मोना चौघऱी के मस्तिष्क को तीव्र झटका लगा । वह फौरन समझ गई कि उसे घेरा जा रहा हैं-तगड़े वदोबस्त' के साथ घेरा जा रहा है । उसकी आखों में खतरनाक भाव नाच उठे I
सव ठीक चल रहा था ।
किसी प्रकार की दिक्कत और परेशानी नहीं थी ।
कल दोपहर की बात है । जव उसने अपने फ्लैट की खिडकी खोली तो सामने सडक पार फुटपाथ. के करीब हरे रग की कार को खडे देखा, जिसकी ड्राइविंग सीट पर कोई व्यक्ति मौजूद था । मोना चौधरी ने उसके वहां खडे होने को महज . इत्तफाक समझा I खिडकी वद कर ली । दो घटे के बाद उसने
फिर खिडकी खोली तो हरे रग' की कार को उसकी जगह पर मौजूद पाया । ड्राइबिग' सीट पर आदमी भी मोजूद था, परंतु वह नहीं, जो पहले था I अब नया आ गया था I मोना चौधरी को इस बारे में पूरा यकीन था कि जो व्यक्ति पहले कार में बैठा था - उसने सफेद रग की या ऐसे ही किसी लाइट कलर की शर्ट पहन रखी थी जबकि अब जो व्यक्ति बैठा था उसने गाढे रग की कमीज पहन रखी थी । मतलब कि कार बही थी, ड्राइविंग सीट पर मौजूद आदमी बदल गया था ।
मोना चौधरी को सतर्क करने के लिए इतनी बात ही काफी थी I
इस बार उसने खिडकी बद' नहीं की I पर्दा गिरा दिया और पर्दे की झिरी से कार को देखने लगी । कार का इस प्रकार घटों खडे रहना, ड्राइविंग सीट पर बैठे आदमी का बदलते रहना, वह भी उसके फ्लैट ,के ठीक सामने-यह बात खामखाह नहीं हो सकती थी । मोना चौधरी के हिसाब के मुतबिक कोई भी बात बिना वजह नहीं होती I इस बात के पीछे कोई न कोई कारण अवश्य होता है I
आधा घटा' कार पर पर्दे की झिरीं में से निगाह. रखने पर भी मोना चौधरी समझ नहीं पाई' कि हरी कार वाला उसके फ्लेट की निगरानी कर रहा है या किसी दूसरे की क्योंकि उसने हर तरफ देखा था । कार से बाहर आकर टहला भी था परतु मोना चौधरी के फ्लेट की तरफ नहीं देखा था I
सोचो' में डूबी मोना चौधरी खिडकी से हट गई I
वदन पर पडी लबी घुटनों तक आ रही कमीज उतारी तो उसका जानलेवा, हसीन जिस्म चमक उठा ।
आदमकद शीशे के सामने पहुंचकर उसने खुद को निहारा । देखती रही अपने एक एक अग को I मोना चौधरी को ऐसा लगा जैसे बीते हुए दिन की अपेक्षा आज वह ज्यादा जबान हो गई हो I आखों में मदहोशी के भाव नाच उठे I मोना चौधरी ने दातों से होठो को . काटा और पलटकर बाथरुम में प्रवेश कर गई । पद्रह मिनट बाद जव वह बाथरूम से बाहर निकली. तो उसके सगपरमरी' जिस्म पर पानी की बुंदे जैसै मोतियों की तरह चमक रही थी । आखो से मदहोशी के भाव गायब हो चुके थे I ठंडे' पानी ने उसे सामान्य अवस्था में ला दिया था I सुलगती सोचे' ठडी पड गई ।
अपने हगामाखेज जिस्म पर बिना कुछ डाले मोना चौधरी खिडकी पर पहुची' और पर्दे की झिरी से बाहर देखा I वो कार अपनी जगह पर ही खडी थी I मोना चौधरी के होठे सिकुड गए I वह दूसरे कमरे में पहुची ची । बार्डरोब खोलकर कपडे निकाले।
ब्रा पैंटी के बाद जीन की पैंट और टॉप डाला। बालों मे कंघी फेरी ।
उसका चमकता जिस्म इस तारह छिप गया था, जैसे बादलो की ओट में चाँद I मोना चौधरी ने सिगरेट सुलगाकर कश लिया ।
मस्तिष्क में बाहर मौजूद हरे रंग की खडी कार घूम रही थी I आगे बढकर मोना चौधरी ने ड्राज खोलकर. रिवाल्वर निकाला I चैम्बर चैक किया, फिर उसे पैट की जेब में डाल लिया । यूं तो रिवाॅल्बर की कोई जरूरत नहीं थी, परंतु सतर्कता बरतना उसकी जिदगी का अहम हिस्सा था । बाहर खडी कार . उसके लिए भी हो सकती-थी और उसके लिए नहीं भी । कुछ भी हो सकता था I शाम के पश्चात अधेरा' घिर आया था I
. . मोना चौधरी के पास इन दिनों कोई खास काम नहीं था ओर न ही उसे बाहर कहीं जाना था । वह फ्लैट में ही रही । अलबत्ता कार पर उसकी निगाह अवश्य रही I बीच चीच में रह रहकर कार पर निगाह मारती I रात की नीद उसने पूरी ली ।
सुबह उठकर पुन कार पर पर्दे की झिरीं में से निगाह मारी तो कार को वहीँ खडे पाया I ड्राइविंग सीट पर बैठा आदमी बदला पाया । मोना चौधरी की आखें सिकुड गई । जो भी हो, उसे भारी गडबड का अहसास हुआ I अगले ही पल उसने मन ही-मन फैसला लिया I
आखो में सख्ती के भाव नाचे I अब यह जानना जरूरी था कि हरी कार का चक्कर क्या है I
वह इस सिलसिले को ज्यादा देर नहीँ चलने देना चाहती थी । अगर वह हरी कार उसके लिए खडी हे तो । मोना चौधरी नहा धोकर तैयार हुईं I उसने स्कर्ट और जिप वाली छोटी सी शर्ट पहनी I स्कर्ट जरूरत के हिसाब से ही थी I वह मात्र कूल्हों को ही ढाप रही थी I ठीक इसी तरह जिप चाली शर्ट सिर्फ छातियों को ही कठिनता से छिपा पा रही थी I और ऊपर से झाकने पर छातियों का आधे से ज्यादा नजारा हो रहा था । कयामत ढा रही थी मोना चौधरी I छोटो पिस्टल उसने अपने कपडों में इस तरह छिपाई कि देखने वाले को पिस्टल का आभास न हो I . फिर कार की चाबियों को स्कर्ट की पॉकेट में डाला और फ्लैट सै बाहर आकर मेन डोर लाक किया और बाहर की तरफ बढ गई । इस समय सबसे जरूरी यह जानना था कि बाहर खडी हरी कार उसके लिए है या किसी और के लिए ।