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कहीं वो सब सपना तो नही complete

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मैं थोड़ा परेशान हो गया ,,,,वो नंगे बदन रोते हुए बेड पर बैठकर मेरे गले लगी हुई थी और रोती जा रही

थी,,,उसने मुझे बाहों मे भर लिया और मैने भी अपने हाथों को उसकी पीठ पर रखा लेकिन मस्ती से नही

प्यार से,,,मैने प्यार से उसके सर पर हाथ रखा और बड़े प्यार से हाथ को उसके सर पर फिराते हुए उस से बात

करने लगा,,,,उस से उसके रोने की वजह पूछने लगा,,,,

क्या हुआ कविता,,,,,,तुम एक दम से इतना रोने क्यूँ लगी,,,क्या मुझसे कोई ग़लती हो गई,,,,,

वो कुछ नही बोली बस रोती रही,,,,उसका रोने अब और भी ज़्यादा हो गया था,,,वो बिलख-बिलख कर फुट -फुट कर

रोने लगी थी,,,,मुझे उसको संभालना मुश्किल हो रहा था,,,,,

मैने फिर बड़े प्यार से उसके सर पर हाथ फिराते हुए उस से पूछा,,,,,,,,क्या हुआ कविता ,,कुछ तो बोलो,,

क्या मेरे से कोई ग़लती हो गई,,,,बोलो ना,,प्ल्ज़्ज़ ऐसे रोओ मत तुम,,,,अगर मेरे से कोई ग़लती हुई तो बता दो मैं

चला जाता हूँ यहाँ से,,,,,

तभी उसने अपने सर को मेरे शोल्डर से उठाकर थोड़ा पीछे किया और मेरी तरफ देखते हुए मुझे किस करने

लगी,,,,,,,,,,,नही सन्नी तुम्हारी कोई ग़लती नही है,,,ग़लती तो मेरी है,,,,,इतना बोलकर वो फिर रोने लगी,,,

क्या हुआ कुछ तो बोलो ना,,,तुम्हारी क्या ग़लती कुछ तो बोलो,,,

तभी उसने मेरे मुँह पर हाथ रखा और बोली,,,,,,,अब कुछ मत बोलो सन्नी,,बस मुझे प्यार करो,,मुझे अपनी

बाहों मे भरके बस मुझे प्यार करो सन्नी,,,इतना प्यार करो कि मैं सब कुछ भूल जाउ,,,बस खो जाउ

तुम्हारी बाहों मे ,,,,मुझे प्यार करो सन्नी मुझे प्यार करो सन्नी प्लज़्ज़्ज़्ज़्ज़ ,,प्ल्ज़्ज़ सन्नी ,,वो यही बोलती

जा रही थी और मेरे लिप्स पर हल्की हल्की किस करती जा रही थी,,,,

मैने उसके सर को अपने हाथों मे पकड़ा तो उसने रोते हुए नज़रे झुका ली लेकिन उसकी आँखों से आँसू अभी

भी बह रहे थे,,,,,उसका मासूम चेहरा किसी डर से किसी शरम झुका हुआ था,,,,लेकिन फिर भी वो झुके

चेहरे से नम आँखों से धीर धीरे बोलती जा रही थी,,,मुझे प्यार करो सन्नी,,,मुझे प्यार करो सन्नी,

मैं उसकी मुँह से ये अल्फ़ाज़ सुनके थोड़ा खुश हो गया और थोड़ा बेचैन भी,,,मैने उसके सर को पकड़ा हुआ था

दोनो हाथों से फिर मैने उसके चेहरे को थोड़ा उपर किया ताकि उसकी आँखों मे देख सकू लेकिन जैसे ही

मैने उसके चेहरे को उपर किया उसने अपनी नमी से भरी हुई आँखों को थोड़ा और झुका लिया और मेरे से

डरने लगी शरमाने लगी,,,लेकिन नम आँखों से आँसू रुकने का नाम नही ले रहे थे,,,,मैने आगे बढ़ कर

अपने लिप्स को उसकी एक आँख पर रखा और हल्की किस करदी,,,फिर दूसरी आँख पर भी किस करदी किस करने के बाद

उसकी आँखे बंद हो गई लेकिन बंद आँखों से भी पानी की धारा निकलती जा रही थी,,,,मैने अपनी ज़ुबान को

उसकी चिन पर रखा और आँखों से निकलने वाली आँसू को चिन से चाट-ता हुआ उसकी आँख की तरफ बढ़ने लगा ,

ऐसे ही मैने चिन से होते हुए दोनो तरफ की आँखों से बहने वाले आँसुओं को चाट कर सॉफ कर दिया और फिर

से एक बार उसकी आँखों पर किस करदी,,,,

आँसू पीने के बाद आँखों पर किस की तो उसने दोनो आँखों को खोला और मुझे गौर से बड़े प्यार से देखने

लगी,,,,,,,,

मैं काफ़ी टाइम तक उसके फेस को हाथों मे पकड़ कर उसकी तरफ देखता रहा,,,उसकी आँखों से आँसू अब रुक गये

थे और वो बड़े प्यार से मुझे देख रही थी,,,,,,,,,,,,,कुछ टाइम रूम मे सन्नाटा रहा फिर धीरे से बड़े

प्यार से कविता बोली,,,,,

ऐसे क्या देख रहे हो सन्नी,,ऐसे मत देखो मुझे शरम आ रही थी,,,

मैं कुछ नही बोला बस उसकी तरफ देखता रहा,,,

क्या हुआ सन्नी बोलो ना,,,सन्नी ,,,बोलो ना क्या हुआ,,,,वो बड़े प्यार से बोल रही थी,,

कुछ नही कविता,,,,सोच रहा हूँ तेरे नमकीन आँसू भी मैं किसी मीठे शरबत की तरह पी गया अब

तुझे चाहूं तो कैसे चाहूं किस क़दर चाहूं ,,,,,कैसे प्यार करूँ ,,,

तभी उसने हंस कर शरमा कर मुझे देखा और बड़े प्यार से आगे बढ़ कर मेरे लिप्स पर हल्की किस करदी और बोली,,,,

ऐसे,,,,,ऐसे प्यार करो मुझे सन्नी,,,इतना प्यार करो कि मैं खुशी से पागल हो जाउ,,,,

 
मैने उसकी तरफ देखा और उसको शोल्डर से पकड़ा और बेड पर पीछे की तरफ लेटा दिया और खुद उसके पास उसकी

तरफ मुँह करके लेट गये और अपने लिप्स को उसके लिप्स पर रख दिया,,,,लेकिन बड़े आराम से बड़े प्यार से,,इस बार

उसने भी जल्दबाज़ी नही की और ना ही मैने,,,,मैने उसके लिप्स को अपने लिप्स से हल्के से पकड़ा और चूसने लगा अब

वो शांत होके लेटी रही उसने कुछ नही किया बस सब कुछ मुझे ही करने दिया,,,,उसने खुद को मुझे पूरी तरह

से सौंप दिया मेरे हवाले कर दिया,,,,मैं भी अब उसको बड़े प्यार से बड़े आराम से मस्त करने लगा था,,प्यार

करने लगा था,,,,

मैने उसके लिप्स को अपने लिप्स मे जकड़ा और प्यार से चूमने और चूसने लगा,,,वो भी बड़े प्यार से मुझे किस

का रेस्पॉन्स देने लगी थी,,,अब मेरा राइट वाला हाथ उसकी गर्दन के पास उसके बूब्स के उपर था जबकि लेफ्ट

वाला हाथ उसके सर पर था और उसके बालों को बड़े प्यार से सहला रहा था,,,उसका एक हाथ मेरे जिस्म और बेड के

बीच मे से मेरी पीठ पर था जबकि दूसरा हाथ मेरे सर पर मेरे कान और गाल के पास से मेरे सर को सहला

रहा था,,,हम दोनो बिना किसी जल्दबाज़ी के हल्के हल्के मस्ती करने लगे थे,,,,अब मेरा हाथ जो उसकी गर्दन

पर था वो उसकी सुराही जैसी गर्दन को बड़े प्यार से महसूस करते हुए सहलाने लगा था और धीरे धीरे वो

हाथ गर्दन से होता हुआ नीचे उसके बूब्स की तरफ बढ़ने लगा था लेकिन मैने उसके बूब्स को टच नही किया

बल्कि बूब्स के उपर वेल हिस्से पर गर्दन के पास ही अपने हाथ को घूमता रहा और धीरे धीरे उसके बूब्स की

तरफ बढ़ने लगा,,,,मेरा राइट हॅंड अब उसके बूब्स के उपर पहुँच गया और मैने बारी बारी से उसके बूब्स को

हाथ मे लेके हल्के हल्के दबाना शुरू कर दिया ,कभी मैं उसके राइट वाले बूब को सहलाता तो कभी लेफ्ट

वाले बूब को और कभी गर्दन से लेके बूब्स की लाइन मे नीचे उसकी कमर तक अपने हाथ से सहलाने लगता और

ऐसा करते हुए जब भी मेरा हाथ उसकी बूब्स की लाइन से होता हुआ उसकी कमर और पेट तक जाता तो उसका जिस्म

हल्के झटके मारने लगता,,,और उसी पलों के दौरान वो मेरे सर को हल्का कस कर अपने हाथ मे पकड़ लेती,,,

मैं उसको किस करते हुए उसके बूब्स को कभी उसके पेट को कभी कमर को सहला रहा था फिर कुछ देर बाद

मैने उसके लिप्स से अपने लिप्स दूर किए और एक बार उसके चेहरे की तरफ देखा जो काफ़ी राहत महसूस कर रही

थी उसकी आँखें बंद थी,,मैने उसकी चिन पर हल्की किस की और उसकी गर्दन से होता हुआ उसके बूब्स पर आ गया

और बूब्स को मुँह मे भरके चूसने लगा,,,जब मैं उसके बूब्स चूस रहा था तो उसने मेरे सर पर अपने

हाथ रखे और मेरे सर को सहलाने लगी ,,कुछ टाइम मैं भी उसके पेट और कमर को सहलाता रहा फिर मेरा

हाथ उसकी चूत पर चला गया मैने बड़े प्यार से उसकी चूत की लाइन को अपनी 2 उंगलियों से खोला और तीसरी उंगली

को उसकी चूत की लाइन से सहलाता हुआ उसकी चूत के अंदर घुसा दिया और मेरे ऐसा करते ही वो थोड़ा हिलने

जुलने लगी,,तभी मैने उसकी शांत करने के लिए अपनी उंगली को चूत से बाहर किया और फिर से उंगली को वापिस

चूत मे घुसा दिया और इस बार उसके हिलने से पहले मैने 1 नही 2 उंगलियों को उसकी चूत मे घुसा दिया और

जल्दी ही बाहर भी निकाल लिया,,,उसकी चूत की सील खुली हुई थी लेकिन फिर भी उसकी चूत बहुत टाइट थी,,,मैने

2 उंगलियों को उसकी चूत मे हल्के हल्के अंदर बाहर करना शुरू कर दिया जिसमे मुझे थोड़ी सी भी दिक्कत

नही हुई क्यूकी उसकी चिकनी चूत अपने ही पानी की वजह से काफ़ी ज़्यादा चिकनी हो गई थी और मेरी 2 उंगलियाँ उसकी

चूत मे बड़े आराम से अंदर बाहर होने लगी थी,,,,साथ साथ मैं उसके बूब्स को भी चूस रहा था और वो

मेरे सर को बड़े प्यार से सहलाते हुए हल्की हल्की सिसकियाँ ले रही थी,,,उसकी सिसकियों से सॉफ पता चल रहा था

कि वो काफ़ी मस्ती मे आ गई थी,,,जब उसकी सिसकियाँ कुछ तेज हुई तो मैने उसके बूब्स को मुँह से निकाल दिया और

जल्दी से उठकर उसकी चूत के पास चला गया और उसके कुछ सोचने से पहले ही चूत के उपर जाके अपने लिप्स को

उसकी चूत पर रखा और उसकी चूत को मुँह मे भर लिया,,,उसकी चूत को मुँह मे भरके मैने हल्के हल्के

अपनी उंगलियों को भी चूत मे अंदर बाहर करना जारी रखा और उसकी चूत को अपने मुँह मे भरके भी

चूसने लगा और साथ साथ अपनी ज़ुबान से चूत को उपर से भी चाटने लगा,,,,फिर मैने उसकी चूत से अपनी

उंगलियाँ बाहर निकली और उसकी चूत को अपने हाथों से दोनो तरफ खोल दिया और अपनी ज़ुबान को उसकी चूत

मे घुसा दिया मेरे ऐसा करते ही उसके मुँह से एक लंबी अहह के साथ मेरा नाम निकला,,

सुउुुउउन्न्ञननननननननननन्न्नयययययययययययययययययययययययययी आआआआआआआआआहह

ये आवाज़ सुनके मुझे कुछ हो गया और मैने उसकी चूत मे अंदर तक जहाँ तक मेरी ज़ुबान घुस गई घुसा

दी और अपनी ज़ुबान को अंदर बाहर करने लगा और उसकी चूत को अपनी ज़ुबान से चोदने लगा,,,मुझे अभी 2-3

मिनट ही हुए थे उसकी चूत को अपनी ज़ुबान से चोदते हुए कि उसकी सिसकियाँ तेज हो गई और उसके बदन ने झटके

मारने शुरू कर दिए और देखते ही देखते उसने तेज आवाज़ से सिसकियाँ लेते हुए चूत से पानी बहाना शुरू कर

दिया और मैने भी उसकी चूत के पानी को पीना शुरू कर दिया ,,,जब मैं उसकी चूत का पानी पी रहा था तो

मैने देखा कि वो सिसकियाँ लेते हुए अपने सर को उठाकर मेरी तरफ देख रही थी,,,उसने बड़ी अजीब नज़रो से

मुझे देखा शायद उसको मेरा उसकी चूत का पानी पीना अच्छा नही लगा लेकिन उसको क्या पता ये भी किस्मत की

बात है जो किसी को जवान चूत का पानी पीना नसीब होता है,,,,मैने उसकी चूत से निकलने वाला सारा पानी

पी लिया और उसकी चूत को अच्छी तरह चाट कर सॉफ कर दिया ,,,

फिर मैं बेड से उठा और उस रूम मे एक तरफ टेबल पर पड़ी हुई आयिल की शीशी की तरफ बड़ा ,,,वो बेड पर लेटी

हुई हल्की हल्की सिसकियाँ ले रही थी और मुझे उठकर जाते देख रही थी,,,तभी मैं आयिल वाली शीशी लेके वापिस आया

और उसकी तरफ देखा,,,,मुझे उसके चेहरा पर एक राहत भरी मुस्कान नज़र आ रही थी लेकिन जल्दी ही उसके चेहरे

पर मस्ती छाने लगी थी क्यूकी मैने उसके सामने अपने लंड को हाथ मे लिया और उसपे आयिल लगाने लगा ,,वो भी

समझ गई थी अब क्या होने वाला है लेकिन वो थोड़ा डर रही थी,,,मैं बेड से नीचे खड़ा होके लंड पर आयिल

लगा रहा था जबकि वो बेड पर लेटी हुई मेरे लंड को देख कर मस्ती मे भरती जा रही थी लेकिन उसके चेहरे पर

एक डर भी सॉफ सॉफ नज़र आ रहा था,,वो मेरे लंड के साइज़ से डर रही थी और मन ही मन सोच रही थी कि ये

मूसल उसकी चूत मे जाएगा भी या नही क्यूकी थोड़ी देर पहले उसने खुद कोशिश की थी लेकिन नाकाम रही और

'उसको दर्द भी बहुत हुआ था,,,,,वो बड़े डर से मेरे लंड को तरफ देख रही थी,,,और मैं मस्ती मे अपने लंड

पर आयिल लगाता हुआ उसकी तरफ और उसके नंगे जिस्म की तरफ बड़े प्यार और मस्ती से देख रहा था,,,

मैं बेड के उपर चढ़ गया और घुटनो के बल उसकी टाँगों के बीच मे बैठ गया ,,मेरे एक हाथ मे आयिल

वाली शीशी थी जबकि दूसरे हाथ से मैं अपने लंड पर आयिल लगा कर हल्की हल्की मालिश करता हुआ आयिल को पूरे

लंड पर लगा रहा था,,,,उसकी नज़रे मेरे लंड पर टिकी हुई थी वो कुछ डरी हुई थी,,तभी मैने अपने लंड

से हाथ हटा लिया और उसी हाथ को उसकी चूत पर रखा और आयिल लगे हाथ की 2 उंगलियाँ उसकी चूत मे घुसा दी

चूत ने फिर से पानी बहाना शुरू कर दिया था मेरा लंड देख कर वो मस्ती मे आ गई थी,उंगलियों पर भी

काफ़ी आयिल लगा हुआ था इसलिए उंगलियाँ एक पल से पहले उसकी चूत मे घुस गई थी मैने उंगलियों को आधा चूत

मे घुसा दिया और आधी उंगलियों को चूत से बाहर रखते हुए थोड़ा उपर उठा लिया और चूत के अंदर वाले

हिस्से की उंगलियों को चूत के अंदर की तरफ झुका दिया और चूत के बाहर बची उंगलियों पर शीशी से आयिल

गिराने लगा ,,उंगलियों का झुकाव चूत के अंदर की तरफ था इसलिए जब शीशी से आयिल उंगलियों पर गिरने लगा

तो खुद-ब-खुद उसकी चूत के अंदर की तरफ बहने लगा,,,उसकी चिकनी चूत आयिल की वजह से और भी ज़्यादा चिकनी

हो गई थी और अब तो मैने उसी चूत के अंदर भी आयिल भर दिया था और 2 उंगलियों से आयिल को चूत के अंदर की

दीवारों पर भी लगा दिया था,,,,,जब चूत अंदर से भी चिकनी हो गई तो मैने अपने हाथ को उसकी चूत से

बाहर निकाला और आयिल वाले हाथ को वापिस अपने लंड पर लगा कर हल्की मालिश की फिर मैं उसके जिस्म पर आगे

की तरफ झुकने लगा,,,,वो समझ गई कि मैं लंड को उसकी चूत मे डालने वाला हूँ इसलिए उसने अपने दोनो

हाथ मेरी चेस्ट पर रखे और मुझे रोकने लगी,,,,मुझे उसके फेस पर डर के भाव सॉफ नज़र आ रहे थे

इसलिए मैने उसका डर कम करने क लिए उसको प्यार से देखा और नीचे उसके जिस्म की तरफ झुकने लगा जैसे जैसे

मैं नीचे झुकता चला गया वैसे वैसे मेरा आयिल लगा लंड उसकी चूत के करीब आता चला गया ,,लेकिन मैं

अभी चूत मे लंड घुसाने के लिए नही उसको किस करने के लिए नीचे की तरफ झुका था,,मैने झुक कर उसके

फोरहेड पर हल्की किस की और उसको ये यकीन दिलवाया कि मैं ज़्यादा दर्द नही करूँगा और उसने भी रज़ामंदी

मे मेरे सर को पकड़ा और हल्की किस करते हुए मुझे आगे बढ़ने का इशारा कर दिया,,मैने अपने एक हाथ से

अपने लंड को पकड़ा और उसकी चूत के होल के उपर रखा और मेरे ऐसा करते ही उसने तेज तेज साँसे लेना शुरू

कर दिया उसकी सांसो की आवाज़ मे उसकी घबराहट का सॉफ सॉफ पता चल रहा था,,,

मैने लंड को हाथ मे पकड़ा और चूत के होल पर रखा और हल्के से लंड को आगे की तरफ खिसका दिया,लंड

बहुत हार्ड था और चूत बहुत टाइट फिर भी आयिल की वजह से लंड और चूत काफ़ी चिकने हो गये थे और जैसे ही

मैने हल्का ज़ोर लगाया मेरा लंड उसकी चूत मे घुसने लगा अभी लंड की टोपी आधी ही अंदर घुसी थी कि उसकी

साँसे और ज़्यादा तेज हो गई हार्ट बीट बढ़ने लगी,,,,मैने अपने लंड को वहीं रोक दिया और ज़्यादा आगे नही किया

फिर कुछ देर उसके फोरहेड पर किस करता रहा,,,जब फिर उसकी हालत ठीक हुई तो मैने लंड को फिर से हल्का आगे

की तरफ खिसका दिया इस बार मेरे लंड की पूरी टोपी उसकी चूत मे घुस गई थी,,,उसकी चूत इतनी टाइट थी कि

मुझे लग रहा था जैसे मैने मेरे लंड की टोपी को अपनी मुट्ठी मे कस के पकड़ा हुआ है,,,,जब टोपी अंदर

घुस गई तो उसके माथे पर पसीना आने लगा घबराहट के मारे मैने बड़े प्यार से उसके सर पर हाथ फिराते

हुए उसके लिप्स पर हल्की हल्की किस शुरू करदी मेरा दूसरा हाथ उसकी चूत की तरफ बढ़ने लगा और मैने उस हाथ

को उसकी चूत के उपर रखा और हल्की हल्की उंगली से उसको मस्त करने की कोशिश करने लगा ताकि उसे दर्द का

एहसास थोड़ा कम हो और कुछ देर ऐसे ही रुक कर चूत पर उंगली करते हुए उसको किस करता रहा,,,,फिर कुछ

देर बाद मैने लंड को हल्का सा आगे किया तो मेरा लंड फिसल कर 4 इंच तक उसकी चूत मे घुस गया और उसका

मुँह दर्द से खुल गया वो चिल्लाने वाली थी लेकिन मैने अपनी उंगली की स्पीड को उसकी चूत पर थोड़ा तेज कर दिया

जिस से उसको थोड़ी ज़्यादा मस्ती चढ़ने लगी और वो दर्द को थोड़ा भूल गई ,,,मैने उंगली की स्पीड को तेज करते

हुए उसको मस्ती देनी शुरू की और मोका देखकर लंड को थोड़ा और ज्याद अंदर खिसका दिया अब मेरा 6 इंच तक

लंड उसकी चूत मे घुस गया था और उसकी दर्द भी नही हुआ था,,मैं कुछ देर ऐसे ही रुका रहा फिर मैने

अपने जिस्म को उसके जिस्म से उठा लिया और दोनो हाथों को बेड पर रखते हुए अपने जिस्म को उसके जिस्म से उपर

करके खुद को अड्जस्ट किया फिर हल्की हल्की स्पीड के साथ लंड को अंदर बाहर करने लगा,,,करीब 2-3 मिनट

तक मैं बड़ी स्लो स्पीड मे लंड को आगे पीछे करता रहा उसके हाथ जो बेड पर थे अब वो हाथ मेरी चेस्ट

पर आ गये थे और उसने मेरी चेस्ट को हल्के से सहलाना शुरू कर दिया था मैं समझ गया कि थोड़ा ही सही लेकिन

इसको मज़ा तो आने ही लगा था इसलिए मैने स्पीड थोड़ी तेज करने के लिए उसकी रज़ामंदी माँगते हुए नीचे झुककर

उसको एक किस करदी तो उसने मुझे अपनी बाहों मे भरके अपने दोनो हाथ मेरी पीठ पर रखे और मुझे

स्पीड तेज करने का इशारा कर दिया और मैने भी स्पीड थोड़ी तेज करदी,,,

मैने लंड को और ज़्यादा अंदर नही किया बस 5-6 इंच तक लंड को अंदर करके चुदाई शुरू करदी थी वो भी

ज़्यादा तेज स्पीड से नही ,,लेकिन स्पीड पहले से थोड़ी तेज हो चुकी थी और इस बात का पता मुझे उसकी सिसकियों से

लग रहा था वो मस्ती मे सिसकियाँ लेते हुए मेरा नाम लेने लगी थी,,,,आहह सुउन्न्ञनययययययी आह

उुउऊहह हमम्म्ममममममम उसका सर मस्ती के मारे बेड पर इधर उधर हिलने लगा था

वो मस्ती मे पागल होने लगी थी उसने अपने दोनो हाथों से मुझे कस के पकड़ा हुआ था और अपने हाथों से

मेरी पीठ को सहलाते हुए सिसकियाँ लेती जा रही थी,,,,मैं भी बहुत मस्त हो गया था क्यूकी अब मुझे डर नही

था उसको दर्द होने का अब वो मस्ती मे मज़ा लेने लगी थी मैं भी अब मज़ा लेना चाहता था मैने अपने

सर को उसके बूब्स पर रखा और उसके एक बूब को मुँह मे भर लिया तभी उसने मेरे सर को बालों से पकड़ा और

अपने बूब्स से दूर कर दिया फिर उसने अपने उसी बूब को अपने हाथ मे पकड़ा और दूसरे हाथ से मेरे सर को

पकड़ा और बड़े प्यार से मेरे सर को अपने बूब्स पर दबा कर मुझे अपने हाथ से पकड़ कर अपने बूब को

चुसवाने लगी,,,वो हाथ से दबा दबा कर अपने बूब को मेरे मुँह मे भरने लगी थी और दूसरे हाथ से मेरे

सर को सहलाने लगी थी ,,अब मेरी स्पीड भी पहले से तेज होने लगी थी,,मुझे इतनी टाइट चूत पहले कभी नही

मिली थी,,,,मैं सोच रहा था ये वर्जिन होगी लेकिन इसको सील खुली हुई थी लेकिन फिर भी इसकी चूत अब तक की

सबसे टाइट चूत थी मेरे लिए,,,,सच बोलू तो मेरे लिए ये किसी वर्जिन चूत से कम नही थी,,,मुझे ऐसा

लग रहा था जैसे मेरा 6 इंच का लंड मेरे दोनो हाथों मे मेरी मुठियों मे क़ैद है और मैं ज़ोर ज़ोर से

अपने लंड को दबा दबा कर मूठ मार रहा हूँ,,,,सच मे मुझे इतना ज़्यादा मज़ा आ रहा था कि मैं

बता नही सकता,,,

 
कविता भी अब काफ़ी मस्ती मे थी,,,उसके मुँह से अब सिसकियों की आवाज़ भी तेज हो गई थी और वो अपने हाथ से अपने

बूब को ज़ोर ज़ोर से दबा कर मुझे चुस्वा रही थी,,,और दूसरे हाथ से मेरे सर को सहला रही थी साथ साथ

सिसकियाँ लेती हुई मेरा नाम ले रही थी,,,मैं करीब 8-10 मिनट से उसे ऐसे ही चोद रहा था फिर मेरा

दिल किया पोज़ चेंज करने को लेकिन मुझे इतना मज़ा आ रहा था कि मेरा दिल नही कर रहा था उसके उपर से

उठने को या अपना लंड उसकी चूत से बाहर करने को,,इसलिए मैं ऐसे ही लेटा लेटा उसकी चूत मारता रहा कुछ

देर बाद उसकी आवाज़ तेज होने लगी थी करीब 12-15 मिनट बाद मैं समझ गया कि अब वो झड़ने वाली है इसलिए

मैने स्पीड थोड़ी तेज करदी लेकिन इतनी देर मे वो झड गई थी और झडते हुए उसकी आवाज़ पूरे रूम मे घूजने

लगी थी,,,मुझे पता था अब वो दूसरी बार लगातार नही कर सकेगी इसलिए मैने उसके उपर से उतरने की कोशिश

की लेकिन तभी उसने सिसकियाँ लेते हुए मुझे अपनी बाहों मे भर लिया और मेरी पीठ को तेज़ी से आगे पीछे करने

लगी ,मैं उसकी हिम्मत से हैरान हो गया लेकिन मस्ती मे होने की वजह से मैने झटके लगाना चालू रखा और

तेज़ी से उसकी चूत मारनी शुरू करदी अभी वो ठीक से झड़ी भी नही थी कि दूसरी बार मेरे साथ मस्ती करने

लगी थी,,,,फिर जब तक मेरे लंड से पानी नही निकला मैं उसकी चूत मरता रहा ,,,मैने कोई पोज़ चेंज नही

किया बस उसके उपर लेटा रहा वो भी ऐसे ही लेटी लेटी मेरी पीठ को सहलाती रही,,,जब मेरे लंड से पानी निकलने

लगा तो मैने लंड को बाहर निकाला और अपने हाथ मे पकड़ कर उसके पेट पर रखा और तेज़ी से मूठ मारते हुए

अपने स्पर्म को उसके पेट पर गिरा दिया,,तभी उसकी चूत ने भी पाना बहाना शुरू कर दिया उसकी चूत से

इतना पानी निकला कि बेडशीट भीग गई,,,शायद उसने पेशाब कर दिया था ,,लंड से स्पर्म निकलते टाइम जब उसकी

चूत से निकलने वाले पानी की छींटे मेरी टाँगों पर पड़ी तो मैने मस्ती मे उसकी तरफ देखा तो उसने अपने

फेस को शरमाते हुए एक तरफ मोड़ लिया और तेज़ी से सिसकियाँ लेते हुए तेज तेज साँसे लेने लगी,,,

लंड से पानी निकलने के बाद मैं बेड पर उसकी बगल मे लेट गया और खुद की हालत पर क़ाबू करने की

कोशिश करने लगा,,,,,मैं आज बहुत खुश था कविता के साथ मस्ती करके,,,,मैं तबसे भरा हुआ था जबसे

मैने करण को रितिका को गोद मे उठाकर रूम मे लेके जाते देखा था ,,,मेरा भी दिल था सुहागरात मनाने

के लिए और ये थी मेरी सुहागरात,,भले ही मैने कुछ टाइम पहले कामिनी भाभी के साथ भी मस्ती की थी लेकिन

मुझे जो मज़ा आज कविता के साथ आया था वो मज़ा पूरी ज़िंदगी मे कभी नही आया था,,,,,,,

मैं और कविता दोनो नंगे जिस्म बेड पर लेटे हुए थे ,,,मैं भी बहुत थक गया था और कविता भी ,,सर्दी

शुरू हो गई थी लेकिन फिर भी हम दोनो नंगे ही लेटे हुए थे ,,अभी कुछ देर पहले चुदाई की थी एक दूसरे

के जिस्म को अपने जिस्म की गर्मी से गर्म किया था इसलिए सर्दी का एहसास तक नही हो रहा था,,,काफ़ी टाइम तक रूम

मे सन्नाटा रहा बस मेरी और कविता की तेज तेज साँसे गूँज रही थी रूम मे,,फिर कुछ देर बाद मुझे बेड

के हिलने की आवाज़ हुई शायद कविता हिली थी,,मैने अपने सर को कविता की तरफ किया तो देखा कि उसका ध्यान मेरी

तरफ था लेकिन जैसे ही मैने उसकी तरफ देखा उसने अपने फेस को दूसरी तरफ टर्न कर लिया और बेड पर उठकर

बैठ गई,,उसकी टाँगे ज़मीन पर थी शायद वो उठने लगी थी,,,तभी उसने उठने की कोशिश की पर शायद उसकी

हालत ठीक नही थी,,उसके जिस्म मे जान नही बची थी उठने के लिए वो बहुत ज़्यादा थकि हुई लग रही थी,,लेकिन

फिर भी उसने कोशिश करके अपने जिस्म को बेड से उठाया और पास मे पड़ी एक चद्दर को अपने नंगे जिस्म पर

ओढ़ लिया और वहाँ से चलके थोड़ी आगे की तरफ हो गई,,,वो आगे को चलने की कोशिश कर रही थी लेकिन सॉफ पता

चल रहा था कि उस से चला नही जा रहा था,,,शायद चुदाई के दर्द की वजह से या फिर चुदाई के सुख की वजह

से उसका जिस्म बहुत ज़्यादा थक गया था,,,,,वो हल्के हल्के कदम बढ़ाती हुई आगे की तरफ बढ़ने लगी फिर एक जगह

रुक कर नीचे झुक गई,,,मैने बेड पर उपर उठके देखा तो वो ज़मीन पर पड़ी हुई अपनी बनियान नुमा कुर्ते

को उठा रही थी जो उसने उतार कर फैंका था अपने जिस्म से,,,,वो जैसे ही कुर्ता उठाने के लिए झुकी तो खुद को

संभाल नही सकी और नीचे गिर गई,,,,

मैं एक दम से बेड से उठा और उसके पास चला गया,,मैने पास जाके उसको सहारा दिया और उठाकर खड़ा कर दिया

फिर नीचे से उसका कुर्ता उठाकर उसको पकड़ा दिया,,,उसने कुर्ता पकड़ते टाइम मेरी तरफ देखा और मेरे नंगे

जिस्म को देखकर शरमाने लगी,,उसने शरमाते हुए अपने कुर्ते को पकड़ लिया,,मैं समझ गया कि ये मेरे से

शरमा रही है इसलिए कुर्ता पहनने के लिए यहाँ आ गई थी,,,क्यूकी और कोई कपड़ा नही था आस पास मे एक चद्दर

थी जिसको उसने पहले ही ओढ़ लिया था अपने जिस्म पर,,,,,मैने उसको सहारा दिया हुआ था फिर मैने उसको बेड की

तरफ लेके आने की कोशिश की लेकिन उसने अपना हाथ उठाकर मुझे बाथरूम की तरफ चलने का इशारा किया,,

मैं उसको बाथरूम की तरफ लेके जाने लगा,,,उसका चलना बहुत मुश्किल हो गया था,,,उसके जिस्म मे शायद जान

ही नही बची थी,,,वो बड़े हल्के कदमो से चल रही थी 1-2 बार तो गिरते गिरते बची थी,,,जैसे तैसे मैने

सहारा देके उसको बाथरूम तक पहुँचा दिया,,,

बाथरूम के दरवाजे के पास जाके उसने मुझे वहीं रोक दिया और बाथरूम के दरवाजे को पकड़कर बाथरूम

के अंदर चली गई और अंदर जाते ही दरवाजा भी बंद कर लिया,,,

 
दरवाजा बंद करते टाइम भी वो सर झुका कर नीचे की तरफ देख रही थी,,सॉफ पता चल रहा था कि वो मेरे

से शरमा रही है,,,,

वो बाथरूम मे चली गई और मैं वापिस बेड पर आके लेट गया और खो गया अपने ख़यालो मे,,,आज इतना मज़ा

आया था मुझे कि मैं बहुत ज़्यादा खुश था ,,इतना खुश कि मुझे डर था मैं कहीं खुशी से पागल ही नही

हो जाउ कहीं,,,इतनी खूबसूरत लड़की आ गई थी आज मेरी ज़िंदगी मे जिसके बारे मे मैं सपने मे ही सोचता

रहता था अक्सर,,,सपने मे ना जाने कितनी बार उसकी चुदाई की थी मैने लेकिन आज हक़ीक़त मे उसकी चुदाई करके

जो मज़ा आया था उसको मैं शब्दो मे बयान नही कर सकता ,,,

करण ने तो अपनी सुहागरात मना ली थी रितिका के साथ और तबसे मैं भरा बैठा हुआ था,,,हालाकी कामिनी भाभी

की चुदाई भी करली थी मैने लेकिन फिर भी जो मज़ा मुझे कविता के साथ आया था वो कामिनी भाभी के साथ

नही आ सकता था,,,सही मायने मे ये थी मेरी सुहागरात,,मेरी और मेरी प्यारी कविता की सुहाग रात,,,मैं

अपने ही हसीन सपनो मे खोया हुआ था तभी मुझे बाथरूम के दरवाजा खुलने की आवाज़ आई,,,

मैने बाथरूम की तरफ देखा तो कविता वहाँ से बाहर निकल रही थी,,उसने वही कुर्ता पहना हुआ था,,,उस

कुर्ते के नीचे उसने कुछ नही पहना था,,,तभी वो बाथरूम से बाहर आते आते मेरी तरफ देखकर वापिस बाथरूम

मे भाग गई,,,,मैने सोचा इसको क्या हुआ,,,तभी मुझे याद आया कि मैं नंगा हूँ शायद इसलिए वो शरमा

कर वापिस भाग गई होगी,,,,और ऐसा ही हुआ,,,वो शरमा गई थी मुझे नंगा देखकर इसलिए बाथरूम मे वापिस

भाग गई थी मेरे लिए टवल लेने के लिए,,,,

वो टवल को हाथ मे पकड़कर शरमाते हुए बेड के पास आ रही थी,,,उसकी नज़रे झुकी हुई थी,,,उसने बेड के

पास आके टवल को मेरी तरफ फेंका और खुद पलट कर खड़ी हो गई,,,टवल पकड़कर मैं खड़ा हुआ और

टवल को अपनी कमर पर लपेट लिया और लपेट कर हल्का सा खांसने की आवाज़ करदी ताकि उसको पता चल जाए कि

अब मैं नंगा नही हूँ,,,

मेरे खांसने की आवाज़ सुनके वो मेरी तरफ पलटी और मुझे देखने लगी,,,वो अभी भी शरमा रही थी,,,

अब इतना क्यूँ शरमा रही हो,,,और ये टवल किस लिए,,हम दोनो एक दूसरे को बिना कपड़ो के देख चुके है

और बिना कपड़ो के एक जिस्म जो दूसरे जिस्म के साथ करता है वो सब कर चुके है तो भला अब ये शरम कैसी

अब ये परदा कैसा,,,,इतना बोलकर मैं उसके पास गया तभी वो मेरे से दूर हट गई और बेड के दूसरी तरफ चली

गई,,फिर उसने शरमाते हुए बेड पर पड़ी बेडशीट उठा ली जो बहुत ज़्यादा भीग चुकी थी उसकी चूत के पानी

से,,,,वो बेड शीट उठाने लगी तभी मैं बोल पड़ा,,,

अरे ये क्या हुआ,,,इतना पानी किसने गिरा दिया बेड पर,,पूरी शीट गीली हो गई है,,,,

मैने इतना बोला ही था कि उसने पहले मेरी तरफ गुस्से से देखा ,,,और फिर शरमा कर मुस्कुरा कर अपने फेस को

झुका लिया और अपना काम करने लगी,,,,उसने बेडशीट उठाकर साइड पर रख दी फिर न्यू बेडशीट लेके बेड पर

बिछा दी,,,,पहले वाली बेडशीट लाइट कलर की थी लेकिन ये दूसरी वाली डार्क कलर की थी,,,,इस पर भी मुझे

मज़ाक सूझने लगा,,,

हां ये बेडशीट अच्छी है डार्क कलर की,,,जितना भी पानी गिरे जितनी भी गंदी हो किसी को पता नही चलेगा,

मैने इतना बोला तो वो फिर से मुझे गुस्से से देखने लगी,,,,

उसने गुस्से से मुझे देखा तो मैं चुप करके उसकी हेल्प करने लगा बेडशीट सेट करने मे ,,बेड शीट ठीक

तरह से बिछ गई तो उसने एक कंबल लिया और बेड पर लेट गई कंबल लेके,,,,

मैं थोड़ा परेशान था,,,,इसको क्या हुआ ऐसे क्यूँ बिहेव करने लगी ये,,,जैसे कि कुछ हुआ ही नही था,,या शायद

कुछ ज़्यादा ही शरम आ रही थी उसको मेरा सामना करने मे,,,

वो कंबल लेके लेट गई थी जबकि मैं ऐसे ही टवल लपेट कर बेड पर लेट गया,,,,मुझे ठंडी तो नही लग रही

थी और अगर किसी जवान लड़की के साथ इस उमर मे एक ही बेड पर लेटने मे मुझे ज़रा भी ठंडी का एहसास होता

तो लानत थी मेरी जवानी पर,,,,आख़िर जवान खून था मेरा भी और गरम भी,,,,

हालाकी मुझे ठंड नही लग रही थी फिर भी मैं जानभूज कर नाटक करने लगा,,,,,जैसे मुझे बहुत ज़्यादा

ठंड लग रही हो,,,,

आहह कितनी ठंड है यहाँ,,,कोई इस ग़रीब को एक कंबल दे देता तो,,,क्या कोई नही यहाँ जो इस ग़रीब को

ठंड से बचा सके,,मैं इतना बोलता हुआ जानभूज कर काँपने लगा था ताकि मेरे हिलने से बेड भी हिलने

लगे और कविता का ध्यान मेरी तरफ आ जाए,,,,और ऐसा ही हुआ,,,,उसने मेरी तरफ मुँह किया और अपने कंबल को

चारों तरफ से ठीक करके ढक लिया खुद को,,,मुझे तो लगा था ये मुझे अपने कंबल मे बुला लेगी लेकिन'

इसने तो ऐसा नही किया,,,,,,,

तभी वो बोली,,,,,बहुत बेशरम है तू,,,कितना हर्ट करता है,,ज़रा भी तरस नही ख़ाता किसी पर,,,,तेरी यही

सज़ा है कि ठंडी मे लेटा रह तू,,,उसने इतना बोला और हँसने लगी,,,लेकिन उसके हँसने मे भी एक दर्द था जो सॉफ

सॉफ बता रहा था कि उसको चूत मे दर्द हो रहा है,,,फिर भी वो मेरे से मज़ाक करने मे लगी हुई थी,,

उसकी यही बात मुझे अच्छी लगी,,,इसलिए मैं उसके करीब हो गया,,,अच्छा तो मैं बेशरम हूँ,,,तो ठीक है

इतना बोलकर मैने टवल निकाल दिया और साइड मे फैंक दिया,,,,अब मैं बेशरम हूँ तो इसकी क्या ज़रूरत

उसने जल्दी से अपना फेस को कंबल के अंदर कर लिया,,,,सन्नी टवल लपेट ले प्लज़्ज़्ज़ मुझे शरम आ रही है

अच्छा तो अब शरम आ रही है,,तब कहाँ थी शरम जब बिना कपड़ो की मेरी बाहों मे थी,,,इतना बोलकर

मैं उसके करीब हो गया,,तब शरम नही आ रही थी क्या,,,

उसने अपने सर को कंबल से बाहर किया और आँखें बंद करके अपने सर को ना मे हिला दिया और बता दिया कि

'उस टाइम उसको शरम नही आ रही थी,,,

अच्छा शरम नही आ रही थी,,तो क्या मज़ा आ रहा था,,

उसने अपने सर को शरमाते हुए हां मे हिला दिया और जल्दी से कंबल को वापिस सर पर ले लिया,,,

अच्छा अगर तब मज़ा आ रहा था तो भला अब शरमाना कैसा,,,अब ये शरम का परदा कैसा,,हटा दो अब ये

परदा कि अब तो हम बेपर्दा हो चुके है ,,,,

लेकिन वो कुछ नही बोली ना ही कोई इशारा किया,,,,मैने फिर बोला,,,हटा दो ना परदा,,प्लज़्ज़्ज़्ज़

वो फिर चुप रही और कुछ नही बोली,,,,

अच्छा चलो नही हटाओ परदा लेकिन इतना तो बता दो मज़ा आया था क्या,,,और कितना मज़ा आया था,,,,बता ना कविता

प्लज़्ज़्ज़

तभी उसने कंबल को उतारा और हंस कर मुझे देखा,,,,,,,बहुत मज़ा आया,,,यही सुनना है ना तूने सन्नी,,तो सुन

ले ,,बहुत बहुत बहुत मज़ा आया मुझे,,,,तू मेरी लाइफ का पहला मर्द है जिसने मुझे इतना मज़ा दिया है,,

उसने इतना बोला तो मैं बीच मे बोल पड़ा,,,,,पहला मर्द ,,लेकिन तुम तू वर्जिन नही,,,,,,मैं इतना बोलता बोलता

चुप हो गया,,,

और वो भी हँसते हँसते एक दम से उदास हो गई,,,,,उसकी आँखे नम हो गई,,,,शायद वो रोने लगी थी,,,

अरे तू रो मत प्ल्ज़्ज़ मैं तुझे हर्ट नही करना चाहता था,,,मैं तो बस,,,,

मैं जानती हूँ सन्नी तो क्या बोलना चाह रहा है और तू क्या सोच रहा है मेरे बारे मे,,,,तुझे लगता होगा

मैं अच्छी लड़की नही हूँ,,क्यूकी मैं वर्जिन नही हूँ,,,,तुमको नही पता मेरे साथ,,,,अभी वो बोलने ही

लगी थी कि दरवाजा खुला और कामिनी भाभी अंदर आ गई,,,

भाभी के आते ही कविता ने जल्दी से एक पिल्लो मेरे उपर फैंक दिया क्यूकी मैं नंगा था,,,भाभी ने

अंदर आते हुए मुझे हंस कर देखा और बेड पर कविता के पास जाके बैठ गई,,,,,भाभी के हाथ मे एक नकली लंड

था,,,,भाभी ने वो लंड मेरी तरफ किया और बोलने लगी,,,,सन्नी तू पहला मर्द नही जिसने कविता के साथ मस्ती

की है ये रहा वो पहला मर्द जिसके साथ कविता पहले भी मस्ती कर चुकी है,,,यही वो मर्द है जो कविता की

सील खोल चुका है,,,,

भाभी ने इतना बोला तो कविता थोड़े गुस्से से भाभी की तरफ देखने लगी,,,,

अरे गुस्सा क्यूँ करती है,,चूत को चूत नही तो क्या बोलू बता ज़रा,,,,और मैं क्या ग़लत बोल रही हूँ यहीं

है ना वो मर्द जो तेरी चूत मे घुस चुका है पहले और सील खोल चुका है तेरी,,,

मैं थोड़ा हैरान रह गया,,मुझे याद आया कि कुछ देर पहले भाभी इसी रूम से इस नकली लंड को लेके गई

थी,,,,,,,,,,,,,,,,तो क्या तुम इस नकली लंड के साथ मस्ती करती हो कविता,,,मैने इतना बोला तो कविता चुप करके

मुझे देखने लगी,,,

और नही तो क्या सन्नी,,,यही है वो लंड और तू मुझे वो मर्द समझ सकता है जिसने ये लंड घुसाया था इसकी

कुवारि चूत मे,,,इतना बोलकर भाभी ने कविता की टाँगों पर हाथ रख दिया,,,

तभी कविता गुस्से से बोली,,,भाभी ये क्या कर रही हो,,,,

अरे अब गुस्सा क्यूँ करती है,,,,,ओह्ह अच्छा समझ गई सन्नी के सामने तुझे नही टच करूँ मैं,,,ठीक है

जी अब बचपन का प्यार है तेरे पास तो मुझे क्यूँ छूने देगी तू खुद को,,,

भाभी ने इतना बोला तो कविता फिर से भाभी को गुस्सा होने लगी,,भाभी चुप कर जाओ बॅस,,,

अरे अब मैं बोल भी नही सकती क्या,,,तेरा ये बचपन का प्यार इतना अज़ीज़ हो गया कि अपनी दोस्त जैसी भाभी को

चुप करवाने लगी तू,,,,

क्या बोल रही हो भाभी मैं कुछ समझा नही,,,,,,

तू कुछ समझेगा भी नही सन्नी क्यूकी तेरी उमर के लड़के अक्सर बुद्धू होते है,,,ये कविता बचपन से तुझे

लाइक करती है,,,जब देखो घर मे बस तेरी ही बात करती रहती है,,,सन्नी ऐसा है सन्नी वैसा है ,,,मेरे तो

कान पक जाते थे ये सुन सुन कर,,,,देखा ना अब भी तेरे सामने मुझे खुद को टच नही करने दे रही

जबकि अक्सर मेरे साथ ही मस्ती करती है,,और मेरे से ही चूत की सील भी खुलवाई है इसने,,,

बस बहुत हो गया भाभी ,,,अब आप जाओ यहाँ से,,,,कविता चिल्ला कर गुस्से मे बोली तो भाभी बेड से उठकर

दरवाजे की तरफ चली गई,,,,

अच्छा अच्छा जा रही हूँ मैं,,,अब जितना मर्ज़ी प्यार करो तुम दोनो,,,,जब तक दिल करे ऐसे ही मस्ती करते रहो

बेड पर नंगे लेट कर,,,भाभी ने मेरा नंगा जिस्म देखकर ये बात बोली थी,,,मेरे लंड के उपर एक पिल्लो

पड़ा हुआ था बस ,,,

भाभी के बाहर जाते ही कविता उठी और हल्के कदमो से चलके दरवाजे के पास गई और दरवाजे को अंदर से

लॉक कर दिया,,,,और वापिस बेड पर आके बैठ गई,,,

तू इतना भड़क क्यूँ गई थी भाभी पर,,,,,वो क्या झूठ बोल रही थी,,,

नही सन्नी वो बस मैं,,,,

तो क्या भाभी सब सच बोल रही थी,,,तू मुझे लाइक करती है,,,मुझे चाहती है,,,लेकिन कब्से ,,और कभी मुझे

बताया क्यूँ नही तूने,,,

क्या बोलती,,,तुझे खुद पता नही चलता कि एक लड़की जो अपनी जवानी मे है और उसका अभी तक कोई भी बाय्फ्रेंड

नही है,,,बस एक तू ही दोस्त है उसका,,,तेरे सिवा उसने किसी भी लड़के से दोस्ती नही की कभी,,,क्या इतना सब कुछ

होने के बाद भी तुझे बताना कि मैं तुझे प्यार करती हूँ ये ज़रूरी था क्या,,,

देख मैं ठहरा पागल ,,,और तुझे पता है लड़के होते ही पागल है,,,दिल की बात समझने मे हम लड़को को

अक्सर देर हो जाती है,,,और अगर तू एक बार बता देती तो तेरा क्या घिस जाता ,,,एक बार बस इशारा कर देती तो

मैं समझ जाता ना,,,

कितनी बार इशारा किया मैने पर तूने ध्यान ही नही दिया मेरी तरफ,,,तेरा ध्यान पता नही किस तरफ रहता था,,

मेरा ध्यान तो हमेशा ही तेरी तरफ था कविता,,,बस मुझे बताना नही आया,,

मेरी तरफ ध्यान रहता तो बात ही क्या थी सन्नी,,,मैं तो तेरे ध्यान के लिए तरस गई थी,,,तू कभी ध्यान नही

देता था मेरी तरफ,,,

मैं डरता था कविता कहीं तुम गुस्सा कर गई कहीं तुम मुझे लाइक नही करती हुई तो मेरी तो दोस्ती भी ख़तम

हो जाएगी तेरे से,,,मैं तेरे जैसी अच्छी दोस्त को खोना नही चाहता था,,,,

मैं भी अच्छे दोस्त को खोना नही चाहती सन्नी,,,इसलिए तुझे कुछ नही बता सकी कभी,,,क्यूकी अगर बता देती

तो डर था कहीं कोई दोस्त मेरे से दूर नही हो जाए,,,और अब अगर दोस्त करीब है तो मैं उस से कुछ झूठ

भी नही बोलना चाहती,,,,

झूठ कैसा झूठ,,,

अभी जो कुछ भाभी बोलके गई है सब झूठ है सन्नी,,,,,भाभी ने आज तक मुझे हाथ भी नही लगाया और

ना ही भाभी ने उस नकली वाले खिलोने से मेरे साथ कुछ किया था,,,,और उस खिलोने की ज़रूरत मुझे कभी

महसूस भी नही हुई आज तक,,

क्या मतलब ,,,अगर उस नकली लंड से तुम्हारी चूत की सील नही खुली थी तो कैसे खुली थी ,,कॉन था वो मर्द

वो थोड़ा उदास होके,,,,,,,वो मर्द कोई और नही था सन्नी,,,,वो मेरा बाप था,,,,इतना बोलकर वो रोने लगी,,,

मैं थोड़ा हैरान हो गया था,,,ये क्या बोल रही हो तुम कविता,,,

सच बोल रही हूँ सन्नी,,क्यूकी मैं किसी रिश्ते की शुरुआत झूठ से नही करना चाहती,,,मेरा बाप ही था

वो मर्द जिसने मेरे साथ वो सब किया,,,,मैं अपनी ज़िंदगी का पहला सेक्स उसके साथ करना चाहती थी जिस से प्यार

करती हूँ लेकिन मेरे बाप ने अपनी झूठी शान और झूठी मर्यादा की खातिर मेरे सभी सपनो पर सभी

उम्मीदो पर पानी फेर दिया और बर्बाद कर दिया मुझे

तुमको पता है ना कि मेरे भैया सूरज कैसे है,,,,वो बच्चा पैदा नही कर सकते क्यूकी वो नामर्द है,और

मेरे बाप ने ही भाभी के साथ 2 बार वो घटिया हरकत की ताकि हम लोगो के परिवार को एक लड़का मिल सके

एक वारिस मिल सके लेकिन 2 बार लड़की ही हुई ,,,,मुझे कुछ पता नही था इसके बारे मे क्यूकी मुझे किसी ने पता

लगने ही नही दिया था ,,,और जब तीसरी बार वो सब होने लगा तो भाभी ने मुझे सब बता दिया और मैने अपने

बाप के खलाफ भाभी का साथ दिया,,,,तो मेरे बाप ने मेरे साथ ही मुँह कला कर लिया शराब के नशे मे

ना तो माँ कुछ कर सकी और भाई तो वैसे भी कुछ नही कर सकता था अगर भाई कुछ कर सकता होता तो ये

सब नही होता,,,

मैं जानती हूँ तुम्हारे और भाभी के बारे मे ,,तुम्हारे और भाई के बारे मे भी क्यूकी भाभी ने मुझे

सब बता दिया था ,,भाई और डॅड के बारे मे भी,,,,मैं तो सब से अंजान ही थी,,,और जब सब कुछ जाना तो सबकी

सज़ा भी मिली मुझे,,,,,एक बार तो डॅड ने शराब के नशे मे ऐसे हरकत की थी लेकिन बाद मे उनको ये सब

अच्छा लगने लगा,,,उन्होने 4 बार मेरे साथ वो गंदी हरकत की थी,,,,मैं किसी को बता भी नही सकती थी ना ही

पोलीस मे जा सकती थी क्यूकी इस से मेरे ही घर की बदनामी होती,,,,मैने ये बात सोनिया को बता दी थी इसलिए

जब भी डॅड घर पर आते थे मैं उन दिनो सोनिया को अपने घर पर रख लेती थी अपने साथ,क्यूकी मोम और

भाई ने तो कुछ नही करना था लेकिन सोनिया के होते हुए डॅड मेरे पास भी नही आ सकते थे,,,,

वो रो रही थी और सारी बात बता रही थी,,,,

भले ही मेरे बाप ने मेरे साथ सेक्स किया था सन्नी लेकिन एक आग भी लगा दी थी मेरे जिस्म मे,,,तभी तो तेरे

हल्का सा टच करने भर से मैं बहक जाती थी क्यूकी मैं भी उसी के साथ वो सब करना चाहती थी जिसपर

यकीन करती थी और दुनिया मे सबसे ज़्यादा तेरे पर यकीन करती हूँ मैं तेरे से प्यार करती हूँ मैं,,,

जब भी तू मेरे पास आता मुझे टच करता तो मेरे जिस्म मे एक अजीब सी मस्ती छाने लगती और मैं कुछ

ही पॅलो मे बहक जाती थी,,मेरा खुद पर क़ाबू नही रहता था,,,,मैं जवानी का मज़ा ले चुकी थी भले

ही वो मज़ा मेरे साथ ज़बरदस्ती से हुआ था वो भी मेरे बाप ने किया था लेकिन फिर भी मैं उस जवानी के

मज़े को उस मस्ती को पहचान गई थी,,,मैं अब असली मज़ा तेरे साथ करना चाहती थी क्यूकी मैं तुझे बहुत

प्यार करती हूँ सन्नी और तेरे पर ही सबसे ज़्यादा यकीन करती हूँ,,,

लेकिन जब तू मेरी चूत के पास जाता तो मैं डर जाती कि अगर तुझे पता चल गया कि मैं वर्जिन नही हूँ तो

पता नही तू मेरे बारे मे क्या सोचेगा,,,शायद तू मुझे बाकी लड़कियों की तरह ग़लत लड़की समझ लेगा तो मेरा

तो दिल ही टूट जाएगा,,,क्यूकी मैं ग़लत नही हूँ सन्नी,,,वक़्त ने मेरे साथ बहुत कुछ ग़लत किया था,,,वो

बोलती जा रही थी और रोती जा रही थी,,,,

कुछ देर बाद उसके अल्फ़ाज़ ख़तम हो गये लेकिन आँसू अभी भी बहते जा रहे थे,,,,,,

 
मैं उसके पास गया और उसको अपने गले से लगा लिया,,,,,,इतना सब हो गया तेरे साथ तो तूने मुझे बताया क्यूँ नही

एक बार बता सकती थी ना,,,,अगर तुझे मेरे भाभी के और सूरज भाई के बारे मे सब पता था तो तू अपने बारे

मे भी मुझे बता ही सकती थी,,,,और भाभी भी तो बता सकती थी,,,,लेकिन नही,,,,आज भी भाभी ने झूठ ही

बोला मेरे साथ,,,,,और मैं जानता हूँ उन्होने ऐसा क्यूँ किया था,,,,ताकि मैं तुझे ग़लत नही समझु और ना

ही तेरे और तेरे बाप के बारे मे मुझे कुछ पता चले,,,,लेकिन इतना सब कुछ हो गया और तू इतना सब सहती

गई,,,

मैं उस से बात करता हुआ दिल मे ये भी सोच रहा था कि मेरा बाप भी तो मेरी बेहन को चोदता है लेकिन

वो सब रज़ामंदी से हुआ था ना कि कोई ज़ोर ज़बरदस्ती से,,,अगर कविता भी अपने बाप से रज़ामंदी मे सेक्स करती

तो कुछ बुरा नही था लेकिन उसके बाप ने तो शराब के नशे मे उसके साथ ज़बरदस्ती की थी जो बहुत बुरी बात

थी,,,,वो बेचारी को कितना कुछ सहना पड़ा था,,,,वो भी अपने ही घर मे वो भी अपनो के साथ,,,,अब मुझे ये

भी पता चल गया था कि ये जब अपनी माँ को मिलने गई थी सूरज भाई के साथ तो सोनिया को क्यूँ लेके गई थी अपने

साथ,,,ताकि वहाँ पर उसका बाप उसके साथ फिर कोई घटिया हरकत नही कर सके,,,लेकिन साथ ही मुझे डर भी

लगने लगा था कि इसने अपने और अपने बाप के बारे मे सोनिया को बता दिया था तो क्या मेरे ,,कामिनी भाभी और

सूरज भाई के बारे मे भी सोनिया को कुछ बता तो नही दिया था,,,,

मैं यही सोचता हुआ उसको बाहों मे भरके बेड पर बैठा हुआ था,,,मैं अभी भी नंगा ही था लेकिन अब

कोई ग़लत इरादा नही था दिल मे ना ही मस्ती का मूड था,,,,तभी मैं आराम से उसको बाहों मे भरके बेड

पर लेट गया और साथ मे उसको भी लेटा लिया और हम दोनो पर कंबल ओढ़ लिया ,,,उसने अपने सर को मेरे शोल्डर

के पास मेरी चेस्ट पर रखा हुआ था और रो रही थी जबकि मैं उसके आँसू पोछता हुआ उसको चुप करवाने की

कोशिश कर रहा था,,,ऐसे ही दुख सुख बाँट-ते हुए हम दोनो एक दूसरे को बाहों मे भरके सो गये,,कब

आँख लगी पता ही नही चला,,,,,,,,,

सुबह जब उठा तो देखा कि मैं अकेला ही था बेड पर,,,,मैने रूम मे नज़र घुमाई तो कविता वहाँ नही

थी ,,,तभी मैने टेबल पर देखा तो मेरे कपड़े पड़े हुए थे जो शायद प्रेस भी किए हुए थे,,मेरे जूते

भी वहीं पास मे थे,,,,ये सब तो रात को कामिनी भाभी के रूम मे थे,,,,खैर मैं उठा और फ्रेश होके

कपड़े पहन कर बाहर आ गया,,,,देखा तो कविता और कामिनी भाभी नाश्ता तैयार कर रही थी,,,दोनो किचन मे

खड़ी होके बातें भी कर रही थी,,,,

तभी मैं भी किचन मे चला गया,,,अरे ननद भाभी मे क्या बात हो रही है हमे भी तो पता चले,,,

मेरी बात सुनके भाभी और कविता मेरी तरफ पलट गई,,,,

कुछ खास नही सन्नी बस ,,,,,,और वैसे हम ननद और भाभी नही दोस्त है,,,,क्यूकी एक ननद और भाभी से

कहीं ज़्यादा प्यार है हम दोनो मे,,लेकिन अब लगता है कविता को प्यार करने वाला कोई और मिल गया है,,,भाभी

ने ये बात मज़ाक मे बोली थी,,,,,

कविता शरमा गई भाभी की बात सुनके,,,तभी भाभी किचन से बाहर आ गई ,,नाश्ता बन गया था और भाभी

ने कविता के साथ मिलकर नाश्ता टेबल पर लगा दिया,,,मैने भी थोड़ी हेल्प करदी थी,,,,

फिर हम लोग बैठकर नाश्ता करने लगे,,,नाश्ता करते टाइम मैं और कविता पास पास बैठे हुए थे जबकि

भाभी सामने की तरफ थी,,,मैं भाभी की तरफ ध्यान दे रहा था लेकिन भाभी मेरी तरफ बिल्कुल भी ध्यान

नही दे रही थी,,,,नाश्ता ख़तम हो गया और भाभी उठकर अपने रूम मे चली गई,,मैं भाभी को जाते हुए

पीछे से देख रहा था,,,,मेरा ध्यान भाभी की तरफ था तभी कविता ने मुझे भाभी की तरफ देखते हुए

पकड़ लिया ,,,,,

उस रूम की तरफ ध्यान देना छोड़ दो सन्नी,,,,क्यूकी अगर तुम दोबारा उस रूम मे जाओगे तो मेरे पास

कभी वापिस नही आओगे,,,,याद रखना,,,,,कविता ने ये बात ऐसे बोली थी जैसे मुझे ओरडर दिया हो,,अपना फैंसला

सुनाया हो,,,,

मैं कुछ नही बोला बस अपने बर्तन लेके किचन मे चला गया,,,,किचन से बर्तन रखके बाहर आया और

कविता को बाइ बोलके वहाँ से जाने लगा,,,,,

अभी मैं बाहर दरवाजे की तरफ जाने ही लगा था कि भाभी बाहर आ गई,,,,,भाभी ने बाहर आके मुझे

कविता के सामने बाहों मे भर लिया ,,,,,,मैं कविता की तरफ देख रहा था क्यूकी उसके सामने भाभी ने

मुझे बाहों मे भरा था मुझे डर लग रहा था,,,,

ये आख़िरी बार है सन्नी जब तुम और मैं इतने करीब है,,,,आज के बाद तुम मेरे करीब नही आ सकते क्यूकी

अब तुमको कविता के करीब रहना है,,,मुझे तुमसे जो चाहिए था मिल गया है,,भाभी ने अपने पेट पर

हाथ लगाते हुए ये बात बोली,,,,तुम्हारा बीज़ मेरे पेट मे पलने लगा है सन्नी,,,अब मुझे तेरे से और कुछ

नही चाहिए,,अब तू पूरी तरह से कविता का है,,,कविता मेरी ननद कम और दोस्त ज़्यादा है,,इस घर मे वहीं

एक है जिसने हर कदम मेरा साथ दिया है हर मुश्किल मे मेरे साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी हुई

थी ये,,,अब तुझे अपने पास रखके मैं इस से दूर नही हो सकती और ना ही तुझे इस से दूर कर सकती हूँ,अब

तक जो हम लोगो मे हुआ वो आज के बाद नही होगा,,,

कल रात जितना मज़ा लेना था तेरे साथ मैने ले लिया है,,,जितनी मस्ती करनी थी करली,,कल की रात हम लोगो की

आख़िरी रात थी और तेरे साथ कविता की एक शुरूवात थी,,आख़िरी रात को भूल जाओ और कविता के साथ एक नई शुरुआत

करो,,,कल की रात मैने तुझे इसी लिए बुलाया था ताकि तेरे साथ आख़िरी रात की मस्ती कर सकूँ और ये कविता

तुझे मेरे साथ मस्ती करते हुए देखना चाहती थी,,जितना टाइम हम लोग रूम मे थे ये रूम के बाहर

से हम लोगो को देख रही थी,,,,,इसका इरादा ये नही था कि ये तेरे साथ वो सब करेगी ये तो बहुत डरती थी इसलिए

तो मैने इसको वो नकली लंड भी दिया था ताकि तेरी और मेरी मस्ती देखकर इसके जिस्म मे जो आग लगी उसको ये नकली लंड

से ठंडा कर सके लेकिन इसको नकली लंड से मस्ती नही करनी थी इसको तो तेरे साथ मस्ती करनी थी,,,जब मैने इसको

बताया कि तू किचिन मे है और वो भी नंगा तो इस से रहा नही गया और ये वहाँ आ गई,,,और फिर जो हुआ तुझे

पता है,,,,मेरा तो मूड था सारी रात तेरे साथ एक लास्ट बारी मस्ती करने का लेकिन कविता की वजह से मुझे पीछे

हटना पड़ा,,,,,और अब मैं कभी आगे बढ़ भी नही सकती ,,,,अब जितना आगे बढ़ना है तुझे कविता के साथ बढ़ना

होगा,,,,,भाभी ने इतना सब बोला और मेरे गले लग के मेरे फोरहेड पर किस की बरसात करदी और नम आखों मे

आँसू लेके वहाँ से अपने रूम मे चली गई,,,,

 
कविता वहीं खड़ी होके मुझे देख रही थी,,,उसने एक बार हंस कर मुझे देखा और मैं भी वहाँ से चल

पड़ा कविता को बाइ बोलके,,,,,अब मुझे कविता की बात का जवाब भी मिल गया था जो बात उसने बोली थी,,,कि

अगर भाभी के रूम मे जाना है तो मेरे रूम का रास्ता भूल जाना,,,,,,,

मैं बाइक पर घर आ रहा था ,,खुश भी था और परेशान भी,,,एक चूत मिल गई थी और एक चूत हमेशा

के लिए दूर हो गई थी,,,लेकिन जो भी हुआ था अच्छा हुआ था,,,सबकी मर्ज़ी से हुआ था,,,,और सबसे बड़ी बात थी

कि कविता मिल गई थी मुझे जिसके लिए मैं इतना तरस रहा था,,,कब्से उसके साथ सेक्स करना चाहता था लेकिन हम,

दोनो मे सेक्स का नही एक प्यार का रिश्ता भी बन गया था जो सेक्स से कहीं ज़्यादा एहमियत रखता था मेरे

लिए,,,,,,,

कविता के घर से खुशी खुशी मैं अपने घर की तरफ चल पड़ा,,,,जहाँ एक तरफ कविता जैसी लड़की के मिलने'

की खुशी थी वहीं दूसरी तरफ कामिनी जैसी भाभी से दूर होने का गम भी था,,लेकिन कविता के करीब रहने

के लिए कामिनी भाभी से दूर होना ज़रूरी भी था,,यही सोच और ख्याल से परेशान होता हुआ मैं घर पहुँच

गया,,,,,मैं घर के गेट के पास पहुचा तो देखा कि 2 लोग खड़े हुए थे मेरे घर के पास जो मेरे घर

की तरफ घूर रहे थे और जैसे ही मैने उनकी तरफ देखा तो वो लोग वहाँ से चले गये,,,

मुझे ये लोग ठीक नही लग रहे थे,,,,और जिस अंदाज़ से वो वहाँ से गये थे सॉफ पता चल रहा था वो

मुझे देखकर भाग गये थे,,,,ये लोग कहीं अमित और उसके बाप के लोग तो नही थे,,,,मुझे थोड़ा डर

लगने लगा था,,अपने लिए नही ,,अपनी फॅमिली के लिए,,,,

मैने गेट खोला और घर के अंदर चला गया,,,,अंदर घुसा ही था कि माँ हाथ मे कुछ समान लिए खड़ी

हुई थी,,,,

अरे आ गया तू ,,सही टाइम पर आया,,,तुझे पता होगा कि बुटीक की चाबी कहाँ है,,,माँ ने मेरे पास

आते हुए बोला,,,,

हाँ पता है लेकिन आपको क्या ज़रूरत पड़ गई बुटीक की चाबी की,,,मैने माँ से सवाल किया,,,,

कुछ नही सन्नी बेटा थोड़ा काम था मुझे बुटीक पर,,,,चल जल्दी बता चाबी कहाँ है और मेरे साथ

चल तू भी,,,,

लेकिन कहाँ माँ ,,,,कहाँ जाना है अपने,,,,

मुझे अलका के घर जाना है,,,और फिर शिखा को कुछ काम है बुटीक पर,,,,चल जल्दी चाबी बता कहाँ

है और मेरे साथ चल,,,,

मैने माँ को चाबी दी और माँ के साथ चल पड़ा करण के घर की तरफ,,,,जाने से पहले मैने सोनिया को अच्छी

तरह से गेट बंद करने को बोला,,,,

हम लोग जा रहे है,,,,गेट अच्छी तारह बंद कर लेना,,कोई भी आए तो मत खोलना,,,मैने सोनिया को ऐसा इसलिए

बोला था क्यूकी मुझे डर था कहीं वो लोग फिर से नही आ जाए जो मेरे घर के बाहर खड़े हुए थे,,,

मैं कोई छोटी बच्ची नही हूँ जो ऐसे बात कर रहा है मेरे साथ,,सोनिया ने थोड़ा नखरे से बोला और गेट

बंद करके वहाँ से अंदर चली गई,,,,मैं भी माँ को लेके करण के घर की तरफ चल पड़ा,,,,

माँ ये बुटीक की चाबी का क्या करना है और क्या काम है बुटीक पर शिखा दीदी को,,,

अरे बेटा जबसे करण की शादी हुई है अलका और शिखा तरस गई है मस्ती के लिए,,,आज हम लोगो का प्लान है

बुटीक पर रहके मस्ती करने का,,,,तेरा दिल करे तो तू भी चलना हम लोगो के साथ,,,,

नही माँ मेरा दिल नही है आप लोग ही जाना ,मेरी तबीयत ठीक नही है,,,,

मैं जानती थी तू ऐसा ही बोलेगा इसलिए घर से नकली लंड लेके आई हूँ वो भी बड़े वाला,,,माँ ने इतनी बात

हँसते हुए बोली,,,,,

ऐसे ही मज़ाक करते हुए बातें करते हुए हम लोग करण के घर पहुँच गये,,,,करण के घर जाके कुछ ही

देर बाद माँ अलका आंटी और शिखा घर से शॉपिंग के लिए बोलकर वहाँ से चली गई जबकि मैं वहीं रुक गया

,,मेरा दिल तो नही था रुकने का लेकिन करण ने मुझे रोका तो मुझे रुकना पड़ा,,,,

और सूनाओ सन्नी भाई क्या हाल चाल है आपका,,कहाँ थे ,,,कल भी हम लोगो ने इंतेज़ार किया था आपका,आंटी

तो आई थी लेकिन तुम नही आए थे,,,,

मैं ठीक हूँ करण भाई,,,,कल किसी काम से बिज़ी था इसलिए नही आया,,,,तुम लोग सूनाओ क्या हाल है,,,शादी

करके खुश तो हो ना,,,,और तुम लोगो की शादी से शिखा दीदी और अलका आंटी भी खुश है ना,,,

हाँ सन्नी भहँ लोग बहुत खुश है,,,,ये बात करण ने बोली,

तभी मैने कविता की तरफ देखा,,,,तो वो भी बोली,,,हाँ सन्नी मैं भी बहुत खुश हूँ,,माँ और शिखा दीदी

भी बहुत खुश है और वो दोनो बहुत अच्छी है,,,,

चलो अच्छी बात है,,,,आंटी जी और शिखा दीदी भी खुश है तुम दोनो की शादी से,,अब मेरी दुआ है किसी क़ी

नज़र नही लगे तुम दोनो को,,,हमेशा ऐसे ही हंसते खेलते रहो तुम दोनो,,,,

अब किसकी नज़र लगनी है सन्नी भाई,,,,करण ने थोड़ी उत्सुकता से पूछा,,,

भाभी के पिता जी की,,,,लेकिन मुझे नही लगता अब वो कुछ कर सकते है लेकिन अमित और उसका बाप कोई पंगा

कर सकते है,,,,उन लोगो से थोड़ी परेशानी हो सकती है शायद,,,

सही कहाँ तुमने सन्नी,,,,मेरे डॅड कुछ न्ही कर सकते अब,,,,कल वो शगुन लेके आए थे यहाँ पर,,,

ये बात रितिका ने बोली थी बड़े प्यार से खुश होके,,,

क्या,,,,तुम्हारे डॅड आए थे कल यहाँ,,,और वो भी शगुन लेके,,,,

हाँ सन्नी भाई,,,,इसके पिता जी आए थे,,,लेकिन सुरेश नही था उनके साथ वो अकेले आए थे,,,माँ से शिखा

से मेरे से और रितिका से माफी भी माँग कर गये थे जो भी सुरेश ने किया उसके लिए,,,वो अब बहुत शर्मिंदा

थे,,कल हम लोगो के साथ लंच भी किया था उन्होने ,,,आंटी जी भी यहीं थी तब,,,,

ये तो बहुत अच्छी बात है,,चलो कुछ तो अच्छा हुआ इन दिनो मे तुम दोनो की शादी के बाद,,,,अब बस अमित और

उसके बाप का कुछ करना पड़ेगा वर्ना वो लोग पंगा कर सकते है,,,,

उन लोगो का जो करना है वो बाद मे करते है पहले नाश्ता तो करले सन्नी भाई,,,,,

नाश्ता अभी,,,अभी तो लंच टाइम हो गया है करण भाई,,,,

हम लोगो का तो नाश्ता टाइम है सन्नी भाई,,,,अभी तो सोके उठे है कुछ देर पहले हम लोग,,,,करण ने इतना

सब हंस कर बोला लेकिन रितिका मुझे देखकर शरमा गई,,,,और उठकर बाहर चली गई,,,

उसके जाते ही करण हँसने लगा,,,,साथ मे मैं भी,,,,

अच्छा लगा मुझे करण भाई तुम दोनो को इतना खुश देखकर,,,हमेशा ऐसे ही हंसते खेलते रहना तुम दोनो,,

ये सब तुम्हारी मेहरबानी है सन्नी भाई,,,,जो कुछ भी किया तुमने ही किया है,,,चलो अब बाहर चलते है

हम लोग नाश्ता करते है और तुम लंच कर लेना,,,,इतना बोलकर करण और मैं हंसते हुए रूम से बाहर आ गये

और बाहर आके देखा कि रितिका किचन मे चली गई थी,,,,

मैं और करण भी वहाँ चले गये,,,,,

 
अरे ये क्या रितिका भाभी,,,,अभी आपके हाथों से शगुन की मेहन्दी भी नही उरती और आप किचन का काम करने

लगी,,,,,,,ये ग़लत बात है करण भाई,,,,रितिका भाभी को किचन के काम नही करना चाहिए,,,,

अच्छा सन्नी अगर मैं नही करूँगी तो कॉन करेगा,,,,रितिका भाभी ने हंसते हुए बोला,,,और वैसे भी माँ और

शिखा ही काम करती है अब वो नही है तो मुझे ही करना होगा ना,,,,,,अच्छा एक बात बताओ कि अगर मैं और

कारण अकेले रहते होते तो भी मुझे ही सारा काम करना पड़ता ना,,,,,,तो भी मैं क्या ये मेहन्दी के उतरने

का इंतजार करती रहती,,,,

ऐसी बात नही है भाभी ये तो परंपरा होती है हर घर की ,,नयी बहू से घर का काम नही करवाया जाता

अच्छा अगर मैं काम नही करूँगी तो कॉन करेगा,,,,और वैसे ही मैं इस घर की बहू नही बेटी बनकर आई

हूँ,,,माँ करण से ज़्यादा मुझे प्यार करने लगी है,,,

करण ने उदास होके मेरी तरफ देखा,,,,हां सन्नी भाई ये ठीक बोल रही है,,,तभी तो मेरी पसंद का

खाना न्ही बनाती माँ,,,, जो भी बनाती है रितिका की पस्संद का ही बनाती है,,,,

मैं करण की बात सुनके हँसने लगा और साथ मे रितिका भी,,, अच्छा जी,,इतना प्यार हो गया है सास बहू मे,,ये

तो बहुत अच्छी बात है,,,वैसे अब किसकी पस्संद का खाना बना रही हो आप भाभी,,,

तुम्हारी पसंद का,,,,रितिका ने हंसते हुए जवाब दिया,,,,

मेरी पसंद का,,,,भला आपको कैसे पता मुझे क्या पसंद है,,,,,

मुझे सब पता है सन्नी,,,,कुछ बातें करण से पता चली कुछ बातें माँ और शिखा दीदी से और कुछ बातें

आपकी माँ से पता चली है मुझे कि आपको क्या पसंद है और क्या नही,,,,,जैसे आपको मटर पनीर,,वाइट

चने और साथ मे भिंडी की सब्जी पसंद है और अभी मैं वही बना रही हूँ,,,,

अरे वाह आपको तो सब पता चल गया मेरे बारे मे ,,लेकिन मुझे तो कुछ भी नही पता आपके बारे,

यही तो फ़र्क है सन्नी तुम मे और मेरे मे,,मैं तुम्हारे बारे मे सब जानती हूँ लेकिन तुम सब जान कर

भी अंजान हो,,,,,मैं भाभी की बात नही समझा लेकिन जिस अंदाज़ से रितिका भाभी मुझे देख रही थी उस से

मैं थोड़ा परेशान हो गया,,,,,

तभी मैने बात को पलटने के लिए बोला,,,,,लाओ भाभी मैं भी कुछ हेल्प कर देता हूँ आपकी,,,,,

अच्छा क्या हेल्प करोगे,,भाभी ने फिर अजीब तरीके से बात की,,,

कुछ कह नही भाभी लेकिन सब्जी अच्छी तरह से काट लेता हूँ मैं,,,मैने इतना बोला और एक तरफ पड़ा हुआ

नाइफ उठा लिया और पास मे पड़ी हुई भिंडी भी उठा ली और भिंडी को काटने लगा,,,

तभी करण का फोन बजने लगा और वो फोन के लिए अपने रूम मे चला गया,,,,,

मैं शेल्व पर चॉपिंग बोर्ड रखके उसके उपर भिंडी काटने लगा जबकि रितिका मेरे से दूर खड़ी होके

आटा गूँथ रही थी,,,,मेरी पीठ थी उसकी तरफ और मैं पूरा ध्यान सब्जी काटने पर दे रहा था,,लेकिन मेरे

कानों मे आटा गूँथति हुई रितिका की चूड़ियों की आवाज़ हल्का मीठा शौर मचाने लगी थी जिस से मैं नज़रे

बचा कर रितिका की तरफ देख लेता था,,,एक बार मैं रितिका की तरफ देख रहा था तो उसने अपने हाथों से

अपने बालों की एक लट को जो उसके चेहरे पर आके उसको परेशान कर रही थी उस लट को अपने हाथ से एक साइड

करने की कोशिश की,,,,बालों की लट तो साइड हो गई थी लेकिन उसके हाथ आटे वाले थे जिस से थोड़ा गुन्था हुआ

आटा उसके फोरफेड पर लग गया था,,,,

तभी मैं उसको देखकर हँसने लगा,,,उसने मुझे उसकी तरफ देखकर हंसते हुए पकड़ लिया और इशारे मे

पूछने लगी,,क्या हुआ सन्नी हंस क्यूँ रहे हो,,

तभी मैने उसको इशारा किया कि उसके फोरहेड पर आटा लगा हुआ है,,,,

वो भी हँसने लगी और हंसते हुए मेरे करीब आ गई,,,,,,,,मुझे देख कर तुझे हँसी आती है ना सन्नी और तुझे

हंसते देखकर मुझे खुशी होती है,,वैसे भी तू शुरू से मुझपे हंसता ही आया है,,जाने अंजाने ही सही हर

बार मेरा मज़ाक ही बनाया है तूने और मैं पगली तेरी खुशी को देखकर खुश हो जाती हूँ,,,

भाभी मैं तो वो मैं ,,,,मुझसे कुछ नही बोला जा रहा था,,हिम्मत ही नही हो रही थी,,,,,रितिका भाभी

मैं तो इसलिए हंस रहा था क्यूकी आपके फोरहेड पर आटा लगा हुआ था,,,

जानती हूँ सन्नी और ये मैने जनभूज कर लगाया है ताकि तेरा ध्यान मेरी तरफ आए और तू खुश हो जाए,,,

मैं तो हमेशा तुझे खुश करना चाहती हूँ खुश देखना चाहती हूँ,,और तू है कि मुझे देखकर

ही खुश होता रहता है,,,,मेरा मज़ाक बना कर खुश होता है,,,

तुम क्या बोल रही हो मुझे कुछ समझ नही आ रहा,,,

मुझे और मेरी किसी बात को तूने आज तक कभी समझा भी नही है सन्नी,,,,तू समझ जाता तो ये सब नही होता

ये बात भाभी ने थोड़ी उदास होके बोली थी,,,

 
क्या नही होता,,,,क्या तुम करण से शादी करके खुश नही हो,,,,क्या ये सब ग़लत हुआ है,,,,

नही सन्नी करण से शादी करवा कर तूने मुझे मेरी ज़िंदगी का सबसे अच्छा तोहफा दिया है और तेरी बात मानके

मैने करण से पहला सेक्स करके उसको शादी का सबसे अच्छा तोहफा भी दे दिया है लेकिन जिस चीज़ पर किसी और का हक़ था वो किसी और को मिल गई,,,ये बात खुशी की नही है मेरे लिए,,,,मैने सपना देखा था करण से शादी का जो

तूने पूरा कर दिया हक़ीक़त मे बदल दिया लेकिन साथ ही एक और सपना देखा था मैने जिसको तूने तोड़ दिया

तुम अब ये सब शुरू मत करो प्ल्ज़्ज़ रितिका,,,,,तुम जानती हो जो नही हो सकता कभी नही हो सकता,,,,तुम अब

शादी शुदा हो करण की वाइफ हो,,अब तुमपे करण का हक़ बनता है,,,,,

हक़ तो तुम्हारा भी बनता था ,,और अब भी बनता है,,,,लेकिन तूने मुझे पहले भी ठुकराया और शायद अब भी

ठुकरा रहे हो क्यूकी तुझे शायद मैं खूबसूरत नही लगती ,,अच्छी नही लगती,,,,

ऐसी बात नही है रितिका तुम बहुत खूबसूरत हो लेकिन इस खूबसूरती की वजह से मैं अपने दोस्त को उसकी दोस्ती को

या उसके यकीन को धोखा नही दे सकता,,,

तुम बहुत तेज हो सन्नी,,,,बातें भी खूब बना लेते हो,,,,दोस्ती और यकीन की बात करके तुम मेरे से बचना

चाहते हो,,,,एक औरत की नज़र से तुमको देखु तो तुम पर गुस्सा आता है क्यूकी तुम उसके खूबसूरत जिस्म को

ठुकरा कर बेहूदा दोस्ती की बातें करते हो ,,लेकिन अगर एक दोस्त की नज़र से देखु तो तुम बहुत अच्छा कर रहे

हो जो दोस्ती की वजह से एक कमसिन खूबसूरत और जवान लड़की को ठुकरा रहे हो,,,तुम्हारी यही बात तो अच्छी

लगती है मुझे,,,,,कि तुम यकीन नही तोड़ते किसी का,,,,,यही वजह है कि मैं तुमको लाइक करती हूँ ,इतना

लाइक करती हूँ कि बता नही सकती,,,,

सही कहा ,,मैं करण का यकीन नही तोड़ सकता,,,,वो मेरा दोस्त है,,,,,

जानती हूँ,,लेकिन औरत होने के नाते मुझे तेरे पर गुस्सा आता है,,,,दिल करता है ये नाइफ लेके तेरा खून

कर दूं मैं,,उसने इतना बोला और एक नाइफ उठाकर मेरे गले से लगा दिया,,,बोलो क्या बोलते हो,,क़तल कर दूं

क्या मैं तुम्हारा,,फिर शायद मुझे भी चैन मिले क्यूकी तुमने बार बार मुझे ठुकराया है और हर बार

मेरी बेज़्ज़ती की है,,,,

तुम जो चाहो कर सकती हो रितिका भाभी,,तुम्हारा हक़ बनता है,,,,

उसने नाइफ को मेरे गले पर रखा और खुद आगे की तरफ बढ़ कर मेरे फेस के करीब अपना फेस कर लिया और

अपनी होठों को थोड़ा सा खोलकर मेरे फेस पर हल्की हवा मारने लगी अपने मुँह से ,,उसकी साँसों की गरम

और मदहोश करने वाली खुश्बू से मैं थोड़ा हिल सा गया था,लेकिन फिर भी ना जाने कैसे मैने खुद को

क़ाबू मे किया हुआ था,,और खुद पर क़ाबू करते हुए मैं उस से थोड़ा दूर हट गया,,,

उसने मेरी इस हरकत से मुझे हंस कर बड़े प्यार से देखा,,,,फिर चलके मेरे करीब हो गई,,,मैं अभी उस से

दूर हुआ था कि वो वापिस मेरे पास आ गई थी,,,,,

हक़ तो तुम्हारा भी बनता है सन्नी,,,,मेरी जान लेने का,,,,मैं तो तुम्हारी जान नही ले सकती लेकिन अगर तुम

चाहो तो मेरी जान ले भी सकते हो,,,,उसने मेरा हाथ पकड़ा जिसमे नाइफ पकड़ा हुआ था और उस हाथ को अपने

हाथ मे पकड़ कर अपनी गर्दन पर लगा दिया,,,,बोलो क्या मेरा क़तल कर सकते हो तुम,,तुम्हारे लिए तो ये

आसान काम है,,,,

ये क्या बेहूदा मज़ाक है ,,,,,मैने इतना बोला और अपने हाथ को रितिका के हाथ से छुड़वा लिया और दूर हट गया

तभी करण एक दम से अंदर आ गया,,,,,

ओह्ह माइ गॉड,,,,,सही टाइम पर दूर हो गया रितिका भाभी से वर्ना करण पता नही क्या सोचता,,,मुझे लगा

करण ने कुछ नही देखा लेकिन मैं ग़लत था,,,,,,

उसने किचन मे आते ही बोला,,,,,अरे क्या हो गया भाभी और देवेर मुझे देखकर चुप क्यूँ हो गये,,,

रितिका एक दम से बोल पड़ी,,,,,कुछ नही करण इसको सब्जी काटने मे प्रोबलम हो रही थी मैने बोला मैं सिखा '

देती हूँ तो बोलने लगा रहने दो मैं खुद कर लूँगा,,,,तो मैने भी ज़ोर ज़बरदस्ती नही की,,,,खुद ही काटने

दो पता चल जाएगा,,,,,

तभी करण मेरे पास आ गया और बोला,,,,,अरे तू भी किस काम मे पड़ गया है सन्नी भाई,,रहने दे ये औरत

लोगो का काम है रितिका खुद कर लेगी हम लोग बाहर चलते है,,,,

मुझे भी लगा बाहर जाना ही सही है लेकिन तभी रितिका बोल पड़ी,,,,मैं अकेली कैसे करूँगी इतना काम सन्नी

को रहने दो ना यहाँ,,,मेरी हेल्प के लिए ,,,,तुमको बाहर जाना है तो जाओ करण,,,,

नही करण भाई तुम भी बाहर मत जाओ,,,यही रूको,,,हम लोग यहीं बातें कर लेते है साथ साथ मैं भाभी

की हेल्प भी कर दूँगा,,,,,मैं नही चाहता था कि करण मुझे अकेले को भाभी के साथ छोड़कर बाहर जाए

ठीक है भाई मैं यही रुकता हूँ लेकिन मुझसे कोई काम नही होगा,,मैं बस बातें करके टाइम पास कर

सकता हूँ तुम लोगो का,,

हां हां ठीक है करण भाई ,,,,तू यहीं रह बस ,,कुछ मत कर बातें ही करता रह ,,,बस बाहर नही जाना,

मैने इतना बोला तो रितिका ने मेरी तरफ हंस कर देखा,,,उसको लगा कि मैं उस से डर गया हूँ और शायद मैं

डर भी गया था,,,,बात ये नही कि मैं रितिका से डरता था मैं तो करण के यकीन टूट जाने से डरता था,,

उसके बाद जब तक सब्जी नही कट गई मैं बाहर नही गया और जब हम लोगो का काम ख़तम हो गया तो मैं

करण के साथ बाहर चला गया,,,और फिर हम लोग बाहर बैठकर बातें करने लगे,,,,

मैं और करण बाहर निकलकर सोफे पर बैठने लगे लेकिन तभी करण ने मुझे इशारा किया कि अंदर रूम मे

चलते है,,,मैं उसके साथ उसके रूम मे चला गया,,,

अबे रूम मे क्यूँ लेके आया,,बाहर ही बैठ जाते और बात कर लेते,,बाहर डरता था क्या बात करने से ,,या बोलू

कि रितिका से डरते हो,,मैने हंसते हुए मज़ाक मे ये बात बोली थी

हां भाई रितिका से डरता हूँ ,,तभी तो 2 दिन से ना मोम के पास गया हूँ ना शिखा के पास,,दोनो कुछ

उदास लग रही थी आज भी,,,

अबे तेरे पास इतनी खूबसूरत बीवी आ गई है फिर भी तुझे शिखा और अलका आंटी की पड़ी है,,,अभी तो कुछ दिन

मस्ती कर रितिका के साथ ,,वैसे भी माँ और तेरी बेहन ने कहाँ जाना है,,,अभी नया फूल खिला है बाग मे

पहले उसकी खुश्बू लेले फिर वापिस चला जाना माँ और शिखा के पास,,,

भाई नये फूल की खुुशबू ले चुका हूँ,,बोलू तो सील खोल चुका हूँ रितिका की ,,,2 रातों मे खूब

चुदाई करली है उसकी ,,,,अब उसको भी दर्द होने लगा है आज ही बोल रही थी कुछ दिन दूर रहने को ,,,बोली

पेन हो रहा है 2-3 आराम करने दो,,,और वैसे भी मेरा दिल माँ और शिखा के साथ मस्ती को भी कर रहा है,

अरे वाह क्या बात है,,सील खोल दी तूने भाभी की,,,ये तो अच्छी बात है,,,,जंग जीत गया तू सील खोलकर,,और

दर्द भी दिया ,,,वाह भाई वाह,,,चल कोई ना अब 2 दिन दूर ही रहना ,,सील खुलने के बाद जब नयी नयी चुदाई

होती है तो सूजन आ जाती है इसलिए दर्द होता होगा भाभी को,,,तू कुछ दिन दूर ही रहना उन से और माँ के

साथ मस्ती कर लेना,,और हां शिखा के साथ भी,,

लेकिन कैसे भाई ,,,रितिका घर पे होती है,,दिल तो करता है उसको सब कुछ बता दूं लेकिन डर भी लगता है,,

आबे पागल हो गया है क्या,,,,अभी नयी नयी शादी हुई है अभी से कुछ मत बताना और जब टाइम आएगा तो अपनेआप

पता चल जाएगा उसको,,,वैसे तू कोई जल्दबाज़ी मत करना,,,और रही बात माँ और शिखा के साथ मस्ती करने की

तो वो तू अब भी कर सकता है बुटीक पर जाके,,,

बुटीक पर,,,किसके बुटीक पर भाई,,,,करण हैरान होके बोला,,,

अरे भुआ के बुटीक पर,,,माँ अलका आंटी और शिखा को लेके वहीं गई है मस्ती करने के लिए,,,बोल रही थी

शिखा और अलका आंटी बहुत तरस रही है मस्ती के लिए,,,अब अगर तुझे भी जाना है तो जा उनके पास

करण खुश हो गया,,,,लेकिन भाई रितिका से क्या बोलूँगा,,,,

इसमे क्या प्रोबलम है,,,,उसको बोल देना तू मेरा साथ किसी ज़रूरी काम से जा रहा है ,,,,

ठीक है भाई,,,,चल तू भी साथ चलना मेरे मस्ती करेंगे सब लोग मिलकर वैसे भी काफ़ी दिन हो गये है

साथ मिलकर मस्ती नही की हम लोगो ने ,,

ठीक है,,,लंच करते है फिर चलते है,,,,

फिर हम लोग इधर उधर की बातें करने लगे,,,कुछ देर बाद रितिका भाभी ने आवाज़ लगाई कि लंच तैयार

हो गया है,,,मैं और करण बाहर चले गये उसके रूम से लंच करने के लिए,,,

 
लंच करते टाइम भी मैं रितिका भाभी की तरफ ज़्यादा ध्यान नही दे रहा था बस खाने पर ध्यान दे रहा

था,,,,लंच करके मैं वहाँ से निकल पड़ा और करण भी मेरे साथ चल पड़ा,,,उसने भाभी को बोला था कि

वो मेरे साथ किसी ज़रूरी काम से जा रहा है,,,फिर मैं और करण पहुँचे बुटीक पर और वहाँ पहुँच

कर हम लोगो ने शिखा ,,अलका आंटी और मेरी माँ के साथ मिलकर खूब मस्ती की,,फिर रात होने से पहले हम

लोग चल पड़े अपने अपने घर की तरफ,,,,,,

बुटीक से मस्ती करके करण गया अपने घर अपनी माँ और बेहन के साथ जबकि मैं माँ को लेके अपने घर

आ गया,,,,

घर पहुँचा तो सीधा उपर अपने रूम मे चला गया,,,डॅड घर आ चुके थे और नीचे बैठकर टीवी देख

रहे थे,,जबकि सोनिया उपर रूम मे ही बैठकर स्टडी कर रही थी,,,जब मैं रूम मे घुसा तो वो बेड

पर बैठी हुई थी,,,,

कहाँ था तू,,,स्टडी नही करनी थी क्या,,तेरे को तो कोई टेन्षन ही नही है सन्नी ,,याद रख अगर तेरी वजह से

मुझे मेरी अक्तिवा नही मिली तो बहुत बुरा होगा तेरे साथ,,,सोनिया हल्के गुस्से और नखरे का साथ बोली,,

सौरी सोनिया,,मुझे थोड़ा काम था करण के साथ इसलिए लेट हो गया ,,,बस नहा धो कर फ्रेश हो जाउ फिर

करता हूँ स्टडी,,,

हां हां करले बहाने जितने करने है,,,,एक तू है बहानेबाज और एक कविता है,,मेडम की तबीयत ठीक नही

है,,,बोलने लगी भाई के साथ घूम कर आई हूँ तबीयत बिगड़ गई है,,,,झूठी बहानेबाज कहीं की,,,

अरे ऐसे क्यूँ बोल रही हो उसको,,,हो सकता है उसकी तबीयत सच मे खराब हो सकती है,,,,,

वैसे मुझे तो पता ही था कि उसकी तबीयत सच मे खराब है,,,क्यूकी उसकी तबीयत मेरी वजह से ही तो खराब

हुई थी,,,

तो क्यूँ गई अपने भाई के साथ घूमने ,,मैने मना भी किया था मत जाओ ,,,एग्ज़ॅम के दिन चल रहे है,सोनिया

हल्के गुस्से से बोली

वो एग्ज़ॅम से बोर हो गई होगी मन बहलाने के लिए चली गई होगी अपने भाई के साथ,,इसमे क्या बड़ी बात है,,

वैसे तुझे शरम आनी चाहिए ,,जब तू बीमार थी तो वो तेरी इतनी केर करती थी और अब वो बीमार हुई है तो

उसकी खबर लेने की जगह तू उसको बहानेबाज बोल रही है,,क्या यही दोस्ती है तेरी,,,

बस बस तू चुप कर,,तुझे मेरे और कविता के बीच मे बोलने की ज़रूरत नही,,,,जाके जल्दी फ्रेश होज़ा और स्टडी

कर चुप-चाप बैठकर,,,,उसने ये बात ऐसे बोली जैसे ओरडर दे रही हो,,,,वैसे भी इसके सामने बोलना मेरे

बस की बात नही इलसीए मैं चुप करके बाथरूम मे घुस गया,,,

साला एक तो बाथरूम की टॅब ठीक से काम नही कर रही थी,,,,ये तो शूकर है मुँह-हाथ धोना था तो थोड़े

पानी से काम चल गया ,,अगर नहाना होता तो मैं शोभा के रूम मे ही जाता ,,,,,खैर मैं मुँह-हाथ धोके

बाहर आ गया और अपने बेड पर बैठकर स्टडी करने लगा,,,

सोनिया ने डिन्नर करने भी नीचे नही जाने दिया ,,,खाना प्लेट मे लेके उपर ही आ गई ,और डिन्नर करके हम

लोग फिर स्टडी करने लगे,,,पहले तो मैं अपने बेड पर बैठा रहा फिर डिन्नर के बाद मैने दरवाजे को

अंदर से बंद किया और मॅट्रेस को नीचे ज़मीन पर लगा कर सोनिया के बेड से दूर बैठ गया,,,सोनिया मेरी

इस हरकत से मुझे खुश होके देखने लगी थी,,,मैने भी हंस कर उसकी तरफ देखा और फिर ध्यान अपनी बुक

की तरफ कर लिया,,,,

सुबह भी सोनिया ने मुझे उठा दिया था क्यूकी मैं मॅट्रेस को दरवाजे के पास लगा कर लेटा हुआ था,उसने

मुझे उठाया तो मैने मॅट्रेस को बेड पर रखा और वो बाहर चली गई,,,,,उसके जाने के बाद मैं भी फ्रेश

होके नीचे चला गया,,,,,,

नीचे जाके देखा तो मोम और डॅड समान पॅक कर रहे थे,,सोनिया भी मोम की हेल्प करने लगी थी,,,,

अरे मोम ये समान क्यू पॅक कर रही हो,,,मैने मोम के रूम मे जाते ही पूछा,,,,

मुझे पता था तू भूल जाएगा सन्नी,,,,,माँ ने हंसते हुए बोला,,,,रेखा की शादी है ना हम लोगो को गाँव

जाना है,,,,

ओह्ह शिट मैं तो सच मे भूल गया था मोम,,,

तभी सोनिया मज़ाक मे बोल पड़ी,,,,,,हां मोम अक्सर इंटेलिजेंट लोग छोटी छोटी बातें भूल ही जाते है,,,

उसने इतना बोला तो मोम और डॅड हँसने लगे,,,,

माँ मेरा भी बहुत दिल करता है शादी मे जाने का,,,गाँव जाके घूमने का,,,मैने मायूस मुँह बनाते हुए

बोला,,,,

चल चुप कर,,,एग्ज़ॅम से डरने वाले नालयक लड़के,,,,,मुझे पता है तू बहाना बना रहा है गाँव जाने का

सोनिया ने इतनी बात बोली तो सब लोग फिर से हँसने लगे,,,

क्यू तेरा दिल नही करता क्या गाँव जाने का,,मैने चिढ़ते हुए सोनिया की बात का जवाब दिया,,

दिल तो करता है मेरा पर मुझे एग्ज़ॅम की ज़्यादा टेन्षन है,,,एग्ज़ॅम नही होते तो मैं चली जाती,,,

एग्ज़ॅम कब ख़तम हो रहे है तुम लोगो के बेटी,,,,ये बात डॅड ने पूछी,,,,

डॅड एक एग्ज़ॅम कल है और एक एग्ज़ॅम उसके 1 दिन बाद,,,,

ओह नो बेटा,,,,, परसो रात को तो रेखा की शादी है ,,मतलब रात को रेखा की शादी है और अगले दिन सुबह

तुम लोगो का एग्ज़ॅम है,,,,,,अगर तुम लोग शादी पर गये तो रात की शादी अटेंड करके सुबह एग्ज़ॅम टाइम तक

वापिस आना मुश्किल होगा,,,

इट्स ओके डॅड ,,हम शादी के बाद मिल लेंगे रेखा को गाँव जाके,,,वैसे भी शादी से ज़्यादा ज़रूरी है मेरे

एग्ज़ॅम ,,,सोनिया ने इतनी बात मेरी तरफ देखते हुए बोली,,,मैं समझ गया वो मुझे चिड़ा रही है,,,

ये हुई ना बात बेटी,,,अच्छा तो अब हम लोग चलते है,,,

डॅड आप वापिस कब तक आओगे,,,,मैने डॅड का बॅग पकड़ा और बाहर जाते हुए ये बात डॅड से पूछी,,,

बेटा हम लोग शादी के 2 दिन बाद ही वापिस आयंगे,,क्यूकी गाँव मे शादी के बाद भी बहुत रस्मे होती है

पूरी करने वाली,,,हम लोगो को कम से कम 6-7 दिन तो लग ही जाने है,,,,तब तक तुम लोग झगड़ा बिल्कुल मत

करना ,,,अच्छे भाई बेहन की तरह मिलकर रहना,,,,

माँ हम लोगो अब कब लड़ते है,,,अब तो हम दोनो की फाइट कबकि ख़तम हो गई है,,,अब आप बेफ़िक्र होके

जाओ,.,,

मैने मन ही मन सोचा कि मोम डॅड तो चले जाएँगे बेफ़िक्र होके लेकिन अब मुझे थोड़ी फ़िक्र होने लगी थी

क्यूकी 7 दिन मुझे और सोनिया को अकेले रहना था ,,,,अगर कुछ ग़लत हो गया तो ,,और अगर कुछ नही हुआ तो,,,

मोम डॅड चले गये ,,,,मैं और सोनिया गेट बंद करके वापिस अंदर आ गये,,,सोनिया ने नाश्ता लगा दिया टेबल पर

जो मोम बना कर गई थी,,,,उसने प्लेट मे नाश्ता रखा और कॉफी कप मे डालके मेरी तरफ कर दी,,,मैने अपनी

प्लेट और कॉफी कप लिया और उपर चला गया और उपर जाके भुआ की किचन के बाहर लगे डाइनिंग टेबल पर बैठ

कर नाश्ता करने लगा,,,,

 
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