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एक दूसरे की बीबीयों के रसभरे होंठ

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दूसरे वह जो उनकी बीबी दूसरों की बीबियों से ज्यादा खूबसूरत है इस बात से वह हमेशा बड़े गर्वान्वित महसूस करते हैं। वह अपनी बीबियों को अपने मित्रों और सोशल ग्रुप में ले जाने में सामान्यतः लालायित रहते हैं; जिससे की वह सबको दिखा सकें की उनकी बीबी सबसे ज्यादा सुन्दर है और वह ऐसे बीबी के पति हैं। पर ऐसे पति भी अपनी बीबी को दूसरोँ से खुलकर मिलने देने से कतराते हैं।

तीसरे वह, जो अपनी बीबी खूब सूरत है उसका पूरा आनंद लेते हैं। सबसे पहले वह अपनी बीबी से खूब प्रेम करते हैं और उसे अपने प्रेम के बंधन में ऐसे बाँध देते हैं की चाहते हुए भी वह किसी और के चक्कर में न पड़े। बादमें जब एक बार उन्हें तसल्ली हो जाती है की उनकी बीबी हमेशा उनकी ही रहेगी तब वह उसे दूसरों से खुल के मिलाते हैं और गैर मर्दों के बीबी को घूरने पर नासमीर न होकर उस का पूरा आनंद लेते हैं।

मैं शायद चौथी ही किस्म का इंसान था जिसने अपनी बीबी से खूब प्रेम कर उसे अपने प्रेम के बंधन में ऐसे बाँध लिया था की वह किसी और के चक्कर में न पड़ सके। बादमें एक बार तसल्ली हो जाने पर उसे दूसरों से खुल के मिलाता रहा। न सिर्फ गैर मर्दों के घूरने पर नासमीर न होकर उस बात का भरपूर आनंद लिया; बल्कि ऐसा भी सोचने लगा की हमारे (मैं और मेरी बीबी) दोनों के मन पसंद किसी गैर मर्द के साथ मिलकर क्यों न मैं मेरी बीबी से जमकर सेक्स करूँ और उसे वह आनंद दूँ जिसकी शायद उसे कल्पना भी न हो। यह विचार मुझे बड़ा उत्तेजित करता था।

यह बात शायद पहले ही से मेरे मन में रही होगी पर पहली बार यह बात ठोस रूप से मेरे सामने तब आयी जब मेरे बॉस ने मेरी बीबी को जबरन खिंच कर उस पार्टी में डांस के लिए ले जाना चाहा। मुझे तब मेरे बॉस की हरकत से नासमीरगी नहीं महसूस हुई, बल्कि एक अजीब से रोमांच का अनुभव हुआ। तब मुझे समझ नहीं आया की मुझे ऐसा महसूस क्यों हुआ। खैर तब तो रुखसार ने उन्हें साफ़ मना कर दिया और उनको एक करारा झटका देकर भगा दिया।

उस दावत में जब मेरी कमसिन, पतली कमर और ३४ – २८ – ३४ फिगर वाली ख़ूबसूरत बीबी अपने लहराते हुए बालों और अपनी उछ्रुंखल लचकती चाल में अपने थिरकते हुए लचीले स्तनों की और ध्यान न देते हुए मुख्य हाल में दाखिल हुई तब सारे पुरुष और स्त्री उसी को ताड़ने लगे। ऐसी स्त्री को पुरुष वर्ग कामुकता से देखे तो उसमें कुछ अस्वाभाविक तो था नहीं। पर मेरी बीबी ने मेरे दोस्त राज के पाँव तले की तो जमीन ही जैसे हटा दी। वह तो रुखसार को देख लोलुपता की खाई में जैसे गिरने लगा। वह सब भुलाकर, यहां तक की उसकी अपनी बीबी के होते हुए भी निर्लज्जता पूर्वक मेरी बीबी को ताड़ता ही जा रहा था।

उस दावत में अपने आपको बड़ी मुश्किल से सम्हालते हुए मेरे करीबी दोस्त राज ने जब मेरी बीबी पर डोरे डालने शुरू किये और बड़े सलीके से वह उसे ललचाने लगा तो मेरे जहन में एक अजीब सा रोमांच होने लगा और मेरे मनमें एक गुप्त भाव जगा जो चाहता था की मेरी बीबी मेरे दोस्त की जाल में फंस जाय।

हालाँकि मैं जानता था की ऐसा कुछ होने वाला नहीं है, क्योंकि मेरी बीबी इतनी रूढ़िवादी और मेरे प्रति इतनी निष्ठांवान थी की मेरे चाहते हुए भी वह दूसरे मर्दों से ललचाना तो दूर, वह ऐसे ठर्कु मर्दों की और तिरस्कार से देखती थी।

पर कहानी में ट्विस्ट तब आया जब मैंने राज की बीबी को पहली बार देखा। हॉल मैं जैसे ही वह दाखिल हुई की मेरी आँखें उस पर गड़ी की गड़ी रह गयीं। डॉली ऐसी मस्त लग रही थी जैसी की मैंने अपने सपने में किसी सेक्सी औरत की कल्पना की थी। मेरे गहन में एक ऐसी सेक्सी औरत की मूरत थी जिसके होंठ पहले हुए मद मस्त गुलाब की पंखुड़ियों की तरह लाल हों और जिसकी चाल से उसके नितम्ब ऐसे थिरकते हों जैसे कोई हाथिनी चल रही हो। जब उसके पति राज ने अपनी बीबी डॉली की मुझसे पहचान कराई तो उसने अपना हाथ लंबाया जिसे अपने हाथों में लेते ही मेरे पुरे बदन में जैसे आग लग गयी।

अक्सर भारतीय पत्नियां कोई पुरुष से पहचान कराने पर नमस्कार करके अपना पिंड छुड़ा लेती हैं। पर मुझे लगा जैसे डॉली मेरा स्पर्श करने के लिए जितना मैं आतुर था उतनी ही वह भी थी। शायद इस लिए भी हो क्यों की उस समय उसका पति मेरी बीबी को इतनी बेशर्मी से घूर रहा था जिससे की उसके पति की नियत साफ़ साफ़ नजर आ रही थी। उधर मेरी बीबी रुखसार भी हंस हंस कर उसकी बातों का लुत्फ़ उठा रही थी और शायद अनजाने में ही राज को प्रोत्साहित कर रही थी।

 
मुझे क्यों ऐसे लग रहा था की जैसे डॉली की आँखें मुझे देख अनायास ही नशीली हो रही थी। वह मुझे इशारा कर रही थी की मैं उसके करीब जाऊं और उससे कुछ बात करूँ। मैं अपने आपको रोक नहीं पाया। मुझे उसे अपनी बाँहोँ में भरनेकी ऐसी ललक लग गयी की मैं डॉली के बारे में सोचते सोचते बेचैन हो गया। तब मुझे राज की मेरी बीबी रुखसार को लुभाने वाली योजना की सफलता में ही मेरी मंज़िल नजर आयी। जाहिर है मैं मेरी बीबी को राज के करीब लाने में राज का सहायक बन गया।

जब मैंने देखा की राज भी वही सोच रहा था जो मैं सोच रहा था तब तो मुझे मेरी मंझिल करीब ही नजर आने लगी। राज को भी मेरी बीबी इतनी भा गयी की वह उसके करीब आने की लिए अपनी बीबी डॉली को मेरे करीब लाने के लिए लालायित हो गया। मैं उसे मेरी बीबी का प्रलोभन दे रहा था और वह मुझे अपनी बीबी का। मेरे और राज के एकजुट होने पर भी रास्ता मात्र आधा ही आसान हुआ था। प्रश्न था की बीबियों का अवरोध कैसे तोड़ा जाय। बीबियों को कैसे हमारी योजना में शामिल किया जाय।

तो मेरे मन में यह विचार आया की दोनों बीबियों को एकसाथ मनाना बड़ा मुश्किल काम था। बीबियाँ वैसे ही बड़ी मालिकाना अथवा स्वामिगत होती हैं। वह आसानी से अपने पति को किसी गैर औरत की बाहोँ में देख नहीं सकती। खैर मात्र बीबियों के लिए ही यह कहना भी ठीक नहीं है, क्योंकि पति भी तो ऐसे ही होते हैं। पर हमारे बारे में यह था की मुझे पूरा भरोसा था की हम दोनों पति अपनी बीबी को एक दूसरे के साथ शारीरिक रूप से सम्भोग करवाने के लिए मानसिक रूप से तैयार हो चुके थे।

उसमें भी मैं तो वैसे ही राज को मेरी बीबी रुखसार को ललचा ने की कोशिश करते देख बड़ा उत्तेजित हो रहा था। मैं ऐसा मानता था की एक मर्द एक स्त्री को पूरी तरह जातीय सम्भोग में संतुष्ट नहीं कर पाता है। साधारणतः मर्द जल्दी स्खलित हो जाता है, पर स्त्री एक साथ कई बार स्खलित हो जाने के उपरान्त भी सम्भोग का आनंद लेने के लिए उत्सुक रहती है। उसे जातीय सम्भोग में थकाने के लिए एक मर्द पर्याप्त नहीं। एक स्त्री दो मर्दों को सहज ही संतुष्ट कर सकती है और दो मर्द ही उसको पूरी तरह से संतुष्ट कर सकते हैं।

यह बात शादी के कुछ सालों के बाद तो सटीक साबित होती है। मैं तो स्वयं यह चाह रहा था की मेरी प्यारी खूबसूरत बीबी एक बार हमारे मन पसंद गैर मर्द से जातीय सम्भोग का आनंद ले। बल्कि मेरे मनकी ख्वाहिश थी के मैं ऐसे मर्द के साथ मिलकर मेरी सुन्दर पतिव्रता बीबी को दो मर्दों से एक साथ उत्छ्रुन्खल चुदाई के आनंद का अनुभव कराऊँ। मैं स्वयं उस बात का आनंद लेना चाहता था और मैं अपनी बीबी को भी एक गैर मर्द से चुदाई का आनंद मिले यह अनुभव उसे करवाने के लिए बड़ा ही उत्सुक था। राज की बीबी डॉली मुझे एक बोनस के रूप में मिल सकती थी वह सोचकर मेरे मन में अजीब सी थनगनाहट होने लगी। तब भला मैं कैसे रुकता?

जैसे की इस कहानी की श्रृंखला के पूर्वार्ध में दर्शाया गया था, मेरी सरल और निष्ठावान (जिसे मैं नीरस समझता था वह) सुन्दर सेक्सी बीबी रुखसार, मेरे और राज के चालाकी भरे कारनामों से हमारे झांसे में आ ही गयी। होली की उस रात को हम दोनों ने उसे उतना उकसाया की उसे जाने अनजाने हम दोनों की बाहों में आना ही पड़ा। यह सच है की हमने उसे कूटनीति अपना कर पहले ललचाया और राज के व्यक्तित्व द्वारा प्रभावित किया।

राज ने भी मेरी बीबी से काफी सेक्सुअल शरारतें कर के अपनी और आकर्षित करनेकी कोशिश की। फिर उस रात उसे थोड़ी शराब पिलाकर तनाव मुक्त किया। मैंने उसे स्त्री जाती कमजोर होने के नाम पर चुनौती देकर बहकाया। राज ने नौकरी खोने की हृदयभेदक झूठी कहानी सुनाकर मेरी बीबी को भावुकता में डुबो दिया। और तब आखिर में मैंने मौका देख कर उसे मेरे दोस्त को अपने स्त्रीत्व द्वारा सांत्वना देने (अर्थात राज को बाहों में लेना, चुम्बन, शारीरिक संग करने देना और करना इत्यादि) के लिए बाध्य किया।

फिर क्या था? हम दोनों उसे छोड़ते थोड़े ही? जैसे ही मेरी बीबी उस होली की रात को अपनी नैतिकता में थोड़ा सा समझौता कर बैठी की हम दोनों ने उसे अपने जाल में फांस ही लिया। मेरी बीबी को भी थोड़ा बहुत अंदेशा तो था ही की हम दोनों मर्द मिलकर उसको एक साथ थ्री सम सेक्स में शामिल करने के लिए बहुत इच्छुक थे। मैंने तो मेरी बीबी को साफ़ साफ़ मेरी ऐसी इच्छा थी ऐसा बता ही दिया था। पर वह ज़रा भी टस की मस नहीं हो रही थी। इसीलिए हमें यह सब करना पड़ा। आखिर में हमें पता लगा की वह भी अपने ह्रदय के एक गहरे छुपे हुए अँधेरे कोने में राज के बारेमें एक तरह की ललक अनुभव कर रही थी। राज का व्यक्तित्व उसे एक उत्तेजना देता था। राज के बारेंमें बात करने मात्र से ही वह अपने अंदर ही अंदर उत्तेजित हो जाती थी। पर वह स्वयं भी इस बात को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं थी। हमें उसे तैयार करना था।

 
राज के व्यक्तित्व ने मेरी बीबी को काफी प्रभावित किया था। परंतु जैसे की हिंदुस्तानी महिलाएं शादी शुदा स्त्री मर्यादा के कारण अपनी इच्छा प्रकट नहीं कर पाती, वैसे ही रुखसार ने भी राज के प्रति जो थोड़ा आकर्षण था, उसे अपने ह्रदय के कोई कोनेमें गाड़ दिया था। यहाँ तक की मेरी बीबी यह मानने से भी मना करती थी की वह राज के प्रति कामुक भाव से आकर्षित थी। मैं उसी आकर्षण को उस अंधकूप से बाहर निकालकर अपनी बीबी के सामने प्रकट करना चाहता था।

खैर, जब एकबार मर्यादा का बाँध टूट गया तब मेरी बीबी मेरे और राज के द्वारा रातके एक बजेसे सुबह के चार बजे तक काम क्रीड़ा का आनंद लेती रही; या यूँ कहिये की वह हम दोनों मर्दों से चुदती रही और हम दोनों मर्दों को चोदती रही। उस रात की सुबह चार बजे जब हम दोनों मर्दों ने दो बार अपना वीर्य मेरी बीबी के मुंह, बदन पर और फुद्दी में उंडेल दिया और मेरी बीबी उस रात शायद छह बार झड़ गयी तब हम मर्दों ने अपने हथियार डाल दिए। रुखसार तो तब भी तैयार थी। उसका जूनून देखने लायक था।

खैर, उस के बाद रुखसार ने कहा वह नहाना चाहती है। तब राज ने और मैंने मिलकर हमारी नायिका, मेरी बीबी को उसके मना करने पर भी जबरन अपनी बाहों में उठाया और उसे बाथरूम में ले गए। रुखसार उस रात की महारानी थी और हम दोनों उसके गुलाम।

उस रात रुखसार शायद अपने वयस्क जीवन में पहली बार खुद नहीं नहायी। राज ने और मैंने मेरी बीबी को बड़े प्यार से नहलाया। नहलाते हुए भी राज मेरी बीबी के मम्मों को और उसके फुद्दीड़ के गालोँ को बार बार अपनी हथेलियों में सहलाने और भींचने में लगा रहता था। यह सब देखकर मेरी उत्तेजना की कोई सीमा नहीं थी। रुखसार उस रात को अपनी इतनी अति विशिष्ट सेवा का मजा ले रही थी। शादी के बाद उसको एक मात्र मर्द से सेवा मिलती थी। उस रात उसकी आज्ञा पालन और सेवा करने के लिए दो मर्द उत्सुक थे।

मैं उस रात काफी थक गया था। जैसे ही हम नहा कर बाहर निकले और हमने अपने अपने रात्रि के सूट और गाउन इत्यादि पहने, की हम सब एक साथ धड़ाम से बिस्तरे में जा गिरे। उस समय राज ने मेरी बीबी को बाँहों में लिया और उसे चुम्बन करने लगा। उसने अपनी प्रेमिका एवं मेरी बीबी को बताया की पिछली रात में जब पहली बार रुखसार ने वह गाउन पहना था तब रुखसार उस नाइट गाउन में करीब करीब नग्न ही दिख रही थी। रुखसार ने जब यह सूना तो वह आयने के सामने जा खड़ी हुई। उसने स्वयं अपनी नग्नता को जब देखा तब वह लाज से राज से चिपक गयी और उसे उसकी छाती पर अपने दोनों हाथों से पीटते हुए बोली, “तुम दोनों ने मुझे आज खूब उल्लू बनाया। मैं भी गधी थी जो तुम्हारी बातोँ मेँ आ गयी।” राज और मैं रुखसार को देख मुस्कुरा रहे थे।

जाहिर है की उस रात रुखसार हम दोनों के बीच में सोई हुई थी। मैंने देखा की मेरी बीबी कुछ सोच में पड़ी जाग रही थी। पलंग में गिरने के साथ ही मैं तो लुढ़क गया। राज भी सो गया। रुखसार मेरे सामने मेरे चेहरे से चेहरा मिलाकर लेटी हुई थी। उसके कूल्हे राज के और थे। थोड़ी मिनटों मैं ही राज ने खर्राटे मारना शुरू कर दिया। गहरी नींद में भी राज ने रुखसार के पीछे से रुखसार को अपनी दोनों बाहोँ के बाहु पाश में जकड रखा था। मुझे ऐसे लगा जैसे राज ने मेरी बीबी के स्तनों पर अपना अधिकार जमा लिया था। नींद में भी राज की दोनों हथेलियां रुखसारके मद मस्त और लाल स्तनों को सहला और दबा रही थीं। उस अवस्था में भी राज का लण्ड कड़क था और शायद मेरी बीबी की गांड में गाउन के ऊपर से घुसने की चेष्टा में लगा हुआ लग रहा था।

सुबह अचानक ही मेरी आँख खुली तो मैंने आधी नींद में ही, “आह…. ऑफ़….. आआआ….. हाई…….. माई……. ” इत्यादि आवाजे सुनी। मेरी आँखों की पलकें आधी अधूरी नींद के कारण भारी सी लग रही थी। मुझे अचानक जग जानेसे एकदम साफ़ नहीं दिख रहा था। उस हालात में मुझे ऐसा लगा जैसे राज और मेरी बीबी रुखसार की रात अभी ख़त्म नहीं हुई थी। वह दोनों पूरी तरह निर्वस्त्र हालात में दिख रहे थे। बिस्तर में लेटे हुए ही राज पीछे से धक्के मारकर अपना मोटा और कड़ा लण्ड मेरी बीबी की फुद्दी में पेल रहा था और उसे पीछे से जोर से चोद रहा था। राज मेरी बीबी की फुद्दी में अच्छे तरीके से अपना लण्ड डालने के लिए टेढा सोया हुआ था और मेरी बीबी रुखसार की दोनों टाँगों के बीच में था। रुखसार का एक पाँव राज के नीचे और दूसरा पाँव राज की सहायता करने के लिए उस के बदन के ऊपर रखा हुआ था।

उस समय सुबह की भीगी मंद मंद हवा चल रही थी और भोर की आभा खिड़की से कमरें में प्रवेश करना चाह रही थी। उजाला न होते हुए भी कमरे में साफ़ दिखाई दे रहा था। मैं एक अंगड़ाई लेते हुए बैठा तो देखा की जैसे की पूरी रात भर हुआ था, राज ने अपने दोनों हाथों ,में मेरी बीबी के स्तनों को कस के पकड़ रखा था। मेरी बीबी मेरी और घूमी हुई थी। राज के टोटे फट्ट फट्ट आवाज करते हुए रुखसार के नितम्ब पर फटकार लगा रहे थे। मेरी बीबी राज के मोटे लंबे लण्ड को अपने योनि मार्ग में इंजन में चलते हुए पिस्टन की तरह अंदर बाहर होते हुए अनुभव का दर्द भरा आनंद ले रही थी और साथ में कामुकता भरे स्वर में कराह रही थी।

राज को मेरी बीबी को इतने जूनून से चोदते देख कर मेरा सर ठनक रहा था। रुखसार भी उससे बड़े प्यार से चुदवा रही थी। अब वह झिझक नहीं थी। वह दर्द रुखसार को मीठा लग रहा था। अब मेरी बीबी हंसते हुए राज का लंबा और मोटा लण्ड अपने योनि मार्ग में अंदर बाहर होते हुए अनुभव कर रही थी। उसका उन्माद भरा आनन्द उसके चेहरे पर साफ़ झलकता दिख रहा था। वह राज को प्रोत्साहित कर रही थी वह उसे और ताकत से चोदे। वह राज को जैसे चुनौती दे रही थी। मेरी रूढ़िवादी, शर्मीली, निष्ठावान और नीरस बीबी एक गैर मर्द की चुदाई का भरपूर आनंद ले रही थी।

 
मुझे जगा हुआ देख मेरी बीबी थोड़ी झेंप गयी और मेरी और थोड़ी सी सहमी निगाहों से देखने लगी।

मैंने अपना मुंह उसके मुंह के पास ले जा कर उसे चुम्बन किया। परंतु पिछेसे राज के जोरदार धक्कों से वह बेचारी इतनी हिल रही थी की मैं उसे ठीक से चूम नहीं पाया। मैंने उसे अपनी आँखों से ही सांत्वना दी और उसके गालोँ पर पप्पी दी।

थोड़ी ही देर में राज और रुखसार अपनी शिखर पर पहुँच गए। राज और रुखसार की कामुकता भरी कराहट से कमरा गूंज उठा। राज ने भी एक धक्का और दिया और मेरे देखते ही देखते रुखसार की फुद्दी में से ढेर सारी मलाई चू कर चद्दर पर गिरने लगी। राज के सर पर पसीने की बूँदें झलक रही थी। उसने मेरी और देखा। पिछली रात की मस्ती के मुकाबले माहौल थोड़ा बदला सा लग रहा था। शायद वह सुबह नए दिन का असर था। मेरी बीबी को चोदते हुए देख कर कहीं मैं बुरा न मान जाऊं इस डर से शायद वह थोड़ा सा नर्वस हो रहा था। मैं उसे देखकर मुस्कुराया। मेरी मुस्कुरान से रुखसार और राज दोनों ने थोड़ी राहत महसूस की।

राज ने मेरी और देखते हुए कहा, “यार, सॉरी। तू गहरी नींद सो रहा था। पिछेसे भाभी जान इतनी सेक्सी लग रही थी की मैं अपने आप को नियत्रण में रख नहीं पाया। मैं तुझे क्या कहूँ? मैं तेरा जीवन भर का ऋणी हूँ। मैंने मेरी पूरी जिंदगी में इतना जबदस्त सेक्स कभी नहीं किया। आज मेरी जिंदगी की सब ईच्छ पूरी हो गयी।”

मैंने रुखसार की और देखा तो उसने अपनी नजरें झुका दी। राज की सारी बात उसने सुनी पर वह कुछ नहीं बोली।

जैसे ही राज ने अपना गिला और ढीला लण्ड मेरी बीबी की फुद्दी में से निकाला, रुखसार बड़ी फुर्ती से पलट कर मेरी बाहों में आ गयी। मैं अपनी बीबी को उस अवस्था में देखकर उत्तेजित हो रहा था। मैंने उसे अपने आहोश में ले लिया। मैं उसके नाक, कान,गाल और उसकी नाभि बगैरह को चूमने लगा। मैं रुखसार को आश्वस्त करना चाहता था की मैं उससे किसी तरह से नासमीर नहीं हूँ और मुझे कोई ईर्ष्या भी नहीं हो रही थी।

रुखसार राज के साथ सम्भोग के बाद और भी खूबसूरत कोई अप्सरा समान सुन्दर लग रही थी। उस नग्न अवस्था में की जब उसकी फुद्दी में से मेरे दोस्त का वीर्य टपक रहा था, वह एक रति सामान लग रही थी। उस सुबह मैंने मेरी बीबीको पहली बार वास्तव में मेरी काम संगिनी के रूप में अनुभव किया जिसे मुझे अनोखी आल्हादना का भाव हो रहां था।

मैं उठ खड़ा हुआ और एक टिश्यू का बॉक्स लेकर रुखसार की योनि से राज के वीर्य को साफ़ किया और मैं मेरी बीबी से लिपट गया। मैंने उसे कहा, “आज मैं तुम्हें पाकर वास्तव मैं धन्य हो गया। आज तुमने मेरी एक विचित्र कामना को अपनी स्त्री सुलभ लज्जा का त्याग करके फलीभूत किया है इसका ऋण मैं कैसे चुकाऊंगा यह मैं कह नहीं सकता। तुम्हारी जगह यदि कोई और बीबी होती तो बड़ा दिखावा और हंगामा करती और नैतिकता का झंडा गाड़ती फिरती। बादमें मुझसे छिपकर शायद वही करती जो आज तुमने मेरे कहने से मेरी इच्छानुसार मेरे सामने किया है। ।“

रुखसार ने मेरी और देखा। स्त्रीगत लज्जा से आँखें नीची कर अपने होठों पर हलकी सी मुस्कराहट लाकर उसने मेरा हाथ थामा और उसपर अपनी प्यारी उँगलियों को हलके से बड़े दुलार से फेरते हुए बड़े ही धीमी मधुर आवाज में बोली, “वास्तव में तो मैं तुम्हारी ऋणी हूँ। तुमने मुझे आज वास्तव में एक सह भागिनी का ओहदा दिया है तुमने मुझे यह अनुभव कराया है की मैं तुम्हारी जिंदगी मैं कितनी अधिक महत्वता रखती हूँ। तुमने मेरे प्रति मालिकाना भाव न रखते हुए मुझे राज की और आकर्षित होने के लिए प्रेरित किया। आपने आज मुझे भी बड़े सम्मान के साथ एक गैर मर्द से जातीयता का अनुभव प्राप्त कराया और उसके लिए मुझे कोई चोरी छुपी से कुछ गलत या पाप कर्म भी नहीं करना पड़ा, यह कोई भी बीबी के लिए एक अद्भुत और अकल्पनीय बात है।“

ऐसा कह कर मेरी बीबी ने मुझे अपनी बाँहोँ में ले लिया। बादमें उसने राज की और देखा जो गौर से हमारा वार्तालाप सुन रहा था। रुखसार ने अपने हाथ बढाए तो राज भी उसकी बाँहोँ में आ गया।

मेरी बीबी तब हंस पड़ी और हलके लहजे में मुझसे बोली, “डार्लिंग, यह मत समझना की मैं आज राज से आखरी बार सेक्स कर रही हूँ। तुम्हारा दोस्त सेक्स करने में उस्ताद है। वह भली भाँती जानता है की अपनी प्रियतमा को कैसे वह उन ऊंचाइयों पर ले जाए जहां वह पहले कभी नहीं गयी। मैं उससे बार बार सेक्स करना चाहती हूँ। इसके लिए मैं तुम्हारी सहमति चाहती हूँ। जब तुम मुझे राज की और आकर्षित होने के लिए प्रेरित कर रहे थे तब मैंने तुम्हें इसके बारे में आगाह किया था। और हाँ, मैं यह भी जानती हूँ की तुम डॉली को पाना चाहते हो। शायद इसिलए तुम दोनों ने मिलकर यह धूर्त प्लान बनाया। तुम ने सोचा होगा की रुखसार को पहले फांसेंगे तो डॉली बेचारी को तो हम तीनों मिलकर फांस ही लेंगे। यदि तुमने यह सोचा था तो सही सोचा था। अब मैं तुम्हारे साथ हूँ। जब मैं तुम दोनों के चुंगल में फंस ही गयी तो डॉली कैसे बचेगी? आज मैं भी तुम्हारी धूर्त मंडली में शामिल हो गयी।”

 
राज को तो बस मेरी बीबी के स्तनों के अलावा कुछ और जैसे नजर ही नहीं आ रहा था। वह रुखसार को सुनते हुए भी उन्हें सहला रहा था। तब रुखसार ने राज की और देखा और बोली, “राज आज मैं एक बात स्पष्ट रूप से कहना चाहती हूँ। मैं भी तुम्हारी सहशायिनी तब तक बनी रहूंगी जब तक तुम डॉली को मेरे पति की सहशायिनी बनाने के लिए उत्साहित करते रहोगे। जैसे की तुमने पहले समीर से कहा था की मैं और डॉली और तुम और समीर के बीच में कोई अंतर नहीं होना चाहिए। यह बात अब तुम्हें पूरी करनी होगी। हम दोनों डॉली को राजी करने में तुम्हारी सहायता करेंगे।”

बदन पर एक भी कपडा नहीं और राज को हिदायत देती हुए रुखसार इतनी सेक्सी लग रही थी की मुझ से रहा नहीं गया। मैंने फुर्ती से मेरा नाईट सूट निकाला और मैं मेरी नंगी बीबी को लिपट गया और उसको लिटा कर उसके ऊपर सवार होकर उसके होठों को चूमने और चूसने लगा और उसपर सवार होकर उसे चोदने लगा।

जब मैंने राज की और देखा तो पाया की जैसे ही मैं मेरी बीबी को चोद रहा था तो राज ने रुखसार के हाथ में अपना लन्ड पकड़ा दिया जिसे वह प्यार से सहला रही थी। आश्चर्य इस बात का था की उस समय मुझे मेरी बीबी को चोदते देख कर राज का लन्ड फिरसे एकदम कड़क हो गया था। जैसे जैसे मैंने मेरी बीबी रुखसार को चोदने की रफ़्तार बढ़ाई तो रुखसार भी राज के लन्ड को हिलाने की रफ़्तार बढ़ाती गयी। शायद उस समय मेरी बीबी राज को हस्त मैथुन का आनंद देना चाहती थी।

मैं अपने आप को रोक नहीं पाया तब मुझे मेरी मलाई ही निकालनी थी। देर तक चोदने के बाद मैंने मेरा वीर्य मेरी बीबी फुद्दी में ही खाली कर दिया। मेरे लिए तो यह एक अद्भुत अनुभव था जब मैं एक रात में तीन बार झड़ गया। साथ ही साथ में राज भी रुखसार के फुर्तीले हस्त मैथुन से उत्तेजित हो कर एक बार फिर अपने वीर्य को रोक नहीं पाया और उस के गरमा गर्म वीर्य का फव्वारा रुखसार के हाथों में और चद्दर पर फ़ैल गया। रुखसार भी शायद मेरे साथ ही झड़ गयी थी।

होली की राज के घर में बितायी वह रात हम तीनों के जीवन की एक यादगार रात बन गयी थी। छुटियाँ ख़त्म होने के बाद फिरसे वही सामान्य व्यावहारिक जीवन शुरू हो गया। घर, बच्चे, नौकरी, माँ बाप, रिस्तेदारी इत्यादि, रुखसार और मुझ पर हावी हो गए। मेरे माता पिता जो छुट्टियों में हमारे साथ थोड़े दिन बिताने आये थे वह अपने गांव वापस चले गए थे।

ठीक उसी तरह राज और डॉली की जिंदगी भी वही पुराणी घिसी पिटी पटरी पर चलने लगी थी। राज और डॉली हम से मिलने कभी कबार आते थे, पर व्यस्तता के कारण वह भी थोड़ी देर बैठ कर चले जाते थे। उन दिनों राज की व्यस्तता कुछ ज्यादा ही बढ़ गयी थी। उस की नौकरी के काम सम्बंधित यात्राएं पहले से ज्यादा लंबी होती जा रही थीं।

होली की उस रात हुए प्रकरण ने मेरे और मेरी बीबी रुखसार के जीवन में एक अद्भुत परिवर्तन ला दिया था। उस रात के बाद से ही मैं मेरी बीबी का वास्तविक रूप में हीरो बनचुका था। रुखसार मुझसे चुदवाने के लिए बड़ी आतुर रहने लगी। मैं भी उसे उकसाने के लिए अक्सर राज के लन्ड के बारे में बात करने लगा और रुखसार को और उत्तेजित करके खूब चोदने लगा।

एक बात तो मुझे माननी पड़ेगी की राज ने कभी भी मेरी बीबी के प्रति जरा सा भी हीनता या निम्नता का भाव नहीं दर्शाया। बल्कि उस रात के बाद वह रुखसार के प्रति और सम्मान पूर्ण रवैया अपनाने लगा। हाँ यह सच है की उस रात के बाद मेरे सामने मेरी बीबी और राज कुछ ज्यादा ही स्वतंत्र महसूस कर ने लगे थे। पर जैसे ही राज की बीबी साथ में होती तो हम सब बड़ी सावधानी बरतते और डॉली को यह अंदेशा ही नहीं होने देना चाहते थे हमारे बीच में कुछ हुआ भी था।

इस बीच काफी दिनों बाद एक बार राज का मुझे फ़ोन आया। वह बोला की वह थोड़ा परेशान था और रुखसार और मुझसे मिलकर कुछ ख़ास बात करना चाहता था। उसने पूछा की क्या वह उसी दिन दोपहर को मेरे घर पर हम दोनों से मिल सकता है? वह हम दोनों से एकाध घंटा बात करके सब बताना चाहता था। राज उसी रातको बाहर टूर पर जा रहा था।

मैंने उससे पूछा की ऐसी क्या ख़ास बात थी तो बोला की वह मुझे मिलकर ही बताएगा। मुझे ऑफिस में बड़ा जरुरी काम था। मेरे लिए घर जाना संभव नहीं था। मैंने राज से कहा की वह मेरे घर जा कर रुखसार से सारी बात बताये। शाम को जब मैं घर जाऊंगा को रुखसार से पूछ लूंगा।

राज ने तब थोड़ा हिचकिचाते हुए कहा, ” मैं मिलूं? रुखसार को? अकेले में? तुम नहीं आ सकते हो क्या?”

तब मैंने उसे छेड़ते हुए कहा, “कमाल है भई? अब तुम्हें रुखसार से अकेले मिलने में सकुचाहट कब से होने लगी? अब हमारे बीच कौन सा पर्दा है? मैं जरूर आता, पर आ नहीं सकता। मज़बूरी है। आज ऑफिस में बहुत जरुरी मीटिंग है। मेरा यहां से निकलना संभव नहीं। पर तुम उसकी चिंता मत करो। मैं रुखसार को फ़ोन कर बता दूंगा की तुम आ रहे हो। तुम बेझिझक जाओ और रुखसार के साथ मस्ती से मिलो और जो कुछ कहना करना है वह उसे कहो और करो। मेरी इजाजत है।”

 
राज जैसे मेरी बात सुनकर सहम सा गया और बोला, “तुम भी न? अपनी हरकतों से बाझ नहीं आओगे। खैर, मैं रुखसार से सारी बात कर लूंगा। वह तुम्हें शाम को बता देगी।”

मैंने उसी मजाक भरे लहजे में कहा, “वह तो उसे बताना ही पडेगा।”

मैंने तुरंत बाद रुखसार को फ़ोन किया और बताया की राज दोपहर को उसे मिलने आएगा। वह हमसे मिलकर कुछ ख़ास बात करना चाहता है। मैंने यह भी बताया की मैं व्यस्त था और घर आ नहीं पाउँगा। मैंने रुखसार से कहा की वह खुद राज से बात करले और शाम को मुझे बतादे।

तब मेरी बीबी ने सकुचाते हुए मुझसे पूछा, “आप ने यह क्या किया? आप आ जाते न? आप आ जाओ। मुझे राज से अकेले में मिलना ठीक नहीं लगता। आप होते हो तो बात कुछ और है। राज को तो आप जानते ही हो। कहीं वह मूड में आ जाए और अकेले में कुछ कर बैठे तो फिर? मुझे समझ नहीं आता की मैं क्या करुँगी। अगर आप नहीं हो तो मुझे बड़ा अजीब लगेगा।”

मुझसे रहा नहीं गया। मैं जोर से हंस पड़ा। मैंने कहा, “उस रात को तो तुम बड़ी सयानी बातें कर रही थी की तुम तो उससे बार बार चुदवाना चाहती थी? अब क्या हुआ?” फिर मैंने उसे धीरे से कहा, “कोई चिंता मत करो। वह ऐसा क्या कर लेगा जो उसने अब तक नहीं किया? तुम भी खुलकर उस से मिलो और चांस मिलता है तो मजे करो। पर हाँ, शाम को मुझे सब सच सच और खुल कर बताना।”

रुखसार ने “धत, तुम भी न?” कह कर फ़ोन काट दिया।

उस रातको मैं काम की वजह से देर से घर पहुंचा। रुखसार मेरा इन्तेजार कर रही थी। हम दोनों ने डाइनिंग टेबल पर रखा खाना गरम कर खाया और रुखसार रसोई साफ़ कर के बिस्तरे में आयी। मैं भी कपडे बदल कर उसीका इन्तेजार कर रहा था। आज काफी समय के बाद राज हमारे घर आया था। जरूर आज कुछ न कुछ तो हुआ था।

मैंने देखा की मेरी बीबी अपनी प्रसन्नता को दबाने का प्रयास कर रही थी। उसके आते ही मैं उसे अपनी बाहोँ में भर लिया और बोला, “भाई आज तो मेरी बीबी का आशिक आया था। बड़ी चहक रही है मेरी बीबी!”

रुखसार ने हल्का मुस्कुराते हुए कहा, “अरे? तुम मुझे चिढाना बंद करोगे भी?” फिर थोड़ा शर्मा कर बोली, “अब ज्यादा सयाने मत बनो। तुम भी तो जानते हो वह क्यों आया था। तुम्हीने तो मुझे कहा था की ठीक है। मिल लो उसे। अब राज का मुझे मिलने का मतलब तो तुम जानते ही हो न?”

मैंने पूछा,”मुझे बताओ तो सही डार्लिंग के क्या हुआ? क्या क्या किया राज ने तुम्हारे साथ? सच सच बताना।”

अब मेरी बीबी काफी असमंजस में पड़ गयी की क्या बोले। फिर धीरे से बोली, “हाँ भाई बताना तो पड़ेगा ही, सब सच सच। घर में मैं अकेली ही थी। मुन्नू को स्कूल से लौटने में कोई दो घंटे का समय था। तुम तो अपने दोस्त को भली भाँती जानते हो। वह तो रंगीला है ही। एक तो हम दोनों अकेले, दूसरे तुम्हारी पूरी इजाजत और तीसरे हम कई दिनों के बाद मिले थे। बस और पूछने की बात ही क्या थी? उसके आते ही मैंने जैसे दरवाजा अंदर से बंद किया की वह मुझे उठा कर बैडरूम में ले आया। मुझे चूमते हुए कहने लगा की मेरे बगैर उसके इतने दिन कैसे गुजरे हैं वह कह नहीं सकता।

जब मैंने उसे पूछा की क्यों डॉली नहीं थी क्या? तो वह बोला की डॉली की तो हालत अजीब सी हुई पड़ी थी। वह यही बात तो हमसे करने आया था। डॉली को कुछ शक हो गया है की उसका पति का मेरे साथ चक्कर चल रहा है। उसे पक्का भरोसा अब तक नहीं है। इस कारण वह राज को शक की निगाहों से देख रही है। इस कारण डॉली राज से कुछ कतराती रहती है। बेचारा राज मुझे कह रहा था की वह सेक्स का एकदम भूखा है।”

मैंने पूछा, “फिर क्या हुआ?”

रुखसार थोड़ीदेर चुप हो गयी। मैं बड़ा अधीर हो रहा था। रुखसार जैसे एक सपने में खो गयी। जब मैंने उसे झक झोरा तो जैसे वह हड़बड़ा उठी और मेरी और नजर झुका कर बोली, “और मैं क्या कहूँ? तुम तो जानते ही हो की क्या हुआ होगा। अब मुझसे सब उगलवाना क्यों चाहते हो?”

 
मैं रुखसार के जवाब से झुंझला उठा। अरे भाई, मैं तुम्हारी जुबान से ही वह सब सुनना चाहता हूँ। मैंने इसी लिए तो राज को ख़ास तुमसे अकेले में मिलने को बाध्य किया ताकि तुम दोनों स्वछन्द रूप से बिना किसी हिचकिचाहट से चुदाई करो और फिर बादमें तुम मुझे सारी कहानी खुलके सुनाओ। मैंने बड़े मुश्किल से संयम रखते हुए पूछा, “जानू, तुम जानती ही हो, की मुझे तुम्हारा और राज का प्रेमालाप सुनना बड़ा उत्तेजित करता है। यह देखो।” मैंने रुखसार का हाथ मेरे पाजामे में मेरी टाँगों के बीच मेरे लन्ड पर रखा और उसे मेरा लौड़ा सहलाने के लिए दबाया। तब मेरी बीबी ने पाया की मेरा लौड़ा एकदम कड़क हो गया था। उसे पाजामे के ऊपर से ही प्यार से सहलाते और दबाते हुए रुखसार मेरी और देखकर शर्माते हुए हल्का सा मुस्कुराई और अपनी नजर नीचे गड़ी हुई रखकर बोलने लगी।

वह बोली, “मुझे बिस्तर लिटा राज ऊपर चढ़ गया और मेरे होठ पर होठ रख कर उसने मेरे मुंह में अपनी जीभ घुसेड़ दी और अपनी जिह्वा से ही जैसे मेरे मुंह की चुदाई करने लगा। उसके मुंह का सारा रस मेरे मुंह में आ रहा था। उसकी लार सारी मेरे मुंह में जा रही थी। जानू मैं तुमसे झूठ नहीं बोलूंगी। मुझे उसकी लार का स्वाद अच्छा लग रहा था। मैं उसकी लार को बड़े चाव से चाट रही थी। वह भी मेरी लार का आस्वादन रहा था।“

रुखसार ने मुड़ कर मेरी और देखा और थोड़ा सकुचाते हुए बोली, “फिर उसने मेरा ब्लाउज के अंदर हाथ डालकर मेरे मम्मों को सहलाना शुरू किया। उससे धीरज नहीं रखी जा रही थी। उसने मेरे कपड़ों को भी नहीं हटाया और मुझ पर टूट पड़ा। मैंने कहा कपडे तो निकालने दो। तो वह बोला उससे रहा नहीं जा रहा था।

खैर, मैंने जब उसे दुबारा कहा की भाई अब मैं डेढ़ से दो घंटे तक उसीकी हूँ और हमारे पास समय है। तब फिर उसने प्यार से मेरा ब्लाउज, साडी, पेटीकोट बगैरह खोलना शुरू किया। उसका लण्ड उसकी पैंट में अकड़ा हुआ था। मेरा हाथ अनायास ही उसकी ज़िप पर चला गया। मैंने उसकी ज़िप खोली और उसकी निकर हटाई तो उसका मोटा लण्ड उसकी पेंट में से बाहर कूद पड़ा। मैंने उसे प्यार से सहलाना शुरू किया। उसके लण्ड के छेद में से जैसे उसके पूर्व रस की धार निकल पड़ी। उसका लण्ड फौलाद के छड़ की तरह अकड़ा और सख्त था। जैसे ही मैं राज के लण्ड पर हाथ फेरने लगी तो मेरी हथेली राज के पूर्व रस की चिकनाई से लथपथ हो गई। ऐसा लग रहा था जैसे उसका लिंग अभी अभी किसी की फुद्दी में अपना पूरा वीर्य छोड़ कर निकला हो।“

जैसे ही मेरी बीबी रुकी तो मैंने उसकी और थोड़ी सख्त नजर से देखा। रुखसार भली भाँती जान गयी थी की मैं उसके चोदने की बातें करनेसे से बड़ा उत्तेजित हो जाता था और वह कहानी पूरी विस्तार से सुने बगैर मैं उसको छोडूंगा नहीं। इस कारण वह भी अपनी स्त्रीगत लाज को छोड़ कर बड़े ही विस्तार पूर्वक उस दोपहर के उनके मिलन कार्यालाप के बारेमें बताने लगी।

मेरी बीबी की बात सुन कर मेरा बुरा हाल हो रहा था। मैं अपने आप को नियत्रण में रख नहीं पा रहा था। मेरे पाजामे में मेरा लण्ड फर्राटे मार रहा था। रुखसार ने भी उसे महसूस किया। तो रुखसार ने कहा, “जाने मन यह बात क्या है? तुम राज और मेरी चुदाई की बात सुनकर इतना उत्तेजित कैसे हो जाते हो? खैर चलो अगर तुम्हें आनंद मिलता है तो फिर तो मैं तूम्हे पूरी कहानी कुछ भी छोड़े बगैर साफ़ साफ़ सुनाती हूँ।” ऐसा कह कर रुखसार आगे की कहानी सुनाने को अग्रसर हुई।

वह बोलने लगी, “उसका यह हाल देख कर मुझे लगा की वास्तव में उसे कई दिनों से डॉली ने अपने पास नहीं फटकने दिया होगा। बेचारा! उसके लण्ड पर मेरा हाथ लगते ही उसके लिंग के छिद्र में से जैसे फौव्वारा छूटने लगा। ऐसा तो सेक्स के दौरान वीर्य छोड़ने पर होता है। मैं समझ गयी की आज तो बस मुझे खूब दबा कर चोदने के लिए ही आया है और बहुत उतावला हो रहा है। पर आज मुझे उसे थोड़ा चिढाना था। मैंने कहा, “अरे??? इतना उतावला क्यों हो रहे हो? मेरे पति ने हमें पूरी इजाजत दे दी है। मैं तो अभी तुम्हारी ही हूँ। हम दोनों अकेले है। मुझे भी तो मझा कराओ?”

तब राज थोड़ा सा रुक गया और उसने मुझे अपनी बाँहों में ले लिया और मैंने एक एक करके उसके शर्ट के बटन खोल दिए। उसने अपनी बनियान खोल दी। मैं तुम्हारे दोस्त के लिंग को सहलाती रही और उसके अंड कोशों को प्यार से मेरी हथेली में सहलाती और प्यार से धीरे से दबाती भी थी। तुमने तो राज के अंड कोष देखे हैं। वह काफी बड़े हैं। तब तक राज ने मुझे पूरी नंगी कर दिया। उसका मुंह मेरे मुंह पर था और उसकी जीभ मेरे मुंह में थी।“

मैं अपनी बीबी की चुदाई की बात सुन बड़ा ही उन्मादित हो रहा था। पर मुझे मेरी बीबी का यूँ झिझक ते हुए “लिंग, योनि” शब्द अच्छे नहीं लगे। मैंने उसे हलकेसे पर करारे शब्दों में कहा, :जानूँ, अब यह सभ्यता का नकाब छोडो। यह लिंग, योनि, सेक्स आदि शब्दों का प्रयोग न करो। साफ़ साफ़ बोलो “लन्ड, फुद्दी, चुदाई इत्यादि। चलो आगे बढ़ो।

रुखसार तब अपनी लज्जा से उभर ने की कोशिश कर रही थी। वह धीरे से कहानी आगे बढ़ाते हुए बोली, “उस ने मेरे स्तनों को दोनों हाथों में इतना कस के पकड़ रखा था की मेरी चीख निकल पड़ी। धीरे से उसने अपना मुंह मेरे मुंह पर से हटाया और उसे मेरे दोनों स्तनों पर रख दिया। वह एक हाथ से मेरे एक स्तन को भींचता था तो मुंह से मेर दूसरे स्तन को चूसता था। और चूसता भी ऐसे की वह चूसते चूसते मेरे स्तन को इतना खींचा की मेरे बूब्स लाल होगये। उसके मुंह में से मेरी निप्पल आ जाती और उसे जोर से चूस कर या दाँतो से काट कर उसने मेरे स्तनों पर गहरे निशान बना दिए। देखो तो।”

 
मेरी बीबी ने तब अपना गाउन खोल कर अपने स्तन मुझे दिखाए। वास्तव में उसके स्तन खून से जैसे लाल हो गए थे और उसके ऊपर राज के दाँतो के निशान साफ़ साफ़ नजर आ रहे थे। मुझे मेरे दोस्त पर ईर्ष्या भी हुई की वह साला कितना लकी है। अगर उसकी बीबी ने साथ नही दिया तो रुखसार उससे चुदने के लिए तैयार बैठी थी। अब उसे जब चाहिए तो एक न एक फुद्दी तो चुदवानेको तैयार ही थी। और उपरसे मेरी बीबी मुझे अपने स्तन और निप्पलों पर पड़े मेरे दोस्त के दाँतों के निशान दिखा रही थी। पर गुस्सा या नासमीर होने के बजाय मैं तो कामोत्तेजना से घायल हो रहा था।

मैं राज के दाँतों के निशान पर ही मेरी बीबी के स्तन और निप्पलोँ को चूसने और काटने लगा। मुझे एक अजीब सा रोमांच हो रहा था की मैं भी उसी जगह पर अपना अधिकार जमा रहा हूँ जहाँ पर राज ने अधिकार जमाया था।

मैं जानना चाहता था की आगे और क्या हुआ। मैंने रुखसार की और प्रश्नात्मक दृष्टि से देखा।

रुखसार ने आगे बोलना शुरू किया, “मैंने राज को कहा की तुम मुझे नीचे से चाटो। मैं गरम हो रही थी। राज का मेरे स्तनों और होठों पर चुम्बन करनेसे मैं भी काफी कामोत्तेजक हो रही थी। जब राज ने नीचे झुक कर मेरे पैरों के बीच मेरी योनि, सॉरी सॉरी, मेरी फुद्दी चाटना और चूसना शुरू किया तो मैं एकदम बेकाबू हो गयी। मुझसे रहा नहीं गया। मैं जल्द ही झड़ने वाली थी।

राज ने तब मेरी फुद्दी में दो उंगली डाल कर मुझ उँगलियों से चोदना शुरू किया। राज ने तो जैसे आग में घी डालने का काम किया। मेरी उत्तेजना सीमा से उपर जा रहीथी। तब में चरम पर पहुँच रही थी और चंद सेकंडों में ही मैं जैसे एक उत्तेजना के सैलाब में बह गयी और मैं ऐसी झड़ी की मत पूछो। थोड़ी देर के लिए मुझे राज ने सांस लेने का मौका दिया और वह मेरी फुद्दी में अपनी उँगलियों से फिर चोदने लगा।“

रुखसार की बात सुनते हुए मेरा लौड़ा थनगनाने लगा। मेरे लन्ड की नसोँ में मेरा वीर्य की जैसे बाढ़ आ गयी। मेरे लन्ड के छिद्र में से पूर्व रस झर रहा था। मैंने फुर्ती से अपने पजामें का नाडा खोल दिया और मेरे लन्ड को मेरी बीबी के हाथों में दे दिया। और मैं भी राज की ही तरह अपनी बीबी को अपनी उँगलियों से चोदने लगा। मेरे उंगली चोदन से रुखसार छटपटाने लगी। एक तो वह राज की बात करके वैसे ही गरम हो रही थी, ऊपर से मेरे ऊँगली चोदन से उसकी उत्तेजना बढ़ती ही जा रही थी।

इस दुगुने उत्तेजक धमाकों को झेलना उसके लिए कठिन हो रहा था। वह हवस की पीड़ा से कराहने लगी। मैंने भी देखा की वह तुरंत ही अपना रस का फौव्वारा छोड़ने वाली थी तो मैंने तेजी बढ़ाई और अपने कूल्हों को ऊपर नीचे करते हुए और बिस्तर पर रगड़ते हुए मेरी बीबी ने एक भारी सांस लेते हुए अपना प्रेम रस का झरना छोड़ा।

मैंने ठान लिया था की मैं मेरी बीबी और मेरे दोस्त के बीच हुयी कहानी पूरी सुनूँगा। अपनी बीबी को बाहों में भरते हुए मैंने उसके गाउन की ज़िप खोल दी। जैसे जैसे मेरी बीबी उसकी राज के साथ की रति क्रीड़ा की बात कर रही थी, मैं भी वैसे वैसे राज के विरोधी की तरह मेरी बीबी के साथ वही दुहरा रहा था।

मैंने कहा, “मेरी रानी आगे क्या हुआ वह भी तो बताओ।”

मैंने महसूस किया की रुखसार की छाती की धड़कनें तेज होती जा रही थी। वह बोली, “राज के तेज उंगली चोदन से मैं पागल हो रही थी। तुमने भी मुझे यह कहकर हरी झण्डी देदी थी की मैं राज के साथ खुल के मस्ती करूँ। राज मुझे कह रहा था की तुमने उसे भी मेरे साथ पूरी मस्ती करने की छूट दे दी थी। तो फिर बचा ही क्या था? मैं अपना आपा खो बैठी और राज के उंगली चोदन इतनी उकसा गई की उसे मुझे चोदने के लिए चिल्ला कर कहने लगी की बस करो, मुझे तुम्हारी उँगलियाँ नहीं तुम्हारा मोटा लन्ड मेरी प्यासी फुद्दी में चाहिए। बस मेरा इतना कहना ही काफी था। राज मुझ पर चढ़ बैठा और मेरी गीली फुद्दी के ऊपर अपना गिला लथपथ मोटा कड़ा लन्ड रगड़ने लगा।

मैं अपने होशो हवास में नहीं थी। मुझ पर भी हवस का जूनून हावी हो गया था। उस वक्त मेरा ध्यान सिर्फ चुदने पर ही था। तुम्हारा प्रोत्साहन और राज का मेरी और पागलपन मेरी हवस की कामना की आग को भड़काए जा रहा था। मैंने उसका लन्ड मेरे हाथ में लिया और मेरी फुद्दी के छिद्र के बीच रखा और उसे मेरी फुद्दी में अपने हाथ से थोड़ा अंदर घुसेड़ा। उसने एक धीरे से धक्का मर कर उसे थोडा मेरी फुद्दी में घुसेड़ा। तब मने राज की और देखा। वह समझ गया की मैं उसे धीरेसे धक्का मारने के लिए इशारा कर रही थी। धीरे धीरे वह अपना लन्ड अंदर बाहर करने लगा।”

मेरी बीबी मेरे दोस्त से चुदने की बात कह कर शायद उतनी ही उन्मादित हो रही थी, जितना मैं उसकी बात सुनकर हो रहा था। उसने कहा, “बस फिर तो राज मुझमें ऐसे जोर जोर से अपना लन्ड पेलने लगा की जैसे वह मुझे आखरी बार चोद रहा हो। मुझे भी आज इतना नशा चढ़ा हुआ था की मैं भी उसके साथ पूरी तरह अपनी चुदाई करवाने के लिए उछल उछल कर उसका लन्ड मेरी फुद्दी में उससे डलवा रही थी। हम दोनों चुदाई में इतने बदहोश हो कर कराह रहे थे की मुझे डर था की कहीं कोई सुन न ले। आज तो तुम्हारे दोस्त ने हद ही कर दी। वह मुझे ऐसे चोदता रहा ऐसे चोदता रहा की आज तो उसने मुझे भी थका दिया। बीच में मैंने उसे एकाध बार रोका भी, क्योंकि मैं बाथरूम जाना चाह रही थी।“

“मैं उठ खड़ी हुई और जब मैंने अपने ऊपर एक चद्दर डाली तो वह भी उसने निकाल दी। जैसे तैसे मैं नंगी ही बाथरूम की और भागी तो वह मेरे पीछे पीछे बाथरूम तक भी पहुँच गया। वह मेरे साथ बाथरूम के अंदर आना चाहता था। शायद वह मुझे पेशाब करते हुए देखना चाहता था। जब मैं उसे पीछे की और हटा ने लगी तब उसने मुझे बाथरूम के बाहर ही जकड लिया।

वहाँ भी मुझे आगे से नीचे की और झुका कर जैसे वह मुझे पीछे से चोदना चाहता था। हाय माँ! उसका लन्ड कड़क खड़ा लहराता देख कर में शर्म से मर रही थी की क्या करूँ। बड़ी मुश्किल से मैंने अपने आपको उससे छुड़ाया और उसे बाथरूम के दरवाजे पर ही रोका और तब मैं बाथरूम गयी।“

मेरी प्यारी बीबी मेरे दोस्त के साथ अपनी काम क्रीड़ा की कहानी सुनाते सुनाते शर्म से लाल हो रही थी। पर मैं भी तो पूरी कहानी सुनने पर अड़ा हुआ था। एक गहरी सांस ले कर रुखसार फिर से बोलने लगी, “पर पेशाब कर लेने के बाद मैंने जब दरवाजा खोला तो वह वहीँ खड़ा था। उसने मुझे उसी हालात में अपनी बाहों में उठा लिया और फिर मुझे बिस्तर पर लिटा कर मेरे पर चढ़ गया और मेरे पाँव अपने कन्धों पर रखवा कर तुम्हारे दोस्त ने मुझे दुबारा चोदना शुरू किया।” पता नहीं पर शायद आधे घंटे तक हम चुदाई करते रहे। बीच में मैं तो दो बार झड़ चुकी थी। आखिर में एक जोर सी कराह देते हुए उसने अपना पूरा वीर्य मेरी फुद्दी में उंडेल दिया। उसने इतना अपना माल छोड़ा की एक बार तो मैं डर ही गयी की मैं कहीं उस से गर्भवती न बन जाऊं।”

फिर थोड़ा रुक कर वह बोली, “खैर, ऐसा कुछ भी नहीं होगा क्योंकि मैं गोलियां ले रही हूँ। जानूँ, तुमने मुझे एक तरह से पागल बना दिया है। आज तक मैं चुदाई में इतना उन्मादित नहीं हुई जितना तुम दोनों ने मिलकर मुझे बना दिया है। अब जब तुम या राज मुझे चोदते हो तो मुझे क्या होता है पता नहीं, पर मेरे पुरे बदन में ऐसा नशा फ़ैल जता है की मेरे हर अंग में बिजली की तरह झटके लगने लगते है। मैं उसका वर्णन करने में असमर्थ हूँ।”

 
मैं रुखसार के जवाब से झुंझला उठा। अरे भाई, मैं तुम्हारी जुबान से ही वह सब सुनना चाहता हूँ। मैंने इसी लिए तो राज को ख़ास तुमसे अकेले में मिलने को बाध्य किया ताकि तुम दोनों स्वछन्द रूप से बिना किसी हिचकिचाहट से चुदाई करो और फिर बादमें तुम मुझे सारी कहानी खुलके सुनाओ। मैंने बड़े मुश्किल से संयम रखते हुए पूछा, “जानू, तुम जानती ही हो, की मुझे तुम्हारा और राज का प्रेमालाप सुनना बड़ा उत्तेजित करता है। यह देखो।” मैंने रुखसार का हाथ मेरे पाजामे में मेरी टाँगों के बीच मेरे लन्ड पर रखा और उसे मेरा लौड़ा सहलाने के लिए दबाया। तब मेरी बीबी ने पाया की मेरा लौड़ा एकदम कड़क हो गया था। उसे पाजामे के ऊपर से ही प्यार से सहलाते और दबाते हुए रुखसार मेरी और देखकर शर्माते हुए हल्का सा मुस्कुराई और अपनी नजर नीचे गड़ी हुई रखकर बोलने लगी।

वह बोली, “मुझे बिस्तर लिटा राज ऊपर चढ़ गया और मेरे होठ पर होठ रख कर उसने मेरे मुंह में अपनी जीभ घुसेड़ दी और अपनी जिह्वा से ही जैसे मेरे मुंह की चुदाई करने लगा। उसके मुंह का सारा रस मेरे मुंह में आ रहा था। उसकी लार सारी मेरे मुंह में जा रही थी। जानू मैं तुमसे झूठ नहीं बोलूंगी। मुझे उसकी लार का स्वाद अच्छा लग रहा था। मैं उसकी लार को बड़े चाव से चाट रही थी। वह भी मेरी लार का आस्वादन रहा था।“

रुखसार ने मुड़ कर मेरी और देखा और थोड़ा सकुचाते हुए बोली, “फिर उसने मेरा ब्लाउज के अंदर हाथ डालकर मेरे मम्मों को सहलाना शुरू किया। उससे धीरज नहीं रखी जा रही थी। उसने मेरे कपड़ों को भी नहीं हटाया और मुझ पर टूट पड़ा। मैंने कहा कपडे तो निकालने दो। तो वह बोला उससे रहा नहीं जा रहा था।

खैर, मैंने जब उसे दुबारा कहा की भाई अब मैं डेढ़ से दो घंटे तक उसीकी हूँ और हमारे पास समय है। तब फिर उसने प्यार से मेरा ब्लाउज, साडी, पेटीकोट बगैरह खोलना शुरू किया। उसका लण्ड उसकी पैंट में अकड़ा हुआ था। मेरा हाथ अनायास ही उसकी ज़िप पर चला गया। मैंने उसकी ज़िप खोली और उसकी निकर हटाई तो उसका मोटा लण्ड उसकी पेंट में से बाहर कूद पड़ा। मैंने उसे प्यार से सहलाना शुरू किया। उसके लण्ड के छेद में से जैसे उसके पूर्व रस की धार निकल पड़ी। उसका लण्ड फौलाद के छड़ की तरह अकड़ा और सख्त था। जैसे ही मैं राज के लण्ड पर हाथ फेरने लगी तो मेरी हथेली राज के पूर्व रस की चिकनाई से लथपथ हो गई। ऐसा लग रहा था जैसे उसका लिंग अभी अभी किसी की फुद्दी में अपना पूरा वीर्य छोड़ कर निकला हो।“

जैसे ही मेरी बीबी रुकी तो मैंने उसकी और थोड़ी सख्त नजर से देखा। रुखसार भली भाँती जान गयी थी की मैं उसके चोदने की बातें करनेसे से बड़ा उत्तेजित हो जाता था और वह कहानी पूरी विस्तार से सुने बगैर मैं उसको छोडूंगा नहीं। इस कारण वह भी अपनी स्त्रीगत लाज को छोड़ कर बड़े ही विस्तार पूर्वक उस दोपहर के उनके मिलन कार्यालाप के बारेमें बताने लगी।

मेरी बीबी की बात सुन कर मेरा बुरा हाल हो रहा था। मैं अपने आप को नियत्रण में रख नहीं पा रहा था। मेरे पाजामे में मेरा लण्ड फर्राटे मार रहा था। रुखसार ने भी उसे महसूस किया। तो रुखसार ने कहा, “जाने मन यह बात क्या है? तुम राज और मेरी चुदाई की बात सुनकर इतना उत्तेजित कैसे हो जाते हो? खैर चलो अगर तुम्हें आनंद मिलता है तो फिर तो मैं तूम्हे पूरी कहानी कुछ भी छोड़े बगैर साफ़ साफ़ सुनाती हूँ।” ऐसा कह कर रुखसार आगे की कहानी सुनाने को अग्रसर हुई।

वह बोलने लगी, “उसका यह हाल देख कर मुझे लगा की वास्तव में उसे कई दिनों से डॉली ने अपने पास नहीं फटकने दिया होगा। बेचारा! उसके लण्ड पर मेरा हाथ लगते ही उसके लिंग के छिद्र में से जैसे फौव्वारा छूटने लगा। ऐसा तो सेक्स के दौरान वीर्य छोड़ने पर होता है। मैं समझ गयी की आज तो बस मुझे खूब दबा कर चोदने के लिए ही आया है और बहुत उतावला हो रहा है। पर आज मुझे उसे थोड़ा चिढाना था। मैंने कहा, “अरे??? इतना उतावला क्यों हो रहे हो? मेरे पति ने हमें पूरी इजाजत दे दी है। मैं तो अभी तुम्हारी ही हूँ। हम दोनों अकेले है। मुझे भी तो मझा कराओ?”

 
तब राज थोड़ा सा रुक गया और उसने मुझे अपनी बाँहों में ले लिया और मैंने एक एक करके उसके शर्ट के बटन खोल दिए। उसने अपनी बनियान खोल दी। मैं तुम्हारे दोस्त के लिंग को सहलाती रही और उसके अंड कोशों को प्यार से मेरी हथेली में सहलाती और प्यार से धीरे से दबाती भी थी। तुमने तो राज के अंड कोष देखे हैं। वह काफी बड़े हैं। तब तक राज ने मुझे पूरी नंगी कर दिया। उसका मुंह मेरे मुंह पर था और उसकी जीभ मेरे मुंह में थी।“

मैं अपनी बीबी की चुदाई की बात सुन बड़ा ही उन्मादित हो रहा था। पर मुझे मेरी बीबी का यूँ झिझक ते हुए “लिंग, योनि” शब्द अच्छे नहीं लगे। मैंने उसे हलकेसे पर करारे शब्दों में कहा, :जानूँ, अब यह सभ्यता का नकाब छोडो। यह लिंग, योनि, सेक्स आदि शब्दों का प्रयोग न करो। साफ़ साफ़ बोलो “लन्ड, फुद्दी, चुदाई इत्यादि। चलो आगे बढ़ो।

रुखसार तब अपनी लज्जा से उभर ने की कोशिश कर रही थी। वह धीरे से कहानी आगे बढ़ाते हुए बोली, “उस ने मेरे स्तनों को दोनों हाथों में इतना कस के पकड़ रखा था की मेरी चीख निकल पड़ी। धीरे से उसने अपना मुंह मेरे मुंह पर से हटाया और उसे मेरे दोनों स्तनों पर रख दिया। वह एक हाथ से मेरे एक स्तन को भींचता था तो मुंह से मेर दूसरे स्तन को चूसता था। और चूसता भी ऐसे की वह चूसते चूसते मेरे स्तन को इतना खींचा की मेरे बूब्स लाल होगये। उसके मुंह में से मेरी निप्पल आ जाती और उसे जोर से चूस कर या दाँतो से काट कर उसने मेरे स्तनों पर गहरे निशान बना दिए। देखो तो।”

मेरी बीबी ने तब अपना गाउन खोल कर अपने स्तन मुझे दिखाए। वास्तव में उसके स्तन खून से जैसे लाल हो गए थे और उसके ऊपर राज के दाँतो के निशान साफ़ साफ़ नजर आ रहे थे। मुझे मेरे दोस्त पर ईर्ष्या भी हुई की वह साला कितना लकी है। अगर उसकी बीबी ने साथ नही दिया तो रुखसार उससे चुदने के लिए तैयार बैठी थी। अब उसे जब चाहिए तो एक न एक फुद्दी तो चुदवानेको तैयार ही थी। और उपरसे मेरी बीबी मुझे अपने स्तन और निप्पलों पर पड़े मेरे दोस्त के दाँतों के निशान दिखा रही थी। पर गुस्सा या नासमीर होने के बजाय मैं तो कामोत्तेजना से घायल हो रहा था।

मैं राज के दाँतों के निशान पर ही मेरी बीबी के स्तन और निप्पलोँ को चूसने और काटने लगा। मुझे एक अजीब सा रोमांच हो रहा था की मैं भी उसी जगह पर अपना अधिकार जमा रहा हूँ जहाँ पर राज ने अधिकार जमाया था।

मैं जानना चाहता था की आगे और क्या हुआ। मैंने रुखसार की और प्रश्नात्मक दृष्टि से देखा।

रुखसार ने आगे बोलना शुरू किया, “मैंने राज को कहा की तुम मुझे नीचे से चाटो। मैं गरम हो रही थी। राज का मेरे स्तनों और होठों पर चुम्बन करनेसे मैं भी काफी कामोत्तेजक हो रही थी। जब राज ने नीचे झुक कर मेरे पैरों के बीच मेरी योनि, सॉरी सॉरी, मेरी फुद्दी चाटना और चूसना शुरू किया तो मैं एकदम बेकाबू हो गयी। मुझसे रहा नहीं गया। मैं जल्द ही झड़ने वाली थी।

राज ने तब मेरी फुद्दी में दो उंगली डाल कर मुझ उँगलियों से चोदना शुरू किया। राज ने तो जैसे आग में घी डालने का काम किया। मेरी उत्तेजना सीमा से उपर जा रहीथी। तब में चरम पर पहुँच रही थी और चंद सेकंडों में ही मैं जैसे एक उत्तेजना के सैलाब में बह गयी और मैं ऐसी झड़ी की मत पूछो। थोड़ी देर के लिए मुझे राज ने सांस लेने का मौका दिया और वह मेरी फुद्दी में अपनी उँगलियों से फिर चोदने लगा।“

रुखसार की बात सुनते हुए मेरा लौड़ा थनगनाने लगा। मेरे लन्ड की नसोँ में मेरा वीर्य की जैसे बाढ़ आ गयी। मेरे लन्ड के छिद्र में से पूर्व रस झर रहा था। मैंने फुर्ती से अपने पजामें का नाडा खोल दिया और मेरे लन्ड को मेरी बीबी के हाथों में दे दिया। और मैं भी राज की ही तरह अपनी बीबी को अपनी उँगलियों से चोदने लगा। मेरे उंगली चोदन से रुखसार छटपटाने लगी। एक तो वह राज की बात करके वैसे ही गरम हो रही थी, ऊपर से मेरे ऊँगली चोदन से उसकी उत्तेजना बढ़ती ही जा रही थी।

इस दुगुने उत्तेजक धमाकों को झेलना उसके लिए कठिन हो रहा था। वह हवस की पीड़ा से कराहने लगी। मैंने भी देखा की वह तुरंत ही अपना रस का फौव्वारा छोड़ने वाली थी तो मैंने तेजी बढ़ाई और अपने कूल्हों को ऊपर नीचे करते हुए और बिस्तर पर रगड़ते हुए मेरी बीबी ने एक भारी सांस लेते हुए अपना प्रेम रस का झरना छोड़ा।

मैंने ठान लिया था की मैं मेरी बीबी और मेरे दोस्त के बीच हुयी कहानी पूरी सुनूँगा। अपनी बीबी को बाहों में भरते हुए मैंने उसके गाउन की ज़िप खोल दी। जैसे जैसे मेरी बीबी उसकी राज के साथ की रति क्रीड़ा की बात कर रही थी, मैं भी वैसे वैसे राज के विरोधी की तरह मेरी बीबी के साथ वही दुहरा रहा था।

मैंने कहा, “मेरी रानी आगे क्या हुआ वह भी तो बताओ।”

मैंने महसूस किया की रुखसार की छाती की धड़कनें तेज होती जा रही थी। वह बोली, “राज के तेज उंगली चोदन से मैं पागल हो रही थी। तुमने भी मुझे यह कहकर हरी झण्डी देदी थी की मैं राज के साथ खुल के मस्ती करूँ। राज मुझे कह रहा था की तुमने उसे भी मेरे साथ पूरी मस्ती करने की छूट दे दी थी। तो फिर बचा ही क्या था? मैं अपना आपा खो बैठी और राज के उंगली चोदन इतनी उकसा गई की उसे मुझे चोदने के लिए चिल्ला कर कहने लगी की बस करो, मुझे तुम्हारी उँगलियाँ नहीं तुम्हारा मोटा लन्ड मेरी प्यासी फुद्दी में चाहिए। बस मेरा इतना कहना ही काफी था। राज मुझ पर चढ़ बैठा और मेरी गीली फुद्दी के ऊपर अपना गिला लथपथ मोटा कड़ा लन्ड रगड़ने लगा।

मैं अपने होशो हवास में नहीं थी। मुझ पर भी हवस का जूनून हावी हो गया था। उस वक्त मेरा ध्यान सिर्फ चुदने पर ही था। तुम्हारा प्रोत्साहन और राज का मेरी और पागलपन मेरी हवस की कामना की आग को भड़काए जा रहा था। मैंने उसका लन्ड मेरे हाथ में लिया और मेरी फुद्दी के छिद्र के बीच रखा और उसे मेरी फुद्दी में अपने हाथ से थोड़ा अंदर घुसेड़ा। उसने एक धीरे से धक्का मर कर उसे थोडा मेरी फुद्दी में घुसेड़ा। तब मने राज की और देखा। वह समझ गया की मैं उसे धीरेसे धक्का मारने के लिए इशारा कर रही थी। धीरे धीरे वह अपना लन्ड अंदर बाहर करने लगा।”

 
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