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रवि---- आज तुम मेरे साथ चलो शोरूम।
आरती--- शोरूम? मैं क्या करुँगी शोरुम,?
रवि--- अरे चलो तो सही,
आरती--- आज नही कल चलूंगी।
रवि--- जैसी तुम्हारी मर्जी।
फिर दोनों नीचे आ जाते है और डाइनिंग टेबल पर नास्ता करने लगते है, सोनल अभी उठी नही थी।
रवि नास्ता करके बाहर निकल जाता है, उसकी कोई कॉल आयी हुई थी,
इस बात से अनजान की सोनल उठ कर वही गार्डन में है,
हां विनोद, मैंने मोनिका से बात कर ली है, और वो तैयार है. तुम शोरूम के पीछे वाले फ्लैट में पहुँचो और मैं मोनिका को लेकर आता हूँ…….अरे आरती की चिंता मत करो, वो अंदर है.’ रवि विनोद (आरती के भाई) से बात कर रहे थे. सोनल गलती से उनकी बाते सुन ली थी, पर सोनल को ये समझ नहीं आ रहा था की पापा मोनिका को लेकर क्यूँ जा रहे हे. सोनल ने उनके पीछे जाने का तय किया.
रवि अंदर जाकर आरती को बोलकर कार ले कर निकलता है, उससे पहले ही सोनल बाहर जाकर ऑटो कर लेती है और कार का पीछा करती है,
रवि अगले मोड़ पर कार को रोकता है तो सोनल देखती है कि सर् को दुप्पटे से बिल्कुल ढके एक लड़की कार में सवार होती है
सोनल को कुछ गलत लगा, वैसे उसने कभी अपने पापा के बारे में गलत नहीं सोचा की वो गलत काम कर सकते है, सोनल अपने पापा जैसा ही अपना पति चाहती थी, काफी मासूम और सीधासाधा. वो चाहने लगी थी अपने पापा को,
रवि ने मोनिका को कार में पीछे बिठाया और फ्लैट के रस्ते की ओर चले गए, सोनल भी ऑटो में उनके पीछे पीछे चल पडी. वो कार में थे तो आसानी से पहुँच गए पर सोनल ऑटो से जा रही थी, सोनल पीछा तो नहीं कर सकती थी पर उसे रास्ता पता था. करीब आधे घंटे बाद सोनल वहां पर पहुँची, सोनल ने ऑटो वाले का किराया चुका कर फ्लैट की तरफ गयी। और फ्लैट के पास पहुची। फ्लैट का दरवाजा लॉक था अंदर से , सोनल को कोई रास्ता नही मिला तो सोनल बैक साइड पहुँचि, वहा बैक साइड में छोटी सी दीवार थी उसके कूदने के बाद एक और बैक डोर था। सोनल वो दीवार फांद कर अंदर गयी और डोर चेक किया । किस्मत से डोर ओपन था, सोनल धीरे से अंदर दाखिल हुईं,
फिर उसे अंदर से अजीब आवाज़ सुनाई दी, सोनल अंदर हाल में आ गयी, वैसे वैसे आवाज़ तेज़ होती गयी. उसे आसानी से पता चल गया की ये आवाज़ चुदवाने की है और धीरे धीरे उसने मोनिका की आवाज़ को पहचान लिया. एक मिनट के लिए सोनल रूक गयी, की कहीं वो गलत तो नहीं कर रही, अगर पापा को पता चल गया तो क्या होगा.
पर फिर सोचा की शायद विनोद मामा मोनिका को चोद रहे हो और पापा सिर्फ उसे छोड़ने आये हो तो..ये सोचकर सोनल फिर से दरवाजे की तरफ़ आगे चली. आगे चलते ही उसने डोर ओपन दिखा और पीछे हट गयी फिर उस ने इधर उधर देखा कि कैसे देखूं कि पापा को पता ना चले.
उसने दूसरी तरफ एक रोशन दान दिखा, सोनल वहा पहुची और देखा वहा कपड़ो की गठरियां पड़ी है, सोनल उनपर चढ़कर रोशनदान तक पहुच गयी। अब फिर सोनल ने ऊपर हो कर देखा तो मोनिका कुत्ते की स्टाइल में थी और रवि मोनिका को जमकर चोद रहे थे..रवि और निशा पूरे नंगे थे. सोनल ने कभी आपमे पापा को ऐसे नहीं देखा था.
सोनल अपने पापा को और पापा के लंड को देखकर हैरान हो गयी..रवि जबरदस्त दम लगाकर मोनिका को चोद रहे थे, मोनिका की जांघे लाल लाल हो गयी थी मतलब रवि उसे आधे घंटे से चोद रहे था. रवि ने उसके बालों को पकड़ के रक्खा था उसका सर भी पीछे खींचकर रक्खा था और वो कुतिया की तरह चुदवा रही थी. सोनल एक दम सुन्न हो गयी थी.
‘विनोद..तुम भाई अगली बार से मत आना, तुम कुछ करते नहीं हो और बस बैठ के देखते रहते हो..क्यूँ मोनिका.’ रवि ने मोनिका को धक्के मारते हुए कहा.
‘ह ह…ह ह्ह्ह्ह…हां साहब जी.’ मोनिका की जबान लडखडा रही थी, वो काफी थक गयी थी. रवि रूकने का नाम नहीं ले रहे था. रवि के पाँव के थपेड़ो की आवाज़, ऊपर से मोनिका की जबरदस्त चुदाई की आवाज़ सुनकर सोनल की चूत भी गीली हो गयी. पता ही नहीं चला कब सोनल का हाथ उसकी अपनी चूत पर चला गया.
सोनल उन दोनों को देखकर जीन्स के ऊपर से ही अपनी चूत मसलने लगी. मोनिका कुतिया की तरह झुकी हुई थी और उसने अपने दोनों हाथ मेज पर लगा कर रक्खे थे. रवि के लंड के धक्के इतने जोरदार थे कि उसकी छाती मेज से टकरा रही थी. सोनल ने देखा की मोनिका मेज को मुट्ठी में लेने की कोशिश कर रही थी, सोनल का अंदाज़ा सही था वो अब झाड़ने वाली थी.
और सोनल के मन में आया ही था की एकदम से वो ढीली हो गयी और उसकी चूत का पानी निकल गया और वो नीचे गिर गयी. रवि का लंड बहार आ गया.सोनल ने देखा सच में उसके पापा का लंड रामू से कम नहीं था. सोनल तो उसे देखते ही पागल हो गयी. और उसे ही देखती रही. फिर रवि ने मोनिका को उठाया और आराम से बिठाया.
मोनिका भी समझ गयी और अपने घुटनों पर बैठ कर रवि के लंड को हिलाने लगी. रवि ने झट से लंड उसके मूंह में डाल दिया और उसके मूंह को चोदने लगे..बेचारी मोनिका..सोनल उसकी हालत समझ रही थी वो काफी थक गयी थी. उधर विनोद मामा बस देखे जा रहे थे. फिर रवि ने अपने लंड को बहार निकला और अपने हाथो से लंड को हिलाने लगे और हट गए..अब सोनल उनके लंड को देख नहीं पा रही थी.
‘ओह्ह्ह..आआअह्ह्ह….बस इतनी सी आवाज़ निकली और उसके पापा के लंड से वीर्य छुट गया..’ सोनल अपने पापा के लंड को देखने के चक्कर में भूल गयी की वो गठरियों पर खडी थी और उसके हिलते ही गठरियां हिल गया और सोनल नीचे गिर गयी. सोनल सीधा गठरियों के साथ नीचे आ गयी. तीनो आवाज सुनकर चौंक गए और रवि ने एकदम से अपनी पेंट उठा ली. और बाहर आकर देखा तो सामने सोनल को पाया। सोनल भी शरमा गयी, सोनल को और कुछ नहीं सुझा तो वो वहां से चल दी. अब सोनल पापा का सामना नहीं कर सकती थी. पापा क्या कहेंगे..
सोनल पापा के डर से जल्दी से चले जा रही थी और इतने में सोनल ने कार के आने की आवाज़ सूनी और मुड़कर देखा. उसके पापा ही आ रहे थे, उन्होंने उसकी ओर देखा और सोनल ने शर्म से आँखे नीचे कर ली, उसे शर्म और डर दोनों लग रहा था. सोनल डर के मारे अपनी टीशर्ट को उंगलियों से खेलने लगी.
‘बैठो..घर अभी दूर है..’ रवि सोनल के पास आकर रुके और कहा. सोनल तो एक ही सेकंड में बैठ गयी. रवि कार चलाने लगा। सोनल एकदम सुन हो कर बैठी थी तभी रस्ते में उसे समझ आया कि मोनिका भी उसकी बगल में बैठी है। तब सोनल को कुछ हौसला हुआ कि मैंने कौनसा गुनाह किया है जो मैं डर रही हूँ, पापा को देखो गलत काम उन्होंने किया फिर भी बिना किसी शर्म और डर के कैसे चौधरी की तरह कहा कि बैठो…
और मोनिका मेरी बगल में बैठी है। सोनल फिर से पापा के मर्दाना होने पर फ़िदा हो गयी.
अब सोनल डर नहीं रही थी, सोनल को पता नहीं क्यो अपने पापा पर प्यार आ रहा था, उन्होंने जो किया वो गलत था, उनकी इज्जत के लिए घर की इज्जत के लिए. पर पता नहीं सोनल अपने पापा की ओर खिंच रही थी. सोनल ने बिना डर के अपने पापा के कंधे पर अपना हाथ रख दिया. जैसे बीवी अपने पति के कंधे पर हाथ रखती है ऐसे. बस अब सोनल के मन में चल रहा था कि किसी तरह अपने पापा के लंड को छूना है. क्या जालीम लंड है उसके पापा का.
सोच ही सोच में घर के करीब पहुँच गये, रवि ने उनको घर से पहले उसी मोड़ पर उतार दिया जहा से मोनिका को पिक किया था।
सोनल और मोनिका दोनो पैदल घर की तरफ चल पड़ी।
दोनो शांत चल रही थी, सोनल ने ही चुपी तोड़ी,
मोनिका कब से चल रहा है ये सब,
मोनिका--- सोनल बेबी प्लीज् मेम साहब को मत बताईयेगा। पिछले छह महीने से चल रहा है,
सोनल---- चिंता ना करो मैं किसी को नही बताऊँगी लेकिन तुम्हे घर चल कर मुझे सारी बात बतानी होंगी।
मोनिका--- ठीक है मैं सब कुछ बात दूँगी तुम्हे। वैसे आप क्यो जानना चाहती हो।
सोनल--- बस मन है जानने का।
दोनो घर पहुच जाती है, मोनिका अपने क्वाटर में और सोनल घर मे जाती है,
आरति-- कहा थी सोनल बेटा।
सोनल--- एक फ्रेंड को कुछ प्रॉब्लम हो गयी थी उसके घर गयी थी।
आरती चाह कर भी ज्यादा नही पूछ पाती। उसे आजकल सोनल से डर लगता था क्या कब बोल दे।
आरती--- बेटा वो स्कूल नही जाएगी आज।
सोनल--- नही।
सोनल अपने कमरे में चली जाती है, आरति सोनल कर रहते रामू काका को बुलाने या उसके पास जाने से डरती है और अपने कमरे में चली जाती है। आरती के जाते ही सोनल बाहर आती है और किचन में रामू को कहती है कि मोनिका को उसके कमरे भेज दे उसका सर दर्द कर रहा है हेड मसाज करवानी है।
रामू क्वाटर जाकर मोनिका को बुला लाता है और सोनल के रूम में भेज देती है।
मोनिका के रूम में आते ही सोनल उसे अपने पास बेड पर बैठा लेती है और उसे पापा के साथ कैसे उसकी चुदाई स्टार्ट हुई पूछती है। मोनिका रवि के साथ अपनी पहली चुदाई की बात बताती है कि छह महीने पहले आरती सोनल के साथ अपनी बहन के घर गयी हुई थी , आरती रात वही रुकने वाली थी.शाम का समय रवि अकेला था घर मे, रामू काका और जया काकी बाजार गए हुए थे और मोनिका आई बरतन माँजने, मोनिका के दिल मे तेज़ गुदगुदी सी होने लगी, अकेला घर, उसमे वो और रवि अकेले, सोच रही थी कि काश रवि उसको बाहों मे भर कर नंगा कर दे, और उसके खूबसूरत जिस्म को देखे. मगर हमेशा की तरह अपनी इच्छा को दबाए रखा, ऐसा करना ठीक नहीं था, वो शादी शुदा और मैं भी. पर ऐसे महॉल मे मैं बहुत ही गरम हो रही थी और शायद साहब जी भी। साहब अपने लंड को अपने आप ही मसलने लगे, मोनिका किचन मे बर्तन मांज रही थी, किचन के बाद डाइनिंग रूम थी और उसके बाद आपका कमरा, जैसे कि मुट्ठी मारने मे और भी मज़ा आए तो साहब ने कमरे मे रखे ड्रेसिंग टेबल के आईने को घुमा कर ऐसे रखा जैसे कि कमरे के दूसरे तरफ खड़े होकर साहब डाइंग रूम का दरवाज़ा देख सके, जहाँ से मैं बर्तन माँजने के बाद आती और साहब एक दम नंगे होकर अपने लंड को मसल्ने लगा और आईने की तरफ देखते रहे, सोचा अगर मैंने देख लिया और कुच्छ कहती भी है तो कह देते कि मैं तो अपने कमरे मे कपड़े बदल रहा था और आईने की तरफ ध्यान नहीं गया कि बाहर से दिख रहा है.
थोरी देर के बाद बर्तन धोने के बाद मैं डाइंग रूम में आ गयी, मेरा दिल और भी ज़ोर से धरकने लगा, सामने कमरे में साहब ननगे खड़े थे, ऐसा ही हुआ उसे देख कर मुझे ऐसा लगा जैसे अपने कपड़े बदल रहै है। उनका नँगा बदन देख कर मुझे भी कुछ कुछ होने लगा, अपने आप एक हाथ चोली के अंदर बूब्स से खेल रहा था और दूसरा हाथ घाघरे के उपर से चूत पर रखा था, शायद साहब ने मुझे आईने से देख लिया था, मेरी धरकन और भी तेज़ होने लगी, समझ गयी कि आग उधर भी लगी थी, दो बार नहीं सोचा और धड़कते दिल से, साहब वैसे ही नंगा बाहर की तरफ आ गये,मैं मदहोश आँखें बंद किए अपने जिस्म से खेल रही थी, साहब के आने की आहट से चौंक उठी और घबरा कर जल्दी से अपनी चुननी ठीक करने लगी और साहब ने मेरे हाथ थाम लिए और कहा–“घबराओ मत मोनिका, मैं भी तुम्हे प्यार करने के लिए बेचैन हो रहा हूँ.”
शरमाती घबराती मैं कहने लगी–“आपको आईने मे नंगा देख कर अपने आप को रोक नहीं पाई, एक मीठी सी गुदगुदी होने लगी थी, मगर मैने नहीं समझा कि आप मुझे देख लोगे.” मेरी इस अदा ने साहब को और भी मदहोश कर दिया और साहब बोले कि–“मैने जानभुज कर आईना ऐसे ही रखा था जिससे मैं तुम्हे देख सकूँ और शायद तुम भी मुझे देख सको.” साहब मेरा कोमल चेहरा अपने दोनो हाथो मे लेते हुए आगे कहा–” तुम बहुत ही खूबसूरत हो मोनिका, तुम्हारा यह चेहरा एक गुलाब के फूल जैसा सुन्दर है और तुम्हारे यह दो होंठ जैसे गुलाब की दो पंखुरियाँ हो, चूमने को जी करता है.” मैं शरमाते हुए कहने लगी–“मुझे जाने दो बाबूजी, यह ठीक नहीं है, मुझे शरम आती है.” साहब मेरी बात अनसुनी करके अपने तपते होंठ मेरे काँपते होंठो पर रख दिए, कितने कोमल होंठ थे साहब के, कितनी मिठास थी उन होंठो मे.
मैं शरमाती, अपनी आँखें झुककर कहने लगी–“ऐसा मत कहिए बाबूजी, ऐसा मत कीजिए, मैं सह नहीं पाउन्गि, आज तक किसी ने मेरी तारीफ नहीं की, मैं तो खामोश अपने तन को राहत देना चाहती थी, आप का नंगा बदन,उठा हुआ….मैं तडप उठी, पर आप ने देख लिया.”
साहब ने हैरानी मे पूछा–“क्यूँ, तुम्हारा मर्द तुम्हारी तारीफ नहीं करता, इतनी हसीन,इतनी खुबुसरत हो तुम.”
मैंने अपना सिर नीचा कर लिया –“कहना नहीं चाहिए, पर मेरा मर्द तो शराब के नशे मे धुत रात को आता था और मेरी तरफ देखता भी नहींथा, जब उसकी इच्छा होती थी अपनी पतलून नीचे करके मेरा घाघरा उपर करके बस अपनी आग ठंडी कर लेता था और मैं तड़पति रह जाती थी , अब तो उसे मरे भी कितने महीने हो गये है,”
“तुम्हारा मर्द बदनसीब है, इतनी सुन्दर औरत और देखता भी नहीं था, मैने तो जब से तुम्हे देखा है, फिदा हो गया हूँ तुम पर. जी करता है तुम्हे देखता ही रहूं, अपनी बाहों मे लेकर प्यार करूँ और तुम्हारा यह प्यारा मुखरा चूमता रहूं.” कहते हुए साहब ने मुझे अपने आगोश मे ले लिया. चुपचाप मैं उनकी बाहों मे समा गयी और अपना सिर उनके सीने पर रख लिया, उससे बहुत ही राहत मिल रही थी, मेरा घबराना कुच्छ कम हुआ था. इन सभ बातों मे साहब लंड भी थोड़ा सा मुरझा गया था, मेरा खूबसूरत, कोमल जिस्म उनकी बाहों मे था, मुझे भी बहुत ही अच्छा लगा रहा था, थोरी देर तक ऐसे ही मुझे अपनी बाहों मे बाँधे रखा और फिर मेरे गाल को सहला कर मेरा मुँह उपर किया, हमारी निगाहें मिली, प्यार भरा था उनकी आँखों मे, उसे अपना महसूस कर रहा थी, शायद वो भी ऐसा ही महसूस कर रहै थे इसीलिए वो भी बेफिकर मुझे अपनी बाहों मे बाँधे थे, मैने उनका माथा चूम लिया और उन प्यारी सी आँखों पर अपने होंठ रख कर एक चुंबन दिया और तो साहब ने कहा–“मोनिका, आज मैं तुम्हे प्यार करके तुम्हारी यह तडप निकाल दूँगा, और तुम्हे महसूस कराउँगा कि तुम वाकई मे कितनी हसीन हो.” कहते हुए उन्होंने अपने होंठ मेरे होंठो पर रख दिए, इस बार मैं नहीं हटी और उनके चुंबन का जवाब अपने चुंबन से दिया, मैने अपने होंठ नहीं हटाए और उनके होंठ अपने होंठो के बीच लेकर चूसने लगी, जवाब मे वो भी मेरा उपर का होंठ चूसने लगे.मैं बिना होंठ हटाए कहने लगी–“मुझे पिघला दिया तुमने, बेताब थी ऐसे चुंबन के लिए, मेरा दिल इतना धड़क रहा है कि ऐसे लग रहा है की उच्छल कर बाहर आ जाएगा.”
मेरे गाल को चूम कर कहने लगे–“मैं भी सुनू कैसे धड़क रहा है तुम्हारा दिल.”
कहते हुए वे नीचे हुये और अपना कान मेरे कोमल सीने पर रख दिया, एक लंबी साँस ली मैंने, वाकई मे बहुत ही तेज़ धड़क रहा था, उनकी बाहें मेरी कमर के इर्द गिर्द थी,
उसके बाद हम दोनों एक दूसरे से नंगे होकर लिपट गये और चुम्मा चाटी करने लगे। साहब मेरे दूध हाथ से दबाने लगे। मुझे अभी बहुत मजा मिल रहा था। फिर साहब मेरे मस्त मस्त दूध पीने लगे। मेरी चूत ढीली और रसीली होनी लगी। मैंने उसके मोटे लंड को हाथ में लेकर सहलाने लगी। धीरे धीरे साहब का लंड खड़ा होने लगा। आधे घंटे तक उन्होंने मेरे इतना दूध पिया की मेरी छातियाँ बिलकुल लाल लाल हो गयी। कई बार चुदास में आकर साहब ने मेरे दूध को अपने दांत से काट लिया। मैं तडप उठी।
फिर वो मेरी चूत पर आ गये और मेरी रसीली बुर पीने लगे। आह मुझे बहुत सुख मिला। मेरी चूत से माल निकलने लगा जिसको वो चाट रहे थे। इसी बीच मैंने थोडा सा मूत दिया। साहब वो भी चाट गये। फिर उन्होंने व्हिस्की की बोतल उठा ली और मेरी चूत पर धीरे धीरे गिराने लगे। और नीचे मुँह लगाकर पीने लगे। कम से कम यही खेल २ घंटा चला। साहब कभी मेरी चूचियों पर व्हिस्की डालकर पीते, तो कभी चूत पर। फिर उन्होंने मेरे दोनों घुटने खोल दिए और लंड मेरे चुत में डाल दिया।
"मोनिका!!..तुमको चोद तो रहा हूँ..पर ऐसे चूत देना की लगे की मैं अपनी पत्नी को चोद रहा हू!!" साहब बोले
ये सुनकर मैंने उनको अपनी बाँहों में भर लिया और उसी तरह से चुदवाने लगी जैसी मेरा पति मुझे चोदा करता था। कुछ दी देर में साहब ने अच्छी रफ्तार पकड़ ली और मुझे पटर पटर करके चोदने लगे। मेरा और उसका पेट पट पट की आवाज करते हुए बड़ी तेज तेज टकरा रहा था। मैं मजे से चुदवा रही थी।
"आआआआ ...साहब जी...औ.र तेज चोदो..आह आह ...फाड़ दे मेरा भोसड़ा..आज!!" मैंने किसी रंडी की तरह चिल्लाने लगी तो साहब भी जोश में आ गये। उन्होंने मेरे दोनों कंधे कसके पकड़ लिया और जल्दी जल्दी मुझे ठोंकने लगे। लगा जैसे कोई चुदाई वाली मशीन मुझे चोद रही है। साहब मेरी गर्मा गर्म सिकारियां, मेरी कामुक आवाजों का भरपूर आनंद ले रहे थे। मुझे फट फट फरके फक कर रहे थे। वो बहुत मेहनत से मेरे साथ मेरी चिकनी योनी में सम्भोग कर रहे है। मुझे बहुत मजा मिला। आज कई महीने बाद फिर से मेरी चूत का सटर उठा और उसका उदघाटन हुआ। साहब मेरे दूध भी पी रहे थे और मेरे सेक्सी ओंठ पी चूस रहे थे। ३० मिनट बाद साहब मेरी चुत में आउट हो गये।
फिर मैं उसने किसी जोंक की तरह चिपक गयी और प्यार करने लगी।
"मोनिका!!!..कैसी चुदाई की मैंने...क्या तुम्हारे मर्द से जादा अच्छी चुदाई की???" साहब ने पूछा
"हाँ .साहब ! आपके लौड़े में तो अभी बहुत दम है। एक साथ आप कई औरतों को चुदाई के खेल में हरा दोगे!!" मैंने कहा
उसके बाद मैं साहब का लंड चूसने लगी। इतने गोरे मस्त लौड़े को मुँह में लेकर चुसना बहुत गर्व की बात थी। कितना बड़ा, कितना गुलाबी और कितना मीठा लौड़ा है साहब का। उन्होंने मेरे सर पर हाथ रख दिया और अपने मुँह की ओर धक्का दे देकर वो लंड चुस्वाने लगे। उनको भी इसमें बहुत मजा मिल रहा था। मैं उनकी गोलियां भी मुँह में भरकर चूस लेती थी। मैं गले तक साहब का लौड़ा चूस रही थी। उनके लंड से माल रिसने लगा था क्यूंकि वो बहुत उत्तेजित महसूस कर रहे थे। फिर लंड चुस्वाने के बाद साहब ने मुझे बिस्तर पर कुतिया बना दिया। मैं अपने दोनों हाथों और घुटनों पर कुतिया बन गयी। साहब मेरी गांड पीने लगे। मुझे एक अलग सा नशा छाने लगा। फिर उन्होंने मेरी गांड में ढेर सारा तेल लगा दिया और लंड मेरी गांड में डाल दिया और फिर वो मेरी गांड मारने लगी।
शुरू शुरू में मुझे लग रहा था इतना मोटा लंड मैं बर्दास्त नही कर पाउंगी, पर 10 मिनट बाद मेरी गांड का छेद खुल गया और मैं मजे से उछल उछलकर कर गांड मरवाने लगी।
"आह आह आह ..हा हा हा!!" करके साहब मेरी गांड चोद रहे थे। कुछ देर बाद तो जैसे मुझे गांड मरवाने का चस्का लग गया। डेढ़ घंटे तक साहब ने मेरी गांड दबाकर चोदी, उसके बाद साहब ने अपना माल मेरी गांड में ही छोड़ दिया। उसके बाद फिर कुतिया बनाकर मेरी चूत मारी। अब तो जब भी मूड होता है साहब मुझे फ़्लैट में ले जाकर मेरी चुदाई करते है,
ऐसे मोनिका ने अपनी चुदाई की कहानी बता दी सोनल को।
सोनल---- फिर विनोद मामा कब साथ मिले तुम लोगो के।
मोनिका---- एक दिन मम्मसहब घर नही थी, तुम स्कूल गयी थी तब मैं और साहब उनके रूम में मस्ती कर रहे थे तब तुमारे मामा आ गए थे अचानक। तब से ही वो कभी कभी आ जाते है। हां वैसे उनका आना न आना एक ही बात है उनका लण्ड बिल्कुल छोटा है और जल्दी झड़ जाते है, फिर बैठकर देखते रहते है मुझे चुदवाते हुए तुमारे पापा से।
सोनल मोनिका की चुदाई कहानी सुनकर बहुत गर्म हो गयी, वो पहले ही अपने पापा की चुदाई लीला देखकर मदहोश थी, अब मोनिका की स्टोरी सुनकर और हो गयी।
मोनिका चोर आँखों से सोनल को देखा वो पलट कर मोनिका को ही देख रही थी। मोनिका ने नजरंदाज कर दिया। सोनल कुछ बैचेन नजर आ रही थी।
अचानक मोनिका ने सोनल को पुकारा- सोनल बेबी, तुम ये जानकर क्या करोगी ।
उसकी आवाज में भारीपन था।
मोनिका ने कहा- तुम्हारे पापा और मैं बस मजा ले रहे हैं एक दूसरे के जिस्म का !
सोनल- मैं पागल हो रही हूँ ये सब देख कर, एक अजीब सी आग भर रही है। मैं क्या करूँ?
मोनिका- मेरी जान आ, आ जा, तुझे कुछ नया मजा दूँ जिंदगी का।
सोनल- नही, ये ग़लत है, मैंने कभी किसी के साथ कभी ऐसा नहीं किया। तुम तो वैसे भी लड़की हो।
मोनिका- तो आज कर ले। आ जा ऐसा मौका दुबारा नहीं आता।
सोनल- मुझे शर्म आ रही है !
मोनिका- अपने कपड़े उतार दे सारे ! एकदम नंगी हो जा ! फ़िर शर्म जाती रहेगी।
और फ़िर मोनिका ने सोनल को एकदम नंगा कर दिया। वो ऑंखें बंद कर के लेटी थी।
मोनिका- अब बोल क्या हो रहा है?
सोनल- कुछ नही, एक अजीब सा नशा बढ़ रहा है जिस्म में।
मोनिका- बोल क्या चाहती है?
सोनल- मुझे किस करो, मेरे होंठों में, जैसे तुम और पापा कर रहे थे।
और मोनिका सोनल के सिरहाने बैठ गई और उसके सर को अपने हाथों में ले कर उसके होंठों पर अपने होंठ रख कर उसे चूसने लगी। सोनल भी अपने आप को रोक नहीं पाई और उसकी किस में शामिल हो गई। सोनल और मोनिका एक दूसरे के होंठों को चूस रहे थी, कभी अपनी अपनी जीभ निकालते और एक दूसरे से मिलते हुए एक दूसरे के मुंह में घुसा देते। कुछ देर ये सिलसिला चलता रहा।
अब मोनिका सोनल के मम्मों को हाथों में ले कर चूसने लगे, एक एक हाथ उसके जिस्म को टटोल रहा था। उसकी जांघों पर फिसल रहा था। सोनल अपने आप में नहीं थी, उसके अन्दर जैसे एक चिंगारी उठ रही हों। गरम आहों से कमरा भर गया था।सोनल से अब बर्दाशत नहीं हुआ। मोनिका सोनल का सारा रस पी जाने को बेताब थी। सो मोनिका ने सोनल की टाँगे खोल कर में अपनी जीभ एक दम से उसकी चूत में घुसा दी।
सोनल- सी स्स्स्स हाय ! ये क्या कर दिया मोनिका ! स्स्स्स्स हाय !
मोनिका बेतहाशा उसके रस को चूसे जा रही थी और उसके सारे जिस्म को चाटने में व्यस्त थी। दोनों सेक्स का भरपूर मजा ले रही थी। मोनिका ने सोनल को अचानक उल्टा कर दिया और उसके चूतड़ ऊपर उठा दिए। अब मोनिका ने अपने जीभ उसके पीछे घुसा दी।
सोनल की सिस्कारियां बढ़ रही थी- हाय, मोनिका ये क्या आग लगा थी, घुसा दे अपनी जीभ, अपने उंगलिया मेरे पीछे। चोद मुझे अपनी जीभ से।
मोनिका और तेजी से उसे अपनी उँगलियों से चोदने लगी, कभी आगे से कभी पीछे से, तब तक मोनिका सोनल के नीचे लेट कर उसे चाटने लगी, सोनल बुरी तरह से गीली थी। मोनिका सोनल की चूत को चाट चाट कर उसकी आग बुझाने में लगी थी।
सोनल के शांत हो जाने के बाद सोनल ने मोनिका को चोदा जैसे मोनिका ने उसको किया था।
उस दिन दोनो ने चार बार एक दूसरे को चोदा। शाम कब हो गई पता ही नहीं चला।
सोनल और मोनिका खुश थी कि मोनिका इसलिए कि सोनल भी उनके खेल में शामिल हो गई है। अब ये खेल और मजेदार हो गया था, और सोनल इसलिए कि वो अब जल्द ही अपने पापा को हासिल कर लेगी।
आरती--- शोरूम? मैं क्या करुँगी शोरुम,?
रवि--- अरे चलो तो सही,
आरती--- आज नही कल चलूंगी।
रवि--- जैसी तुम्हारी मर्जी।
फिर दोनों नीचे आ जाते है और डाइनिंग टेबल पर नास्ता करने लगते है, सोनल अभी उठी नही थी।
रवि नास्ता करके बाहर निकल जाता है, उसकी कोई कॉल आयी हुई थी,
इस बात से अनजान की सोनल उठ कर वही गार्डन में है,
हां विनोद, मैंने मोनिका से बात कर ली है, और वो तैयार है. तुम शोरूम के पीछे वाले फ्लैट में पहुँचो और मैं मोनिका को लेकर आता हूँ…….अरे आरती की चिंता मत करो, वो अंदर है.’ रवि विनोद (आरती के भाई) से बात कर रहे थे. सोनल गलती से उनकी बाते सुन ली थी, पर सोनल को ये समझ नहीं आ रहा था की पापा मोनिका को लेकर क्यूँ जा रहे हे. सोनल ने उनके पीछे जाने का तय किया.
रवि अंदर जाकर आरती को बोलकर कार ले कर निकलता है, उससे पहले ही सोनल बाहर जाकर ऑटो कर लेती है और कार का पीछा करती है,
रवि अगले मोड़ पर कार को रोकता है तो सोनल देखती है कि सर् को दुप्पटे से बिल्कुल ढके एक लड़की कार में सवार होती है
सोनल को कुछ गलत लगा, वैसे उसने कभी अपने पापा के बारे में गलत नहीं सोचा की वो गलत काम कर सकते है, सोनल अपने पापा जैसा ही अपना पति चाहती थी, काफी मासूम और सीधासाधा. वो चाहने लगी थी अपने पापा को,
रवि ने मोनिका को कार में पीछे बिठाया और फ्लैट के रस्ते की ओर चले गए, सोनल भी ऑटो में उनके पीछे पीछे चल पडी. वो कार में थे तो आसानी से पहुँच गए पर सोनल ऑटो से जा रही थी, सोनल पीछा तो नहीं कर सकती थी पर उसे रास्ता पता था. करीब आधे घंटे बाद सोनल वहां पर पहुँची, सोनल ने ऑटो वाले का किराया चुका कर फ्लैट की तरफ गयी। और फ्लैट के पास पहुची। फ्लैट का दरवाजा लॉक था अंदर से , सोनल को कोई रास्ता नही मिला तो सोनल बैक साइड पहुँचि, वहा बैक साइड में छोटी सी दीवार थी उसके कूदने के बाद एक और बैक डोर था। सोनल वो दीवार फांद कर अंदर गयी और डोर चेक किया । किस्मत से डोर ओपन था, सोनल धीरे से अंदर दाखिल हुईं,
फिर उसे अंदर से अजीब आवाज़ सुनाई दी, सोनल अंदर हाल में आ गयी, वैसे वैसे आवाज़ तेज़ होती गयी. उसे आसानी से पता चल गया की ये आवाज़ चुदवाने की है और धीरे धीरे उसने मोनिका की आवाज़ को पहचान लिया. एक मिनट के लिए सोनल रूक गयी, की कहीं वो गलत तो नहीं कर रही, अगर पापा को पता चल गया तो क्या होगा.
पर फिर सोचा की शायद विनोद मामा मोनिका को चोद रहे हो और पापा सिर्फ उसे छोड़ने आये हो तो..ये सोचकर सोनल फिर से दरवाजे की तरफ़ आगे चली. आगे चलते ही उसने डोर ओपन दिखा और पीछे हट गयी फिर उस ने इधर उधर देखा कि कैसे देखूं कि पापा को पता ना चले.
उसने दूसरी तरफ एक रोशन दान दिखा, सोनल वहा पहुची और देखा वहा कपड़ो की गठरियां पड़ी है, सोनल उनपर चढ़कर रोशनदान तक पहुच गयी। अब फिर सोनल ने ऊपर हो कर देखा तो मोनिका कुत्ते की स्टाइल में थी और रवि मोनिका को जमकर चोद रहे थे..रवि और निशा पूरे नंगे थे. सोनल ने कभी आपमे पापा को ऐसे नहीं देखा था.
सोनल अपने पापा को और पापा के लंड को देखकर हैरान हो गयी..रवि जबरदस्त दम लगाकर मोनिका को चोद रहे थे, मोनिका की जांघे लाल लाल हो गयी थी मतलब रवि उसे आधे घंटे से चोद रहे था. रवि ने उसके बालों को पकड़ के रक्खा था उसका सर भी पीछे खींचकर रक्खा था और वो कुतिया की तरह चुदवा रही थी. सोनल एक दम सुन्न हो गयी थी.
‘विनोद..तुम भाई अगली बार से मत आना, तुम कुछ करते नहीं हो और बस बैठ के देखते रहते हो..क्यूँ मोनिका.’ रवि ने मोनिका को धक्के मारते हुए कहा.
‘ह ह…ह ह्ह्ह्ह…हां साहब जी.’ मोनिका की जबान लडखडा रही थी, वो काफी थक गयी थी. रवि रूकने का नाम नहीं ले रहे था. रवि के पाँव के थपेड़ो की आवाज़, ऊपर से मोनिका की जबरदस्त चुदाई की आवाज़ सुनकर सोनल की चूत भी गीली हो गयी. पता ही नहीं चला कब सोनल का हाथ उसकी अपनी चूत पर चला गया.
सोनल उन दोनों को देखकर जीन्स के ऊपर से ही अपनी चूत मसलने लगी. मोनिका कुतिया की तरह झुकी हुई थी और उसने अपने दोनों हाथ मेज पर लगा कर रक्खे थे. रवि के लंड के धक्के इतने जोरदार थे कि उसकी छाती मेज से टकरा रही थी. सोनल ने देखा की मोनिका मेज को मुट्ठी में लेने की कोशिश कर रही थी, सोनल का अंदाज़ा सही था वो अब झाड़ने वाली थी.
और सोनल के मन में आया ही था की एकदम से वो ढीली हो गयी और उसकी चूत का पानी निकल गया और वो नीचे गिर गयी. रवि का लंड बहार आ गया.सोनल ने देखा सच में उसके पापा का लंड रामू से कम नहीं था. सोनल तो उसे देखते ही पागल हो गयी. और उसे ही देखती रही. फिर रवि ने मोनिका को उठाया और आराम से बिठाया.
मोनिका भी समझ गयी और अपने घुटनों पर बैठ कर रवि के लंड को हिलाने लगी. रवि ने झट से लंड उसके मूंह में डाल दिया और उसके मूंह को चोदने लगे..बेचारी मोनिका..सोनल उसकी हालत समझ रही थी वो काफी थक गयी थी. उधर विनोद मामा बस देखे जा रहे थे. फिर रवि ने अपने लंड को बहार निकला और अपने हाथो से लंड को हिलाने लगे और हट गए..अब सोनल उनके लंड को देख नहीं पा रही थी.
‘ओह्ह्ह..आआअह्ह्ह….बस इतनी सी आवाज़ निकली और उसके पापा के लंड से वीर्य छुट गया..’ सोनल अपने पापा के लंड को देखने के चक्कर में भूल गयी की वो गठरियों पर खडी थी और उसके हिलते ही गठरियां हिल गया और सोनल नीचे गिर गयी. सोनल सीधा गठरियों के साथ नीचे आ गयी. तीनो आवाज सुनकर चौंक गए और रवि ने एकदम से अपनी पेंट उठा ली. और बाहर आकर देखा तो सामने सोनल को पाया। सोनल भी शरमा गयी, सोनल को और कुछ नहीं सुझा तो वो वहां से चल दी. अब सोनल पापा का सामना नहीं कर सकती थी. पापा क्या कहेंगे..
सोनल पापा के डर से जल्दी से चले जा रही थी और इतने में सोनल ने कार के आने की आवाज़ सूनी और मुड़कर देखा. उसके पापा ही आ रहे थे, उन्होंने उसकी ओर देखा और सोनल ने शर्म से आँखे नीचे कर ली, उसे शर्म और डर दोनों लग रहा था. सोनल डर के मारे अपनी टीशर्ट को उंगलियों से खेलने लगी.
‘बैठो..घर अभी दूर है..’ रवि सोनल के पास आकर रुके और कहा. सोनल तो एक ही सेकंड में बैठ गयी. रवि कार चलाने लगा। सोनल एकदम सुन हो कर बैठी थी तभी रस्ते में उसे समझ आया कि मोनिका भी उसकी बगल में बैठी है। तब सोनल को कुछ हौसला हुआ कि मैंने कौनसा गुनाह किया है जो मैं डर रही हूँ, पापा को देखो गलत काम उन्होंने किया फिर भी बिना किसी शर्म और डर के कैसे चौधरी की तरह कहा कि बैठो…
और मोनिका मेरी बगल में बैठी है। सोनल फिर से पापा के मर्दाना होने पर फ़िदा हो गयी.
अब सोनल डर नहीं रही थी, सोनल को पता नहीं क्यो अपने पापा पर प्यार आ रहा था, उन्होंने जो किया वो गलत था, उनकी इज्जत के लिए घर की इज्जत के लिए. पर पता नहीं सोनल अपने पापा की ओर खिंच रही थी. सोनल ने बिना डर के अपने पापा के कंधे पर अपना हाथ रख दिया. जैसे बीवी अपने पति के कंधे पर हाथ रखती है ऐसे. बस अब सोनल के मन में चल रहा था कि किसी तरह अपने पापा के लंड को छूना है. क्या जालीम लंड है उसके पापा का.
सोच ही सोच में घर के करीब पहुँच गये, रवि ने उनको घर से पहले उसी मोड़ पर उतार दिया जहा से मोनिका को पिक किया था।
सोनल और मोनिका दोनो पैदल घर की तरफ चल पड़ी।
दोनो शांत चल रही थी, सोनल ने ही चुपी तोड़ी,
मोनिका कब से चल रहा है ये सब,
मोनिका--- सोनल बेबी प्लीज् मेम साहब को मत बताईयेगा। पिछले छह महीने से चल रहा है,
सोनल---- चिंता ना करो मैं किसी को नही बताऊँगी लेकिन तुम्हे घर चल कर मुझे सारी बात बतानी होंगी।
मोनिका--- ठीक है मैं सब कुछ बात दूँगी तुम्हे। वैसे आप क्यो जानना चाहती हो।
सोनल--- बस मन है जानने का।
दोनो घर पहुच जाती है, मोनिका अपने क्वाटर में और सोनल घर मे जाती है,
आरति-- कहा थी सोनल बेटा।
सोनल--- एक फ्रेंड को कुछ प्रॉब्लम हो गयी थी उसके घर गयी थी।
आरती चाह कर भी ज्यादा नही पूछ पाती। उसे आजकल सोनल से डर लगता था क्या कब बोल दे।
आरती--- बेटा वो स्कूल नही जाएगी आज।
सोनल--- नही।
सोनल अपने कमरे में चली जाती है, आरति सोनल कर रहते रामू काका को बुलाने या उसके पास जाने से डरती है और अपने कमरे में चली जाती है। आरती के जाते ही सोनल बाहर आती है और किचन में रामू को कहती है कि मोनिका को उसके कमरे भेज दे उसका सर दर्द कर रहा है हेड मसाज करवानी है।
रामू क्वाटर जाकर मोनिका को बुला लाता है और सोनल के रूम में भेज देती है।
मोनिका के रूम में आते ही सोनल उसे अपने पास बेड पर बैठा लेती है और उसे पापा के साथ कैसे उसकी चुदाई स्टार्ट हुई पूछती है। मोनिका रवि के साथ अपनी पहली चुदाई की बात बताती है कि छह महीने पहले आरती सोनल के साथ अपनी बहन के घर गयी हुई थी , आरती रात वही रुकने वाली थी.शाम का समय रवि अकेला था घर मे, रामू काका और जया काकी बाजार गए हुए थे और मोनिका आई बरतन माँजने, मोनिका के दिल मे तेज़ गुदगुदी सी होने लगी, अकेला घर, उसमे वो और रवि अकेले, सोच रही थी कि काश रवि उसको बाहों मे भर कर नंगा कर दे, और उसके खूबसूरत जिस्म को देखे. मगर हमेशा की तरह अपनी इच्छा को दबाए रखा, ऐसा करना ठीक नहीं था, वो शादी शुदा और मैं भी. पर ऐसे महॉल मे मैं बहुत ही गरम हो रही थी और शायद साहब जी भी। साहब अपने लंड को अपने आप ही मसलने लगे, मोनिका किचन मे बर्तन मांज रही थी, किचन के बाद डाइनिंग रूम थी और उसके बाद आपका कमरा, जैसे कि मुट्ठी मारने मे और भी मज़ा आए तो साहब ने कमरे मे रखे ड्रेसिंग टेबल के आईने को घुमा कर ऐसे रखा जैसे कि कमरे के दूसरे तरफ खड़े होकर साहब डाइंग रूम का दरवाज़ा देख सके, जहाँ से मैं बर्तन माँजने के बाद आती और साहब एक दम नंगे होकर अपने लंड को मसल्ने लगा और आईने की तरफ देखते रहे, सोचा अगर मैंने देख लिया और कुच्छ कहती भी है तो कह देते कि मैं तो अपने कमरे मे कपड़े बदल रहा था और आईने की तरफ ध्यान नहीं गया कि बाहर से दिख रहा है.
थोरी देर के बाद बर्तन धोने के बाद मैं डाइंग रूम में आ गयी, मेरा दिल और भी ज़ोर से धरकने लगा, सामने कमरे में साहब ननगे खड़े थे, ऐसा ही हुआ उसे देख कर मुझे ऐसा लगा जैसे अपने कपड़े बदल रहै है। उनका नँगा बदन देख कर मुझे भी कुछ कुछ होने लगा, अपने आप एक हाथ चोली के अंदर बूब्स से खेल रहा था और दूसरा हाथ घाघरे के उपर से चूत पर रखा था, शायद साहब ने मुझे आईने से देख लिया था, मेरी धरकन और भी तेज़ होने लगी, समझ गयी कि आग उधर भी लगी थी, दो बार नहीं सोचा और धड़कते दिल से, साहब वैसे ही नंगा बाहर की तरफ आ गये,मैं मदहोश आँखें बंद किए अपने जिस्म से खेल रही थी, साहब के आने की आहट से चौंक उठी और घबरा कर जल्दी से अपनी चुननी ठीक करने लगी और साहब ने मेरे हाथ थाम लिए और कहा–“घबराओ मत मोनिका, मैं भी तुम्हे प्यार करने के लिए बेचैन हो रहा हूँ.”
शरमाती घबराती मैं कहने लगी–“आपको आईने मे नंगा देख कर अपने आप को रोक नहीं पाई, एक मीठी सी गुदगुदी होने लगी थी, मगर मैने नहीं समझा कि आप मुझे देख लोगे.” मेरी इस अदा ने साहब को और भी मदहोश कर दिया और साहब बोले कि–“मैने जानभुज कर आईना ऐसे ही रखा था जिससे मैं तुम्हे देख सकूँ और शायद तुम भी मुझे देख सको.” साहब मेरा कोमल चेहरा अपने दोनो हाथो मे लेते हुए आगे कहा–” तुम बहुत ही खूबसूरत हो मोनिका, तुम्हारा यह चेहरा एक गुलाब के फूल जैसा सुन्दर है और तुम्हारे यह दो होंठ जैसे गुलाब की दो पंखुरियाँ हो, चूमने को जी करता है.” मैं शरमाते हुए कहने लगी–“मुझे जाने दो बाबूजी, यह ठीक नहीं है, मुझे शरम आती है.” साहब मेरी बात अनसुनी करके अपने तपते होंठ मेरे काँपते होंठो पर रख दिए, कितने कोमल होंठ थे साहब के, कितनी मिठास थी उन होंठो मे.
मैं शरमाती, अपनी आँखें झुककर कहने लगी–“ऐसा मत कहिए बाबूजी, ऐसा मत कीजिए, मैं सह नहीं पाउन्गि, आज तक किसी ने मेरी तारीफ नहीं की, मैं तो खामोश अपने तन को राहत देना चाहती थी, आप का नंगा बदन,उठा हुआ….मैं तडप उठी, पर आप ने देख लिया.”
साहब ने हैरानी मे पूछा–“क्यूँ, तुम्हारा मर्द तुम्हारी तारीफ नहीं करता, इतनी हसीन,इतनी खुबुसरत हो तुम.”
मैंने अपना सिर नीचा कर लिया –“कहना नहीं चाहिए, पर मेरा मर्द तो शराब के नशे मे धुत रात को आता था और मेरी तरफ देखता भी नहींथा, जब उसकी इच्छा होती थी अपनी पतलून नीचे करके मेरा घाघरा उपर करके बस अपनी आग ठंडी कर लेता था और मैं तड़पति रह जाती थी , अब तो उसे मरे भी कितने महीने हो गये है,”
“तुम्हारा मर्द बदनसीब है, इतनी सुन्दर औरत और देखता भी नहीं था, मैने तो जब से तुम्हे देखा है, फिदा हो गया हूँ तुम पर. जी करता है तुम्हे देखता ही रहूं, अपनी बाहों मे लेकर प्यार करूँ और तुम्हारा यह प्यारा मुखरा चूमता रहूं.” कहते हुए साहब ने मुझे अपने आगोश मे ले लिया. चुपचाप मैं उनकी बाहों मे समा गयी और अपना सिर उनके सीने पर रख लिया, उससे बहुत ही राहत मिल रही थी, मेरा घबराना कुच्छ कम हुआ था. इन सभ बातों मे साहब लंड भी थोड़ा सा मुरझा गया था, मेरा खूबसूरत, कोमल जिस्म उनकी बाहों मे था, मुझे भी बहुत ही अच्छा लगा रहा था, थोरी देर तक ऐसे ही मुझे अपनी बाहों मे बाँधे रखा और फिर मेरे गाल को सहला कर मेरा मुँह उपर किया, हमारी निगाहें मिली, प्यार भरा था उनकी आँखों मे, उसे अपना महसूस कर रहा थी, शायद वो भी ऐसा ही महसूस कर रहै थे इसीलिए वो भी बेफिकर मुझे अपनी बाहों मे बाँधे थे, मैने उनका माथा चूम लिया और उन प्यारी सी आँखों पर अपने होंठ रख कर एक चुंबन दिया और तो साहब ने कहा–“मोनिका, आज मैं तुम्हे प्यार करके तुम्हारी यह तडप निकाल दूँगा, और तुम्हे महसूस कराउँगा कि तुम वाकई मे कितनी हसीन हो.” कहते हुए उन्होंने अपने होंठ मेरे होंठो पर रख दिए, इस बार मैं नहीं हटी और उनके चुंबन का जवाब अपने चुंबन से दिया, मैने अपने होंठ नहीं हटाए और उनके होंठ अपने होंठो के बीच लेकर चूसने लगी, जवाब मे वो भी मेरा उपर का होंठ चूसने लगे.मैं बिना होंठ हटाए कहने लगी–“मुझे पिघला दिया तुमने, बेताब थी ऐसे चुंबन के लिए, मेरा दिल इतना धड़क रहा है कि ऐसे लग रहा है की उच्छल कर बाहर आ जाएगा.”
मेरे गाल को चूम कर कहने लगे–“मैं भी सुनू कैसे धड़क रहा है तुम्हारा दिल.”
कहते हुए वे नीचे हुये और अपना कान मेरे कोमल सीने पर रख दिया, एक लंबी साँस ली मैंने, वाकई मे बहुत ही तेज़ धड़क रहा था, उनकी बाहें मेरी कमर के इर्द गिर्द थी,
उसके बाद हम दोनों एक दूसरे से नंगे होकर लिपट गये और चुम्मा चाटी करने लगे। साहब मेरे दूध हाथ से दबाने लगे। मुझे अभी बहुत मजा मिल रहा था। फिर साहब मेरे मस्त मस्त दूध पीने लगे। मेरी चूत ढीली और रसीली होनी लगी। मैंने उसके मोटे लंड को हाथ में लेकर सहलाने लगी। धीरे धीरे साहब का लंड खड़ा होने लगा। आधे घंटे तक उन्होंने मेरे इतना दूध पिया की मेरी छातियाँ बिलकुल लाल लाल हो गयी। कई बार चुदास में आकर साहब ने मेरे दूध को अपने दांत से काट लिया। मैं तडप उठी।
फिर वो मेरी चूत पर आ गये और मेरी रसीली बुर पीने लगे। आह मुझे बहुत सुख मिला। मेरी चूत से माल निकलने लगा जिसको वो चाट रहे थे। इसी बीच मैंने थोडा सा मूत दिया। साहब वो भी चाट गये। फिर उन्होंने व्हिस्की की बोतल उठा ली और मेरी चूत पर धीरे धीरे गिराने लगे। और नीचे मुँह लगाकर पीने लगे। कम से कम यही खेल २ घंटा चला। साहब कभी मेरी चूचियों पर व्हिस्की डालकर पीते, तो कभी चूत पर। फिर उन्होंने मेरे दोनों घुटने खोल दिए और लंड मेरे चुत में डाल दिया।
"मोनिका!!..तुमको चोद तो रहा हूँ..पर ऐसे चूत देना की लगे की मैं अपनी पत्नी को चोद रहा हू!!" साहब बोले
ये सुनकर मैंने उनको अपनी बाँहों में भर लिया और उसी तरह से चुदवाने लगी जैसी मेरा पति मुझे चोदा करता था। कुछ दी देर में साहब ने अच्छी रफ्तार पकड़ ली और मुझे पटर पटर करके चोदने लगे। मेरा और उसका पेट पट पट की आवाज करते हुए बड़ी तेज तेज टकरा रहा था। मैं मजे से चुदवा रही थी।
"आआआआ ...साहब जी...औ.र तेज चोदो..आह आह ...फाड़ दे मेरा भोसड़ा..आज!!" मैंने किसी रंडी की तरह चिल्लाने लगी तो साहब भी जोश में आ गये। उन्होंने मेरे दोनों कंधे कसके पकड़ लिया और जल्दी जल्दी मुझे ठोंकने लगे। लगा जैसे कोई चुदाई वाली मशीन मुझे चोद रही है। साहब मेरी गर्मा गर्म सिकारियां, मेरी कामुक आवाजों का भरपूर आनंद ले रहे थे। मुझे फट फट फरके फक कर रहे थे। वो बहुत मेहनत से मेरे साथ मेरी चिकनी योनी में सम्भोग कर रहे है। मुझे बहुत मजा मिला। आज कई महीने बाद फिर से मेरी चूत का सटर उठा और उसका उदघाटन हुआ। साहब मेरे दूध भी पी रहे थे और मेरे सेक्सी ओंठ पी चूस रहे थे। ३० मिनट बाद साहब मेरी चुत में आउट हो गये।
फिर मैं उसने किसी जोंक की तरह चिपक गयी और प्यार करने लगी।
"मोनिका!!!..कैसी चुदाई की मैंने...क्या तुम्हारे मर्द से जादा अच्छी चुदाई की???" साहब ने पूछा
"हाँ .साहब ! आपके लौड़े में तो अभी बहुत दम है। एक साथ आप कई औरतों को चुदाई के खेल में हरा दोगे!!" मैंने कहा
उसके बाद मैं साहब का लंड चूसने लगी। इतने गोरे मस्त लौड़े को मुँह में लेकर चुसना बहुत गर्व की बात थी। कितना बड़ा, कितना गुलाबी और कितना मीठा लौड़ा है साहब का। उन्होंने मेरे सर पर हाथ रख दिया और अपने मुँह की ओर धक्का दे देकर वो लंड चुस्वाने लगे। उनको भी इसमें बहुत मजा मिल रहा था। मैं उनकी गोलियां भी मुँह में भरकर चूस लेती थी। मैं गले तक साहब का लौड़ा चूस रही थी। उनके लंड से माल रिसने लगा था क्यूंकि वो बहुत उत्तेजित महसूस कर रहे थे। फिर लंड चुस्वाने के बाद साहब ने मुझे बिस्तर पर कुतिया बना दिया। मैं अपने दोनों हाथों और घुटनों पर कुतिया बन गयी। साहब मेरी गांड पीने लगे। मुझे एक अलग सा नशा छाने लगा। फिर उन्होंने मेरी गांड में ढेर सारा तेल लगा दिया और लंड मेरी गांड में डाल दिया और फिर वो मेरी गांड मारने लगी।
शुरू शुरू में मुझे लग रहा था इतना मोटा लंड मैं बर्दास्त नही कर पाउंगी, पर 10 मिनट बाद मेरी गांड का छेद खुल गया और मैं मजे से उछल उछलकर कर गांड मरवाने लगी।
"आह आह आह ..हा हा हा!!" करके साहब मेरी गांड चोद रहे थे। कुछ देर बाद तो जैसे मुझे गांड मरवाने का चस्का लग गया। डेढ़ घंटे तक साहब ने मेरी गांड दबाकर चोदी, उसके बाद साहब ने अपना माल मेरी गांड में ही छोड़ दिया। उसके बाद फिर कुतिया बनाकर मेरी चूत मारी। अब तो जब भी मूड होता है साहब मुझे फ़्लैट में ले जाकर मेरी चुदाई करते है,
ऐसे मोनिका ने अपनी चुदाई की कहानी बता दी सोनल को।
सोनल---- फिर विनोद मामा कब साथ मिले तुम लोगो के।
मोनिका---- एक दिन मम्मसहब घर नही थी, तुम स्कूल गयी थी तब मैं और साहब उनके रूम में मस्ती कर रहे थे तब तुमारे मामा आ गए थे अचानक। तब से ही वो कभी कभी आ जाते है। हां वैसे उनका आना न आना एक ही बात है उनका लण्ड बिल्कुल छोटा है और जल्दी झड़ जाते है, फिर बैठकर देखते रहते है मुझे चुदवाते हुए तुमारे पापा से।
सोनल मोनिका की चुदाई कहानी सुनकर बहुत गर्म हो गयी, वो पहले ही अपने पापा की चुदाई लीला देखकर मदहोश थी, अब मोनिका की स्टोरी सुनकर और हो गयी।
मोनिका चोर आँखों से सोनल को देखा वो पलट कर मोनिका को ही देख रही थी। मोनिका ने नजरंदाज कर दिया। सोनल कुछ बैचेन नजर आ रही थी।
अचानक मोनिका ने सोनल को पुकारा- सोनल बेबी, तुम ये जानकर क्या करोगी ।
उसकी आवाज में भारीपन था।
मोनिका ने कहा- तुम्हारे पापा और मैं बस मजा ले रहे हैं एक दूसरे के जिस्म का !
सोनल- मैं पागल हो रही हूँ ये सब देख कर, एक अजीब सी आग भर रही है। मैं क्या करूँ?
मोनिका- मेरी जान आ, आ जा, तुझे कुछ नया मजा दूँ जिंदगी का।
सोनल- नही, ये ग़लत है, मैंने कभी किसी के साथ कभी ऐसा नहीं किया। तुम तो वैसे भी लड़की हो।
मोनिका- तो आज कर ले। आ जा ऐसा मौका दुबारा नहीं आता।
सोनल- मुझे शर्म आ रही है !
मोनिका- अपने कपड़े उतार दे सारे ! एकदम नंगी हो जा ! फ़िर शर्म जाती रहेगी।
और फ़िर मोनिका ने सोनल को एकदम नंगा कर दिया। वो ऑंखें बंद कर के लेटी थी।
मोनिका- अब बोल क्या हो रहा है?
सोनल- कुछ नही, एक अजीब सा नशा बढ़ रहा है जिस्म में।
मोनिका- बोल क्या चाहती है?
सोनल- मुझे किस करो, मेरे होंठों में, जैसे तुम और पापा कर रहे थे।
और मोनिका सोनल के सिरहाने बैठ गई और उसके सर को अपने हाथों में ले कर उसके होंठों पर अपने होंठ रख कर उसे चूसने लगी। सोनल भी अपने आप को रोक नहीं पाई और उसकी किस में शामिल हो गई। सोनल और मोनिका एक दूसरे के होंठों को चूस रहे थी, कभी अपनी अपनी जीभ निकालते और एक दूसरे से मिलते हुए एक दूसरे के मुंह में घुसा देते। कुछ देर ये सिलसिला चलता रहा।
अब मोनिका सोनल के मम्मों को हाथों में ले कर चूसने लगे, एक एक हाथ उसके जिस्म को टटोल रहा था। उसकी जांघों पर फिसल रहा था। सोनल अपने आप में नहीं थी, उसके अन्दर जैसे एक चिंगारी उठ रही हों। गरम आहों से कमरा भर गया था।सोनल से अब बर्दाशत नहीं हुआ। मोनिका सोनल का सारा रस पी जाने को बेताब थी। सो मोनिका ने सोनल की टाँगे खोल कर में अपनी जीभ एक दम से उसकी चूत में घुसा दी।
सोनल- सी स्स्स्स हाय ! ये क्या कर दिया मोनिका ! स्स्स्स्स हाय !
मोनिका बेतहाशा उसके रस को चूसे जा रही थी और उसके सारे जिस्म को चाटने में व्यस्त थी। दोनों सेक्स का भरपूर मजा ले रही थी। मोनिका ने सोनल को अचानक उल्टा कर दिया और उसके चूतड़ ऊपर उठा दिए। अब मोनिका ने अपने जीभ उसके पीछे घुसा दी।
सोनल की सिस्कारियां बढ़ रही थी- हाय, मोनिका ये क्या आग लगा थी, घुसा दे अपनी जीभ, अपने उंगलिया मेरे पीछे। चोद मुझे अपनी जीभ से।
मोनिका और तेजी से उसे अपनी उँगलियों से चोदने लगी, कभी आगे से कभी पीछे से, तब तक मोनिका सोनल के नीचे लेट कर उसे चाटने लगी, सोनल बुरी तरह से गीली थी। मोनिका सोनल की चूत को चाट चाट कर उसकी आग बुझाने में लगी थी।
सोनल के शांत हो जाने के बाद सोनल ने मोनिका को चोदा जैसे मोनिका ने उसको किया था।
उस दिन दोनो ने चार बार एक दूसरे को चोदा। शाम कब हो गई पता ही नहीं चला।
सोनल और मोनिका खुश थी कि मोनिका इसलिए कि सोनल भी उनके खेल में शामिल हो गई है। अब ये खेल और मजेदार हो गया था, और सोनल इसलिए कि वो अब जल्द ही अपने पापा को हासिल कर लेगी।