fasal ke liye naye beej lene the isliye jaa raha hun.

Heena : achha.... tumko maine pehle iss gaav me kabhi dekha nahi tum kahi bahar rehte the kya pehle...?

Main : jee... (mujhe yaad aa gaya ki fiza ne apne bare me kisi ko bhi batane se mujhe mana kiya hua hai)

Heena : achha tumne aisa ladna kaha seekha?

Main : pata nahi jab jarurat hoti hai khud hi sab kuch aa jata hai.

Heena : hathiyaar bhi chala sakte ho?

Ye baat sunkar mujhe jane kya ho gaya or mujhe ajeeb si tasveeren nazar aane lagi jisme main logo par goliyaan chala raha hun maine shehar ke logo jaise kapde pehne hai mere aas-pass bahut saare log hai tabhi mere sir me dard hone laga or mujhe chakkar se aane lage or mera poora badan paseene se bheeg gaya...

 
अपडेट-16

हीना : क्या हुआ ठीक तो हो. (मुझे कंधे से हिलाते हुए)

मैं : जी नही...हाँ मैं ठीक हूँ.

हीना : कहाँ खो गये थे.

मैं : कुछ नही.... कुछ नही आप मुझे यही उतार दीजिए मैं चला जाउन्गा अपने आप.

हीना : मैने कुछ ग़लत बोल दिया क्या.

मैं : नही मेरी शायद तबीयत खराब है आप मुझे यही उतार दीजिए मैं चला जाउन्गा.

हीना : अरे क्या हुआ बताओ तो सही....रूको...ये लो पानी पीओ (पानी की बोतल मुझे देते हुए)

मैं : (पानी पी कर अपना पसीना सॉफ करते हुए) शुक्रिया

हीना : क्या हुआ था तुमको एक दम से.

मैं : पता नही

हीना : बीज बाद मे ले लेना पहले तुम मेरे साथ डॉक्टर के पास चल रहे हो ठीक है

मैं : नही मैं ठीक हूँ बेकार मे तक़लीफ़ ना करे.

हीना : अर्रे ठीक कैसे हो अभी देखा नही कैसे पसीना-पसीना हो गये थे.

शहर आके हीना मुझे डॉक्टर के पास ले गई जिसने मेरा चेक-अप किया. फिर डॉक्टर ने मुझे बाहर जाने को कह दिया ऑर खुद हीना से बात करने लगा कुछ देर बाद हीना भी डॉक्टर के कमरे से बाहर आ गई.

मैं : क्या कहा डॉक्टर ने आपसे?

हीना : तुम ठीक हो (मुस्कुराते हुए) बस ये कुछ दवाइयाँ दी है डॉक्टर ने जो तुमको लेनी है ऑर एक बार फिर हम को चेक-अप के लिए आना पड़ेगा ऑर कुछ टेस्ट करवाने पड़ेंगे.

मैं : हीना जी क्यो पैसे खराब कर रही है मैं एक दम ठीक हूँ ये डॉक्टर तो बस ऐसे ही....

हीना : तुम डॉक्टर हो....नही ना फिर जैसा कहती हूँ वैसे करो.

मैं : कितने पैसे हुए ?

हीना : तुमसे मतलब

मैं : नही वो आपको वापिस भी तो करने है इसलिए.....

हीना : तुम इतना क्यो सोचते हो...पैसे की फिकर छोड़ो ऑर अपनी सेहत का ख्याल रखा करो अगर मैं साथ ना होती तो....

मैं : तो कुछ नही (मुस्कुराते हुए)

हीना : अब तुम मेरे साथ ही वापिस जाओगे समझे....

मैं : मेरा तो यहाँ छोटा सा काम है मैं यहाँ क्या करूँगा

हीना : कुछ नही पहले हम तुम्हारे बीज लेने चलते हैं फिर मेरी शॉपिंग के लिए चलेंगे ठीक है.

मैं : ठीक है.

हॉस्पिटल से निकलकर हम पहले बीज मंडी गये फिर वहाँ से हीना के लिए शॉपिंग करने चले गये जहाँ मैने फ़िज़ा ऑर नाज़ी के लिए भी कुछ कपड़े खरीद लिए फिर हम घर के लिए निकल पड़े. सारे सफ़र के दोरान मैं बस चुप-चाप बैठा अपने ज़हन मे आने वाली तस्वीरो के बारे मे सोचता रहा कि आख़िर मैं हूँ कौन...क्यो मुझे मेरा अतीत याद नही है.... क्यो 20-20 लोग भी मिलकर मुझसे लड़ाई नही कर सकते....ऑर वो हथियार चलाना मुझे कहाँ से आए वो मेरे ज़हन का बस ख्याल था या मैं सच मे हथियार चला सकता हूँ. तभी एक जीप तेज़ी से हमारी तरफ आई जिसमे कुछ शहर के लड़के बैठे थे जो बार-बार चिल्ला रहे थे उन्होने हाथ मे शराब की बोतल पकड़ी हुई थी. अचानक उन्होने बीच सड़क मे जीप रोक दी ऑर हमारी कार भी उनकी वजह से रोकनी पड़ी.

हीना : ड्राइवर बाहर जाके देखो क्या समस्या है इन लड़को के साथ.

मैं : हीना जी मैं जाके देखता हूँ

हीना : नही तुम रहने दो जाओ ड्राइवर तुम जाओ ऑर उनको जीप साइड पर करने को बोलो

ड्राइवर : अच्छा छोटी मालकिन.

ड्राइवर उन लड़को के पास गया ऑर थोड़ी-देर बहस के बाद उन्होने ड्राइवर को मारना शुरू कर दिया मैने एक मुस्कुराहट के साथ हीना की तरफ देखा ऑर बिना कुछ कहे कार से बाहर निकल गया....बाहर निकलते ही मैं दौड़कर उनकी तरफ गया ऑर उन लड़को पर धावा बोल दिया सबसे पहले एक सामने खड़ा था जिस पर मैने हमला किया इससे पहले कि वो कुछ कह पाता या कर पाता मैने उसके मुँह पर मुक्का मारा ऑर वो ज़मीन पर गिर गया.....

अचानक सब लड़के मुझे देखकर हैरान से हो गये ऑर मुझसे लड़ने की बजाए सब अपने घुटनो पर बैठ गये ओर माफी माँगने लगे मुझे कुछ समझ नही पाया कि ये क्या हुआ ये तो अभी इतनी गुंडागर्दी कर रहे थे अचानक इन्हे क्या हो गया जो ये मुझसे माफी माँगने लगे....

1 लड़का : भाई माफ़ कर दो हम को पता नही था आप की गाड़ी है.

2 लड़का : भाई आप ज़िंदा हो ये जानकार बहुत खुशी हुई.

मुझे उनके इस तरह के बर्ताव से कुछ समझ नही आ रहा था कि क्या कहूँ इनको....

मैं : तुम जानते हो मैं कौन हूँ.

1 लड़का : भाई माफ़ कर दो आपके पैर पड़ता हूँ पहचानने मे ग़लती हो गई.

मैं : बताओ मुझे मैं कौन हूँ क्या तुम मुझे जानते हो.

2 लड़का : भाई माफ़ भी कर दो आगे से ऐसा नही होगा हम को पता नही था आपकी कार है

मैं : बता मुझे मैं कौन हूँ मैं तुम्हे कुछ नही कहूँगा.

1 लड़का : शेरा भाई कैसी बात कर रहे हो आपको कौन नही जानता.

मैं : मैं शेरा हूँ....कौन शेरा....

इससे पहले कि मैं कुछ ऑर कह पाता हीना कार से निकलकर बाहर आ गई ऑर जैसे ही मैं पिछे को मुड़ा वो लोग वहाँ से भाग गये ऑर अपनी जीप मे बैठकर चले गये.

हीना : (मुस्कुराते हुए) क्या बात है एक ही मुक्के मे इतने सारे लड़को को अपने पैरो मे डाल लिया

मैं : हीना जी आपने ये क्या किया उनको भगा दिया जानती हो आपके आने से वो लोग भाग गये मुझे उनसे कुछ पुछ्ना था...

हीना : क्या पुछ्ना था अर्रे माफ़ भी कर दो उनको बिचारों ने पैर तो पकड़ लिए अब क्या जान लोगे उनकी चलो कार मे..... अर्रे अब कार कौन चलाएगा ये तो बेहोश हो गया ऑर मुझे कार चलानी तो आती ही नही (रोने जैसा मुँह बनाके ऑर अपने ड्राइवर की तरफ देखते हुए )

मैं : मैं चलाउन्गा

हीना : (हैरानी से) तुम कार भी चला लेते हो.

मैं : हाँ शायद

हीना : वाह क्या बात है तुम तो छुपे रुस्तम हो चलो पहले इस ढक्कन को कार मे फेंको कोई काम के नही है अब्बू के आदमी (मुँह बनाते हुए) मैं अगली सीट पर तुम्हारे साथ ही बैठ जाती हूँ पिछे ये मनहूस पड़ा रहेगा.

(असल मे मैं नही जानता था कि मैं कार चला सकता हूँ या नही लेकिन उन लड़को ने जैसे कहा कि हम को पता नही था कि आपकी कार है उससे मैने बस अंदाज़ा लगाया था कि शायद मैं कार चला सकता हूँ.)

मैं कार मे ड्राइवर सीट पर बैठा ऑर मैं नही जानता मैने कार चलानी कहाँ सीखी लेकिन जैसे ही मैं कार की ड्राइवर सीट पर बैठा अचानक से मुझे सब कुछ याद आने लगा ऑर कुछ ही देर मे कार हवा से बातें करने लगी आज ना जाने क्यो कार चलते हुए मुझे बहुत खुशी हो रही थी ऑर मैं हवा से बाते करते हुए कार को तेज़-तेज़ दौड़ा रहा था......

हीना : नीर आराम से चलाओ तुम बहुत तेज़ चला रहे हो मुझे डर लग रहा है.

मैं : देखती जाओ आज बहुत वक़्त के बाद ये स्टारिंग व्हील मेरे हाथ आया है आज इसको चलाउन्गा नही उड़ा दूँगा...

हीना : इतना ख्याल रखना कि कही मुझे ना उड़ा देना. हाहहहहहाहा

ऐसे ही बाते करते हुए हम गाँव वापिस आ गये मैने सरपंच की हवेली के सामने कार रोकी ऑर खुद पैदल चलता हुआ अपने घर की तरफ कदम बढ़ा दिए आज मैं बहुत खुश था क्योंकि आज इतने वक़्त के बाद मुझे मेरा असल नाम पता चला था शेरा हाँ यही नाम लेके पुकारा था उन लड़को ने मुझे मैं बे-क़रार हुआ जा रहा था ये खबर फ़िज़ा ऑर नाज़ी को देने के लिए......

Update-16

Heena : kya hua thik to ho. (mujhe kandhe se hilate hue)

Main : ji nahi...ha main thik hun.

Heena : kaha kho gaye the.

Main : kuch nahi.... kuch nahi aap mujhe yhi utaar dijiye main chala jaunga apne aap.

Heena : maine kuch galat bol diya kya.

Main : nahi meri shayad tabiyat kharab hai aap mujhe yhi utaar dijiye main chala jaunga.

Heena : aare kya hua bataao to sahi....ruko...ye lo pani peo (paani ki bottal mujhe dete hue)

Main : (paani pee kar apna paseena saaf karte hue) shukriya

Heena : kya hua tha tumko ek dam se.

Main : pata nahi

Heena : beej baad me le lena pehle tum mere sath doctor ke pass chal rahe ho thik hai

Main : nahi main thik hun bekaar me taqleef na kare.

Heena : arre thik kaise ho abhi dekha nahi kaise paseena-paseena ho gaye the.

Shehar aake heena mujhe doctor ke pass le gai jisne mera check-up kiya. fir doctor ne mujhe bahar jane ko keh diya or khud heena se baat karne laga kuch der baad heena bhi doctor ke kamre se bahar aa gai.

Main : kya kaha doctor ne aapse?

Heena : tum thik ho (muskurate hue) bas ye kuch dawayiyaan di hai doctor ne jo tumko leni hai or ek baar fir ham ko check-up ke liye aana padega or kuch test karwane padenge.

Main : heena ji kyo paise kharab kar rahi hai main ek dam thik hun ye doctor to bas aise hi....

Heena : tum doctor ho....nahi naa fir jaisa kehti hun waise karo.

Main : kitne paise hue ?

Heena : tumse matlab

Main : nahi wo aapko wapis bhi to karne hai isliye.....

Heena : tum itna kyo sochte ho...paise ki fikar chodo or apni sehat ka khyaal rakha karo agar main sath naa hoti to....

Main : to kuch nahi (muskurate hue)

Heena : ab tum mere sath hi wapis jaoge samjhe....

Main : mera to yahan chhota sa kaam hai main yahan kya karunga

Heena : kuch nahi pehle hum tumhare beej lene chalte hain fir meri shoping ke liye chalenge thik hai.

Main : thik hai.

Hospital se nikalkar hum pehle beej mandi gaye fir wahan se heena ke liye shoping karne chale gaye jahan maine fiza or naji ke liye bhi kuch kapde khareed liye fir hum ghar ke liye nikal pade. Saare safar ke doraan main bas chup-chap baitha apne zehan me aane wali tasveero ke bare me sochta raha ki akhir main hun kaun...kyo mujhe mera ateet yaad nahi hai.... kyo 20-20 log bhi milkar mujhse ladayi nahi kar sakte....or wo hathiyaar chalana mujhe kaha se aaye wo mere zehan ka bas khyaal tha yaa main sach me hathiyaar chala sakta hun. Tabhi ek jeep tezi se hamaari taraf aayi jisme kuch shehar ke ladke baithe the jo bar-bar chilla rahe the unhone hath me sharab ki bottale pakadi hui thi. Achanak unhone bich sadak me jeep rok di or hamaari car bhi unki wajah se rokni padi.

Heena : Driver bahar jake dekho kya samasya hai inn ladko ke sath.

Main : heena ji main jake dekhta hun

Heena : nahi tum rehne do jao driver tum jao or unko jeep side par karne ko bolo

Driver : achha chhoti malkin.

Driver unn ladko ke pass gaya or thodi-der behas ke baad unhone driver ko maarna shuru kar diya maine ek muskurahat ke sath heena ki taraf dekha or bina kuch kahe car se bahar nikal gaya....Bahar nikalte hi main daudkar unki taraf gaya or unn ladko par dhaava bol diya sabse pehle ek samne khada tha jis par maine hamla kiya isse pehle ki wo kuch keh pata ya kar pata maine uske munh par mukka mara or wo zameen par gir gaya.....

Achanak sab ladke mujhe dekhkar hairaan se ho gaye or mujhse ladne ki bajaye sab apne ghutno par baith gaye or maafi mangne lage mujhe kuch samajh nahi paya ki ye kya hua ye to abhi itni gundagardi kar rahe the achanak inhe kya ho gaya jo ye mujhse maafi maangne lage....

1 ladka : bhai maaf kar do ham ko pata nahi tha aap ki gaadi hai.

2 ladka : bhai aap zinda ho ye jaankar bahut khushi hui.

Mujhe unke iss tarah ke bartaav se kuch samajh nahi aa raha tha ki kya kahu inko....

Main : tum jante ho main kaun hun.

1 ladka : bhai maaf kar do aapke pair padta hun pehchaane me galati ho gai.

Main : bataao mujhe main kaun hun kya tum mujhe jante ho.

2 ladka : bhai maaf bhi kar do aagey se aisa nahi hoga ham ko pata nahi tha aapki car hai

Main : bata mujhe main kaun hun main tumhe kuch nahi kahunga.

1 ladka : sheraa bhai kaisi baat kar rahe ho aapko kaun nahi janta.

Main : main shera hun....kaun shera....

Isse pehle ki main kuch or keh pata heena car se nikalkar bahar aa gai or jaise hi main pichhe ko muda wo log wahan se bhaag gaye or apni jeep me baithkar chale gaye.

Heena : (muskurate hue) kya baat hai ek hi mukke me itne sare ladko ko apne pairo me daal liya

Main : heena ji aapne ye kya kiya unko bhaga diya janti ho aapke aane se wo log bhaag gaye mujhe unse kuch puchhna tha...

Heena : kya puchhna tha arre maaf bhi kar do unko bicharo ne pair to pakd liye ab kya jaan loge unki chalo car me..... arre ab car kaun chalayega ye to behosh ho gaya or mujhe car chalani to aati hi nahi (rone jaisa munh banake or apne driver ki taraf dekhte hue )

Main : main chalaunga

Heena : (hairani se) tum car bhi chala lete ho.

Main : haa shayad

Heena : waah kya baat hai tum to chhupe rustam ho chalo pehle iss dhakkan ko car me fenko koi kaam ke nahi hai abbu ke aadmi (munh banate hue) main agli seat par tumhare sath hi baith jati hun pichhe ye manhuns pada rahega.

(Asal me main nahi janta tha ki main car chala sakta hun ya nahi lekin unn ladko ne jaise kaha ki ham ko pata nahi tha ki aapki car hai usse maine bas andaza lagaya tha ki shayad main car chala sakta hun.)

Main car me Driver seat par baitha or main nahi janta maine car chalani kaha seekhi lekin jaise hi main car ki driver seat par baitha achanak se mujhe sab kuch yaad aane laga or kuch hi der me car hawa se baaten karne lagi aaj na jane kyo car chalate hue mujhe bahut khushi ho rahi thi or main hawa se baate karte hue car ko tez-tez duda raha tha......

Heena : Neer aaram se chalao tum bahut tez chala rahe ho mujhe darr lag raha hai.

Main : dekhti jao aaj bahut waqt ke baad ye stairing wheel mere haath aaya hai aaj isko chalaunga nahi udaa dungaa...

Heena : itna khyaal rakhna ki kahi mujhe naa udaa dena. hahahahahahaha

Aise hi baate karte hue hum gaav wapis aa gaye maine sarpanch ki haveli ke samne car roki or khud paidal chalta hua apne ghar ki taraf kadam badha diye aaj main bahut khush tha kyonki aaj itne waqt ke baad mujhe mera asal naam pata chala tha shera haa yhi naam leke pukara tha unn ladko ne mujhe main be-qaraar hua jaa raha tha ye khabar fiza or nazi ko dene ke liye......

 
अपडेट-17

जैसे ही मैं घर पहुँचा तो नाज़ी ने दरवाज़ा खोला ऑर मुझे देखते ही उसके चेहरे पर एक मुस्कान आ गई जिसका जवाब मैने भी एक मुस्कान के साथ दिया....

नाज़ी : इतनी जल्दी कैसे आ गये.

मैं : मैं वहाँ बीज लेने गया था घर बसाने नही (हँसते हुए)

नाज़ी : आज कल नीर साहब आपको बहुत बातें आ गई है (मुस्कुराते हुए)

मैं : बस जी आपकी सोहबत का असर है

नाज़ी : अच्छा जी...... देखना कही सोहबत मे बिगड़ ना जाना हमारी.

मैं : नही बिगड़ता जी आप तो बहुत अच्छी हो

नाज़ी : हमम्म तभी अच्छाई का फ़ायदा उठाते हो अंधेरे मे बदमाश... (हँसती हुई)

मैं : वो मैं वो.....(ज़मीन पर देखते हुए)

नाज़ी : बस...बस... अच्छा ये बताओ शहर से आ रहे हो मेरे लिए क्या लाए?

मैं : बीज लाया हूँ खाओगी (हाहहहहहहहाहा) ये लो तुम्हारे, बाबा ऑर फ़िज़ा जी के लिए ओर नये सूट लाया हूँ.

इतने मे फ़िज़ा की रसोई से आवाज़ आई...

फ़िज़ा : कौन आया है नाज़ी

नाज़ी : कोई नही भाभी एक बुधु है जो नये कपड़े लाया है (हँसती हुई)

मैं : अच्छा....बुधु वापिस करो नया सूट.....

नाज़ी : (भागते हुए) भाभी बचाओ......मेरा नया सूट ले रहे हैं.

इतने मे फ़िज़ा रसोई मे से बेलन लेके बाहर आ गई.....ऑर नाज़ी उपर कोठरी मे कपड़े लेके भाग गई ऑर अंदर से दरवाज़ा बंद कर लिया.....

फ़िज़ा : अर्रे नीर तुम हो ये पागल तो कह रही थी बुधु है कोई

मैं : जी वो बुद्धू आपके सामने है

फ़िज़ा : नाज़ी भी पागल है ऐसे ही डरा दिया.... मुझे लगा पता नही कौन है

मैं : ओह्ह अच्छा तो इसलिए आप बेलन लेके आई थी....हाहहहहहाहा

फ़िज़ा : अच्छा तुम इतनी जल्दी कैसे आ गये

मैं : वो बस सीधी मिल गई थी ना इसलिए

फ़िज़ा : लेकिन अपने गाव से तो शहर के लिए सीधी बस कोई है ही नही

मैं : वो कुछ लोग कार मे शहर जा रहे थे तो मुझे भी उन्होने शहर छोड़ दिया पैसे भी नही लिए (मैने फ़िज़ा को झूठ बोला क्योंकि हीना के बारे मे बोलता तो उसको अच्छा नही लगता इसलिए)

फ़िज़ा : ओह्ह अच्छा...ऐसे ही किसी अंजान के साथ ना जाया करो नीर अगर वो ग़लत लोग होते तो....अपने बारे मे नही तो कम से कम हमारे बारे मे ही सोच लिया करो....

मैं : अर्रे तुम तो ऐसे ही घबरा जाती हो देखो कुछ नही हुआ सही सलामत तो हूँ वैसे भी तुमको लगता है मेरा कोई कुछ बिगाड़ सकता है (मुस्कुराते हुए अपने डोले फ़िज़ा को दिखाते हुए)

फ़िज़ा : फिर भी आगे से ऐसे किसी अंजान के साथ नही जाना ठीक है

मैं : जो हुकुम सरकार का (मुस्कुराते हुए)

फ़िज़ा : अच्छा वो बीज मिल गये

मैं : हंजी मिल गये..... ये बाकी के पैसे भी रख लो ऑर इसमे से कुछ पैसे खर्च हो गये वो मैं नये कपड़े आपके नाज़ी ऑर बाबा के लिए लाया था वो नाज़ी उपर लेके भाग गई

फ़िज़ा : कोई बात नही.... नीर तुम सारे पैसे मुझे क्यो दे रहे हो कुछ अपने पास भी रखा करो तुम्हारी ज़रूरत के लिए

मैं : मेरा खर्चा ही क्या....ख़ाता यहाँ हूँ, रहता यहाँ हूँ ऑर कोई बुरी आदत मुझे है नही सिवाए तुम्हारे तो फिर पैसे किसलिए आप ही रखू.

फ़िज़ा : हमम्म पता है.....अब मैं बुरी आदत हो गई हूँ ना..... नीर तुम अपने लिए कुछ नही लाए.

मैं : नही वो अपने लिए मुझे कुछ पसंद ही नही आया

फ़िज़ा : अगली बार जब जाओगे तो या तो अपने लिए भी कुछ लेके आना नही तो ये भी वापिस कर आना मुझे नही चाहिए.

मैं : अर्रे ऐसे भी क्या कर रही हो मैं बहुत प्यार से लाया था

फ़िज़ा : जानती हूँ....लेकिन तुम अपने लिए अगर कुछ खरीद लोगे तो क्या हो जाएगा आख़िर मेरा भी मन करता है कि मेरा नीर अच्छे-अच्छे कपड़े पहने ऑर गाव मे सब आदमियो से सुंदर दिखे...

मैं : कुछ नही वो बस ऐसे ही पैसे बहुत लग गये थे इसलिए.....अच्छा छोड़ो ये सब बाबा कहाँ है....

फ़िज़ा : वो ज़रा पड़ोस मे हैदर साब के घर गये हैं उनके पोते का पता लेने

मैं : क्यो क्या हुआ

फ़िज़ा : कुछ नही दोपहर को वो छत से गिर गया था उसकी टाँग टूट गई

मैं : ओह्ह्ह अच्छा... तभी मैं सोच रहा था आज ये तितली इतना शोर कैसे मचा रही है

फ़िज़ा : इस तितली को जल्दी इस घर से रवाना करना पड़ेगा (मुस्कुराते हुए)

 


हम ऐसे ही बाते कर रहे थे कि तभी पिछे से नाज़ी की आवाज़ आई....

नाज़ी :भाभी नीर अगर कमरे मे चले गये तो मैं नीचे आ जाउ

फ़िज़ा : हाँ नीचे आजा वो बुद्धू अपने कमरे मे चला गया (हँसती हुई)

मैं : तुम भी बुधु....ठीक है (नाराज़ होके जाते हुए)

फ़िज़ा : अर्रे जान गुस्सा क्यो होते हो मैं तो मज़ाक कर रही थी अच्छा लो कान पकड़े अब तो माफ़ कर दो अपनी फ़िज़ा को.

मैं : (मुस्कुराते हुए) तुम ऑर नाज़ी दोनो एक जैसी हो एक नंबर की ड्रामेबाज़.

नाज़ी : क्यो जी आप मेरी भाभी से कान क्यो पकड़वा रहे हो (अपने दोनो हाथ कमर पर रखते हुए)

मैं : मैने तो कुछ भी नही कहा जी आपकी प्यारी भाभी को ये खुद ही कान पकड़े खड़ी है.

फ़िज़ा : देखो नाज़ी ये हम सब के लिए नये कपड़े लाए हैं ऑर अपने लिए कुछ नही लाए.

नाज़ी : क्यो जी अपने लिए कुछ क्यो नही लाए

मैं : अर्रे ग़लती हो गई अगली बार जब जाउन्गा तो ले आउन्गा अब तो खुश हो दोनो

फ़िज़ा : ठीक है फिर हम सब एक साथ ही नये कपड़े पहनेगे तब तक नाज़ी मेरे कपड़े भी संभालकर अंदर रख दो

अभी हम तीनो ऐसे ही बात कर रहे थे कि इतने मे बाबा भी आ गये ऑर मुझे घर मे देखकर खुश होते हुए बोले....

बाबा : आ गये बेटा

मैं : जी बाबा आप बीज देख लीजिए ठीक लाया हूँ या नही

बाबा : (बीज हाथ मे लेके देखते हुए) बहुत अच्छे बीज लाए हो बेटा अब तो तुम लगभग सारा काम ही सीख चुके हो.

मैं : जी ये सब तो मुझे फ़िज़ा जी ने सिखाया है

बाबा : हाँ बेटा ये मेरी सबसे लायक बच्ची है

फ़िज़ा : (नज़रे झुका के मुस्कुराते हुए)

नाज़ी : ऑर मैं.....बाबा मैं आपकी लायक बच्ची नही हूँ (रोने जैसा मुँह बनाके)

बाबा : ऑह्हूनो तुम्हारे सामने तो बात करना ही बेकार है जाने तुम्हारा बच्पना कब जाएगा

फ़िज़ा : बाबा अब हम को इसके लिए कोई अच्छा सा लड़का देखना शुरू कर देना चाहिए सिर पर ज़िम्मेदारी आएगी तो खुद ही बचपना करना छोड़ देगी.

नाज़ी : क्या भाभी आप भी.... (मुस्कुराते हुए ऑर मेरी तरफ देखते हुए)

बाबा : बेटी कोई अच्छा लड़का भी तो मिले तब ही बात चलाए तुम्हारी नज़र मे कोई हो तो बता दो

फ़िज़ा : नही बाबा मैं तो ऐसे ही मज़ाक कर रही थी अभी तो इसके खेलने खाने के दिन है....

बाबा : चलो फिर ये ज़िम्मेदारी भी मैं तुमको ही देता हूँ जब तुमको लगे कि ये शादी के लायक हो गई है तो खुद ही इसके लिए लड़का ढूँढ लेना मुझे तुम्हारी पसंद पर पूरा भरोसा है.

फ़िज़ा : जी बाबा..... अच्छा बाबा आप ऑर नीर बाते करो मैं रसोई मे ज़रा खाना बना लूँ

बाबा : हाँ बेटा अच्छा याद करवाया फ़िज़ा ने.... मुझे तुमसे एक ज़रूरी बात करनी थी.

मैं : जी बाबा हुकुम कीजिए

बाबा : बेटा अब तो तुम सब काम देखने लग गये हो ऑर तुम तो जानते हो कि अपनी फ़िज़ा बेटी भी अब उम्मीद से है तो इस हालत मे इसका काम करना सही नही है ऑर खेत का मेहनत वाला काम तो बिल्कुल भी नही तो मैं सोच रहा हूँ कि जब तक बच्चा नही हो जाता तुम अकेले ही खेत का सारी देखभाल करो क्योंकि फ़िज़ा के बाद एक तुम ही हो जिस पर मैं भरोसा कर सकता हूँ क़ासिम का तो तुम जानते ही हो वो हुआ ना हुआ एक बराबर है.... बाकी नाज़ी को तुम चाहो तो अपनी मदद के लिए साथ लेके जाना चाहो तो ले जाना तुम्हे मेरे फ़ैसले से कोई ऐतराज़ तो नही.

मैं : ऐतराज़ किस बात का बाबा आपका हुकुम सिर आँखो पर

बाबा : खुश रहो बेटा मुझे तुमसे यही उम्मीद थी....अल्लाह सबको ऐसी लायक औलाद दे

(इतना कह कर बाबा नाज़ी को आवाज़ लगते हुए अपने कमरे मे चले गये)

मैं वही पर बैठा बाबा के फ़ैसले के बारे मे सोचने लगा ऑर साथ ही अपने असल नाम के बारे मे सोच रहा था. काफ़ी देर मैं बाहर खड़ा रहा ऑर अपनी पुरानी जिंदगी को याद करने की कोशिश करता रहा लेकिन मुझे कुछ भी पिच्छला याद नही आ रहा था. अब मैं सोच रहा था कि अपने नाम के बारे मे सबको बताऊ या चुप रहूं बरहाल मैने ये फ़ैसला किया कि मैं इस बारे मे किसी को भी कुछ नही बताउन्गा ऑर जब तक मुझे कुछ ऑर बाते अपने बारे मे पता नही चल जाती या फिर याद नही आ जाती अपने बारे मे तब तक चुप रहूँगा. रात को खाने के वक़्त मैं नाज़ी ऑर फ़िज़ा तीनो खाने पर बैठ गये ऑर रोज़ की तरह बाबा आज भी जल्दी सो गये थे. खाने के वक़्त मैने सबको बाबा का फ़ैसला सुना दिया. जिस पर पहले तो फ़िज़ा नही मानी लेकिन मेरे इसरार पर वो मान गई ऑर घर मे रहने का फ़ैसला कर लिया. लेकिन उसने ये शर्त रखी कि मैं अकेले काम नही करूँगा ऑर नाज़ी को भी अपने साथ लेके जाउन्गा ताकि वो मेरी खेत मे मदद कर सके जिस पर नाज़ी खुशी-खुशी मान गई. फिर हम तीनो खाना खाने लग गये.

नाज़ी : अच्छा भाभी बाबा ने मुझे आपके लिए कुछ हिदायतें दी है.

फ़िज़ा : (खाना खाते हुए) क्या कहा बाबा ने

नाज़ी : वो शाम को बाबा ने मुझे कमरे मे बुलाया था तो कह रहे थे कि अब हमारे घर मे कोई बड़ी बुजुर्ग औरत तो है नही जो तुम्हारी भाभी का ख्याल रख सके इसलिए मैं ही अबसे तुम्हारा ख्याल रखूँगी.

फ़िज़ा : (हँसती हुई) अच्छा जी..... खुद को संभाल नही सकती मेरा ख्याल रखेगी.

नाज़ी : (चिड़ते हुए) हँसो मत ना भाभी मैं सच कह रही हूँ अब से आप ना तो रसोई मे ज़्यादा काम करेंगी ना ही कोई सॉफ-सफाई करेंगी.

फ़िज़ा : चलो जी.... तो खाना कौन बनाएगा घर कौन सॉफ करेगा महारानी जी.

नाज़ी : मैं हूँ ना मैं सब संभाल लूँगी इतना तो आपसे काम सीख ही लिया है

फ़िज़ा : कोई बात नही कल सुबह देख लेंगे तुम कितने पानी मे हो. (हँसते हुए)

नाज़ी : हाँ...हाँ....देख लेना

फ़िज़ा : मज़ाक छोड़ ना नाज़ी मैं कर लूँगी तू रहने दे तुझसे अकेले नही संभाला जाएगा ये सब.

नाज़ी : आप भी तो संभालती हो ना...फिर मैं भी संभाल लूँगी फिकर ना करो.

फ़िज़ा : लेकिन अभी तो मुझे बस दूसरा महीना लगा है तुम सब अभी से मुझे बिस्तर पर डाल रहे हो ये तो ग़लत है अभी तो मैं काम करने लायक हूँ सच मे.

नाज़ी : मैं कुछ नही जानती बाबा का हुकुम है उन्ही को जाके बोलो मुझे ना सूनाओ हाँ.

फ़िज़ा : (मुझे देखते हुए) तुम ही समझाओ ना इसे

मैं : (अभी तक चुप-चाप बस इनकी बाते सुन रहा था) यार मैं क्या समझाऊ बाबा का हुकुम है तो मैं क्या बोल सकता हूँ इसमे.

फ़िज़ा : ठीक है सब मिलकर मुझे मरीज़ बना दो (रोने जैसा मुँह बनाते हुए)

नाज़ी : ये हुई ना बात (फ़िज़ा का गाल चूमते हुए) मेरी प्यारी भाभी.

ऐसे ही हम बाते करते हुए खाना खाते रहे फिर खाने के बाद मैं तबेले मे पशुओ को बाँधने चला गया ऑर फ़िज़ा ऑर नाज़ी रसोई मे काम निबटाने मे लग गई. मैं मेरे सब काम से फारिग होके जब अंदर आया तब तक नाज़ी ऑर फ़िज़ा भी लगभग अपना सारा काम निबटा चुकी थी. तभी फ़िज़ा ने मुझे इशारे से रसोई मे बुलाया. जब मैं अंदर गया तो नाज़ी वहाँ नही थी ऑर फ़िज़ा मुझे कुछ परेशान सी लग रही थी.

मैं : क्या हुआ परेशान हो?

फ़िज़ा : जान एक ऑर गड़-बॅड हो गई है (मुँह रोने जैसा बनाते हुए)

मैं : क्या हुआ सब ख़ैरियत तो है

फ़िज़ा : आज से नाज़ी भी मेरे साथ मेरे कमरे मे सोया करेगी ताकि रात को अगर मुझे किसी चीज़ की ज़रूरत हो तो मेरी मदद कर सके.

मैं : तो इसमे रोने जैसा मुँह बनाने की क्या बात है ये तो अच्छी बात है तुमने तो मुझे भी बेकार मे डरा दिया.

फ़िज़ा : नहियिइ..... जान तुम मेरी बात नही समझे.

मैं : अब क्या हुआ है यार बाबा ठीक ही तो कह रहे हैं अब मैं या बाबा तो तुम्हारे साथ सो नही सकते ना इसलिए नाज़ी एक दम सही है.

फ़िज़ा : लेकिन फिर मैं मेरी जान को प्यार कैसे करूँगी (रोने जैसा मुँह बनाते हुए)

मैं : अच्छा तो ऐसा बोलो ना फिर.....

फ़िज़ा : ये बाबा ने तो सब गड़बड़ कर दिया अब हम क्या करेंगे. (मेरे कंधे पर सिर रखते हुए)

मैं : मैं सोचता हूँ कुछ आज-आज का दिन कैसे भी गुज़ार लो कल देखेंगे ठीक है

फ़िज़ा : कल रात भी हमने प्यार नही किया एक-दूसरे को ऑर ऐसे ही सो गये थे जान....

मैं : अब कर भी क्या सकते हैं मुझे बस एक दिन दो कुछ सोचता हूँ मैं तुम भी कुछ सोचो.

फ़िज़ा : हमम्म

मैं : ये नाज़ी कहाँ है

फ़िज़ा : तुम्हारा बिस्तर करने गई है (मुस्कुराते हुए)

मैं : तभी तुम इतना चिपक के खड़ी हो.

फ़िज़ा : क्यो अब चिपक भी नही सकती.....मेरी जान है (मुझे ज़ोर से गले लगाती हुई)

मैं : अच्छा अब छोड़ो नही तो नाज़ी आ जाएगी तो क्या सोचेगी.

फ़िज़ा : म्म्म्मडमम थोड़ी देर बसस्स....फिर चले जाना वैसे भी रात को सोना ही तो है.

मैं : जैसी तुम्हारी मर्ज़ी. (फ़िज़ा को गले से लगाते हुए)

इतना मे नाज़ी की आवाज़ आई ऑर हम को ना चाहते हुए भी अलग होना पड़ा.

नाज़ी : क्या बात है आज तुम भी रसोई मे (मुझे देखते हुए) बर्तन धुलवाने आए हो क्या.

फ़िज़ा : जी नही इनको मैने बुलाया था

नाज़ी : क्यो कोई काम था तो मुझे बुला लेती.

फ़िज़ा : अर्रे नही वो बस कल से तुम दोनो ने ही खेत जाना है तो इनको सब काम अच्छे से समझा रही थी ऑर कौनसा समान मैने कहाँ रखा है वो सब बता रही थी.

नाज़ी : वो सब तो इनको पहले से ही पता है भाभी तुम तो ऐसे कर रही हो जैसे हम पहली बार खेत जा रहे हैं (हँसती हुई)

फ़िज़ा : नही फिर भी बताना तो मेरा फ़र्ज़ है ना.

Update-17

Jaise hi main ghar pohoncha to nazi ne darwaza khola or mujhe dekhte hi uske chehre par ek muskaan aa gai jiska jawab maine bhi ek muskaan ke sath diya....

Nazi : itni jaldi kaise aa gaye.

Main : main wahan beej lene gaya tha ghar basane nahi (hansate hue)

Nazi : aaj kal Neer sahab aapko bahut baate aa gai hai (muskurate hue)

Main : bas ji aapki sohbat ka asar hai

Nazi : achha jiiii...... dekhna kahi sohbat me bigad na jana hamaari.

Main : nahi bigadta ji aap to bahut achhi ho

Nazi : hhhmmm tabhi achhayi ka fayeda uthate ho andhere me badmash... (hansatee hui)

Main : wo main wo.....(zameen par dekhte hue)

Nazi : bas...bas... achha ye bataao shehar se aa rahe ho mere liye kya laaye?

Main : beej laya hun khaogi (hahahahahahahahaha) ye lo tumhare, baba or fiza ji ke liye or naye suit laya hun.

Itne me fiza ki rasoyi se awaaz aayi...

Fiza : koun aya hai nazi

Nazi : koi nai bhabhi ek budhu hai jo naye kapde laya hai (hansatee hui)

Main : achha....budhu wapis karo naya suit.....

Nazi : (bhagte hue) bhabhi bachao......mera naya suit le rahe hain.

Itne me fiza rasoyi me se belan leke bahar aa gai.....or nazi upar kothari me kapde leke bhaag gai or andar se darwaza band kar liya.....

Fiza : arre Neer tum ho ye pagal to keh rahi thi budhu hai koi

Main : ji wo budhu aapke samne hai

Fiza : nazi bhi pagal hai aise hi daraa diya.... mujhe laga pata nahi kaun hai

Main : ohh achha to isliye aap belan leke aayi thi....hahahahahahaha

Fiza : Achha tum itni jaldi kaise aa gaye

Main : wo bus sidhi mil gai thi naa isliye

Fiza : lekin apne gaav se to shehar ke liye sidhi bus koi hai hi nahi

Main : Wo kuch log car me shehar jaa rahe the to mujhe bhi unhone shehar chod diya paise bhi nahi liye (maine fiza ko jhooth bola kyonki heena ke bare me bolta to usko achha nahi lagta isliye)

Fiza : ohh achha...aise hi kisi anjaan ke sath naa jaya karo Neer agar wo galat log hote to....apne bare me nahi to kam se kam hmare bare me hi soch liya karo....

Main : arre tum to aise hi ghabra jati ho dekho kuch nahi hua sahi salamat to hun waise bhi tumko lagta hai mera koi kuch bigaad sakta hai (muskurate hue apne doley fiza ko dikhate hue)

Fiza : fir bhi agey se aise kisi anjaan ke sath nahi jana thik hai

Main : jo hukum sarkaar ka (muskurate hue)

Fiza : achha wo beej mil gaye

Main : hanji mil gaye..... ye baaki ke paise bhi rakh lo or isme se kuch paise kharch ho gaye wo main naye kapde aapke nazi or baba ke liye laya tha wo nazi upar leke bhag gai

Fiza : koi baat nahi.... Neer tum sare paise mujhe kyo de rahe ho kuch apne pass bhi rakha karo tumhari jarurat ke liye

Main : mera kharcha hi kya....khata yahan hun, rehta yahan hun or koi buri aadat mujhe hai nahi siwaye tumhare to fir paise kisliye aap hi rakho.

Fiza : Hhhmmm pata hai.....ab main buri aadat ho gai hun naa..... Neer tum apne liye kuch nahi laaye.

Main : nahi wo apne liye mujhe kuch pasand hi nahi aya

Fiza : agli bar jab jaoge to ya to apne liye bhi kuch leke aana nahi to ye bhi wapis kar aana mujhe nahi chahiye.

Main : arre aise bhi kya kar rahi ho main bahut pyaar se laya tha

Fiza : janti hun....lekin tum apne liye agar kuch khareed loge to kya ho jayega akhir mera bhi mann karta hai ki mera neer achhe-achhe kapde pehne or gaav me sab aadmiyo se sundar dikhe...

Main : kuch nahi wo bas aise hi paise bahut lag gaye the isliye.....achha chodo ye sab baba kaha hai....

Fiza : wo zra pados me haider saab ke ghar gaye hain unke pote ka pata lene

Main : kyo kya hua

Fiza : kuch nahi dupehar ko wo chhat se gir gaya tha uski taang toot gai

Main : ohhh achha... tabhi main soch raha tha aaj ye titli itna shor kaise macha rahi hai

Fiza : iss titli ko jaldi iss ghar se rawana karna padega (muskurate hue)

hum aise hi baate kar rahe the ki tabhi pichhe se Nazi ki awaz aayi....

Nazi :bhabhi Neer agar kamre me chale gaye to main niche aa jau

Fiza : haa niche aaja wo budhu apne kamre me chala gaya (hansatee hui)

Main : tum bhi budhu....thik hai (naraz hoke jate hue)

Fiza : arre jaan gussa kyo hote ho main to mazaak kar rahi thi achha lo kaan pakde ab to maaf kar do apni fiza ko.

Main : (muskurate hue) tum or nazi dono ek jaisi ho ek number ki dramebaaz.

Nazi : kyo ji aap meri bhabhi se kaan kyo pakdwa rahe ho (apne dono hath kamar par rakhte hue)

Main : maine to kuch bhi nahi kaha ji aapki pyaari bhabhi ko ye khud hi kaan pakde khadi hai.

Fiza : dekho nazi ye hum sab ke liye naye kapde laye hain or apne liye kuch nahi laaye.

Nazi : kyo ji apne liye kuch kyo nahi laaye

Main : arre galati ho gai agali baar jab jaunga to le aaunga ab to khush ho dono

Fiza : thik hai fir hum sab ek sath hi naye kapde pehnege tab tak nazi mere kapde bhi sambhalkar andar rakh do

Abhi hum teeno aise hi baat kar rahe the ki itne me baba bhi aa gaye or mujhe ghar me dekhkar khush hote hue bole....

Baba : aa gaye beta

Main : ji baba aap beej dekh lijiye thik laya hun ya nahi

Baba : (beej hath me leke dekhte hue) bahut achhe beej laye ho beta ab to tum lagbhag sara kaam hi seekh chuke ho.

Main : ji ye sab to mujhe fiza ji ne sikhaya hai

Baba : haa beta ye meri sabse layak bachi hai

Fiza : (nazre jhuka ke muskurate hue)

Nazi : or main.....baba main aapki layak bachi nahi hun (rone jaisa munh banake)

Baba : ohhuno tumhare samne to baat karna hi bekaar hai jane tumhara bachpana kab jayega

Fiza : baba ab ham ko iske liye koi achha sa ladka dekhna shuru kar dena chahiye sir par jimmedari aayegi to khud hi bachapana karna chod degi.

Nazi : kya bhabhi aap bhi.... (muskurate hue or meri taraf dekhte hue)

Baba : beti koi achha ladka bhi to mile tab hi baat chalaye tumhari nazar me koi ho to bata do

Fiza : nahi baba main to aise hi mazaak kar rahi thi abhi to iske khelne khane ke din hai....

Baba : chalo fir ye jimmedari bhi main tumko hi deta hun jab tumko lage ki ye shaadi ke layak ho gai hai to khud hi iske liye ladka dhundh lena mujhe tumhari pasand par poora bharosa hai.

Fiza : ji baba..... achha baba aap or neer baate karo main rasoyi me zra khana bana loo

Baba : haa beta achha yaad karwaya fiza ne.... mujhe tumse ek jaruri baat karni thi.

Main : ji baba hukum kijiye

Baba : beta ab to tum sab kaam dekhne lag gaye ho or tum to jante ho ki apni fiza beti bhi ab ummeed se hai to iss halat me iska kaam karna sahi nahi hai or khet ka mehnat wala kaam to bilkul bhi nahi to main soch raha hun ki jab tak bacha nahi ho jata tum akele hi khet ka sari dekhbhaal karo kyonki fiza ke baad ek tum hi ho jis par main bharosa kar sakta hun qasim ka to tum jante hi ho wo hua naa hua ek barabar hai.... baki nazi ko tum chaho to apni madad ke liye sath leke jana chaho to le jana tumhe mere faisle se koi aitraaz to nahi.

Main : aitraaz kis baat ka baba aapka hukum sir aankho par

Baba : khush raho beta mujhe tumse yhi ummeed thi....allah sabko aisi layak aulaad de

(itna keh kar baba nazi ko awaaz lagate hue apne kamre me chale gaye)

Main wahi par baitha baba ke fasile ke bare me sochne laga or sath hi apne asal naam ke bare me soch raha tha. kaafi der main bahar khada raha or apni purani jindagi ko yaad karne ki koshish karta raha lekin mujhe kuch bhi pichhla yaad nahi aa raha tha. Ab main soch raha tha ki apne naam ke bare me sabko batau ya chup rhun barahaal maine yei faisla kiya ki main iss bare me kisi ko bhi kuch nahi bataunga or jab tak mujhe kuch or baate apne bare me pata nahi chal jati ya fir yaad nahi aa jati apne bare me tab tak chup rahunga. Raat ko khane ke waqt main nazi or fiza teeno khane par baith gaye or roz ki tarah baba aaj bhi jaldi so gaye the. khane ke waqt maine sabko baba ka faisla suna diya. jis par pehle to fiza nahi maani lekin mere israar par wo maan gai or ghar me rehne ka faisla kar liya. lekin usne ye shart rakhi ki main akele kaam nahi karunga or nazi ko bhi apne sath leke jaunga taki wo meri khet me madad kar sake jis par nazi khushi-khushi maan gai. Fir hum teeno khana khane lag gaye.

Nazi : achha bhabhi baba ne mujhe aapke liye kuch hidayaten di hai.

Fiza : (khana khate hue) kya kaha baba ne

Nazi : wo shaam ko baba ne mujhe kamre me bulaya tha to keh rahe the ki ab hmare ghar me koi badi bujurg aurat to hai nahi jo tumhari bhabhi ka khyaal rakh sake isliye main hi abse tumhara khyaal rakhungi.

Fiza : (hansatee hui) achha ji..... khud ko sambhaal nahi sakti mere khyaal rakhegi.

Nazi : (chidte hue) Hasso mat naa bhabhi main sach keh rahi hun ab se aap naa to rasoyi me jyaadaa kaam karengi naa hi koi saaf-safayi karengi.

Fiza : chalo ji.... to khana kaun banayega ghar kaun saaf karega maharani ji.

Nazi : main hun naa main sab sambhaal lungi itna to aapse kaam seekh hi liya hai

Fiza : koi baat nahi kal subah dekh lenge tum kitne paani me ho. (hansate hue)

Nazi : ha...ha....dekh lena

Fiza : mazaak chod naa nazi main kar lungi tu rehne de tujhse akele nahi sambhala jayega ye sab.

Nazi : aap bhi to sambhalti ho naa...fir main bhi sambhaal lungi fikar na karo.

Fiza : lekin abhi to mujhe bas dusra maheena laga hai tum sab abhi se mujhe bistar par daal rahe ho ye to galat hai abhi to main kaam karne layak hun sach me.

Nazi : main kuch nahi janti baba ka hukum hai unhi ko jake bolo mujhe naa sunao haan.

Fiza : (mujhe dekhte hue) tum hi samjhao na isse

Main : (abhi tak chup-chap bas inki baate sunn raha tha) yaar main kya samjhau baba ka hukum hai to main kya bol sakta hun isme.

Fiza : thik hai sab milkar mujhe mareez bana do (rone jaisa munh banate hue)

Nazi : ye hui naa baat (fiza ka gaal chumte hue) meri pyaari bhabhi.

Aise hi hum baate karte hue khana khate rahe fir khane ke baad main tabele me pashuwo ko bandhne chala gaya or fiza or nazi rasoyi me kaam nibatane me lag gai. Main mere sab kaam se farig hoke jab andar aaya tab tak nazi or fiza bhi lagbhag apna sara kam nibata chuki thi. tabhi fiza ne mujhe ishare se rasoyi me bulaya. Jab main andar gaya to naazi wahan nahi thi or fiza mujhe kuch pareshaan si lag rahi thi.

Main : kya hua pareshaan ho?

Fiza : jaan ek or gad-bad ho gai hai (munh rone jaisa banate hue)

Main : kya hua sab khairiyat to hai

Fiza : aaj se nazi bhi mere sath mere kamre me soya karegi taaki raat ko agar mujhe kisi chij ki jarurat ho to meri madad kar sake.

Main : to isme rone jaisa munh banane ki kya baat hai ye to achhi baat hai tumne to mujhe bhi bekaar me daraa diya.

Fiza : nahiiii..... jaan tum meri baat nahi samjhe.

Main : ab kya hua hai yaar baba thik hi to keh rahe hain ab main ya baba to tumhare sath so nahi sakte naa isliye nazi ek dam sahi hai.

Fiza : lekin fir main meri jaan ko pyaar kaise karungi (rone jaisa munh banate hue)

Main : achha to aisa bolo naa fir.....

Fiza : ye baba ne to sab gadbad kar diya ab hum kya karenge. (mere kandhe par sir rakhte hue)

Main : main sochta hun kuch aaj-aaj ka din kaise bhi guzaar lo kal dekhenge thik hai

Fiza : kal raat bhi hamane pyaar nahi kiya ek-dusre ko or aise hi so gaye the jaan....

Main : ab kar bhi kya sakte hain mujhe bas ek din do kuch sochta hun main tum bhi kuch socho.

Fiza : Hhhhmmm

Main : ye nazi kaha hai

Fiza : tumhara bistar karne gai hai (muskurate hue)

Main : tabhi tum itna chipak ke khadi ho.

Fiza : kyo ab chipak bhi nahi sakti.....meri jaan hai (mujhe jor se gale lagati hui)

Main : achha ab chodo nahi to nazi aa jayegi to kya sochegi.

Fiza : mmmmmm thodi der basss....fir chale jana waise bhi raat ko sona hi to hai.

Main : jaisi tumhari marzi. (fiza ko gale se lagate hue)

Itna me nazi ki awaz aayi or ham ko naa chahte hue bhi alag hona pada.

Nazi : kya baat hai aaj tum bhi rasoyi me (mujhe dekhte hue) bartan dhulwane aaye ho kya.

Fiza : ji nahi inko maine bulaya tha

Nazi : kyo koi kaam tha to mujhe bula leti.

Fiza : arre nahi wo bas kal se tum dono ne hi khet jana hai to inko sab kaam achhe se samjhaa rahi thi or kounsa samaan maine kaha rakha hai wo sab bata rahi thi.

Nazi : wo sab to inko pehle se hi pata hai bhabhi tum to aise kar rahi ho jaise hum pehli baar khet jaa rahe hain (hansatee hui)

Fiza : nahi fir bhi batana to mera farz hai naa.

 
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