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आजाद पंछी जम के चूस complete

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रवि ने कमल को चेतावनी दी कि अगर दोबारा ऐसी हरकत की तो उसी समय घर से निकाल दिये जाओगे।

कमल को उसके कोर्स पूरे होने तक शांति कुंज में रहने की परमिशन मिल जाती है,

आरती भी खुश हो जाती है कि उसे कमल के साथ चुदाई का मौका मिल जाएगा। आरती सोनल और कमल को आगे सावधानी बरतने को कहती है, ताकि रवि फिर से कोई बखेड़ा न खड़ा करें।

‌एक दिन कमल के साथ उसके इंस्टिट्यूट पर पढ़ने वाला उसका एक फ़्रेंड अर्पित घर पर आया। उस समय आरती डाइनिग हाल में ही थी। अर्पित आरती को देखते ही उसपे लट्टू हो गया। उसने जब आरती को देखा तो साला पागल हो गया। अर्पित कमल का काफ़ी अच्छा दोस्त था तो इसलिये दोनो काफ़ी खुले हुये थे उसने कमल को बोला की यार कमल क्या जबरदस्त माल है बे तेरी चाची साली रांड़ को पटक पटक कर चोदने में बहुत मज़ा आयेगा.

अर्पित की बात सुनकर कमल का भी मन पलट गया और कमल भी आरती को अब अपनी आंटी की तरह नहीं बल्कि एक रांड़ की तरह देखने लगा।

कमल ने भी अर्पित से कहा-- हां, साली रंडी जब किचन में काम करती थी तो पसीने के कारण उसके ब्लाउज पर लाइन बन जाती साली छिनाल की गठीली जवानी देख कर मेरा लंड तन जाता है।

दोनो रूम में जाकर ऐसे ही आरती के बारे में सेक्सी बातें करते है, फिर अर्पित कमल को आरती से घूमने के लिए पूछने को कहता है। कमल आरती से पूछता है तो वो रेडी हो जाती है।

दोनो आरती के साथ घूमने भी जाने लगे। तीनो मूवी शॉपिंग और कई बार लंच पर जाते थे अब अर्पित भी आरती से काफ़ी खुल गया था मगर उसे समझ में नहीं आ रहा था की उसकी चूत तक कैसे पहुँचे।

अर्पित अक्सर अपनी इच्छा पूरी करने के लिये रंडियों के पास जाता था। कॉलेज के बाद कभी कभी कमल और अर्पित दोनो कोठे पर जाकर रंडी बजाते थे.

उनकी दोस्ती अनवर नाम के एक भडवे से थी।

एक दिन अर्पित बोला : यार कमल साले तू कब तक अपनी आंटी की चुत दिलवाएगा, अब तो कुछ करना कमल बोला : भाई अर्पित रण्डी तो है नही वो जो जाकर कह दु मेरे दोस्त को भी दे दे। अगर कोई पंगा हो गया अबकी बार तो अंकल मुझे घर से निकाल देंगे। फिर मैं भी जाऊँगा उसकी चुत से। तू ही कोई तरकीब लगा जिससे तू भी आंटी की चोद सके।

फिर अचानक से अर्पित ने बोला : क्यों ना हम अनवर से मदद माँगे वो साला लड़कियों को पटाने में माहिर है वो ज़रूर कोई रास्ता निकाल लेगा.

उसकी बात कमल को समझ में आ गयी बात सच ही थी ।

एक दिन कमल अर्पित और अनवर एक घंटे से बार मैं बैठ कर दारू पी रहे थे तभी अर्पित ने बोला : यार अनवर भाई आपसे थोड़ी सी मदद चाहिये बहुत ही सीक्रेट और जरुरी बात है।

अनवर : हाँ बोलो क्या हो गया तुमको साला इतना क्या जरुरी काम है।

अर्पित ने अनवर को आरती चाची के बारे में बताया और उसकी फोटो भी दिखाई देखते ही अनवर बोला, सालो तुम लोगों ने मेरे को इस रांड़ के बारे में पहले क्यों नहीं बताया यह तो साली मस्त छिनाल माल है मस्त पटाखा है

अनवर बोला : देखो लडको तुम्हारी चाची में दम है साली मस्त है मैं तुम लोगों की मदद कर सकता हूँ मगर एक शर्त है

मैं इस पटाखे को पहले में बुझाऊगां इसकी चूत बजाऊगां बाद में अर्पित तुम्हे भी पक्का मौका मिलेगा और कमल तुम बुरा मत मानना मैं इस रांड़ से धंधा भी करवाऊगां आज कल ऐसी घरेलू रखेलो की डिमाण्ड बहुत है मार्केट में बोलो डील मंजूर है।

अर्पित और कमल एक दूसरे को देखते रह गये और फिर दोनो ने कहा मंजूर है उसके बाद अनवर भी आरती को पटाने का प्लान बनाने लगा

अनवर ने उनको कहा की तुम लोग आरती को एक बार मूवी के लिये लेकर आओ।

मूवी के बाद अनवर उन लोगों से मिला उन्होंने उनका आरती से परिचय करवाया और कहाँ की यह हमारे अग्रेजी के टीचर है।

मूवी के बाद बात होते होते उन दोनो ने आरती से कहा की हमें आज बहुत ही जरुरी काम है, आंटी जी आप अनवर जी के साथ शॉपिंग कर लो फिर ये आपको घर छोड़ देंगे।

और फिर दोनो वहा से चले गये। आरती और अनवर शॉपिंग कर रहे थे। अनवर कोई 6 इंच 5 फुट के होंगे और उनकी तगड़ी बॉडी भी थी, देखने में एकदम पहलवान आरती जल्द ही उनसे घुल मिल गयी। शॉपिंग के बाद लंच करते हुये अनवर ने आरती के खाने में नींद की गोली डाल दी जैसे ही गोली असर करने लगी अनवर ने तुरंत आरती को गाड़ी में डाल के अपने कोठे पर लेकर आया। कमल और अर्पित भी उसके साथ आ गये। कोठे पर जाकर अनवर ने उनको एक केमरा दिया और वीडियो बनाने को कहा।

अनवर बिस्तर पर शेर की तरह कूदे और आरती की चुचियों को मसलने लगे। कमल के देखते हुए बोला, साली क्या मस्त माल है बे तेरी रखैल चाची इसकी तो मैं आज माँ चोद दूँगा बहुत दिन बाद ऐसा तगड़ा माल मिला है.

कमल बोला, चोद दो अनवर भाई चोद दो मेरी चाची को इसकी चूत में बहुत खुजली है मिटा दो आज इसकी आग साली के बदन ने हमारी भी जवानी को परेशान कर रखा है। अब आज तो इस रांड़ को अपनी रखैल बना दो।

अब अनवर ने जल्दी से दारू के दो पेक लगाते हुये आरती की चूचि को मसलने लगे उसने आरती की लाल रंग की साड़ी को उतार के साइड पर फेक दिया और आरती के उपर बैठ के उनके डीप क्लीवेज को चाटने लगा।

धीरे धीरे आरती को होश आने लगा था और वो भी गर्म गर्म सिसकियाँ भरने लगी थी। अनवर ने आरती के ब्लाउज और ब्रा को खोल के फेक दिया और आरती के बोबो पर अपना मुँह लगा कर पागल कुत्तों की तरह चूसने और चाटने लगे।

एक हाथ से एक बोबो को मसलते हुये वो दूसरे बोबे को चूस रहा था। आरती काम अग्नि में बहकते हुये तड़पने लगी और आहें भरने लगी। कमल और अर्पित तो वीडियो बनाने में लगे हुये थे।

कमल को अपने सपनो की रांड़ आरती को चूदते हुये देख कर बहुत मज़ा आ रहा था.

आरती के बोबो को लाल करने के बाद अनवर आरती के होंठो को अपने दातों से चबाते हुये उनकी जीभ को चूसने लगे। ऐसा स्मूच कमल ने कभी नहीं देखा था उसे डर लगने लगा की कहीं आरती की साँस ना रुक जाये और वो मर ना जाये।

अनवर को रोकना अब मुमकिन ना था वो चाह कर भी आरती को छुटवा नहीं सकते थे।

अनवर भाई अपनी हर रंडी को पहले खुद चखते थे बाद में अपने चमचो और कुत्तों को देते थे। आज तो वो आरती को अपने लंड की रानी बना कर ही रहने वाले थे अपने स्मूच करने के बाद अनवर भाई ने आरती के पेटिकोट को उपर करके उनकी टाँगों से खेलना शुरू कर दिया.

इतने में ही आरती को अचानक से पूरा होश आ गया था। कमल और अर्पित की तो फट ही गयी थी।

आरती ने अनवर को धक्का दिया और वो पीछे हट गये गुस्से में आकर अनवर ने आरती को दो कड़क थप्पड़ लगाये और बोला : अपनी औकात में रहा कर साली रंडी तेरे को मालूम नहीं है हरामी तू किसके कोठे पर है ज़्यादा चू चा की ना तो तेरी बॉडी भी नहीं मिलेगी। देख तेरा भतीजा तेरे को मेरे पास लाया है अब यह वीडियो बना रहा है शांति से यहाँ का माहौल गर्म कर नहीं तो पूरा देश तेरी जवानी से अपना बिस्तर गर्म करेगा बेच दूँगा में यह वीडियो समझी।

आरती डर गयी और कमल को बोली की कमल तुमने ऐसा क्यों किया मेरे साथ।

कमल बोला, चुप बे साली दो टके की छिनाल तेरे पति ने उस दिन मुझे कुते की तरह पीटा और तू कुछ नही बोली ,तू और तेरी बेटी दोनो मुझसे खुद चुदती थी और सजा सिर्फ मुझे मिली। अब तू भी रंडी बन कर चुद सबसे, उसके बाद तेरी बेटी को भी यही लाऊँगा।

अर्पित बोला : क्यों चाची जी बहुत गर्मी है ना आपकी जवानी में अब बेचो अपनी जवानी को इस कोठे पर यहाँ तो आपको रोज नये नये लंड मिलेंगे अपनी चूत की प्यास मिटाने को।

यह सब सुनके आरती रोने लगी.

तब अनवर ने आरती को अपनी बाहों में भर के बोला आरती डार्लिंग क्यों रो रही हो देखो हम सब के साथ मस्ती करो और इन्जॉय करो यहा रोने धोने से क्या होगा तेरा रेट भी में ही रखूँगा तू जैसे मर्द के साथ सोना चाहोगी वैसा ही लाउगां टेन्शन मत लो अब यहाँ से वापस जाने का कोई रास्ता नहीं है।

यह बोलते बोलते उसने आरती का पेटिकोट खोल दिया और लाल रंग की उनकी पेंटी के उपर से आरती की चूत पर उंगली घूमना शुरू कर दिया।

आरती ने सारे रास्ते बंद होते देख सोचने लगी कि अभी वो चुदाई का मजा ले क्योकि बिना चोदे ये लोग उसे जाने भी नही देंगे। बाकी इनका बंदोबस्त वो यहा से निकलने के बाद करेगी।

फिर आरती धीरे धीरे मस्त होने लगी और अनवर भाई के सीने से लिपटने लगी और उनकी छाती चूमने लगी अनवर ने बोला अब बनी ना तू अनवर की रांड़ आ जानेमन तेरे को अब जन्नत दिखाता हूँ।

यह कह के अनवर ने आरती का हाथ अपने पजामे पर रखा.

आरती ने बोला अनवर मियाँ यह क्या है।

अनवर ने बोला--जानेमन यह मेरा लंड है और तुम्हारा खिलोना खेलो इसके साथ।

आरती ने अनवर का पाजामा उतारा और उनकी चड्डी भी उतार दी और एक सस्ती रंडी की तरह अनवर का लंड हिलाने लगी और उससे खेलने लगी।

अनवर : और हिला मेरे लंड को रंडी और ज़ोर से हिला यह तेरे नामर्द भडवे पति का लंड नहीं है एक मर्द का लंड है चूस इसको साली हरामी छिनाल।

आरती चाची : अरे इतना भी मत जोश दिखाओ अनवर मियाँ। दिखाओ आज पहली बार एक असली मर्द मिला है दिखा दो अपनी सारी मर्दानगी।

यह कह के आरती अनवर का 7 इंच बड़ा मोटे लंड को कुत्तों की तरह चाटने लगी। अनवर की आहें निकल गयी.

अनवर : साली तेरे से भारी रंडी नहीं देखी है अब तक मैने क्या चूसती है अन्दर ले पूरा इसको मूँह में खा जा इसको आज तेरी चिकनी चूत को मेरा बड़ा लंड फाड़ देगा।

आरती : हाँ मेरे राजा।

आरती को पता नहीं क्या हो गया था अपनी सारी शर्म खोने के बाद उसमे और किसी भी और रंडी में अब कोई फर्क नहीं रह गया था.

अनवर : आआहह और चूस्स्स और ज़ोर से…. साली रंडी बड़ी कुत्ती चीज़ है तू आआहह

आरती : आ रहा है ना मज़ा….

अनवर: हाँ रानी हाँ….

अनवर आरती की चड्डी उतारने लगे और आरती को बिल्कुल नंगा कर दिया वो आरती की चूत में उंगली करने लगे.

आरती : आअहह धीरे से दर्द होता है.

अनवर : दर्द में ही तो मज़ा है जानेमन.

आरती: तेरी उंगली ने मेरा हाल यह कर दिया है तो तेरा लंड तो मुझे पागल ही कर देगा.

अनवर: आज तक तूने लंड का स्वाद चखा ही कहाँ है चूस इसको ज़ोर से.

अब अनवर ने आरती को बिस्तर पर लेटा दिया और 69 पोज़िशन में जा कर उनकी चूत को चाटने लगे और अपना लंड आरती के मूँह में डाल दिया। अपनी एक उंगली उन्होने आरती की गांड में डाल कर हिलाना शुरू कर दी। आरती की हालत ख़राब हो गयी थी।

आरती : आआहह…. हाय मेरी जवानी….साली बेकार ही हो जाती… अगर आज आपका यह लंड ना मिलता और ज़ोर से घुसाओ उंगली फाड़ डालो मेरी गांड को अनवर : हमारे और इस कोठे के होते हुये तेरी जवानी बेकार कैसे जाती रानी तेरी इस चूत को तो में चूस चूस के बेहाल कर दूँगा और रही तेरी गांड वो तो मैं मारूँगा ही साली छिनाल बड़ा ही मस्त आइटम है तू. साली कहाँ छुपी थी इतने दिनो से

आरती : आअहह मत रूको अब आअहह….आआआआहहाई यह क्या हो रहा है मुझे…. आआहह….

अनवर ने अपनी स्पीड और बड़ा दी और वो भी आरती की चूत को काटने लगे और अपनी जीभ को पूरी उनकी चूत में घुसा दिया अनवर की उंगलियाँ आरती की गांड के छेद को फाड़े जा रही थी और दूसरे हाथ से अनवर आरती की गांड पर थप्पड़ ही थप्पड़ लगाये जा रहे थे

अनवर: और ले रंडी… आज निकालता हूँ तेरी मस्ती साली एक नंबर की रांड़ है तू

आरती : आअहह धीरे से भगवान के लिये… बहुत दर्द हो रहा है.

अनवर : इतना ही अगर दर्द हो रहा है तो जाकर अपने पति जैसे किसी नामर्द से चुदवा रंडी यहा तेरी कोई नहीं सुनेगा…समझी… तेरा भगवान भी नहीं…

आरती : आआहह….हाई….. थोड़े से तो प्यार से करो ना राजा..मैं कहीं भाग थोड़ी ना रही हूँ…

अनवर : हाँ हाँ… साली भागेगी कहाँ तू तू अब अनवर भाई की रखैल है समझी और तेरी जैसी चिकनी रंडी को कैसे चोदना है यह मुझे बहुत अच्छे से आता है भूल जा अब सब कुछ आज से तू वही करेगी जो मैं बोलूँगा समझी… बोल… समझी या नहीं..

आरती : समझ गयी सब समझ गयी…आआहह… आअहह हाईई भगवान मेरी चूत…. आआहहहहहह और तेज और…..यह….. हाँ हाँ बस ऐसे ही…. हाइईइ आअहह….. आआहहहहा

आरती ज़ोर से चिल्लाते हुये ठंडी हो गयी अनवर का लंड अपने मुँह से निकाल के छोड़ दिया और अपने पहले मजे में ही पसीने पसीने हो गयी

अनवर : क्यों रंडी साली बस हो गयी तू ठंडी मेरे लंड को उकसाती है तू यह ले साली छिनाल

अनवर के थप्पड़ से चाची जी सहम गयी

अनवर भाई ने आरती को अपना गुलाम बना लिया था वो आरती को बिस्तर पर छोड़ के खड़े हो गये और बोले चल रंडी खड़ी हो अभी बहुत काम बाकी है तेरे को ठंडा करने नहीं आया हूँ मैं, तू आई है मेरे को ठंडा करने खड़ी हो कर चूस मेरे लंड को

आरती : थोड़ी देर रुक जाओ ना प्लीज़ मेरे से और नहीं होता

अनवर : तेरे लिये रुकुंगा मैं चल खड़ी हो नहीं तो वापस मारूंगा तेरे को रंडी।

आरती डरी हुई अनवर का लंड मुँह में ले कर चूसने लगी मगर अपना पहला मजा लेने के कारण उनमे अब दम ना था और जिस तरह से वो अनवर का लंड चूस रही थी उससे अनवर ने गुस्सा हो कर आरती को एक और थप्पड़ मारा और बोला तू समझी कल से तू मेरे से ही नहीं यहाँ के बाकी ग्राहको से भी चुदेगी ज़्यादा आवाज की तो मार दूँगा तेरे को समझी साली कुत्तिया तेरे जिस्म से बहुत पैसे कमाऊंगा में और तेरे वीडियो पर तो पूरी दुनिया मूठ मारेगी चल अब खड़ी हो

आरती रोते हुये अपने आप को संभाल के खड़ी हुई और अनवर से माफी माँगने लगी

आरती: मुझको माफ़ कर दो मैं भूल गयी थी की अब मैं एक रंडी हूँ सिर्फ़ एक रंडी जो आप बोलोगे वैसा ही होगा आज से यह जिस्म मैं आपके हवाले करती हूँ माफ़ कर दो मेरे को।

अनवर ज़ोर ज़ोर से हँसने लगे और अपना लंड हिलाते हुये बोले

अनवर : बहुत जल्दी समझ गयी तेरी चाची कमल साली कुत्तिया पहले समझ जाती तो इतनी मार नही खाती.

कमल : अनवर भाई थोड़ा रहम करो ना चाची जी पर आप इनको भले जब चाहो चोदो मगर आरती से धन्धा तो मत करवायो ना यह रंडी हमको दे दो हम संभाल लेंगे इसको

अनवर : (गुस्से में) साले भडवे औकात में रहा कर अपनी तेरा इस गली में आना बन्ध करवा दूँगा समझा मेरे को मत सिखा क्या करना है

कमल : सॉरी अनवर भाई माफ़ करना आप जैसा बोलोगे वैसा ही होगा

अनवर : आजा आरती रानी अब तेरे को आगे की सैर करवाता हूँ साला पूरा मूड खराब कर दिया तुम सबने आरती : हमारी नादानी को माफ़ कीजियेगा.

आरती अनवर का लंड पकड़ के उसको अब चूसने लगी अपने हाथों से अनवर के आंड और थैली को मसलते हुये वो उनका लंड का सूपड़ा अपने मूँह में डाल के चूसने लगी अनवर भी धक्के लगाने लगे और आरती के मूँह को चोदने लगे उनके मूँह से आहहह निकलने लगी आरती ने अनवर मियाँ को खुश करने के लिये अपनी एक उंगली उनकी गांड में घुसा दी अनवर तो जैसे पागल हो गये और आरती के बालों को पकड़ के खीचने लगे और ज़ोर से अपने लंड को धकेलने लगे आरती की साँस फूलने लगी थी

कमल और अर्पित शांति से डर के कारण वीडियो बनाते रहे।

अनवर : अब जा कर बनी ना तू रंडी और चूस साली छिनाल… हाआंन्न… और ज़ोर से…

अनवर पूरी मस्ती में आने के बाद आरती को उनकी कमर के बल पटक दिया और उनकी दोनो टाँगों को उपर करके उनकी चूत पर अपना मूँह वापस रख कर चाटने लगे आरती की चीख निकलने लगी थी वो जिस तरह से आरती की चूत चाट रहे थे और गांड में अपनी उंगली डाल रहे थे.

उससे आरती की हालत वापस खराब होने लगी थी अपने हाथ को आरती की गांड के छेद से निकाल के वो आरती के मूँह में डालने लगे आरती उनकी उंगलियों को चाटने लगी और आहे भरने लगी अब आरती से और नहीं रहा जा रहा था

आरती : अनवर मियाँ चोद दो मुझे अपने लंड से मार दो मेरी चूत को कर दो मेरी चूत को फाड़ दो अपने लंड से और मत तडपाओं मैं मर जाउंगी अब नहीं रहा जाता अल्लाह के लिये बुझा दो मेरी आग आज फाड़ दो मेरी चूत को

अनवर : देख कैसे तड़प रही है तू मेरे लंड के लिये हाह्हआआअ ऐसी ही रखैल अच्छी लगती है मेरे को जिसको अपनी ओकात मालूम हो चाहिये ना मेरा लंड तेरे को हाँ चाहिये ना बोल ना मेरे को बोल ना साली बोल…

आरती : हाँ चाहिये मेरे को आपका लंड चाहिये मैं आपकी रखैल हूँ दे दो मेरे को अपना लंड दे दो भगवान के लिये बुझा दो मेरी आग।

अनवर ने आरती की चूत को चाटना बंद किया और आरती के बाल पकड़ के खीच के उनको कुत्तिया बना दिया अपना लम्बे चोड़े लंड को अपने हाथ में पकड़ कर धीरे धीरे से वो आरती की चूत पर उसको रगड़ने लगे। आरती तड़पने लगी और कराहें भरने लगी लंड रगड़ते रगड़ते अनवर ने एक ही झटके में पूरे ज़ोर से अपना लंड आरती की चूत के अंदर डाल दिया। आरती ज़ोर से चिल्लाने लगी मगर अनवर ने बिना रुके एक के बाद एक जोरदार धक्के लगाने लगे.

इतना मोटा लम्बा लंड आरती की छोटी सी नरम चूत को फाड़ते हुये जैसे ही अंदर घूसा आरती की जान निकल गयी। उनकी चूत अब भी बहुत टाइट थी अनवर आरती के बाल को और ज़ोर से खीचते हुये अपना लंड अंदर बाहर करने लगे और दूसरे हाथ से कभी आरती की गांड को मारते और कभी उनकी चूचियों को को नोचते। आरती रो रही थी और दर्द के कारण चिल्ला रही थी उनकी चिकनी चूत से खून निकल रहा था अनवर : ले रंडी ले मेरा लंड बहुत आग थी ना तेरे जिस्म में देख मेरा लंड कैसे चोद रहा है तेरी चूत को

आरती : आआहह धीरे मेरी चूत फट जायेगी आआअहह…..

अनवर : साली छिनाल तेरी चूत फाड़कर ही यह मेरा लंड शांत होगा आज देख रंडी आज मैं तेरी चूत को बिना कन्डोम के चोद रहा हूँ यही औकात है तेरी और तेरी चूत की मेरे लंड का माल जब तेरी चूत में जायेगा तो तू मेरे नाजायज़ भड़वे की रांड़ माँ बनेगी शायद मेरे बच्चे के कारण ही तेरे खानदान मैं कोई मर्द पैदा होगा

आरती : आआहह बहुत दर्द हो रहा है…. हाइईइ ऐसा ना करो अनवर मैं एक शादीशुदा औरत हूँ मेरे बारें में कुछ तो सोचो

अनवर ज़ोर ज़ोर के झटके लगाते हुये बोले : साली तू मेरी रखैल है तू पालेगी मेरे बच्चे को अपने पति का बच्चा बना के समझी अब तेरा घर यह कोठा है और तू मेंरी रखैल है भूल जा अपने पति को।

अनवर ने आरती जी की कमर को पकड़ा और उनको गोदी में उठा के खड़े हो गये उन्होने आरती को पलट दिया और अपने लंड पर बिठा दिया.

अब वो खड़े खड़े उनको चोद रहें थे अपने होठ आरती के होंठो पर रख कर वो आरती की चूत में खड़े खड़े अपना लंड डालने लगे उन दोनो के बदन की गर्मी से पूरा कमरा गर्म हो गया था उन दोनो का बदन पसीने से भीग गया था और वो आरती को चूमते और पेलते जा रहें थे। आरती की चूत भी अब मस्त हो गयी थी। एक मस्त लंड को अपनी चूत में पाकर वो अब मस्त हो गयी थी वो भी अनवर के बालों को पकड़ के आहें भरने लगी थी

आरती : हाइईइ…. क्या लंड है आपका अनवर …. मत रूको डालते जाओ अपना लंड मेरी चूत के अंदर बहुत मज़ा आ रहा है मत रूको मेरे राजा… हाइईइ… आहहहहहह…. आआहहाः

अनवर : साली मज़ा तो मुझे भी बहुत आ रहा है तेरे नरम बदन से खेलने में और तेरी टाइट चूत मारने में क्या ग़ज़ब माल है तू आआहहहः यह ले साली रंडी यह ले

आरती : हाईईईईईई मारी जाऊं में तेरे लंड पर आज तक जिंदगी में ऐसा मज़ा कभी नहीं आया था हाईईइ… मस्त कर दिया है मेरे को तेरे लंड ने क्या फौलाद है…. आआहहह हाइईईई.

मैं आज से सिर्फ़ और सिर्फ़ तेरी रंडी हूँ तेरे लंड की गुलाम आआहह….और ज़ोर से…. आअहह….

अनवर ने अपनी रफ़्तार बडाते हुये और ज़ोर से पेलना शुरू कर दिया था आरती की बाते सुनकर उनका जोश और बड़ गया और वो और बेरहमी से आरती को चोदने लगे आरती को बिस्तर पर लेटा कर अब वो उनके उपर चड गये और आरती के मूँह को चूमते चाटते वो उनके पूरे चेहरे को चूमने लगे एक हाथ से चूचियाँ मसलते हुये वो अपने लंड को आगे पीछे कर रहे थे आरती का बदन सिकुड़ने लगा और आरती ने अपनी चूत को टाइट करते हुये अनवर भाई का लंड जकड़ लिया।

आरती अनवर भाई के मजबूत बाहों में पिघलने लगी और दूसरी बार अपना पानी छोड़ के अधमरी हो गयी मगर अनवर तो रुकने का नाम ही नहीं ले रहा था अपनी स्टाइल बदलते हुये अब उसने आरती को उपर कर दिया और खुद लेट गये.

आरती उसके फौलादी लंड के उपर बैठ के उपर नीचे होने लगी अनवर अब सीधा उनके क्लाइटॉरिस और बच्चे दानी को चोद रहा था कुछ ही देर में आरती वापस मस्त हो गई और ज़ोर ज़ोर से कूदने लगी और साथ में अनवर भी चाची जी की चूचियो को कस के निचोड़ते हुये तेज़ी से अपना लंड पेलने लगे दोनो ही अपने जिस्म की आग और प्यास को बुझाने के लिये पागल हो रहे थे जैसे जैसे अनवर अपना सारा माल छोड़ने के करीब आने लगे वो उतनी ही तेज़ी से पेलने लगे आरती भी मस्त होकर आखें बंद करके और बस मस्त हो कर अपनी काम ज्वाला शान्त करने में लगी थी अनवर : हाँ रानी….आअहह बहुत मजा आ रहा है आअहह साली मस्त कर दिया है आज तूने मुझको

आरती : आअहह अनवर भाई आअहह.

अब अनवर अचानक से लंड पेलते पेलते आरती से लिपट गये। आरती भी पागलों की तरह उनको अपनी बाहों में भरने लगी दोनो ज़ोर ज़ोर से आहें भरने लगे और अनवर ने एक आखरी ज़ोर के झटके के साथ अपना सारा माल उनकी चूत में गिरा दिया। आरती ने भी अपना पानी छोड़ दिया और अनवर के उपर गिर गयी और उनको चुमने लगी अनवर धीरे धीरे अपना लंड पेले जा रहे थे और फिर उनकी चूत से अपना लंड निकाल लिया आरती की चूत फ़ुल गयी थी सूजन के कारण आरती के झाटों पर अनवर का माल गिरा हुआ था उनकी पूरी चूत माल से भर गयी थी वो दोनो पूरी तरह संतुष्ट हो कर बिस्तर पर लेटे हुये थे आरती अनवर के लंड को हाथों से पकड़ के सहला रही थी और अनवर उनके बोबो को सहला रहें थे.

अनवर : मज़ा आया या नहीं तेरे को मेरी रानी.

आरती : हाइईइ बहुत मज़ा आया आज अब जाकर में पूरी औरत बनी हूँ आपके लंड का पानी पाकर मेरी चूत की आग शांत हुई है

अनवर : साली तेरे जैसी कातिल रंडी पाकर मेरा लंड भी बहुत दिनो बाद शांत हुआ है तेरी कातिल जवानी ने मेरे लंड को पागल कर दिया है

यह कह कर अनवर आरती को चूमने लगे और अपनी बाहों में भरने लगे थोड़ी देर बाद वो उठे और दारू के पेक बना के आरती को पिलाने लगे वो दोनो दारू पी के नशे मे एक दूसरे के शरीर से खेल रहे थे कभी आरती उनके लंड को सहलाती कभी चूमती अनवर आरती की चूत में उंगली करते और बोबो को दबाते हुये चूम रहे थे

तभी अनवर बोला : सुन भडवे कमल.

कमल बोला : बोलीये अनवर भाई

अनवर भाई : बड़ा मस्त माल लाया है आज तू अब मेरा काम कर अपने अंकल को फोन करके बोल की तेरी चाची आज अपनी सहेली का यहाँ गयी है और वहीं रुकेगी और तुम दोनो कोई काम में बिज़ी हो जाओ साला मेरे को कोई परेशानी नहीं माँगता है.

कमल : जैसा आप बोलो अनवर भाई लकिन अंकल नही इनकी बेटी को फ़ोन करता हु वो सब सम्भाल लेगी।

अनवर : आज रात तेरी चाची मेरा बिस्तर गर्म करेगी और तू और तेरा दोस्त जाकर किसी और रांड़ को बजाओं समझे.

कमल: ठीक है अनवर भाई जैसा आप बोलो

आरती अनवर भाई की बाहों में लेटी हुई उनको चूम रही थी और वो दोनो अनवर के कमरे से निकल के बाहर जा रहे थे

उन्होंने अनवर के कहने पर केमरे को चालू ही रख दिया था मगर अंदर का नज़ारा वो मिस नहीं करना चाह रहे थे और अनवर भाई की रंडियों में उन्हें आज पहली बार कोई इन्टरेस्ट नहीं था वो दोनो गेट के बाहर खड़े हो कर अंदर का नज़ारा देख रहे थे

आरती : क्यों नहीं जाने दिया मुझे, अब क्या इरादा है आपका

अनवर : हा हाहह… आज तो तू रात भर मेरे बिस्तर को गर्म करेगी रानी कहीं नहीं जाने दूँगा तेरे को सुन आज से तू आरती होगी अपने घर पर इस कोठे पर तेरा नाम होगा रेशमा, अनवर की रखैल रेशमा रानी।

आरती : और तुम होगे मेरे चुदक्कड भडवे अनवर मियाँ मेरे मालिक मेरे लंड दाता

अनवर : साली छिनाल बहुत जल्दी ही रंडियों जैसी बात करना सीख गयी है तू बहुत जल्दी बहुत आगे जायेगी तू ऐसे ही मस्त बातें करते और एक दूसरे की बॉडी से खेलते हुये अनवर का लंड वापस तैयार हो रहा था वो लंड खड़ा हो रहा था और अनवर अपनी प्यारी रांड़ रेशमा रानी को चूमते जा रहे थे.

आरती भी गर्म होने लगी थी अनवर ने अचानक आरती की गांड में उंगली डाल दी और आरती ने एक सेक्सी सी आवाज निकाली… आअहह उसके बाद तो जो हुआ वो देख कर तो कमल भी पागल ही हो गया था अनवर ने आरती को दूसरी तरफ मोड़ दिया और उनकी गांड में अपनी नाक को घुसा दिया और सूंघने लगे थोड़ी देर बाद उन्होने अपनी जीभ से आरती की गांड को चाटना शुरू कर दिया आरती मस्त हो गयी थी वो अनवर के लंड को अपनी पकड़ में कसने लगी अनवर उठे और आरती की गांड को फैला दिया और अपना लंड उनकी गांड के छेद पर पोज़िशन करने लगे.
 
इससे पहले की आरती कुछ समझती और बोलती अनवर ने एक ज़ोर का झटका लगाया और अपना सख़्त लंड आरती की गांड में डाल दिया आरती बहुत ज़ोर से चिल्लाई और शोर करने लगी अनवर ने अपने हाथ से आरती का मुँह पकड़ के बन्ध किया और एक और झटके में अपना पूरा लंड आरती की गांड के अंदर घुसा दिया थोड़ी देर हल्के हल्के झटके मारने के बाद आरती का दर्द थोड़ा बहुत कम हुआ और वो कुछ शांत हुई तो अनवर आरती के बोबो को दबाते हुये उनकी गांड में लंड आगे पीछे करते रहें। आरती तो बस आँखें बन्ध करके सिसकियाँ भरती हुई मज़े ले रही थी अब दर्द काबू में होता देख कर अनवर ने वही अपना जानवर वाला रूप दिखा दिया और बेरहमी से ज़ोर ज़ोर से अपना लंड आरती की गांड में आगे पीछे करने लगे उसने आरती को ऐसा चोदा की आरती की 7 पीढ़िया भी इस चुदाई को भूला ना पायेगी दर्द से बेहाल आरती रो रही थी और मस्ती भी ले रही थी.

अनवर ने अपनी पूरी हवस आरती की गांड पर निकाल दी हवसी दरिंदे की तरह उसने आरती को अपनी रखैल रेशमा बना डाला गांड मारते मारते अनवर ने अपनी दो ऊँगलियां आरती की चूत में घुसा दी। आरती को तो अपनी वासना की आग में कुछ समझ में नहीं आ रहा था और वो सिर्फ़ गर्म गर्म सिसकियाँ भर रही थी अब जब अनवर झड़ने वाला था तो उसने झटके से अपना लंड निकाला और आरती को पलटकर उसके मूँह में अपना लंड डाल दिया। आरती लोली पोप की तरह उनके दानव लंड को चूस रही थी उसके बाद अनवर ने अपना लंड निकाला और आरती के मूँह के सामने उसको ज़ोर ज़ोर से हिलाने लगे फिर वो अचानक ज़ोर से चीखा और अपना सारा माल आरती के चेहरे, आँखों और होठ पर गिरा दिया बचा हुआ माल उनकी चूचियों पर भी डाल दिया.

आरती इस समय एक बहुत ही सस्ती सी रंडी लग रही थी उसका वीडियो मार्केट में धूम मचाने वाला था अनवर का काम अब भी पूरा नहीं हुआ था वो आरती को पूरी रांड़ बना कर ही हार मानने वाले थे उसने आरती के चेहरे और बोबो पर पड़े माल को चम्मच से उठा उठा कर एक ग्लास में भरा और आरती को अपना चेहरा चाटने को बोला उसके बाद उन्होने वो माल का ग्लास आरती को पिला दिया और एक ब्रश से अपने दाँत को अपने माल से ब्रश करने को बोला.

आरती के पास कोई और रास्ता नही था धीरे धीरे वो भी इस गंदी सी हरकत को इन्जॉय करने लगी और अनवर के माल से ब्रश करते हुये उससे खेलने लगी कुछ देर खेलने के बाद उन्होने वो सारा माल एक झटके में पी लिया। यह सब होने के बाद अनवर खड़े हुये और आरती अधमरी हालात में पड़ी हुई कराह रही थी

तभी अनवर चिलाया : अबे बहन के लोड़ो बाहर से देखना बन्द करो और अंदर आओ.

मुझे को पता था की तुम दोनो भडवे कहीं नहीं जाओगे बहुत मस्त माल है तेरी चाची इसका जिस्म बेच के जो भी कमाई होगी वो आधी आधी बाटेंगे ठीक है अब बुझा लो अपनी हवस इसके साथ चोदो और चोदो साली छिनाल को

वो दोनो एक दूसरे का मूँह देखने लगे और एक मिनिट में कपड़े उतार के आरती पर चढ़ गये। उनदोनो ने रात भर आरती को चोदा और थोड़ी देर बाद उनको तो लगा की मर गयी है रंडी की बच्ची मगर उन्हें तो अपनी हवस शांत करने से मतलब था और वो रात भर आरती को चोदते रहें।

जहा आरती को पहले चुदाई का मज्जा आ रहा था वही अब हवस ठंडी होने पर अपने आप से घिन आ रही थी और वो बस सुबह होने का इंतज़ार कर रही थी।
 
आगले दिन सुबह कमल और अर्पित आरती को उठाते है और फ्रेश होने के लिए बोलते है, आरती फ्रेश होने के लिए वही बाहर बाथरूम में चली जाती है, तब तक दोनो जाकर नास्ता लेने जाते है,

आरती फ्रेश होकर कमरे में आती है और नहाकर उसके निढाल जिस्म मे एक अजीब सी स्फूर्ति भर गयी. आरती कमरे में आकर अपने कपड़े ढूँढने लगी. कपड़े कमरे के एक कोने पर पड़े हुए मिले. आरती अपने कपड़े पहन कर वही कुर्सी पर बैठ जाती है और कुछ सोचने लग जाती है, आरती को सारे कपड़े मिल गये नही मिला तो उसकी पॅंटी. उसने पॅंटी को पूरे कमरे मे छान मारा मगर वो कहीं नही मिली, शायद तीनो मेसे किसी ने उसे उठा कर अपने पास रख ली हो किसी यादगार के रूप मे. आरती ने बिना पॅंटी के ही पेटीकोट पहन लिया.

कमल और अर्पित दोनो नास्ता लेकर आ जाते है और तीनो नास्ता करते है, फिर आरती उनसे चलने को कहती है, कमल अनवर को फ़ोन करता है,

कुछ देर रिंग जाने के बाद अनवर फ़ोन उठाटा है और बोलता है, क्या है भड़वे क्यो नींद की मा बहन कर रहा है,

कमल--भाई वो चाची जी घर जाने के लिए बोल रही है,

अनवर-- हां बात करा रण्डी से,

आरती--हां अनवर मिया।

अनवर-- क्या रे रण्डी यहाँ मन नही लग रहा क्या तेरा।

आरती--नही वो मेरी बेटी अकेली है घर तो चिंता हो रही थी।

अनवर--ठीक है रण्डी जा और शाम की आ जाना,

आरती--शाम को क्यो?

अनवर--जितना बोला है उतना कर, रण्डी

आरती--ठीक है

फिर अनवर फ़ोन काट देता है, और कमल आरती को लेकर वहा से निकल जाता है, आरती बाहर आती है तो देखती कि वो शहर का रेड लाइट एरिया था, बस जहा उसे रखा गया था वो उस एरिया से थोड़ा अलग था,

आरती वहा से बाहर आते ही कमल से बाइक रोकने को बोलती है और ऑटो कर लेती है,

कमल को बिना कुछ बोले आरती वहा से निकल जाती है,

आरती ऑटो वाले को एक एड्रेस देती है और चलने को कहती है, ऑटो कुछ देर में उस अड्रेस पर पहुच जाती है, आरती ओटो से उतर कर एक कमरे को तरफ बढ़ती है, वो मन ही मन दुआ कर रही थी कि जिससे वो मिलने जा रही है वो शख्स उसे कमरे पर मिले।

आरती उस कमरे पर पहुचती है, और देखति है कि कमरा बाहर से लॉक नही है तो खुश हो जाती है।

आरती दरवाजा नॉक करती है, तकरीबन पांच मिनेट बाद दरवाजा खुलता है, दरवाजा खुलते ही सामने वाला शख्स आरती को देखते ही भौचका रह जाता है,

आरती बिना कुछ बोले उष्को साइड करके कमरे के अंदर चली जाती है,

वो शख्स वही खड़ा रहा जाता है, अंदर जाकर आरति एक लोहे की कुर्सी पर बैठ जाती है, और

आरती-- क्या हुआ ऐसे क्यो रिएक्ट कर रहे हो?

"मेम साब आप यहाँ इस समय, मैं कोई सपना तो नही देख रहा,"

आरती-- हां

बताईये हमारी कैसे याद आयी आज आपको, आपने तो हमे भूला ही दिया था, उस शख्स ने पूछा।

आरती-- मैं एक बहुत बड़ी मुसीबत में फस गयी हु, क्या तुम मेरी मदद करोगें।

कैसी मुसीबत क्या हुआ बताईये, मैं चाहे जैसा भी हु खुद चाहे आपके साथ व्यहार करू लेकिन कोई मुसीबत आपके सामने हो और मैं मदद न करू, ये नही ही सकता, वैसे भी मैं आपके परिवार का नॉकर हु नमक खाया है आपका।

वो आदमी पीछे रखी एक कुर्सी पर बैठ गया

आरती धीमी आवाज में उसे कल की सारी कहानी बताति है, जैसे जैसे आरती बताती चली जाती है, उस आदमी का गुस्सा बढ़ता चला जाता,

आप बताओ मेम साहब वो कुत्ते कौन कौन है, उनकी मा बहन एक न कर दी तो मेरा नाम भोला नहीं,

आरती भोला के पास ही आयी थी क्योंकि अनवर से भोला जैसा शख्स ही निपट सकता था।

आरती ने रात की ज्यादती के बारे में बताया और उसने ये बात छुपा ली कि वो कमल से पहले से चुदती आ रही है और सोनल के बारे में भी छुपा गयी।

आरती--भोला शांत रहो हमे चालाकी से काम लेना होगा, मेरी वीडियो है उसके पास वो पहले लेनी होगी,

भोला--मेम साहब आप चिंता न करे , उस एरिया में कोउ माई का लाल ऐसा नही जो भोला के सामने टिक सके, आप चलो, मेरे साथ

आरती-- अभी नही शाम को उसने बुलाया है, तब मैं फोन करुँगी तुमको तभी वहा आ जाना,

भोला--ठीक है, मेम साहब आप घर जाईये और शाम की फ़ोन करना तब तक मैं मेरे कुछ साथियों को बुलाता हु

आरती घर आ जाती है, सोनल हाल में ही उसका इंतज़ार कर रही होती है, वो स्कूल नही गयी थी।

सोनल--मम्मी कहा थी आप और आपकी हालत ठीक नही लग रही,कमल ने भी कुछ नही बताया,

आरती-- कहा है वो कुत्ता, आरती ने एक गर्जना की। जिससे सोनल भी डर जाती है,

सोनल-- क्या हुआ मम्मी बताओ न, कमल ने क्या किया।

आरती उसे पीछे आने को कहती है और पहले स्टोर रूम से रस्सी और एक बेंत ले लेती है, सोनल बस आंखे फाडे अपनी मम्मी को देखती रहती है,

कमल आराम से अपने कमरे में सो रहा होता है, उसके अनुसार तो जैसे आरती रात में चुद रही थी वो उनकी गुलाम बन चुकी थी,

आरती उप्पेर कमरे में जाति है और देखती है कि कमल आराम से गहरी नींद में सो रहा है, आरती गुस्से में एक जोरदार बेंत उसकी गण्ड पर मरती है, हमला इतनी जोरदार था कि उसकी गण्ड की चमड़ी बेंत के साथ उपड आती है, कमल नींद से उठता है लेकिन समझ नही पाता कि हुआ क्या और अपने चुतरो पर हाथ रख बेड पर बैठ जाता है, सामने आरती चंडी का रूप लिए खड़ी थी, और साइड में सोनल हक़ीबक्की,

आरति-- क्यो बे रण्डी की ओलाद कुत्ते को घी हजम नही हुआ, तुझसे चुद क्या ली तो रण्डी बनाने चल पड़ा।

कमल के मुह से कुछ नही निकल रहा था, उसने सपने के भी नही सोचा था कि आरती जैसी लेडी ऐसे भी उस पर हमला कर सकती है,।

कमल-- चाची आप ये...

आगे वो बोल नही पाया, आरती ने बेंत की बौछार उस पर कर दी उसके शरिर पर जगह जगह बेंत से चमड़ी उखड़ गए और कमल दर्द से बिलबिलाने लगा। आरती ने तुरंत रस्सी से एक फंदा बनाया और उसके दोनो हाथ बेड के सिहराने के साथ बांध दिए और फिर पैर भी दोनो सिरों से बांध दिए,

आरती-- बोल कुत्ते क्या प्लान था तेरा, जब तुझे आराम से घर मे चुत मिल रही थी तो क्यो किया ये सब।

कमल धीमी आवाज में-- आंटी वो मैं अर्पित की बातों में आ गया, उसे भी आपके साथ सेक्स करना था तो उसने अनवर से कहा, अनवर आपकी फ़ोटो देख कर आपको--

आगे कमल चुप हो गया

क्या रण्डी बनाने की बोला, और तुम मान गया, कुत्ते अगर अर्पित को सेक्स करना था तो मुझसे बोल देता तुझे चुत दे सकती हूं तो उष्को भी दे देती तो घिस थोरे न जाती, लेकिन तू तो मुझे कोठे पर ही ले गया, हरामजादे वो तो मैंने दिमाग से काम लिया और वहा कोप्परेट करके खुद को बचा लिया, अब देखना तेरे उस अनवर का क्या हाल करती हूं--आरति एक सांस में बोलती चली गयी।

सोनल अपनी मम्मी से कमल के कारनामे सुनकर बिफर फड़ी और कमल के सीने पर सवार होकर उसपर थप्पड़ की बौछार कर दी।

आरती ने उसे रोक कर उसके कान में कुछ कहा और उसकी बात सुनकर सोनल बाहर चली गयी, कुछ देर में सोनल वापिश आयी तो उसके हाथ मे एक गिलाश में कोल्ड ड्रिंक थी, और एक पेन ड्राइव।

सोनल में ग्लास मेज पर रख कर कमल के कपड़े उतारने लगी और उष्को बिल्कुल नँगा कर दिया, फिर कमल को वो कोल्ड ड्रिंक पिला दी जबरदस्ती, और पेन ड्राइव को led में लगा कर एलसीडी स्टार्ट कर दी, और स्क्रीन पर एक हार्ड कोर पोर्न मूवी स्टार्ट हो गई, जिसे देख कर कमल आरती और सोनल की तरफ देखने लगा, तभी उसे लगा कि न चाहते हुए भी उसका लण्ड अपने आप खड़ा हो रहा है, एलसीडी में पोर्न मूवी की जबरदस्त चुदाई की आवाजें गुजनी स्टार्ट हो गयी, कमल का लण्ड उन आवाज़ से अधिक उतेजित हो गया और लण्ड की नसें ऐसे तन गयी की अभी फट जाएगी, कमल चाह रहा था कि उसके हाथ खुल जाए और वो अपने लण्ड की मुठ लगा कर उसे शांत कर लेकिन ये मुमकिन नही था।

कमल की हालत बहुत खराब थी, वो जोर जोर से चिलाने लगा और सोनल को खोलने को बोलने लगा, लेकिन सोनल ने उसे खोलने की बजाए उसके लण्ड से खेलने लगी, उसके लण्ड पर हल्के हल्के बेनत से चोट चोट देने लगी, जिससे कमल को असहनीय पीड़ा होने लगी, कमल उनसे अपने को छोड़ने की भीख मांगने लगा।

सोनल की छेड़छाड़ से कमल अधिक उत्तजित हो कर अपने लण्ड से पानी छोड़ दिया, लेकिन उसका लण्ड खड़ा का खड़ा ही रहा, कमल ने सोनल को थोड़ा पानी पिलाने की रिक्वेस्ट की, सोनल झट से बाहर जाकर कोल्ड ड्रिंक ले आयी और पिला दी कमल को,

कमल ने जैसे ही ड्रिंक पिया उसका असर उसके लण्ड पर हुआ उसका लण्ड फिर से खड़ा होकर फुफकारने लगा, उसकी हालत फिर से खराब होने लगा,

तभी मोनिका कमरे में आती है, मोनिका को देख कर कमल को झटका लगता है, मोनिका पुरी नँगी थी, उसकी इस हालत को देख कर कमल हवस से पागल हो जाता है और बुरी तरह से चिलाने लगता है, जैसे ही सोनल इशारा करती है, मोनिका बेड पर चढ़ जाती है और 69 कि पोजीसन में कमल के उप्पेर लेट जाती है, मोनिका कमल के मुह पर अपनी चुत रगडने लगती है और मजबूरी में कमल उसकी चुत चाटने लगता है,जिससे उसके शरीर मे सेक्स चढ़ने लगता है और उसका लण्ड फटने को हो जाता है, वो चाहता है कि मोनिका उसके लण्ड को सहलाये प्यार करे, तभी उसकी मनोकामना पूरी होती है और मोनिका उठ कर उसके लण्ड पर बैठ जाती है, और जोर जोर से उसके लण्ड पर कूदने लगती है, दो मिनेट में ही उसके लण्ड से पानी छूट जाता है लेकिन उसका लण्ड नही बैठता मोनिका एक लय में उसके लण्ड पर कूदती रहती है, लण्ड की नसों में फिर से उत्तेजना का संचार होता है, जिससे उसके लण्ड में दर्द होना स्टार्ट हो जाता है उसकी नशे खिंच जाती है, तभी मोनिका उसके उप्पेर से हट जाती है, और उसके लण्ड को अपने हाथों से जोर जोर से हिलती है, कमल दर्द के मारे चिलाने लगता है, सोनल और आरती वहा से जा चुकी होती है, एलसीडी में अभी अभी भी मूवी चल रही थी जिसमे जबरदस्त चुदाई का सीन चल रहा था,

आरती ने कमल के लिए अजीब सजा सोची थी, उसने कोल्ड ड्रिंक में वियाग्रा की गोलियां मिलाकर उसे पिलाया था जिससे उसके शरीर मे सेक्स दौड़ रहा था, और अभी तक उसका लण्ड अपना पानी छोड़ता और फिर से खड़ा हो जाता,

शाम तक कमल की हालत बहुत खराब हो जाती है, वह रो रोकर उनसे माफी मांगता है और भविष्य में चुदाई से तौबा करता है,

तभी आरती के पास अर्पित की काल आति है कि अनवर उसे बुला रहा है, वो कमल के लिए भी पूछता है कि वो कहा है फ़ोन नही उठा रहा,

आरती उसे कहती है कि वो गांव चला गया है कोई जरूरी काम हो गया था।

अर्पित आरती को 30 मिनेट में पिकउप करने को कहता है, आरती उसे घर आने को कहती है,

अर्पित 30 मिनेट बाद आ जाता है, जब वो पहुचता है तो आरति डोर खोलती है और उसे हाल में बैठा देती है और खुद तयार होने कमरे में चली जाती है, तभी मोनिका वहा आती है और किचन से कोल्ड ड्रिंक लाकर अर्पित को देती है, अर्पित कोल्ड ड्रिंक पीने लगता है, मोनिका वही बैठकर कामुक नजरो से अर्पित को देखने लग जाती है, कोल्ड ड्रिंक पीते पीते अर्पित को नशा और उतेजना दोनो महसूस होने लगती है।

मोनिका उसे इशारे से उप्पेर आने को कहती है,अर्पित उसके पीछे पीछे उप्पेर चला जाता है, उप्पेर पहुचकर मोनिका उसके साथ चिपक जाती है और उसके होंठो को किस करने लगती है, अर्पित भी उष्को बाहों में लेकर पागलो की तरह चूमने लगता है, तभी मोनिका उष्को दूर करके उसकी आँखो पर पटी बांध देती है और कमल के कमरे में ले जाती है, अर्पित मदहोश हालात में कमरे में जा कर खड़ा हो जाता है, मोनिका अर्पित को बेड पर लेटा देती और उसके लण्ड को सहलाने लगती है, तभी अर्पित को अहसास होता है कि कोई उसके मुह पर किस भी कर रहा है, वो अंदर ही अंदर खुश हो जाता है, तभी उसके हाथ कोई बेड से बांध देता है और पैर भी, और उसकी आँखों की पटिया खुल जाती है, और वो देखता है कि मोनिका नँगी सामने खड़ी है, और पास में सोनल भी खड़ी है, वो दो जवान लड़कियों को अपने पास देख कर खुश होता है, तभी उसे अपने पास बेड पर कोई लेटा हुआ दिखता है, वो पलटता है और कमल को नँगा अपने साथ दिखता है, वो चौक जाता है, कमल बेहोश होता है लेकिन अर्पित देखता है कि उसका लण्ड खम्बे की तरह खड़ा है, वो कुछ समझ नही पाता।

तभी आरति कमरे में आती है और उसके साथ जया भी होती है,

आरती--काकी जा तेरा शिकार रेडी है भुझा ले अपनी प्यास, ऐसा जवान लौंडा फिर नही मिलेगा।

जया काकी खुश हो जाती है और मोनिका को वहाँ से जाने को कहती है, मोनिका बिना कुछ कहे बाहर चली जाती है, जया उसके जाती न्नगी हो जाती है और बेड पर चढ़ जाती है, और अर्पित को नँगा कर देती है, और जानवरों की तरह अर्पित को जगह जगह काटने लगती है, उसके लण्ड को जोर जोर से मडोड देती है, अर्पित दर्द से चिलाने लगता है, उसकी चीखों से कमल को होश आ जाता है और देखता है कि अर्पित उसके पास बंधा हुआ है,

कमल--अर्पित तू कैसे आ गया यहाँ,

अर्पित-- भाई ये सब क्या है, और तुझे क्या हुआ।

कमल-- मुझसे क्या पूछ रहा है अब तू खुद देख लेना क्या हो रहा है यहाँ,

तभी सोनल बेंत से अर्पित को पीटने लगती है

आरती--क्यो कुते मुझे रण्डी बनवायेगा, बोल

अर्पित--नही आंटी गलती हो गयी माफ कर दो मुझे।

आरती-- सोनल दोज़ दो इसे,और काकी निचोड़ लेना इसको जितना हो सके इसको मालूम चलना चाहिए कि औरत अगर चुदने पर आए तो आदमी की क्या हालत कर सकती है,

और आरति बाहर आ जाती है, और भोला को फ़ोन करती है

आरती--भोला मैं वहा जा रही हु, उसने बुलाया है मुझे, तुम देख लो क्या कर सकते हो।

भोला--आप पहुँचिये मम्मसहब मैंने पूरी तैयारी कर ली है,

आरती फ़ोन काट कर बाहर आकर ऑटो करती है और अनवर के कोठे की तरफ निकल जाति है,

आरती ऑटो को थोड़ी दूर रुकवाती है और इधर उधर देखती है उसे थोड़ी दूरी पर एक कार खड़ी दिखती है, जिसमे से उसे देख कर भोला बाहर आता है,और उसके पास आता है

भोला-- मेम साहब आप जाईये अंदर, मैं सिचुएशन देख कर अंदर आता हूं।

आरती--ठीक है मै जाती हूं।

आरति कोठे की तरफ निकल जाती है, कोठे के बाहर दो आदमी खड़े होते है, जो उष्को देख कर हसने लगते है और उसे अंदर ले जाते है,

आरति को दरवाजा खोल कर अंदर भेज देते है और खुद वापिश बाहर आ जाते है,

आरति अंदर जाती है तो वहा अनवर कुर्सी पर बैठा था और तीन आदमी उसके आसपास बैठे थे, वो लोग tv पर कुछ देख रहे थे,

अनवर-- आ गयी रेशमा रण्डी, और तेरे दोनो भड़वे कहा है,

आरती कुछ नही बोलती और tv स्क्रीन देखती है तो उसके शरीर मे चींटियां काटने लगती है, tv पर कल रात की उसकी चुदाई की मूवी चल रही थी,

अनवर-- आजा रण्डी देख क्या बढ़िया मूवी बनी है तेरी, इसकी मार्केट में काफी डिमांड होगी।

आरती खड़ी खड़ी देखती रहती है, तभी अनवर खड़ा होता है और उसके पास आता है, और एक जोरदार चांटा उसके मुह पर मारता है, आरती एक थप्पड़ में जमीन पर गिर जाती है, और उसके मुह से खून आने लगता है, अनवर बिना कोई परवाह किये उसके बाल पकड़ता है और कहता है

रण्डी तुझे कल समझाया था यहा एक बार बोला जाता है चल अब मेरे लण्ड को बाहर निकाल और चुस उसे, कब से बेचारा तड़प रहा है,

आरती एक बार दरवाजे को देखती है और अनवर की पेंट की जिप खोल कर लण्ड बाहर निकाल लेती है, फिर दरवाजे को देखती है, और अपने मुह को लण्ड की तरफ बढ़ाती है,

तभी दरवाजा चरमराकर टूट कर गिर जाता है, और एक दम से पांच आदमी अंदर घुस जाते है, और दो अनवर को पकड़ लेते है और बाकी तीनो दूसरे आदमियों को। तभी आरती फुर्ती से उठती है औरटीवी बन्ध करती है, और टीवी से कनेक्ट cam रिकॉर्डर उठा कर तोड़ देती है,

तब तक भोला अंदर आ जाता है और अनवर पर ताबड़तोड़ हमला कर देता है, अनवर समझ ही नही पा रहा था कि हो क्या रहा है, वो तो सोच भी नही सकता था कि जो ओरत कल आराम से चुद कर गयी हो वो आज ऐसा कोई प्लान करेगी।

भोला-- बोल कुते मेरी मेम साहब को रण्डी बनाएगा, हराम के जने बोलता क्यो नही।

अब अनवर क्या बोलता उष्को तो कुछ समझ नही आ रहा था,

अनवर बाकी तीन लोगों की तरफ जाता है तो तीनो झट से घुटनों पर बैठकर बोलने लगते है कि वो तो आज अनवर के बुलाने पर आए थे कि कोठे पर नया माल आया है,

भोला उनकी तलाशी लेता है तो उनकी id चेक करता है तो उनकी बात सच निकलती है तीनो सिर्फ चुदाई के लिए आये होते है, भोला तीनो को वार्निंग दे कर भगा देता है, और अनवर को उठा कर बाहर कार में ले आता है, आरती भी उसी कार में बैठ जाती है दो लोग bike से होते है, भोला कार एक बाहरी इलाके में ले जाता है,

जहाँ जंगल होता है, कार जंगल के अंदर पुराने खण्डर के पास रुकती है,

भोला और आरती नीचे उतरते हैऔर भोला उन दो आदमियों को इशारा किया. उन दोनो ने अनवर को लगभग घसीट ते हुए लाकर खण्डर में आरति की गोद मे गिरा दिया. अंदर आरति एक कुर्सी पर बैठी होती है और उस ने अनवर को अपनी गोद मे कुच्छ इस तरह लिटाया कि उसका मुँह ज़मीन की ओर था आरती की गोद मे उसके कमर का हिस्सा था. आरति के चेहरे के सामने अनवर के चुतर थे. उसके घुटने मुड़े हुए थे.

तभी एक आदमी ने एक छड़ी लाकर आरती को दी. अनवर कुच्छ समझ पाता तभी ”सटाक” से उस छड़ी की मार उसके कूल्हों पर पड़ी.

“उईईई माआआआ…” अनवर उसकी मार से चिहुनक उठा. फिर एक के बाद एक मार पड़ती चली गयी जब तक ना अनवर के दोनो कूल्हे सुर्ख लाल हो गये.

“आअहह……माआआ…..नहियीईईई……” अनवर चीखे जा रहा था मगर उसकी आवाज़ सुनने और उस पर रहम करने वाला वहाँ कोई भी नही था. आरती मारती जा रही थी और उससे कल रात के बारे में कहती जा रही थी. जब अनवर कुच्छ नही बोला तो आरती ने उसके कूल्हों को अलग कर उसकी गांड मे वो स्टिक काफ़ी अंदर तक डाल दी. अनवर च्चटपटाने लगा.

जब आरती का हाथ शांत हुआ तो उन्ही दोनो आदमियों ने अनवर को बाहों से पकड़ कर उठाया.

“ अब बता बनाएगा मुझे रण्डी बोल वरना तेरी इस चमड़ी को तेरे बदन से नोच कर अलग कर दूँगी” आरती का चेहरा गुस्से से लाल हो रहा था.

“मुझसे गलती हो गयी, जो मैं उन दोनों की बातों में आ गया…आपको किस तरह यकीन दिलाऊ की मेरी कोई गलती नही है.” अनवर आरती के पैरों के पास घुटने के बल बैठ कर उससे रहम की भीख माँगने लगा.

तभी भोला की आवाज गूंजी

“ चल बे दोनो वापस शुरू हो जाओ. साला बहुत बड़े जिगर वाला है। इसको रण्डी बनाने का शौक है लोगो के कहने पर, और ये तो राजा है उस एरिया का तो क्या हुआ मैं भी पत्थर से पसीना निकाल देने का बल रखता हूँ.”

फिर उन लोगों ने अनवर की गांड से वो छड़ी निकाली. उसके पैर लड़खड़ा रहे थे. अनवर अपने पैरों पर खड़ा होने की कोशिश कर रहा था मगर उसके कमर का हिस्सा सुन्न सा हो गया था. उसके कूल्हे इतनी बुरी तरह जल रहे थे कि वो उन दोनो का सहारा लेकर ही खड़ा रहा.

फिर दोनो अनवर को बालों से खींचते हुए एक कोने मे रखे एक लकड़ी के घोड़े के पास ले गये. लकड़ी का वो घोड़ा देखने मे वैसा ही था जैसे घोड़े की सवारी छोटे बच्चे करते हैं मगर इस घोड़े की उँचाई तीन फुट के आस पास थी और सबसे अजीबो ग़रीब जो चीज़ था वो था कि घोड़े के पीठ पर लगा एक तीन इंच घेर का और एक फुट से कुच्छ लंबा बेलनकार लकड़ी का टुकड़ा. घोड़े के कुच्छ उपर छत से दो रस्सियाँ लटक रही थी.

अनवर ठिठक कर उस घोड़े को अस्चर्य से देखने लगा. उसे असमंजस मे देख कर दोनो आदमी बहूदे तरीके से हँसने लगे. अनवर क्या उस घोड़े को देखकर तो आरती भी हैरत में थी और भोला को देख रही थी।

भोला अनवर की तरफ देखते हुए बोला

“ तूने पहले कभी घुड़सवारी की है? आ जा तुझे इस घोड़े की सवारी कराएँगे. जिंदगी भर कभी ऐसी घोड़े की सवारी दोबारा करने को नही मिलेगी तुझे. खूब जम कर सवारी करना.तूने बहुत सी लड़कियों को घोड़ी बनाया होगा और उनको घोड़े की सवारी करवाई होगी आज तू खुद करके देख”

उन्हों ने छत से लटकती रस्सियों से अनवर के दोनो हाथ बाँध दिए. दोनो रस्सियों के बीच एक डंडा बँधा था जिससे रस्सियाँ एक दूसरे से लगभग तीन फुट की दूरी पर रहें.

उन रस्सियो के दूसरे सिरे एक गिरारी से होकर दूसरी ओर एक खूँटे से बँधे थे. भोला उठ कर उन रस्सियों को खींचने लगा फल स्वरूप अनवर के हाथ छत की ओर उठ गये और वो पंजो पर खड़ा हो गया. कुच्छ और खींचते ही उसके पैर ज़मीन से उपर उठ गये.

“छोड़ दो ऊवू क्या कर रहे हो. ऊऊहह…….” भोला रस्सियों को लगातार खींचता रहा और अनवर का जिस्म उपर उठता चला गया. उसके पास खड़े दोनो ने उसकी टॅंगो को पकड़ कर अलग कर दिया. अनवर उनकी हरकतों का मतलब समझ कर बुरी तरह से काँप उठा. उसे लगा शायद कल का सवेरा उसके नसीब मे नही है. उष्को उसकी करनी याद आने लगी कि क्यो वो आरती के लफड़े में पड़ा। उष्को कल रात की चुदाई भारी पड़ रही थी।

दोनो उसे खींचते हुए उस घोड़े के पास ले आए.

“हे भगवाअन मुझे बचाओ. मैं मर जौन्गयाईई……..ऊऊओ नहियीई ऐसा मत करना. प्लीईएज मै ऐसा दोबारा किसी के साथ नही करुगा. मुझे माआफ़ कर दो.” अनवर रोने लगा.

उन लोगों ने उसकी परवाह किए बिना उसकी दोनो टाँगों को फैला कर उसे घोड़े के उपर स्थित कर के छत से बँधी रस्सी को धीरे धीरे ढीला करने लगे. अनवर नीचे आता जा रहा था. कुच्छ देर बाद उन्हों ने अनवर को हवा मे ही रोक कर उस घोड़े को उसके नीचे इस तरह सेट किया कि उसकी पीठ पर लगा वो लकड़ी का टुकड़ा उसकी दोनो जांघों के बीच था.

उसका जिस्म वापस नीचे आने लगा. अनवर ने घबराहट मे अपनी आँखें बंद कर ली और आगे होने वाले दरिंदगी की पराकाष्ठा का इंतेज़ार करने लगा. उष्को अपनी करनी याद आने लगी लेकिन उसने कभी अपने लिए ये नही सोच रखा था। अनवर अपनी टाँगो को सिकोड़ने की पूरी ताक़त से कोशिश कर रहा था. मगर दो मजबूत आदमी के सामने उसकी क्या चलती?

कुच्छ ही देर मे उसकी गांड को किसी ठंडी चीज़ ने छुआ. अनवर बुरी तरह डर गया था. कुछ उंगलियों ने उसकी गांड की फांकों को अलग कर के उसकी गांड को चौड़ा किया. उसके झूलते बदन को इस तरह सेट किया की वो लकड़ी का टुकड़ा अनवर की गांड की खुली फांकों के बीच था. अब वो अनवर को इस अवस्था मे रख कर एक दूसरे को पल भर के लिए देखे फिर तीनो ने अपने हाथों मे थमी चीजोंको छोड़ दिया. अनवर की दोनो टाँगे फ्री होते ही उसने उन्हे सिकोड़ने की कोशिश कि मगर तब तक देर हो चुकी थी. तीसरे आदमी के द्वारा उसे हवा मे लटकाए हुए रस्सियों को छोड़ देने की वजह से अनवर के जिस्म का पूरा वजन नीचे की ओर पड़ा और अनवर उस लकड़ी के उपर के सिरे पर दो पल टिका रहा . तीसरे ही पल वो लकड़ी का खंबा उसकी गांड को चीरता हुया अंदर घुसता चला गया. अनवर का जिस्म अपने वजन से नीचे आने लगा और वो दर्द से चीखने लगा. चीखते चीखते अनवर पर बेहोशी छाने लगी तो पास खड़े आदमियों ने पानी के झपके देकर उसे होश मे ला दिया.

अनवर का जिस्म तभी रुका जब वो लकड़ी का गुल्ला पूरी तरह उसकी गांड मे धँस नही गया. उसके पैर अब भी ज़मीन को नही छू पाए थे. काश उसके पैर ज़मीन को छू जाते तो पैरों का सहारा पाकर वो अपनी गांड को उस गुल्ले से निकाल पाता.

ऐसा लग रहा था मानो उसकी गांड को फाड़ कर रख दिया हो. खून की एक पतली धार उसकी गांड से रिस्ते हुए घुटने की तरफ बढ़ रही थी और अनवर दोबारा बेहोश होने लगा मगर एक आदमी ने लाकर एक बाल्टी पानी उसके सिर पर उधेल दी. पानी इतना ठंडा था की अनवर के दाँत बजने लगे.

अनवर उस पल को कोस रहा था जब उसने उच्छल उच्छल कर इस आरती को रण्डी बनाने को अर्पित को बोला था. अगर पहले इस टॉर्चर के दसवें हिस्से का भी पता होता तो वो सपने मे भी आरती को नही छुता. ये तो आदमी की खाल मे छिपे दरिंदे थे.

तीनो अनवर को उस अवस्था मे खड़ा रख कर आगे क्या किया जाय ये सोच रहे थे कि एक आदमी अंदर आया और बैठे हुए भोला के कानो मे कुछ कहा.

“चल इसे छोड… “ दोनो ने एक पल अस्चर्य से उसकी तरफ देखा. “ साले जो बोलता हूँ जल्दी कर वरना इस घोड़े की अगली सवारी तुम दोनो करोगे.” उसके इतना कहते ही दोनो किसी कठपुतली की तरह अनवर की ओर बढ़े, “ उतार इसे घोड़े पर से.” दोनो ने उसे सहारा देकर उस घोड़े से उतार दिया. अनवर की टाँगे उसके जिस्म का बोझ सम्हाले नही रख सकी और अनवर वहीं फर्श पर ढेर हो गया. उसके जिस्म मे कोई हलचूल नही थी. दोनो आदमी उस खण्डर से निकल गये

अनवर ज़मीन पर पड़े पड़े सूबक रहा था. भोला अब भी उसी तरह अनवर के सामने खड़ा हुया था. उसने अपने बूट की एक लटजोरदार ठोकर उसके कूल्हों पर मारी. अनवर दर्द से बिल्बिलाते हुए चित हो गया जिससे उसके कूल्हे ज़मीन की तरफ हो गए उसके मार से बच जाएँ. मगर अगले ही पल उसके बूट की एक और ठोकार उसकी जांघों के बीच उसके लण्ड के उपर पड़ी. अनवर दर्द से दोहरा हो गया.

“म्‍म्माआअ……मुझे मत मरूऊओ….प्लीईएसस” अनवर रोने लगा था.

“चल अब नाटक बंद कर और उठ कर कपड़े पहन ले. या इसी न्नगी हालात बाहर जाना है।”
 
अनवर सुनते ही जैसे तैसे खड़ा होता है और अपनी पेंट पहनता है, और भोला के पीछे पीछे लंगड़ाता हुआ बाहर निकल जाता है, आरति ये सब देख कर हैरानी से भोला को देखती है लेकिन कुछ नही बोलती और बाहर आ जाती है, बाहर कार स्टार्ट थी, भोला आरति कार में बैठ जाते है और दूसरे आदमी को बाइक से अनवर को सड़क तक छोड़ने को बोल देता है भोला,

वो आदमी अनवर को सड़क पर छोड़कर निकल जाता है, भोला आरती को उसके घर छोड़ता है और निकल जाता है,

आरती घर पहुचती है और सीधे कमल वाले कमरे में जाति है, कमरे में कमल और अर्पित दोनो अभी तक बेड पर बंधे होते है, लेकिन बेहोश होते है लेकिन उनके लण्ड अभी भी खड़े थे, जया काकी उनके पास ही लेटी हुई थी, आरती देखती है कि दोनों के शरीर को देखती है जगह जगह कटने के निशान होते है सोनल मोनिका और जया ने शायद उनको दांतो से काटा था, आरती मोनिका को बुलाती है और पानी मंगवाती है, सोनल भी वही आ जाती है, मोनिका पानी लेकर आरती को देती है और आरती दोनो के मुह पर पानी मारकर उठाती है, पानी के मुह पर पड़ते ही दोनो हड़बड़ा कर उठ जाते है,

आरती--हां तो मजनुओं क्या हाल चाल है, चुदाई से मन भर गया या अभी और करनी है,

दोनो एक दम से गिड़गिड़ाने लगते है, आरती दोनो को खोल देती दोनो खुलते ही खड़े होने लगते है लेकिन लगातार चुदाई के कारण उनके शरीर मे ताकत ही कहा बची थी, सुबह से दोनो के लण्ड से पानी निकल रहा था अभी उनकी हालत चूसे हुए आम की तरह थी उनका बदन टूट गया था लेकिन फिर दोनो ने फुर्ती से अपने अपने कपड़े पहने और वहा से भाग लिए, लेकिन आरती ने कमल को आवाज देकर रोक लिया और उसे अपने सामान को भी ले जाने को कहा,

कमल फटाफट ने अपना सामान समेटा और निकल गया।

कमल बाहर आता है तो घर से बाहर अर्पित उसका वेट कर रहा होता है,

कमल-- यार अब क्या होगा, तेरे चक्कर मे मेरा ये हाल हो गया, साला चाची गयी हाथ से और रहने का ठिकाना भी गया,

अर्पित--मुझे क्या मालूम था कि ये तेरी चाची बेंडिट क़वीन निकलेगी साली रात को तो खुद उछल उछल चुद रही थी और आज इसने हमारा ये हाल कर दिया,

कमल-- अब मैं क्या करूँ, घर जा नही सकता और यहा रहने का ठिकाना नही,

अर्पित-- यार मैं भी नही रख सकता तुझे, मेरे घर भी मेरे पैरेंट्स allow नही करेंगे।

तू चल अनवर भाई से बात करते है, वो कोई हल जरूर निकालेंगे, ये तेरी रण्डी चाची अभी भी अनवर भाई के पास से ही आयी है उसने बुलाया था इसको, अनवर भी से वो वीडियो लेकर इसको सबक सिखायँगे।

कमल और अर्पित सीधे बाइक से अनवर के कोठे पर पहुचते है,लेकिन अनवर उन्हें वहा नही मिलता, वहा उन्हें एक आदमी बताता है कि कुछ लोग आए थे जो अनवर को उठाकर ले गए है,

अर्पित-- अब ये अनवर भाई को कौन ले गया, साला आज का दिन ही मनहुष है,

कमल-- हां भाई अब क्या करे।

दोनो बाहर निकलने के लिए मुड़ते है तो उन्हें अनवर आता हुआ दिखता है, जो अपनी दोनो टांगे चोडी कर के चल रहा था,

दोनो अनवर को देख खुश हो जाते है,

अर्पित-- भाई कहा थे आप, उस चाची ने हमारी वाट लगा दी, साली को अभी यहा बुलाओ उष्को सबक सिखाना है,

अर्पित आगे कुछ बोलता इससे पहले ही एक जोरदार तमाचा उसके मुह पर पड़ता है,

अनवर--साले गांडू तू सबक सिखाएगा उसे, हरामजादे बताया क्यो नही उसके लिंक गुंडों के साथ भी है,

अर्पित अपने गाल को सहलाते हुए-- भाई क्या हुआ आप मुझे ही मार रहे है, हमे उस रण्डी को सबक सिखाना है,

अनवर--भड़वे दूर रह उससे ये शूकर मना की तुमको छोड़ दिया उसने साले, मुझे क्या समझ रखा था तुमने मैं कोई डॉन हु जो पूरे शहर में मेरी हकूमत चलती है, अच्छा भला अपना कोठा सम्भाल रहा था लेकिन तेरे चक्कर मे मैं भी उस चाची के हाथों चढ़ गया, क्या बताऊँ सालों पूरी गैंग है उसकी, उझसे उलझना भी मत।

कमल--भाई वो बात तो ठीक है इस अर्पित को गांड दिलवाने के चक्कर मे हाथ आयी चुत के साथ साथ रहने का ठिकाना भी गया,

अनवर--तो मैं क्या करूँ, साला यहाँ खुद की इज्जत का फलूदा हुआ पड़ा है,

अर्पित--भाई वैसे आपके साथ उन लोगो ने क्या किया जो ऐसे चल रहे थे आप,

अनवर-- सालों यहाँ से निकल लो अब क्यो गुस्सा दिला रहे हों।

कमल--भाई मैं क्या करूँ कहा जाऊ अब, इस शहर में कोई ओर ठिकाना भी नही है,

अनवर--तो अब मैं कोठे पर रंडियों की जगह तुझ जैसे भड़वे को रखु अब, तुझसे धंधा करवाऊं।

कमल--भाई ऐसे तो मत कहो, बस दो महीने की बात है,कुछ मेरे रहने का प्रबंध कर दो भाई, प्लीज़ भाई,

अनवर--ऐ अर्पित गांडू समझा इसको कहा रखु इसको, तू क्यो नही ले जाता इसको अपने घर,

कमल--ये गांडू कह रहा इसके पेरेंट्स मुझे नही रखेंगे।

अनवर--तो मैं क्या करूँ, यहाँ कहा रखु तुझे साले।

अर्पित--भाई प्लीज् आप इसका कोई प्रबंध करो न

अनवर--क्यो मैने क्या ठेका ले रखा है,

चलो निकल लो यहा से, अब मुझे आराम करना है,

दोनो वहा से निकल जाता है,

कमल के पास कोई रास्ता नही बचता इसलिए वो अपने गांव के लिए बस में बैठ जाता है, और अर्पित अपने घर के लिए।

वहा सोनल आरति से रात की सारी कहानी सुन रही थी,

सोनल--वाव मोम वैसे मज्जा तो बहुत आया होगा आपको जैसे आप बता रही है, फिर उन लोगो के साथ ये सब क्यो किया।

आरति--बेटा तूने ही सिखाया था न कि अगर ये सब करना है तो अपनि मर्जी से करो दबाव में नही। अगर कमल अर्पित के लिए बात करता तो शायद मैं मान भी जाति लेकिन उसने तो मुझे कोठे पर ही बिठवा दिया था, हालांकि तुम कहोगी कि एक दिन भोला ने भी मुझे जबतदस्ती दो लोगो से चुदवाया था जिस दिन तूने मुझे वहाँ देखा था, लेकिन ये नही जानती की उसमे मेरी भी रजामंदी थी वर्ना भोला ये सब कर ही नही पाता, और दोबारा बताओ उसने कब मुझे बुलाया।

अगर यहा इन लोगो को जरा भी ढील देती तो तुमारी मम्मी इस घर की इज्जतदार बहु से कोठे की रण्डी बन जाती।

सोनल--ओह्ह मम्मी फिर तो आप बाल बाल बची।

आरती--हम्म्म्म।

सोनल--मम्मी वैसे भोला ने आपसे आपकी जान बचाने का हर्जाना नही वसूला।

आरती--नही यार पता नही अचानक क्या हुआ

उसे उसने अनवर की सजा भी पूरी नही होने दी और उसे छोड़कर निकल आया वहा से।

सोनल--ओह कोउ सिरियस मैटर तो नही मम्मी,

आरति--वो तो भोला से मिलने पर मालूम पड़ेगा। चल छोड़ डिनर करते है आ जा बाहर ।

सोनल--ठीक है मम्मी। मम्मी वैसे आगे का क्या सोच रखा है आपने इस इंसीडेंट के बाद क्या आप खुद को रोक लेगी आगे के लिए।

आरती--ज्यादा तो नही कह साख्ति लेकिन कुछ समय तक तो घर से बाहर जाने में भी डर लगेगा।

सोनल-- मम्मी अब शायद ये बहुत ज्यादा हो गया है, हमे ध्यान देना चाहिए अपनी लाइफ पर, नही तो ऐसे ही हर कोई हमारा फायदा उठाएगा।

वैसे मम्मी आप पापा को बताएगी ये सब।

आरति--क्या बताऊँ तुम बोलो, तुम्हारे वाले मेटर में मैने ही उस कमल को बचाया था,अब अगर तुम्हरे पापा को पता लगा तो मालूम हैं ना क्या कहेंगे कि तुम लोगो के साथ मैं भी शामिल थी उस समय। उनको मालूम नही चलना चाहिय।

सोनल--ठीक है मम्मी।

फिर आरति और सोनल हाल में आ जाती है और तब तक रवि भी आ जाता है, और फिर रवि के फ्रेश होने के बाद तीनों डिन्नर करते है और फिर अपने कमरे में आ जाते है,

कमरे में आने पर रवि आरति से कमल के बारे में पूछता है कि कहा है,खाना खाने क्यो नही आया।

आरति रवि से कह देती है कि उसे शक था कि कमल अभी भी सोनल के पीछे था और उसे फिर से बहका सकता था इएलिये उसे घर से निकाल दिया।

रवि पहले ही उसे निकालना चाहता है इसलिए ज्यादा रियेक्ट नही करता और सोने लगता है।

सुबह सभी अपने रूटीन से उठते है और रवि आफिस और सोनल स्कूल चले जाते है। आरती हाल में बैठकर tv देख कर समय व्यतीत कर रही होती है कि तभी रामु काका वहा आ जाता है।

रामु--बहु,

आरती--तुम, यहा क्या कर रहे हो, मना किया था ना घर के अंदर आने को।

रामु--वो बहु ज्या बता रही थी कि कमल ने कोई पंगा कर दिया था।

आरति रामु का जवाब न देकर जया को आवाज लगाती है,

ज्या--ज्या जी बहु रानी।

आरती--क्या कहा है तूने इससे।

ज्या--कुछ नही बहु रानी वो तो बस मैने सोचा कि कही वो लड़का कुछ हरकत न करे इसलिए मोनिका के बाबू को बुलवा लिया।

आरति--जो इंसान खुद उस लड़के जैसा हो वो क्या इसे सम्भालेगा। इससे कहो कि ये क्वाटर में ही रहे यहाँ घर मे न आये। और इसको समझा देना की अगर फिर से कोई गलत हरकत की तो इसे ही नही तुमको भी यहा से जाना होगा।

रामु बिना कुछ कहे वहा से चला जाता है।

उधर कमल अपने घर पहुंचता है तो उसके घर वाले उससे अचानक आने का कारण पूछते है,लकिन वो कुछ नही बताता है।

तो उसके बापू रवि के पास फ़ोन करके पूछते है तो रवि कहता है कि कमल शहर में गलत संगत में पड़ कर बिगड़ गया है इसलिए उसकी गन्दी आदतों के कारण उसे घर से निकाल दिया है उसने।

कमल के बापू उससे पूछते है तो वो कुछ नही कहता बस उनकी डांट सुनता रहता है,

उसका बापू कमल से उसकी कोर्स का पूछता है तो वो कहता है कि जब रहने का ठिकाना नही है तो शहर में कहा रहकर अपना कोर्स पूरा करता।

अगले दिन कमल का बापू उसे लेकर शहर आता है, और रवि के शोरूम पर पहुचता है,

कमल का बापू रवि से विनती करता है कि वो कमल को माफ कर दे और उसे सिर्फ दो महीने ओर अपने घर रख ले। रवि काफी कोशिश करता है मना करने की लेकिन कमल के बापू की विनती के कारण उसका दिल पसीज जाता है और उनदोनो को लेकर घर आता है।

घर आकर रवि आरती से बात करता है, लेकिन आरती मना कर देती है कमल को घर पर रखने को।

रवि हाल में जहा कमल और उसके बापू बैठे होते है वहा आकर उनसे कहा देता है कि आरती मना कर रही है।

कमल का बापू आरति से मिलने को कहता है,रवि आरति को हाल में बुला लेते है,

कमल का बापू--भाभी जी, कृपया करके दो महीने और इस नालायक को यहा रहने दीजिए आपकी हम पर बहुत कृपा होगी।

आरति--भाई साहब, देखिए हमारे घर मे जवान बेटी है और इसकी संगत का असर उसपर भी पड़ता है, इसलिए हमें माफ कीजिये।

बापू--भाभी जी हम वादा करते है अगर अब कोई इसकी शिकायत आयी तो इसकी खाल उदेड देंगे हम।

आरति कुछ सोचती है--देखिए भाई साहब घर में तो हम रख नही सकते इसको हां, बाहर सर्वेंट क्वाटर के पास वाला रूम खाली है उसमें ये रह सकता है लेकिन घर में नही आएगा ये, इसका खाना हम वही भिजवा देंगे, बाकी सभी सुविधा इसको नोकरो के साथ एडजस्ट करनी होगी,बाथरूम इत्यादि, और अबसे अपने सभी काम इसको खुद करने होंगे।

कमल का बापू--धन्यवाद भाभी जी आपका ये अहसान मै पूरी जिंगदी नही भूलूंगा।

आरति--भाई साहब ये आपकी और इनकी पुरानी दोस्ती को देखकर मैं दोबारा इसको मौका दे रही हु बस।

कमल--चाची मैं वादा करता हु आपको शिकायत का मौका नही दूँगा अबकी बार।

मुझसे जो भी गलती हुयी है उसे सुधार लूंगा मैं।

आरति--ठीक है ठीक है, अब उसकी जरूरत नही बस क्वाटर में रहना और अपनि पढ़ाई करना। और यहा तुमको रहने दे रही हु सिर्फ तुम्हरे पिताजी के लिये और इससे ज्यादा का एक्सेप्ट भी मत करना और जो भी सुविधा इस घर मे पहले मिलती थी उनकी उम्मीद फिर से मत करना।

आरती दबे सब्दो में कमल को हिंट दे देती है कि वो किन सुविधा की बात कर रही है।

फिर आरती जया काकी को बोलकर खाना बनवाती है और कमल के बापू को लंच करवाती है, फिर कमल को सर्वेंट क्वाटर में भिजवा देती है जया के साथ।
 
कमल बाहर सर्वेंट क्वाटर में रहने लगा, अब कमल घर से इंस्टीट्यूट और इंस्टिट्यूट से घर तक ही सीमित रहता, उसने अपने आप को काफी हद तक सुधार लिया था

अर्पित के साथ उसने हाय हेलो की दोस्ती ही रख ली थी। दारू बाजी रण्डी बाजी से तौबा कर ली थी। पहले रवि और आरती उसकी पैसों से हेल्प कर देते थे इसलिए वो अर्पित के साथ मौज मस्ती कर लेता था लकीन अब उसके घर की हालत नही थी कि उसे ज्यादा पैसे भिजवा सकते, घर से सिर्फ जरूरत के हिसाब से ही पैसे आते थे,वैसे भी कमल को समझ आ चुका थी कि बुरे वक्त में कोउ किसी का नही होता है।

हा, कभी कभी उसे आरती और सोनल को देख कर अपना पुराना वक़्त याद आ जाता कि कैसे यहा घर मे उसकी मौज थी, जब मन करे मा-बेटी में से किसी को पकड़ लो और दोनो उसका कितना ख्याल रखती थी, अच्छा खाना अछे कपड़े,और आरती उसे अच्छी पॉकेट मनी भी देती थी लेकिन अर्पित के चक्कर मे अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मार ली थी,

कमल का जैसे हुका पानी बंद हो चुका था,अंदर घर से। ऐसे ही इन सब बातों को एक हफ्ता गुजर गया था, आरति और सोनल ने अपने पर कंट्रोल कर लिया था, हां मन होने पर दोनो लैस्बियन सेक्स जरूर कर लेती थी, लेकिन चुदाई से तौबा कर रखी थी। कमल उस हादसे से काफी उबर चुका था, हालांकि आरति और सोनल से उसकी कोई बात नही होती थी लेकिन मोनिका और जया से उसकी काफी बनने लगी थी, जया काकी वैसे भी उस दिन की चुदाई को याद करती थी क्योंकि उसके जीवन मे पहली बार उसने किसी मर्द को चोदा था, नही तो सभी सिर्फ अपनी हवस मिटाते थे, जया की भावना को किसी ने नही समझा था,

अब कमल उसके पास ही रहता था तो उसकी हवस की आग भड़कने लगी थी लेकिन दोनो को आरती का डर था।

लकीन कहते है ना कि शेर के मुह खून लग जाता है तो उष्को कोई नही रोक सकता है तो उसी तरह अगर लण्ड को भी चुत की आदत लग जाती है तो वो भी नही सुनता किसी की भी।

हररोज जया काकी का फिगर कमल को उकसा रहा था , उसकी छाती का साईज़ कम से कम 34 तो होगा ही, उसके बूब्स काम करते हुए तरबूजों की तरह उछलते और हर किसी को अपनी तरफ आकर्षित करते थे.

फिर जब कमल उसे देखता तो उसका लंड उसे एक बार नीचे से ऊपर तक देखते ही एकदम तनकर खड़ा हो जाता था और कमल सीधा बाथरूम में जाकर अपने लंड को सहलाने लगता और कुछ ही देर बाद मुठ मारकर बाहर आ जाता। फिर एक हफ्ते तक कमल जया काकी को लगातार रोज़ देखता रहा और फिर कमल ने और उसके लंड ने ठान लिया कि उसकी चूत को तो वो कैसे भी फाड़कर रहैगा.

फिर कमल ने ज्या काकी को अगले दिन से ही अपनी तरफ आकर्षित करने का प्लान बनाया और अगले दिन से जब जब वो अपने रूम में आती कमल वहीं पर चला जाता और उसके बड़े बड़े बूब्स को घूर घूरकर देखता. तो जया हमेशा अपने बूब्स को अपने कपड़ो में छुपाने की कोशिश किया करती. लेकिन बड़े बड़े बूब्स और काम करने की वजह से वो हमेशा नाकाम रहती, उसके बूब्स थोड़ी ही देर बाद फिर से बाहर की तरफ झांकने लगते, उसे भी अब कमल पर पूरी तरह से शक होने लगा था.

लेकिन जया कमल से कुछ नहीं कह सकी और फिर दो दिन तक सब ऐसे ही चलता रहा. फिर कमल ने थोड़ा सा और आगे की तरफ बड़ने की सोची और जब जया काकी एक दिन सर्वेंट बाथरूम में सफाई करने आने वाली थी तो कमल ने वहां पर उससे पहले ही जाकर टॉयलेट का दरवाजा खोल दिया और अपने 8 इंच लंबे लंड को खड़ा करके मुठ मारने लगा. जैसे ही जया काकी आई और कमल को लंड पकड़े हुए देखकर एकदम चौंक गयी और शरमाकर बाहर चली गयी.

तो कमल ने सोचा कि कहीं वो आरति से शिकायत ना कर दे इसलिए कमल उसके पास गया तो कमल ने देखा कि वो थोड़ा डर सी गयी. कमल ने उससे कहा कि प्लीज़ तुम यह बात किसी को मत बताना वरना मुझे चाची नाराज होकर डाँटेगी.

तो जया काकी थोड़ा धीरे आवाज़ में बोली कि प्लीज़ मुझे कुछ नहीं करना, में किसी को भी नहीं बोलूँगी.

कमल समझ गया था कि वो अब पट चुकी है,बस नाटक कर रही है, और उसके लंड की भूखी है। लेकिन कमल ने उस दिन उसके साथ कुछ नहीं किया,

अगले दो दिन तक जया काकी कमल से दूर दूर रही, और फिर जब जया काकी तीसरे दिन कमल के सामने आई तो उसके चेहरे पर एक अलग ही मुस्कान थी, लेकिन उस समय आरति भी घर पर थी।

कुछ देर बाद जब आरति बाहर चली गई तो कमल में थोड़ी हिम्मत आई और फिर जब जया उसके रूम में खाना लेकर आई तो कमल ने उसे पीछे से जाकर पकड़ लिया और कमल ने उससे कहा कि काकी मुझे तुम बहुत अच्छी लगती हो,उस दिन से तुम्हारी बहुत याद आती है, तुम्हे बहुत प्यार करता हूँ।

फिर जया काकी ने 20 सेकण्ड तक कमल से कुछ नहीं कहा और फिर कमल धीरे धीरे अपना लंड उसकी गांड पर रगड़ने लगा और उसके बूब्स को मसलने लगा.

जया काकी ने कहा कि प्लीज़ अभी मुझे कुछ मत करो वरना हमें कोई देख लेगा, मैं कल रात को तुम्हारे कमरे मे आ जाउंगी और तब तुम्हे जो कुछ भी करना हो कर लेना.

उसके मुहं से यह बात सुनकर तो कमल की ख़ुशी का कोई ठिकाना ही नहीं रहा और फिर कमल ने उसका चेहरा अपनी तरफ किया और उसे एक किस किया.

ज्या ने भी कमल का साथ दिया, लेकिन फिर जया काकी जल्दी से वहां से चली गई.

उस पूरी रात कमल बिल्कुल भी चैन से सो नहीं पाया में बार बार जया काकी के बारे में सोचकर मुठ मारता रहा और फिर आख़िरकार वो रात आ ही गयी जिसका कमल बहुत बेसब्री से इंतजार कर रहा था. उस दिन कमल अपनी ट्यूशन भी नहीं गया.

फिर जब जया काकी उसके कमरे में आई और जब कमल ने उसे देखा तो काकी आज एकदम पटाखा बनकर आई थी और उसका लंड तो पहले से ही उसके बारे में सोच सोचकर खड़ा था, अब वो उसकी पेंट को फाड़कर बाहर निकल जाने को तैयार था और काकी जैसे ही अंदर आई तो कमल ने दरवाजा बंद कर लिया. जया काकी बेड पे जाकर बैठ गयी.

फिर कमल रूम में घुसते ही उस पर टूट पड़ा और उसे पागलों की तरह किस करने लगा, जया भी उसका पूरा साथ दे रही थी और वो दोनों चार पांच मिनट तक लगातार किस करते रहे. फिर कमल ने ज्या काकी के बूब्स को बिना कपड़े खोले पकड़ लिया और ऊपर से ही धीरे धीरे दबाने और सहलाने लगा. तो जया ने कमल का हाथ पकड़ा और कहा कि प्लीज़ थोड़ा ज़ोर से दबाओ. फिर कमल जोश में आकर ज़ोर ज़ोर से दबाने और चूसने लगा.

जया को भी मज़ा आने लगा और वो लगातार सिसकियों की आवाजें निकाल रही थी ऊईईईईई आह्ह्ह्हह्ह्ह्हह्ह उफ्फ्फ्फफ्फ्फ्फ़. कमल का जोश और भी बड़ गया और कमल ने उसे धीरे धीरे नंगा करना चालू किया. जैसे ही जया काकी ने ब्रा उतारी तो कमल जन्नत में पहुंच गया और उसके बूब्स बड़े बड़े और एकदम गोरे थे।

कमल ने उन्हे एक एक करके चूसना चालू कर दिया, जिसकी वजह से जया काकी को और भी ज़्यादा मज़ा आने लगा, लेकिन अब कमल से और कंट्रोल नहीं हो रहा था, उसके लंड में तो जैसे आग लग गयी थी. कमल ने झट से अपना लंड बाहर निकाला और उसके हाथ में पकड़ा दिया तो वो उसे पकड़कर हल्के हल्के हाथ से सहलाने लगी, जैसे कि वो इस काम में खिलाड़ी हो और दो मिनट तक मसलने के बाद कमल ने उससे कहा कि काकी चलो अब मेरा लंड थोड़ा गीला कर दो.

फिर वो एक बार में उसका कहा समझ गई और कमल बिल्कुल सीधा बैठ गया. वो कमल का लंड एक लोलीपोप की तरह चूसने लगी और कहने लगी कि वाह यह तो मेरी उम्मीद से भी बड़ा और मोटा निकला है, इसे चूसने में तो बहुत मज़ा आता है और वो पूरा का पूरा लंड मुहं में लेकर चूसने लगी. कमल को इतना मज़ा अपनी जिंदगी में कभी नहीं आया था. तीन चार मिनट के बाद उसका माल निकलने वाला था इसलिए कमल ने उससे कहा कि काकी अब मेरा वीर्य बाहर आने वाला है . लेकिन उसने नहीं सुना और कमल ने एक जोरदार पिचकारी के साथ अपना सारा वीर्य उसके मुहं में डाल दिया और वो उसे पी गयी.

अब कमल की बारी थी और कमल ने जब उसकी पेंटी उतारी तो देखा कि उसकी चूत पर एक भी बाल नहीं है.

जया ने कहा कि जानू में तुम्हारे लिए हर एक रास्ता साफ करके आई हूँ जिससे तुम आज मेरी चूत को अच्छी तरह से चोद दो और मुझे पूरे मज़े दो.

तो कमल से अब उसकी बातें सुनकर रुका नहीं जा रहा था. उसकी बातें उसमें और भी जोश भर रही थी.

फिर कमल ने अपना लंड उसकी चूत की दीवार पर रखा और एक हल्का सा धक्का मारा, लेकिन उसका मोटा लंड आराम से अंदर नहीं जा रहा था इसलिए कमल ने थोड़ा सा तेल लेकर अपने लंड और उसकी चूत पर लगाया और एक ही झटके में आधा लंड घुसा दिया. वो दर्द के मारे चीख पड़ी और कमल ने उसी समय उसके होंठो को अपने होंठो से दबा लिया. उसने दर्द के मारे उसकी कमर को कसकर पकड़ लिया और उसकी पीठ पर अपने नाखून तक गड़ा दिए, कमल ने हल्के हल्के से अपना लंड अंदर बाहर किया.

उसे अब मज़ा आ रहा था और कमल भी जोश में आ गया और कमल ने अगले ही धक्के में पूरा लंड अंदर कर दिया वो ज़ोर से चिल्लाई ऊईईईई माँ मर गई अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह थोड़ा धीरे करो।. तो कमल लंड को अंदर की तरफ रखकर उसे वापस से किस करता रहा और बूब्स को चूसने लगा. फिर दस मिनट के बाद वो शांत हो गयी और वो दोनों वापस चालू हो गये. कमल धीरे धीरे लंड को अंदर बाहर करता रहा।

जया काकी की सिसकियों की आवाजें आ रही थी ऊईईइ आआहह अह्ह्ह हाँ चोद डाल मुझे उह्ह्ह्ह आज मेरी चूत फाड़ दे, हाँ और ज़ोर से अंदर तक डाल दे.

उसके मुहं से यह सब शब्द सुनकर कमल और भी जोश में आ गया और कमल ने फिर से अपनी रफ़्तार तेज कर दी, पांच सात मिनट तक उसे चोदने के बाद कमल ने महसूस किया कि काकी झड़ गयी, लेकिन कमल फिर भी चालू था और थोड़ी सी देर बाद उसका भी माल बाहर आने वाला था तो कमल ने अपना लंड चूत से बाहर निकाला और काकी के मुहं में डाल दिया और उसके मुहं में ही धक्के देकर झड़ गया और अब दोनों थककर बेड पर लेट गये.

फिर वो दोनों दस मिनट तक किस करते रहे और कमल उसके बूब्स को दबाने लगा. कमल ने कहा कि काकी में तुमसे बहुत प्यार करता हूँ और में अब तुम्हे हर रोज इसी तरह प्यार करना चाहता हूँ।

जया काकी ने कहा कि अब में तुम्हारी रंडी हूँ और तुम मेरे साथ जो चाहे करो, में कभी मना नहीं करूँगी।

फिर दोनों वापस जोश में आ गये और उसके बाद उन्होंने दो बार और सेक्स किया और एक बार डोगी स्टाइल भी ट्राई की और कमल ने उसकी गांड भी मारी.

कमल इतने दिनों की कसर एक दीन में ही पूरी कर रहा था और फिर दोनों ने बाथरूम में जाकर एक दूसरे को साफ किया और थोड़ी शरारत की और फिर कपड़े पहनकर वापस किस करने लगे.

फिर 6 बज गये और काकी अंदर चली गयी. कमल वही कमरे में पड़ा रहा अपने बिस्तर पर इस बात से अनजान की मोनिका ने उनका पूरा कार्यक्रम देख लिया है।

कमल सोच रहा था कि अगर काकी को फंसा ले तो वो उसकी इस घर मे फिर से एंट्री करवाने में मदद कर सकती है, लेकिन इस बार कमल की कोई दुर्भावना नही थी वो तो बस दोनो मा बेटी को फंसा कर अपनी लाइफ सेट करना चाहता था। उसने ठान लिया था कि अगर इस बार वो इन मा बेटी की चुदाई करने में सफल रहा तो किसी दूसरे के चक्कर में नही खोएगा।

कमल ने अपनी पहले की लाइफ और अबकी लाइफ दोनो देख ली थी। उसे अपनी गलती का अहसास था कि उसने अपने खुद के हाथों सोने के अंडे देने वाली मुर्गी को दूसरे के हाथों सौप दिया था। अगर आरति अनवर के हाथों मजबूर हो जाती भी तो उसे क्या मिलता जबकि अगर वो सिर्फ खुद आरती और सोनल को यूज़ करता तो उनसे कितना फायदा ले सकता था।

बस अब उसने कैसे भी करके आरती को खुश करना था ताकि वो इस घर मे अंदर दाखिल हो सके।
 
अब जया काकी के सहारे कमल का टाइम पास अच्छे से होने लगा था लेकिन अभी उसकी इंर्टी घर मे नही हुई थी,

एक दिन आरती को अपने रिस्तेदारी में एक शादी में जाना हुआ तो वो सोनल और जया काकी को भी साथ ले गयी। उनको आने जाने और शादी को अटेंड करने में तीन दिन लगने थे तो वो मोनिका को घर सम्भाल कर निकल गए।

अब मोनिका अकेली थी घर मे तो उसके दिमाग मे खुराफात सूझ रही थी, इन दिनों में उसकी चुदाई नही हुई थी, न तो रवि मिलता और न ही रामु। उसने जबसे अपनी माँ और कमल की चुदाई देखी तो उसके तन बदन में भी आग लगी हुई थी लेकिन उसे मौका नही मिल रहा था। आज वो घर पर अकेली थी उसे किसी का डर भी नही था।

मोनिका अपना प्लान बनाने लगी, उसने कमल को कहा कि आज घर पर कोई नही है तो उसे घर की सफाई करनी है तो घर का काम काफी बढ़ गया है तो यदि तुम आधे दिन को आ सकते हो तो आधे दिन में अपना काम निपट जाएगा।

तो कमल ने भी ‘हाँ’ भरी कि चलो घर का काम हो जाएगा।

उस दिन कमल सुबह इंस्टीट्यूट गया, अपना काम करके दिन में वापिश आ गया, काम करते-करते दोपहर हो गई थी तो मोनिका बोली- चलो कमल,पहले खाना खा लेते हैं।

वैसे भी इंस्टीट्यूट में काम करके तो कमक आधा हो गया था, मोनिका ने उसकी हालत देखते हुए मुस्कुरा कर कहा- चलो कमल, आज मैं तुम्हें खाना खिला देती हूँ।

कमल को थोड़ा संकोच हुआ, लेकिन मान देते हुए कमल ने ‘हामी’ भरी।

तो मोनिका ने अपनी चुनरी निकाल दी और जानबूझ कर कमल की तरफ झुक कर बैठ गई। उसके बड़े-बड़े मम्मे बाहर उभर कर दिखाई दे रहे थे, जैसे वो बाहर आना चाहते हों।

कमल का लौड़ा तो खड़ा हो रहा था लेकिन उसने कण्ट्रोल किया।

मोनिका धीरे से कमल के पास आकर बैठ गई और उसे खिलाने लगी।

कमल की हालत और ख़राब हो रही थी, तो उसने उसके बारे में पूछना शुरू किया, कमल ने हँस-हँस कर जवाब दिया।

फिर मोनिका ने पूछा- तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड क्यों नहीं है?

लेकिन कमल के पास इसका कोई जवाब नहीं था, तो कमल चुप ही रहा। मोनिका समझ गई थी और अब तो वो उस से चिपक कर बैठ गई और उसके मम्मे कमल के हाथ को छू रहे थे। कमल को कुछ अजीब सा लगा तो वो दूर हो गया।

मोनिका ने पूछा- तूने आज पहली बार किसी लड़की को छुआ है क्या..!

तो कमल ने कहा- नहीं वो बात नही..!

मोनिका हँसने लगी, तो कमल ने कहा- चलो बाकी का काम भी निपटा लेते हैं। मुझे ज़रा मार्किट जाना है, इंटरनेट का कुछ काम है।

मोनिका बोली- जल्दी क्या है.. अभी बहुत काम बाकी है, चलो हम उप्पेर स्टोर में सामान को चैक कर लेते हैं, क्या क्या बेकार का पड़ा है।

फिर दोनो उप्पेर स्टोर गए, वहाँ का सामान चैक कर लिया।

तो मोनिका बोली- अभी टांड़ के ऊपर का सामान बाकी है, मैं चैक करती हूँ, तुम मुझे नीचे से पकड़ो।

मोनिका टेबल पर चढ़ गई। कमल ने टेबल को नीचे से पकड़ा हुआ था। उसने जो ड्रेस पहनी हुई थी उसमें से उसकी अन्दर की पूरी फिल्म दिख रही थी। उसकी गांड का आकर बड़ा था। अब चूंकि कमल ने नीचे से पकड़ रखा था, अचानक टेबल हिली और मोनिका का संतुलन बिगड़ा, वो एक बार तो गिरते-गिरते बची।

कमल ने कहा- तुम उतर आओ.. मैं चैक कर लेता हूँ।

तो मोनिका मान गई और कमल टेबल पर चढ़ गया। उसी समय जरा टेबल हिली और मोनिका ने अचानक कलम के पैर नीचे से पकड़ लिए और बोली- तुम तसल्ली से चैक करो..!

कमल ने जब नीचे देखा तो मोनिका के दो बड़े-बड़े मम्मे उसके पैरों को छू रहे थे, लेकिन उसके मन में ख्याल आया कि अगर इसने आरति को कुछ बता दिया तो गया काम से। कमल अब कोई गलती नही करना चाहता था।

कमल सिर को एक बार झटक कर अपने काम में लग गया। तभी अचानक उसके पैर फिसला और कमल टेबल पर से पास के सोफे पर गिरा और मोनिका उसके ऊपर आ गिरी। कमल उसके नीचे लेटा हुआ था। उसके दोनों पपीते उसकी छाती से चिपके थे।

कमल हक्का-बक्का था, जैसे ही उठने को हुआ, तो उसने कमल को पकड़ लिया और बोली- कहाँ जा रहे हो.. रुको थोड़ी देर..!

मोनिका कमल के ऊपर थी तो उसका लंड खड़ा हो गया। अब लौड़ा उठा तो मोनिका को कमल के लौड़े का उठान महसूस हो गया, वो समझ गई और उसने नीचे हाथ ले जाकर कमल के लंड को पैन्ट खोल कर हाथ में पकड़ लिया और हिलाने लगी।

बोली- तुम्हारा लंड तो बहुत बड़ा ही गया है..!

तो कमल बोला- ये क्या कर रही हो मोनिका..! ये गलत है..अगर चाची को मालूम चला तो!

तो मोनिका बोली- कुछ भी मालूम नहीं चलेगा मेमसाहब को.. जब मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं, तो तुम्हें क्या प्रॉब्लम है..! अब चुपचाप बैठो और मैं जैसा कहती हूँ, वैसा करते जाओ..!

मोनिका अब पूरी तरह कामुक हो गई थी। उसने कमल का लंड हिलाते-हिलाते मुँह में ले लिया और चूसने लगी।

अब धीरे-धीरे कमल के अन्दर की काम वासना जागने लगी और कमल भी थोड़ा-थोड़ा मजे लेने लगा।

कमल ने उसकी ड्रेस की चैन खोली और पूरी तरह निकाल दी।

तो मोनिका बोली- पहले डोर अन्दर से बंद करके आओ..!

तो कमल ने दरवाजे को अंदर से बंद करके आया और उसकी ब्रा-पैन्टी निकाल दी। मोनिका ने भी उसकी पैन्ट और बाकी के कपड़े निकाल दिए।

अब वो दोनों पूरे नंगे थे एक-दूसरे से लिपट गए और कमल ने उसके होंठों को चूमना शुरू किया और उसके मम्मे दबाने लगा।

मोनिका को भी मजा आ रहा था और वो उसका लंड छोड़ ही नहीं रही थी।

मोनिका बोली- आज के दिन मैं तेरी हूँ.. तू जो चाहे वो कर ले.. बस मेरी प्यास बुझा दो।

कमल लगातार उससे चूमा-चाटी कर रहा था।

फिर मोनिका कमल से बोली- चलो अभी सीधे बैठ जाओ..!

और वो उसकी गोद में बैठ गई और उसके लंड पर सवार हो गई।

उसने बोला- अब तुम सीधे लेट जाओ..!

और मोनिका कमल के ऊपर चढ़ गई और उसके लंड को अपनी चूत में डलवा कर मजे लेने लगी।

कुछ ही देर के घमासान में कमल बोला- मैं झड़ने वाला हूँ..!

तो मोनिका बोली- रुको झड़ना मत.. मैं तेरा माल पीना चाहती हूँ..!

और वो फट से लौड़े से उतर गई और कमल के लंड को चूसने लगी। वो ऐसे चूस रही थी, जैसे कचरा खींचने वाली मशीन कचरा खींचती है। और कमल झड़ गया और उसने पूरा वीर्य मुँह के अन्दर खींच लिया। बहुत ही अनोखा अहसास था कमल के लिए जो वो बयान नहीं कर सकता..!

कमल की सारी झिझक खत्म हो चुकी थी और उसके बाद कमल ने उसे अलग-अलग पोजीशन में 3 बार और चोदा।

तीन दिन तक कमल ने मोनिका को घर के हर हिस्से में चोद कर अपनी गुलाम बना लिया। कमल ने अपना एक कदम और घर मे इंट्री का बढ़ा लिया था क्योंकि उसने मोनिका को सोनल के लिए पटा लिया था कि जब सोनल वापिश आएगी तो वो उसे कमल को माफ करके फिर से उसके सम्बन्ध बनवायेगी।

तीन दिन बाद आरती और जया काकी वापिश आ जाती है लेकिन सोनल वही रुक जाती है, कमल फिर से क्वाटर में शिफ्ट हो जाता है,

आरती और रवि के रिलेशन फिर से नार्मल होने लगते है, धीरे धीरे दोनो में फिर से सेक्स होने लगता है और दोनो अपनी सेक्स डिजायर एक दूसरे से पूरे करने लगते है,

सेक्स में दोनो अब हर तरीके को इस्तेमाल करते है,किनकी सेक्स वाइल्ड सेक्स अनल,

उनकी सेक्स लाईफ अब तक बहुत अच्छी तरह चल रही थी, क्योकि उन घटनाओ ने उनका जीवन पूरा का पूरा बदल कर रखा दिया था।

आरती ने अपने आपको बाहरी सेक्स से दूर कर लिया था लकीन उसे नही मालूम था कि उसके लाइफ में अभी बहुत कुछ बाकी है जो उसे झेलना है या मजजे लेना है ये आरती पर निर्भर करेगा। वो कैसे रियेक्ट करेगी।

रवि ने अपने शोरूम में शेल्स डेस्क के लिए शुभांगी नाम की लड़की को रखा था, जोकि जब से शोरूम में आई थी रवि उसके पीछे पागल था, और शुभांगी भी अपनी नॉकरी के लिए रवि को रोक नही पा रही थी,

उस दिन शुभांगी शोरूम में अपना काम कर रही थी, उसने उस समय लाल कलर की साड़ी पहनी हुई थी और लाल कलर का ब्लाउज पहना हुआ था।

फिर कुछ देर बाद रवि वहा आया, वो शुभांगी के पीछे से जाने लगा और कुछ देर के बाद शोरूम में ज्यादा भीड़ होने का फ़ायदा उठाकर उसने शुभांगी की छाती पर हाथ रख दिया और अब शुभांगी के बूब्स रवि के हाथ में थे और फिर धीरे से उसने शुभांगी के बूब्स से होते हुए अपने हाथों को कमर पर लिए, लेकिन भीड़ बहुत ज्यादा होने की वजह से शुभांगी उसे रोक ना सकी l

फिर कमर और गांड को दबाकर रवि ने शुभांगी के नीचे चूत तक अपनी उंगली को डाल दिया। तब एक आदमी थोड़ा दूर खड़ा होकर एक स्टॉल पर चाय पी रहा था, और शुभांगी पर पूरा पूरा ध्यान रख रहा था। दूर खड़ा खड़ा शोरूम में जो हो रहा था सब कुछ देख रहा था, लेकिन उसके चेहरे से लग रहा था कि उसे रवि की हरकत अछि नही लग रही है पर शायद मजबूर था और कुछ भी नहीं कर सकता था। फिर उसने जाते हुए शुभांगी की तरफ पीछे मुड़कर देखा तो उनकी नजर आपस मे मिली। शुभांगी उसकी तरफ हल्की सी हंसी,

शाम को शुभांगी शोरूम से छूटि करके अपने घर पहुचती है और अपनी keys से लॉक खोल कर अंदर जाती है,

शुभांगी जैसे ही अंदर पहुचती है तो सामने सोफे पर बैठे शक्श को बैठे देख कर चौक जाती है। ये वही शक्श था जो शोरूम के सामने बैठा था।

शुभांगी--अरे आप, जल्दी आ गए

ये शक्श शुभांगी का पति केशव था, जोकि शुभांगी पर नजर रख रहा था क्योंकि शुभांगी रवि की हरकतों की वजह से घर मे चिड़चिड़ापन रखती थी और सेक्स में भी केशव का पहले जैसा साथ नही रखती थी तो केशव ने उस पर नजर रखने की सोची।

केशव ने आज सोचा था कि शुभांगी उसे आज शोरूम की बात बताएगी।

लेकिन उस बात को शुभांगी ने उससे घर पर आकर भी कुछ नहीं बताया इसलिए केशव को उस पर बहुत गुस्सा आया

केशब ने शुभांगी की बात का जवाब नही दिया और उस पर टूट पड़ा और केशव ने शुभांगी को घर पर आते ही बहुत बुरी तरह से चोदा।

केशव ने शुभांगी को इतने जबरदस्त तरीके से कभी नहीं चोदा था और आज वो भी बहुत थक गई और फिर चोदने के बाद शुभांगी केशव से बोली कि क्या बात है आज कुछ ज़्यादा ही जोश में हो? ऐसा क्यों किया फ्रेश तो होने देते मैं कहा भागी जा रही थीं।।

उस समय केशव बहुत गुस्से में था, केशव ने कहा कि क्या मैं तुम्हारे लिए कम पड़ता हूँ जो तुम उस आदमी से अपने बूब्स दबवा लेती हो?

तो केशव के मुहं से यह बात सुनकर शुभांगी एकदम चकित हो गई और ज़ोर ज़ोर से रोने लगी और फिर वो बोली कि मैं उससे अपनी मर्जी से कभी कुछ नहीं करवाती हूँ वो खुद मुझे बहुत डराता, धमकाता है और जबरदस्ती मेरे साथ यह सब करता है।

तो केशव ने उससे पूछा कि क्या मतलब?

तो शुभांगी ने अपनी आप बीती सुनाते हुए बोली कि वो शोरूम का मालिक रवि बाबू है और मेरी तरफ ऐसे ही हमेशा घूरकर देखता है और उस दिन जब मेरी इंटरव्यू पर उससे पहली बार मुलाकात हुई तब भी उसने मुझे नॉकरी पर रखने के बदले दोस्ती का प्रस्ताव रखा। मजबूरी मुझे मानना पड़ा, तुम भी तो जानते हो अगर मैं ये नोकरी नही करती तो हम किस मुसीबत में फस जाते। इसलिये हा कर दी, मैने सोचा कि रवि बाबू सिर्फ दोस्ती ही रखेंगे लेकिन एक दिन वो हमारे घर पर आया था और फिर उसने मुझसे पानी माँगा तो मैंने किचन से लाकर उसे पानी दिया तब उसने अंदर आकर मुझे अचानक से पीछे से पकड़ लिया मेरे साथ ज़बरदस्ती करने लगा, उसने मुझे किस किया और मेरे बूब्स दबाने लगा और फिर वो मुझसे बोला कि देती है क्या? तो मैंने कहा कि नहीं और में ज़ोर ज़ोर से रोने लगी तो उसने जाते जाते मुझसे बोला कि मैंने अगर यह बात किसी को बताई तो में तुझे जान से मार डालूँगा।

केशव ने बिल्कुल डरी और सहमी हुई सी शुभांगी को थोड़ा अपने करीब लिया और उसे अपनी बाहों में लेकर गले लगा किया और उसे चूमने लगा।

केशव ने उससे सॉरी कहा और शुभांगी ने भी उसे अपने गले लगाकर ठीक है कहा

और अब केशव मन मे सोचने लगा कि कि उसे अब क्या करना है?

तो केशव ने रवि और उसके परिवार के बारे में सारी जानकारियां निकाली तो उसने देखा कि उसके एक लड़की है, लेकिन वो यहाँ पर नहीं है इस समय और वो यहाँ पर उसकी पत्नी आरति के साथ रहता है और उसने अब तक अपनी कॉलोनी और ओफिस की कई औरतों को चोदा है। अपने घर की नॉकरानी को भी नही छोड़ा।

दो दिन बाद आरती में चुदास भड़की हुई थी,उसने उस दिन रवि को घर जल्दी घर आने को बोला, आरती का मूड आज वाइल्ड सेक्स का था तो उसने जया और मोनिका को सख्त हिदायत दी कि वो शाम की जल्दी काम खत्म करके क्वाटरर में चली जाए और रात को डिस्टर्ब न करे।

शाम को जया अपना सब कम खत्म करके रूम पर चली गयी। रवि भी ज्यादा जल्दी नही लेकिन अंधेरा होने से पहले आ गया था,जब तक रवि फ्रेश हुआ तब तक आरति ने नीचे खाना और उससे पहले मूड बनाने के लिए ड्रिंक का प्रबंध कर लिया था, और हाल की बती बुझा कर सिर्फ कैंडल जला दी, आरती आज बहुत मूड में थी,

रवि जब नीचे आता है तो नीचे का माहौल देख कर खुश हो जाता है, आरति एक बहुत ही सेक्सी मेक्सि में थी,जिसको देख कर रवि का लण्ड खड़ा हो जाता है,

और आरती की तरफ बढ़ जाता है, आरति हल्की हल्की आवाज में म्यूजिक चला देती है और बहुत ही सेक्सी डांस करने लगी,

ये पति भी न अजीब होते है… न समय देखते है और न जगह… बस जब मन किया अपनी पत्नी के तन को छूकर उसे छेड़ने लगते है. ये बात आरति अच्छी तरह से जान चुकी थी. शाम के 8 बजे थे और बगल में ही खड़े रवि ने पीछे से आकर उसकी मैक्सि पर से ही उसकी ब्रा में हाथ डालकर उसके बूब्स दबाने लगे और निप्पल को अपनी उँगलियों से मसलने लगे. आरती तो पहले ही मूड में थी. उसे अच्छा भी लग रहा था पर इस समय आरती का रवि को तड़पाने का प्लान था, रवि के जिस्म को इस तरह उकसाने का कि उसे बेदर्दी से चोदे, पर रवि कहाँ रुकने वाला था. वो तो आरती के नर्म मुलायम बूब्स दबाते हुए खुद उत्तेजित हो रहा था और उसकी उत्तेजना से लण्ड कठोर होते हुए आरति के पीछे उसके बड़े नर्म कुलहो पर और जोर जोर से दस्तक दे रहा था.

“ओहो आप भी न आते ही शुरू हो जाते है. आप अपने इसको संभालकर रखिये न अपने पास. दूर कीजिये उसे मुझसे.पहले कुछ खाना खा लीजिए”, आरती ने अनमनी आवाज़ में कहा और अपने पति के उस कठोर होते लण्ड को अपने हाथ से अपनी मैक्सी से दूर करने लगी.

पर रवि को जितना मना करती वो और करीब आता गया. “डार्लिंग… अब तुम इतनी सेक्सी हो तो इसमें मेरी क्या गलती है?” और रवि अपने लण्ड को और जोरो से आरति के कुलहो पर दबाने लगे और आरति के बूब्स को और जोरो से मसलने लगे.

“तुम भी न… वक़्त तो देखो… अभी पूरी रात पड़ी है, इस समय कोई भी आ सकता है”, आरती ने रवि को तड़पाते हुई समझाने की कोशिश की.

“आरति डार्लिंग… अब ये मत कहना कि अभी तुम्हे कुछ नहीं हो रहा है.” रवि ने कहा और आरति के ब्रा के अन्दर से हाथ निकालकर आरति की कमर पर हाथ फेरने लगे. और फिर धीरे धीरे कमर पर से हाथ निचे सरकाते हुए आरती की मेक्सि के अन्दर उसकी पेंटी को ओर ले जाने लगे. बूब्स दबाने की वजह से आरती भी थोड़ी उत्तेजित हो गयी थी और उसकी चुत भी गीली हो गयी थी. रवि इस वक़्त आरति की मेक्सि के अन्दर से उसकी पेंटी में हाथ डालकर आरती की चुत को सहलाने लगे. “देखो डार्लिंग… सिर्फ मेरा ही नहीं तुम्हारी भी तो गीली हो चूकी है. आखिर तुम भी तो उत्तेजित हो रही हो.”, रवि ने कहा.

“प्लीज़ छोडो न जानू. मत छेड़ो मुझे.”, आरती ने सोचा शायद प्यार से बात बन जाए.

“आरती … तुम कहो तो मैं अपनी पत्नी की चुत को चूसकर उसकी प्यास बुझा दू?”, रवि ने कहा.

“छि.. कैसी बातें कर रहे हो खाने के वक़्त. तुम्हारी अपनी प्यास है… मेरी प्यास का बहाना मत बनाओ.”, आरती ने कहा और रवि का हाथ अपनी पेंटी से बाहर निकाल दिया और झट से कुर्सी पर बैठ गयी.

क्योंकि रवि ने आरती की मेक्सि को हटा दिया था इसलिए कृति ने सबसे पहले अपने मेक्सि को अपनी चूची पर ढंका और फिर अपने बालो का जुड़ा बनाने लगी. भले आरति गर्म हो चुकी थी पर रवि को तड़पाना चाहती थी वो.

देखते ही देखते आरति रवि की बांहों से दूर किचन में चली गयी से और रवि सिर्फ आन्हें भरते रह गए. “तुम्हारे लिए पैक बनाती हूँ मैं. तुम बैठकर मूड बना लो.”, आरति बोली पर रवि तो उसे देखकर मुस्कुरा रहे थे.

रवि टेबल की तरफ जाने लगा तभी किसी ने दरवाजा खटखटाया, रवि झुंझलाते हुई, अब कौन आ मरा, और दरवाजे की तरफ बढ़ा

बाहर खड़े शक्श ने उस समय अपने चेहरे पर मास्क लगाया हुआ था और उसके एक हाथ में क्लॉरोफॉर्म का कपड़ा था और फिर शायद उसने जैसा सोचा था वैसे ही हुआ रवि ही उस समय दरवाजे पर था l

फिर उस शख्श ने रवि को झट से मुहं पर क्लॉरोफॉर्म का कपड़ा लगाकर बेहोश कर दिया और 5 मिनट के बाद अंदर से आवाज़ आई आरति कि कहाँ गए आप क्या हुआ?

वह जान गया कि रवि की बीवी की आवाज थी और फिर आरति के आने के डर की वजह से उसने रवि को एक कुर्सी से बाँध दिया और घर का दरवाजा अंदर से लगा दिया।

फिर जब वो वहा से हाल के अंदर गया तो उसने देखा कि आरती ब्रा और पेंटी में ही किचन की स्लैब पर जूखी हुई है और मैक्सी पास में पड़ी है,

आरती अपने खयालो में गुम थी, उसे लगा कि रवि बाहर जो भी आया है उसे टरका कर यहा आएगा

लेकिन उस शख्श ने आरती के पास में जाकर उसके मुहं पर अपना एक हाथ लगाया और फिर एकदम से उसके बदन पर गिरकर बोला कि ज्यादा ज़ोर से चिल्लाने, चिल्लाने की कोई ज़रूरी नहीं है।

आरती एक दम डर कर सहम गई, उसके मुह से कुछ नही निकला तो उस शख्स ने अपनी बात कहनी स्टार्ट की, ये शख्स केशव ही था जो अपनी बीबी का बदला लेने आया था, उसने पूरी कहानी आरती को सुना दी कि उसने शुभांगी के साथ क्या क्या किया।फिर कुछ देर डरने के बाद आरती ने उसकी पूरी बात सुनी और फिर

केशव--मैं यहाँ पर अपना हिसाब चुकता करने आया हूँ और तुम्हारे पति ने एक बार मेरी पत्नी को ज़बरदस्ती से चोदा है और आज में उसे सबक सिखाना चाहता हूँ।

आरती केशव की बात सुनकर बहुत गुस्सा हुई कि रवि अभी भी खुद को नही सुधार रहा है तो आरती केशव से चुदने के लिए तैयार हो गई, क्योंकि उसे भी पता था कि उसका पति वैसा ही है जैसा केशव ने उसे सब कुछ बताया और अब आरती ने देखा कि केशव ने रवि को पूरा नंगा करके कुर्सी को बांध दिया है तो

आरती उससे बोली कि मैं उसे ऐसा दिखाउंगी कि तुम मुझसे यह सब ज़बरदस्ती कर रहे हो।

आरति ने उसका पूरा पूरा साथ देने का वादा किया।

फिर केशव ने कहा कि ठीक है और अब केशव भी पूरा नंगा हुआ तो आरती ने देखा कि उसका लंड भी साईज में बड़ा, मोटा और अच्छा है।

फिर केशव ने थोड़ा पानी रवि के मुहं पर डाला तो वो अब धीरे धीरे अपने होश में आने लगा, लेकिन मुहं पर पट्टी बंधी होने के कारण वो कुछ बोल ना सका और बस चुपचाप देखता ही रहा l

अब केशव ने आरती को चाकू दिखाकर आरती के जिस्म को मसलना शुरू किया और उसके बूब्स को दबाया और करीब 15 मिनट तक लगातार आरती के जिस्म के हर एक अंग को चाटा और उसके बूब्स को तो चूस चूसकर लाल कर डाले और अब बारी थी आरती की चूत की, आरती की चुत एकदम नाजुक गुलाब की तरह उससे कामुक कर देने वाली खुश्बू निकल रही थी l

वो अंदर से बहुत खुली हुई थी, लेकिन केशव को देखने से पता चला कि उसकी चूत चोदने में बहुत ज़बरदस्त थी और केशव ने उसकी चूत को चाट चाटकर एकदम लाल कर दिया था। वो सिर्फ़ ऑश ओहहहह आईईइ छोड़ दो मुझे प्लीज आह्ह्हह्ह मेरे साथ ऐसा मत करो कर रही थी।

यह सब काम रवि की कुर्सी के ठीक सामने ही चल रहा था, लेकिन रवि एकदम लाचार, मजबूर वो अपनी पत्नी को केशव से चुदता हुआ देख सकता था, लेकिन उसकी कोई भी किसी भी तरह की मदद नहीं कर सकता था और वो दोनों भी यही चाहते थे और अब तक सब कुछ एकदम ठीक ठाक चल रहा था।

फिर केशव ने एकदम से आरती के पैरों को पकड़कर एकदम से पूरी तरह से खोल दिया जिसकी वजह से वो बहुत ज़ोर से चीखने लगी और फिर केशव ने चूत के मुहं पर लंड को रखकर एक ही जोरदार झटके से पूरा का पूरा लंड, चूत में उतार दिया।

तो आरती के मुहं से बहुत ज़ोर की चीखने के साथ साथ बहुत बार अजीब सी आवाजे भी निकाली उह्ह अफफ्फ्फ माँ ऑश ओहहह्ह्ह प्लीज बाहर निकालो उह्ह्हह्ह्ह्ह वरना में मर जाउंगी, छोड़ दो मुझे, प्लीज अब बाहर करो, इसे मेरी चूत फट जाएगी, मुझे बहुत दर्द हो रहा है, लेकिन में केशव आरती के बदन पर पड़ा रहा l

केशव ने आरती को 15 मिनट तक लगातार ज़ोर ज़ोर से धक्के देकर चोदा, उसके मुहं को चाटते हुए, उसके कान को काटते हुए, उसके बूब्स को दबाते मसलते हुए केशव ने उसे लगातार धक्के देकर चोदा, क्योंकि केशव का चुदाई के समय झड़ने का समय रवि से बहुत ज़्यादा था।

केशव बहुत देर तक आरती की चूत पर टिका रहा और अब उसकी चूत तो ढीली हो गयी और उसकी गरम गरम सांसे केशव को और भी जोश दे रही थी और आरती के जिस्म की खुश्बू तो जैसे केशव उस समय जन्नत में था। अब आरती को भी केशव की चुदाई करने से बहुत अच्छा लग रहा था, लेकिन आरती अपने पति रवि को दिखने के लिए केशव के हर एक धक्के पर चीखती चिल्लाती रही l

जिससे रवि को लगे कि यह सब काम जबरदस्ती हो रहा है और केशव उसे चोदता रहा, लेकिन कुछ देर बाद में झड़ने लगा और केशव ने अपना वीर्य उसकी चूत में ही डाल दिया और केशव 5 मिनट तक उसके ऊपर ही लंड को चूत में डालकर पड़ा रहा। फिर आरती केशव के कान में बोली कि वाह यार तुम तो बहुत अच्छा चोदते हो, लेकिन अब बस करो।

तो केशव ने कहा कि अभी तो एक बार और भी चुदाई होगी और फिर दोनो उठे और देखा तो रवि का लंड भी उठा हुआ है और वो नज़ारा तो बहुत जबरदस्त था। केशव ने फिर से अपना लंड आरती के मुहं पर रगड़ा आरती के गुलाबी होंठो पर अपना पूरा लंड घुमा रहा था, लेकिन केशव ने आरती के मुहं में नहीं दिया। शायद उसे डर था कि कहीं आरती काट ना ले और बीच में रखी हुई एक टेबल पर आरती का एक पैर रख दिया और केशव उसके ऊपर चढ़कर उसके पीछे से उसकी चूत में लंड को डाल रहा था।

तभी आरती उफफफ्फ़ उफ़फ्फ़ ऑशओह उह्ह्ह प्लीज अब छोड़ दो मुझे कर रही थी और वो हर बार रवि की आखों में देख रही थी और उसकी चूत को तो केशव पीछे से धक्के देकर फाड़ रहा था और बहुत देर बाद केशव ने उसकी चूत में ही एक बार और अपना वीर्य डाला और फिर आरती को बहुत देर तक रगड़ा।

उसकी टाईट गांड में लंड डाला और अब केशव आरती की गांड को फाड़ रहा था, लेकिन आरती बहुत ज़ोर ज़ोर से चिल्ला रही थी। उसके बूब्स पर केशव के दोनों हाथ गोल गोल घूम रहे थे और रवि अपना लंड खड़ा करके रो रहा था। केशव ने इस बार झड़ने से पहले अपना लंड आरती की गांड से बाहर निकाला और रवि के मुहं पर झड़ गया और कपड़े पहनकर आरती के कान में बोला कि अब तू उसे समझा देना कि मैंने आज तुझे क्यों चोदा?

केशव ये बोल कर वहा से निकल गया, आरती ने खुद को संभालने की एक्टिंग की ओर रवि को खोल दिया,

रवि ने खुलते ही अपने मुह को साफ करने की वाश बेसिन पर दौड़ा, अपने को साफ करके आरती के पास आया, और उससे पूछने लगा कि कोन था ये,

आरती--मुझे क्या मालूम कौन था, तुम्हारा ही जानकार था कोई,

रवि--मेरा कौन जानकार?

आरती--जिसकी बीबी को तुम नोकरी के रौब दिखाकर चोद कर आये थे वो बदला लेने आया था और बोल कर गया है कि अब अगर आगे तुमने कुछ किया तो वो फिर उसका बदला लेगा।

रवि--क्या ये शुभांगी का पति था?

आरती--कौन शुभांगी?

रवि--वो वो अभी एक लड़की रखी है शोरूम पर।

आरती--तो तुमने उसके साथ भी। तूम नही सुधरोगे।

आरती वहा से निकल जाती है और उप्पेर कमरे में चली जाती है,

आरती अंदर बेड पर लेट कर सोचती है कि उसने ना चाहते हुए भी बदले की भावना में आकर अपनी चूत को कुर्बान कर दिया। उसे अपनी मस्त वाली चुदाई की मन ही मन ख़ुशी भी थी, लेकिन चुदाई खत्म होने के बाद में थोड़ा सा दु:ख भी हुआ, लेकिन अब सोचने के क्या फायदा था वो तो अपना काम कर गया था और वो उसके लंड से चुदकर अपने आप को बहुत संतुष्ट समझ रही थी। ऐसा सुख अगर उसे अपने पति से पहले ही मिला होता तो क्यो वो बाहर गंदे आदमीयो से अपनी चुदाई क्यों करवाती? लेकिन जो भी हुआ सब ठीक हुआ ।। इससे कुछ तो अक्ल लगेगी रवि को।
 
उधर शादी में पिछले तीन दिनों में सोनल ने क्या क्या गुल खिलाये है वो देखते है,सोनल शादी में काफी एन्जॉय कर रही थी, शादी में आये काफी लड़को के साथ उसने मस्ती कर रही थी, हर तरफ लड़के सोनल के पीछे लट्टू की तरह घूम रहे थे, लेकिन अभी तक सोनल ने किसी को टच करने नही दिया था,

लड़की की शादी वाले घर में न जाने कितने काम होते है. और ऐसे ही एक घर में किसी अच्छी लड़की की तरह सोनल भी सभी कामो में हाथ बताने में व्यस्त थी. आज कुछ घंटो में संगीत शुरू होने के पहले कुछ रस्में हो रही थी जिसमे सोनल दुल्हन की मदद कर रही थी जो की उसकी हमउम्र ही थी. यकीन ही नहीं होता था कि दो दिन पहले तक तो सोनल लीला को जानती भी नहीं थी और आज सोनल उसकी शादी में अच्छी सहेली बनकर वहां थी. तभी लीला की माँ जोकि सोनल की चाची लगती थी सोनल के पास आई और बोली, “सोनल, ३ घंटे में संगीत शुरू हो जाएगा. जा तू भी कमरे में जाकर कपड़े बदलकर तैयार हो जा. और सीधे संगीत वाले हॉल में आ जाना. आज बहुत मस्ती करनी है तुम लड़कियों को! खूब नाचना गाना है.. तू अच्छा सा लहंगा या साड़ी पहन कर आना. हाँ.”

“जी चाची. हाँ मुझे भी तैयार होने में समय लगेगा.”, सोनल अपने बिखर चुके बालों को कानो के पीछे फंसती हुई अपनी साड़ी को समेटते हुए बोली. अब तो अपने हाथों से साड़ी के आँचल को बार बार अपने ब्लाउज के ऊपर ठीक करना जैसे उसकी आदत हो गयी है.

कमरे में आकर हाथ-मुंह अच्छी तरह से धोकर अब सोनल तैयार होने लगी थी. सोनल ने पहले से ही संगीत में पहनने के लिए एक हलकी ऑरेंज रंग की सैटिन साड़ी चूज करके रखी थी. वैसे तो दिन में भी सोनल ने नीली रंग की सैटिन साड़ी पहनी थी, पर शायद सोनल को सैटिन से प्यार ही इतना है कि दोबारा पहनने से खुद को रोक नहीं सकी वो. वैसे भी आज संगीत में डांस करते वक़्त सैटिन या फिर शिफ्फौन की साड़ी ही बेस्ट होती… लहंगा तो सोनल शादी के वक़्त पहनने वाली थी तो आज साड़ी ही ठीक रहेगी सोनल ने सोचा… और अपनी पहनी हुई साड़ी उतारकर एक ओर तह करके रखने लगी. उसके बाद अपना ब्लाउज उतारने के लिए हुक खोलने लगी. सोनल को … बूब्स के ऊपर ब्लाउज उतारते और पहनते वक़्त हुक लगाने खोलने में बड़ा मज़ा आता था। फिर अच्छी तरह से मेकअप करने के बाद सोनल ने पेटीकोट बदला और अपनी साड़ी पहननी शुरू की. सैटिन की साड़ी बदन पर चढ़ते ही उसके जिस्म में कुछ कुछ होने लगा. सोनल खुद को आईने में देखकर हंसती रही और सोचने लगा कि आज तो पूरी रात यूँ ही खुबसूरत दिखूंगी मैं… न जाने कितने लडको की नज़रे रहेंगी मुझ पर! फिर सोनल ने दीपिका पदुकोने के तरह अपनी साड़ी की पतली पतली प्लेट बनाकर अपने ब्लाउज पर पिन कर दी. इस तरह से क्लीवेज और कमर दिखाती हुई पतली प्लेट के साथ साड़ी पहनना आजकल उसकी जैसी दुबली पतली और लम्बी लड़कियों में फैशन है.

२ घंटे खुद को सँवारने के बाद बार बार अपने मेकअप को ठीक करने के बाद जब सोनल संतुष्ट हो गयी तो अपनी एक पर्स उठायी और उसमे अपने मेकअप का सारा सामान रख दिया. और फिर अपनी बड़ी सी पर्स को कंधे पर टांग कर देखने लगी कि वो उसकी साड़ी से मैच कर रही है या नहीं. अब सोनल ने हील्स पहनी और फिर एक बार अपने सुन्दर बालों को स्टाइल करके घर के निचे आ गयी.

घर के निचे से शादी के मेहमान कार से उस हॉल जा रहे थे जहाँ संगीत होना था. वो हाल घर से सिर्फ आधा किलोमीटर दूर था… तो सोनल ने सोचा कि क्यों न पैदल ही जाया जाए. वैसे भी सैटिन साड़ी पहनकर चलने में भी कितना मज़ा आता है! पर चाची जी ने सोनल को देखा तो उन्होंने एक लड़के को उसके साथ भेज दिया ताकि वो अकेली खुबसूरत सजी संवारी लड़की सड़क पर अकली न चले. “हाय… अब तो सड़क पर मुझे कोई छेड़ भी नहीं पायेगा.”, सोनल थोड़ी सी उदास हो गयी. पर जल्दी ही सोनल उस चम्पू लड़के के साथ हॉल पहुच गयी. वहां पर लीला और उसकी सहेलियां बहने हॉल में जाने को तैयार थी.

सोनल को आते देख लीला तुरंत उसके पास आई और उसका हाथ खिंच कर सोनल को एक और उनकी ही उम्र की लड़की से मिलवाने ले आई. थोड़ी कम हाइट की, गोल गोल चेहरे वाली, भरी-पूरी बदन वाली ये लड़की ऐसी लगती थी जैसे एक बच्चे की माँ हो. पर लीला ने कहा, “सोनल , ये रश्मि है….विशाल भैया की पत्नी, अपनी भाभी है.. इनकी लव मैरिज हुई है अभी दो महीने पहले ही, इसलिए घरवाले नाराज थे लेकिन अभी मेरी शादी की वजह से इनको घर मे एंट्री दी है, और ये तुम्हारे शहर से ही है,वैसे तो आसपास मेरी सभी बहने तुम लोगो के साथ रहेगी पर तुम दोनों अकेली न फील करो इसलिए तुम्हारा परिचय करा रही हूँ.”

सोनल संगीत के हॉल में पहुची तो वहां रंग-बिरंगी साड़ियों में औरतों के बीच आकर उसकी ख़ुशी दुगुनी हो गयी.

रश्मि ने लाल रंग की साड़ी पहन रखी थी. उसके भरे-पुरे तन के अनुरूप उसने खुला पल्ला रखा हुआ था जिससे उसका पेट छिप रहा था पर क्लीवेज साफ़ दीखता था. जैसी भी हो सेक्सी तो लग रही थी रश्मि. उसको देखकर साफ़ पता चल रहा था कि उसको साड़ी पहनने की आदत नहीं है और बस स्पेशल मौके पर ही दूसरो की मदद से पहन पाती होगी. आजकल की लडकियां भी न.. समझती नहीं कि साड़ी कितनी आसानी से रोज़ पहनी जा सकती है. सोनल को देखते ही रश्मि इतने जोर से मुस्कुराई और सोनल से ऐसे जोरो से गले लग गयी जैसे कि उसे सालो से जानती हो. उसके और सोनल के बूब्स भी उसके गले लगाने से दब गए थे. सोनल तो थोड़ी आश्चर्य में थी पर औरतों की ख़ुशी के बीच सोनल भी खुश थी तो उसने ज्यादा ध्यान नहीं दिया. लेकिन सोनल को कुछ याद आया और मुस्करा कर आगे बढ़ी।

तब तक लीला अपनी बहनों और सहेलियों के साथ सीढ़ी चढ़कर ऊपर हॉल की तरफ जाने लगी. संगीत शुरू होने वाला था. उनको अपना लहंगा उठाकर जाते देखने का दृश्य बड़ा ही सुन्दर था. रश्मि ने भी उनके पीछे बढ़ने के लिए अपनी उँगलियों से अपनी साड़ी की प्लेट पकड़ी और साड़ी को सलीके से ऊपर उठाकर सीढ़ियों पर चढ़ने को तैयार होने लगी जैसे औरतें अपनी साड़ी उठाकर चढ़ती है. पर तभी अचानक सोनल ने जोर से अपनी कुंहनी से रश्मि के बूब्स पर वार किया… और अबकी बार रश्मि आश्चर्य से सिर्फ “आउच” कह सकी. और फिर सोनल ने उसकी बांह को पकड़ कर उससे जोर से अपने बूब्स दबा दिए.. और बोली, “भाभी जी, चलो न हम भी चलते है.”

“चल ही तो रही हूँ.”, रश्मि ने अपने बूब्स पर हाथ रखते हुए कहा. और फिर एक बार अपनी साड़ी उठायी और पर्स संभाले चढ़ने लगी. उसे देखकर सोनल ने भी साड़ी उठायी और अपने खुले पल्ले से स्ट्रगल करते हुए उसके पीछे पीछे आने लगी. पहले बहुत सी लड़कियों से सोनल सहेली की तरह गले मिली है… और उनके बूब्स भी एक दुसरे को छूआते रहे है पर रश्मि ने जैसे अपने बूब्स जोरो से उसकी बांह में दबाये थे.. वैसा आजतक किसी लड़की ने उसके साथ नहीं किया था. सोनल यही सोच रही थी "अपनी उँगलियों के बीच प्लेट के निचे मुझे उसके बूब्स के स्पर्श की वजह से मेरी चुत गीली होती महसूस हुई. “ओहो… ये क्या हो रहा है? मेरी नाज़ुक पेंटी तो इस गीलेपन को छुपा नहीं पाएगी.”, सोनल मन ही मन सोचने लगी. वो तो प्लेट पकड़ कर साड़ी उठाने के बहाने से वो लोगो की नजरो से छुपी हुई थी. कहाँ घर से निकलते वक़्त सोनल आज लडको के सपने देख रही थी और कहाँ एक लड़की पर उसका दिल आ गया था! आखिर क्यों रश्मि के लिए उसके दिल मे फ़ीलिंग आयी थी।

ऊपर आने के बाद भी सोनल रश्मि का पीछा ही नहीं छोड़ रही थी. जब संगीत शुरू हुआ तो वो रश्मि के ही बगल में आकर बैठ गयी.. और एक बार फिर से अपने बूब्स उसकी बांहों से छुआकर बोली, “मज़ा आ रहा है न रश्मि भाभी”. रश्मि सिर्फ हाँ कह सकी. रश्मि बेचैनी से महसूस करने लगी सोनल के कारण और वो किसी तरह अपने पल्लू से अपना चेहरे का पसीना पोछने लगी.

“रश्मि भाभी… प्लीज़ मेरा पर्स एक बार संभालना… मैं ज़रा एक बार फेसबुक पर अपनी फोटो तो डाल लू.”, सोनल ने कहा और धम्म से अपना पर्स उसकी गोद पर रख दिया!! और फिर किसी तरह अपने बिखरते गिरते खुले पल्ले को संभालती हुई सोनल किसी तरह अपने फ़ोन से फेसबुक पर कुछ कुछ मेसेज करने लगी. और कुछ देर के बाद फ़ोन को रश्मि की गोद में रखे हुए उसके पर्स में रखकर अपना एक हाथ रश्मि की गोद पर रख कर स्टेज की ओर देखने लगी जहाँ लीला की सहेलियां इस वक़्त डांस कर रही थी. “अब क्या होगा मेरा? सोनल को मेरी कमर के निचे की असलियत पता चल गयी तो?”, रश्मि को चिंता होने लगी.

पर सोनल एक कदम आगे थी. वो तो खुद ही अपने हाथ को पर्स के निचे से रश्मि की साड़ी की प्लेट के बीच डालती हुई उसके नीचे कुछ महसूस कर रही थी. और उसे अपनी उँगलियों से उकसा भी रही थी. सच तो सोनल को पता चल गया था. पर कैसे? रश्मि किसी तरह वहां उसे उसका पर्स पकड़ा कर अपनी पर्स और और पल्लू से अपने नीचे छुपाती हुई वहां से उठना चाहती थी … सोनल ने किसी से अभी कुछ कह दिया तो क्या होगा सोचकर ही रश्मि को डर लग रहा था. पर सोनल ने रश्मि के उठते ही उसका हाथ खिंच लिया और बोली, “भाभी, बैठो न कितना मज़ा आ रहा है यहाँ. कहाँ जाओगी तुम वैसे?” और सोनल रश्मि की ओर देखकर कुछ अलग तरह से हँसने लगी.

स्टेज पर सभी के डांस देखकर अच्छा तो लग रहा था. और फिर सोनल ने सच जानते हुए भी रश्मि को आगे परेशान नहीं किया. पर फिर लीला ने सभी लड़कियों को साथ में अंत में डांस करने के लिए बुलाया.. जिसमे सोनल और रश्मि भी शामिल थी. और पूरे डांस के समय सोनल रश्मि के साथ साथ ही चिपकी रही. और तो और वो अपनी गांड को भी रश्मि की कमर के निचले हिस्से से रगड़ रगड़ कर डांस कर रही थी. सभी लोगो के बीच रश्मि को छुपा पाना कितना मुश्किल हो रहा था! बार बार पल्लू से उसको ढंकते हुए उसे बहुत शर्म आ रही थी. और फिर शर्म के मारे रश्मि किसी तरह सोनल से बचती हुई बाथरूम की ओर भागी जहाँ वो अपने इरेक्शन का कुछ कर सके… न जाने कैसी ख़राब किस्मत थी उसकी. कहाँ वो दुसरे लडको के लंड खड़े करने के सपने देख कर आई थी… और आज खुद को संभाल नहीं पा रही थी!

डांस करते वक़्त भी सोनल उससे चिपक चिपक कर डांस कर रही थी … और वो किसी तरह अपनी साड़ी की प्लेट के पीछे कुछ छुपा रही थी.

बाथरूम में आकर रश्मि अपनी साड़ी को हिलाती हुई अपने जोशीले लंड को ठंडा करने की कोशिश करने लगी और अपने पल्लू से अपने पसीने को पोंछने लगी.

किसी तरह मेरा लंड थोडा नार्मल होने लगा. जी सच है ये कि "रश्मि एक ट्रांसजेंडर औरत जो थी. वैसे तो वो ऑपरेशन करा कर अपना लण्ड बदलना चाहती थी पर उसके पति विशाल को रश्मि का लण्ड बहुत पसंद था.. इसलिए उसने अपना ऑपरेशन नहीं कराया था!."
 
रश्मि ने अपनी पर्स से एक और पेंटी निकाली जो उसने एक्स्ट्रा रखी थी, अब उसे पहनकर थोडा नार्मल रह सकेगी वो.

पर उसकी मुसीबत अब तक ख़त्म कहाँ हुई थी. उसके पीछे पीछे उसे ढूंढते हुए सोनल भी बाथरूम आ गयी. उसको देखते ही रश्मि गुस्से में आ गयी और उस पर चीख उठी.. “तू चाहती है क्या है मुझसे सोनल? हाँ, मेरा लंड है… तू क्यों पीछे पड़ी है मेरे? तुझे जिसे भी बताना है बता दे. मैं डरने वाली नहीं हूँ तुझसे, तेरे भैया ने जानते हुए मुझसे शादी की है, दुसरो से कोई मतलब नही मुझे”

रश्मि को चीखते देख सोनल ने उसका मुंह तुरन्त बंद किया और बोली, “संजना… ये क्या कर रही है? धीरे बोल. सबको पता चल जायेगा”

संजना? ये तो उसके फेसबुक के फेक प्रोफाइल का नाम था. सोनल को कैसे पता चला?

“यार कब से तुझे फेसबुक पे मेसेज कर रही हूँ पर तू फ़ोन देख ही नहीं रही है. नम्रता नाम है मेरा फेसबुक पर. फेसबुक पर हम दोस्त नहीं है पर तुम्हारी प्रोफाइल देखी थी मैंने. तुम्हे देखते ही पहचान गयी थी मैं. इसलिए तुम्हारी बगल से ही तुमको फ़ोन पर मेसेज किया पर तुमने अपना फ़ोन देखा ही नहीं. बार बार तुमको इशारे कर रही थी पर तुम समझ ही नहीं रही थी.”, सोनल बोली.

और रश्मि हैरत में उसकी ओर देखते रह गयी. उसने पर्स से फ़ोन निकाला तो उसके कई मेसेज थे. वो मेसेज पढ़ते ही उसे हँसी आ गयी.

“मैं पोर्न मूवी देख देख कर ट्रांसजेंडर के बारे में जानना चाहती थी इसलिए एक id बनाई हुई है मैंने, हमारे कॉमन फ्रेंड है तो तुम्हारी प्रोफाईल काफी बार देखी है मैने। बस तुम्हारी बाहर की दुनिया में क्या क्या होता है जानना चाहती थी लेकिन किस्मत से तुम यहा मुझे मेरी भाभी के रूप मे मिल गयी. क्योंकि तुम भी ट्रांसजेंडर हो, तो तुम्हारे साथ अपना राज़ शेयर करके मैं ज्यादा बेफिक्र होकर मस्ती करना चाहती थी.”, सोनल ने कहा.

उसकी बातें सुनकर रश्मि मुस्कुरा दी. और उसके करीब आ गयी.

“सोनल.. मैं इसी बिल्डिंग में ऊपर के कमरे में ठहरी हूँ. तुम संगीत के बाद मेरे पास आओगी तो खूब बात कर सकूंगी तुम से.”, रश्मि ने कहा.

“हाँ ज़रूर”, सोनल ने मुस्कुराकर उसका हाथ पकड़कर बोली.

और फिर सोनल ने उसकी ओर कुछ ख़ास नजरो से देखा और बोली, “वैसे क्या तुमारे बूब्स असली है? और मैं लंड भी अच्छा चूस लेती हूँ. तुम्हारे लंड की प्यास बुझानी हो तो मैं रहूंगी तुम्हारे लिए” सोनल ने एक बार फिर उसकी साड़ी को वहां छुआ जहाँ उसका लंड था.

रश्मि भी उसके और करीब आ गयी और बोली, “वैसे मैंने आजतक किसी की चुत चुसी नहीं हूँ… पर मुझे यकीन है कि मैं भी अच्छे से चूसूंगी. मेरी चुत चूसने की प्यास को बुझाने दोगी तुम?” उसने भी उसकी साड़ी को वहां छुआ और उसकी चुत को सहलाने लगी और उसके होंठो को चूमने लगी.

“रुक जाओ न सोनल.. कोई आ जाएगा.”, रश्मि बोली और शर्मा गयी.

हम दोनों संगीत के बाद की रात को लेकर उतावली हो चुकी थी. आज वो दोनों औरतें मिलकर अपने सपने सच करने वाली थी. उन दोनों ने एक दुसरे का हाथ थामा और मुस्कुराते हुए बाहर चली आई. बाहर उन दोनों को इतने पास देखकर कुछ लड़के उन्हें घूरने लगे… और वो दोनों उन लडको को देखकर बस खिलखिलाकर हँस दी.

अब उन्हें किसी और लड़के की ज़रुरत नहीं थी. क्योंकि सोनल के पास रश्मि थी… उसे तो अब बस बेसब्री से इंतज़ार कर रही थी जब वो उसके लंड को अपने हाथो में पकड़ कर हिलायेगी…

फिर जैसे जैसे शादी की रस्मे पूरी हुई, दोनो रूम में जाने को उत्सुक थी लेकिन अभी ये सम्भव नही हो सका,

आरती सोनल को वहा से लेकर घर आ गयी और वापिश चलने के लिए बोलने लगी, लेकिन सोनल को अपना सपना पूरा करना था एक ट्रांसजेंडर के साथ मिलने का तो उसने जिद पकड़ ली कि वो अभी वापिश नही जाएगी कुछ दिन रुक कर आएगी।

उनदोनो को वहा न देख कर लीला की मम्मी भी वहाँ आ गयी और दोनो की बहस सुनने लगी फिर उसने सोनल की फेवर ली कि अभी काफी रस्मे बाकी है शादी की। अब पगफेरे पर लीला आएगी तो भी सोनल की जरूरत पड़ेगी, इसलिए सोनल रुक जाएगी कुछ दिन,

आरती को ना चाहते हुए भी सोनल को वहाँ रुकने की परमिशन देनी पड़ी।

सोनल वही रुक जाती है आरति और जया काकी दोनो निकल जाते है घर के लिए। लेकिन सोनल और रश्मि का रात को मिलने का प्रोग्राम नही बनता, बल्कि सोनल शादी में आये एक लड़के से मस्ती करते हुए टच में आ गयी। दोनो काफी एक दूसरे के साथ खुल गए थे और अगले दिन मूवी देखने का भी प्लान कर लिया था।

अगले दिन सुबह रश्मि अपने पति विशाल को नास्ता कराकर सीधे सोनल के रूम में जाती है, और डोर पर जाकर नोक करके आआवज देती है।

अन्दर आ जाओ भाभी”, सोनल ने जवाब दिया. जिसे सुनकर रश्मि दरवाज़ा खोलकर अन्दर आ गयी. अन्दर आते ही उसने देखा कि सोनल सिर्फ पेंटी पहनी हुई है और पूरी तरह से नग्न है. उसे ऐसी हालत में देखते ही रश्मि पीछे मुड गयी और बोली, “ओहो सोनल…पहले कपड़े तो पहन लेती फिर मुझे कहती अंदर आने को”

पर सोनल ने मुडती हुई रश्मि का तुरंत हाथ पकड़ा और अपनी बांहों में खिंच लायी. सोनल के नग्न स्तन रशमी के स्तनों से अब लग रहे थे. “भाभी अब तुमसे क्या शर्माना. हम दोनों औरतें ही तो है. और वैसे भी मेरे बूब्स और आपके बूब्स में ज्यादा फर्क कहाँ है?”

“चल हट. बहुत बेशर्म हो गयी है तू. औरतों के बीच भी कुछ मर्यादा होती है.”, रश्मि ने सोनल को अपने से दूर धकेलते हुए कहा जिससे सोनल के स्तन रश्मि के हाथो से और दब गए.

“भाभी तुम भी न बहुत शर्माती हो. रुको मैं एक मिनट में कपडे पहनती हूँ.”, सोनल बोली और अपनी ब्रा पहनने लगी. सोनल ने आज कुछ ज्यादा ही मेकअप किया हुआ था और ब्रा भी बड़ी सेक्सी पहन रही थी. और फिर उसने एक छोटी सी स्कर्ट पहनी और ऊपर से एक सेक्सी टॉप जिसमे उसका क्लीवेज काफी गहरा लग रहा था.

“आज का क्या प्रोग्राम है तुम्हारा?”, रश्मि ने पूछा.

“ भाभी. आज तो मैं बॉयफ्रेंड के साथ सिनेमा जाऊंगी.”, सोनल मुस्कुराते हुए बोली.

सोनल का इस तरह बेझिझक बॉयफ्रेंड के साथ जाना और कमरे में नग्न रहना देखकर रश्मि थोड़ी सी असहज थी. शायद इसलिए वो अपनी साड़ी के पल्लू को अपनी उँगलियों के बीच पकड़ कर अपनी नर्वसनेस छुपाने की कोशिश कर रही थी. रश्मि थोड़ी ओल्ड फैशन लड़की थी सोनल के सामने.

सोनल तैयार हो चुकी थी. लिप ग्लॉस लगाये आज उसके होंठ बेहद रसीले लग रहे थे. काफी बिंदास स्वाभाव की लड़की थी सोनल. तैयार होकर सोनल अपनी ट्रांसजेंडर भाभी के करीब आई और उसका हाथ पकड़ कर बोली, “भाभी तुम यदि शरमाओ न तो एक बात का जवाब दोगी?”

“क्या सवाल है?”, रश्मि तो सवाल सुनने के पहले ही घबरायी हुई थी.

“क्या तुम लंड चुस्ती हो?”, सोनल ने बेझिझक अपनी भाभी की आँखों में देखते हुए पूछा.

“छी… ऐसा नहीं बोलते”, रश्मि ने सोनल से मुंह फेर कर अपनी साड़ी के पल्लू को पकड़ कर घुमाने लगी. वो अब भी नर्वस थी.

“ठीक है.. ठीक है.. तो ये बताओ क्या आप मेरे भैया को ब्लो जॉब देती हो?”, सोनल हँसते हुए बोली.

“बहुत बदतमीज़ हो गई है तू सोनल.”, रश्मि ने बिना सोनल की ओर देखे कहा.

“अरे भाभी… प्लीज़ बताओ न… क्या आप भैया का लंड चुस्ती हो?”, सोनल अपनी रश्मि भाभी के सामने आकर बोली. बेचारी रश्मि तो शर्म के मारे अपनी नजरे झुकायें खड़ी थी. उसे पता था कि सोनल जवाब सुने बगैर उसे छोड़ेगी नहीं.

“हाँ, चुस्ती हूँ मैं उनका लंड.”, थोड़ी शर्माती थोड़ी मुस्काती रश्मि ने अपनी साड़ी से मुंह छिपाते हुए कहा. तो सोनल भी मुस्कुरा दी. “… पर तू क्यों पूछ रही है?”, रश्मि ने सोनल से पूछा.

“भाभी… मैं सोच रही हूँ कि आज अपने बॉयफ्रेंड को खुश करने के लिए उसके लंड को चुसू. आखिर इससे गर्भवती होने का डर नहीं रहता न?”

“सोनल… शादी से पहले ये सब ठीक नहीं है.”, रश्मि ने एक भाभी के नज़रिए से कहा.

“ओहो भाभी.. अब तुम भी मम्मी की तरह लेक्चर न दो. तुमने भी तो शादी के पहले भैया के साथ सेक्स किया ही होगा न?”

सोनल की बात सही थी इसलिए रश्मि चुप रह गयी.
 
“अच्छा भाभी… आप मुझे सिखाओगी कि लंड कैसे चूसते है?”, सोनल ने पूछा. तो रश्मि ने नटखट आँखों से उसकी ओर देखा और बोली, “चुप कर… कुछ भी कहती रहती है. मैं नहीं सिखाने वाली तुझे.”

“भाभी… क्यों इतने नखरे दिखा रही हो? ज़रा सिखा दोगी तो तुम्हारा कुछ बिगड़ जाएगा क्या?”, सोनल ने रश्मि का हाथ पकड़ते हुए कहा और अपनी भाभी के तन से बिलकुल चिपक गयी. रश्मि बेचारी क्या करती और उसने नज़रे झुकाकर हाँ कर दी. अब सोनल अपनी भाभी के कुछ कहने का इंतज़ार करने लगी. और रश्मि ने बिस्तर पर बैठकर अपने आँचल को संवारा और आँखें बंद कर बोली, “ठीक है तो तू सुन…”

“पर आँखें क्यों बंद कर रही हो भाभी?”

“मैं आँखें खोलकर तेरे सामने नहीं कह सकती. तुझे सुनना है तो सुन.”, रश्मि बोली.

“ठीक है. तुम आँखें बंद कर के ही सिखा दो.”, और सोनल अपनी भाभी से चिपक कर बैठ गयी.

“सबसे पहले उनके बेहद करीब जाना… इतने करीब कि तुम्हारे बूब्स उनके सीने से लग जाए. फिर उनकी बांहों को अपने दोनों हाथो से पकड़ कर उनके तन से लगकर खड़ी हो जाना. और फिर उनकी नजरो में देखते हुए उनके होंठो को चूमना”

रश्मि की बात सुन सोनल ने रश्मि की ब्लाउज की आस्तीन पर से उसकी दोनों बांहों को पकड़ा और उसे बिस्तर से उठाया और रश्मि के सीने से चिपक गयी. रश्मि की आँखें अब भी बंद थी और उसे समझ नहीं आया कि सोनल क्या कर रही है. पर सोनल अपनी भाभी के बूब्स से अपने बूब्स दबाकर बेहद करीब आ गयी और अपनी भाभी के मुलायम होंठो पर अपने होंठो से हल्का सा चुम्बन देकर बोली, “ऐसे?”

सोनल की गर्म सांसें और बूब्स को अपने सीने पर महसूस कर रश्मि एक बार फिर नर्वस होने लगी. और वो अपनी आँखें बंद की रही. सोनल मेरे साथ कुछ ऐसा वैसा तो नहीं करेगी? ऐसे विश्वास के साथ रश्मि गहरी सांसें लेने लगी.

“इसके बाद क्या करना है भाभी?”, सोनल ने जब कहा तो रश्मि जैसे वापस होश में आते हुए बोली, “… और फिर… और फिर… धीरे धीरे उनके तन पर हाथ फेरते हुए उनकी पेंट के उस हिस्से पर ले जाना और उसे ऊपर से ही पकड़ने की कोशिश करना. इस वक़्त उनका लंड धीरे धीरे कर खड़ा होने की कोशिश करेगा.”

तो सोनल भी अपनी भाभी की साड़ी पर से ही उनके तन पर हाथ फेरते हुए उनकी कमर के निचे उस हिस्से तक ले गयी जहाँ प्लेट के पीछे रश्मि का लंड छुपा हुआ था. उसके ऊपर हाथ फेरते हुए सोनल ने धीरे से रश्मि के लंड को साड़ी के ऊपर से ही पकड़ने की कोशिश की. रश्मि भाभी का लंड इस वक़्त मुलायम से थोडा सख्त होने लगा था. “और आगे भाभी…”, सोनल आंहे भरती हुई बोली.

“… और फिर धीरे धीरे अपने बूब्स को उनके तन से दबाकर पूरे शरीर को छूते हुए निचे अपने घुटनों पर चली जाना.” और सोनल ने वैसा ही किया और अपने बूब्स अपनी भाभी के कोमल तन पर दबाने लगी. रश्मि के बूब्स तो वैसे ही सोनल के स्पर्श से सख्त हो गए थे और उसके निप्पल भी फुल गए थे. रश्मि की साँसे गहरी हो चली थी. सोनल उसके जिस्म को गर्म जो कर रही थी. रश्मि की साड़ी पर सोनल के फिसलते हुए बूब्स धीरे धीरे उसके लंड के पास पहुच गए.

“अब उनके लंड को फिर से अपने हाथो से उनकी पेंट के ऊपर से ही सहलाना.. जब तक वो थोडा और सख्त न हो जाए.” रश्मि की बात सुन सोनल ने एक बार फिर रश्मि की साड़ी की प्लेट के बीच हाथ डाला और ऊपर से ही उनके लंड को सहलाने लगी. रश्मि का लंड अब और सख्त हो चला था. उसके स्तन भी अब फुल गए थे और उसका ब्लाउज अब गहरी साँसों की वजह से उसे और टाइट लग रहा था. आज तक रश्मि को इसके पहले किसी लड़की ने इस तरह छुआ नहीं था. वो तो हमेशा से ही अपने पति की ही थी. पर उसकी ननद सोनल आज उसे बेहद उकसा रही थी. सोनल को भी अपनी भाभी की सैटिन साड़ी को छूने में मज़ा आ रहा था. वो भी उत्सुक थी जानने के लिए कि उसकी भाभी का लंड आखिर कैसा है. छूने पर तो रश्मि का लंड सोनल को बड़ा ही लग रहा था पर उसने अब तक उसे देखा नहीं था. वो तो जैसे उसे देखने को बेताब हो रही थी. साड़ी में उसकी भाभी के लंड की उभरती हुई आकृति उसे उकसा रही थी.

रश्मि और सोनल… इन दोनों औरतों को एहसास ही नहीं रहा कि ये जो वो कर रही थी उन्हें इस तरह मदहोश करने लगेगा. इसके पहले न कभी रश्मि का और न ही सोनल का किसी औरत में इंटरेस्ट था… फिर भी दोनों इस तरह मदहोश हो रही थी.

“… और अब उन्हें कमर से पकड़ कर धीरे से धक्का देकर बिस्तर पर लेटा देना और प्यार से उनके ऊपर चढ़ जाना.”

सोनल ने रश्मि की बात सुन रश्मि की कमर पर हाथ फेरा और फिर उनकी साड़ी हटाकर अपने होंठो से उनकी नाभि को चूम लिया और फिर अपने दोनों हाथो से भाभी की कमर को पकड़कर उन्हें बिस्तर पर लिटा उनके ऊपर चढ़ने लगी.

“.. अब धीरे धीरे उनके पैरो को छूते और चुमते हुए उनकी कमर तक जाना.” रश्मि की आवाज़ अब मदहोशी भरी हो गयी थी. बंद आँखों के साथ उसकी आवाज़ कांपने लगी थी.

और सोनल ने वैसा ही किया. उसने अपनी भाभी की साड़ी से लिपटी हुई टांगो को अपने बूब्स से छूते हुए ऊपर बढ़ने लगी… अपने हाथ से उनकी जांघो पर लिपटी हुई साड़ी को फेरने लगी और धीरे धीरे आगे बढ़कर उनकी कमर तक जा पहुंची जहाँ उसने अपनी भाभी की नाभि और थिरकती कमर को खूब चूमा. रश्मि ने अपने लंड के इतने पास सोनल को चुमते हुए महसूस किया तो वो और मचल उठी… और खुद अपने हाथो से अपने ब्लाउज पर से अपने बूब्स को मसलने लगी. पर सोनल तो अपनी भाभी को और तडपाना चाहती थी इसलिए उसने अपनी भाभी का हाथ उनके बूब्स पर से हटा दिया.

“.. अब उनके पेंट की ज़िप खोलकर उनके लंड को धीरे से बाहर निकालना.”, रश्मी आगे सोनल को बताती रही.

रश्मि भाभी ने तो पेंट पहनी नहीं थी इसलिए सोनल उनकी साड़ी के निचे से हाथ ले जाते हुए उनकी साड़ी को ऊपर उठाने लगी और उनके मखमली पैरो को छूने लगी और फिर उनकी जांघो पर अपने हाथ फेरने लगी. रश्मि अब पूरी तरह मचल उठी थी… वो तड़प रही थी कि कब सोनल उसके उफनते हुए लंड को पकडे पर सोनल अपनी भाभी को और उकसाती रही. कुछ देर जांघो को छूने के बाद सोनल ने रश्मि की साड़ी को और ऊपर उठाया और उनकी पेंटी पर उभरे हुए लंड को अपने हाथो से छूने लगी. अब तो उनके लंड का आकर उस पेंटी में साफ़ दिख रहा था. सोनल खुद अब उसे निकाल कर छूने को बेचैन हो गयी थी. उसने अपनी भाभी की पेंटी को निचे कर अपनी भाभी का लंड बाहर निकाल दिया… जिसे देखकर सोनल की आँखों में चमक आ गयी.

आज तक सोनल ने बहुत से लडको के लंड देखे थे और उनसे चूदी भी थी. पर ये लंड बेहद ख़ास था… गुलाबी और साफ़ सुथरा.. जिसके आसपास एक भी बाल न था. चमकदार, गुलाबी, और बेहद सुन्दर लंड था वो… इतना साफ़ तो उसे कोई रश्मि की तरह की औरत ही रख सकती थी. सोनल उसे तुरंत चूस लेना चाहती थी पर उसे तो अभी अपनी भाभी को और तडपाना था.

“.. अब वो लंड तुम्हारे होंठो के लिए बेताब हो रहा होगा. पर तुम उसे कुछ देर अपने हाथो से छूना…” रश्मि बंद आँखों से मदमस्त होते हुए बोली और अपने होंठो को खुद ही कांटने लगी.

सोनल ने भी वैसा ही किया और उसकी आँखों के सामने वो लंड और मचलने लगा.

“अब उस लंड के चमकते हुए गोल हिस्से को अपने होंठो से सिर्फ चूमना ताकि वो और बेताब हो..”, रश्मि बोली.

उफ़… सोनल के लिए खुद को उस लंड को चूसने से रोक पाना बेहद मुश्किल हो रहा था पर उसने सिर्फ उसे चूमा. तो वो लंड और मचलकर हिलोरे मारने लगा.

“… अब भी यदि लंड पूरी तरह सख्त न हुआ हो तो उसे अपने स्तनों के बीच दबाते हुए… उसे और उकसाना..” मदहोश होते हुए भी सोनल को सही तरीका सीखा रही थी.
 
सोनल के नर्म स्तनों के बीच तो जैसे रश्मि का लंड और सख्त हो गया. सोनल खुद बेचैन हो गयी थी. उसे समझ नहीं आ रहा था कि वो खुद को उकसा रही है या भाभी को?

“.. अब अपने हाथो से उसे पकड़ कर अपनी गर्म सांसें उस पर छोड़ना और फिर धीरे धीरे अपने होंठो को उस पर लपेट देना. और फिर अपने होंठो को धीरे धीरे उस लंड को अपने मुंह में लेना शुरू करना…. पर सिर्फ ऊपर का हिस्सा… एक अच्छी औरत अभी उस लंड को इसी तरह से और उकसाती है.”

फिर सोनल ने अपने लिप ग्लॉस लगे रसीले होंठो से उस लंड को लपेटा और फिर उसे धीरे धीरे मुंह में लेने लगी. उसकी भाभी का लंड सोनल के मुंह में जाने को बेताब होने लगा और उसकी भाभी अपने निप्पल को और जोरो से अपनी उँगलियों से मसलने लगी. इतने नर्म होंठ कभी उसने अपने लंड पर महसूस नहीं किये थे. और फिर सोनल ने अपनी भाभी के लंड को थोडा सा चूसकर अपने मुंह से बाहर निकाल दिया.

“… और अब… और अब…”, रश्मि बदहवास हो रही थी, “… अब अपनी जीभ से उस लंड की लम्बाई को निचे से ऊपर तक चाटना…” सोनल भी अपनी भाभी की मदहोशी से मचल कर उस लंड को जीभ से निचे से ऊपर तक चाटने लगी.

“… और अब… और अब… एक बार फिर….”, रश्मि से अपने बूब्स को मसलते हुए बोला भी न जा रहा था “… और अब… एक बार फिर उसे होंठो से अपने मुंह में ले लेना…”

सोनल अब एक बार फिर अपने होंठो से उस लंड को लपेटते हुए मुंह में लेने लगी और अपनी जीभ से लपलपाते हुए उस लंड को चूसने लगी… पर वो अब भी सिर्फ उपरी हिस्से को मुंह में लेकर अपनी भाभी को तदपा रही थी… और उसकी भाभी बेचैन हुए जा रही थी.

रश्मि की सांसें बहुत तेज़ होती जा रही थी… मचलती हुई रश्मि के पूरे जिस्म में आग लग चुकी थी और उसका बदन लहराने लगा… और उसके पैर भी सरकने लगी.. कमर थिरकने लगी… अब उससे रहा नहीं जा रहा था और वो उत्साह में लगभग चीख उठी..”अब चुस्ती क्यों नहीं है साली! कितना तडपाएगी मुझे…?” और उसने सोनल का सर पकड़ कर दबा दिया कि वो पूरे लंड को मुंह में ले ले.

रश्मि को इस तरह तड़पते देख सोनल भी अब पूरे उत्साह से भाभी के गुलाबी लंड को चूसने लगी और अपने मुंह में अन्दर बाहर करने लगी… उसे बेहद मज़ा आ रहा था. वो सोच रही थी कि उसने पहले कभी ऐसा क्यों नहीं किया… लंड को चूसते चूसते कभी वो अपनी भाभी के बूब्स दबाती तो उसकी भाभी की कमर लचक कर जोश में उठ जाती… कभी वो भाभी की गांड को दबाती… और पूरे जोश से उस लंड को चुस्ती रही. किसी लड़के के लंड से कम नहीं था वो लंड… पर बेहद ही खुबसूरत और आकर्षक था… सोनल ने ऐसा लंड कभी नहीं देखा था. उसके हर स्ट्रोक पर उसकी भाभी आँहें भरती और मदहोशी भरी आवाजें निकालती. इन दोनों औरतों को बेहद मज़ा आ रहा था… पर इस बेहद उत्तेजित समय का अंत भी जल्दी आता है… और जल्दी ही उसकी भाभी के लंड से रस बाहर आने लगा. शायद हॉर्मोन की वजह से उस लंड से रस कम आता था जिसे सोनल ने अपनी भाभी के पेटीकोट से ही पोंछ लिया. दोनों औरतें अब थक चुकी थी और ख़ुशी के मारे वहीँ एक दुसरे पर निढाल हो गयी.

रश्मि ने सोनल को उठाकर अपने चेहरे के करीब लाया और उसके होंठो को अपने होंठो के बीच चूस लिया और सोनल के बूब्स को दबाने लगी. दोनों ही एक दुसरे के बूब्स पकड़ आँखें बंद किये कुछ देर वही एक दुसरे से चिपक कर लेटी रही.

थोड़ी देर बाद सोनल अपनी भाभी की बांहों से बाहर निकलकर बिस्तर पर उठ बैठी और भाभी की ओर मुस्कुराती हुई देख कर बोली, “भाभी आप सचमुच बहुत अच्छे से सिखाती हो.”

सोनल की बात सुन रश्मि शरमा गयी. आज ननद और भाभी का रिश्ता ही बदल गया था. दोनों एक दुसरे की आँखों में एक चमक देख सकती थी.

“अच्छा भाभी… मैं शाम को मिलूंगी तुमसे.”, सोनल बिस्तर से उठने लगी तो रश्मि ने उसका हाथ पकड़कर रोक लिया… “इतनी जल्दी क्या है? कुछ देर यहीं रुक जाओ न..”, रश्मी ने उससे प्यार भरा निवेदन किया.

“भाभी… मेरा बॉयफ्रेंड मेरा इंतज़ार कर रहा है. मैं शाम को जल्दी आऊंगी… पक्का.”, सोनल ने कहा और झट से पर्स उठाकर कमरे से बाहर चल दी.

और रश्मि उस कमरे में बिस्तर में वैसे ही लेटी रही… उसका ब्लाउज सोनल ने खोल दिया था… उसके बूब्स ब्लाउज और ब्रा से बाहर आ चुके थे… उसके बाल और साड़ी बिखर चुकी थी. वो सोच में पड़ गयी थी कि ये सब क्या हुआ? उसे अपने पति विशाल का ख्याल आने लगा… यदि उन्हें पता लगा तो क्या करेगी वो? इसी दुविधा में रश्मि वहीँ सोचती रह गयी.।

किसी आम गृहिणी की तरह दिन भर घर के काम निपटाने के बाद, रश्मि नहा धोकर एक मैक्सी पहनकर अपने कमरे में बिस्तर में लेटी हुई थी. उसका मन बड़ा विचलित था. आज सुबह सुबह ही सोनल के साथ जो हुआ वो बात उसे बेचैन कर रही थी. रह रह कर उसे याद आ रहा था कि कैसे वो मदहोश हो रही थी जब उसकी ननद सोनल उसका लंड चूस रही थी. रश्मि बेचैन थी क्योंकि उसे लग रहा था कि आज उसने अपने पति को धोखा दिया है और वो भी पति की बहन के साथ. उसे ग्लानी हो रही थी. पर इस बात के लिए तो ज़िम्मेदार सोनल थी न जिसने ये सब शुरू किया? पर फिर रश्मि ने सोनल को उसके साथ सेक्स करने से रोका भी तो नहीं?

करवट बदलती रश्मि सोचती रही कि ऐसा कैसे हुआ? एक ओर तो ग्लानी पर सुबह की याद कर उसके जिस्म में रोंगटे भी खड़े हो जाते. उसकी मैक्सी में बिना ब्रा पहनी हुई रश्मि के स्तन सुबह के बारे में सोच कर फुल रहे थे. रश्मि सोच रही थी कि बचपन से ही वो जानती थी कि उसके अन्दर औरत बनने की हसरत है, और शायद इसलिए वो हमेशा से आदमियों की तरफ आकर्षित थी… उसने कभी सोचा भी नहीं था कि उसे एक और औरत के साथ सेक्स करके इतना मज़ा आएगा. सोनल के नर्म होंठ का चुम्बन और उसके मखमली स्तन की याद रश्मि को उतावले करने लगे. शादी के पहले अपने पति के अलावा रश्मी ने सिर्फ एक बार एक क्रॉसड्रेसर के साथ सेक्स किया था जिसमे रश्मि एक औरत ही थी. पर एक लड़की के साथ सेक्स का अनुभव उसके लिए नया था. उसे समझ नहीं आ रहा था कि ऐसे कैसे हो सकता है.

बेचैन होकर उलटती पलटती रश्मि की दोपहर कैसे बीत गयी पता भी नहीं चला. अब किसी गृहिणी की तरह उसे शाम का खाना बनाना था. उसके पति विशाल एक घंटे में घर आते ही होंगे. आज तो रश्मी ने वादा भी किया था कि आज रात वो अपने पति की हसरतें पूरी करेगी. इसलिए रश्मि उठ खड़ी हुई.. इतनी देर बिस्तर पर बिताने के बाद भी वो थकी हुई थी. उठते ही उसने पहले तो अपनी मैक्सी उतारी और अपने पति की खातिर एक सेक्सी साड़ी पहनने की सोची.

उसने एक सफ़ेद रंग की सैटिन साड़ी निकाली जिसकी हरे रंग की बॉर्डर थी और हरे रंग के ही फुल-पत्तियों के प्रिंट थे. उस साड़ी से मैच करता हुआ एक नेट का पारदर्शी ब्लाउज था जिसके अन्दर सब कुछ दीखता था. उसे पता था कि उस ब्लाउज में उसके बूब्स देखकर उसके पति खुद को रोक नहीं सकेंगे. पर घर में मेहमान भी तो थे ? इसलिए उसने एक काली रंग की ब्रा पहन ली और उसके ऊपर ब्लाउज. उसकी पारदर्शी ब्लाउज में उसकी ब्रा साफ़ दिखाई दे रही थी. रश्मि वाकई में सेक्सी थी और उस हरी-सफ़ेद साड़ी में तो वो और भी खिल रही थी.

तैयार होकर रश्मि किचन आकर खाना बनाने में व्यस्त हो गयी. करीब एक घंटे बाद घर का दरवाज़ा खुला. “लगता है विशाल आ गए है.”, रश्मि ने सोचा.. और अपनी साड़ी के आँचल से अपने ब्लाउज को पूरी तरह ढंककर अपने पल्लू को अपनी कमर पर लपेटकर अपने काम में फिर लग गयी. उसे पता था कि यदि उसके पति ने उसका क्लीवेज और ब्लाउज सामने से देख लिया तो वो खुद को काबू में नहीं रख पायेंगे. वैसे भी वो तो घर आते ही उससे लिपट जाते है. वो उस पल के लिए तैयार थी. उसे अपने पति की बांहों में जाने का इंतज़ार भी था ताकि वो एक बार फिर अपने पति के प्यार को महसूस कर आज की सुबह की बात को भुला सके.

“कैसी है मेरी जाने तमन्ना?”, विशाल ने आते ही कहा और अपनी प्यारी पत्नी को पीछे से उसकी कमर से पकड़ कर अपनी बांहों में ले लिया. “क्या बात है आज बड़े खुश लग रहे है आप?”, रश्मी मुस्कुराती हुई बोली. रश्मि की इसी मुस्कराहट पर तो विशाल दीवाने थे.

“लगता है आज कोई घर पर नहीं है… अब तो मेरे पास अपनी पत्नी के साथ समय बिताने का मौका है.”, विशाल ने कहा और रश्मी की साड़ी के अन्दर हाथ डाल उसकी कमर को छूने लगे.

“सभी मंदिर गए है,आते ही होंगे. ज़रा सब्र करो.”, रश्मी ने नटखट तरीके से कहा और विशाल अपनी पत्नी की कमर को छूते रहे और उसके कुलहो को अपने तन से जोर से लगाने लगे.

“सब्र ही तो नहीं होता है जानेमन. वैसे भी तुमने सुबह वादा किया था.”, विशाल ने रश्मी के चेहरे को छूते हुए कहा. ये पति भी न.. ऐसे ही तो होते है. इनसे रुका ही नहीं जाता. और पत्नी को ही हमेशा से समझदारी से बर्ताव करना पड़ता है.

रश्मि पलटकर अपनी पति की बांहों में आ गयी और उनके सीने पर हाथ रखते हुए बोली, “मैंने रात का वादा किया था. रात तो हो जाने दो.” रश्मी की नज़रे कहते कहते झुक गयी. पति की बांहों में उसे अच्छा लग रहा था.

उफ्फ्फ… ये पत्नियां भी न कभी कभी इतनी प्यारी लगती है. सुन्दर साड़ी में लिपटी इतनी सेक्सी पत्नी बांहों में हो और उसके नर्म स्तन पति के सीने से दब रहे हो तब समझदारी से बर्ताव करना एक पति के लिए बहुत मुश्किल होता है. दिल पे किसी तरह काबू कर एक अच्छे पति की तरह विशाल बोले, “ठीक है तुम कहती हो तो मैं रात का इंतज़ार करता हूँ.”

रश्मी मुस्कुराई और अपने काम में लग गयी. अब उसका मन खुश हो गया था. विशाल भी अपने कमरे में कपडे बदलने चले गए.

तभी घर का दरवाज़ा एक बार फिर से खुला और दरवाज़े से इस बार सोनल दौड़ी चली आई और पूरे उत्साह के साथ आकर अपनी भाभी को पीछे से पकड़ ली. बहुत खुश लग रही थी वो. भले सोनल के स्तन उसकी भाभी की पीठ पर उस पकड़ में दब रहे थे पर इस वक़्त इस पकड़ में सुबह की तरह की कामुकता नहीं थी बल्कि एक सहेली की तरह की भावना था. “भाभी!!”, सोनल ख़ुशी से चीख पड़ी.

रश्मी भी इस वक़्त खुश थी तो उसने पूछा, “क्या बात है? बड़ी खुश लग रही हो?” पर धीरे धीरे उसे एहसास होने लगा कि सोनल के स्तन उसकी पीठ से लगे हुए है. ऐसा तो पहले भी कई बार हुआ था पर तब रश्मी को सिर्फ एक औरत की भावना आती थी. लेकिन आज सुबह के बाद कुछ तो बदल गया था.

सोनल ने रश्मि के कान के पास अपने होंठ लाकर धीमी आवाज़ में कहा, “भाभी.. धीरेन्द्र तो आज बहुत खुश हो गया.” न जाने क्यों रश्मि का मन एक बार फिर विचलित होने लगा. “कौन धीरेन्द्र?”, रश्मि ने रुखी आवाज़ में कहा. “अरे भाभी… मेरा बॉयफ्रेंड धीरेन्द्र जिसके लिए मैं आज आपसे वो सीखकर गयी थी.”, सोनल उछलती हुई बोली.

रश्मि जानती थी कि धीरेन्द्र कौन है और सोनल ब्लो जॉब के बारे में बात कर रही थी. न जाने क्यों सोनल और उसके बॉयफ्रेंड के बारे में सोचकर ही रश्मि के मन में थोडा सा गुस्सा आने लगा. उसे समझ नहीं आ रहा था कि वो ऐसा क्यों सोच रही है. क्या उसे जलन हो रही थी सोनल को किसी और के साथ सेक्स करते हुए सोच कर? मगर क्यों? वो तो खुद अपने पति के साथ ख़ुश थी… फिर सोनल जिसके साथ जो चाहे करे.. उसे क्या? पर सोनल को कम से कम सुबह के बारे में रश्मि से कुछ कहना चाहिए था. क्या जो सुबह हुआ वो सिर्फ एक मज़ाक था? सोनल सुबह की बात को ऐसे कैसे अनदेखा कर सकती थी? ऐसे ही न जाने कितने ही ख्याल रश्मि के मन में आने लगे.

सोनल की बात को अनदेखा कर रश्मी ने बड़ी बेरुखी से कहा, “जाकर खाने की मेज पर बैठो. तुम्हारे भैया आ गए है और खाने का इंतज़ार कर रहे है. सारा दिन बस मौज मस्ती करती हो, तुमारी मम्मी इसीलिए छोड़कर गयी है क्या”

सोनल रश्मि के मुंह से ऐसी बात सुनकर आश्चर्य में थी. रश्मि उसकी ख़ुशी में शामिल क्यों नहीं हो रही है? सोचते हुए सोनल खाना मेज पर जाने लगी. और वहीँ रश्मि बेचैन हुई जा रही थी कि उसे सोनल और धीरेन्द्र के बारे में सोच कर इर्ष्य क्यों हो रही है.

थोड़ी देर बाद खाना लग जाने पर विशाल बाहर आये और सभी ने साथ में खाना खाना शुरु किया.

“सोनल … तुम्हारा दिन कैसा गुजरा यहाँ ?”, विशाल ने खाते हुए यूँ ही सोनल से पूछा.

“अच्छा बीता दिन तो मेरा भैया.”, सोनल ने भाभी के मूड को देखते हुए धीमी आवाज़ में कहा.

“अपनी बहन को समझाओ कि यहा इस शहर में नई है,ध्यान रखे अपना. खूब मौज मस्ती करती रहती है सारा दिन.”, रश्मि ने गुस्से से विशाल की थाली में चावल परोसते हुए कहा.

“रश्मि… यही दिन ही तो मौज मस्ती करने वाले होते है. थोडा खुश रह लेगी तो इसमें बुरा क्या है.”, विशाल ने रश्मि को समझाते हुए कहा.
 
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