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Guest
"अब । साफ़ बोलो I क्या नाम बताया था तुमने ? मोना चौधरी ?"
'हा I " मोना चौधरी ने होशाग की आखो में देखा…"मुझे चियांग से हिदुस्तानी सीक्रेट की फिल्म हासिल करनी है । इस मामले से तुम बखूबी वाकिफ हो होशाग । "
" मैडम मोना । "
" मिस I" मोना चौधरी ने उसे टोका I “
"मिस मोना चौधरी |" होशाग ने कड़वे स्वर में कहा---"तुम्हारे मिस्टर पहाडिया ने चियाग को मजाक समझ रखा हे जो हर बार चियाग से निबटने के लिए हसीन जवान युवती को भेज देता हे । जैसे चियांग उसकी खूबसूरती पर मर मिटेगा और सीक्रेट की फिल्म उसके हवाले कर देगा । पहले रूबी को भेजा और अब तुम्हें I इसमेँ कोई शक नहीं कि तुम्हारी छटाई में पहाडिया ने दिंमाग से काम लिया होगा क्योकि तुम बेपनाह खूबसूरत हो । "
मोना चौधरी हसी I
"मिस मोना चौधरी I" होशाग पहले की तरह एक एक शब्द चबाकर कहने लगा समझदारी इसी में है कि तुन प्लेन पकडो और फौरन हिंदुस्तान चली जाओ I "
" क्यों ?"
" चियाग जैसे इसान से जीतना आसान ही नहीं बल्कि बेहद असभब है I शायद सभव ही नहीं ।"
"फिक्र मत करो I इस मामले में मैं चियाग से बात कर लूगी !"
"मैने बोला तो-कोईं फायदा नहीं I " होशाग ने जैसे निर्णायक अवाज में सिर हिलाया-"वह चियाग है I और वैसे भी हिंदुस्तानी' सीक्रेट का सौदा चीन से पटने जा रहा है । “
मोना चौधरी के होठ' भिच गए I
‘ "अभी पटा तो नहीं ?"
." नहीं I लेकिन ख्याल है कि अगले तीन दिन में सौदा निबट जाएगा ।"
"तीन दिन बहुत होते है I वेसे यह बात तुम्हें कैसे पता चली ?"
होशाग ने मोना चौधरी को घूरा ।
"फालतू के सवाल मत करो । "
मोना चौधरी ने मुस्कराकर कश लिया I
"तुम कहो तो हिंदुस्तान के लिए प्लेन की टिकट मैं बुक करा दू !"
"नहीं I बिना काम पूरा किए मैं बापस नहीं जाऊंगी I "
"यानी कि मरने का पक्का इरादा है है ।" होशाग ने सख्त निगाहों से उसे देखा ।
"ऐसा ही समझ लो । "
"एक ही काम के लिए तुम लोग बार बार आते रहे और ~ असफ़ल होते रहे हो तो कोई बडी बात नहीं कि चियाग की निगाह मुझ पर पड़ जाए I मैँ बेकार का खतरा मोल नहीं लेना चाहता । "
'"क्या मतलब? "
. . . "मैं इस मामले में अब किसी की सहायता नहीं कर सकता ।" होशाग ने मुट्टिया भीचकरकर कहा ।
मोना चौधरी ने शात निगाहों से होशाग को देखा I
" लेकिन मिस्टर पहाडिया तो कह रहे थे कि मेरी हर बात मानोगे I ”
" नही मान रहा तो तुम्हारी भलाई के लिए I मौत से तुम्हें बचाने के लिए । “
"मुझे अपनी नहीं देश की भलाई चाहिए I " मोना चौधरी ने एक एक शब्द चबाकर कहा ।
" कह देने से देश की भलाई नहीं हो जाती I और चियाग से निबटना किसी के बस का नहीं है I "
मोना चौधरी सख्त निगाहों से होशाग को घूरने लगीं I
" तुम हिंदुस्तान चली जाओ I ”
"नहीं I काम पूरा किए विना मैं वापस पलटने वाली नहीं' । " मोना चौधरी के दात भिच गए I
" तुम चियाग को नहीं जानती I वह....... I"
" मै सिर्फ अपने मक्सद को जानती हूं जिसके लिए में यहां आई हूं मिस्टर होशाग I "
होशाग ने कठोर नजरों से मोना चौधरी को देखा I
" तुम मौत के कुए मे छलाग लगाने को कह रहीं हो I "
" मामूली बात है मेरे लिए I जिसे तुम मौत का कुआ कह रहे हो वह मेरे लिए ठडे पानी का समदर है I क्योकिं इस काम के पीछे देश-भक्ति का ज़ज्वा हे । तुम शायद मेरी बात न समझ सको । "
"देश-भक्ति का जज्बा यह नहीं कंहत्ता कि अपनी जान के दुश्मन बन जाओ I बल्कि यह कहता है देश की खातिर काम करो I " होशाग ने एक-एक शब्द पर जोर देकर समझाने वाले भाव से कहा ।
"और अगर काम में जान का खतरा हो तो पलटकर भाग . . लो यही ना ?" मोना चौधरी कडबे स्वर मे बोली I
"तुम पागल तो नहीं हो ?"
मोना चौधरी ने मुस्कराकर सिर हिलाया I
होशाग आहत भाव से मोना चौधरी को देखता रहा I
मोना चौधरी ने सिगरेट का कश लिया I
" क्या देख रहे हो होशाग ?" . . .
"तुम्हें I " होशाग का स्वर गभीर था I "
"मुझे ?” मोना चौधरी मुस्कराई ।
"हा I " होशाग ने गभीरता से सिर हिलाया-"मैँ यह बात कभी भी पसद नहीं करूगा कि तुम जैसी खूबसूरती दुनिया से उठ जाए I चियाग तुम्हारे शरीर को छलनी छलनी कर दे । "
"तो ?"
"तो । " होशाग ने मोना चौधरी की आखो में झाका-"मै किसी भी सिलसिले में तुम्हारी सहायता नहीँ कर सकता I "
"सोच लिया ?" मोना चौधरी गभीर हो गई I
"पक्की तरह सोच लिया I "
मोना चौधरी ने कश लेकर सिगरेट कमरे के खाली कोने मेँ उछाल दी ।
"एक बात का जवाब तो दो होशाग । " मोना चौधरी उठकर टहलने लगी I
होशाग ने प्रश्न भरी निगाहों से मोना चौधरी को देखा ।
" तुम क्या समझते हो-तुम्हारे इनकार कर देने से मै हिदुस्तान चली जाऊगी ?”
"मैं कुछ भी नहीं समझता I तुम जो चाहो सोच सकती हो ।" होशाग ने लापरवाही से कहा I
"मैं जो काम करने आई हूं वह हर हाल मेँ पूरा करके ही जाऊगी I
"तुम...." होशाग ने कड़वे स्वर में कहा…"मरने आई हो और मेरे ख्याल में मरकर ही जाओगी। "
"यह भी मेरे काम का ही हिस्सा है I काम पूरा करो या मरो । " मोना चौधरी ने सिर हिलाकर गभीर स्वर मेँ कहा I
होशाग ने सिगरेट सुलगाई और कुर्सी पर बैठकर सुलझे स्वर में बोला---- "मिस मोना चौधरी । मै जो क्रह रहा हू उस पर जरा गोर
करना I इस काम की खातिर दो एजेट पहले भी मर चुके हैं, इस बात से तुम बखूबी वाकिफ हो I और सब कुछ जानते हुए भी तुम फिर मरने को आ गई' I आठ-दस-बारह हजार की तनख्वाह के पीछे अपनी जान गवाना बेवकूफाना हरकत है। समझदारी से काम लो । इस काम से किनारा कर लो I मैँ मिस्टर पहाडिया क्रो मैसेज भेज देता हू कि चियाग और चीन में सौदा पट गया है I और वह फिल्म चीन के पास पहुच गई है , ऐसा करने से सब कुछ ठीक हो जाएगा I "
मोना चौधरी ठिठकी I
उसने होशाग को देखा ।
"देश से गद्दारी करने का तुम मुझे अच्छा सबक पढ़ा रहे हो I ”
"भूल है तुम्हारी I मै' तुम्हारी जान बचाने की चेष्टा कर रहा हू कि तुम । "
"मेरी जान की फिक्र करना तुम छोड़ दो । " मोना चौधरी का स्वर सख्त हो गया।
. . . होशाग ने होठ भीच लिए …
"मिस्टर पहाडिया से तुम्हें हर महीने मोटी रकम मिलती है होशाग I"
"तो...?'
" और वह रकम तुम्हें सिर्फ इसलिए दी जाती है तुम वक्त आने पर पूरी तरह हमारी मदद करो I"
"मैरी की हुई मदद के कारण ही तुमसे पहले आए दोनों एजेट अपनी जान से हाथ धो बैठे हैं।"
"तुम सिर्फ अपने हिस्से का काम करो I कौन मरता है और कौन. जिदा रहता है इससे तुम्हें कोई मतलब नही होना चाहिए । " मोना चौधरी ने गभीर, किंतु सख्त स्वर में कहा ।
"तुम्हारा मतलब कि तुम लोग आते रहो मरते रहो और मैं पत्थर के वुत्त की तरह सब कुछ देखता रहू I "
"हा I यही मतलब है मेरा । "
होशाग ने कश लेकर नकारात्मक मुद्रा में सिर हिलाया I
'हा I " मोना चौधरी ने होशाग की आखो में देखा…"मुझे चियांग से हिदुस्तानी सीक्रेट की फिल्म हासिल करनी है । इस मामले से तुम बखूबी वाकिफ हो होशाग । "
" मैडम मोना । "
" मिस I" मोना चौधरी ने उसे टोका I “
"मिस मोना चौधरी |" होशाग ने कड़वे स्वर में कहा---"तुम्हारे मिस्टर पहाडिया ने चियाग को मजाक समझ रखा हे जो हर बार चियाग से निबटने के लिए हसीन जवान युवती को भेज देता हे । जैसे चियांग उसकी खूबसूरती पर मर मिटेगा और सीक्रेट की फिल्म उसके हवाले कर देगा । पहले रूबी को भेजा और अब तुम्हें I इसमेँ कोई शक नहीं कि तुम्हारी छटाई में पहाडिया ने दिंमाग से काम लिया होगा क्योकि तुम बेपनाह खूबसूरत हो । "
मोना चौधरी हसी I
"मिस मोना चौधरी I" होशाग पहले की तरह एक एक शब्द चबाकर कहने लगा समझदारी इसी में है कि तुन प्लेन पकडो और फौरन हिंदुस्तान चली जाओ I "
" क्यों ?"
" चियाग जैसे इसान से जीतना आसान ही नहीं बल्कि बेहद असभब है I शायद सभव ही नहीं ।"
"फिक्र मत करो I इस मामले में मैं चियाग से बात कर लूगी !"
"मैने बोला तो-कोईं फायदा नहीं I " होशाग ने जैसे निर्णायक अवाज में सिर हिलाया-"वह चियाग है I और वैसे भी हिंदुस्तानी' सीक्रेट का सौदा चीन से पटने जा रहा है । “
मोना चौधरी के होठ' भिच गए I
‘ "अभी पटा तो नहीं ?"
." नहीं I लेकिन ख्याल है कि अगले तीन दिन में सौदा निबट जाएगा ।"
"तीन दिन बहुत होते है I वेसे यह बात तुम्हें कैसे पता चली ?"
होशाग ने मोना चौधरी को घूरा ।
"फालतू के सवाल मत करो । "
मोना चौधरी ने मुस्कराकर कश लिया I
"तुम कहो तो हिंदुस्तान के लिए प्लेन की टिकट मैं बुक करा दू !"
"नहीं I बिना काम पूरा किए मैं बापस नहीं जाऊंगी I "
"यानी कि मरने का पक्का इरादा है है ।" होशाग ने सख्त निगाहों से उसे देखा ।
"ऐसा ही समझ लो । "
"एक ही काम के लिए तुम लोग बार बार आते रहे और ~ असफ़ल होते रहे हो तो कोई बडी बात नहीं कि चियाग की निगाह मुझ पर पड़ जाए I मैँ बेकार का खतरा मोल नहीं लेना चाहता । "
'"क्या मतलब? "
. . . "मैं इस मामले में अब किसी की सहायता नहीं कर सकता ।" होशाग ने मुट्टिया भीचकरकर कहा ।
मोना चौधरी ने शात निगाहों से होशाग को देखा I
" लेकिन मिस्टर पहाडिया तो कह रहे थे कि मेरी हर बात मानोगे I ”
" नही मान रहा तो तुम्हारी भलाई के लिए I मौत से तुम्हें बचाने के लिए । “
"मुझे अपनी नहीं देश की भलाई चाहिए I " मोना चौधरी ने एक एक शब्द चबाकर कहा ।
" कह देने से देश की भलाई नहीं हो जाती I और चियाग से निबटना किसी के बस का नहीं है I "
मोना चौधरी सख्त निगाहों से होशाग को घूरने लगीं I
" तुम हिंदुस्तान चली जाओ I ”
"नहीं I काम पूरा किए विना मैं वापस पलटने वाली नहीं' । " मोना चौधरी के दात भिच गए I
" तुम चियाग को नहीं जानती I वह....... I"
" मै सिर्फ अपने मक्सद को जानती हूं जिसके लिए में यहां आई हूं मिस्टर होशाग I "
होशाग ने कठोर नजरों से मोना चौधरी को देखा I
" तुम मौत के कुए मे छलाग लगाने को कह रहीं हो I "
" मामूली बात है मेरे लिए I जिसे तुम मौत का कुआ कह रहे हो वह मेरे लिए ठडे पानी का समदर है I क्योकिं इस काम के पीछे देश-भक्ति का ज़ज्वा हे । तुम शायद मेरी बात न समझ सको । "
"देश-भक्ति का जज्बा यह नहीं कंहत्ता कि अपनी जान के दुश्मन बन जाओ I बल्कि यह कहता है देश की खातिर काम करो I " होशाग ने एक-एक शब्द पर जोर देकर समझाने वाले भाव से कहा ।
"और अगर काम में जान का खतरा हो तो पलटकर भाग . . लो यही ना ?" मोना चौधरी कडबे स्वर मे बोली I
"तुम पागल तो नहीं हो ?"
मोना चौधरी ने मुस्कराकर सिर हिलाया I
होशाग आहत भाव से मोना चौधरी को देखता रहा I
मोना चौधरी ने सिगरेट का कश लिया I
" क्या देख रहे हो होशाग ?" . . .
"तुम्हें I " होशाग का स्वर गभीर था I "
"मुझे ?” मोना चौधरी मुस्कराई ।
"हा I " होशाग ने गभीरता से सिर हिलाया-"मैँ यह बात कभी भी पसद नहीं करूगा कि तुम जैसी खूबसूरती दुनिया से उठ जाए I चियाग तुम्हारे शरीर को छलनी छलनी कर दे । "
"तो ?"
"तो । " होशाग ने मोना चौधरी की आखो में झाका-"मै किसी भी सिलसिले में तुम्हारी सहायता नहीँ कर सकता I "
"सोच लिया ?" मोना चौधरी गभीर हो गई I
"पक्की तरह सोच लिया I "
मोना चौधरी ने कश लेकर सिगरेट कमरे के खाली कोने मेँ उछाल दी ।
"एक बात का जवाब तो दो होशाग । " मोना चौधरी उठकर टहलने लगी I
होशाग ने प्रश्न भरी निगाहों से मोना चौधरी को देखा ।
" तुम क्या समझते हो-तुम्हारे इनकार कर देने से मै हिदुस्तान चली जाऊगी ?”
"मैं कुछ भी नहीं समझता I तुम जो चाहो सोच सकती हो ।" होशाग ने लापरवाही से कहा I
"मैं जो काम करने आई हूं वह हर हाल मेँ पूरा करके ही जाऊगी I
"तुम...." होशाग ने कड़वे स्वर में कहा…"मरने आई हो और मेरे ख्याल में मरकर ही जाओगी। "
"यह भी मेरे काम का ही हिस्सा है I काम पूरा करो या मरो । " मोना चौधरी ने सिर हिलाकर गभीर स्वर मेँ कहा I
होशाग ने सिगरेट सुलगाई और कुर्सी पर बैठकर सुलझे स्वर में बोला---- "मिस मोना चौधरी । मै जो क्रह रहा हू उस पर जरा गोर
करना I इस काम की खातिर दो एजेट पहले भी मर चुके हैं, इस बात से तुम बखूबी वाकिफ हो I और सब कुछ जानते हुए भी तुम फिर मरने को आ गई' I आठ-दस-बारह हजार की तनख्वाह के पीछे अपनी जान गवाना बेवकूफाना हरकत है। समझदारी से काम लो । इस काम से किनारा कर लो I मैँ मिस्टर पहाडिया क्रो मैसेज भेज देता हू कि चियाग और चीन में सौदा पट गया है I और वह फिल्म चीन के पास पहुच गई है , ऐसा करने से सब कुछ ठीक हो जाएगा I "
मोना चौधरी ठिठकी I
उसने होशाग को देखा ।
"देश से गद्दारी करने का तुम मुझे अच्छा सबक पढ़ा रहे हो I ”
"भूल है तुम्हारी I मै' तुम्हारी जान बचाने की चेष्टा कर रहा हू कि तुम । "
"मेरी जान की फिक्र करना तुम छोड़ दो । " मोना चौधरी का स्वर सख्त हो गया।
. . . होशाग ने होठ भीच लिए …
"मिस्टर पहाडिया से तुम्हें हर महीने मोटी रकम मिलती है होशाग I"
"तो...?'
" और वह रकम तुम्हें सिर्फ इसलिए दी जाती है तुम वक्त आने पर पूरी तरह हमारी मदद करो I"
"मैरी की हुई मदद के कारण ही तुमसे पहले आए दोनों एजेट अपनी जान से हाथ धो बैठे हैं।"
"तुम सिर्फ अपने हिस्से का काम करो I कौन मरता है और कौन. जिदा रहता है इससे तुम्हें कोई मतलब नही होना चाहिए । " मोना चौधरी ने गभीर, किंतु सख्त स्वर में कहा ।
"तुम्हारा मतलब कि तुम लोग आते रहो मरते रहो और मैं पत्थर के वुत्त की तरह सब कुछ देखता रहू I "
"हा I यही मतलब है मेरा । "
होशाग ने कश लेकर नकारात्मक मुद्रा में सिर हिलाया I