S
StoryPublisher
Guest
आरती जो कि अपनी सोच से निकलना नहीं चाहती थी पर रवि की हरकतों से वो भी थोड़ा थोड़ा उत्तेजित होने लगी थी
रवि- इधर घुमो हाँ… और अपने होंठ दो,
आरती भी बिना ना नुकार के रवि की ओर पलट गई और अपने होंठों को रवि को सोप दिया । रवि उसके होंठों को पीता गया और अपने हाथों से उसके गाउनको सामने से खोलकर अपने हाथों को उसके गोल गोल उभारों पर रख कर उनके साइज का सर्वे करने लगा था
आरती- हमम्म्म कहा ना मन नहीं है
रवि- बस थोड़ी देर हाँ… बस लेटी रहो बाकी में कर लूँगा आज
आरती- प्लीज ना आज नहीं
पर उसके मना करने के तरीके से पता चलता था कि वो चाहती तो थी पर क्यों मना कर रही थी पता नहीं उसके हाथ अब रवि के सिर और पीठ पर घूमने लगे थे
रवि- रूको थोड़ी देर बस
आरती- उूउउम्म्म्ममममम ईईईईईईीीइसस्स्स्स्स्सस्स
करती हुई धीरे-धीरे रवि का साथ देने लगी थी रवि के किस करने में आज कुछ अलग था वो आज बहुत ही वाइल्ड तरीके से किस कर रहा था जोर लगा के उसके पूरे होंठों को अपने मुख के अंदर तक चूसकर घुसा लेता था और फिर अपनी जीब को भी उसके मुख के अंदर तक घुसा ले जाता था उसके हाथ अब थोड़े रफ हो गये थे
उसकी चूचियां खूब जोर-जोर से दबाते जा रहे थे कि तभी रवि आरती के ऊपर से थोड़ा सा हटा और अपने पाजामे को नीचे की ओर सरका दिया और आरती के हाथ को पकड़कर अपने लण्ड पर रखने लगा
रवि- पकडो इसे
आरती ने कोई ना नुकर नहीं की और झट से उसके लण्ड को अपनी कोमल हथेलियो में जकड़ लिया और रवि को रिटर्न किस करने लगी
रवि का लण्ड टाइट हो चुका था पर अचानक ही उसकी आखों के सामने वो एक मोटा सा और लंबा सा लण्ड घूम गया भोला का काले रंग की वो आकृति उसके जेहन में एक अजीब सी उथल पुथल मचा रही थी कसी हुई जाँघो के सामने से झूलता हुआ वो लण्ड उसके मन में अंदर तक उसे हिलाकर रख दिया उसकी हथेलिया रवि के लण्ड पर बहुत कस गई और वो रवि को किस करती हुई उसके लण्ड को जैसे निचोड़ने लगी थी रवि को भी अचानक ही हुए आरती की हरकतों में बदलाव से बेचैनी होने लगी थी वो थोड़ा सा उठा और आरती की जाँघो के बीच से एक ही झटके में उसकी पैंटी को उतार फेका और झट से उसकी चुत में समा गया
आरती भी जैसे तैयार ही थी अंदर जाते ही आरती फिर से एक सेक्स मेनिक बन गई थी अपनी कमर को उछाल कर बहुत ही तेजी से रवि का साथ देने लगी थी वो जानती थी कि रवि ज्यादा देर का मेहमान नहीं है पर ना जाने क्यों वो आज बहुत ही कामुक हो उठी थी शायद उसकी बजाह थी वो आकृति जो उसके जेहन में अचानक ही उठ गई थी भोला का सर्पाकार काले और मोटे लण्ड की आकृति उसकी माँस पेशियाँ और उसका वो गठीला कद काठी और खा जाने वाली नजर वो अपनी आखों के सामने उस इंसान की याद करके अपने पति का साथ दे रही थी पता नहीं क्यों वो आज रवि से पहले ही झड गई और एक ठंडी लाश की तरह से रवि की बाहों में लटक गई
रवि अपनी रफ़्तार को बढ़ाए हुए आरती को अब भी चोद रहा था और बहुत ही जोर-जोर से आरती को लगातार किस करता जा रहा था
रवि- क्यों क्या हुआ आज तो मन नहीं था अन्नाअनाआआआआआआआआआआ हमम्म्ममममममममममम
हान्फते हुए रवि भी आरती के ऊपर ढेर हो गया
आरती रवि के नीचे लेटी हुई अपने हाथों से रवि के बालों को धीरे-धीरे सहलाते हुए रवि को अपनी बाहों में धीरे से कस्ती जा रही थी जैसे वो नहीं चाहती थी कि रवि उसके ऊपर से हटे पर अंदर की ओर देखती हुई वो भोला के बारे में सोचने को मजबूर हो रही थी क्यों सोच रही थी वो पर ना जाने क्यों बार-बार उसके जेहन में उस समय का सीन उभरकर आ जाता था उस औरत का और पीछे की ओर से भोला को आगे पीछे होते हुए देखा था उसने वो औरत चिल्ला भी नहीं रही थी यानी कि उसे मजा आ रहा था वो उसका साथ दे रही थी उस सांड़ का उस हबसी का और वो भी दिन के उजाले में छत पर आखिर क्यों
वो औरत कौन थी और भोला के साथ वहां कैसे पहुँची क्या वो औरत उनके यहां ही काम करती है या कौन है पर भोला को मना भी कर सकती थी ऐसा क्या हुआ जो वो छत पर जाके यह सब करना पड़ा इतनी उत्तेजना किस काम की
पता नहीं सोचते सोचते कब वो सो गई पर रात भर उसके सपने में वो सीन उसके शरीर में एक अजीब सी उत्तेजना को हवा देता रहा और जब वो सुबह उठी तो उसकी उत्तेजना वैसे ही थी जैसे रात को थी वो पलटी और रवि की ओर घूमी पर रवि तो उठ चुका था और शायद नीचे भी चला गया था बाथरूम भी खाली था वो भी जल्दी से उठी और चाय पीने को नीचे आई फिर तो कुछ भी पासिबल नहीं था जल्दी-जल्दी से रवि और आरती तैयार होकर फैक्टरी फिर शोरुम और फिर शाम और पूरा दिन यू ही निकल गया रात को भी कुछ ज्यादा बदलाब नहीं हाँ… एक बदलाब जरूर था रवि अब ज्यादा ही आरती को प्यार करने लगा था रोज रात को रवि खुद ही आरती को पकड़कर निचोड़ने लगा था और आरती भी उसका साथ देने लगी थी पर एक बदलाब जो कि आरती के जीवन में आ गया था वो था फैक्टरी में देखा गया वो सीन जो हमेशा ही उसके जेहन में छाया रहता था और उसे उत्तेजित करता रहता था शायद इसीलिए अब हमेशा रवि की जीत होती थी और आरती की हार पर रवि खुश था और आरती भी लेकिन आरती थोड़ा सा आब्सेंट माइंडेड हो गई थी वो हमेशा ही कुछ ना कुछ सोचती रहती थी
रवि- इधर घुमो हाँ… और अपने होंठ दो,
आरती भी बिना ना नुकार के रवि की ओर पलट गई और अपने होंठों को रवि को सोप दिया । रवि उसके होंठों को पीता गया और अपने हाथों से उसके गाउनको सामने से खोलकर अपने हाथों को उसके गोल गोल उभारों पर रख कर उनके साइज का सर्वे करने लगा था
आरती- हमम्म्म कहा ना मन नहीं है
रवि- बस थोड़ी देर हाँ… बस लेटी रहो बाकी में कर लूँगा आज
आरती- प्लीज ना आज नहीं
पर उसके मना करने के तरीके से पता चलता था कि वो चाहती तो थी पर क्यों मना कर रही थी पता नहीं उसके हाथ अब रवि के सिर और पीठ पर घूमने लगे थे
रवि- रूको थोड़ी देर बस
आरती- उूउउम्म्म्ममममम ईईईईईईीीइसस्स्स्स्स्सस्स
करती हुई धीरे-धीरे रवि का साथ देने लगी थी रवि के किस करने में आज कुछ अलग था वो आज बहुत ही वाइल्ड तरीके से किस कर रहा था जोर लगा के उसके पूरे होंठों को अपने मुख के अंदर तक चूसकर घुसा लेता था और फिर अपनी जीब को भी उसके मुख के अंदर तक घुसा ले जाता था उसके हाथ अब थोड़े रफ हो गये थे
उसकी चूचियां खूब जोर-जोर से दबाते जा रहे थे कि तभी रवि आरती के ऊपर से थोड़ा सा हटा और अपने पाजामे को नीचे की ओर सरका दिया और आरती के हाथ को पकड़कर अपने लण्ड पर रखने लगा
रवि- पकडो इसे
आरती ने कोई ना नुकर नहीं की और झट से उसके लण्ड को अपनी कोमल हथेलियो में जकड़ लिया और रवि को रिटर्न किस करने लगी
रवि का लण्ड टाइट हो चुका था पर अचानक ही उसकी आखों के सामने वो एक मोटा सा और लंबा सा लण्ड घूम गया भोला का काले रंग की वो आकृति उसके जेहन में एक अजीब सी उथल पुथल मचा रही थी कसी हुई जाँघो के सामने से झूलता हुआ वो लण्ड उसके मन में अंदर तक उसे हिलाकर रख दिया उसकी हथेलिया रवि के लण्ड पर बहुत कस गई और वो रवि को किस करती हुई उसके लण्ड को जैसे निचोड़ने लगी थी रवि को भी अचानक ही हुए आरती की हरकतों में बदलाव से बेचैनी होने लगी थी वो थोड़ा सा उठा और आरती की जाँघो के बीच से एक ही झटके में उसकी पैंटी को उतार फेका और झट से उसकी चुत में समा गया
आरती भी जैसे तैयार ही थी अंदर जाते ही आरती फिर से एक सेक्स मेनिक बन गई थी अपनी कमर को उछाल कर बहुत ही तेजी से रवि का साथ देने लगी थी वो जानती थी कि रवि ज्यादा देर का मेहमान नहीं है पर ना जाने क्यों वो आज बहुत ही कामुक हो उठी थी शायद उसकी बजाह थी वो आकृति जो उसके जेहन में अचानक ही उठ गई थी भोला का सर्पाकार काले और मोटे लण्ड की आकृति उसकी माँस पेशियाँ और उसका वो गठीला कद काठी और खा जाने वाली नजर वो अपनी आखों के सामने उस इंसान की याद करके अपने पति का साथ दे रही थी पता नहीं क्यों वो आज रवि से पहले ही झड गई और एक ठंडी लाश की तरह से रवि की बाहों में लटक गई
रवि अपनी रफ़्तार को बढ़ाए हुए आरती को अब भी चोद रहा था और बहुत ही जोर-जोर से आरती को लगातार किस करता जा रहा था
रवि- क्यों क्या हुआ आज तो मन नहीं था अन्नाअनाआआआआआआआआआआ हमम्म्ममममममममममम
हान्फते हुए रवि भी आरती के ऊपर ढेर हो गया
आरती रवि के नीचे लेटी हुई अपने हाथों से रवि के बालों को धीरे-धीरे सहलाते हुए रवि को अपनी बाहों में धीरे से कस्ती जा रही थी जैसे वो नहीं चाहती थी कि रवि उसके ऊपर से हटे पर अंदर की ओर देखती हुई वो भोला के बारे में सोचने को मजबूर हो रही थी क्यों सोच रही थी वो पर ना जाने क्यों बार-बार उसके जेहन में उस समय का सीन उभरकर आ जाता था उस औरत का और पीछे की ओर से भोला को आगे पीछे होते हुए देखा था उसने वो औरत चिल्ला भी नहीं रही थी यानी कि उसे मजा आ रहा था वो उसका साथ दे रही थी उस सांड़ का उस हबसी का और वो भी दिन के उजाले में छत पर आखिर क्यों
वो औरत कौन थी और भोला के साथ वहां कैसे पहुँची क्या वो औरत उनके यहां ही काम करती है या कौन है पर भोला को मना भी कर सकती थी ऐसा क्या हुआ जो वो छत पर जाके यह सब करना पड़ा इतनी उत्तेजना किस काम की
पता नहीं सोचते सोचते कब वो सो गई पर रात भर उसके सपने में वो सीन उसके शरीर में एक अजीब सी उत्तेजना को हवा देता रहा और जब वो सुबह उठी तो उसकी उत्तेजना वैसे ही थी जैसे रात को थी वो पलटी और रवि की ओर घूमी पर रवि तो उठ चुका था और शायद नीचे भी चला गया था बाथरूम भी खाली था वो भी जल्दी से उठी और चाय पीने को नीचे आई फिर तो कुछ भी पासिबल नहीं था जल्दी-जल्दी से रवि और आरती तैयार होकर फैक्टरी फिर शोरुम और फिर शाम और पूरा दिन यू ही निकल गया रात को भी कुछ ज्यादा बदलाब नहीं हाँ… एक बदलाब जरूर था रवि अब ज्यादा ही आरती को प्यार करने लगा था रोज रात को रवि खुद ही आरती को पकड़कर निचोड़ने लगा था और आरती भी उसका साथ देने लगी थी पर एक बदलाब जो कि आरती के जीवन में आ गया था वो था फैक्टरी में देखा गया वो सीन जो हमेशा ही उसके जेहन में छाया रहता था और उसे उत्तेजित करता रहता था शायद इसीलिए अब हमेशा रवि की जीत होती थी और आरती की हार पर रवि खुश था और आरती भी लेकिन आरती थोड़ा सा आब्सेंट माइंडेड हो गई थी वो हमेशा ही कुछ ना कुछ सोचती रहती थी