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रेशमा और शेर सिंग मुझे अपने साथ लेकर हॉल में बने स्टेज पर पहुँचे.., रेशमा इस समय अपने गॅंग में मौजूद सभी आदमियों को संबोधित
करके मेरा परिचय कराना चाहती थी कि तभी उन तमाम लोगों के बीच खड़े रॉकी की नज़र जैसे ही मुझ पर पड़ी..,
उसने मुझे फ़ौरन पहचान लिया और वो एक साथ चीख पड़ा – ये तो वो ही है.., इसे पकडो.., जाने मत देना…, ये कहता हुआ वो स्टेज की तरफ लपका..,
सभी उसकी आवाज़ सुनकर उसकी तरफ देखने लगे जो अब लोगों को पार करता हुआ स्टेज की तरफ ही आ रहा था…!
सच कहूँ तो उसे अपनी तरफ आते हुए देखकर एक बार तो मेरी गान्ड ही फट गयी.., ये भेन्चोद अब खेल बिगाड़ेगा.., अब साला जैसे ही मेरी
हक़ीकत बताएगा.., यहाँ खड़े तमाम गन धारी मुझे भून कर रख देंगे…!
गनों की तो छोड़ो, इतने सारे लोग अगर एक साथ भी मेरे उपर पिल पड़े तो… ये सोचते ही मेरी गान्ड तक का पसीना छूट गया..,
इतना तो मे जान ही चुका था कि रॉकी और उसके बाप विक्रम राठी की इस गॅंग में क्या हैसियत है…?
रॉकी को स्टेज की तरफ आते हुए किसी और की तो बात छोड़ो खुद शेर सिंग और रेशमा ने भी उसे आने से नही रोका…!
लेकिन जैसे ही वो स्टेज पर पहुँचा तभी एक चमत्कार हो गया.., रॉकी ने आते ही अपने इकलौते साबुत उल्टे हाथ का थप्पड़ शेर सिंग के गाल पर जमा दिया…!
उसकी इस हरकत से शेर सिंग ही नही रेशमा और मेरे सहित वहाँ मौजूद सभी लोग अचंभे में पड़ गये..!
रेशमा ने आगे बढ़कर रॉकी को कंधे से पकड़कर झकझोरते हुए कहा – ये क्या हिमाकत है रॉकी, तुमने शेर सिंग साब को थप्पड़ क्यों मारा…?
रेशमा की बात सुनकर रॉकी दहाड़ते हुए बोला – चुप कर साली कुतिया.., छिनाल औरत.., मुझे सब पता है तू इसका लंड लेती है.., तुम दोनो ने मिलकर मेरे बाप को अपने रास्ते से हटाया है..,
मे अब तुम दोनो का खून पी जाउन्गा…, आने दो बॉस को तुम दोनो की खाल खिचवाकर भूसा ना भरवाया तो मेरा नाम भी रॉकी नही…!
ये कहते हुए उसने मेरी तरफ एक आँख दबा दी…,
मे उसे देखकर बस मुस्करा भर दिया.., एक लंबी साँस छोड़ते हुए मन ही मन बुद-बुदा उठा…, जियो संजू प्यारे.. सही समय पर आकर बचा
लिया तुमने यार…, वरना आज तो मेरा भुर्ता बनाना तय था…!
अपने मात-हतों के सामने अचानक थप्पड़ खाकर और रेशमा के साथ बदतमीज़ी करते देख शेर सिंग का पारा सातवें आसमान पर जा
पहुँचा, गुस्से में उसके नथुने फूलने पिचकने लगे और उसने भी जबाब में एक करारा सा थप्पड़ रॉकी के गाल पर जड़ दिया…!
तभी रॉकी ने अपने इकलौते हाथ से उसका गला पकड़ लिया.., अब ये रॉकी की पकड़ होती तो शायद शेर सिंग अपने आप को आसानी से
छुड़ा भी लेता लेकिन उसके अंदर इस समय ताक़त तो एक ख़ूँख़ार प्रेत की समाई हुई थी…,
लिहाजा जल्दी ही शेर सिंग को ये एहसास होने लगा कि अब वो मरने वाला है.., उसके गले से अजीब किस्म की आवाज़ें निकलने लगी…!
इससे पहले कि रॉकी के शरीर में मौजूद संजू शेर सिंग को उपर पहुँचा पाता.., रेशमा के इशारे पर मेने शेर सिंग को उसकी गिरफ़्त से आज़ाद करा दिया और रॉकी को एक जोरदार धक्का देकर स्टेज से नीचे धकेल दिया…!
रेशमा स्टेज से दाहडी…, देख क्या रहे हो तुम सब.., मारो साले इस हरामी को.., और तब तक मारो जब तक ये बेजान होकर अपने होशो
हवास ना खो दे…,
उसका इतना कहना था कि एक साथ पचासों हाथ और लात घूँसे रॉकी पर पड़ने लगे.., वो कुच्छ देर तो चीखता रहा.., बोलता रहा कि मुझे क्यों मार रहे हो..? मेरी क्या ग़लती है..?
क्योंकि जैसे ही उसका पीटना शुरू हुआ.., संजू ने उसे मुक्त कर दिया था और दूर से ही उसे पिटते हुए देखकर मज़े ले रहा था.., जो सिर्फ़ मुझे ही दिखाई दे रहा था..,
मेने इशारे से उसे हाई-फ़ाई किया.., थोड़ी ही देर में भीड़ ने मार मार कर रॉकी का भुर्ता बना दिया.., और वो अचेत होकर ज़मीन पर पड़ा रह गया.., जिसे उठाकर लोगों ने एक कमरे में बंद कर दिया…!
इस तरह से मेरी एक मात्र पहचान बताने वाले का इलाज संजू ने बड़ी आसानी से कर दिया था.., अब मुझे यहाँ पहचानने वाला कोई नही था..,
अब बस देखना ये था कि रेशमा मेरा परिचय इन लोगों के सामने किस रूप में करवाती है…?
रॉकी को किसी मरे हुए कुत्ते की तरह घसीट कर एक कमरे में डालकर बाहर से ताला बंद कर दिया.., सबको हिदायत कर दी कि जब तक कहा ना जाए वो बाहर नही आना चाहिए…!
जब ये मामला शांत हुआ तो रेशमा ने सबको संबोधित करके मेरा परिचय कराते हुए कहा – ये मिस्टर. गौरव राजवंशी हैं.., हमारे नये साथी..,
इन्हें हमारे जैसे कामों का अच्छा ख़ासा अनुभव है…,
कुच्छ समय पहले तक पश्चिमी उत्तर प्रदेश में इनका गिरोह सक्रिय था.., लेकिन नयी सरकार के आते ही जैसा कि हम सबको ग्यात ही है.., वहाँ की पोलीस ने सारे गुण्डों का जीना हराम कर दिया है…!
इनका भी गिरोह ख़तम हो गया और ये संयोग से मुझसे टकरा गये..,
जैसा कि आप सब लोग जानते ही हैं.., कुच्छ ही समय में हमारे 3-3 मैन आदमियों को मौत के घाट उतार दिया गया.., जिसमें युसुफ ख़ान को तो आप सबके सामने ही संजू ने हलाक़ कर दिया…, और कम्बख़्त एक छोटी सी ग़लती की वजह से खुद भी मारा गया…!
काम का बोझ बहुत बढ़ गया है.., राठी साब के मारे जाने के बाद तो अंदर और बाहर की सारी ज़िम्मेदारी शेर सिंग साब के कंधों पर ही आ गयी है.. जिन्हें वो अकेले नही उठा सकते…!
अतः हमने फ़ैसला किया है कि आज से बल्कि अभी से बॉस ने मिस्टर. राजवंशी को हमारे इस मैन अड्डे का सरदार घोषित करने का फ़ैसला लिया है..,
यहाँ की हर गति विधि इनकी देख रेख में ही होगी.., यहाँ तक कि मुझे खुद और सिंग साब को भी इनकी हर बात माननी होगी अगर हमारे
दल के फेवर में हुई तो…!
रेशमा की ये घोषणा सुनकर एक ओर शेर सिंग भी सकते में आ गया.., वो कुच्छ कहने ही वाला था कि रेशमा ने आँखों के इशारे से उसे चुप रहने के लिए कहा…,
दूसरी ओर मेरे चेहरे पर एक विषैली मुस्कान आ गयी.., मेरे यहाँ आने का मकसद अब आसान नज़र आ रहा था..,
बहरहाल.., इतनी उद्घोषणा करने के बाद रेशमा मुझे और शेर सिंग के साथ ऑफीस में पहुँची.., जहाँ घुसते ही शेर सिंग किसी बिगड़ैल घोड़े की तरह बिदकते हुए बोला…
ये क्या हिमाकत है रेशमा.., क्या इसके लिए तुमने बॉस से पूछा है.., ये अंजान आदमी है.., आज से पहले मेने तो इसे देखा तक नही और
तुमने इससे पूरे गॅंग का ही जिम्मा सौंप दिया…?
रेशमा अपने होठों पर एक मनमोहक मुस्कान बिखेरते हुए बोली – शांत सिंग साब शांत.., पहली बात.. मिस्टर. राजवंशी मुझे आज पहली बार नही दो दिन पहले ही मिल चुके हैं..
इनकी मंशा जानकर ही मेने बॉस से इनके बारे में तब पुछा जब राठी साब जिंदा थे.., तभी उन्होने इसकी ज़िम्मेदारी मेरे उपर ही डाल दी थी…,
उसके बाद से रती का भी कत्ल हो गया.., तो फिर तो इनका हमारे दल में आना और भी लाजिमी हो गया है.., रही बात यहाँ का लीडर बनाने की..,
ज़रा सोचिए…, आपकी उमर बढ़ रही है.., इनका नया जोशीला खून हमारे लिए ज़्यादा काम आ सकता है अगर ज़िम्मेदारी बड़ी होगी तो..,
और फिर इससे आपका कॉन सा ओहदा कम होने वाला है..,
वैसे भी आपके उपर बाहर कस्टमर बनाने की भी ज़िम्मेदारी बढ़ गयी है…, सो प्लीज़ डॉन’ट बी हेज़िटेट.., ओके…
और अगर फिर भी आपको लगता है कि आपके साथ कोई ज़्यादती हुई है.., तो आप बॉस से बात कर सकते हैं…, इतना कहकर रेशमा मुझे
लेकर ऑफीस से बाहर आ गयी.., और पीछे छोड़ आई शेर सिंग के दिमाग़ में चलता बवांडर…!
बाहर आकर मुझे साथ लिए वो उस पूरे अड्डे का मुआयना कराती रही.., कॉन सी चीज़ कहाँ रहती है.., क्या क्या कारोबार चलता है सब उसने विस्तार से बताया.
मेरे रहने के लिए उसने ऑफीस के बगल में मौजूद एक शानदार सूट में मेरी सारी व्यवस्था करा दी..,
इन सब कामों में दिन पूरा गुजर गया.., अंधेरा होते ही वो मुझे अड्डे पर ही छोड़ कर और कल आने का वादा करके खुद भी वहाँ से चली गयी..,
शेर सिंग पहले ही जा चुका था.., जो अब शायद तथाकथित बॉस के सामने अपना दुखड़ा रोने वाला था.., जो भी हो लेकिन फिलहाल अब इस अड्डे का मे अकेला सर्वे सर्वा था…!!!
करके मेरा परिचय कराना चाहती थी कि तभी उन तमाम लोगों के बीच खड़े रॉकी की नज़र जैसे ही मुझ पर पड़ी..,
उसने मुझे फ़ौरन पहचान लिया और वो एक साथ चीख पड़ा – ये तो वो ही है.., इसे पकडो.., जाने मत देना…, ये कहता हुआ वो स्टेज की तरफ लपका..,
सभी उसकी आवाज़ सुनकर उसकी तरफ देखने लगे जो अब लोगों को पार करता हुआ स्टेज की तरफ ही आ रहा था…!
सच कहूँ तो उसे अपनी तरफ आते हुए देखकर एक बार तो मेरी गान्ड ही फट गयी.., ये भेन्चोद अब खेल बिगाड़ेगा.., अब साला जैसे ही मेरी
हक़ीकत बताएगा.., यहाँ खड़े तमाम गन धारी मुझे भून कर रख देंगे…!
गनों की तो छोड़ो, इतने सारे लोग अगर एक साथ भी मेरे उपर पिल पड़े तो… ये सोचते ही मेरी गान्ड तक का पसीना छूट गया..,
इतना तो मे जान ही चुका था कि रॉकी और उसके बाप विक्रम राठी की इस गॅंग में क्या हैसियत है…?
रॉकी को स्टेज की तरफ आते हुए किसी और की तो बात छोड़ो खुद शेर सिंग और रेशमा ने भी उसे आने से नही रोका…!
लेकिन जैसे ही वो स्टेज पर पहुँचा तभी एक चमत्कार हो गया.., रॉकी ने आते ही अपने इकलौते साबुत उल्टे हाथ का थप्पड़ शेर सिंग के गाल पर जमा दिया…!
उसकी इस हरकत से शेर सिंग ही नही रेशमा और मेरे सहित वहाँ मौजूद सभी लोग अचंभे में पड़ गये..!
रेशमा ने आगे बढ़कर रॉकी को कंधे से पकड़कर झकझोरते हुए कहा – ये क्या हिमाकत है रॉकी, तुमने शेर सिंग साब को थप्पड़ क्यों मारा…?
रेशमा की बात सुनकर रॉकी दहाड़ते हुए बोला – चुप कर साली कुतिया.., छिनाल औरत.., मुझे सब पता है तू इसका लंड लेती है.., तुम दोनो ने मिलकर मेरे बाप को अपने रास्ते से हटाया है..,
मे अब तुम दोनो का खून पी जाउन्गा…, आने दो बॉस को तुम दोनो की खाल खिचवाकर भूसा ना भरवाया तो मेरा नाम भी रॉकी नही…!
ये कहते हुए उसने मेरी तरफ एक आँख दबा दी…,
मे उसे देखकर बस मुस्करा भर दिया.., एक लंबी साँस छोड़ते हुए मन ही मन बुद-बुदा उठा…, जियो संजू प्यारे.. सही समय पर आकर बचा
लिया तुमने यार…, वरना आज तो मेरा भुर्ता बनाना तय था…!
अपने मात-हतों के सामने अचानक थप्पड़ खाकर और रेशमा के साथ बदतमीज़ी करते देख शेर सिंग का पारा सातवें आसमान पर जा
पहुँचा, गुस्से में उसके नथुने फूलने पिचकने लगे और उसने भी जबाब में एक करारा सा थप्पड़ रॉकी के गाल पर जड़ दिया…!
तभी रॉकी ने अपने इकलौते हाथ से उसका गला पकड़ लिया.., अब ये रॉकी की पकड़ होती तो शायद शेर सिंग अपने आप को आसानी से
छुड़ा भी लेता लेकिन उसके अंदर इस समय ताक़त तो एक ख़ूँख़ार प्रेत की समाई हुई थी…,
लिहाजा जल्दी ही शेर सिंग को ये एहसास होने लगा कि अब वो मरने वाला है.., उसके गले से अजीब किस्म की आवाज़ें निकलने लगी…!
इससे पहले कि रॉकी के शरीर में मौजूद संजू शेर सिंग को उपर पहुँचा पाता.., रेशमा के इशारे पर मेने शेर सिंग को उसकी गिरफ़्त से आज़ाद करा दिया और रॉकी को एक जोरदार धक्का देकर स्टेज से नीचे धकेल दिया…!
रेशमा स्टेज से दाहडी…, देख क्या रहे हो तुम सब.., मारो साले इस हरामी को.., और तब तक मारो जब तक ये बेजान होकर अपने होशो
हवास ना खो दे…,
उसका इतना कहना था कि एक साथ पचासों हाथ और लात घूँसे रॉकी पर पड़ने लगे.., वो कुच्छ देर तो चीखता रहा.., बोलता रहा कि मुझे क्यों मार रहे हो..? मेरी क्या ग़लती है..?
क्योंकि जैसे ही उसका पीटना शुरू हुआ.., संजू ने उसे मुक्त कर दिया था और दूर से ही उसे पिटते हुए देखकर मज़े ले रहा था.., जो सिर्फ़ मुझे ही दिखाई दे रहा था..,
मेने इशारे से उसे हाई-फ़ाई किया.., थोड़ी ही देर में भीड़ ने मार मार कर रॉकी का भुर्ता बना दिया.., और वो अचेत होकर ज़मीन पर पड़ा रह गया.., जिसे उठाकर लोगों ने एक कमरे में बंद कर दिया…!
इस तरह से मेरी एक मात्र पहचान बताने वाले का इलाज संजू ने बड़ी आसानी से कर दिया था.., अब मुझे यहाँ पहचानने वाला कोई नही था..,
अब बस देखना ये था कि रेशमा मेरा परिचय इन लोगों के सामने किस रूप में करवाती है…?
रॉकी को किसी मरे हुए कुत्ते की तरह घसीट कर एक कमरे में डालकर बाहर से ताला बंद कर दिया.., सबको हिदायत कर दी कि जब तक कहा ना जाए वो बाहर नही आना चाहिए…!
जब ये मामला शांत हुआ तो रेशमा ने सबको संबोधित करके मेरा परिचय कराते हुए कहा – ये मिस्टर. गौरव राजवंशी हैं.., हमारे नये साथी..,
इन्हें हमारे जैसे कामों का अच्छा ख़ासा अनुभव है…,
कुच्छ समय पहले तक पश्चिमी उत्तर प्रदेश में इनका गिरोह सक्रिय था.., लेकिन नयी सरकार के आते ही जैसा कि हम सबको ग्यात ही है.., वहाँ की पोलीस ने सारे गुण्डों का जीना हराम कर दिया है…!
इनका भी गिरोह ख़तम हो गया और ये संयोग से मुझसे टकरा गये..,
जैसा कि आप सब लोग जानते ही हैं.., कुच्छ ही समय में हमारे 3-3 मैन आदमियों को मौत के घाट उतार दिया गया.., जिसमें युसुफ ख़ान को तो आप सबके सामने ही संजू ने हलाक़ कर दिया…, और कम्बख़्त एक छोटी सी ग़लती की वजह से खुद भी मारा गया…!
काम का बोझ बहुत बढ़ गया है.., राठी साब के मारे जाने के बाद तो अंदर और बाहर की सारी ज़िम्मेदारी शेर सिंग साब के कंधों पर ही आ गयी है.. जिन्हें वो अकेले नही उठा सकते…!
अतः हमने फ़ैसला किया है कि आज से बल्कि अभी से बॉस ने मिस्टर. राजवंशी को हमारे इस मैन अड्डे का सरदार घोषित करने का फ़ैसला लिया है..,
यहाँ की हर गति विधि इनकी देख रेख में ही होगी.., यहाँ तक कि मुझे खुद और सिंग साब को भी इनकी हर बात माननी होगी अगर हमारे
दल के फेवर में हुई तो…!
रेशमा की ये घोषणा सुनकर एक ओर शेर सिंग भी सकते में आ गया.., वो कुच्छ कहने ही वाला था कि रेशमा ने आँखों के इशारे से उसे चुप रहने के लिए कहा…,
दूसरी ओर मेरे चेहरे पर एक विषैली मुस्कान आ गयी.., मेरे यहाँ आने का मकसद अब आसान नज़र आ रहा था..,
बहरहाल.., इतनी उद्घोषणा करने के बाद रेशमा मुझे और शेर सिंग के साथ ऑफीस में पहुँची.., जहाँ घुसते ही शेर सिंग किसी बिगड़ैल घोड़े की तरह बिदकते हुए बोला…
ये क्या हिमाकत है रेशमा.., क्या इसके लिए तुमने बॉस से पूछा है.., ये अंजान आदमी है.., आज से पहले मेने तो इसे देखा तक नही और
तुमने इससे पूरे गॅंग का ही जिम्मा सौंप दिया…?
रेशमा अपने होठों पर एक मनमोहक मुस्कान बिखेरते हुए बोली – शांत सिंग साब शांत.., पहली बात.. मिस्टर. राजवंशी मुझे आज पहली बार नही दो दिन पहले ही मिल चुके हैं..
इनकी मंशा जानकर ही मेने बॉस से इनके बारे में तब पुछा जब राठी साब जिंदा थे.., तभी उन्होने इसकी ज़िम्मेदारी मेरे उपर ही डाल दी थी…,
उसके बाद से रती का भी कत्ल हो गया.., तो फिर तो इनका हमारे दल में आना और भी लाजिमी हो गया है.., रही बात यहाँ का लीडर बनाने की..,
ज़रा सोचिए…, आपकी उमर बढ़ रही है.., इनका नया जोशीला खून हमारे लिए ज़्यादा काम आ सकता है अगर ज़िम्मेदारी बड़ी होगी तो..,
और फिर इससे आपका कॉन सा ओहदा कम होने वाला है..,
वैसे भी आपके उपर बाहर कस्टमर बनाने की भी ज़िम्मेदारी बढ़ गयी है…, सो प्लीज़ डॉन’ट बी हेज़िटेट.., ओके…
और अगर फिर भी आपको लगता है कि आपके साथ कोई ज़्यादती हुई है.., तो आप बॉस से बात कर सकते हैं…, इतना कहकर रेशमा मुझे
लेकर ऑफीस से बाहर आ गयी.., और पीछे छोड़ आई शेर सिंग के दिमाग़ में चलता बवांडर…!
बाहर आकर मुझे साथ लिए वो उस पूरे अड्डे का मुआयना कराती रही.., कॉन सी चीज़ कहाँ रहती है.., क्या क्या कारोबार चलता है सब उसने विस्तार से बताया.
मेरे रहने के लिए उसने ऑफीस के बगल में मौजूद एक शानदार सूट में मेरी सारी व्यवस्था करा दी..,
इन सब कामों में दिन पूरा गुजर गया.., अंधेरा होते ही वो मुझे अड्डे पर ही छोड़ कर और कल आने का वादा करके खुद भी वहाँ से चली गयी..,
शेर सिंग पहले ही जा चुका था.., जो अब शायद तथाकथित बॉस के सामने अपना दुखड़ा रोने वाला था.., जो भी हो लेकिन फिलहाल अब इस अड्डे का मे अकेला सर्वे सर्वा था…!!!