• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

कमीना पार्ट - II Incest compleet

  • Thread starter Thread starter StoryPublisher
  • Start date Start date
कमीना पार्ट - II Incest--5

सोनू- पहले अपनी गंद के नीचे तकिया तो लगा तभी तो तेरे इस मस्त भोस्डे की मस्त ठुकाई होगी,

कविता- तकिया गंद के नीचे रखते हुए, देखो बहुत दिन हो गये है ज़रा आराम से करना, जाओ पहले तेल लगा लो अपने लंड

पर फिर अंदर डालो, मैने अपने लंड पर तेल लगा लिया और कविता की चूत मे धीरे से अपना लंड अंदर उतार दिया और धीरे

धीरे धक्के मारने लगा,

कविता- ओह सोनू कितने दिनो के बाद मेरी चूत को लंड नसीब हुआ है, आग लगे तुम्हारी ऐसी नौकरी को अब मैं तुम्हे नही जाने

दूँगी, और दिन रात तुमसे ऐसे ही चुदवाउन्गि,

सोनू- मेरी रानी फिकर मत कर अब जल्दी ही मैं तुझे यहाँ से अपने साथ ले जाउन्गा और फिर रोज तेरी चूत मारूँगा, तू नही जानती

अकेले रह रह कर लंड हिलाने के सिवा कोई चारा भी नही रहता है और तू तो मेरे लंड को जानती है इसको कितनी ही चूत मिल जाए

अगले दिन बराबर खड़ा हो कर चोदने के लिए मचलने लगता है, अब तो बस बसी बड़ी रंडियो की चूत सोच सोच कर मूठ

मारने के अलावा कोई कम नही बचा है,

कविता- ओह आ आह थोड़ा तेज तेज करो ना,

सोनू- आराम से रानी अभी तेज तेज मार दूँगा तो कहेगी रुक जाओ रुक जाओ मेरा निकलने वाला है,

कविता- अच्छा नही कहूँगी अब थोड़ा तेज तेज धक्के मारो और मेरे दूध भी दबाओ ना,

मैं कविता के मोटे मोटे दूध को दबाते हुए गहरे धक्के उसकी चूत मे मारने लगा और वह अपनी गंद उठा उठा कर

मेरे धक्को का जवाब देने लगी, ओह ओह आ आ आ सोनू प्लीज़ प्लीज़ रुक जाओ रुक जाओ,

मैं कविता की बात सुन कर और तेज उसकी चूत ठोकने लगा और उसने मेरे हाथ को अपने दूध से एक दम से हटाते हुए कहा,

सोनू रुक जाओ नही तो मैं अभी निकाल दूँगी, मैं उसकी बात सुन कर अपने लंड को रोक लिया और उसके रसीले होंठो को चूसने लगा 5

-10 सेक. बाद मैने फिर से लंड को और गहराई तक डालना शुरू कर दिया और उसकी गंद के नीचे दोनो हाथ ले जाकर उसे अपने

हाथो मैं उठा कर उसकी चूत मारने लगा,

कविता- सोनू अब मुझसे नही रहा जाता अगर मैं ज़रा भी हिली तो मेरा निकल जाएगा,

सोनू- अच्छा चल एक बार निकाल लेते है क्योकि बहुत दिनो की प्यास है ना इसलिए जल्दी ही पानी छूटने के कगार पर आ चुका और

और फिर मैने कविता की चूत मे ताबड़तोड़ धक्के मारते हुए पानी निकाल दिया और कविता मुझसे बुरी तरह चिपक कर हफने लगी,

कुछ देर पड़े रहने के बाद मैं बाथरूम से वापस आया तब तक कविता बिस्कुट और नमकीन खाने लगी, मैं उसे देख

कर मुस्कुराया, क्यो कि अभी थोड़ी देर पहले ही तो हम सब ने खाना खाया था,

कविता मेरी मुस्कुराहट देख कर समझ गई मैं क्यो मुस्कुरा रहा था और अपना मूह बना कर कहने लगी, इसमे मेरी कोई

ग़लती नही है तुम मेरी ठुकाई ही इस कदर करते हो कि मुझे करने के बाद भूख लग आती है,

सोनू- हाँ तो खा ले ना मैने कब मना किया है,

कविता- मुस्कुराते हुए, एक बार मे ही मस्त कर देते हो तुम दुबारा की इच्छा ही नही रह जाती, आख़िर कहाँ से सीखा है तुमने

इतनी मस्त तरीके से चुदाई करना,

सोनू- मम्मी को देख देख कर

कविता- मुस्कुराते हुए, मैं देख रही हू अपनी मम्मी की गंद और भोसड़ा सोच सोच कर तुम कुछ ज़्यादा ही तेज तेज ठोकने

लगते हो,

पता नही अगर उनकी गंद और फूला हुआ भोसड़ा पा जाओ तो किस कदर उनकी गंद और भोसड़ा ठोकोगे,

तभी कविता ने मेरे लंड को देखा और उसे फिर से दबाते हुए कहा देखो अभी झाड़ा है और अपनी मम्मी की मोटी गंद और

चूत याद करते ही कैसा डंडे जैसा तन गया है,

सोनू- क्या करू रानी मोम की मोटी गंद और चूत को सोचते ही मेरा लंड खड़ा हो जाता है उपर से तू मुझसे मेरी मम्मी की

नशीली चूत और गुदाज गंद की बात करती है तो एक अलग ही मज़ा आने लगता है,
 
कविता- चुदने के बाद बहुत खुश दिख रही थी और कहने लगी, रुक जाओ मैं ज़रा खा लू फिर मुझे आगे बताना और क्या क्या

किया पापा ने मम्मी के साथ, और फिर कविता खाने मे लग गई और मैं टीवी के चॅनेल बदलने लगा, थोड़ी देर बाद कविता और

मैं फिर से एक दूसरे के करीब आकर चिपक गये,

कविता- अच्छा यह बताओ जब तुमने अपनी मोम को चुद्ते देखा तो सबसे अच्छा नज़ारा कौन सा लगा जिसे तुम कभी भूल नही

पाते हो,

सोनू- डार्लिंग जब मोम अपनी दोनो टाँगे हवा मे उठा कर अपनी जाँघो को फैला कर डॅड को दिखाती और चाटने को कहती वह

नज़ारा यानी उनका वह फूला हुआ चिकना भोसड़ा देख कर मैं पागल हो जाता था, औरत की कमर से लेकर जाँघो तक के बीच

का जो फैलाव होता है वह बहुत ही आकर्षित करता है और उस पर जब औरत अपनी मोटी मोटी चिकनी जाँघो को फोल्ड करके जब अपनी

मस्त चूत दिखती है उस समय वह देखने लायक नज़ारा रहता है,

कविता- उस समय तुम्हारा भी मन करने लगा होगा कि काश अपने डॅड की जगह तुम अपनी मों के मस्त भोस्डे को चाट रहे

होते,

सोनू- हाँ यह तुमने सच कहा और फिर मैने कविता की मोटी गंद को दबाते हुए उसे अपनी बाँहो मे भर लिया और फिर से

एक मस्त चुदाई का सिलसिला शुरू हो गया,

सुबह सुबह कविता नहा धोकर मंदिर चली गई थी और मोम फर्श पर पोछा लगा रही थी,

सोनू- मा तूने तो फर्श बिल्कुल चिकना कर दिया,

रति- मुस्कुराते हुए अपने साड़ी के पल्लू से अपने माथे का पसीना पोछती है और उसके मोटे मोटे तंदुरुस्त दूध उसके लाल

ब्लाउज से आधे से ज़्यादा बाहर की तरफ निकले आ रहे थे, हाँ बेटा चिकनाहट तो बहुत हो रही है पर तू संभाल कर चलना

कही फिसल ना जाना,

मेरा हाथ एक बार को तो मोम के मोटे मोटे खरबूजे देख कर अपने आप लंड पर चला गया जिसे मोम ने भी देख लिया फिर

मैने मुस्कुराते हुए कहा मोम ऐसी चिकनाहट पर तो कोई भी फिसल जाए,

रति भी आज ऐसा लग रहा था जैसे खूब चुदासि हो और कहने लगी...

रति- बेटा अभी तूने असली चिकनाहट देखी ही कहाँ है इससे भी चिकने चिकने फर्श होते है जिस पर चलते ही अच्छे अच्छे फिसल

जाते है, और फिर मोम खड़ी हो गई और उसका गुदाज उठा हुआ पेट और गहरी नाभि पूरी तरह मेरे सामने आ गई और मेरा लंड

पेंट के अंदर पूरी तरह तन चुका था, ऐसा लग रहा था कि मोम को पूरी नंगी करके उनसे कस कर चिपक जाओ और खूब उनके

मसल पेट और गहरी नाभि को उनके मोटे मोटे बोबे दबाते हुए चुसू चाटू, मोम का बदन पसीने मे भीग गया था और

उनकी बगल और ब्लाउज गीला हो चुका था,

सोनू- जानबूझ कर मोम की आँखो के सामने ही उनके मोटे मोटे दूध को देखता हुआ, मोम आप तो पूरी गीली हो रही है,

रति- मुस्कुराते हुए, क्या करू बेटे कुच्छ औरतो मे कुछ जल्दी ही गीलापन आ जाता है,

सोनू- मोम आप तो कुछ ज़्यादा ही गीली लग रही है,

रति- इधर उधर देखती हुई, क्या करू मैं तो रोज ही इसी तरह गीली हो जाती हू, और फिर मोम मेरे पाजामे के उठे हुए तंबू को

बड़ी हसरत भरी निगाहो से देखती हुई, ला अपना पाजामा उतार कर मुझे दे दे देख कितना गंदा हो रहा है ला मैं धो देती हू,
 
मैं तो जैसे इंतजार मे ही था और मैने जल्दी से अपना पाजामा उतार दिया, मेरा लोड्‍ा पूरी तरह तो खड़ा नही था लेकिन इतना बड़ा

और मोटा ज़रूर लग रहा था कि अच्छी अच्छी औरतो का ईमान डगमगा जाए, मोम मेरे अंडरवेर के बड़े से उभार को देखती

ही रह गई और जैसे ही मैने उनकी नज़रो को पकड़ा उन्होने इधर उधर नज़रे कर ली, मैने पाजामा उन्हे देकर टॉवेल लगा लिया

और मोम बाथरूम की ओर चली गई तभी कविता भी मंदिर से लॉट आई, आते ही साली कमिनि ने मेरे टॉवेल मे तने लोड्‍े को अपनी

मुट्ठी मे मुस्कुराते हुए कस कर जाकड़ लिया और कहने लगी,

कविता- लगता है मा जी का गदराया बदन देख कर खड़ा हुआ है,

सोनू- अरे नही जानेमन यह तो तुम्हारी मस्त मटकती गंद देख कर तन गया था,

कविता- आँखे दिखाती हुई, ज़्यादा बनो मत मैं सब जानती हू कितने कामीने हो तुम, तभी पिछे से मा आ गई जो कि केवल

पेटिकोट को अपने दूध तक ढके हुए नहाने की तैयारी मे थी,

क्रमशः.......................................
 
sonu- pahle apni gand ke niche takiya to laga tabhi to tere is mast bhosde ki mast thukai hogi,

kavita- takiya gand ke niche rakhte huye, dekho bahut din ho gaye hai jara aaram se karna, jao pahle tel laga lo apne land

par phir andar dalo, maine apne land par tel laga liya aur kavita ki chut mai dhire se apna land andar utar diya aur dhire

dhire dhakke marne laga,

kavita- oh sonu kitne dino ke bad meri chut ko land naseeb hua hai, aag lage tumhari aisi naukri ko ab mai tumhe nahi jane

dungi, aur din rat tumse aise hi chudwaungi,

sonu- meri rani fikar mat kar ab jaldi hi mai tujhe yaha se apne sath le jaunga aur phir roj teri chut marunga, tu nahi janti

akele rah rah kar land hilane ke siva koi chara bhi nahi rahta hai aur tu to mere land ko janti hai isko kitni hi chut mil jaye

agle din barabar khada ho kar chodne ke liye machalne lagta hai, ab to bas basi badi randiyo ki chut soch soch kar mutth

marne ke alawa koi kam nahi bacha hai,

kavita- oh aah aah thoda tej tej karo na,

sonu- aram se rani abhi tej tej mar dunga to kahegi ruk jao ruk jao mera nikalne wala hai,

kavita- achcha nahi kahungi ab thoda tej tej dhakke maro aur mere doodh bhi dabao na,

mai kavita ke mote mote doodh ko dabate huye gahre dhakke uski chut mai marne laga aur vah apni gand utha utha kar

mere dhakko ka jawab dene lagi, oh oh aah aah aah sonu please please ruk jao ruk jao,

mai kavita ki bat sun kar aur tej uski chut thokne laga aur usne mere hath ko apne doodh se ek dam se hatate huye kaha,

sonu ruk jao nahi to mai abhi nikal dungi, mai uski bat sun kar apne land ko rok liya aur uske rasile hontho ko chusne laga 5

-10 sec. bad maine phir se land ko aur gahrai tak dalna shuru kar diya aur uski gand ke niche dono hath le jakar use apne

hatho mai utha kar uski chut marne laga,

kavita- sonu ab mujhse nahi raha jata agar mai jara bhi hili to mera nikal jayega,

sonu- achcha chal ek bar nikal lete hai kyoki bahut dino ki pyas hai na isliye jaldi hi pani chutne ke kagar par aa chuka aur

aur phir maine kavita ki chut mai tabadtod dhakke marte huye pani nikal diya aur kavita mujhse buri tarah chipak kar hafne

lagi,

kuch der pade rahne ke bad mai bathroom se vapas aaya tab tak kavita biskut aur namkeen khane lagi, mai use dekh

kar muskuraya, kyo ki abhi thodi der pahle hi to hum sab ne khana khaya tha,

kavita meri muskurahat dekh kar samajh gai mai kyo muskura raha tha aur apna muh bana kar kahne lagi, isme meri koi

galti nahi hai tum meri thukai hi is kadar karte ho ki mujhe karne ke bad bhukh lag aati hai,

sonu- ha to kha le na maine kab mana kiya hai,

kavita- muskurate huye, ek bar mai hi mast kar dete ho tum dubara ki ichcha hi nahi rah jati, aakhir kaha se sikha hai tumne

itni mast tarike se chudai karna,

sonu- mummy ko dekh dekh kar

kavita- muskurate huye, mai dekh rahi hu apni mummy ki gand aur bhosda soch soch kar tum kuch jyada hi tej tej thokne

lagte ho,

pata nahi agar unki gand aur phula hua bhosda pa jao to kis kadar unki gand aur bhosda thokoge,

tabhi kavita ne mere land ko dekha aur use phir se dabate huye kaha dekho abhi jhada hai aur apni mummy ki moti gand aur

chut yaad karte hi kaisa dande jaisa tan gaya hai,

sonu- kya karu rani mom ki moti gand aur chut ko sochte hi mera land khada ho jata hai upar se tu mujhse meri mummy ki

nashili chut aur gudaj gand ki bat karti hai to ek alag hi maja aane lagta hai,

kavita- chudne ke bad bahut khush dikh rahi thi aur kahne lagi, ruk jao mai jara kha lu phir mujhe aage batana aur kya kya

kiya papa ne mummy ke sath, aur phir kavita khane mai lag gai aur mai TV ke channel badalne laga, thodi der bad kavita aur

mai phir se ek dusre ke karib aakar chipak gaye,

kavita- achcha yah batao jab tumne apni mom ko chudte dekha to sabse achcha najara kaun sa laga jise tum kabhi bhul nahi

pate ho,

sonu- darling jab mom apni dono tange hawa mai utha kar apni jangho ko phaila kar dad ko dikhati aur chatne ko kahti vah

najara yani unka vah phula hua chikna bhosda dekh kar mai pagal ho jata tha, aurat ki kamar se lekar jangho tak ke beech

ka jo phailav hota hai vah bahut hi akarshit karta hai aur us par jab aurat apni moti moti chikni jangho ko fold karke jab apni

mast chut dikhati hai us samay vah dekhne layak najara rahta hai,

 
kavita- us samay tumhara bhi man karne laga hoga ki kash apne dad ki jagah tum apni mom ke mast bhosde ko chat rahe

hote,

sonu- ha yah tumne sach kaha aur phir maine kavita ki moti gand ko dabate huye use apni banho mai bhar liya aur phir se

ek mast chudai ka silsila shuru ho gaya,

subah subah kavita naha dhokar mandir chali gai thi aur mom farsh par pocha laga rahi,

sonu- ma tune to farsh bilkul chikna kar diya,

rati- muskurate huye apne sadi ke pallu se apne mathe ka pasina pochhti hai aur uske mote mote tandurust doodh uske lal

blauj se aadhe se jyada bahar ki taraf nikale aa rahe the, ha beta chiknahat to bahut ho rahi hai par tu sambhal kar chalna

kahi fisal na jana,

mera hath ek bar ko to mom ke mote mote kharbuje dekh kar apne aap land par chala gaya jise mom ne bhi dekh liya phir

maine muskurate huye kaha mom aisi chiknahat par to koi bhi fisal jaye,

rati bhi aaj aisa lag raha tha jaise khub chudasi ho aur kahne lagi...

rati- beta abhi tune asli chiknahat dekhi hi kaha hai isse bhi chikne chikne farsh hote hai jis par chalte hi achche achche fisal

jate hai, aur phir mom khadi ho gai aur uska gudaj utha hua pet aur gahri nabhi puri tarah mere samne aa gai aur mera land

pent ke andar puri tarah tan chuka tha, aisa lag raha tha ki mom ko puri nangi karke unse kas kar chipak jao aur khub unke

masal pet aur gahri nabhi ko unke mote mote bobe dabate huye chusu chatu, mom ka badan pasine mai bhig gaya tha aur

unki bagal aur blauj gila ho chuka tha,

sonu- janbujh kar mom ki aankho ke samne hi unke mote mote doodh ko dekhta hua, mom aap to puri gili ho rahi hai,

rati- muskurate huye, kya karu bete kuchh aurto mai kuch jaldi hi gilapan aa jata hai,

sonu- mom aap to kuch jyada hi gili lag rahi hai,

rati- idhar udhar dekhti hui, kya karu mai to roj hi isi tarah gili ho jati hu, aur phir mom mere pajame ke uthe huye tambu ko

badi hasrat bhari nigaho se dekhti hui, la apna pajama utar kar mujhe de de dekh kitna ganda ho raha hai la mai dho deti hu,

mai to jaise intjar mai hi tha aur maine jaldi se apna pajama utar diya, mera loda puri tarah to khada nahi tha lekin itna bada

aur mota jarur lag raha tha ki achchi achchi aurto ka iman dagmaga jaye, mom mere underwear ke bade se ubhar ko dekhti

hi rah gai aur jaise hi maine unki najro ko pakda unhone idhar udhar najre kar li, maine pajama unhe dekar towel laga liya

aur mom bathroom ki aur chali gai tabhi kavita bhi mandir se lot aai, aate hi sali kamini ne mere towel mai tane lode ko apni

mutthi mai muskurate huye kas kar jakad liya aur kahne lagi,

kavita- lagta hai ma ji ka gadraya badan dekh kar khada hua hai,

sonu- are nahi janeman yah to tumhari mast matakti gand dekh kar tan gaya tha,

kavita- aankhe dikhati hui, jyada bano mat mai sab janti hu kitne kamine ho tum, tabhi pichhe se ma aa gai jo ki keval

petikot ko apne doodh tak dhake huye nahane ki taiyari mai thi,

kramashah...................................

 
कमीना पार्ट - II Incest--6

रति- कविता ज़रा अलमारी से साबुन निकाल कर दे तो, कविता उसे साबुन देने लगी तब मा ने कहा, बेटे दीवाली के बाद 8-15 दिन की

छुट्टी ले ले हम लोग अपने गाँव चलते है मेरे मैके मे भैया की लड़की की शादी है और कविता का पिहर भी पास ही है तो

वह भी घूम आएगी और तेरे ताऊ के बड़े लड़के मनोहर की बीबी को भी लड़का हुआ है तो उसके नामकरण मे भी शामिल हो

जाएगे,

सोनू- ठीक है मा मैं छुट्टी की अपलिकेशन दे देता हू, दीवाली के दिन कविता ने बहुत ही खूबसूरत साड़ी पहनी हुई थी और बिल्कुल

दुल्हन की तरह सजी हुई थी, हालाकी मोम भी काफ़ी सजी धजी थी, काफ़ी खुशी का महॉल था और घर मे काफ़ी मिठाइया बनाई

जा रही थी, रात को मेरा कविता के साथ मस्त चुदाई करने का मूड था और यह बात वह भी भली भाँति जानती थी कि सोनू मुझे

इतनी सजी धजी देख कर ज़रूर खूब मस्त ठुकाई करेगा,

और इसी लिए वह बार बार मोम के सामने मुझे देख कर मुस्कुरा रही

थी और शायद मोम भी समझ रही थी कि आज मेरा बेटा खूब तबीयत से उसकी बहू को चोदने वाला है जब भी मोम थोड़ा

इधर उधर होती मैं कभी कविता के बोबे मसल देता कभी उसकी मोटी गंद दबा देता और वह मुझसे छितक कर मुस्कुराते

हुए दूर भाग जाती,

तभी कविता किचन मे खड़ी थी और मैने देखा मोम बाहर बरामदे मे है और मैने पिछे से

कविता के मोटे मोटे दूध को खूब कस कर पकड़ कर दबाने लगा और तभी मैने देखा मोम ने मुझे उसके दूध

दबाते देख लिया और एक दम से मोम से मेरी नज़रे मिली और मैं चुपचाप बाहर आ गया और कविता भी यह देख कर हल्के

हल्के मुस्कुराती हुई फिर से काम मे लग गई,

रात को पूजा के बाद दीवाली के पटाखे आधी रात तक फोड़ते रहे और खूब मिठाइयो का मज़ा लिया और फिर मैं और कविता खाना

खाने के बाद बेड पर आ गये,

कविता ने बताया कल आपकी छीनाल मौसी भी आ रही है,

सोनू- मुस्कुराते हुए, बेचारी को छीनाल क्यो बोल रही हो,

कविता- मेरे पति से रात भर अपनी चूत दबवाती रही तो उन्हे छीनाल ना कहु तो क्या कहु,

सोनू- उस बेचारी को क्या पता कि उसके भतीजे ने रात भर उसकी फूली हुई चूत को दबाया था,

कविता- मूह बनाते हुए, चलो हटो भी, पक्की छीनाल है तुम्हारी मौसी, ऐसा हो नही सकता कि कोई मर्द रात भर किसी औरत की

चूत मर्दन करे और उसे पता भी ना चले,

सोनू- कविता की फूली हुई चूत को उसकी पैंटी के उपर से दबाता हुआ, अब चोदु रानी मौसी को अब तो तुम्हारी चूत दबाने और मरने का टाइम हो गया और और फिर मैने कविता को अपनी बाँहो मे भर लिया..............

रति- अगले दिन अरे कविता मौसी को फोन करके पूछ ले कि वह भी गाँव जाएगी क्या

कविता- नही मा जी मैने कल ही उनसे पुछा था वह 1 महीने बाद आएगी और वैसे भी

सोनू ने 3 सीट रिज़र्व करवा ली है और वह कह रहे थे कि हमे छोड़ कर वापस आ जाएगे

ज़्यादा छुट्टी नही मिली है

आज मुझे कुच्छ शॉपिंग करना थी और मैं मार्केट मे घूम रहा था तभी मेरी नज़र कुछ

फॅन्सी ब्रा और पैंटी पर पड़ी कुछ तो ऐसी थी जिनको पहनने के बाद पिछे से औरतो की

गंद की गुदा पर बस एक डोरी रहती थी और पूरी गंद नज़र आती मुझे वह बड़ी अच्छी लगी

और मैने सोचा कविता जब इसे पहन कर मेरे सामने आएगी तो कितना अच्छा लगेगा

बस फिर क्या था मैने एक ब्लू और एक रेड कलर की ब्रा और पैंटी ले ली, घर पहुच कर

कविता को दिखाई तो वह मुझे मुस्कुराकर मुक्का मारते हुए कहने लगी

कविता- लगता है आज कल आपका दिन भर लंड खड़ा रहता है तभी तो इन सब चीज़ो पर इतना ध्यान रहता है.

सोनू- अब मुझे पहन कर भी दिखओगि या बाते ही बनाती रहोगी.

कविता- नहा कर पहनूँगी और फिर कविता मुस्कुराती हुई अंदर चली गई और मैं उसके

मटकते चुतडो को देखता रह गया,

मैं बैठ कर न्यूज़ पेपर पढ़ने लगा तभी कविता नहा कर मंदिर की ओर चली गई

और मैं वापस पेपर पढ़ने लगा रत को कविता को ब्लू कलर की पैंटी मे देख कर

मस्त हो गया और उस रात मैने उसके चुतडो को खूब दबोच दबोच कर सहलाया, कविता

को चोदने के बाद मैने टीवी ऑन कर ली और देखने लगा, कविता सो चुकी थी और मुझे

नींद नही आ रही थी सो मैने सोचा कोई अडल्ट फिल्म देखी जाए और मैने डीवीडी पर पॉर्न

मूवी लगा दी कुछ ही देर मे मेरा मौसम फिर बन गया और मैं कविता की नंगी गंद पर

हाथ फेरते हुए अपना लंड सहलाने लगा, हालाकी कविता सो चुकी थी लेकिन वह उस पैंटी मे

बहुत मस्त लग रही थी और उसे पूरे चूतड़ नंगे नज़र आ रहे थे, मैने थोड़ी देर अपने लंड

को सहलाया और फिर सोचा अब मूत कर सो जाना चाहिए इसलिए मैं बाथरूम की ओर चल दिया,

पापा 3 दिन के लिए बाहर गये हुए थे और मेरी नज़र जैसे ही मोम के कमरे पर पड़ी उनके रूम

की लाइट ऑन थी, मैने घड़ी देखा तो उस समय रात के 2 बज रहे थे मैने सोचा मोम लाइट चालू

करके सो गई होगी और मैने धीरे से उनके रूम की विंडो के पास जाकर देखा तो एक दम से चौंक गया,

मोम मेरी लाई हुई रेड कलर की पैंटी पहन कर ड्रेसिंग टेबल के सामने नंगी खड़ी थी और बार बार

पैंटी के उपर से कभी अपनी फूली हुई चूत को दबा दबा कर देखती और कभी पीछे घूम कर अपनी

भारी गंद जो की उसकी पैंटी मे नही समा रही थी को देखने लगती, मोम के इतने भारी भरकम गोरे

गोरे चुतडो को देखते ही ऐसा लगा जैसे मेरा लंड पानी छोड़ देगा, वाकई मे पैंटी तो सही मायने

मे मोम के उपर ज़्यादा अच्छी लग रही थी, मेरा तो लंड यह सोच सोच कर फटा जा रहा था कि मेरी

मा मेरी लाई हुई पैंटी को पहन कर मेरे सामने नंगी खड़ी है,
 
वाकई मे मा के चूतड़ कविता से भी डबल थे

कविता तो मा के सेक्सी बदन से आधी नज़र आती थी और वह लाल रंग की पैंटी उनकी गंद मे इस कदर फसि हुई थी

कि मैं देख कर मस्त हो गया, तभी मोम मिरर के सामने से बेड की तरफ गई और उसकी मस्तानी चाल देख कर

मेरे लंड की नसे तन कर इतनी फुल गई जैसे अभी फट पड़ेगी, तभी मा बेड पर लेट गई और लाइट ऑफ कर दी,

मुझसे रहा नही जा रहा था और मैं कविता के पास जाकर उसकी गंद को अपने लंड से दबा कर लेट गया और फिर

ना जाने कब नींद आ गई

सोनू- कविता तुम्हारी ब्लू पैंटी बहुत अच्छी लग रही थी आज रेड वाली पहनना

कविता- हस्ते हुए अरे मैं तो आपको बताना ही भूल गई वह पैंटी तो मा जी ने ले ली है

उन्हे वह पैंटी बहुत पसंद आई है कल ही उन्होने वह पैंटी पहन ली थी,

सोनू- अरे मैं तुम्हारे लिए लाया था तुमने मोम को क्यो दे दी,

कविता- मुस्कुराते हुए अरे तो क्या हो गया मा जी पर वह पैंटी बहुत अच्छी लग रही थी,

सोनू- तूने देखी है मोम को पहने हुए

कविता-मेरा लंड पकड़ कर मसल्ते हुए, हाँ और तुम देख लेते तो अपनी मोम की मोटी गंद

मारने के लिए तड़प उठते, बहुत सेक्सी नज़र आ रही थी उसमे,

सोनू- अच्छा बहुत भारी चूतड़ है क्या मोम के

कविता- अरे तुम्हारा तो बस उनकी गंद की दरार मे मूह डाल कर चाटने का मन होने लगता

उस रात कविता ने काफ़ी गरम बाते की और फिर हम लोग गाँव चल दिए वहाँ से कविता अपने मयके चली

गई और मैं गाँव मे ही रुक गया

मेरी एक चाची जिसका नाम सविता था वह मा से मिलने के लिए आई, रंडी बड़ी मोटी गंद की मालकिन थी

बिल्कुल मा की तरह, उसकी मा से बनती भी बहुत थी उपर से नाभि के नीचे साड़ी बाँधने के कारण उसका

गुदाज पेट भी बिल्कुल मा की तरह ही नज़र आता था क्योकि मा भी साड़ी काफ़ी नीचे बाँधती थी मा के उभरे

हुए पेट को देख कर उसकी फूली चूत की कल्पना करना बड़ा आसान था, जैसे ही चाची झुकी उसके बाहरी चुतडो

पर मेरी निगाहे टिक गई लेकिन मुझे नही पता था कि मा मेरी नज़रो को ही देख रही थी, चाची की मोटी गंद को

देखते हुए अनायास मेरा हाथ अपने लोड्‍े पर चला गया और मैने अपना लोड्‍ा मसल्ते हुए चाची की गंद को जी भर

कर देखा लेकिन जैसे ही मेरी नज़र मा पर पड़ी हमारी नज़रे मिल गई और मैं सकपका गया और डर गया लेकिन मा

के चेहरे पर एक अजीब चमक और हल्की मंद मुस्कान देख कर ना जाने क्यो मेरा लंड झटके मारने लगा लेकिन मैं

जल्दी से वहाँ से उठ कर चला गया और फिर पूरा गाँव घूम कर रात को ही हर लोटा

रात को मा ने मेरे पसंद का खाना बनाया था खाना खाने के बाद

रति- सोनू ज़रा इधर आ

मा ज़मीन पर बिस्तेर लगा कर लेटी हुई थी और उसकी साड़ी उसके घुटनो तक थी पेर उसने मोडे हुए थे मैं तो उसकी

गोरी गुदाज पिंदलिया देख कर मस्त हो गया मेरी आँखे उस वक़्क्त और भी लाल हो गई जब मैने देखा कि मा की आँखे

बहुत कामुक नज़र आ रही थी

रति- सोनू बेटे ज़रा पेर दबा दे बड़ी अकड़न सी महसूस हो रही है, मैं तो जैसे इंतजार मे ही था मैने झट से

उसके पेरो को अपने हाथो मे थाम कर धीरे धीरे दबाने लगा,

रति- आह बड़ा अच्छा दबा रहा है सोनू बड़ा आराम मिल रहा है, मैं मा की गोरी गोरी टॅंगो को खूब मसल मसल

कर दबा रहा था और उसकी साड़ी के अंदर झाँकने की कोशिश कर रहा था, मा बड़े गौर से मेरा चेहरा देख रही

थी,

रति- सोनू थोड़ा उपर तक दबा ना, सबसे ज़्यादा दर्द तो जाँघो मे हो रहा है,

मेरा हाथ मा की मोटी मोटी गुदाज जाँघो तक पहुचा और मैने मा की मखमली चिकनी जाँघो को कुछ इस तरह से

दबाया जैसे कोई मर्द अपनी बीबी की मोटी जाँघो को उसे चोदने से पहले सहलाता और दबाता है मेरे रग रग मे

मस्ती भर गई और मा ने भी आँखे बंद कर ली लेकिन तभी मादरचोद चाची ना जाने कहाँ से आ तपकी और सारा

मज़ा किरकिरा हो गया

सविता- मुस्कुराते हुए क्या हो रहा है सोनू अपनी मा की बड़ी सेवा कर रहा है तू, कभी अपनी चाची के भी हाथ

पाँव दबा दिया कर,

मैने देखा उस समय मा का भी चेहरा मुरझा सा गया था जैसे उसकी मेहनत पर पानी फिर गया हो,

रति- आ सविता हो गया खाना पीना

सविता- हाँ दीदी हो गया तभी तो मैने सोचा कि तुम्हारे पास ही जाकर थोड़ी देर गप्पे मारती हू,

सोनू- मा मैं सोने जाउ
 
रति- ठीक है बेटा

मैं वहाँ से उठ कर अपने कमरे मे आ गया तभी मेरे मन मे आया कि क्यो ना चाची और मा की बाते सुनू देखे

दो मस्त घोड़िया आधी रात मे क्या बाते करती है मैं अपने रूम मे ना जाकर मा के कमरे के बाहर ही चुपचाप

खड़ा हो गया,

सविता- रति के भारी चुतडो पर चिकोटी काटते हुए, क्यो दीदी इतनी रात तक जाग रही हो लगता है भैया की

याद आ रही है,

रति- मुस्कुराते हुए, भैया की याद ना आएगी तो क्या इतनी रात को तेरी याद सताएगी

सविता- दीदी जब चूत फूली होती है तब अपने जवान बेटे से पेरो की मालिश ना करवाया करो कही उसने जंघे

दबाते दबाते चूत दबा दी तो लेने के देने पड़ जाएगे,

रति- मुस्कुरकर बनावटी गुस्सा दिखाते हुए, अरे कुछ तो शरम कर सविता वह मेरा बेटा है,

सविता- जानती हू तुम्हारा बेटा है पर यह क्यो भूल जाती हो कि उसकी शादी हो चुकी है और अब तो वह रोज तुम्हारे

और मेरे जैसी औरत को नंगी करके चोद्ता है,

रति- चल अब चुप कर

सविता- अच्छा दीदी एक बात बताओ जब इन जवान लड़को से अपने पैर दबबाते है तो यह भी सोचते होंगे कि जाँघो

के उपर कैसी मस्त फूली हुई चूत होगी,

रति- क्यो नही सोचते होंगे और फिर सोनू तो शादीशुदा है वह तो सब जानता है कि औरत की चूत कैसी रहती है,

सविता- मुस्कुराते हुए, यही तो मैं कहना चाहती हू दीदी की जवान लोंडे से अपनी जंघे मत दब्वाया करो कही जोश

मे आकर तुम्हारी चूत दबा दी तो

रति- मुस्कुराते हुए, दबा देगा तो तेरे कौन से बाल झाड़ जाएगे, मेरा बेटा है मेरी चूत दबा भी देगा तो तेरा क्या

बिगड़ जाएगा,

मा की बाते सुन कर मैं तो एक दम मस्त हो रहा था और कान लगा कर दोनो की बाते सुन रहा था, मेरा लंड पूरी औकात

मे आ चुका था,

सविता- मूह बनाते हुए, भला मेरा क्या बिगड़ेगा मैं तो बस ऐसे ही कह रही थी,

रति- मुस्कुराते हुए इस बार सविता के चुतडो को दबाते हुए, लगता है देवेर जी के लोड्‍े मे अब वो धार नही बची

इसीलिए तू दिनभर पनियाई फिरती है

सविता- अरे दीदी अब क्या बताऊ, लंड डालते ही पानी छोड़ देते है यह उनकी रोज की आदत हो गई है,

रति- तो फिर तू क्या करती है

सविता- क्या करूँगी बस चूत सहला कर सो जाती हू

रति- कुछ सोचते हुए, हूँ

सविता- दीदी तुम्हे तो भैया खूब कस कस कर ठोकते होंगे ना

रति- मूह बनाते हुए अरे कहाँ रे उनका भी वही हाल है जो तेरे मरद का है, तेरा कम से कम रोज डालने की कोशिश

तो करता है, पर ये तो 4-5 साल से इन चीज़ो से दूर हो गये है अब महीने मे एक आध बार चोद्ते है वह भी 2-4

मिनिट के लिए और फिर झाड़ जाते है,

सविता- तो फिर दीदी तुम क्या करती हो

रति- मुस्कुराते हुए, मुझसे तो रहा नही जाता है, मैं तो चूत मे कुछ डाले बिना रह ही नही पाती हू इसलिए कुछ

ना कुछ डाल कर कम से कम आधा घंटा करना पड़ता है नही तो मुझे तो नींद ही नही आती,

सविता- दीदी वह तो ठीक है मैने भी कई बार ऐसा किया लेकिन दीदी लंड जैसा मज़ा नही मिलता है,

रति- हाँ वह तो है लंड की बात ही अलग होती है और फिर रति ने एक लंबी अंगड़ाई ली और कहा सविता आज तो बहुत

थक गई हू अब नींद आ रही है

सविता- ठीक है दीदी मैं भी चलती हू बहुत रात हो गई है,

सविता चाची के जाने के बाद मा सो गई और मैं उन दोनो की रसीली बाते सोचता हुआ आकर लेट गया, पर मेरे मन मे

एक इच्छा ज़रूर जाग्रत हो गई थी वह थी चाची और मा को खूब कस कस कर ठोकने की

सुबह उठ कर चाइ पीने के बाद जैसे ही मैं सविता चाची के घर गया और घर के अंदर घुसा आँगन के एक

कोने का नज़ारा

देख कर मेरी आँखे फटी की फटी रह गई सविता चाची पूरी नंगी खड़ी होकर नहा रही थी, हे उसके मोटे मोटे

गोरे गोरे भारी भरकम चुतडो को देख कर तो मैं पागल हो गया

कितने सुडोल और चौड़े थे उनके चूतड़, देख कर ऐसा लग रहा था कि जाकर उनकी मोटी गंद पर ज़ोर दार थप्पड़

मारु और उनके चुतडो को चौड़ा करके अपना लंड पेल दू, तभी सविता चाची की नज़र मुझ पर पड़ गई और वह एक

दम से मुझे देख कर अपना पेटिकोट उठा कर उसे अपने सीने से लगा लिया मैं जैसे ही पलट कर जाने को हुआ तभी

चाची ने मुझे आवाज़ देकर रोक दिया
 
सविता- अरे सोनू कहाँ जा रहा है बैठ ना मैं तो नहा चुकी हू

चाची के चेहरे पर एक अलग ही मुस्कुराहट थी और बार बार वह मेरे पेंट मे बने तंबू को देख रही थी मैं भी

उसे छोड़ने के लिए लालायित था इसलिए मैं भी चाह रहा था कि वह मेरा तंबू अच्छे से देख ले,

सविता- अपना पेटिकोट पहनते हुए मुस्कुराकर कहने लगी, संजू तूने मुझे नंगी तो नही देखा

उसकी इस बात से मेरा लंड ऐसे उछल पड़ा जैसे पेंट फाड़ कर बाहर आ जाएगा,

मैने हसरत भरी निगाहो से उसे देखता हुआ कहने लगा नही चाची ऐसी कोई बात नही है

सविता- मुस्कुराते हुए, मुझे तो लगा कि तू बहुत देर से खड़ा खड़ा मुझे नंगी देख रहा था,

सोनू- हस्ते हुए नही चाची ऐसी कोई बात नही है,

सविता- ले मेरी चोली की गाँठ तो बाँध दे ज़रा

सविता चाची मेरे बिल्कुल करीब आकर मेरी तरफ अपनी पीठ करके घूम गई उसकी चिकनी पीठ और गोरी कमर और उसके

भारी चूतड़ मुझे पागल किए जा रहे थे मैं उसकी चोली बाँधने लगा तभी सविता चाची ने थोड़ी सी अपनी गंद

मेरी तरफ कर दी जिससे मेरा लंड उनके पेटिकोट के उपर से उनकी गंद को छु गया,

सविता- सच बता सोनू तूने मुझे नंगी देख लिया था ना,

सविता चाची के बार बार नंगी शब्द कहने से मेरा लंड अब कुछ ज़्यादा ही तनटना गया था मुझसे रहा नही गया

और मैने उनकी गंद मे अपने लंड का दबाव थोड़ा बढ़ा कर कहा हाँ चाची मैने आपको पूरी नंगी देखा है, मेरा

हाथ चोली बाँधने की बजाय उनकी पीठ सहला रहा था और वह अपनी गंद का ज़ोर मेरे लोड्‍े पर लगाए हुए थी,

सविता- तुझे शरम नही आई अपनी मा समान चाची को नंगी देखते हुए,

सोनू- वो चाची ग़लती से मेरी नज़र आप पर पड़ गई,

सविता- ऐसे ग़लती से फिर तो तूने अपनी मा को भी नंगी देखा होगा,

सोनू- हाँ चाची कई बार देखा है,

सविता- अपने होंठ अपने दांतो से काटते हुए अपनी गंद सोनू के लोड्‍े पर दबा कर कहती है, हाँ अब तो तू बड़ा हो

गया है तेरी शादी हो चुकी है अब तो तू रोज ही अपनी बीबी को नंगी देखता होगा,

सोनू- अपने लंड को चाची की गंद मे दबाते हुए, हाँ चाची रोज ही देखता हू, बिना नंगी देखे मुझे नींद ही

नही आती,

सविता- नंगी देख कर क्या करता है, सविता की आवाज़ मई कपकपाहट थी,

सोनू- सविता की गर्दन पर मूह रख कर चूमते हुए अपने होंठो को उसके कान के पास ले जाकर धीरे से कहता है,

चाची नंगी देख कर फिर चोद्ता हू,इतना कह कर सोनू अपने हाथ से सविता चाची की मोटी गंद को थाम कर लंड

उसकी गंद मे रगड़ देता है,

सविता- सीसियाते हुए, तूने तो मुझे भी नंगी देखा है तो अब क्या करेगा,

सोनू- सविता चाची के गले को चूमता हुआ उसकी गदराई गंद को अपने हाथो मे भर कर, चाची अब मैं तुम्हे

चोदुन्गा,

सविता- एक दम से पलट कर सोनू से चिपक जाती है और पागलो की तरह उसके होंठो को चूमते हुए उसके खड़े

लंड को उसकी पेंट के उपर से पकड़ कर मसल्ने लगती है,

सोनू सविता चाची को अपनी बाँहो मे भर कर उसके मोटे मोटे दूध को खूब ज़ोर ज़ोर से मसल्ने लगता है और

उसके होंठो का रस पीने लगता है साथ ही सोनू अपने एक हाथ से सविता चाची की गंद को सहलाते हुए उसके

चुतडो की दरार मे अपना हाथ भर कर उसकी गुदा सहलाने लगता है,

क्रमशः....................................
 
rati- kavita jara almari se sabun nikal kar de to, kavita use sabun dene lagi tab ma ne kaha, bete diwali ke bad 8-15 din ki

chhutti le le hum log apne ganv chalte hai mere maike mai bhaiya ki ladki ki shadi hai aur kavita ka pihar bhi pas hi hai to

vah bhi ghum aayegi aur tere tauji ke bade ladke manohar ki bibi ko bhi ladka hua hai to uske namkaran mai bhi shamil ho

jayege,

sonu- thik hai ma mai chutti ki aplication de deta hu, diwali ke din kavita ne bahut hi khubsurat sadi pahni hui thi aur bilkul

dulhan ki tarah saji hui thi, halaki mom bhi kaphi saji dhaji thi, kaphi khishi ka mahol tha aur ghar mai kaphi mithaiya banai

ja rahi thi, rat ko mera kavita ke sath mast chudai karne ka mood tha aur yah bat vah bhi bhali bhati janti thi ki sonu mujhe

itni saji dhaji dekh kar jarur khub mast thukai karega,

aur isi liye vah bar bar mom ke samne mujhe dekh kar muskura rahi

thi aur shayad mom bhi samajh rahi thi ki aaj mera beta khub tabiyat se uski bahu ko chodne wala hai jab bhi mom thoda

idhar udhar hoti mai kabhi kavita ke bobe masal deta kabhi uski moti gand daba deta aur vah mujhse chhitak kar muskurate

huye dur bhag jati,

tabhi kavita kichan mai khadi thi aur maine dekha mom bahar baramde mai hai aur maine pichhe se

kavita ke mote mote dhoodh ko khub kas kar pakad kar dabane laga aur tabhi maine dekha mom ne mujhe uske doodh

dabate dekh liya aur ek dam se mom se meri najre mili aur mai chupchap bahar aa gaya aur kavita bhi yah dekh kar halke

halke muskurati hui phir se kam mai lag gai,

rat ko puja ke bad diwali ke fatake aadhi rat tak fodte rahe aur khub mithaiyo ka maja liya aur phir mai aur kavita khana

khane ke bad bed par aa gaye,

kavita ne bataya kal aapki chinal mausi bhi aa rahi hai,

sonu- muskurate huye, bechari ko chinal kyo bol rahi ho,

kavita- mere pati se rat bhar apni chut dabwati rahi to unhe chinal na kahu to kya kahu,

sonu- use bechari ko kya pata ki uske bhatije ne rat bhar uski phuli hui chut ko dabaya tha,

kavita- muh banate huye, chalo hato bhi, pakki chinal hai tumhari mausi, aisa ho nahi sakta ki koi mard rat bhar kisi aurat ki

chut mardan kare aur use pata bhi na chale,

sonu- kavita ki phuli hui chut ko uski panty ke upar se dabata hua, ab chhodu rani mausi ko ab to tumhari chut dabane aur

marne ka time ho gaya aur aur phir maine kavita ko apni banho mai bhar liya..............

rati- agle din are kavita mausi ko phone karke punch le ki vah bhi ganv jayegi kya

kavita- nahi ma ji maine kal hi unse puchha tha vah 1 mahine bad aayegi aur vaise bhi

sonu ne 3 seat reserve karwa li hai aur vah kah rahe the ki hame chhod kar vapas aa jayege

jyada chutti nahi mili hai

aaj mujhe kuchh shoping karna thi aur mai market mai ghum raha tha tabhi meri najar kuch

fancy bra aur panty par padi kuch to aisi thi jinko pahanne ke bad pichhe se aurto ki

gand ki guda par bas ek dori rahti thi aur puri gand najar aati mujhe vah badi achchi lagi

aur maine socha kavita jab ise pahan kar mere samne aayegi to kitna achcha lagega

bas phir kya tha maine ek blue aur ek red color ki bra aur panty le li, ghar pahuch kar

kavita ko dikhai to vah mujhe muskurakar mukka marte huye kahne lagi

kavita- lagta hai aaj kal aapka din bhar land khada rahta hai tabhi to in sab chijo par itna dhyan rahta hai.

sonu- ab mujhe pahan kar bhi dikhaogi ya bate hi banati rahogi.

kavita- naha kar pahnugi aur phir kavita muskurati hui andar chali gai aur mai uske

matakte chutado ko dekhta rah gaya,

mai beth kar news paper padhne laga tabhi kavita naha kar mandir ki aur chali gai

aur mai vapas paper padhne laga rat ko kavita ko blue color ki panty mai dekh kar

mast ho gaya aur us rat maine uske chutado ko khub daboch daboch kar sahlaya, kavita

ko chodne ke bad maine tv on kar li aur dekhne laga, kavita so chuki thi aur mujhe

neend nahi aa rahi thi so maine socha koi adult film dekhi jaye aur maine dvd par porn

movie laga di kuch hi der mai mera mausam phir ban gaya aur mai kavita ki nangi gand par

hath pherte huye apna land sahlane laga, halaki kavita so chuki thi lekin vah us panty mai

bahut mast lag rahi thi aur use pure chutad nange najar aa rahe the, maine thodi der apne land

ko sahlaya aur phir socha ab mut kar so jana chahiye isliye mai bathroom ki aur chal diya,

papa 3 din ke liye bahar gaye huye the aur meri najar jaise hi mom ke kamre par padi unke room

ki light on thi, maine ghadi dekha to us samay rat ke 2 baj rahe the maine socha mom light chalu

karke so gai hogi aur mai dhire se unke room ki window ke pas jakar dekha to ek dam se chounk gaya,

mom meri lai hhi red color ki panty pahan kar dressing table ke samne nangi khadi thi aur bar bar

panty ke upar se kabhi apni phuli hui chut ko daba daba kar dekhti aur kabhi piche ghum kar apni

bhari gand jo ki uski panty mai nahi sama rahi thi ko dekhne lagti, mom ke itne bhari bharkam gore

gore chutado ko dekhte hi aisa laga jaise mera land pani chhod dega, vakai mai panty to sahi mayne

mai mom ke upar jyada achchi lag rahi thi, mera to land yah soch soch kar fata ja raha tha ki meri

ma meri lai hui panty ko pahan kar mere samne nangi khadi hai, vakai mai ma ke chutad kavita se bhi double the

kavita to ma ke sexy badan se aadhi najar ati thi aur vah lal rang ki panty unki gand mai is kadar fasi hui thi

ki mai dekh kar mast ho gaya, tabhi mom mirror ke samne se bed ki taraf gai aur uski mastani chal dekh kar

mere land ki nashe tan kar itni full gai jaise abhi fat padegi, tabhi ma bed par let gai aur light off kar di,

mujhse raha nahi ja raha tha aur mai kavita ke pas jakar uski gand ko apne land se daba kar let gaya aur phir

na jane kab neend aa gai

sonu- kavita tumhari blue panty bahut achchi lag rahi thi aaj red wali pahanna

kavita- haste huye are mai to aapko batana hi bhul gai vah panty to ma ji ne le li hai

unhe vah panty bahut pasand aai hai kal hi unhone vah panty pahan li thi,

sonu- are mai tumhare liye laya tha tumne mom ko kyo de di,

kavita- muskurate huye are to kya ho gaya ma ji par vah panty bahut achchi lag rahi thi,

sonu- tune dekhi hai mom ko pahne huye

kavita-mera land pakad kar masalte huye, ha aur tum dekh lete to apni mom ki moti gand

marne ke liye tadap uthte, bahut sexy najar aa rahi thi usme,

sonu- achcha bahut bhari chutad hai kya mom ke

kavita- are tumhara to bas unki gand ki darar mai muh dal kar chatne ka man hone lagta

us rat kavita ne kaphi garam bate ki aur phir hum log ganv chal diye vaha se kavita apne mayke chali

gai aur mai ganv mai hi ruk gaya

meri ek chachi jiska nam savita tha vah ma se milne ke liye aai, randi badi moti gand ki malkin thi

bilkul ma ki tarah, uski ma se banti bhi bahut thi upar se nabhi ke niche sadi bandhne ke karan uska

gudaj pet bhi bilkul ma ki tarah hi najar aata tha kyoki ma bhi sadi kaphi niche bandhti thi ma ke ubhare

huye pet ko dekh kar uski phuli chut ki kalpna karna bada aasan tha, jaise hi chachi jhuki uske bahri chutado

par meri nigahe tik gai lekin mujhe nahi pata tha ki ma meri najro ko hi dekh rahi thi, chachi ki moti gand ko

dekhte huye anayas mera hath apne lode par chala gaya aur maine apna loda masalte huye chachi ki gand ko jee bhar

kar dekha lekin jaise hi meri najar ma par padi hamari najre mil gai aur mai sakpaka gaya aur dar gaya lekin ma

ke chehre par ek ajeeb chamak aur halki mand muskan dekh kar na jane kyo mera land jhatke marne laga lekin mai

jaldi se vaha se uth kar chala gaya aur phir pura ganv ghum kar rat ko hi har lota

rat ko ma ne mere pasand ka khana banaya tha khana khane ke bad

rati- sonu jara idhar aa

ma jameen par bister laga kar leti hui thi aur uski sadi uske ghutno tak thi per usne mode huye the mai to uski

gori gudaj pindliya dekh kar mast ho gaya meri aankhe us waqkt aur bhi lal ho gai jab maine dekha ki ma ki aankhe

bahut kamuk najar aa rahi thi
 
Back
Top