S
StoryPublisher
Guest
बात हमें समझ आ गई थी..... हमारी शादी ....... इस समाज के लिए चर्चा का बहुत बड़ा topic है.... लोगों को हमारा प्यार नजर नहीं आता..... बल्कि हमें और हमारे परिवार को वो उंच-नीच के बंधनों से बाँध कर रखना चाहते हैं! मैं इनसे प्यार करती हूँ... 'ये' मुझसे प्यार करते हैं... तो दुनिया को प्रॉब्लम क्या है? क्यों हमें हैं से नहीं जीने देती? बाकायदा शादी की है 'इन्होने' मुझसे फिर भी दुनिया को बस हमारी उम्र के अंतर में ज्यादा रूचि है! क्यों हमारे इस प्यार की सजा हमारे बच्चों को दी जाती है?
अब आगे......
पर अभी नेहा की बात पूरी नहीं हुई थी........ 'इन्होने' थोड़ा प्यार से जोर दे कर उससे पूछा; "बेटा... उस लड़के का नाम क्या है जो आपको तंग करता है?" नेहा ने सुबकते हुए अपनी बात पूरी की; "अक्षय....यादव..... वो हमारी..... ही ..... गली में....... रहता है...... हमेशा मुझे tease करता है....... कहता है.... तेरे पापा ने ...... अपने से ........... बड़ी............ लड़की से.......... " बस आगे बोलते-बोलते नेहा फिर से रो पड़ी| इन्होने उसे चुप कराना चाह.... "बस मेरी बच्ची..... बस....."
"वो..... किसी को ...... मेरा .....दोस्त नहीं ........ बनने देता| जब भी. कोई मुझसे........ बात करता... है तो ये......उसे भी चिढ़ाने लगता है........ इसलिए कोई...... मुझसे बात ..नहीं करता|" नेहा ने रोते-रोते कहा .... और फिर उसे खाँसी आ गई| मैंने जल्दी से उठ कर उसे पानी ला कर दिया और इन्होने उसे अपनी गोद में बिठाया हुए पानी पिलाया और उसकी पीठ को सहला कर उसे शांत किया| "बस बेटा.... अब मेरी बच्ची को कोई तंग नहीं करेगा|" नेहा की बातें मेरे दिलों-दिमाग में घर कर गईं.... मुझे खुद से नफरत होने लगी| मेरे एक गलत फैसले ने मेरी बच्ची को इतना दुःख दिया.... सच में मैं बहुत स्वार्थी हूँ...... अपने बच्चों के भविष्य के बारे में जरा भी नहीं सोचा| अपने प्यार को पाने के लिए मैंने बच्चों का भविष्य दाँव पर लगा दिया! कैसी माँ हूँ मैं? यही सोच-सोच कर मैं अंदर ही अंदर कुढ़ने लगी थी..... मुझे पता ही नहीं चला कब इन्होने नेहा को गोद में ले कर सुला दिया और उसे आयुष वाले कमरे में लिटा कर आ गए| "संगीता....संगीता.....hey ......" इनकी आवाज सुनकर मैं अपने ख्यालों से वापस आई|"क्या हुआ? क्या सोच यही हो?" 'इन्होने सवाल पूछा... और जो मेरे दिमाग में चल रहा था मैंने वो सब बोल दिया|"
"हमारी एक गलती ने बच्चों की ये हालत कर दी|" मेरे इस पूरे वाक्य में 'इन्हें' "गलती" शब्द बहुत बुरा लगा ... और ये मुझपर बरस पड़े|
"गलती..... मेरे प्यार को तुम गलती का नाम देती हो? आयुष मेरी गलती है? या फिर ये बच्चा जो तुम्हारी कोख में है वो एक गलती है? how could you say this? i don't give a danm what this society thinks of me and you .... what really matters is YOU! और तुम्हें ये प्यार गलती लगता है तो सच में मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गई|" इसके आगे इन्होने कुछ नहीं कहा और ये कम्बल ओढ़ कर दूसरी तरफ मुँह कर के लेट गए| मुझे एहसास हुआ की मैंने इनका दिल दुखाया है..... हमारे 'पाक़' प्यार को मैंने 'गलती' कह कर इनके प्यार को गाली दी है| जो इंसान मेरे साथ अपनी पूरी जिंदगी बिताने के लिए अपने परिवार से लड़ पड़ा हो ... उसके प्यार को 'गलती' कहना उसके दिल को चोट पहुँचाना हुआ| मैं 'इनकी' बगल में लेट गई और इन्हें sorry बोलने लगी..... "sorry जानू.... प्लीज मुझे माफ़ कर दो! मेरा ये मतलब नहीं था.... प्लीज.... प्लीज...." पर 'इन्होने' कोई जवाब नहीं दिया और दूसरी तरफ करवट किये हुए लेटे रहे| मैंने जोर लगा कर 'इन्हें' अपनी तरफ घुमाया और फिर 'इनके' दाहिने हाथ को अपना तकिया बनाया और अपना दाहिना हाथ 'इनकी' छाती पर रख सो गई| सच में .... चाहे कितनी भी tension हो... गम हो... तकलीफ हो... इनके हाथों को तकिया बनाके कर लेटते ही सब भूल जाती हूँ|इनका दिल इतना बड़ा है की मेरी हर गलती माफ़ कर देते हैं.... रात तीन बजे फिर से दरवाजे पर दस्तक हुई... मैं जानती थी की नेहा होगी... इसलिए मैं जल्दी से उठी और उसे गोद में उठा कर लाइ ... उसके माथे को चूमा और फिर इनकी बगल में लिटा दिया| फिर मैं बाहर गई और आयुष को भी गोद में उठा लाइ और उसे भी नेहा के बगल में लिटा दिया|
सुबह मैं 'इनके' जागने से पहले उठ गई.... माँ-पिताजी को चाय दी और बच्चों को बारी-बारी तैयार कर दिया| जब 'इनकी' चाय ले कर आई तो देखा 'ये' अब भी सो रहे थे| 'इन्हें' सोता हुआ तो मैंने कई बार देखा था.... पर आज कुछ ज्यादा ही प्यार आ रहा था 'इन' पर! जैसे एक छोटा बच्चा सोते समय cute लगता है... वैसे ही आज 'ये' भी सोते हुए बहुत cute लग रहे थे| मुझसे खुद पर काबू नहीं रहा .... मैंने चाय 'इनके' सिरहाने राखी और इनके पास बैठ गई और 'इन्हें' प्यार निहारने लगी..... आँखें जैसे तृप्त ही नहीं हो रही थीं.... क़ाश सारी जिंदगी 'इनको' निहारती रहूँ! इनके अधरों को देख ... मेरा मन मचलने लगा था..... और जब खुद पर काबू ना रहा तो मैंने झुक कर उन अधरों को चूम लिया| मेरे दोनों हाथ इनके गालों पर थे .... दिल नहीं कर रहा था की इनके अधरों को अपने होठों की गिरफ्त से आजाद करूँ.... शुरू-शुरू में इनकी तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं हो रही थी..... क्योंकि ये अभी भी नींद में थे| फिर धीरे-धीरे इनके अधरों ने भी जवाब देना शुरू कर दिया| मेरा दिल नहीं चाहता था की वो परमसुख जो मुझे आज इतने दिनों के बाद मिल रहा है वो ख़त्म हो.... (आयुष के जन्मदिन से ले कर आजतक इन्होने मुझे छुआ नहीं था|) पर किसी न सच ही कहा है... हर अच्छी चीज कभी न कभी ख़त्म हो ही जाती है| वही मेरे साथ उस दिन हुआ.... आयुष एक दम से कमरे में आ गया और उसकी हहलकदमी ने हमारा वो 'चुम्बन' disturb कर दिया| मैं शर्म के मारे बाथरूम में घुस गई... और ये भी उठ बैठे|
मैं बाथरूम में खड़ी दोनों की बातें सुनने लगी....
"पापा कल रात को एक जादू हुआ|"
"अच्छा... क्या जादू हुआ?"
"मैं कल अपने कमरे में सोया था... और सुबह उठा तो आपके बेड पर था|" ये सुन कर 'ये' हँस पड़े.... और तभी मैं भी बाहर आ गई| मुझे देख इन्होने कहा; "बेटा ... ये जादू आपकी माँ का है| आज सुबह मेरे साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ.... मैं तो सपना देख रहा था की मैं. आप और नेहा hide and seek खेल रहे हैं.... आप दोनों छुपे हुए हो और मैं आप दोनों को ढूँढ रहा हूँ….. की नजाने कहाँ से एक परी आ गई... और मुझसे बात कर रही है| फिर अचानक से...." इनकी बात पूरी होने से पहले आयुष बोल उठा; "और मम्मी ने आपको kiss किया| ही...ही...ही...ही..." उसकी बातें सुन कर मेरे गाल शर्म से लाल हो गए| तभी नेहा भी आ गई और आयुष को गुस्सा करने लगी; "शैतान..... बहुत बदमाश हो गया है तू! मम्मी..... सब लड़के एक जैसे होते हैं|" ये कहते हुए नेहा ने मेरा पक्ष लिया..... ये मेरे लिए पहलीबार था! 'ये' मेरी तरफ देख मुस्कुरा रहे थे और मेरे गाल लाल हो रहे थे......!
______________________________
I LOVE YOU MY DEAR HUBBY!
अब आगे......
पर अभी नेहा की बात पूरी नहीं हुई थी........ 'इन्होने' थोड़ा प्यार से जोर दे कर उससे पूछा; "बेटा... उस लड़के का नाम क्या है जो आपको तंग करता है?" नेहा ने सुबकते हुए अपनी बात पूरी की; "अक्षय....यादव..... वो हमारी..... ही ..... गली में....... रहता है...... हमेशा मुझे tease करता है....... कहता है.... तेरे पापा ने ...... अपने से ........... बड़ी............ लड़की से.......... " बस आगे बोलते-बोलते नेहा फिर से रो पड़ी| इन्होने उसे चुप कराना चाह.... "बस मेरी बच्ची..... बस....."
"वो..... किसी को ...... मेरा .....दोस्त नहीं ........ बनने देता| जब भी. कोई मुझसे........ बात करता... है तो ये......उसे भी चिढ़ाने लगता है........ इसलिए कोई...... मुझसे बात ..नहीं करता|" नेहा ने रोते-रोते कहा .... और फिर उसे खाँसी आ गई| मैंने जल्दी से उठ कर उसे पानी ला कर दिया और इन्होने उसे अपनी गोद में बिठाया हुए पानी पिलाया और उसकी पीठ को सहला कर उसे शांत किया| "बस बेटा.... अब मेरी बच्ची को कोई तंग नहीं करेगा|" नेहा की बातें मेरे दिलों-दिमाग में घर कर गईं.... मुझे खुद से नफरत होने लगी| मेरे एक गलत फैसले ने मेरी बच्ची को इतना दुःख दिया.... सच में मैं बहुत स्वार्थी हूँ...... अपने बच्चों के भविष्य के बारे में जरा भी नहीं सोचा| अपने प्यार को पाने के लिए मैंने बच्चों का भविष्य दाँव पर लगा दिया! कैसी माँ हूँ मैं? यही सोच-सोच कर मैं अंदर ही अंदर कुढ़ने लगी थी..... मुझे पता ही नहीं चला कब इन्होने नेहा को गोद में ले कर सुला दिया और उसे आयुष वाले कमरे में लिटा कर आ गए| "संगीता....संगीता.....hey ......" इनकी आवाज सुनकर मैं अपने ख्यालों से वापस आई|"क्या हुआ? क्या सोच यही हो?" 'इन्होने सवाल पूछा... और जो मेरे दिमाग में चल रहा था मैंने वो सब बोल दिया|"
"हमारी एक गलती ने बच्चों की ये हालत कर दी|" मेरे इस पूरे वाक्य में 'इन्हें' "गलती" शब्द बहुत बुरा लगा ... और ये मुझपर बरस पड़े|
"गलती..... मेरे प्यार को तुम गलती का नाम देती हो? आयुष मेरी गलती है? या फिर ये बच्चा जो तुम्हारी कोख में है वो एक गलती है? how could you say this? i don't give a danm what this society thinks of me and you .... what really matters is YOU! और तुम्हें ये प्यार गलती लगता है तो सच में मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गई|" इसके आगे इन्होने कुछ नहीं कहा और ये कम्बल ओढ़ कर दूसरी तरफ मुँह कर के लेट गए| मुझे एहसास हुआ की मैंने इनका दिल दुखाया है..... हमारे 'पाक़' प्यार को मैंने 'गलती' कह कर इनके प्यार को गाली दी है| जो इंसान मेरे साथ अपनी पूरी जिंदगी बिताने के लिए अपने परिवार से लड़ पड़ा हो ... उसके प्यार को 'गलती' कहना उसके दिल को चोट पहुँचाना हुआ| मैं 'इनकी' बगल में लेट गई और इन्हें sorry बोलने लगी..... "sorry जानू.... प्लीज मुझे माफ़ कर दो! मेरा ये मतलब नहीं था.... प्लीज.... प्लीज...." पर 'इन्होने' कोई जवाब नहीं दिया और दूसरी तरफ करवट किये हुए लेटे रहे| मैंने जोर लगा कर 'इन्हें' अपनी तरफ घुमाया और फिर 'इनके' दाहिने हाथ को अपना तकिया बनाया और अपना दाहिना हाथ 'इनकी' छाती पर रख सो गई| सच में .... चाहे कितनी भी tension हो... गम हो... तकलीफ हो... इनके हाथों को तकिया बनाके कर लेटते ही सब भूल जाती हूँ|इनका दिल इतना बड़ा है की मेरी हर गलती माफ़ कर देते हैं.... रात तीन बजे फिर से दरवाजे पर दस्तक हुई... मैं जानती थी की नेहा होगी... इसलिए मैं जल्दी से उठी और उसे गोद में उठा कर लाइ ... उसके माथे को चूमा और फिर इनकी बगल में लिटा दिया| फिर मैं बाहर गई और आयुष को भी गोद में उठा लाइ और उसे भी नेहा के बगल में लिटा दिया|
सुबह मैं 'इनके' जागने से पहले उठ गई.... माँ-पिताजी को चाय दी और बच्चों को बारी-बारी तैयार कर दिया| जब 'इनकी' चाय ले कर आई तो देखा 'ये' अब भी सो रहे थे| 'इन्हें' सोता हुआ तो मैंने कई बार देखा था.... पर आज कुछ ज्यादा ही प्यार आ रहा था 'इन' पर! जैसे एक छोटा बच्चा सोते समय cute लगता है... वैसे ही आज 'ये' भी सोते हुए बहुत cute लग रहे थे| मुझसे खुद पर काबू नहीं रहा .... मैंने चाय 'इनके' सिरहाने राखी और इनके पास बैठ गई और 'इन्हें' प्यार निहारने लगी..... आँखें जैसे तृप्त ही नहीं हो रही थीं.... क़ाश सारी जिंदगी 'इनको' निहारती रहूँ! इनके अधरों को देख ... मेरा मन मचलने लगा था..... और जब खुद पर काबू ना रहा तो मैंने झुक कर उन अधरों को चूम लिया| मेरे दोनों हाथ इनके गालों पर थे .... दिल नहीं कर रहा था की इनके अधरों को अपने होठों की गिरफ्त से आजाद करूँ.... शुरू-शुरू में इनकी तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं हो रही थी..... क्योंकि ये अभी भी नींद में थे| फिर धीरे-धीरे इनके अधरों ने भी जवाब देना शुरू कर दिया| मेरा दिल नहीं चाहता था की वो परमसुख जो मुझे आज इतने दिनों के बाद मिल रहा है वो ख़त्म हो.... (आयुष के जन्मदिन से ले कर आजतक इन्होने मुझे छुआ नहीं था|) पर किसी न सच ही कहा है... हर अच्छी चीज कभी न कभी ख़त्म हो ही जाती है| वही मेरे साथ उस दिन हुआ.... आयुष एक दम से कमरे में आ गया और उसकी हहलकदमी ने हमारा वो 'चुम्बन' disturb कर दिया| मैं शर्म के मारे बाथरूम में घुस गई... और ये भी उठ बैठे|
मैं बाथरूम में खड़ी दोनों की बातें सुनने लगी....
"पापा कल रात को एक जादू हुआ|"
"अच्छा... क्या जादू हुआ?"
"मैं कल अपने कमरे में सोया था... और सुबह उठा तो आपके बेड पर था|" ये सुन कर 'ये' हँस पड़े.... और तभी मैं भी बाहर आ गई| मुझे देख इन्होने कहा; "बेटा ... ये जादू आपकी माँ का है| आज सुबह मेरे साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ.... मैं तो सपना देख रहा था की मैं. आप और नेहा hide and seek खेल रहे हैं.... आप दोनों छुपे हुए हो और मैं आप दोनों को ढूँढ रहा हूँ….. की नजाने कहाँ से एक परी आ गई... और मुझसे बात कर रही है| फिर अचानक से...." इनकी बात पूरी होने से पहले आयुष बोल उठा; "और मम्मी ने आपको kiss किया| ही...ही...ही...ही..." उसकी बातें सुन कर मेरे गाल शर्म से लाल हो गए| तभी नेहा भी आ गई और आयुष को गुस्सा करने लगी; "शैतान..... बहुत बदमाश हो गया है तू! मम्मी..... सब लड़के एक जैसे होते हैं|" ये कहते हुए नेहा ने मेरा पक्ष लिया..... ये मेरे लिए पहलीबार था! 'ये' मेरी तरफ देख मुस्कुरा रहे थे और मेरे गाल लाल हो रहे थे......!
______________________________
I LOVE YOU MY DEAR HUBBY!