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आजाद पंछी जम के चूस complete

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ननंद भाभी के कुछ अनबन चल रही है ऐसा विशाल को समझ आ गया था. इसलिए बिना ज्यादा कुछ बोले वो खाना खाकर अपने कमरे में चले गए.

रश्मि ने खाने की मेज समेटी और बर्तन धोकर बिना सोनल से बात किये अपने अपने कमरे में चली गयी. सोनल सोचती रही कि भाभी क्यों उससे ऐसे नाराज़ हो रही है? अपने बॉयफ्रेंड के बारे में तो उसने भाभी को पहले से ही बताया हुआ था फिर अब क्यों भाभी इस तरह रुखी हो रही है?

सोनल को अनदेखा कर रश्मि अपने बेडरूम आ गयी जहाँ उसके पति विशाल उसका बेसब्री से इंतज़ार कर रहे थे. उनकी आँखों की आतुरता देख रश्मी मुस्कुराते हुए बोली, “ज़रा रुको मैं अभी आती हूँ.” और पति को तडपाती हुई रश्मि कमर मटकाते हुए कमरे से लगे बाथरूम चली गयी. अपने पति को रिझाना रश्मी को बखूबी आता था.

बाथरूम में आते ही रश्मी ने ब्लाउज में लगी हुई पिन को खोलकर अपने पल्लू को उतारा और फिर अपना ब्लाउज उतारने लगी. ब्लाउज को किनारे में रख रश्मी ने अपनी ब्रा उतार दी. और फिर से ब्लाउज पहनने लगी. ब्लाउज पहनकर रश्मि ने खुद को आईने में देखा. उसके हरे पारदर्शी ब्लाउज में उसके बड़े बड़े निप्पल साफ़ झलक रहे थे. फिर रश्मी ने अपने हाथो को ब्लाउज के अन्दर डालकर अपने स्तनों को ब्लाउज में सही तरह से एडजस्ट किया कि फिर रश्मी ने अपने हाथो को ब्लाउज के अन्दर डालकर अपने स्तनों को ब्लाउज में सही तरह से एडजस्ट किया कि उसके निप्पल पॉइंट कर उभरे हुए दिखे. संतुष्ट होने पर रश्मि ने एक बार फिर अपनी सैटिन साड़ी के पल्लू को अपने कंधे पर चढ़ाया और फिर अपनी बिंदी को माथे पर सही जगह पर लगाया. रश्मी इस वक़्त बेहद हॉट दिख रही थी. और फिर उसने अपने होंठो पर लिप ग्लॉस लगाया ताकि उसके होंठ चुमते वक़्त और रसीले लगे. रश्मि ने एक बार फिर अपने आँचल को संभाला और मुस्कुराती हुई बाथरूम से निकल कर बेडरूम आ गयी.

रश्मि अपनी सेक्सी चाल से अपने पति विशाल को रिझाने लगी और बिस्तर पर उनके बगल में आकर बैठ गयी. फिर उसने अपने पैरो को ऊपर उठाकर बिस्तर पर रखा, फिर अपने घुटनों को मोड़ अपनी साड़ी के पल्लू को संभाला और फिर नटखट नजरो से अपने पति की ओर कातिल मुस्कान से उन्हें घायल कर उनसे मुंह फेरकर उनके बगल में सो गयी.

बिस्तर पर अपनी लेटी हुई पत्नी की ब्लाउज में खुली हुई पीठ और सैटिन साड़ी में लिपटी हुई खुबसूरत बड़ी सी गांड देख विशाल और बेचैन हो उठे. सचमुच रश्मि को अपने पति को रिझाना बखूबी आता था. विशाल रश्मि के करीब आ गए और पीछे से अपनी पत्नी की कमर पे हाथ डालते हुए उसकी साड़ी के अन्दर हाथ डालने लगे और उसकी गर्दन पे चुमते हुए बोले, “अब और कितना तरसाओगी जानेमन? कब से तुम्हारा इंतज़ार कर रहा हूँ.”

विशाल अब अपने हाथ रश्मी के ब्लाउज पर फेरने लगे और उसके स्तन दबाने लगे. रश्मी भी मुस्कुराती हुई अपने हाथ पीछे कर अपने पति के सर को अपने और करीब लाने लगी ताकि वो उसे गर्दन पर अच्छी तरह चूम सके. “आज तो तुमने ब्रा भी नहीं पहनी है डार्लिंग. अब मुझसे और रुका नहीं जाएगा.”, विशाल ने कहा.

“तो आपको रोक कौन रहा है जानू… मैं तो आपकी ही हूँ.”, रश्मि ने मदहोशी भरी आवाज़ में कहा.

विशाल अब और उत्साह से रश्मी के बूब्स के बीच हाथ डालकर दबाने लगे और फिर उसकी पीठ पर चूमने लगे. धीरे धीरे उन्होंने हाथो को निचे ले जाकर रश्मी की साड़ी की चुन्नटो के बीच ले गए जहाँ उन्होंने रश्मी के लंड को पकड़ लिया और उसे सहलाने लगे. “डार्लिंग … सुबह का काम जो अधूरा रह गया था… आओ मैं पूरा करता हूँ.” विशाल ने कहा और रश्मी के लंड को और सहलाने लगे. रश्मी का लंड भी खड़ा हो रहा था पर उसके दिल में कुछ और था. वो नहीं चाहती थी कि आज विशाल उसका लंड चुसे.

विशाल अब भी रश्मी के लंड को उसकी साड़ी पर से ही सहला रहे थे तो रश्मि ने अपने एक हाथ से उसे हटाया. और अपने हाथ को अपने पीछे लिपटे हुए पति के पैजामे में डाला और उनका खड़ा लंड अपने कोमल हाथों से बाहर निकाल कर उसे हिलाने लगी. हिलते हाथो के साथ उसकी हरे कांच की चूड़ियों की खनक बेहद मोहक लग रही थी. रश्मी ने फिर उस लंड को अपनी गांड पर दबाया. विशाल का लंड रश्मो के नर्म हाथो और गांड के बीच मचल उठा… रश्मि की सैटिन साड़ी के स्पर्श से तो वो और तन गया. “आज मेरी नहीं तुम्हारी खुश होने की बारी है प्रिये.”, रश्मी ने एक अच्छी पत्नी की भाँती विशाल से कहा और उनके लंड अपनी गांड पर लिपटी साड़ी पर जोर जोर से दबाने लगी. विशाल तो इस वक़्त और भी उत्तेजित हो गए.

विशाल ने अपनी पत्नी को अपनी ओर पलटाया और उसकी आँखों में देखने लगे. रश्मि भी अपनी कातिल मुस्कान और रसीले होंठो के साथ उन्हें देखने लगी. विशाल ने फिर रश्मि की साड़ी को उसके ब्लाउज के ऊपर से हटाया और उसका पारदर्शी ब्लाउज देख वो मचल उठे. बिना ब्रा के उस पारदर्शी ब्लाउज में रश्मि के बड़े बड़े स्तन साफ़ झलक रहे थे और उसके निप्पल सख्त हो गए थे. जिसे देख विशाल उन निप्पल को पकड़ अपनी उँगलियों से मसलने लगे तो रश्मी ने आँहें भरते हुए अपनी आँखें बंद कर ली.

“जानू आओ मैं तुम्हारे बूब्स को इस ब्लाउज से आज़ाद करता हूँ.”, विशाल ने कहा और रष्मि के ब्लाउज की हुक खोलने लगे. पति भी न ऐसे ही होते है. बातें तो ऐसी करते है जैसे सब कुछ अपने लिए नहीं बल्कि सिर्फ पत्नी की ख़ुशी के लिए कर रहे है. बिना ब्रा के तो वैसे भी रश्मि के स्तन आज़ाद ही थे. रश्मि की ब्लाउज की सारी हुक खुलते ही विशाल ने उन दोनों हिलते हुए स्तनों को अपने दोनों हाथो से जोरो से मसल दिया तो रश्मी एक मीठे दर्द भरी आंह निकाल कर मचलने लगी. और फिर विशाल ने अपना सर उन दोनों नर्म बड़े बड़े स्तनों के बीच रख दिया और उन स्तनों को और चूमने लगे. मदमस्त होती रश्मी ने भी अपने हाथो से विशाल के सर को अपने बूब्स पर और जोर से दबाया और उनके सर को अपने सैटिन साड़ी के आँचल से ढँक दिया. विशाल भी कामुक होकर रश्मी के स्तनों को चूसते रहे और अपनी जीभ से रश्मी के निप्पल को उकसाने लगी. मचलती हुई रश्मी से रहा न गया और बोली, “और जोर से चुसो न मेरे बूब्स को… मेरे निप्पल को अपने दांतों से कांटो न जानू” विशाल ने भी वैसा ही किया तो उत्तेजना के मारे रश्मि ने अपनी मुट्ठियाँ भींच ली और आँखें बंद कर मज़ा लेने लगी… उसका तन बदन उसके स्तन पर हर चुम्बन पर लहरा उठता.

कुछ देर तक अपनी पत्नी के स्तनों का आनंद लेने के बाद विशाल ने अपनी पत्नी को पलटाकर उठाया और उसे डौगी पोजीशन में बिस्तर में तैयार किया और खुद पत्नी की गांड के पीछे आ गए. इस वक़्त रश्मि के बाल बिखर गए थे, ब्लाउज खुला हुआ था जिसमे से उसके स्तन उस पोजीशन में लटक कर झूल रहे थे. अब तो बस रश्मि की गांड को बेसब्री से इंतज़ार था. विशाल ने भी ज्यादा देर न करते हुए रश्मि की साड़ी को पीछे से उठाया और उसकी पेंटी उतारकर अपने लंड से वहां छूने लगे.

रश्मी तो जैसे अब मदहोश हो चुकी थी. अब वो अपनी गांड को मदहोशी में लहराने लगी और अपने पति के लंड को और तरसाने लगी. पर वो तो खुद तरस रही थी. अपनी पत्नी की तड़प देखकर विशाल ने भी झट से अपने लंड को रश्मी के अन्दर डाल दिया. उस एक झटके में रश्मी तो जैसे झूम उठी और उसके मुंह से एक आवाज़ एक आंह निकल पड़ी. कामुकता की मारी रश्मी अपने एक हाथ से अपने स्तनों को छूकर दबाने लगी. और विशाल भी अपने एक हाथ से रश्मि की डोग्गी पोजीशन में झूलते हुए स्तनों को पकड़ कर दबाने लगे. “और जोर से दबाओ न!”, रश्मी मदहोशी में लगभग चीख उठी. तो पत्नी की बात सुनकर विशाल और जोर से दबाने लगे और जोर जोर से अपने लंड को अन्दर बाहर करने लगे. इस दौरान रश्मी के मुंह से निकलने वाली आन्हें और तेज़ हो गयी थी. अक्सर रश्मी ऐसी आवाजें नहीं निकाला करती थी क्योंकि उसकी ननंद लीला बगल के कमरे में ही सोया करती थी. पर आज न जाने रश्मि को क्या हो गया था, उसे बिलकुल परवाह नहीं थी कि उसकी ये चरम उत्तेजना में निकलने वाली आवाजें किसे सुनाई देती है. विशाल को तो वैसे ही ऐसी आवाज़ करके मदहोश होती हुई पत्नी ज्यादा आकर्षक लगती थी तो उन्होंने कुछ कहा नहीं. विशाल अपनी पत्नी के बड़े स्तनों को और जोर जोर से मसल मसल कर उसे और आनंद दे रहे थे, और वहीँ गांड में लंड को भी बड़े तेज़ी से अन्दर बाहर कर रहे थे.

और फिर कुछ समय में पति-पत्नी के बीच की ये लीला पूरी हो गयी. दोनों के चेहरे पर एक संतुष्टि का भाव था. आज रश्मी बाकी दिनों के मुकाबले बहुत ज्यादा कामोत्तेजित थी. चाहे जो भी वजह थी इसके पीछे, विशाल बहुत खुश थे. और फिर विशाल अपनी पत्नी के बड़े स्तनों के बीच सर रखकर सो गए. और रश्मि भी उनके सर को जोर से अपने सीने से दबाकर उनके सर पर हाथ फेरते फेरते सो गयी. पर होता है न कि अक्सर ऐसी रातें यूँ ही ख़त्म नहीं हो जाती. खासकर पति तो अपनी पत्नी को छूकर पूरी रात उकसाते रहते है. विशाल रात भर हलकी हलकी नींद में रश्मि के स्तनों को दबाते तो कभी रश्मी के कठोर हो चुके निप्पलो को चूस कर उसे और उकसाते, और रश्मी बिस्तर में ही बेचैन होकर अपने तन को काबू में करने की कोशिश करती पर दोनों के जिस्म एक दुसरे के और करीब आ जाते.

और देखते ही देखते न जाने कब सुबह हो गयी दोनों को पता भी न चला. रश्मी बिस्तर में अभी भी पति की बांहों में लेटी हुई थी. उसने ब्लाउज तो पहना हुआ था पर उसके हुक खुले हुए थे और स्तन बाहर निकले हुए थे. कितने सुन्दर और सुडौल लग रहे थे वो स्तन. रश्मि की कमर के निचे अब भी साड़ी लिपटी हुई थी. साड़ी पहनने का यह तो फायदा है कि उसे बिना उतारे ही प्यार करने का आनंद लिया जा सकता है. और फिर उस साड़ी का मोहक कपडा यदि सैटिन हो तो पति पत्नी दोनों ही उसके स्पर्श से और उत्तेजित हो जाते है.

सुबह सुबह रश्मी की आँखें अब भी नींद से बंद थी. पर विशाल उसे ऐसे ही थोड़ी छोड़ने वाले थे. वो तो रश्मी की कमर के निचे उसकी साड़ी पर हाथ फेरते हुए रश्मि के लंड को छूकर तरसाने लगे. क्योंकि रश्मी ने अन्दर पेंटी नहीं पहनी थी तो रश्मी का लंड खडा होकर साड़ी से उभरकर दिखने लगा. विशाल अपनी पत्नी के इस खुबसूरत लिंग को साड़ी पर से ही पकड़कर सहलाने लगे. रश्मी एक बार फिर बदहवास हो रही थी. लेकिन जहाँ एक ओर पति जब चाहे तब रोमांटिक होने को तैयार होते है, वहीँ एक पत्नी अपनी ज़िम्मेदारी भी जानती है. रश्मी को पता था कि उसे उठकर सबके लिए नास्ता और अपने पति के टिफ़िन की तैयारी करनी है. खुद पर काबू करते हुए रश्मी ने अपने पति के हाथ को हटाया और बोली, “छोडो न जानू. मुझे अब तुम्हारा टिफ़िन बनाना है”

“ऐसे कैसे छोड़ दू अपनी प्यारी पत्नी को. आखिर मुझे उसे भी तो खुश करना है.”, विशाल ने रश्मी के लबो को चुमते हुए कहा. पर रश्मी उनसे दूर होकर बिस्तर पर उठ बैठी और बोली, “मुझे खुश करना है या तो तुम्हारी अपनी ख़ुशी है. चलो अब छोडो मुझे.”

रश्मी ने अपनी साड़ी जो उठकर घुटनों के ऊपर तक आ गयी थी, उसे सरकाकर निचे किया. और फिर अपने ब्लाउज के हुक लगाने लगी. इतने सुन्दर स्तन वापस उस सेक्सी ब्लाउज में कैद होते देख विशाल और उत्तेजित होने लगे. ये पति भी न! ऐसे ही होते है. और फिर वो बोले, “ठीक है तुम्हे मुझे इसी तरह छोड़कर जाना है तो चली जाओ. पर तुम्हारी ये पेंटी मैं नहीं दूँगा। विशाल के हाथ में रश्मी की पेंटी थी.

“तो ठीक है. तुम्ही रख लो उसे. मैं बिना पेंटी के ही चली जाती हूँ.”, रश्मी हँस पड़ी और अपने सीने को साड़ी के आँचल से ढंकती हुई बिस्तर से उठ खड़ी हुई और अपने पति को तडपाती हुई जाने लगी. और विशाल वहीँ दिल में हसरतें लिए रह गए.

मुस्कुराती हुई कृति जब किचन पहुंची तो उसने देखा कि सोनल जाग चुकी थी और ब्रेड टोस्ट का नाश्ता कर रही थी. रश्मि को एहसास हुआ कि उसका लिंग अब भी खड़ा हुआ है और साड़ी में उभर कर दिख रहा है. कोई और दिन होता तो रश्मी उसे छिपाने की कोशिश करती. लेकिन कल जो सोनल और रश्मी के बीच हुआ था, उसके बाद से न जाने क्यों रश्मि के दिल में सोनल को लेकर नाराजगी थी. उसने सोनल को अनदेखा करते हुए किचन में जाकर अपने काम करने लगी. सबसे पहले तो उसने अपने बालों को बांधकर जूडा बनाया और फिर पति के लिए चाय बनाने लगी.

इस वक़्त सोनल का चेहरा भी कुछ उखड़ा हुआ था.

“लगता है कल रात पति-पत्नी के बीच बहुत प्रेम लीला हुई है.”, सोनल ने अपनी भाभी से कहा. उसकी आवाज़ में एक गुस्सा साफ़ झलक रहा था. आखिर उसे रात को पति-पत्नी की क्रीडा के दौरान आवाजें सुनाई पड़ ही गयी थी. पर क्यों नाराज़ थी वो रश्मी से? आखिर रश्मी भाभी ने तो उसे वो सीखाया था जो कल अपने बॉयफ्रेंड धीरेन्द्र के साथ आजमा सकी थी. कल शाम को तो अपनी भाभी को ये सब बताते हुए बड़ी खुश थी वो. फिर क्यों आज वो इतनी नाराज़ थी, ये तो वो खुद भी नहीं जानती थी.

“हाँ.. हमने कल रात प्यार किया है. तुझे क्या करना है?”, रश्मि ने भी लगभग उखड़े स्वर में जवाब दिया. जब सोनल अपने बॉयफ्रेंड के साथ ये सब कर सकती है तो फिर रश्मि और विशाल जो की पति पत्नी है, वो क्यों नहीं? ऐसे ही कुछ ख्याल रश्मि के मन में चल रहे थे. पर न जाने क्यों उसे सोनल को देखकर गुस्सा आ रहा था. वो समझ नहीं पा रही थी कि आखिर उसे सोनल से क्या परेशानी है.

अपनी भाभी से रुखा जवाब मिलने पर सोनल बिना कुछ कहे उठकर किचन से अपने कमरे की ओर चली गयी. और रश्मि भी अपने पति के लिए खाना बनाने में व्यस्त हो गयी.
 
रश्मी अब तक अपने पति विशाल के लिए टिफ़िन तैयार कर चुकी थी और बस किचन में बर्तन समेट ही रही थी कि तभी विशाल पीछे से आये और अपनी पत्नी से लिपट गए. और अपनी प्यारी पत्नी रश्मी की पीठ को चूमने लगे. यदि रात सुहानी बीती हो तो सुबह सुबह पति इस तरह से और रोमांटिक हो ही जाते है. रश्मी ने भी उनके चुम्बन का प्यार भरा जवाब दिया और अपने कोमल हाथो से अपने पीछे खड़े विशाल के चेहरे को छूने लगी.

“अब छोडो भी मुझे. आपको ऑफिस के लिए देर हो रही होगी. लीजिये आपका टिफ़िन तैयार है.”, और रश्मी ने बड़े ही प्यार से पलट कर विशाल को टिफ़िन पकडाया. पर रश्मी अब भी विशाल की बांहों में गिरफ्त थी. उसे कोई शिकायत भी नहीं थी. विशाल ने अपनी पत्नी के होंठो को एक बार रस भर कर चूमा और उसे विदा कर ऑफिस निकल गए. और रश्मी उनके चुम्बन के एहसास को अनुभव करती वहीँ खड़ी रह गयी. रश्मी के निप्पल में एक सिहरन सी छोड़ गए थे विशाल.

आखिर कल की रात बहुत हॉट थी. रश्मी ने अपनी तरफ से विशाल को खुश करने की पूरी कोशिश जो की थी. और फिर उसे भी मज़ा तो आया था. पर ये तो सिर्फ रश्मी का दिल जानता था कि कल की हॉट रात के पीछे रहस्य क्या था. कल दिन में जब रश्मी की ननंद सोनल ने रश्मी के लिंग को चूसकर ब्लो जॉब दिया था उसके बाद से ही उसके मन में एक ग्लानी थी. कल के पहले रश्मी के जिस्म को उसके पति विशाल के अलावा किसी ने नहीं छुआ था… न किसी आदमी ने और न ही किसी औरत ने. पर कल? कल रश्मी ने अपने पति के पीछे उन्हें धोखा दिया और वो भी उनकी बहन के साथ. उसके मन में ग्लानी तो होनी ही थी. पर इसके अलावा भी कुछ और बात थी. कल जब सोनल घर वापस आई और रश्मी को अपने बॉयफ्रेंड धीरेन्द्र के साथ का किस्सा सुनाया तब से न जाने क्यों रश्मी के मन में इर्ष्य ने घर कर लिया था. उसे सोचकर बहुत जलन हो रही थी कि सोनल ने रश्मी के अलावा किसी और का भी लिंग चूसा था. पहले की बात होती तो शायद रश्मी को फर्क नहीं पड़ता पर अब न जाने क्यों उसे ऐसा महसूस हो रहा था. यही कारण था कि जब विशाल ने रात को रश्मी को अपनी बांहों में लिया तो वो न सिर्फ अपने पति को धोखा देने के प्रायश्चित में उन्हें पूरे समर्पण भाव के साथ अपना तन सौंप रही थी बल्कि साथ ही वो सोनल को भी एहसास दिलाना चाहती थी कि यदि सोनल धीरेन्द्र के साथ सेक्स करके खुश है तो वो भी अपने पति के साथ खुश थी.

आखिर रश्मी जैसा चाहती थी वैसा ही हुआ भी था. सोनल सुबह सुबह ही रश्मी से रूखे स्वर में बात कर रही थी. और सुबह के दो शब्दों के कहने के बाद से वो एक भी बार रश्मी से बात करने के लिए अपने कमरे से बाहर तक नहीं आई थी. कल तक जो ननंद भाभी के बीच एक प्यार भरा रिश्ता था वो एक बार में ही जिस्म की आग में झुलसते हुए कही बिखर गया था.

भले ही रश्मी एक सीधी साधी गृहिणी थी पर उसे भी अपने रूप पर गर्व था. सोनल की चिंता छोड़ कर रश्मी ने अपने ब्लाउज को अपनी साड़ी से ढंका और अब नहाने के लिए बाथरूम आ गयी. बाथरूम में आकर रश्मी ने धीरे धीरे खुद को आईने में देख अपनी साड़ी उतारनी शुरू की. एक एक प्लेट को धीरे धीरे खिंच कर खोलती हुई रश्मी अपने रूप को देखकर इठलाने लगी. और फिर उसके बाद अपनी ब्लाउज को खोलने लगी. बिना ब्रा के उसके स्तन ब्लाउज से तुरंत बाहर निकल आये. और रश्मी ने अपने निप्पल को पकड़ कर मसलना शुरू कर दिया. उसे एक बार फिर बड़ा मज़ा आ रहा था. और फिर वो अपने दुसरे हाथ से अपने पेटीकोट के ऊपर सहलाने लगी और पहले हाथ से अपने स्तनों को मसलने लगी. जल्दी ही रश्मी का लंड खड़ा हो चूका था और उसकी वजह से उसका पेटीकोट उठ चूका था. आखिर उसने अन्दर पेंटी तक नहीं पहनी थी. उत्तेजना में रश्मी ने अपना पेटीकोट उतारा और फिर अपने खड़े लंड को और सहलाने लगी. कठोर निप्पल और खड़े लंड के साथ वो आईने में बड़ी सेक्सी लग रही थी. खुद के लंड को देख वो बड़ी खुश हुई. गुलाबी चमचमाता हुआ और बिलकुल साफ़ सुथरा लिंग था रश्मी का जिसके आसपास एक बाल तक नहीं था. और फिर मुस्कुराती हुई रश्मी शावर में जाकर नहाने लगी. वो चाहती तो उत्तेजना में वो खुद को और सहला सकती थी. पर इतनी खुबसूरत औरत भला खुद को खुश करे? ये तो अपमान ही होगा न? जब पूरी दुनिया में कोई भी उसके जिस्म को छूकर उसे खुश करने को बेताब होगा तो वो क्यों भला खुद मेहनत करे? हंसती मुसकुराती हुई रश्मी नहाकर बाहर निकली और उसने एक सुन्दर सी लेस वाली ब्रा पहनी. भीगे बालो में बहुत ही सेक्सी लग रही रश्मी की ब्रा ने जब उसके बूब्स को अपने अन्दर कैद किया तब जाकर उसका खुद के तन पर थोडा सा वश वापस आने लगा था. और फिर रश्मी ने धीरे से अपने कोमल पैरो पर एक हलकी सी सैटिन पेंटी को सरकाया और खुद के चिकने पैरो को अपनी उँगलियों से छूते हुए रश्मी ने वो पेंटी पहन ली. और फिर उसके बाद एक मैचिंग पेटीकोट में अपनी कमर को लहराती हुई नाडा बांधकर रश्मी अब साड़ी पहनने को तैयार थी.

वैसे तो रश्मी को अपनी ब्रा के ऊपर ब्लाउज पहनना चाहिए था पर आज उसने बिना ब्लाउज के ही साड़ी पहनने की सोची. घर में वैसे भी सिर्फ सोनल थी और वो भी बाहर जाने वाली ही होगी. और न भी जाए, तो आज रश्मी को उसके रहने न रहने से फर्क नहीं पड़ता था. और फिर रश्मी ने अपने बड़े बड़े कुलहो पर अपनी साड़ी को एक राउंड लपेटा और फिर अपनी दुबली पतली उँगलियों की सहायता से अपने साड़ी में एक एक प्लेट सलीके से बनाने लगी. भीगे लम्बे बालो में इतने करीने से प्लेट बनती हुई रश्मी को इस वक़्त कोई देख लेता तो यकीनन ही उसका खुद पर काबू नहीं रहता. यदि वहां विशाल होते तो मदहोश होकर वो इस वक़्त कभी अपनी पत्नी के स्तनों को दबाते या फिर उसके कुलहो को. और यदि वहां सोनल होती तो? क्या सोनल अपनी भाभी के स्तनों को दबाती हुई अपने घुटनों पर बैठकर अपनी भाभी की साड़ी उठाती और उनके लंड को बाहर निकाल कर अपने रसीले होंठो से चुस्ती? हाय, ये कैसा ख्याल आ रहा था रश्मी के मन में? वो अपने पति को फिर दोबारा कभी धोखा नहीं देना चाहती थी. फिर भी न जाने क्यों उसके दिल में ये विचार आकर उसके जिस्म में आग लगा रहे थे.

रश्मी आज बिना ब्लाउज के ही साड़ी पहनकर तैयार थी.

जहाँ एक ओर रश्मी अपने मन से लड़ रही थी वहीँ उसकी ननंद सोनल की मनोदशा कुछ अलग ही थी. अपने कमरे में बिस्तर में नाइटी पहनी सोनल लेटी हुई थी और उसके मन में एक गुस्सा भरा हुआ था. करवटें बदलती हुई सोनल के मन में अपनी भाभी के प्रति क्यों इतना गुस्सा था वो खुद समझ नहीं पा रही थी. यदि उसकी भाभी ने अपने पति के साथ रात को सेक्स किया तो सोनल को इस बात से क्यों फर्क पड़ रहा था? आखिर वो भी तो अपने बॉयफ्रेंड के साथ सेक्स करके खुश थी? रह रह कर उसके मन में धीरेन्द्र के साथ सेक्स की जगह उसे कल दोपहर को अपनी भाभी के साथ किये सेक्स की तसवीरें आ रही थी जब वो अपनी भाभी का गुलाबी लंड चूस रही थी. ऐसा क्यों हो रहा था उसेक साथ? धीरेन्द्र को छोड़ वो भाभी के बारे में क्यों सोच रही थी? खुद के मन को सोनल खुद ही नहीं समझ पा रही थी. उसका मन कर रहा था कि अपने कमरे से निकल कर अपनी भाभी पर चीख पड़े. ऐसे ही न जाने क्या क्या सोचती हुई सोनल न तो आज नहाई थी और न आज बाहर गयी थी धीरेंद्र से मिलने. उसे अपने कमरे के बाहर खटपट की आवाज़ सुनाई पड़ रही थी. ज़रूर उसकी रश्मि अब नहाकर आ चुकी होगी और बाहर के कमरे में कुछ कर रही होगी. पर थोड़ी देर में वो खटपट भी बंद हो गयी. क्या उसे बाहर जाकर रश्मी से कुछ कहना चाहिए? और कहे भी तो क्या कहे? यही कि रश्मी अपने पति के साथ सेक्स न करे? ऐसा कैसे कह सकती थी वो. उसे समझ नहीं आ रहा था कि वो करे भी तो क्या करे? पर इस तरह बिस्तर में करवट बदलते तड़पती तो नहीं रह सकती थी वो. उसे कुछ तो करना होगा.

और फिर सोनल बिना कुछ सोचे समझे अपनी घुटनों तक की नाइटी पहने हुए ही अपने कमरे से बाहर आ गयी. बाहर आकर उसने देखा कि रश्मी सोफे पर बैठी हुई अपने घुटनों को मोड़े हुए गृहशोभा मैगज़ीन पढ़ रही थी. रश्मी ने तो आज ब्लाउज भी नहीं पहना था. बस खुले पल्ले के साथ ब्रा को ढंककर साड़ी पहनी हुई उसकी भाभी को भीगे बालो में देखकर एक ओर सोनल को गुस्सा भी बहुत आ रहा था पर वहीँ दूसरी ओर… उसकी भाभी उसे बेहद आकर्षक भी लग रही थी. सोनल को न जाने क्यों उसकी भाभी को देखते ही उसकी भाभी की कमर के निचले हिस्से की ओर ध्यान जा रहा था. उसकी भाभी की धवल गोरी कमर में सॉफ्ट सी नाभि के निचे साड़ी की खुबसूरत प्लेट्स के पीछे उसकी भाभी का लंड छुपा है, यह ख्याल उसके मन में क्यों आ रहा था? सोनल को देखते ही उसकी रश्मि भाभी ने अपनी साड़ी के आँचल को कुछ इस तरह सरकाया कि वो उसके दोनों स्तनों के बीच आकर बैठ गयी. अब रश्मि का एक स्तन उसकी लेस वाली ब्रा में और उभर कर दिखाई दे रहा था. पर सोनल की ओर ज्यादा ध्यान न देते हुए रश्मी ने अपने एक पैर को दुसरे पैर पर रखा और अपनी नाभि को साड़ी से ढंकते हुए हाथ में रखी मैगज़ीन का पन्ने पलट कर देखने लगी. रश्मि सोनल को अनदेखा करने का ड्रामा कर रही थी. वो उसे सच में अनदेखा करना चाहती थी पर कर नहीं पा रही थी. इसलिए अपनी मैगज़ीन में ध्यान देने की कोशिश कर रही थी. पर वहां भी उसका दिल कहाँ लग रहा था?

अपनी भाभी की ऐसी हरकत देखकर एक बार फिर सोनल के दिल में गुस्सा बढ़ गया. और वो गुस्से में ही अपनी भाभी के बगल में आकर बैठ गयी. रश्मी की नज़र अब सोनल के गोरी चिकनी टांगो पर थी. उसे पता था कि बिना नहाई हुई सोनल के बिखरे बाल और उस नाइटी में उसकी गोरी चिकनी टाँगे सभी कुछ रश्मी को उकसा रही थी. उसके स्तन जैसे खुद ब खुद ही फूलने लगे थे. पर फिर भी किसी तरह खुद पे काबू कर वो उन सब भावनाओं को अनदेखा करती रही. अब दोबारा अपने पति को वो धोखा नहीं देगी.. वो भी उस औरत, उस सोनल के लिए जो खुद किसी और मर्द के साथ सोकर आई थी. रश्मी ने सोनल को अनदेखा किया तो सोनल का पारा और चढ़ गया और अब उससे रहा नहीं गया और वो गुस्से से अपनी भाभी पर चीख पड़ी, “क्यों भाभी रात को अपने पति के साथ बीतने के बाद भी तुम्हारे जिस्म की आग नहीं बुझी जो तुम अब भी इस तरह से अपने स्तन निकाले बेशर्मो की तरह बैठी हो?”

बहुत कडवी बात कह दी थी सोनल ने. तो रश्मि भला कैसे चुप रहती? “मेरे जिस्म की आग से तुझे क्या करना है? हाँ मैं सोयी थी अपने पति के साथ. कम से कम अपने पति के साथ ही कर रही थी न. किसी ऐरे गिरे आदमी का लंड तो नहीं चूस रही थी न मैं? और वैसे भी तुझे क्या फर्क पड़ता है कि मैं क्या करती हूँ?”, रश्मी ने भी गुस्से में मैगज़ीन को बंदकर पटकते हुए कहा.

“भाभी!”, रश्मी की बात सुनकर सोनल गुस्से से उबल उठी और अपनी भाभी की नर्म बांहों को जोर से अपने हाथ से पकड़कर अपनी ओर खींचती हुई बोली. उसकी मजबूत पकड़ से रश्मी की नाज़ुक बांहों में थोडा दर्द हुआ जो उसके चेहरे पर दिख पड़ा. दोनों इस वक़्त एक दुसरे की नजरो में देख रही थी. गुस्से में दोनों की सांसें भी बहुत तेज़ चलने लगी थी. रश्मी के स्तन भी तेज़ साँसों के साथ फूलते और संकुचाते थे. और यही हाल सोनल के स्तनों का उसकी नाइटी में हो रहा था.

“मुझे क्या फर्क पड़ता है? जानना चाहती हो मुझे क्या फर्क पड़ता है?”, सोनल ने और भी गुस्से में कहा तो रश्मी बस उसकी ओर देखते ही रह गयी. और फिर एक झटके में सोनल ने अपनी भाभी की बांह को जोरो से अपनी ओर ऐसे खिंचा कि दोनों के स्तन एक दुसरे से दब गए… और दोनों के चेहरे बेहद करीब आ गए. इतने करीब कि जब सोनल ने रश्मी के होंठो को जोरो से चूमा तो रश्मी उसे रोकने के लिए कुछ कर भी नहीं सकी. दोनों के स्तन और निप्पल तुरंत ही फूलकर एक दुसरे को दबाने लगे. सोनल अपनी भाभी के बालों में उंगलियाँ फेरती हुई अपनी भाभी को मदहोश होकर चूमने लगी… और एक हाथ से भाभी की साड़ी पर से उनके स्तनों को दबाने लगी. भले यह सब शायद २०-३० सेकंड चला होगा मगर इतना मदहोशी भरा चुम्बन था वो कि रश्मी को उसे रोकना बहुत मुश्किल हो रहा था. खुद वो बेसुध हुए जा रही थी और सोनल के हाथ उसके स्तनों को दबाते हुए उसे और उकसा रहे थे. पर फिर भी किसी तरह रश्मी ने हिम्मत करके अपने दोनों हाथो से पूरा जोर लगाकर शिल्पा के स्तनों को धक्का देकर अपने आप से दूर किया. मदहोश होते हुए भी रश्मी सोनल के इस कृत्य से बहुत गुस्से में थी. दूर होते ही उसकी सांसें इतनी तेज़ हो गयी कि उसके स्तन ऊपर निचे होने लगे. बढ़ी हुई धडकनों के साथ उसने अपनी साड़ी संभाली और आँचल से अपने स्तनों को तुरंत ढंककर गुस्से से सोनल की ओर देखने लगी. रश्मि को गुस्से में देख सोनल को थोडा होश आया तो उसे समझ नहीं आ रहा था कि उसने जो अभी किया वो सही था या गलत. उसके चेहरे पर अब थोड़ी शर्म दिखने लगी थी और रश्मी के चेहरे पर गुस्से की लालिमा.

पर जब दो खुबसूरत औरतों के जिस्म एक दुसरे के लिए बेकाबू हो, तब गुस्से को प्यार में बदलने में बहुत समय नहीं लगता है. और फिर गुस्से से लाल रश्मी ने सोनल की दोनों बांहों को जोर से पकड़ा और अब वो पूरी तरह से मदहोश होती हुई सोनल के होंठो को जोरो से चूमने लगी. और फिर फिर सोनल के स्तनों को भी पूरे जोर से दबाने लगी. रश्मी के चुम्बन पाकर अब सोनल ने भी खुद पर वश खो दिया था. और वो भी अपनी भाभी के रसीले होंठो को चूसने लगी… और भाभी के नर्म स्तनों को मसलने लगी. पर अब सोनल के चुम्बन में गुस्सा नहीं प्यार और पैशन था. लेकिन रश्मि अब भी अपने दिल की बात कह देना चाहती थी. और अपने अपमान का बदला लेती हुई रश्मि ने सोनल से कहा, “तुझे लंड चूसने का बड़ा शौक है न? तो आज अपने भाभी के लंड से चुद कर भी देख ले.” रश्मी पूरी ताकत से सोनल को सोफे पर लेटाने लगी और अपनी साड़ी उठाकर उसने अपनी पेंटी उतार दी और अपना खड़ा हुआ लंड निकाल सोनल की चूत की ओर बढाने लगी. “तो तुम्हे रोक कौन रहा है भाभी?”, सोनल बोली और उसने अपने दोनों पैरो को फैला दिया और अपनी नाइटी उठाकर अपनी पेंटी को सरकाकर अपनी योनी को अपनी भाभी के लिए खोल दिया. उत्तेजना में रश्मी ने अपनी साड़ी से अपने लंड को निकाला और तुरंत ही सोनल की योनी में एक एक झटके में डाल दिया. रश्मि के लिए ये पहला अनुभव था पर सोनल की योनी के अन्दर उसके लंड के जाते ही उसे एक चरम आनंद महसूस हुआ. और वो सोनल के हाथो से अपने स्तनों को जोरो से दबवाने लगी. सोनल ने भी अपनी आँखें बंद कर ली और चीख पड़ी, “और जोर से चोदो न भाभी!” और कामोत्तेजना में बदहवास रश्मी अपने लंड को सोनल की योनी में अन्दर बाहर करने लगी. रश्मी के स्तन ऐसा करते हुए झूलने लगे और उसके लम्बे बाल सोनल के सीने पर लहराने लगे. सोनल अब खुद अपने स्तनों को दबाने लगी.

ननंद और भाभी के बीच ये पल बेहद कामुक था. दोनों कभी एक दुसरे के होंठो को जोरो से चूमती, कभी कांटती तो कभी एक दुसरे के स्तनों को दबाकर चुस्ती और फिर निप्पल को दांतों से कांटती. आखिर दोनों औरतें थी तो जानती थी कि कैसे एक दुसरे के स्तनों को मसल कर उन्हें आनंद देना है. ऐसा पल ऐसी उत्तेजना ऐसी कामुकता तो उन्होंने कभी किसी आदमी के साथ महसूस नहीं किया था. कुछ तो ख़ास था इस पल में जो इन लहराते हुए कोमल जिस्मो को इतना मादक बना रहे थे. दोनों के नर्म जिस्म.. सॉफ्ट साड़ी और नाइटी में लिपटे हुए उन्हें मदहोश किये जा रहे थे. सोनल ने पहले आदमियों के लंड तो खुद के अन्दर बहुत लिए थे पर ये तो एक औरत का लंड था, वो भी उसकी भाभी का! भाभी के नर्म मुलायम स्तन और कठोर लिंग का विरोधाभास भी सोनल को कुछ गलत नहीं लग रहा था. कितनी उतावली हो गयी थी वो. और वहीँ रश्मी जीवन में पहली बार अपने लिंग का इस तरह एक औरत की योनी में कर रही थी. उसके लिए बिलकुल नया और कामुक अनुभव था ये. सोनल के स्तनों को दबाकर और उसकी योनी में अपने लिंग को डालकर इतना आनंद मिलेगा उसे, ऐसा तो उसने कभी सोची भी नहीं थी. ये सच था कि उसके पति विशाल उसका लिंग कभी कभी चूसते थे,रोज खुद अपना लिंग रश्मी की गांड में डालते थे, उसका भी अपना मज़ा था पर ये पल तो उससे भी ज्यादा उतावला करने वाला था. और फिर लिपटते रगड़ते उन दोनों औरतों के नर्म जिस्म एक दुसरे में समाकर थोड़ी देर में शांत हो गए. दोनों औरतों के चेहरे पर एक अलग सी ख़ुशी थी. और दोनों एक दुसरे की बांहों में एक दुसरे को देखती रह गयी. रश्मी अभी भी सोनल के ऊपर लेटी हुई थी और दोनों नवयौवनाओं के स्तन दबकर दोनों को आनंद दे रहे थे.

“भाभी, अब हम दोनों क्या करेंगी? इन सबका क्या मतलब है? हमारे रिश्तो का क्या होगा अब?”, सोनल ने अपने स्तनों पर लेटी हुई रश्मी के बालों को उँगलियों से सहलाते हुए पूछा. एक ही लाइन में बहुत कठिन सवाल कर दिए थे सोनल ने. और इतनी मादकता के बाद इस तरह के सवाल का जवाब सोचने की रश्मि की ज़रा भी इच्छा नहीं थी. वो तो बस इस पल को जी लेना चाहती थी. अपने एक एक रोम में महसूस हो रहे रोमांच को बिना ग्लानी के महसूस करना चाहती थी. फिर भी ये सवाल उसके मन को भी विचलित कर रहे थे. यदि रश्मी अपनी ननंद के साथ ये रिश्ता बनाये रखती है तो उसके पति विशाल का क्या होगा? अपने पति को छोड़कर वो सोनल के साथ क्या जीवन बिता सकती है? पर वो तो गलत होगा. आखिर विशाल उससे न जाने कितना ही प्यार करते है. और फिर उन्होंने उसे एक औरत होने का सम्मान दिलाया है जो शायद ही इस समाज में रश्मि जैसी औरत को कोई दिलाता. उसे एहसास था कि एक पत्नी होने का सौभाग्य उसे मिला है जो उसके जैसी औरतों के लिए बस एक सपना होता है. नहीं, वो विशाल को नहीं छोड़ सकती चाहे उसे सोनल के साथ जैसा भी लगा हो. पर सोनल के प्रति अपने आकर्षण का क्या करेगी वो? ये विचार और सवाल आते ही रश्मि ने उन्हें इस वक़्त नज़रंदाज़ करने की कोशिश करते हुए कहा, “हम कुछ न कुछ करेंगे सोनल” और फिर उसने सोनल के होंठो को अपने होंठो से चूसते हुए उसे दिलासा दिलाने की कोशिश की.

पर रश्मी का चुम्बन सोनल को दिलासा न दिला सका. रश्मी का लिंग अब नरम हो चूका था और अब भी सोनल की योनी में ही था. अपनी भाभी की साड़ी को पकड़कर उसके मखमली कपडे पर सुन्दर फूलो के प्रिंट को निहारती हुई सोनल भी कुछ विचारो में खो गयी थी. उसके दिल में अब एक चाहत घर कर गयी थी कि अब से उसकी भाभी सिर्फ और सिर्फ उसकी हो, किसी और की नहीं. पर वो अपने भैया के साथ ऐसा कैसे कर सकती है? जिस भाई और भाभी ने उसे इतना प्यार दिया था उन्ही का घर उजाड़ कर वो कैसे रह सकती है. वैसे भी अपने भाई का जीवन यदि उसने बर्बाद कर दिया तो ये समाज उसके और रश्मी भाभी के रिश्ते को स्वीकार नहीं करेगा. और फिर रश्मी को भी समाज में इज्ज़त नहीं दिला सकेगी वो जो उसके भाई के साथ रश्मी को रहते हुए मिलती थी. उफ्फ.. ये कैसी स्थिति में फंस गयी थी ये दोनों औरतें. करे तो करे भी क्या ये दोनों अब? फिर भी जब तक इन सवालों का जवाब नहीं मिल जाता तब तक दोनों साथ में खुश तो रह ही सकती है. शायद दोनों यही सोच रही थी और दोनों एक दुसरे की ओर मुस्कुरा कर देखने लगी.

सोनल ने सोच लिया कि जब भी मौका मिलेगा वो रश्मी भाभी के साथ वक़्त बिताएगी। उसे रश्मी के साथ अलग ही मजा आया था जो लड़को के साथ चुद कर नही आया।

शाम को उस दिन जब विशाल घर आये तो ननंद भाभी में एक बार फिर से मिठास देखकर वो बड़े खुश हुए. ननंद भाभी दोनों एक दुसरे की कितनी सहायता कर रही थी और कितनी ख़ुशी से चहकते हुए बात कर रही थी. दोनों के चेहरे पर चमक देखकर विशाल की चिंता दूर हो गयी थी. पर उन्हें कुछ कहाँ पता था.

दिन बित रहे थे और समय के साथ रश्मी और सोनल एक दुसरे के बेहद करीब आते जा रहे थे. ननंद भाभी एक दुसरे के लिए न सिर्फ कपडे पसंद करती बल्कि एक दुसरे को पहनाती भी थी. और कपडे पहनाते हुए जब दोनों एक दुसरे के स्तनों और लिंग को छूती तो कई बार उनके बीच की करीबी कामुक पलो में बदल जाती. ये सब विशाल से छिपकर होता था. विशाल तो बस यही सोचते थे कि ननंद भाभी पक्की सहेलियां बन गयी है. अब तो सोनल तय करती थी कि रश्मी कौनसी ब्रा और कौनसी साड़ी पहनेगी. और विशाल इन सबसे अनभिज्ञ थे. क्योंकि अपने पति के प्रति कृतज्ञ रश्मी अपने पति की भरपूर सेवा करती और वो सब कुछ करती जो एक पत्नी से अपेक्षित था. रश्मी जानती थी कि सोनल के साथ उसका रिश्ता हमेशा हमेशा के लिए नहीं रह सकता था. आखिर एक दिन उसकी ननंद सोनल को उसके घर भी जाना होगा, और जल्दी ही वो वक़्त आ गया, जब सोनल के वापिश घर आने के लिए आरती का फ़ोन आया।

रश्मी से बेहद प्यार करने लगी थी सोनल और शायद इसलिए उसने अपनी वापिसी से पहले एक रात उसने सुहागन के जोड़े में रश्मि के साथ अपनी सुहागरात मनाई थी. रश्मी लहंगा पहनी हुई थी और सोनल ने एक भारी लाल साड़ी. सोने से लदी भाभी और ननंद के बीच की वो हॉट रात दोनों के लिए यादगार थी. और उसके बाद दोनों कितना ही गले लग कर रोई भी थी.

पर शायद उन दोनों की किस्मत ही थी कि उनको अलग होना पड़ रहा था और लेकिन ननंद भाभी ने एक दुसरे से मिलने के बहाने अपना रिश्ता बनाकर एक दुसरे की बनी रहने का वादा किया।

इधर जया काकी और मोनिका ने मिलकर आरती से कमल को माफी दिलवा दी थी, लेकिन उसे क्वाटर में ही रखा, पहले वाला कमरा नही दिया गया,

अब कमल घर मे ही खाना खाता था और कभी भी आ जा सकता था, कमल धीरे धीरे फिर से आरति के पास जाने की कोशिस में था, क्योकि सोनल के आने के बाद दोनों को मनाना कठिन था, गर पहले आरती मान जाती है तो फिर सोनल भी मान ही जाएगी।

अब तो जया काकी और मोनिका भी उसके साथ थी जो अपनी कामुक बातो से आरती में वासना की आग जला रही थी, जिसको भुझाने के लिए सबसे बढ़िया हथियार उस समय कमल ही घर पर मौजूद था, इसलिए धीरे धीरे आरति फिर से कमल की तरफ आकर्षित होने लगी, और अपनी वासना के आगे हार मानकर कमल से चुद गयी, और एक बार सिलसिला शुरू होने पर उनका रूटीन बन गया हररोज चुदाई का, उस दिन आरति के साथ इतनी चुदाई के बाद कमल थक चुका था. इसलिए अपने कमरे में आ कर कमल नंगा ही अपने बिस्तर पर लेट गया और सो गया. कुछ देर बाद आरति ने आकर उसे जगाया.

"कमल... उठ... सोने से पहले पजामा तो पहन लेता. अपना लौड़ा सारी दुनिया में नुमाइश करने का इरादा है क्या"?

"चाची... नुमाइश के लिए दुनिया है लेकिन घर तो इसका आपके अंदर है".

आरति मुस्कुराई. उसने पल्लू हटा के उनकी नाभि चूमी फिर उनकी नाभि चाटने लगा. आरति ज़ोर से उसका सर दबाने लगी और उससे अपना पेट चटवाने लगी.

"कमल, जितना प्यार तुझे मेरे पेट को करना है कर ले. सोनल रास्ते में है।"

"चाची ये तो बुरी खबर है. आपकी चूत में तो आग लग जाएगी."

"सही कहा कमल... बहुत मिस करूँगी इस छोटे शेर को".

"चाची... तो एक बार... मेरा लंड चूसो ना".

"ज़रूर चूसूंगी, कमल... लेकिन वादा कर की तू अभी मेरे उपर या अंदर अपना माल नही गिराएगा".

"तो कहाँ गिराऊंगा... चाची?"

"यह मेरे पास एक शीशी है. उसमे अपना सारा माल गिरा देना. नहा धो कर आई हूँ. फिर से नही नहाना मुझे".

"ठीक है, चाची. अब चूसो ना प्लीज़".

आरति बिस्तर पर बैठ गयी. कमल के लंड को अपने दोनो हाथों में लेकर प्यार से बोली.

"ये महाशय तो थकते ही नहीं. इतनी चुदाई की, फिर भी शांत नही हुआ. बड़ा गुस्सैल लंड है".

फिर आरति ने उसका लंड चाटना शुरू कर दिया और प्यार से उसके टटटे सहलाने लगी.

कमल को बड़ा आनंद आ रहा था. चाची उसका लंड टट्टों से टोपे तक चाटती. एक बार आरति ने उसके लंड का छेद अपनी जीभ से छेड़ा, कमल के अंदर बिजली दौड़ गयी.

"चाची, उधर ही चाटो ना".

"बदमाश... चाची से अपना छेद चटवाता है... शर्म नही आती तुझे?"

कमल मुस्कुराया और चाची के बाल सहलाने लगा.

आरति भी मुस्कुराई और उसके छेद को अपनी जीभ से चाटने लगी.

"बहुत अच्छा लग रहा है, चाची... रुकना मत".

कमल नंगा खड़ा अपना छेद चटवा रहा था. आरति उसके टटटे सहला रही थी.
 
कमल को इतना आनंद आ रहा था. उसने आरति की चूचियाँ ब्लाउस के उपर से ही पकड़ ली और कस-कस के दबाने लगा.

"आराम से कमल... साड़ी खराब मत कर".

"चाची प्लीज़... क्या मैं आपका मुँह चोद सकता हूँ"?

"नही!"

"प्लीज़ चाची... अभी आप हररोज नही मिलोगी मुझे प्लीज़ करने दो".

"उफ्फ... ठीक है कर ले... लेकिन अगर तूने मेरे मुँह में अपना माल छोड़ा, तो याद रखना, तुझे कभी अपने जिस्म पर हाथ नही रखने दूँगी".

"ठीक है चाची".

कमल नीचे झुक कर आरति के होंठ चूमने लगा. खूब देर उनका रसपान किया.

आरति तब तक उसके टटटे सहला रही थी. फिर कमल ने अपना लंड आरती के मुँह के सामने ले आया. आरती ने भी अपना मुँह हल्का सा खोला.

कमल ने आरती का चेहरा पकड़ा और अपना लंड उनके मुँह में सरका दिया. आरति जीभ से उसका लंड गीला कर रही थी. साथ ही उसके टट्टो की मसाज कर रही थी.

कमल को बहुत आनंद आ रहा था. कुछ देर बाद कमल ने अपने कूल्हे आगे-पीछे करने शुरू किए. उनकी मुँह चुदाई शुरू हो गयी थी. कमल प्यार से उनका मुँह चोद रहा था. लेकिन ख़याल रख रहा था की अपना माल उनके मुँह में ना गिरा दे.

आरति खूब मज़े ले रही थी. एक हाथ से वो उसके टटटे सहला रही थी. तभी कमल ने उनका दूसरा हाथ अपने कूल्हे पर महसूस किया. आरती कमल के कूल्हे अपने नाखूनो से नोचने लगी. कमल को मज़ा आ रहा था. करीब 15 मिनिट ऐसे ही चला.

अचानक आरती की उंगली कमल के पिछवाड़े के छेद पर पड़ी और वो उसे अपनी उंगली से मलने लगी.

कमल को लगा वो छूटने वाला है.

"चाची मैं.... मैं... मैं छूट रहा हूँ".

आरति ने तुरंत अपने मुँह से उसका लंड निकाला और एक हाथ से हिलाने लगी. दूसरे हाथ से शीशी का ढक्कन खोला और बोली, "ले कमल.. इसमे झड़ना".

"चाची आप हिलाती रहो... मैं छूटने वाला हूँ".

चाची ने वैसा ही किया. जल्दी ही कमल छूटा.

उसका माल लंड से निकल कर शीशी को भरने लगा. कमल 20 सेकेंड छूटा जिससे पूरी शीशी भर गयी.

छूटने के बाद कमल बिस्तर पर गिर पड़ा और आराम करने लग. आरती साड़ी ठीक करने लगी.

थोड़ी देर बाद आरती उसके पास आई और शीशी को देख कर बोली.

"हाय राम! कमल तू कितना माल छोड़ता है. एक बार में. इतने माल से तो तू 10 औरतों को एक साथ पेट से कर सकता है".

"मुझे तो सिर्फ़ एक ही औरत को पेट से करना है". कमल आरति के पेट पर हाथ फिराते हुए बोला.

"हट.. बदमाश... मुझे पेट से करेगा तू?... अपनी चाची को पेट से करेगा?... अपनी नाजायज़ औलाद देगा मुझे?"

"क्यों नही चाची... आप इस दुनिया की सबसे उत्तम औरत हो... आप नही चाहोगी की आपके साथ जो बच्चा पैदा करे वो भी उत्तम हो?... आप नही चाहोगी की आपका बेटा मेरे जैसा मस्त लंड पाए?"

"बिल्कुल चाहूँगी, कमल... लेकिन एक नाजायज़ औलाद को जन्म नही देना मुझे.... ये बता... तुझे सच में मैं उत्तम लगती हूँ?"

"चाची... आप तो सर्व-गुण संपन्न हो. आप खूबसूरत हो. सेक्सी हो. अच्छा खाना बनाती हो. कौन नही चाहेगा आपसे शादी करना. और आपका ये गोरा मुलायम पेट और ये प्यारी सी नाभि.... कौन मर्द नही चाहेगा की उसका बच्चा इस पेट में पले... चाची अगर आपकी बहन होती तो मैं उससे ज़रूर शादी कर लेता".

आरती मुस्कुराई और उसे आके चूम लिया.

"चल... तेरे चाचा आते ही होंगे. कपड़े पहन ले".

आरति इतना कहके चली गयी.

थोड़ी देर बाद रवि आ गये और खाना खाने के लिए।

कमल को भी वही बुलाया गया. टेबल पे आरती और रवि बैठे थे. जया काकी खाना बना रही थी.

"मैं काकी की ज़रा मदद करती हूँ." आरती रवि से बोली.

आरती किचन में आ गयी और जया की हेल्प करने लगी। तभी किचन में कमल भी किसी बहाने से आकर आरती के पीछे खड़ा हो गया. फिर आरति की कमर पर अपना हाथ रख दिया.

आरती चौंक उठी और पीछे घूमी तो कमल ने उन्हे झट से चूम लिया.

वो कमल से अलग हुई और बोली "कमल... यहाँ नही... तेरे अंकल बगल वाले हाल में ही हैं"

"चाची आप खाना बनाइए... मुझे अब आपकी चूत तो अगले कई दिनो तक नही मिलेगी... अब ऐसे ही मज़े लेने पड़ेंगे"

आरती ने चेहरे से नाराज़गी जताई पर वो खाना बनाने लग गयी. जया काकी बाहर हाल में टेबल पर प्लेट्स लगाने चली गयी।

कमल ने अपना हाथ सरका कर उनके पेट पर ले गया और नाभि से खेलने लगा.

"एक दिन देखना इस पेट से मेरी औलदें पैदा होंगी"

फिर कमल अपना हाथ साड़ी के अंदर सरका कर आरति की चूत को रगड़ने लगा.

दूसरे हाथ से कमल चूचियाँ दबाने लगा.

"कमल... नही... तेरे चाचा को सब सुनाई दे जाएगा".

लेकिन आरति की चूत गीली होने लगी थी.

"कमल ये वक़्त और जगह नही है ये सब करने की".

"तो चूत क्यूँ गीली है तेरी... आरती".आरती उसकी तरफ गुस्से से देखने लगी.

आरती ने उसका हाथ अपनी चड्डी में से निकाल दिया और खाना लेकर डाइनिंग टेबल पर चली गई.

कमल थोड़ी देर बाद पानी लेकर डाइनिंग टेबल पर पहुंचा और आरती के बगल में बैठ गया. सब लोग खाना खाने लगे और कमल ने धीरे से आरती के पेट पर हाथ रख दिया. आरती ने उसे फिर गुस्से की नजरों से देखा. लेकिन कमल ने अपना हाथ नहीं हटाया और प्यार से उनका पेट चलाने लगा. नाभि के इर्द-गिर्द गोल गोल अपनी उंगलियों से घुमा घुमा के कमल आनंद ले रहा था. फिर कमल ने एक चम्मच गिरने के बहाने से नीचे झुका और पल्लू हटा के उनका पेट चूम लिया. आरति ने उसका चेहरा अपने पेट से हटाया और खाना खाने लग गई. कमल को मालूम था कि अगले कुछ दिनों तक आरति की खूबसूरत चुत का स्वाद उसे नसीब नहीं होगा. इसलिए उसने सोचा कि कुछ दिन उनकी चड्डी से ही काम चलाना पड़ेगा. उससे रुका नहीं गया और कमल धीरे-धीरे आरती की साड़ी उठाने लगा. उनकी गोरी सुडौल जांघें उसे ललचा रही थी. कमल ने उनकी जांघ पर अपना हाथ रख दिया. बहुत ही मुलायम त्वचा थी.आरती ने झट से उसका हाथ अपने हाथ से पकड़ लिया और आंखों से इशारा किया रुकने का. लेकिन कमल कहां मानने वाला था. जैसे ही आरती ने उसका हाथ छोड़ा कमल धीरे-धीरे फिर से आरती की चड्डी की तरफ अपना हाथ बढ़ाने लगा. उनकी चड्डी के पास पहुंचकर कमल आरती की चूत सहलाने लगा. चड्डी बहुत गीली थी. आरति की आंखें गुस्से से तमतमा रही थी. लेकिन कमल ने एक ना सुनते हुए धीरे धीरे आरति की चड्डी नीचे उतारने लगा. थोड़ी ही देर में आरती की चड्डी कमल ने उनके जिस्म से अलग कर दी और किसी बहाने से नीचे झुक कर उनकी चड्डी अपनी जेब में रख ली. आरती साड़ी के नीचे अब पूरी नंगी थी. खैर कमल का रात का इंतजाम तो हो गया. उसने सोचा आरति की चड्डी की महक लेते हुए मीठी नींद सोयगा. फिर सब खाना खाकर सोने चले गए. कमल लेटे लेटे आरती की चड्डी की महक लेते हुए अपना लंड हिला रहा था. तभी किसी ने उसके दरवाजे पर खटखटाया. कमल ने दरवाजा खोला तो सामने आरती खड़ी थी और गुस्से से उसे देख रही थी.

तभी आरती ने उसके गाल पर जोर का थप्पड़ रसीद कर दिया.

"तूने क्या मुझे अपनी रंडी समझ रखा है? जब आकर मेरी चूत मैं अपनी उंगली करेगा या सब की मौजूदगी में मेरी चड्डी उतार के मुझे नंगा करेगा? शुक्र मना कि तेरे चाचा को नहीं पता चला. पहले भी तुझे बोला था मेरे साथ कोई जोर जबरदस्ती नहीं करना. मैं कोई ढाई रूपए वाली रंडी नहीं हूं जो तू मेरे साथ अपनी मनमानी करें. बेशर्म मुझे पेट से करना चाहता था ना तू. आइंदा मुझे छूना भी मत नहीं तो मैं पुलिस में जाऊंगी और तेरी शिकायत करूंगी. तू मेरी चूत के जितने मजे लेना चाहता था ले चुका. अब बस मेरी चड्डी पर ही मुंह मारना. भड़वा साला मुझे अपनी रंडी समझता है".
 
कमल को यकीन नहीं हुआ कि आरती इतना बुरा मान गई है. वो आरती को मनाने उनके पीछे गया. आरती ने उसे धमकाया की वह सच में पुलिस के पास जाएंगे अगर उसने उन्हें छुआ भी तो. फिर आरती अपने कमरे में चली गई और कमल भी अपने कमरे में आ गया. आरती की चड्डी संभालकर अंदर रख दी और बिना हस्तमैथुन किए सो गया.

अगले दिन सोनल वापिश आ गयी। सोनल चुप चुप रहने लगी थी, उसने कमल को घर मे देख कर भी कोई रिएक्ट नही किया। आरती और कमल दोनो सोनल के बेहव से हैरत में थे।

अगले 10 दिन तक कमल की आरती से बात नहीं हुई. वह उसे देखकर इग्नोर करती. खाना खाने को बुलाने के लिए भी जया से कहती. आरती कमल से नाराज थी. और इस नाराजगी के चलते कमल इतने दिनों किसी से भी चुदाई नहीं किया. एक रात पानी पीने के लिए जब कमल उठा तो न जाने क्यों रसोई के दरवाजे से घर के अंदर चला गया, वहा आरती के कमरे से कामुक आवाजें आ रही थी. कमल दरवाजे पर कान लगाकर खड़ा हो गया.

"हां जानू.... हां बस वही पर... बस उधर ही... प्लीज रुकना मत.... चोदो मुझे.... चोदो मुझे... मेरी चूत की प्यास बुझाओ"

"मेरी जान.... हा.... हां.... मैं छूट रहा हूं.... मैं छूट रहा हूं"

रवि छूट के आरती के जिस्म से अलग हो गए और खर्राटे मार के सोने लगे. आरती रोने लगी.

"10 दिन से मेरा संभोग अधूरा रह जाता है... अपने कमल से कुछ सीख... बिना मेरा पानी निकाले छूटता नहीं था... बेचारा आज कल बस हस्तमैथुन ही कर पा रहा होगा. लेकिन गलती उसी की ही है... पर माफी भी तो मांग सकता है ना".

उसके बाद आरती सो गई और कमल भी अपने कमरे में आकर सो गया. सुबह हुई तो रवि काम पर चला गया और सोनल स्कूल। रवि भी कॉलेज जाने के लिए तैयार हो रहा था. बाहर आया तो आरती के कमरे की तरफ गया. आरती नहा कर आई थी और साड़ी पहनकर अपने बाल सवार रही थी. कमल धीरे से आकर जमीन पर बैठ गया और अपना सर उनके पांव पर लगा दिया.

"यह क्या कर रहा है कमल?"

"चाची प्लीज मुझे माफ कर दीजिए. मुझसे गलती हो गई. आप की मर्जी के बिना अब कभी मैं आपको हाथ भी नहीं लगाऊंगा"

आरती ने उसे उठने को कहा फिर उसे अपने गले से लगा लिया.

"जा कमल एक बार फिर मैंने तुझे माफ किया. लेकिन वादा कर ऐसी हरकत तू दोबारा कभी नहीं करेगा".

"वादा करता हूं चाची... आप जब से नाराज हुई तब से मैं हस्तमैथुन भी नहीं कर पाया हूं"

आरती को कस के गले लगा लिया और फूट-फूट कर रोने लगा.

"रो मत कमल... तुझे सबक सिखाना जरूरी था"

"चाची आई लव यू... आपके बिना मैं जी नहीं पाऊंगा".

"आई लव यू टू कमल"

फिर आरती ने उसे चूम लिया. कमल भी आरती को प्यार से चूमने लगा.

"बड़ा तड़पाया मैंने मेरे कमल को.... ले... जितना प्यार करना है कर ले".

आरति ने पल्लू खोल दिया और उनका गोरा पेट कमल के सामने था. कमल ने आरति की नाभि को चूम लिया और खूब देर तक चूमता रहा. फिर प्यार से उनका पेट सहलाने लगा और फिर उनका पेट अपने चेहरे से लगा लिया.

"चल कमल अब तू कॉलेज जा और रात को मुझे तेरी जरूरत पड़ेगी".

"क्या हुआ चाची?"

" 10 दिन की प्यासी हूं समझ जा". आरती ने कमल को आंख मारते हुए बोला.

कमल खुशी-खुशी कॉलेज चला गया. और रात का बेसब्री से इंतजार करने लगा. कॉलेज से वापस आया तो जया काकी खाना बना रही थी.

कमल मुंह हाथ धोकर घर मे आया और टीवी देखने लगा. थोड़ी देर बाद खाना लग गया.कमल और आरती खाना खाने लगे. खाना खाने के बाद आरती उसके पास आई और बोली "तैयार रहना तुझे कॉल करूंगी थोड़ी देर में".

रात को सब सोने चले गए. उसे मालूम था कि शायद रवि और आरती की चुदाई शुरू हो गई होगी. करीबन 1 घंटे बाद उसे आरती का फोन आया.

"कमल मेरे कमरे में आ जा".

कमल उत्साहित होकर आरती के कमरे में गया. वहां रवि भी सो रहा था और नीचे गद्दा बिछा हुआ था.

"आजा कमल... गद्दे पर लेट जाओ".

"लेकिन चाचा?"

"अरे तेरे चाचा को मैंने थोड़ी शराब पिला दी. सुबह तक नहीं उठेंगे."

 
कमल कपड़े उतारकर नंगा हो गया और लंड हाथ में लेकर धीरे धीरे हिलाने लगा. आरती ने भी अपने सारे कपड़े उतार दिए और उसके लंड को ललचाई निगाहों से देखने लगी.

"कमल तरस गई हूं तेरे लंड के लिए. चूत मेरी बड़ी प्यासी है. आज की प्यास बुझा जा".

"जरूर चाची. आप गद्दे पर लेट जाइए और बंदा आप की खिदमत में हाजिर है".

चाची गद्दे पर लेट गई. और कमल अपना मुंह आरती की चूत के पास ले गया. कमल ने गहरी सांस अंदर ली तो उसकी मादक खुशबू से उसका लंड पूरे शबाब पर आ गया. कमल ने अपनी जीभ निकाली और प्यार से आरती की चूत चाटने लगा. बहुत ही गर्म थी उन

सकी चूत. और जल्द ही चूत से पानी बहने लगा. कमल सारा पानी चट कर गया. आरती की कामुक आवाजें निकाल रही थी और अपनी चूचियां सहला रही थी. कमल अपना काम करता रहा. फिर कमल ने अपनी उंगली ली और उनका दाना रगड़ने लगा. आरती तो मानो पागल ही हो गई. उनकी सांसे तेज हो गई.

"हां कमल बस मुझे चाटता रह. प्लीज रुकना मत. मुझे छूटने मैं मेरी मदद कर.... आह.... आह.... आह... हां मेरे राजा. काश तू मेरा पति होता. चाट मुझे. चाट मुझे"

कमल एक हाथ से उनका दाना रगड़ रहा था और दूसरे हाथ से उनकी चूचियां मसल रहा था. तभी आरती के अंदर से एक आवाज आई "आह" की और आरती छूटने लगी. आरती खूब देर छूटी और फिर शांत हो गई. कमल ऊपर आ गया और आरति को चूमने लगा. आरती भी उसे चूमने लगी. कमल ने देखा आरती की आंखों से आंसू बह रहे थे. कमल ने प्यार से उनकी आंखें चूम ली और आंसू पी गया.

"कमल मैं 10 दिन की प्यासी हूं. मेरे अंदर आग लगी हुई थी. आग बुझाने के लिए शुक्रिया. अरे यह क्या, तेरा छोटा शेर तो बड़ा उछल रहा है."

आरती उसे उठने को बोली. खुद भी उठ गयी. कमल का लंड मुंह में लिया और प्यार से चूसने लगी. कभी-कभी उसके लंड के छेद को वह अपनी जीभ से छेड़ती तो कमल को आनंद आ जाता. कमल भी 10 दिन से कुछ नहीं किया था. उसके अंडे में बहुत माल था.

"चाची प्लीज अब चोदने दो ना. आप चुस्ती रही तो मैं आपके मुंह में ही झड़ जाऊंगा"

आरती ने उसका लंड अपने मुंह से निकाला और गद्दे पर लेट गई. कमल उनके ऊपर चढ़ गया, अपना लंड उनकी चूत के मुंह पर रखा और एक ठोकर मारी जिस से उसका पूरा लंड एक ही बार में नंगी चूत में जा धसा.

आरती के मुंह से कामुक आवाजें आने लगी. कमल ने धीरे धीरे अपना लंड आगे पीछे करना चालू किया. चुदाई शुरू हो चुकी थी. कमल ने आरती को चूम लिया और फिर उनकी एक चूचुक मुंह में लेकर चूसने लगा.

"हां. चोद मेरे राजा. चोद मेरे राजा. बना दे मेरी चूत का भोसड़ा".

कमल कस के आरती को चोदने लगा. आरती खूब मज़े लेने लगी और गंदी गंदी गालियां देने लगी.

"आह मादड़चोद.... ओ बहनचोद.... चोद रे साले मादरजात.... खुद को मेरी चूत के लायक साबित कर".

"कुत्तिया. रंडी. छिनाल. पति से चुदवाती है और अब अपने बेटे समान भतीजे से चुदवा रही है. मेरी रांड"

आरती ने उसे कस के पकड़ लिया, अपने पैर कमल के चूतड़ों पर रख दिए उसे कस के चोदने को कहने लगी. कमल ने अपनी रफ़्तार बढ़ा दी. अब आरती की चूत से फच फच फच फच की आवाज आने लगी. तभी अचानक आरती छूटने लगी. कमल ने अपनी रफ्तार थोड़ी और बढ़ाई और आरती को छूटने में मदद की. कमल ने आरती को चूम लिया. कमल के अंडे आरती के चूतड़ों पर तबला बजा रहे थे. बहुत ही कामुक माहौल था. आरती पसीने से तर थे. फिर भी कमल को और चोदने को कहती रही. तभी कमल को लगा कि वो भी छूटने वाला है. उसने आरती को कस के पकड़ लिया.

"चाची मैं छूटने वाला हूं. अपना माल कहां निकाल दूं?"

"जहां भी तेरा मन करें निकाल दे. तूने खुद को मेरे जिस्म के काबिल साबित कर दिया है".

कमल ने आरती को चूम लिया और फिर उनकी चूत में छूटने लगा. 10 दिन का माल इतना ज्यादा था कि उनकी चूत से उसका माल बहने लगा और जमीन पर इकट्ठा होने लगा. कमल 20 सेकंड तक छूटता रहा और आरती प्यार से उसके अंडे सहला रही थी.

वो दोनों बहुत थक गए थे और एक दूसरे की बाहों में ही आराम करने लगे. कमल का लंड अभी भी आरती की चूत मे ही था और माल छोड़ रहा था.

"चाची, इतना माल कितनी औरतों को पेट से कर सकता है?"

कमल ने मुस्कुराते हुए पूछा.

"कम से कम 25-30 औरतों के लिए तो इतना माल काफी होगा".

"चाची, थैंक यू. आपके बिना तो यह लंड पागल ही हो गया था. मुझे लगता है आपकी चूत ही इसका असली घर है".

"अच्छा बेटा जी. और अपना यह माल जो छोड़ रहा है उसका घर कहां है?"

कमल मुस्कुराया और आरती के पेट को चूम लिया.

"यही है मेरे माल की असली जगह. आपके पेट में. 9 महीने अपना घर बनाएगा उसको"

"हट बदमाश. मुझे मां बनाएगा तू? और बाप कौन होगा. तू या तेरा चाचा?"

"आप जैसा बोलो चाची. मैं तो आपसे शादी भी कर लूंगा. आई लव यू आरती".

"आई लव यू टू कमल. तुझे एक खुशखबरी सुनाऊं?"

"क्या हुआ चाची? क्या सच में आप पेट से हो?"

"अरे नहीं रे पगले. तेरे चाचा अगले हफ्ते 2 महीने के लिए मुंबई जा रहे हैं और सोनल भी 1 महीने के लिए फिर से अपने चाचा के घर जा रही हैं।".

"मतलब?"

"मतलब तू और मैं 1 महीने के लिए इस घर में अकेले होंगे".

"सच में चाची?" कमल की खुशी का ठिकाना नहीं रहा और उसने आरती को चूम लिया.

"मैं इंतजार नहीं कर सकता, चाची आपके साथ अकेले वक्त बिताने का".

"अच्छा ऐसा क्या करेगा तुम मेरे साथ?"

"बस चाची. इतना चोदूंगा की एक साथ आप आधे दर्जन बच्चों की मां बन जाओगी".

आरती हंसने लगी और उसे चूम लिया. कमल का मन था कि आज आरती से चिपक कर ही सो जाये.

"उठ जा कमल कपड़े पहन ले और अपने कमरे में जाकर सो जा".

"चाची प्लीज सोने दो ना आज अपने साथ. बड़े दिन हो गए हैं".

"कमल हफ्ता भर सब्र कर. खूब मस्ती करेंगे हम दिन में. रात में चिपक कर सोएंगे एक साथ".

कमल ने आरति के होठों को चूम लिया और उठ गया. कमल अपने कपड़े पहनने लग गया तो देखा आरती की चूत काफी खुल गई थी.

"देखो चाची असली मर्द से चोदने का असर. आपकी चूत भी बंद होने का नाम नहीं ले रही".

आरती हंसने लगी और कमल अपने कमरे में चला गया और आरती के ख्यालों में खोया खोया ही सो गया.

आरती ने कमल को कुछ दिन अपने पर संयम बरतने को कहा, आरती ने कमल को तड़पाने का प्लान बनाया जिससे उसमे हवस की आग भड़क जाए और कमल जब मौका मिले तो रगड़ कर चुदाई करे उसकी।

आरती ने कमल को समझा दिया कि जब भी मौका मिले तो ऐसे रियेक्ट करे कि पहली बार सेक्स कर रहे हो , आरती ने इस एक महीने में अपनी सारी फैंटसी पूरी करने का प्लान बनाया। कमल ने भी सोच लिया कि अबसे वो आरती के अनुसार ही सब काम करेगा, उसका मतलब आरति और सोनल को फिर काबू करने का था, उसका मकसद अब इस घर पर राज करने का था, उसके लिए पहले आरती को खुश कर कर सोनल को पाना था,

कुछ दिन के बाद कि बात है, कमल का लंड रात को अचानक खड़ा हो गया और उसकी इच्छा हुई की वो आरती चाची के बाथरूम में जा कर उनकी पैंटी और ब्रा सूँघ कर मुठ मारे। कमल चुप-चाप बाथरूम की ओर जाने लगा तो उसे आरती के कमरे से हल्की सी लाइट और कुछ आवाज़ सुनाई दी। कमल भी धड़कते दिल से आरती के दरवाजे से कान लगा कर सुनने लगा। अंदर आरती चुदाई में मस्त हो कर रवि को बहनचोद और मादरचोद की गालियाँ दे रही थी।

कमल से रहा नहीं गया। उसने सोचा यह मौका है जब वो आरती को चुदते हुए देख सकेगा और मजा ले पायेगा और कमल सीधा बालकोनी की ओर गया क्योंकि उसे मालूम था वहाँ की खिड़की पर पर्दा नहीं है और वहाँ से उसे सब दिखाई देगा। कमल चुपचाप दबे पैरों से बालकोनी में गया और अंदर का सीन देख कर तो उसे जैसे मन की इच्छा मिल गयी। आरती अपनी दोनों टांगों को फैला कर लेटी हुई थी और रवि उनकी चूत में भीड़ा हुआ था।

आरती नशे में थी और कह रही थी,

मादरचोद कभी तो मेरी चूत को ठंडा करा कर, बस भोंसड़ी वाले अपना लंड डाल कर अपने आप को ठंडा कर लेता है। आज मादरचोद अगर तूने मेरी चूत को ठंडा नहीं किया तो मैं बज़ार में रंडी बन कर चुदवाऊँगी।

रवि भी अपनी और से पूरी ताकत लगा रहा था और कह रहा था कि साली रंडी कितना चोदता हूँ तुझे, पर तेरी चूत की प्यास ही खत्म नहीं होती और तेरा बदन इतना मस्त है की चार पाँच शॉट में ही मेरा लंड झड़ जाता है और इतना बोलते-बोलते ही रवि अपना लंड आरती की चूत में झाड़ कर लुड़क गया।

आरती बोलती रहीं कि पता नहीं कब मेरी चूत की प्यास ठंडी होगी, ये गाँडू तो मुझे ठंडा ही नहीं कर पाता है।

आरती और रवि को इस तरह गंदी भाषा में गालियाँ देते हुए बातें करते सुनकर कमल का लंड तन कर खड़ा हो गया था। उसकी बड़ी इच्छा करी कि मैं अंदर जाऊँ और आरती को पकड़ कर खूब चोदूँ।

कमल अपना लंड हाथ में पकड़ कर वापस अपने कमरे की और चल दिया। रास्ते में सोनल का कमरा पड़ता था। आरती की चुदाई देखने के बाद कमल का लंड फड़फड़ा रहा था। पता नहीं कमल किस ख्याल में सोनल के कमरे में घुस गया। उसे जब ध्यान आया तो उसने अपने आप को सोनल के बिस्तर के पास खड़ा पाया। सोनल इस समय अपनी नाईटी में आराम से सो रही थी जो उसके चुतड़ों को सिर्फ़ आधा ढके हुई थी। कमल के सामने अभी भी आरती की चुदाई का सीन चल रहा था और इसी गर्मी में उसने देखा कि सोनल की मस्त चिकनी-चिकनी टाँगें और फुले हुए चूतड़ जो उसने पैंटी में छुपाये हुए थे। उस से रहा नहीं गया और वो बिस्तर के साइड में हो कर उसकी चिकनी टाँगों को अपने होठों से चूमने लगा, और धीरे-धीरे उसकी गाँड की दरार में अपने होंठ और नाक रख दी और अपने होंठों से किस करने लगा। इतने में सोनल कुछ कुनमुनाई और कमल डर के मारे चुप चाप कमरे से निकल गया।

उसके बाद कमल बाथरूम गया और आरति की पैंटी और ब्रा अपने रूम में ला कर सूँघते और चाटते हुए खूब मुठ मारी, मुठ मारते-मारते कमल आरति की ब्रा अपने होंठों से लगा कर सो गया।

अगली सुबह में आरती ने उसे झकझोड़ के जगाया और बोली,कमल आज कालेज क्यों नहीं गया? देख सुबह के दस बज रहे हैं, तेरे चाचा को तो आज सुबह महीने भर के लिये मुंबई जाना था, वो तो कभी के चले भी गये और सोनल भी अपने चाचा के घर चली गई है, मैं भी थक रही हूँ, तू नहा धो के नाश्ता कर ले तो मैं भी थोड़ा लेटूँगी।

कमल ने जल्दी से उठ कर सबसे पहले आरती की पैंटी और ब्रा ढूँढी पर उसे कहीं नहीं मिली। उसकी तो डर के मारे सिट्टी पिट्टी गुम हो गई, और वो सोचने लगा की अगर आरती को पता पड़ गया तो आरती नाराज होकर उसकी खूब पिटाई करेंगी।

कमल चुपचाप अपने सारे काम पूरे करके टीवी देखने बैठ गया और उधर आरती नाश्ता देकर अंदर जा कर लेट गयीं। थोड़ी देर बाद आवाज दे कर कमल को अपने कमरे में बुलाया, और बोली कमल मेरा जरा बदन दबा दे।

 
उस समय आरती सिर्फ़ ब्लाऊज़ और पेटीकोट में थीं और कहने के बाद पेट के बल हो कर उल्टी लेट गई। आरति ने अपने ब्लाऊज़ का सिर्फ़ एक हुक छोड़ कर सारे हुक खोले हुए थे और अपना पेटीकोट भी कुछ

ज्यादा ही नीचे कर के बाँधा हुआ था जिस से उनकी गाँड की दरार साफ नज़र आ रही थी। कमल के सामने वो चूतड़ थे जिसे सिर्फ़ देख कर ही उसका लंड खड़ा हो जाता था और आरती तो अपना पूरा बदन उस को दिखाते हुए मसलने को कह रही थी। कमल बिना देर करे चुपचाप आरती के साईड में बैठ कर धीरे-धीरे उनका बदन दबाने लगा, उनके चिकने बदन को छूते ही उसका लंड तन कर खड़ा हो गया। जब पेटीकोट के ऊपर से आरती के चूतड़ दबाये तो लंड एक दम मस्त हो गया। पेटीकोट के ऊपर से ही आरती के चूतड़

दबा कर मालूम पड़ गया था कि गाँड वाकय में बहुत गदरायी हुई और ठोस है।

थोड़ी देर बाद आरती बोली, अरे कमल,

जरा तेल लगा कर जोर से जरा अच्छी तरह से मालिश कर।

कमल ने कहा, चाची तेल से आपका ब्लाऊज़

खराब हो जायेगा, आप अपना ब्लाऊज़ खोल दो।

आरती बोली, कमल मैं तो लेटी हूँ,

तू मेरे पीछे से ब्लाऊज के हुक खोल के साईड में

कर दे।

कमल बड़े धीरे-धीरे से उनके ब्लाऊज के हुक खोले और अब आरती की नंगी पीठ पर सिर्फ़ काली ब्रा के स्ट्रैप दिख रहे थे। कमल ने थोड़ा सा तेल अपने हाथों पर लेकर आरती की पीठ पर मलना चालू किया पर बार-बार आरती की काली ब्रा के स्ट्रैप दिक्कत दे रहे थे। कमल ने आरती को बोला कि चाची आपकी पूरी ब्रा खराब हो रही है और मालिश करने में भी दिक्कत हो रही है।

तब आरती बोली कि तू मेरे ब्रा के स्ट्रैप खोल दे।

आरती के मुँह से यह सुन कर उसका लंड तो झटके लेने लगा। उसने भी बड़े ही प्यार से ब्रा के हुक खोल दिये। कमल उस नंगी पीठ पर धीरे-धीरे तेल से

मालिश करने लगा।

थोड़ी देर बाद आरति बोली,कमल जरा मेरे नीचे भी मालिश कर दे।

कमल ने कहा, चाची कहाँ करूँ?

तो आरती बिना किसी शरम के बोलीं की

मेरे चुतड़ों की और किसकी।

कमल ने कहा, पर उसके लिए तो आपका पेटीकोट उतारना पड़ेगा।

तब आरती बोली, जा कर अच्छे से पहले दरवाजा बंद कर आ।

कमल जल्दी से जाके दरवाजा बंद कर के आया तो देखा आरती पहले से ही अपना पेटीकोट उतार कर पिंक पैंटी और काली ब्रा को अपने हाथों से दबाय, पेट के बल उल्टी बिस्तर पर लेटी हुई थीं। कमल तेल लेकर धीरे-धीरे आरती की मस्त टाँगों की और उन मस्ताने गदराये चूतड़ों की मालिश चालू कर दी।

मालिश करते-करते जब कमल आरती की जाँघों पर पहुँचा तो उसके हाथ बार-बार पैंटी के ऊपर से आरती की कसी हुई चूत की मछलियों से टच हो रहे थे जो उसे एक अजीब तरह का आनन्द दे रहे थे। कमल को पता नहीं क्या सूझा, उसने आरती की पैंटी के साइड से अपनी एक उंगली धीरे-धीरे अंदर डाली और आरती की चूत पर उंगली फेरने लगा। आरती की चूत एक दम बिना बाल की थी और उसकी साफ़्टनैस से मालूम हो रहा था की आरती शेव नहीं बल्कि हेयर रिमूवर से अपनी चूत के बाल साफ़ करी थीं।

तभी अचानक आरती सीधी हुई और अपनी काली ब्रा को छोड़ के एक चाँटा कमल के गाल पर मार दिया और बोली, मादरचोद, तुझे शरम नहीं आती मेरी चूत में उंगली डालते हुए।

कमल समझ गया कि आरती अपनी कोई फैंटेसी पूरी कर रही है तो उसने भी वैसे ही नाटक करते हुए साथ देने की सोची।

जब आरती उठी उस समय उसे अपनी काली ब्रा का ध्यान नहीं रहा और ब्रा के हुक पहले से ही खुले होने के कारण आरती की वो मस्त गोरी-गोरी चूचीयाँ जिसपे भूरे रंग के बड़े से निप्पल थे, कमल के सामने पूरी नंगी हो गई और कमल चाँटे की परवाह किये बिना आरती की मस्त चूचीयाँ देखता रहा। आरती ने भी उन्हें छुपाने की कोई कोशिश नहीं की, बल्कि एक और चाँटा मारते हुए बोलीं, मादरचोद, बहन के लौड़े,

तू मुझे क्या चूतिया समझता है, कल रात को

मेरी पैंटी और ब्रा तेरे तकिये पर कैसे पहुँच गई,

बता सच-सच मदरचोद, मैने मना किया था ना कि कुछ दिन रुक जा फिर मेरी पैंटी और ब्रा के साथ क्या कर रहा था?

आरती इस तरह की भाषा में उसके साथ बात करेगी ये उम्मीद कमल ने नही की थी और इस वक्त उनका गुस्सा देख कर उसने डरते-डरते बताया कि, कल रात को जब चाचा आपको प्यार कर रहे थे, उस समय मैंने आपको देखा था और पता नहीं, आप उस समय

इतनी सुंदर लग रही थीं कि बाथरूम में जा कर आपकी पैंटी और ब्रा लेकर अपने बिस्तर पर आ गया और आपकी पैंटी और ब्रा को सूँघते हुए और चाटते हुए अपने हाथ से मैंने खूब मुठ मारी।

इस पर आरती ने एक चाँटा और मारा और बोलीं, बहनचोद मुझे तो तूने नंगा देख लिया चुदवाते हुए अब तू अपने कपड़े उतार के मेरे समने पूर नंगा हो के दिखा,मैं देखूँ तो सही आखिर कितनी आग लगी है तेरे लंड में!

उस समय आरती की चूचियाँ देख कर कमल का लंड पूरा तना हुआ था। आरती ने आगे बढ़ कर अपने लिये एक सिगरेट जलाई और कमल का

पायजामा खोल दिया और उसका सढ़े आठ इंच लम्बा और ढाई इंच मोट लौड़ा आरती की आँखों के सामने झूलने लगा। आरती की आँखें फैल गयीं और वोह बस इतना ही बोली, मादरचोद! इंसान का लंड है की घोड़े का,अभी तक छुपा के क्यो रखा था, पहले क्यों नहीं दिखाया, इस लंड को देख कर तो कोई भी औरत नंगी हो कर अपनी चूत उछाल- उछाल कर चुदवायेगी!

ये बोलते-बालते उसके लंड को आरती ने अपने हाथ में ले लिया और बड़े प्यार से अपना हाथ आगे-पीछे करते हुए उसे देखने लगी।।

इस से पहले कि कमल कुछ बोल पाता, उसके लंड से पिचकारी निकली और आरती के होंठों और नंगी चूचियों पर जा कर पसर गयी।

मीना चाची अब बड़े प्यार से बोलीं, माँ के लौड़े! बहनचोद! तू तो एकदम चूतिया

निकला,मैं तो समझ रही थी की मेरी ब्रा खोल कर और मुझे पैंटी में देख कर शायद तू मेरे साथ जबर्दस्ती करके मेरी चुदाई करेगा। पर मुझे तू माफ कर दे, जब तूने मुझे अपनी बाहों में लेकर चोदा नहीं तो मैंने गुस्से में तेरी पिटाई कर दी, पर क्या करूँ इतने साल से मेरी ख्वाइस थी कि मेरी चुदाई फोर्सली होती, असली मर्द से चुदने की ख्वाहिश मन में ही रह जाती है! आज जब मैं सुबह तेरे कमरे में गयी और अपनी पैंटी और ब्रा से तेरा मुँह ढका पाया तो मैं समझ गयी की तू मेरे सपने देख कर मुठ मारता है, तेरा घोड़े जैसा लंड देख कर तो मैं पागल हो गयी हूँ, तू भी अब चूत लेने के लिये तैयार है,चल और बता अपनी चाची की चूत चोदेगा?

कमल की तो जैसे मन की मुराद पूरी हो गयी। कमल पहले तो हक्का बक्का खड़ा रहा और बाद में उसने कुछ झिझकते हुए उन ही के अंदाज़ में रोल प्ले करते हुए कहा, चाची! जब से मै इस घर मे आया हु हमेशा आपको चोदने की सोचता हूं, मैं हमेशा ही आपको सपने में बिना कपड़ों के नंगी, सिर्फ़ ऊँची हील्स वाली सैंडल पहने हुए इमैजिन करता था और आपके मोटे चूतड़ और चूचीयों को इमैजिन करता

था, मैंने मुठ तो बहुत मारी है पर मुझे चोदना नहीं आता, तुम बताओगी तो मैं बहुत प्यार से मन लगा कर तुमको चोदूँगा!

आरती बोलीं, कमल अब तेरा लंड देखने के बाद ही मैं तो तेरी हो गयी और चुदाई तो मैं खूब सीखा दूँगी

पर तुझे मेरी हर बात माननी होगी और अगर तूने मुझे मस्त कर दिया तो मैं तुझे जो तू इनाम माँगेगा तुझे दूँगी और ध्यान रहे ये बात किसी को मालूम नहीं होनी चाहिए!

अब हम दोनों के बीच कोई शरम या पर्दा नहीं रह गया था।

आरती ने कहा, आज से तू

और मैं जब भी अकेले होंगे, तू मुझे सिर्फ़ आरती बुलाना और अब मुझे अपनी बाहों में भर कर मेरे होंठ चूसते हुए मेरे चूतड़ मसल!

 
कमल ने भी इतने दिनों की मुठ मारने के बाद मिला आरती का नंगा बदन अपनी बाहों में पकड़ कर उठा लिया और नंगी आरती को अपनी बाहों में भर कर उनके नरम-नरम होंठों को अपने मुँह से चूसने लगा। और अपने हाथ पीछे ले जा कर उनकी पैंटी में डाल कर उन मतवाले चूतड़ों को दबाने लगा। जब कमल पेटीकोट के उपर से दबा रहा था, उसे उस समय ही मालूम हो गया था की आरती के चूतड़ बहुत ही तगड़े और मस्त हैं, और अब जब उनके नंगे चूतड़ पकड़े तो हाथों में कुछ ज्यादा ही जान आ गयी और कमल कस-कस कर मसलने लगा।

आरती ने भी उसे अपनी बाहों में कस कर पकड़ रखा था जिस से उनकी माँसल

चूचियाँ कमल के सीने से लग कर उसे गुदगुदा रही थी। थोड़ी देर एक दूसरे को चूसने के बाद आरती उस से अलग हुई और अपनी अलमारी खोल कर व्हिस्की की बोतल निकाल कर बोली, जब तक सोनल वापस नहीं आती तेरी चुदाई की क्लासिज़ चालू और अब तू हफते भर मेरी क्लास अटेंड

करेगा!

इतना कह कर मीना चाची ने दो ग्लास में शराब डाली और दो सिगरेट जला लीं और एक मुझे देते हुए कहा, जो मैं बताऊँ वैसे ही करना!

लेकिन चाची मैंने कभी स्मोक या ड्रिंक नहीं की है! कमल थोड़ा हैरान होते हुए बोला।

मादरचोद... नहीं की है तो आज कर ले... चुदाई भी तो तूने पहले कभी नहीं की है... मज़ा आयेगा.. बिलीव मी! आरती बोली।

उसके बाद आरती एक हाथ में व्हिस्की का ग्लास और एक में सिगरेट पकड़

कर उसके सामने आई और बोली, बहन के लौड़े!

तू मुझे हाई हील के सैंडलों में इमैजिन करता है ना, चल अब अपने हाथों से मेरे पैरों में सैंडल

पहना और फिर मेरा पेट चूमते हुए मेरी पैंटी उतार और पीछे से मेरी गाँड के छेद में उंगली डाल और धीरे-धीरे से अपने मुँह से मेरे पेट को चूमते हुए मेरी बूर के ऊपर ला कर मेरी चूत को अभी सिर्फ़ ऊपर से ही चूस। मैं तुझ से नाचते हुए अपनी चूत चुसवाँऊगी, बाद में जब तू अपनी ड्रिंक और सिगरेट खतम कर लेगा तब तुझे बताऊँगी की औरतें अपनी चूत का पानी

मर्दों को कैसे पिलाती हैं।

कमल तो उस समय कुछ बोलने की हालत में ही नहीं था। कमल तो बार-बार यही सोच रहा था की वो कोई सपना तो नहीं देख रहा है। खैर, कमल ने आरती के आदेश अनुसार उनके गोरे-गोरे नरम पैरों को चूम कर उनको चार इंच ऊँची पेन्सिल हील्स वाले सैण्डल पहनाये।

फिर कमल आरती के बताय तरीके से उनको अपनी बाहों में भर कर चूमने और पैंटी उतारने लगा। आरती अपने चूतड़ हिला-हिला कर अपनी ड्रिंक और सिगरेट पी रही थी और जब कमल के होंठ आरती की चूत के उभार पर टच हुए तो आरती ने कस कर उसका सर पकड़ा और चूत के उभार पर दबा दीया। वो मीठी-मीठी सितकारियाँ भरने लगी और बोली,

कमल तुझे मैं ज़िंदगी का इतना प्यार दूँगी की जब तू अपनी बीवी को चोदेगा तो

हमेशा मेरी ही चूत याद करेगा!

कमल भी मन लगा कर आरती की चूत की दरार पर और उभार पर जीभ फेरने लगा। थोड़ी देर बाद आरती के चूतड़ों में एक कंपन आया और कमल का सर जोर से दबाते हुए अपनी चूत का पानी बहार छोड़ दिया। उसके बाद कमल के बगल में बैठ गयी और बोली,

कमल! आज पहली बार ऐसा हुआ है की मैं अपनी चूत चुसवाते हुए झड़ी हूँ!

आरती की आँखें शराब और ओरगैज़्म के कारण नशीली हो रही थी। आरती ने कमल का लंड पकड़ लिया और चोंकते हुए बोली,

हाय-हाय कमल! यह क्या हाल कर रखा है तूने अपने लंड का, तन कर एक दम फटने को हो रहा है मेरे प्यारे कमल! लंड को इतना नहीं अकड़ाते की लंड फट ही जाये और वैसे भी आज से यह लंड अब सिर्फ़ मेरा है, चल थोड़ा तेरे लंड को ढीला कर दूँ,फिर तुझे आराम से अपनी चूत का पानी पिलाऊँगी!

इसके बाद आरती ने उसे एक छोटा सा पैग और दिया और एक-एक सिगरेट जला कर उसके बदन से चिपट गयी, और उसे खींच कर बिस्तर पर टाँगें सीधी कर के पीठ के सहारे

बिठा दिया और बोली, चल अब तू आराम से अपनी ड्रिंक और सिगरेट पी! और फिर कमल का लंड पकड़ कर कहा, मैं लंड की ड्रिंक और सिगरेट बना कर पीयुँगीऔर तेरी मस्ती निकले तो निकाल दियो मेरे मुँह में,लंड चूसना किसे कहते हैं अब मैं तुझे वो बताऊँगी!

इतना कह कर आरती ने अपने रसीले होंठ कमल के लंड के सुपाड़े पर रख दिए जो कि तन कर एक दम लाल टमाटर की तरह हो रहा था और फिर धीरे-धीरे उसके लंड को अपने मुँह के अंदर जीभ फिराते हुए सरकाने लगी। उसे

नहीं मालूम औरतों को लंड चूसते हुए कैसा लगता है पर वो इतना बता सकता था की कोई भी मर्द मादरचोद अपना लंड चुसवाने के बाद बिना चूत लिये रह नहीं सकता, चाहे उसे उसके लिये कुछ भी क्यों ना करना पड़े। कमल के उपर तो उस समय आरती के नंगे बदन का नशा, व्हिस्की का नशा, सिगरेट का नशा और आरती से लंड चुसवाने का नशा ऐसा छाया हुआ था की जैसे वो किसी और दूसरी दुनिया में है।

 
पहले तो आरती बड़े प्यार से अपना मुँह उपर नीचे सरका-सरका कर उसे लंड चुसाई का मज़ा देने लगी। कमल का पूरा लंड आरती के मुँह में समा नहीं पा रहा था पर वो बहुत तबियत से कमल की आँखों में आँखें डाल कर चूस रही थी। कमल का तो मस्ती के मारे बुरा हाल था। उसने आरती का सिर कस कर अपने हाथों में पकड़ लिया और हाथ से उनका सिर उपर नीचे करने लगा और नीचे से अपने चूतड़ उछाल- उछाल कर आरती के मुँह में ही शाट देने लगा और जब कमल झड़ा तो उसने कस कर आरती का सिर पकड़ कर नीचे से एक शाट लगाया जिस से उसका लंड सीधा

आरती के गले में जा कर फँस गया और उस समय उसका पूरा साढ़े आठ इंच और ढाई इंच मोटा लौड़ा जड़ तक आरती के मुँह में घुसा हुआ था और उसकी झाँट के बाल आरती की नाक में घुस रहे थे। जब कमल शाट लगा कर आरती के गले में अपना लंड फँसाकर झड़ रहा था उस समय आरती बूरी तरह छटपटा रही थी और कमल से दूर जाने की कोशीश कर रही थी पर उसने भी कस कर उन का सिर पकड़ा हुआ था और जब तक उसके पानी की आखिरी बूँद नहीं निकली, उसने आरती का सिर नहीं छोड़ा।

आरती वाकय में बहुत चूदास औरत थी। इतनी तक्लीफ होने के बाद भी उसने कमल के लंड का सारा पानी चाट-चाट कर पी गयी और एक भी बूँद बाहर नहीं गिरने दी। आरती ने उसका झड़ा हुआ लंड अपने मुँह से बाहर करा तो कमल बोला, चाची आई एम सारी! मैं अपने आप को कंट्रोल नही कर पाया!

आरती ने उसके होंठ चूमते हुए कहा,

डार्लिंग तू सिर्फ़ मुझे आरती बोल और मादरचोद मैं इसी तरह तो अपन बदन रगड़वाना चाहती हूँ, कसम से आज पहली बार लंड चूसने का असली मज़ा मिला है। ऐसा प्यारा और तगड़ा लंड हो तो मैं ज़िंदगी भर चूसती रहूँ!

लंड चुसवाने के बाद कमल भी थोड़ा सा मस्त हो चूका था। मैंने कहा, क्यों आरती चा...

मेरा मतलब सिर्फ़ आरती... तुम्हारा इतना चुदास बदन है, तुमने शादी से पहले किसी से

चुदवाया या नहीं?

आरती बड़े दुख से बोली ,अरे नहीं रे,

मेरे पास अपनी चूत फड़वाने के और नए-नए लंड लेने के मोके तो बहुत थे पर मैंने सोचा हुआ था के मैं अपनी चूत सुहाग रात वाले दिन ही अपने हसबैंड को दूँगी। पर मुझे क्या पता था की मेरी किस्मत में ऐसा गांडू लिखा हुआ है। अगर मुझे पता होता तो मैं शादी से पहले जम

कर अपनी चूत का मज़ा उठाती। तेरे चाचा का सिर्फ़ पाँच इंच लम्बा और एक इंच मोटा

है और बस पाँच-छ: धक्के में ही झड़ जाता है और गांडू की तरह मेरी चूचियों पर उल्टा लेट कर सो जाता है!

तेरे चाचा को छोड़ अब से मैं अपना नंगा बदन तुझसे चुदवाऊँगी, बस तू मेरा साथ मत अलग

करना!

आरती कहते-कहते बहुत भावुक हो गयी थीं। कमक ने आरती को अपनी बाहों में भर लिया और एक दम फ़िल्मी डाय़लोग मारते हुए बोला, आरती

डार्लिंग आज से मैं तुम्हारे जिस्म की भूख को शाँत करूँगा और जब तुम कहोगी उसी समय अपना लंड तुम्हारी सेवा में हाज़िर कर दूँगा! आज से तुम्हारे दुख के दिन बीत गये। आज से तुम सिर्फ़ इस असली लंड का मज़ा लो और इतना कह कर आरती को दबा दबा कर उसके रसीले होंठ चूसने लगा।

आरती की चूचियों का दबाव पाकर और उनकी मस्त मोटी-मोटी जवानी सीने से लगा कर कमल का लंड फिर से पूरा तन गया था। आरती बोली, भोसड़ी के! तेरा लंड है की मस्त गन्ना, देख तो सही कैसे खड़ा हो कर लहरा रहा है!

कमल ने कहा, आरती यह तो फिर से तुम्हारे होंठों को ढूँढ रहा है चुसाने के लिये।

आरती बोली, कमल! गन्ना तो मैं अबकी बार अपनी चूत में ही चूसूँगी, पहले तो मुझे अपनी सिगरेट और ड्रिंक आराम से पीने दे और तू अपनी ड्रिंक मेरी चूत से निकाल कर पी, आ जा कमल आज तुझे औरतों की चूत पीना सिखा दूँ!

इतना कह कर आरती अपने चूतड़ आराम से बिस्तर पर टिका कर बैठ गयी और अपनी दोनों टाँगें खोल कर पैंटी में कसी हुई चूत की मछलियों को दिखाने लगी।

इतने में आरती बोलीं, चल मादरचोद! मेरी टाँगें और जाँघें चूमते हुए मेरी पैंटी उतार और मेरी चूत में अपना मुँह लगा कर ऐसे चूस जैसे आइसक्रीम चूसता है और फिर अपनी जीभ को मेरी दरार के अंदर डाल और खूब घुमा-घुमा कर मेरी चूत को अंदर तक चाट,

याद रहे चूसाई और चटाई तब तक चलती रहे जब तक मैं तुझे मना नहीं करूँ और इस दौरान अगर मेरी चूत से मेरी मस्ती निकले तो उसे अपनी ड्रिंक समझ कर चाट कर पी जाना!

बड़ा ही सैक्सी सीन था। आरती बिल्कूल नंगी, सिर्फ़ पैंटी और सैक्सी सैंडल

पहने, एक हाथ में ड्रिंक और एक हाथ में सिगरेट लेकर स्मोक कर रही थीं। उनके मस्त मम्मों पर उनके भूरे-भूरे निप्पल ऐसे दिख रहे थे कि जैसे कह रहे हों कि आजा आज जी भर के मज़ा ले ले,बहुत मुठ मार ली तू ने और फिर आरती ने अपनी चिकनी मस्त टाँगों को फैला दिया। कमल ने भी झुकते हुए आरती की मस्त जाँघों को बारी-बारी चूमते हुए खूब चाटा, और फिर मस्ती में आरती की पैंटी के उपर से ही उनकी चूत की दरार को चाटने लगा। उसके होंठ आरती की चूत पर लगते ही

आरती मस्ती में आ गयी और बोली,

कमल अब जल्दी से मेरी पैंटी उतार के

मेरी मस्त जवानी चूस ले, मदरचोद इतना मज़ा दूँगी कि किसी औरत ने आज तक किसी मर्द को नहीं दिया होगा!

कमल बड़े प्यार से आरती की पैंटी धीरे-धीरे उनकी चूत से सरकाते हुए उतारने लगा। आरती ने अपने चूतड़ हवा में उठा दिये थे ताकि कमल जल्दी से उनकी पैंटी उतार कर चूसना चालू करे। आरती शायद यह नहीं जानती थी कि यह कमल के लिए किसी सुहाग रात से कम नहीं थी, और अपनी

प्यारी दुल्हन का मुखड़ा, जिसके कारण ना जाने उसने कितनी बार अपने हाथ से अपने लंड का पानी गिराया था, आराम से पैंटी उतार कर इत्मीनान से देखना चहता था।

आरती बोली, देख ले कमल! जी भर के देख मेरी चिकनी चूत को, पता है मैं

अपनी चूत शेव नहीं करती क्योंकि उस से चूत थोड़ी सी खुरदरी हो जाती है बल्कि

हेयर रिमुवर से बाल साफ़ करती हूँ ताकि मेरी चूत हमेशा मुलायम और चिकनी रहे।

कमल देर तक आरती की चूत को देखता रहा और अपनी हथेली फेरता रहा। कुछ देर

बाद आरती बोली, देख कमल इतना नहीं तरसाते, मेरे भोसड़े में आग लग रही है। जल्दी से चूसके ठंडी कर दे।

कमल ने भी अब ज्यादा रुकना मुनासिब नहीं समझा और अपने होंठ आरती की चूत के गुलाबी होंठों पर रख दिये। आरती ने एक गहरी सितकारी लेते हुए उसके सर को अपनी चूत पे दबा लिया। कमल का मुँह दबने से उसकी नाक में आरती की चूत की खुशबू उतरती चली गयी और उस पर ना जाने क्या

नशा चढ़ा उसने अपने होंठों से उनकी चूत दबाकर चूसनी चालू कर दी और अपनी जीभ अंदर-बाहर करते हुए आरती की चूत के अंदर करने लगा। इस समय आरती ने उसका सर अपनी पूरी ताकत से अपनी चूत पर दबाया हुआ था और अपनी मस्त चिकनी जाँघों से उसका सर जकड़ा हुआ था, जिसके कारण आरती की सितकारियाँ और गालियाँ उसके कानों तक नहीं पहूँच पा रही थीं। आरती के मस्त चूतड़ अब उछलने चालू हो गये थे, और उन्होंने उसके हाथ अपनी चूचियों पर से हटा कर अपने दोनों चूतड़ों के नीचे कर दिये थे।

कमल भी इशारा पा कर उन मस्त चूतड़ों को दबा-दबा कर मसलते हुए आरती की चूत चूसता रहा। अचानक आरती ने अपने चूतड़ों का एक जोरदार झटका मारा और उसका सर दबा कर उसके मुँह में अपनी चूत का पानी निकालने लगी। कमल को पानी इतना टेस्टी लगा कि कमल

दोबारा उनकी चूत में जीभ घुसेड़ कर उनकी चूत की दीवारों पर लगा हुआ उनकी चूत का पानी चाटने लगा। आरती शायद इस दोबारा चुसाई के लिये तैयार नहीं थीं और अचानक चालू हुई दोबारा चुसाई ने आरती को पागल बना दिया और उसने

अपनी जाँघें जोर से कस कर झड़ना चालू किया। उसने अपनी जाँघें इतनी जोर से

दबा ली थी कि अगर कमल अपने दोनों हाथों से उन्हें अलग नहीं करता तो शायद उसका सर चकनाचूर हो जाता। कमल ने जब मुँह उठा कर देखा तो आरती के चेहरे पर भरपूर ठंडक दिखायी पड़ रही थी।

आरती ने कमल की आँखों में आँखें डालते हुए कहा,पता है कमल, मैंने आज तक सिर्फ़ किताबों में पढ़ा था या ब्लू-फिल्मों में देखा था कि औरतों को अपनी चूत मर्दों से चुसवाने से चूत को वो सुख मिलता है जो उसको लंड से चुदवाकर भी नहीं मिलता। वाकय में कमल आज तूने मेरी चूत चूसकर वो सुख दिया है जो मुझे आज तक नसीब नहीं हुआ था, थैंक यू!
 
कमल ने भी कहा, चाची... सारी... आरती... मुझे नहीं मालूम तुम्हें कितना मज़ा आया पर मुझे तो तुम्हारी चूत का पानी पी कर और चूत चूस कर मज़ा आ गया, आज के बाद जब भी तुम मिलोगी, मैं सबसे पहले तुम्हारी चूत चूसुँगा और चाटुँगा।

कमल का लंड इतनी सारी मस्ती एक साथ मिल जाने पर लोहे की रॉड की तरह हो रहा था।

आरती ने बड़े प्यार से अपने होंठों को चौड़ा करके उसके लंड का सुपाड़ा अपने होंठों में भर लिया और फिर एक मिनट तक उसके ऊपर अपनी जीभ फिराती रही जिससे कमल अपना कँट्रोल खो बैठा और आरती की गर्दन पकड़ कर उनका मुँह अपने लंड पर दबाने लगा। आरती ने झट से अपना मुँह ऊपर खींच लिया और प्यार से बोली, कमल मैं तो तेरे लंड को बता रही थी की अपनी दुल्हन से मिलने के लिये तैयार हो जा, आज तेरी दुल्हन जी भर के तेरे धक्के लेगी और बाद में तेरी आखिरी बूँद तक चूसेगी। अब बस आजा कमल तुझे आगे का लेसन पढ़ा दूँ। अब मुझसे सहन नहीं हो पा रहा है।

आरती ने एक तकिया अपने चूतड़ों के नीचे लगाया और एक अपने सर के नीचे और पीठ के बल लेट गयीं। बड़े प्यार से बोली,

चल आज तू अपनी आरती की सवारी कर ले, चढ़ जा अपनी आरति पर, और तू बहुत तरसा है ना तू मेरी चूत के लिए, चल आज के बाद नहीं तरसेगा, चल आजा बना ले अपनी चाची से संबंध, बना दे अपनी चाची को रंडी।

कमल को आरती ने अपनी टाँगें फैला कर टाँगों के बीच में कर लिया और तकिया लगा होने के कारण आरती की चूत एकदम फूल कर उठी हुई थी। आरती बोली, देख कमल मैं अपने हाथ से अपनी चूत के लिप्स खोलुँगी, तू बस अपने हाथ से

अपना लंड पकड़ कर मेरा जो गुलाबी छेद दिखेगा, उस पर अपने लंड का सुपाड़ा रगड़,

और जब तक मैं ना कहूँ लंड मेरे अंदर मत उतारना।

आरती ने एक सिगरेट जलाई और दूसरे हाथ से अपनी उंगली से अपनी चूत के लिप्स खोल कर दिखाने लगी, और बोली, आजा बेटा! चल रगड़ अपना लंड।

कमल ने भी अपनी मस्ती में डूबे हुए लंड को आरती की फैली हुई चूत पर रगड़ना चालू कर दिया। पहली बार में उसे आरती की चूत की गरमी महसूस हुई। आरती सितकारी लेते हुए बोली, देख ले बहनचोद! जैसे तूने मुझे बाहों में लेकर किस करा था उसी तरह मैं तेरे लंड को अपने चूत के लिप्स के बीच में लेकर किस कर रही हूँ,मज़ा आ रहा है कि नहीं?

कमल के दोनों कान लाल हो गये थे, उसने कहा, आरती मेरे बदन में यह कैसी आग लग रही है?

आरती बोली, बस मेरी जान थोड़ा सा और फिर तू मेरी आग बुझा और मैं तेरी आग बुझाऊँगी।

एक मिनट और लंड घिसने से कमल का बदन मारे मस्ती के कांपने लगा। आरती समझ गयी कि ये अब कंट्रोल के बाहर है। उसने बड़े प्यार से अपना हाथ आगे बढ़ा कर अपनी चूत के छेद पर टिका दिया और बोलीं, देख कमल! तेरा लंड बहुत मोटा लम्बा और तगड़ा है, मेरी चूत में इसकी जगह धीरे-धीरे ही बनेगी, इसलिये तू धीरे-धीरे अपना लंड मेरी चूत में उतार और अपने चूतड़ के धक्के दे और लंड

आगे पीछे कर, चल अब चालू हो जा,तू भी सीख ले चुदाई क्या होती है, चोद ले

अपनी चाची को जी भर के, पर मादरचोद अगर तू अपने चाचा की तरह जल्दी झड़ा तो बैंगन से तेरी गाँड मारूँगी वो भी बिना क्रीम के!

कमल ने पहले तो एक हल्का सा शॉट लगाया जिस से उसका दो इंच लंड आरती की

चूत में सरक गया और उनकी चूत के गुलाबी लिप्स ने उसका लंड जकड़ लिया। आरती की चूत अंदर से सुलग रही थी जिसकी असली गरमी उसने अब महसूस करी।

आरती बोली, आआहहहहहहहहहहहा मेरे राजा शाबाश मेरे शेर, अब धीरे-धीरे

अपना लंड पेल मेरे अंदर!

कमल ने भी एक-दो धक्के तो दिये पर इतना ताव आ गया की उसने एक जोर का झटका मारा और उसका छः इंच लंड आरती की चूत में समा गया। आरती ने अपने चूतड़ ऐसे उछाले जैसे उन्हें बिजली का करँट लग गया हो और बोली, बहन के लौड़े! चोदना सीखा नहीं और मेरी चूत फाड़ने पर उतर आया ज़रा आहिस्ता-आहिस्ता चोद अपनी चूत रानी को!

आरती बोलती रहीं और कमल ने आरती को उनकी कमर के नीचे से उभरे हुए मोटे चूतड़ों से पकड़ा और अपने चूतड़ों का पूरा दम लगा कर जबरदस्त शॉट मारा जिस से उसका पूर लंड आरती की चूत में समा गया और आरती के बदन पर लेट गया और अपनी बाहों में कस के पकड़ लिया जिस से आरती की निप्पल कमल के निप्पल से लग गयी और आरती के माँसल जोबन कमल की छाती के नीचे दब गये।

आरती ने दर्द के मारे करीब एक फुट अपनी गांड हवा में उछाली और गालियाँ देती हुई बोली, माँ के लौड़े! क्या कर दिया तूने, माँ चोद कर रख दी मेरी चूत की अरे भोसड़ी वाले ऐसे थोड़ी मैंने चूत की माँ चोदने को कहा था,तेरा साला लंड है कि मूसल मेरी तो मदरचोद चूत फट गयी आज, चोद दे मादरचोद� हाय हाय बड़ा दर्द हो रहा है! पर कमल ने आरती को पूरी तरह से दबोच रखा था और उनकी टाँगें अपनी टाँगों में फसायी हुई थीं।

अब धीरे-धीरे अपना लंड आगे पीछे करना चालू किया और उसके होंठों पर अपने होंठ रख कर बड़े प्यार से उसके मुँह को और उसकी जीभ को चूसते हुए शॉट लगाने लगा। जब कमल ने देखा की आरती का तड़पना कुछ कम हो गया तो कमल ने आरती से पूछा कि डार्लिंग दर्द हो रहा है तो थोड़ा सा बाहर निकाल लूँ?

आरती एकदम शेरनी की तरह बोली,

मादरचोद इतने साल मैं इसके लिये तो तड़पी हूँ की कोई तो मेरी चूत फाडे और चोद-चोद कर उसका भोंसड़ा बना दे और तू कह रहा है की बाहर निकालू।

इसके लिए तो मैं रण्डी बनि हु,चोद मेरे राजा मेरी टाँगें उठ-उठा के जितना चोदना है चोद ले, मेरे सनम मेरी तो चूत अब

तेरी हो गयी!

आरती इस समय पूरी मस्ती में थीं। कमल भी पूरी तरह से मसताया

हुआ था और कमल ने एक किताब में देखे हुए पोज़ को आज़माते हुए आरती की दोनों टाँगें अपने कंधे पर रखीं और उनके मस्त मम्मे अपने हाथों में कस कर पकड़ लिये और उछल-उछल कर आरती की चूत में पेलने लगा जिस से उसका लंड पूरा जड़ तक आरती की चूत में उतर रहा था। इतना प्यारा सीन था की जब कमल कस कर शॉट लगाता था उस समय आरती के चूतड़ पूरे फैल जाते और चौड़े हो कर दब जाते और कमल का पूरा लंड आरती की चूत में समा जाता और फिर जब आरती नीचे से अपने चूतड़ों का धक्का देती तो उसका लंड थोड़ा सा बाहर आता और आरती की वो मस्त गाँड फिर गोल और मस्त हो जाती। अब दोनों की चुदाई की लय सैट हो चुकी थी और आरती तो मानो जन्नत की सैर कर रही थी, और बारबार यही बोल रही थी कि आज जैसी चुदाई का सुख मुझे कभी नहीं मिला, मुझे मालूम था की चुदाई में मज़ा आता है पर इतना मज़ा आता है मुझे नहीं मालूम था! ले मेरे बलम, चोद अपनी चाची को, जी भर के अपनी चाची की जवानी का मज़ा लूट ले! कहाँ था बहन चोद, क्यो ऐसे हरकत करता है कि मेरी चुत से दूर जाता है, अब तो खूब चुदवाऊँगी मेरे राजा, मेरे दिलबर, आज से तो तू मेरा असली हसबैंड है!

करीब पन्द्रह बीस मिनट तक जम कर टाँगें उठा कर चोदने के बाद कमल का पानी निकलने वाला था। उसने आरती की दोनों टाँगें छोड़ कर उन्हें अपनी बाहों में भर लिया और बोला, मेरी रानी! ले मेरा पानी अपनी मस्त चूत में, कर ले ठंडा अपनी चूत को मेरे लंड के पानी से।

आरती भी बोलीं कि राजा मैं भी बस झड़ने की कगार पर हूँ जरा दो तीन धक्के करारे-करारे जमा दे मेरी चूत में।

कमल ने आरति को कस के अपने चूत्तड़ हिला-हिला कर जबरदस्त शॉट देने चालू कर दिये।

आरती तो दो धक्कों बाद ही

किलकारी मारते हुए झड़ने लगी। उसका पानी सीधा कमल के लंड के लाल हुए सुपाड़े पर

गिर रहा था जिसे कमल पूरी तरह से महसूस कर रहा था। कमल ने भी दो-तीन धक्के और मारे और आरती के होंठों पे अपने होंठ चिपका दिये और उनकी जीभ चूसते हुए अपने लंड का पानी आरती की चूत में निकाल दिया। आरती की चूत के अंदर झड़ने में जो स्वर्ग का आनन्द प्राप्त हो रहा था उसके कारण कमल क्षण भर के लिये अपने होश हवास खो बैठा।

जब कमल को होश आया तो देखा आरती उसके लंड पर झुकी हुई थी और बड़ी बेसब्री से उसका लंड चूस रही थी। कमल को होश में आया देख आरती ने कमल का लंड छोड़ कर दो सिगरेट जलाईं और उसे अपनी बाहों में लेकर उसके सीने पर अपना सर रख कर स्मोक करने लगी और बोली, कमल मैं किस ज़ुबाँ से तेरा शुक्रिया अदा करूँ, मेरी समझ में नहीं आ रहा है। मैं तो आज से तेरी हो गयी! तू आज से सही मायने में मेरा हसबैंड है और मैं तेरी वाईफ! तुझे चूत का इतना सुख दूँगी की तू हमेशा मुझे याद करेगा! तूने मुझे बताया है कि असली चुदाई क्या होती है! आज पहली बार है कि चुदवाकर मेरी चूत को पसीना आ गया। मैं तो बस आज से तेरी गुलाम हो गयी। बस मेरे प्यारे कमल,मुझे चोदना मत बँद करना, तेरे लिये तो मैं चूत खोले पड़ी रहूगी, बस तू दोबारा गलती से भी हमारे बीच किसी को मत लाना,हम ऐसे ही मस्ती करेंगे,

कमल ने भी आरती को अपनी बाहों में कस कर कहा कि आरती आज से तुम भी मेरी हो गयी। अब से दोबारा तुम्है अपने अलग नही होने दूँगा

आरती तुम नहीं, मैं तुम्हारा गुलाम हूँ और जब तक चाचा नहीं आते, तुम मेरी वाईफ बन

जाओ और मुझे जम कर अपने शरीर की शराब पिलाओ।

अपने सपनों की रानी के साथ चुदाई करके कमल तो अपने आप को बड़ा ही भाग्यशाली समझ रहा था। चुदाई करने के बाद कमल और आरती एक स्मोक करते हुए एक दूसरे से लिपट कर पड़े हुए थे। आरती अपना सिर कमल की छाती पर रख कर स्मोक कर रही थी और कमल धीरे-धीरे उनके मस्त मोटे चूत्तड़ों पर हाथ फेर रहा था। कमक ने कहा,

आरती डार्लिंग क्या हुआ, तुम तो एकदम ही शाँत हो कर लेट गयी हो।

तो आरती ने शर्माते हुए उसके होंठों का किस लिया और बड़े प्यार से लंड हाथ में लेकर बोली, कमल मुझे लग रहा है कि मेरी असली शादी तो आज हुई है और सुहाग रात मनी है और जैसे कोई लड़की पहली बार अपने मर्द से चुदवाकर मस्त हो कर शर्माती है बिल्कुल मुझे वैसा ही लग रहा है। कमल मेरे सरताज, मेरी चूत के मालिक!

तू जो बोलेगा मैं सब करूँगी पर तू मुझे आज कसम दे कि तू हर रोज़ मुझे चोदेगा। लेकिन दोबारा से वो गलती नही करेगा, तेरे चाचा आ जायेगा तब भी मैं मौका निकाल कर तुझसे अपनी चूत ठंडी करवाऊँगी।

कमल तो चुदाई कर के मस्त पड़ा हुआ था।

कमल ने भी कहा, आरती फिर से वो गलती करके मैं तुम्हे नही खो सकता, मैं बेवक़ूफ़ था जो तुम्हे दुसरो के हाथों में सोपने चला था, अब बस तुम मेरी हो, और मैं चाहता हु की जिंगदी भर मेरे साथ रहो तूम। बस मेरा एक ही सपना है।

आरती बड़े प्यार से बोली, अब क्या जरूरत है सपने देखने की,तू बोल तो सही,मैं तेरे लिये अब कुछ भी करूँगी।

कमल ने कहा, आरती मैं हमेशा ही यह सोचता हु कि तुम्हारी शादी मुझ से हुई है और अपनी सुहाग रात वाले दिन तुम शर्माती हुई दुल्हन की तरह सज-धज के मेरे लिये पलंग पर बैठी हो और फिर मैं तुम्हें जी भर के चोदता हूँ।

आरती ने कमल के होंठों का एक लम्बा सा किस लिया और करीब पाँच मिनट तक उसके

होंठ चूसने के बाद बोली, मेरे राजा! बस अब तुझे मेरी चूत और नहीं मिलेगी और ना ही तू मुठ मारेगा।

कमल के उपर तो जैसे पहाड़ गिर पड़ा।

उसने कहा,

आरती ये तुम क्या कह रही हो?

आरती बड़े ही मादक अँदाज़ में बोली, मादरचोद! आज तेरी और मेरी,

रात को सुहाग-रात मनेगी और मैं चाहती हूँ कि तू अब दिन भर मुझे नंगा देखे और अपना

मूसल जैसा लौड़ा मसले ताकि जब रात को मेरे साथ सुहाग-रात मनाये तो मुझे कड़-कड़ाते हुए चोदे जिससे मेरी चूत का एक-एक पोर खुल जाये।

कमल ने भी कहा, आरती पर मैं रात तक कैसे दोबारा इंतज़ार करूँगा, इतनी नशीली शराब पीने का!

आरती ने उसकी छाती को चूमते हुए कहा, बहनचोद तू मेरे बारे में सोच कि मैं कैसे रहुँगी रात तक तेरा मस्त मादरचोद लंड लिये बिना। मेरी चूत खुली हुई तो क्या हुआ पर मैं भी अपनी ज़िंदगी में वो सुख भोगना चाहती हूँ जिस की कभी मैंने कल्पना भी नही करी थी।

इसके बाद आरती उठी और अपनी पिंक ब्रा और पिंक पैंटी पहन ली। आरती दिन भर सिर्फ़ ब्रा-पैंटी और कमल की पसंद के चार इंच ऊँची एड़ी के सैण्डलों में ही घूमती और घर के काम करती रही और बीच-

बीच में अपने हाथ या सैण्डल से कमल के लंड को सहला कर या कभी एक चूँची बाहर कर के उसके होंठों के पास ला कर भाग जाती। कभी दूर खड़े हो कर अपनी पैंटी धीरे से नीचे खिसका कर अपनी चूत का उभार दिखाती, और कभी कमल के चेहरे के सामने अपने चूत्तड़ ला कर पैंटी सरकाती और अपनी गाँड दोनो हाथों से पकड़ कर चौड़ा कर के दिखाती। जब कमल पकड़ने को जाता तो कहती ,मेरे मादरचोद डार्लिंग! ये सब माल जी भर के भोगना रात को।

कमल के लंड का तो बुरा हाल था। बेचारा दिन भर आरती का बदन देख-देख कर अटैंशन

में खड़ा रहा। शायद वो भी सोच रहा था की छिनाल जितना तरसाना है तरसा ले,

रात को तेरे भोसड़ी को भोंसड़ा नहीं बनाया तो मेरा नाम नहीं। आरती ने शाम को कमल को एक घंटे के लिये घर के बाहर भेज दिया और बोली कि डार्लिंग! इंतज़ार के सारी घड़ियाँ खतम और वापस आ कर नहा धो कर एक दम दुल्हा बन कर अपनी दुल्हन की सुहाग-रात मना! आज तेरी शादी मुझ से हुई है और मैं तेरी दुल्हन और तेरी पत्नी हूँ और तू मेरा हसबैंड। जल्दी से आ मेरी जान! मेरी चूत में शोले भड़क रहे हैं। दिन भर तो मैंने बर्दाश्त कर लिया पर अब बर्दाश्त नहीं कर पा रही हूँ!

कमल भी एक घंटे के लिये बड़े बेमन से बाज़ार घूमता रहा और वापस आ कर अपने कमरे में जा

कर नहाने चला गया। रेज़र से अपनी सारी झँटें साफ़ करी और लंड पर खूब तेल की

मालिश करी और अपने बदन को रगड़-रगड़ के साफ़ किया। तैयार होते वक्त अपने बदन पर खूब क्रीम मली और सैंट छिड़का। अपने सबसे स्मार्ट कपड़े पहने और शीशे में अपने को देख कर अपनी सुहाग-रात मनाने के लिये आरती के कमरे की तरफ़ चल पड़ा। आरती वाकय में एक बहुत ही स्टॉयलिश और मस्त औरत थी। जब कमल ने आरती के कमरे को खट- खटाया तो वो अंदर से बोली,

बस दो मिनट में अंदर आ जाना।

कमल ने जब दो मिनट बाद दरवाज़ा खोला तो दँग रह गया कि आरती ने घंटे भर में अपने कमरे की काया ही पलट दी थी। पूरा कमरा गुलाब से सज़ा हुआ था और भीनी-भीनी

उत्तेजित करने वाले इम्पोर्टेड सैंट की खुशबू हवा में फैली हुई थी। आरती अपनी

सबसे सैक्सी दिखने वली साड़ी पहन कर और अपने चेहरे पर एक लम्बा सा घूँघट डाल कर पलँग के बीचों-बीच बैठी हुई थी, और पलँग के साईड टबल पर एक पूरी व्हिस्की की बोत्तल और सिगरेट का पैकेट रखा हुआ था।

उन दोनों के जिस्म में उस समय एक लावा फूट

रहा था एक दूसरे को बुरी तरह चोदने के लिये, और आरति ने सब इंतज़ाम करा हुआ था कि आज जम कर रात भर चुदाई हो।

कमल ने धीरे से पलँग पर बैठ कर आरती को अपनी और खिसकाया और बड़े धीरे से उनका घूँघट ऊपर उठा दिया। आरती ने आज कुछ ज्यादा ही सैक्सी मेक-अप करा हुआ था। उसने अपने होंठों पर लाल चमकने वाली लिपस्टिक लगायी हुई थी और पूरे मुखड़े पर बहुत ही सुंदर तरीके से मेक-अप करा हुआ था। ब्लाऊज़ उसने बहुत ही लो कट पहना था और अगर ब्लाऊज़ को ब्रा बोला जाये तो ज्यादा मुनासिब होगा और अंदर उसने ब्रा शायद बहुत ही छोटी साइज़ की पहनी हुई थी क्योंकि उसमें से आरती कि मस्तानी जवानी छलक-छलक के बाहर आने को मचल रही थी। उसने अपने घने-घने बालों को खुला रखा था जो किसी झरने की तरह उसकी कमर तक लहरा रहे थे। आरति ने अपने हाथों और पैरों के नाखुनों पर लाल नेल पॉलिश लगा रखी थी। साथ ही उसने कमल को और भी उत्तेजित करने के लिये काले रंग की बहुत ही ऊँची (लगभग पाँच इंच) पेन्सिल हील की सैण्डल पहनी हुई थी। उसके गोरे-गोरे पैरों को उन सैण्डलों में देख कर कमल का लंड उसकी पैंट के अंदर साँप की तरह फुँफकारने लगा।

कमल ने बड़े ही प्यार से आरती का चेहरा अपने हाथों में ले कर उसके गुलाबी होंठों पर अपने होंठ रख दिये और तबियत से उसके होंठ और जीभ चूसने लगा और फिर आरती की कमर में हाथ डाल कर उसकी नंगी पीठ पर फेरने लगा। आरती ने भी उसे अपनी बाहों में ले लिया और अपनी चूचियों का दबाव देते हुए उसके होंठ और जीभ चूसने लगी। उन्हें होश नहीं वो कब तक एक दूसरे को यूँ ही चूसते रहे। जब दोनो अलग हुए तो कमल ने कहा,

आरती डार्लिंग तुम तो वाकय में बहुत खूबसुरत हो। मैं तुमको अपनी वाईफ बना कर धन्य हो गया। तुम्हारा बदन लगता है जैसे भगवान ने तुम्हें खुद अपने हाथों से बनाया है। तुम्हें देख लेने के बाद कैसे कोई इंसान कैसे अपने

ऊपर काबू रख सकता है!

आरती बोली, मॉय डार्लिंग! मैं बहुत खुश किस्मत हूँ कि तुम मेरे हसबैंड हो और आशा करती हूँ कि तुम मेरी बूर को चूत और चूत को भोंसड़ा बना दोगे!
 
इतना कह कर वो दोनों पलंग से उठे और एक दूसरे को बाहों में भर कर डाँस करने लगे। डाँस करते- करते कमल ने आरती की साड़ी पीछे से उठायी और उसकी पैंटी में हाथ डाल के उसके चूत्तड़ मसलने लगा। इधर आरति भी उसकी शर्ट के बटन खोलने लगी और खोल कर उसकी शर्ट को फेंक दिया। कमल ने भी आरती की साड़ी का एक छोर पकड़ कर खींचना चालू कर दिया और आरती ने भी अपना पूरा मस्त शरीर घूम-घूम कर दिखाते हुए साड़ी को उतरवाया। अब आरती सिर्फ़ ब्रा-कट ब्लाऊज़ और एक बहुत ही झीने पेटीकोट में थीं, जिसमें से अंदर का सब कुछ दिख रहा था। आरती ने आज ब्लैक कलर की जी-स्ट्रिंग पैंटी पहनी हुई थी जिस से सिर्फ़ उनकी चूत ढकी हुई थी और उनके गोरे-गोरे और मोटे-मोटे माँसल चूत्तड़ एक दम नंगे हो कर गज़ब ढा रहे थे। आरती एक दम नयी नवेली दुल्हन कि तरह शरमाने लगी तो कमल ने आगे बढ़ कर उन्हें अपनी बाहों में ले लिया और पेटीकोट के ऊपर से उनके गुदाज़ चूतड़ों को दबाने लगा। आरती ने भी अपने हाथ आगे करे और उसकी पैंट को खोल कर उतार दिया। इधर कमल ने भी आरती के झीने से पेटीकोट का नाड़ा खोल कर नीचे गिरा दिया और अपने हाथ पीछे ले जा कर उनके ब्रा-नुमा ब्लाऊज़ के हुक खोल दिये और उनका ब्लाऊज़ धीरे से उनकी बाहों पर से सरकाते हुए उतारने लगा। आरती ने आज बहुत ही छोटी (माइक्रो) ब्रा पहनी हुई थी। कमल साफ़-साफ़ देख रहा था कि ब्रा के कप बडी ही मुशकिल से आरती के निप्पलों को ढक पा रहे थे और साथ ही ब्रा

काफी टाइट भी होने के कारण आरती के मम्मे उबाल खा कर बाहर आने को मचल रहे थे।

आरती अब सिर्फ़ पैंटी-ब्रा और हाई हील सैण्डलों मे थी और कमल भी अब सिर्फ़ अंडरवीयर में था। दोनो ने एक दूसरे को फिर से बाहों में जकड़ लिया और एक दूसरे को मसलते हुए नाचने लगे। थोड़ी देर बाद कमल कुर्सी पर बैठ गया और आरती को बोला,

डार्लिंग तुम आज अपनी गाँड हिलाते हुए दो पैग बनाओ और अपने हाथों से मुझे पिलाओ।

आरती भी बड़े ही मादक अंदाज़ में अपने भारी-भारी चूत्तड़ उसके चेहरे के सामने ला कर टेबल पर झुक कर दो पैग बनाने लग गयी। जी-स्ट्रिंग पैंटी पहने होने के कारण आरती की चूत तो पूरी ढकी थी और स्ट्रिंग का स्ट्राप पूरा आरती की गाँड की दरार के अंदर घुस कर उनकी गाँड के भूरे रंग के छेद को छिपाये हुए था। आरती के मस्त फूले हुए चूत्तड़ अपनी आँखों के सामने पा कर कमल मदहोश हो गया और अपने होंठ आरती के चूत्तड़ों पर लगा कर उनकी गाँड की दरार में अपनी जीभ घुसाड़ने लगा। आरती एकदम सितकार उठी और बोली, डार्लिंग! ये क्या कर रहे हो, बड़ी

गुद-गुदी हो रही है!

कमल ने कोई ध्यान ना देते हुए अपनी जीभ आरती की गाँड के भूरे छेद पर फेरनी चालू रखी और हाथ बड़ा कर उनकी झुकी हुई मस्तानी छातियों को पकड़ लिया और दबाने लगा। आरती तो मस्ती के मारे अपने चूत्तड़ गोल-गोल हिलाने लगी। पैग बनाने के बाद उसने आरती को खींच के अपनी गोदी में बैठा लिया और बोला, आरती क्या बात है, मैंने ऐसी पैंटी तो आज तक नहीं देखी जिसमे चूत तो ढकी रहती है पर गाँड पूरी नंगी रहती है।

आरती बड़ी मस्ती में बोली,

डार्लिंग इसे जी-स्ट्रिंग कहते हैं और ये खास कर चुदास औरतों के लिये ही बनाई गयी है। जिनकी चूत में ज्यादा खुजली होती है और जो पब्लिक में अपने चूतड़ों का जलवा दिखाना चाहती हैं वो ऐसी पैंटियाँ और हाई हील सैंडल खूब पहनती हैं। हाई हील

सैंडलों से चाल और भी मस्तानी हो जाती है और पीछे से गाँड और सामने से छातियाँ सैक्सी तरह से उघड़ जाती हैं। मैंने आज खास तेरे लिये पहनी है।

कमल ने आरती की फूली हुई चूचियों की घाटी में अपना मुँह लगा दिया और पसीने और सैंट की

महक सूँघते हुए उसकी चूचियों कि घाटी चूसने लगा। आरती ने भी उसका सर पकड़ कर अपनी चूचियों पर दबा लिया। थोड़ी देर आरती की चूचियों कि घाटी चूसने के बाद कमल ने आरती को कहा कि अब वो उसे ड्रिंक पिलायें। आरती ने टेबल पर से ग्लास उठा कर उसके होंठों से लगा दिया और बोली, डार्लिंग एक घूँट में खतम करना।

कमल ने भी दूसरा ग्लास उठा कर आरती के होंठों से लगा दिया। आरती बड़ी ही मादरचोद थी। उसने ड्रिंक पूरी नीट बनाई थी, बिना सोडे और पानी के। आरती तो अब रोज़ जम कर पीती थी पर कमल तो अभी नौसिखिया ही था। पर हिम्मत कर के कमल ने भी एक घूँट में खाली कर दी और आरती ने भी पूरी ड्रिंक एक घूँट में खाली कर दी। कमल ने कस कर आरती की कमर में बाहें डाल कर अपनी और खींच लिया और उसकी उठी हुई मदमस्त चूचियों को दबाने लगा और आरती को बोला, मेरी जान एक सिगरेट पिला दो!

आरती बोली, डार्लिंग! सिगरेट मैं अपने स्टाइल से पिलाऊँगी।

इतना कह कर आरती ने सिगरेट जलायी और एक कश ले कर अपने होंठ उसके होंठों से लगा दिये और सारा धुआँ उसके मुँह में छोड़ दिया।

कमल ने कस कर आरती की एक चूँची जो उसकी हथेली में थी बहुत ही बे-दर्दी से मसल दिया। आरती भी चिहुँक उठी, और बोली, तुम बड़े वोह हो जी, मेरी मस्त जवानी इतनी बुरी तरह से मसल कर रख दी।

कमल ने भी कहा, मीना रानी आज तुम्हारी चूचियाँ कुछ ज्यादा ही उभार लिये हुए हैं,

तुमने क्या जादू करा है कि सुबह से लेकर शाम तक तुम्हारी चूँची एक दम इतनी बड़ी हो गयी।

आरती शर्माते हुए बोली कि मैं आज तुमको उन चूचियों का मज़ा देना चाहती हूँ जो मेरी शादी के समय थी। इसी लिये मैंने आज इस टाइट माइक्रो ब्रा में अपनी चूचियाँ कसी है ताकि मेरी चूचियाँ उसमें समायें नहीं और फूट-फूट के बाहर निकल आने को तरसें।

मेरी चूचियाँ कब से तड़प रही हैं तुम्हारे होंठों से चुसाने के लिये।

कमल ने भी बिना देर करे हुए अपने हाथ पीछे ले जा कर आरती की माइक्रो ब्रा के हुक खोल दिये। ब्रा के हुक खुलते ही आरति कि चूचियाँ एक दम स्प्रिंग की तरह उछली और मचल कर ब्रा की कैद से बाहर आ गयी। आरती ने अपने भूरे रंग के निप्पलों को आज रूज़ लगा कर एक दम गुलाबी बनाया हुआ था और कमल ने बेसब्री से उन पिंक निप्पलों को अपने मुँह में ले लिया और लम्बे-लम्बे चुस्से मारने लगा। रूज़ लगे होने के कारण आरती के निप्पल एक दम चैरी की तरह मीठे थे। आरती की तो सितकारी ही निकली जा रही थी और कमल की तो ऐसी इच्छा हो रही थी कि आरति की चूत का जूस इन निप्पलों से निकले और वो पी जाये।

आरती उसके सिर को अपनी चूचियों पर दबाती हुई सितकारियाँ भर रही थी और बोल रही थी कि डार्लिंग! पी ले मेरे जिस्म का नशा। आज तो जी खोल के अपनी जवानी का नशा पिलाऊँगी तुझे। अरे मादरचोद चूस ले मेरे निप्पलों को! और आरति ने अपने हाथों से उसकी अंडरवियर उतार दी जिससे उसका लौड़ा आरती के पेट पर टक्कर मारने लगा।

आरती लंड को कस कर अपने हाथों से दबा रही थी और बोली, वाह मेरे बहन के लौड़े! अपनी दुल्हन से मिलने के लिये चिकना बन कर आया है। आज देखती हूँ कि किसकी माँ चुदती है, मेरी चूत की या तेरी। आरती ने कमल के बाल पकड़ कर अपनी चूचियों पर से उसका सर उठाया और बोलीं, डार्लिंग पहले एक मीठा सा चोदा लगा दे, मेरी चूत इस समय धड़क रही है, नहीं तो जल कर खाक हो जायगी। बाद में आराम से चूसाते हुए और चाटते हुए एक दूसरे को चोदेंगे।

कमल का भी बुरा हाल था। सुबह की चुदाई के बाद तो कमल भी तड़प रहा था आरती को चोदने के लिये। कमल ने उनको अपनी गोदी में उठा कर बिस्तर पर लिटा दिया और आरती की टाँगें फैला कर जी-स्ट्रिंग उतारी। वाह क्या नज़ारा था! आरती ने अपनी चूत के लिप्स भी रूज़ लगा कर गुलाबी करे हुए थे। कमल ने कहा, आरती थोड़ा सा और तड़प ले मेरी जान, अभी तो तेरी बूर के लिप्स मुझे इनवाइट कर रहे हैं चूसने

के लिये और बोलते हुए कमल ने अपने होंठ आरति की बूर के होंठों से चिपका कर जीभ चूत में घूसेड़ दी।

आरती बोलती रहीं कि, डार्लिंग मैं अपनी चूत का पहला पानी तेरे लंड पर झाड़ना चाहती हूँ। मादरचोद बाद में चाट लियो मेरी बूर। अभी तो अपने गन्ने से मेरी चूत को चोद दे। जालिम कितना और तड़पायेगा अपनी आरति को।

कमल ने देखा की आरती की चूत से उसका थोड़ा-थोड़ा मदन रस रिसना चालू हो गया था और अगर कमल ज्यादा उसकी चूत चूसता तो वो वहीं पर अपना सारा माल निकाल देतीं। कमल ने उसकी चूत पर से मुँह हटा लिया और आरती के ऊपर चढ़ कर उसकी मोटी-मोटी चूचियों पर अपने चूतड़ रखे और अपना लंड आरती के सामने लहराते हुए बोला, मेरी जान! जरा अपनी चूँची के निप्पल से मेरी गाँड मारो और मेरे लंड को अपने होंठों का प्यार दो। फिर देखो आज तुम्हारी चूत की क्या भजिया बनाता हूँ!

आरती ने झट से उसका लौड़ा अपने होंठों में ले लिया और दोनो हाथों से अपनी चूँची पकड़ कर कभी एक निप्पल तो कभी दूसरा निप्पल उसकी गाँड के छेद पर रगड़ने लगी और कमल धीरे-धीरे आरती का मुँह चोद रहा था और बोला, मेरी जान! आज तो लंड की पहली धार तुम्हारे मुँह में ही उतारूँगा। ज़रा तबियत से चूस। मेरी प्यारी जान, झड़ने के बाद तू लंड के खड़े होने की चिंता मत कर,आज तो जम के तेरे साथ सुहाग रात मनानी है। मैं तो आज पूरी रात चोदूँगा।

फिर धीरे से कमल ने अपने शॉट की स्पीड बढ़ा दी और हुमच-हुमच के आरती के मुँह में लंड पेलने लगा। एक शॉट में पूरा जड़ तक उनके गले तक उतार देता और उसी क्षण खींच के बाहर निकाल लेता और इस से पहले कि आरती सम्भलें, दोबारा लंड उनके गले तक उतार देता। आरती भी पीछे नहीं थी। वाकय में ऐसे चूस रही थी जैसे सदियों से लंड चूसने के लिये तरस रही हों। कमल पाँच मिनट तक उनके मुँह को ऐसे ही चोदता रहा और आखिर में अपना पूरा लंड उनके गले में फंसा कर बलबला कर झड़ गया। आरती के गले में पूर लंड फंसा होने के कारण उसकी पूरी धार सीधी उनके गले में उतर रही थी और वोह हरामजादी आरती भी बिना नुकुर-पुकुर किये उसका रस पी रही थीं।

पूरा रस निकलने के बाद जब कमल ने अपना लंड उनके मुँह से निकालना चाहा तो आरति ने उसके चूत्तड़ पकड़ कर अपने मुँह पर दबा लिये और उसके झड़े हुए लंड की दोबारा से चूसाई चालू कर दी। कमल तो इस नशीली चूसाई से पागल हो गया। झड़ कर दोबारा चुसवाने में जो मज़ा कमल को आ रहा था उसका वर्णन करना बड़ा मुश्किल है। साला उसका लंड भी मादरचोद हो गया था। पाँच मिनट की चूसाई में ही साला फिर से तैयार हो गया था। कमल ने कहा,

आरती आ जाओ, अब तुम्हारी चूत रानी बजाता हूँ!

वो थोड़ा सा लंड अपने मुँह से निकाल के बोली, थोड़ा सा और ठहर डार्लिंग,

अभी थोड़ा और चूस के लोहे की तरह बना दूँ,

फिर जम के मेरी चूत बजाना!

ये बोलकर उन्होंने उसका पूरा लंड मुँह के बाहर निकाला और सिर्फ़ उसके लंड के सुपाड़े को और मूतने वाले छेद को अपनी जीभ में लपेट-लपेट कर जो मज़ा देना चालू किया वो अभी तक का सबसे गुदगुदाने वाला मज़ा था। कमल मस्ती में आ के अपने चूत्तड़ों के नीचे दबी हुई उनकी मोटी-मोटी चूचियों को बड़ी बुरी तरह से मसलने लगा। करीब दो तीन मिनट ऐसे करने के बाद उसका लंड वाकय में दोबारा फटने की कगार पे आ गया था। आरती इसे भाँप चूकी थीं। इसी लिये उन्होंने जीभ फेरना बंद करा और बोली,

अब आजा डार्लिंग! अब मेरी चूत खोल दे इस लौड़े से!

कमल आरति के उपर से हट कर उनकी जाँघों के बीच आ गया और उन्होंने भी अपनी जाँघें पूरी खोल दीं थी और अपनी उंगली से अपनी चूत के लिप्स खोल दिये थे जिससे उनका रस में डूबा हुआ गुलाबी छेद दिख रहा था। आरती बोलीं, देख ले डार्लिंग! अपनी पूरी खोल के दे रही हूँ,

बाद में मत कहना कि आरती ने खोल के चुदवाई नहीं!

कमल ने आगे बढ़ कर अपने लंड का सुपाड़ा आरती की चूत के खुले हुए लिप्स के बीच में रख दिया और हाथ से पकड़ कर आराम से उनके गुलाबी छेद पर अपना सुपाड़ा रगड़ने लगा और आरती से पूछा कि आज तुम्हारी चूत हलाल करूँ कि झटका चोदूँ?

आरती बोलीं, हलाल तो बहुत हो चुकी डार्लिंग! आज तो झटका चुदाई कर दो और माँ चोद दो मेरी चूत की!

कमल ने घुटने के बल हो कर आरती की दोनों टाँगें अपने कँधे पर रख कर उन्हें फैला दिया और अपनी गाँड का पूरा जोर लगा कर एक करारा सा झटका मारा जिससे मेरा पूरा साढ़े आठ इंच लम्बा लौड़ा आरती की चूत में समा गया। आरती क्षण भर के लिये तो चीखीं और फिर बड़बड़ाने लगीं, मादरचोद! आखिर तूने मेरी चूत की माँ चोद ही डाली। अरे भोसड़ी वाले मैंने यह थोड़ी बोला था कि अपना पूरा गन्ना मेरी चूत में एक झटके से उतार देना। बहन के लौड़े! आज मुझे वाकय में लग रहा है के मेरी असली सुहाग रात तो आज है। इतना दर्द तो मुझे पहली सुहाग रात को भी नहीं हुआ था। डार्लिंग क्या लौड़ा दिया है! मेरी तो चूत आज वाकय में चूत बन गयी। डार्लिंग तूने आज मुझे धन्य कर दिया। मैं तो तेरी गुलाम हो गयी। मादरचोद! तू मेरा हसबैंड बन जा आज से। ले मेरी चूत चोद ले, जितनी चोदनी है!

कमल तो बस लगातार दनादन उनकी चूत में अपने लौड़े के धक्के दिये जा रहा था। जब भी उसका धक्का लगता तो उसकी जाँघें आरती के चूत्तड़ों और जाँघों से लग कर थप-थप की आवाज़ पैदा कर रही थीं। करीब आठ-दस मिनट के ज़ोरदार धक्कों के बाद आरती ने किलकारी मारते हुए उसके लंड पर अपना पानी फेंक दिया। कमल ने भी आरती की टाँगें अपने कँधों से उतार कर नीचे कर दीं और उन्हें चौड़ा कर के आरती के ऊपर लेट कर कसके उनको अपनी बाहों में भर लिया और अपने होंठ उन के रसीले होंठों पर एक बार फिर से जमा कर उनकी जीभ को चूसने लगा। बड़े आराम से कमल अपने चूत्तड़ उछाल-उछाल के आरती की चूत में अपना लौड़ा पेल रहा था। डार्लिंग आरती ने भी अपने दोनों हाथ कस कर उसके चूत्तड़ों पर दबाय हुए थे और जब कमल अपना लंड बाहर खींचता तब वोह अपने दोनों हाथों से उसके चूत्तड़ दबा देती जिससे कि जल्दी से फिर उसका लंड उनकी चूत में समा जाये।

आरती ने कमल को अपने ऊपर से उतरने के लिये कहा और उसके समने घुटने के बल एक कुत्तिया की तरह हो कर अपने चूत्तड़ उसकी तरफ कर दिये और बोली, ले बहन के लौड़े! अब तू कुत्ता बन। मैं अपनी चूत उभार के देती हूँ और तू उसमें अपना मस्त गन्ना उतार और फिर कस-कस कर मेरे चूत्तड़ों पर धक्के मारते हुए तबला बजा!

इतना कह कर आरती ने अपनी गाँड उपर की और उठा दी और चूचियों को बिस्तर पर टिका दिया और अपना पेट नीचे करके अपनी जाँघों के बीच में से मुस्कुराती हुई चूत खोल दी। आरती के चूत्तड़ चौड़े होने के कारण उनका मस्त भूरे रंग का गाँड का छेद दिख रहा था जिसको देख कर अन्दाज़ा हो रहा था कि आरती ने अभी तक गांड चुदाई का लुत्फ ज्यादा नहीं उठाया है। इस समय वो नज़ारा दिख रहा था कि कमल अपने आप को रोकने में नाकाम था। कमल ने आरती की रिस रही बूर में लंड थोड़ा सा घिसा और धक्का मार कर पूरा लंड उनकी चूत में झटके से उतार दिया। वाह क्या मज़ा आया! जैसे ही उसने अपनी जाँघों से आरती के फूली हुई चूत्तड़ों पर जम के धका दिया तो मक्खन की तरह उसका लंड आरती की उभरी हुई चूत में घुसा और उसके धक्के के दबाव से आरति के चूत्तड़ स्पंज की तरह दब कर फैल गये और फैल कर और चौड़े हो गये और बाद में स्पंज की ही तरह फिर से फूल कर अपनी शेप में आ गये जिससे कमल को आरती के चूत्तड़ों का धक्का महसूस हुआ। कमल को इस आसन में आरती की चूत लेने में बहुत मज़ा आ रहा था और कमल और जोश के साथ चूत बजाने लगा। जोश में आकर कमल ने अपनी एक उँगली अपने थूक से गीली की और इससे पहले कि आरती कुछ समझ पातीं, कमल ने अपनी उँगली आरती की गाँड में घुसा दी।

वो एक दम चिहुँक उठी और बड़-बड़ाई,

क्या कर रहा है मादरचोद! मेरी चूत तो अपने लंड से भर दी अब क्या मेरी गाँड अपनी उँगली से भरेगा क्या? आज बहुत दिन बाद किसी मर्द ने मेरी गाँड का छेद छेड़ा है। चल थोड़ा मेरी गाँड में अपनी उँगली चला दे!

वाकय में बहुत ही टाइट गाँड का छेद था। उँगली गीली होने के बावजूद बड़ी कसी-कसी उनकी गाँड में घुस रही थी। करीब आठ-दस मिनट तक कुत्ता चुदाई में आरती दो बार अपनी चूत का पानी निकाल चूकी थी और कमल के हर शॉट का जम कर जवाब अपने चूत्तड़ों के धक्के से दे रही थी और बड़-बड़ाते हुए कह रही थी की, मेरे जानू आज तो ज़िंदगी का असली मज़ा आ गया। बहन के लौड़े जब तेरा मूसल जैसा लंड पूरा मेरे अंदर घुस कर मेरी बच्चेदानी पर लगता है तो मैं तो बस गनगना जाती हूँ। बहनचोद! तू मेरा हसबैंड क्यों नहीं बना?

तुझसे तो इतना चुदवाती कि तू हमेशा मस्त रहता। मादरचोद तेरे से चुदवाकर मेरी चूत को पसीना आ जाता है। तेरी तो जिस से शादी होगी उसकी तो सुहाग रात वाले दिन माँ चुद जायेगी। ज़िन्दगी भर चुदना भूल जायेगी। चोद मेरे लंड, चोद, बहनचोद!
 
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