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आखिरी शिकार complete

सुबह साढे छ: बजे ट्रेन बारविक स्टेशन पर रुकी

डेनवर पहुंचने से पहले बारविक ट्रेन का आखिरी स्टापेज था।

ट्रेन के एक थर्ड क्लास कम्पार्टमेंट में बैठे राज ने सावधानी से खिड़की से बाहर प्लेटफार्म पर झांका । कहीं उसे पुलिस के दर्शन नहीं हुए । उसने शान्ति की गहरी सांस ली । किंग्स क्रास स्टेशन पर पुलिस का तगड़ा पहरा था।

राज ने मारिट से अपना टिकट ले लिया था और यार्ड का लम्बा चक्कर लगाकर रेलवे लाइनों में से होता हुआ चुपचाप ट्रेन के प्लेटफार्म से विपरीत दिशा में पहुंच गया था । ट्रेन स्टार्ट होने

पर वह चलती गाड़ी में सवार हुआ था । सारे रास्ते उसने अपनी पलक नहीं झपकने दी थी । सारा सफर उसने बड़ी सजगता से तय किया था | बारविक से पहले ट्रेन पीटरबोरोह, यार्क, डालिंगटन, डरहाम और न्यूकैसल स्टेशनों पर रुक चुकी थी लेकिन कहीं उसे पुलिस की सन्देहजनक गतिविधि के लक्षण दिखाई नहीं दिये थे और न ही ऐसा कोई खतरा अब बारबिक

स्टेशन पर दिखाई दे रहा था ।

उसी क्षण खिड़की के पास से एक अखबार वाला गुजरा | राज ने एक अखबार खरीदा और उसे बिना खोले लपेटकर बगल में दबा लिया। ट्रेन चल पड़ी। वह अपने स्थान से उठ खड़ा हुआ |

मार्गरेट ट्रेन के अगले डिब्बों में कहीं थी । डेनवर पहुंचने से पहले राज उसे तलाश कर लेना चाहता था।

यात्रियों से ठसाठस भरी गाड़ी में राज आगे बढा । ट्रेन के सारे डिब्बे एक-दूसरे से मिले हुये थे । डिब्बों को मिलाने वाले गुफा जैसे झूलते रास्तों से होता वह आगे बढा ।

अन्त में वह उस कम्पार्टमेंट में पहुंच गया जहां एक कोने की सीट पर मार्गरेट बैठी थी।

मार्गरेट ने व्यग्र नेत्रों से उसकी ओर देखा ।

राज ने उसे आंख से संकेत किया और आगे बढ गया । वह दो डिब्बों को मिलाने वाले प्लेटफार्म पर जा खड़ा हुआ और मारपीट की प्रतीक्षा करने लगा।

उसने अपनी बगल में दबा अखबार निकाला और उसे खोलकर पहले पृष्ठ पर निगाह डाली । अखबार उसके हाथों से छूटता-छूटता बचा | पहले ही पृष्ठ पर उसकी तस्वीर छपी हुई थी।

कई क्षण वह अपलक अपनी तस्वीर को घूरता रहा । वह सोच रहा था कि उसकी तस्वीर पुलिस के हाथ में कैसे पड़ गई। फिर उसने इस तस्वीर को पहचान लिया । वह उसके पासपोर्ट की तस्वीर थी।

पिछली रात को रेडियो पर उसका हुलिया ब्राडकास्ट किया गया था । शायद कैलवर्ली गैस्ट हाउस के मैनेजर ने उस हुलिये के दम पर राज को पहचान लिया था और पुलिस को सूचित कर दिया था कि उस हुलिये का आदमी उनके गैस्ट हाउस में ठहरा हुआ था । पुलिस ने गैस्ट हाउस में उसके कमरे पर छापा मारा होगा और राज का सामान अपने अधिकार में कर लिया होगा । राज के सामान में उसका पासपोर्ट भी था जिस पर उसकी तस्वीर लगी हुई थी।

अखबार में तस्वीर छप जाने के बाद स्थिति बड़ी विकट हो गई थी । हुलिया किसी को याद नहीं रहता था या लोग सुनकर भूला देते थे लेकिन तस्वीर हर किसी को याद रह सकती थी।

तस्वीर के नीचे जनता से अपील की गई थी कि वह तस्वीर वाले आदमी को पकड़वाने में पुलिस को सहयोग दें।

"क्या है यह ?" - उसे मार्गरेट की आवाज सुनाई दी।

राज ने देखा वह भी अखबार में छपी उसकी तस्वीर को घूर रही थी।

राज ने अखबार मोड़ कर जेब में रख लिया

और बोला - "मैडम, मुझे लग रहा है कि अब मैं जल्दी ही गिरफ्तार होने वाला हूं । इसलिये तुम मुझसे अलग ही रहो ।"

"अलग रहूं? क्या मतलब ?"

“मतलब यह कि लगभग आधे घण्टे में ट्रेन डेनवर पहुंच जायेगी । तुम डेनवर उतर कर दूसरी गाड़ी पकड़ कर वापिस लन्दन चली जाओ । मैं तुम्हारी मदद के बिना ही तुम्हारे भाई के टापू पर उसे तलाश कर लूंगा ।"

"तुम ऐसा नहीं कर पाओगे? तुम जरूर कहीं दलदल में फंस कर अपनी जान से हाथ धो बैठोगे।"

"देखा जायेगा । बहरहाल मुझे अब तुम्हारी मदद की जरूरत नहीं।"

"लेकिन अब मैं तुम्हारे साथ रहना चाहती हूं। अगर मेरा भाई जिन्दा है तो मैं उसे चेतावनी देना चाहती हूं कि तुम उसकी हत्या करना चाहते हो

?"

"तुम ऐसा कर सकती हो ?"

"शायद कर सकू । शायद न कर सकूँ लेकिन मैं कोशिश जरूर करूंगी।"

"लेकिन कल तक तो तुम बड़ी दृढता से यह कह रही थीं कि तुम्हारा भाई मर चुका था फिर तुम चेतावनी किसे देना चाहती हो?"

वह कुछ क्षण चुप रही और फिर धीरे से बोली "शायद वाकई कोई करिश्मा हो गया हो ।"

"अगर अनिल साहनी और रोशनी भी डेनवर पहुंच गये हुये तो तुम अपनी जान से हाथ धो सकती हो ।”

मार्गरेट चुप रही।

"नादानी मत करो।" - राज बोला - "जाकर अपनी सीट पर बैठो । डेनवर उतर कर लन्दन की वापिसी की ट्रेन पकड़ लेना ।"

और राज उसको वहीं खड़ा छोड़कर लम्बे डग भरता वापिस अपने कम्पार्टमेंट की ओर बढ़ गया

अभी वह अगली बोगी के गलियारे के मध्य में ही पहुंचा था कि गलियारे के एक कम्पार्टमेंट का दरवाजा खुला और एक आदमी राज के रास्ते में आ खड़ा हुआ ।

राज ठिठक गया । उसकी निगाह उस आदमी के चेहरे पर पड़ी और उसका दिल धड़कने लगा वह वही पुलिसमैन था कि जिसके जबड़े पर उसने मिशन कम्पाउण्ड को पिछली गली में चूंसा मारा था । वह उस समय यूनीफार्म के स्थान पर सूट पहने हुये था लेकिन फिर भी राज ने उसे पहचान लिया था ।

राज ने घूमकर देखा । उसके पीछे एक और आदमी खड़ा था । उसकी कठोर आंखें राज के चेहरे पर टिकी हुई थी और उसके होंठों पर मुस्कुराहट थी।

पुलिसमैन और उस आदमी की निगाहें मिलीं। पुलिसमैन ने सहमतिसूचक ढंग से सिर हिला दिया।

"इन्स्पेक्टर मार्श ऐट योर सरविस, मिस्टर राज ।" - पिछला आदमी मीठे स्वर से बोला और । उसने अपना पर्स खोल कर राज के आगे कर दिया ।

पर्स में इन्स्पेक्टर का पुलिस बैज लगा हुआ था । राज के मुंह से बोल नहीं फूटा ।

"भीतर तशरीफ लाइये ।" - इन्स्पेक्टर उसे उस कम्पार्टमेंट की ओर धकेलता हुआ बोला, जिसका दरवाजा खोलकर पुलिसमैन बाहर निकला था।

राज उस कम्पार्टमेंट में घुस गया । इन्स्पेक्टर और पुलिसमैन उसके पीछे भीतर प्रविष्ट हो गये

"साहब की तलाशी लो ।" - इन्स्पेक्टर ने आदेश दिया ।

पुलिसमैन ने उसकी तलाशी ली।

"क्लीन ।" - वह बोला। इन्स्पेक्टर ने सन्तुष्टपूर्ण ढंग से सिर हिलाया ।

"आप सोच रहे होंगे कि हम यहां कैसे पहुंच गये ?" - इन्स्पेक्टर बोला ।

राज चुप रहा।

 
"आपकी जानकारी के लिये यार्क स्टेशन से एक आदमी आपके कम्पार्टमेंट में सवार हुआ था । उसने रेडियो ब्राडकास्ट में आपका हुलिया सुना था और आपको फौरन पहचान लिया था । डार्लिंगटन उतरकर उसने पुलिस को रिपोर्ट कर दी थी । सूचना यार्ड पहुंच गई थी कि आप डेनवर की ट्रेन में सवार थे । मैं पुलिस हैलीकॉप्टर द्वारा बारविक पहुंच गया और वहीं से इस टेन पर सवार हो गया । साथ में मैं पीटर को ले आया था ताकि आपकी शिनाख्त हो सके। वैसे पीटर का जबड़ा अभी भी दुख रहा है ।"

“आप चाहते क्या हैं ?" - राज खोखले स्वर से बोला।

"यह भी बताने की जरूरत है!" - इन्स्पेक्टर आश्चर्य व्यक्त करता हुआ बोला - "यू आर अन्डर अरैस्ट, मिस्टर राज | आप डेनवर उतरकर मेरे साथ वापिस लन्दन चल रहे हैं ।"

"किस इलजाम में अन्डर अरैस्ट हूं मैं ?"

"इलजाम कुछ नहीं । आप अपनी मर्जी से मेरे साथ चल रहे हैं।"

"अपनी मर्जी से तो मैं यहां से हिलूंगा भी नहीं।"

"देखो, मिस्टर !" - इन्स्पेक्टर एकाएक बेहद कर्कश स्वर से बोला - "ज्यादा होशियारी दिखाने की कोशिश मत करो वर्ना पछताओगे । मैं तुम्हारी असलियत जान चुका हं इसलिये तम्हारे साथ इज्जत से पेश आना चाहता हं । तम प्रेस रिपोर्टर हो । यह तुम्हारा प्रेस कार्ड और पासपोर्ट मुझे तुम्हारे सामान में से मिला है ।" - इन्स्पेक्टर अपनी जेब से दोनों चीजें निकाल कर राज के सामने करता हुआ बोला - "तुम अपने देश के प्रधानमंत्री की प्रेस पार्टी के साथ लन्दन आये हो इसलिये तुम्हें और तुम्हारे देश को और तुम्हारे प्रधानमंत्री को किसी स्कैण्डल से बचाने के लिये मैं तुम्हारे साथ शराफत से पेश आ रहा हूं वर्ना मैं तुम्हें एक दर्जन चार्ज लगाकर गिरफ्तार कर सकता हूं जिनमें से इंगलैंड में अनाधिकार प्रवेश

और एक पुलिस अधिकारी पर हमला तो बड़े मामूली चार्ज हैं।"

राज ठण्डा पड़ गया ।

"डेनवर में हेलीकॉप्टर हमारी प्रतीक्षा कर रहा होगा । उसमें सवार होकर हम वापिस लन्दन जा रहे हैं । ओके?"

“आप मुझसे चाहते क्या हैं ?"

"मुख्यत: हम तुम्हारे अनिल साहनी और रोशनी नाम के दो साथियों को गिरफ्तार करना चाहते हैं जिनकी वजह से हमारे पुलिसमैनों की जान गई हैं और साथ ही मैं यह जानना चाहता हूं कि यह

सब कुछ क्यों हो रहा है ? इसके अलावा भी बहुत-सी बातें हैं जो तुम हमें बताओगे जैसे..."

उसी क्षण कम्पार्टमेंट का द्वार खुला ।

तीनों ने घूमकर द्वार की ओर देखा । द्वार पर मारिट खड़ी थी।

राज ने एक गुप्त दृष्टि इन्स्पेक्टर और पुलिसमैन के चेहरों पर डाली ।

उनकी सूरतों से ऐसा नहीं लगता था जैसे उन्होंने मार्गरेट को पहचाना हो। मार्गरेट भीतर प्रविष्ट होने लगी।

"आई एम सॉरी, मैडम" - इन्स्पेक्टर खेदपूर्ण स्वर से बोला - "यह कम्पार्टमेंट सुरक्षित है । आप किसी दूसरे कम्पार्टमेंट में जगह तलाश कीजिये ।"

"और कहीं जगह नहीं है ।" - मार्गरेट बोली - "और यह कम्पार्टमेंट खाली पड़ा है । और फिर मुझे कहीं लिखा तो दिखाई दे नहीं रहा कि यह

सुरक्षित कम्पार्टमेंट है।"

"फिर भी आप भीतर नहीं आ सकतीं । मैं पुलिस अधिकारी हूं और हमें इस कम्पार्टमेंट की जरूरत है

"ओह !" - मारिट निराश स्वर से बोली- "आई एम सॉरी।"

इन्स्पेक्टर उसके विदा होने की प्रतीक्षा करने लगा। \

"लेकिन अगर आप पुलिस अधिकारी हैं तो मैं आपसे एक बात पूछना चाहती हूं।" “पूछिये ।" - इन्स्पेक्टर उतावले स्वर से बोला ।

"जिस जंजीर को खींचकर गाड़ी रुकवाई जाती है उस पर लिखा है कि जंजीर खींचने वाले को पांच पाउण्ड जुर्माना हो सकता है । क्या यह सच है?"

“बिल्कुल सच है ?"

"और अगर किसी के पास पांच पाउण्ड न हो तो ?"

"तो उसे जेल जाना पड़ सकता है।"

"ओह । बैंक्यू ।" मारिट वहां से चली गई।

राज का दिल धड़कने लगा | जो ऊंट-पटांग बातें वह इन्स्पेक्टर से करके गई थी उनका एक ही मतलब हो सकता था ।

वह जंजीर खींचने वाली थी और वह राज को इस बात का स्पष्ट संकेत दे गई थी।

राज बड़ी व्यग्रता से ट्रेन रुकने की प्रतीक्षा करने लगा।

गाड़ी रुक गई।

"क्या हो गया ?" - इन्स्पेक्टर होंठों में बुदबुदाया

और खिड़की का पल्ला खोलकर बाहर झांकने लगा। राज ने देखा गाड़ी एक नदी के पुल पर खड़ी थी।

फिर उसने एक लापरवाही भरी निगाह पुलिसमैन पर डाली, वह भी उसके प्रति असावधान था । राज ने एक बार फिर अपने और कम्पार्टमेंट के दरवाजे के बीच में खड़े पुलिसमैन पर छलांग लगा दी।

 
पुलिसमैन, जो कि पहले ही मिशन कम्पाउण्ड की पिछली गली में पहले राज के और फिर अनिल साहनी के आक्रमण का शिकार होकर अधमरा हो चुका था, रेत के बोरे की तरह भरभरा कर एक ओर गिर गया ।

अगले ही क्षण राज कम्पार्टमेंट से बाहर था ।

उसी क्षण इन्स्पेक्टर वापिस घूमा । जब तक उसकी समझ में आया कि वास्तव में क्या हो गया था, तब तक राज बाहर गलियारे में भागा

जा रहा था । इन्स्पेक्टर ने रिवाल्वर निकाल लिया और उसके पीछे भागा । \

कई लोग अपने-अपने कम्पार्टमेंट से बाहर गलियारे में निकल आये थे । राज उनके बीच में से रास्ता बनाता हुआ आगे बढ रहा था । उस स्थिति में राज को गोली का निशाना बना पाना

सम्भव नहीं था। और इससे पहले कि इन्स्पेक्टर राज के समीप पहुंच पाता राज बोगी के दरवाजे पर पहुंच गया और फिर उसने वहीं से नीचे नदी में छलांग लगा दी।

लगभग तभी बगल की बोगी के दरवाजे में से मार्गरेट नदी में कूद पड़ी।

सौभाग्यवश अगर वे दोनों ही दक्ष तैराक न होते तो उनके लिये इतनी ऊंचाई से छलांग लगा पाना सम्भव नहीं होता।

राज कुछ क्षण पानी के भीतर ही तैरता हुआ आगे बढता रहा फिर जब उसकी सांस टूटने लगी तो उसने पानी के ऊपर सिर निकाला | मार्गरेट भी उससे थोड़ी दूर पानी में तैर रही थी।

नदी का बहाव बहुत तेज था इसलिये वह कुछ क्षणों में ही पुल से इतनी दूर निकल आये थे कि इन्स्पेक्टर का उन्हें गोली का निशाना बना पाना सम्भव नहीं था।

मार्गरेट और राज नदी के बहाव के साथ-साथ तैरने लगे । शीघ्र ही पुल और उस पर खड़ी रेलगाड़ी उनसे काफी दूर हो गई । फिर राज ने रेलगाड़ी को अपने स्थान से रेंगते देखा।

कुछ देर वे यूं ही पूरी शक्ति से नदी के बहाव के साथ तैरते रहे फिर वे दोनों किनारे पर आ गये और नदी के किनारे पर बैठकर हांफने लगे। उनके कपड़े भीगकर उनके शरीर से चिपक गये थे।

"तुमने नदी में छलांग क्यों लगाई ?" - सांस व्यवस्थित हो जाने पर राज ने पूछा ।

"एक ही सवाल बार-बार मत पूछो ।" - वह बोली - "मैं पहले ही बता चुकी हूं कि अगर मेरा भाई जिन्दा है तो मैं उसे चेतावनी देना चाहती हूं कि तुम उसकी हत्या करना चाहते हो ।"

"इतनी ऊंचाई से नदी में कूदने से तुम्हारी गरदन टूट सकती थी।" "तुम्हारी गरदन भी टूट सकती थी लेकिन गरदन न मेरी टूटी है और न तुम्हारी ।"

"तुमने खामखाह अपने आपको झमेले में फंसा दिया ।"

"अब फिजूल बातें करना बंद करो और शुक्र मनाओ कि मेरी वजह से तुम पुलिस के हाथों में पड़ने से बच गये हो ।"

"तुम्हारे लिये तो मेरा पुलिस के हाथों पड़ना ही अच्छा था । फिर मैं तुम्हारे भाई की हत्या कैसे कर पाता?"

"तुम अपने बाकी दो साथियों को भूल रहे हो।"

राज चुप हो गया । वह सोच रहा था कि क्या रोशनी और अनिल साहनी डेनवर पहुंच पायेंगे ।

मार्गरेट अपने शरीर पर हाथ फेर-फेर कर अपने गीले कपड़ों में से पानी निकालने का प्रयत्न करने लगी।

"तुम्हें तो इस इलाके की जानकारी होगी !" - राज भी वही क्रिया दोहराता हुआ बोला । मारिट ने सहमतिसूचक ढंग से सिर हिला दिया |

"यहां डेनवर कितनी दूर हैं ?"

"बीस मील ।" - मार्गरेट बोली - "डेनवर उन पहाड़ियों के पीछे है ।" - मारिट दूर उन पहाड़ियों की ओर, जिनके पीछे से सूर्य उदय हो रहा था, संकेत करती बोली।

"और हम वहां तक पहुंचेंगे कैसे ?"

“पैदल चलने के सिवाय कोई चारा दिखाई नहीं देता लेकिन पैदल चलने से भी बड़ी समस्या है कपड़े सुखाने की और पेट भरने की ।"

"उसका भी इन्तजाम हो जायेगा ।" - राज अनिश्चित स्वर से बोला।

"और यह भी सम्भव है कि इन्स्पेक्टर भी पुल पर ही ट्रेन से उतर गया हो और अब हमारे पीछे आ रहा हो ।"

"मुझे यह कम सम्भव दिखाई देता है । मेरे ख्याल से वह ट्रेन द्वारा डेनवर पहुंचेगा और फिर वहां से पुलिस की सहायता से हमारी तलाश करवायेगा।"

"यह भी हो सकता है।" - मार्गरेट ने स्वीकार किया।

"मार्गरेट, एक बात बताओ?"

"पूछो।" “

क्या तुम्हें वाकई विश्वास है कि जार्ज टेलर मर चुका है ?"

“पहले था लेकिन अब तुम लोगों की बातें सुन कर नहीं रह है । अब मैं वाकई सोचने लगी हूं कि शायद मेरे देश के विदेश मन्त्रालय ने मेरे भाई की शिनाख्त में गलती की हो ।"

"तुम्हारा भाई न केवल जिन्दा है बल्कि वह हाल ही में पांच आदमियों की हत्या भी कर चुका है। और मेरा खुद उससे सामना हो चुका है । उसने मेरी भी हत्या करने की कोशिश की थी।"

"लेकिन तुमने उसकी सूरत नहीं देखी थी । केवल आवाज सुनी थी।"

"वह नि:संदेह जार्ज टेलर था । वह जार्ज टेलर की ही आवाज थी । वह आवाज उसके सिवाय किसी और की हो ही नहीं सकती थी।"

"देखो मिस्टर" - एकाएक मारिट तनिक उच्च स्वर से बोली- "मेरा भाई जिन्दा है या नहीं, इस बारे में मुझे कोई संदेह नहीं है कि मेरा भाई दगाबाज नहीं है, नहीं था । वह अपने साथियों

को धोखा नहीं दे सकता ।"

राज ने जान-बूझकर उस बात का विरोध नहीं किया ।

***

 
उनकी तकदीर अच्छी थी । रास्ते में एक किसान के घर में उन्हें शरण मिल गई जहां उन्हें कपड़े सुखाने की सुविधा तो प्राप्त हुई ही, साथ ही वहां उनके भोजन का भी प्रबन्ध हो गया । फिर उसी किसान के सब्जी के ट्रक पर बैठकर वे डेनवर

पहुंच गये । जब तक वे समुद्र के किनारे पहुंचे तब तक अंधेरा हो चुका था |

मार्गरेट उसे समुद्र के पानी में बने एक स्टील और लकड़ी के शैड में ले आई।

शैड में एक लगभग बीस फुट लम्बी मोटरबोट खड़ी थी। '

मार्गरेट मोटरबोट के केबिन में प्रविष्ट हो गयी। उसने अपना बैग खोला और उसमें से एक चाबी छांट कर इग्नीशन में लगाई । मोटरबोट के शक्तिशाली इंजन की घरघराहट से वातावरण गूंज उठा।

"आओ।" - मार्गरेट ने राज को आवाज दी ।

राज ने पैर आगे बढाया ही था कि उसे अपने पीछे हल्की-सी आहट की आवाज सुनाई दी ।

उसने घूमकर पीछे देखा ।

अन्धकार में उसे कुछ दिखाई नहीं दिया ।

"कौन है?" - वह जोर से बोला ।

भूत की तरह रोशनी उसके सामने आ खड़ी हुई ।

राज ने देखा उसके होंठ भिंचे हुये थे और चेहरा राख की तरह सफेद था ।

"हल्लो !" - राज बोला ।

"जार्ज टेलर के टापू पर जा रहे हो?" - रोशनी का स्वर ऐसा था जैसे किसी कुयें में से निकल रहा हो।

"हां । यह मोटरबोट जार्ज टेलर की है । मारिट हमें टापू तक ले जायेगी।"

"अन्धकार में वह हमें भटका तो नहीं देगी ?"

"अगर वह खुद भटक जाये तो दूसरी बात है वर्ना वह जानबूझ कर ऐसा करे, इसकी मुझे संभावना नहीं दिखाई देती ।"

"चलो।" - रोशनी बोली और मोटरबोट की ओर बढी।

“अनिल साहनी कहां है ?" - राज ने पूछा ।

"मोटरबोट में चलो । मैं सब बताती हूं।" दोनों मोटरबोट में सवार हो गये और केबिन में

आ गये।

मार्गरेट ने मोटरबोट की हैड लाइट ऑन कर दी

और इन्जन स्टार्ट कर दिया । मोटरबोट समुद्र की छाती को चीरती हुई आगे बढी ।

राज कुछ क्षण केबिन के प्रकाश में रोशनी के वीरान चेहरे को देखता रहा और फिर बोला "अनिल साहनी..."

"मर चुका है ।" - रोशनी धीरे से बोली ।

"कैसे?" - राज हैरानी से बोला - "क्या हुआ था ? क्या पुलिस..."

"वह भी जार्ज टेलर का शिकार बन गया ।"

मार्गरेट के होंठों से सिसकारी निकल गई ।

"कैसे ?" - राज ने पूछा।

"बताती हूं।" - रोशनी यूं बोली जैसे नींद में बोल रही हो - "मैं और अनिल साहनी लन्दन से चुपचाप एक मालगाड़ी में सवार होने में सफल हो गये थे । अनिल बुरी तरह घायल था । पुलिस की एक गोली उसके कन्धे को फाड़ती हुई। निकल गयी थी । जख्म की मुनासिब ड्रेसिंग करवाने का कोई साधन नहीं था । मैंने किसी प्रकार बांधकर खून रोक दिया था लेकिन अनिल की हालत खराब होती जा रही थी । रात में उसको बुखार भी हो गया । सारी रात वह भयंकर तकलीफ में तडपता रहा । प्यास से उसका बरा हाल था लेकिन कहीं पानी नहीं था । सवेरा होने पर गाड़ी एक स्थान पर खेतों के बीच में रुकी। मुझे दूर खेतों में एक ट्यूबवैल दिखाई दिया । मैं मालगाड़ी से उतर कर अनिल के लिये पानी लेने चली गयी । अभी मैं थोड़ी ही दूर गयी थी कि अनिल की चीख सुनायी दी । मैंने घूमकर देखा और..."

एकाएक रोशनी चुप हो गई । उसकी मुट्ठियां भिंच गई । उसके होंठ एक-दूसरे के साथ कस गये । उसकी आंखें सिकुड़ गयी ।

"फिर क्या हुआ ?" - राज ने व्यग्र स्वर से पूछा।

 
"फिर क्या हुआ ?" - राज ने व्यग्र स्वर से पूछा।

"मैंने देखा, अनिल मालगाड़ी के डिब्बे से आधा बाहर लटक रहा था । जार्ज टेलर ने उसकी गरदन दबोची हुई थी। अनिल बुरी तरह उसकी पकड़ में छटपटा रहा था । फिर मेरे देखते-ही देखते जार्ज टेलर ने अनिल को डिब्बे से बाहर धकेल दिया । अनिल बगल की रेल की पटरी पर जाकर गिरा । उसी समय उस पटरी पर विपरीत दिशा से एक ट्रेन आ रही थी । मैं बहुत दूर थी। मैं कुछ कर नहीं सकती थी । अनिल में पटरी से उठ पाने की हिम्मत नहीं थी । नतीजा यह हुआ कि वह विपरीत दिशा से आती ट्रेन के नीचे आ गया और कट कर मर गया । जैसे जार्ज टेलर ने जे सिहांकुल को चलती गाड़ी के आगे धक्का देकर मार डाला था वैसे ही उसने अनिल साहनी की भी जान ले ली।"

"यानी कि तुमने अपनी आंखों से मेरे भाई को देखा था ?" - मार्गरेट तीव्र स्वर से बोली।

"हां!"

मार्गरेट ने विचित्र नेत्रों से राज की ओर देखा ।

"तुमसे जार्ज टेलर को पहचानने में गलती तो नहीं हुई ?" - राज बोला।

"डोंट टाक नानसैंस ।" - रोशनी बोली- "मेरा और जार्ज टेलर का बरसों का साथ था । मुझसे उसे पहचानने में गलती नहीं हो सकती ।"

"अनिल साहनी के मरने के बाद क्या हुआ ?"

"मैं मालगाड़ी की ओर भाग रही थी । जब तक मैं पटरियों के समीप पहुंची, विपरीत दिशा से आती हुई रेलगाड़ी वहां से गुजर चुकी थी। अनिल साहनी की कटी हुई लाश पटरियों पर पड़ी थी और मालगाड़ी भी अपने स्थान पर रेंगने लगी थी । मैं जल्दी से मालगाड़ी में सवार हो गई । मैंने गाड़ी से बाहर दोनों ओर दूर तक देखा। जार्ज टेलर मुझे कहीं दिखाई नहीं दिया । मुझे विश्वास था कि वह

मालगाड़ी के ही डिब्बे में छुपा हुआ था । मालगाड़ी डेनवर पहुंच गई, गाड़ी स्टेशन के आउटर सिग्नल पर रुकी और फिर एकाएक मेरी निगाह एक डिब्बे से निकल कर भागते हुये जार्ज टेलर पर पड़ी । मैं भी गाड़ी से उतर कर उसके पीछे भागी । समुद्र तट तक मैंने उसका पीछा किया । वहां से वह एक मोटरबोट पर सवार होकर भाग निकला । मुझे विश्वास है कि वह जरूर अपने टापू की ओर गया था ।"

"लेकिन मेरे भाई की मोटरबोट तो यह है ।" - मार्गरेट तीव्र विरोधपर्ण स्वर से बोली- "अपनी मोटरबोट छोड़कर वह किसी दूसरी मोटरबोट पर सवार होकर टापू की ओर क्यों गया ?"

"यह सब मुझे नहीं मालूम ।" - रोशनी बोली "लेकिन मैंने उसे मोटरबोट पर सवार होकर टापू की ओर जाते देखा है।"

"और तुमसे जार्ज टेलर को पहचानने में कोई गलती नहीं हुई है ?" - राज ने पूछा । "सवाल ही नहीं पैदा होता ।" - रोशनी दृढ स्वर से बोली।

"आल राइट ।" - राज पटाक्षेप करता हुआ बोला - "हम जार्ज टेलर के टापू की ओर जा ही रहे हैं । अगर वह टापू पर है तो हम उसे जरूर

खोज निकालेंगे।" '

फिर कोई कुछ नहीं बोला ।

***

टापू राज की कल्पना से ज्यादा बड़ा निकला । वहां तेज हवायें चल रही थीं और वह गहरी धुंध की चादर से ढक हुआ था । डेनवर के समुद्र तट पर स्थिति शैड जैसा ही एक शैड वहां भी बना हुआ था, जिसमें मार्गरेट ने बड़ी सावधानी से लाकर मोटरबोट खड़ी कर दी। “कोई और मोटरबोट यहां नहीं है ।" - राज बोला।

"शायद जार्ज टेलर ने मोटरबोट कहीं और खड़ी की हो !" - रोशनी बोली।

"तुमने उसे समुद्र तट से मोटरबोट पर रवाना होते देखा था । सम्भव है वह यहां आया ही न हो ।"

"वह जरूर यहीं आया होगा ।" - रोशनी दृढ स्वर में बोली। '

"तुम ऐसा दावा कैसे कर सकती हो?"

"मेरा दिल कहता है ।"

"लेकिन..."

"अगर मेरा भाई टापू पर मौजूद है" - एकाएक मार्गरेट बीच में बोल पड़ी - "तो वह टापू पर मौजूद मकान के अतिरिक्त और कहीं नहीं हो सकता।"

"तुम हमें वहां का रास्ता दिखाओ।" - रोशनी अधिकारपूर्ण स्वर से बोली ।

मार्गरेट ने एक उपेक्षापूर्ण निगाह रोशनी पर डाली और फिर उसने राज को मोटरबोट से उतरने का संकेत किया।

राज और रोशनी मोटरबोट से नीचे उतर आये

राज ने मारिट की मोटरबोट को किनारे से बांधने में सहायता की । फिर मार्गरेट भी मोटरबोट से उतर आई।

मार्गरेट एक अंधेरी पगडण्डी पर चलने लगी। उसके पीछे रोशनी और सबसे पीछे राज चलने लगा।

"आप लोग मेरे एकदम पीछे चलिये ।" - मारिट चेतावनी भरे स्वर से बोली - "वर्ना कहीं दलदल में पांव पड़ जायेगा ।"

कोई कुछ नहीं बोला।

अन्धकार में वे थोड़ी दूर आगे बढे । फिर सामने चट्टानों में से काटकर बनाई गई सीढियां दिखाई देने लगीं । वे सीढिया चढने लगे।

लगभग दो सौ सीढियां तय करने के बाद एकाएक एक विशाल इमारत उनके सामने आ गई । इमारत दोमंजिली थी और चट्टानों में ही काटे हुए लम्बे-चौड़े प्लेटफार्म पर बनी हुई थी। उसकी दीवारें भारी पत्थरों की बनी हुई थीं।

इमारत के पिछवाड़े से और ऊंचाई की ओर सीढियां जा रही थीं।

मार्गरेट मुख्यद्वार की ओर बढी ।

"ठहरो।" - राज ने उसकी बांह थाम ली "शायद भीतर कोई हो !"

"भीतर कोई नहीं है ।" - मार्गरेट बोली - "यह औरत खामखाह अनाप-शनाप बक रही है ।"

"फिर भी रिस्क लेने की जरूरत नहीं ।"

"मुझे दरवाजे के पास तक जाने दो । मैं दरवाजा देखकर ही बात दूंगी कि भीतर कोई है या नहीं

"कैसे?"

"हम टापू छोड़ने से पहले दरवाजे को हमेशा सील कर जाते हैं । अगर सील ठीक हुई तो इसका मतलब है कि भीतर कोई नहीं गया ।"

"आई सी ।"

"तुम्हारे पास माचिस है ?"

राज ने सिगरेट लाइटर निकालकर जलाया । लाइटर का प्रकाश द्वार पर पड़ा । जहां द्वार के दोनों पल्ले मिलते थे वहां लाख की सील लगी हुयी थी जो एकदम सही सलामत मौजूद थी। साफ जाहिर था कि हाल ही मैं दरवाजे को खोला नहीं गया था ।

"क्या भीतर घुसने का कोई और भी रास्ता है ?" - राज ने पूछा।

"कोई नहीं ।" - मार्गरेट बोली - "भीतर घुसने का यही एक रास्ता है ।"

"शायद कोई खिड़की खुली हो!" - रोशनी बोली

"खिड़की के रास्ते कोई भीतर नहीं घुस सकता। हर खिड़की में मोटी-मोटी सलाखें लगी हुई हैं

और अगर खिड़की के रास्ते भीतर घुसा जा भी सकता हो तो भी मेरे भाई को अपने ही मकान में खिड़की के रास्ते घुसने की क्या जरूरत है ?" रोशनी कुछ नहीं बोली।

मार्गरेट ने अपने पर्स में से एक चाबी निकाली और उसकी सहायता से मुख्य द्वार का ताला खोला । उसने द्वार को धक्का देकर खोल दिया ।

तीनों भीतर प्रविष्ट हो गये।

 
मार्गरेट ने बिजली का स्विच ऑन कर दिया ।

राज ने लाइटर बुझाकर जेब में रख लिया । उसने देखा वे एक विशाल हॉल में खड़े थे।

उसी क्षण बगल के कमरे के द्वार से उसकी सी धम्म की आवाज आई।

बिजली की फुर्ती से रोशनी ने अपने कोट की जेब से मोजर रिवाल्वर निकाल ली।

"कौन है ?" - वह आतंकित स्वर से बोली ।

"कोई नहीं है, रोशनी ।" - राज तनिक उपहासपूर्ण स्वर से बोला - "केवल एक चूहा है

बगल के द्वार के समीप एक चूहा बैठा था और गोल-गोल आंखों से उनकी ओर देख रहा था । राज ने अपना एक पांव जोर से फर्श पर मारा | चूहा पलक झपकते ही दृष्टि से ओझल हो गया

रोशनी ने रिवाल्वर वापिस जेब में रख ली । "तुम दोनों यहीं ठहरो ।" - राज बोला - "मैं इमारत में देखकर आता हूं।"

"कोई फायदा नहीं ।" - मार्गरेट बोली- "इमारत में कोई नहीं है । इमारत में कोई नहीं हो सकता

"फिर भी देखने में क्या हर्ज है ?" अगले दस मिनटों में राज ने इमारत का चप्पा चप्पा छान मारा।

कहीं कोई नहीं था।

"वह कहीं टापू पर छुपा हो सकता है ।" - रोशनी बोली। "नानसैंस ।" - मार्गरेट मुंह बिचकाकर बोली ।

"तुम अपना थोबड़ा बंद रखो ।" - रोशनी गर्ज कर बोली। मार्गरेट दूसरी ओर देखने लगी।

"लेकिन इतनी रात गये हम टापू पर उसे तलाश नहीं कर सकते ।" - राज अपनी कलाई पर बन्धी घड़ी पर दृष्टिपात करता हुआ बोला -

"ग्यारह बजने वाले हैं । टापू बहुत बड़ा है और इस पर जगह-जगह पलक झपकते ही इन्सान को निगल जाने वाली दलदल हैं और धुंध की वजह से अंधेरे में कुछ देख पाना भी संभव नहीं है । ऐसे वातावरण में किसी को तलाश करने के चकर में हमें अपनी जान खो बैठेंगे।" रोशनी चुप रही । उसके चेहरे पर उलझन के भाव थे।

"मेरी राय में रात हम इस इमारत में गुजारते हैं" - राज बोला - "कल सुबह हम टापू पर जार्ज टेलर को तलाश करेंगे।" |

रोशनी ने बड़ी अनिच्छा से सहमतिसूचक ढंग से सिर हिला दिया।

"यहां सोने का क्या इन्तजाम है सकता है ?" - राज ने मार्गरेट से पूछा । "यहां चार बैडरूम हैं ।" - मार्गरेट ने बताया -

आखिरी शिकार

"दो पहली मंजिल पर और दो नीचे ।"

"मुझे नीचे का बैडरूम दिखाओ।" - रोशनी जल्दी से बोली।

मार्गरेट ने राज की ओर देखा । राज ने सहमतिसूचक ढंग से सिर हिला दिया । हाल के सामने एक दरवाजा था जिसके आगे एक लम्बा गलियारा था | मार्गरेट रोशनी का लेकर उस गलियारे में चली गई।

राज मुख्य द्वार के पास पहुंचा । उसने मुख्य द्वार को मजबूती से भीतर से बंद कर लिया और वापिस हाल में आ खड़ा हुआ । उसने एक सिगरेट सुलगा लिया और मार्गरेट के लौटने की प्रतीक्षा करने लगा।

कुछ देर बाद मारिट वापिस लौटी ।

"वह तो जाते ही बिस्तर में घुस गई।" - मारिट बोली - "मैंने उससे भोजन के लिये बहुत आग्रह किया लेकिन उसने साफ मना कर दिया ।"

"तुम्हारा मतलब है यहां भोजन का इंतजाम है ?" - राज बोला। "क्यों नहीं है ? इस इमारत में दस आदमियों के लिये एक महीने के लिये पर्याप्त रसद मौजूद है

"वैरी गुड ! तुम रोशनी को छोड़ो । वह लन्दन से डेनवर तक बहुत यातनापूर्ण सफर तय करके आई है । उसे सोने दो ।"

"ठीक है फिर । तुम ऊपर चले जाओ ऊपर दो बैडरूम हैं । उसमें से एक तुम्हारे लिये है । मैं भोजन का प्रबन्ध करती हूं।" "मैं कोई मदद कर सकता हूं?"

"जरूरत नहीं।"

"ओके देन ।"

राज सीढियां चढकर पहली मंजिल पर पहुंच गया । वहां निचले गलियारे के ऊपर वैसा ही एक गलियारा था । राज ने टटोल कर गलियारे की बत्ती जलाई । उसने दाई ओर का पहला दरवाजा खोला । वह बैडरूम था । उसने उस कमरे की भी बत्ती जला दी । बैडरूम के मध्य में एक विशाल सुसज्जित पलंग था । राज ने जूते उतार दिये और बाकी कपड़ों सहित पलंग पर लेट गया । उसने अपने ऊपर कम्बल खींच लिया

उसने एक नया सिगरेट सुलगा लिया।

बाहर टापू पर सांय-सांय करती हवा चल रही थी और धुंध गहरी होती जा रही थी ।

राज जार्ज टेलर के बारे में सोच रहा था ।

क्या जार्ज टेलर जिन्दा था ? और अगर वह जिन्दा था तो क्या वह टापू पर मौजूद था ?

फिर उसके कोनों में जार्ज टेलर का भर्राया हुआ स्वर गूंजने लगा - वह विशिष्ट स्वर जो उसने मिलर के मकान पर सुना था ।

उसी क्षण कमरे की बत्ती बुझ गई ।

राज तत्काल उठकर बैठ गया ।

कमरे में घुप्प अंधेरा छा गया था ।

 
राज पलंग से उतरा और बिना जूते पहने द्वार की ओर बढा । उसने द्वार खोलकर बाहर झांका गलियारे में भी घुप्प अंधेरा छाया हुआ था । इमारत एकदम अंधकार के गर्त में डूब गयी थी। राज ने अपनी जेब से लाइटर निकाला । अभी

उसने लाइटर जलाने का उपक्रम ही किया था कि...

"रोशनी ! इज दैट यू, रोशनी ?" राज के कानों में भर्राया हुआ, धीमा किन्तु स्पष्ट, विदेशी स्वर पड़ा।

राज के रोंगटे खड़े होने लगे । वह जार्ज टेलर की आवाज थी। आवाज सीढियों की ओर से आ रही थी।

राज ने आगे कदम बढाया ।

उसी क्षण अन्धकार में एक शोला-सा लपका |

किसी अज्ञात भावना से प्रेरित होकर उसी क्षण राज ने स्वयं को फर्श पर गिरा दिया ।

रिवाल्वर की गोली सनसनाती हुई आई और राज के ऊपर से गुजर गई। फिर उसके कानों में रोशनी की चीख की आवाज पड़ी।

साथ ही अन्धकार में भागते कदमों की आवाज सुनाई दी।

फिर एकाएक शान्ति छा गई।

राज सावधानी से अपने स्थान से उठा ।

"रोशनी !" - उसने आवाज दी ।

जवाब नदारद ।

वह टटोलता हुआ आगे बढा । सीढियों के समीप पहुंचकर उसने झिझकते हुये लाइटर जलाया ।

सीढियों के निचले सिरे के समीप भय और आतंक की प्रतिमूर्ति बनी मार्गरेट खड़ी थी।

“मिस्टर राज !" - वह आतंकित स्वर से बोली

“यस !" - राज धीरे से बोला।

"क्या हुआ ?"

"कुछ नहीं । तुम्हें मालूम है मेन स्विच कहां है ?"

"हां । हाल में है।"

"जरा देखो, मेन स्विच ऑफ तो नहीं है ?"

"देखती हूं।"

राज अपने स्थान से नहीं हिला |

लगभग एक मिनट बाद इमारत की सारी बत्तियां जल उठीं।

"मेन स्विच ऑफ था ।" - हॉल की एक दीवार के समीप खडी मार्गरेट बोली ।

"मार्गरेट, ऊपर आओ।" - राज लाइटर बुझाकर जेब में डालता हुआ बोला |

मार्गरेट तेजी से सीढियां तय करके राज के पास पहुंच गई। “मैंने गोली चलने की आवाज और चीख सुनी थी ।" - वह बोली।

"हमने वही गोली तलाश करनी है ।" - राज बोला - "गलियारे की दीवारों को तुम भी देखो, मैं भी देखता हूं।"

दोनों सावधानी से गलियारे की दीवारों का निरीक्षण करने लगे।

गोली पर निगाह मार्गरेट की पड़ी । गोली राज वाले बैडरूम के दरवाजे के चौखट में धंसी हुई थी।

राज के कहने पर मारिट किचन में से एक चाकू ले आई । चाकू की सहायता से राज ने चौखट की लकड़ी गोदकर गोली निकाल ली।

"यह मोजर रिवाल्वर से निकली गोली है ।" - राज गोली को अपनी हथेली पर उलटता पलटता बोला।

"फिर?"

"फिर यह कि अब सारा किस्सा मेरी समझ में आ गया है।"

"कौन-सा किस्सा?"

"नीचे चलो । अभी सब मालूम हुआ जाता है ।"

दोनों नीचे आ गये।

 
राज ने देखा इमारत का मुख्य द्वार खुला था । दोनों रोशनी के बैडरूम में पहुंचे । रोशनी गायब थी।

मार्गरेट के चेहरे पर गहरी उलझन के भाव उभर आये।

राज बेहद शांत था ।

दोनों हाल में वापिस लौट आये ।

"मेरा बैग !" - एकाएक मार्गरेट बोली ।

"क्या हुआ तुम्हारे बैग को ?" - राज ने तीव्र स्वर से पूछा।

"मैंने उस मेज पर" - मारिट हाल में द्वार के समीप रखी एक गोल मेज की ओर संकेत करती हुई बोली - "अपना बैग रखा था । बैग गायब है

"बैग में क्या मोटरबोट के इग्नीशन की चाबी भी थी?"

"नहीं । बैग में बाकी चाबियां थी लेकिन मोटरबोट की चाबी नहीं थी । वह चाबी मैं बैग में

डालना भूल गयी थी । वह चाबी मैंने अनजाने में अपनी पतलून की जेब में डाल ली थी।"

“वैरी गुड ।" - राज सन्तुष्ट स्वर में बोला । राज मुख्य द्वार की ओर बढा ।

अभी उसने दरवाजा बन्द करने के लिये हाथ बढाया ही था कि उसे बाहर अंधकार में एक साया दिखाई दिया । राज ने जल्दी से द्वार बन्द करने की कोशिश की लेकिन साया उससे ज्यादा फुर्तीला था । साया एक छलांग मारकर दरवाजे

के दोनों पल्लों के बीच पहुंच गया ।

राज दो कदम पीछे हट गया ।

वह साया इन्स्पेक्टर मार्श का था । उसके पीछे दो ब्रेनगनों से लैस पुलिसमैन थे । इन्स्पेक्टर के अपने हाथ में रिवाल्वर थी।

"सो वी मीट अगेन ।" - इन्स्पेक्टर मार्श अन्दर हाल में कदम रखता हुआ बोला ।

"आप यहां कैसे टपक पड़े, इन्स्पेक्टर साहब ?" - राज निराशापूर्ण स्वर से बोला ।

इन्स्पेक्टर ने उसके प्रश्न का उत्तर नहीं दिया ।

"एण्ड हाउ आर यू, मैडम ?" - इन्स्पेक्टर मार्गरेट को सम्बोधित करता हुआ बोला "आपने ट्रेन रोक कर एक अपराधी को भगाने में मदद की थी लेकिन फिर भी मैं आपकी हिम्मत की दाद देता हूं।"

मार्गरेट चुप रही।

"इन्स्पेक्टर साहब" - राज फिर बोला - "लेकिन आप यहां पहुंचे कैसे? बाई गॉड, मैं हैरानी से मरा जा रहा हूं | मेरी निगाह में तो आपके पास यह जानने का कोई साधन ही नहीं था कि हम यहां आये हैं ?"

"लेकिन तुम्हारे अनिल साहनी नाम के लम्बे-चौड़े साथी को मालूम था कि तुम लोग यहां आने वाले थे।"

“अनिल साहनी ! लेकिन वो तो मर चुका है ।" “कब मर चुका है ।" - इन्स्पेक्टर कब शब्द पर विशेष जोर देता हुआ बोला ।

"क्या मतलब ?" - राज ने पूछा |

"तुम्हें कैसे मालूम कि वह मर चुका है?"

"है मालूम मुझे । वह ट्रेन के नीचे आकर मरा है

"तुम्हें यह बात जरूर रोशनी नाम की लड़की ने बताई है।"

राज ने तनिक हिचकिचाते हुये सहमतिसूचक ढंग से हिला दिया ।

"रोशनी कहां है?"

"पहले आप मेरी बात का तो जवाब दीजिये ?"

इन्स्पेक्टर कुछ क्षण चुप रहा और फिर बोला "अनिल साहनी चलती ट्रेन की चपेट में जरूर आ गया था लेकिन फौरन मरा नहीं था । मरने से पहले उसने हमे बताया था कि उसे उसकी सहयोगिनी रोशनी ने मालगाड़ी के डिब्बे में से दूसरी पटरी पर विपरीत दिशा से आती चलती गाड़ी के सामने धक्का दे दिया था ।"

मार्गरेट बुरी तरह चौंकी लेकिन राज के चेहरे पर हल्के से आश्चर्य के भाव भी नहीं उभरे ।

"अनिल साहनी ने ही मरने से पहले हमें यह बताया था कि रोशनी और तुम लोग इस टापू पर जरूर जाओगे ।" - इन्स्पेक्टर फिर बोला ।

"अनिल साहनी ने यह नहीं बताया कि रोशनी ने उसे धक्का क्यों दिया ?" - राज ने पूछा ।

"नहीं ।"

"और क्या कहा था उसने ?"

"कुछ नहीं । और कुछ कह पाने से पहले ही उसके प्राण निकल गये थे । ...

वह लड़की कहां आखिरी शिकार है?"

"कौन-सी लड़की ?"

"रोशनी । मैं उसे अनिल साहनी की हत्या के इल्जाम में गिरफ्तार करना चाहता हूं।"

 
"आप उसे केवल अनिल साहनी की ही नहीं बल्कि तौफीक इस्माइल, जे सिंहाकुल, तांग पेई और मेरी शरमन नाम के चार अन्य प्राणियों की हत्या के इल्जाम में और मेरी दो बार हत्या करने के प्रयत्न के इल्जाम में भी गिरफ्तार कर सकते हैं, बशर्ते कि आपने खुद ही उसके यहां से भाग निकलने का कोई सामान न कर दिया हो ।"

"क्या मतलब?"

"रोशनी यहां नहीं है । वह थोड़ी देर पहले इस इमारत में से निकल भागी है । वह आप की मोटरबोट में टापू से भाग सकता है।"

"नहीं भाग सकती ।" - इन्स्पेक्टर निश्चयात्मक स्वर से बोला - "मेरी मोटरबोट की इग्नीशन की चाबी मेरी जेब में है और मोटरबोट पर एक सशस्त्र सिपाही पहरा दे रहा है।"

"वैरी गुड ।" - राज सन्तुष्ट स्वर से बोला - "फिर आप टापू पर रोशनी को बड़ी आसानी से गिरफ्तार कर सकते हैं क्योंकि मोटरबोट के बिना

वह यहां से भाग नहीं सकती । और जितने ज्यादा आपके पास आदमी होंगे, टापू पर उसको तलाश करना उतना ही आसान होगा।"

"मेरे पास दस सशस्त्र आदमी हैं और सबके पास बड़ी शक्तिशाली टार्च हैं । मेरे आदमी अधिक से अधिक दो घन्टे में उसे तलाश कर लेंगे।"

"रोशनी सशस्त्र है।"

"मेरे आदमी भी सशस्त्र हैं और उस लड़की से ज्यादा होशियार हैं।"

राज चुप रहा।

"पहले इमारत की तलाशी लो ।" - इन्स्पेक्टर पुलिसमैनों से बोला। ब्रेनगनधारी पुलिसमैन आगे बढे ।

दस मिनट बाद इन्स्पेक्टर के पास वापिस आकर उन्होंने सूचना दी कि इमारत में और कोई नहीं है

"अब तुम लोग सारा टापू छान मारो ।" - इन्स्पेक्टर ने आदेश दिया - "दो घण्टे के भीतर रोशनी मेरे हवाले होनी चाहिये।"

पुलिसमैन सैल्यूट मार कर वहां से विदा हो गये ।

“आप दोनों तशरीफ रखिये ।" - इन्स्पेक्टर अपने रिवाल्वर वाले हाथ से कुर्सियों की ओर संकेत करता हुआ बोला - "और मैं आप दोनों को चेतावनी देता हूं कि अगर इस बार आपने कोई होशियारी दिखाने की कोशिश की तो आप अपनी जान से हाथ धो बैठेंगे ।"

राज और मारिट बैठ गये।

इन्स्पेक्टर उनके सामने एक कुर्सी घसीट पर बैठ गया।

रिवाल्चर उसके हाथ में था और वह तत्परता और सावधानी की प्रतिमूर्ति बना बैठा था ।

उसी क्षण भूत की तरह इमारत के मुख्य द्वार पर रोशनी आ खड़ी हुई।

"इन्स्पेक्टर !" - वह धीमे स्वर से बोली । '

इन्स्पेक्टर चिहुंक कर द्वार की ओर घूमा । साथ ही मशीन की तरह उसका रिवाल्वर वाला हाथ ऊपर उठा।

रोशनी के हाथ में थमी रिवाल्वर ने दो बार आग उगली।

एक गोली इन्स्पेक्टर के कन्धे में घुस गई । उस गोली ने इन्स्पेक्टर को फिरकनी की तरह घुमा दिया । इन्स्पेक्टर कुर्सी को लिये-दिये फर्श पर

लोट गया।

"इतना कत्लेआम तुम्हें इसलिये करना पड़ रहा है" - राज शान्ति से बोला - "क्योंकि तुम्हें यह मालूम नहीं है कि जार्ज टेलर मर चुका है।"

"क्या बक रहे हो ?" - रोशनी बोली - "तुम्हें अभी भी इस लड़की की बकवास पर विश्वास है ?"

"जार्ज टेलर वाकई मर चुका है । मुझे इस लड़की की बात पर विश्वास है । जार्ज टेलर आज से छ: महीने पहले हांगकांग में एक मोटर दुर्घटना का शिकार होकर मर चुका है । अगर तुम्हें मालूम होता कि जार्ज टेलर मर चुका है तो

शायद तुम अपने चार साथियों की हत्या उसके सिर पर थोपने की कोशिश नहीं करती ।"

रोशनी चुप रही। "और तुम्हारी जानकारी के लिये अनिल साहनी ट्रेन की चपेट में आ जाने के बाद फौरन नहीं मर गया था । वह इन्स्पेक्टर मार्श को यह बयान देकर मरा था कि उसे मालगाड़ी में से तुमने धक्का दिया था । तुमने खुद अनिल साहनी की हत्या की थी लेकिन मुझे यह विश्वास दिलाने की कोशिश की थी कि जार्ज टेलर ने अनिल साहनी

को मारा था । लेकिन मैडम अनिल साहनी के बयान के बारे में सुनने से पहले ही मुझे मालूम हो चुका था कि मार्गरेट ठीक कहती थी, उसका भाई जार्ज टेलर वाकई मर चुका था और यह कि तुम उसकी भर्राहटभरी विशिष्ट आवाज की नकल करके मुझे मूर्ख बना रही थीं । पहली बार मिलर के फ्लैट में जब मैंने तुम्हारी आवाज सुनी थी तो मैं पूर्णतया धोखा खा गया था लेकिन जार्ज टेलर

की आवाज की नकल करने की ट्रिक तुम्हें मुझ पर दसरी बार नहीं आजमानी चाहिये थी। थोडी देर पहले मुझ पर गोली चलाने से पहले जब तुमने जार्ज टेलर की आवाज की नकल की तो मुझे संदेह हो गया था । और रहा सहा संदेह तब दूर हो गया था जब मैंने दरवाजे के पैनल में से वह गोली गोदकर निकाली थी जो तुमने मुझ पर चलाई थी। वह मोजर रिवाल्वर की गोली थी

और मोजर रिवाल्वर मैंने शुरू से ही तुम्हारे पास देखी थी और वह अभी भी तुम्हारे हाथ में है । और फिर इस इमारत में मेरे, मागररेट के और तुम्हारे सिवाय कोई चौथा आदमी नहीं था। इमारत के तमाम खिड़कियां दरवाजे भीतर से बंद थे और रिवाल्वर केवल तुम्हारे पास थी। इमारत में तुम्हारा नाम लेकर पुकारने वाला और मुझ पर गोली चलाने वाला केवल एक ही आदमी हो सकता था और वह तुम थी।"

रोशनी के होंठों पर एक विषैली मुस्कराहट आई

"बहुत समझदार आदमी हो ।" - वह बोली - "लेकिन मैंने यह सब कुछ क्यों किया?"

 
"क्योंकि तुम्हारे साथी जार्ज टेलर की तलाश में थे ताकि वे उसे तलाश करके उसे मौत की सजा दे सकते जबकि जार्ज टेलर पहले ही मर चुका था । और तुम्हारे सहित यह बात किसी को मालूम नहीं थी । तुम नहीं चाहती थीं कि जान फ्रेडरिक वगैरह जार्ज टेलर को तलाश कर पाते इसलिये तुमने उसकी आवाज नकल की और उसकी ओर संकेत करने वाली अधिक से अधिक हरकतें की ताकि सारे सिलसिले को ज्यदा से ज्यादा उलझा सको।"

"और मैं यह क्यों नहीं चाहती थी कि जान फ्रेडरिक वगैरह जार्ज टेलर को तलाश कर पाते -

"मैं हकीकत का अच्छा खासा अनुमान लगा सकता हूं। मैं जानता हूं कि अपनी पोल खुल जाने के बाद तुम मुझे जीवित नहीं छोड़ोगी लेकिन अगर मेरा अनुमान ठीक हो तो कम-से कम यह बात स्वीकार जरूर लेना ।"

"आल राइट | बोलो।"

"जान फ्रेडरिक की यह धारणा थी कि चीनी सीक्रेट सर्विस को ज्योति विश्वास का पता जार्ज टेलर ने बताया था क्योंकि वह टार्चर से डर गया

था । जान फ्रेडरिक की यह धारणा तुम्हारी वजह से बनी थी । चीनियों ने सबसे पहले उसे टार्चर किया था । बाद में वह बेहोश हो गया था । बाद में क्या हुआ, इसकी खबर उसे तुम्हीं से लगी थी । तुमने उसे बताया था कि पहले चीनियों ने तुम्हें टार्चर किया था और तुम्हारी जुबान खुलवाने में असफल रहने के बाद वे जार्ज टेलर की ओर आकर्षित हुये थे लेकिन जार्ज टेलर ने यातना से बचने के लिये अपनी जुबान खोल दी थी। जबकि मेरे ख्याल से हुआ यह था कि जार्ज टेलर की बारी ही नहीं आई थी । चीनी तुम्हारी ही

जुबान खुलवाने में सफल हो गये थे । चीनियों के टार्चर का मुकाबला न कर पाने की वजह से तुमने अपनी जुबान खोल दी थी । मैडम, चीनियों को ज्योति विश्वास का पता जार्ज टेलर ने नहीं, तुमने बताया था ।"

रोशनी के होंठ भिंच गये । उसके नेत्र राज के चेहरे पर स्थिर हो गये।

"बाद में" - राज बोलता रहा - "जब जान फ्रेडरिक ने पूछा तो अपनी कायरता का इल्जाम तुमने जार्ज टेलर पर थोप दिया । तुमने कह दिया कि जार्ज टेलर ने टार्चर से बचने के लिये चीनियों को ज्योति विश्वास का पता बता दिया था । जान फ्रेडरिक ने फौरन तुम्हारी बात पर विश्वास कर लिया । उस स्थिति में उसका तुम्हारी बात पर विश्वास कर लेना स्वाभाविक भी था । वह खुद चीनियों के टार्चर से अधमरा हुआ पड़ा था । तुम घायल थीं लेकिन जार्ज टेलर के जिस्म पर एक

खरोंच भी नहीं थी । इस घटना के और तुम लोगों के वहां से भाग निकलने के बीच के समय में जान फ्रेडरिक हर क्षण बेहोश रहा इसलिये कोई ऐसी नौबत भी नहीं आई कि जार्ज टेलर उस इल्जाम को नकार सकता जो कि तुमने उसकी जानकारी के बिना उस पर लगा दिया था । बाद में तुम्हारे बचे हुये साथियों को भी मालूम हुआ कि ज्योति विश्वास, लैला और ली ता नान की मौत का इकलौता जिम्मेदार जार्ज टेलर था । फिर तौफीक इस्माइल ने कसम खाई कि जब तक वह जार्ज टेलर को तलाश करके उसकी हत्या नहीं कर देगा, चैन से नहीं बैठेगा | बाकी लोगों ने भी तौकीफ इस्माइल की बात का समर्थन किया । तुम अपने साथियों के इस फैसले से भयभीत हो गई । तुम जानती थीं कि अगर तुम्हारे साथी जार्ज टेलर की तलाश करने में सफल हो गये तो तुम्हारी हकीकत खुल जायेगी । सबको मालूम हो जायेगा कि गद्दार जार्ज टेलर नहीं, तुम थीं । इसीलिये जब तुम्हें लगा कि तांग पेई जार्ज टेलर की तलाश करने में सफल होने

वाला है तो तुमने टेम्स नदी में धक्का देकर उसकी हत्या कर दी । फिर जब जे सिंहाकुल को जार्ज टेलर का सुराग मिल गया तो तुमने उसे अनिल साहनी की तरह चलती ट्रेन के सामने धक्का दे दिया और उसके टुकड़े-टुकड़े हो गये । तौफीक इस्माइल से तुम सबसे ज्यादा भयभीत थी । वह जार्ज टेलर को पाताल से भी खोद निकालने में दृढ प्रतिज्ञ था इसलिये तुमने उसका पहले ही काम तमाम कर दिया । जान फ्रेडरिक वगैरह समझते थे कि ज्योति विश्वास के हैण्ड

राइटिंग की नकल केवल जार्ज टेलर कर सकता था लेकिन वास्तव में ज्योति विश्वास के हैंड राइटिंग की हूबहू नकल तुम भी कर लेती थीं ।"

"मैं ज्योति विश्वास के हैंडराइटिंग की नकल नहीं कर सकती थी ।" - रोशनी बोली ।

"तो फिर तौफीक इस्माइल के नाम वह चिट्ठी किसने लिखी थी जो वह चेचक के दागों भरे चेहरे वाला लम्बा-तडंगा अंग्रेज तौफीक इस्माइल के पास लाया था?"

"वह चिट्ठी उसी ने लिखी थी । वह आदमी किसी भी प्रकार के हैण्ड-राइटिंग की नकल में दक्ष है। मेरे पास ज्योति विश्वास की कुछ पुरानी चिट्ठियां थीं । उन्हीं की सहायता से उसने ज्योति विश्वास के हैण्ड-राइटिंग में तौफीक इस्माइल के नाम चिट्ठी तैयार कर ली थी और तौफीक इस्माइल धोखा खा गया था ।"

"वह आदमी है कौन ?"

"मेरा एक पुराना साथी है।" - रोशनी लापरवाही से बोली - "उसका वास्तविक नाम पीटर ब्रैडमैन है

"और तौफीक इस्माइल की गरदन में छुरा किसने घोंपा था ? तुमने या पीटर ने?" "मैंने । पीटर ने उसकी अपनी गिरफ्त में दबोच लिया था और मैंने उसकी गरदन में छुरा घोंप दिया था । बाद में पीटर उसकी लाश को सड़क

पर फेंक आया था ।"

राज एक क्षण को चुप हो गया ।

मार्गरेट विस्फारित नेत्रों से कभी राज की ओर तो कभी रोशनी की ओर देख रही थी।

 
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