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Guest
डॉक्टर सुरेंदर ने कहा की वो डायरेक्ट बैंगलोर मिलेंगे और अनिल भी उन्हें सीधा बैंगलोर ही मिलने वाला था| उन्होंने मुझे एक Link मेल किया था… मैंने सोचा की एक बार मैं भी बात कर लूँ! तो मैंने उन्हें फोन मिलाया;
"हेलो सुरेंदर जी बोल रहे हैं!"
"हाँ जी बोल रहा हूँ... आप कौन?"
"जी मैं संगीता.... अनिल की बहन|"
"ओह्ह...जी नमस्ते|"
"सुरेंदर जी अम्म्म.. मुझे आपसे कुछ पूछना था... actually आपने जिस हॉस्पिटल के बारे में बताया वो बैंगलोर में है| क्या यहाँ दिल्ली में कोई हॉस्पिटल नहीं?"
"संगीता जी... दरअसल हमारे doctor's journal में ये article आया था| मेरा एक दोस्त है जो बैंगलोर में रहता है| दिल्ली में मेरा कोई contact नहीं है... still i'll try my best .... meanwhile हम बंगलोरे में एक बार हॉस्पिटल चेक कर लेते हैं|
"जी.... and thank you .... very much!"
"अरे संगीता जी थैंक यू कैसा.... आप अनिल की दीदी हैं तो मेरी भी दीदी जैसी हुई ना| you don't worry."
मेरी सुरेंदर जी से बात हुई तो मन को थोड़ी तसल्ली हुई|
अब आगे.........
एक उम्मीद जिसके सहारे इस जीवन की नैय्या पार हो सकती थी! जैसे ही मैं मुड़ी तो पीछे मेरी 'माँ' नेहा खड़ी थी! वो एक डीएम से बोल पड़ी; "हुँह... आप... पापा अगर आपकी जगह झोटे तो आपको ठीक करने के लिए करोड़ों रूपए फूँक देते! और आप... आपको तो पैसे बचाने हैं! इतने पैसे बचा के करोगे क्या?" ये सब उसने मुझे टोंट मरते हुए कहा|
"बेटा ऐसा नहीं है, मैं तो......." मेरे आगे कुछ कहने से पहले ही 'मेरी माँ' ने अपना 'फरमान' सुना दिया!
"मुझे सब पता है..... आप .... ये प्यार मोहब्बत... ये सब बस दिखावा है... और कुछ नहीं| जो लोग प्यार में पड़ते हैं उनका हाल पापा जैसा होता है| खेर मैं आपको कुछ बताने आई थी| मैंने decide किया है की मैं कभी शादी नहीं करुँगी!"
"बेटा....ये तू क्या कह रही है!" मैंने उसे समझाना चाहा पर अभी उसकी बात पूरी नहीं हुई थी|
"मैं ता उम्र पापा की सेवा करुँगी! कभी शादी नहीं करुँगी! ये प्यार-व्यार कुछ नहीं होता.... वैसे भी मुझे आपकी वजह से पापा का प्यार तो मिला नहीं.... बची हुई जिंदगी मैं पापा के साथ ही गुजरूँगी|" आगे कुछ कहने से पहले माँ (सासु माँ) आ गईं| म्हे लगा की वो अपना ये 'फैसला' माँ को भी सुनाएगी पर शायद उसमें इतनी हिम्मत नहीं थी| उसने topic चेंज करते हुए कहा; "दादी जी... मामू आ गए?" माँ ने उसे कहा की अनिल नीचे उसका इन्तेजार कर रहा है| नेहा बिना आगे कुछ कहे नीचे भाग गई!
अपनी बेटी की मुंह से ये सब सुन कर मैं टूट गई.... अब तक उसने मुझे दोषी ही बनाया था और आज तो उसने मुझे सजा ही सुना दी| मैं फूट-फूट के रोने लगी.... माँ को कुछ समझ नहीं आया तो वो मुझे चुप कराने लगीं| मैंने रो-रो कर माँ से अपनी बात कही; "माँ..... अब.....अब जान नहीं बची मुझ में....टूट चुकी हूँ! मैं... मेरी किस्मत ऐसी है! ना तो मैं एक अच्छी बेटी साबित हो सकी और ना ही अच्छी पत्नी! ........... और अब तो मैं एक अच्छी माँ भी साबित नहीं हो सकी! मैं....बहुत अभागी हूँ...... ऐसा ...ऐसा देवता जैसा पति मिला और मैंने उसकी कदर तक ना की! इन्होने हर कदम पर मेरे साथ चलना चाहा और मैं इनके साथ चलने से कतराती रही|माँ..... आप लोग क्यों मेरी तरफदारी करते हैं.....मैं इस लायक ही नहीं! सच कहते हैं पिताजी मुझे मर ही जाना चाहिए था! इस हँसते-खेलते परिवार को मेरी ही नजर लग गई माँ...... मेरी बुरी किस्मत इस घर को ही निगल ना जाए....प्लीज माँ .... मुझे .... मुझे थोड़ा सा जहर ला दो.... मुझे मरने दो.... मैं ... " आगे कुछ कहने से माँ ने मुझे रोक दिया और मेरे आँसूं पोछते हुए बोलीं; "बेटी..... हम सब मानु से बहुत प्यार करते हैं ओ मानु तुझसे बहुत प्यार करता है तो इस हिसाब से हम तुझसे भी बहुत प्यार करते हैं! तेरी तरफदारी करना हक़ है हमारा आखिर शादी के बाद तू हमारी बेटी बन गई ना? उसी तरह मानु तेरे पिताजी का बेटा बन गया.... अब अगर उसकी वजह से तुझे कुछ तकलीफ हो जाती तो हम दोनों (सासु माँ और ससुर जी) उसका जीना बेहाल कर देते| और फिर तेरी कोई गलती नहीं है..... हाँ मैं समझ सकती हूँ की नेहा तुझसे नाराज है पर उसकी नाराजगी उसके पापा के ठीक होने पर खत्म हो जायेगी| तू चिंता मत कर...हिम्मत बांधे रख और ये हमेशा याद रख की इस वक़्त तू ही वो 'खूँटा' है जिससे ये पूरा परिवार बंधा है| अगर तू ने ही हार मान ली तो यहाँ कौन है जो इस समय में आगे आएगा| इन बूढी हड्डियों में अब हिम्मत नहीं की वो बेटे के साथ बहु को भी तकलीफ में देखे|
एक तू ही है जो बच्चों को संभाल रही है| आयुष तो अभी बहुत छोटा है और नेहा से तर्क करने की ताकत सिर्फ तुझ में है| मैं उससे बात करुँगी... तू फ़िक्र ना कर|"
माँ ने अपनी तरफ से पूरी कोशिश की थी पर मेरा दिल आज बहुत बेचैन था! माँ के सामने तो मैंने जैसे-तैसे खुद को रोक लिया पर माँ के जाने के बाद मेरे आँसूं फिर बहने लगी... मैं इनके सामने बैठ गई और इनका हाथ अपने हाथों में ले कर इनसे बात करने लगी; "आप क्यों मुझ पर इतना गुस्सा निकाल रहे हो? इतना ही गुस्सा है तो मेरी जान ले लो! पर इस तरह मुझ पर जुल्म तो मत करो! इतना प्यार करते हो मुझसे ...फिर इतनी नाराजगी क्यों? एक बार बस एक बार अपनी आँखें खोल दो... प्लीज ....i beg of you ..... !!! प्लीज .....i promise .... i promise मैं आज के बाद आपसे कभी नाराज नहीं हूँगी! कभी आपसे बात करना बंद नहीं करुँगी! प्लीज.... मन जाओ.... अच्छा मेरे लिए ना सही तो अपनी बेटी नेहा के लिए....आयुष के लिए ....प्लीज..... जानते हो नेहा ने प्रण किया है की वो कभी शादी नहीं करेगी! मेरे कारन सात साल....उसे आपका प्यार नहीं मिल पाया! कम से कम उसके लिए ही ..............." पर मेरी कही किसी भी आत का उन पर (मेरे पति) कोई असर नहीं पड़ा| वो अब भी उसी तरह मूक लेटे हुए थे! सारी रात मैं बस रोती रही ... बिलखती रही.... और सच पूछो तो उस वक़्त मुझे एहसास हुआ की मेरी आँख से गिरे एक कतरे आँसूं को देख ये इतने परेशान हो जाय करते थे की घर-भर अपने सर पर उठा लिया करते थे... और आज मैं यहाँ बिलख-बिलख के रो रही हूँ ... इनसे मिन्नतें कर रही हूँ की आप वापस आ जाओ.... मेरे आँसुओं की क्या कीमत थी, उस दिन मुझे ज्ञात हुआ! उस रात शायद भगवान को मुझ पर तरस आ गया हो...या फिर ये कहें की उन्होंने नेहा की दुआ कबूल कर ली और....................
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I LOVE YOU MY DEAR HUBBY!❤❤❤
"हेलो सुरेंदर जी बोल रहे हैं!"
"हाँ जी बोल रहा हूँ... आप कौन?"
"जी मैं संगीता.... अनिल की बहन|"
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"सुरेंदर जी अम्म्म.. मुझे आपसे कुछ पूछना था... actually आपने जिस हॉस्पिटल के बारे में बताया वो बैंगलोर में है| क्या यहाँ दिल्ली में कोई हॉस्पिटल नहीं?"
"संगीता जी... दरअसल हमारे doctor's journal में ये article आया था| मेरा एक दोस्त है जो बैंगलोर में रहता है| दिल्ली में मेरा कोई contact नहीं है... still i'll try my best .... meanwhile हम बंगलोरे में एक बार हॉस्पिटल चेक कर लेते हैं|
"जी.... and thank you .... very much!"
"अरे संगीता जी थैंक यू कैसा.... आप अनिल की दीदी हैं तो मेरी भी दीदी जैसी हुई ना| you don't worry."
मेरी सुरेंदर जी से बात हुई तो मन को थोड़ी तसल्ली हुई|
अब आगे.........
एक उम्मीद जिसके सहारे इस जीवन की नैय्या पार हो सकती थी! जैसे ही मैं मुड़ी तो पीछे मेरी 'माँ' नेहा खड़ी थी! वो एक डीएम से बोल पड़ी; "हुँह... आप... पापा अगर आपकी जगह झोटे तो आपको ठीक करने के लिए करोड़ों रूपए फूँक देते! और आप... आपको तो पैसे बचाने हैं! इतने पैसे बचा के करोगे क्या?" ये सब उसने मुझे टोंट मरते हुए कहा|
"बेटा ऐसा नहीं है, मैं तो......." मेरे आगे कुछ कहने से पहले ही 'मेरी माँ' ने अपना 'फरमान' सुना दिया!
"मुझे सब पता है..... आप .... ये प्यार मोहब्बत... ये सब बस दिखावा है... और कुछ नहीं| जो लोग प्यार में पड़ते हैं उनका हाल पापा जैसा होता है| खेर मैं आपको कुछ बताने आई थी| मैंने decide किया है की मैं कभी शादी नहीं करुँगी!"
"बेटा....ये तू क्या कह रही है!" मैंने उसे समझाना चाहा पर अभी उसकी बात पूरी नहीं हुई थी|
"मैं ता उम्र पापा की सेवा करुँगी! कभी शादी नहीं करुँगी! ये प्यार-व्यार कुछ नहीं होता.... वैसे भी मुझे आपकी वजह से पापा का प्यार तो मिला नहीं.... बची हुई जिंदगी मैं पापा के साथ ही गुजरूँगी|" आगे कुछ कहने से पहले माँ (सासु माँ) आ गईं| म्हे लगा की वो अपना ये 'फैसला' माँ को भी सुनाएगी पर शायद उसमें इतनी हिम्मत नहीं थी| उसने topic चेंज करते हुए कहा; "दादी जी... मामू आ गए?" माँ ने उसे कहा की अनिल नीचे उसका इन्तेजार कर रहा है| नेहा बिना आगे कुछ कहे नीचे भाग गई!
अपनी बेटी की मुंह से ये सब सुन कर मैं टूट गई.... अब तक उसने मुझे दोषी ही बनाया था और आज तो उसने मुझे सजा ही सुना दी| मैं फूट-फूट के रोने लगी.... माँ को कुछ समझ नहीं आया तो वो मुझे चुप कराने लगीं| मैंने रो-रो कर माँ से अपनी बात कही; "माँ..... अब.....अब जान नहीं बची मुझ में....टूट चुकी हूँ! मैं... मेरी किस्मत ऐसी है! ना तो मैं एक अच्छी बेटी साबित हो सकी और ना ही अच्छी पत्नी! ........... और अब तो मैं एक अच्छी माँ भी साबित नहीं हो सकी! मैं....बहुत अभागी हूँ...... ऐसा ...ऐसा देवता जैसा पति मिला और मैंने उसकी कदर तक ना की! इन्होने हर कदम पर मेरे साथ चलना चाहा और मैं इनके साथ चलने से कतराती रही|माँ..... आप लोग क्यों मेरी तरफदारी करते हैं.....मैं इस लायक ही नहीं! सच कहते हैं पिताजी मुझे मर ही जाना चाहिए था! इस हँसते-खेलते परिवार को मेरी ही नजर लग गई माँ...... मेरी बुरी किस्मत इस घर को ही निगल ना जाए....प्लीज माँ .... मुझे .... मुझे थोड़ा सा जहर ला दो.... मुझे मरने दो.... मैं ... " आगे कुछ कहने से माँ ने मुझे रोक दिया और मेरे आँसूं पोछते हुए बोलीं; "बेटी..... हम सब मानु से बहुत प्यार करते हैं ओ मानु तुझसे बहुत प्यार करता है तो इस हिसाब से हम तुझसे भी बहुत प्यार करते हैं! तेरी तरफदारी करना हक़ है हमारा आखिर शादी के बाद तू हमारी बेटी बन गई ना? उसी तरह मानु तेरे पिताजी का बेटा बन गया.... अब अगर उसकी वजह से तुझे कुछ तकलीफ हो जाती तो हम दोनों (सासु माँ और ससुर जी) उसका जीना बेहाल कर देते| और फिर तेरी कोई गलती नहीं है..... हाँ मैं समझ सकती हूँ की नेहा तुझसे नाराज है पर उसकी नाराजगी उसके पापा के ठीक होने पर खत्म हो जायेगी| तू चिंता मत कर...हिम्मत बांधे रख और ये हमेशा याद रख की इस वक़्त तू ही वो 'खूँटा' है जिससे ये पूरा परिवार बंधा है| अगर तू ने ही हार मान ली तो यहाँ कौन है जो इस समय में आगे आएगा| इन बूढी हड्डियों में अब हिम्मत नहीं की वो बेटे के साथ बहु को भी तकलीफ में देखे|
एक तू ही है जो बच्चों को संभाल रही है| आयुष तो अभी बहुत छोटा है और नेहा से तर्क करने की ताकत सिर्फ तुझ में है| मैं उससे बात करुँगी... तू फ़िक्र ना कर|"
माँ ने अपनी तरफ से पूरी कोशिश की थी पर मेरा दिल आज बहुत बेचैन था! माँ के सामने तो मैंने जैसे-तैसे खुद को रोक लिया पर माँ के जाने के बाद मेरे आँसूं फिर बहने लगी... मैं इनके सामने बैठ गई और इनका हाथ अपने हाथों में ले कर इनसे बात करने लगी; "आप क्यों मुझ पर इतना गुस्सा निकाल रहे हो? इतना ही गुस्सा है तो मेरी जान ले लो! पर इस तरह मुझ पर जुल्म तो मत करो! इतना प्यार करते हो मुझसे ...फिर इतनी नाराजगी क्यों? एक बार बस एक बार अपनी आँखें खोल दो... प्लीज ....i beg of you ..... !!! प्लीज .....i promise .... i promise मैं आज के बाद आपसे कभी नाराज नहीं हूँगी! कभी आपसे बात करना बंद नहीं करुँगी! प्लीज.... मन जाओ.... अच्छा मेरे लिए ना सही तो अपनी बेटी नेहा के लिए....आयुष के लिए ....प्लीज..... जानते हो नेहा ने प्रण किया है की वो कभी शादी नहीं करेगी! मेरे कारन सात साल....उसे आपका प्यार नहीं मिल पाया! कम से कम उसके लिए ही ..............." पर मेरी कही किसी भी आत का उन पर (मेरे पति) कोई असर नहीं पड़ा| वो अब भी उसी तरह मूक लेटे हुए थे! सारी रात मैं बस रोती रही ... बिलखती रही.... और सच पूछो तो उस वक़्त मुझे एहसास हुआ की मेरी आँख से गिरे एक कतरे आँसूं को देख ये इतने परेशान हो जाय करते थे की घर-भर अपने सर पर उठा लिया करते थे... और आज मैं यहाँ बिलख-बिलख के रो रही हूँ ... इनसे मिन्नतें कर रही हूँ की आप वापस आ जाओ.... मेरे आँसुओं की क्या कीमत थी, उस दिन मुझे ज्ञात हुआ! उस रात शायद भगवान को मुझ पर तरस आ गया हो...या फिर ये कहें की उन्होंने नेहा की दुआ कबूल कर ली और....................
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I LOVE YOU MY DEAR HUBBY!❤❤❤