[color=rgb(41,]मैं बेड पर मरियम की बगल में लेट गया और उसको अपनी बाहों में भर लिया. उसकी चूचियाँ मेरी छाती में गढ़ने लगीं. वो अभी तक रह रह कर कांप उठती थी. पीछे से तनवी भी उसके साथ चिपक गयी और उसस्क्कॉ तसल्ली देते हुए बोली के क्यों मरियम पूरा मज़ा आया ना. मरियम एक अद्भुत मुस्कान के साथ बोली के हां दी जो मैने कभी ख्वाब में भी नही सोचा था वो मज़ा मुझे आया पर लंड जब पहली बार अंदर गया था तो बहुत दर्द हुआ था. तनवी बोली के होता है जब कुमारी झिल्ली को लंड फाड़ता है तो दर्द होता है मुझे भी हुआ था पर उसके बाद तो मज़ा ही मज़ा है. अब अगली बार जब तुम अपनी चूत में लंड घुस्वावगी तो कोई दर्द नही होगा. दी अगली बार कब आएगी, मरियम ने पूछा? एक महीने से पहले नही, तनवी ने जवाब दिया. मैने भी मरियम को कहा के देखो अगर तुम ज़्याद चुदवाऑगी तो तुम्हारी चूत ढीली पड़ जाएगी और फिर जब शादी के बाद तुम्हारा खाविंद तुम्हारी चूत मारेगा तो उसे पता लग जाएगा के तुम पहले ही बहुत चुद चुकी हो तो तुम्हारे लिए मुश्किल होगी. और अगर चूत टाइट हो तो खाविंद को पता नही चलता. क्योंकि झिल्ली का ना होना चुदे होने का सबूत नही है. झिल्ली तो ज़्यादा खेल कूद और ज़्यादा साइकल चलाने से भी कट फॅट जाती है.

फिर अब तुमने चुदाई का मज़ा ले लिया है तो अब तुमको इसकी तरफ से अपना ध्यान हटाकर अपनी पढ़ाई में लगना होगा ताकि तुम अच्छे नम्बरो से पास होकर अपना और स्कूल का नाम करो. तुम्हारे घर के लोग भी तुमसे खुश होंगे और तुम्हे अच्छे कॉलेज में दाखिला भी मिलेगा आगे पढ़ाई के लिए और इसके लिए तुम्हारे अब्बू और अम्मी भी तुम्हें नही रोकेंगे. वो बोली के यह बात तो बिल्कुल ठीक है. मैं ऐसा ही करूँगी. फिर मैने तनवी से कहा के मरियम को हॉट वॉटर ट्रीटमेंट देने का इंतेज़ां करे. तनवी बाथरूम में चली गयी और मैने मरियम को पेन किल्लर टॅबलेट खिला दी. फिर उसको प्यार से अपनी गोडे में उठाकर बाथरूम में ले आया और तनवी द्वारा तैयार टब में मरियम को बिठा दिया और उसको कहा के पानी में बैठी रहना और अपनी चूत की सिकाई करना जब तक पानी ठंडा ना हो जाए.

फिर मैं तनवी को लेकर बाहर आ गया और उसको अपनी बाहों में लेकर कहा के तनवी डियर अगर तुम्हारी भड़की हुई भावनाओं को रात को शांत किया जाए तो कैसा रहेगा? वो तुनक कर बोली कि मेरी याद आ गयी? मैने उसको अपनी बाहों में भींच कर कहा के मैं अपने दोस्तों को कभी नही भूलता और मैने फ़ैसला किया है के तुम पर महीने में एक बार की पाबंदी नही होगी और तुम जब भी चाहोगी मैं तुम्हारी चुदाई कर दूँगा पर फिर भी यही काहूँग कि जितना ज़्यादा संयम से काम लोगि तुम्हारा ही फयडा होगा. उसने कहा के उसे किसी संयम की ज़रूरत नही है उसके पास उसकी दादी का नुस्ख़ा है जिसके 5 दिन के इस्तेमाल से उसकी चूत नयी जैसी हो जाएगी और कोई नही कह सकेगा के पहले चुद चुकी है. मैं बड़ी हैरानी से उसको देखता रहा और पूछा के सच में क्या यह संभव है? वो मुस्कुराते हुए बोली के बिल्कुल संभव है यह ट्राइड आंड टेस्टेड है और कोई भी शक़ नही है इसमे, हर बार यह उम्मीद से बढ़कर साबित हुआ है क्योंकि यह एक बिल्कुल नयी बात है जिसे आम लोग जानते ही नही हैं तो मानेंगे कैसे. फिर वो हंसते हुए बोली के ऐसा करो के तुम मुझे चोद-चोद कर मेरी चूत ढीली कर दो फिर मैं 5 दिन इस नुस्खे को तैयार करके इस्तेमाल करूँगी और फिर खुद ही देख लेना के क्या रिज़ल्ट निकलता है.

मैं मुस्कुराए बिना ना रह सका और कहा के इतना बढ़िया निमंत्रण मैं कैसे अस्वीकार कर सकता हूँ? ठीक है फिर आज से ही शुरू कर देते हैं तुम्हारी चूत ढीली करने का प्रोग्राम. वो भी हंस दी. इतने में मरियम भी बाथरूम से निकल कर आ गयी. उसने एक बड़ा सा टवल लपेट रखा था और उसकी चाल में लड़खड़ाहट बिल्कुल महसूस नही हो रही थी. मैने उसको अपने पास बुलाया और उसका टवल खोल कर उसकी चूत को चेक किया. चूत पर अभी भी थोरी सूजन थी और वो फूली हुई भी थी. फिर मैने एक अस्ट्रिंजेंट क्रीम लेकर थोरी सी उसकी चूत पर लगाई और हल्के हाथ से मालिश कर दी. वो कब मेरी गोद में बैठ गयी मुझे पता ही नही चला. मरियम ने अपनी बाहें मेरे गले में डाल दीं और मुझे चूम कर बोली के आज जो मज़ा आया हा वो सारी उमर उसको नही भूल सकेगी. मैने भी उसको वापिस किस किया और कहा के इसको चाहे ना भूलना पर अपनी पढ़ाई को ही अब याद रखना और कुच्छ दिन के लिए इसको अपने दिमाग़ में सुला देना और इम्तिहान तक जागने मत देना. वो हंस पड़ी और बोली मुश्किल तो होगी पर मैं कर लूँगी. तनवी ने उसको कपड़े निकाल कर दिए और दोनो अपने-अपने कपड़े पहनकर तैयार हो गयीं और तनवी उसको ले कर घर छ्चोड़ने के लिए चल दी.

कोई डेढ़ घंटे के बाद तनवी वापिस आई और बोली के सब ठीक है कोई परेशानी नही हुई बल्कि उसकी बहनें ही घर में थीं और उन्होनें बहुत ज़िद की के मैं वहाँ रुकू और चाय पी कर जाऊं पर मैने ऑटो वेट कर रहा है कहकर मना कर दिया और आ गयी. मैने उसको अपनी बहो में ले लिया और अपने साथ सटा कर कहा के बहुत बढ़िया है फिर आज अपना ईनाम लेने के लिए नीचे आओगी या मैं ऊपेर आकर दूं? वो बोली के मैं ही नीचे आकर ले लूँगी और ऊपेर अपने रूम में चली गयी.

फिर मैने अपने साइन-बोर्ड पेंटर को बुलवाया और जिम क्लब का साइन-बोर्ड बनाने को कहा. उसके आने पर मैने उसको बताया के लॅडीस जिम क्लब (गर्ल्स ओन्ली) का साइन-बोर्ड बना के ले आए और नीचे लिख दे के 'फॉर मेंबरशिप कोंट: मिस तनवी - 98********'. उसको जगह बताई और माप लेकर वो चला गया यह कहकर के अगले दिन सुबह 10 बजे वो बोर्ड लगा देगा. मैं लेटकर सोचने लगा के चलो अबकाम शुरू होने वाला है लेकिन बहुत होशियारी से चलना होगा कहीं किसी को भनक भी लग गयी तो बहुत बड़ी मुसीबत आ जाएगी. मैने एक बार फिर सारे इंतेज़ामों के बारे में सोचा और एक-एक करके मन ही मन उनको चेक किया और सब कुच्छ ठीक पाकर मुझे तसल्ली हुई और मैं थोरी देर सोने की कोशिश करने लगा. रात को पता नही कितनी देर जागना पड़े तनवी की चुदाई करने में.

शाम को मेरी आँख खुली कोई 7-30 बजे और मैं फ्रेश होकर आधे घंटे के बाद ऊपेर तनवी के यहाँ पहुँच गया. मुझे देखकर तनवी बहुत खुश हुई और बोली के राज तुम हो बहुत स्वीट. वादे के पक्के और सब दोस्तों का ख़याल रखने वाले. तुम सही अर्थों में दोस्ती का मतलब ही नही दोस्ती निभाना भी जानते हो. मैने हंसते हुए कहा के बातें बनाना तो कोई तुमसे सीखे और आगे बढ़कर उसको अपनी बाहों में ले लिया. फिर वो हंसते हुए बोली के मैं तो आने वाली थी क्योंकि तुम्हें कहकर आई थी. मैने उसको कहा के मैं भी तो तुमको लेने ही आया हूँ और साथ ही एक गिलास वो शरबत भी पीना चाहता हूँ. वो मुस्कुराई और मुझे हाथ पकड़ कर अंदर ले गयी और एक गिलास शरबत पिलाया. फिर हम नीचे आ गये. नौकर को मैने कह ही रखा था के खाना बना के रख देगा और मैं ले लूँगा. तनवी ने खाना गरम किया और हम जल्दी से खाना खाकर निबट गये. फिर दोनो ने मिल कर बर्तन समेटे और एक सेट बर्तनों का साफ करके रख दिया ताकि नौकरों को पता ना लगे की मेरे साथ किसी और ने भी खाना खाया था.

हम दोनो बेडरूम में आ गये. आते ही मैने सबसे पहले अपने कपड़े उतारे और पूरी तरह नंगा हो गया. तनवी मुस्कुराई और उसने भी मेरा अनुसरण करते हुए अपने सारे कपड़े उतार फेंके और मेरी तरह पूरी नंगी होकर मुझसे लिपट गयी और बोली आज का दिन बहुत लंबा हो गया था मेरे लिए. मैने उसको कहा के हो जाता है और वो कहते हैं ना इंतेज़ार की घड़ियाँ लंबी होती हैं. पर अब तो कोई इंतेज़ार बाकी नही रहा ना. तनवी हंस पड़ी और मुझसे कस के लिपट गयी. मैं उसको अपने साथ चिपकाए हुए ही बेड पर ले आया और फिर शुरू हुआ चुदन चुदाईका खेल जो 2 घंटे से ज़्यादा चला और इस दौरान मैने उसको दो बार चोदा और वो पता ही नही कितनी बार झड़ी क्योंकि मैं दूसरे राउंड में उसकी मस्त चुदाई करते हुए 5 के आगे गिनना भूल गया.
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[color=rgb(41,]इसी तरह दो हफ्ते बीत गये. हमारा चुदन चुदाई का खेल चलता रहा कभी मैं ऊपेर चला जाता और कभी तनवी नीचे आ जाती और इन दो हफ्तों में शायद दो या तीन दिन ही हमने यह खेल नही खेला वरना रोज़ ही हम इस में मशगूल रहे. जिम क्लब का बोर्ड लग गया था. मेंबर्ज़ डालने के लिए तनवी को मैने बोल दिया था. तनवी लड़कियों से बात करके उन्हें तैयार करने का काम शुरू करने वाली थी. उधर मरियम काएक्सपेरिमेंट बहुत पॉज़िटिव रहा था. दो हफ्तों में मरियम अपने पुराने लेवेल के बहुत करीब पहुँच गयी थी और वो तनवी को थॅंक्स बोलने भी आई थी. तनवी ने उसको समझा दिया था के वो अपनी पढ़ाई की ओर ध्यान दे ताकि अब जो उसमे इंप्रूव्मेंट्स नज़र आनी शुरू हुई हैं वो बनी रहें. मरियम प्रॉमिस करके गयी थी के वो ऐसा ही करेगी और क्योंकि अब उसकी जिगयसा शांत हो चुकी थी इसीलिए वो अपनी पढ़ाई पर ज़्यादा कॉन्सेंट्रेट कर पा रही थी. प्रिया और नेहा ने भी मेरे कहने पर तनवी से बात की थी और वो भी अपनी पढ़ाई के बारे में संतुष्ट थीं कि अब वो अच्छी तरह से कॉन्सेंट्रेट कर रही हैं. मैने सब रेस्पॉन्सिबिलिटी तनवी को दे दी थी और वो अब मेरे द्वारा मार्क की गयी लड़कियों पर ध्यान दे रही थी. मैने तनवी को सीक्ट्व की कोई जानकारी नही होने दी थी. वो सारी स्टडी मैं खुद ही करता था और किसी भी लड़की के बारे में यदि मुझे कोई शक़ होता तो मैं तनवी को उसकी मार्क्स की डीटेल दे देता था और फिर वो नज़र रखती थी और निश्चय करती थी कि आगे क्या करना है.

क्लब की मेंबरशिप के लिए काफ़ी अप्लिकेशन्स आ गयी थीं.तनवी ने 18-20 साल की लड़कियों को मेंबरशिप देनी शुरू कर दी और 8 लड़कियाँ मेंबर भी बन गयी थीं. जिम स्टार्ट कर दिया था और तनवी सुबह ही 6 बजे से 7 बजे तक सबको एक्सर्साइज़ करवाती थी. वो एक जानकार लड़की होने के कारण सब ठीक से संभाल पा रही थी. मैं भी वहीं अपनी एक्सर्साइज़ करता था और मेरा टाइम भी वही था. मेरा एक्विपमेंट हेवी था और अलग कोने में था. तीन तरफ दीवार थी और एक तरफ ग्लास था और उसी तरफ डोर भी था. मेरी पीठ ग्लास की तरफ होती थी पर अंदर मिरर लगे होने से मैं पूरे हॉल को आराम से देख सकता था. बाहर से बहुत ध्यान से देखने पर भी केवल इतना नज़र आता था कि अंदर कोई है या नही. मैं अंदर अपनी एक्सर्साइज़स करता था 40-45 मिनट तक और फिर बाहर मेरे रूम के सामने गर्ल्स के लिए तोड़ा सा हेवी एक्विपमेंट भी था उनके लिए जो ज़्यादा वेट लॉस के लिए एक्सर्साइज़ करना चाहती थीं. उनको एक्सर्साइज़ मैं करवाता था और केवल 15 मिनट. तनवी ने पहले 15 मिनट का एरोबिक एक्सर्साइज़ का रुटीन बनाया था बॉडी वॉर्म-अप के लिए फिर 30 मिनट बॉडी टोनिंग की लाइट एक्शेरेरसिसेस का रुटीन था और एंड में 15 मिनट हेवी एक्सर्साइज़ वाली लड़कियाँ मेरी तरफ आ जाती थीं और बाकी लड़कियों को तनवी वेट मेंटेनेन्स एक्सर्साइज़स करवाती थी. लड़कियों में दो तो मेरे पड़ोस में से थीं कोयल 18 साल और शिल्पी 19 साल और दो मेरी कॉलोनी की ही थीं बिंदु 18 साल और ऋतु 20 साल और पास ही रहती थीं. बाकी 4 लड़कियाँ थोड़ी दूर से आती थीं और इनमें दो बहनें नाज़िया 20 साल और ज़ाकिया 22 साल भी थीं और बाकी दोनो लड़कियाँ थीं निक्की 18 साल और नीशी 21 साल. सभी लड़कियाँ सुंदर ही थीं पर दोनो बहनें और दो और लड़कियाँ, एक मेरे पड़ोस की शिल्पी और एक मेरी कॉलोनी की ऋतु कुच्छ ज़्यादा ही सुंदर थीं. वैसे जवानी से भरपूर हर लड़की सुंदर ही दिखती है.

दोनो बहनों में से नाज़िया थोड़ी सी ओवरवेट थी लेकिन ज़्यादा नही पर फिर भी उसको ध्यान करना ज़रूरी था नही तो वो मोटी हो सकती थी. उसे 3-4 किलो वज़न कम भी करना था हिप्स और कमर से जो उसकी बॉडी के अनुपात से कुच्छ ज़्यादा भरे हुए थे. मेरे पास 3 लड़कियाँ आती थीं. बाकी की दोनो लड़कियों को मामूली सी वेट प्राब्लम थी जो की एक्सर्साइज़स से ठीक हो सकती थी. तनवी ने सबको कलॉरी चार्ट भी बना कर दिया था की अलग अलग तरह के खाने में कितनी कॅलरीस होती हैं और एक दिन में कितनी कॅलरीस कन्स्यूम करनी चाहिए जो नॉर्मल वर्किंग में बर्न हो जाती हैं और कैसी एक्सर्साइज़ से कितनी कॅलरीस बर्न होती हैं ताकि सब ज़्यादा कॅलरीस ना लें और अपने आप को मेनटेन करके रखें. और यह सब शुरू हुए दो हफ्ते होने वाले थे कि एक दिन जब मैं जिम की सीडीयाँ उतर रहा था तो देखा कि दोनो बहनें मेरे आगे थीं. नाज़िया आगे और ज़ाकिया पीच्छे थी. अचानक मैने देखा कि जैसे ही नाज़िया आखरी सीडी पर पर रखने वाली थी कि उसका पैर फिसल गया और उसने घूम कर ज़ाकिया को पकड़ने की कोशिश भी की पर पकड़ ना पाई और गिर गयी. उसकी एक टाँग अपने ही नीचे आ गयी और वो बहुत ज़ोर से चिल्लाई. इतने में तनवी भी आ गयी थी तो मैने और तनवी ने दौड़ कर नाज़िया को उठाया और टेबल पर लिटा दिया.

आज उसने एक ढीला पाजामा और टॉप पहना हुआ था. पाजामा थोड़ा लंबा होने के कारण उसका पैरउसमे फँस गया था और वो गिर गयी थी. तनवी ने उसको पूछा के कहाँ लगी है और कहाँ दर्द हो रही है? उसने हाथ से बताया के दायां घुटने पर बहुत ज़्यादा दर्द हो रहा है. तनवी ने चेक करना चाहा तो ढीले पाजामा में कुच्छ पता नही चल रहा था. उसने तुरंत खींच कर उसका पाजामा नीचे कर दिया और एक टवल उसकी जांघों पर रख दिया. पाजामा उतार कर उसने उसका घुटना देखा तो वो अंदर की तरफ दर्द कर रहा था और थोड़ी सूजन भी आ गयी थी. तनवी ने हाथ लगाकर अच्छी तरह से चेक किया और मुझे बोला के राज इसकी जाँघ को अच्छे से पकड़ लो और जब मैं कहूँ तो क्लॉकवाइज़ हल्का सा प्रेशर रखना ताकि जाँघ दूसरी तरफ ना मूड सके. मैने अपने दोनो हाथों में उसकी जाँघ को अच्छे से पकड़ लिया और तनवी ने उसकी पिंडली पकड़ कर आंटी क्लॉकवाइज़ एक हल्का सा झटका दिया. एक हल्की सी टिक की आवाज़ हुई और नाज़िया ज़ोर से चीखने को हुई पर आआआआआआअँ करके रह गयी और मुस्कुराने लगी. तनवी की ओर देख कर बोली के यह क्या जादू किया है के दर्द एकदम गायब हो गया है. तनवी ने बताया के कुच्छ नही तुम्हारा घुटने का जोड़ हिल गया था जो मैने सेट तो कर दिया है पर अभी तुम्हें इस पर ज़ोर नही डालना है. मुझे उसने कहा के इस पर हल्के हाथ से मसाज करते रहो तब तक मैं लड़कियों की एक्सर्साइज़ शुरू करवा देती हूँ. ज़ाकिया जो सारा रुटीन अच्छे से समझ चुकी थी, को उसने अपनी जगह पर खड़ा कर दिया और कहा कि तुम सबको एक्सर्साइज़ कारवओ और मैं नाज़िया को ऊपेर ले जाकर इसको स्पेशल तेल की मालिश करती हूँ ताकि यह जल्दी ठीक हो सके.

तनवी ने मुझे कहा के मैं नाज़िया को उठा लूँ और ऊपेर ले चलूं. मैने उससे अपने दोनो हाथों में उठा लिया और तनवी ने उसकी टाँग पकड़ ली और हम दोनो उसको लेकर ऊपेर बेडरूम में आ गये. मैने जब नाज़िया को उठाया तो उसने अपना एक बाजू मेरी पीठ पर करके मुझे पकड़ लिया जिस कारण उसका सुडौल मम्मा मेरी छाती से लगा और मैं चौंक गया. उसने ब्रा नही पहनी हुई थी. उसका सख़्त मम्मा मेरी छाती से दबा हुआ था और वो अपने हाथ से मेरी पीठ पर और ज़्यादा दबाव बना रही थी ताकि उसका मम्मा और ज़्याद दबे. तनवी ने नाज़िया को बेड पर लिटा दिया और उसकी टाँग के नीचे एक तकिया लगा दिया और उसको कहा के हिलना मत. मुझे उससणने कहा के घुटने के अंदर और नीचे की तरफ मालिश करते रहो और मैं तेल लेकर आती हूँ. तनवी को उसने थोड़ा साइड करके लेटने को कहा ताकि घुटने के अंदर और नीचे की तरफ मालिश हो सके. फिर वो ऊपेर चली गयी. मैने उसके घुटने की मालिश शुरू की. दोनो हाथों को घुटने पर रखा और उनको अलग दिशाओं में ले जाता. फिर उनको वापिस लाकर घुटने पर मिला देता. जैसा तनवी ने कहा था, मैं हल्के हाथ से ही मालिश कर रहा था. मैने देखा के नाज़िया मेरी ओर ही देख रही थी और मुझसे नज़रें मिलते ही वो मुस्कुरा दी.

उसकी आँखों में लाल डोरे नज़र आ रहे तहे और उनमें एक मस्ती सी नज़र आ रही थी. मैं ऐसी नज़र से अंजान नही था पर अपनी तरफ से कोई पहल नही कर सकता था. हां अपना ऊपेर जाने वाला हाथ मैं ज़्यादा ही ऊपेर ले जाने लगा और करीब करीब उसकी चूत तक ही पहुँच रहा था. उसकी उत्तेजना बढ़ रही थी और उसका सीना ऊपेर नीचे होने लगा था. मैने अपने हाथ को पूरा ऊपेर ले जाना शुरू कर दिया और हर बार जब हाथ ऊपेर जाता तो उसकी जाँघ के जोड़ तक जाकर उसकी चूत को छ्छू कर वापिस आता. तनवी तब तक तेल लेकर आ गयी और मुझे देख कर बोली के दो बूँदें तेल लेकर अपने हाथों पर अच्छी तरह से लगाकर मालिश करो और हर 10 मिनिट के बाद 2-2 बूँदें तेल लगाते रहना. मैने वैसा ही करना शुरू कर दिया. यह तो कोई स्पेशल तेल ही था थोरी देर में ही मेरे हाथ काफ़ी गरम हो गये तो ज़ाहिर है की उसके घुटने पर भी सेक लग रहा होगा. गरमी तो कहीं और भी चढ़ रही थी. मैं देख रहा था की नाज़िया की साँसें भी गरम हो रही थीं और वो काफ़ी तेज़ी से साँस ले रही थी. पर मैं खामोशी से उसके घुटने की मालिश करता रहा और हर बार मेरा हाथ ऊपेर जाता तो उसकी चूत को भी टटोल कर वापिस आता. नाज़िया ने अपने हाथ हिलाने शुरू कर दिए और खुद भी हिलने को हुई तो मैने उसको रोका और कहा के हिलो मत. वो बोली की उसको बेचैनी हो रही है. मैं समझ तो रहा था के क्यों हो रही है पर उसकी बेचैनी को दूर नही कर सकता था. कुच्छ तो पहल उसको ही करनी थी.

नाज़िया से जब रहा नही गया तो उसने अपने दोनो हाथ उठा कर अपनी गोलैईयों पर रख दिए और उन्हे आहिस्ता आहिस्ता मसलने लगी. उसके हाथों के बीच उसके छ्होटे छ्होटे निपल उसके पतले टॉप में उभर कर नज़र आने लगे थे. तनवी और नाज़िया के आने में अभी समय था. मैने नाज़िया से पूछा की क्या बात है क्या तुम्हारी तकलीफ़ बढ़ गयी है? वो बोली के नही दर्द तो नही हो रहा पर कुच्छ अजीब सा लग रहा है और वो नही जानती कि क्या हो रहा है. मैने फिर पूछा के तुम यह क्या कर रही हो? और मैने अपने हाथ उसके दोनो हाथों पर रख दिए. उसका चेहरा पूरा लाल टमाटर हो गया और वो कुच्छ नही बोली. मैने उसको फिर पूच्छा की यह क्या कर रही हो तो वो बोली के पता नही. मैने कहा के हाथ हटाओ मुझे देखने दो कही यहा भी तो नही लगी है. मैने उसके टॉप के अंदर हाथ डाल कर टॉप को ऊपेर उठाया और उसके हाथों को हटाते हुए उसके मम्मे नंगे कर दिए और उनको दबा दबा के देखने का बहाना करने लगा. क्या मस्त मम्मे थे एकदम सॉलिड रब्बर की डॉग बॉल जैसे और जैसे ही मेरा हाथ नाज़िया के मम्मों पर लगा वो ज़ोर से सीत्कार कर उठी और उसने अपने हाथों से मेरे हाथों को दबा दिया और बोली के ज़ोर से मसल दो इनको बहुत अजीब सा लग रहा है. मुझसे बर्दाश्त नही हो रहा. मैने कहा के मैं समझ गया हूँ के तुम्हें ठीक कैसे करना है. वो बोली तो जल्दी से करो ना जो भी करना है.

मैं तेज़ी से बाथरूम से टवल लेकर आया और उसकी गांद के नीचे लगा दिया फोल्ड करके और उसकी पॅंटी को नीचे कर दिया और उसकी चूत को देखता ही रह गया. बिना बालों की चूत की दोनो गुलाबी पुट्तियाँ आपस मे जुड़ी हुई थीं और उसके पानी से भीगी हुई थीं. मैने एक हाथ से उसकी चोटिल जाँघ को कस के पकड़ा और दूसरे हाथ की उंगली उसकी चूत की लकीर पर चलाने लगा और साथ ही अपने अंगूठे से उसकी चूत के दाने को रगड़ने लगा. नाज़िया को मैने कहा के अब जो होने वाला है वो होने देना और अपनी टाँग को मत हिलाना और अपना हाथ उसकी जाँघ से उठाकर उसके मम्मों को बारी बारी से मस्सलने लगा. 4-5 मिनट में ही नाज़िया आआआआआआआआआः ऊऊऊऊऊऊऊओ करती झाड़ गयी और मैने टवल से उसकी चूत को पोंछ कर उसकी पॅंटी ठीक कर दी और उसका टॉप नीचे करते हुए कहा कि आज के लिए उसकी बेचैनी का इतना इलाज ही काफ़ी है. उसने चौंक कर मेरी तरफ देखा और शर्मा कर अपनी आँखें झुका लीं. बहुत प्यारी लग रही थी नाज़िया पर समय ना होने के कारण मैं कुच्छ कर नही सकता था. मैने उसको पूछा के कैसे लगा? वो चुप रही तो मैने दुबारा पूछा के बताओ कैसा लगा? वो धीमे स्वर में बोली के बहुत अच्छा लगा. मैने कहा के मज़ा आया? उसने हां में सर हिलाया और आँखें मूंद लीं. मैने कहा की बाकी कल देखेंगे.

थोड़ी देर में ही तनवी और नाज़िया की आपी ज़ाकिया आ गयीं और तनवी ने नाज़िया से पूछा के अब कैसा लग रहा है? नाज़िया बोली के दर्द तो नही है तनवी ने कहा के जानती हूँ. पर अभी तुमको 3 दिन मालिश करवानी पड़ेगी फिर पूरा आराम आएगा. आज का दिन तो तुम अपना पैर नीचे नही लगाना और इस पर अपना वज़न बिल्कुल नही डालना. कल तुम्हे चेक करके ही पता चलेगा कि कैसा है और क्या करना है. फिर तनवी ने उसकी टाँग पर नीचे की ओर एक खपकची बाँध दी जो उसकी जाँघ से ले कर उसकी पिंडली तक थी और उसको कहा के इसको खोले नही. ज़ाकिया से उसने कहा के उम्मीद तो है के अब दर्द नही होगा पर अगर हो तो कोई भी पेन किल्लर टॅबलेट दे देना और कल इसको ज़रूर लेकर आना. फिर मैं और तनवी उनको मेरी कार में घर छ्चोड़ने गये क्योंकि आज वो ऑटो से आई थीं. जब हम वहाँ पहुँचे तो तनवी चौंक गयी पर बोली कुच्छ नही. मैं भी चुप ही रहा. फिर तनवी और ज़ाकिया ने जैसे नाज़िया को कार में बिठाया था वैसे ही निकल कर घर के अंदर ले गयीं और फिर तनवी वापिस आकर कार में बैठी और बोली के चलो. [/color]
 
[color=rgb(41,]चलते ही तनवी ने मुझसे पूछा के जानते हो ये कौन हैं? मैं क्या कहता, मैने कहा के नही. तो तनवी ने बताया के यह मरियम की बहनें हैं क्योंकि यह वही घर है जहाँ मैने मरियम को छ्चोड़ा था. मैने कहा के तुमने तो कहा था के उसकी बहनें ही घर में थीं तो तुमने देखा नही था उनको. वो बोली के नही शकल नही देख पाई थी क्योंकि दुपट्टा लपेटा हुआ था. मैं हंस पड़ा. फिर तनवी ने एक धमाका किया कि तुम कहाँ तक पहुँचे नाज़िया के साथ? मैं चौंक कर बोला क्या मतलब? वो बोली के मैं नाज़िया को देखते ही समझ गयी थी के तुमने कुच्छ ना कुच्छ किया है उसके साथ और फिर उसकी चोट तो ठीक हो चुकी थी नीचे ही. तेल की मालिश का तो बहाना था तुम्हारे हाथ लगवाने का. मैने तनवी की ओर देखा तो वो शरारत से मुस्कुरा रही थी. मैने कहा के उसको ज़िंदगी का पहला मज़ा मिला है मेरे हाथों से और ज़्यादा कुच्छ करने का तो टाइम ही नही था.

तनवी बोली के फिकर ना करो अभी वो कल और परसों भी तो मालिश करवाने वाली है जो मेरे हिसाब से काफ़ी होंगे तुम्हारे लिए उसको शीशे में उतारने के लिए. तुम्हारी मदद मेरा तेल कर ही रहा है, उसका कमाल तो तुम देख ही चुके हो. मैने कहा के यह सब तुम्हारे तेल ने किया था, मैं तो समझ रहा था के मेरा स्पर्श उसको उत्तेजित कर रहा है. तनवी मुस्कुराइ और बोली के दोनो का मिलाजुला रिक्षन था. हम घर पहुँचे और अपने अपने कमरे में चले गये तैयार होकर स्कूल जाने के लिए. ऑफीस में पहुँचकर मैने अपना पीसी ऑन किया और उसे क्लियर करने की सोची. मैं हर 15-16 दिन में अपने पीसी की सफाई करता था. मतलब के टेंप फोल्डर, टेंप इंटरनेट फाइल्स, रीसेंट डॉक्युमेंट्स के फोल्डर्स को खाली कर देता था ताकि पीसी की स्पीड अच्छी रहे. सबसे पहले मैने टेंप इंटरनेट फाइल्स, फिर टेंप फोल्डर्स खाली कर दिए.

सबसे आख़िर में मैने माइ रीसेंट डॉक्युमेंट्स का फोल्डर खाली करने के लिए खोला. फोल्डर में फाइल्स कुच्छ ज़्यादा ही थीं. जो कंप्यूटर्स की जानकारी रखते हैं उनको तो समझ आ ही जाएगा पर होता यह है के जब भी कोई फाइल या फोल्डर खोला जाता है कंप्यूटर में तो उसका एक शॉर्टकट रीसेंट डॉक्युमेंट्स फोल्डर में आ जाता है और उसकी प्रॉपर्टीस में जायें राइट क्लिक करके तो पता चल जाता है कि लास्ट आक्सेस कब हुई थी उस फाइल या फोल्डर की. मुझे शक़ हुआ तो मैने सारी फाइल्स देखनी शुरू कर दीं. बहुत सारी फाइल्स ऐसी थीं जिनको मैने पिच्छले 15-20 दिन तो क्या कयि महीनों से आक्सेस नही किया था. इसका एक ही मतलब था के मेरी जानकारी के बिना किसी ने मेरे कंप्यूटर के साथ छेड़-छाड़ की थी. मैने कुच्छ फाइल्स को राइट क्लिक करके उनकी प्रॉपर्टीस चेक की तो पता चला के सब 2 दिन पहले ही असीस्स की गयी थीं 11 और 12 बजे के बीच में. मैने सोचा तो ध्यान आया कि 2 दिन पहले मैं कोई 10-45 पर ऑफीस से निकला था और एक मीटिंग करके मैं 12-30 पर वापिस आ गया था. मैने अपने रूम की सीक्ट्व की रेकॉर्डिंग चेक की तो पता चला के तनवी मेरे पीसी पर 11-12 बजे तक बैठी थी और अच्छी तरह से मेरे पीसी को चेक करके गयी थी. मुझे बहुत हैरानी हुई पर मैने उस वक़्त तनवी से कुच्छ भी कहना उचित नही समझा और छुट्टी होने पर घर आ गया. पर चलने से पहले मैने अपने कंप्यूटर का पासवर्ड बदल डाला और उसमे 5 मिनटका स्क्रीनसावेर लॉक लगा दिया ताकि 5 मिनट इनॅक्टिव रहने पर पीसी लॉक हो जाए और फिर पासवर्ड डालने पर ही खुले. घर आकर मैं सोचता रहा कि मुझे तनवी से बात करनी चाहिए या नही. यह तो अच्छा था के सीक्ट्व की रेकॉर्डिंग के लिए अलग कंप्यूटर था और उसके साथ कोई छेड़-छाड़ नही हुई थी जो मैने चेक कर लिया था. फिर मैने फ़ैसला किया कि अभी तनवी से कोई बात नही करूँगा पर अब उसकी हर हरकत पर नज़र रखूँगा. मैने नीचे जिम में सीक्ट्व कॅमरास फिट करवा दिए थे और अब मैने ऊपेर तनवी के रूम में भी कॅमरास फिट करवाने का इंटेज़ाम कर दिया. अगले दिन ही हमारे स्कूल जाने के बाद कॅमरास फिट हो जाने थे.

मैने उस दिन की रेकॉर्डिंग चेक की जो की नॉर्मल ही लग रही थी. 11 बजे तनवी मेरे ऑफीस में दाखिल हुई और मेरे पीसी पर बैठ गयी और उसके आक्षन्स से लग रहा था कि वो फाइल्स खोल कर चेक करती रही थी कि लगभग 11-50 पर तनवी के मोबाइल की घंटी बजी. तनवी ने अपना फोन उठाकर चेक किया और मैन डोर की तरफ देखा और मैन डोर लॉक देखकर उसने फोन उठा लिया और बोली कि हां बोलो क्या बात है. मैं चौंक गया कि तनवी किसके साथ बात कर रही है? फिर तनवी की आवाज़ आई के मैं चेक कर चुकी हूँ पूरा एक घंटा पर मुझे ऐसा कुच्छ नही मिला जो तुम्हारे काम का हो. इसका मतलब था के तनवी मेरा पीसी किसी के कहने पर उसके लिए चेक कर रही थी. तनिवि बोल रही थी के मैने बताया ना मैं उसको शीशे में उतार चुकी हूँ और उसका विश्वास भी जीत चुकी हूँ. कोई फिकर वाली बात नही है मेरी फिकर तो बिल्कुल मत करो. मैं अपने फ़ैसले पर कायम रहा के मैं तनवी से कुच्छ भी नही पूच्हूंगा और उसे बिल्कुल भी नही लगने दूँगा की मुझे कुच्छ पता चल गया है और मैं उस पर नज़र रख रहा हूँ. बल्कि अब मैं अपने पीसी में कोई ऐसी फाइल नही रहने दूँगा जिसके कारण किसी को मेरी गतिविधियों के बारे में पता चल सके. पूरे सीक्ट्व की रेकॉर्डिंग्स का कनेक्षन मैने अपने घर पर करवा दिया और पीसी को घर पर शिफ्ट कर दिया, और उसको बहुत अच्छी तरह से पासवर्ड प्रोटेक्षन और आक्सेस प्रोटेक्षन दे दिया. अब बिना मेरी मर्ज़ी के कोई उस पीसी को खोलकर चेक नही कर सकता था. मैने सोच लिया के कभी-कभी तनवी को मौका दूँगा कि वो मेरे पीसी पर बैठ कर मेरा कुच्छ काम करे ताकि वो आराम से मेरे पीसी को चेक कर सके. इसके दो लाभ होंगे एक तो वो यह समझेगी के मुझे उस पर अधिक विश्वास हो गया है और दूसरा वो बेफिकर होकर मेरे ऑफीस में बैठेगी और हो सकता है के कुच्छ ऐसा कर बैठे कि उसकी असलियत मेरे सामने आ जाए. [/color]
 
[color=rgb(41,]अगले दिन नाज़िया को सीधे ही मेरे बेडरूम में पहुँचा दिया गया ताकि उसकी मालिश की जा सके. तनवी ज़ाकिया को लेकर नीचे चली गयी और मैने नाज़िया की मालिश करने के लिए तेल की शीशी उठा ली. जात जाते तनवी कह गयी के आज पट्टी बाँधने की ज़रूरत नही पड़ेगी. आज नाज़िया ने ट्रॅक सूट पहना हुआ था जिसका टॉप फ्रंट ज़िप वाला था. मैने नाज़िया से पूछा के आज वो कैसा महसूस कर रही है. उसने बताया के दर्द तो बिल्कुल नही है और अब तो ऐसा लगता ही नही के उसे चोट भी कभी लगी थी. मैने कहा के बहुत अच्छी बात है. मैने नाज़िया को कहा के उसका पाजामा उतारना पड़ेगा. उसने मुस्कुराते हुए अपना पाजामा उतार दिया और अपनी आँखें बंद करके लेट गयी. मैने उसकी पट्टी खोली और साथ ही खपकची भी निकाल दी. फिर उसकी टाँग को उठाकर अपनी गोद में रख लिया और मालिश करने लगा. पट्टी ज़्यादा टाइट करके बँधी होने से उसकी जाँघ और पिंडली पर निशान पड़े हुए थे जिनको मैं मालिश से ठीक कर रहा था. मैने उसकी मालिश करते हुए उसकी टाँग घुटने पर से मोडके उसकी जाँघ पर प्यार से हाथ फेरते कहा के दर्द तो नही है. वो सिहर गयी और बोली के दर्द तो नही है पर उसको फिर कल जैसा लगने लगा है. मैने कहा के कोई बात नही मैं कल की तरह फिर उसे ठीक कर दूँगा. वो शर्मा गयी और कुच्छ नही बोली. मैं जाकर एक टवल ले आया और पास में रख लिया. कमरे का दरवाज़ा मैने लॉक कर दिया. फिर मैने उसको ओर प्यार से देखा और उसकी दोनो जांघों पर प्यार से हाथ फेरने लगा. उसकी आँखें लाल होने लगीं और वो मस्ती में आने लगी.

मैने उसको उठाकर अपने ऊपेर के कपड़े उतारे और उसकी पीठ की ओर बैठकर उससे अपनी गोद में बिठा लिया और उसका भी टॉप उतार दिया. कल की तरह उसने आज भी अंदर कुच्छ नही पहना हुआ था. अब नाज़िया एक पॅंटी में मेरी गोद में बैठी हुई थी. मैने अपने दोनो हाथ उसकी बगलों से लेजाकार उसस्के कड़क मम्मों पर रख दिए तो वो ज़ोर से कांप गयी और उसकी सीत्कार निकल गयी. मैने अपने हाथों से उसकी दोनो मम्मे दबाने शुरू कर दिए. उसके छ्होटे छ्होटे निपल्स एक दम खड़े हो गये थे और मेरे हाथों में गुदगुदी कर रहे थे. मैने नाज़िया के ऊपेरी शरीर को अपने एक बाजू पर करते हुए अपना मुँह नीचे किया और उसके एक उभार को अपने मुँह मे ले लिया. दूसरे उभार पर मेरे हाथ की सख्तियाँ बदस्तूर चल रही थीं. मैं दोनो मम्मों को बारी बारी अपने मुँह से चुभलाने लगा. एक मेरे मुँह में होता तो दूसरा मेरे हाथों में. 4-5 मिनट में ही नाज़िया पूरी मस्ती में आ गयी और उत्तेजना से उसका चेहरा और आँखें लाल हो गयीं. उसस्के मुँह से आआआआआः, ऊऊऊऊओ की आवाज़ें निकलने लगीं. उसने अपना हाथ नीचे अपनी पॅंटी में कसी चूत पर रख दिया और अपनी चूत को दबाने लगी. मैने उससे प्यार से कहा के पॅंटी गीली हो जाएगी तो उसने पूछा की क्या करूँ? मैने कहा के ऐसे में यही करना चाहिए के इसको उतार दो. उसने शरम से अपनी आँखें बंद कर लीं और अपनी पॅंटी भी उतार दी.

मैं उसको अपने से अलग करके खड़ा हो गया और उसे लिटा कर बोला के रूको पहले मैं भी तुम्हारी पोज़िशन में आ जाऊ. वो चुप रही. उसकी साँसें तेज़ चल रही थीं और वो अपना एक हाथ अपने भारी मम्मे पर रख कर उसे दबा रही थी और दूसरे हाथ से अपनी चूत को सहला रही थी. नाज़िया के सर के नीचे दो तकिये लगाकर मैं उसकी टाँगों के बीच में आ गया और उसकी टाँगें उठाकर अपने कंधों पर ऐसे रखीं के उसकी टाँगें घुटनों से मुड़कर मेरी पीठ पर लटक गयीं. इस हालत में उसकी चूत मेरे मुँह के बहुत करीब आ गयी. चूत की लकीर पर पानी की बूँदें चमक रही थीं. मैने अपने दोनो हाथ उसकी जांघों पर रख कर उंगलियों से उसकी चूत के दोनो फांको को खोल दिया. उसकी दोनो गुलाबी पुट्तियाँ फड़फदा रही थीं और उसकी चूत अंदर से एकदम लाल गुलाबी रंग की नज़र आ रही थी. मैने ज़ोर से साँस ली और उसकी चूत से आ रही मादक सुगंध मुझे दीवाना करने लगी. मैने अपनी जीभ निकाली और उसकी चूत की दोनो पंखुड़ियों को चाटने लगा. उसने ज़ोर से एक सिसकारी ली और बोली कि यह क्या कर रहे हो? मैने कहा के तुम्हें मज़ा आ रहा है ना? नाज़िया आहिस्ता से बोली कि हां. तो मैने कहा के बस फिर कुच्छ मत बोलो और मज़ा लेती रहो. मैं जो भी जैसे भी कर रहा हूँ मुझे करने दो. वो चुप हो गयी.

मैने अपनी जीभ वापिस उसकी चूत पर लगा दी और उसकी गुलाब की पंखुड़ियों को अपनी जीभ को ऊपेर नीचे करके और दबा के चाटने लगा. ऊपेर जाते हुए मैं अपनी जीभ से उसके भज्नासे को भी अपनी जीभ से रगड़ रहा था. नाज़िया च्चटपटाने लगी और बोली के हाआआआआआए माआआआआआ ईईईईईई मूवूयूयूवूऊवूऊवयझीयीईयी क्य्ाआआआअ हूऊऊऊओ राआआआआआाआआआआआ हाआआआआआई. आईसीईईई हीईीईईईईईईईईई करूऊऊऊऊऊ बहुउउउउउउउउउउउत मज़ाआआआअ आआआआआआअ हाआआआई. मैने अपना मुँह पूरा खोल कर उसकी चूत पर रख दिया और अपनी जीभ को उसकी चूत में घुसा दिया. नाज़िया उच्छल पड़ी पर मेरे हाथों की पकड़ और उसकी टाँगों के मेरे कंधों पर लटके होने से वो ज़्यादा कुच्छ नही कर पाई. मैने अपनी जीभ से नाज़िया की नाज़ुक चूत को चोदना शुरू किया. उसके दोनो हाथ पकड़ कर उसकी चूत के दोनो ओर रख कर उसको कहा कि इसको खोल कर रखो और अपनी जीभ से उसकी चूत को चोदना चालू रखते हुए मैने अपने दोनो हाथ उसके सख़्त हो चुके मम्मों पर जमा दिए और निपल्स को अपनी उंगलियों से छेड़ने लगा. मेरे दाँतों की रगड़ और जीभ की चुदाई से वो बहुत तेज़ी से मंज़िल की ओर बढ़ रही थी. थोड़ी देर में ही नाज़िया का जिस्म झूमने लगा और उसके मुँह से ऊऊऊऊऊऊं आआआआआं की आवासें निकली और साथ ही वो काँपने लगी. नाज़िया की चूत भालभाला के पानी छ्चोड़ने लगी.

नाज़िया के शांत होने पर मैने उसकी टाँगें नीची कर दीं और खड़ा हो गया. वो भी बैठ गयी और प्यार से मुझे देखने लगी. फिर नाज़िया ने हाथ बढ़ाकर मेरे आकड़े हुए लंड पर रख दिया और बोली के हाए मा कितना गरम है यह तो जैसे मेरा हाथ ही जला देगा. मैने कहा के तुम्हारी चूत की गर्मी तो निकल गयी है इसकी गर्मी अभी नही निकली इसलिए इतना गुस्से से और भी गरम हो रहा है. वो हंस के बोली तो इसकी भी गर्मी निकाल देते ना. मैने कहा के इतना टाइम ही कहाँ है पर थोड़ी सी गर्मी तो निकाल ही सकते हैं जैसे तुम्हारी थोड़ी सी गर्मी निकाली है. वो बोली कैसे? तो मैने उसको खड़ा कर दिया और वो मुझसे लिपट गयी. मैने उसे डीप किस किया और उसे अपने साथ चिपकाए हुए ही बेड पर लेट गया. फिर मैने उसके मम्मे अपने हाथों में ले लिए और एक को जीभ से चाटने लगा. वो फिर से उत्तेजित होने लगी. मैने उसका मुँह अपने पैरों की तरफ करके उसके घुटने मोड़ दिए तो उसकी चूत एक बार फिर मेरे सामने थी. पर इस बार उसकी मुलायम गोल गांद भी मेरी आँखों के सामने थी और उसमे से उसकी गांद का प्यारा सा छेद भी मुझे दिख रहा था.

मैने नाज़िया को कहा के मेरे लंड की गर्मी को अपने मुँह में लेकर शांत करे. उसने मेरे लंड को अपने दोनो हाथों में लेकर सहलाना शुरू कर दिया और अपने हाथ ऊपेर नीचे करने लगी. फिर एक हाथ बेड पर सहारे के लिए टिका कर अपना मुँह मेरे लंड के पास ले आई और लंड के सुपारे को चूम कर अपनी जीभ से चाटने लगी. मेरा लंड उत्तेजना से और अधिक अकड़ गया और उच्छलने लगा. मैने उससे कहा कि नाज़िया देर ना करो इसको अपने मुँह में ले लो. लेती हूँ कहकर उसने अपने पूरा मुँह खोला और लंड को अंदर करने की कोशिश करने लगी. थोड़ी सी कोशिश के बाद लंड का सुपरा उसके मुँह में चला गया और वो उसको अपनी जीभ से मुँह के अंदर ही चाटने लगी. इधर मैने उसकी चूत पर अपनी जीभ चलानी शुरू कर दी थी. मेरी जीभ उसके भज्नासे को रगड़ती हुई उसकी दरार में होकर उसकी गांद के छेद को छूती तो वो चिहुनक जाती. उधर मैने नीचे से अपनी गांद उठाकर अपना लंड उसके मुँह में और ज़्यादा डालने की कोशिश शुरू कर दी. नाज़िया को मैने कहा के जितना ज़्यादा अंदर कर सकती हो लंड को कर लो और इसको चूस्ति रहो जैसे लॉलीपोप चूस्ते हैं.

अपने दोनो हाथों से मैने नाज़िया की चूत को खोला और अपनी जीब उसमे घुसा दी और जीभ से उसको चोदने लगा. एक अंगूठे से मैने उसस्के भज्नासे को सहलाना शुरू कर दिया. जितनी उसकी उत्तेजना बढ़ती उतना ज़्यादा मेरा लंड नाज़िया अपने मुँह में लेती जाती. फिर मैने अपने लंड से उसके मुँह को चोदना शुरू कर दिया. अपनी थूक से एक उंगली गीली करके मैने उसकी गांद के छेद को रगड़ना शुरू किया तो वो काँप गयी. मैने अपनी उंगली दुबारा गीली की और उसकी गांद के छेद पर रख कर थोड़ा सा दबाव डाला. उसकी गांद का टाइट छल्ला थोड़ा खुला और मेरी उंगली आधा इंच उसकी गांद में घुस गयी. वो उच्छल पड़ी पर मेरे हाथों की मज़बूत पकड़ ने उसे हिलने नही दिया. उंगली मैने वहीं रहने दी और उसकी चूत में अपनी जीभ अंदर बाहर करने की रफ़्तार तेज़ कर दी. उससे मज़ा आना शुरू हो गया और वो मस्ती में झूम झूम कर मेरे लंड को अपने मुँह में अंदर बाहर करते हुए चूसने लगी. मैं भी झड़ने की कगार पर आ गया और वो भी मस्ती के चरम की ओर अग्रसर हो रही थी. 5-7 मिनट में ही वो झाड़ गयी और मैने अपने हाथ नीचे करके उसके सर को पकड़ कर 8-10 बार अपने लंड को उसके मुँह में अंदर बाहर किया और फिर मेरी उत्तेजना का बाँध भी टूट गया और मेरे लंड से गरम गरम गाढ़े वीर्य की पिचकारी उसके मुँह में गिरी जो वो सतक गयी. मैने अपना लंड उसके हलक तक उतार दिया और झटके लेने लगा. हर झटके के साथ मेरा वीर्य उसके हलक में जाता और वो गतक जाती. मेरा स्खलन पूरा होने पर मैने अपने आप को ढीला छ्चोड़ दिया और वो भी आ कर मेरी छाती से आ लगी और गहरी गहरी साँसें लेने लगी.

थोड़ी देर बाद जब हम संयत हुए तो वो बोली के आज तो मेरी चूत की गर्मी दो बार निकाल दी सच में बहुत मज़ा आया. मैने कहा के असली गर्मी तो चूत की निकलती है लंड से चुदाई करने से और मज़ा भी इतना आता है कि यह सब मज़े भूल जाओगी. तो वो तुनक कर बोली के फिर वैसे ही क्यों नही किया? मैने पूछा के कैसे? तो वो बोली के वैसे ही जैसे कह रहे हो. मैने कहा के क्या कह रहा हूँ? वो बोली के बहुत शरारती हो मेरे मुँह से ही कहलाना चाहते हो? मैने कहा के दोनो नंगे होकर एक दूसरे से चिपके हुए हैं और एक दूसरे को मज़े दे चुके हैं और तुम अभी भी शर्मा रही हो? तो वो बोली के ठीक है बताओ अपने लंड से मेरी चूत क्यों नही मारी? मैने उसे ज़ोर से अपने साथ भींच लिया और कहा के यह हुई ना बात नाज़िया, वो इसीलिए के तुम्हारी मर्ज़ी भी तो पक्की पता नही थी और मैं बिना लड़की की मर्ज़ी के कभी नही करता और ज़बरदस्ती तो हरगिज़ नही. जब तक और जहाँ तक लड़की चाहेगी मैं करूँगा और जहाँ उसने रोक दिया उसके आगे फुल स्टॉप. वो बोली के मैं तो चाहती थी पर शरम के मारे बोली नही और सोचा के आप खुद ही कर दोगे सब कुच्छ. मैने उसको कहा के देखो यह आप आप करके तुम इतना फासला क्यों बना रही हो हमारे बीच में. और अगर तुम चाहती थीं के मैं तुम्हें चोद्कर लड़की से औरत बना दूं तो कहना था या इशारा तो किया होता पर कोई बात नही देर ईज़ ऑल्वेज़ आ टुमॉरो. मैने हंस कर कहा के कल जब आओगी तो तुम्हें चोद भी देंगे मेरी जान. वो इसी मे सिहर उठी और मुझसे अमरबेल की तरह चिपक गयी.

मैं उसको लेकर बाथरूम में आया और मुँह हाथ धोकर हम बाहर आए. कपड़े पहनते हुए मैने उससे कहा कि अभी थोड़ा दर्द का बहाना करती रहना ताकि कल भी मालिश के लिए आ सको. हम रेडी हुए ही थे कि मुझे तनवी की आवाज़ आई. मैने जल्दी से नाज़िया को बेड पर लिटा दिया और जल्दी से दरवाज़ा खोल दिया. जब तनवी ज़ाकिया के साथ अंदर आई तो मैं टवल से अपने हाथ पोंच्छ रहा था. मैने ज़ाकिया से पूछा के आज कैसे जाना है तो वो बोली के आज कार लेकर आई हूँ इसलिए कोई फिकर की बात नही है. मैने कहा के फिकर तो वैसे भी नही था पर चलो तुम कार लाई हो तो भी ठीक है. फिर वो नाज़िया को सहारा देकर ले गयी. जाते हुए नाज़िया बहुत अच्छा हल्का सा लंगदाने की आक्टिंग कर रही थी. तनवी ने उनके साथ बाहर निकलते हुए कहा के कल भी मालिश करवा लेना बिल्कुल ठीक हो जाओगी. नाज़िया ने निकलते हुए पीछे मुड़कर मुझे थॅंक यू कहा ऑरा आँख मार दी. तनवी वापिस आई और मुझे बाहों में लेकर बोली के आज कहाँ तक पहुँचे? एनी प्रोग्रेस? मैने उसे बताया तो वो हंस दी और बोली की बहुत अच्छे जा रहे हो. वो चल दी ऑफीस के लिए तैयार होने और मैं भी तैयार होने लगा.

ऑफीस पहुँच कर मैने सोचा के तनवी को कुच्छ काम का बहाना कर के अपने पीसी पर बिठा देता हूँ. मैने उसको बुलाया और कुच्छ काम दे दिया जो डेढ़-दो घंटे का था और उसको कहा के जैसे ही टाइम मिले वो इसको कर्दे और अगर थोड़ा बच जाए तो छुट्टी के बाद कर्दे. उसने कहा के ठीक है. उसने कुच्छ तो मेरे राउंड्स पे जाने पर कर दिया और बाकी का छुट्टी के बाद करने के लिए रख दिया. छुट्टी के बाद मैं घर आके सीक्ट्व के मॉनिटर पर बैठ गया और तनवी को देखने लगा के वो क्या करती है. उसने फटाफट काम ख़तम किया और फिर पीसी चेक करने लगी. कुच्छ नही मिला. फिर उसने टेबल की ड्रॉयर्स चेक करनी शुरू कर दीं. कुच्छ ऑफीस की फाइल्स थीं वो उसने देख कर वापिस रख दीं. मैं एक बात देख रहा था कि वो जिस चीज़ को भी चेक करती थी उसे बिल्कुल वैसे ही वापिस रख देती थी जैसे वो पहले थी ताकि पता ना चले कि किसी ने वहाँ कुच्छ छेड़ छाड़ की है. शायद उससे मतलब की कोई चीज़ हाथ नही लगी इसलिए कुच्छ मायूस सी वो वहाँ से निकल गयी. मैं उठकर अपने बेडरूम में आ गया और लेट कर आराम करने लगा और सोचने लगा.

मैने बहुत सोचा कि तनवी क्या ढूँढ रही है और किसके लिए पर कुच्छ समझ नही आ रहा था. इसके अलावा उसकी कोई भी बात ग़लत नही थी बल्कि वो बहुत अच्छे से मेरे काम में मेरी मदद कर रही थी. सिर्फ़ यही एक बात परेशान कर रही थी और इसका कोई उपाय नज़र नही आ रहा था. कोई तो है जो यह सब करवा रहा है. पर क्यों का कोई भी जवाब नही नज़र आ रहा था. मेरी आज तक किसी से लड़ाई नही हुई थी इसलिए दुश्मनी का तो सवाल ही नही पैदा होता. फिर यह सब क्या था मेरी समझ से बाहर था. मुझे लगा के वेट आंड . ही ठीक रहेगा मेरे लिए शायद कुच्छ सामने आ जाए. शायद तनवी कुच्छ ऐसा कर बैठे की उसकी पॉल-पट्टी खुल जाए. अगर नही आया तो देखेंगे क्या करना है. यही सब सोचते सोचते कब 5 बज गये पता ही नही चला. होश तो तब आया जब नौकर पूच्छने आया के चाय कमरे में लूँगा या बाहर. मैने उसको कहा के बाहर ही रखो मैं आता हूँ. मैने उठकर मुँह हाथ धोए और बाहर आकर चाय पीने लगा. चाय के बाद एक बार सोचा के ऊपेर तनवी के पास चला जाए पर फिर पता नही क्यों मैने यह विचार त्याग दिया.

मेरी सोच फिर वही थी के क्या करूँ और कैसे यह पहेली सुलझेगी? पर कुच्छ समझ नही आ रहा था. फिर बहुत सोचने के बाद मैने अपने एक दोस्त को कॉंटॅक्ट किया जो डीटेक्टिव एजेन्सी चलाता है और उसको तनवी की सारी डीटेल्स दे दी और कहा के इस लड़की की पास्ट और प्रेज़ेंट की पूरी जानकारी चाहिए डीटेल्ड. मैने उसे यह बता दिया कि यह मेरे स्कूल में नयी रखी गयी है और मेरे ही घर के 2न्ड फ्लोर पर रह रही है. बाकी की सारी डीटेल्स चाहिए. उसने कहा कि टाइम लगेगा पर कहो तो जैसे जैसे जानकारी मिलती है तुम्हें पास करता रहूं या पूरी जन्म कुंडली बना के एक ही बार में सारी जानकारी दूं. मैने उसको बोला के जैसे ही कोई जानकारी मिलती है मुझे पास करते रहो और अंत में सारी डीटेल्स इकट्ठी करके रिपोर्ट बना देना. फिर मैं इंतेज़ार करने लगा उसकी रिपोर्ट्स का. [/color]
 
[color=rgb(41,]अगले दिन किसी त्योहार की छुट्टी थी. मैं सुबह उठा और फ्रेश होकर चाय पीने और अख़बार देखने लगा. मुझे इंतेज़ार था नाज़िया का. आज उसको चोद्कर लड़की से औरत बनाना था. यह सोच कर ही मेरा लंड जॉकी में करवटें लेने लगा. खैर इंतेज़ार ख़तम हुआ और वो टाइम भी आ ही गया जिसका मैं बेसब्री से इंतेज़ार कर रहा था. ज़ाकिया नाज़िया को सहारा देकर ला रही थी. मैने पूछा के तनवी नही आई तो ज़ाकिया ने कहा के नही वो नही आई पर आज तुम्हारी पुरानी पहचान वाली को लाई हूँ. कहकर उसने आवाज़ दी के आ जाओ कब तक बाहर खड़ी रहोगी? मैने दरवाज़े की तरफ देखा तो मैं चौंक गया. दरवाज़े में मरियम खड़ी थी. उसके चेहरे का रंग उड़ा हुआ था. वो डरते-डरते अंदर आई. मुझे उसकी सूरत देखकर खुद डर लगने लगा के यह क्या हो गया है और अब आगे क्या होने वाला है? ज़ाकिया ने आगे बढ़कर नाज़िया को बेड पर लिटा दिया और वापिस मेरे पास आकर मुझे गिरेबान से पकड़ कर बोली तुम समझते क्या हो अपने आप को? मैने कहा के मैं कुच्छ समझा नही तुम क्या कहना चाह रही हो ज़ाकिया?

उसका चेहरा लाल भभूका हो रहा था और वो एक-एक लफ्ज़ चबा कर बोली दिमाग़ खराब हो गया है मेरा. पागल हो गयी हूँ मैं. तुमने यह कैसी उल्टी गंगा बहा रखी है? पहले मेरी सबसे छ्होटी बेहन को चोदा और आज मेरी दूसरी छ्होटी बेहन को चोदने का प्रोग्राम बनाया हुआ है. मैं क्या करूँ. अगले महीने मेरी शादी है और मैं अपने होने वाले शौहर को मिलने गयी थी कल. वहाँ उसने मुझे अकेले में चोदने की कोशिश की पर मेरी सील तोड़ने में कामयाब नही हो सका. तड़पति हुई घर पहुँची तो यह महारानियाँ दोनो अपनी-अपनी आप बीती एक दूसरे को सुना रही थीं और मैं चुप खड़ी सुनती रही. मेरी जलती आग में यह घी डालती रहीं और मैं जलती रही. यह सब सुनकर नाज़िया और मरियम दोनो के चेहरे पर छाए परेशानी के बादल छट गये और दोनो एक दूसरे को देख कर हल्के से मुस्कुराने लगीं. ज़ाकिया बोले जा रही थी कि अल्लाह-अल्लाह करके अब टाइम आया है और तुम पूछ रहे हो के मैं क्या कहना चाह रही हूँ? मैं बड़ी हूँ और पहले मेरी आग को बुझाओ फिर कुच्छ और करना. मैं मुस्कुराते हुए आगे बढ़ा और उसको अपनी बाहों में भरकर कहा के मना किसने किया है ज़ाकिया रानी और उसको अपने साथ चिपका कर उसके गुलाब की पट्टियों जैसे दोनो होंठ अपने होंठों मे क़ैद कर लिए और चूसने लगा. अपनी जीभ उंनपर फेरी तो वोकाँप उठी और मुझे अपनी बाहों में कस लिया. मैने मरियम को कहा के दरवाज़ा लॉक कर्दे.

वो खुशी खुशी गयी और जैसे ही उसने दरवाज़ा लॉक किया मैने कहा के तुम तीनो अपने अपने कपड़े उतार कर बिल्कुल नंगी हो जाओ और मैं अपने कपड़े भी उतारने लग गया. तीनो ने सारे कपड़े उतार दिए और मेरा बेडरूम जैसे रोशनी से भर गया. तीन कड़क जवान गोरी चित्ति लड़कियाँ नंगी मेरे आगे खड़ी थीं और मेरा लंड क़िस्सी साँप की तरह अपना फन उठाकर उनको सलामी दे रहा था. ज़ाकिया मेरे लंड को बड़ी दिलचस्पी से देख रही थी और बोली के वाह तुम्हारा औज़ार तो बहुत बढ़िया लगता है. अभी देखते हैं इसकी धार. मैने कहा के घबराओ मत तुम तीनो को दो-दो बार तो ठंडा कर ही सकता है कम-से-कम. वो बोली के कहने और करने में बहुत फ़र्क होता है राज करो तो जानें. मैने आगे बढ़ कर उसको पकड़ा और बेड पर ले आया. उसको सीधा लिटा दिया और मरियम और नाज़िया को बोला के इसके मम्मे चूसो और चूस-चूस कर लाल कर दो और इसके पूरे बदन को भी प्यार से सहलाओ. इसको इतना उत्तेजित करो के यह छटपटाने लगे पर तुम डरना नही और रुकना भी नही. मज़ा इसको तभी आएगा जब यह पूरी तरह से उत्तेजित हो जाएगी.

दोनो ने ज़ाकिया को जाकड़ लिया और मेरे कहे का अनुसरण करने लगीं. मैने नाज़िया से कहा के इसके नीचे दो तकिये लगा दो जैसे तुम्हारे नीचे लगाए थे. उसने जल्दी से तकिये लगाए और अपने काम में लग गयी. मैने उसकी टाँगें उठा कर अपने कंधों पर लटका दीं और उसकी चूत की दरार में अपनी जीभ चलाने लगा. तिहरे आक्रमण से वो बहुत जल्दी उत्तेजित हो गयी और छटपटाने लगी और हााआआं हुउउउउउउउउउउउउउन ऊऊऊऊऊऊऊऊओ की आवाज़ें निकालने लगी. मैने अपने दोनो हाथों से उसकी चूत को खोला और मैं देखता ही रह गया उसकी चूत का नज़ारा. हल्के गुलाबी रंग की पंखुड़ीयाँ और अंदर गहरे लाल रंग की उसकी चूत जो उसकी बढ़ती उत्तेजना के कारण गीली हो चुकी थी और फड़फदा रही थी. मैने अपनी एक उंगली उठाकर उसकी पुट्तियों को सहलाया और उसके दाने के आसपास फिराना शुरू कर दिया. वो काँपने लगी और बोली के हाए रीईईईईईईईईई नाज़ी तू सच बता रही थी के बड़ा मज़ा आता है. मैं तो हवा में उड़ रही हूँ और डर लग रहा है कहीं गिर ना जाऊ. मेरी आग और बढ़ गयी है जल्दी कुच्छ करो राज. मैने उसके दाने को उंगली से सहलाया तो वो और काँपने लगी. फिर मैने उसके दाने को सहलाते सहलाते उसकी चूत अपने मुँह से पूरी धक दी और अपनी जीभ को अंडा डाल कर दबाने लगा. वो कराह उठी और उसने कोशिश की के अपनी चूत को मेरे मुँह पर दबा दे पर जिस पोज़िशन में वो थी वो ज़्यादा हिल नही सकती थी.

मैने अपनी जीभ से उसे चोदना शुरू कर दिया. बहुत जल्दी वो उत्तेजना की ऊँचाइयाँ छूने लगी. हाआआआआअँ आईसीईईईई हीईीईईईईईईईईईईईईईईईईई करूऊऊऊऊऊऊओ, माआआआआआऐं गइईईई, माआआआअर डूऊऊऊऊ, मेरिइईईईईईईईई चूऊऊऊऊथ, ईईईईई क्य्ाआआआआआ हूऊऊऊऊऊ गय्ाआआआअ मुझीईईईईई, आआआआअँ आआआआअँ आआआआअँ. और उसकी चूत काबाँध टूट गया और वो झाड़ गयी. मैने अपने मुँह को नही हटाया और उसकी चूत को चाटना चालू रखा. थोड़ी ही देर में वो फिर से उत्तेजित होने लगी तो मैने उसकी टाँगें नीचे करके तकिये हटा दिया. जेल की ट्यूब उठाकर उसकी चूत मैं अंदर तक जेल लगा दी और थोड़ी सी अपने लंड पर भी लगाकर उसे चिकना कर दिया. फिर अपने लंड को उसकी चूत पर रगड़ना शुरू किया, नीचे से ऊपेर और ऊपेर से नीचे. उसकी चूत पाओ रोटी की तरह फूल गयी थी और झटके लेकर खुल-बंद हो रही थी. चूत के छ्ल्ले पर अपने लंड का सुपरा रख कर मैने दबाव डाला तो आधा टोपा अंदर चला गया. मैने बाहर निकालकर फिर अंदर डाला तो थोड़ा और अंदर चला गया. फिर मैं उसे ऐसे ही आगे पीछे करने लगा. आगे करते उसका छल्ला अंदर दबाता और मैं हल्का सा झटका देता तो मेरा लंड एक-दो सूत और अंदर चला जाता और बाहर करता तो उसका छल्ला बाहर को आता पर मैं लंड को बाहर नही आने देता. 4-5 बार ऐसा करने पर मेरे लंड का सुपरा और एक इंच लंड उसकी चूत में घुस गया और मैने वही एक इंच लंड अंदर बाहर करना शुरू कर दिया.

एक-दो धक्कों के बाद मैं हल्का सा ज़ोर बढ़ा देता और थोड़ा थोड़ा करके मेरा लंड उसकी कुंआरी झिल्ली तक पहुँच गया और वो बोली के बस दर्द होता है. मैने कहा के पहली चुदाई है एक बार तो दर्द होगा ही. उसके बाद तुम्हे मज़ा ही मज़ा आएगा और दर्द कभी नही होगा. मैं अपनी पोज़िशन सेट करके उतना ही लंड अंदर बाहर करने लगा और जब वो पूरी तरह से मस्ती में आ गयी तो मैने अपना लंड सुपारे तक बाहर निकाल कर एक पूरी ताक़त लगाकर धक्का मारा और मेरा लंड गकच करके ज़ाकिया की सील तोड़कर अंदर घुस गया. ज़ाकिया की एक ज़ोरदार चीख निकली जिसे मरियम ने अपना मुँह उसके मुँह पर रख के बंद कर दिया. मैने अपना हाथ नीचे लाकर उसके दाने पर अपना अंगूठा रख दिया और रगड़ने लगे. उधर वो दोनो अपनी आपी को प्यार से सहला रही थीं और थोड़ी देर में ही ज़ाकिया की उत्तेजना फिर से बढ़नी शुरू हो गयी और दर्द भी कम हो गया. बहुत टाइट चूत थी उसकी और मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मेरा लंड किसी शिकंजे में कॅसा हुआ हो. मैने ज़ोर लगा कर अपने लंड को बाहर किया और थोड़ी जेल और लगाकर वापिस अंदर डाल दिया और आहिस्ता आहिस्ता अंदर बाहर करने लगा. उसकी दोनो पुट्तियाँ मेरे लंड से चिपकी हुई थीं और जब मैं लंड को अंदर करता तो दोनो अंदर को दब जातीं और साथ ही चूत काछल्ला भी अंदर हो जाता और जब मैं लंड को बाहर निकालता तो छल्ले के साथ साथ दोनो पुट्तियाँ भी बाहर आ जातीं. घर्षण का आनंद बहुत ही अधिक आ रहा था.

अभी मेरा लंड आधा अंदर जाना बाकी था. हर 4-5 धक्कों के बाद मैं थोड़ी जेल अपने लंड पर और लगा देता और साथ ही आधा इंच लंड को और अंदर घुसा देता. इस तरह करते करते मेरा लंड जड़ तक अंदर घुस गया और उसकी बच्चेदानी से जेया टकराया. टकराते ही ज़ाकिया ने एक ज़ोर की झुरजुरी ली और बोली यह क्या हुआ तो मैने कहा के लंड पूरा अंदर घुस गया है और उसकी बच्चेदानी से जा टकराया है इसलिए उसे गुदगुदा गया है. वो बोली के बहुत अच्छा लग रहा है करते रहो. अपनी बच्चेदानी के मुँह पर मेरे लंड की 8-10 ठोकरें ही वो सह पाई और उसका पूरा शरीर अकड़ गया और वो एक बहुत ही लंबी आआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआः के साथ झाड़ गयी. झटके खाते उसके शरीर के साथ उसकी चूत भी खुलने और बंद होने लगी. जब तक वो झड़ती रही मैं अपना लंड उसकी चूत में जड़ तक डाल कर निश्चल पड़ा रहा और हाथ बढ़ा कर उसके मम्मे अपने हाथों में पकड़ लिए. बहुत ही प्यारा पहला स्पर्श था उसके मम्मों का. जैसे दो कच्चे अमरूद मेरे हाथों में आ गये थे पर इतने चिकने थे उसके मम्मे के मेरे हाथों से फिसले जा रहे थे. उसके अंगूरी निपल मैने अपने अंगूठों और उंगलियों में दबाए तो उसकी एक मादक आआआआआआः निकली.

झड़ने के बाद उसने अपना शरीर ढीला छ्चोड़ दिया था और अब एक बार फिर से उसकी उत्तेजना बढ़ने लगी थी. मैने अपना लंड दो इंच बाहर निकालकर वापिस अंदर पेलना शुरू कर दिया और थोड़ी देर तक उसे ऐसे ही चोद ता रहा. कुच्छ समय में ही उसने भी अपनी गांद उठाकर मेरे लंड का स्वागत करना शुरू कर दिया और मैं अपना लंड पूरा बाहर निकालकर पेलता रहा. जब मैं अपना लंड बाहर निकालता तो सिर्फ़ टोपा अंदर रह जाता और मैं वापिस अंदर घुसा देता. लंड जब अंदर घुसना शुरू होता तो वो अपनी गांद उठाना शुरू कर देती और फिर हमारे शरीर आपस में टकराते. चुदाई का मस्त संगीत कमरे में गूँज रहा था. फॅक-फॅक फॅक-फॅक और मेरी गोलियों की थैली उसकी गांद से टकराती तो पाट-पाट की आवाज़ होती. मैं जानता था की अब मैं और ज़्यादा देर तक नही रुक सकता, इसीलिए मैने अपने धक्कों की रफ़्तार कम ही रक्खी थी ताकि मेरी उत्तेजना ज़्यादा ना बढ़े. पर ज़ाकिया की उत्तेजना बढ़ती जा रही थी और अब उसे चुदाई का भरपूर मज़ा आ रहा था. दर्दका नाम-ओ-निशान ख़तम हो चुका था. हम तीनों के मिलेजुले प्रयास उसकी उत्तेजना को बढ़ाते जा रहे थे और वो उचक उचक कर चुदवा रही थी.

फिर वही हुआ जो होना था. ज़ाकिया ने बोलना शुरू कर दिया. मार दो मेरी चूत को, फाड़ दो मेरी चूत को. हाए राज तुम्हारा लंड तो बड़ा प्यारा है रे, ऐसे रगड़ कर अंदर बाहर हो रहा है के बहुत मज़ा आ रहा है. फिर उसकी साँसें अटकने लगीं और वो माआआआआआऐं गइईईईईईई रीईईईईईईई, पकड़ लूऊऊऊऊऊऊ मुझीईईईईई, माआआआआआ ईईईईई कैसाआआआआ मज़ाआआआआआअ हाआआआआआआआई, रोमीीईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईई मेरईईईईईईय रजाआाआआआ माआआआआईं गइईईई. और वो झाड़ गयी. मैं तो पहले ही तैयार था सो मैने भी उसके बोलते ही अपनी रफ़्तार खूब तेज़ करदी थी. 10-12 ज़ोरदार धक्को के साथ ही मैं भी अपने चरम पर पहुँचा और अपना लंड उसकी चूत में जड़ तक डाल के अपने गरम गरम वीर्य की पिचकारियाँ उसकी चूत में छ्चोड़ने लगा. मेरा लंड उसकी बच्चेदानी से सटा हुआ था और वीर्य की गरम गरम धार उसकी बच्चेदानि के मुँह पर पड़ी तो वो काँप कर एक बार और झाड़ गयी और अपने शरीर को ढीला छ्चोड़ दिया. मैं भी उसके ऊपेर गिर गया और मुझे नाज़िया और मरियम ने ज़ाकिया के साथ जाकड़ लिया.

जब हम दोनो संयत हुए तो मैने मरियम से कहा के ज़ाकिया के लिए हॉट वॉटर ट्रीटमेंट का इंटेज़ाम करे तो वो तुरंत उठी और बाथरूम में चली गयी. मैं खड़ा होकर बेड से नीचे उतरा और ज़ाकिया को भी उठने को कहा. नाज़िया को कहा के इसको सहारा देना पड़ेगा तो वो बहुत हैरान हुई. मैने कहा के होता है पहली चुदाई के बाद ऐसा ही होता है अगर चुदाई ढंग की हो तो लड़की अपने आप खड़ी नही हो सकती. नाज़िया की आँखों में लाल डोरे तेर रहे थे तो मैने उसको तसल्ली दी और कहा के घबराओ नही अब अगला नंबर तुम्हारा है. तुमने देख ही लिया है कि चुदाई कैसे होती है और कितना दर्द होता है जब लंड चूत में पहली बार जाता है और फिर उसके बाद कितना मज़ा आता है. पूच्छ लो ज़ाकिया से. ज़ाकिया ने शर्मा कर आँखें बंद कर लीं. फिर हम दोनो उसको पकड़ कर बाथरूम में ले गये और उसको गरम पानी के टब में बिठा दिया जिसमे मैने एक शीशी से थोड़ा अस्ट्रिंजेंट लोशन मिला दिया था. वो टब में बैठ गयी और मैने उससे कहा के जब तक पानी ठंडा ना हो जाए वो इसमे बैठी रहे और अपनी चूत की सिकाई करे. फिर खड़ी होकर चेक करे कि ज़्यादा दर्द तो नही है. अगर ज़्यादा दर्द हो तो एक बार और गरम पानी की सिकाई करनी पड़ेगी. तुम सिकाई करो और मैं नाज़िया की खबर लेता हूँ कहकर नाज़िया को लेकर बाहर आ गया. हमारे पीछे पीछे मरियम भी आ गयी और हम तीनों बेड पर आ गये. नाज़िया हमारे बीच में थी.

मैने नाज़िया की गर्दन के नीचे से अपना बयाँ हाथ डाल कर उससे ऐसे अपने पास किया की उसकी पीठ मेरी छाती से लग गयी और मेरा हाथ उसके सख़्त बायें मम्मे पर आ गया. उसका दूसरा मम्मा अपने दायें हाथ में लेकर दबाना शुरू किया. वो ज़ाकिया की चुदाई देखकर बहुत गरम हो चुकी थी. मेरे द्वारा मम्मों को दबाए जाने पर वो सीत्कार कर उठी और अपना हाथ मेरे सर पर लाकर मेरे सर को अपने माम्मे पर झुका लिया. मैं समझ गया और बढ़कर उसके मम्मे को अपने मुँह में ले लिया. उसका अंगूर के जैसा निपल सर उठाए खड़ा था और मेरे मुँह में आते ही मैने उसे अपने दाँतों से हल्का सा दबाया और उसकी नोके पर अपनी जीभ को फिराया तो वो तड़प उठी. उसका भरा हुआ बदन मुझे स्पर्श सुख का बहुत ही मादक एहसास करा रहा था. मरियम को मैने कहा के मेरे लंड को अपने मुँह की गर्मी से गरम करो ताकि यह नाज़िया की चूत का उद्घाटन कर सके. मरियम ने तुरंत मेरे कहे का पालन किया और आकर मेरे लंड को अपने हाथ में लिया और दूसरे हाथ से मेरी गोलियों को सहलाने लगी और अपनी जीभ से मेरे लंड को चाटना शुरू कर दिया. मेरे लंड पर उसकी जीभ ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया और मेरे खून ने मेरे शरीर में अपनी रफ़्तार बढ़ा दी और वो डेकशिनेयन होकर मेरे लंड में भरने लगा. जैसे जैसे मरियम की जीभ मेरे सुपारे को चाट रही थी वैसे वैसे मेरे लंड में खून का संचार बढ़ रहा था और वो अकड़ना शुरू हो गया था.

मैने अपना एक हाथ बढ़कर मरियम के अपेक्षाकृत छ्होटे पर कड़क मम्मे को दबाया और उसको प्यार से पूछकर कर कहा कि सेवा का मेवा तुमको अभी दूँगा और आज तुम्हारी भी मस्त चुदाई करके तुमको बहुत मज़ा दूँगा. वो पूरे जोश से मेरे लंड को अपने मुँह में भरकर चूसने लगे. मेरा लंड अब पूरी तरह से अपने स्वरूप में आ गया था और झटके खाने लगा था. मैने मरियम को रोका और कहा के अब नाज़िया की चूत को मेरे लंड के लिए तैयार करे. मरियम ने मेरा लंड अपने मुँह से एक पोप की आवाज़ के साथ निकाला और नाज़िया की चूत पर अपना मुँह टीका दिया. नाज़िया ने एक झुरजुरी ली और अपनी दोनो टाँगें खोलकर अपनी चूत उठाकर मरियम के मुँह पर चिपका दी. उधर मैं अपने दोनो हाथों में उसके दोनो मम्मों को मस्सलने लगा और साथ ही उसको डीप किस करना शुरू कर दिया. नाज़िया तेज़ी से गरम होती जा रही थी. वासना की आग ने उसके जिस्म को पूरी तरह से अपने आगोश में ले लिया था और वो च्चटपटाने लगी थी. उसने अपना मुँह मेरे मुँह से अलग करके कहा अब और कितना तडपाओगे. अब रहा नही जा रहा जल्दी से मुझे चोदो और अपने लंड से मेरी चूत की चटनी बना दो. [/color]
 
[color=rgb(41,]मैने उसकी हालत पर तरस खाते हुए उसकी दोनो टाँगों के बीच आ गया और उसकी टाँगें खोल कर उसकी चूत को देखने लगा. चूत मरियम के चूसने से काफ़ी गीली हो चुकी थी और फूल कर कुप्पा हो गयी थी. मैने जेल की ट्यूब उठा कर जेल उसकी चूत और अपने लंड पर लगा दी और अपने लंड को उसकी चूत की लकीर पर रगड़ने लगा. लंड को मैने अपने हाथ में पकड़ा हुआ था और लंड के टोपे को उसकी चूत की दरार में दबा के रगड़ रहा था. नीचे से ऊपेर और ऊपेर से नीचे. जब मेरे लंड की दबाव वाली रगड़ उसस्के भज्नसे पर पड़ती तो वो अपनी चूत को ऊपेर उठा देती. फिर मैने अपने लंड का टोपा उसकी चूत के मुहाने पर रखा और दबाव डाला तो सुपरा उसकी चूत के छल्ले को फैला कर अंदर घुसा तो नाज़िया एक बार काँप गयी. मैने थोड़ा दबाव और डाला तो लंड एक इंच और अंदर चला गया. नाज़िया का जिस्म भरा हुआ होने केकारण उसकी चूत बहुत टाइट थी और मेरे लंड को उसने ज़ोर से पकड़ रखा था. मैने ऐसे ही 5-6 घस्से मारे अपने लंड को एक इंच अंदर बाहर करके तो नाज़िया को मज़ा आना शुरू हो गया और वो मस्ती में चिल्लाई हां हां ऐसे ही करो बहुत मज़ा आ रहा है. मैने कहा के नाज़िया अभी जब मैं अपना लंड तुम्हारी चूत में और अंदर डालूँगा तो तुम्हारी सील टूट जाएगी और सील टूटने पर दर्द भी होगा.

मरियम को मैने कहा के नाज़िया के मुँह पर बैठ जाए और अपनी चूत उसके मुँह पर लगा दे. नाज़िया को बोला के मरियम की चूत को अपनी जीभ से चाट कर और चोद्कर मरियम को गरम करदो ताकि तुम्हारे बाद मैं इसको भी चोद सकूँ. फिर मैने उसको कहा के मेरी पूरी कोशिश होगी के तुम्हें दर्द कम से कम हो जब मैं तुम्हारी चूत मैं अपना लंड पेलूँगा पर दर्द तो होगा ही और वो तुमको सहना पड़ेगा. क्या तुम उसके लिए तैयार हो? वो बोली के हां मैं तो 3 दिन से तैयार हूँ पर तुम हो की मेरा कोई ख़याल ही नही कर रहे हो. आज कुच्छ भी हो जाए मेरी चूत को अच्छी तरह से चोद कर मुझे लड़की से औरत बना दो राज्ज्जज्ज्ज्ज्ज्ज्ज मैं और नही रुक सकतिईईईईईईईईईईईई. उसके इस तरह के इसरार पर मैं अपने आप को रोक नही पाया और अपने लंड को बाहर खीच कर अपनी पूरी ताक़त से अंदर घुसाने के लिए एक भरपूर ज़ोरदार धक्का मारा और मेरा लंड उसकी सील को तोड़कर आधे से ज़्यादा उसकी चूत में घुस गया. नाज़िया के मुँह से निकली चीख मरियम की चूत में दबकर रह गयी.

नाज़िया की आँखों से आँसू बहने लगे और बेड पर गिरने लगे. मैं रुक गया और अपने हाथों से उसके जिस्म को सहलाने लगा. उसके दोनो मम्मो को भी सहालाया और दबा कर उनके निपल्स को भी अपनी उंगली और अंगूठे के बीच में लेकर मस्सला. फिर जब उसका दर्द कुच्छ कम हुआ और उसकी साँसें नॉर्मल चलने लगीं तो मैने अपने लंड को उसकी चूत में हल्के हल्के घिसना शुरू किया. मतलब यह कि मेरा लंड आगे पीछे तो हो रहा था पर अंदर बाहर नही हो रहा था. उसकी चूत के छल्ले ने मेरे लंड को जहाँ से पकड़ रखा था वहीं था बस हल्का सा आगे पीछे होने से छल्ला और उसकी गुलाबी पुट्तियाँ अंदर बाहर हो रही थीं और उतना ही मेरा लंड आगे पीछे हो रहा था. इस हल्के घिस्सों से नाज़िया को मज़ा मिलना शुरू हुआ और वो भी अपनी गांद को हिलाने लग गयी और मैने भी अपने लंड को थोड़ा और अंदर बाहर करने लगा. मैने थोड़ा और अंदर करने की कोशिश में दबाव बढ़ाया तो नाज़िया ज़ोर से उूुुुुुुुुुउउन्ह कर उठी. मैं रुक गया और दबाव कम कर दिया. ऐसे ही अंदर बाहर करने पर नाज़िया की चूत में नॅचुरल ल्यूब्रिकेशन से मेरा लंड आराम से अंदर बाहर होने लगा.

फिर मैने मौका देखकर अपना लंड सुपारे तक बाहर खींचा और पूरी ताक़त से अंदर घुसेड दिया. लंड सीधा उसकी बच्चेदानी के मुँह से जा टकराया और नाज़िया एक बार फिर चीख नही सकी क्योंकि मुँह तो मरियम की चूत ने दबा रखा था. नाज़िया ने दोनो हाथों से ज़ोर लगा कर मरियम को हटा दिया और रोते हुए बोली के मार डालोगे क्या मुझे. चूत मारने की थी जान से मारने की थोडा ना कही थी. मेरी हँसी निकल गयी नाज़िया की बात सुनकर और मैने उसको बड़े प्यार से कहा कि जानू चूत ही मार रहा हूँ और घबराओ मत तुम्हें मरने भी नही दूँगा. अब लंड तुम्हारी चूत में पूरा घुस चुका है और जितना दर्द होना था हो गया. अब तुम्हें कभी भी लंड लेने में दर्द नही होगा. आराम से चुदवा सकती हो बिना किसी डर या दर्द के. थोड़ी देर में तुम्हारा दर्द ख़तम हो जाएगा और उसकी जगह तुमको मज़ा आना शुरू होगा और वो ऐसा मज़ा होगा जो तुम्हें पिछले दो दिनों में भी नही आया होगा. मैने उसके मम्मे अपने हाथों में लेकर सहलाने शुरू कर दिए और धीरे धीरे उसका दर्द कम होने लगा और दर्द की जगह उसके चेहरे पर एक हल्की सी कामुक मुस्कुराहट आ गयी.

जब मैने देखा कि उसका दर्द कम हो गया है और उसका जिस्म अब पहले से ढीला पड़ चुक्का है तो मैने अपने लंड को थोड़ा सा 2 इंच के करीब बाहर निकालकर अंदर डाला और ऐसे ही पेलने लगा. थोरी देर में ही नाज़िया भी नीचे से अपनी गांद हिलाने लगी. आहिस्ता आहिस्ता मैने अपनी रफ़्तार के साथ साथ ज़ोर भी बढ़ाना शुरू कर दिया. अपने लंड को अंदर बाहर करने की लंबाई भी बढ़ानी चालू कर दी. 15-20 धक्कों के बाद ही मेरा लंड सुपारे तक तेज़ी से बाहर आता और उतनी ही तेज़ी से और ज़ोर से अंदर घुस जाता. जब लंड अंदर घुसता तो नाज़िया भी अपनी गांद उठाकर उसका स्वागत करती. 10-15 मिनट की जोशीली चुदाई में नाज़िया चार बार झाड़ गयी. जब वो झड़ने लगती मैं अपनी रफ़्तार बहुत ही धीमी कर देता और जैसे ही उसका झड़ना बंद होता मेरी रफ़्तार वापिस तेज़ हो जाती. चौथी बार झड़ने के बाद उसने मुझे रोक दिया कि बस अब और नही. मैने भी पहली चुदाई होने के कारण रोक लिया और अपने लंड को बाहर निकाल लिया. मेरा लंड बाहर निकल कर उच्छलने लगा जैसे नाराज़ हो तो मैने कहा के रुक जाओ दोस्त अभी तुम्हें मरियम की प्यारी चूत को खोदने का मौका मिलेगा नाराज़ मत हो मेरे यार.

मैने मुड़कर देखा तो ज़ाकिया बाहर आ चुकी थी और मस्ती में हमे देख रही थी. मैने नाज़िया को सहारा देकर उठाया और बाथरूम में ले आया. तब तक मरियम टब में गरम पानी भर चुकी थी. आस्त्रगेन्त लोशन डाल कर मैने नाज़िया को उस में बिठा दिया और कहा के जब तक पानी ठंडा ना हो जाए अपनी चूत की सिकाई करती रहे. अब मरियम की बारी थी. मैने मरियम की ओर देखा तो वो बड़ी हसरत भरी निगाहों से मुझे देख रही थी और मुझसे नज़र मिलते ही उसने मुस्कुरा कर अपनी आँखें झुका लीं. मैने आगे बढ़कर उसको अपने साथ चिपका लिया और वो एक झुरजुरी लेकर मुझसे लिपट गयी. मैं उस फूल जैसे हल्के बदन को उठाकर बेडरूम में आ गया और बेड पर ले आया. उसने अपनी दोनो बाहें मेरे गले में डाल दी थीं और उसके छ्होटे छ्होटे मम्मे मेरी छाती पर मचल रहे थे और मरियम का चेहरा आवेश में तमतमा रहा था. ज़ाकिया ने आगे बढ़कर उसकी पीठ सहलाते हुए कहा के लाडो अब तू जी भर के चुदवा ले और मैं तेरी पूरी मदद करूँगी. जो तू कहेगी मैं वैसे ही करूँगी. मरियम को मैने बेड पर लिटा दिया और उसके साथ ही मैं भी लेट गया. ज़ाकिया उसके दूसरी तरफ आ गयी और उसके मम्मे को मुँह में भर कर चूसने लगी. मरियम सीत्कार कर उठी और च्चटपटाने लगी. उसने काटर दृष्टि से मुझे देखा और मैने देर करना उचित नही समझा और सीधा उसकी टाँगों के बीच में आ गया.

मैने अपना आकड़ा हुआ लंड अपने हाथ में लेकर उसकी चूत की दरार में फिराना शुरू कर दिया. वो सिसकारियाँ लेने लगी. मैने हल्के से अपने लंड को उसकी चूत के मुहाने पर रख कर दबाया तो गकच करके सुपरा अंदर घुस गया और वो चिहुनक गयी. मैने हल्का सा दबाव डाला तो मेरा लंड उसकी चूत में अंदर घुस्सने लगा. उसकी आँखें मूंद गयीं और वो गहरी साँसें लेने लगी. 3-4 इंच लंड अंदर चला गया तो मैने उसे टोपे तक बाहर खींचा और एक हल्का सा धक्का मारा. लंड 6-7 इंच अंदर घुस गया और मरियम के मुँह से हुउऊँ की आवाज़ निकली. मैने पूछा के दर्द हो रहा है क्या? तो वो बोली के नही दर्द तो नही हो रहा पर भारी भारी लग रहा है. उसकी चूत की ग्रिप मेरे लंड पर बहुत टाइट थी तो मैने कहा के भरा हुआ तो लगेगा ही तुम्हारी चूत मेरा लंड खा रही है तो कुच्छ तो लगेगा ही ना. तो वो मुस्कुरा दी और बोली के अब जल्दी जल्दी चोद डालो मुझसे रुका नही जा रहा. मैने कहा के एक बार लंड पूरा तुम्हारी चूत में अड्जस्ट हो जाए फिर तुम्हे जन्नत के मज़े करवा दूँगा मेरी रानी.

मैने अपने लंड को अंदर बाहर करना शुरू कर दिया और आहिस्ता आहिस्ता हर धक्के पर थोड़ा और अंदर करते करते थोड़ी देर में ही पूरा लंड उसकी चूत में पेल दिया. जैसे ही मेरा लंड पूरा मरियम की चूत में घुसा मैने अपने हाथ उसकी मुलायम गांद के नीचे लगाकर उसकी गांद को कस के पकड़ लिया और धक्के लगाने लगा. मरियम आनंद विभोर होकर बोली के हाँ ऐसे ही मारो मेरी चूत में आग लग रही है इसकी आग बुझा दो. मैने कहा के अभी तुम्हारी चूत की आग को ठंडा करता हूँ मेरी रानी और मैने उसके चूतड़ उठाकर अपने लंड से लंबे लंबे शॉट लगाने शुरू कर दिए. धीरे धीरे मेरी रफ़्तार भी तेज़ होती गयी और फिर इतनी तेज़ हो गयी के पता ही नही लग रहा था कब लंड अंदर और कब लंड बाहर हो रहा है. ज़ाकिया उसके मम्मों को दबाती चूस्टी आँखें फाड़ कर चुदाई का नज़ारा ले रही थी जैसे डर रही हो कि इतने भयंकर धक्के और वो भी इतनी तेज़ी से उसकी छ्होटी बेहन कैसे सह पाएगी, कहीं उसकी चूत ही ना फॅट के दो टुकड़े हो जाए.

कुच्छ देर बाद मरियम हाआआआआआआआं हाआआआआआआआं करती हुई झड़ने लगी. उसका शरीर झटके खाने लगा और उसकी चूत की पकड़ मेरे लंड पर बढ़कर कम होने लगी. मेरा लंड उसकी चिकनी हो चुकी चूत में और आसानी से अंदर बाहर होने लगा और मुझे लगा के मैं ज़्यादा देर तक नही रुक सकूँगा तो मैने उसके झड़ने के दौरान अपनी रफ़्तार कम करदी. मरियम संयत हुई तो उसने अपनी आँखें खोल कर मेरी और देखा और मुस्कुरा दी. क्या मस्त और क़ातिल मुस्कुराहट थी. फिर वो बोली कि अभी और भी चोदोगे? मैने भी वैसे ही मुस्कुराहट के साथ जवाब दिया कि अगर तुम नही चाहती तो रहने दो. वो एकदम बोली की नही नही मैं तो सिर्फ़ पूछ रही थी की कहीं तुम थक तो नही गये. मैने कहा के जब तुम तीनो बहनों जैसी खूबसूरत और कड़क जवान लड़कियाँ इतने प्यार और इसरार से चुदवा रही हों तो कोई चूतिया ही थकेगा. तो वो हंस पड़ी और बोली की चोदो आज मुझे जी भर के चोदो. कल से आग लग रही थी मेरी चूत में और दो बार उंगली करके भी खुजली ख़तम नही हुई थी. आज फाड़ दो इसको. मैने कहा के फाड़ दूँगा तो चोदुन्गा किसको? हां खुजली मिटा दूँगा ये मेरा वादा है.

उधर ज़ाकिया उसके मम्मों को लगातार दबाए और चूसे जा रही थी जिस कारण वो फिर मस्ताने लगी और उसकी आँखें फिर से कामुकता से लाल होकर चढ़ने लगीं. मैने ज़ाकिया से कहा के तुम ज़रा नाज़िया की खबर लो वो ठीक तो है और मैं तब तक इसकी चूत की गर्मी निकालता हूँ. ज़ाकिया उठकर बाथरूम में चली गयी और मैने मरियम की गांद को वापिस बेड पर टीका दिया और उसकी टाँगें उठाकर अपनी बाहों पर लटका दीं और अपने हाथ उसकी बगलों से लेजाकर नीचे से उसके कंधों पर ले आया और मज़बूती से उसके कंधे पकड़ लिए. इस तरह उसकापूरा जिस्म दोहरा हो गया और उसकी गांद अपने आप ही हवा में उठ गयी जिसे वो चाह कर भी नीचे नही कर सकती थी और हिला भी नही सकती थी. उसकी चूत अब पूरी खुल कर मेरे सामने थी और मेरे लंड के प्रचंड धक्के झेल रही थी. अब मैने अपने धक्कों की रफ़्तार थोड़ी बढ़ा दी तो मरियम जो पूरी तरह से अब मेरे रहम-ओ-करम पर थी हाआआआआआं आईसीईईईईई हीईीईईईईईईईईईईईईईईई करूऊऊऊऊऊओ ज़ूऊऊऊऊओर ज़ूऊऊऊऊओर सीईईईईईई चूऊऊऊऊदूऊऊऊऊऊऊ. आआआआआआआ आआआआआआअँ माआआआआआईं फिररर्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्ररर झड़नीईईईई वालिइीईईईईईईईईईईईईई हूऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊं. उसका जिस्म एक बार फिर अकड़ गया और वो झड़ने लगी और उसकी चूत ने मेरे लंड पर फिर से अपना दबाव बढ़ाना और कम करना शुरू कर दिया जिसके चलते मैं भी झड़ने को हो गया. मैने उसके झड़ने की परवाह ना करते हुए 8-10 धक्के पूरे ज़ोर से मारे और झाड़ गया. मैने अपने लंड पूरा जड़ तक उसकी टाइट चूत में डाल दिया और अपने वीर्य की पिचकारियाँ उसकी बच्चेदानि के मुँह पर मारने लगा.

उसकी दोनो टाँगें मैने आज़ाद करदी तो वो बेजान सी मेरे दोनो तरफ गिर पड़ीं. मैने अपने हाथ उसके छ्होटे छ्होटे सख़्त अमरूदों पर रख दिए और उनके निपल्स को अपनी उंगलियों और अंगूठों में दबा कर मसल्ने लगा. फिर हम दोनो के जिस्म ढीले पड़ गये और मैं उसकी बगल में लुढ़क गया और उसको अपने ऊपेर खींच लिया. मरियम को अपनी बाहों में कस्स के मैने उससे डीप किस करना शुरू कर दिया. उसके मम्मे मेरी छाती को गुगुडाते रहे और वो आँखें बंद करके झड़ने के बाद की तृप्ति का आनंद लेने लगी. ज़ाकिया और नाज़िया ने हमारे दोनो तरफ से हमको अपनी बाहों में ले लिया और हमारे साथ चिपक गयीं. 5 मिनट के बाद हम सब अलग हुए तो मैने ज़ाकिया और नाज़िया से पूछा के हां अब बताओ कैसी रही तुम्हारी पहली चुदाई. दोनो ने मुस्कुराते हुए कहा के हमें नही पता था कि इतना मज़ा आता है चुदवाने में.

मैने ज़ाकिया को अपने पास बुलाया और उसको अपने साथ चिपका कर उसके मम्मों से खेलते हुए उससे कहा के अगले शनिवार को वो फिर जाए अपने होने वाले शौहर के पास जब वो अकेला होता है और उसको बताए के उसके पास से आकर तुमने अपनी आग बुझाने के लिए एक मोमबत्ती से अपनी सील तोड़ ली थी. साथ ही उसको कहना के तुम डरो नही कि जल्दी झाड़ जाओगे तो मैं क्या सोचूँगी. जल्दी झाड़ जाओगे तो मैं फिर से तुम्हारे लंड को सहला कर चूम कर खड़ा कर लूँगी और फिर तुम अच्छे से चुदाई कर सकोगे और इतनी जल्दी झदोगे भी नही. मेरी सहेली ने मुझे बताया है कि डरने की कोई बात नही है धीरे धीरे सब ठीक हो जाएगा. ज़ाकिया बड़ी खुश हुई और बोली के क्या वाकई सब ठीक हो जाएगा. तो मैने उसको कहा के हां इस उमर में जिस्मानी कमज़ोरी नही होती यह ज़हनी डर है जिसकी वजह से वो जल्दी झाड़ गया. अगर तुम उसको इस तरह तसल्ली दोगि तो उसका डर भी कम हो जाएगा और वो ठीक भी हो जाएगा. ज़ाकिया बहुत खुश हुई और उसने मुझे अपनी बाहों में कस के एक ज़ोरदार बोसा दिया मेरे होंठों पर. ज़ाकिया बोली के ठीक है मैं ऐसा ही करूँगी पर शादी से पहले एक बार तुमसे और चुदवाना चाहूँगी अगर तुम चाहो तो. मैने कहा के मेरी जान जब भी तुम्हारा दिल करे चुदवा लेना मैं हसीन लड़कियों को कभी मना नही करता. इस पर हम सब हंस पड़े और फिर हमने अपने अपने कपड़े पहने और वो चली गयीं.

मैं पूरी तरह से थका हुआ था और इसलिए आराम करने लगा. अगले दिन से फिर पुराना रुटीन शुरू हो गया. मैं हर दूसरे-तीसरे दिन तनवी को कुच्छ काम देकर अपने पीसी पर बिठा देता के छुट्टी के बाद या जब भी टाइम मिले वो उसको कर दे. उस दिन मैं पासवर्ड प्रोटेक्षन हटा देता. काम छ्होटा ही होता जिसमे दो घंटे से कम समय ही लगना होता. वो थोड़ा बहुत तो स्कूल टाइम में ही कर देती जब मैं राउंड पर होता और बाकी आधे-पौने घंटे का ये कहकर बचा देती कि बाकी छुट्टी के बाद करेगी. काम के साथ-साथ वो मेरे पीसी को अच्छी तरह से चेक करती पर कुच्छ ना मिलने पर खीज जाती. पर उसको मिलता कैसे, मैं अपने पीसी का ध्यान जो रखता था कि उसमे कुच्छ भी ऐसा ना हो जिसकेकारण कोई मुझे फँसा सके.

उधर मेरा दोस्त तनवी की इन्वेस्टिगेशन में लगा हुआ था और धीरे धीरे रिपोर्ट्स भी आनी शुरू हो गयी थीं. शुरू में तो तनवी के द्वारा बताई गयी सारी बातें सच निकलीं और उनमें कोई भी झूट नही पाया गया. मैं निराश हो गया था और इस तहकीकात को ख़तम ही करवाने वाला था कि एक छ्होटी सी बात ने मेरा ध्यान आकर्षित किया और वो था कि उसकी एक बेहन जो तनवी से 3 साल बड़ी है चंडीगढ़ में ब्याही हुई है और उसकी शादी उसके पापा की डेत से पहले ही हो चुकी थी. इसके बारे में उसने कभी कोई ज़िकार नही किया था और ना ही बताया था कि उसकी कोई बड़ी बेहन भी है जो कि थोड़ा अटपटा लग रहा था. मैने अपने दोस्त को उसके बारे में और अधिक जानकारी लेने के लिए कहा. वहाँ से आई रिपोर्ट्स में भी खास कुच्छ पता नही चला लेकिन सबसे अंत में आई चंडीगढ़ की फाइनल रिपोर्ट ने मुझे चौंका दिया. उसमे तनवी की बेहन का जो अड्रेस दिया हुआ था वो मेरी ससुराल के पड़ोस का था. [/color]
 
[color=rgb(41,]मैने अपने दोस्त से उसे दुबारा चेक करने के लिए कहा और ये भी पता करने के लिए कहा के तनवी की बहन की ससुराल वालों के मेरी ससुराल वालों से कैसे और क्या संबंध थे. कुच्छ दिन मे उसने मुझे फाइनल रिपोर्ट दे दी और उसमे दी गयी जानकारी सबसे अधिक चौंकाने वाली थी. तनवी का कुच्छ ना कुच्छ चक्कर मेरे साले से था और उसी के कारण मेरी ससुराल और तनवी की बहन की ससुराल वालों के जो बहुत अच्छे संबंध थे वो खराब हो चुके थे और इसी वजह से ही तनवी की बड़ी बहन ने अपने मायके से संबंध ख़तम कर लिया था. और शायद इसीलिए तनवी ने अपने बारे मे सब कुच्छ बता कर भी अपनी बड़ी बहन का कोई ज़िकार तक नही किया था. एक और बात जो खुल कर सामने आई वो ये थी के तनवी के पिता एक खानदानी वैद्य थे और उसकी ननिहाल का भी यही खानदानी काम था. अब मुझे पता चला के तनवी को देसी दवाओं की जानकारी कैसे और कहाँ से थी और उसका वो चॅलेंज जो उसकी चूत के बारे मे था, के मैं उसको चोद चोद कर कितनी भी ढीली कर दूँ वो उसको दुबारा किसी दवा के इस्तेमाल से केवल 5 दिन मे ठीक कर लेगी और ऐसी लगेगी जैसे कुँवारी लड़की की चूत होती है.

लेकिन सभी बातों का निचोड़ ये था के कहीं भी 2 और 2 मिलकर 5 नही हो रहे थे और ना ही 3 हो रहे थे. पर परेशानी ये थी के 2 जमा 2 कहीं से 4 भी तो नही हो रहे थे. मतलब ये कि मैं वापिस वहीं पहुँच गया था जहाँ से शुरू हुआ था और मुझे इतना सब कुच्छ जान कर भी ये नही पता चला था कि तनवी क्या चाहती है और उसके साथ कौन है और अगर वो किसी के लिए काम कर रही है तो वो कौन है और उसकी मंशा क्या है. मैने बहुत सोचा और इसके बारे मे मुझे कोई समाधान नही सूझा कि कैसे और क्या करने से सब पता लगे. फिर मैने अपने डीटेक्टिव फ्रेंड से ही अपनी समस्या का समाधान पूछा. उसने मुझे अपने ऑफीस मे बुलाया और मैने उसको अपने और तनवी के संबंधों को छोड़कर बाकी की सारी ही जानकारी दी और उसको पूछा के समस्या का कोई समाधान है तो बताए. वो हंस पड़ा और बोला के यार तूने पहले क्यों नही ये सब बताया. सीधा सा समाधान है के उसकी कॉल डीटेल्स निकलवा लेते हैं सब अपने आप पता चल जाएगा किसको फोन करती है और किसका फोन आता है. मैने उसको तनवी का नंबर दिया और उसने कहा के वो कॉल डीटेल्स नही ले सकता वो तो मुझे ही लानी पड़ेंगी. मैने पूछा के वो कैसे? तो उसने बताया के हमारा एक और दोस्त है जो उसी फोन कंपनी मे काफ़ी ऊँची पोस्ट पर है और शायद वो मेरी मदद कर सके.

मैने वहीं से उस दोस्त को फोन किया और तुरंत मिलने की इच्छा की और कहा के बहुत ज़रूरी काम है. उसने कहा के अभी तो वो ऑफीस मे ही है तो मैने कहा के मैं वहीं आ जाता हूँ. उसने कहा के मोस्ट वेलकम. मैं उसके ऑफीस पहुँच गया और अपना कार्ड उसके पास भेजा. उसने तुरंत मुझे अंदर बुलवाया और हाथ मिलाने के बाद मुझे बैठने को कहा और पूछा के बोलो क्या काम है? मैने उसका नॉटेपद उठाया और उसपर तनवी का नंबर लिख कर उसकी ओर बढ़ा दिया और कहा की इस नंबर की कॉल डीटेल्स चाहिए. उसने मेरी ओर देखा और बोला कि ऐसी क्या बात हो गयी तो मैने कहा के कुच्छ नही बस थोड़ी सी एंक्वाइरी करनी है. उसने कहा के अगर ये पोस्ट पैड है तो मैं पिच्छले 3 बिलिंग साइकल की रिपोर्ट तुम्हे दे सकता हूँ और अगर प्रीपेड है तो देखना पड़ेगा. मैने कहा के देखो, मेरा 3 महीने की डीटेल्स से भी काम हो जाएगा. उसने अपने कंप्यूटर मे वो नंबर फीड किया और बोला के नंबर प्रीपेड है, मैं देखता हूँ. फिर उसने और कुछ देर लगा कर कहा के राज यू आर वेरी लकी के अभी तो डीटेल्स मिल जाएँगी क्योंकि ये पुराना नंबर है और पुराने सॉफ्टवेर मे ही अभी चल रहा है. अगर तुम नेक्स्ट वीक आते तो मैं तुम्हे हेल्प नही कर पाता. फिर तो केवल डी.सी.पी. के ऑर्डर पर ही ये डीटेल्स निकाली जा सकती थीं. मैने कहा के चलो अच्छी बात है अब मुझे डीटेल्स निकाल दो. उसने कहा के उसने प्रिनटाउट ऑर्डर कर दिया है अभी पेओन लेकर आ जाएगा और बताओ क्या लोगे. फिर उसने कोल्ड ड्रिंक मंगवा ली और कोल्ड ड्रिंक आने के थोड़ी देर बाद ही पेओन प्रिनटाउट भी दे गया. मैने कोल्ड ड्रिंक ख़तम की और अपने दोस्त को कहा कि मेरे लिए कोई भी काम हो तो बेजीझक मुझे बताए. उसने हंसते हुए कहा के अगले साल... तुम्हारा बेटा और कहीं जा भी नही सकता मेरे दोस्त, मैने उसकी बात काटी. वो हंस पड़ा और बोला के राज तुम नही बदले. और ना ही बदलूँगा, कह कर मैं वापिस अपने डीटेक्टिव दोस्त के ऑफीस की ओर चल पड़ा.

वहाँ पहुँचकर मैने लिस्ट उसके सामने रख दी और उसने उसकी 3-4 फोटोकॉपीस निकाल लीं और ओरिजिनल मेरी ओर सरका दी और बोला के देख लो इसमे कोई नंबर जाना पहचाना है तो. मैने देखा तो कोई नंबर ऐसा नही लगा जो मेरी पहचान का हो. फिर हम ने लिस्ट के बारे मे विचार विमर्श किया और उसने कहा के वो पता करेगा सब पर कॉल करके और कुच्छ भी जानकारी होगी तो मुझे बताएगा. मुझे भी उसने कहा के मैं अपने फोन से वो सारे नंबर्स डाइयल करके देखूं के कोई जानकार का नंबर तो नही है उसमे. काई बार नंबर याद नही रहते पर सेव किए हुए होते हैं तो सामने आ जाते हैं और कॉल कनेक्ट होने से पहले ही काट दूँ तो कन्फर्म भी हो जाएगा और उधर किसी को पता भी नही चलेगा. मैं समझ गया और उसको कुच्छ पैसे देकर वहाँ से आ गया. वो तो नही ले रहा था पर मैने ही ज़बरदस्ती दिए क्योंकि मैं जानता हूँ की इस काम मे कितना खर्चा होता है.

मैं घर पहुँचा और लिस्ट को दुबारा स्टडी करने लगा. मुझे कोई भी नंबर पहचाना हुआ नही लगा. फिर मुझे याद आया कि तनवी ने जब पहली बार मेरे पीसी को चेक किया था तो किसी से बात भी की थी. मैने वो रेकॉर्डिंग चेक की और उसका टाइम चेक किया और कॉल लिस्ट मे उसी टाइम की इनकमिंग कॉल चेक की और वो नंबर नोट कर लिया. फिर मैने अपने दोस्त को फोन करके उसे वो नंबर दिया और कहा के मुझे इस नंबर पर शक़ है और वो इसको इन्वेस्टिगेट करके मुझे बताए कि ये किसका है. मेरे दोस्त ने मुझे कहा के वो मुझे अगले दिन ही बता देगा के वो नंबर किसका है.

मैं अभी सोचों मे ही था कि तनवी आ गयी. मैने उसे बैठने को कहा और वो बैठ गयी. मुझे सोच मे देख कर वो बोली कि क्या बात है बहुत उदास लग रहे हो? मैने कहा नही कुच्छ खास नही पर आज मुझे अपनी पत्नी की बहुत याद आ रही है. कल उसकी बरसी है. उसने मेरी ज़िंदगी ही बदल के रख दी थी. मेरे जैसे आदमी को उसने प्यार से ऐसे बाँध लिया था की मैं अपने आप को बदलने पर मजबूर हो गया. उसके जाने के इतने टाइम बाद भी मैं अपने आप को पूरी तरह संभाल नही पाया हूँ. मेरे मा, पिताजी और भाई के साथ वो भी चली गयी. मेरी तो पूरी दुनिया ही ख़तम हो गयी. मैं ज़िंदा रहा तो सिर्फ़ अपने बच्चों के लिए. मुझे उन तीनों के जाने का इतना दुख नही हुआ जितना उसके जाने का. उसको तो मैने जाना था लेने के लिए 3 दिन बाद. पर अचानक मा, पिताजी और भाई का शिमला जाने का प्रोग्राम बन गया 3-4 दिन का और जब उसे पता चला कि वो वापिस चंडीगढ़ होकर ही आ रहे हैं तो उसीने ज़िद करी के वो भी उनके साथ ही वापिस आ रही है.

मैं चुप हुआ तो तनवी मेरे पास आ गयी और मेरे बालों मे हाथ फिरा कर बोली की बहुत प्यार करते थे तुम उनको. वो बहुत अच्छी थीं और अच्छे लोग दुनिया मे ज़्यादा दिन नही रहते. मैं भी अपने पिताजी को बहुत मिस करती हूँ. पर क्या करें यहाँ आ कर इंसान हार जाता है. मेरी तरह तनवी की भी आँखे गीली थीं. फिर मैं उठकर बैठ गया और तनवी को अपने साथ चिपका लिया और उसकी पीठ पर हाथ फेरने लगा. तनवी ने कहा के मैं नही जानती थी कि तुम अपनी पत्नी से इतना प्यार करते थे. मैने कहा के वो थी ही ऐसी. उसने मुझे इतना प्यार दिया और कभी भी कोई भी शर्त नही रखी. वो प्यार से सब कुच्छ मनवा लेती थी. और ये उसकी सबसे बड़ी खूबी थी कि जो भी बात होती थी उसको बहुत अच्छे से समझ कर ही आगे का सोचती थी. कभी किसी बात पर हमारा मतभेदभी होता था तो वो अपनी बात या तो अच्छे से समझा देती थी या मेरी बात को समझकर मान जाती थी.

कितनी अच्छाइयाँ गिन्वाऊ उसकी. वो तन की सुन्दर तो थी ही, मन से और भी अधिक सुन्दर थी. पति-पत्नी मे प्यार होना बहुत अच्छी बात है, जो हमारे बीच मे था, पर उसके भी ऊपेर होती है अंडरस्टॅंडिंग जो की हमारे बीच मे प्यार से भी अधिक थी. दोनो एक दूसरे को कॉंप्लिमेंट करते थे. एक दूसरे के पूरक थे हम दोनो. उसके बाद तो जैसे मैं खो गया था. बच्चो का ख्याल ना होता तो शायद मैं कभी उभर ही ना पाता उसके वियोग से. मैं संभाला तो केवल और केवल बच्चो की खातिर और उनकी वजह से. नहीं तो पता नही मेरा क्या होता. तनवी जो खामोशी से मेरा प्रलाप सुन रही थी, भावुक हो गयी और मुझे दिलासा देते हुए बोली कि हां कुच्छ लोग ऐसे ही होते हैं कि इंसान उन्हे कभी नही भूल पाता. पर तुमने उनके बाद अपनी ज़िम्मेवारियों को बहुत अच्छे से निभाया है और दोनो बच्चो को काबिल और अच्छा इंसान ही नही बनाया उनकी शादी भी अच्छी तरह से करके उनको बढ़िया तरीके से सेट्ल कर दिया है, जो की अपने आप मे एक बहुत बड़ी उपलब्धि है. वो जहाँ कहीं भी हैं उन्हे इस बात की बहुत खुशी होगी की उनके दोनो बच्चे खुश हैं और वेल सेटल्ड हैं और तुमने उनकी देखभाल मे कोई कमी नही आने दी.

फिर पता नही क्या हुआ कि तनवी एक दम चौंक कर मुझसे अलग हो गयी और बोली कि मैं अभी आती हूँ ज़रा ऊपेर मुझे कुच्छ काम याद आ गया है. मैं 10-15 मिनट मे आती हूँ. कह कर वो ऊपेर चली गयी. मैं अपने ख्यालों मे गुम था. 5-6 मिनट के बाद जाने क्यों मैं उठकर अपने पीसी पर आया और उसमे सीक्ट्व को खोलकर तनवी को देखने लगा. तनवी अपने फोन पर किसी से बात कर रही थी और उसकाचेहरा गुसे मे तमतमा रहा था. मैने वॉल्यूम बढ़ाया और उसकी आवाज़ आने लगी...नही भाय्या आपको बहुत बड़ी ग़लतफहमी हुई है राज के बारे मे. पता नही आपको क्यों ऐसा लगा. सच बात तो ये है कि मैं बहुत गिल्टी फील कर रही हूँ. इतनी शरम आ रही है मुझे कि मैं राज से कैसे नज़र मिला सकूँगी. फिर थोड़ी देर चुप रहने के बाद वो बोली की ठीक है भाय्या, बाइ. और उसने फोन काट दिया.

मैने देखा कि तनवी की आँखे भीगी हुई थीं और वो बहुत ही बेचैन नज़र आ रही थी. फिर उसके चेहरे के भाव बदले और ऐसा लगा जैसे उसने कोई निश्चय कर लिया है और उसके चेहरे पर एक अलग आत्मविश्वास झलकने लगा. फिर वो कमरे से बाहर आ गयी. मैने भी पीसी ऑफ किया और अपने बेडरूम मे आकर पहले की तरह लेट गया. थोड़ी देर के बाद ही तनवी आ गयी और मेरे पास आकर अपना चेहरा झुका कर बैठ गयी. मैने उसका हाथ पकड़ कर अपनी ओर खींचा तो वो मुझ पर ढेर हो गयी और मुझसे लिपट कर रोने लगी. मैने उसको पूछा कि क्या हुआ रो क्यों रही हो. उसने कहा कि राज बात ही ऐसी है कि मैं अपने आप मे बहुत बुरा फील कर रही हूँ और समझ नही पा रही की तुम्हे कैसे और क्या कहूँ. मुझे कुच्छ कन्फेस करना है और मैं समझ नही पा रही हूँ कि कैसे और कहाँ से शुरू करूँ. मैने कहा के कहीं से भी शुरू करो कोई फ़र्क नही पड़ता, पर अपने दिल पर कोई बोझ मत रखो और बेझिझक जो भी कहना चाहती हो कह डालो. उसने कहा की ठीक है मैं शुरू से ही सब कुच्छ बताती हूँ.

और तनवी ने बोलना शुरू किया. उसी के शब्दों मे: राज मैने तुम्हे बताया नही के मेरी एक बड़ी बहन भी है जो चंडीगढ़ मे रहती है. वो मुझसे 8 साल बड़ी है. एक ग़लतफहमी की वजह से हमारे उसके साथ संबंध टूट चुके हैं. हुआ यूँ कि उसकी शादी के 2 साल बाद उसका पहला बच्चा होने वाला था तो मैं अपनी मा के साथ उसके यहाँ चली गयी थी क्योंकि उसके घर मे और कोई औरत नही है. डेलिवरी के टाइम पर मेरी बहन 3 दिन हॉस्पिटल मे थी और मेरी मा भी उसके साथ हॉस्पिटल मे ही रही. घर पर मैं और मेरे जीजा अकेले थे. मेरे जीजा ने दूसरे दिन मेरी मासूमियत और नासमझी का फ़ायडा उठाना चाहा और इसके पहले की मैं कुच्छ समझती या बोलती उनके पड़ोस मे रहने वाले सुरेश भैया वहाँ आ गये और उन्होने मेरे जीजा को बहुत डांटा और मुझे अपने साथ लेकर हॉस्पिटल आ गये. वो मेरे जीजा से उमर मे बड़े हैं इसलिए मेरी बहन उनको भैया कहकर बुलाती थी और इसीलिए मैं भी उनको भैया ही कहती थी.

हमारे हॉस्पिटल पहुँचने पर भैया ने मा और बहन को कुच्छ नही बताया और यही कहा कि मैं हॉस्पिटल आना चाहती थी इसलिए वो मुझे अपने साथ ले आए हैं. अभी वो इतना बता ही रहे थे कि मेरे जीजा उनकी पत्नी को साथ लेकर हॉस्पिटल पहुँच गये और हमे वहाँ देखकर चौंकने का नाटक करते हुए सुरेश भैया को बुरा भला कहने लगे उनके और मेरे उल्टे सीधे संबंध जोड़कर और भाभी ने भी जीजा का साथ दिया, जाने क्या पट्टी पढ़ा कर लाए थे जीजा उनको. भैया एकदम सकपका गये और इतना ही बोले कि तनवी से पूच्छ लो क्या सच है. मेरे कुच्छ बोलने से पहले ही जीजा बोल पड़े कि तनवी तो वही बोलेगी जो सुरेश ने उसको पढ़ाया है. मैं रोने लगी तो मेरी बहन ने भी उनके इल्ज़ाम सच मानते हुए मुझे ही बुरा कहा और बोली कि अब क्यों रो रही है मुँह काला करते हुए नही रोई. मा ने उसे चुप कराया और सुबह होते ही मुझे लेकर वापिस आ गयी. पूरे रास्ते हम दोनो मे कोई बात नही हुई.

घर पहुँच कर मा ने पिताजी को सारी बात बताई तो मेरे पिताजी ने मुझसे पूछा कि तनवी ये सब क्या है. मैं अपने आप को रोक ना पाई और चिल्ला कर बोली के सब झूठ है सुरेश भैया ने तो मुझे जीजा से बचाया है, वो ना आते तो जाने जीजा मेरे साथ क्या करते. फिर मैने सारी बात मा और पिताजी को बताई. पिताजी को बहुत गुसा आया. मा भी सन्न रह गयी और इतना ही बोली के उन्हे विश्वास तो नही हुआ था कि सुरेश भैया ऐसा कुच्छ कर सकते हैं पर क्योंकि जीजा के साथ भाभी भी ऐसा कह रही थी तो वो कुच्छ बोल नही सकी.

पिताजी तुरंत चंडीगढ़ के लिए रवाना हो गये. सबसे पहले सुरेश भैया को मिलकर उन्होनें मेरी बात की पुष्टि की और फिर बहन के घर गये और पहले तो बहन को समझाने की कोशिश की और फिर जीजा से भी बात की. जीजा अपनी ग़लती को नही माने और बहन ने भी उनकासाथ ही दिया. पिताजी गुसे मे दोनो को बुरा भला कह कर और ये कह कर कि वो सारी उमर उनकी सूरत नही देखेंगे वापिस आ गये. सुरेश भैया से सारी बात पिताजी ने भाभी के सामने ही करी ताकि उनके दिल मे भैया के लिए कोई बुरी भावना ना रहे.

पिताजी के घर आते ही सुरेश भैया का फोन आया और उन्होने पिताजी से कहा की पिताजी को भैया के लिए अपने बेटी-दामाद से झगड़ा नही करना चाहिए था. पिताजी ने कहा की बेटी-दामाद हैं इसीलिए सिर्फ़ इतना ही करके आ गया हूँ कोई और होता तो पता नही क्या कर बैठता. मेरी मा रोने लगी और फोन लेकर सुरेश भैया से बोली की बेटा मुझे माफ़ कर देना मैं भी तुम्हे ही ग़लत समझ बैठी. सुरेश भैया ने कहा की नही माजी माफी की कोई बात नही है आपकी जगह मैं होता तो मैं भी वही करता जो आपने किया. फिर मा ने कहा की बेटा उनकी खबर हमे देते रहना अब उनका मुँह तो मैं नही देखूँगी, पर है तो बेटी इसलिए उनकी खबर से ही संतोष कर लूँगी. भैया ने कहा की ठीक है वो फोन करके उनकी खबर देते रहेंगे. हालाँकि भैया के और उनके घर वालों के उस घर से कोई संबंध नही रहे पर खबर तो दे ही सकते हैं उनकी.

इतना कह कर तनवी कुच्छ रुकी और मुझसे बोली के राज तुम जानते हो ये सुरेश भैया कौन हैं? मैं मुस्कुरा दिया और कहा कि हां वो मेरा साला है. तनवी चौंक कर बोली तुम्हे कैसे पता? मैने कहा कि वो सब बाद मे पहले तुम अपनी बात पूरी कर्लो. तनवी ने फिर बोलना शुरू किया.[/color]
 
[color=rgb(41,]उसी के शब्दों मे: एक दिन सुरेश भाय्या ने मुझे फोन किया और कहा कि उन्हे मुझसे बहुत ज़रूरी काम है. ये मेरे देल्ही मे आने के कुच्छ दिन बाद की बात है. मैने पूछा कि क्या काम है तो उन्होनें कहा की काम बहुत टेढ़ा है और मैं ही उसे कर सकती हूँ और इसके लिए वो किसी और को कह भी नही सकते. मैने फिर कहा की अगर मैं उसे कर सकती हूँ तो ज़रूर कर दूँगी आप कहें क्या काम है. उन्होनें कहा कि वो 1-2 दिन मे देल्ही आ कर मुझे बता देंगे. मैं इंतजार करने लगी. सुरेश भाय्या देल्ही आए और मुझे मिले. उन्होनें मुझे तुम्हाए बारे मे बताया और कहा कि उनको शक़ है कि उनकी बहन की मौत जिस आक्सिडेंट मे हुई है उसमे तुम्हारा कुच्छ ना कुच्छ हाथ ज़रूर है. और मुझे ये पता लगाना है कि सच क्या है. मैने पूछा की आप कैसे कह सकते हैं और इतने दिनों के बाद अब क्या और कैसे पता चलेगा. उन्होनें कहा कि उनकी पत्नी तो शुरू से ही कहती आ रही है इस बारे मे और हमे ये भी पता लगा था कि शादी के पहले तुम्हारे बहुत लड़कियों से संबंध थे. फिर अभी कुच्छ दिन पहले उनके साले ने तुम्हे अपनी कार मे 2 लड़कियों के साथ देखा जो चुपके से तुम्हारी कार मे बैठ कर चली गयीं और इत्तेफ़ाक़न उसने कुच्छ घंटों के बाद फिर तुम्हे देखा और वो लड़कियाँ तुम्हारी कार से उतर कर तेज़ी से एक तरफ बढ़ गयीं और एक ऑटो मे बैठ कर चली गयीं. उसने ये बात अपनी बहन को बताई और उसने सुरेश भाय्या को सब बताया और कहा कि हो ना हो राज अपनी पुरानी आदतों को नही छोड़ पाया और इसीलिए उसने दीदी को रास्ते से हटा दिया.

ये सब सुनकर मुझे बड़ा अजीब सा लगा पर मैं भाय्या को मना नही कर सकी और तुम्हारे पास नौकरी के लिए आ गयी. तुमने मुझे नौकरी भी दी और मेरे इशारे का कोई फयडा उठाने की कोशिश नही की तो मुझे तभी लगा कि सुरेश भाय्या को ग़लतफहमी हुई है पर मैं बिना किसी ठोस सबूत के उन्हे कुच्छ नही कह सकती थी. उन्हे लगता कि मैं अपनी जान छुड़ाने के लिए ऐसा कह रही हूँ. फिर मैं एक दिन मौका मिलने पर तुम्हारा ऑफीस का पीसी पूरा खंगाल दिया कि उसमे कोई कॉंटॅक्ट डीटेल या कोई और तुम्हारा नोट या कुच्छ भी ऐसा मिल जाए कि इस बात की पुष्टि हो सके की उस आक्सिडेंट मे तुम्हारा कोई हाथ था या नही. सुरेश भाय्या चाहे जो भी समझ रहे हों मैं तुम्हे बिना किसी सबूत के गुनहगार नही मान सकती थी चाहे वो छ्होटा सा ही कुच्छ क्यों ना हो. कुच्छ तो हो जो इस की कोई भी जानकारी दे सके. पर होता भी कैसे, बेबुनियाद बातो का कोई भी सबूत नही होता. फिर तुमने अपनी थियरी मुझे समझाई और मुझे भी वो समझ मे आ गयी और मैने उस पर तुम्हारा साथ भी देना शुरू कर दिया. और तुम्हारी आज की बातों ने तो मुझे पक्का विश्वास दिला दिया की सुरेश भाय्या सिर्फ़ अपनी पत्नी की बातों के बहकावे मे आ गये हैं और सारा शक़ सिरे से बेबुनियाद है.

इसके बाद मैं अपने आप को नही रोक पाई और मैने सब कुच्छ तुम्हे बता दिया है. तुम जो भी सज़ा मुझे देना चाहो दे सकते हो मैं बिल्कुल बुरा नही मानूँगी. और हो सके तो मुझे माफ़ कर देना.

अपनी बात ख़तम करके तनवी ने अपना मुँह नीचे कर लिया और उसकी आँखों से आँसू टपकने लगे. मैने हाथ बढाकर तनवी को अपने निकट किया और उसके आँसू पोन्छ्ते हुए उसे कहा कि मैं बिल्कुल भी नाराज़ या गुस्सा नही हूँ, हां परेशान ज़रूर था पर वही बात की तुम्हारी तरह बिना सबूत और वजह जाने कुच्छ फ़ैसला नही कर सकता था. तनवी चौंक गयी और बोली क्या मतलब. मैने मुस्कुराते हुए उसे सब बताया कि कैसे पीसी से शुरू होकर मैने उसकी जासूसी करवाई थी और परेशान था की वो ऐसा क्यों कर रही है और किसके कहने पर कर रही है. फिर मैने उसे वो नंबर बताया और पूछा के ये सुरेश का नंबर ही है ना. वो चौंक कर बोली कि हां पर तुम्हे कैसे मालूम. मैने कहा की मैं अपनी खोजबीन मे इस नंबर तक पहुँच गया था और कल परसों तक ये भी जान लेता कि ये किसका नंबर है.

फिर मैने उसको वो सवाल किया जो ये सब जान लेने के बाद मुझे सबसे ज़्यादा परेशान कर रहा था. मैने उसको पूछा कि ये बताओ की तुम्हारा मुझसे शारीरिक संबंध बनाने का यही कारण तो नही था. उसकी आँखे एक बार फिर भर आईं और उसने नज़रें उठाकर मेरी तरफ देखा और बोली कि नही वो तो मेरा अपने हालात से एक समझौता था पर हां झूठ नही बोलूँगी, ये ख्याल भी आया था मेरे दिल मे की तुम्हारे और नज़दीक आ जाने से मुझे अपने उस काम मे भी आसानी होगी. उसका सच सुन कर मुझे उस पर बहुत प्यार आया और मैने उसे अपनी बाहों मे भर लिया और कहा कि मुझे बहुत खुशी है कि एक सच का सामना दिलेरी से करने वाली लड़की मेरी दोस्त है और अब तुम्हे किसी भी प्रकार की चिंता करने की ज़रूरत नही है. मेरे दिल मे तुम्हारी इज़्ज़त और तुम्हारे लिए प्यार और भी बढ़ गया है.

फिर शुरू हुआ वही चिर परिचित चुदन चुदाई का एक नया दौर. इस बार के हमारे मिलन मे शारीरिक संपर्क के साथ साथ कुच्छ और भी था जिसे शब्दों मे नही बयान किया जा सकता. शायद इसी को आत्माओं का मिलना कहते हैं. तनवी का ऐसा समर्पण मैने पहले कभी भी महसूस नही किया था. और कब आँख लग गयी मुझे पता ही नही चला. सुबह जब मैं उठा तो तनवी बेख़बर नंगी लेटी हुई थी मेरी बगल मे और मैं भी पूरी तरह नंगा ही था. उसके चेहरे पर संतुष्टि के बहुत ही प्यारे भाव थे. मैने उसे अपनी बाहों मे भर कर उसका माथा चूम लिया. वो कसमासाई और उसने अपनी आँखे खोली और पूछा सुबह हो भी गयी. फिर उसने अपने कपड़े पहने और बोली कि अब आगे का क्या प्रोग्राम है. मैने मुस्कुरा कर कहा की जैसे चल रहा था वैसे ही चलेगा, कोई ऐतराज़. वो भी शोखी से बोली की ऐतराज़ कैसा और क्यों. मैने तो बस ऐसे ही पूछा था ताकि अब और शिद्दत से काम पे लगूँ और तुम्हे खुश कर दूं. मैं अभी भी गिल्ट फीलिंग से उबर नही पाई हूँ. मैने उसको एक बार फिर अपनी बाहों मे भर लिया और कहा कि भूल जाओ सब कुच्छ और आगे की सोचो.

तनवी एक लंबी साँस लेकर मुझसे अलग होते हुए बोली की एक बहुत बड़ा बोझ उतर गया उसके सर से और जिम के लिए तैयार होने चली गयी. मैं भी अपने नित्य-कर्म से निवरतता होने चला गया और थोड़ी ही देर मे मैं और तनवी लगभग इकट्ठे ही जिम पहुँचे. तनवी जिम मे चली गयी और मैं अभी गेट ही खोल रहा था कि नाज़िया और ज़ाकिया आ पहुँचीं. ज़ाकिया का चेहरा बहुत खिला हुआ था और मेरे कुच्छ पूच्छने से पहले ही उसने आगे बढ़कर मुझे अपनी बाहों मे कस लिया और बोली के राज तुम्हारा आइडिया काम कर गया और बहुत बढ़िया रहा. बहुत मज़ा आया मैं तुम्हारा एहसान कभी नही भूल सकती. मैने भी उसे अपने साथ भींच लिया और कहा कि दोस्ती मे ऐसी बातों की कोई जगह नही होती, दोस्त होते ही एक दूसरे की मदद के लिए हैं. फिर हम सब नीचे जिम मे आ गये और अपने अपने रुटीन मे लग गये.

जिम के बाद मैं ऊपेर आ रहा था तो तनवी भी मेरे साथ हो ली और बोली - "मैने सुरेश भाय्या को सब बता दिया है और समझा दिया है. वो बहुत शर्मिंदा हो रहे थे और कह रहे थे कि उनको तो पहले भी विश्वास नही था पर अपनी पत्नी के बार-बार कहने पर वो भी शंकित हो गये थे परंतु अब वो बहुत शर्मिंदा हैं और तुमसे माफी चाहते हैं."

मैं: "कोई बात नही तनवी उनको कहना कि मुझे कोई गिला नही है उनकी जगह अगर मैं होता तो शायद मैं भी ऐसा ही सोचता. खैर जो हो गया सो हो गया, मिट्टी डालें उसपर."

फिर मैने तनवी के सामने ही सुरेश का नंबर मिलाया और बात की. उनके फोन उठाने पर मैने कहा - "सुरेश भाई मैं राज बोल रहा हूँ. तनवी ने आपको सब बता ही दिया है. आपको इस बारे मे कुच्छ भी सोचने की ज़रूरत नही है. मैं बिल्कुल भी नाराज़ नही हूँ और अब आप जब भी मुझे मिलेंगे बिल्कुल ऐसे मिलेंगे जैसे कुच्छ हुआ ही नही है और इसका ज़िकार भी नही करेंगे. एक बात है कि इसके चलते एक बहुत अच्छी बात हुई है और वो ये की आपने अंजाने मे मुझे एक बहुत अच्छी असिस्टेंट दे दी है जो मेरा काम बहुत बढ़िया ढंग से कर रही है और उसने मेरा बोझ बहुत कम कर दिया है. मैं इसके लिए आपका शूकारगुज़ार हूँ."

सुरेश रुँधे गले से इतना ही बोल पाया, "राज तुम बहुत अच्छे हो."

मैं: "भाई इंसान कोई बुरा नही होता वक़्त और हालात उसे अच्छा या बुरा बना देते हैं. खैर कोई बात नही ऑल ईज़ वेल दट एंड्स वेल. मेरे लिए तो बहुत ही अच्छा हुआ है. तनवी मेरा काम बहुत अच्छे से कर रही है और मैं वाकाई मे बहुत खुशनसीब हूँ की मुझे एक विश्वस्नीय और ईमानदार असिस्टेंट मिल गयी है. ठीक है भाई अभी मुझे स्कूल के लिए तैयार होना है रखता हूँ."

और मैने फोन काट दिया. तनवी ने मुझे अपनी बाहों मे भर लिया और बोली के राज इसमे कोई दो राई नही के तुम बहुत अच्छे इंसान हो. मैं हंस दिया और उसको अपनी बाहों मे भींच कर चूमा और उसकी गांद पर एक हल्की सी चपत लगा कर कहा के अच्छे की लगती जल्दी जाओ और स्कूल के लिए तैयार हो जाओ और मुझे भी तैयार होने दो और जल्दी से नीचे आओ नाश्ता इकट्ठे ही करेंगे. वो हँसती हुई ऊपेर भाग गयी.

इसी तरह कयि दिन गुज़र गये. एग्ज़ॅम्स सर पर होने के कारण सभी स्टूडेंट्स पढ़ाई मे लगे थे और इधर उधर से ध्यान हटाया हुआ था. मैने भी सब तरफ से ध्यान हटाकर इसी तरफ लगाया हुआ था. मेरी गतिविधियाँ भी कम हो गयी थीं और पूरा ध्यान इसी तरफ था कि स्कूल कारिज़ल्ट पहले से अच्छा रहे. इसके लिए एक्सट्रा क्लासस और स्पेशल कोचैंग का इंटेज़ाम किया था स्टूडेंट्स के लिए ताकि कोई भी स्टूडेंट पीछे ना रह जाए. यही थी हमारे स्कूल की स्पेशॅलिटी और पहचान की हर स्टूडेंट की स्पेशल केर की जाती थी इंडिविजुयली. फिर एग्ज़ॅम्स भी हो गये और रिज़ल्ट भी आ गया.

स्कूल का ओवरॉल रिज़ल्ट पहले से बेटर ही था और इसके लिए सारे टीचर्स बधाई के पात्र थे. नया सेशन शुरू होने जा रहा था और अडमियन्स के लिए लोग आ रहे थे. केयी सिफारिशें भी आ रही थीं. इन्ही मे एक सिफारिश मेरे एक बहुत अच्छे दोस्त की भी थी. उसके भाय्या फॉरिज्न सर्विस मे थे और 3 साल उस मे रहने के बाद उनकी वापिस इंडिया पोस्टिंग हो गयी थी. उनकी लड़की का सीनियर.सेकेंडरी मे अडमिज़न करवाना था. मैने उसे कहा की मेरे पास भेज दो अडमिज़न हो जाएगा.

अडमिज़न के लिए भाय्या-भाभी साथ ही आए. मैने उठकर उनका स्वागत किया. अभी मैं उनसे हाथ ही मिला रहा था की एक लड़की अंदर आई और मैं उसे देखता ही रह गया. भाय्या-भाभी को बिठाकर मैने उसकी तरफ देखा तो वो मुस्कुरा के बोली: "हाई, आइ आम प्राची और ये मेरे मम्मी-पापा हैं."

मैने भी मुस्कुराते हुए उसे कहा: "प्राची बहुत अच्छा है कि तुम भी साथ ही आई हो, समझो कि तुम्हारा अडमिज़न तो हो ही गया है और तुम कल से क्लासस जाय्न कर सकती हो."

फिर मैने भाय्या को फॉर्म निकाल कर दिया जो उन्होनें भर दिया और अपने बॅग मे से प्राची के सर्टिफिकेट्स और फोटोस साथ लगा दीं. मैने पेओन को बुलाकर फॉर अकाउंट्स मे भिजवा दिया और कहा कि बिल बनवाकर ले आए. वो बिल ले आया और भाय्या ने कॅश गिनकर दे दिया, जिसकी रसीद भी पेओन ले आया. मैने पेओन को कहा कि बुक्स और यूनिफॉर्म भी लाकर दे दे. पीयान रसीद लेकर गया और बुक्स और नोट-बुक्स का पॅकेट और यूनिफॉर्म का बॅग लेकर आ गया. वो भी भाय्या को दे दिया. फिर मैने प्राची को कहा: "प्राची इस स्कूल मे अडमिज़न मिलना अपने आप मे एक उपलब्धि है. यहाँ टीचिंग सिलबस बेस्ड ही नही होती स्टूडेंट बेस्ड भी होती है. तुम्हारी हर कमी का यहाँ पूरा ध्यान रखा जाएगा चाहे वो एक्सट्रा क्लासस के थ्रू हो या स्पेशल कोचैंग से. एक्सट्रा क्लासस के लिए कोई चार्ज नही है पर हां स्पेशल कोचैंग के लिए नॉमिनल चार्ज होता है. नो बंकिंग स्कूल अट ऑल. कोई स्टूडेंट विदाउट इन्फर्मेशन स्कूल नही आता तो क्लास टीचर को उसके मम्मी-पापा से फोन पर बात करके बताना होता है ताकि उन्हे पता रहे कि उनका बच्चा स्कूल नही आया. पूरा स्कूल टाइम मे एक डॉक्टर और एक लेडी डॉक्टर ड्यूटी पर होते हैं ताकि किसी भी स्टूडेंट को कोई भी परेशानी मे अटेंड कर सकें. अगर कोई एमर्जेन्सी हो और हमारे डॉक्टर्स से हॅंडल ना हो सकती हो तो स्टूडेंट्स के फॅमिली डॉक्टर की डीटेल फॉर्म मे ही भरवाई होती है जहाँ स्टूडेंट को ले जाया जाता है और पेरेंट्स को इनफॉर्म कर दिया जाता है. आइ पर्सनली लुक आफ्टर एवेरी स्टूडेंट. आइ आम शुवर तुम्हे यहाँ कोई भी परेशानी नही होगी और तुम एक अच्छी स्टूडेंट बनोगी और अपने साथ साथ स्कूल का नाम भी करोगी."

भाय्या-भाभी मेरी बातें बड़े आनंद से सुन रहे थे और मुस्कुरा रहे थे. भाय्या ने कहा: "ठीक है राज हमे जाना है और अबसे प्राची तुम्हारे हवाले है. मुझे पूरा विश्वास है कि तुम उसकी बहुत अच्छी देखभाल करोगे." उन्होने अपनी जेब से एक चेक़ निकाला और मेरी तरफ बढ़ाते हुए कहा: "मुझे तुम्हारे ट्रस्ट का नाम नही पता था तो मैने ब्लॅंक ही रख छोड़ा है और अमाउंट भी तुम खुद ही भर लेना."

मैने चेक़ उठाया और उनके सामने ही फाड़ दिया और गुस्से से उन्हे कहा: "आप मेरे बड़े भाई हैं, मैं आपकी बहुत इज़्ज़त करता हूँ इसलिए कुच्छ कह नही सकता पर आप मुझे शर्मिंदा तो ना करें." भाय्या मुझे प्यार से देखते रहे और उठ गये. मैं भी खड़ा हो गया. वो मेरे पास आए और मुझे गले से लगा कर बोले: "नाराज़ मत हो भाई पर ऐसा दस्तूर है इसलिए हो गया. आइ आम सॉरी अगर तुम्हे बुरा लगा है तो."

मैं मुस्कुरा दिया और प्राची से कहा कि कल से जाय्न करोगी ना. उसके हां मे सर हिलाने पर मैने कहा: "ठीक है कल असेंब्ली मे ना जाकर मेरे पास आना मैं तुम्हे ब्रीफ कर दूँगा स्कूल के बारे मे और तुम्हारी हॉबीस वग़ैरा भी नोट कर लूँगा. उसके बाद रेग्युलर क्लासस कर लेना." फिर मैने भाय्या-भाभी को बाहर तक छोड़ा और उनको और प्राची को विदा करके अपने ऑफीस मे आकर बैठ गया.

दिल मे बहुत हलचल मची हुई थी. दिल-ओ-दिमाग़ पर प्राची ही च्छाई हुई थी. वो थी ही इतनी सुन्दर. मैं आपको प्राची के बारे मे बताना ही भूल गया. वो 18 साल की 5'-4" लंबी गोरी चित्ति दुबली पतली लड़की थी. केसर मिले दूध जैसी रंगत, 32-26-30 की फिगर जो उसके टाइट जीन्स और टॉप मे सॉफ झलक रही थी. बड़ी-बड़ी शरबती आँखे, उनपर कमान जैसे भोन्हे (आइब्राउस). सबसे आकर्षक बात थी उसके चेहरे की मासूमियत. कुल मिलाकर वो रति का अवतार लगती थी. मैं तो बस उसकी मोहिनी का शिकार हो गया था और अब मुझे बेसब्री से इंतजार था अगले दिन उस से मिलने का. [/color]
 
[color=rgb(41,]प्राची ने कुच्छ ऐसा अस्सर डाला था मेरे ज़हन पर कि मुझे और कुच्छ सूझ ही नही रहा था. दोपहर को जब खाने पर बैठे थे तो तनवी से भी मेरी मनोस्थिति च्छूपी ना रह सकी. उसने मुझसे पूच्छ ही लिया: "क्या बात है राज कुच्छ खोए-खोए से और उड्द्वेलित लग रहे हो?" मैं मुस्कुरा दिया और बोला, "तुमने भी भाँप ही लिया तनवी, आज एक नयी अड्मिशन हुई है..."

"प्राची", तनवी ने मेरी बात काटी. मैं फिर से मुस्कुराए बिना ना रह सका और बोला, "बहुत ही अच्छे से समझ लेती हो तुम मुझे, मेरा क्या होगा जब तुम चली जाओगी?"

तनवी: "इसमे हैरानी की क्या बात है, वो है ही ऐसी, मैने उससे देखा था तुम्हारे ऑफीस से निकलते, मम्मी-पापा थे शायद उसके साथ. उसको देखते ही मैं समझ गयी कि नयी अड्मिशन हुई है, बुक्स और यूनिफॉर्म बॅग भी तो था. फिर मैने चेक किया तो नाम भी पता चल गया. अब तुम्हारी यह दशा देखकर तो कोई भी 2 और 2 चार कर सकता है."

मैने तनवी को प्रशंसा भरी नज़रों से देखते हुए कहा, "मैं बहुत भाग्यशाली हूँ के मुझे तुम्हारे जैसी दोस्त मिली है."

तनवी: "नही, प्राची बहुत भाग्यशाली है के उससे तुमने पसंद कर लिया है और वो तुम्हारे संसर्ग में आकर लड़की से औरत बन-ने जा रही है."

मैं: "यह क्या कह रही हो तनवी?"

तनवी: "ठीक कह रही हूँ रोमी, मेरा दावा है कि एक महीने के अंदर वो तुम्हारे नीचे उच्छल रही होगी, मैं हूँ ना."

मेरा लंड उसकी बात सुनकर मेरे जॉकी में उच्छलने लगा. तनवी से मेरी हालत च्छूपी नही थी, उसने हाथ बढ़ा कर मेरी जांघों पर रख दिया और प्यार से सहलाते हुए मेरे आकड़े हुए लंड पर ले आई तो मैने कहा कि क्यों सोए हुए नाग को छेड़ रही हो तो हंस के बोली कि सोया हुआ कहाँ है यह तो जाग गया है और मैं जानती हूँ की इस अंधे नाग को इसके बिल का रास्ता दिखाना है. हम दोनो उठे और बिना देरी किए हुए बेडरूम में आ गये और कब हमारे कपड़े हमारे शरीरों का साथ छ्चोड़ गये और कब हम बेड पर एक दूसरे में समाने को आतुर हो गये और कब एक घंटा बीत गया पता ही नही चला. फिर हम दोनो एक दूसरे की बाहों में सीमटे हुए सो गये और शाम को 6 बजे के बाद हमारी नींद खुली. दोनो इकट्ठे ही उठे और एक दूजे की ओर देख कर मुस्कुराए और एक बार फिर एक दूजे की बाहों में बँध गये. रात का खाना भी हम ने इकट्ठे ही खाया और इकट्ठे ही सोए. आख़िर सुबह भी हो ही गयी.

स्कूल पहुँचे. और प्राची भी आ गयी. पेवं ने जैसे ही बताया मैने उससे अंदर बुला लिया. क्या लग रही थी वो, एकदम गुड़िया सी. स्कूल यूनिफॉर्म में उसकी सुडौल गोरी टाँगें चमक रही थीं. मैने अपने चेहरे पर एक ज़बरदस्त मुस्कान लाते हुए उससे चेर पर बैठने के लिए कहा और उसे बताने लगा.

मैं: "प्राची आज तुम्हारा स्कूल का पहला दिन है और तुम्हारा स्वागत है. मुझे पूरा विश्वास है के यू विल प्रूव टू बी आन असेट टू दा स्कूल. मेरे रहते तुम्हें यहाँ कोई भी परेशानी नही होगी और आशा करता हूँ कि यहाँ तुम्हारा यह साल बहुत अच्छा बीतेगा. मैं स्टूडेंट्स के साथ हमेशा एक दोस्त की तरह रहता हूँ तो क्या तुम मुझसे दोस्ती करोगी?"

प्राची: "(मुस्कुराते हुए) जी मैं बहुत खुश हूँ कि मुझे इतने अच्छे स्कूल में अड्मिशन मिला है. पापा और चाचा बहुत तारीफ़ कर रहे थे स्कूल की और आपकी भी और मैं प्रॉमिस करती हूँ कि आइ विल नेवेर लेट यू डाउन. और मुझे बहुत खुशी होगी आपसे दोस्ती करके."

मैं: "गुड. किसी भी तरह की कोई भी बात हो तुम मेरे पास बेझिझक आ सकती हो और मैं हर तरह से तुम्हारी मदद करूँगा और बदले में मुझे केवल एक प्रॉमिस चाहिए कि तुम्हारी पढ़ाई में किसी भी तरह की कोई भी कमी नही आनी चाहिए. अगर तुम्हें मुझसे बात करने में कोई परेशानी हो तो तनवी से बात कर सकती हो, मैं तुम्हें तनवी से मिलवा देता हूँ."

मैने तनवी को इंटरकम पर कॉल करके कहा कि मेरे ऑफीस में आ जाए. तनवी आई तो मैने प्राची से उसे मिलवा दिया और कहा कि उसको सब बातें समझा दे और उसका ध्यान रखे. तनवी उससे अपने साथ ले गयी और जाते जाते मुझे एक अर्थपूर्ण मुस्कान दे गयी.

मैं दोनो को जाते हुए देखता रहा और सोचने लगा कि देखो अब तनवी क्या गुल खिलाती है. मुझे बहुत सोचने पर भी ऐसा नही लगा कि तनवी अपना दावा पूरा कर पाएगी पर फिर यह सोचकर रह गया कि त्रिया चरित्रां, पुरुषास्या भागयाँ देव ना जानाती, का मनुष्या. स्त्री काचरित्रा और पुरुष का भाग्या, देवता नही जानते मनुष्या क्या जानेगा. थोड़ी देर बाद तनवी मेरे पास आई और बोली के ज़्यादा से ज़्यादा एक महीना. मैं मुस्कुरा कर रह गया. प्राची की सूरत मेरी आँखों के सामने घूमती रही सारा दिन.

3-4 दिन के बाद तनवी ने कहा कि ग्राउंड रेडी हो रही है प्राची से तुम्हें मिलाने की. मैने पूछा की कैसे तो वो बोली की आम खाने से मतलब रखो और मुस्कुरा दी. फिर उसने बताया कि प्राची उस में रह कर आई है इसलिए उसे इंग्लीश लॅंग्वेज में तो कोई परेशानी नही है पर यहाँ के हिसाब से उसे ग्रामर और स्पेल्लिंग्स में थोड़ी मुश्किल आ रही है और वही मुश्किल उसे हिन्दी में भी आ रही है. तनवी उससे कोचैंग दे रही थी हर दूसरे दिन एक घंटा पढ़ा कर दोपहर को स्कूल के बाद अपने कमरे में.

कुच्छ दिन बाद तनवी एक शाम को मेरे पास आई और उसने मुझे बताया कि मामला आगे बढ़ना शुरू हो गया है. मेरे पूच्छने पर उसने जो बताया वो उसी के शब्दों में:

हमेशा की तरह आज भी जब प्राची आई तो मैं उसे पढ़ाने बैठी. मैने उस दिन स्कूल से आने के बाद नाहकार केवल एक नाइटी ही पहनी थी और उसके नीचे कुच्छ भी नही पहना था. प्राची उस दिन एक लाइट ब्लू कलर के ढीले से टॉप और बर्म्यूडा शॉर्ट्स में बहुत प्यारी लग रही थी. मैं उसकी ओर देख रही थी तो उसने पूछा के क्या देख रही हैं ऐसे? मैने कहा के प्राची तुम बहुत सुंदर हो, बहुत खुशनसीब होगा जिससे तुम्हें प्यार करने का अवसर मिलेगा. प्राची शर्मा गयी और अपनी नज़रें झुका कर बोली के ऐसी बातें मत कीजिए. मैने कहा के क्यों तुम्हें अच्छी नही लगती ऐसी बातें, तुम्हारा कोई बॉय फ्रेंड नही था क्या उस में. तो प्राची ने कहा के नही उसने कभी इस बारे में सोचा भी नही है. मैने तब तक अपना हाथ उसके घुटने पर रख दिया था और बहुत ही धीरे से उसे सहला रही थी. मैने उससे कहा कि देखो प्राची अब तुम बच्ची नही हो बड़ी हो गयी हो और तुम ना भी चाहो तब भी लड़के तुम्हारे पीछे पड़ेंगे ही दोस्ती करने के लिए और उसके भी आगे बहुत कुच्छ करने के लिए. और बहुत कुच्छ क्या वो चौंक कर बोली? मैने कहा कि तुम हो ही इतनी सुन्दर के किसी का भी दिल तुम्हें प्यार करने को चाहेगा. इस बीच मेरा हाथ लगातार उसके घुटने से आगे बढ़ रहा था बहुत ही धीरे-धीरे और अब उसकी गोरी, चिकनी, कोमल जाँघ को सहला रहा था. प्राची ने मेरे हाथ को हटाने की कोई कोशिश नही की सिर्फ़ अपनी दोनो टाँगें भींच कर मेरे हाथ को जकड़ने की कोशिस ज़रूर की.

मैं उसे बातों मे ही उलझा कर अपने हाथ की कारगुज़ारी चालू रखे हुए थी. प्राची का चेहरा लाल हो रहा था और मैं समझ रही थी की ये सब उसके लिए नया है और उसे इसका कोई अनुभव नही है. प्राची ने कहा की वो मेरी बात का मतलब नही समझी. मैने कहा की देखो प्राची तुम इतनी सनडर हो की तुम्हे हर कोई प्यार करना चाहेगा ऐसे, कहते हुए मैने अपने हाथ को प्यार से उसकी जाँघ पर फिराया तो प्राची के मुँह से एक मादक सिसकारी निकल गयी. मैने तुरंत उसको पूचछा की प्राची तुम्हे अच्छा लगा ना? प्राची का चेहरा लाल अनार हो गया और वो कुच्छ नही बोली सिर्फ़ अपना सर झुका लिया. मैने प्यार से उसकी जाँघ को सहलाना जारी रखा. अब उसकी टाँगें भींची हुई नही तीन.

फिर मैने उसको कहा के प्राची इसके आयेज भी बहुत कुच्छ करना चाहेंगे तुम्हारे साथ. उसने पूचछा की क्या? मैने पूचछा की तुम बुरा तो नही मानोगी? अब बात चल ही पड़ी है तो मैं चाहती हूँ की तुम सब जान लो. प्राची ने प्रश्नवाचक दृष्टि से मेरी ओर देखा. मैने अपना दूसरा हाथ बढ़कर उसकी पीठ के पीच्चे से लेजाकर उसको अपने पास खींचा और फिर उसकी बगल से आयेज निकाल कर उसके माममे पर रख दिया और बहुत ही हल्का सा दबाव डाला. उसका छ्होटा सा मम्मा मेरी हथेली मे पूरा आ गया और उसका कड़क हो चुका मटर के छ्होटे दाने जैसा निपल मेरी हथेली को गुदगुदाने लगा. मेरे इस आक्रमण से प्राची सिहर गयी और उसका पूरा शरीर काँप गया जैसे कोई करेंट उसके शरीर मे दौड़ गया हो. उसने एक गहरी साँस ली और बोली की ये क्या हो रहा है मुझे? मैने पूचछा की तुम्हे अच्छा लग रहा हैं ना प्राची? उसने हन मे अपने सर को हिलाया.

मैने अपने हाथ का दबाव उसके माममे पर तोड़ा बढ़ा दिया और दूसरे हाथ से उसकी जाँघ को सहलाते हुए, अपने हाथ को उसकी बर्म्यूडा शॉर्ट्स के अंदर घुसा दिया. प्राची की जांघों पर गूस बंप्स उभर आए और उसकी साँसें तेज़ हो गयीं. फिर मैने कहा की ये मेरे एक लड़की के प्यार करने से तुम्हे मज़ा आ रहा है तो सोचो की जब एक मर्द तुम्हे ऐसे प्यार करेगा तो कितना आनंद आएगा. प्राची ने कोई जवाब नही दिया और मेरे द्वारा दिए जा रहे आनंद का अनुभव करती रही. मैने अपना हाथ नीचे लाकर उसके टॉप को ऊपेर उठा दिया और उसका एक प्यारा सा मम्मा बाहर निकाल लिया और उसको अपने मुँह मे लेकर चुभलाने लगी. प्राची के शरीर मे सर से पाँव तक एक तेज़ करेंट की लेहायर दौड़ गयी और उसके मुँह से एक ज़ोर की सिसकारी निकली और वो बोली दीदी ये क्या हो रहा है मुझे मैं से नही पा रही हूँ. मैने अपना मुँह उसके माममे से हटा लिया और पूचछा के अगर तुम्हे अच्छा नही लग रहा तो रुक जाती हूँ? वो बोली की नही दीदी बहुत अच्छा लग रहा है आप करती रहो.

मैने अपना मुँह दुबारा उसके मम्मे पर रख दिया और उसको पूरा अपने मुँह मे भर के चूसने लगी. प्राची की साँसें बहुत तेज़ हो गयीं. तुम भी तो मुझे ऐसे ही प्यार करो ना, मैने उसको कहा तो प्राची ने अपना एक हाथ मेरी जांघों पर रख दिया और दूसरा हाथ मेरे एक मम्मे पर और मुझे प्यार से सहलाने लगी. प्राची बोली कि हाए दीदी बहुत मज़ा आ रहा है. मैने उसको पूछा की प्यार करने मे ज़्यादा मज़ा आ रहा है या करवाने मे. प्राची ने कहा के दोनो मे ही आ रहा है. फिर मैने उसका टॉप पूरा उतार दिया और अपनी नाइटी उतार कर पूरी नंगी हो गयी. प्राची मुझे देखती ही रह गयी और बोली की दीदी आप भी बहुत सुंदर हो और आपके बूब्स तो बहुत प्यारे हैं और इतने बड़े हैं और इतने टाइट हैं. मैने उसे कहा कि तुम भी जब मेरी उमर की हो जाओगी प्राची तो तुम्हारे बूब्स भी बड़े हो जाएँगे और इनका ख्याल रखोगी तो टाइट भी रहेंगे.

फिर मैने उसको लीप किस करना शुरू किया तो वो एकदम चिपक गयी मुझसे और वापिस किस करने लगी. मैने उसका बर्म्यूडा भी खोल कर उतार दिया और उसकी लाइट पिंक कलर की पॅंटी भी उतार दी. अब हम दोनो बिल्कुल नंगी एक दूजे से चिपकी हुई थीं. मैने अपनी एक टाँग उठाकर प्राची की टाँगों के बीच मे डाल दी और रगड़ने लगी. एक हाथ से उसकी गोल गांद को सहलाते हुए और कभी दबाए हुए उसको चूमती रही. फिर मैने अपना हाथ आगे लाकर उसकी कुँवारी बिना बालों की मुलायम चूत पर रख दिया जो पूरी तरह से गीली हो चुकी थी. मैने अपनी एक उंगली उसकी चूत की लकीर पर फिराई तो वो काँप कर मुझसे चिपक गयी. मेरी उंगली उसकी गांद के छेद से होती हुई उसके भज्नासे को छ्छू गयी. वो तड़प उठी. मैने कहा की देखो प्राची सबसे ज़्यादा मज़ा तो तुम्हे तब आएगा जब तुम्हारी इस चूत मे किसी मर्द का कड़क लंड घुसेगा.

प्राची बोली कि दीदी मैने तो सुना है की बहुत दर्द होता है जब इसमे वो घुसता है. मैने उसको पूछा के वो क्या? प्राची शर्मा कर बहुत धीमी आवाज़ मे बोली की वही जो आप अभी कह रही थीं, लंड. मैं हंस दी और उसको बोली कि मेरी गुड़िया पहली बार जब लंड किसी की चूत मे घुसता है तो उसकी कुंआरा झिल्ली फॅट जाती है और उसकी वजह से दर्द होता है जो हर लड़की को पहली चुदाई मे सहना पड़ता है. ये दर्द एक बार ही होता है और थोड़ी देर के लिए ही होता है. मज़ा तो उसके बाद मे ही आता है और इतना मज़ा आता है की उसके आयेज सारे मज़े बेकार लगने लगते हैं.

फिर मैने प्राची की दोनो टाँगें खोल दीं और अपने मुँह उसकी चूत पर चिपका दिया. वो चौंक कर बोली ये क्या कर रही हो दीदी? तो मैने कहा के तुम्हारी चूत को चाटने लगी हूँ. वो हैरान होकर बोली कि ऐसे भी करते हैं क्या? मैने कहा के हां तुम देखना कितना मज़ा आएगा तुम्हे और मैने अपनी जीभ उसकी चूत की लकीर पर फिरानी शुरू कर दी. मेरी जीभ जब उसके भज्नासे पर पहुँची तो प्राची ज़ोर से काँप उठी. थोड़ी देर के बाद ही उसने कहा के छोड़ दो दीदी मेरा पेशाब निकलने वाला है. मैने हंस कर कहा कि नही पेशाब नही तुम्हारा पानी निकलने वाला है जो मज़े की चरम सीमा पर निकलता है.

मैने तेज़ी से अपनी जीभ उसकी चूत मे चलानी शुरू कर दी और वो थोड़ी देर मे ही आ.....आ......ह, ओ......ह करती हुई झाड़ गयी. उसका शरीर अकड़ गया और वो हाँफने लगी.फिर मैने प्राची को अपनी बाहों मे कस्स लिया और पूछा कि कैसा लगा मेरी गुड़िया को मेरा प्यार करना. वो शर्मा कर बोली कि दीदी बहुत मज़ा आया, मुझे नही पता था कि इतना मज़ा भी आता है. मैने कहा कि प्राची ये तो कुच्छ भी नही है सिर्फ़ ऊपेरी मज़ा है असली मज़ा तो तुम्हे तब आएगा जब तुम्हारी चूत मे लंड घुसेगा और तुम्हे चोद कर मज़े की चरम सीमा पार कराएगा. प्राची बोली के पता नही वो कब होगा?

मैने कहा के प्राची वो जब भी तुम चाहोगी हो सकता है और अगर तुम चाहो तो मैं तुम्हारी मदद कर सकती हूँ. तुम मेरी दोस्त हो और दोस्त ही दोस्त के काम आते हैं. फिर आज जो कुच्छ हुआ है उसके बाद तो हमारी दोस्ती और भी पक्की हो गयी है, है ना? उसने कहा कि वो तो हो गयी है और बहुत ही पक्की हो गयी है पर .... मैने उसकी बात को काट दिया और कहा कि वो तुम मुझ पर छोड़ दो अगर तुम्हे मुझ पर विश्वास है तो. प्राची बोली की दीदी आप के ऊपेर तो मुझे अपने से भी ज़्यादा विश्वास है.

फिर तनवी ने मुझे कहा के राज तुम अगर चाहो तो कल ही प्राची की कुँवारी चूत का उद्घाटन कर सकते हो. मैने उसे कल भी बुलाया है और वो आ रही है कल दोपहर को 3-4 घंटे के लिए. मेरा लंड अकड़ चुका था उसकी बातें सुनकर. मैने तनवी से कहा कि कल की कल देखेंगे तुम तो पहले आज की बात करो. मैने उसका हाथ पकड़ कर अपने लंड पर रख दिया और वो मुस्कुरा कर बोली कि वाह राज तुम तो एवर रेडी रहते हो. मैने उसे खींच कर अपने साथ सटा लिया और फिर उसे लेकर बेडरूम मे आ गया. तनवी भी उत्तेजित थी, उसने प्राची को तो चरमा सुख प्रदान कर दिया था पर खुद वंचित रह गयी थी. फिर हम दोनो ने जमकर चुदाई का आनंद लिया. खाने के बाद भी चुदाई का एक और दौर चला और हम दोनो नंगे ही सो गये एक दूजे से चिपक कर.
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[color=rgb(41,]अगले दिन स्कूल से आने के बाद मैने फ्रेश होकर जल्दी लंच कर लिया और तोड़ा आराम करके नाहकार फ्रेश हो गया. प्राची के आते ही तनवी ने उसे लेकर मेरे पास आना था. थोड़ी देर मे ही तनवी प्राची को लेकर आ गयी. उसने हल्के फ़िरोज़ी रंग का टॉप और बर्म्यूडा शॉर्ट्स पहनी हुई थी और बिल्कुल लाइफ साइज़ गुड़िया लग रही थी. प्राची ने मुझे विश किया तो मैने आगे बढ़कर उसका हाथ पकड़ा और हेलो कहते हुए अपनी ओर खींचा. वो थोड़ा शर्मा गयी और नज़रे झुकाकर मेरी तरफ आ गयी. मैने उसे अपनी बाहों मे भर लिया और उसके गाल पर एक प्यारी सी किस करके कहा कि देखो शरमाने से काम नही चलेगा, हम दोस्त हैं और दोस्ती मे शर्म नही की जाती. उसने कहा कि ठीक है. फिर मैने उसको अपने साथ ही सोफे पर बिठा लिया और कहा कि तनवी बोल रही थी कि तुम सेक्स के बारे मे बिल्कुल अंजान हो और चाहती हो कि तुम्हे उसके मज़े का पूरा अनुभव कराया जाए.

प्राची का चेहरा पूरी तरह लाल हो गया और वो बोली के चाहती तो हूँ. मैने कहा कि मैं इसमे तुम्हारी पूरी मदद कर सकता हूँ अगर तुम चाहो तो. प्राची ने कहा कि उसे डर लगता है कि दर्द बहुत होगा. मैने कहा के देखो प्राची पहली बार करने पर दर्द तो होगा ही पर मैं इस बात का पूरा ख़याल रखता हूँ के दर्द कम से कम हो और पूरा मज़ा आए. उसके चेहरे पर दुविधा के भाव देखकर मैने कहा के ऐसा करते हैं के पहले मैं तनवी के साथ करता हूँ और तुम अच्छे से देख और समझ लो फिर अगर तुम्हारा दिल चाहे तो तुम भी करवा लेना. मैं कभी भी किसी के साथ ज़बरदस्ती नही करता. अगर तुम नही चाहोगी तो रहने देंगे. टेन्षन बिल्कुल नही लेना तुम. इस पर वो बोली की ठीक है. मैं उठकर दोनो को अपने बेडरूम मे ले आया.

अंदर आते ही मैने और तनवी ने अपने कपड़े उतारने शुरू कर दिए. प्राची दोनो को हैरानी से देखती रही. तनवी ने उसे कहा कि देख क्या रही हो, चलो अपने कपड़े तो उतारो. मैने भी उसको अपने साथ चिपकाते हुए कहा कि देखो प्राची हम आपस मे बाकी सब तो कर ही सकते हैं ना, तुम हमारे साथ स्पर्श सुख तो प्राप्त कर ही सकती हो और अगर नही चाहोगी तो तुम्हारी चुदाई नही करूँगा, और बहुत तरीके हैं मज़ा लेने के, वैसे ही मज़ा लो.

प्राची ने भी अपने कपड़े उतार दिए. मैं तो उसे देखता ही रह गया. छ्होटे छ्होटे उसके मम्मे, पतली लंबी टांगे, भरी हुई जंघें, पिचका हुआ पेट और गोरी रंगत मे उसकी नीली नसें दिख रही थी जो उसकी खूबसूरती को और भी बढ़ा रही थी. मैने आगे बढ़कर उसे अपने साथ चिपका कर उसके एक मम्मे पर अपना हाथ रख दिया और आहिस्ता से उसे दबाया और सहलाया. उसका अनार के दाने जैसा निपल कड़क होकर मेरी हथेली को गुदगुदाने लगा. मैने अपना मुँह नीचे करके उसके दूसरे मम्मे को अपने मुँह मे भर लिया. प्राची के मुँह से एक मादक सिसकारी निकली और वो ज़ोर से मेरे साथ चिपक गयी.

मैं उसे और तनवी को लेकर बेड पर आ गया. तनवी ने मेरे अपडे हुए लंड को हाथ मे लेकर प्राची को दिखाया और कहा देखो ये हैं लंड और चूत मे जब अंदर जाता है तो बहुत मज़ा आता है और असली मज़ा वही होता है. मैने तनवी और प्राची के बीच मे आकर दोनो के एक एक मम्मे को अपने हाथ मे लेकर सहलाना शुरू क्या. फिर मैने प्राची को कहा के वो तनवी की दूसरी साइड पर आ जाए और उसके मम्मे सहलाए. मैने तनवी को किस करना शुरू किया. फिर उसकी गर्दन पर अपने होंठ फिराते हुए उसके मम्मे को चूसा और अपने मुँह का नीचे कासफ़र जारी रखते हुए उसकी नाभि से हो कर उसकी चूत पर अपना मुँह टीका दिया. तनवी ने प्राची को उलट जाने के कहा और उसकी टांगे सहलाते हुए उसकी चूत को चाटना शुरू कर दिया और प्राची से कहा के मेरे लंड को सहलाए और अगर बुरा ना लगे तो उसको चूमे और लॉलिपोप की तरह चूसे.

प्राची ने बड़ी कोमलता से मेरा लंड अपने हाथ मे लिया और उसे चूमा, फिर अपनी ज़बान से उसके टोपे को छ्छू कर देखा और फिर टोपे तो अपने मुँह मे ले लिया. वो बहुत तेज़ी से लंड को चूसना सीख रही थी और थोड़ी देर मे ही वो बहुत अच्छी तरह से लंड को चूसने लगी. तनवी की कसमसाहट को देख कर मैं समझ गया कि वो मस्ती मे आ चुकी है. मैने प्यार से अपना लंड प्राची के मुँह से निकाला और तनवी की चूत के सुराख पर लगा दिया. फिर मैने प्राची से कहा के अच्छी तरह से देख ले की लंड चूत मे कैसे जाता है.

प्राची उठकर बैठ गयी और बहुत ध्यान से देखने लगी. मैने तनवी की चूत पर अपने लंड को रगड़ा और फिर उसकी दोनो पुट्तियों को फैला कर अपना लंड उसकी चूत मे दबाना शुरू कर दिया. तनवी ने एक सिसकारी ली और बोली एक ही झटके मे डाल दो ना पूरा अंदर. तो मैने हंसते हुए कहा के प्राची को भी तो समझाना है कि लंड कैसे चूत मे जाता है. आधा लंड जब तनवी की चूत मे घुस गया तो मैं रुक गया और लंड को बाहर खींच कर फिर अंदर डाल दिया. इस बार आधे से थोड़ा ज़्यादा अंदर कर दिया. मैने देखा की उत्तेजना के मारे प्राची का चेहरा तमतमा रहा था और उसने अपना एक हाथ अपने मम्मे पर रखा हुआ था और उसे दबा रही थी. प्रच ने अपना दूसरा हाथ बढ़ाकर मेरे लंड को च्छुआ, जैसे देख रही हो की ये कैसा डंडा है जो चूत को भेद कर अंदर बाहर हो रहा है. 3-4 घससों मे मैने अपना पूरा लंड तनवी की चूत मे डाल दिया और प्राची से कहा के देख लो पूरा लंड तनवी की चूत मे चला गया है और उसे कोई दर्द नही हुआ बल्कि मज़ा आ रहा है.

फिर मैने प्राची से कहा के देखती रहो अब मैं चुदाई शुरू करने जा रहा हूँ. मैने लंबे घस्से मारने शुरू कर दिए. अपना लंड मैं टोपे तक बाहर खींच लेता और फिर एक ही झटके मे पूरा तनवी की चूत मे डाल देता. हर घस्से पर तनवी के मुँह से एक मादक आआआआआआआः निकलती और वो अपनी गांद उठा कर लंड के अंदर आने का स्वागत करती. धीरे धीरे मैने घस्सो की रफ़्तार बढ़ानी शुरू कर दी और ये रफ़्तार इतनी बढ़ गयी की प्राची हैरानी से देख रही थी कि इतनी तेज़ी से मेरा लंड तनवी की चूत मे अंदर बाहर हो रहा है और तनवी को उसका बहुत मज़ा आ रहा है. फिर मैने अपने घस्सो का ज़ोर भी बढ़ाना शुरू कर दिया और अब हमारे शरीर आपस मे टकराने पर आवाज़े भी करने लगे.

करीब 10 मिनट की तगड़ी चुदाई के बाद तनवी झाड़ गयी और उसके साथ ही मैने अपनी रफ़्तार अत्यधिक तेज़ करके पूरे ज़ोर से धक्के मारने शुरू कर दिए और 10-15 करारे घस्से मार के मैं भी झाड़ गया और अपना लंड तनवी की चूत मे पूरा घुसा कर अपने वीर्य की पिचकारी छोड़ दी.

प्राची अपना उत्तेजना से लाल चेहरा घुमा घुमा कर कभी मेरा और कभी तनवी का चेहरा देख रही थी. तनवी के चेहरे पर असीक तृप्ति के भाव देखकर उसने एक झुरजुरी ली और बोली कि इतना मज़ा आता है. मैने हंस कर कहा कि हां मज़ा तो बहुत ही आता है चुदाई मे, पर तुम बताओ के तुम्हारा क्या ख्याल है ट्राइ करना चाहोगी या अभी और सोचना है. प्राची ने एक बार मेरी तरफ देखा और पूछा कि जो पहली बार दर्द होगा वो कितना होगा तो मैने कहा कि जितना इंजेक्षन लगवाने पर होता है उसी तरह का होगा बस थोड़ा सा ज़्यादा होगा. वो झेलने के बाद मज़े ही मज़े हैं, और सब से मज़े की बात ये है कि दर्द सिर्फ़ एक बार ही होगा और मज़े तुम बार बार ले सकोगी. दर्द फिर कभी नही होगा. इंजेक्षन की तरह नही की जितनी बार लग्वाओ उतनी बार दर्द होगा. ये सुनकर प्राची मुस्कुरा दी.

तनवी ने उठकर पास पड़े एक टवल से मेरे लंड और अपनी चूत को पोंच्छा और प्राची के पास आकर उसके मम्मे सहलाने लगी और बोली की लाडो तुमने देख ही लिया है कि ये जादू का डंडा जिसे लंड कहते हैं मेरी चूत मे कितनी तेज़ी से और ज़ोर से अंदर बाहर हो रहा था और मुझे कोई भी दर्द नही हुआ और मुझे भरपूर मज़ा आया. फिर उसने मेरे लंड को सहलाना शुरू कर दिया और मेरा लंड जो शिथिल पड़ गया था फिर से अकड़ने लगा. मैने प्राची को अपने पास खींच कर अपने ऊपेर लिटा लिया और उसे डीप किस करने लगा. अपना एक हाथ उसके कड़क मम्मे पर रखकर सहलाने लगा और दूसरा हाथ उसकी चूत पर फेरना शुरू कर दिया. धीरे धीरे प्राची की मस्ती बढ़ने लगी. दूसरी तरफ से तनवी ने भी एक हाथ से मेरे लंड को सहलाते हुए दूसरे हाथ से प्राची के शरीर को सहलाना शुरू कर दिया.

प्राची को मैने और ऊपेर करके उसके मम्मे को मुँह मे लेकर चुभलना शुरू किया और तनवी को बोला कि नीचे से वो प्राची को प्यार करे. क्या एहसास था. बहुत ही अनोखा था उसका स्पर्श. हाथ उसके जिस्म पर फिसल फिसल जा रहे थे. थोड़ी ही देर मे प्राची की साँसें तेज़ हो गयीं और वो इधर उधर मचलने लगी. मैने उसको सीधा करके लिटा दिया और तनवी को इशारे से ऊपर आने को कहा. मैने लूब्रिकेटिंग जेल्ली उठा कर उसकी चूत पर लगा दी और अपनी उंगली से उसे फैलाने लगा और उसकी चूत के छल्ले पर अपनी उंगली से दबाव डाला.

प्राची की चूत की फाँकें पूरी तरह से आपस मे चिपकी हुई थी और उसकी चूत का छल्ला बहुत टाइट था. मैने हल्का सा दबाव बढ़ाकर अपनी उंगली उसके अंदर कर दी और उसे इस तरह से दबा कर घुमाने लगा जिस से प्राची की चूत का छल्ला थोड़ा ढीला हो जाए. मेरे उंगली अंदर डालने पर प्राची चिहुनक गयी और बोली ये क्या कर रहे हैं. तनवी ने कहा कि तुम्हारी चूत का उद्घाटन करने की तैयारी कर रहे हैं.

फिर तनवी ने प्राची का ध्यान बटाने के लिए उसके साथ बातें करनी शुरू कर दीं. वो बोली कि प्राची तुम बहुत भाग्यशाली हो की राज जैसा समझदार और प्यार करने वाला तुम्हारी पहली चुदाई करने जा रहा है. तुम्हे इतना मज़ा देगा कि तुम सब कुच्छ भूल जाओगी और ऐसा मज़ा तुम्हे पहले कभी भी नही आया होगा. प्राची ने कहा कि मज़ा तो बाद मे आएगा, पर जो दर्द होगा पहले उसका क्या? तनवी हंस पड़ी और बोली कि प्राची तुम दर्द से डर रही हो, वो तो तुम्हे चाहे कोई भी चोदे या तुम खुद अपने हाथ से कोई भी चीज़ अपनी चूत मे डाल लो पहली बार तो होगा ही पर राज इतने प्यार से चुदाई करता है की तुम्हे दर्द कम से कम होगा और मज़ा ज़्यादा से ज़्यादा आएगा.

तुम बिल्कुल भी डरो नही दर्द होगा भी तो वो बहुत ही थोड़ी देर के लिए होगा और मज़ा इतना ज़्यादा होगा कि तुम्हारा दर्द उसमे खो जाएगा. चिंता की कोई बात ही नही है. राज को बहुत तजुर्बा है कुँवारी चूतो की पहली चुदाई का और मेरे सामने ही इसने 5-6 कुँवारी चूतो का उद्घाटन किया है और मेरी भी पहली चुदाई राज ने ही की थी. इसलिए मैं तुम्हे विश्वास दिलाती हूँ की चिंता की कोई भी बात नही है.

इधर अब मेरी दो उंगलियाँ प्राची की चूत मे जा चुकी थी और मैं उन्नको घुमा कर चूत के छल्ले को ढीला करने मे जुटा हुआ था. साथ ही मैं और तनवी दोनो मिलकर प्राची की उत्तेजना को बढ़ाने मे भी लगे हुए थे. मैं रह रह कर चूत के भज्नासे को छेड़ देता था और उसकी चिकनी जांघों को अपने दूसरे हाथ से सहला भी रहा था. तनवी कभी उसे डीप किस कर रही थी और कभी उसके मम्मे मुँह मे लेकर चूसने लगती तो कभी अपने हाथो मे लेकर उसके निपल चुटकी मे प्यार से मसल देती. प्राची के मुँह से अब हाआआआआआआआं, हूऊऊऊऊऊऊऊओन की आवाज़े आनी शुरू हो गयी थी.

मैने ढेर सारी लूब्रिकेटिंग जेल्ली प्राची की चूत मे लगा दी और अपने लंड पर भी अच्छी तरह से लगा कर उसे चिकना करके प्राची की टाइट चूत मे घुसने के काबिल बना दिया. फिर मैने तनवी को इशारा किया और प्राची की दोनो टांगे पूरी खोल कर अपने लंड को उसकी चूत की दरार पर रगड़ने लगा. प्राची अपनी तेज़ साँसों के साथ उत्तेजित हो चुकी नज़र आ रही थी और उसकी आँखे मूंदी हुई थी. मैने अपने लंड काटोपा उसकी चूत के छल्ले पर रख कर दबाव डालना शुरू किया. थोड़ी सी जगह बनते ही मैने एक हल्का सा झटका दिया और मेरा टोपा प्राची की चूत के छल्ले को पूरा फैला कर अंदर घुस गया. प्राची उच्छलने को हुई पर मेरे हाथों की उसकी जांघों पर पकड़ मज़बूत होने के कारण और तनवी के उसको कस के पकड़ने की वजह से बिल्कुल भी नही हिल सकी.

मैने पूछा के प्राची क्या हुआ? तो वो बोली के जैसे दर्द होने लगा था पर नही हुआ और अब बहुत भारी सा लग रहा है, क्या डाल दिया है? मैने कहा के हां डाल तो दिया है पर थोड़ा सा ही गया है अंदर और अब और भी अंदर जाएगा. पर तुम चिंता ना करो तुम्हे कुच्छ नही होगा हम दोनो हैं ना. मैने अपने लंड को अंदर बाहर हिलाना शुरू कर दिया और सिर्फ़ इतना ही की प्राची की चूत का छल्ला मेरे लंड पर जहाँ था वहीं रहे बस लंड के साथ ही अंदर को दब जाए और बाहर आ जाए. उधर तनवी ने प्राची को उत्तेजित करना चालू रखा हुआ था और उसी वजह से प्राची को कुच्छ समझ नही आ रहा था कि क्या हो रहा है और क्या होने जा रहा है. तनवी ने अपना एक हाथ नीचे करके प्राची के दाने को छेड़ना शुरू कर दिया और प्राची की आँखे फिर से मुन्दने लगी. मैने धीरे धीरे झूलते हुए एक ज़ोरदार धक्का मारा और मेरा लंड प्राची की सील को तोड़ता हुआ अंदर घुस गया.

प्राची के मुँह से एक ज़ोर की चीख निकली जो कमरे की दीवारों से टकरा कर रह गयी. बाहर भी चली जाती तो कुच्छ फिकर नही था क्यों कि बाहर कोई भी नही था. मैने अपने लंड को वहीं पर जाम कर दिया. प्राची की टांगे जो इस बीच मैने उठा दी थी बुरी तरह से काँप रही थी और उसकी आँखों से मोती झार रहे थे. तनवी ने उसको बड़े प्यार से सहलाते हुए कहा कि बस अब हो गया और जो भी दर्द होना था हो गया. अब तुम्हारी चूत आराम से लंड ले सकती है आगे कभी भी लंड घुसने मे दर्द नही होगा. मैं पहले की तरह ही लंड को हल्के हल्के अंदर बाहर कर रहा था लेकिन उतना ही जैसे पहले शुरू मे था. थोड़ी ही देर मे प्राची समान्य होती नज़र आई तो मैने अपने लंड को आधा इंच अंदर बाहर करना शुरू कर दिया लेकिन बहुत धीरे धीरे. अब इतना एक्सपीरियेन्स हो चुका था कि मैं ये सब मशीनी अंदाज़ मे करता था, मतलब की इसके लिए मुझे कुच्छ भी सोचना या कोई प्रयास नही करना पड़ता था सब अपने आप ही होता था.

थोड़ी देर और गुज़री और प्राची के चेहरे से सारा तनाव और दर्द की रेखायें मिट गयी थी और उनकी जगह एक मनमोहक मुस्कान ने ले ली थी. मैने पूछा के क्यों प्राची अब दर्द तो नही हो रहा. प्राची ने कहा के नही अब दर्द तो बहुत ही कम हो रहा है और मज़ा आना शुरू हो गया है, आप करते रहो. फिर क्या था मैने अपने लंड के धक्कों की लंबाई बढ़ानी शुरू कर दी और थोड़ी देर मे ही मेरा लंड आधा बाहर आकर अंदर जा रहा था. प्राची ने भी नीचे से अपनी गांद हिलानी शुरू कर दी थी और मज़े ले रही थी. हर धक्के के साथ मैं अपने लंड को थोड़ा और अंदर कर देता था. नतीजा ये की 15-20 धक्कों के बाद मेरे लंड का टोपा प्राची की बच्चेदानी के मुँह से जा टकराया और उसको गुदगुदा गया. वो मस्ती मे झूमती हुई बोली के ये क्या किया है. मैने प्यार से कहा के कुच्छ नही मेरा लंड पूरा अंदर घुस कर तुम्हारी बच्चेदानी के मुँह से टकराया है और तुम्हे गुदगुदा गया है. मैने उसे पूछा की उसे अच्छा लग रहा है या नही? प्राची बोली के बहुत मज़ा आ रहा है.

फिर मैने बड़े प्यार से प्राची की चुदाई शुरू कर दी. तनवी के साथ मैं एक बार झाड़ चुका था, इसलिए मुझे दुबारा झड़ने मे टाइम तो लगना ही था. मैं एक लयबद्ध तरीके से प्राची की चुदाई करने लगा. प्राची के गुदाज का स्पर्श मुझे बहुत रोमांचित कर रहा था और मैं उसका भरपूर आनंद ले रहा था. चुदन चुदाई का इस खेल का मैं पुराना खिलाड़ी हूँ, इसलिए मुझे मज़ा लेने के साथ साथ मज़ा देना भी खूब अच्छी तरह से आता है. मैं कभी अपने घिसों की रफ़्तार तेज़ कर देता और कभी कम और कभी लंबाई ज़्यादा और कभी कम. [/color]
 
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