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आंटी और माँ के साथ मस्ती complete

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मम्मी मेरी शैतानी मुस्कुराहट को देख कर थोड़ा घबरा जाती है

मम्मी मेरी शैतानी मुस्कुराहट से थोड़ा घबरा जाती है,हालाँकि उन्हे भी पता था कि मे गान्ड मारने वाला हूँ ,शायद ये सोच रही होगी कि जब मे चूत की ऐसी हालत कर सकता हूँ तो गान्ड की क्या हालत करूगा

मम्मी:तो अब क्या करेगा,गान्ड मारेगा

मे:बिल्कुल मम्मी,आपकी गान्ड है ही ऐसी कि कॉन नही मारना चाहेगा

मम्मी:आजकल के बच्चे भी बस गान्ड के पीछे पड़े रहते है

मे:मम्मी मे बताउन्गा ना आपको गान्ड मारना किसे कहते है ,एक बार गान्ड चुदाई का मज़ा ले लिया तो आगे से गान्ड मरवाना ज़्यादा पसंद करोगी

मम्मी:हाँ वो भी देख लेगे ,लेकिन अगर मुझे दर्द हुआ या तूने कुछ ऐसा किया जिससे मुझे अच्छा नही लगा तो याद रखना गान्ड तो दूर ही बात है चूत भी नही मारने दूँगी

((मे अपने मन,एक बार लंड गान्ड मे घुसने दो ,फिर कॉन सुनने वाला है ,ऑर फिर ऐसी मस्त गान्ड मारूगा कि सब कुछ भूल जाओगी))

मम्मी:क्या सोच रहा है

मे:कुछ नही ,बस प्लॅनिंग कर रहा हू

मम्मी:अभी की कोई प्लॅनिंग मत कर ,अभी चूत चोद ली ,अब थोड़ा आराम करके ,थोड़ा बहुत खेतो मे काम करेंगे,यहाँ बस चुदाई करने ही नही आए,ऑर जब तेरी मामी कल आएगी तो देखेगी कि कल हमने कुछ काम नही किया तो क्या सोचेगी

मे:अरे मम्मी ,आप मामी की चिंता क्यो करती हो,उन्हे मे देख लुगा

मम्मी:बोल तो ऐसे रहा है जैसे तूने मामी को भी चोद डाला हो

((मम्मी अपनी बात ख़तम करते करते एक दम आश्चर्य से बोली,मम्मी को पता चल गया था))

मम्मी:कमिने ,मतलब कल भाभी को कोई चोट नही लगी थी ,तूने उनकी चुदाई करके ऐसी हालत कर दी थी

मे बस मुस्कुरा रहा था

मम्मी:तूने अपनी मामी को भी नही छोड़ा

मे:मेने थोड़े ही बोला था मामी को मुझसे चुदवाने के लिए वो खुद आई थी

मम्मी:ऑर क्या बोला चोद दे मुझे,ज़्यादा समझदार मत बन

मे:मे झूट नही बोल रहा हूँ,ऑर ये देखो उन्होने ही आज मुझे ये सरसो के तेल की सीसी दी है जिससे आज मे तुम्हारी अच्छे से गान्ड मार सकूँ

मम्मी आश्चर्य से मुझे देखती हुई

मे:ऑर हाँ ,आज आते समय मामी यही बोल रही थी कि अगर मेने आपकी गान्ड नही मारी तो मेरे लिए अच्छा नही होगा

मम्मी अब थोड़ा शांत होते हुए

मम्मी:तो कल तुमने भाभी की गान्ड मारी थी,तभी तो उनसे सही से चला नही जा रहा था

मे:हाँ मम्मी,कल जमकर मामी की गान्ड मारी थी

मम्मी:मेने नही मरवानी तेरे से गान्ड ,मेरी भी ऐसी हालत कर देगा तू

मे:मामी भी यही चाहती है कि कल आप उनकी जैसे हालत मे जाओ

मम्मी:नही नही ,मे नही मरवाउन्गी गान्ड

मे:अरे मम्मी ,बहुत मज़ा आता है,चाहे तो आप मामी से पूछ लेना

मम्मी:नही तू झूठ बोल रहा है

मे:मम्मी ,मुझे आपकी कसम ,अगर बहुत मज़ा आता है,तभी तो वो बोल रही थी कि आज अपनी मम्मी की गान्ड ज़रूर मारना

मम्मी:अगर तूने झूठ बोला तो

मे:तो जो सज़ा देना है दे देना

मम्मी:चल अब थोड़ी सी नींद निकाल लेती हूँ ,फिर देखेगे क्या करना है

मे:ठीक है मम्मी,जब तक मे भी सुस्ता लेता हूँ थोड़ी ताक़त आ जाएगी ,जिससे आपकी अच्छे से गान्ड मार कर आपको जन्नत की शैर करा सकूँ

मम्मी:हट शैतान कही का

बस फिर हम दोनो नींद के आगोश मे चले गये

 
मे जब उठा तो दोपहर हो चुकी थी ,मेने देखा कि मम्मी अभी तक तक सोई हुई है,मुझे ये सोचकर हसी आ गयी कि हमेशा मम्मी मुझे उठाती है लेकिन चुदाई के बाद हमेशा मे मम्मी को उठाता हूँ

मे जानता था कि आज मम्मी को अपनी गान्ड चुदवाने से कोई नही बचा सकता,लेकिन फिर भी मेने मम्मी को नही उठाना बेहतर समझा

मेने मामी द्वारा दी गयी सरसो के तेल की सीसी को लिया ऑर उसे घूर्ने लगा,पता नही क्यो मुझे उस तेल को घूर्ना बहुत अच्छा लग रहा था,या शायद ये मे जानता था कि ये तेल मम्मी के उस छेद पे लगेगा जिसने मुझे पागल कर रखा है,ऑर जिसने मुझ जैसे एक सीधे साधे लड़के को शातिर लड़का बना दिया था

मुझसे समय निकालना बहुत भारी पड़ रहा था,लेकिन मम्मी से प्यार होने की वजह से मे उन्हे कोई तकलीफ़ नही देना चाहता था हालाँकि मे मम्मी की गान्ड जोरदार तरीके से मारना चाहता था

कुछ देर यूही बीत जाने के बाद मेने सोचा क्यो ना टाइम पास किया जाए जब तक मम्मी भी उठ जाएगी

तो इस चक्कर मे मेने तेल की सीसी उठाई ऑर 8-10 बूंदे हाथ मे डाली ऑर अपने लंड पे ले जाकर मसल्ने लगा

मेने फिर कुछ बूंदे ली ऑर फिर लंड पे लगाकर मसलने लगा,मेरा लंड तेल मे इतने चमक रहा था जैसे किसी ने मोटा डंडा तेल मे से निकाला हो,

सरसो का तेल होने की वजह से अब मेरा हाथ अपने लंड पे बहुत आसानी से फिसल रहा था,मुझे बहुत मज़ा आ रहा था मम्मी की कल्पना करते हुए अपने लंड को मसलने मे ऑर मे ये कल्पना करके मज़ा उठा रहा था कि कैसे मेरा लंड मम्मी की गान्ड के छेद से अंदर बाहर हो रहा है ,ऑर मुझे पता ही नही चला कि कब मे उस स्थिति मे पहुच गया जहाँ मेरा लंड पानी छोड़ने वाला ही था ,पर मेने कैसे भी करके लंड को पानी निकालने से रोका

मे खुद से बोला ,मम्मी के सामने रहते हुए खुद को काबू करना बहुत मुस्किल है ,क्यो ना यहाँ से निकल कर थोड़ा इधर उधर के खेतों मे घूम आउ,अभी मम्मी को सोए हुए तकरीबन 2 घंटे हुए होगे ,मेने मम्मी की इतनी जबरदस्त चुदाई की है कि शायद मम्मी अभी 2-3 घंटे ऑर सोए,इससे अच्छा है बाहर घूम अओ

मे बाहर घूमने निकल गया ,आस पास देखा तो कोई नज़र नही आया,धूप जोरो की पड़ रही थी

तो मैं राजू के खेतो की तरफ निकल गया,मे जानता था कि राजू परसो आएगा ,ऑर उसके घर मे कोई है नही इसलिए उसकी माँ यही होगी ,ऑर उसके दर्शन हो जाए वो काफ़ी है

मे फिर राजू के खेतो की ओर निकल पड़ा ओर बहुत जल्द मे राजू के खेतो के पास पहुच गया,मे वही एक बड़े से पेड़ के पीछे छिपकर मंजू को ढूँढने लगा,मुझे काफ़ी निराशा हुई कि मंजू कही नही थी ,तो मेने सोच लिया कि मंजू अपनी कुटिया मे आराम कर रही होगी

मेने थोड़ा इंतज़ार किया पर मुझसे रुका नही जा रहा था ,तो मे हिम्मत करके कुटिया की ओर चला गया

((यहाँ मेरे गाँव मे सब खेतो मे कुटिया बनी होती है जिससे गर्मी मे दिन मे छाँव मे आराम किया जा सके,लेकिन लोग बाग आज कल इसे चुदाई मे ज़्यादा काम मे ले रहे है,यहाँ कुटिया मे कोई आता नही ,ऑर दूर दूर तक बड़े खेत होने के कारण किसी को पता भी नही चलता))

मे जैसे ही कुटिया के पास पहुचा ,मुझे कुछ आवाज़े सुनाई दी ,मुझे ये आवाज़े पहचानने मे देर नही लगी कि ये चुदाई के दौरान आने वाली आवाज़े है ,मे बहुत आश्चर्य मे पड़ गया कि मंजू भी किसी से चुदवा सकती है

मेरी हिम्मत नही हो रही थी कि मे अंदर देख सकूँ ,लेकिन मेने हिम्मत जुटाई ऑर खिड़की की दरार से देखने लगा लगा,मुझे कुछ दिखाई नही दे रहा था,फिर मेने खिड़की को थोड़ा सा धक्का दिया जिससे खिड़की थोड़ी सी खुल गयी,थोड़ी से आवाज़ भी आई ,लेकिन हवा ही इतनी चल रही थी कि कोई ये नही सोचेगा कि किसी ने खिड़की खोली है,

अब खिड़की की दरार इतनी खुल गयी थी कि मे अंदर देख सकता था,जैसे ही मेने अंदर देखा मेरा मुँह खुला का खुला रहा गया,जो आदमी मंजू को नीचे लेटकर चोद रहा था वो ऑर कोई नही बल्कि हमारे गाँव के बहादुर चाचा थे

(बहादुर चाचा,मेरे गाँव के सबसे ठरकी आदमी,दिनभर गंजा पीते रहते थे ,उसकी पत्नी की मौत को अरसा बीत चुका था,एक बड़े खेतो का मालिक,जिसपे इसने कई मजदूर रख रखे है,ऑर अधिकतर मजदूर औरते थी जिनकी उमर 40-50 के बीच होती थी ,ऑर चाचा की उमर लगभग ,65 साल,लेकिन कोई ये नही कह सकता कि ये 65 साल के है ऑर चुदाई मे तो उनका जवाब नही ,वो तरीबन 50 से उपर औरतों ऑर लड़कियो को चोद चुके है जिसमे अधिकतर उनकी मजदूर हुआ करती थी,वो रखता ही केवेल औरतो को मज़दूरी पे,जिससे उनको पटा के चोद सके जिसमे से अधिकतर औरतो को चोद चुका था ऑर बची कूची बहुत जल्द चुदने वाली थी,क्यो कि चाचा किसी को बक्श दे ऐसा हो नही सकता था ऑर कोई चाचा से नही पटे ये वो होने नही देते थे

 
ये कोई नही जानता केवल हमारे जैसे ठरकी लड़को को छोड़कर,जब हम छोटे छोटे थे तब से बहादुर चाचा कई लड़कियो को बहला फुसला कर खेतो मे ले जाते थे ,पूछने पे कहते थे कि एक नया गेम खेलने जा रहे है ऑर वो अकेले मे ही खेले जाता है,ऑर उन्हे खेतो मे लेजा कर चुदाई करते थे,छोटी लड़किया जल्दी बहक भी जाती थी ,इसलिए उनसे चुद जाती थी,हमें बहुत गुस्सा आता था साला ये ठरकी कैसे पटा कर चुदाई कर लेता है )

मे:साला इसने तो राजू की माँ को भी पटा लिया,ऑर मेने वापस खिड़की की दरार से से देखा

बहादुर चाचा ज़ोर ज़ोर से मंजू को चोद रहे,उनका बड़ा लंड पूरा बाहर निकल कर पूरा अंदर जा रहा था ऑर मंजू भी ""हाँ चाचा ऑर ज़ोर से चोदो"" बोल रही थी

मुझसे रहा नही गया कहीं मेरा पानी ना निकल जाए इसलिए मे वापस दबे पाव अपने खेत की ओर निकल लिया जहाँ मैं मम्मी की गान्ड चोदने वाला था

मेरा दिमाग़ खराब हो रहा था,अब मुझसे बिल्कुल नही रुका जा रहा था जब से मेने मंजू को उस ठरकी चाचा से चुदते देखा है,मे बहुत तेज तेज चल रहा था,पता नही क्यो मुझे मंजू को चुदते देख मुझे अच्छा नही लग रहा था

मे बस अपनी ही उधेड़बुन मे चल रहा था,मुझे पता भी नही चला कि कब हमारा खेत आ गया,

मे कुटिया मे गया ,मम्मी अभी भी सो रही थी,मम्मी के बदन पे कोई कपड़ा नही था,मम्मी नंगी ही सो रही थी,मुझे सेक्स का खुमार इतना चढ़ गया था कि जहाँ पहले मे मम्मी को कोई दिक्कत नही देना चाहता था वही मे मम्मी की परवाह किए बिना मम्मी की गान्ड पे अपने होठ रख कर किस करने लगा,मेरे किस करके के कारण मम्मी भी जाग गयी

मम्मी:क्या कर रहा है

((मंजू को चुदते देख मेरा पूरा मूड खराब हो गया था,मे बिल्कुल हल्के मूड मे नही था))

मे:सुधा मुझसे रुका नही जा रहा जल्द से चोद लेने दो

मम्मी:इतनी जल्दी भी क्या है ऑर मुझे नाम से क्यो पुकार रहे हो

मे:अब हम माँ बेटे नही रहे ,हम अब प्रेमी हो चुके है ,मे तेरा प्रेमी ऑर तुम मेरी प्रेमिका ,ऑर प्रेमी एक दूसरे को नाम से ही पुकारते हैं

मम्मी:तेरी फिर से नौटंकी शुरू हो गयी

((अब मे थोड़ा थोड़ा शांत होने लगा था ,मंजू को बदाहूर चाचा के साथ चुदते हुए देखने के बाद मेरा तो दिमाग़ ही खराब हो गया था))

मे बोला मम्मी आप पलट जाओ,मे आपके बदन की मालिश कर देता हूँ,((ये तो एक बहाना था,मे तो मम्मी की गान्ड की मालिश करके गान्ड मारना चाहता था))

मम्मी बोली आज तो इतना बदन भी नही दुख रहा ,फिर क्यो मालिश कर रहा है

मे:चुदाई से पहले अगर मालिश हो जाती है तो शरीर चुदाई के दौरान लंबे समय तक टिका रहता है

मम्मी:ऑर कितना चोदेगा,बात तो ऐसी कर रहा है मुझे रात भर चोदे जाएगा

मे:बिल्कुल मम्मी,मे आपको आज रात भर चोदने वाला हूँ

मम्मी:एक चुदाई के बाद तो लूड़क जाता है

मे:लेकिन उस एक चुदाई मे मेने आपकी हालत खराब नही कर दी थी,बोलो

मम्मी:तो मे कब कह रही हूँ कि तुझ मे दम नही ,तू चोदता तो बड़ा मस्त है,मेरी चूत की सारी नसें ही ढीली कर दी है

मे:मेरी रानी पलट जाओ ,मुझे मालिश करनी है

मम्मी:इस रानी पे राजा अपना हुकुम नही चला सकता,बल्कि रानी राजा पे हुकुम चलाती है(मम्मी मज़ाक मे बोलते हुए)

मे:तो क्या हुकुम था इस राजा के लिए

मम्मी:पहले हमारी आगे से मालिश करो फिर पीछे मालिश करना,ओर अगर तुमने हमे मालिश से खुश कर दिया तो हम भी तुम्हे इनाम देकर खुश करेंगे

 
धन्यवाद

सॉरी मित्रो २ दिन टाइम नही मिल पाया
 
मम्मी:पहले हमारी आगे से मालिश करो फिर पीछे मालिश करना,ओर अगर तुमने हमे मालिश से खुश कर दिया तो हम भी तुम्हे इनाम देकर खुश करेंगे

मम्मी अब बिल्कुल सीधी लेट गयी ,मेने अपने हाथ मे सरसो के तेल की कुछ बूंदे ली,हाथ का मसाला ऑर मम्मी के पेट पे रख दिए,ऑर मसल्ने लगा,मम्मी के मुँह से सिसकारिया निकलने लगी,बहुत ही जल्द मम्मी का पेट इतना चिकना हो गया जैसे कि किसी चमकीले पत्थर को तेल मे डुबोकर बाहर निकालने पे चमकता है,मेने कुछ बूंदे सरसो के तेल की ऑर ली ऑर इस बार मेने अपना हाथ चुचि पे लेजा कर मम्मी की चुचियो की मालिश करने लगा,मे अपनी उंगलियो से मम्मी के निपल को मसल्ने लगा धीरे धीरे पता ही नही चला कि मे ज़ोर ज़ोर से चुचिया मसल्ने लग गया था ,मुझे इसका आससास तब हुआ तब मम्मी के मुँह से दर्द की कराह सुनी

मे होश मे आया ऑर फिर कुछ बूंदे ऑर लेकर मैं इस बार मम्मी की चूत की मालिश करने लगा,जैसे ही मैं अपने हाथ मम्मी की चूत पे ले गया मम्मी के मुँह से"आअहह" निकल गयी,मम्मी की चूत बहुत गरम थी,मे बस मम्मी की फूली हुई चूत की मालिश कर रहा था ,मेरा एक हाथ धीरे धीरे मम्मी की जांघों पे चला गया था,बहुत ही मांसल जांघे थी मम्मी की एक दम मखमल जैसी,बहुत मज़ा आ रहा था,मम्मी की चूत की मालिश की वजह से चूत ने पानी छोड़ना शुरू कर दिया था,

मेरे मन मे आ रहा था कि मम्मी की चूत का स्वाद चखू,आज तक हिम्मत नही हुई थी पर आज सोचा जो होगा देखा जाएगा,देखे तो सही चूत का स्वाद कैसा होता है,पॉर्न मूवीस मे तो बहुत चूस्ते है चूत,बस ये सोचकर मेने अपना मुँह मम्मी की चूत पे रख दिया,मम्मी की चूत बहुत गर्म थी

पता नही चल रहा था कि चूत की खुसबू है या बदबू,या शायद ये सेक्स का नशा था ,पर मम्मी की चूत पे मुँह रखने मे बहुत मज़ा आया जैसे कुछ हासिल कर लिया हो,मम्मी भी चौंक गयी गयी कि ये मेने क्या किया पर मम्मी ने मज़ा आने के कारण मुझे कुछ बोला नही ऑर आनंद लेने लगी

अब मे अपनी जीब निकाल कर मम्मी की चूत को चाट रहा था,चूत के पानी का स्वाद थोड़ा खारा खारा सा था पर चूत चूसने मे बहुत मज़ा आ रहा था,काश ये सब पहले ही कर चुका होता,मेने खुद पे अफ़सोस जाहिर किया,मे अपनी जीब से चूत को उपर से नीचे तक चाट रहा था,

मम्मी ये सब बर्दास्त नही कर सकी मम्मी की चूत ने पानी छोड़ दिया,पता नही कैसे लेकिन मे सारा पानी पी गया,मम्मी अपने हाथ मेरे सिर पे रखकर मेरे सिर को अपनी चूत की तरफ धकेल रही थी ,मैं भी अब अपनी जीब को चूत मे घुसाने लगा था,

मम्मी "हाँ बेटा ऐसे चूसे जा,बहुत मज़ा आ रहा है""

मे अपनी जीब से मम्मी की चूत को चोदने लगा था,मेरी जीब लगभग पूरी अंदर जा रही थी ,ऑर मम्मी ज़ोर ज़ोर से मेरे सिर को चूत की तरफ धकेल रही थी जिससे मेरी जीब ऑर अंदर तक घुस सके,कुछ देर यूही चलता रहा ऑर एक बार फिर मम्मी की चूत ने पानी छोड़ दिया था,इस बार चूत का पानी मेरे मुँह पे फैल गया था,ऐसा लग रहा था जैसे मे नहा कर आया हूँ,मेने अपना सिर उपर किया,ऑर ज़ोर ज़ोर से साँसे लेने लगा,मम्मी की भी साँसे तेज हो चुकी थी ,फिर हम दोनो एक दूसरे को देखकर हँसने लगे

मैने पूछा मम्मी मज़ा आया,

""हाँ बेटे बहुत मज़ा आया,तूने तो कमाल ही कर दिया"मम्मी ने जवाब दिया

मम्मी अब तुम पेट के बल लेट जाओ,

मम्मी बोली"बेटा,तुमने मुझे खुश किया है,अब ये शरीर तुम्हारा है इनाम के रूप पे,जो मर्ज़ी आए करो इसके साथ"ऑर ये कह कर मम्मी पेट के बल लेट गयी,

मुझे मम्मी की गान्ड का उभार बहुत अच्छा लग रहा था,पहले गोरी गोरी पीठ,उसके बाद नीचे की ओर जाती कमर ऑर उसके बाद उपर चढ़ती हुई गान्ड ,ये सब देखकर तो कोई जन्नत भूल जाए,मेने तेल लेकर मम्मी की पीठ से मालिश शुरू की ,तेल का स्पर्श पाकर मम्मी की पीठ चमक उठी,मे मम्मी की मालिश बहुत अच्छे से कर रहा था,पूरा हाथ घुमा घुमा कर,धीरे धीरे मे हाथ को नीचे की ओर ले जाने लगा,ऑर बहुत ही जल्द मेरा हाथ गान्ड के अगले हिस्से मे पहुँच गये जहाँ से गान्ड की दरार शुरू होती है,मे मम्मी की कमर पे भरपूर तेल डाल कर मालिश कर रहा था

 
अब मे अपने हाथ को मम्मी की गान्ड के उपर ले जाने लगा,मेने मम्मी की गान्ड को तेल से चिकना कर दिया था,मे भर भर के तेल मम्मी की गान्ड पे डाल कर मालिश कर रहा था,इस तरह मे मम्मी की जाँघो तक मालिश करने लगा,मुझसे अब रहा नही जा रहा था मम्मी की गान्ड को थिरकता देख,मैं मम्मी की गान्ड नीचे से उपर धकेल कर चोद देता कभी उपर से नीचे,इससे गान्ड मे एक थिरकन पैदा हो रही थी,जिसे देखकर मेरा दिल धक धक हो रहा था,मे अब ऑर ज़्यादा देर नही रुक सकता था ,इसलिए मेने मम्मी की गान्ड के दोनो हिस्सो को विपरीत दिशा मे खोला,जैसे ही मम्मी की बड़ी सी गान्ड की दरार चौड़ी हुई,मुझे वो छेद दिखाई दिया जिसने मुझे पागल बना रखा था,जिसके कारण मेने चाची से धोका किया जिन्होने मुझे चोदना सिखाया था,छेद इतना प्यारा था कि किसी को भी एक ही नज़र मे अपना दीवाना बना दे

छेद इतना छोटा था कि उसमे एक उंगली घुसाने मे भी बहुत ताक़त लगानी पड़े,सुखी गान्ड मे तो किसी भी हालत मे ही नही घुसा सकता चाहे गान्ड लहू लुहान हो जाए,ऑर थूक से ज़्यादा फ़र्क नही पढ़ने वाला था ,थूक से केवल ज़्यादा से 2 उंगलिया घुसाइ जा सकती है जिसमे एक छोटी उंगली भी शामिल थी,3 इंच मोटा लंड तो थूक के साथ नही घुसाया जा सकता,अगर घुसाया तो इसके बहुत घातक परिणाम हो सकते थे

मेने मन ही मन सोचा कि मामी को कैसे पता चला कि मम्मी की गान्ड अभी खुली नही है ,कुवारि है,तभी तो उन्होने ने मुझे सरसो का तेल दिया है ,जिससे मे बहुत मज़े से मम्मी की गान्ड मार सकूँ,मुझे मामी से ये पूछना पड़ेगा ऑर मेने मन ही मन मामी को धन्यवाद दिया

गान्ड का छेद इतना प्यारा था कि उसको चाटने के बारे मे मुझे सोचना ही नही पड़ा जैसे मुझे चूत चाटने मे सोचना पड़ गया था ऑर मेने अपना मुँह गान्ड के छेद पे रख दिया,मेरा मुँह गान्ड के छेद पे रखने पर मम्मी उस हालत मे पहुच गयी जहाँ मज़े की कोई सीमा नही थी,मम्मी के मुँह से बस यही बात निकल रही थी कि मे छेद को चाटना रोकू नही,

""हाँ बेटा ऐसे ही चाटे जा गान्ड को ,रुकना मत , बस चाटे जा,""

ऑर मैं अपनी जीब निकाल कर छेद को चाटने लगा पता नही क्या बात थी उस छेद मे,पर उसे चाटने मे मज़ा बहुत आ रहा था,मेरे लगातार चाटने की वजह से मेरा बहुत सारा थूक मम्मी की गान्ड पे आ गया था ,ऑर गान्ड के छेद से होते हुए चूत के उपर से ज़मीन पे टपक रहा था,ऑर साथ मे चूत का पानी भी टपक रहा था,मम्मी की ऐसी हालत शायद कभी नही हुई थी ,उनकी चूत ने कई बार पानी छोड़ दिया था,इधर मे बस गान्ड के छेद को चाटे जा रहा था,काफ़ी देर चाटने के बाद के गान्ड का छेद थोड़ा सा खुला,हालाँकि वो इतना नही खुला था कि उसमे एक उंगली घुसाइ जा सके,पर इतना खुल गया था कि एक उंगली डालकर उसको थोड़ा चौड़ा कर सके

मे छेद चाटे जाने वाला खेल ख़तम करना चाहता था जिससे मैं गान्ड मे लंड डालने वाला गेम शुरू कर सकूँ,पर ना तो मम्मी का अपने शरीर पे बस था ना ही मेरा,मे बस छेद को चाटे जा रहा था अब तो मेने अपना हाथ लेजा कर एक उंगली चूत मे डालकर उसको आगे पीछे करना शुरू कर दिया था,एक तरफ चूत मे उंगली अंदर बाहर हो रही थी ऑर एक तरफ गान्ड के छेद पर मेरी जीभ लगातार चल रही थी ,मम्मी की चूत एक बार फिर पानी छोड़ने वाली थी ,मुझे पता नही कैसे पता चल गया,इसलिए मैं एक उंगली से चूत को चोदने लगा ,मेरी उंगली इतनी तेज अंदर बाहर हो रही थी कि उसमे से "फॅक फेच फॅक"की आवाज़े आने लग गयी थी ऑर कुछ ही देर मे मम्मी एक चीख के साथ झड गयी,आज चूत ने इतना पानी छोड़ा था कि नीचे की ज़मीन बहुत गीली हो गयी थी

अब मैं रुका ,अपनी उंगली चूत से निकाली ऑर अपने मुँह मे लेकर चूसने लगा ऑर चूत के पानी का स्वाद लेने लगा,मे बोला मम्मी आपकी चूत के पानी का स्वाद तो बहुत अच्छा है,

मम्मी ने जवाब दिया हर औरत की चूत का पानी अच्छा होता है,अब मेने अपनी उंगली मुँह से निकाली जिस पर थूक लगा हुआ था ऑर रख दी मम्मी की गान्ड के छेद पे ऑर वही घूमने लगा,पहले ही थूक था छेद पे ऑर उंगली पे थूक लगा होने के कारण छेद कोई विरोध नही कर रहा था,जैसे ही मेरी उंगली छेद के ठीक उपर हो जाती छेद खुलने लगता

अब मुझसे रहा नही गया मेने अपनी उंगली छेद के उपर रोकी ऑर अपना दबाव बढ़ाने लगा,शुरू शुरू मे छेद ने साथ दिया लेकिन एक लिमिट आने के बाद उसने भी विरोध करना शुरू कर दिया,मम्मी को अनुभव नही था कि गान्ड मरवाना क्या चीज़ होती है इसलिए अक्सर बचने की कॉसिश करती रहती थीं,यहाँ भी एक बार फिर कॉसिश की ,

"बेटा रहने दे ना गान्ड को ,चूत चोद ले"मम्मी बोली ,,,

ऐसे कैसे रहने दूं मम्मी ,आज तो आपकी गान्ड मार कर ही रहूँगा ,इस गान्ड के पीछे मे कब से पड़ा हूँ ,तुम नही जानती कि कैसे मेने ये गान्ड सलीम से चुदने से बचाई है वहाँ तुम उससे गान्ड मरवाने को तैयार हो गयी थी ऑर यहाँ अपने सगे बेटे को मना कर रही हो,,

 
ऐसे कैसे रहने दूं मम्मी ,आज तो आपकी गान्ड मार कर ही रहूँगा ,इस गान्ड के पीछे मे कब से पड़ा हूँ ,तुम नही जानती कि कैसे मेने ये गान्ड सलीम से चुदने से बचाई है वहाँ तुम उससे गान्ड मरवाने को तैयार हो गयी थी ऑर यहाँ अपने सगे बेटे को मना कर रही हो,,

मम्मी थोड़ा चिंता मे शायद उन्हे लगा मुझे बुरा लग गया है

"अरे नही बेटा वो तो मे बहक गयी थी ,चाची ने गान्ड के बारे मे इतना बताया ऑर मज़ा दिया कि मुझ मे गान्ड मरवाने की इच्छा इतनी तीव्र हो गयी थी कि मुझसे रुका नही जा रहा था ऑर तब मे तुमसे चुदि भी नही थी इसलिए मुझे सलीम से गान्ड मरवाने को राज़ी होना पड़ा, नही तो मे क्यो अपने बेटे को मना करूगी""मम्मी ने जवाब दिया

मैं बस मुस्कुराया मैं जानता था कि अब मेरा रास्ता सॉफ हो चुका है अब चाहे मम्मी को कितना भी दर्द क्यो ना हो जाए मुझे रोकेगी नही ,ऑर मेने अपनी इस होशियारी के लिए अपने आप को धन्यवाद दिया,ऑर मेने अपना ध्यान वापस गान्ड के छेद पे लगाया,,मेने एक बार फिर उंगली मुँह मे ली ऑर वापस गान्ड के छेद पे ले गया,ऑर इस बार थोड़ा ज़्यादा दबाव बनाया,ऑर मम्मी की हल्की सी "आअहह" के साथ मेरी उंगली थोड़ी सी अंदर सरक गयी थी ,गान्ड का छल्ला इतना चौड़ा तो हो चुका था कि उसने एक उंगली को अंदर जाने की अनुमति दे दी थी,उसके बाद मेने थोड़ा सा थूक छेद पे थुका ऑर दूसरे हाथ की मदद से उस छेद के आस पास चिकना कर दिया जिससे मेरी उंगली अंदर जाते समय थूक को भी अंदर ले जा सके ,ऑर फिर मे धीरे धीरे उंगली को अंदर धकेल्ता गया ऑर आधी अंदर ले गया,ऑर उसे बिना बाहर निकाले अंदर ही घुमाने लगा,ऐसा करने से मम्मी मे एक बार फिर सेक्स की भावना जाग गयी क्यो मेरा ऐसा करना उन्हे बहुत अच्छा रहा था ,ऑर सबूत था चूत का पानी छोड़ना,

मेने अबकी बार उंगली पूरी बाहर निकाली ऑर एक बार फिर जीब से गान्ड के छेद को चाटने लगा ,अबकी बार थोड़ी सी जीब अंदर जा रही थी ,मेने अब सरसो का तेल लिया ऑर कुछ बूंदे गान्ड के छेद पे डाल दी ,ऑर फिर से उंगली रखी ,मुझे विस्वास नही हुआ कि मेरी उंगली बिना किसी दिक्कत के गप्प के अंदर घुस गयी,ऑर कुछ ही देर मे पूरी अंदर घुस गयी

,अब मेने उंगली को अंदर बाहर करना शुरू किया,ऐसा करने से मम्मी को भी मज़े आ रहे थे,मेने अगला कदम उठाने की सोची ,मेने अब दो उंगली एक साथ छेद पे रखकर दबाब बनाया,सरसो के तेल की वजह से बिना ज़्यादा दिक्कत के दोनों उंगली अंदर जाने लगीं ,मम्मी को इतना दर्द नही हो रहा था जिसे वो सहन नही कर सके,शायद अगर सरसो का तेल नही होता तो मम्मी मुझे गान्ड मे उंगली नही घुसाने देती,बहुत जल्द मेरी दोनो उंगलियो बड़े आराम से अंदर बाहर हो रही थी ,

मेने पूछा "मम्मी कैसा लग रहा है"",

अच्छा लग रहा है बेटे,मम्मी ने जवाब दिया

कुछ देर यौही चलता रहा जब मुझे लगा गान्ड का छल्ला इतना तो खुल गया है कि थोड़ी बहुत मेहनत मे वो लंड को घुसने दे

मे खड़ा हुआ ,अपने लंड पे तेल की बूंदे डालकर मसल्ने लगा,हालाँकि मेरे लंड पे पहले ही तेल लगा हुआ था,ऑर तेल डालने से बिल्कुल चिकना हो गया कि तेल मेरे लंड से टपकने लगा,मेरे लंड की नसें फूलकर फटने जैसी हालत मे हो गयी थी ,शायद मेरी उत्सुकता थी जिसकी वजह से लंड इतने झटके खा रहा था,इस वक्त लंड लोहे जैसा सख़्त हो गया था,

मे बोला ""मेरी रानी आज अपनी पहली बार गान्ड मरवाने को तैयार हो""

मम्मी ने जवाब दिया "हाँ मेरे स्वामी,इस शरीर पे आपका हक है ,मे बिल्कुल तैयार हूँ""

मम्मी नीचे लेटी हुई अपने सिर को घुमा के मेरे लंड को देख कर "आज तो तुम्हारा लंड बहुत बड़ा लग रहा है,कहीं मेरी गान्ड फाड़ ना दे",

मेने जवाब दिया "मम्मी आपकी ये मस्त गान्ड देखकर ही मेरा लंड उतावला हो रहा है ,देखो फूलकर कितना बड़ा हो गया है कि इसकी नसें तक दिखने लगी है

मम्मी मेरे लंड को देखकर थोड़ा घबरा भी जाती है ,

मैं बोला"मम्मी मेरे लंड को अपनी गान्ड मे लेने के लिया तैयार हो जाओ"

मैं तो तैयार हूँ पर थोड़ी सी घबराहट हो रही है" मम्मी ने जवाब दिया

मे मम्मी से बोला"बस मम्मी आप पीछे मत देखो,ऑर भूल जाओ कि आप गान्ड मरवाने वाली हो देखना लंड कब पूरा अंदर घुस जाएगा पता भी नही चलेगा"

जब ये मोटा लंड अंदर घुसेगा तो कहाँ से भूल जाउ कि मैं गान्ड नही मरवा रही हूँ,जो होगा देख जाएगा

 
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