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एक मस्त लम्बी कहानी .......!complete

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. मेरी बात पर उसे यकीन नहीं हुआ मगर खुशी उसके चेहरे से झलक रही थी। फ़िर उसने थोड़ा आशंकित मन से सानिया के विषय में पूछा। मैं इसी पल के इन्तजार में था कि कब वो यह बात चलाए और मैं उसको बताऊँ। मैंने आराम से कह दिया कि सब हो गया है और अपने पप्पू को मैं उसके छेद की सैर करा चुका पिछले दिनों में। उसको विश्वास नहीं हो रहा था। अब मैंने उससे आधा सच और आधा झूठ कहा-"यार जमील, सानिया के सील तो हमारे बाजी लगाने के पहले से टूटी हुई थी और इस शर्त को तो मैं जीत गया हूँ। इसके बाद हीं मैंने तेरे लिए लड़की खोजी और उस पर २०००० खर्च किए हैं एक घन्टे के लिए। सोच साले, तेरी बेटी को चोदने की कीमत मुझे ऐसी बड़ी चुकानी पड़ी है। पर कोई बात नहीं यार सानिया के लिए ये रकम कुछ नहीं है।" साले जमील का मुँह आश्चर्य से खुला रह गया। कुछ पल बाद बोला-"क्या सच में वो पहले से करती है यह सब? छी: छी: मुझे विश्वास नहीं हो रहा।" जमील सच में दुखी था अपनी बेटी के बारे में जान कर। यह सब बातें पहले पैग को बनाते समय हो रही थी। मैंने जाम आगे बढ़ाया और कहा, "चीयर्स...दोस्त चीयरअप... से चीयर्स..."। जमील तेजी से गिलास खाली कर दिया, फ़िर पूछा, "और तू कैसे कर सका यह सब सानिया के जिस्म के साथ?" मैं अब मस्त था, झिझक की कोई बात थी हीं नही सो कहता गया, "जैसे किसी भी मस्त माल के साथ किया जाता है। अपने कड़क लन्ड को उसकी मस्त गुलाबी चूत में ठाँस कर उपर से जम कर धक्के लगाए दोस्त। वो भी क्या मस्त हो चुदाई यार। अभी भी लग रहा है कि लन्ड जल रहा है उसकी चूत की गर्मी से। पर अब तू परसों के लिए तैयार रह। तुझे एक लौन्डिया की सील तोड़नी है, वो भी सिर्फ़ दो घन्टे में।" वो अब भी बोला कि मुझे विश्वास नहीं हो रहा कि सानिया अनछुई नहीं है। मैंने कहा-"ठीक है फ़िर तुम मेरे घर पर परसों रहना और मैं परसों दोपहर सानिया के साथ तेरे घर पर रहुँगा और उस दिन मैं उसकी तभी की पहनी हुई पैन्टी तुझे ला कर दुँगा, तब तो मानेगा? बिना धुली हुई पैन्टी देख कर। वैसे तु चाहे तो सानिया को बुला और पूछ ले, पर हो सकता है कि वो घबड़ा जाए। वि तो नहीं जानती न हमारे शर्त के बारे में और तुझसे काफ़ी पर्दा भी है उसका। परसों मैं उसको बता दुँगा कि तु भी जवान लड़की का रसिया है तो शायद फ़िर अगर तुम पुछो तो वो सच बोले। वैसे भी उसको सब बताना होगा, तभी तो तुम्हारे सामने वो चुदेगी।" और मैं हँसने लगा। जमील उलझन में था तो मैंने दुसरा पैग बना दिया।
 
. अगले दिन मैंने सानिया को सब बात बताई और वो काफ़ी खुश हुई। उसे इस बात की खुशी थी कि मैं उसको उसके अब्बू के सामने चोदुँगा। उसे उम्मीद नहीं थी कि उसके अब तक के स्ट्रीक्ट अब्बू सामने बैठ कर अपनी बेटी को चुदाते देखने को राजी हो जाएँगे। शायद इस kinky situation ने उसे और उत्तेजित कर दिया था। और फ़िर वो दिन आ गया जब जमील को मेरे घर उस कुँवारी लड़की को चोदने आना था। मैंने सुबह हीं फ़ोन करके उसको याद दिलाया। वो एक बजे आने को कहा तो मैंने भी सुरी को समय बता दिया। मैंने आज की छुट्टी ले ली थी। सुरी करीब साढ़े बारह में उस लड़की जुली को ले कर आया। जुली का रंग सच में कुछ ज्यादा हीं काला था। दुबली-पतली, छोटी सी लड़की थी वो, शायद ५ फ़ीट भी लम्बी नहीं थी। बदन भी बहुत भरा हुआ नहीं था, शायद दुबली होने की वजह से। एक लम्बे से प्रीन्टेड फ़्रौक पहन कर वो आयी थी और अपने उमर से कम दिख रही थी। चुचियों का उभार तो दिख रहा था पर अभी ब्रा बिना ही फ़्रौक पहने होने से खास पता नहीं चल रहा था। उसकी माँ भी साथ थी। करीब १७ साल की जुली देखने में १५ से कुछ ऊपर दिख रही थी। जुली की नाक बैठी हुई थी जिस वजह से उसका चेहरा भद्दा लगता था। मैंने सुरी को १५०००० दे दिये और पूछा, "कुँवारी हैं न, चेक कर लिए हो?" तो सुरी से पहले उसकी माँ बोली-"हाँ साहेब, १००%. आप भी तसल्ली कर लीजिए न।" इसके बाद उसने अपनी बेटी को कहा, "जुली, साहेब को पैन्ट खोल के दिखाओ"। जुली भी तुरन्त जमीन पर बैठ गयी और अपने पैन्टी या कहिए ब्लूमर को उतार कर अपने जाँघ खोल दिये। लौन्डिया का चेहरा जैसा हो, जवान बूर मस्त हीं होती है। उसके इस अंदाज के बाद मैं भी झुक कर उसके बूर की पुत्तियों को खोल कर भीतर की गुलाबी झिल्ली के दर्शन किए। काली-काली झाँटों से घिरी हुई काली-कलुटी बूर के भीतर का भाग एक्दम से लाल था और चमक रहा था। मेरे उठने के बाद जुली भी खड़ी हो गयी और कपड़े पहन लिए। सुरी ने उसकी माँ शायद १२००० दिए और दोनों साथ हीं चले गये। मैंने जुली को पानी पिलाया और बताया कि मेरा एक दोस्त अभी आयेगा, और वही उसको चोदेगा। फ़िर मैं उसके साथ इधर-उधर की बात करने लगा और तब तक जमील आ गया। जमील उस कमसीन कली सी जुली को देख मस्त हो गया। साले को अनुभव कम था, उसे तो वो कोई स्कूल-जाती बच्ची दिखी। मैंने अब जमील से कहा कि अब तुम इसके साथ मस्ती करो दो घन्टे ज्यादा से ज्यादा। मैं चला सानिया की गीली पैन्टी लाने। मैं भी दो घन्टे में आता हूँ, तब तक निबट लो। जमील फ़िर पेशोपेश में पड़ गया, "यार, क्या सच में सानिया के पास जा रहे हो?" मैंने पुरी बेहयाई से कहा, "हाँ दोस्त, अब जब तुम्हें पता है कि उसको लन्ड का स्वाद मिल चुका है तो क्यों परेशान हो? तुम अपना मजा लो और उसको अलग मजा लेने दो। मेरे साथ करेगी तो तुम्हें तसल्ली तो होगी कि वो सेफ़ है, वर्ना बाहर पता नहीं किस-किस से चुदा लेगी।" जमील बोला-"असल में यार, मुझे यह बात पच नहीं रही कि मेरी बेटी ऐसी है, खैर...अब वो जो करे।" मैं उसकी परेशानी समझ कर बोला-"अब भूल जाओ यह सब और इस लौन्डिया की सील तोड़ कर मजे करो। पुरा पैसा वसूल कर लेना। और सानिया ऐसी है कि कैसी है वो मैं अब जब आऊँगा तब बताऊँगा।" और मैं निकल गया। सानिया आज फ़िर दरवाज खोल कर मेरे से लिपट गयी। शुक्र है कि आज वो एक नाईटी पहन कर दरवाजा खोली थी।
 
. मैंने उसे याद दिलाया कि आज वो एक पैन्टी पहन ले पहले फ़िर मेरा लन्ड चुसे ताकि अगर उसकी बूर गीली हो जाए तो उसका गीलापन उसकी पैन्टी में महसुस हो। उसने तुरंत नाईटी उपर करके मुझे दिखाया कि वो एक सेक्सी पैन्टी पहने हुए है। वो सफ़ेद रंग की एक छोटी से पैन्टी पहने हुए थी और शायद अपनी बूर से खेल-खेल कर उसको हल्का गीला भी कर चुकी थी। मैं यह सब देख मस्त हो गया। सानिया सच में अपने अब्बू के साथ के लिए सब करने को तैयार थी। मैंने आधे घंटे तक लगातार उसकी बूर चाटी और फ़िर उसको ऊँगली से खुब चोदा। उसकी बूर इतनी गीली कर दी की मुझे पानी उसके बूर के बाहरी होठों तक दिखने लगा और तब मैंने उसको पैन्टी पहना कर सामने से पैन्टी को साईड में करके चोदा ताकि जब मेरा लन्ड उसके बूर को मथे तो जो मक्खन-मलाई भीतर से निकल सब पैन्टी के सम्पर्क में जरुर आए। करीब सवा घंटे के खेल के बाद मैं और वो दोनों लगभग साथ-साथ झड़े। मैंने अपना माल उसकी मुँह में निकाला और वो हमेशा की तरह उसको निगल गयी। मैं उसकी उस गीली पैन्टी को उसके बदन से उतार कर एक पौलिथीन में डाल उसके घर से अपने घर की तरफ़ चल दिया। मैं जब घर पहुँचा तब जमील टीवी देख रहा था। मैंने उससे पूछा कि जुली किधर है तो उसने जवाब दिया कि बाथरुम में गयी है, सब साफ़ करने। वह मुस्कुरा रहा था। मैं समझ गया कि उसने जुली की सील तोड़ी है और खुश है। मैंने आगे पूछा-"माल कैसा था?" वो खुश हो कर बोला-"बहुत मस्त। बहुत मजा आया।" मैंने पूछा, "साली नखरे भी की थी क्या?" जमील बोला, "नहीं यार, ये तो जैसे बेचैन थी कि कोई उसकी सील तोड़े। मेरे से ज्यादा तो उसे हड़बड़ी थी। साली अपने हाथ से पकड़ कर लगा कर करायी मेरे से। खुब मजा आया। दर्द भी हँसते-हँसते सह गयी। सील टुटने के बाद खुद मुझे पीछे ढ़केल कर अपनी ऊँगली से खुद चेक भी की। इसके बाद एक बार धो कर आयी और तब जम के मजा दी। थैंक्स यार, तेरी वजह से यह सब मजा मिला।" मैंने उसके कंधे पर एक हल्का चपत लगाया, "जियो मेरे शेर, आज एक दम मस्त दिख रहे हो साले। उमर १० साल कम दिख रही है। अब भाभी जी से मिलोगे तो उसका क्या हाल करोगे, मुझे सब अब दिख रहा है।" अपनी बीवी की बात सुन कर जमील का चेहरा लाल हो गया। तभी जुली आ गयी, और मुझे देख कर मुस्कुराई। मैंने देखा कि उसके चेहरे पर कोई हिचक नहीं थी। मैंने उसको कहा-"क्यों मजा आया मेरे दोस्त के साथ?" जुली ने कहा-"हाँ, जैसा सोची थी उससे ज्यादा मजा लगा। दर्द तो हुआ पर मजा आया।" मैंने उसको कहा कि क्या वह अपना बूर एक बार और दिखाएगी, जैसे उसने पहले मुझे अपनी सील दिखाई थी। जुली तुरन्त वही जमीन पर बैठ गयी। वो अब बिना पैन्टी के ही थी। फ़िर से पहले की तरह ही अपने जाँघ खोल कर मुझे अपना बूर दिखाई, और मैंने भी उसकी बूर की पुत्ती खोल कर उसके बूर के भीतर की लाली देखी। चुदने के बाद उसकी बूर ज्यादा ही लाल दिख रही थी पर अब उसके बूर के भीतर की झिल्ली फ़टी हुई दिखी। हल्का-हल्का अवशेष उसका अभी भी था, जो शायद तीन-चार चुदाई के बाद पुरी तरह से गायब हो जाने वाला था। पर जुली लड़की से औरत बन कर बहुत खुश दिखी। मैंने उसको अपने ड्रावर से एक पैन्टी निकाल कर दी। सच तो यह है कि मैं घर पर ३०/७५ साईज से ३४/८५ साईज की दो-चार पैन्टी रखता था ऐसे मौके के लिए। आज कल जिस उमर की लड़कियों को मैं चोदता था, उनकी साईज इन्हीं में से कुछ होती थी। जुली तो नयी पैन्टी पा और खुश हो गयी। जामील यह सब देख बोला-"यार बाबू, तो तो साले घर पर पुरी तैयारी रखता है। कमाल है यार।" मैंने कहा-"साले जमील, एक बार अपने घर पर लड़की ला कर चोदना शुरु करो, तुम भी यह सब रखने लगोगे। वैसे तुम्हें बहुत परेशानी नहीं होगी, घर पर सानिया है हीं, उसकी पैन्टी काम आयेगी ऐसे समय में जब लड़की को पैन्टी की जरुरत पड़ेगी।" अब मुझे असल बात याद आयी। मैंने कहा-"हाँ, यह लो सानिया की पैन्टी।" और मैंने हाथ के पौलिथिन से सानिया की जो पैन्टी मैं लाया था निकाल कर जमील की तरफ़ उछाल दिया जिसे उसने कैच कर लिया। उसे मुठ्ठी में लेने के बाद बोला-"गीली है यार", तो मैंने कहा-"हाँ, जब मैंने सानिया को चोदा तब भी यही पैन्टी उसके बदन पर था। मैंने इसे एक साईड करके उसकी चूत चोदी और फ़िर उसकी पनिआई हुई चूत पे इसको खुब रगड़ा और इसे खुब गिला करके तेरे लिए लाया हूँ यार। एक बार सुँघ कर तो देख।" जमील हिचक रहा था। जुली को कुछ समझ नहीं आ रहा था कि हम क्या बात कर रहें हैं। मैंने फ़िर से जमील को कहा-"यार एक बार देख तो सुँघ कर, कैसी खुश्बू है सानिया के बूर की। अब मेरे से कैसी शर्म। तेरे लिए हीं लाया हूँ और मैंने उसके हाथ से पैन्टी ले कर खुद एक लम्बी साँस खीं कर उसको सुँघा। पैन्टी से अभी भी सानिया के बूर की खट्टी-कसैली बू आ रही थी!
 
.फ़िर उसको अपने ह्थेली में ऐसे फ़ैलाया कि उसकी चूत से सटा हुआ भाग एक दम सामने हो गया और फ़िर मैं अपने हाथ को जमील के नाक के सामने कर दिया। जमील हल्के से सुँघा तो मैंने उसको उकसाया, "अबे साले जोर से सुँघ ना, देख तो अभी भी सानिया की बूर की बू, इसमें से आ रही है। एक बार देख तो ले कि कैसी खुश्बू है तुम्हारे जवान बेटी की बूर में। कसम से कहता हूँ यार, इस कुँवारी जुली की बूर से जरा भी कम न है तेरी बेटी की चूत।" अब जमील ने जोर की साँस खींची, आँख बन्द और चेहरे पर मस्ती। आज पहली बार एक बाप को अपनी जवान बेटी की बूर के पानी की ऐसे खुश्बू लेते देख मेरा लन्ड टनटनाने लगा। वो जमील अब पक्का बेटीचोद दिख रहा था मुझे और मैं अब सोचने लगा कि कैसे साले की बेटी को उसी हरामी के सामने चोदुँगा। मेरा लन्ड यह सब सोच ठनक गया और दो-चार ठुनकी भी लगा दिया। जुली सब सुन कर कुछ समझने लगी और वो भी अब जमील के चेहरे के भाव देख रही थी। वो अब पैन्टी को नाक से सटा कर सुँघ रहा था और उसे हल्के से अपने नाक और होठ पर घुमा रहा था। मैंने कहा-"चाट ले यार, टेस्ट कर ले अपनी बेटी की बूर का पानी" और जमील सच में पैन्टी को उसी जगह पर चाटने लगा जहाँ सानिया के बूर की पुत्ती सटी हुई थी उस पैन्टी से। मादरचोद अब हरामीपन की हद कर रहा था और मैंने जुली को कहा कि वो अब प्लीज मेरा लन्ड चुस कर झाड़ दे, मैंने उसको इसके अलग से पैसे का वायदा किया। जुली खुशी-खुशी मेरे पास आ गयी और मेरे लन्ड को बाहर निकाल कर चुसने लगी। मैं सानिया के बदन के बारे मेम सोचने लगा। जमील साला पता नहीं क्या सोच रहा था। मैंने देखा कि वो खुद अपने हाथ में अपना लन्ड पकड़ कर मुठ मार रहा था और पैन्टी से खेल रहा था। मैं समझ गया कि अब साला बेटीचोद अपनी बेटी सानिया के बारे में सोच कर मुठ मार रहा है। मेरे और जमील दोनों के लन्ड से लगभग साथ हीं माल निकला। मेरा सब जुली के हथेली पर फ़ैल गया जबकि जमील ने अपना माल सानिया के पैन्टी के उपर गिराया और फ़िर उसी पैन्टी से अपना लन्ड पोंछा। मैंने अब उससे पूछा-"अब बतओ, कब समय देते हो मुझे?" उसने पूछा-"किसलिए?" मैंने याद कराया कि अब जब वो एक लड़की की सील तोड़ चुका तो शर्त के हिसाब से अब उसको अपनी बेटी को मुझसे चुदाते हुए देखना था।
 
.यह सुन कर जमील फ़िर संकोच में पर गया, "यार यह मुझसे नहीं होगा, बदले में तुम जो कहो। तुम तो उसके साथ कर हीं रहे हो। जितना चाहो करो, पर मुझे बहुत शर्म आयेगी उसको यह सब करते देखते हुए। वो भी तो शर्माएगी मेरे सामने।" मैंने कहा-"अरे नहीं साले, सानिया तो बेचैन है तुमसे चुदाने के लिए और तू है कि शर्मा रहा है। वो बहुत मस्त लड़की है दोस्त। जब मैंने कहा कि आज तुम फ़िर मेरे घर पर एक लड़की चोद रहे हो तो उसने कहा कि काश कि वो तुमसे चुदा पाती। तब मैंने कहा कि एक बार वो तुम्हारे सामने मुझसे चुदा ले। शायद हम दोनों को देख कर तुम्हें भी उसको चोदने की हिम्मत हो जाए।" पर मेरे कई बार कहने पर भी जमील तैयार नहीं हुआ। तभी जुली की माँ उसको लेने आ गयी। जमील ने जुली को ५००/- बख्शीश के तौर पर दिए और फ़िर आगे मिलने का वायदा भी किया। तभी जमील की बीवी का फ़ोन आ गया। पता चला कि वो अगले दिन आ रही है, दो दिन के लिए। मुझे लग गया कि अब अगले दो दिन तक कुछ नहीं होगा। इसके बाद जमील भी अपने घर की तरफ़ चल दिया। जमील की बीवी दो नहीं बल्कि पाँच दिन रही और फ़िर उसके जाने के दो दिन बाद शनिवार को शाम में मैं जमील के घर पर था। एक बार फ़िर से हमारे साथ एक बोतल था और था दो ग्लास। लगभग ८ बजे थे और सानिया पूछी कि क्या आप लोग को कुछ चाहिए, मैं नहाने जा रही हूँ। वो एक सफ़ेद गाउन पहने थी। जमील ने कहा-"नहीं, तुम जाओ" और मैंने कहा कि वो पास आए। सानिया मुस्कुराते हुए पास आयी तो मैंने उसको कहा कि वो एक पैग अपने हाथ से बना दे हमारे लिए। वो जब हमारे लिए पैग बना दी तो मैंने कहा कि अब एक घुँट अपने हाथ से पिला भी दे। सानिया आराम से मेरे पास आयी और ग्लास आगे बढ़ाया तो मैंने उसकी कमर पकड़ लिया और अपनी ओर खींचा। मेरा इशारा समझ सानिया मेरे गोदी में बैठ कर ग्लास मेरे होठों से लगायी। मैंने भी अपना एक हाथ गाउन के उपर से हीं उसकी चुची पर रख कर उसके बाप के सामने ही उसकी मस्त गोलाई से खेलने लगा। जमील का चेहरा अजीब हो रहा था। उसने सानिया को वहाँ से जाने को कहा। मैं सब देख रहा था। मैंने सानिया को कहा, "अब जरा मेरे यार को भी अपने हाथ से पिला दो एक बार। साला मेरा सुख देख चिढ़ रहा है।" सानिया उठी और बरे आराम से अपने बाप की गोदी में बैठ गयी और उसका ग्लास उठा कर मुँह से लगा दिया।
 
. जमील अचकचाते हुए पीने लगा तब मैं आगे बढ़ कर जमील की गोद में बैठी सानिया की जाँघ पर हाथ रख दिया। जमील को अंदाजा नहीं था कि उसकी गोद में बैठी उसकी अपनी मस्त जवान बेटी की जाँघ को मैं सहला रहा हूँ। मैं अब हल्के-हल्के उसके गाउन को उपर कर रहा था। जब उसका दाहिना जाँघ पुरा नंगा हो गया तब जमील को पता चला कि मैं उसकी बेटी के साथ क्या कर रहा हूँ। वह तुरन्त गाउन को नीचे कर के सानिया की नंगी जाँघ को ढ़क दिया और सानिया से जोर से कहा कि वो नहाने जाए। सानिया को भी लगा कि जाना चाहिए तो वो चल दी। मैंने अपनी जिस हथेली को उसके जाँघ पर मला था उसे सुँघा-"वाआआअह...."। जमील यह सब देख कहा-"बाबू, अब ये सब नहीं करो।" मैंने कहा-"क्यों? सानिया को तो बहुत मजा आता है। बहुत मस्त हो कर चुदाती है मेरे से। यार इस मस्त माल को मस्ती लेने दो और तुम भी इस मस्त चीज की छेद में गोते लगाओ। लन्ड हरा हो जाएगा, जवानी आ जायेगी ऐसा माल अगर दस दिन चोद लोगे, कसम से।" जमील बोला-"नहीं बाबू, अब ये सब नहीं। अब सानिया किसी के साथ नहीं करेगी यह सब। सोचो यार, जैसी भी है मेरी बेटी है। तुम्हारे बेटी के जैसी है। वो जवानी के जोश में कुछ कर ली, पर हम लोग को तो होश में रहना चाहिए।" मैंने कहा-"अबे अगर वो जवान है, और वो खुद मुझे लाईन दी है तो मैं क्यों ना चोदूँ उसको। और रही बात कि वो तेरी बेटी है, तो बता जरा जिस किसी को मैं चोदुँगा वो किसी न किसी की बेटी तो होगी। तू भी तो साले अब तक जो लड़की को चोदा वो भी तो किसी की बेटी है। यार दुनिया में ऐसा हीं है, सब एक दुसरे की बेटी को चोदते रहते हैं। पर यार बहुत कम लोग होते हैं जिनको अपनी बेटी को चोदने का मौका मिलता है। तुम्हारी तो बेटी ऐसी सुन्दर है, हूर है हूर। और सब से बड़ी बात कि वो खुद तुम से चुदाने को बेचैन है तो चोद लो एक बार फ़िर देखना, साले तेरा लन्ड उसकी बूर में हमेशा के लिए फ़ँस जायेगा।" जमील लगा कि अब रो पड़ेगा, "नहीं बाबू, अब जो तू इस बारे में कुछ भी बोला तो हमारी दोस्ती खत्म।" उसकी इस बात पर मैं चुप हो गया और फ़िर अपना ग्लास खाली कर चुप-चाप चल दिया। अगले दिन रविवार था और सानिया दोपहर में मेरे घर आयी। उसको लग गया था कि रात में कुछ हुआ है, जो अच्छा नहीं है। मैंने सब बात सानिया को बता दिया और बोला कि अब आगे उसे ही कुछ करना होगा जिससे जमील के लन्ड में सानिया के लिए सुरसुरी पैदा हो। सानिया सब सुन कर बोली-"ठीक है, अब मै हीं कोशीश करुँगी कि अब्बू अब कुछ करें। अगर कुछ न हुआ तो उनका बलात्कार कर दुँगी पर अब एक बार उनसे जरुर चुदाउँगी।" फ़िर अचानक उसके शब्द गंभीर से चंचल हो गये और कहा कि अब एक बार जल्दी से मुझे मस्ती का जाम पिलाईए तब जाऊँगी और फ़िर अपना लौंग स्कर्ट उठा कर, पैन्टी नीचे ससार कर अपना चुतड़ मेरी तरफ़ कर के झुक गयी। मैं इशारा समझ पीछे से उसकी चूत चाटने लगा और साथ ही अपने लन्ड को हल्के हल्के हिलाने लगा। लन्ड में जब सुरुर आ गया तो मैंने उसे उसकी चूत में पीचे से पेल दिया और फ़िर उसकी मस्त चुदाई शुरु कर दी। साली हल्के हल्के कराह रही थी मस्ती से, आआह आआआह ओ ओह ओ ओह आआह इइइइस्स्स्स्स्स आह। उसके आवाज मुझे जोश दिला रही थी। मैं अब जोर से उसकी बूर में लन्ड पेलने लगा था। हच हच फ़च फ़च की आवाज होने लगी थी। हम दोनों सब कुछ भूल कर एक दुसरे के शरीर का भोग कर रहे थे। मेरा अब निकलने वाला था, तो मैंने लन्ड बाहर खींच लिया। पर सानिया ने एक बार फ़िर मेरा लन्ड भीतर घुसा लिया और बोली, "आज चाचू अपना सब माल मेरे चूत में निकालो।

 
. तुम्हारा माल अपने चूत में पैक कर के घर ले जाऊँगी।" मैंने कहा-"अगर बच्चा ठहर गया तो"। उसने बेशर्मी से कहा-"तुमसे निकाह कर लुँगी। तुम्हारा बच्चा पैदा करुँगी।" यह सुन कर मैं और मस्त हो गया और अपना सब माल उसकी गोरी-चिट्टी चूत के भीतर उड़ेल दिया। जब लन्ड बाहर निकला तो मेरा लसलसा सफ़ेद माल उसकी चूत से बाहर बह निकला तो वो उसको अपने हाथ से समेट कर वापस अपने चूत के भीतर डाल ली और फ़िर अपनी पैन्टी पहन ली। उसकी पुरी पैन्टी गीली हो गयी पर वो उस गीली पैन्टी के उपर से ही सल्वार पहन ली। फ़िर मेरे होठ चुम कर बाहर निकल गयी।...इसके बाद की कहानी एक बार फ़िर सानिया की जुबानी पेश है...। मैं जब घर आयी तो अब्बू शायद मेरा हीं इंतजार कर रहे थे। उन्होंने पूछा, "कहाँ गयी थी दोपहर में बेटी?" मैंने देखा कि उनका मूड बहुत अच्छा है तो मैंने सच कह दिया-"बाबू चाचा के घर"। एक क्षण रुक कर उन्होंने आगे पूछा-"क्यों?" और मैंने फ़िर सच कह दिया-"आपको पता है अब सब। चाचा ने बताया है आपको।" अब अब्बू प्यार से बोले-"हाँ पता तो है पर देखो बेटी यह सब ऐसे ठीक नहीं है। अभी तुम इस सब के लिए बच्ची हो।" मैंने गौर किया कि अब्बू की नजर मेरे बदन पर उपर से नीचे तक फ़िसल रही है। मुझे यह देख अच्छा लगा और मैंने जवाब दिया-"आप को जो लगता हो अब्बू पर अब मैं बच्ची नहीं हूँ, जवान लड़की हूँ और मुझे यह सब अच्छा लगता है इसीलिए करती हूँ। अब तो सप्ताह में एक बार कम से कम करना जरुरी लगता है वर्ना बेचैनी होने लगती है पुरे बदन में। आपका तो पता होगा कि जब तक यह मजा नहीं मिले तब तक तो फ़िर भी ठीक है पर एक बार अगर जिस्म का सच्चा मजा मिल जाए तो फ़िर उसकी याद बार-बार आती है।" अब्बू फ़िर बोले-"वो सब ठीक है बेटी पर थोड़ा रुक जाओ, तुम्हारी निकाह पढ़ा दुँगा फ़िर करना यह सब कोई कुछ नहीं कहेगा।" मैं हँसते हुए बोली-"वो तो अभी भी कोई कुछ नहीं कहता। बस अब आपको पता है तो आप इतना बोल रहें है। अगर आपको यह सब पता नहीं होता और तब भी मैं यह सब करती तो। वो तो चाचा के साथ मैंने कर लिया कि अगर एक बार उनसे कर ली तो फ़िर बाहर के गैर लड़कों से नहीं करना होगा और तब सीक्रेसी ज्यादा रहेगी। अब्बू आप फ़िक्र ना करें, मैं आपका और आपकी इज्जत का ख्याल रखुँगीं।" अब अब्बू बोले-"जैसी तुम्हारी मर्जी सानिया बेटी, पर मुझे अब भी यह ठीक नहीं लगता कि तुम यह सब किसी के साथ करो।" अब्बू बात तो कर रहे थे पर शब्दों को बहुत संभाल कर बोल रहे थे और मेरे बदन को घुर-घुर कर बातें कर रहे थे तो मैंने सोचा कि एक ट्राई ले लेती हूँ। मैंने कहा-"अब्बू आप भी तो उनके घर पर लड़कियों के साथ सोए हैं। जब आप इतने साल बाद सेक्स का मजा ले सकते हैं तो फ़िर सोचिए कि मैं तो अभी-अभी जवान हुई हूँ, दो महिने से यह सब मजा लेना जाना है तो मेरी क्या हालत होती होगी जब मन करता होगा। और अब्बू आप तो देख रहे हैं मैं बच्ची नहीं हूँ (कहते हुए मैंने एक हल्की अंगराई ली)। आप तो मेरी पैन्टी भी देख चुके।" अब्बू के चेहरे का रंग उड़ने लगा यह सब सुन कर। मुझे यह देख मजा आया और मैंने आगे कहा, "आज फ़िर दिखाऊँ आपको?"। यह कहते हुए मैंने अपना हाथ अपने स्कर्ट की भीतर घुसाया और एक झटके से अपनी पैन्टी उतार दी। मैंने इतनी तेजी से यह किया कि उनको शायद हीं मेरी चूत दिखी होगी। फ़िर मैंने पैन्टी को अब्बू की गोदी में डाल दिया। वो पैन्टी अभी भी मेरी चूत के रस और चाचा के लन्ड के रस से गीली थी। मैंने एक भरपुर नजर अब्बू पर डाली, और फ़िर पैन्टी को देखा जो उनकी गोदी में था, फ़िर अपने चुतड़ को बड़े सेक्सी अंदाज में मतकाते हुई सामने से हट गयी। मैं सोच रही थी कि क्या अब्बू मेरी चूत के बारे में सोच रहे हैं या नहीं? इसके बाद मैं अब्बू के सामने जान-बुझ कर इठला कर चलती ताकि उनको मेरे बदन के उभारों का अहसास हो। दो-तीन दिन बाद मुझे लगने लगा कि अब वो मुझे कुछ अलग नज़र से देखते हैं। फ़िर मेरे पीरियड शुरु हो गये और तब मैं खुद थोड़ा सिकुड़ गयी अपने में हीं, पर मुझे अपना लक्ष्य याद था। चार दिन बाद जब मैं अपने पीरियड से फ़ारिग हुई तब मेरे भीतर एक अलग आग लगी हुई थी। उस दिन शाम को नहाते हुए मुझे आईडिया आया कि अब घर पर मैं अपने अंडर्गार्मेन्ट्स नहीं पहनूँ तो मेरी चुचियों की झलक ज्यादा मिलेगी अब्बू को, और अगर वो कोशिश करें तो मेरे चूत के भी दर्शन होगें और मुझे पता चल जायेगा कि वो मेरी चूत को देखना पसंद करते हैं कि नहीं। अगर मुझे लगा कि वो मेरे चूत को देखने में इच्छुक हैं तब मैं थोड़ा और आगे बढ़ुँगी। उस रात तो खैर कुछ न हुआ पर अगले सुबह मैं पैजामे और कुर्ते में उनके सामने सुबह की चाय ले कर गयी। उनके बिस्तर पर मैं भी बैठ गयी और मैं जब भी हिलती मेरी चुचियाँ कुरते में हिलती और अब्बू के नजर दो-एक बार चुची पर अँटकी।

 
. मै दो बार जान कर उनके सामने झुकी ताकि उनको मेरे चुची की गोरी चमड़ी का कुछ हिस्सा दिखे। पर मुझे पता नहीं चला कि उनके दिल में कुछ हुआ या नहीं। मैं खाली कप को ले कर लौटते हुए तय कर लिया कि शाम में लौन में चाय के वक्त उनके सामने बिना पैन्टी के स्कर्ट में बैठुँगी और थोड़ी झलक दिखाउँगी। अब मुझे शाम का इंतजार था। शाम को अब्बू करीब ५ बजे आराम करके उठे और फ़िर लौन में फ़ूलों को पानी देने के बाद वहीं कुर्सी पर बैठ गये। मैंने उनसे पूछा-"चाय लाउँ।" उनके हाँ कहने के बाद, मैंने एक बार फ़िर आईने के सामने कुर्सी पर बैठ कर सब चेक किया और समझ लिया कि अगर मैं अपना एक पै कुर्सी पर रखूँ तभी उनको सामने से मेरा चूत दिख सकेगा, वर्ना नौर्मल तरीके से बैठने पर भी जाँघ भले दिखे पर चूत नहीं दिखेगा क्योंकि मेरी स्कर्ट लम्बी थी। खैर मैं चाय ले कर गयी और अब्बो के सामने बैठ कर चाय बनायी और उन्हें दिया फ़िर अपना कप ले कर बैठ गयी। स्लीव-लेस टौप बदन पर था थोड़ा टाईट और मेरी नुकीली चुची और नन्हीं सी निप्पल की झलक उन्हें जरुर मिल रही थी। मैंने दो-चार बार अपने चुची और निप्पल को सहलाया भी टौप के उपर से हीं ताकि अब्बू का ध्यान उस तरफ़ जाए और वही हुआ भी। फ़िर ऐसे किया जैसे मेरे पैर में नीचे की तरफ़ मच्छर काटा है। पहले मै हल्का सा झुक कर उसे सहलाई फ़िर मच्छर की बात कहते हुए अपना पैर मोड़ कर कुर्सी पर रख ली और ऎड़ी के पास खुजलाने लगी। स्कर्ट उपर उठा तो पर ऐसे सेट हुआ की मेरी एक जाँघ पुरी नंगी हो गयी पर मेरी चूत पुरी तरह से ढ़्क गयी। मेरे अब्बू की नजर बार-बार मेरे नंगे जाँघ से फ़िसल कर मेरे चूर की तरफ़ जाती पर फ़िर हट जाती। मैंने अपने हाथ से हलके से रगड़ते हुए उसे थोड़ा किनारे किया ऐसे कि अब्बू को न लगे कि मैं जान-बुझ कर ऐसा कर रही हूँ। मुझे उम्मीद है कि ऐसे उनको मेरे चूत का पुरा नजारा तो नहीं मिला होगा पर एक साईड से मेरे चूत के पास की गोरी चमड़ी जरुर दिखी होगी और शायद मेरे चूत पर उग रही काली-काली झाँट भी १२-१५ दिन की दाढ़ी जितनी बड़ी दिखी होगी। अब्बू की नजर बार-बार उसी तरफ़ जा रही थी पर संकोच की वजह से वहाँ टिक नहीं रही थी। करीब २ घंटे बाद सात बजे बाबू चाचा आ गये, मैं खुश हो गयी। चाचू आज कई दिन बाद आए थे और साथ में एक जौनी वाकर व्हिस्की लाए थे। मेरे अब्बा से उन्होंने कहा कि वो तीन दिन के लिए नेपाल गये थे और वहीं से वो व्हीस्की लाएँ हैं। फ़िर उन्होंने मेरे चुतड़ पर एक हल्का सा थप्पड़ लगाया और कहा कि जाओ कुछ लाओ खाने वास्ते। मैं जल्दी से सलाद और मिक्स्चर ले कर आयी। दोनों दोस्त घर के भीतर आ गये और तब चाचू ने कहा कि आज सानिया बेटा तुम हमें शराब पिलाओ तो ज्यादा और बेहतर नशा होगा। फ़िर मेरे अब्बा से कहा-"क्यों दोस्त, अगर जवान लड़की पिलाए तो मजा ज्यादा आता है, है ना?" मेरे अब्बू ने कहा-"हाँ, यार और मेरी ओर देखा।" मैं मुस्कुराते हुए उठी और पैग बना दिया फ़िर जब चाचू की तरफ़ बढ़ाया तो वो मुझे गोदी में खींच लिए। मेरे कपड़े के उपर से हीं मेरे छाती को मसला और जब उन्हें लगा कि सिर्फ़ एक कपड़ा है वहाँ तो वो बेशर्मी से बोले, "वाह आज तो तुम तैयार हो मेरे लिए, क्यो?" मैं बिना कुछ कहे उठ गयी और अब्बू की गोदी में खुद बैठ गयी और ग्लास उनके मुँह से लगाया। चाचू बोले-"यार जमील एक बार इसकी चुची तो छु कर देख, कैसी मस्त है और इसने ब्रा भी नहीं पहना है।" अब्बू की नजर मेरे चुची पर थी।
 
मैं उम्मीद कर रही थी कि शायद आज अब्बू मेरी छाती छुएँ। पर अब्बू ने मेरे हाथ से ग्लास ले लिया और खुद पीने लगे। मैं उनकी गोदी में बैठ कर हीं खुद से अपनी चुची सहलाई। चाचू यह देख बोले, "क्या जमील, बेटी को तड़पा रहे हो। दो मर्द के रहते इसे खुद से अपनी चुची मसलनी पर रही है", कहते हुए वो मुझे अपनी गोदी में खींच लिए और मेरी चुची को सहलाए। मैं उन्हें पुरा सहयोग दे रही थी। अब्बू के सामने शर्माने की कोई जरुरत थी नहीं, बल्कि मैं तो चाह रही थी कि अब्बू खुद बेशर्मी करने लगें। पर वो तो इधर उधर नजर कर रहे थे, और ऐसे कर रहे थे जैसे उन्हें मुझे देखने में कोई दिलचस्पी नहीं है। मैं अब उन्हें भूल कर चाचू के साथ पर ध्यान लगा कर अपने चेहरे को थोड़ा उपर कर दिया और चाचू मेरे होठ चुमने लगे। फ़िर चाचू ने अपना हाथ मेरे जाँघ पर रखा और धीरे-धीरे मेरा स्कर्ट उपर करने लगे। जैसे हीं मेरा स्कर्ट पुरी तरह उपर हुआ और मेरी चूत नंगी हुई, अब्बू बोल पड़े-"छीः, बहुत गन्दे हो तुम दोनों। मैं यहाँ सामने बैठा हूँ और इस तरह की हरकत कर रहे हो।" मैं चाचू के सीने को सहला रही थी और वो मेरे बूर के आस-पास की चमड़ी छू रहे थे। चाचू बोले-"यार जमील ऐसे भड़को मत मेरे दोस्त। तुम बाजी हारे हुए हो, और शर्त के मुताबिक तो मुझे सानिया को कम से कम एक बार तो तुम्हारे सामने चोदना हीं है। सानिया को सब पता है और जब वो तुम्हारे सामने चुदवाने को तैयार है तो तुम भी आराम से बैठो और देखो आज एक दम लाईव शो। पुरी दुनिया कितने सारे पैसे खर्च करके देखती है चुदाई का लाईव शो, तुम्हें तो हम फ़्री में दिखा रहे हैं।" फ़िर वो मुझसे पुछे-"क्यों सानिया बेटा, तुम्हें कोई प्रोबलेम है जमील के सामने चुदाने में?" मैं तपाक से बोली-"मुझे कोई परेशानी नहीं, मुझे तो अपने खुद के मजे से मतलब है और आपके साथ बहुउउउउउउउउउउउउउत मज्जा आता है चाचा जान...।" मैंने अपनी आवाज में एक सेक्सी टोन पैदा किया और एक सेक्सी उह्ह्ह्ह्ह कर दी। चाचू मुझे गोदी से उतार कर खड़े हो गये और अपने जीन्स पैंट की जिप खोल दिए। मैं इशारा समझ गयी और उनके सामने घुटने पर बैठ कर अपना हाथ पैंट के खुले जिप के भीतर डाल उनके लन्ड को पकड़ कर बाहर खींच ली। मैंने अब्बू के तरफ़ देखा भी नहीं पर जिस ऐंगल से हम दोनो उनके सामने थे, मुझे पता था कि उनको सब एक दम साफ़ दिख रहा होगा। चाचू का लन्ड आधा कड़ा था, और मैं उसको अपनी मुट्ठी से हल्के-हल्के सहलाई तो चाचू बोले कि थोड़ा चुसो सानिया। और मैंने अपने होठों पर जीभ घुमा कर होठ को गीला किया और चाचू के लन्ड को मुँह में भर ली। चाचू मेरे सर को पकड़ कर अपना लन्ड मेरे मुँह में पेलने लगे और तब मैंने अपने अब्बू की तरफ़ तिरछी नजर से देखा। हमारी नजर मिली तो वो अचानक उठ गए-"छीः छीः..., हद हो गयी", उनके मुँह से निकला। वो वहाँ से चले गये। पर हम दोनों अब कहाँ रुकने वाले थे। आज पहली बार अपने घर पर अब्बू की मौजुदगी में मैं चुदाने जा रही थी। यही बात मुझे एक्स्ट्रा मजा दे रही थी। करीब १० मिनट एक-दुसरे को चुमने-चाटने के बाद चाचू ने मुझे जमीन पर ही लिटा दिया और उपर से चढ़ गए। अब तक मैं हल्की सिस्कारी भर रही थी पर अब जब मेरी मस्त चुदाई शुरु हुई तो मैं जोर-जोर से चीखने लगी। मैं बड़े गन्दे शब्द बोल रही थी। मुझे पता था कि अब्बू पास हीं हैं और वो सब सुन सकते हैं। मैं उन्हें सुनाने के लिए खुब मस्त हो कर कराह रही थी और अनाप-शनाप बक रही थी।
 
.चाचू भी सब समझ रहे थे और मुझे चोदते हुए खुब सारी गालियाँ बक रहे थे। वैसे तो हम दोनों जब भी चुदाई गेम खेलते, एक-दुसरे को गालियाँ देते रहते, पर आज की बात हीं कुछ और थी। आज हमें पता था कि हम दोनों की आवाज आज कोई और भी सुन रहा है जो बहुत स्पेशल है। हमारी बातें जो हो रहीं थी उसकी एक झलक मैं आपको बताती हूँ। मैं - "आआह्ह चाचा जान मजा आ रहा है, खुद चोदिए मुझे। वाह और जोर से डालिए.." चाचू - "सही बात कह रही हो, बहुत मजा आ रहा है। चुदो आज तुम मस्त हो कर। यह लो एक जोर का धक्का अपनी बूर के भीतर, लुटो मजा अपनी जवानी का।" मैं - "वाआआअह्ह, और जोर से इइइइइइइस्स्स्स्स्स्स्स्स्स, आअह्ह्ह्ह्ह आह्ह्ह्ह्ह हुम्म्म्म्म" चाचू - "ये लो बेटी, यह लो यह लो एक और लो एक धक्का और लो" मै - "वाह, बहुत अच्छा से चोद रहे हो चाचू, इस्स्स्स्स्स्स्स्स मेरे बूर को खुब चोदो, जम कर चोदो। मेरी बूर तुम्हें मजा दे रही है कि नहीं?" चाचू - "अरे मेरी बुल्बुल, बहुत मजा दे रही है तेरी बूर। एक दम शानदार है, मक्खन बूर है तेरी मेरी जान। चुद आज जम कर साली। मेरी रन्डी बन कर चुद साली आज। मैं - "मुझे तो आप रन्डी बना दिए मेरे जानू, अब जैसे चोदो वैसे चुदुंगी तुमसे मेरे राजा, मेरे चाचा, मेरे हुजूर मेरे मालिक..., इस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स आआआआआह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह मैं तेरी बांदी हूँ, मुझे खुब चोदो, जम कर पेलो मेरे बूर में अपना लन्ड मेरे आका इइइइस्स्स्स्स्स्स आआआआआआअह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह।" चाचू - "ले साली चुद, साली कुतिया, साली रन्डी साली हराम जादी मेरी बांदी हो तो साली सड़क पर चुदो एक बार गाँड़ खोल कर अपनी गाँड़ मराओ किसी कुत्ते से साली रन्डी। मैं - कुत्ते से क्यों, तुमसे गाँड़ मराऊँगी रे साले भँरवें, साले मादरचोद। अपनी भतीजी को चोद रहे हो और उसको रन्डी बना दिए। साले तुम तो पक्के हरामी हो, बेटी-चोद हो साले। चाचू - "ज्यादा फ़रफ़रा मत साली कुतिया। नहीं तो तेरी इसी बूर से बेटी पैदा करके उसको तुम्हारे सामने चोद दुँगा, जैसे तुम्हें आज तुम्हरे बाप के सामने चोद रहा हूँ।" मैं - मेरा बाप यहाँ नहीं है साले ......... आआआअह्ह्ह्ह इस्स्स्स्स्स्स्स्स्स" चाचू - "तेरा बाप साला सब सुन रहा है, शर्म से हट गया है, पर सब देख रहा होगा किसी छेद से। साला एक कुँवारी चूत के लिए बेटी को चुदा रहा है। देखना एक दिन वो तुम्हें भी चोदेगा।" मैं - "मैं तो कब से अपने बाप से चुदाने के लिए तैयार हूँ, पर उसे मैं बेटी दिखती हूँ, माल नहीं दिखती जबकि पुरी दुनिया को मैं माल दिखती हूँ। मैं आपको माल दिखती हूँ न?" चाचू - "हाँ रे साली मेरी कुतिया, तू जबर्दस्त माल दिखती हो। दिखती क्या हो, तुम माल हो माल। ऐसा माल जिसको सब चोदना चाहें। चुद साली चुद, और चुद रन्डी साली।" हम दोनों अब सब कुछ साफ़ बोल रहे थे। अब तो अब्बू को निशाना बना कर बोल रहे थे। चाचू भी जम कर मेरी बूर को चोदे थे आज। थोड़ी देर बाद चाचू ने मुझे पलटने को कहा और मैं पलट गयी। अब मैं कुतिया बनी हुई थी और चाचू कुत्ते की तरह मुझे चोद रहे थे और वैसे हीं हाँफ़ रहे थे। उनकी जाँघ मेरे चुतड़ से टकरा टकरा कत थप-थप की आवाज कर रही थी। मैं मजे से मदहोश हुई जा रही थी। तभी चाचू बोले-"आह बेटी अब मेरा निकलेगा, कहाँ लोगी जल्दी बोलो।" मैंने बोली-"मुँह में मुँह में" और चाचा के लन्ड के बाहर निकालते हीं मैं वहीं जमीन पर हल्के से ऊठी की वो अपना लन्ड मेरे मुँह में ठाँस दिए। और मेरे अब्बू को जैसे सुनाते हुए बोले-"मराओ अब मुँह सानिया। तुम पुरा रन्डी हो गयी हो। बाजार में सबसे मंहगी बिकोगी। चुस कर खा जाओ मेरा रस। आह्ह्ह् आआआआह्ह" और वो मेरे मुँह में झड़ गये। मैंने उनका सब माल पी लिया, और ऐसा तो मैं पहले भी कर चुकी हूँ।
 
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