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कहीं वो सब सपना तो नही complete

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मैं सोनिया के पास नही रहना चाहता था जितना हो सके उस से दूर रहना चाहता था,,,ये बात नही कि मैं

उसके साथ सेक्स नही करना चाहता था लेकिन मैं डरता था,,बस उसको हर्ट नही करना चाहता था,,,,,अब घर

मे कोई नही था और ऐसे मोके पर सोनिया के पास होने से मेरे अंदर का जानवर कभी भी उसको हर्ट कर सकता

था लेकिन मैं हर्ट करके नही प्यार से सब कुछ करना चाहता था,,,लेकिन वो मान नही रही थी,,,,और अब मैं

शायद उसको मनाना भी नही चाहता था,,,,मैं यही सब सोचता हुआ नाश्ता कर रहा था,,तभी सोनिया उपर

आ गई,,,

तू यहाँ क्यूँ आ गया भाई,,नीचे बैठकर नाश्ता नही कर सकता था क्या,,,

मेरी मर्ज़ी,,मुझे यहाँ बैठना था,,तुझे कोई प्रोबलम है क्या मेरे यहाँ बैठकर नाश्ता करने से,,मैने

थोड़ा गुस्से मे बोला तो सोनिया थोड़ी मायूस हो गई,,,

फिर उसने मायूसी भरे चेहरा पर नकली मुस्कान लिए मेरे से बोला,,,,कोई नही भाई तू जहाँ मर्ज़ी बैठ

मुझे क्या,,,मैं तो ऐसे ही पूछ रही थी,,,,

वो ये सब मुस्कुरा कर बोल रही थी लेकिन मैं जानता था वो मायूस है और ये हँसी नकली है जिस से वो मुझे

पागल बनाने की कोशिश कर रही है ,,,लेकिन मैं पागल बनने वाला नही,,उसको बचपन से जानता हूँ

मैं,,

वो अपने रूम मे चली गई और मैं नाश्ता करने लगा,,,लेकिन मुझे नाश्ता निगलने मे थोड़ी मुश्किल हो रही

थी क्यूकी मैने सोनिया को थोड़ा हर्ट कर दिया था जो मुझे अच्छा नही लग रहा था,,

वो रूम मे गई और अपनी बुक्स लेके बाहर आ गई फिर मेरे पास आके फेस पर वहीं नकली मुस्कान लेके मेरे

से बोली,,,,,,,जब नाश्ता ख़तम हो जाए भाई तो डाइनिंग रूम मे आ जाना मिलकर स्टडी करते है,,,कविता का तो

पता नही आएगी या नही

मुझे थोड़ी टेन्षन थी सोनिया के साथ अकेले घर मे रहने पर,,,इसलिए मैने उसको कविता को फोन करने को

बोला,,,

तू कविता को फोन करके बुला ले ना,,सब मिलकर स्टडी कर लेंगे,,,

भाई मैने फोन किया था लेकिन उसने बोला वो नही आएगी,,,शायद अभी भी तबीयत ठीक नही है उसकी,,

तूने उसकी तबीयत के बारे मे पूछा नही क्या उस से,,,,

पूछा था भाई लेकिन वो बोली कि अब वो ठीक है बस ऐसे ही आराम कर रही है,,,,उसका दिल नही था आने को

इसलिए मैने भी ज़्यादा फोर्स नही किया,,,और वैसे भी उसका भाई कहीं गया हुआ है आउट ऑफ टाउन इसलिए भी वो

नही आ रही,,,

उसकी बात से मैं सोच मे पड़ गया,,क्या मैने इतना ज़्यादा ज़ोर लगा दिया था उसकी चुदाई मे कि उसकी तबीयत

इतनी ज़्यादा बिगड़ गई थी,,

मैं अपनी ही सोच मे बैठा हुआ था तभी सोनिया बोली,,,,अब तूने स्टडी करने आना है मेरे साथ या यहीं

बैठकर कविता का इंतजार करना है,,,,

नही तुम जाओ और स्टडी करो,,,मैं नीचे बैठकर खुद स्टडी कर लूँगा,,,,इतना बोलकर मैं बाकी का बचा हुआ

नाश्ता करने लगा,,

वो मेरी बात से थोड़ी उदास हो गई ,,,,ओके भाई ,,इतना बोलकर वो भुआ के ड्रॉयिंगरूम मे चली गई और उसके

जाने के बाद मैं नाश्ता ख़तम करके नीचे चला गया और सोफे पर बैठकर टीवी देखने लगा,,,

मैं टीवी देखते हुए सोच रहा था कि अब कैसे भी करके मोम डॅड के आने तक सोनिया से दूर रहना होगा,,वैसे

तो मैं ऐसा मोका तलाश कर रहा था ऐसे मोके की वेट मे था कि कब मुझे और सोनिया को अकेले रहने का मोका

मिलेगा लेकिन अब जब मुझे मोका मिला था तो मुझे डर लगने लगा था और मैं उस से दूर भागने लगा था

मुझे अभी टीवी देखते हुए कुछ ही टाइम हुआ था कि सोनिया नीचे आ गई,,,,

आइ न्यू इट सन्नी,,,,उसने थोड़ा तेज आवाज़ मे बोला,,,,,मुझे पता था तू स्टडी नही कर रहा होगा टीवी देख रहा

होगा मज़े से,,,,,

उसकी बात सुनके मैं एक दम से पीछे मुड़ा तो वो सीडियों के पास से सोफे की तरफ आते हुए मुझे गुस्से से

देख रही थी,,,

मैना कहा था मेरे साथ बैठकर स्टडी करले लेकिन नही तुझे तो अकेले बैठकर स्टडी करनी है,,,और यहाँ

स्टडी करने की जगह तू आराम से लेट कर टीवी देख रहा है,,,,,सोच ले सन्नी अगर तेरी वजह से मुझे मेरी

अक्तिवा नही मिली तो मेरे से बुरा कोई नही होगा,,,,

तेरे से बुरा वैसे भी कोई नही है,,,,मैने ये बात धीरे और मज़ाक मे बोली ,,,,,

क्या बोला तू फिर से बोलना ज़रा,,,,उसने मेरे पास आके मेरे हाथ से टीवी का रिमोट छीनते हुए गुस्से से बोला,,

छोड़ ये रिमोट और टीवी बंद करके स्टडी कर मेरे साथ उपर चलके,,,,

मेरे हाथ मे रिमोट था और वो मेरे से रिमोट पकड़ने की कोशिश कर रही थी ,,,उसने अपना पूरा ज़ोर लगा दिया

तो मुझे लगा कि रिमोट मेरे हाथ से निकल जाएगा इसलिए मैने अपने दूसरे हाथ से भी रिमोट पकड़ने की

कोशिश की जिसस वजह से मेरे हाथ उसके हाथ के उपर आ गया और मैने रिमोट पकड़ते हुए उसका हाथ ही पकड़

लिया और ऐसा करते ही मुझे अजीब बेचैनी होने लगी,,,,मेरे अंदर तूफान सा उठने लगा,,लेकिन मैने खुद पर

क़ाबू किया और रिमोट को छोड़ दिया,,,,और उठकर खड़ा हो गया,,,

मुझे नही करनी स्टडी तेरे साथ बैठकर,,,मुझे अकेले रहना है,,,,मैने ये बात गुस्से मे बोली तो शायद वो

समझ गई थी कि मैं उस से दूर रहने की बात क्यूँ कर रहा हूँ,,,

अकेले रहना है तो अकेले रह मुझे क्या,,,,लेकिन मेरे सामने रह तू बस ताकि मुझे पता चलता रहे कि तू

स्टडी कर रहा है,,,,

इतना बोलकर वो उपर चली गई और कुछ देर बाद हाथ मे कुछ बुक्स लेके वापिस नीचे आ गई और आते ही मेरा

हाथ पकड़ कर घर से बाहर सामने वाले गार्डन मे ले गई,,,,

चल बैठ जा यहाँ और स्टडी कर ,,मैं उसकी बात मान कर बैठ गया उसने मुझे बुक दी और अपनी बुक लेके

मेरे से दूर जाके बैठ गई ,,,,

सर्दी की धूप थी इसलिए हम लोग गार्डन मे बैठ गये,,,सोनिया मेरे से करीब 12-15 कदम की दूरी पर जाके

बैठ गई थी,,उसने टाँगों को घास पर फैला दिया और बुक को अपने घुटनो पर रखके स्टडी करने लगी

थी,,,,

उसने अभी ब्लू जीन और साथ मे पिंक टॉप पहना हुआ था,,,उसके हाथ मे एक पेन था जिसको वो बार बार अपने

मुँह से पकड़ रही थी कभी उस पेन से बुक पर कुछ लिखने लगती फिर पेन को वापिस मुँह मे पकड़ लेती ,मैं

अपनी बुक पर ध्यान कम दे रहा था और उसकी तरफ ज़्यादा देख रहा था ,,वैसे मैं उसको इग्नोर करने की

कोशिश तो कर रहा था लेकिन इस टाइम उसका गोरा रंग जो सर्दी की तीखी धूप मे और भी ज्यागा गोरा लगने लगा

था उसका पूरा रूप निखर कर बाहर आने लगा था ,,उसका मासूम चेहरा और चेहरा पर उड़ती झुलफे और मुँह

पे पकड़ा हुआ पेन ,,,मेरी तो हालत खराब होने लगी थी इतनी मासूमियत से मेरे सामने बैठकर पढ़ती सोनिया

को देखकर,,वो भी बीच बीच मे बुक से ध्यान हटा कर मेरी तरफ देख रही थी लेकिन जब भी वो मुझे

देखती मैं नज़रे झुका लेता और ध्यान बुक की तरफ कर लेता,,वो मेरी इस हरकत से हँसने लगती उसको लगता मैं

उस से डर गया हूँ लेकिन उसको क्या पता था कि मैं उस से कम और खुद से ज़्यादा डर रहा हूँ क्यूकी कैसे

इस टाइम मैं खुद पर क़ाबू करके बैठा हुआ था ये बस मैं ही जानता था,,,

कुछ टाइम बाद वो घास पर लेट गई ,,,उसने अपने पेट को नीचे घास की तरफ किया और लेट गई फिर उसने बुक

को अपने सर के सामने रख लिया,,,,उसने अपने एक हाथ को पानी एल्बो से बंद किया और एल्बो को ज़मीन पर

टिका लिया और उसी हाथ की हथेली पर अपनी चिन को रखते हुए अपने सर को हाथ की हथेली पर टिका कर सामने

पड़ी बुक को रीड करने लगी,,,,उसका एक हाथ उसके सर के बोझ को झेल नही पा रहा था इसलिए उसने दूसरे हाथ

को भी एल्बो से बेंड किया और उसको भी ज़मीन पर टिका कर अपने दोनो हाथों पर अपनी चिन को रखा और

बुक रीड करने लगी,,,जब भी उसको पेज टर्न करके नेक्स्ट पेज पर जाना होता वो अपने एक हाथ को ज़मीन से

उठा लेती,,,मैने भी ऐसे ही किया और उसी हालत मे लेट कर बुक रीड करने लगा लेकिन मेरा ध्यान बुक पर

कम और सोनिया की तरफ ज़्यादा था,,,मैं उसके मासूम चेहरा को देख रहा था ,,उसकी पलके झुकी हुई थी और

उसका ध्यान बुक पर था लेकिन जल्दी ही उसका ध्यान मेरी तरफ आ गया और वो जल्दी से उठकर बैठ गई,,,लेकिन

मैं ऐसे ही लेटा रहा और उसकी तरफ देखता रहा,,,,,

तभी उसने अपने सर को हिलाया और एशारे से मेरे से पूछने लगी,,,,,क्या देख रहे हो सन्नी,,,,

मैं भी सर को ना मे हिला दिया और बता दिया कि मैं कुछ नही देख रहा,,,और मैने अपना ध्यान बुक

पर कर लिया,,,,

कुछ देर बाद मेरा ध्यान उसकी तरफ गया तो वो अपने हाथ से अपने चेहरे को हवा दे रही थी शायद उसको

गर्मी लगने लगी थी और लगती भी क्यू नही,,,अभी सर्दी शुरू हुई थी इसलिए ज़्यादा देर तक धूप मे बैठना

बहुत मुश्किल था ,,,मैं जहाँ बैठा हुआ था वहाँ पेड़ की कुछ छाया थी धूप कम थी इसलिए मुझे

कोई दिक्कत नही हो रही थी,,,उसने देखा कि मेरे पास ज़्यादा धूप नही है और वो जल्दी से उठकर मेरे पास

आके बैठ गई,,,,लेकिन ज़्यादा पास नही 5-6 कदम की दूरी पर,,,क्यूकी ज़्यादा पास आने की ग़लती वो नही करने वाली

थी,,,

कुछ देर वो बैठी रही और बाद मे फिर से लेट गई,,,,इस बार उसने पीठ को ज़मीन से लगा लिया था और बुक

को अपने पेट पर रखके स्टडी करने लगी थी,,,मैं भी लेटा हुआ था लेकिन जल्दी ही मैं उठके बैठ गया था,

क्यूकी मेरा धान उसके जिस्म पर चला गया था,,,उसका टॉप जो थोड़ा छोटा था और लेटने की वजह से उसकी कमर

थोड़ी सी नंगी हो गई थी,और मेरी नज़र उसकी नंगी और दूध जैसी गोरी कमर पर अटक गई थी,,मैं पता नही

कितने टाइम से उसकी कमर को देखता रहा तभी मैं एक दम से डर गया,,,

सोनिया गुस्से से बोली,,,,,,,,,,क्या कर रह हो सन्नी,,,,

उसकी बात से डर कर मैने नज़रे उसकी काम्र से हटा ली और उसके फेस की तरफ देखा,,तो उसकी आँखें गुस्से से लाल

हो गई थी,,,,

कुउछ न्ह्ही म्मैईन्न तो स्टडी कर रहा था,,,,मैने डरते हुए बोला था ,,,,

जानती हूँ क्या स्टडी कर रहे हो तुम,,,,इतना बोलकर वो उठी और अपना टॉप ठीक करते हुए वहाँ से अंदर की

तरफ चली गई,,,,,और जाते जाते मुझे गुस्से से बोल गई,,,,

 
मैं अंदर जा रही हूँ तुम यहीं बैठकर स्टडी करो,,जब तक मैं लंच नही बना लेती तब तक अंदर नही

आना तुम,,,,इतना बोलके वो अंदर चली गई और दरवाजा बंद कर लिया,,,,,उसके जाते ही मैं सर पकड़ कर घास

पर लेट गया,,,,

साला ये तो पंगा है,,,,दूर रहना मुश्किल है सोनिया से लेकिन पास जाना और भी ज़्यादा मुश्किल है,,,करूँ भी

तो क्या करूँ मैं,,,,कुछ समझ नही आ रहा था,,,लेकिन एक बात अच्छी हो गई थी,,मैं खुद उस से दूर

होने की या उसको दूर करने की कोशिश कर रहा था और अब वो खुद ही मेरे से दूर चली गई थी,,,,अब

लंच टाइम तक कोई टेन्षन नही थी,,,,क्यूकी तब तक मैं भी बाहर ही बैठने वाला था या बोलो तो सोने

वाला था,,,,मौसम बहुत अच्छा था मैने बुक साइड पर रखी और सोनिया के बारे मे सोचता हुआ ,,उसके मासूम

चेहरे के बारे मे सोचता हुआ नींद के आगोश मे चला गया,,,,,

नींद मे भी मैं सोनिया के सपने देख रहा था

लेकिन जल्दी ही मेरे सपने मे वो रात आ गई जब मैं कविता के साथ था नंगे जिस्म एक ही बेड पर ,,,

तभी कुछ देर बाद मुझे सोनिया की आवाज़ सुनाई दी,,,,

बस यही आता है तुम्हें या टीवी देखना या सोना,,,,और कुछ नही कर सकता तू,,,सोनिया घर के दरवाजे से बाहर

आते हुए गुस्से से मुझे बोल रही थी,,,,

मैं आँखें मल्ता हुआ उठा और बोला,,,,मैं सो नही रहा था बस बुक रीड करते करते आँखें दुखने लगी

थी इसलिए आँखों को आराम देने क लिए कुछ देर आँखें बंद करके लेट गया था,,,,,

हां हां बुक रीड करते ही तेरी आँखें थकती है,,,अभी तुझे तेरा लॅपटॉप लाके दे दूँ तो उसमे 24 अवर्स

बिना थके गेम खेलता रहेगा टाइम पास करता रहेगा ,कभी नही थकेगा तू और ना तेरी ये आँखें ,,

मैं उसकी बात का कोई जवाब नही दे पाया बस चुप चाप उठके खड़ा हो गया,,,

अब चुप क्यूँ है ,,,,कुछ बोलता क्यूँ नही,,,,वो गुस्से से फिर से बोली,,,,

बोला ना बाबा मैं सो नही रहा था बस थक गया था इसलिए लेट गया,,,,तू बिना वजह क्यूँ गुस्सा करती रहती है

मैं बिना वजह गुस्सा नही करती ,,,तू ही हर बार मुझे गुस्सा दिलवाता है,,,वो फिर से गुस्से से बोली

अब मैने क्या कर दिया,,,,थक गया था तो लेट गया था इसमे तुझे गुस्सा दिवाले वाली क्या बात थी,,,,

तू तो कुछ करता ही नही सन्नी,,,बस गेम खेलता है,,,सोता रहता है,,,टीवी देखता रहता है या अपनी बेहूदा

और घटिया हरकते करता रहता है,,,

मैं सोनिया की बात समझ गया उसका इशारा उस हरकत की तरफ था जब वो मेरे पास घास पर लेटी हुई थी और

उसका टॉप उसकी कमर से उपर उठा हुआ था और मैं उसकी नंगी कमर को देख रहा था,,,,

मुझे कोई बात नही सूझ रही थी इसलिए मैने उसको लंच के बारे मे पूछ लिया,,,,लंच बन गया क्या,,

हां बन गया तभी तुझे बुलाने आई थी,,,,चल आजा अंदर,,,,

मैने सोचा अच्छा हुआ लंच की बात करदी वर्ना पता नही क्या क्या सुनाती रहती ये हिट्लर मुझको,,,,

मैं जल्दी से उसके पास से गुजर कर घर के अंदर चला गया जबकि वो मुझे घुरती रही,,,,

अंदर जाके मैं सीधा माँ के रूम मे गया और मुँह हाथ धो कर बाहर डाइनिंग टेबल पर बैठ गया,,,तब

तक सोनिया ने खाना लगा दिया था,,,,मैने चुप चाप बैठकर खाना ख़तम किया ,,,मैने उसकी तरफ ध्यान

भी नही दिया क्यूकी मुझे पता था वो गुस्से मे है,,,अगर उसकी तरफ देख लेता तो खाना चबाना भी मुश्किल

होता और उसको गले से नीचे निगलना भी ,,,

खाना ख़तम करके मैं सोफे पर जाके लेट गया,,,,और टीवी देखने लगा,,,,

तू फिर से लेट गया,,,अभी सोके थका नही क्या तू सन्नी,,,सोनिया बर्तन किचन मे रखके मेरे पास आके बोली,

अरे मेरी माँ अभी तो लंच किया और अभी फिर से स्टडी शुरू कर दूं क्या,,,कुछ देर तो आराम से टीवी देखने

दो,,,मैने इतनी बात हाथ जोड़कर बोली थी सोनिया से,,,

सोनिया मेरी तरफ देखकर हँसने लगी,,,ठीक है ठीक है,,,,,कुछ देर आराम कर्लो और टीवी देख लो,,,बाद मे मैं

स्टडी करवाउंगी तुझे,,,,फिर कोई बहाना नही चलना तेरा,,,,कि मैं थक गया हूँ ,,आँखें दुखने लगी

है ,,,,

ओके अम्मा जी ,,,अब तो टीवी देखने दो बाद मे जितनी स्टडी करवानी होगी करवा लेना,,,बस कुछ देर आराम करने

दो,,,

ठीक है,,,इतना बोलकर हंसते हुए वो दूसरे सोफे पर जाके बैठ गई और जाते जाते मेरे हाथ से रिमोट छीन कर

ले गई,,,,और फिर अपनी पसंद का एक बोरिंग सा प्रोग्राम लगा लिया वही सास बहू वाला,,,,मैने सोचा कोई बात

नही इसको टीवी देखने दो और अपुन आराम करता है और वैसे भी ऐसा प्रोग्राम देखकर अक्सर नींद अच्छी आने लगती

है,,,,,,,,,,,,

वो बड़े ध्यान से टीवी देख रही थी जैसे टीवी मे खो ही गई थी,,,और मैं उसको देखने लगा था, जैसे वो टीवी मे खो गई थी मैं भी उस मे खो सा गया था,,,

तभी उसकी ज़ुल्फो की एक लट जो उसके चेहरे पर आ गई थी उसने अपनी ज़ुल्फो की उस लट को अपनी उंगली से अपने कान के पीछे करते हुए मेरी तरफ देख लिया और तभी मेरा ध्यान उसकी तरफ ही था,,,,

क्या देख रहे हो सन्नी,,,,उसकी आवाज़ से मैं एक दम चौंक गया,,,

कुछ नही,,मैं तो ये वो,,,ये बोरिंग शो देख रहा हूँ,,,मैने टीवी की तरफ इशारा करते हुए बोला

आए ब्लॅकी इसको बौरिंग मत बोल ये मेरा सबसे अच्छा शो है,,मुझे बहुत अच्छा लगता है ये शो

तुझे अच्छा लगता है तो क्या ये अच्छा हो जाएगा,,,मुझे तो बौरिंग लगता है ,,,इतना ज़्यादा बौरिंग कि मुझे तो

नींद भी आने लगी है ये शो देखकर,,,

वो थोड़ा चिडते हुए,,,बोला ना इसको बौरिंग मत बोल,,,ये मेरा सबसे पसंदीदा शो है,,,ये बात वो थोड़ी

इतराते हुए बोली,,,

हां हां जानता हूँ जैसी तू बौरिंग वैसे तेरे पसंदीदा शो भी बौरिंग,,,,और वैसा ही था तेरा खाना ,,,

इतना सड़ा हुआ खाना आज तक नही खाया मैने,,,

वो थोड़ा गुस्से से बोली,,,,चल चल चुप कर,,मैं तो बहुत अच्छा खाना बनाती हूँ,,,और आज भी इतना अच्छा बनाया

था कि पेट भरके खाया मैने,,,

अपने खाने की तारीफ तू खुद ही कर सकती है मैं नही,,,मैने तो इतना सड़ा हुआ,,इतना फीका खाना आज तक

नही खाया,,,ना मिर्च थी उसमे ना न्नमक था और ना ही कोई मसाला,,,,तेरी तरह बोरिंग है तेरे शो और तेरी

तरह फीका और बिना स्वाद का है तेरा खाना,,,,

ओई ब्लॅकी बोला ना मेरे शो को बौरिंग मत बोल और मेरा खाना तो बहुत अच्छा था ,,बिल्कुल मेरे जैसा

तीखा ,,,मैं भी तो तीखी मिर्च हूँ और मेरा खाना भी तीखा था एक दम स्पाइसी,,,

अच्छा तू तीखी मिर्च है क्या,,,सच मे,,,

हां हूँ,,तुझे कोई शक है,,,वो फिर से इतराते हुए बोली,,,

अच्छा अगर तू तीखी मिर्च है तो मुझे तीखा खाना बहुत पस्संद है,,,मैने इतना बोला और हँसने लगा,,,

लेकिन वो मेरी बात से शरमा भी गई,,फिर एक दम से बोली,,,,अपनी बकवास बंद करले वर्ना मारूँगी तुझे,,

तू मारेगी मुझे,,मैने हंसते हुए उसको चिड़ाते हुए बोला,,,,

हां मारूँगी,,,,और वो भी इस रिमोट से,,,,उसने रिमोट को हवा मे उठा लिया और मेरी तरफ करके मुझे

दिखाने लगी,,,,

चल चल साइड हो,,,बड़ी आई रिमोट मारने वाली,,,खाना तो ठीक से बनाया नही जाता और रिमोट से मारने चली

है मुझे,,,,मैं उसको जान बूझ कर तंग कर रहा था ताकि वो हर्ट हो जाए अपने खाने की बेज़्ज़ती सुनकर और

गुस्से मे वहाँ से चली जाए,,,

मैं उसको हर्ट करने की कोशिश मे था लेकिन गुस्से मे उसने कुछ ऐसा किया जिस से मैं हर्ट हो गया,,उसने

मज़ाक मज़ाक मे रिमोट को मेरी तरफ फेंका और रिमोट सीधा आके मेरी लेफ्ट आँख के बिल्कुल पास आके लगा,,,

उसने तो मज़ाक मज़ाक मे धीरे से मारा था लेकिन रिमोट की एक कॉर्नर काफ़ी ज़ोर से मेरी लेफ्ट आँख के पास

लगी और मुझे बहुत हर्ट हुआ,,,मुझे थोड़ा सा दर्द हुआ और दर्द के मारे मेरे मुँह से अह्ह्ह्ह निकल गई और जल्दी

ही मेरा हाथ मेरी लेफ्ट आँख के उपर चला गया,,मैने हाथ से अपनी आँख को दबा लिया,,,,

 
सोनिया जल्दी से अपने सोफे से उठकर मेरे पास आ गई,,,,ओह्ह शिट्ट ,एम्म्म सूउररयी सुन्नयी मैने जानभूज

कर नही मारा मैने तो मज़ाक मे हल्के से रिमोट को तेरी तरफ फेंका था,,,,आइ म सूउरयी सन्नी

मेरा एक हाथ मेरी आँख पर था और मेरी आँख बंद थी लेकिन मैं दूसरी आँख से सोनिया की तरफ देख रहा था

वो थोड़ा परेशान हो गई थी और डर भी गई थी मेरी चोट की वजह से,,,,,यही तो प्यार था हम भाई बेहन मे

की किसी का दर्द नही देख सकते थे हम दोनो,,,ना वो मुझे हर्ट करके खुश थी ना मैं उसको,,,लेकिन जाने

अंजाने जैसे मैं उसको हर्ट कर देता था वैसे आज उसने भी मुझे हर्ट कर दिया था,,,,वो बस सौरी सौरी बोलती

जा रही थी,,,,और मेरे पास आके सोफे पर थोड़ी सी जगह मे बैठ गई थी,,,

सन्नी ज़ोर से लगा क्या,,,दिखा ज़रा,,,,इतना बोलके उसने मेरा हाथ पकड़ा और मेरी आँख से मेरा हाथ हटा दिया

हाथ हट-ते ही उसने मेरी आँख को देखा,,,मेरी आँख के बिल्कुल पास आके लगा था रिमोट जिस से आँख पर हल्की

सूजन आ गई थी,,,,,ओह्ह मयी गॉड ये तो सूज गई है सन्नी,,,,उसकी आँखों मे आँसू आ गये मेरा दर्द

देखकर,,,,

आइम सौरी सन्नी मैने जान भूज कर नही मारा तेरी कसम सन्नी,,,,वो फिर से सौरी बोलती जा रही थी

अरे रो क्यूँ रही है पगली,,मैं जानता हूँ तूने जानभूज कर नही मारा क्यूकी मुझे पता है तू मुझे कभी

हर्ट नही कर सकती जैसे मैं नही कर सकता,,,,चल अब रोना बंद कर ,,,कुछ नही हुआ है मुझे,,,ठीक हूँ

मैं,,,इतना बोलकर मैने उसकी आँखों से निकलने वाले आँसू सॉफ किए अपने हाथ से और उसको चुप करवाने लगा

वो रोती जा रही थी और मैं एक हाथ से उसके आँसू पोंछ रहा था तभी उसने मेरा हाथ साइड कर दिया ,,आँख

खोल अपनी सन्नी दिखा ज़रा अंदर तो चोट नही लगी,,,वो रोती हुई बोल रही थी.,,

अरे कुछ नही हुआ बोला ना,,तू बिन-वजह परेशान हो रही है,,,,

फिर वो रोते हुए अपने ही अंदाज़ मे बोली,,,,बोला ना आँख खोल और दिखा मुझे,,,,

वो रोते हुए भी गुस्सा कर सकती थी यही तो खूबी थी उसकी जिस से मेरी फट-ती थी,,,उसके कहने पर मैने

आँख खोली तो वो ज़्यादा परेशान हो गई,,,

क्या हुआ तू इतनी परेशान क्यूँ हो गई,,,,

सन्नी वो तेरी आँख अंदर से लाल हो गई है,,,,लगता है बहुत ज़ोर से लगा तुझे,,,,दर्द हो रहा होगा ना,,,इतना

बोलकर वो फिर से रोने लगी,,,,

नही नही कुछ नही हुआ तू परेशान मत हो ठीक हूँ मैं,,,इतनी चोट तो लगती ही रहती है,,,अब तू रोना

बंद कर ,,,,

सौरी सन्नी ,,,,सब मेरी वजह से हुआ,,बहुत बुरी हूँ मैं,,,हर वक़्त गुस्सा करती रहती हूँ तेरे पर,,हर

बात पर डाँट देती हूँ,,,,आज तो खाना भी अच्छा नही खिला सकी तुझे और अब चोट भी लगा दी तेरे,,,वो

बहुत ज़्यादा रोने लगी,,,,

अरे पगली बोला ना कुछ नही हुआ मुझे,,,,अब तू मेरी छुटकी बेहन है मुझे डाँटने का तो पूरा हक़ बनता

है तुझे,,,,और तुझे किसने बोला कि खाना अच्छा नही था,,,,खाना बहुत अच्छा बना था,,,मैं तो मज़ाक कर रहा

था,,तूने देखा नही मैने आज 2 रोटी भी ज़्यादा खाई थी,,,,सच मे खाना बहुत अच्छा बना था,,इतना बोलते हुए

मैं उसकी आँखों से आँसू पोंछता जा रहा था,,,

खाने की तारीफ सुनके उसका रोना बंद हो गया लेकिन चेहरे पर मायूसी अभी भी थी उसके,,,,खाना अच्छा बना था

तो झूठ क्यू बोला तूने,,,ना तू झूठ बोलता और ना मैं तुझे मारती,,,सब तेरी वजह से हुआ और मैं पगली

समझ रही थी सब मेरी ग़लती है,,,,बिना वजह रो रही हूँ मैं ,,तेरे साथ ऐसा ही होना चाहिए,,,

अच्छा सौरी बाबा सब मेरी ग़लती है,,अब खुश,,,

तभी उसने हल्के से थप्पड़ मारा मेरे गाल पर जिसस से मेरी आँख के पास हल्का दर्द हुआ,,

अहह ,,,,,,,मेरे मुँह से आहह निकल गई,,,

ओह्ह सौररी सन्नी,,,मैने वो जानभूज कर,,,सौरी ,,,,उस से ग़लती हो गई थी इसलिए उसने अपने दोनो हाथों से

अपने कान पकड़ लिए और सौरी बोलने लगी,,,,वो किसी छोटी बच्ची की तरह कान पकड़ कर बैठी हुई थी और मुझे

सौरी बोल रही थी

इस वक़्त वो किसी मासूस बच्ची जैसी लग रही थी उसको देखकर मैं उसके मासूम चेहरे मे खो सा गया,,भूल गया कि मुझे चोट लगी है भूल गया कि मुझे दर्द हो रहा है,,,,जैसे मैं उसके मासूम चेहरे मे खो गया था वो भी एक टक मेरी आँखों मे देख रही थी,,,,

तभी उसने अपनी जीन की पॉकेट से एक रुमाल निकाला और मेरी आँख बंद करके उस रुमाल को मेरी आँख पर

रख दिया,,,,

ये क्या कर रही हो,,,,रुमाल क्यू रखा मेरी आँख पर,,,,

कुछ नही भाई,,,,रुमाल रखकर हल्की गरम हवा दूँगी अपने मुँह से तो तेरी आँख का दर्द थोड़ा कम हो

जाएगा,,,,इस से पहले मैं कुछ बोलता या उसको ऐसा करने से मना करता उसने मेरी आँख बंद करके मेरी

आँख पर रुमाल रखा और खुद नीचे झुककर उस रुमाल पर अपने होंठ रखे और मुँह खोलकर अपने मुँह से

गरम हवा मारने लगी रुमाल पर जिसकी गर्मी मुझे अपनी आँख पर महसूस होने लगी और शायद मुझे कुछ

आराम भी मिलने लगा मुझे कुछ रहट महसूस होने लगी,,,,,

मैं सोफे पर लेटा हुआ था,,,,और वो सोफे पर थोड़ी सी जगह पर बैठी हुई थी,,,,मेरी लेफ्ट आँख पर चोट

लगी थी जिस पर रुमाल रखकर वो गर्म हवा मार रही थी,,,,वो मेरे जिस्म पर झुकी हुई थी जिस वजह से

उसका लेफ्ट हॅंड मेरी चेस्ट पर था और उसका राइट हॅंड उस रुमाल पर था,,उसने रुमाल को अपने हाथ से पकड़ा

हुआ था,,

जबकि मेरा लेफ्ट हॅंड सोफे से नीचे लटक रहा था और राइट हॅंड मेरे और सोफे के बीच मे था,,,मेरा लेफ्ट हॅंड

सोफे से नीचे उसकी टाँगों के पास टच हो रहा था लेकिन किसी ग़लत मकसद से नही,,,,लेकिन मेरा राइट हॅंड

पता नही कब मेरे पेट पर आ गया और वहाँ से सोनिया की कमर को टच करने लगा,,,वो मेरी चेस्ट पर झुकी

हुई थी और मेरी आँख पर हवा मार रही थी ,,,उसके छोटे छोटे बूब्स मेरी चेस्ट पर टच करने लगे थे

जिस से मुझे हल्की मस्ती चढ़ने लगी थी और उसकी गर्म साँसे जो रुमाल से होती हुई मेरी आँख तक गर्मी पहुँचा

रही थी ,,उस गर्मी से मेरा जिस्म भी गर्म होने लगा और पता नही कब मेरा राइट हॅंड उसकी कमर को टच

करता हुआ उसकी पीठ पर चला गया,

वो मेरे उपर झुकी हुई थी जिस वजह से उसका टॉप थोड़ा उपर उठ गया था और मेरा हाथ उसकी जीन और टॉप के

बीच मे नंगी हुई पीठ पर रखा गया था,,,मैने अपने हाथ को हिलाया नही बस ऐसे ही वहाँ पड़ा रहने

दिया मुझे पता था अगर हाथ हिला तो पंगा हो जाना है,,,पंगा तो वैसे भी हो ही रहा था मेरे साथ,,,

किसी ग़लत मकसद से ना सही लेकिन हाथ नंगी पीठ पर टच होते ही मेरी हालत खराब होने लगी और शायद

सोनिया की भी,,,उसकी साँसे पहले से ज़्यादा गर्म हो गई थी और उसकी हार्ट बीट भी तेज हो गई थी,,,तेज तेज धड़कते

दिल के साथ उसकी छाती उपर नीचे होने लगी और उसके छोटे छोटे बूब्स रुक रुक कर मेरी छाती से टच होने

लगे,,,मेरा हाथ जो उसकी नंगी पीठ पर था उसकी उंगलियों ने मस्ती मे अपनी हरकते करना शुरू कर दिया

था,,,सोनिया शायद घबरा गई थी इसलिए मेरे जिस्म से उपर नही उठ रही थी लेकिन जैसे ही मेरे हाथ की हरकते

शुरू हुई वो एक दम से उपर उठ गई,,,उसके उठने की वजह से मेरा हाथ जो उसकी पीठ पर था वो पीठ से गिरता

हुआ मेरे पेट पर उसकी कमर के पास आ गया और अभी भी उसकी कमर को टच कर रहा था

 
वो उठकर सीधी होके बैठ गई थी,,,उसकी हार्ट बीट तेज थी,,,वो तेज तेज साँसे ले रही थी,,,उसके फेस पर हल्की

मायूसी थी और डर बहुत ज़्यादा था,,,वो बहुत ज़्यादा परेशान भी लग रही थी,,उसकी आँखें जो मदहोश हो चुकी

थी और भारी होती जा रही थी ,,,उसके बदन काँप रहा था ,,,उसका एक हाथ अभी भी मेरी चेस्ट पर रखा हुआ

'था वो भी मेरे दिल के करीब,,,वो इतनी ज़्यादा तेज़ी से साँसे ले रही थी जैसे गर्म होने पर लड़की लेती थी लेकिन

उसकी हालत से पता नही चल रहा था वो मदहोश हो गई थी,,,,या डर रही थी,,,,,लेकिन उसकी आँखों मे एक

अजीब सी उलझन थी जिस से मैं भी उलझ गया था ,,,,मुझे कुछ समझ नही आ रहा था,,,,

तभी वो धीरे से बोली,,,,,,कुछ आरामम मिला सन्नीई,,,,

मेरी एक आँख पर रुमाल था और मैं एक आँख से उसकी तरफ देख रहा था,,,

उसकी आवाज़ और उसकी ज़ुबान उसका साथ नही दे रही थी ,,,वो बोलते टाइम डरी हुई थी,,,उसकी ज़ुबान लड़खड़ा रही थी

,,,

मैने उसकी बात का कोई जवाब नही दिया,,,

उसने फिर से पूछा,,,,कुछ आराम मिला य्या नहीइ सन्नी ग्गर्र्म्म ह्हव्वा से,,,

मैने हां मे सर हिला दिया,,,,हां कुछ आराम तो मिला ,,,,कुछ देर और गर्म हवा डू शायद ज़्यादा आराम

मिले,,,,

उसने हां मे सर हिला दिया और नीचे झुकने लगी,,लेकिन तभी मैने अपने लेफ्ट हॅंड से अपनी आँख पर पड़ा हुआ

रुमाल उठा दिया,,,,

उसने मेरी तरफ सवालिया नज़रो से देखा,,,,,रुमाल क्यूँ उठा दिया सन्नी,,,,

कुछ नही,,,,सोचा रुमाल के बिना हवा ज़्यादा गर्म लगेगी तो शायद ज़्यादा आराम भी मिलेगा,,,,तुम बिना रुमाल

के हवा दो मेरी आँख को,,,

उसने डरते हुए मेरी तरफ देखा फिर नज़रे घुमा कर मेरे उस हाथ की तरफ देखा जो मेरे पेट पर पड़ा

हुआ था लेकिन उसकी कमर को टच कर रहा था,,,,उसने डरते हुए उस हाथ की तरफ देखा और फिर वापिस मेरी

तरफ देखा और धीरे धीरे नीचे की तरफ झुकने लगी,,,उसका एक हाथ मेरी चेस्ट पर था जिस से वो मेरी

टी-शर्ट को कसके पकड़ती जा रही थी,,,सॉफ पता चल रहा था वो घबरा रही थी,,,,उसने मेरे हाथ की तरफ देखा

था जो उसकी कमर को टच कर रहा था उसको पता था अगर वो नीचे झुकेगी तो मेरा हाथ वापिस उसकी पीठ

पर चला जाएगा इसलिए वो डरते हुए मेरे हाथ की तरफ देख रही थी,,

हिम्मत करके बड़ी धीरे धीरे वो नीचे की तरफ बढ़ती आ रही थी और उसकी साँसे गर्म होती जा रही थी जो

करीब 1 फीट से ही मेरे चेहरे पर गर्मी का एहसास देने लगी थी,,,उसके दिल की धड़कन भी मुझे इतनी दूर

से सुनाई दे रही थी,,,उसकी साँसे गर्म भी थी और उखड़ भी रही थी,,,वो बड़ी हिम्मत करके नीचे झुकती आ

रही थी और जैसे जैसे वो नीचे झुक रही थी वैसे वैसे मेरा राइट हॅंड जो मेरे पेट पर था और उसकी कमर

को टच कर रहा था वो हाथ उसकी पीठ पर उसी जगह चला गया था जहाँ पहले था,,नीचे झुकने की वजह

से उसका टॉप फिर से पीठ से उठने लगा था और उसकी पीठ नंगी होने लगी थी,,

मेरा हाथ वापिस जीन और टॉप के बीच हल्की से नंगी हुई पीठ पर चला गया,,,,वो मेरी आँख के उपर अपने

लिप्स करके झुकती चली आ रही थी और उसके करीब आते आते उसकी साँसे और ज़्यादा गर्म होने लगी थी,,जैसे ही वो

मेरी आँख के पास पहुँची और अपने मुँह को खोलकर अपने लिप्स मेरी आँख पर रखने लगी मैने खुद को

थोड़ा हिला दिया और अड्जस्ट करते हुए अपने सर को हिला कर अपनी आँख की जगह अपने लिप्स को कर दिया,,,मैने ये

सब इतनी जल्दी किया कि उसको कुछ समझ नही आया और जैसे ही उसने लिप्स मेरी आँख को टच करने वाले थे वही

लिप्स अब मेरे लिप्स पर टच हो गये थे,,,,ऐसा होते ही मेरे जिस्म मे एक मस्ती की लहर दौड़ गई और शायद

उसके जिस्म मे एक डर की ,,,,,

उसका मुँह खुला हुआ था और जैसे ही उसके लिप्स मेरे लिप्स पर आए मैने अपनी ज़ुबान को उसके मुँह मे घुसा

दिया और उसके लोवर लिप्स को अपने लिप्स मे पकड़ लिया,,,मेरे ऐसा करते ही उसका हाथ जो मेरी चेस्ट पर था उस

हाथ से उसने मेरी टी-शर्ट को कस्के अपनी मुट्ठी मे पकड़ लिया और ऐसा करते हुए उसके नाख़ून मेरी चेस्ट पर

घुस गये थे उसने अपने नाखूनो से मेरी चेस्ट को हल्का सा कुरेद दिया था ,,मुझे हल्का दर्द हुआ लेकिन

मज़ा बहुत आया,,,,मैने उसके लोवर लिप्स को अपने लिप्स मे पकड़ा और अपने मुँह मे भरके चूसने लगा और इसी

टाइम मेरी ज़ुबान उसके मुँह मे थी और मैं अपनी ज़ुबान से उसकी ज़ुबान को टच कर रहा था,,मेरा हाथ जो

उसकी नंगी पीठ पर था वो हाथ उसकी पीठ से उपर उठने लगा वो भी उसके टॉप के अंदर से,,

मेरा हाथ उसकी नंगी पीठ पर टॉप के अंदर से उपर की तरफ बढ़ने लगा,,मेरे लिप्स उसके लिप्स मे जकड़े हुए

थे जिनको मैं बड़े प्यार से चूस रहा था ,,,उसने अपने सर को उपर करने की कोशिश की लेकिन जल्दी से नही

धीरे धीरे और तभी मैने अपने लेफ्ट हाथ को जो सोफे से नीचे लटक कर उसकी टाँगों को टच कर रहा था

उस हाथ को उसके सर पर रखा और उसके सर को वापिस अपने लिप्स पर दबा दिया और उसको ऐसे ही किस करने लगा

उसने भी अपने दूसरे हाथ को मेरे शोल्डर पर रखा और मेरे शोल्डर पर ज़ोर से अपने नाख़ून घुसा दिया

और जल्दी से मेरे से दूर होने लगी,,,,मैने भी ज़्यादा ज़ोर नही लगाया और उसको उपर उठने दिया ,,,वो धीरे से

उपर उठती गई और मेरा लिप्स से दूर होती गई,,,,उसके उपर होते होते मेरा हाथ भी उसकी पीठ से फिसलता हुआ

नीचे की तरफ आने लगा,,,जब तक वो सीधी हुई तब तक मेरा हाथ वापिस मेरे पेट पर आ गया था और उसकी कमर

को टच करने लगा था,,

वो सीधी होके बैठ गई थी,,,मेरा हाथ उसकी पीठ से नीचे आ गया था मेरे पेट पर ,,दूसरा हाथ उसके सर

से नीचे होके वापिस सोफे से नीचे लटक गया था,,,उसका एक हाथ अभी तक मेरी चेस्ट पर था और उसने अपनी मुट्ठी

मे मेरी टी-शर्ट को कसके पकड़ा हुआ था,,वो उपर तो उठ गई थी लेकिन उसकी आँखें बंद थी,,मैं उसकी तरफ

देख रहा था,,वो आँखें बाद किए तेज़ी से साँसे ले रही थी,,,,उसका दिल अभी भी बहुत तेज़ी से धड़क रहा था,

उसने अपने दूसरे हाथ को अपने दिल पर रखा और अपने दिल पर क़ाबू करने लगी,,मैं बस लेटा हुआ उसके लिप्स

के बचे खुचे स्वाद का आनंद ले रहा था और उसके मासूम चेहरे की तरफ देख रहा था,,,,

कुछ देर बाद उसने आँखें खोली और मेरी तरफ देखा.,,वो कुछ नही बोली बस तेज़ी से धड़क रहे दिल को

क़ाबू करने मे लगी हुई थी,,,उसने अपने हाथ को मेरी चेस्ट से उठा लिया और उस हाथ से अपने लिप्स पर लगे

हुए मेरे थूक को सॉफ करने लगी थी,,,और ऐसा करते हुए वो सीधा मेरी आँखों मे देख रही थी,,,मैं भी

एक-टक उसकी आँखों मे देख रहा था,,,

मुझे तो आराम मिला ,,क्या तुझे आराम मिला,,,,,मैने इतना हंसते हुए बोला सोनिया से,,,

वो कुछ नही बोली बस जल्दी से वहाँ से उठी और किचन मे भाग गई,,,,मैं सोफे पर लेटा हुआ उसको देखता

रहा,,,,वो किचन मे जाके फ्रिड्ज के पास खड़ी हो गई और फ्रिड्ज से पानी की बॉटल निकाल कर पानी पीने लगी,,

वो बहुत तेज़ी से पानी पे रही थी उसने पानी की एक बॉटल को मुँह से लगा लिया और तेज़ी से पानी पीते हुए बॉटल को

तब तक मुँह से अलग नही किया जब तक बॉटल खाली नही हो गई,,,,फिर उसने बॉट्टेल को रखा और किचन से बाहर

आ गई,,,,लेकिन वो मेरे पास नही आई वो सीडियों की तरफ जाने लगी थी और जाते हुए मेरे से नज़रे न्ही मिला रही

थी,,लेकिन फिर भी मैने उसकी नज़रो मे देख ही लिया,,,वो रो रही थी ,,,,,

जैसे वो कदम रखने लगी पहली सीढ़ी पर मैंने उसको आवाज़ दी,,,,,सोनिया,,,,,

मेरी आवाज़ सुनके वो वहीं रुक गई लेकिन मेरी तरफ पलटी नही,,,,,

मुझे लगता है तुमको कविता के घर चले जाना चाहिए,,,एक तो उसकी तबैयत का पता कर लेना और उसके साथ

उसके घर मे बैठकर स्टडी भी कर लेना,,,इसी मे सबका फ़ायदा है,,,यहाँ रहने पर किसी का भी नुकसान

हो सकता है,,,

वो वापिस नही पलटी बस ऐसे ही खड़ी रहके बोलने लगी,,,,,,मुझे कहीं नही जाना सन्नी,,,,यहीं रहना है इस

घर मे,,,इतना बोलकर वो उपर जाने लगी

मैने फिर से उसको आवाज़ दी लेकिन वो नही रुकी,,,और अपनी आँखों से आँसू पोन्छते हुए उपर की तरफ चली गई

 
मैने सोचा कि ये तो पंगा हो गया,,,भले ही उसने मुझा रोका नही लेकिन फिर भी वो रोने तो लगी थी मेरी

इस हरकत से ,,,मैं कुछ नही करना चाहता था लेकिन वो मेरे इतने पास थी कि मेरे से खुद पर क़ाबू नही

हुआ,,और ग़लती उसकी है मेरी नही मैने कितनी बार बोला मेरे पास मत आया करो लेकिन वो है कि सुनती ही नही,,,

पर अब तो वो मेरी आँख की वजह से मेरे पास आई थी ताकि मेरा दर्द ठीक कर सके लेकिन मैं ऐसा कमीना

इंसान जो अपना दर्द कम करने वाली सोनिया को ही हर्ट कर दिया था,,वो रोने लगी थी,,सिर्फ़ मेरी वजह से,,,

मुझे पता था वो यहाँ से नही जाएगी इसलिए मैं कविता को फोन करने को सोची ताकि कविता यहाँ आ

जाएगी और उसके होते हुए मैं सोनिया के पास भी नही जाउन्गा और शायद कविता के आने पर मेरा ज़्यादा ध्यान

कविता पर रहेगा ,,,,,और वैसे भी मेरा बड़ा दिल कर रहा था अब कविता से मिलने को,,,सोनिया ने एक आग जो

लगा दी थी पूरे जिस्म मे जिसको कविता ही भुजा सकती थी,,,,,लेकिन कविता ने तो सॉफ सॉफ मना कर दिया था

आने से,,उसने बोला कि सूरज भाई घर पर नही है वो नही आ सकती ,,,,मैने बोला कि मैं उसके घर आ जाता

हूँ तो उसने इस बात से भी मना कर दिया,,,,,,

क्यूकी उसके घर जाके मैं कामिनी भाभी के साथ तो कुछ नही कर सकता था और कविता ने सीधी तरह से बोल

दिया था कि उसकी तबीयत ठीक नही है,,,तो भला मैं उसके घर जाके क्या करता,,,,

मैं करीब 25-30 मिनट ऐसे ही सोचता रहा ,,कभी सोनिया के बारे मे तो कभी कविता का बारे मे,,

फिर सोचा कि क्यूँ ना करण के घर चला जाए,,,,वहाँ से शिखा को या अलका आंटी को लेके बुटीक पर चला

जाउन्गा मस्ती करने के लिए,,,और अगर ना भी मस्ती कर सका तो कम से कम घर से बाहर तो चला जाउन्गा,,और

रात होने से पहले घर वापिस नही आउन्गा,,,और रात को आके खुद को मोम-डॅड के रूम मे बंद कर लूँगा ताकि

रात को सोनिया के साथ कुछ ग़लत हरकत नही कर सकूँ,,,

अभी 3 बजे थे और रात होने मे कम से कम 4-5 अवर्स थे,,,मुझे 4-5 अवर्स कहीं बाहर टाइम पास करना

ही होगा,,,इसलिए रेडी होने के लिए मैं उपर जाने लगा क्यूकी मेरे कपड़े उपर पड़े हुए थे,,,,सोनिया के रूम

मे,,,,,मुझे वहाँ जाने मे डर तो लग रहा था लेकिन वहाँ जाना भी ज़रूरी था क्यूकी मैं इन कपड़ो मे तो

घर से बाहर नही जा सकता था,,,,खैर ''मैं हिम्मत करके उपर की तरफ चलने लगा,,,,,

25-30 मिनट नीचे बैठा रहा और सोचता रहा कि अब क्या किया जाए,,,,

सोनिया ने मेरी आँख का दर्द कम करने की कोशिश की लेकिन मैने उसका ही दर्द बढ़ा दिया था ,,उसको हर्ट किया

था रुला दिया था,,,अब मुझे कैसे भी करके रात तक उस से दूर रहना था क्यूकी वो कविता के घर जाने को

तैयार नही थी,,,,और ना ही अब कविता यहाँ आने को तैयार थी,,,,सब पंगा हो गया था वो भी मेरी वहज से,,,

सोनिया हर्ट हुई मेरी वजह से,,,,कविता की तबीयत ठीक नही थी वो भी मेरी वजह से,,,,,,

अब मैं किसी को हर्ट नही करना चाहता था,,,इसलिए रात तक कहीं बाहर टाइम पास करना चाहता था,,और वैसे

भी जाने अंजाने ही सही मैने सोनिया को हर्ट किया था और जाने अंजाने ही सही उसके करीब होके मैं कुछ गर्म

हो गया था मुझे ये गर्मी निकालनी थी कहीं ना कहीं,,,,और सबसे अच्छा रास्ता था अलका आंटी और शिखा को अपने

साथ बुटीक पर लेके जाना,,,उन्ही के साथ मस्ती कर सकता था मैं,,और इस तरह मैं कुछ देर घर से बाहर

और सोनिया से दूर रह सकता था,,,,,क्यूकी जितना टाइम मैं घर पर रहूँगा उतना टाइम यही डर रहेगा कि कहीं

मैं सोनिया को हर्ट नही कर दूं,,,

मैं सीढ़ियों से उपर चला गया,,,सोनिया को भी उपर आए 25-30 मिनट हो गये थे,,,मेरे कपड़े उसी रूम मे

थे जहाँ सोनिया थी और मुझे उस रूम मे जाने से बहुत डर लग रहा था लेकिन जाना भी ज़रूरी था,,,मुझे पता

था मैं उसका सामना नही कर सकता ,,फिर भी हिम्मत करके मैं उसके रूम मे चला ही गया,,,मैने हिम्मत

करके बड़ी धीरे से दरवाजा खोला और अंदर देखने लगा,,मैने देखा सोनिया अपने बेड पर नही थी ,,मैने

दरवाजा थोड़ा और खोला और रूम मे देखने लगा मैं इतना डरा हुआ था कि मैं खुद न्ही गया अंदर बस

अपने सर को दरवाजे से अंदर किया था और दरवाजा भी इतना ही खोला था जिस से मेरा सर अंदर चला जाए और मैं

अंदर देख सकूँ,,,,

मैने सर को दरवाजे से अंदर किया और रूम मे हर तरफ देखने लगा,सोनिया कहीं नही थी,,,शायद वो बाथरूम

मे होगी या शायद बुक लेके भुआ वाले ड्रॉयिंग रूम मे स्टडी करने चली गई होगी,,,मैं जल्दी से रूम

मे घुस गया और अपने कपड़े निकालने लगा और कपड़े निकालते हुए मैने देखा कि बाथरूम का दरवाजा खुला

हुआ था इसका मतलब सोनिया बाथरूम मे नही थी,,मैने रूम को अंदर से लॉक किया और जल्दी अपने कपड़े निकाले

और बेड पर रखे फिर अपने कपड़े उतार दिए और बाथरूम मे घुस गया नहाने के लिए लेकिन इस बाथरूम की

तो टॅब खराब थी पानी बहुत कम निकलता था,,,इसलिए मैने कपड़े वहीं रहने दिए और शोभा के रूम मे चला

गया क्यूकी उसके रूम का बाथरूम और तब ठीक से काम करती थी,,,मैं जल्दी से नहा धो कर तैयार हो गया और

घर से निकल गया,,,,जब मेन गेट खोलकर बाइक को बाहर निकाल रहा था तभी मैने देखा कि सोनिया भुआ वाले

ड्रॉयिंग रूम की खिड़की पर बैठी हुई थी जिसकी खिड़की घर के फ्रंट गर्दन की तरफ खुलती थी,,,,मैने एक बार

उसकी तरफ देखा तो वो कुछ उदास लग रही थी,,,मैं भी उसको देखकर उदास हो गया लेकिन मैने ज़्यादा ध्यान

नही दिया उसकी तरफ क्यूकी मैं जितना देखता उतना ही उदास होता और उसको भी उदास कर देता,,,,मैने बाइक निकाली

और वहाँ से चला गया,,,

मेरा दिल किया करण के घर जाने को लेकिन मैं करण के घर नही गया बस शिखा दीदी को फोन कर दिया और

बोल दिया भुआ के बुटीक पर आने को ,,मैं घर से जाते टाइम बुटीक की चाबी साथ लेके गया था,,मैं

खुद उपर जाके बैठ गया और शिखा दीदी और अलका आंटी का वेट करने लगा,,,,वो लोग भी कुछ देर मे वहाँ आ

गई ,,,उन्होने नीचे आके बेल बजाई तो मैं नीचे चला गया गेट खोलने क लिए,,

मैने नीचे जाके गेट खोला तो शिखा दीदी और अलका आंटी को देखकर खुश हो गया,,वो दोनो ने बहुत ही ज़्यादा

सेक्सी ड्रेस पहनी हुई थी,,,,शिखा ने एक स्किन कलर का टाइट फिटिंग सूट पहना हुआ था जो उसके बदन से एक दम

चिपका हुआ था वो सूट इतना ज़्यादा टाइट था कि जो भी देखता शिखा दीदी को उसको दीदी के जिस्म का सही सही नाप

मिल जाता ,,,,उसके बड़े बड़े बूब्स जो सूट के उपर से बाहर निकल रहे थे ,,उनका पेट जो एक दम सपाट था

और वो मोटी नही थी लेकिन हल्के भरे बदन की थी इसलिए उनका हल्का सा पेट बहुत ही ज़्यादा सेक्सी लग रहा था उस

टाइट फिटिंग सूट मे,,मैं उसकी तरफ देखता ही रह गया ,,,,

 
ऐसे क्या देख रहे हो सन्नी इतना बोलकर शिखा दीदी अंदर आ गई और आते ही मेरे से चिपक गई,,वो इतनी ज़ोर से

आके मेरे गले लगी थी कि धक्के से मेन गेट से 2-3 कदम पीछे खिसक गया था,,शिखा दीदी ने गले लगते ही

मेरे लिप्स पर अपने लिप्स रखे और मुझे किस करना शुरू कर दिया और मैं तो वैसे ही सोनिया की वजह से गर्म होके

आया था घर से और अब शिखा दीदी को इस टाइट फिटिंग सूट मे देखकर मूड और भी खराब हो गया था लेकिन शिखा

दीदी को किस करते हुए मैं पीछे अलका आंटी की तरफ देख रहा था जो गेट से अंदर आके गेट बंद कर चुकी

थी और सामने से चलके मेरे और दीदी की तरफ आ रही थी,,,मैने उसको देखा तो जो गर्मी जो आग सोनिया और शिखा

दीदी ने लगाई थी मेरे जिस्म मे अलका आंटी ने उस आग मे अपने हुस्न का आयिल डालके उस आग को और भी ज़्यादा भड़का दिया था,,,,,

सही कहा है किसी ने,,,,जब औरत की उमर हो 16-17 (सोलह-सत्रा) तो वो बन जाती है जवान लंड के लिए ख़तरा ,,

और जब हो उसकी उमर 29-30 (उनतीस-तीस) तो वो बन जाती है एक दम मस्त चीज़

और जब हो उसकी उमर 45-50 (पेंतालीस-पचास) इतनी चुदक्कड हो जाती है नही बुझती है उसकी प्यास,,,,,फिर वो

प्यास चाहे उस औरत की हो या लंड घुसाने वाले मर्द की,,,,,

अभी अलका आंटी भी मुझे बहुत ज़्यादा चुदक्कड लग रही थी,और वही प्यास मुझे अलका आंटी मे नज़र आ रही थी,,,

वो आज इतनी ज़्यादा चुदासी लग रही थी कि गेट बंद करके जिस अंदाज़ से वो मुझे देख रही थी ऐसे लग रहा था

जैसे किस तो मुझे शिखा दीदी कर रही है लेकिन मेरे होंठों मे स्वाद आ रहा था अलका आंटी के होंठों का ,,,

अलका आंटी हम दोनो से दूर खड़ी होके अपने लोवर लिप्स को वापिस पलट कर अपने मुँह मे भरके दाँतों से

काट रही थी,,,

अभी अलका आंटी ने एक ब्लॅक कलर की साड़ी पहनी हुई थी,,वो गेट के पास खड़ी हुई थी और अपने लिप्स को अपने

मुँह मे भरके दाँतों से हल्के हल्के काट रही थी ,,उनकी आँखों मे एक नशा था एक मस्ती थी और उसी मस्ती

मे वो अपने बूब्स को अपने हाथों मे भरके दबा रही थी ,,उनके बूब्स ब्लाउस से आधे से भी ज़्यादा बाहर

निकले हुए थे लेकिन जब वो अपने बूब्स को अपने ही हाथों मे पकड़ कर दबा रही थी तो उनके बूब्स और भी

ज़्यादा बाहर निकलने को मचल रहे थे,,,,,,वो मस्ती मे मुझे देखती हुई अपने बूब्स को ज़ोर ज़ोर से दबा

रही थी तभी उन्होने अपने हाथ को अपने पेट की तरफ किया और पेट के आगे से साड़ी को साइड हटा दिया और मैं

उनका हल्का सा मोटा गौरे रंग का मखमली पेट देखकर मस्ती मे शिखा को जबरदस्त किस करने लगा,,शिखा

भी पहले से मुझे पागलो की तरह किस कर रही थी,,,

फिर अलका आंटी ने आगे बढ़ कर शिखा को पकड़ कर साइड कर दिया,,,,,चल पीछे हट बेटी पहले मुझे ज़रा चख

लेने दे इस सन्नी के होंठों का रस तू बाद मे चख लेना,,,,,आंटी ने शिखा को साइड किया और खुद मेरे से

चिपक गई,,

अरे रूको ना आंटी,,,,यहाँ नही उपर चलते है,,,अगर चुदाई का मज़ा लेना ही है तो अच्छी तरह उपर चलके लेते

है ना,,,,,मैने इतना बोला और शिखा जल्दी से उपर की तरफ चलने लगी जबकि अलका आंटी और मैं हाथों मे हाथ

डालके एक साथ उपर की तरफ जाने लगे,,,,मैं और अलका आंटी अभी पीछे थे कि शिखा एक रूम मे घुस गई और

जब तक मैं और अलका आंटी वहाँ पहुँचे तब तक वो अपनी कमीज़ उतार चुकी थी और सलवार खोलने मे लगी

हुई थी,,,,

उसको देखकर अलका आंटी हँसने लगी,,,लगता है इस लड़की की चूत मे कुछ ज़्यादा ही आग लगी हुई है,,,आंटी की

बात सुनके मैं भी हँसने लगा,,,,,हाँ आंटी जी मुझे भी ऐसा ही लगता है और आग तो मुझे भी लगी हुई है

कहो तो भुजा ले आग से आग को,,

अरे बेटा इसलिए तो यहाँ आई हूँ मैं ताकि आग से आग भुजा सकूँ,,,,,इतने दिन से चुदाई नही की आज तो सारी आग

भुजा लूँगी,,,,

पर आंटी जी अभी कल ही तो हम सबने मिलकर इतना मज़ा किया था ,,,,आप थी मैं था ,,करण शिखा और मेरी माँ

भी तो थी साथ मे,,,कितना मज़ा किया था कल भूल गई,,,

नही बेटा कुछ नही भूली,,,लेकिन करण के पापा को बाहर गये कितने महीने हो गये है जबकि तुम लोगो को चुदाई

करते हुए अभी कुछ ही टाइम हुआ है,,,अब तो जब तक 3-4 महीने दिल भरके चुदाई नही करती तब तक नही आग

भुजने वाली मेरी चूत की,,,

सही बोला आंटी जी,,,वैसे भी आप जैसी खूबसूरत औरत को दिन मे 2-3 बार तो चुदाई करवानी ही चाहिए,,,और

सच बोलू तो अगर मैं आपका पति होता तो रोज आपकी चुदाई करता,,,मुझे तो गुस्सा आता है अंकल पर जो आप जैसी

मस्त औरत को छोड़कर दूर चला गया है,,,मैं तो कभी आपसे दूर नही जाता,,,,

हयी मैं मर जावा सन्नी,,,,काश तू ही मेरा पति होता तो मैं भी तेरे को दूर नही जाने देती,,,इतना चुदवाती

तेरे से कि चूत को फाड़ कर रख देती,,,और गान्ड मे तो इतना लंड घुसाती की गान्ड का भोसड़ा बन जाता,,,अलका

आंटी ऐसे बात कर रही थी इसका मतलब था वो आज फुल मस्ती के मूड मे थी,,शिखा भी अपनी माँ की बातों

से मस्त होके नगी होके बेड पर लेट गई थी और चूत पर उंगली करते हुए एक हाथ से अपने बूब्स को मसल्ने

लगी थी,,,,,

अब जल्दी आ जाओ ना आप लोग भी ,देखो मेरी चूत से अमृत रस भी बहने लगा है,,,,,शिखा ने अपनी चूत मे

उंगली घुसा दी और चूत के पानी से गिल्ली हो चुकी उंगली को मेरी और अलका आंटी की तरफ करके दिखाने लगी थी,,

इतनी भी क्यूँ बैसब्रि हो रही हो बेटी ,,थोड़ा आराम से,,,अगर मज़ा लेना ही है तो जल्दबाज़ी क्या करनी,,,अलका ने

अपने ब्लाउस को खोलते हुए ये बात बोली और फिर ब्लाउस को उतार कर साइड मे रख दिया,,

जल्दबाज़ी है मुझे माँ,,,उधर करण की शादी हो गई है हर रात वो सुहागरात मना रहा है और हम दोनो

नकली लंड से काम चला रही है,,,,शिखा थोड़ी चिड़ते हुए बोली,,,

तभी मैने अलका आंटी को अपनी बाहों मे पकड़ा और उनके बूब्स को मसल्ते हुए बोला,,,चलो आंटी इसकी चूत

की आग भुजा ही देते है कितनी तड़प रही है बेचारी,,,इतना बोलकर मैं आंटी के साथ बेड के पास चला गया,,

बेड के पास जाके आंटी मेरी टी-शर्ट उतारने लगी,,,,हां बेटा आग तो भुजानी ही पड़ेगी और इसकी बात भी सही है

करण तो रोज सुहागरात मना रहा है और हम दोनो को नकली लंड से काम चलाना पड़ता है वो भी छुप-छुप

कर,,या रात को हम दोनो साथ सोती है तब,,,,लेकिन तब भी बहुत ध्यान देना पड़ता है,,,,यहाँ हम डरती

रहती है और वहाँ करण रितिका के साथ सुहागरात मनाता रहता है,,,,

मेरी टी-शर्ट उतर चुकी थी और मैं खुद अपने हाथों से अपनी पॅंट को उतार रहा था,,,,वैसे आंटी आप लोगो ने

उसकी सुहागरात का बेड बहुत अच्छा सजाया था,,,मैं तो तभी मस्त हो गया था दिल किया उस बेड पर जाके मैं भी

थोड़ी मस्ती करलूँ,,

तभी शिखा बोल पड़ी,,,,कोई बात नही सन्नी,,,ऐसा ही बेड हम फिर से सज़ा देंगी तेरे लिए और मैं उसी बेड पर

तेरे साथ सुहागरात भी मनाउन्गी तू फ़िक्र मत कर,,,,बस आज इस चूत की प्यास भुजा दे,,,,

मेरी पॅंट निकल चुकी थी और मैं अपने हाथों से अलका आंटी के बूब्स को मसल रहा था और आंटी खुद अपने

अपनी साड़ी को निकाल कर पेटिकोट को खोल रही थी,,,,और पल भर मे पेटिकोट नीचे गिर गया और हम दोनो नंगे

हो गये,,,,शिखा तो पहले से नंगी थी बेड पर,,,,

हां बेटा सही कहा इसने,,,,एक दिन तेरी भी सुहागरात की बेड सज़ा दूँगी मैं ,,,,,,और तेरी सुहागरात की दुल्हन

होगी ये शिखा,,,,पूरी रात मस्ती करना इसके साथ,,,,

ये अकेली क्यूँ आंटी जी,,,,,,अब भी साथ रहना आंटी जी,,,एक रात मे 2-2 दुल्हन से सुहागरात मनाउन्गा मैं,,,

मैने ये बात आंटी के बूब्स दबाते हुए बोली,,,और फिर हम लोग बेड पर शिखा के पास चले गये,,,और फिर

शुरू हुआ चुदाई का खेल जो रात तक चलता रहा,,,

मैने 3-4 अवर्स मे 2 बार चुदाई की थी और एक बार पानी निकाला था शिखा के मुँह मे और एक बार अलका आंटी

के मुँह मे,,,अलका आंटी और शिखा भी 2 बार झड़ी थी और मैने उनकी छूट का पानी पिया था,,फिर हम लोग

वहाँ से अपने अपने घर की तरफ चल पड़े,,,,

 
अलका आंटी मुझे रोकना चाहती थी और शिखा भी,,वैसे मैं भी रुकना चाहता था उन लोगो के साथ बुटीक पर

लेकिन सोनिया घर पर अकेली थी और मुझे उसकी टेन्षन थी,,ये बात अलका आंटी और शिखा को भी पता था कि सोनिया

घर पर अकेली है इसलिए उन लोगो ने मुझे नही रोका और अगर रोकती भी तो भी मैं नही रुकता,,,,

बुटीक पर लॉक लगा कर मैं चला अपने घर की तरफ और शिखा अलका आंटी को लेके चल पड़ी अपने घर की

तरफ,,,,

मैं घर पहुँचा तो काफ़ी लेट हो गया था,,,10 बजे से उपर हो गया था टाइम,,,सर्दिया शुरू हो गई थी इसलिए

रात जल्दी हो गई थी और 10 बजे का मतलब था आधी रात ,,,मैने गेट खोला और बाइक अंदर किया फिर मेन डोर

पर जाके बेल बजाई तो पहली बेल पर ही सोनिया ने आके दरवाजा खोल दिया,,

दरवाजा खोलकर सोनिया ने मेरी तरफ देखा ,,और मैने भी उसकी तरफ देखा,,,,कुछ टाइम हम लोगो की नज़रे मिली

और फिर उसने अपनी नज़रे झुका ली और दरवाजे से एक साइड की तरफ हो गई,,,,उसके साइड होते ही मैं घर के अंदर

चला गया,,,,

मैं मोम के रूम मे जाने लगा तभी सोनिया ने दरवाजा बंद करके मुझे आवाज़ लगा दी,,,,इतनी लेट क्यूँ हो

गये भाई,,,मैं कब्से तुम्हारा वेट कर रही थी,,,इतने फोन किए तुमने फोन भी नही उठाया मेरा,,

मैं उसको इग्नौर करना चाहता था लेकिन ये काम मेरे लिए मुश्किल था,,,,,,,,,,,,,,,,,,क्यूँ वेट कर रही थी

चुप चाप सो नही सकती थी क्या,,,

उसने मायूस होके बोला,,,,,भाई मैं डिन्नर के लिए तेरा वेट कर रही थी,,ताकि तुम आओ और हम भाई बेहन एक

साथ बैठकर डिन्नर करे,,,,मैने तेरी पसंद का सब कुछ बनाया है,,

किसने बोला था मेरी पसंद का बनाने को और किसने कहा था वेट करने को,,,खुद डिन्नर कर लेती,,,मैने थोड़ा

चिड़ते हुए बोला,,,

ऐसे क्यूँ बोल रहा है भाई गुस्से से,,,मैने तो सब कुछ तेरी वजह से किया,,,,इतना बोलकर वो डाइनिंग टेबल के पास

गई और वहाँ से एक कटौरी लेके मेरे पास आ गई,,

देख भाई मैने तेरी पसंद की खीर भी बनाई है,,,,पता है कितना टाइम लगा ये खीर बनाने मे ,,,और तू

है कि गुस्सा कर रहा है,,

मुझे नही खानी कोई खीर-वीर,,,और किसने बोला था ये सब ड्रामा करने को,,,मैने बोला था क्या,,,,,,मुझे

नही खाना कुछ भी ,,मैं बाहर से खाना खाकर आया हूँ और अब मुझे नींद आ रही है,,,,

तभी वो रोने लगी और उसकी आँख से एक आँसू निकला और खीर वाली कटौरी मे गिर गया,,,,उसने खीर वाली कटौरी को

वापिस रखा डाइनिंग टेबल पर और रोते हुए बोनले लगी,,,,

ठीक है मत खाओ सो जाओ जाके,,,,मैं ही पागल हूँ जो इतनी मेहनत से सब कुछ बनाया तेरे लिए और तू है की

गुस्सा कर रहा है,,,खुद ग़लती करता है ,,,खुद बुरे काम करता है और खुद ही गुस्सा भी करता है,,,जाओ सो

जाओ जाके ,,,तुमको नही खाना तो मुझे भी नही खाना,,,,इतना बोलकर वो रोती जा रही थी,,,

मेरा दिल किया उसको चुप करवाने को क्यूकी मुझसे कुछ भी बर्दाश्त होता था लेकिन उसकी आँखों मे आँसू

मेरे से बर्दाश्त नही होते थे,,,लेकिन उसका रोना ज़रूरी था और उसका गुस्से होना भी ज़रूरी था,,क्यूकी वो गुस्सा

रहेगी तभी मेरे से दूर रहेगी,,,,

नही खाना तो मत खा ,,जा दफ़ा हो जा यहाँ से और चली जा उपर अपने कमरे मे,,,,मैने थोड़ा गुस्से से चिड़ते

हुए बोला तो वो फूट-फूट कर रोने लगी और वहाँ से भाग कर उपर चली गई,,,,,

मैं भी आके मोम के रूम मे लेट गया,,,मेरा मूड भी काफ़ी खराब हो गया था मैं बस सो जाना चाहता

था,,इसलिए मैं उठा और डॅड की अलमारी से पयज़ामा निकाल कर पहन लिया और वापिस बेड पर लेट गया,,,लेकिन मुझे

नींद नही आ रही थी,,,,एक तो मैने सोनिया पर गुस्सा करके उसको रुला दिया था इस बात से मुझे खुद पर भी

गुस्सा था पर मेरा ऐसा करना भी ज़रूरी था उस से दूर रहने के लिए,,,और दूसरा मैं भूखा भी था और भूखे

पेट नींद नही आती,,,,इसलिए मैं बाहर डाइनिंग टेबल पर आया जहाँ खाना ऐसे ही पड़ा हुआ था,,और वहीं पड़ी

हुई थी वो खीर वाली कटौरी,,,,

मुझे खीर बहुत अच्छी लगती थी और अब मुझे भूख भी बहुत लगी हुई थी इसलिए मैने खीर वाली कटौरी उठाई

और खीर खाने लगा लेकिन तभी मेरा दिल पसीज गया,,,वो खीर एक दम नमकीन लग रही थी मुझको,,हालाकी

उसमे बहुत मीठा स्वाद होता है लेकिन इस खीर मे एक आँसू गिरा था सोनिया का जिस से खीर नमकीन लगने लगी

थी मुझे,,मुझे खीर ख़ाके खुद पर बहुत गुस्सा आ रहा था,,मैने उस मासूम को क्यूँ रुला दिया,,उसकी क्या

ग़लती थी, जो ग़लती थी सब मेरी थी,,,मैं हवस मे इतना अँधा हो गया था कि अपनी मासूम बेहन पर गुस्सा करने

लगा था उसको हर्ट करने लगा था ,,,,

अपने ज़ज़्बातों मे मैं इतना पागल हो गया था कि उन्ही ज़ज़्बातों की वजह से मेरी ज़ुबान का टेस्ट भी बदल

गया था,,,,मुझे कुछ अच्छा नही लग रहा था,,,उस मासूम के एक आँसू मे इतना खारा-पन था कि खीर भी

नमकीन हो गई थी,,,,

फिर मुझे याद आया कि मुझे भूखे पेट नींद नही आ रही थी तो भला सोनिया को कैसे नींद आएगी,,,उसने

भी तो कुछ नही खाया,,,,इसलिए मैं प्लेट मे खाना लगा कर उपर उसके रूम मे चला गया,,मैं रूम

मे गया तो लाइट जल रही थी और वो पिल्लो को हग करके रो रही थी,,,उसकी पीठ थी दरवाजे की तरफ इसलिए उसने

मुझे रूम मे अंदर आते नही देखा,,,,,मैं रूम मे गया और खाने की प्लेट को हाथ मे लेके उसके बेड के

पास चला गया,,फिर एक हाथ से उसको हिलाने लगा लेकिन मैं उसको हाथ नही लगाना चाहता था इसलिए मैं उसके

हाथ मे पकड़े हुआ पिल्लो को पकड़ कर उसको खींचा तो सोनिया का ध्यान मेरी तरफ आया,,,,वो एक दम से

उठकर बैठ गई ,,,,

मैं भी उसके बेड पर बैठ गया और खाने की प्लेट को हम दोनो के बीच मे रख लिया,,फिर हाथ आगे बढ़ाकर

उसके आँसू पोन्छने लगा,,,,,उसने मेरा हाथ झटक दिया और गुस्सा करने लगी,,,,मेरे से रूठने लगी,,,

अब क्यूँ आया है तू यहाँ,,,जा चला जा यहाँ से मुझे बात नही करनी तेरे से,,तू बहुत बुरा है,,,वो रोते हुए

हल्के गुस्से से बोल रही थी,,,

मत बात कर ,,,लेकिन ये खाना तो खा ले,,,

मुझे नही खाना,,,मुझे भूख नही है,,,,

अच्छा बाबा सौरी,,,,ग़लती हो गई,,इतना बोलकर मैने रोटी का एक नीवाला तोड़ा और उसके मुँह की तरफ ले गया,,,,चल

अब माफ़ कर्दे मुझे और खाना खा ले,,,

उसने मेरा हाथ पीछे कर दिया,,,,मुझे नही खाना,,इतना बोलकर उसने अपने फेस को दूसरी तरफ टर्न कर लिया,,

देख तू नही खाएगी तो मैं भी नही खाउन्गा,,,,,मैने थोड़ा उदास होके बोला,,

लेकिन तू तो बोल रहा था तू बाहर से ख़ाके आया है भाई,,,,झूठ बोल रहा था क्या तू भाई,,,,

हां मैं झूठ बोल रहा था और अब सच बोल रहा हूँ ,,मुझे बहुत भूख लगी है गुस्सा थूक दे मेरी

छुटकी बहना और खाना खा ले वर्ना मुझे भी भूखा रहना पड़ेगा,,,,

उसने अपने हाथों से अपने आँसू पोन्छ दिए और तभी मैने अपने हाथ को आगे किया तो उसने मुँह खोलकर मेरे

हाथ से वो नीवाला खा लिया,,,और खाते हुए बोली,,,,,,तू सच मे बहुत बुरा है भाई,,,कभी कभी बहुत गुस्सा

आता है तुझपे,,,,

जानता हूँ,,,मैं बहुत बुरा हूँ,,,,और तुम बहुत अच्छी हो,,,,चलो अब अच्छी बच्ची बनके खाना खा लो और

सो जाओ,,,,मैं भी चलता हूँ नीचे और खाना ख़ाता हूँ,,,,

यहीं बैठ जाओ भाई हम साथ मिलकर खाना खाते है,,,,उसने बड़े प्यार से बोला,,,

नही पगली,,,मैं यहाँ नही बैठ सकता ,,मुझे नीचे जाना होगा,,तू समझ रही है ना मेरी बात,,,,मैं यहाँ

नही रुक सकता ज़्यादा देर,,,,क्यूकी मैं तुझे और ज़्यादा हर्ट नही करना चाहता ,,,मैने उसको इतना बोला और वो

मेरी बात का मतलब समझ गई,,,,

उसने हां मे सर हिला दिया और बता दिया कि वो मेरी बात समझ गई है,,,

फिर वो खाना खाने लगी और मैं वहाँ से बाहर आने लगा और आते हुए मैं उसके दरवाजे के पास खड़ा हो गया

और पीछे मूड के उस से बोला,,,,

खीर बहुत अच्छी बनी है सोनिया,,,तुम भी खा लेना ,,,,मैने ये बात हंस कर बोली तो उसके फेस पर भी हल्की

स्माइल आ गई,,,

फिर मैं नीचे आ गया और प्लेट मे डिन्नर लगाने लगा,,,लेकिन तभी मेरी नज़र पड़ी उस कटौरी पर जिसमे खीर

थी और सोनिया का एक आँसू गिर गया था,,,,,मैने खाना प्लेट मे लगाने से पहले खीर की कटौरी उठा ली और फिर

से एक स्पून खीर लेके मुँह मे डालके खाने लगा ,,,,अब वही खीर जो कुछ टाइम पहले मुझे नमकीन लगने

'लगी थी वो खीर फिर से मीठी हो गई थी इतनी ज़्यादा मीठी की मुझे लगने लगा जैसे मेरे मुँह मे शक्कर घुल

रही हो,,,,मैं समझ गया कि अगर सोनिया उदास हो तो मुझे कुछ भी अच्छा नही लगना और अब मैं सोनिया को खुश

करके आया था इसलिए मुझे खीर का स्वाद मीठा लगने लगा था,,,

सच कहते है लोग,,ज़ज़्बात सिर्फ़ इंसान का मिजाज़ ही नही ज़ुबान का स्वाद भी बदल देते है कभी कभी,,,,

मैने डिन्नर करके खीर की एक कटौरी भरके अपने साथ मोम डॅड के रूम मे ले गया और आराम से लेट कर खीर

का मज़ा लेने लगा,,,,खीर सच मे बहुत ही ज़्यादा स्वाद बनी थी,,,,चावल का एक एक दाना मुँह मे घुलता ही जा रहा

था,,,और ड्राइ फ्रूट्स तो पूछो मत कितने डाले थे सोनिया ने,,,,चावल के दाने कम और बादाम पिस्ता ज़्यादा मिल

रहे थे मुझे खीर मे,,,,

मैं बेड पर लेटा हुआ बड़े स्वाद से खीर का मज़ा ले रहा था और साथ मे अपने मोबाइल पर फेसबुक ऑन कर लिया था और

टाइम पास करने लगा था,,,तभी मुझे किसी के खांसने की आवाज़ आई तो मैने पीछे मूड कर देखा,,,

दरवाजे के पास सोनिया खड़ी हुई थी,,,,

तुम यहाँ क्या कर रही हो,,तुमको बोला था ना उपर रहने को,,,

भाई मैं तो डिन्नर वाले बर्तन रखने आई थी किचन मे,,,,

रख दिए ना,,,,अब जाओ और सो जाओ उपर जाके,,,,,

मैं तो सो जाउन्गा लेकिन तुम अभी तक क्यूँ नही सोए भाई,,,,,उसने मेरे से सवाल किया वो भी थोड़ा डरते हुए,,

मैं तो खीर खा रहा था ,,सच मे बहुत अच्छी बनी है खीर ,,पेट भर गया लेकिन दिल नही भर रहा खाने

से ,,,,दिल करता है बस ख़ाता जाऊ,,,,

तो खा लो ना किसने रोका है भाई,,,,आपके लिए तो बनाई थी मैने,,,

बहुत बहुत शुक्रिया मेरी छुटकी बहना मेरे लिए खीर बनाने का ,,,,अब जाओ उपर जाके सो जाओ टाइम बहुत हो गया

है,,,,

अभी नही सोना मुझे भाई,,,,कल एग्ज़ॅम है ना अभी तो एग्ज़ॅम की तैयारी करनी है,,,,,सोना तो बहुत देर बाद है मुझे

तभी उसने मेरे हाथ मे पकड़ा हुआ मोबाइल देख लिया,,,,,ये मोबाइल पर क्या कर रहे हो भाई,,,

कुछ नही बस खीर खाते हुए टाइम पास कर रहा था,,,,,

टाइम ही पास करना है तो एग्ज़ॅम की तैयारी मे टाइम पास करो ना ,,,मोबाइल मे क्या रखा है,,,वो थोड़े हल्के गुस्से

मे बोली थी,,,,मुझे पता है वो स्टडी के मामले मे कितनी सीरीयस रहती है हर टाइम,,,,

वैसे भाई तेरी तैयारी हो गई क्या एग्ज़ॅम की,,,उसने ये सवाल भी थोड़े गुस्से से किया था

उसने इतना पूछा तो मेरे से कोई लफ्ज़ नही निकला मुँह से मैं बस सर को झुका कर बैठ गया,,,

मैं पहले ही जानती थी भाई,,,तूने तैयारी नही की होगी,,,,सारा दिन पता नही कहाँ घूमता रहा और घर भी लेट

आया तू,,,,अब भी मोबाइल पर लगा हुआ है,,,,कुछ तो ध्यान दो भाई कल एग्ज़ॅम है तुम्हारा,,,

वो मैं वो ,,,,,मैं बस स्टडी करने ही वाला था खीर ख़तम करके,,,,

 


वो मेरी बात सुनके हँसने लगी,,,मैं सब जानती हूँ भाई तूने कोई तैयारी नही करनी बस जब मोबाइल से थक जाना था

तो सो जाना था तूने,,,,

उसकी बात से मैं भी हँसने लगा,,,,

चलो मेरे साथ उपर भाई मैं आपको क्वेस्चन्स की एक लिस्ट बना देती हूँ आप उस पर ध्यान देना तो कल पक्का

आपका एग्ज़ॅम बहुत अच्छा होगा,,,,

तभी मैं थोड़ा गुस्से से,,,,मुझे नही जाना उपर ,,जो लिस्ट बना कर देनी है यहीं देदे मुझे,,,

वो थोड़ा सहम गई मेरे गुस्से से,,,,भाई मुझे डर लगता है,,,

डर लगता है ,,,किस से,,,,मेरे से डर लगता है क्या,,,,मैने थोड़ा घबरा कर पूछा उस से,,,,

उसने कुछ नही बोला बस सर को झुका कर ना मे हिला दिया,,,,और बता दिया उसको मेरे से डर नही लगता,,

तो फिर किस से डर लगता है तुझे,,,,

मुझे अकेले उपर रहने से डर लगता है भाई,,,,उपर वाला सारा फ्लोर खाली है ना इसलिए,,,

तो इसमे क्या है,,,पहले भी तो अक्सर तू अकेली ही सोती थी ना उपर कुछ दिनो से,,,

तब कोई ना कोई होता था भाई घर मे उपर,,,, भुआ और शोभा दीदी होती थी ना,,,,,लेकिन आज तो बस मैं हूँ घर

पर और आप हो,,,,और आप नीचे सो रहे हो तू मुझे डर लगता है अकेले उपर रहने मे ,,,,आप चलो ना मेरे साथ

उपर भाई प्लज़्ज़्ज़्ज़्ज़

नही मुझे नही जाना उपर तेरे रूम मे मैं यहीं ठीक हूँ,,,,मैं फिर थोड़ा गुस्से मे बोला,,,,

मैं उपर जाने को बोल रही हूँ भाई लेकिन अपने रूम मे नही,,,,उसने इतना बोला और शरमा कर सर को झुका

लिया,,,

मैं उसकी इस बात से थोड़ा शर्मसार हो गया,,,,

आप उपर चलो भाई और शोभा दीदी के रूम मे रहना ,,आपके वहाँ होने से मुझे डर नही लगेगा,,,,,

मैं थोड़ा अजीब फील करने लगा था,,,उसने उपर जाने को बोला लेकिन मुझे लगा वो अपने रूम मे जाने को बोल

रही थी,,,,,लेकिन मैं ग़लत था और मेरी इस बात से वो शरमा गई थी और मैं तो पानी पानी हो गया था शरम से

ठीक है तुम चलो मैं आता हूँ,,,,

वो उपर चली गई और मैं उसके थोड़ी देर बाद उपर चला गया,,,,,मैं उसके रूम के पास जाके डोर पर नॉक किया

तो उसने दरवाजा खोला ,,,,,मैने देखा रूम की लाइट ऑफ थी बस एक नाइट लॅंप चल रहा था जो सोनिया और मेरे

बेड के बीच मे पड़े हुए टेबल पर पड़ा था,,,,रूम मे हल्की रोशनी थी उस लॅंप की,,,,,

सोनिया ने दरवाजा खोला और मुझे एक पेपर पकड़ा दिया,,,,भाई इसमे कुछ ज़रूरी क्वेस्चन्स लिखे हुआ है आप बस

एक बार ध्यान से इन क्वेस्चन्स को देख लेना ,,,कल के एग्ज़ॅम मे बहुत हेल्प हो जाएगी आपकी,,,,

मैं वहाँ से जाने लगा तो सोनिया बोली,,,,भाई कोई हेल्प की ज़रूरत पड़ी तो पूछ लेना,,,,

मैने वो पेपर पकड़ा और अपनी बुक लेके शोभा के रूम मे चला गया और जाके बेड पर बैठकर स्टडी करने लगा

,,,मैं खुद के ध्यान को पूरी तरह बुक पर लगा रहा था ताकि मेरे दिमाग़ मे सोनिया का ख्याल तक नही आए

और ऐसा ही हुआ,,मैं स्टडी मे इतना खो गया था कि कब रात के 2 बज गये पता ही नही चला,,,और मुझे नींद भी

नही आ रही थी,,,,तभी स्टडी करते हुए मैं एक क्वेस्चन मे थोड़ा उलझ गया,,मुझे उसका जवाब नही मिल रहा

था ,,,,मैने सोचा सोनिया से पूछ लेता हूँ क्यूकी वो भी स्टडी कर रही होगी और अब तक जाग ही रही होगी,,

मैं शोभा के रूम से निकला और सोनिया के रूम मे चला गया,,,,मैने दरवाजे खोला और अंदर देखा तो रूम

मे लॅंप जल रहा था,,,,सोनिया बेड की बॅक से पीठ लगाकर बैठी हुई थी उसकी टाँगें बेड पर बिछि हुई थी और

उसने अपनी बुक को अपनी टाँगों पर रखा हुआ था,,उसका एक हाथ उसी बुक पर था जबकि दूसरा हाथ अपने बेड

पर था,,,मुझे लगा वो स्टडी कर रही है लेकिन जब मैं उसके पास गया तो देखा कि उसका सर झुका हुआ था ,,गर्दन

नीचे की तरफ मूडी हुई थी,,,,वो स्टडी करते करते ऐसी ही हालत मे सो गई थी,,,पहले तो मुझे उस पर हँसी

आने लगी लेकिन फिर मुझे उसकी मासूमियत पर प्यार आने लगा,,,,

मैने देखा कि उसने अपनी टाँगों पर कंबल को घुटनो तक ओढ़ रखा था ,,और घुटनो के पास ही उसकी बुक

पड़ी हुई थी,,,,उसका एक हाथ बुक के उपर पड़ा हुआ था,,,,मैने हिम्मत करके उसके हाथ को पकड़ा और बुक से

उठा दिया फिर बुक को बंद करके साइड के टेबल पर रख दिया,,,,,,मुझे ऐसा करते हुए डर तो लग रहा था लेकिन

फिर भी मैं हिम्मत करके उसको लिटाना चाहता था,,क्यूकी जिस हालत मे वो सो रही थी उस से लग रहा था कि वो कभी

भी बेड पर गिर सकती है,,,इसलिए उसके बेड पर गिरने से पहले ही मैं उसको लेटा देना चाहता था,,,

मैने बुक को बंद करके साइड टेबल पर रखा और फिर हिम्मत करके अपने एक हाथ को उसकी गर्दन के पीछे

रखा और दूसरे हाथ को उसकी टाँगों के नीचे घुटनो के पास रखा और उसको बेड से हल्का सा उपर उठा लिया ,,मेरे

ऐसे करते ही उसकी टाँगों पर जो कंबल था वो नीचे गिर गया और उसकी गोरी मखमली नंगी टाँगें मेरे सामने

आ गई,,,,मेरा कुछ ग़लत इरादा नही था मैं तो जितना हो सके उस से दूर रहने की कोशिश कर रहा था,,,लेकिन

कंबल नीचे होने से उसकी गोरी-गोरी टाँगें देखकर मुझे कुछ होने लगा और फिर मुझे अपने हाथ पर उसकी

टाँग का सपर्श भी मस्त करने लगा,,,,मैने उसको बेड से 2 फीट तक उपर उठा लिया था अब उसका जिस्म मेरी बाहों

मे था,,,,मेरा एक हाथ उसकी नंगी टाँगों पर था क्यूकी उसने एक निक्केर पहनी हुई थी,,लेकिन पहले तो इसने एक

पयज़ामा पहना हुआ था ये निक्केर कब पहन ली,,,हो सकता है मेरे जाने के बाद इसने चेंज किया होगा,,

वो बेड से उपर मेरी बाहों मे थी,,,उसका सर नीचे झुका हुआ था और उसकी सुराही जैसी गर्दन जो हल्की लाइट मे

भी चमक रही थी,,,उसकी मखमली टाँगें जो मेरा दिमाग़ खराब करने लगी थी,,,गोद मे होने की वजह से उसके

बदन की तेज खुश्बू मिलने लगी थी मुझे,,वो मुझे पागल करने लगी थी लेकिन फिर भी ना जाने कैसे मैने खुद

को क़ाबू मे किया हुआ था,,,,मैने खुद पर कंट्रोल करते हुए उसको बेड पर ठीक तरह से लेटा दिया फिर हल्के

से उसके सर को उपर उठा कर उसके सर के नीचे एक पिल्लो रखा और उसके बदन पर गर्दन तक कंबल ओढ़ा दिया

अब बस उसका क्यूट सा फेस ही कम्बल से बाहर था,,,

मैं उसके फेस मे इतना खो गया था कि जितना मैं उसके नंगे जिस्म मे भी नही खो सकता था,,वो सोती हुई किसी

छोटी बच्ची जैसी क्यूट लग रही थी,,,नींद मे भी मासूम फेस पर एक क्यूट सी स्माइल थी,,,,मैं इतना खो गया उसको

देखने मे की अपने बेड पर बैठ गया और उसके खूबसूरत क्यूट फेस को देखने लगा,,,,पता नही कितने टाइम से

मैं उसको देख रहा था ,,शायद मैने पलक भी नही झपकाई थी ,,,तभी सोनिया हल्की सी हिली और उसने आँखें

खोलकर मेरी तरफ देखा,,वो थोड़ा डर गई थी शायद,,,,,लेकिन जब उसने अपने बदन को कंबल मे पाया तो थोड़ी

खुश हो गई,,,,फिर लेटे लेटे ही बोली,,,,

तुम यहाँ क्या कर रहे हो भाई,,,,

 
उसकी बात से मैं थोड़ा डर गया,,,अब इसको क्या बोलू,,ये पता नही मेरे बारे मे क्या सोच रही होगी,,

क्या हुआ भाई ,,कहाँ खो गये,,,भाई,,,,भाई,,,,

तभी मे ख्यालों से बाहर निकला,,,,,,कुछ नही मैं तो बस कुछ पूछने आया था तेरे से,,,

क्या पूछना है भाई,,,,उसने उठते हुए बोला,,,और उठकर बैठ गई,,,

पता नही,,,,मैं भूल गया,,,तभी मैं उठा और वहाँ से जाने लगा,,,तू सोजा आराम से मैं चलता हूँ

तभी उसने रूम से बाहर जाते हुए मुझे आवाज़ लगाई,,,भाई ये कंबल तूने दिया मुझपर,,,

मैं वहीं खड़ा हो गया और कुछ नही बोला बस ऐसे ही खड़ा रहा उसकी तरफ पीठ करके,,

वो फिर से बोली ,,,भाई बोलो ना,,ये कंबल तुमने दिया मुझपे,,क्यूकी मैं तो स्टडी कर रही थी तो ये कंबल

कैसे आया मुझपे और मैं बेड पर कब लेटी भाई,,

तभी मैं वापिस पलटा और बोला,,,,मैं तेरे से कुछ पूछने आया था ,,यहाँ आके देखा तो तुम बेड पर बैठी

हुई ही सो रही थी,,,शायद स्टडी करते हुए तुम्हारी आँख लग गई थी,,,,सो मैने तुमको लेटा दिया और्र्र्र्ररर

इतना बोलते बोलते मैं चुप हो गया,,और सर को नीचे झुका लिया,,,और वापिस पलट कर जाने लगा,,,,

तभी सुने पीछे से बोला,,,,,,शुक्रिया भाई,,,,,

मैं रुका नही और वहाँ से चलके शोभा के रूम मे आ गया और आके अंदर से कुण्डी लगा ली और बेड पर लेट

गया,,,मैने लाइट भी ऑफ नही की थी,,,,तभी मैं लाइट ऑफ करने क लिए उठा तो देखा कि 4 बज रहे थे,,,ओह्ह

मययी गॉड ,,मैं जब सोनिया के रूम मे गया था तो 2 बजे थे और अब 4 भी बज गये ,,क्या मैं इतना खो गया

था उसके मासूम और क्यूट फेस मे की मुझे टाइम का पता ही नही चला ,,,सच मे उसकी खूबसूरती ने तो मेरी

ज़िंदगी मे टाइम को भी रोक सा दिया था,,,,2 अवर्स कैसे बीत गये उसको देखते हुए मुझे पता ही नही चला ,मुझे

तो ऐसे लगा जैसे अभी वो सोई थी और मैं उसको देख रहा था और तभी पलक झपकाने जितने टाइम मे वो उठ गई

थी,,,,,मेरे 2 अवर्स पलक झपकाने जितने टाइम मे बीत गये थे,,,

मैं फिर से उसके मासूस फेस के बारे मे सोचने लगा हालाकी मुझे वो पल भी याद आ रहे थे जब मैने उसको

गोद मे उठा लिया था कुछ पल के लिए और मदहोश भी होने लगा था उसके जिस्म की खुश्बू से ,,लेकिन उसके क्यूट

फेस ने उसके जिस्म को नज़रअंदाज़ करने पर मजबूर कर दिया था मुझे,,,

हयी अल्लाह ,,,,,,,,,क्या कोई इतना भी खूबसूरत हो सकता है कि कोई उसके संगमरमर जैसे तराशे हुए जिस्म को

भूलकर बस उसके मासूम और भोले भले चेहरे मे ही खो जाए,,,

हां हो सकता है कोई इतना खूबसूरत,,,और मेरी सोनिया ऐसी ही थी,, इतनी खूबसूरत थी कि उसको देखकर जन्नत की

हूर भी जलने लगे उसकी खूबसूरती से,,,अगर कामदेव भी उसको देखे तो अपनी मेनिका को भूल जाए और खो

जाए उसके चेहरे मे,,,,इतनी ज़्यादा खूबसूरत थी मेरी सोनिया,,,मैं भी खो गया था उसके ख़यालो मे और कब

उसके बारे मे सोचता हुआ नींद के आगोश मे चला गया पता ही नही चला ,,,,

पता चला सुबह जब सोनिया बाहर खड़ी होके रूम के दरवाजे पर नॉक करने लगी थी,,,,भाई उठ जल्दी कॉलेज

नही जाना क्या,,,भाई जल्दी उठ बहुत टाइम हो गया है,,,,

वो नॉक करती जा रही थी और बोलती जा रही थी,,,,

मैं उठा और दरवाजा खोल दिया,,,,,

क्या भाई कब्से नॉक कर रही हूँ ,,,कितनी गहरी नींद सोते हो तुम,,,,अब जल्दी से फ्रेश होके तैयार हो जाओ मैने

नाश्ता बना दिया था,,,,इतना बोलकर वो नीचे चली गई,,,,और जाते जाते फिर से मुझे जल्दी नीचे आने को बोल गई

मैं भी फ्रेश होके तैयार होके नीचे चला गया,,,उसने नाश्ता लगा दिया था ,फिर हम दोनो ने नाश्ता किया और

फिर घर से बाहर चले गये,,,,मैने बाइक स्टार्ट की और तभी वो मेरी बाइक पर बैठने लगी,,,

तू यहाँ क्यूँ बैठ रही है,,,,कविता नही आ रही क्या तुझे लेने के लिए,,,,,,,

नही भाई उसकी तबीयत थी नही वो बोल रही थी वो ऑटो मे चली जाएगी,,,,

तभी मैने बाइक बंद किया और बोला,,,,कैसी दोस्त है तू,,,,वो तुझे घर से लेने आती थी और आज उसकी तबीयत खराब

है तो तुम उसको लेके नही जा सकती अपने साथ,,,,चलो शोभा दीदी की अक्तिवा ले जाओ और कविता को भी अपने साथ ले

जाना,,,,,

मैं उसको अपने साथ नही लेके जाना चाहता था,,,,

वो मेरी बात सुनके थोड़ा उदास हो गई फिर उदास चेहरा से शोभा दीदी की अक्तिवा लेके वहाँ से चली गई और जाते

हुए मुझे गुस्से से देखकर गई,,,,

उसके जाते ही मैने घर लॉक किया और बाइक लेके कॉलेज की तरफ चल पड़ा,,,,

एग्ज़ॅम के बाद मैं कॅंटीन मे बैठ गया कुछ देर क लिए,,,कॅंटीन वाला बहुत इज़्ज़त करता था मेरी इसलिए मेरे

कहने पर उसने कुछ टेबल बाहर खुले मे लगवा दिए ,,,वैसे भी सर्दी हो गई थी और धूप मैं बैठने का

मज़ा ही कुछ और था,,,लेकिन धूप ज़्यादा गर्म लगती थी अभी इसलिए मैने एक टेबल को एक छोटे ट्री के पास लगवा

लिया था जहाँ ज़्यादा धूप नही थी,,,,मैं वहाँ बैठकर कॉफी लेने लगा था ,,वैसे तो करण को भी आना था

लेकिन वो सला अपनी नयी नवेली दुल्हन की वजह से घर भाग गया था,,उसके साथ चिपक कर जो बैठना था उसको,,,

करण तो नही था मेरे साथ देने के लिए लेकिन कोई और आ गया था मेरे साथ देने,,,,सोनिया और कविता दोनो मेरे

पास आ गई थी,,,,

मेरे पास आके कविता शरमा कर मुझसे मिली और मैं भी बड़े प्यार से उसको मिला,,,,वैसे तो मैं अक्सर उसके साथ

हाथ मिलता था लेकिन आज पता नही क्यू मैं उसके गले लग गया,,,,

मैने उसको बाहों मे भरा और बड़े प्यार से बोला,,,मैं उसको मिला तो प्यार से था लेकिन मुझे याद आया कि

सोनिया भी वहीं थी इसलिए मैने थोड़ा मज़ाक मे बात टाल दी,,,,क्या हाल है आपका कविता जी ,,मैने मज़ाक मे

इतना बोला तो कविता हँसने लगी और मेरी इस हरकत पर सोनिया भी खुश हो गई,,,

मुझे लगा था वो शायद गुस्सा करेगी लेकिन वो तो हँसने लगी थी,,शायद उसको पता चल गया था मैं मज़ाक कर

रहा हूँ,,,

कविता मेरे से अलग हुई और शरमा कर पीछे हट गई,,,,,

ओके कविता तू कुछ देर बैठ सन्नी के पास और मैं तब तक लाइब्ररी होके आती हूँ कुछ काम है,,,,,और तू इसको

ज़्यादा तंग नही करना सन्नी,,,उसने उंगली से इशारा करके ऐसा बोला जैसे मुझे धमकी दे रही हो,,,

नही नही सोनिया जी मैं इसको तंग नही करता कभी,,आप खुद ही पूछ लो,,मैं तो बहुत ज़्यादा केर करता हूँ

कविता जी की,,,मैने मज़ाक मे बोला तो कविता फिर से शरमा गई ,,,,

जानती हूँ सन्नी वो तो अभी देख ही लिया है मैने कि तू कितनी केर करता है कविता की,,,,सोनिया ने इतनी बात मज़ाक

मे बोली तो कविता फिर से शरमा गई,,,,

सोनिया वहाँ से चली गई और कविता मेरे पास बैठ गई ,,,,,,सोनिया के जाते ही कविता ने ज़ोर से मेरी कमर पर एक

चिमती काट दी ,,मेरे मुँह से आहह निकल गई,,,

ये क्या कर रही हो,,दुख़्ता है ,,मैने दर्द के मारे कविता से बोला,,,

अच्छा है दुखने दे,,,,तू भी तो हर्ट करता है ना सबको तुझे भी हर्ट होना सीखना होगा,,,

अब मैने क्या कर दिया,,,,जो इतना हर्ट करने लगी हो,,,,

अभी क्या हरकत की थी सोनिया के सामने,,,,उसको शक हो जाता तो,,,,ये तो अच्छा हुआ उसने सब मज़ाक समझ लिया

वर्ना पंगा हो जाता,,,,

मैने उसकी बात सुनी और सर को झुका लिया,,,,सौरी तुझे देखकर मैं इतना खो गया कि भूल गया था सोनिया भी

है साथ मे,,,अब गुस्सा मत कर ना प्ल्ज़्ज़

ओके नही करती,,,बट अगली बार ऐसी ग़लती नही करना ,,,अगर सोनिया को ज़रा भी शक हो गया तो वो जान ले लेगी मेरी,,

कविता ने ये बात डरते हुए बोली थी,,,उसके फेस से सॉफ पता चल रहा था वो कितना डरती है सोनिया से,,,,

तेरी क्या कविता वो मेरी भी जान ले लेगी अगर उसको ज़रा सा भी शक हो गया तो,,,,तुझे तो शायद माफ़ भी कर्दे वो

और आसान मौत देदे लेकिन मुझे तो तडपा तडपा कर मारेगी वो हिट्लर,,,,,मेरी बात से कविता हँसने लगी,,,

अच्छा अगर इतना डरता है तो ऐसे हरकते क्यूँ करता है फिर,,,आगे से ख्याल रखना इस बात का,,

ओक कविता मेडम जी,,,मैं ख्याल रखूँगा इस बात का,,,और आपका भी ,,,,मैने थोड़ा फ्लर्ट किया तो वो फिर से

शरमा गई,,,,,

 
मेरे दिमाग़ मे था कि कविता ने अपने बाप की हरकत के बारे मे सोनिया को बता दिया था क्यूकी सोनिया उसकी

बेस्टफ्रेंड थी तो क्या उसने मेरे बारे मे भी कुछ बता तो नही दिया होगा सोनिया को ,,,लेकिन मैं फालतू मे ही डर

रहा था ,,कविता ने कुछ नही बताया होगा सोनिया को क्यूंकी वो तो खुद बहुत बुरी तरह से डरी हुई थी सोनिया से,इतनी

बुरी तरह से तो शायद मैं भी नही डरता था सोनिया से,,,,,ओह्ह सौररी भूल गया,,,मैं भी बहुत डरता था सोनिया

से,,,,,

अच्छा बता तबीयत कैसी है अब,,,,मैने थोड़े शरारती अंदाज़ मे पूछा था तो कविता भी समझ गई मैं क्या

पूछ रहा हूँ इसलिए वो शरमा गई,,,

बोल ना तबीयत कैसी है,,,,,मैने फिर से पूछा,,,

उसने शरमा कर सर को झुका लिया और बोला,,,,,अब पहले से बेहतर हूँ भाभी की वजह से,,,

भाभी की वजह से,,,,कैसे?????

भाभी ने गर्म पानी से ठीक किया मुझे,,,,कविता ने फिर से शरमाते हुए बोला,,

गर्म पानी से,,,,वो भला कैसे,,,,क्या हुआ था तुझे जो गर्म पानी से ठीक हो गई,,,,मैने फिर से मज़ाक मे बोला

तभी उसने ज़ोर से च्युन्टी काट दी मेरे और इस बार पहले से भी ज़्यादा दर्द हुआ मुझे,,,मेरे मुँह से आहह निकल गई

और वो हँसने लगी,,

मैने फिर से मज़ाक मे बोला ,,,बता ना क्या हुआ था तुझे जो गर्म पानी से आराम मिला,,,मैने इतना बोला तो उसने'

फिर से हाथ आगे करके मुझे चींटी काटने की कोशिश की लेकिन मैने उसका हाथ पकड़ लिया और मेरे ऐसा करते ही

वो डर गई,,,,,,सन्नी प्ल्ज़्ज़ हाथ चूड़ ,,प्ल्ज़्ज़ सन्नी,,,,,कॉलेज है सब देख रहे है,,,,प्लज़्ज़्ज़ सन्नी

उसको कॉलेज का डर नही था बल्कि उसको इस बात का डर था कहीं मेरे छूने भर से वो क़ाबू से बाहर नही हो

जाए और बहक कर कोई ग़लती नही कर दे,,,

मैने उसको छोड़ दिया और फिर नौरमल बातें करने लगा,,मुझे पता था वो वाली बात करूँगा तो कविता के

साथ-साथ मैं भी बहक जाउन्गा और फिर बहुत मुश्किल हो जाएगी,,,,,

ये क्या हुआ तेरी आँख पर ,,,कविता ने हाथ लगाते हुए पूछा,,,,

तभी मुझे याद आया कि कल जब मैं बुटीक पर गया था शिखा और अलका को लेके तो उन दोनो का ध्यान एक बार

भी नही गया मेरी आँख की चोर्ट पर लेकिन कविता ने आज भी ध्यान दिया था मेरी चोट पर,,,जबकि कल सूजन ज़्यादा

थी आज तो बहुत कम सूजन थी ,,,पास से देखकर ही पता चलता था कि आँख पर चोट लगी है,,,फिर मुझे समझ

आया कि शिखा और अलका तो बस चुदाई के लिए मेरे पास आती है उनका और मेरा रिश्ता बस चुदाई का है,,,लेकिन कविता

के साथ मेरा प्यार का रिश्ता है वो केर करती है मेरी ,,,,प्यार करती है मुझ से इसलिए तो हल्की से हल्की चोट पर भी

ध्यान चला गया था उसका,,,

कुछ नही बस हल्की चोट है,,,,,,मैने कविता को प्यार से बोला,,,,

फिर हम लोगो की बातें होती रही जब तक सोनिया नही आ गई और जब सोनिया आ गई तो कविता उसके साथ चली गई जबकि

मैं वहीं बैठा रहा कुछ देर,,,मैने सोनिया को घर की चाबी देने को कोशिश की लेकिन उसने बोला कि वो कुछ

देर कविता के घर रुकने वाली है और जब घर जाएगी तो मुझे कॉल कर देगी और जब मैं घर जाऊ तो उसको कॉल

कर दूं,,,,,

सोनिया चली गई और कुछ देर टाइम पास करने के बाद मैं भी घर की तरफ चल पड़ा,,,वैसे मेरा दिल नही था

घर जाने को,,क्यूकी मैं सोनिया से दूर रहना चाहता था,,,फिर सोचा कि घर चलता हूँ और सोनिया को कॉल नही

करूँगा ,,,,जब उसका दिल होगा आ जाएगी और जितना लेट आए उतना ही बेहतर है हम दोनो के लिए,,,,,

सोनिया जब जा रही थी कविता को साथ लेके तो कविता बार बार पीछे मूड के देख रही थी,,,वो थोड़ी उदास थी शायद

उसका दिल नही था मेरे से दूर जाने का ,,लेकिन सोनिया की वजह से उसको जाना पड़ा,,,,

मैं कॉलेज से निकला ही था कि थोड़ी दूरी पर मुझे करण सड़क पर खड़ा नज़र आया,,,मैने उसके पास जाके

बाइक रोक दिया,,,,,

आबे तू यहाँ क्या कर रहा है ,,,मैने बाइक करण के पास रोकते ही पूछा,,

कुछ नही सन्नी भाई घर जा रहा था तो बाइक खराब हो गई,,बाइक को ठीक करने के लिए दे दिया है अब घर जाने

के लिए ऑटो की वेट कर रहा था लेकिन अभी तक कोई ऑटो नज़र नही आया,,,,

चल आजा मैं छोड़ देता हूँ,,ऑटो का किराया मुझे दे देना,,,,मैने ये बात हंसते हुए बोली तो करण भी हँसने

लगा और हंसता हुआ बाइक पर आके बैठ गया,,,,

मैने बाइक वहाँ से करण के घर की तरफ मोड़ दिया और कुछ इधर उधर की बातें करते हुए हम लोग करण के

घर पहुँच गये,,,,

बेल बजाने पर शिखा ने आके गेट खोला और मुझे देखकर जल्दी से मेरे से चिपक गई और बिना हेलो बोले ही

मुझे किस करने लगी,,,,

क्या कर रही हो दीदी ,,,,रितिका देख लेगी ,,,,करण ने शिखा को मेरे से दूर करते हुए बोला लेकिन शिखा फिर से

वापिस मुझे चिपक गई और किस करते हुए बोली,,,,,,नही देखती तेरी रितिका वो उपर छत पर है माँ के साथ ,,धूप

सैक रही है,,,

इतना बोलकर रितिका मुझे डीप किस करने लगी ,,फिर कुछ देर हम ऐसे ही किस करते रहे और फिर घर के अंदर

चले गये ,,,,,

 
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