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Guest
"नाम मत लो उस हरामजादे का I वह कई बार हमारा काम खराब कर चुका हे I" शागली खतरनाक स्वर में गुर्राया- "साला हाथ नहीं लग रहा, वरना कब का मारा गया होता वह।"
मोना चौधरी की निगाह शागली पर थी ।
"बान ली का पता बताओ I "
"क्यों ?" मोना चौधरी ने कड़वे स्वर में कहा…"ताकि तुम उसकी हत्या कर सको ?”
… "हा | वह....!"
"तुम लोगों के मामले में मैँ नहीं पढ़ना चाहती I मुझे सिर्फ अपने काम से मतलब है । "
शागली मोना चौधरी को घूरने लगा I
मोना चौधरी उसकी निगाहों से बेपरवाह खडी रही I
"बोलो शागली! भाव कम करते हो या मै वान ली के पास जाऊ ?"
तभी होशाग कह उठा ।
"तुम कितना दे सकती हो ?"
मोना चौधरी ने होशाग को देखा । .
"अगर फिल्म मुझे लाकर दे दी जाए तो हिन्दुस्तानी एक करोड रुपया I "
"नही तो ?"
"अगर मुझे चियांग के ठिकाने तक ही पहुचाना हे तो पचास लाख रुपया I ” मोना चौधरी ने सपाट स्वर में - कहा…"इसमें कोई गुजाइश नहीं हे कि रकम को बढाया जा सके I इतनी रकम तक ही सौदा करने के मेरे पास आर्डर हैं I इससे ज्यादा तो मैं एक रुपया भी नहीं दे सकती । "
पल-भर की खामोशी के बाद शागली ने सिर हिलाया ।
"यह तो कम हैं I "
"रहने दो I मैँ वान ली के पास जाकर । "
"तुम उस हरामजादे के पास नहीं जाओगी I ” शांगली दहाडा ।
"मैं तुम्हारी गुलाम नहीं हूं जो तुम इस तरह मुझसे पेश आओ । " मोना चौधरी सख्त स्वरं में कह उठी-"अगर हम में सौदा नहीं पटता' तो किसी से तो सौदा पटेगा ही I " मोना चौधरी मन ही-मन मुस्करा रही थी I
होशाग ने ठीक ही बताया था कि शागली के साथ कैसे बात करनी है I वान-ली का नाम सुनकर शागली तडप उठा था I दोनों में धधे की दुश्मनी थी और दोनों सगे भाई थे I शागली ने अपने पर काबू पाया और होशाग तथा दोनों ओदेदारो को देखा ।
"तुम लोगों की इस बारे में क्या राय है ?"
~ "आप खुद ही फैसला कीजिए मिस्टर शागली I " ओहदेदारों ने कहा I
"इस समय हमारे सामने दो बातें अहम हैँ I " शागली ने होशाग को देखा I I
"क्या बात ?"
"नम्बर एक तो वान…ली के पास यह लडकी नहीं पहुचनी चाहिए I उसे पैसा मिलेगा तो वह अपने धधे को और भी मजबूती से जमाएगा । सवाल काम का नहीं, उसके पास पैसा आने का है जितना पैसा वान ली के पास आएगा वह खुद को मजबूत करता चला जाएगा I "
"यह बात तो ठीक है I " होशाग ने गभीरता से सिर हिलाया I
"और दूसरी बात तो यह हे कि आज़ हमारे गैग को हथियारों के लिए खुद पैसे की जरूरत है I ” शामली ने गभीर स्वर में कहा-"इससे मिलने वाले पैसे से हम हथियारों की पूर्ति कर सकते हैं I "
" गुड I ” होशाग ने सिर हिलाया-"यह बात तो बहुत अच्छी कहीँ I "
" मेरे ख्याल में हमें पचास लाख वाले सौदे पर हा कर देनी चाहिए I"
" नहीं । " एक ओहदेदार ने फौरन टोका ।
"क्यों ?" शांगली ने तीखी निगाहों से उसे देखा ।
"यह चियाग से वास्ता रखता मामला हे I अगर उसे इस बात की भनक भी पढ़ गई और उसकी टेढी निगाह हम पर पड़ गई । तो हमारे. साथ…साथ वह गैंग को भी खत्म कर देगा I" ओहदेदार ने एक एक शब्द चबाकर कहा…"थोड़े से पैसों की खातिर हम अपने लिए तबाही नहीं ला सकते । "
"थोबड़ा बद रखो I " शागली गुर्रोंया I
"यह ठीक तो कह रहा है I ” दूसरा ओहदेदार बोला ।
" गैंग का बडा मैं हू तुम नहीं I मुझे मालूम हे किं हमारे गैंग' को हथियारों की ज़रूरत है और हथियारों के लिए दौलत की । आने वाले वक्त में हमारे पास हथियार कम हो गए तो बात किसके ऊपर आएगी मेरे ऊपर I दल के नेता के ऊपर I' शामली ने सख्त स्वर में कहा ।
"ऐसा है तो हम कुछ और करके भी दौलत हासिल कर सकते हैं । " ओहदेदार बोला I
"यह काम क्यों न करें l”
" इसमें खतरा है I "
"परवाह नही खतरे की अगर हम खत्तरे से डरने लगे तो... I "
"तुम नहीं डरते माना लेकिन जो लोग इस काम मे लगेगें । वे तो जान से जा सकते हैं । "
शांगली ने दात भीचकर ओहदेदार को घूरा I
"ठीक हे इस काम में मोना चौधरी के साथ मैं रहूगा । "
" तुम- ? " ओहदेदार चौका' ।
" 'हा मै' I मैं भी साथ चलूगा । यह काम पूरा हो गया तो हमें दो फायदे होगे । गैंग मेँ हथियारों की पूर्ति पूरी हो जाएगी और हमारा दुश्मन वान ली मोना चौधरी से पैसा नहीँ कमा पाएगा I "
इसके बाद कोई ओहदेदार नहीं बोला ।
शागली ने मोना चौधरी को देखा I
"मुझे पचास लाख़ बाला सौदा मजूर है I " शागली ने कहा…"पच्चीस लाख एडवास I "
"एडवास तुम्हें दो दिन बाद मिलेगे I" मीना चौधरी ने विश्वास-भरे स्वर में कहा-"मैँ अपने साथी क्रो खबर कर देती दूं I पैसा कहीं पडा है, उसे लाने में दो दिन लगेंगे' I "
"ठीक है जब हमें पैसा मिलेगा I " शांगली कह उठा --- "'तब हम काम की शुरुआत करेगें I ”
"नहीं काम की शुरूआत तो अभी हो जाएगी I " मोना चौधरी ने कहा…"मैं । "
"बिना पैसा लिए हम काम की शुरुआत नहीं करते I "
" मिस्टर शागली" I " मोना चौधरी ने शागली की आखो में झाका'-"काम हम अभी शुरू करेगे I दो दिन बाद मेरा आदमी तुम्हें पच्चीस लाख़ दे देगा I जिस सीक्रेट फिल्म को मैने
हासिल करना है वह मैं तुम्हें दे दूगी अगर उसे हासिल कर पाई तो I वापस आकर अपनी तसल्ली कर लेना कि पेमेट मिल गई कि नहीं । "
"तुम वहा मारी भी जा सकती हो चियाग तुमसे मजे लेकर तुम्हे साफ भी करा सकता है I "
"तो ?
"तब हमारो पेमेट का क्या होगा ? इस बात को मद्देनजर' रखते हुए तो हमें एडवास में पूरे पचास लाख मिल जाने चाहिए I ” शागली ने एक एक शब्द, चबाकर मोना चौधरी की आखों में झाका ।
" तुम लोगों को पूरी पेमेट ही मिल जाआऐगी शागली I"
"वह कैसे ?”
"मेरा एजेट साथी देगा I " मोना चौधरी बोली…"मै' उसे अभी फोन कर देती हू I डेढ दिन या दो दिन के भीतर वह पच्चीस लाख देगा और यही पर रहेगा, मेरी वापसी, होने तक । अगर मै वापस नहीं आ सकी तो मेरा वह ऐजेंट साथी बाकी . पच्चीस लाख देकर चले जाएगा I ”
शामली ने पहलू बदला ।
"मामला जमा नही I " शागली ने सिर हिलाया I
"हम पेमेट पहले लेते है' I " ओहदेदार बोला I '
"यह बात नहीं बनेगी I " मोना चौधरी ने कहा…"मैं पैसे हाथ में लेकर नहीं घूमती । हमारे पास तो हथियार हौते हैं और हम लोग वायदों पर खरे उतरते हैँ I वान ली हमारे लिए पहले भी काम कर चुका हैं I दो बार तो,उसे सप्ताह बाद पेमेट दी गई I वह जानता है कि हम चीटिग नहीं करते ।"
"फिर तुमने वान ली का नाम लिया। " शागली गुर्राया ।
मोना चौधरी की निगाह शागली पर थी ।
"बान ली का पता बताओ I "
"क्यों ?" मोना चौधरी ने कड़वे स्वर में कहा…"ताकि तुम उसकी हत्या कर सको ?”
… "हा | वह....!"
"तुम लोगों के मामले में मैँ नहीं पढ़ना चाहती I मुझे सिर्फ अपने काम से मतलब है । "
शागली मोना चौधरी को घूरने लगा I
मोना चौधरी उसकी निगाहों से बेपरवाह खडी रही I
"बोलो शागली! भाव कम करते हो या मै वान ली के पास जाऊ ?"
तभी होशाग कह उठा ।
"तुम कितना दे सकती हो ?"
मोना चौधरी ने होशाग को देखा । .
"अगर फिल्म मुझे लाकर दे दी जाए तो हिन्दुस्तानी एक करोड रुपया I "
"नही तो ?"
"अगर मुझे चियांग के ठिकाने तक ही पहुचाना हे तो पचास लाख रुपया I ” मोना चौधरी ने सपाट स्वर में - कहा…"इसमें कोई गुजाइश नहीं हे कि रकम को बढाया जा सके I इतनी रकम तक ही सौदा करने के मेरे पास आर्डर हैं I इससे ज्यादा तो मैं एक रुपया भी नहीं दे सकती । "
पल-भर की खामोशी के बाद शागली ने सिर हिलाया ।
"यह तो कम हैं I "
"रहने दो I मैँ वान ली के पास जाकर । "
"तुम उस हरामजादे के पास नहीं जाओगी I ” शांगली दहाडा ।
"मैं तुम्हारी गुलाम नहीं हूं जो तुम इस तरह मुझसे पेश आओ । " मोना चौधरी सख्त स्वरं में कह उठी-"अगर हम में सौदा नहीं पटता' तो किसी से तो सौदा पटेगा ही I " मोना चौधरी मन ही-मन मुस्करा रही थी I
होशाग ने ठीक ही बताया था कि शागली के साथ कैसे बात करनी है I वान-ली का नाम सुनकर शागली तडप उठा था I दोनों में धधे की दुश्मनी थी और दोनों सगे भाई थे I शागली ने अपने पर काबू पाया और होशाग तथा दोनों ओदेदारो को देखा ।
"तुम लोगों की इस बारे में क्या राय है ?"
~ "आप खुद ही फैसला कीजिए मिस्टर शागली I " ओहदेदारों ने कहा I
"इस समय हमारे सामने दो बातें अहम हैँ I " शागली ने होशाग को देखा I I
"क्या बात ?"
"नम्बर एक तो वान…ली के पास यह लडकी नहीं पहुचनी चाहिए I उसे पैसा मिलेगा तो वह अपने धधे को और भी मजबूती से जमाएगा । सवाल काम का नहीं, उसके पास पैसा आने का है जितना पैसा वान ली के पास आएगा वह खुद को मजबूत करता चला जाएगा I "
"यह बात तो ठीक है I " होशाग ने गभीरता से सिर हिलाया I
"और दूसरी बात तो यह हे कि आज़ हमारे गैग को हथियारों के लिए खुद पैसे की जरूरत है I ” शामली ने गभीर स्वर में कहा-"इससे मिलने वाले पैसे से हम हथियारों की पूर्ति कर सकते हैं I "
" गुड I ” होशाग ने सिर हिलाया-"यह बात तो बहुत अच्छी कहीँ I "
" मेरे ख्याल में हमें पचास लाख वाले सौदे पर हा कर देनी चाहिए I"
" नहीं । " एक ओहदेदार ने फौरन टोका ।
"क्यों ?" शांगली ने तीखी निगाहों से उसे देखा ।
"यह चियाग से वास्ता रखता मामला हे I अगर उसे इस बात की भनक भी पढ़ गई और उसकी टेढी निगाह हम पर पड़ गई । तो हमारे. साथ…साथ वह गैंग को भी खत्म कर देगा I" ओहदेदार ने एक एक शब्द चबाकर कहा…"थोड़े से पैसों की खातिर हम अपने लिए तबाही नहीं ला सकते । "
"थोबड़ा बद रखो I " शागली गुर्रोंया I
"यह ठीक तो कह रहा है I ” दूसरा ओहदेदार बोला ।
" गैंग का बडा मैं हू तुम नहीं I मुझे मालूम हे किं हमारे गैंग' को हथियारों की ज़रूरत है और हथियारों के लिए दौलत की । आने वाले वक्त में हमारे पास हथियार कम हो गए तो बात किसके ऊपर आएगी मेरे ऊपर I दल के नेता के ऊपर I' शामली ने सख्त स्वर में कहा ।
"ऐसा है तो हम कुछ और करके भी दौलत हासिल कर सकते हैं । " ओहदेदार बोला I
"यह काम क्यों न करें l”
" इसमें खतरा है I "
"परवाह नही खतरे की अगर हम खत्तरे से डरने लगे तो... I "
"तुम नहीं डरते माना लेकिन जो लोग इस काम मे लगेगें । वे तो जान से जा सकते हैं । "
शांगली ने दात भीचकर ओहदेदार को घूरा I
"ठीक हे इस काम में मोना चौधरी के साथ मैं रहूगा । "
" तुम- ? " ओहदेदार चौका' ।
" 'हा मै' I मैं भी साथ चलूगा । यह काम पूरा हो गया तो हमें दो फायदे होगे । गैंग मेँ हथियारों की पूर्ति पूरी हो जाएगी और हमारा दुश्मन वान ली मोना चौधरी से पैसा नहीँ कमा पाएगा I "
इसके बाद कोई ओहदेदार नहीं बोला ।
शागली ने मोना चौधरी को देखा I
"मुझे पचास लाख़ बाला सौदा मजूर है I " शागली ने कहा…"पच्चीस लाख एडवास I "
"एडवास तुम्हें दो दिन बाद मिलेगे I" मीना चौधरी ने विश्वास-भरे स्वर में कहा-"मैँ अपने साथी क्रो खबर कर देती दूं I पैसा कहीं पडा है, उसे लाने में दो दिन लगेंगे' I "
"ठीक है जब हमें पैसा मिलेगा I " शांगली कह उठा --- "'तब हम काम की शुरुआत करेगें I ”
"नहीं काम की शुरूआत तो अभी हो जाएगी I " मोना चौधरी ने कहा…"मैं । "
"बिना पैसा लिए हम काम की शुरुआत नहीं करते I "
" मिस्टर शागली" I " मोना चौधरी ने शागली की आखो में झाका'-"काम हम अभी शुरू करेगे I दो दिन बाद मेरा आदमी तुम्हें पच्चीस लाख़ दे देगा I जिस सीक्रेट फिल्म को मैने
हासिल करना है वह मैं तुम्हें दे दूगी अगर उसे हासिल कर पाई तो I वापस आकर अपनी तसल्ली कर लेना कि पेमेट मिल गई कि नहीं । "
"तुम वहा मारी भी जा सकती हो चियाग तुमसे मजे लेकर तुम्हे साफ भी करा सकता है I "
"तो ?
"तब हमारो पेमेट का क्या होगा ? इस बात को मद्देनजर' रखते हुए तो हमें एडवास में पूरे पचास लाख मिल जाने चाहिए I ” शागली ने एक एक शब्द, चबाकर मोना चौधरी की आखों में झाका ।
" तुम लोगों को पूरी पेमेट ही मिल जाआऐगी शागली I"
"वह कैसे ?”
"मेरा एजेट साथी देगा I " मोना चौधरी बोली…"मै' उसे अभी फोन कर देती हू I डेढ दिन या दो दिन के भीतर वह पच्चीस लाख देगा और यही पर रहेगा, मेरी वापसी, होने तक । अगर मै वापस नहीं आ सकी तो मेरा वह ऐजेंट साथी बाकी . पच्चीस लाख देकर चले जाएगा I ”
शामली ने पहलू बदला ।
"मामला जमा नही I " शागली ने सिर हिलाया I
"हम पेमेट पहले लेते है' I " ओहदेदार बोला I '
"यह बात नहीं बनेगी I " मोना चौधरी ने कहा…"मैं पैसे हाथ में लेकर नहीं घूमती । हमारे पास तो हथियार हौते हैं और हम लोग वायदों पर खरे उतरते हैँ I वान ली हमारे लिए पहले भी काम कर चुका हैं I दो बार तो,उसे सप्ताह बाद पेमेट दी गई I वह जानता है कि हम चीटिग नहीं करते ।"
"फिर तुमने वान ली का नाम लिया। " शागली गुर्राया ।