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Guest
अपडेट-34
दोस्तो यहाँ से कुछ नये करेक्टर का परिचय कराता हूँ ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
शेख साब {बाबा} :- एज- 58 साल, दिखने मे काफ़ी रौबदार इंसान, काम- गॅंग का मैं लीडर, शेरा जैसे बाकी सब लोग इसके लिए ही काम करते हैं.
अनीस (छोटा शेख):- एज- 32 साल, शेख का बेटा ऑर एक ला-परवाह किस्म का इंसान इसलिए शेख कोई भी काम इसको सोंपना ज़रूरी नही समझता. हर वक़्त ड्रग्स के नशे मे ऑर लड़कियो मे डूबा रहता है.
मुन्ना (जापानी):- एज- 28 साल, शेरा का जिगरी दोस्त है ऑर देखने मे जापानी जैसा लगता है इसलिए जापानी नाम से अंडरवर्ल्ड मे मशहूर, काम- ड्रग्स एजेंट ऑर आर्म्स एजेंट के साथ डील फिक्स करना ऑर फाइट क्लब मे शेरा का पार्ट्नर.
रसूल :- एज-34 साल, काम- शेरा के बाद शेरा का सारा काम यही संभालता है.
सूमा :- एज-25 साल, काम- विदेशी क्लाइंट्स के साथ ड्रग्स ऑर आर्म्स की डील फिक्स करना ओर तमाम एजेंट्स से पैसा कलेक्ट करके शेख साहब तक पहुँचना.
लाला ऑर गानी :- एज-34-28 साल, काम- होटेल्स ऑर क्लब्स संभालना.
मैं बड़े गोर से बारी-बारी सब लोगो की तस्वीरे देख रहा था ऑर उनको पहचाने की कोशिश कर रहा था लेकिन मुझे किसी का भी चेहरा याद नही आ रहा था. तभी ख़ान ने एक ऐसी तस्वीर टेबल पर फेंकी जिसको मैं उठाए बिना नही रह सका. ये तो मेरी तस्वीर थी लेकिन मैने उस तस्वीर मे मूछ रखी हुई थी इसलिए मेरा हाथ खुद ही अपने चेहरे पर चला गया जैसे मैं अपने हाथ से अपने चेहरे का जायज़ा ले रहा हूँ कि क्या ये मेरी ही तस्वीर है.
ख़ान : क्या हुआ कुछ याद आया अपने बारे मे.
मैं : (ना मे सिर हिलाते हुए) क्या ये मेरी तस्वीर है
ख़ान : जी हुजूर ये आपकी ही तस्वीर है ऑर इन तस्वीरो को अच्छे से देख लो तुमको अब ऐसा ही फिर से बनना है.
मैं : लेकिन आपने बताया नही मैं वहाँ तक पहचूँगा कैसे.
ख़ान : उसका भी एक रास्ता है
मैं : कौनसा रास्ता
ख़ान : तुम्हारा पुराना दोस्त जापानी जो फाइट क्लब संभालता है वहाँ से तुम तुम्हारी दुनिया मे एंट्री कर सकते हो. वैसे भी शेरा उस फाइट क्लब का सबसे फ़ेवरेट फाइटर हैं (मुस्कुराते हुए)
मैं : तो क्या मुझे वहाँ जाके लड़ना होगा.
ख़ान : (मुस्कुराते हुए) ऐसा ही कुछ.
मैं : मैं समझा नही आप कहना क्या चाहते हैं.
ख़ान : तुमको वहाँ जाके वहाँ के उनके लोगो को मारना होगा ऑर उनका माल लूटना होगा ताकि उन लोगो का ध्यान तुम्हारी तरफ जाए ऑर वो तुमको पहचान ले.
मैं : क्या मैं बिना कोई वजह उनसे लड़ाई करूँ.
ख़ान : वजह मैं बना दूँगा. तुमको तो बस जाके लड़ाई करनी है.
मैं : ठीक है.
उसके बाद वो तस्वीरे मुझे देकर ख़ान वापिस चला गया ऑर अब मैं अकेला बैठा उन तस्वीरो को देख रहा था ऑर अपनी पुरानी जिंदगी को याद करने की कोशिश कर रहा था लेकिन मुझे कुछ भी याद नही आ रहा था. ऐसे ही मैं अपनी सोचो मे गुम्म बैठा हुआ तस्वीर देख रहा था कि मुझे पता ही नही चला कब डॉक्टर रिज़वाना मेरे पास आके बैठ गई.
रिज़वाना : कहाँ खो गये जनाब. (मेरे मुँह के सामने चुटकी बजाते हुए)
मैं : जी कही नही बस वो मैं अपनी पुरानी जिंदगी के बारे मे याद करने की कोशिश कर रहा था लेकिन कुछ भी याद नही आ रहा.
रिज़वाना : कोई बात नही जैसे-जैसे तुम अपने बारे मे जानोगे तुमको याद आता जाएगा. वैसे तुमको सच मे तुम्हारे घरवालो के बारे मे भी कुछ नही याद.
मैं : (मुस्कुरा कर ना मे सिर हिलाते हुए) आपके घर मे कौन-कौन है.
रिज़वाना : कोई भी नही मेरे अम्मी अब्बू की कार आक्सिडेंट मे डेथ हो गई थी तब से अकेली ही हूँ (मुस्कुरा कर)
मैं : कोई भी नही है. मेरा मतलब पति या बचे.
रिज़वाना : नही....(मुस्कुरा कर) इन सब चीज़ो के लिए वक़्त तब ही मिल सकता है जब ड्यूटी से फ़ुर्सत मिले यहाँ तो सारा दिन हेड क्वॉर्टर मे लोगो का इलाज करने मे ही वक़्त निकल जाता है.
मैं : हाँ जब आपके लोग ऐसे ही किसी पर हमला करेंगे तो इलाज तो करना ही पड़ेगा उनका.
रिज़वाना : अच्छा वो....हाहहहाहा नही ऐसी बात नही है वो तो ख़ान ने तुम्हारा टेस्ट लेना था बस इसलिए.... ऑर वैसे भी तुमने कौनसी कसर छोड़ी थी.
मैं : मैने क्या किया मैं तो बस हल्का फूलका उनको दूर किया था खुद से. (मुस्कुरा कर)
रिज़वाना : रहने दो... रहने दो... उस दिन हेड क्वॉर्टर्स मे तुमने हमारे लोगो की क्या हालत की थी पता है मुझे. मैने ही इलाज किया था उनका बिचारे 5 लोगो के तो फ्रेक्चर तक आ गये थे बॉडी मे. ऐसा भी कोई किसी को मारता है.
मैं : (नज़रे नीचे करके मुस्कुरा कर)वो एक दम मुझ पर हमला हुआ तो मुझे कुछ समझ नही आया कि क्या करूँ इसलिए मैने भी हमला कर दिया.
रिज़वाना : हंजी.... ऑर जो हाथ मे आया उठा के मार दिया...हाहहहहहाहा
मैं : (बिना कुछ बोले मुस्कुरा दिया)
रिज़वाना : चलो तुम बैठो मैं कुछ खाने के लिए लाती हूँ.
मैं : आप क्यो... कोई नौकर नही है यहाँ पर.
रिज़वाना : जी नही आपके ख़ान साहब को किसी पर भरोसा भी तो नही है इसलिए सारा काम मुझे ही करना पड़ेगा (रोने जैसा मुँह बनाके)
मैं : कोई बात नही मैं हूँ ना मैं आपकी मदद कर दूँगा.
रिज़वाना : (हैरान होते हुए) तुमको खाना बनाना आता है.
मैं : जी फिलहाल तो खाना ही आता है लेकिन आप सिखाएँगी तो बनाना भी सीख जाउन्गा.
रिज़वाना : हाहहहहाहा रहने दो तुम खाते हुए ही अच्छे लगोगे बना मैं खुद लूँगी.
उसके बाद रिज़वाना रसोई की तरफ चली गई ऑर मैं उसको जाते हुए देखता था. लेकिन मेरी शैतानी नज़र का मैं क्या करूँ जो ना चाहते हुए भी ग़लत वक़्त पर ग़लत चीज़ देखती है. रिज़वाना को जाते हुए देखकर मेरी नज़र सीधा उसकी गान्ड पर पड़ी जो उसके चलने से उपर नीचे हो रही थी उसकी जीन्स की फीटिंग से गान्ड की गोलाई के उभार ऑर भी वजह तोर पर नज़र आ रहे थे. जिससे मेरे लंड मे भी हरकत होने लगी ऑर वो जागने लगा. मैने अपने दोनो हाथो से अपने लंड को थाम लिया ऑर एक थप्पड़ मारा की साले हर जगह मुँह उठाके घुसने को तेयार मत हो जाया कर वो डॉक्टर हैं हीना या फ़िज़ा नही जिसकी गहराई मे तू जब चाहे उतर जाए. लेकिन मेरा लंड था कि बैठने का नाम ही नही ले रहा था मेरी नज़रों के सामने बार-बार रिज़वाना की गान्ड की तस्वीर आ रही थी ऑर मेरा दिल चाह रहा था कि उसकी खूबसूरत उभरी हुई गान्ड के दीदार मैं एक बार फिर से करूँ. इसलिए ना चाहते हुए भी मैं खड़ा होके रसोई की तरफ चला गया ताकि चुपके से रिज़वाना की मोटी सी ऑर बाहर को निकली हुई गान्ड को जी-भरकर देख सकूँ.
अभी मैं रसोई के गेट तक ही पहुँचा था कि अचानक रिज़वाना हाथ मे खाने की ट्रे लेके बाहर आ गई ऑर मुझसे टकरा गई जिससे सारी सब्जी की ग्रेवी मुझ पर ऑर रिज़वाना पर गिर गई ऑर कुछ बर्तन भी ज़मीन पर गिरने से टूट गये. सब्जी की ग्रेवी उसके ऑर मेरी दोनो की कमीज़ पर गिर गई थी. वो मेरे सामने प्लेट लेके अब भी खड़ी थी. हम दोनो ही इस अचानक टकराव के लिए तेयार नही थे इसलिए जल्दबाज़ी मे मैने उसके सीने से ग्रेवी सॉफ करने के लिए अपने दोनो हाथ उसकी छाती पर रख दिए ऑर वहाँ से हाथ फेर कर सॉफ करने लगा. मेरे एक दम वहाँ हाथ लगाने से रिज़वाना को जैसे झटका सा लगा ऑर पिछे हो गई साथ ही उसने अपने दोनो हाथ से ट्रे भी छोड़ दी जो सीधा मेरे पैर पर आके गिरी. ये सब इतना अचानक हुआ कि हम दोनो ही कुछ समझ नही पाए.
रिज़वाना : आपको लगी तो नही.(फिकर्मन्दि से)
मैं : जी नही मैं ठीक हूँ माफ़ कीजिए वो मैने आप पर सब्जी गिरा दी.
रिज़वाना : कोई बात नही.... (अपने हाथ से अपने टॉप से ग्रेवी झाड़ते हुए) लेकिन आप यहाँ क्या करने आए थे.
मैं : जी वो मैने सोचा आपकी मदद कर दूं इसलिए आ रहा था (नज़रे झुका कर)
रिज़वाना : (मुस्कुराते हुए) कोई बात नही... इसलिए मैने आपको कहा था आप खाते हुए ही अच्छे लगेंगे. खाना तो सारा गिर गया अब क्या करे.
मैं : आप कोई फल खा लीजिए मैं तो पानी पीकर भी सो जाउन्गा. (मुस्कुराते हुए)
रिज़वाना : पानी पी कर क्यो सो जाओगे. अब इतनी गई गुज़री भी नही हूँ कि खाना दुबारा नही बना सकती.
मैं : रहने दो रिज़वाना जी दुबारा मेहनत करनी पड़ेगी आपको.
रिज़वाना: खाना तो खाना ही है ना नीर क्या कर सकते हैं. (कुछ सोचते हुए) म्म्म्माम चलो ऐसा करते हैं बाहर चलते हैं
खाने के लिए फिर तो ठीक है. (मुस्कुरा कर)
मैं : जैसी आपकी मर्ज़ी (मुस्कुराकर)
रिज़वाना : चलो फिर तुम भी कपड़े बदल लो मैं भी चेंज करके आती हूँ.
मैं : अच्छा जी.
उसके बाद हम दोनो कपड़े पहनकर तेयार हो गये ऑर मैं बाहर हॉल मे बैठकर रिज़वाना का इंतज़ार करने लगा. कुछ देर बाद रिज़वाना भी तेयार होके आ गई. उसने सफेद कलर का सूट पहन रखा था जिसमे वो किसी परी से कम नही लग रही थी जैसे ही वो मेरे सामने आके खड़ी हुई तो उसके बदन सी निकलने वाले खुश्बू ने मुझे मदहोश सा कर दिया.
रिज़वाना : मैं कैसी लग रही हूँ. (मुस्कुरा कर)
मैं : एक दम परी जैसी (मुस्कुरा कर)
रिज़वाना : हाहहहाहा शुक्रिया. अर्रे तुमने फिर से वही गाववाले कपड़े पहन लिए.
मैं : जी मेरे पास यही कपड़े हैं
रिज़वाना : (अपने माथे पर हाथ रखते हुए) ओह्ह मैं तो भूल ही गई थी कि तुमको नये कपड़े भी लेके देने हैं.
मैं : नये कपड़ो की क्या ज़रूरत है मैं ऐसे ही ठीक हूँ.
रिज़वाना : नीर अब तुम शेरा हो ऑर शेरा ऐसे कपड़े नही पहनता ख़ान ने मुझे बोला भी था तुम्हारे कपड़ो के लिए लेकिन मैं भूल ही गई. चलो पहले तुम्हारे लिए कपड़े ही लेते हैं उसके बाद हम खाना खाने जाएँगे ठीक है.
मैं : ठीक है.
फिर हम दोनो रिज़वाना की कार मे बैठ कर बाज़ार चले गये पूरे रास्ते मैं बस रिज़वाना को ही देख रहा. उसके बदन की खुश्बू ने पूरी कार को महका दिया था. उस खुश्बू ने मुझे काफ़ी गरम कर दिया था इसलिए मैं पूरे रास्ते अपने लंड को अपनी टाँगो मे दबाए बैठा रहा ताकि रिज़वाना की नज़र मेरे खड़े लंड पर ना पड़ जाए. अब मुझे रिज़वाना के साथ बैठे हुए हीना के साथ बिताए लम्हे याद आ रहे थे जब मैं उसको कार चलानी सीखाता था. थोड़ी देर बाद हम बाज़ार आ गये ऑर वहाँ रिज़वाना ने पार्किंग मे गाड़ी खड़ी की ऑर फिर वो मुझे एक बड़ी सी दुकान (शोरुम) मे ले गई जहाँ उसने मेरे लिए बहुत सारे कपड़े खरीदे. रिज़वाना के ज़िद करने पर मैने बारी-बारी सब कपड़े पहन कर देखे ऑर रिज़वाना को भी अपना ये नया बदला हुआ रूप दिखाया जिसको देखकर शायद रिज़वाना की भी आँखें खुली की खुली ही रह गई. मैं भी अपने इस नये रूप से बहुत हैरान था क्योंकि अब तक मैने गाँव के सीधे-शाधे कपड़े ही पहने थे. लेकिन खुद को आज ऐसे बदला हुआ देखकर मुझे एक अजीब सी खुशी का अहसास हो रहा था ऑर मैं बार-बार खुद को शीशे मे देख रहा था ऑर खुद ही मुस्कुरा भी रहा था.
मैं : कैसा लगा रहा हूँ रिज़वाना जी.
रिज़वाना : (मुस्कुरा कर मेरी जॅकेट का कलर ठीक करते हुए) ये हुई ना बात अब लग रहा है कि शेरा अपने रंग मे आया है.
मैं : ये भी आपका ही कमाल है (मुस्कुरा कर)
रिज़वाना : चलो अब खाना खाने चलते हैं.
मैं : हंजी चलिए. वैसे भी बहुत भूख लगी है
रिज़वाना : भूख लगी है.....पहले क्यो नही बताया चलो चलें.
उसके बाद मैं ऑर रिज़वाना शॉपिंग बॅग्स उठाए अपनी कार की तरफ जा रहे थे कि अचानक 4 लोगो ने हम को घेर लिया ऑर रिज़वाना को अपनी तरफ खींचकर उसके गले पर एक नोकदार चाकू लगा दिया मैं इस अचानक हमले को समझ नही पाया कि ये लोग कौन है ओर हम से क्या चाहते हैं.
मैं : कौन हो तुम लोग (गुस्से से)
एक आदमी : सीधी तरीके से सारा माल निकाल ऑर हम को दे नही तो ये लड़की जान से जाएगी.
मैं : ठीक है ये लो सब तुम रख लो (अपने शॉपिंग बॅग उनकी तरफ फेंकते हुए) लेकिन इनको छोड़ दो.
वो आदमी : साले हम को चूतिया समझा ये कचरा नही पैसा निकाल.
मैं : मेरे पास पैसे नही है इनको जाने दो.
मेरा इतना कहना था कि उसने अपने चाकू का दबाव रिज़वाना के गले पर बढ़ा दिया जिससे दर्द से रिज़वाना की आँखें बंद हो गई ऑर उसने कराहते हुए मुझे कहा....
रिज़वाना : आअहह.... (दर्द से कराहते हुए) नीर मारो इनको ये लोग चोर है.
रिज़वाना का इतना कहना था कि मैं उन लोगो पर टूट पड़ा जो मेरे सामने खड़ा था मैं उसको गर्दन से पकड़ लिया ऑर अपना सिर उसकी नाक पर ज़ोर से मारा ऑर वो वही गिर गया. इतने मे साथ खड़े आदमी ने चाकू से मुझ पर हमला किया जिससे मैने उसकी कलाई पकड़कर नाकाम कर दिया ऑर उसको अपनी तरफ खींचकर अपनी कोहनी उसके सिर मे मारी ऑर साथ ही उसका मुँह नीचे करके अपना घुटना उसके मुँह पर मारा वो भी वही गिर गया तभी जिसने रिज़वाना को पकड़ा था उसने रिज़वाना को मुझ पर धकेल दिया ऑर अपने बचे हुए 1 साथी के साथ वहाँ से पार्किंग की तरफ भाग गया. मैने जल्दी से रिज़वाना को थाम लिया ऑर उससे गिरने से बचा लिया.
मैं : आप ठीक हो.
रिज़वाना : (अपने गले पर हाथ रखकर हाँ मे सिर हिलाते हुए)
मैं : क्या हुआ आपको लगी है क्या. (उसका हाथ उसके गले से हटा ते हुए)
मैं : ये तो खून निकल रहा है. मैं उसको छोड़ूँगा नही सालाआ.....
रिज़वाना के कुछ कहने से पहले ही मैं उन लोगो के पिछे भाग गया वो लोग कार पार्किंग मे घुस गये थे. अब मैं उनको जल्दी से जल्दी पकड़ना चाहता था इसलिए मैं कारो के उपर से छलाँग लगाता हुआ उनके पिछे भागने लगा. वो दोनो पार्किंग की अलग-अलग डाइरेक्षन मे भाग रहे थे लेकिन मुझे दूसरे आदमी से कोई मतलब नही था मुझे उस आदमी पर सबसे ज़्यादा गुस्सा था जिसने रिज़वाना के गले पर चाकू रखा था इसलिए मैं उसकी तरफ उसके पिछे भागने लगा जल्दी ही पार्किंग ख़तम हो गई ऑर वो एक दीवार के सामने आके रुक गया मैने जल्दी से एक कार की छत से कूद कर उसके उपर छलाँग लगा दी जिससे मेरे दोनो घुटने उसके पेट मे लगे ऑर वो वही गिर गया मैने फिर उसको खड़ा किया ऑर उसका सर ज़ोर से दीवार मे मारा जिससे दीवार पर गोल-गोल खून का निशान सा बन गया मैने फिर से उसको खड़ा किया ऑर फिर उसको दीवार की तरफ धकेल दिया उसके फिर से सिर टकराया. ऐसे ही मैने कई दफ्फा उसका सिर दीवार मे मारा लेकिन अब वो बेहोश हो चुका था. इतने मे रिज़वाना मेरे पिछे भागती हुई आई ऑर मुझे पकड़ लिया.
Update-34
Sheikh Saab {baba} :- Age- 58 saal, dikhane me kaafi roubdaar insaan, Kaam- Gang ka main leader, shera jaise baki sab log iske liye hi kaam karte hain.
Anees (chhota sheikh):- Age- 32 saal, Sheikh ka beta or ek la-parwaah kism ka insaan isliye sheikh koi bhi kaam isko sompna jaruri nahi samjhta. Har waqt druggs ke nashe me or ladkiyo me dooba rehta hai.
Munna (japani):- Age- 28 saal, Shera ka jigri dost hai or Dekhne me japani jaisa lagta hai isliye japani naam se underworld me mashunr, Kaam- Druggs agent or Arms agent ke sath deal fix karna or fight club me shera ka partner.
Rasool :- Age-34 saal, kaam- shera ke baad shera ka sara kaam yhi sambhalta hai.
Sooma :- Age-25 saal, Kaam- Videshi clients ke sath druggs or arms ki deal fix karna or tamam agents se paisa collect karke sheikh sahab tak pohonchana.
Lala or Gaani :- Age-34-28 saal, Kaam- Hotels or clubs sambhalna.
Main bade gor se bari-bari sab logo ki tasveere dekh raha tha or unko pehchaane ki koshish kar raha tha lekin mujhe kisi ka bhi chehra yaad nahi aa raha tha. Tabhi khan ne ek aisi tasveer table par fenki jisko main uthaye bina nahi reh saka. Ye to meri tasveer thi lekin maine uss tasveer me mooch rakhi hui thi isliye mera hath khud hi apne chehre par chala gaya jaise main apne hath se apne chehre ka jayeza le raha hun ki kya ye meri hi tasveer hai.
Khan : kya hua kuch yaad aaya apne bare me.
Main : (naa me sir hilate hue) kya ye meri tasveer hai
Khan : ji hujoor ye aapki hi tasveer hai or inn tasveero ko achhe se dekh lo tumko ab aisa hi fir se banna hai.
Main : lekin aapne bataayaa nahi main wahan tak pohonchunga kaise.
Khan : uska bhi ek rasta hai
Main : kounsa rasta
Khan : tumhara purana dost japani jo fight club sambhalta hai wahan se tum tumhari duniya me entry kar sakte ho. waise bhi shera uss fight club ka sabse favroute fighter hain (muskurate hue)
Main : to kya mujhe wahan jake ladna hoga.
Khan : (muskurate hue) Aisa hi kuch.
Main : main samjha nahi aap kehna kya chahte hain.
Khan : tumko wahan jake wahan ke unke logo ko marna hoga or unka maal lootna hoga taaki unn logo ka dhyaan tumhari taraf jaye or wo tumko pehchaan le.
Main : kya main bina koi wajah unse ladayi karu.
Khan : wahanj main bana dunga. tumko to bas jake ladayi karni hai.
Main : thik hai.
Uske baad wo tasveere mujhe dekar khan wapis chala gaya or ab main akela baitha unn tasveero ko dekh raha tha or apni purani jindagi ko yaad karne ki koshish kar raha tha lekin mujhe kuch bhi yaad nahi aa raha tha. aise hi main apni socho me gumm baitha hua tasveer dekh raha tha ki mujhe pata hi nahi chala kab Doctor rizwana mere pass aake baith gai.
Rizwana : kaha kho gaye janab. (mere munh ke samne chukti bajate hue)
Main : ji kahi nahi bas wo main apni purani jindagi ke bare me yaad karne ki koshish kar raha tha lekin kuch bhi yaad nahi aa raha.
Rizwana : koi baat nahi jaise-jaise tum apne bare me janoge tumko yaad aata jayega. waise tumko sach me tumhare gharwalo ke bare me bhi kuch nahi yaad.
Main : (muskurakar naa me sir hilate hue) aapke ghar me koun-koun hai.
Rizwana : koi bhi nahi mere ammi abbu ki car accident me death ho gai thi tab se akeli hi hun (muskurakar)
Main : koi bhi nahi hai. mera matlab pati ya bache.
Rizwana : Nahi....(muskurakar) inn sab chijo ke liye waqt tab hi mil sakta hai jab duty se fursat mile yahan to sara din head quarter me logo ka ilaaj karne me hi waqt nikal jata hai.
Main : haa jab aapke log aise hi kisi par hamla karenge to ilaaj to karna hi padega unka.
Rizwana : achha wo....Hahahahaha nahi aisi baat nahi hai wo to khan ne tumhara test lena tha bas isliye.... or waise bhi tumne kounsi kasar chodi thi.
Main : maine kya kiya main to bas halka fulka unko door kiya tha khud se. (muskurakar)
Rizwana : rehne do... rehne do... uss din head quarters me tumne hamaare logo ki kya haalat ki thi pata hai mujhe. maine hi ilaaj kiya tha unka bichare 5 logo ke to frecture tak aa gaye the body me. Aisa bhi koi kisi ko marta hai.
Main : (nazre niche karke muskurakar)wo ek dam mujh par hamla hua to mujhe kuch samajh nahi aya ki kya karu isliye maine bhi hamla kar diya.
Rizwana : hanji.... or jo hath me aya utha ke maar diya...hahahahahahaha
Main : (bina kuch bole muskurakar)
Rizwana : chalo tum baitho main kuch khaane ke liye laati hun.
Main : aap kyo... koi naukar nahi hai yahan par.
Rizwana : ji nahi aapke khan sahab ko kisi par bharosa bhi to nahi hai isliye sara kaam mujhe hi karna padega (rone jaisa munh banake)
Main : koi baat nahi main hun naa main aapki madad kar dunga.
Rizwana : (hairaan hote hue) tumko khana banana aata hai.
Main : Ji filhaal to khana hi aata hai lekin aap seekhayengi to banana bhi seekh jaunga.
Rizwana : hahahahahaha rehne do tum khate hue hi achhe lagoge bana main khud lungi.
Uske baad Rizwana rasoyi ki taraf chali gai or main usko jate hue dekhta tha. Lekin meri shaitaani nazar ka main kya karu jo na chahte hue bhi galat waqt par galat chij dekhti hai. Rizwana ko jate hue dekhkar meri nazar seedha uski gaanD par padi jo uske chalne se upar niche ho rahi thi uski jeans ki feeting se gaanD ki golayi ke ubhaar or bhi wajah tor par nazar aa rahe the. Jisse mere lund me bhi harkat hone lagi or wo jaagne laga. maine apne dono hatho se apne lund ko thaam liya or ek thappad mara ki sale har jagah munh uthake ghusne ko teiyaar mat ho jaya kar wo doctor hain Heena ya fiza nahi jiski gehrayi me tu jab chahe utar jaye. Lekin mera lund tha ki baithne ka naam hi nahi le raha tha meri nazaro ke samne bar-bar rizwana ki gaanD ki tasveer aa rahi thi or mera dil chaah raha tha ki uski khubsurat ubhari hui gaanD ke deedar main ek baar fir se karu. Isliye naa chahte hue bhi main khada hoke rasoyi ki taraf chala gaya taki chupke se rizwana ki moti si or bahar ko nikali hui gaanD ko jee-bharkar dekh saku.
Abhi main Rasoyi ke gate tak hi pohoncha tha ki achanak Rizwana hath me khane ki tray leke bahar aa gai or mujhse takra gai jisse saari sabji ki gravy mujh par or rizwana par gir gai or kuch bartan bhi zameen par girne se toot gaye. Sabji ki gravy uske or meri dono ki kameez par gir gai thi. Wo mere samne plate leke ab bhi khadi thi. hum dono hi iss achanak takraav ke liye teiyaar nahi the isliye jaldbaazi me maine uske seene se greavy saaf karne ke liye apne dono hath uski chaatee par rakh diya or wahan se hath ferkar saaf karne laga. Mere ek dam wahan hath lagane se rizwana ko jaise jhatka sa laga or pichhe ho gai sath hi usne apne dono hath se tray bhi chod di jo seedha mere pair par aake giri. Ye sab itna achanak hua ki hum dono hi kuch samajh nahi paye.
Rizwana : Aapko lagi to nahi.(fikarmandi se)
Main : ji nai main thik hun Maaf kijiye wo maine aap par sabji gira di.
Rizwana : koi baat nahi.... (apne hath se apne top se gravy jhadte hue) lekin aap yahan kya karne aaye the.
Main : ji wo maine socha aapki madad kar doo isliye aa raha tha (nazre jhuka kar)
Rizwana : (muskurate hue) koi baat nahi... isliye maine aapko kaha tha aap khate hue hi achhe lagenge. Khana to sara gir gaya ab kya kare.
Main : aap koi Phal khaa lijiye main to paani peekar bhi so jaunga. (muskurate hue)
Rizwana : Paani pee kar kyo so jaoge. ab itni gai guzri bhi nahi hun ki khana dubara nahi bana sakti.
Main : rehne do rizwana ji dubara mehnat karni padegi aapko.
Rizwana: khana to khana hi hai na neer kya kar sakte hain. (kuch sochte hue) mmmmm chalo aisa karte hain bahar chalte hain khane ke liye fir to thik hai. (muskurakar)
Main : jaisi aapki marzi (muskurakar)
Rizwana : chalo fir tum bhi kapde badal lo main bhi change karke aati hun.
Main : achha ji.
Uske baad hum dono kapde pehankar teiyaar ho gaye or main bahar hall me baithkar rizwana ka intzaar karne laga. Kuch der baad rizwana bhi teiyaar hoke aa gai. Usne safed color ka suit pehan rakha tha jisme wo kisi pari se kam nahi lag rahi thi jaise hi wo mere samne aake khadi hui to uske badan si nikalne wale khushboo ne mujhe madhosh sa kar diya.
Rizwana : main kaisi lag rahi hun. (muskurakar)
Main : ek dam pari jaisi (muskurakar)
Rizwana : hahahahaha Shukriya. Arre tumne fir se wahi gaavwale kapde pehan liye.
Main : ji mere pass yhi kapde hain
Rizwana : (apne maathe par hath rakhte hue) ohh main to bhul hi gai thi ki tumko naye kapde bhi leke dene hain.
Main : naye kapdo ki kya jarurat hai main aise hi thik hun.
Rizwana : neer ab tum shera ho or shera esse kapde nahi pehanta khan ne mujhe bola bhi tha tumhare kapdo ke liye lekin main bhul hi gai. chalo pehle tumhare liye kapde hi lete hain uske baad hum khana khane jayenge thik hai.
Main : thik hai.
Fir hum dono rizwana ki car me baith kar bazaar chale gaye poore raste main bas rizwana ko hi dekh raha. uske badan ki khoshboo ne poori car ko mehkaa diya tha. Uss khushboo ne mujhe kafi garam kar diya tha isliye main poore raste apne lund ko apni taango me dabaye baitha raha taki rizwana ki nazar mere khade lund par naa pad jaye. Ab mujhe rizwana ke sath baithe hue heena ke sath bitaye lamhe yaad aa rahe the jab main usko car chalani seekhata tha. Thodi der baad hum bazaar aa gaye or wahan rizwana ne parking me gaadi khadi ki or fir wo mujhe ek badi si dukaan (Showroom) me le gai jahan usne mere liye bahut saare kapde khareede. Rizwana ke jidd karne par maine bari-bari sab kapde pehan kar dekhe or rizwana ko bhi apna ye naya badla hua roop dikhaya jisko dekhkar shayad rizwana ki bhi aankhen khuli ki khuli hi reh gai. Main bhi apne iss naye roop se bahut hairaan tha kyonki ab tak maine gaav ke seedhe-shaadhe kapde hi pehne the. Lekin khud ko aaj aise badla hua dekhkar mujhe ek ajeeb si khushi ka ahsaas ho raha tha or main bar-bar khud ko sheeshe me dekh raha tha or khud hi muskura bhi raha tha.
Main : kaisa laga raha hun Rizwana ji.
Rizwana : (muskurakar meri jacket ka color thik karte hue) Ye hui naa baat ab lag raha hai ki shera apne rang me aaya hai.
Main : ye bhi aapka hi kamaal hai (muskurakar)
Rizwana : chalo ab khana khane chalte hain.
Main : hanji chaliye. waise bhi bahut bhukh lagi hai
Rizwana : Bhukh lagi hai.....pehle kyo nahi bataayaa chalo chalen.
Uske baad main or rizwana shoping bags uthaye apni car ki taraf ja rahe the ki achanak 4 logo ne ham ko gher liya or rizwana ko apni taraf khinchkar uske gale par ek nokdaar chaaku laga diya main iss achanak hamle ko samajh nahi paya ki ye log kaun hai or humse kya chahte hain.
Main : koun ho tum log (gusse se)
Ek Aadmi : seedhi tareeke se sara maal nikaal or ham ko de nahi to ye ladki jaan se jayegi.
Main : thik hai Ye lo sab tum rakh lo (apne shoping bag unki taraf fenkte hue) lekin inko chod do.
Wo aadmi : sale ham ko chutiya samjha ye kachra nahi paisa nikaal.
Main : mere pass paise nahi hai inko jane do.
Mera itna kehna tha ki usne apne chaaku ka dabaav rizwana ke gale par badha diya jisse dard se rizwana ki aankhen band ho gai or usne karahate hue mujhe kaha....
Rizwana : Aaahh.... (dard se karahate hue) neer maaro inko ye log chor hai.
Rizwana ka itna kehna tha ki main unn logo par toot pada jo mere samne khada tha main usko garden se pakad liya or apna sir uski naak par jor se mara or wo wahi gir gaya. itne me sath khade aadmi ne chaaku se mujh par hamla kiya jisse maine uski kalayi pakadkar nakaam kar diya or usko apni taraf khinchkar apni kohni uske sir me maari or sath hi uska munh niche karke apna ghutna uske munh par mara wo bhi wahi gir gaya tabhi jisne rizwana ko pakda tha usne rizwana ko mujh par dhakel diya or apne bache hue 1 saathi ke sath wahan se parking ki taraf bhaag gaya. maine jaldi se rizwana ko thaam liya or usse girne se bacha liya.
Main : aap thik ho.
Rizwana : (apne gale par hath rakhkar haa me sir hilate hue)
Main : kya hua aapko lagi hai kya. (uska hath uske gale se hata te hue)
Main : ye to khun nikal raha hai. main usko chodunga nahi salaaaa.....
Rizwana ke kuch kehne se pehle hi main unn logo ke pichhe bhaag gaya wo log car parking me ghus gaye the. Ab main unko jaldi se jaldi pakadna chahta tha isliye main caro ke upar se chalaang lagata hua unke pichhe bhagne laga. wo dono parking ki alag-alag direction me bhaag rahe the lekin mujhe dusre aadmi se koi matlab nahi tha mujhe uss aadmi par sabse jyaadaa gussa tha jisne Rizwana ke gale par chaku rakha tha isliye main uski taraf uske pichhe bhagne laga jaldi hi parking khatam ho gai or wo ek deewar ke samne aake ruk gaya maine jaldi se ek car ki chhat se kood kar uske upar chalaang laga di jisse mere dono ghutne uske pet me lage or wo wahi gir gaya maine fir usko khada kiya or uska sir jor se deewar me mara jisse deewar par gol-gol khun ka nishaan sa ban gaya maine fir se usko khada kiya or fir usko deewar ki taraf dhakel diya uske fir se sir takraya. aise hi maine kai daffa uska sir deewar me mara lekin ab wo behosh ho chuka tha. Itne me Rizwana mere pichhe bhagti hui aayi or mujhe pakad liya.