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आयशा खान से सच्चा प्यार और चुदाई--3
जब आयशा नदी में कूदी तो आयशा का स्कूल ड्रेस ऊपर की तरफ उठा और आयशा की चिकनी चिकनी जांघे दिखी ,आयशा नदी में अठखेलिया करने लगी और बोली ''आपको तैरना नहीं आता है इस लिए आप डरते हो सर'' तो मैंने बोला ''आता है तैरना पर कोई देख नहीं ले हम दोनों को इस लिए डरता हु'' तो आयशा बोली ''सर आप को लड़की होना था,अल्ला मिया ने आपको लड़का बनाकर गलती किया '' इतना कहकर आयशा हसने लगी, तो मैं भी अपनी लुंगी-बनियान उतार कर नदी कूद गया और आयशा के साथ नहाने लगा आयशा के सर्ट की दो बटन को खोल दिया और चुचियो को सहलाने लगा , मैं पहली बार किसी लड़की की चूची को हाथ लगाया था क्या टाइट चुचिया थी आयशा की पानी में ही चुचियो को चूसने भी लगा, तो आयशा सर्मा गई और बोली ''रहने दो सर कोई आ नहीं जाए''तब मुझे आयशा की बात सही लगी और मैंने आयशा को बोला '' आशा तुम बाहर निकल जाओ पानी से नहीं तो पानी सुख जाएगा तुम्हारे वदन की गर्मी से '' तो आयशा हसने लगी और कुछ नहीं बोली हम दोनों करीब 15 मिनट नदी में खूब नहाये आपस में लिपट लिपट कर मेरा लण्ड फनफना उठा आयशा की चूत का रसपान करने के लिए, मैंने आयशा से कहा ''चलो उधर चलते है '' [जंगल की तरफ इसारा किया] तो आयशा बोली ''नहीं कोई आ जाएगा देख लेगा '' तो मैं मन मसोस कर रह गया और फिर आयशा को बोला ''चलो फिर बाहर निकलो'' और हम दोनों पानी से बाहर आ गए , आयशा की स्कूल ड्रेस की सर्ट में से आयशा की चुचिया दिख रही थी मैंने आयशा को बोला '' आशा बटन लगा लो'' तो आशा ने सर्ट की बटन लगा लिया | आयशा का गीला वदन साफ़ साफ़ दिखाई दे रहा था मैंने आयशा को बोला 'आशा दुपट्टा रख लो मैं पागल हो रहा हु तुम्हे देखकर '' तो आयशा अपनी चुचिओ को दुपट्टे से ढक लिया और कुछ देर बाद दोनों नदी से अलग अलग रास्ते से घर चले आये किसी ने देखा भी नहीं |
आयशा और लड़कियों को पढ़ाते पढ़ाते समय कब निकल गए पता ही नहीं चला मार्च का महीना आ गया [मैं 10 दिन से गाँव से अपडाउन करता था इस लिए आयशा की जानकारी नहीं मिली] एक दिन आयशा स्कूल नही आई तो उसकी एक फ्रेंड से पूछा तो पता चला की उसके अब्बु और अम्मी कही बाहर गई हुई है ओ दिन भर दूकान पर बैठती है मैं 5 बजे स्कूल से छूटा और आयशा के दूकान गया तो दूकान बंद मिली तो मैं दूकान के बगल में लगे छोटे सटर [जिससे घर के अंदर आते जाते है ] को खटखटाया तो कुछ देर में आयशा निकली एक कम्बल ओढ़े हुए , आयशा को देखते ही मैं समझ गया ये बीमार है तब मैं गली में घुसा और फिर भी मैंने उससे पूछ लिया '' क्या हुआ आशा'' तो बोली ''बुखार आ रहा है '' तब मैंने पूछा की ''अब्बु कहा है'' तो जबाब मिला '' बनारस गए है '' तब मैंने पूछा ''क्यों '' तो बोली ''मौसी का निकाह है '' फिर मैंने पूछा ''किस डाक्टर को दिखाया '' तो आयशा बोली '' किसी को नहीं दिखाया '' फिर मैंने पूछा कितने दिन से बुखार आ रही है '' तो बोली ''दो दिन हुए '' तब मैंने आयशा का वदन टटोला तो देखा की अभी भी खूब जोर की बुखार है
तब मैंने आयशा को बोला '' चलो मैं डाक्टर को दिखा दू '' तो पहले तो आयशा ने ना नुकुर किया पर मैंने आयशा का हाथ पकड़ा और बुलट में बिठाया और डाक्टर के पास ले गया और आयशा को दिखाया दवाई लाकर आयशा को वापस घर ले आया और आयशा को बिस्तर पर लिटा दिया और आयशा का सिर दबाने लगा तो आयशा ने हाथ पकड़ लिया और बोली ''इतनी सेवा मत करो सर '' तो मैंने कहा की '' दुःख में साथ नहीं दुगा तो कब दुगा '' और बहुत से बाते किया पर आयशा का घर बदबू मार रहा था बकरियो की गंध दिमाग खराब कर रही थी मुझे ऐसा लगे आयशा के घर से बहार निकल जाउ पर आयशा को इस हालत में छोड़ नहीं सकता था , कुछ देर में आयशा बोली '' आप जाइए सर,नहीं तो मुहल्ले वाले क्या सोचेगे आपकी इज्जत पर धब्बा लगेगा '' तो मैंने बोला '' सोचने दो तुम्हारी जान से बढ़कर मेरी इज्जत नहीं है '' पर आयशा बार बार यही कहे जा रही थी इस लिए मैं आयशा के घर से उठकर चला आया अपन कमरे पर साम को 7 बजे आयशा के पास फिर से गया तो देखा की उसकी बुखार अभी भी कम नहीं हुई तब एक टेबलेट और दिया जो दूध के साथ देनी थी पर आयशा के घर दूध नहीं था तो बाजार से दूध लाया और चूल्हे में गर्म किया और आयशा को जबरजस्ती दूध पिलाया और साम की दवाई खिलाया डाक्टर ने खाना खाने के लिए मना किया था
इस कारण कुछ फल लाया था ओ खिलाने लगा तो आयशा एक एप्पल खाई और मना कर दिया जब मैंने आग्रह किया की और खा लो तो मना कर दिया तब मैंने पूछा '' आशा और क्या खाना पसंद करोगी '' तो आयशा हलके से मुस्कुराई और बोली '' केला खाने का मन कर रहा है '' तो मैंने कहा ''ठीक है मैं केला लाता हु '' तो बोली '' अभी रहने दीजिये रात में खा लूँगी केला '' तो मैंने कहा '' लेकर आता हु , रख दू नहीं तो दूकान बंद हो जाएगी '' और इतना कह कर मैं आयशा के पास से उठा और बाजार से जाकर केला लाया और आयशा के पास रख दिया तब तक रात के 8 बज गए थे आयशा ने पूछा ''आपने खाना खा लिया क्या '' तो मैंने बोला ''नहीं कौन बनाये इतनी रात को, दूध पीकर सो जाउगा'' तो आयशा बोली ''मैं बना देती हु आप खा लीजिये'' तो मैंने कहा ''आशा तुम्हारी तबियत ठीक नहीं है मत परेसान हो '' फिर भी आयशा नहीं मानी और उठने लगी तो मैंने आयशा को फिर से लिटा दिया और बोला ''आराम मिल जाए तब बना देना'' और मैं इतना कह कर फिर अपने रूम में आ गया
8.45 पर केरोसिन के स्टोप में दूध गरम करने लगा इतने में किसी ने दरवाजे में दस्तक दिआ तो जाकर देखा तो मुह ढाक कर एक कम्बल ओढ़े हुए सामने आयशा खड़ी थी,दरवाजा खुलते ही आयशा रूम के अंदर आ गई जल्दी से [कस्बे में स्ट्रेट लाइट नहीं होने से अन्धेरा रहता है] और दरवाजा बंद कर दिया और कमरे के अंदर आ गई , मैंने पूछा ''बुखार उत्तर गई '' तो कुछ नहीं बोली तब मैंने आयशा के हाथ पकड़ कर देखा तो बुखार उत्तर चुकी थी , इतने में दूध जलने की बदबू आई मैं दौड़ा कर किचेन वाले रूम में देखा की सारा दूध उफन कर बाहर आ गया था , मैंने जल्दी से स्टोव को बंद किया और तपेली को उतारा देखा की उसमे से कुछ दूध बह गया था इतने में आयशा आई और ये सब देख कर बोली '' चलिए हटिये ये काम मेरा है आपका नहीं ' 'तब मैं वहा से हट गया और आयशा खाना बनाने लगी हम दोनों बाते भी करते गए और खाना बन गया तब तक रात के 10 बज गए आयशा और मैंने एक ही थाली में खाना खाये पर आयशा ने तो ज्यादा नहीं खाया |
खाने के बाद आयशा बोली '' मैं जाऊ अब '' तो मैंने बोला ''मैं मना कर दुगा तो मान जाओगी क्या '' तब आयशा कुछ नहीं बोली और अपनी नजरे नीची करके खड़ी रही , तब मैंने आयशा को पकड़ कर चिपका लिया सीने से और किस कर लिया गाल पर तो आयशा मेरे सीने से चिपकी रही और फिर बोली '' अब तो जाने दीजिये '' तब मैंने बोला ''प्यास जगा कर प्यास नहीं बुजाओगी '' तो बोली ''रुकिए'' और मेरे से अलग होकर किचेन वाले रूम में गई और एक ग्लास पानी लाइ और बोली ''लीजिये'' और मंद मंद मुस्कुराने लगी तब मैंने गिलास को एक किनारे रख दिया और आयशा के होठो को किस करते हुए चूसने लगा और आयशा के स्तन पर हाथ रख दिया और सलवार के ऊपर से स्तन को सहलाने लगा, आयशा कोई बिरोध रही थी कुछ देर में आयशा भी किस करने लगी मेरे पीठ पर हाथ घुमाने लगी, लुंगी के नीचे मेरा लण्ड खड़ा होकर तन गया धीरे से आयशा को बिस्तर पर बैठा दिया और आयशा की जांघो को सहलाने लगा इतने में आयशा मेरे जांघ पर अपना हाथ दिया और जांघ को सहलाने लगी और फिर मेरे लण्ड पर अपना हाथ रख दिया पर हाथ रखते ही जल्दी से हाथ को हटा लिया और लुंगी के नीचे खड़े लण्ड को देखने लगी और बोली '' मैं जा रही हु ,मुझे डर लग रहा है ''
मैंने बोला '' क्यों डर रही हो '' तो कुछ नहीं बोली और बिस्तर से उठकर खड़ी हो गई तो मैंने हाथ पकड़ कर फिर से आयशा को बिठा लिया तो आयशा बोलती है '' सिर दर्द कर रहा है छोड़ दीजिये मुझे '' तब मैंने आयशा को बोला '' लेट जाओ सिर दबा देता हु '' और इतना कह कर आयशा का हाथ पकड़ कर बिस्तर पर लिटा दिया और आयशा के सिर पर थोड़ा सा ''रमेश्वारादि '' का तेल डालकर आयशा का सिर दबाने लगा तो आयशा बोलती है '' इतनी सेवा नहीं करिये '' तो मैंने बोला ''तुम मेरा प्यार हो आशा तुम्हारे लिए कुछ भी करुगा '' तो आयशा बोली '' निकाह करेंगे मेरे साथ '' तब मैंने बोला ''हां करुगा तुम तैयार हो '' तो आयशा बोली '' हा तैयार हु पर आप इतने बड़े आदमी है नहीं करेंगे '' तब मैंने बोला ''करुगा तुम साथ दे दो तो'' तो आयशा बोली '' मैं तैयार हु '' तो आयशा बिस्तर से उठी और मुझे किस करते हुए चिपक गई तो मैंने आयशा को फिर से किस करने लगा और आयशा के कुर्ती को ऊपर उठाया और स्तन को ब्रा के ऊपर से सहलाने लगा और झुक कर आयशा के गुलाब जैसे सुन्दर होठो को चूसने लगा आयशा भी मेरे होठो को चाटने लगी और कुछ देर में मेरे लण्ड को पकड़ लिया तो मैंने कान में धीरे से बोला '' केला खाओगी '' तो मुस्कुराई और मादक नजरो से देखी तब मैंने आयशा के सलवार का नाड़ा खोल दिया
और सलवार को नीचे खिसकाने लगा तो सलवार को पकड़ लिया तो मैंने बोला '' उतारो इसे '' तो बोली '' न '' मैंने फिर से बोला ''उतारो'' तो आयशा बिजली के बल्ब की तरफ देखने लगी मैं समझ गया ये सर्मा रही है तो मैं उठा और बल्ब को बंद कर दिया कमरे में अन्धेरा हो गया पर किचेन वाले रूम की हलकी हलकी लाइट आ रही थी और फिर मैंने आयशा का सलवार उतार दिया , आयशा की गोरी गोरी चिकनी चिकनी पतली पतली दूधिया जांघे दिखाई दे गई , आयशा ने पेंटी पहन रखी थी मैंने आयशा की जांघो पर हाथ घुमाते घुमाते पेंटी के किनारो से उसकी चूत पर हाथ घुमाया तो चूत पर हलके हलके मुलायम बाल थे ,चूत के किनारो को ऊँगली से सहलाने लगा … … ……………………
""पर मेरी नींद खुल गई और मेरे बगल में लेटी हुई मेरी पत्नी मेरे लण्ड के साथ खेल रही थी क्योकि स्वप्न में मैं मेरी पत्नी की चूत सहला रहा था पत्नी गरम पड़ गई थी मैंने उन्हें ससुराल में नहीं चोदना चाहता था पर ओ है की गर्म पड़ गई थी और अपनी गाउन को उतार कर सिर्फ ब्रा और पेंटी में लेटी हुई थी ओ मेरे चढ्ढी को उतार कर मुझे नंगा कर चुकी थी और खुद भी नंगी होकर मेरे लण्ड को अपनी चूत में घुसेड़ कर मुझे चोद रही थी मैं उन्हें फ़टाफ़ट चोदने लगा और 10 मिनट बाद जब ओ संतुष्ट हो कर अलग हो गई तो मैं कपड़ा पहनने लगा मोबाइल में देखा की रात के दो बज गए है कुछ ही देर में पत्नी ब्रा और पेंटी में ही खुर्राटे लेने लगी और फिर से आयशा की यादो में खो गया आयशा और मेरे जीवन की पहली चुदाई को याद करने लगा""
……………………… आयशा ने पेंटी पहन रखी थी मैंने आयशा की जांघो पर हाथ घुमाते घुमाते उसकी चूत पर हाथ घुमाया तो चूत पर हलके हलके मुलायम बाल थे ,चूत के किनारो को ऊँगली से सहलाने लगा [कोक शास्त्र, कामसूत्र जैसे कई किताबो को पढ़ रखा था इस लिए चुदाई का किताबी ज्ञान खूब था मेरे पास आज उस ज्ञान को आजमाने का अच्छा मौका था] और कुछ देर में पेंटी के किनारे को हाथ से पकड़ा और चूत को चाटने लगा तो आयशा मेरे सर को पकड़ कर किनारे करने लगी और धीरे से बोली ''कितने गंदे हो ये कोई चाटने के जगह है क्या '' तो मैंने बोला ''आशा यही तो जन्नत है '' तो आयशा बोली ''छिः छिः कैसे बाते करते है '' तब मैंने फिर से आयशा की चूत को चाटने लगा आयशा ने फिर से मेरे सर को पकड़ कर हटाने लगी तो मैंने आयशा के दोनों हाथो को एक ही हाथ से पकड़ कर चूत को चाटने लगा आयशा को अच्छा लगाने लगा तो बोली '' हाथ छोड़िये दर्द करने लगा'' तब मैंने आयशा के हाथ को छोड़ दिया और आयशा की पेंटी को आयशा के वदन से अलग कर दिया और दोनों टांगो को फैलाते हुए आयशा की चूत को चाटने लगा
आयशा धीरे धीरे गर्म होने लगी तब मैंने आयशा को बोला ''इसे भी उतारो ना [कुर्ती की तरफ इसारा किया] तब आयशा बैठ गई और अपनी कुर्ती को उतारने लगी पर आयशा कुर्ती उतारते हुए काँप रही थी इस लिए उसकी कुर्ती नहीं उत्तर रही थी तब मैं आयशा को बोला की दोनों हाथ ऊपर करो तो आयशा ने अपने दोनों हाथ को ऊपर किया तब मैं कुर्ती को उतार दिया अब आयशा के वदन में सिर्फ ब्रा बची थी मैंने ब्रा का हुक खोला और आयशा की सुंदरसुन्दर चुचिया ब्रा से आजाद होकर बाहर आ गई , मैं पहली बार किसी लड़की को इस तरह से नंगी देख रहा हु ,आयशा की छोटी छोटी चुचिया गजब की सुन्दर थी ,आयशा बेड पर बैठी हुई थी मैं झुककर आयशा की बूब्स को चूसने आयशा मेरे सिर के बालो पर अपनी उंगलियो को फसाकर घुमाने लगी मेरे सिर को सहलाने लगी अपनी उंगलियो के पोर से फिर मेरी पीठ पर हाथ घुमाने लगी पर मैंने बनियान पहन रखी थी जिसे आयशा उतारने लगी तो मैंने दोनों हाथ ऊपर कर दिया तो आयशा मेरी बनियान को उतार दिया मैं आयशा की जांघो पर हाथ हुमाता रहा
इतने में आयशा मेरे जांघो पर अपना हाथ राखी और जांघो को सहलाने लगी और लुंगी को उतार दिया और चढ्ढि के ऊपर से मेरे लण्ड पर हाथ घुमाने लगी तब मैं खुद ही मेरी चढ्ढी को उतार दिया और आयशा के सामने नंगा होकर बैठा गया आयशा मेरे लण्ड को आवाक होकर देखने लगी आयशा के चेहरे पर हवाइयां उड़ रही थी ऐसा लग रहा था जैसे ओ डर रही हो तब मैंने आयशा का हाथ पकड़ा और अपने लण्ड के ऊपर आयशा का हाथ रख दिया पहले तो आयसा डरी फिर लण्ड को पकड़ लिया डरते डरते आयशा के हाथ में मेरा लंबा और तगड़ा लण्ड नहीं पकड़ में आ रहा था मैं आयशा के कमर को पकड़ कर नजदीक खिसकाया और आयशा की चूत के पास लण्ड को ले गया तो आयशा डर कर पीछे खिसकने लगी तो मैंने फिर से आयशा आकि कमर को पकड़ा और लण्ड के नजदीक लाया और झुककर आयशा की चुचियो को चूसने लगा और एक हाथ से चूत में ऊँगली से सहलाने लगा और आयशा को पूस करके बिस्तर पर लिटा दिया और आयशा की दोनों टांगो को पकड़ कर फैला दिया और चूत को चाटने लगा आयशा की चूत गीली हो गई चुचियो की निप्पल टाइट पड़ गई मैं समझ गया आयशा लण्ड लेने को तैयार हो चुकी है , मैंने लण्ड के सुपाड़े की चमड़ी को पीछे खिसकाया और आयशा की चूत के मुह पर लण्ड को रखा पर चूत के ज़रा से छेद में लण्ड को कैसे डालु ये सोचने लगा और ऊगली से आयशा की चूत की दोनों तरफ की स्किन को फैलाया और लण्ड को चूत के मुह में टिका दिया और धीरे धीरे लण्ड को आयशा की चूत में घुसेड़ने लगा
अभी लण्ड का आधा सुपाड़ा ही चूत में घुसा था की आयशा के मुह से कराहने की आवाज आई और आयशा ने आपने चूतड़ को खिसका लिया तब लण्ड बाहर आ गया और आयशा डर कर बैठ गई और बोली ''रहने दो सर दर्द हो रहा है '' तो मैंने आयशा को पुचकारा और फिर से लिटा दिया और चूत में ''रामेश्वारादि तेल''[रामेश्वारादि तेल को सिर पर लगाने से बहुत अच्छी खुसबू आती है और सर में हलकी से चुनचुनाहट होती है,आयशा की चूत में भी हलके हलके चुनचुनाहट होने लगी थी ] को एक ढक्कन आयशा की चूत में डालकर चूत को चिकनी कर दिया और फिर धीरे धीरे लण्ड को पुश करने लगा लण्ड का सुपाड़ा कब घुस गया आयशा को पता ही नहीं चला तब मैं आयशा के ऊपर झुक गया और आयशा को किस करने लगा , चुचियो को चूसने लगा और लण्ड के हलके हलके झटके मारने लगा और धीरे धीरे करके आधा लण्ड घुसेड़ दिया और लण्ड को आगे पीछे करने लगा और फिर एक हल्का सा झटका मारा और पूरा का पूरा 8 इंच लंबा लण्ड आयशा की चूत की ''कौमार्य झिल्ली '' को फाड़ते हुए अंदर तक घुस गया जैसे ही कौमार्य झिल्ली फटी तो आयशा को दर्द हुआ और उसके आँखों से आँसू निकल पड़े तो मैं आयशा के आशुओ को मेरी जीभ से चाटने लगा तो आयशा भावुक होकर रोने लगी और धीरे से बोली '' इतना प्यार मत करो नहीं तो आपकी ये लैला आपसे बिछड़ जाएगी
'' तब मैंने आयशा को बोला '' मेरी लैला को मेरे से कोई नहीं छीन सकता'' आयशा रोती जाती और मैं आयशा के आशु चाटते जाता उधर लण्ड के झटके लगातार चूत पर पड़ रहे थे आयशा चुदाई के आनंद में खो गई आशु बहना बंद हो गया और आयशा बड़े प्यार से चुदाने लगी आयशा कुछ ही पलो में अपनी आँखों को बंद कर लिया और लम्बी लम्बी साँसे लेने लगी मैं झटके की गति और प्रहार दोनों को बढ़ा दिया आयशा मेरे होठो को किस करती मेरे सिर पर ,पीठ पर हाथ घुमाती मैं लगातार झटके मारने लगा मुस्किल से 5 मिनट की चुदाई में आयशा और मैं एक साथ झर गए आयशा जोर से लिपट गई मैं झरते वक्त पूरी ताकत से लण्ड को आयशा की चूत में घुसा दिया और आयशा के ऊपर लेट गया और किस करता रहा , आयशा की चूत से ढेर सारा वीर्य बहकर बाहर आने लगा तो आयशा बोली ''उठो ना अब '' तो मैं लण्ड को बाहर निकालते हुए उठ गया और देखा की लण्ड में खून लगा है आयशा भी उठी और खून को देखकर घबरा गई और मेरी तरफ देखने लगी तो मैंने आयशा को समझाया की तुमने पहली बार किया है न इस लिए तुम्हारी झिल्ली फट गई है तो आयशा कुछ नहीं बोली और मुझे किस करने लगी और धीरे से कान में बोलती है '' आज आपने जन्नत पहुंचा दिया'' और इतना कह कर लिपट गई मेरे साथ फिर उठी और कपडे पहनने लगी तो मैंने बोला '' मत पहनो '' तो बोली ''हट्ट सर्म लग रही है '' तो मैंने फिर से कहा की ''अब काहे की सरम अब तो सब देख लिया मैंने '' तब भी आयशा नहीं मानी और कपडे पहन लिया तब मैंने भी कपडे पहन लिया कुछ देर में आयशा घर जाने लगी तो मैंने आयशा को बोला ''अभी मत जाओ ना''
जब आयशा नदी में कूदी तो आयशा का स्कूल ड्रेस ऊपर की तरफ उठा और आयशा की चिकनी चिकनी जांघे दिखी ,आयशा नदी में अठखेलिया करने लगी और बोली ''आपको तैरना नहीं आता है इस लिए आप डरते हो सर'' तो मैंने बोला ''आता है तैरना पर कोई देख नहीं ले हम दोनों को इस लिए डरता हु'' तो आयशा बोली ''सर आप को लड़की होना था,अल्ला मिया ने आपको लड़का बनाकर गलती किया '' इतना कहकर आयशा हसने लगी, तो मैं भी अपनी लुंगी-बनियान उतार कर नदी कूद गया और आयशा के साथ नहाने लगा आयशा के सर्ट की दो बटन को खोल दिया और चुचियो को सहलाने लगा , मैं पहली बार किसी लड़की की चूची को हाथ लगाया था क्या टाइट चुचिया थी आयशा की पानी में ही चुचियो को चूसने भी लगा, तो आयशा सर्मा गई और बोली ''रहने दो सर कोई आ नहीं जाए''तब मुझे आयशा की बात सही लगी और मैंने आयशा को बोला '' आशा तुम बाहर निकल जाओ पानी से नहीं तो पानी सुख जाएगा तुम्हारे वदन की गर्मी से '' तो आयशा हसने लगी और कुछ नहीं बोली हम दोनों करीब 15 मिनट नदी में खूब नहाये आपस में लिपट लिपट कर मेरा लण्ड फनफना उठा आयशा की चूत का रसपान करने के लिए, मैंने आयशा से कहा ''चलो उधर चलते है '' [जंगल की तरफ इसारा किया] तो आयशा बोली ''नहीं कोई आ जाएगा देख लेगा '' तो मैं मन मसोस कर रह गया और फिर आयशा को बोला ''चलो फिर बाहर निकलो'' और हम दोनों पानी से बाहर आ गए , आयशा की स्कूल ड्रेस की सर्ट में से आयशा की चुचिया दिख रही थी मैंने आयशा को बोला '' आशा बटन लगा लो'' तो आशा ने सर्ट की बटन लगा लिया | आयशा का गीला वदन साफ़ साफ़ दिखाई दे रहा था मैंने आयशा को बोला 'आशा दुपट्टा रख लो मैं पागल हो रहा हु तुम्हे देखकर '' तो आयशा अपनी चुचिओ को दुपट्टे से ढक लिया और कुछ देर बाद दोनों नदी से अलग अलग रास्ते से घर चले आये किसी ने देखा भी नहीं |
आयशा और लड़कियों को पढ़ाते पढ़ाते समय कब निकल गए पता ही नहीं चला मार्च का महीना आ गया [मैं 10 दिन से गाँव से अपडाउन करता था इस लिए आयशा की जानकारी नहीं मिली] एक दिन आयशा स्कूल नही आई तो उसकी एक फ्रेंड से पूछा तो पता चला की उसके अब्बु और अम्मी कही बाहर गई हुई है ओ दिन भर दूकान पर बैठती है मैं 5 बजे स्कूल से छूटा और आयशा के दूकान गया तो दूकान बंद मिली तो मैं दूकान के बगल में लगे छोटे सटर [जिससे घर के अंदर आते जाते है ] को खटखटाया तो कुछ देर में आयशा निकली एक कम्बल ओढ़े हुए , आयशा को देखते ही मैं समझ गया ये बीमार है तब मैं गली में घुसा और फिर भी मैंने उससे पूछ लिया '' क्या हुआ आशा'' तो बोली ''बुखार आ रहा है '' तब मैंने पूछा की ''अब्बु कहा है'' तो जबाब मिला '' बनारस गए है '' तब मैंने पूछा ''क्यों '' तो बोली ''मौसी का निकाह है '' फिर मैंने पूछा ''किस डाक्टर को दिखाया '' तो आयशा बोली '' किसी को नहीं दिखाया '' फिर मैंने पूछा कितने दिन से बुखार आ रही है '' तो बोली ''दो दिन हुए '' तब मैंने आयशा का वदन टटोला तो देखा की अभी भी खूब जोर की बुखार है
तब मैंने आयशा को बोला '' चलो मैं डाक्टर को दिखा दू '' तो पहले तो आयशा ने ना नुकुर किया पर मैंने आयशा का हाथ पकड़ा और बुलट में बिठाया और डाक्टर के पास ले गया और आयशा को दिखाया दवाई लाकर आयशा को वापस घर ले आया और आयशा को बिस्तर पर लिटा दिया और आयशा का सिर दबाने लगा तो आयशा ने हाथ पकड़ लिया और बोली ''इतनी सेवा मत करो सर '' तो मैंने कहा की '' दुःख में साथ नहीं दुगा तो कब दुगा '' और बहुत से बाते किया पर आयशा का घर बदबू मार रहा था बकरियो की गंध दिमाग खराब कर रही थी मुझे ऐसा लगे आयशा के घर से बहार निकल जाउ पर आयशा को इस हालत में छोड़ नहीं सकता था , कुछ देर में आयशा बोली '' आप जाइए सर,नहीं तो मुहल्ले वाले क्या सोचेगे आपकी इज्जत पर धब्बा लगेगा '' तो मैंने बोला '' सोचने दो तुम्हारी जान से बढ़कर मेरी इज्जत नहीं है '' पर आयशा बार बार यही कहे जा रही थी इस लिए मैं आयशा के घर से उठकर चला आया अपन कमरे पर साम को 7 बजे आयशा के पास फिर से गया तो देखा की उसकी बुखार अभी भी कम नहीं हुई तब एक टेबलेट और दिया जो दूध के साथ देनी थी पर आयशा के घर दूध नहीं था तो बाजार से दूध लाया और चूल्हे में गर्म किया और आयशा को जबरजस्ती दूध पिलाया और साम की दवाई खिलाया डाक्टर ने खाना खाने के लिए मना किया था
इस कारण कुछ फल लाया था ओ खिलाने लगा तो आयशा एक एप्पल खाई और मना कर दिया जब मैंने आग्रह किया की और खा लो तो मना कर दिया तब मैंने पूछा '' आशा और क्या खाना पसंद करोगी '' तो आयशा हलके से मुस्कुराई और बोली '' केला खाने का मन कर रहा है '' तो मैंने कहा ''ठीक है मैं केला लाता हु '' तो बोली '' अभी रहने दीजिये रात में खा लूँगी केला '' तो मैंने कहा '' लेकर आता हु , रख दू नहीं तो दूकान बंद हो जाएगी '' और इतना कह कर मैं आयशा के पास से उठा और बाजार से जाकर केला लाया और आयशा के पास रख दिया तब तक रात के 8 बज गए थे आयशा ने पूछा ''आपने खाना खा लिया क्या '' तो मैंने बोला ''नहीं कौन बनाये इतनी रात को, दूध पीकर सो जाउगा'' तो आयशा बोली ''मैं बना देती हु आप खा लीजिये'' तो मैंने कहा ''आशा तुम्हारी तबियत ठीक नहीं है मत परेसान हो '' फिर भी आयशा नहीं मानी और उठने लगी तो मैंने आयशा को फिर से लिटा दिया और बोला ''आराम मिल जाए तब बना देना'' और मैं इतना कह कर फिर अपने रूम में आ गया
8.45 पर केरोसिन के स्टोप में दूध गरम करने लगा इतने में किसी ने दरवाजे में दस्तक दिआ तो जाकर देखा तो मुह ढाक कर एक कम्बल ओढ़े हुए सामने आयशा खड़ी थी,दरवाजा खुलते ही आयशा रूम के अंदर आ गई जल्दी से [कस्बे में स्ट्रेट लाइट नहीं होने से अन्धेरा रहता है] और दरवाजा बंद कर दिया और कमरे के अंदर आ गई , मैंने पूछा ''बुखार उत्तर गई '' तो कुछ नहीं बोली तब मैंने आयशा के हाथ पकड़ कर देखा तो बुखार उत्तर चुकी थी , इतने में दूध जलने की बदबू आई मैं दौड़ा कर किचेन वाले रूम में देखा की सारा दूध उफन कर बाहर आ गया था , मैंने जल्दी से स्टोव को बंद किया और तपेली को उतारा देखा की उसमे से कुछ दूध बह गया था इतने में आयशा आई और ये सब देख कर बोली '' चलिए हटिये ये काम मेरा है आपका नहीं ' 'तब मैं वहा से हट गया और आयशा खाना बनाने लगी हम दोनों बाते भी करते गए और खाना बन गया तब तक रात के 10 बज गए आयशा और मैंने एक ही थाली में खाना खाये पर आयशा ने तो ज्यादा नहीं खाया |
खाने के बाद आयशा बोली '' मैं जाऊ अब '' तो मैंने बोला ''मैं मना कर दुगा तो मान जाओगी क्या '' तब आयशा कुछ नहीं बोली और अपनी नजरे नीची करके खड़ी रही , तब मैंने आयशा को पकड़ कर चिपका लिया सीने से और किस कर लिया गाल पर तो आयशा मेरे सीने से चिपकी रही और फिर बोली '' अब तो जाने दीजिये '' तब मैंने बोला ''प्यास जगा कर प्यास नहीं बुजाओगी '' तो बोली ''रुकिए'' और मेरे से अलग होकर किचेन वाले रूम में गई और एक ग्लास पानी लाइ और बोली ''लीजिये'' और मंद मंद मुस्कुराने लगी तब मैंने गिलास को एक किनारे रख दिया और आयशा के होठो को किस करते हुए चूसने लगा और आयशा के स्तन पर हाथ रख दिया और सलवार के ऊपर से स्तन को सहलाने लगा, आयशा कोई बिरोध रही थी कुछ देर में आयशा भी किस करने लगी मेरे पीठ पर हाथ घुमाने लगी, लुंगी के नीचे मेरा लण्ड खड़ा होकर तन गया धीरे से आयशा को बिस्तर पर बैठा दिया और आयशा की जांघो को सहलाने लगा इतने में आयशा मेरे जांघ पर अपना हाथ दिया और जांघ को सहलाने लगी और फिर मेरे लण्ड पर अपना हाथ रख दिया पर हाथ रखते ही जल्दी से हाथ को हटा लिया और लुंगी के नीचे खड़े लण्ड को देखने लगी और बोली '' मैं जा रही हु ,मुझे डर लग रहा है ''
मैंने बोला '' क्यों डर रही हो '' तो कुछ नहीं बोली और बिस्तर से उठकर खड़ी हो गई तो मैंने हाथ पकड़ कर फिर से आयशा को बिठा लिया तो आयशा बोलती है '' सिर दर्द कर रहा है छोड़ दीजिये मुझे '' तब मैंने आयशा को बोला '' लेट जाओ सिर दबा देता हु '' और इतना कह कर आयशा का हाथ पकड़ कर बिस्तर पर लिटा दिया और आयशा के सिर पर थोड़ा सा ''रमेश्वारादि '' का तेल डालकर आयशा का सिर दबाने लगा तो आयशा बोलती है '' इतनी सेवा नहीं करिये '' तो मैंने बोला ''तुम मेरा प्यार हो आशा तुम्हारे लिए कुछ भी करुगा '' तो आयशा बोली '' निकाह करेंगे मेरे साथ '' तब मैंने बोला ''हां करुगा तुम तैयार हो '' तो आयशा बोली '' हा तैयार हु पर आप इतने बड़े आदमी है नहीं करेंगे '' तब मैंने बोला ''करुगा तुम साथ दे दो तो'' तो आयशा बोली '' मैं तैयार हु '' तो आयशा बिस्तर से उठी और मुझे किस करते हुए चिपक गई तो मैंने आयशा को फिर से किस करने लगा और आयशा के कुर्ती को ऊपर उठाया और स्तन को ब्रा के ऊपर से सहलाने लगा और झुक कर आयशा के गुलाब जैसे सुन्दर होठो को चूसने लगा आयशा भी मेरे होठो को चाटने लगी और कुछ देर में मेरे लण्ड को पकड़ लिया तो मैंने कान में धीरे से बोला '' केला खाओगी '' तो मुस्कुराई और मादक नजरो से देखी तब मैंने आयशा के सलवार का नाड़ा खोल दिया
और सलवार को नीचे खिसकाने लगा तो सलवार को पकड़ लिया तो मैंने बोला '' उतारो इसे '' तो बोली '' न '' मैंने फिर से बोला ''उतारो'' तो आयशा बिजली के बल्ब की तरफ देखने लगी मैं समझ गया ये सर्मा रही है तो मैं उठा और बल्ब को बंद कर दिया कमरे में अन्धेरा हो गया पर किचेन वाले रूम की हलकी हलकी लाइट आ रही थी और फिर मैंने आयशा का सलवार उतार दिया , आयशा की गोरी गोरी चिकनी चिकनी पतली पतली दूधिया जांघे दिखाई दे गई , आयशा ने पेंटी पहन रखी थी मैंने आयशा की जांघो पर हाथ घुमाते घुमाते पेंटी के किनारो से उसकी चूत पर हाथ घुमाया तो चूत पर हलके हलके मुलायम बाल थे ,चूत के किनारो को ऊँगली से सहलाने लगा … … ……………………
""पर मेरी नींद खुल गई और मेरे बगल में लेटी हुई मेरी पत्नी मेरे लण्ड के साथ खेल रही थी क्योकि स्वप्न में मैं मेरी पत्नी की चूत सहला रहा था पत्नी गरम पड़ गई थी मैंने उन्हें ससुराल में नहीं चोदना चाहता था पर ओ है की गर्म पड़ गई थी और अपनी गाउन को उतार कर सिर्फ ब्रा और पेंटी में लेटी हुई थी ओ मेरे चढ्ढी को उतार कर मुझे नंगा कर चुकी थी और खुद भी नंगी होकर मेरे लण्ड को अपनी चूत में घुसेड़ कर मुझे चोद रही थी मैं उन्हें फ़टाफ़ट चोदने लगा और 10 मिनट बाद जब ओ संतुष्ट हो कर अलग हो गई तो मैं कपड़ा पहनने लगा मोबाइल में देखा की रात के दो बज गए है कुछ ही देर में पत्नी ब्रा और पेंटी में ही खुर्राटे लेने लगी और फिर से आयशा की यादो में खो गया आयशा और मेरे जीवन की पहली चुदाई को याद करने लगा""
……………………… आयशा ने पेंटी पहन रखी थी मैंने आयशा की जांघो पर हाथ घुमाते घुमाते उसकी चूत पर हाथ घुमाया तो चूत पर हलके हलके मुलायम बाल थे ,चूत के किनारो को ऊँगली से सहलाने लगा [कोक शास्त्र, कामसूत्र जैसे कई किताबो को पढ़ रखा था इस लिए चुदाई का किताबी ज्ञान खूब था मेरे पास आज उस ज्ञान को आजमाने का अच्छा मौका था] और कुछ देर में पेंटी के किनारे को हाथ से पकड़ा और चूत को चाटने लगा तो आयशा मेरे सर को पकड़ कर किनारे करने लगी और धीरे से बोली ''कितने गंदे हो ये कोई चाटने के जगह है क्या '' तो मैंने बोला ''आशा यही तो जन्नत है '' तो आयशा बोली ''छिः छिः कैसे बाते करते है '' तब मैंने फिर से आयशा की चूत को चाटने लगा आयशा ने फिर से मेरे सर को पकड़ कर हटाने लगी तो मैंने आयशा के दोनों हाथो को एक ही हाथ से पकड़ कर चूत को चाटने लगा आयशा को अच्छा लगाने लगा तो बोली '' हाथ छोड़िये दर्द करने लगा'' तब मैंने आयशा के हाथ को छोड़ दिया और आयशा की पेंटी को आयशा के वदन से अलग कर दिया और दोनों टांगो को फैलाते हुए आयशा की चूत को चाटने लगा
आयशा धीरे धीरे गर्म होने लगी तब मैंने आयशा को बोला ''इसे भी उतारो ना [कुर्ती की तरफ इसारा किया] तब आयशा बैठ गई और अपनी कुर्ती को उतारने लगी पर आयशा कुर्ती उतारते हुए काँप रही थी इस लिए उसकी कुर्ती नहीं उत्तर रही थी तब मैं आयशा को बोला की दोनों हाथ ऊपर करो तो आयशा ने अपने दोनों हाथ को ऊपर किया तब मैं कुर्ती को उतार दिया अब आयशा के वदन में सिर्फ ब्रा बची थी मैंने ब्रा का हुक खोला और आयशा की सुंदरसुन्दर चुचिया ब्रा से आजाद होकर बाहर आ गई , मैं पहली बार किसी लड़की को इस तरह से नंगी देख रहा हु ,आयशा की छोटी छोटी चुचिया गजब की सुन्दर थी ,आयशा बेड पर बैठी हुई थी मैं झुककर आयशा की बूब्स को चूसने आयशा मेरे सिर के बालो पर अपनी उंगलियो को फसाकर घुमाने लगी मेरे सिर को सहलाने लगी अपनी उंगलियो के पोर से फिर मेरी पीठ पर हाथ घुमाने लगी पर मैंने बनियान पहन रखी थी जिसे आयशा उतारने लगी तो मैंने दोनों हाथ ऊपर कर दिया तो आयशा मेरी बनियान को उतार दिया मैं आयशा की जांघो पर हाथ हुमाता रहा
इतने में आयशा मेरे जांघो पर अपना हाथ राखी और जांघो को सहलाने लगी और लुंगी को उतार दिया और चढ्ढि के ऊपर से मेरे लण्ड पर हाथ घुमाने लगी तब मैं खुद ही मेरी चढ्ढी को उतार दिया और आयशा के सामने नंगा होकर बैठा गया आयशा मेरे लण्ड को आवाक होकर देखने लगी आयशा के चेहरे पर हवाइयां उड़ रही थी ऐसा लग रहा था जैसे ओ डर रही हो तब मैंने आयशा का हाथ पकड़ा और अपने लण्ड के ऊपर आयशा का हाथ रख दिया पहले तो आयसा डरी फिर लण्ड को पकड़ लिया डरते डरते आयशा के हाथ में मेरा लंबा और तगड़ा लण्ड नहीं पकड़ में आ रहा था मैं आयशा के कमर को पकड़ कर नजदीक खिसकाया और आयशा की चूत के पास लण्ड को ले गया तो आयशा डर कर पीछे खिसकने लगी तो मैंने फिर से आयशा आकि कमर को पकड़ा और लण्ड के नजदीक लाया और झुककर आयशा की चुचियो को चूसने लगा और एक हाथ से चूत में ऊँगली से सहलाने लगा और आयशा को पूस करके बिस्तर पर लिटा दिया और आयशा की दोनों टांगो को पकड़ कर फैला दिया और चूत को चाटने लगा आयशा की चूत गीली हो गई चुचियो की निप्पल टाइट पड़ गई मैं समझ गया आयशा लण्ड लेने को तैयार हो चुकी है , मैंने लण्ड के सुपाड़े की चमड़ी को पीछे खिसकाया और आयशा की चूत के मुह पर लण्ड को रखा पर चूत के ज़रा से छेद में लण्ड को कैसे डालु ये सोचने लगा और ऊगली से आयशा की चूत की दोनों तरफ की स्किन को फैलाया और लण्ड को चूत के मुह में टिका दिया और धीरे धीरे लण्ड को आयशा की चूत में घुसेड़ने लगा
अभी लण्ड का आधा सुपाड़ा ही चूत में घुसा था की आयशा के मुह से कराहने की आवाज आई और आयशा ने आपने चूतड़ को खिसका लिया तब लण्ड बाहर आ गया और आयशा डर कर बैठ गई और बोली ''रहने दो सर दर्द हो रहा है '' तो मैंने आयशा को पुचकारा और फिर से लिटा दिया और चूत में ''रामेश्वारादि तेल''[रामेश्वारादि तेल को सिर पर लगाने से बहुत अच्छी खुसबू आती है और सर में हलकी से चुनचुनाहट होती है,आयशा की चूत में भी हलके हलके चुनचुनाहट होने लगी थी ] को एक ढक्कन आयशा की चूत में डालकर चूत को चिकनी कर दिया और फिर धीरे धीरे लण्ड को पुश करने लगा लण्ड का सुपाड़ा कब घुस गया आयशा को पता ही नहीं चला तब मैं आयशा के ऊपर झुक गया और आयशा को किस करने लगा , चुचियो को चूसने लगा और लण्ड के हलके हलके झटके मारने लगा और धीरे धीरे करके आधा लण्ड घुसेड़ दिया और लण्ड को आगे पीछे करने लगा और फिर एक हल्का सा झटका मारा और पूरा का पूरा 8 इंच लंबा लण्ड आयशा की चूत की ''कौमार्य झिल्ली '' को फाड़ते हुए अंदर तक घुस गया जैसे ही कौमार्य झिल्ली फटी तो आयशा को दर्द हुआ और उसके आँखों से आँसू निकल पड़े तो मैं आयशा के आशुओ को मेरी जीभ से चाटने लगा तो आयशा भावुक होकर रोने लगी और धीरे से बोली '' इतना प्यार मत करो नहीं तो आपकी ये लैला आपसे बिछड़ जाएगी
'' तब मैंने आयशा को बोला '' मेरी लैला को मेरे से कोई नहीं छीन सकता'' आयशा रोती जाती और मैं आयशा के आशु चाटते जाता उधर लण्ड के झटके लगातार चूत पर पड़ रहे थे आयशा चुदाई के आनंद में खो गई आशु बहना बंद हो गया और आयशा बड़े प्यार से चुदाने लगी आयशा कुछ ही पलो में अपनी आँखों को बंद कर लिया और लम्बी लम्बी साँसे लेने लगी मैं झटके की गति और प्रहार दोनों को बढ़ा दिया आयशा मेरे होठो को किस करती मेरे सिर पर ,पीठ पर हाथ घुमाती मैं लगातार झटके मारने लगा मुस्किल से 5 मिनट की चुदाई में आयशा और मैं एक साथ झर गए आयशा जोर से लिपट गई मैं झरते वक्त पूरी ताकत से लण्ड को आयशा की चूत में घुसा दिया और आयशा के ऊपर लेट गया और किस करता रहा , आयशा की चूत से ढेर सारा वीर्य बहकर बाहर आने लगा तो आयशा बोली ''उठो ना अब '' तो मैं लण्ड को बाहर निकालते हुए उठ गया और देखा की लण्ड में खून लगा है आयशा भी उठी और खून को देखकर घबरा गई और मेरी तरफ देखने लगी तो मैंने आयशा को समझाया की तुमने पहली बार किया है न इस लिए तुम्हारी झिल्ली फट गई है तो आयशा कुछ नहीं बोली और मुझे किस करने लगी और धीरे से कान में बोलती है '' आज आपने जन्नत पहुंचा दिया'' और इतना कह कर लिपट गई मेरे साथ फिर उठी और कपडे पहनने लगी तो मैंने बोला '' मत पहनो '' तो बोली ''हट्ट सर्म लग रही है '' तो मैंने फिर से कहा की ''अब काहे की सरम अब तो सब देख लिया मैंने '' तब भी आयशा नहीं मानी और कपडे पहन लिया तब मैंने भी कपडे पहन लिया कुछ देर में आयशा घर जाने लगी तो मैंने आयशा को बोला ''अभी मत जाओ ना''