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पूनम फिर से सारे पिक्स देखने लगी. अब पिक्स देखते हुए पूनम के दिमाग़ मे लेटर मे लिखी हुई बातें भी आ रही थी. पूनम उन लड़कियों को पहचानने की कोशिश करने लगी. वो किसी भी लड़की को पहचान नही पाई और लड़कों के फेस पिक्स मे नही दिख रहे थे. फोटो मे 2 अलग अलग लड़कियाँ और 2 अलग अलग मॅरीड औरतें थी. पूनम अब गौर से उनके बदन और हरकतों को देख रही थी और उनके बदन से खुद
को कंपॅरिज़न करने लगी. वो चारों खुसूरत चेहरे, गोरे और कसे हुए जिस्म वाली थी. पूनम अपनी चुचि के साइज़ और निपल को देखी तो उसे लगा कि उन चारों से मैं कम तो नही ही हूँ. लेकिन जब वो अपनी बालों से भरी चूत और उन चारों की चिकनी चमकती हुई चूत देखी तो उसे लगा कि मैं इनकी तरह नही हूँ. मैं शरीफ और अच्छे घर की लड़की हूँ.
पूनम अब ये सब रख दी और उन लड़कों के बारे मे सोचने लगी कि 'कैसें हैं वो लड़के जो इतनी लड़कियों के साथ ये सब कर रहे हैं. उनलोगों को और किसी चीज़ से कोई मतलब नही है. बस सेक्स करना है और काम ख़तम. तभी तो सीधा सीधा लेटर मे चुदाई की बात कर रहे हैं. कोई प्यार मोहब्बत नही. सीधी बात, नो बकवास.' उसे पक्का यकीन था कि इस फोटो मे जो लंड है वो इन लड़कों का ही होगा. उसे
फिर से इन लड़कियों पे भी गुस्सा आ रहा था कि 'ये गंदा काम तो करवा ही रही है, मस्ती मे पिक भी खिंचवा रही है. अगर ये पिक उसके किसी घरवाले ने देख लिया तो क्या इज़्ज़त रह जाएगी उसकी.'
फिर उसे लगा कि क्या पता कि ये लड़कियाँ भी इसी तरह की होंगी और कई सारे और लड़कों के साथ भी ऐसा करती होगी. उसके दिमाग़ मे लेटर मे लिखी लाइन चलने लगी कि यही उमर है मस्ती करने की और जवानी फिर लौट कर वापस नही आती. पूनम अपने बारे मे सोचने
लगी कि ‘ये लोग इतने लोगों के साथ मस्ती कर रहे हैं, और एक मैं हूँ जो अभी तक लिप किस भी नही करने दी बेचारे अमित को. लेकिन
शादी के बाद तो ये सब करना ही है. दीदी भी तो अभी जीजा जी से चुदवा ही रही होगी. लेकिन शादी मे तो अभी टाइम है.
पूनम अपने मन मे कुच्छ सोच ली और मुस्कुराते हुए फिर से पिक्स देखने लगी. वो अभी गौर से लंड देख रही थी. उसे अब रियल लंड देखना
था. वो फिर से चूत मे उंगली करने लगी और उसकी चूत ने दुबारा काम रस उगल दिया. पूनम तेज साँसे लेती हुई बेड पे निढाल हो पड़ी रही और उसकी चूत से रस बहकर बेड पे गिरता रहा.
पूनम इसी तरह नंगी ही सो गयी. सुबह अचानक से उसकी आँख खुली तो वो देखी कि फोटो और लेटर इसी तरह बेड पे ही रखा हुआ है. वो हड़बड़ा कर उठी और अपने कपड़े पहन ली और रात मे सोचे हुए अपनी बात के बारे मे सोचने लगी. उसका मन उधेरबुन मे था. वो फिर से
एक बार लेटर पढ़ी और पिक्स को हल्की नज़र से देखी और फोटो और लेटर को आल्मिराह मे अच्छे से छुपा कर रख दी. पूनम अपने निश्चय को मज़बूत करती हुई बाहर आ गयी और बाथरूम चली गयी.
को कंपॅरिज़न करने लगी. वो चारों खुसूरत चेहरे, गोरे और कसे हुए जिस्म वाली थी. पूनम अपनी चुचि के साइज़ और निपल को देखी तो उसे लगा कि उन चारों से मैं कम तो नही ही हूँ. लेकिन जब वो अपनी बालों से भरी चूत और उन चारों की चिकनी चमकती हुई चूत देखी तो उसे लगा कि मैं इनकी तरह नही हूँ. मैं शरीफ और अच्छे घर की लड़की हूँ.
पूनम अब ये सब रख दी और उन लड़कों के बारे मे सोचने लगी कि 'कैसें हैं वो लड़के जो इतनी लड़कियों के साथ ये सब कर रहे हैं. उनलोगों को और किसी चीज़ से कोई मतलब नही है. बस सेक्स करना है और काम ख़तम. तभी तो सीधा सीधा लेटर मे चुदाई की बात कर रहे हैं. कोई प्यार मोहब्बत नही. सीधी बात, नो बकवास.' उसे पक्का यकीन था कि इस फोटो मे जो लंड है वो इन लड़कों का ही होगा. उसे
फिर से इन लड़कियों पे भी गुस्सा आ रहा था कि 'ये गंदा काम तो करवा ही रही है, मस्ती मे पिक भी खिंचवा रही है. अगर ये पिक उसके किसी घरवाले ने देख लिया तो क्या इज़्ज़त रह जाएगी उसकी.'
फिर उसे लगा कि क्या पता कि ये लड़कियाँ भी इसी तरह की होंगी और कई सारे और लड़कों के साथ भी ऐसा करती होगी. उसके दिमाग़ मे लेटर मे लिखी लाइन चलने लगी कि यही उमर है मस्ती करने की और जवानी फिर लौट कर वापस नही आती. पूनम अपने बारे मे सोचने
लगी कि ‘ये लोग इतने लोगों के साथ मस्ती कर रहे हैं, और एक मैं हूँ जो अभी तक लिप किस भी नही करने दी बेचारे अमित को. लेकिन
शादी के बाद तो ये सब करना ही है. दीदी भी तो अभी जीजा जी से चुदवा ही रही होगी. लेकिन शादी मे तो अभी टाइम है.
पूनम अपने मन मे कुच्छ सोच ली और मुस्कुराते हुए फिर से पिक्स देखने लगी. वो अभी गौर से लंड देख रही थी. उसे अब रियल लंड देखना
था. वो फिर से चूत मे उंगली करने लगी और उसकी चूत ने दुबारा काम रस उगल दिया. पूनम तेज साँसे लेती हुई बेड पे निढाल हो पड़ी रही और उसकी चूत से रस बहकर बेड पे गिरता रहा.
पूनम इसी तरह नंगी ही सो गयी. सुबह अचानक से उसकी आँख खुली तो वो देखी कि फोटो और लेटर इसी तरह बेड पे ही रखा हुआ है. वो हड़बड़ा कर उठी और अपने कपड़े पहन ली और रात मे सोचे हुए अपनी बात के बारे मे सोचने लगी. उसका मन उधेरबुन मे था. वो फिर से
एक बार लेटर पढ़ी और पिक्स को हल्की नज़र से देखी और फोटो और लेटर को आल्मिराह मे अच्छे से छुपा कर रख दी. पूनम अपने निश्चय को मज़बूत करती हुई बाहर आ गयी और बाथरूम चली गयी.