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आ बैल मुझे मार- मोना चौधरी सीरीज complete

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आ बैल मुझे मार- मोना चौधरी सीरीज

एक विषकन्या के लिए कुर्बान होने का जज्बा !

विदेशी धरती पर दुश्मनों के बीच अकेली खतरनाक हसीना ।

जब…जब उसे लूटने की कोशिश की गई, उसने लूटने वालों की लाशें बिछा दीं ।

आ बैल मुझे मार

मोना चौधरी का दिल दहला देने वाला डाइनामाइटी हगामा ।

अनिल मोहन
 
मोना चौघऱी के मस्तिष्क को तीव्र झटका लगा । वह फौरन समझ गई कि उसे घेरा जा रहा हैं-तगड़े वदोबस्त' के साथ घेरा जा रहा है । उसकी आखों में खतरनाक भाव नाच उठे I

सव ठीक चल रहा था ।

किसी प्रकार की दिक्कत और परेशानी नहीं थी ।

कल दोपहर की बात है । जव उसने अपने फ्लैट की खिडकी खोली तो सामने सडक पार फुटपाथ. के करीब हरे रग की कार को खडे देखा, जिसकी ड्राइविंग सीट पर कोई व्यक्ति मौजूद था । मोना चौधरी ने उसके वहां खडे होने को महज . इत्तफाक समझा I खिडकी वद कर ली । दो घटे के बाद उसने

फिर खिडकी खोली तो हरे रग' की कार को उसकी जगह पर मौजूद पाया । ड्राइबिग' सीट पर आदमी भी मोजूद था, परंतु वह नहीं, जो पहले था I अब नया आ गया था I मोना चौधरी को इस बारे में पूरा यकीन था कि जो व्यक्ति पहले कार में बैठा था - उसने सफेद रग की या ऐसे ही किसी लाइट कलर की शर्ट पहन रखी थी जबकि अब जो व्यक्ति बैठा था उसने गाढे रग की कमीज पहन रखी थी । मतलब कि कार बही थी, ड्राइविंग सीट पर मौजूद आदमी बदल गया था ।

मोना चौधरी को सतर्क करने के लिए इतनी बात ही काफी थी I

इस बार उसने खिडकी बद' नहीं की I पर्दा गिरा दिया और पर्दे की झिरी से कार को देखने लगी । कार का इस प्रकार घटों खडे रहना, ड्राइविंग सीट पर बैठे आदमी का बदलते रहना, वह भी उसके फ्लैट ,के ठीक सामने-यह बात खामखाह नहीं हो सकती थी । मोना चौधरी के हिसाब के मुतबिक कोई भी बात बिना वजह नहीं होती I इस बात के पीछे कोई न कोई कारण अवश्य होता है I

आधा घटा' कार पर पर्दे की झिरीं में से निगाह. रखने पर भी मोना चौधरी समझ नहीं पाई' कि हरी कार वाला उसके फ्लेट की निगरानी कर रहा है या किसी दूसरे की क्योंकि उसने हर तरफ देखा था । कार से बाहर आकर टहला भी था परतु मोना चौधरी के फ्लेट की तरफ नहीं देखा था I

सोचो' में डूबी मोना चौधरी खिडकी से हट गई I

वदन पर पडी लबी घुटनों तक आ रही कमीज उतारी तो उसका जानलेवा, हसीन जिस्म चमक उठा ।

आदमकद शीशे के सामने पहुंचकर उसने खुद को निहारा । देखती रही अपने एक एक अग को I मोना चौधरी को ऐसा लगा जैसे बीते हुए दिन की अपेक्षा आज वह ज्यादा जबान हो गई हो I आखों में मदहोशी के भाव नाच उठे I मोना चौधरी ने दातों से होठो को . काटा और पलटकर बाथरुम में प्रवेश कर गई । पद्रह मिनट बाद जव वह बाथरूम से बाहर निकली. तो उसके सगपरमरी' जिस्म पर पानी की बुंदे जैसै मोतियों की तरह चमक रही थी । आखो से मदहोशी के भाव गायब हो चुके थे I ठंडे' पानी ने उसे सामान्य अवस्था में ला दिया था I सुलगती सोचे' ठडी पड गई ।

अपने हगामाखेज जिस्म पर बिना कुछ डाले मोना चौधरी खिडकी पर पहुची' और पर्दे की झिरी से बाहर देखा I वो कार अपनी जगह पर ही खडी थी I मोना चौधरी के होठे सिकुड गए I वह दूसरे कमरे में पहुची ची । बार्डरोब खोलकर कपडे निकाले।

ब्रा पैंटी के बाद जीन की पैंट और टॉप डाला। बालों मे कंघी फेरी ।

उसका चमकता जिस्म इस तारह छिप गया था, जैसे बादलो की ओट में चाँद I मोना चौधरी ने सिगरेट सुलगाकर कश लिया ।

मस्तिष्क में बाहर मौजूद हरे रंग की खडी कार घूम रही थी I आगे बढकर मोना चौधरी ने ड्राज खोलकर. रिवाल्वर निकाला I चैम्बर चैक किया, फिर उसे पैट की जेब में डाल लिया । यूं तो रिवाॅल्बर की कोई जरूरत नहीं थी, परंतु सतर्कता बरतना उसकी जिदगी का अहम हिस्सा था । बाहर खडी कार . उसके लिए भी हो सकती-थी और उसके लिए नहीं भी । कुछ भी हो सकता था I शाम के पश्चात अधेरा' घिर आया था I

. . मोना चौधरी के पास इन दिनों कोई खास काम नहीं था ओर न ही उसे बाहर कहीं जाना था । वह फ्लैट में ही रही । अलबत्ता कार पर उसकी निगाह अवश्य रही I बीच चीच में रह रहकर कार पर निगाह मारती I रात की नीद उसने पूरी ली ।

सुबह उठकर पुन कार पर पर्दे की झिरीं में से निगाह मारी तो कार को वहीँ खडे पाया I ड्राइविंग सीट पर बैठा आदमी बदला पाया । मोना चौधरी की आखें सिकुड गई । जो भी हो, उसे भारी गडबड का अहसास हुआ I अगले ही पल उसने मन ही-मन फैसला लिया I

आखो में सख्ती के भाव नाचे I अब यह जानना जरूरी था कि हरी कार का चक्कर क्या है I

वह इस सिलसिले को ज्यादा देर नहीँ चलने देना चाहती थी । अगर वह हरी कार उसके लिए खडी हे तो । मोना चौधरी नहा धोकर तैयार हुईं I उसने स्कर्ट और जिप वाली छोटी सी शर्ट पहनी I स्कर्ट जरूरत के हिसाब से ही थी I वह मात्र कूल्हों को ही ढाप रही थी I ठीक इसी तरह जिप चाली शर्ट सिर्फ छातियों को ही कठिनता से छिपा पा रही थी I और ऊपर से झाकने पर छातियों का आधे से ज्यादा नजारा हो रहा था । कयामत ढा रही थी मोना चौधरी I छोटो पिस्टल उसने अपने कपडों में इस तरह छिपाई कि देखने वाले को पिस्टल का आभास न हो I . फिर कार की चाबियों को स्कर्ट की पॉकेट में डाला और फ्लैट सै बाहर आकर मेन डोर लाक किया और बाहर की तरफ बढ गई । इस समय सबसे जरूरी यह जानना था कि बाहर खडी हरी कार उसके लिए है या किसी और के लिए ।
 
अपार्टमेंट के पोर्च में खडी अपनी काऱ पर मोना चौधरी ने निगाह मारी और पैदल ही चलती हुई बाहर आ गई I उसका रुख सढ़क पार फुटपाथ के किनारे पर खडी हरी कार की तरफ़ था ।

मोना चौधरी कार के पास पहुची ठिठकी I

कार की ड्राइविग सीट पर बेठे व्यक्ति ने गर्दन घुमाकर, होठ सिक्रोड़कर मोना चौधरी को देखा I वह तैतीस बरस या अड़तीस बरस का होगा I छ: फीट कद I भरा चुस्त बदन I

बदन पर बढिया कीमती कपडे I वह किसी अच्छे खाते पीते खानदान से वास्ता रखने वाले इसानों में से था ।

"हाय I" मोना चौधरी ने दरवाजे पर हाथ रखकर शोख स्वर में कहा । . .

कार मे बैठे व्यक्ति के चेहरे पर छाई बोरियत में कोई कमी नहीं हुई I वह उसी प्रकार बैठा नाखुश निगाहों से मोना चौधरी को देखता रहा और जबरदस्ती वाले अदाज में उसके होठ हिले I

" है....लो !"

"क्या हो रहा हे ?" मोना चौधरी होले से हसी ।

"कुछ नहीं I " उसने मक्खी उडाने वाले अदाज में कहा I

" लगता है जिसका इतजार कर रहे हो वह आईं नहीं । जनाब का मूड उखडा हुआ है I "

जवाब में वह कघे उचकाकर रह गया I फिर उसने सिगरेट सुलगाई तो मोना चौधरी ने हाथ बढाकर उसके पैकेट में से एक सिगरेट निकालकर सुलगाने के पश्चात कश लिया I

वह बेपरवाह ही रहा मोना चौधरी की तरफ से ।

"चलें l" मोना चौधरी ने होठो को खास अदाज में गोल किया ।

"कहां ?" वह जैसे अभी भी बोरियत के ढेर पर बैठा था I

मोना चौधरी का कातिल जिस्म और खूबसूरती उसकी खोपडी खराब न कर सकी… थी I और यही बात मोना चौधरी को इस बात का एहसास दिला रही थी कि कहीँ न कही गढ़बड़ है । क्योकि उसके जवान, हसीन चेहरे और कहर बरपा देने वाले जिस्म को देखकर तो मरता आदमी भी एक बारगी खडा हो जाऐ ।

"कहीं भी I तुम्हारे पास जगह हो तो ठीक नहीं तो किसी होटल में चलते हैं !! "

उस व्यक्ति ने मुह बनाकर पहली बार खास निगाह मोना चौधरी के चेहरे पर मारी !! . . . मोना चौधरी ने आख दबा दी ।

"कितना ले लेती हो ?"

"सामने वाला जित्तना भी दे दे । कम हो ज्यादा हो मुझे कोई दिक्कत नही I "

"फिर भी कुछ मालूम तो हो कि... I”

"तुमने जितना देना हो दे देना ! मेरी तरफ़ से पूरी छूट !"

उसने कश लिया !! दो पल सोचा I "

"जाओ तुम ।"

"क्या ? " मोना चौधरी अचकचाई ।

"हा ।“ उसने सिर हिलाया-"तुम्हें कहा से दूगा I आज मैं साथ नंहीँ लाया।"

"साथ नहीं लाए I" मोना चौधरी ने आखे फार्डी-"घऱ छोड़कर आए हो क्या?"

"हा बीबी ने निकाल लिया था पर्स I उसे कितनी बार कहा हे पर्स में से जो लेना हो ले लो लेकिन वापस जेब में डाल दिया करो I लेकिन वह डालना भूल गई और मैं पैट डालकर वेसे ही घर से चलता बना I फिर कभी मिलना आज बात नहीं बनने वाली I " उसने लापरवाही से कहा और दूसरी तरफ मुह घुमाकर कश लेने लगा I
 
मोना चौधरी समझ गई कि वह सफेद झूठ बोल रहा है टरका रहा है और इस टरकाने का वह कारण भी नहीं समझ पाई ।

अब उसे स्पष्ट तौर पर गडबढ़ महसूस होने लगी ।

"चिता क्यों करते हो I पर्स घर रह गया तो कोई बात नहीं । मोना चौधरी हंसी-"आज ऐसे ही सही I अगली बार जब मिलोगे तब पेमेट कर देना । कम ओंन कहा चलना हैं ? बोलो डियर I"

उसने पुन निगाहे उठाकर मोना चौधरी को देखा ।

~ "अगली बार के लिए मैं खिसक गया, नजर ही न आया तो ?"

” चिंता मत करो I यह मेरी जिम्मेदारी रही I " मोना चौधरी हसी ।

"बात दरअसल यह है कि आज कुछ नहीं हो सकता । "

"घर तो पर्स रह गया हे और पर्स....?“

"तुम नहीं समझोगी I बस इतना समझ लो कि आज कुछ नहीं हो सकता I "

"पक्का ?“

" पक्के से भी पक्का I"

"मुझे तो लगता है कल भी कुछ नहीं हो सकेगा। " मोना चौधरी ने गहरी सांस ली ।

"क्यों कल क्यों नहीँ ?"

" तुम्हारे पास वह है ही नहीँ जिससे सब कुछ होता हैं । अगर वह होता तो मुझे फ्री की हासिल होते देखकर पागल हो उठते I " मोना चौधरी ने व्यग्य से कहा और बाह भीतर करके उसका गाल थपथपाया--"तुम झूठ बोल रहे हो कि तुम्हारी बीबी है । तुम जैसों की बीबिया नहीं होतीं I बाय बाय बीच के l ” कहने के साथ ही मोना चौधरी वापस पलटी और अपार्टमेंट के गेट के भीतर प्रवेश करके पार्किग में खडी अपनी कार मे बैठी…उसे स्टार्ट किया और गेट से बाहर सडक पर आ गई ।

और जब हरी कार के समीप पहुची तो फौरन ब्रेक लगाई I कार मे बेठे उसी व्यक्ति ने नीरस निगाहों से गर्दन घुमाकर उसे देखा I

"चलना है ? " मोना चौधरी ने ऊचे स्वर में कहा…"सारा खर्चा मेरा । "

उसने शात भाव में सिर हिला दिया । जवाब मे मोना चौधरी हँसी और कार आगे बढा दी।

गडबड़ ! यह शब्द बार वार उसके मस्तिष्क में कौघ रहा था । वह आदमी कार में किसी काम के लिए बैठा था । और किसी भी हाल में यहां से हिलना नहीं चाहता था I कल से कार खडी थी I ज़रा भी नहीं हिली थी, परंतु निगरानी करने वाले चेहरे बदल रहे थे I अगर यह निगरानी उसकी नहीं हो रही थी तो मोना चौधरी को उनकी हरकतों की ,जरा भी परवाह नहीं थी ।

और अगर उसकी हो रही थी...? यह बात अभी मालूम हो जानी थी I

कार आगे ले जाने के पश्चात मोना चौधरी बैक मिरर में पीछे का नजारा देखती रही I हरी कार अपनी जगह खडी रही l एक इच भी नहीं' हिली थी I देखते ही देखते उसकी कार काफी आगे आ गई थी I हरी कार का नज़र आना भी बद' हो गया था । मोना चौधरी ने गहरी सास ली I उसे लगा कि हरी कार उसके लिए नहीं है I उसकी टोह में नहीं है I उसकी निगरानी पर नहीं है I उसे किसी और से ही मतलब है I कुछ देर बाद मोना चौधरी हरी कार की तरफ से निश्चिंत हो गई थी । यहा तक कि वह कार और कार वाला भी उसकी सोचो से हट गया था । मोना चौधरी निंश्चित होकर ड्राइव करती रही I यह स्थिति मात्र तीन चार मिनट रहीँ I ज्यों ही उसने एक क्रासिंग को पार किया एकाएक दो कारे उसके अगल-बगल चलने लगीं I मोना चौधरी की आखें सिकुडी I

उसने कार को तेजी से आगे. बढा ले जाना चाहा, परंतु आगे जा रही कार ने न तो उसे रास्ता दिया और न ही आगे बढने दिया I

मोना चौधरी के दात भिंच गए I

मोना चौधरी ने कार की गति धीमी करके पीछे से निकल जाने की सोची I बैक मिरर में निगाह मारी तो दात और भी सख्ती के साथ भिच गए I ठीक पीछे भी कार थी, यह सब देखकर उसे फोरन इस बात का एहसास हो गया था कि उसे धेरा जा रहा हे-और तगडे हिसाब से घेरा जा रहा है ।

मोना चौधरी ने एक बार फिर स्थिति का जायजा लिया । परतु कोई फायदा नजर नहीं आया ।

बच निकलने का कोई रास्ता नहीं था । उसने घेरने वाली कारों पर निगाह मारी ।हर कार में मात्र एक ड्राइवर था I यानी कि चार कारें , चार आदमी I उनमें से कोई' भी पुलिस वाला नहीँ लग रहा था और

न ही कोई बदमाश या गैगस्टर I

"फिर ये लोग कौन है' ?"

एकाएक उसे हरी कार का ध्यान आया । परंतु इन चारों में कोई भी हरी कार नही थी और न ही इन कारों में वह हरी कार वाला था, जिससे उसकी बात हुई थी I परतु अब मोना चोघरी इस बात को दावे के साथी कह सकती थी कि उसे धेरने वाले उस हरी कार वाले के ही साथी-हैं l जोकि इनमें नहीं था I
 
बहरहाल मोना चौधरी ने मन ही मन फैसला किया कि जो लोग भी हैँ किसी भी सूरत में उसे इन लोगों के हाथ नहीं पड़ना है ।

परतु अगले ही पल मोना चौधरी को इस बात का एहसास हुआ कि उसे घेरने वाली चारों कारें उसे आगें आने वाले मोढ़ की तरफ ले जाना चाहती हैँ और इसी कोशिश में उन सब. .कारों की स्पीड धीमी होकर वे कारें उसकी कार के वेहद करीब आ पहुची हैँ और एक तरह से उसे अपनी मनचाही दिशा की तरफ मुड़ने को कह रही हैँ ।

मोना चौधरी महसूस कर रही थी कि इस वक्त मनमानी नहीं चलेगी । और उसने नानुकर करने की चेष्टा की तो वे चारों खुलकर भी सामने आ सकते थे I जो कि किसी के भी हक में ठीक न होता I

सख्ती से होठ भीचे मोना चौधरी ने उन्ही के इशारे के मुताबिक कार को मोड लिया! यह सुनसान, सड़क थी I इस सडक पर ट्रैफिक न के बराबर था । मोना चौधरी को इस बात का पूर पूरा एहसास था कि यह सिलसिला ज्यादा देर नहीं चलने वाला, अब किसी भी मुनासिब जगह पर उसकी कार रोककर उस पर अपना कब्जा करेगे I इसलिए फौरन इनके घेरे से निकलना ज़रूरी था I

मोना चौधरी ने होंठो को सख्ती से भीचा और एक्सीलेटर पर पाव दबा दिया I

कार ने एकाएक स्पीड पकडी और तेजी से आगे जा रही कार से जा टकराई I

आगे वाली कार का वैलेस बिगडा I कार सडक के किनारे पर उतरती चली गई I मोना चौधरी ने खास अदाज' में स्टेयरिंग घुमाया तो बाईं तरफ चल रही कार को साइड लगीं और उसका भी वैलेस बिगड गया I अगले ही पल मोना चौधरी तेजी से कार को दोडाती चली गई ।

पीछे रह गई दोनों कारें तेजी से उसके पीछे दोर्डी I~

फायरिंग भी हुई और तुरत ही मोना चौधरी को इस बात का एहसास हो गया कि फायरिंग का निशाना वह नहीं उसकी कार है I यानी कि कार के पहिए I मोना चौधरी की तेजी से दौडती कार पीछे आ रही दोनों कारों से हर पल दूर होती जा रही थी I

मोना चौधरी जानती थी कि चद ही पलों में वह पीछे आने वाली कारो की पहुंच से दूर हो चुकी होगी!

परंतु कुछ आगे जाते ही उसकी आखें सिकुड गई । कार की स्पीड कम होती चली गई I होठो के बीच कठोरता से भरी मुस्कान रेग गई I

सडक के बीचो बीच आड्री तिरछी वही हरे रग की कार इस तरह खडी थी कि उसके दाए-बाए से कोई भी न गुजर सके… .

और कार की वाडी से लापरवाही से टेक लगाए वहीँ खडा था जिससे कुछ देर पहले उसने बात की थी I दातों में माचिस की तीली दबाए उसे दाए वाए घुमा रहा था I मोना चौधरी ने उसके करीब पहुचकर कार रोक दी I निगाहें हर पल उस पर ही टिकी रही' I इस दौरान उसने सिगरेट सुलगाई और स्कर्ट में छिपा रखी पिस्टल टटोली I फिर निगाहें . उस व्यक्ति पर टिका दीं I उसने ब्राउन क्लर की पैट , लेदर के जूते और चैक शर्ट पहन रखी थी. I चेहरे पर दो दिन की शेव बढी हुई थी I बालों में उगलिया फेर फेरकर वह उन्हे' पीछे की तरफ का रहा था I

कार में बैठी मोना चौधरी को देखते हुए उसने सिगरेट सुलगाई ।

पीछे वाली दोनों कारें भी पीछे आ रही थी परतु किसी ने भी उसकी कार तक आने की चेष्टा' नहीँ की थी. I

लेकिन मोना चौधरी' जानती थी कि पीछे वाले हथियारों के साथ तैयार होगे' ।

वब आगे नहीं आया । वहीँ खडा मोना चौधरी को देखता रहा, कश लेता रहा ।

मोना चौधरी समद गई कि उसे ही कार से बाहर निकलना पड़ेगा I वह निकली-बेहद सतर्क और दिलोदिमाग ने' खतरनाक इरादे लिए I इस दृढता के साथ कि यह जो लोग भी हैं, इनके जो इरादे भी हैँ, वह उन्हे' किसी भी हाल में कामयाब नहीं होने देगी I होठों में फसी सिगरेट का कश लेकर. उसे उगतियो में फसाया और होठो पर दिलकश मुस्कान त्तिए अदा भरी चाल से चलकर व उसके पास पहुची' ।

"हेलो !" मोना चौधरी खित्तखिलाई ।

वह उसी बोरियत-भरे अदाज में खडा रहा ।

"मेरे पीछे कारों मेँ आने वाले आदमी तुम्हारे ही हैं ना ?" मोना चौधरी पुन: बोली ।

जबाव में उसने होले से गरदन हिला दी ।

" 'तुम्हारे आदमियों का निशाना बहुत घटिया है I इतने फायर किए, एक भी निशाने पर नहीं लगा ।

" मैं समझा दूगा, अगली बार निशाना नहीं चूकेगा । "

"इसी बार ही समझाकर लाते I " मोना चौधरी ने . खिलखिलाकर कहा और कश लेकर सिगरेट एक तरफ उछाल दी ।

"चल । " वह उसे घूरकर बोला-"कार ने बैठ I"

"मैं इतनी पसद आ गई हूं तुझे ! " मोना चौधरी हसी I

" हां !"

"तो उसी समय चल पडते, जब मैने तुम्हे चलने को कहा था ।"

"जरूर चलता I लेकिन मुझे माल की कीमत देने की आदत नहीं है I " वह कड़वे स्वर मे बोला I

"मैँ तो फ्री मे तैयार थी।"

"फ्री की चीज को तो मै देखता भी नहीं I " उसने तीखे स्वर में कहा I

"अब क्या तीर मार रहे हो ?"

"अब तो छीनकर ले रहा हू। '"

मोना चौधरी हसी I जबकि वह अच्छी तरह समझ रही थी कि बात वह नहीं है जो हो रही है I असल मामला असली मुद्दा कुछ और ही है I उसे ले जाने का इनका दूसरा ही मकसद है ।

" पता बता दो कहा पहुचना है I दो घटे तक आ जाऊगी' I "

"अब और इंतजार का बक्त नहीं है I कार मेँ बैठो । " उसने सख्त स्वर में कहा I

मोना चौधरी ने उसे घूरा I

"कल से तुम लोग मेरे फ्लैट की निगरानी कर रहे हो I तब अदर ही क्यों न आ गए ?”

"ओह I तो तुम्हें मालूम था ?”

"क्या चाहते हो ?" मोना चौधरी अब शात थी I

"मालूम. हो जाएगा । कार में बैठो-फौरन I "

मोना चौधरी ने दृढ़ता भरे अदाज में नकारात्मक मुद्रा मैं सिर हिलाया । …
 
"जब तक मुझें बात नहीं मालूम होगी तब तक सिर्फ मेरी ही चलेगी I "

" पीछे दो आदमी खडे हैं I उनके पास रिवाॅल्बर हैँ I इधऱ मैँ खड़ा हू । तुम हमारी बात मानने पर मजबूर हो । "

"गलतफहमी मेँ हो तुम I " मोना चौधरी ने उसकी आखों में झाका I

कई पल दोनों एक दूसरे की आखों में देखते रहे ।

"तुम्हारा यह इनकार तुम्हारी मौत का कारण बन सकता है । "

मोना चौधरी हसी I होंठों से सर्द हसी निकली ।

~ "मुझे जानते हो?"

"हा I सुना है तुम्हारा नाम मोना चौधरी है । "

"इसके आगे ??"

" आगे भी कुछ कुछ जानता हूं । "

"फिर भी मेरे सामने धमकी भरे शब्दों का इस्तेमाल कर रहे हो ?"

"सरकार ने लिखित तोर पर तो मुझे ऐसा कोई आर्डर नहीं दिया कि तुम्हें धमकी न दू I " उसका स्वर कडवा था I

मोना चौधरी दात भीचे उसे देखने लगी I

अगले ही पल उसने रिवाल्वर निकाली और रुख़ मोना चौधरी क्री तरफ़ कर दिया I

मोना चौधरी की आखों में कठोरता नाच उठी ।

उसने रिवाॅल्बर वाले हाथ से इशारा करके मीना चौधरी को कार में बैठने को कहा ।

मोना चौधरी ने मजबूरी दर्शाई और बिना कहे आगे बढ कर कार का दरबाजा खोला और भीतर प्रबेश कर गई l

कार के पास खडे व्यक्ति. ने दूर खडे दोनों व्यक्तियों को .पास आने का इशारा किया I ठीक उसी पल मोना चौधरी ने कार के दूसरी तरफ का दरवाजा खोला और बाहर निकलकर कार की ओट में हो गई I यानी कि कारं के एक तरफ वह और दूसरी तरफ रिवाॅल्बर लिए वह आदमी I

इसके साथ ही हाथ में छोटी सी पिस्टल दबी नजर आने लगी थी I I

"कार मे वापस आ जाओ I ” उसने सख्त स्वर में कहा I

वह व्यक्ति चौका' I

"तुम्हारी रिबाल्बर ने मुझे कार में प्रवेश करने को मजबुर किया था, परंतु यह नहीं कहा था कि दूसरी तरफ से बाहर निकलना मना है I " मोना चौधरी ने जहरीले स्वर में हंसकर कहा ।

"मैँ तुम्हें शूट नहीं करना चाहता परंतु अगर तुम ऐसी ही हरकत्ते करती रही.....!"

"मेरे हाथ में पिस्टल है । " अगले ही पल मोना चौधरी का स्वर उसके कानों में पडा I .चद्र पलों के लिए बहा सन्नाटा छा गया I

. "हिलना मत्त I " मोना चौधरी का सख्त स्वर उसके कानों मे पड़ा--"मैं चाहू' तो तुम्हें अभी इसी वक्त शूट कर सकती हूं I "

" कार की खिडकियों में से तुम मेरे निशाने पर हो । "

"तुम्हारा रिवात्वा पिस्टल वगैरह खाली तो नहीं है ? "

"गोली चलाकर दिखाऊ ?”

"जरूस्त नहीँ । मैने' यू ही तुमसे पूछा था I"

"कौन हो तुम ?"

"मुझे कालिया कहते हैं !"

"मुझसे क्या चाहते ही ?”

… "तुम्हें इस प्रश्न का जवाब नहीं मिल सकता !"

"क्यो ?" कालिया ने कोई जबाब नहीं दिया I

"जो मैने. पूछा है मुझे उसका उत्तर चाहिए I "

कलिया ने अपने होठ' बद रखे I

"चलाऊ गोली ?”

"अभी नहीं I कुछ देर रूक जाओ I "

मोना चौधरी एकाएक सीधी खडी हो गई I

~ "हिलना मत । ऐसे ही रहना I " मोना चौधरी के होठो से गुर्राहट गुर्राहट निकली I

कालिया ने हिलने. की जरा भी चेष्टा नहीं की I क्योकि वह जानता था कि हिलने या हरकत करने की स्थिति में वह उसे आसानी से शूट कर सकती हे I

मोना चौधरी कार के साथ साथ सावधानी से घूमती हुई उससे दो' कदम की दूरी पर आ खडी हुई I

कालिया ने सख्त निगाहों से उसे देखा I उसका रिबाल्बर बाला हाथ नीचे को झुका हुआ था । उगल ट्रेगर पर कसी थी I

"मिस्टर कालिया I तुम्हारी जरा सी हरकत तुम्हारी. जिदगी ले सकती है I " मोना चौधरी ने मौत से भरे स्वर में कहा ।

हाथ में थमी पिस्टल का रुख कालिया की तरफ था I वह थोड़ा-सा और आगे बढी I
 
"मैँ जानता हूं । " कालिया ने स्थिर लहजे में कहा ।

"मैं तुम्हारे हाथ से रिवाॅल्बर लेने जा रही हूं बेहरकत ही रहना ।

कालिया खामोश रहा ।

मोना चौधरी सावधानी से थोडा झुकी और हाथ आगे बढाकर कालिया के हाथों में थमा रिवाॅल्बर ले लिया…"अपने आदमियों से कह दो मुझे शूट करने की चेष्टा न करें ।"

कालिया ने कुछ दूर रिवाॅल्बरे थामे अपने दोनों आदमियों को देखा I

' "वह फायर नहीं करेगे क्योकि उन्हे' मालूम है कि मैँ खतरे में हूं । " कालिया बोला ।

"अब बोलो I " मोना चौधरी के हाथों में थमे दोनों रिवाॅल्बरों का रुख कालिया की तरफ था…"'क्या चक्कर है ।"

-कालिया ने पहले रिवाल्बरों को फिर मोना को देखा।

" सिगरेट सुलगा लू ?”

मोना चौधरी के सहमति से सिर हिलाने पर कालिया ने सिगरेट सुल्गाई ।

"बात दरअसल यह है कि तुम खूबसूरत बहुत हो । "

मोना चौधरी के होंठों से खतरनाक हसी निकली I

"मेरे बाॅस को ऐसी लड़किया' बहुत पसद हैं जो खूवसुरत होने के साथ साथ खतरनाक भी ही' I "

"अच्छा I ऐसी लडकियों का तुम्हारा वास क्या करता हैं ?”

"यह तो पता नहीं लेकिन उन्हे लेकर वह कमरे मेँ बद हो जाता है I ’

"गुड l और कमरे में क्या होता है ?"

"यह नहीं मालूम ?"

. . कालिया ने इनकार में सिर हिलाया । I

"नहीं मालूम तो मैं बता देती हू। वह I "

तभी जाने क्या हुआ-कमाल तो कालिया का ही था? कालिया का शरीर जाने कब सडक से थोडा सा उछला और उसके दोनों जूतों की नोके मोना चौधरी की ठीक हथेलियों पर पडी । "

यह बेहद खतरनाक और तीव्रता से किया गया वार था I मोना चौधरी के हाथो' से दोनो' रिवाल्वर निकले और ऊपर हबा मे उछलते गए ।

कालिया द्धारा किए गए इस वार का मतलब था फि वह कूल्हो' के बल नीचे गिरता, फिर खडा होता I परतु कालिया इस कदर एक्सपर्ट था कि नीचे गिरने की अपेक्षा वह पैरों पर खडा हो गया था I बस खडा ही हुआ था I सभल न सका था ।

स्पष्ट था कि उसके द्वारा किए गए वार पर मोना चौधरी पल भरके लिए संकपकाती l हडबड़ाती । देखती कि क्या हुआ है I ऐसा कालिया का विचार था, परंतु' वह मोना चौधरी थी l

जो कुछ होने से पहले ही समझ जाती थीं कि क्या होने जा रहा हे I यह-जुदा बाते होती कि सभलने का वक्त नहीं होता ।। कालिया के पाव अभी सडक' पर टिके ही थे कि... ।

किसी भैसे की तरह मोना चौधरी आगे आई, उसका सिर कालिया के पेट में घूसता चला गया I कालिया के होठो' से ~ पीड़ा-भरी हल्की सी कराह निकली I वह थोड़ा-सा नीचे 'झुका' दोनों हाथों से पेट को थामे ।

मोना चौधरी मन…ही-मन हैरान हुईं कि उसके इस बार पर सामने चाला नीचे गिरता और पेट थामे चीखता हुआ नीचे पडा रहता I परंतु कालिया को कोई खास असर नहीं हुआ था I

नीचे झुका कालिया इससें पहले सीधा होता मोना चौधरी ने दात किटकिटाकर उसे कमर से पकडा और पूरी शक्ति से हबा में उछाल दिया I पाच फीट ऊपर उछलता हुआ कालिया जब सडक की तरफ . आया तो एकाएक उसके जिस्म ने कलाबाजी खाई और अगले ही पल वह टार्गो के दम पर सडक पर खडा था I 'मोना चौधरी की आखो' में सख्त भाव नाच रहे थे I

मोना चौधरी को घूरते हुए कालिया ने जेब से माचिस की तीली निकाली… और उसे दातों में फ़साकर दबाते हुए, चबाते ~ हुए दाए बाए घुमाने लगा I उसकी आखों में तीखे भाव थे I

तभी मोना चौधरी के होठो से गुर्राहट निकली I उसका शरीर हवा में उछला और किसी तीर की भाति उसका शरीर कालिया की तरफ बढा ।

कालिया की आखें सिकुड चुकी थीं I होठ' भिच' चुके थै ।
 
ज्यों ही मोना चौधरी की टागे कालिया के पास पहुची, . उसकी छोटी सी स्कर्ट हवा के वेग से कूल्हो' की तरफ पलटी I उसकी गुलाबी रंग की पैटी चमक उठी I फिगर का जो नजारा कालिया ने देखा उससे वह स्तब्ध रह गया । ऐसे कस-बल तो उसने अपनी जिदगी' में पहले कभी नहीं देखे थे I और इसी बात के कारण कालिया जेसे सतर्क सावधान व्यक्ति से चूक हो गई I मोना चौधरी की दोनों टागे कालिया के चेहरे पर जा टकराईं I

कालिया की आखों के सामने से जानलेवा दृश्य गायब हो गया ।

उसके गले से छोटी सी तीव्र चीख निकली और लुढ़कता नीचे जा गिरा I मोना चौधरी नीचे गिरी और उसी फ्त उछलकर खडी हो गई I जबकि कालिया उसके बाद ही खडा हो गया I गाल भीतर से फट जाने से खून होठो के रास्ते बाहर जाने लगा था I कालिया ने खून का गट्ठर बाहर थूका और खा जाने चाली . निगाहों से मोना चौधरी को देखा I उसकी आखों में सोच के गहरे भाव नाच रहे थे I कालिया के दोनों साथी अब पहले से करीब आ गए थे I

लेकिन अभी भी बीस कदम की दूरी पर दोनो' के हाथों में रिवाॅल्बरें दबी थीं l

कालिया ने अपने दोनों आदमियो को देखा ।

उन दोनो ने जैसे कालिया से इजाजत चाही । परतु कालिया की निगाह पुन: मोना चौधरी पर जा टिकी ।

मोना चौधरी के चेहरे पर खतरनाक भाव फैले थे ।

"इस वक्त तुम खुले में हो I " कालिया शब्दों को चबाकर होठो से बहते खून को हथेली से पोछता हुआ, दात पीसकर कह उठा-- "मेरा एक इशारा तुम्हारे शरीर में कई छेद पैदा कर सकता है I बेहतर होगा कि मेरा मुकाबला करना छोडकर खुद को ढील दै दो । "

"साले I कुत्ते !" मोना चौधरी ने पुन खतरनाक छलांग कालिया पर लगाई I इस बार न तो स्कर्ट हबा से पलटकर कूल्हो' की तरफ उठी और न ही उसकी गुलार्बी रंग की पैटी के उसे दर्शन हुए I वेसे भी कालिया को अब दूसरी चोट खाना पसद नहीं था I

कालिया फौरन एक तरफ हटा । I

मोना चौधरी का हबा में गुजरता शरीर उसके पास से निकला तो मोना चौधरी ने अपनी दाई' बाह कालिया के गले में डाल दी और कालिया को लेती हुई सडक की ढलान पर नीचे गिरती चली गई I दोनों छ फीट तक मिट्टी झाडियों और पत्थरों पर रगड खाते चले गए ।

वे रुके l

मोना चौधरी ने उसके गले से बाह निकाल ली और दाए, हाथ की मुटठी बनाका पूरी शक्ति के साथ उसके सिर पर वार किया ।

फिरं पास पडा पत्यर उठाकर उसके चेहरे पर मारा I कालिया इस वार को तुरत बचा गया । क्रोध में मोना चौधरी ने .हाथ मेँ थमे पत्थर को उस पर दे मारा जो कि कालिया के कधे पर लगा I

कालिया की आखें सुर्ख हो गई ।

चेहरे पर खतरनाक भाव लिए वह उठने को हुआ कि करीब पडी मोना चौधरी उछलकर कालिया के ऊपर जा पडी I मोना चौधरी की सख्त शरीर में प्रवेश कर जाने वाली आकर्षक जानलेवा छातिया कालिया को चुभने लगीं I लेकिन कालिया के पास अब इतना वक्त नहीं था कि वह मोना चौधरी के हुस्न पर ध्यान दे पाता I

और मोना चौधरी तो वैसे भी अपने खूनी अदाज में आ चुकी थी I वह अपने आसपास मडरा रहे खतरे को स्पष्ट देख रही थी I इस बात से वाकिफ थी कि कालिया ने अगर अपने आदमियों को उसे शूट करने का इशारा दे दिया तो फिर मामला जाने किस करबट बैठे ।।

वह किस्सा ही निबटा देना चाहती थी I

यानी कि कालिया जो भी था वह उसे खत्म कर देना चाहती थी ।

बिना कमांडर के फौज टिकती' ही कहा' है I कालिया के मरते ही वे दोनो' भागने का रास्ता टूढने लगेगे'। कालिया के ऊपर पहुचकऱ मोना चौधरी कुछ करती उससे पहले ही कालिया हरकत में आ गया । उसने अपने शरीर को खास अदाज में झटका दिया I

मोना चौधरी उसके ऊपर से नीचे जा गिरी । कालिया फौरन खडा हुआ I मोनां चौधरी उठ कर खडी हो रही थी कि कालिया ने अपना जूता उसके' कूल्हो पर मारा मोना चौधरी पुन कूल्हो के बल नीचे गिरी!

कालिया झुका I उसने मोना चौधरी की टागें पकर्डी और ~ अगले ही पल तेजी से उसे फिरकनी की,भाति घुमाने लगा I

मोना चौधरी की छोटी सी स्कर्ट पुन ऊपर उठ गई । पर उसने उसकी गुलाबी पैटी पर निगाह न मारी ।

और फिर एकाएक कालिया ने मोना चौधरी की टागें छोड दी । हवा में लहराता मोना चौधरी का शरीर करीब बीस फीट दूर जा गिरा I
 
पत्थरों की तीव्र रगड़ उसके जिस्म के कई हिस्सों को लगी I बड़े-से पत्थर से टकराकर उसका शरीर रूका । पीडा की तीव्र लहर उसके बदन में उठी जिसकी परवाह किए बिना वह तुरत उठ खडी हुई I आखों में खूनी भाव लिए लिए उसने कालिया क्रो देखा I जो अपनी जगह पर खडा खूनी निगाहों से उसे देख रहा था I अब मामला बढ़ गया था I कालिया के दोनों रिवाल्वरधारी भी आगे बढकर सडक के किनारे ढलान के करीव आ खडे हुए थै I रिवाॅल्बर का रुख मोना चौधरी की तरफ था जो उनसे तीस फीट दूर थी I बीच , मे' कालिया मौजूद था । वे दोनों शायद कालिया के हुक्म के इंतजार में थे । परतु कालिया ने तो जैसे सोच लिया था कि मोना चौधरी से वह खुद निबटेगा । मोना चौधरी का मस्तिष्क तेजी से दौड रहा था I अपने आसपास मडराते खतरे को उसने भाप लिया था I वह बेहथियार थी, जबकि उसके सामने दो रिबॉंल्बधारी खडे थे ।

और कभी भी उसे. शूट कर सकते थे I कालिया की उसे परवाह नहीं थी I उससे वह जैसे तैसे निबट सकती. थी, हद भी .होती तो दोनों का मुकाबला बराबर का रहता I परंतु' कालिया के हारने की स्थिति में उसके आदमी उसे शूट का सकते थे I

दोनों ही स्थिति मे वह खतरे में घिरी थी । कालिया को खत्म करती तो उसे भी शूट कर दिया जाता I

या फिर कालिया उस पर हावी होकर उसे नुकसान पहुचा देता I . . अगर उसकी पिस्टल गिरी ना होती तो वह इस सारी स्थिति को आसानी से अपने हक में कर लेती I लेकिन वह निहत्थी थी

और रिवाॅल्बरो से घिरी थी।

मोना चौधरी ने फौरन निर्णय लिया कि इन हालात में टकराना मूर्खता से भरा काम था I उसकी जान को भारी खत्तर्रा पैदा हो सकता था I

. मोना चौधरी ने अपनी कार पर निगाह मारी I वह कुछ दुर सड़क पर खडी थी । उस तक पहुचने के लिए कालिया और दोनों रिवाॅल्बधारियों को पार करना पडता जो कि आसान काम नहीं था I

एकाएक कालिया दात भीचे खतरनाक अंदाज में मोना चौघरी की तरफ़ बढा।

फैसले का वक्त आ पहुचा था I

कालिया से इस वक्त तो टकराने का ख्याल मोना चौधरी अपने दिमाग से निकाल चुकी थी I इस वक्त कालिया से टकराने का मतलब था, खुद को . मुसीबत में डालना I . .

एकाएक मोना चौधरी पलटी और गोली की रफ्तार से दौड पडी I वह जंगल वाला हिस्सा था और पेडों पहाडी पत्थरों से भरा पड़ा था I ज्यादा तेज रफ्तार से भागना भी संभब नहीं था ।

उसे एकाएक इस तरह भागते देखकर कालिया चौका I

"गोली मत चलाना I जैसे भी हो इसे पकडो I " कालिया चिल्लाया और मोना चौधरी के पीछे दौड़ पडा I

कालिया के दोनों साथी भी रिवॉल्वर थामे उसके पीछे भागे I

मोना चौधरी ने जब कालिया का गोली न चलाने वाला आर्डर सुना तो मन ही मन उसने राहत की सास ली परतु वह इस बात से वाकिफ थी कि गोली न चलाने का मतलब न चलाना नहीं है बल्कि गोली न चलाने का मतलब उसकी जान नहीँ लेने का आर्डर है I जरूस्त पडने पर उसकी बाह कंधे या फिर टागों पर गोली चलाई जा सकती थी ।

भागते भागते मोना चौधरी ने पीछे देखा I

कालिया और उसके बीच का फासला कम होता जा रहा था I इस ऊबड खाबढ़ पथरीले रास्ते पर वह इतनी तेज़ गति से नहीं भाग पा रही थी जितनी तेज गति से कालिया दौड़ रहा था I अगर यही हालात रहे तो कालिया उसके सिर पर सवार होगा मिनट-भर में I इस सोच के साथ ही मोना चौधरी के होठ भिचत्ते चले गए I

मोना चौधरी बड़े से टीले के पीछे छिपी थ्री I उसके दात भिचे' हुए थेI आखों में क्रोध की लहरें बार बार उठ रही थी । उखड़ी सासों को वह संयत कर रही थी I कालिया और उसके दोनों आदमी भूत की तरह इस प्रकार उसके पीछे पडे थे कि वह किसी भी हाल में उनसे पीछा न छुड़ा पा रही थी I मोना चौधरी मन-ही-मन हैरान अवश्य थी कि मात्र तीन आदमियों से उसे बचकर भागना पड रहा हे और भागना भी कठिन लग रहा हैं I इसका सिर्फ एक ही कारण था कि पीछे आने वाले लोग हथियारबंद थे और उसके' पास कोई हथियार नहीं था वरना फैसला कब का हो जाना था I बहरहाल कालिया के बारे में वह नतीजा निकाल चुकी थी कि वह सख्तजान हिम्मत वाला आदमी है वरना जैसे वार उसने उस पर किए थे, अगर कोई दूसरा होता तो उठ नहीं पाता I परतु कालिया उन वारों क्रो आसानी से झेल ही नहीं गया था, वल्कि जवाब भी बारों से दिया था, यह जुदा बात थी कि पूरी तरह वह कामयाब नहीं हो सका था, वे लोग चाहते तो उसे निशाना बना सकते थे, परतु' उन्होनै ऐसा नहीं किया ।
 
बल्कि कालिया ने फायर करने से अपने आदमियों को मना कर दिया था I

मोना चौधरी को अब इस बात का विश्वास होने लगा था कि जब उसकी कार पर गोलिया चलाईं गई तो जानबूझकर निशाना लगाने मे लापरवाही की गई थी । . कालिया और उसके आदमी उसकी जान-नही.लेना. चाहते उसे जिदा पकडना चाहते थे ।

क्यों ? अवश्य ही कोई 'खास-मोटा… कारण रहा होगा ।

… सोचने पर भी मोना चौधरी को ध्यान नहीं आया कि कभी कालिया को उसने पहले भी देखा हो I

बहरहाल मोना चौधरी तब तक इन लोगों के हाथ नहीं आना चाहती थी जब तक कि असल मामला उसे मालूम नहीं हो जाता । तभी उसके कानों में आहट पडी I मोना चौधरी सतर्क हो गई I अगले ही पल कालिया उसे नजर आया I जो दवे पाव सतर्क मुद्रा मे जरा जरा आगे बढ़ता हुआ उसे ही तलाश कर, रहा था I

अजीब इत्तफाक ही रहा कि कालिया की निगाह उस टीले की तरफ नहीं गई जिसकी आड में मोना चौधरी खडी थी I

अगर गई होती तो इस वक्त दोनो आमने सामने होते, जबकि अब कालिया की पीठ उसकी तरफ थी I मोना चौधरी जानती थी कि किसी भी वक्त कालिया की नजर उस पर पड सकती है I

"कलिया I" मोना चौधरी ने शात स्वर मे' पुकारा ।

कलिया बिजलीं की सी तेजी से घूमा ।

मोना चौधरी उछली I उसका घूसा वेग के साथ कालिया के गाल पर पडा I इसके साथ ही मोना चौधरी का, घुटना पेट में ।

कालिया तीव्र कराह के साथ नीचे जा गिरा । मोना चौधरी ने दात किटकिटाकर उसके ऊपर छलाँग लगा दी और जमीन से उठते कालिया की गरदन के गिर्द दाईं बाह' लपेट ली I

कालिया को ऐसा लगा जैसे कोई लोहे .का शिकजा उसकी गरदन में कस गया हो । उसी पल कालिया के दोनों साथी हाथों में रिबाल्बर लिए वहा प्रकट हुए ।

"कालिया I" मोना चौधरी गुर्राई-"'अपने आदमियों से कह रिवाॅल्बर दूर फेक दे'।"

कालिया ने अपनी गरदन से मोना चौधरी की बाह को हटाने का प्रयास किया I

परतु सफल न हो सकां ।

"बोल कलिया। I" मोना चौधरी ने दात किटकिटाक्रर अपनी कलाइयों में उसकी गरदन को कसा l

"यह जो कह रही हे वैसा ही करो I " कालिया फसे स्वर में बोला ।

कालिया के आदमियों ने रिवाल्बरे कुछ दूर उछाल दीं।

"तेरा पूरा नाम क्या हे ?" मोना चौधरी का स्वर बेहद सख्त था I

"के.के कालिया I”

"मैं अग्रेजी में नहीं हिदी में पूछ रहीँ हूं।"

"केवल किशन कालिया । "

"'कौन है तू?"

“ बस I मेरे नाम के अलावा तुम मुझसे कुछ नहीं जान सकतीं । " कालिया का स्वर दृढ़ता से भरा था ।

"तेरा यह जवाब तेरी मौत का सबब भी बन सकता है I "

"यह बाद की बात हे मोना चौधरी I" कालिया की आवाज भी सख्त हो उठी I

"मुझसे क्या चाहते हो ?? मेरे पीछे क्यों पडे हो. ?"

"यह बात पूछने पर नहीं हम अपनी मर्जी सै बता देगे I मेरी गरदन पकडकर यह मत्त सोचो कि तुमने मुझे मज़बूर कर दिया है । बेबस कर दिया है I तुम्हें तुम्हारे प्रश्नों का जवाब मिल जाएगां I"

मोना चौधरी कै होठो से गुर्राहट निकली ।

"अभी नहीं मिलेगा ?"

"नहीं !"

" मै गरदन का दबाव बढाकर सैकडो मे तुम्हारी जान ले सकती हू !"

कालिया कडवी हसी हसा I " तो लो ।"

" क्या ?"

"मेरी जान ले लो पूरी छूट है । " कालिया ने कहा फिर सामने खडे दोनों आदमियों से बोला…" मेरी फिक्र मत करो --आगे बढो और इसे पकड़ लो I जितनी देर में तुम आगे बढकर इसे पकडोगे I उसके दुगने वक्त मेँ भी यह मेरी गर्दन दबाकर. . मेरी जान नहीं ले सकती I कम आन ।"

मोना चौधरी चौकी' I कालिया वास्तव में ठीक कह रहा था ।

कालिया के दोनों आदमी आगे बढे I

" स्टाप I " मोना चौधरी गुर्राई---"अगर तुम लोग आगे बढे तो मै एक ही झटके में इसकी गर्दन की हड्डी तोड दूगी I"

मोना चौधरी के इन शब्दों पर भी वे दोनों नहीं रुके ।

"स्क जाओं । " कालिया कडबे स्वर में बोला I वे दोनों ठिठके तो कालिया ने मोना चौधरी से कहा-"तुम्हारे कहने पर मैं तुम्हें अपनी गर्दन की हड्डी तोडने का मौका देता हू। I "…

" तोडो I "

मोना। चौधरी को कालिया वास्तव में अजीब इसांन लगा I जिस अदाज में कलिया की गर्दन मोना चौधरी की कलाई के शिकजे में थी , उसे देखते हुए वह वास्तव में उसकी गर्दन की हड्डी आसानी से तोड सकती थी I

"मरना ही चाहते हो ? " मोना चौधरी ने मौत के से स्वर में कहा ।

" हा । " कालिया ने पूर्ववत लहजे मे कहा I

मोना चौघरी के होठो से गुर्राहट निकली । उसने खास अदाज में कालिया की गर्दन को झटका दिया I ऐसे झटके से वह अपने कां दुश्मनों की गर्दन की हड्डिया तोड़कर उनका किस्सा खत्म कर चुकी थी I

~ परतु कालिया की गर्दन को वह झटका नही लगा I

वज़ह--- यह रही कि कलिया ने गर्दन को खास एगिल' मे कर लिया था । मोना चौधरी को मन-ही मन हेरत हुई । उसने तीन चार बार पुन: झटका दिया, परंतु कालिया की गर्दन झटका नहीं खा सकी, जैसाकि मोना चौधरी देना…चाहती थी ।

कालिया जहरीले स्वर में हसा ।
 
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