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आदमी हु आदमी से प्यार करता हु

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उसकी बात में सेक्स भी था और डाँट भी. उसकी ये बात मेरे दिल को छू गई. उसे भी मेरी फिक्र थी. वो मुझे दुखी नहीं देख सकता. क्या वो भी मुझसे प्यार करता है? इस बात का जवाब मेरे पास नहीं था लेकिन इतना तो पक्का था कि वो मेरी परवाह करता है.

खैर, वो उठकर दोबारा रसोई में गया और एक बड़ी सी थाली लेकर वापस आ गया. उसने थाली चारपाई पर रखी और हुक्के को हटाकर साइड में रखा स्टूल उठाकर दोनों चारपाई के बीच में रख दिया. स्टूल पर थाली रखते हुए बोला- आ जा, रोटी खा ले.मैंने कहा- ठीक है, पर पहले मुझे हाथ धोने हैं.वो बोला- क्यों, हाथों में गोबर लगा हुआ है क्या?मैं फिर हँस पड़ा।उसने कहा- दांत मत दिखा, जल्दी बाहर जाकर वॉशबेसिन में हाथ धो ले और आकर रोटी खा ले.

मैं जल्दी से हाथ धोकर आ गया. थाली में देखा तो 8-10 रोटियों का ढेर था. उस पर ढेर सारा मक्खन, एक बड़ा कटोरा सब्जी का और साथ में मट्ठे के दो बड़े-बड़े ग्लास.मैंने कहा- इतनी सारी रोटियां किसके लिए हैं?उसने कहा- हमारे लिए हैं और किसके लिए है? तू जाट के घर में है, यहां ऐसे ही खाया जाता है.मैं उसके मुंह की तरफ देखता रह गया.

वो बोला- खा ले अब, मेरा थोबड़ा ही देखता रहेगा?(मेरा चेहरा ही देखता रहेगा क्या)मैंने कहा- तुम्हारे चेहरे से नज़र हटती ही नहीं.वो बोला- नौटंकी मत कर, चुपचाप रोटी खा ले.

मैं उसके साथ बैठकर खाना खाने लगा. उसे मेरी बातें नौटंकी लग रही थीं. लेकिन मेरी नज़र सच में उसके चेहरे से हटती ही नहीं थी। मैं खाते-खाते भी उसे ही देख रहा था. निवाला जब वो मुंह में ले जाता तो उसके मजबूत भारी डोले फूलकर टी-शर्ट में फंस जाते थे। जब वो घी लगी उंगलियां चाटता तो मन करता उसकी उंगलियों को मैं ही चाट लूं.

देखते ही देखते वो 5-6 रोटियाँ खा गया. और मुझसे पूछा- तू खा नहीं रहा?मैं हंस पड़ा. मन ही मन कह रहा था ‘सारी रोटियां तो खुद ही खा गया और मुझसे कह रहा है कि तू खा ही नहीं रहा.’

मुझे उसके इस चुलबुले अंदाज़ से बहुत प्यार था. मैं सोच रहा था कि काश… मैं लड़की होता तो शायद ये मेरे प्यार को समझ पाता. लेकिन फिर ये भी सोचा कि अगर लड़की होता तो क्या पता इसके साथ होता या नहीं होता.कहते हैं कि जो होता है पहले से लिखा होता है. अगर मेरी किस्मत में रवि का साथ लिखा है, उसके लंड से चुदने का अहसास लिखा है तो मुझे समलैंगिक होने में कोई परेशानी नहीं है.

मैं इन्हीं ख्यालों में था कि उसने कहा- और खाएगा क्या?मैंने कहा- नहीं, मेरा पेट भर गया.वैसे भी जब वो सामने होता था तो मेरा पेट वैसे ही भर जाता था. बस मन नहीं भरता था उसे देखकर. उसके लाल रसीले होंठ, उसकी काली शरारती आँखें और देसी अंदाज़. मैं उसके लिए पागल था.

वो थाली उठाकर ले जाते हुए बोला- आ जा हाथ धो ले.मैंने उठकर हाथ धो लिए, हाथ धोकर मैं कमरे में वापस आ गया.

वो खाट पर लेटा हुआ था, मुझे देखकर उसने लोअर के ऊपर से अपने लंड पर हाथ फिराते हुए मेरा तरफ मुस्कुराकर देखा. जवाब में मैंने भी उसके लंड पर प्यार से हाथ फिरा दिया. उसकी हल्की सी सिसकी निकल गई- आहहह…रवि बोला- सोनू, तुझे तो लड़की होना चाहिए था. इतना मज़ा तो लड़कियाँ भी नहीं देती, जितना तेरी गांड मारकर आया मुझे!

उसके मुंह से ये बात सुनकर मैं हल्के से मुस्कुरा दिया, मैंने कहा- और आप जितना प्यार मुझे किसी ने नहीं दिया आज तक!वो बोला- क्या हर वक्त प्यार-प्यार लगा रहता है. मज़े लिया कर जिंदगी के… प्यार व्यार सब 4 दिन के चोंचले हैं. ऐसा कुछ नहीं होता.

उसका जवाब सुनकर मेरा मुंह उतर गया. फिर भी मैं उस पर कोई हक नहीं जताना चाहता था. वो मेरे साथ था, मेरे लिए यही काफी था. लेकिन कमबख्त दिल है न, एक बार जो चीज़ मिल जाती है फिर उसके लिए इसमें घमंड पैदा हो जाता है, सोचता है कि इस पर उसी का हक है.

रवि के दिल में मेरे लिए क्या था, यह तो मैं नहीं जानता था लेकिन मुझे लगने लगा था कि उस पर मेरा ही हक़ है. मैं उसे किसी और के साथ बर्दाश्त नहीं कर सकता था शायद. चाहे वो लड़की हो या कोई लड़का.प्यार इतना पज़ेसिव क्यूं होता है? लेकिन प्यार कभी भी हक़ नहीं जताता, प्यार तो बस प्यार होता है, जिससे है उसके लिए हर हद पार कर जाने को तैयार और बदले में कुछ नहीं मांगता, प्यार तो बस देने के लिए बना है. ये बात जब मुझे समझ आई तब तक काफी देर हो चुकी थी.

आगे की कहानी जल्द ही लेकर लौटूंगा.

 
अभी तक आपने पढ़ा कि मैंने रवि के घर जाकर उसके साथ खाना खाया और उसको अपने दिल की बात बताने की कोशिश की लेकिन उसके दिल में मेरे लिए क्या था, मैं नहीं जान पाया था। वो मेरी परवाह तो करता था लेकिन मेरे अंदर जो लड़की बैठी थी, वो अपनी पलकें बिछाए उस बादल के बरसने के इंतज़ार में गांडू जिंदगी की कड़ी धूप में टकटकी लगाए उसकी आखों में असली प्यार की एक बूंद के लिए तरसती हुई देखती रहती थी कि कभी तो एक बूंद बरसे और उसका ये बरसों का इंतज़ार खत्म हो जाए।

हम दोनों हुक्के वाले कमरे में थे और मैंने उसके लंड पर हल्के से हाथ फिरा दिया। मेरे नर्म हाथों की छुअन से उसके लंड में तनाव आने लगा था। लेकिन साथ में ही उसकी माँ रसोई में खाना बना रही थी। मन तो कर रहा था उसके मुस्कुराते हवस भरे चेहरे को देखते हुए वहीं उसकी लोअर को नीचे निकालकर उसके लंड को चूसना शुरु कर दूं लेकिन भावनाओं को रोकते हुए मैं उसके पास ही आराम से बैठ गया।उसने मेरा हाथ पकड़कर अपनी लोअर के ऊपर अपने लंड पर रखवा लिया तो मेरे अंदर अजीब सी सरसरी दौड़़ गई, उसको छूते ही मुझ पर नशा सवार हो जाता था। मैंने उसके लंड को लोअर के ऊपर से ही सहलाना शुरु कर दिया। तीस सेकेंड में ही उसका लौड़ा लोअर में तनकर मेरे हाथ में भर गया। रवि ने लेटे हुए ही मुझे हाथ पकड़ कर अपने ऊपर गिरा लिया और मेरा मुंह अपने लंड पर रखवा लिया। मेरे होठों ने जैसे ही उसके तने हुए लौड़े को छुआ मेरी आंखें बंद होने लगी।

वो भी समझ गया मैं गर्म हो चुका हूं, रवि ने कहा- दरवाजा तो ढाल दे!मैंने उठकर दरवाज़ा ढाल दिया, वापस आकर उसके पास बैठा तो उसने अपनी गांड ऊपर उठाते हुए लोअर नीचे निकाल दी, उसकी गेहुंए रंग की मोटी जांघों के बीच में उसके आंडों के ऊपर और काले घने झांटों के बीच में उसका लौड़ा तनकर सीधा छत की तरफ देखते हुए झटके मार रहा था। मैंने बैठते ही उसके लौड़े को अपने नर्म हाथों में भरकर प्यार से सहलाया, उसकी आंखों में आनन्द की लहर बहने लगी।उसने मेरी गर्दन पकड़ी और मेरे होठों लंड के करीब ला दिया, मुझे उसके लौड़े की महक आने लगी, दो पल के इंतज़ार के बाद उसने मेरी गर्दन को नीचे दबाते हुए होठों को लंड पर लगा और मेरे होंठ खुलते ही लंड अंदर जा घुसा।

मैं भी पूरे आनन्द के साथ उसके लौड़े को चूसने लगा, वो मेरे बालों में हाथ फिराने लगा। मैंने उसके मोटे-मोटे बालों से भरे आण्डों को अपनी गर्म जीभ से चाटा तो उसका आनन्द दोगुना हो गया।तभी रसोई में बरतन गिरने की कुछ आवाज़ आई, उसने फटाफट से अपनी लोअर ऊपर कर ली और टांगों को घुटनों से मोड़ लिया ताकि लोअर के बीच में खड़ा हुआ लंड दिखाई न दे।और मैं उठकर दूसरी चारपाई पर बैठ गया।हम दोनों नॉर्मल होने की कोशिश करने लगे।

5 मिनट बाद उसकी मां कमरे में दाखिल हुई, उनके हाथ में रोटी की थाली थी, वो आकर रवि वाली चारपाई पर बैठ गई और खाना खाने लगी।मैं थोड़ नर्वस था। मुझसे पूछने लगी।और बेटा- कहां से आया है?मैंने कहा- बहादुरगढ़ से!उन्होंने फिर पूछा- क्या काम करता है।मैंने कहा- आंटी, अभी तो पढ़ाई कर रहा हूं।उन्होंने अगला सवाल पूछा- रवि को कैसे जानता है?

अब रवि ने बीच में ही बात काटते हुए कहा- मां, सारा इंटरव्यू अभी ले लेगी क्या। बेचारा थका हारा आया है। थोड़ा आराम कर लेन दे। फिर पूछ लिये जो पूछना हो।मुझे थोड़ी चैन की सांस आई, नहीं तो फंसने ही वाला था।आंटी ने कहा- तो फिर खेत में घुमा ले आ इसको; खेत की रखवाली भी हो जाएगी और वहां ट्यूबवेल पर नहा लियो, इसकी थकान भी उतर जाएगी।उसने कहा- ये बात तो ठीक कह रही है मां तू, मैं इसको खेत में घुमा ले आता हूं।

हम उठकर घर से बाहर निकल गए। दो बज चुके थे और दोपहर की धूप जला रही थी। खेत तक पहुंचते-पहुंचते मैं पसीने से तर-बतर हो चुका था; गर्मी में मेरा मुंह लाल हो चुका था, मेरे मुंह को देख कर रवि बोला- तू तो टमाटर हो गया धूप में!कहकर वो हंसने लगा।

उसकी हंसी मुझे भी प्यारी लगी; मैं भी मुस्कुरा दिया लेकिन साथ ही गर्मी भी लग रही थी।

15 मिनट चलने के बाद हम खेत में एक कोठरी के पास पहुंच गए जहां ट्यूबवेल बंद पड़ा था। पानी की हौद में झांका तो तलहटी में साफ पानी चमक रहा था। पानी के नीचे हरी रंग की काई जैसे हरी मखमली चादर लग रही थी जिसके चिकनेपन का अहसास उसको बाहर से देखने पर भी हो रहा था।

रवि कोठरी के अंदर घुस गया; मैं बाहर ही खड़ा रहा।दो मिनट बाद ट्यूबवेल की मोटर से घर्र-घर्र की आवाज़ हुई और हौद में पानी गिरने लगा। रवि बाहर आ गया। बाहर आकर उसने टी-शर्ट निकालना शुरु की और उसकी मजबूत बालों वाली छाती नंगी होकर धूप और पसीने में चमकने लगी। उसने लोअर भी निकाल दी; अब वो कच्छे में था। वो हौद के अंदर घुस गया और ट्यूबवेल के नीचे डुबकी लगा दी। दो-तीन डुबकियां लगाने के बाद जब वो खड़ा हुआ तो उसके भीगे बदन को देखकर मेरे मुंह से लार टपकने लगी। उसके लंबे बाल गीले होकर उसके माथे पर फैल गए थे; उसकी मर्दाना छाती भीगकर और सेक्सी लग रही थी।

मेरी नज़र नीचे गई तो उसके होठों से टपकता पानी छाती पर गिरता हुआ पेट से फिसल कर उसके गीले कच्छे की इलास्टिक से उछलता हुआ उसके लंड के उभार को और साफ दिखाता हुआ उसकी जांघों के बीच में गिर रहा था। दोपहर की गर्मी में उसके भीगे जिस्म ने मेरे अंदर की गर्मी को और बढ़ा दिया।

उसने आंख मारते हुए मुझे अंदर हौद में आने का इशारा किया। मैंने फटाफट कपड़े निकाले और अपने गोरे चिकने कोमल बदन के साथ पानी में उतर गया। हौद में उतरते ही काई पर मेरा पैर फिसला और मैं उसकी छाती से जा लगा; मैंने रवि को बाहों में भरते हुए शरीर का बैलेंस बनाया।

मैंने उसकी आंखों में देखा और उसने मेरी; अपने सारे प्यार को आंखों में समेटकर मैं कह रहा था- मैं तुझ पर अपनी जिंदगी वार दूं।और वो कह रहा था- मैं अपना पूरा लंड तेरी कोमल गांड में उतार दूं।

अगले ही पल उसने मुझे अपनी मजबूत बाहों में पकड़कर नीचे हौद में बैठा लिया और मेरा सिर ट्यूबवेल की धार के नीचे कर दिया। दिन की गर्मी में ट्यूबवेल का ठंडा पानी और रवि के साथ का अहसास, मेरी सारी थकान उतर गई।2 मिनट तक मैं ऐसे पानी की धार के नीचे रवि के प्यार में भीगता रहा। फिर उसने मुझे उठाया और मेरी भीगी निप्पलों पर दांतों से काट लिया। मैं सिसक उठा; उससे चिपक गया। उसका लौड़ा तन गया, वो हौद की दीवारी पर बैठ गया और कच्छा नीचे सरका दिया; उसका भीगा लौड़ा सलामी दे रहा था।

उसने कहा- देख क्या रहा है? आ जा मेरी जान। शांत कर दे इसे!मैं पानी में घुटनों के बल बैठा और उसके भीगे गर्म लौड़े को अपने गर्म होठों में लेकर आंखें बंद कर ली और मज़े से उसे चूसने लगा। मेरी हर हरकत में उसके लिए प्यार भरा था जो उसके लंड के कड़ेपन को बढ़ाता जा रहा था। उसने मेरे सिर को पकड़कर जोर-जोर से अपना लंड चुसवाना शुरू कर दिया।

5 मिनट तक लंड चुसवाने के बाद उसने मुझे उठने को कहा और अपनी गोद में बैठा लिया। उसकी जांघ पर बैठते ही वो मेरी गर्दन को चूमने लगा; उसका एक हाथ मेरी कमर पर था और दूसरे हाथ से मेरे निप्पल मसलने लगा।

मुझसे रहा नहीं गया, मैंने उसके होठों को चूमने के लिए उसके सिर को अपनी तरफ खींचा, होठों पर होंठ रखते ही मेरी गांड खुल गई। लेकिन अगले ही पल उसने मुझे पीछे हटा दिया; शायद वो मुझे अपने होंठ चूसने की इज़ाजत नहीं देना चाहता था लेकिन मैं उसके होठों पर जान छिड़कता था; उसके होठों को चूसना काम-क्रीड़ा में मुझे परम आनन्द देता था; लेकिन शायद उसको ये पसंद नहीं था।

 
मैं कुछ नहीं बोला और अगले ही पल उसने मेरी अंडरवियर को निकाला और मेरे गीले नर्म चूतड़ों को दबाने लगा। उसके मर्दाना हाथ मेरी गांड में एक सुखद अहसास दे रहे थे। उसने वहीं पर बैठे-बैठे मुझे अपने हाथों से उठाया और सीधा मुझे अपनी जांघों के बीच में तने लंड पर बैठाना शुरु कर दिया।उसके 8 इंच के लौड़े के मेरी गांड पर टच होते ही मेरी गांड ने उसे रास्ता देना शुरु कर दिया और धीरे-धीरे उसका लंड मेरी घायल गांड में उतरने लगा। मैंने गांड को अगल-बगल हिला कर एडजस्ट करते हुए उसके लंड को गांड में पूरा उतरवा लिया।

जब लंड पूरा अंदर उतर गया तो रवि मेरी निप्पल मसलते हुए मेरी कमर को चूमने लगा, मैं उसके लंड पर खुद ही धीरे-धीरे ऊपर नीचे उछलने लगा। दो मिनट तक ऐसे ही चुदने के बाद वो उठने लगा और उसने मुझे हौद की दीवारी पर झुका लिया। पानी में खड़ा होकर उसने मुझे घोड़ी बनाया और मेरी गांड को चोदने लगा। इस पोज़ में मुझे काफी दर्द हो रहा था लेकिन वो रवि था। उसके दर्द में भी मज़ा आ रहा था।

5-7 मिनट तक उसने मुझे पानी में खड़े-खड़े जमकर चोदा; और अचानक लंड को निकाल लिया; मुझे अपनी तरफ घुमाते हुए मुझे नीचे बैठा दिया और लौड़ा मेरे मुंह में देकर अंदर बाहर करने लगा।उसका लंड में पत्थर जैसा कड़ापन आ चुका था जो मेरे गले को छीलता हुआ अंदर बाहर हो रहा था।

दो मिनट बाद उसके मोटे लंड ने मेरे गले में गर्म चिपचिपे वीर्य की पिचकारी मारनी शुरू कर दी जिसकी एक-एक बूंद के स्वाद को महसूस करते हुए मैं उसको पीता जा रहा था। 6-7 झटकों में वो शांत हो गया। मैंने मुंह से लंड को निकाला और ट्यूबवेल की धार से पानी लेकर उसके आधे सोए हुए लंड को धोने लगा; उसे गुदगुदी सी हो रही थी।

उसके बाद हम दोनों कुछ देर पानी में नहाए और बाहर आकर बदन का पानी सूखने का इंतज़ार करने लगे। उसके भीगे कामदेव जैसे जिस्म से मेरी नज़र हट ही नहीं रही थी।वो बोला- और चाहिए क्या?मैंने कहा- मेरा मन तो कभी तुझसे भरता ही नहीं!सुनकर वो हंसने लगा और बोला- कोई बात नहीं, रात को आज फिर तेरे साथ सुहागरात मनाऊंगा; आज तेरी सारी हसरत पूरी कर दूंगा।मैंने कहा- अगर मैं लड़की होता तुझसे ही शादी करता.

उसने एक स्माइल दी और बदन के पानी को हाथों से पौंछने लगा और टी-शर्ट पहनने लगा। टी-शर्ट पहनने के बाद उसने कच्छा निकाला और हौद की दीवारी पर डाल दिया। उसके टी-शर्ट के नीचे, उसकी मोटी-मोटी जांघों के बीच में उसका सांवला सा लंड मेरी गांड मारने के बाद आधी सोई हुई अवस्था में लटक रहा था जो पहले से काफी मोटा और गोल लग रहा था।उसने लोअर पहन ली।मैंने भी अपने कपड़े पहने और अपने अंडरवियर धोने लगा।

वो ट्यूबवेल बंद करने कोठरी में चला गया। मैंने उसके गीले अंडरवियर को उठाया और उसको अंदर से पलट कर देखा तो उसके भीगे अंडरवियर में चिपचिपा पदार्थ (रवि का कामरस) लगा हुआ था। मैंने उसे चाट लिया। मैं उसके लिए पागल सा रहता था; उसके जिस्म के रोम-रोम से प्यार था मुझे!

वो ट्यूबवेल बंद करके बाहर आ गया। मैंने अंडरवियर धोकर उसे पकड़ा दिया; उसने कच्छे को सिर पर डाला और हम घर की तरफ चलने लगे।

रास्ते गुजरते हुए 50 गज की चौड़ाई में मिट्टी खुदी हुई थी; शायद अखाड़ा था।मैंने पूछा- ये किसका अखाड़ा है?उसने कहा- हमारा ही है, मैं सुबह यहां पर पहलवानी करने आता हूं।मैंने कहा- मैं तुम्हें लंगोट में देखना चाहता हूं प्लीज़!उसने कहा- सुबह आ जाना मेरे साथ लेकिन अपनी हरकतों पर कंट्रोल रखियो; यहां पर हमारे गांव के और आस-पास के गांव के और भी लड़के आते हैं। उन्हें शक नहीं होना चाहिए कि तेरे मेरे बीच में कुछ चल रहा है।

उसकी बात सुनकर एक बार तो मुझे बुरा लगा; लेकिन फिर सोचा कि वो कुछ सोचकर ही कह रहा होगा। और वैसे भी हमारा जो रिश्ता है उसे हम सबके सामने खुलकर निभा भी नहीं सकते।मैंने कहा- ठीक है, मैं ऐसी कोई हरकत नहीं करूंगा, जिससे तुम्हारे दोस्तों को मेरे बारे में कुछ पता चले!कहकर हम घर की तरफ निकल चले।

घर पहुंचे तो भैंसों को नहलाने का दूसरा टाइम हो चुका था। जाते ही आंटी ने रवि से कहा- सारा दिन खेत में ही रहने को नहीं कहा था। जा, जाकर भैंसों को नहलाकर आ जा। तेरे बापू आ गया तो खाल (चमड़ी) उतार देगा तेरी!मैंने कहा- मैं भी चलूं?वो बोला- और तू क्या अंडे देगा यहां। चल डंडा उठा ले और भैंसों के बरामदे की तरफ!मैंने कहा- कौन सा डंडा, तुम्हारे वाला या लकड़ी वाला?उसने मेरी तरफ आंखें निकालते हुए इशारा किया कि अंदर मां बैठी है, मुंह बंद रख।मैं उसे चिढ़ाकर अंदर ही अंदर हंसने लगा और उसके पीछे-पीछे चल दिया।

 
वापस लौटते समय रास्ते में एक अखाड़े को देखकर मैंने रवि से रिक्वेस्ट की कि मैं उसे पहलवानी के लंगोट में देखना चाहता हूं तो उसने कहा कि अखाड़े में आस-पास के गांव से भी लड़के पहलवानी करने आते हैं और उसने इस शर्त पर मेरी रिक्वेस्ट मान ली कि मैं कुछ ऐसी-वैसी हरकत न करूं ताकि उसके दोस्तों को मेरे और रवि के रिश्ते के बारे में कोई शक न हो। ये सब बातें होने के बाद हम घर पहुंचे तो उसकी मां ने कहा कि भैंसों को नहलाने का टाइम हो गया है। हम भैंसों को नहलाने के लिए जोहड़ पर जा पहुंचे। जोहड़ पर जाकर रवि ने भैंसों को जोहड़ में उतार दिया।रवि ने कहा- चल जोहड़ में उतरकर भैंसों को नहलाते हैं।

मैंने कहा- मैं जोहड़ में अंदर नहीं जाऊंगा, मुझे तो डर लगता है और ना ही मुझे तैरना आता है।वो बोला- ठीक है, तू यहीं रह!कह कर उसने डंडा एक तरफ फेंका और चप्पलें निकाल दीं. मैंने सोचा कि वो अकेला ही जोहड़ में जाने की तैयारी कर रहा है। मैं जोहड़ के पानी में तैर रही भैंसों को देखने लगा और अचानक पीछे से एक जोर का धक्का मेरी पीठ पर लगा और मैं छपाक की आवाज़ के साथ जोहड़ के पानी में जा गिरा.मैं एकदम से हड़बड़ा गया और सांसों भर गया… जब कुछ पल बाद संभला तो रवि बाहर खड़ा ठहाका मारकर हंस रहा था और हंसते हुए बोला- आया मजा?मैंने कहा- यार… ये क्या बात हुई.. मैंने कहा था ना मुझे तैरना नहीं आता!“तो मैं कौन सा डुबा रहा हूं तुझे?”

पानी के नीचे की मिट्टी चिकनी थी, मैं खड़ा होने की कोशिश करता और फिर पैर फिसल जाता!

कुछ देर उसने ऐसे ही मज़े लिये… फिर मेरी तरफ हाथ बढ़ा दिया और मुझे बाहर की तरफ खींच लिया. वो बोला- देख मैं दिखाता हूं कैसे तैरते हैं…कह कर उसने पीछे की तरफ पलटी मारी और पानी में गोता लगा दिया. कुछ सेकेण्ड्स तक तो वो मुझे दिखा ही नहीं। और जब दिखा तो मुझ से 20 फीट की दूरी पर जा कर… वो मछली की तरह अंदर ही अंदर तैरना जानता था। कुछ देर पानी में रहने के बाद वो बाहर आया, उसकी लोअर से पानी टपक रहा था और गीली लोअर में उसका लंड भी अलग से दिख रहा था।

क्योंकि ट्यूबवेल से आने के बाद उसने अंडरवियर नहीं पहना और हम सीधे जोहड़ पर ही आ गए थे। मैं उसकी टपकती लोअर में उसके लंड की शेप को ताड़ रहा था और वो मुझे देख रहा था। किनारे पर पहुंच कर बोला- देख क्या रहा है, आज रात तेरी गांड की मालिश करने वाला है ये!रवि की बात सुन कर मैं मुस्कुरा दिया, और वो हड़ेड..हडेड.. की आवाजें करते हुए भैंसों को पानी से बाहर हांकने लगा।

5 मिनट बाद भैंसें पानी से बाहर आ गईं और हम घर की तरफ चल पड़े।

भैंसों को बांध कर हम घर आ गए जहां रवि के साथ मैंने खाना खाया था. शाम के 5 बज चुके थे और सूरज ढलना शुरु हो गया था, हम घर जा कर बारी बारी से नहा लिये और कपड़े बदल लिये। हुक्के के साथ वाले कमरे में रवि की माँ और पापा का कमरा था। मैंने रवि के पापा को देख कर दूर से ही नमस्ते की और हम वापस बैठक वाले कमरे में चले गए, साथ ही हुक्का रखा हुआ था।रवि ने चिलम को हाथ लगा कर देखा तो वो गर्म थी। मैं उसके सामने वाली चारपाई पर बैठा था, उसने एक लंबी घूंट हुक्के की भरी और सारा धुंआ मेरे मुंह पर मार दिया। मैं खांसते हुए हंसने लगा “क्या कर रहे हो?” मैंने झेंपते हुए पूछा.वो बोला- तुझे भी हुक्का पिला रहा हूं।मैंने कहा- मुझे तुम्हारी जांघों के बीच में लटक रहा हुक्का ज्यादा पसंद है। वो पिला दो, जितना पिलाना चाहते हो।रवि बोला- रात को वो हुक्का अपने मुंह में लेकर ही सो जाना।मैंने कहा- और अगर मैंने उसे दांतों से काट लिया तो?वो बोला- वो तू देख ले, काटेगा तो दोबारा नहीं मिलेगा। अब ये तू ही डिसाइड कर ले कि एक बार लेना है उसके बाद भी लेना है।मैंने कहा- तुम कितनी बार करोगे…रवि बोला- जब तक तेरा मन ना भर जाए…मैंने कहा- मेरा मन तो कभी तुम से भरता ही नहीं।वो बोला- सोच ले बेटा… जब तेरी गांड में बिना तेल का मूसल (लौड़ा) जाएगा तो फिर रोना मत!मैंने कहा- देख लेंगे, कौन कितने पानी में है.वो बोला- ठीक है, रात को जब तेरी चीखें निकलेंगी तो तुझे खुद ही पता लग जाएगा।मैंने कहा- ठीक है, मुझे इस रात का बेसब्री से इंतज़ार है।

वो बोला- क्यूं, मैं क्या तेरा लोग (पति) लगता हूं…?मैंने कहा- मेरी ऐसी किस्मत कहां कि तुम मुझे अपनी लुगाई (पत्नी) बना लो…सुन कर वो हंस पड़ा, बोला- तू पागल है भोसड़ी के…मैंने कहा- हां, पागल तो मैं हूं, लेकिन तुम्हारे प्यार में।उसने हाथ जोड़ते हुए कहा- बस भाई… अब दोबारा शुरु मत हो।मैं एक बार तो उदास सा हुआ, फिर मुस्कुराते हुआ कहा- जो हुकुम मेरे आका…

तभी बाहर से आवाज़ आई…“सीटू, रोटी खा ले.”वो बोला- आया मां…कह कर वो बाहर निकल गया, मैंने टाइम देखा तो 6.30 बज चुके थे।

10 मिनट बाद वापस आया तो उसके हाथ में वही रोटियों भरी थाली थी जिसमें बहुत सारा घी लगा हुआ था और साथ में दो बड़े कटोरे सब्जी के थे।पीछे पीछे उसकी मां आई जिसके हाथ में दो बड़े ग्लास लस्सी के थे। ये सब रखते हुए उसकी माँ ने कहा- बेटा, अपना ही घर समझ… शर्माना मत, छिक के खाइये (पेट भर के खाना)मैंने हल्के से मुस्काते हुए कहा- जी आंटी!उसकी माँ वापस चली गई और हम रात का खाना खाने लगे।

जाटों में शाम के 6-7 बजे ही डिनर हो जाता है और 9 बजे बेड पर जाने का टाइम।लेकिन आज बेड पर जाने का टाइम मेरे लिए बहुत भारी हो रहा था। रवि के साथ मेरी दूसरी सुहागरात होने वाली थी जिसकी तरफ बढ़ता हुआ एक एक पल मेरी धड़कन बढ़ा रहा था। ऐसा नहीं था कि मैं उसके साथ पहली बार सेक्स करने वाला हूं लेकिन पता नहीं क्यों उसके साथ कुछ करने के बारे में सोचते ही मेरी सांसें गहरी होने लगती थी और दिल में अजीब सी खुशी भी होती थी।

हमने खाना खाया और कुछ देर बाहर टहलने निकल गए। रास्ते में चलते हुए उसने मुझे अपने एक दो दोस्तों से भी मिलवाया।जब तक हम वापस आए तो शाम के 8 बज चुके थे। हुक्के के साथ वाले कमरे में टीवी चलने की आवाज़ आ रही थी और दरवाज़ा ढला हुआ था। हमारे आने की आहट पाकर उस की माँ ने अंदर से ही आवाज़ लगाई- सीटू, भैंसों को देख कर आ जा और वहां का गेट बंद करके आ जा!रवि ने कहा- ठीक है मां.

रवि ने मुझ से कहा- तू यहीं रुक, मैं अभी 10 मिनट में आता हूं।कह कर वो बाहर चला गया।तब तक मैं उसके साथ सेक्स की बातें सोचने लगा।

आधा घंटा बीत गया लेकिन वो लौटा नहीं।

मैंने सोचा- 10 मिनट की कह कर गया था और अभी तक नहीं आया। मुझे उसके पास न होने से बेचैनी सी होती थी। लेकिन करता भी तो क्या..वहीं खाट पर लेटे हुए टाइम किल कर रहा था।और 15 मिनट बीत जाने के बाद वो गेट की आवाज़ हुई… और वो कमरे में दाखिल हुआ, उसके हाथ में एक छोटा सा कागज़ का लिफाफा था जो उसने वहीं कमरे में बनी अलमारी में रख दिया।मैंने पूछा- कहां रह गये थे।वो बोला- कुछ नहीं, भैंसों को चारा डालने में टाइम लग गया।कहते हुए उसने कमरे का दरवाज़ा बंद कर दिया और अंदर से कुंडी लगा ली।

कुंडी लगते ही मेरे मन में लड्डू फूटने लगे, मेरे मर्द के साथ सुहागरात का टाइम हो गया है।

उसने हुक्का एक तरफ कोने में रख दिया और साथ वाली चारपाई पर आकर लेट गया। उसने सफेद लोअर पहनी हुई थी और काला हाफ बाजू का टी-शर्ट डाल रखा था जिसमें उसके सेक्सी मजबूत बालों भरे हाथों को छूने के लिए मचल रहा था। खाट (चारपाई) पर लेटते ही उसके लंड में तनाव आना शुरु हो चुका था। जैसे ही मेरी नज़र उसके लंड पर गई उसके लंड ने भी ये भांप लिया कि मेरा छेद भी तैयार है और रवि के लंड ने लोअर में अपना आकार ले लिया और वो लोअर में ही तनकर अपनी पूरी शेप में आ गया।

अब मैं और इंतज़ार नहीं कर सकता था। रवि के बुलाए बिना ही मैं उठ कर उसकी चारपाई पर जाकर बैठ गया और लोअर में तने उस के लंड पर प्यार से हाथ फिराने लगा। मैं उस के चेहरे के हाव भाव देख रहा था जिसमें हवस और आनंद दोनों ही घुले हुए थे। उसने मेरे टी-शर्ट में हाथ डाल लिया और मेरी कमर को सहला रहा था।2-3 मिनट तक उसके लंड को सहलाने के बाद उस के लंड में लग रहे झटकों के कारण उस का प्रीकम (कामरस) उस की लोअर पर दिखाई देने लगा और उस का लौड़ा पूरे उफान में आ कर किसी भारी भरकम मोटे डंडे की तरह मेरे हाथों में भरने लगा।

 
रवि ने अपना हाथ मेरी टीशर्ट से निकाला और मेरे सिर पर रख कर उसे नीचे झुकाते हुए सीधा अपनी लोअर में तने लंड पर मेरे मुंह को रखवा दिया। मैं उसकी लोअर की खुशबू और लोअर पर लंड के टोपे की जगह लगे प्रीकम को सूंघता हुआ उसे चाटने लगा।उसने मेरे सिर पर हाथ का दबाव बढ़ाया और मैं उस के पूरे लंड पर अपने होंठ फिराने लगा। उस की सांसों की आवाज़ तेज़ होने लगी और हाथ का दबाव बढ़ता हुआ मेरे सिर को उसकी जांघों के बीच घुसाने लगा. मैं भी उस की लोअर के बीच वाले हिस्से को यहां वहां से चूमने-चाटने लगा। उस के लंड को सूंघता और उसे लोअर के ऊपर से ही दांतों के बीच पकड़ने की कोशिश करता।

हम दोनों का जोश हर पल बढ़ता जा रहा था। मैंने नज़रें उठा कर रवि के चेहरे की तरफ देखा तो उस के लाल होंठ हवस में सी सी कर रहे थे और आंखें बंद करके वो अपने लंड पर मेरे होठों की छुअन का आनंद ले रहा था।मुझे भी उसके लंड के साथ खेलने में बहुत मजा आ रहा था। मैंने उसके टी-शर्ट को लोअर की इलास्टिक के पास से थोड़ा ऊपर उठाया तो उसके झाँटों के ऊपर वाले हिस्से के पास पेट पर बालों की खूबसूरत सी लकीर उस की नाभि से होती हुई उस की टीशर्ट में छाती की तरफ ऊपर जा कर छिप जा रही थी।

मैंने उस के पेट के बालों पर हल्के से किस करना शुरु किया तो उसकी सिसकारी निकल गई- इस्स्स्… स्सश!वो बोला- क्या कर रहा है, गुदगुदी हो रही है मुझे।मैंने उसके पेट पर अगल बगल में किस करना जारी रखा। वो तड़पता रहा, मचलता रहा।

फिर मैंने उसके दोनों हाथों को ऊपर की तरफ सीधा करवा दिया और उसके टी-शर्ट को छाती तक उठा दिया। उस की बालों वाली छाती पर निप्पलों के पास जाकर टीशर्ट फंस गया। मैंने रवि की मर्दाना बालों वाली छाती पर किस करना शुरु कर दिया। उसकी छाती के बीच वाले हिस्से को चूमने के बाद मैंने उस के निप्पलों पर होंठ रख दिए और उसके निप्पलों को चूसने लगा, लेकिन जल्दी ही उसने मुझे वहां से हटा दिया और थोड़ा ऊपर उठकर अपनी टी-शर्ट को निकाल कर साथ वाली चारपाई पर फेंक दिया।

उसकी छाती मेरे सामने नंगी थी, मैं उसकी छाती के बालों में होंठ फिराने लगा और धीरे-धीरे प्यार से किस करते हुए उसके गले के आगे वाले हिस्से को होठों के सहारे मुंह में भरकर चूसने लगा। उस पर अंदर ही अंदर जीभ फिराने लगा। वो कामुक सिसकियां ले रहा था- अम्म्म्म… उम्म्ह… अहह… हय… याह… ऊंहहह… आह…उसके हाथ मेरी गांड को चूचे समझ कर दबा रहे थे और उसका लंड मुझे अपने पेट पर झटके मारता हुआ अलग से महसूस हो रहा था।

कुछ देर गर्दन को किस करने के बाद मैंने उसके दोनों हाथों को पीछे की तरफ फैलवा कर सीधे करवा और उसके कांख (अंडरआर्म) के बालों वाला हिस्सा ऊपर आ गया। मैंने उसके अंडरआर्म में सूंघा तो उस के पसीने की मदहोश करने वाली खुशबू में मेरी आंखें बंद हो गई। मैं उस के बालों को जीभ निकाल कर चाटने लगा। उसे भी मजा आ रहा था इस हरकत में। मैंने बारी बारी से दोनों अंडरआर्म के बालों को जी भर के चाटा और उस मर्द की जवानी का रस पीया।अब बात हम दोनों के काबू से बाहर थी। वो मेरे मुंह में लंड देने के इंतज़ार में था और मैं उसके लंड को चूसने के लिए मरा जा रहा था।

रवि के घर में उसके साथ मेरी दूसरी सुहागरात शुरु हो चुकी थी और उसकी लोअर में तने लंड को चूमने चाटने के बाद मैंने उसकी छाती को नंगा करवा कर छाती के बालों को चूमा, उसकी गर्दन पर प्यार से किस किया और फिर उसने टी-शर्ट निकाल दिया और मैंने उसके दोनों हाथों को पीछे फैलवा कर उसके अंडरआर्म के बालों को जी भर के चाटा और उस मर्द की जवानी का रस पीया।उसकी जवानी की खुशबू में डूबा हुआ सा मैं दोबारा उसकी छाती पर किस करने लगा। उसकी छाती के बाल जो छाती को ढक कर बीच वाले हिस्से में इकट्ठे होकर धारा की तरह नीचे पेट की तरफ आकर उसकी नाभि से होकर उसके झाँटों में मिल रहे थे। उसके सेक्सी बालों की लकीर में नाक फिराता हुआ मैं उसकी लोअर के इलास्टिक तक पहुंच गया जहां उसकी फ्रेंची की सफेद पट्टी शुरु हो रही थी।

रवि की लोअर में तना लौड़ा और लोअर से ऊपर का उसका नंगा बदन और साथ ही उसके चेहरे पर तैरती अंतर्वासना की लहरें मुझे उसके लिए पागल किए जा रही थीं. मैंने अपने दांतों से उसकी लोअर की इलास्टिक को नीचे खींचने की कोशिश की। लेकिन उसकी गांड इतनी मोटी थी मुझे कामयाबी नहीं मिली और दो पल बाद उसने थोड़ा उठते हुए अपने हाथों से ही लोअर को अपनी जांघों तक नीचे सरका दिया।

उसकी लोअर का परदा नीचे गिरते ही मेरे सपनों का लौड़ा मेरे मर्द की फ्रेंची में तना हुआ मेरे मुंह में जाने के लिए तड़पता हुआ दिखाई दिया। उसके मोटे लंड ने जॉकी की फ्रेंची को ऊपर उठा रखा था और फ्रेंची का राइट साइड वाला लगभग आधा हिस्सा उसके प्रीकम से गीला होकर लौड़े की नोक पर झाग बना चुका था। मैंने तने हुए लौड़े के मुंह पर उसके झाग को अपनी जीभ की नोक से टच किया तो लंड ने झटका दे दिया। उस झटके के जवाब में मैंने उसकी टोपी को अपने होठों से चूस लिया और रवि की गहरी ‘आह…’ निकल गई। उसके चेहरे को देख कर मैं आसानी से अंदाज़ा लगा सकता था कि वो अपना प्रीकम से तर हो चुका लौड़ा मेरे गर्म मुंह में देने के लिए तड़प रहा है।

 
उसने कहा- बस कर अब फ्रेंची में ही निकलवाएगा क्या…मैंने हल्के से मुस्काते हुए उसके सेक्सी चेहरे की तरफ देखते हुए फ्रेंची में बनी लंड की शेप पर होंठ फिराते हुए बड़े ही प्यार से उसकी फ्रेंची की इलास्टिक को धीरे से नीचे खींचना शुरु कर किया। उसके घने काले झाटों से पर्दा हटाती हुई धीरे-धीरे नीचे सरकती हुई फ्रेंची फिसल रही थी और उसके बांस जैसे मोटे लंड की जड़ दिखना शुरु होकर धीरे-धीरे लंड की गोलाई को नंगा करके फ्रेंची ने लंड के टोपे पर आकर उसका साथ छोड़ दिया और लगाम से छूटे घोड़े की तरह उसका लौड़ा एकदम से उछलकर उसके बालों भरे आण्डों को पूरा दर्शाता हुआ उसके झाटों के ऊपर जाकर लेट गया।उसकी फ्रेंची को जांघों से नीचे फंसा कर मैं भी अपने मर्द की उबल रही जवानी को निहारने लगा। मैंने धीरे से उसकी मोटी जांघों के बीच बनी अंधेरी खाई पर टिक कर फैले हुए आण्डों पर गर्म जीभ लगाई तो वो सिकुड़ते हुए हरकत में आ गए। और लंड ने एक जोर का उछाला देते हुए बता दिया कि आँडों के मालिक को मजा आया।

मैंने उसके गोल सांवले भारी आँडों को मुंह में भर लिया और उसके पेट पर कोमलता से हाथ फिराते हुए उसके आँडों को अंदर ही अंदर जीभ से गुदगुदाने लगा। उसके लंड ने झटके पर झटके मारना शुरु कर दिए और रवि के हाथ मेरे बालों में प्यार से उंगलियां फिराने लगे। उसकी आँखें आनन्द में बंद थीं और वो आँड चुसाई के गहरे सागर में गोते लगा रहा था।5 मिनट तक मैंने उसके भारी भरकम आँडों को चूस चूस कर उसे पागल कर दिया।

वो बोला- एक मिनट रुक।मैंने आँडों से मुंह हटा लिया और उठकर बैठ गया, मैंने पूछा- क्या हुआ?वो बोला- तू एक बार आँखें बंद कर!मैंने हैरानी से उसकी तरफ देखा।वो बोला- कर ना आँख बंद।

मैंने मुस्कुराते हुए आँखें बंद कर ली, वो चारपाई से उठ गया और एक मिनट के अंतराल के बाद वापस आकर लेट गया। मेरी आँखें बंद ही थीं। मुझसे बिना कुछ कहे उसने मेरी गर्दन पकड़ी और नीचे झुकाते हुए मेरे होठों को लंड के टोपे पर रख दिया। मैं भी उसके लंड को मुंह में लेने के लिए मरा जा रहा था पर जैसे ही मैंने होंठ खोल कर लंड को अंदर लेना शुरु किया और जीभ पर लगता हुआ लंड अंदर तक गया तो मुझे कुछ मीठा मीठा स्वाद आने लगा।मैंने आँख खोलकर देखा तो उसके झाटों पर शहद की कुछ बूंदें गिरी हुई थीं।

लंड की जड़ तक तक बह कर शहद झाटों में जा रहा था। मैंने उसकी तरफ देखा तो उसने आँख मार दी और वही कातिल मुस्कान से पुच्च करके एक सेक्सी पप्पी भी दे दी। मैं पागलों की तरफ उसके शहद में डूबे लंड को चूसने लगा। दांतों को टच किए बिना प्योर होठों वाली चुसाई और साथ में शहद की मिठाई।आह… इससे ज्यादा आनन्द मुझे लौड़ा चूसने में कभी नहीं आया। मैंने अपने पूरे प्यार को उसके लौड़े की चुसाई में लगा दिया और वो 2-3 मिनट में ही मेरे सिर को दबाता हुआ मेरे मुंह में वीर्य की पिचकारी मारने लगा।आनन्द से भरे 5-6 झटकों में उसने अपने आँडों की टंकी का रस मेरे मुंह में खाली कर दिया। मैं उसकी एक एक बूंद को निचोड़ता हुआ उसका स्वाद चखता हुआ अपने मर्द के लंड से निकले सोनूको अपने अंदर ले गया और उसके लंड को यूं ही मुंह में रखे हुए ही उसके पेट पर सिर रखकर लेट गया।

वो भी शांत हो गया और उसके दोनों हाथ मेरी कमर पर आकर बंध गए। उसकी झाटों से मर्दानगी की खुशबू आ रही थी।हम दोनों दस बारह मिनट तक ऐसे ही पड़े रहे। उसके बाद मैंने मुंह में रखे उसके सोए हुए गिलगिले लंड को जीभ की मदद से अंदर ही अंदर चाटते हुए मुंह में एक गाल से दूसरे गाल की तरफ यहां वहां हिलाना डुलाना और उस पर जीभ फिराना शुरु कर दिया। वो ऐसे ही बिना हरकत किए हुए लेटा रहा।

5 मिनट तक लंड के साथ खेलने के बाद जीभ की मेहनत ने रंग दिखाना शुरु किया और लंड ने धीरे-धीरे मेरे गर्म मुंह के अंदर ही अपना आकार बढ़ाना शुरु कर दिया और अगले 5 मिनट में उसके लौड़े ने फिर से मेरे मुंह को भर दिया।मैंने दोबारा चुसाई शुरु कर दी। अबकी बार तनाव में हल्की सी कमी थी क्योंकि आज मैं रवि के लंड को तीसरी बार निचोड़ने की तरफ आगे बढ़ रहा था। लेकिन पता नहीं क्या बात थी उसमें, अगर उसके पास लंड ना भी होता तो भी मैं उसे ऐसे ही प्यार करता।

 
मैंने पूरे जोश के साथ उसके लंड को चूसना जारी रखा। उसका एक हाथ अब मेरी लोअर के अंदर घुसकर मेरी गांड को मसल रहा था, उसे बार-बार दबाकर चुदाई के लिए तैयार कर रहा था और दूसरा हाथ मेरे सिर पर दबाव बनाकर लंड को गले तक पहुंचाने में मदद कर रहा था। मैं भी पूरी कोशिश के साथ उसके लंड को गले के अंदर तक ले जाता और होंठ उसके झाँटों को चूम कर वापस आ जाते।उसकी स्पीड बढ़ रही थी, 5 मिनट तक इसी स्पीड के साथ चुसाई चली और उसने मुझे उठने का इशारा किया। मैं उठ बैठा और रवि ने अपनी लोअर और फ्रेंची दोनों अपनी टांगों से बाहर निकाल कर साथ वाली खाट पर एक तरफ फेंक दी और मेरे टीशर्ट को उठाते हुए मेरे हाथों को ऊपर उठवा कर मुझे ऊपर से नंगा करवा दिया। मेरी छोटी छोटी चूचियों को दबाते हुए उसने बैठे बैठे ही अपने होठों में भर लिया और मेरे निप्पलों को चूसने लगा दांतों से हल्के से काटते हुए!

मुझे मीठा-मीठा दर्द देने लगा, मैंने उसको अपनी बांहों में भर लिया और अपने निप्पल चुसवाने लगा। अब मेरी सिसकारियां निकल रही थीं, मैं उसके होठों और दांतों की हरकत से अपने निप्पलों पर होने वाली सेंसेशन और गुदगुदी से पागल सा हुआ जा रहा था। मैंने रवि के सिर को अपने निप्पलों पर दबा लिया। उसने मुझे लोअर निकालने का इशारा किया और मैंने निप्पल चुसवाते हुए ही लोअर निकाल दी।

अब उसने मुझे पीठ के बल खाट पर पटका और मुझ पर चढ़ गया। कभी निप्पलों को काट लेता तो कभी गर्दन पर किस कर देता।

मैं तो बदहवास सा होकर उसकी हरकतों का मज़ा लेने लगा। पांच सात मिनट तक वो मेरे जिस्म से खेलता रहा और अचानक उसने मेरे हाथ नीचे दबा लिए और मेरी छाती पर बैठ कर लंड को मेरी ठुड्डी पर ला कर पटकने लगा। वैसे तो मैं उस के वज़न के नीचे दबा जा रहा था फिर भी मैंने उस के आनन्द में कोई खलल पैदा नहीं होने दिया और वो लंड को मेरे होठों पर रगड़ने लगा।और अगले ही पल मेरे सिर के दोनों ओर अपने हाथों का सहारा बनाकर लंड को दोबारा मेरे मुंह में दे दिया और मेरे मुंह को चोदने लगा। उसके आँड मेरी छाती पर झूलते हुए मेरी ठुड़्ड़ी पर आकर लग जाते। और मैं लेटा हुआ उसका लंड को पूरा अंदर ले जाता। उसका लंड मेरे थूक से बिल्कुल चिकना हो चुका था।

रवि ने 5 मिनट तक ऐसे ही मेरे मुंह को चोदा और फिर तेजी से लंड को निकालते हुए जोश के साथ मेरी टांगें ऊपर उठा दीं। उसने मेरी गांड के छेद पर थूक दिया और लंड के टोपे को गांड पर फिराने लगा। मैं तो आनन्द के सातवें आसमान पर पहुंच गया। वैसे तो दिन की चुदाई के बाद मुझे गांड सूजी हुई महसूस हो रही थी फिर भी उसके लंड का गांड के छेद पर फिरना मुझे पागल किए जा रहा था। मैं दोबारा उसका लंड लेने के लिए तैयार हो चुका था।

रवि ने मेरी दोनों टांगों को एक साथ एक हाथ में पकड़ा और दूसरे हाथ से लंड को गांड के छेद पर लगा कर टांगों को छोड़ दिया। धीरे धीरे उसका आठ इंच का लौड़ा मेरी गांड में सांप की तरह अंदर घुसने लगा।मुझे दर्द हो रहा था पर रवि का लंड लेने के बारे में सोच कर साथ ही मजा भी आ रहा था।वो मेरा प्यार था.धीरे धीरे उसने पूरा लंड गांड में उतार दिया और मेरी टांगें अपने दोनों तरफ फैलवा कर मुझ पर लेट गया। उसका लंड पूरी मेरी गांड में समा गया और मुझे अपने मर्द का वो जुड़ाव जैसे स्वर्ग की ओर ले गया। मेरी आँखें बंद हो गईं और मैंने अपने दोनों हाथों से कस कर उसकी कमर को पकड़ लिया और उसे अपनी बांहों में जकड़ते हुए उसके लंड को आँडों तक अपनी गांड में समा लिया।

मैं उसे प्यार से चूमने लगा। उसकी गर्दन पर किस करने लगा और वो आराम से लंड मेरी गांड में डालकर ऐसे ही लेटा रहा। मेरे हाथ उसकी कमर को सहला रहे थे।मेरी यह सुहागरात पहली सुहागरात से कहीं ज्यादा हसीन और आनन्द देने वाली साबित हो रही थी।

मेरी आंखें बंद हो गईं और मैंने अपने दोनों हाथों से कस कर उसकी कमर को पकड़ लिया और उसे अपनी बाहों में जकड़ते हुए उसके लंड को आंडों तक अपनी गांड में समा लिया। मैं उसे प्यार से चूमने लगा। उसकी गर्दन पर किस करने लगा और वो आराम से लंड मेरी गांड में डाल कर ऐसे ही लेटा रहा।मेरे हाथ उसकी कमर को सहला रहे थे, मैं चाह रहा था कि वो यूं ही अपना लंड मेरी गांड में डाल कर लेटा रहे और यह रात कभी खत्म ना हो.

2 मिनट बाद उसने लेटे लेटे ही धीरे धीरे हरकत में आना शुरु किया और लंड को गांड में हल्के रिदम के साथ अंदर बाहर करने लगा। वो भी पूरा मजा ले रहा था।तीन चार मिनट तक ऐसे ही हल्की स्पीड में उसने इजाफा करना शुरु किया और उसके इंजन के पिस्टन ने मेरी गांड में अंदर बाहर होना शुरु कर दिया। रवि अब मेरे ऊपर से उठ गया और उसने एक एक हाथ में मेरी एक एक टांग पकड़ ली और मेरी गांड ऊपर उठाते हुए तेजी से उसमें लंड को अंदर बाहर करने लगा।

मुझे दर्द होने लगा लेकिन उसकी स्पीड हर पल के साथ बढ़ती जा रही थी। खाट से चूं-चूं की आवाजें आने लगीं। पर वो अपनी स्पीड बढा़ता ही जा रहा था। उसकी स्पीड के साथ-साथ मेरा दर्द भी बढ़ रहा था…मेरे चेहरे का आनन्द गायब हो गया और उसकी जगह गांड के दर्द के अहसास ने ले ली।

रवि ने और ज़ोर से चुदाई करते हुए मेरी गांड को मसलना शुरु कर दिया। मेरी गांड में जैसे मिर्ची का छिड़काव होने लगा। चुदाई की स्पीड के चलते खाट का बिस्तर भी मेरी कमर के नीचे इकट्ठा हो रहा था। लेकिन रवि पूरे जोश में गांड चुदाई का मजा ले रहा था। उसने और जोश के साथ मुझे अपनी तरफ खींचा और मेरी गांड को उठा कर खुद भी मेरे ऊपर झुक कर मेरी टांगों को एक हाथ में पकड़े हुए और तेज़ स्पीड से गांड को चोदने लगा।

मैं दर्द के मारे तड़पने लगा, क्योंकि रवि के साथ ट्यूबवेल में चुदाई के कारण गांड सूजी हुई थी इसलिए दर्द हर पल बढ़ता ही जा रहा था, मेरा चेहरा लाल हो गया और सांस लेना भारी होने लगा, रवि मेरे चेहरे की तरफ देखे जा रहा था और मेरा दर्द उसे और तेज़ गांड मारने के लिए उकसा रहा था।

मेरी आंखों की साइड से पानी गिरने लगा लेकिन मैंने मुंह से चूं तक नहीं की। लग रहा था कोई जले पर नमक छिड़क कर हथौड़ा अंदर बाहर कर रहा है।

दस मिनट तक चली इस जबरदस्त चुदाई के बाद रवि को मुझ पर रहम आया और उसने स्पीड बढ़ाकर चार पांच तेज़ झटके गांड में लगाए और उसके माथे का पसीना मेरी छाती पर गिरने लगा। वो झड़ कर धीरे धीरे शांत होने लगा और थक कर मेरे ऊपर गिर गया। उसका लंड मेरी गांड में ही सिकुड़ने लगा और मैं उसकी कमर को सहला रहा था।उसने लंड निकाला और एक तरफ लेट गया।

मैं उठ कर उसके माथे के पसीने को पौंछने लगा और घायल गांड के सहारे उसके पेट के पास बैठ गया। उसकी आंखें बंद थीं। जब आंखें खोलीं तो मैं उसके चेहरे को देखकर मुस्कुरा रहा था…

 
रवि बोला- साले जब तुझे इतना दर्द होता है तो चुदता ही क्यों है? क्यों गांड मरवाता है?मैंने कहा- मुझे नहीं पता, लेकिन तुमसे प्यार करता हूँ इसलिए दर्द को बर्दाश्त कर जाता हूँ.

वो बोला- देख सोनू, यार जो तू सोच रहा है, मैं चाह कर भी वो तुझे नहीं दे सकता… मुझे लड़कियों में इंटरेस्ट है। और वैसे भी प्यार व्यार तो मैं किसी लड़की से भी नहीं करता! तू तो फिर भी लड़का है. मुझे ये सब प्यार व्यार रोमांस के चोंचले पसंद नहीं हैं। लेकिन मैं तेरी भावनाओं की कद्र करता हूँ इसीलिए तुझे किसी बात के लिए मना नहीं करता। और फिर तू लंड भी अच्छा चूसता है, लड़कियों के साथ सेक्स करने में सौ तरह के नखरे झेलने पड़ते हैं। मैं कॉन्डॉम के बिना नहीं करवाऊँगी, मैं मुंह में नहीं लूंगी, गांड नहीं मरावाऊँगी… मैं ऐसा नहीं करती, मैं वैसा नहीं करती और पता नहीं क्या क्या… बेवजह के नाटक मुझ से बर्दाश्त नहीं होते। लंड तो उन को भी चाहिए होता है फिर नखरा किस बात का। पर तेरे साथ करने में बहुत मजा आता है मुझे।

उस की बातें सुन कर मैं दुखी सा हो गया। मैं सोच रहा था, रवि भी मुझे इस्तेमाल कर रहा है, मुझ से सिर्फ सेक्स की आग ठंडी करवा रहा है। लेकिन मैं कहाँ जाऊं, मैं तो इससे प्यार करता हूँ ना। खैर, सेक्स के लिए ही सही, उसे मेरा साथ पसंद तो है, मेरे लिए यही बहुत है। सोच कर मैंने दिल को तसल्ली दे दी।

उस को इस बात का पता ना लगे कि मैं उस की बात सुन कर दुखी हो गया हूँ, मैंने तुरंत बात आगे बढ़ाते हुए कहा- तो आप अपनी बीवी को भी सेक्स के अलावा कुछ नहीं दोगे?वो बोला- तब की तब देखेंगे, अभी तो मेरी एक गर्लफ्रेंड है जो मेरा काम चला देती है.वह बोला- लेकिन तू बड़ा प्यार प्यार करता रहता है। यार लड़का और लड़की के बीच में तो प्यार तो सुना था लेकिन मुझे ये समझ नहीं आता कि तू लड़का हो कर किसी दूसरे लड़के से प्यार कैसे कर सकता है?मैंने कहा- जब आप को प्यार के बारे में पता ही नहीं तो ये कैसे समझ पाओगे के प्यार दो लड़कों के बीच में भी हो सकता है।

वो बोला- बात तो तेरी भी ठीक है। लेकिन यार तू एक बात बता ‘जब कोई सेक्सी सी लड़की तेरे सामने आती है तो तुझे कैसा लगता है?’मैंने कहा- उससे पहले आप एक बात बताओ।वो बोला- हाँ पूछ?“जब आप किसी लड़के को देखते हो तो आपके मन में क्या फीलिंग आती है?”वो बोला- पागल है क्या… मुझे किसी लड़के को देख कर फीलिंग क्यों आएगी?मैंने कहा- तो बस यही बात मेरे साथ भी है, मुझे किसी लड़की को देख कर कोई फीलिंग आती ही नहीं। चाहे वो दिखने में कैसी भी हो। या कोई लड़की मेरे सामने पूरी नंगी ही क्यों न खड़ी हो… मुझे कोई फर्क ही नहीं पड़ेगा।वो बोला- अच्छा… और लड़के को देख कर क्या फीलिंग आती है?

मैंने कहा- मैं इस बात का जवाब भी ड़े दूंगा लेकिन उससे पहले आप मेरी एक बात का जवाब दो।वो बोला- ये भी पूछ ले?“आप के सामने जब कोई लड़की आती है तो क्या आप का लंड उस को देखते ही खड़ा हो जाता है?”वो बोला- नहीं यार… कोई काली कलूटी या मेरी नापसंद की लड़की आएगी तो मैं उस की तरफ देखता भी नहीं।मैंने कहा- तो मेरे साथ भी यही है, मैं भी सामने वाले हर लड़के को देख कर ये नहीं सोचता कि इसका लंड ले लूं… प्यार तो बहुत दूर की बात है।

वो बोला- तो मुझ में तूने ऐसा क्या देख लिया?मैंने कहा- जब आप को पहली बार आकाश की शादी में देखा था तो मैं आप की सेक्सी बॉडी को देख कर आप की तरफ अट्रैक्ट हुआ था।वो बोला- कैसे?“आप का हैंडसम चेहरा, आप की चैस्ट, आप की बालों वाली छाती, आप के डौले, आप की थाइज़, बिखरे बालों वाला देसी हेयर स्टाइल… आप के लाल होंठ… आप की काली सेक्सी आंखें… और सबसे ज्यादा आप की स्माइल… बहुत सेक्सी लगी मुझे!”

मेरी रोमांटिक बात सुन कर वो हंस पड़ा, बोला- अच्छा रै… कति ध्यान तै देख ग्या तू तै मनै… (तू तो बिल्कुल ध्यान से देख गया मुझे)मैंने कहा- यही तो मैं आप को समझाना चाहता हूँ कि मुझे आप जैसा कोई मिला ही नहीं आज तक… और फिर रात को जब आपने नशे में मेरे साथ सेक्स करते हुए मुझे ‘आई लव यू’ बोला, तो मुझे आपसे प्यार हो गया। और अब हालत ऐसी है कि मैं आप को देखे बिना रह ही नहीं पाता हूँ इसलिए आप से मिलने हिसार चला आया. लेकिन आप मुझे बताए बिना ही वहाँ से निकल आए?

वो बोला- पागल, मुझे नहीं पता था कि तू मुझे लेकर इतना सीरियस हो गया है। वैसे भी रात को नशे में था तो मुझे कुछ ज्यादा याद भी नहीं रहा कि क्या हुआ… लेकिन मजा बहुत आया तेरी गांड मार कर…मैंने कहा- कोई बात नहीं, आप मेरे साथ हो और मैं आप को जब चाहे टच कर सकता हूँ, आप से बात कर सकता हूँ, इतना ही बहुत है मेरे लिए।मेरी बात सुन कर वो खामोश हो गया.

 
मैं भी कुछ देर उस को ऐसे ही देखता रहा… वो कुछ सोच रहा था… वो मुझे ध्यान से देख रहा था और मैं उसे!वो बोला- तू सच में मुझ से इतना प्यार करता है?उस का ये सवाल यूं तो बहुत आसान था, लेकिन जवाब देना मेरे लिए बहुत मुश्किल था… जवाब सोचते सोचते आकाश की शादी में रवि का लंड चूसने से लेकर संदीप के हाथों बेरहमी से चुदने तक की सारी घटनाएँ पल भर में मेरे दिल और दिमाग को झिंझोड़ गई… उस तक पहुंचने के रास्ते में जो भी हुआ वो उसे बता भी तो नहीं सकता था। वो मेरी आंखों में देखता हुआ मेरे जवाब का इंतज़ार कर रहा था… और जवाब मेरी घायल गांड से चल कर टूटे हुए दिल से होता हुआ गले तक भर तो गया लेकिन निकला… आंसू बन कर!

मैं उसके हाथ को अपने हाथ में लेकर अपने चेहरे से लगाता हुआ रोने लगा। उसने दूसरा हाथ मेरी कमर पर फिराते हुए मुझे अपनी छाती पर लेटा लिया, उसके सीने से निकल रही धड़कन की धक धक मुझे अपने कानों में साफ साफ सुनाई दे रही थी। वो मेरे बालों में हाथ फिरा रहा था और मेरा दर्द आंसू बन कर उस की नंगी छाती को भिगा रहा था.

मन ही मन मैंने भगवान से कहा- हे भगवान… अगले जन्म में भी मुझे गाण्डू ही बनाना और अगली बार भी इसी से मिलाना। मैं इसी के साथ खुश हूँ।ये सोचते सोचते दिल हल्का हो रहा था और आंखें बंद।मैं सो गया.

सुबह अचानक ही गेट पर बजी घंटी के साथ नींद टूटी… उसने हाथ मार कर मुझे उठाया और मैं तुरंत ही टी-शर्ट और लोअर पहन कर दूसरी चारपाई पर जाकर लेट गया। रवि ने भी अपनी टी-शर्ट और लोअर डाली और उठ कर बाहर दरवाजे पर गया। गेट खोल कर देखा तो कोई लड़का गेट पर खड़ा था।लड़के ने कहा- अरै सीटू… खाड़़े मैं नहीं चालता के आज? (अखाड़़े में नहीं चल रहा क्या आज…)वो बोला- यार, मेरा एक दोस्त आया हुआ है.लड़के ने कहा- के होया फेर… उसनै बी गेल्याँ ले चल! (कोई बात नहीं, उस को भी साथ ले चल…)रवि बोला- यार कल रात को ही आया है, तुम लोग जाओ मैं कल आ जाऊँगा.लड़का बोला- चल ना यार… तेरा दोस्त भी घूम आवगा, और तेरे बिना पहलवानी का मजा भी नहीं आता.

उसकी ज़िद देखकर रवि बोला- ठीक है, तुम लोग चलो, मैं आता हूँ थोड़ी देर में…वापस आकर रवि ने कहा- तू मुझे लंगोट में देखना चाहता था ना… ले तेरी ये ख्वाहिश भी आज पूरी कर ही देता हूँ… चल उठ हम अखाड़़े में जा रहे हैं।

मुझे पता था वो तीन बार चुदाई के बाद थका हुआ है लेकिन फिर भी केवल मेरी खातिर अखाड़े में जा रहा है.मैंने आंखें मलते हुए चप्पलें पहन लीं… घड़ी में टाइम देखा तो सुबह के 4.30 बज चुके थे… हम ने हाथ मुंह धोया और गेट खोल कर खेतों की तरफ निकल पड़े.हम लगभग 5 बजे तक अखाड़े के पास पहुंच गए.

सुबह का सूरज धीरे धीरे अपनी रोशनी बिखेर रहा था. रवि ने एक तरफ जा कर अपना लाल लंगोट निकाला और लोअर को नीचे करके लंगोट बांधने लगा। मैंने मुंह घुमा लिया। वो मेरी इस हरकत पर हैरान था शायद।वो मेरे पास आ कर बोला- तू तो कह रहा था मुझे लंगोट में देखना चाहता है… और तूने मुझे देखा भी नहीं?मैंने कहा- मैं नहीं चाहता कि मेरी वजह से आप पर कोई उंगली उठाए कि आप एक गाण्डू से दोस्ती रखते हो।वो बोला- तू पागल है क्या, बेफिक्र रह… अब मुझे फर्क नहीं पड़ता इन सब बातों से!मैंने कहा- लेकिन मुझे पड़ता है। अब मैं ऐसी कोई हरकत नहीं करुंगा जिससे आपको शर्मिन्दा होना पड़े.वो बोला- तू टेंशन मत ले और मौज कर…

कह कर हम अखाड़े की तरफ बढ़ चले… वहाँ चार-पांच लड़के पहले से ही मौजूद थे जो काफी हट्टे कट्टे थे और सबका शरीर सिर से लेकर पैर तक मिट्टी में सना हुआ था। रवि ने मेरे सामने अपनी टी-शर्ट उतारी, उस की मजबूत छाती नंगी हो गई, उसने टी-शर्ट मुझे पकड़ा दी और उसने लोअर नीचे सरकाई तो मैं अपने आपको उसे देखे बिना रोक नहीं पाया। उस की सेक्सी थाई और उनके बीच में बंधा लंगोट और लंगोट में बंधा उसका भारी भरकम हथियार और उस हथियार के ऊपर निकल रहे उस के काले घने झाँट… मैंने एक नज़र भर उस को देखा और फिर नज़र हटा ली। उसने लोअर भी मुझे पकड़ा दी।

मेरा एक और सपना पूरा कर दिया उसने!

वो कपड़े मुझे पकड़ा कर अखाड़े की तरफ बढ़ा और सबको आवाज़ लगाई- अरै, पहलवानों अकेले अकेले लगे हुए हो।रवि की बात आवाज़ सुनकर जैसे ही उन पहलवानों ने नज़र हमारी तरफ घुमाई… मेरे पैरों तले की ज़मीन खिसक गई.

मेरे सामने अखाड़े में मिट्टी और रेत में लथपथ शरीर के साथ संदीप वहाँ पर खड़ा हुआ था… वही संदीप जिसकी बाइक पर मैंने लिफ्ट ली थी रवि के घर तक आने के लिए और वो मुझे किसी दूसरे गांड नेवली खुर्द में ले गया था और वहां उसने एक कोठरी में शराब पीकर अपने दो दोस्तों के साथ मेरी गांड मारी थी और मुझे वहीं पर कोठरी में घायल अवस्था में सोता हुआ छोड़ कर चले गए थे।

आगे की कहानी जल्दी ही लेकर लौटूंगा.

 
अभी तक आपने पढ़ा कि रवि के साथ उसी के घर पर मेरी दूसरी सुहागरात… यार के साथ हुई जिसमें उसने मेरी गांडफाड़ चुदाई की. हम दोनों के बीच में हमारे रिश्ते को लेकर काफी बातें भी हुईं जिसमें नतीजा यह निकल कर आया कि वो अपनी सेक्स की प्यास बुझाने के लिए मेरे साथ भले ही दोस्ती जैसा रिश्ता निभा रहा था लेकिन उसके दिल में मेरे लिए एक सॉफ्ट कॉर्नर भी था जिसको वो अपने मुंह से स्वीकार नहीं करना चाहता था.लेकिन उसकी बातों से मुझे यह पता लग गया कि वो भी मुझे चाहता है.

उस रात की सुबह बहुत ही चौंकाने वाली थी जब मैं और रवि अखाड़े में पहुंचे तो हल्की सर्द सुबह ने अंगड़ाई लेते हुए चंदा की चांदनी की चमकीली चादर को हटाकर सूरज की किरणों से सजी लाल ओढ़नी अपने सिर पर डालने की तैयारी कर ली थी. अखाड़े में पहुंचकर रवि ने अपना लंगोट बांधा और उस सेक्सी पहलवान मर्द को देखकर मेरी आह निकल गई. मुझे नहीं पता था कि मैं इतना किस्मत वाला हूं कि ऐसे मर्द के दिल में जगह बनाने में कामयाब हो पाया हूं.

लेकिन जैसे ही रवि ने अखाड़े में मौजूद पहलवानों को आवाज़ लगाई तो कामयाबी और खुशी के सूरज को अतीत का ग्रहण लग गया. रवि की आवाज़ सुनकर उन पहलवानों ने नज़र हमारी तरफ घुमाई… रेत में लथपथ उन पहलवानों में एक संदीप था, जिसे देख कर मेरे चेहरे पर हैरानी और डर का नंगा मुखौटा लग गया जिसके नीचे मेरे ज़हन में उथल पुथल मच गई कि अब मैं क्या करूं. मुझे उस रात का एक एक पल याद आ रहा था जब संदीप ने अपने दोस्तों के साथ मेरी गांड मारी थी। लेकिन उससे भी ज्यादा चिंता इस बात की थी कि अब क्या होगा? संदीप रवि के गांव में क्या कर रहा है और वो भी उसी अखाड़े में जिसमें मैं खुद ही रवि को लेकर आया हूं।मेरी किस्मत कहां ले जाना चाहती है मुझे।

अगर इसने रवि को उस रात के बारे में बता दिया तो मैं तो जीते जी मर जाऊंगा। कहीं रवि के सामने सारी सच्चाई आ गई और उसने मुझे छोड़ दिया तो? लेकिन यहां से वापस भाग कर जाऊं कहां.. भागा तो रवि को क्या जवाब दूंगा? मेरे आगे अतीत का कुंआ था और पीछे रवि को खोने के डर की अंधेरी खाई जिसकी गहराई का अंदाज़ा भी लगाने की हिम्मत नहीं थी मुझ में!लेकिन फिर थोड़ा संभला, सोचा कि जो होगा देखा जाएगा, अब आ गया तो आ गया, वैसे भी रवि मुझे मारे, पीटे या दुत्कारे, मैं पीछे नहीं हटूंगा, अगर किस्मत को यही मंज़ूर है तो यही सही.

मैं रवि के पीछे पीछे चलते हुए अखाड़े के किनारे तक चला गया। रवि अपनी जांघ पीटता हुआ अखाड़े में घात लगाने के लिए आगे बढ़ा और संदीप का मिट्टी में सना चेहरा अपने हाव भाव छिपाए हुए था। लेकिन उसकी आंखों में कुछ वैसा ही डर था जो मेरे दिल को बैठाए जा रहा था। वो मुझे देखता और नज़रें चुरा लेता, फिर मैं उसे देखता और नज़रें चुरा लेता. 2-3 मिनट तक आंखों की लुका छिपी से मुझे ये तो पता लग गया कि वो भी किसी बात को लेकर डरा हुआ है. लेकिन ये समझ नहीं आ रहा था कि उसको कैसा डर है?अब मुझ में थोड़ी हिम्मत आ चुकी थी और मैं वहीं खड़ा होकर उन पहलवानों की कुश्ती के दांव देखने लगा. बीच बीच में संदीप मुड़ मुड़ कर मुझे देखता और फिर नज़रें चुरा लेता।

एक घंटे तक यही चलता रहा। जब सब लोग प्रैक्टिस करके आराम के लिए बैठ गए तो रवि और संदीप के बीच कुछ गुफ्तगू शुरु हुई. अब मैं डर गया, मुझे लगा अब ये जरूर मेरी बात कर रहा होगा और उस रात की सारी बात बता देगा कि कैसे मैं इसके और इसके दो दोस्तों के साथ उस कोठरी में चुदा था।मैं घबरा गया और मैंने मुंह फेर लिया और यहां वहां देखने लगा, मुझे अब वहां खड़े रहना पल पल भारी हो रहा था। मेरे दिल की धड़कन धम्म धम्म करने लगी थी और दिल बैठा जा रहा था।कुछ देर उन दोनों में बातचीत होती रही और उसके बाद वो लोग उठ खड़े हुए. मुझे लगा कि मैंने रवि को जैसे खो ही दिया हो, बेचैनी और घबराहट में मुझे सांस लेना मुश्किल हो रहा था.

वो सारे पहलवान लड़के उठ कर पास ही चल रहे ट्यूबवेल की तरफ बढ़ने लगे और पास पहुंच कर एक एक करके पानी के हौद में गोता लगाने लगे. यूं तो सारे ही पहलवान मर्दाना जिस्म के मालिक थे लेकिन रवि उनमें सबसे अलग ही दिख रहा था.लेकिन इस वक्त मेरे मन के आसमान में सेक्स नाम की चिड़िया दूर दूर तक कहीं दिखाई नहीं दे रही थी.

वो सारे लड़के एक एक करके नहा लिए और कोठरी की दूसरी तरफ जाकर लंगोट बदलने लगे. 10 मिनट बाद सब के सब कपड़े पहन कर चलने लगे. दो अलग दिशा में हो लिए और दो अलग दिशा में. एक रवि के साथ मेरी तरफ बढ़ रहा था. मैं लगातार रवि के चेहरे के भावों की ज़मीन को टटोलने में लगा था कि कहीं उनमें मेरे लिए नफरत का कोई अंकुर तो नहीं फूट गया है. लेकिन जैसे जैसे रवि मेरे पास आ रहा था मुझे ऐसा कोई बीज नज़र नहीं आ रहा था.

 
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