S
StoryPublisher
Guest
वो गाडी तेजी से उस रस्ते से गुज़र रही थी जिसके दोनों ओर घने जंगल थे.....नीम अँधेरे में हेडलाइट की रौशनी ही सिर्फ आगे के रास्ते को उजागर कर रही थी...अचानक सहमे हुए राम ने दूसरा सिगरेट का कश लगा लिया.....वो दहशत में था| और उसके हाथ सर्द रात और अबतक हुए कॉटेज में बिताये पलो को याद करते ही सिहर उठ रहा था | ऐसा लग रहा था जैसे अचानक कोई उसके सामने आ खड़ा होगा|
अचानक गाडी हिचकोले खाने लगी राम सिगरेट को मुंह से निकालते हुए गियर पे गियर मारते रहा...लेकिन गाडी थम चुकी थी |
उसे अहसास हुआ की गाडी अपने आप ठहर गयी थी| उसने उतरते हुए तेजी से गाड़ी का इंजन फाटक खोला तो उसके हाथ जल गए "ससस आआहहह".........उसने जलन होने से अपने हाथो को फूंका
"डैम इट"........उसने गाडी को एक ठोखर मारी.....इंजन गरम हो गया था और उससे धुआँ निकल रहा था|
डेड लेक से बहार निकलना उसका बेहद ज़रूरी था....वो फिर उलटे पाव वापिस कॉटेज नहीं पहुंच सकता था वो काफी दूर निकल आया था| अचानक उसे एक घुटती सी आवाज़ दोहराई अपने कानो में महसूस की...उसका पूरा जिस्म सिहर उठा.....उसने पलटके जब देखा तो खामोशी और वीरान जंगल के सिवाय कुछ नहीं था....
तभी उसने इंजन डोर जैसे वापिस लगायी....अचानक उसके प्राण काँप उठे|
"आअह्ह्ह्ह नहहहहह्ही"...............राम एकदम चीख उठा | उस वक़्त उसने अपने मुंह पे हाथ रख लिया था| उसका पूरा शरीर थर्राये काँप उठ रहा था.....क्यूंकि सामने दिल को दहला देने वाला जैसे वो दृश्य था | क्यूंकि ठीक सामने इंजन दूर के लगते ही उसने देखा की उसकी कार की सीट के भीतर एक कटा हुआ सर उसे देखके ठहाका लगाये हस्स रहा था| खौफनाक मंज़र ऐसा कभी राम ने नहीं देखा था|
उसने फ़ौरन अपनी गन उठायी और कांपते हुए उसकी ओर निशाना साधा...."हाहाहा हाहाहा हाहाहा हाहाहाहाहा हाहाहा"........हस्ती जा रही थी वो उसके खौफनाक चेहरे को ब्यान करना मुश्किल था | उसके पुरे चेहरे पे खरोच के निशाँ थे गर्दन धढ़ से जो अलग हुयी थी वहा से अब भी ताजा खून बह रहा था| उसके बाल उसके चेहरे के दोनों झूल रहे थे और उसकी आँखे सुर्ख सफ़ेद लाल थी| ऐसा लग रहा था जैसे किसी मुर्दे का ज़िंदा सर हो| उसे देखते ही देखते राम चिल्ला उठा.....उसका दिल उसके मुंह को आने लगा उसे मालूम ही नहीं हुआ|
उसने फ़ौरन चीखा "चुप आई सेड गेट डी फ़क ऑफ माय साइट"........कहते कहते उसके कांपते हाथो ने ट्रिगर खींच दिया.....धच्च...एक गोली सीधे गाडी के शीशो को तोड़ते हुए उसके सीट में जा धसी.......लेकिन उसकी हैरत तब हुयी जब उसने पाया की सीट पर कोई सर कटी हुयी मौजूद ही नहीं थी|
धीरे धीरे करके राम गाड़ी के तरफ आने लगा....उसने पास आते हुए अंदर झाका और एक झटके में गाड़ी का दरवाजा खोल दिया....वहा कुछ भी मौजूद नहीं था.........उसने अपने सर को पकड़ लिया..क्यूंकि वो यकीनन उसका भ्रम नहीं था| उसने एक बार गाड़ी के पीछे भी सावधानी से सेहमते हुए झाँका लेकिन वहा कुछ नहीं था| उस वक़्त उसे अपने कानो में हवाओ का शोर सुनाई देने लगा| हो हो करती सर्द हवाएं चल रही थी.....उसका दिल फिर काँप उठ रहा था | उसने एक डिब्बा गाड़ी की डिक्की से निकाला फिर कुछ दिएर सोचते हुए अपनी गन को बाए हाथ में ही लिए वो सड़क से निचे उतरते हुए उन घने जंगलो में प्रवेश करने लगा|
काफी अँधेरा था| झींगुर की किड़ किड़ करती आवाज़ उसे उस नीमअँधेरे और खामोश वीरान जंगलो में हर तरफ से सुनाई दे रही थी....वो एक एक कदम बड़ी सावधानी से रख रहा था| अचानक उसने देखा की वो जितना घने जंगलो के भीतर जा रहा था आस पास उसे सिर्फ जंगल झाड़ के कोई पानी मिलने का विकल्प नहीं मिल रहा था| आखिर में हार मानते हुए वो वही एक पेड़ पे सर टिकाये कुछ देर के लिए आँखे मूंदे खड़ा रहा| एक तो वो भयंकर रात ऊपर से नींद जैसे उसके आँखों में चढ़ रही थी| ऊपर से उसे डेड लेक से बहार निकलना था| अचानक उसे अहसास हुआ जैसे उसके चेहरे पे टप टप करते हुए कुछ पड़ रहा था...उसने आँख खोलते हुए अपने चेहरे पे लगे उन बूंदो को देखा तो हाथ में उसके खून लग गया| वो आँखे बड़ी किये अपनी गर्दन को ऊपर की तरफ जैसे जैसे उठाने लगा खौफ्फ़ उसके दिल में समां उठी|
क्यूंकि पेड़ पर उसे एक सर कटी लाश दिखी| साहिल ने जो बयानात दिया था ये उसी औरत की सर कटी झूलती हवा में तैरती वो लाश उसे जान पड़ी....."नही नहीं नहीं आह्हः"..........भौकलया राम डब्बे को वही फैख आनन् फानन वापिस उलटे पाव जंगल से बाहर की तरफ भागने लगा..."बचाओ मुझे somebudy हेल्प मी".........वो चीखता डरता हुआ वापिस गिरते पड़ते अपनी गाड़ी की तरफ आने लगा...और उसी पल उसने देखा की कोहरा बहुत ज़्यादा छाया हुआ था| एका एक उसे बहुत लोगो की ठहाका लगाती वो हसी सुनाई देने लगी...."हहहह हाहाहा हाहाहा हाहाहा".........."शट अप आई सेड शट अप"..........अंधाधुंध अपने कान को पकडे भौखलाये अवस्था में राम ने उस कोहरे में फायरिंग शुरू कर दी| लेकिन जितनी बार भी उसने गोलिया चलाई उतनी बार उसे सिर्फ ठहाका लगाती गूंजती वो हसी सिर्फ सुनाई दे रही थी| उसने अपने कान पकड़ लिए उसने उसी कोहरे में भागते हुए जैसे तैसे गाड़ी का दरवाजा खोला तो उस हाथ ने कस्सके उसके गर्दन को जकड लिया
"आह्हः स आह्हः उग्गहह"......अपने गले से उस कटे हाथ को छोड़ने की नाकाम कोशिशे राम कर रहा था उसकी आँख खौफ्फ़ से फटी जा रही थी...क्यूंकि उसने देखा की गाड़ी में सैकड़ो मुर्दे जैसे उसे ही देख रहे थे उनका चेहरा इतना भयंकर था की ब्यान करना मुश्किल...."नहीं नहीं छोड़ दो मुझे जाने दो आह्हः आह्हः"...........मुर्दो ने जैसे बारी बारी से उसके मासो को खाना शुरू कर दिया....राम दर्द के अहसास से चीखते हुए उन्हे अपने से दूर धकेलना चाह रहा था लेकिन उस सर कटी लाश ने उसे अपनी गिरफ्त में खींच लिया था| राम को उन सबने मिलके गाड़ी में जैसे खींच लिया...दरवाजा अपने आप गाड़ी का लग गया| खून से लथपथ बस वो हाथ शीशो पे राम के घिस रहे थे| दर्दनाक चीखो का सिलसिला कुछ दिएर तक यु ही चलता रहा| उसके बाद राम की आखरी वो दर्दनाक चीख थी जिसके बाद गाड़ी के निचले हिस्सों से बस खून बहते हुए निकल रहा था|
______________________________
धढ़ धढ़.....एका एक साहिल दिप और अरुण ने मिलके उस लकड़ी के बने दिवार के पल्लो को अपनी ताक़त से तोड़ दिया था| जब वो भीतर दाखिल हुए तो अंदर गुप् अँधेरा था| रैना और सौम्य अभी भी जिस कमरे से वो उस कमरे में प्रवेश किये थे उसके ठीक पहले वाले कमरे में ही मौजूद थे| अरुण ने उसी पल टोर्च जलाते हुए चारो तरफ मारा| डीप ने देखा की पुरे दीवारों पे मकड़ी की जालिया थी| और बहुत जर्जर सी उस कमरे की हालत हो गयी थी | वो रूम किसी कबाड़खाने जैसा लग रहा था|
"ये यकीनन मैरी का सिंगल रूम होगा जहा वो वक़्त बिताया करती थी देखो उसकी हर तरफ तस्वीरें लगी हुयी है....वो देखो वहा पे उसका हस्बैंड फर्नांडेस की तस्वीर है ये शादी की तस्वीर लग रही है न?".........अरुण ने सहमति में डीप के कहे को सुना
"ये देखो ग्रामोफ़ोन"..........साहिल ने इस बार टोका....पीछे पीछे रूम में टोर्च मारते हुए रैना और सौम्य भी चारो ओर नज़र फिरा रहे थे| "लेकिन दीप हुम्हे इस कमरे से क्या हासिल होगा ऐसे तो कई और भी रूम्स है जो अबतक हमने खोले नहीं है"..........."नहीं अरुण इस कॉटेज का ये एक मात्रा कमरा है जहाँ मुझे अजीब सा महसूस हो रहा है कुछ न कुछ तो ज़रूर जानने को मिलेगा".........अभी उन दोनों की बात सब सुन ही रहे थे की इतने में सौम्या को अपने पीछे किसी के होने की मौजूदगी सी हुयी|
उसने सेहमते हुए पलटकर जैसे पीछे की ओर देखा...तो उसकी चीख निकल गयी...."फर्नांडेस"........चीखते हुए हर कोई हड़बड़ाए सौम्य की तरफ हुआ.....एका एक रैना भी उस वक़्त चीख उठी....जावेद और साहिल भी काँप उठे.....दीप ने पाया की सच में दिवार के एक कोने पर फर्नांडेस के ही कपड़ो में एक कंकाल पड़ी हुयी थी जो न जाने कबसे वैसे ही उस बंद घर में मजूद थी|
"ये फर्नांडेस की लाश है"........दीप ने आगे बढ़ते हुए उसपे टोर्च मारा....अरुण भी उस लाश के करीब आया...पीछे रैना और सौम्य एकदूसरे को कस्सके पकडे हुए थे....अरुण ने झुककर देखा तो लाश के पास उसे एक छोटी बोतल मिली....."इटस पोइसन".........अरुण ने शीशी की उस बोतल को सबकी तरफ दिखाया
"यानी की फर्नांडेस ने खुदखुशी की थी उसे किसी रूह ने नहीं मारा था लेकिन अगर इसकी लाश यहाँ थी तो फिर इसकी बीवी मैरी उसकी लाश कहा होगी?"
दीप अभी सोच ही रहा था की उसकी नज़र सामने खुले उस कवर्ड की तरफ हुयी....उसमें पुराणी कुछ किताबे थी| जैसे दीप ने उसपर से धूल हटाते हुए उसे बाहर निकाला तो पाया की निचे एक पुराना टेप रिकॉर्डर मशीन था|......कुछ ही देर में वो टेप रिकॉर्डर लिए उस कमरे से अपने कमरे की ओर आये....अरुण ने एक बार लॉक्ड दरवाजे की तरफ ध्यान दिया उसे बाहर किसी की आहट महसूस नहीं हुयी तो वो शांत हुआ|
हर कोई उस टेप रिकॉर्डर को बीच में रखके गोल घेरा बनाये बैठा हुआ था....आस पास मोमबत्तिया जल रही थी|....बाहर की बरसात अब थम चुकी थी| लेकिन बिजलिया अब भी कड़क रही थी| जावेद ने तुरंत हवा से खुलती लगती उसे खिड़की को झट से बंद कर दिया.....और फिर सबके साथ आके बैठ गया|
दीप के कहे अनुसार...अरुण ने उसके प्ले बटन को जैसे ही दबाया उसमें से एक भारी गले की आवाज़ बोलनी शुरू हो गयी...सबको मालुम था की ये आवाज़ फर्नांडेस की थी |
"ये टेप रिकॉर्डर जिसे भी हासिल हुयी हो उसे कॉटेज के राज़ भी मालुम पड़ चुके होंगे|......ये मेरी बदकिस्मती थी जो मैंने ये घर अपनी बिलवेड वाइफ मैरी फर्नांडेस के लिए ख़रीदा था....हमारी शादी को १ महीना ही हुआ था की मैंने उसके लिए शहर से दूर इस वीरान सुनसान डेड लेक में एक सुन्दर सा कॉटेज उसके लिए बनवाया था...ताकि हम अपनी ज़िन्दगी चैन और सुकून से काट सके....लेकिन किसे पता था की हमने अपनी ज़िन्दगियों को मौत के दलदल में उतार दिया....मुझे आज भी याद है उन लोगो की बात जो इस कॉटेज के बनाते वक़्त काम अधूरा छोड़के भाग गए थे| मुझे याद है की मैंने कितनी मुश्किलों से इस जगह को हासिल किया था और कैसे यहाँ अपना घर बनाया था| उस वक़्त मेरे ज़ेहन में मैरी की दीवानगी थी जो मुझे कुछ भी करने को गुज़र देने पे पूरी इख़्तियार रखती थी.उसके बाद !"
अचानक गाडी हिचकोले खाने लगी राम सिगरेट को मुंह से निकालते हुए गियर पे गियर मारते रहा...लेकिन गाडी थम चुकी थी |
उसे अहसास हुआ की गाडी अपने आप ठहर गयी थी| उसने उतरते हुए तेजी से गाड़ी का इंजन फाटक खोला तो उसके हाथ जल गए "ससस आआहहह".........उसने जलन होने से अपने हाथो को फूंका
"डैम इट"........उसने गाडी को एक ठोखर मारी.....इंजन गरम हो गया था और उससे धुआँ निकल रहा था|
डेड लेक से बहार निकलना उसका बेहद ज़रूरी था....वो फिर उलटे पाव वापिस कॉटेज नहीं पहुंच सकता था वो काफी दूर निकल आया था| अचानक उसे एक घुटती सी आवाज़ दोहराई अपने कानो में महसूस की...उसका पूरा जिस्म सिहर उठा.....उसने पलटके जब देखा तो खामोशी और वीरान जंगल के सिवाय कुछ नहीं था....
तभी उसने इंजन डोर जैसे वापिस लगायी....अचानक उसके प्राण काँप उठे|
"आअह्ह्ह्ह नहहहहह्ही"...............राम एकदम चीख उठा | उस वक़्त उसने अपने मुंह पे हाथ रख लिया था| उसका पूरा शरीर थर्राये काँप उठ रहा था.....क्यूंकि सामने दिल को दहला देने वाला जैसे वो दृश्य था | क्यूंकि ठीक सामने इंजन दूर के लगते ही उसने देखा की उसकी कार की सीट के भीतर एक कटा हुआ सर उसे देखके ठहाका लगाये हस्स रहा था| खौफनाक मंज़र ऐसा कभी राम ने नहीं देखा था|
उसने फ़ौरन अपनी गन उठायी और कांपते हुए उसकी ओर निशाना साधा...."हाहाहा हाहाहा हाहाहा हाहाहाहाहा हाहाहा"........हस्ती जा रही थी वो उसके खौफनाक चेहरे को ब्यान करना मुश्किल था | उसके पुरे चेहरे पे खरोच के निशाँ थे गर्दन धढ़ से जो अलग हुयी थी वहा से अब भी ताजा खून बह रहा था| उसके बाल उसके चेहरे के दोनों झूल रहे थे और उसकी आँखे सुर्ख सफ़ेद लाल थी| ऐसा लग रहा था जैसे किसी मुर्दे का ज़िंदा सर हो| उसे देखते ही देखते राम चिल्ला उठा.....उसका दिल उसके मुंह को आने लगा उसे मालूम ही नहीं हुआ|
उसने फ़ौरन चीखा "चुप आई सेड गेट डी फ़क ऑफ माय साइट"........कहते कहते उसके कांपते हाथो ने ट्रिगर खींच दिया.....धच्च...एक गोली सीधे गाडी के शीशो को तोड़ते हुए उसके सीट में जा धसी.......लेकिन उसकी हैरत तब हुयी जब उसने पाया की सीट पर कोई सर कटी हुयी मौजूद ही नहीं थी|
धीरे धीरे करके राम गाड़ी के तरफ आने लगा....उसने पास आते हुए अंदर झाका और एक झटके में गाड़ी का दरवाजा खोल दिया....वहा कुछ भी मौजूद नहीं था.........उसने अपने सर को पकड़ लिया..क्यूंकि वो यकीनन उसका भ्रम नहीं था| उसने एक बार गाड़ी के पीछे भी सावधानी से सेहमते हुए झाँका लेकिन वहा कुछ नहीं था| उस वक़्त उसे अपने कानो में हवाओ का शोर सुनाई देने लगा| हो हो करती सर्द हवाएं चल रही थी.....उसका दिल फिर काँप उठ रहा था | उसने एक डिब्बा गाड़ी की डिक्की से निकाला फिर कुछ दिएर सोचते हुए अपनी गन को बाए हाथ में ही लिए वो सड़क से निचे उतरते हुए उन घने जंगलो में प्रवेश करने लगा|
काफी अँधेरा था| झींगुर की किड़ किड़ करती आवाज़ उसे उस नीमअँधेरे और खामोश वीरान जंगलो में हर तरफ से सुनाई दे रही थी....वो एक एक कदम बड़ी सावधानी से रख रहा था| अचानक उसने देखा की वो जितना घने जंगलो के भीतर जा रहा था आस पास उसे सिर्फ जंगल झाड़ के कोई पानी मिलने का विकल्प नहीं मिल रहा था| आखिर में हार मानते हुए वो वही एक पेड़ पे सर टिकाये कुछ देर के लिए आँखे मूंदे खड़ा रहा| एक तो वो भयंकर रात ऊपर से नींद जैसे उसके आँखों में चढ़ रही थी| ऊपर से उसे डेड लेक से बहार निकलना था| अचानक उसे अहसास हुआ जैसे उसके चेहरे पे टप टप करते हुए कुछ पड़ रहा था...उसने आँख खोलते हुए अपने चेहरे पे लगे उन बूंदो को देखा तो हाथ में उसके खून लग गया| वो आँखे बड़ी किये अपनी गर्दन को ऊपर की तरफ जैसे जैसे उठाने लगा खौफ्फ़ उसके दिल में समां उठी|
क्यूंकि पेड़ पर उसे एक सर कटी लाश दिखी| साहिल ने जो बयानात दिया था ये उसी औरत की सर कटी झूलती हवा में तैरती वो लाश उसे जान पड़ी....."नही नहीं नहीं आह्हः"..........भौकलया राम डब्बे को वही फैख आनन् फानन वापिस उलटे पाव जंगल से बाहर की तरफ भागने लगा..."बचाओ मुझे somebudy हेल्प मी".........वो चीखता डरता हुआ वापिस गिरते पड़ते अपनी गाड़ी की तरफ आने लगा...और उसी पल उसने देखा की कोहरा बहुत ज़्यादा छाया हुआ था| एका एक उसे बहुत लोगो की ठहाका लगाती वो हसी सुनाई देने लगी...."हहहह हाहाहा हाहाहा हाहाहा".........."शट अप आई सेड शट अप"..........अंधाधुंध अपने कान को पकडे भौखलाये अवस्था में राम ने उस कोहरे में फायरिंग शुरू कर दी| लेकिन जितनी बार भी उसने गोलिया चलाई उतनी बार उसे सिर्फ ठहाका लगाती गूंजती वो हसी सिर्फ सुनाई दे रही थी| उसने अपने कान पकड़ लिए उसने उसी कोहरे में भागते हुए जैसे तैसे गाड़ी का दरवाजा खोला तो उस हाथ ने कस्सके उसके गर्दन को जकड लिया
"आह्हः स आह्हः उग्गहह"......अपने गले से उस कटे हाथ को छोड़ने की नाकाम कोशिशे राम कर रहा था उसकी आँख खौफ्फ़ से फटी जा रही थी...क्यूंकि उसने देखा की गाड़ी में सैकड़ो मुर्दे जैसे उसे ही देख रहे थे उनका चेहरा इतना भयंकर था की ब्यान करना मुश्किल...."नहीं नहीं छोड़ दो मुझे जाने दो आह्हः आह्हः"...........मुर्दो ने जैसे बारी बारी से उसके मासो को खाना शुरू कर दिया....राम दर्द के अहसास से चीखते हुए उन्हे अपने से दूर धकेलना चाह रहा था लेकिन उस सर कटी लाश ने उसे अपनी गिरफ्त में खींच लिया था| राम को उन सबने मिलके गाड़ी में जैसे खींच लिया...दरवाजा अपने आप गाड़ी का लग गया| खून से लथपथ बस वो हाथ शीशो पे राम के घिस रहे थे| दर्दनाक चीखो का सिलसिला कुछ दिएर तक यु ही चलता रहा| उसके बाद राम की आखरी वो दर्दनाक चीख थी जिसके बाद गाड़ी के निचले हिस्सों से बस खून बहते हुए निकल रहा था|
______________________________
धढ़ धढ़.....एका एक साहिल दिप और अरुण ने मिलके उस लकड़ी के बने दिवार के पल्लो को अपनी ताक़त से तोड़ दिया था| जब वो भीतर दाखिल हुए तो अंदर गुप् अँधेरा था| रैना और सौम्य अभी भी जिस कमरे से वो उस कमरे में प्रवेश किये थे उसके ठीक पहले वाले कमरे में ही मौजूद थे| अरुण ने उसी पल टोर्च जलाते हुए चारो तरफ मारा| डीप ने देखा की पुरे दीवारों पे मकड़ी की जालिया थी| और बहुत जर्जर सी उस कमरे की हालत हो गयी थी | वो रूम किसी कबाड़खाने जैसा लग रहा था|
"ये यकीनन मैरी का सिंगल रूम होगा जहा वो वक़्त बिताया करती थी देखो उसकी हर तरफ तस्वीरें लगी हुयी है....वो देखो वहा पे उसका हस्बैंड फर्नांडेस की तस्वीर है ये शादी की तस्वीर लग रही है न?".........अरुण ने सहमति में डीप के कहे को सुना
"ये देखो ग्रामोफ़ोन"..........साहिल ने इस बार टोका....पीछे पीछे रूम में टोर्च मारते हुए रैना और सौम्य भी चारो ओर नज़र फिरा रहे थे| "लेकिन दीप हुम्हे इस कमरे से क्या हासिल होगा ऐसे तो कई और भी रूम्स है जो अबतक हमने खोले नहीं है"..........."नहीं अरुण इस कॉटेज का ये एक मात्रा कमरा है जहाँ मुझे अजीब सा महसूस हो रहा है कुछ न कुछ तो ज़रूर जानने को मिलेगा".........अभी उन दोनों की बात सब सुन ही रहे थे की इतने में सौम्या को अपने पीछे किसी के होने की मौजूदगी सी हुयी|
उसने सेहमते हुए पलटकर जैसे पीछे की ओर देखा...तो उसकी चीख निकल गयी...."फर्नांडेस"........चीखते हुए हर कोई हड़बड़ाए सौम्य की तरफ हुआ.....एका एक रैना भी उस वक़्त चीख उठी....जावेद और साहिल भी काँप उठे.....दीप ने पाया की सच में दिवार के एक कोने पर फर्नांडेस के ही कपड़ो में एक कंकाल पड़ी हुयी थी जो न जाने कबसे वैसे ही उस बंद घर में मजूद थी|
"ये फर्नांडेस की लाश है"........दीप ने आगे बढ़ते हुए उसपे टोर्च मारा....अरुण भी उस लाश के करीब आया...पीछे रैना और सौम्य एकदूसरे को कस्सके पकडे हुए थे....अरुण ने झुककर देखा तो लाश के पास उसे एक छोटी बोतल मिली....."इटस पोइसन".........अरुण ने शीशी की उस बोतल को सबकी तरफ दिखाया
"यानी की फर्नांडेस ने खुदखुशी की थी उसे किसी रूह ने नहीं मारा था लेकिन अगर इसकी लाश यहाँ थी तो फिर इसकी बीवी मैरी उसकी लाश कहा होगी?"
दीप अभी सोच ही रहा था की उसकी नज़र सामने खुले उस कवर्ड की तरफ हुयी....उसमें पुराणी कुछ किताबे थी| जैसे दीप ने उसपर से धूल हटाते हुए उसे बाहर निकाला तो पाया की निचे एक पुराना टेप रिकॉर्डर मशीन था|......कुछ ही देर में वो टेप रिकॉर्डर लिए उस कमरे से अपने कमरे की ओर आये....अरुण ने एक बार लॉक्ड दरवाजे की तरफ ध्यान दिया उसे बाहर किसी की आहट महसूस नहीं हुयी तो वो शांत हुआ|
हर कोई उस टेप रिकॉर्डर को बीच में रखके गोल घेरा बनाये बैठा हुआ था....आस पास मोमबत्तिया जल रही थी|....बाहर की बरसात अब थम चुकी थी| लेकिन बिजलिया अब भी कड़क रही थी| जावेद ने तुरंत हवा से खुलती लगती उसे खिड़की को झट से बंद कर दिया.....और फिर सबके साथ आके बैठ गया|
दीप के कहे अनुसार...अरुण ने उसके प्ले बटन को जैसे ही दबाया उसमें से एक भारी गले की आवाज़ बोलनी शुरू हो गयी...सबको मालुम था की ये आवाज़ फर्नांडेस की थी |
"ये टेप रिकॉर्डर जिसे भी हासिल हुयी हो उसे कॉटेज के राज़ भी मालुम पड़ चुके होंगे|......ये मेरी बदकिस्मती थी जो मैंने ये घर अपनी बिलवेड वाइफ मैरी फर्नांडेस के लिए ख़रीदा था....हमारी शादी को १ महीना ही हुआ था की मैंने उसके लिए शहर से दूर इस वीरान सुनसान डेड लेक में एक सुन्दर सा कॉटेज उसके लिए बनवाया था...ताकि हम अपनी ज़िन्दगी चैन और सुकून से काट सके....लेकिन किसे पता था की हमने अपनी ज़िन्दगियों को मौत के दलदल में उतार दिया....मुझे आज भी याद है उन लोगो की बात जो इस कॉटेज के बनाते वक़्त काम अधूरा छोड़के भाग गए थे| मुझे याद है की मैंने कितनी मुश्किलों से इस जगह को हासिल किया था और कैसे यहाँ अपना घर बनाया था| उस वक़्त मेरे ज़ेहन में मैरी की दीवानगी थी जो मुझे कुछ भी करने को गुज़र देने पे पूरी इख़्तियार रखती थी.उसके बाद !"