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वैसे तो रामु काका बहुत सहनशील थे लेकिन सोनल ने इतनी कसकर थप्पड़ मारे थे कि उनकी शक्ति अब जवाब दे गयी और उनकी आँखो से आँसू आने लगे।
तो सोनल बोली कि तुमने मेरे पैरो और सेंडल को गंदा कर दिया है इन्हे साफ करो।
तो रामु काका के मना करने पर सोनल ने अपने सेंडल खुद ही उतारे और उसके बाद तो उनके मुहं पर सोनल के सेंडल बरसने लगे। जितने सोनल ने रामु काका के चेहरे पर थप्पड़ मारे थे उससे भी ज़ोर से उसने सेंडल मारे जिससे उसके मुहं पर भी सोनल के सेंडलो के निशान पड़ गये और रामु काका के चेहरे पर सोनल के सेंडल का नंबर 8 भी छप गया था।
फिर सोनल बोली कि अब मेरे तलवो को चाट कर साफ करो।
तो रामु काका सोनल के तलवे चाटने लग गया.. लेकिन सोनल के तलवे बहुत ही गोरे और मुलायम थे जीभ लगते ही रामु को सोनल के तलवो का टेस्ट बहुत अच्छा लगने लगा था। फिर रामु काका ने सोनल के तलवे चाट चाटकर साफ किए ।
और फिर सोनल बोली कि यदि तुम यह चाहते हो कि मैं पापा को यह बात ना बताऊँ तो जो मैं कहूँ आज के बाद वही करना और यह बात ध्यान रखना कि औरो के सामने तो में तुम्हारी वही सोनल बिटिया हूँ और तुम्हारे सामने तुम्हारी मालकिन.. समझे?
रामु काका बोले कि जी बिटिया समझ गया। फिर एक करारा थप्पड़ गाल पर पड़ा और सोनल बोली.. कहा ना कि तुम्हारे सामने तुम्हारी मालकिन।
तो रामु बोला कि जी मालकिन।
तो सोनल बोली कि आज के बाद मेरे गुलाम बनकर रहना वरना में तुम्हारा क्या हाल करूँगी.. यह तुम बहुत अच्छी तरह जान गये होगे?
फिर रामु बोला कि जी मालकिन में हमेशा आपका गुलाम ही बनकर रहूँगा।
फिर सोनल बोली कि चलो अब पानी लेकर आओ और मेरे पैरो को भी साफ करो।
तो रामु काका सोनल के पैरो को धोने के लिए पानी लेने गया और अपना चेहरा भी साफ करने लगा और जैसे ही रामु अपने चहरे को धोने लगा तो पीछे से सोनल ने एक जोरदार लात उसकी गांड पर मारी.. जिससे उसका चेहरा नल की टूटी पर लगा जिससे उनके नाक पर खून आने लगा। फिर सोनल जोर से चीखते हुए बोली कि मैंने तुम्हे अपने पैरो को धोने के लिए कहा था और तुम अपने चहरे को धो रहे हो.. तुम्हारी इतनी हिम्मत कैसे हुई?
रामु ने कहा कि बिटिया वो..
तो इस बार सोनल ने उसके लंड पर लात मारी और बोली कि मैंने तुमसे पहले भी कहा था कि मैं तुम्हारी मालकिन हूँ।
तो रामु ने कहा कि माफ करना मालकिन और दर्द से उसके लंड का बुरा हाल हो रहा था।
तब सोनल बोली कि गुलाम हो गुलाम बनकर ही रहो और जैसा में कहूँ वैसा ही करो.. चलो पानी की बाल्टी उठाओ और मेरे साथ रूम में चलो।
तो रामु बाल्टी उठाकर सोनल के रूम में चल पड़ा और रूम में जाकर सोनल सोफे पर बैठ गयी और उसे अपने पैर धोने के लिए कहा।
तो रामु उसके पैरो को धोने लगा और धो धो कर रामु ने उसके पैरो को पहले से भी अधिक खूबसूरत बना दिया जिससे सोनल का गुस्सा थोड़ा शांत हुआ।
फिर सोनल बोली कि अब तुम इस पानी से अपना मुहं धो सकते हो। फिर जिस पानी में रामु काका ने अभी सोनल यानी कि उसकी मालकिन के पैरो को साफ किया था.. रामु ने उस पानी में अपने चहरे को साफ किया और उसे अब थोड़ा दर्द भी कम होने लगा.. ना जाने सोनल के पैरो में ऐसी क्या ताक़त थी कि पानी से धोते ही उसका चेहरा पहले से भी साफ हो गया था। फिर सोनल बोली कि जाओ और याद रखना तुम मेरे गुलाम बनकर ही रहोगे।
तो रामु बोला कि जी मालकिन।
जैसे तैसे करके उस दिन रामु काका ने अपना काम खत्म किया,
रात को सब खाना खाकर कुछ देर बाद सो गये और फिर रामु काका भी अपना दर्द भुलाकर सो गये।
कुछ देर बाद सोनल रामु काका के कमरे में आई और उसके मुहं पर सोते हुए एक तमाचा जड़ दिया। सोनल के तमाचे से रामु काका की नींद उड़ गयी और रामु काका जाग गये और रामु काका बोले कि क्या हुआ बिटिया.. आपने अब क्यों मारा?
बस रामु काका का इतना ही कहना था कि सोनल ने रामु काका को बालों से पकड़कर बिस्तर से नीचे खींचा और धनाधन थप्पड़ो की बरसात कर दी.. करीब 5 मिनट तक उनके मुहं का भुर्ता बनाने के बाद वो बोली कि मैंने कहा था ना कि में तुम्हारी मालकिन हूँ.. तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मुझे बिटिया कहने की?
तो रामु काका बोले कि मुझे माफ़ कर दो मालकिन.. में भूल गया था आपका थप्पड़ खाकर मेरा दिमाग काम करना बंद कर गया था।
तो सोनल बोली कि आज में तुम्हारा दिमाग सही कर देती हूँ और उसके बाद सोनल रूम से बाहर गयी और दो मिनट बाद ही वापस आ गयी और अब उसके हाथ में एक गोल डंडा था और रूम में आते ही सोनल बोली कि चल कुत्ता बनकर दिखा। तो रामु तुरंत ही अपने दोनों हाथों और पैरो को ज़मीन पर रखकर कुत्ता बन गया और जैसे ही वो कुत्ता बना सोनल ने खिचकर उसकी गांड पर डंडा मारा और रामु काका दर्द से चीख उठे। सोनल ने खींचकर चार बार और मारा तो दर्द से उनकी जान निकल गई। तो रामु काका बोले कि प्लीज़ मालकिन इस बार माफ़ कर दो आगे से में हमेशा ध्यान रखूँगा कि आप मेरी मालकिन हो।
तो सोनल ने उनकी गांड पर डॅंडो की बौछार कर दी और करीब 10 मिनट तक उनकी गांड लाल करने के बाद सोनल बोली कि इस बार छोड़ रही हूँ.. लेकिन अगली बार ग़लती हुई तो याद रखना तुम बैठने के काबिल भी नहीं रहोगे
तो रामु बोला कि जी मालकिन में याद रखूँगा
और थोड़ी देर में फिर रामु बोला कि मालकिन आप इतनी रात मेरे रूम में क्यों आ गयी?
तो सोनल बोली कि मेरे पैरो में आज पूरा दिन सेंडल पहनने के कारण दर्द हो रहा है तो मैंने सोचा कि मेरा गुलाम किस काम आएगा इसलिए में तुम्हारे पास आ गयी।
फिर सोनल बेड पर बैठ गयी और अपने पैरो को मिनी टेबल जो कि गुलदस्ता या टेबल फेन रखने के काम आता है उस पर पैरो को रखकर बैठ गयी और रामु काका को बोली कि चलो मेरे तलवो को चाटो और याद रखना जब तक में ना कहूँ तुम्हारी जीभ मेरे पैरो से अलग नहीं होनी चाहिए।
फिर रामु बोला कि जी मालकिन जैसी आपकी आज्ञा।
फिर रामु काका ने सोनल के तलवो को चाटना शुरू कर दिया सोनल के पैर बिल्कुल गोरे और एकदम साफ दिख रहे थे। तो रामु ने जैसी ही सोनल के तलवो को चाटना शुरू किया उनके तलवो का स्वाद चखकर रामु काका तो अब पागल सा हो गये थे और कुत्तो की तरह सोनल के तलवो को चाटने लगे और अब उनको सोनल के तलवो को चाटने में बड़ा मज़ा आ रहा था। फिर रामु काका सोनल के तलवो को अब अपने मुहं से चूसने लगे थे.. ऐसे स्वाद से तो रामु काका पागल हो रहै थे और करीब आधे घंटे तक सोनल के तलवे चाटने के बाद सोनल बोली कि बस रुक जाओ। अब मेरा दर्द खत्म हो गया है और एक बात और आज के बाद हर सुबह उठते ही मेरे कमरे में आ जाना समझे।
तो रामु काका बोले कि क्यों मालकिन?
फिर सोनल बोली कि क्योंकि अब से तुम्हे हर सुबह मेरे पैरो को चाटना है समझे..
रामु काका बोले कि जी मालकिन जैसा आपका हुक्म।
फिर सोनल बोली कि कल कविता के सामने मेरा पालतू कुत्ता बनकर रहना और अगर ज़रा भी तुमने कोई बात मानने से इनकार किया तो अपना चेहरा याद कर लेना कि मैंने तुम्हारा क्या हाल किया था?
तो रामु ने कहा कि जी मालकिन जैसा आप हुक्म देंगी मैं वैसा ही करूँगा और फिर सोनल अपने रूम में चली गयी और रामु अपने बिस्तर पर सोने लगा तो उनकी गांड में बहुत दर्द होने लगा.. क्योंकि सोनल ने डंडे मार मारकर उनकी गांड को लाल कर दिया था। उनसे अब सोया भी नहीं जा रहा था। फिर करीब दो घंटे बाद दर्द कम हुआ और वो सो गये।
फिर सुबह उठते ही पहले रामु सीधा अपनी मालकिन सोनल के रूम में गया तब सोनल रूम में नहीं थी और कविता नहा रही थी। सोनल बाहर गार्डन में योग कर रही थी, रामु सीधा गार्डन में चला गया।
सोनल खड़े होकर योग कर रही थी और रामु सीधा उसके पैरो में गिर पड़ा और उसके पैरो को चाटने लगा और दोनों पैरो को चाटने के बाद उसने कहा कि गुड मॉर्निंग मालकिन।
तो सोनल के चहरे पर हल्की सी मुस्कान आई और बोली कि मेरी मम्मी के आशिक़ की यही जगह सही है मम्मी का आशिक़ अब मेरा गुलाम बनकर रहेगा क्यों रामु काका जी?
तो रामु काका बोले कि जी मालकिन
तो सोनल बोली कि वाह्ह्ह् क्या बात है? तुम अब पूरी तरह मेरे गुलाम बन चुके हो और मेरे इशोरो पर नाचने लगे हो.. तुम मेरे पूरे पालतू कुत्ते बन चुके हो।
फिर रामु काका बोले कि जी मालकिन मैं तो हूँ ही आपका पालतू कुत्ता.. जैसा आप कहती है यह कुत्ता वैसा ही करता है आपके हर हुक्म को मानता है।
तो सोनल बोली कि चलो जाओ अब तुम्हारी मालकिन के लिए खाना बना दो.. उसके बाद तुम मेरे रूम में जाकर झाड़ू पोछा लगाना।
तो रामु बोला कि जी मालकिन अभी करता हूँ और किचन में चला गया। नास्ता रेडी करके सोनल के रूम में पहुँचे रामु काका और आधे घंटे में सोनल के फर्श को पूरा चमका दिया और अब फर्श पर मिट्टी का एक दाना भी नहीं दिखाई दे रहा था।
फिर उसके बाद रवि और आरति खाना खाकर ऑफिस चले गये, सोनल और कविता स्कूल चली गयी
और दोपहर को सोनल और कविता वापिश आ गयी। कविता ने लाल कलर की जिन्स और भूरे कलर की टी-शर्ट पहन रखी थी और बहुत सेक्सी लग रही थी। उसके बूब्स बड़े बड़े और जिस्म एकदम मस्त था और रामु अब भी घूर घूरकर उसके बूब्स देख रहा था और रामु उसके बूब्स देखकर पागल हो गया और उसे देखकर उसका लंड खड़ा हो गया।
फिर उस वक़्त सोनल फ्रेश हो रही थी और कविता हाल में बैठ कर tv चालू कर लीया और वहीं सोफे पर बैठकर रामु के साथ बातें करने लगी। फिर कुछ देर बाद सोनल हाल में आई और रामु को देखते ही एक जोरदार थप्पड़ उसके मुहं पर मारा और बोली कि तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मेरी बहन से बात करने की? तुम्हे तुम्हारी औकात पता होनी चाहिए तुम्हारी औकात पैरो में बैठने की है.. चलो कुर्सी से खड़े हो जाओ और मेरी बहन के पैरो में जाकर बैठो।
तो रामु अपने मुहं पर हाथ रखकर कविता के पैरो के पास जाकर बैठ गया और कविता भी यह सब देख रही थी। वो बोली कि सोनल यह सब क्या है? आप अपने बुजुर्ग नॉकर को क्यों मार रही हो?
तो सोनल बोली कि अरे नहीं मेरी प्यारी बहना.. यह बुजुर्ग नॉकर नहीं अब मेरा गुलाम है और इस गुलाम को वही करना होगा जो में इसे करने को कहूँगी। इसे मेरा हर हुक्म मानना पड़ेगा यही इसकी सज़ा है तूझे देखने की।
फिर कविता बोली कि देखने की क्या देखने की?
तो सोनल बोली कि यह तूझे खिड़की से कपड़े चेंज करते हुए देख रहा था और
और वो तो शुक्र है कि मैंने शीशे में से इसे देख लिया था और उसके बाद मैंने इसका वो हाल किया है कि जिंदगी भर यह कभी तूझे देखने की हिम्मत नहीं करेगा और यह गुलामी भी इसे इसी वजह से करनी पड़ रही है।
तो कविता बोली कि दीदी यह तो सच में बहुत कमीना है.. ऐसे इंसान को तो चप्पलो से मारना चाहिए। तो सोनल बोली कि तुम ठीक कह रही हो बहना.. वैसे तो में इसे अपने सेंडलो से मार चुकी हूँ.. लेकिन तुम चाहो तो तुम भी अपने अरमान पूरे कर सकती हो।
तब कविता बहुत खुश हो गयी और सोनल ने मुझे कविता के पैरो में बैठने को कहा।
रामु बोला कि नहीं मालकिन जब से मैंने इनको कपड़े चेंज करते हुए देखा है तब से आप पहले ही मेरा बहुत बुरा हाल कर चुकी हो.. अब तो मुझ पर रहम करो।
तभी सोनल ने आगे आकर एक जोरदार तमाचा रामु के मुहं पर मारा और बोली कि तुमसे जितना कहा गया है उतना ही करो मेरे आगे ज़्यादा ज़बान चलाने की कोशिश मत करो.. वरना में तुम्हारी खाल खींचकर रख दूँगी।
तब रामु कविता के पैरो के सामने आकर बैठ गया और कविता ने अपना सीधे पैर का सेंडल उतारा और मुझे दिखाते हुए बोली कि आज इन सेंडलो से तुम्हारे चहरे का वो हाल करूँगी कि कभी किसी की बहन को देख नहीं पाओगे और ताबड़तोड़ रामु के मुहं पर सेंडल मारने चालू कर दिए।
सोनल का थप्पड़ खाकर पहले ही रामु के गाल पर दर्द हो रहा था.. लेकिन कविता ने तो इतने खींचकर उसके मुहं पर सेंडल मारे कि मारे जिसके दर्द से उसकी तो जान ही निकल रही थी.. लेकिन वो कुछ कर भी नहीं सकता था। कविता ने तो सेंडलो से मार मार कर रामु का पूरा चेहरा लाल कर दिया था और वो बोली कि कमीने तेरा तो चेहरा बिगाड़ दूँगी।
यह रामु की जिंदगी में पहली बार हुआ था कि दो लड़कियों ने उसे अपने सेंडलो से पीटा था और उसे गुलामी करनी पड़ रही थी। कविता का सेंडल कभी उसके सीधे गाल पर पड़ता तो कभी उल्टे गाल पर कविता ने सच में सेंडल मार मारकर रामु के चेहरे का नक्शा ही बिगाड़ दिया था और सेंडलो से पिटने के कारण रामु काका की आँख के नीचे सूजन आ गयी थी.. लेकिन कविता थी कि रुकने का नाम ही नहीं ले रही थी। उसके सेंडल तड़ातड़ रामु काका के गालो पर बरस रहे थे। फिर रामु काका की जान में जान तब आई जब उसे कविता मार मारकर थक चुकी थी.. क्योंकि उसका शरीर थोड़ा हैल्थी था जिसके कारण वो जल्दी ही थक जाती थी।
उसके जिस्म पर अब पसीने की लहर चल पड़ी थी.. फिर वो रुकने के बाद बोली कि जाओ और मेरे लिए पानी लेकर आओ
रामु को तब थोड़ा चैन मिला था। रामु काका पानी लेने गया और फिर वापस आया और उन्हें पानी दिया। तब जाकर उन्होंने उस पर रहम खाया और उसे मारना रोक दिया और उसके मुहं पर थूक थूककर बोली कि तू कमीना है और दोबारा उसके मुहं पर थूककर बोली कि कमीना कुत्ता है।
फिर रामू ने अपने चहरे से थूक साफ किया तो सोनल ने पीछे से आकर उसकी कमर पर एक लात मारी और बोली कि तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई अपना चेहरा साफ करने की?
तो रामु बोला कि सॉरी मालकिन ग़लती हो गयी।
तो सोनल ने रामु काका के बालों को पकड़कर ऊपर खींचा और उसके मुहं पर थूकने लगी और बोली कि ले मेरा भी थूक। तो रामु काका का पूरा चहरा सोनल ने अपने थूक से भर दिया था और उसके बाद उसे कविता ने अपने पास बुलाया और कविता ने फिर से रामु काका मुहं पर थूक दिया।
फिर कविता ने ज़मीन पर थूक दिया और हाथ से इशारा करके बोली कि अगर फर्श पर मुझे ज़रा सा भी थूक नज़र आया तो मैं तुम्हारी चमड़ी उधेड़ दूँगी और बोली कि जहाँ जहाँ पर मेरा थूक गिरा है.. उसे अपने मुहं से चाटना।
फिर सोनल ने एक जोरदार लात रामु काका के पैरो के ऊपर मारी जिससे उसकी पैरो की उंगलियों में दर्द होने लगा क्योंकि उसने उस वक़्त चप्पल वगेरह कुछ पहन नहीं रखा था। उसके बाद सोनल ने उसके दोनों पैरो पर दो बार और खींचकर लात मारी और बोली कि चलो कविता शुरू हो जाओ।
कविता ने पहले अपने सेंडल पर थूक दिया जिसे उसने चाटकर साफ कर दिया। फिर कविता ने सोनल के सेंडलो पर भी थूक दिया उसे भी चाटकर उसने साफ किया। तभी सोनल के मन मे पता नही किया हुआ और उसने एक दम से अपनी पजामी नीचे सरकाई और नीचे बैठ गयी, नीचे उसने पैंटी नही पहनी हुई थी, नीचे बैठते ही उसने मूतना शुरु कर दिया, एक दम से अपने मुह पर पानी की बौछार देख कर रामु काका ने सामने देखा तो उनको सोनल की छोटी से चुत से पानी का फवारा फूटता दिखा, रामु काका इस हसीन नजारे में खो गए उनको ये भी नही मालूम चला कि सोनल का पेशाब उनके मुह में जा रहा है, उसने इसकी परवाह भी नही की और आराम से सोनल का पेशाब अपने मुह में लेने लगा। कविता भौचक्की रह गयी इस दृश्य को देख कर , फिर उष्को भी पता नही क्या सूझी की वो भी अपनी स्कर्ट उठा कर रामु के मुह पर अपनी चुत टिका कर उसके मुह में मूतना शुरू कर दिया। रामु भी घटाघट सब मुत पी गया।
फिर सोनल ने रामु को सब साफ करने को बोल कर दोनो कमरे में चली गयी।
तो सोनल बोली कि तुमने मेरे पैरो और सेंडल को गंदा कर दिया है इन्हे साफ करो।
तो रामु काका के मना करने पर सोनल ने अपने सेंडल खुद ही उतारे और उसके बाद तो उनके मुहं पर सोनल के सेंडल बरसने लगे। जितने सोनल ने रामु काका के चेहरे पर थप्पड़ मारे थे उससे भी ज़ोर से उसने सेंडल मारे जिससे उसके मुहं पर भी सोनल के सेंडलो के निशान पड़ गये और रामु काका के चेहरे पर सोनल के सेंडल का नंबर 8 भी छप गया था।
फिर सोनल बोली कि अब मेरे तलवो को चाट कर साफ करो।
तो रामु काका सोनल के तलवे चाटने लग गया.. लेकिन सोनल के तलवे बहुत ही गोरे और मुलायम थे जीभ लगते ही रामु को सोनल के तलवो का टेस्ट बहुत अच्छा लगने लगा था। फिर रामु काका ने सोनल के तलवे चाट चाटकर साफ किए ।
और फिर सोनल बोली कि यदि तुम यह चाहते हो कि मैं पापा को यह बात ना बताऊँ तो जो मैं कहूँ आज के बाद वही करना और यह बात ध्यान रखना कि औरो के सामने तो में तुम्हारी वही सोनल बिटिया हूँ और तुम्हारे सामने तुम्हारी मालकिन.. समझे?
रामु काका बोले कि जी बिटिया समझ गया। फिर एक करारा थप्पड़ गाल पर पड़ा और सोनल बोली.. कहा ना कि तुम्हारे सामने तुम्हारी मालकिन।
तो रामु बोला कि जी मालकिन।
तो सोनल बोली कि आज के बाद मेरे गुलाम बनकर रहना वरना में तुम्हारा क्या हाल करूँगी.. यह तुम बहुत अच्छी तरह जान गये होगे?
फिर रामु बोला कि जी मालकिन में हमेशा आपका गुलाम ही बनकर रहूँगा।
फिर सोनल बोली कि चलो अब पानी लेकर आओ और मेरे पैरो को भी साफ करो।
तो रामु काका सोनल के पैरो को धोने के लिए पानी लेने गया और अपना चेहरा भी साफ करने लगा और जैसे ही रामु अपने चहरे को धोने लगा तो पीछे से सोनल ने एक जोरदार लात उसकी गांड पर मारी.. जिससे उसका चेहरा नल की टूटी पर लगा जिससे उनके नाक पर खून आने लगा। फिर सोनल जोर से चीखते हुए बोली कि मैंने तुम्हे अपने पैरो को धोने के लिए कहा था और तुम अपने चहरे को धो रहे हो.. तुम्हारी इतनी हिम्मत कैसे हुई?
रामु ने कहा कि बिटिया वो..
तो इस बार सोनल ने उसके लंड पर लात मारी और बोली कि मैंने तुमसे पहले भी कहा था कि मैं तुम्हारी मालकिन हूँ।
तो रामु ने कहा कि माफ करना मालकिन और दर्द से उसके लंड का बुरा हाल हो रहा था।
तब सोनल बोली कि गुलाम हो गुलाम बनकर ही रहो और जैसा में कहूँ वैसा ही करो.. चलो पानी की बाल्टी उठाओ और मेरे साथ रूम में चलो।
तो रामु बाल्टी उठाकर सोनल के रूम में चल पड़ा और रूम में जाकर सोनल सोफे पर बैठ गयी और उसे अपने पैर धोने के लिए कहा।
तो रामु उसके पैरो को धोने लगा और धो धो कर रामु ने उसके पैरो को पहले से भी अधिक खूबसूरत बना दिया जिससे सोनल का गुस्सा थोड़ा शांत हुआ।
फिर सोनल बोली कि अब तुम इस पानी से अपना मुहं धो सकते हो। फिर जिस पानी में रामु काका ने अभी सोनल यानी कि उसकी मालकिन के पैरो को साफ किया था.. रामु ने उस पानी में अपने चहरे को साफ किया और उसे अब थोड़ा दर्द भी कम होने लगा.. ना जाने सोनल के पैरो में ऐसी क्या ताक़त थी कि पानी से धोते ही उसका चेहरा पहले से भी साफ हो गया था। फिर सोनल बोली कि जाओ और याद रखना तुम मेरे गुलाम बनकर ही रहोगे।
तो रामु बोला कि जी मालकिन।
जैसे तैसे करके उस दिन रामु काका ने अपना काम खत्म किया,
रात को सब खाना खाकर कुछ देर बाद सो गये और फिर रामु काका भी अपना दर्द भुलाकर सो गये।
कुछ देर बाद सोनल रामु काका के कमरे में आई और उसके मुहं पर सोते हुए एक तमाचा जड़ दिया। सोनल के तमाचे से रामु काका की नींद उड़ गयी और रामु काका जाग गये और रामु काका बोले कि क्या हुआ बिटिया.. आपने अब क्यों मारा?
बस रामु काका का इतना ही कहना था कि सोनल ने रामु काका को बालों से पकड़कर बिस्तर से नीचे खींचा और धनाधन थप्पड़ो की बरसात कर दी.. करीब 5 मिनट तक उनके मुहं का भुर्ता बनाने के बाद वो बोली कि मैंने कहा था ना कि में तुम्हारी मालकिन हूँ.. तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मुझे बिटिया कहने की?
तो रामु काका बोले कि मुझे माफ़ कर दो मालकिन.. में भूल गया था आपका थप्पड़ खाकर मेरा दिमाग काम करना बंद कर गया था।
तो सोनल बोली कि आज में तुम्हारा दिमाग सही कर देती हूँ और उसके बाद सोनल रूम से बाहर गयी और दो मिनट बाद ही वापस आ गयी और अब उसके हाथ में एक गोल डंडा था और रूम में आते ही सोनल बोली कि चल कुत्ता बनकर दिखा। तो रामु तुरंत ही अपने दोनों हाथों और पैरो को ज़मीन पर रखकर कुत्ता बन गया और जैसे ही वो कुत्ता बना सोनल ने खिचकर उसकी गांड पर डंडा मारा और रामु काका दर्द से चीख उठे। सोनल ने खींचकर चार बार और मारा तो दर्द से उनकी जान निकल गई। तो रामु काका बोले कि प्लीज़ मालकिन इस बार माफ़ कर दो आगे से में हमेशा ध्यान रखूँगा कि आप मेरी मालकिन हो।
तो सोनल ने उनकी गांड पर डॅंडो की बौछार कर दी और करीब 10 मिनट तक उनकी गांड लाल करने के बाद सोनल बोली कि इस बार छोड़ रही हूँ.. लेकिन अगली बार ग़लती हुई तो याद रखना तुम बैठने के काबिल भी नहीं रहोगे
तो रामु बोला कि जी मालकिन में याद रखूँगा
और थोड़ी देर में फिर रामु बोला कि मालकिन आप इतनी रात मेरे रूम में क्यों आ गयी?
तो सोनल बोली कि मेरे पैरो में आज पूरा दिन सेंडल पहनने के कारण दर्द हो रहा है तो मैंने सोचा कि मेरा गुलाम किस काम आएगा इसलिए में तुम्हारे पास आ गयी।
फिर सोनल बेड पर बैठ गयी और अपने पैरो को मिनी टेबल जो कि गुलदस्ता या टेबल फेन रखने के काम आता है उस पर पैरो को रखकर बैठ गयी और रामु काका को बोली कि चलो मेरे तलवो को चाटो और याद रखना जब तक में ना कहूँ तुम्हारी जीभ मेरे पैरो से अलग नहीं होनी चाहिए।
फिर रामु बोला कि जी मालकिन जैसी आपकी आज्ञा।
फिर रामु काका ने सोनल के तलवो को चाटना शुरू कर दिया सोनल के पैर बिल्कुल गोरे और एकदम साफ दिख रहे थे। तो रामु ने जैसी ही सोनल के तलवो को चाटना शुरू किया उनके तलवो का स्वाद चखकर रामु काका तो अब पागल सा हो गये थे और कुत्तो की तरह सोनल के तलवो को चाटने लगे और अब उनको सोनल के तलवो को चाटने में बड़ा मज़ा आ रहा था। फिर रामु काका सोनल के तलवो को अब अपने मुहं से चूसने लगे थे.. ऐसे स्वाद से तो रामु काका पागल हो रहै थे और करीब आधे घंटे तक सोनल के तलवे चाटने के बाद सोनल बोली कि बस रुक जाओ। अब मेरा दर्द खत्म हो गया है और एक बात और आज के बाद हर सुबह उठते ही मेरे कमरे में आ जाना समझे।
तो रामु काका बोले कि क्यों मालकिन?
फिर सोनल बोली कि क्योंकि अब से तुम्हे हर सुबह मेरे पैरो को चाटना है समझे..
रामु काका बोले कि जी मालकिन जैसा आपका हुक्म।
फिर सोनल बोली कि कल कविता के सामने मेरा पालतू कुत्ता बनकर रहना और अगर ज़रा भी तुमने कोई बात मानने से इनकार किया तो अपना चेहरा याद कर लेना कि मैंने तुम्हारा क्या हाल किया था?
तो रामु ने कहा कि जी मालकिन जैसा आप हुक्म देंगी मैं वैसा ही करूँगा और फिर सोनल अपने रूम में चली गयी और रामु अपने बिस्तर पर सोने लगा तो उनकी गांड में बहुत दर्द होने लगा.. क्योंकि सोनल ने डंडे मार मारकर उनकी गांड को लाल कर दिया था। उनसे अब सोया भी नहीं जा रहा था। फिर करीब दो घंटे बाद दर्द कम हुआ और वो सो गये।
फिर सुबह उठते ही पहले रामु सीधा अपनी मालकिन सोनल के रूम में गया तब सोनल रूम में नहीं थी और कविता नहा रही थी। सोनल बाहर गार्डन में योग कर रही थी, रामु सीधा गार्डन में चला गया।
सोनल खड़े होकर योग कर रही थी और रामु सीधा उसके पैरो में गिर पड़ा और उसके पैरो को चाटने लगा और दोनों पैरो को चाटने के बाद उसने कहा कि गुड मॉर्निंग मालकिन।
तो सोनल के चहरे पर हल्की सी मुस्कान आई और बोली कि मेरी मम्मी के आशिक़ की यही जगह सही है मम्मी का आशिक़ अब मेरा गुलाम बनकर रहेगा क्यों रामु काका जी?
तो रामु काका बोले कि जी मालकिन
तो सोनल बोली कि वाह्ह्ह् क्या बात है? तुम अब पूरी तरह मेरे गुलाम बन चुके हो और मेरे इशोरो पर नाचने लगे हो.. तुम मेरे पूरे पालतू कुत्ते बन चुके हो।
फिर रामु काका बोले कि जी मालकिन मैं तो हूँ ही आपका पालतू कुत्ता.. जैसा आप कहती है यह कुत्ता वैसा ही करता है आपके हर हुक्म को मानता है।
तो सोनल बोली कि चलो जाओ अब तुम्हारी मालकिन के लिए खाना बना दो.. उसके बाद तुम मेरे रूम में जाकर झाड़ू पोछा लगाना।
तो रामु बोला कि जी मालकिन अभी करता हूँ और किचन में चला गया। नास्ता रेडी करके सोनल के रूम में पहुँचे रामु काका और आधे घंटे में सोनल के फर्श को पूरा चमका दिया और अब फर्श पर मिट्टी का एक दाना भी नहीं दिखाई दे रहा था।
फिर उसके बाद रवि और आरति खाना खाकर ऑफिस चले गये, सोनल और कविता स्कूल चली गयी
और दोपहर को सोनल और कविता वापिश आ गयी। कविता ने लाल कलर की जिन्स और भूरे कलर की टी-शर्ट पहन रखी थी और बहुत सेक्सी लग रही थी। उसके बूब्स बड़े बड़े और जिस्म एकदम मस्त था और रामु अब भी घूर घूरकर उसके बूब्स देख रहा था और रामु उसके बूब्स देखकर पागल हो गया और उसे देखकर उसका लंड खड़ा हो गया।
फिर उस वक़्त सोनल फ्रेश हो रही थी और कविता हाल में बैठ कर tv चालू कर लीया और वहीं सोफे पर बैठकर रामु के साथ बातें करने लगी। फिर कुछ देर बाद सोनल हाल में आई और रामु को देखते ही एक जोरदार थप्पड़ उसके मुहं पर मारा और बोली कि तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मेरी बहन से बात करने की? तुम्हे तुम्हारी औकात पता होनी चाहिए तुम्हारी औकात पैरो में बैठने की है.. चलो कुर्सी से खड़े हो जाओ और मेरी बहन के पैरो में जाकर बैठो।
तो रामु अपने मुहं पर हाथ रखकर कविता के पैरो के पास जाकर बैठ गया और कविता भी यह सब देख रही थी। वो बोली कि सोनल यह सब क्या है? आप अपने बुजुर्ग नॉकर को क्यों मार रही हो?
तो सोनल बोली कि अरे नहीं मेरी प्यारी बहना.. यह बुजुर्ग नॉकर नहीं अब मेरा गुलाम है और इस गुलाम को वही करना होगा जो में इसे करने को कहूँगी। इसे मेरा हर हुक्म मानना पड़ेगा यही इसकी सज़ा है तूझे देखने की।
फिर कविता बोली कि देखने की क्या देखने की?
तो सोनल बोली कि यह तूझे खिड़की से कपड़े चेंज करते हुए देख रहा था और
और वो तो शुक्र है कि मैंने शीशे में से इसे देख लिया था और उसके बाद मैंने इसका वो हाल किया है कि जिंदगी भर यह कभी तूझे देखने की हिम्मत नहीं करेगा और यह गुलामी भी इसे इसी वजह से करनी पड़ रही है।
तो कविता बोली कि दीदी यह तो सच में बहुत कमीना है.. ऐसे इंसान को तो चप्पलो से मारना चाहिए। तो सोनल बोली कि तुम ठीक कह रही हो बहना.. वैसे तो में इसे अपने सेंडलो से मार चुकी हूँ.. लेकिन तुम चाहो तो तुम भी अपने अरमान पूरे कर सकती हो।
तब कविता बहुत खुश हो गयी और सोनल ने मुझे कविता के पैरो में बैठने को कहा।
रामु बोला कि नहीं मालकिन जब से मैंने इनको कपड़े चेंज करते हुए देखा है तब से आप पहले ही मेरा बहुत बुरा हाल कर चुकी हो.. अब तो मुझ पर रहम करो।
तभी सोनल ने आगे आकर एक जोरदार तमाचा रामु के मुहं पर मारा और बोली कि तुमसे जितना कहा गया है उतना ही करो मेरे आगे ज़्यादा ज़बान चलाने की कोशिश मत करो.. वरना में तुम्हारी खाल खींचकर रख दूँगी।
तब रामु कविता के पैरो के सामने आकर बैठ गया और कविता ने अपना सीधे पैर का सेंडल उतारा और मुझे दिखाते हुए बोली कि आज इन सेंडलो से तुम्हारे चहरे का वो हाल करूँगी कि कभी किसी की बहन को देख नहीं पाओगे और ताबड़तोड़ रामु के मुहं पर सेंडल मारने चालू कर दिए।
सोनल का थप्पड़ खाकर पहले ही रामु के गाल पर दर्द हो रहा था.. लेकिन कविता ने तो इतने खींचकर उसके मुहं पर सेंडल मारे कि मारे जिसके दर्द से उसकी तो जान ही निकल रही थी.. लेकिन वो कुछ कर भी नहीं सकता था। कविता ने तो सेंडलो से मार मार कर रामु का पूरा चेहरा लाल कर दिया था और वो बोली कि कमीने तेरा तो चेहरा बिगाड़ दूँगी।
यह रामु की जिंदगी में पहली बार हुआ था कि दो लड़कियों ने उसे अपने सेंडलो से पीटा था और उसे गुलामी करनी पड़ रही थी। कविता का सेंडल कभी उसके सीधे गाल पर पड़ता तो कभी उल्टे गाल पर कविता ने सच में सेंडल मार मारकर रामु के चेहरे का नक्शा ही बिगाड़ दिया था और सेंडलो से पिटने के कारण रामु काका की आँख के नीचे सूजन आ गयी थी.. लेकिन कविता थी कि रुकने का नाम ही नहीं ले रही थी। उसके सेंडल तड़ातड़ रामु काका के गालो पर बरस रहे थे। फिर रामु काका की जान में जान तब आई जब उसे कविता मार मारकर थक चुकी थी.. क्योंकि उसका शरीर थोड़ा हैल्थी था जिसके कारण वो जल्दी ही थक जाती थी।
उसके जिस्म पर अब पसीने की लहर चल पड़ी थी.. फिर वो रुकने के बाद बोली कि जाओ और मेरे लिए पानी लेकर आओ
रामु को तब थोड़ा चैन मिला था। रामु काका पानी लेने गया और फिर वापस आया और उन्हें पानी दिया। तब जाकर उन्होंने उस पर रहम खाया और उसे मारना रोक दिया और उसके मुहं पर थूक थूककर बोली कि तू कमीना है और दोबारा उसके मुहं पर थूककर बोली कि कमीना कुत्ता है।
फिर रामू ने अपने चहरे से थूक साफ किया तो सोनल ने पीछे से आकर उसकी कमर पर एक लात मारी और बोली कि तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई अपना चेहरा साफ करने की?
तो रामु बोला कि सॉरी मालकिन ग़लती हो गयी।
तो सोनल ने रामु काका के बालों को पकड़कर ऊपर खींचा और उसके मुहं पर थूकने लगी और बोली कि ले मेरा भी थूक। तो रामु काका का पूरा चहरा सोनल ने अपने थूक से भर दिया था और उसके बाद उसे कविता ने अपने पास बुलाया और कविता ने फिर से रामु काका मुहं पर थूक दिया।
फिर कविता ने ज़मीन पर थूक दिया और हाथ से इशारा करके बोली कि अगर फर्श पर मुझे ज़रा सा भी थूक नज़र आया तो मैं तुम्हारी चमड़ी उधेड़ दूँगी और बोली कि जहाँ जहाँ पर मेरा थूक गिरा है.. उसे अपने मुहं से चाटना।
फिर सोनल ने एक जोरदार लात रामु काका के पैरो के ऊपर मारी जिससे उसकी पैरो की उंगलियों में दर्द होने लगा क्योंकि उसने उस वक़्त चप्पल वगेरह कुछ पहन नहीं रखा था। उसके बाद सोनल ने उसके दोनों पैरो पर दो बार और खींचकर लात मारी और बोली कि चलो कविता शुरू हो जाओ।
कविता ने पहले अपने सेंडल पर थूक दिया जिसे उसने चाटकर साफ कर दिया। फिर कविता ने सोनल के सेंडलो पर भी थूक दिया उसे भी चाटकर उसने साफ किया। तभी सोनल के मन मे पता नही किया हुआ और उसने एक दम से अपनी पजामी नीचे सरकाई और नीचे बैठ गयी, नीचे उसने पैंटी नही पहनी हुई थी, नीचे बैठते ही उसने मूतना शुरु कर दिया, एक दम से अपने मुह पर पानी की बौछार देख कर रामु काका ने सामने देखा तो उनको सोनल की छोटी से चुत से पानी का फवारा फूटता दिखा, रामु काका इस हसीन नजारे में खो गए उनको ये भी नही मालूम चला कि सोनल का पेशाब उनके मुह में जा रहा है, उसने इसकी परवाह भी नही की और आराम से सोनल का पेशाब अपने मुह में लेने लगा। कविता भौचक्की रह गयी इस दृश्य को देख कर , फिर उष्को भी पता नही क्या सूझी की वो भी अपनी स्कर्ट उठा कर रामु के मुह पर अपनी चुत टिका कर उसके मुह में मूतना शुरू कर दिया। रामु भी घटाघट सब मुत पी गया।
फिर सोनल ने रामु को सब साफ करने को बोल कर दोनो कमरे में चली गयी।