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करीना कपूर की पहली ट्रेन (रेल) यात्रा

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रेड साड़ी और स्लीवलेश ब्लाउज में करीना का गोरा लचीला बदन कहर ढा रहा था, बेहद ही ज़्यादा खूबसूरत और हाट लग रही थी करीना। उसने तो ट्रेन से जाने के लिये किसी आम औरत जैसा लगने के लिये साड़ी पहनी थी, लेकिन नॉलेज कम होने के कारण नासमझी में मर्दों के लण्ड खड़े करने वाली मस्त रेड साड़ी जो करीना की नाभि से नीचे थी, इस कारण करीना की नाभि बहुत से्सी लग रही थी, और ब्लाउज स्लीवलेश और टाइट होने के कारण करीना के बड़े-बड़े दूध के टैंकर अपने पूरे साइज में ब्लाउज से तने हुये दिख रहे थे, और पीछे गाण्ड तो मशाअल्लाह, लाजवाब, और ब्लाउज स्लीवलेश होने के कारण करीना की गोरी पीठ बहुत हाट लग रही थी। करीना ने रेड साड़ी पे मैचचींग रेड लिपीसटिक आईने में देखकर लगाई।

फिर मोबाइल में टाइम देखते-देखते जल्दी-जल्दी अपना मेकप करती है, और सैफ का गिफ्ट किया हुआ खुशबूदार सेंट अपने गोरे बदन पर छिड़कती है। ये सब करने के बाद करीना अपने आपको आईने में देखकर बोलती है- “कितनी खूबसूरत लग रही हूँ मैं, किसी की नजर ना लगे आज, आज अगर सैफ यहाँ होते तो मुझे जबर्जस्ती किस करते, और सारा मेकप बिगाड़ देते मेरा, इस्शह…”

करीना ने माथे पर बिंदिया, हाथ में सोने के कंगन, और गले में मोतियों का नेकलेश जिसे सैफ की माँ ने उसे दिया था, ये सब श्रांगार करीना करती है। और घड़ी जब 6:12 बजाती है तब करीना जल्दी-जल्दी रूम से बाहर निकलती है। रूम लाक करके वो सीढ़ियों से नीचे हाल की तरफ बढ़ती है, जहाँ रामू अभी-अभी सारा ब्रेकफ़ास्ट डाइनिंग टेबल पर लगा रहा था।

तभी रामू की नजर करीना की तरफ जाती है तो रामू हाथों से काम करते-करते करीना की तरफ देखकर मन ही मन बोलता है- “रेड साड़ी में तो मैडमजी पटाखा लग रही है…” और रामू का दूसरा हाथ अपने लण्ड को मसल रहा था।

करीना तो अपने ड्रेस को ठीक-ठाक करके सीढ़ियों से आ रही थी, कि तभी वो रामू की तरफ देखती है।

तो झट से रामू जो करीना के बदन को देख रहा था वो अपनी नजर नीचे काम की तरफ करता है।

करीना मन ही मन- “कितना अच्छा है रामू, कल ही उसके साथ हादसा हुआ था, और उसकी आँखों का भी प्राब्लम हुआ था, लेकिन ठीक होते ही वो आज यहाँ काम करने लौट आया, इस तरह के अच्छे लोग आज दुनियाँ में बहुत कम हैं…” और करीना ऐसे सोचते हुये नीचे हाल में पहुँच जाती है।

रामू करीना को देखकर बोलता है- “गुड मॉर्निंग मैडमजी…”

करीना- “थैंक यू फॉर हेल्प रामू, मुझे तो लगा कि आज तुम नहीं आओगे काम के लिये…”

रामू- “कोई बात नहीं मैडमजी…”

करीना- “अब तुम्हें ठीक से दिख रहा है ना?”

रामू करीना की तरफ देख स्माइल देते हुये बोलता है- “हाँ मैडमजी अब सब दिख रहा है…”

रामू को ऐसे अपनी तरफ स्माइल करते देखकर करीना जरा शरमाकर नजर नीचे झुकाती है, क्योंकि करीना कल रात रामू के सामने तौलिया में और फिर कपड़े बदलने के लिए नंगी भी हुई थी। रामू की आँखें देखकर करीना को रामू के साथ वो रात की ट्रेजडी याद दिला रहे थे, लेकिन करीना खुद को समझाती है कि उस रात में रामू अँधा था, और करीना शरमाते हुये डाइनिंग टेबल के नज़दीक जाकर कुसी पर बैठ जाती है।

रामू को पता था कि करीना डाइटिंग करती है, तो उसके हिसाब से, वो नाश्ता करीना के सामने डिश में परोस देता है। रामू के ए्सप्रेशन्स ऐसे थे जैसे कल रात कुछ हुआ ही ना हो।

उधर करीना को रामू से नजर मिलाने में शरम आ रही थी, जैसे तैसे वो अपना नाश्ता खाना शुरू करती है।

 
सुबह 6:10 बजे

गोगा भी घर का सारा काम करके रेलवे स्टेशन जाने के लिये बस स्टैंड पर रेलवे स्टेशन को जाने वाली बस का इंतजार कर रहा था। वो जब चोरी की गई घड़ी में टाइम देखता है, तो मॉर्निंग के 6:13 बज चुके थे। गोगा मन ही मन- “अरे माँ की आँख, ये बस को इतना टाइम क्यों लग रहा है? अगर और देर हो गई तो मेरा सारा प्लान चौपट हो जाएगा, इससे अच्छा है कि थोड़ा सा खर्च करके आटो से ही जाऊँ रेलवे स्टेशन…” और गोगा हाइवे से गुजर रहे आटो को रोकता है।

आटो वाला- “किधर जाना है?”

गोगा- “मुंबई रेलवे स्टेशन…”

आटो वाला- “₹150 हो जाएँगे, चलेगा?”

गोगा- “साले तेरा दिन है… चलेगा…” और गोगा आटो में बैठ जाता है, आटो रेलवे स्टेशन की ओर बढ़ता है।

गोगा आटो में बैठकर मन ही मन- “मैं तो आज उत्तेजित हूँ पूरा, आज तो बोलीवुड की सबसे बड़ी रंडी के साथ सफ़र जो करने वाला हूँ। एक बार अगर करीना के साथ ट्रेन में चढ़ जाऊँ तो उस रंडी को कोई बचा नहीं सकता मेरे शैतानी प्लान से। उससे पहले उस रंडी को अभी फ़ोन करके पूछता हूँ कि वो अभी घर पर है या, रेलवे स्टेशन पहुँच गई, नहीं तो वो हरामजादी अकेली ही चली जाएगी, और मैं हाथ मसलता रह जाऊँगा…” और गोगा करीना के दिए हुये नम्बर को डायल करता है, और थोड़ी ही देर में रिंग बजनी शुरू होती है, ट्रिंग ट्रिंग।

करीना- “हेलो, कौन?”

गोगा- “क्या साली भूल गई? मैं गोगा, और इतना टाइम क्यों लगाया फ़ोन उठाने में?”

करीना- “मैं अभी नाश्ता कर रही हूँ, घर पर ही हूँ…”

गोगा मन ही मन- “साली कमीनी, अब तक घर पर बैठी आराम से नाश्ता कर रही है, ये हरामजादी आज की ट्रेन मिस करवाएगी, और फिर ये मौका आएगा या नहीं, ये तो मुझे पता नहीं। मुझे अभी के अभी इस रंडी को अपनी बीमारी की आड़ में इस फ़ोन से ही चोदूँगा गालियाँ देकर…”

गोगा- “हरामजादी, बाजारू रंडी, तू आने वाली है ना रेलवे स्टेशन? 7:00 बजे की ट्रेन है…”

करीना गोगा की बात सन्न, मन ही मन- “लगता है मैंने गोगा को गुस्सा दिला दिया, इस कारण वो मुझे ऐसी गंदी-गंदी गालियाँ दे रहा है, छीछी मुझे भूलना नहीं चाहिए कि गोगा एक मानसिक रूप से बीमार आदमी है, जो गुस्से को कंट्रोल करने के लिये ऐसी गालियाँ देता है, और गुस्सा ना कंट्रोल हो तो आत्महत्या भी कर सकता है। तो इस मानसिक रूप से कमजोर आदमी की किसी बात का मुझे बुरा नहीं मानना चाहिए, मुझे गोगा से प्यार से बात करनी चाहिए, जिससे वो शांत हो जाए, और कोई गलत कदम ना उठाए…”

करीना नाश्ता खतम करके डाइनिंग टेबल की कुसी से उठकर खड़ी होकर हाथ धोने वासबेमसन की तरफ बढ़ते हुये बोलती है- “सारी गोगा, मैं आ जाउन्गी 6:30 बजे, अभी तो 6:13 ही तो बजे हैं, 4-5 मिनट आगे-पीछे हो जाएँगे लेकिन में 7:00 बजने से पहले, रेलवे स्टेशन पहुँच जाउन्गी, तो तुम प्लीज़्ज़ि… गुस्सा मत हो…”

रामू जरा अचंभे से डाइनिंग टेबल सॉफ करते हुये करीना की बातें सुन रहा था। रामू मन ही मन- “मेडमजी, ये किससे इतनी प्यार से बात कर रही हैं? ये गोगा कौन है, जिससे मेडमजी सारी बोल रही हैं? कोई बड़ा आदमी ही होगा जिससे करीना जैसी बोलीवुड स्टार सारी बोल रही है…”

गोगा- “हाँ ठीक है साली, अगर तू मुंबई रेलवे स्टेशन 7:00 बजने के पहले नहीं आई तो पता नहीं मैं क्या कर बैठूँगा, क्योंकि तुमने कल मेरे साथ सफ़र करने का प्रामिस किया था, याद है ना?”

करीना- “हाँ गोगा, मुझे याद है वो प्रामिस, मैं 7:00 बजने के पहले आ जाउन्गी, अब तुम फ़ोन रखो, नहीं तो और देर हो जायेगी…”

गोगा- “ठीक है, आ जा जल्दी, मैं कुछ मिनट में पहूच जाऊँगा रेलवे स्टेशन…”

करीना- “बाइ, रखती हूँ फ़ोन…”

गोगा- “हाँ, बाइ…”

करीना फ़ोन कट करके किचेन में हाथ धोने चली जाती हैं।

***** *****

और अब आटो वाला भी गोगा को लेकर यहाँ मुंबई रेलवे स्टेशन पहुँच चुका था। गोगा आटो से उतरकर आटो वाले को ₹150 भाड़ा दे देता है, और गोगा रेलवे स्टेशन की तरफ चलते बढ़ ही रहा था कि तभी पीछे से आटो वाला बोलता है- “क्या साहबजी, किस रंडी पर इतना गुस्सा उतार रहे थे फ़ोन पर? जरा हमें भी बताइए…”

गोगा आटो वाले की बात सुनकर पीछे मुड़कर बोलता है- “अरे वो हलकट जवानी वाली आइटम है, उससे ही बोल रहा था…”

आटो वाला- “क्या साहब, अच्छा मजाक कर लेते हो…” और आटो वाला वहाँ से चला जाता हैं।

गोगा रेलवे स्टेशन की ओर बढ़ते हुये मन ही मन- “मेरा तो लण्ड खड़ा हो जाता है जब मैं करीना जैसी मस्त एक्ट्रेस को, रंडी कहकर बुलाता हूँ। वाहह, क्या जादू किया है मैंने? अब सिर्फ़ एक ही काम बाकी है कि यहाँ से करीना को अपने गाँव गोंडा ले जाना, और वहाँ अपना नाचने का धन्धा फिर से खोलूँगा, और उस हरामजादे ब्लू-फिल्म थियेटर वाले से बिला भी लूँगा, मादरचोद…”

ऐसा सोचते-सोचते गोगा रेलवे स्टेशन के अंदर चला जाता है, और सीधा मुंबई से उतरप्रदेश की टिकेट निकालने, टिकेट काउन्टर पे चला जाता है, और गोगा खखड़की से अंदर झाींकते हुये बोलता है- “मुंबई से उतरप्रदेश की एक टिकेट देना…”

टिकेट काउन्टर औरत- “आपको जाना कहाँ है उतरप्रदेश में, ये बोलिये पहले…”

गोगा मन ही मन- “ये तो उस रंडी से पूछना भूल ही गया कि, उसने किस सिटी में जाने के लिये टिकेट निकाला है, साली…” और गोगा उस काउन्टर पे कुछ बोले बिना ही वहाँ से चला जाता है।

और सीधा टेलीफ़ोनबूथ में फ़ोन लगाने जाता है, लेकिन वो टेलीफ़ोन अस्थाई रूप से बंद था, उसका मोबाइल बैलेन्स भी खतम हो चुका था, जिससे वो करीना को फ़ोन करके पता कर सके कि वो उतरप्रदेश के किस सिटी की टेकेट निकाली हैं। करीना से कॉन्टेक्ट करने की कोई राह ना देखकर गोगा ट्रेन प्लेटफार्म पर बेंच पर बैठकर करीना का इंतजार करता है।

सबेरे 6:25 बजे सोमवार

करीना ने अपना सामान तो कल ही पैक कर लिया था, जिसमें वो ड्रेसेस थी जिसमें करीना सफ़रोंन में आइटम डान्स करने वाली थी, और कुछ एक्स्ट्रा ड्रेसेस भी करीना ने अपने बैग में पैक किए थे जो वो खाली वक़्त में पहन सके।

करीना अपना हाथ धो कर, तौलिया से पोंछते-पोंछते रामू को बोलती है- “रामू, जरा रूम में जाकर मेरा पर्स, और, रेड कलरे का बैग ले आना जरा…”

रामू ये सुनते ही दौड़ते-दौड़ते करीना के रूम की तरफ जाता है।

और साड़ी में हाट लग रही करीना अपने घर का मुख्य दरवाजा खोल बाहर चली जाती है तो उसके सामने सोहेल को खड़ा देखकर वो बोलती है- “तुम अब यहाँ क्या कर रहे हो सोहेल? मैं अभी जा रही हूँ, 7:00 बजे की ट्रेन है…”

सोहेल- “पता है, इसलिये तो आया हूँ मेडमजी। मैं और कुछ 3 लोग आपकी प्रोटेक्शन के लिये आपके साथ चलेंगे…”

करीना गुस्सा होकर बोलती है- “तुम्हें मैंने कल ही बोला था ना, कि अगर मैं बाडीगार्ड्स के साथ ट्रेन से गई तो वहाँ पब्लिक को पता चल सकता है कि मैं बोलीवुड स्टार हूँ। इसलिए मैं ट्रेन से नकाब पहनकर जाने वाली हूँ, जिससे पब्लिक मुझे कामन औरत समझ बैठेगी…”

सोहेल- “लेकिन मैम…”

करीना सोहेल की बात काटकर बोलती है- “लेकिन वेकिन कुछ नहीं, मैंने बोला ना कि मैं अकेली जाउन्गी, तो जाउन्गी। लेकिन अगर तुमने मुझे रोकने की या सैफ को कुछ भी इस सफ़र के बारे में बोला, तो मैं तुम्हें नौकरी से निकाल दूँगी समझे?”

तभी रामू बैग और पर्स लेकर करीना के पास आ जाता है।

करीना रामू के हाथ से पर्स लेकर बोलती है- “रामू, तुम वो बैग सामने वाली कार के फ्रंट सीट पर रखो…”

वैसे ही रामू बैग कार के फ्रंट सीट पर रख देता है।

सोहेल करीना का गुस्सा देखकर- “अगर आपको जाना ही है ऐसे तो ठीक है, लेकिन आप ख्याल रखिए अपना, और कोई भी मुशीबत आए तो सीधा फ़ोन कर दीजिएगा मुझे…”

सोहेल मन ही मन- “कैसा समझाऊँ आपको मेडमजी, आप जैसी खूबसूरत एक्ट्रेस के लिये ऐसे कहीं से भी अकेले जाना कितना अनसेफ है आपके लिये…”

करीना- “कोई मुश्किल नहीं आएगी, तुम फिकर मत करो, मैं मक्खन की तरह उतरप्रदेश चली जाउन्गी, ठीक है?”

सोहेल- “ठीक है, टेक केयर मेडमजी…”

और करीना कार की तरफ बढ़कर ड्राइविंग सीट पर बैठ जाती है। फिर कार होम पार्किंग से निकालकर खुले गेट से बाहर रास्ते पर कार आती हैं।

रामू और सोहेल करीना के बंगलो के मुख्य दरवाजे से करीना को ऐसे अकेले जाते हुये देखकर बोलते हैं।

रामू- “कितनी जिद्दी हैं मेडमजी कि अकेली ही चली गईं…”

सोहेल- “पता नहीं इस जिद् से मेडमजी को क्या मिलेगा?”

करीना अपनी प्राइवेट ब्लैक मर्सिडीज की स्पीड बढ़ाती है और जी॰पी॰एस॰ को देखते-देखते मुंबई रेलवे स्टेशन की तरफ बढ़ती है। करीना कार चलाते-चलाते, बाहर कुछ गरीब लोगों को देखकर मन ही मन- “बेचारे, मैं यहाँ एसी में हूँ… और वो वहाँ रास्ते पर झाड़ू मारकर अपना पेट भर रहे हैं, कितने दुख की बात है…”

करीना को पत्ता नहीं है कि वक़्त आने पर यही गरीब लोग उसकी गाण्ड भी अपने तने हुये लण्ड से बजा सकते हैं, लेकिन करीना तो ठहरी भोली-भाली, इस्तेमाल क्या पता होगा एक्टिंग और नाचने के सिवा।

कुछ ही देर में करीना रेलवे स्टेशन पहुँच जाती है, कार रेलवे स्टेशन के पार्किंग में पार्क करके वो पर्स से अपना मेचिंग रेड थोड़ा सा पारदर्शी और स्टाइलिश नकाब निकालकर, उससे करीना अपना खूबसूरत चेहरा इस बेदर्द दुनियाँ से ढक लेती हैं। अपने एक हाथ में पर्स और दूसरे हाथ में बैग लेकर नर्वस करीना कार का दरवाजा खोलकर बाहर आ जाती हैं। फिर कार लाक करके रेलवे स्टेशन की ओर इधर-उधर नजर घुमाती है, क्योंकि वो पहली बार ऐसे अकेले, वो भी रेलवे स्टेशन जैसे स्थान पर आई थी।

 
सुबह का वक़्त था, इस कारण वहाँ रेलवे स्टेशन के रास्ते के नज़दीक की फुटपाथ पर कुछ भिखारी टाइप लोग, कोई नंगे, कोई चड्ढी में सो रहे थे, उस तरफ जब करीना की नजर जाती है और इतने सारे बदसूरत लोगों को ऐसे नंगे, फटे कपड़े में सोते देख करीना को घिनौना लगता हैं। वो जैसे तैसे अपनी 36” साइज की गाण्ड मटकाते हुये रेलवे स्टेशन की ओर बढ़ती है।

सुबह 6:40 बजे सोमवार

करीना जब रास्ते से रेलवे स्टेशन की ओर बढ़ रही थी, तब उसके लगाए हुये परफ्यूम की खुकबू और पैर में पहनी चाँदी की पायल से आती छन्न-छन्न आवाज से रास्ते के फुटपाथ पर सोए हुये भिखारियों में से देबू की नींद खुल जाती है, देबू एक 59 साल का बूढ़ा है जो दिन भार रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म पर केले बेचता है, उसके पास औरतों से बात करने की तमीज ही नहीं है, पिछले साल ही वो एक बूढ़ी 50 साल की औरत पर रेप अटेम्पट करने के लिये 3 महीने के लिए जले में भी गया था।

और उस बूढ़े के शागिर्द जो उसके दोनों तरफ सोए हुये थे, उनमें से एक जो बालसुधार गृह से पिछले महीने ही भागकर यहाँ आया था, उसका नाम है मंगेश, जिसकी उमर है 12 साल, और दूसरा जिसकी उमर 40 साल है, जो लोकल ट्रेल में चढ़कर लोगों की पाकेट मारता है, और कीमती चीजें भी चुराता है, उसका नाम करीम है जो देबू का दूर का रिश्तेदार है।

करीना आगे बढ़ चुकी थी और पीछे देबू फुटपाथ पर उठकर बैठ जाता है और करीना को देखकर बोलता है- “ऐसी मस्त हरे भरे बदन वाली खुशबूदार बाम्ब तो मैंने पहली बार देखीं है, क्या मस्त गाण्ड मटका रही है, मजा आई गवा वाहह…”

बेबो तो बड़े अचंभे से रेलवे स्टेशन की बिल्डिंग को देखकर, बिल्डिंग के बड़े दरवाजे से वो अंदर जाती है। एक बोलीवुड एक्ट्रेस पहली बार अकेली किसी ऐसे स्थान पर आई है, जहाँ लोगों की भीड़ हर रोज होती है। करीना बहुत आड्वेंचरस फील कर रही थी। किसी छोटी बच्ची की तरह करीना रेलवे ट्रैक से आ और जा रही ट्रेन्स को देखकर उत्तेजित हो रही थी। एक आज़ाद पक्षी की तरह करीना उस रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म पर जाने के लिए आगे बढ़ती है। लेकिन उस भोली करीना को पता नहीं है कि इस जगह, गोगा जैसे हजारों भेड़िए हैं, जो उसकी मासूमियत का गलत फ़ायदा उठा सकते हैं।

करीना बैग और पर्स पकड़े रेलवे स्टेशन प्लेटफार्म पर पहुँचकर गोगा को देखने इधर-उधर देखने लगती है, कि तभी उसकी नजर बेंच पर बैठे गोगा पर जाती है, वो चलते-चलते गोगा की तरफ, एक बोलीवुड एक्ट्रेस अकेली, एक अंधेरे की तरफ अंजाने में बढ़ रही थी, और उसके आसपास कुछ लोग उसके बदन के हर हिस्से को देखकर आहें भर रहे अपने भाजी, फलों के, एट्सेटरा ठेलों को, प्लेटफार्म पर सजा रहे थे जो उनका रोज का ही काम है। करीना के गाल शरम से लाल थे, क्योंकि ऐरे-गैरे लोगों की नजर करीना को घूर रही थी, लेकिन करीना उन सबको नज़रअंदाज करके गोगा की तरफ आगे बढ़ी जाती है।

गोगा बेंच पर बैठा मन ही मन- “कब आएगी रांड़, अब तो 6:45 भी बज चुके है, और मैंने किसी ट्रेन की टिकेट भी नहीं निकाली…” कि तभी पीछे से आती पायल की खनक, जो धीरे-धीरे नज़दीक आ रही थी, उस तरफ जाती है, और वो पीछे मुड़कर देखता है तो सामने, एक खूबसूरत गोरे बदन वाली, और चलते वक़्त उसकी बड़ी-बड़ी 36डी की चुचियाँ ऊपर-नीचे उछल रही थी, आ रही थी।

वो करीना थी लेकिन नकाब में गोगा पहचान ना सका। जब करीना गोगा के सामने आ जाती है तब गोगा को समझ में आता है कि ये हाट औरत और कोई नहीं करीना कपूर खान है, और गोगा का खुला मुँह बंद हो जाता है, और वो करीना को नज़दीक पाकर जरा हड़बड़ाते हुये बोलता है- “एयाया, आ गाई मेडमजी, कितना टाइम लगा दिया, मैं तो बोर ही हो गया था, अकेले बैठकर यहाँ…”

करीना- “सारी गोगा, मैं भी क्या करती, कल रात मुझ पर मुशीबतों का पहाड़ जो गिरा था…”

गोगा- “कैसी मुशीबत?”

करीना- “वो जाने दो, अब ट्रेन कब आएगी?”

गोगा- “हाँ, मुझे भी वही पूछना था कि तूने उतरप्रदेश की कौन सी सिटी के लिये ट्रेन बुक की है?”

करीना गोगा के पास बेंच पर बैठते हुये बोलती है- “बोला था ना उतरप्रदेश की टिकेट है…”

गोगा- “जरा मोबाइल दे तेरा, तू तो बेवकूफ़ है साली, गँवार…”

बेंच के सामने ही एक प्लेटफार्म क्लीनर आदमी प्लेटफार्म की सफाई कर रहा था, और करीना की मांसल जांघों को साड़ी में देखकर लार टपका रहा था, तभी जब गोगा करीना को गँवार और बेवकूफ़ बोलता है तब वो करीना की तरफ देखकर हँसने लगता है।

और जब करीना उस आदमी को देखती है तब वो अपने हँसने पर कंट्रोल करके अपना काम करने में लग जाता है।

करीना- “देखो गोगा, तुम ऐसी भाषा इस्तेमाल मत करो यहाँ मेरे ऊपर, लोग हँस रहे है मेरे ऊपर…”

गोगा- “तुम हो ही इसी लायक, तेरा मोबाइल दे मुझे, चेक करने दे कि कौन सी सिटी की ट्रेन बुक किया है…”

करीना को अब जरा-जरा समझ में आता है कि गोगा के कहने का मतलब क्या है? और वो झट से बोलती है- “मोबाइल की कोई जरूरत नहीं ईडियट, सिरोंन किस सिटी में है, पता है ना वो सिटी…”

गोगा- “हाँ तो पटना में ना… तो सीधा-सीधा बोलना था ना फिर, फोकट में खाली टाइम वेस्ट किया मेरा, चल टिकेट काउन्टर पे टिकेट लेने…”

 
करीना बेंच से उठकर गोगा के साथ टिकेट काउन्टर पे जाते-जाते मन ही मन बोलती है- “थैंक गोड कि मैंने नक़ाब पहना है, कितनी थर्ड क्लास भाषा इस्तेमाल करता है गोगा? छीछि, मैं तो ऐसे लोगों को अपनी जूती भी ना बनाऊँ। पर वो भी क्या करे, वो भी तो अपनी बीमारी की मजबूरी में ही मुझे ये सब गुस्से में कह रहा है। मैंने ही तो उससे बोला था कि ‘मैं उसकी बीमारी को समझती हूँ’, कुछ घंटे ही तो मैं उसके साथ रहूंगी, उसके बाद मैं अपने रास्ते और वो अपने रास्ते चले जाएँगे, इसलिये मुझे उसकी बातों का बुरा नहीं मानना चाहिए…”

गोगा करीना को लेकर टिकेट काउन्टर पर पहुँच जाता है, और काउन्टर खखड़की को खटखट करता है। टिकेट काउन्टर औरत नाक की आवाज सुनकर गोगा की तरफ देखकर बोलती है- “हाँ सर, मैं आपकी क्या मदद कर सकती हूँ?”

गोगा- “ये जो मेडमजी हैं उन्हें टिकेट लेना है, उन्होंने आनलाइन टिकेट खरीदा है…”

टिकेट काउन्टर औरत करीना से ई-मेल अड्रेस लेकर आनलाइन बुकिंग चेक करके करीना को टिकेट देती है, और बोलती है- “आपका नाम तो मेरी पसंदीदा एक्ट्रेस के ऊपर है, और फोटो में भी उन्हीं की तरह दिखती हैं आप…”

करीना काउन्टर औरत की बात को काटते हुये टिकेट लेते हुये बोलती है- “तुम भी ना… अच्छा मजाक कर लेती हो…” और करीना उस टिकेट काउन्टर औरत को देखकर चुप रहने का इशारा करती है, और हड़बड़ाते हुये उस टिकेट काउन्टर से टिकेट लेकर बेंच पर बैठने चली जाती है।

गोगा टिकेट काउन्टर औरत से पूछता है- “मुझे भी पटना का एक ट्रेन टिकेट चाहिए…”

टिकेट काउन्टर औरत- “सर, पटना की ट्रेन पूरी तरह से बुक है, कोई जगह नहीं बची…”

गोगा ये बात सुनकर पूरा हिल जाता है, और बोलता है- “क्या? एक भी नहीं है?”

टिकेट काउन्टर औरत- “नहीं है, सारी सर, लेकिन आप कल आइए…”

गोगा मन ही मन- “ये पनौती गलत टाइम पर लगी है। करीना के साथ जाकर ही मैं अपने प्लान को अंजाम दे सकता हूँ। हे भगवान् कोई रास्ता दिखाओ…”

तभी गोगा के दिमाग में एक प्लान आता है। उसे शाहरुख खान जब ‘0’ था तो उसने डब्ल्यू॰टी॰ से सफ़र किया था, तो उसे लगता है कि ये इतिहास वो दोहरा सकता है। गोगा अपना मायूस काला कलूटा चेहरा नीचे झुकाए, करीना जहाँ बैठी थी वहाँ जाकर करीना के बाजू में बेंच पर बैठ जाता है।

गोगा को ऐसे मायूस बैठे देखकर करीना बोलती है- “क्या हुआ? इतना मायूस क्यों हो तुम?”

गोगा- “पटना की एक भी टिकेट नहीं है- “

करीना- “ओह नो… अब क्या मुझे अकेले ही जाना होगा?”

गोगा करीना की तरफ देखकर बोलता है- “नहीं, टिकेट नहीं मिला तो क्या हुआ, लेकिन मैं तेरे साथ सफ़र करूँगा वो भी डब्ल्यू॰टी॰…”

करीना- “डब्ल्यू॰टी॰ मतलब?”

गोगा- “विदाउट टिकेट…”

करीना- “ये लीगल है?”

गोगा- “नहीं, लेकिन तुम ज़्यादा फिकर मत करो, मैं संभाल लूँगा…”

करीना- “अगर पुलिस ने पकड़ लिया तो?”

गोगा मन ही मन- “पुलिस का ही तो डर है, अगर पोमलस ने पकड़ लिया, तो डब्ल्यू॰टी॰ से सफ़र के जुर्म में जेल चला जाऊँगा, और ये रंडी मेरे हाथ से छूट जाएगी, लेकिन रिस्क तो उठाना ही होगा…”

गोगा- “तू क्यों इतना टेंशन लेती है, मैं सभाल लूँगा…”

अब 7:00 भी बज चुके थे और पटना जाने वाली ट्रेन अभी तक आई नहीं थी, गोगा तो फुल टेंशन में बेंच पर बैठा, डब्ल्यू॰टी॰ से सफ़र की प्लानिंग कर रहा था।

करीना बेंच पर बैठे-बैठे बोर हो जाती है, और गोगा को बोलती है- “मैं जरा सफ़र के लिये पानी की बोतल खरीदकर और टिकेट काउन्टर से पटना की ट्रेन की पूछताछ करके आई, मेरे पर्स और बैग के ऊपर नजर रखना, यही रख रही हूँ बेंच पर…”

गोगा- “हाँ, जाओ, लेकिन जल्दी वापपस आना, मैं जरा यहीं बैकर ट्रेन का इंतजार करता हूँ…”

करीना- “हाँ, ठीक है…” और करीना पहले बेंच से उठकर अपनी गाण्ड को मटकाते हुये चलते-चलते टिकेट काउन्टर पे जाती है, और टिकेट काउन्टर पे बोलती है- “हेलो…”

टिकेट काउन्टर औरत- “मेम आपको मैंने पहले ही पहचान लिया था आपका आई॰डी देखकर कि आप करीना हैं, मुझे पता था कि आप इस फ़ैन को मिलने आएँगी…”

करीना- “ओह्ह… जरा धीरे बोलो, यहाँ कोई मुझे पहचानता नहीं है, इस नकाब की वजह से…”

टिकेट काउन्टर औरत- “लेकिन आप ऐसे छुपते हुये, वो भी ट्रेन से क्यों सफ़र कर रही हैं?”

करीना- “वो लंबी कहानी है, अभी तो तुम्हें ये बात किसी को नहीं बतानी है कि मैं यहाँ ऐसे ट्रेन से सफ़र करने वाली हूँ। अगर किसी को भी पता चला कि मैं करीना यहाँ अकेली ट्रेन से सफ़र कर रही हूँ तो तुम्हें अंदाज़ा होगा ही कि क्या हो सकता है? क्योंकि तुम एक औरत हो, और एक औरत ही औरत का दर्द समझ सकती है…”

टिकेट काउन्टर औरत- “मैं समझ सकती हूँ मेडमजी, लेकिन मुझे आपका आटोग्राफ चाहिए…” और काउन्टर औरत करीना को पेन और कागज देती है।

करीना- “तुम भी ना…” और करीना कागज पर अपना साइन करती है, और टिकेट काउन्टर औरत को साइन किया हुआ कागज देते हुये बोलती है- “बाइ दा वे, तुम्हारा नाम क्या है?”

टिकेट काउन्टर औरत करीना का साइन किया हुआ कागज लेते हुये बोलती है- “थैंक यू मेम, लेकिन आपके साथ वो अधेड़ काला बूढ़ा आदमी कौन था, जो आपके साथ था यहाँ?”

करीना- “वो ना… वो मेरा गाइड है, चलो बहुत सवाल पूछ लिये तुमने, मैं अब जाती हूँ… और ये सीक्रेट किसी को ना बताना…” और करीना वहाँ से जाती है। करीना ने कागज देते वक़्त 5000 रूपये भी उस काउन्टर औरत को अपना मुँह बंद रखने के लिये दिए थे।

……………………………………..

सुबह के 7:04 बज चुके हैं और सूरज के प्रकाश में करीना का गोरा बदन रेड साड़ी और स्लीवलेश ब्लाउज में बेहद ही आकर्षक लग रहा था। करीना जैसे-जैसे अपनी गाण्ड मटकाते प्लेटफार्म पे चलती आगे बढ़ रही थी, वैसे-वैसे जो सूट-बूट में लोग थे वो भी और जो फटे पुराने कपड़े पहने वहाँ भीख माँग रहे थे और कुछ जो ठेले पर कुछ ना कुछ बेच रहे थे वो सब लोग, करीना के गिराए गोरे जिस्म को देखकर लार टपका रहे थे। करीना की साड़ी का पल्लू जैसे-तैसे करीना के 36” साइज के दोनों दूध के टेंकर्स को ना के बराबर कवर कर रहा था, और भोली करीना अपनी 36” साइज की बड़ी-बड़ी चुचियों का अंजाने में सामूहिक प्रदर्शन कर रही थी। चलते वक्त करीना की चुचियाँ ऊपर-नीचे उछल रही थीं, और ऐसा कामुक नजरा देखकर मुंबई रेलवे स्टेशन करीना की वजह से गरम हो गया था।

करीना को भी अब ऐसे फ्रीयली, वो भी रेलवे स्टेशन जैसे स्थान पर चलना अच्छा लगता है, क्योंकि करीना के फैंस जब भी उसे देखते कहीं भी, तो करीना भीड़ के कारण कभी कार में क़ैद हो जाती, तो कभी किसी के रूम में, तो कभी होटेल में। लेकिन आज करीना, खुली हवा में साँस ले रही थी, प्लेटफार्म के दूसरे छोर पर करीना को बड़ी सी दुकान दिखती है, तो वो उस दुकान की ओर पानी की बोतल लेने चल पड़ती हैं।

 
तभी एक प्लेटफार्म के बीचोबीच कुछ फलवाले उसे पुकारते हैं- “ओह्ह… मेडमजी यहाँ, यहाँ आइए, सस्ते फल हैं…”

करीना उस आवाज की ओर सामने देखती है तो कुछ दो फलवाले प्लेटफार्म के बीचोबीच, और करीना से 100 फीट दूर थे। करीना सोचती है- “मुझे सफ़र के लिये फल भी लेने चाहिए, इतना बुला रहे हैं ये फलवाले तो यहीं से फल ले लेती हूँ, अगर फल ताजे और अच्छे हों तो?”

फलवालों को तो सिर्फ़ करीना के गोरे हरे-भरे बदन का नज़दीक से दर्शन करना था। दोनों फलवालों के, ऐसी मस्त जवानी देखकर होश उड़े हुये थे, और जैसे-जैसे करीना अपनी मांसल मस्त जांघों को और 36डी ब्रा में क़ैद बड़ी-बड़ी चुचियों को चलते वक़्त ऊपर-नीचे उछलते और हिलते और अपनी ओर बढ़ते देखकर दोनों फलवालों के लण्ड खड़े थे। सुबह का वक़्त था तो ज़्यादा भीड़ नहीं थी। करीना के जिस्म का दर्शन लेने के लिये, वो दोनों फलवालों कि उमर 54 साल के आसपास ही थी, दोनों के दोनों बेवड़े, रात होते ही सब एक साथ बैठकर किसी भी खाली जगह पे दारू पीते, तो कभी रंडियों को पैसे देकार चुफ़ाई करते।

फलवालों का बायोडाटा

1॰ केले बेचने वाला, जिसका नाम कालू है, उसकी उमर 55 साल, रंग सावला, दिखने में बदसूरत, उँचाई 5’2”, मोटा पेट, और खाशियत, खूबसूरत औरतों को देखकर उसका 10 इंच बड़ा लण्ड हर वक्त खड़ा रहता है, वो इस वक़्त सफेद फटी पुरानी धोती में हैं।

2॰ संतरे और सेब बेचने वाला काजी हैं, उसकी उमर 53 साल, रंग काला, दिखने में बदसूरत, उँचाई 5’7”, तगड़ा शरीर, और खाशियत, जब भी वो रंडी बाजार में जाता तो सब रंडियाँ डरकर चुप हो जाती हैं, क्योंकि उसके लण्ड की साइज 13” इंच है, और वो जब किसी बाजारू रंडी को चोदता तो उस रंडी के पहले से ही फटे छेदों की वाट लगा डालता अपने लण्ड की मार से।

करीना का गदराया जिस्म अपने नज़दीक आते देखकर दोनों फलवालों का मुँह खुला का खुला था, कि तभी कालू करीना को देखकर बोलता है- “अबे काजी, क्या माल है देख, जी तो कर रहा है साली का रेप ही कर दूँ…”

काजी भी करीना की तरफ देखकर बोलता है- “अगर यहाँ कोई नहीं होता तो साली को नंगा करके बलात्कर ही कर डालता यहीं…”

और उन दोनों फलवालों केो ऐसे अपनी तरफ देखता देखकर करीना जरा सी शरमा जाती है और मन ही मन बोलती है- “ओह्ह… कैसे घूर रहे हैं मुझे दोनों, लगता है मैं इस साड़ी में बहुत खूबसूरत लग रही हूँ, इसलिये ये दोनों गरीब मुझे घूर रहे हैं…” करीना उन फलवालों का ऐसे उसके बदन को घूरना लाइटली लेती है, और उसकी खूबसूरती के लिए एक कमेंट मानती है।

कुछ चलने के बाद करीना उन दोनों के ठेलों के पास पहुँच जाती है, और उन दोनों की तरफ देखकर बोलती है- “भैया, ये सब फल ताजे हैं क्या?”

ये सुनते ही दोनों फलवाले जो करीना के जिस्म को देखकर अपनी हवस भरी दुनियाँ में खोए थे, वो जाग जाते हैं, लेकिन करीना जैसी भरे हुये जिस्म की औरत को अपने नज़दीक देखकर दोनों के लण्ड पूरे खड़े थे, वो दोनों प्लेटफार्म पर नीचे बैठे अपनी फलों की टोकरियों को सभाले थे। काजी की आँखें करीना के उन्नत बड़े-बड़े दोनों दूध के टेंकर्स पे टिकी थीं और वो करीना को बोलता है- “मेडमजी, आपके संतरे बहुत ताजे हैं…”

काजी को ऐसे अपनी चुचियों को देखकर इस तरह का गंदा कमेंट मारते देखकर करीना गुस्से में बोलती है- “बेशर्म, क्या बोल रहे हो तुम?”

काजी करीना की गुस्से भरी आवाज सुनकर होश में आता है और अपनी नजर करीना की चुचियों से हटाकर ऊपर करीना के चेहरे पर करते हुये बोलता है- “मेडमजी मैंने बोला कि ये संतरे ताजे हैं, जो मैं बेच रहा हूँ यहाँ…”

करीना मन ही मन- “लगता है मैंने ही गलत सुना होगा…”

करीना- “हाँ, ठीक है…” और कालू की तरफ देखकर बोलती है- “ये केले कितने में दोगे?”

और कालू भी एक हाई-फ़ाई खूबसूरत औरत को अपने सामने खड़ी देखकर उसकी मांसल जांघों को घूरते हुये बोलता है- “मेडमजी, ये केले ₹40 का आधा दर्जन दूँगा…”

करीना- “क्या बेवकूफ़ बना रहे हो मुझे, मुझे पता है फलों के रेट कितने चल रहे हैं समझे, आधा दर्जन 20 रूपये में देना है तो दो नहीं तो मैं केले नहीं लूँगी यहाँ से…” कहकर करीना यहाँ अपने आपको एक स्मार्ट कामन औरत दिखाना चाहती है, जो यहाँ फल लेने आई है।

उन दोनों के यहाँ जब भी कोई औरत फल लेने आती, तो वो दोनों उस औरत को किसी ना किसी तरह सिडयूस और अब्यूस कर ही लेते। ये तो उन दोनों की खाशियत थी, तो इससे करीना जो यहाँ नकाब पहनकर पहली बार आई है तो वो कैसे इन दोनों से बचती।

कालू काजी की ओर देखता है और शैतानी स्माइल देता है फिर करीना की ओर देखकर बोलता है- “मेडमजी, केले की साइज तो देखो जरा, ठीक से देखो, अगर आप इस केले को मुँह में लेंगी तो बार-बार यहीं से केले रोज लेंगी…”

करीना कालू की बात सुनकर जरा परेशान और गुस्सा हो जाती है- “क्या बके जा रहे हो तुम?”

कालू- “मतलब आप खाकर तो देखो केला…”

करीना- “नहीं, अभी नहीं, मेरी ट्रेन है…” और करीना किसी कामन औरत की तरह केलों को देखने नीचे झुक जाती है।

और उस झुकने के कारण करीना की बड़ी-बड़ी चुचियाँ जो ब्लाउज में क़ैद थी, वो नीचे ब्लाउज में किसी बड़े आम की तरह लटक रही थी, और इन लटकती चुचियों को देखकर काजी और कालू एक दूसरे की ओर देखते हैं, और स्माइल करते हैं।

उसी वक़्त देबू और उसके शागिर्द प्लेटफार्म पे धन्धा करने आ जाते हैं। देबू ने केले की टोकरी अपने सर पर ले रखी थी, और वो जिस जगह केले बेचता था प्लेटफार्म पे उसी जगह की ओर वो अपने शागिर्द के साथ चले जा रहा था। मतलब काजी और कालू के ठेले से 3-4 फीट बाजू में ही, लेकिन जब देबू उस जगह की ओर जा रहा था, तभी उसे वही औरत दिखती है, जिसकी खुकबू और पायल की खनक से उसकी आज नींद खुली थी। वो उस औरत को काजी और कालू के ठेले पर फल लेने के लिये ऐसे नीचे झुका हुआ देखकर बोलता है- “क्या गाण्ड है, क्या माल है…”

करीम देबू की बात सुनकर बोलता है- “क्या हुआ? कहाँ है माल?”

देबू- “अरे अंधे, सामने देख…”

करीम को भी वो नजारा दिखता है और वो बोलता है- “गाण्ड तो मस्त है देबू भाई, लेकिन हाथ में नहीं आएगी अपने…”

देबू- “हाथ नहीं आई तो क्या हुआ, छेड़ तो सकते हैं ना…”

और करीम और देबू मंगेश की ओर देखकर हँसने लगते है जिसकी उम्र 12 साल है, मंगेश जो की 12 साल का नाबालिग है, तो इस कारण करीम और देबू उसे कुछ भी ऐसा वैसा करने के लिये कहते। उसी वजह से दो महीने पहले एक औरत को छेड़ने के जुर्म में मंगेश को पुलिस ने बालसुधार गृह भी भेजा था, वो नाबालिग था, इस कारण उसपर कोई कानूनी दफाएँ ज़्यादा नहीं लगती, और इसका देबू बहुत अच्छी तरह इस्तेमाल करता है।

देबू हँसते हुये बोलता है- “चल मंगेश, अब तेरा काम यहाँ से चालू होता है, इस बार काम करने पर तुझे दो केले ज़्यादा मिलेंगे…”

मंगेश- “क्या काम है काका, जल्दी बताइए…”

करीम को कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि देबू के दिमाग में चल क्या रहा है?

देबू- “मंगेश, वो तुझे गाण्ड झुकाए औरत दिख रही है ना जो फल देख रही है?”

मंगेश- “हाँ, तो?”

देबू- “उसकी गाण्ड पर 4 थप्पड़ मार के भाग आगे, फिर मैं तुझे 4 केले दूँगा, बोल मंजूर है?”

मंगेश जो कि बहुत छोटा था, तो उसे ये घिनौना काम ठीक लगा और वो बोला- “इतना सा ही काम है ना? लो अभी जाता हूँ… लेकिन बाद में केले देना भूलना मत चाचा…”

देबू अपने एक हाथ से टोकरी और दूसरे हाथ से अपना लण्ड मसलते हुये बोलता है- “अरे हाँ, नहीं भूलूँगा जा, तू अभी जा जल्दी…”

मंगेश जरा सा डर तो रहा था लेकिन अपने पेट के खातिर नीचे झुकी हुई फल देख रही करीना की तरफ जाने लगता है।

करीम- “क्या भाई, बच्चे को कुछ भी करने को बोलते हो…”

देबू- “तू चुप बैठ, और आगे क्या होता है देख…”

 
कुछ ही देर में मंगेश करीना की मोटी गाण्ड के पीछे खड़ा हो जा ता हैं, और अपने एक हाथ को थूक लगाता है, और दोनों हाथ एक दूसरे से रगड़ते हुये गरम करता है, और वहाँ करीना नीचे झुके हुये केले संतरे देख रही थी, और मंगेश करीना की गाण्ड की मोटी गोरी फांकों पर ठप्पड़ मारना शुरू करता है। ये सब इतनी जल्दी हुआ कि करीना को कुछ रिएक्ट करने का मौका ही नहीं मिला, और मंगेश 1-2-3-4 करके 4 थप्पड़ करीना की मोटी गाण्ड पर लगा देता है।

गाण्ड पर थप्पड़ों की आवाज प्लेटफार्म पर गूँज उठती हैं। इस कारण शरम और दर्द से करीना की चीख निकलती है- “अह्ह, मेरी *****…” और वो सीधी खड़ी होकर पीछे मुड़ रही होती ही है कि मंगेश वहाँ से भाग जाता है।

करीना भागते लड़के को देखकर गुस्से और दर्द से चिल्लाई- “ओह्ह… कमीना, कोई उस लड़के को पकड़ो…”

उधर जिस मर्द ने भी ये थप्पड़ कांड देखा उसका लण्ड खड़ा हो गया था। देबू तो बड़ी गौर से देख रहा था, मंगेश जब थप्पड़ मार रहा था करीना की गाण्ड पर। तब करीना की गाण्ड की फांके थप्पड़ से हिल रही थीं, ये देखकर तो देबू के मुँह से आवाज निकलती है- “आअह्ह… मंगेश ने तो उसकी गाण्ड लाल कर दी, करीम भाई…” और जैसे कुछ हुआ ही ना हो वैसे, देबू करीम के साथ उसकी रोज की फल लगाने की जगह पर बढ़ जाता है।

करीना को चीखता और पीछे उस लड़के को करीना की गाण्ड पर थप्पड़ मारते हुये जब काजी और कल्लू देख रहे थे, तब उनकी आँखें फटी की फटी रह गई थीं।

करीना जब अपनी थप्पड़ से दर्द कर रही गाण्ड पीछ मुड़कर हाथ से सहला रही होती है तब उसकी नजर पीछे आ जा रहे लोगों पर जाती है, जो अंदर ही अंदर उसे गाण्ड सहलाता देखकर हँस रहे थे। करीना उन लोगों को गुस्से से पूछती है- “वो बेशर्म बच्चा तुम लोगों में से किसका था? सीधा-सीधा बताओ नहीं तो मैं पुलिस में जाउन्गी…”

तभी टोकरी सर पर लिये देबू करीना के पास से अपनी फल बेचने की जगह पर जा रहा होता है तब वो करीना की गुस्से भरी आवाज सुन लेता है, और वो अपनी जगह पर करीना के सामने से जाते हुये बोलता है- “मेडमजी, वो मेरे साथ ही रहता है, आप इतना गुस्सा क्यों हो रही है लोगों पर?”

करीना गुस्से से देबू की तरफ देखकर बोलती है- “आपको क्या दिखा नहीं कि उस लड़के ने अभी क्या किया? अंधे हैं क्या?”

देबू अपनी जगह पर पहुँच जाता है और काजी से 3 फीट दूर अपनी केले की टोकरी अपने सामने रखकर खुद बैठते हुये बोलता है- “हाँ… देखा ना… तो क्या हुआ, वो तो एक छोटे बच्चे की शरारत थी…”

करीम जो कि देबू के पास ही बैठा था, वो धीरे से देबू के कान में बोलता है- “मरवाओगे क्या चाचा, क्या बोले जा रहे हो?”

देबू करीम की बात को अनदेखा करके करीना को बोलता है- “मंगेश ने जो किया वो देखा मैंने…”

करीना गुस्से में- “तो उसे अभी के अभी यहाँ लाइए मेरे सामने, मुझे उससे बात करनी है…”

देबू- “क्या मेडमजी, आप इतनी सी बात को कितना खींच रही हैं…”

करीना- “क्या? ये तुम्हें छोटी बात लग रही है? निहायती घटिया इंसान हो…”

देबू- “आआऽऽ ज़्यादा बोल रही है तू। तू ही तो इस से्सी साड़ी और ब्लाउज में, अपने दो बड़े-बड़े आम दिखा रही है, अपनी मोटी गाण्ड दिखा रही है, तो किसी के भी मन में तुझे छूने के लिये लालच तो आएगा ही, और मंगेश ने तो सिर्फ़ थप्पड़ मारा तेरी गाण्ड पर हाथ से, लेकिन हम होते तो कुछ और ही मार रहे होते समझी…”

और ये बात सुनकर काजी और कालू जो करीना के सामने ही थे वो अपनी हँसी कंट्रोल नहीं कर पाते और हँसने लगते हैं।

और काजी और कालू को ऐसे अपने ऊपर हँसता देखकर करीना आग बाबूला हो जाती है और कालू के ठेले को लात मारती है।

ये देखकर काजी और हँसने लगता है, और कल्लू करीना की इस हरकत से उसे घूरते हुये बोलता है- “अबे साली रन्डी, ये जो चर्बी है ना, वो अपने घर पर दिखा समझी, हरामजादी बड़े बाप की रंडी औलाद…”

करीना से ऐसे उसकी लाइफ में किसी ने भी बात नहीं की, लेकिन आज इस जगह, कुछ फलवालों ने उसको जलील किया था।

तभी दूर खड़ा रेलवे हवलदार ये चल रहा झगड़ा दूर से देखता है, और वो दौड़ते हुये उन फलवालों के पास आता है, और कहता है- “के छल्ले काय रे? कषाला मेडमजी को परेशान कर रहे हो?”

करीना झट से बोलती है- “अच्छा हुआ आप यहाँ आ गये, इन बदतमीज़ लोगों को अभी यहाँ से जेल ले जाइए, इन्होंने मुझे गंदी-गंदी गालियाँ दी और, इनके एक साथी ने मुझे गलत जगह मारा…”

हवलदार पहले करीना के बदन को नीचे से ऊपर तक देखते हुये बोलता है- “मेडमजी, आपने क्या इनके खिलाफ शिकायत लिखवाई है? अगर लिखवाई है तो मैं इन लोगों को अभी पकड़ सकता हूँ…”

करीना- “नहीं लिखवाई है शिकायत…”

हवलदार- “तो फिर शिकायत लिखवाइए, फिर पोलीस इन्हें गिरफ्तार करेगी…”

करीना मन ही मन- “ये जगह तो गंदी है ही, और यहाँ के लोग भी गंदे हैं, छीछी, अब अगर शिकायत इनके खिलाफ करूँगी तो मैं बोलीवुड स्टार हूँ ये सबको पता चल ही जाएगा, और साथ ही साथ मुझे जो सिरोंन में जाना है वो भी कैंसिल हो जायेगा, इससे अच्छा है कि इन कमीनों को ठीक से देखकर याद रखती हूँ, फिर शो हो जाने के बाद इनको चक्की पीसने जेल भेज दूँगी, लेकिन मुझे अभी अपने गुस्से पर काबू रखना चाहिए…”

करीना फलवालों को गुस्से से देखकर हवलदार को बोलती है- “हाँ… मैं शिकायत लिखवाऊँगी इनके खिलाफ, लेकिन अभी मेरी ट्रेन आने वाली है तो बाद में शिकायत पुलिस स्टेशन जाकर लिखवाऊँगी, लेकिन आप जरा इन्हें समझा दीजिएगा कि औरतों से ठीक से बात करें…”

फिर करीना वहाँ से आगे दुकान पर जाकर पानी की बोतल लेकर वापपस गोगा की तरफ बढ़ती हुई मन ही मन- “कितने गंदे लोग हैं, मुझे एक कामन औरत समझकर अगर इन लोगों ने मुझसे ऐसा सलूक किया, तो मैंने अगर मेरा नकाब निकाला तो मेरे प्राइवेट अंगों को जो घूर रहे है वो तो मुझे, एवव… इससे आगे तो मुझे सोचना ही नहीं…”

तभी स्पीकर पर अनाउसमेंट होती है- “मुंबई से पटना जाने वाली ट्रेन आ चुकी है, धन्यवाद…” ऐसी अनाउसमेंट 2-3 बार आती है।

करीना मन ही मन- “हे भगवान, ट्रेन आ गई…” और करीना गोगा जहाँ बैठा था उस जगह पहुँच जाती है, लेकिन गोगा बेंच पर नहीं था, और करीना का बैग भी नहीं था वहाँ। करीना मन ही मन- “अब ये कहाँ गया मेरा बैग लेकर, ओह्ह नो…”

फिर पीछे से आवाज आती है- “अबे कमीनी, मैं तुझे कितना ढूँढ रहा था, और तुम यहाँ ऐसे खड़ी हो…”

करीना पीछे आवाज की ओर मुड़ती है तो वो गोगा था, जो उसका बैग लिये खड़ा था।

करीना गोगा को देखकर बोलती है- “उफ़फ्फ़… मैं तुम्हें ही ढूँढ रही थी गोगा…”

गोगा- “वो जाने दो, तू अब चल जल्दी, ट्रेन भी आ गई है पटना जाने वाली…” और करीना और गोगा ट्रेन की तरफ बढ़ते हैं।

करीना- “क्या तुमने टिकेट निकाला?”

गोगा- “नहीं, अब तू चुप बैठ, मैं डब्ल्यू॰टी॰ से सफ़र करूँगा, एसी एकानमी में, अगर किसी को भी पता चला कि मैं डब्ल्यू॰टी॰ से सफ़र करूँगा तो सब गड़बड़ हो जायेगी, और तूने तो साली फर्स्ट क्लास में टिकेट बुक की होगी…”

तभी ट्रेन का टी॰टी॰ई॰ जिसका नाम शकील है वो ट्रेन से बाहर आकर जो पटना जाने वाले हैं उनका टिकेट चेक कर रहा था कि तभी उसे नकाब पहने करीना दिखती है जो पटना की ट्रेन की ओर ही आ रही होती है। शकील करीना को देखते-देखते मन ही मन बोलता है- “क्या मस्त माल है, इतनी बड़ी-बड़ी चुचियाँ और इतनी से्सी फिगर तो मैं पहली बार इस रेलवे स्टेशन पर देख रहा हूँ… मजा आई गवा…”

और करीना शकील टी॰टी॰ई॰ के पास से ट्रेन में जाने ही वाली थी कि शकील ने रोक लिया और टिकेट दिखाने को कहा- “ओ मेडमजी, कहाँ जा रही हैं, अपने नौकर के साथ? यहाँ आइए और अपना टिकेट दिखाईए…”

 


गोगा जरा गुस्सा तो हो गया, क्योंकि उसे टी॰टी॰ई॰ ने नौकर कहकर पुकारा था।

करीना और गोगा टी॰टी॰ई॰ के पास जाते हैं और करीना अपना टिकेट टी॰टी॰ई॰ को दिखाती है- “ये लीजिए भैया …”

करीना का टिकेट देखकर शकील जरा हैरान होता हुआ करीना को देखकर हँसता है।

शकील को ऐसे अपने ऊपर हँसता देखकर करीना बोलती है- “क्या हुआ?”

शकील- “आप दिखने में हाई-फ़ाई लगती हैं, फिर भी टिकेट स्लीपर क्लास, नो एसी क्लास का निकाला है आपने वाह… मुझे तो लगा था फर्स्ट क्लास ली होगी…”

करीना को ट्रेन के बारे में कुछ समझ नहीं थी, उसे स्लीपर क्लास, नो एसी और फर्स्ट क्लास के बारे में कुछ पता नहीं था, तो वो अपनी आँखें बड़ी करके शकील को कहती है- “तो क्या हुआ, फर्स्ट क्लास में ऐसा क्या होता है जो एसी स्लीपर एकानमी क्लास में नहीं होता?”

करीना के इस सवाल से शकील समझ जाता है कि करीना पहली बार सफ़र कर रही है तो वो जवाब में कहता है- “फर्स्ट क्लास में प्राइवेसी होती है, और पर्सनल एसी होता है, और स्लीपर क्लास नो-एसी क्लास में प्राइवेसी नहीं होती सब लोग आमने सामने ही बैठते हैं और सोते हैं, और एसी की सुविधा भी नहीं होती…”

करीना के नौकर रामू ने गलती से नासमझी में करीना को ट्रेन की एसी एकानमी क्लास की टिकेट आनलाइन बुक कर दी थी

करीना- “एवववव, मतलब मुझे प्राइवेसी नहीं मिलेगी? और एसी भी नहीं होगा, हे भगवान…”

गोगा मन ही मन- “चलो ये एक ठीक हुआ, के करीना ने अपनी बेवकूफी की वजह से एसी स्लीपर एकोनमी की टिकेट बुक की, नहीं तो मुझे लगा था कि ये फर्स्ट क्लास में और मैं स्लीपर क्लास नान एसी में रहूँगा…”

शकील शैतानी स्माइल देकर कहता है- “जी हाँ, अब आप नम्बर 8 बोगी में अपनी जगह के बुक किए नम्बर पर जाइए जो टिकेट पे है…”

करीना मन ही मन- “ये बेवकूफ़ रामू ने मुझे मेरे स्टेटस के मुताबिक ट्रेन के फर्स्ट क्लास की बुकिंग नहीं की, क्या मुशीबत है? प्राइवेसी भी नहीं होगी छीछी… अब पीछे भी नहीं हट सकती, मुझे उसी क्लास से सफ़र करना ही होगा, है भगवान्…”

और करीना गोगा के साथ नम्बर 8 बोगी की तरफ बढ़ ही रही थी कि शकील गोगा को बोला- “ओ भाईसाब, आप कहाँ जा रहे हैं मेमसाब के साथ? टिकेट तो दिखाईए?”

गोगा हड़बड़ाते हुये बोलता है- “साहब, वो क्या है कि मुझे मेडमजी का समान लेजाकर जहाँ मेडमजी बैठेंगी वहाँ रखूँगा, बहुत भारी है बैग…”

शकील- “हाँ ठीक है ठीक है, और ट्रेन निकलने से पहले बाहर आ जाना सामान रखकर…”

गोगा- “हाँ, ठीक है…” और गोगा उस बोगी की तरफ बढ़ता है।

करीना- “तुमने झूठ क्यों बोला शकील से?”

गोगा- “तो क्या उससे ये बोलता कि, मैं डब्ल्यू॰टी॰ से सफ़र करने वाला हूँ तेरे साथ, अब चुपचाप बैठ और चल…”

और शकील पीछे से करीना की मस्त मोटी गाण्ड को मटकते देखकर मन ही मन- “क्या मस्त गाण्ड है साली की, आज तो बड़ा अच्छा मौका मिला है एक हाई क्लास की औरत को टॉर्चर करने का, लेकिन कैसे करूँ? मौका तो है, क्योंकि ये साली नोन ए॰सी॰ स्लीपर में सफ़र करने वाली है, वो भी अकेले, लेकिन इस मौके का कैसे इस्तेमाल करूँ, अपनी हवस की भूख बुझाने के लिये?”

शकील एक 51 साल का आदमी था जिसकी उँचाई 5’7” है और वो कादी तगड़ा और बदसूरत है, उसके मुँह में हमेशा गुटखा रहता है, इस कारण उसके दाँत किसी दानव की तरह दिखते हैं, उसका पेट बाहर आया हुआ है, और नहाना पसंद नहीं है। अपने बदन की बदबू को छुपाने के लिये वो खुशुबूदार सेंट इस्तेमाल करता है, गांजे की लत से शकील की आँखें लाल ही रहती हैं, और कहीं भी चोदने का मौका मिले तो वो छोड़ता नहीं है, वो चुफ़ाई के वक़्त इतना वहशी हो जाता है कि, इसी वजह से उसकी पत्नी भी उसे छोड़कर भाग गई।

गोगा करीना का सामान और टिकेट लिये करीना के साथ 8 नम्बर की बोगी में चढ़ जाता है। वो करीना के टिकेट नम्बर वाली सीट ढूँढ रहा था, और करीना, गोगा के पीछे-पीछे पर्स हाथ में पकड़कर चल रही थी। नोन ए॰सी॰ वाली बोगी में ज़्यादातर गरीब और मध्य वर्ग के लोग ही सफ़र करते हैं। करीना को देखते ही कोई भी बोल सकता है कि वो हाई क्लास औरत है, क्योंकि उसने महुँगे सोने के गहने पहने थे, और सोने से ज़्यादा उसका गोरा कोमल बदन उसकी हाई क्लास लाइफ स्टाइल की गवाही दे रहा था।

अपने खूबसूरत चेहरे पर स्टाइलिश जरा सी पारदर्शी नक़ाब में तो करीना कोई राजकुमारी ही लग रही थी, और साथ ही पहनी हुई रेड साड़ी और स्लीवलेस ब्लाउज में करीना बेहद ही से्सी लग रही था, करीना की हर चाल पर मटकती गाण्ड देखकर उस बोगी में सफ़र करने वाले हर मर्द के लण्ड में हलचल हो रही थी। आज पहली

बार कोई खूबसूरत हाई क्लास औरत नोन ए॰सी॰ क्लास में सफ़र करने वाली है। और करीना जैसी से्सी मस्त गोरे बदन वाली औरत की उस बोगी में मौजूदगी से बोगी का माहौल कामुक और मस्त हो गया था।

गोगा करीना की सीट तक पहुँच जाता है, और फिर करीना की सीट के नीचे करीना का और अपना सामान रख देता है। वहाँ बैठा हर शख्स गोगा को करीना का नौकर ही समझ रहा था, क्योंकि गोगा की शकल थी ही ऐसी, उसने फटी पुरानी ब्लैक पैंट और ब्लैक चेक की मैली सी शर्ट पहना था। फिर करीना उस फ्लैट 3 फीट के बेंच पर बैठ जाती है, और गोगा खिड़की के बाजू में जो पींखा होता है उसे चालू करता है और खुद भी करीना के बाजू में बैठ जाता है।

करीना को इतने सारे लोगों के बीच में, वो भी उसके बदन को घूरते मर्दों के बीच बैठकर बहुत परेशानी महसूस हो रही थी। करीना जिस सीट पर बैठी थी उसी सीट के आगे वाली सीट पर 3 लोग बैठे हुये थे, और वो तीनों दिखने में ही डरावने और बेवड़े लग रहे थे, और सामने मस्त चिकना माल देखकर लार टपका रहे थे।

और वहाँ शरम से अपनी आँखें झुकाए नीचे देखकर करीना मन ही मन- “क्या मुशीबत है, कितने गंदे लोग हैं यहाँ, छीछी मुझे तो अभी से साँस लेना भी मुश्किल हो रहा है।

फिर करीना गोगा को बोलती है- “गोगा, तुम जरा यहाँ सरकोगे, मैं खिड़की के नज़दीक बैठना चाहती हूँ…”

गोगा उठ खड़ा होता है और करीना सरक के खिड़की के नज़दीक जाकर बैठ जाती हैं।

गोगा बेचारा फुल टेंशन में था क्योंकि वो डब्ल्यू॰टी॰ से सफ़र कर रहा था, मतलब विदाउट टिकेट सफ़र कर रहा था, जिससे वो अगर पकड़ा गया तो उससे जेल भी हो जाएगी, और उसका सारा खेल चौपट हो सकता है। उसके दिमाग में अब यही था कि ‘कब ट्रेन चालू होगी और कब वो करीना के साथ पटना पहुँचकर अपने प्लान को हकीकत में अंजाम देगा’

और वहाँ आगे जो 3 लोग बैठे हुये थे, वो करीना की मांसल जांघें और ना के बराबर साड़ी के पल्लू से ढकी हुई 36” की चुचियाँ देखकर गरम हो गये थे, उन तीनों की उम्र 34, 36, 40 साल है। उनमें से 34 साल वाला जो कि शादीशुदा है और उसका नाम संदेश है, उसके बाजू में बैठा हुआ समीर है जिसकी उम्र 36 साल है और वो भी शादीशुदा है और उसके बगल में 40 साल का अब्दुल एक नाकारा, हवस से भरा हुआ इंसान है जिसे सिर्फ़ पीना और रंडियों को ठोंकना ही आता है।

उन तीनों में से अब्दुल ही है, जो धरती पर बोझ है। समीर और संदेश तो अपनी जोब की इंटेरव्यू देने पटना जा रहे हैं, लेकिन ये अब्दुल तो सिर्फ़ उनके साथ टाइम पास करने जा रहा था, अब्दुल का शरीर काला भोंडा सा, और उसने तब सफेद कुर्ता पायजामा पहना हुआ है, और सिर पर मुस्लिम टोपी है। अब्दुल अपने सामने एक खूबसूरत औरत को देखकर अपने दोनों दोस्तों को धीमी आवाज में बोलता है- “यारों, क्या मस्त माल बैठा है सामने, दिल तो कर रहा है आज इस मस्त चूची वाली औरत के साथ कुछ ऐसा वैसा कर ही दूँ…”

ये सुनकर संदेश बोलता है- “आआऽ भाई तू कुछ भी ऐसा वैसा मत कर, हम दोनों का जाब के लिये इींटरव्यू है, कमीने…”

अब्दुल- “हाँ… हाँ, पता है दोस्तों, मैं तो मजाक कर रहा था…”

समीर- “हाँ… पता है तेरा मजाक, कमीने। क्लास में जब मैं था तब, मेरी गलडफ्रेंड को तूने मजाक-मजाक बोलते हुये चोदा था, अभी तक भूला नहीं हूँ, इसीलिये तुझे हम दोनों अपने घर नहीं बुलाते, क्योंकि क्या पता तू हमारी बीवियों को भी ठोंक दे…” और वो तीनों धीमी आवाज में हँसने लगते हैं।

10 मिनट बीत जाते है, और ट्रेन चालू हो जाती है। गोगा की धड़कनें भी बढ़ जाती हैं, क्योंकि वो डब्ल्यू॰टी॰ से सफ़र कर रहा था, और ट्रेन भी चालू हो चुकी थी।

अब्दुल जरा कन्फ्यूज था क्योंकि करीना के साथ एक एक्स्ट्रा आदमी था, और यहाँ सिर्फ़ 4 लोगों के सोने की जगह थी, करीना के आगे वाली सीट पर अब्दुल सोने वाला था, और करीना के सीट के ऊपर भी एक सीट थी जिस पर समीर सोने वाला था। अब्दुल के सीट के ऊपर भी एक सीट थी जिस पर संदेश सोने वाला था। वो ये सोच रहा था कि करीना के बाजू में जो आदमी, याने गोगा, कहाँ सोएगा? तो वो गोगा से इस बारे में पूछता है- “ओह्ह… सरजी, आप क्या मेडमजी के साथ हो?”

गोगा सामने वाले का सवाल सुनकर उसकी तरफ देखकर बोलता है- “हाँ, मैं मेडमजी का दूर का रिश्तेदार हूँ…”

अब्दुल मन ही मन- “साला, मैं तो समझा ये नौकर है मेडमजी का, बड़ी अजीब बात है कि ये इस खूबसूरत माल का रिश्तेदार है…”

अब्दुल- “ओह्ह… तो आपकी स्लीपर सीट कहाँ है?”

गोगा जरा डर जाता है, और गुस्से और हड़बड़ाते हुये बोलता है- “तुझे क्या करना है बे… तू अपना देख समझा, ज़्यादा सवाल मत कर…”

गोगा को ऐसे बोलता देखकर अब्दुल और उसके दोस्त समझ जाते हैं कि गोगा डब्ल्यू॰टी॰ से सफ़र कर रहा है। झट से समीर बोलता है- “तो क्या आप डब्ल्यू॰टी॰ से सफ़र कर रहे हो?”

ये सुनकर गोगा की फट जाती है और वो कुछ बोलता नहीं।

गोगा को ऐसे डरता देखकर करीना समीर की ओर देखकर बोलती है- “प्लीज़्ज़ि, आप किसी को बताइएगा नहीं कि ये गोगा विदाउट टिकेट सफ़र कर रहा है, प्लीज…”

कोयल जैसी आवाज सुनकर समीर करीना को पूछता है- “आपका नाम क्या है? और इतनी क्या इमरजेंसी आ गई कि तुम्हारा ये रिश्तेदार डब्ल्यू॰टी॰ से सफ़र करने के लिये मजबूर है?”

गोगा मन ही मन- “साले कमीने लोग, जी तो कर रहा है सालों को ट्रेन नीचे फैंक दूँ, मेरी तो इनकी वजह से वाट लगने वाली है…”

 
करीना अपने पहचान छुपाने के लिए झूठ बोलते हुये कहती है- “मेरा नाम सोनिया है, और ये मेरा रिश्तेदार जरा बीमार है, मेरा तो टिकेट मैंने निकाला, लेकिन इसका टिकेट निकालने से पहले ही सब टिकेट खतम हो गया, और आज ही इसे पटना के बड़े अस्पताल में भरती करवाना है…”

गोगा मन ही मन- “वाह मेरी बुलबुल, बड़े ही सफाई से झूठ बोल रही हो…”

अब्दुल करीना की बात टोकते हुये बोलता है- “तो क्या हुआ? कानून के मुताबिक, डब्ल्यू॰टी॰ से सफ़र करना बहुत बड़ा जुर्म है…”

तभी संदेश जो कि समीर के बाजू में बैठा था वो अब्दुल से बोलता है- “अरे अब्दुल मेडमजी मजबूर हैं, क्योंकि उनका रिश्तेदार बीमार है, उसे भरती करना है अस्पताल में, तो तू जरा अपनी जुबान बंद ही रख, जब टी॰टी॰ई॰ आएगा तो उनका वो देख लेंगे, समझा…”

समीर- “सही बोल रहे हो संदेश भाई, हम अब डब्ल्यू॰टी॰ की बात करना बंद करते हैं, जिससे कोई मुशीबत ना आए, मेडमजी पर…”

करीना ये सुनकर बोलती है- “आपका साथ देने के लिये थैंक यू सो मच…”

लेकिन अब्दुल के दिमाग में तो अब शैतानी विचार कूदाफान्दी कर रहे थे, क्योंकि सामने बैठी खूबसूरत औरत के खिलाफ उसे एक बड़ा हथियार मिल गया था, और उस हथियार को कैसा इस्तेमाल करे ये सोच रहा था…”

करीना और गोगा और सामने वो तीन लोग थे, और उन्हीं के कोच के सामने अपने-अपने सीट पर लोग बैठे हुये, और कुछ मर्द करीना को घूरे जा रहे थे, जिससे करीना जरा परेशान थी, और इस बात को समीर समझ गया तो वो उठा और उस छोटी सी स्लीपर कोच रूम को पर्दे से ढक दिया जिससे बाहर अपनी-अपनी जगह पर बैठे मर्द करीना के गोरे बदन को देख ना पाएीं, और करीना कंफर्टेबल फील करे, उनके साथ।

करीना जिस कोच में बैठी थी उस कोच को पर्दे से ढकता देखकर, बेबो समीर को देखकर स्माइल करती है।

अब्दुल मन ही मन- “मेरे दिमाग़ में इस मस्त गाण्ड वाली आइटम के साथ खेलने का प्लान है, लेकिन ये मेरे दो-दोस्त और ये सामने जो आदमी बैठा है, ये सब कबाब में हड्डी है…” कि तभी अब्दुल के दिमाग में ट्यूब जलती है, उसी के मुताबब्क वो अपने दोस्तों को बोलता है- “यारों चलो खंबा निकालकर एक-एक पेग मारते हैं, मैं अभी बोर हो रहा हूँ…”

समीर- “पागल है क्या? अभी नहीं, सामने मेडमजी बैठी है, उनके सामने नहीं…”

करीना समीर की बात सुनकर झट से बोलती- “मुझे कोई प्राब्लम नहीं… आपको जो करना है, वो कीजिए, आपने हमारी इतनी हेल्प की है, तो मुझे आपके एंजाय में हड्डी नहीं बनना…”

संदेश- “ये तो आपका बड़प्पन है मेडमजी…”

अब अब्दुल संदेश की बात काटते हुये बोलता है- “चलो अब मेडमजी को भी कोई प्राब्लम नहीं है। और हमारे साथ एक और साथी है पीने को…”

समीर- “कौन?”

अब्दुल- “ये मेडमजी का रिश्तेदार…”

और ये सुनते ही गोगा का चेहरा खुशी से खील उठा, क्योंकि वो भी इन तीनों की तरह बेवड़ा ही था। गोगा को तो करीना की सच्चाई मालूम थी के वो एक बोलीवुड स्टार है, लेकिन उसके सामने जो 3 लोग बैठे थे उन्हें नहीं पता था कि करीना एक सुपर स्टार है, करीना की पहचान, एक नक़ाब की वजह से छुपी हुई थी।

संदेश- “लेकिन वो तो बीमार है…”

गोगा संदेश की बात सुनकर झट से बोलता है- “अबे, डॉक्टर ने मुझे बीमारी के दर्द को सहने के लिये दारू पीने को कहा है, तो मुझे कोई प्राब्लम नहीं…”

ये सुनते ही वो तीनों दोस्त हँसने लगते हैं।

अब्दुल- “साला पहले तो चुपचाप बैठा था, अब देख दारू का नाम लेकर कैसा पोपट की तरह बोल रहा है। हाहाहा…”

और करीना भी अब्दुल की बात सुनकर हँसने लगती है, एक हाई-फ़ाई एक्ट्रेस 4 बेवड़ों के बीच बैठकर उनके जो्स पर हँस रही थी।

संदेश नीचे रखे बैग को निकालकर चार काँच के ग्लास और एक बैगपाइपर का खंबा निका लता है। और समीर काँच के ग्लासेस सीट के बाजू में एक जायींड ट्रे पर रख देता है, और अब्दुल बोलता है- “रुक समीर, मैं पेग बनाता हूँ…”

अब्दुल पहले सोडे की बोतल का ढक्कन खोलकर, सब ग्लास में थोड़ा-थोड़ा सोडा डालके फिर, दारू एक-एक करके डाल देता है, वो एक ग्लास में जरा सी दारू डालता है, और बाकी ग्लास में दारू ज़्यादा डालकार पेग स्ट्रॉंग बनाता है, और कम दारू वाला ग्लास अब्दुल ले लेता है, और बाकी सब स्ट्रॉंग पेग वाले ग्लास गोगा, समीर, और संदेश ले लेते हैं, और चीयर्स करके सब बातचीत करते-करते पेग पीने लगते हैं।

अब उन चारों का दारू का दूसरा पेग चल रहा है। दूसरे पेग की दो सिप लगाने के बाद, समीर गोगा को बोलता है- “अरे तुमने अपना नाम नहीं बताया, क्या है तेरा नाम?”

गोगा के 3 सिप हुये थअ, अब उसके ऊपर नशे का शुरूर चढ़ रहा था, वो बोलता है- “मेरा नाम लण्ड है लण्ड। तू बोल तेरा नाम क्या है?”

संदेश और अब्दुल हँसते हुये समीर की तरफ देखते हैं।

और करीना गोगा की बात सुनकर शरम से लाल हुये जा रही थी।

तभी समीर तीसरा सिप लगाते हुये बोलता है- “अबे साले, तेरा नाम अगर लण्ड है तो मेरा नाम चूत है…” और वो चारो हँसने लगते हैं।

चारों अब इतने नशे में थे कि वो ये भी भूल गये कि एक औरत बाजू में बैठी है, इसका भी लिहाज नहीं था, और वो औरत कोई आम औरत नहीं थी, वो तो एक बोलीवुड की सुपर स्टार है। लेकिन समीर, अब्दुल, संदेश इस बात से अंजान हैं।

करीना खिड़की के पास बैठी इन चारों की गंदी बातचीत को सुनकर मन ही मन- “कितने गंदे शब्द इस्तेमाल कर रहे है, ये लोग? अब इनकी भी क्या गलती है। क्योंकि मैंने सुना है कि, दारू पीने के बाद लोग अपने होश खो देते हैं, इस कारण ही ये ऐसे बात कर रहे हैं, मुझे इन्हें नज़रअंदाज करना चाहिए…”

तभी समीर ‘हलकट जवानी’ का गाना मोबाइल पे लगा देता है। और अब्दुल झट से बोलता है- “अबे ये इस गाने में वो नाचने वाली, मुझे पसंद है बहुत…”

करीना ये सुनकर जरा शरमा जाती है।

तभी गोगा बोलता है- “साले मुझे पता है, कि तुझे ये नाचनेवाली रंडी क्यों पसंद है?”

अब्दुल- “क्यों?”

गोगा- “क्योंकि उस साली के चूचे इतने बड़े-बड़े हैं कि तू, उसका दूध, हफ्तों तक पी सकता है दारू के साथ…”

अब्दुल ये सुनकर हँसने लगता है और बोलता है- “हाँ… एकदम सही बात बोली तूने, लण्ड…”

अपने ऊपर इस तरह का कामेंट सुनकर करीना की शरम गुस्से में बदल जाती है, और वो अपनी चुचियों को अपने पल्लू से ढकने लगती है। लेकिन पूरी तरह ढक नहीं पाती, क्योंकि चुचियाँ बड़ी-बड़ी थीं।

और वो चारों हलकट जवानी के गाने में नाचने वाली के बारे में बहुत अब्युसिब शब्द इस्तेमाल करते हुये 15 मिनट बात-चीत करते हैं।

इन चारों की बातचीत सुनकर आख़िरकार करीना अपने कान पर हाथ रखकर बंद कर ले ती है।

तभी पूरा खंबा खतम हो जाता है, गोगा, समीर, संदेश पूरे नशे में धुत्त थे, लेकिन अब्दुल जरा सा होश में था, तो वो संदेश और समीर को कहता है- “अरे सालों, अब तुम लोग आराम करने ऊपर की सीट पर जाओ, नहीं तो कुछ उल्टा सीधा कर बैठोगे…” और अब्दुल समीर को सहारा देकार सीढ़ी से ऊपर की सीट पर लेटा देता है, और वैसे ही संदेश को भी करीना के ऊपर की सीट पर लेटता है, और खुद भी अपनी करीना के सामने वाली सीट पर बैठकर करीना को देख रहा होता है।

गोगा तो पूरा टल्ली करीना के बाजू में सीट पर कोने का सहारा लेकर बैठे-बैठे ही सो गया था, और करीना बाहर खिड़की से देखकर कोच में चल रही हरकतों को नज़रअंदाज कर रही थी।

अब्दुल करीना की जांघों और चुचियों को देखकर बोलता है- “ओ मेडमजी, आप बोर तो नहीं हो गई?”

करीना अब्दुल की और देखकर बोलती है- “बोर तो हो गई हूँ… पर कर भी क्या सकते हैं?”

अब्दुल- “आप पिएंगी क्या?”

करीना गुस्से में बोलती है- “पागल हो क्या, तुमने ये मुझे पूछा भी कैसे?”

अब्दुल- “आप गलत समझ रही हैं, मेरे कहने का मतलब है आप कुछ जूस पिएंगी? मेरे पास आपल जूस है…”

करीना- “नहीं, मुझे नहीं चाहिए, मैं ऐसे ही ठीक हूँ…”

अब्दुल बैग में से आपल जूस की बोतल निकालता है और जबर्जस्ती करीना को वो बोतल पीने के लिये कहते हुये बोलता है- “लीजिए ना मेडमजी, प्लीज़्ज़ि, नहीं तो मैं बुरा मान जाऊँगा, दो सिप तो लगाइए, नहीं तो लोग कहेंगे कि अब्दुल को महेमान-नवाजी भी करनी नहीं आती…”

अब्दुल को ऐसे कहता देखकर करीना मजबूरी में वो आपल जूस की बोतल अपना नक़ाब जरा सा ऊपर करके अपने मुलायम होंठ खोलकर जूस पीने लगती है, और कहती है- “एवव कड़वा है बहुत, छीई…”

अब्दुल- “नया ब्रांड है मेडमजी आपल का, और एक बार लगाइए, फिर मीठा लगेगा…”

करीना जो पी रही थी, वो आपल जूस नहीं था, वो तो अब्दुल ने घर से आते वक़्त आपल जूस की बोतल में बची हुई शराब डाली थी, वो थी।

अब करीना दूसरा सिप लगाती है, पहली बार शराब पीने से करीना को बेहोशी छाने लगती है। ये देखकर अब्दुल करीना के हाथ से आपल की बोतल लेकर, खुद भी एक सिप लगाता है। फिर अब्दुल मन ही मन- “ये प्लान तो साला काम करेगा, अब ये तीनों तो 3-4 घंटे में होश में आ जाएँगे, और इससे पहले मैं इस मस्त आंटी का रसपान भी कर लूँगा…”

वही करीना भी दारू के दो सिप लगाने से होश में नहीं थी, और वो बोलती है- “मेरा सर, आह्ह… चकरा रहा है, आऽऽ…” और करीना खिड़की के पास कोने का सहारा लेकर अपनी आँखें बंद कर लेती है। एक हसीन बोलीवुड एक्ट्रेस, अकेली, पूरी बेसुध, एक बलात्कारी, हवस से भरे भेड़ियों से भरी ट्रेन की बोगी में थी।

अब्दुल अपनी आपल की बोतल फिर से नीचे बैग में रखकर अपने सीट से उठकर बेसुध सीट के कोने में बैठी करीना की ओर जाता है। अब्दुल के हाथ थर-थर काप रहे थे, क्योंकि वो पहली बार किसी खूबसूरत औरत के बदन के साथ अपनी हवस मिटाने के लिए खेलने वाला था।

 
अब्दुल करीना के बदन को देखकर अपना लण्ड मसलते हुये मन ही मन- “आज तो मजा आएगा इस खूबसूरत खिलोनेसे खेल कर, अगर मैंने और ज़्यादा देर कर दी तो ये तीनों, और ये रंडी भी होश में आ जाएगी, मुझे इससे पहले ही अपनी हवस मिटाने के लिये जो करना है वो करना होगा, नहीं तो मौका हाथ से चला जाएगा, ऐसा गदराया गोरा बदन मुझे फिर मिलेगा भी नहीं…” ये सोचते-सोचते अब्दुल अपनी सीट से उठ खड़ा होता है, और करीना और गोगा के बीच में बैठ जाता है।

अब अब्दुल अपने बदसूरत चेहरे को करीना के बदन के नज़दीक ले जाता है, और करीना के गोरे बदन से आने वाली इत्र की खुशबू से बावरा सा हो जाता है। उसने पहली बार किसी खुशुबूदार औरत के इतने नज़दीक से दीदार किए थे। तभी खिड़की से एक हवा के झोंके से करीना का पल्लू कंधे से निकल जाता है, और इससे करीना के दोनों बड़े-बड़े आम ब्लाउज में क़ैद अब्दुल के सामने एक्सपोज हो जाते हैं।

अब्दुल मन ही मन- “कितनी बड़ी-बड़ी चुचियाँ है इसकी, लगता है बहुत लोगों ने इसकी चुचियों का मजा लिया है, लेकिन जो मजा मैं लेने वाला हूँ, वो किसी ने अबतक इसकी चुचियों से लिया नहीं होगा…” ऐसा सोचते हुये अब्दुल करीना को गोद में उठाते हुये खड़ा हो जाता है, अपनी सीट पर लिटा देता है, और खड़े होकर करीना के गोरे-गोरे हरे-भरे बदन को ऐसे लेटा हुआ देखकर अब्दुल अपने मुँह से हवस की लार टपका रहा था। लेकिन वो अंजान था कि जिस औरत को अपनी हवस मिटाने के लिये वो इस्तेमाल करने वाला है, वो औरत एक बोलीवुड की फेमस सुपरस्टार, हर मर्द के दिल में धड़कने वाली करीना कपूर है।

लेकिन करीना की ये पहचान करीना के खूबसूरत चेहरे पर लगा नकाब छुपा रहा था, लेकिन पता नहीं कि अगर ये पहचान अब्दुल जान गया तो क्या होगा?

अब्दुल की आँखें करीना की बड़ी-बड़ी चुचियों पर टिकी थी, करीना की चुचियों पर पल्लू नहीं था, इस कारण करीना की 36डी की चुचियाँ अब्दुल के सामने रेड ब्लाउज में थीं। अब्दुल अपने दोनों हाथ करीना की दोनों चुचियों पर रखकर पहले तो धीरे-धीरे चुचियाँ दबाकर उसकी कोमलता को महसूस करता है। फिर अब्दुल मन ही मन- “ओह्ह… कितनी मुलायम हैं इस रंडी की चुचियाँ…”

और फिर प्यार से सहलाने की जगह अब्दुल करीना की दोनों चुचियाँ ब्लाउज के ऊपर से ही, अपने दोनों हाथों से किसी भोंपू की तरह दबा रहा था। अब्दुल के दिमाग पर अब हवस हावी हो रही थी। एक गंदी नाली का कीड़ा अंजाने में बोलीवुड स्टार के बड़े-बड़े चूचे बेदर्दी से दबा रहा था। तभी करीना के पास खड़ा अब्दुल नीचे झुक जाता है और अपना मुँह करीना की दाईं चूची के पास लाता है और ब्लाउज के ऊपर से ही करीना की चुचियाँ मुँह में ले लेता है, और काटने और चूसने लगता है, और दूसरे हाथ से करीना की बाईं चूची अपने दाएँ हाथ से बेदर्दी से दबा रहा होता है।

अगर करीना होश में होती तो दर्द से चीख रही होती, दाईं और बाईं चुचियाँ बारी-बारी ब्लाउज के ऊपर से ही दबाने और चूसने के बाद अब्दुल की हिम्मत और बढ़ जाती है, और वो करीना के ब्लाउज के हुक निकालता है, और आगे से पूरा खोल देता है। अब करीना के 36डी के दोनों बड़े-बड़े चूचे खुले ब्लाउज से रेड ब्रा में अब्दुल के सामने थे।

अब्दुल मन ही मन- “क्या मस्त पके हुये आम हैं साली के, ऐसे मस्त आम तो मैं अपने लाइफ में पहली बार देख रहा हूँ, कितना दूध होगा इन चुचियों में? मैं तो आज इस साली के दूध के टेंकर्स चूस-चूस के खाली कर दूँगा…” ये बोलते हुये अब्दुल करीना की ब्रा को जोश में आकार बिना सोचे एक हाथ से बीच से पकड़कर खींचता है, और जोर से ब्रा के मेटल हुक के टूटने की आवाज आती है, और ब्रा निकलकर अब्दुल के हाथ में आ जाती है।

अब तो करीन कपूर की चुचियाँ, आगे से खुले ब्लाउज से अब्दुल के सामने एक्सपोज थीं। ये नजारा देखकर अब्दुल का लण्ड पूरे साइज में खड़ा हो गया था, जिसकी साइज 12” इंच है। करीना की चुचियाँ अब पूरी तरह नंगी थीं, 36डी की ब्रा में क़ैद चूचे अब आज़ाद थे, और अब ब्रा के बिना करीना की चुचियाँ, पहले से ज़्यादा बड़ी लग रही थीं, पूरी 38” की।

करीना की गुलाबी चुचियाँ अब्दुल के काटने और दबाने से लाल थीं, और ये देखकर अब्दुल पगला जाता है, और वो अपने दोनों हाथों की उंगलियों से करीना के निपल्स पकड़ता है और खींचता है, जैसे कोई गाय का दूध निकालने के लिये करता है। करीना की गुलाबी चुचियाँ अब्दुल के दिए हुये दर्द से लाल-लाल थीं। अब्दुल फिर अपना मुँह करीना की चुचियों के पास लाता है, और बारी-बारी करीना की चुचियाँ सूँघता है। अब्दुल को दूध की सुगंध आ रही थी, और वो झट से करीना की दोनों चुचियाँ अपने दोनों हाथों से दबाता है।

करीना के निप्पल, और चुचियाँ इतनी बड़ी थी की अब्दुल के एक हाथ में पूरी चूची नहीं आ रही थी। तभी अब्दुल अपने एक मुँह में करीना का दाँया निप्पल पूरा अपने मुँह में ले लेता है, और बिदी से चूसने लगता है, जैसे माँ अपने बच्चे को दूध की बोतल से दूध पिलाने के लिए बोतल का निप्पल बच्चे के मुँह में लगाती है और बोतल पीछे से दबाती है जिससे दूध बोतल से निकलकर बच्चे के मुँह में जाता है, वैसे ही अब्दुल करीना की दाईं चूची अपने मुँह में लेकर चूस रहा था, और अपने हाथ से वही चूची पूरे जोर से दबाता है, और ऐसे ही 1-2 मिनट चूसने के बाद, करीना की चूची से दूध की बूंदे अब्दुल के मुँह में जाने लगती हैं।

अब्दुल चूसते-चूसते मन ही मन- “अबे माँ की आँख, इसकी चुचियाँ तो दूध छोड़ने लगी…” कहकर अब्दुल बेदर्दी से चुचियाँ पूरे जोर से दबाता है, तो करीना का दूध पहले से ज़्यादा निकलने लगता है। अब अब्दुल करीना का पूरा निप्पल मुँह में लेकर चूस रहा था।

अब्दुल की इस बेदर्दी से बेहोश करीना के मुँह से भी दर्द के कारण ‘आअह्ह’ की सिसकारियाँ निकलने लगती हैं। गुटखा, पान, तंबाकू खाने से अब्दुल के दाँत राक्षस की तरह थे तो जीभ भी खुरदरी थी, इस कारण करीना की मुलायम और साफ्ट चुचियाँ अब्दुल की चुसाई से लाल हो गई थीं।

अब्दुल बारी-बारी करीना की दोनों चुचियों से जी भरकार दूध चूसता, और चुचियाँ अपने दाँतों से काटता भी है। 15 मिनट तक चुचियाँ चूसने के बाद अब्दुल अपने मुँह से करीना की चुचियाँ आज़ाद करता है। तब करीना की चुचियों पर अब्दुल के काटने के निशान स्पष्ट रूप से दिख रहे थे। अब्दुल के टॉर्चर से करीना की चुचियाँ पूरी लाल-लाल हो गई थीं। फिर जो उसने करीना की चुचियों कौ चूस-चूस के और दाँत से काटकर जो हाल किया था, वो देखकर मन ही मन- “बेचारी की चुचियों का मैंने चूस-चूस के बुरा हाल कर दिया है, पूरी लाल हो गई है चुचियाँ। लेकिन मुझे तो बड़ा मजा आया दूध पीकर इस रंडी का। साली रंडी बीच-बीच में ‘आअह्ह’ की सिसकारियाँ भी ले रही थीं …”

फिर अब्दुल जोश में करीना की दोनों बड़ी-बड़ी 38” साइज की चुचियों पर जोर-जोर से थप्पड़ बरसाता है। थप्पड़ से हिलते चूचे देखकर अब्दुल का लण्ड अब पैंट से बाहर आने के लिये तड़प रहा था, लेकिन तभी अब्दुल की नजर करीना के रेड नकाब से ढके चेहरे पर जाती है। अब्दुल मन ही मन- “अब इस मस्त चुचियों की मालकिन का चेहरा भी मस्त ही होगा, जो ये रंडी नकाब से छिपा रही है…”

अब्दुल नकाब निकालने ही वाला था की, जानी पहचानी आवाज पर्दे से ढके कोच के दूसरी साइड से आती है, वो शकील है जो करीना और उसके साथ सफ़र कर रहे चार आदमियों के सामने वाली कोच में टिकेट चेक कर रहा था।

अब्दुल मन ही मन- “इसकी माँ की आँख ये टी॰टी॰ई॰ को भी अभी यहाँ टपकना था, अगर मुझे इस रंडी के साथ ऐसे देखा तो, वो समझे जायेगा कि मैं इसका रेप कर रहा हूँ…” ये बोलते हुये अब्दुल करीना के ब्लाउज को फिर से लगाने के लिये करीना के हुक आगे से लगाने की कोशिश करता है, लेकिन उसने करीना की ब्रा को फाड़ कर फेंका था, इस कारण करीना की चुचियाँ पूरी साइज में फूली हुई थीं, और ब्लाउज में जैसे-तैसे क़ैद हो रही थीं, फिर अब्दुल अपना जोर लगाकर ब्लाउज का हुक फिर से लगाता है, उसके बाद उसकी नजर सीट के नज़दीक गिरी ब्रा पर जाती है, जो उसने जोश में आकर फाड़ के करीना की चुचियाँ आज़ाद की थी। वो ब्रा अब्दुल चलती ट्रेन की खिड़की से बाहर फैंक देता है, और करीना को उठाकर फिर से गोगा के साइड में खिड़की के कोने का सहारा देकर बैठा देता है।

लेकिन अभी भी करीना के सिर से दारू उतरी नहीं थी, अभी भी वो बेहोश थी। अब्दुल अपने लण्ड पर पत्थर रखकर, मजबूरी में करीना से दूर जाकर अपनी सीट पर बैठ जाता है, और सोने की एक्टिंग करता है।

और 2-3 मिनट बाद शकील टिकेट चेक करते हुये करीना के कोच तक पहुँचता है। शकील मन ही मन- “यही स्लीपर कोच है जिस सीट का नम्बर उस मस्त हाई-फ़ाई औरत के पास था। आज तो साली के साथ फ्लर्ट करूँगा, जैसे फिल्मों में होता है, और मौका मिलने पर चौका भी मारूँगा…” ऐसे सोचते हुये टी॰टी॰ई॰ शकील परदा हटाते हुये कोच के अंदर जाता है, और सबको ऐसे सोता और दारू की सुगंध आती देखकर शकील को समझ आता है कि सब दारू पीकर लेट चुके हैं, और तभी उसकी नजर खिड़की का सहारा लेकर सो रही औरत पर जाता है, जो करीना है।
 
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