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अहसान complete



अपडेट-34

दोस्तो यहाँ से कुछ नये करेक्टर का परिचय कराता हूँ ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

शेख साब {बाबा} :- एज- 58 साल, दिखने मे काफ़ी रौबदार इंसान, काम- गॅंग का मैं लीडर, शेरा जैसे बाकी सब लोग इसके लिए ही काम करते हैं.

अनीस (छोटा शेख):- एज- 32 साल, शेख का बेटा ऑर एक ला-परवाह किस्म का इंसान इसलिए शेख कोई भी काम इसको सोंपना ज़रूरी नही समझता. हर वक़्त ड्रग्स के नशे मे ऑर लड़कियो मे डूबा रहता है.

मुन्ना (जापानी):- एज- 28 साल, शेरा का जिगरी दोस्त है ऑर देखने मे जापानी जैसा लगता है इसलिए जापानी नाम से अंडरवर्ल्ड मे मशहूर, काम- ड्रग्स एजेंट ऑर आर्म्स एजेंट के साथ डील फिक्स करना ऑर फाइट क्लब मे शेरा का पार्ट्नर.

रसूल :- एज-34 साल, काम- शेरा के बाद शेरा का सारा काम यही संभालता है.

सूमा :- एज-25 साल, काम- विदेशी क्लाइंट्स के साथ ड्रग्स ऑर आर्म्स की डील फिक्स करना ओर तमाम एजेंट्स से पैसा कलेक्ट करके शेख साहब तक पहुँचना.

लाला ऑर गानी :- एज-34-28 साल, काम- होटेल्स ऑर क्लब्स संभालना.

मैं बड़े गोर से बारी-बारी सब लोगो की तस्वीरे देख रहा था ऑर उनको पहचाने की कोशिश कर रहा था लेकिन मुझे किसी का भी चेहरा याद नही आ रहा था. तभी ख़ान ने एक ऐसी तस्वीर टेबल पर फेंकी जिसको मैं उठाए बिना नही रह सका. ये तो मेरी तस्वीर थी लेकिन मैने उस तस्वीर मे मूछ रखी हुई थी इसलिए मेरा हाथ खुद ही अपने चेहरे पर चला गया जैसे मैं अपने हाथ से अपने चेहरे का जायज़ा ले रहा हूँ कि क्या ये मेरी ही तस्वीर है.

ख़ान : क्या हुआ कुछ याद आया अपने बारे मे.

मैं : (ना मे सिर हिलाते हुए) क्या ये मेरी तस्वीर है

ख़ान : जी हुजूर ये आपकी ही तस्वीर है ऑर इन तस्वीरो को अच्छे से देख लो तुमको अब ऐसा ही फिर से बनना है.

मैं : लेकिन आपने बताया नही मैं वहाँ तक पहचूँगा कैसे.

ख़ान : उसका भी एक रास्ता है

मैं : कौनसा रास्ता

ख़ान : तुम्हारा पुराना दोस्त जापानी जो फाइट क्लब संभालता है वहाँ से तुम तुम्हारी दुनिया मे एंट्री कर सकते हो. वैसे भी शेरा उस फाइट क्लब का सबसे फ़ेवरेट फाइटर हैं (मुस्कुराते हुए)

मैं : तो क्या मुझे वहाँ जाके लड़ना होगा.

ख़ान : (मुस्कुराते हुए) ऐसा ही कुछ.

मैं : मैं समझा नही आप कहना क्या चाहते हैं.

ख़ान : तुमको वहाँ जाके वहाँ के उनके लोगो को मारना होगा ऑर उनका माल लूटना होगा ताकि उन लोगो का ध्यान तुम्हारी तरफ जाए ऑर वो तुमको पहचान ले.

मैं : क्या मैं बिना कोई वजह उनसे लड़ाई करूँ.

ख़ान : वजह मैं बना दूँगा. तुमको तो बस जाके लड़ाई करनी है.

मैं : ठीक है.

उसके बाद वो तस्वीरे मुझे देकर ख़ान वापिस चला गया ऑर अब मैं अकेला बैठा उन तस्वीरो को देख रहा था ऑर अपनी पुरानी जिंदगी को याद करने की कोशिश कर रहा था लेकिन मुझे कुछ भी याद नही आ रहा था. ऐसे ही मैं अपनी सोचो मे गुम्म बैठा हुआ तस्वीर देख रहा था कि मुझे पता ही नही चला कब डॉक्टर रिज़वाना मेरे पास आके बैठ गई.

रिज़वाना : कहाँ खो गये जनाब. (मेरे मुँह के सामने चुटकी बजाते हुए)

मैं : जी कही नही बस वो मैं अपनी पुरानी जिंदगी के बारे मे याद करने की कोशिश कर रहा था लेकिन कुछ भी याद नही आ रहा.

रिज़वाना : कोई बात नही जैसे-जैसे तुम अपने बारे मे जानोगे तुमको याद आता जाएगा. वैसे तुमको सच मे तुम्हारे घरवालो के बारे मे भी कुछ नही याद.

मैं : (मुस्कुरा कर ना मे सिर हिलाते हुए) आपके घर मे कौन-कौन है.

रिज़वाना : कोई भी नही मेरे अम्मी अब्बू की कार आक्सिडेंट मे डेथ हो गई थी तब से अकेली ही हूँ (मुस्कुरा कर)

मैं : कोई भी नही है. मेरा मतलब पति या बचे.

रिज़वाना : नही....(मुस्कुरा कर) इन सब चीज़ो के लिए वक़्त तब ही मिल सकता है जब ड्यूटी से फ़ुर्सत मिले यहाँ तो सारा दिन हेड क्वॉर्टर मे लोगो का इलाज करने मे ही वक़्त निकल जाता है.

मैं : हाँ जब आपके लोग ऐसे ही किसी पर हमला करेंगे तो इलाज तो करना ही पड़ेगा उनका.

रिज़वाना : अच्छा वो....हाहहहाहा नही ऐसी बात नही है वो तो ख़ान ने तुम्हारा टेस्ट लेना था बस इसलिए.... ऑर वैसे भी तुमने कौनसी कसर छोड़ी थी.

मैं : मैने क्या किया मैं तो बस हल्का फूलका उनको दूर किया था खुद से. (मुस्कुरा कर)

रिज़वाना : रहने दो... रहने दो... उस दिन हेड क्वॉर्टर्स मे तुमने हमारे लोगो की क्या हालत की थी पता है मुझे. मैने ही इलाज किया था उनका बिचारे 5 लोगो के तो फ्रेक्चर तक आ गये थे बॉडी मे. ऐसा भी कोई किसी को मारता है.

मैं : (नज़रे नीचे करके मुस्कुरा कर)वो एक दम मुझ पर हमला हुआ तो मुझे कुछ समझ नही आया कि क्या करूँ इसलिए मैने भी हमला कर दिया.

रिज़वाना : हंजी.... ऑर जो हाथ मे आया उठा के मार दिया...हाहहहहहाहा

मैं : (बिना कुछ बोले मुस्कुरा दिया)

रिज़वाना : चलो तुम बैठो मैं कुछ खाने के लिए लाती हूँ.

मैं : आप क्यो... कोई नौकर नही है यहाँ पर.

रिज़वाना : जी नही आपके ख़ान साहब को किसी पर भरोसा भी तो नही है इसलिए सारा काम मुझे ही करना पड़ेगा (रोने जैसा मुँह बनाके)

मैं : कोई बात नही मैं हूँ ना मैं आपकी मदद कर दूँगा.

रिज़वाना : (हैरान होते हुए) तुमको खाना बनाना आता है.

मैं : जी फिलहाल तो खाना ही आता है लेकिन आप सिखाएँगी तो बनाना भी सीख जाउन्गा.

रिज़वाना : हाहहहहाहा रहने दो तुम खाते हुए ही अच्छे लगोगे बना मैं खुद लूँगी.

उसके बाद रिज़वाना रसोई की तरफ चली गई ऑर मैं उसको जाते हुए देखता था. लेकिन मेरी शैतानी नज़र का मैं क्या करूँ जो ना चाहते हुए भी ग़लत वक़्त पर ग़लत चीज़ देखती है. रिज़वाना को जाते हुए देखकर मेरी नज़र सीधा उसकी गान्ड पर पड़ी जो उसके चलने से उपर नीचे हो रही थी उसकी जीन्स की फीटिंग से गान्ड की गोलाई के उभार ऑर भी वजह तोर पर नज़र आ रहे थे. जिससे मेरे लंड मे भी हरकत होने लगी ऑर वो जागने लगा. मैने अपने दोनो हाथो से अपने लंड को थाम लिया ऑर एक थप्पड़ मारा की साले हर जगह मुँह उठाके घुसने को तेयार मत हो जाया कर वो डॉक्टर हैं हीना या फ़िज़ा नही जिसकी गहराई मे तू जब चाहे उतर जाए. लेकिन मेरा लंड था कि बैठने का नाम ही नही ले रहा था मेरी नज़रों के सामने बार-बार रिज़वाना की गान्ड की तस्वीर आ रही थी ऑर मेरा दिल चाह रहा था कि उसकी खूबसूरत उभरी हुई गान्ड के दीदार मैं एक बार फिर से करूँ. इसलिए ना चाहते हुए भी मैं खड़ा होके रसोई की तरफ चला गया ताकि चुपके से रिज़वाना की मोटी सी ऑर बाहर को निकली हुई गान्ड को जी-भरकर देख सकूँ.

अभी मैं रसोई के गेट तक ही पहुँचा था कि अचानक रिज़वाना हाथ मे खाने की ट्रे लेके बाहर आ गई ऑर मुझसे टकरा गई जिससे सारी सब्जी की ग्रेवी मुझ पर ऑर रिज़वाना पर गिर गई ऑर कुछ बर्तन भी ज़मीन पर गिरने से टूट गये. सब्जी की ग्रेवी उसके ऑर मेरी दोनो की कमीज़ पर गिर गई थी. वो मेरे सामने प्लेट लेके अब भी खड़ी थी. हम दोनो ही इस अचानक टकराव के लिए तेयार नही थे इसलिए जल्दबाज़ी मे मैने उसके सीने से ग्रेवी सॉफ करने के लिए अपने दोनो हाथ उसकी छाती पर रख दिए ऑर वहाँ से हाथ फेर कर सॉफ करने लगा. मेरे एक दम वहाँ हाथ लगाने से रिज़वाना को जैसे झटका सा लगा ऑर पिछे हो गई साथ ही उसने अपने दोनो हाथ से ट्रे भी छोड़ दी जो सीधा मेरे पैर पर आके गिरी. ये सब इतना अचानक हुआ कि हम दोनो ही कुछ समझ नही पाए.

रिज़वाना : आपको लगी तो नही.(फिकर्मन्दि से)

मैं : जी नही मैं ठीक हूँ माफ़ कीजिए वो मैने आप पर सब्जी गिरा दी.

रिज़वाना : कोई बात नही.... (अपने हाथ से अपने टॉप से ग्रेवी झाड़ते हुए) लेकिन आप यहाँ क्या करने आए थे.

मैं : जी वो मैने सोचा आपकी मदद कर दूं इसलिए आ रहा था (नज़रे झुका कर)

रिज़वाना : (मुस्कुराते हुए) कोई बात नही... इसलिए मैने आपको कहा था आप खाते हुए ही अच्छे लगेंगे. खाना तो सारा गिर गया अब क्या करे.

मैं : आप कोई फल खा लीजिए मैं तो पानी पीकर भी सो जाउन्गा. (मुस्कुराते हुए)

रिज़वाना : पानी पी कर क्यो सो जाओगे. अब इतनी गई गुज़री भी नही हूँ कि खाना दुबारा नही बना सकती.

मैं : रहने दो रिज़वाना जी दुबारा मेहनत करनी पड़ेगी आपको.

रिज़वाना: खाना तो खाना ही है ना नीर क्या कर सकते हैं. (कुछ सोचते हुए) म्म्म्माम चलो ऐसा करते हैं बाहर चलते हैं

खाने के लिए फिर तो ठीक है. (मुस्कुरा कर)

मैं : जैसी आपकी मर्ज़ी (मुस्कुराकर)

रिज़वाना : चलो फिर तुम भी कपड़े बदल लो मैं भी चेंज करके आती हूँ.

मैं : अच्छा जी.

उसके बाद हम दोनो कपड़े पहनकर तेयार हो गये ऑर मैं बाहर हॉल मे बैठकर रिज़वाना का इंतज़ार करने लगा. कुछ देर बाद रिज़वाना भी तेयार होके आ गई. उसने सफेद कलर का सूट पहन रखा था जिसमे वो किसी परी से कम नही लग रही थी जैसे ही वो मेरे सामने आके खड़ी हुई तो उसके बदन सी निकलने वाले खुश्बू ने मुझे मदहोश सा कर दिया.

रिज़वाना : मैं कैसी लग रही हूँ. (मुस्कुरा कर)

मैं : एक दम परी जैसी (मुस्कुरा कर)

रिज़वाना : हाहहहाहा शुक्रिया. अर्रे तुमने फिर से वही गाववाले कपड़े पहन लिए.

मैं : जी मेरे पास यही कपड़े हैं

रिज़वाना : (अपने माथे पर हाथ रखते हुए) ओह्ह मैं तो भूल ही गई थी कि तुमको नये कपड़े भी लेके देने हैं.

मैं : नये कपड़ो की क्या ज़रूरत है मैं ऐसे ही ठीक हूँ.

रिज़वाना : नीर अब तुम शेरा हो ऑर शेरा ऐसे कपड़े नही पहनता ख़ान ने मुझे बोला भी था तुम्हारे कपड़ो के लिए लेकिन मैं भूल ही गई. चलो पहले तुम्हारे लिए कपड़े ही लेते हैं उसके बाद हम खाना खाने जाएँगे ठीक है.

मैं : ठीक है.

फिर हम दोनो रिज़वाना की कार मे बैठ कर बाज़ार चले गये पूरे रास्ते मैं बस रिज़वाना को ही देख रहा. उसके बदन की खुश्बू ने पूरी कार को महका दिया था. उस खुश्बू ने मुझे काफ़ी गरम कर दिया था इसलिए मैं पूरे रास्ते अपने लंड को अपनी टाँगो मे दबाए बैठा रहा ताकि रिज़वाना की नज़र मेरे खड़े लंड पर ना पड़ जाए. अब मुझे रिज़वाना के साथ बैठे हुए हीना के साथ बिताए लम्हे याद आ रहे थे जब मैं उसको कार चलानी सीखाता था. थोड़ी देर बाद हम बाज़ार आ गये ऑर वहाँ रिज़वाना ने पार्किंग मे गाड़ी खड़ी की ऑर फिर वो मुझे एक बड़ी सी दुकान (शोरुम) मे ले गई जहाँ उसने मेरे लिए बहुत सारे कपड़े खरीदे. रिज़वाना के ज़िद करने पर मैने बारी-बारी सब कपड़े पहन कर देखे ऑर रिज़वाना को भी अपना ये नया बदला हुआ रूप दिखाया जिसको देखकर शायद रिज़वाना की भी आँखें खुली की खुली ही रह गई. मैं भी अपने इस नये रूप से बहुत हैरान था क्योंकि अब तक मैने गाँव के सीधे-शाधे कपड़े ही पहने थे. लेकिन खुद को आज ऐसे बदला हुआ देखकर मुझे एक अजीब सी खुशी का अहसास हो रहा था ऑर मैं बार-बार खुद को शीशे मे देख रहा था ऑर खुद ही मुस्कुरा भी रहा था.

मैं : कैसा लगा रहा हूँ रिज़वाना जी.

रिज़वाना : (मुस्कुरा कर मेरी जॅकेट का कलर ठीक करते हुए) ये हुई ना बात अब लग रहा है कि शेरा अपने रंग मे आया है.

मैं : ये भी आपका ही कमाल है (मुस्कुरा कर)

रिज़वाना : चलो अब खाना खाने चलते हैं.

मैं : हंजी चलिए. वैसे भी बहुत भूख लगी है

रिज़वाना : भूख लगी है.....पहले क्यो नही बताया चलो चलें.

उसके बाद मैं ऑर रिज़वाना शॉपिंग बॅग्स उठाए अपनी कार की तरफ जा रहे थे कि अचानक 4 लोगो ने हम को घेर लिया ऑर रिज़वाना को अपनी तरफ खींचकर उसके गले पर एक नोकदार चाकू लगा दिया मैं इस अचानक हमले को समझ नही पाया कि ये लोग कौन है ओर हम से क्या चाहते हैं.

मैं : कौन हो तुम लोग (गुस्से से)

एक आदमी : सीधी तरीके से सारा माल निकाल ऑर हम को दे नही तो ये लड़की जान से जाएगी.

मैं : ठीक है ये लो सब तुम रख लो (अपने शॉपिंग बॅग उनकी तरफ फेंकते हुए) लेकिन इनको छोड़ दो.

वो आदमी : साले हम को चूतिया समझा ये कचरा नही पैसा निकाल.

मैं : मेरे पास पैसे नही है इनको जाने दो.

मेरा इतना कहना था कि उसने अपने चाकू का दबाव रिज़वाना के गले पर बढ़ा दिया जिससे दर्द से रिज़वाना की आँखें बंद हो गई ऑर उसने कराहते हुए मुझे कहा....

रिज़वाना : आअहह.... (दर्द से कराहते हुए) नीर मारो इनको ये लोग चोर है.

रिज़वाना का इतना कहना था कि मैं उन लोगो पर टूट पड़ा जो मेरे सामने खड़ा था मैं उसको गर्दन से पकड़ लिया ऑर अपना सिर उसकी नाक पर ज़ोर से मारा ऑर वो वही गिर गया. इतने मे साथ खड़े आदमी ने चाकू से मुझ पर हमला किया जिससे मैने उसकी कलाई पकड़कर नाकाम कर दिया ऑर उसको अपनी तरफ खींचकर अपनी कोहनी उसके सिर मे मारी ऑर साथ ही उसका मुँह नीचे करके अपना घुटना उसके मुँह पर मारा वो भी वही गिर गया तभी जिसने रिज़वाना को पकड़ा था उसने रिज़वाना को मुझ पर धकेल दिया ऑर अपने बचे हुए 1 साथी के साथ वहाँ से पार्किंग की तरफ भाग गया. मैने जल्दी से रिज़वाना को थाम लिया ऑर उससे गिरने से बचा लिया.

मैं : आप ठीक हो.

रिज़वाना : (अपने गले पर हाथ रखकर हाँ मे सिर हिलाते हुए)

मैं : क्या हुआ आपको लगी है क्या. (उसका हाथ उसके गले से हटा ते हुए)

मैं : ये तो खून निकल रहा है. मैं उसको छोड़ूँगा नही सालाआ.....

रिज़वाना के कुछ कहने से पहले ही मैं उन लोगो के पिछे भाग गया वो लोग कार पार्किंग मे घुस गये थे. अब मैं उनको जल्दी से जल्दी पकड़ना चाहता था इसलिए मैं कारो के उपर से छलाँग लगाता हुआ उनके पिछे भागने लगा. वो दोनो पार्किंग की अलग-अलग डाइरेक्षन मे भाग रहे थे लेकिन मुझे दूसरे आदमी से कोई मतलब नही था मुझे उस आदमी पर सबसे ज़्यादा गुस्सा था जिसने रिज़वाना के गले पर चाकू रखा था इसलिए मैं उसकी तरफ उसके पिछे भागने लगा जल्दी ही पार्किंग ख़तम हो गई ऑर वो एक दीवार के सामने आके रुक गया मैने जल्दी से एक कार की छत से कूद कर उसके उपर छलाँग लगा दी जिससे मेरे दोनो घुटने उसके पेट मे लगे ऑर वो वही गिर गया मैने फिर उसको खड़ा किया ऑर उसका सर ज़ोर से दीवार मे मारा जिससे दीवार पर गोल-गोल खून का निशान सा बन गया मैने फिर से उसको खड़ा किया ऑर फिर उसको दीवार की तरफ धकेल दिया उसके फिर से सिर टकराया. ऐसे ही मैने कई दफ्फा उसका सिर दीवार मे मारा लेकिन अब वो बेहोश हो चुका था. इतने मे रिज़वाना मेरे पिछे भागती हुई आई ऑर मुझे पकड़ लिया.

Update-34

Sheikh Saab {baba} :- Age- 58 saal, dikhane me kaafi roubdaar insaan, Kaam- Gang ka main leader, shera jaise baki sab log iske liye hi kaam karte hain.

Anees (chhota sheikh):- Age- 32 saal, Sheikh ka beta or ek la-parwaah kism ka insaan isliye sheikh koi bhi kaam isko sompna jaruri nahi samjhta. Har waqt druggs ke nashe me or ladkiyo me dooba rehta hai.

Munna (japani):- Age- 28 saal, Shera ka jigri dost hai or Dekhne me japani jaisa lagta hai isliye japani naam se underworld me mashunr, Kaam- Druggs agent or Arms agent ke sath deal fix karna or fight club me shera ka partner.

Rasool :- Age-34 saal, kaam- shera ke baad shera ka sara kaam yhi sambhalta hai.

Sooma :- Age-25 saal, Kaam- Videshi clients ke sath druggs or arms ki deal fix karna or tamam agents se paisa collect karke sheikh sahab tak pohonchana.

Lala or Gaani :- Age-34-28 saal, Kaam- Hotels or clubs sambhalna.

Main bade gor se bari-bari sab logo ki tasveere dekh raha tha or unko pehchaane ki koshish kar raha tha lekin mujhe kisi ka bhi chehra yaad nahi aa raha tha. Tabhi khan ne ek aisi tasveer table par fenki jisko main uthaye bina nahi reh saka. Ye to meri tasveer thi lekin maine uss tasveer me mooch rakhi hui thi isliye mera hath khud hi apne chehre par chala gaya jaise main apne hath se apne chehre ka jayeza le raha hun ki kya ye meri hi tasveer hai.

Khan : kya hua kuch yaad aaya apne bare me.

Main : (naa me sir hilate hue) kya ye meri tasveer hai

Khan : ji hujoor ye aapki hi tasveer hai or inn tasveero ko achhe se dekh lo tumko ab aisa hi fir se banna hai.

Main : lekin aapne bataayaa nahi main wahan tak pohonchunga kaise.

Khan : uska bhi ek rasta hai

Main : kounsa rasta

Khan : tumhara purana dost japani jo fight club sambhalta hai wahan se tum tumhari duniya me entry kar sakte ho. waise bhi shera uss fight club ka sabse favroute fighter hain (muskurate hue)

Main : to kya mujhe wahan jake ladna hoga.

Khan : (muskurate hue) Aisa hi kuch.

Main : main samjha nahi aap kehna kya chahte hain.

Khan : tumko wahan jake wahan ke unke logo ko marna hoga or unka maal lootna hoga taaki unn logo ka dhyaan tumhari taraf jaye or wo tumko pehchaan le.

Main : kya main bina koi wajah unse ladayi karu.

Khan : wahanj main bana dunga. tumko to bas jake ladayi karni hai.

Main : thik hai.

Uske baad wo tasveere mujhe dekar khan wapis chala gaya or ab main akela baitha unn tasveero ko dekh raha tha or apni purani jindagi ko yaad karne ki koshish kar raha tha lekin mujhe kuch bhi yaad nahi aa raha tha. aise hi main apni socho me gumm baitha hua tasveer dekh raha tha ki mujhe pata hi nahi chala kab Doctor rizwana mere pass aake baith gai.

Rizwana : kaha kho gaye janab. (mere munh ke samne chukti bajate hue)

Main : ji kahi nahi bas wo main apni purani jindagi ke bare me yaad karne ki koshish kar raha tha lekin kuch bhi yaad nahi aa raha.

Rizwana : koi baat nahi jaise-jaise tum apne bare me janoge tumko yaad aata jayega. waise tumko sach me tumhare gharwalo ke bare me bhi kuch nahi yaad.

Main : (muskurakar naa me sir hilate hue) aapke ghar me koun-koun hai.

Rizwana : koi bhi nahi mere ammi abbu ki car accident me death ho gai thi tab se akeli hi hun (muskurakar)

Main : koi bhi nahi hai. mera matlab pati ya bache.

Rizwana : Nahi....(muskurakar) inn sab chijo ke liye waqt tab hi mil sakta hai jab duty se fursat mile yahan to sara din head quarter me logo ka ilaaj karne me hi waqt nikal jata hai.

Main : haa jab aapke log aise hi kisi par hamla karenge to ilaaj to karna hi padega unka.

Rizwana : achha wo....Hahahahaha nahi aisi baat nahi hai wo to khan ne tumhara test lena tha bas isliye.... or waise bhi tumne kounsi kasar chodi thi.

Main : maine kya kiya main to bas halka fulka unko door kiya tha khud se. (muskurakar)

Rizwana : rehne do... rehne do... uss din head quarters me tumne hamaare logo ki kya haalat ki thi pata hai mujhe. maine hi ilaaj kiya tha unka bichare 5 logo ke to frecture tak aa gaye the body me. Aisa bhi koi kisi ko marta hai.

Main : (nazre niche karke muskurakar)wo ek dam mujh par hamla hua to mujhe kuch samajh nahi aya ki kya karu isliye maine bhi hamla kar diya.

Rizwana : hanji.... or jo hath me aya utha ke maar diya...hahahahahahaha

Main : (bina kuch bole muskurakar)

Rizwana : chalo tum baitho main kuch khaane ke liye laati hun.

Main : aap kyo... koi naukar nahi hai yahan par.

Rizwana : ji nahi aapke khan sahab ko kisi par bharosa bhi to nahi hai isliye sara kaam mujhe hi karna padega (rone jaisa munh banake)

Main : koi baat nahi main hun naa main aapki madad kar dunga.

Rizwana : (hairaan hote hue) tumko khana banana aata hai.

Main : Ji filhaal to khana hi aata hai lekin aap seekhayengi to banana bhi seekh jaunga.

Rizwana : hahahahahaha rehne do tum khate hue hi achhe lagoge bana main khud lungi.

Uske baad Rizwana rasoyi ki taraf chali gai or main usko jate hue dekhta tha. Lekin meri shaitaani nazar ka main kya karu jo na chahte hue bhi galat waqt par galat chij dekhti hai. Rizwana ko jate hue dekhkar meri nazar seedha uski gaanD par padi jo uske chalne se upar niche ho rahi thi uski jeans ki feeting se gaanD ki golayi ke ubhaar or bhi wajah tor par nazar aa rahe the. Jisse mere lund me bhi harkat hone lagi or wo jaagne laga. maine apne dono hatho se apne lund ko thaam liya or ek thappad mara ki sale har jagah munh uthake ghusne ko teiyaar mat ho jaya kar wo doctor hain Heena ya fiza nahi jiski gehrayi me tu jab chahe utar jaye. Lekin mera lund tha ki baithne ka naam hi nahi le raha tha meri nazaro ke samne bar-bar rizwana ki gaanD ki tasveer aa rahi thi or mera dil chaah raha tha ki uski khubsurat ubhari hui gaanD ke deedar main ek baar fir se karu. Isliye naa chahte hue bhi main khada hoke rasoyi ki taraf chala gaya taki chupke se rizwana ki moti si or bahar ko nikali hui gaanD ko jee-bharkar dekh saku.

Abhi main Rasoyi ke gate tak hi pohoncha tha ki achanak Rizwana hath me khane ki tray leke bahar aa gai or mujhse takra gai jisse saari sabji ki gravy mujh par or rizwana par gir gai or kuch bartan bhi zameen par girne se toot gaye. Sabji ki gravy uske or meri dono ki kameez par gir gai thi. Wo mere samne plate leke ab bhi khadi thi. hum dono hi iss achanak takraav ke liye teiyaar nahi the isliye jaldbaazi me maine uske seene se greavy saaf karne ke liye apne dono hath uski chaatee par rakh diya or wahan se hath ferkar saaf karne laga. Mere ek dam wahan hath lagane se rizwana ko jaise jhatka sa laga or pichhe ho gai sath hi usne apne dono hath se tray bhi chod di jo seedha mere pair par aake giri. Ye sab itna achanak hua ki hum dono hi kuch samajh nahi paye.

Rizwana : Aapko lagi to nahi.(fikarmandi se)

Main : ji nai main thik hun Maaf kijiye wo maine aap par sabji gira di.

Rizwana : koi baat nahi.... (apne hath se apne top se gravy jhadte hue) lekin aap yahan kya karne aaye the.

Main : ji wo maine socha aapki madad kar doo isliye aa raha tha (nazre jhuka kar)

Rizwana : (muskurate hue) koi baat nahi... isliye maine aapko kaha tha aap khate hue hi achhe lagenge. Khana to sara gir gaya ab kya kare.

Main : aap koi Phal khaa lijiye main to paani peekar bhi so jaunga. (muskurate hue)

Rizwana : Paani pee kar kyo so jaoge. ab itni gai guzri bhi nahi hun ki khana dubara nahi bana sakti.

Main : rehne do rizwana ji dubara mehnat karni padegi aapko.

Rizwana: khana to khana hi hai na neer kya kar sakte hain. (kuch sochte hue) mmmmm chalo aisa karte hain bahar chalte hain khane ke liye fir to thik hai. (muskurakar)

Main : jaisi aapki marzi (muskurakar)

Rizwana : chalo fir tum bhi kapde badal lo main bhi change karke aati hun.

Main : achha ji.

Uske baad hum dono kapde pehankar teiyaar ho gaye or main bahar hall me baithkar rizwana ka intzaar karne laga. Kuch der baad rizwana bhi teiyaar hoke aa gai. Usne safed color ka suit pehan rakha tha jisme wo kisi pari se kam nahi lag rahi thi jaise hi wo mere samne aake khadi hui to uske badan si nikalne wale khushboo ne mujhe madhosh sa kar diya.

Rizwana : main kaisi lag rahi hun. (muskurakar)

Main : ek dam pari jaisi (muskurakar)

Rizwana : hahahahaha Shukriya. Arre tumne fir se wahi gaavwale kapde pehan liye.

Main : ji mere pass yhi kapde hain

Rizwana : (apne maathe par hath rakhte hue) ohh main to bhul hi gai thi ki tumko naye kapde bhi leke dene hain.

Main : naye kapdo ki kya jarurat hai main aise hi thik hun.

Rizwana : neer ab tum shera ho or shera esse kapde nahi pehanta khan ne mujhe bola bhi tha tumhare kapdo ke liye lekin main bhul hi gai. chalo pehle tumhare liye kapde hi lete hain uske baad hum khana khane jayenge thik hai.

Main : thik hai.

Fir hum dono rizwana ki car me baith kar bazaar chale gaye poore raste main bas rizwana ko hi dekh raha. uske badan ki khoshboo ne poori car ko mehkaa diya tha. Uss khushboo ne mujhe kafi garam kar diya tha isliye main poore raste apne lund ko apni taango me dabaye baitha raha taki rizwana ki nazar mere khade lund par naa pad jaye. Ab mujhe rizwana ke sath baithe hue heena ke sath bitaye lamhe yaad aa rahe the jab main usko car chalani seekhata tha. Thodi der baad hum bazaar aa gaye or wahan rizwana ne parking me gaadi khadi ki or fir wo mujhe ek badi si dukaan (Showroom) me le gai jahan usne mere liye bahut saare kapde khareede. Rizwana ke jidd karne par maine bari-bari sab kapde pehan kar dekhe or rizwana ko bhi apna ye naya badla hua roop dikhaya jisko dekhkar shayad rizwana ki bhi aankhen khuli ki khuli hi reh gai. Main bhi apne iss naye roop se bahut hairaan tha kyonki ab tak maine gaav ke seedhe-shaadhe kapde hi pehne the. Lekin khud ko aaj aise badla hua dekhkar mujhe ek ajeeb si khushi ka ahsaas ho raha tha or main bar-bar khud ko sheeshe me dekh raha tha or khud hi muskura bhi raha tha.

Main : kaisa laga raha hun Rizwana ji.

Rizwana : (muskurakar meri jacket ka color thik karte hue) Ye hui naa baat ab lag raha hai ki shera apne rang me aaya hai.

Main : ye bhi aapka hi kamaal hai (muskurakar)

Rizwana : chalo ab khana khane chalte hain.

Main : hanji chaliye. waise bhi bahut bhukh lagi hai

Rizwana : Bhukh lagi hai.....pehle kyo nahi bataayaa chalo chalen.

Uske baad main or rizwana shoping bags uthaye apni car ki taraf ja rahe the ki achanak 4 logo ne ham ko gher liya or rizwana ko apni taraf khinchkar uske gale par ek nokdaar chaaku laga diya main iss achanak hamle ko samajh nahi paya ki ye log kaun hai or humse kya chahte hain.

Main : koun ho tum log (gusse se)

Ek Aadmi : seedhi tareeke se sara maal nikaal or ham ko de nahi to ye ladki jaan se jayegi.

Main : thik hai Ye lo sab tum rakh lo (apne shoping bag unki taraf fenkte hue) lekin inko chod do.

Wo aadmi : sale ham ko chutiya samjha ye kachra nahi paisa nikaal.

Main : mere pass paise nahi hai inko jane do.

Mera itna kehna tha ki usne apne chaaku ka dabaav rizwana ke gale par badha diya jisse dard se rizwana ki aankhen band ho gai or usne karahate hue mujhe kaha....

Rizwana : Aaahh.... (dard se karahate hue) neer maaro inko ye log chor hai.

Rizwana ka itna kehna tha ki main unn logo par toot pada jo mere samne khada tha main usko garden se pakad liya or apna sir uski naak par jor se mara or wo wahi gir gaya. itne me sath khade aadmi ne chaaku se mujh par hamla kiya jisse maine uski kalayi pakadkar nakaam kar diya or usko apni taraf khinchkar apni kohni uske sir me maari or sath hi uska munh niche karke apna ghutna uske munh par mara wo bhi wahi gir gaya tabhi jisne rizwana ko pakda tha usne rizwana ko mujh par dhakel diya or apne bache hue 1 saathi ke sath wahan se parking ki taraf bhaag gaya. maine jaldi se rizwana ko thaam liya or usse girne se bacha liya.

Main : aap thik ho.

Rizwana : (apne gale par hath rakhkar haa me sir hilate hue)

Main : kya hua aapko lagi hai kya. (uska hath uske gale se hata te hue)

Main : ye to khun nikal raha hai. main usko chodunga nahi salaaaa.....

Rizwana ke kuch kehne se pehle hi main unn logo ke pichhe bhaag gaya wo log car parking me ghus gaye the. Ab main unko jaldi se jaldi pakadna chahta tha isliye main caro ke upar se chalaang lagata hua unke pichhe bhagne laga. wo dono parking ki alag-alag direction me bhaag rahe the lekin mujhe dusre aadmi se koi matlab nahi tha mujhe uss aadmi par sabse jyaadaa gussa tha jisne Rizwana ke gale par chaku rakha tha isliye main uski taraf uske pichhe bhagne laga jaldi hi parking khatam ho gai or wo ek deewar ke samne aake ruk gaya maine jaldi se ek car ki chhat se kood kar uske upar chalaang laga di jisse mere dono ghutne uske pet me lage or wo wahi gir gaya maine fir usko khada kiya or uska sir jor se deewar me mara jisse deewar par gol-gol khun ka nishaan sa ban gaya maine fir se usko khada kiya or fir usko deewar ki taraf dhakel diya uske fir se sir takraya. aise hi maine kai daffa uska sir deewar me mara lekin ab wo behosh ho chuka tha. Itne me Rizwana mere pichhe bhagti hui aayi or mujhe pakad liya.

 


अपडेट-35

रिज़वाना : क्या कर रहे हो नीर छोड़ दो वो मर जाएगा.

मैं : इसने चाकू कैसे लगाया गर्दन पर आपकी.

रिज़वाना : (मुझे पिछे खींचते हुए) मैं अब ठीक हूँ नीर चलो यहाँ से.

उसके बाद लग-भाग खींचती हुई रिज़वाना मुझे पार्किंग से बाहर ले आई. बाहर आके मैं रुक गया ऑर अब मैं काफ़ी शांत हो चुका था. मैने रुक कर अपने दोनो हाथ रिज़वाना की गर्दन की साइड पर रख दिए ऑर उसकी गर्दन उपर करके उसका घाव देखने लगा वो भी किसी बच्चे की तरह मेरे सामने मासूम सा चेहरा लिए अपनी गर्दन उठाए खड़ी हो गई.

मैं : बहुत दर्द हो रहा है क्या.

रिज़वाना : मैं ठीक हूँ नीर फिकर मत करो. (मुस्कुराते हुए)

मैं : चलो घर चलकर मरहम पट्टी करता हूँ आपकी.

रिज़वाना : (बिना कुछ कहे मुस्कुराते हुए) हमम्म

फिर हम दोनो वापिस कार के पास आ गये ऑर मैने अपने ज़मीन पर गिरे हुए शॉपिंग बाग उठाए ऑर वो भी कार मे रख दिए.

मैं : कार मैं चलाऊ.

रिज़वाना : (बिना कुछ बोले चाबी मेरी तरफ करके मुस्कुराते हुए) हमम्म.

फिर मैं ऑर रिज़वाना घर की तरफ निकल गये पूरे रास्ते हम खामोश थे ऑर रिज़वाना मुझे ही देखे जा रही थी ऑर मुस्कुरा रही थी.

मैं : क्या हुआ ऐसे क्या देख रही हैं.

रिज़वाना : कुछ नही..... एक बात पुछू....

मैं : हाँ पुछिये....

रिज़वाना : तुमने उस आदमी को इतना क्यो मारा

मैं : मारता नही तो क्या प्यार करता.... आपकी गर्दन पर चाकू लगाया उसने ऑर देखो कितना खून भी आ गया था आपके.

रिज़वाना : तुमने सिर्फ़ इसलिए उसको इतना मारा.

मैं : मार खाने वाले काम किए थे इसलिए मारा मैने उसको.

रिज़वाना : इतनी फिकर मेरी आज तक किसी ने नही की. (रोते हुए)

मैं : (गाड़ी को ब्रेक लगाते हुए) अर्रे रिज़वाना जी आप रोने क्यो लगी क्या हुआ.

रिज़वाना : (अपने आँसू सॉफ करते हुए) कुछ नही...

मैं : (पिछे पड़ी पानी की बोतल रिज़वाना को देते हुए) ये लो पानी पी लो.

रिज़वाना : (बोतल पकड़ते हुए) शुक्रिया.

कुछ देर मे वो ठीक हो गई इसलिए मैने फिर कार स्टार्ट की ऑर घर की तरफ बढ़ना शुरू कर दिया. लेकिन रिज़वाना अब भी मुझे ही देखे जा रही थी ऑर मुस्कुरा रही थी. अचानक मुझे ख़याल आया.

मैं : रिज़वाना जी....

रिज़वाना : हमम्म

मैं : उन कमीनो के चक्कर मे खाना लेना तो भूल ही गये (मुस्कुरा कर)

रिज़वाना : अरे हाँ... आपको तो भूख भी लगी थी....कोई बात नही यहाँ से लेफ्ट मोड़ लो यहाँ भी एक अच्छा रेस्टोरेंट है वहाँ से ले लेंगे.

मैं : ठीक है.

उसके बाद मैं ऑर रिज़वाना रेस्टोरेंट चले गये जहाँ से हमने खाना पॅक करवा लिया ऑर फिर हम वापिस घर की तरफ चले गये. घर आके मैने पहले सारा समान कमरे मे रखा ऑर फिर रिज़वाना से मेडिकल बॉक्स लेकर उसके कमरे मे ही उसके जखम पर दवाई लगाने लगा. रिज़वाना मुझे बस देख कर मुस्कुराती रही. फिर हम दोनो ने साथ खाना खाया. खाने के बाद रिज़वाना मेरे साथ बैठकर टीवी देखने की ज़िद्द करने लगी इसलिए मैं भी उसके पास ही बैठकर टीवी देखने लगा. रिज़वाना ऑर मैं हम दोनो साथ मे बैठे टीवी देख रहे थे लेकिन कोई भी ढंग का प्रोग्राम नही आ रहा था इसलिए हमने कुछ देर टीवी देखने के बाद बंद कर दिया.

रिज़वाना : तुमको नींद आ रही है क्या.

मैं : (ना मे सिर हिलाते हुए) आपको आ रही है.

रिज़वाना : नही...चलो फिर बाते करते हैं....

मैं : अच्छा... जैसी आपकी मर्ज़ी.

रिज़वाना : (कुछ सोचते हुए) तुमको डॅन्स आता है

मैं : (ना मे सिर हिलाते हुए) मुझे एक ही तरीके से हाथ पैर चलाना आता है वो अभी आप कुछ देर पहले देख ही चुकी है.

रिज़वाना : चलो मैं सिखाती हूँ दूसरे तरीके से भी हाथ पैर हिलाए जा सकते हैं.(मुस्कुराते हुए)

उसके बाद रिज़वाना ने एक म्यूज़िक चला दिया ऑर मुझे अपने सामने खड़ा कर लिया फिर मेरा एक हाथ अपनी कमर पर रख दिया ऑर दूसरा हाथ अपने हाथ मे थाम लिया ऑर उसने अपने एक हाथ मेरे कंधे पर रख लिया ऑर रिज़वाना ने मुझे धीरे-धीरे हिलाना शुरू कर दिया मैं भी जैसे वो मुझे हिला रही थी हिलना शुरू हो गया.

जब रिज़वाना मेरे साथ मुझसे चिपक कर खड़ी थी तब मुझे डॅन्स का नही उसके जिस्म का मेरे जिस्म के साथ जुड़े होना ज़्यादा मज़ा दे रहा था. वो बड़े प्यार मेरे कंधे पर हाथ फेर रही ऑर मेरा हाथ खुद-ब-खुद उसकी कमर को सहला रहा था मज़े से मेरी आँखें बंद हो गई थी ऑर मैने उसे कमर से पकड़ कर अपने ऑर करीब कर लिया जिससे उसके नुकीले मम्मे मुझे अपनी छाती पर चुभते हुए महसूस होने लगे इससे मुझे भी मेरी जीन्स पॅंट मे हलचल सी महसूस होने लगी लेकिन जीन्स इतनी टाइट थी कि मेरा लंड सही से खड़ा नही हो पा रहा था बस जीन्स के अंदर ही मचल रहा था ऑर बाहर आने का रास्ता तलाश कर रहा था. कुछ देर हम ऐसे ही एक दूसरे का हाथ थामे नाचते रहे फिर उसने मेरा हाथ छोड़ दिया ऑर अपनी दोनो बाजू मेरे गले मे किसी हार की तरह डाल दी ऐसे ही मेरी आँखों मे देखती हुई अपना ऑर मेरा बदन धीरे-धीरे हिलाने लगी.

रिज़वाना : एक बात बोलूं

मैं : हमम्म

रिज़वाना : तुम्हारी आँखें बहुत अच्छी है नशीली सी.. (मुस्कुराते हुए)

मैं : मुझे तो आपकी आँखें पसंद है कितनी बड़ी-बड़ी है जैसे किसी हिरनी की आँखें हो.

रिज़वाना : (शर्मा कर नज़रें झुकाते हुए) शुक्रिया

फिर कुछ देर के लिए हम दोनो खामोश हो गये ऑर ऐसे ही डॅन्स करते रहे. डॅन्स तो उसके लिए था मैं तो उसके जिस्म की गर्मी का मज़ा ले रहा था. हम दोनो एक दूसरे से एक दम चिपके हुए थे बस हम दोनो के चेहरे कुछ इंच के फ़ासले पर थे लेकिन फिर भी हम एक दूसरे की साँसों की गरमी अपने चेहरे पर महसूस कर रहे थे. अब मुझसे भी ऑर बर्दाश्त नही हो रहा था इसलिए मैं आगे बढ़ने का सोच की रहा था कि अचानक लाइट चली गई ऑर पूरे कमरे मे अंधेरा हो गया जिससे हम दोनो का ध्यान एक दूसरे से हटकर अंधेरे की तरफ गया इसलिए मेरे ना चाहते हुए भी रिज़वाना मुझसे अलग हो गई....

रिज़वाना : ओह्हुनो फिर से लाइट चली गई....तुम रूको मैं रोशनी के लिए कुछ लेके आती हूँ

मैं : रहने दो ना ऐसे ही ठीक है अंधेरे मे क्या नज़र आएगा

रिज़वाना : मुझे अंधेरे मे डर लगता है...बस 2 मिंट मे आ रही हूँ

मैं : ठीक है जल्दी आना...

रिज़वाना : बस 2 मिंट ऐसे गई ऑर ऐसे आई.

मैं क्या सोच रहा था ऑर क्या हो गया जैसे किसी ने मेरे अरमानो पर पानी फेर दिया हो मैं अपने दिल मे बिजली वालो को गालियाँ निकाल रहा था कि हरामखोरो ने अभी लाइट बंद करनी थी कुछ देर रुक जाते तो इनके बाप का क्या जाता था. पूरे कमरे मे चारो तरफ अंधेरा था बस खिड़की से हल्की सी चाँद की रोशनी कमरे के अंदर आ रही थी. वो भी बहुत कम क्योंकि खिड़की के आगे परदा लगा हुआ था. मैने सोचा कि कमरे मे गरमी हो रही है इसलिए खिड़की से परदा हटा दूं ताकि ताज़ी हवा भी आ सके ऑर रोशनी भी. अभी मैं परदा हटाने के लिए एक कदम ही आगे बढ़ाया था कि अचानक मुझे रिज़वाना की चीख सुनाई दी मैने फॉरन चीख की तरफ भागता हुआ गया. एक तो अंधेरा था उपर से कुछ नज़र भी नही आ रहा था इसलिए मैं नीचे पड़ी चीज़ो से टकराता हुआ दीवार को पकड़ कर आगे की तरफ बढ़ने लगा.

आवाज़ रसोई की तरफ से आई थी इसलिए मैं अंदाज़े से उस तरफ बढ़ रहा था. एक तो आज मेरा यहाँ पहला दिन था उपर से जगह भी मेरे लिए नयी थी इसलिए मुझे सही से रास्ते का अंदाज़ा नही हो रहा था इसी वजह से जगह-जगह चीज़े मुझसे टकरा रही थी कुछ देर बाद मैं रिज़वाना को आवाज़ लगाता हुआ रसोई के पास आ ही गया.

मैं: रिज़वाना जी कहाँ हो आप

रिज़वाना : (कराहते हुए) मैं यहाँ हूँ आयईयीई....ससिईईई....

मैं : क्या हुआ चोट लगी क्या

रिज़वाना : (रोते हुए) हाँ बहुत ज़ोर से लगी है

मैं : (बर्तनो से टकराते हुए) क्या हुआ चोट कैसे लग गई.

रिज़वाना : नीर उस तरफ नही दूसरी तरफ आओ जहाँ तुम हो वहाँ बर्तन है....

मैं : (घूमते हुए) अच्छा...

रिज़वाना : वो शाम को जो सब्जी गिरी थी ना मैने बाज़ार जाने की जल्दी मे उठाई नही थी बस उस पर ही पैर फिसल गया ऑर मैं गिर गई. मुझसे उठा नही जा रहा.... (रोते हुए)

मैं जैसे ही रिज़वाना के पास पहुँचा मैने नीचे बैठकर अंधेरे मे हाथ इधर-उधर घुमाए तो रिज़वाना के चेहरे से मेरा हाथ टकराया मैने जल्दी से बिना कुछ बोले उसको अपनी गोद मे उठा लिया ऑर खड़ा हो गया.

रिज़वाना : (कराहते हुए) अययईीी.....आराम से...

मैं : अब जाना किस तरफ है

रिज़वाना : तुम चलो मैं बताती हूँ

मैं : क्या पहेलिनुमा घर बनाया है

रिज़वाना : (अपनी दोनो बाजू मेरे गले मे डालते हुए) मैने थोड़ी बनाया है जैसा गवरमेंट. ने मुझे दिया मैने ले लिया.

मैं : इससे अच्छा तो मेरा घर था जहाँ कम से कम हाथ पैर तो नही टकराते थे अंधेरे मे

रिज़वाना : तुमको भी चोट लगी क्या

मैं : थोड़ी सी पैर मे लगी है वो आप चिल्लाई तो मैं घबरा गया कि जाने क्या हुआ है इसलिए जल्दी से आपकी आवाज़ की तरफ भागा बस इसी जल्दी मे मेज़ से पैर टकरा गया.

रिज़वाना : ज़्यादा चोट तो नही लगी

मैं : पता नही मैने देखा नही.

रिज़वाना : यहाँ से अब लेफ्ट घूम जाओ....मेरे कमरे मे चलकर मुझे दिखाओ कितनी चोट लगी है.

मैं : (हँसते हुए) देखोगी कैसे हाथ को हाथ नज़र तो आ नही रहा चोट क्या दिखेगी.

रिज़वाना : फिकर मत करो यहाँ अक्सर लाइट चली जाती है फिर थोड़ी देर मे आ जाती है.

ऐसे ही हम बाते करते हुए धीरे-धीरे रिज़वाना के कमरे मे आ गये ओर रिज़वाना ने ही गेट खोला ऑर फिर मैने रिज़वाना को धीरे से उसके बेड पर रख दिया....

रिज़वाना : (दर्द से कहते हुए) आयईीई... नीर कमर मे ऑर पीछे बहुत दर्द हो रही है हिला भी नही जा रहा.

मैं : अब अंधेरे मे तो कुछ कर भी नही सकते यार लाइट आने दो फिर देखते हैं.

रिज़वाना : अर्रे यार जिस काम के लिए गये थे वो तो किया ही नही.

मैं : कौनसा काम

रिज़वाना : मोमबत्ती यार (हँसते हुए)

मैं : जाने दो कोई बात नही आगे ही मोमबत्ती के चक्कर मे इतना तमाशा हो गया अब ऐसे ही ठीक है. देखा मैने मना किया था ना लेकिन आप ही बोल रही थी कि 2 मिंट का काम है. अब देखो आपका ही काम हो गया (हँसते हुए)

रिज़वाना : (मेरे कंधे पर थप्पड़ मारते हुए) एक तो मुझे चोट लग गई है उपर से मेरा मज़ाक उड़ा रहे हो जाओ मैं नही बोलती तुमसे.

मैं : अच्छा-अच्छा माफी डॉक्टरनी साहिबा.

रिज़वाना : जाओ माफ़ किया... अच्छा ये तुम मुझे डॉक्टरनी साहिबा क्यो बुलाते रहते हो

मैं : अब आप डॉक्टरनी हो तो डॉक्टर ही बुलाउन्गा ना

रिज़वाना : डॉक्टर मैं सिर्फ़ हेड-क्वार्टेर के मेरे क्लिनिक मे हूँ यहाँ घर पर नही

मैं : तो फिर मैं यहाँ आपको क्या बुलाऊ.

रिज़वाना : म्म्म्मयम सिर्फ़ रिज़वाना बुला सकते हो

मैं : अच्छा तो सिर्फ़ रिज़वाना जी अब ठीक है (हँसते हुए)

रिज़वाना : (हँसते हुए) नीर तुम जानते हो आज बहुत मुद्दत के बाद मैने इतनी खुशी पाई है तुम क्या आए मेरी जिंदगी मे ऐसा लगता है जिंदगी फिर से रोशन हो गई.

मैं : मैने भी आज पहली बार इतनी मस्ती की है.

रिज़वाना : (कराहते हुए) आहह मेरी पीठ सस्सस्स

मैं : क्या हुआ बहुत दर्द है क्या.

रिज़वाना : अगर कमर को हिलाती हूँ तो दर्द होता है वैसे ठीक है

मैं : रूको लगता है कमर अटक गई है.

रिज़वाना : मुझे भी ऐसा ही लगता है.... एक काम करो मेरी कमर को झटका दो ठीक हो जाएगी.

मैं : ठीक है आप मेरा सहारा लेके खड़ी होने की कोशिश करे

रिज़वाना : मैं गिर जाउन्गी नीर

मैं : मैं हूँ ना फिकर मत करो इस बार पकड़ लूँगा आपको. नही गिरोगि बस मेरा हाथ मत छोड़ना.

रिज़वाना : ठीक है

उसके बाद रिज़वाना मेरे हाथ के सहारे बेड पर धीरे-धीरे घुटने के बल खड़ी होने लगी लेकिन उसको खड़े होने मे दर्द हो रहा था इसलिए मैने अपने दोनो हाथ उसकी कमर मे डाले ओर उसकी दोनो बाजू अपने गर्दन पर लपेट ली अब मैने झटके से रिज़वाना को खड़ा किया...

रिज़वाना : आअहह ससस्स

मैं : अब कैसा लग रहा है

रिज़वाना : पहले से बेहतर है लेकिन दर्द अभी भी हल्की-हल्की हो रही है.

मैने बिना रिज़वाना से पुछे उसकी पिछे से कमीज़ उठाई ऑर उसकी नंगी पीठ पर हाथ फेरने लगा रिज़वाना को शायद इस तरह मेरे हाथ लगाने की उम्मीद नही थी इसलिए उसको एक झटका सा लगा ऑर वो मुझसे ऑर ज़ोर से चिपक गई. अब मैं उसकी कमर को प्यार से सहला रहा था ऑर वो खामोश होके मेरे गले मे अपनी बाहे डाले घुटने के बल खड़ी थी. कुछ ही देर मे हम दोनो की साँस तेज़ होने लगी ऑर रिज़वाना ने मेरे कंधे पर अपना सिर रख लिया उसकी तेज़ होती सांसो की गरमी मैं अपनी गर्दन पर महसूस कर रहा था. मैने भी इस मोक़े का फायेदा उठाना ही मुनासिब समझा ऑर अपना हाथ उपर की जानिब बढ़ाने लगा. अब मेरा हाथ उसकी ब्रा के स्ट्रॅप के नीचे के तमाम हिस्से की सैर कर रहा था. शायद उसको भी मज़ा आ रहा था इसलिए वो खामोश होके बस मेरे कंधे पर अपना सिर रखकर लेटी हुई थी उसके नाज़ुक होंठों का लांस मुझे अपनी गर्दन पर महसूस हो रहा था. मैं चाहता था कि वो मेरी गर्दन को चूमे लेकिन वो बस मेरी गर्दन से अपने होंठ जोड़े खड़ी थी ऑर आगे नही बढ़ रही थी इसलिए मैने ही पहल करना मुनासिब समझा मैने अब अपने दोनो हाथ उसकी कमीज़ मे डाल लिए ऑर दोनो को उसकी पीठ पर उपर-नीचे घुमाने लगा साथ ही मैने अपनी गर्दन हल्की सी नीच को झुका कर अपने होंठ उसकी गालो पर रख दिया ओर धीरे-धीरे अपने होंठ उसकी गालो पर घुमाने लगा ये अमल शायद उसको भी मज़ा दे रहा था इसलिए उसने अपना चेहरा थोड़ा सा उपर की जानिब कर लिया ताकि मेरे होंठ अच्छे से उसकी गाल को च्छू सके.

Update-35

Rizwana : kya kar rahe ho neer chod do wo mar jayega.

Main : isne chaku kaise lagaya garden par aapki.

Rizwana : (mujhe pichhe khinchte hue) main ab thik hun neer chalo yahan se.

Uske baad lag-bhag khinchti hui rizwana mujhe parking se bahar le aayi. Bahar aake main ruk gaya or ab main kaafi shaant ho chuka tha. maine ruk kar apne dono hath rizwana ki garden ki side par rakh diye or uski garden upar karke uska ghaav dekhne laga wo bhi kisi bache ki tarah mere samne masoom sa chehra liye apni garden uthaye khadi ho gai.

Main : bahut dard ho raha hai kya.

Rizwana : main thik hun neer fikar mat karo. (muskurate hue)

Main : chalo ghar chalkar maraham patti karta hun aapki.

Rizwana : (bina kuch kahe muskurate hue) Hhhmmm

Fir hum dono wapis car ke pass aa gaye or maine apne zameen par geere hue shoping bag uthaye or wo bhi car me rakh diye.

Main : Car main chalau.

Rizwana : (bina kuch bole chaabi meri taraf karke muskurate hue) hhhmmm.

Fir main or rizwana ghar ki taraf nikal gaye poore raste hum khamosh the or rizwana mujhe hi dekhe jaa rahi thi or muskura rahi thi.

Main : kya hua esse kya dekh rahi hain.

Rizwana : kuch nahi..... ek baat puchu....

Main : haa puchhiye....

Rizwana : tumne uss aadmi ko itna kyo maara

Main : marta nahi to kya pyaar karta.... aapki garden par chaaku lagaya usne or dekho kitna khun bhi aa gaya tha aapke.

Rizwana : tumne sirf isliye usko itna maara.

Main : maar khane wale kaam kiye the isliye maara maine usko.

Rizwana : Itni fikar meri aaj tak kisi ne nahi ki. (rote hue)

Main : (gaadi ko break lagate hue) arre rizwana ji aap rone kyo lagi kya hua.

Rizwana : (apne aansoo saaf karte hue) kuch nahi...

Main : (pichhe padi pani ki bottal rizwana ko dete hue) ye lo paani pee lo.

Rizwana : (bottal pakadte hue) shukriya.

Kuch der me wo thik ho gai isliye maine fir car start ki or ghar ki taraf badhna shuru kar diya. lekin rizwana ab bhi mujhe hi dekhe jaa rahi thi or muskura rahi thi. Achanak mujhe khayaal aaya.

Main : rizwana ji....

Rizwana : Hhhmmm

Main : unn kameeno ke chakkar me khana lena to bhul hi gaye (muskurakar)

Rizwana : Aree ha... aapko to bhukh bhi lagi thi....koi baat nahi yahan se left mod lo yahan bhi ek achha resturant hai wahan se le lenge.

Main : thik hai.

Uske baad main or Rizwana resturant chale gaye jahan se hamane khana pack karwa liya or fir hum wapis ghar ki taraf chale gaye. Ghar aake maine pehle sara samaan kamre me rakha or fir rizwana se medical box lekar uske kamre me hi uske jakham par dawayi lagane laga. rizwana mujhe bas dekh kar muskurati rahi. Fir hum dono ne sath khana khaya. Khane ke baad rizwana mere sath baithkar TV dekhne ki zidd karne lagi isliye main bhi uske pass hi baithkar TV dekhne laga. Rizwana or main hum dono sath me baithe TV dekh rahe the lekin koi bhi dhang ka programme nahi aa raha tha isliye hamane kuch der TV dekhne ke baad band kar diya.

Rizwana : tumko neend aa rahi hai kya.

Main : (naa me sir hilate hue) aapko aa rahi hai.

Rizwana : nahi...chalo fir baate karte hain....

Main : achha... jaisi aapki marzi.

Rizwana : (kuch sochte hue) tumko dance aata hai

Main : (naa me sir hilate hue) mujhe ek hi tareeke se hath pair chalana aata hai wo abhi aap kuch der pehle dekh hi chuki hai.

Rizwana : chalo main seekhati hun dusre tareeke se bhi hath pair hilaye jaa sakte hain.(muskurate hue)

Uske baad Rizwana ne ek music chala diya or mujhe apne samne khada kar liya fir mera ek hath apni kamar par rakh diya or dusra hath apne hath me thaam liya or usne apne ek hath mere kandhe par rakh liya or rizwana ne mujhe dheere-dheere hilana shuru kar diya main bhi jaise wo mujhe hila rahi thi hilna shuru ho gaya.

Jab rizwana mere sath mujhse chipak kar khadi thi tab mujhe dance ka nahi uske jism ka mere jism ke sath jude hona jyaadaa maza de raha tha. Wo bade pyaar mere kandhe par hath fer rahi or mera hath khud-b-khud uski kamar ko sehlaa raha tha maze se meri aankhen band ho gai thi or maine usse kamar se pakad kar apne or kareeb kar liya jisse uske nukiley mamme mujhe apni chaatee par chubhte hue mehsoos hone lage isse mujhe bhi meri jeans pant me halchal si mehsoos hone lagi lekin jeans itni tight thi ki mera lund sahi se khada nahi ho paa raha tha bas jeans ke andar hi machal raha tha or bahar aane ka rasta talaash kar raha tha. kuch der hum aise hi ek dusre ka hath thaame nachte rahe fir usne mera hath chod diya or apni dono baaju mere gale me kisi haar ki tarah daal di aise hi meri aankhon me dekhti hui apna or mera badan dheere-dheere hilane lagi.

Rizwana : ek baat bolu

Main : Hhhmmm

Rizwana : Tumhari aankhen bahut achhi hai nasheeli si.. (muskurate hue)

Main : Mujhe to aapki aankhen pasand hai kitni badi-badi hai jaise kisi hirni ki aankhen ho.

Rizwana : (sharmakar nazare jhukate hue) shukriya

Fir kuch der ke liye hum dono khamosh ho gaye or aise hi dance karte rahe. Dance to uske liye tha main to uske jism ki garmi ka maza le raha tha. Hum dono ek dusre se ek dam chipke hue the bas hum dono ke chehre kuch inch ke fasle par the lekin fir bhi hum ek dusre ki saanson ki garami apne chehre par mehsoos kar rahe the. ab mujhse bhi or bardasht nahi ho raha tha isliye main aagey badhne ka soch ki raha tha ki achanak light chali gai or poore kamre me andhera ho gaya jisse hum dono ka dhyaan ek dusre se hatkar andhere ki taraf gaya isliye mere naa chahte hue bhi rizwana mujhse alag ho gai....

Rizwana : Ohhuno fir se light chali gai....tum ruko main roshni ke liye kuch leke aati hun

Main : rehne do na aise hi thik hai andhere me kya nazar aayega

Rizwana : mujhe andhere me darr lagta hai...bas 2 mint me aa rahi hun

Main : thik hai jaldi aana...

Rizwana : bas 2 mint aise gai or aise aayi.

Main kya soch raha tha or kya ho gaya jaise kisi ne mere armaano par paani fer diya ho main apne dil me bijli walo ko gaaliyaan nikaal raha tha ki haramkhoro ne abhi light band karni thi kuch der ruk jate to inke baap ka kya jata tha. poore kamre me charo taraf andhera tha bas khidki se halki si chaand ki roshni kamre ke andar aa rahi thi. wo bhi bahut kam kyonki khidki ke aagey parda laga hua tha. maine socha ki kamre me garami ho rahi hai isliye khidki se parda hata doo taki taazi hawa bhi aa sake or roshni bhi. abhi main parda hatane ke liye ek kadam hi aagey badhaya tha ki achanak mujhe rizwana ki cheekh sunayi di maine foran cheekh ki taraf bhagta hua gaya. ek to andhera tha upar se kuch nazar bhi nahi aa raha tha isliye main niche padi cheejo se takrwata hua deewar ko pakad kar aagey ki taraf badhne laga.

Aawaz rasoyi ki taraf se aayi thi isliye main andaze se uss taraf badh raha tha. Ek to aaj mera yahan pehla din tha upar se jagah bhi mere liye nayi thi isliye mujhe sahi se raste ka andaza nahi ho raha tha issi wajah se jagah-jagah chije mujhse takra rahi thi kuch der baad main rizwana ko awaaz lagata hua rasoyi ke pass aa hi gaya.

Main: rizwana ji kaha ho aap

Rizwana : (karahate hue) main yahan hun aayyiiii....ssiiiii....

Main : kya hua chot lagi kya

Rizwana : (rote hue) haa bahut jor se lagi hai

Main : (bartano se takrate hue) kya hua chot kaise lag gai.

Rizwana : Neer uss taraf nahi dusri taraf aao jahan tum ho wahan bartan hai....

Main : (ghumte hue) achha...

Rizwana : wo shaam ko jo sabji giri thi naa maine bazar jane ki jaldi me uthayi nahi thi bas uss par hi pair fisal gaya or main gir gai. mujhse utha nahi jaa raha.... (rote hue)

Main jaise hi rizwana ke pass pohoncha maine niche baithkar andhere me hath idhar-udhar ghumaye to rizwana ka chehre se mera hath takraya main jaldi se bina kuch bole usko apni god me utha liya or khada ho gaya.

Rizwana : (karahate hue) ayyyiii.....araam se...

Main : ab jana kis taraf hai

Rizwana : tum chalo main batati hun

Main : kya pahelinuma ghar banaya hai

Rizwana : (apni dono baaju mere gale me dalte hue) maine thodi banaya hai jaisa govt. ne mujhe diya maine le liya.

Main : isse achha to mera ghar tha jahan kam se kam hath pair to nahi takraate the andhere me

Rizwana : tumko bhi chot lagi kya

Main : thodi si pair me lagi hai wo aap chillayi to main ghabra gaya ki jane kya hua hai isliye jaldi se aapki aawaz ki taraf bhaaga bas isi jaldi me mez se pair takra gaya.

Rizwana : jyaadaa chot to nahi lagi

Main : pata nahi maine dekha nahi.

Rizwana : yahan se ab left ghum jao....mere kamre me chalkar mujhe dikhao kitni chot lagi hai.

Main : (hansate hue) dekhogi kaise hath ko hath nazar to aa nahi raha chot kya dikhegi.

Rizwana : fikar mat karo yahan aksar light chali jati hai fir thodi der me aa jati hai.

Aise hi hum baate karte hue dheere-dheere rizwana ke kamre me aa gaye or rizwana ne hi gate khola or fir maine rizwana ko dheere se uske bed par rakh diya....

Rizwana : (dard se kahate hue) ayyiiii... Neer kamar me or piche bahut dard ho rahi hai hila bhi nahi jaa raha.

Main : ab andhere me to kuch kar bhi nahi sakte yaar light aane do fir dekhte hain.

Rizwana : arre yaar jis kaam ke liye gaye the wo to kiya hi nahi.

Main : kounsa kaam

Rizwana : mombatti yaar (hansate hue)

Main : jane do koi baat nahi aggey hi mombatti ke chakkar me itna tamasha ho gaya ab aise hi thik hai. dekha maine mana kiya tha na lekin aap hi bol rahi thi ki 2 mint ka kaam hai. ab dekho aapka hi kaam ho gaya (hansate hue)

Rizwana : (mere kandhe par thappad marte hue) ek to mujhe chot lag gai hai upar se mera mazaak udaa rahe ho jao main nahi bolti tumse.

Main : achha-achha maafi doctorni sahiba.

Rizwana : jao maaf kiya... achha ye tum mujhe doctorni sahiba kyo bulate rehta ho

Main : ab ap doctorni ho to doctor hi bulanga na

Rizwana : doctor main sirf head-quaters ke mere clinic me hun yahan ghar par nahi

Main : to fir main yahan aapko kya bulau.

Rizwana : mmmmm sirf rizwana bula sakte ho

Main : achha to sirf rizwana ji ab thik hai (hansate hue)

Rizwana : (hansate hue) Neer tum jante ho aaj bahut muddat ke baad maine itni khushi paayi hai tum kya aaye meri jindagi me aisa lagta hai jindagi fir se roshan ho gai.

Main : maine bhi aaj pehli baar itni masti ki hai.

Rizwana : (karahate hue) aahhhh meri peeth sssss

Main : kya hua bahut dard hai kya.

Rizwana : agar kamar ko hilati hun to dard hota hai waise thik hai

Main : ruko lagta hai kamar atak gai hai.

Rizwana : mujhe bhi aisa hi lagta hai.... ek kaam karo meri kamar ko jhatka do thik ho jayegi.

Main : thik hai aap mera sahara leke khadi hone ki koshish kare

Rizwana : main gir jaungi Neer

Main : main hun naa fikar mat karo iss bar pakad lunga aapko. Nahi girogi bas mera hath mat chodna.

Rizwana : thik hai

Uske baad rizwana mere hath ke sahare bed par dheere-dheere ghutne ke bal khadi hone lagi lekin usko khade hone me dard ho raha tha isliye maine apne dono hath uski kamar me daale or uski dono baaju apne garden par lapet lee ab maine jhatke se rizwana ko khada kiya...

Rizwana : aaahhhhh ssss

Main : ab kaisa lag raha hai

Rizwana : pehle se behtar hai lekin dard abhi bhi halki-halki ho rahi hai.

Maine bina rizwana se puchhe uski pichhe se kameez uthayi or uski nangi peeth par hath ferne laga rizwana ko shayad iss tarah mere hath lagane ki ummeed nahi thi isliye usko ek jhatka sa laga or wo mujhse or jor se chipak gai. Ab main uski kamar ko pyaar se sehlaa raha tha or wo khamosh hoke mere gale me apni baahe daale ghutne ke bal khadi thi. kuch hi der me hum dono ki saans tez hone lagi or rizwana ne mere kandhe par apna sir rakh liya uski tez hoti saanso ki garami main apni garden par mehsoos kar raha tha. maine bhi iss moqe ka fayeda uthana hi munasib samjha or apna hath upar ki janib badhane laga. ab mera hath uski bra ke strap ke niche ke tamaam hisse ki sair kar raha tha. shayad usko bhi maza aa raha tha isliye wo khamosh hoke bas mere kandhe par apna sir rakhkar leti hui thi uske nazuk honthon ka lams mujhe apni garden par mehsoos ho raha tha. Main chahta tha ki wo meri garden ko chume lekin wo bas meri garden se apne honth jode khadi thi or aagy nahi badh rahi thi isliye maine hi pehal karna munasib samjha maine ab apne dono hath uski kameez me daal liye or dono ko uski peeth par upar-niche ghumane laga sath hi maine apni garden halki si nich ko jhuka kar apne honth uski gaalo par rakh diya or dheere-dheere apne honth uski gaalo par ghumane laga ye amal shayad usko bhi maza de raha tha isliye usne apna chehra thoda sa upar ki janib kar liya taki mere honth achhe se uski gaal ko chhu sake.

 
अपडेट-36

कुछ देर ऐसे ही करने के बाद मुझसे बर्दाश्त करना मुश्किल हो गया था इसलिए मैने धीरे-धीरे उसकी गाल को चूमना शुरू कर दिया. अब मेरे हाथ नीचे उसकी कमर पर अपना कमाल दिखा रहे थे ऑर होंठ उसकी गाल पर. उसकी तरफ से कोई विरोध ना होने पर मैने आगे बढ़ने का सोचा ऑर उसकी गाल से होता हुआ साइड से उसके होंठों को भी चूमने लगा पहले तो उसने अपने होंठ सख्ती से बंद कर लिए लेकिन बार-बार मेरे वहाँ चूमने पर उसने भी अपने होंठों को थोड़ा सा खोल दिया. कुछ देर ऐसे ही करने के बाद मैने अपना एक हाथ आगे की तरफ किया ऑर उसके पेट को सहलाने लगा उसका नर्म-ओ-नाज़ुक पेट मुझे ऑर भी मज़ा दे रहा था. मेरा ऐसा करना शायद उसके सबर के बाँध को तोड़ने के लिए काफ़ी था उसने अपनी एक बाजू मेरी गर्दन से निकाली ऑर मेरी कमर मे डालकर मुझे ऑर ज़ोर से अपने से चिपका लिया. ऑर अपनी गर्दन को दूसरी तरफ करके मेरे दूसरे कंधे पर रख लिया. शायद अब वो चाहती थी कि मैं उसकी दूसरी गाल को भी वैसे ही चुमू इसलिए मैने वही अमल उसके दूसरे गाल के साथ भी शुरू कर दिया लेकिन इस बार वो खुद अपनी गाल को मेरे होंठों से जोड़ रही थी ऑर कोशिश कर रही थी कि जल्दी से जल्दी मैं उसके होंठों तक आउ लेकिन मैं इस बार उसके गाल को ही चूम रहा था. नीचे मेरा लंड पूरी तरह जाग गया था ऑर जीन्स मे झटपटा रहा था बाहर निकलने के लिए. अब एक नयी चीज़ हुई उसने जो हाथ मेरी कमर पर रखा था पिछे से उसको मेरी टी-शर्ट मे डाल दिया ऑर मेरी पीठ को सहलाने लगी दूसरा हाथ उसका अब भी मेरी गर्दन पर ही लिपटा हुआ था मैने मोक़े की नज़ाकत को समझते हुए अपना हाथ जो उसकी पीठ सहला रहा था उसको थोड़ा उपर की तरफ करने की कोशिश की लेकिन उसकी कमीज़ पेट से बेहद तंग होने की वजह से मेरा हाथ उपर की तरफ नही जा रहा था क्योंकि उसने टाइट फीतिंग का सूट पहना हुआ था. इसलिए मैने उसकी कमीज़ उतारने की कोशिश की लेकिन इस बार उसने मेरा हाथ पकड़ लिया ऑर गर्दन को नही मे हिलाया. लेकिन अब मुझसे सबर करना मुश्किल हो रहा था इसलिए मैने अपने एक हाथ से उसका चेहरा उपर किया ऑर अपने चेहरे के सामने ले आया अब हम दोनो की साँसे एक दूसरे के चेहरे से टकरा रही थी मैने अपनी नाक उसकी नाक से हल्की सी टकराई ऑर फिर पिछे को हो गया उसने जल्दी से मेरा चेहरा अपने दोनो हाथो से पकड़ लिया ऑर मेरे होंठों को पहले हल्के से चूम लिया ऑर फिर बुरी तरह चूसने लगी. अब मैने अपने दोनो हाथ उसकी कमर पर रख लिया ऑर उसने फिर से अपनी दोनो बाजू मेरे गले मे हार की तरफ डाल लिए ऑर लगातार मेरे होंठों को चूसने लगी उसके चूमने मे इतनी क़शिष थी कि मुझे साँस लेने मे भी तक़लीफ़ होने लगी थी इसलिए मैने अपना चेहरा पिछे कर लिया लेकिन उसने फिर से मेरा चेहरा पकड़ लिया ऑर मेरे होंठों पर टूट पड़ी अब उसने अपने दोनो हाथ मेरी टी-शर्ट के गोल गले पर रख लिया जैसे अपने दोनो हाथो को मेरी टी-शर्ट के गले से लटका दिया हो.

मैं समझ चुका था कि अब वो मुकम्मल गरम हो चुकी है इसलिए मैने एक बार फिर उसकी कमीज़ को उपर उठाने की कोशिश की इस बार उसने मेरा हाथ नही पकड़ा लेकिन मेरे होंठों को चूस्ते हुए ही गर्दन को नही मे हिलाने लगी. मैने अपना मुँह पिछे कर लिया उसने फिर से मेरे होंठ चूसने चाहे तो मैने गर्दन मोड़ ली इस बार उसने ज़बरदस्ती मेरी गर्दन को अपने दोनो हाथो से पकड़ा ऑर मेरे फिर से होंठ चूसने लगी साथ ही मेरा एक हाथ पकड़ कर अपने दाएँ मम्मे पर रख दिया. उसके मम्मी को छुते ही मुझे ऑर उसको भी जैसे करेंट सा लगा क्योंकि उसका मम्मे हीना के मम्मों से भी बड़े थे उनको दबाने से ही मम्मो की सख्ती का अंदाज़ा लगाया जा सकता था. मैं अब दोनो हाथो से उसकी कमीज़ के उपर से उसके मम्मे दबा रहा था ऑर वो मेरे होंठ चूस रही थी. तभी अचानक लाइट आ गई. (यक़ीन करो दोस्तो उस वक़्त मुझे इतना गुस्सा आ रहा था बीजली वालो पर कि कोई बीजली बोर्ड का मुलाज़िम सामने होता तो साले का लंड काट कर फैंक देता. कमीनो ने हर बार ग़लत टाइमिंग पर ही एंट्री मारी.कुछ गुस्सा मुझे अपनी किस्मत पर भी आ रहा था कि साला हर बार मेरे साथ ही ऐसा क्यो होता है.) लाइट आने का नतीज़ा ये हुआ कि जो रिज़वाना पूरी-क़शिष से मेरे होंठ चूस रही थी ऑर मुझसे मम्मे मसलवा रही थी वो एक दम रोशनी हो जाने से घबरा गई ऑर मुझसे दूर हो गई ऑर बेड पर बैठकर अपने सिर पर हाथ रख लिया. मैं समझ नही पा रहा था कि रिज़वाना को अचानक क्या हो गया अभी तो ये एक दम ठीक थी.

मैं : क्या हुआ रिज़वाना

रिज़वाना : (परेशान होते हुए)तुम जाओ यहाँ से.

मैं : लेकिन हुआ क्या

रिज़वाना : (चिल्लाते हुए) मैने कहा ना तुम जाओ यहाँ से एक बार मे बात समझ नही आती.

उसका इस तरह मुझ पर चिल्लाना मुझे अच्छा नही लगा इसलिए मैं बिना कोई जवाब दिया उसके कमरे का गेट ज़ोर से दीवार पर मारता हुआ बाहर निकल गया ऑर अपने कमरे मे जाके लेट गया. मेरा दिल बीजली वालो को हज़ार गालियाँ दे रहा था ऑर खुद पर अफ़सोस भी हो रहा था कि मेरे पास 2 इतने हसीन मोक़े आए जो मैने ऐसे ही ज़ाया कर दिए. साथ ही मुझे रिज़वाना का बर्ताव भी परेशान कर रहा था क्योंकि मैने उसको जब भी देखा था मुस्कराते हुए देखा था लेकिन आज अचानक उसको गुस्सा किस बात पर आया आख़िर क्यो उसने मेरे साथ ऐसा बर्ताव किया. मुझे लगा शायद मैने जल्दी कर दी इसलिए वो नाराज़ थी ऑर मेरी सबसे बड़ी ग़लती ये थी कि मैं हर लड़की को फ़िज़ा ऑर हीना जैसा ही समझ रहा था मुमकिन था वो मुझे पसंद नही करती. ऑर आख़िर पसंद करती भी क्यो उसकी नज़र मे मैं एक अपराधी हूँ अनपढ़-गवार हूँ जिसको कपड़े पहनने तक की अक़ल नही ऑर वो खुद इतनी बड़ी डॉक्टर है इतनी खूबसूरत है... भला वो मुझे पसंद क्यो करेगी इसलिए मैने वहाँ रहना मुनासिब ना समझा ऑर अपना बॅग पॅक करने लगा साथ ही जल्दी से अपने गाँव वाले थैले मे से इनस्प्टेक्टर ख़ान का कार्ड निकाला ऑर बेड के पास पड़े फोन से ख़ान का नंबर डायल कर दिया.

ख़ान : हेलो...हाँ रिज़वाना बोलो इस वक़्त कैसे फोन किया.

मैं : जी मैं नीर बोल रहा हूँ.

ख़ान : हाँ नीर बोलो क्या हुआ कुछ चाहिए क्या.

मैं : जी आप मेरे रहने का इंतज़ाम कहीं ओर कर देंगे तो बेहतर होगा.

ख़ान : अर्रे क्या हुआ रिज़वाना ने कुछ कह दिया क्या.

मैं : जी नही उन्होने कुछ नही कहा बस मेरा यहाँ दिल नही लग रहा आप ऐसा करे मुझे मेरे गाँव ही भिजवा दे तो बेहतर होगा यहाँ बड़े लोगो मे मुझे अजीब सा लगता है मैं ठहरा ज़ाहील-गवार भला मेरा यहाँ क्या काम.

ख़ान : कैसी बच्चों जैसी बात कर रहे हो मैने वहाँ तुमको इसलिए रखा है कि कल से तुम्हारी ट्रैनिंग करवा सकूँ ना की तुमको वहाँ छुट्टियाँ बिताने के लिए समझे.

मैं : जी मुझे आपकी हर बात मंज़ूर है लेकिन अब यहाँ नही रहना चाहता आप चाहे तो मैं आपके दफ़्तर मे सोफे पर सो जाउन्गा लेकिन यहाँ मुझे नही रहना.

ख़ान : तुम रिज़वाना से बात कर्वाओ मेरी.

मैं : जी वो अपने कमरे मे सो रही है.

ख़ान : ठीक है फिर सुबह होते ही उसको बोलना मुझसे बात करे. ऑर नीर यार आज की रात तुम कैसे भी वहाँ गुज़ार लो कल मैं तुम्हारा कही ऑर इंतज़ाम कर दूँगा ठीक है.

मैं : जी शुक्रिया.

उसके बाद मैने फोन रख दिया ऑर वही सोफे पर बैठा गर्दन नीचे किए आँखें बंद करके अपनी ग़लती पर पछटाने लगा कि मैं यहाँ आया ही क्यो था. तभी मुझे कुछ गीलापन अपने पैर पर महसूस हुआ मैने आँखें खोलकर देखा तो रिज़वाना मेरे पैरो के पास मुँह नीचे करके बैठी थी ऑर शायद रो रही थी इसलिए उसके आँसू मेरे पैरो पर गिर रहे थे.

मैं : अर्रे रिज़वाना जी आप...आप रो रही है....देखिए मैं अपनी ग़लती पर शर्मिंदा हूँ आगे से ऐसी ग़लती नही होगी.

रिज़वाना : (रोते हुए) हाँ ग़लती होगी भी कैसे मुझे छोड़कर जो जा रहे हो.

मैं : जीिीइ...क्या

रिज़वाना : मैने सब सुन लिया है जो तुम ख़ान को बोल रहे थे.

मैं : जी मेरी ग़लती थी इसलिए मेरा यहाँ रहना सही नही है. मुनासिब होगा मैं यहाँ से चला जाउ. आप रोइए मत अगर आप कहेंगी तो मैं अभी चला जाउन्गा लेकिन आप रोइए मत.

रिज़वाना : जाके भी दिखाओ.....(मेरे दोनो हाथ मज़बूती से पकड़ते हुए) मुझे माफ़ नही कर सकते नीर (रोते हुए मेरे घुटने पर अपने चेहरा रखते हुए)

मैं : (कुछ ना समझने वाले अंदाज़ मे) जी आप क्या कह रही है मुझे कुछ समझ नही आ रहा.

रिज़वाना : मैं एक दम घबरा गई थी नीर ऑर उसी चक्कर मे तुम पर गुस्सा हो गई. तुमसे पहले कोई मेरे इतना करीब नही आया कभी इसलिए अचानक जब तुम पास आए तो मैं डर गई थी ओर सब कुछ भूलकर तुम पर गुस्सा हो गई.

मैं : कोई बात नही वैसे भी ग़लती मेरी थी (मुस्कुराते हुए) आप नीचे क्यो बैठी है पहले आप उपर आके बैठो ऑर रोना बंद करो

रिज़वाना : (मेरे साथ बैठते हुए ऑर बिना कुछ बोले मुझे गले लगाते हुए) आम सॉरी नीर मैं अपनी ग़लती पर शर्मिंदा हूँ मुझे तुम पर इस तरह चिल्लाना नही चाहिए था.

मैं : कोई बात नही... वैसे मैं आपसे नाराज़ नही हूँ रिज़वाना जी.

रिज़वाना : फिर मुझे छोड़कर क्यो जाना चाहते हो.

मैं : (रिज़वाना की बाजू अपने गले से निकालते हुए)ताकि वो ग़लती दुबारा ना हो.

रिज़वाना : अगर कोई अब तुम्हारे बिना ना रह सकता हो तो....ऑर अब तुम कुछ भी कर लो मैं मना नही करूँगी मैं डर गई थी सॉरी....

मैं : कोई किसी के बिना नही मरता रिज़वाना जी.....ऑर आपने ठीक किया. मेरे जैसा अनपढ़-गवार आपके किसी काम का नही.

रिज़वाना : (फिर से मुझे गले लगाते हुए) मुझे नही पता तुम मे ऐसा क्या है लेकिन अब मैं तुमसे दूर नही रह सकती. 1 दिन मे जाने तुमने मुझ पर क्या जादू कर दिया है. मुझे छोड़कर मत जाओ प्लीज़....

मैं : लेकिन अब तो मैने ख़ान को बोल दिया है

रिज़वाना : उसकी फिकर तुम मत करो मैं हूँ ना ख़ान को मैं देख लूँगी बस कल तुम नही जाओगे समझे. यही रहोगे मेरे पास....

मैं : जैसी आपकी मर्ज़ी....लेकिन आज के बाद मैं आपके कमरे मे नही आउन्गा.

रिज़वाना : ठीक है मत आना अब मैं भी उस कमरे मे नही जाउन्गी वही रहूंगी जहाँ तुम रहोगे. चलो अब मेरी कसम खाओ मुझे छोड़कर नही जाओगे.

मैं : आप जब जानती है कि जो चीज़ हो नही सकती फिर उसके लिए कसम क्यो दे रही है.

रिज़वाना : तुम ख़ान का काम कर दो फिर तुम आज़ाद हो उसके बाद हम दोनो रह सकते हैं यहाँ हमेशा के लिए.

मैं : जी नही मैं यहाँ नही रह सकता काम होने के बाद मैं मेरे घर चला जाउन्गा मेरे गाँव मे मेरी ये जिंदगी अब उनकी दी हुई है. आज अगर मैं ज़िंदा हूँ तो ये उनका ''अहसान" है मुझ पर.

रिज़वाना : क्या मैं भी उस परिवार का हिस्सा नही बन सकती. मैं तुम्हारे लिए अपना सब कुछ छोड़ने को तेयार हूँ.

मैं : (हँसते हुए) कहना बहुत आसान है रिज़वाना जी लेकिन करना बहुत मुश्किल.

रिज़वाना : ठीक है फिर तुम ख़ान का काम कर दो उसके बाद मैं भी ये नौकरी छोड़ दूँगी जहाँ तुम रखोगे जिस हाल मैं रखोगे मैं रहने को तैयार हूँ. ऑर आज के बाद खुद को अनपढ़-गवार मत कहना.

मैं : लेकिन मेरे पास आपको देने के लिए कुछ भी नही है अपना घर भी नही सब कुछ बाबा का है.

रिज़वाना : कौन कहता है तुम्हारे पास कुछ नही तुम्हारे पास इतना प्यार करने वाला दिल है ऑर एक लड़की को इससे ज़्यादा कुछ नही चाहिए होता. तुम नही जानते नीर इतने साल मैने कैसे गुज़ारे है आज मेरे पास सब कुछ होके भी कुछ नही है. बचपन मे ही माँ-बाप गुज़र गये फिर बड़ी हुई तो डॉक्टर बन गई ऑर अब सारा दिन दूसरो का ख्याल रखती हूँ लेकिन असल मे आज तक किसी ने मेरा ख्याल नही रखा मैं बचपन से अकेली ही रहती आ रही हूँ. आज तुम आए मेरी जिंदगी मे ऑर जैसे मेरा ख्याल रखा ऐसा कभी किसी ने नही किया मेरे लिए. अब मेरी किस्मत देखो एक इंसान मिला जो मेरी इतनी फिकर करता है मेरे लिए लड़ता है ऑर मैने उसको भी नाराज़ कर दिया ऑर अब तुम भी मुझे छोड़कर चले जाओगे. (फिर से रोते हुए)

मैं : नही जाउन्गा अब रोना बंद करो चलो. (रिज़वाना की गाल पर लगे आँसू सॉफ करते हुए)

रिज़वाना : मेरी कसम खाओ.

मैं : अगर लौटकर वापिस आ गया तो नही जाउन्गा अगर नही आ सका तो....

रिज़वाना : (मेरे मुँह पर हाथ रखते हुए) ऐसा मत बोलो (फिर से मुझे गले लगाते हुए)

मैं : अच्छा ठीक है रिज़वाना जी काफ़ी रात हो गई है अब आप सोने जाओ मैं भी सो जाता हूँ सुबह ख़ान ने बुलाया भी है.

रिज़वाना : ठीक है.

वो बिना कुछ बोले उठी ऑर मेरे बिस्तर पर जाके बैठ गई ऑर मैं बस उसको देख रहा था.

मैं : रिज़वाना जी आप यहाँ सोएंगी.

रिज़वाना : (बिना कुछ बोले हाँ मे सिर हिलाते हुए)

मैं : ठीक है फिर मैं यहाँ सो जाता हूँ. (सोफे पर लेट ते हुए)

रिज़वाना : चुप करके यहाँ आओ नही तो मैं फिर से रोने लग जाउन्गी.

मैं : (सोफे से उठते हुए) अब क्या हुआ

रिज़वाना : लाइट ऑफ करो ऑर यहाँ आके लेटो मेरे साथ. (मुस्कराते हुए)

मैं : लेकीन्न्न....

रिज़वाना : लेकिन-वेकीन कुछ नही चलो लाइट ऑफ करके यहाँ आओ.

मैं बिना कुछ बोले गया ऑर लाइट ऑफ करके आ गया ऑर बिना कुछ बोले रिज़वाना के साथ लेट गया रिज़वाना मेरी तरफ मुँह करके लेटी थी ऑर मुस्कुरा रही थी.

रिज़वाना : नीर अभी तक नाराज़ हो.

मैं : नही तो.....क्यो.

रिज़वाना : पास आओ ना मेरे.

मैं : (करवट बदलकर रिज़वाना के करीब जाते हुए) अब ठीक है

रिज़वाना : (मेरे होंठ चूमते हुए) रात को भी जीन्स टी-शर्ट पहनकर सोने का मूड है.

मैं : तो क्या पहनु तुमने ही तो गाँव वाले कपड़े पहन ने से मना किया था.

रिज़वाना : अर्रे आज ही तो इतने सारे कपड़े लेके आए हैं जाओ जाके शॉर्ट्स पहन लो.

मैं : (कुछ ना समझने वाले अंदाज़ मे)शॉर्ट्स क्या...

रिज़वाना : रूको मैं लेकर आती हूँ.

रिज़वाना उठी ऑर जाके मेरे शॉपिंग बॅग्स मे झाँकने लगी 5-6 बॅग्स मे देखने के बाद उसने एक मे हाथ डाला ऑर देखकर मेरी तरफ फेंक दिया.

रिज़वाना : जाओ ये पहन आओ...रात को टाइट कपड़े पहनकर नही सोना चाहिए.

मैं : अच्छा... (उठकर बाथरूम मे जाते हुए)

जब मैं कपड़े बदलकर वापिस आया तो रिज़वाना एक चद्दर लिए लेटी हुई थी.

मैं : अर्रे इतनी गर्मी मे चद्दर क्यो ली है.

रिज़वाना : पास आओगे तो पता चलेगा ना...

मैं : (बिना कुछ बोले बेड पर लेट ते हुए) अब ठीक है.

रिज़वाना : (मेरी चेस्ट पर हाथ फेरते हुए) एम्म्म बॉडी अच्छी बनाई है.

मैं : शुक्रिया.

रिज़वाना : चलो अब तुम भी चद्दर मे ही आ जाओ.

मैं : क्यो...

रिज़वाना : आओगे तो पता चलेगा ना.

Update-36

Kuch der aise hi karne ke baad mujhse bardasht karna mushkil ho gaya tha isliye maine dheere-dheere uski gaal ko chumna shuru kar diya. ab mere hath niche uski kamar par apna kamaal dikha rahe the or honth uski gaal par. Uski taraf se koi virodh na hone par maine aagey badhne ka socha or uski gaal se hota hua side se uske honthon ko bhi chumne laga pehle to usne apne honth sakhti se band kar liye lekin bar-bar mere wahan chumne par usne bhi apne honthon ko thoda sa khol diya. kuch der aise hi karne ke baad maine apna ek hath aagey ki taraf kiya or uske pet ko sehlane laga uska narm-o-nazuk pet mujhe or bhi maza de raha tha. Mera aisa karna shayad uske sabar ke baandh ko todne ke liye kaafi tha usne apni ek baaju meri garden se nikali or meri kamar me daalkar mujhe or jor se apne se chipka liya. or apni garden ko dusri taraf karke mere dusre kandhe par rakh liya. shayad ab wo chahti thi ki main uski dusri gaal ko bhi waise hi chumu isliye maine wahi amal uski dusri gaal ke sath bhi shuru kar diya lekin iss bar wo khud apni gaal ko mere honthon se jod rahi thi or koshish kar rahi thi ki jaldi se jaldi main uske honthon tak aau lekin main iss bar uski gaal ko hi chum raha tha. Niche mera lund poori tarah jaag gaya tha or jeans me jhatpata raha tha bahar nikalne ke liye. Ab ek nayi chij hui usne jo hath meri kamar par rakha tha pichhe se usko meri T-shrt me daal diya or meri peeth ko sehlane lagi dusra hath uska ab bhi meri garden par hi lipata hua tha maine moqe ki nazakat ko samjhte hue apna hath jo uski peeth sehla raha tha usko thoda upar ki taraf karne ki koshish ki lekin uski kameez pet se behad tang hone ki wajah se mera hath upar ki taraf nahi jaa raha tha kyonki usne tight feeting ka suit pehna hua tha. isliye maine uski kameez utarne ki koshish ki lekin iss baar usne mera hath pakad liya or garden ko nahi me hilaya. Lekin ab mujhse sabar karna mushkil ho raha tha isliye maine apne ek hath se uska chehra upar kiya or apne chehre ke samne le aaya ab hum dono ki saanse ek dusre ke chehre se takra rahi thi maine apna naak uski naak se halka sa takraya or fir pichhe ko ho gaya usne jaldi se mera chehra apne dono hatho se pakad liya or mere honthon ko pehle halke se chum liya or fir buri tarah chusne lagi. ab maine apne dono hath uski kamar par rakh liya or usne fir se apni dono baaju mere gale me haar ki taraf daal liye or lagatar mere honthon ko chusne lagi uske chumne me itni qashish thi ki mujhe saans lene me bhi taqleef hone lagi thi isliye maine apna chehra pichhe kar liya lekin usne fir se mera chehra pakad liya or mere honthon par toot padi ab usne apne dono hath meri T-shrt ke gol gale par rakh liya jaise apne dono hatho ko meri T-shrt ke gale se latka diya ho.

Main samajh chuka tha ki ab wo mukammal garam ho chuki hai isliye maine ek baar fir uski kameez ko upar uthane ki koshish ki iss baar usne mera hath nahi pakda lekin mere honthon ko chuste hue hi garden ko nahi me hilane lagi. Maine apna munh pichhe kar liya usne fir se mere honth chusne chahe to maine garden mod lee iss baar usne jabardasti meri garden ko apne dono hatho se pakda or mere fir se honth chusne lagi sath hi mera ek hath pakad kar apne daayen mamme par rakh diya. uske mummy ko chhute hi mujhe or usko bhi jaise current sa laga kyonki uska mamme heena ke mamme se bhi bade the unko dabane se hi mummo ki sakhti ka andaza lagaya jaa sakta tha. main ab dono hatho se uski kameez ke upar se uske mamme daba raha tha or wo mere honth chus rahi thi. Tabhi achanak light aa gai. (Yaqeen karo dosto uss waqt mujhe itna gussa aa raha tha beejli walo par ki koi beejli board ka mulazim samne hota to sale ka lund kaat kar faink deta. kameeno ne har baar galat timming par hi entry maari.kuch gussa mujhe apni kismat par bhi aa raha tha ki sala har baar mere sath hi aisa kyo hota hai.) Light aane ka nateeza ye hua ki jo Rizwana poor-qashish se mere honth chus rahi thi or mujhse mamme masalwa rahi thi wo ek dam roshni ho jane se ghabra gai or mujhse door ho gai or bed par baithkar apne sir par hath rakh liya. main samajh nahi paa raha tha ki rizwana ko achanak kya ho gaya abhi to ye ek dam thik thi.

Main : kya hua rizwana

Rizwana : (pareshaan hote hue)tum jao yahan se.

Main : lekin hua kya

Rizwana : (chillate hue) maine kaha naa tum jao yahan se ek baar me baat samajh nahi aati.

Uska iss tarah mujh par chillana mujhe achha nahi laga isliye main bina koi jawab diya uske kamre ka gate jor se deewar par marta hua bahar nikal gaya or apne kamre me jake let gaya. Mera dil beejli walo ko hazaar gaaliyaan de raha tha or khud par afsos bhi ho raha tha ki mere pass 2 itne haseen moqe aaye jo maine aise hi zaya kar diye. Sath hi mujhe rizwana ka bartaav bhi pareshaan kar raha tha kyonki maine usko jab bhi dekha tha muskrate hue dekha tha lekin aaj achanak usko gussa kiss baat par aaya akhir kyo usne mere sath aisa bartaav kiya. Mujhe laga shayad maine jaldi kar di isliye wo naraz thi or meri sabse badi galati ye thi ki main har ladki ko fiza or heena jaisa hi samajh raha tha mumkin tha wo mujhe pasand nahi karti. Or akhir pasand karti bhi kyo uski nazar me main ek apradhi hun anpadh-gawaar hun jisko kapde pehanne tak ki aqal nahi or wo khud itni badi doctor hai itni khubsurat hai... bhala wo mujhe pasand kyo karegi isliye maine wahan rehna munasib na samjha or apna bag pack karne laga sath hi jaldi se apne gaav wale thaile me se Insptector khaan ka card nikala or bed ke pass pade phone se khan ka number dail kar diya.

Khan : hallo...ha rizwana bolo iss waqt kaise phone kiya.

Main : ji main Neer bol raha hun.

Khan : haa Neer bolo kya hua kuch chahiye kya.

Main : ji aap mere rehne ka intezaam kahi or kar denge to behtar hoga.

Khan : arre kya hua rizwana ne kuch keh diya kya.

Main : ji nahi unhone kuch nahi kaha bas mera yahan dil nahi lag raha aap aisa kare mujhe mere gaav hi bhijwa de to behtar hoga yahan bade logo me mujhe ajeeb sa lagta hai main thahra zahil-gawaar bhala mera yahan kya kaam.

Khan : kaisi bacho jaisi baat kar rahe ho maine wahan tumko isliye rakha hai ki kal se tumhari training karwa saku na ki tumko wahan chhuttiyan bitane ke liye samjhe.

Main : ji mujhe aapki har baat manzoor hai lekin ab yahan nahi rehna chahta aap chahe to main aapke daftar me sofe par so jaunga lekin yahan mujhe nahi rehna.

Khan : tum rizwana se baat karwao meri.

Main : ji wo apne kamre me so rahi hai.

Khan : thik hai fir subah hote hi usko bolna mujhse baat kare. Or Neer yaar aaj ki raat tum kaise bhi wahan guzaar lo kal main tumhara kahi or intezaam kar dunga thik hai.

Main : ji shukriya.

Uske baad maine phone rakh diya or wahi sofe par baitha garden niche kiye aankhen band karke apni galati par pachhtane laga ki main yahan aaya hi kyo tha. Tabhi mujhe kuch geelapan apne pair par mehsoos hua maine aankhen kholkar dekha to rizwana mere pairo ke pass munh niche karke baithi thi or shayad rou rahi thi isliye uske aansoo mere pairo par gir rahe the.

Main : arre rizwana ji aap...aap rou rahi hai....dekhiye main apni galati par sharminda hun aagey se aisi galati nahi hogi.

Rizwana : (rote hue) haa galati hogi bhi kaise mujhe chodkar jo jaa rahe ho.

Main : jiiii...kya

Rizwana : maine sab sunn liya hai jo tum khan ko bol rahe the.

Main : ji meri galati thi isliye mera yahan rehna sahi nahi hai. munasib hoga main yahan se chala jau. aap royiye mat agar aap kahengi to main abhi chala jaunga lekin aap royiye mat.

Rizwana : jaake bhi dikhao.....(mere dono hath mazbooti se pakdate hue) mujhe maaf nahi kar sakte Neer (rote hue mere ghutne par apne chehra rakhte hue)

Main : (kuch na samjhne wale andaaz me) ji aap kya keh rahi hai mujhe kuch samajh nahi aa raha.

Rizwana : main ek dam ghabra gai thi Neer or usi chakkar me tum par gussa ho gai. tumse pehle koi mere itna kareeb nahi aaya kabhi isliye achanak jab tum pass aaye to main darr gai thi or sab kuch bhulkar tum par gussa ho gai.

Main : koi baat nahi waise bhi galati meri thi (muskurate hue) aap niche kyo baithi hai pehle aap upar aake baitho or rona band karo

Rizwana : (mere sath baithe hue or bina kuch bole mujhe gale lagate hue) Am sorry Neer main apni galati par sharminda hun mujhe tum par iss tarah chillana nahi chaiye tha.

Main : Koi baat nahi... waise main aapse naraz nahi hun rizwana ji.

Rizwana : fir mujhe chodkar kyo jana chahte ho.

Main : (rizwana ki baaju apne gale se nikalte hue)taaki wo galti dubara na ho.

Rizwana : Agar koi ab tumhare bina naa reh sakta ho to....Or ab tum kuch bhi kar lo main mana nahi karungi main darr gai thi sorry....

Main : koi kisi ke bina nahi marta rizwana ji.....or aapne thik kiya. mere jaisa anpadh-gawaar aapke kisi kaam ka nahi.

Rizwana : (fir se mujhe gale lagate hue) mujhe nahi pata tum me aisa kya hai lekin ab main tumse door nahi reh sakti. 1 din me jane tumne mujh par kya jadu kar diya hai. mujhe chodkar mat jao please....

Main : lekin ab to maine khan ko bol diya hai

Rizwana : uski fikar tum mat karo main hun naa khan ko main dekh lungi bas kal tum nahi jaoge samjhe. yhi rahoge mere pass....

Main : jaisi apki marzi....lekin aaj ke baad main apke kamre me nahi aaunga.

Rizwana : thik hai mat aana ab main bhi uss kamre me nahi jaungi wahi rahungi jahan tum rahoge. Chalo ab meri kasam khao mujhe chodkar nahi jaoge.

Main : aap jab janti hai ki jo chij ho nahi sakti fir uske liye kasam kyo de rahi hai.

Rizwana : tum khan ka kaam kar do fir tum azaad ho uske baad hum dono reh sakte hain yahan hamesha ke liye.

Main : ji nahi main yahan nahi reh sakta kaam hone ke baad main mere ghar chala jaunga mere gaav me meri ye jindagi ab unki di hui hai. Aaj agar main zinda hun to ye unka ''Ahsaan" hai mujhe par.

Rizwana : kya main bhi uss parivaar ka hissa nahi ban sakti. Main tumhare liye apna sab kuch chodne ko teiyaar hun.

Main : (hansate hue) kehna bahut asaan hai rizwana ji lekin karna bahut mushkil.

Rizwana : thik hai fir tum khan ka kaam kar do uske baad main bhi ye naukari chod dungi jahan tum rakhoge jis haal main rakhoge main rehne ko teiyaar hun. Or aaj ke baad khud ko anpadh-gawaar mat kehna.

Main : lekin mere pass apko dene ke liye kuch bhi nahi hai apna ghar bhi nahi sab kuch baba ka hai.

Rizwana : koun kehta hai tumhare pass kuch nahi tumhare pass itna pyaar karne wala dil hai or ek ladki ko isse jyaadaa kuch nahi chahiye hota. tum nahi jante Neer itne saal maine kaise guzaare hai aaj mere pass sab kuch hoke bhi kuch nahi hai. Bachpan me hi maa-baap guzar gaye phir badi hui to doctor ban gai or ab sara din dusro ka khyaal rakhti hun lekin asal me aaj tak kisi ne mera khyaal nahi rakha main bachpan se akeli hi rehti aa rahi hun. Aaj tum aaye meri jindagi me or jaise mera khyaal rakha aisa kabhi kisi ne nahi kiya mere liye. ab meri kismat dekho ek insaan mila jo meri itni fikar karta hai mere liye ladta hai or maine usko bhi naraz kar diya or ab tum bhi mujhe chodkar chale jaoge. (fir se rote hue)

Main : nahi jaunga ab rona band karo chalo. (rizwana ki gaal par lage aansu saaf karte hue)

Rizwana : meri kasam khao.

Main : agar lautkar wapis aa gaya to nahi jaunga agar nahi aa saka to....

Rizwana : (mere munh par hath rakhte hue) aisa mat bolo (fir se mujhe gale lagate hue)

Main : achha thik hai Rizwana ji kaafi raat ho gai hai ab aap sone jao main bhi so jata hun subah khan ne bulaya bhi hai.

Rizwana : thik hai.

Wo bina kuch bole uthi or mere bistar par jake baith gai or main bas usko dekh raha tha.

Main : rizwana ji aap yahan soyengi.

Rizwana : (bina kuch bole haa me sir hilate hue)

Main : thik hai fir main yahan so jata hun. (sofe par let te hue)

Rizwana : chup karke yahan aao nahi to main fir se rone lag jaungi.

Main : (sofe se uthte hue) ab kya hua

Rizwana : light off karo or yahan aake leto mere sath. (muskrate hue)

Main : Lekinnn....

Rizwana : lekin-wekin kuch nahi chalo light off karke yahan aao.

Main bina kuch bole gaya or light off karke aa gaya or bina kuch bole rizwana ke sath let gaya rizwana meri taraf munh karke leti thi or muskura rahi thi.

Rizwana : Neer abhi tak naraz ho.

Main : nahi tooo.....kyo.

Rizwana : pass aao na mere.

Main : (karwat badalkar rizwana ke kareeb jate hue) ab thik hai

Rizwana : (mere honth chumte hue) Raat ko bhi jeans T-shrt pehankar sone ka mood hai.

Main : to kya pehnu tumne hi to gaav wale kapde pehan ne se mana kiya tha.

Rizwana : arre aaj hi to itne sare kapde leke aaye hain jao jake shorts pehan lo.

Main : (kuch na samajhne wale andaaz me)shorts kya...

Rizwana : ruko main lekar aati hun.

Rizwana uthi or jake mere shoping bags me jhankne lagi 5-6 bags me dekhne ke baad usne ek me hath dala or dekhkar meri taraf fenk diya.

Rizwana : jao ye pehan aao...raat ko tight kapde pehankar nahi sona chahiye.

Main : Achha... (uthkar bathroom me jate hue)

Jab main kapde badalkar wapis aaya to rizwana ek chaddar liye leti hui thi.

Main : arre itni garmi me chaddar kyo lee hai.

Rizwana : pass aaoge to pata chalega naa...

Main : (bina kuch bole bed par let te hue) ab thik hai.

Rizwana : (meri chest par hath ferte hue) mmmm body achhi banayi hai.

Main : shukriya.

Rizwana : chalo ab tum bhi chaddar me hi aa jao.

Main : kyo...

Rizwana : aaoge to pata chalega naa.

 


अपडेट-37

मैं बिना कुछ बोले रिज़वाना के साथ चद्दर के अंदर आके लेट गया ऑर अंदर जाते ही मुझे एक झटका सा लगा क्योंकि रिज़वाना ने अंदर कुछ नही पहना था ऑर एक दम नंगी थी. वो मेरे चद्दर के अंदर आते ही मुझसे लिपट गई उसकी बड़ी ऑर ठोस छातीया मेरे सीने मे धँसने लगी उसके निपल एक दम सख़्त हुए पड़े थे जो मुझे अपने सीने पर महसूस हो रहे थे. उसके नाज़ुक जिस्म का अहसास मिलते ही मुझ पर एक अजीब सी मदहोशी छाने लगी ऑर मैने उसको अपनी बाहो मे जाकड़ लिया. अब इस बार वो मेरी गाल को चूम रही थी ऑर मेरी छाती पर हाथ फेर रही थी. धीरे-धीरे वो मेरे उपर आके लेट गई ऑर मेरे चेहरे को चूमने लगी नीचे मेरा लंड फिर से जाग गया था ऑर शॉर्ट्स मे टेंट बनाए खड़ा हो गया था. जिसको रिज़वाना ने अपनी जाँघो मे क़ैद कर रखा था. अब वो धीरे-धीरे मेरी गालो से होते हुए मेरी गर्दन पर चूम रही थी ऑर नीचे की तरफ जा रही थी कुछ ही देर मे वो मेरी छाती पर आ गई ऑर चूमने लगी.

मुझ पर एक अजीब सा मदहोशी का नशा हावी हो रहा था इसलिए मैने उसको कमर से पकड़ लिए ऑर उपर की तरफ खींचा. मेरे इशारे को समझते हुए वो वापिस उपर आ गई ऑर मेरी आँखों मे देखने लगी ऑर मेरे होंठों को चूमने लगी मैने जल्दी से उसे कमर से पकड़कर पलट दिया अब वो मेरे नीचे थी ऑर मैं उसके उपर. मैने उसके होंठ चूसने शुरू किए जिसका उसने भी भरपूर साथ दिया उसका एक हाथ मेरी पीठ को सहला रहा था ऑर दूसरा हाथ मेरे सिर के बालो से खेल रहा था. हम दोनो को ही इस वक़्त कोई होश नही था उसके होंठ चूस्ते हुए मैने उसके एक मम्मे को अपने हाथ मे थाम लिया ऑर उसको दबाने लगा. कुछ देर मेरे होंठों को चूसने के बाद उसने मेरे सिर को अपने एक हाथ से नीचे की तरफ दबाया शायद वो चाहती थी कि मैं अब उसके मम्मों को भी उसके होंठों की तरह चुसू. मैं जल्दी से नीचे जाके किसी जंगली की तरह उसके बड़े-बड़े मम्मों पर टूट पड़ा ऑर उसके निपल्स को ज़ोर-ज़ोर से चूसने लगा. वो किसी बिन पानी की मछली की तरह मेरे नीचे पड़ी तड़प रही थी ऑर सस्सिईइ..... सस्सिईइ..... की आवाज़ निकल रही थी वो कभी मेरा सिर पकड़ कर एक मम्मे पर रखती तो कभी दूसरे मम्मे पर. मैं भी उसके दोंनो मम्मों को बारी-बारी चूस्ता जा रहा था. थोड़ी देर मम्मे चूसने के बाद मैं थोडा ऑर नीचे की तरफ जाने लगा ऑर उसके पेट पर चूमने ऑर चूसने लगा. मैने जैसे ही अपनी ज़ुबान उसकी नाभि (नेवेल) मे डाली उसको एक झटका सा लगा ऑर उसने अपना पेट अंदर की तरफ खींच लिया ऑर मेरा सिर पकड़ कर अपने पेट पर दबा दिया शायद उसको भी मज़ा आ रहा था कुछ देर उसकी नाभि को चूसने चाटने के बाद मैं ऑर नीचे जाने लगा ऑर उसकी चूत के उपर जहाँ बाल (हेर्स) थे वहाँ चूमने लगा मेरा ऐसा करने से उसने अपनी दोनो टांगे आपस मे जोड़ ली. मैने एक झलक गर्दन उठाके उपर की तरफ देखा तो उसकी आँखें बंद थी मैने उसकी दोनो जाँघो पर अपने हाथ रखे ऑर धीरे-धीरे उन्हे खोलने लगा मेरा इशारा मिलते ही वो किसी चाबी लगे खिलोने की तरह अपनी दोनो टांगे खोलती चली गई उसकी चूत एक दम सॉफ ऑर क्लीन थी उस पर बाल का कोई नामो-निशान नही था आज तक मैने जितनी भी चूत को चोदा था सब पर जंगल उगा हुआ था यहाँ तक कि हीना की चूत पर भी थोड़े-थोड़े बाल थे लेकिन रिज़वाना की चूत एक दम सॉफ ऑर गोरी चिट्टी थी. अब मैने अपना मुँह सीधा उसकी चूत पर रखा ऑर वहाँ चूम लिया. उसकी चूत लगातार पानी छोड़ने की वजह से बहुत गीली हो गई थी ऑर मेरे चूमने से कुछ पानी मेरे होंठों पर भी लग गया था. लेकिन मेरा चूत पर चूमना रिज़वाना के लिए किसी झटके से कम नही था वो एक दम उच्छल सी गई ऑर अपना सिर उपर की तरफ उठा दिया. मैने अपना एक हाथ उसकी छाती पर रख कर उससे फिर से लिटा दिया ऑर वापिस उसकी चूत को चूमने लगा उसकी टांगे काँपने लगी थी ऑर बार-बार वो अपनी टांगे बंद करने की कोशिश कर रही थी लेकिन मैने उसकी दोनो टाँगो को मज़बूती से पकड़ रखा था.

कुछ देर बाद जब वो थोड़ी ठीक हो गई तो मैने अपना मुँह खोला ओर उसकी पूरी चूत को अपने मुँह मे भर लिया ओर चूसने लगा उसके मुँह से एक जोरदार सस्स्स्सस्स ऊहह की आवाज़ निकली ऑर उसने मेरा सिर अपनी चूत पर दबा दिया साथ ही अपनी गान्ड को उपर की तरफ उठाने लगी. मैं अब लगातार उसकी चूत को चूस रहा था ऑर उसका एक हाथ ने सख्ती से मुझे मेरे बालो से पकड़ रखा था ऑर अपनी चूत पर दबा रही थी कुछ देर चूसने के बाद उसके जिस्म ने एक झटका खाया फिर दूसरा झटका ऑर ऐसे ही झटके खाती हुई उसने हवा मे अपनी गान्ड उपर को उठा ली ओर कुछ देर ऐसे ही रहने के बाद वो एक दम से बेड पर गिर गई ऑर तेज़-तेज़ साँस लेने लगी शायद वो फारिग हो गई थी.

अब उसने मुझे मेरे बालो से पकड़ा ओर उपर की तरफ खींचा मैं जैसे ही उपर को हुआ वो फिर से मेरे होंठों पर टूट पड़ी ऑर बेतहाशा मुझे चूमने ऑर मेरे होंठ चूसने लगी. शायद उसको ऐसा करने से बे-ईतेहाँ मज़ा आया था कुछ देर मुझे चूमने के बाद उसने अपने हाथ नीचे किया ऑर पिछे से मेरी शॉर्ट्स को नीचे कर दिया ऑर मेरी गान्ड पर अपना हाथ फेरने लगी. फिर अपना हाथ आगे लाकर आगे से भी मेरे शॉर्ट्स को नीचे कर दिया ऑर फिर अपने पैर की मदद से शॉर्ट्स को मेरी टाँगो से आज़ाद कर दिया अब हम दोनो सिर्फ़ एक चद्दर मे क़ैद थे उसने अपनी टांगे फैलाई हुई थी ऑर मेरा लंड सीधा उसकी चूत के मुँह पर अपनी दस्तक दे रहा था. उसके होंठ चूस्ते हुए ही मैने अपना हाथ नीचे किया ऑर अपना लंड पकड़कर निशाने पर रख दिया. उसने जल्दी से अपना मुँह मेरे होंठों से आज़ाद किया ऑर मेरे कान मे धीरे से बोली....

रिज़वाना : नीर आराम से करना मैने पहले कभी किया नही.

मैं : कभी भी नही.

रिज़वाना : (मुस्कुरा कर ना मे सिर हिलाते हुए) उऊहहुउऊ.

मैने फिर से उसके होंठों को अपने होंठों मे क़ैद कर लिया ओर धीरे से अपने लंड का दबाव उसकी चूत की छेद पर दिया लेकिन उसकी चूत का छेद इतना तंग था कि मेरा लंड फिसलकर उपर की तरफ चला गया मैने फिर से अपने लंड पर ढेर सारा थूक लगाया ऑर फिर लंड को निशाने पर रखा लेकिन लंड फिर से फिसल कर उपर को चला गया.

मैं : तुम पकड़कर खुद डालो.

रिज़वाना : (मुस्कुरा कर) अच्छा...

रिज़वाना ने मेरे लंड को पकड़ा ओर धीरे से मेरे कान मे बोली.

रिज़वाना : ये तो बहुत बड़ा है अंदर कैसे जाएगा.

मैं : चला जाएगा पहली बार तक़लीफ़ होगी फिर आराम से चला जाएगा.

रिज़वाना : मुझे मत सिख़ाओ मैं डॉक्टर हूँ. लेकिन नीर ये सच मे बड़ा है ऑर मोटा भी ज़्यादा लग रहा है बहुत दर्द होगा.

मैं : मैं आराम से करूँगा.

रिज़वाना : ठीक है जल्दी मत करना प्लज़्ज़्ज़.

फिर मैने अपने लंड को निशाने पर रखा ऑर इस बार ज़रा ज़ोर से झटका दिया जिससे लंड की टोपी अंदर चली गई ऑर रिज़वाना ने एक सस्स्सस्स के साथ अपनी आँखें बंद कर ली अब मैं कुछ देर रुका ऑर फिर से एक झटका दिया इस बार थोड़ा सा ऑर लंड अंदर गया ऑर कही जाके अटक गया मैं ज़ोर लगा रहा था लेकिन अंदर नही जा रहा था मैने अपना लंड बाहर निकाला उस पर फिर से थूक लगाया ऑर इस बार ज़रा ज़ोर से झटका दिया इस बार लंड कुछ आगे चला गया लेकिन रिज़वाना की दर्द से चीख निकल गई सस्स्स्सस्स आआययईीीई बहुत दर्द हो रहा है नीर जल्दी बाहर निकालो (रोते हुए) मेरी जान निकल रही है प्लज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़.... उसने अपने दोनो हाथो के बड़े-बड़े नाख़ून मेरे कंधो मे गढ़ा दिए. जिससे मुझे भी बेहद दर्द हुआ.

मैं : बस हो गया इतना ही दर्द था अब नही होगा.

रिज़वाना : एक बार बाहर निकालो प्ल्ज़्ज़ मेरी दर्द से जान निकल रही है.

मैने बिना कुछ बोले लंड बाहर निकाल लिया ऑर रिज़वाना लगातार रोए जा रही थी मैं बस उसके उपर लेटा उसको चुप करवा रहा था ऑर उसको चूम रहा था. वो काफ़ी देर ऐसे ही रोती रही.

रिज़वाना : मेरा मुँह सूख रहा है प्यास लगी है

मैने बिना कुछ बोले पास पड़ा पानी का ग्लास उठाया ऑर पानी को मुँह मे भर लिया ऑर अपने होंठ उसके होंठों पर रख दिए वो दर्द से कराह रही थी ऑर सस्स...सस्स कर रही थी मैने अपने होंठ जैसे ही उसके होंठों पर रखे तो उसने अपनी आँखें खोल दी अब मैं अपने मुँह वाला पानी उसके मुँह मे गिराने लगा ऑर वो बिना कोई हरकत किए वो पानी पीने लगी जब पानी ख़तम हो गया तो मैने ग्लास उसको दिया ताकि वो पानी पी सके.

रिज़वाना : ग्लास से नही मुँह से पिलाओ.

मैं कुछ देर उसको ऐसे ही अपने मुँह मे भरकर पानी पिलाता रहा उसको शायद मेरा ऐसा करना बहुत अच्छा लगा था अब वो भी मुस्कुरा रही थी ऑर आराम से पानी पी रही थी.

रिज़वाना : बसस्स अब आगे भी ऐसे ही पानी पिया करूँगी (मुस्कुराते हुए)

मैं : अब दर्द ठीक है

रिज़वाना : दर्द अब पहले से कुछ काम है लेकिन अभी भी बहुत तेज़ जलन हो रही है अंदर

मैं : एक बार पूरा डाल लोगि फिर दर्द नही होगा.

रिज़वाना : मैने बोला भी था आराम से करना लेकिन तुम तो एक दम जंगली हो.

मैं बिना कुछ बोले उसको देखता रहा ऑर उसके होंठ चूमकर अपना लंड फिर से निशाने पर रखा ऑर हल्का सा झटका दिया अब लंड टोपी से थोड़ा ऑर आगे तक बिना कोई रुकावट अंदर चला गया लेकिन रिज़वाना को अभी भी दर्द हो रहा था.

रिज़वाना : कुछ देर ऐसे ही रहो जब दर्द ठीक हो जाएगा फिर हिलाना अंदर.

मैं : अच्छा.

कुछ देर मैं ऐसे ही अंदर लंड डाले उसके उपर पड़ा रहा ऑर हम एक दूसरे के होंठ चूस्ते रहे थोड़ी देर बाद उसने खुद ही नीचे से अपनी गान्ड को हिलाना शुरू कर दिया तो मैं समझ गया कि अब उसका दर्द कम हो गया है इसलिए मैने भी धीरे-धीरे लंड को अंदर बाहर करने लगा लेकिन चूत अब भी काफ़ी तंग थी इसलिए मेरा आधे से थोड़ा कम लंड भी अंदर फस-फस कर जा रहा था. कुछ देर धीरे-धीरे झटके लगाने के बाद जब उसके चेहरे पर से दर्द ख़तम हो गया तो मैने अपनी रफ़्तार कुछ तेज़ करदी ऑर लंड को भी ऑर अंदर तक डालने की कोशिश करने लगा. लेकिन अब रिज़वाना को इतना दर्द नही हो रहा था या शायद वो दर्द को बर्दाश्त कर रही थी.

रिज़वाना : ऑर कितना रह गया है बाहर.

मैं : बस थोड़ा सा ही बाक़ी है.

रिज़वाना : ऐसा करो एक ही बार मे पूरा डाल दो मैं दर्द बर्दाश्त कर लूँगी.

मैं : पक्का

रिज़वाना : (बिना कुछ बोले मेरे होंठ चूमकर हाँ मे सिर हिलाते हुए) हमम्म.

मैं अपने लंड को टोपी तक बाहर निकाला ऑर एक ही बार मे जोरदार झटका चूत के अंदर मारा लंड पूरे से थोड़ा सा कम अंदर तक चला गया लेकिन कुछ लंड अभी भी बाहर बाकी था. लेकिन रिज़वाना के मुँह से एक बार फिर से ससस्स....आयईयीई....... की आवाज़े निकलने लगी.

रिज़वाना : रुक जाओ नीर बस ऐसे ही रहो अब हिलना मत.

मैं : (उसके माथे पर हाथ फेरते हुए) ठीक है.

कुछ देर ऐसे ही लेटे रहने के बाद उसका इशारा मिलते ही मैं फिर से शुरू हो गया और इस बार मैं झटके भी थोड़े तेज़ लगा रहा था. अब रिज़वाना का दर्द भी पहले से बहुत कम हो गया था ऑर वो भी मेरा पूरा साथ दे रही थी कुछ देर ऐसे ही झटके लगाने के बाद एक बार फिर से उसका जिस्म अक़ड गया ऑर उसने अपनी गान्ड को हवा मे उठा लिया ऑर झटके खाने लगी ऑर फिर बेड पर ढेर होके तेज़-तेज़ साँस लेने लगी. अब मैं उसको उपर से हट गया ऑर उसको उठा कर उल्टा लिटा दिया ऑर उसकी गान्ड को उपर को उठाया मेरा इशारा समझ कर वो घोड़ी के जैसे अपने हाथ ऑर घुटनो के सहारे बेड पर खड़ी हो गई अब मैं उसके पिछे आ गया ऑर अपना लंड फिर से उसकी चूत के मुँह पर रखा ऑर धीरे-धीरे लंड को अंदर डालने लगा उसको अब भी लंड डालने पर दर्द हो रहा था जिस वजह से उसके मुँह से एक सस्स्स्सस्स की आवाज़ निकल रही थी. अब मैने एक हाथ से उसके बाल पकड़ लिए ऑर दूसरा हाथ उसकी गान्ड पर रख कर झटके लगाने लगा उसको शायद ऐसा करने से बहुत मज़ा आ रहा था इसलिए कुछ देर मे वो भी मेरा भरपूर साथ देने लगी अब उसको अपने दर्द की कोई परवाह नही थी ऑर मुझे बार-बार ज़ोर से करो नीर .....ज़ोर से करो नीर ..... बोल रही थी मैं भी अब अपनी पूरी रफ़्तार से झटके लगा रहा था उसको चोदते हुए मेरा उसके बाल खींचना काफ़ी पसंद आया था शायद इसलिए जब भी मैं उसके बालो से हाथ हटा लेता तो वो खुद ही मेरा हाथ पकड़ कर अपने बालो पर रख लेती. इसलिए मैं भी अब उसके बाल पकड़ कर तेज़-तेज़ झटके लगा रहा था पूरा कमरा उसकी सस्सस्स.....सस्स्सस्स.....आआहह.....ऊऊहह.....आयईयीई.... की आवाज़ो से गूँज रहा था. अब हम दोनो मज़े मे खोए हुए थे मैं अब फारिग होने के करीब था इसलिए मैं अब अपनी पूरी रफ़्तार से झटके लगा रहा था. कुछ ही देर मे मैं अपनी मंज़िल पर आ गया ऑर साथ ही एक बार फिर उसका जिस्म भी झटके खाने लगा ऑर हम दोनो एक साथ ही फारिग हो गये मैं फारिग होने के बाद बहुत थक गया था इसलिए उसकी पीठ पर ही ढेर हो गया वो भी वैसे ही बेड पर उल्टी ही लेट गई ऑर अब हम दोनो अपनी सांसो को दुरुस्त करने की कोशिश कर रहे थे. मैं अपनी आँखें बंद किए रिज़वाना के उपर लेटा था ऑर वो अपने एक हाथ पिछे ले जाकर मेरे सिर पर अपने हाथ फेर रही थी कुछ देर बाद जब हम दोनो की साँस ठीक हो गई तो मैं उसके उपर से हटकर साइड पर लेट गया वो भी वैसे ही मुझसे लिपट कर सो गई. उस रात बहुत मज़े की नींद आई हम दोनो को ही होश नही था कि कहाँ पड़े हैं.

सुबह जब मेरी नींद खुली तो रिज़वाना किसी मासूम बच्चे की तरह मेरे साथ लेटी थी ओर मुझे देखकर मुस्कुरा रही थी.

मैं : (अपनी आँखें मलते हुए) सुबह हो गई.

रिज़वाना : हंजी सुबह हो गई..... गुड मॉर्निंग स्वीटहार्ट.

मैं : तुम कब उठी.

रिज़वाना : थोड़ी देर पहले.

मैं : मुझे उठाया क्यो नही.

रिज़वाना : तुम सोए हुए इतने प्यारे लग रहे थे कि उठाने का दिल ही नही किया.

मैं : अर्रे चलो तेयार हो जाओ ख़ान ने बुलाया था उसके पास भी जाना है.

रिज़वाना : (मुझे गले लगाते हुए) एम्म्म आज कहीं नही जाना आज मैं मेरी जान के साथ रहूंगी बस आज कोई काम नही करना.

मैं : वो तो ठीक है लेकिन अगर नही जाएँगे तो ख़ान गुस्सा हो जाएगा ना.

रिज़वाना : मैं क्या करूँ मुझसे उठा ही नही जा रहा.

मैं : क्यो क्या हुआ

रिज़वाना : (हँसते हुए) अच्छा क्या हुआ मुझे...कल रात क्या हुआ था... याद करो....चलो...चलो....

मैं : (कुछ सोचते हुए) अच्छा वो.... ज़्यादा दर्द हो रहा है.

रिज़वाना : (मेरे होंठ चूमकर ना मे सिर हिलाते हुए) उऊहहुउऊ...

मैं : चलो फिर आज साथ मे नहाते हैं

रिज़वाना : हमम्म लेकिन नीचे जलन हो रही है लगता है आज तो क्लिनिक जाना ही पड़ेगा.

मैं : क्यो क्लिनिक मे क्या है...

रिज़वाना : वहाँ से एक क्रीम लानी है वो लगाउन्गी तो ठीक हो जाएगी.

मैं : तुम आज आराम करो घर पर मुझे बता दो कौनसी क्रीम है मैं ले आउन्गा.

रिज़वाना : हमम्म अच्छा ऑर जब नर्स पुछेगि तो क्या बोलोगे.

मैं : बोल दूँगा रिज़वाना ने मँगवाई है.

रिज़वाना : हुह...रहने दो मैं खुद ही ले आउन्गि...तुम तो जिसको नही भी पता चलना होगा उसको भी बता दोगे. (हँसते हुए)

मैं : चलो फिर तैयार हो जाते हैं जाना भी है

रिज़वाना : ठीक है चलो. अच्छा सुनो हेड-क्वॉर्टर्स जाके किसी को हमारे बारे मे कुछ मत बताना अभी. मुनासिब वक़्त आने पर हम सबको बताएँगे ठीक है अभी चुप रहना ऑर हमारे बारे मे किसी से कोई बात ना करना.

मैं : (हाँ मे सिर हिलाते हुए) हमम्म

Update-37

Main bina kuch bole rizwana ke sath chaddar ke andar aake let gaya or andar jate hi mujhe ek jhatka sa laga kyonki rizwana ne andar kuch nahi pehna tha or ek dam nangi thi. wo mere chaddar ke andar aate hi mujhse lipat gai uski badi or thos chaateeyaan mere seene me dhansne lagi uske nipple ek dam sakht hue pade the jo mujhe apne seene par mehsoos ho rahe the. Uske nazuk jism ka lamz milte hi mujh par ek ajeeb si madhoshi chhane lagi or maine usko apni baaho me jakad liya. Ab iss baar wo meri gaal ko chum rahi thi or meri chaatee par hath fer rahi thi. Dheere-dheere wo mere upar aake let gai or mere chehre ko chumne lagi niche mera lund fir se jaag gaya tha or shorts me tent banaye khada ho gaya tha. jisko rizwana ne apni jaangho me qaid kar rakha tha. ab wo dheere-dheere meri gaalo se hote hue meri gardan par chum rahi thi or niche ki taraf jaa rahi thi kuch hi der me wo meri chaatee par aa gai or chumne lagi.

Mujh par ek ajeeb sa madhoshi ka nasha haawi ho raha tha isliye maine usko kamar se pakad liye or upar ki taraf khincha. mere ishare ko samajhte hue wo wapis upar aa gai or meri aankhon me dekhne lagi or mere honthon ko chumne lagi maine jaldi se usse kamar se pakadkar palat diya ab wo mere niche thi or main uske upar. maine uske honth chusne shuru kiya jiska usne bhi bharpoor sath diya uska ek haath meri peeth ko sehla raha tha or dusra hath mere sir ke baalo se khel raha tha. hum dono ko hi iss waqt koi hosh nahi tha uske honth chuste hue maine uske ek mamme ko apne hath me thaam liya or usko dabane laga. kuch der mere honthon ko chusne ke baad usne mere sir ko apne ek hath se niche ki taraf dabaya shayad wo chahti thi ki main ab uske mummo ko bhi uske honthon ki tarah chusu. main jaldi se niche jake kisi jungli ki tarah uske bade-bade mummo par toot pada or uske nipples ko jor-jor se chusne laga. wo kisi bin paani ki machhali ki tarah mere niche padi tadap rahi thi or sssiiii..... sssiiii..... ki awaz nikal rahi thi wo kabhi mera sir pakad kar ek mamme par rakhti to kabhi dusre mamme par. Main bhi uske donno mummo ko bari-bari chusta jaa raha tha. Thodi der mamme chusne ke baad main thoda or niche ki taraf jane laga or uske pet par chumne or chusne laga. maine jaise hi apni jubaan uski naabhi (navel) me daali usko ek jhatka sa laga or usne apna pet andar ki taraf khinch liya or mera sir pakad kar apne pet par daba diya shayad usko bhi maza aa raha tha kuch der uski nabhi ko chusne chatne ke baad main or niche jane laga or uski chut ke upar jahan baal (hairs) the wahan chumne laga mera aisa karne se usne apni dono taangey apas me jod lee. maine ek jhalak garden uthake upar ki taraf dekha to uski aankhen band thi maine uski dono jaangho par apne hath rakhe or dheere-dheere unhe kholne laga mera ishara milte hi wo kisi chaabi lage khilone ki tarah apni dono taangey kholti chali gai uski chut ek dam saaf or clean thi uss par baal ka koi naamo-nishaan nahi tha aaj tak maine jitni bhi chut ko choda tha sab par jungle ugaa hua tha yahan tak ki heena ki chut par bhi thode-thode baal the lekin rizwana ki chut ek dam saaf or gori chitti thi. ab maine apna munh seedha uski chut par rakha or wahan chum liya. uski chut lagatar paani chodne ki wajah se bahut geeli ho gai thi or mere chumne se kuch paani mere honthon par bhi lag gaya tha. lekin mera chut par chumna rizwana ke liye kisi jhatke se kam nahi tha wo ek dam uchhal si gai or apna sir upar ki taraf utha diya. Maine apna ek hath uski chaatee par rakh kar usse fir se lita diya or wapis uski chut ko chumne laga uski taangey kaampne lagi thi or bar-bar wo apni taangey band karne ki koshish kar rahi thi lekin maine uski dono taango ko mazbooti se pakad rakha tha.

Kuch der baad jab wo thodi thik ho gai to maine apna munh khola or uski poori chut ko apne munh me bhar liya or chusne laga uske munh se ek jordaar sssssss oohhhh ki awaz nikali or usne mera sir apni chut par daba diya sath hi apni gaanD ko upar ki taraf uthane lagi. main ab lagatar uski chut ko chus raha tha or uska ek hath ne sakhti se mujhe mere baalo se pakad rakha tha or apni chut par daba rahi thi kuch der chusne ke baad uske jism ne ek jhatka khaya fir dusra jhatka or aise hi jhatke khati hui usne hawa me apni gaanD upar ko utha lee or kuch der aise hi rehne ke baad wo ek dam se bed par gir gai or tez-tez saans lene lagi shayd wo farig ho gai thi.

Ab usne mujhe mere balo se pakada or upar ki taraf khincha main jaise hi upar ko hua wo fir se mere honthon par toot padi or betahasha mujhe chumne or mere honth chusne lagi. shayad usko aisa karne se be-itehaan maza aaya tha kuch der mujhe chumne ke baad usne apne hath niche kiya or pichhe se meri shorts ko niche kar diya or meri gaanD par apna hath ferne lagi. fir apna hath aagey laakar aagey se bhi mere shorts ko niche kar diya or fir apne pair ki madad se shorts ko meri taango se azaad kar diya ab hum dono sirf ek chaddar me qaid the usne apni taangey failayi hui thi or mera lund seedha uski chut ke munh par apni dastak de raha tha. uske honth chuste hue hi maine apna hath niche kiya or apna lund pakadkar nishane par rakh diya. usne jaldi se apna munh mere honthon se azaad kiya or mere kaan me dheere se boli....

Rizwana : Neer araam se karna maine pehle kabhi kiya nahi.

Main : kabhi bhi nahi.

Rizwana : (muskurakar naa me sir hilate hue) uuhhuuu.

Maine fir se uske honthon ko apne honthon me qaid kar liya or dheere se apne lund ka dabaav uski chut ki ched par diya lekin uski chut ki ched itni tang thi ki mera lund phisalkar upar ki taraf chala gaya maine fir se apne lund par dher sara thook lagaya or fir lund ko nishane par rakha lekin lund fir se phisal kar upar ko chala gaya.

Main : tum pakadkar khud daalo.

Rizwana : (muskurakar) achha...

Rizwana ne mere lund ko pakda or dheere se mere kaan me boli.

Rizwana : ye to bahut bada hai andar kaise jayega.

Main : chala jayega pehli baar taqleef hogi fir araam se chala jayega.

Rizwana : mujhe mat sikhao main doctor hun. lekin Neer ye sach me bada hai or mota bhi jyaadaa lag raha hai bahut dard hoga.

Main : Main araam se karunga.

Rizwana : thik hai jaldi mat karna plzzz.

Fir maine apne lund ko nishane par rakha or iss baar zra jor se jhatka diya jisse lund ki topi andar chali gai or rizwana ne ek ssssss ke sath apni aankhen band kar lee ab main kuch der ruka or fir se ek jhatka diya iss baar thoda sa or lund andar gaya or kahi jake atak gaya main jor laga raha tha lekin andar nahi jaa raha tha maine apna lund bahar nikaala uss par fir se thook lagaya or iss baar zra jor se jhatka diya iss baar lund kuch aggey chala gaya lekin rizwana ki dard se cheekh nikal gai sssssss aaayyyiiiii bahut dard ho raha hai Neer jaldi bahar nikaalo (rote hue) meri jaan nikal rahi hai plzzzzzz.... usne apne dono hatho ke bade-bade nakhun mere kandho me gada diye. Jisse mujhe bhi behad dard hua.

Main : bas ho gaya itna hi dard tha ab nahi hoga.

Rizwana : ek baar bahar nikaalo plzz meri dard se jaan nikal rahi hai.

Maine bina kuch bole lund bahar nikaal liya or rizwana lagatar roye jaa rahi thi main bas uske upar leta usko chup karwa raha tha or usko chum raha tha. wo kaafi der aise hi roti rahi.

Rizwana : mera munh sookh raha hai pyaas lagi hai

maine bina kuch bole pass pada paani ka glass uthaya or paani ko munh me bhar liya or apne honth uske honthon par rakh diye wo dard se karaha rahi thi or sss...sss kar rahi thi maine apne honth jaise hi uske honthon par rakhe to usne apni aankhen khol di ab maine apne munh wala paani uske munh me girane laga or wo bina koi harkat kiye wo paani peene lagi jab paani khatam ho gaya to maine glass usko diya taki wo paani pee sake.

Rizwana : glass se nahi munh se pilao.

Main kuch der usko aise hi apne munh me bharkar paani pilata raha usko shayad mera aisa karna bahut achha laga tha ab wo bhi muskura rahi thi or aram se paani pee rahi thi.

Rizwana : basss ab aagey bhi aise hi paani piya karungi (muskurate hue)

Main : ab dard thik hai

Rizwana : dard ab pehle se kuch kam hai lekin abhi bhi bahut tez jalan ho rahi hai andar

Main : ek baar poora daal logi fir dard nahi hoga.

Rizwana : maine bola bhi tha araam se karna lekin tum to ek dam jungali ho.

Main bina kuch bole usko dekhta raha or uske honth chumkar apna lund fir se nishane par rakha or halka sa jhatka diya ab lund topi se thoda or aagey tak bina koi rukawat andar chala gaya lekin rizwana ko abhi bhi dard ho rahi thi.

Rizwana : kuch der aise hi rho jab dard thik ho jayega fir hilana andar.

Main : achha.

Kuch der main aise hi andar lund dale uske upar pada raha or hum ek dusre ke honth chuste rahe thodi der baad usne khud hi niche se apni gand ko hilana shuru kar diya to main samajh gaya ki ab uska dard kam ho gaya hai isliye maine bhi dheere-dheere lund ko andar bahar karne laga lekin chut ab bhi kaafi tang thi isliye mera adha se thoda kam lund bhi andar phas-phas kar jaa raha tha. kuch der dheere-dheere jhatke lagane ke baad jab uske chehre par se dard khatam ho gaya to maine apni raftaar kuch tez kardi or lund ko bhi or andar tak daalne ki koshish karne laga. Lekin ab rizwana ko itna dard nahi ho raha tha ya shayad wo dard ko bardasht kar rahi thi.

Rizwana : or kitna reh gaya hai bahar.

Main : bas thoda sa hi baaqi hai.

Rizwana : aisa karo ek hi baar me poora daal do main dard bardasht kar lungi.

Main : pakka

Rizwana : (bina kuch bole mere honth chumkar haa me sir hilate hue) Hhhmmm.

Main apne lund ko topi tak bahar nikala or ek hi baar me jordaar jhatka chut ke andar maara lund poore se thoda sa kam andar tak chala gaya lekin kuch lund abhi bhi bahar baaki tha. lekin rizwana ke munh se ek baar fir se ssss....aayyiiii....... ki awaze nikalne lagi.

Rizwana : ruk jao Neer bas aise hi raho ab hilna mat.

Main : (uske maathe par hath ferte hue) thik hai.

Kuch der aise hi lete rehne ke baad uska ishara milte hi main fir se shuru ho gaya or iss baar main jhatke bhi thode tez laga raha tha. Ab rizwana ka dard bhi pehle se bahut kam ho gaya tha or wo bhi mera poora sath de rahi thi kuch der aise hi jhatke lagane ke baad ek baar fir se uska jism aqad gaya or usne apni gaanD ko hawa me utha liya or jhatke khane lagi or fir bed par dher hoke tez-tez saans lene lagi. ab main usko upar se hat gaya or usko utha kar ulta lita diya or uski gaanD ko upar ko uthaya mera ishara samajh kar wo ghodi ke jaise apne hath or ghutno ke sahare bed par khadi ho gai ab main uske pichhe aa gaya or apne lund fir se uski chut ke munh par rakha or dheere-dheere lund ko andar daalne laga usko ab bhi lund daalne par dard ho raha tha jis wajah se uske munh se ek sssssss ki awaz nikal rahi thi. ab maine ek hath se uske baal pakad liya or dusra hath uski gaanD par rakh kar jhatke lagane laga usko shayad aisa karne se bahut maza aa raha tha isliye kuch der me wo bhi mera bharpoor sath dene lagi ab usko apne dard ki koi parvaah nahi thi or mujhe bar-bar jor se karo Neer .....jor se karo Neer ..... bol rahi thi main bhi ab apni poori raftar se jhatke laga ha tha usko chodte hue mera uske baal khinchna kaafi pasand aaya tha shayad isliye jab bhi main uske baalo se hath hata leta to wo khud hi mera hath pakad kar apne baalo par rakh leti. Isliye main bhi ab uske baal pakad kar tez-tez jhatke laga raha tha poora kamra uski sssss.....ssssss.....aaaahhhh.....oooohhhhhh.....aayyiiiii.... ki awazo se gunj raha tha. ab hum dono maze me khoye hue the main ab farig hone ke kareeb tha isliye main ab apni poori raftaar se jhatke laga raha tha. kuch hi der me main apni manzil par aa gaya or sath hi ek baar fir uska jism bhi jhatke khane laga or hum dono ek sath hi farig ho gaye main farig hone ke baad bahut thak gaya tha isliye uski peeth par hi dher ho gaya wo bhi waise hi bed par ulti hi let gai or ab hum dono apni saanso ko durust karne ki koshish kar rahe the. main apni aankhen band kiye rizwana ke upar leta tha or wo apne ek hath pichhe le jakar mere sir par apne hath fer rahi thi kuch der baad jab hum dono ki saans thik ho gai to main uske upar se hatkar side par let gaya wo bhi waise hi mujhse lipat kar so gai. Uss raat bahut maze ki neend aayi hum dono ko hi hosh nahi tha ki kaha pade hain.

subah jab meri jaag khuli to rizwana kisi masoom bache ki tarah mere sath leti thi or mujhe dekhkar muskura rahi thi.

Main : (apni aankhen malte hue) Subah ho gai.

Rizwana : Hanji subah ho gai..... gud morning Sweetheart.

Main : tum kab uthi.

Rizwana : thodi der pehle.

Main : mujhe uthaya kyo nahi.

Rizwana : tum soye hue itne pyaare lag rahe the ki uthane ka dil hi nahi kiya.

Main : arre chalo teiyaar ho jao khan ne bulaya tha uske pass bhi jana hai.

Rizwana : (mujhe gale lagate hue) mmmm aaj kahi nahi jana aaj main meri jaan ke sath rahungi bas aaj koi kaam nahi karna.

Main : wo to thik hai lekin agar nahi jayenge to khan gussa ho jayega na.

Rizwana : main kya karu mujhse utha hi nahi jaa raha.

Main : kyo kya hua

Rizwana : (hansate hue) achha kya hua mujhe...kal raat kya hua tha... yaad karo....chalo...chalo....

Main : (kuch sochte hue) achha wo.... jyaadaa dard ho raha hai.

Rizwana : (mere honth chumkar naa me sir hilate hue) uuhhhuuu...

Main : chalo fir aaj sath me nahate hain

Rizwana : hhhmmm lekin niche jalan ho rahi hai lagta hai aaj to clinic jana hi padega.

Main : kyo clinic me kya hai...

Rizwana : wahan se ek cream laani hai wo lagaungi to thik ho jayegi.

Main : tum aaj aram karo ghar par mujhe bata do kounsi cream hai main le aaunga.

Rizwana : hhhmmm achha or jab nurse puchhegi to kya bologe.

Main : bol dunga rizwana ne mangwayi hai.

Rizwana : huh...rehne do main khud hi le aaungi...tum to jisko nahi bhi pata chalna hoga usko bhi bata doge. (hansate hue)

Main : chalo fir taiyaar ho jate hain jana bhi hai

Rizwana : thik hai chalo. achha suno head-quarters jake kisi ko hamaare bare me kuch mat batana abhi. munasib waqt aane par hum sabko batayenge thik hai abhi chup rehna or hamaare bare me kisi se koi bat na karna.

Main : (haa me sir hilate hue) Hhhmmm

 


अपडेट-38

उसके बाद मैने जैसे चद्दर हटाई बेड पर एक खून का निशान लगा हुआ था जिसको मैं ऑर रिज़वाना दोनो देख रहे थे ऑर मुस्कुरा रहे थे रिज़वाना से ठीक से चला नही जा रहा था इसलिए वो अपनी टाँग को थोड़ी चौड़ी करके चल रही थी उसके इस तरह चलने पर मैं अपनी हँसी रोक नही पाया ऑर ज़ोर-ज़ोर से हँसने लगा.

रिज़वाना : (मुस्कुराते हुए) हँसो मत सब तुम्हारा ही किया हुआ है

मैं : मैने बोला था कपड़े उतार कर मेरे साथ सोने को.

रिज़वाना : अच्छा...अच्छा...ठीक है अब मुझे बाथरूम तक लेके चलो दर्द हो रही है. (चूत को सहलाते हुए)

उसके बाद मैने उसको गोद मे उठाया ऑर हम दोनो नहाने चले गये वहाँ हम दोनो साथ नहाए मेरा लंड तो एक बार फिर से खड़ा हो गया था लेकिन रिज़वाना की हालत देखकर मैं अपने जज़्बात काबू कर लिए ऑर फिर हम दोनो तेयार होके हेडक्वॉर्टर्स चले गये. नाश्ता भी हमने रास्ते मे ही किया. हेड क्वॉर्टर जाते ही ख़ान मेरे सामने अपने सवालो की दुकान खोले खड़ा हो गया.

ख़ान : आ गये जनाब रात को क्या हुआ था यार

रिज़वाना : कुछ नही घरवाले याद आ रहे थे जनाब को मैने समझा दिया है अब सब सेट है.

ख़ान : देख लो अगर कोई समस्या है तो मेरे साथ तुम रह सकते हो.

मैं : नही कोई समस्या नही वो मुझे बस घरवालो की याद आ रही थी.

ख़ान : (रिज़वाना को देखते हुए )ये तुमको क्या हुआ पैर मे चोट लगी है क्या

रिज़वाना : हाँ रात को लाइट चली गई थी मैं मोमबत्ती लेने गई तो वहाँ सब्जी पर पैर स्लिप हो गया ऑर पैर मे मोच आ गई. नीर नही होता तो मैं उठ भी नही सकती थी.

ख़ान : अपना ख्याल रखा करो यार ऑर तुमको मैने कितनी बार बोला है कोई नौकरानी रख लो.

रिज़वाना : अर्रे अकेली तो हूँ मैं अब एक इंसान के लिए क्या नौकरानी रखू.

ख़ान : चलो जाओ डॉक्टर साहिबा पहले अपना इलाज करो तब तक मैं थोड़ा नीर साहब से बात कर लूँ.

रिज़वाना : हमम्म.... (मेरी तरफ देखते हुए) जब तुम्हारा काम ख़तम हो जाए तो मेरे पास क्लिनिक मे आ जाना ठीक है.

मैं : अच्छा जी

उसके बाद ख़ान मुझे एक अजीब सी जगह ले गया जहाँ बहुत सारी मशीन्स पड़ी थी मेरे लिए ये जगह एक दम नयी थी इसलिए मैं चारो तरफ बड़े गौर से देख रहा था वहाँ काफ़ी सारे लोग हाथ मे छोटी-छोटी मशीन्स पकड़े बैठे थे ऑर उसके साथ कुछ ना कुछ कर रहे थे.

मैं : ख़ान साहब हम यहाँ क्यो आए हैं

ख़ान : यहाँ मैं तुमको हर क़िस्म का स्पाइ डिवाइस इस्तेमाल करना सिखाउन्गा जो आगे जाके तुम्हारे काम आएगा. ऑर इनकी मदद से तुम मुझ तक उस गॅंग की इन्फर्मेशन भी भेज सकते हो.

मैं : अच्छा...

उसके बाद पूरा दिन वो मुझे अलग-अलग क़िस्म की छोटी-छोटी मशीन्स के बारे मे बताता रहा ऑर मुझे उनको इस्तेमाल करना भी सीखाता रहा मैं हर चीज़ को बड़े ध्यान से समझ रहा था ऑर उसको अपने दिमाग़ मे बिताने की कोशिश कर रहा था. वहाँ बैठे लोग मुझे उन औज़ारो को इस्तेमाल करना भी सीखा रहे थे ऑर मेरी ज़रूरत के मुताबिक़ मुझे वो समान दे भी रहे थे जिसको मैं खुद एक बार इस्तेमाल करके देख रहा था ऑर फिर मैं एक छोटे से बॅग मे वो तमाम समान को डाल रहा था.

मेरा पूरा दिन वही डिवाइसस को देखने ऑर वो कैसे काम करते हैं उसको समझने मे ही गुज़रा उसके बाद शाम को मैं ऑर रिज़वाना घर आ गये. आते ही रिज़वाना मुझ पर किसी भूखे जानवर की तरह टूट पड़ी ऑर हम फिर से चुदाई मे लग गये. अब ये हमारा रोज़ का रुटीन सा हो गया था कि दिन मे मैं ख़ान से ट्रैनिंग लेता ऑर शाम से लेकर सुबह तक हम को बस बहाना चाहिए था चुदाई करने का अब रिज़वाना मेरे बिना एक पल भी नही रहती थी. कुछ ही दिन मे वो मुझ से बहुत ज़्यादा जूड सी गई थी ओर मुझे बे-पनाह प्यार करने लगी थी. अक्सर जब भी मैं ख़ान से ट्रैनिंग ले रहा होता तो रिज़वाना किसी ना किसी बहाने से मेरे पास आ जाती. मुझे पता ही नही चला कि 15 दिन कैसे गुज़र गये ऑर मेरी ट्रनिंग भी मुकम्मल हो गई आखरी दिन ख़ान ने ऐसे ही मुझे अपने कॅबिन मे बुलाया वहाँ उसके पास एक आदमी बैठा था जो मुझे देखते ही खड़ा हो गया ऑर हैरानी से घूर्ने लगा.

ख़ान : बैठो-बैठो यार अब ये अपना ही आदमी है इससे डरने की ज़रूरत नही.

मैं : ख़ान साहब आपने मुझे बुलाया था.

ख़ान : हाँ नीर अब तुम्हारी ट्रैनिंग तो पूरी हो ही गई है इसलिए मैने सोचा तुम्हारे जाने का इंतज़ाम भी कर दूं.

मैं : (चोन्कते हुए) जाने का...कहाँ जाना है मुझे.

ख़ान : अर्रे भाई तुमको तुम्हारे गॅंग तक नही पहुँचना क्या....

मैं : ओह्ह्ह अच्छा हाँ... तो बताइए कब जाना है

ख़ान : कल जाना है

मैं : (कुर्सी से खड़ा होते हुए) कलल्ल्ल.... इतनी जल्दी...

ख़ान : क्यो क्या हुआ कल जाने मे कोई परेशानी है क्या.

मैं : जी नही एस बात नही है बस मैं एक बार वहाँ जाने से पहले अपने घरवालो से मिलना चाहता था.

ख़ान : ठीक है फिर तुम आज ही अपने गाव हो आओ ऑर अपने घरवालो से मिल आओ लेकिन सुबह तक वापिस आ जाना क्योंकि मुझे खबर मिली है कि कल रात को तुम्हारे पुराने साथी लाला, गानी ऑर सूमा शहर मे आ रहे हैं ड्रूग्स की डील करने के लिए ऑर तुमको उनकी नज़रों के सामने लाना ज़रूरी है. तभी तुम उस गॅंग तक पहुँच पाओगे.

मैं : जी अच्छा... लेकिन मैं उनके सामने पहुँचुँगा कैसे.

ख़ान : इसलिए तो तुमको यहाँ बुलाया है इनसे मिलो ये है राणा (सामने कुर्सी पर बैठे उस आदमी की तरफ इशारा करते हुए)

राणा : सलाम शेरा भाई (मुझसे हाथ मिलाते हुए)

मैं : वालेकुम.सलाम जनाब.

ख़ान : ये पेशे से एक ड्रग डीलर है ऑर हमारा खबरी भी है. तुम इसके साथ वहाँ डील करने जाओगे ऑर वहाँ उनके लोगो का माल लूटोगे ऑर उनके आदमियो को ख़तम करोगे बाकी सब काम मैने इसको समझा दिया है.

मैं : जी ठीक है.

ख़ान : अब तुम गाव चले जाओ ऑर अपने घरवालो से मिल आओ.

मैं : ठीक है.

ख़ान : ऑर सुनो... हमारे पास वक़्त नही है इसलिए सुबह तक याद से वापिस आ जाना क्योंकि सुबह होते ही तुमको राणा के साथ जाना है.

मैं : (हाँ मे सिर हिलाते हुए) जी अच्छा...

उसके बाद वो दोनो कमरे मे बैठे रहे ऑर मैं बाहर आ गया. मुझे ये सब इतने जल्दी होने की उम्मीद नही थी मैने तो सोचा था कुछ दिन ऑर मैं अपने घरवालो के पास रह लूँगा लेकिन यहाँ तो ख़ान ने मुझे बस एक रात का ही वक़्त दिया है ऑर अब तो रिज़वाना भी है जो मुझे बे-इंतेहा मुहब्बत करती है उसको मैं कैसे सम्झाउन्गा. मैं अपनी इन्ही सोचो मे था कि मेरे कदम खुद ही रिज़वाना के कॅबिन की तरफ मुझे ले गये.

मैं : क्या मैं अंदर आ सकता हूँ डॉक्टरनी साहिबा.

रिज़वाना : (मुस्कुराते हुए) अर्रे तुम आज इतनी जल्दी फ्री हो गये. ऑर ये क्या तुमको अंदर आने के लिए मुझसे इजाज़त लेने की ज़रूरत कब से पड़ने लग गई... चलो अंदर आओ.

मैं : वैसे ही सोचा तुम कोई काम कर रही होगी.

रिज़वाना : (अपनी कुर्सी से खड़े होके मेरे पिछे आते हुए) मेरी जान तुम्हारे लिए तो वक़्त ही वक़्त है बताओ क्या खिदमत करू मेरी जान की... (पिछे से मेरी गाल चूमते हुए)

मैं : मुझे तुमसे कुछ कहना है.

रिज़वाना : क्या हुआ तुम परेशान लग रहे हो सब ठीक तो है.

मैं : मैं आज गाव जा रहा हूँ उसके बाद कल सुबह मुझे मिशन के लिए निकलना है.

रिज़वाना : (मेरी कुर्सी को अपनी तरफ घूमाते हुए) क्या....इतनी जल्दी....

मैं : (हाँ मे सिर हिलाते हुए) हम्म...

उसके बाद हम दोनो खामोश हो गये ऑर रिज़वाना वापिस अपनी जगह पर जाके बैठ गई ऑर अपना समान समेटने लगी. मुझे उसका इस तरह का बर्ताव अजीब सा लगा.

मैं : क्या हुआ नाराज़ हो.

रिज़वाना : नही...नाराज़ क्यो होना है बस थोड़ी सी उदास हूँ सोचा नही था तुम इतनी जल्दी चले जाओगे.

मैं : उदास क्यो हो... अर्रे मैं जल्दी वापिस आ जाउन्गा ना.

रिज़वाना : मैने सोचा था तुम कुछ दिन मेरे पास ही रुकोगे.

मैं : ख़ान ने आज ही मुझे बताया मैं भी क्या करू.

रिज़वाना : (अपना सारा समान अपने बॅग मे डालते हुए) चलो चलें.

मैं : कहाँ चलें

रिज़वाना : घर मे तुम्हारी पॅकिंग करने ऑर कहाँ

मैं : ऑर तुम्हारा काम....

रिज़वाना : आज कोई काम नही बस आज मैं तुम्हारे साथ रहना चाहती हूँ.

उसके बाद रिज़वाना ने जल्दी छुट्टी लेली ऑर हम दोनो घर के लिए निकल गये. रिज़वाना पूरे रास्ते खामोश ऑर उदास ही बैठी थी जो मुझे सच मे अच्छा नही लग रहा था.

मैं : क्या हुआ है रिज़वाना अब ऐसे उदास मत बैठो यार.

रिज़वाना : मैं ठीक हूँ (मेरे कंधे पर अपना सिर रखते हुए)

मैं : एक बात बोलू...

रिज़वाना : हमम्म्म

मैं : तुम ऐसे उदास बैठी अच्छी नही लगती

रिज़वाना : तो क्या तुम्हारे जाने की खुशियाँ मनाऊ.

मैं : तुमको पता है तुम जब हँसती हो तो बहुत सेक्सी लगती हो मेरी तो नियत ही खराब हो जाती है.

रिज़वाना : (हँसते हुए) उूुउउ..... तंग मत करो ना नीर . एक तो पहले मूड खराब कर दिया अब हंसा रहे हो.

मैं : मैने क्या किया यार ये तो ख़ान ने ही मुझे जो बोला मैने तुमको बता दिया.

रिज़वाना : (रोने जैसा मुँह बनाते हुए)मत जाओ ना....नीर .

मैं : जाना तो पड़ेगा क्या करे मजबूरी है.

रिज़वाना : मैं तुम्हारे बिना कैसे रहूंगी कभी सोचा है.

मैं : एम्म्म चलो एक काम करते हैं तुम भी मेरे साथ ही चलो.

रिज़वाना : कहाँ चलु...

मैं : मेरे गाव ऑर कहाँ... रात वहाँ ही रहेंगे ऑर सुबह तक वापिस आ जाएँगे.

रिज़वाना : मैं....मैं कैसे...

मैं : क्यो गाँव जाने मे क्या परेशानी है

रिज़वाना : परेशानी वाली बात नही है तुम्हारे घरवाले मुझे पसंद नही करते इसलिए उनको शायद मेरा वहाँ रहना अच्छा ना लगे.

मैं : अर्रे वो लोग बहुत अच्छे हैं यार तुम फिकर मत करो कोई कुछ नही कहेगा.

रिज़वाना : लेकिन...

मैं: लेकिन-वेकीन कुछ नही तुम साथ आ रही हो... मतलब आ रही हो... वैसे भी मेरे पास एक ही दिन बचा है कल सुबह को तो मिशन के लिए निकलना है ऑर मैं चाहता हूँ मैं अपना ज़्यादा से ज़्यादा वक़्त अपने चाहने वालो के साथ गुज़ारु जिनमे अब तुम भी हो.

रिज़वाना : (मुस्कुरकर मेरी गाल चूमते हुए ) अच्छा....ठीक है मैं भी चलती हूँ.

मैं : ये हुई ना बात

रिज़वाना : तुमको पता है तुम बहुत ज़िद्दी हो.

मैं: हाँ हूँ...कोई ऐतराज़

रिज़वाना : (मुस्कुरा कर ना मे सिर हिलाते हुए) उुउऊहहुउऊ....

मैं : अच्छा रिज़वाना मैं सोच रहा था जाने से पहले घरवालो के लिए थोड़ा समान खरीद लू तो क्या हम पहले बाज़ार चलें अगर तुमको ऐतराज़ ना हो तो.

रिज़वाना : हाँ-हाँ ज़रूर क्यो नही वैसे भी इतने दिन बाद घर जा रहे हो खाली हाथ थोड़ी ना जाओगे.

उसके बाद कोई खास बात नही हुई हम हेड-क्वॉर्टर से सीधा मार्केट चले गये वहाँ मैने नाज़ी,फ़िज़ा ऑर बाबा के लिए बहुत सारा समान खरीदा. फिर हम घर आ गये ऑर आते ही रिज़वाना मुझ पर टूट पड़ी ऑर पागलो की तरह मुझे चूमने लगी फिर हमने एक बार सेक्स किया ऑर उसके बाद मैं थक कर सो गया लेकिन रिज़वाना मेरी ओर अपनी पॅकिंग करने लगी रही. शाम को जब मैं सो कर उठा तो रिज़वाना ने सब कुछ रेडी कर दिया था उसके बाद मैं भी नहा कर तेयार हुआ ऑर फिर हम दोनो गाव के लिए निकल पड़े.

Update-38

Uske baad maine jaise chaddar hatayi bed par ek khun ka nishaan laga hua tha jisko main or rizwana dono dekh rahe the or muskura rahe the rizwana se thik se chala nahi jaa raha tha isliye wo apni taang ko thodi choudi karke chal rahi thi uske iss tarah chalne par main apni hassi rok nahi paya or jor-jor se hasne laga.

Rizwana : (muskurate hue) hasso mat sab tumhara hi kiya hua

Main : maine bola tha kapde utaar kar mere sath sone ko.

Rizwana : achha...achha...thik hai ab mujhe bathroom tak leke chalo dard ho rahi hai. (chut ko sehlate hue)

Uske baad maine usko god me uthaya or hum dono nahane chale gaye wahan hum dono sath nahaye mera lund to ek bar fir se khada ho gaya tha lekin rizwana ki haalat dekhkar main apne jazbaat kaabu kar liye or fir hum dono teiyaar hoke headquarters chale gaye. nashta bhi hamane raste me hi kiya. Head quarter jate hi khan mere samne apne sawaalo ki dukaan khole khada ho gaya.

Khan : aa gaye janab raat ko kya hua tha yaar

Rizwana : kuch nahi gharwale yaad aa rahe the janab ko maine samjha diya hai ab sab set hai.

Khan : dekh lo agar koi samasya hai to mere sath tum reh sakte ho.

Main : nahi koi samasya nahi wo mujhe bas gharwalo ki yaad aa rahi thi.

Khan : (rizwana ko dekhte hue )ye tumko kya hua pair me chot lagi hai kya

Rizwana : haa raat ko light chali gai thi main mombatti lene gai to wahan sabji par pair slip ho gaya or pair me moch aa gai. Neer nahi hota to main uth bhi nahi sakti thi.

Khan : apna khyaal rakha karo yaar or tumko maine kitni baar bola hai koi naukrani rakh lo.

Rizwana : arre akaili to hun main ab ek insaan ke liye kya naukrani rakhu.

Khan : chalo jao doctor sahiba pehle apna ilaaj karo tab tak main thoda Neer sahab se baat kar loo.

Rizwana : Hhhmmm.... (meri taraf dekhte hue) jab tumhara kaam khatam ho jaye to mere pass clinic me aa jana thik hai.

Main : achha ji

Uske baad khan mujhe ek ajeeb si jagah le gaya jahan bahut saari machines padi thi mere liye ye jagah ek dam nayi thi isliye main charo taraf bade gaur se dekh raha tha wahan kaafi sare log hath me choti-choti machines pakde baithe the or uske sath kuch na kuch kar rahe the.

Main : khan sahab hum yahan kyo aye hain

Khan : yahan main tumko har qism ka spy device istemaal karna sikhaunga jo aagey jake tumhare kaam aayega. or inki madad se tum mujh tak uss gang ki information bhi bhej sakte ho.

Main : achha...

Uske baad poora din wo mujhe alag-alag qism ki choti-choti machines ke baare me batata raha or mujhe unko istemaal karna bhi seekhata raha main har chij ko bade dhyaan se samajh raha tha or usko apne dimag me bithane ki koshish kar raha tha. wahan baithe log mujhe unn auzaro ko istemaal karna bhi seekha rahe the or meri jarurat ke mutabiq mujhe wo samaan de bhi rahe the jisko main khud ek baar istemaal karke dekh raha tha or fir main ek chhote se bag me wo tamaam samaan ko daal raha tha.

Mera poora din wahi devices ko dekhne or wo kaise kaam karte hain usko samajhne me hi guzra uske baad shaam ko main or rizwana ghar aa gaye. Aate hi rizwana mujh par kisi bhukhe janwar ki tarah toot padi or hum fir se chudayi me lag gaye. Ab ye hmara roz ka routine sa ho gaya tha ki din me main khan se training leta or shaam se lekar subah tak hum ko bas bahana chahiye tha chudayi karne ka ab rizwana mere bina ek pal bhi nahi rehti thi. Kuch hi din me wo mujh se bahut jyaadaa jood si gai thi or mujhe be-panah pyaar karne lagi thi. Aksar jab bhi main khan se training le raha hota to rizwana kisi na kisi bahane se mere pass aa jati. Mujhe pata hi nahi chala ki 15 din kaise guzar gaye or meri traning bhi mukammal ho gai akhri din khan ne aise hi mujhe apne cabin me bulaya wahan uske pass ek aadmi baitha tha jo mujhe dekhte hi khada ho gaya or hairaani se ghurne laga.

Khan : baitho-baitho yaar ab ye apna hi aadmi hai isse darne ki jarurat nahi.

Main : khan sahab aapne mujhe bulaya tha.

Khan : haa neer ab tumhari training to poori ho hi gai hai isliye maine socha tumhare jane ka intezaam bhi kar doo.

Main : (chonkte hue) jane ka...kaha jana hai mujhe.

Khan : arre bhai tumko tumhare gang tak nahi pohonchana kya....

Main : ohhh achha haa... to batayiye kab jana hai

Khan : kal jana hai

Main : (kursi se khada hote hue) kallll.... itni jaldi...

Khan : kyo kya hua kal jane me koi pareshani hai kya.

Main : ji nahi esse baat nahi hai bas main ek baar wahan jane se pehle apne gharwalo se milna chahta tha.

Khan : thik hai fir tum aaj hi apne gaav ho aao or apne gharwalo se mil aao lekin subah tak wapis aa jana kyonki mujhe khabar mili hai ki kal raat ko tumhare purane sathi lala, gaani or sooma shehar me aa rahe hain druggs ki deal karne ke liye or tumko unki nazaro ke samne lana jaruri hai. Tabhi tum uss gang tak pohonch paoge.

Main : ji achha... lekin main unke samne pohonchunga kaise.

Khan : isliye to tumko yahan bulaya hai inse milo ye hai raana (samne kursi par baithe uss admi ki taraf ishara karte hue)

Rana : Salaam shera bhai (mujhse hath milate hue)

Main : W.Salaam janab.

Khan : ye peshe se ek drugg dealer hai or hmara khabari bhi hai. tum iske sath wahan deal karne jaoge or wahan unke logo ka maal lootoge or unke aadmiyo ko khatam karoge baaki sab kaam maine isko samjha diya hai.

Main : ji thik hai.

Khan : ab tum gaav chale jao or apne gharwalo se mil aao.

Main : thik hai.

Khan : Or suno... hamare pass waqt nahi hai isliye subah tak yaad se wapis aa jana kyonki subah hote hi tumko rana ke sath jana hai.

Main : (haa me sir hilate hue) Ji Achha...

Uske baad wo dono kamre me baithe rahe or main bahar aa gaya. Mujhe ye sab itne jaldi hone ki ummeed nahi thi maine to socha tha kuch din or main apne gharwalo ke pass reh lunga lekin yahan to khan ne mujhe bas ek raat ka hi waqt diya hai or ab to rizwana bhi hai jo mujhe be-intehaa muhabbat karti hai usko main kaise samjhaunga. Main apni inhi socho me tha ki mere kadam khud hi rizwana ke cabin ki taraf mujhe le gaye.

Main : kya main andar aa sakta hun doctorni sahiba.

Rizwana : (muskurate hue) arre tum aaj itni jaldi free ho gaye. Or ye kya tumko andar aane ke liye mujhse ijajat lene ki jarurat kab se padne lag gai... chalo andar aao.

Main : waise hi socha tum koi kaam kar rahi hogi.

Rizwana : (apni kursi se khade hoke mere pichhe aate hue) meri jaan tumhare liye to waqt hi waqt hai bataao kya khidmat karu meri jaan ki... (pichhe se meri gaal chumte hue)

Main : mujhe tumse kuch kehna hai.

Rizwana : kya hua tum pareshaan lag rahe ho sab thik to hai.

Main : main aaj gaav jaa raha hun uske baad kal subah mujhe mission ke liye nikalna hai.

Rizwana : (meri kursi ko apni taraf ghumate hue) kyaa....itni jaldi....

Main : (haa me sir hilate hue) Hhhmm...

Uske baad hum dono khamosh ho gaye or rizwana wapis apni jagah par jake baith gai or apna samaan sametne lagi. mujhe uska iss tarah ka bartaav ajeeb sa laga.

Main : kya hua naraz ho.

Rizwana : nahi...naraz kyo hona hai bas thodi si udaas hun socha nahi tha tum itni jaldi chale jaoge.

Main : udaas kyo ho... Arre main jaldi wapis aa jaunga naa.

Rizwana : maine socha tha tum kuch din mere pass hi rukoge.

Main : khan ne aaj hi mujhe bataya main bhi kya karu.

Rizwana : (apna sara samaan apne bag me dalte hue) chalo chalen.

Main : kaha chalen

Rizwana : ghar me tumhari packing karne or kaha

Main : or tumhara kaam....

Rizwana : Aaj koi kaam nahi bas aaj main tumhare sath rehna chahti hun.

Uske baad rizwana ne jaldi chhuti leli or hum dono ghar ke liye nikal gaye. Rizwana poore raste khamosh or udaas hi baithi thi jo mujhe sach me achha nahi lag raha tha.

Main : kya hua hai rizwana ab aise udaas mat baitho yaar.

Rizwana : main thik hun (mere kandhe par apna sir rakhte hue)

Main : ek baat bolu...

Rizwana : hhhmmmm

Main : tum aise udaas baithi achhi nahi lagti

Rizwana : to kya tumhare jane ki khushiyaan manau.

Main : Tumko pata hai tum jab hansatee ho to bahut sexi lagti ho meri to niyat hi kharab ho jati hai.

Rizwana : (hansate hue) uuuuu..... tang mat karo na neer . Ek to pehle mood kharab kar diya ab hasa raha ho.

Main : maine kya kiya yaar ye to khan ne hi mujhe jo bola maine tumko bata diya.

Rizwana : (rone jaisa munh banate hue)mat jao naa....neer .

Main : jana to padega kya kare majboori hai.

Rizwana : main tumhare bina kaise rahungi kabhi socha hai.

Main : mmmm chalo ek kaam karte hain tum bhi mere sath hi chalo.

Rizwana : kaha chalu...

Main : mere gaav or kaha... Raat wahan hi rahenge or subah tak wapis aa jayenge.

Rizwana : main....main kaise...

Main : kyo gaav jane me kya pareshani hai

Rizwana : pareshani wali baat nahi hai tumhare gharwale mujhe pasand nahi karte isliye unko shayad mera wahan rehna achha na lage.

Main : arre wo log bahut achhe hain yaar tum fikar mat karo koi kuch nahi kahega.

Rizwana : lekin...

Main: lekin-wekin kuch nahi tum sath aa rahi ho... matlab aa rahi ho... waise bhi mere pass ek hi din bacha hai kal subah ko to mission ke liye nikalna hai or main chahta hun main apna jyaadaa se jyaadaa waqt apne chahne walo ke sath guzaru jinme ab tum bhi ho.

Rizwana : (muskurakar meri gaal chumte hue ) achha....thik hai main bhi chalti hun.

Main : ye hui naa baat

Rizwana : tumko pata hai tum bahut ziddi ho.

Main: haa hun...koi aitraaz

Rizwana : (muskurakar naa me sir hilate hue) uuuuhhhuuu....

Main : achha rizwana main soch raha tha jane se pehle gharwalo ke liye thoda samaan khareed loo to kya hum pehle bazaar chalen agar tumko aitraaz na ho to.

Rizwana : ha-ha jarur kyo nai waise bhi itne din baad ghar jaa rahe ho khali hath thodi na jaoge.

Uske baad koi khas bat nahi hui hum head-quarter se seedha market chale gaye wahan maine nazi,fiza or baba ke liye bahut saara samaan khareeda. fir hum ghar aa gaye or aate hi rizwana mujh par toot padi or paglo ki tarah mujhe chumne lagi fir hamane ek baar sex kiya or uske baad main thak kar so gaya lekin rizwana meri or apni packing karne lagi rahi. shaam ko jab main so kar utha to rizwana ne sab kuch ready kar diya tha uske baad main bhi nahakar teiyaar hua or fir hum dono gaav ke liye nikal pade.

 
अपडेट-39

पूरे रास्ते मैं अपनी गाव की लाइफ ऑर गाव वालों के बारे मे रिज़वाना को बताता रहा. कुछ ही घंटे मे हम मेरे गाव मे आ चुके थे आज इतने दिन बाद अपने गाव मे आके मुझे बहुत खुशी हो रही थी. वैसे तो ये गाव मेरा नही था लेकिन जाने क्यो अब इस गाव से भी प्यार हो गया था इसकी मिट्टी की खुश्बू मुझे एक अजीब सा सुकून देती थी. कुछ ही देर मे मैने मेरे घर के सामने गाड़ी रोकदी जहाँ नाज़ी घर के बाहर बँधे पशुओ को चारा डालने मे मसरूफ़ थी. मैने जल्दी से कार बंद की ऑर एक मुस्कुराहट के साथ गाड़ी का दरवाज़ा खोला. पहले तो नाज़ी मुझे गौर से देखती रही ऑर जब उससे यक़ीन हो गया कि ये मैं ही हूँ तो वो चारे का टोकरा वही फेंक कर मेरी तरफ भागने लगी ऑर आके मुझे गले से लगा लिया. नाज़ी को गले लगाके मैं भी ये भूल गया कि मैं नाज़ी से नाराज़ था. आज तो बस दिल खोलकर सबसे मिलना चाहता था.

नाज़ी : तुम कहाँ से टपक पड़े.....इतने दिन बाद कहाँ से याद आ गई हमारी.

मैं : अर्रे पागल लड़की आस-पास भी देख लिया कर.

नाज़ी : (रिज़वाना को देखकर जल्दी से मुझसे अलग होती हुई) ओह्ह्ह माफ़ कीजिए डॉक्टरनी जी.... मैने आपको देखा नही.

रिज़वाना : (हँसते हुए) कोई बात नई...जब कोई अपना बहुत दिन बाद मिलता है तो काबू नही रहता खुद पर मैं समझ सकती हूँ.

मैं : अब सारी बातें यही करनी है या अंदर भी जाने दोगि.

नाज़ी : (अपने सिर पर हाथ मारते हुए) ओह्ह मैं तो भूल ही गई चलो अंदर आओ.

उसके बाद हम तीनो घर के अंदर आ गये ऑर नाज़ी का शोर सुनकर सबसे पहले फ़िज़ा बाहर आई तो उसकी भी हालत कुछ नाज़ी जैसी ही थी. मुझे देखते ही उसका चेहरा खुशी से खिल उठा जैसे ही वो मेरे पास आने लगी तो मेरे साथ खड़ी रिज़वाना को देखकर उसने अपने कदम वही रोक लिए ऑर डोर से ही मुझे ओर रिज़वाना को सलाम किया. हम-दोनो ने भी फ़िज़ा को अदब से सलाम किया ऑर इतना मे नाज़ी कमरे के अंदर भाग गई जहाँ बाबा होते थे. मैने भी जल्दी से नाज़ी के पीछे-पीछे ही कमरे मे चला गया बाबा से मिलने के लिए. मुझे देखते ही बाबा का चेहरा भी खुशी से खिल उठा मैं अब उनके पास जाके बैठ गया ऑर अदब से उनको सलाम किया उन्होने ने भी मेरे माथे को चूम लिया.

मैं : कैसे हैं आप बाबा.

बाबा : बेटा अब तुम आ गये हो तो अब तंदुरुस्त हो गया हूँ. तुम क्या आ गये ऐसा लगता है घर मे रौनक आ गई. हमने तुमको बहुत याद किया बेटा.

मैं : (मुस्कुराते हुए) इस घर की रौनक तो आप से है बाबा. मैने भी आप सब को बहुत याद किया. ऐसा एक भी दिन नही गया जब आपकी याद ना आई हो.

बाबा : बेटा हमारा तो घर ही सूना हो गया था तुम्हारे जाने के बाद. वो पगली नाज़ी तो दरवाज़ा नही बंद करने देती थी कि नीर ही ना आ जाए.

नाज़ी : क्या बात है आते ही बाबा के पास बैठ गये हो बाहर नही आना क्या जनाब... हम भी आपके इंतज़ार मे हैं.

मैं : हां बस... बाबा को मिलकर आता हूँ.

बाबा : चलो बेटा मैं भी तुम्हारे साथ बाहर ही चलता हूँ.

मैं : जी बाबा चलिए (बाबा को उठाते हुए)

बाबा : क्या बात है बेटा काम बहुत जल्दी ख़तम हो गया तुम्हारा. ख़ान साहब भी आए हैं क्या.

मैं : जी नही बाबा ख़ान साहब नही आए. ऑर वो इतने दिन तो मैं ट्रैनिंग के लिए गया हुआ था. कल मुझे मेरे असल काम पर भेजा जा रहा था तो मैने सोचा जाने से पहले आप सब से मिलकर जाउ. वैसे भी आप - सब की बहुत याद आ रही थी.

बाबा : (उदास होते हुए) अच्छा किया बेटा जो मिलने आ गये.... कल फिर से जा रहे हो बेटा.

मैं : जी बाबा

जब मैं बाबा को लेके बाहर आया तो शायद रिज़वाना ने मेरे जाने के बारे मे फ़िज़ा ऑर नाज़ी को पहले ही बता दिया था इसलिए उनका खुश-हाल चेहरा फिर से उदास हुआ पड़ा था.

मैं : अर्रे क्या हुआ आप सबने मुँह क्यो लटका लिया.

फ़िज़ा : कल तुम फिर से जा रहे हो हमने तो सोचा था कि सारा काम ख़तम करके ही आए हो.

मैं : (कुर्सी पर बाबा को बैठते हुए) हंजी कल निकलना है ओर काम भी जल्दी ही ख़तम कर दूँगा फिकर मत करो.

नाज़ी : वापिस कितने दिन मे आओगे

मैं : पता नही कुछ दिन लग सकते हैं इसलिए मैने सोचा की जाने से पहले सबसे मिलता हुआ चलूं. अच्छा बाबा ये डॉक्टर रिज़वाना है जिनके पास मैं शहर मे रहता हूँ.

रिज़वाना : (बाबा को अदब से सलाम करते हुए)

मैं : बाबा ये भी आज मेरे साथ यही रुक जाए तो आपको कोई ऐतराज़ तो नही बिचारी इतनी दूर से मुझे छोड़ने आई हैं.

बाबा : नही नही बेटा कैसी बातें कर रहे हो भला मुझे क्या ऐतराज़ होगा ये भी तो हमारी नाज़ी जैसी ही है ऑर ये तुम्हारा अपना घर है बेटा रहो जितने दिन तुम चाहो.

रिज़वाना : जी शुक्रिया बाबा जी मैं बस कल नीर के साथ ही चली जाउन्गी.

नाज़ी : वैसे बाबा नीर पहले से काफ़ी बदला हुआ नही लग रहा.

बाबा : नही बेटा ये तो पहले जैसा ही है

नाज़ी : उउउहहुउऊ....कपड़े तो देखो ना नीर के बाबा (मुस्कुराते हुए) गुंडा लग रहा है ना.

फ़िज़ा : (मुस्कुरा कर) चुप कर पागल इतना अच्छा तो लग रहा है वैसे भी शहर मे रहने का कुछ तो असर आएगा.

उसके बाद सारा दिन ऐसे ही गुज़रा रात को बाबा अपनी आदत के मुताबिक़ जल्दी सो गये लेकिन नाज़ी,फ़िज़ा ऑर रिज़वाना को चैन कहाँ था वो तीनो मुझे पूरी रात घेरकर बैठी रही ऑर मेरे गुज़रे 15 दिनो के बारे मे मुझसे पूछती रही ऐसे ही सारी रात बातों का सिल-सिला चलता रहा. तीनो आज खुश भी थी ऑर उदास भी थी. लेकिन मैं मजबूर था ना उनको मुकम्मल खुशी दे सकता था ना ही उनकी उदासी को दूर कर सकता था. बातें करते हुए जाने कब सुबह हो गई पता ही नही चला अब मुझे अपने वादे के मुताबिक़ जाना था. मेरा बिल्कुल जाने दिल नही था ऑर ना ही घर मे किसी को मुझे भेजने का दिल था लेकिन फिर भी बाबा की दी हुई ज़ुबान को मुझे पूरा करने के लिए जाना था. सुबह बाबा भी जल्दी उठ गये ऑर उठ ते ही मुझे अपने कमरे मे बुला लिया मेरे पिछे-पिछे नाज़ी, फ़िज़ा ऑर रिज़वाना भी उसी कमरे मे आ गई.

मैं : जी बाबा आपने मुझे बुलाया था.

बाबा : (हाँ मे सिर हिलाते हुए) बेटा अब तुम थोड़ी देर मे चले जाओगे इसलिए वहाँ जाके अपना ख़याल रखना.

मैं : जी बाबा... आप सब लोग भी अपना ख्याल रखना

रिज़वाना : (पिछे से मेरे कंधे पर हाथ रखते हुए) नीर तुम फिकर मत करो मैं हूँ ना तुम्हारी गैर मोजूद्गी मे मैं यहाँ आती रहूंगी ऑर इनको किसी चीज़ की कमी नही होगी ये मेरा तुमसे वादा है.

मैं : (मुस्कुरकर) शुक्रिया बस अब मैं चैन से जा सकता हूँ.

फ़िज़ा : बाबा मुझे डर लग रहा है. पता नही वो लोग कैसे होंगे.... आप एक बार ख़ान साहब से बात करके देखिए ना उन्हे कह दीजिए कि हमे नही नीर को नही भेजना.

मैं : बच्चों जैसी बात मत करो फ़िज़ा तुम जानती हो बाबा ने वादा किया था ऑर वैसे भी ख़ान की मदद करके मैं भी तो हमेशा के लिए आज़ाद हो जाउन्गा फिर तो हमेशा के लिए यहाँ ही रहूँगा ऑर रही मेरी बात तो उपर वाले का करम से मैं अकेला भी पूरी फ़ौज़ पर भारी हूँ.

नाज़ी : बस-बस....जब देखो लड़ने पर आमादा रहते हो. वहाँ जाके अपना खाने पीने का ख्याल रखना ऑर हो सके तो हमे फोन करते रहना ऑर अपनी खैर-खबर देते रहना.

मैं : (ना मे सिर हिलाते हुए) नही नाज़ी मैं फोन नही कर पाउन्गा.

नाज़ी : (आँखें दिखाते हुए) क्यो... वहाँ फोन नही है क्या....

मैं : ख़ान साहब ने बोला था कि वहाँ जाके जब तक मेरा मिशन पूरा नही हो जाता मैं किसी को नही जानता ऑर मेरा कोई नही.

फ़िज़ा : क्यो कोई नही हम हैं ना....

मैं : (अपने सिर पर हाथ रखते हुए) अर्रे उन लोगो को मैं अपनी कोई कमज़ोरी नही दिखा सकता उनकी नज़र मे तो मैं शेरा ही हूँ ना जिसका आगे-पिछे कोई नही.

बाबा : (अपने दोनो हाथ हवा मे उठाते हुए) मालिक मेरे बेटे की हिफ़ाज़त करना.... नाज़ी बेटा वो मैं जो ताबीज़ लेके आया था नीर के लिए वो ले आओ ज़रा.

नाज़ी : अभी लाई बाबा

मैं : कौनसा ताबीज़ बाबा

बाबा : बेटा ये बहुत मुबारक ताबीज़ है बहुत दुआ के साथ बनाया गया है ये तुम्हारी हर बुरी बला से हिफ़ाज़त करेगा.

नाज़ी : (तेज़ कदमो के साथ कमरे मे आके बाबा को ताबीज़ देते हुए) ये लो बाबा.

बाबा : (मेरे गले मे ताबीज़ बाँध कर मेरा माथा चूमते हुए) खुश रहो बेटा. अब तुम तेयार हो जाओ तुम्हारे जाने का वक़्त हो गया.

मैं : जी बाबा.

उसके बाद मैं ऑर रिज़वाना जल्दी से तेयार होने मे लग गये ऑर नाज़ी ऑर फ़िज़ा मेरे ऑर रिज़वाना के लिए नाश्ता बनाने लग गई. तेयार होके हम सब ने साथ मे नाश्ता किया ऑर उसके बाद फिर वही ढेर सारे आँसू ऑर बेश-कीमत दुवाओ के साथ मुझे विदा किया गया. कार मे रिज़वाना भी खुद को रोने से रोक नही पाई ऑर तमाम रास्ते वो भी मेरे कंधे पर सिर रख कर रोती रही. यक़ीनन इन सब के दिल मे जो मेरे लिए प्यार था वही मेरा जाना मुश्किल कर रहा था मेरा दिल चाह रहा था कि मैं ना कर दूं ऑर मैं ना जाउ. लेकिन मैं ऐसा चाह कर भी नही कर सकता था इसलिए अपने दिल को मज़बूत करके मैने कार की रफ़्तार बढ़ा दी अब मैं जल्दी से जल्दी शहर पहुँचना चाहता था. सब घरवाले ऑर रिज़वाना के बारे मे सोचते हुए जल्दी ही मैने कार को शहर तक पहुँचा दिया.

मैं : रिज़वाना हम शहर आ गये हैं अब बताओ तुम भी मेरे साथ हेड-क्वॉर्टर चलोगि या तुमको घर चोद दूँ.

रिज़वाना : (अपने आँसू पोन्छ्ते हुए) मैं भी तुम्हारे साथ ही चलती हूँ ना घर मे कौन है जिसके पास जाउ.

मैं : ठीक है.

उसके बाद हम हेड-क़्वार्टेर पहुँच गये जहाँ ख़ान ओर राणा ह्मारा पहले से इंतज़ार कर रहे थे मैने रिज़वाना को उसके कॅबिन मे जाने का इशारा किया लेकिन वो फिर भी मेरे पिछे-पिछे ख़ान के कॅबिन मे ही आ गई. मेरे कमरे मे घुसते ही ख़ान ने तालियो के साथ मे मेरा स्वागत किया.

ख़ान : (ताली बजाते हुए) वाह भाई वा क्या ज़ुबान का पक्का आदमी है देख राणा तुझे बोला था ना ये सुबह आ जाएगा.

राणा : साहब आपको पक्का यक़ीन है ये शेरा ही है.

ख़ान : मेरा दिमाग़ मत खराब कर तुझे जो बोला वो कर फालतू मे अपना दिमाग़ मत चला समझा.

राणा : जी माफ़ कर दीजिए ग़लती हो गई.

रिज़वाना : ख़ान तुम नीर को कहाँ भेज रहे हो.

ख़ान : सॉरी मेडम ये सीक्रेट है आपको नही बता सकता.

रिज़वाना : (मुझे देखते हुए) अपना ख्याल रखना ऑर जाते हुए मुझे मिलकर जाना.

मैं : (हाँ मे सिर हिलाते हुए) अच्छा.

उसके बाद रिज़वाना कमरे से बाहर चली गई ऑर मैं राणा के साथ वाली कुर्सी पर आके बैठ गया. ख़ान अपनी कुर्सी से खड़ा हुआ ऑर जल्दी से तेज़ कदमो के साथ कमरे के बाहर खड़े गार्ड की तरफ गया ऑर उससे दूर जाके खड़े होने का बोल दिया ऑर फिर वापिस अपनी कुर्सी पर आके बैठ गया. मैं ऑर राणा दोनो ख़ान को बड़े गौर से देख रहे थे. ख़ान ने मुझे एक मुस्कान के साथ देखा ऑर बोला...

ख़ान : हाँ तो नीर मिल आए घरवालो से.

मैं : जी मिल आया.

ख़ान : अब मेरे काम के लिए तेयार हो.

मैं : हंजी एक दम तेयार हूँ

ख़ान : बहुत खुंब... तो ठीक है फिर अभी थोड़ी देर मे निकलना है उससे पहले मेरे साथ आओ... राणा तुम यही बैठो ऑर हो सके तो अपने लिए चाय कॉफी मंगवा लेना यार.

राणा : जी कोई बात नही मैं ठीक हूँ आप अपना काम ख़तम कर ले.

ख़ान : (मेरे कंधे पर हाथ मरते हुए ) चलो मेरे साथ आओ.

मैं बिना कोई जवाब दिए अपनी कुर्सी से खड़ा हुआ ऑर सवालिया नज़रों के साथ ख़ान के पिछे-पिछे चलने लगा. ख़ान मुझे एक कमरे मे ले गया जहाँ सिर्फ़ एक टेबल ऑर दो कुर्सियाँ लगी हुई थी.

ख़ान : तुम अंदर बैठो मैं अभी आता हूँ.

मैं : जी अच्छा.

कुछ देर इंतज़ार करने के बाद ख़ान एक बॅग के साथ कमरे मे आ गया ऑर बॅग को टेबल पर मेरे सामने रख दिया ऑर मेरे देखते ही देखते बॅग खोल कर उसमे से समान निकालना शुरू किया.

ख़ान : अपने जूते उतारो ऑर ये जूते पहन लो.

मैं : क्यो... इनमे क्या खराबी है अभी नये ही लिए हैं.

ख़ान : जो मैं जूते तुमको दे रहा हूँ ये फॅशन के लिए नही बल्कि इनमे ट्रांसमेटेर लगा है इससे मुझे पता चलता रहेगा की तुम कहाँ हो.

मैं : (अपने जूते उतारते हुए) अच्छा पहन लेता हूँ.

ख़ान : (टेबल पर एक हॅंड पिस्टल रखते हुए) ये गन है तुम्हारी सेफ्टी के लिए ज़रूरत पड़े तो ही चलाना लेकिन याद रखना अब तुम नीर हो ऑर नीर पेशावॉर क़ातिल नही है.

मैं : (गन उठाते हुए) जी अच्छा.

ख़ान : (एक लॉकेट निकालते हुए) ये देखने मे लॉकेट जैसा है लेकिन असल मे कॅमरा है इससे पहन लो... तुम उन लोगो के साथ जहाँ भी जाओ अपने लॉकेट से खेलने के बहाने उनकी ऑर नये लोगो की तस्वीरे लेते रहना.

मैं : ठीक है.

ख़ान : जो तुमको ट्रैनिंग मे सिखाया था वो सब याद है ना.

मैं : जी सब याद भी है ऑर मैं अब सब डिवाइस इस्तेमाल भी कर सकता हूँ.

ख़ान : ठीक है.

मैं: लेकिन ख़ान साहब वो तस्वीरें मैं आप तक पहुन्चाउन्गा कैसे.

ख़ान : मैं तुमको हर हफ्ते तुम्हारे फाइट क्लब पर मिलूँगा वहाँ हर बार तुम अपना लॉकेट इस दूसरे लॉकेट से बदल देना ताकि तुम्हारे लॉकेट से तस्वीरे लेकर मैं उनको डवलप करवा सकूँ ऑर तुम दूसरे लॉकेट से ऑर नयी तस्वीर ले सको.

मैं : जी अच्छा.... लेकिन मुझे कैसे पता चलेगा कि आप मुझे कब ऑर कहाँ मिलोगे.

ख़ान : तुम बस अपने फाइट क्लब मे आ जया करना वहाँ तुमको मेरा कोई ना कोई आदमी मिल जाएगा जो तुमको मेरा मिलने का वक़्त ऑर जगह बता देगा.

मैं : ठीक है.

ख़ान : वहाँ जाके लड़की ऑर ताक़त के नशे मे मत डूब जाना ऑर जब भी मोक़ा मिले सबूत इकट्ठे करते रहना ताकि मैं उन लोगो को सज़ा दिलवा सकूँ.

मैं : (हां मे सिर हिलाते हुए) जी अच्छा.

ख़ान: अब तुम राणा के साथ जाओ वो तुमको तुम्हारी मंज़िल तक पहुँच देगा ऑर एक ज़रूरी बात तुम मेरे लिए काम करते हो ये बात कभी ग़लती से भी किसी को मत बताना नही तो वो लोग तुमको वही ख़तम कर देंगे.

मैं: हमम्म

ख़ान : अब तुम राणा के साथ जाओ ओर उसके साथ जाके डील करो याद रखना तुमको वहाँ जाके लड़ाई करनी है किसी भी बहाने से समझ गये.

मैं : हाँ सब समझ गया.

ख़ान : कुछ भी समझ नही आया तो फिर से पूछ लो लेकिन वहाँ जाके कोई गड़बड़ मत करना तुम नही जानते तुम पर मैं कितना बड़ा दाव खेल रहा हूँ अगर तुमने कोई ग़लती की तो मेरी जान भी ख़तरे मे आ जाएगी क्योंकि उन लोगो की पहुँच का तुमको अंदाज़ा नही है यहाँ मेरे स्टाफ मे भी उन लोगो ने अपने कुछ कुत्ते पल रखे हैं इसलिए मैने तुम्हारी ट्रैनिंग को एक दम टॉप सीक्रेट ऑर सिर्फ़ अपने भरोसे के आदमियो के साथ पूरा करवाया है.

मैं : आप फिकर ना करें सब वैसे ही होगा जैसा आप चाहते हैं मुझे पर भरोसा किया है तो भरोसा रखिए ऑर मेरे पिछे से मेरे घरवालो को कोई तक़लीफ़ नही होनी चाहिए.

ख़ान : उनकी फिकर तुम मत करो मैं खुद उनका ख्याल रखूँगा ऑर देखूँगा कि उनको किसी भी चीज़ की कमी ना हो.

मैं : जी शुक्रिया.

उसके बाद मैं ओर ख़ान वापिस ख़ान के कॅबिन मे चले गये जहाँ राणा मेरा इंतज़ार कर रहा था.

मैं: ख़ान साहब मैं एक मिंट आया जाने से पहले एक बार डॉक्टर साहिबा से मिल आउ.

ख़ान : जाओ लेकिन जल्दी आना.

उसके बाद मैं रिज़वाना के कॅबिन मे चला गया जहाँ वो शायद मेरा ही इंतज़ार कर रही थी मेरे कॅबिन मे आते ही उसने दरवाज़ा अंदर से बंद किया ऑर मुझे गले लगा लिया.

रिज़वाना : जा रहे हो.

मैं : हमम्म बस तुमको मिलने के लिए ही आया था.

रिज़वाना : कहाँ जा रहे हो.

मैं : पता नही ख़ान ने मुझे भी नही बताया बस इतना पता है राणा के साथ जाना है.

रिज़वाना : ठीक है कोई बात नही. वहाँ अपना ख़याल रखना ऑर अगर मुमकिन हो तो मुझे फोन कर लेना जब भी मोक़ा मिले.

मैं : अच्छा... ठीक है अब मैं जाउ.

रिज़वाना : हम्म जाओ

मैं : मुझे छोड़ॉगी तो जाउन्गा

रिज़वाना : रुक जाओ 2 मिंट ढंग से गले भी नही लगाने देते....(कुछ देर मुझे गले से लगा कर) हमम्म अब ठीक है अब जाओ (मेरे होंठ चूमते हुए)

मैं : तुम भी अपना ख्याल रखना ऑर रोना मत.

रिज़वाना : (मुस्कुरा कर हाँ मे सिर हिलाते हुए) हमम्म

Update-39

Poore raste main apni gaav ki life or gaav walo ke bare me rizwana ko batata raha. kuch hi ghante me hum mere gaav me aa chuke the aaj itne din baad apne gaav me aake mujhe bahut khushi ho rahi thi. waise to ye gaav mera nahi tha lekin jane kyo ab iss gaav se bhi pyaar ho gaya tha iski mitti ki khushbu mujhe ek ajeeb sa sukoon deti thi. Kuch hi der me maine mere ghar ke samne gaadi rokdi jahan nazi ghar ke bahar bandhe pashuwo ko chaara daalne me masroof thi. maine jaldi se car band ki or ek muskurahat ke sath gaadi ka darwaza khola. pehle to nazi mujhe gaur se dekhti rahi or jab usse yaqeen ho gaya ki ye main hi hun to wo chaare ka tokra wahi fenk kar meri taraf bhagne lagi or aake mujhe gale se laga liya. Nazi ko gale lagake main bhi ye bhul gaya ki main nazi se naraz tha. aaj to bas dil kholkar sabse milna chahta tha.

Nazi : Tum kaha se tapak pade.....itne din baad kaha se yaad aa gai hamaari.

Main : arre pagal ladki aas-pass bhi dekh liya kar.

Nazi : (rizwana ko dekhkar jaldi se mujhse alag hoti hui) ohhh maaf kijiye doctorni ji.... maine aapko dekha nahi.

Rizwana : (hansate hue) koi baat nai...jab koi apna bahut din baad milta hai to kaboo nahi rehta khud par main samajh sakti hun.

Main : ab saari baaten yhi karni hai ya andar bhi jane dogi.

Nazi : (apne sir par hath marte hue) ohh main to bhul hi gai chalo andar aao.

Uske baad hum teeno ghar ke andar aa gaye or nazi ka shor sunkar sabse pehle fiza bahar aayi to uski bhi haalat kuch nazi jaisi hi thi. mujhe dekhte hi uska chehra khushi se khil utha jaise hi wo mere pass aane lagi to mere sath khadi rizwana ko dekhkar usne apne kadam wahi rok liye or door se hi mujhe or rizwana ko salaam kiya. Hum-dono ne bhi fiza ko adab se salaam kiya or Itna me naazi kamre ke andar bhaag gai jahan baba hote the. maine bhi jaldi se nazi ke piche-piche hi kamre me chala gaya baba se milne ke liye. Mujhe dekhte hi baba ka chehra bhi khushi se khil utha main ab unke pass jake baith gaya or adab se unko salaam kiya unhone ne bhi mere maathe ko chum liya.

Main : kaise hain aap baba.

Baba : beta ab tum aa gaye ho to ab tandrust ho gaya hun. tum kya aa gaye aisa lagta hai ghar me rounak aa gai. Hamane tumko bahut yaad kiya beta.

Main : (muskurate hue) iss ghar ki raunak to aap se hai baba. maine bhi aap sab ko bahut yaad kiya. aisa ek bhi din nahi gaya jab aapki yaad naa ayi ho.

Baba : beta hmara to ghar hi soona ho gaya tha tumhare jane ke baad. wo pagli nazi to darwaza nahi band karne deti thi ki neer hi naa aa jaye.

Nazi : kya baat hai aate hi baba ke pass baith gaye ho bahar nahi aana kya janab... hum bhi aapke intzaar me hain.

Main : haa bas... baba ko milkar aata hun.

Baba : chalo beta main bhi tumhare sath bahar hi chalta hun.

Main : ji baba chaliye (baba ko uthate hue)

Baba : kya baat hai beta kaam bahut jaldi khatam ho gaya tumhara. khan sahab bhi aaye hain kya.

Main : ji nahi baba khan sahab nahi aaye. Or wo itne din to main training ke liye gaya hua tha. kal mujhe mere asal kaam par bheja jaa raha tha to maine socha jane se pehle aap sab se milkar jau. waise bhi aap - sab ki bahut yaad aa rahi thi.

Baba : (udaas hote hue) Achha kiya beta jo milne aa gaye.... kal fir se jaa rahe ho beta.

Main : ji baba

Jab main baba ko leke bahar aaya to shayad rizwana ne mere jane ke bare me fiza or nazi ko pehle hi bata diya tha isliye unka khush-haal chehra fir se udaas hua pada tha.

Main : arre kya hua aap sabne munh kyo latkaa liya.

Fiza : kal tum fir se jaa rahe ho hamane to socha tha ki saara kaam khatam karke hi aaye ho.

Main : (kursi par baba ko betthate hue) hanji kal nikalna hai or kaam bhi jaldi hi khatam kar dunga fikar mat karo.

Nazi : wapis kitne din me aaoge

Main : pata nahi kuch din lag sakte hain isliye maine socha ki jane se pehle sabse milta hua chalu. Achha baba ye doctor rizwana hai jinke pass main shehar me rehta hun.

Rizwana : (baba ko adab se salaam karte hue)

Main : baba ye bhi aaj mere sath yhi ruk jaye to aapko koi aitraaz to nahi bichari itni door se mujhe chodne aayi hain.

Baba : nahi nahi beta kaisi baaten kar rahe ho bhala mujhe kya aitraaz hoga ye bhi to hamaari nazi jaisi hi hai or ye tumhara apna ghar hai beta rho jitne din tum chaho.

Rizwana : ji shukriya baba ji main bas kal neer ke sath hi chali jaungi.

Nazi : waise baba neer pehle se kaafi badala hua nahi lag raha.

Baba : nahi beta ye to pehle jaisa hi hai

Nazi : uuuhhuuu....kapde to dekho na neer ke baba (muskurate hue) gunda lag raha hai na.

Fiza : (muskurakar) chup kar pagal itna achha to lag raha hai waise bhi shehar me rehne ka kuch to asar ayega.

Uske baad sara din aise hi guzra raat ko baba apni aadat ke mutabiq jaldi so gaye lekin nazi,fiza or rizwana ko chain kaha tha wo teeno mujhe poori raat gherkar baithi rahi or mere guzre 15 dino ke bare me mujhse puchhti rahi aise hi saari raat baaton ka sil-sila chalta raha. Teeno aaj khush bhi thi or udaas bhi thi. Lekin main majboor tha naa unko mukammal khushi de sakta tha na hi unki udaasi ko door kar sakta tha. Baaten karte hue jane kab subah ho gai pata hi nahi chala ab mujhe apne vaade ke mutabiq jana tha. mera bilkul jane dil nahi tha or naa hi ghar me kisi ko mujhe bhejne ka dil tha lekin fir bhi baba ki di hui zubaan ko mujhe poora karne ke liye jana tha. Subah baba bhi jaldi uth gaye or uth te hi mujhe apne kamre me bula liya mere pichhe-pichhe nazi, fiza or rizwana bhi usi kamre me aa gai.

Main : ji baba aapne mujhe bulaya tha.

Baba : (ha me sir hilate hue) beta ab tum thodi der me chale jaoge isliye wahan jake apna khayaal rakhna.

Main : ji baba... aap sab log bhi apna khyaal rakhna

Rizwana : (pichhe se mere kandhe par hath rakhte hue) neer tum fikar mat karo main hun na tumhari gair mojudgi me main yahan aati rahungi or inko kisi chij ki kami nahi hogi ye mera tumse vaada hai.

Main : (muskurakar) shukriya bas ab main chain se jaa sakta hun.

Fiza : baba mujhe dar lag raha hai. pata nahi wo log kaise honge.... aap ek baar khan sahab se baat karke dekhiye na unhe keh dijiye ki hume nahi neer ko nahi bhejna.

Main : bacho jaisi baat mat karo fiza tum janti ho baba ne vaada kiya tha or waise bhi khan ki madad karke main bhi to hamesha ke liye azaad ho jaunga fir to hamesha ke liye yahan hi rahunga or rahi meri baat to upar wale ka karam se main akela bhi poori fauz par bhaari hun.

Nazi : bas-bas....jab dekho ladne par amaada rehte ho. wahan jake apna khane peene ka khyaal rakhna or ho sake to hume phone karte rehna or apni khair-khabar dete rehna.

Main : (Na me sir hilate hue) nahi nazi main phone nahi kar paunga.

Nazi : (aankhen dikhate hue) kyo... wahan phone nahi hai kya....

Main : khan sahab ne bola tha ki wahan jake jab tak mera mission poora nahi ho jata main kisi ko nahi janta or mera koi nahi.

Fiza : kyo koi nahi hum hain na....

Main : (apne sir par hath rakhte hue) arre unn logo ko main apni koi kamzori nahi dikha sakta unki nazar me to main shera hi hun naa jiska aagey-pichhe koi nahi.

Baba : (apne dono hath hawa me uthate hue) malik mere bete ki hifazat karna.... Nazi beta wo main jo tabeez leke aaya tha neer ke liye wo le aao zra.

Nazi : abhi laayi baba

Main : kounsa tabeez baba

Baba : beta ye bahut mubarak tabeez hai bahut dua ke sath banaya gaya hai ye tumhari har buri bala se hifazat karega.

Nazi : (tez kadmo ke sath kamre me aake baba ko tabiz dete hue) ye lo baba.

Baba : (mere gale me tabiz bandh kar mera matha chumte hue) khush rho beta. ab tum teiyaar ho jao tumhare jane ka waqt ho gaya.

Main : ji baba.

Uske baad main or rizwana jaldi se teiyaar hone me lag gaye or nazi or fiza mere or rizwana ke liye nashta banane lag gai. Teiyaar hoke hum sab ne sath me nashta kiya or uske baad fir wahi dher saare aansu or besh-kimat duwao ke sath mujhe vida kiya gaya. Car me rizwana bhi khud ko rone se rok nahi paayi or tamaam raste wo bhi mere kandhe par sir rakh kar roti rahi. yaqeenan inn sab ke dil me jo mere liye pyaar tha wahi mera jana mushkil kar raha tha mera dil chah raha tha ki main naa kar doo or main naa jau. lekin main aisa chah kar bhi nahi kar sakta tha isliye apne dil ko mazboot karke maine car ki raftaar badha di ab main jaldi se jaldi shehar pohonchna chahta tha. Sab gharwale or rizwana ke bare me sochte hue jaldi hi maine car ko shehar tak pohoncha diya.

Main : rizwana hum shehar aa gaye hain ab bataao tum bhi mere sath head-quarters chalogi ya tumko ghar chod doo.

Rizwana : (apne aansu ponchhte hue) main bhi tumhare sath hi chalti hun na ghar me koun hai jiske pass jau.

Main : thik hai.

Uske baad hum head-quaters pohonch gaye jahan khan or rana hmara pehle se intzaar kar rahe the maine rizwana ko uske cabin me jane ka ishara kiya lekin wo fir bhi mere pichhe-pichhe khan ke cabin me hi aa gai. mere kamre me ghuste hi khan ne taliyo ke sath me mera swagat kiya.

Khan : (taali bajate hue) wah bhai wah kya zubaan ka pakka aadmi hai dekh rana tujhe bola tha na ye subah aa jayega.

Rana : sahab aapko pakka yaqeen hai ye shera hi hai.

Khan : mera dimaag mat kharab kar tujhe jo bola wo kar faltu me apna dimaag mat chala samjha.

Rana : ji maaf kar dijiye galti ho gai.

Rizwana : khan tum neer ko kaha bhej rahe ho.

Khan : Sorry madam ye secret hai aapko nahi bata sakta.

Rizwana : (mujhe dekhte hue) apna khyaal rakhna or jate hue mujhe milkar jana.

Main : (haa me sir hilate hue) Achha.

Uske baad rizwana kamre se bahar chali gai or main rana ke sath wali kursi par aake baith gaya. khan apni kursi se khada hua or jaldi se tez kadmo ke sath kamre ke bahar khade guard ki taraf gaya or usse door jake khade hone ka bol diya or fir wapis apni kursi par aake baith gaya. main or rana dono khan ko bade gaur se dekh rahe the. khan ne mujhe ek muskaan ke sath dekha or bola...

Khan : haa to neer mil aaye gharwalo se.

Main : ji mil aaya.

Khan : ab mere kaam ke liye teiyaar ho.

Main : hanji ek dam teiyaar hun

Khan : bahut khunb... to thik hai fir abhi thodi der me nikalna hai usse pehle mere sath aao... Rana tum yhi baitho or ho sake to apne liye chaye coffy mangwa lena yaar.

Rana : ji koi baat nahi main thik hun aap apna kaam khatam kar le.

Khan : (mere kandhe par hath marte hue ) chalo mere sath aao.

Main bina koi jawab diye apni kursi se khada hua or sawaliya nazaro ke sath khan ke pichhe-pichhe chalne laga. khan mujhe ek kamre me le gaya jahan sirf ek table or do kursiyaan lagi hui thi.

Khan : tum andar baitho main abhi aata hun.

Main : ji achha.

Kuch der intzaar karne ke baad khan ek bag ke sath kamre me aa gaya or bag ko table par mere samne rakh diya or mere dekhte hi dekhte bag khol kar usme se samaan nikalna shuru kiya.

Khan : apne joote utaro or ye joote pehan lo.

Main : kyo... inme kya kharabi hai abhi naye hi liye hain.

Khan : jo main joote tumko de raha hun ye fashion ke liye nahi balki inme transmeter laga hai isse mujhe pata chalta rahega ki tum kaha ho.

Main : (apne joote utarte hue) achha pehan leta hun.

Khan : (table par ek hand pistol rakhte hue) ye gun hai tumhari safety ke liye jarurat pade to hi chalana lekin yaad rakhna ab tum neer ho or neer peshawar qatil nahi hai.

Main : (Gun uthate hue) ji achha.

Khan : (ek locket nikalte hue) ye dekhne me locket jaisa hai lekin asal me camera hai isse pehan lo... tum unn logo ke sath jahan bhi jao apne locket se khelne ke bahane unki or naye logo ki tasveere lete rehna.

Main : thik hai.

Khan : jo tumko training me sikhaya tha wo sab yaad hai na.

Main : ji sab yaad bhi hai or main ab sab device istemaal bhi kar sakta hun.

Khan : thik hai.

Main: Lekin khan sahab wo tasveeren main aap tak pohonchaunga kaise.

Khan : main tumko har hafte tumhare fight club par milunga wahan har bar tum apna locket iss dusre locket se badal dena taki tumhare locket se tasveere lekar main unko devolp karwa saku or tum dusre locket se or nayi tasveer le sako.

Main : ji achha.... lekin mujhe kaise pata chalega ki aap mujhe kab or kaha miloge.

Khan : tum bas apne fight club me aa jaya karna wahan tumko mera koi na koi aadmi mil jayega jo tumko mera milne ka waqt or jagah bata dega.

Main : thik hai.

Khan : wahan jake ladki or taqat ke nashe me mat doob jana or jab bhi moqa mile saboot ikathe karte rehna taki main unn logo ko sajaa dilwa saku.

Main : (haa me sir hilate hue) ji achha.

Khan: Ab tum rana ke sath jao wo tumko tumhari manzil tak pohoncha dega or ek jaruri baat tum mere liye kaam karte ho ye baat kabhi galati se bhi kisi ko mat batana nahi to wo log tumko wahi khatam kar denge.

Main: Hhhmmm

Khan : ab tum rana ke sath jao or uske sath jake deal karo yaad rakhna tumko wahan jake ladayi karni hai kisi bhi bahane se samajh gaye.

Main : haa sab samajh gaya.

Khan : kuch bhi samajh nahi aaya to fir se puch lo lekin wahan jake koi gadbad mat karna tum nahi jante tum par main kitna bada daav khel raha hun agar tumne koi galati ki to meri jaan bhi khatre me aa jayegi kyonki unn logo ki pohonch ka tumko andaza nahi hai yahan mere staff me bhi unn logo ne apne kuch kutte pal rakhe hain isliye maine tumhari training ko ek dam top secret or sirf apne bharose ke admiyo ke sath poora karwaya hai.

Main : aap fikar na kare sab waise hi hoga jaisa aap chahte hain mujhe par bharosa kiya hai to bharosa rakhiye or mere pichhe se mere gharwalo ko koi taqleef nahi honi chahiye.

Khan : unki fikar tum mat karo main khud unka khyaal rakhunga or dekhunga ki unko kisi bhi chij ki kami na ho.

Main : ji shukriya.

Uske baad main or khan wapis khan ke cabin me chale gaye jahan rana mera intzaar kar raha tha.

Main: khan sahab main ek mint aaya jane se pehle ek baar doctor sahiba se mil aau.

Khan : jao lekin jaldi aana.

Uske baad main rizwana ke cabin me chala gaya jahan wo shayad mera hi intzaar kar rahi thi mere cabin me aate hi usne darwaza andar se band kiya or mujhe gale laga liya.

Rizwana : jaa rahe ho.

Main : hhhmmm bas tumko milne ke liye hi aaya tha.

Rizwana : kaha jaa rahe ho.

Main : pata nahi khan ne mujhe bhi nahi bataayaa bas itna pata hai rana ke sath jana hai.

Rizwana : thik hai koi baat nahi. wahan apna khayaal rakhna or agar mumkin ho to mujhe phone kar lena jab bhi moqa mile.

Main : achha... thik hai ab main jau.

Rizwana : hhhhmm jao

Main : mujhe chodogi to jaunga

Rizwana : ruk jao 2 mint dhang se gale bhi nahi lagane dete....(kuch der mujhe gale se laga kar) hhhmmm ab thik hai ab jao (mere honth chumte hue)

Main : tum bhi apna khyaal rakhna or rona mat.

Rizwana : (muskurakar haa me sir hilate hue) Hhhmmm

 
अपडेट-40

उसके बाद मैं ऑर रिज़वाना ख़ान के कॅबिन तक आ गये ऑर ख़ान के कॅबिन तक मुझे छोड़कर रिज़वाना हाथ हिलाकर मुझे अलविदा कहती हुई वापिस अपने कॅबिन की तरफ चली गई. मेन गेट खोल कर ख़ान के कॅबिन मे चला गया.

ख़ान : तुम्हारा मिलना-मिलना हो गया.

मैं (हँसते हुए) जी हो गया जनाब.

ख़ान : शूकर है...(हाथ जोड़ते हुए) चल भाई राणा खड़ा हो जा ऑर लग जा कम पर इसको मैने सब समझा दिया है ऑर तू भी कोई लफडा मत करना.

राणा : जनाब आगे कभी गड़-बड हुई है जो अब होगी.

ख़ान : पहले तू अकेला होता था इस बार ये भी तेरे साथ है.

राणा : फिकर ना करे जनाब मैं साथ हूँ ना सब संभाल लूँगा.

ख़ान : इसको वहाँ पहुँचने के बाद मुझे फोन कर देना ऑर मुझे इसके पल-पल की खबर चाहिए समझा.

राणा : (अपना दायां हाथ सिर पर रखते हुए) ओके बॉस.... चलो भाई शेरा आपको आपकी मंज़िल तक पहुंचाता हूँ.

उसके बाद मैं ऑर राणा एक कार मे बैठे ऑर अपने नये सफ़र के लिए रवाना हो गये मैं नही जानता था कि मुझे कहा भेजा जा रहा है ऑर वो लोग कौन है ऑर कैसे होंगे क्या वो मुझे अपने साथ लेके जाएँगे या नही. मुझे ये भी नही पता था कि जिस सफ़र पर मुझे भेजा गया है वहाँ से मैं ज़िंदा लौटुन्गा भी या नही. ऐसे ही कई सवाल मेरे दिमाग़ मे चल रहे थे. लेकिन इस वक़्त मेरे पास किसी सवाल का जवाब नही था लेकिन तेज़ी से गुज़रने वाले वक़्त के पास मेरे हर सवाल का जवाब था. अब मैं चुप-चाप बैठा अपनी आने वाली मज़िल का इंतज़ार कर रहा था जहाँ मुझे जाना था.

राणा गाड़ी को तेज़ रफ़्तार से भगा रहा था ऑर मैं खिड़की से अपना चेहरा बाहर निकाले ठंडी हवा का मज़ा ले रहा था. मुझे नही पता कब मेरी आँख लग गई ऑर मैं सो गया. जाने मैं कितनी देर सोता रहा लेकिन राणा के हिलाने से मेरी आँख खुल गई...

राणा : शेरा भाई एरपोर्ट आ गया है उतरो...

मैं : (दोनो हाथो से आँखें मलते हुए) क्या....

राणा : भाई एरपोर्ट आ गया फ्लाइट पकड़नी है ना गाड़ी से उतरो....

मैं : (अपने दोनो हाथ अपने मुँह पर फेरते हुए) हाँ चलो...

उसके बाद मैं ऑर राणा गाड़ी से उतर गये राणा ने जल्दी से गाड़ी की पिच्छली सीट से उसका ऑर मेरा सूट केस निकाला ऑर मेरी तरफ बढ़ने लगा. मैने अपना सूट केस पकड़ लिया ऑर उसने अपना. फिर हमने गाड़ी को वही छोड़ दिया ऑर हम दोनो एरपोर्ट के अंदर आ गये. ये जगह मेरे लिए एक दम नयी थी मैं ठीक होने के बाद पहले कभी ऐसी जगह पर नही आया था. राणा ने मुझे एक जगह की तरफ इशारा करके बैठने को कहा ऑर खुद किसी से मिलने चला गया. मैं एरपोर्ट पर एक खाली जगह पर बैठ गया ऑर चारो तरफ देख रहा था वहाँ के लोग जो घूम रहे थे ओर सेक्यूरिटी गार्ड जो लोगो को चेक कर रहे थे. एक जगह पर सबके समान को एक मशीन (स्केनर) मे डाल कर चेक किया जा रहा था इसलिए मुझे अपने समान की फिकर होने लगी क्योंकि इतना तो मुझे देख कर ही समझ आ गया था कि मेरा समान भी ज़रूर चेक होगा ऑर मेरे पास पिस्टल भी थी ऑर ख़ान के दिए हुए ट्रांसमेटेर्स भी जिससे ख़ान मुझ तक पहुँच सके. अभी मैं सोच ही रहा था कि राणा 2 गार्ड जिनके पास हथियार थे उनके साथ मेरी तरफ आ रहे थे मुझे लगा शायद उन लोगो ने राणा को पकड़ लिया. इसलिए मैने जल्दी से अपना एक हाथ जॅकेट मे डाल लिया जिस तरफ पिस्टल थी ऑर अपना हाथ पिस्टल पर रख लिया.

राणा : चलो भाई काम हो गया 10 मिंट बाद फ्लाइट है अपनी...

मैं : (चैन की साँस लेकर अपना हाथ जॅकेट से बाहर निकालते हुए ) अच्छा... लेकिन ये लोग कौन है.

राणा : भाई ये ख़ान साहब के ही लोग हैं हम को यहाँ कोई परेशानी ना हो इसलिए...

मैं : अच्छा... मैं तो समझा तुमको इन्होने पकड़ लिया.

राणा : (मुस्कुरा कर) नही भाई सब ठीक है आप बे-फिकर हो जाए.

मैं : (हाँ मे सिर हिलाते हुए) हमम्म यार राणा वैसे हम क्या शहर से बाहर जा रहे हैं.

राणा : (हँसते हुए) भाई आपको ख़ान साहब ने कुछ नही बताया.

मैं : (ना मे सिर हिलाते हुए)

राणा : कोई बात नही.... चलो चलें देर हो रही है.

उसके बाद कोई खास बात नही हुई जल्दी ही हम रनवे पर आ गये जहाँ हमारा छोटा सा प्लेन ऑलरेडी तेयार खड़ा था. हम दोनो को वो दोनो लोग बिना सेक्यूरिटी चेक के एक छोटे से प्लेन तक छोड़ गये जहाँ सिर्फ़ मैं ऑर राणा ही बैठे थे बाकी तमाम प्लेन खाली पड़ा था. मैं हर चीज़ को बड़ी हैरानी से देख रहा था क्योंकि ये सब कुछ मेरे लिए एक दम नया था. खैर कुछ ही घंटे के बाद हम हमारी मंज़िल तक पहुँच गये. फ्लाइट से उतरने के बाद मैं राणा के पिछे-पिछे ही चल पड़ा क्योंकि मैं नही जानता था कि उसके बाद कहाँ जाना है. फ्लाइट से उतरने के बाद एरपोर्ट पर एक कार पहले से मोजूद थी जिसमे मैं ऑर राणा बैठ गये. बाहर रात हो गई थी लेकिन इतनी ज़्यादा रोशनी ऑर बड़ी-बड़ी बिल्डिंग्स थी जो मैने पहले कभी नही देखी थी मैने जल्दी से कार का ग्लास नीचे किया ऑर बाहर देखने लगा.

राणा : भाई क्या कर रहे हो शीशा बंद करो कोई देख सकता है.

मैं : यहाँ हम को कौन जानता है यार देखने दो ना अच्छा लग रहा है.

राणा : भाई आपके लिए ये शहर अजनबी है लेकिन आप इस शहर के लिए अजनबी नही हो आपके इस शहर मे सिर्फ़ दोस्त ही नही दुश्मन भी बहुत है. मैं आपके लिए ही कह रहा हूँ.

मैं : (बिना कुछ बोले शीशा उपर करते हुए) ठीक है.... वैसे क्या तुम मेरे बारे मे सब कुछ जानते हो.

राणा : भाई इस शहर मे शायद ही कोई ऐसा हो जिसने शेरा भाई का नाम नही सुना हो.

मैं : वैसे अब हम जा कहाँ रहे हैं.

राणा : होटेल मे जहाँ हमने रुकना है फिर कल शाम को डील है तो वहाँ जाना है.

मैं : अच्छा...

उसके बाद हम दोनो कार मे खामोश बैठे रहे ऑर कुछ देर बाद कार ने हम को एक बहुत ऊँची बिल्डिंग के सामने उतार दिया ये एक बेहद शानदार होटेल था. अंदर राणा के साथ मैं होटेल के अंदर चला गया वहाँ हम दोनो के लिए पहले से रूम बुक थे. राणा मुझे शाम को तेयार रहने का बोलकर अपने कमरे मे चला गया. मैं भी सफ़र से थक गया था इसलिए रूम मे आते ही सो गया. सुबह मैं देर से उठा ऑर नाश्ता मंगवाने के बाद मेरे पास अब करने को कोई काम नही था इसलिए अपना वक़्त टीवी देखकर गुज़ारने की कोशिश करने लगा. लेकिन आज मुझसे वक़्त काटे नही काट रहा था. मैं अकेला बहुत ज़्यादा बोर हो रहा था इसलिए वक़्त से पहले ही नहा कर तेयार हो गया ऑर शाम को राणा का इंतज़ार करने लगा. खैर शाम को राणा ने मेरा दरवाज़ा खत-खाटाया ऑर इस बार उसके साथ कुछ ऑर लोग भी थे. वो सब लोग मुझे बड़ी हैरानी से देख रहे थे लेकिन मुझे किसी का भी चेहरा याद नही था शायद राणा सही था यहाँ के काफ़ी लोग मुझे जानते थे. हम सब तेज़ कदमो के साथ लिफ्ट की तरफ बढ़ने लगे. लिफ्ट मे राणा के साथ खड़े लोग मुझे बड़ी हैरानी से देख रहे थे. कुछ देर बाद हम होटेल से निकले ऑर कार मे बैठ गये. कार मे बैठने के बाद आगे जाने क्या होने वाला है ये सोच कर मेरी दिल की धड़कन काफ़ी तेज़ हो गई थी ऑर मुझे घबराहट सी हो रही थी इसलिए मैं पानी की बोटल से बार-बार पानी पी रहा था.

कुछ ही देर बाद गाड़ी एक अज़ीब सी जगह आके रुक गई. ये जगह बाहर से किसी खंडहर जैसी लग रही थी ऑर काफ़ी पुरानी सी इमारत थी जो लगता था कि बहुत वक़्त से बंद पड़ी हो आस-पास काफ़ी कचरा जमा हुआ पड़ा था. मैं उस जगह को गौर से देखने लग गया. उसके बाद सब लोग गाड़ी से उतर गये लेकिन जब मैं भी गाड़ी से उतरने लगा तो राणा ने मुझे रोक दिया.

राणा : भाई आप कार मे ही बैठो.. अगर हम लोग 5 मिंट मे वापिस नही आए तो आप अंदर आ जाना ऑर जो भी मिले मिले ठोक देना साले को ऑर याद रखना आपको पैसे ऑर ड्रूग्स दोनो उठाने हैं.

मैं : ठीक है याद रखूँगा.

फिर वो लोग चले गये ऑर मैं गाड़ी मे बैठा हुआ अपनी घड़ी मे वक़्त देखने लगा. अब मुझे 15 मिंट गुज़रने का इंतज़ार था. मैने जल्दी से एक बार फिर अपनी कोट की जेब मे हाथ डाला ऑर पिस्टल को निकाल कर अपने हाथ मे पकड़ लिया ऑर उसमे से मेग्ज़ीन निकाल कर गोलियाँ चेक की ऑर फिर से मॅग्ज़िन को पिस्टल मे डाल दिया ऑर अपनी पिस्टल को लोड कर लिया साथ ही दूसरी जेब से साइलेनसर निकाल कर पिस्टल की नली पर लगा दिया ताकि गोली चलने की आवाज़ कम से कम हो. मैं अंदर से घबरा भी रहा था ऑर उन लोगो से सामना करने के लिए बे-क़रार भी था. मैं कभी घड़ी की तरफ देख रहा था कभी उस टूटी सी इमारत की तरफ. अब मुझसे इंतज़ार करना मुश्किल हो रहा था इसलिए मैने जल्द बाज़ी मे गाड़ी का गेट खोला ऑर 10 मिंट होने पर ही अपनी पिस्टल हाथ मे लिए उस इमारत मे घुस गया लेकिन अंदर घुसते ही मुझे समझ नही आ रहा था कि किस तरफ जाना है क्योंकि वहाँ से 3 रास्ते निकल रहे थे ऑर अंधेरा भी काफ़ी था क्योंकि रात होने लगी थी. थोड़ा आगे जाने पर मुझे सामने वाले रास्ते पर कुछ रोशनी नज़र आई इसलिए मैं दीवार का सहारा लेके सामने वाले रास्ते की तरफ बढ़ने लगा.

वहाँ मुझे सामने 2 लोग नज़र आए जो मेरी तरफ पीठ करके खड़े थे. मैने अपनी बंदूक का पहला निशाना बाएँ तरफ खड़े आदमी की खोपड़ी पर लगाया ऑर पिस्टल का ट्रिग्गर दबा दिया एक झटके के साथ पिस्टल से गोली निकली ऑर उस आदमी के भेजे से आर-पार हो गई वो आदमी वही ज़मीन पर गिर गया. इतने मे दूसरा आदमी जो उसकी दूसरी तरफ खड़ा था उसको गिरता देख कर उसकी तरफ बढ़ा तो मैने अपना दूसरा निशाना उसके सिर मे लगाया लेकिन वो झुक कर थोड़ा उपर को देखने लगा ऑर अपनी गर्दन चारो तरफ घुमाने लगा. इसलिए गोली उसके सिर की जगह उसके गले मे लगी जिससे वो ज़मीन पर गिर गया ऑर तड़पने लगा. मैं जल्दी से उसके पास गया ऑर एक गोली ऑर उसके सिर मे मार दी. उस आदमी के पास जाना ही मेरी सबसे बड़ी ग़लती थी. वहाँ जाते ही मेरी तरफ गोलियाँ चलने लगी. मैं जल्दी से खुद को बचाने के लिए दीवार के पिछे हो गया. कुछ देर गोलियाँ चलाने के बाद वो लोग रुक गये मैने धीरे से अपनी गर्दन बाहर निकाली ओ उन्न लोगो की पोज़ीशन चेक करने लगा. उनमे से 3 लोग जिस बँच पर ड्रूग्स ऑर पैसे पड़े थे उसके पिछे छुपे हुए थे ऑर 2 लोग एक खंबे के पिछे थे जहाँ मैं खड़ा था वहाँ से उन पर निशाना लगाना बहुत मुश्किल था. बाकी राणा ऑर जो लोग मेरे साथ कार मे यहाँ आए थे उनका कोई नाम-ओ-निशान नही था.

मेरी नज़रें राणा ऑर उसके साथ आए लोगो को तलाश कर रही थी लेकिन वहाँ कोई भी मुझे नज़र नही आ रहा था. तभी उन लोगो ने फिर से गोलियाँ चलानी शुरू करदी इसलिए मुझे फिर से दीवार के पिछे जाना पड़ा. अब मैं उस जगह पर अकेला था ऑर वो 5 लोग थे मैं सोच रहा था कि इनको कैसे ख़तम करूँ इसलिए अपनी नज़र चारो तरफ दौड़ा रहा था कि लेकिन वहाँ मुझे कुछ भी ऐसा नज़र नही आ रहा था जिससे मैं उनको बाहर निकाल सकूँ. तभी मुझे ख्याल आया मैने ज़मीन से एक पत्थर उठाया ऑर उपर बंद पड़े लटकते हुए पंखे पर निशाना लगा के ज़ोर से पत्थर मारा. पत्थर की टॅन्न्न्न्न की आवाज़ से सबकी नज़र उपर चली गई जिससे मुझे मेरी पोज़ीशन बदलने का मोक़ा मिल गया. मैने जल्दी से छलाँग लगाकर एक खंबे के पीछे चला गया. यहाँ से मैं सिर्फ़ 2 लोगो पर सही निशाना लगा सकता था मैने जल्दी से टेबल के नीचे बैठे आदमी पर निशाना लगाया ऑर गोली चला दी गोली सीधा उसके पेट मे लगी ऑर वो गिर गया ऑर तड़पने लगा. उसके पास जो दूसरा आदमी वो अपने साथ वाले को गोली लगने से शायद डर गया इसलिए खड़ा होके अपने दूसरे साथी की तरफ भागने लगा मैने जल्दी से अपना निशाना लगाया ऑर उसको दूसरी तरफ पहुँचने से पहले ही ढेर कर दिया. अब मुझे बाकी 3 को भी मारना था. लेकिन जहाँ मैं खड़ा था वहाँ से मैं उन तक नही पहुँच सकता था इसलिए मैने गोलियाँ ज़ाया करना मुनासिब नही समझा ऑर वही खड़े होकर उनकी अगली चाल का इंतज़ार करने लगा. तभी उनमे से एक की आवाज़ आई...

आदमी : ओये कौन है तू साले....क्यो गोली चला रहा है...पोलीसवाला है क्या...साले हर बार हड्डी पहुँचती तो हैं इस बार तुझे तेरा हिस्सा नही मिला जो यहाँ मुँह मारने आ गया है. साले हम शेख साहब के लोग है ऑर ये माल भी उनका है हम को जाने दे वरना तेरी लाश का भी पता नही चलेगा.

मैं खामोश रहा ऑर चुप चाप उनके बाहर निकलने का इंतज़ार करने लगा. वो लोग कुछ देर ऐसे ही चिल्लाते रहे. काफ़ी देर बाद जब मेरी तरफ से कोई आवाज़ नही आई तो उन लोगो ने फिर से गोलियाँ चलानी शुरू करदी अब की बार मैने जवाब मे कोई गोली नही चलाई ऑर उनके बाहर निकलने का इंतज़ार करने लगा. कुछ देर बाद उनमे से एक आदमी खंबे के पिछे से बाहर आया ऑर मेज़ के पास आके रुक गया ऑर इधर-उधर देखने लगा. अब की बार मैने उसे पूरा मोक़ा दिया कि वो बॅग को बंद कर सके. फिर उसने अपने दूसरे साथी को भी हाथ से इशारा किया ऑर वो भागता हुआ बंदूक ताने मेरी तरफ बढ़ने लगा. मैं यही चाहता था मैं जल्दी से खंबे के पिछे से बाहर निकला ऑर सबसे पहले जो मेरी तरफ आ रहा था उसके पैर मे गोली मारी वो वही गिर गया ऑर तड़पने लगा इतना मे जो दूसरा आदमी मेज़ के पास खड़ा उसने दोनो बॅग उठाए ऑर खंबे की तरफ भागने लगा मैने उसकी पीठ मे 2 गोली मारी वो भी वही गिर गया अब मैने अपना निशाना उस लेटे हुए आदमी पर लगाया जिसके पैर मे गोली लगी थी इस बार मैने सीधा उसके माथे पर गोली मारी. दोनो आदमी ख़तम हो चुके थे ऑर अब सिर्फ़ एक आदमी बचा था ऑर मेज़ के पास ही पैसे वाला ऑर ड्रूग्स वाला बॅग गिरे पड़े थे. इस बार मैने आवाज़ लगाई...

मैं : मुझे पता है तू अकेला ही बचा है अगर यहाँ से निकलना चाहता है तो निकल जा माल को भूलजा वो मेरा हुआ.

वो आदमी : लेकिन इसकी क्या गारंटी है कि तुम गोली नही चलाओगे.

मैं : साले मैं तुझे टीवी बेच रहा हूँ जो गारंटी चाहिए..... निकलना है तो निकल जा नही तो तुझे मार कर तो मैं ये माल हासिल कर ही लूँगा.

वो आदमी : ठीक है माल तुम रख लो लेकिन गोली मत चलना.

मैं : मंज़ूर है अपनी पिस्टल फैंक कर बाहर आजा.

उसके बाद उस आदमी ने मेज़ की तरफ अपनी पिस्टल फेंक दी ऑर सिर पर हाथ रख कर बाहर आ गया. मैने जल्दी से थोड़ा सा बाहर निकलकर अपनी पिस्टल का निशाना उसके दिल पर लगाया ऑर गोली चला दी वो आदमी भी वही ख़तम हो गया. उसके बाद मैं धीरे से बाहर आया ऑर झुक कर धीरे-धीरे आगे मेज़ की तरफ बढ़ने लगा जिसके पास दोनो बॅग गिरे पड़े थे मैने चारो तरफ देखा वहाँ मुझे कोई भी नज़र नही आ रहा था इसलिए मैने जल्दी से दोनो बॅग उठाए ऑर राणा ऑर उसके लोगो को ढूँढने लगा लेकिन मुझे वो कही नज़र नही आए इसलिए मैं उस खंडहर से बाहर निकल आया. अब मैने चारो तरफ देखा लेकिन बाहर भी सिवाए गाड़ी के कोई नही था. मैने दोनो बॅग गाड़ी मे रखे ओर कार स्टार्ट की ताकि वापिस होटेल जा साकु. तभी कार के केबिनेट मे किसी फोन की घंटी की आवाज़ सुनाई दी जो शायद काफ़ी देर से बज रहा था. मैने जल्दी से केबिनेट खोला ऑर फोन बाहर निकाला ऑर फोन उठा कर अपने कान से लगाया दूसरी तरफ से जो आवाज़ सुनाई दी वो जानी-पहचानी सी लगी. ये तो ख़ान था.....

मैं : हेल्लो....

ख़ान : हां भाई शेरा क्या खबर है.

मैं : ख़ान साहब मुझे राणा एक डील पर लेके गया था जहाँ एक समस्या हो गयी है

ख़ान : वो सब मुझे पता है ये बताओ दोनो बॅग कहाँ है.

मैं : मेरे पास...

ख़ान : उनमे से कोई ज़िंदा तो नही बचा.

मैं : नही मैने सबको ख़तम कर दिया...

ख़ान : अच्छा किया.... अब तुम यहाँ से अपने होटेल चले जाओ जहाँ तुम रुके हुए हो.

मैं : लेकिन राणा ऑर उसके लोग जाने कहाँ चले गया हैं मैने उनको सब जगह ढूँढ लिया है कोई भी नही मिला मुझे.

ख़ान : कोई बात नही उनको मैने ही बोला था कि निकल जाने को वहाँ से.

मैं : ठीक है फिर अब मेरे लिए क्या हुकुम है.

ख़ान : तुम बस अपने होटेल जाओ ऑर कल रात तक इंतज़ार करो राणा खुद ही तुम्हारे पास आ जाएगा... वैसे तुम्हारा निशाना बहुत अच्छा है.

मैं : शुक्रिया... वैसे आपको कैसे पता कि मेरा निशाना अच्छा है.

ख़ान : मैं तुमसे दूर ज़रूर हूँ लेकिन तुम्हारी पल-पल की खबर मेरे पास पहुचती है ऑर वैसे भी ये तो पूरे अंडरवर्ल्ड मे मशहूर है कि शेरा का निशाना कभी नही चुकता... नही तो पहली बार हथियार उठाने वाला आदमी ढंग से गोली भी नही चला सकता ऑर तुमने सबको 8 गोली मे ही ख़तम कर दिया. ये जान कर अच्छा लगा कि तुम्हारा निशाना अब भी जबरदस्त है.

मैं : शुक्रिया.... जनाब ये पैसे ऑर ड्रग्स का क्या करना है.

ख़ान : अभी तुम इसको अपने पास ही रखो होटेल मे जब कल रात को राणा आएगा तो उसको दे देना ऑर तुम अब मेरी इजाज़त के बिना होटेल से बाहर मत जाना ये फोन भी मुझसे बात करने के बाद तोड़ देना समझ गये.

मैं : ठीक है.

Update-40

Uske baad main or rizwana khan ke cabin tak aa gaye or khan ke cabin tak mujhe chodkar rizwana hath hilakar mujhe alvida kehti hui wapis apne cabin ki taraf chali gai. main gate khol kar khan ke cabin me chala gaya.

Khan : tumhara milna-milana ho gaya.

Main (hansate hue) ji ho gaya janab.

Khan : Shukar hai...(hath jodte hue) chal bhai rana khada ho jaa or lag jaa kam par isko maine sab samjha diya hai or tu bhi koi lafda mat karna.

Rana : janab aagey kabhi gad-bad hui hai jo ab hogi.

Khan : pehle tu akela hota tha iss baar ye bhi tere sath hai.

Rana : fikar na kare janab main sath hun na sab sambhaal lunga.

Khan : isko wahan pohonchane ke baad mujhe phone kar dena or mujhe iske pal-pal ki khabar chahiye samjha.

Rana : (apna dayaan hath sir par rakhte hue) ok boss.... chalo bhai shera aapko aapki manzil tak pohoncha doo.

Uske baad main or rana ek car me baithe or apne naye safar ke liye ravaana ho gaye main nahi janta tha ki mujhe kaha bheja jaa raha hai or wo log koun hai or kaise honge kya wo mujhe apne sath leke jayenge ya nahi. mujhe ye bhi nahi pata tha ki jis safar par mujhe bheja gaya hai wahan se main zinda lotunga bhi ya nahi. aise hi kai sawaal mere dimaag me chal rahe the. Lekin iss waqt mere pass kisi sawaal ka jawab nahi tha lekin tezi se guzrne wale waqt ke pass mere har sawaal ka jawab tha. Ab main chup-chap baitha apni aane wali mazil ka intzaar kar raha tha jahan mujhe jana tha.

Raana gaadi ko tez raftaar se bhaga raha tha or main khidki se apna chehra bahar nikaale thandi hawa ka maza le raha tha. mujhe nahi pata kab meri aankh lag gai or main so gaya. jane main kitni der sota raha lekin raana ke hilane se meri aankh khul gai...

Rana : shera bhai airport aa gaya hai utro...

Main : (dono hatho se aankhen malte hue) kyaa....

Rana : bhai airport aa gaya flight pakadni hai na gaadi se utaro....

Main : (apne dono hath apne munh par ferte hue) haa chalo...

Uske baad main or rana gaadi se utar gaye rana ne jaldi se gaadi ki pichhli seat se uska or mera suit case nikala or meri taraf badhne laga. maine apna suit case pakad liya or usne apna. Fir hamane gaadi ko wahi chod diya or hum dono airport ke andar aa gaye. ye jagah mere liye ek dam nayi thi main thik hone ke baad pehle kabhi aisi jagah par nahi aaya tha. Rana ne mujhe ek jagah ki taraf ishara karke baithne ko kaha or khud kisi se milne chala gaya. Main Airport par ek khaali jagah par baith gaya or chaaro taraf dekh raha tha wahan ke log jo ghum rahe the or security guard jo logo ko check kar rahe the. ek jagah par sabke samaan ko ek machine (scaner) me daal kar check kiya jaa raha tha isliye mujhe apne samaan ki fikar hone lagi kyonki itna to mujhe dekh kar hi samajh aa gaya tha ki mere samaan bhi jarur check hoga or mere pass pistol bhi thi or khan ke diye hue transmeters bhi jisse khan mujh tak pohonch sake. Abhi main soch hi raha tha ki Rana 2 guard jinke pass hathiyaar the unke sath meri taraf aa rahe tha mujhe laga shayad unn logo ne rana ko pakad liya. Isliye maine jaldi se apna ek hath jacket me daal liya jiss taraf pistol thi or apna hath pistol par rakh liya.

Rana : chalo bhai kaam ho gaya 10 mint baad flight hai apni...

Main : (chain ki saans lekar apna hath jacket se bahar nikalte hue ) achha... lekin ye log koun hai.

Rana : bhai ye khan sahab ke hi log hain ham ko yahan koi pareshani na ho isliye...

Main : achha... main to samjha tumko inhone pakad liya.

Rana : (muskurakar) nahi bhai sab thik hai aap be-fikar ho jaye.

Main : (haa me sir hilate hue) Hhhmmm yaar rana waise hum kya shehar se bahar jaa rahe hain.

Rana : (hansate hue) bhai aapko khan sahab ne kuch nahi bataayaa.

Main : (na me sir hilate hue)

Rana : koi baat nahi.... chalo chalen der ho rahi hai.

Uske baad koi khas baat nahi hui jaldi hi hum runway par aa gaye jahan hmara chhota sa plane already teiyaar khada tha. hum dono ko wo dono log bina security check ke ek chhote se plane tak chod gaye jahan sirf main or rana hi baithe the baaki tamaam plane khaali pada tha. Main har chij ko badi hairaani se dekh raha tha kyonki ye sab kuch mere liye ek dam naya tha. khair Kuch hi ghante ke baad hum humari manzil tak pohonch gaye. flight se utarne ke baad main Rana ke pichhe-pichhe hi chal pada kyonki main nahi janta tha ki uske baad kaha jana hai. Flight se utarne ke baad airport par ek car pehle se mojood thi jisme main or rana baith gaye. bahar raat ho gai thi lekin itni jyaadaa roshni or badi-badi buildings thi jo maine pehle kabhi nahi dekhi thi maine jaldi se car ka glass niche kiya or bahar dekhne laga.

Rana : bhai kya kar rahe ho sheesha band karo koi dekh sakta hai.

Main : yahan ham ko koun janta hai yaar dekhne do naa achha lag raha hai.

Rana : bhai aapke liye ye shehar ajnabi hai lekin aap iss shehar ke liye ajnabi nahi ho aapke iss shehar me sirf dost hi nahi dushman bhi bahut hai. main aapke liye hi keh raha hun.

Main : (bina kuch bole sheesha upar karte hue) thik hai.... Waise kya tum mere bare me sab kuch jante ho.

Rana : bhai iss shehar me shayad hi koi aisa ho jisne shera bhai ka naam nahi suna ho.

Main : waise ab hum jaa kaha rahe hain.

Rana : hotel me jahan hamane rukna hai fir kal shaam ko deal hai to wahan jana hai.

Main : achhaa...

Uske baad hum dono car me khamosh baithe rahe or kuch der baad car ne ham ko ek bahut oonchi building ke samne utaar diya ye ek behad shandaar hotel tha. Andar rana ke sath main hotel ke andar chala gaya wahan hum dono ke liye pehle se room book the. Rana mujhe shaam ko teiyaar rehne ka bolkar apne kamre me chala gaya. Main bhi safar se thak gaya tha isliye room me aate hi so gaya. Subah main der se utha or nashta mangwane ke baad mere pass ab karne ko koi kaam nahi tha isliye apna waqt TV dekhkar guzarne ki koshish karne laga. Lekin aaj mujhse waqt kaate nahi kat raha tha. Main akela bahut jyaadaa bore ho raha tha isliye waqt se pehle hi naha kar teiyaar ho gaya or shaam ko rana ka intzaar karne laga. khair shaam ko Rana ne mera darwaza khat-khataya or iss baar uske sath kuch or log bhi the. Wo sab log mujhe badi hairani se dekh rahe the lekin mujhe kisi ka bhi chehra yaad nahi tha shayad rana sahi tha yahan ke kaafi log mujhe jante the. hum sab tez kadmo ke sath Lift ki taraf badhne lage. Lift me rana ke sath khade log mujhe badi hairani se dekh rahe the. kuch der baad hum hotel se nikale or car me baith gaye. car me baithne ke baad aagey jane kya hone wala hai ye soch kar meri dil ki dhadkan kaafi tez ho gai thi or mujhe ghabrahat si ho rahi thi isliye main paani ki bottal se baar-baar paani pee raha tha.

kuch hi der baad gaadi ek azeeb si jagah aake ruk gai. ye jagah bahar se kisi khandhar jaisi lag rahi thi or kaafi puraani si imaarat thi jo lagta tha ki bahut waqt se band padi ho aas-pass kafi kachra jama hua pada tha. main uss jagah ko gaur se dekhne lag gaya. uske baad sab log gaadi se utar gaye lekin jab main bhi gaadi se utarne laga to raana ne mujhe rok diya.

Rana : bhai aap car me hi baitho.. Agar hum log 5 mint me wapis nahi aaye to aap andar aa jana or jo bhi mile mile thok dena sale ko or yaad rakhna aapko paise or druggs dono uthane hain.

Main : thik hai yaad rakhunga.

Fir wo log chale gaye or main gaadi me baitha hua apni ghadi me waqt dekhne laga. Ab mujhe 15 mint guzarne ka intzaar tha. maine jaldi se ek baar fir apni coat ki jeb me hath dala or pistol ko nikaal kar apne hath me pakad liya or usme se magzine nikaal kar goliyaan check ki or fir se magzine ko pistol me daal diya or apni pistol ko load kar liya sath hi dusri jeb se silencer nikaal kar pistol ki nali par laga diya taaki goli chalne ki awaz kam se kam ho. Main andar se ghabra bhi raha tha or unn logo se samna karne ke liye be-qaraar bhi tha. main kabhi ghadi ki taraf dekh raha tha kabhi uss tooti si imarat ki taraf. ab mujhse intzaar karna mushkil ho raha tha isliye maine jald baazi me gaadi ka gate khola or 10 mint hone par hi apni pistol hath me liye uss imarat me ghus gaya lekin andar ghuste hi mujhe samajh nahi aa raha tha ki kis taraf jana hai kyonki wahan se 3 raste nikal rahe the or andhera bhi kaafi tha kyonki raat hone lagi thi. Thoda aagey jane par mujhe samne wale raste par kuch roshni nazar aayi isliye main dewaar ka sahara leke samne wale raste ki taraf badhne laga.

wahan mujhe samne 2 log nazar aaye jo meri taraf peeth karke khade the. maine apni bandook ka pehla nishana baayen taraf khade aadmi ki khopdi par lagaya or pistol ka trigger daba diya ek jhatke ke sath pistol se goli nikali or uss aadmi ke bheje se aar-paar ho gai wo aadmi wahi zameen par gir gaya. itne me dusra aadmi jo uski dusri taraf khada tha usko girta dekh kar uski taraf badha to maine apna dusra nishana uske sir me lagaya lekin wo jhuk kar thoda upar ko dekhne laga or apni garden charo taraf ghumane laga. isliye goli uske sir ki jagah uske gale me lagi jisse wo zameen par gir gaya or tadapne laga. main jaldi se uske pass gaya or ek goli or uske sir me maar di. Uss aadmi ke pass jana hi meri sabse badi galati thi. wahan jate hi meri taraf goliyaan chalne lagi. maine jaldi se khud ko bachane ke liye deewar ke pichhe ho gaya. Kuch der goliyaan chalane ke baad wo log ruk gaye maine dheere se apni garden bahar nikali or unn logo ki posittion check karne laga. unme se 3 log jiss banch par druggs or paise pade the uske pichhe chhupe hue the or 2 log ek khambe ke pichhe the jin par jahan main khada tha wahan se nishana lagana bahut mushkil tha. baaki rana or jo log mere sath car me yahan aaye the unka koi naam-o-nishaan nahi tha.

Meri nazare rana or uske sath aye logo ko talaash kar rahi thi lekin wahan koi bhi mujhe nazar nahi aa raha tha. tabhi unn logo ne fir se goliyaan chalani shuru kardi isliye mujhe fir se deewar ke pichhe jana pada. ab main uss jagah par akela tha or wo 5 log the main soch raha tha ki inko kaise khatam karu isliye apni nazar charo taraf dauda raha tha ki lekin wahan mujhe kuch bhi aisa nazar nahi aa raha tha jisse main unko bahar nikaal saku. tabhi mujhe khyaal aya maine zameen se ek pathar uthaya or upar band pade latakte hue pankhe par nishana laga ke jor se pathar mara. pathar ki tannnnn ki awaz se sabki nazar upar chali gai jisse mujhe meri possition badalne ka moqa mil gaya. Maine jaldi se chalaang lagakar ek khambe ke piche chala gaya. yahan se main sirf 2 logo par sahi nishana laga sakta tha maine jaldi se table ke niche baithe aadmi par nishana lagaya or goli chala di goli seedha uske pet me lagi or wo gir gaya or tadpne laga. uske pass jo dusra aadmi wo apne sath wale ko goli lagne se shayad dar gaya isliye khada hoke apne dusre sathi ki taraf bhagne laga maine jaldi se apna nishana lagaya or usko dusri taraf pohonchne se pehle hi dher kar diya. ab mujhe baaki 3 ko bhi marna tha. lekin jahan main khada tha wahan se main unn tak nahi pohonch sakta tha isliye maine goliyaan zaya karna munasib nahi samjha or wahi khade hokar unki agli chaal ka intzaar karne laga. tabhi unme se ek ki awaz aayi...

Aadmi : oye koun hai tu sale....kyo goli chala raha hai...policewala hai kya...sale har baar haddi pohonchate to hain iss baar tujhe tera hissa nahi mila jo yahan munh maarne aa gaya hai. sale hum sheikh sahab ke log hai or ye maal bhi unka hai ham ko jane de warna teri laash ka bhi pata nahi chalega.

Main khamosh raha or chup chap unke bahar nikalne ka intzaar karne laga. wo log kuch der aise hi chillate rahe. kaafi der baad jab meri taraf se koi awaaz nahi aayi to unn logo ne fir se goliyaan chalani shuru kardi ab ki baar maine jawab me koi goli nahi chalayi or unke bahar nikalne ka intzaar karne laga. kuch der baad unme se ek aadmi khambe ke pichhe se bahar aaya or mez ke pass aake ruk gaya or idhar-udhar dekhne laga. ab ki baar maine use poora moqa diya ki wo bag ko band kar sake. fir usne apne dusre sathi ko bhi hath se ishara kiya or wo bhagta hua bandook taane meri taraf badhne laga. main yhi chahta tha maine jaldi se khambe ke pichhe se bahar nikla or sabse pehle jo meri taraf aa raha tha uske pair me goli maari wo wahi gir gaya or tadapne laga itna me jo dusra aadmi mez ke pass khada usne dono bag uthaye or khambe ki taraf bhagne laga maine uski peeth me 2 goli maari wo bhi wahi gir gaya ab maine apna nishana us lete hue aadmi par lagaya jiske pair me goli lagi thi is baar maine seedha uske maathe par goli maari. dono aadmi khatam ho chuke the or ab sirf ek aadmi bacha tha or mez ke pass hi paise wala or druggs wala bag gire pade the. is baar maine awaaz lagayi...

Main : mujhe pata hai tu akela hi bacha hai agar yahan se nikalna chahta hai to nikal jaa maal ko bhulja wo mera hua.

Wo aadmi : lekin iski kya garenty hai ki tum goli nahi chalaoge.

Main : sale main tujhe TV bech raha hun jo garenty chahiye..... nikalna hai to nikal jaa nahi to tujhe maar kar to main ye maal hasil kar hi lunga.

Wo aadmi : thik hai maal tum rakh lo lekin goli mat chalana.

Main : manzoor hai apni pistol faink kar bahar aaja.

Uske baad wo aadmi ne mez ki taraf apni pistol fenk di or sir par hath rakh kar bahar aa gaya. maine jaldi se thoda sa bahar nikalkar apni pistol ka nishana uske dil par lagaya or goli chala di wo aadmi bhi wahi khatam ho gaya. uske baad main dheere se bahar aya or jhuk kar dheere-dheere aagey mez ki taraf badhne laga jiske pass dono bag gire pade the maine charo taraf dekha wahan mujhe koi bhi nazar nahi aa raha tha isliye maine jaldi se dono bag uthaye or rana or uske logo ko dhundhne laga lekin mujhe wo kahi nazar nahi aaye isliye main uss khandar se bahar nikal aaya. Ab maine charo taraf dekha lekin bahar bhi siwaye gaadi ke koi nahi tha. maine dono bag gadi me rakhe or car start ki taaki wapis hotel jaa saku. tabhi car ke cabinate me kisi phone ki ghanti ki awaz sunayi di jo shayad kaafi der se baj raha tha. maine jaldi se cabinate khola or phone bahar nikala or phone utha kar apne kaan se lagaya dusri taraf se jo awaz sunayi di wo jaani-pehchani si lagi. ye to khan tha.....

Main : hallo....

Khan : haa bhai shera kya khabar hai.

Main : khan sahab mujhe rana ek deal par leke gaya tha jahan ek samasya ho gaya hai

Khan : wo sab mujhe pata hai ye bataao dono bag kaha hai.

Main : mere pass...

Khan : unme se koi zinda to nahi bacha.

Main : nahi maine sabko khatam kar diya...

Khan : achha kiya.... ab tum yahan se apne hotel chale jao jahan tum ruke hue ho.

Main : lekin rana or uske log jane kaha chale gaya hain maine unko sab jagah dhundh liya hai koi bhi nahi mila mujhe.

Khan : koi baat nahi unko maine hi bola tha ki nikal jane ko wahan se.

Main : thik hai fir ab mere liye kya hukum hai.

Khan : tum bas apne hotel jao or kal raat tak intzaar karo rana khud hi tumhare pass aa jayega... waise tumhara nishaana bahut achha hai.

Main : shukriya... waise aapko kaise pata ki mera nishana acha hai.

Khan : main tumse door jarur hun lekin tumhari pal-pal ki khabar mere pass pohonchti hai or waise bhi ye to poore underworld me mashunr hai ki shera ka nishana kabhi nahi chunkta... nahi to pehli baar hathiyaar uthane wala aadmi dhang se goli bhi nahi chala sakta or tumne sabko 8 goli me hi khatam kar diya. ye jaan kar achha laga ki tumhara nishana ab bhi jabardast hai.

Main : shukriya.... janab ye paise or druggs ka kya karna hai.

Khan : abhi tum isko apne pass hi rakho hotel me jab kal raat ko rana aayega to usko de dena or tum ab meri ijajat ke bina hotel se bahar mat jana ye phone bhi mujhse baat karne ke baad tod dena samajh gaye.

Main : thik hai.

 


अपडेट-41

उसके बाद ख़ान ने फोन बंद कर दिया ऑर मैने उस फोन को वही तोड़कर फैंक दिया फिर मैं वापिस होटेल मे आ गया. अब मुझे अगले दिन तक सिर्फ़ इंतज़ार करना था क्योंकि ऑर कोई कम मेरे पास करने को नही था. मैं बाहर भी नही जा सकता था क्योंकि ख़ान ने मुझे बाहर जाने से मना किया था. ऐसे ही मैने अगला सारा दिन सिर्फ़ टीवी देख कर ऑर सो कर ही गुज़ारा. अगली शाम को किसी ने मेरे रूम का दरवाज़ा खट-खाटाया तो मैने जल्दी से पहले अपनी पिस्टल निकाली ऑर उसको अपनी कमर के पिछे टाँग लिया ऑर आहिस्ता से दरवाज़ा खोल दिया सामने राणा खड़ा था जिसके साथ 2 ऑर आदमी थे.

मैं : तुम हो... यार कल कहाँ चले गये थे कुछ बताया भी नही.

राणा : भाई ख़ान साहब का ऑर्डर था कि अगर वो लोग कुछ नाटक करे तो पैसे वही छोड़कर चले जाना.

मैं : ठीक है

राणा : भाई वो दोनो बॅग कहाँ है.

मैं : (उंगली से इशारा करते हुए) बेड के नीचे पड़े है निकाल लो.

राणा : (झुक कर बेड के नीचे देखते हुए) ठीक है.... भाई आप जल्दी से तेयार हो जाओ अभी निकलना है.

मैं : अब कहाँ जाना है.

राणा : (दोनो बॅग बाहर निकलते हुए)भाई वो लोग जिनका ये माल है वो उस आदमी का चेहरा देखना चाहते हैं जिसने उनका माल लूटा था ऑर उनके लोग मारे थे.

मैं : मतलब मुझे... कुछ गड़-बॅड तो नही होगी.

राणा : भाई फिकर मत करो आपके ही पुराने साथी हैं आपको क्या होना है. वैसे भी शीक साहब का माल हर कोई नही लूट सकता.

मैं : तो क्या मैं अब शीक साहब से मिलने वाला हूँ.

राणा : नही भाई अभी तो आपको बस लाला भाई ऑर गानी भाई ही मिलेंगे.

मैं : ठीक है... जाना कहाँ है

राणा : आपके पुराने क्लब मे जाना है भाई

मैं : ठीक है

उसके बाद मैं जल्दी से बाथरूम मे गया ऑर तेयार हो के बाहर आ गया. फिर मैं राणा ऑर बाकी वो 2 लोग कार मे बैठ कर निकल पड़े. कुछ देर बाद कार पार्किंग वाली जगह पर रोक दी गई ऑर हम सब बाहर निकल आए. राणा मुझे एक अजीब सी जगह लेके गया जहाँ बहुत तेज़ म्यूज़िक बज रहा था. हमे वहाँ खड़े 2 लोगो ने दूसरे गेट से अंदर जाने का इशारा किया तो हम लोग दूसरी तरफ से अंदर चले गये. वहाँ गेट पर हम सबकी अच्छे से तलाशी ली गई ऑर मेरी पिस्टल वही बाहर ही निकाल ली गई. अब मुझे सच मे डर लग रहा था क्योंकि अब हम मे से किसी के पास भी हथियार नही थे. बढ़ते हुए हर कदम के साथ मेरे दिल की धड़कन भी बढ़ रही थी. लेकिन राणा एक दम खुश ऑर बहुत सुकून से मुस्कुराता हुआ चल रहा था जैसे कुछ हुआ ही ना हो. हम लोगो के पिछे 4 लोग गन्स लिए चल रहे थे उन्होने हमे एक कॅबिन मे बिठा दिया जिसके सामने वाली कुर्सी खाली पड़ी थी. हम चारो अपने सामने पड़ी कुर्सियो पर बैठ गये. मैं कमरे को देखने लगा जो काफ़ी शानदार तरीके से सजाया गया था उसकी हर चीज़ काफ़ी कीमती लग रही थी. तभी राणा की आवाज़ आई...

राणा : भाई अब सब आपके उपर ही है संभाल लेना.

मैं : भेन्चोद वो जो बाहर तेरा बाप खड़ा था उसने मेरी पिस्टल ले ली हैं अब इनको क्या मैं टेबल कुर्सी से संभालूँगा चूतिए....

राणा : भाई आपके हाथ जोड़ता हूँ यहाँ हाथ मत उठाना नही तो बहुत समस्या हो जाएगा हम मे से कोई भी ज़िंदा बाहर नही जाएगा.

मैं : तो साले यहाँ मेरी क्या क़ुर्बानी देने के लिए लाया है मुझे.

तभी पिछे से कॅबिन का गेट खुला ऑर 5-6 लोग अंदर आए जिन्होने हम सबके सिर पर बंदूक तान दी इसलिए हम सब लोग हाथ उपर करके अपनी-अपनी जगह से खड़े हो गये. मैं अभी सोच ही रहा था कि इनको कैसे संभालू कि तभी दुबारा कॅबिन का दरवाज़ा खुला ऑर 2 ऑर लोग अंदर आ गये इनको मैं पहले देख चुका था ये लाला ऑर गानी थे जो शीक के होटेल्स ऑर क्लब्स संभालते थे. वो दोनो शायद भाग कर आए थे इसलिए उनकी साँस फूली हुई थी. आते ही वो दोनो मुझे बड़े गौर से देखने लगे ऑर मेरे पास आके मेरे सिर पर लगी बंदूक को झटके से उधर कर दिया ऑर जिसने मेरे सिर पर बंदूक तान रखी थी उसको थप्पड़ मार कर गालियाँ देने लगे....

गानी : भेन्चोद इतना भी नही पता अपने लोगो पर बंदूक नही तानते ये तो अपना भाई है शेरा (मुझे गले लगाते हुए)

लाला : (मेरे कंधे पर हाथ रखते हुए) ओये तू कहाँ था यारा इतने वक़्त से हम सब ने तुझे कितना ढूँढा. जापानी तो तेरे पिछे पागल सा हुआ पड़ा था शीक साहब भी परेशान हो गये थे हमने तो सोचा तू मर मूक गया होगा.

गानी : क्या हुआ यार तू हम को ऐसे क्यो देख रहा है.

राणा : मैने अपना वादा पूरा किया अब माल मैं रख सकता हूँ.

लाला : ओये तू नही जानता तूने हम को हमारी ताक़त दे दी है जा रख ले शीक साहब का इनाम समझ कर.

गानी : राणा रुक ओये... तूने बताया नही हमारा माल लूटने की हिम्मत किसने की थी.

मैं : मैने....

लाला : ओये तूने.... वही मैं सोच रहा था ये शेर का शिकार कौन खा गया.

मैं : शेर का शिकार सिर्फ़ शेरा ही खा सकता है.

गानी : सच कहा यार तूने....लेकिन यार तू इतने वक़्त तक था कहाँ पर.

राणा : भाई जान इनको पिच्छला कुछ भी याद नही है याददाश्त एक दम सॉफ हो चुकी है.

लाला : तुझे ये मिला कहाँ पर ये बता.

मैं : कुछ महीने पहले मैं एक ग़रीब किसान को मिला था अधमरी ऑर ज़ख्मी हालत मे जिन्होने ना सिर्फ़ मुझे बचाया बल्कि मेरी मरहम पट्टी भी की मगर जब तक मुझे होश आया तो मुझे कुछ भी याद नही था. (मैने उनको वही बताया जो ख़ान ने मुझे कहने को बोला था)

गानी : यार कहाँ रहता है वो ग़रीब किसान हम को बता उसका घर भर देंगे नोटो से जिसने हमारे यार हम को लौटा दिया उसकी 7 पुश्तो को काम नही करना पड़ेगा.

राणा : वो अब इस दुनिया मे नही रहे भाई जान. इसलिए ये शहर आए थे काम की तलाश मे मेरे एक आदमी ने इनको पहचान लिया तो हमने इनको अपने साथ काम पर लगा लिया.

लाला : (राणा को धक्का देते हुए) ओये भेन्चोद तुउउउ काम देगा शेरा को... साले औकात क्या है तेरी... 2 टके का डीलर है. गानी ठोक दे इस मदर्चोद को.

राणा : (लाला के पैर पकड़ते हुए) माफी भाई जान मैं तो बस इनको आप तक ही पहुँचाना चाहता था ऑर कुछ नही.

गानी : तेरा मकसद नेक़ था लेकिन तूने हमारा माल लूटने की ऑर हमारे आदमी मरवाने की ग़लती कैसे की इसको तो कुछ याद नही है लेकिन तू तो सब जानता था ना.

लाला : (मुझे कॅबिन से बाहर लेके जाते हुए) चल आ भाई तुझे तेरी असल जगह दिखाऊ इसको गानी संभाल लेगा.

मैं : पहले इसको जाने दो इसने कुछ नही किया उन लोगो को मैने मारा था.

गानी : ठीक है भाई तू कहता है तो माफ़ किया (राणा को लात मारते हुए) चल भाग जा भोसड़ी के ऑर दुबारा नज़र मत आना मुझे... इस बार तू शेरा की वजह से बच गया अगली बार हमारे माल पर हाथ डालने के बारे मे सोचा भी याद रखना जो बक्ष्णा जानते हैं वो जान लेना भी जानते हैं.

राणा : (मेरे पैर पकड़ते हुए) आपका बहुत-बहुत शुक्रिया शेरा भाई.

मैं : चल जा यहाँ से.

लाला : यार गानी तू शेरा को लेके चल मैं ये खुश खबरी अभी सबको देके आता हूँ.

उसके बाद मैं ओर गानी कॅबिन के बाहर क्लब मे उपर आ गये. जहाँ एक काँच के ग्लास से नीचे का तमाम नज़ारा दिखाई दे रहा था. मैं उस काँच के पास खड़ा होके नीचे नाचते लड़के-लड़कियो को देखने लगा जो म्यूज़िक की रिदम पर थिरक रहे थे.

गानी : (शराब का ग्लास मेरी तरफ करते हुए) ये ले भाई तेरे मिलने की खुशी मे

मैं : नही शुक्रिया मैं पीता नही हूँ.

गानी : (हैरान होते हुए) ओये मेरे दारू के टॅंकर तेरी तबीयत तो ठीक है तू तो कूरली भी दारू से करता था तुझे क्या हो गया यार.

मैं : मुझे कुछ याद नही है ऑर मैं जब से ठीक हुआ हूँ तब से मैने दारू को हाथ तक नही लगाया इसको पीना तो दूर की बात है.

गानी : ठीक है भाई तेरी मर्ज़ी.... वैसे क्या देख रहा है नीचे.... कोई पाटोला (सुंदर लड़की) पसंद आया है तो बता उठा लेते हैं साली को.... (मेरे कंधे पर हाथ मारकर हँसते हुए)

मैं : नही यार मैं तो ऐसे ही देख रहा था (मुस्कुराते हुए)

तभी लाला भी वहाँ आ गया.

लाला : बता मेरे यार क्या सेवा करे तेरी... ओये तेरा हाथ अभी तक खाली है यार गानी दारू दे भाई को.... इतनी मुद्दत बाद अपने ग़रीब खाने मे आया है शेरा.

गानी : (ना मे सिर हिलाते हुए) साहब ने छोड़ दी है यार

लाला : हैंन्न्न्..... ओये साची... ज़रा मुँह इधर करना शेरा...हाहहहहाहा

मैं : हाँ मैं दारू नही पीता

लाला : भाई शेर खून ना पीए तो हम मान सकते हैं लेकिन शेरा दारू ना पिए ये बात तो हमारी भी समझ से बाहर है... क्या यार उस बूढ़े ने हमारे यार का बेड़ा-गर्क कर दिया है.

मैं : दुबारा उस बुजुर्ग के लिए कभी ग़लत लफ्ज़ मत निकालना.... उस इंसान ने मुझे नयी जिंदगी दी है समझे...

गानी : अर्रे यार गुस्सा क्यो होता है भाई लाला तो मज़ाक कर रहा था चल अब नही बोलेगा जाने दे... माफ़ कर दे यार.

लाला : (कान पकड़ कर उठक-बैठक निकालते हुए ) लेह भाई बसस्सस्स

तभी एक आदमी वहाँ आया ऑर उसने गानी के कान मे कुछ कहा ओर चला गया.

गानी : यार शेरा तुझे जापानी ऑर सूमा बुला रहे हैं.

मैं : कहाँ पर...

गानी : वही.... यार तेरी पुरानी मान-पसंद जगह पर ऑर कहाँ....

लाला : तू भी ना गानी यार उसको कुछ याद नही है ऑर तू लगा है अपनी चावल मारने. (मेरी बाजू पकड़ते हुए) चल भाई मैं तुझे लेके चलता हूँ.

मैं : ठीक है चलो लेकिन यार मेरी गन तो वापिस कर दो तुम्हारे आदमियो ने तलाशी लेते हुए निकाल ली थी. (हँसते हुए)

गानी : अर्रे यार इतनी सी बात ये ले तू मेरा घोड़ा (गन) रख ले मैने कल ही नया खरीदा है अगर पता होता तू आ रहा है तो तेरे लिए भी एक ऐसी मंगवा लेता.

मैं : नही यार तूने अपने लिए मँगवाई है तो मैं ये नही ले सकता इसको तू ही रख.

गानी : अर्रे यार क्या लड़की जैसे नाटक कर रहा है ये ले रख चला के देखना एक दम माखन है माखन रेपिड फाइयर है

जर्मन ऑटोमॅटिक 12 राउंड है जब तक सामने वाले की एक गोली निकलेगी तेरी 6 गोलियाँ निकल चुकी होंगी.... ये ले रख (ज़बरदस्ती मेरी बेल्ट मे फसाते हुए)

मैं : शुक्रिया गानी भाई....

गानी : ओये ये शरीफो के चोंचले कहाँ से सीख कर आया है यार चल इधर आ यारो को शुकरिया ऐसे बोलते हैं... (मुझे गले लगाते हुए)

लाला : अगर तुम्हारा लैला मजनू का रोमॅन्स ख़तम हो गया हो तो हम लोग चलें.

मैं : हाँ...हाँ...चलो....

Update-41

Uske baad khan ne phone band kar diya or maine uss phone ko wahi todkar faink diya fir main wapis hotel me aa gaya. ab mujhe agle din tak sirf intzaar karna tha kyonki or koi kam mere pass karne ko nahi tha. main bahar bhi nahi jaa sakta tha kyonki khan ne mujhe bahar jane se mana kiya tha. aise hi maine agla sara din sirf TV dekh kar or so kar hi guzara. Agli shaam ko kisi ne mere room ka darwaza khat-khataya to maine jaldi se pehle apni pistol nikali or usko apni kamar ke pichhe taang liya or ahista se darwaza khol diya samne rana khada tha jiske sath 2 or aadmi the.

Main : tum ho... yaar kal kaha chale gaye the kuch bataayaa bhi nahi.

Rana : bhai khan sahab ka order tha ki agar wo log kuch naatak kare to paise wahi chodkar chale jana.

Main : thik hai

Rana : bhai wo dono bag kaha hai.

Main : (ungali se ishara karte hue) bed ke niche pade hai nikaal lo.

Rana : (jhuk kar bed ke niche dekhte hue) thik hai.... bhai aap jaldi se teiyaar ho jao abhi nikalna hai.

Main : ab kaha jana hai.

Rana : (dono bag bahar nikalte hue)bhai wo log jinka ye maal hai wo uss aadmi ka chehra dekhna chahte hain jisne unka maal loota tha or unke log maare the.

Main : matlab mujhe... kuch gad-bad to nahi hogi.

Rana : bhai fikar mat karo aapke hi purane sathi hain aapko kya hona hai. waise bhi sheikh sahab ka maal har koi nahi loot sakta.

Main : to kya main ab sheikh sahab se milne wala hun.

Rana : nahi bhai abhi to aapko bas lala bhai or gaani bhai hi milenge.

Main : thik hai... jana kaha hai

Rana : aapke purane club me jana hai bhai

Main : thik hai

Uske baad main jaldi se bathroom me gaya or teiyaar ho ke bahar aa gaya. Fir main rana or baaki wo 2 log car me baith kar nikal pade. kuch der baad car parking wali jagah par rok di gai or hum sab bahar nikal aaye. rana mujhe ek ajeeb si jagah leke gaya jahan bahut tez music baj raha tha. hume wahan khade 2 logo ne dusre gate se andar jaane ka ishara kiya to hum log dusri taraf se andar chale gaye. wahan gate par hum sabki achhe se talashi lee gai or meri pistol wahi bahar hi nikaal lee gai. Ab mujhe sach me darr lag raha tha kyonki ab hum me se kisi ke pass bhi hathiyaar nahi the. badhte hue har kadam ke sath mere dil ki dhadhkan bhi badh rahi thi. Lekin rana ek dam khush or bahut sukoon se muskurata hua chal raha tha jaise kuch hua hi na ho. hum logo ke pichhe 4 log guns liye chal rahe the unhone hume ek cabin me bitha diya jiske samne wali kursi khaali padi thi. hum charo apne samne padi kursiyo par baith gaye. Main kamre ko dekhne laga jo kaafi shandaar tareeke se sajaya gaya tha uski har chij kaafi keemti lag rahi thi. tabhi rana ki awaaz aayi...

Rana : bhai ab sab aapke upar hi hai sambhaal lena.

Main : bhenchod wo jo bahar tera baap khada tha usne meri pistol le lee hain ab inko kya main table kursi se sambhalunga chutiye....

Rana : bhai aapke hath jodta hun yahan hath mat uthana nahi to bahut samasya ho jayega hum me se koi bhi zinda bahar nahi jayega.

Main : to sale yahan meri kya qurbani dene ke liye laya hai mujhe.

Tabhi pichhe se cabin ka gate khula or 5-6 log andar aaye jinhone hum sabke sir par bandook taan di isliye hum sab log hath upar karke apni-apni jagah se khade ho gaye. main abhi soch hi raha tha ki inko kaise sambhalu ki tabhi dubara cabin ka darwaza khula or 2 or log andar aa gaye inko main pehle dekh chuka tha ye lala or gaani the jo sheikh ke hotels or clubs sambhalte the. wo dono shayad bhaag kar aaye the isliye unki saans phuli hui thi. Aate hi wo dono mujhe bade gaur se dekhne lage or mere pass aake mere sir par lagi bandook ko jhatke se udhar kar diya or jisne mere sir par bandook taan rakhi thi usko thappad maar kar gaaliyaan dene lage....

Gaani : bhenchod itna bhi nahi pata apne logo par bandook nahi taante ye to apna bhai hai shera (mujhe gale lagate hue)

Lala : (mere kandhe par hath rakhte hue) oye tu kaha tha yaara itne waqt se hum sab ne tujhe kitna dhundha. japani to tere pichhe pagal sa hua pada tha sheikh sahab bhi pareshaan ho gaye the hamane to socha tu mar muk gaya hoga.

Gaani : kya hua yaar tu ham ko aise kyo dekh raha hai.

Rana : maine apna vaada poora kiya ab maal main rakh sakta hun.

Lala : oye tu nahi janta tune ham ko hamaari taqat de di hai jaa rakh le sheikh sahab ka inaam samajh kar.

Gaani : Rana ruk oye... tune bataayaa nahi hmara maal lootne ki himmat kisne ki thi.

Main : maine....

Lala : oye tune.... wahi main soch raha tha ye sher ka shikaar koun khaa gaya.

Main : sher ka shikaar sirf shera hi khaa sakta hai.

Gaani : sach kaha yaar tune....lekin yaar tu itne waqt tak tha kaha par.

Rana : bhai jaan inko pichhla kuch bhi yaad nahi hai yaddasht ek dam saaf ho chuki hai.

Lala : tujhe ye mila kaha par ye bata.

Main : kuch maheene pehle main ek gareeb kisaan ko mila tha adhamaari or jakhmi haalat me jinhone naa sirf mujhe bachaya balki meri maraham patti bhi ki magar jab tak mujhe hosh aya to mujhe kuch bhi yaad nahi tha. (maine unko wahi bataayaa jo khaan ne mujhe kehne ko bola tha)

Gaani : yaar kaha rehta hai wo gareeb kisaan ham ko bata uska ghar bhar denge noto se jisne hmara yaar ham ko lauta diya uski 7 pushto ko kaam nahi karna padega.

Rana : wo ab iss duniya me nahi rahe bhai jaan. isliye ye shehar aaye the kaam ki talaash me mere ek aadmi ne inko pehchaan liya to hamane inko apne sath kaam par laga liya.

Lala : (Rana ko dhakka dete hue) oye bhenchod tuuuu kaam dega shera ko... sale aukaat kya hai teri... 2 takke ka dealer hai. gaani thok de iss madarchod ko.

Rana : (lala ke pair pakadte hue) maafi bhai jaan main to bas inko aap tak hi pohonchana chahta tha or kuch nahi.

Gaani : tera maksad neq tha lekin tune hmara maal lootne ki or hamaare aadmi marwane ki galati kaise ki isko to kuch yaad nahi hai lekin tu to sab janta tha naa.

Lala : (mujhe cabin se bahar leke jate hue) chal aa bhai tujhe teri asal jagah dikhau isko gaani sambhal lega.

Main : pehle isko jane do isne kuch nahi kiya unn logo ko maine maara tha.

Gaani : thik hai bhai tu kehta hai to maaf kiya (rana ko laat marte hue) chal bhaag jaa bhosdi ke or dubara nazar mat aana mujhe... iss baar tu shera ki wajah se bach gaya agli baar hamaare maal par hath daalne ke baare me socha bhi yaad rakhna jo bakshna jante hain wo jaan lena bhi jante hain.

Rana : (mere pair pakadte hue) aapka bahut-bahut shukriya shera bhai.

Main : chal jaa yahana se.

Lala : yaar gaani tu shera ko leke chal main ye khush khabri abhi sabko deke aata hun.

Uske baad main or gaani cabin ke bahar club me upar aa gaye. jahan ek kaanch ke glass se niche ka tamaam nazara dikhayi de raha tha. main uss kaanch ke pass khada hoke niche nachte ladke-ladkiyo ko dekhne laga jo music ki rhythem par thirak rahe the.

Gaani : (sharab ka glass meri taraf karte hue) ye le bhai tere milne ki khushi me

Main : nahi shukriya main peeta nahi hun.

Gaani : (hairaan hote hue) oye mere daaru ke tanker teri tabiyat to thik hai tu to koorli bhi daaru se karta tha tujhe kya ho gaya yaar.

Main : mujhe kuch yaad nahi hai or main jab se thik hua hun tab se maine daru ko hath tak nahi lagaya isko peena to door ki baat hai.

Gaani : thik hai bhai teri marzi.... waise kya dekh raha hai niche.... koi patola (sunder ladki) pasand aaya hai to bata utha lete hain sali ko.... (mere kandhe par hath markar hansate hue)

Main : nahi yaar main to aise hi dekh raha tha (muskurate hue)

Tabhi lala bhi wahan aa gaya.

Lala : Bata mere yaar kya sewa kare teri... oye tera hath abhi tak khaali hai yaar gaani daaru de bhai ko.... itni muddat baad apne gareeb khane me aya hai shera.

Gaani : (naa me sir hilate hue) sahab ne chod di hai yaar

Lala : hainnnn..... oye sachi... zra munh idhar karna shera...hahahahahaha

Main : haa main daaru nahi peeta

Lala : bhai sher khun naa peeye to hum maan sakte hain lekin shera daru na piye ye baat to hamaari bhi samajh se bahar hai... kya yar uss budhe ne hamaare yaar ka beda-gark kar diya hai.

Main : dubara uss bujurg ke liye kabhi galat lafz mat nikalna.... uss insaan ne mujhe nayi jindagi di hai samjhe...

Gaani : arre yaar gussa kyo hota hai bhai lala to mazaak kar raha tha chal ab nahi bolega jane de... maaf kar de yaar.

Lala : (kaan pakad kar uthak-baithak nikalte hue ) leh bhai basssss

Tabhi ek aadmi wahan aaya or usne gaani ke kaan me kuch kaha or chala gaya.

Gaani : yaar shera tujhe japani or sooma bula rahe hain.

Main : kaha par...

Gaani : wahi.... yaar teri purani man-pasand jagah par or kaha....

Lala : tu bhi naa gaani yaar usko kuch yaad nahi hai or tu laga hai apni chawal maarne. (meri baaju pakadte hue) chal bhai main tujhe leke chalta hun.

Main : thik hai chalo lekin yaar meri gun to wapis kar do tumhare admiyo ne talashi lete hue nikaal lee thi. (hansate hue)

Gaani : arre yaar itni si baat ye le tu mera ghoda (gun) rakh le maine kal hi naya khareeda hai agar pata hota tu aa raha hai to tere liye bhi ek aisi mangwa leta.

Main : nahi yaar tune apne liye mangwayi hai to main ye nahi le sakta isko tu hi rakh.

Gaani : arre yaar kya ladki jaise naatak kar raha hai ye le rakh chala ke dekhna ek dam makhan hai makhan repid fire hai german automatic 12 round hai jab tak samne wala ki ek goli nikalegi teri 6 goliyaan nikal chuki hongi.... ye le rakh (jabardasti meri belt me phasate hue)

Main : Shukriya gaani bhai....

Gaani : oye ye shareefo ke chonchale kaha se seekh kar aya hai yaar chal idhar aa yaaro ko shukariya aise bolte hain... (mujhe gale lagate hue)

Lala : agar tumhara laila majnu ka romance khatam ho gaya ho to hum log chalen.

Main : ha...ha...chalo....

 
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