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आदमी हु आदमी से प्यार करता हु

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रवि उस लड़के के साथ भीगे हुए लंगोट में मेरे करीब तक आ पहुंचा. उसके भीगे लंगोट में कैद उसके लौड़े का नज़ारा ही अलग था. लेकिन मैंने पल भर से ज्यादा उसे देखने की हिम्मत नहीं की क्योंकि मैंने उससे वादा किया था कि कोई ऐसी हरकत नहीं करूंगा जिससे उसको मेरी तरफ से शर्मिंदा होना पड़े.रवि की टीशर्ट और लोअर मेरे हाथ में थी. वो जैसे ही मेरे पास आया मैंने कपड़े उसकी तरफ बढ़ा दिए. उसने मेरे हाथ से कपड़े लेते हुए साथ वाले लड़के को बताया कि यही है वो दोस्त जो कल से मेरे घर आया हुआ है.मुझे देख कर उस लड़के ने मुझ से हाथ मिलाया और हाल चाल पूछा.

रवि ने अपनी टी-शर्ट पहन ली. मैंने मुंह दूसरी तरफ घुमा लिया क्योंकि वो लंगोट खोलने वाला था. जब उसने लोअर पहन ली तो मुझे चलने के लिए कहा- चल सोनू, घर चलते हैं.

हम तीनों रवि के घर की तरफ बढ़ चले। रास्ते में मैं इसी उधेड़बुन में लगा रहा कि संदीप और रवि के बीच में बात तो हुई लेकिन न तो संदीप के चेहरे से कुछ निष्कर्ष निकल सका और रवि भी बिल्कुल सामान्य व्यवहार कर रहा है.यही सोचते-सोचते हम रवि के घर तक आ पहुंचे. घर के पास पहुंच कर वो लड़का आगे निकल गया और हम गेट से अंदर आ गए.

मेरे मन में अब सौ तरह के सवाल उछल-कूद कर रहे थे कि आख़िर इन दोनों के बीच में बात क्या हुई. लेकिन मैंने अपनी जिज्ञासा की प्यास को धीरज का पानी पिलाना जारी रखा. सोचा कि बात कुछ हो या न हो लेकिन सामने तो आ ही जाएगी.

सुबह के 7 बज चुके थे, आंटी ने हमारे घर आते ही दूध के गिलास हाथ में थमा दिए. गिलास इतने बड़े कि अगर पूरा पी लूं तो मैं पूरे दिन खाना न खाऊं, लेकिन रवि गटक गटक करते हुए कुछ ही सेकेंड्स में गिलास खाली कर गया और एक तरफ रख दिया.मैंने कहा- मुझ से इतना दूध नहीं पीया जाएगा आंटी.वो बोलीं- हां, वो तो तेरी सेहत देखकर लग ही रहा है.रवि और उसकी मां दोनों ठहाका मार कर हंस पड़े.

मैं भी मुस्कुरा दिया, मैंने रवि का गिलास उठाया और उसमें आधा दूध डालकर पीने लगा. रवि के झूठे गिलास में दूध पीने के अहसास ने मेरे अंदर के आत्मविश्वास और रवि के लिए मेरे प्यार को और बढ़ा दिया. दूध पीकर मैंने गिलास आंटी को वापस दे दिया।आंटी बोली- बेटा, मैं दूसरा गिलास दे देती.

मैंने रवि की तरफ देखा और आंटी से कहा- नहीं आंटी, दूध बहुत अच्छा था.आंटी बोली- और पी ले फिर?मैंने रवि वाला गिलास ही आगे करते हुए कहा, इसी में डाल दो.आंटी ने बाकी बचा दूध भी डाल दिया और मैं उसको रवि के चेहरे की तरफ देखते-देखते गटक गया.दूध तो पी लिया लेकिन पेट जैसे फूलकर गुब्बारा हो गया.आंटी बोली- और दूं?मैंने कहा- नहीं आंटी, पेट में जगह नहीं बची.

आंटी ने कहा- अभी थोड़ी देर में खाने का टाइम हो जाएगा.मेरी आंखें फटी रह गईं.वो दोनों मेरे चेहरे की हवाईयों को देखकर हंसने लगे.

आंटी मुस्कुराते हुए रसोई में चली गई और हम हुक्के वाले कमरे में जाकर अलग अलग चारपाई पर जाकर गिर गए। रवि को कुश्ती की थकान थी और मुझे पेट को संभालने की.रवि बोला- अब तो खुश है न तू? मुझे लंगोट में देखना चाहता था, देख लिया ना?मैंने कहा- हां, खुश हूं.मैंने सोचा- रवि संदीप के बारे में कुछ बात नहीं कर रहा है. मामला क्या है, ये कैसे जानता है उसे, और अगर जानता है तो उसने क्या बताया इसे?

मैंने हिम्मत करके बात छेड़ते हुए कहा- अखाड़े में सब पहलवान तुम्हारे ही गांव के थे क्या?वो बोला- नहीं, मेरे गांव के 3 ही थे उनमें.

मैंने कहा- एक तो हमारे साथ ही आया था.रवि बोला- हां, और 2 जो पैदल जा रहे थे.मैंने पूछा- और बाकी के 2?वो बोला- उनमें से वो छोटे वाला मालापुर का था और लम्बे वाला जो तगड़ा सा था वो नेवली खुर्द का।

ये नाम सुनते ही मैं सहम-सा गया। मैंने अंजान बनते हुए कहा- नेवली खुर्द भी पास ही का गांव है क्या?वो बोला- हां, क्यों, तुझे पसंद आ गया क्या वो पहलवान?रवि ने मुझे चिढ़ाते हुए पूछा.मैंने कहा- कौन?रवि बोला- संदीप…मैंने कहा- नहीं, मैं तो ऐसे ही पूछ रहा था.कहते हुए मेरी आवाज़ जैसे गले में ही आते आते दबी जा रही हो.

उसने मेरे चेहरे के भाव देखकर कहा- कित खो गया तू…?(क्या सोच रहा है)मैंने ना में गर्दन हिला दी, यहां वहां कमरे में देखने लगा.मैंने बात बदलते हुए कहा- तुम्हारा कमरा यही है क्या?वो बोला- ये तो बैठक वाला कमरा है. अभी बापू आता ही होगा हुक्का पीने।

इतने में उसके पापा कमरे में दाखिल हुए, मैंने उनको नमस्ते की।रवि बोला- चल, हम साथ वाले कमरे में बैठते हैं.कह कर वो उठ गया और उसके साथ मैं भी पीछे पीछे कमरे से बाहर निकल गया।

 
साथ वाले कमरे में घुसे तो सामने पलंग था और साथ ही सोफे रखे हुए थे। पलंग के ठीक सामने मेज पर टीवी चल रहा था जिसमें समाचार चल रहे थे. रवि जाकर पलंग पर लेट गया और टीवी का रिमोट उठाकर चैनल बदलने लगा. एक चैनल पर सनी देओल की घातक चल रही थी, उसने वहां रुक कर रिमोट एक तरफ फेंक दिया.मैंने कहा- ये सड़ी हुई फिल्में देखने में क्या मज़ा आता है तुम्हें?वो बोला- तू क्या देखेगा… ये रिश्ता क्या कहलाता है?कह कर वो हंसने लगा जैसे मुझे चिढ़ा रहा हो…

मैंने मुंह बनाते हुए कहा- नहीं, मुझे इतना शौक नहीं है टीवी देखने का.वो बोला- हां, तुझे तो लंड देखने का ही शौक है.मैंने कहा- हां, लेकिन सिर्फ तुम्हारा…

उसका ध्यान फिल्म में केंद्रित हो रहा था. मैंने यहां वहां नज़र घुमाई तो बेड के पास ही शो-केस में कुछ फोटो रखी हुई थीं जिसमें रवि के मम्मी पापा के साथ एक लड़की और थी.मैंने पूछा- ये तुम्हारी बहन है क्या?वो बोला- हां, मुझसे बड़ी है… इसकी शादी हो चुकी है.

वो फिर बोला- अरे शादी से याद आया, तुझे अपनी गर्लफ्रेंड की फोटो दिखाता हूं.मैंने भी एक्साइटेड होते हुए कहा- हां, यार… मैं भी तो देखूं कौन है वो खुशनसीब.वो बोला- रुक, अभी दिखाता हूं।

उसने टीवी के साथ ही रखी अलमारी खोली और उसमें से एक भारी सी एल्बम निकाल कर ले आया.मैंने कहा- ये किसकी एल्बम है?वो बोला- शांति रख… बताता हूं.एल्बम खोलकर फोटो देखना शुरु किया तो पता चला ये उसकी बहन की शादी की एल्बम थी.मैंने कहा- इस एल्बम में तुम्हारी गर्लफ्रेंड की फोटो?वो बोला- चोंच बंद रखेगा?

वो एल्बम पलटता रहा… और एक पेज़ पर आकर रुक गया। फोटो में उसकी बहन, बहन का पति और एक दोनों तरफ दो लड़कियाँ खड़ी थीं.उनमें से उसने एक लड़की की फोटो पर उंगली रखते हुए कहा- देख… ये है तेरी भाभी…

उस लड़की की फोटो को देखने के बाद मेरे दिमाग ने मुझे आगे बढ़ने ही नहीं दिया, मुझे वो चेहरा कुछ जाना-पहचाना सा लगा, लेकिन जब ध्यान आया तो मेरे मुंह से निकल पड़ा- ये?वो बोला- क्या हो गया… चौंक क्यूं रहा है?मैंने कहा- कुछ नहीं, बहुत सुंदर लड़की है..बस इतना कह कर मेरे माथे पर पसीना आना शुरु हो गया.

ये वही लड़की थी जिसको मैंने संदीप के साथ बस में उसका लंड चूसते हुए देखा था.रवि बोला- अब तो इसकी शादी हो चुकी है लेकिन मेरा दिल इसी पर आया था..बाकी तो सारी टाइम पास थी मेरे लिए.

मैंने माथे का पसीना पौंछा और उस लड़की के फोटो पर नज़रें गड़ गईं मेरी.

अभी तक आपने पढ़ा कि रवि के साथ सुहागरात मनाने के बाद अगली सुबह मैं उसके साथ अखाड़े में गया और वहाँ जाकर किस्मत ने संदीप के रुप में मेरे मुंह पर एक और तमाचा मारा जिसकी गूंज अभी मिटी भी नहीं थी कि रवि ने मुझे अपनी बहन की शादी वाली एल्बम दिखा दी जिसमें उसकी गर्लफ्रेंड का फोटो था. यह वही लड़की थी जिसको मैंने संदीप के साथ बस में उसका लंड चूसते हुए देखा था.उस लड़की का फोटो देखकर मेरे अंदर की सांस अंदर और बाहर की बाहर ही रह गई। किस्मत की ये क्या आंख मिचौली हो रही है मेरे साथ। मेरी नज़रें उस लड़की की फोटो पर गड़ गईं थी और मेरे माथे पर पसीना आना शुरु हो गया।

मैंने रवि से कहा- पीने का पानी कहाँ है?वो बोला- क्या हुआ?मैंने कहा- कुछ नहीं, मुझे प्यास लगी है। पीने का पानी कहाँ है?

सुन कर वो हंसने लगा और बोला- तेरी आंखें भी फटी रह गई ना मेरी जान को देख कर…मैंने उसकी बात की हामी भरते हुए कहा- हाँ, काफी सुंदर लड़की है।वो बोला- एल्बम रख दे, चल मैं इसके साथ पहली चुदाई की कहानी सुनाता हूं तुझे!उसने एल्बम मेरे हाथ से लेकर एक तरफ रख दी और मुझे अपने साथ बिस्तर पर लेटा लिया।

मेरे दिमाग ने काम करना बंद कर दिया था, मैं बस रवि के हाथ की कठपुतली सा बना यूं का यूं बेड पर लेट कर छत की तरफ देखने लगा। उसने अपने हाथ में मेरा हाथ लिया और कहानी सुनाने लगा..वो बोला- जब पहली बार ये मेरी बहन के साथ घर पर आई थी तो मुझे इससे देखते ही प्यार हो गया था जैसे तुझे मुझसे हो गया। उसके बाद ये काफी दिनों तक घर नहीं आई तो मैंने अपनी बहन से पूछा कि तेरी वो सहेली कौन थी?बहन ने बताया कि वो मेरे कॉलेज में साथ ही पढ़ती है।

 
बस फिर क्या था, ये बात पता लगते ही मैंने कॉलेज के चक्कर लगाने शुरु कर दिए, वो जब भी दिखती मैं उसे ताड़ने लगता, वो भी मुझे देख कर मुस्कुरा देती थी। उस टाइम मैं इस की सेक्सी फिगर की तरफ अट्रैक्टेड था लेकिन धीरे धीरे मुझे इस से प्यार होने लगा।

फिर तो मैंने इसका नम्बर भी निकलवा लिया, इससे बातें शुरु हुईं तो घंटों इसके साथ लगा रहता था। मेरे घर वालों को भी मुझ पर शक होने लग गया था। इसलिए हमने फोन पर बातचीत कम कर दी। मैंने इसको मिलने के लिए बाहर बुलाया और हम पार्क में बैठकर घंटों बातें करते रहते थे।

फिर एक दिन मैंने इसके होठों को किस किया तो इसने भी मना नहीं किया। इसके बाद हम जब भी मिलते तो किसिंग शुरु हो जाती। ऐसा काफी दिन तक चलता रहा। फिर एक दिन शाम का टाइम था हम पार्क में बैठे हुए थे, अंधेरा होने वाला था, हमने मौका देखकर किसिंग शुरु कर दी। मैं इसके होठों को चूस रहा था और ये मेरे… बहुत मजा आ रहा था। फिर इसने खुद ही मेरी पैंट में तने लंड पर हाथ रख दिया और उसको अपने हाथ से ऊपर ही ऊपर सहलाने लगी।

इसके नर्म हाथों में जाकर मेरा लौड़ा मेरे काबू से बाहर हो गया। मैंने उसके सूट पर से उसकी चूचियों को दबाना शुरु कर दिया, उसने भी मुझे मना नहीं किया। मैं आगे बढ़ता ही जा रहा था, मैंने इसकी चूचियों को ज़ोर से दबाना शुरु किया तो इसने मेरी पैंट की चेन खोल कर अपना हाथ अंदर डाल लिया और मेरी फ्रेंची के ऊपर से मेरे लौड़े को अपने हाथ में लेकर दबाने लगी।

मैं तो जैसे पागल सा हो रहा था, मैंने इसकी सलवार का नाड़ा खोला और इसकी पैंटी के ऊपर से इसकी चूत को सहलाने लगा। इसने अपनी टांगें फैला लीं और अपनी चूत रगड़वाने लगी। हम दोनों ये भूल ही गए थे कि हम पार्क में ये सब कर रहे हैं।

इसके बाद मैंने इसकी पैंटी में हाथ डालकर देखा तो इसकी चूत से पानी सा निकला हुआ था। मैंने इसकी चूत को रगड़ना शुरु कर दिया। इसने मेरे होठों को और ज़ोर से चूसना शुरु कर दिया। मैंने अपनी दो उंगली इसकी चूत में डाल दी और इस हरकत पर इसने मुझे अपने ऊपर लेटा लिया। मैंने इसकी सलवार को नीचे निकलवा दिया और इसकी चूचियों पर मुंह रखकर इसकी चूत में उंगलियों को अंदर बाहर करने लगा।

इसने नीचे से मेरी पैंट का हुक खोला और मैंने पैंट निकाल निकाल दी। इसने मेरी फ्रेंची भी निकलवा दी और मेरे लंड को अपने हाथ में लेकर सहलाने लगी। इसके नर्म हाथों में जाकर ऐसा लग रहा था जैसे अब झड़ ही जाऊँगा.. अब मैं रुक नहीं सकता था, मैंने इसके हाथों को दोनों तरफ ज़मीन में नीचे दबोचा और लंड को इसकी चूत पर लगा कर इसके ऊपर लेट गया। मेरे वज़न से लंड इसकी चूत में पूरा एक ही बार में अंदर उतर गया।

मैंने इसके होठों को चूसते हुए इसकी चूत में लंड अंदर बाहर करना शुरु कर दिया। मैंने स्पीड बढ़ाई तो इसने दोनों हाथों को मेरी कमर पर बांध लिया और अपनी चूत चुदवाने लगी। मैं भी चूत के नशे में बावला सा होकर इसकी रगड़ाई कर रहा था। इसने अपने नाखूनों से मेरी कमर को नोचना शुरु कर दिया। इसे भी बहुत मजा आ रहा था और मुझे तो इतना आ रहा था कि क्या बताऊं… चूत की बात ही अलग है…कह कर रवि ने मेरी छोटी छोटी चूचियों पर मेरी निप्पलों को मसल दिया। लेकिन मुझ पर उसकी इस हरकत का कोई असर नहीं हुआ.

उसने मेरा हाथ हिलाया और बोला- तू सुन रहा है ना?मैंने कहा- हाँ, फिर आगे क्या हुआ?

रवि बोला- फिर क्या, मैंने उस दिन पहली बार पार्क में इसकी चूत मारी थी। उसके बाद तो धीरे धीरे ये मेरे घर भी आने लगी। जब घर पर कोई नहीं होता था तो मैं इसको बहन के बहाने बुला लेता था और इसकी चूत मारता था। लेकिन फिर मेरी बहन की शादी बीच में आ गई, उसके बाद हम काफी दिनों तक नहीं मिले क्योंकि बहन तो जा चुकी थी।और कुछ दिनों बाद इसका फोन आया कि इसका रिश्ता तय हो गया है, अब वो घर से बाहर नहीं आ पाएगी।

जब इसने रिश्ते की बात बताई तो मुझे धक्का सा लगा, मैंने इससे कहा- तू तो कह रही थी तू मुझसे प्यार करती है?ये बोली- हाँ, तो मैंने कब मना किया है… कि मैं नहीं करती। लेकिन घर वालों ने रिश्ते की बात पहले ही कर रखी थी। इसलिए मैं तेरा दिल नहीं तोड़ना चाहती थी।

 
मैंने सोचा कि ये भी मुझ से इतना प्यार करती है कि मेरा दिल रखने के लिए इसने इतना बड़ा जोखिम उठा लिया इसलिए मेरे दिल में इसके लिए प्यार और बढ़ गया। मैंने सोचा कि अब जब शादी हो गई है तो इसकी ज़िंदगी में दखल देना ठीक नहीं है । इसलिए मैंने इसको फोर्स करना बंद कर दिया और ये भी कभी मिलने नहीं आई। लेकिन ये मुझे बहुत याद आती है… इसलिए जब भी मन करता है, मैं इसकी फोटो देख लेता हूं।

मैंने रवि की बातें तो सुन ली और मुझे समझ भी आ गईं। लेकिन मेरे अंदर जो तूफान चल रहा था वो अभी किस दिशा में जाने वाला है, ये समझना मेरे लिए मुश्किल हो रहा था।मैंने कहा- मेरा गला सूखा जा रहा है, पीने का पानी कहाँ रखा है?वो बोला- बिनौले खा कै आया है क्या? मैं यहाँ इतनी सेक्सी स्टोरी सुना रहा हूं और तू पानी पानी किए जा रहा है… रुक अभी लाता हूं!

वो बेड से उठा और कमरे से बाहर निकल कर किचन में चला गया, अब मुझे सब समझ में आ रहा था कि सुबह जब संदीप ने मुझे अखाड़े में देखा तो वो मुझसे डर क्यों रहा था। भले ही उसने अपने दोस्तों के साथ मिलकर चुदाई की थी लेकिन अब उसको ये डर था कि मैं रवि के पास कैसे पहुंच गया… और कहीं मैं रवि को उस लड़की के बारे में न बता दूं जिसने सोनीपत से आ रही बस में संदीप का लंड चूसा था और संदीप उसे कई बार चोद भी चुका था।

वो लड़की रवि के साथ रिलेशन में भी थी, रिलेशन ही नहीं, रवि तो उससे प्यार भी करता है।यह सोच कर मेरा दिल बैठा जा रहा था… अब मैं क्या करुं। मैं तो अपने रवि से मिलने आया था और किस्मत मेरे साथ क्या खेल कर रही है। अपना प्यार पाना मुझे इतना महंगा पड़ेगा मैंने कभी इसकी कल्पना भी नहीं की थी।मैं तो अपनी गांडू जिंदगी के सागर से निकलने के लिए यहाँ आया था लेकिन मैं तो इस भंवर में और फंसता ही जा रहा हूं… अब तक हुआ जो हुआ लेकिन अब क्या…क्या करुं… कहाँ जाऊं… किसको बताऊं… और किस से छिपाऊं… हे भगवान… इतना बड़ा खेल… पहले ही जिंदगी से परेशान हूं अब कुछ सुकून मिला तो वो भी इस कीमत पर?

ये सब सोच कर मेरे दिमाग की नसें फटने को हो रही थीं। जिस रवि को मैं जान से ज्यादा चाहता हूं, मैं उससे इतनी बड़ी बात कैसे छिपाऊं… और मान लो अगर उसका दिल टूटने से बचाने के लिए छिपा भी लूं… मगर कल को कहीं से ये बात खुल गई तो उस विश्वास का क्या जो वो मुझ पर करता है। इतना बड़ा धोखा जो उसके साथ हुआ है अगर उसको बताता हूं तो वो कैसे झेलेगा… और अगर छिपाता हूं तो मैं अपनी अंतरआत्मा को क्या जवाब दूंगा।कुछ देर के लिए उसकी खुशी के लिए मैं ये बात अपने सीने में दफन भी कर लूं… लेकिन उसको कहीं और से पता लग गया… फिर दोनों तरफ से धोखा खाकर उसका क्या हाल होगा.

ये सारी बातें मेरे दिमाग पर हर पल प्रेशर बढ़ाती ही जा रही थीं, मुझे वहाँ पर एक पल भी रुकना भारी हो रहा था, इतने में रवि पानी का गिलास लेकर आ गया।मैंने गटक-गटक करके एक ही सांस में सारा पानी पी लिया, मैंने कहा- एक और ला दे यार प्लीज़…

उसने मेरी तरफ हैरानी से देखा, मैं गहरी सोच में था पर नॉर्मल दिखाने की कोशिश कर रहा था।वो दूसरा गिलास लेने के लिए गया।मैंने सोचा कि यहाँ से निकलना पड़ेगा… अगर यहाँ पर रहा तो कुछ न कुछ गड़बड़ हो ही जाएगी। मैंने तय कर लिया कि मैं अभी निकल जाता हूं।

रवि दूसरा गिलास लेकर आ गया, मैंने पानी पीया और रवि से कहा- रवि यार, घर से मां का फोन आया है… मुझे अभी जाना होगा।वो बोला- क्या बात हो गई…सब ठीक तो है ना?मैंने कहा- पता नहीं, लेकिन मां कह रही थी कि जल्दी से जल्दी घर आ जा, बहुत जरूरी काम है। इतना कहकर मां ने फोन काट दिया। इसलिए मुझे अभी जाना होगा।रवि बोला- रोटी तो खा ले, फिर चला जाइयो…मैंने कहा- नहीं, फिर दोबारा कभी आऊँगा तुमसे मिलने… अभी मुझे जाना होगा।

कह कर मैं चलने के लिए उठा और दरवाज़े की तरफ बढ़ा तो उसने हाथ पकड़ लिया…वो बोला- फिर कब आएगा?मैंने कहा- जल्दी ही आऊँगा, तेरे सिवा और जाऊँगा कहाँ… उसने मुझे अपनी तरफ खींचा और मैं उसके पेट से सट कर उसकी छाती से जा लगा, उसने पीछे से दोनों बाहों का घेरा बनाते हुए मुझे जकड़ लिया।मैंने नज़रें उठाकर उसकी आंखों में देखा… जिनमें सेक्स की जगह प्यार की धुंधली सी झलक दिखाई दे रही थी, जिसे वो तो छिपाना चाहता था लेकिन मैं तो उसकी आंखों को पढ़ने में माहिर था।वो बोला- जल्दी आना… अब मेरी आदत बिगाड़ दी है तूने… ज्यादा दिन मन नहीं लगेगा तेरे बिना!

मेरी बदकिस्मती मेरी आंखों से आंसू बनकर गिरने लगी, मैं उसके सीने से लिपट गया और जितना दम मेरी नाजुक बाजुओं में था मैंने सारा समेटते हुए उसे बाहों में भर लिया। उसके सीने से लिपट गया… उसने मेरी कमर पर प्यार से हाथ फिराया और सिर को प्यार से सहलाया।

मैं उससे अलग होकर मुड़ते हुए कमरे के दरवाज़े को पटकते हुए बाहर आ गया और गेट खोल कर बाहर गली में निकल गया।जाते जाते उसने मुझे फिर रुला दिया, अब मेरा कलेजा फट रहा था, मैं दौड़ कर जोहड़ के पास पहुंचा और वहाँ एक पेड़ के पीछे जाकर चीख-चीख कर रोने लगा। लेकिन वहाँ रुकना भी उसी की याद दिला रहा था, मैंने अपने आंसू पौंछे और बदहवास सा होकर बाहर मेन रोड की तरफ चल पड़ा।

 
अभी तक आपने पढ़ा कि मैं रवि के घर रात में रुका हुआ था। उसके साथ दूसरी सुहागरात होने के बाद सुबह जब हम अखाड़े में पहुंचे तो संदीप भी वहाँ पहलवानी करने आया हुआ था। वहाँ पर संदीप और रवि के बीच कुछ बातें हुईं लेकिन मुझे इस बात का पता नहीं लग पाया कि संदीप ने रवि से मेरे बारे में क्या बात की।जब हम घर लौटे तो रवि ने मुझे अपनी बहन की शादी की एल्बम दिखाई जिसमें उसकी गर्लफ्रेंड की फोटो थी। ये वही लड़की थी जिसको मैंने संदीप के साथ बस में देखा था। रवि ने बताया कि वो उस लड़की से कैसे मिला और कैसे उसने उसके साथ पार्क में पहली बार सेक्स किया। रवि की ज़िंदगी की ये सच्चाई मेरे सामने आई तो मेरा वहाँ पर सांस लेना भारी हो गया और मैं मां के फोन का बहाना बनाकर उससे अलग हो कर अपने घर वापस आ गया।

घर आकर 2-3 दिन तो मुझे होश ही नहीं था कि मैं क्या कर रहा हूँ, क्या खा रहा हूँ, क्या देख रहा हूँ, बस ऐसे ही खोया-खोया सा रहने लगा।मेरी मां को मुझ पर शक हो गया, उसने पूछा- सोनू, क्या बात है… जब से तू हिसार से आया है कुछ उदास सा रहता है।वैसे तो मैं मां से झूठ नहीं बोलना चाहता था लेकिन अगर सच्चाई बताता तो कौन सी? अपने गे होने की… रवि से प्यार करने की… संदीप से चुदने की या रवि की बेवफा गर्लफ्रेंड की?इसलिए मैंने बहाना बनाकर कह दिया कि मेरा दोस्त काफी मुसीबत में फंस गया था बस उसी के लिए परेशान हूँ।मां बोली- ऐसी क्या मुसीबत आ गई जो तू उसके लिए इतना परेशान हो रहा है?मैंने कहा- मां, ये आपके मतलब की बात नहीं है। हम दोस्तों के बीच की बात है।तो वो बोली- ठीक है, मत बता, लेकिन चिंता करने से क्या मुसीबत कम हो जाएगी? अगर कोई परेशानी है तो उसका समाधान ढूँढने की कोशिश करनी चाहिए… ना कि मुंह लटका कर बैठ जाना चाहिए.

मां की यह बात सुनकर मेरी उदासी टूटी, मैंने सोचा कि बात तो मां ठीक ही कह रही है। अगर परेशानी है तो उसका हल भी ढूँढने की कोशिश करनी होगी मुझे।मैं मां की तरफ देखकर मुस्कुरा दिया, मुझे मुस्कुराता देख कर मां को भी थोड़ी तसल्ली हो गई और वो मेरे सिर पर हाथ फेर कर अपने काम में लग गई।

अब मैं यह सोचने लगा कि अगर रवि को सीधे ये बात बता दूं कि उसके साथ धोखा हुआ है तो शायद मैं उसके दिल पर चोट लगने का कारण बन जाऊंगा। मुझे कोई और तरीका निकालना होगा। मैं रोज़ इन्हीं विचारों में रहता कि रवि के सामने सच्चाई कैसे लाई जाए।

लगभग 15 दिन बाद रवि का फोन आया, उसने मुझे हिसार आने के लिए कहा लेकिन मैंने काम का बहाना बनाकर उसे मना कर दिया। मैं अभी उसका सामना करने के लिए तैयार नहीं था। एक हफ्ते बाद फिर उसका फोन आया, उसने फिर मुझे अपने घर आने के लिए कहा लेकिन मैंने इस बार भी मना कर दिया।

वो बोला- क्या बात है भाई… यही प्यार था क्या तेरा? इतने दिन से बुला रहा हूँ और तुझे आने की फुरसत नहीं लग रही? पिछले महीने आया था तो बड़ी प्यार-प्यार की बातें कर रहा था। मन भर गया तेरा मुझ से?मैंने कहा- नहीं यार… ऐसी बात नहीं है, बस घर से निकलने का टाइम नहीं मिल रहा।वो बोला- कोई बात नहीं, मैं ही पागल था जो तेरी बातों को सच मान बैठा। गांडू आखिर गांडू ही होता है।

उसकी यह बात सुन कर ऐसा लगा जैसे किसी ने मेरे दिल में लोहे की कील ठोक दी हो। अपनी मजबूरी से झल्ला कर मैंने फोन काट दिया। अब उसको कैसे समझाऊं कि मैं उससे क्यों नहीं मिलना चाहता। उसे क्या पता था कि वो मेरे लिए क्या मायने रखता है… लेकिन हर बार ज़हर का घूंट तो पीने की तो जैसे आदत सी हो जाती है गांडुओं को। यह कोई नई बात थोड़े ही थी मेरे लिए।लेकिन मुझे इस बात की चिंता थी कि कल को अगर सारी सच्चाई का पता लगता है तो वो उसको सहन कर पाएगा या नहीं। मेरे दिमाग पर हर दिन प्रेशर बढ़ता जा रहा था।

एक दिन मैं यूं ही शाम के समय खेतों में टहलने गया हुआ था, वहाँ पर चल रहे ट्यूबवेल को देख कर उसके साथ हुए सेक्स की यादें ताज़ा हो गईं। वैसे तो वो हर वक्त मेरे ख्यालों में रहता था लेकिन आज दिल कुछ ज्यादा ही भारी हो रहा था।

रात का खाना खा कर मैं बिस्तर पर लेटा हुआ फोन में ग़मगीन गाने सुन रहा था। उसकी फोटो मेरे वॉलपेपर पर लगी रहती थी हमेशा। मैं उसके चेहरे को देखता रहता था। देखते देखते अचानक मेरा ध्यान डेट की तरफ गया।15 मई! हे भगवान… 18 को तो उसका जन्मदिन है। ये बात मैं कैसे भूल गया… मेरे दिल की धड़कन धक धक हो उठी। मैंने सोचा, उसका जन्मदिन है और मैं यहाँ घर बैठा हुआ हूँ। लेकिन जाऊं तो जाऊं किस मुंह से उसके पास।

 
फिर अचानक मेरे दिमाग में तरकीब आई कि क्यों इस दिन उसे सारी सच्चाई बता दूं। मुझे यकीन है कि अपने जन्मदिन वाले दिन वो मेरी बात का बुरा नहीं मानेगा। मैं चुपचाप बिना बुलाए उसे सरप्राइज़ देने पहुंच जाऊंगा… उसे मना भी लूंगा और संदीप के बारे में भी सारी सच्चाई बता दूंगा।मैंने सोचा, अच्छा आइडिया है सोनू… इससे अच्छा मौका तो हो ही नहीं सकता इस समस्या को हल करने का।

मैंने 18 मई के लिए प्लानिंग करना शुरु कर दिया। अगले ही दिन मैंने मार्केट जाकर उसके लिए एक फिटिंग वाली शर्ट खरीदी। एक शहद की शीशी और एक महंगे वाला पर्फ्यूम… ये सब सामान लेकर मैंने रख लिया और दो दिन पहले ही मां को बोल दिया कि मैं 18 को अपने दोस्त के यहाँ जा रहा हूँ।मां ने मेरा मूड ठीक होते देख कर कोई आनाकानी नहीं की।

अब मुझसे एक एक घंटा काटना भारी हो रहा था। बड़ी मुश्किल से 17 का दिन और वो रात गुज़री… 18 की दोपहर के बाद मैं हिसार के लिए निकल पड़ा, मुझे 9-10 बजे तक हिसार पहुंचना था। इसके लिए मैंने पहले से ही प्लानिंग कर रखी थी। मैं बस, ट्रेन, ऑटो का इस्तेमाल करते हुए 9 बजे तक हिसार पहुंच गया। मैं रवि को सरप्राइज़ देने के बारे में सोच कर अंदर ही अंदर खुश हो रहा था।

मैंने बस स्टैंड पर पहुंच कर रवि को फोन किया तो उसने कहा- हाँ, आ गई याद तुझे मेरी?मैंने उससे पूछा- कहाँ हो तुम?वो बोला- मैं तो हिसार में अपने दोस्तों के साथ पार्टी कर रहा हूँ। तू कहाँ है..मैंने कहा- मैं भी हिसार में ही हूँ…वो बोला, क्यूं, यहाँ क्या गांड मरवा रहा है?

मुझे उसकी बात का ज़रा भी बुरा नहीं लगा… मुझे पता था कि वो मुझसे नाराज़ होकर गुस्सा कर रहा है।मैंने कहा- मैं तुमसे मिलना चाहता हूँ.वो बोला- ठीक है, तुझे एड्रेस भेज रहा हूँ इस पर आ जा!

कुछ देर बाद मेरे फोन में एक मैसेज रिसीव हुआ जिसमें हिसार के सेक्टर 14 का एक एड्रेस लिखा हुआ था। मैंने वहाँ से ऑटो की और उस पते पर पहुंच गया। मैंने पहुंच कर रवि को फोन किया तो उसने फोन नहीं उठाया, बेल जाती रही, कुछ सेकेण्ड्स बाद फोन कट गया।

मैंने दोबारा फोन किया तो उसने फोन काट दिया।जब मैंने तीसरी बार फोन किया तो उसने फोन उठाया और बोला- क्यों भड़क कर रहा है?मैंने कहा- एक बार मिल ले यार… फिर वापस चला जाइयो..वो बोला- क्यों… मेरा लंड लिए बिना तेरी गांड का कीड़ा शांत नहीं होता क्या..

वो नशे में बोल रहा था… और उसके पीछे से और भी कई लड़कों की हंसी सुनाई दे रही थी।एक तो मैं इतनी दूर उससे मिलने के लिए आया था और वो ऐसा बिहेव कर रहा था… अपने दोस्तों के सामने ही मुझे गांडू गांडू कह कर बुला रहा था… मेरा गला रूंधने लग गया, मैंने भारी होती आवाज़ में कहा- रवि… बस एक बार मिल ले यार… मैं तुझे देख कर वापस चला जाऊंगा.मेरी रूंधती हुई आवाज़ सुनकर शायद उसके दिमाग ने कुछ काम किया होगा, वो बोला- रुक मैं आता हूँ।

मैंने भगवान का शुक्र मनाया… नहीं तो इतनी रात को वापस कहाँ जाता!फोन काटने के 2-3 मिनट बाद मैंने देखा कि वो लड़खड़ाता हुआ गेट से बाहर निकल कर आया, मैं हाथ में उसके लिए खरीदे गए गिफ्ट लेकर खड़ा था।उसे देखते ही मैंने अपने पसीजे दिल को संभाला और उसको हैप्पी बर्थडे बोला।उसने कहा- हाय मेरी जान… तुझे मेरा बर्थ डे याद था। लेकिन तू ये कैसे भूल गया कि रवि तेरे जैसी रंडियों को अपने लंड के नीचे ही रखता है।

उसके मुंह से दारू की स्मैल आ रही थी, मैं समझ नहीं पा रहा था कि उसे हो क्या गया है, वो ऐसी बातें क्यों कर रहा है, वो मेरा रवि हो ही नहीं सकता।वो बोला- अब आ ही गया है तो अंदर भी आजा… तू भी थोड़े मजे कर ले न जान…वो मेरा हाथ पकड़ कर मुझे अंदर ले गया।

अंदर जाकर मैंने देखा कि काफी तेज़ आवाज़ में म्यूजिक बज रहा था और तीन चार लड़के जो हट्टे कट्टे थे और लगभग 24 से 28 साल की उम्र के थे, अपनी शर्ट उतारे हुए दारू की बोतल हाथ में लेकर नाच रहे थे और एक दूसरे को पिलाए जा रहे थे।उनमें से एक लड़का संदीप भी था।

उसको देखते ही सारी बात मेरी समझ में आ गई, ये सब उसी का किया धरा है।संदीप ने मेरी तरफ देखा और हंसते हुए बोला- क्यों बे गांडू… आ गया तू फिर से हम पांचों से गांड मरवाने?वो सारे मुझे देख कर हंसने लगे।

रवि भी मुझे अकेला छोड़कर उनके साथ नाचने लगा, वो दारू पीते जा रहे थे और नाचते जा रहे थे। सामने कंप्यूटर स्क्रीन पर वीडियो गाने चल रहे थे। वो कुछ देर ऐसे ही नाचते रहे और मैं ऐसे ही वहाँ पर बेइज्जत सा खड़ा रहा।एकाएक वो पंजाबी गाना बंद हो गया और दूसरा वीडियो चल पड़ा जिसे देख कर मेरी आंखें हैरानी से फटी रह गईं। ये वीडियो देखकर मेरे दिल को इतना गहरा धक्का लगा कि पीछे की दीवार के सहारे जा लगा।

 
ये उसी कोठरी की वीडियो थी जिसमें संदीप ने अपने दो दोस्तों के साथ मिलकर मेरी गांड मारी थी। वीडियो शुरु होते ही रवि को छोड़ चारों लड़कों ने अपने लंड अपनी जींस की पैंट की जिप से निकाले और मेरी तरफ देख कर हिलाने लगे. वो सारे नशे में धुत्त थे, उनके हाथ में उनके सोए हुए लंड थे, मुंह से इस्स्स.. आहहह.. इस्स्स.. कर रहे थे।

जहाँ से वीडियो शुरु हुआ वहाँ पर जग्गी मेरे मुंह में लंड डाल कर चुसवा रहा था, राजबीर मेरी गांड में उंगलियां डाल कर अंदर बाहर कर रहा था और मैं जग्गी का लंड चूसने में मस्त था।उसके बाद राजबीर यानि कि राजू मेरी गांड में लंड डालकर उसे चोदने लगता है… उसके बाद संदीप आता है और राजू से लंड बाहर निकालने को कहता है… राजू मेरी गांड से लंड बाहर निकाल रहा होता है। संदीप उसके पास जाकर खड़ा हो जाता है और दोनों ही अपने लंड मेरी गांड के छेद पर लगाकर मेरे दोनों हाथ पीछे की तरफ खींचने लगते हैं।दर्द के मारे मैं होश खो देता हूँ और बेसुध होकर गिर जाता हूँ, ये लोग डर जाते हैं कि मुझे क्या हो गया। और राजू अपना लंड वापस निकाल लेता है लेकिन संदीप कहता है कि डर मत… ये बहुत बड़ी रंडी है, कुछ नहीं होगा इसे।इतना कह कर वो मेरी गांड मारना चालू रखता है लेकिन मैं तो बेहोश हो चुका था। तो संदीप को कुछ खास मज़ा नहीं आया.. उसके बाद जगबीर आता है और मेरी गांड में अपना लंड देकर अंदर बाहर करने लगता है, 5 मिनट बाद वो झड़ कर उठ जाता है और उसके बाद राजू फिर से मेरी गांड को चोदने लगता है और कुछ ही देर में वो भी झड़ जाता है.संदीप अभी सामने ही ये सब देख रहा होता है, वो मेरे मुंह के पास आकर लेट जाता है और मुंह को अपने हाथों से खोलते हुए उसमें अपना लंड दे देता है और मेरे मुंह को चोदने लगता है। लेकिन उसे यहाँ भी मज़ा नहीं आया। इसके बाद राजू कहता है कि संदीप तुझे ऐसे मज़ा नहीं आएगा, रुक मैं बताता हूँ कैसे कर।राजू जग्गी को अपने साथ बुलाता है और मुझे सीधा पीठ के बल लेटा देता है। अब दोनों मेरी एक एक टांग को अपने हाथ में इस तरह से पकड़ कर उठा लेते हैं कि मेरी गांड का छेद सीधा हवा में आ जाता है जहाँ पर संदीप घुटनों के बल खड़ा हुआ था। राजू ने कहता है कि अब डाल, संदीप अपना लंड मेरी गांड में डाल कर चोदने लगता है… राजू और जग्गी मेरी टांगों को पकड़े हुए हैं और संदीप पूरा ज़ोर लगा कर मेरी गांड को चोद रहा होता है. 5 मिनट बाद संदीप की मेरी थाईज़ को पकड़ कर अपने धक्कों की स्पीड बढा देता है… उसके धक्के इतने तेज़ थे कि उसके आंड मेरी थाइज़ से लगकर फट्ट फट्ट की आवाज़ कर रहे थे जो वीडियो में भी साफ सुनाई दे रही थी। राजू और जग्गी मेरी टांगों को पकड़े हुए कामुक सिसकारियां ले रहे थे और कह रहे थे- चोद साले को… फाड़ दे इसकी गांड।संदीप अगले 2 मिनट तक पूरी ताकत के साथ मेरी गांड को चोदता है और एकाएक झटके देता हुए मेरी गांड में झड़ जाता है. मेरी गांड से लंड निकालकर वो खड़ा हो जाता है और माथे का पसीना पोंछते हुए बगल में झटक देता है. उसके उठते ही राजू और जग्गी मेरी टांगों को छोड़ देते हैं और संदीप कैमरे की तरफ हाथ बढ़ाता है और कैमरा कोठरी की छत की तरफ हिलता हुआ बंद हो जाता है।

वीडियो रुकते ही मैंने देखा कि वो पांचों भी वीडियो देख रहे थे और ठहाका मारकर हंसने लगे। अब मेरी समझ में आया कि रवि मेरे साथ ऐसा बर्ताव क्यों कर रहा था। यह आग संदीप ने लगाई थी लेकिन मेरे अंदर अब बदले की आग धधक उठी थी।लेकिन फिर रवि के बारे में सोचा… अगर मैं संदीप की असलियत रवि को बता भी दूं तो भी चोट तो रवि को लगेगी और दर्द मुझे ही होना है… इसलिए बेइज्जती का वो कड़वा ज़हर मैंने वहीं पर पी लिया। मैंने सोचा, रवि और मेरा साथ इतना ही था।इतना सब होने के बाद अब वो मुझ पर थूकेगा भी नहीं।

मैं दरवाज़े की तरफ बढ़ने लगा और दरवाज़ा खोलने ही वाला था कि रवि ने मेरा हाथ पकड़ लिया, बोला- कहाँ जा रहा है गांडू?मैंने गुस्से और ग्लानि से भरी आवाज़ में कहा- आत्महत्या करने।वो बोला- आज लंड नहीं लेगा क्या मेरा?सुनकर वो सारे के सारे हंसने लगे।

 
अभी तक आपने पढ़ा कि मैं रवि के जन्मदिन पर उसे सरप्राइज़ गिफ्ट देने के लिए दोबारा हिसार चला गया। लेकिन रवि मुझे अपने घर नहीं बल्कि शहर में एक दोस्त के फ्लैट पर पार्टी करता हुआ मिला जहां पर 5-6 लड़कों के साथ संदीप भी मौजूद था। संदीप ने जब जग्गी और राजू के साथ नेवली खुर्द में मेरी गांड मारी थी तो चुपके से उसने मेरी वीडियो बना ली थी जो मुझे रवि के जन्मदिन वाले दिन उसी फ्लैट पर दिखाई गई। ये वीडियो ही रवि और मेरे रिश्ते में आग लगाने के लिए काफी थी। मैं सारी बात समझ चुका था कि अब मेरे और रवि के बीच कुछ नहीं बचेगा। क्योंकि अगर मैं अपने मुंह से उसको संदीप की करतूतों के बारे में बताता तो वो शायद कुछ हद तक मुझे फिर भी अपना दोस्त बना कर रख लेता लेकिन मेरी चुदाई की वीडियो उसे किसी और के पास से मिले… इस घटना के बाद मैंने सारी उम्मीद छोड़ दी थी।

मैं वहां से वापस निकलने लगा तो रवि ने मेरा हाथ पकड़ लिया।रवि बोला- आज मेरा लंड लिए बिना ही चला जाएगा क्या?यह बात सुनकर वे सारे लड़के ठहाका मारकर हंसने लगे। मैं दुनिया की हर बेइज्जती बर्दाश्त कर सकता था लेकिन रवि के सामने संदीप ने मेरा वो हाल किया जिसका घाव शायद इस जन्म में तो भरने वाला नहीं था। लेकिन फिलहाल मुझे कुछ नहीं सूझ रहा था।

मैंने रवि से कहा- मुझे जाने दो।वो बोला- तू मुझसे प्यार करता है ना…मैं उसकी बात का कोई जवाब नहीं दे रहा था और अपना हाथ उसके हाथ से छुड़ाने की कोशिश कर रहा था। ऐसा नहीं था कि मुझे उसकी बातों का बुरा लग रहा था…वो तो मेरी जान भी ले लेता फिर भी मैं उफ्फ तक ना करता…लेकिन इस वक्त वो नशे में था और जो वीडियो उसने देखी है उसका रवि पर क्या असर हुआ है ये भी मैं अच्छी तरह जानता था। इसलिए मैं वहां से बस निकल जाना चाहता था।

लेकिन रवि ने मेरा हाथ नहीं छोड़ा, मैं छटपटाता रहा।संदीप ने कहा- रवि, तू इस गांडू के साथ इंजॉय कर रात भर… लंड लेने का बहुत शौक है इसे… आज इसकी सारी कसर निकाल दे। हम लोग चलते हैं, सुबह फ्लैट की चाबी मैं तेरे घर से ले लूंगा।कह कर उन सबने अपनी अपनी शर्ट पहनी और हल्ला करते हुए कमरे से बाहर निकल गए।

रवि ने दरवाज़ा अंदर से बंद कर दिया। मैं अपने साथ में जो सामान लेकर आया था वो फर्श पर पड़ा हुआ था। उसने पॉलीबैग को खोला और शर्ट निकालकर देखी और एक तरफ फेंक दी। मेरे अरमानों पर पानी फिर रहा था… कहां मैं उसको सरप्राइज़ देने के लिए आया था और मुझे ही इतना ज़हरीला तोहफा मिल रहा था।

उसने सेंट की बोतल निकाली और उसे भी एक तरफ फेंक दिया। उसके बाद थैली में टटोला तो शहद की शीशी निकली। उसे देखकर वो इस तरह मुस्कुराया जैसे कह रहा हो- चोर शायद चोरी करना छोड़ सकता है लेकिन गांडू अपनी गांड मरवाना नहीं छोड़ सकता।आज उसकी ये मुस्कुराहट मेरे दिल में सुकून पैदा करने की बजाए मुझे खून के आंसू रुला रही थी। मुझे लग रहा था मैंने उसे खो ही दिया। अब वो मेरी बात का यकीन कभी नहीं करेगा।

उसने शहद की शीशी नीचे पड़े गद्दे पर फेंकी और मेरी तरफ बढ़ा। उसने शर्ट निकाली हुई थी, उसकी छाती बिल्कुल नंगी थी और वो पसीने से तर बतर हो रहा था। बिखरे हुए बालों के नीचे माथे पर पसीना और लाल आंखें जिनमें बदला और टूटे हुए दिल का दर्द साफ साफ दिखाई दे रहा था मुझे।

उसने मुझे पीछे की तरफ धक्का दिया और मैं गद्दे के पास फर्श पर चूतड़ों के बल जा गिरा। मेरे पास आकर उसने मेरे सिर को पकड़ा और अपनी फेडड डार्क ब्लू जींस की जिप के आस पास मेरे मुंह को रगड़ने लगा। वो दोनों हाथों से मेरे मुंह को अपनी जींस की जिप के अगल बगल घुसाए जा रहा था।

आज उसकी पकड़ मुझे दर्द दे रही थी।

2 मिनट बाद उसकी जींस में उसका लंड अपनी शेप में आना शुरु हो गया और धीरे धीरे उसके लंड ने अपना पूरा आकार ले लिया और वो जींस में तन कर झटके मारने लगा। उसकी जींस के बटन के पास पेट पर पसीने की बूंदें बहकर अंदर बटन के ऊपर दिख रहे अंडरवियर के इलास्टिक को भिगा चुकी थीं। वो मेरे होठों को जबरदस्ती अपने तने हुए लंड पर रगड़ता ही जा रहा था।

मैं उस वक्त हालात के दलदल में ऐसा फंसा हुआ था कि जितना निकलने की कोशिश करूं उतना ही अंदर धंसता जाऊं… और निकालने वाला और कोई नहीं… खुद रवि था जिसका भरोसा मुझ पर से उठ चुका था।अब तो मैंने हाथ-पैर मारना बंद कर दिया था और बस रवि की मजबूत पकड़ के नीचे दबी गर्दन का कबूतर बनकर उसके गुस्से के सैलाब में तैरने की नाकामयाब कोशिश कर रहा था।

 
रवि ने मेरे होठों को जींस पर बेरहमी से रगड़ने के बाद अपनी जींस का मोटा बटन खोल दिया और जिप को नीचे करके जॉकी की ग्रे फ्रेंची में तने लौड़े को मेरे होठों पर फिराने लगा। आज मैं ना तो मन से उसका साथ दे रहा था और ना ही तन से, वो जो कर रहा था बस करता जा रहा था।

मेरी अंतर्वासना तो घायल मन के कोने में कहीं पड़ी हुई एक घूंट पानी भी नहीं मांग रही थी। मेरी आंखों में ना आंसू थे और ना कोई भाव…

रवि ने अपनी फ्रेंची निकाली और लंड को निकाल कर सीधा मेरे मुंह में दे दिया और ज़ोर-ज़ोर से मेरे मुंह में धक्के मारने लगा। मेरा गला उसके लंड के टोपे से चोक होकर मेरी सांस घुटने लगी। लेकिन रवि मेरे मुंह में लग रहे धक्कों के बहाने जैसे कह रहा हो- मेरे सिवा किसी और के पास चुदने क्यों गया साले..आज मुझे अहसास हो रहा था कि खुद पर कंट्रोल न करने का अंजाम कितना भयानक हो सकता है। अब मैं पछता रहा था.. कि ना मैं बस में संदीप के लंड की तरफ आकर्षित हुआ होता… ना उससे बात होती… और ना ही वो मेरी मजबूरी का फायदा उठाता.मेरी वो एक गलती मेरे प्यार को मुझसे मीलों दूर ले गई।

रवि मेरे मुंह में लंड को ज़ोर ज़ोर से अंदर बाहर कर रहा था। एक तरफ मेरा गला छिल कर दर्द करने लगा था तो वहीं रवि के लंड का टोपा भी टमाटर की तरह लाल हो चुका था। उसने मेरे मुंह से लंड निकाला और मेरी शर्ट के बटन फाड़ दिए. उसके बाद उसने मेरी पैंट के हुक को खोल कर मुझे नीचे से भी नंगा कर दिया। मेरी गर्दन पकड़ कर मुझे गद्दे पर घोड़ी बना दिया और मेरा सिर दीवार से सटा कर पास में पड़ी शहद की शीशी उठा ली। उसने थोड़ा सा शहद अपनी उंगली से निकाल कर मेरी गांड पर लगाया, दोबारा थोड़ा सा शहद अपने लंड पर और अपने घुटनों को थोड़ा मोड़ते हुए अपने लंड का टोपा मेरी गांड पर लगा कर इतना ज़ोर से धक्का मारा कि मेरी रूह तक हिल गई, दर्द के मारे मेरी टांगें कांपने लगी।

उसने अपनी उंगलियां मेरे होठों की बगल में फंसा कर मेरे मुंह में डाल दीं। उसने मेरे चेहरे पर अपनी पकड़ बनाई और मेरी गांड में अपने लंड को पेलना शुरु कर दिया। आज उसका हर एक धक्का मुझे अपने गांडूपन का अहसास करवा रहा था कि गांडू की जिंदगी होती कैसी है.

एक तो दारू का नशा और ऊपर से उसका टूटा हुआ दिल… दोनों ही रवि को मेरी गांड फाड़ने के लिए मजबूर कर रहे थे। वो जो़र ज़ोर से धक्का मार रहा था और उसकी उंगलियां मेरे होठों को बगल से फाड़ रही थीं। उसकी मजबूत पकड़ के बावजूद उसके धक्कों का फोर्स इतना ज्यादा था कि मेरा सिर दीवार से टकरा कर धम्म धम्म कर रहा था।उसने 15-20 मिनट तक मेरी ऐसे ही चुदाई की। मेरी गांड में दर्द इतना था कि मुझे पता नहीं चला कि वो झड़ा भी या नहीं… वो धीरे-धीरे स्पीड कम करते हुए रूक गया और हांफता हुआ वहीं गद्दे पर गिर गया।

मैं भी उसी पोज़िशन में घुटने पेट में सिकोड़ कर दीवार के साथ लग कर गिर गया। मैंने उसके चेहरे की तरफ देखा तो उसकी आंखें बंद थी और हांफती सांसों के कारण उसका पेट तेज़ी से ऊपर नीचे होता हुआ दिखाई दे रहा था। उसकी जींस उसके घुटनों के नीचे पिंडलियों में जाकर फंसी हुई थी और उसकी फ्रेंची घुटनों के ठीक ऊपर उसकी मोटी मांसल बालों वाली जांघों पर आकर फंसी हुई थी। उसका लंड आधी सोई हुई अवस्था में एक तरफ गिर कर धीरे धीरे सिकुड़ रहा था। उसके हाथ उसके सिर की बगल में पड़े हुए थे और हथेलियां छत की तरफ आधी खुली हुई थीं।

मैं उसको बिना किसी भाव के देखे जा रहा था, उसके चेहरे पर शांति थी और मेरे चेहरे पर शून्य… मेरी आंख में ना आंसू थे और ना माथे पर कोई शिकन।

कुछ देर बाद रवि खर्राटें लेने लगा और उसे देखते देखते मुझे भी नींद आ गई।

रात के करीब 3-4 बजे अचानक मेरी आंख खुली तो मैंने देखा रवि बैठा हुआ मेरे चेहरे को देख रहा था।मैं एकदम से उठकर बैठा और इससे पहले की कुछ बोलता उसने एक ज़ोर का थप्पड़ मेरे मुंह पर जड़ दिया, मुझे लगा जैसे मेरी गर्दन घूम गई हो, मेरी आंखों से तुरंत आंसू गिरने लगे। मैंने रवि की तरफ देखा तो उसके चेहरे पर गुस्से और दया के मिले जुले भाव थे।

 
मैंने उससे कुछ कहने की बजाए उसके सामने हाथ जोड़ लिए। वो मेरे हाथों को पकड़ कर अपने हाथों में लेता हुआ मेरे पास आया और मुझे अपनी गोद में लेटा लिया… उसकी गोद में आकर मैं अपने सारे दर्द भूल कर उससे लिपट गया और बिना आवाज़ किये फूट फूट कर रोने लगा।मैंने रोते हुए उससे कहा- मुझे माफ कर दे भाई… मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गई। मुझे पता है तू मेरी बात का यकीन नहीं करेगा, लेकिन मैं तुझसे बहुत प्यार करता हूं। अगर तूने भी मुझे छोड़ दिया तो मैं सच में मर जाऊंगा.

वो मेरी कमर पर हाथ फिराते हुए मुझे बाहों में भर कर मुझे अपनी छाती से लगा कर प्यार करने लगा। मुझे पता था कि उसने मेरे साथ जो भी किया वो सब गुस्से में किया और अब उसे इसका पछतावा हो रहा है।वो बोला- तेरा वो वीडियो संदीप ने कब और कैसे बनाया था?उसका ये सवाल सुन कर मेरे दिमाग ने काम करना बंद कर दिया, मैं एकदम से चुप हो गया।

उसने मुझे उठाया और मेरी आंखों में आंखें डालते हुए पूछा- मैं कुछ पूछ रहा हूं तुझसे सोनू, तेरा वो वीडियो संदीप ने कब और कैसे बनाया?मैं घबरा गया… अब क्या जवाब दूं इसे… अगर मैंने बस वाली बात बताई तो क्या होगा। ये पहले ही गुस्से में है… अगर वो सच्चाई इसे पता चली तो उसका अंजाम और भी बुरा हो सकता है.

मैंने कहा- गलती मेरी ही थी। जब मैं पहली बार तुझसे मिलने हिसार आया था तो संदीप मुझे वहीं बस स्टैंड पर मिल गया था। वो अपने किसी दोस्त को ड्रॉप करने आया था। मैंने इसको टॉयलेट की तरफ जाते देखा तो खुद पर काबू नहीं रख पाया। मैं भी इसके साथ ही टॉयलेट में घुस गया और इसके लंड को देखने लगा। संदीप ने देखा कि मैं इसके लंड को देख रहा हूं तो इसका लंड खड़ा होने लगा और वो अपने लंड को मेरी तरफ देख कर हिलाने लगा। इसका लंड काफी बड़ा था तो मेरा मन किया मैं इसके लंड को चूस लूं। संदीप ने पूछा ‘कहां जाएगा?’ तो मैंने तुम्हारे गांव का नाम बता दिया। वो बोला ‘ठीक है, मेरे साथ चल…’ मैं रास्ते में तुझे अपना लंड भी चुसा दूंगा और तू आगे चले जाना… बस वहीं पर रास्ते में इसने मुझे उस कोठरी में अपना लंड चुसवाया और मेरी चुदाई की वीडियो बना ली।

रवि ने मेरी आंखों में देखा- तो मैंने नज़रें झुका लीं।उसने पूछा- तू सच बोल रहा है?मैंने कहा- मैं तुमसे झूठ क्यों बोलूंगा..वो बोला- ठीक है फिर आज के बाद मुझे कभी अपनी शक्ल मत दिखाना..मैंने उसकी बात का कोई जवाब नहीं दिया…

उसने फिर कहा- सुन रहा है ना मैं क्या कह रहा हूं…मैंने मुंडी हिलाते हुए हामी भर दी।

उसने दो मिनट तक मेरे चेहरे के भावों को देखा और बोला- चल उठ तुझे बस स्टैंड पर पटक देता हूं। और आइंदा कभी हिसार की सीमा में दाखिल हुआ तो मुझसे बुरा कोई नहीं होगा।

मैंने चुपचाप उठकर कपड़े पहन लिए, चलते हुए मेरी नज़र कमरे के कोने में गई जहां पर वो शर्ट पड़ी हुई थी जिसको मैं उसे गिफ्ट करने के लिए लेकर आया था। मेरी आंखों से पानी छलकने ही वाला था लेकिन मैंने दिल मजबूत करते हुए उसे अंदर ही रोक लिया और रवि के पीछे-पीछे कमरे से बाहर निकल गया।

उसने रूम लॉक किया और हम गाड़ी में आकर बैठ गए। मैं बुत बनकर चुपचाप उसके साथ बैठा हुआ था।

5-7 मिनट में बस स्टैंड आ गया। सुबह के लगभग 5 बजे का टाइम हो गया था और बस स्टैंड पर लोगों की चहल पहल चालू हो चुकी थी। रवि ने गाड़ी बस स्टैंड के अंदर रोक कर मुझे उतरने के लिए कहा।मैं चुपचाप नीचे उतर गया और दिल्ली साइड वाले स्टैंड की तरफ बढ़ चला। मैंने मुड़ कर देखा तो रवि गाड़ी को स्पीड में दौड़ा कर स्टैंड से बाहर लेकर निकल गया। उसके बाद ना तो कभी उसका फोन आया और ना ही मैंने उसे फोन करने की कोशिश की।

मैं जिंदा लाश की तरह अपना टाइम पास करता रहा। दो साल बीत गए उसकी याद में…

फरवरी 2015 में मौसी के घर से फोन आया, आकाश की बीवी यानि मौसी की बहू ने लड़के को जन्म दिया था। मौसी ने हमें सोनीपत बुलाया था। मैं वहां जाना तो नहीं चाहता था लेकिन मां की बात रखने के लिए मैं चलने के लिए तैयार हो गया।

आकाश की शादी और मौसी के घर से मेरे प्यार के तार जुड़े थे। घर पहुंच कर मैं हर चीज़ को ऐसे देखता जैसे अपने पिछले जन्म को जी रहा हूं। रवि की यादें वहां जाकर फिर से ताज़ा हो गईं। लेकिन इस बार सिर्फ उसके ख्याल थे..वो नहीं।

हम फंक्शन के दो दिन पहले पहुंच गए थे, 14 को फंक्शन था..हम 12 को ही चले गए थे। मैं यहां वहां अपना टाइम पास करता रहता, 14 फरवरी को खाने के लिए टैंट लग गया, घर में गहमा गहमी थी लेकिन मेरे लिए सब फीका… मैं ऐसे ही घर के मेन गेट पर खड़ा हो कर टाइम पास कर रहा था।

अचानक एक गाड़ी घर के सामने आकर रुकी, मैंने नम्बर प्लेट देखी तो मेरी धड़कन रुक गई, वो रवि की गाड़ी थी। मैं एकदम से पीछे हट कर दरवाज़े की साइड में जाकर दीवार के साथ लग गया। बाहर देखने की मेरी हिम्मत नहीं हो रही थी।गाड़ी की खिड़की धम्म से बंद होने की आवाज़ हुई और कुछ ही सेकेण्ड्स में रवि मेन गेट से अंदर दाखिल हुआ।

मैं भौंचक्का सा वहीं दीवार से सटा खड़ा था। जैसे ही उसने अंदर कदम रखे, उसकी निगाहें मुझ पर पड़ीं… मैंने उसे देखा और उसने मुझे।उसने मेरी तरफ ऐसे देखा मानो आंखों ही आंखों में मुझसे कह रहा हो- मुझे माफ कर दे सोनू…वो देख कर आगे बढ़़ गया।

अंदर जाकर मौसी से मिला और 5 मिनट बाद मेरे पास वापस आया। वो मेरा हाथ पकड़ कर गाड़ी की तरफ ले गया, मुझे गाड़ी में बैठाया और पास की नहर पर ले गया। वहां पर हम दोनों के बीच जो बातें हुईं वो मैं साइट पर सार्वजनिक रूप से नहीं लिख सकता हूं क्योंकि ये किसी की इज्जत और किसी परिवार के मान का सवाल है।

फंक्शन के बाद रवि वापस हिसार चला गया और मैं अपने घर।

इससे आगे जो कुछ हुआ वो मुझमें लिखने की हिम्मत नहीं है।मैं सोनू.. और ये थी मेरी कहानी।

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समाप्त

 
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