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कहीं वो सब सपना तो नही complete



मुझे डरता देख कविता हँसने लगी,,,तभी मैने कविता को इशारा किया कि वो माँ की जगह पर बैठ जाए ऑर वो उठकर

वहाँ बैठ गई जबकि मैं उठके कविता की जगह पर बैठ गया ऑर कविता को टवल गीला करके देने लगा ऑर कविता टवल

को सोनिया एक फॉरहेड पर रखने लगी,,,,,

मैं जब भी गीला टवल कविता के हाथ मे देखता या कविता के हाथ से दूसरा टवल पकड़ता मेरा हाथ कविता के हाथ को

टच कर जाता तो वो शर्मा जाती ,,लेकिन मैं उसकी तरफ कोई खास ध्यान नही देता बस अपने काम मे लगा रहता,,,,,

लेकिन मेरा ध्यान सोनिया की तरफ ज़रूर जा रहा था जो मुझे घूर कर देख रही थी लेकिन तभी उसकी आँखें बंद होने

लगी मैं समझ गया कि अब ये सोने वाली है क्यूकी डॉक्टर ने इसको नींद वाली मेडिसिन दी थी,,,,,ऑर ऐसा ही हुआ करीब 5-7 मिनट बाद उसकी आँखें बंद हो गई ,,,,,

ऑर तभी माँ अंदर आ गई ,,,,चलो चलो बच्चो उठो ऑर हाथ धो कर खाना खा लो,,,,माँ ने हाथ मे पकड़ी हुई प्लेट

को दूसरे बेड पर रख दिया जो मेरा बेड था,,,,माँ ने प्लेट को बेड पर रख दिया ऑर पानी वाले जग को टेबल पर रख दिया

ऑर कविता के हाथ से गीला ऑर ठंडा टवल पकड़ लिया,,,,,,,,,चलो अब उठो ऑर खाना खा लो ये सब मैं करती हूँ,,,

कविता कुछ नही बोली ऑर बातरूम मे चली गई ऑर हाथ धो कर वापिस आके बेड पर बैठ गई तब तक मैं माँ को टवल

गीला करके देता रहा,,,,,कविता के बाहर आते ही मैं भी बेड से उठा ऑर बाथरूम मे चला गया ऑर हाथ धो कर वापिस

अपने बेड पर गया,,,,,,मैने देखा कि कविता अपना खाना खा रही थी प्लेट से लेकिन मेरी प्लेट नही थी,,,,,

माँ आप कविता की प्लेट तो ले आई लेकिन मेरी प्लेट कहाँ है,,,,,,,,

यही तेरी प्लेट है सन्नी बेटा तुम दोनो एक ही प्लेट मे खाना खा लो,,,,,

लेकिन माँ मुझे अपनी प्लेट मे खाना है ,,मैं इसके साथ खाना नही खा सकता,,,,,

क्यू नही खा सकता छोटा था तब भी तो इसके साथ मिलकर खाना ख़ाता था तू अब क्या इतना बड़ा हो गया है कि एक प्लेट मे खाना नही खा सकता इसके साथ,,,,क्या शरम आती है तुझे,,,,,ऑर वैसे भी मेरे 2 हाथ है 4 नही जो एक साथ 2 प्लेट ऑर पानी का जग भी लेके उपर आ जाती,,,,,,चल अब बैठ उसके साथ ऑर खाना खा ले,,,,,,माँ हल्के गुस्से मे बोली ,,,,

नही आंटी जी ये शरमाता नही है इसको डर लगता है मेरे से क्यूकी मेरे हाथों पे ज़हर लगा हुआ है ना,,,,कविता ने

इतना बोला ऑर हँसने लगी माँ भी साथ मे हँसने लगी,,,,,लेकिन तभी माँ बोल पड़ी,,,,,,श्ह्ह्ह्ह्ह अब चुप करके खाना खा

लो ऑर कोई आवाज़ नही करना,,सोनिया को मेडिसिन दी है इसको सोने दो आराम से,,,,,,माँ ने मेरी तरफ देखा ऑर मुझे बेड पर कविता के साथ बैठने का इशारा किया ऑर मैं भी चुप चाप बैठ गया,,,,क्यूकी सुबह कॉलेज मे कुछ नही खाया

था ऑर कारण के घर भी कॉफी ही पी थी इसलिए बहुत भूख लगी हुई थी मुझे,,,,,मैं अपने बेड पर बैठा ऑर खाना खाने

लगा एक ही प्लेट मे कविता के साथ,,,,,,

लेकिन मुझे अच्छा नही लग रहा था अगर इतनी जोरो से भूख नही लगी होती तो मैं कभी एक प्लेट मे इसके साथ खाना नही ख़ाता ,,,,,,

हम दोनो खाना खाने लगे ऑर माँ सोनिया एक फॉरहेड पर ठंडे टवल रखने मे बिज़ी हो गई,,,,,,,,मैं चुप चाप

खाना खा रहा था तभी कविता बार बार मुझे देख कर शरमा रही थी हँसती जा रही थी ,,,,,मैने आँखों ही आँखों

मे पूछा क्या है,,तू इतना हंस क्यू रही है,,,,तो उसने भी अपने सर को ना मे हिला कर बोला कि कुछ नही,,,,

मैने फिर पूछा कि क्या हुआ तू पागल है जो हँस रही है,,,,तो वो बस शरमाती जा रही थी ऑर हँसती हुई हल्के हल्के खाने को चबा रही थी,,,,मैं भी चुप करके खाना खाने लगा ऑर उसकी तरफ ध्यान ही नही दिया,,,,,ऑर खाना खाते हुए माँ

ऑर सोनिया की तरफ देखने लगा,,,

तभी मेरे लिप्स पर कुछ टच हुआ मैने देखा कि कविता हाथ मे एक रोटी का नीवाला लेके मुझे खिलाने की कोशिश कर

रही थी ऑर हँस रही थी,,,,मैने मूह खोलने से मना कर दिया,,,,,,

खा ले ना मेरे हाथ पे सच मे ज़हर नही लगा हुआ,,,कविता के बोलते ही माँ का ध्यान हम लोगो की तरफ आया ऑर माँ

ने कविता को हाथ मे नीवाला लेके मुझे खिलाते हुए देख लिया,,,,मैं समझा कि बेटा अब तो तू गया माँ पता नही क्या सोच

रही होगी,,,,,,,तभी माँ हल्के से बोली,,,,,,इतना नखरा क्यू करता है ऑर शरमाता क्यूँ है ,,,बचपन मे भी तो तुम सब

मिलकर ऐसे ही खाना खाते थे तो अब क्या हुआ ,,,,चल खा ले रोटी कविता के हाथ से ऑर इतना मत शर्मा,,,,,मैने कुछ

नही बोला ऑर मूह खोल दिया ओर कविता के हाथ से नीवाला खा लिया,,,,,,

तभी कविता ने मुझे इशारा किया प्लेट की तरफ ऑर फिर अपने मूह की तरफ ऑर मूह खोल दिया,,,,वो बोल रही थी कि अब तुम मुझे रोटी का एक नीवाला खिलाओ,,,,मैने सर हिला कर मना कर दिया,,,लेकिन उसने ज़िद्द की ऑर ज़िद्द भी की किसी छोटे बच्चे की तरह,,

मैने भी उसकी ज़िद्द मान ली ऑर रोटी का नीवाला लेके उसके मूह की तरफ हाथ बढ़ा दिया,,,,उसने मूह खोला तो मैं उसके पिंक कलर के छोटे छोटे लिप्स को देखता रह गया,,,ये नही कि पहली बार देख रहा था लेकिन अभी पता नही क्यू उसके लिप्स बहुत ही ज़्यादा अच्छे लग रहे थे,,,,मैं उसके लिप्स मे खो ही गया था ऑर मेरा हाथ उसके मूह के पास जाके रुक गया था ,,मुझे पता ही नही था कि वो मूह खोल कर मेरे हाथ मे पकड़े हुए नीवाले का वेट कर रही थी,,,,मैं तो बस उसके लिप्स को देखता जा रहा था,,,,,,तभी उसने मेरा हाथ पकड़ा ऑर जल्दी से मेरे हाथ को अपने मूह मे करीब करके मेरे हाथ से रोटी का नीवाला अपने मूह मे भर लिया ऑर खाने लगी,

,तभी मैं होश मे आया ऑर उसकी तरफ देखने लगा तो वो मुझे अजीब नज़रो

से देखने लगी,,,,वो मुझे पूछ रही थी कि क्या हुआ सन्नी लेकिन मेरे पास उसकी घूरती नज़रो के सवाल का कोई जवाब नही था इसलिए मैं रूम मे इधर उधर देखने लगा,,,,,फिर वापिस मेरा ध्यान उसकी तरफ गया तो वो हाथ मे रोटी का नीवाला लेके मुझे खिलाने के लिए अपने हाथ को मेरे मूह के करीब कर रही थी ऑर हल्के से मुस्कुरा रही थी,,,,,मैने फिर से मूह खोला उसके हाथ का नीवाला खाने लगा ,,ऑर तभी उसने मुझे फिर से उसको एक नीवाला खिलाने को बोला तो मैने मना नही किया लेकिन इस बार मैने ध्यान रखा कि मैं उसके लिप्स देखने मे खो ना जाउ कहीं ऑर ठीक तरह से एक नीवाला उसके मूह तक पहुँचा दूं,,,,,ऑर ऐसा ही हुआ मैने रोटी का नीवाला उसके मूह तक पहुँचा दिया ऑर उसके लिप्स की तरफ ध्यान नही दिया ,,लिप्स क्या मैं तो मूह की तरफ भी ध्यान नही दे रहा था पता नही कब मेरा हाथ उसके मूह मे गया 'ऑर उसने नीवाला खाने की कोशिश मे मेरी उंगली पर ज़ोर से काट दिया,,,,,मुझे बहुत दर्द हुआ मैं चिल्लाने वाला ही था कि मेरा ध्यान माँ ऑर सोनिया की तरफ गया,,,,,ऑर मेरी आवाज़ मेरे मूह मे घुट कर रह गई लेकिन दर्द तो हुआ था ऑर इसी वजह से मेरी आँखों से हल्का सा पानी निकलने लगा,,,,,,

मैं दर्द से तड़प उठा था लेकिन वो हँसती जा रही थी,,,,,उसको ये सब मज़ाक लग रहा था इस वक़्त वो कोई छोटी बच्ची बनीहुई थी ऑर खाना खाते टाइम मेरे से मज़ाक कर रही थी,,,,,मेरी आँखों मे पानी था लेकिन उसको कोई फ़र्क नही पड़ रहा था वो तो मुझे ज़ुबान निकाल का चिड़ा रही थी ,,मेरा मज़ाक बना रही थी,,,

माँ भी उसकी तरफ देखने लगी और हँसने लगी,,, माँ ने अपने माथे पर हाथ मारते हुए उसको बोला,,,,,,,,पगली कहीं की,,,तू बच्ची की बच्ची रहना,,,,ऑर फिर से माँ हल्के से हँसते हुए अपने हाथ मे पकड़ा हुआ गीला टवल सोनिया के माथे पर रखने

लगी,,,,

मैने कविता की तरफ देखा ऑर उसको बोला कि अब तू मुझे खाना खिला तो उसने सॉफ मना कर दिया,,,,क्यूकी उसको पता था

अब मैं भी उस से बदला लूँगा तो उसने सॉफ तोर पर सर को ना मे हिला कर मना कर दिया,,,,मैं फिर से उसको बोला ऑर ज़िद करने लगा,,,माँ ने एक बार हम लोगो की तरफ देखा ऑर वापिस अपने काम मे लग गई,,,माँ के देखते ही कविता मुझे खाना खिलाने को मान गई ऑर फिर अपने हाथ मे एक नीवाला लेके मुझे खिलाने लगी,,,लेकिन वो बहुत डर रही थी उसको पता था कि अब मैं भी उसकी उंगली पर काटुन्गा ऑर मैं वैसे भी उसको अपने दाँत दिखा कर डरा रहा था ऑर वो डर भी रही थी जैसे जैसे उसका हाथ मेरे मूह के करीब आ रहा था वो अपनी आँखों को बंद करती जा रही थी,,जब उसका हाथ मेरे लिप्स के पास टच करने लगा तो उसने आँखें बंद करके अपने फेस को एक तरफ मोड़ लिया ऑर हाथ को आगे बढ़ा दिया ऑर ऐसे फेस बनाने लगी कि जैसे मैं अभी उसके हाथ पर काट रहा हूँ,,,,फिर उसने फेस को पूरी तरह से टर्न कर लिया ऑर बुरी तरह से डर गई,,,,मैने उसके हाथ को पकड़ा ऑर अपने मूह मे भर लिया ऑर उसके हाथ से नीवाला ख़ाके उसके हाथ को मूह से निकाल दिया ,,,मैं उसके हाथ को या उंगली को काटा नही,,,उसने अपने हाथ के पीछे होते ही अपने फेस को मेरी तरफ किया ऑर रहट की साँस ली ओर मुझे नज़रो ही नज़रो मे थॅंक्स्क्स्क्स बोला,,लेकिन मैं उसका डरा हुआ चेहरा देख कर हँसने लगा

तभी वो भी हँसने लगी,,,,,,

कुछ देर बाद मैं तो चुप हो गया लेकिन वो हँसती रही,,,,,मुझे लगा शायद ये पागल हो गई है,,,,डर की वजह से मैने उसको पूछा क्या हुआ पगली तो उसने अपने लिप्स के नीचे उंगली लगा कर मुझे इशारा किया कि तुम्हारे लिप्स के नीचे कुछ लगा हुआ है,,,मैं अपने हाथ से सॉफ करने की कोशिश की लेकिन साफ नही हुआ ,,उसने फिर मुझे हाथ थोड़ा राइट साइड करने को बोला तो मैने फिर कोशिश की लेकिन मेरा फेस सॉफ नही हुआ,,,,वो हँसने लगी ऑर मुझे रुकने को बोलने लगी,,,मैने हाथ अपने फेस से नीचे कर लिया तभी उसने अपने हाथ को मेरे मूह की तरफ किया ऑर अपनी उंगली से मेरे लोवर लिप्स के नीचे लगी हुई दाल को सॉफ करने लगी जो उसकी ग़लती से मेरे लिप्स के नीचे लगी थी,,,,जब वो डर कर मुझे खाना खिला रही थी तो उसका हाथ काँप रहा था जिस वजह से थोड़ी डाल मेरे लिप्स के नीचे लग गई थी,,,,,

उसने उंगली से डाल को सॉफ किया ऑर उंगली को मेरे मूह मे डाल दिया ताकि मैं डाल को उंगली से चाट सकूँ,,उसकी उंगली मूह मे घुसते ही मैं उंगली पर लगी दाल को चाटने लगा ऑर उंगली को चूसने लगा,,उसकी नरम ऑर छोटी उंगली मेरे मूह मे गर्म होने लगी थी ऑर मक्खन की तरह पिघलने लगी थी मेरे मूह मे,,,उसकी उंगली पर लगी दाल अब मुझे दाल मखनि का टेस्ट देने लगी थी,,,मैं उसके स्वाद मे इतना खो गया कि उसकी उंगली को चूस्ता ही रहा ,,,मुझे पता नही क्या हो गया था मुझे एक अजीब सा टेस्ट मिलने लगा था उसकी उंगली से जो मुझे बहुत अच्छा लग रहा था ,,,उसकी उंगली को मेरे मूह मे करीब 15-20 सेकेंड हो गये थे उसने उंगली बाहर नही की ऑर ना मैने उसकी उंगली को मूह से बाहर किया,,तभी मैने उसकी तरफ देखा तो वो मुझे उंगली चूस्ते देख परेशान हो गई थी,,उसके माथे पर पसीना आ गया था,,उसका मूह खुला हुआ था ऑर हार्ट बीट तेज हो गई थी,,उसका दूसरा हाथ उसके बूब्स के उपर क्लीवेज की लाइन पर था ऑर हल्का सा हार्ट की तरफ था वो दिल की धड़कन को क़ाबू मे कर रही थी,,मुझे सब देख कर डर लगने लगा था कि कविता क्या सोच रही होगी लेकिन डरने के बावजूद मैं उसकी उंगली को चूस्ता ही जा रहा था,,

मैने उसके हाथ को अपने हाथ मे पकड़ लिया ऑर उंगली को ऑर भी ज़्यादा मूह मे भर लिया ,,,मुझे पता नही क्या हो गया था मैं उसकी उंगली को अपने मूह मे भरके अपनी ज़ुबान से उसकी उंगली के साथ खेलने लगा,,,मैने देखा कि उसकी उंगली भी मेरे मूह के हल्के से इधर उधर घमने लगी थी,,,वो शायद गर्म होने लगी थी,,तभी उसने तेज़ी से साँस लेते हुए माँ की तरफ देखा ऑर मुझे भी उधर देखने को बोला,,,मैने माँ की तरफ देखा तो माँ अपने काम मे लगी हुई थी लेकिन कविता ने मुझे माँ के कमरे मे होने का डर दिखा दिया ऑर मुझे हाथ छोड़ने को कहा ,,मैने जल्दी से उसके हाथ को अपने हाथ से छोड़ दिया ऑर वो जल्दी से बेड से उठी ऑर बाथरूम मे चली गई,,,,,

 
मैं तो साला डर ही गया कि ये सब क्या हो गया,,,,कैसे हो गया,,,,,मैने तो ऐसा कुछ भी नही सोचा था,,,ऑर ना ही मेरा मूड

था ऑर ना ही हॉंसला था कि मैं कविता के साथ ऐसी वैसी कोई हरकत कर सकता,,,लेकिन मुझे ये सोच कर खुशी हुई थी कि

कविता की उंगली भी मेरे मूह मे हिलने जुलने लगी थी,,शायद उसको ये सब अच्छा लगा था,,,,मैं अभी सोच ही रहा था कि माँ

की आवाज़ मेरे कानो मे पड़ी,,,,,,,

किस सोच मे डूब गया सन्नी बेटा ,खाना जल्दी ख़तम करो,,,,,मैं जल्दी से प्लेट की तरफ ध्यान करके खाना खाने लगा,,

कुछ देर मे कविता बाथरूम से बाहर आ गई,,जब तक मैं अपने हिस्से का खाना खा चुका था,,,,,कविता आके माँ के पास

दूसरे बेड पर बैठ गई ओर माँ का साथ देने लगी सोनिया के सर पर गीले टवल रखने मे,,,,,अरे बेटी पहले खाना तो ख़तम

कर लेती ये सब तो बाद मे भी हो जाएगा,,,,,,,

मैने जितना खाना था खा लिया आंटी जी,,,,,तभी माँ ने प्लेट की तरफ देखा जिसमे अभी भी खाना पड़ा हुआ था,,,,माँ ने

मुझे हल्के गुस्से मे बोला,,,,,तेरे को कितनी बार बोला है झूठा नही छोड़ते सन्नी बेटा,,,चल जल्दी प्लेट खाली कर,,,

लेकिन माँ मैं तो अपने हिस्से का खा चुका हूँ बाकी तो कविता का है,,,,,माँ ने कविता की तरफ देखा तो कविता मेरी

तरफ देखने लगी लेकिन मेरे से आँख नही मिला पाई ऑर जल्दी से माँ से बोली,,,,,आंटी जी मेरा पेट भर गया मैं ऑर नही

खा सकती,,,,

इतनी जल्दी पेट भर गया तेरा,,,तभी तो इतनी दुबली पतली हो गई है,,,,1 रोटी भी नही खाई तूने पूरी,,,,माँ ने कविता को बोला ऑर

मुझे प्लेट ख़तम करने को बोला,,,,,,मैने जैसे तैसे प्लेट का खाना खा लिया ओर बाथरूम मे जाके हाथ धो आया,,

तभी कविता वो खाली प्लेट लेके खड़ी हुई थी,,,,

तू रहने दे कविता मैं इसको नीचे रख दूँगा,,,,,नही सन्नी तुम बैठो मैं बर्तन नीचे रख कर आती हूँ,,,,,

मैने बोला ना तू रहने दे,,,,,,,मैं अभी बोल ही रहा था कि माँ उठी ओर कविता के हाथ से बर्तन ले लिए,,,,,तुम पता नही

कब बड़े होगे ,,जब देखो छोटी छोटी बात पर लड़ते रहते हो,,अब प्लेट की वजह से लड़ रहे हो,,,,छोड़ो मैं बर्तन

नीचे रखके आती हूँ तुम दोनो सोनिया की पट्टियाँ करो तब तक,,,,,,

कविता फिर वापिस बेड पर बैठ गई ओर मैं माँ की जगह पर बैठ गया,,,,,अब सोनिया सो चुकी थी गहरी नींद मे इसलिए

मुझे उसका डर नही था,,,,,,मैं माँ की जगह पर बैठ गया ओर कविता मुझे टवल गीला करके देने लगी,,,,एक दो बार तो

उसने थोड़ा बचके मुझे टवल पकड़ाया लेकिन एक बार उसका हाथ मेरे हाथ को टच कर गया,,,,वो नीचे टेबल के पास

पड़े पानी के बर्तन को देख रही थी लेकिन मेरे हाथ से उसका हाथ टच होते ही वो सर उठा कर मुझे देखने लगी,,,

हम दोनो की नज़रे मिली तो हम एक दूसरे को देखते रह गये तभी मैने उसके हाथ को अपने हाथ मे पकड़ लिया ऑर हल्के

से दबा दिया,,,उसने अपने हाथ को पीछे करने की कोशिश की लेकिन मैने उसके हाथ को कस्के अपने हाथ मे पकड़ लिया ऑर

उसको अपने करीब खींचने लगा तभी वो जल्दी से बेड से उठ गई ओर मेरे से हाथ छुड़वा कर अपना बॅग उठा कर वहाँ

से जाने लगी,,,,,मैने पीछे से उठकर जल्दी से उसके बॅग को हाथ मे पकड़ लिया ,,उसने पीछे मूड कर मेरे हाथ से अपना बॅग

छुड़वाने की कोशिश की तो मैने आगे बढ़ कर उसके हाथ को फिर से पकड़ लिया,,,मैने उसको अपने करीब कर लिया लेकिन तभी

मुझे सीडियों मे माँ की आवाज़ आई तो मैने जल्दी से उसके हाथ को छोड़ दिया लेकिन मेरे दूसरे हाथ मे उसका बॅग अभी

भी पकड़ा हुआ था,,,,,,,

तभी माँ अंदर आ गई,,,,,,,अरे तू जा रही है कविता बेटी,,,,,,,मैं ऑर कविता माँ को देख कर डर गये,,,,,,,,मुझे लगा कि अब

मैं क्या करूँ लेकिन आते ही माँ ने कविता के जाने की बात की तो मैने भी माँ की बात को आगे बढ़ा दिया,,,,,,

हाँ देखो ना माँ इसकी बेस्ट फ्रेंड बीमार है ऑर ये घर जाने का बोल रही है,,,,मैं इसको रोक रहा था बट पता नही क्यू

नही रुक रही ये,,,,तभी उसने मुझे पीछे मूड कर देखा ऑर उसका मूह खुला हुआ था वो हैरान रह गई मेरी बात सुनके,,

क्यू जा रही हो बेटी रुक जाओ थोड़ी देर,,,,,,,,,माँ ने कविता से बोला,,,,,,,

आंटी जी मैं कहीं नही जा रही मैं तो बस आपको बोलने आ रही थी कि पानी अब ठंडा नही रहा आप थोड़ी आइस लेके आना

उपर आते टाइम,,,,,उसने माँ को उस बर्तन की तरफ इशारा किया जिस मे हम टवल गीला कर रहे थे,,,,वो पानी अब ठंडा

नही रहा,,,,,,

श अच्छा ठीक है तुम रूको मैं आइस लेके आती हूँ,,,,,,तभी कविता मेरे को देख कर डर गई,,,,,नही आंटी जी आप रूको मैं

लेके आती हूँ,,,,आप यहीं बैठ जाओ,,,,,

माँ अंदर आके बैठ गई ऑर मैं भी ,,,,,कविता नीचे चली गई,,,,,मैं समझ गया कि ये भी काफ़ी तेज है,,,मेरी चाल पर अपनी

चाल चल गई,,,,,,,

मैं माँ के साथ बैठ गया वो नीचे से बर्फ लेके आ गई,,,ओर मुझे वहाँ से उठने को बोला ऑर खुद मेरी जगह बैठ कर

माँ की हेल्प करने लगी,,,,,

उसके बाद कुछ खास नही हुआ ओर करीब 30-40 मिनट बाद कविता अपने घर भी चली गई ,,,,,लेकिन जाते जाते वो मुझे

ऐसे अंदाज़ से देख कर गई कि मैं समझ नही सका उसकी नज़रो मे क्या है,,,,,प्यार है,,नफ़रत है या गुस्सा,,,,

उस दिन मैं ऑर माँ डिन्नर टाइम तक सोनिया के सर पर कोल्ड वॉटर की पट्टियाँ करते रह ऑर जब माँ नीचे खाना तैयार करने

गई तो मैं अकेला इस काम मे लगा रहा,,,

मैं सोनिया के सर पर ठंडे पानी का टवल रख रहा था लेकिन उसका माथा इतना ज़्यादा गर्म था कि ठंडा टवल कुछ पल

मे ही गर्म हो जाता,,उसको अभी भी कम से कम 104 या 105 बुखार था,,मुझे खुद पर गुस्सा आ रह था क्यूकी मुझे लग

रहा था कि मेरी ग़लती की वजह से उसको बुखार हुआ है क्यूकी मेरी उसी हरकत के बाद से सोनिया की तबीयत बिगड़ी थी,,,,,

खैर मैं अपने काम मे लगा हुआ था तो कुछ देर बाद डिन्नर तैयार करके माँ उपर आ गई ओर साथ मे शोबा दीदी भी थी,,,

शोबा पास आके बेड पर बैठ गई ऑर सोनिया के माथे पर हाथ लगा कर बुखार चेक करने लगी,,,,,हयी राम माँ इसका

तो माथा बहुत ज़्यादा गर्म है,,,,,डॉक्टर को बुलाया था या नही,,,,,

हाँ बेटी बुलाया था ,,,,डॉक्टर ने इसको मेडिसिन भी दी थी,,,बोल रहा था कि गर्मी का बुखार है मेडिसिन से ज़्यादा इसको आराम

की ज़रूरत है,,,ऑर जब तक ये आराम करती रहे तब तक इसके सर पर ठंडे पानी के टवल रखने है जिस से बुखार जल्दी ठीक

होगा,,,,,लेकिन एक बात की टेन्षन है इसने सुबह से हल्का नाश्ता किया है बस उसके बाद कुछ नही खाया,,,कविता भी बता

रही थी कॉलेज मे भी इसने कुछ नही खाया ,,,,अब जबसे डॉक्टर मेडिसिन देके गया है तभी से सो रही है,,,,पता नही कब

तक उठेगी ओर कब खाना खाएगी,,,,,

तभी शोबा ने अपने फोन से डॉक्टर का नंबर डाइयल किया,,,,रूको माँ मैं अभी पूछ लेती हूँ डॉक्टर अंकल से,,,,

शोबा ने फोन कान पर लगा लिया ऑर बात करने लगी,,,,,

शोबा,,,,हेलो डॉक्टर अंकल,,,,

डॉक्टर,,,,हेलो शोबा बेटी,,,हाउ आर यू,,,,

शोबा,,मैं ठीक हूँ अंकल ,,,लेकिन ये सोनिया ठीक नही है,,,,आपको तो पता ही है,,,

डॉक्टर,,,हाँ बेटी मैं मेडिसिन देके भी गया था,,,,,1 -2 दिन मे ठीक हो जाएगी,,,बस तेंडे पानी की पट्टियाँ करते रहो उसके

फॉरहेड पर,,,,

शोबा,,,,,,वो तो कर रहे है अंकल लेकिन ये अभी तक सो रही है,,,,,माँ को टेन्षन हो रही है इसने सुबह से कुछ नही खाया

है,,,,क्या अभी इसको उठाकर खाना खिला सकते है,,,,,,

डॉक्टर,,,,,,नही बेटी अभी इसको सोने दो उठना मत इसको,,,ये अपने आप उठ जाएगी ,,,,,ऑर हाँ इसको खाना मत खिलाना अभी क्यूकी

गर्मी के बुखार मे बॉडी कुछ ज़्यादा ही गर्म हो जाती है जिस वजह से भूख नही लगती,,,अभी इसको उठा भी दोगे तो भी

ये खाना नही खाएगी,,,आप बस ठंडे पानी की पट्टियाँ करते रहो ताकि बॉडी ठंडी होने लगे ऑर बुखार उतर जाए फिर

जब ये उठेगी तो अपने आप खाना खा लेगी,,,तब तक इसको सोने दो आराम से ,,वैसे मैं कल सुबह आउन्गा तो देख लूँगा,,,,

शोबा,,,,ठीक है डॉक्टर अंकल मैं समझ गई लेकिन माँ टेन्षन ले रही है,,,,,,इसने कुछ खाया जो नही है,,,,चलो मैं

माँ को समझा देती हूँ,,,,, ऑर आप सुबह आ जाना प्ल्ज़्ज़ ,,मुझसे इसकी ये हालत देखी नही जाती,,,,,

डॉक्टर,,,,,तुम बेफ़िक्र रही बेटी मैं टाइम पर आ जाउन्गा,,,,ऑर ज़्यादा टेन्षन मत लो,,वो ठीक हो जाएगी,,,,ओके बेटी,,,,

शोबा,,ओके अंकल ,,,,बयए

शोबा फोन कट करके माँ ऑर मुझे सब बात बता देती है,,,,,

 


तब तक क्या ये भूखे पेट ही सोती रहगी बेटी,,,,इसने कुछ नही खाया है इतनी देर से,,माँ हल्का उदास होके बोल रही थी,,,,

माँ आप टेन्षन मत लो ,,,डॉक्टर ने जो बोला है ठीक ही बोला है,,इसको आराम करने दो जब उठ जाएगी तो अपने आप खाना खा लेगी,,,,

ठीक है बेटी,,,,,चलो इसने तो नही खाना कुछ भी लेकिन तुम लोग तो चलो ओर जाके खाना खा लो तब तक मैं इसके पास बैठ जाती हूँ,,,,

नही माँ आप जाओ मैं बैठ जाती हूँ ,,,वैसे भी आप लोग काफ़ी देर से बैठे हुए हो,,,,शोबा ने मुझे वहाँ से उठा दिया

ऑर खुद बैठ गई ,,,,फिर मैं ऑर माँ खाना खाने नीचे चले गये जहाँ मामा भी बैठा हुआ था,,,,मुझे साले पर गुस्सा

आ रहा था सोनिया बीमार है वो कमीना एक बार भी उसका हाल चाल पूछने नही आया,,,,साला नशेड़ी कहीं का,,,

मुझे बहुत गुस्सा आ रहा था मामा पर,,,,,बट मैं क्या कर सकता था,,,,,,,

हम लोगो ने खाना खाया फिर मामा अपने रूम मे चला गया जबकि माँ मेरे साथ उपर सोनिया एक रूम मे चली गई,,

हम लोगो ने शोबा को नीचे भेज दिया ,,ऑर खुद सोनिए के पास बैठ गये,,,,शोबा भी कुछ देर बाद खाना ख़ाके उपर

आ गई ऑर आते टाइम आइस लेके आई साथ मे क्यूकी पानी फिर गर्म हो गया था,,,,,

माँ अभी अब जाके आराम करो मैं ऑर सन्नी यहीं रहते है,,,,,,,

नही शोबा बेटी अभी तुम जाओ ऑर आराम करो मैं यही रुकती हूँ ,,,,,,,ऑर हाँ सन्नी को भी साथ ले जाओ,,ये दोपेहर से यही बैठा हुआ है,,इसको भी थोड़ा आराम करने दो,,,,

नही माँ मुझे आराम नही करना मैं ठीक हूँ,,,आप जाओ ऑर आराम करो,,,,,मुझे यहीं रुकना है ,,,अपने रूम मे

वाह भाई हो तो ऐसा जब फाइट हुई थी सोनिया से तो इस रूम मे सोने भी नही आता था अब सोनिया बीमार है तो यही रुकने को बोल रहा है ऑर रूम को भी अपना रूम बोल रहा है,,,,माँ हल्का खुश होके बोल रही थी,,,,,

ठीक है बेटा तुम यही रूको मैं जाती हूँ ऑर थोड़ा आराम करके आती हूँ,,,,,,

माँ नीचे क्यू जाना है यहीं रुक जाओ ऑर मेरे बेड पर आराम कर्लो,,,,मैं ऑर शोबा दीदी सोनिया के पास बेड पर बैठ जाते है

हाँ ये भी ठीक है बेटा,,,,ऑर जब तुम मे से कोई थक जाए तो मुझे उठा देना,,,इतना बोलकर माँ मेरे बेड पर लेट गई जबकि

मैं ऑर शोबा सोनिया एक पास बैठ कर उसके माथे पर ठंडे पानी की पट्टियाँ करने लगे,,,,

रात भर माँ ऑर शोबा ने बीच बीच मे थोड़ा आराम कर लिया था लेकिन मैं एक पल के लिए भी नही लेटा था,,,मुझ से

सोनिया की ऐसी हालत देखी नही जाती थी,,,,क्यूकी मैं खुद को उसकी हालत के लिया क़सूरवार समझ रहा था ऑर रात भर बैठ

कर अपनी ग़लती की सज़ा दे रहा था खुद को,,,,

सुबह कोई 6-7 बजे सोनिया की आँख खुली तब माँ उसके पास थी ऑर मैं फ्रेश होने बाथरूम मे गया हुआ था ,,जब मैं

फ्रेश होके नहा धो के बाथरूम से बाहर आया तो देखा कि डॉक्टर भी सुबह सुबह ही आ गया था,,,,वो सोनिया को इंजेक्षन

लगा रहा था,,,,

अब कैसी है मेरी बेटी,,,,पहले से कुछ बेहतर महसूस हो रहा है या नही,,,,,

जी डॉक्टर अंकल पहले से बेहतर हूँ मैं लेकिन बॉडी मे थोड़ा पेन हो रहा है,,थकान महसूस हो रही है ,,उठने का भी

दिल नही कर रहा,,,,,

डॉक्टर-ऐसा होता है अक्सर जब काफ़ी टाइम बुखार चाढ़ रहता है,,,,अभी कुछ देर ओर आराम करना होगा ,,बोलू तो कम से कम 2 दिन

बेड से नही उठना ,,जितन आराम करोगी उतनी जल्दी ठीक हो जाओगी,,,,,अब बोलो भूख लगी है या नही,,,,,

सोनिया-नही डॉक्टर अंकल अभी भूख नही है,,,फिर से सोने का दिल कर रहा है,,,,

नही बेटी अभी नही सोना,,पहले कुछ खा लो अगर खाने का दिल नही तो थोड़ा जूस पी लो,,,,

तभी माँ ने टेबल से जूस का ग्लास उठाया जो माँ पहले ही डॉक्टर के कहने पर बना के लाई थी ,,शोबा दीदी सोनिया को बेड

पर बिठाने लगी लेकिन उनसे अकेले से नही हो रहा था तो मैं आगे बढ़ा लेकिन सोनिया ने मुझे गुस्से से देखा ऑर करीब आने

से मना करने लगी,,,मुझे बड़ा गुस्सा आया उस टाइम सोनिया पर,,,,एक तो इतनी तबीयत खराब है फिर भी गुस्सा करने से बाज़

नही आती ये कमिनि,,,,,फिर डॉक्टर ने शोबा दीदी की हेल्प की ऑर सोनिया को उठा कर बिठा दिया ऑर उसकी पीठ बेड से लगा दी,,,फिर माँ ने जूस का ग्लास सोनिया के मूह को लगा दिया,,,,

नही माँ मुझे नही पीना,,,,सोनिया मूह से मना कर रही थी लेकिन अपने हाथ से माँ को मना नही कर पा रही थी,,,

बुखार ऑर थकान की वजह से उसके जिस्म मे जान ही नही बची थी वो अपना हाथ भी नही उठा पा रही थी,,,,

डॉक्टर,,,,,बेटी ज़्यादा मत पियो जितना दिल करता है पी लो,,1-2 घूट ही पी लो वही बहुत है ,,,,

सोनिया ने डॉक्टर की बात मान ली ऑर थोड़ा जूस पी लिया,,,,,

डॉक्टर,,ये हुई ना बात,,,,तुम तो बहुत अच्छी लड़की हो जो इतना कहना मानती हो,,,

आपका ही कहना मान रही है डॉक्टर हम लोगो का तो कभी नही मानती,,,,हम लोग मिन्नत भी करते रहते तो भी मूह नही लगाती थी ये जूस के ग्लास को,,,,माँ ने हँसते हुए बोला तो सोनिया गुस्से से माँ को देखने लगी,,,,

गुस्सा क्यू करती है ठीक तो बोल रही हूँ मैं,,,,माँ ने हँसते हुए बोला तो शोबा के साथ डॉक्टर भी हँसने लगा,,,,,

अब तुम लेट जाओ ज़्यादा देर बैठोगी तो थक जाओगी,,,,और हो सके तो फिर से सो जाओ,,,,,ऑर जितना हो सके आराम करो,,,,

क्या अभी फिर से अपने मुझे नींद की मेडिसिन दी है डॉक्टर अंकल,,,,सोनिया ने हल्की आवाज़ मे बोला,,वैसे भी उसकी आवाज़ ही नही निकल रही थी,,,,

नही बेटी अब नींद की मेडिसिन नही दी तुम को वो तो कल दी थी अब ज़रूरत नही,,,अब तो तुम खुद सोने की कोशिश करो वैसे

भी तुम बुखार की वजह से बहुत थक गई हो अब तुमको अपने आप नींद आ जाएगी,,,,

ओके तो अब मैं चलता हूँ लेकिन हाँ अभी भी आपको इसके सर पर ठंडे पानी के पट्टियाँ करनी है,,,,मेडिसिन से इतना आराम नही मिलता जितना ठंडे पानी से मिलेगा,,,,

ठीक है डॉक्टर साहब ,,,वैसे भी हम लोग अब तक ठंडे पानी की पट्टियाँ कर रहे है,,,,,पूरी रात भी करते रहे है,,,,

ये तो बहुता अच्छी बात है तभी तो कुछ ठीक हुई है सोनिया बेटी,,,,,,ओके अब मुझे इज़ाज़त दीजिए,,इतना बोलकर डॉक्टर चला गया

माँ डॉक्टर को नीचे तक छोड़ने गई,,,ऑर शोबा सोनिया के पास बैठ गई,,,,,

तू हो गया फ्रेश सन्नी,,,चल अब तू बैठ सोनिया के पास मैं चली फ्रेश होने ,,,

नही दीदी आप मत जाओ ,,,,पहले माँ को आने दो फिर चली जाना,,,,,सोनिया मेरी तरफ गुस्से से देख रही थी ऑर हल्की आवाज़ मे शोबा को जाने से रोक रही थी,,,,,,,

अरे बुद्धू मैं कही दूर जा रही हूँ क्या साथ वाले रूम मे तो जा रही हूँ,,वैसे सन्नी तो है ना यहाँ माँ भी आती

ही होगी,,,तू आराम कर मैं अभी आई,,,,

नही दीदी माँ को आने दो फिर चली जाना,,,,तभी माँ अंदर आ गई,,,,,

लो आ गई माँ ,,,,अब क्या मैं जा सकती हूँ सोनिया जीई,,,शोबा ने थोड़ा हँसके मज़ाक मे बोला ऑर वहाँ से चली गई,,,,,

 


क्या हुआ मेरी बेटी,,इतना उदास क्यू है मैं तो यही हूँ ऑर तू शोबा को जाने क्यू नही दे रही थी ,,सन्नी भी तो यही है ना

यही तो बात है जो सन्नी यहाँ है माँ,,,माँ आते ही सोनिया एक पास बैठ गई ऑर सोनिया हल्की आवाज़ मे बोलने लगी,,,,इसको यहाँ से भेज दो माँ ,,,मेरे रूम से बाहर निकाल दो इसको,,,,

अभी तबीयत ठीक नही है फिर भी फाइट करना नही भूली तू,,,ये यहाँ रहेगा तो क्या होगा ऑर वैसे भी तेरे को पता है

इसने कितना ख्याल रखा है तेरा,,,रात भर तेरे सर पे ठंडे पानी के टवल रखे है इसने,,,,,

बट माँ रात को तुम ऑर शोबा दीदी भी थी ना यहाँ,,,,,दीदी ने बताया ,,तुम लोगो ने भी तो इतना कुछ किया है अगर इसने भी थोड़ा बहुत कर दिया तो क्या हुआ,,,,,

थोड़ा बहुत,,,,इसने तो बहुत कुछ किया है ,,,,रात को मैं ऑर शोबा भी इसी रूम मे थी ,,,,हम लोग तो थोड़ी थोड़ी देर बाद आराम

करने क लिए लेट जाते थे ऑर सो भी जाते थे लेकिन ये पगला पूरी रात जागता रहा ऑर तेरे पास ही बैठा रहा,,,एक पल के लिए

सोना तो दूर की बात है तेरे से दूर भी नही हुआ,,,पीठ सीधी करने के लिए लेटा भी नही,,,,ऑर तू इसको रूम से बाहर जाने

को बोल रही है,,,,तेरे को तो खुश होना चाहिए कि तेरे को ऐसा भाई मिला है जो तुझे इतना प्यार करता है तेरी इतनी फ़िक्र करता है,,,,,

माँ की बात सुनके सोनिया ने मेरी तरफ देखा तो सही लेकिन अभी भी उसकी आँखों मे गुस्सा था,,,,मैं भी उसकी तरफ देख

रहा था तभी माँ ने मुझे बेड पर आने को बोला,,,,सन्नी तू थोड़ी देर के लिए बैठ जा यहाँ मुझे किचन मे थोड़ा

काम है मैं आती हूँ ,,तब तक तेरी शोबा दीदी भी आ जाएगी नहा धो कर,,,,,इतना बोलकर माँ उठी ऑर वहाँ से जाने लगी,,

अब तू सन्नी से फाइट नही करना सोनिया ऑर आराम से लेट कर ठंडे पानी की पट्टियाँ करवा लेना मैं कुछ देर मे आती हूँ

नाश्ते की तैयारी करके,,इतना बोलकर माँ वहाँ से चली गई ऑर मैं माँ की जगह बैठ गया ऑर टवल को पानी के बर्तन मे

गीला करके सोनिया एक माथे पर रख दिया,,,,

क्या तू सच मे पूरी रात नही सोया सन्नी,,,,सोनिया ने हल्की आवाज़ मे मेरे से पूछा,,,,,

मैं कुछ नही कहा बस अपनी आँखों की तरफ इशारा किया जो ना सोने की वजह से हल्की सूज गई थी,,,,,

बहुत अच्छी बात है तेरे साथ ऐसा ही होना चाहिए सन्नी ,,,भगवान करे तेरी आँखें ऑर सूज जाए तो मज़ा आए,,,,तेरी वजह

'से मेरा ये हाल हुआ है अब तू ये मत सोचना कि तूने रात भर जाग कर मेरी सेवा की है तो मैं तेरी उन सारी ग़लतियों को

माफ़ कर दूँगी जिनकी वजह से मेरा ये हाल हुआ ,,,,मैं तुझे कभी माफ़ नही करूँगी ऑर ना कभी भूल सकती हूँ तेरी

गान्डि हरकतों को,,,,,,तू जितना अच्छा है उस से कहीं ज़्यादा बुरा है,,,,,,

तभी मैने उसके फेस पर अपना हाथ रख दिया,,,,,,,,तेरी सेवा करने का मुझे कोई शॉंक भी नही है लेकिन अगर तू बीमार

रहेगी तो मैं फाइट किसके साथ करूँगा इसलिए तेरे को जल्दी अच्छी करने की कोशिश कर रहा हूँ,,,,,,ऑर जो हरकते मैने तेरे

साथ की है उनको कभी भूलना भी नही ओर कभी माफ़ भी नही करना तू मुझे क्यूकी अगर तू भूल गई या तूने मुझे माफ़

कर दिया तो तेरा गुस्सा ठंडा हो जाना है ऑर तूने फिर से मेरे करीब आने की कोशिश करनी है जो तेरे लिए काफ़ी ख़तरनाक

साबित हो सकती है,,,,तेरा गुस्सा तुझे मेरे से दूर रहने मे हेल्प करेगा ऑर मुझे भी तेरे करीब नही आने देगा,,,इस गुस्से

को कभी कम नही होने देना ,,क्यूकी गुस्सा कम होते ही हम लोगो मे फंसला भी कम होना शुरू हो जाना है जो हम दोनो

के लिए बहुत बड़ी मुसीबत होगी,,,,

तभी उसने मेरा हाथ पकड़ने की ऑर मुझे रोकने की कोशिश की लेकिन कमज़ोरी की वजह से वो हाथ को ज़्यादा हिला नही पा रही

थी,,,,,,फिर भी उसका हाथ मेरे हाथ पर आ गया ऑर उसने मुझे रोकने की कोशिश की,,,,,मैं उसके हाथ को वापसी बेड पर आराम

से रख दिया,,,,,,,,,,,

अभी गुस्सा मत कर पहले ठीक हो जा बाद मे जितना लड़ना होगा मेरे से जितना गुस्सा करना होगा कर लेना लेकिन पहले ठीक हो

जाओ,,,,ऑर इसलिए तो मैं इतनी मेहनत कर रहा हूँ ताकि तू जल्दी ठीक हो जाए ऑर मेरे से फाइट करना शुरू कर्दे,,,,अब आराम से

लेट जा ऑर मुझे मेरा काम करने दे,,,,,,उसके बाद वो चुप हो गई लेकिन गुस्से से मुझे घुरती रही ऑर मैं प्यार से हल्की

स्माइल करता हुआ अपने काम मे लगा रहा ऑर उसके माथे पर ठंडे टवल रखने लगा,,,,,,,,

आज शोबा भी बुटीक पर नही गई ऑर शिखा को फोन कर के बता दिया था कि सोनिया बीमार है इसलिए वो भी नही आई,,उसका

भी दिल नही था आज आने का क्यूकी आज करण घर पे अकेला था उनकी माँ अलका आंटी उनके नाना जी के पास गई थी ,,आज दोनो भाई

बेहन घर पर रहके मस्ती करने वाले थे,,

मैं सोनिया के पास रहा ओर तब तक माँ ऑर शोबा नाश्ता करने लगी जब उन लोगो का नाश्ता हो गया तो वो उपर आ गई ऑर मैं

नाश्ता करने लगा,,,,मैने देखा कि माँ ने नाश्ते मे कॉफी नही बनाई थी ,,,चाइ बनाई थी ऑर मुझे चाइ पस्संद

नही थी,,चाइ पीती थी शोबा दीदी ऑर मामा भी,,,मामा तो था ही नशेड़ी जिसको चाइ अच्छी लगती थी,,चाइ से चरस का असर जो

ज़्यादा हो जाता है,,,,,,वैसे अब मामा नज़र नही आ रहा था कहीं ,,शायद बाहर गया होगा,,,,,

खैर मैं नाश्ता कर ही रहा था तभी बेल बजी मैने जाके दरवाजा खोला तो सामने कविता थी,,,,

मेरे मूह मे ब्रेड थी जिसको मैं चबा रहा था ,,मेरा भरा हुआ फूला मूह देख कर वो हँसने लगी,,,,,ऑर शरमाने

भी लगी,,,,,वो आज कुछ ज़्यादा ही हसीन लग रही थी मुझे,,,,,मैं उसको देख ही रहा था तभी शोबा बेल की आवाज़ सुनके नीचे

आ गई थी,,,,

हेलो सन्नी,,,,,,,,

हेलो कविता ,,मैं खाना ख़ाता हुए बोला तो मेरा साउंड क्लियर नही था जिसको सुनकर वो हल्का ज़ोर से हँसने लगी,,,,

मैने जल्दी से मूह का खाना चबा कर अंदर निगल लिया ऑर फिर से उसकी हेलो का जवाब दिया,,,,,,

इतना हँस क्यू रही है बंदरिया ,,तू खाना खाते टाइम बोलती नही क्या,,,,,

बोलती हूँ लेकिीन इतना अजीब नही,,,वो फिर हँसने लगी,,,,

तभी शोबा दीदी की आवाज़ आई,,,,,कॉन है सन्नी,,,,,,

पता नही दीदी कोई पागल लड़की है ,,,,मैं इतना बोला ही था कि कविता ने मुझे ज़ोर से घुसा मारा मेरे पेट मे मैं दर्द

से कराह उठा ऑर तभी उसने मुझे धक्का देके दरवाजे से पीछे किया ऑर अंदर आ गई,,,,,

क्यू कैसा लगा पागल लड़की का घुसा सन्नी बेटा,,,शोबा दीदी ऑर कविता दोनो हँसने लगी,,,,,

हेलो दीदी,,,,,,,,,,,हाउ आर यू??

हेलो कविता ,,,,,,मैं ठीक हूँ कविता ,,,,यू टेल,,,,

मैं भी ठीक हूँ दीदी ,,,,आज आप कॉलेज नही गई दीदी,,,,

नही कविता वो सोनिया की तबीयत ठीक नही थी इसलिए मैं नही गई,,,,,

अब कैसी है वो दीदी,,,मैं भी उसी की वजह से आज कॉलेज नही जा रही सोचा सोनिया के पास बैठ कर बातें करूँगी

थोड़ा टाइम पास हो जाएगा उसका भी ओर मेरा भी,,,,,,

तभी मैने दीदी को बोला,,,,दीदी इसको टाइम पास करने दो आप मेरे लिए कॉफी बना दो,,,,माँ ने आज नाश्ते मे कॉफी नही

बनाई मेरे लिए,,,,,

नही सन्नी अभी नही अभी मैं बहुत थक गई हूँ रात को सोई भी नही ठीक से,,,अब बहुत नींद आ रही है मैं माँ को

बोलके आई हूँ कि थोड़ी देर सोने जा रही हूँ,,,,,,ये तो बेल बजी तो देखने आ गई कि कॉन आया है,,,,,

आपकी बेहन बीमार है ऑर आप सोने जा रही हो दीदी ,,मैं मज़ाक मे बोला दीदी को,,मैं भी तो रात भर नही सोया ,,,,तो क्या

मैं भी नाश्ता करके सो जाउ,,,,,

तेरा तो पता नही मैं तो सोने जा रही हूँ ऑर वैसे अब तो मुझे बहाना भी मिल गया है कविता जो आ गई है,,अब ये माँ की

हेल्प करेगी ओर मैं जाके सो जाउन्गी,,,,,बहुत थक गई रात को मैं,,,,,इतना बोलकर दीदी उपर जाने लगी,,,,,

लेकिन मुझे कॉफी तो बना दो दीदी ,,उसके बिना नाश्ता कैसे करूँगा,,,,प्ल्ज़्ज़ दीदी,,,,

तभी दीदी ने उपर जाते हुए पीछे मूड कर कविता की तरफ देखा,,,,तुझे कॉफी बनानी आती है क्या कविता,,,,,,

कविता ने हां मे सर हिला दिया,,,,,,

तो ठीक है पहले तू इस पागल एक लिए कॉफी बना दे फिर उपर आ जाना अपनी फ्रेंड के पास ऑर अगर खुद पीनी है तो अपने

लिए भी बना लेना,,,,,,

 


दीदी ने मुझे पागल बोला तो कविता हँसने लगी,,,दीदी आप भी पिओगी क्या,,,,,,,ऑर आंटी जीई,,,,,,,,,

नही मुझे नही पीनी मैं तो सोने लगी हूँ,,,,ऑर माँ भी नही पिएगी क्यूकी माँ ने अभी चाइ पी थी,,,,इसी को आदत है

कॉफी पीने की,,इतना बोलकर दीदी उपर चली गई,,,,,

तू इतना हँस क्यू रही थी जब दीदी ने मुझे पागल बोला था,,,,,,,

मेरी मर्ज़ी मैं जब दिल करे तब हँस सकती हूँ,,,,,,,तुझे क्या लेना देना,,,,

तभी मैं भी ज़ोर से हँसने लगा,,,,,,

अब तुझे क्या हुआ है तू क्यू पागलो की तरह ज़ोर ज़ोर से हँसने लगा है,,,,,

जब दीदी ने मुझे पागल बोला तो तू हँसी थी मेरे पे ,,अब दीदी ने तुझे नौकरानी बन दिया तो मेरा भी हक़ बनता है हँसने

का,,,,,

दीदी ने मुझे नौकरानी कब बोला,,,,कविता थोड़ा चिढ़ते हुए बोली,,,,,

नौकरानी बोला नही लेकिन बना तो दिया ना ,,तभी तो घर आने वाले मेहमान को खुद कॉफी बनाने एक लिए बोल दिया,,,,खुद

के लिए भी ऑर मेरे लिए भी,,,,,मैं इतना बोलकर ज़ोर ज़ोर से हँसने लगा,,,,,,

कॉफी पीनी है या नही,,,,,,कविता ने मुझे धमकी दी,,,,,अब नौकरानी बोला तो मैं नही बनाउन्गी कॉफी खुद बना लेना,,

ऑर वैसे भी मैं इस घर की मेहमान नही हूँ,,,ये घर मेरा भी है,,,,आंटी मुझे बेटी कहती है,,ऑर तुझे पागल ,,,

कविता भी ज़ोर से हँसने लगी,,

सॉरी कविता जी मैं तो मज़ाक कर रहा था ,आप तो इसी घर की मालकिन हो ऑर मैं पागल हूँ,,,अब तो कॉफी बना दो मुझे

मालकिन,,,,मैं भी मज़ाक की बात का जवाब मज़ाक मे दिया,,,,,

उसने हाथ मे पकड़ा हुआ बॅग सोफे पर रखा ऑर किचन मे चली गई जबकि मैं डाइनिंग टेबल पर बैठ कर बाकी का नाश्ता

करने लगा जो बस ज़रा सा ही बच रहा था,,फिर मैं बर्तन लेके किचन मे चला गया,,,,,

कविता गॅस के पास खड़ी हुई थी ऑर कॉफी बना रही थी,,,,,,,नौकरानी जी आप गॅस पर कॉफी क्यू बना रही हो ,,मेरे इतना बोलते

ही कविता डर कर पीछे मूडी ऑर मुझे देख शरमाने लगी,,,,

ई ब्लककी नौकरानी किसको बोला,,,,,वो शरमाती हुई लेकिन एक नखरे ऑर अकड़ के साथ बोली,,,,,

तुझे बोला ऑर किसको बोला,,,तुझे कॉफी मेकर मे कॉफी बनानी नही आती क्या जो गॅस पे बना रही है,,,मैने हँसते हुए

मज़ाक मे बोला,,,,

देख ब्लॅकी मुझे नौकरानी मत बोल वर्ना,,,,,कविता हल्के गुस्से मे चिढ़ती हुई बोली,,,,,

तभी माँ किचन मे आ गई,,,,,,अरे तुम दोनो आज भी फाइट कर रहे हो,,,,कब ख़तम होगी तुम लोगो की ये फाइट,,माँ ने

किचन मे आते ही बोला,,,

मैने पीछे मूड कर माँ की तरफ देखा,,,,तभी कविता ने माँ को हेलो बोला

हेलो आंटी,,,,,,

हेलो बेटी,,,,,क्या हुआ अब किस बात पे फाइट हो रही है तुम लोगो की,,,,,,

देखो ना आंटी एक तो मैं इस पगले को कॉफी बना कर दे रही हूँ उपर से ये मुझे नौकरानी बोल रहा है,,,,मैं

कोई नौकरानी हूँ इस घर की,,,

नही कविता जी आप तो मालकिन हो इस घर की,,,क्यू कविता जी मैने ठीक कहा ना,,,,

देखो आंटी फिर से मुझे चिड़ा रहा है,,,कभी नौकरानी बोलता है अभी मालकिन,,,,खुद को पता नही क्या समझता है ये,,

अरे ये क्या बात हुई सन्नी ,,,एक बात बोलो तुम या तो नौकरानी बोलो या मालकिन,,,,माँ ने भी हँसते हुए मज़ाक मे बोला,,,लेकिन

ये नौकरानी वाला तो मसला समझ आया बट ये मालकिन वाली क्या बात है,,,,,

यही बोल रही थी कि ये नौकरानी नही मालकिन है इस घर की,,,,मैं माँ को हँसते हुए बोला,,,,

तो ठीक कह रही है ये,,,ये मेरी बेटी सोनिया की बेस्ट फ्रेंड है ऑर मेरे लिए मेरी बेटी सोनिया की जैसी है,,,अगर सोनिया इस घर

की मालकिन हो सकती है तो ये क्यू नही,,,,,इसका भी उतना हक़ बनता है जितना सोनिया का,,,,,

माँ ने इतनी बात बोली तो कविता माँ के गले लग गई ,,ओह्ह तांख्षकशकश आंटी जी,,,,माँ के गले लग्के वो पीछे हुई ऑर मुझे ज़ुबान

निकाल कर दिखाने लगी ऑर साथ मे एक हाथ का अंगूठा भी दिखा कर मुझे किसी बच्चे की तरह चिडाने लगी,,,,,

तभी माँ ने फ्रिड्ज खोली ऑर आइस निकाला ली,,,,,चलो तुम दोनो फाइट करो मैं चली उपर,,,,माँ वहाँ से जाने लगी,,

सोनिया कैसी है अब आंटी जी,,ऑर आप आइस लेने क्यू आई,,शोबा दीदी कहाँ है,,,,

बेटा शोबा तो सो गई ऑर सोनिया अब ठीक है पहले से,,अभी जाग रही है,,सोने वाली थी की शोबा ने उसको बता दिया कि तुम आ

गई हो तो अब वो नही सोने वाली,,तेरी वेट कर रही है,,,,,जल्दी आजा उपर,,,,

अभी आती हूँ आंटी जी इस ब्लॅकी को कॉफी देके,,,आप कॉफी पिओगी क्या आंटी जी,,,,,

नही बेटी मैने अभी चाइ पी थी कुछ देर पहले,,,,तुम सन्नी को कॉफी पिलाओ,,,

माँ वहाँ से चली गई,,,,,ऑर कविता मुझे फिर से चिडाने लगी,,,,,देखा मैं भी इस घर की मालकिन हूँ अब ज़रा तमीज़

से बात करने मेरे से,,,,समझे ब्लॅकी,,,,कविता एक हल्के नखरे के साथ बोल रही थी,,,

समझ गया नौकरानी जी,,,,अब जल्दी से कॉफी बना ,,

नौकरानी नही मालकिन हूँ मैं समझा ब्लॅकी,,,,,वो फिर नखरे से बोली,,,,

चल चल बड़ी आई मालकिन,,,मेरे लिए तू नौकरानी है बस ,,,,अब जल्दी कॉफी बना ऑर दे मेरे को,,,

देख अब अगर तूने मुझे एक बार भी नौकरानी बोला तो अच्छा नही होगा समझ गया,,,,,

बोलूँगा एक बार नही हज़ार बार बोलूँगा,नौकरानी ,,नौकरानी,,

देख सन्नी बस कर वर्ना मारूँगी मैं तेरे को,,,वो हाथ को हवा मे उठाके मुझे मारने के लिए आगे आई,,,,

मारेगी मुझे ,,,,,,?? इतनी हिम्मत है क्या तेरे मे,,,,,??

हाँ है हिम्मत तू एक बार ऑर बोल बस नौकरानी मुझे फिर देखना,,,,

अच्छा तो ये बात है ,,,चल बोलता हूँ फिर तो ,,,,देखु तो सही कितनी हिम्मत है तेरे मे,,,,,नौकरानी कहीं की,,,,

मैने अभी बोला ही था कि कविता मेरे पास आ गई ऑर अपने हाथ से मुझे हल्के से थप्पड़ मारने लगी,,तभी मैने अपने एक

हाथ से उसके हाथ को पकड़ लिया,,उसने भी दूसरा हाथ उठा कर थप्पड़ मारने की कोशिश की तो मैने उसके दूसरे हाथ को

भी पकड़ लिया ऑर उसको पीछे की तरफ ले गया ऑर उसको गॅस के पास शेल्व के साथ लगा लिया,,,,,,मैने उसके दोनो हाथों को अपने

हाथों मे पकड़ा हुआ था,,,,वो ज़ोर लगा लगा कर अपने हाथ मेरे हाथ से छुड़वाने की कोशिश कर रही थी लेकिन मैने भी

अपना ज़ोर लगाया हुआ था ,,,,,,

बस इतना ही ज़ोर है,,,नौकरानी जी,,,,,मैने हँसते हुए बोला,,,,

अब अगर नौकरानी बोला तो मैं तेरा वो हाल करूँगी सन्नी,,,अभी उसने बोलना शुरू किया था कि मैने उसकी बात को बीच मे

रोक दिया,,,,,,,,तूने मेरा क्या हाल करना ये तो मुझे नही पता लेकिन अब मैं तेरा क्या हाल करूँगा ये तू देखती जा बस,,,

मैने उसके दोनो हाथों को पीछे करके उसकी पीठ से लगा दिया जिस से मेरे हाथ भी उसकी पीठ पर चले गये ऑर मेरी छाती

उसकी छाती से टच हो गई,,,,इस तरह मैं उसके बहुद करीब हो गया,,,मेरे चेहरा उसके चेहरा से बस 1 फीट दूर था ,,

उसने मुझे इतने करीब से देखा तो शर्मा कर अपने सर को नीचे झुका लिया ऑर इसके साथ ही उसकी हार्ट बीट भी तेज हो गई,,,

उसकी छोटे छोटे बूब्स मेरी छाती से टच करने लगे,,,मेरे बेक़ाबू होने के लिए तो इतना सब ही बहुत था ,,,मैने आगे

बढ़ कर अपने फेस को उसके ऑर भी ज़्यादा करीब कर दिया जिस से मेरी साँसे उसके माथे पर लगने लगी ऑर उसके बाल मेरी सांसो की हवा के कारण हिलने लगे,,,,तभी मैने उसके हाथों को छोड़ दिया ऑर अपने हाथ उसकी पीठ पर रख दिया,,वो एक दम से सिहर उठी,,,,,

ये क्या कर रही हूँ सन्नी ,,,,

मैं उसकी बात का कोई जवाब नही दिया,,,,,

सन्नी छ्छूड्डू मुउज़्झहही क्कू आ जाएगा,उसकी ये बात सुनके मैं थोड़ा हैरान हो गया,,,ऑर अपने फेस को उसके

ऑर ज़्यादा करीब ले गया ऑर अपने एक हाथ से उसकी पीठ को सहलाते हुए दूसरे हाथ से उसके झुके हुए चेहरे को उसकी चिन से

पकड़ कर उपर उठा दिया,,,,,,,,क्या बोला तूने,,कोई आ जाएगा,,,,तुझे किसी के आने का डर है मेरे इतने करीब होने से तुझे

कोई डर नही लग रहा क्या मेरे से,,,,

उसने कुछ नही बोला ,,,बस अपने आँखें दूसरी तरफ करली,,,मैने फिर से पूछा ,,तुझे मेरे से डर नही लग रहा क्या,,,,

नही मुझे तेरे से डर नही लगता,,,,,इतना बोलकर उसने अपने हाथ सामने की तरफ किए ओर मुझे हल्का सा धक्का मार कर पीछे

करने की कोशिश की मैं उसकी इस हरकत को पहले से समझ गया था ऑर मैं उसकी पीठ को अपने हाथ से कस्के पकड़ लिया

जिस से वो मेरे ऑर भी ज़्यादा करीब आ गई,,,,

अच्छा सच मे तुझे मेरे से डर नही लगता,,,,,,मैं हल्की आवाज़ मे बोला,,

उसकी साँसे अभी तक फुल गरम हो गई थी फिर भी वो खुद पर क़ाबू करने मे काफ़ी तेज थी,,,,नही मुझे तेरे से डर नही

लगता पागल ब्लॅकी,,,इतना बोलकर वो मुझे देख कर हँसने लगी,,,,

 


मेरा ध्यान उसकी आँखों की तरफ था जिसमे मुझे हल्की शरारत नज़र आ रही थी लेकिन उसकी हँसी उस से भी ज़्यादा नटखट

लग रही थी,,,,उसके लिए ये सब मज़ाक था लेकिन उसकी तेज ऑर गर्म साँसे मुझे बता रही थी कि वो भी कुछ हद तक गर्म हो

चुकी है लेकिन फिर भी खुद पर क़ाबू कर रही है,,,,,,

अच्छा तो मैं पागल हूँ,,,,,तू मुझे पागल समझती है,,,,,मैं भी मज़ाक मे बोला ऑर उसकी चिन को अपने हाथ से अलग करके

अपने हाथ को वापिस उसकी पीठ पर ले गया ऑर दोनो हाथों से उसको अपने से सटा लिया जिसस से उसके छोटे छोटे बूब्स मेरी

छाती से बुरी तरह से चिपक गये ,,उसके मूह से हल्की अहह निकल गई शायद दर्द की वजह से,,,,,

तुझे पागल क्या समझना तू तो है ही पागल ,,ब्लॅकी,,,,,वो हँसती हुई बोलती जा रही थी लेकिन उसके बोलने का अंदाज़ बता रहा

था कि बोलते टाइम उसकी ज़ुबान उसका साथ नही दे रही थी,,,,लड़खड़ाती सांसो की वजह से उसकी आवाज़ भी लड़खड़ा रही थी,,,,,

ठीक है तो मैं पागल सही ऑर पागल बंदा तो कुछ भी कर सकता है ,,कैसी भी गुस्ताख़ी कर सकता है उसके लिए तो कोई सज़ा

भी नही मिलती उसको,,,,अब मैं भी पागल हूँ तो तेरे से गुस्ताख़ी करने का हक़ है मुझे,,,,इतना बोलकर मैने अपने फेस

को आगे किया तो उसने जल्दी से अपने फेस को टर्न कर लिया ,,मैं भी अपने फेस को उसकी गर्दन की तरफ करके अपने लिप्स उसकी

गर्दन पर रख दिए,,,,,,उसके मूह से एक लंबी अहह के साथ मेरा नाम निकल गया सुउन्न्ञननन्न्नयययययययी,,,,,,,,,,,,,,

मैं उसकी गर्दन पर अपने लिप्स रखे ओर हल्की किस करदी ,,मेरे ऐसा करते ही उसके हाथ जो अभी तक मेरी छाती पर थे वो

जल्दी ही मेरी पीठ पर चले गये ऑर उसने मुझे अपनी बाहों मे जकड लिया ,,,उसके ऐसा करते ही मैं समझ गया कि ये अपने

बस मे नही है,,,गरम हो गई है,,,जवान लड़की के लिए खुद पर क़ाबू करना मुश्किल होता है ऐसी हालत मे,,,मैं उसकी

इस हरकत के बदले मे अपने हाथ उसकी पीठ पर से सहलाते हुए उसकी गान्ड पर ले गया ओर अपने दोनो हाथों से उसको उठाकर

शेल्व पर बिठा दिया,,शेल्व पर बैठते ही उसने मुझे एक बार देखा ओर शरमा कर सर नीचे झुका लिया मैं अपने हाथ

से उसके सर को उपर किया ऑर देखा की उसकी आँखें शरम के मारे बंद थी ,,मैं आगे बढ़ कर अपने लिप्स उसके लिप्स पर रख

दिए,,,वो एक दम से शेल्व पर उछल गई ओर मेरे लिप्स को अपने लिप्स मे जकड लिया,,,,,मैं तो हैरान ही रह गया,,मुझे अभी

एक पल ही हुआ था उसके लिप्स पर अपने लिप्स रखे की उसने मेरे लिप्स को अपने लिप्स मे भर लिया ओर किस करने लगी,,,मैने अपने हाथ

उसकी गान्ड के नीचे से हटा कर उसकी पीठ पर रख दिए ऑर इस से पहले मैं उसकी पीठ को सहलाना शुरू करता उसके हाथ

मेरी पीठ पर चलने लगे,,,मेरी तो एक दम से हालत ही खबर हो गई,,,साला ये क्या हो गया एक दम से,,,मैं तो इसको गर्म करने

की कोशिश कर रहा था लेकिन ये तो पहले से ज्वालामुखी की तरह आग उगल रही है,,,,मैने भी उसको किस का रेस्पॉन्स देना

शुरू कर दिया ओर अपने एक हाथ से उसकी पीठ को सहलाते हुए अपने दूसरे हाथ को उसके सामने की तरफ ले आया ऑर उसकी कमर

को सहलाने लगा,,,,उसके हाथ भी मेरी पूरी पीठ को सहला रहे थे,,,,,

वो मुझे इतने बढ़िया तरीके से किस कर रही थी की मुझे यकीन ही नही हो रहा था,,,,वो मेरे लिप्स को अपने मूह मे भरके

कभी चुस्ती तो कभी हल्के से काट देती तो कभी मेरी ज़ुबान को अपने दाँतों मे भरके अपने मूह मे खींच लेती तो

कभी अपनी ज़ुबान को मेरे मूह मे घुसा देती ऑर हर तरफ घुमाने लगती,,,मैं तो इतना ज़्यादा मस्त हो गया था कि पता नही

कब मेरा हाथ उसके बूब्स पर चला गया और मैने उसके बूब को हल्के से दबा दिया,,,,तभी एक दम से उसने मुझे धक्का

दिया ऑर मैं जाके ज़मीन पर गिर गया वो जल्दी से शेल्व से जंप करके नीचे उतरी ओर किचन से बाहर की तरफ भाग गई लेकिन

वो दरवाजे के पास जाके रुक गई ऑर वही खड़ी होके मुझे देखने लगी,,,,,

उसकी साँसे तेज़ी से चल रही थी ऑर छोटे छोटे बूब्स उपर नीचे हो रहे थे,,,उसकी आँखों मे एक अजीब सी कशिश थी एक

मस्ती थी जिसकी मदहोशी मे वो खो गई थी ,,,उसकी आँखों मे इतना नशा था कि ऐसा लग रहा था उसने ड्रिंक की है,,इधर

मैं भी ज़मीन पर गिरा हुआ था ऑर मेरी हालत भी कुछ ऐसी ही थी,,,उसके सॉफ्ट लिप्स का स्वाद अभी तक मेरे मूह मे था उसकी

सांसो को मैं अभी भी अपने फेस पर महसूस कर रहा था ,,इधर मेरा लंड भी मस्ती मे सर उठाने लगा था जिस पर

कविता का ध्यान चला गया था,,उसने कुछ पल मेरे लंड की तरफ देखा,,,,,

अब जल्दी उठ जा पागल ब्लॅकी ऑर कॉफी लेके उपर आ जाना ,,,वो सांसो पर क़ाबू करके इतना बोली ओर हँसती हुई वहाँ से भाग

गई,,,,,मैं तो साला चाकर खाने लगा था ज़मीन पर बैठा बैठा,,,ये साला क्या हो गया एक दम से,,,इसने वो सब कैसे ,,,

मेरी समझ मे कुछ नही आ रहा था,,,,मैं बस कन्फ्यूज़ सा हो गया था,,,,दिमाग़ खराब कर दिया था उस कविता ने एक

ही पल मे,,,,मैं खुद पर क़ाबू करता हुआ ज़मीन से उठा ऑर खड़ा हो गया,,,,इधर मेरा लंड भी पूरी ओकात मे खड़ा

हुआ था,,,,,,मैं जैसे तैसे कॉफी को कप मे डालके उपर सोनिया के रूम मे लेके गया ,,ऑर मैं उपर तक कैसे पहुँचा

ये मैं ही जानता हूँ,,,,,,ऐसा लग रहा था कि अभी मेरे हाथ से कप नीचे गिर जाने है ओर शायद मैं भी गिर जाउन्गा,,उस

कविता ने मेरी ऐसी हालत करदी थी कि मैं बता नही सकता,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

मैं कॉफी के कप लेके सोनिया के रूम मे गया तो सोनिया लेटी हुई थी जबकि माँ ऑर कविता सोनिया के सर पर कोल्ड वॉटर के टवल

रख रही थी,,,,वो भी सोनिया के पास उसी के बेड पर बैठी हुई थी,,,,

मैं अंदर गया तो कविता मुझे देख कर शरमा रही थी लेकिन सोनिया अभी भी गुस्से मे थी,,,,अब तो मुझे ऐसे लगने

लगा था जैसे उसकी आँखें है ही ऐसी,,,हर दम गुस्से से लाल ही रहती है,,,

अरे बेटा तू कॉफी लेके क्यू ले आया,,तेरी मालकिन ने कॉफी नही बना के दी तुझे,,,,,,इतना बोलकर माँ हँसने लगी साथ मे कविता

भी,,,ऑर हल्की स्माइल सोनिया एक फेस पर भी आ गई ,,लेकिन जब मैं उसकी तरफ देखा तो फिर से मुझे गुस्से से देखने लगी,,,

माँ ये मेरी मालकिन नही नौकरानी है,,,,लेकिन कुछ ज़्यादा ही सर पर चढ़ि हुई है ,,,खुद कोई काम नही करती सब काम मेरे

से करवाती है,,,इतना बोलकर मैं हँसने लगा लेकिन मेरा साथ किसी ने नही दिया तो मैं जल्दी ही चुप हो गया,,,ऑर मेरे चुप

होते सब लोग फिर से हँसने लगे,,,,,

मैं समझ गया भाई लेडीस से तू नही जीत सकता भला इसी मे है कि चुप चाप बैठ जा ऑर कॉफी पी ले,,,,ऑर मैने ऐसा

ही किया ,,,

मैं बैठ गया अपने बेड पर ऑर कॉफी पीने लगा कविता का कप मैने पास के टेबल पर रख दिया,,,,,

माँ सोनिया ऑर कविता अपनी बातों मे लगी हुई थी तो मैने लॅपटॉप ऑन किया ऑर गेम खेलने लगा ,,,सब अपनी मस्ती मे थे

मैने कॉफी ख़तम की ऑर आराम से लेट गया तभी माँ उठी ऑर उठकर रूम से बाहर जाने लगी,,,,अच्छा बेटी अब तुम यही

बैठ कर सोनिया से बात करो मैं थोड़ी देर मे आई,,इतना बोलकर माँ बाहर गई ऑर जाते टाइम सोनिया ऑर कविता की नज़रो से बच

कर मुझे इशारा कर गई नीचे आने का,,,,मैं भी 2 मिनट बाद उठा ऑर नीचे चला गया,,,,,मुझे पता था कविता के आने

से सोनिया के दिल लगा रहेगा ,,शोबा सो चुकी है तो माँ इस मोके का फ़ायदा ज़रूर उठाएगी,,,,ऑर वैसे भी कविता की वजह से

मैं काफ़ी गरम हो गया था या बोलू कि उसने मुझे काफ़ी गर्म कर दिया था,,,,वो मेरी सोच से कुछ तेज निकली,,,,

मैं नीचे गया तो माँ अपने रूम मे थी,,,,,,क्या हुआ माँ मुझे क्यू बुलाया,,,,,माँ अपनी अलमारी से कपड़े निकाल रही थी,,,

कुछ नही बेटा,,मुझे ज़रा मार्केट तक जाना है ये कुछ मेडिसिन लेके आनी है सोनिया के लिए ऑर साथ ही कुछ देर के लिए मुझे

अलका के पास भी जाना है,,,तू भी मेरे साथ चल,,,

लेकिन माँ अलका आंटी तो करण के नाना नानी के पास गई है ,,उसके नाना जी की तबीयत ठीक नही थी,,,,,करण ने बताया था मुझे

गई हुई थी बेटा लेकिन आज ही सुबह कुछ देर पहले वो वापिस आ गई है,,,,अब हमे उसके घर जाना है तेरे लिए एक खुश खबरी

है वहाँ पर,,,,,

क्या खुशख़बरी माँ ,,क्या वो मान गई है मेर साथ मस्ती करने के लिए,,,,,,मैने खुश होके माँ से पूछा,,,,,

मानी तो कब्से हुई है बेटा लेकिन अगर मस्ती करनी ही है तो क्यू ना थोड़ी ज्याद मस्ती के साथ की जाए,,,,थोड़ा तडपाया जाए

थोड़ा तरसाया जाए,,,,मेरे पास एक प्लान है ,,तू बस तैयार होके मेरे साथ चल फिर देख मैं क्या करती हूँ,,,,

मैं तो माँ की बात सुनके खुश ही हो गया,,कविता की वजह से मेरा बुरा हाल था ,,कविता से तो कुछ नही कर सका तो माँ

ने नीचे बुला लिया तो सोचा कि माँ के साथ मस्ती कर लूँगा लेकिन अब माँ ने भी मना कर दिया था,,लेकिन एक अच्छी बात थी कि

अलका आंटी तैयार थी मस्ती करने के लिए,,,मैं तो दिल ही दिल मे सोचने लगा कि जाते ही अलका आंटी को चोदना शुरू कर दूँगा,,

बेड पर नंगी कर लूँगा ऑर घुसा दूँगा अपना मूसल उनकी गान्ड मे,,,,

मैं जल्दी से तैयार हो गया ऑर माँ भी तैयार हो गई,,,,,,माँ उपर जाके कविता को बोल आई कि हम लोग सोनिया के लिए मेडिसिन लेने

जा रहे है ऑर फिर हम दोनो करण के घर की तरफ चल पड़े,,,,,,माँ ने रास्ते मे कुछ नही बताया मैने एक दो बार पूछा

भी कि माँ आपका प्लान क्या है लेकिन माँ कुछ नही बोली,,,,,

कुछ देर बाद हम करण के घर पहुँच गये,,,,मुझे बार बार ऐसा लग रहा था कि अलका आंटी नही आई होगी शायद

माँ का मूड होगा करण ऑर मेरे साथ मिलकर मस्ती करने का ,,ऑर हो सकता है शिखा भी हम लोगो का साथ दे लेकिन जब

हम लोगो के डोर बेल बजने पर अलका आंटी ने गेट खोला तो मैं हैरान हो गया,,,,लेकिन आंटी मुझे देख कर बहुत

खुश हो गई थी,,,,,,

 
माँ आगे बढ़ कर अलका आंटी के गले लग गई ऑर दोनो ने एक दूसरे को हाई हेलो बोला,,,,अलका आंटी जब माँ के गले लग्के बात

कर रही थी तब भी उनका ध्यान मेरी तरफ ही था ,,आज वो कुछ अलग ही मूड मे लग रही थी,,उनकी आँखों मे अजीब चमक

ओर फेस पर एक खुशी थी,,,,माँ के गले से बाहें निकाल कर आंटी मेरी तरफ आई,,,,,

हेलो आंटी जी,,,लेकिन आंटी ने मेरी हाई हेलो का जवाब नही दिया बस सीधा मेरे गले लग गई,,,,,आज आंटी ने नाइटी ही पहनी

हुई थी,,,लेकिन आंटी तो सुबह वापिस आई थी तो नाइटी क्यूँ पहनी हुई थी,,क्या वो रात को वापिस आई थी,,,,मुझे कुछ समझ

नही आ रहा था,,लेकिन आज उनके बर्ताव मुझे कुछ अजीब लग रहा था,,,उन्होने जब मुझे अपनी बाहों मे भरा हुआ था

तब वो मुझे कस्के अपने साथ चिपका रही थी,,,उनके बड़े बड़े बूब्स मेरी छाती से दब गये थे लेकिन फिर भी वो थोड़ा

ज़ोर लगा रही थी,,,,,,मैने भी अपने बाहों को आंटी के जिस्म पर कस दिया ओर आंटी को अपने से चिपका लिया लेकिन तभी माँ

ने मुझे पीछे से हंस कर देखा ऑर ऐसा करने से मना किया तो मैने जल्दी से आंटी को अपनी बाहों से आज़ाद कर दिया ऑर

पीछे हट गया,,,,तभी आंटी ने मुझे हंस कर देखा ऑर वापिस अंदर की तरफ जाने लगी ऑर जाते हुए माँ का हाथ पकड़ कर उनको

भी अपने साथ ले गई,,,,मैं भी पीछे पीछे अंदर की तरफ जाने लगा ऑर मेरी नज़र पड़ी मेरे सामने मटक मटक कर चल

रही 2 भारी भरकम गान्ड पर जो लटके झटके मारते हुए मेरे सामने चल रही थी,,,,क्या बोलू कोन्सि गान्ड ज़्यादा मस्त थी

माँ की या अलका आंटी की,,,,,मेरा बस चलता तो दोनो को नंगी करने अभी गान्ड मे मूसल घुसा देता,,,,लेकिन माँ ने बोला

था कोई जल्दबाजी नही करनी इसलिए मैं क़ाबू कर रहा था खुद पर वर्ना तभी आंटी की गान्ड पर हाथ फेर देता जब

उनके गले लगा हुआ था ,,,,

मैं अंदर गया तो जाके सोफे पर बैठ गये जबकि माँ ऑर आंटी जी सामने वाले सोफे पर बैठ गई,,,,,,

आज कैसे आना हुआ दीदी,,,,,,अलका आंटी ने माँ से पूछा,,,,

कुछ नही अलका मैं तो तेरे पिता जी का मेरा मतलब करण के नाना जी का हाल चाल पूछने आई थी,,,पता चला था शोबा से कि

तुम उनके पास गई हुई हो,,क्या हुआ है उनको,,,

कुछ नही हुआ दीदी बस ओल्ड एज हो गये है तो कुछ ना कुछ प्रोबलम रहती है,,,,मैं गई थी उका हाल चाल पता करने आज सुबह

ही वापिस आई हूँ,,,,,वो करण ने जाना था ना अपने दोस्तो के साथ घूमने,,,,,

मैं साला सोच मे पड़ गया वो किस दोस्त के साथ घूमने गया है,,,,दोस्त तो बस मैं हूँ उसका ,,,,ऑर मुझे ही नही पता वो

कहाँ गया है,,,,,,मैं इतना परेशान था कि आंटी से पूछने ही लगा था कि तभी माँ आने मुझे चुप रहने को बोला,,,,

कहाँ गया है करण अलका,,,,

आपको तो पता होगा दीदी ,,,सन्नी ने बताया होगा,,,,कॉलेज की तरफ से कुछ दोस्त गोआ घूमने जाने वाले थे ,,

हां मुझे बताया था सन्नी ने मैं भूल गई,,,,,माँ ने ऐसा बोला तो मुझे कुछ समझ नही आया ,,कॉन्सा गोआ कोन्से दोस्त

ये सब क्या हो रहा है,,,,,

सन्नी बेटा तुम क्यूँ नही गये गोआ,,,करण भी उदास था तेरे बिना जाने पर,,,,तू चला जाता तो उसको अच्छा लगता,,,

मैं कुछ बोलता इस से पहले माँ बोलने लगी,,,,,ये भी जाना तो चाहता था लेकिन कुछ दीनो मे इनके टेस्ट शुरू होने वाले है

तो मैने सोचा इसको नही जाने देती,,,,वैसे भी पहले ये कुछ दिन गाओं रहके आया था तो बहुत छुट्टियाँ हो गई थी इसकी,,,माँ

ने ऐसा बोला तो मुझे हल्का हल्का समझ आने लगा कि ये सब माँ की प्लानिंग होगी,,,,लेकिन करण कहाँ गया ऑर शिखा दीदी

कहाँ है वो तो आज बुटीक पर भी नही आई,,शोबा दीदी ने बताया था मुझे,,,,लगता है शोबा दीदी को भी इसके बारे मे

कुछ नही पता होगा,,,,

चलो कोई बात नही ये नही गया तो क्या हुआ,,,,,वैसे चला जाता सन्नी भी तो करण खुश हो जाता,,,,वो भी बोल रहा था कि

टेस्ट से पहले कुछ मस्ती करने का दिल कर रहा है ,,,इसलिए मैने भी नही रोका उसको,,,,,

अच्छा बोलो दीदी आपके लिए चाइ लेके आउ या कॉफी ,अलका आंटी ने माँ से पूछा,,,

मुझे कुछ नही लेना अलका,,,थन्क्ष्क्ष्क्ष,,,मैं तो सोनिया की मेडिसिन लेने आई थी तो सोचा तेरे से भी मिलके चलती हूँ,,,सो

यहाँ आ गई,,,,

सोनिया को क्या हुआ दीदी,,,,,अलका परेशान होके बोली,,,,,

कुछ नही गर्मी की वजह से बुखार हो गया है,,,सारा दिन स्टडी की टेन्षन मे खाना पीना भी भूल जाती है अब पेट मे

गर्मी हो गई तो बुखार हो गया,,,,उसके लिए ही आई थी मैं बाज़ार,,,,,

हयी राम इतनी प्यारी बच्ची को बुखार हो गया,,,,घर तो सुना सुना हो गया होगा उसके बिना,,,,

हाँ सही बोला अलका ,,जबसे वो बीमार हुई है घर सुना सुना हो गया है,,,,,कल से हम लोग एक रूम मे ही बैठे हुए है

रात भर तो ठीक से सोए भी नही,,,डॉक्टर ने ठंडे पानी की पट्टियाँ करने को बोला है,,,,बस उसी मे लगे हुए थे,,,ये तो अब

मेडिसिन लेनी थी ओर सोनिया भी पहले से बेहतर हो गई थी ,,,उपर से उसकी दोस्त कविता आ गई तो दोनो बैठ कर बातें करने

लगी,,मैं सोचा अच्छा हुआ कविता आ गई मुझे घर से बाहर आने का मोका तो मिला ऑर वैसे भी दिल बहल जाएगा सोनिया का

जब कुछ बातें कर लेगी कविता से,,,,

दीदी आपका अच्छा है ,,कुछ तो दिल बहल जाएगा लेकिन मेरा तो दिल उदास हो गया है,,,,इधर करण चला गया दोस्तो के साथ गोआ

उधर शिखा बोल रही थी कुछ दिन घर नही आएगी,,,,शोबा के साथ बुटीक पर ही रहेगी कोई बड़ा ऑर्डर मिला है उनलोगो

को,,,उसी के लिए कुछ दिन बिज़ी रहने वाली है ऑर शोबा के साथ ही रहेगी,,,,

ये तो अच्छा है ना,,,काम करेगी तो दिल लगा रहेगा उसका,,,,,

उसका दिल तो लग जाएगा लेकिन मेरा क्या होगा दीदी,,,,मैं तो अकेली हूँ घर पे,,,,,मुझे अकेले रहने की आदत नही है,,

अकेले रहने मे क्या डरना पगली,,,,अच्छा अगर ज़्यादा ही डर लगता है तो बोलो मैं आ जाती हूँ तेरे साथ रहने को जब तक

करण नही आ जाता,,,,,,,माँ ने हंस कर बोला,,

ये ठीक है दीदी,,,,,,,,आप आ जाओ ,,,दिल भी लगा रहेगा ऑर टाइम भी पास हो जाएगा,,,,अलका आंटी ने भी मज़ाक मे बोला,,,,,

नही रे पगली मैं कहाँ आ आसक्ति हूँ,,,,,घर पे इतना काम जो होता है ,,,तेरे घर पे तो काम वाली आती है लेकिन मैने

तो कोई काम वाली भी नही रखी,,अगर रख लेती तो सारा काम वो कर देती ओर मैं सारा दिन बोर होती रहती,,,,अब घर के काम

करती हूँ तो दिल लगा रहता है,,,,,

मैने मन ही मन सोचा माँ तूने काम वाली को इसलिए नही रखा क्यूकी घर मे हर टाइम चुदाई का प्रोग्राम जो चलता रहता

है ,,अगर काम वाली रख लेती तो प्रोग्राम कैसे करती ,,,मामा ऑर विशाल के साथ,,,,,,,,,,,ऑर अब मेरे साथ भी,,,,

मेरे घर भी कहाँ आती है कोई कामवाली ,,एक आती है जो सुबह 9 से 11 तक रहती है,,,,सॉफ सफाई करती है ऑर कपड़े धो जाती है

बाकी किचन का काम तो मैं खुद ही करती हूँ,,,,,वो भी थोड़ा ही काम है बाकी सारा दिन बोर होती हूँ,,,,आप आ जाओ ना

यहाँ रहने दीदी ,,,,,,बस कुछ दिन की बात है जब तक करण नही आ जाता,,,,मेरा टाइम पास हो जाया करेगा,,ऑर सबसे बड़ी

बात की मुझे रात मे अकेले बहुत डर लगता है,,,मैं तो अपने रूम मे भी सोने से डरती हूँ अकेले मे,,,,वो तो बच्चे घर

होते है तो टेन्षन फ्री होके सो जाती हूँ,,,,,,प्ल्ज़्ज़ दीदी आ जाओ ना आप कुछ दिन की बात है,,,,,करण आएगा तो आप चली जाना,,

नही अलका मैं नही आ सकती लेकिन तेरे डर का एलाज़ ज़रूर कर सकती हूँ,,,,,मैं नही तो क्या हुआ ये सन्नी तो है ना,,इसको

अपने घर पे रखले कुछ दिन,,,,फिर तो ठीक है ना,,,,

अब मैं समझ गया सारी बात ,,ये माँ का प्लान था मुझे अलका आंटी के साथ रखने का,,ताकि मैं अलका आंटी को तडपा

तडपा कर मस्ती कर सकूँ,,,,,,लेकिन करण कहाँ गया था,,,,कहीं वो अपनी रितिका के साथ तो नही गया,,,,,

सन्नी को,,,,,,,,,क्या ये रहेगा मेरे घर पे,,,,आंटी ने मेरी तरफ देखते हुए बोला,,,,ऑर मैने माँ से पहले ही जवाब दे दिया

हां क्यू नही आंटी जी अगर आपको डर लगता है तो मैं यहाँ रहने को तैयार हूँ,,,,अगर मेरी माँ अकेली होती तो करण भी

मेरी माँ आके साथ रुकने को तैयार हो जाता तो फिर मैं क्यू नही,,,,

मेरी बात सुनके अलका आंटी खुश हो गई लेकिन मेरी माँ मेरी बात से ज़्यादा खुश लग रही थी,,,,,

हां तो सन्नी बेटा तुम कॉन्सा करण से कम हो ऑर अलका आंटी को अपनी ही माँ समझो ऑर इनके साथ रहो,,ताकि इनको कोई डर नही

लगे ना ही दिन को ऑर ना ही रात को,,,,

थॅंक्स्क्स्क्स सन्नी बेटा मेरे साथ रहने के लिए,,तुम ना होते तो मैं तो अपने ही घर मे डर डर के रहती ,,,,ऑर शिखा को कभी रात को बुटीक पर नही रहने देती,,,,,,

चलो अब तेरी प्रोबलम दूर हो गई अलका ,,अब मैं चलती हूँ,,,,,माँ उठी ओर अलका आंटी को बाइ बोलके जाने लगी मैं भी

साथ मे बाहर की तरफ चल पड़ा,,,,,,

अच्छा अब मैं चलती हूँ अलका ,,,ऑर जितना जल्दी हो सके सन्नी को भेज देती हूँ तेरे घर,,,,,

ठीक है दीदी लेकिन जल्दी भेजना ,,मेरे को अकेले मे डर लगता है,,,,

मैं सोचा जब करण कॉलेज जाता है ऑर शिखा बुटीक जाती है तब किसको रखती है घर पे अपना डर दूर करने के

लिए,,,,साली कामिनी कितनी ओवेरक्टिंग कर रही है,,,,,,

मैं घर से बाहर की तरफ जा रहा था तभी मैं वापिस पलट कर देखा तो अलका आंटी ज़रूरत से ज़्यादा ही खुश लग रही

थी,,,,,,

मैने माँ को साथ लिया ओर वहाँ से चल पड़ा,,,,,,,,,,,,

माँ ये सब क्या था,,,,,,,,ऑर करण कहाँ है,,,,,,

करण शिखा के साथ बुटीक पर है ऑर कुछ दिन वहीं रहेगा,, जब तक तेरी भुआ वापिस नही आ जाती,,,,मुझे कल रेखा

का फोन आया था कि गीता ऑर अशोक कुछ दिन वहीं रुकने वाले है कुछ काम है उन लोगो को वहाँ पर,,,,अब जब तक

गीता ऑर अशोक नही आ जाते तब तक शिखा ऑर करण बुटीक पर ऑर तू अलका के साथ घर पर,,,,,जितनी मर्ज़ी मस्ती करना लेकिन

एक दम से नही थोड़ा तडपा तडपा कर,,,,,,वो तैयार है तेरे साथ सोने के लिए बट ज़रा प्यार से सोना तू,,,,जल्दबाज़ी करके नही,,,,

ठीक है माँ समझ गया,,,,,मैं अभी घर जाके कपड़े लेके अलका आंटी के पास आ जाता हूँ,,,,,,,,,,,,

अभी आ जाना लेकिन बोला है तुझे जल्दबाज़ी मत करना,,,,,क्यूकी तरसाने ऑर तडपाने मे जो मज़ा आता है उसकी बात ही अलग होती है

ठीक है माँ,,,,,,समझ गया अब मैं बच्चा नही हूँ जो बार बार बता रही हो,,,,,,

बच्चा तो है तू मेरा तेरे को समझाना तो मेरा फ़र्ज़ है क्यूकी तू कुछ ज़्यादा ही नटखट हो गया है ,,इतना बोलकर माँ ने

मेरे लंड को हाथ मे पकड़ कर हलके से दबा दिया,,,,,

क्या करती हो माँ हम लोग रोड पर जा रहे है कोई देख लेगा,,,,,तभी माँ ने हाथ पीछे कर लिया,,,,,,क्या करूँ बेटा आज बहुत

खुजली हो रही है,,,,,तेरा मामा भी ठीक नई है 1-2 दिन से,,,पता नही क्या हुआ है,,,,अब तू ही कुछ कर सकता है इस खुजली का,,,

ठीक है माँ घर जाके देखता हूँ कि कितनी खुजली हो रही है,,,,,

लेकिन बेटा घर पे तो सोनिया है ऑर साथ मे कविता भी,,,,,तो घर पे मस्ती कैसे होगी,,,,

तो आप ऐसा क्यू नही करती माँ बुटीक पर क्यू नही चली जाती,,,,,वहाँ तो शिखा ऑर करण भी है,,,,,दोनो के साथ मस्ती

कर लेना,,,,,,

हाँ ये ठीक है बेटा,,,,बड़ी अच्छी बात बोली तूने,,,,,अब जल्दी कर मेरे से रहा नही जाता,,,,,मेडिसिन लेते है फिर तू मुझे

बुटीक पर छोड़ देना ऑर खुद घर चला जाना,,,,ऑर सोनिया को बोल देना कि मैं अलका आंटी के घर पर हूँ ऑर जब कविता

ने जाना हुआ तो मुझे फोन कर देना,,,,,

ठीक है माँ,,,,,,,,,,,,,,,उसके बाद हमने मेडिसिन ली ऑर मैने माँ को बुटीक पर छोड़ दिया ऑर खुद घर आ गया,,,,घर

आके मैं बेल बजाई ऑर दरवाजा खुलने की वेट करने लगा,,,,,तभी मेरा ध्यान गया कि शोबा दीदी की अक्तिवा नही थी घर पे,,

कविता ने आके दरवाजा खोला,,,अरे ब्लॅकी तू अकेला आ गया आंटी जी कहाँ है,,,,,

 


मालकिन साहिबा आप आते ही शुरू हो गई अगर मैं भी शुरू हो गया तो रुकना मुश्किल हो जाएगा,,,,,मैने हँसते हुए बोला तो

कविता भी हँसने लगी लेकिन उसने शरमाते हुए चेहरा भी झुका लिया,,,

अच्छा अच्छा सॉरी बाबा,,,,,,,,लेकिन आंटी जी कहाँ है ये तो बता,,,,,,

माँ अलका आंटी के घर पर रुक गई बोल रही थी थोड़ा काम है,,,,,ऑर बोल रही थी जब तूने जाना होगा तब माँ को कॉल कर देना

ताकि माँ घर पर आ जाए सोनिया के पास,,,,,

मुझे अभी नही जाना मैं तो शाम तक हूँ यहाँ,,घर पे बोलकर आई हूँ,,,वैसे जब जाना होगा मैं कॉल कर दूँगी आंटी

जी को,,

मैं घर के अंदर आ गया ,,,,शोबा दीदी कहाँ है ,,,,कहीं गई है क्या,,,,,,,,

दीदी बुटीक पर चली गई,,,,बोल रही थी ज़रूरी काम है ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

मैं समझ गया ,,,,,,आज तो सब मिलकर मस्ती करने वाले है,,,,,,,,,,करण ऑर शिखा पहले से वहाँ है अब मैं माँ को

भी वहाँ छोड़कर आया हूँ ऑर अब शोबा भी वहाँ चली गई है,,,,,,,लेकिन मैं कन्फ्यूज़ था,,,अलका आंटी के घर जाउ

मैं या घर पे रुकु क्यूकी शाम तक कविता यहाँ पर है,,,अलका आंटी के साथ तो अभी कुछ नही हो सकता आज लेकिन कोशिश

तो आज से शुरू करनी होगी,,,,,ऑर इधर कविता के साथ कोशिश कर चुका हूँ वो शायद तैयार भी हो जाएगी लेकिन सोनिया घर]पे

है ऑर उसने मुझे कविता के साथ देख लिया तो मेरी मौत पक्की है,,,,,,कुछ समझ नही आ रहा था,,,,,मैं सोच मे डूब

गया,,,,

क्या हुआ सन्नी क्या सोच रहे हो तुम,,,,

कुछ नही बस कॉफी पीने का दिल कर रहा है ,,,,क्या तू बना देगी कॉफी,,,,

अभी तो पे थी तूने कॉफी कुछ देर पहले अब फिर दिल करने लगा,,,,,

क्या करू पागल इंसान हूँ मैं ,,,,कॉफी नही पीता तो कुछ ना कुछ गुस्ताख़ी करने का दिल करने लगता है,,,,,

कविता हँसने लगी,,,,वो तो कॉफी पीने के बाद भी करता होगा तेरा दिल,,,इतना बोलकर वो वहाँ से उपर की तरफ चली गई,,,,ऑर जाते

जाते एक जगह रुक गई,,,,,,,,,,लेकिन मैं तुझे गुस्ताख़ी नही करने दूँगी,,,,,,,,याद रखना,,,,,,,वो हस्ती हुई उपर भाग

गई,,,,,,,

मैं भी यहाँ नीचे खड़ा हुआ उसकी तरफ देख कर खुश हो गया,,,,ऑर सोचने लगा कि ये तो लाइन पर आ गई शायद,,,लेकिन

थोड़ी मुश्किल है,,,,,,,,कहीं ये सब मेरे साथ मज़ाक तो नही कर रही,,,,क्यूकी दिखने मे तो ये मासूम लगती है लेकिन जब

मुझे किस किया था तो ये काफ़ी तेज लग रही थी मुझे,,,,,,

खैर अभी इसके साथ कुछ नही कर सकता था मैं,,,,क्यूकी वो उपर भाग गई थी सोनिया के रूम मे ऑर वहाँ तो कुछ हो ही

नही सकता था तो मैं अपने कुछ कपड़े लिए बॅग मे ,मैं रूम मे गया ऑर कविता को बोला,,,,,,,,,,,,कविता मैं कुछ दिन अपने दोस्त के घर रहने वाला हूँ,,,माँ को

मैं बता दिया था ,,,,,अब तुझे बता रहा हूँ तुम बाकी लोगो को बता देना,,,,मैं जब बोल रहा था सोनिया मुझे गुस्से से

ही देख रही थी जैसे हमेशा देखती थी,,,,

मैं वहाँ 4-5 दिन रहने वाला हूँ ऑर वैसे भी यहाँ रहके क्या करूँगा,,,बीमार लोगो की सेवा भी करूँगा तो भी गाली

ही मिलेगी खाने को,,,,,,,मैने इतना बोला तो कविता हँसने लगी लेकिन जब सोनिया ने गुस्से से देखा तो वो चुप हो गई,,,

सच मे जा रहे हो सन्नी,,,,,सोनिया ने हल्की आवाज़ मे बोला,,,,लेकिन मैं उसको बात का जवाब नही दिया,,,,,,,,,,

ओके बाइ कविता,फिर मिलते है,,,,,ऑर हां याद से जाने से पहले माँ को कॉल कर देना,,,,,,मैं इतना बोला तो सोनिया गुस्से मे आ

गई क्यूकी मैं कविता से बात की थी ओर उसकी बात का कोई जवाब नही दिया,,,,,,

ओक्क्क्क कविता ,,बयीई,,,,,,,,,,,,,

बयए सन्नी,,,,,,,,,,

कविता ने मुझे बाइ बोला तो मैं सोनिया की तरफ देखा उसकी आँखों मे गुस्सा था लेकिन चेहरे पर उदासी थी,,,लेकिन उस से

भी ज़्यादा उदास लग रही थी मुझे कविता,,,,,,मन तो नही कर रहा था जाने का क्यूकी कविता थी यहाँ लेकिन भुआ ऑर डॅड के

आने से पहले मुझे अलका आंटी के साथ सेट्टिंग करनी थी वर्ना वो लोग आ जाते ऑर करण को बुटीक पर रहना मुश्किल हो जाता,,,

मेरे पास टाइम कम था तो मैं इन दो खूबसूरत लड़कियों को उदास छोड़के वहाँ से चला गया,,,,

उदास लड़कियों को छोड़ कर मैं चला अलका आंटी के पास ,,मेरे पास दिन बहुत काम थे इन्ही दिनो मे मुझे अलका आंटी

को तड़पाना था तरसाना था ऑर बेड तक लेके आना था,,,ऑर साथ मे खुद भी तड़पना था,,,,,,अलका आंटी भी तैयार थी ऑर मैं तो

कब्से तैयार हूँ लेकिन माँ के कहने पर मुझे ये सब करना पड़ रहा था,,,,पता नही माँ ऐसा क्यू कर रही थी,,,,,खैर

मैं अलका आंटी के घर की तरफ चल पड़ा ,,अभी मैं कुछ दूर ही था कि मुझे किसी की कॉल आई ,,,,,,मैं बाइक को साइड पर रोका

ऑर देखा तो कोई अननोन नंबर से कॉल आ रही थी,,,,,,,मैं कॉल पिक की तो आवाज़ से मैं सामने वाले को पहचान गया,,,,

ये कॉल थी सूरज भैया की,,,,,

हेलो सन्नी,,,,,,,,

हेलो भैया,,,,,,हाउ आर यू,,,,,,

मैं ठीक हूँ सन्नी तुम सूनाओ,,,,,,,,ऑर क्या कर रहे हो आज कल,,,,

मैं भी ठीक हूँ भैया ,,,,,,,कुछ खास नही कर रहा बस बोर हो रहा हूँ,,,,,,,,

अरे हमारे होते हुए बोर होने की क्या ज़रूरत,,,,,,आ जाओ मस्ती करते है,,ना तुमको बोर होना पड़ेगा ऑर ना हमको,,,,

नही भैया अभी नही आ सकता थोड़ा काम है,,,,,,,,फिर कभी,,,,,साला मैं मना तो कर दिया लेकिन मेरा दिल बहुत कर रहा

था सूरज की गान्ड मारने को,,,,ऑर साथ मे भाभी की भी,,,,

अच्छा भाई ठीक है मत आओ,,,,,,,,लेकिन एक छोटा काम तो कर सकते हो हमारा,,,,,ताकि हम तुम्हारी तरह बोर ना हो ऑर खुल

कर मस्ती कर सके,,,,,

क्या काम बोलो अभी कर देता हूँ सूरज भाई,,,,,,,,,,,,,

यार वो जो स्ट्रॅप-ऑन देके गया तू कामिनी को वो बहुत अच्छा लगता है ऑर मुझे भी,,,लेकिन वो पतला बहुत है,,हमे एक दूसरा वाला

चाहिए ,थोड़ा छोटा हो लेकिन थोड़ा मोटा भी हो,,,,,समझ रहा है ना,,,,,

हाँ भैया समझ गया,,,,,मैं अभी कुछ देर मे आता हूँ घर पे ऑर दे जाता हूँ,,,,,,,,ठीक है भैया,,,,

नही घर पे नही सन्नी मेरे ऑफीस मे आना अभी मैं वहीं हूँ,,,

ठीक है भैया अभी आता हूँ,थोड़ी देर मे,,,,,

इसके बाद भैया ने फोन कट कर दिया ओर मैं भी अपने फोन को पॉकेट मे डाला ऑर करण के घर की तरफ चल पड़ा,,,

कुछ देर मे मैं करण के घर पहुँच गया,,,,,

मैं बेल बजाई तो अलका आंटी ने गेट खोला ऑर मुझे देख कर आँखें चमक गई उनकी,,,,वो इतनी ज्याद खुश हो गई कि

पूछो मत,,,,,

आ गये बेटा,,,,,बड़ी जल्दी आ गया तू बेटा,इतना बोलते हुए आंटी ने गेट को ऑर भी ज़्यादा खोल दिया ऑर मैं घर के अंदर जाने

लगा,,,,,,,,,,,,,,

आप बोलो तो मैं वापिस चला जाता हूँ आंटी जी कुछ देर बाद आ जाउन्गा,,,मैं हँसते हुए मज़ाक मे बोला,,,,

अरे नही नही बेटा अच्छा किया तू जल्दी आ गया ,,वैसे तुझे तो ऑर भी जल्दी बुला लेती मैं लेकिन,,,आंटी बोलती हुई चुप कर

गई,,,,

मैं अंदर गया ऑर आंटी भी गेट लॉक करके अंदर आ गई,,,,

कुछ खाने पीने को चाहिए तो बता दे बेटा,,,,ऑर ला ये बॅग मैं करण के रूम मे रख देती हूँ,,,,

आप रहने दीजिए मैं खुद रख देता हूँ आंटी जी,,,,,,आप अपना काम कीजिए ऑर हो सके तो मुझे भी कोई काम बता

दीजिए वर्ना मैं बोर हो जाउन्गा,,,,,,,,,,

अरे तुम तो घर के मेहमान हो ऑर मेहमान से काम नही करवाया जाता बेटा,,,,,,,,,,

ये बता ग़लत है आंटी जी,,,,,,,,,आप मेरी माँ जैसी हो ओर मैं भी तो आपके बेटे जैसा हूँ फिर भला मेहमान क्यू बोल रही

हो आप मुझे,,,क्या आप मुझे अपना बेटा नही समझती,,,,

अरे बेटा गुस्सा क्यू करता है,,,,,,तू तो मेरा रज़ा बेटा है,,,जैसे करण वैसे ही तू,,,,इतना बोलकर आंटी मेरे करीब आ गई ऑर

मुझे बाहों मे भर लिया,,,,,,,,,,मैं भी इसी मोके की तलाश मे था,,,,,,,,,जैसे ही आंटी मे मुझे गले से लगाया मैने भी

आंटी को अपनी बाहों मे जकड लिया लेकिन ज़्यादा ज़ोर नही लगाया क्यूकी माँ ने बोला था जल्दबाज़ी नही करनी,,,,

ऐसा बोल तो दिया था माँ ने लेकिन माँ को क्या पता मेरी इस वक़्त क्या हालत थी ओर मेरे से भी ज़्यादा बुरा हाल तो था अलका आंटी

का,,,,,

अच्छा बता अब मेरा बेटा क्या खाएगा,,,,,,,,,,आंटी ने मेरे से दूर होते हुए पूछा,,,

अभी कुछ नही खाना मुझे आंटी जी,,,,मैं नाश्ता करके आया हूँ घर से,,,,,

अरे बेटा नाश्ता किए तो बहुत टाइम हो गया होगा तुझे,,,,,देख अब तो लंच टाइम हो रहा है,,,,,आंटी ने मुझे वॉल

क्लॉक की तरफ इशारा करते हुए बोला,,,,,,

अभी भूख नही है आंटी जी,,,,,

ठीक है बेटा जब भूख लगे तो बता देना ,,,ओर दिल करे तो खुद ही फ्रिड्ज से कुछ निकाल कर खा लेना,,,शरमाना नही

ऑर इसको अपना ही घर समझना,,,,

जी आंटी जी ,,,,,,,,,,,,लेकिन अभी भूख नही है ,जब भूख लगेगी तो बता दूँगा फिलहाल तो मुझे थोड़ा काम से भी जाना है,,,,,,,,

आंटी उदास होके बोली,,,,,,,,,,,कहाँ जाना है तूने अभी,,,,,

कविता के भाई सूरज के ऑफीस जाना है थोड़ा काम है लेकिन उस से पहले माल मे जाना है कुछ समान लेके आना है,,,,,

जाना तो मुझे भी है माल लेकिन मुझे शाम को जाना है,ठीक है अभी तू जा ,,

अगर आपको भी जाना है तो अभी चलते है साथ मे आंटी,,,,,,,,,,,,,,आप भी शॉपिंग कर लेना ऑर मैं भी अपना काम कर लूँगा,,

ये भी ठीक है बेटा,,,,,,,,चल तू रुक मैं अभी तैयार होके आती हूँ,,,,,,,,,,

मैने मन ही मन सोचा कि तैयार होने की क्या ज़रूरत है आप तो अभी भी एक दम मस्त लग रही हो,,,,आंटी मेरे करीब से

गुजर कर अपने रूम की तरफ जाने लगी गान्ड मटकाति हुई,,,,,,,मैं नोट किया कि आज आंटी कुछ ज़्यादा ही मटक मटक

कर चल रही थी,,,,,पक्का माँ ने बोला होगा ऑर आंटी तभी ऐसे चल रही थी मुझे खुश करने के लिए ताकि मेरा ध्यान जाए

उनकी मटकती गान्ड पर,,,,

मैं करण के रूम मे गया ऑर अपना बॅग वहीं रख दिया फिर बाथरूम मे जाके हल्का सा मूह हाथ धो लिया फिर बाहर

आके सोफे पर बैठ गया लेकिन तभी मेरी नाजर पड़ी आंटी के रूम की तरफ जिसका दरवाजा खुला हुआ था,,,,,,मैने सोचा

कि आंटी दरवाजा खोलकर तैयार हो रही है क्या,,इसी उत्सुकता मे मैं आंटी के रूम के पास चला गया ऑर जैसे ही मैं

वहाँ पहुँचा तो अंदर का नजारा देख कर खुश हो गया,,,,,आंटी ने एक ग्रीन कलर की साड़ी पहनने की तैयारी की थी

लेकिन अभी तक साड़ी पहनी नही थी,,,,सारी से मॅचिंग पेटिकोट पहना हुआ था जो उनके पेट पर बँधा हुआ था नाभि से

हल्का सा नीचे ओर उनका वो पेट देख कर मुझे झटका लगने लगा बहुत तेज मस्ती भरा झटका,,,,आंटी अपने हाथ पीछे

करके ब्लाउस की डोरी बाँध रही थी ,,उनका ब्लाउस पीछे से फुल ओपन था ऑर एक पतली सी डोरी थी जो अभी वो बाँध ही रही थी

उनकी पूरी पीठ नंगी थी जो मेरा दिमाग़ खराब कर रही थी ,,मेरे से क़ाबू नही हो रहा था ओर मैं पता नही कब रूम

के अंदर चला गया,,मेरे कदम खुद-ब-खुद आगे चलने लगे थे,,,,

पता तो मुझे तब चाल जब आंटी की आवाज़ पड़ी मेरे कनों मे,,,,,तुम क्या कर रहे हो यहाँ सन्नी बेटा,,,,

मैं एक दम नींद से जगा,,कुछ नही आंटी जी बस आपको देखने आया था कि आप तैयार होने मे इतना टाइम क्यू लगा रही हो,,

आंटी ने शरमाते हुए नज़रे झुका ली,,,,क्यूकी आंटी अभी भी डोरी को बाँध रही थी,,,उनके हाथ पीठ की तरफ थे,,,

अरे आंटी जी आप शर्मा क्यू रही हो,,भला कोई माँ अपने बेटे से शरमाती है क्या,,,ऑर मैं भी तो आपके लिए करण जैसा

हूँ,,,क्या आप उस से शरमाती हो कभी,,,,

आंटी ने हल्के से शरमाते हुए अपने फेस को उपर किया ऑर मेरी तरफ देखने लगी,,,,उनके हाथ अभी भी उनकी पीठ पर

थे,,,,,,

ओहफू आंटी जी एक डोरी बाँधने मे इतना टाइम,,,,दीजिए मैं बाँध देता हूँ,,,,मैं इतना बोलकर आगे बढ़ा ऑर उनके पास

जाके उनकी पीठ की तरफ चला गया,,,

नही बेटा मैं बाँध लूँगी लेकिन मैं नही माना ऑर डोरी को अपने हाथ मे पकड़ लिया,,तभी आंटी मिरर की तरफ फेस करके

खड़ी हो गई वही हाथ जो अभी उनकी पीठ पर थे वो उनकी छाती पर चले गये ऑर वो छाती को कवर करके मिरर मे खुद

को देख कर शरमाने लगी,,,उनके हाथ छाती पर थे लेकिन फिर भी मुझे उनके बूब्स हल्के हल्के नज़र आ रहे थे

क्यूकी उनके बूब्स थे ही बहुत बड़े बड़े,,,,वो पूरी कोशिश कर रही थी उनको छुपाने की लेकिन इसी कोशिश मे उनके बूब्स

ज्याद उभर कर बाहर निकल रहे थे,,,,,,,आंटी ने मिरर मे पीछे मेरी तरफ देखा तो मैने अपना ध्यान डोरी बाँधने

पर केंद्रित्त कर दिया ऑर अंजान बनके डोरी बाँधने लगा ,,जैसे मेरे मन मे कुछ नही मैं तो बस डोरी बाँध रहा

हूँ लेकिन बीच बीच मे मैं आंटी की तरफ देख लेता था नज़रे बचा कर,,,,जब भी डोरी बाँधते टाइम मेरे हाथ आंटी

की पीठ से लगते तो एक तूफान उठने लगता था मेरे दिल मे,,लेकिन मैं खुद पर क़ाबू करके डोरी बंद रहा था,,लेकिन

आंटी के खुद पर क़ाबू नही हो रहा था ,,,जब भी मेरा हाथ हल्के से उनकी पीठ पर टच करता वो एक दम से सिहर

जाती ऑर शरमाने लगती,,,,मैने जल्दी ही डोरी बाँध दी लेकिन आंटी के लिए वो एक दो पल का टाइम बहुत लंबा था,,,,

 
लीजिए डोरी बँध गई,,अब साड़ी तो आप खुध पहन लोगि ना आंटी जी या उसमे भी हेल्प करू,,,,मैने बहुत सीरीयस होके ये

बात बोली थी ताकि आंटी को कोई शक ना हो,,,

लेकिन आंटी फिर भी शर्मा गई,,,,,नही बेटा तुम जाओ मैं खुद पहन लूँगी,,,,

ठीक है आंटी जी लेकिन जल्दी करना मुझे सूरज भाई की कॉल आई थी फिर से,,,,

ठीक है बेटा तुम चलो मैं 2 मिनट मे आई,,,,फिर मैं बाहर चला गया,,,,

मैं बाहर जाके दरवाजे के पास छुप गया ,,मैने देखा कि आंटी खुद अपनी पीठ पर अपने हाथ घुमा रही थी ऑर

वही मस्ती महसूस करने की कोशिश कर रही थी जो अभी कुछ देर पहले मेरे हाथ लगने से मिल रही थी उनको,,,,

तभी मैने थोड़ी दूर जाके फिर आवाज़ लगाई,,,,,,,जल्दी करना आंटी जी सूरज भाई की कॉल आ रही है,,,,मैने साइड होके देखा तो आंटी ने जल्दी से अपने हाथ झटक लिए अपनी पीठ से ऑर बेड पर पड़ी साड़ी उठा कर तैयार होने लगी,,,,,

कुछ देर मे आंटी तैयार होके बाहर आ गई ऑर मैं बस देखता ही रह गया,लेकिन जल्दी ही खुद पर क़ाबू भी कर लिया,,,,

चलो चले बेटा,,,मैं तैयार हूँ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

मैने दिल ही दिल मे बोला,,,,,,,,कहाँ जाना है आंटी,,,,,बाहर या अंदर बेडरूम मे ,,,,,

तभी आंटी ने अपने हाथ मे पकड़ी हुई चाबी मेरी तरफ की,,,,,,,,,,,,ये क्या आंटी जी,,,,,,,,,ये कार की चाबी है बेटा मेरे से

साड़ी पहन कर बाइक पर नही बैठा जाएगा,,,,,,,,,

शिट यार बाइक पर जो मज़ा आना था वो कार मे कहाँ,,,,,,,,लेकिन फिर भी हम लोग कार मे ही गये,,,,

मैने कार माल की तरफ मोड़ ली ओर कुछ देर मे हम माल पहुँच गये,,,,,,,,,,

मैं आंटी जी को उनकी फवर्ट शॉप पर छोड़ा ओर खुद सेक्स्टाय शॉप पर चला गया,,,,ऑर सूरज भाई के लिए कुछ अलग अलग साइज़ के स्ट्रॅप-ऑन खरीद लिए,,,,फिर वापिस आंटी जी के पास आ गया,,,,,,,,तभी मैं देखा कि आंटी जी ने भी शॉपिंग करली थी,,,

अरे इतनी जल्दी आपकी शॉपिंग हो भी गई,,,,,मैं हैरान हो गया,लॅडीस की शॉपिंग वो भी इतनी जल्दी,,,,

हां बेटा कुछ खास नही लेना था बस थोड़ा ही समान था,,,,तभी आंटी का फोन बजने लगा,,,,,

हेल्ल्लो,,,,

हां वो समान ले लिया,,,,,इतना बोलकर आंटी ने फोन कट कर दिया,,,,,

किसका फोन था आंटी जी,,,,

कुछ नही बेटा मेरी एक फ्रेंड का था उसने कुछ समान मँगवाया था उसी के बारे मे पूछ रही थी ले लिया या नही

ओके आंटी जी,,,,,अब चले या कुछ ऑर भी लेना है,,,,,,,,,,

नही बेटा जो चाहिए था ले लिया अब चलते है,,,,,साला ऐसा क्या लेना था जो कुछ ही देर मे शॉपिंग हो गई आंटी की,,,

खैर हम लोग वहाँ से चले ऑर सूरज भाई के ऑफीस आ गये,,,,,,,,

आप यहीं रूको आंटी जी मैं अभी आया,,,,मैने कार को साइड पे पार्क किया ओर कार स्टार्ट रखके एसी ऑन करके सूरज के पास चला गया ऑर उसका समान भी अपने साथ ले गया,,,,

मैं अंदर गया तो एक लड़की बैठी हुई थी ,मैने उस से सूरज भाई के बारे मे पूछा तो उसने टेलिकॉम से फोन किया ऑर

सूरज भाई को मेरे बारे मे बताया फिर उस लड़के ने मुझे ऑफीस की तरफ इशारा किया ऑर मैं अंदर चला गया,,,

सामने सूरज भाई बैठे हुए थे ऑर उनके साथ एक ऑर बंदा बैठ हुआ था,,,जो मुझे जाना पहचाना लग रहा था

हेलो भैया,,,,,,,,

हेलो सन्नी,,,,,,,,,,

सर ये सन्नी है ,मेरी बेहन कविता के साथ ही कॉलेज मे पढ़ता है,,,,,,,,,,,,,सूरज ने अपने पास बैठे हुए आदमी को

मेरे बारे मे बोला,,,,,मैं उसी आदमी के पास जाके उसको हेलो बोलके उसके साथ वाली चेयर पर बैठ गया,,,,

इस से पहले कोई कुछ बोलता मैं बोल पड़ा,,,,,,,,,,,,

एक्सक्यूस मे सर मैने आपको कहीं देखा है,,,,,,,याद नही आ रहा कहाँ देखा है बट देखा ज़रूर है,,,,,

सन्नी ये इनस्पेक्टर वहीद ख़ान है,,,,,मेरे अच्छे दोस्त है,,,,

हां बेटा देखा होगा मुझे ,,मैं तुम्हारे कॉलेज मे बहुत बार आया हूँ,,,,,,,किसी काम के सिलसिले मे ,,,,लेकिन वो काम

कभी नही बना,,,,,,,,

तभी मुझे याद आया कि ये तो वही पोलीस वाला है जो उन लड़कियों की ख़ुदकुशी की इन्वेस्टिगेशन करने आया था हमारे

कॉलेज मे ,,,

कॉन्सा काम सर,,,,,मुझे भी बता दीजिए,,,,,

छोड़ बेटा बहुत पुरानी बात है,,,,,,,अब तो उस केस की फाइल भी बंद हो चुकी है,,,,,लेकिन मैं अभी तक नही भुला उस केस

को अभी भी वो केस मेरे माइंड मे घूम रहा है,,,

किस केस की बात कर रहे हो आप सर,,,,,,,

तभी सूरज बोला,,,सन्नी कुछ टाइम पहले तुम्हारे कॉलेज मे एक ही वीक मे 2 लड़कियों ने कॉलेज की छत से कूद कर अपनी जान दी थी,,,उसी केस की इन्वेसिगेशन ख़ान साहब ही कर रहे थे,,,,लेकिन ना तो कॉलेज की तरफ से कोई सबूत मिला ऑर ना ही कोई ऐसी बात पता चली जिस से साबित हो कि ये शूसाइड थी,क्यूकी वो लड़कियाँ बहुत होनहार थी ऑर अच्छे घर की थी,,,,,,स्टडी या फिर ऐसी वैसी कोई टेन्षन नही थी,,,,

ओह्ह अच्छा उन लड़कियों की बात कर रहे हो आप,,,,,,,,,,तभी मैं बोलू कि आपको पहले भी कहीं देखा है,,कुछ पता चला

कि नही सर उनके बारे मे,,,,,,,,

नही बेटा,,,अभी कुछ पता नही चला,,,,,,,बहुत कोशिश की तो एक गवाह मिला था लेकिन ऐन मोके पर वो भी अपने ब्यान से

पलट गया,,,,,,,,तभी तो केस फाइल बंद हो गई ,,,,

किसका नाम लिया था उसने सर,,,,

छोड़ो बेटा अब क्या फ़ायदा,,,,,,,,,,,

नही सर बोलो शायद मैं आपकी कुछ हेल्प कर सकूँ,,,,,,,

अच्छा ऐसी बात है तो सुनो,,,,,,,,,लड़कियों ने आत्महत्या नही की थी,,,उनको मजबूर किया गया था,,ऑर जिन लोगो ने मजबूर किया था वो किसी अमीर पॉलिटीशियन के बेटे थे,,,,जब तक मैं उनकी गिरेबान तक जाता एक तो मेरा गवाह मुकर गया ऑर उपर से उनलोगो ने अपना ज़ोर लगा कर मेरा तबदला करवा दिया,,,

क्या नाम थे उन लोगो एक सर,,,,,,,,,,,

 


अभी तो याद नही लेकिन तुम लोगो के कॉलेज के बिगड़े हुए लड़के थे वो,हर कोई डरता था उन से,,,,,,,,कोई उनका नाम नही

लेता था यहाँ तक कि प्रिन्सिपल भी नही,,,,,

ऐसे तो 2 ही लड़के है सर,,,,,,,,,,,,एक तो अमित ऑर दूसरा सुरेश,,,,,,,,,,,,,,,,

हां बेटा बिल्कुल सही,,,यही नाम था उनका,,,,,,,,,,,मैने देखा कि इनस्पेक्टर ख़ान की आँखों मे खून उतर आया था उनका

नाम सुनके,,,,,,,,,तुम कुछ जानते हो उनके बारे मे या उन लड़कियों के बारे मे,,,,,अगर जतने हो तो बोलो,,,,,,,मैं वापिस इस

सहर मे आ गया हूँ,अगर तुम जानते हो तो बताओ मुझे,,,,,हो सकता है मैं तुम्हारी हेल्प से उन फाइल्स को री-ओपन कर सकूँ,,,

री-ओपन करके क्या होगा ख़ान सर,,,,,,बहुत पोलीस वाले आए ओर गये,कोई कुछ नही कर सका,,,,,,,हर कोई दवाब मे आके या तो नोकरी छोड़ जाता है या शहर छोड़ जाता है,,,,,,,,,,अभी कुछ दिन पहले भी उनलोगो ने एक लड़के को बहुत मारा था,,,,पोलीस भी आई थी ,लेकिन कुछ नही हुआ ,जब प्रिन्सिपल से पता चला कि वो लोग किसके बेटे है तो पोलीस ने कुछ नही किया ऑर चुप चाप वहाँ से चली गई,,,,अगर मैं आपकी हेल्प करूँगा तो क्या गारंटी की आप उन लोगो को उनके किए कि सज़ा दोगे ,,अगर आप फिर से डर कर भाग गये तो,,,,

मेरे ऐसा बोलते ही सूरज मुझे घूर्ने लगा ऑर चुप रहने को बोलने लगा,,,,

लेकिन मैं चुप नही किया क्यूकी मेरी आँखों मे भी खून था गर्मी थी एक जुनून था ,मैं भी उनलोगो को उनके किए की

सज़ा देना चाहता था,,,,,,,,,,,,,,

तुम ठीक कह रह हो सन्नी बेटा,,,,हो सकता है पोलीस उन लोगो से डर जाए उनके दवाब मे आ जाए,,,,,,,लेकिन ये मत भूलो कि मैं एक मुसलमान हूँ अपने वादे का पक्का हूँ,,,,,,,,वादे के लिए जान भी दे सकता हूँ,,,,,ऑर रही बात अपनी बात से

मुकरने की तो एक पोलीस वाला होने की खातिर मैं डर के पीछे हट भी सकता हूँ लेकिन एक भाई होने की खातिर मैं उनलोगो को जब तक उनके किए की सज़ा नही दूँगा तब तक मेरी बेहन की रूह को चैन नही मिलना,,,,,,ये सब बोलते टाइम इनस्पेक्टर ख़ान अपने दाँतों को मसल रहा था ऑर उसकी आँखों मे खून उतर आया था,,,,,,,,,,,,,,

मैं ये सब सुनकर एक दम से खामोश हो गया,,,,,,,,क्या उनमे से एक लड़की आपकी बेहन थी,,,,मैने बड़े उदास स्वर मे

पूछा तो ख़ान साहब की आँखें नम हो गई,,,,,,,,,,

हां सन्नी बेटा,,,इसलिए तो बोल रहा हूँ कि अगर तुम कुछ जानते हो तो मुझे बता दो,,,,,,मैं वादा करता हूँ उनलोगो का

वो हाल करूँगा कि उनकी रूह तक काँप उठेगी ,,,,

ऐसी बात है तो ठीक है ख़ान सर,,,,,मैं आपका साथ हूँ,,,,,,मुझे पता है उन लोगो तक कैसे पहुँचना है,,,,,आप बस

मुझे कुछ दिन की मोहलत दीजिए,,,,मैं उनके खिलाफ पक्के सबूत दे दूँगा आपको,,,,,

मेरी बात सुनके ख़ान साहब खुस हो गये,,,,अगर तूने ऐसा कुछ कर दिया तो ये ख़ान तेरा एहसान जिंदगी भर नही भूलेगा

सन्नी,,,,,,,ख़ान साहब ने मेरा हाथ पकड़ा ऑर चूम कर अपनी आँखों से लगा लिया,,,,,

मैने उनसे वादा किया कि ये पंजाबी भी आपका साथ ज़रूर देगा ख़ान साहब ,,,उन लोगो को उनके किए की सज़ा ज़रूर मिलेगी,,

मैं वहाँ से उठा ओर सूरज भाई का बॉक्स वही टेबल पर रखा ऑर वहाँ से चला गया,,,मैं बहुत गुस्से मे था ,,,क्यूकी मैं

अभी उस बेहन के भाई से मिला था जिसके साथ अमित ऑर सुरेश ने कुत्तों जैसी हरकत की थी,,,,मेरा खून खौल रहा था

मैं अभी सूरज एक ऑफीस से बाहर ही निकला था कि पीछे से आवाज़ आई,,,,,,रूको सन्नी ,,,,,,,,,

मैने पीछे मूड कर देखा तो ख़ान साहब मेरे पीछे ही आ रहे थे,,,,,,,,,,,,,,ज़रा बात सुनो सन्नी,,,,,,,,

वो मेरे पास आए ऑर मेरे शोल्डर पर हाथ रखके मुझे एक साइड पर ले गये,,,,,,

देखो सन्नी ,,,,,मैं एक पोलीस वाला हूँ लोगो की आँखें रीड कर लेता हूँ,,,,,,मुझे तेरी आँखों मे एक जुनून नज़र

आया है,मुझे लगता है उन लोगो ने तेरे साथ भी ज़रूर कुछ किया है या तेरे किसी चाहने वाले के साथ ऑर जितने विश्वास से तू बोल रहा है मुझे सबूत देने के लिए तो मुझे लगता है तेरे पास कुछ ना कुछ खबर तो है,,,,,सच बोलना सन्नी,,

ख़ान साहब की आँखों मे एक उम्मीद थी,,,,सच की उम्मीद,,,,,,,,,

अपने सही सोचा ख़ान साहब,,,,,,,मेरे पास कुछ ऐसा है कि जो आपको दे दूँगा तो ओं लोगो की फाँसी पकई है,,,,,,,

क्या है सन्नी अभी दो मुझे जल्दी,,,,,,,,,,,,,ख़ान साहब पूरे जोश मे बोले,,,,

नही ख़ान साहब ऐसे नही,,,,,,,,,,ऐसे सब गड़बड़ हो सकता है,,,मेरे पास एक प्लान है,,,,,,,,,,,जो कितना कामयाब होगा ये

डिपेंड करता है सुरेश अमित ऑर उनके एक दोस्त सुमित पर,,,,मैने सारी बात ख़ान साहब को बता दी,,,,सीडीज़ के बारे मे भी

ख़ान साहब की आँखों मे गुस्सा इतना ज़्यादा था कि उनका बस चलता तो अभी अमित ऑर सुरेश को गोली मार देते,,,,

तुम्हारे पास वो सीडीज़ कैसे आई सन्नी,,,,,,,,,,ख़ान साहब ने मेरे से पूछा,,,,

तो मैने शुरू से लेके सारी बात बता दी ख़ान साहब को,,,,,,करण क़ी बेहन शिखा के साथ जो हुआ ऑर कहाँ हुआ,,,ऑर सीडीज़ के बारे मे भी बता दिया,,,,,

मेरे पास एक प्लान है ख़ान साहब जिस से साँप भी मर जाएगा ऑर लाठी भी नही टूटेगी लेकिन वो प्लान कामयाब होगा उन्ही लोगो की वजह से ,,,,अमित ऑर सुरेश की वजह से,,,,,,,,,,,बस तब तक हमे थोड़ा वेट करना होगा,,,,,

मैं समझ सकता हूँ सन्नी,,,,,,,,,इतना टाइम वेट किया तो थोड़ा ऑर सही ,,अब मैं भी तेरे साथ हूँ ,,,कुछ काम हो तो

मुझे याद करना,,,,,ये ख़ान दोस्ती के लिए कुछ भी करने को तैयार रहता है,,,,,इतना बोलकर ख़ान साहब अपने पोलीस वाले

अंदाज़ के साथ वहाँ से चले गये लेकिन उनकी आँखों मे पोलीस वाला गुस्सा नही था एक भाई वाला गुस्सा था,,,

 
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