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एक अनोखा बंधन**:-कि नई शुरुआत (2) complete

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'*****इनकी लेखनी'*****

अपॉइंटमेंट वाले दिन मैं, नेहा और संगीता डॉक्टर अंजलि के चैम्बर पहुँच गए| नेहा को बाहर छोड़ कर हम दोनों अंदर डॉक्टर के केबिन में बैठ गए| हमने डॉक्टर साहिबा को सारी बात बता दी|हमारी सारी बात इत्मीनान से सुनने के बाद उन्होंने हमें बाहर बैठने को कहा और नेहा को अंदर बुलाया|नेहा से करीबन 20 मिनट तक बात करने के बाद उन्होंने हमें अंदर बुलाया और नेहा को फिर से बाहर बैठने को कहा| मैंने अपना मोबाइल नेहा को दे दिया ताकि वो उसमें कुह गेम आदि खेले और बोर न हो जाए|

अब आगे......

cabin के अंदर जो हुआ वो मैं आज पहली बार experience कर रही थी| मुझे लगता था की माँ-बाप बच्चों की सिर्फ अच्छी परवरिश की जिम्मेदारी उठाते हैं| पर आज मुझे पता चला की एक अच्छी परवरिश ही नहीं बल्कि उन्हें एक अच्छा इंसान बनाने की भी जिमेदारी माँ-बाप के सर होती है|

डॉक्टर साहिबा जी को शक था की हमारी शादी से नेहा खुश नहीं है..... या फिर शादी के बाद हम बक्छों पर जरा भी ध्यान नहीं देते| पर 'इन्होने' उनका ये शक मिटा दिया| डॉक्टर साहिबा ने इनसे नेहा के बारे में बहुत से सवाल पूछे जिन्हें मैं आपके सामने उसी तरह पेश कर रही हूँ जैसे 'ये' लिखते हैं| (आशा करती हूँ आपको ये पसंद आएगा|)

अंजलि : मैंने नेहा से बात की.... और मुझे ये पता चला की वो आपसे बहुत प्यार करती है| आखिर लड़कियाँ होती हैं अपने पिता की सबसे लाड़ली|

मैं: पर आयुष भी 'इनसे' उतना ही प्यार करता है| बल्कि इनका जाड तो हर बच्चे के सर चढ़ कर बोलता है|

मैंने कुछ ज्यादा ही confidence में आ कर ये कह दिया....... ये सुन कर डॉक्टर अंजलि मेरी तरफ हैरानी से देखने लगीं तब मुझे एहसास हुआ की मैंने ये क्या कह दिया! पर तभी 'इन्होने' जैसे-कैसे बात संभाली|

"वो..... actually बच्चों के साथ मेरी अच्छी understanding है|"

अंजलि: ok .... तो आप दोनों सबसे ज्यादा किसे प्यार करते हैं?

मैं: दोनों बच्चों को .... (मेरा जवाब शायद satisfactory नहीं था...... इसलिए इन्होने फिर बात संभाली|)

"हमने आज तक बच्चों को ये महसूस नहीं होने दिया की हम उनके साथ किसी तरह का पक्षपात करते हैं| अगर नेहा रात को मेरे पास सोती है तो दिन में मैं और आयुष साथ-साथ computer पर game खेलते हैं| मैं दोनों को बराबर प्यार करता हूँ.... किसी को कम किसी को ज्यादा नहीं|

अंजलि: और आप संगीता?

मैं: जी ....मैं भी| (मैं झूठ नहीं बोल सकती थी ......पर अपने पति को भी झूठा नहीं बनाना चाहती थी| इसलिए मैंने बिना किसी confidence के जवाब दिया|)

उन्हें ये पता चल ही गया होगा की मैं 'इनसे' बहुत प्यार करती हूँ..... पर उन्होंने इस बात को उस समय ज्यादा कुरेदा नहीं|

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जी ....मैं भी| (मैं झूठ नहीं बोल सकती थी ......पर अपने पति को भी झूठा नहीं बनाना चाहती थी| इसलिए मैंने बिना किसी confidence के जवाब दिया|)

उन्हें ये पता चल ही गया होगा की मैं 'इनसे' बहुत प्यार करती हूँ..... पर उन्होंने इस बात को उस समय ज्यादा कुरेदा नहीं|

अब आगे.....

अंजलि जी ने 'इनसे' नेहा से जुड़े कुछ सवाल पूछे... हैरानी की बात ये थी की उनका ध्यान केवल 'इन्हीं' पर था| ऐसा लग रहा था जैसे वहां कोई interview चल रहा हो!

अंजलि: नेहा का favorite subject क्या है?

"mathematics"

अंजलि: नेहा की favorite teacher?

"माथुर mam ... और वो history पढ़ाती हैं!"

अंजलि: favorite food?

"राजमा चावल.... और chips !!!"

अंजलि: best friend?

"........" इनके पास कोई जवाब नहीं था......और मेरे पास तो ऊपर के किसी सवाल का जवाब नहीं था! सच में हमारा कभी इस बात पर ध्यान ही नहीं गया की नेहा का कोई दोस्त नहीं है| घर में वो हमेशा चिहुँकती रहती थी ...... मुझे तो हमेशा लगता था की वो बहुत खुश है|

अंजलि: नेहा भी इसी तरह चुप थी| क्या आपने कभी नहीं सोचा की ...........

"जी नहीं..... तो क्या उसकी इस हालत का कारन दोस्त न होना है?" ('इन्होने' अंजलि की बात काटते हुए कहा|)

अंजलि: नहीं ये कारन तो नहीं है पर मैं जानना चाहती थी की आप अपनी बच्ची के बारे में कितना जानते हैं| please बुरा मत मानिये पर वो आपका अपना खून नहीं है ....... और आमतौर पर fathers उन्हें उतना प्यार नहीं देते!

मैं: ये आप क्या कह रहीं हैं? ऐसा कटाई नहीं है.... आपने नेहा से बात की ना? क्या आपको लगता है की 'ये' उसे प्यार नहीं करते? नेहा के बारे में मुझसे ज्यादा 'ये' जानते हैं और फिर भी आप ऐसा कह रहीं हैं!

अंजलि: आप माँ हैं.... और आप ही अपने बच्ची पर ध्यान नहीं देतीं? आपके रूखे बर्ताव के कारन वो इतना डर चुकी है की सपनों को सच मान लेती है| वो तो उसे अपने पापा के प्यार का सहारा है तो वो खुद को संभाल लेती है .... वरना कुछ गलत भी हो सकता था|

अंजलि की बातें सच थीं .... और बहुत कड़वी भी| पर मैं helpless थी.... चाहे कुछ भी करूँ मेरा ध्यान ‘इन’ पर से हटता ही नहीं था| मैंने अपने प्यार को इन्हें समर्पित कर दिया था..... ! "तो डॉक्टर अब हमें क्या करना चाहिए?"

अंजलि: i m sorry पर इसका इलाज दवाइयों से possible नहीं है| ये तो आपको खुद ही सम्भालना पड़ेगा ... ख़ास तौर पर आप! आप उसके पापा हैं और सबसे ज्यादा प्यार भी वो आपसे करती है|

इन्होने कुछ जवाब नहीं दिया ........ बस हाँ में सर हिलाया और हम उठ कर बाहर आ गए| मैं जानती थी की इन्हें ये सब सुनकर कितनी तकलीफ हुई है..... और सच पूछो तो मैं ये सोच रही थी की हम यहाँ आये ही क्यों? क्या ये सब सुनने के लिए? ये कैसी counsellings थी? गलती मेरी थी और सुन्ना 'इन्हें' पड़ा|बाहर waiting hall में आने पर पता नहीं कैसे इन्होने अपने expression बदल लिए और हँसते हुए नेहा का हाथ पकड़ के बाहर आ गए| मैं जानती थी की ये नेहा से लाख छुपाएं पर मुझसे अपने जज़्बात नहीं छुपा सकते| गाडी में बैठे-बैठे मैं बेचैन होने लगी और मुझे एक तरह से गुस्सा आने लगा की ऐसा क्यों है? क्यों नेहा ने कोई दोस्त नहीं बनाया? इसलिए जब मैंने नेहा से पूछा; "नेहा.... क्या ये सच है की तुम्हारा......." मेरे आगे कुछ कहने से पहले ही इन्होने मेरी बात काट दी; "lets not discuss it here ..... " और इधर नेहा मेरा अधूरा सवाल सुन कर कुछ सोचे लगी तो इन्होने बात घुमा दी; "यार मुझे भूख लग रही है... anybody wants pizza?" ये सुनकर नेहा का ध्यान भटक गया और उसने खुश होते हुए अपना हाथ ऊपर उठा दिया| अपने गम को छुपाना कोई इनसे सीखे.... गाडी पार्क करे के बाद नेहा आगे-आगे रेस्टुरेंट की तरफ भाग रही थी जिससे 'इन्हें' मुझे समझने का समय मिल गया| "please अभी इस बात को एह से discuss मत करो| हम इस पर पहले खुद बात कर लें!" ये मुझे समझाना कम और डाँटना ज्यादा लगा|

"आप ये बताओ की क्यों पैसे फूंकें इतने? सिर्फ यही सुनने के लिए की ये 'आपको' खुद सम्भालना पड़ेगा! अभी भी तो 'आप' ही संभाल रहे हो?" मैंने थोड़ा चिड कर कहा|जवाब में 'इन्होने' कहा; "वहाँ जाने से ये तो पता चला की मेरी बेटी का कोई दोस्त नहीं है! and correct me if i m wrong .... ये बात हमें घर में रहते हुए आजतक पता नहीं चली!" 'इनकी' ये बात सच थी...

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"आप ये बताओ की क्यों पैसे फूंकें इतने? सिर्फ यही सुनने के लिए की ये 'आपको' खुद सम्भालना पड़ेगा! अभी भी तो 'आप' ही संभाल रहे हो?" मैंने थोड़ा चिड कर कहा|जवाब में 'इन्होने' कहा; "वहाँ जाने से ये तो पता चला की मेरी बेटी का कोई दोस्त नहीं है! and correct me if i m wrong .... ये बात हमें घर में रहते हुए आजतक पता नहीं चली!" 'इनकी' ये बात सच थी...

अब आगे.....

इन्होने cheese capsicum and onion वाला पिज़्ज़ा आर्डर किया| पिज़्ज़ा खाते-खाते इन्होने नेहा का ध्यान भटकाने के लिए random topic छेड़ दिया|पिज़्ज़ा खाने के बाद हम वहाँ से निकले और रास्ते भर 'इन्होने' नेहा का ध्यान जरा सी भी देर के लिए उन बातों पर जाने न यहीं दिया| घर पहुँच कर नेहा ने अपनी पढ़ाई शुरू कर दी..... और मैं, माँ और 'ये' बैठक में चाय पीने लगे| माँ ने इनसे डॉक्टर से जो बात हुई उसके बारे में पूछा और 'इन्होने' censored बात माँ को बता दी| (मेरी गलतियों का 'इन्होने' जिक्र नहीं किया|) बातें सुनने के बाद माँ ने भी कहा की क्या जर्रूरत थी पैसे फूंकने की..... पर ये चुप रहे| आखिर माँ उठ कर अपने कमरे में आराम करने चली गेन और ये किसी गहरी चिंता में मग्न हो गए| मैं ने 'इनका' ध्यान भटकने की सोची .... मैं उठी और 'इनके' बगल में आ कर बैठ गई.... अपनी दाहिनी बाह इनके कंधे पर धीरे से रखी की कहीं इनका ध्यान भांग ना हो जाए.... और फिर धीरे से अपने होंठ इनके गाल के पास ले आई और kiss करने लगी|

इससे पहले की मेरे होंठ इनके दाढ़ी वाले गालों से मिल पाते ये एक दम से उठ खड़े हुए|मुझे बहुत बुरा लगा .... बहुत ज्यादा! इन्होने कुछ नहीं कहा और बाहर चले गए...... मैं अपने कमरे में आई और सोचने लगी की आखिर 'इन्होने' ऐसा behave क्यों किया? क्या अंजलि ने जो कहा उसके कारन? या फिर ये उस दिन की बात के लिए 'ये' अब भी मुझसे नाराज थे? फिर मुझे लगा की 'इन्हें' उस दिन कैसा लगा होगा जब मैंने इनके साथ इसी तरह behave किया था? हाँ .... हो न हो... ये मुझे feel करवा रहे थे की 'इन्हें' उस दिन कैसे लगा था! मैंने सोचा इनके आने पर मैं इनसे माफ़ी माँग लूँगी.... मैं उठी और lunch की तैयारी में लग गई| खाने के समय तक पिताजी और 'ये' दोनों लौट आये थे| 'ये' सीधा हमारे कमरे में fresh होने चले गए... और मैं भी इनके पीछे-पीछे कमरे में पहुँच गई| उस समय 'ये' bathroom में थे... मैं सोचने लगी की बात शुरू कैसे करूँ?

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इससे पहले की मेरे होंठ इनके दाढ़ी वाले गालों से मिल पाते ये एक दम से उठ खड़े हुए|मुझे बहुत बुरा लगा .... बहुत ज्यादा! इन्होने कुछ नहीं कहा और बाहर चले गए...... मैं अपने कमरे में आई और सोचने लगी की आखिर 'इन्होने' ऐसा behave क्यों किया? क्या अंजलि ने जो कहा उसके कारन? या फिर ये उस दिन की बात के लिए 'ये' अब भी मुझसे नाराज थे? फिर मुझे लगा की 'इन्हें' उस दिन कैसा लगा होगा जब मैंने इनके साथ इसी तरह behave किया था? हाँ .... हो न हो... ये मुझे feel करवा रहे थे की 'इन्हें' उस दिन कैसे लगा था! मैंने सोचा इनके आने पर मैं इनसे माफ़ी माँग लूँगी.... मैं उठी और lunch की तैयारी में लग गई| खाने के समय तक पिताजी और 'ये' दोनों लौट आये थे| 'ये' सीधा हमारे कमरे में fresh होने चले गए... और मैं भी इनके पीछे-पीछे कमरे में पहुँच गई| उस समय 'ये' bathroom में थे... मैं सोचने लगी की बात शुरू कैसे करूँ?

अब आगे.........

जैसे ही ये bathroom से बाहर आये और तौलिये से अपना मुँह पोंछने लगे मैंने बात शुरू की; "आप ये दाढ़ी क्यों बढ़ा रहे हैं? आप clean shave कितने अच्छे लगते थे..... आपको पता है कितने time से मैंने आपके गालों को kiss नहीं किया| जब भी मैं आपको kiss आने आती हूँ तो ये दाढ़ी बीच में आ जाती है| मेरा भी मन करता है की मैं आपके गाल पर वो 'love bites' बनाऊँ... और फिर आपको भी तो पसंद हैं वो....!!! " (मैंने इन्हें आँख मारते हुए कहा|)

"जानू मैं इसलिए दाढ़ी रखता हूँ ताकि mature लगूँ ... clean shave में मैं बच्चा लगता हूँ! अब तो जल्दी ही तीन बच्चों का बाप बनने वाला हूँ कम से कम अब तो mature लगने दो!"

"तो क्या तीन बच्चों का बाप clean shave नहीं रह सकता?" मैंने सवाल किया|

"यार समझा करो... मुझे तुम्हारे compatible लगना है|"

"असल में तो मुझे आपके compatible लगना चाहिए.... “

"वो तुमसे होगा नहीं!" इन्होने मुझे टोंट मारा|

इसका टोंट का कारन ये है की मैंने अस बहु बनने का ही इरादा कर रखा था| जबकि इनका कहना था की बहु बनने के साथ थोड़ा fashionable भी दिखो| इसलिए शुरू-शुरू में ये मेरे लिए अलग-अलग तरह की साड़ियाँ लाते थे...वो करधनी जो हमने हमारे family holiday cum honeymoon पर ली थी वो भी ऐसी की ऐसी रखी है| इतनी सुन्दर-सुन्दर साड़ियाँ ...wow .... पहनों तो लगे जैसे की कोई 'महारानी'! और एक मैं पागल हूँ जो उन्हें पैक कर के रखती हूँ| designer झुमके ... nail polish ..... पायल..... काजल ... lipstick .... सब ला कर दिया इन्होने... और तो और इनकी पसंद की मैं कायल हूँ| सच में ...... मैं इनकी पसंद की कुछ कदर ही नहीं करती| और ये हैं की इन्होने मुझे टोकना भी बंद कर दिया... हाँ वैसे भी इतनी बार प्यार से बोला ... समझाया मुझे...पर मैं ने कभी इनकी बात नहीं मानी| आप लोग भी सोचेंगे की कैसी पत्नी है? अपनी पति की ख़ुशी के लिए इतना भी नहीं करती....... और ये हाल तो तब है जब पिताजी (ससुर जी) या माँ (सासु जी) को मेरे सजने सँवारने पर कोई ऐतराज नहीं है| पर इनकी ई एक खासियत है.... ये अभी तक यहीं बदले... जरा भी नहीं... मैं जैसी थी इन्होने मुझे वैसा ही accept किया... वही गाँव की गंवार जैसी बीवी... और इन्हें अब भी मुझ पर फक्र है! कभी मुझे बदलने के लिए यहीं कहा.... अभी तक जो भी मैं खुद को बदल सकी वो इसलिए ताकि हमारे बच्चों को हमारे कारन कोई embarrassment न झेलनी पड़े| खेर उस दिन मुझे एक बात समझ आई.... वो ये की दुनिया की नजर में मेरी उम्र और 'इनकी' उम्र में अंतर साफ़ झलकता था| उस अंतर को छुपाने के लिए 'इन्होने' दाढ़ी उगाने का सहारा लिया| 'ये' मुझसे इतना प्यार करते हैं की इन्होने ये बात मुझसे छुपाई........कारन ये की 'ये' मुझे दुखी नहीं करना चाहते थे..... इतना प्यार करते हैं ये मुझसे!

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उस दिन मुझे एक बात समझ आई.... वो ये की दुनिया की नजर में मेरी उम्र और 'इनकी' उम्र में अंतर साफ़ झलकता था| उस अंतर को छुपाने के लिए 'इन्होने' दाढ़ी उगाने का सहारा लिया| 'ये' मुझसे इतना प्यार करते हैं की इन्होने ये बात मुझसे छुपाई........कारन ये की 'ये' मुझे दुखी नहीं करना चाहते थे..... इतना प्यार करते हैं ये मुझसे!

अब आगे.....

उस दिन शाम को पिताजी को 'इन्होने' नेहा की सारी रिपोर्ट दी और अब हमें क्या करना है उसके बारे में भी बताया| इनकी बात सुन कर मैं थोड़ा हैरान रह गई.... पता नहीं ये क्या-क्या सोचते रहते हैं| 'इन्होने' अपने प्लान पर काम करना शुरू कर दिया..........

रात को खाना खाने के बाद मैंने आयुष को सुला दिया .... इधर ‘इन्होने’ नेहा से कह दिया की; "बेटा... मुझे आपसे दो मिनट बात करनी है| आप फ्री हो कर आ जाना|" नेहा तुरंत ही अपना बैग पैक कर के हमारे कमरे में आ गई और हम दोनों के बीच में बैठ गई| 'इन्होने' पहले उसका माथा चूमा ... उसे अपने सीने से लगाया और फिर बात शुरू की;

"नेहा... बेटा क्या सच में आपका कोई best friend नहीं है?"

"नहीं पापा... मुझे किसी best friend की जर्रूरत नहीं, आप जो हो मेरे पास!"

"पर बेटा एक friend तो हर एक को चाहिए होता है|" मैंने कहा|

"पर किस लिए मम्मी?"

"बेटा... आप उससे अपने दिल की हर बात कर सकते हो|" इन्होने मेरी बात को आगे बढ़ाया|

"वो तो मैं करती हूँ.... आप से|"

"आप उससे हंसी मजाक करते हो.... उसके साथ घूमने जाते हो.... उससे homework में मदद लेते हो... खाते-पीते हो... enjoy करते हो|" इन्होने नेहा को और विवरण दिया|

"पापा.... मैं आपके साथ हँसी-मजाक करती हूँ... आपके साथ घूमने जाती हूँ... आप अलग-अलग तरह का खाना खिलते हो.... इतना enjoy आर्वाटे हो....और रही बात homework में मदद लेने की तो उसकी मुझे कोई जर्रूरत ही नहीं| मैं पहले से ही पढ़ाई में बहुत sharp हूँ... और ये बात मुझे दादाजी कहते हैं| फिर ऐसे में मुझे एक friend की क्या जर्रूरत? आप हो ना उसकी कमी पूरी करने के लिए?" "पर मैं हमेशा तो नहीं रहूँगा ना?" 'इन्होने' काफी गंभीर होते हुए कहा| ये सुन कर नेहा की आँखें भर आईं…….उसने रोते-रोते कहा; "आप ऐसा क्यों बोल रहे हो पापा?"

"बेटा... मैं सच कह रहा हूँ| एक न एक दिन तो सब को......." मैंने 'इनके' कुछ कहने से पहले 'इनके' होंठों पर हाथ रख 'इन्हें' आगे कुछ बोलने से रोक दिया| "आप प्लीज ऐसा मत बोलो|" मैंने इन्हें मना किया क्योंकि नेहा बहुत दुखी हो गई थी| इन्होने नेहा के आँसुं पोछे और उसे अपने सीने से लगा लिया| कमरे में सन्नाटा छा गया..... दस मिनट तक हम सब चुप रहे|

"नेहा.... बस बेटा अब रोना नहीं..... अब बताओ क्या बात है? क्यों आपके friends नहीं हैं?" इन्होने नेहा को पुचकारते हुए पूछा| पर नेहा ने जवाब में अपना सर झुका लिया... नजरें नीचे कर जैसे इस सवाल से बचना चाह रही थी|

"बोलो बेटा..." मैंने भी थोड़ा जोर दिया|

"आप दोनों भी यही सवाल पूछ रहे हो? उधर वो आंटी जी भी यही अवाल पूछ रही थीं| मेरे दोस्त ना होने का बुरे सपने देखने से क्या लेना-देना है?" नेहा की बात सुन कर मैं चौंक गई और 'इनकी' तरफ हैरानी से देखने लगी| पर इनके चेहरे पर मुझे जरा भी हैरानी नहीं दिखी.... जैसे की ये सब जानते हों| फिर 'इन्होने' मेरी तरफ देखा और बुद-बढ़ाते हुए कहा; "जैसी माँ ... वैसी बेटी!" .... मतलब मेरी ही तरह नेहा भी छुप-छुप कर बातें सुना करती थी| एक बात साफ़ हो गई थी.... की कुछ तो था जो नेहा हम से छुपा रही थी|"नेहा..." इन्होने नेहा का हाथ पकड़ा और अपने सर पर रख दिया और उसे अपनी कसम दे डाली; "आपको मेरी कसम... बोलो क्या बात है?"

नेहा की आँखें फिर छलक आईं और उसने रोते-रोते सब बोला; "मेरी क्लास में एक लड़का है.... वो और उसके दोस्त मुझे बहुत चिढ़ाते हैं!"

"क्यों? मेरी बेटी ना तो मोती है... ना पतली है.... ना उसे चस्मा लगा है.... तो फिर वो तुम्हें क्यों चिढ़ाते हैं?" मैंने कारन पूछा| नेहा फिर से चुप हो गई.....

"नेहा ... अपने पापा से बातें छुपाओगे|" इनका कहना था की नेहा फिर से इनके सीने से लग गई और फफक-फफ़क के रोने लगी.....

"वो मुझे आप दोनों के......... शादी.....करने से......" नेहा ने बहुत मुश्किल से ये सब बोला| इन्होने नेहा को अपने सीने से लगाए रखा और उसकी पीठ सहलाने लगे|

बात हमें समझ आ गई थी..... हमारी शादी ....... इस समाज के लिए चर्चा का बहुत बड़ा topic है.... लोगों को हमारा प्यार नजर नहीं आता..... बल्कि हमें और हमारे परिवार को वो उंच-नीच के बंधनों से बाँध कर रखना चाहते हैं! मैं इनसे प्यार करती हूँ... 'ये' मुझसे प्यार करते हैं... तो दुनिया को प्रॉब्लम क्या है? क्यों हमें हैं से नहीं जीने देती? बाकायदा शादी की है 'इन्होने' मुझसे फिर भी दुनिया को बस हमारी उम्र के अंतर में ज्यादा रूचि है! क्यों हमारे इस प्यार की सजा हमारे बच्चों को दी जाती है?

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