• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

एक मस्त लम्बी कहानी .......!complete

  • Thread starter Thread starter StoryPublisher
  • Start date Start date
,सानिया बोल रही थी, "मजा आ जायेगा, अगर किसी विदेशी से भी चुदाने का मौका मिले तो। रागिनी तुम कभी चुदी हो किसी विदेशी से?" रागिनी ने साफ़ कहा, "नहीं दीदी, अभी तक तो नहीं। अभी तक तो सिर्फ़ मोटे-मोटे भद्दे सेठ से हीं वास्ता पड़ा है। सालों का लन्ड तो उनके पेट के भार में दबा रहता है, और पैसा इतना कि उसके जोर पर रोज लड़की खरीदते हैं, भले हीं ढ़ंग से चोद पाएँ या नहीं।" अब मैं बोल पड़ा-"मैं मोटा और भद्दा सेठ हूँ, मुझे लड़की चोदने नहीं आता है, साली क्या कह रही है तू? अभी पटक कर गाँड़ में लन्ड पेल दुँगा।" रागिनी हँस दी, ’अरे अंकल आप तो कभी मेरे कस्टमर रहे हीं नहीं, इस बार क्या मैं आपसे कोई पैसा ले रही हूँ। सच तो यह है अंकल की आपसे अच्छा तो मुझे कोई आज तक मिला हीं नहीं, क्या मस्ती करा देते हैं आप, पुरा बदन झनझना जाता है। क्यों दीदी, हैं न यह बात?" अब मेरी तारीफ़ करने की बारी सानिया की थी और साली ने जम कर तारीफ़ की। वो बोली-"हाँ सही बोल रही हो। चाचू जैसा कोई नहीं है। सच में, मैं ज्यादा लोग से नहीं चुदी हूँ पर जितने से चुदवाई हूँ, चाचू इज द बेस्ट। इनका तो हर स्टाईल लाजवाब है-चाहे चुची चुसें या बूर चाटें य गाँड़ में ऊँगली चलाएँ, सब तरह से लड़की को बेदम करके हीं लन्ड पेलेंगे। तब तक तो मेरी हालत तो खराब हो जाती है, वो कहते हैं न "बिच इन हीट (गर्मी चढ़ी हुई कुतिया) या बोलो भादो मास की कुतिया" बन जाती हूँ मैं तो इनके साथ। इस्ट और वेस्ट, माय चाचू इज द बेस्ट..." उसकी बातें तो रंडीपने की हद पर थीं। मैंने उसको टोकते हुए कहा, "बस बस, अभी वेस्ट का पता तो तुमको अब चलेगा, जरा मैनेजर को आने दो वापस तब भेजता हूँ तुम्हें उन गोरे लौन्डों के पास, वापस आना फ़िर बताना कि कौन बेस्ट है", और हम सब हँसने लगे।
 
. करीब आधे घंटे बाद मैनेजर आया। उसके साथ एक गोरा भी था। मैनेजर ने हमारा परिचय कराया। उसका नाम एडवीन था, करीब ३० साल उम्र का वह एक फ़्रांसिसी था। मैनेजर के इशारे से एक बेयरा वहाँ चाय ले आया, और चाय पीते हुए मैनेजर से बात शुरु किया। वो लोग १८००० देने को तैयार थे पर सानिया को उन तीनों के साथ सेक्स करना होता। सानिया यह सुन रही थी, और खुश दिख रही थी, जमील को तो कुछ सुझ नहीं रहा था, वो ऐसा होगा इसकी कल्पना भी नहीं किया था सपने में भी। मैंने सानिया के तीनों से सेक्स की बात को मना कर दिया, और तब एडवीन ने २०००० की बात कही। मैंने ३०००० के लिए कहा, १०००० प्रति व्यक्ति। खैर २५००० में बात पक्की हुई, और सानिया की आँखें चमक गई। मैनेजर भी खुश था, वो हमारे लिए एक लड़की का इंतजाम करने की बात कह वहाँ से चला गया। मैंने उसको कह दिया था कि हमें कैसी लौन्डिया पसंद है, वो देख हीं रहा है, तब उसने कहा, "आप चिंता न करें सर, मैं कमसीन माल हीं लाऊँगा आपके लिए।" एडविन जाते जाते कह गया सानिया से कि वो थोड़ा इंडियन ड्रेस पहन कर तैयार हो कर आ जाए आधे घंटे में।
 
.जमील अब बड़े चिन्तित स्वर में सानिया को कुछ कहना चाहा, पर सानिया ने तुरंत उसकी बात काटी और कहा-"अब्बू, अब कुछ नहीं, मुझे मौका मिला है तो मैं इस ट्रीप में खुब मजे करुँगी।" मैंने जमील को सांत्वना दी, "यार अब जाने दो उसको, जवान है, तो जवानी के खेल का लुत्फ़ लेगी हीं। अगर कोई लड़की खुद तय कर ले कि वो अब चुदवाएगी, तो उसको कैसे रोक सकता है कोई, वह कहीं न कहीं अपना मुँह काला करेगी हीं। तेरी बेटी तो बिना तुमसे कुछ छुपाए सब करती है, इतनी ईमानदार तो है ये। और यार, वैसे भी वो साला मैनेजर अभी एक लौन्डिया लाएगा, उसके साथ पहले तुम कर लेना, फ़िर एक बार मैं भी उसको चोद कर अपना जायका थोड़ा बदल लुँगा।" रागिनी व्यंग्य में बोली-"वाह अंकल, नई लौन्डिया के नाम पर दोनों बुड़्ढ़े फ़िसल गए, मेरा क्या होगा सोचा भी नहीं।" मैंने उसके गाल पर प्यार भरी चपत लगाई-"अरे बेटा तू तो मेरी जान है, तुम्हारी तो मैं रात भर चोदुँगा, जमील को हीं उसे रात में संभालना होगा।"सानिया जब तैयार हो कर वापस आई तो वो गजब ढ़ा रही थी। मेरे मुँह से तो सीटी निकल गई। उसने एक काला-लाल लौंग स्कर्ट और छॊटी सी कुर्ती पहनी थी, जो शायद रागिनी की थी, इस लिए उसका पेट खुला हुआ था (सानिया, रागिनी से ज्यादा लम्बी है)। उसके गोरे सपाट पेट पर एक गहरी गुलाबी नाभी अपने को बूर की छॊटी बहन साबित कर रही थी। हल्के से मेकप ने उसकी खुबसुरती बढ़ा दी थी। सानिया ने जब हम सबको अपनी तरफ़ैसे घूरते हुए पाया तो आँख मारी। मैंने कहा-"कयामत ढ़ा रही हो डार्लिंग आज," तो सानिया मुस्कुराई और अपना स्कर्ट उपर उठा दिया। साली ने भीतर एक दम छॊटी सी लाल पैन्टी पहनी थी, जो लग रहा थी कि किसी १४-१५ साल की लड़की की साईज की थी और उसकी बूर में धंसी हुई थी, जिससे उसके बूर के दोनों फ़ाँक थोड़े आधे-अधुरे से अपने मौजुदगी का अहसास करा रहे थे। जल्दी हीं उसने अपना जलवा समेटा और फ़िर हमारी तरफ़ एक फ़्लाईंग किस उछालते हुए बाहर की तरफ़ चल दी। रागिनी ने कहा - "बेस्ट औफ़ लक..."।
 
उसके जाने के एक मिनट के भीतर मैनेजर अपने साथ एक माल ले कर हाजिर हुआ। एक दम सही माल लाया था पट्ठा। १८-१९ की उम्र, पहाड़ी नाक-नक्श, खुब गोरी चिकनी माल थी वो। रंजीता नाम था उसका। हमें हल्के से प्रणाम करके पास खड़ी हो गयी, तो मैनेजर ने कहा कि लगभग नई हीं है सर अभी यह, इसे कुछ देना नहीं है, यह हमारी तरफ़ से है, और कुछ अगर आप चाहें तो बताएँ। मैंने कहा कि सब ठीक है तो वो चला गया। मैंने उसे पास बिठाया और फ़िर पूछा कि क्या वो कुछ लेगी-चाय पानी वगैरह...। उसने ना में सर हिलाया। शायद वो अभी ज्यादा चुदी नहीं थी। मेरी तो लार टपकने लगी थी। मैंने जमील को कहा-"क्यों दोस्त अब तुम जाओगे, या मैं हीं पहले चोद लू फ़िर रात भर तुम रखोगे इसको।" तो वो चुप रहा, शायद उसे सानिया का ख्याल आ रहा था। सही भी था, आखिर सानिया थी तो उसकी सगी बेटी...पर वो भी क्या करता, अब जब उसकी बेटी खुद रंडी बन कर खुश हो रही थी तो।मैंने रंजिता तो अपने साथ चलने का इशारा किया, तो वो मेरे साथ बेडरुम में आ गयी। कमरे में आते हीं मैंने उसको कहा कि वो एक बार मेरे लन्ड को चुसे, इतना चुसे कि मेरा माल निकल जाए। मेरा इरादा था कि जब मुझे रंजिता को एक बार हीं चोदना था तो उसी एक बार में मैं साली का सारा रस पुरा चुस लेना चाहता था। रंजिता के लन्ड निकालने और चुसने की स्टाईल से मुझ जैसे अनुभवी को पता चल गया कि वो अभी इस खेल में अनाड़ी है। मैंने पूछा, "पता है न कि कैसे चुदाया जाता है मर्द को मजा देने के लिए? बोलो।" मेरे जोर देने पर वो बोली, "हाँ, पता है, दो बार पहले भी वो यहाँ आई है।" मैंने उसको बात करने के लिए मजबूर करने के लिए पूछा-"क्या-क्या की थी तुम तब? लन्ड चुसी थी?" वो बोली-"नहीं।" मैं तो पहले हीं समझ गया था। मैंने कहा अब चुसो ठीक से, मैं जैसे बता रहा हूँ, अगर मर्द को मजा दोगी तो तुम्हें भी चुदाने में मजा आएगा और पैसे भी ज्यादा कमाओगी, अगर मर्दों में तुम्हारी डीमान्ड होगी तो। मर्द के सामने नंगी हो टांग खोल कर लेट जाने से तुम्हें कुछ मजा थोड़े ना मिलेगा, उल्टे दर्द ही हुआ होगा ऐसे चुदी होगी तो। बिना मजा के चुदी हो आज तक इसीलिए ऐसे छुई-मुई सी गुमसुम हो यहाँ, वर्ना अगर मजा मिला होता तो खुश होती कि आज एक और नया लन्ड से बूर की खुजली मिटेगी, ऐसा सोच कर।"
 
फ़िर मैंने उसको समझाया कि कैसे मर्द के लौंडे को चुसा जाता है। बच्ची समझदार थी, जल्दी हीं समझ गई और मेरे लन्ड में सुरसुरी पैदा करने लगी। जल्दी हीं मैं छूट गया, उसकी मुँह में हीं। उसने मुँह बिचकाया, पर मेरे समझाने से सब पी गयी। उसके होठ पर मेरे लन्ड का जूस थोड़ा सा चमक रहा था। बड़ी प्यारी से सुरत लग रही थी साली की। अब मैंने उसको खड़ा किया और फ़िर एक-एक कर उसके कपड़े उतार दिए। कुर्ता, फ़िर सल्वार, फ़िर समीज, फ़िर ब्रा और अंत में पैन्टी। साली का नंगा बदन मस्त था। हल्की-हल्की काली-काली झाँटों से घिरी हुई उसकी बूर एकदम ठ्स्स टाईट दिख रही थी। मैंने जब सकी झाँटों पर उँगली चलाई को उसके बदन की थड़थड़ाहट मुझे महसूस हुई। उसकी झाँटों के आकार और लम्बाई ने मुझे बता दिया कि अभी इस लौन्डिया की झाँट अनछुई है, कभी कैंची तक नहीं चली इस पर। मैंने पूछा-"कितने दिन से झाँट साफ़ नहीं की हो जान?" वो बोली-"शुरुआत में हीं दो बार की थी फ़िर नहीं साफ़ की कभी।" मैंने देखा कि अब वो थोड़ा खुलने लगी है तो फ़िर पूछा-"किस उम्र में झाँट निकलनी शुरु हुई तुम्हें ? झाँट पहले आई या माहवारी?" रंजिता ने कहा-"१५ में कुछ महिना कम था जब माहवारी शुरु हुई, झाँट उससे करीब तीन-चार महिने पहले से निकलना शुरु हुई। माहवारी के पहले हीं दो बार साफ़ की थी कैंची से।" मैंने अब तक उसे बिस्तर पे लिटा दिया था और उसकी चुचियों को चुसना, मसलना शुरु कर दिया था। जल्दी हीं रंजिता कसमसाने लगी। मेरे जैसा अनुभवी रसिया के लिए तो वो नौसिखुआ थी। उसे बेचैन करने के बाद, मैं उसकी बूर की तरफ़ ध्यान देना शुरु किया। बूर की चटाई उसके लिए अनोखा अनुभव था। उसकी बूर मुझे एकदम कुँवारी बूर का मजा दे रही थी। उससे निकल रही खुश्बू मेरे लन्ड को टनटना चुकी थी। मैंने उसको जब पूरी तरह से तड़फ़ड़ाते हुए देखा तो उसके उपर चढ़ गया। उसके जाँघ खोले और फ़िर अपना लन्ड हौले-हौले साली के बूर में पेल दिया। उसके जवानी के रस से सराबोर बूर में लन्ड घुसाने के लिए किसी चिकनाई की भी जरुरत नहीं थी। साली को मचलने से फ़ुर्सत कहाँ थी कि उसको पता चलता कि कब उसकी बूर चुदनी शुरु हुई। वो जब मैंने उपर से हुमच-हुमच कर उसको चोदना शुरु किया तब उसने आँख खोल कर मुझे देखा। मैंने अपने होठ उसके होठ पर रख दिये और उसका रस-पान करते हुए उसके बूर की चुदाई करने लगा। करीब १० मिनट चोदने के बाद मैंने उसको कहा कि अब वो पलट जाए। पर उसमें जान कहाँ बाकि था। मैंने हीं उसको पलटा और फ़िर उसको ठीक से पोजीशन किया और फ़िर पीछे से उसकी चुदाई शुरु कर दी, "चुद साली कुतिया, बोल साली मजा आ रहा है कि नहीं तुम्हें। पाई थी कभी ऐसा मजा मेरी बुल्बुल।" उसे ऊँह-आह-इइइस्स्स्स्स्स्स्स से फ़ुर्सत हीं कहाँ था। साली बस अपनी चुदाई का मजा ले रही थी और मैं था कि उसे आज उसकी जवानी का भरपुर मजा दिला रहा था। ७-८ मिनट बाद फ़िर मैंने उसको चित लिटा दिया और उसके जाँघों के बीच उँकड़ू बैठ खुब तेजी से उसकी चुदाई कर दी।तभी वो दर्द या मजे की अधिकता से हल्के-हल्के चीखने जैसी आवाज निकालने लगी। उसके बूर की थड़थड़ाहट ने मुझे बता दिया कि साली झड़ गयी है, तभी मेरे लन्ड ने भी अपनी पिचकारी छॊड़ी और मेरा माल उसकी बूर में जड़ तक गिरने लगा। मेरे दिमाग में आया को चलो, आज एक और बूर को मेरे लन्ड ने अपना रस पिला दिया। वो भी अब थक गयी थी और मैं भी। हम दोनों थोड़ी देर शान्त पड़े रहे और फ़िर मैं कपड़े पहनने लगा। वो भी अपने कपड़े पहनी और फ़िर हम दोनों बाहर आ गये, देखा कि जमील और रागिनी आपस में बातें कर रह्ये हैं और जमील अब थोड़ा नौर्मल दिख रहा था। चेहरे पर का तनाव कम हो गया था।
 
.जमील और रागिनी दोनों ने हमें देखा, तो मैं मुस्कुराया और कहा, "मेरा तो हो गया जमील, अब तुम रंजिता को ले जा सकते हो, रात भर के लिए अब तुम्हारी है, जैसे चोदो।" रागिनी ने अब कहा, "इनको तो अभी सानिया की फ़िक्र हो रही है, कि पता नहीं कैसी होगी वहाँ, क्या बीत रही होगी उस पर।" मैंने मस्ती से कहा, "अब फ़िक्र छोड़ यार, और मस्ती कर। यहाँ हम सब मस्ती के लिए हीं आएँ हैं, सानिया लकी है कि उसको नए-नए अनुभव करने का मौका मिला। रागिनी कौल-गर्ल कहलाती है पर आज तक किसी गोरे से नहीं चुदी, और सानिया को देख क्या किस्मत है साली की, कि घर का माल होने के बावजूद उसे एक-दो नहीं तीन-तीन गोरे के साथ मस्ती करने का मौका मिला। अब उसकी फ़िक्र छोड़, मस्त हो कर चुद रही होगी वहाँ और तू साले यहाँ मुँह बनाए बैठा है।" जमील अब बोला, "यार बाबू, एक बार उस्को रिंग करके पूछ न, सब ठीक है कि नहीं, कोई तकलीफ़ तो नहीं है उसे?" मैंने भी सोचा कि चलो देख लेते हैं साली का क्या हाल है, सो मैंने उसे कौल कर दिया। ६-७ रिंग बाद उसकी थोड़ी साँस फ़ुली हुई सी आवाज आई-"हाँ चाचू बोलो...।" मैं कहा-"अरे तेरे अब्बू तेरा हाल जानने के लिए बेचैन हैं?", और मैंने फ़ोन का स्पीकर औन कर दिया।उसे तो मस्ती चढ़ी हुई थी, उसे लगा कि उसका बाप उसकी चुदाई के बारे में जानना चाहता है (उसके बारे में नहीं), सो वह चहक कर बोली, "बहुत मजा आ रहा है चाचू, अभी तक तो किसी ने मुझे चोदा भी नहीं है. पर चुस-चाट कर बेदम कर दिया हैं इस साअले गोरों ने। अभी तो पुरी तरह नंगी भी मैं नहीं हुई हूँ। मेरे बदन पर से सिर्फ़ पैन्टी ही उतारी है इन हरामियों ने और बारी-बारे से मेरी चूत चुस रहे हैं, आउच....अभी साले ने मेरे चूत की चमड़ी को हल्के से दाँत से काट लिया, साला मादरचोद...अब्बू आप फ़िक्र मत करो। अब आ गयी हूँ तो पुरा मस्ती करुँगी, फ़िर पता नहीं ऐसा मौका मिले ना मिले। अभी जो प्लान है कि तीनों बारी-बारी से मेरी चुदाई करेंगे और फ़िर मुझे सोने के लिए छॊड़ देंगे। फ़िर रात में तीनों साथ मिल कर मुझे चोदेंगे। सच बहुत मजा आएगा। बाद में आऊँगी तब सब बताऊँगी सुबह।" इसके बाद उसके हाँफ़ने की आवाज आने लगी, तो मैंने फ़ोन बंद कर दिया।
 
जमील यह सब सुन कर एक ठंडी साँस भर कर कहा, "खैर अब तो उसकी मर्जी। जब तक कि सेक्स का मजा न मिला हो तब तक तो रोका जा सकता है, पर अगर एक बार सेक्स का मजा मिल गया, वो भी इस तरह तो फ़िर किसी को रोका नहीं जा सकता। म्झे तो अब यह डर है कि जब इसकी अम्मी तो यह सब पता चलेगा फ़िर क्या होगा?" मैंने हँसते हुए कहा, "यार इस डर का सिर्फ़ एक ही हल है, किसी तरह भाभी जी को भी एक बार सानिया के साथ भिरा दो। जैसे सानिया ने तुम्हें सीधा कर लिया वैसे हीं वो भाभी जी से भी निपट लेगी। तेरी बेटी अब चूत के मजा के लिए सब कर लेगी, तू परेशान न हो। अभी सिर्फ़ रंजिता की जवान खुश्बूदार चूत के बारे में सोच, कि कैसे इसकी रात भर बैन्ड बजाएगा। ५-७ बार से ज्यादा नहीं चुदी, मेरे से चुदाते हुए कराह दी थी यह बच्ची। इसकी तो आज तक झाँट भी नहीं छिली है। वियाग्रा लेगा क्या?" जमील की आँख में चमक आई, "तू लाया है क्या?" मैंने जेब से निकाल कर एक गोली दी, "ले साले तू भी क्या याद करेगा, अब जा बैन्ड बजा साली की। साले बेटी से कम उम्र की बच्ची को वियाग्रा खा कर चोदते हुए कुछ नहीं लगता और आज जब बेटी तीन गोरों से अपने तीनों छेद को (चूत, मुँह और गांड़) लन्ड से खुदवाने वाली है तो उसकी फ़िक्र में गान्ड़ फ़ट रही है। अब कल देखना अपनी बेटी का नंगा बदन तब पता चलेगा कि कैसे तीनों ने अपना पैसा वसूल किया है उस छिनाल को चोद कर। साली बहुत खुशी-खुशी गयी है रंडीपना दिखाने, अब पता चलेगा कि असल में रंडी को पेल कर कैसे पाई-पाई वसूला जाता है मर्दों के द्वारा।" जमील भी अब थोड़ा बेफ़िक्र हो कर कहा, ’हाँ यार, अब जब साली खुद रंडी बनना पसंद की है तो चुदे साली, मैं क्यों फ़िक्र करूँ।इसके बाद हम सब पास में ही इधर-उधर घुमने निकल गए। रंजिता लोकल थी, सो वो ही गाईड भी बनी हुई थी। हमने दिन का लंच साथ में पैक करा कर रख लिया था। एक जगह सुनसान में मैंने रागिनी को चोदा। वो पहली बार खुली हवा में बादल और सूरज के नीचे चुदी, खुब मस्त हो कर चुदी। जमील को मैंने कहा कि वो भी रंजिता को एक बार चोद ले, पर उसने मना कर दिया कि वो रात में हीं रंजिता कि चूत लेगा, अभी लेने से रात में वो बासी हो जाएगी। तब रागिनी में उसे कहा कि वो चाहे तो उसे चोद ले, पर जमील का मूड शायद नहीं था, या शायद वो अभी भी सानिया के बारे में सोच थोड़ी दुविधा में था। हमने उसे यो हीं छोड़ दिया।
 
फ़िर हम एक फ़िल्म की मैटिनी शो देखने चले गए। शाम को करीब ७.३० में वापस कौटेज में आए और तब मैंने ही कहा कि एक बार सानिया से पूछता हूँ कि क्या सब हुआ, कैसा रहा दिन। फ़ोन मिला कर मैंने स्पीकर औन कर दिया। सानिया ने जो बताया, सब सुन रहे थे। उसने कहा कि करीब १ बजे तक तीनों ने उसे बारी-बारी से चोदा। हरेक ने अलग-अलग उसके बेड पर उसे मसला और कुल मिला कर लगातार करीब तीन घंटे उसे अपना बदन उन सब को सौंपना पड़ा। फ़िर सब लंच करके दिन में सो गए। अभी करीब आधे घंटे पहले हीं वो उठी है, और अब आज रात को सब मिल कर एक साथ उसके साथ सेक्स करेंगे। उन लोगों ने उसे कहा है कि वो भारी खाना न खाए, आज रात वो उसकी जम कर चुदाई करेंगे और गाँड़ भी मारेंगे। जमील अब बोला-"नहीं बेटा, यह मत करने देना, तुम्हें तकलीफ़ होगी, अभी बच्ची हो तुम।" अब सानिया सीधे अपने अब्बू से बोली-"अब्बू आप अब मुझे बच्ची कहना बंद कीजिए, इत्ना देख रहे है आप मुझे, खुद भी चोदे और आपको अभी तक मैं जवान नहीं दिख रही। वैसे भी, मैं इन लोगों से कुछ के लिए ना नहीं कहने वाली। ये सब सेक्स में एक्सपर्ट हैं, पता है सिर्फ़ मेरी चूत को चाट चूस कर इन लोगों ने मुझे दो बार मजा दिया। मेरे सामने एक ने अपनी गर्लफ़्रेन्ड की गांड़ मारी, पर इसके पहले सिर्फ़ गांड़ चाट चाट कर उसका ढ़ीला कर दिया और बड़े प्यार से उसमें घुसा दिया, लगा जैसे ये तो कई तकलीफ़ की बात हीं नहीं है।" जमील बोला-"पर बेटा, ये सब..."। सानिया-’बस अब्बू अब रहने दो, अच्छा न है, तुम्हारे लिए। तुमसे तो अपनी बेटी की गांड़ मारी नहीं जाएगी, सो अगर ये लोग मेरी गांड़ मार-मार कर उसे थोड़ा खोल देंगे तो तुम्हें भी आसानी होगी, मेरी गांड़ मारने में। ठीक है, अब कल सुबह बात करना, फ़िर बताऊँगी सब।", और फ़ोन कट गया।मुझे समझ आ गया कि सानिया ने अच्छी ऐक्टिंग की और ऐसे जताया कि उसकी गांड़ कोरी है, जबकि मुझे और रागिनी को पता है कि मैं उसकी गांड़ में पहले ही अपना लन्ड पेल चुका हूँ। साला बेवकूफ़ जमील अभी तक यह अंदाजा नहीं लगा पाया था कि उसकी बेटी की सील मैंने हीं खोला वर्ना वो समझ जाता कि मेरे जैसा गांडू उसकी ऐसी मस्त बेटी की गांड़ को कुँवारी तो आज तक नहीं हीं रहने देता। सच, मुझे अब उसकी बेवकूफ़ी पर तरस आ रहा था। मेरे दिमाग में तभी एक बात आई कि अब जब उसकी बेटी को रंडी बनाने का काम पूरा हो गया तो अब क्यों नहीं उसकी मस्त बीवी को एक बार शीशे में उतारा जाए। मैं अब लगातार इसी लाईन पर सोंच रहा था। जमील की बेटी सानिया एक दम एकहरे-छरहरे बदन की लौन्डिया थी तो उसकी बीवी दोहरे बदन की पूरी खीली हुई औरत। उसकी चूची भी बड़ी-बड़ी थी ३८ साईज की और उसकी कमर पर दो रेखाएँ भी बनी थी उसकी चूची की भार की वजह से। माँ भी बेटी जैसी हीं गोरी-चिट्टी थी। पर मस्ती उसमें कितनी थी, पता नहीं। सानिया की मस्ती हीं उसे जल्द हीं मेरी राह पर ले आई, पर उसकी अम्मी...., मैं यही सब सोच रहा था।
 
खैर रात का खाना वाना खाने के बाद जमील ने वियाग्रा खा लिया, और बोला-"बाबू, आज रंजिता का गांड़ भी मारूँगा। जब वहाँ सानिया की गाँड़ वे लोग मारेंगे हीं तो यहाँ जो मिली है उसकी गाँड़ क्यों छोड़ दूँ?" रागिने ने अब चुटकी ली-"अंकल, वहाँ तो दीदी को इसका पैसा मिला है, यहाँ यह बेचारी तो फ़्री में मिली है आपको।" जमील भी अब धीरे-धीरे बदल रहा था, "फ़्री में नहीं मिली है ये लौन्डिया, मेरी बेटी वहाँ जा कर उन विदेशियों से चुदा रही है, इसके एवज में मैनेजर इसे यहाँ लाया है।" मैंने अब बात को लपका और अब तक की सबसे गंदी बात कह गया, "हाँ यार जामील, साले बेटीचोद, तुम इस हरामजादी रंजिता से पूरा पैसा वसूलो आज। तेरी बेटी तो वहाँ अपने बूर और गाँड़ में गोरे-गोरे लन्ड पेलवा-पेलवा कर लौन्डिया की कीमत चुका रही है। अब अगर तुम साली को पूरा नहीं निचोड़े को लानत है तुम पर की तेरी बेटी को तो सब चोदें और तू किसी की बेटी को ठीक से ना निचोड़े तो। समझ ले कि इस रंजिता को अल्लाह ने तेरे लिए हीं भेजा है, साली को फ़ाड़ देना आज। और वियाग्रा है मेरे पास अगर एक और लेना हो तो...।" जमील ने नहीं में सर हिलाया और फ़िर रंजिता को अपनी गोदी में खींच लिया और हमें बोला की अब हम वहाँ से हट जाएँ। मैने भी रागिनी का हाथ पकड़ा और फ़िर बगल के रूम में चला गया।बिस्तर पर आने के बाद रागिनी अपने कपड़े खोलने लगी। वो बहुत हीं मुग्ध हो कर मुझे नंगा होते हुए देख रही थी। फ़िर वो बोली-"आज आप भी एक वियाग्रा खा लीजिए न अंकल। सच्ची, आप सब की बात से मुझे लग रहा है कि आज की रात मेरे लिए भी अनोखी हो तो मजा आ जाए।" यह सुन मैंने भी एक गोली खाली ली, और सोच लिया की साली रागिनी की बूर और गांड़ दोनों जब तक पड़पड़ाने नहीं लगेगी, उस छिनाल को नहीं छोड़ूँगा। जल्दी हीं मैं उस साली के उपर था और हरामजादी को भरपुर गालियाँ देते हुए चोद रहा था। शुरुआत मैंने उसको हरामजादी कह कर किया और फ़िर जल्द हीं रंडी, कुतिया, बप्चोदी, भाईचोदी, भोसड़ीवाली छिनाल, रंडी और न जाने क्या-क्या कह रहा था। वो मेरे जोए के धक्के खा रही थी और कराह रही थी। तभी बगल की रूम से लगा की रंजिता को जमील खुब जोर से चोद रहा है क्योंकि उसकी कराह्ट में रागिनी की कराहट वाली बात नहीं थी, उसे शायद दर्द हो रहा था। मैं रागिने पर से उतर गया, और बाहर की तरफ़ झांका, तो जो देखा रागिनी को इशारा किया कि वो भी देखे। जमील उसे पलट कर उसके गाँड़ में अपना लन्ड ठाँशने की कोशिश कर रहा था, और बेचारी की कोरी गाँड़ उस मादरचोद जमील का काला मोटा लंड भीतर ले नहीं पा रही थी।
 
Back
Top