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कहीं वो सब सपना तो नही complete

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वो लोग जब मेरे से मार पीट कर रहे थे तो साथ साथ मेरी तलाशी लेने की कोशिश भी कर रहे थे,,,

हो ना हो वो सीडी की तालश मे थे,,,,

मुझे गुस्सा तो था उन लोगो पर लेकिन वो लोग कोई आम लोग नही थे पेशेवर गुंडे लग रहे थे,,,इसलिए

कोई पंगा नही करने की जगह मैं करण के घर की तरफ चल पड़ा,,,,

करण के घर पहुँचा तो करण मेरा हुलिया देख कर डर गया और फिर गुस्से मे बोला,,,,ये क्या हुआ भाई

,,,,किसने तेरा ये हाल किया भाई

कुछ नही भाई,,,,बस छोटा सा आक्सिडेंट हो गया था,,,,इस से पहले वो कुछ बोलता मैने उसको चुप करवा

दिया,,,

चल अब जल्दी तैयार हो जा और चल मेरे साथ,,,,

लेकिन भाई अपना हाल तो देखो आप,,,,,,,उसने मेरी तरफ इशारा करते हुए बोला,,,मुझे कोई चोट तो नही

लगी थी लेकिन उन लोगो से फाइट करते हुए मेरे कपड़े फॅट गये थे,,,,

अबे धीरे बोल शिखा या अलका आंटी ने मुझे ऐसी हालत मे देखा लिया तो पंगा हो जाना है,,,और बात मेरे घर

पहुँच जानी है,,,,

भाई उनको पता नही चलना,,वो दोनो घर से चली गई है,,,,,जहाँ आपने बोला था ,,,बस मैं तेरा इंतेज़ार

कर रहा था,,,,

अच्छा किया तूने उनको भेज दिया,,वैसे भी वहाँ बहुत सारी तैयारी करने वाली होती है,,,वैसे माँ से तूने बात

की थी या दीदी ने,,,,

मैने तो दीदी को बोला था लेकिन दीदी ने माँ को बता दिया,,और अभी आपके आने से 2-3 मिनट पहले ही वो गई है

घर से,,,,

चल अब तू भी जल्दी तैयार हो जा,,,अपने पास ज़्यादा टाइम नही है,,,और मुझे भी एक टी-शर्ट दे अपनी,,अब तेरी

शादी मे फटी हुई टी-शर्ट पहनकर थोड़ी जाउन्गा मैं,,,मैने हंस कर मज़ाक मे बोला,,,

'

हम दोनो घर से तैयार होके अपने रास्ते चल पड़े,,,,

करीब 2-3 अवर्स के बाद मैं करण के साथ कोर्ट रूम पहुँच गया ,,,,मैने अमित के बाप को भी

फोन करके यहीं आने को बोल दिया था,,,

ये कोर्टरूम स्पेशल मॅरेज करवाने के लिए ही बना हुआ था और यहाँ जो बंदा बैठा हुआ था वो ख़ान

भाई का भरोसे वाला बंदा था जो लीगल मॅरेज करवाता था,,,

मैं और करण वहाँ पहुँचे तो अमित ,,अमित का बाप,,,सुरेश और सुरेश का बाप सब लोग यहाँ मौजूद

थे,,उन लोगो के साथ कोई भी बॉडीगार्ड नही था कोई गन्मन नही था,,,,क्यूकी मैने ही बोला था उन लोगो

को ऐसा करने को,,,,

मैं जैसे ही वहाँ पहुँचा अमित और सुरेश करण और मेरी तरफ गुस्से से घूर्ने लगे,,,

सुरेश का पैर टूटा हुआ था और वो व्हील्चैर पर बैठा हुआ था,,,,

तभी अमित का बाप बड़े प्यार से आगे बढ़ कर मुझे मिलने आया,,,,मैने भी उनको नमस्ते बोला और उनसे

हाथ मिलाया,,,

अमित का बाप तो आगे बढ़ कर बड़े प्यार से करण के गले लग्के भी मिला,,,,और उसके इशारे से रितिका का बाप

भी बड़े प्यार से आगे बढ़ कर करण के गले लग्के मिला ,,,,

अरे बेटा यहाँ क्यूँ बुला लिया हमको,,,शादी तो मंदिर मे करवानी थी ना करण और रितिका की,,,

जी अंकल जी,,,लेकिन करण बोला कि उसको मंदिर मे नही कोर्ट मे शादी करनी है,,,,मंदिर की शादी को कोई

मानेगा या नही लेकिन कोर्ट की शादी को तो हर कोई मानेगा ना,,,मैने इतना बोला तो सुरेश का बाप और अमित

का बाप दोनो गुस्से से दाँत पीसने लगे,,,,

क्यूँ यहाँ कोई पंगा है क्या शादी करवाने मे अंकल जी,,,

अरे बेटा कोर्ट की शादी भी कोई शादी होती है क्या,,,,शादी तो मंदिर मे होती है,,,,पूरे रीति-रिवाज़ के साथ

वैसे तो शादी पूरी शान से होती है लेकिन ये शादी तो तुमको पता है किस वजह से हो रही है,,इसलिए कम

से कम मंदिर मे होती शादी तो अच्छा था,,,,

अरे अंकल जी छोड़िए ना ,,आप भी कहाँ मंदिर और रीति-रिवाज़ के चक्कर मे पड़ गये,,आज कल का ज़माना

मॉडर्न है और शादी भी मॉडर्न ही होती है,,,,,,जस्ट 2-3 साइन किए और हो गई शादी,,,,

अच्छा बाकी बातें बाद मे अंकल जी पहले ये बताए कि रितिका कहाँ है,,,वो नज़र नही आ रही,,,मैने थोड़ा

हंस कर पूछा तो वो लोग थोड़ा सहम सा गये,,,,

अरे बेटा वो यही है,,,कार मे बैठी हुई है,,,तुम बोलो तो अभी बुला लाता हूँ उनको,,,,लेकिन तुम पहले

ये बताओ कि वो सीडी कहाँ है,,,,

आप रितिका को बुलाओ सीडी भी अभी मिल जाएगी अंकल जी,,,,

तभी अमित के बाप ने अमित को इशारा किया और उसने अपने मोबाइल से किसी को फोन किया,,,,कुछ ही देर मे

2 लड़कियाँ उस कोर्टरूम मे आ गई,,,,वो दोनो लड़कियाँ अपने साथ एक और लड़की को लेके आई थी जो सर से पैर

तक दुल्हन की तरह सजी हुई थी,,,बस उसका चेहरा ढँका हुआ था,उसने सर पर पल्ल्लू लिया हुआ था अपने ही

दुपट्टे से,,,,,

वो लड़कियाँ अंदर आ गई और उनके आते ही अमित ने दरवाजा बंद कर दिया,,,,

लो आ गई बेटा रितिका,,,अमित के बाप ने बड़ी खुशी से बोला,,,

क्या ये रितिका है अंकल जी,,,,लेकिन इसने चेहरा क्यूँ छुपा कर रखा हुआ है,,,इतना बोलकर मैं आगे बढ़ा और

उस लड़की के सर से दुपट्टा हटाने लगा,,,तभी अमित के बाप ने आगे बढ़ कर मेरा हाथ पकड़ लिया,,,,,

अरे नही बेटा,,,ऐसा नही करते,,,शादी से पहला दुल्हन का मुँह देखना अपशकुन होता है हम लोगो

मे,,,,एक बार शादी होने दो फिर देखते रहना इसका मुँह,,,,

मैं हंस कर पीछे हो गया,,,क्यूकी मुझे पता था ये रितिका नही थी...,कोई और थी,,,,

ठीक है अंकल जी जैसा आप चाहो,,,,तो शादी का काम शुरू करे,,,

इतनी भी क्या जल्दी है,,,ये बात बोली अमित ने और आगे बढ़ कर हम लोगो के पास आ गया,,,,

शादी भी हो जाएगी लेकिन पहले ये बताओ कि वो सीडी कहाँ है,,,,अमित थोड़ा गुस्से मे बोला,,,

तभी अमित के बाप आगे बढ़ कर ,.,,,,,,सन्नी बेटा अमित के कहने का मतलब है कि एक बार हमे भी वो सीडी

दिखा दो ताकि हम लोगो को भी यकीन हो जाए कि सीडी तुम्हारे पास है,,,,

आप बेफ़िक्र रहिए अंकल जी,,,,सीडी यहीं है मेरे पास,,,,,

तुम्हारे पास मतलब ,,अभी तुम्हारे पास है सीडी,,,,तुम्हारी पॉकेट मे है क्या,,,,,

अमित ने खुशी से इतना बोला और अपने फोन को कान पर लगा कर हमसे दूर होकर किसी से बात करने लगा,,,,,,

जबकि मैं अमित एक बाप से बात कर रहा था,,,,

अभी हम लोग बात ही कर रहे थे कि तभी कोर्ट रूम के दरवाजा खुला और ???

ये लोग तो वही थे जिन लोगो से मेरा सुबह आक्सिडेंट हुआ था,,,इस से पहले मैं कुछ करता उन लोगो ने

आगे बढ़ कर मुझे पकड़ लिया,,,,,सुबह वो लोग 4 थे लेकिन अभी वो 6 लोग थे,,,,,4 लोगो ने आगे बढ़ कर मुझे

पकड़ लिया,,,,,

करण ने आगे बढ़ कर उनको हटाने की कोशिश की लेकिन तभी 2 लोगो ने करण को भी पकड़ लिया,,,,,

उनमे से एक आदमी ने मुझे गालियाँ देनी शुरू करदी,,,,,,,,,,साले सुबह आक्सिडेंट करके भाग गया था,,,जो

नुकसान हुआ वो क्या तेरा बाप देगा,,,,उस आदमी ने मुझे कस के एक थप्पड़ मारा तभी अमित ने आगे बढ़ कर

उस आदमी को पकड़ लिया,,,,

क्यूँ मार रहे हो इसको,,,,क्या किया है इसने,,,,,अमित ऐसे बोल रहा था जैसे वो मेरा साथ दे रहा था,,,

उस आदमी ने अपनी पॉकेट से एक पिस्टल निकाली और अमित एक तरफ कर दी,,,अमित जल्दी से पीछे हो गया,,,,,देख

भाई तेरे से मेरा कोई झगड़ा नही है,,,इस लड़के ने सुबह मेरी बाइक से टक्कर लगा दी थी और मेरी बाइक का

नुकसान करके वहाँ से भाग गया था,,,,,हमे कोई लफडा नही करना बस ये हमको हमारे नुकसान के

पैसे दे दे,,,,हम लोग यहाँ से चले जाएँगे,,,,

तभी उस कोर्ट के वकील ने भी उन लोगो को रोकने की कोशिश की लेकिन उन लोगो ने उसकी तरफ भी अपनी पिस्टल

तान दी और वो बेचारा अपनी चेयर पर वापिस बैठ गया,,,,मैने भी उनको इशारा कर दिया था चुप-चाप

बैठने के लिए,,,,

वो अभी बोल ही रहा था,,, करण ने ज़ोर लगाकर खुद को छुड़वाने की कोशिश की लेकिन मैने उसको मना कर

दिया और इशारा किया चुप-चाप खड़े रहने को,,,

देख भाई वो मेरी ग़लती नही थी,,,,तू ही रेड लाइट क्रॉस करके मेरे से टकरा गया था,,,मैं फिर भी तेरा

नुकसान भरने को तैयार हूँ,,,बता कितना नुकसान हुआ तेरा,,,,,

मैने अभी बोला ही था कि उस आदमी ने मुझे कस के 2-3 थप्पड़ लगा दिए,,,,,तू अपनी बकवास बंद रख

लड़के ,,और जो नुकसान हुआ है वो तो मैं लेके ही जाउन्गा,,,,सुबह तो तू भाग गया था और अब यहाँ पर मेरा

एक भाई काम करता है जिसने सुबह तुझे देख लिया था मेरे से फाइट करते,,उसी ने फोन करके मुझे बताया

है कि तू यहाँ है,,,,इसलिए मैं यहाँ आया हूँ तेरे से नुकसान के पैसे लेने,,,

फिर उस आदमी ने मेरी तलाशी लेनी शुरू की,,,,फिर सर से पैर तक मेरी तलाशी लेके उसने करण की तलाशी ली

और फिर मेरी पॉकेट से मेरा वॉलेट निकाला और उसमे जितने भी पैसे थे सब निकाल लिए,,,लेकिन फिर भी वो

मेरी तलाशी लेने लगा,,,,,

फिर जब उसको कुछ नही मिला तो उसने पैसे अपनी पॉकेट मे डाले और वॉलेट को ज़मीन पर फैंक दिया और

गुस्से से बोलता हुआ वहाँ से जाने लगा,,,,,इस बार तो पैसे लेके छोड़ रहा हूँ अगली बार ग़लती से मेरे से

टकरा गया तो टाँगें तोड़ दूँगा ,,,याद रखना,,,,,,वो गुस्से से मुझे इतना बोलता हुआ वहाँ से जाने लगा और

जाते हुए उसने ना मे सर हिलाकर अमित के बाप को कुछ इशारा भी किया,,,,,

 
उन लोगो को लगा कि मुझे कुछ पता नही चला लेकिन मैने सब कुछ देख लिया था,,,

फिर वो सब लोग गुस्से से बोलते हुए वहाँ से चले गये,,,,,,करण ने उन लोगो के पीछे जाने की कोशिश की लेकिन

मैने करण को रोक दिया,,,,लेकिन तभी मैने उस कोर्टरूम के पीओन को जो दरवाजे के बाहर खड़ा हुआ था

उसको उन लोगो के पीछे भेज दिया,,,

ये लोग कॉन थे बेटा,,,,इतना बोलते हुए अमित का बाप मेरे पास आया और बड़े प्यार से मेरे से पूछने लगा,

ज़्यादा ज़ोर से तो नही मारा तुमको बेटा,,,,

तभी अमित गुस्से से,,,,,,,,,अगर पिस्टल नही होती उनके पास तो एक-एक का सर फोड़ देता,,,,

गुस्सा मत कर अमित भाई,,,,और मुझे कुछ नही हुआ,,,बस हल्के हल्के हाथ लगे है 2-4,,,,इतने से मुझे कोई

फ़र्क नही पड़ता,,,,,

चलो छोड़ इन बातों को अब हम लोग अपना काम करते है,,,,जो करने आए थे,,,,

वो तो हो जाएगा बेटा लेकिन पहले वो सीडी तो पता चले कहाँ है,,,,अमित का बाप फिर से सीडी के पीछे पड़ गया

था,,,,

सीडी भी यहीं है अंकल जी,,,,मेरे पास,,,,बस शादी हो जाए तो सीडी भी दे दूँगा आपको,,,,

अमित के बाप को पता था सीडी मेरे पास नही है क्यूकी अभी वो आदमी मेरी पूरी तलाशी लेके गया था और साथ

मे करण की भी,,,उसको हम लोगो के पास कोई सीडी नही मिली थी,,,

नही बेटा पहले सीडी के दर्शन करवा दो फिर होगी शादी,,,

सिर्फ़ सीडी के नही पहले तो आप लोगो को किसी और चीज़ के दर्शन करवाने है अंकल जी,,,इतना बोलकर मैं कोर्ट

रूम से एक ऑफीस की तरफ गया जो ऑफीस उसी वकील का था,,,मैने ऑफीस का दरवाजा खोला और तभी करण

की मोम और शिखा उस ऑफीस से कोर्टरूम की तरफ आ गई,,,,,शिखा को देखकर अमित थोड़ा सकपका गया ,,

लेकिन जो लोग उसके बाद कोर्ट रूम मे आए उनको देख कर सब लोगो के साथ-साथ सुरेश का बाप सबसे ज़्यादा

सकपका गया,,,,

शिखा दीदी और अलका आंटी के पीछे पीछे पायल भाभी और उसके साथ रितिका भी उसी कोर्टरूम मे आ गई,,वो

दोनो बहुत खूबसूरत लग रही थी,,,वैसे तो शिखा और अलका आंटी भी कम नही थी लेकिन आज रितिका सब पर

भारी पड़ रही थी,,,

रितिका और पायल भाभी को देख कर अमित सुरेश और उन लोगो के बाप के होश उड़ गये,,,,

क्यूँ अंकल जी,,,,कैसा लगा ये सब,,,,वो लोगो का मुँह खुला का खुला रह गया ,,,उन लोगो मे से किसी के मुँह से

एक लफ़्ज तक नही निकला,,,,,सबके होश गुम हो गये रितिका और पायल भाभी को देख कर,,,,और मेरे होश गुम

थे रितिका को देख कर,,,,,रितिका सर से पैर तक दुल्हन की तरह सजी हुई थी,,,,लाल रंग का दुल्हन का जोड़ा

,,,,हाथ मे कलाई से लेके एल्बो तक बड़ी बड़ी चूड़ियों से आधी बाजू भरी हुई थी,,,गले मे मंगलसूत्र

और माँग भरी हुई थी,,,,

ये देख कर सुरेश और उसका बाप थोड़ा गुस्से मे आ गये,,,सुरेश का बाप हम लोगो की तरफ बढ़ा लेकिन तभी

अमित के बाप ने उसको रोक लिया,,,,

क्यूँ अंकल की गुस्सा आ गया ना ये सब देख कर,,,,ये सब मेरा प्लान था,,,,वैसे आप लोगो का प्लान भी अच्छा

था,,,,रितिका को पायल भाभी के साथ बाहर भेज देना फिर घूँघट मे किसी नकली रितिका से शादी करवा

देना और सीडीज़ हासिल कर लेना,,,,तभी तो आप लोगो को मंदिर मे शादी करने की पड़ी थी ताकि बाद मे मंदिर

की शादी को कोई नही मानता,,,ना आप लोग और ना ये समाज़,,,,और वैसे भी आपकी इस नकली रितिका की शादी अगर हो

भी जाती करण से तो आप लोगो को क्या फ़र्क पड़ने वाला था,,,

अमित का बाप थोड़े गुस्से मे ,,,,चल अब हो गई ना शादी,,,अब तो वो सीडी कर मेरे,,,

इतनी भी क्या जल्दी है,,,,पहले लीगल मॅरेज तो हो जाए,,जिसको ना आप झुटला सको और ना ये समाज़ और क़ानून

तेरी इतनी हिम्मत,,,ये कहता हुआ अमित अपनी पॉकेट से पिस्टल निकालता हुआ मेरी तरफ बड़ा,,,,,वो जैसे ही मेरे

पास आया अमित के बाप ने उसको भी रोक लिया,,,,

अरे वाह,,,,अब तो पिस्टल भी निकल आई,,,,,पहले कहाँ थी ये पिस्टल जब वो लोग तुमको पिस्टल दिखा रहे थे,,

मैने मज़ाक मे अमित को बोला,,,

मेरी बात सुनके अमित और उसका बाप चुप हो गये,,,,,,,,,,,,,

मैं जानता हूँ वो सब भी आपका ही प्लान था अंकल जी,,,लेकिन कोई बात नही,,,,ऐसा होता रहता है अक्सर,,अब

जल्दी से इन लोगो की शादी कर देते है इस से पहले कि कोई और पंगा हो,,,,,

तभी करण हँसते हुए,,,,अब और क्या पंगा हो सकता है सन्नी भाई,,,,

मैने भी हँसते हुए करण की बात का जवाब दिया,,,,,,,,करण भाई मैं वो सीडीज़ देख चुका हूँ मुझे

पता है उन सीडीज़ मे क्या है,,,,,ऐसी घिनोनी हरकते है इन नवाबजादो जिसको देख कर गुस्सा आता है,,,लेकिन

इसमे इनका कोई क़सूुर नही,,,,ये सब तो विरासत मे मिला है इन लोगो को,,ऐसी घटिया हरकते करना तो अपने

ही बाप से सीखा है इन लोगो ने,,,,,आज इनके बाप ने भी तो अपना पूरा ज़ोर लगा लिया था ,,,अपनी हर घटिया

चाल खेल चुके है ये लोग,,लेकिन अब हमारी बारी है,,,,,,,,,,

देखो अंकल जी,,,,मुझे पता था आप लोग ऐसी वैसी हरकते ज़रूर करोगे इसलिए रितिका और करण की शादी

पहले ही मंदिर मे करवा दी है हम लोगो ने ,,,और अब कोर्ट मेरिज करवानी है,,,,

ऐसा हरगिज़ नही हो सकता,,,,तू क्या सोचता है हम ऐसा होने देंगे,,,,अमित गुस्से से बोलने लगा,,,

मुझे पता है तुम लोग अपनी पूरी कोशिश करोगे,,लेकिन मैने भी हाथ पे पत्ते स्ट्रॉंग रखे हुए है

क्यूकी मुझे पता है आप लोग भी कम नही हो,,,,,

क्या मतलब तेरा सन्नी भाई,,,करण फिर हँसते हुए बोला,,,,साथ मे शिखा ,,अलका आंटी,,,और पायल भी

हँसने लगी,,,जबकि रितिका तो अपने बाप और भाई को गुस्से से घूर रही थी,,,

मतलब ये है मेरा करण भाई कि मुझे पता था इन लोगो ने ऐसी घटिया हरकत ज़रूर करनी है और इसी

लिए मैने अपने एक दोस्त को वो सीडी पकड़ा दी थी ताकि अगर टाइम आने पर हम लोग तेरी शादी करके रितिका को

अपने घर नही लेके गये तो मेरा वो दोस्त जो सीडी हाथ मे लेके इनस्पेक्टर ख़ान के पोलीस स्टेशन के पास खड़ा हुआ

है वो सीडी को उसके हवाले कर देगा,,,,,

मेरे मुँह से ये बात सुनके सब लोग हैरान रह गये,,,,,

तभी अमित एक बाप ,,,नही सन्नी बेटा तू हम लोगो के साथ ऐसा नही कर सकता,,तूने ही कहा था कि तू हम

लोगो का साथ देगा,,,,

अंकल जी साथ तो मैं दे रहा था लेकिन पहले घटिया काम की शुरुआत भी तो आप लोगो ने ही की है,,,मैं तो

बस आपका ही साथ दे रहा हूँ घटिया काम मे,,,,

अब बोलो शादी करवानी है या इंतेज़ार करना है कि कब मेरा दोस्त सीडी लेके ख़ान के पास जाए और ख़ान आप लोगो

को पकड़ने के लिए आपके पीछे निकल पड़े,,,,

तभी अमित का बाप सुरेश के बाप के पास गया और वो लोग कुछ बातें करने लगे,,,,अमित गुस्से मे मुझे

घूर रहा था और हाथ मे पकड़ी हुई पिस्टल दिखा रहा था,,,,

तभी शिखा हम लोगो के पास आ गई,,,,,अमित उसकी तरफ देख कर हँसने लगा,,,तभी शिखा ने अपने हाथ मे

पकड़ी हुई पिस्टल उसकी तरफ की तो अमित की सिट्टी-पीटी गुल हो गई,,,,ये पिस्टल करण ने दी थी शिखा को घर से

निकलने से पहले,,,,और ऐसे ही एक पिस्टल थी पायल भाभी एक पास जो उन्होने लाके मुझे पकड़ा दी,,,,

ये सब देख कर अमित और सुरेश का बाप थोड़ा डर गये साथ मे अमित और सुरेश भी,,,

 
ठीक है सन्नी बेटा,,हम रितिका की शादी करवा देते है,,,,लेकिन इस बात का क्या भरोसा कि तुम वो सीडी हमे

दे दोगे,,,और उसकी कोई कॉपी नही होगी तुम लोगो के पास,,,,

देखिए अंकल जी ये सब पॉलिटिक्स खेलना मुझे नही आता,,,,ये सब आप जैसे लोगो का काम है,,,,मैं तो बस

जैसे को तैसा करने मे यकीन करता हूँ,,,मैं कोई प्लान नही करता अगर आप लोगो ने भी कोई प्लान नही

किया होता,,,,,अब भी टाइम है आप सही रास्ते चलिए और मेरा यकीन कीजिए,,,,और अगर अब भी आप लोगो को

मेरा यकीन नही तो आपकी मर्ज़ी है,,,जो मर्ज़ी कीजिए,,,,

तभी अमित का बाप चुप चाप हम लोगो के पास आ गया और साथ मे सुरेश का बाप भी,,,,

फिर मैने वकील की तरफ इशारा किया तो उसने मेरिज के पपर्स निकाल कर टेबल पर रख दिए ,,

फिर सब लोगो ने अपने अपने साइन किए,,,,अमित और उसके बाप ने तो एक पल से पहले ही साइन कर दिए लेकिन

सुरेश और उसका बाप फिर हल्की सोच मे पड़ गये लेकिन अमित और उसके बाप ने उनको समझा दिया था,,,,

सुरेश तो साइन करके पीछे हट गया लेकिन सुरेश का बाप साइन नही कर रहा था तभी सुरेश ने व्हील्चैर

पर बैठे हुए अपने बाप को साइन करने का बोला तो सुरेश के बाप ने सुरेश को सबके सामने कस्के थप्पड़

मारा,,,,,साले हरामी ये सब तेरी वजह से हो रहा है,,,,,

इतना बोलकर वो सुरेश को गालियाँ देने लगा,,,लेकिन तभी अमित के बाप ने उसको समझा दिया,,,,,

फिर सुरेश के बाप ने भी साइन कर दिया और अपने बेटे को वापिस गालियाँ देने लगा,,,क्यूकी अमित ने लड़कियों

को फसाने का काम किया था जबकि उनकी वीडियो बनाने का काम किया था सुरेश ने,,,जिसके बारे मे वो लोग

जानते थे,,,,

शादी होते ही रितिका और करण खुश हो गये,,,,क्यूकी अब वो क़ानूनी तौर पर पति पत्नी बन गये थे अब

ना तो उनको अपने बाप का डर था ना ही किसी और का,,,,,

हम सब बड़े खुश थे लेकिन कुछ लोग थे जो खुश नही थे ,,,,,,

तभी अमित का बाप मेरे पास आया और बोला,,,,,,,लो बेटा अब तो हो गई शादी ,,,अब तो बुलाओ अपने दोस्त को

और वो सीडी करो हम लोगो के हवाले,,,,

कॉन सा दोस्त अंकल जी,,,...मैने हँसते हुए मज़ाक मे बोला,,,

तभी सुरेश का बाप भी हम लोगो के पास आ गया,,,ये क्या मज़ाक लगा रखा है तूने,,,अब हो गई ना शादी

चल सीडी कर हमारे हवाले,,,,बुला अपने दोस्त को जल्दी,,,,

अरे अरे अंकल जी गुस्सा क्यूँ होते हो,,,सीडी आपको मिल जाएगी,,,लेकिन उसके लिए मुझे किसी को बुलाने की ज़रूरत

नही क्यूकी जिसके पास सीडी है वो दोस्त अभी यहीं मौजूद है,,,,

तभी सुरेश का बाप बड़ी उत्सुकता से,,,,कहाँ है वो दोस्त और कहाँ है वो सीडी,,,

ये रहा वो दोस्त और ये रही वो सीडी,,,इतनी बात बोलके रितिका ने अपने पर्स मे से वो सीडी निकाली ,,,

सब लोगो का मुँह खुला का खुला रह गया,,,,अमित उसका बाप,,,सुरेश और उसका बाप ,,,सब मुँह खोलकर रितिका

की तरफ देख रहे थे और ख़ासकर रितिका के हाथ मे पकड़ी हुई उस सीडी की तरफ,,,

यही है ना वो सीडी जिसके लिए इतना कुछ हुआ है और अब भी हो रहा है,,,रितिका ने इतना गुस्से मे बोला और वो

सीडी अपने बाप की तरफ फैंक कर मारी,,

वो सीडी रितिका के बाप की छाती पर लगी और नीचे ज़मीन पर गिर गई,,,,रितिका के बाप ने शरम से अपना सर

झुका लिया लेकिन सीडी ज़मीन पर गिरते ही अमित और उसका बाप किसी लालची कुत्ते की तारह उस सीडी पर लपक पड़े

अमित ने वो सीडी उठा ली ,,,अमित और उसका बाप दोनो बहुत खुश हो गये थे,,,,तभी अमित का बाप बोला

,,सन्नी बेटा यही है दूसरी सीडी या इसके अलावा कोई और सीडी भी है तुम्हारे पास,,,,,

जी अंकल जी,,यही है दूसरी सीडी अब इसके अलावा कोई और सीडी नही मेरे पास,,,जो है बस यही है,,,

अमित और उसका बाप खुशी से वो सीडी लेके कोर्टरूम से बाहर जाने लगे तभी मैने उसको आवाज़ लगा दी,,,

एक मिनट रुकिये अंकल जी,,,,,यही वो सीडी है अब मेरे पास कोई सीडी नही है,,और ना ही इन सीडीज़ की कोई कॉपी है

लेकिन सुमित के पास इसकी और कोई कॉपी है या नही ये मुझे नही पता,,,,

मैने इतना बोला तो अमित और उसका बाप गुस्से मे मुझे घूरते हुए वहाँ से बाहर चले गये,,,जबकि पीछे

खड़े हुआ हम सब लोग हँसने लगे,,,,

फिर मैं वापिस पलटा और मेरी नज़र पड़ी सुरेश और उसके बाप पर जो शरम के मारे अपना सर झुका कर

खड़े हुए थे,,,अपनी ही बेटी और बेहन के हाथों जॅलील होने पर दोनो का सर शरम से झुक गया था,,,

मैं चलके रितिका और करण के पास गया और उन लोगो को लेके रितिका के बाप के पास आया,,,

चलो अब तुम लोग इनका आशीर्वाद लो,,,,,मैने इतना बोला तो करण ने तो अपने ससुर का आशीर्वाद ले लिया और

उसके ससुर ने भी उसके सर पर हाथ रखके उसको आशीर्वाद दे दिया लेकिन रितिका ने सॉफ मना कर दिया,,,

क्या हुआ रितिका तुम अपने पापा का आशीर्वाद क्यूँ नही ले रही,,,

ये इंसान मेरा बाप नही है सन्नी,,,,अब तक तो ये मेरा बाप था लेकिन आज पता चला कि सुरेश के सभी

गंदे काम मे ये भी उसकी मदद करता था इसलिए जैसे सुरेश मेरे लिए मर चुका है वैसे ही आज मेरा

बाप भी मेरे लिए मर गया है,,,,

नही रितिका ऐसा नही बोलते,,,,ये इंसान अभी भी तुम्हारा बाप और ये लड़का तुम्हारा भाई है,,,,माना इन

लोगो ने बहुत ग़लतियाँ की है लेकिन अब इनके झुके हुए सर देख कर लगता है कि इनको अपनी ग़लती पर शरम

आ रही है,तभी तो सर उठाकर ये हम लोगो की आँखों मे नही देख रहे,,,,और वैसे भी एक बाप अपने

बच्चे के सभी बुरे कामों पर परदा डालता है,,उसकी लिए उसका बच्चा जैसा भी हो,,अच्छा हो या बुरा उसका

बच्चा ही रहता है,,,,,वैसे ही ये आदमी जो अभी तेरे सामने खड़ा है ये जितना भी बुरा क्यूँ ना हो ये तेरा

बाप ही है,,,,आज अपनी ही बेहन और बेटी के सामने ये लोग सर झुका कर खड़े हुए है इस से बड़ी और क्या

सज़ा हो सकती है इन लोगो के लिए,,,

रितिका मेरी बात सुनके भी आगे नही बढ़ी लेकिन करण के इशारा करने पर उसने झुक कर अपने बाप का

आशीर्वाद ले लिया,,,,,उसके बाप ने भी अपने हाथ को अपनी बेटी के सर पर रखा और आशीर्वाद देके आँखों

मे आँसू लेके वहाँ से चला गया और जाते जाते वो अपने बेटे की व्हील्चैर को भी धक्का लगाके वहाँ से

बाहर चला गया,,,,

 
मैने बाहर निकल कर देखा तो वो लोग कोर्ट के पिछले दरवाजे से बाहर जा रहे थे,,,जहाँ से अक्सर या

तो चोर लोग जाते है या पॉलिटीशियन,,,,लोग,,,,,,,,,,,,

उन लोगो के जाते ही करण और रितिका दोनो मेरे गले लग गये और मुझे बाहों मे हग करके थॅंक्स्क्स्क्स

बोलने लगे,,,,थॅंक्स्क्स्क्स सन्नी भाई ,,,,तूने मेरी शादी रितिका से करवा दी ये एहसान मैं ज़िंदगी भर नही

भूल सकता,,,,तेरा जितना भी शुक्रिया अदा करूँ कम है,,,,,

अबे चुप कर और फालतू की डायलॉग-बाजी बंद कर,,,,एक दोस्त कभी दूसरे दोस्त पर एहसान नही करता,,समझा

सब लोग रूम मे बड़े खुश थे ,,फिर हम लोग भी हँसते खुशी मनाते हुए कोर्टरूम से बाहर निकल

कर मेन गेट की तरफ बढ़ने लगे,,,,,,कोर्ट के मेन गेट के पास मैने देखा कि ख़ान भाई सिंपल कपड़ो

मे खड़े हुए थे,,उन्होने यूनिफॉर्म नही पहना हुआ था,,,,,और आस-पास ही उनके लोग मौजूद थे वो भी

सिंपल कपड़ो मे,,,,

हम लोग ख़ान भाई के पास पहुँचे तो रितिका भाग कर ख़ान भाई के गले लग गई और रोने लगी,,,

अरे बुद्धू लड़की,,,,अब क्यूँ रो रही है,,,अब तो तुझे खुश होना चाहिए तेरी शादी जो हो गई है करण

के साथ,,,,आज का दिन रोने का नही बल्कि खुश होने का है ,,तुझे तेरी पसंद का जीवन-साथी जो मिल गया

है,,,,,,,रितिका बस रोती जा रही थी ख़ान भाई को हग करके,,,,वो ख़ान भाई को अपने भाई सुरेश से कहीं

ज़्यादा मानती थी,,,,,इसलिए तो आज मंदिर मे जब रितिका की शादी हुई थी ख़ान भाई ने ही उसका कन्या-दान भी

किया था जो अक्सर लड़की का बाप या भाई करता है,,,,

चल बस भी कर अब रोना बंद कर मेरी छुटकी बहना,,,ख़ान भाई की आँखें भी नम हो गई थी जब उन्होने

रितिका का रोता हुआ चेहरा देखा,,,,तभी करण ने आगे बढ़ कर ख़ान भाई के पैर छू कर उनका आशीर्वाद

लिया और साथ मे रितिका ने भी,,

आज से ये तेरी अमानत है करण,,और खबरदार अगर इसको कभी हर्ट किया या रुलाया,,,याद रखना तेरी बीवी का

भाई एक पोलीस वाला है,,,,ख़ान भाई ने ये बात थोड़ी हंस कर बोली तो सब लोग भी हँसने लगे,,,

रितिका भी खुश हो गई और करण को मज़ाक मे बोलने लगी,,,,,सुन लिया ना,,,,अगर मुझे कभी हर्ट किया तो

मेरा ये पोलीस वाला भाई तुझे बहुत ज़्यादा हर्ट करेगा.,,,,,,,रितिका की बात पर भी सब लोग खुश हो गये

फिर मैने पोलीस की बड़ी बस मे देखा कि कुछ लोग बैठे हुए थे,,,,मैने पास जाके देखा तो ये वही

लोग थे जो सुबह मेरी बाइक से टकरा गये थे और अब कोर्टरूम मे अंदर आके भी मेरे से मार-पीट

करने लगे थे,,,,,

ख़ान भाई ने मुझे अपने साथ लिया और उसी वॅन के पास चले गये,,,,अब बोलो सन्नी भाई क्या करना है इन

लोगो का,,,,,मैने भी हँसते हुए मज़ाक मे बोल दिया,,,,,,कुछ खास नही ख़ान भाई बस जब तक अपना बाकी का

काम नही हो जाता तब तक सरकारी मेहमान बना कर रखो इनको और अच्छी तरह से खातिरदारी भी करो इनकी

और इस वाले की तो ज़रा ज़्यादा खातिर करना,,,,,मैने उस आदमी की तरफ इशारा किया जिसने मुझे 3-4 थप्पड़

मारे थे,,,,,

ख़ान भी हँसने लगे और वो सब लोग डर गये जो वॅन मे बैठे हुए थे,,,,,

ख़ान भाई हम लोगो से मिले और वहाँ से चले गये ,,,और कोर्ट से बाहर आते ही पायल भाभी भी टॅक्सी करके

एर-पोर्ट की तरफ चली गई और जाते जाते मुझे अपने शरारती अंदाज़ मे हग करके गई,,,उसने मुझे हग किया तो

सब लोग हमे देख रहे थे,,,,,शिखा ,,,,अलका,,करण और रितिका भी,,,,

ख़ान भाई गये अपने रास्ते ,,,पायल गई अपने रास्ते,,,और हम लोग भी चल पड़े अपने रास्ते,,,,मैं बाइक पर

गया और बाकी लोग टॅक्सी मे चल पड़े करण के घर की तरफ,,,,,,,,

आज मैं बहुत खुश था रितिका और करण की शादी करवा कर मैने अपनी शर्त पूरी करदी थी,,,जो सपना

दिखाया था रितिका और करण को उस सपने को मैने हक़ीक़त का रूप दे दिया था और सब कुछ इतनी आसानी से

हो गया था कि मुझे यकीन ही नही हो रहा था,,,मुझे लगा था वो लोग कुछ पंगा कर सकते है ,,,हालाकी

उन लोगो ने पंगा किया भी लेकिन उस से कोई खास फरक नही पड़ा,,,,लेकिन अब मुझे और भी ज़्यादा डर लगने

लगा था क्यूकी कोर्ट से जाते हुए रितिका का बाप और भाई तो सर झुका कर गये थे लेकिन अमित और उसका बाप

मुझे गुस्से से घूरते हुए गये थे,,,

मैं बाइक पर चल पड़ा टॅक्सी के पीछे पीछे करण के घर की तरफ और टॅक्सी मे शिखा ,,अलका ,,करण और

रितिका थे,,,,मैं बहुत खुश था आज करण की शादी करवा कर,,,और मेरे से भी ज़्यादा खुश थे कारण

और रितिका,,,और उतनी ही खुशी झलक रही थी अलका और शिखा के चेहरे पर,,वो लोग भी करण की शादी से बहुत

खुश थे,,,

जैसे ही टॅक्सी रुकी करण के घर के बाहर तभी सामने से एक और टॅक्सी आके रुकी,,,,और उस मे से मेरी माँ बाहर

निकल कर आ गई,,,,इधर अलका आंटी भी टॅक्सी से निकली और मेरी माँ के गले लग्के मिली,,,,

दोनो एक दूसरे के गले लग्के शादी की मुबारकबाद देने लगे,,,,,

अलका>>> जो समान मैने बोला था वो ले आई ना आप सरिता दीदी,,,,

माँ>>> हां हां जो तूने बोला था सब समान ले आई मैं,,,चल अब जल्दी शादी-शुदा जोड़ी का वेलकम

करने की तैयारी करते है,,,,इतना बोलकर माँ और अलका वापिस करण और रितिका के पास आई

माँ करण और रितिका को एक बार बड़े प्यार से मिली और बोली,,,,अभी के लिए इतना ही पहले तुम लोगो का वेलकम

करके गृहप्रवेश करके घर के अंदर ले जाउ फिर मिलती हूँ ठीक से,,,,,इतना बोलके माँ शिखा और अलका

आंटी को अपने साथ लेके घर के अंदर चली गई,,,और जाते जाते मुझे टॅक्सी मे से समान निकालने को बोल

गई,,,,,

मैं टॅक्सी के पास गया तो देखा उसमे प्लास्टिक के 6-7 बॅग पड़े हुए थे जिनको मैने टॅक्सी वाले के साथ मिलकर

घर के अंदर पहुँचा दिया फिर टॅक्सी वाले को उसके पैसे देके वहाँ से भेज दिया,,,,,इतनी देर मे माँ और

अलका आंटी ने मिलकर करण और रितिका के वेलकम की तैयारी करली,,,,

मैने देखा कि माँ अलका आंटी और शिखा हाथ मे एक आरती की थाली लेके गेट के पास खड़ी हुई थी फिर उन

लोगो ने अपने रीति-रिवाज़ के साथ करण और रितिका का वेलकम किया और उनको घर के अंदर ले गई,,,

हम सब करण को शिखा दीदी के रूम मे ले गये,,,फिर माँ और अलका आंटी ने खाने पीने का इंतेज़ाम किया

खाना घर पर नही बनाया था वो माँ लेके आई थी मार्केट से,,,,हम लोग इधर उधर की बातें करते हुए

खाना खा रहे थे लेकिन मेरा ध्यान बार बार रितिका की तरफ जा रहा था जो दुल्हन के लिबास मे बहुत

ज़्यादा खूबसूरत लग रही थी,,,,,मेरा कुछ ग़लत अंदाज़ा नही था उसे देखने का मैं तो इसलिए देख रहा

था क्यूकी वो सचमुच बहुत ज़्यादा खूबसूरत लग रही थी,,,खाना खाते टाइम जब भी करण स्पून से उसको

कुछ खिलाता तो वो शर्मा जाती और रूम मे सब लोग उसको देख कर हँसने लगते,,,माँ अलका आंटी और शिखा

ने तो इतना मज़ाक किया उन दोनो के साथ कि उन लोगो का खाना पीना मुश्किल हो गया,,,,

जैसे मैं बार बार रितिका की खूबसूरती को निहार रहा था वैसे ही माँ भी बार बार रितिका की तारीफ

करती हुई थक नही रही थी,,,

तभी हम लोगो का खाना ख़तम हो गया फिर माँ अलका आंटी और शिखा दीदी उठकर करण के रूम मे

चली गई,,,,और यहाँ रह गये मैं करण और रितिका,,,

बाकी लोगो के सामने रितिका शरमा रही थी लेकिन जब हम लोग ही रह गये तो रितिका खुल कर बात करने लगी

हालाकी दुल्हन के लिबास मे होने की वजह से वो मेरे से थोड़ा शर्मा रही थी लेकिन इतना भी नही जितना

वो बाकी सब के सामने शरमा रही थी,,,,

करण और रितिका बार बार मुझे थॅंक्स्क्स्क्स बोल रहे थे ,,,,वो लोग बहुत खुश थे शादी करके ,,खुश तो

मैं भी था लेकिन मुझे कहीं ना कहीं थोड़ा डर भी लग रहा था क्यूकी आज तो सब कुछ ठीक से हो गया

था लेकिन आगे चलके कोई पंगा हो भी सकता था,,,,,,रितिका का बाप और भाई शायद कुछ ना करे अब क्यूकी

उन लोगो की आँखों मे आने वाले आँसू बता रहे थे वो लोग कितना शर्मिंदा हो गये थे लेकिन अमित और

उसका बाप कुछ भी कर सकते थे क्यूकी जाते टाइम वो बड़े गुस्से से देख कर गये थे मुझको,,,,

हम लोग बातें ही कर रहे थे तभी माँ अलका आंटी और शिखा दीदी वापिस आ गये रूम मे,,,,,

कहाँ गये थे आप लोग,,इतना टाइम क्या कर रहे थे,,,,,

तभी शिखा हँसते हुए,,,,,नई जोड़ी के लिए सुहागरात का कमरा सज़ा रहे थे,,,,शिखा ने इतना बोला तो

रितिका ने शरमा कर नज़रे झुका ली,,,,

मैने मज़ाक मज़ाक मे बोला ,,,,ओह्ह वाउ कैसा सज़ा रूम ज़रा मुझे भी बताओ,,,,मुझे पता था ऐसे

बोलने से रितिका और शरमा जाएगी और उसका शरमाना मुझे बहुत अच्छा लग रहा था,,,

तभी माँ बोली,,,,,जा खुद ही जाके देख ले सन्नी बेटा,,,एक दिन तेरा रूम भी तो सज़ाना पड़ेगा हम लोगो

को,,,,माँ ने इतना बोला तो अब शरमाने की बारी मेरी थी,,,,मैं रितिका से भी ज़्यादा शरमा गया और मेरी

इस हरकत से सब लोग हँसने लगे,,,,मैं इतना ज़्यादा शरमा गया कि उठकर रूम से बाहर चला गया मेरे जाते

ही सब लोग ज़ोर ज़ोर से हँसने लगे,,,,,

तभी शिखा मेरे पास आई और मेरा हाथ पकड़कर मुझे करण के रूम मे ले गई,,,,

 


मैं करण के रूम मे पहुँचा तो देख कर दिल खुश हो गया मेरा,,,,उसका रूम इतना अच्छा सजाया हुआ

था जैसे फ़िल्मो मे होता है,,,,बेड पर हर तरफ फूल ही फूल थे ,,बेड के चारों तरफ फूलों के

लंबे लंबे हार लटक रहे थे,,बेड पर वाइट कलर की बेडशीट बिछी हुई थी लेकिन गुलाब की पत्तियों

की वजह से बेड शीट गुलाबी लग रही थी,,,बेड से लेके रूम के दरवाजे तक भी फूलों का कार्पेट बनाया

हुआ था,,,,उसको देख कर मैं बड़ा खुश हो गया,,,,बस खो ही गया था ,,,

तभी मेरे लिप्स पर शिखा ने अपने लिप्स रख दिए और मेरे कुछ करने से पहले ही एक डीप किस करने लगी

मुझे,,,,,,मैं भी रूम की सज़वट देख कर इतना मस्त हो गया था कि दिल कर रहा था अभी शिखा को लेके

बेड पर चला जाउ और अपनी सुहाग शाम मना लूँ,,,क्यूकी अभी शाम हो रही थी,,,,

मैं सुहागरात के लिए सज़ा हुआ रूम देख कर और शिखा के किस करने पर मस्ती के सागर मे गोते खाने

लगा और मेरे हाथ शिखा के बदन पर कसने लगे ,,मैं उसकी पीठ को सहलाते हुए उसको किस करने लगा वो

भी मस्ती मे मुझे किस करती हुई मेरी पीठ को सहलाने लगी थी लेकिन तभी उसका हाथ मस्ती मे मेरे लंड

पर चला गया,,,,मैं एक दम से उछल गया,,,,,,मस्ती से नही डर से ,,,क्यूकी हम लोग करण के रूम के

'बाहर खड़े हुए थे ,,अंदर बेड से लेके दरवाजे तक फूलों का कार्पेट लगा हुआ था,,,हम लोग चलके

अंदर जाते तो सब खराब हो जाता और बाहर खड़े रहके हम हद से ज़्यादा नही बढ़ सकते थे,,क्यूकी कोई

भी आ सकता था वहाँ पर,,,,,और तभी ऐसा ही हुआ,,,,माँ कुछ बर्तन रखने के लिए शिखा के रूम से बाहर

निकल आई तभी उनकी नज़र हम दोनो पर पड़ी और इसका पता मुझे तब लगा जब मेरी पीठ पर हल्का सा हाथ

लगा उनका,,,,,,

कुछ तो शरम करो तुम दोनो,,,,माँ ने मेरी पीठ पर हाथ मारते हुए बोला,,,,

माँ ने इतना बोला तो एक दम से मैं और शिखा एक दूसरे से दूर हो गये,,,,

कुछ तो सोचो अगर रितिका देख लेती तो,,,,,माँ ने थोड़ा गुस्से मे लेकिन हल्की आवाज़ मे बोला,,,,

सौरी आंटी जी,,,वो करण की शादी हो गई है अब रितिका के आने के बाद पता नही वो हम लोगो की तरफ

ध्यान भी देगा या नही,,,और वैसे भी इस बेड को देखकर मुझसे कंट्रोल नही हुआ,,,,

जानती हूँ बेटी,,मैं समझ सकती हूँ,,,,अब भाभी आ गई है तो थोड़ा सम्भल कर रहना होगा तुम सबको

कहीं उसने देख लिया तो पंगा हो जाना है,,,और इस बेड को देखकर तो मुझसे भी रहा नही जा रहा,,,माँ

ने मस्ती मे मुझे हल्की किस करते हुए बोला,,,

चलो अब जाके भाभी और भाई के पास बैठ जाओ,,,,,,माँ ने इतना बोला और किचन की तरफ चली गई जबकि

मैं और शिखा करण और रितिका के पास चले गये,,,,शिखा ने जाते जाते मुझे बड़े प्यार से बोला,,,,

याद रखना एक दिन तेरे साथ भी मैं ऐसे ही सजे हुए बेड पर सुहागरात ज़रूर मनाउन्गी सन्नी,,,शिखा

ने इतना बोला और मुझे पीठ पर हल्की सी चुटकी काट दी,,,,,,,,फिर हम दोनो जाके बैठ गये रितिका और करण

के पास,,,,,

फिर काफ़ी टाइम तक हम लोग ऐसे ही बैठ कर मज़ाक करते रहे और जब रात होने को हुई तो हम लोगो ने बड़े

प्यार से करण और रितिका को उनके रूम तक छोड़ दिया,,,

हम लोगो ने करण और रितिका को करण के रूम के बाहर तक छोड़ा,,,यहाँ से करण को रितिका को गोद मे

उठाकर बेड तक लेके जाना था,,करण शरमा रहा था लेकिन जब हम लोगो ने ज़ोर डाला तो उसने रितिका को गोद

मे उठा लिया,,,,,अब रितिका शरमाने लगी,,,,लेकिन जैसे ही मैने रितिका की तरफ देखा तो उसने मुझे अजीब

नज़रो से देखा ,,,मैं कुछ समझ नही पाया,,,,हम दोनो एक दूसरे की आँखों मे आँखें डालके देख रहे

थे तभी माँ मेरे पास आई,,,,

ये दोनो तो चले रूम मे बेटा चलो अब हम भी चले अपने घर,,,,डिन्नर टाइम हो गया है डॅड रास्ता

देख रहे होंगे,,,,,मैं एक दम से माँ की बात सुनके उनकी तरफ पलट गया और मैने वापिस मुड़कर

रितिका और करण की तरफ नही देखा,,,शायद तब तक वो भी रूम मे चले गये होंगे,,,,

मैं मोम को लेके घर की तरफ चल पड़ा ,,,मैं रास्ते मे बाइक चलाता हुआ रितिका और करण के बारे मे

सोच रहा था,,,,और ख़ासकर रितिका की घूरती आँखों के बारे मे ,,,वो मुझे बहुत अजीब नज़रो से देख रही

थी,,,मुझे कुछ समझ नही आ रहा था,,,तभी मैने अपने लंड पर माँ का हाथ महसूस किया जो हल्की

मस्ती एक साथ मेरे लंड को दबा रही थी,,,,

माँ मत करो ना कोई देख लेगा,,,,,,

माँ ने हँसते हुए बोला,,,,,इतना अंधेरा है कॉन देखने वाला है यहाँ बेटा,,,,,और वैसे भी उन दोनो को

देख कर मेरी हालत खराब हो गई है,,,,जल्दी से घर जाके तेरे बाप के साथ सुहागरात मनाउन्गी मैं,,,

तेरा दिल करे तो तू भी आ जाना ,,,,

माँ की बात सही थी,,,,अंधेरा बहुत था,,वैसे भी सर्दियों मे रात जल्दी ही हो जाती है और बहुत कम लोग

नज़र आते है सड़क पर,,,,और दूसरा करण और रितिका की वजह से मैं भी मस्त हो गया था,,,,लेकिन जब भी मैं

रितिका के बारे मे सोचता तो उसकी घूरती हुई आँखें मुझे कन्फ्यूज़ कर देती,,,,,खैर हल्की मस्ती मे कन्फ्यूज़

होता हुआ मैं माँ को लेके घर आ गया,,,,

घर पर आके मैं सीधा रूम मे चला गया,,,सोनिया नीचे थी और डॅड भी,,,माँ भी नीचे डिन्नर की तैयारी

करने लगी थी,,,,,

मैं जल्दी से बाथरूम मे घुस गया और शवर लेने लगा,,,बहुत थक गया था इसलिए शवर लेके जब बाहर

निकला तो बेड पर लेट-ते ही मेरी आँख लग गई,,,

रात जब मेरी आँख खुली तो मैने देखा कि मेरे पास ही सोनिया बैठी हुई थी अपने बेड पर,,,वो बुक गोद

मे रखकर स्टडी कर रही थी,,,साला मैं इतना थक गया था कि इसी रूम मे सो गया,,,मुझे पता ही नही

चला,,,,

जैसे ही मेरी आँख खुली सोनिया बोल पड़ी,,,,,लगता है करण की शादी करवा कर कुछ ज़्यादा ही थक गये तुम

सन्नी,,,अब और सोना है या उठकर स्टडी करनी है,,,,

मैं आँखें मल्ता हुआ उठा,,,,नही अभी स्टडी नही करनी ,,,कल करते है,,,मैने इतना बोला और बेड से उठ

गया,,,और उठकर रूम के दरवाजे के पास गया,,,,दरवाजा तो बंद था लेकिन कुण्डी नही लगी हुई थी,,,मैने

दरवाजे की कुण्डी लगा दी,,,,कुण्डी की आवाज़ से सोनिया थोड़ा डर गई,,,,मैं कुण्डी लगा कर वापिस पलटा और अपने

बेड की तरफ जाने लगा,,,,

तभी सोनिया हल्की डरी हुई आवाज़ मे बोलने लगी,,,अच्छा हुआ करण की शादी हो गई रितिका से,,,अब वो अपनी ही

बेहन के साथ ऐसी घटिया हरकते तो नही करेगा कभी,,,,

मैं सोनिया की बात सुनके हँसने लगा,,,क्यूकी उसने करण का ताना मुझे मारा था,,उसको डर था कि कुण्डी

लगाकर मैं उसकी तरफ आ रहा हूँ और उसने मुझे रोकने के लिए करण की बात की थी,,,

मैं हँसते हुए अपने बेड के पास गया और अपने बेड से मॅट्रेस उठा लिया और उठकर दरवाजे के पास वाली

दीवार के पास ज़मीन पर मॅट्रेस लगा लिया और वहीं लेट गया,,,,,

सोनिया मेरी इस हरकत से थोड़ा खुश हो गई क्यूकी मैं मॅट्रेस को ज़मीन पर उसके बेड से दूर लगा रहा

था,,,उसने हंस कर मुझे थॅंक्स्क्स्क्स बोला शायद और मैने भी हंस कर उसको देखा और बता दिया कि डरने की ज़रूरत

नही मेरे से,,,,,,

उन दोनो की शादी ज़रूरी थी,,,,तुझे नही पता उसके पीछे कोई वजह थी,,,,जो वजह तू सोच रही है वो नही,,,

वो दोनो एक दूसरे से प्यार करते है इसलिए उनकी शादी करवाना ज़रूरी थी,,,और जो उसके और उसकी बेहन शिखा

के बीच मे है वो सब उन लोगो की आपस की बात है,,,कोई मजबूरी रही होगी उनकी,,,,तुझे उनका पूरा सच

नही पता और पूरा सच जाने बिना किसी पर ग़लत उंगली करना बुरी बात है,,,,

मुझे पता है उनका सच ,,तूने बताया था मुझे,,,वो अमित और बाकी की सारी बात भी,,लेकिन फिर भी उन्दोनो

का ऐसा करना बुरी बात है,,,,

मैं हँसने लगा उसकी बात पर,,,,तुम अगर किसी को अच्छा नही कह सकती तो तुम्हारा कोई हक़ नही बनता उसको

बुरा कहने का,,,,और रही बात सही ग़लत की तो बता मैं यहाँ तेरे रूम मे सोके ग़लती कर रहा हूँ या

तेरे रूम मे तेरे से दूर सोके ग़लती कर रहा हूँ,,,,क्या जवाब है तेरे पास इस बात का,,,,

वो सन्नी वो मियन्न,,,,उूओ,,,,,,उसको कोई जवाब नही सूझ रहा था वो बस चुप करके बैठ गई,,,मैने

एक बार उसकी तरफ हंस कर देखा और बोला,,,,

चल अब सोजा रात बहुत हो गई है,,,सुबह मिलकर स्टडी करते है,,और कल शायद कविता भी आ जाएगी मेरी

हेल्प करने के लिए,,,,

उसने गुस्से से मुझे देखा और बोली,,,,,,,,,वो नही आने वाली कल,,,,,कल वो अपने भाई के साथ अपनी माँ को

मिलने जा रही है,,,,उसने इतना बोला और मेरी तरफ पीठ करके लेट गई,,,,

उसने ये बात थोड़ी गुस्से मे बोली तो मैं डर गया,,,कहीं उसने सोनिया को कुछ बता तो नही दिया,,,कहीं

वो उस दिन की हरकत पर गुस्सा तो नही हो गई,,,मैं यही बातें सोचता हुआ दोबारा नींद के आगोश मे

चला गया,,,

सुबह जल्दी सोनिया ने मुझे उठा दिया,,,,,,सन्नी उठो,,,,सन्नी,,,सन्नी,,,,

मेरी आँख खुली तो सोनिया मुझे उठा रही थी,,,,क्या हुआ क्यूँ उठा रही हो,,,,और कितनी बार बोला मेरे पास

मत आया करो,,,,,

मुझे भी शॉंक नही तेरे पास आने का लेकिन मुझे अब उठकर बाहर जाना है ये दरवाजा खोलना है,,और अगर

दरवाजा खुलते ही मोम अंदर आ गई और उसने तुझे ज़मीन पर यहाँ सोते देख लिया तो पंगा हो जाना है ,,

 
मैं उसकी बात सुनके उठा और मॅट्रेस को वापिस बेड पर रखा और फिर से सो गया,,,फिर जब आँख खुली तो

लंच टाइम भी बीत गया था,,,,,आज कुछ ज़्यादा हो सोया था मैं,,,,,

उठकर फ्रेश होके नीचे गया तो देखा सोनिया नीचे बैठकर टीवी देख रही थी,,,,,उस से पूछने पर पता

चला माँ घर पर नही थी ,,,,करण के घर गई थी,,,,

मैं भी तैयार हुआ और करण के घर जाने लगा,,,तभी सोनिया बोली,,,,,,कामिनी भाभी का फोन आया था सन्नी

तुमको बुला रही थी वो,,बोली कुछ काम है,,,मैने पूछा तो बोलने लगी सन्नी से काम है,,मुझे भी

नही बताया,,,,

मैने अपनी पॉकेट से फोन निकाला तो देखा कि कामिनी भाभी की 8 मिस कॉल थी ,,,मैने भाभी को फोन

किया तो भाभी ने फोन नही उठाया ,,मैने 2-3 बार ट्राइ किया बट भाभी ने फोन नही उठाया ,,फिर

मुझे याद आया कि आज तो कविता अपने भाई के साथ जाने वाली है अपनी माँ को मिलने के लिए इसलिए कामिनी

भाभी आज अकेली होगी घर पे,,क्यूकी कल रात ही सोनिया ने मुझे बताया था कि कविता अपने भाई के साथ जा

रही है,,,,,,तभी तो भाभी ने मुझे इतने फोन किए ,,,,,

मैने सोनिया को बोला कि मैं काम से बाहर जा रहा हूँ और बाइक लेके कामिनी भाभी के घर की तरफ चल

पड़ा,,,

मैं भाभी के घर पहुँचा तो भाभी गेट खोलने बाहर आई लेकिन जैसे ही भाभी ने मुझे देखा वो

वापिस अंदर भाग गई और 2 मिनट बाद फिर बाहर आ गई,,,,,

अब टाइम मिला तुझे,,,,,कब्से फोन कर रही थी उठाया क्यूँ नही,,,,मैने भाभी से ये बात बोलनी थी लेकिन

भाभी तो मेरे से भी पहले मुझे बोलने लगी थी फोन के बारे मे,,,,

भाभी ने गेट खोला और मैं अंदर चला गया,,,,

अरे भाभी मैं भी तो कब्से आपको फोन कर रहा था,,,आप भी तो फोन नही उठा रही,,, अब आप गेट

खोलने आई तो वापिस अंदर क्यूँ भाग गई थी,,,,,

वो मैं वो ,,,तूने ठीक से देखा नही मैने नाइटी पहनी हुई थी और अब सूट पहन कर बाहर आई

हूँ,,,पहले नाइटी मे बाहर आती तो कोई देख लेता मुझे,,,

कॉन देख लेता भाभी,,,पहले भी तो आप नाइटी पहन कर बाहर आ जाती थी,,तो आज क्या हुआ,,,मैने मज़ाक

मे बोला

कुछ नही हुआ,,,तू तो पक्का बेशरम है लेकिन मुझे तो शरम आती है,,,मुझे अच्छा नही लगता मुझे कोई

नाइटी मे देखे,,,,भाभी ये बोलकर शरमाने लगी,,,

मैं भी नही देख सकता क्या,,,,,मैने फिर मज़ाक मे बोला

भाभी फिर शरमाते हुए ,,,,तू तो पक्का बेशरम है,,,,तेरे क्या कहने,,,,चल अब सारी बात यहीं करेगा

कि अंदर भी आएगा,,,,,

मैं भाभी के साथ अंदर चला गया,,,,अंदर जाके भाभी सीधा अपने बेडरूम मे चली गई और मैं भी

उनके पीछे पीछे चला गया,,,,

तुमको पता है मैं फोन क्यूँ कर रही थी,,,,भाभी ने शरमाते हुए बोला,,,,

हाँ पता है,,,,मुझे सोनिया ने रात को ही बता दिया था कि कविता और सूरज भाई बाहर जाने वाले है,,

हाँ तभी तो सुबह से फोन कर रही थी तुझे,,,तू है कि फोन उठाता ही नही,,,भाभी थोड़े नखरे से

चिढ़ती हुई बोली,,,,

अरे भाभी अब क्यूँ गुस्सा करती हो ,,,,अब तो मैं आ गया हूँ,,,,अब तो प्यार मुहब्बत की बातें करो मेरे

साथ,,,,मैने इतना बोला और भाभी को पीछे से पकड़ कर अपनी बाहों मे भर लिया,,,क्यूकी मैं बहुत मूड

मे था,,कल रात करण और रितिका की सुहागरात थी,,,जब करण रितिका को गोद मे उठाकर अपने रूम मे लेके

जा रहा था तभी मेरे लंड मे उछाल आने शुरू हो गये थे,,,,अब तो मैं बस भाभी को पूरी तरह से

खा जाना चाहता था,,,,,,अभी मैने भाभी को पीछे से हग किया ही था कि भाभी ने भी पलट कर मुझे

बाहों मे भर लिया और जैसे ही हम दोनो के लिप्स एक दूसरे से टच हुए ही थे कि तभी हमे किचन मे

बर्तन गिरने की आवाज़ आई,,,,भाभी एक दम से मेरे से दूर हो गई और बाहर भाग गई,,,,मैं भी भाभी

के पीछे पीछे गया तो देखा कि एक प्लेट किचन की ज़मीन पर गिरी हुई थी और भाभी उसको उठा रही थी,,

अरे ये प्लेट अपने आप कैसे गिर गई,,,,,मेरी आवाज़ सुनके भाभी एक दम से चौंक गई और पीछे मूड के मुझे

देखने लगी,,,,

वो मैने गॅस पर चावल रखे थे ना ,,लगता है उस चावल वाले बर्तन मे भाँप ज़्यादा हो गई थी

इसलिए उसके उपर पड़ी प्लेट गिर गई होगी,,,,,,

इस टाइम चावल,,,,अभी तो लंच टाइम कबका बीत गया भाभी,,,,मैने मज़ाक मज़ाक मे बोला,,,

जानती हूँ सन्नी लेकिन अकेली हूँ घर पे तो क्या लंच और क्या डिन्नर,,,,भाभी ने भी मेरी बात का

जवाब मज़ाक मे दिया,,,

भाभी ने वो प्लेट बर्तन पर रखी और पीछे की तरफ पलटी,,,तब तक मैं भाभी के पास पहुँच गया

था भाभी जैसे ही पलटी मैने भाभी को फिर से पकड़ लिया और जल्दी से भाभी के लिप्स को अपने लिप्स मे

जकड लिया,,भाभी ने भी एक मिंट से पहले मुझे किस का रेस्पॉन्स देना शुरू कर दिया,,हम लोग 5-6 मिनट

तक ऐसे ही एक दूसरे को पकड़ कर एक दूसरे के होंठों का स्वाद लेते रहे तभी भाभी ने मुझे थोड़ा दूर

किया और खुद भी मेरे से अलग हो गई,,,,

क्या हुआ भाभी मज़ा नही आ रहा था क्या किस करके,,,,,

भाभी शर्मा गई और मेरी तरफ पीठ करके खड़ी हो गई,,,तभी मैने देखा कि भाभी गॅस बंद कर रही

थी और गॅस बंद करके भाभी फिर से मेरी तरफ पलट गई,,,,

मज़ा तो आ रहा था लेकिन मैने सोचा अगर मज़ा लेना ही है तो ज़रा खुलकर मज़ा क्यूँ ना लिया जाए,,,इतना

बोलकर भाभी मेरे पास आई और मुझे पकड़ कर बेडरूम की तरफ ले गई,,,,और जैसे ही हम लोग बेडरूम

मे घुसे भाभी ने जल्दी से दरवाजा बंद कर दिया और अंदर से कुण्डी भी लगा ली,,,,

इस से पहले मैं कुछ बोलता या करता भाभी ने अपने कपड़े निकाल दिए,,और फिर हुआ मस्ती का प्रोग्राम

शुरू,,,,,सूरज भाई के जाने की वजह से भाभी भी फुल मूड मे थी और रात करण और रितिका की सुहागरात

की वजह से मैं भी फुल मूड मे था,,,भाभी अपने कपड़े निकाल कर नंगी होने लगी और मैं भी जल्दी

से अपने कपड़े खोलने लगा ,,,,आज भाभी कुछ ज़्यादा ही जल्दी मे थी और खुद अपने कपड़े निकालने लगी थी

,,वैसे तो अक्सर वो बहुत शरमाती रहती थी लेकिन आज मस्ती की वजह से उनकी शरम कहीं उड़ गई थी,,मेरे

सामने नंगी होने मे उन्होने ज़रा भी देर नही की थी,,,मैं अभी अपनी पेंट निकाल रहा था जबकि भाभी

पूरी नंगी हो गई थी,,,भाभी का मदमस्त नंगा बदन देख कर मेरे से रहा नही गया,,और मैं अपनी

पेंट उतारता हुआ भाभी की तरफ बढ़ने लगा,,भाभी कुण्डी लगा कर दरवाजे के पास खड़ी हुई थी और मैने

भाभी के पास जाके भाभी को कस के बाहों मे भर लिया और इस से पहले मैं भाभी पर टूट पड़ता

भाभी मेरे पर टूट पड़ी,,,,

 
मैं भाभी के पास पहुँचा और भाभी को बाहों मे भरा लेकिन तभी भाभी एक दम से मेरे लिप्स

पर टूट पड़ी और अपनी पूरी ज़ुबान घुसा कर मेरे मुँह मे मुझे किस करने लगी,,,वो मेरे लिप्स को ऐसे

खाने लगी जैसे आज के बाद मैं कभी उसके हाथ ही नही लगने वाला ,,,जैसे रेगिस्तान मे किसी को पानी

मिलता है तो वो एक ही बार मे सारी प्यास भुजा लेना चाहता है वैसे ,,भाभी किसी भूखी शेरनी की तरह

टूट कर मुझपे झपट पड़ी थी,,,ऐसा लगता था जैसे ये बरसो से लंड के लिए तरस रही थी,,,लेकिन सूरज भाई

तो आज ही गया था बाहर कहीं,,,,

खैर मैं भी उसी अंदाज़ मे भाभी को किस करने लगा ,,,मेरी पॅंट खुल चुकी थी और मेरी टाँगों पर

घुटनो के करीब पहुँच गई थी जबकि मेरा उपर वाला जिस्म नंगा हो गया था,,,,मेरी बाहों मे जकड़ी

हुई भाभी पूरी नंगी थी उसका संगमरमर जैसा चिकना बदन मेरी बाहों मे फिसलता जा रहा था,,,मैं

जितना उसको बाहों मे कसने की कोशिश करता वो उतनी ही फिसलती जाती मेरी बाहों से,,हम दोनो काफ़ी देर

तक ऐसे ही खड़े रहे और पागलो की तरह एक दूसरे के लिप्स को चूस्ते रहे,,भाभी की ज़ुबान मेरे मुँह मे

और मेरी ज़ुबान भाभी के मुँह मे हर तरफ घूमती जा रही थी,,वो कभी मेरे उपर वाले लिप्स को अपने

लिस्प मे जकड लेती तो कभी नीचे वाले लिप्स को,,,मैं भी ऐसे ही कभी भाभी के उपर वाले लिप्स को तो

कभी नीचे वाले लिप्स को चूस्ता जा रहा था,,,पता नही चल रहा था कि आज कों ज़्यादा पागल हुआ जा रहा था

,,मैं या भाभी,,,,

तभी भाभी एक दम से मुझसे दूर हो गई ,,,,वो मेरे से करीब 3-4 फीट दूर जाके खड़ी हो गई और अपनी

उखड़ती हुई साँसों पर क़ाबू करती हुई मेरी तरफ देखने लगी,,वो अपने लिप्स से नीचे बहते हुए मेरे थूक

को सॉफ करने लगी और मदमस्त नज़रो से मुझे देखने लगी,,,,मेरे लिप्स और चिन भी थूक से सराबोर हो

गये थे,,हम लोगो का आधा फेस थूक से भीग गया था,,,हम एक दूसरे को किस नही कर रहे थे बल्कि

एक दूसरे के लिप्स को खा रहे थे,,,तभी मैं हल्के से चलता हुआ भाभी के पास गया तो वो पीछे हटने

लगी,,वो मुझे बड़े शरारती अंदाज़ मे देख रही थी और मुझे उनकी यही अदा अच्छी लग रही थी,,,आज वो

कहीं ज़्यादा खुलकर पेश आ रही थी,,शायद घर पर कोई नही था इसलिए आज बिना किसी डर के वो खुल कर

मस्ती करने के मूड मे थी,,,

मैं भाभी के पास जा रहा था जबकि वो पीछे लगे हुए बेड की तरफ जा रही थी,,,जब तक मैं बेड के करीब

पहुँचा तब तक भाभी बेड पर चढ़ गई थी,,मैं बेड के पास पहुँच कर अपनी पॅंट को अपनी टाँगों

से बाहर निकालने की कोशिश करने लगा जबकि भाभी बेड पर आगे की तरफ झुक गई और मेरे लंड को मुँह मे

भरके चूसने लगी,,,,मैं हल्का झुका हुआ था और जैसे ही भाभी ने मेरे लंड को मुँह मे भरा मैं हल्की

मस्ती के झटके से हिल गया और मेरा संतुलन बिगड़ गया और मैं गिरने लगा था तभी भाभी ने मेरा हाथ

पकड़ा और मुझे बेड की तरफ खींच लिया,,,मैं बेड पर घूमकर पीठ के बल गिरा ,,,और तभी भाभी

उठी और जल्दी से मेरे सर के करीब आ गई,,इस से पहले मैं कुछ करता भाभी ने अपनी टाँगें खोली और

अपनी चूत को मेरे मुँह के उपर कस्के मेरे सर पर बैठ गई और खुद जल्दी से झुक कर मेरे लंड को मुँह

मे भर लिया,,,मेरी पॅंट अभी तक मेरे पैरो मे अटकी हुई थी लेकिन अब मैं पॅंट के बारे मे भूल ही गया

था क्युकि भाभी ने लंड को मुँह मे भरते ही बड़े मस्त अंदाज़ से चूसना शुरू कर दिया था,,,भाभी ने

आज पहली ही बार मे आधे से ज़्यादा लंड को मुँह मे भर लिया था और कुछ पल बाद ही मेरा पूरा लंड

भाभी के गले से नीचे उतर चुका था,,,इधर भाभी मेरे लंड को मुँह मे लेके उपर नीचे हिल रही थी

और उधर भाभी अपनी चूत को मेरे मुँह के उपर रखके अपनी कमर को हिला रही थी जिस से भाभी की

चूत के सॉफ्ट लिप्स मेरे लिप्स पर रगड़ खा रहे थे,,,अब तक मेरे हाथ भाभी की गान्ड पर चले गये

थे और मैने भाभी की गान्ड को दोनो हाथों से पकड़कर उनकी चूत को अपने मुँह पर और ज़्यादा ज़ोर

से दबा लिया था जिस से उनकी चूत के लिप्स मेरे मुँह मे भर गये थे और मैं तेज़ी से उनको चूसना शुरू

कर दिया था,,,,

मैं भाभी की चूत के लिप्स को इतनी तेज़ी से और पागलपन से चूस रहा था जैसे कुछ देर पहले मैं भाभी

के लिप्स को चूस रहा था,,,भाभी की चूत भी मेरे थूक से चिकनी हो गई थी और मस्ती मे भाभी की

चूत ने काफ़ी पानी भी बहाना शुरू कर दिया था जिस से चूत के उपर और आस-पास काफ़ी चिकनाहट हो गई थी,

उधर भाभी की गान्ड के उपर मेरे हाथों ने भाभी के दोनो नितंबों को एक एक करके हाथ मे पकड़

लिया था और कस कस के दबाना शुरू कर दिया था बीच बीच मे दोनो हिस्सों को ज़ोर लगा कर दोनो तरफ

से खोल देता जिस से भाभी की गान्ड का होल भी खुलने लगता,,,,मैने अपनी 2 उंगलियाँ भाभी की गान्ड मे

घुसा दी और उनकी गान्ड को दोनो तरफ करके खोल दिया फिर दोनो हाथों की 2 उंगलियाँ और डाली गान्ड के

'अंदर और तेज़ी से उंगलियों की अंदर बाहर करने लगा,,,भाभी की गान्ड अब पहले से कहीं ज़्यादा खुली हो

चुकी थी और होती भी क्यूँ नही मैने सूरज भाई को अपने लंड के साइज़ का मोटा स्ट्रॅप-ऑन जो लाके दिया था,,ये

उसी स्ट्रॅप-ऑन का कमाल था,,,मैने 2 उंगलियों से गान्ड को खोला हुआ था और 2 उंगलियों से गान्ड की हल्की

चुदाई कर रहा था साथ मे भाभी की चूत को कस कस के मुँह मे भरके चूस रहा था,,

उधर भाभी भी मेरे पूरे लंड को बिना किसी परेशानी के मुँह मे भरके गले से नीचे तक गटक रही थी

मेरे लंड का थोड़ा सा भी हिस्सा बाहर नही रहता था बस मेरी बॉल्स ही थी जो भाभी के लिप्स से टकरा रही

थी,,भाभी बड़ी तेज़ी से अपने सर को उपर नीचे कर रही थी,,,मुझे ऐसा लग रहा था कि मैं किसी टाइट

चूत या गान्ड की चुदाई कर रहा हूँ और जल्दी ही झड जाउन्गा,,,और ऐसे ही हुआ ,,,मैं भाभी की चूत को

15-20 मिनट से चाट और चूस रहा था भाभी भी मेरे लंड को मुँह मे गले से नीचे तक घुसा कर

चूस रही थी ,,अब हम दोनो ही झड़ने वाले थे और जब तक भाभी की चूत का पानी मेरे गले से नीचे

नही उतरा मैने भाभी की चूत को मुँह से दूर नही किया और जब तक मेरे लंड का पानी भाभी के गले

से नीचे तक नही उतरा भाभी ने मेरे लंड को मुँह से बाहर नही निकाला,,,लंड के पानी की लास्ट ड्रॉप तक

भाभी के गले से नीचे गटक चुकी थी लेकिन भाभी फिर भी मेरा लंड चूस रही थी भाभी मुझे

चुदाई के लिए तैयार कर रही थी और उधर मैं भी भाभी की चूत का सारा पानी पी चुका था लेकिन फिर भी

भाभी की चूत के पिंक और सॉफ्ट लिप्स को अपने मुँह मे भरके चूस्ता ही जा रहा था,,,,

उसके बाद मैने भाभी की खूब जोरदार चुदाई की,,भाभी ने चावल बनाए थे लेकिन चुदाई करके

भाभी की भूख मिट गई थी और डिन्नर टाइम तक मैने भाभी की 2 बार चुदाई की,,,हम लोग रूम से बाहर

भी नही निकले,,,,जब चुदाई नही भी कर रहे थे तब भी मैं और भाभी बेड पर लेट कर एक दूसरे को

हल्की हल्की किस करके टाइम पास कर रहे थे,,,,,

 
सर्दी शुरू हो गई थी,,,अंधेरा जल्दी हो गया था,,,,भाभी को डिन्नर की तैयारी तो नही करनी थी क्यूकी पहले

ही चावल बना चुकी थी लेकिन चावल के साथ दाल बनाना ज़रूरी था,,,,इसलिए भाभी मुझे वहाँ छोड़कर

खुद किचन मे चली गई,,,,और जाते जाते बाहर से मुझे कुण्डी लगा गई,,,,

मैने दरवाजे पर नॉक करके पूछा तो भाभी ने मज़ाक मज़ाक मे बोला,,,,,,,सन्नी तूने मुझे किचन

मे भी आराम से काम नही करने देना है इसलिए तू डिन्नर रेडी होने तक रूम मे ही लॉक रहेगा,,,,

मैं भाभी की बात समझ गया था क्यूकी आज मैं बहुत मोड़ मे था मैने 2 बार भाभी की चुदाई की

थी वो भी इतनी दमदार की भाभी की तौबा तौबा हो गई थी,,,,

भाभी डिन्नर तैयार करने गई जबकि मैं बेड पर लेट गया और मेरी आँख लग गई,,,करीब 40-50 मिनट बाद

भाभी ने आके मुझे उठाया ,,,मैं उठा तो देखा कि डिन्नर भाभी बेड पर लेके आ गई थी,,,

अरे डिन्नर यहाँ क्यूँ लेके आ गई आप भाभी जी,,,,बाहर चलते है ना,,,,,

नही सन्नी,,आज मेरा बहुत मूड है,,,आज हम रूम से बाहर नही जाएँगे ,,,डिन्नर भी यहीं बेड पर

होगा आज तो,,,,इतनी बात भाभी ने शरमाते हुए बोली ,,,,,

अच्छा तो ये बात है,,,फिर तो जल्दी जल्दी डिन्नर ख़तम करना चाहिए,,,,,मैने भी मज़ाक मे बोला,,,

तभी मैने देखा कि भाभी ने रोटी भी बना ली थी जबकि पहले तो भाभी ने चावल ही बनाए थे,,लेकिन

अब रोटी भी बना ली थी,,,,,

अरे भाभी चावल ही काफ़ी थे ये रोटी क्यूँ बनाई अपने,,,,चावल से ही काम चला लेते हम लोग,,,

वो गॅस ऑफ करना भूल गई थी चावल नीचे लग गये थे,,,,ये थोड़े से चावल ही बचे थे इसलिए मैने

5-6 रोटी भी बना ली,,,,क्यूँ तुझे रोटी अच्छी नही लगती क्या दाल के साथ,,,,

नही ऐसी बात नही है मैने तो इसलिए पूछा था क्यूकी चावल बहुत ज़्यादा थे तो रोटी की क्या ज़रूरत,,,ये

तो अब पता चला चावल नीचे लग गये थे (जल गये थे),,,,

फिर हम लोगो ने डिन्नर ख़तम किया और भाभी बर्तन लेके किचन मे जाने लगी,,अब भाभी के दोनो

हाथों मे बर्तन थे और कुछ बर्तन बेड पर भी रह गये इसलिए मैं भाभी के बाहर जाते ही बेडशीट

को अपने जिस्म पर लपट कर बाहर चला गया बर्तन किचन मे रखने,,,,वैसे तो भाभी ने शायद रूम

लॉक कर देना था लेकिन दोनो हाथों मे बर्तन होने की वजह से भाभी रूम को लॉक नही कर सकी,,,और

मैं भाभी के पीछे पीछे चला गया,,,,मैं बर्तन लेके किचन मे गया था तो मैने देखा कि भाभी

किचन मे नही थी,,,,मैं किचन से बर्तन रखके बाहर निकला तो देखा भाभी एक रूम से बाहर निकल

रही थी,,,,लेकिन जैसे ही भाभी की नज़र मेरे पर पड़ी भाभी थोड़ा डर गई थी,,,ये रूम भाभी की सास और

ससुर का था ,,,,,

अरे भाभी आप वहाँ क्या कर रही थी,,,,वो कुउच न्ह्हि मैं तो,,,,,भाभी थोड़ा परेशान हो गई थी,,,

क्या हुआ भाभी इतना डर क्यूँ गई,,,मैने कोई चोरी पकड़ ली क्या आपकी,,,,

भाभी ने हँसते हुए बोला,,,,कैसी चोरी,,,मैं तो ये लेने गई थी रूम से,,,भाभी ने अपने हाथ मे पकड़ा

हुआ एक प्लास्टिक का नकली लंड मेरी तरफ करके मुझे दिखाया,,,,,1 से मज़ा नही आया ,,,अब रात को 2 लंड का

मज़ा लूँगी मैं,,,,भाभी ने इतना बोला और मेरा हाथ पकड़ कर मुझे वापिस रूम मे ले गई,,

रूम मे जाके हम लोगो की मस्ती फिर से शुरू हो गई,,,मैने अपने जिस्म पर लिपटी हुई बेडशीट उतारकर

फैंक दी और नंगा होके भाभी से लिपट गया,,,,फिर मैने भाभी को चुदाई का मज़ा देना शुरू कर दिया वो

भी 2 लंड से,,,कभी मेरा लंड भाभी की चूत मे होता और नकली लंड भाभी की गान्ड मे और कभी मेरा

लंड भाभी की गान्ड मे होता और नकली लंड भाभी की चूत मे,,,,भाभी भी आज बहुत ज़्यादा मस्ती के

मूड मे थी और वही हाल मेरा था,,,

डिन्नर के बाद एक बार और चुदाई करके हम लोग आराम करने के लिए लेट गये,,,,क्यूकी आज की पूरी रात हम

लोगो की थी,,,,भाभी की आँख लग गई थी शायद,,5-6 अवर्स मे मैने 3 बार भाभी की जमकर चुदाई की थी

पूरा जिस्म हिला कर रख दिया था भाभी का इसलिए शायद वो थोड़ा थक गई थी और आराम करने लगी थी,,भाभी

की आँख लग गई तो मैं भी थोड़ा आराम करने लगा,,,

तभी मुझे हल्की प्यास लगने लगी,,मैने देखा उस रूम मे कोई पानी की बॉटल भी नही थी इसलिए मैं

उठकर किचन मे जाने लगा क्यूकी फ्रिड्ज वहीं पड़ा हुआ था,,,,मैं भाभी के रूम से निकला तो बाहर

बहुत अंधेरा था,,तभी मैने देखा कि कामिनी भाभी की सास के रूम से हल्की लाइट बाहर निकल रही थी

वैसे तो दरवाजा बंद था लेकिन दरवाजे के नीचे से पता चल रहा था रूम की लाइट जल रही थी,,मैने

कोई खास गौर नही किया और किचन की तफर चलने लगा,,,तभी मेरा पैर किसी टेबल या चेयर से टकरा गया और

हल्का शोर भी हुआ,,,मैं भी गिरते गिरते बचा,,,,तभी मेरी नज़र पड़ी फिर से भाभी की सास के रूम की

तरफ तो उसकी लाइट ऑफ हो गई थी,,,,मुझे कुछ समझ नही आया,,,क्या कोई था उस रूम मे ,,क्यूकी लाइट अपने

आप तो ऑफ नही हो सकती थी,,,,मुझे कुछ ठीक नही लगा इसलिए मैं उस रूम की तरफ जाने लगा,,,अभी मैं

उस रूम की तरफ चलने ही लगा था कि मुझे कामिनी भाभी अपने रूम के दरवाजे के पास खड़ी हुई नज़र

आई,,,वहाँ अंधेरा तो बहुत था लेकिन भाभी के रूम की लाइट जल रही थी और भाभी रूम के दरवाजे के

पास खड़ी हुई थी,,,भाभी मेरी तरफ देख कर हँसने लगी क्यूकी मैं बिल्कुल नंगा था,,मैं भाभी के

रूम से नंगा ही बाहर आ गया था क्यूकी घर पर कोई नही था मेरे और भाभी के अलावा,,

तभी भाभी चलके मेरे पास आई,,,,वो नाइटी मे थी,,,भाभी हँसते हुए बोली,,,,क्या हुआ सन्नी कहाँ जा

रहे थे ,,,वो भी नंगे,,,,,

कुछ नही भाभी मुझे प्यास लगी थी इसलिए पानी पीने जा रहा था,,,,,

भाभी शरमाते हुए,,,,पानी तो किचन मे है तो इस रूम मे क्या करने जा रहे थे,,भाभी ने अपनी सास

के रूम की तरफ इशारा करते हुए बोला जिसके अंदर कभी लाइट ऑन थी और अभी ऑफ हो गई थी,,,

कुछ नही भाभी ,,मैं तो जस्ट देखने जा रहा था कि लाइट अपने आप कैसे ऑफ हो गई,,,पहले तो रूम मे

लाइट जल रही थी,,,

वो रूम की लाइट मे कुछ प्रोबलम है सन्नी,,खुद ही ऑन हो जाती है और खुद ही ऑफ,,,,इतना बोलकर भाभी

ने मुझे किचन मे जाने का इशारा किया,,,जाओ तुम किचन मे जाके पानी पी लो मैं देखती हूँ लाइट

का क्या पंगा है,,,,

मैं किचन की तरफ चला गया जबकि भाभी उस रूम मे चली गई,,,,किचन मे लाइट ऑफ थी,,लेकिन मुझे

पता था फ्रिड्ज कहाँ पड़ा हुआ है इसलिए मैने लाइट ऑन नही की बस फ्रिड्ज ओपन किया जिस से फ्रिड्ज की लाइट

से रोशनी हो गई थी किचन मे,,,,मैने पानी की बोटल निकाली और पानी पीने लगा,,,तभी मुझे दरवाजा बंद

होने की आवाज़ सुनाई दी,,मैने बाहर जाके देखा तो भाभी अपनी सास के रूम से निकलकर अपने रूम मे

जा रही थी,,उस रूम की लाइट अब ऑफ हो चुकी थी,,,भाभी भी अपने रूम मे चली गई और मैं वापिस फ्रिड्ज

के पास खड़ा होके पानी पीने लगा,,,,मुझे बहुत तेज प्यास लगी हुई थी,,,,मैने जबसे खाना खाया था तबसे

पानी नही पिया था,,,

मैं नंगा ही फ्रिड्ज के पास खड़ा हुआ था,,फ्रिड्ज का डोर खुला हुआ था और मैं एक हाथ से फ्रिड्ज के डोर

का सहारा लेके एक हाथ से पानी की बॉटल को उपर करके अपने मुँह को भी उपर उठाकर पानी को उपर से अपने

मुँह मे डालके पी रहा था,,मैं बॉटल को मुँह नही लगाना चाहता था और ना ही मैने पानी पीने के लिए

कोई ग्लास लिया था,,,,मैं अभी बॉटल उपर करके मुँह उपर उठाके पानी पी रहा था और जैसे ही मैने अपने

सर को वापिस नीचे किया तो मेरे होश उड़ गये,,,मेरे गले मे पानी अटका हुआ था और फिर भी मेरा गला बहुत

ज़्यादा सूखने लगा था,,,मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मेरे पैरो के नीचे से ज़मीन निकल गई हो,,मैं

बहुत ज़्यादा डर गया परेशान हो गया,,,,मेरे सामने कविता खड़ी हुई थी,,,,

ऊओह म्मय्यी गूदडद यईी क्काहहानं ससी आ गगयइी,,,,,,मैं डरते हुए अपने मन मे खुद से ये बात

पूछ रहा था,,,,मैं एक दम से इतना ज़्यादा डर गया था कि मुझे कुछ समझ नही आ रहा था,,,तभी

कविता ने हंस कर मुझे देखा और मेरे हाथ से वो पानी की बॉटल पकड़ ली और खुद सर को उपर छत की तरफ

करके पानी पीने लगी,,,,मैं एक दम से शांत खड़ा हुआ था और फ्रिड्ज की रोशनी मे कविता को देख रहा

था,,उसने एक ज़ींस का कुर्ता या कोई बनियान टाइप कुछ पहना हुआ था जो बहुत पतले कपड़े का था,,जब वो

सर को उपर करके पानी पी रही थी तो पानी की कुछ ड्रॉप्स उसके मुँह से बाहर निकलकर चिन से होते हुए उसके

कुर्ते पर गिरने लगी थी और जहाँ जहाँ भी पानी की ड्रॉप गिर रही थी वहाँ वहाँ से उसका कुर्ता उसके जिस्म से

चिपक रहा था और उसका जिस्म नज़र आ रहा था,,,मैं उसको ऐसे अपने करीब देखकर डर गया,,,तभी मुझे

याद आया कि उसका जिस्म तो पानी गिरने की वजह से नज़र आ रहा है जबकि मैं तो नंगा खड़ा हुआ हूँ इतना

याद आते ही मैने जल्दी से फ्रिड्ज को बंद करने की कोशिश की लेकिन तब तक बहुत देर हो गई थी,,कविता पानी

पीकर अपने सर को नीचे कर चुकी थी,,अभी फ्रिड्ज का दरवाजा बंद होने ही वाला था कि उसने दरवाजे को अपने

हाथ से पकड़ लिया और फिर से पूरा खोल दिया और पानी को बॉटल को फ्रिड्ज मे रखने लगी,,,तभी उसका ध्यान

मेरे नंगे जिस्म पर पड़ा और वो हँसने लगी लेकिन मेरी हालत खराब हो गई थी,,,वो मुझे नंगा देखकर

खुश हो रही थी जबकि मुझे उसके सामने नंगा खड़ा होके बहुत शरम आ रही थी ,,,मेरा फेस शरम

से लाल हो गया था मुझे ऐसा लग रहा था जैसे इस टाइम कविता लड़का है और मैं लड़की हूँ ,,क्यूकी वो मुझे

देख कर शरमा नही रही थी बल्कि खुश हो रही थी,,,,

तभी उसने बॉटल को फ्रिड्ज मे रखा और फ्रिड्ज का दरवाजा बंद कर दिया,,,किचन मे एक दम से अंधेरा

हो गया और एक दम सन्नाटा भी हो गया,,बस मेरी डरती हुई साँसों की आवाज़ थी और कविता की साँसों की अजीब

आवाज़ थी,,,,तभी वो मेरे पास आ गई,,,मुझे बड़ा झटका लगा,,,,उसने मेरे पास आके मुझे बाहों मे

भर लिया ,,उसकी दोनो बाहें मेरे गले मे थी और तभी उसने अपने होंठों को मेरे कान के करीब किया और

बड़े प्यार से बोली,,,,

जू मुुझहही दीकखन्ना त्ता म्मैईन्न द्दईकखह चुउक्की हूंन,,अब ईट्टन्न्ना मात्त स्शहररम्माऊ

सन्नी,,,,,,उसका इतना सब बोलने का अंदाज़ बहुत मस्ती भरा था जो मुझे भी मस्त कर गया,,उसकी दोनो बाहें

मेरे गले मे थी उसका आधा नंगा जिस्म मेरे पूरे नंगे जिस्म से चिपका हुआ था उसने छोटे छोटे बूब्स

मेरी छाती से दबे हुए थे ,उसके दिल की तेज धड़कन मुझे अपने दिल पर महसूस हो रही थी वैसे मेरा दिल

भी डर के मारे बड़ी तेज़ी से धड़क रहा था लेकिन मस्ती मे दिल की धड़कन डर की धड़कन से कहीं ज़्यादा

तेज हो गई थी,,तभी उसने कुछ ऐसा किया जिस से मैं एक दम दंग रह गया,,,,उसने मेरे सर को अपने हाथों

से पकड़ा और मेरे लिप्स को अपने लिप्स मे जकड लिया और इतनी जबरदस्त किस की मुझे कि मैं क़ाबू से बाहर

हो गया,,,उसने मेरे लिप्स को अपने लिप्स मे भरके इतनी मस्ती से चूसना शुरू किया कि मेरे लंड ने अंगड़ाई

लेना शुरू कर दिया था,,उसने मुझे कोई 8-10 सेकेंड तक किस की और फिर मेरे से दूर हो गई और किचन से बाहर

चली गई,,,,मैं कुछ सोच समझ नही सका,,,ये घर पर थी लेकिन भाभी ने तो कहा था कि घर पर कोई न्ही

है तो ये कहाँ से आ गई,,,,

वो तो किचन से बाहर चली गई थी लेकिन मैं यहाँ खड़ा हुआ सोच मे पड़ गया था एक तो मैं बहुत ज़्यादा

डरा हुआ था क्यूकी कविता ने मुझे नंगा देख लिया था उपर से उसने मुझे इतनी जबरदस्त छोटी सी किस करके

मुझे इतना मस्त कर दिया था कि मेरा लंड पूरे जोश मे खड़ा हो गया था वो भी बस 8-10 सेक मे ,,मैं

अब उस से अलग हो गया था लेकिन अभी भी मुझे उसके लिप्स का स्वाद अपने लिप्स पर महसूस हो रहा था,,मैं

अपने लिप्स पर अपनी ज़ुबान घुमा कर उसके लिप्स का बचा-खुचा स्वाद चखने की कोशिश करने लगा था ,,,

फिर मैं खुद पर क़ाबू करके किचन से बाहर गया,,,मैने देखा कि कविता के माँ के रूम की लाइट

जल रही थी और दरवाजा भी पूरा खुला हुआ था,,,,मुझे कविता कहीं नज़र नही आ रही थी शायद वो उसी रूम

मे थी तभी तो उस रूम की लाइट अपने आप ऑन-ऑफ हो रही थी,,,मैं हिम्मत करके उस रूम के पास जाने लगा

और जैसे ही मैं उस रूम के पास पहुँचा तो मैने अंदर देखा तो कविता बेड के पास खड़ी होके मुझे

ही देख रही थी,,,मैं नंगा रूम के बाहर खड़ा हुआ था और वो एक कुर्ते या बनियान पहन कर रूम

के अंदर खड़ी हुई थी,,,उसने कुर्ते के नीचे कुछ नही पहना हुआ था,,,उसकी टाँगें पूरी की पूरी नंगी थी

मैं तो उसको ऐसी हालत मे देखकर मस्त हो गया था और मस्ती मे मेरा लंड भी खड़ा हुआ था,,तभी उसने '

कुछ ऐसा किया कि लंड ने ज़ोर से झटके खाने शुरू कर दिए,,,,उसने मेरी तरफ देखते हुए अपने दोनो हाथ

उपर उठाकर अपने कुर्ते को अपने जिस्म से अलग कर दिया,,,मैं तो साला दंग हो रह गया,,,,उसने कुर्ते को उतारा

और एक तरफ फैंक दिया,,,और नंगी होके मुझे रूम मे अंदर आने का इशारा करने लगी,,,मैं भी उसके

इशारे से पहले किसी कट्पुतली की तरह उसके नंगे जिस्म से खिंचा हुआ उसके रूम की तरफ बढ़ने लगा था ,,

मेरी नज़रे उसके गोरे संगमरमर जैसे बदन पर अटक गई थी,,,,उसने अपने जिस्म से सभी पर्दे उठा दिए थे

और अपने खूबसूरत जिस्म की नुमाइश करते हुए मुझे अपने पास आने को उकसा रही थी लेकिन मैं उसके उकसाने

से पहले से उसके बदन की चमक से चोंधिया कर उसकी तरफ बढ़ने लगा था,,,,,मेरा हाल ऐसा था जैसे तेज

हवा मे किसी कटी पतंग का हाल होता है जो खुद को हवा के भरोसे छोड़ देती है मैने भी खुदको

उसके हवाले छोड़ दिया था ,,मेरा जिस्म उसके जिस्म को देखता हुआ उसके जिस्म की गर्म हवा मे उड़ता हुआ उसके

करीब जाने लगा था,,,,,

 
मैं उसके रूम की तरफ बढ़ने लगा था जबकि वो भी अपने रूम से दरवाजे की तरफ या बोलो कि मेरी तरफ

बढ़ने लगी थी,,मैं और वो दरवाजे से बस 2 कदम दूर थे तभी मुझे दरवाजा खुलने की आवाज़ आई और

मेरा ध्यान गया उस तरफ तो मैने देखा कि कामिनी भाभी अपने रूम के दरवाजे के पास खड़ी होके मुझे

देख रही थी,,,मैं उनकी तरफ देखता हुआ कविता के रूम की तरफ चल रहा था तभी भाभी ने मुझे हाथ

उठाकर बाइ बोला फिर अपने लिप्स पर हाथ रखके मुझे एक फ्लाइयिंग किस की और वापिस अपने रूम के अंदर चली

गई और दरवाजा बंद कर लिया,,,,मैं भाभी की इस हरकत से थोड़ा टेन्षन मे आ गया ,,मेरा ध्यान अभी भी

भाभी के रूम की तरफ था जबकि मेरे कदम चल रहे थे कविता के रूम की तरफ ,,,तभी कविता ने आगे

बढ़ कर मेरा हाथ पकड़ लिया और मुझे अपने रूम मे खींच लिया,,,जैसे ही मैं रूम के अंदर खींचा

गया कविता ने दरवाजा बंद कर लिया और जल्दी से मेरे से लिपट गई,,,

बंद कमरे मे हम दोनो नंगे जिस्म एक दूसरे से चिपक कर खड़े हुए थे ,,उसके दोनो हाथ मेरे जिस्म

से लिपट गये थे ,,,हम दोनो इतने करीब थे कि हम लोगो मे से हवा भी क्रॉस नही हो सकती थी,,,उसके

छोटे छोटे बूब्स मेरी छाती से थोड़ा नीचे दब रहे थे और मुझे एक मीठा और सॉफ्ट एहसास दे रहे थे

,,उसके हाथ तो मेरे जिस्म से लिपट चुके थे लेकिन मेरे हाथ अभी तक नीचे लटक रहे थे लेकिन मेरे हाथों

को उसके जिस्म तक जाने मे ज़्यादा देर नही लगी,,उसके जिस्म की खुसबू,, उसकी गर्म साँसों का मेरे जिस्म से टकराना

उसके हाथों का मेरे जिस्म पर कसते चला जाना यही सब काफ़ी था मुझे गर्म करने के लिए,,मेरा लंड इतना

ज़्यादा हार्ड हो गया कि मेरे से अब बर्दाश्त नही हो रहा था,,मैं बस उसको बाहों मे भर लेना चाहता

था लेकिन फिर भी मैं ना जाने क्यूँ उसको बाहों मे भरने से डर रहा था,,,शायद मैं थोड़ा कन्फ्यूज़ '

था जो सब भी हो रहा था मुझे अजीब लग रहा था,,,मुझे नही पता था कविता घर पर थी और जब उसने

मुझे नंगी हालत मे देख लिया था तबसे मुझे कुछ डर सा लगने लगा था शायद इसी वजह से मैं उसके

करीब होने मे थोड़ा टाइम लगा रहा था ,,लेकिन उसके जिस्म ने मेरे जिस्म से लिपटकर अपने जिस्म की गर्मी से

मेरे जिस्म को भी गर्म करना शुरू कर दिया था,,,

हम लोग काफ़ी टाइम तक ऐसे ही खड़े रहे ,,बिना हिले जुले ,,,,हम दोनो ने एक दूसरे को बाहों मे जकड़ा हुआ

था लेकिन कोई भी कुछ भी हरकत नही कर रहा था,,,बस उसके बूब्स मेरे जिस्म से लग रहे थे और मेरा हार्ड

हो चुका लंड उसके पेट और मेरे जिस्म मे दबकर नीचे की तरफ मूड गया था और एसी हालत मे मेरे लंड मे

हल्का दर्द भी होने लगा था,,,लेकिन वही दर्द मुझे हल्की मस्ती भी दे रहा था,,,और तभी उसने कुछ

ऐसा किया कि मेरे जिस्म की गर्मी और ज़्यादा बढ़ने लगी थी,,,उसने अपने सॉफ्ट लिप्स को मेरी छाती से टच कर दिया

था और मेरी छाती पर हल्की हल्की किस करने लगी थी और किस करते टाइम उसके हाथ भी मेरे जिस्म पर कस्के

पकड़ बनाने लगे थे लेकिन उसकी पकड़ ज़्यादा मजबूत नही बन रही थी इसलिए वो ऐसे ही खड़ी रहके मुझे

किस करती रही ,,एक के बाद एक उसने मेरी छाती पर कम से कम 15-20 किस करदी थी,,,उसके सॉफ्ट लिप्स का एहसास

अपनी छाती पर महसूस करके मैं भी काफ़ी गर्म हो गया था मेरे हाथ उसके जिस्म पर कसते चले जा रहे

थे,,,तभी उसने मेरी छाती से अपने लिप्स को हटा लिया और अपने सर को उपर करके मेरी तरफ देखने लगी,,,

उसने अपने सर को उपर किया और मेरी तरफ बड़े प्यार से देखा ,,,वो अब शरमा तो रही थी लेकिन खुश भी

थी और उसकी आँखों मे हल्की नमी भी थी लेकिन वो नमी दुख की या किसी तरह की परेशानी की नही थी वो नमी

'थी खुशी की शायद वो खुश थी मेरी बाहों मे आके और मैं भी बहुत खुश था लेकिन मैं थोड़ा परेशान

भी था,,मुझे कुछ समझ नही आ रहा था,,,तभी उसके जिस्म ने हल्के से उपर उठना शुरू किया,,,उसने अपने

दोनो पैरो को एडियों से उपर उठा लिया और अपने जिस्म के पूरे वजन को अपने पैरो की उंगलियों पर डालके

अपने जिस्म को हल्के से उपर उठा लिया,,,,जितनी देर उसका जिस्म हल्के से उपर उठता गया और उसके लिप्स मेरे लिप्स के करीब होते गये उतनी देर तक उसकी आँखे धीरे धीरे बंद होती गई,,,,मुझे उसकी आँखों मे आज अजीब सी

मदहोशी नज़र आ रही थी ऐसा लग रहा था जैसे वो नशे मे है उसने ड्रिंक की हुई है लेकिन ये नशा शराब

का नही था ये था मस्ती का नशा सेक्स का नशा जो शराब से कही ज़्यादा तेज नशा था,,उसका जिस्म उपर उठता गया

और उसके लिप्स मेरे लिप्स की तरफ बढ़ते गये और उसकी आँखें धीरे धीरे बंद होती गई,जब तक उसके लिप्स मेरे लिप्स

तक पहुँचे उसकी आँखे बंद हो चुकी थी,,,और जैसे ही उसके लिप्स मेरे लिप्स से टच हुए मेरी आँखें बड़ी बड़ी

हो गई ,,,मैं एक दम से दंग सा रह गया हालाकी मुझे पता था सब क्या हो रहा है लेकिन फिर भी ना जाने क्यूँ

मैं कुछ सोचने समझने का क़ाबिल नही रह गया था ,,बस जो हो रहा था उसको महसोस करने लगा था फिर भी

कहीं एक डर था मेरे दिल मे,,,

उसके लिप्स मेरे लिप्स से टच होते ही एक तेज मस्ती भरी लहर दौड़ गई हम दोनो के जिस्म मे और हम दोनो ने

उस लहर को एक दूसरे के जिस्म मे महसूस भी किया था,,शायद वो लहर हम दोनो के जिस्म मे इधर से उधर

पास हो रही थी,,,हम दोनो इतने करीब होके लिपटे हुए थे कि उसका दिल मेरे दिल के करीब होके धड़क रहा

था और हम दोनो को अपने दिल की धड़कन भी एक दूसरे के दिल मे धड़कती महसूस होने लगी थी,,,उसके लिप्स

मेरे लिप्स से टच होते ही मैने अपने लिप्स को हल्के से खोल दिया और तभी उसने मेरे एक लिप्स को अपने लिप्स से

पकड़ लिया और मुझे हल्के से किस करने लगी थी,,,मैने भी उतने ही प्यार से और एक मीठे एहसास के साथ उसको

किस का रेस्पॉन्स देना शुरू कर दिया था,,,उसने मेरे लोवर लिप्स को अपने लिप्स मे जकड़ा और हल्के से चूसना

शुरू कर दिया जबकि मेरे दोनो लिप्स मे उसका उपर वाला लिप्स जकड़ा हुआ था और मैं उसको बड़े प्यार से और बिना

किसी जल्दबाज़ी से चूस रहा था,,,तभी उसका जिस्म हल्के से नीचे की तरफ खिसकने लगा ,,शायद उसके पैर की उंगलियाँ

उसके वजन को संभाल पाने मे नाकाम होने लगी थी ,,क्यूकी उसकी लड़खड़ाती हुई सांसो की तरह उसका जिस्म भी

लड़खड़ा रहा था,,उसके लड़खड़ाते हुए जिस्म का वजन पैरो की उंगलियाँ नही उठा पा रही थी इसलिए उसका जिस्म

नीचे होने लगा था और उसके लिप्स मेरे लिस्प से दूर होने लगे थे लेकिन उसको अपने लिप्स को मेरे लिप्स से दूर

नही करना था इसलिए वो बार बार अपने जिस्म को उपर करने की कोशिश कर रही थी और मेरे जिस्म को कस कर अपनी

बाहों मे भरने की कोशिश कर रही थी ताकि वो मुझे कस कर अपनी बाहों मे भर ले और उसका जिस्म नीचे की

तरफ नही हो सके लेकिन उसकी पकड़ इतनी मजबूत नही थी इसलिए मैने उसको अपनी बाहों मे कस लिया क्यूकी

मैं भी उसके मीठे और सॉफ्ट लिप्स को अपने लिप्स से दूर नही होने देना चाहता था,,,इसलिए मैने उसको अपनी

बाहों मे कसना शुरू कर दिया लेकिन उसका संगमरमर जैसा चिकना बदन मेरे हाथों से फिसलता जा रहा

था मुझे उसको पकड़ने मे मुश्किल हो रही थी इसलिए मैने अपने हाथों को उसकी पीठ से सहलाते हुए उसकी

कमर से नीचे उसकी गान्ड की तरफ बढ़ाना शुरू कर दिया और मुझे ऐसा करने मे थोड़ी सी भी मेहनत नही करनी

पड़ी क्यूकी मेरे हाथ उसकी पीठ पर फिसलते हुए खुद-ब-खुद उसकी गान्ड के उपर तक चले गये थे,,

वो बहुत पतली सी कमसिन लड़की थी ,,,पतली सी कमर वाली और उसकी गान्ड भी बहुत छोटी थी ,,,उसकी गान्ड के दोनो

हिस्से मेरे दोनो हाथों मे दबे आराम से आ गये थे और मैने उसको उसकी गान्ड से पकड़ कर उपर उठा लिया

उसने भी मेरी मदद करने के लिए अपने हाथों को मेरी गर्दन मे डालके मुझे ज़ोर से पकड़ा और अपनी टाँगों

को भी मेरी कमर से लपेट कर मुझे कस कर अपनी पकड़ मे ले लिया,,,,ऐसा करते हुए उसका पूरा जिस्म हवा मे

उठ गया था उसकी गान्ड मेरे हाथों मे थी और मैने उसको हवा मे उठा लिया था,,,हम दोनो ऐसे ही खड़े

हुए कम से कम 5-7 मिनट तक किस करते रहे,,,,और एक दूसरे के जिस्म को गर्म करते रहे,,,उसका वजन फूलों

से भी कम था ,,और मस्ती के जोश मे मुझे उसको उठाने मे कोई दिक्कत नही हुई थी,,,,

कुछ देर बाद उसने अपने लिप्स को मेरे लिप्स से दूर किया और मुझे हंस कर देखा और फिर अपनी गर्दन को घुमा

कर रूम मे पड़े बेड की तरफ देखने लगी,,,मैने भी उसकी नज़र का पीछा किया और बेड की तरफ देखा और मैं

उसका इशारा भी समझ गया,,,मैने उसको गोद मे उठाया हुआ था और उसको ऐसे ही गोद मे उठाकर बेड के पास

ले गया और बेड के पास जाते ही मैने उसको बेड पर लेटा दिया और खुद उसके उपर लेट-ता चला गया,,ऐसा करने से

मेरा लंड एक बार उसकी चूत से रग्गड़ खा गया था,,,,,नौरमल हालत मे अगर कोई और होता मेरा साथ तो अब

तक मेरा लंड उसकी चूत मे घुस चुका होता लेकिन कविता की बारे मे मैं थोड़ा डर रहा था मैं बिना उसकी

रज़ामंदी से उसकी चूत तक नही जाना चाहता था,,क्यूकी मुझे पता था ऐसा करना जल्दबाज़ी होगी और शायद उसको

ऐसा करना अच्छा भी नही लगेगा,क्यूक लास्ट टाइम भी जब मैं उसकी चूत तक पहुँचा था वो रोने लग गई थी और

आज बड़ी किस्मत से शायद मुझे ये मोका मिला था मैं इसको गँवाना नही चाहता था,,,,मैं धीरे धीरे आगे

बढ़ना चाहता था ,,उसकी रज़ामंदी से,,,,,

मैने उसको बेड पर लेटा दिया और खुद भी उसके जिस्म पर गिरता चला गया,,,वो बेड पर लेट गई और मैं उसके

उपर लेट गया,,हम दोनो के लिप्स फिर से एक दूसरे के लिप्स का स्वाद लेने मे लग गये थे,,,अब उसके हाथ मेरी

पीठ पर चले गये थे जबकि मेरे दोनो हाथ बेड पर थे मैं उसको टच नही कर रहा था ये बात उसको

अच्छी नही लगी शायद,,उसने मेरे लिप्स को अपने लिप्स से अलग किया और मेरी तरफ देखते हुए मेरे दोनो हाथों

को पकड़ा और शरमाते हुए अपने बूब्स के पास अपने पेट पर रख दिया,,और जैसे ही मेरे हाथ उसके पेट पर उसके

बूब्स के पास रखे गये उसने शरमाते हुए मेरे सर को पकड़ा और नीचे करके वापिस मेरे लिप्स पर किस करने

लगी,,,किस करते हुए अभी उसको 2 पल का टाइम ही हुआ था कि उसने अपनी उंगलियों खोलकर मेरे बालों मे सहलाना'

शुरू कर दिया और मेरे हाथ भी जो उसके पेट पर थे हल्के से उसके पेट पर बूब्स के पास सहलाने लगे थे

 
,,वैसे मुझे कुछ करने की ज़रूरत नही पड़ रही थी उसका चिकना खुशबूदार जिस्म खुद-ब-खुद मेरे से वो

सब करवा रहा था जो मैं करना चाहता था ,,,मेरे हाथ उसके पेट पर हल्के से सहलाते हुए उसके बूब्स की

तरफ बढ़ने लगे थे और इसी बात से उसका जिस्म रह रह कर झटके मारने लगा था और उन्ही झटको से मेरे हाथ

अपने आप आगे की तरफ बढ़ने लगे थे और जब तक उसका जिस्म झटके मारता रहा मेरा हाथ उसके बूब्स की तरफ

बढ़ते गये और कुछ ही देर मे मेरे हाथ उसके बूब्स पर थे ,,उसको 2 छोटे छोटे बूब्स मेरे हाथों मे पूरे

के पूरे समा गये थे वो किसी छोटे सेब जितने बड़े थे और अपनी उमर के हिसाब से थोड़ा आकार भी ले चुके

थे ,,,मैने उसके बूब्स को बड़े प्यार से अपने हाथों मे पकड़ा और हल्के से दबा दिया और ऐसा करते ही उसने

अपने हाथों से मेरे सर को अपने करीब खींच कर मेरे लिप्स को थोड़ा तेज़ी से चूसना शुरू कर दिया और उसके

हाथ भी मेरे सर पर तेज़ी से सहलाने लगे थे,,,,उसके बूब्स की छोटी छोटी ब्राउन कलर की डुंड़िया जो किसी

काली मिर्च के दाने जितनी बड़ी थी वो हल्की हल्की हार्ड हो गई थी जिस पर मैने अपनी उंगलियों से हल्की हल्की

छेड़खानी शुरू करदी थी और वो डुंड़िया और ज़्यादा हार्ड होने लगी थी ,,,मैने उन घुंडीयों को उंगलियों मे

पकड़ कर हल्के से दबाना शुरू कर दिया था ,,

कुछ देर हम ऐसे ही किस करते रहे उसके हाथ मेरे सर पर सहलाते रहे जबकि मेरे हाथ उसके छोटे छोटे बूब्स

को सहलाने मे लगे हुए थे मैं उसके बूब्स की घुंडीयों को भी उंगलियों मे पकड़ कर दबा रहा था फिर

कुछ देर बाद उसने मेरे बालों को हल्के से खींचा और मेरे लिप्स को अपने लिप्स से दूर करके मेरे सर को

अपने जिस्म पर नीचे की तरफ लेके जाना शुरू कर दिया मैं उसकी बात समझ गया और खुद अपने जिस्म को नीचे'

की तरफ ले जाने लगा ,,मैने अपने लिप्स को उसके लिप्स से अलग करके उसकी चिन पर अपने लिप्स रखके और हल्की किस करते हुए नीचे की तरफ बढ़ने लगा ,,मस्ती मे उसकी गर्दन अकड़ कर उपर की तरफ हो गई और मैं उसकी गर्दन

से किस करता हुआ धीरे धीरे नीचे बढ़ता जा रहा था,,,मेरे हाथ अभी भी उसके बूब्स को सहला रहे थे और

उसके हाथ भी मेरे सर पर थे ,,वो मेरे सर पर ज़ोर डालके मुझे नीचे की और खिसका रही थी ,,,और मैं भी

उसके जिस्म को चूमता हुआ नीचे की तरफ आ रहा था और जल्दी ही मेरा सर उसके बूब्स के पास आ गया और मैं कुछ

पल के लिए उसके छोटे छोटे बूब्स को निहारता रहा और हल्के हल्के सहलाता रहा ,,,फिर मैने उसके फेस की तरफ

देखा और उसने शर्माके मुझे देखा और अपने हाथों से मेरे सर को अपने बूब्स की तरफ झुका दिया और कुछ

ही पल मे मेरे लिप्स उसके राइट बूब्स की डुँड़ी के उपर थे और मैने बूब्स पर लिप्स टच करने से पहले

अपनी ज़ुबान को बाहर निकाला और अपनी ज़ुबान से उसके बूब की डुँड़ी को हल्के से टच कर दिया और ऐसा होते ही

उसकी कमर ने एक झटका मारा और उसका जिस्म उपर की तरफ उछल गया और उसके बूब मेरे लिप्स से टकरा गया लेकिन जल्दी ही वो नीचे भी हो गया और मेरे लिप्स से उसके बूब्स फिर से दूर हो गया लेकिन उसने फिर से मेरे सर को

अपने बूब्स पर दबा दिया और मैने भी जल्दी से मुँह खोलकर उसके बूब को मुँह मे भर लिया और हल्के से

चुस्के मुँह से बाहर निकाल दिया,,,और फिर से अपने हाथ से उसके बूब्स को पकड़ा और हल्के से दबा कर फिर से

अपने मुँह मे भर लिया और चूसने लगा ,,मेरे मुँह मे बूब्स जाते ही उसके मुँह से हल्की हल्की आह अह्ह्ह्ह

की आवाज़ निकलने लगी जिस से पता चल गया कि वो मस्ती मे डूबने लगी थी और उसके डूबने से ही मेरी नोका

पार लगने वाली थी,,,,

मैने उसके बूब्स को हाथों मे पकड़ा हुआ था और हल्के हल्के चूस रहा था उसके छोटे छोटे बूब्स मेरे

हाथों मे भी और मेरे मुँह मे भी बड़े आराम से आ रहे थे और मैं बड़े प्यार से उनको चूस रहा था,

उसके मुँह से हल्की हल्की सिसकियाँ निकल रही थी और उसके हाथ मेरे सर को बड़े प्यार से सहला रहे थे,,,तभी

करीब मैं 4-6 मिनट तक ऐसे ही उसके बूब्स को चूस्ता रहा मेरा दिल करने लगा नीचे की तरफ बढ़ने के लिए

लेकिन मैं जल्दबाज़ी नही करने वाला था लेकिन आज शायद कविता को जल्दी थी उसने खुद ही मेरे सर को अपने बूब्स

से हटा दिया और मुझे नीचे की तरफ खिसकाने लगी,,,मैं उसकी तेज़ी से उसकी जल्दबाज़ी से थोड़ा हैरान था लेकिन

मैं बहुत मस्त भी हो गया था और उसके ऐसा करते ही मैने भी अपने सर को उसके बूब्स से उठा लिया और उसके

पेट पर किस करते हुए उसकी चूत की तरफ बढ़ने लगा,,,,,मैने खुद की टाँगों को घुटनो से मोड़ लिया था

और उसकी खुली टाँगों के बीच मे बैठ गया था,,मेरा खड़ा लंड उसकी चूत पर घिस रहा था लेकिन मैने

लंड को आगे नही किया ,,बल्कि मैने तो अपने लंड को कोई भी हरकत नही करने दी थी क्यूकी मैं पहले उसकी

तरफ से कदम आगे बढ़ाने के बारे मे सोच रहा था,,,,,

उसकी टाँगें खुली हुई थी और मैं अपनी टाँगों को घुटनो से मोड़ कर उसकी टाँगों के बीच मे बैठ गया

था मेरा सर अभी भी झुका हुआ था उसके पेट के उपर और मैं उसके पेट पर किस करता जा रहा था वो भी बड़े

प्यार से मेरे सर को सहला रही थी अपनी उंगलियों से,,,,,मुझे उसके बूब्स से लेके चूत के 3 इंच उपर तक

जाने मे कम से कम 3-4 मिनट का टाइम लग गया था ,,,मैं बहुत धीरे धीरे आगे बढ़ रहा था,,,जब मैं उसकी

चूत के 3 इंच उपर था तो मुझे उसकी चूत की हल्की नमकीन खुश्बू आने लगी थी ,,उसकी चूत पर उगे

हुए हल्के हल्के भूरे रंग के सॉफ्ट बाल मेरी चिन पर लगने लगे थे और मुझे अपनी चिन पर हल्की गुदगुदी

महसूस होने लगी थी,,,,उसी गुदगुदी और नमकीन खुसबू से मेरे लिप्स किस करते हुए उसकी चूत पर और ज़्यादा

नीचे की तरफ बढ़ने लगे और कुछ पल बाद मैं उसकी चूत तक पहुँच गया था,,,जैसे ही मैं उसकी चूत पर

पहुँचा मुझे याद आया पिछली बार वो रोने लगी थी इसलिए मैने सर को उपर उठाकर उसकी तरफ देखा और

नज़रो ही नज़रो मे उस से आगे बढ़ने की इजाज़त माँगी उसने भी रज़ामंदी मे अपने सर को हाँ मे हिला दिया और

मुझे आगे बढ़ने का इशारा दे दिया,,,,मैने भी जल्दी से अपने लिप्स को उसकी चूत पर रख दिया ,,,उसकी चूत

के सॉफ्ट बाल मेरी नाक से टकराने लगे थे जो हल्के भूरे रंग के थे,,उसकी चूत के बालों से भी हल्की

नमकीन खुसबू आ रही थी लेकिन जैसे ही मेरी नाक उसकी चूत के उपर जाके टिक गयी तो मुझे इतनी तेज और

तीखी खुश्बू आने लगी थी उसकी चूत से कि मेरा पागलपन बढ़ने लगा था एक ही पल मे लेकिन फिर भी पता

नही मैं कैसे खुद पर क़ाबू कर रहा था,,,,

मैं उसकी चूत की खुश्बू को अपनी नाक के रास्ते से अपने पूरे जिस्म तक पहुचाने लगा था जिस से मेरे पूरे

जिस्म मे मस्ती की लहर दौड़ने लगी थी,,,मैं तेज़ी से साँसे लेता हुआ उसकी चूत को सूंघने लगा था और खुद के

जिस्म मे मस्ती की खुश्बू को भरने लगा था और उसी खुश्बू से मस्त होके पता नही कब मेरी ज़ुबान मेरे

मुँह से बाहर निकली और मैने अपनी ज़ुबान को उसकी चूत की लाइन पर टच कर दिया और उसकी चूत की लाइन पर

लगे हल्के नमकीन पानी को चाटने लगा,,,,मेरी ज़ुबान उसकी छूट की एक पतली सी लाइन पर उपर से नीचे तक

घूमने लगी थी,,,,उसकी चूत के नमकीन पानी का स्वाद मुझे बहुत अच्छा लग रहा था ये एक नया स्वाद था

मेरे लिए,,,,हालाकी मैने बहुत चूत का पानी पिया था लेकिन इस चूत का पानी मुझे बाकी सब चूत से ज़्यादा

नमकीन लग रहा था क्यूकी ये मेरी लाइफ की पहली जवान चूत थी अब तक तो मुझे ढली उमर की चूत ही मिली

थी जो काफ़ी नमकीन थी लेकिन इस चूत का नमकीन स्वाद किसी नीब्बू के अचार की तरह था,,,,ये बात वही बता

सकता है जिसने चूत के पानी चखा हो कभी,,,,,

मैं हल्के हल्के उसकी चूत के पानी को चखने लगा था और हल्के हल्के उसकी चूत को चाट रहा था और वो

मस्ती मे बस सिसकियाँ लेती जा रही थी उसका सर बेड पर इधर से उधर हिलने लगा था,,,,वो किसी मछली की तरह

झटपटाने लगी थी करवटें ले रही थी बेड पर और मेरे सर को अपने हाथों से अपनी चूत पर दबा रही थी

उसका बस चलता तो मेरे सर को अपनी चूत मे घुसा लेती ,,वो कुछ ज़्यादा ही मस्त हो गई थी और उसकी चूत को

चाट-ता हुआ मैं भी काफ़ी मस्त हो गया था,,,मेरे हाथ जो अब उसकी चूत के दाने तरफ पहुँच गये थे

मैने उन हाथों से उसकी चूत को हल्के से पकड़ा और खोल दिया,,,मैं एक दम से दंग रह गया ,,मैं ज़िंदगी

मे पहली बार जवान चूत देख रहा था उसका रंग एक दम गुलाबी था और अंदर से वो सिंधुरी रंग की थी

मैं इतना ज़्यादा खुश हो गया था कि मेरा दिल करने लगा अभी अपने लंड को घुसा दूं इसकी चूत मे लेकिन

तभी मुझे हल्की मायूसी हुई ,,क्यूकी इसकी चूत की सील खुली हुई थी,,,,मैने दोनो हाथों से उसकी चूत को

खोला और कुछ देर उसकी चूत को देखता रहा फिर मैने उसकी तरफ देखा तो वो मेरी घुरती हुई आँखों से

डर गई और उसकी आँखें नम होने लगी,,मुझे लगा शायद वो फिर से मुझे चूत तक नही जाने देना चाहती

इसलिए रोने लगी थी इसलिए मैं जल्दी से उसकी चूत से डोर हो गया और उसको ये बता दिया कि मैं कुछ नही

करने वाला जब तक उसकी मर्ज़ी नही होगी ,

मैं उस से दूर होके उठकर बैठ गया और उसकी तरफ देखने लगा,,,कविता रोते हुए जल्दी से बेड से उठी और

मेरे उपर झपट पड़ी उसने मुझे बेड पर लेटा दिया और खुद मेरे उपर चढ़ गई,,,मैं कुछ नही समझा लेकिन

तभी उसने कुछ ऐसा किया कि मैं दंग रह गया,,,उसने मेरे लिप्स को अपने लिप्स मे जकड़ा और किस करते हुए मेरे

हाथ पकड़ कर अपने बूब्स पर रखे और तभी उसने अपने हाथ से मेरे लंड को पकड़ा और अपनी चूत पर

रखते हुए अपनी चूत को मेरे लंड पर दबाने लगी,,,मेरा लंड बहुत मोटा था और उसकी चूत बहुत टाइट

थी इसलिए लंड को चूत मे जाने मे दिक्कत हो रही थी ,,,चूत तो पानी बहा चुकी थी लेकिन लंड अभी काफ़ी

खुश्क था जो चूत मे घुसने मे दिक्कत कर रहा था लेकिन वो नही मान रही थी वो लंड को हाथ मे

पकड़कर चूत के होल पर रखकर खुद के जिस्म को लंड पर नीचे दबा रही थी जिस से लंड चूत के अंदर

घुसने लगा था और उसके मुँह से हल्की चीख निकलने लगी थी,,,उसके लिप्स मेरे लिप्स मे क़ैद थे लेकिन फिर भी

उसकी चीख रूम मे गूँज रही थी,,,वो चीख को दबाने के लिए मुझे बहुत ज़ोर ज़ोर से किस करने लगी थी

ताकि उसकी आवाज़ नही निकल पाए लेकिन मेरा लंड बहुत मोटा था जो उसकी जवान और टाइट चूत मे मुश्किल से घुस

रहा था और उसको दर्द भी हो रहा था इसलिए उसकी आवाज़ निकलती जा रही थी जिस से सॉफ पता चल रहा था कि उसको

दर्द हो रहा है,,,,लेकिन वो फिर भी रुक नही रही थी बस अपनी चूत को मेरे लंड पर दबाती जा रही थी,,,

वो काफ़ी टाइम से कोशिश कर रही थी ,,मुझे किस करते हुए मेरे लंड को अपनी चूत मे लेने के लिए लेकिन मेरा

लंड बहुत मोटा था जो उसकी टाइट चूत मे नही घुस रहा था ,,वो बार बार दर्द से बिलखती हुई मेरे लंड

पर अपनी चूत रखके अपनी चूत को नीचे दबा रही थी ताकि मेरा लंड उसकी चूत मे घुस जाए लेकिन उसकी

सारी कोशिश नाकाम जा रही थी,,,,इतने टाइम बाद भी मेरे लंड की हल्की सी टोपी ही घुसी उसकी चूत मे जिसको

वो हल्के हल्के अंदर बाहर करते हुए दर्द से तड़प रही थी,,,तभी एक दम से उसने अपने लिप्स को मेरे लिप्स से

दूर किया और अपने सर को मेरे सर से उपर उठा लिया तभी मैने उसकी आँखों मे देखा तो उसकी आँखों मे

आँसू आ गये थे और चेहरा पर एक डर नज़र आ रहा था,,सॉफ पता चल रहा था कि उसकी चूत मे मेरा लंड

नही घुस रहा था लेकिन टोपी की वजह से ही उसको दर्द होने लगा था,,,,वो रोते हुए एक दम से मेरे उपर से

उठी और बेड पर मेरे से दूर होके पीठ करके बैठ गई और ज़ोर ज़ोर से रोने लगी,,,,

मुझे कुछ समझ नही आया कि अब इसको क्या हो गया,,,,अब तो मैने कुछ नही किया जो किया इसने किया फिर क्यूँ

रोने लगी ये,,,,क्या मेरे से कोई ग़लती हो गई,,,,क्या मैने कुछ ग़लत कर दिया,,,,,लेकिन मैने तो कुछ किया ही

नही था,,जो भी किया उसने किया,,,,,,,मुझे कुछ समझ नही आया लेकिन उसके रोने की आवाज़ से मुझे उसपे दया आ

गई और मैं उसके करीब चला गया,,,,,,,,,,,,,हालाकी मुझे उसपे गुस्सा भी आ रहा था क्यूकी उसकी टाइट चूत मे

मेरे लंड की टोपी घुस गई थी और हल्के हल्के अंदर बाहर भी होने लगी थी और मुझे हल्का हल्का मज़ा भी

आने लगा था लेकिन उसने सारा मज़ा खराब कर दिया था,,,लेकिन उसके रोने की आवाज़ से मेरा दिल पसीज गया था और

मैं हिम्मत करके उसके करीब हो गया,,,,और जैसे ही मैने पीछे से उसके शोल्डर पर हाथ रखा तो वो मेरी

तरफ पलट गई,,,,और आँखों मे आँसू लेके मुझे रोते हुए देखने लगी,,,,फिर एक दम से वो आगे बढ़ कर मेरे

से लिपट गई,,,,,

 
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